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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 6: ड जभारतम् – युगप रवतनम्
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
61 – 74 15 47 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम् AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · सं स्कृ त · द पकम्
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: ड जभारतम् – युगप रवतनम्
NCERT कक्षा 8 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के षष्ठः पाठः — ड जभारतम् – युगप रवतनम् का सम्पूण हल। यह पाठ एक संवाद-नाट्य है
— नवदे हली त प्रधानम न्त्र-सङ् ग्रहालय क शै क्षक यात्रा से लौटे छात्र (य शका, अथवः, भास्करः, वे दका, ेया, राघवः) अपने अध्यापक के साथ
कक्षा म ‘ ड जटल्-भारत’ योजना पर चचा करते ह — हॉलोग्राम्, AR–VR, कृ त्रमबु द्ध, ड ज-लॉकर्, फ़ास्टॅ ग्, यूपीआय्, द क्षा, ई-नाम् से लेकर
साङ्ग णक-सुरक्षा तक। नीचे पृष्ठ 61 से 74 तक के पाठगत प्रश्न, पाठान्त-गीत का पद े दः → अन्वयः → अथः → भावः, ‘वयं शब्दाथान्
जानीमः’, ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ (क्त-प्रत्ययः तथा शतृ-प्रत्ययः), अभ्यासात् जायते स द्धः के प्रश्न १–९ (हर उपभाग स हत, शब्दजाल तथा मेलन-
सारणी समेत), योग्यता वस्तरः और प रयोजनाकायम् क्रमशः हल कए गए ह — पहले संस्कृत उत्तर, फर कोष्ठक म हन्द अथ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
द पकम् (कक्षा 8) 61 – 74
खं ड प्रश्न
15 47
माध्यम
हन्द
पाठे वद्यमानाः प्रश्नाः — पृष्ठ 64–65
संवादे छात्रैः पृ ाः प्रश्नाः तथा अध्यापकस्य उत्तरा ण
पाठः
प्र.1 “महोदय ! अस्य स्वरूपं क ञ्चत् स्प ीकरोतु।” ( ेया, पृष्ठ 64)
उत्तरम् (अध्यापक स्य वचनम्) — - -
िडिजटल ् शासन सेवायाः अन्तग तं ‘िडजी-लॉकर’् (आ धार-पॅन -काड्
-
इ त् याद ीना ं िडिजटल ् सङ् ग हणम् ), ‘ई-शासन -पटलम्’ यथ ा — ‘उमङ्ग्’ (UMANG), ‘माय-् गव्’ (My-Gov),
‘जेम्’ (GeM) इत्याद यः। ऑ न्-लैन ्–टीकाकरण-पञ् जीकरणाथ ं ‘कोिवन्-पटलम्’ (COWIN) अिस्त।
हन्द अथ: ड जटल-शासन-सेवा के अन्तगत ‘ डजी-लॉकर’ आता है ( जसम आधार, पैन-काड आ द ड जटल
रूप म संगृहीत रहते ह); ई-शासन के पटल ह — उमंग (UMANG), माय-गव (My-Gov), जेम (GeM) आ द।
ऑनलाइन ट काकरण-पंजीकरण के लए ‘को वन’ (COWIN) पोटल है।
ध्यातव्यम्: ेया का वाक्य प्रश्न- चह्न के बना है, फर भी यह प्रश्न ही है — स्पष्टीकरोतु लोट् -लकार, प्रथमपुरुष,
एकवचन का आदराथक अनुरोध है (‘कृपया स्पष्ट क जए’)। संस्कृत म गुरुजन से पूछते समय प्रश्न प्रायः इसी
वनम्र आ ाथ रूप म रखा जाता है।
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प्र.2 “ कन्तु य द ग्राम्य-क्षेत्रे अन्तजालस्य समस्या अ स्त त ह तत्र कथम् एतासां सेवानाम् उपयोगः भ वष्य त ?”
(य शका, पृष्ठ 64)
उत्तरम् ( ेयायाः तथा भास्करस्य वचनम्) — सवकारः अन्तज लस्य उ त्तरो त्तरं िवस्ताराय काय ं करोित। अने न
-क्षेत्रे अिप उच् च गते ः जालस्य उपलिब्धः भिवष्यित। एतासां सेवानाम् उपयोगः िशक्षायाः माध्यमेन अिधकािधकं
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पच ारणीयः।
हन्द अथ: सरकार इंटरनेट के उत्तरोत्तर वस्तार के लए काय कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्र म भी उच्च ग त के
नेटवक क उपलब्धता हो जाएगी। और इन सेवाओं का उपयोग शक्षा के माध्यम से अ धका धक फैलाया जाना
चा हए।
यही दो उपाय क्य : पाठ ग्रामीण समस्या का उत्तर दो स्तर पर दे ता है — (1) अवसंरचना (उच्चगतेः जालम् =
high-speed network), और (2) ड जटल्-साक्षरता ( शक्षायाः माध्यमेन प्रचारः)। केवल नेटवक पहुँचा दे ना
पयाप्त नह ; उपयोग करना सखाना भी आवश्यक है।
प्र.3 “आचाय ! क कृ षक्षेत्रे अ प ड जटल्-भारतस्य योगदानम् अ स्त ?” (अथवः, पृष्ठ 65)
उत्तरम् — आ म् ! ‘ई-नाम्’ (e-NAM), ‘पीएम्-िकसान्-अन ुपयोगः’ (PM KISAN), डोन्-पौद्य ोिगकी
इ त् याद ीिन पटलािन सि न्त।
हन्द अथ: हाँ! कृ ष-क्षेत्र म भी ई-नाम (राष्ट्रीय कृ ष बाज़ार), पीएम- कसान ऐप और ोन-प्रौद्यो गक जैसे पटल
(प्लेटफ़ॉम) ह।
Tip: पृष्ठ 73 क योग्यता वस्तरः सारणी इसी उत्तर को बढ़ाती है — वहाँ कृ षक्षेत्र म ई-रा ष्ट्रय-कृ ष-आपणः
(eNAM), प्रधानमन्त्री- कसान्-सम्मान न धः (PM-KISAN), चल- कसान्-सन्दे श-सेवा (mKisan),
कृषक-सु वधा-सेवा (Kisan Suvidha) — चार नाम दए गए ह। परीक्षा म यही अ त रक्त नाम अंक बढ़ाते ह।
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प्र.4 “बहु सम्यक्। कन्तु ‘ ड जटल्’ इत्यस्य वा णज्ये क दृशः प्रभावः अ स्त ?” (य शका, पृष्ठ 65)
उत्तरम् — -
आ भासीय पटलम् अन ुपयोगः च इ त् येत योः मा ध्यमेन आ भासीयं (ऑ न्-लैन ्) िवक्र यं भवित। ‘आ श-ु
-
पितिक्र या कू टः ’ (QR Code) इत्याधािरतः िविनमयश्च भवित।
हन्द अथ: आभासीय पटल (वेबसाइट) तथा अनुप्रयोग (ऐप) — इन दोन के माध्यम से ऑनलाइन वक्रय होता है,
और QR कोड के आधार पर लेन-दे न भी होता है।
पाठ से जो ड़ए: इसी चचा म अध्यापक ने पहले कहा था — अधुना आपणेषु वस्तुक्रयणाथ साक्षात् मुद्रायाः
आवश्यकता ना स्त। मुद्रार हत- व नमयसन्दभ व े भारतस्य अग्रगण्यं ानम् अ स्त। (नकद र हत लेन-दे न म
वश्व म भारत का ान सबसे आगे है।)
पाठान्ते गीतम् — पृष्ठ 65
(सव म लत्वा गाय न्त) — पाठसमापकः ोकः
ोकः
प्र.1 “सव वक सतं भा त ड जटल्-भारतेऽधुना। जीवनस्य च सौकय सहसा लभते जनः॥” — अस्य ोकस्य
पद े दः, अन्वयः, अथः, भावः च लखत।
१. पद च् छे द ः —
सवम् + िवकिसतम् + भाित + िडिजटल्-भारते + अधुन ा।
जीवनस्य + च + सौकयम् + सहसा + लभते + जनः॥
स -व े दः: भारतेऽधुना = भारते + अधुना। यहाँ पूवरूप-स है — ‘ए’ के बाद ‘अ’ आने पर ‘अ’ का लोप
हो जाता है और उसके ान पर अवग्रह (ऽ) चह्न लखा जाता है।
२. अन्वयः — -
अध ुना िडिजटल ् भारते सव ं िवकिसतं भाित। जनः च जीवन स्य सौकय ं सहसा लभते ॥
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३. अथः: आज ड जटल भारत म सब कुछ वक सत दखाई दे ता है, और मनुष्य जीवन क सु वधा तत्काल ही प्राप्त
कर लेता है।
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शब्दाथः — .भा g , सु वधा; सहसा =
c त = शोभते / दृश्यते (शोभा पाता है, दखाई दे ता है); सौकयम् = सुकaरत्वम्
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seशीघ्रम् (तुरन्त); जनः = मनुष्यः।
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४. भावः: पूरा पाठ जस नष्कष तक पहुँचा है, यह ोक उसी को दो पं क्तय म बाँध दे ता है। पहली पं क्त राष्ट्र क
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बात कहती है — ड जटल भारत म हर क्षेत्र (शासन, शक्षा, स्वास्थ्य, कृ ष, वा णज्य) वक सत द ख रहा है। दूसरी
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पं क्त व्य क्त क बात कहती है — इस वकास का फल कसी दूर के भ वष्य म नह , आज ‘सहसा’ ही सामान्य जन
को सु वधा के रूप म मल रहा है। इसी से पाठ का शीषक साथक होता है — यह केवल तकनीक का बदलना नह ,
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युगप रवतनम् है।
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emहो जाती है — इसी लए पाठ म इससे पहले रङ्गसङ् केत है (सव म लत्वा गाय न्त)। छन्द अनु ु प् है — चार-
भाषा-सौन्दयम्: ‘सव ... सहसा’ तथा ‘स◌ौकय’ म ‘स’ क आवृ त्त से अनुप्रास बनता है, जससे यह पं क्त गाने
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gl चार चरण, प्रत्येक म आठ अक्षर।
योग्य
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वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 66–67
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शब्दाथ-सारणी तथा ‘मातृभाषया अथ लखत’ स्तम्भः
