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CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core

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About CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core

CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core is available here for free download. Published by CBSE for Class 12, this syllabus can be viewed online or downloaded as a PDF (10 pages). Candidates preparing for Class 12 can use CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core?

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Is CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core free to download?

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CBSE Class 12 Syllabus 2027 Hindi Core – Text

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Page 1

FOR CBSE CLASS 12 SYLLABUS EXAM PREPARATION

CBSE Class 12
Syllabus 2027
Question Paper · Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT DETAILS

CBSE Class 12 Syllabus 2027 Question Paper Hindi Core

Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests

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ह ॠदी (आधार) a
हिषय कोड – 302
क঴ा 11िी ॠ–12िी ॠ (2026-27)
(2025
(2026-27)
-26)

दसवी ॠ क঴ा तक ह ॠ दी का अ यन करने वाला हि঴ाथी समझते ॽए पुने व सुनने के साथ-साथ ह ॠ दी म७
सोचने और उसे मौखिक एवॠ हलखित ॺप म७ ঢ कर पाने की सामा द঴ता अहजित कर चुका ोता ै ।
उৡतर मा हमक र पर आने के बाद इन सभी द঴ताओॠ को उस र तक ले जाने की आव कता ोती
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ै , ज ाफ़ भाषा का ঋयोग हभ -हभ व ार-঴ेআोॠ की माफ़ गोॠ के अनुॺप हकया जा सके। आधार पाਉॿम,
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साह खिक बोध के साथ-साथ भाषायी द঴ता के हवकास को ৸ादा म दे ता ै । य पाਉॿम उन
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हि঴ाहथियोॠ के हलए उपयोगी साहबत ोगा, जो आगे हव हव ालय म७ अ यन करते ॽए ह ॠ दी को एक हवषय के
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ॺप म७ पु७ गे या हव৯ान/सामाहजक हव৯ान के हकसी हवषय को ह ॠ दी मा म से पुना चा ७ गे। य उनके हलए
भी उपयोगी साहबत ोगा, जो उৡतर मा हमक र की हि঴ा के बाद हकसी तर के रोजगार म७ लग ag
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जाएॠ गे। व ाफ़ कामकाजी ह ॠ दी का आधारभूत अ यन काम आएगा। हजन हि঴ाहथियोॠ की ॹहच जनसॠचार
मा मोॠ म७ ोगी, उनके हलए य पाਉॿम एक आरॠ हभक पृ भूहम हनहमित करे गा। इसके साथ ी य
पाਉॿम सामा ॺप से तर -तर के साह ि के साथ हि঴ाहथियोॠ के सॠ बॠध को स ज बनाएगा। हि঴ाथी
भाहषक अहभ खঢ के सू঵ एवॠ जहिल ॺपोॠ से पररहचत ो सक७गे। वे यथाथि को अपने हवचारोॠ म७ वखित
करने के साधन के तौर पर भाषा का अहधक साथिक उपयोग कर पाएफ़ गे और उनम७ जीवन के ঋहत मानवीय
सॠवेदना एवॠ स क हि का हवकास ो सकेगा।

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रािरीय हि঴ा नीहत 2020 तथा क७ঈीय मा हमक हि঴ा बोडि ारा समय-समय पर द঴ता आधाररत हि঴ा,
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कला समेहकत अहधगम, अनुभवा क अहधगम को अपनाने की बात की गई ै जो हि঴ाहथियोॠ की ঋहतभा को
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उजागर करने, िेल-िेल म७ सीिने पर बल दे ने,आनॠदपूणि ৯ानाजिन और हव ाजिन के हवहवध तरीकोॠ को
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अपनाने तथा अनुभव के ारा सीिने पर बल दे ती ै ।
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द঴ता आधाररत हि঴ा से ता यि ै सीिने और मू ाॠ कन करने का एक ऐसा हिकोण जो हि঴ाथी के
सीिने के ঋहतफल और हवषय म७ हविेष द঴ता को ঋा करने पर बल दे ता ै । द঴ता व ঴मता, कौिल,
৯ान और हिकोण ै जो खঢ को वा हवक जीवन म७ कायि करने म७ स ायता करती ै । इससे हि঴ाथी य
सीि सकते ॰ हक ৯ान और कौिल को हकस ঋकार ঋा हकया जाए तथा उ ७ वा हवक जीवन की
सम ाओॠ पर कैसे लागू हकया जाए। ঋिेक हवषय, ঋिेक पाठ को जीवनोपयोगी बनाकर ঋयोग म७ लाना ी
द঴ता आधाररत हि঴ा ै । इसके हलए उৡ रीय हचॠ तन कौिल पर हविेष बल दे ने की आव कता ै ।

