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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: आदमी का अनुपात
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
126 – 139 20 49 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: आदमी का अनुपात
ग रजा कुमार माथुर क यह क वता आदमी को उसके असली आकार म रखकर दखाती है। पहले वह कमरे से ब्र ांड तक एक सीढ़ बनाती है, फर
उसी सीढ़ से उतरकर उसी कमरे म लौट आती है — जहाँ दो व्य क्त दो अलग-अलग दु नया बना लेते ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 8) 126 – 139
खं ड प्रश्न
20 49
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 128
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
नम्न ल खत प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) लगाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते
ह। (1) क वता के अनुसार ब्र ांड म मानव का ान कैसा है? • पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूण • ब्र ांड क
तुलना म अत्यंत सूक्ष्म • सूय, चंद्र आ द सभी नक्षत्र से बड़ा • समस्त प्रकृ त पर शासन करने वाला
सही उत्तर — ★ ब्र ांड क तुलना म अत्यंत सूक्ष्म।
क वता आदमी को नापने के लए एक सीढ़ बनाती है — आदमी कमरे से छोटा, कमरा घर म, घर मुहल्ले म, मुहल्ला नगर म, नगर
प्रदे श म, प्रदे श दे श म, दे श पृथ्वी पर, पृथ्वी अन गन नक्षत्र म ‘करोड़ म एक ही’, और वह सब भी ‘लाख ब्र ांड ’ म से एक ब्र ांड
के भीतर। हर सीढ़ पर आदमी का आकार घटता जाता है। इसी को क व ‘यह है अनुपात / आदमी का वराट से’ कहकर सीधे बता
दे ते ह।
बाक वकल्प क्य नह : क वता म कह भी आदमी को बड़ा, महत्वपूण या शासक नह कहा गया। उलटे , उसका
बड़ा होने का दावा ही क वता का व्यंग्य-लक्ष्य है — ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ क व क सहम त नह ,
आदमी का भ्रम है।
प्र.2 (2) क वता म मुख्य रूप से कन दो वस्तुओं के अनुपात को दखाया गया है? • पृथ्वी और सूय • दे श और नगर •
घर और कमरा • मानव और ब्र ांड
सही उत्तर — ★ मानव और ब्र ांड।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
घर-कमरा, नगर-दे श, पृथ्वी-नक्षत्र — ये जो ड़याँ क वता म आती तो ह, पर वे मं ज़ल नह , सी ढ़याँ ह। क व इन्ह एक के बाद एक
इसी लए रखते ह ता क दो सरे साफ़ दख — एक सरे पर कमरे से भी छोटा आदमी, दूसरे सरे पर वराट ब्र ांड। तुलना अंत म
इन्ह दोन के बीच होती है: ‘यह है अनुपात / आदमी का वराट से’।
प्र.3 (3) क वता के अनुसार मानव कन भाव और काय म लप्त रहता है? • त्याग, ान और प्रेम म • सेवा और
परोपकार म • ईष्या, अहं, स्वाथ, घृणा म • उदारता, धम और न्याय म
सही उत्तर — ★ ईष्या, अहं, स्वाथ, घृणा म।
क वता क पं क्त है — ‘इस पर भी आदमी / ईष्या, अहं, स्वाथ, घृणा, अ वश्वास लीन’। ‘लीन’ शब्द ध्यान दे ने योग्य है: इसका अथ
है डू बा हुआ, रमा हुआ। यानी ये भाव आदमी के साथ कभी-कभी घटने वाली दुघटना नह , उसक रोज़ क हालत ह।
ध्यान द: ‘इस पर भी’ इस पं क्त क धुरी है — इतना छोटा होने के बावजूद। यही ‘इस पर भी’ क वता के दोन
हस्स को जोड़ता है।
प्र.4 (4) क वता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है? • वह अपनी सीमाओं और दुबलताओं को नह
समझता। • वह दूसर पर शासन ा पत करना चाहता है। • वह प्रकृ त के साथ तालमेल नह बठा पाता है। • वह
अपने छोटे पन को भूल अहंकारी हो जाता है।
इस प्रश्न के एक से अ धक उत्तर सही ह। तारा लगाइए — पहले, दूसरे और चौथे वकल्प पर।
वह अपने छोटे पन को भूल अहंकारी हो जाता है। — यही क वता का मूल आरोप है। ‘अहं’ शब्द क वता म सीधे आया है,
और पूरी पहली सीढ़ बनाई ही इस लए गई है क यह भूल पकड़ी जा सके।
वह अपनी सीमाओं और दुबलताओं को नह समझता। — ‘इस पर भी आदमी…’ का अथ ही यह है क अपनी अस लयत
जान लेने के बाद भी उसका आचरण नह बदलता।
वह दूसर पर शासन ा पत करना चाहता है। — ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ इसी का सीधा प्रमाण है।
तीसरा वकल्प क्य नह : प्रकृ त से तालमेल क बात क वता कह नह उठाती। क वता का वषय आदमी का
आदमी के साथ व्यवहार है — द वार, स्वा मत्व और बँटवारा — प्रकृ त के साथ उसका बरताव नह ।
प्र.5 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ वचार क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
इस काम म उत्तर से ज़्यादा महत्व कारण का है। चचा को इस क्रम म चलाइए —
1. हर साथी अपना चुना हुआ वकल्प बताए और क वता क वह पं क्त पढ़े जसके आधार पर उसने चुना।
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2. जहाँ मतभेद हो, वहाँ यह दे खए क दोन पं क्तयाँ अलग-अलग ह या एक ही पं क्त के दो अथ नकाले गए ह।
3. अंत म तय क जए क कस उत्तर के पीछे पं क्त का सीधा प्रमाण है और कौन-सा उत्तर केवल हमारी अपनी राय है।
नमूना उत्तर: “चौथे प्रश्न म मने ‘वह अपने छोटे पन को भूल अहंकारी हो जाता है’ चुना, क्य क क वता क पूरी
पहली सीढ़ — कमरे से ब्र ांड तक — केवल यह दखाने के लए बनाई गई है क आदमी कतना छोटा है। पर मेरी
मत्र ने ‘वह दूसर पर शासन ा पत करना चाहता है’ चुना और ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ पं क्त पढ़कर
सुनाई। हमने पाया क दोन उत्तर एक ही बात के दो हस्से ह — अहंकार भीतर का भाव है, स्वामी बनना उसका
बाहरी रूप। इस लए हमने दोन पर तारा लगाया।”
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 129
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) “अन गन नक्षत्र म / पृथ्वी एक छोट / करोड़ म एक ही।”
भावाथ — असंख्य तार -नक्षत्र के बीच हमारी पृथ्वी एक छोटा-सा गोला भर है; करोड़ पड म से बस एक।
पर इन तीन पं क्तय म दो अथ एक साथ चल रहे ह, और यही इनका स दय है। ‘करोड़ म एक ही’ का पहला अथ है — करोड़ म से
महज़ एक, यानी नगण्य। दूसरा अथ है — करोड़ म केवल एक ऐसी, यानी अनोखी, अकेली, जस पर जीवन है। क व दोन अथ
जान-बूझकर एक साथ रखते ह।
यह क्य काम करता है: इससे पाठक को एक ही साँस म दो बात मलती ह — वनम्रता (हम बहुत छोटे ह) और
ज़म्मेदारी (जो चीज़ करोड़ म एक ही है, उसे सँभालना ही होगा)। य द क व केवल ‘छोट ’ कहते तो नराशा आती;
‘एक ही’ जोड़कर वे उसी छोटे पन को मूल्यवान बना दे ते ह।
शब्द पर ध्यान: ‘अन गन’ = अन गनत। यह अ न श्चत संख्यावाचक वशेषण है — क व गनती नह दे ते, गनती क
असंभवता दे ते ह। बड़ी संख्या बताने से अ धक असर संख्या के छू ट जाने का पड़ता है।
प्र.2 (ख) “संख्यातीत शंख सी द वार उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
भावाथ — इतना छोटा आदमी गनती से परे, शंख जतनी अन गनत द वार खड़ी करता रहता है और खुद को दूसरे का मा लक
घो षत करता है।
यहाँ दो यु क्तयाँ एक साथ चलती ह —
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात
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मुहावरा: ‘द वार उठाना’ का अथ ईंट-गारे क द वार बनाना नह , भेद खड़े करना है — जा त, धम, भाषा, अमीरी-गरीबी, दे श
क सीमाओं क द वार।
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अ तशयो क्त: ‘संख्यातीत शंख सी’ — शंख भारतीय संख्या-प्रणाली क एक वशाल संख्या है (1017, यानी 100 पद्म)। क व
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द वार को उसी माप से नापते ह।
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aअसली चोट कहाँ है: ठ क पहले क वता ने आदमी को नक्षत्र के आगे धूल-कण बताया था। अब वही धूल-कण
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शंख जतनी द वार बनाता है और स्वामी बनने चलता है। छोटे कता के साथ इतना बड़ा माप जोड़ते ही अनुपात
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बगड़ जाता है — और बगड़ा हुआ अनुपात ही हास्यास्पद लगता है। क व को कुछ कहना नह पड़ता; व्यंग्य आँकड़े
से पैदा होता है।
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(ग) “दे श क कौन कहे / एक कमरे म / दो दु नया रचाता है।”
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a भावाथ — देश के बीच क द वार क तो बात ही छो ड़ए; आदमी एक ही छोटे-से कमरे के भीतर दो अलग-अलग दु नया बना लेता
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है।
‘दे श क कौन कहे’ मुहावरेदार प्रश्न-शैली है — इसका अथ.cहै ‘उनक तो चचा ही क्या’। क व पूछ नह रहे, वे प्रश्न क शक्ल म व्यंग्य
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कर रहे ह।
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यह अंत ही क्य : क वता क शुरुआत ‘दो व्य क्त कमरे म’ से हुई थी। बीच म वह ब्र ांड तक गई। अब वह ठ क
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उसी कमरे म लौट आती है — पर लौटती है एक नई खबर लेकर: उन दो व्य क्तय के बीच भी अब एक द वार खड़ी
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हो चुक है। सबसे बड़े वस्तार के बाद सबसे छोटा बँटवारा — यही वरोधाभास क वता क सबसे तेज़ चोट है।
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agl ‘दो दु नया’ का अथ: दु नया यहाँ ज़मीन नह , सोच है। एक ही कमरे म रहते हुए भी जब दो लोग एक-दूसरे से बात
करना बंद कर दे ते ह, तो कमरा एक रहकर भी दो हो जाता है।
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मलकर कर मलान — पृष्ठ 129
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पाठ से
मलान
प्र.1 नीचे दो स्तंभ दए गए ह। अपने समूह म चचा करके स्तंभ 1 क पं क्तय का मलान स्तंभ 2 म दए गए सही अथ
से क जए। स्तंभ 1 — 1. संख्यातीत शंख सी द वार 2. पृथ्वी एक छोट , करोड़ म एक 3. ईष्या, अहं, स्वाथ,
घृणा 4. दो व्य क्त कमरे म / कमरे से छोटे 5. प र ध नभ गंगा क 6. एक कमरे म दो दु नया रचाता। स्तंभ 2 — 1.
