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HBSE Class 12 Syllabus 2025 Hindi Elective

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About HBSE Class 12 Syllabus 2025 Hindi Elective

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Frequently Asked Questions

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HBSE Class 12 Syllabus 2025 Hindi Elective – Text

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Page 1

Haryana Board
Syllabus
2024-25

Page 2

हररयाणा विद्यालय
विक्षा बोर्ड
पाठ्यक्रम एिं ऄध्यायिार ऄंको का विभाजन
(2024-25)
कक्षा-बारहिीं विषय:वहन्दी(ऐवछछक)
कोर्:523
सामान्य वनदेि:
1. संपूणड पाठ्यक्रम के अधार पर एक िार्षषक परीक्षा होगी।
2. िार्षषक परीक्षा 80 ऄंकों की होगी और अंतररक मूलयांकन 20
ऄंकों का होगा।
3. अंतररक मूलयांकन के वलए:
वनम्नानुसार अिवधक मूलयांकन होगा:

क) 4 ऄंकों के वलए दो SAT परीक्षा अयोवजत की जाएगी
वजनका ऄंवतम अंतररक मूलयांकन के वलए 04 ऄंकों का
भारांक होगा।
ख) 2 ऄंकों के वलए एक ऄधड िार्षषक परीक्षा अयोवजत की
जाएगी वजसका ऄंवतम अंतररक मूलयांकन के वलए 02 ऄंकों
का भारांक होगा।

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ग) 2 ऄंकों के वलए विषय विक्षक CRP (कक्षा कक्ष की
भागीदारी) के वलए मूलयांकन करें गे और ऄवधकतम 02 ऄंक
देंगे।
घ) 2 ऄंकों के वलए एक प्री-बोर्ड परीक्षा अयोवजत की जाएगी
वजसका ऄंवतम अंतररक मूलयांकन के वलए 02 ऄंकों का
भारांक होगा।
ङ) 5 ऄंकों के वलए छात्रों द्वारा एक पररयोजना कायड ककया
जाएगा वजसका ऄंवतम अंतररक मूलयांकन के वलए 05 ऄंकों
का भारांक होगा।
च)5 ऄंकों के वलए विद्यथी की ईपवथथवत के वनम्नानुसार 05 ऄंक
प्रदान ककए। जाएँगे :-
75% से 80% तक - 01 ऄंक
80% से ऄवधक से 85% तक - 02 ऄंक
85% से ऄवधक से 90% तक - 03 ऄंक
90% से ऄवधक से 95% तक - 04 ऄंक
95% से ऄवधक से 100% तक - 05 ऄंक

पाठ्यक्रम संरचना (2024-25)
कक्षा- बारहिीं विषय: वहन्दी(ऐवछछक)
कोर्: 523
पुथतक का ऄध्याय ऄंक
नाम
रचनात्मक बोध  ऄपरित गद्यांि 10

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 ऄपरित पद्यांि
ऄंतरा भाग-2  रामचंद्र िुक्ल - प्रेमघन की छाया - थमृवत 20
(गद्य खंर्)  पंवर्त चंद्रधर िमाड गुलेरी - सुवमररनी के
मनके
 फणीश्वरनाथ 'रे णु' - संिकदया
 भीष्म साहनी - गांधी, नेहरू और याथसेर
ऄराफात
 ऄसगर िजाहत – िेर,पहचान,चार हाथ,
साझा
 वनमडल िमाड – जहां कोइ िापसी नहीं
 ममता कावलया- दूसरा देिदास
 हजारी प्रसाद वद्विेदी – कु टज
ऄंतरा भाग-2  जयिंकर प्रसाद - (क) देिसेना का 20
(काव्य खंर्) गीत
(ख) कानेवलया का गीत
 सूयडकांत वत्रपािी 'वनराला'- सरोज
थमृवत
 सविदानंद हीरानंद िात्थयायन- 'ऄज्ञेय'
(क)यह दीप ऄके ला
(ख) मैंने देखा, एक बूँद
 के दारनाथ ससह - (क) बनारस
(ख)कदिा
 रघुिीर सहाय - (क) िसंत अया
(ख) तोड़ो
 तुलसीदास - (क) भरत राम का
प्रेम