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mहकत अहधगम को हि঴ण-अहधगम ঋहॿया म७ सुहनहित करना अिहधक आवm.क ै। कला के
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कला समे
सॠस.ार म७ क ना की एक अलग ी उडान ोती ै । कला एक खঢ की रचना कsअहभ e खঢ ै। कला
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lकहवता, रॠ गिाला, याআा,
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समेहकत अहधगम से ता यि ै कला के हवहवध ॺपोॠ यथा सॠगीत, नृि, नािक,
l मूहतिकला, आभूषण बनाना, गीत हलिना, नुজड नािक, कोलाज, पो र, कलाaঋदििनी को हि঴ण अहधगम
ag की ঋहॿया का अहभ ह ा बनाना। हकसी हवषय को आरॠ भ करने के हलए आइस ঍ेहकॠग गहतहवहध के ॺप
म७ तथा सामॠज पूणि समझ पैदा करने के हलए अॠतरहवषयक या बॽहवषयक पररयोजनाओॠ के ॺप म७ कला
समेहकत अहधगम का ঋयोग हकया जाना चाह ए। इससे पाठ अहधक रोचक एवॠ ঁा ो जाएगा।

अनुभिा क अहधगम या आनुभहवक ৯ानाजिन का उ े िैह঴क वातावरण को हि঴ाथी क७हঈत बनाने के
साथ-साथ यॠ मू ाॠ कन करने , आलोचना क ॺप से सोचने , हनणिय लेने तथा ৯ान का हनमाि ण कर उसम७
पारॠ गत ोने से ै । य ाफ़ हि঴क की भूहमका मागिदिि क की र ती ै । ৯ानाजिन अनुभव स योगा क अथवा
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तॠআ ोता ै और य हि঴ाथी को एक साथ कायि करने तथा यॠ के अनुभव ारा सीिने पर बल दे ता ै ।
य हस ाॠ त और व ार के बीच की दू री को कम करता ै I

इस पाਉॿम के अ यन से:

1. हि঴ाथी अपनी ॹहच और आव कता के अनुॺप साह ि का ग न और हविेष अ यन जारी रि
सक७गे।
2. हव हव ालय र पर हनधाि ररत ह ॠ दी-साह ि से सॠ बॠहधत पाਉॿम के साथ स ज सॠबॠध िाहपत कर
सक७गे।
3. लेिन-कौिल के ाव ाररक और सृजना क ॺपोॠ की अहभ खঢ म७ स঴म ो सक७गे।
4. रोिगार के हकसी भी ঴ेআ म७ जाने पर भाषा का ঋयोग ঋभावी ढॠ ग से कर सक७गे।
5. य पाਉॿम हि঴ाथी को जनसॠचार तथा ঋकािन जैसे हवहभ -঴ेআोॠ म७ अपनी ঴मता ঢ करने
का अवसर ঋदान कर सकता ै ।
6. हि঴ाथी दो हभ पाठोॠ की पाਉव ु पर हचॠतन करके उनके म की सॠब ता पर अपने हवचार
अहभ ঢ करने म७ स঴म ो सक७गे।
7. हि঴ाथी रिे -रिाए वाভोॠ के िान पर अहभ खঢपरक/ खिहत आधाररत/ उৡ हचॠतन ঴मता के ঋ ोॠ
पर स जता से अपने हवचार ঋकि कर सक७गे।

उ े :
● सॠঋेषण के मा म और हवधाओॠ के हलए उपयुঢ भाषा ঋयोग की इतनी ঴मता उनम७ आ चुकी ोगी
हक वे यॠ इससे जुडे उৡतर पाਉॿमोॠ को समझ सक७गे।
● भाषा के अॠदर सहॿय स ा सॠबॠध की समझ।
● सृजना क साह ि की समझ और आलोचना क हि का हवकास।
● हि঴ाहथियोॠ के भीतर सभी ঋकार की हवहवधताओॠ (धमि, जाहत, हलॠग, ঴े আ एवॠ भाषा सॠबॠधी) के ঋहत
सकारा क एवॠ हववेकपूणि रवैये का हवकास।
● पठन-सामঁी को हभ -हभ कोणोॠ से अलग-अलग सामाहजक, साॠ ृ हतक हचॠताओॠ के पररঋेশ म७
दे िने का अ ास करवाना तथा आलोचना क हि का हवकास करना।
● हि঴ाथी म७ रीय साह ि की समझ और उसका आनॠद उठाने की ঴मता तथा साह ि को ঒े
बनाने वाले त ोॠ की सॠवेदना का हवकास।
● हवहभ ৯ानानु िासनोॠ के हवमिि की भाषा के ॺप म७ ह ॠ दी की हवहिि ঋकृहत और उसकी ঴मताओॠ
का बोध।
● कामकाजी ह ॠ दी के उपयोग के कौिल का हवकास।
● जनसॠचार मा मोॠ (हঋॠि और इलेঠरॉहनक) म७ ঋयुঢ ह ॠ दी की ঋकृहत से पररचय और इन मा मोॠ की
आव कता के अनुॺप मौखिक एवॠ हलखित अहभ खঢ का हवकास।
● हि঴ाथी म७ हकसी भी अपररहचत हवषय से सॠबॠहधत ঋासॠहगक जानकारी के ঔोतोॠ का अनुसॠधान और
वखित ढॠ ग से उनकी मौखिक और हलखित ঋ ुहत की ঴मता का हवकास।

