Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 8: पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य
मनोहरम्
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
85 – 96 15 55 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 30 pages
Page 2
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · सं स्कृ त · द पकम्
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य
मनोहरम्
NCERT कक्षा 8 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के अष्टमः पाठः — पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् का सम्पूण हल। यह पाठ भारत के
पूव त्तर (ऐशान्य) कोण के आठ राज्य — अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरम्, मेघालयः, मजोरमः, नागालैण्डम्, त्रपुरा तथा स क्कमः — का प रचय
अध्या पका और छात्र के संवाद के रूप म दे ता है, और बीच म दो ोक से ‘सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च’ नाम क व्याख्या करता है। नीचे पृष्ठ 85 से
96 तक के संवादगत प्रश्न, दोन ोक का पदच्छे दः → अन्वयः → अथः → भावः, ‘वयं शब्दाथान् जानीमः’, ‘अत्र इदम् अवधेयम् (दश दशः)’,
अभ्यासात् जायते स ः के प्रश्न १–९ (हर उपभाग स हत, वग चत्र-जालम् तथा प का समेत), योग्यता वस्तरः और प रयोजनाकायम् क्रमशः हल
कए गए ह — पहले संस्कृत उत्तर, फर कोष्ठक म हन्द अथ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
द पकम् (कक्षा 8) 85 – 96
खं ड प्रश्न
15 55
माध्यम
हन्द
पाठगताः प्रश्नाः (कक्षा-संवादे ) — पृष्ठ 86–88
अध्या पकायाः छात्राणां च संवादः
सं वादः
प्र.1 अध्या पका – शुभाशयाः। अद्य क पठनीयम् ?
अद्य वयं स्वदे शस्य राज्यानां वषये प ठतुम् इच्छामः। (आज हम अपने दे श के राज्य के वषय म पढ़ना चाहते ह।)
पाठे छात्राः स्वयम् एतद् उत्तरं दद त — “वयं सव स्वदे शस्य राज्यानां वषये ातु मच्छामः।” (हम सब अपने दे श के राज्य के वषय
म जानना चाहते ह।)
ध्यान द: ‘पठनीयम्’ यहाँ अनीयर् प्रत्ययान्त कृदन्त है — ‘पढ़े जाने योग्य’। इसी से आगे प्रश्न ३ म ‘पठनीयम् = पठ्
+ अनीयर्’ का वभाग करना है।
प्र.2 अध्या पका – शोभनम्। वदत, अस्माकं दे शे क त राज्या न स न्त ?
अस्माकं दे शे अष्टा वश तः (२८) राज्या न स न्त। (हमारे दे श म अ ाईस राज्य ह।)
Page 1 of 30
Page 3
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
स्वरा उत्तरं ददा त — “महोदये ! मम भ गनी कथय त यत् अस्माकं दे शे अष्टा वश तः राज्या न स न्त इ त। एतद् अ त रच्य
अष्टकेन्द्रशा सतप्रदे शाः अ प स न्त।”
क्य : यहाँ ‘अष्टा वश तः’ संख्यावाचक पद है — अष्ट (८) + वश तः (२०) = २८। इसके साथ अष्ट
केन्द्रशा सतप्रदे शाः भी ह, जन्ह राज्य म नह गना जाता, क्य क वे प्रत्यक्ष रूप से केन्द्र-शासन के अधीन ह।
प्र.3 अध्या पका – भवतु, अ प यूयं जानीथ यद् एतेषु राज्येषु अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽ स्त यः सप्तभ गन्यः एकः
भ्राता च इ त नाम्ना प्र थतः अ स्त ?
आम्, जानीमः। अष्टराज्यानाम् एकः समवायः ‘सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च’ इ त नाम्ना प्र थतः अ स्त। (हाँ, हम जानते ह।
आठ राज्य का एक समूह ‘सात बहन और एक भाई’ नाम से प्र सद्ध है।)
पाठे छात्राः साश्चय परस्परं पश्यन्तः वद न्त — “सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च !”
शब्दाथः: समवायः = समाहारः (समूह) · प्र थतः = प्रख्यातः (प्र सद्ध) · जानीथ = अवगच्छथ (तुम सब जानते हो
— मध्यमपुरुष बहुवचन)।
प्र.4 ीशः – इमा न राज्या न सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च इ त कमथ कथ्यन्ते ?
सामा जक-सांस्कृ तक-प रदृश्यानां साम्याद् भौगो लकवै शष्ट्यात् च इमा न राज्या न ‘सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च’ इ त
उक्तोपा धना प्र थता न। (सामा जक-सांस्कृ तक दृश्य क समानता के कारण तथा भौगो लक वशेषता के कारण ये राज्य इस नाम
से प्र सद्ध ह।)
अध्या पका स्पष्टं कथय त — “प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वतते।” (यह प्रयोग प्रतीकात्मक है।) अथात् ‘भ गनी’ तथा ‘भ्राता’ इ त शब्दौ
वास्त वकं कौटु म्बकं सम्बन्धं न सूचयतः, अ पतु समानताया: प्रतीकम् स्तः।
ऐसा क्य : इन आठ राज्य क भाषाएँ अलग ह, पर उनका पहाड़ी-वनप्रधान भूगोल, जनजातीय समाज, पव-
परम्पराएँ और कला-रु च एक जैसी ह। इसी साम्य को दखाने के लए पुस्तक ने ‘बहन और भाई’ का प्रतीक चुना है
— स क्कम बाद म जुड़ा और क्षेत्रफल म छोटा है, इस लए वह ‘लघुः भ्राता’ कहलाता है।
Page 2 of 30
Page 4
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 सव छात्राः – अहो ! अत्यन्तं सुखकरी वाता। ावयतु तावद् यत् का न ता न राज्या न इ त ?
ता न अष्ट राज्या न स न्त — अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरम्, मजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डम्, त्रपुरा च (इ त सप्त
भ गन्यः), तैः सह लघुः भ्राता स क्कमः। (वे आठ राज्य ह — अरुणाचल प्रदे श, असम, म णपुर, मजोरम, मेघालय, नागालैण्ड
और त्रपुरा; इनके साथ छोटा भाई स क्कम।)
अध्या पका उत्तरं ोकद्वयेन ददा त, ततः गद्येन — “इ ं भ्रात्रा स क्कमेन सह भ गनीसप्तके इमा न राज्या न स न्त ... यद्य प
क्षेत्रप रमाणैः इमा न लघू न वतन्ते तथा प गुणगौरवदृष्ट्या बृहत्तरा ण प्रतीयन्ते।”
भावः: क्षेत्रफल से छोटे होने पर भी गुण और गौरव क दृ ष्ट से ये राज्य बहुत बड़े प्रतीत होते ह — पुस्तक इन्ह
भारतवृक्षे पुष्प-स्तबकसदृशा न (भारत रूपी वृक्ष पर पुष्प-गुच्छ के समान) कहती है।
प्र.6 स्वरा – अन्यत् कम प वै शष्ट्यम स्त एतासाम् ?
आम्, नूनम् अ स्त एव। (हाँ, नश्चय ही है।) अध्या पकायाः उत्तरे त्री ण वै शष्ट्या न स न्त —
स्वाधीनता — भ्रात्रा सह इमाः सप्तभ गन्यः स्वीये प्राचीने तहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः; न केना प शासकेन इमाः
स्वायत्तीकृताः। (प्राचीन इ तहास म ये प्रायः स्वतन्त्र ही रह ; कसी शासक ने इन्ह अपने अधीन नह कया।)
प्राकृ तक-सम्पत् — पवत-वृक्ष-पुष्प-प्रभृ त भः प्राकृ तकसम्प ः सुसमृद्धा न स न्त इमा न राज्या न; भारतवृक्षे पुष्प-
स्तबकसदृशा न वराजन्ते एता न।
जनजा तबहुलता तथा कला — गारो-खासी-नागा- मजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः अत्र नवस न्त। एतत्प्रादे शकाः
शरीरेण ऊज स्वनः, बहुभाषा भः सम न्वताः, पवपरम्परा भः प रपू रताः, स्वलीला-कलासु च नष्णाताः स न्त।
प्र.7 मालती – महोदये ! तत्र तु वंशवृक्षाणां वना न अ प प्राप्यन्ते ?
आम्। अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुय वद्यते, अतः प्रदे शेऽ स्मन् हस्त शल्पानां बाहुल्यं वतते। (हाँ। यहाँ बाँस के वृक्ष क प्रचुरता है,
इस लए इस प्रदे श म हस्त शल्प क बहुलता है।)
पाठस्य वाक्यम् — “आवस्त्राभूषणेभ्यः गृह नमाणपयन्तं प्रायः वंशवृक्ष न मतानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रयते।” (वस्त्र-आभूषण से लेकर
घर बनाने तक प्रायः बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग कया जाता है।) साम्प्रतं वंशोद्योगोऽयम् अन्तारा यख्या तम्
अवाप्तोऽ स्त। (आजकल यह बाँस-उद्योग अन्तराष्ट्रीय ख्या त प्राप्त कर चुका है।)
कारण: वषा-बहुल तथा पवतीय भू म म बाँस सुगमतया उगता है; जो वस्तु प्रचुर मात्रा म उपलब्ध हो, वही उस प्रदे श
के शल्प का आधार बनती है — इसी लए यहाँ वंश- शल्प इतना वक सत हुआ।
Page 3 of 30
Page 5
as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
मृदुलः – मान्ये ! क भ्रमणाय भ्रातृ-भ गनीप्रदे शोऽयं समीचीनः ?
