aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

AglaSem पर कक्षा 8 संस्कृत पाठ 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? (दीपकम्) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 9 (Deepakam).
NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? - Page 1 of 33

About NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (33 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ??

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? have?

NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? contains 33 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 8 study material?

You can find more Class 8 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 8 Sanskrit Chapter 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (33 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 9: कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — द पकम्

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

97 – 110 14 41 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 32 pages

Page 2

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · सं स्कृ त · द पकम्

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
NCERT कक्षा 8 संस्कृत क पाठ्यपुस्तक द पकम् के नवमः पाठः — कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? का स ूण हल। पाठ का शीषक ही उसका
प्रश्न है — ‘कोऽरुक्’ अथात् कः अरुक् ? कौन नीरोग है ? भगवान् धन्वन्त र शुक (तोते) का रूप धारण कर यही प्रश्न पूछते ह और आचाय वाग्भट
तीन सूत्र म उत्तर दे ते ह — हतभुक्, मतभुक्, ऋतुभुक्। यहाँ पाठ के चत्र-संवाद, शब्दाथ-सारणी, ‘इदम् अत्र अवधेयम्’ ( वशेषण- वशेष्य),
अभ्यासात् जायते स ः के छह प्रश्न, योग्यता वस्तरः तथा प रयोजनाकायम् — सबका उत्तर दया गया है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

द पकम् (कक्षा 8) 97 – 110

खं ड प्रश्न

14 41

माध्यम

हन्द

चत्र-संवादः (पाठे वद्यमानः प्रश्नः) — पृष्ठ 97
पाठारम्भे चत्रसंवादः — माता, पुत्री, पुत्रः च

चत्र-सं वादः

प्र.1 “उष्णं भोजनं कमथ न ददा त ?” (पुत्री मातरम् अपृच्छत् — पृष्ठ 97)

उत्तरम् — अत्युष्णं भोजनं खािदतुं न योग् यम्, यतः ते न मुखे दाहः भवेत ्। ‘अत्युष्णं भोजनं िहतकरं न भवित ’ इित
आयुवद स्य उपदे शः। अतः माता उष्णं भोजनं न ददाित।

चत्र-संवाद म माता स्वयं यही कारण बताती है — “वत्से ! मुखे दाहः भवेत्, अ प च ‘अत्युष्णं भोजनं हतकरं न भव त’ इ त
आयुवदस्य उपदे शः।” इसी लए वह पहले कहती है — “वत्से, भोजनम् अत्युष्णम् अ स्त, क ञ्चत् प्रतीक्षस्व।”

हन्द अथ: बेट ! (बहुत गरम भोजन खाने से) मुँह म जलन हो सकती है, और इसके अ त रक्त ‘अत्यन्त गरम
भोजन हतकर नह होता’ — यह आयुवद का उपदे श है। इस लए माता कहती है — थोड़ी प्रतीक्षा करो।

व्याकरण-सङ् केतः: अत्युष्णम् = अ त + उष्णम् (यण्-स न्ध नह , वृ द्ध नह — यहाँ ‘अ त’ उपसग-तुल्य अव्यय
है); यह ‘भोजनम्’ का वशेषण है, अतः वशेष्य क भाँ त नपुंसक लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, एकवचन। प्रतीक्षस्व
— प्र त + ईक्ष् धातु, लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन, आत्मनेपद = ‘प्रतीक्षा करो’।

Page 1 of 32

Page 3

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

पाठ-सूत्रम्: यह छोटा-सा संवाद ही पूरे पाठ का द्वार है — इसी बात पर पुत्र कहता है ‘आयुवदे बहवः आहार नयमाः
स न्त’, और माता ‘आहार वषये एकः रोचकः प्रसङ्गः’ — अथात् धन्वन्त र और वाग्भट क कथा — सुनाने लगती है।

वयं शब्दाथान् जानीमः — पृष्ठ 101–102
शब्दाथ-सारणी तथा ‘मातृभाषया अथ लखत’ स्तम्भः

शब्दाथाः

प्र.1 वयं शब्दाथान् जानीमः — मातृभाषया अथ लखत। (पाठस्य शब्दाथ-सारणी, पृष्ठ 101–102)

सारणी का अ न्तम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — उसम अपनी मातृभाषा ( हन्द , मराठ , त मल, बाङ् ग्ला … जो भी
आपक भाषा हो) म अथ लखना है। नीचे पूरी सारणी संस्कृत-अथ, हन्द और अंग्रेज़ी स हत द गई है; अ न्तम स्तम्भ के लए
नमूना उत्तर हन्द म दया गया है।

Page 2 of 32

Page 4

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द ENGLISH मातृभाषया अथः
(नमूना — हन्द )

िनरामयाः नीरो गणः स्वस्थ Healthy रोगरिहत, तन्दुरुस्त

अरुक् स्वस्थः नीरोग One who is not sick जो बीमार न हो

झिटित शीघ्रमेव शीघ्र Quickly तुर न्त, फ़ ौरन

िहतभुक् यः हतकरं खाद त हतकारक खाने One who eats nutritious जो लाभदायक भोजन
वाला food करे

िमतभुक् यः आवश्यक-मात्रा- सी मत मात्रा म One who eats food in जो नपा-तुल ा खाए
अनुसारं भोजनं खाद त भोजन करने वाला limited quantity

ऋतुभक
ु ् यः ऋत्वनुकूलं पथ्यं ऋतु के अनुसार One who eats food which जो मौसम के अनुस ार
भोजनं करो त उपयुक्त भोजन करने is appropriate as per खाए
वाला season

पयुञ्जीत प्रयोगं कुयात् प्रयोग करे Should take से वन करना चािहए

अनुवतते अनुसर त अनुसरण करता है Follows पीछे -पीछे चलता है, बना
रहता है

अजातानाम् न उत्पन्नानाम् जो पैदा नह हुए Of those who are not जो अभी हुए ही नही ं
उनको born

अनुत्पित्तकरम् यत् ( वकारान्) न जो ( वकार ) को That which may not cause जो रोग पैद ा न होने दे
उत्पादय त उत्पन्न न करे (harm)

लघूनाम् सुपाच्यानाम् सुपाच्य खाद्य का Of digestible food हल्के , जल्दी पचने वाले
भोजन का

उि ष्टम् उ ल्ल खतम् बताया गया है Which has been कहा गया है
instructed

गिरष्ठम् यत् क ठनतया पच्यते जो क ठनता से पचे Difficult to digest भारी, दे र से पचने वाला

अितमात्रम् मात्रायाः आ धक्यम् अत्य धक मात्रा से In excessive quantity ज़रूरत से ज्य
़ ादा

अिशताद्यात् भुक्तात् खाए हुए से From eaten food खाए गए भोजन से

व्यपाश्रयम् आश्रयस्थानम् अवलम्ब Depending िजस पर िटका हो,
आधार

वणकािन्तजनकम् वणस्य सौन्दयस्य च रूप रंग नखारने that which enhances the चेहरे का रंग -रूप
उत्पादकम् वाला beauty and complexion िनखारने वाला

बुभक्ष
ु ायाम् क्षुधायाम् भूख लगने पर On feeling hungry भूख लगे तब

Page 3 of 32

Page 5

as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions

क्य यह अभ्यास उपयोगी है: ये अठारह शब्द ही पाठ के पाँच
. com
ोक क कुञ्जी ह। ‘अजातानाम्’,
‘अनुत्प त्तकरम्’ जाने बना ोक १ नह खुलता; ‘लघूनाम्’, ‘ग रष्ठम्’, ‘अ तमात्रम्’ जाने बना em
m a s
gl
ोक २ नह , और
‘अ शताद्यात्.’c o a
em
, ‘व्यपाश्रयम् ’, ‘वणका न्तजनकम्’ जाने बना ोक ३ नह ।

a s
gl
aध्यातव्यम् : हतभुक्, मतभुक्, ऋतुभुक् — तीन भुज् धातु + क्वप् से बने हलन्त (व्यञ्जनान्त) पुं लङ्ग शब्द ह,

co m
ag
अतः प्रथमा एकवचन म भी रूप ‘ हतभुक्’ ही रहता है, ‘ हतभुक्कः’ नह ।

m .
as e
a g l
इदम् अत्र अवधेयम् — पृष्ठ 102–103
co m
m.
व्याकरण-पे टका — वशेषणम्, वशेष्यम् तथा तयोः सम्ब ः

m as e
व्याकरणम्
.co a g l
a s em
a glप्र.1 वशेषणम् कम् ? वशेष्यम् कम् ? पाठात् उदाहरणं दत्त्वा स्पष्टयत।
m a s
m .co agl
l a se
g
aषतां सूचयित तत् िवशेषणम् इित उच्यते ।
िवशेषणम् — यत् पदं क स्यिचत् िवशे
िवशेष्यम् — यत् पदं मुख्यतया िवशेषरूपेण उच् यते तत् पदं िवशेष्यं भवित।
co m
m .
m as e
.co a g l
m
पाठस्य उदाहरणे — ‘उत्तमाः वैद्याः’ — अत्र ‘वैद्यस्य’ वशेषता उक्ता, अतः वैद्याः = वशेष्यपदम् तथा उत्तमाः = वशेषणपदम्।

l a seएवमेव पाठे ‘उत्तमाः’, ‘मनोहरम्’ इत्यादयः शब्दाः वशेषतां प्रकटय न्त, अतः एते वशेषणा न स न्त।

ag
हन्द म: जो पद कसी क वशेषता बताए वह वशेषण है; और जसक वशेषता बताई जाती है, जो मुख्य रूप से
se m
com g l a
. a
कहा जाता है, वह वशेष्य है। ‘मनोहरं शुकरूपम्’ म ‘शुकरूपम्’ वशेष्य है और ‘मनोहरम्’ उसका वशेषण।
m
ase
agl
पहचानने का तरीका: वाक्य म से सं ा हटा द जए — य द शेष पद अकेला अधूरा लगे तो वही वशेषण है।
‘ वशाले प्राङ्गणे’ म ‘ वशाले’ अकेला अधूरा है; ‘प्राङ्गणे’ अपने-आप म पूरा — इस लए ‘प्राङ्गणे’ वशेष्य, ‘ वशाले’

co m
वशेषण।
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 32

Page 6

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 वशेष्य- वशेषणयोः सम्ब ः क दृशः ? त्री ण नयमा न उदाहरणस हतं लखत।

