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FOR CBSE CLASS 12 PREPARATION
CBSE Class 12 Sample
Paper 2027 for Hindi
Elective
EXAM YEAR TYPE SUBJECT
CBSE Class 12 2027 Sample Paper Hindi
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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्ቚतिदर्श ्ቚश्न प्ቔ (2026-27)
ह द
िं ी (ऐच्छिक) कोड सिंख्या (002)
क्षा – बार व िं
तनर्ाशररि समय : 03 घिंटे अधर्किम अिंक : 80 m
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सामान्य तनदे र् – e m l as
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ों lको बहुत सावधािी से पढ़िए और उिका अिुपािि कीजिए:
निम्िलिखित नि्शे शg
a
इस ्ቚश्ि प्ቔ में कि 13 ्ቚश्ि हैं | सभी ्ቚश्ि अनिवार्य हैं |
ु
र्ह ्ቚश्ि प्ቔ तीि िंडों में ववभाजित है - क, ि और ग |
िंड-क में अपढ़ित बोध पर आधाररत कुि 2 ्ቚश्ि हैं, जििमें उप्ቚश्िों की संख्र्ा 13 है।
िंड-ि में अलभव्र्जतत और माध्र्म पर आधाररत कुि 4 ्ቚश्ि हैं, जििमें उप्ቚश्िों की संख्र्ा 10 है ।
्ቚश्िों में ववकल्प ढ़्शए गए हैं।
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िंड-ग में पाठ्र् पुस्तकों अंतरा और
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अंतराि पर आधाररत कुि 7 ्ቚश्ि हैं, जििमें उप्ቚश्िों की संख्र्ा
21 है । ्ቚश्िों में ववकल्प ढ़्शए गए हैं। s e
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ag से लिखिए।
र्थासंभव तीिों िंडों के ्ቚश्िों के उ्ቈर ्ቅम
खिंड – क 18 अिंक
(अपहिि बोर्)
1. निम्िलिखित गदर्ांश को ध्र्ािपूवक
य पिकर उस पर आधाररत ्ቚश्िों के उ्ቈर लिखिए- 10
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ढ़हमाचि ्ቚ्शे श के िाहौि स्पीनत में एक ककसाि िे पहिी बार हींग की सफितापूवक
m य िेती
c.कीo है। र्ह एक ऐसी उपिजधध है िो इस घरेिू मसािे की िेती में '्ቅांनत िाsemसकती है’, .co
s em जिसे कभी भारतीर् धरती पर उगािा असंभव मािा िाता था। िाहौि gघाटी l a के सािगरा
la a
ag गााँव के ककसाि तोग चं्श िे सीएसआईआर-ढ़हमािर् िैवसंप्शा ्ቚौदर्ोगगकी संस्थाि
(आईएचबीटी), पािमपुर के वै्ञानिकों दवारा उपिधध कराए गए बीिों से चार साि की
कडी मेहित के बा्श र्ह उपिजधध हालसि की है ।
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आईएचबीटी के वै्ञानिकों की एक टीम िे हाि ही में तोग चं्श के िेत का ्शौरा ककर्ा,
िहााँ वे ककसाि की इस अिोिी उपिजधध से ्ቚभाववत हुए। टीम िे ्शे श के ववलभन्ि ्षे्ቔों
में हींग की िेती के परी्षण ककए थे, िेककि उन्हें कहीं भी सफिता िहीं लमिी। तोग चं्श
की र्ह सफिता हींग उगािे के सपिे को साकार करिे की ढ़्शशा में आशा की ककरण है ,
जिसे अब तक अफगानिस्ताि और ईराि से निर्ायत ककर्ा िाता रहा है । तोग चं्श, जिन्होंिे
एक बीघा ज़मीि पर हींग की सफितापूवक
य िेती की है , को उम्मी्श है कक िाहौि-स्पीनत
के अन्र् ककसाि भी इस सफिता को ्शोहराकर भारत को हींग के ्षे्ቔ में आत्मनिभयर
बिािे में र्ोग्शाि ्शें गे।
चार साि पहिे सीएसआईआर-आईएचबीटी, पािमपुर की टीम के ्शौरे के ्शौराि, ढ़हमाचि
्ቚ्शे श की िाहौि घाटी की िं डी और शष्ु क ििवार्ु हींग की िेती के लिए उपर्त
ु त पाई
गई थी। वै्ञानिकों िे घाटी के कुछ ककसािों को हींग के बीि ढ़्शए थे, ताकक वे इसे अपिे