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(ख) पद
 मवलक मुहम्मद जायसी - बारहमासा
 विद्यापवत - पद
 घनानंद - कवित्त
ऄंतराल भाग -  सूरदास की झोपड़ी 7
2  वबथकोहर की माटी
 ऄपना मालिा
ऄवभव्यवि और 1) विवभन्न माध्यमों के वलए लेखन 15
माध्यम 2) पत्रकारीय लेखन के विवभन्न रूप और
लेखन प्रकक्रया
3) वििेष लेखन- थिरूप और प्रकार
4) कै से बनती है कविता
5) नाटक वलखने का व्याकरण
6) कै से वलखें कहानी
7) कै से करें कहानी का नाट्य रूपांतरण
8) कै से बनता है रे वर्यो नाटक
9) नए और ऄप्रत्यावित विषयों पर लेखन
अदिड जीिन 1)दुबडलता छोड़ो--- दृढ़ता ऄपनाओ 8
मूलय (ईत्तरा) 2) दुविधा से उपर ईिो
3) संतुवलत जीिन
4) कायड में कु िलता लाएं
5) िांत मन --ईन्नत जीिन
6) संघषों में विजय का मागड
7) खेती से ऄर्षजत गौरि और समृवि
8) दुगाड भाभी
9) सिे भिंतु सुवखन:

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10) हेमचंद्र विक्रमाकदत्य
योग 80
अंतररक मूलयांकन 20
कु ल योग 100
ऄंतरा भाग-2 (गद्य खंर्):
1) प्रेमघन की छाया थमृवत संथमरणात्मक वनबंध में िुक्ल जी ने सहदी
भाषा एिं सावहत्य के प्रवत ऄपने प्रारं वभक रुझानों का बड़ा रोचक
िणडन ककया है। प्रेमघन के व्यवित्ि ने िुक्ल जी की समियथक
मंर्ली को ककस तरह प्रभावित ककया, सहदी के प्रवत ककस प्रकार
अकर्षषत ककया तथा ककसी रचनाकार के व्यवित्ि वनमाडण अकद
से संबंवधत पहलुओं का बड़ा वचत्ताकषडक वचत्रण आस वनबंध में
ककया गया है।
2) पंवर्त चंद्रधर िमाड गुलेरी सुवमररनी के मनके नाम से तीन लघु
वनबंध-बालक बच गया, घड़ी के पुजे और ढेले चुन लो
पाठ्यपुथतक में कदए गए हैं। बालक बच गया वनबंध का मूल
प्रवतपाद्य है विक्षा ग्रहण की सही ईम्र। लेखक मानता है कक हमें
व्यवि के मानस के विकास के वलए विक्षा को प्रथतुत करना
चावहए, विक्षा के वलए मनुष्य को नहीं। हमारा लक्ष्य है मनुष्य
और मनुष्यता को बचाए रखना मनुष्य बचा रहेगा तो िह समय
अने पर विवक्षत ककया जा सके गा। लेखक ने ऄपने समय की
विक्षा प्रणाली और विक्षकों की मानवसकता को प्रकट करने के
वलए ऄपने जीिन के ऄनुभि को हमारे सामने ऄत्यंत व्यािहाररक

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रूप में रखा है। घड़ी के पुजे में लेखक ने धमड के रहथयों को जानने
पर धमड ईपदेिकों द्वारा लगाए गए प्रवतबंधों को घड़ी के दृष्ांत
द्वारा बड़े ही रोचक ढंग से प्रथतुत ककया है। ढेले चुन लो में लोक
विश्वासों में वनवहत ऄंधविश्वासी मान्यताओं पर चोट की गइ है।
तीनों वनबंध समाज की मूल समथयाओं पर विचार करने िाले हैं।
आनकी भाषा िैली सरल, बोलचाल की होते हुए भी गंभीर ढंग से
विषय प्रितडन करने िाली हैं।
3) फणीश्वर नाथ रे णु संिकदया कहानी में मानिीय संिेदना की गहन
एिं विलक्षण पहचान प्रथतुत हुइ है। ऄसहाय और सहनिील नारी
मन के कोमल तंतु की, ईसके दुख और करुणा की, पीड़ा तथा
यातना की ऐसी सूक्ष्म पकड़ रे णु जैसे ‘अत्मा के विलपी’ द्वारा ही
संभि है। रे णु ने बड़ी बहुररया की पीड़ा को ईसके भीतर के
हाहाकार को संिकदया के माध्यम से ऄपनी पूरी सहानुभूवत प्रदान
की है। लोकभाषा की नींि पर खड़ी संिकदया कहानी पहाड़ी झरने
की तरह गवतमान है। ईसकी गवत, लय, प्रिाह, संिाद और संगीत
पढ़ने िाले के रोम-रोम में झंकृत होने लगता है।
4) भीष्म साहनी - गांधी, नेहरू और याथसेर ऄराफात ईनकी
अत्मकथा अज के ऄतीत का एक ऄंि है। जोकक एक संथमरण है।
आसमें लेखक ने ककिोरािथथा से प्रौढ़ािथथा तक के ऄपने ऄनुभिों
को थमृवत के अधार पर िब्दबि ककया है। प्रभाििाली िब्द
वचत्रों के माध्यम से प्रथतुत ककया है। प्रथतुत संथमरण ऄत्यंत
रोचक, सरस एिं पिनीय बन पड़ा है क्योंकक भीष्म साहनी ने
ऄपने रोचक ऄनुभिों को बीच-बीच में जोड़ कदया है। आस पाि के