ब्र ांड क वशालता का प्रतीक 2. आदमी के संकु चत होने का प्रतीक 3. मनुष्य ारा ख ची गई कृ त्रम सीमाएँ 4.
सी मत ान म भी और अलगाव क प्रवृ त्त 5. पृथ्वी क अल्पता और अनोखेपन क ओर संकेत 6. मनुष्य क
नकारात्मक भावनाएँ
स्तंभ 1 (पं क्त) स्तंभ 2 (अथ) आधार
1. संख्यातीत शंख सी दीवारे ं 3. मनुष्य ारा खी ंची गई कृ ित्र म सीमाएँ ये द वार ईंट क नह , आदमी क बनाई हुई ह — इसी लए
‘कृ त्रम’।
2. पथ्ृ वी एक छोटी, करोड़ों में 5. पथ्ृ वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर ‘छोट ’ म अल्पता, ‘एक ही’ म अनोखापन — दोन एक
एक संके त साथ।
3. ईष्य , अहं, स्वाथ, घ ृणा 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ क वता इन्ह एक साथ गनाकर आदमी का भीतरी चत्र
बनाती है।
4. दो व्यिक्त कमरे में / कमरे से 2. आदमी के संकु िचत होने का पतीक क वता का पहला माप — आदमी कमरे से भी छोटा।
छोटे
5. पिरिध नभ गंग ा की 1. ब ांड की िवशालता का पतीक आकाशगंगा क प र ध सबको समेटे हुए है।
6. एक कमरे में दो दुिनया 4. सीिमत स्थान में भी और अलगाव की जगह घटती गई, बँटवारा फर भी बना रहा।
रचाता पवृि
मलान का सूत्र: स्तंभ 1 क छह पं क्तयाँ क वता के तीन काम बाँटती ह — वशालता दखाना (5), लघुता दखाना
(2 और 4) और आदमी का बरताव दखाना (1, 3, 6)। पहले हर पं क्त को इन तीन खान म डा लए, फर स्तंभ 2
अपने आप बैठ जाएगा।
अनुपात — पृष्ठ 129–130
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पाठ से
समू ह चचा
प्र.1 इस क वता म ‘मानव’ और ‘ब्र ांड’ के उदाहरण ारा व्य क्त के अल्पत्व और सृ ष्ट क वशालता के अनुपात को
दखाया गया है। अपने सा थय के साथ मलकर वचार क जए क मानव को ब्र ांड जैसा वस्तार पाने के लए
इनम से कन- कन गुण या मूल्य क आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्य चुने, यह भी साझा क जए।
पृष्ठ 130 पर ‘मानव’ के चार ओर जो शब्द दए गए ह, वे दो साफ़ हस्स म बँट जाते ह। पहले उन्ह छाँ टए, फर चु नए।
जो वस्तार दे ते ह (चु नए) जो सकोड़ते ह (छो ड़ए)
सहअिस्तत्व, सौहाद , िविवधता, समावेिशता, सहनशीलता, संतल
ु न, स्वतंत्र ता, वचस्व, स ा, अहंक ार, ईष्य , स्वाथ, िवरोध, मतभेद , अिवश्वास,
शािं त, िवस्तार , िवशालता सीमाबद्धता, लघुता
चुनाव और कारण —
सहअ स्तत्व और समावे शता — ब्र ांड क सबसे बड़ी वशेषता उसका आकार नह , उसका समेटना है: ‘सबको समेटे है /
प र ध नभ गंगा क ’। जो सबको जगह दे ता है, वही बड़ा होता है।
सौहाद और सहनशीलता — ये ठ क उन्ह भाव क काट ह जन्ह क वता गनाती है (ईष्या, घृणा, अ वश्वास)। जस भाव से
द वार बनती है, उसका उलटा भाव ही द वार गराता है।
व वधता — ‘हर ब्र ांड म / कतनी ही पृ थ्वयाँ / कतनी ही भू मयाँ / कतनी ही सृ ष्टयाँ’ — सृ ष्ट एक जैसी नह , अनेक
तरह क है। जो अलगपन को स्वीकार करता है, वह सृ ष्ट जैसा हो जाता है।
संतुलन — ‘अनुपात’ शब्द का ही दूसरा नाम संतुलन है। अपनी जगह ठ क-ठ क जान लेना ही संतुलन है।
मूल तक: क वता म आदमी का छोटापन उसका शरीर नह , उसका व्यवहार है — द वार उठाना और स्वामी बनना।
इस लए बड़ा होने का रास्ता भी शरीर या श क्त नह , व्यवहार ही है। जो जतने लोग को अपने भीतर जगह दे ता है,
वह उतना ही बड़ा है। यही ब्र ांड का तरीका है।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 130
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) क वता के अनुसार मानव कन कारण से स्वयं को सीमाओं म बाँधता चला जाता है?
क वता पाँच कारण नाम लेकर गनाती है — ईष्या, अहं, स्वाथ, घृणा और अ व ास। इन्ह म ‘लीन’ रहकर आदमी ‘संख्यातीत
शंख सी द वार’ उठाता चला जाता है।
इन पाँच को अलग-अलग दे खए तो हर एक अपनी तरह क द वार बनाता है —
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ईष्या दूसरे के बढ़ने को अपनी हार मान लेती है, इस लए वह दूसरे को दूर रखती है।
अहं अपने को ऊँचा मानता है, इस लए बराबरी क जगह नह छोड़ता।
स्वाथ हर चीज़ को ‘मेरा’ और ‘तेरा’ म बाँट दे ता है — और यही बँटवारा सीमा है।
घृणा दूसरे को अपने से नीचा ठहराती है।
अ व ास सबसे ख़तरनाक है, क्य क वह बात करने का रास्ता ही बंद कर दे ता है — और जहाँ बात बंद, वहाँ द वार पक्क ।
असल कारण: इन पाँच के नीचे एक ही जड़ है — अपने अनुपात को भूल जाना। जो आदमी यह याद रखता है क
वह अन गन नक्षत्र के बीच एक छोटे ग्रह का छोटा-सा जीव है, उसके भीतर स्वामी बनने क इ ा टक ही नह
सकती।
प्र.2 (ख) य द आपको इस क वता क एक पं क्त को द वार पर लखना हो, जो आपको प्र त दन प्रे रत करे तो आप
कौन-सी पं क्त चुनगे और क्य ?
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है, इस लए उत्तर म पं क्त + कारण दोन होने चा हए। कारण बताते समय यह ज़रूर ल खए क
वह पं क्त आपके रोज़ के कस काम या कस आदत को बदलेगी।
नमूना उत्तर: “म लखूँगी — ‘करोड़ म एक ही’। यह पं क्त दो बात एक साथ कहती है, इसी लए मने इसे चुना।
एक ओर यह याद दलाती है क करोड़ म म भी बस एक ँ, इस लए घमंड करने का कोई कारण नह । दूसरी ओर
यह कहती है क करोड़ म एक ही ऐसी पृथ्वी है — यानी जो अकेली है, वह अनमोल है। रोज़ सुबह इसे पढ़कर मुझे
दो काम याद आएँगे — कसी से बड़प्पन न जताना, और अपने आसपास क चीज़ को — पेड़, पानी, अपने साथी
— मामूली न समझना।”
दूसरे अ े वकल्प: ‘सबको समेटे है’ — साथ लेकर चलने क याद; ‘यह है अनुपात / आदमी का वराट से’ —
अपनी जगह पहचानने क याद।
प्र.3 (ग) क व ने मानव क सीमाओं और क मय क ओर ध्यान दलाया है, ले कन कह भी क्रोध नह दखाया।
आपको इस क वता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चता या कुछ और? क्य ?
मेरे वचार म क वता का मूल भाव चता है, और उसे कहने का ढं ग मृदु व्यंग्य। करुणा भी नीचे-नीचे बहती है, पर वह ऊपर दखाई
नह दे ती।
प्रमाण पं क्तय से —
व्यंग्य: ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ और ‘दे श क कौन कहे’। यहाँ क व आरोप नह लगाते, बस आदमी का काम दोहरा
दे ते ह — और वह अपने-आप हास्यास्पद लगने लगता है।
चता: ‘इस पर भी आदमी…’ म जो ‘इस पर भी’ है, वही चता क आवाज़ है — इतना सब जान लेने के बाद भी आदमी नह
बदलता।
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करुणा: क व आदमी को दोषी कहकर छोड़ नह दे ते; वे उसे वराट के सामने रखकर उसक छोट -सी हस्ती दखाते ह। यह डाँट
नह , तरस है।
क्रोध क्य नह है: क्रोध म क व को स्वयं ऊँचे मंच पर खड़ा होना पड़ता, यानी ‘अपने को दूजे का स्वामी’ बताना
पड़ता — ठ क वही दोष जसक क वता आलोचना कर रही है। इस लए क व केवल अनुपात दखाते ह, फ़ैसला नह
सुनाते। तथ्य को सामने रख दे ना यहाँ गुस्से से कह ज़्यादा असर करता है।
प्र.4 (घ) आपके अनुसार ‘द वार उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने
वचारानुसार समझाइए।
क वता म ‘द वार उठाना’ ईंट-पत्थर का काम बलकुल नह है — यह एक मुहावरा है, जसका अथ है लोग के बीच भेद और दूरी
खड़ी करना।
सबसे पक्का सबूत गनती म ही है। ईंट क द वार ‘संख्यातीत शंख’ जतनी नह हो सकत — इतनी द वार बनाने के लए न जगह
है, न सामग्री। जो चीज़ इतनी असंख्य हो सकती है, वह अनदे खी ही होगी।
ये अनदे खी द वार कैसी होती ह —
जा त, धम, भाषा और प्रांत के नाम पर बनाए गए भेद।
अमीर-गरीब का भेद, लड़का-लड़क का भेद।
‘हम’ और ‘वे’ क सोच — दे श क सीमाएँ इसी सोच का बड़ा रूप ह।
सबसे छोट द वार: कसी से बोलना बंद कर दे ना। क वता का अंत इसी द वार पर होता है — ‘एक कमरे म / दो दु नया रचाता
है’।
ध्यान द जए: क्रया ‘उठाना’ है, ‘बनना’ नह । यानी ये द वार अपने-आप नह खड़ी होत — कोई उन्ह उठाता है।
और जसे उठाया जा सकता है, उसे गराया भी जा सकता है। क वता क उम्मीद इसी एक क्रया म छपी है।
प्र.5 (ङ) मानवता के वकास म सहयोग, समपण और स हष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृ त्तयाँ ईष्या, अहं, स्वाथ और
घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृ त्तय से कह अ धक प्रभावी ह। उदाहरण दे कर बताइए क स हष्णुता या सहयोग के
कारण समाज म कैसे प रवतन आए ह?