िेतों में उगा सकें। हािााँकक घाटी के कई ककसािों िे हींग उगािे की कोलशश की, िेककि
चं्श ही भाग्र्शािी रहे जिन्होंिे इसे सफितापूवक
य उगार्ा।
्ቨोत- आववष्कार प्ऴ्ቔका, िवंबर 2025 अंक से साभार
(I) तोग चं्श की हींग की िेती की सफिता ककसका पररणाम है ? 1
(A) वव्शे शी निवेश का
(B) उत्कृष्ट िीविशैिी का
(C) वै्ञानिक सहर्ोग का
(D) ककसािों के परस्पर सहर्ोग का
(II) निम्िलिखित कथिों पर ववचार कीजिए:- 1
(i) िाहौि स्पीनत की ज़मीि पर ककसाि बरसों से हींग की िेती कर रहे थे।
(ii) हींग के बीि ढ़हमाचि ्ቚ्शे श के िाहौि स्पीनत के कई ककसािों को ढ़्शए गए थे।
(iii) आईएचबीटी की टीम िे ्शे श के ववलभन्ि ्षे्ቔों में हींग की िेती के परी्षण ककए थे।
गदर्ांश के अिुसार कौि-सा/ से कथि सही हैं?
ववकल्प
(A) केवि कथि (i) सही है ।
(B) केवि कथि (i) और (ii) सही हैं।
2
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(C) केवि कथि (i) और (iii) सही हैं।
(D) केवि कथि (ii) और (iii) सही हैं।
(III) निम्िलिखित कथि-कारण को ध्र्ािपूवक
य पढ़िए तथा उ्ቈर के लिए सही ववकल्प का चर्ि 1
कीजिए।
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कथि : ढ़हमाचि ्ቚ्शे श की िाहौि घाटी हींग की िेती के लिए उपर्त
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ु त पाई गई थी।
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कारण : ढ़हमाचि ्ቚ्शे श की िाहौि घाटी की िं डी और शष्ु क ििवार्ु हींग की िेती के e m
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लिए िीक थी।
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ववकल्प :ag
(A) कथि और कारण ्शोिों गित हैं।
(B) कथि सही है , ककंतु कारण गित है ।
(C) कथि सही है और कारण उसकी उगचत व्र्ाख्र्ा करता है ।
(D) कथि सही है , ककंतु कारण उसकी उगचत व्र्ाख्र्ा िहीं करता है ।
हींग की िेती ्ቅांनत कैसे िा सकती है ? m
c. o
(IV) 1
(V)
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तोग चं्श की हींग िेती में सीएसआईआर-आईएचबीटी की भूलमका रही। लसदध कीजिए। 2
(VI) ककसाि और वै्ञानिकों का संर्ुतत ्ቚर्ास भारत
l as को हींग के ्षे्ቔ में आत्मनिभयर बिािे में 2
g
र्ोग्शाि ्शे गा। गदर्ांश के आधार अपिेa ववचार लिखिए।
(VII) गदर्ांश से ्ቚाप्त सं्शेश अपिे शध्शों में लिखिए। 2
2. निम्िलिखित काव्र्ांश को पिकर उस पर आधाररत ्ቚश्िों के उ्ቈर लिखिए- 8
रे ्ቚवासी, िाग, तेरे
्शे श का संवा्श आर्ा।
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c.भेo्शमर् सं्शेश सुि पुिककत m.co
m िगों िे चंचु िोिी; s e
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a ्ቚेम से झुक-झुक ्ቚणनत में
पा्शपों की पंजतत डोिी;
्शरू ्ቚाची की तटी से
ववश्व के तण
ृ -तण
ृ िगाता;
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कफर उ्शर् की वार्ु का वि में
सुपररगचत िा्श आर्ा।
रे ्ቚवासी, िाग, तेरे
्शे श का संवा्श आर्ा।
व्र्ोम-सर में हो उिा ववकलसत
अरुण आिोक-शत्शि;
गचर-्शि
ु ी धरणी ववभा में
हो रही आिं्श-ववह्वि ।
चम
ू कर ्ቚनत रोम से लसर
पर चिा वर्शाि ्ቚभु का,
रजश्म-अंिलि में वपता का
स्िेह-आशीवाय्श आर्ा।
रे ्ቚवासी, िाग, तेरे
्शे श का संवा्श आर्ा।
लसंध-ु तट का आर्य भावुक
आि िग मेरे हृ्शर् में ,
िोिता, उदगम ववभा का
्शीप्त-मुि ववजस्मत उ्शर् में ;
उग रहा जिस ्ቌ्षनति-रे िा
से अरुण, उसके परे तर्ा?