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माध्यम से रचनाकार के व्यवित्ि के ऄवतररि राष्ट्रीयता, देिप्रेम
और ऄंतरराष्ट्रीय मैत्री जैसे मुद्दे भी पािक के सामने ईजागर हो
जाते हैं।
5) ऄसगर िजाहत - िेर, पहचान, चार हाथ और साझा नाम से
ईनकी चार लघुकथाएँ दी गइ हैं। िेर प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक
लघुकथा है। िेर व्यिथथा का प्रतीक है वजसके पेट में जंगल के
सभी जानिर ककसी न ककसी प्रलोभन के चलते समाते चले जा रहे
हैं। पहचान में राजा की बहरी, गूँगी और ऄंधी प्रजा पसंद अती है
जो वबना कु छ बोले वबना कु छ सुने और वबना कु छ देखे ईसकी
अज्ञा का पालन करती रहे। कहानीकार ने आसी यथाथड की
पहचान कराइ है। भूमंर्लीकरण और ईदारीकरण के दौर में आन्हें
प्रगवत और ईत्पादन से जोड़कर संगत और ईरों भी िहराया जा
रहा है। चार हाथ पूँजीिादी व्यिथथा में मजदूरों के िोषण को
ईजागर करती है। पूँजीपवत भाँवत-भाँवत के ईपाय कर मजदूरों को
पंगु बनाने का प्रयास करते हैं।साझा में ईद्योगों पर कब्जा जमाने
के बाद पूँजीपवतयों की नजर ककसानों की जमीन और ईत्पाद पर
जमी है। गाँि का प्रभुत्ििाली िगड भी आसमें िावमल है। िह
ककसान को साझा खेती करने का देता है और ईसकी सारी फसल
हड़प लेता है। ककसान को पता भी नहीं चलता और ईसकी सारी
कमाइ हाथी के पेट में चली जाती है। यह हाथी और कोइ नहीं
बवलक समाज का बना और प्रभुत्ििाली िगड है जो ककसानों को
भीख में र्ालकर ईसकी सारी मेहनत को हजम करता है। यह

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कहानी अजादी के बाद ककसानों की बदहाली का िणडन करते हुए
ईसके कारणों की पहल करती है।
6) वनमडल िमाड- जहाँ कोइ िापसी नहीं यात्रा-िृत्तांत धुंध से ईिती
धुन संग्रह से वलया गया है। ईसमें लेखक ने पयाडिरण संबंधी
सरोकारों को ही नहीं, विकास के नाम पर पयाडिरण विनाि से
ईपजी विथथापन संबंधी मनुष्य की यातना को भी रे खांककत ककया
है। यह पाि विथथावपतों की ऄनेक समथयाओं का हृदयथपिी
वचत्र प्रथतुत करता है। आस सत्य को भी ईद्घारटत करता है कक
अधुवनक औद्योगीकरण की अँधी में वसफड मनुष्य ही नहीं
ईखड़ता, बवलक ईसका पररिेि, संथकृ वत और अिास थथल भी
हमेिा के वलए नष् हो जाते हैं।
7) ममता कावलया- दूसरा देिदास कहानी में लेवखका ने आस तरह
घटनाओं का संयोजन ककया है कक ऄनजाने में प्रेम का प्रथम
ऄंकुरण संभि और पारो के हृदय में बड़ी ऄजीब पररवथथवतयों में
ईत्पन्न होता है। कहानी के माध्यम से लेवखका ने प्रेम को बंबइया
कफलमों की पररपाटी से ऄलग हटाकर ईसे पवित्र और थथायी
थिरूप प्रदान ककया है। कथ्य, विषयिथतु, भाषा और विलप की
दृवष् से कहानी बेजोड़ है।
8) हजारी प्रसाद वद्विेदी- कु टज वहमालय पिडत की उँचाइ पर सूखी
विलाओं के बीच ईगने िाला एक जंगली पौधा है, वजसमें फू ल
लगते हैं। आसी फू ल की प्रकृ वत पर यह वनबंध कु टज वलखा गया है।
कु टज में न वििेष सौंदयड है, न सुगंध, कफर भी लेखक ने ईसमें
मानि के वलए एक संदि
े पाया है। कु टज में ऄपराजेय जीिनिवि