e
प्र.8
m l as
.co a g
a s em
आम्g,lअतीव समीचीनः। एता न राज्या न तु भ्रमणाथ स्वगसदृशा न स न्त, अतः अवश्यं चलामः। (हाँ, बहुत उपयुक्त है। ये
a
राज्य तो भ्रमण के लए स्वग के समान ह, अतः हम अवश्य चलगे।)
o m
. c ag
अ भनवः पूवमेव कथय त — “भ्रातृ-भ गनीप्रदे शोऽयं ब ाकषकः इ त प्रतीयते।” सव छात्राः उ ैः वद न्त — “आगा म न अवकाशे
वयं तत्रैव गन्तु मच्छामः।” स्वरा अध्या पकाम् अ प सह गन्तुm
s e ं प्राथयते, अध्या पका च वद त — “रोचते मेऽयं वचारः।”
a gla
शब्दाथः: ब ाकषकः = अत्याकषकः (अत्य धक आकषक) · समीचीनः = उ चतः/उपयुक्तः · स्वगसदृशा न =
स्वगतुल्या न।
co m
em.
m l as
m .co a g
ase ाख्या (पदच्छे दः · अन्वयः · अथः · भावः) — पृष्ठ 86
agl
ोक-
अध्या पकायाः मुखेन उक्तौ ोकौ
m a s
.co agl
ोकौ
a s em
प्र.1
a gl ।
अद्वयं मत्रयं चैव न- त्र-युक्तं तथाद्वयम्
सप्तराज्यसमूहोऽयं भ गनीसप्तकं मतम्॥ — अस्य ोकस्य पदच्छे दम्, अन्वयम्, अथ भावं च लखत।
co m
m .
m as e
.co a g l
m
यह ोक पहेली क शैली म सात बहन के नाम गनाता है — प्रत्येक राज्य को उसके पहले अक्षर से सू चत कया गया है।
l a se
ag पद च् छे द ः — अ-द्वयम् + मत्रयम् + च + एव + न-ित्र-युक्तम् + तथा + अद्वयम्।
se m
सप्त-राज्य-समूहः + अयम् + भिगनी-सप्तकम् + मतम्।
com g l a
m . a
gl ase
a
अन्वयः — अ-द्वयम्, म-त्रयम्, न-ित्र-युक्तं च एव, तथा अद्वयम् (इित) अयं सप्तराज्यसमूहः भिगनीसप्तकं मतम्।
co m
m .
as e
अथः — ‘अ’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘म’ से आरम्भ होने वाले तीन, ‘न’ तथा ‘ त्र’ से युक्त (एक-एक) — इस प्रकार यह सात
m
.co
राज्य का समूह ‘भ गनीसप्तक’ (सात बहन) माना गया है।
a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
em . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 4 of 30
Page 6
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
ोक का सङ् केत कतने राज्या न
अ-द्वयम् २ अरुणाचलपदे शः, असमः
म-त्रयम् ३ मिणपुरम्, मेघालयः, िमजोरमः
न-युक्तम् १ नागालै ण्डम्
त्र-युक्तम् १ ित्रपुरा
योगः ७ भिगनीस प्तकम्
भावः — क व ने सात राज्य के नाम याद रखने का सरल उपाय दया है — आद्याक्षर के आधार पर गणना। ‘अ’ के दो, ‘म’ के तीन,
‘न’ का एक और ‘ त्र’ का एक — कुल सात। यही ‘सप्तभ गन्यः’ ह।
ाकरण-सङ् केत: ‘अद्वयम्’, ‘मत्रयम्’, ‘भ गनीसप्तकम्’ — तीन नपुंसक लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, एकवचन के
समूहवाचक पद ह (द्वयम्, त्रयम्, सप्तकम् = समुदाय)। ‘मतम्’ भी नपुंसक लङ्ग प्रथमा एकवचन — वधेय- वशेषण
के रूप म प्रयुक्त।
प्र.2 तेन युक्तो लघुः भ्राता स क्कमः इ त व ुतः।
पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥ — अस्य ोकस्य पदच्छे दम्, अन्वयम्, अथ भावं च लखत।
यही ोक पाठ का शीषक भी है — इसम आठवाँ राज्य स क्कम जोड़कर सम्पूण ऐशान्य कोण को दे खने का नमन्त्रण दया
गया है।
पद च् छे द ः — ते न + युक्तः + लघुः + भ ाता + िसिक्कमः + इित + िव त
ु ः।
पश्यत + कोणम् + ऐशान्यम् + भारतस्य + मनोहरम्।
अन्वयः — ते न युक्तः लघुः भ ाता िसिक्कमः इित िव त
ु ः। (यूयं) भारतस्य मनोहरम् ऐशान्यं कोणं पश्यत।
अथः — उस (सप्तराज्यसमूह) के साथ जुड़ा हुआ छोटा भाई ‘ स क्कम’ नाम से प्र सद्ध है। (हे छात्रो!) भारत के मनोहर ईशान
(उत्तर-पूव) कोण को दे खो।
भावः — सात बहन के साथ आठवाँ राज्य स क्कम ‘लघु भ्राता’ के रूप म जुड़ता है — इसी लए पूरा समूह ‘अष्टभ गन्यः’ अथवा
‘सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च’ कहलाता है। दूसरी पं क्त म क व ‘पश्यत’ (लोट् लकार, मध्यमपुरुष, बहुवचन) कहकर पाठक को इस
सुन्दर पूव त्तर भारत क ओर आँख उठाने का आमन्त्रण दे ता है।
Page 5 of 30
Page 7
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
‘ऐशान्यं कोणम्’ क्या है: ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेट के अनुसार ईशानी = North-East। भारत के मान चत्र म
यही उत्तर-पूव कोना है, जहाँ ये आठ राज्य बसे ह। ‘मनोहरम्’ तथा ‘ऐशान्यम्’ दोन ‘कोणम्’ के वशेषण ह —
नपुंसक लङ्ग, द्वतीया वभ क्त, एकवचन।
वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 88–89
शब्दाथ-सारणी तथा ‘मातृभाषया अथ लखत’ स्तम्भः
शब्दाथाः
प्र.1 अधो ल खतानां पाठगतशब्दानां संस्कृत-अथ, हन्द -अथ, आङ् ग्ल-अथ च लखत। (मातृभाषया अथ लखत)
पाठ क दोन शब्दाथ-सार णयाँ नीचे एक साथ द गई ह। ‘मातृभाषया अथ लखत’ स्तम्भ म हन्द -भाषी छात्र ‘ हन्द ’ वाला
अथ लखगे; जनक मातृभाषा अन्य है, वे अपनी भाषा म वही अथ लख।
Page 6 of 30
Page 8
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH
स्वदे शस्य नजराष्ट्रस्य अपने दे श का Of our country
वैिचत्र्यम् व शष्टं स्वरूपम् िविचत्रता Uniqueness
पवहिन्त प्रकषण वह न्त बहती है ं Flows
भू-वैिवध्यम् भूमेः व वधता भूिम की िविवधता Land diversity
पीठस्थलािन खण्डस्थला न पठार Plateau
जानीथ अवगच्छथ जानते हो (You all) Know
ऐशान्यम् पूव त्तर दशा पूव त्तर िदशा North-East corner
ातुम ् वे दतुम् जानने के िलए To know
भागेभ्यः खण्डेभ्यः भागों से From parts
समवायः समाहारः समूह Combination
के न्द शािसतपदे शाः प्रत्यक्षं केन्द्रशासनाधीनाः प्रदे शाः के न्द द्वारा शािसत पदे श Union Territories
अितिरच्य अ त रक्तभावेन इसके अितिरक्त Besides
पिथतः प्रख्यातः पिस द्ध Famous
पतीकात्मकः साङ् के तकः पतीकात्मक Symbolic
साम्याद् सादृश्याद् समानता के कारण Because of similarity
उक्तोपािधना उक्तेन नाम्ना िदए हएु नाम से By the given name
ेत्र पिरमाणैः क्षेत्रफलस्य प रमाणेन ेत्रफल के नाप से By extent of area
गण
ु गौरवदृ ष्ट ा गुणस्य गौरवस्य च दृष्ट्या गुण एवं गौरव की दृ िष्ट से In terms of virtues and glory
बहृ त्तरािण वशाला न बहुत बड़ े Very significant
स्वाधीनाः स्वतन्त्राः स्वतन्त्र Independent
स्वायत्तीकृ ताः अधीनीकृताः अपने अधीन िकए गए Captured / Autonomous
पाकृ ितकसंपिद् भः प्रकृ तजात- वभवैः पाकृितक संपदाओं से With rich natural resources
पुष्पस्तबकसदृ शािन पुष्पपुञ्जसमाना न पुष्प-गुच्छ के समान Like flower bouquet
साविहतमनसा सावधानमनसा ध्यानपूवक With attention
Page 7 of 30
Page 9
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
ऊजिस्वनः ऊजायुक्ताः शिक्तशाली Energetic
पवपरम्परािभः उत्सवपरम्परा भः उ त्सवों की परंपरा से By the festive traditions
पिरपूिरताः प रपूणाः भरपूर Full of
स्वलीलाकलािभः नजके ल-कला भः अपनी लीलाओं से By own amusements and pastimes
िनष्णाताः पारङ्गताः िनपुण Experts / Master
वंशवृ ाणाम् वंशपादपानाम् बाँस के वृ ों के Of bamboo trees
ब ाकषकः अत्याकषकः अत्यिधक आकषक Very attractive
Tip: इन शब्द म बहुत-से तृतीया-बहुवचन के रूप ह — प्राकृ तकसंप ः, पवपरम्परा भः, स्वलीलाकला भः,
क्षेत्रप रमाणैः। इन्ह ‘…के द्वारा / …से’ प ढ़ए, तभी वाक्य का अथ खुलता है।
अत्र इदम् अवधेयम् — पृष्ठ 90
ाकरण-पे टका — दश दशः
ाकरणम्
प्र.1 पूवाग्नेयी द क्षणा च नैऋती प मा तथा।
वायवी चोत्तरैशानी ऊध्वा चाधो दशो दश॥ — ोकस्य पदच्छे दम् अथ च लखत। दश दशः नामतः लखत।
यह ोक दस दशाओं के नाम एक ही पं क्त म गना दे ता है।
पद च् छे द ः — पूव + आग्ने यी + दि णा + च + नै ऋ ती + पिश्चमा + तथा।
वायवी + च + उत्तरा + ऐशानी + ऊध्व + च + अधः + िदशः + दश।
अन्वयः — पूव , आग्ने यी, दि णा च, नै ऋ ती, पिश्चमा तथा, वायवी च, उत्तरा, ऐशानी, ऊध्व च अधः (इित) दश
िदशः।
अथः — पूव, आग्नेय, द क्षण, नैऋत्य, प श्चम, वायव्य, उत्तर, ईशान, ऊध्व (ऊपर) तथा अधः (नीचे) — ये दस दशाएँ ह।
Page 8 of 30
Page 10
as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
दक् (संस्कृतम्) ENGLISH दक् (संस्कृतम्) ENGLISH
m l a se
.co ag
पूव East आग्नेयी South-East
se m
g l a
a
दि णा South नैऋती South-West
पिश्चमा West वायवी North-West
. com ag
उत्तरा North
e m ईशानी North-East
Up / Highgl
as
ऊध्व
a अधः Down / Low
co m
m.