एक भि
ू ा ्शे श धलू मि-सा,
मझ
ु े तर्ों र्ा्श आर्ा?
रे ्ቚवासी, िाग, तेरे
4
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्शे श का संवा्श आर्ा।
्ቨोत: पुस्तक :स्वतं्ቔता पुकारती
कवव- ‘रामधारी लसंह ढ़्शिकर’
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(I) कववता का मख्
ु र् सं्शेश तर्ा है ?
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(A) ्ቚकृनत का संर्षण आवश्र्क । e m
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(B) व्र्जततगत सुि को साझा करिा।
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(C) वतयमaािg जस्थनत की गचंता व्र्तत करिा।
(D) ्ቚवासी को ्शे श की चेतिा से िोडिा।
(II) कवव का अंतनियढ़हत ्ቚश्ि "उग रहा जिस ्ቌ्षनति-रे िा से अरुण, उसके परे तर्ा?" ककस 1
भाव को उभारता है ?
(A) भौनतक वस्तुओं की िोि।
(B) जि्ञासा और चेतिा की िोि। m
(C) िए सत्र् और उिािे की िोि।
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(D) मिुष्र् की सीमा से आगे की िोि। as
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(III) निम्िलिखित कथि-कारण को ध्र्ािपव
ू क
य पढ़िए तथा उ्ቈर के लिए सही ववकल्प का चर्ि 1
कीजिए।
कथि: कववता में उजल्िखित "अरुण आिोक-शत्शि" एक िए ्ቚभात का ्ቚतीक है ।
कारण: "अरुण आिोक-शत्शि" सूर्ो्शर् के ्ቚकाश से खििे फूि की तरह ्शे श के िए
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उत्साह को ्शशायता है ।
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ववकल्प :
m (A) कथि और कारण ्शोिों गित हैं। s e m
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g la (B) कथि सही है , ककंतु कारण गित है ।
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(C) कथि सही है और कारण उसकी उगचत व्र्ाख्र्ा करता है ।
(D) कथि सही है , ककंतु कारण उसकी उगचत व्र्ाख्र्ा िहीं करता है ।
(IV) "गचर-्शि
ु ी धरणी ववभा में हो रही आिं्श-ववह्वि" से तर्ा आशर् है ? 1
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(V) कववता में ्ቚकृनत के ककि ्शो तत्वों का वणयि ्शे श की िव-िागनृ त के ्ቚतीक के रूप में 2
हुआ है ?
(VI) "एक भूिा ्शे श धलू मि, सा मुझे तर्ों र्ा्श आर्ा?" पंजतत के माध्र्म से कवव का मिोभाव 2
स्पष्ट कीजिए।
खिंड- ख 22 अिंक
(अभिव्यच्ति और माध्यम पस्
ु िक के आर्ार पर )
3. निम्िलिखित ्ቚश्िों के उ्ቈर लिखिए - 5
(I) एंकर पैकेि से तर्ा तात्पर्य है ? 1
(शध्श सीमा-िगभग 20 शध्श)
(II) प्ቔकाररता की भाषा में मुिडा तर्ा है ? इसका महत्व बताएाँ। 2
(शध्श सीमा-िगभग 40 शध्श)
(III) सिीव और रोचक फीचर कैसे लििा िा सकता है ? ककन्हीं ्शो ्ऴबं्शओ
ु ं का उल्िेि कीजिए। 2
(शध्श सीमा-िगभग 40 शध्श)
4. निम्िलिखित ्ቚश्िों में से ककन् ीिं दो ्ቚश्िों के उ्ቈर िगभग 60 र्ब्दों में लिखिए 2x3=6
(I) रे डडर्ो के लिए समाचार लििते हुए ककि अनिवार्य गण
ु ों का पािि करिा चाढ़हए? 3
(II) 'समाचार-प्ቔ में अगर आगथयक और िेि का पष्ृ ि ि हो तो वह संपूणय समाचार प्ቔ िहीं 3
मािा िाएगा।' कथि का औगचत्र् लसदध कीजिए।
(III) िोिी ररपोटय और इि डेप्थ ररपोटय में अंतर स्पष्ट कीजिए। 3
5. निम्िलिखित तीि ववषर्ों में से ककस एक ववषर् पर िगभग 100 र्ब्दों में रचिात्मक 5
िेि लिखिए –
(I) िब मैंिे अििािे लिंक पर जतिक ककर्ा...