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है, थिािलंबन है, अत्मविश्वास है और विषम पररवथथवतयों में भी
िान के साथ जीने की क्षमता है। िह समान भाि से सभी
पररवथथवतयों को थिीकारता है। सामान्य से सामान्य िथतु में भी
वििेष गुण हो सकते हैं यह जताना आस वनबंध का ऄभीष् है।
ऄंतरा भाग-2 (काव्य खंर्) :
1) जयिंकर प्रसाद:- कानेवलया का गीत -यह गीत चंद्रगुप्त नाटक
का प्रवसि गीत है। वसलयूकस की बेटी कानेवलया के द्वारा भारत
के प्राकृ वतक सौंदयड िह गौरि गाथा का िणडन ककया गया है।
देिसेना का गीत-यह गीत प्रसाद जी के नाटक थकं द गुप्त से वलया
गया है आसमें देिसेना कक पीड़ा के क्षणों का िणडन ककया गया है
2) सूयडकांत वत्रपािी वनराला :- सरोज थमृवत-सरोज थमृवत कविता
वनराला की कदिंगत पुत्री सरोज पर कें कद्रत है। यह कविता बेटी के
कदिंगत होने पर वपता का विलाप है। वपता के आस विलाप में कवि
को कभी िकुं तला की याद अती है कभी ऄपनी थिगीय पत्नी की।
बेटी के रूप रं ग में पत्नी का रूप रं ग कदखाइ पड़ता है, वजसका
वचत्रण वनराला ने ककया है। यही नहीं आस कविता में एक
भाग्यहीन वपता का संघषड, समाज से ईसके संबंध, पुत्री के प्रवत
बहुत कु छ न कर पाने का ऄकमडण्यता बोध भी प्रकट हुअ है। आस
कविता के माध्यम से वनराला का जीिन-संघषड भी प्रकट हुअ है।
िे कहते हैं- ‘दुख ही जीिन की कथा रही, क्या कहँ अज जो नहीं
कहीं’।

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3) सविदानंद हीरानंद िात्थयायन ऄज्ञेय:- यह दीप ऄके ला-यह दीप
ऄके ला कविता में ऄज्ञेय ऐसे दीप की बात करते हैं जो स्नेह भरा
है, गिड भरा है, मदमाता भी है ककतु ऄके ला है। ऄहंकार का मद
हमें ऄपनों से ऄलग कर देता है। मैंने देखा एक बूंद मैने देखा एक
बूँद कविता में ऄज्ञेय ने समुद्र से ऄलग प्रतीत होती बूँद की
क्षणभंगुरता को व्याख्यावयत ककया है। आस कविता के माध्यम से
कवि ने जीिन में क्षणभंगुरता के महत्त्ि को समझाया है।
4) के दारनाथ ससह:- बनारस कविता में प्राचीनतम िहर बनारस के
सांथकृ वतक िैभि के साथ िे ि बनारसीपन पर भी प्रकाि र्ाला
गया है। बनारस विि की नगरी और गंगा के साथ विविष् अथथा
का कें द्र है। बनारस में गंगा, गंगा के घाट, मंकदर तथा मंकदरों और
घाटों के ककनारे बैिे वभखाररयों के कटोरे वजनमें िसंत ईतरता है-
का वचत्र बनारस कविता में ऄंककत है कदिा कविता बाल
मनोविज्ञान से संबंवधत है वजसमें पतंग ईड़ाते बिे से कवि पूछता
है वहमालय ककधर है। बालक का ईत्तर बाल सुलभ है कक वहमालय
ईधर है वजधर ईसकी पतंग भागी जा रही है। हर व्यवि का
ऄपना यथाथड होता है, बिे यथाथड को ऄपने ढंग से देखते हैं। कवि
को यह बाल सुलभ संज्ञान मोह लेता है।
5) रघुिीर सहाय:- िसंत अया कविता कहती है कक अज मनुष्य का
प्रकृ वत से ररश्ता टू ट गया है। िसंत ऊतु का अना ऄब ऄनुभि
करने के बजाय कै लेंर्र से जाना जाता है। ऊतुओं में पररितडन
पहले की तरह ही थिभाितः घरटत होते रहते हैं। पत्ते झड़ते हैं,
कोपलें फू टती हैं, हिा बहती है, ढाक के जंगल दहकते हैं, कोमल