क्रम कैसे चलता है: ोक पूव से आरम्भ करके घड़ी क दशा म घूमता है — पूवा → आग्नेयी → द क्षणा →
as e
omम ऊपर-नीचे जोड़ने से कुल दश दशः हो जाती ह। l
नैऋती → प श्चमा → वायवी → उत्तरा → ईशानी। इस प्रकार चार मुख्य दशाओं के बीच-बीच म चार कोण- दशाएँ
आती ह।.cअन्त a g
a s em
a gl
m a s
.co agl
प्र.2 पाठस्य शीषके ‘कोणम् ऐशान्यम्’ इत्यस्य कः अथः ? एतस्य पाठे न सह कः सम्बन्धः ?
se m
g l a
a
‘ऐशान्यं कोणम्’ इत्यस्य अथः — ईशान-कोणः, अथात् उत्तर-पूव दशा (North-East corner)। (‘ऐशान्य कोण’ का अथ
है उत्तर-पूव कोना।)
. com
‘अत्र इदम् अवधेयम्’ इ त पे टकायाम् उक्तम् — ईशानी – North-East। शब्दाथ-सारण्यां च —em
m a s
l कोणे वतन्ते। अतः क वः वद त
o पाठे व णता न अष्ट राज्या न “देशस्य पूव त्तरभागे स्थता न”, अथात् भारतस्यagऐशान्ये
ऐशान्यम् = पूव त्तर दशा।
सम्बन्धः.c—
s m कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” — भारत के इसी मनोहर उत्तर-पूव कोने को देखो।
e“पश्यत
gl a—
a
se m
m एकवचनम्। a
ाकरणम्: ‘ऐशान्यम्’ पदं ‘ईशान’ शब्दात् ष्यञ्-सदृश त द्धतप्रत्ययेन नष्पन्नं वशेषणम् अ स्त; अत्र ‘कोणम्’
. coक्तः a g l
em
इत्यस्य वशेषणत्वात् नपुंसक लङ्गे द्वतीया वभ
a s
agl
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 90
co m
m .
as e
com
प्रश्नः १ : अधो ल खतानां प्रश्नानाम् एकपदे न उत्तरं लखत
. a g l
m
ase
अभ्यासः
agl c
अस्माकं दे शे क त राज्या न स न्त ?
m .
e
प्र.1 (क)
m a s
e m . co agl
as
अष्टा वश तः। (अ ाईस।)
a g l
पाठे स्वरा वद त — “अस्माकं दे शे अष्टा वश तः राज्या न स न्त।”
com
m .
m ase
.co
a g l Page 9 of 30
Page 11
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
Tip: एकपदे न उत्तर दे ते समय केवल वही एक पद ल खए जो प्रश्नवाचक शब्द (यहाँ ‘क त’) का स्थान लेता है —
पूरा वाक्य नह ।
प्र.1 (ख) प्राचीने तहासे काः स्वाधीनाः आसन् ?
सप्तभ गन्यः। (सात बहन अथात् पूव त्तर के सात राज्य।)
पाठवाक्यम् — “भ्रात्रा सह इमाः सप्तभ गन्यः स्वीये प्राचीने तहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः।”
ाकरणम्: ‘काः’ तथा ‘सप्तभ गन्यः’ दोन स्त्री लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, बहुवचन ह — इसी लए क्रया भी
बहुवचन ‘आसन्’ है।
प्र.1 (ग) केषां समवायः ‘सप्तभ गन्यः’ इ त कथ्यते ?
अष्टराज्यानाम्। (आठ राज्य का।)
पाठवाक्यम् — “एतेषु राज्येषु अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽ स्त यः सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च इ त नाम्ना प्र थतः अ स्त।”
ध्यान द: प्रश्न ‘केषां’ (षष्ठी बहुवचन) पूछता है, अतः उत्तर भी षष्ठी बहुवचन म — ‘अष्टराज्यानाम्’। समूह आठ
राज्य का है; उसम से सात ‘भ गन्यः’ और एक ( स क्कम) ‘भ्राता’ कहलाता है।
प्र.1 (घ) अस्माकं दे शे क त केन्द्रशा सतप्रदे शाः स न्त ?
अष्ट। (आठ।)
पाठवाक्यम् — “एतद् अ त रच्य अष्टकेन्द्रशा सतप्रदे शाः अ प स न्त।”
शब्दाथः: केन्द्रशा सतप्रदे शाः = प्रत्यक्षं केन्द्रशासनाधीनाः प्रदे शाः (Union Territories) — वे प्रदे श जो सीधे
केन्द्र सरकार के अधीन ह।
Page 10 of 30
Page 12
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्र.1 (ङ) सप्तभ गनी-प्रदे शे कः उद्योगः सवप्रमुखः ?
वंशोद्योगः। (बाँस का उद्योग।)
पाठवाक्यम् — “साम्प्रतं वंशोद्योगोऽयम् अन्तारा ष्ट्रयख्या तम् अवाप्तोऽ स्त।”
कारण: “यतो ह अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुय वद्यते” — यहाँ बाँस प्रचुर मात्रा म मलता है, इस लए वस्त्र-आभूषण से
लेकर गृह नमाण तक बाँस का ही उपयोग होता है और वही यहाँ का प्रमुख उद्योग बन गया।
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 90–91
प्रश्नः २ : अधो ल खतानां प्रश्नानां पूणवाक्येन उत्तरं लखत
अभ्यासः
प्र.2 (क) भ्रातृस हत-भ गनीसप्तके का न राज्या न स न्त ?
भ्रातृस हत-भ गनीसप्तके अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरम्, मजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डम्, त्रपुरा स क्कमः च इ त
अष्ट राज्या न स न्त।
(भाई स हत बहन-सप्तक म अरुणाचल प्रदे श, असम, म णपुर, मजोरम, मेघालय, नागालैण्ड, त्रपुरा और स क्कम — ये आठ राज्य
ह।)
पाठवाक्यम् — “इ ं भ्रात्रा स क्कमेन सह भ गनीसप्तके इमा न राज्या न स न्त — अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरम्, मजोरमः,
मेघालयः, नागालैण्डं, त्रपुरा चे त।”
Tip: ‘भ्रातृस हत’ शब्द का अथ है ‘भाई के साथ’ — अतः उत्तर म स क्कम को अवश्य जो ड़ए, तभी संख्या आठ
बनती है। केवल ‘सप्तभ गन्यः’ पूछा जाए तो स क्कम छोड़ द जए।
प्र.2 (ख) इमा न राज्या न सप्तभ गन्यः इ त कमथ कथ्यन्ते ?
सामा जक-सांस्कृ तक-प रदृश्यानां साम्याद् भौगो लकवै शष्ट्यात् च इमा न राज्या न ‘सप्तभ गन्यः’ इ त कथ्यन्ते।
(सामा जक तथा सांस्कृ तक दृश्य क समानता के कारण एवं भौगो लक वशेषता के कारण ये राज्य ‘सात बहन’ कहे जाते ह।)
अध्या पका योजय त — “प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वतते।” (यह प्रयोग प्रतीकात्मक है — वास्त वक भाई-बहन का सम्बन्ध नह ।)
Page 11 of 30
Page 13
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
तक: जब अनेक प्रदे श का भूगोल, जनजीवन, पव और कला एक-सी हो, तब उन्ह एक कुटु म्ब के रूप म दे खना
सरल हो जाता है। इसी दृ ष्ट से पुस्तक ‘भ गनी’ शब्द को साम्य का प्रतीक बनाती है।
प्र.2 (ग) ऐशान्यकोणप्रदे शेषु के नवस न्त ?
ऐशान्यकोणप्रदे शेषु गारो-खासी-नागा- मजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः नवस न्त।
(उत्तर-पूव कोण के प्रदे श म गारो, खासी, नागा, मजो, लेप्चा आ द अनेक जनजातीय लोग रहते ह।)
पाठवाक्यम् — “जनजा तबहुलप्रदे शोऽयम्। गारो-खासी-नागा- मजो-लेप्चा-प्रभृतयः बहवः जनजातीयाः अत्र नवस न्त।”
पाठ आगे जोड़ता है: “शरीरेण ऊज स्वनः एतत्प्रादे शकाः बहुभाषा भः सम न्वताः, पवपरम्परा भः प रपू रताः,
स्वलीला-कलासु च नष्णाताः स न्त।”
प्र.2 (घ) पूव त्तरप्रादे शकाः केषु नष्णाताः स न्त ?