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शब्दाथाः
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g भरना है।)
प्र.1 .cमातृभाषया अथ लखत — (पृष्ठ 66–67 क शब्दाथ-सारणी का अ न्तम a
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स्तम्भ
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सारणी का पाँचवाँ स्तम्भ तुम्हारी अपनी मातृभाषा के लए खाली छोड़ा गया है। नीचे पूरी सारणी हन्द अथ के साथ द जा रही है;
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जनक मातृभाषा हन्द नह है, वे इसी क्रम म अपनी भाषा का शब्द लख।
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शब्दः संस्कृत अथः हन्द अथ ENGLISH
सङ् ग हालयः वस्तुसङ् ग्रहगृहम् संगहालय Museum
हॉलोग ाम् त्रवैम-प्र तमू तः होलोगाम Hologram
विधता वास्तिवकता संव धता वास्त वकता संविधत वास्तिवकता Augmented Reality (AR)
आभासीया वास्तिवकता आभासीया वास्त वकता आभासी वास्तिवकता Virtual Reality (VR)
कृ ित्रमबुिद्धः या न्त्रक बु द्धः कृ ित्रम-बुिद्धमत्ता Artificial Intelligence (AI)
िडिजटल्-पक्षेपणम् सङ्गणक- चत्रप्रदशनम् िडिजटल पक्षेपण Digital Projection
संवादः वातालापः संवाद Conversation
पौद्योिगकी तन्त्र ानम् पौद्योिगकी Technology
उत्सुक ता ज ासा उ त्सुक ता Curiosity
भाषणम् प्रवचनम् भाषण Speech
उपकरणािन यन्त्रा ण उपकरण Devices
अन्तज लम् अन्तजालम् संचार / इंटरनेट Internet
योगदानम् सहयोगः योगदान Contribution
आशुपितिक्रयाकू टः झ ट त प्र त क्रयायाः कूटः आशु पितिक्रया कोड Quick Response Code
िवस्ततृ म् वस्तारपूवकम् िवस्ततृ Detailed
उपलिब्धः स द्धः उपलिब्ध Achievement
दै निन्दनजीवनम् दै नक-जीवनम् दै िनक जीवन Daily Life
शासनम् प्रशासनम् शासन Governance
िशक्षणम् वद्याप्रदानम् िशक्षण Teaching
िवत्तीयसमावेशनम् धन वषयकः समावेशः िवत्तीय समावेशन Financial Inclusion
आधारपत्रम् आधारः (प रचयपत्रम्) आधार–पत्र Aadhar Card
पमाणपत्रम् साक्ष्यपत्रम् पमाण–पत्र Certificate
शुल्कम् करः शुल्क Fee
त्वरया शीघ्रम् जल्दी Quickly
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जनधनयोजना एका वत्तीय-समावेशनयोजना जनधन योजना Jandhan Financial Scheme
अनुद ानम् दानम् अनुद ान Grant
िशक्षायाः माध्यमेन शक्षणोपायेन िशक्षा के माध्यम से Through Education
पचारणीयः प्रचारयोग्यः पचार–योग्य Worth propagating
कृ िषः कृ ष-कायम् खेती Agriculture
वािणज्यम् व्यापारः व्यापार Trade
आजीिवका व्यवसायः / वृ त्तः व्यवसाय Employment / Occupation
साङ् गिणक-सुर क्षा जालसुरक्षा साइबर सुरक्षा Cyber security
िडिजटल्-बन्धनम् ड जटल्-बन्धनम् िडिजटल्-बन्धन Digital Arrest
िडिजटल्-साक्षरता ड जटल्- शक्षा िडिजटल्-साक्षरता Digital Literacy
Tip: ध्यान दो क सारणी के कई शब्द नए गढ़े गए संस्कृत पा रभा षक शब्द ह — आशुप्र त क्रयाकूटः (आशु =
शीघ्र + प्र त क्रया + कूटः = कोड), साङ्ग णक-सुरक्षा (सङ्गणक = कम्प्यूटर से बना वशेषण), अन्तजालम् (अन्तः +
जालम् = भीतर फैला जाल)। समास खोलकर दे खने पर अथ अपने-आप स्पष्ट हो जाता है — रटना नह पड़ता।
अत्र इदम् अवधेयम् — पृष्ठ 68–69
व्याकरण-पे टका — १. क्त-प्रत्ययः, २. शतृ-प्रत्ययः
व्याकरणम्
प्र.1 १. क्त-प्रत्ययः — ‘क्त’-प्रत्ययस्य प्रयोगः कदा भव त ? सोदाहरणं स्प ीकुरुत।
िनयमः — ‘क् ’- त् त प ययस्य पयोगः भूत कालाथ कम वा च् ये भाववा च् ये च भवित।
रूपिनम णम् → धात ःु + क्त-पत्ययः = कृ + क्त → कृ तः
वाक्य कैसे बदलता है — धातुएँ दो प्रकार क होती ह — अकमकाः तथा सकमकाः। सकमक वाक्य ली जए —
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रामः पाठम् अपठत्। (कत ृवाच्यम्)
अत्र कत्त कः ? → रामः । अत्र कम िकम् ? → पाठम् । िक्रया का ? → अपठत् ।
िक्रयायाः पुरु ष-वचन-सम्बन्धः कत ृपदे न सह अिस्त।
परन्तु जब ‘क्त’ प्रत्यय जोड़ा जाता है तो वाक्य कमवाच्य म बदल जाता है और तब —
क त्तिर त ृत ीया , कमिण च पथ मा भवित।
बालकः पाठं पठित। (कत ृवाच्यम्) → बालके न पाठः पिठतः। (कमवाच्यम्)
रामः रावणम् अमारयत्। → रामेण रावणः मािरतः।
Why it happens: ‘क्त’ से बना पद क्रया नह , वशेषण है — वह कम का वशेषण बनता है। इस लए
उसका लङ्ग-वचन कम के अनुसार चलता है, कता के अनुसार नह ; और कता को ‘करण’ क तरह तृतीया म रख
दया जाता है। यही कारण है क क्त-प्रत्ययान्त पद तीन लङ्ग म चलता है।
क्रमः मूलधातुः क्त-प्रत्यय पुं लङ्गम् स्त्री लङ्गम् नपुंसक लङ्गम्
१. युज् युक्त युक्तः युक्ता युक्तम्
२. भू भूत भूतः भूता भूतम्
३. िवश् वष्ट िवष्टः िवष्टा िवष्टम्
४. दा दत्त द त्तः द त्ता द त्तम्
५. रक्ष् र क्षत रिक्षतः रिक्षता रिक्षतम्
पाठ से उदाहरण: इसी पाठ म क्त-प्रत्ययान्त पद भरे पड़े ह — प्रद शताः (प्रौद्यो गक्यः, स्त्री लङ्ग बहुवचन),
प्रयुक्ताः स न्त, उप व ः (प्रधानमन्त्री), व स्मता अभवम् (वे दका, स्त्री लङ्ग), प्राप्तः अनुभवः, पी डताः भव न्त,
वभक्ताः भवेयुः। हर बार लङ्ग-वचन कम/कतृपद के साथ मलता है — इसी से पहचान होती है।
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प्र.2 २. शतृ-प्रत्ययः — ‘शतृ’-प्रत्ययस्य प्रयोगः कुत्र भव त ? सारण पूरयत।
िनयमः — ‘ शत ृ ’-पत्ययस्य पयोगः वत मानकाले काय ं कु वन्तं जनं पद ाथ ं वा बोधयित।
अस्य पयोगः के वलं परस्मैपिदिभः धातुिभः सह भवित। अस्य पयोगः ित्रषु िलङ् गेष ु भवित।
रूपिनम णम् → धात ःु + शत ृ-पत्ययः = पठ् + शत ृ = पठन्
क्रमः मूलधातुः लट् -लकारः शतृ-प्रत्ययान्तं पदम्
१. दृ श ् पश्य त पश्यन्
२. कृ करो त कु वन्
३. ा जाना त जानन्
४. इष् इच्छ त इच्छन्
५. गम् गच्छ त गच्छन्
Why it happens: शतृ-प्रत्ययान्त पद हन्द के ‘-ता हुआ’ के बराबर है — पठन् बालकः = पढ़ता हुआ
बालक। यह भी क्रया नह , वशेषण है, इस लए वशेष्य के लङ्ग-वचन- वभ क्त के अनुसार चलता है — पुं लङ्ग
पठन्, स्त्री लङ्ग पठन्ती, नपुंसक पठत्। ध्यान रहे — शतृ केवल परस्मैपद धातुओं से बनता है; आत्मनेपद धातुओं
म इसके ान पर ‘शानच्’ प्रत्यय लगता है (लभ् → लभमानः)।
Check it yourself: इसी पाठ का वाक्य ली जए — अनेन भारतीयानां जीवनम् अ धकं सरलं जायमानम्
अ स्त। यहाँ ‘जायमानम्’ जन् (आत्मनेपद ) धातु से बना है, इस लए यह शानच् है, शतृ नह — और नपुंसक लङ्ग
‘जीवनम्’ के साथ मला है। दोन प्रत्यय को अलग-अलग पहचानना ही इस पेट का उ े श्य है।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 69
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम्
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प्रश्नः १ : पाठस्य आधारेण अधो ल खतानां प्रश्नानाम् उत्तरा ण एकपदे न लखत
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िडिजटल ् पौ द्य ोिगकी।
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हन्द अथ: प्रधानमन्त्री-संग्रहालय म ड जटल प्रौद्यो गक का प्रयोग हुआ है। पाठ का वाक्य है — अत्र व वधाः
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ड जटल्-प्रौद्यो गक्यः प्रयुक्ताः स न्त।
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a gl व्याकरण-सङ् केतः: प्रश्न म क दृशी (स्त्री लङ्ग) है, इस लए उत्तर भी स्त्री लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, एकवचन म —
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‘ ड जटल्-प्रौद्यो गक ’। ‘प्रौद्यो गक ’ ङ प्-प्रत्ययान्त स्त्री लङ्ग शब्द है (नद क तरह चलता है), इस लए बहुवचन
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‘प्रौद्यो गक्यः’ बनता है।
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(ख) हॉलोग्राम्-द्वारा कस्य भाषणं दृश्यते ?