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भ्रमर ऄपनी मथती में झूमते हैं। िाथति में कवि ने अज के मनुष्य
की अधुवनक जीिन िैली पर व्यंग्य ककया है आस कविता की भाषा
में जीिन की विर्ंबना वछपी हुइ है। प्रकृ वत से ऄंतरं गता को व्यि
करने के वलए कवि ने देिज, तद्भि िब्दों और कक्रयाओं का भरपूर
प्रयोग ककया है। ऄिोक, मदन महीना, पंचमी, नंदनिन, जैसे
परं परा में रचे-बसे जीिनानुभिों की भाषा ने आस कविता को
अधुवनकता के सामने एक चुनौती की तरह खड़ा कर कदया है।
कविता में सबबों और प्रतीकों का भी सुंदर प्रयोग हुअ है। तोड़ो
ईद्बोधनपरक कविता है। आसमें कवि सृजन हेतु भूवम को तैयार
करने के वलए चट्टानें, उसर और बंजर को तोड़ने का अह्िान
करता है।
6) तुलसीदास :- पाठ्यपुथतक में प्रथतुत चौपाइ और दोहों को
रामचररतमानस के ऄयोध्या कांर् से वलया गया हैं। आन छंदों में
राम िनगमन के पश्चात् भरत की मनोदिा का िणडन ककया गया
है। भरत भािुक हृदय से बताते हैं कक राम का ईनके प्रवत
ऄत्यवधक प्रेमभाि है। िे बचपन से ही भरत को खेल में भी
सहयोग देते रहते थे और ईनका मन कभी नहीं तोड़ते थे।
7) मवलक मोहम्मद जायसी:- प्रवसि रचना पद्माित के ‘बारहमासा’
के कु छ ऄंि कदए गए हैं। प्रथतुत पाि में कवि ने नावयका नागमती
के विरह का िणडन ककया है। कवि ने िीत के ऄगहन और पूस माह
में नावयका की विरह दिा का वचत्रण ककया है। प्रथम ऄंि में प्रेम
के वियोग में नावयका विरह की ऄवि में जल रही है और भिरे
तथा काग के समक्ष ऄपनी वथथवतयों का िणडन करते हुए नायक

1
1

Page 13

को संदि
े भेज रही है। वद्वतीय ऄंि में विरवहणी नावयका के िणडन
के साथ-साथ िीत से ईसका िरीर काँपने तथा वियोग से हृदय
काँपने का सुंदर वचत्रण है।
8) विद्यापवत :- आस पाठ्यपुथतक में विद्यापवत के तीन पद वलए गए
हैं। पहले में विरवहणी के हृदय के ईद्गारों को प्रकट करते हुए
ईन्होंने ईसको ऄत्यंत दुखी और कातर बताया है। दूसरे पद में
वप्रयतमा सवख से कहती है कक मैं जन्म-जन्मांतर से ऄपने वप्रयतम
का रूप ही देखती रही परं तु ऄभी तक नेत्र संतुष् नहीं हुए हैं।
ईनके मधुर बोल कानों में गूँजते रहते हैं। तीसरे पद में कवि ने
विरवहणी वप्रयतमा का दुखभरा वचत्र प्रथतुत ककया है।
9) घनानंद दल :- प्रथतुत पुथतक में कवि घनानंद के प्रथम कवित में
कवि ने ऄपनी प्रेवमका सुजान के दिडन की ऄवभलाषा प्रकट करते
हुए कहा है कक सुजान के दिडन के वलए हो ये प्राण ऄब तक ऄटके
हुए हैं।
ऄंतराल भाग-2 :-
1. सूरदास की झोंपड़ी - सूरदास की झोंपड़ी प्रेमचंद के
ईपन्यास रं गभूवम का एक ऄंि है। एक दृवष्हीन व्यवि
वजतना बेबस और लाचार जीिन जीने को ऄवभिप्त होता है,
सूरदास का चररत्र िीक आसके विपरीत है। सूरदास ऄपनी
पररवथथवतयों से वजतना दुखी ि अहत है ईससे कहीं ऄवधक
अहत है भैरों और जगधर द्वारा ककए जा रहे ऄपमान ि
ईनकी इष्याड से है। सूरदास के चररत्र की वििेषता यह है कक