(II) िब मैंिे अभर्ारण्र् में िीप की सवारी का आिं्श लिर्ा....
(III) िब मैंिे रे िवे प्िेटफामय पर एक बच्चे को रोते ्शे िा…..
6. निम्िलिखित में से ककन्हीं दो ्ቚश्नों के उ्ቈर िगभग 60 र्ब्दों में लिखिए- 2x3=6
(I) शध्शों से िेििे का ्ቚर्ास कववता है । लसदध कीजिए। 3
(II) िाटक के मंच-नि्शे श हमेशा वतयमाि काि में ही लििे िािे का कारण उ्शाहरण सढ़हत 3
लिखिए।
6
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(III) कहािी को रोचक बिािे के लिए ककि बातों का ध्र्ाि रििा पडता है ? उ्शाहरण सढ़हत 3
स्पष्ट कीजिए।
खिंड- ग 40 अिंक
(पाठ्य पुस्िकों अिंिरा, अिंिराल के आर्ार पर)
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7. निम्िलिखित पढ़ित काव्र्ांश को पिकर उस पर आधाररत ्ቚश्िों के सवायगधक उपर्ुतत
om
5x1=5
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ववकल्पों का चर्ि कीजिए– . c e m
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वह िता वहीं की, िहााँ किी
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glह से ढ़हिी, पिी,
तू खििी, aस्िे
अंत भी उसी गो्श में शरण
िी, माँ्श
ू े दृग वर महामरण!
मझ
ु भाग्र्हीि की तू संबि
र्ग
ु वषय बा्श िब हुई ववकि
्शि
ु ही िीवि की कथा रही m
तर्ा कहूाँ आि, िो िहीं कही !
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हो इसी कमय पर व्ቌपात
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र्ढ़्श धमय, रहे ित स्शा माथ ag
इस पथ पर, मेरे कार्य सकि
हो ्ቝष्ट शीत के-से शत्शि !
कन्र्े, गत कमों का अपयण
कर, करता मैं तेरा तपयण !
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(I) निम्िलिखित में से कौि-सा ववकल्प कवव दवारा स्वर्ं को 'भाग्र्हीि' कहिे का कारण 1
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c. oीिं हो सकता:
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e m (i) एकमा्ቔ पु्ቔी की र्ुवावस्था में ही मत्ृ र्ु हो िािा la
las ag
ag (ii) पु्ቔी को िन्म ्शे ते ही पत्िी का ्शे हावसाि हो िािा
(iii) कवव रूप में साढ़हत्र् िगत में पहचाि ि लमि पािा
ववकल्प
(A) केवि (i)
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(B) केवि (iii)
(C) केवि (ii) और (iii)
(D) केवि (i) और (ii)
(II) निम्िलिखित कथि-कारण को ध्र्ािपूवक
य पढ़िए तथा उ्ቈर के लिए सही ववकल्प का चर्ि 1
कीजिए।
कथि: 'वह िता वहीं की, िहााँ किी' पंजतत में कवव अपिी पत्िी और प्ቔ
ु ी के ववषर् में
बात कर रहे हैं।
कारण : कवव अपिी पत्िी और पु्ቔी के निधि से व्र्ाकुि हैं , पु्ቔी सरोि का पािि-
पोषण और मत्ृ र्ु उसके िनिहाि में हुई थी।
ववकल्प :
(A) कथि और कारण ्शोिों गित हैं।
(B)कथि सही है , ककंतु कारण गित है ।
(C)कथि सही है और कारण उसकी उगचत व्र्ाख्र्ा करता है ।
(D) कथि सही है , ककंतु कारण उसकी उगचत व्र्ाख्र्ा िहीं करता है ।
(III) ्ቚस्तुत पंजततर्ों का मूि भाव है - 1
(A) ्ቅोध
(B) घण
ृ ा
(C) शांत
(D) करुणा
(IV) अपिे सभी कार्ों के ्ቝष्ट होिे की तुििा कवव दवारा की िा रही है - 1
(A) अनतवजृ ष्ट में िष्ट हो चक
ु े कमिों से
(B)शीत के ्ቚकोप से िष्ट हो चक