पूव त्तरप्रादे शकाः स्वलीला-कलासु नष्णाताः स न्त।
(पूव त्तर के नवासी अपनी लीला-कलाओं म नपुण ह।)
पाठवाक्यम् — “... पवपरम्परा भः प रपू रताः, स्वलीला-कलासु च नष्णाताः स न्त।”
ाकरणम्: ‘केषु’ तथा ‘स्वलीला-कलासु’ दोन सप्तमी वभ क्त, बहुवचन म ह। ‘ नष्णातः’ (= पारङ्गतः, नपुण)
के योग म वषय सप्तमी म आता है — जैसे ‘सः ग णते नष्णातः’।
प्र.2 (ङ) वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः कुत्र क्रयते ?
आवस्त्राभूषणेभ्यः गृह नमाणपयन्तं प्रायः सवत्र वंशवृक्ष न मतानां वस्तूनाम् उपयोगः क्रयते।
(वस्त्र तथा आभूषण से लेकर घर बनाने तक प्रायः सवत्र बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग कया जाता है।)
पाठवाक्यम् — “प्रदे शेऽ स्मन् हस्त शल्पानां बाहुल्यं वतते। आवस्त्राभूषणेभ्यः गृह नमाणपयन्तं प्रायः वंशवृक्ष न मतानां वस्तूनाम्
उपयोगः क्रयते।”
Page 12 of 30
Page 14
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
क्य : क्य क “अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुय वद्यते” — बाँस यहाँ सहज उपलब्ध है, इस लए वह वस्त्र, आभूषण, बतन,
घर — सबका क ा माल बन गया है। यही आगे चलकर अन्तराष्ट्रीय ख्या त वाला वंशोद्योग बना।
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 91
प्रश्नः ३ : अधो ल खतेषु पदे षु प्रकृ त-प्रत्यय वभागं कुरुत (यथा — गन्तुम् = गम् + तुमुन्)
अभ्यासः
प्र.3 (क) ातुम् = ............... + ...............
ातुम् = ा + तुमुन्। (‘ ा’ धातु + ‘तुमुन्’ प्रत्यय = जानने के लए।)
नयम: तुमुन् प्रत्यय धातु से जुड़कर ‘…ने के लए’ अथ वाला अव्यय बनाता है। उदाहरण म दया ‘गन्तुम् = गम् +
तुमुन्’ भी यही है। ऐसे पद अव्यय होते ह — इनका रूप कभी नह बदलता।
और उदाहरण: पठ् + तुमुन् = प ठतुम्, दृश् + तुमुन् = द्रष्टु म्, ु + तुमुन् = ोतुम्।
प्र.3 (ख) व ुतः = ............... + ...............
व ुतः = व + ु + क्त। (उपसग ‘ व’ + ‘ ु’ धातु + ‘क्त’ प्रत्यय = वख्यात, प्र सद्ध।)
नयम: क्त भूतका लक कमवाच्य कृदन्त प्रत्यय है; यह वशेषण बनाता है और लङ्ग-वचन- वभ क्त के अनुसार
चलता है। यहाँ पुँ ल्लङ्ग प्रथमा एकवचन — ‘ व ुतः’। ोक म यह ‘ स क्कमः’ का वशेषण है।
तुलना: ु + क्त = ुतः (सुना हुआ); व जुड़ने पर अथ बदलकर ‘चार ओर सुना गया’ अथात् ‘प्र सद्ध’ हो जाता है।
प्र.3 (ग) अ त रच्य = ............... + ...............
अ त रच्य = अ त + रच् + ल्यप्। (उपसग ‘अ त’ + ‘ रच्’ धातु + ‘ल्यप्’ प्रत्यय = इसके अ त रक्त, इससे अ धक।)
Page 13 of 30
Page 15
as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
नयम: ‘क्त्वा’ प्रत्यय तब ल्यप् बन जाता है जब धातु के पहले उपसग लगा हो। जैसे — गम् + क्त्वा = गत्वा, परन्तु
m as e
l
आ + गम् + ल्यप् = आगत्य। यहाँ ‘अ त’ उपसग है, इस लए क्त्वा नह , ल्यप् लगा।
.co a g
a s em
gl उदाहरण: व + हस् + ल्यप् = वहस्य; प्र + णम् + ल्यप् = प्रणम्य; आ + धृ + ल्यप् = आधृत्य (यह पद
aअभ्यास
और
४ के नदश म ही आया है)।
com
e m . ag
g l as
प्र.3 (घ) a
पठनीयम् = ............... + ...............
co m
em.
m l as
.co g
पठनीयम् = पठ् + अनीयर्। (‘पठ् ’ धातु + ‘अनीयर्’ प्रत्यय = पढ़े जाने योग्य।)
a
emअनीयर् वध्यथक कृत्य-प्रत्यय है — ‘…ने योग्य’, ‘…ना चा हए’ अथ दे ता है। संवाद म अध्या पका पूछती है
a s
a gl नयम:
— ‘अद्य क पठनीयम् ?’ अथात् ‘आज क्या पढ़ा जाना चा हए ?’
m a s
m.co agl
a se
पाठ के अन्य कृत्य-पद: कथनीयम् (कथ् + अनीयर्), आयोजनीयः (आ + युज् + अनीयर्), करणीयः (कृ +
l
ag
अनीयर्) — ये तीन भी इसी पाठ म आए ह।
co m
m .
m स as e
.co
अभ्यासात् जायते ः — पृष्ठ 91
a g l
a s em
प्रश्नः ४ : रेखाङ् कतम् पदम् आधृत्य प्रश्न नमाणं कुरुत
agl अभ्यासः
se m
com g l a
. a
em
प्र.4 (क) वयं स्वदे शस्य राज्यानां वषये ातु मच्छामः।
a s
उत्तर agl
वयं कस्य राज्यानां वषये ातु मच्छामः ?
co m
m .
as e
(हम कसके राज्य के वषय म जानना चाहते ह ?)
m l
.co a g
m व ध: रेखाङ् कत पद ‘स्वदे शस्य’ षष्ठी वभ क्त, एकवचन, पुँ ल्लङ्ग है। षष्ठी एकवचन का प्रश्नवाचक पद ‘कस्य’
s e
agla होता है। रेखाङ् कत पद हटाकर उसी वभ क्त-वचन का प्रश्नवाचक र खए, शेष वाक्य ज्य -का-त्य रहने द जए।
.c
s e m
m a
em . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 14 of 30
Page 16
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (ख) सप्तभ गन्यः प्राचीने तहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः।
काः प्राचीने तहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः ?
(कौन प्राचीन इ तहास म प्रायः स्वतन्त्र ही दे खी गईं ?)
व ध: ‘सप्तभ गन्यः’ स्त्री लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, बहुवचन है। स्त्री लङ्ग प्रथमा बहुवचन का प्रश्नवाचक रूप ‘काः’
है। य द पद पुँ ल्लङ्ग होता तो ‘के’ और नपुंसक लङ्ग होता तो ‘का न’ आता।
प्र.4 (ग) प्रदे शेऽ स्मन् हस्त शल्पानां बाहुल्यं वतते।
प्रदे शेऽ स्मन् केषां बाहुल्यं वतते ?
(इस प्रदे श म कनक बहुलता है ?)
व ध: ‘हस्त शल्पानाम्’ नपुंसक लङ्ग, षष्ठी वभ क्त, बहुवचन है; उसका प्रश्नवाचक रूप ‘केषाम्’ है (नपुंसक
तथा पुँ ल्लङ्ग दोन म षष्ठी बहुवचन ‘केषाम्’ ही होता है)।
प्र.4 (घ) एता न राज्या न तु भ्रमणाथ स्वगसदृशा न।
एता न राज्या न तु भ्रमणाथ क दृशा न (स न्त) ?
(ये राज्य तो भ्रमण के लए कैसे ह ?)
व ध: रेखाङ् कत पद ‘स्वगसदृशा न’ वशेषण है — गुण बताता है, वस्तु नह । वशेषण पर प्रश्न बनाते समय ‘ कम्’
नह , ‘क दृश्’ शब्द का रूप लगाया जाता है। यहाँ वशेष्य ‘राज्या न’ नपुंसक लङ्ग प्रथमा बहुवचन है, अतः
‘क दृशा न’।
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 91–92
Page 15 of 30
Page 17
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्नः ५ : यथा नदशम् उत्तरत
अभ्यासः
प्र.5 (क) ‘महोदये ! मम भ गनी कथय त’। अत्र ‘मम’ इ त सवनामपदं कस्यै प्रयुक्तम् ?
‘स्वरायै’ — अथात् स्वरा नाम्न्यै छात्रायै ‘मम’ इ त सवनामपदं प्रयुक्तम्।
(यहाँ ‘मम’ सवनाम स्वरा नाम क छात्रा के लए प्रयुक्त हुआ है।)
कैसे पहचान: संवाद म यह वाक्य स्वरा बोलती है — “स्वरा – महोदये ! मम भ गनी कथय त यत् ...”। ‘मम’ (मेरा)
उत्तमपुरुष का सवनाम है, इस लए वह हमेशा बोलने वाले क ओर संकेत करता है। संवाद म वक्ता का नाम दे खते ही
उत्तर मल जाता है।
ाकरणम्: ‘मम’ = अस्मद् शब्द क षष्ठी वभ क्त, एकवचन। प्रश्न ‘कस्यै’ (चतुथ एकवचन स्त्री लङ्ग) है, अतः
उत्तर भी चतुथ म — ‘स्वरायै’।
प्र.5 (ख) ‘सामा जक-सांस्कृ तकप रदृश्यानां साम्याद् इमा न उक्तोपा धना प्र थता न’। अ स्मन् वाक्ये प्र थता न इ त
क्रयापदस्य कतृपदं कम् ?