िनयमः (क ) — िलङ् गम्: िवशेष्यस्य यत् िलङ् गं भवित तत् एव िलङ् गं िवशेषणस्य अिप भवित।
िनयमः (ख) — वचनम्: िवशेष्यस्य यत् वचनं भवित तदे व वचनं िवशेषणस्य अिप भवित।
िनयमः (ग) — िवभिक्तः: िवशेष्यस्य या िवभिक्तः सा एव िवभिक्तः िवशेषणस्य अिप भवित।

नयमः पाठस्य ववरणम्
उदाहरणम्

(क) लौिककः खगः ‘खगः’ वशेष्यपदं पुं लङ्गम् अ स्त, अतः ‘लौ ककः’ वशेषणपदम् अ प पुं लङ्गम् एव।
िलङ् गम्

(ख) वचनम् उ त्त माः वैद्य ाः ‘वैद्याः’ वशेष्यपदं बहुवचने वतते, अतः ‘उत्तमाः’ वशेषणपदम् अ प बहुवचने एव।

(ग) िवभिक्तः मध रु ां वाणीम् ‘वाणीम्’ वशेष्यपदं तीया वभक्तौ वतते, अतः ‘मधुराम्’ वशेषणपदम् अ प द्वतीया वभक्तौ
एव।

सूत्ररूपेण श्लोकः —
यिल्लङ् गं यद्वचनं या च िवभिक्तिवशेष्यस्य।
तिल्लङ् गं तद्वचनं सा च िवभिक्तिवशेषणस्यािप॥

ोक का अथ: वशेष्य का जो लङ्ग, जो वचन और जो वभ क्त हो, वशेषण का भी वही लङ्ग, वही वचन और
वही वभ क्त होती है। — यही तीन नयम एक पं क्त म।

ऐसा क्य : संस्कृत म वशेषण स्वतन्त्र नह है; वह वशेष्य के साथ समाना धकरण होता है — अथात् दोन एक ही
वस्तु को कहते ह। एक ही वस्तु के दो नाम अलग-अलग लङ्ग-वचन- वभ क्त म कैसे रह सकते ह ? इस लए वशेषण
को वशेष्य के अनुसार बदलना पड़ता है। हन्द म ‘अच्छा लड़का / अच्छ लड़क ’ म भी यही होता है, पर संस्कृत म
वभ क्त भी मलानी पड़ती है।

प्र.3 अस्यां सा रण्यां केषाञ्चन वशेषणपदानां त्रषु लङ्गे षु प्रयोगः द शतः। एतान् पठत। (तथा वाक्यप्रयोग-सारणी
अ प पठत।)

सारणी १ — त्रषु लङ्गे षु रूपा ण:

Page 5 of 32

Page 7

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

शब्दः पुं लङ्गम् स्त्री लङ्गम् नपुंसक लङ्गम्

उत्तम उ त्त मः उ त्त मा उ त्त मम्

मनोहर मनोहरः मनोहरा मनोहरम्

िविस्मत िविस्मतः िविस्मता िविस्मतम्

उत्कृ ष्ट उ त्कृ ष्टः उ त्कृ ष्टा उ त्कृ ष्टम्

एक एकः एका एकम्

सारणी २ — वाक्यप्रयोगः:

पुं लङ्गम् स्त्री लङ्गम् नपुंसक लङ्गम्

उ त्त मः बालकः उ त्त मा बािलका उ त्त मं ग ृहम्

मनोहरः पवतः मनोहरा वािटका मनोहरम् उ द्य ानम्

उ त्कृ ष्टः ले खकः उ त्कृ ष्टा ले िखका उ त्कृ ष्टं पुस्तकम्

एकः िवद्य ालयः एका पाकशाला एकं िचत्र म्

सारणी म दे खने क बात: वशेषण का मूल शब्द (प्रा तप दक) एक ही है — ‘उत्तम’। लङ्ग बदलते ही अन्त
बदलता है — पुं लङ्ग म -ः, स्त्री लङ्ग म -आ, नपुंसक लङ्ग म -म्। ये अकारान्त वशेषण ह; इनके रूप क्रमशः
‘बालक’, ‘लता’ और ‘फल’ शब्द क भाँ त चलते ह।

स्वयं आजमाइए: इसी नयम से बनाइए — व स्मतः शष्यः / व स्मता शष्या / व स्मतं मुखम्; मधुरः स्वरः /
मधुरा वाणी / मधुरं फलम्।

अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 104
प्रश्नः १ : अधो ल खतान् प्रश्नान् एकपदे न उत्तरत

अभ्यासः

प्र.1 (क) शुकरूपं कः धृतवान् ?

उत्तरम् — धन्वन्तिरः (भगवान् धन्वन्तिरः)।

Page 6 of 32

Page 8

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

पाठे — “भारतवष वैद्याः व भन्नानां व्याधीनां शमनं कथं कुव न्त” इ त ातुं पुरा भगवान् धन्वन्त रः मनोहरं शुकरूपं धृत्वा
प्र तग्रामम् अभ्रमत्।

हन्द अथ: ‘भारत म वैद्य भाँ त-भाँ त के रोग को कैसे शान्त करते ह’ — यह जानने के लए भगवान् धन्वन्त र ने
सुन्दर तोते का रूप धारण कया और गाँव-गाँव घूमे।

व्याकरण-सङ् केतः: धन्वन्त रः — इकारान्त पुं लङ्ग, प्रथमा वभ क्त, एकवचन, क्य क यह ‘धृतवान्’ क्रया का
कता है। धृतवान् = धृ + क्तवतु — भूतका लक कृदन्त, पुं लङ्ग प्रथमा एकवचन।

प्र.1 (ख) धन्वन्त रः (शुकः) कुत्र उप वश्य ध्व नम् अकरोत् ?

उत्तरम् — वृक्षे (भवनपाश्वस्थे वृक्षे)।

पाठे — भ्रमणकाले सः बहूनां प्रख्यातवैद्यानां भवनपा े वृक्षे उप वश्य ‘कोऽरुक्’ ‘कोऽरुक्’ ‘कोऽरुक्’ इ त ध्व नम् अकरोत्।

हन्द अथ: घूमते समय वह अनेक प्र सद्ध वैद्य के घर के पास खड़े पेड़ पर बैठकर ‘कोऽरुक्’ क आवाज़ लगाता
रहा।

व्याकरण-सङ् केतः: वृक्षे — अकारान्त पुं लङ्ग, सप्तमी वभ क्त, एकवचन। ‘कुत्र’ (कहाँ) का उत्तर आधार
बताता है, और आधार म सप्तमी होती है — आधारोऽ धकरणम्।

प्र.1 (ग) अन्ते शुकः कस्य आश्रमस्य समीपं गतवान् ?

उत्तरम् — वाग् भट स्य (वैद्य स्य वाग्भटस्य)।

पाठे — अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य कुट रसमीपं गतवान्। तत्र वशाले प्राङ्गणे स्थतं पुष्पतरुम् आरुह्य मधुरया गरा ‘कोऽरुक्’ इ त
शब्दम् अकरोत्।

हन्द अथ: अन्त म वह वैद्य वाग्भट क कुट के पास गया। वहाँ वशाल आँगन म खड़े फूल वाले पेड़ पर चढ़कर
मीठ वाणी से ‘कोऽरुक्’ पुकारा।

Page 7 of 32

Page 9

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

व्याकरण-सङ् केतः: वाग्भटस्य — षष्ठी वभ क्त, एकवचन, पुं लङ्ग। ‘कस्य’ का उत्तर सदा षष्ठी म आता है —
सम्बन्ध बताने के लए।

प्र.1 (घ) ऋतवः क त स न्त ?

उत्तरम् — षट् (षट् ऋतवः सिन्त)।

पाठे — वसन्तः, ग्रीष्मः, वषा, शरद्, हेमन्तः, श शरः — चे त षट् ऋतवः भव न्त।

क्रमः ऋतुः हन्द

१ वस न्तः वसन्त

२ ग ीष्मः ग्रीष्म

३ वष वषा

४ शरद् शरद

५ हेम न्तः हेमन्त

६ िशिशरः श शर

व्याकरण-सङ् केतः: षट् संख्यावाचक वशेषण है और सदा बहुवचन के साथ आता है — ‘षट् ऋतवः स न्त’, ‘षट्
ऋतुः अ स्त’ नह । यही कारण है क पाठ म ‘ऋतवः’ बहुवचन म है।

यह प्रश्न पाठ से क्य जुड़ा है: ‘ऋतुभुक्’ का अथ ही है — इन छह ऋतुओं के अनुकूल भोजन करने वाला। ऋतुएँ
कतनी ह, यह जाने बना ‘ऋतुभुक्’ क प रभाषा अधूरी रह जाती है।

प्र.1 (ङ) वाग्भटः शुकस्य रहस्यं केभ्यः उक्तवान् ?