हि঴ण-यु्ियाफ़
● कुछ बात७ इस र पर ह ॠ दी हि঴ण के लশोॠ के सॠ दभि म७ सामा ॺप से क ी जा सकती ॰ । एक तो
य ै हक क঴ा म७ दबाव एवॠ तनाव मुঢ मा ौल ोने की खिहत म७ ये लশ ाहसल हकए जा सकते
॰ । चूफ़हक इस पाਉॿम म७ तैयारिुदा उ रोॠ को कॠठि कर लेने की कोई अपे ঴ा न ीॠ ै , इसहलए
हवषय को समझने और उस समझ के आधार पर उ र को ि ब करने की यो৓ता हवकहसत
करना हि঴क का काम ै । इस यो৓ता के हवकास के हलए क঴ा म७ हि঴ाहथि योॠ और हिह঴का के

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बीच हनबाि ध सॠवाद जॺरी ै । हि঴ाथी अपनी िॠकाओॠ और उलझनोॠ को हजतना अहधक ঢ कर७ गे,
उनमे उतनी िता आ पाएगी।
● भाषा की क঴ा से समाज म७ मौजूद हवहभ ঋकार के ॠ ोॠ पर बातचीत का मॠच बनाना चाह ए।
उदा रण के हलए सॠहवधान म७ हकसी ि हविेष के ঋयोग पर हनषेध को चचाि का हवषय बनाया जा
सकता ै । य समझ िॺरी ै हक हि঴ाहथियोॠ को हसूि सकारा क पाठ दे ने से काम न ीॠ चलेगा
बखि उ ७ समझाकर भाहषक यथाथि का सीधे सामना करवाने वाले पाठोॠ से पररचय ोना जॺरी ै ।
● िॠकाओॠ और उलझनोॠ को रिने के अलावा भी क঴ा म७ हि঴ाहथियोॠ को अहधक-से -अहधक बोलने के
हलए ঋेररत हकया जाना जॺरी ै । उ ७ य अ सास कराया जाना चाह ए हक वे पहठत सामঁी पर
राय दे ने का अहधकार और ৯ान रिते ॰ । उनकी राय को ঋाथहमकता दे ने और उसे बे तर तरीके से
पुनः ঋ ुत करने की अ ापकीय िै ली य ाफ़ बॽत उपयोगी ोगी।
● हि঴ाहथियोॠ को सॠ वाद म७ िाहमल करने के हलए य िॺरी ोगा हक उ ७ एक नाम ीन समू न
मानकर अलग-अलग खঢयोॠ के ॺप म७ अ हमयत दी जाए। हि঴कोॠ को अসर एक कुिल
सॠयोजक की भूहमका म७ यॠ दे िना ोगा, जो हकसी भी इৢु क खঢ को सॠवाद का भागीदार बनने
से वॠहचत न ीॠ रिते , उसके कৡे -पজे वঢ को मानक भाषा-िैली म७ ढाल कर उसे एक आभा दे
दे ते ॰ और मौन को अहभ ॠजना मान बैठे लोगोॠ को मुिर ोने पर बा कर दे ते ॰ ।
● अঋिाहित हवषयोॠ पर हचॠतन तथा उसकी मौखिक व हलखित अहभ खঢ की यो৓ता का हवकास
हि঴कोॠ के सचेत ঋयास से ी सॠभव ै । इसके हलए हि঴कोॠ को एक हनहित अॠ तराल पर नए-नए
हवषय ঋ ाहवत कर उन पर हलिने तथा सॠभाषण करने के हलए पूरी क঴ा को ঋेररत करना ोगा।
य अ ास ऐसा ै , हजसम७ हवषयोॠ की कोई सीमा तय न ीॠ की जा सकती। हवषय की असीम
सॠभावना के बीच हि঴क य सुहनहित कर सकते ॰ हक उसके हि঴ाथी हकसी हनबॠध-सॠकलन या
कुॠजी से तैयारिु दा सामঁी उतार भर न ले। तैयार िुदा सामঁी के लोभ से , बा तावि ी स ी मुखঢ
पाकर हि঴ाथी नये तरीके से सोचने और उसे ि ब करने के हलए तैयार ोॠगे। मौखिक
अहभ खঢ पर भी हविेष ान दे ने की िॺरत ै , ভोॠहक भहव म७ सा঴ाਚार, सॠगो ी जैसे मौकोॠ
पर य ी यो৓ता हि঴ाथी के काम आती ै । इसके अ ास के हसलहसले म७ हि঴कोॠ को उहचत
ावभाव, मानक उৡारण, पॉज, बलाघात, ाहजरजवाबी इिाहद पर िास बल दे ना ोगा।
● का की भाषा के ममि से हि঴ाथी का पररचय कराने के हलए िॺरी ोगा हक हकताबोॠ म७ आए
का ाॠ िोॠ की लयब ঋ ुहतयोॠ के ऑहडयो-वीहडयो कैसेि तैयार हकए जाएफ़ । अगर आसानी से कोई
गायक/गाहयका हमले तो क঴ा म७ म कालीन साह ि के हि঴ण म७ उससे मदद ली जानी चाह ए।
● एन सी ई आर िी, हि঴ा मॠআालय के हवहभ सॠगठनोॠ तथा तॠআ हनमाि ताओॠ ारा उपल कराए गए
कायिॿम/ ई-सामঁी, वृ हचআोॠ और हसनेमा को हि঴ण सामঁी के तौर पर इ ेमाल करने की िॺरत
ै । इनके ঋदििन के ॿम म७ इन पर लगातार बातचीत के िररए हसनेमा के मा म से भाषा के ঋयोग
की हवहििता की प चान कराई जा सकती ै और ह ॠ दी की अलग-अलग छिा हदिाई जा सकती ै ।
हि঴ाहथियोॠ को रीय परी঴ा करने को भी क ा जा सकता ै ।
● क঴ा म७ हसूि एक पाਉपु क की उपखिहत से बे तर य ै हक हि঴क के ाथ म७ तर -तर की
पाਉसामঁी को हि঴ाथी दे ि सक७ और हि঴क उनका क঴ा म७ अलग-अलग मौकोॠ पर इ ेमाल
कर सके।
● भाषा लगातार ঁ ण करने की हॿया म७ बनती ै , इसे ঋदहिित करने का एक तरीका य भी ै हक
हि঴क िुद य हसिा सक७ हक वे भी ि कोि, साह िकोि, सॠदभिঁॠथ की लगातार मदद ले र े ॰ ।
इससे हि঴ाहथियोॠ म७ इसका इ ेमाल करने को लेकर त रता बुे गी। अनुमान के आधार पर
हनकितम अथि तक पॽफ़ चकर सॠतुि ोने की जग वे स ी अथि की िोज करने के हलए ঋेररत ोॠगे।
इससे ि ोॠ की अलग-अलग रॠ गत का पता चलेगा और उनम७ सॠवेदनिीलता बुे गी। वे ि ोॠ के
बारीक अॠतर के ঋहत और सजग ो पाएफ़ गे।