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agl उत्तरम् — पधानमि न्त्रणः।
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हन्द अथ: होलोग्राम के ारा प्रधानमन्त्री का भाषण दखाई दे ता है। पाठ म छात्र कहते ह — अत्र हॉलोग्राम्- ारा
s व प्रधानमन्त्री अत्र उप वष्टः इ त भासते।
प्रधानम न्त्रणः भाषणं ूयते दृश्यते च।aप्रत्यक्षमे
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व्याकरण-सङ् केतः: प्रश्नपद कस्य षष्ठी एकवचन है, अतः उत्तर भी षष्ठी वभ क्त, एकवचन, पुं लङ्ग —
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‘प्रधानम न्त्रणः’ (प्रधानम न्त्रन् शब्द, ‘न्’-अन्त पुं लङ्ग, राजन् क तरह)।
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प्र.3 (ग) कस्याः प्रभावः दै न न्दनजीवने दृश्यते ?
उत्तरम् — ‘ िडिजटल ् ’-योजनायाः।
हन्द अथ: ‘ ड जटल’ योजना का प्रभाव दै नक जीवन म दखाई दे ता है। अध्यापक का वाक्य — ‘ ड जटल्’
योजनायाः प्रभावः दै न न्दने जीवनेऽ प दृश्यते।
व्याकरण-सङ् केतः: कस्याः स्त्री लङ्ग षष्ठी एकवचन है, इस लए उत्तर भी षष्ठी एकवचन स्त्री लङ्ग — ‘योजनायाः’
(योजना, आकारान्त स्त्री लङ्ग, रमा क तरह)। य द प्रश्न ‘कस्य’ होता तो उत्तर पुं लङ्ग/नपुंसक लङ्ग म दे ना पड़ता —
प्रश्नवाचक का लङ्ग ही उत्तर का लङ्ग तय करता है।
प्र.4 (घ) भारत-सवकारस्य महत्त्वाकाङ् क्षणी योजना का अ स्त ?
उत्तरम् — -
िडिजटल ् योजना (िडिजटल-् भारत -योजना)।
हन्द अथ: भारत-सरकार क महत्त्वाकांक्षी योजना ‘ ड जटल-भारत’ योजना है। पाठ म राघव कहता है —
ड जटल्-योजना भारतस्य का चत् महत्त्वाकाङ् क्षणी योजना अ स्त — और अध्यापक उसका समथन करते ह —
आम् राघव ! एषा भारतसवकारस्य व शष्टा महत्त्वाकाङ् क्षणी योजना अ स्त।
व्याकरण-सङ् केतः: का = कम् शब्द का स्त्री लङ्ग प्रथमा एकवचन। अतः उत्तर प्रथमा वभ क्त, एकवचन, स्त्री लङ्ग
म — ‘ ड जटल्-योजना’। इसी से ‘महत्त्वाकाङ् क्षणी’ वशेषण भी स्त्री लङ्ग रूप म आया है।
प्र.5 (ङ) ‘फ़ास्टॅ ग्’ इत्यस्य उपयोगेन कस्य सङ् ग्रहणं भव त ?
उत्तरम् — माग श ल्
ु क स्य।
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हन्द अथ: फ़ास्टै ग के उपयोग से माग-शुल्क (टोल) का संग्रहण होता है। अथव का वाक्य — मम पतरौ ‘फ़ास्टॅ ग्’
इत्यस्य उपयोगं कुरुतः। अनेन राजमागषु स्वचा लत व धना मागशुल्कस्य सङ् ग्रहणं त्वरया भव त।
व्याकरण-सङ् केतः: उत्तर षष्ठी वभ क्त, एकवचन, नपुंसक लङ्ग — ‘मागशुल्कस्य’ (मागस्य शुल्कम् = मागशुल्कम्,
षष्ठी-तत्पुरुष समास)। ध्यान दो — ‘सङ् ग्रहणम्’ भाववाचक क्रयारूप है, इस लए जसका संग्रह हो रहा है वह षष्ठी
म आता है, तीया म नह ।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 69–70
प्रश्नः २ : पाठस्य आधारेण अधो ल खतानां प्रश्नानाम् उत्तरा ण पूणवाक्येन लखत
अभ्यासः
प्र.1 (क) प्रधानम न्त्रसङ् ग्रहालये काः ड जटल्-प्रौद्यो गक्यः प्रद शताः स न्त ?
उत्तरम् — पधानमि न्त्रसङ् ग हालये हॉलोग ाम् , ‘विधता-वास्तिवकता’ (AR), ‘आ भासीया-वास्तिवकता’ (VR),
-
कृ ि त्रमब ुि द्ध आ धािरतं संवाद यन्त्रम् , िडिजटल-् पक्षेपण-च लिच् च त्रम् इत्याद यः िडिजटल-् पौद्य ोिगक्यः पद िशताः
सि न्त।
हन्द अथ: प्रधानमन्त्री-संग्रहालय म होलोग्राम, संव धत वास्त वकता (AR), आभासी वास्त वकता (VR), कृ त्रम-
बु द्ध पर आधा रत संवाद-यन्त्र तथा ड जटल-प्रक्षेपण-चल चत्र आ द ड जटल प्रौद्यो ग कयाँ प्रद शत ह।
प्रौद्यो गक छात्रः/छात्रा कः अनुभवः
हॉलोग ाम् सव छात्राः, पधानमिन्त्रणः भाषणं ूयते दृ श्यते च; िदवङ् गताः नेतारः अिप जीिवताः इव दृ श्यन्ते
य शका
AR तथा VR अथवः ऐितहािसकवत्तृ ािन पत्यक्षम् इव अनुभयू न्ते; ‘भारतीय-स्वतन्त्रता-सङ् गामः’ दृ ष्ट् वा
पूवजानां संघ षः ायते
कृ ित्रमबुिद्ध-आधािरतं भास्करः अस्माकं सविवधपश्नानाम् उ त्तरािण ददाित
संवादयन्त्रम्
िडिजटल्-पक्षेपण-चलिच्चत्रम् वे दका स म्पूणस्य भारतस्य िवकास -यात्रा पदिशता अिस्त
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम् AglaSem · NCERT Solutions
Tip: ‘पूणवाक्येन’ का अथ है — प्रश्न के शब्द को ही उत्तर का ढाँचा बनाओ। यहाँ प्रश्न म ‘प्रद शताः स न्त’ है,
इस लए उत्तर भी उसी क्रया पर समाप्त होना चा हए।
प्र.2 (ख) जनाः कमथ साङ्ग णक-अपराधेन पी डताः भव न्त ?
उत्तरम् — -
जनाः पायशः लोभात् भयात् वा साङ् गिणक अपराधेन पीिडताः भवि न्त।
हन्द अथ: लोग प्रायः लोभ के कारण अथवा भय के कारण साइबर-अपराध से पी ड़त होते ह। पाठ का मूल वाक्य
— अनेक वधाः साङ्ग णक-अपराधाः भव न्त। जनाः प्रायशः लोभात् भयात् वा साङ्ग णक-अपराधेन पी डताः भव न्त।
व्याकरण-सङ् केतः: लोभात्, भयात् — पञ्चमी वभ क्त, एकवचन, ‘हेतु’ (कारण) के अथ म। ‘ कमथम्’ पूछे
जाने पर कारण पञ्चमी या ‘-अथम्’ म ही दया जाता है, यह इस उत्तर क कुंजी है।
Why it happens: पाठ यह भी संकेत करता है क उपाय क्या है — भास्कर कहता है एत स्मन् वषये जनाः
जागृताः भवेयुः तदथम् अ प उपायाः चन्तनीयाः। अथात् ठगी का मूल कारण अ ान है, इस लए इसका उत्तर
जागरूकता है — नई तकनीक बन्द करना नह ।
प्र.3 (ग) य शका ‘ ड ज-लॉकर्’ इत्यस्य उपयोगं कथं करो त ?
उत्तरम् — यिशका ‘िडिज-लॉकर’् इत्यस्य उपयोगं करोित। त त्र त स्याः आ धारपत्रं िवद्य ालयीयं पमाणपत्रं च
स ुरि क्षतम् अि स्त।
हन्द अथ: य शका ‘ ड ज-लॉकर’ का उपयोग करती है। उसम उसका आधार-पत्र तथा वद्यालय का प्रमाण-पत्र
सुर क्षत रखा हुआ है। पाठ म वह स्वयं कहती है — अहं स्वयं ‘ ड ज-लॉकर्’ इत्यस्य उपयोगं करो म। मम आधारपत्रं
वद्यालयीयं प्रमाणपत्रं च तत्र सुर क्षतम् अ स्त।
ध्यातव्यम्: उत्तर लखते समय उत्तमपुरुष को प्रथमपुरुष म बदलना पड़ता है — पाठ म ‘अहं ... करो म, मम ...’
है; उत्तर म ‘य शका ... करो त, तस्याः ...’ हो जाएगा। यही छोट -सी बात पूणवाक्य-उत्तर म अंक दलाती है।
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प्र.4 (घ) ड जटल्-भारतस्य वत्तीयसमावेशने काः योजनाः स न्त ?