उत्तरम् — िशष्येभ्यः (छात्रेभ्यः)।

Page 8 of 32

Page 10

as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions

पाठे — तदा वाग्भटः शुकस्य रहस्यम् उक्तवान् — “ प्रय शष्याः ! अयं वहगः न सामान्य वहगः, अ प तु आयुवदस्य पूज्यः दे वः
co m
भगवान् धन्वन्त रः एव स्वयं शुकरूपेण अत्र आगच्छत्।”
e m.
m l as
.co a g
s em
हन्द अथ: तब वाग्भट ने तोते का रहस्य बताया — “ प्रय शष्यो ! यह पक्षी साधारण पक्षी नह है, ब ल्क आयुवद
a
agl
के पूज्य दे वता भगवान् धन्वन्त र ही स्वयं तोते के रूप म यहाँ आए थे।”

. com
व्याकरण-सङ् केतः: प्रश्न म केभ्यः ( कम् शब्द, चतुथ वभ क्त, बहुवचन, पुं लङ्ग) है, अतः उत्तर भी उसी
ag
a s emके साथ जसे कहा जाए, उसम चतुथ आती है — सम्प्रदाने
agl
वभ क्त-वचन म — शष्येभ्यः। ‘उक्तवान्’ (कहना)
चतुथ ।

co m
em.
mस l as
.co g
अभ्यासात् जायते ः — पृष्ठ 104
em a
a s
प्रश्नः २ : प कातः उ चता न पदा न चत्वा रक्त
l
ाना न पूरयत (चरकस्य, कुट रसमीपं, भारतवष, आयुवद ानेन, अ तमात्रं)

g
aअभ्यासः
m a s
m.co agl
se
प्र.2 (क) ……………………… जनाः कथं नरामयाः भव न्त ?

g l a
a

co m
m .
उत्तरम् — भारतवष जनाः कथं िनरामयाः भविन्त ?
m as e
.co a g l
s m
eक्य
gl a
a
यही पद: रक्तस्थान से पहले कोई क्रया नह , और ‘जनाः’ कता है — अतः यहाँ ान बताने वाला पद

m
चा हए। प का म केवल ‘भारतवष’ ही सप्तमी वभ क्त (अ धकरण) म है। अथ बनता है — ‘भारत म लोग कैसे

a se
com l
नीरोग रहते ह ?’ — और यही तो प्रश्न धन्वन्त र के मन म था।
. a g
m
gl ase
a
व्याकरण-सङ् केतः: भारतवष — नपुंसक लङ्ग, सप्तमी एकवचन। नरामयाः ‘जनाः’ का वशेषण है, इस लए वह
भी पुं लङ्ग, प्रथमा, बहुवचन म है — वशेषण- वशेष्य का वही नयम।

co m
m .
m अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य ……………………… गतवान्। as e
. co(ख) a g l
sem
प्र.2
a
agl c
m .
e

om a s
. c
emकु टीरसमीपं गतवान्। agl
s
उत्तरम् — अन्ते सः वैद्य स्य वाग्भटस्य
a
agl

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 9 of 32

Page 11

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

क्य यही पद: ‘गतवान्’ (गया) क्रया गन्तव्य माँगती है, और गन्तव्य म तीया वभ क्त आती है (कम ण
द्वतीया)। प का म केवल ‘कुट रसमीपं’ द्वतीया एकवचन म है। साथ ही ‘वाग्भटस्य’ षष्ठी है — कसक कुट ?
वाग्भट क ।

व्याकरण-सङ् केतः: कुट रसमीपम् = कुट रस्य समीपम् — षष्ठी-तत्पुरुष समास; नपुंसक लङ्ग, द्वतीया, एकवचन।

प्र.2 (ग) तव उत्कृष्टेन ……………………… अहम् अतीव सन्तुष्टः अ स्म।

उत्तरम् — तव उत्कृ ष्टे न आयुवद ाने न अहम् अतीव सन्त ष्ु टः अिस्म।

यह वही वाक्य है जो धन्वन्त र ने वाग्भट से कहा था — तुम्हारे उत्कृष्ट आयुवद- ान से म अत्यन्त सन्तुष्ट हूँ; अब तुम आयुवद के
अष्टाङ्ग- वचार का सारभूत ग्रन्थ रचो।

क्य यही पद: ‘उत्कृष्टेन’ वशेषण तृतीया एकवचन म है — तो उसका वशेष्य भी तृतीया एकवचन म ही होगा।
प का म केवल ‘आयुवद ानेन’ तृतीया म है। ‘सन्तुष्टः’ के साथ जस कारण से सन्तोष हो, उसम तृतीया आती है
(हेतौ तृतीया)।

प्र.2 (घ) महषः ……………………… नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः।

उत्तरम् — महषः चरक स्य नाम भवन्तः श्रुत वन्तः स्युः।

क्य यही पद: ‘महषः’ षष्ठी एकवचन म है; उसके साथ जुड़ने वाला नाम भी षष्ठी एकवचन म चा हए —
‘चरकस्य’। अथ — ‘मह ष चरक का नाम आप लोग ने सुना ही होगा।’ पाठ म वाग्भट यही कहकर चरकसं हता के
ोक सुनाते ह।

व्याकरण-सङ् केतः: स्युः — अस् धातु, व ध लङ् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = ‘ह गे / ह ’। यहाँ यह
सम्भावना बताता है — ‘सुना ही होगा’।

Page 10 of 32

Page 12

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ङ) लघुद्रव्या ण ……………………… सेवनेन हा नकरा ण जायन्ते।

उत्तरम् — लघुद व्यािण अितमात्रं सेवने न हािनकरािण जायन्ते ।

क्य यही पद: बचा हुआ एकमात्र पद यही है, और अथ भी ठ क बैठता है — यह ोक २ का सीधा भावाथ है :
ग रष्ठ द्रव्य भी थोड़ी मात्रा म खाने पर सुपाच्य हो जाते ह, और हलके द्रव्य भी अ धक मात्रा म खाने पर
हा नकारक बन जाते ह। अथात् वस्तु नह , मात्रा नणय करती है।

ध्यातव्यम्: यही ‘ मतभुक्’ का सार है — कोई भोजन अपने-आप म बुरा नह ; मात्रा बगड़ने पर अच्छा भोजन भी
रोग बन जाता है।

अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 104
प्रश्नः ३ : अधो ल खतानां प्रश्नानां पूणवाक्येन उत्तरा ण लखत

अभ्यासः

प्र.3 (क) मधुरां वाण श्रुत्वा च कत्सा नरतः वाग्भटः कम् अकरोत् ?

उत्तरम् — मधुरां वाणीं श्र त्ु वा िचिक त्सािनरतः वाग् भटः पाङ् गणम् आगत्य सव सु िद क्ष ु अपश्यत्।

क्षण भर म उसे वह मनोहर तोता दख गया — क्षणात् वाग्भटः मनोहरं तं शुकम् अपश्यत्।

हन्द अथ: मीठ वाणी सुनकर च कत्सा म लगे हुए वाग्भट आँगन म आए और चार दशाओं म दे खा। एक ही क्षण
म उन्ह ने उस सुन्दर तोते को दे ख लया।

व्याकरण-सङ् केतः: श्रुत्वा तथा आगत्य — दोन क्त्वा / ल्यप् प्रत्ययान्त अव्यय (पूवका लक क्रया); उपसग हो
तो ‘क्त्वा’ के स्थान पर ‘ल्यप्’ होता है — इसी लए ‘आ + गम् + ल्यप् = आगत्य’। दक्षु — ‘ दश्’ शब्द, सप्तमी
बहुवचन।

Page 11 of 32

Page 13

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 (ख) वाग्भटः झ ट त कम् अकरोत् ?

उत्तरम् — वाग् भटः झिटित त स्मै िवहगाय मधुरािण फलािन समिपतवान्।

परन्तु उस पक्षी ने फल नह लए — परन्तु सः खगः फला न न गृहीत्वा पुनर प तथैव ‘कोऽरुक्’ इ त प्रश्नस्वरेण शब्दम्
अकरोत्।

हन्द अथ: वाग्भट ने तुरन्त उस पक्षी को मीठे फल अ पत कए। पर वह पक्षी फल न लेकर फर उसी तरह प्रश्न-भरे
स्वर म ‘कोऽरुक्’ बोलता रहा। इसी से वाग्भट समझ गए क जब तक इसके प्रश्न का उत्तर नह मलेगा, यह भोजन
नह चाहेगा।

व्याकरण-सङ् केतः: तस्मै वहगाय — चतुथ वभ क्त, एकवचन; जसे कुछ दया जाए वह सम्प्रदान होता है —
सम्प्रदाने चतुथ । यहाँ ‘तस्मै’ (सवनाम) और ‘ वहगाय’ (सं ा) दोन एक ही वभ क्त-वचन म ह।

प्र.3 (ग) छात्राः पुनः ज ासया आचाय कम् अपृच्छन् ?

उत्तरम् — छात्राः पुन ः िज ासया अपृच् छन् — “आचाय ! ‘िहतभुक् , िमतभुक् , ऋतुभक
ु ् ’ इित एते षां कः आशयः
?”

इसी प्रश्न के उत्तर म वाग्भट ने मह ष चरक के तीन ोक सुनाए — एक हतभुक् पर, एक मतभुक् पर और एक ऋतुभुक् पर।

हन्द अथ: छात्र ने फर ज ासा से पूछा — “आचाय ! ‘ हतभुक्, मतभुक्, ऋतुभुक्’ — इनका क्या आशय है
?”

व्याकरण-सङ् केतः: ज ासया — तृतीया एकवचन, स्त्री लङ्ग; ‘ कस प्रकार से पूछा’ यह बताने वाली करण/हेतु-
तृतीया। अपृच्छन् — प्रच्छ् धातु, लङ् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन = ‘उन्ह ने पूछा’।

Page 12 of 32

Page 14

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 (घ) भगवान् धन्वन्त रः अस्माकं कृते संक्षेपेण क प्रदत्तवान् ?

उत्तरम् — भगवान् धन्वन्तिरः अस्माकं कृ ते संक्षेपेण स्वास्थ्यरक्षणाय सूत्ररूपेण सन्दे शं पद त्तवान्।

वह सन्दे श यही है — व्यायामः प्रातरु ाय, नत्यं दन्त वशोधनम्। स्वच्छजलेन सुस्नानं, बुभुक्षायाञ्च भोजनम्॥

सन्दे श का सार (पाठानुसार): प्र त दन प्रातःकाल ही जागना चा हए, उसके बाद व्यायाम करना चा हए; फर भली
प्रकार दाँत साफ़ करने चा हए; स्वच्छ जल से अच्छ तरह स्नान करना चा हए; और जब पेट म सचमुच भूख लगे
तभी हतकर, थोड़ा तथा ऋतु के अनुकूल भोजन लेना चा हए।

व्याकरण-सङ् केतः: अस्माकं कृते = ‘हमारे लए’ — ‘कृते’ के योग म षष्ठी आती है। स्वास्थ्यरक्षणाय — चतुथ
एकवचन, प्रयोजन बताने के लए (तादथ्य चतुथ )।

प्र.3 (ङ) ऋषयः नत्यं कां प्राथनां कुव न्त ?