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2

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झोंपड़ी के जला कदए जाने के बािजूद िह ककसी से प्रवतिोध
लेने में विश्वास नहीं करता बवलक पुनर्षनमाडण में विश्वास
करता है। आसीवलए िह वमिु अ के सिाल-" जो कोइ सौ
लाख बार झोंपड़ी को अग लगा दे तो" के जिाब में दृढ़ता के
साथ ईत्तर देता है- “तो हम भी सौ लाख बार बनाएँग"े ।
2. वबथकोहर की माटी- प्रथतुत पाि वबथकोहर की माटी
विश्वनाथ वत्रपािी की अत्मकथा नंगातलाइ का गाँि का एक
ऄंि है। अत्मकथात्मक िैली में वलखा गया यह पाि ऄपनी
ऄवभव्यंजना में ऄत्यंत रोचक और पिनीय है। लेखक ने ईम्र
के कइ पड़ाि पार करने के बाद ऄपने जीिन में माँ, गाँि
और असपास के प्राकृ वतक पररिेि का िणडन करते हुए
ग्रामीण जीिन िैली, लोक कथाओं, लोक मान्यताओं को
पािक तक पहुँचाने की कोविि की है।
3. ऄपना मालिा (खाउ-ईजार्ू सभ्यता में)- प्रभाष जोिी का
ऄपना मालिा-खाउ- - ईजार्ू सभ्यता में पाि जनसत्ता, 1
ऄक्टू बर 2006 के कागद कारे थतंभ से वलया गया है। आस
पाि में लेखक ने मालिा प्रदेि की वमट्टी, िषाड, नकदयों की
वथथवत, ईद्गम एिं विथतार तथा िहाँ के जनजीिन एिं
संथकृ वत को वचवत्रत ककया है। पहले के मालिा ‘मालि धरती
गहन गंभीर, र्ग-र्ग रोटी पग-पग नीर' की ऄब के मालिा
‘नदी नाले सूख गए, पग-पग नीर िाला मालिा सूखा हो
गया' से तुलना की है। जो मालिा ऄपनी सुख-समृवि एिं
संपन्नता के वलए विख्यात था िही ऄब खाउ - ईजार्ू

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सभ्यता में फँ सकर ईलझ गया है। यह खाउ-ईजार्ू सभ्यता
यूरोप और ऄमेररका की देन है वजसके कारण विकास की
औद्योवगक सभ्यता ईजाड़ की ऄपसभ्यता बन गइ है। आससे
पूरी दुवनया प्रभावित हुइ है, पयाडिरण वबगड़ा है।
ऄवभव्यवि और माध्यम :-
1) विवभन्न माध्यमों के वलए लेखन – जनसंचार के विवभन्न
माध्यमों की खूवबयाँ और खावमयाँ, मुकद्रत माध्यम में लेखन के
वलए ध्यान रखने योग्य बातें,रे वर्यो समाचार की
संरचना,रे वर्यो के वलए समाचार लेखन, टेलीविज़न खबरों के
विवभन्न चरण, रे वर्यो और टेलीविजन समाचार की भाषा
और िैली, आं टरनेट पत्रकाररता का आवतहास और भारत में
आं टरनेट पत्रकाररता, वहन्दी नेट संसार।

2) पत्रकारीय लेखन के विवभन्न रूप और लेखन प्रकक्रया –
पत्रकारीय लेखन क्या है?समाचार कै से वलखा जाता है?
समाचार लेखन और छह ककार, फीचर क्या है? फीचर कै से
वलखें? वििेष ररपोटड कै से वलखे? विचारपरक लेखन - लेख,
रटवपपवणयाँ,संपादकीय लेखन,थतंभ लेखन, संपादक के नाम
पत्र, साक्षात्कार।