उत्तरम् — िवत्तीयसमावेश न स्य क्षेत्रे ‘य ूपीआ य’,
् ‘रूपे-काड् ’, ‘जनधनयोजना’ इत्याद ीिन बहूिन साधनािन
सि न्त।
हन्द अथ: वत्तीय समावेशन के क्षेत्र म यूपीआई, रुपे-काड तथा जनधन योजना जैसे बहुत-से साधन ह। अध्यापक
आगे जोड़ते ह — अधुना आपणेषु वस्तुक्रयणाथ साक्षात् मुद्रायाः आवश्यकता ना स्त। मुद्रार हत- व नमयसन्दभ वश्वे
भारतस्य अग्रगण्यं ानम् अ स्त। (अब दुकान म सामान खरीदने के लए नकद रुपये क आवश्यकता नह ; नकद-
र हत लेन-दे न म वश्व म भारत सबसे आगे है।)
Did you know? पृष्ठ 73 क सारणी म यही सूची और बड़ी है — एक कृत- व न मय-पटलम् (UPI), भीम-
अनुप्रयोगः (BHIM App), आधार-सक्षम- वत्तीय-पद्ध तः (AEPS), रुपे-काड् (RuPay), ई-रूपी (e-
RUPI), जनधन-आधार-दूरवाणी-त्रयी (JAM Trinity)।
प्र.5 (ङ) ड जटल्-भारते शक्षायाः क्षेत्रे केषां पटलानाम् उपयोगः करणीयः ?
उत्तरम् — िश क्षायाः क्षेत्रे ‘द ीक्षा’ (DIKSHA), ‘स्वयम्’ (SWAYAM), ‘स्वयं-पभा’ (SWAYAM
PRABHA), ‘ई-पाठशाला’ (ePathshala), ‘भारतीय-राि य-िडिजटल-् पस्ु तकालयः’, ‘िन ष्ठा’
(NISHTHA), ‘पीएम्-ई-िवद्य ा’ (PM e-VIDYA) इत्याद ीनां िनःशल्ु क -िडिजटल-् शैिक्षकमञ् च ानाम् उपयोगः
करणीयः।
हन्द अथ: शक्षा के क्षेत्र म द क्षा, स्वयम्, स्वयं-प्रभा, ई-पाठशाला, भारतीय राष्ट्रीय ड जटल पुस्तकालय, नष्ठा
तथा पीएम-ई- वद्या — इन नःशुल्क ड जटल शै क्षक मंच का उपयोग करना चा हए।
व्याकरण-सङ् केतः: केषाम् षष्ठी बहुवचन है, इस लए उत्तर भी षष्ठी बहुवचन म — ‘मञ्चानाम् / पटलानाम्
उपयोगः’। करणीयः कृत्य-प्रत्ययान्त (अनीयर्) पद है, जो ‘उपयोगः’ (पुं लङ्ग, प्रथमा, एकवचन) के अनुसार चला है।
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम्
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(च) ग्राम्य-क्षेत्रेषु ड जटल्-सेवानां समस्या कथं नराकतु शक्यते ?
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प्र.6
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उत्तरम् — सवकारः अन्तज लस्य उ त्तरो त्तरं िवस्ताराय काय ं करोित , अने न गाम्य-क्षेत्रे अिप उच् च गते ः जालस्य
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उपलि ब्धः भिवष्यित। एतासा ं सेवानाम् उपयोगः िश क्षायाः मा ध्यमेन अिधकािधकं पच ारणीयः। एवं ग ा म् य -क्षेत्रेष ु
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िडिजटल ् सेवाना ं सम स्या िनराकत ुं श क्यते ।
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हन्द अथ: सरकार इंटरनेट के लगातार वस्तार का काय कर रही है, जससे ग्रामीण क्षेत्र म भी उच्च ग त के नेटवक
m a s emजाना चा हए। इन्ह
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क उपलब्धता हो जाएगी। साथ ही इन सेवाओं का प्रचार शक्षा के माध्यम से अ धका धक कया
o ग्रामीण क्षेत्र क समस्या दूर क जा सकती है।
दो उपाय.cसे a
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agl Try This: अपने गाँव या मुहल्ले के लए दो और उपाय संस्कृत म सोचो — जैसे ग्रामे सामान्यसेवाकेन्द्रम् (CSC)
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ापनीयम्, वद्यालये छात्राः वृद्धान् ड जटल्-प्रयोगं शक्षयेयुः। उत्तर तभी पूरा होता है जब उपाय अवसंरचना +
शक्षा दोन को छू ता है।
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अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 70
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प्रश्नः ३ : अधः दत्तान् शब्दान् सम्यक् संयोजयत
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अभ्यासः
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अधः दत्तान् शब्दान् सम्यक् संयोजयत — (क) हॉलोग्राम् (ख) यूपीआय् (UPI) (ग) ड ज-लॉकर् (घ) फ़ास्टॅ ग्
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प्र.1
(FASTag) (ङ) वीआर (VR)
.
कृ त्रम-बु द्धः (AI) · आभासीया-वास्त वकता · शी ं, सुर क्षतं, सुगमं च
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ड जटल्-धनदे य-प्रत्यपणम् · ड जटल्-प्रमाणपत्रम् · राजमागषु स्वचा लत व धना मागशुल्कस्य शी ं संग्रहणम्
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क्रमः शब्दः संयोजनीयः शब्दः
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क. हॉलोग ाम् कृ ित्रम-बुिद्धः (AI)
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agl ख. यूपीआय् (UPI) शीघ ं, सुरिक्षतं, सुगमं च िडिजटल्-धनदे य-पत्यपणम्
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िडिजटल्-पमाणपत्रम्
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coराजमाग agl
ग. िडिज-लॉकर्
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घ. फ़ ास्टॅग ् (FASTag)
as e षु स्वचािलतिविधना मागशुल्क स्य शीघ ं संगहणम्
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ङ. वीआर (VR) आभासीया-वास्तिवकता
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मेलन का आधार (क्य यही जोड़ा बनता है):
ङ. वीआर = आभासीया-वास्त वकता — यह तो शब्दाथ-सारणी का सीधा संस्कृत पयाय है (VR = Virtual
Reality)। इस लए सबसे पहले यही जोड़ा तय करो।
ख. यूपीआय् — पाठ म भास्कर कहता है अनेन मम पतरौ अ प त्वरया धनं प्रेष यतुं शक्नुतः — अथात् शीघ्र,
सुर क्षत और सुगम धनदे य-प्रत्यपण (payment)।
ग. ड ज-लॉकर् — य शका के अनुसार उसम आधारपत्र तथा प्रमाणपत्र सुर क्षत रहते ह, इस लए ‘ ड जटल्-
प्रमाणपत्रम्’।
घ. फ़ास्टॅ ग् — अथव का वाक्य लगभग शब्दशः यही है — राजमागषु स्वचा लत व धना मागशुल्कस्य सङ् ग्रहणं
त्वरया भव त।
क. हॉलोग्राम् — शेष बचा एकमात्र वकल्प ‘कृ त्रम-बु द्धः (AI)’ ही उसके साथ जुड़ता है; पुस्तक हॉलोग्राम् को
सङ् ग्रहालय क कृ त्रम-बु द्ध-आधा रत प्रदशन-प्रौद्यो ग कय म गनती है।
ध्यातव्यम्: इसी कारण आगे प्रश्न ७ (क) — हॉलोग्राम् कृ त्रमबुद्धेः एकः प्रकारः अ स्त — पर शुद्धम् ( ) का चह्न ✓
लगता है। दोन प्रश्न के उत्तर आपस म मेल खाने चा हए।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 70
प्रश्नः ४ : अधः प्रदत्तम ूषातः शब्दान् चत्वा रक्त ाना न पूरयत (म ूषा — यूपीआय्, द क्षा, प्रधानम न्त्रणः भाषणं, स्वचा लतं पारदशकं
च, जीवन)
अभ्यासः
प्र.1 (क) प्रधानम न्त्रसङ् ग्रहालये हॉलोग्राम्-द्वारा ............... दृश्यते।
उत्तरम् — पधानमिन्त्रसङ् गहालये हॉलोगाम्- ारा पधानमि न्त्रणः भाषणं दृ श्यते ।
हन्द अथ: प्रधानमन्त्री-संग्रहालय म होलोग्राम के ारा प्रधानमन्त्री का भाषण दखाई दे ता है।
सङ् केतः: क्रया ‘दृश्यते’ कमवाच्य, एकवचन है — इस लए रक्त ान म प्रथमा एकवचन का ही पद बैठेगा —
‘भाषणम्’ (नपुंसक लङ्ग)।
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प्र.2 (ख) ड जटल्-भारतस्य आ थकसमावेशनं सुगमं कतु ............... प्रणाली अ स्त।
उत्तरम् — िडिजटल्-भारतस्य आिथकसमावेशनं सुगमं कत ुं य ूपीआ य ् पणाली अिस्त।
हन्द अथ: ड जटल भारत के आ थक समावेशन को सरल बनाने के लए यूपीआई प्रणाली है।
सङ् केतः: ‘प्रणाली’ के साथ वही नाम जुड़ेगा जो भुगतान-प्रणाली हो — म ूषा म ‘द क्षा’ शै क्षक मञ्च है, अतः
शेष वकल्प ‘यूपीआय्’ ही है।
प्र.3 (ग) ड जटल्-शासनं ............... सेवां प्रददा त।
उत्तरम् — िडिजटल्-शासनं स् वच ािलतं पारद श कं च सेवां पददाित।
हन्द अथ: ड जटल शासन स्वचा लत तथा पारदश सेवा प्रदान करता है।
Why it matters: ‘पारदशकम्’ (transparent) ड जटल-शासन का सबसे बड़ा लाभ है — फ़ाइल कहाँ