उत्तरम् — ऋषयः िन त्यम् इमां पाथ नां कु विन्त —
सव भवन्तु सुिखनः, सव सन्तु िनरामयाः।
सव भद ािण पश्यन्तु मा किश्चद् दुःखभाग् भवेत ्॥

हन्द अथ: सब सुखी ह , सब नीरोग ह , सब कल्याण दे ख, कोई भी दुःख का भागी न बने। — ऋ षय क प्राथना
कसी एक के लए नह , सबके लए है; और उसम ‘ नरामयाः’ (नीरोग) शब्द इसी पाठ का केन्द्र य शब्द है।

व्याकरण-सङ् केतः: भवन्तु, सन्तु, पश्यन्तु — तीन लोट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन (प्राथना/आशीवाद का
लकार)। मा … भवेत् — नषेध के लए ‘न’ नह , ‘मा’ का प्रयोग होता है और उसके साथ व ध लङ् या लुङ् आता
है।

पाठ से जो ड़ए: पाठ क अ न्तम पं क्त म यही भाव है — वस्तुतः सव नय मत- हतकर-भोजनेन रोगमुक्ताः भवेयुः
— अथात् यह प्राथना केवल कामना नह , नय मत और हतकर भोजन से सचमुच पूरी होती है।

Page 13 of 32

Page 15

as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 105
m as e
.co
प्रश्नः ४ : पाठात् यथो चता न वशेषणपदा न वशेष्यपदा न वा चत्वा रक्त ाना न पूरयत
a g l
se m
l a
अभ्यासः

a g
पाठात् यथो चता न वशेषणपदा न वशेष्यपदा न वा चत्वा रक्त ाना न पूरयत — (सारणी १) व भ ानाम् –
om
प्र.4

. c ag
व्याधीनाम् / मनोहरम् – …… / …… – प्राङ्गणे / …… – वाग्भटः / मधुरा ण – …… / …… – वैद्यस्य / महषः –
…… ; (सारणी २) …… – वैद्याः / …… – वृक्षeे m
a s / …… – वाणीम् / लौ ककः – …… / समु चतम् – …… / …… –

agl
शष्याः / सा त्त्वकम् – ……

co m
m.

m
दोन सार णयाँ पूरी करने पर ( रक्तस्थान के उत्तर नारंगी रंग म) —
as e
.co a g l
em
सारणी १

a s
a gl वशेषणम् वशेष्यम् पाठे प्रयोगः

m a s
.co agl
िविभ ानाम् व्याधीनाम् वैद्याः व भ ानां व्याधीनां शमनं कुव न्त (उदाहरणम्)

se m
l a
मनोहरम् धन्वन्त रः मनोहरं शुकरूपं धृत्वा अभ्रमत्
g
शुक रूपम्

िवशाले पाङ् गणे
a तत्र वशाले प्राङ्गणे स्थतं पुष्पतरुम् आरुह्य

co m
िविस्मतः वाग्भटः व स्मतः वाग्भटः च न्ततवान्
m .
m as e
.co
तस्मै वहगाय मधुरा ण फला न सम पतवान्
a g l
eउmम य
मध रु ािण फलािन

a s
agl त्त स् वैद्य स्य उत्तमस्य वैद्यस्य अन्वेषणाय भारतवष प रभ्रमन्

महषः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः
se m
a
महषः

com
चरक स्य

. a g l
m
ase
सारणी २

agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 14 of 32

Page 16

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

वशेषणम् वशेष्यम् पाठे प्रयोगः

उ त्त माः वैद्य ाः उत्तमाः वैद्याः (‘इदम् अत्र अवधेयम्’ पे टकायाम्)

भवनपाश्वस्थे वृक्षे प्रख्यातवैद्यानां भवनपा े वृक्षे उप वश्य

मध रु ाम् वाणीम् मधुरां वाण श्रुत्वा वाग्भटः प्राङ्गणम् आगच्छत्

लौिककः खगः नायं लौ ककः खगः

समुिचतम् उ त्त रम् समु चतम् उत्तरं श्रुत्वा अत्यन्तं प्रीतः सः शुकः

िविस्मताः िशष्याः एतत् सव दूरात् पश्यन्तः व स्मताः शष्याः

साित्त्वकम् भोजनम् समयानुसारं सा त्त्वकं भोजनम् आवश्यकम्

भरने का तरीका (यही परीक्षा म काम आता है): दए हुए पद का लङ्ग, वचन और वभ क्त पहले पहचा नए —
जोड़ीदार पद भी ठ क उसी म होगा। जैसे ‘वैद्यस्य’ षष्ठी एकवचन पुं लङ्ग है, इस लए उसका वशेषण भी षष्ठी
एकवचन म — उत्तमस्य, न क ‘उत्तमः’। इसी तरह ‘ शष्याः’ बहुवचन है, अतः व स्मताः (बहुवचन), जब क
‘वाग्भटः’ एकवचन है, अतः व स्मतः (एकवचन)।

ध्यातव्यम्: ‘मनोहरम्’ का वशेष्य पाठ म शुकरूपम् है (‘मनोहरं शुकरूपं धृत्वा’)। कुछ वद्याथ शुकम् लखते ह
— ‘क्षणात् वाग्भटः मनोहरं तं शुकम् अपश्यत्’ — यह भी पाठ म है और लङ्ग-वचन- वभ क्त तीन मल जाते ह,
अतः वह भी शुद्ध उत्तर है।

अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 105

Page 15 of 32

Page 17

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्रश्नः ५ : पाठं प ठत्वा अधो ल खतप कातः पदा न चत्वा उ चतस ञ्चकायां पूरयत

अभ्यासः

प्र.5 प का — लौ ककः, व्याधीनाम्, दे वः, वृक्षे, त्री ण, उत्तमस्य, वाणीम्, व स्मतः, मधुरया, प्रश्नान्, पूज्यः, खगः,
वशाले, शुकम्, वाग्भटः। इन पद को ‘ वशेषणपदा न’ तथा ‘ वशेष्यपदा न’ नामक दो स ञ्चकाओं म भ रए।
(स ञ्चकासु दत्तम् उदाहरणम् — वशेषणपदा न : लौ ककः ; वशेष्यपदा न : व्याधीनाम्)

वशेषणपदा न वशेष्यपदा न

लौिककः (उदाहरणम्) व्याधीनाम् (उदाहरणम्)

िवशाले वृक्षे

मध रु या वाणीम्

िविस्मतः वाग्भटः

उ त्त म स्य खगः

त्र ीिण शुक म्

पूज्यः दे वः

— पश्नान्

कुल — वशेषणपदा न : ७, वशेष्यपदा न : ८।

प्रत्येक पद पाठ म कसके साथ आया है:

लौ ककः – खगः — “नायं लौ ककः खगः।” (इसी कारण ‘लौ ककः’ वशेषण, ‘खगः’ वशेष्य)
वशाले – प्राङ्गणे — “तत्र वशाले प्राङ्गणे स्थतम्…”
मधुरया – गरा — “मधुरया गरा ‘कोऽरुक्’ इ त शब्दम् अकरोत्।”
व स्मतः – वाग्भटः — “ व स्मतः वाग्भटः च न्ततवान्।”
उत्तमस्य – वैद्यस्य — “उत्तमस्य वैद्यस्य अन्वेषणाय…”
त्री ण – उत्तरा ण — “सूत्ररूपा ण त्री ण उत्तरा ण प्रादात्।”
पूज्यः – दे वः — “आयुवदस्य पूज्यः दे वः भगवान् धन्वन्त रः।”
वाणीम् — “मधुरां वाण श्रुत्वा…”; वृक्षे — “भवनपाश्वस्थे वृक्षे उप वश्य”; शुकम् — “मनोहरं तं शुकम्
अपश्यत्”; प्रश्नान् — “अधो ल खतान् प्रश्नान्…” / “स्वप्रश्नानाम् उत्तरा ण”; व्याधीनाम् — “ व भन्नानां
व्याधीनाम्”।

Page 16 of 32

Page 18

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

छाँटने का सरल नयम: जो पद अकेला बोलने पर ‘कौन-सा ?’ ‘कैसा ?’ पूछने को कहे — वह वशेषण। जो
अपने-आप म वस्तु या व्य क्त का नाम हो — वह वशेष्य। ‘ वशाले’ सुनकर मन पूछता है ‘ वशाल क्या ?’ —
इस लए वशेषण; ‘वृक्षे’ अपने-आप पूण है — इस लए वशेष्य।

सावधानी: वाग्भटः और दे वः यहाँ वशेष्य ह, वशेषण नह — क्य क ये नाम/सं ा ह और इन्ह क वशेषता
‘ व स्मतः’, ‘पूज्यः’ बताते ह।

अभ्यासात् जायते स ः — पृष्ठ 106
प्रश्नः ६ : अधो ल खता न वाक्या न प ठत्वा तेन सम्ब ं ोकं पाठात् चत्वा लखत

अभ्यासः

प्र.6 (क) अस्मा भः नत्यं व्यायामः, स्नानं, दन्तधावनं, बुभुक्षायाञ्च भोजनं कतव्यम्।

सम्ब ः श्लोकः (श्लोकः ४) —
यायामः पातरुत्थाय, िनत्यं द न्तिवशोधनम्।
व्

स्वच् छजलेन सुस्नानं, बुभ क्ष
ु ायाञ्च भोजनम्॥ ४॥

मेल क्य बैठता है: वाक्य म गनाई गई चार बात — व्यायाम, स्नान, दन्तधावन और भूख लगने पर भोजन — इसी
ोक क चार बात ह, उसी क्रम म। ‘दन्तधावनम्’ ोक का ‘दन्त वशोधनम्’ है और ‘स्नानम्’ ोक का
‘स्वच्छजलेन सुस्नानम्’।

भावाथः (पाठानुसार): प्र त दनं प्रातः एव जागरणं कुयात्, ततः परं व्यायामः करणीयः। पुनः सम्यक्तया दन्तमाजनं
करणीयम्। स्वच्छजलेन उत्तमरीत्या स्नानं कत्तव्यम्। यदा उदरे बुभुक्षा भव त तदा एव हतकरं स्वल्पं तथा ऋत्वनुकूलं
भोजनं ग्रहणीयम्।

Page 17 of 32

Page 19

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्र.6 (ख) अस्मा भः हतकरः आहारः सेवनीयः येन वकाराणां शमनं स्वास्थ्यस्य च रक्षणं भवेत्।