‘इमा न’ (इमा न राज्या न) इ त कतृपदम्।
(इस वाक्य म ‘प्र थता न’ क्रया का कता ‘इमा न’ अथात् ‘ये राज्य’ है।)
पहचान का तरीका: कता खोजने के लए क्रया से पू छए — ‘का न प्र थता न ?’ उत्तर मलेगा ‘इमा न’। साथ ही
दे खए क कता और क्रया का लङ्ग-वचन मलता है — ‘इमा न’ (नपुंसक लङ्ग, प्रथमा, बहुवचन) और ‘प्र थता न’
(नपुंसक लङ्ग, प्रथमा, बहुवचन)। यही मेल कता होने का प्रमाण है।
प्र.5 (ग) ‘एतेषां राज्यानां पुनः सङ् घटनं व हतम्’। अत्र ‘सङ् घटनम्’ इ त कतृपदस्य क्रयापदं कम् ?
‘ व हतम्’ इ त क्रयापदम्।
(‘सङ् घटनम्’ कता का क्रयापद ‘ व हतम्’ है — अथात् ‘ कया गया’।)
Page 16 of 30
Page 18
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
पहचान: ‘ व हतम्’ व + धा धातु से क्त प्रत्यय द्वारा बना भूतका लक कृदन्त है, जो यहाँ क्रया का काम कर रहा है।
कता ‘सङ् घटनम्’ नपुंसक लङ्ग प्रथमा एकवचन है और ‘ व हतम्’ भी वही — लङ्ग-वचन का मेल इस जोड़ी को
पक्का कर दे ता है। पूरे वाक्य का अथ — ‘इन राज्य का पुनः गठन कया गया।’
प्र.5 (घ) ‘अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुय वद्यते’। अस्मात् वाक्यात् ‘अल्पता’ इ त पदस्य वपरीताथकं पदं चत्वा लखत ?
‘प्राचुयम्’।
(‘अल्पता’ का वपरीताथक पद ‘प्राचुयम्’ अथात् ‘बहुतायत / प्रचुरता’ है।)
पदम् अथः
अल्पता थोड़ ापन, कमी
पाचुयम् बहुतायत, पचुरता
वाक्यप्रयोगः: ‘पूव त्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां प्राचुय वद्यते, जलस्य अल्पता तु ना स्त।’ — यही जोड़ी अभ्यास ७ (छ) म
भी भरनी है।
प्र.5 (ङ) ‘क्षेत्रप रमाणैः इमा न लघू न वतन्ते’। अ स्मन् वाक्ये ‘स न्त’ इ त क्रयापदस्य क समानाथकं पदं प्रयुक्तम् ?
‘वतन्ते’।
(‘स न्त’ का समानाथक पद ‘वतन्ते’ है — दोन का अथ ‘ह’ होता है।)
अन्तर सम झए: ‘अस्’ धातु परस्मैपद है (अ स्त, स्तः, स न्त), जब क ‘वृत्’ धातु आत्मनेपद है (वतते, वतते,
वतन्ते)। अथ एक है, पर पद (परस्मैपद / आत्मनेपद) भन्न है। इसी पाठ म ‘वतते’ भी अनेक बार आया है —
‘संस्कृ तः महत्त्वाधा यनी वतते’, ‘प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वतते’।
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 92
Page 17 of 30
Page 19
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्नः ६ : अधः शब्दजालं प्रदत्तम् अ स्त। अ स्मन् उप रतः अधः, वामतः द क्षणं चे त आधारं कृत्वा साथक-शब्दान् रेखाङ् कयत (वग चत्र-जालम्)
अभ्यासः
प्र.6 वग चत्र-जालम् — उप रतः अधः तथा वामतः द क्षणं प ठत्वा साथकशब्दान् चनुत।
पुस्तक का ८ × १० का वग चत्र-जाल नीचे ज्य -का-त्य दया है। इसम कुल बीस साथक शब्द छपे ह — सत्रह पं क्तय म
(वामतः द क्षणम्) और तीन स्तम्भ म (उप रतः अधः)।
१ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८
१ ज न जा ितः म ित्र खा सी
२ च अ र िस िण पु ना गा
३ भा ता स िक्क पु रा ज्या िन
४ िम जो र मः र सं स्कृ ितः
५ पू व त्त र म् दे श स्य
६ ब स प्त भ िग न्यः गा रो
७ पा कृ ित कः वं श वृ ः
८ भ िग िन अ रु णा च लः
९ भा ता मे घा ल यः ध िम
१० ना गा लै ण्डम् ब ह वः जोः
वामतः द क्षणं (पं क्तषु) प्राप्ताः शब्दाः —
Page 18 of 30
Page 20
as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
पङ् क्तः वगाः शब्दः अथः
m १–४ as e
१
.co
जनजाितः जनजा त (tribe)
a g l
se m
१
g l a खासी मेघालय क एक जनजा त
a
७–८
२ ७–८ नागा नागालैण्ड क एक जनजा त
co m
३ १–२ भाता
em . भाई (यहाँ स क्कम) ag
as
राgज्lयािन
३ ६–८
a राज्य (बहुवचन)
िमजोरमः
co m
४ १–४ मजोरम राज्य
e m.
com as
संस्कृितः
l
४ ६–८ संस्कृ त
. a g
m
ase
५ १–५ पूव त्तरम् उत्तर-पूव
agl५ ६–८ दे शस्य दे श का
स प्तभिगन्यः om a s
.c agl
६ २–६ सात बहन
se m
g l a
गारो
a
६ ७–८ मेघालय क एक जनजा त
७ १–४ पाकृितकः प्राकृ तक
co m
वंशवृ ः
m .
as e
७ ५–८ बाँस का वृक्ष
८ .co
m अरुणाचल gl
m
अरुणाचलः a
ase
४–८
agl ९ १–२ भाता भाई
se m
com a
मेघालयः
l
९ ३–६ मेघालय राज्य
. ण्डम् a g
e m
as
नागालै
agl
१० १–४ नागालैण्ड राज्य
१० ५–७ बहवः बहुत-से
co m
उप रतः अधः (स्तम्भेषु) प्राप्ताः शब्दाः —
m .
a se
com
.स्तम्भः l
ag अथः
sem
पङ् क्तयः शब्दः
a
agl ४ २–४ िसिक्कमः स क्कम राज्य
c
m .
m
मिणपुरम्
a s e
co agl
५ १–५ म णपुर राज्य
m .