अटक है यह नाग रक स्वयं दे ख सकता है; और ‘स्वचा लतम्’ (automatic) का अथ है क बीच म कसी मनुष्य
के हस्तक्षेप क आवश्यकता नह — जैसे फ़ास्टॅ ग् म होता है।
प्र.4 (घ) ड जटल्-भारतस्य शक्षाक्षेत्रे ............... नाम ड जटल्-शै क्षकमञ्चः अ स्त।
उत्तरम् — िडिजटल्-भारतस्य िशक्षाक्षेत्रे द ी क्षा नाम िडिजटल्-शैिक्षकमञ्चः अिस्त।
हन्द अथ: ड जटल भारत के शक्षा-क्षेत्र म ‘द क्षा’ नाम का ड जटल शै क्षक मंच है।
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Did you know? पृष्ठ 73 के अनुसार द क्षामञ्चः = ान- व नमयाय ड जटल्-अवसंरचना (DIKSHA —
Digital Infrastructure for Knowledge Sharing)। नाम का पूरा वस्तार जान लेने पर उत्तर कभी नह
भूलता।
प्र.5 (ङ) भारतस्य ड जटल्-प रवतनं सवा ण ............... क्षेत्रा ण स्पृश त।
उत्तरम् — भारतस्य िडिजटल्-पिरवतनं सव िण जीवन क्षेत्रािण स्पृशित।
हन्द अथ: भारत का ड जटल प रवतन जीवन के सभी क्षेत्र को छू ता है।
सङ् केतः: म ूषा म पद ‘जीवन’ अकेला (प्रा तप दक रूप म) दया है, क्य क वह यहाँ समास का पूवपद बनता
है — जीवन + क्षेत्रा ण = जीवनक्षेत्रा ण। इस लए इसे अलग शब्द क तरह ‘जीवनम्’ मत लखो।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 71
प्रश्नः ५ : शब्दजालम् (वग चत्र-जालम्) — वामतः द क्षणम्, उप रतः अधः च शब्दान् रेखाङ् कयत
अभ्यासः
प्र.1 अधः अ स्मन् पाठे आगतानां शब्दानाम् आधारेण शब्दजालं प्रदत्तम् अ स्त। अत्र वामतः द क्षणम् उप रतः अधः च
आधारं कृत्वा उदाहरणानुसारं शब्दान् रेखाङ् कयत — (उदाहरणम् : डजीलॉकर्, संवादयन्त्रम्)
पुस्तक म दो शब्द पहले से घेरे हुए ह — डजीलॉकर् (पहली पं क्त म बाएँ से दाएँ) तथा संवादयन्त्र (आठव स्तम्भ म ऊपर से
नीचे)। शेष उ ीस शब्द नीचे दए गए ह। जाल म जो अक्षर कसी शब्द का भाग ह, वे नारङ्ग रंग म दखाए गए ह।
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मा रा िड जी लॉ क र् सं पी सै
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ग मा ट भा िध लो ब्लॉ द म् र्
व् गः ल् सी ता गा क् य िक क्रै
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वा म जे शा िव ा न् म् न् ना
िण ज म स िन अ थ व्य व स्था
ज्य को वे न् म कृ ित्र म बु िद्धः
म् ज क स्व य म् प भा श िन
पौ द्य ो िग की फ़ ा स्टॅ ग् छ क्षा ष्ठा
क . वामतः दिक्षणम् (बाएँ से दाएँ) —
१. िडजीलॉकर् — पिङ् क्तः १, स्तम्भाः ३–७ (उदाहरणम्)
२. यूपीआय् — पिङ् क्तः ५, स्तम्भाः १–४
३. िव ानम् — पिङ् क्तः ६, स्तम्भाः ५–८
४. अथ व्यवस्था — पिङ् क्तः ७, स्तम्भाः ६–१०
५. कृ ित्रमबुिद्ध ः — पिङ् क्तः ८, स्तम्भाः ६–१०
६. स्वयम्पभा — पिङ् क्तः ९, स्तम्भाः ४–८
७. पौद्य ोिगकी — पिङ् क्तः १०, स्तम्भाः १–४
८. फ़ास्टॅ ग् — पिङ् क्तः १०, स्तम्भाः ५–७
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम्
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ख. उपिरतः अधः (ऊपर से नीचे ) —
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९. माय्गव् — स्तम्भः १, पङ् क्तयः १–४
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१०. वािणज्यम् — स्तम्भः १, पङ् क्तयः ६–९
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a११. राजमागः — स्तम्भः २, पङ् क्तयः १–४
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१२. िडिजटल् — स्तम्भः ३, पङ् क्तयः १–४
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१३. आभासीय् — स्तम्भः ४, पङ् क्तयः २–५
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१४. विधता — स्तम्भः ५, पङ् क्तयः २–४ a
१५. िविनमय — स्तम्भः ५, पङ् क्तयः ६–९
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१६. हॉलोगाम् — स्तम्भः ६, पङ् क्तयः २–५
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१७. ब्लॉक्चे न ् — स्तम्भः ७, पङ् क्तयः ३–६
agl १८. संवादयन्त्रम् — स्तम्भः ८, पङ् क्तयः १–६ (उदाहरणम्)
१९. पीएिम्कसान् — स्तम्भः ९, पङ् क्तयः १–६
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२०. सैब म् — स्तम्भः १०, पङ् क्तयः १–५
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ag९–१०
२१. िन ष्ठा — स्तम्भः १०, पङ् क्तयः
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Tip — खोजने क व ध: पहले पूरे पाठ के ड जटल-नाम क सूची बना लो ( ड ज-लॉकर्, यूपीआय्, फ़ास्टॅ ग्,
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द क्षा, स्वयम्प्रभा, नष्ठा, पीएम्- कसान्, माय्-गव्, हॉलोग्राम्, व धता/आभासीया-वास्त वकता, कृ त्रमबु द्धः,
a s em प्रौद्यो गक …)। फर जाल म पहला अक्षर ढूँ ढ़ो और केवल दो दशाओं म दे खो। जाल म शेष अक्षर (त, ना, म, जे,
agl शा, को, वे, छ, क्षा…) केवल भरने के लए रखे गए ह।
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ध्यातव्यम्: जाल म कुछ शब्द पाठ के बाहर कcे oभीmह — ब्लॉक्चेन्, अथव्यव ा, सैबक्रम् तथा व ानम्। ये वषय g l a
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a s emचा हए। ‘सैबक्रम्’ का संस्कृत पयाय पाठ म ‘साङ्ग णक-अपराधः’ के
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से जुड़े ह, इस लए इन्ह भी रेखां कत करना
रूप म आया है।
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m जायते स द्धः — पृष्ठ 71 as e
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अभ्यासात्
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम् AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्नः ६ : अधो ल खतान् शब्दान् वगद्वये वभजत — सङ्गणकसम्बद्धाः, असङ्गणकसम्बद्धाः च
अभ्यासः
प्र.1 शब्दाः — अन्तजालम्, श क्षका, सङ्गणकः, वद्यालयः, ई-पत्रम्, पाठ्यपुस्तकम्, ड जटल्, लेखनी।
सङ्गणकसम्बद्धाः असङ्गणकसम्बद्धाः
अन्तज लम् िशिक्षका
सङ् गणकः िवद्यालयः
ई-पत्रम् पाठ पुस्तकम्
िडिजटल् ले खनी
वभाजन का आधार: जस वस्तु का अ स्तत्व ही सङ्गणक (कम्प्यूटर) अथवा अन्तजाल पर टका हो, वह
‘सङ्गणकसम्बद्धा’ है — अन्तजालम् (नेटवक), सङ्गणकः (यन्त्र स्वयं), ई-पत्रम् (जो केवल वद्युत्-रूप म ही होता
है), ड जटल् (अङ् क य रूप)। शेष चार — श क्षका, वद्यालयः, पाठ्यपुस्तकम्, लेखनी — कम्प्यूटर के बना भी
पूरी तरह रहते ह, इस लए ‘असङ्गणकसम्बद्धाः’।
Think about it: ध्यान दो क पाठ्यपुस्तकम् ‘असङ्गणकसम्बद्धम्’ है, परन्तु उसी पुस्तक का ई-पाठशाला
वाला रूप सङ्गणकसम्बद्ध हो जाता है। अन्तर वस्तु म नह , उसके माध्यम म है — यही ‘ ड जटल्-प रवतनम्’ का
अथ है।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 72
✓ ✗
प्रश्नः ७ : अधो ल खता न वाक्या न प ठत्वा शुद्धं ( ) अशुद्धं ( ) वा इ त च कुरुत
अभ्यासः
प्र.1 (क) हॉलोग्राम् कृ त्रमबुद्धेः एकः प्रकारः अ स्त।
उत्तरम् — श द्ध
ु म् (✓ )
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम् AglaSem · NCERT Solutions
कारणम्: पुस्तक स्वयं प्रश्न ३ क मेलन-सारणी म ‘हॉलोग्राम्’ को ‘कृ त्रम-बु द्धः (AI)’ के साथ जोड़ती है, और पाठ
म हॉलोग्राम् को सङ् ग्रहालय क कृ त्रम-बु द्ध-आधा रत प्रदशन-प्रौद्यो ग कय म गना गया है। अतः यहाँ ✓ लगेगा।
ध्यातव्यम्: तकनीक दृ ष्ट से हॉलोग्राम् मूलतः त्रवैम-प्र तमू तः (three-dimensional projection) है;
आधु नक सङ् ग्रहालय म उसे चलाने-बोलने वाली प्रणाली कृ त्रमबु द्ध पर आधा रत होती है। पुस्तक इसी व्यावहा रक
अथ म दोन को जोड़ती है — इस लए दोन प्रश्न का उत्तर एक-दूसरे से मेल खाता है।