सम्ब ः श्लोकः (श्लोकः १) —
तच्च िनत्यं पयुञ्जीत, स्वास्थ्यं येनानुवतते ।
अजातानां िवकाराणामनुत्पित्तकरं च यत्॥ १॥

मेल क्य बैठता है: वाक्य क दो शत — (1) स्वास्थ्य क रक्षा हो, (2) वकार न ह — ोक क ठ क दो शत ह :
‘येन स्वास्थ्यम् अनुवतते’ तथा ‘अजातानां वकाराणाम् अनुत्प त्तकरम्’। यही हतभुक् क प रभाषा है।

सूक्ष्म बात: ोक ‘अजातानाम्’ कहता है — जो रोग अभी हुए ही नह , उन्ह होने ही न दे ना। अथात् आयुवद क
दृ ष्ट पहले रोग- नवारण पर है, बाद म च कत्सा पर।

प्र.6 (ग) ऋतोः अनुसारं भोजनेन बलस्य वणस्य च अ भवृ ः भव त।

सम्ब ः श्लोकः (श्लोकः ३) —
तस्यािशताद्यादाहारात् बलं वणश्च वधते ।
तस्यतुसात्म्यं िविदतं चे ष्टाहारव्यपाश्रयम्॥ ३॥

मेल क्य बैठता है: वाक्य के दो शब्द ही उत्तर दे दे ते ह — बलम् और वणः; ोक म भी ‘बलं वणश्च वधते’ है। और
‘ऋतोः अनुसारम्’ का प्र तशब्द ोक म ‘ऋतुसात्म्यम्’ है। यही ऋतुभुक् का लक्षण है।

भावाथः (पाठानुसार): जो व्य क्त ऋतुओं के अनुकूल स्वास्थ्यप्रद आहार लेना जानता है और उसी के अनुसार
आचरण करता है, उसका खाया- पया सब बल बढ़ाने वाला, रंग-रूप नखारने वाला, सुख बढ़ाने वाला और आयु
बढ़ाने वाला होता है।

योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 106–108

Page 18 of 32

Page 20

as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions

(क) ोकानां पदच्छे दः अन्वयः च — ोकाः १–५
co m
e m.
m as
योग्यता वस्तरः

.co a g l
a s emनत्यं प्रयुञ्जीत, स्वास्थ्यं येनानुवतते। अजातानां वकाराणामनुत्प त्तकरं च यत्॥ १॥ — अस्य
gl
तच्च ोकस्य
a
प्र.1
पदच्छे दः, अन्वयः, अथः, भावः च लखत।

com
e m . ag
g l as
a
पद च् छे द ः — तत् च िन त्यम् पयुञ् जीत स्वास्थ्यम् येन अनुवत ते , अजातानाम् िवकाराणाम् अनुत्पित्तकरम् च यत्।

m
अन्वयः — अजातानां िवकाराणां च यत् अनुत्पित्तकरं, येन स्वास्थ्यम् अनुवत ते च तत् िन त्यं पयुञ् जीत।
co
m .
m as e
m . co agl
se का नत्य सेवन करना चा हए।
अथः ( हन्द ): जस (आहार) से स्वास्थ्य बना रहे, और जो अभी न हुए (भ वष्य के) रोग को उत्पन्न ही न होने दे —
l a
ag
उसी

om a s
. c agl
भावाथः (पाठानुसार): अथात् यस्य आहारस्य सेवनेन स्वास्थ्यस्य रक्षणं भवेत्, न जातानाम् अथात् अनुत्पन्नानां
वकाराणाम् उत्प त्तः न भवेत्, तादृशः आहारः eसेm
a s वनीयः।

agl
m
भावः: यह हतभुक् क प रभाषा है। ोक भोजन क सूची नह दे ता — कसौट दे ता है : जो खाना स्वास्थ्य

. co
m
टकाए और नए रोग न जन्माए, वही ‘ हत’ है। इसी लए कोई एक भोजन सबके लए हतकर नह होता; हर व्य क्त

m as e
.co l
को अपनी प्रकृ त के अनुसार यह कसौट लगानी पड़ती है।
a g
a s em
agl व्याकरण-सङ् केतः: प्रयुञ्जीत — प्र + युज् धातु, व ध लङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन, आत्मनेपद = ‘सेवन
करना चा हए’। व ध लङ् ही वधान/उपदे श का लकार है, इसी लए आयुवद के नयम प्रायः इसी म कहे जाते ह।
se m
com g l a
m . a
ase
प्र.2 agl
अल्पादाने गुरूणां च लघूनां चा तसेवने। मात्राकारणमु ष्टं द्रव्याणां गुरुलाघवे॥ २॥ — अस्य ोकस्य पदच्छे दः,
अन्वयः, अथः, भावः च लखत।

co m
m .
m as e
.co l

a g
se m
g l a पद च् छे द ः — अल्पादाने गुरूणाम् च लघून ाम् च अितसेवने मात्राकारणम् उि ष्टम् द व्याणाम् गुरु लाघवे।
a c
अन्वयः — गुरूणाम् (द व्याणाम्) अल्पादाने (िहतं भवित ) लघून ां (द व्याणां) च अितसेवने (हािनः भवित )।
m .
m a s e
.co उि ष्टम् (अिस्त)।
गुरु लाघवे (भोजनगहणे) द व्याणां मात्रा कारणम्
m agl
l a se
a g

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 19 of 32

Page 21

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

अथः ( हन्द ): भारी (ग रष्ठ) पदाथ थोड़ी मात्रा म लए जाएँ तो हत करते ह, और हलके (सुपाच्य) पदाथ भी अ धक
मात्रा म खाए जाएँ तो हा न करते ह। इस लए पदाथ के भारी या हलके होने म असली कारण मात्रा ही बताया गया
है।

भावाथः (पाठानुसार): अथात् ग रष्ठद्रव्या ण अ प अल्पमात्रं सेवनेन सुपाच्या न भव न्त, लघुद्रव्या ण च अ तमात्रं
सेवनेन हा नकरा ण जायन्ते। अतः मात्रानुसारम् एव खा दतव्यम्।

भावः: यह मतभुक् क प रभाषा है, और इसका तक सुन्दर है — भोजन ‘भारी’ या ‘हलका’ अपने-आप म नह
होता; मात्रा ही उसे भारी या हलका बनाती है। इसी लए ‘यह चीज़ मत खाओ’ कहने के बजाय आयुवद ‘ कतना
खाओ’ सखाता है।

व्याकरण-सङ् केतः: अल्पादाने, अ तसेवने, गुरुलाघवे — तीन सप्तमी एकवचन म ह, ‘जब ऐसा हो तब’ यह
अवसर बताने के लए। गुरूणाम्, लघूनाम्, द्रव्याणाम् — षष्ठी बहुवचन।

प्र.3 तस्या शताद्यादाहारात् बलं वणश्च वधते। तस्यतुसात्म्यं व दतं चेष्टाहारव्यपाश्रयम्॥ ३॥ — अस्य ोकस्य
पदच्छे दः, अन्वयः, अथः, भावः च लखत।

पद च् छे द ः — त स्य अिशताद्य ात् आहारात् बलम् वणः च वधते , त स्य ऋतुसात्म्यम् िविदतम्, चे ष्टा-आहार-
यपाश्रयम्।
व्

अन्वयः — त स्य (जन स्य) अिशताद्य ात् आहारात् बलं वणः च वधते । त स्य चे ष्टा-आहार-व्यपाश्र यम् ऋतुसात्म्यं
िविदतम् (भोक्तव्यम्)।

अथः ( हन्द ): उस (ऋतु के अनुसार खाने वाले) व्य क्त का खाया- पया आहार बल और वण (का न्त) दोन बढ़ाता
है, क्य क उसे ऋतु के अनुकूल आहार- वहार का ान है — जो आचरण और आहार दोन पर टका होता है।

भावाथः (पाठानुसार): वसन्तः, ग्रीष्मः, वषा, शरद्, हेमन्तः, श शरः — चे त षट् ऋतवः भव न्त। यः पुरुषः ऋतूनाम्
अनुकूलं स्वास्थ्यप्रदम् आहारसेवनं जाना त, तदनुसारं च आचरणं करो त, तस्य जनस्य अ शतं पीतं च सवम प
बलवधकं, वणका न्तजनकं, सुखवधकम् आयुवधकञ्च भव त। अतः ऋतोः अनुसारं भोक्तव्यम्।

भावः: यह ऋतुभुक् क प रभाषा है। ध्यान द जए — ोक केवल ‘आहार’ नह , चेष्टा-आहार दोन कहता है : ऋतु
के साथ भोजन ही नह , दनचया भी बदलनी चा हए। इसी लए पाठ अन्त म जोड़ता है — ‘ नय मत-भावेन
समयानुसारं सा वकभोजनम् आवश्यकम्’।

Page 20 of 32

Page 22

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

व्याकरण-सङ् केतः: अ शताद्यात् आहारात् — पञ्चमी वभ क्त, एकवचन; ‘ जससे वृ द्ध होती है’ यह कारण/
अपादान बताने के लए। स न्ध — ‘तस्य + ऋतुसात्म्यम् = तस्यतुसात्म्यम्’ (गुण-स , अ + ऋ = अर्)।

प्र.4 व्यायामः प्रातरु ाय, नत्यं दन्त वशोधनम्। स्वच्छजलेन सुस्नानं, बुभुक्षायाञ्च भोजनम्॥ ४॥ — अस्य ोकस्य
पदच्छे दः, अन्वयः, अथः, भावः च लखत।

पद च् छे द ः — व्यायामः पातः उत्थाय िन त्यम् द न्तिवशोधनम् स्वच् छजलेन सुस्नानम् बुभक्षु ायाम् च भोजनम्।
अन्वयः — िन त्यं पातः उत्थाय व्यायामः (करणीयः), द न्तिवशोधनं (क त्तव्यम्), स्वच् छजलेन सुस्नानं (कायम्),
बुभक्षु ायां (जातायां) भोजनं च (कत्तव्यम्)।

अथः ( हन्द ): प्र त दन प्रातःकाल उठकर व्यायाम करना चा हए, नत्य दाँत साफ़ करने चा हए, स्वच्छ जल से
अच्छ तरह स्नान करना चा हए, और भूख लगने पर ही भोजन करना चा हए।