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a कायि, सम ा-समाधान कायि,
● क঴ा-अ ापन के पूरक कायि के ॺप म७ सेहमनार, ਅूिोररयल
समू चचाि , पररयोजनाकायि , ा ाय आहद पर बल हदया जाना चाह ए। पाਉॿम म७ जनसॠचार
मा मोॠ से सॠ बॠहधत अॠिोॠ को दे िते ॽए य िॺरी ै हक समय-समय पर इन मा मोॠ से जुडे
खঢयोॠ और हविेष৯ोॠ को भी हव ालय म७ बुलाया जाए तथा उनकी दे ि -रे ि म७ कायििालाएफ़
आयोहजत की जाएॠ ।
● हभ ঴मता वाले हि঴ाहथियोॠ के हलए उपयुঢ हि঴ण सामঁी का इ ेमाल हकया जाए तथा उ ७ हकसी
भी ঋकार से अ हि঴ाहथियोॠ से कमतर या अलग न समझा जाए।
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● क঴ा म७ हि঴क को र ঋकार की हवहवधताओॠ (हलॠग जाहत, धमि, वगि आहद) के ঋहत सकारा क और
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सॠवेदनिील वातावरण हनहमित करना चाह ए।
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emेतु हदिा-हनदे ि l as
঒िण (सु नना) (5la
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঒िण तथा िाचन परी঴ा
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अॠक) : वहणित या पहठत सामঁी को सुनकर अथिঁ ण करना, वाताि लाप करना, वाद-
g पाठ आहद को सुनकर समझना, मू ाॠकन करना और अहभ खঢ के ढॠ ग को
हववाद, भाषण,aकहवता
समझना।
िाचन (बोलना) (5 अॠक): भाषण, स र कहवता-पाठ, वाताि लाप और उसकी औपचाररकता, कायि ॿम-
ঋ ुहत, कथा-क ानी अथवा घिना सुनाना, पररचय दे ना, भावानुकूल सॠवाद-वाचन।