ु ी फ़सिों से
(C) स्शी के ्ቚकोप से िराब हो चक
ु े कमिों से
(D) व्ቌपात होिे के कारण िराब हो चक
ु ी फ़सिों से
(V) निम्िलिखित में से कौि-सा कथि काव्र्ांश के आधार पर सही है - 1
(A) सरोि का पािि-पोषण िनिहाि में हुआ था।
(B) प्ቔ
ु ी सरोि की लश्षा एवं आचरण शकंु तिा से अिग था।
8
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(C ्शि
ु की घडी में कवव धमय का अंतर भूि िािा चाहते थे।
(D) कवव अपिे अच्छे कमों को पु्ቔी के लिए अवपयत करिा चाहते थे।
8. काव्र् िंड पर आधाररत निम्िलिखित तीि ्ቚश्िों में से ककन् ीिं दो ्ቚश्िों के उ्ቈर िगभग 2x2=4
40 र्ब्दों में लिखिए-
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(I) कवव दवारा ्शीप को गवय भरा और म्शमाता कहिे का औगचत्र् स्पष्ट कीजिए।
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तोडो’ कववता के sसं्शभय में स्पष्ट कीजिए कक निमायण से पव
ू य तोडिे की ्ቚक्ቅर्ा आवश्र्क g
(II)
g l a a
है । a
(III) घिािं्श दवारा सुिाि को ढ़्शए िा रहे सं्शेश की मालमयकता स्पष्ट कीजिए। 2
9. निम्िलिखित काव्र्ांशों में से ककसी एक की स्ቚसंग व्र्ाख्र्ा 100 शध्शों में कीजिए। 6
(I) भूपनत मरि पेम पिु रािी। िििी कुमनत िगतु सबु सािी ।।
्शे खि ि िाढ़हं ्ऴबकि महतारीं। िरढ़हं ्शस
ु ह िर पुर िर िारीं ।।
महीं सकि अिरथ कर मि
ू ा। सो सनु ि समखु झ सढ़हउाँ सब सि
ू ा ।।
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. लसर् साथा ।।
सनु ि बि गविु कीन्ह रघि ु ाथा। करर मनु ि बेष ििि m
a
्ऴबि पािढ़हन्ह पर्ा्शे ढ़ह पाएाँ। संकरु साखि lरहे
se
उाँ ऐढ़ह घाएाँ ।।
बहुरर निहारर निषा्श सिेहू । कुलिस कढ़िि ag उर भर्उ ि बेहू ।।
अब सबु आाँखिन्ह ्शे िेउाँ आई। जिअत िीव िड सबइ सहाई ।।
जिन्हढ़ह निरखि मग सााँवपनि बीछी। तिढ़हं ्ऴबषम ्ऴबषु तापस तीछी ।।
तेइ रघुिं्शिु िििु लसर् अिढ़हत िागे िाढ़ह।
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तासु तिर् तजि ्शस
ु ह ्शि
ु ्शै उ सहावइ काढ़ह ।।
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m अरुण र्ह मधमु र् ्शेश हमारा।
अथवा
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(II)
g िहााँ पहुाँच अििाि ्ቌ्षनति को लमिता एक सहारा।।
a
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सरि तामरस गभय ववभा पर ,िाच रही तरुलशिा मिोहर।
नछटका िीवि हररर्ािी पर, मंगि कंु कुम सारा।।
िघु सुरधिु से पंि पसारे , शीति मिर् समीर सहारे ।
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उडते िग जिस ओर माँह
ु ककए, समझ िीड निि प्र्ारा।।
बरसाती आाँिों के बा्शि, बिते िहााँ भरे करुणा िि।
िहरें टकराती अिंत की, पाकर िहााँ ककिारा।।
हे म कंु भ िे उषा सवेरे, भरती ढुिकाती सुि मेरे।
मढ़्शर ऊाँघते रहते िब, िगकर रििी भर तारा।।
10. निम्िलिखित गदर्ांश के आधार पर ढ़्शए गए बहुववकल्पीर् ्ቚश्िों के उ्ቈर के लिए उपर्ुतत 5x1=5
ववकल्प का चर्ि कीजिए -
लशवालिक की इस अित्र्ुच्च पवयत शांखि़ा की भााँनत रामगगरर पर भी उस समर् और कोई
फूि िहीं लमिा होगा। कुटि िे उिके संतप्ृ त गच्ቈ को सहारा ढ़्शर्ा था-बडभागी फूि है र्ह!