६ १–३
l a se ित्रपुरा त्रपुरा राज्य
a g
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 19 of 30
Page 21
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
Check it yourself: जाल म पाठ के सात राज्य (अरुणाचलः, मजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डम्, म णपुरम्,
त्रपुरा, स क्कमः), तीन जनजा तयाँ (गारो, खासी, नागा) तथा शेष पाठ-शब्द छपे ह। असम का नाम जाल म नह
है — गनते समय यह मत भू लए। ऊपर क सारणी म जो अक्षर नारंगी ह वे कसी-न- कसी शब्द का भाग ह; धूसर
अक्षर केवल भरने के लए रखे गए ह।
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 93
प्रश्नः ७ : प कातः पदा न चत्वा रक्तस्थाना न पूरयत — [ स क्कमः, पूव त्तरराज्या न, अष्टा वश तः, स्वदे शस्य राज्यानाम्, अरुणाचलप्रदे शः,
असमः, म णपुरं, मजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रपुरा, जनजा तः, प्राचुयम्]
अभ्यासः
प्र.7 (क) छात्राः अद्य ............... वषये ातु मच्छ न्त।
छात्राः अद्य स्वदे शस्य राज्यानाम् वषये ातु मच्छ न्त।
(छात्र आज अपने दे श के राज्य के वषय म जानना चाहते ह।)
सङ् केत: ‘ वषये’ के पहले षष्ठी वभ क्त आती है — इस लए प का म से षष्ठी वाला पद ‘स्वदे शस्य राज्यानाम्’ ही
ठ क बैठता है। पाठ का मूल वाक्य — ‘वयं सव स्वदे शस्य राज्यानां वषये ातु मच्छामः।’
प्र.7 (ख) अस्माकं दे शे ............... राज्या न तथा अष्ट केन्द्रशा सतप्रदे शाः स न्त।
अस्माकं दे शे अष्टा वश तः राज्या न तथा अष्ट केन्द्रशा सतप्रदे शाः स न्त।
(हमारे दे श म अ ाईस राज्य तथा आठ केन्द्रशा सत प्रदे श ह।)
प्र.7 (ग) सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च इ त ............... कथ्यन्ते।
सप्तभ गन्यः एकः भ्राता च इ त पूव त्तरराज्या न कथ्यन्ते।
(‘सात बहन और एक भाई’ — इस नाम से पूव त्तर के राज्य कहे जाते ह।)
Page 20 of 30
Page 22
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
क्य यही पद: क्रया ‘कथ्यन्ते’ बहुवचन है और कमवाच्य म है; उसका कता नपुंसक लङ्ग प्रथमा बहुवचन चा हए
— ‘पूव त्तरराज्या न’ ठ क बैठता है। ‘ स क्कमः’ एकवचन है, इस लए यहाँ नह चलेगा।
प्र.7 (घ) सप्तभ गन्यः इत्युक्ता न राज्या न — ..............., ..............., ..............., ..............., ...............,
..............., ...............।
सप्तभ गन्यः इत्युक्ता न राज्या न — अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरं, मजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रपुरा।
(‘सात बहन’ कहे जाने वाले राज्य ह — अरुणाचल प्रदे श, असम, म णपुर, मजोरम, मेघालय, नागालैण्ड और त्रपुरा।)
ध्यान: यहाँ स क्कमः नह आएगा — वह ‘भ गनी’ नह , ‘लघुः भ्राता’ है। इसी लए प का म ‘ स क्कमः’ दया तो
गया है, पर वह इस प्रश्न-समूह म कह नह भरा जाता; वह वकल्प केवल जाँचने के लए रखा गया है।
प्र.7 (ङ) प्रदे शेऽ स्मन् ............... बाहुल्यम् अ स्त।
प्रदे शेऽ स्मन् जनजा तः बाहुल्यम् अ स्त।
(इस प्रदे श म जनजा त क बहुलता है।)
पाठवाक्यम् — “जनजा तबहुलप्रदे शोऽयम्।” (यह जनजा तबहुल प्रदे श है।)
ध्यान द: प का म शब्द ‘जनजा तः’ प्रथमा रूप म दया है; वाक्य म उसे समास के रूप म जनजा त-बाहुल्यम्
प ढ़ए, तभी अथ पूरा खुलता है — ठ क वैसे ही जैसे पाठ म ‘हस्त शल्पानां बाहुल्यं वतते’ आया है।
प्र.7 (छ) पूव त्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां ............... वद्यते।
पूव त्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां प्राचुयम् वद्यते।
(पूव त्तर राज्य म बाँस के वृक्ष क प्रचुरता है।)
पाठवाक्यम् — “यतो ह अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुय वद्यते।”
Tip: यही पद प्रश्न ५ (घ) म ‘अल्पता’ का वपरीताथक भी है — एक ही शब्द दो अभ्यास म काम आ गया।
Page 21 of 30
Page 23
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 93
प्रश्नः ८ : भन्नप्रकृ तकं पदं चनुत
अभ्यासः
प्र.8 (क) गच्छ त, पठ त, धाव त, अहसत्, क्र ड त
भन्नप्रकृ तकं पदम् — ‘अहसत्’।
(अलग पद है ‘अहसत्’।)
कारण: गच्छ त, पठ त, धाव त, क्र ड त — चार लट् लकारे (वतमानकाले), प्रथमपुरुष एकवचन ह। कन्तु ‘अहसत्’
लङ् लकारे (भूतकाले) प्रथमपुरुष एकवचन है — इसके आरम्भ म ‘अ’ (अडागम) लगा है, जो भूतकाल का चह्न
है।
प्र.8 (ख) छात्रः, सेवकः, शक्षकः, ले खका, क्र डकः
भन्नप्रकृ तकं पदम् — ‘ले खका’।
कारण: छात्रः, सेवकः, शक्षकः, क्र डकः — चार पुँ ल्लङ्गे अकारान्त शब्द ह (रामवत् रूप)। ‘ले खका’ स्त्री लङ्गम्
आकारान्त शब्द है (रमावत् रूप)।
प्र.8 (ग) पत्रम्, मत्रम्, पुष्पम्, आ ः, फलम्
भन्नप्रकृ तकं पदम् — ‘आ ः’।
कारण: पत्रम्, मत्रम्, पुष्पम्, फलम् — चार नपुंसक लङ्गे (फलवत्) ह और ‘म्’ म समाप्त होते ह। ‘आ ः’
पुँ ल्लङ्गम् है और वसगान्त है।
Page 22 of 30
Page 24
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्र.8 (घ) ा ः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, शाखा, वृषभः, सहः
भन्नप्रकृ तकं पदम् — ‘शाखा’।
कारण: व्या ः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, वृषभः, सहः — ये सब प्रा णवाचका न (पशु-प क्षवाचक) पुँ ल्लङ्ग पद ह।
‘शाखा’ प्राणी नह , वृक्षस्य अङ्गम् है और स्त्री लङ्ग भी है — इस प्रकार दो दृ ष्टय से भन्न है।
प्र.8 (ङ) पृ थवी, वसुन्धरा, ध रत्री, यानम्, वसुधा
भन्नप्रकृ तकं पदम् — ‘यानम्’।
कारण: पृ थवी, वसुन्धरा, ध रत्री, वसुधा — चार पृ थव्याः पयायाः (समानाथक) तथा स्त्री लङ्ग ह। ‘यानम्’ का अथ
है ‘वाहन’ — यह नपुंसक लङ्ग है और अथ क दृ ष्ट से भी इस समूह म नह आता।
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 94
प्रश्नः ९ : वशेष्य- वशेषणानाम् उ चतं मेलनं कुरुत
अभ्यासः
प्र.9 वशेषण-पदा न — अयम्, संस्कृ त व शष्टायाम्, महत्त्वाधा यनी, प्राचीने, एकः ; वशेष्य-पदा न — संस्कृ तः,
इ तहासे, प्रदे शः, समवायः, भारतभूमौ। उ चतं मेलनं कुरुत।
मेलनम् इदम् —
वशेषण-पदम् वशेष्य-पदम् लङ्गम् · वभ क्तः · वचनम् पाठे प्रयोगः
अयम् पदे शः पुँ ल्लङ्ग · प्रथमा · एकवचन जनजा तबहुलप्रदे शोऽयम्
संस्कृ ितिविशष्टायाम् भारतभूमौ स्त्री लङ्ग · सप्तमी · एकवचन व वध-संस्कृ त व शष्टायां भारतभूमौ
महत्त्वाधाियनी संस्कृितः स्त्री लङ्ग · प्रथमा · एकवचन एतासां संस्कृ तः महत्त्वाधा यनी वतते
पाचीने इितहासे पुँ ल्लङ्ग · सप्तमी · एकवचन स्वीये प्राचीने तहासे
एकः समवायः पुँ ल्लङ्ग · प्रथमा · एकवचन अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽ स्त
Page 23 of 30
Page 25
as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions
मलाने का नयम: संस्कृत म वशेषण अपने वशेष्य के लङ्ग, वभ क्त और वचन — तीन का अनुसरण करता है।
. com
m a s emवशेष्य ढूँ ढ़ए।
gl चा हए —
इस लए पहले हर वशेषण का लङ्ग- वभ क्त-वचन पहचा नए, फर उसी लङ्ग- वभ क्त-वचन वाला
जैसे ‘संस्कृ त.cवoशष्टायाम्’ स्त्री लङ्ग सप्तमी एकवचन है, तो उसका जोड़ीदार भी वैसा ही होना
eमmौ’। इसी तरह ‘प्राचीने’ सप्तमी एकवचन है, अतः ‘इ तहासे’ के साथ जुड़ेगा। a
a s
agl
‘भारतभू
co m
Tip: ‘महत्त्वाधा यनी’ का ‘-ई’ अन्त स्त्री लङ्ग का सङ् केत है — इसी लए वह पुँ ल्लङ्ग ‘समवायः’ या ‘प्रदे शः’ के
e m . ag
as
साथ नह जुड़ सकता, केवल ‘संस्कृ तः’ के साथ जुड़ता है।
a g l
co m
m.
योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 94–95
m as e
o l
अ त रक्त-सूचनाः, अष्टराज्यानां सारणी तथा वै शष्ट्य-वणनम्
. c a g
a s em
योग्यता वस्तरः
agl
s
योग्यता वस्तरे प्रदत्ता न पञ्च तथ्या न संस्कृतभाषया लखत।
m a
प्र.1
m .co agl
l a se
g
पुस्तक ने पाँच अ त रक्त तथ्य दए ह — a
com
1. पत्काई इ त भारतस्य पूव त्तरभागे बमादे शेन सह सीमाव तक्षेत्रे स्थता पवतशृङ् खला अ स्त। (पत्काई भारत के पूव त्तर भाग म
m .
se
बमा के साथ लगते सीमावत क्षेत्र म स्थत एक पवतशृंखला है।)
o m l a
g लम्बी नद है।)
.c नद म णपुर, नागालैण्ड, मजोरम, असम तथा बांग्लादेश म बहने वाली ९००aकलोमीटर
2. बराकनद भारतस्य म णपुरं, नागालैण्डं, मजोरमः, असमः चे त राज्येषु एवञ्च बङ्गलादे शे वहन्ती ९०० क.मी. द घा नद अ स्त।
se m
(बराक
g l a 3. गारोपवतः, खासीपवतः, जय न्तयापवतः च उत्तरपूव यपीठस्थले स्थताः त्रयः पवतशृङ् खलाः स न्त। (उत्तर-पूव पठार पर
a स्थत ये तीन पवतशृंखलाएँ ह।)
se m
o m l a
4. मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः (कोयला), लौह-अयस्कः, स लमेनाइटः, क्षार शला, यूरे नयम् इत्यादयः ख नजसम्पदः प्रचुरं
.c a g
m
वद्यन्ते। (मेघालय के पठार पर कोयला, लौह-अयस्क, स लमे न ाइट, क्षार शला, यू रे नयम आ द ख नज-सम्पदाएँ प्रचु र मात्रा म
ह।)
l a se
agखः महाभारतं, रामायणं, पुराणा न इ त प्राचीनग्र ेषु अ प उपलभ्यते। (सात बहन के
5. सप्तभ गन्यन्तगतप्रदे शानाम् उल्ले
अन्तगत आने वाले प्रदे श का उल्लेख महाभारत, रामायण तथा पुराण जैसे प्राचीन ग्र म भी मलता है।)
. c om
m
ये तथ्य पाठ से कैसे जुड़ते ह: पाठ के आरम्भ म कहा गया था क ये राज्य ‘पूव हमालय-
a s em े णषु पत्काई-नागपवत-
. a gl उन्ह दो नाम — पत्काई और
cप्रदेoशे च स्थता न’ और ‘एतेषु बराक-ब्रह्मपुत्रा द-नद्यः प्रवह न्त’। योग्यता वस्तरः
asem
l
बराक — का वस्तार करता है, और ‘पीठस्थला न’ शब्द को गारो-खासी-जय न्तया पवत तथा मेघालय क ख नज-
a g
.c
सम्पदा से जोड़कर ठोस बना दे ता है।
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
com
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 30
Page 26
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 योग्यता वस्तरे प्रदत्ताया: सारण्याः आधारेण अष्टानां राज्यानां राजधान राजभाषां च लखत।
पुस्तक क सारणी के अनुसार —
क्र. राज्यम् राजधानी राजभाषा अन्याः भाषाः (केचन)
सं.