भावाथः (पाठानुसार): प्र त दनं प्रातः एव जागरणं कुयात्, ततः परं व्यायामः करणीयः। पुनः सम्यक्तया दन्तमाजनं
करणीयम्। स्वच्छजलेन उत्तमरीत्या स्नानं कत्तव्यम्। यदा उदरे बुभुक्षा भव त तदा एव हतकरं स्वल्पं तथा ऋत्वनुकूलं
भोजनं ग्रहणीयम्।

भावः: यह ोक वही सन्दे श है जो धन्वन्त र ने सूत्ररूप म दया — पूरी दनचया चार पद म। सबसे मा मक शब्द
अ न्तम है — बुभुक्षायाञ्च भोजनम् : भोजन घड़ी दे खकर नह , भूख दे खकर करना चा हए। यही पाठ के आरम्भ के
चत्र-संवाद से जुड़ता है, जहाँ बेट भूख लगने पर भोजन माँगती है और माता उसे थोड़ा ठण्डा होने दे ती है।

व्याकरण-सङ् केतः: प्रातरु ाय = प्रातः + उ ाय ( वसग-स , वसग का ‘र्’)। उ ाय — उत् + स्था + ल्यप्,
पूवका लक अव्यय = ‘उठकर’। बुभुक्षायाम् — सप्तमी एकवचन, स्त्री लङ्ग (भाव-सप्तमी — ‘भूख लगने पर’)।

प्र.5 सव भवन्तु सु खनः, सव सन्तु नरामयाः। सव भद्रा ण पश्यन्तु मा क श्चद् दुःखभाग्भवेत्॥ ५॥ — अस्य ोकस्य
पदच्छे दः, अन्वयः, अथः, भावः च लखत।

पद च् छे द ः — सव भवन्तु सुिखनः सव सन्तु िनरामयाः सव भद ािण पश्यन्तु मा किश्चद् दुःखभाग् भवेत ्।
अन्वयः — सव सुिखनः भवन्तु, सव िनरामयाः सन्तु। सव भद ािण पश्यन्तु, किश्चद् दुःखभाक् मा भवेत ्।

Page 21 of 32

Page 23

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

अथः ( हन्द ): सब सुखी ह , सब नीरोग ह , सब कल्याण (शुभ) दे ख, कोई भी दुःख का भागी न बने।

भावाथः (पाठानुसार): संसारे सव सुखेन नवसेयुः, ते नीरो गणः च भवेयुः। ते परस्परं समभावेन उत्तम वचारैः च
वचारयेयुः। तेषां कल्याणं भवेत्। क श्चद् अ प जनः कदा प दुःखं न प्रा ुयात्। वस्तुतः सव नय मत- हतकर-भोजनेन
रोगमुक्ताः भवेयुः।

भावः: पाठ यहाँ व्य क्त से समाज तक पहुँचता है। पहले चार ोक बताते ह क म कैसे नीरोग रहूँ; यह ोक
कामना करता है क सब नीरोग रह। और पाठ इसे केवल प्राथना नह रहने दे ता — अ न्तम पं क्त जोड़ती है क
नय मत तथा हतकर भोजन से यह कामना सचमुच पूरी हो सकती है।

व्याकरण-सङ् केतः: चार क्रयाएँ — भवन्तु, सन्तु, पश्यन्तु — लोट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन; ‘भवेत्’
व ध लङ् एकवचन। नषेध म ‘न’ नह , ‘मा’ आया है। दुःखभाक् = दुःखस्य भाक् (भागी) — षष्ठी-तत्पुरुष; स न्ध
से ‘दुःखभाग्भवेत्’ बना।

योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 108
(ख) चरकसं हतायाः प रचयः

योग्यता वस्तरः

प्र.1 चरकसं हतायाः प रचयं लखत — का र चतवान् ? त स्मन् ग्र ेकत ाना न स न्त ? तत्र क व णतम् ?

उत्तरम् — महिषः चरकः चरकसंिहतागन्थं रिचतवान्। चरकसंिहता इित आयुवद स्य पमुखः गन्थः अिस्त।
अिस्मन् गन्थे अष्ट स्थानािन सिन्त।

Page 22 of 32

Page 24

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः ानम् हन्द म

१ सूत्र स्थानम् मूल सद्धान्त एवं सूत्र

२ िनदानस्थानम् रोग का कारण एवं पहचान

३ िवमानस्थानम् माप, मात्रा एवं परीक्षा- व ध

४ शरीर स्थानम् शरीर क रचना

५ इिन्द यस्थानम् इ न्द्रयाँ एवं रोग-लक्षण

६ िचिक त्सास्थानम् च कत्सा

७ क ल्पस्थानम् औषध- नमाण

८ िसि स्थानम् च कत्सा क सफलता एवं पञ्चकम

ग्र े क व णतम् — अत्र न केवलं रोगाणां च कत्सा एव व णता, अ पतु स्वास्थ्यस्य संरक्षणाथम् आयुषः च संवधनाथम्
उपायाः अ प न दष्टाः।

यही बात इस पाठ क जड़ है: चरकसं हता केवल ‘रोग हो जाने पर क्या कर’ नह बताती; वह ‘रोग हो ही न, और
आयु बढ़े ’ — इसके उपाय भी बताती है। पाठ के तीन ोक ( हतभुक्, मतभुक्, ऋतुभुक्) इसी दूसरे भाग से आए
ह। इसी लए वाग्भट कहते ह — ‘महषः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः।’

पाठ-सम्ब ः: धन्वन्त र ने वाग्भट से कहा था — ‘त्वम् अवश्यमेव आयुवद-अष्टाङ्ग वचार-सारभूतं तन्त्रं वरचयेः’ —
अथात् आयुवद के आठ अङ्ग के वचार का सार-ग्रन्थ रचो। आचाय वाग्भट ने वही कया, और चरक उनसे भी
पूववत आचाय ह।

योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 108–109

Page 23 of 32

Page 25

as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions

(ग) आहारप रचयः — सा त्त्वकः, राज सकः, ताम सकः आहारः (श्रीमद्भगव ता १७/८–१०)
co m
e m.
m as
योग्यता वस्तरः

.co a g l
a s eत्त्mवकः आहारः — “आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्री त ववधनाः। रस्याः स्नग्धाः
gl
सा रा हृद्याः आहाराः
a
प्र.1
सा त्त्वक प्रयाः॥” (श्रीमद्-भगव ता १७/८) — अस्य भावाथ लखत।

co m
e m . ag
g l as
a
पद च् छे द ः — आयुः-सत्त् व-बल-आरोग् य-सुख-पीित -िववधनाः रस्याः िस्न ग् धाः िस्थराः हृद्य ाः आहाराः साित्त् वकिपयाः।
अन्वयः — आयुः-सत्त् व-बल-आरोग् य-सुख-पीित -िववधनाः, रस्याः, िस्न ग् धाः, िस्थराः, हृद्य ाः आहाराः m
. co
साित्त्वक(जनानां) िपयाः (भविन्त)। s e m
m a
m . co agl
l a se
ag अथः ( हन्द ): जो आहार आयु, सत्त्व (बु -बल), बल, आरोग्य, सुख और प्री त — इन छह को बढ़ाने वाले
ह , तथा रसयुक्त, स्नग्ध, स्थर (दे र तक शरीर म टकने वाले) और हृदय को भाने वाले ह — वे सा वक व्य क्तय
m a s
.co agl
को प्रय होते ह।

se m
g l a
a
भावाथः (पाठानुसार): खाद्यं वना जीवनधारणं सम्भवं ना स्त। भगवता प्रदत्तं शरीरम् आहारेण पुष्टं भूत्वा
कमकरणाय समथ स्यात्। ये आहाराः आयुषः वद्धकाः, बु द्धप्रदायकाः, बलकारकाः, आरोग्यप्रदाः, सुखदाः,

co m
.
प्री तगुणयुक्ताः, रसयुक्ताः, स्नग्धगुणप रपूणाः, खाद्यसारप रपू रताः च — ते आहाराः स्वभावतः सा वकजनानां
m
m as e
l
प्रयाः भव न्त। अतः आरोग्याथ सा त्त्वकः आहारः सेवनीयः।
.co a g
a s em
agl भावः: ध्यान द जए — ोक स्वाद से नह , प रणाम से आहार को पहचानता है : जो खाकर आयु, बल और

m
प्रसन्नता बढ़े , वही सा वक। यही कसौट पाठ के ोक १ क ‘ हतभुक्’ वाली कसौट से मलती है।

a se
.com a g l
m
ase
प्र.2 agl
राज सकः आहारः — “कट् वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्ष वदा हनः। आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः॥”
(श्रीमद्भगव ता १७/९) — अस्य भावाथ लखत।

co m
m .
m as e
l

.co a g
m पदच्छे दः — कटु -अम्ल-लवण-अित-उष्ण-तीक्ष्ण-रूक्ष-िवदािहनः आहाराः राजसस्य इष्टाः दुःख-शोक-आमय-
l a se
ag
पदाः। .c
s e m
m -िवदािहनः दुःख-शोक-आमय-पदाः आहाराः राजसस्य इष्टाः a
agl
अन्वयः — कटु -अम्ल-लवण-अत्युष्ण-तीक्ष्cणo-रूक्ष
e m.
(भविन्त )।
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 24 of 32

Page 26

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

अथः ( हन्द ): अत्यन्त तीखे, ख े , नमक न, बहुत गरम, तेज़, रूखे और जलन पैदा करने वाले आहार राजस प्रकृ त
के लोग को प्रय होते ह; ये आहार दुःख, शोक और रोग दे ने वाले ह।

भावाथः (पाठानुसार): अ तकटु ः, अत्यम्लः, अ तलवणः, अत्युष्णः, अ ततीक्ष्णः, अ तरूक्षः, अ त वदाही च आहारः
राजसजनानां प्रयः भव त। एतस्य आहारस्य सेवनेन अनेके व्याधयः भव न्त। एतस्य सेवनेन मनुष्यः दुःखं शोकं च
प्रा ो त। अतः हतम् इच्छन् छात्रः कदा प एतस्य आहारस्य सेवनं न कुयात्।