धन्र् हो कुटि, तुम 'गािे के साथी' हो। उ्ቈर की ओर लसर उिाकर ्शे िता हूाँ, सु्शरू तक
ऊाँची कािी पवयत शांखि़ा छाई हुई है और एकाध सफ़े्श बा्शि के बच्चे उससे लिपटे िेि रहे
हैं। मैं भी इि पुष्पों का अ्सर्य उन्हें चिा ्शाँ ।ू पर काहे वास्ते? िेककि बुरा भी तर्ा है ? कुटि
के र्े सं्श
ु र फूि बहुत बरु े तो िहीं हैं। िो कालि्शास के काम आर्ा हो उसे ्ቘर्ा्शा इ्ሸज़त
लमििी चाढ़हए। लमिी कम है । पर इ्ሸज़त तो िसीब की बात है । रहीम को मैं बडे आ्शर के
साथ स्मरण करता हूाँ। ्शररर्ाढ़्शि आ्शमी थे, पार्ा सो िुटार्ा। िेककि ्शनु िर्ा है कक मतिब
से मतिब है , रस चस
ू िेती है , नछिका और गुििी फेंक ्शे ती है । सुिा है , रस चस
ू िेिे के
बा्श रहीम को भी फेंक ढ़्शर्ा गर्ा था। एक बा्शशाह िे आ्शर के साथ बुिार्ा, ्शस
ू रे िे फेंक
ढ़्शर्ा! हुआ ही करता है । इससे रहीम का मोि घट िहीं िाता। उिकी फतकडािा मस्ती कहीं
गई िहीं। अच्छे -भिे क्ቖ्शाि थे। िेककि बडे िोगों पर भी कभी-कभी ऐसी ववतष्ृ णा सवार
होती है कक गिती कर बैिते हैं। मि िराब रहा होगा, िोगों की बेरुिी और बेक्ቖ्शािी से
मुरझा गए होंगे-ऐसी ही मिःजस्थनत में उन्होंिे ्ऴबचारे कुटि को भी एक चपत िगा ्शी।
(I) अित्र्ुच्च पवयत शांखि़ा का अथय है – 1
(A) ऊाँचा
(B) बहुत ऊाँचा
(C) सबसे ऊाँचा
(D) सामान्र् ऊाँचा
(II) कुटि "गािे का साथी" से अलभ्ቚार् है - 1
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(A) बंिर में उगिे वािा
(B) गरीबी में साथ ्शे िे वािा
(C) ्ቚकृनत का साथ निभािे वािा
(D) कढ़िि समर् में साथ निभािे वािा
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(III) "इ्ሸज़त तो िसीब की बात है " — इस पंजतत के माध्र्म से िेिक कहिा चाहते हैं कक इ्ቘज़त
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................से लमिती है । e m
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(A) धि
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(B) ्ቚकृनत g
(C) भाग्र्
(D) मेहित
(IV) "्शनु िर्ा है कक मतिब से मतिब है , रस चस
ू िेती है , नछिका और गि
ु िी फेंक ्शे ती है " 1
कथि से िेिक का कहिा है कक-
(A) ्शनु िर्ा िाभ ्शे िती है । m
(B) संसार फि की इच्छा रिता है ।
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(C) संसार में स्वाथय की पराकाष्िा है ।
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(D) िोग वस्तु का उपर्ोग कर उसे भa ि
ू िाते हैं।
(V) निम्िलिखित कथि-कारण को ध्र्ािपव
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य पढ़िए तथा उ्ቈर के लिए सही ववकल्प का चर्ि 1
कीजिए।
कथि - कुटि की तुििा रहीम से करिा उगचत है ।
कारण - ्शोिों िे अपिी स्वतं्ቔता और उ्शारता को महत्वपूणय मािा।
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(A)कथि गित है , ककंतु कारण सही है ।
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(B)कथि और कारण ्शोिों गित हैं।