यह बात इ तहास और रोज़मरा — दोन से सद्ध होती है। कुछ उदाहरण —
स्वतंत्रता संग्राम: गांधी जी का अ हसक आंदोलन सहयोग और सहनशीलता पर टका था। अलग-अलग भाषा, धम और प्रांत
के लोग एक साथ खड़े हुए, तभी इतनी बड़ी सत्ता के सामने टक पाए।
सं वधान और समानता: भारत ने अपने सं वधान म सबको समान अ धकार दए — यह कसी एक समूह क जीत नह ,
अलग-अलग वचार के लोग के आपसी समझौते का फल है।
बीमारी के वरुद्ध: चेचक (स्मॉलपॉक्स) दु नया से मट , क्य क अलग-अलग दे श ने ट के, आँकड़े और डॉक्टर आपस म बाँटे।
अकेला कोई दे श यह नह कर सकता था।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात
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व ान और अंत रक्ष: अंतररा ीय अंत रक्ष स्टे शन कई दे श ने मलकर बनाया और चलाया। जो दे श ज़मीन पर एक-दूसरे से
असहमत रहते ह, वे भी वहाँ साथ काम करते ह।
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आपका अपना मुहल्ला: बाढ़, भूकंप या कसी दुघटना के समय लोग जात-पाँत भूलकर एक साथ खाना और आश्रय जुटाते ह।
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संकट म जो पहली
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ऐसा क्य होता है: ईष्या और स्वाथ बाँटकर घटाते ह — जो मेरा है, वह तेरा नह । सहयोग जोड़कर बढ़ाता है —
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ान, श्रम और संसाधन बाँटने पर घटते नह , कई गुना हो जाते ह। इसी लए द वार उठाने वाला अकेला रह जाता है
और साथ चलने वाला आगे बढ़ जाता है।
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अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 131
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(क) मान ली जए क आप एक दन के लए पूरे ब्र ांड को नयं त्रत कर सकते ह। अब आप मानव क कौन-कौन
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सी आदत को बदलना चाहगे? क्य ?
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यह कल्पना का प्रश्न है, पर इसका उत्तर क वता से जुड़ा रहना चा हए। सबसे अ ा तरीका यह है क आप वही आदत चुन जन्ह
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क वता स्वयं गनाती है — ईष्या, अहं, स्वाथ, घृणा, अ व ास — और हर आदत के बदले म एक ठोस बदलाव बताएँ।
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नमूना उत्तर: “एक दन के लए ब्र ांड मेरे हाथ म हो तो म तीन आदत बदलूँगा।
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s e m — द वार उठाने क आदत। म चा ँगा क उस दन कोई कसी से यह न पूछे क वह कस जा त, धम या
la दे श का है। कारण यह है क क वता के अनुसार आदमी क सारी द वार ‘संख्यातीत’ ह, और वे सब उसी एक सवाल
पहली
ag से शुरू होती ह।
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दूसरी — स्वामी बनने क आदत। उस दन कोई कसी को हुक्म न दे , केवल नवेदन करे। मुझे लगता है ‘अपने को
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s म हर व्य क्त को एक बार रात के आकाश म अन गन नक्षत्र दखाना
दूजे का स्वामी बताता है’ ही सारी लड़ाइय क जड़ है।
तीसरी — अपने को कद्र मानने कlaआदत।
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चा ँगा, ता क उसे अपना असली अनुपात याद आ जाए। जसे अपना आकार याद रहता है, वह घमंड नह कर
पाता।”
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(ख) य द आप अंत रक्ष यात्री बन जाएँ और ब्र ांड के कसी दूसरे भाग म जाएँ तो आप कस ान (कमरा, घर,
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नगर आ द) को सबसे अ धक याद करगे और क्य ?
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उत्तर म एक ही जगह चु नए और उसे ब्योरे से ल खए — कौन-सी आवाज़, कौन-सी गंध, कौन-सा कोना। कारण बताते समय यह
भी जो ड़ए क वह जगह आपके aलए
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: “म अपने घर क छत को सबसे अ धक याद करूँगी। क वता कहती है क कमरा घर म है और घर
मुहल्ले म — पर मेरे लए छत वह जगह है जहाँ ये सारी सी ढ़याँ एक साथ दखती ह। वहाँ से मुझे अपना मुहल्ला भी
दखता है, दूर का नगर भी, और सर उठाऊँ तो वही नक्षत्र जनक बात क वता करती है। शाम क अज़ान, मं दर क
घंट और नीचे गली म खेलते ब क आवाज़ — तीन एक साथ वह सुनाई दे ती ह। अंत रक्ष म सब कुछ होगा, पर
वह मली-जुली आवाज़ नह होगी। मुझे लगता है हम जगह को नह , उस जगह पर बने रश्त को याद करते ह।”
प्र.3 (ग) मान ली जए क एक ब ा या ब ी क वता म उ ल्ल खत सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है—
वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या दे खेगा या दे खेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत ल खए।
कैसे लख: क वता का क्रम ही आपक यात्रा का न ा है — कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदे श → दे श → पृथ्वी →
नक्षत्र → नभ गंगा → ब्र ांड। हर पड़ाव पर एक चीज़ बताइए जो छोट होती जाती है और एक चीज़ जो बड़ी होती जाती है। अंत
म वापस लौ टए — जैसे क वता लौटती है।
नमूना उत्तर (संक्षेप म):
“दरवाज़ा खोलते ही म छत के ऊपर था। नीचे मेरा घर एक डब्बे जैसा लग रहा था, जसक खड़क से अब भी बत्ती
जल रही थी।
थोड़ा और ऊपर — मुहल्ला हथेली भर का हो गया। जस गली म म और मेरा दोस्त झगड़ पड़े थे, वह अब एक पतली
लक र थी। मुझे हँसी आई क इतनी छोट लक र पर हम दो दन नह बोले थे।
नगर एक चमकता जाल बन गया, प्रदे श उस जाल का एक कोना, और दे श एक रंगीन टु कड़ा — पर आश्चय यह क
ऊपर से दे श क कोई सीमा-रेखा दखाई ही नह द । न े म जो मोट लक र थी, ज़मीन पर वह कह नह थी।
फर पृथ्वी — नीली, अकेली, बादल म लपट हुई। तब समझ आया क ‘करोड़ म एक ही’ का असली अथ क्या है।
चार ओर अन गन नक्षत्र थे, पर हरा-नीला केवल यही एक।
नभ गंगा क प र ध तक पहुँचकर पृथ्वी एक चमक ले कण-सी रह गई, और तब मुझे डर लगा — कसी बड़े जीव का
नह , अपने छोटे पन का।
लौटते हुए म सबसे पहले उसी गली म उतरा और अपने दोस्त से बोल पड़ा। इतनी दूर जाकर मने बस एक बात सीखी
— जतनी ऊँचाई से दे खो, द वार उतनी ही छोट दखती ह।”
प्र.4 (घ) इस क वता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्र ांड के अनुपात म कैसा अनुभव करते ह? एक अनु ेद
ल खए— “म ब्र ांड म एक… ँ।”
क्या होना चा हए: पहली पं क्त म एक उपमा चु नए (कण, बूँद, बीज, अक्षर, तारा…), फर दो-तीन वाक्य म बताइए क उस
उपमा से आपको छोटापन महसूस हुआ या ज़म्मेदारी।
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नमूना उत्तर: “म ब्र ांड म एक बीज ँ। बीज सबसे छोट चीज़ म से एक है — मु म सौ समा जाएँ। पर उसी
बीज के भीतर एक पूरा पेड़ बंद रहता है, जसक छाया म आगे चलकर कई लोग बैठगे। क वता पढ़कर मुझे अपना
छोटापन तो समझ आया, पर नराशा नह हुई। नक्षत्र के आगे म कुछ भी नह ँ, यह सच है; ले कन अपने कमरे,
अपने घर और अपनी कक्षा म म द वार भी बना सकता ँ और पुल भी। इतना बड़ा ब्र ांड मेरे हाथ म नह है — पर
एक कमरा तो है, और क वता के अनुसार आदमी क सबसे बड़ी गलती उसी एक कमरे म होती है।”
प्र.5 (ङ) मान ली जए क कसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है क उसे पृथ्वी के कसी व्य क्त क
आवश्यकता है। आप कसे भेजना चाहगे और क्य ?
इस प्रश्न म नाम से अ धक कसौट महत्वपूण है — आप कस गुण के आधार पर चुन रहे ह। पहले गुण तय क जए, फर व्य क्त।
नमूना उत्तर: “म कसी राजा, सेनाप त या सबसे धनी व्य क्त को नह भेजूँगी। जो ‘अपने को दूजे का स्वामी’ मानता
है, वह कसी नए संसार म भी सबसे पहले वही करेगा जो क वता कहती है — द वार उठाएगा।
म कसी श क्षका को भेजूँगी। कारण यह है क शक्षक का काम ही जोड़ना है — वह पहले सुनता है, फर बोलता
है, और अपने से अलग सोचने वाले को भी जगह दे ता है। नए संसार म सबसे पहले भाषा और भरोसा बनाना होगा,
हुकूमत नह । और य द वह पृथ्वी का प रचय दे , तो म चा ँगी क वह यही कहे — हम ‘करोड़ म एक ही’ पृथ्वी से
आए ह, और अभी हम आपस म मलकर रहना सीख ही रहे ह।”
प्र.6 (च) क वता म “ईष्या, अहं, स्वाथ” जैसी प्रवृ त्तय क चचा क गई है। कल्पना क जए क एक दन के लए ये
भाव सभी व्य क्तय म समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज म क्या-क्या प रवतन होगा?