१. अरुणाचल- ईटानगरम् आङ् ग्लभाषा न्यीशी, दाफला, मजी, गल्ल गः, वंछो, ता गनः, हल- मरी, मोहपा,
पदे शः नाक्ट , आकः, तांग्सा, खम्ती इत्यादयः
२. असमः िदसपुरम् अस मया, बङ्गला, बङ्गला, डमासा, म शगः, काब , रम्भा, तनुआ, ताई-फाके, ताई-
बोडो, आङ् ग्लभाषा च ऐत , ताई-खम्ती
३. मिणपुर म् इम्फालः म णपुरी तंगखुलः, हम्मरः, पैते, लुशाई, थादौ / कुक
४. मेघ ालयः िशलांगः खासी, पुआरः, गारो, अबेङ्गः रेन्घा वा, अल गः, अकरवे (अल्वे वा) म , दुअलः,
आङ् ग्लभाषा च उइबोक्, चसकः, मेगामः, लङ्गोजमः वा, रुगा, गाओ-गं चगः,
पुआन् ख्यानीराम, भोई पुआइ, वारः
५. िमजोरमः आइजोलः मज़ो, आङ् ग्लभाषा च असो, छो, हलमः, ‘ हनारः’, लाई, लुसेई, मारा, मउ-खुमी, पैते,
थाडो-कुक च
६. नागालै ण् डम् कोिहमा आङ् ग्लभाषा ‘नागामी’, अस मया, ‘बङ्गला’ च
७. ित्रपुर ा अगरतला आङ् ग्लभाषा, बङ्गला च ‘कक-बरकः’ ‘ त्रपुरी’ वा, हलम्, रङ् खालः, चकमा च
८. िसिक्कमः गङ् गटोकः आङ् ग्लभाषा नेपाली, भू तया, लेप्चा, लम्बू, नेवारी, राय, गुरुंग, मंगाई, शेपा,
तामांगः, सुनवरः च
Did you know? सारणी का अ न्तम स्तम्भ ‘ ोतां स’ है — उसम हर राज्य क सरकारी वेबसाइट द गई है
(जैसे www.assam.gov.in, www.sikkim.gov.in)। प रयोजना-काय करते समय वह से नई जानकारी
ली जए।
प्र.3 योग्यता वस्तरे उक्तानां राज्यानां वै शष्ट्या न संक्षेपेण लखत।
‘सप्तभ गन्यः’ इ त प्र थतः राज्यसमूहः प्राकृ तकसौन्दयण अ त व शष्टः। प्रत्येकं राज्यस्य अ प स्वक यं महत्त्वम् अ स्त।
(‘सात बहन’ नाम से प्र सद्ध यह राज्य-समूह प्राकृ तक सौन्दय से अत्यन्त व शष्ट है; हर राज्य का अपना महत्त्व है।)
Page 25 of 30
Page 27
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
राज्यम् वै शष्ट्यम् (पुस्तकानुसारम्)
अरुणाचलपदे शः भारते अिस्मन् एव पदे शे सूयस्य अरुणोदयः सवपथमं भवित, अतः ‘अरुणाचलः’। अत्र तादृ शः पदे शः अिप अिस्त यत्र
आवष ं िहमपातः भवित।
असमः पूव ं कामरूपम् इित नाम्ना पिस द्धम्। अत्र खिनजम् इन्धनतैल ं तथा इन्धनािनलः (CNG) पचुरमात्रया दृ श्यते। लोके
बहृ त्तमः रमणीयः नदीद्वीपः माजुल ी असमे बह्मपुत्रनदे िस्थतः अिस्त।
मिणपुर म् अस्य उ ल्ले खः महाभारतािदगन्थेष ु अिप ल भ्यते। अत्र स म्पूण िवश्वे एकमात्रं राि यं प्ल वमानम् उ द्यानम् अिस्त, यत्
लोकटक-सरोवरे प्ल वते।
िमजोरम्, िसिक्कम, एतेषां राज्यानाम् अिप स्वकीयािन वैिशष्ट ािन सिन्त (पुस्तके नामतः न िवस्तािरतािन — छात्राः स्वयम् अन्वेष्टुं
मेघ ालय, ित्रपुर ा शक्नुविन्त)।
‘अरुणाचलः’ नाम का अथ: अरुण = उगते सूय क ला लमा, अचल = पवत। जहाँ भारत म सबसे पहले सूय दय
होता है, वही ‘अरुण का पवत’ — अरुणाचल। नाम स्वयं अपने अथ क व्याख्या कर दे ता है।
ध्यान द: मजोरम, स क्कम, मेघालय और त्रपुरा के वशेष तथ्य पुस्तक ने जानबूझकर खुले छोड़े ह — “ मजोरम्,
स क्कम, मेघालय, त्रपुरा राज्यानाम प स न्त वै शष्ट्या न।” यही आगे प रयोजनाकाय का वषय बनता है।
प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 96
प्रकल्प-काय (Project work)
प रयोजनाकायम्
प्र.1 “पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” इ त पाठस्य सन्दभ भ त्तपत्रे उत्तरपूवराज्यानां पृथक् पृथक् मान चत्रं
प्रदशयत। संस्कृतभाषया कस्या प राज्यस्य पञ्चवाक्यैः ववरणं लखत। (उदाहरणम् — नागालैण्डम् : हो न्बल्-
महोत्सवः अत्र प्र स ः।)
यह करके दखाने वाला काय है — उत्तर तुम्हारे अपने भ त्तपत्र (चाट) पर बनेगा। नीचे व ध, आवश्यक बात तथा एक नमूना
दया है।
व धः (कैसे कर) —
1. एक बड़े चाट-पत्र पर बीच म भारत का मान चत्र बनाकर ऐशान्य कोण को अलग रंग से भ रए।
2. उसके चार ओर आठ राज्य के पृथक्-पृथक् मान चत्र चपकाइए — पुस्तक के पृष्ठ ९६ पर नागालैण्ड का ऐसा ही मान चत्र
नमूने के रूप म दया है।
3. प्रत्येक मान चत्र के नीचे दे वनागरी ल प म संस्कृत नाम ल खए — अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरम्, मेघालयः, मजोरमः,
नागालैण्डम्, त्रपुरा, स क्कमः।
4. कसी एक राज्य को चुनकर उसके वषय म संस्कृत के पाँच वाक्य ल खए।
Page 26 of 30
Page 28
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
5. तथ्य पाठ तथा योग्यता वस्तरः क सारणी से ही ली जए (राजधानी, राजभाषा, पवत, नद , ख नज, वशेषता) — या सारणी म
द गई राज्य-वेबसाइट से।
उत्तम ववरणे कम् आवश्यकम् — राज्यस्य स्थ तः, राजधानी, भाषा, प्राकृ तकं वै शष्ट्यम् तथा एकम् उत्सवः अथवा उद्योगः —
पञ्चसु वाक्येषु एता न पञ्च तथ्या न आगच्छे युः।
नमूना उत्तर (मेघालयः) —
1. मेघालयः भारतस्य पूव त्तरभागे स्थतम् एकं राज्यम् अ स्त।
2. अस्य राजधानी शलांगः अ स्त।
3. अत्र खासी, पुआरः, गारो, आङ् ग्लभाषा च राजभाषाः स न्त।
4. गारोपवतः, खासीपवतः, जय न्तयापवतः च अ स्मन् उत्तरपूव यपीठस्थले स्थताः स न्त।
5. मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः, लौह-अयस्कः, स लमेनाइटः, क्षार शला, यूरे नयम् इत्यादयः ख नजसम्पदः प्रचुरं
वद्यन्ते।
( हन्द सार — मेघालय भारत के पूव त्तर भाग का एक राज्य है; राजधानी शलांग; राजभाषाएँ खासी, पुआर, गारो
और अंग्रेज़ी; यहाँ गारो, खासी और जय न्तया पवत ह; तथा यहाँ के पठार पर कोयला, लौह-अयस्क, स लमेनाइट,
क्षार शला और यूरे नयम जैसे ख नज प्रचुर मात्रा म मलते ह।)
प्र.2 पूव त्तरराज्यानां पयटनस्थलानां नामा न ल खत्वा तेषां सं क्षप्तं वणनं कुरुत। (उदाहरणम् — राज्यम् : असमः,
नाम : काजीरङ्गा रा यम् अभयारण्यम्, वणनम् : अत्र एकशृङ्गगजाः दृश्यन्ते। एतत् यूनेस्को- वश्व-प्रत्नक त-
स्थलम् अ स्त।)
पुस्तक के ढाँचे — राज्यम् / नाम / वणनम् — का ही पालन क जए। प्रत्येक स्थल के लए तीन पं क्तयाँ बनाइए और वणन
दो-तीन संस्कृत वाक्य म ल खए।
उत्तम उत्तर म क्या हो — स्थल कस राज्य म है, वहाँ क्या वशेष दखता है, और वह क्य प्र सद्ध है — तीन बात।
Page 27 of 30
Page 29
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (पाठ तथा योग्यता वस्तरः पर आधा रत) —
राज्यम् नाम वणनम्
असमः माजुल ी अयं ब्रह्मपुत्रनदे स्थतः अ स्त। लोके बृहत्तमः रमणीयः नद द्व पः एषः एव।
(यह ब्रह्मपुत्र नद म स्थत है; संसार का सबसे बड़ा और रमणीय नद -द्व प यही है।)