हि णी: वाताि लाप की द঴ताओॠ का मू ाॠ कन हनरॠ तरता के आधार पर परी঴ा के समय ी ोगा। हनधाि ररत
10 अॠकोॠ म७ से 5 ঒वण (सु नना) कौिल के मू ाॠ कन के हलए और 5 वाचन (बोलना) कौिल के मू ाॠ कन के
हलए ोॠगे।
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िाचन (बोलना) एिॠ ঒िण (सुनना) कौिल का मू ाॠकन:
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● परी঴क हकसी ঋासॠहगक हवषय पर एक अनुৢेद का ि वाचन करे गा। अनु ৢेद त ा क या
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सुझावा क ो सकता ै । अनुৢेद लगभग 250 ि ोॠ का ोना चाह ए।

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परी঴क 2-3 हमनि का ঒ अॠि (ऑहडयो खिप) सुनवाएगा। अॠि रोचक ोना चाह ए। क
/घिना पूणि एवॠ ि ोनी चाह ए। वाचक का उৡारण िु , ि एवॠ हवराम हच ोॠ के उहचत ঋयोग
सह त ोना चाह ए।
● परी঴ाथी ानपूविक परी঴क/ऑहडयो खिप को सुनने के पिात परी঴क ारा पूछे गए ঋ ोॠ का
अपनी समझ से मौखिक उ र द७ गे। (1x5 =5)
● हकसी हनधाि ररत हवषय पर बोलना : हजससे हि঴ाथी अपने खঢगत अनुभवोॠ का ঋिा रण कर
सक७।
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● कोई क ानी सुनाना या हकसी घिना का वणिन करना।
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● पररचय दे ना।
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( / पररवार/ वातावरण/ व ु/ खঢ/ पयाि वरण/ कहव /लेिक आहद)
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la परी঴कोॠ के हलए अनुदेि :- ag
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● परी঴ण से पूवि परी঴ाथी को तैयारी के हलए कुछ समय हदया जाए।
● हववरणा क भाषा म७ वतिमान काल का ঋयोग अपेह঴त ै ।
● हनधाि ररत हवषय परी঴ाथी के अनुभव-जगत के ोॠ।
● जब परी঴ाथी बोलना आरॠ भ कर७ तो परी঴क कम से कम ঴ेप कर७ ।

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कौिलोॠ के अॠतरण का मू ाॠकन
(इस बात का हनिय करना हक ভा हि঴ाथी म७ ঒वण और वाचन की हन हलखित यो৓ताएफ़ ॰ )
ॿ. ঒िण (सुनना) िाचन (बोलना)
1 पररहचत सॠदभॵ म७ ঋयुঢ ि ोॠ और पदोॠ को 1 केवल अलग-अलग ि ोॠ और पदोॠ के ঋयोग
समझने की सामा यो৓ता ै । की यो৓ता ঋदहिित करता ै ।
2 छोिे सुसॠब कथनोॠ को पररहचत सॠदभॵ म७ 2 पररहचत सॠदभॵ म७ केवल छोिे सॠब कथनोॠ का
समझने की यो৓ता ै । सीहमत िु ता से ঋयोग करता ै ।
3 पररहचत या अपररहचत दोनोॠ सॠदभॵ म७ कहथत 3 अपे঴ाकृत दीघि भाषण म७ जहिल कथनोॠ के
सूचना को ि समझने की यो৓ता ै । ঋयोग की यो৓ता ঋदहिित करता ै ।
4 दीघि कथनोॠ की शॠिला को पयाि िु ता से 4 अपररहचत खिहतयोॠ म७ हवचारोॠ को ताहकिक ढॠ ग
समझने के ढॠ ग और हन षि हनकाल सकने की से सॠगहठत कर धारा-ঋवा ॺप म७ ঋ ुत
यो৓ता ै । करता ै ।
5 जहिल कथनोॠ के हवचार-हबॠदुओॠ को समझने की 5 उ े और ঒ोता के हलए उपयुঢ िैली को
यो৓ता ঋदहिित करने की ঴मता ै । अपना सकता ै ।