3) वििेष लेखन- थिरूप और प्रकार – वििेष लेखन क्या
है?वििेष लेखन की भाषा और िैली, वििेष लेखन के क्षेत्र,
कै से हावसल करें वििेषज्ञता।
1
4

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4) कै से बनती है- कविता- कविता क्या है? कविता कै से बनती
है? कविता में िब्दों का चयन, कविता में सबब और छंद,
कविता की संरचना, कविता के घटक।
5) नाटक वलखने का व्याकरण- नाटक और ऄन्य विधाएँ, नाटक
में समय का बंधन, नाटक के तत्ि, नाटक के विषय, नाटक में
थिीकार और ऄथिीकार की ऄिधारणा, नाटक की विलप
संरचना।

6) कै से वलखें कहानी – कहानी क्या है? कहानी के तत्ि।

7) नाटक कै से करें कहानी का नाट्य रूपांतरण – कहानी और
नाटक का संबंध, कहानी को नाटक कै से बनाएँ? नाट्य
रूपांतरण की चुनौवतयाँ।

8) कै से बनता है रे वर्यो नाटक – रे वर्यो नाटक की परं परा,
वसनेमा,रं गमंच और रे वर्यो नाटक – समानता और
ऄसमानता,रे वर्यो नाटक में ध्िवन संकेतों की महत्ता।

9) नए और ऄप्रत्यावित विषयों पर लेखन - ऄप्रत्यावित विषय
पीरी लेखन क्या है?क्या आसकी कोइ तकनीक हो सकती
है?कै से करें तैयारी?

1
5

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मावसक पाठ्यक्रम विक्षण योजना (2024-25)
कक्षा- बारहिीं विषय:वहन्दी(ऐवछछक)
कोर्:523
मास पुथतक का विषय- िथतु विक्षण दोहराइ
नाम कालांि कालांि

ऄप्रैल ऄंतरा भाग रामचंद्र िुक्ल - प्रेमघन की छाया 4
-2 – थमृवत

4
जयिंकर प्रसाद - (क) देिसेना
का गीत
(ख) कानेवलया का 4
गीत

1
6

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ऄवभव्यवि  विवभन्न माध्यमों के वलए लेखन 5
और माध्यम  पत्रकारीय लेखन के विवभन्न 5
रूप और लेखन प्रकक्रया

अदिड  दुबडलता छोड़ो-- दृढ़ता ऄपनाओ 1
जीिन मूलय
(ईत्तरा)

मइ ऄंतरा भाग  पंवर्त चंद्रधर िमाड गुलेरी - 5 4
-2 सुवमररनी के मनके 5
 सूयडकांत वत्रपािी 'वनराला'-
सरोज थमृवत
ऄवभव्यवि  वििेष लेखन- थिरूप और 5
और माध्यम प्रकार

अदिड  दुविधा से उपर ईिो 1
जीिन मूलय 1
(ईत्तरा)
1
जून
ग्रीष्मकालीन ऄिकाि (पररयोजना कायड)

जुलाइ ऄंतरा भाग  फणीश्वरनाथ 'रे णु' - संिकदया 5 4
-2  सविदानंद हीरानंद िात्थयायन-
'ऄज्ञेय' 5
(क)यह दीप
1
7

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ऄके ला
(ख) मैंने देखा,
एक बूँद
ऄवभव्यवि  कै से बनती है कविता 5
और माध्यम

अदिड  संतुवलत जीिन 1
जीिन मूलय  कायड में कु िलता लाएं 1
(ईत्तरा)

ऄगथत ऄंतरा भाग  भीष्म साहनी – 4
-2 गांधी, नेहरू और 5
याथसेर ऄराफात
 के दारनाथ ससह - (क)
बनारस
(ख)कदिा
ऄवभव्यवि  नाटक वलखने का व्याकरण 5
और माध्यम

ऄंतराल  सूरदास की झोपड़ी 4
भाग -2
 िांत मन ---ईन्नत जीिन
1
अदिड  संघषों में विजय का मागड
1
जीिन मूलय
(ईत्तरा)

1
8

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वसतंबर
ऄंतरा भाग  ऄसगर िजाहत – 4
िेर,पहचान,चार हाथ, साझा
-2 4
 रघुिीर सहाय - (क) िसंत
अया
(ख) तोड़ो