बदलाव को छोटे से बड़े क ओर ल खए — ठ क उसी क्रम म जसम क वता चलती है। इससे उत्तर म क वता क बनावट भी झलक
जाएगी।
कमरे म: दो लोग जो नाराज़ होकर बैठे थे, बोलने लगगे। ‘दो दु नया’ फर से एक कमरा बन जाएगी।
घर और मुहल्ले म: पड़ोसी का दरवाज़ा खटखटाने म झझक नह होगी। छोट -सी बात पर होने वाले झगड़े खत्म हो जाएँगे।
व ालय म: कोई अंक छपाकर नह रखेगा; जो जसम कमज़ोर है, उसे बाक सखा दगे। नकल क ज़रूरत ही नह बचेगी।
नगर और दे श म: जमाखोरी बंद, भ्रष्टाचार बंद — क्य क दोन क जड़ स्वाथ है। अदालत म मुकदमे घट जाएँगे।
दु नया म: सीमाओं पर तनाव घटे गा, ह थयार पर खच होने वाला धन दवा, पानी और पढ़ाई पर लगेगा।
पर एक दन काफ़ नह : दूसरे दन ये भाव लौट सकते ह, क्य क ईष्या और अहं आदत ह, कानून नह । इस लए
असली बदलाव तभी होगा जब यह एक दन आदत बन जाए — और आदत रोज़ के छोटे -छोटे काम से बनती है:
कसी को अनदे खा न करना, माफ़ माँग लेना, बाँटकर खाना।
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प्र.7 (छ) य द आपको इस क वता का एक पोस्टर बनाना हो जसम इसके मूल भाव— ‘ वराटता और लघुता’ तथा
‘मनुष्य का भ्रम’— दशाया जाए तो आप क्या चत्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करगे? संक्षेप म बताइए।
पोस्टर म तीन चीज़ एक साथ दखनी चा हए — वराटता, लघुता और भ्रम। सबसे सरल उपाय यह है क पोस्टर को दो भाग म
बाँट दया जाए।
चत्र (ऊपर का बड़ा भाग): गहरा नीला-काला आकाश, अन गन तारे, बीच म एक छोट -सी नीली पृथ्वी। पृथ्वी इतनी छोट क
उस पर उँ गली रखनी पड़े।
चत्र (नीचे का छोटा भाग): एक कमरा, जसके बीच बीच एक द वार खड़ी है और दोन ओर एक-एक व्य क्त पीठ कए बैठा
है। दोन के सर के ऊपर एक-एक छोटा गोला, जसम वही बड़ा आकाश दख रहा है — पर वे उसे दे ख नह रहे।
प्रतीक: द वार (कृ त्रम सीमा), तराज़ू (अनुपात), आवधक लस जसके नीचे आदमी खुद को बड़ा दे ख रहा है (भ्रम), और एक
खुला दरवाज़ा (उम्मीद)।
शब्द: ऊपर बड़े अक्षर म “करोड़ म एक ही”, नीचे छोटे अक्षर म “एक कमरे म / दो दु नया रचाता है”। बीच म एक ही
पं क्त — “यह है अनुपात”।
यह डज़ाइन क्य : ऊपर का भाग जान-बूझकर बड़ा और नीचे का जान-बूझकर छोटा रखा गया है, ता क पोस्टर का
आकार ही अनुपात बता दे — दे खने वाले को पढ़ने से पहले महसूस हो जाए।
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 131
पाठ से
शब्द-भं डार
प्र.1 नीचे दए गए रक्त ान म ‘सृ ष्ट’ से जुड़े शब्द अपने समूह म चचा करके ल खए — (शब्द-जाल म कद्र म
‘सृ ष्ट’ तथा एक खाने म ‘पृथ्वी’ पहले से दया गया है; शेष छह खाने रक्त ह।)
पुस्तक के जाल म कद्र म ‘सृ ष्ट’ है और ऊपर क पं क्त के बीच वाले खाने म ‘पृथ्वी’ दया गया है। शेष छह खान म ये शब्द भरे जा
सकते ह —
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शब्द अथ / जुड़ाव
पथ्ृ वी (िदया हुआ ) वह ग्रह जस पर जीवन है
ब ांड सृ ष्ट का सबसे बड़ा फैलाव — क वता का अं तम पड़ाव
पकृ ित सृ ष्ट का दखाई दे ने वाला रूप — पेड़, नद , पवत
नक्षत्र तारे, जनक गनती ‘अन गन’ है
आकाशगंगा (नभ गंगा) तार का समूह, जसक प र ध सबको समेटे है
जीव सृ ष्ट म साँस लेने वाला हर प्राणी
रचना / िनम ण ‘सृ ष्ट’ का शा ब्दक अथ ही है — रचना
और भी शब्द: जगत, संसार, वश्व, भू म, ग्रह, अंत रक्ष, चराचर, वराट। इनम से कोई भी छह चुनकर जाल भरा जा
सकता है।
चुनने का तरीका: ‘सृ ष्ट’ के साथ वही शब्द जो ड़ए जो या तो उसका हस्सा ह (पृथ्वी, नक्षत्र, जीव), या उसका
पयाय ह (जगत, संसार), या उसका अथ खोलते ह (रचना, नमाण)। बेतरतीब शब्द जोड़ने से जाल कमज़ोर हो
जाता है।
सृजन — पृष्ठ 132
पाठ से
गतवध
प्र.1 (क) क वता म कमरे से लेकर ब्र ांड तक का वस्तार दखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखा चत्र,
सीढ़ या ‘मान सक- चत्रण’ (माइंड-मैप) ारा प्रद शत क जए। प्रत्येक स्तर पर कुछ वशेषताएँ ल खए, जैसे—
पास-पड़ोस क एक वशेष बात, नगर का कोई ान, दे श क व वधता आ द। उसके नीचे एक पं क्त म इस प्रश्न
का उत्तर ल खए— “म इस चत्र म कहाँ ँ और क्य ?”
सीढ़ बनाइए और उसे नीचे से ऊपर चढ़ाइए। क वता का क्रम बलकुल यही है —
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स्तर क वता क पं क्त आप क्या लखगे (उदाहरण)
m दो व्य क्त कमरे म / कमरे से छोटे as e
1. व्यिक्त
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मेर ा नाम , मेर ी उम , मुझे क्या अच्छा लगता है
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g l a कमरा है घर म पढ़ ने की मेज़, िखड़की से िदखने वाला पेड़
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2. कमरा
3. घर घर है मुहल्ले म दादी की कहािनयाँ, रसोई की गंध
. comनु कड़ की दुकान, खेल का मैदान, योहार पर सजती गली ag
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4. मुहल्ला मुहल्ला नगर म
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5. नगर नगर है प्रदे श म
a g l बस अ ा, पुस्तकालय, नदी का घाट
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6. पदे श प्रदे श कई दे श म पदे श की बोली, लोकनत्ृ य, फ़ सल
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a s em— एक संिवधान
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7. दे श दे श कई पृथ्वी पर अनेक भाषाएँ, अनेक ऋतुए ँ, अनेक योहार त्
m . एकमा गह जहाँ पानी, हवाaऔर जीवन है
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8. पथ्ृ वी अन गन नक्षत्र म / पृथ्वी एक छोट
agl9. नक्षत्र / नभ गंगा
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सबको समेटे है / प र ध नभ गंगा क करोड़ों तारे , सूय उनमें एक साधारण तारा
m िजसका छोर आज तक िकसी ने नही ं दे खा a s
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10. ब ांड लाख ब्र ांड म / अपना एक ब्र ांड
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नमूना अं तम पं क्त: “म इस चत्र म सबसे नीचे क सीढ़ पर ँ — क्य क आकार म म सबसे छोटा ँ; पर यही
एकमात्र सीढ़ है जस पर म कुछ बदल सकता ँ, इस लए चत्र यह से शुरू होता है।”
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बनाते समय ध्यान र खए: हर ऊपर वाला खाना नीचे वाले को अपने भीतर दखाए (एक डब्बे म डब्बा), केवल
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a s em बगल म नह । क वता क पूरी बनावट इसी ‘भीतर’ पर टक है — इसी लए लगभग हर पं क्त ‘म’ पर खत्म होती है।
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comलखनी हो जसका नाम हो ‘ब्र ांड म मानव’ तो उसको आरंभ g l a
प्र.2
कैसे करगे? कुछ वाक्य ल खए। em
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(ख) अगर इसी क वता क तरह कोई कहानी
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आरंभ का सूत्र: क वता क तरह कहानी भी सबसे छोट चीज़ से शुरू क जए, फर धीरे-धीरे कैमरा पीछे ख चए। इससे पाठक को
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शुरू म ही अनुपात का अंदाज़ा हो जाता है।
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नमूना आरंभ:
“मेज़ पर रखी घड़ी ने ठ क नौ बजाए और छोटे -से कमरे म दो लोग ने एक-दूसरे से मुँह फेर लया।
कमरा उस घर का सबसे छोटा कमरा था। घर उस गली का सबसे पुराना घर था। गली उस नगर क हज़ार ग लय म
से एक थी, और नगर उस दे श के हज़ार नगर म से एक।
उसी समय, उस घर क छत से बहुत ऊपर, एक उपग्रह चुपचाप गुज़र रहा था। उसके कैमरे म न वह कमरा आया, न
वह गली, न वह झगड़ा — सफ़ एक नीला गोला आया, बादल म लपटा हुआ, अन गन तार के बीच अकेला।
कहानी यह से शुरू होती है — इस सवाल से क उस नीले गोले पर वह द वार आ ख़र कतनी बड़ी थी।”
प्र.3 (ग) ‘एक कमरे म दो दु नया रचाता है’ पं क्त को ध्यान से प ढ़ए। अगर आपसे कहा जाए क आप एक ऐसी
दु नया बनाइए जसम कोई द वार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वणन क जए।
पहले तय क जए क आप कस तरह क द वार हटा रहे ह — क वता क द वार ईंट क नह , भेद क है। इस लए बना द वार क
दु नया का अथ खुले मैदान नह , बना भेद का समाज है।
नमूना उत्तर: “मेरी दु नया म मकान ह गे, दरवाज़े भी ह गे — पर उन दरवाज़ पर ताले नह , कुंडी होगी, जसे कोई
भी खटखटा सके।
वहाँ व ालय म बैठने का क्रम अंक से तय नह होगा। खेल के मैदान म ट म बनाते समय कोई आ खर म नह