भावः: ध्यान दे ने योग्य शब्द है अ त — कटु , अम्ल, लवण अपने-आप म व जत नह ; अ त होने पर वे रोग बनते ह।
यह ठ क ोक २ ( मतभुक्) क बात है — दोष वस्तु का नह , मात्रा का है।

पाठ-सम्ब ः: पाठ के आरम्भ म माता यही कहती है — ‘अत्युष्णं भोजनं हतकरं न भव त’। वही ‘अत्युष्ण’ शब्द
यहाँ फर आया है।

प्र.3 ताम सकः आहारः — “यातयामं गतरसं पू त पयु षतं च यत्। उ च्छष्टम प चामेध्यं भोजनं तामस प्रयम्॥”
(श्रीमद्भगव ता १७/१०) — अस्य भावाथ लखत।

पद च् छे द ः — यातयामम् गतरसम् पूित पयुिषतम् च यत् उिच् छष्टम् अिप च अमेध्यम् भोजनम् तामसिपयम्।
अन्वयः — यत् यातयामं, गतरसं, पूित , पयुिषतं , उिच् छष्टम् अिप च अमेध्यं भोजनम् (अिस्त ), तत् तामस(जनाना)ं
िपयम् (भवित)।

अथः ( हन्द ): जो भोजन दे र का रखा हुआ (यातयाम), रस-र हत, दुगन्धयुक्त, बासी, जूठा तथा अप वत्र हो — वह
तामस प्रकृ त के लोग को प्रय होता है।

भावाथः (पाठानुसार): एकप्रहरात् पूव न मतं भोजनम्, अध सक्तं खाद्यम्, अ ग्नदग्धं भोजनम्, आतपशुष्कम्
अन्नम्, ऋतौ गते रसहीनं फलं, पलाण्डु -लशुनाद न दुगन्धपूणा न भोजना न, पूव दवसस्य अव शष्टं खाद्यम्, उ च्छष्टं
खाद्यं, मांस-अण्डकाद न अमेध्यभोजना न तथा च तामस-गुण-युक्ता न द्रव्या ण तामसपुरुषाणां प्रयतरा ण भव न्त।
एतैः भोज्यद्रव्यैः ते प्रीताः आन न्दताः च भव न्त। ताम सक-भोजनेन नद्रा, तन्द्रा, आलस्यं च वधन्ते। अतः
वद्या थ भः एता न त्यक्तव्या न।

भावः: तीन प्रकार का नष्कष एक पं क्त म — सा वक आहार आयु-बल बढ़ाता है, राज सक रोग और शोक दे ता
है, ताम सक आलस्य और तन्द्रा बढ़ाता है। वद्याथ के लए पाठ का स्पष्ट नदश है — सा वक आहार लो, शेष दोन
छोड़ो।

Page 25 of 32

Page 27

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

व्याकरण-सङ् केतः: यातयामम् = यातः यामः यस्य तत् — बहु ी ह समास (‘ जसका एक प्रहर बीत चुका हो’)।
गतरसम् = गतः रसः यस्मात् तत् — यह भी बहु ी ह।

योग्यता वस्तरः — पृष्ठ 109–110
(घ) काश्चन आहार वषयकसूक्तयः

योग्यता वस्तरः

प्र.1 “भोजनं परमेशस्य, भक्तये जीवनाय च। त्वं तु मूख वजाना स भोजनाथ ह जीवनम्॥” (सुमनोवा टका) —
अस्याः सूक्तेः अथ भावं च लखत।

अन्वयः — भोजनं परमेशस्य भक्तये जीवनाय च (अिस्त )। हे मूख ! त्वं तु ‘भोजनाथ ं िह जीवनम्’ (इित )
िवजानािस।

अथः ( हन्द ): भोजन तो ईश्वर क भ क्त के लए और जीवन धारण करने के लए है। पर अरे मूख ! तू तो समझता
है क जीवन ही भोजन के लए है।

भावः: सू क्त एक ही वाक्य को उलटकर पूरा उपदे श दे दे ती है — ‘जीवन के लए भोजन’ ठ क है, ‘भोजन के लए
जीवन’ भूल है। जो खाने को ही जीवन का लक्ष्य बना ले, वह न स्वस्थ रहता है न सन्तुष्ट। भोजन साधन है, साध्य
नह ।

व्याकरण-सङ् केतः: भक्तये तथा जीवनाय — दोन चतुथ एकवचन, प्रयोजन बताने के लए (तादथ्य चतुथ )।
मूख — सम्बोधन प्रथमा, एकवचन।

Page 26 of 32

Page 28

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 “अनारोग्यमनायुष्यमस्वग्य चा तभोजनम्। अपुण्यं लोक व ष्टं तस्मात्तत्प रवजयेत्॥” (मनुस्मृ तः २/५७) —
अस्याः सूक्तेः अथ भावं च लखत।

पद च् छे द ः — अनारोग् यम् अनायुष्यम् अस्वग् यम् च अितभोजनम् अपुण्यम् लोकिविद्वष्टम् त स्मात् तत् पिरवजयेत ्।
अन्वयः — अितभोजनम् अनारोग् यम्, अनायुष्यम्, अस्वग् यम्, अपुण्यं लोकिविद्वष्टं च (भवित ); त स्मात् तत्
पिरवजयेत्।

अथः ( हन्द ): अ धक भोजन करना आरोग्य नष्ट करने वाला, आयु घटाने वाला, स्वग से व ञ्चत करने वाला, पुण्य-
र हत तथा लोक म न न्दत है; इस लए उसे पूरी तरह छोड़ दे ना चा हए।

भावः: यह ठ क मतभुक् का समथन है। ोक अ तभोजन के पाँच दोष एक साथ गनाता है — शरीर (अनारोग्य),
आयु (अनायुष्य), परलोक (अस्वग्य), पुण्य (अपुण्य) और समाज (लोक व द्वष्ट)। इसी लए वह ‘कम करो’ नह ,
प रवजयेत् — ‘ बलकुल छोड़ दो’ — कहता है।

व्याकरण-सङ् केतः: अनारोग्यम्, अनायुष्यम्, अस्वग्यम्, अपुण्यम् — चार म नञ् समास (न + आरोग्यम् =
अनारोग्यम्; स्वर से पहले ‘न’ का ‘अन्’ हो जाता है)। प रवजयेत् — प र + वृज् ( णच्), व ध लङ् , प्रथम पुरुष,
एकवचन।

प्र.3 “ मताहारो नरः सोढुं शक्तः कष्ट-शतं सुखम्। अनभ्यस्तो ह कष्टानामध्यशनो वपद्यते॥” (सुमनोवा टका) —
अस्याः सूक्तेः अथ भावं च लखत।

पद च् छे द ः — िमताहारः नरः सोढुम् शक्तः क ष्ट -शतम् सुखम्। अन भ्यस्तः िह क ष्टानाम् अध्यशनः िवपद्य ते ।
अन्वयः — िमताहारः नरः क ष्ट -शतं सुखं सोढुं शक्तः (भवित )। क ष्टानाम् अन भ्यस्तः अध्यशनः िह िवपद्य ते ।

अथः ( हन्द ): मताहारी (नपा-तुला खाने वाला) मनुष्य सैकड़ कष्ट भी सुख से सह लेने म समथ होता है; परन्तु जो
अ धक खाने वाला है और कष्ट सहने का अभ्यासी नह , वह वप त्त म पड़ जाता है।

भावः: यहाँ मताहार का लाभ केवल पाचन तक सी मत नह है — वह सहनश क्त दे ता है। संयम का अभ्यास शरीर
को क ठनाई सहने योग्य बनाता है; अ त-भोजन उसे कोमल और अस हष्णु बना दे ता है। यही ‘ मतभुक्’ का
जीवनगत फल है।

Page 27 of 32

Page 29

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

व्याकरण-सङ् केतः: सोढु म् — सह् धातु + तुमुन् प्रत्यय (अव्यय) = ‘सहने के लए’। अध्यशनः = अ ध + अशनम्
— अ धक/असमय भोजन करने वाला। मताहारः = मतः आहारः यस्य सः — बहु ी ह समास।

प्र.4 “अशीतेनाम्भसा स्नानं कवोष्णदुग्धसेवनम्। एतद् वो मानुषाः पथ्यं स्नग्धमुष्णं च भोजनम्॥” (भोजप्रब ः) —
अस्याः सूक्तेः अथ भावं च लखत।

पद च् छे द ः — अशीते न अम्भसा स्नानम् कवोष्ण-दुग् ध-सेवनम्। एतत् वः मानुषाः पथ्यम् िस्न ग् धम् उष्णम् च
भोजनम्।
अन्वयः — हे मानुषाः ! अशीते न अम्भसा स्नानम्, कवोष्ण-दुग् ध-सेवनम्, िस्न ग् धम् उष्णं च भोजनम् — एतत् वः
पथ्यम् (अिस्त)।

अथः ( हन्द ): हे मनुष्यो ! बना ठण्डे (अथात् कुछ गुनगुने) जल से स्नान, हलके गरम दूध का सेवन तथा स्नग्ध
और गरम भोजन — यही तुम्हारे लए पथ्य ( हतकर) है।

भावः: यह सू क्त पाठ क दो बात को एक साथ जोड़ती है — ोक ४ का ‘स्वच्छजलेन सुस्नानम्’ और गीता के
सा वक आहार का ‘ स्नग्धाः’ गुण। साथ ही यह पाठ के आरम्भ को भी सन्तु लत करती है : भोजन उष्ण हो — यह
पथ्य है; पर अत्युष्ण हो — तो हतकर नह । संयम दोन ओर चा हए।

व्याकरण-सङ् केतः: अशीतेन अम्भसा — तृतीया एकवचन (करण)। कवोष्णम् = ईषत् उष्णम् (थोड़ा गरम,
गुनगुना) — ‘कु/कव’ यहाँ ‘थोड़ा’ के अथ म। वः = युष्मद् शब्द का चतुथ /षष्ठी बहुवचन का पयाय-रूप = ‘तुम्हारे
लए’।

प रयोजनाकायम् — पृष्ठ 110

Page 28 of 32

Page 30

as e
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?
a g l AglaSem · NCERT Solutions