पररयोजना कायय - कुल अॠक 10
हवषय व ु - 5 अॠक
भाषा एवॠ ঋ ुहत - 3 अॠक
िोध एवॠ मौहलकता - 2 अॠक
● ह ी भाषा और साह ि से जुडे हवहवध हवषयोॠ/ हवधाओॠ / साह िकारोॠ / समकालीन लेिन /
साह खिक वादोॠ / भाषा के तकनीकी प঴ / ঋभाव / अनुঋयोग / साह ि के सामाहजक सॠदभो एवॠ
जीवन मू सॠबॠधी ঋभावोॠ आहद पर पररयोजना कायि हदए जाने चाह ए।
● सআ के ঋारॠ भ म७ ी हि঴ाथी को हवषय चुनने का अवसर हमले ताहक उसे िोध, तै यारी और लेिन के
हलए पयाि समय हमल सके ।

पररयोजना-कायय
‘पररयोजना’ ि योजना म७ ‘परर’ उपसगि लगने से बना ै । ‘परर’ का अथि ै ‘पू णिता’ अथाि त ऐसी योजना जो
अपने आप म७ पूणि ो पररयोजना क लाती ै । हकसी हविेष लশ की ঋाख े तु जो योजना बनाई और
कायाि खित की जाती ै , उसे पररयोजना क ते ॰ । य हकसी सम ा के हनदान या हकसी हवषय के त ोॠ को
ঋकाहित करने के हलए तै यार की गई एक पूणि हवचार योजना ोती ै ।

रािरीय पाਉचचाि की ॺपरे िा, रािरीय हि঴ा नीहत 2020 तथा के ीय मा हमक हि঴ा बोडि ारा समय-समय
पर अनुभवा क अहधगम, आनॠदपूणि अहधगम की बात क ी गई ै । उৡतर मा हमक र पर हि঴ाहथियोॠ
के हलए ह ॠ दी का अ यन एक सृजना क, साह खिक, साॠ ृ हतक और हवहभ ঋयुखঢयोॠ की भाषा के ॺप
म७ ঋयोग करने और करवाने के हलए पररयोजना कायि अिॠत म पूणि व लाभदायक हस ोता ै ।

पररयोजना का म

● खঢगत र पर िोज, कायिवा ी और ৓ार वीॠ - बार वीॠ क঴ा के दौरान अहजित ৯ान और
कौिल, हवचारोॠ आहद पर हचॠतन का उपयोग ।

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● सै ाॠ हतक हनमाि णोॠ और तकॵ का उपयोग करके वा हवक दु हनया के परर ोॠ का हव ेषण और
मू ाॠ कन
● एक तॠ আ और हव ाररत कायि का हनमाि ण करने के हलए म पूणि और रचना क हचॠतन, कौिल
और ঴मताओॠ के अनुঋयोग का ঋदििन
● उन हवषयोॠ पर कायि करने का अवसर हजनम७ हि঴ाहथि योॠ की ॹहच ै I
● नए ৯ान की ओर अঁसर
● िोजी ঋवृह म७ वृख
● भाषा ৯ान समृ एवॠ ाव ाररक
● सम ा समाधान की ঴मता का हवकास

पररयोजना कायय हनधायररत करते समय ान दे ने यो৓ बात७

● पररयोजना कायि हि঴ाहथियोॠ म७ यो৓ता आधाररत ঴मता को ान म७ रिकर हदए जाएफ़ हजससे वे हवषय
के साथ जुडते ॽए उसके ाव ाररक प঴ को समझ सक७। वतिमान समय म७ उसकी ঋासॠहगकता पर
भी ान हदया जाए।
● सআ के ঋार म७ ी हि঴ाहथियोॠ को हवषय चुनने का अवसर हमले ताहक उसे िोध, तैयारी और लेिन
के हलए पयाि समय हमल सके।
● अ ाहपका/अ ापक ारा क঴ा म७ पररयोजना-कायि को लेकर हव ारपूविक चचाि की जाए हजससे
हि঴ाथी उसके अथि, म व ঋहॿया को भली-भाफ़ हत समझने म७ स঴म ो सक७ ।
● ह ॠ दी भाषा और साह ि से जुडे हवहवध हवषयोॠ/ हवधाओॠ/ साह िकारोॠ/ समकालीन लेिन/ भाषा के
तकनीकी प঴/ ঋभाव/ अनु ঋयोग/ साह ि के सामाहजक सॠदभॵ एवॠ जीवन-मू सॠबॠधी ঋभावोॠ आहद
पर पररयोजना कायि हदए जाने चाह ए।
● हि঴ाथी को उसकी ॹहच के अनुसार हवषय का चयन करने के छूि दी जानी चाह ए तथा अ ापक/
अ ाहपका को मागिदििक के ॺप म७ उसकी स ायता करनी चाह ए।
● पररयोजना – कायि करते समय हन हलखित आधार को अपनाया जा सकता ै -
1. ঋमाण – पআ
2. आभार ৯ापन
3. हवषय-सूची
4. उ े
5. सम ा का बयान
6. पररक ना
7. ঋहॿया (साশ सॠঁ , साশ का हव ेषण)
8. ঋ ुतीकरण (हवषय का हव ार)
9. अ यन का पररणाम
10. अ यन की सीमाएफ़
11. ঔोत
12. अ ापक हि णी
● पररयोजना – कायि म७ िोध के दौरान सखिहलत हकए गए हचআोॠ और सॠ दभॵ के हवषय म७ उहचत
जानकारी दी जानी चाह ए। उनके ঔोत को अव अॠहकत करना चाह ए।
● हचআ, रे िाहचআ, हव৯ापन, ঁाफ, हवषय से सॠ बॠहधत आफ़ कडे , हवषय से सॠबॠहधत समाचार की कतरन७
एकहআत की जानी चाह ए।