प्र.2 (ख) व धत-वास्त वकतायाः उपयो गता ऐ तहा सक-घटनानां प्रत्यक्षानुभवाय अ स्त।
उत्तरम् — श द्ध
ु म् (✓ )
कारणम्: अथव का वाक्य ठ क यही कहता है — अत्र ‘व धता-वास्त वकता’ (AR) ‘आभासीया-वास्त वकता’ (VR)
च इत्याभ्यां सम्बद्धा न उपकरणा न अ प स न्त, अनेन ऐ तहा सकवृत्ता न प्रत्यक्षम् इव अनुभूयन्ते। ‘भारतीय-
स्वतन्त्रता-सङ् ग्रामं’ दृष्ट् वा अस्माकं पूवजानां संघषः कयान् वशालः आसीत् इ त ायते।
प्र.3 (ग) ड जटल्-प्रक्षेपण-मान चत्रं भारतस्य वकासयात्रां प्रदशय त।
उत्तरम् — अश द्ध
ु म् (✗ )
कारणम्: पाठ म ‘मान चत्रम्’ नह , चल च्चत्रम् है। वे दका कहती है — अहो ! ‘ ड जटल्-प्रक्षेपण-चल त्रं’ दृष्ट् वा
अहं व स्मता अभवम्। अत्र सम्पूणस्य भारतस्य वकास-यात्रा प्रद शता अ स्त।
शुद्धं वाक्यम्: ड जटल्-प्रक्षेपण-चल त्रं भारतस्य वकासयात्रां प्रदशय त। (मान चत्रम् = न ा, चल त्रम् =
चलती- फरती फ़ल्म — एक अक्षर के अन्तर से पूरा अथ बदल जाता है।)
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम् AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (घ) फ़ास्टॅ ग् इ त राजमागषु स्वचा लत व धना मागशुल्कस्य शी ं संग्रहणं करो त।
उत्तरम् — श द्ध
ु म् (✓ )
कारणम्: अथव का वाक्य लगभग शब्दशः यही है — मम पतरौ ‘फ़ास्टॅ ग्’ इत्यस्य उपयोगं कुरुतः। अनेन राजमागषु
स्वचा लत व धना मागशुल्कस्य सङ् ग्रहणं त्वरया भव त। (‘त्वरया’ = शीघ्रम्।)
प्र.5 (ङ) डजी-लॉकर् इत्यस्य माध्यमेन केवलम् आधार-पत्रं सुर क्षतुं शक्यते।
उत्तरम् — अश द्ध
ु म् (✗ )
कारणम्: ‘केवलम्’ शब्द ही इस वाक्य को गलत बनाता है। य शका कहती है — मम आधारपत्रं वद्यालयीयं
प्रमाणपत्रं च तत्र सुर क्षतम् अ स्त; और अध्यापक जोड़ते ह — ‘ डजी-लॉकर्’ (आधार-पॅन-काड् इत्याद नां
ड जटल्-सङ् ग्रहणम्)।
शुद्धं वाक्यम्: डजी-लॉकर् इत्यस्य माध्यमेन आधार-पत्रं, पॅन-काड् , प्रमाणपत्रम् इत्याद न बहू न प्रलेखा न सुर क्षतुं
शक्यन्ते।
प्र.6 (च) भारतस्य ड जटल्-प रवतनं केवलं शासने प्रभावं करो त, नाग रकजीवने न।
उत्तरम् — अश द्ध
ु म् (✗ )
कारणम्: पाठ का केन्द्र य वाक्य ही इसका खण्डन करता है — अस्माकं दै नकं जीवनं ‘ ड जटल्’ इत्यनेन प रव ततं
प्रभा वतं च भव त। अस्य क्षेत्रं व्यापकम् अ स्त। तथा ‘ ड जटल्’ योजनायाः प्रभावः दै न न्दने जीवनेऽ प दृश्यते।
य शका का ड ज-लॉकर्, अथव के माता- पता का फ़ास्टॅ ग्, भास्कर का यूपीआय् — तीन नाग रक-जीवन के ही
उदाहरण ह।
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम् AglaSem · NCERT Solutions
शुद्धं वाक्यम्: भारतस्य ड जटल्-प रवतनं शासने नाग रकजीवने च — उभयत्र प्रभावं करो त; तत् सवा ण
जीवनक्षेत्रा ण स्पृश त।
प्र.7 (छ) उमङ्ग, माय्-गव्, जेम् इत्यादयः ई-शासन-मञ्चाः स न्त।
उत्तरम् — श द्ध
ु म् (✓ )
कारणम्: अध्यापक का वाक्य — ‘ई-शासन-पटलम्’ यथा — ‘उमङ्ग’ (UMANG), ‘माय्-गव्’ (My-Gov), ‘जेम्’
(GeM) इत्यादयः। तीन ही सरकारी सेवाओं के ड जटल मंच ह — उमङ्ग अनेक सेवाओं का एक ही ऐप, माय्-गव्
जन-संवाद का मंच, जेम् सरकारी खरीद का बाज़ार (सवकारस्य- वप ण-पटलम्)।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 72
प्रश्नः ८ : अव्यव तान् वणान् शब्ददृ ा व्यव तरूपेण लखत (उदाहरणम् — वेय वत्तीसमानशम् = वत्तीयसमावेशनम्)
अभ्यासः
प्र.1 (क) कसङ्गम्ण
क + स + ङ् ग + म् + ण → सङ्गणकम् (स + ङ् ग + ण + क + म्)
अथः: सङ्गणकम् = कम्प्यूटर। पाठ म यही शब्द ‘सङ्गणकः’ (पुं लङ्ग) रूप म भी आया है — जनाः अन्तजालस्य,
सचलदूरवाण्याः, सङ्गणकस्य च साहाय्येन शीघ्रं काया ण सम्पादय न्त।
प्र.2 (ख) कावसरः
का + व + स + रः → सवकारः (स + व + का + रः)
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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 6 ड जभारतम् – युगप रवतनम्
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अथः: सवकारः = सरकार / शासन (Government)। पाठ म — सवकारः अन्तजालस्य उत्तरोत्तरं वस्ताराय काय
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करो त तथा एषा भारतसवकारस्य व शष्टा महत्त्वाकाङ् क्षणी योजना अ स्त।
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प्र.3 (ग) लयः वद्या
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ल + यः + िव + द्या → िवद्य ालयः (िव + द्या + ल + यः)
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अथः: वद्यालयः = पाठशाला। समास खोलो — वद्यायाः आलयः = वद्यालयः (षष्ठी-तत्पुरुष)। पाठ म इससे बना
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वशेषण भी आया है — ‘ वद्यालयीयं प्रमाणपत्रम्’।
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प्र.4 (घ) जक डलॉर्
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िज + क + िड + लॉ + र् → िडिजलॉकर ् (िड + िज + लॉ + क + र्)
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ड ज-लॉकर् = वह ड जटल तजोरी जसम आधार-पत्र, पॅन-काड् , प्रमाणपत्र आ द सुर क्षत रहते ह (पृष्ठ 73
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के अनुसार — ड ज-लॉकर् — सुर क्षत-प्रलेख-संग्रहः)।
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सङ् केतः: यही शब्द प्रश्न ५ के शब्दजाल म पहली पं क्त म उदाहरण के रूप म घेरा गया है — दोन प्रश्न एक-दूसरे
क जाँच कर लेते ह।
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(ङ) शक्तसुम्
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श + क्त + सु + म् → स ुशक्तम् (सु + श + क्त + म्)
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अथः: सुशक्तम् = भली प्रकार सशक्त, साम यवान्। पाठ म यही शब्द बहुवचन म आया है — ड जटल्-श क्तः
सवजनान् सुशक्तान् कुयात् इ त अस्माकं ध्येयम्। तथा आवरण-वाक्य है — ड जटल्-भारतम् — सशक्तीकरणाथ
श क्तः।
अभ्यासात् जायते स द्धः — पृष्ठ 72
प्रश्नः ९ : अधो ल खतं प र े दं प ठत्वा प्रश्नानाम् उत्तरा ण लखत
अभ्यासः
प्र.1 पर े दः — “अद्यतने व ानयुगे सव मनुष्याः ड जटल्-प्रौद्यो गक्याः प्रयोगं कुव न्त। जनाः अन्तजालस्य,
सचलदूरवाण्याः, सङ्गणकस्य च साहाय्येन शी ं काया ण सम्पादय न्त। वद्या थनः अ प ई-अ धगम-प्रणाल
स्वीकृत्य ानं वधय न्त।” — (क) अद्यतनं युगं क दृशम् अ स्त ?
उत्तरम् — अद्य तनं य ुगं िव ानय ुगम् अि स्त।
हन्द अथ: आज का युग व ान-युग है। प रच्छे द का पहला शब्द-समूह ही उत्तर दे दे ता है — ‘अद्यतने
व ानयुगे’।
व्याकरण-सङ् केतः: प रच्छे द म ‘अद्यतने व ानयुगे’ सप्तमी वभ क्त, एकवचन (अ धकरण) म है; उत्तर म उसे
प्रथमा वभ क्त, एकवचन, नपुंसक लङ्ग — ‘ व ानयुगम्’ — म बदलना पड़ता है, क्य क प्रश्न ‘क दृशम् अ स्त
?’ है।
प्र.2 (ख) मानवाः केषां साहाय्येन काया ण शी ं कुव न्त ?
उत्तरम् — मानवाः अन्तज लस्य , सच लदू रवाण्याः, सङ्गणक स्य च साहाय्येन काय िण शीघं कु विन्त।
हन्द अथ: मनुष्य इंटरनेट, मोबाइल फ़ोन तथा कम्प्यूटर क सहायता से काय शीघ्र कर लेते ह।
शब्दाथः — सचलदूरवाणी = चलती- फरती दूरवाणी अथात् मोबाइल फ़ोन (सचल = चलनशील + दूरवाणी =
telephone)।
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व्याकरण-सङ् केतः: ‘साहाय्येन’ के साथ जुड़े तीन पद षष्ठी वभ क्त, एकवचन म ह — अन्तजालस्य,
सचलदूरवाण्याः (स्त्री लङ्ग, ईकारान्त), सङ्गणकस्य। प्रश्न का ‘केषाम्’ भी षष्ठी बहुवचन है — वभ क्त वही रहती है।
प्र.3 (ग) ई-अ धगम-प्रणाल्याः प्रयोगं के कुव न्त ?