मिणपुर म् लोकटक- अत्र सम्पूण व े एकमात्रं रा ष्ट्रयं प्लवमानम् उद्यानम् अ स्त। इदम् उद्यानं लोकटक-सरोवरे
सरोवरः प्लवते।
(यहाँ सारे संसार का एकमात्र राष्ट्रीय तैरता हुआ उद्यान है, जो लोकटक झील पर तैरता है।)
नागालै ण् डम् होिन्बल्-महोत्सवः एषः महोत्सवः अत्र प्र सद्धः। अ स्मन् महोत्सवे राज्यस्य जनजातीनां नृत्यं, गीतं, वेशभूषा च
प्रदश्यन्ते।
(यह महोत्सव यहाँ प्र सद्ध है; इसम राज्य क जनजा तय के नृत्य, गीत और वेशभूषा दखाए
जाते ह।)
मेघ ालयः िशलांगः अयं मेघालयस्य राजधानी अ स्त। पवतैः वृक्षैः पुष्पैः च सुशो भतम् इदं स्थलं पयटकानां प्रयम्
अ स्त।
(यह मेघालय क राजधानी है; पवत , वृक्ष और पुष्प से सुशो भत यह स्थान पयटक को प्रय
है।)
सुझाव: जो स्थल पाठ म नह आए, उनके लए योग्यता वस्तरः क सारणी म द गई राज्य-वेबसाइट (जैसे
www.meghalaya.gov.in) दे खए और तब तथ्य ल खए — अपने मन से मत ग ढ़ए।
प्र.3 वद्यालये ‘उत्तरपूवसंस्कृ त दवसः’ (एकः वशेषः दवसः) आयोजनीयः। छात्राः व वधराज्यानां प रधानं नृत्यं
भोजनं वेशभूषां च प्रस्तुवन्तु। सम्पूणः कायक्रमः संस्कृत-संवाद-माध्यमेन एव करणीयः।
यह पूरी कक्षा का सामू हक काय है — इसक योजना नीचे द व ध से बनाइए।
आयोजन व धः —
1. अष्ट समूहाः रचयत — प्रत्येकः समूहः एकस्य राज्यस्य प्र त न धत्वं करोतु (अरुणाचलप्रदे शः … स क्कमः)।
2. प्रत्येकः समूहः स्वराज्यस्य प रधानं, वेशभूषां, नृत्यं, भोजनं च प्रदशयतु।
3. मञ्चे प्रत्येकं समूहः स्वराज्यस्य वषये संस्कृतेन पञ्च वाक्या न वदतु — राजधानी, भाषा, पवतः/नद , वशेषता।
4. सञ्चालनम् (anchoring) अ प संस्कृतभाषया एव करणीयम् — यही इस काय क मुख्य शत है।
5. अन्ते सव म लत्वा पाठस्य ोकं गायन्तु — “पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥”
Page 28 of 30
Page 30
as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
नमूना उत्तर — मञ्चसञ्चालनस्य संस्कृत-संवादः
m as e
.coसंस्कृत-वाक्यम् a g l
em
वक्ता हन्द अथ
a s
a glसञ्चालकः सुपभातम्। अद्य अस्माकं िवद्यालये ‘उत्तरपूवसंस्कृितिदवसः’ सुप्रभात। आज हमारे वद्यालय म ‘उत्तर-पूव
आयोज्यते। संस्कृ त दवस’ आयो जत हो रहा है।
om
पथमः समूहः अरुणाचलपदे शस्य पिरचयं दास्यित। cआग
. च्छन्तु
ag
em
सञ्चालकः पहला समूह अरुणाचल प्रदे श का प रचय दे गा।
as
छात्राः। छात्र आइए।
g l
छात्रः नमो नमः। अरुणाचलपदे शस्य a
राजधानी ईटानगरम् अिस्त। नमस्कार। अरुणाचल प्रदे श क राजधानी ईटानगर
अत्र भारते सवपथमं सूयस्य अरुणोदयः भवित।
m
है। यहाँ भारत म सबसे पहले सूय दय होता है।
. c o
सञ्चालकः
m
साधु ! इदानी ं मिणपुरस्य समूहः नत्ृ यं पस्तौित।
s em
बहुत अच्छा ! अब म णपुर का समूह नृत्य प्रस्तुत
a
. co agl
करता है।
sसवe m
l a पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥
ag
भारत के मनोहर ईशान कोण को दे खो !
a s
. coकmव वधता म एकता है। जब आठ समूह अलग-अलग agl
sहीemभाषा — संस्कृत — म बोलते ह, तब यह सन्दे श शब्द से नह ,
यह काय क्य : पाठ का सन्दे श ही यह है क पूव त्तर
a
वेशभूषा और नृत्य लेकर एक ही मंच पर lएक
अनुभव से समझ म आता है। ag
co m
m .
m as e
.co a g l
a s em
agl अध्याय — एक नज़र म
पाठ का ढाँचा — आरम्भ म गद्य-प रचय, फर अध्या पका तथा छात्र (स्वरा, ीशः, मालती, अ भनवः, मृदुलः) का
se m
com g l a
. a
संवाद, बीच म दो ोक, अन्त म शब्दाथ-सारणी, ‘अत्र इदम् अवधेयम्’, अभ्यास, योग्यता वस्तरः तथा प रयोजनाकायम्।
m
ase
अष्ट राज्या न — अरुणाचलप्रदे शः, असमः, म णपुरम्, मेघालयः, मजोरमः, नागालैण्डम्, त्रपुरा एवञ्च स क्कमः — ये आठ
agl
राज्य दे श के पूव त्तरभाग म स्थत ह। इनम स क्कम को छोड़कर शेष सात ‘सप्तभ गन्यः’ तथा स क्कम ‘एकः भ्राता’
कहलाता है।
co m
नाम क्य ? — पाठ स्वयं कारण दे ता है — सामा जक-सांस्कृ तक-प रदृश्यानां साम्याद् भौगो लकवै शष्ट्यात् च इमा न
m .
se
उक्तोपा धना प्र थता न। अध्या पका जोड़ती ह क यह प्रयोग प्रतीकात्मक है — ‘बहन-भाई’ शब्द सचमुच के रश्ते नह ,
o m l a
ag श म ह; यहाँ बराक-ब्रह्मपुत्रा द न दयाँ
.cभूगोल तथा प्रकृ त — ये राज्य पूव हमालय- े णय तथा पत्काई-नागपवत-प्रदे
समानता के प्रतीक ह।
se m
g l a
a
बहती ह; पवत े णयाँ, पीठस्थल (पठार), नम्नपवत तथा उपत्यकाएँ भू-वै वध्य बनाती ह। यह प्रदे श पूव तथा द क्षण-पूव
.c
m
ए शया का द्वार है।
m a s e
co gl
जन, संस्कृ त तथा वंशोद्योगः — यह जनजा तबहुल प्रदे श है; गारो, खासी, नागा, मजो, लेप्चा आ द अनेक जनजा तयाँ
m . a
seके प्राचुय के कारण वस्त्र-आभूषण से गृह नमाण तक बाँस का ही उपयोग होता है —
यहाँ रहती ह। लोग ऊजस्वी, बहुभाषी, पव-परम्पराओं से प रपूण तथा स्वलीला-कलाओं म नष्णात ह, और प्राचीन इ तहास
l a
म प्रायः स्वाधीन ही रहे। यहाँ वंशवृक्ष
g ख्या त पा चुका है।
यही वंशोद्योग आज अन्ताराaष्ट्रय
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 30
Page 31
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् AglaSem · NCERT Solutions
ाकरण- बन्दु — ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेट दश दशः सखाती है — पूवा, आग्नेयी, द क्षणा, नैऋती, प श्चमा, वायवी,
उत्तरा, ईशानी, ऊध्वा तथा अधः। पाठ का शीषक ‘कोणम् ऐशान्यम्’ इसी ईशान (उत्तर-पूव) कोण क ओर संकेत करता है।
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द अथ ENGLISH
ऐशान्यम् पूव त्तरिदशा पूव त्तर दशा North-East corner
समवायः समाहारः समूह Combination
केन्द्रशा सतप्रदे शाः पत्य ं के न्द शासनाधीनाः पदे शाः केन्द्र द्वारा शा सत प्रदे श Union Territories
प्र थतः पख्यातः प्र सद्ध Famous
प्रतीकात्मकः साङ् के ितकः प्रतीकात्मक Symbolic
साम्याद् सादृ श्याद् समानता के कारण Because of similarity
उक्तोपा धना उक्तेन नाम्ना दए हुए नाम से By the given name
स्वाधीनाः स्वतन्त्राः स्वतन्त्र Independent
स्वायत्तीकृताः अधीनीकृ ताः अपने अधीन कए गए Captured / Autonomous
पुष्पस्तबकसदृशा न पुष्पपुञ्जसमानािन पुष्प-गुच्छ के समान Like flower bouquet
नष्णाताः पारङ् गताः नपुण Experts / Master
वंशवृक्षाणाम् वंशपादपानाम् बाँस के वृक्ष के Of bamboo trees
Page 30 of 30