ऄवभव्यवि ----
और माध्यम

अदिड खेती से ऄर्षजत गौरि और 1
जीिन मूलय समृवि
(ईत्तरा)

ऄधड-िार्षषक परीक्षा के वलए पुनरािृवत्त 8
ऄधड-िार्षषक परीक्षा

ऄिू बर ऄंतरा भाग  वनमडल िमाड – जहां कोइ 4 4
-2 िापसी नहीं 5
 तुलसीदास - (क) भरत
राम का प्रेम
(ख) पद

ऄंतराल वबथकोहर की माटी 4

1
9

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भाग-2

ऄवभव्यवि  कै से वलखें कहानी 3
और माध्यम  कै से करें कहानी का नाट्य 4
रूपांतरण

अदिड दुगाड भाभी 1
जीिन मूलय
(ईत्तरा)

निंबर ऄंतरा भाग  ममता कावलया- दूसरा देिदास 4 4
-2  मवलक मुहम्मद जायसी – 4
बारहमासा
ऄवभव्यवि कै से बनता है रे वर्यो नाटक 4
और माध्यम

अदिड  सिे भिंतु सुवखनः 1
जीिन
(मूलय
ईत्तरा)

कदसंबर ऄंतरा भाग  हजारी प्रसाद वद्विेदी – कु टज 5 3
-2  विद्यापवत - पद 4

2
0

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ऄंतराल  ऄपना मालिा 3
भाग-2

ऄवभव्यवि  नए और ऄप्रत्यावित विषयों 6
और माध्यम पर लेखन

अदिड  हेमचंद्र विक्रमाकदत्य 1
जीिन मूलय
(ईत्तरा)

जनिरी ऄंतरा भाग घनानंद - कवित्त 3 12
-2  पाठ्यक्रम पुनरािृवत्त

फरिरी पाठ्यक्रम पुनरािृवत्त 20

माचड िार्षषक परीक्षा

नोट:
 विषय विक्षकों को सलाह दी जाती है कक िे छात्रों को िब्दािली
या ऄिधारणा की थपष्ता को बढ़ाने के वलए ऄध्यायों में ईपयोग
की जाने िाली िब्दािली / पररभाषात्मक िब्दों की नोटबुक
तैयार करने के वलए वनदेवित करें ।

2
1

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वनधाडररत पुथतकें :

1. ऄंतरा भाग-2 (BSEH प्रकािन © NCERT)
2. ऄंतराल भाग -2 पूरक पुथतक (BSEH प्रकािन © NCERT)
3. ऄवभव्यवि और माध्यम (BSEH प्रकािन)
4. अदिड जीिन मूलय (ईत्तरा) - कक्षा 12 के वलए (BSEH
प्रकािन)

2
2

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प्रश्न पत्र प्रारूप (2024-25)

ऄध्याय ऄंक प्रश्न वििरण कु ल
संख्या ऄंक
रचनात्मक 5 1 ऄपरित गद्यांि 10
बोध (1x5=5)
ऄपरित पद्यांि
5 1
(1x5=5)
ऄंतरा भाग-2 5 1 बहुविकलपीय प्रश्न 20
(गद्य खंर्) (1x5=5)
गद्यांि पर अधाररत प्रश्न
5 1 (1x5=5)

पाि पर अधाररत प्रश्न

3,2 4 (3+3+2+2=10)

ऄंतरा भाग-2 5 1 बहुविकलपीय प्रश्न 20
(गद्य खंर्) (1x5=5)
5 1 सप्रसंग व्याख्या (दो में कोइ
एक)(5×1=5)

कविताओं पर अधाररत प्रश्न
3,2 4
(3+3+2+2=10)

2
3

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ऄंतराल 2,3 3 पािों पर अधाररत प्रश्न 7
भाग-2 (2+2+3=7)
ऄवभव्यवि 5 1 ऄवतलघुत्तरात्मक प्रश्न 15
और माध्यम (1x5=5)
लघुत्तरात्मक
3, 2 2 (3+2=5)
दीघडईत्तरात्मक(दो में से कोइ
एक) (1x5=5)
5 1
अदिड जीिन 2 4 लघुत्तरात्मक प्रश्न 8
मूलय (ईत्तरा) (4x2=8)
कु ल 80

2
4

Page 26

Haryana Board
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Board / OrgHaryana Board
ExamClass 12
TypeSyllabus
Pages26
Updated30 Apr 2026