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s e (C) कथि सही है ककंतु कारण कथि की सही व्र्ाख्र्ा िहीं है। gla
g la (D) कथि और कारण ्शोिों सही हैं। कारण कथि की सही व्र्ाख्र्ाaहै।
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11 गदर् िंड पर आधाररत तीि में से ककन्हीं दो ्ቚश्नों के उ्ቈर िगभग 40 र्ब्दों में लिखिए- 2x2=4
(I) पािशािा के वावषयकोत्सव में बािक की भाविाओं के अनतररतत सब कुछ था। 'सुलमररिी के 2
मिके' पाि के आधार पर कथि पर ववचार लिखिए।
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(II) र्ास्सेर अराफ़ात के आनतथ्र् के ककन्हीं ्शो उ्शाहरणों का उल्िेि पाि के आधार पर कीजिए? 2
(III) संभव का र्ुवती के ्ቚनत आकषयण र्ुवा होते मि का आकषयण है । कैसे ? 2
12. निम्िलिखित गदर्ांशों में से ककस एक की स्ቚसंग व्र्ाख्र्ा 100 र्ब्दों में लिखिए। 6
(I) हरगो्ऴबि को अचरि हुआ-तो आि भी ककसी को संवढ़्शर्ा की ज़रूरत पड सकती है । इस
ज़मािे में िबकक गााँव-गााँव में डाकघर िि
ु गए हैं, संवढ़्शर्ा के मारफ़त संवा्श तर्ों भेिेगा
कोई? आि तो आ्शमी घर बैिे ही िंका तक िबर भेि सकता है और वहााँ का कुशि
संवा्श माँगा सकता है । कफर उसकी बि
ु ाहट तर्ों हुई?
हरगो्ऴबि बडी हवेिी की टूटी ड्र्ोिी पारकर अं्शर गर्ा। स्शा की भााँनत उसिे वातावरण को
साँघ
ू कर संवा्श का अं्शाज़ िगार्ा।... निश्चर् ही कोई गुप्त समाचार िे िािा है । चााँ्श-सूरि
को भी िहीं मािूम हो। परे वा -पंछी तक ि िािे।
अथवा
(II) र्े िोग आधनु िक भारत के िए 'शरणाथी' हैं, जिन्हें औदर्ोगीकरण के झंझावात िे घर-
ज़मीि से उिाडकर हमेशा के लिए निवायलसत कर ढ़्शर्ा है । ्ቚकृनत और इनतहास के बीच
गहरा अंतर है । बाि र्ा भूकंप के कारण िोग अपिा घरबार छोडकर कुछ अरसे के लिए
बाहर चिे िाते हैं, ककंतु आफत टिते ही वे ्शोबारा अपिे िािे-पहचािे पररवेश में िौट भी
आते हैं। ककंतु ववकास और ्ቚगनत के िाम पर िब इनतहास िोगों को उन्मूलित करता है ,
तो वे कफर अपिे घर वापस िहीं िौट सकते। आधनु िक औदर्ोगीकरण की आाँधी में लसफ़य
मिष्ु र् ही िहीं उिडता, बजल्क उसका पररवेश और आवास स्थि भी हमेशा के लिए िष्ट
हो िाते हैं।
13. निम्िलिखित ्ቚश्िों में से ककन्हीं दो ्ቚश्नों के उ्ቈर िगभग 100 र्ब्दों में लिखिए| 2x5=10
(I) 'सूर्शास की झोपडी' पाि में सूर्शास की िाचारी और संघषय के साथ उसकी जििीववषा का 5
गच्ቔण हुआ है । कथि के आिोक में अपिे ववचार लिखिए।
(II) '्ቚकृनत सिीव िारी बि गई'- इस कथि के सं्शभय में िेिक की ्ቚकृनत, िारी और सौं्शर्य 5
संबंधी मान्र्ताएाँ '्ऴबस्कोहर की माटी' पाि के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
(III) 'मािव धरती गहि गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग िीर' कथि मािवा की ववशेषता को ्शशायता 5
है ।सो्शाहरण लसदध कीजिए।
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