बचेगा।
वहाँ कसी से उसका उपनाम, धम या पता का पेशा पूछकर उसक जगह तय नह क जाएगी — सफ़ उसका नाम
काफ़ होगा।
वहाँ न े तो ह गे, पर वे दशा बताएँगे, बँटवारा नह ।
और सबसे ज़रूरी बात — वहाँ नाराज़गी होगी, झगड़े भी ह गे, पर उनके बाद बोलना बंद नह होगा। क्य क क वता
के अनुसार सबसे छोट और सबसे पक्क द वार यही है — एक ही कमरे म रहकर एक-दूसरे से बात न करना।”
ध्यान र खए: बना द वार क दु नया का अथ ‘सब एक जैसे’ नह है। क वता ‘ कतनी ही सृ ष्टयाँ’ कहकर अनेकता
को सराहती है। द वार अलगपन से नह बनती, अलगपन को नीचा मानने से बनती है।
प्र.4 (घ) एक चत्र ंखला बनाइए जसम ये क्रम दखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → दे श →
पृथ्वी → ब्र ांड। प्रत्येक चत्र म आकार का अनुपात दखाया जाए जससे यह स्पष्ट हो क आदमी कतना छोटा
है।
बनाने क व ध: आठ चौकोर खाने बनाइए। हर अगले खाने म पछला चत्र उसी जगह, पर बहुत छोटा करके र खए और उस पर
एक तीर का नशान लगाइए — ‘आप यहाँ ह’। इस तरह हर पन्ने पर आदमी क जगह वही रहेगी, बस आकार घटता जाएगा। यही
तरक ब अनुपात को आँख से दखा दे ती है।
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चत्र क्या दखे आदमी कतना बड़ा दखे
1. आदमी खड़ा हुआ एक व्य क्त पूरे खाने िजतना
2. कमरा चारपाई, मेज़, खड़क और कोने म वही व्य क्त खाने का लगभग चौथाई
3. घर कई कमरे, आँगन, छत एक उँ गली िजतना
4. पड़ोसी क्षेत्र गली, दुकान, पेड़, मैदान एक िबंद ु
5. नगर ऊपर से दखती सड़क का जाल िदखाई ही न दे — तीर से बताइए
6. दे श न दयाँ, पहाड़, समुद्र-तट के वल तीर
7. पथ्ृ वी नीला गोला, बादल के वल तीर
8. ब ाड
ं अन गन तारे, बीच म एक चमक ला बदु पथ्ृ वी स्वयं िबंद ु भर
अंत म ल खए: क वता क वही दो पं क्तयाँ जनसे यह पूरी ंखला नकली है — “यह है अनुपात / आदमी का
वराट से।”
क वता क रचना — पृष्ठ 132–133
पाठ से
भाषा
प्र.1 (क) अपने समूह के साथ मलकर क वता क अन्य वशेषताओं क सूची बनाइए। अपने समूह क सूची को कक्षा
म सबके साथ साझा क जए।
पुस्तक ने दो वशेषताएँ स्वयं बता द ह — अ धकतर पं क्तय का अं तम शब्द ‘म’ है और पं क्तयाँ बहुत छोट -छोट ह। सूची
इनसे आगे बढ़ाइए —
एक ही साँचे क पुनरावृ त्त: ‘क है ख म’ — कमरा है घर म, घर है मुहल्ले म, मुहल्ला नगर म। साँचा वही रहता है, केवल नाम
बदलते ह।
क्रया का लोप: ‘मुहल्ला नगर म’ म ‘है’ गायब है। इससे ग त तेज़ होती है — जैसे सी ढ़याँ तेज़ी से चढ़ जा रही ह ।
कोई तुक नह : यह मुक्त छं द (अतुकांत) क वता है। लय तुक से नह , दोहराव और छोट पं क्तय से बनती है।
संख्याओं क भरमार: दो, अन गन, करोड़ , लाख , कतनी ही, संख्यातीत, शंख — क वता गनती क भाषा म सोचती है,
इसी लए शीषक भी ग णत का शब्द है — ‘अनुपात’।
क्रयाओं का बदल जाना: पहले भाग म केवल ‘है’ ( त) है; दूसरे भाग म ‘उठाता है’, ‘बताता है’, ‘रचाता है’ (कम) आ
जाते ह। सृ ष्ट बस है, आदमी लगातार करता है।
वृत्ताकार बनावट: क वता कमरे से शुरू होकर कमरे पर ही खत्म होती है।
नदे शक चह्न (—) का प्रयोग: ठहराव दे ने और आगे क बात क ओर संकेत करने के लए।
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तत्सम और आम बोलचाल का मेल: ‘संख्यातीत’, ‘प र ध’, ‘ वराट’ जैसे तत्सम शब्द के साथ ‘मुहल्ला’, ‘कमरा’, ‘दूजे’
जैसे रोज़ के शब्द।
प्र.2 (ख) नीचे इस क वता क कुछ वशेषताएँ और वे पं क्तयाँ द गई ह जनम ये वशेषताएँ झलकती ह। वशेषताओं
का सही पं क्तय से मलान क जए— 1. सरल वाक्य के शब्द को वशेष क्रम म लगाया गया है। 2. मुहावरे का
प्रयोग कया गया है। 3. छोटे से बड़े क ओर वस्तार दे ने के लए शब्द को दोहराया गया है। 4. प्रश्न शैली म व्यंग्य
कया गया है। 5. अ तशयो क्त से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। 6. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य
कया गया है। — पं क्तयाँ: 1. संख्यातीत शंख सी द वार उठाता है 2. कमरा है घर म, घर है मोहल्ले म, मोहल्ला
नगर म… 3. दे श क कौन कहे, एक कमरे म दो दु नया रचाता है 4. कमरा है घर म 5. यह है अनुपात आदमी का
वराट से 6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है
वशेषता पं क्त कैसे
1. सरल वाक्य के शब्दों को 4. कमरा है घर में सीधा वाक्य होता ‘कमरा घर म है’। क व ने ‘है’ को बीच म लाकर
िवशेष क्रम में क्रम बदला, जससे ‘म’ पं क्त के अंत म आ जाए।
2. मुहावरे का पयोग 1. संख्यातीत शंख सी दीवारे ं ‘द वार उठाना’ मुहावरा है — भेद और सीमाएँ खड़ी करना।
उठाता है
3. िवस्तार के िलए शब्दों का 2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले हर पं क्त का अं तम शब्द अगली पं क्त का पहला शब्द बनता है —
दोहराव में, मोहल्ला नगर में… इसी ंखला से वस्तार बनता है।
4. पश्न शैल ी में व्यंग्य 3. दे शों की कौन कहे, एक कमरे में ‘कौन कहे’ प्रश्न क शक्ल म है, पर उत्तर नह माँगता — यह व्यंग्य है।
दो दुिनया रचाता है
5. अितशयोिक्त से भरा 5. यह है अनुपात आदमी का िवराट आदमी क तुलना सीधे असीम वराट से — तुलना को अं तम सीमा
कथन से तक बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया है।
6. मानव के अहंक ार पर 6. अपने को दू जे का स्वामी बताता ‘बताता है’ शब्द बता दे ता है क यह स्वा मत्व सच नह , दावा भर है।
तीखा व्यंग्य है
ध्यान दे ने योग्य बात: दो पं क्तय म एक से अ धक वशेषताएँ एक साथ मौजूद ह। ‘संख्यातीत शंख सी द वार’ म
मुहावरा भी है और अ तशयो क्त भी (शंख = 1017); ‘दे श क कौन कहे’ म प्रश्न-शैली का व्यंग्य भी है और ‘कौन
कहे’ मुहावरा भी। चूँ क मलान म हर वशेषता एक ही पं क्त से जुड़नी है, इस लए ऊपर वाली जोड़ी ही पूरी ता लका
को बैठाती है। कक्षा म य द कसी साथी ने ‘मुहावरा → 3’ और ‘अ तशयो क्त → 1’ जोड़ा हो, तो उसका तक भी
सु नए — यही दे खना क एक पं क्त म कतनी यु क्तयाँ एक साथ काम कर रही ह, इस अभ्यास का असली लाभ है।
क वता का स दय — पृष्ठ 133
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पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) क वता म अलग-अलग प्रकार से ब्र ांड क वशालता को व्यक्त कया गया है। उनक पहचान क जए।
क व वशालता कह भी ‘बहुत बड़ा’ कहकर नह बताते। वे उसे चार अलग-अलग तरीक से हमारे सामने खड़ा करते ह —
1. सीढ़ दार ंखला से — ‘कमरा है घर म / घर है मुहल्ले म / मुहल्ला नगर म / नगर है प्रदे श म / प्रदे श कई दे श म / दे श
कई पृथ्वी पर’। हर पं क्त पछली को अपने भीतर नगल लेती है। वशालता बताई नह जाती, एक-एक कदम चलकर नापी
जाती है।
2. गनती से परे क संख्याओं से — ‘अन गन नक्षत्र ’, ‘करोड़ म एक ही’, ‘लाख ब्र ांड म’, ‘संख्यातीत शंख’। ये संख्याएँ
इतनी बड़ी ह क कल्पना उन्ह पकड़ नह पाती — और यही उनका काम है।
3. समेटने के बब से — ‘सबको समेटे है / प र ध नभ गंगा क ’। यहाँ वशालता आकार से नह , समाने क क्षमता से बताई
गई है।
4. बहुवचन के दोहराव से — ‘हर ब्र ांड म / कतनी ही पृ थ्वयाँ / कतनी ही भू मयाँ / कतनी ही सृ ष्टयाँ’। ‘ कतनी ही’
लगातार तीन बार आता है और हर बार शब्द बहुवचन म है। एक पृथ्वी नह — पृ थ्वयाँ; एक सृ ष्ट नह — सृ ष्टयाँ।
सबसे बड़ी छलाँग: ‘लाख ब्र ांड म / अपना एक ब्र ांड’। ब्र ांड का अथ ही है ‘सब कुछ’। उसका बहुवचन बना
दे ना — और अपने ब्र ांड को उनम से मात्र एक कह दे ना — भाषा क सीमा से भी आगे जाकर वशालता कहना है।
यह पाठक को अपना अनुपात सचमुच महसूस होता है।
प्र.2 (ख) “संख्यातीत शंख सी द वार उठाता है” / “अपने को दूजे का स्वामी बताता है” / “एक कमरे म दो दु नया
रचाता है” — क वता म ये सारी क्रयाएँ मनुष्य के लए आई ह। आप अपने अनुसार क वता म नई क्रयाओं का
प्रयोग करके क वता क रचना क जए।
पहले दे ख ली जए क क व ने कौन-सी क्रयाएँ चुनी ह — उठाता है, बताता है, रचाता है। तीन एक ही तुक म ह (‘-आता है’),
तीन वतमान काल म ह, और तीन करने वाली क्रयाएँ ह। इसी लए आदमी लगातार कुछ न कुछ करता हुआ दखता है, जब क सृ ष्ट
केवल ‘है’।
अब वही ढाँचा लेकर नई क्रयाएँ भ रए — क्रयाएँ बद लए, ढाँचा वही र खए।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात
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नमूना रचना 1 (वही व्यंग्य, नई क्रयाएँ):
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नमूना रचना 2 (उलट दशा — द वार गराने क क्रयाएँ):