उत्तरम् — - -
ई अिधगम पणा ल्याः पयोगं िवद्य ािथ नः कु वि न्त।
हन्द अथ: ई-अ धगम-प्रणाली (e-learning) का प्रयोग वद्याथ करते ह। प रच्छे द म है — वद्या थनः अ प ई-
अ धगम-प्रणाल स्वीकृत्य ानं वधय न्त।
व्याकरण-सङ् केतः: के = कम् शब्द का पुं लङ्ग प्रथमा बहुवचन, अतः उत्तर भी प्रथमा बहुवचन म — ‘ वद्या थनः’
( वद्या थन् शब्द, ‘न्’-अन्त पुं लङ्ग)। स्वीकृत्य ल्यप्-प्रत्ययान्त अव्यय है (स्वी + कृ + ल्यप्) = ‘अपनाकर’।
योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 73–74
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क्षेत्रानुसारं भारते ड जटल्-प्रग तः तथा भारतीय ानपरम्परा
योग्यता वस्तरः
प्र.1 ‘क्षेत्रानुसारं भारते ड जटल्-प्रग तः’ — दश क्षेत्रा ण तेषु प्रमुखा ण पटला न च लखत।
क्षेत्रम् प्रमुखा ण पटला न / योजनाः
१. िशक्षाक्षेत्र म् दीक्षामञ्चः (DIKSHA — ान-िविनमयाय िडिजटल्-अवसंरचना) · राि य-अकॅ डिमक् -िनक्षेपगृहः (National
Academic Depository) · ई-पाठशाला (ePathshala) · सवभ्यः कृ ित्र म -बुिद्ध-अिभयानम् (AI for All)
२. िवत्तं िविनमयः च एकीकृ त-िविनिमय-पटलम् (UPI) · भीम-अनुपयोगः (BHIM App) · आधार-स क्षम-िवत्तीय-पद्धितः (AEPS) · रुपे-काड्
(RuPay) · ई-रूपी-िडिजटल्-वौचर्-पणाली (e-RUPI) · जनधन-आधार -दू र वाणी-त्र यी (JAM Trinity)
३. आरोग्यम् आयुष्मान्-भारत-िडिजटल्-अिभयान-स्वास्थ् य-पिरचयपत्रम् (ABDM) · कोिवन् (CoWIN) · ई-संजीवनी-दू रस्वास्थ् य-
से वा (eSanjeevani)
४. शासनम् िडिज-लॉकर् — सुरिक्षत-पले ख-संगहः (Digi-Locker) · मम शासनम् / जन-संवादाय (MyGov) · ई-जनपदसे वा
(eDistrict) · के न्द ीकृ त-पितवेद न-िनस्तारण-पयवेक्षण-पणाली (CPGRAMS)
५. कृ िषक्षेत्र म् ई-राि य-कृ िष-आपणः (eNAM) · पधानमन्त्री-िकसान्-स म्मानिनिधः (PM-KISAN) · चल -िकसान्-स न्दे श-से वा
(mKisan) · कृ षक -सुिवधा-से वा (Kisan Suvidha)
६. आजीिवका- राि य-आजीिवका-से वा (National Career Service) · िनपुण-भारत-िडिजटल् (Skill India Digital) · कौशल -
िनपुणता मानिचत्रण-पटलम् (ASEEM Portal) · ई-िनपुण-भारत-मञ्चः (eSkill India)
७. न्यायव्यवस्था ई-न्यायालयः (eCourts) · राि य-न्याय-सांिख्यकी-द त्तांश-गुच्छः (NJDG)
८. पिरचयः सुर क्षा अपराध-अपरािध-पत्यक्षािभ ान-जाल -पणाली (CCTNS)
च
९. कर-पणाली वस्तु-से वा-कर-पटलम् (GST Portal) · सवकारस्य-िवपिण-पटलम् (GeM Portal) · उ द्यम-पञ्जीकरण-पटलम्
व्यवसायः च (Udyam Portal)
१०. संपेषणं िडिजटल्-भारतािभयानम् — आधुिनक स्य रा स्य स ञ्जीवनी (Digital India)
तन्त्र ानम् च
इस सारणी का उपयोग: ‘ ड जटल्-भारतम्’ पर पाँच वाक्य लखने ह या नबन्ध — क्षेत्र + उदाहरण का यही
जोड़ा सबसे अच्छा ढाँचा दे ता है। जैसे — शक्षाक्षेत्रे ‘द क्षा’ इ त मञ्चः अ स्त। आरोग्यक्षेत्रे ‘ई-संजीवनी’ इ त
दूरस्वास्थ्य-सेवा अ स्त। कृ षक्षेत्रे ‘ई-नाम्’ इ त रा ष्ट्रयः कृ ष-आपणः अ स्त।
ध्यातव्यम्: सारणी के सर पर वही आदश-वाक्य छपा है जो पाठ के पहले पृष्ठ पर है — ड जटल्-भारतम् :
सशक्तीकरणाथ श क्तः (Digital India — Power to Empower)।
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प्र.2 भारतीय ानपरम्परा — आधु नक-सङ्गणकगणनायाः मूलाधारौ कौ ? कैः प्र तपा दतौ ?
उत्तरम् — छ न्द ःशा स्त्रम् (िपङ्गलाच ायः) — िपङ् गलस्य छन्दःशास्त्रे िधक -सङ् ख्या-व्यवस्था (Binary
Number System) िनरूिपता अिस्त।
आ यभटीयम् (आ यभटः) — आयभटे न पितपािदतः दशमलव-सङ् ख्या-िविधः (Decimal System) एवञ्च
स्थािनमूलक-गणना-िविधः (Place-Value Notation) आधुिनक-सङ् गणकगणनायाः मूलाधारौ स्तः।
हन्द अथ: आचाय पङ्गल के ‘छन्दःशास्त्र’ म -आधारी (binary) संख्या-व्यव ा का नरूपण मलता है, और
आयभट के ‘आयभट य’ म दशमलव संख्या-पद्ध त तथा ानीय-मान क गणना- व ध प्र तपा दत है। ये दोन ही
आधु नक कम्प्यूटर-गणना के मूल आधार ह।
Why it matters: कम्प्यूटर भीतर से केवल ० और १ जानता है — यही ‘द्व्य धक’ (binary) व्यव ा है, जसे
पङ्गल ने छन्द के लघु–गुरु के क्रम गनने के लए बहुत पहले प्रयोग कया था। और ा नमूलक-गणना (place
value) के बना बड़ी संख्याएँ लखी ही नह जा सकत — २०५ म ‘२’ का मूल्य उसके ान से तय होता है।
इसी लए पाठ कहता है क युगप रवतन क जड़ भारतीय ान-परम्परा म ह।
व्याकरण-सङ् केतः: मूलाधारौ स्तः — द्ववचन का प्रयोग है, क्य क आधार दो ह (दशमलव- व ध तथा
ा नमूलक- व ध)। ‘स्तः’ = अस् धातु, लट् -लकार, प्रथमपुरुष, वचन।
प्र.3 अ धकसूचनाथम् अधः प्रदत्तस्य क्यूआर्-कूटस्य उपयोगं कुवन्तु।
यह करने योग्य काय है, लखने योग्य उत्तर नह । पृष्ठ 74 पर छपे आशुप्र त क्रयाकूट (QR Code) को अपने अ भभावक के
मोबाइल के कैमरे से स्कैन करो; उससे ‘ ड जटल् इ ण्डया’ क आ धका रक जानकारी वाला पृष्ठ खुल जाएगा।
करणीयम् (कायक्र मः) —
१. सचलदू रवाण्याः कै मरा-अनुपयोगं उद् घाटयत।
२. पुस्तके पदत्तं क्यूआ र्-कू टं (आशुपितिक्रयाकू टम्) स्कै न् कु रुत।
३. यत् पटलम् उद् घािटतं तत्र दश क्षेत्राणां योजनाः पश्यत।
४. स्वकीये अभ्यासपुस्तके ‘मया िकं नूत नं ातम्’ इित पञ्च वाक्यािन संस्कृ ते न िलखत।
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सुरक्षा-सङ् केतः (पाठ से जुड़ा): पाठ स्वयं ‘साङ्ग णक-सुरक्षा’ क चेतावनी दे ता है। इस लए नयम याद रखो —
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केवलं वश्वसनीयं क्यूआर्-कूटं स्कैन् कुरुत; अ ातं कूटं स्कैन् कृत्वा कदा प धनं मा प्रेषयत। भुगतान
गया अनजान.cQRo कोड ही सबसे आम साइबर-ठगी है। a
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प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 74
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प रयोजना-काय (प्रकल्पः)
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प रयोजनाकायम् a g l
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(1) अधः प्रदत्तसम्पक च े न ( लङ् क् इत्यनेन) ‘आशुप्र त क्रयाकूट’-माध्यमेन (क्यूआर्-कोड् ) च
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प्र.1
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प्रधानम न्त्रसङ् ग्रहालयस्य आभासीयं भ्रमणं कृत्वा भारतस्य ड जटल्- वकासं वणयत।
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a यह क्रया-आधा रत काय है — पहले पुस्तक का लङ् क् / QR कूट खोलकर प्रधानमन्त्री-संग्रहालय का आभासीय भ्रमण
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(virtual tour) करो, फर जो दे खा उसे संस्कृत म लखो।
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उत्तरे िकं िकम् आवश्यकम् (अच् छे उत्तgरl की जाँच -सूच ी) —
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१. भ मणस्य स्थानम् — ‘नवदे हलीस्थः पधानमिन्त्रसङ् गहालयः’।
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२. दृ ष्टानां पौद्योिगकीनां नामािन — हॉलोगाम्, AR, VR, कृ ित्रमबुिद्धः, िडिजटल्-पक्षेपणम्।
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३. एका ऐितहािसकी घटना या तत्र दृ ष्टा।
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a s e४.mस्वकीयः अनुभवः — िकम् अद् भतु म् आसीत् ?