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● ঋमाण ॺप सखिहलत हकए गए आफ़ कडे , हचআ, हव৯ापन आहद aके ঔोत अॠहकत करने के साथ-साथ
समाचार-पআ, पहআकाओॠ के नाम एवॠ हदनाॠ क भी हलिना चाह ए।
● साह िकोि, सॠदभि -ঁॠथ, ि कोि की स ायता लेनी चाह ए।
● पररयोजना-कायि म७ हि঴ाहथियोॠ के हलए अनेक सॠभावनाएफ़ ॰ । उनके खঢगत हवचार तथा उनकी
क ना के हव ृत सॠ सार को अव सखिहलत हकया जाए।

पररयोजना – कायय के कुछ हिषय सुझािा क ॺप म७ हदए जा र े ॰।
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भाषा और साह ि से जुडे हवहवध हवषयोॠ/ हवधाओॠ/ साह िकारोॠ/ समकालीन लेिन के आधार पर
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⮚ ह ॠदी कहिता म७ ঋक
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e ृ हत हचআण (पाठ – उषा / बगुलोॠ के पॠख कहिता)
⮚ हवहभ कहवयोॠsकी कहवताओॠ का तु लना क अ यन, l a
⮚ भाषा िैg
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a ली, हविेषताएफ़
⮚ वतिमान के साथ ঋासॠहगकता इिाहद।
⮚ भारतीय ঁामीण का जीिन (पाठ – प लिान की ढोलक)
⮚ आिादी से प ले, बाद म७ तथा वतिमान म७ खिहत
⮚ सुधार की आव कताएफ़
⮚ आपकी भूहमका/ योगदान/ सुझाव
⮚ समकालीन,साॠ ृ हतक एिॠ साह ्िक हिषयोॠ से सॠबॠहधत
⮚ भूहमका – ভा ै , ভोॠ ै आहद का हववरण m
⮚ हवहभ दे िोॠ म७ ঋभाव
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⮚ भारत के साथ तु लना क अ यन
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⮚ कारण और हनवारण
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⮚ आपकी भूहमका/ योगदान/ सुझाव a
उपयुिঢ हवषय सुझाव के ॺप म७ ঋ ुत हकए गए ॰ । आप हदिाहनदे िोॠ के आधार पर अ हवषयोॠ
का चयन कर सकते ॰ ।
঒िण कौिल एिॠ पररयोजना कायय का मू ाॠकन हि ालय र पर आॠ तररक परी঴क (हिषय
अ ापक) ारा ी हकया जाएगा।

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ह ॠदी (आधार)
हिषय कोड – 302
क঴ा 12िी ॠ (2026-27)
(2025 -26)
(2026-27)
परी঴ा ेतु पाਉॿम हिहनदे िन

 ঋ -पআ तीन खਔोॠ – खॠड- क, ख और ग म७ ोगा|
 खॠड- क म७ अपहठत बोध पर आधाररत ঋ पू छे जाएफ़ गे I सभी ঋ ोॠ के उ र दे ने ोॠगे।
 खॠड- ख म७ अहभ ्ि और मा म पाਉपु क के आधार पर ঋ पू छे जाएफ़ गे| ঋ ोॠ म७ आॠ तररक
हिक हदए जाएफ़ गे |
 खॠड- ग म७ आरो भाग – 2 एिॠ हितान भाग – 2 पाਉपु कोॠ के आधार पर ঋ पू छे जाएफ़ गे|
ঋ ोॠ म७ आॠ तररक हिक हदए जाएफ़ गे |