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यह है अनुपात
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आदमी का से
a glaइसे जानकर आदमी
अपनी द वार गराता है
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दूजे क बात सुनता है
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अपना कोना बँटाता है
दे श क कौन कहे
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एक कमरे म a
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एक दु नया बसाता है
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रचते समय ध्यान द जए: पं क्तयाँ छोट र खए, तुक क चता मत क जए, पर क्रया हमेशा पं क्त के अंत म
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la s खए — जैसे मूल क वता म है। क्रया अंत म आने से हर पं क्त एक चोट क तरह गरती है।
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आपके शब्द — पृष्ठ 134
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पाठ से
शब्द-भं डार
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“सबको समेटे है / प र ध नभ गंगा क ” — आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और
a s emपढ़ा होगा। ले कन क वता म
gl बना है। आप भी अपने समूह म
co ‘नभ गंगा’ जैसे शब्द का प्रयोग कया गया है। यह शब्द दो शब्द से aमलकर
प्र.1
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as em मलकर इसी प्रकार दो शब्द को मलाकर नए शब्द बनाइए।
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m और लयदार हो गया।
नभ + गंगा = नभगंगा — आकाश म बहती हुई गंगा, अथात आकाशगंगा। क व ने ‘आकाश’ क जगह उसका छोटा और अ धक
काव्यात्मक पयाय ‘नभ’ रखा, जससे शब्दeहल्का
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
पहला शब्द दूसरा शब्द नया शब्द अथ
नभ चर नभचर आकाश म वचरने वाला — पक्षी
जल धारा जलधारा पानी क बहती धार
िगिर राज िगिरराज पवत का राजा
पवन पुत्र पवनपुत्र पवन का पुत्र — हनुमान
चंद मुख चंद मुख चंद्रमा-सा मुख
रात रानी रातरानी रात म महकने वाला फूल
िदन कर िदनकर दन करने वाला — सूय
मेघ दू त मेघ दू त बादल जो संदेश ले जाए
ऐसे शब्द क्य बनाए जाते ह: दो शब्द जुड़कर एक चत्र बना दे ते ह। ‘आकाशगंगा’ कहने पर हम एक जानकारी
दे ते ह; ‘नभ गंगा’ कहने पर आँख के सामने आकाश म बहती नद आ जाती है। क वता जानकारी नह , चत्र दे ती है
— इसी लए वह ऐसे शब्द गढ़ती है।
आपके प्रश्न — पृष्ठ 134
पाठ से
खोज
प्र.1 “हर ब्र ांड म / कतनी ही पृ थ्वयाँ / कतनी ही भू मयाँ / कतनी ही सृ ष्टयाँ” — क्या आपके म स्तष्क म कभी
इस प्रकार के प्रश्न आते ह? अवश्य आते ह गे। अपने समूह के साथ मलकर अपने मन म आने वाले प्रश्न क सूची
बनाइए। अपने शक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय क सहायता से इन प्रश्न के उत्तर ढूँ ढ़ने का प्रयास क जए।
सूची बनाते समय प्रश्न को दो खान म र खए — जनका उत्तर आज उपलब्ध है, और जनका उत्तर अभी कसी के पास नह । दोन
तरह के प्रश्न ज़रूरी ह।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्न आज हम क्या जानते ह
हमारी आकाशगंग ा में िकतने तारे है?ं लगभग 10,000 करोड़ से भी अिधक — िगनती अनुम ान से ही होती है।
क्या पथ्ृ वी जैसे और ग ह है?ं वै ािनकों ने अब तक हज़ारों ‘बाह्यगह’ (ए क्सोप्लै नेट) खोजे है;ं कु छ पर पानी की संभावना मानी
जाती है।
सूर ज की रोशनी पथ्ृ वी तक िकतनी दे र में लगभग 8 िमनट 20 से कं ड।
आती है?
ब ांड का छोर कहाँ है? अभी अ ात। हम के वल उतना ही दे ख पाते है ं जहाँ तक पकाश हम तक पहच
ु ँ सका है।
क्या हमारे अलावा भी कही ं जीवन है? अभी तक कोई पमाण नही ं िमला — खोज जारी है।
क्या सचमुच कई ब ांड है?ं यह अभी एक वै ािनक क ल्पना है, िस द्ध नही ं। किवता की पंिक्त ‘लाखों ब ांडों में’ इसी क ल्पना
को छू ती है।
खोजने के ोत: व ालय का पुस्तकालय, व ान क प त्रकाएँ, इसरो (ISRO) और नासा (NASA) क वेबसाइट,
तथा अपने व ान- शक्षक। हर उत्तर के साथ यह भी ल खए क वह कहाँ से मला — ोत लखना अ खोज क
पहली शत है।
वशेषण और वशेष्य — पृष्ठ 134–135
पाठ से
व्याकरण
प्र.1 अब आप नीचे द गई पं क्तय म वशेषण और वशेष्य शब्द को पहचानकर ल खए — 1. दो व्य क्त कमरे म 2.
अन गन नक्षत्र म 3. लाख ब्र ांड म 4. अपना एक ब्र ांड 5. संख्यातीत शंख सी 6. एक कमरे म 7. दो दु नया
रचाता है
जो शब्द वशेषता बताए वह वशेषण, और जसक वशेषता बताई जाए वह वशेष्य (वह सदा सं ा होती है)।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
क्रम पं क्त वशेषण वशेष्य वशेषण का भेद
1. दो व्यिक्त कमरे में दो यिक्त
व् न श्चत संख्यावाचक
2. अनिगन नक्षत्रों में अनिगन नक्षत्र ों अ न श्चत संख्यावाचक
3. लाखों ब ांडों में लाखों ब ांडों अ न श्चत संख्यावाचक
4. अपना एक ब ाड
ं अपना, एक ब ाड
ं ‘अपना’ सावना मक, ‘एक’ न श्चत संख्यावाचक
5. संख्यातीत शंख सी संख्यातीत शंख अ न श्चत संख्यावाचक
6. एक कमरे में एक कमरे न श्चत संख्यावाचक
7. दो दुिनया रचाता है दो दुिनया न श्चत संख्यावाचक
पाँचव पं क्त पर ध्यान: पूरी पं क्त है — ‘संख्यातीत शंख सी द वार उठाता है’। यहाँ ‘संख्यातीत’ ‘शंख’ क
वशेषता बता रहा है, और फर पूरा वाक्यांश ‘संख्यातीत शंख सी’ मलकर ‘द वार’ का वशेषण बन जाता है।
यानी एक वशेषण के भीतर दूसरा वशेषण — इसी से पं क्त म अ तशयो क्त का असर दुगना हो जाता है।
दे खने लायक बात: इस पूरी क वता के लगभग सारे वशेषण संख्यावाचक ह — दो, एक, अन गन, लाख , करोड़ ,
कतनी ही, संख्यातीत। रंग, स्वाद या गुण बताने वाला कोई वशेषण यहाँ है ही नह । कारण साफ़ है — क वता का
वषय ही आकार और गनती है, यानी अनुपात।
आपक बात — पृष्ठ 135
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) कोई ऐसी त बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बगड़ गया हो— जैसे काम का बोझ अ धक और समय कम।
‘अनुपात बगड़ना’ का अथ है — दो चीज़ का आपसी संतुलन टू ट जाना। पुस्तक ने एक उदाहरण दे दया है; कुछ और —
पढ़ाई और न द: परीक्षा के दन म पढ़ने के घंटे बढ़ जाते ह और सोने के घटते जाते ह। नतीजा — पढ़ा हुआ याद ही नह
रहता, क्य क याद रखने का काम न द म होता है।
खच और आमदनी: जब खच आमदनी से बड़ा हो जाए तो घर चलाना क ठन हो जाता है।
वषा और ना लयाँ: बा रश उतनी ही होती है, पर ना लयाँ पट जाएँ तो नगर डू ब जाता है। यहाँ पानी नह , अनुपात बगड़ा है।
पेड़ और मकान: मुहल्ले म मकान बढ़ते गए और पेड़ घटते गए — इस लए गम बढ़ गई।
मोबाइल और खेल: पद पर बीतने वाला समय बढ़ता जाए और मैदान का घटता जाए तो शरीर और मन दोन थकने लगते ह।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
क वता से जो ड़ए: क वता जस अनुपात क बात करती है, वह भी ऐसे ही बगड़ा हुआ है — आदमी का आकार
बहुत छोटा और उसका अहंकार बहुत बड़ा। हर बगड़े अनुपात का इलाज एक ही है — जो बढ़ गया है उसे घटाना,
या जो घट गया है उसे बढ़ाना।
प्र.2 (ख) आप अपने प रवार, व ालय या मोहल्ले म ‘ वराटता’ ( वशाल दृ ष्टकोण) कैसे ला सकते ह? कुछ उपाय
सोचकर ल खए। (संकेत— कसी को अनदे खा न करना, सबक सहायता करना आ द)
वराटता का अथ बड़ा काम करना नह , बड़ी दृ ष्ट रखना है — यानी अपने से आगे दे ख पाना। कुछ ठोस उपाय —
प रवार म: घर के काम म हाथ बँटाना और यह न मानना क रसोई या सफ़ाई कसी एक क ज़म्मेदारी है। बड़ क बात सुनने
के लए रोज़ थोड़ा समय रखना।
व ालय म: मध्याह्न भोजन या खेल के समय कसी को अकेला न छोड़ना। जस वषय म आप अ े ह, वह कसी साथी को
सखा दे ना। नई आने वाली छात्रा को कक्षा दखा दे ना।
ट म बनाते समय: पहले उसे चुनना जसे आमतौर पर सबसे बाद म चुना जाता है।
मुहल्ले म: सफ़ाई अ भयान म शा मल होना, बुजग का सामान उठा दे ना, पानी क बबाद रोकना, त्योहार पर सफ़ अपने समूह
को नह , पूरे मुहल्ले को बुलाना।
भाषा म: कसी क बोली, कपड़ या नाम पर मज़ाक न बनाना — मज़ाक ही सबसे पहली द वार होता है।
कसौट : हर उपाय पर एक सवाल लगाइए — “इससे कोई भीतर आया या कोई बाहर हुआ?” जो काम एक व्य क्त
को भी और भीतर ले आए, वही वराटता है। क वता का ‘सबको समेटे है’ इसी का सूत्र है।
प्र.3 (ग) ‘करोड़ म एक ही पृथ्वी’— इस पं क्त को पढ़कर आपके मन म क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी
को सुर क्षत रखने के लए क्या-क्या करगे?