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५. िनष्कषः — भारतस्य िडिजटल्-िवकासः कीदृ शः ?
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नमूना उत्तर (Sample answer):
अहम् अन्तजालेन प्रधानम न्त्रसङ् ग्रहालयस्य आभासीयं भ्रमणम् अकरवम्। तत्र हॉलोग्राम्- ारा प्रधानम न्त्रणः भाषणं
ुतवान् दृष्टवान् च। ‘व धता-वास्त वकता’ (AR) ‘आभासीया-वास्त वकता’ (VR) च इत्याभ्यां भारतीय-स्वतन्त्रता-
. com
सङ् ग्रामः प्रत्यक्षम् इव अनुभूतः। कृ त्रमबु द्ध-आधा रतं संवादयन्त्रं मम प्रश्नानाम् उत्तरा ण अददात्। ड जटल्-प्रक्षेपण-
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चल च्चत्रे सम्पूणस्य भारतस्य वकास-यात्रा प्रद शता आसीत्। एतत् सव दृष्ट् वा अहम्eअवगच्छम्
s
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— भारतस्य
aglअ स्त। सत्यमेव इदं युगप रवतनम्
.cडoजटल्- वकासः शासने, शक्षायाम्, आरोग्ये, कृषौ, वा णज्ये च सवत्र व्याप्तः
m अ स्त।
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हन्द अथ: मने इंटरनेट से प्रधानमन्त्री-संग्रहालय का आभासी भ्रमण कया। वहाँ होलोग्राम के ारा प्रधानमन्त्री का
भाषण सुना और दे खा। AR और VR से भारतीय स्वतन्त्रता-संग्राम प्रत्यक्ष-सा अनुभव हुआ। कृ त्रम-बु द्ध पर
आधा रत संवाद-यन्त्र ने मेरे प्रश्न के उत्तर दए। ड जटल-प्रक्षेपण-चल चत्र म भारत क सम्पूण वकास-यात्रा दखाई
गई थी। यह सब दे खकर मने जाना क भारत का ड जटल वकास शासन, शक्षा, स्वास्थ्य, कृ ष और व्यापार —
सवत्र फैला है। यह सचमुच युग-प रवतन है।
ध्यातव्यम्: यह नमूना उत्तर ज्य -का-त्य उतारने के लए नह है। तुमने जो सचमुच दे खा, उसी के नाम और
अनुभव भरो — तभी प रयोजना का उ े श्य पूरा होता है।
प्र.2 (2) छात्राः समूहेषु वभक्ताः भवेयुः, प्रत्येकं समूहः ड जटल्-भारतस्य कस्या द प योजनायाः प्रस्तु त करोतु।
यह समूह-काय है। कक्षा को चार-पाँच समूह म बाँटो; हर समूह ‘ ड जटल्-भारत’ क एक योजना ले और उस पर संस्कृत म
प्रस्तु त (presentation) दे ।
पस्तुते ः रूपरेखा (हर समूह इन पाँच िबन्दुओ ं पर बोले) —
१. योजनायाः नाम तथा तस्याः पूणरूपम् — यथा ‘ई-संजीवनी = दू रस्वास्थ्य-सेवा’।
२. किस्मन् क्षेत्रे — िशक्षा / िवत्तम् / आरोग्यम् / शासनम् / कृ िषः / आजीिवका।
३. का समस्या िनवािरता — पूव ं िकम् आसीत्, अधुन ा िकं जातम्।
४. कः लाभं लभते — छात्राः, कृ षकाः, वृद्ध ाः, व्यापािरणः…।
५. एकं वास्तिवकम् उदाहरणम् — स्वगामे स्वनगरे वा दृ ष्टम्।
नमूना प्रस्तु त (Sample answer) — ‘ई-संजीवनी’ इ त योजना:
अस्माकं समूहस्य वषयः ‘ई-संजीवनी’ अ स्त। एषा आरोग्यक्षेत्रस्य दूरस्वास्थ्य-सेवा (Telemedicine) अ स्त। पूव
ग्रामवा सनः च कत्सकं द्रष्टु ं दूरं नगरं गच्छ न्त स्म। अधुना ते ग्रामे एव सङ्गणकेन सचलदूरवाण्या वा च कत्सकेन सह
संवादं कतु शक्नुव न्त। अनेन समयः धनं च रक्ष्यते, वृद्धाः रुग्णाः च वशेषतः लाभं लभन्ते। अस्माकं ग्रामे अ प एकः
वृद्धः एतया सेवया औषधपरामश प्राप्तवान्।
Tip: प्रस्तु त के साथ एक भ त्तपत्रम् (poster) बनाओ — बीच म योजना का चह्न, चार ओर पाँच बन्दु संस्कृत
म। समूह के हर सदस्य को कम-से-कम एक वाक्य बोलने दो; इसी से भाषा का अभ्यास होता है।
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अध्याय — एक नज़र म
पाठ का ढाँचा — यह गद्य-पाठ पूरी तरह संवाद-रूप म है। आरम्भ म कोष्ठक म रङ्गसङ् केत है — (नवदे हली ः
प्रधानम न्त्रसङ् ग्रहालयः। अत्र व वधाः ड जटल्-प्रौद्यो गक्यः प्रद शताः स न्त।) — फर सङ् ग्रहालय म और उसके बाद कक्षा म
अध्यापक तथा छह छात्र क चचा चलती है।
सङ् ग्रहालय म क्या दे खा — हॉलोग्राम् ( त्रवैम-प्र तमू तः) से प्रधानमन्त्री का भाषण, व धता-वास्त वकता (AR) तथा
आभासीया-वास्त वकता (VR) के उपकरण, कृ त्रमबु द्ध-आधा रत संवादयन्त्र, और ड जटल्-प्रक्षेपण-चल त्र
जसम भारत क सम्पूण वकास-यात्रा दखाई गई है।
‘ ड जटल्-भारतम्’ का लक्ष्य — अध्यापक बताते ह क यह भारत-सवकार क महत्त्वाकाङ् क्षणी योजना है; इसका सूत्र है
‘ ड जटल्-भारतम् — सशक्तीकरणाथ श क्तः’। राष्ट्र ड जटल् रूप से समृद्ध हो और ड जटल्-श क्तः सवजनान् सुशक्तान्
कुयात् — यही इसका ध्येय है।
क्षेत्र-दर-क्षेत्र सेवाएँ — शासन म ड ज-लॉकर्, उमङ्ग, माय्-गव्, जेम्, को वन्; वत्त म यूपीआय्, रूपे-काड् , जनधनयोजना;
शक्षा म द क्षा, स्वयम्, स्वयं-प्रभा, ई-पाठशाला, नष्ठा, पीएम्-ई- वद्या; कृ ष म ई-नाम्, पीएम्- कसान्, ोन्-प्रौद्यो गक ;
वा णज्य म आभासीय (ऑन्-लैन्) वक्रय तथा आशुप्र त क्रया-कूट (QR Code) आधा रत व नमय।
चेतावनी भी है — पाठ केवल प्रशंसा नह करता। अध्यापक कहते ह — अस्मा भः ‘साङ्ग णक-सुरक्षा’- वषये अ प
चन्तनीयम्। लोग प्रायः लोभात् भयात् वा साङ्ग णक-अपराध के शकार होते ह, इस लए जन-जागरण के उपाय सोचने
चा हए।
व्याकरण-केन्द्र — ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेट दो कृत्-प्रत्यय सखाती है — क्त-प्रत्ययः (भूतकाल, कमवाच्य–भाववाच्य; कता
म तृतीया, कम म प्रथमा — बालकेन पाठः प ठतः) तथा शतृ-प्रत्ययः (वतमान म काय करने वाला; केवल परस्मैपद धातुओं से
— पठ् + शतृ = पठन्)। दोन तीन लङ्ग म चलते ह।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द अथ ENGLISH
सङ् ग्रहालयः वस्तुस ङ् ग हग ृहम् संग्रहालय Museum
हॉलोग्राम् ित्रवैम -पितमूितः होलोग्राम Hologram
व धता वास्त वकता संविधता वास्तिवकता संव धत वास्त वकता Augmented Reality (AR)
आभासीया वास्त वकता आभासीया वास्तिवकता आभासी वास्त वकता Virtual Reality (VR)
कृ त्रमबु द्धः यािन्त्रकी बुिद्धः कृ त्रम-बु द्धमत्ता Artificial Intelligence (AI)
ड जटल्-प्रक्षेपणम् सङ् गणक-िचत्रपदशनम् ड जटल प्रक्षेपण Digital Projection
आशुप्र त क्रयाकूटः झिटित पितिक्रयायाः कू टः आशु प्र त क्रया कोड Quick Response Code
प्रौद्यो गक तन्त्र ानम् प्रौद्यो गक Technology
अन्तजालम् अन्तज लम् संचार / इंटरनेट Internet
वत्तीयसमावेशनम् धनिवषयकः समावेशः वत्तीय समावेशन Financial Inclusion
आधारपत्रम् आधारः (पिरचयपत्रम्) आधार–पत्र Aadhar Card
त्वरया शीघ म् जल्द Quickly
शक्षायाः माध्यमेन िशक्षणोपायेन शक्षा के माध्यम से Through Education
साङ्ग णक-सुरक्षा जालसुर क्षा साइबर सुरक्षा Cyber security
ड जटल्-बन्धनम् िडिजटल्-बन्धनम् ड जटल्-बन्धन Digital Arrest
ड जटल्-साक्षरता िडिजटल्-िशक्षा ड जटल्-साक्षरता Digital Literacy
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