भाराॠक-80 हनधायररत समय - 03 घॠ िे

िाहषयक परी঴ा े तु भार हिभाजन

खॠड-क (अपहठत बोध) 18 अॠक

1 01 अपहठत ग ाॠ ि (लगभग 250 ि ोॠ का) पर आधाररत बोध, हचॠतन, हव ेषण 10 अॠक
पर बॽहवक ीय ঋ , अहतलघू रा क ঋ , लघू रा क ঋ पूछे जाएफ़ गे I
(बॽहवक ीय ঋ 01 अॠक x 03 ঋ = 03 अॠक, अहतलघू रा क ঋ 01
अॠक x 01 ঋ = 01 अॠक, लघू रा क ঋ 02 अॠक x 03 ঋ = 06 अॠक)

2 01 अपहठत प ाॠ ि (लगभग 100 ि ोॠ का) पर आधाररत बोध, सरा ना, सौॠदयि, 08 अॠक
हचॠतन, हव ेषण आहद पर बॽहवक ीय ঋ , अहतलघू रा क ঋ लघू रा क
ঋ पूछे जाएफ़ गे I (बॽहवक ीय ঋ 01 अॠक x 03 ঋ = 03 अॠक,
अहतलघू रा क ঋ 01 अॠक x 01 ঋ = 01 अॠक, लघू रा क ঋ 02 अॠक
x 02 ঋ = 04 अॠक)

खॠड- ख (अहभ ्ि और मा म पाਉपु क के आधार पर ) 22 अॠक
पाठ सॠূा 3, 4, 5, 11, 12 तथा 13 पर आधाररत
3 हदए गए 03 अঋिाहित हवषयोॠ म७ से हकसी 01 हवषय पर आधाररत लगभग 120 ि ोॠ म७ 06 अॠक
रचना क ले िन (06 अॠक x 01 ঋ )

4 पाठ सॠূा 3, 4, 5, 11 तथा 13 पर आधाररत (02 अॠक x 04 ঋ = 08 16 अॠक
अॠक ) (लगभग 40 ि ोॠ म७ ), (04 अॠक x 02 ঋ = 08 अॠक) (लगभग 80
ि ोॠ म७ )
(हवक सह त)

खॠ ड- ग (आरो भाग – 2 एिॠ हितान भाग-2 पाਉपु कोॠ के आधार पर ) 40 अॠक

5 पहठत का ाॠ ि पर आधाररत 05 बॽहवक ी ঋ (01 अॠक x 05 ঋ ) 05 अॠक

6 का िॠड पर आधाररत 03 ঋ ोॠ म७ से हक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उ र (लगभग 60 ि ोॠ म७ ) 06 अॠक

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(03 अॠक x 02 ঋ )

7 का िॠड पर आधाररत 03 ঋ ोॠ म७ से हक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उ र (लगभग 40 ि ोॠ म७ ) 04 अॠक
(02 अॠक x 02 ঋ )

8 05 अॠक
पहठत ग ाॠ ि पर आधाररत 05 बॽहवक ी ঋ (01 अॠक x 05 ঋ )

9 ग िॠ ड पर आधाररत 03 ঋ ोॠ म७ से हक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उ र (लगभग 60 ि ोॠ म७ ) 06 अॠक
(03 अॠक x 02 ঋ )

10 04 अॠक
ग िॠ ड पर आधाररत 03 ঋ ोॠ म७ से हक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उ र (लगभग 40 ि ोॠ म७ )
(02 अॠक x 02 ঋ )

11 हवतान के पाठोॠ पर आधाररत 03 म७ से 02 ঋ ोॠ के उ र (लगभग 60 ि ोॠ 10 अॠक
म७ ) (05 अॠक x 02 ঋ )

13 (अ) ঒िण तथा िाचन 10+10 =
(ब) पररयोजना कायय 20 अॠक

कुल 100 अॠ क
अॠ क

हनधायररत पु क७ :
1. आरो , भाग–2, एन.सी.ई.आर.िी., नई हद ली ारा ঋकाहित
2. हितान, भाग–2, एन.सी.ई.आर.िी., नई हद ली ारा ঋकाहित
3. ‘अहभ ्ि और मा म’, एन.सी.ई.आर.िी., नई हद ली ारा ঋकाहित
नोि – पाਉॿम के हन हल्खत पाठ िा हदए गए ॰

आरो भाग - 2 का िॠड  गजानन माधव मुखঢबोध – स षि ीकारा ै (पूरा पाठ)
 हूराक गोरिपुरी – गिल
ग िॠड  हव ु िरे – चाली चैखिन यानी म सब (पूरा पाठ)
 रहिया स৪ाद ि ीर - नमक (पूरा पाठ)
हितान भाग - 2  एन ঌ॰क - डायरी के प े

क঴ा बार िी ॠ ेतु ঋ पআ का हि ृत ঋाॺप जानने के हलए कृपया बोडय ारा जारी ঋहतदिय ঋ पআ
दे ख७।
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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSyllabus
Pages10
Languagehindi
Updated24 Sep 2026