भाव — पहले आश्चय, फर ज़म्मेदारी। करोड़ पड म केवल यही एक ऐसी है जहाँ हवा, पानी और जीवन है। जो चीज़ ‘करोड़ म
एक ही’ हो, उसका कोई दूसरा वकल्प नह होता — बगड़ जाए तो जाने के लए कोई और घर नह ।
म क्या करूँगा/करूँगी —
पानी बचाना — नल बंद रखना, टपकते नल क मरम्मत करवाना, वषा-जल संचयन के बारे म घर म बात करना।
बजली बचाना — कमरे से नकलते समय पंखा-बत्ती बंद करना।
प्ला स्टक कम करना — कपड़े का थैला साथ रखना, एक बार इस्तेमाल होने वाली बोतल न लेना।
पेड़ लगाना और लगे हुए पेड़ क दे खभाल करना — लगाने से अ धक क ठन बचाना है।
कूड़े को गीले-सूखे म अलग करना और कागज़ दोन ओर से लखना।
पास क दूरी पैदल या साइ कल से तय करना।
अपने मुहल्ले म इनक चचा करना — अकेले कया गया काम एक घर बचाता है, मलकर कया गया काम मुहल्ला।
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याद र खए: ये सब छोटे काम ह, और क वता का सबक भी यही है — बड़े ब्र ांड म हमारा हाथ बहुत छोटा है, पर
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वह छोटा हाथ भी अपनी जगह पूरा काम कर सकता है।
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प्र.4 (घ) क वता हम ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्र त सचेत करती है। आप अपने कन- कन गुण को प्रबल
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करगे ता क आपम ऐसा भाव न आए?
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‘स्वामी’ बनने का भाव अचानक नह आता; वह छोट -छोट आदत से बनता है। इस लए उसक काट भी आदत म ही है।
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गुण वह रोज़ कैसे दखेगा
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कस भाव को रोकेगा
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अपनी उपल ब्ध का ढढोरा न पीटना; गलती मान लेना
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aglसुनने की आदत बीच म न टोकना; दूसरे क बात पूरी सुनकर उत्तर दे ना वचस्व
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समानता का भाव घर म काम करने वाल से भी उसी शष्टता से बोलना ऊँच-नीच
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घ ृणा
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सहानुभिू त यह सोचना क दूसरे क जगह होता तो मुझे कैसा लगता
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पुस्तक, नोट् स, खाना और अवसर बाँटना वाथ
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जीतने वाले को सचमुच बधाई दे ना ईष्य
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दू स रे की सफलता पर खुशी
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.c कारगर उपाय: अपना अनुपात याद रखना। जसे यह याद रहता है क वह
a gअन गन नक्षत्र के बीच एक छोटे
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aseग्रह का एक छोटा-सा जीव है, उसके भीतर कसी का स्वामी बनने क इ ा टकती ही नह । इसी लए यह क वता
सबसे
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उपदे श नह दे ती — वह सफ़ नाप दखा दे ती है।
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प्र.5
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(ङ) अपने जीवन म ऐसी तीन ‘द वार ’ के वषय म सो चए जो आपने स्वयं खड़ी क ह (जैसे— डर, संकोच
आ द)। फर एक योजना बनाइए क आप उन्ह कैसे तोड़गे? क्या समाज म भी ऐसी द वार होती ह? उन्ह गराने म
हम कैसे सहायता कर सकते ह?
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a s emपहले अपनी द वार पहचा नए, फर हर एक के लए एक छोटा-सा पहला कदम तय क जए। योजना तभी काम करती है जब
agl पहला कदम इतना छोटा हो क कल ही उठाया जा सके।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
मेरी द वार वह क्या रोकती है पहला कदम
कक्षा में पश्न पूछने का संक ोच शंका मन म ही रह जाती है हर िदन कम से कम एक पश्न पूछूँगा — चाहे छोटा ही हो
गिणत से डर अभ्यास से बचता ँ, इस लए डर और रोज़ के वल दो सवाल — पर िबना नागा
बढ़ता है
‘वह मेरे जैस ा नही ं है’ वाली नए सा थय से दूरी बनी रहती है इस स प्ताह उस साथी के पास बैठूँगा िजससे अब तक बात
िझझक नही ं हईु
समाज क द वार और हमारी भू मका — हाँ, समाज म भी ऐसी द वार ह — जा त, धम, जडर, अमीरी-गरीबी, भाषा और क्षेत्र
क । हम इन्ह ऐसे कमज़ोर कर सकते ह —
अपने आसपास कसी को नाम, जा त, रंग, बोली या शरीर के कारण चढ़ाया जाए तो चुप न रहना।
व ालय के समूह म सबको शा मल करना — वशेष आवश्यकता वाले सा थय को भी।
घर पर टोकना, जब कोई कसी समूह के बारे म सब-को-एक-जैसा मान लेने वाली बात कहे।
ऐसे आयोजन म भाग लेना जहाँ अलग-अलग पृष्ठभू म के लोग साथ काम करते ह — खेल, श्रमदान, नाटक।
क्य यही तरीका: क वता क क्रया ‘उठाता है’ है — द वार अपने-आप नह बनत , आदमी उन्ह बनाता है। जसे
बनाया गया है, उसे गराया भी उसी तरह जा सकता है — एक-एक ईंट, एक-एक दन।
संख्यातीत शंख — पृष्ठ 136–137
पाठ से आगे
ता लका
प्र.1 ता लका के आधार पर नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर खो जए — 1. जस संख्या म 15 शून्य होते ह, उसे क्या कहते
ह?
उसे पद्म कहते ह।
पद्म = 1,00,00,00,00,00,00,000
= 1 के आगे 15 शून्य
= 1015
पहचानने का नयम: ता लका के तीसरे स्तंभ म जो घातांक है, वही शून्य क संख्या है। 1015 का अथ ही है — 1
के बाद 15 शून्य।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. महाशंख म कतने शून्य होते ह?
19 शून्य।
महाशंख = 1,00,00,00,00,00,00,00,00,000
= 1019 → 1 के आगे 19 शून्य
ध्यान द जए: ता लका म महाशंख सबसे बड़ी संख्या है और वही अं तम पं क्त म है।
प्र.3 3. एक लाख म कतने हजार होते ह?
100 हजार।
एक लाख = 1,00,000 = 105
एक हजार = 1,000 = 103
1,00,000 ÷ 1,000 = 100
घातांक से जाँच: 105 ÷ 103 = 105−3 = 102 = 100। दो शून्य का अंतर, इस लए सौ गुना।
प्र.4 4. उपयुक्त ता लका के अनुसार सबसे छोट और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
सबसे छोट — एक (इकाई) = 1 = 100
सबसे बड़ी — महाशंख = 1019
दोन का अंतर कतना बड़ा है: महाशंख, एक से पूरे 1019 गुना बड़ा है। क वता क पं क्त ‘संख्यातीत शंख सी
द वार उठाता है’ इसी पैमाने का सहारा लेती है — शंख (1017) जतनी द वार बनाना असंभव है, और यही
असंभवता अ तशयो क्त को जन्म दे ती है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
उत्तर — 1,10,00,00,000, अथात एक अरब दस करोड़।
दस करोड़ = 10,00,00,000 = 108
एक अरब = 1,00,00,00,000 = 109
10,00,00,000 + 1,00,00,00,000
= 1,10,00,00,000 (एक अरब दस करोड़ )
जाँच: एक अरब = दस करोड़ × 10। इस लए जोड़ = दस करोड़ × (10 + 1) = दस करोड़ × 11 =
1,10,00,00,000। दोन तरीक़ से एक ही उत्तर मलता है।
ध्यान र खए: यह भारतीय संख्या प्रणाली है, इस लए अंक इस क्रम म लगते ह — 1,10,00,00,000 (पहले तीन
अंक, फर दो-दो के जोड़े)।
समावेशन और समानता — पृष्ठ 137
पाठ से आगे
समू ह चचा
प्र.1 जैसे पृथ्वी अन गनत नक्षत्र म एक छोटा-सा ग्रह है, वैसे ही प्रत्येक व्य क्त, चाहे वह वशेष आवश्यकता वाला हो
या न हो, समाज का एक महत्वपूण भाग है। एक समूह चचा आयो जत कर जसम सभी मानव के लए समान
अवसर क आवश्यकता पर बल दया जाए। (भले ही उनका जडर, आय, मत, व ास, शारी रक रूप, रंग या
आकार-प्रकार आ द कैसा भी हो)
चचा कैसे चलाएँ —
1. कक्षा को छोटे समूह म बाँ टए। हर समूह एक क्षेत्र ले — व ालय, खेल, यात्रा, नौकरी, सावज नक ान।
2. हर समूह दो सू चयाँ बनाए: कहाँ अवसर बराबर नह मलते और उसे बराबर करने के लए क्या बदलना होगा।
3. अंत म सब मलकर व ालय के लए पाँच नयम तय कर और उन्ह कक्षा म लगाएँ।
चचा म उठने योग्य बदु —
पहुँच (एक्सेस): क्या हमारे व ालय म रप है? पुस्तकालय और शौचालय तक हर व ाथ स्वयं पहुँच सकता है?
भागीदारी: खेल और सांस्कृ तक कायक्रम म क्या हर कोई शा मल हो पाता है, या कुछ लोग हमेशा दशक ही रहते ह?
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
भाषा: हम एक-दूसरे को कन नाम से पुकारते ह? कोई नाम कसी क कमी को उछालता तो नह ?
अवसर बनाम सहानुभू त: समानता का अथ दया नह , बराबरी का मौका है। कसी के लए ऊँची कक्षा तक जाने का रास्ता
बनाना दया नह , उसका अ धकार है।
सं वधान: भारत का सं वधान अनु े द 14–15 म सबको समानता और भेदभाव से सुरक्षा का अ धकार दे ता है।
क वता से जोड़: जो क वता कहती है — ‘सबको समेटे है’ — समावेशन उसी का सामा जक रूप है। और
‘संख्यातीत शंख सी द वार’ ठ क उसका उलटा। इस चचा का असली उ े श्य यही दे खना है क हमारे अपने
व ालय म कौन-सी द वार अब भी खड़ी है।
आज क पहेली — पृष्ठ 137
पाठ से आगे
पहे ली
प्र.1 पता लगाइए क कौन-सा अंत रक्ष यान कौन-से ग्रह पर जाएगा—
पृष्ठ 137 क पहेली — ऊपर चार ग्रह, नीचे चार अंत रक्ष यान; उलझी हुई रेखाएँ इन्ह जोड़ती ह।
यह उलझी रेखाओं वाली पहेली है, इस लए इसका उत्तर ऊपर दए चत्र पर ही नकालना होगा — हर रेखा को आँख से नह , नोक
से चलकर दे खना पड़ता है। नीचे वह तरीका दया है जससे ऐसी पहेली कभी नह उलझती —
1. यान से च लए, ग्रह से नह । नीचे के चार यान को पहले 1, 2, 3, 4 नाम दे द जए।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात
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2. प सल क नोक रेखा पर रखकर धीरे-धीरे सरकाइए। उँ गली से मत चलाइए — उँ गली रेखा ढक दे ती है।
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3. हर कटान (क्रॉ सग) पर रु कए। जहाँ दो रेखाएँ काटती ह, वहाँ यह दे खए क आपक रेखा कस दशा म जा रही थी और
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g बार वही रेखा दोबारा न
रे.खा को हल्का रंग दे द जए (या कनारे पर उसका नंबर लख द जए), ता क अगली
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उसी दशा म सीधे नकल जाइए। मुड़ना नह है — कटान पर रेखाएँ केवल एक-दूसरे के ऊपर से गुज़रती ह।
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4. हर पूरी हुई
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पकड़
5. अंत म जाँच क जए: चार यान और चार ग्रह ह, इस लए हर यान अलग-अलग ग्रह पर पहुँचना चा हए। य द दो यान एक ही
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ग्रह पर पहुँचे, तो कह कसी कटान पर आपक प सल दूसरी रेखा पर फसल गई है — उस जोड़ी को दोबारा जाँ चए।
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उलट जाँच: अब यही काम ऊपर से नीचे क ओर, यानी हर ग्रह से शुरू करके दोहराइए। य द दोन बार वही
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जो ड़याँ बन, तो आपका उत्तर पक्का है। एक ही उत्तर को दो दशाओं से जाँचना ग णत और पहेली — दोन म सबसे
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भरोसेमंद तरीका है।
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em— पृष्ठ 138
झरोखेsसे
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पाठ से आगे
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गीत
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प्र.1 आइए, अब पढ़ते ह प्र सद्ध गीत ‘ह गे कामयाब’। (भावांतर — ग रजा कुमार माथुर)
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यह वही गीत है जसका उल्लेख ‘क व से प रचय’ म है — ग रजा कुमार माथुर ने इसे अंग्रेज़ी गीतeWe
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gl भाषा म फर से रचना है।
oे रूप म लखा। भावांतर का अथ शब्द-दर-शब्द अनुवाद नह , ब ल्क भाव कोaदूसरी
भावांतरcक
.
a s emकहता क्या है — ‘ह गे कामयाब… एक दन’। पूरा गीत एक ही वाक्य को दोहराता है और हर बार उसम एक नई बात जोड़ता
gl है — मन म वश्वास, चार ओर शां त, कसी का डर न होना, और हाथ म हाथ डालकर साथ चलना।
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इसे इसी पाठ म क्य रखा गया: ‘आदमी का अनुपात’ बीमारी बताती है, यह गीत दवा। क वता जन ईष्या, अहं
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और अ वश्वास क द वार क बात करती है, गीत उन्ह के उलटे भाव गाता है — व ास, शां त, नभयता और
साथ चलना। क वता क अं तम पं क्त है ‘एक कमरे म / दो दु नया रचाता है’; गीत क धुरी है ‘हम चलगे साथ-साथ
/ डाल हाथ म हाथ’। दो दु नयाएँ फर से एक होती ह।
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ag एक ही औज़ार, दो अलग काम।
.c→ घर → मुहल्ला…), गीत म दोहराव से व ास बनता है (‘एक दन’ बार-बार)।
ध्यान दे ने योग्य शल्प: दोन रचनाओं म दोहराव ही मुख्य यु क्त है। क वता म दोहराव से वस्तार बनता है (कमरा
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साझी समझ — पृष्ठ 139
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
गतवध
प्र.1 ग रजा कुमार माथुर क अन्य रचनाएँ पुस्तकालय या इंटरनेट पर खोजकर प ढ़ए और कक्षा म साझा क जए।
कहाँ से शुरू कर — ‘क व से प रचय’ म उनक जो कृ तयाँ गनाई गई ह, वे सबसे अ ा आरंभ ह —
मंजीर — उनका आरं भक काव्य-संग्रह।
नाश और नमाण
धूप के धान
शलापंख चमक ले
म वक्त के ँ सामने
‘ह गे कामयाब’ — प्र सद्ध भावांतर गीत, जो इसी पाठ म ‘झरोखे से’ के अंतगत दया गया है।
कक्षा म साझा करने का ढं ग —
1. एक क वता चु नए और उसक दो-तीन पं क्तयाँ सबको सुनाइए — क वता पढ़कर सुनाने से ही उसक लय पकड़ म आती है।
2. बताइए क उसम कौन-सा भाव है और कौन-सा शब्द या बब आपको सबसे अ ा लगा।
3. अंत म यह जो ड़ए क उस क वता क ‘आदमी का अनुपात’ से क्या समानता या भन्नता दखी — वषय क , शल्प क या स्वर
क।
सुझाव: पुस्तकालय के अलावा भारतीय सा हत्य के ड जटल संग्रह और आकाशवाणी के अ भलेख भी काम आ
सकते ह — ग रजा कुमार माथुर स्वयं आकाशवाणी म कई महत्वपूण पद पर रहे थे।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 139
पाठ से आगे
खोज
प्र.1 • हम ह गे कामयाब एक दन • कल्पना जो सतार म खो गई • सुनीता अंत रक्ष म • ब्र ाण्ड और पृथ्वी • हौसल
क उड़ान-मंगलयान
ये पाँच वषय पाठ के दो सर को आगे बढ़ाते ह — एक सरा ब्र ांड का, दूसरा साथ चलने का। खोजते समय हर वषय के साथ
यह भी ल खए क उसका क वता से क्या रश्ता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
वषय क्या खोज क वता से रश्ता
हम होंग े कामयाब गीत का मूल अंग्रेज़ी रूप, ग रजा कुमार माथुर का भावांतर, यह गीत कन दीवारे ं िगराने और साथ चलने का
एक िदन आंदोलन म गाया गया भाव
कल्पना जो िसतारों कल्पना चावला — करनाल (ह रयाणा) म जन्म, अंत रक्ष म जाने वाली ‘अनिगन नक्षत्र ों’ तक पहच
ु ँ ने का
में खो गई भारतीय मूल क पहली म हला; 2003 म कोलं बया दुघटना मानवीय साहस
सुनीता अंतिरक्ष में सुनीता व लयम्स — अंत रक्ष म लंबे समय तक रहने और अंत रक्ष- पथ्ृ वी को बाहर से दे खने का अनुभव
चहलकदमी (स्पेसवॉक) के क तमान
ब ाण्ड और पथ्ृ वी आकाशगंगा, सौरमंडल, प्रकाश-वष का अथ; पृथ्वी सूय से कतनी दूर है किवता की पूर ी सीढ़ ी — पथ्ृ वी से
ब ांड तक
हौसलों की उड़ान- इसरो का मंगलयान (2013–14) — पहले ही प्रयास म मंगल क कक्षा म छोटे साधनों से बड़ा काम —
मंग लयान पहुँचने वाला पहला दे श ‘अनुपात’ का सकारात्मक रूप
प्रस्तु त का सुझाव: पाँच वषय को एक ही चाट पर लगाइए और बीच म क वता क पं क्त ल खए — ‘यह है
अनुपात / आदमी का वराट से’। चार ओर के चत्र यह दखाएँगे क आदमी छोटा होकर भी वराट क ओर हाथ
बढ़ाता रहा है।
अध्याय — एक नज़र म
क वता एक ही साँचे — ‘क है ख म’ — को दोहराते हुए कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदे श → दे श → पृथ्वी →
नक्षत्र → नभ गंगा → ब्र ांड तक फैलती है। हर चरण अपने से पहले वाले को अपने भीतर समेट लेता है।
वशालता यहाँ बताई नह जाती, गनवाई जाती है। पं क्तयाँ छोट ह और लगभग हर पं क्त ‘म’ पर खत्म होती है, इस लए
पढ़ते-पढ़ते पाठक स्वयं एक-एक सीढ़ ऊपर चढ़ता जाता है।
चरम पर पहुँचकर क व नष्कष रखते ह — ‘यह है अनुपात / आदमी का वराट से’। यही क वता का शीषक भी है और उसका
कद्र य वचार भी।
दूसरा भाग उलट दशा म चलता है — इतना छोटा आदमी ईष्या, अहं, स्वाथ, घृणा और अ वश्वास म डू बकर ‘संख्यातीत शंख
सी द वार’ उठाता है और स्वयं को दूसरे का स्वामी बताता है।
अंत क वता को वह लौटा लाता है जहाँ से वह चली थी — ‘एक कमरे म / दो दु नया रचाता है’। सबसे बड़े वस्तार के बाद
सबसे छोटा बँटवारा; यही तीखा वरोधाभास क वता क चोट है।
क व कह क्रोध नह करते। स्वर चता और मृदु व्यंग्य का है — आदमी को डाँटा नह जाता, उसे आईना दखा दया जाता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 9 आदमी का अनुपात AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द / पं क्त अथ क वता म संकेत काव्य-यु क्त
अनुपात दो वस्तुओ ं के आकार का आपसी आदमी और वराट का सापेक्ष आकार शीषक ही क वता का कद्र य वचार
माप
वराट असीम, अत्यंत िवशाल सारा ब्र ांड वशेषण का सं ा क तरह प्रयोग
नभ गंगा आकाशगंग ा ब्र ांड क प र ध दो शब्द से बना नया शब्द
अन गन िजनकी िगनती न हो सके नक्षत्र क संख्या अ न श्चत संख्यावाचक वशेषण
संख्यातीत िगनती से परे द वार क संख्या अ तशयो क्त
शंख 1017 अथ त 100 पद्म द वार क संख्या का माप भारतीय संख्या-प्रणाली से लया गया
शब्द
द वार उठाना भेद और सीमाएँ खड़ी करना जा त, धम, दे श के कृ त्रम बँटवारे मुहावरा
लीन डू बा हुआ , रमा हुआ ईष्या-अहं म डू बा आदमी तत्सम शब्द
दूजे का स्वामी दू स रे का मािलक अ धकार और वचस्व का भाव व्यंग्य
नदे शक चह्न डै श ठहराव और आगे आने वाली बात का वराम चह्न
(—) संकेत
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