प रयोजना-काय (प्रकल्प) — त्री ण काया ण
co m
e m.
m as
प रयोजनाकायम्

.co a g l
a s em प रसरे वद्यमानानां पञ्चवृक्षाणां नामा न तेषाम् औषधीयं प्रयोगं च लखत।
gl
वद्यालयस्य
a
प्र.1

o m
c ag

कैसे कर: यह अपने वद्यालय के अहाते म घूमकर करने काm .
s e काम है। (1) पाँच पेड़-पौधे चु नए जो सचमुच आपके प रसर म ह। (2)
a उसका जो औषधीय उपयोग आपके व ान- शक्षक, आयुवद- च कत्सक
प्रत्येक का संस्कृत नाम और स्थानीय नाम ल खए।l(3)
a g
या घर के बड़े बताएँ, वही ल खए। (4) चाह तो पत्ती चपकाकर या चत्र बनाकर एक चाट बनाइए।
नमूना उत्तर (नमूना — अपने वद्यालय के पेड़ के अनुसार बद लए):
co m
em.
m l as
.co g
संस्कृतनाम हन्द नाम औषधीयः प्रयोगः (संस्कृतम्) हन्द म

m a
l a se
g
तुल सी तुलसी तुल सीपत्र ाणां क्वाथः कासे श्वासे च उपकारकः। पत्त का काढ़ा खाँसी-जकाम म

a लाभकारी।

m a s
.co agl
िनम्बः नीम िनम् बपत्र ािण त्वग ोगेष ु वणशोधने च पयुज्यन्ते। पत्ते त्वचा-रोग तथा घाव साफ़ करने म।

se m
l a
आमलकी आँवला आमलकीफलं के शानां नेत्र योः पाचनस्य च िहतकरम्। फल बाल, आँख और पाचन के लए

a g हतकर।

m
पीपल छाल श्वास-रोग म; पेड़ भरपूर ऑक्सीजन

co
अश्वत्थः अश्वत्थस्य त्वक् श्वासरोगे उपयुज्यते; वृक्षः पचरु ं
पाणवायुं ददाित। दे ता है।
m .
m गूa
e
दाsजलन और त्वचा क रक्षा म
.co
घ ृतकु मारी घृतकुमारी तस्याः द वः दाहे त्वचायाः च र क्षणे उपकरोित।
ag l
a s em (एलोवेरा) उपयोगी।

agl
ध्यातव्यम्: यह सूची पाठ म नह है — यह केवल नमूना है, ता क आप प्रारूप समझ सक। औषधीय प्रयोग सदा
se m
com g l a
. a
शक्षक या वैद्य से पूछकर ही लख, और स्वयं कोई औष ध न ल।
m
ase
agl
m
स्वास्थ्येन सम्ब ानां दश ोकानां संग्रहणं कुरुत।
co
प्र.2

m .
m ase
.co
a g l
a s emकैसे कर: एक ‘स्वास्थ्य- ोक-सञ्च यका’ बनाइए। हर पृष्ठ पर — ोक, उसका ोत (ग्रन्थ तथा अध्याय/ ोक-संख्या), और दो
agl पं क्तय म भावाथ। पाँच ोक तो इसी पाठ से मल जाएँगे; शेष योग्यता वस्तरः क सू क्तय , गीता, मनुस्मृ त, सुभा षतसंग्रह
.c
e m
अथवा पुस्तकालय क आयुवद-पुस्तक से ली जए।

m a s
. co agl
नमूना संग्रह (दश ोकाः) —

e m
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 29 of 32

Page 31

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

क्रमः ोकस्य आरम्भः ोतः वषयः

१ तच्च िनत्यं पयुञ् जीत, स्वास्थ् यं येनानुवतते… चरकसं हता (पाठे ोकः १) हतभुक्

२ ु णां च लघूनां चाितसे वने…
अल्पादाने ग रू चरकसं हता (पाठे ोकः २) मतभुक्

३ तस्यािशताद्य ादाहारात् बलं वणश्च वध ते… चरकसं हता (पाठे ोकः ३) ऋतुभुक्

४ व्यायामः पातरुत्थाय, िनत्यं द न्तिवशोधनम्… पाठे ोकः ४ दनचया

५ सव भवन्तु सुिखनः, सव स न्तु िनरामयाः… पाठे ोकः ५ सवकल्याण-प्राथना

६ आयुःस त्त् वबलारोग्यसुखपीितिववध नाः… श्रीमद्भगव ता १७/८ सा वक आहार

७ कट् वम् ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षिवदािहनः… श्रीमद्भगव ता १७/९ राज सक आहार

८ यातयामं गतरसं पूित पयुिषतं च यत्… श्रीमद्भगव ता १७/१० ताम सक आहार

९ अनारोग्यमनायुष्यम स्वग्य ं चाितभोजनम्… मनुस्मृ तः २/५७ अ तभोजन- नषेधः

१० अशीतेनाम् भसा स्नानं कवोष्णदुग्धसे वनम्… भोजप्रबन्धः स्नानं तथा पथ्यम्

सुझावः: संग्रह करते समय हर ोक के आगे एक पं क्त अपनी भी ल खए — ‘इसे म अपने दन म कैसे उतारूँ ?’
इससे संग्रह केवल नकल न रहकर अभ्यास बन जाएगा।

प्र.3 पाठे आगतान् ोकान् कण्ठ ीकृत्य कक्षायां श्रावयत।

कैसे कर: पाठ के पाँच ोक कण्ठस्थ करके कक्षा म सस्वर सुनाइए। कण्ठस्थ करने का सरल क्रम —

1. पहले पदच्छे द प ढ़ए, ता क हर पद अलग-अलग समझ म आ जाए।
2. फर अन्वय प ढ़ए — इससे वाक्य का ढाँचा मन म बैठ जाता है।
3. अब ोक को अनुष्टुप् छन्द क चाल म, आठ-आठ अक्षर के चार चरण म, ताल दे कर बो लए।
4. दन म तीन बार, तीन दन तक दोहराइए — याद पक्का हो जाएगा।

सुनाने योग्य पाँच ोक —

Page 30 of 32

Page 32

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

१. त च् च िन त्यं पयुञ् जीत , स्वास्थ्यं येन ानुवत ते । अजातानां िवकाराणामनुत्पित्तकरं च यत्॥

२. अल्पादाने गुरूणां च लघून ां चाितसेवने । मात्राकारणमुि ष्टं द व्याणां गुरु लाघवे॥

३. त स्यािशताद्य ादाहारात् बलं वणश्च वधते । त स्यतुसात्म्यं िविदतं चे ष्ट ाहारव्यपाश्र यम्॥

४. व्यायामः पात रुत्थाय, िन त्यं द न्तिवशोधनम्। स्वच् छजलेन सुस्नानं, बुभ क्ष
ु ायाञ् च भोजनम्॥
५. सव भवन्तु सुिखनः, सव सन्तु िनरामयाः। सव भद ािण पश्यन्तु मा किश्चद् दुःखभाग् भवेत ्॥

उच्चारण-सङ् केतः: ‘प्रयुञ्जीत’ म ञ्ज, ‘चेष्टाहारव्यपाश्रयम्’ म श्र तथा ‘दुःखभाग्भवेत्’ म ग्भ — इन संयुक्ताक्षर
पर वशेष ध्यान द जए। ोक ३ म ‘तस्य + ऋतुसात्म्यम्’ क स न्ध से बना ‘तस्यतुसात्म्यम्’ एक ही शब्द क तरह
बो लए।

अध्याय — एक नज़र म
पाठ का ढाँचा — आरम्भ म चत्र-संवाद (रसोई का दृश्य) है, जहाँ भूखी पुत्री शीघ्र भोजन माँगती है और माता कहती है —
‘अत्युष्णं भोजनं हतकरं न भव त’। इसी बहाने माता वाग्भट और शुक क कथा सुनाती है; फर गद्य-कथा, पाँच ोक,
शब्दाथ-सारणी, व्याकरण-पे टका और अभ्यास आते ह।
कथा — भारतवष के वैद्य व्या धय का शमन कैसे करते ह, यह जानने के लए भगवान् धन्वन्त र मनोहर शुक-रूप धारण कर
गाँव-गाँव घूमे और वृक्ष पर बैठकर ‘कोऽरुक्’ पुकारते रहे। कसी ने ध्यान नह दया। अन्त म वे आचाय वाग्भट क कुट के
प्राङ्गण म आए — वाग्भट ने प्रश्न समझा और उत्तर दया।
पाठ का मूल उत्तर — ‘कोऽरुक्?’ अथात् कः स्व ः नीरोगः वतते ? उत्तर तीन सूत्र म — यः हतभुक्, मतभुक्, ऋतुभुक्
च, सः एव सवदा स्वस्थः भव त। हतभुक् = हतकर भोजन करने वाला, मतभुक् = मात्रा भर खाने वाला, ऋतुभुक् = ऋतु के
अनुकूल खाने वाला।
तीन ोक — चरकसं हता से — ोक १ ‘तच्च नत्यं प्रयुञ्जीत’ हतभुक् को, ोक २ ‘अल्पादाने गुरूणां च’ मतभुक्
को तथा ोक ३ ‘तस्या शताद्यादाहारात्’ ऋतुभुक् को समझाता है। ोक ४ (व्यायामः प्रातरु ाय…) दनचया का और
ोक ५ (सव भवन्तु सु खनः…) शा न्तपाठ है।
व्याकरण का केन्द्र — ‘इदम् अत्र अवधेयम्’ पेट वशेषण तथा वशेष्य सखाती है और तीन नयम दे ती है — वशेष्य का
जो लङ्ग, वचन और वभ क्त होगी, वशेषण क भी वही होगी। सूत्र- ोक — य ल्लङ्गं यद्वचनं या च वभ क्त वशेष्यस्य।
त ल्लङ्गं तद्वचनं सा च वभ क्त वशेषणस्या प॥
योग्यता वस्तरः — पाँच ोक का पदच्छे द-अन्वय-भावाथ, चरकसं हता का प रचय (आठ स्थान), आहार के तीन प्रकार
(सा वक, राज सक, ताम सक — गीता १७/८–१०) तथा आहार- वषयक चार सू क्तयाँ द गई ह।

Page 31 of 32

Page 33

कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्दः अथः (संस्कृतम्) हन्द अथ ENGLISH

अरुक् स्वस्थः नीरोग One who is not sick

नरामयाः नीरोिगणः स्वस्थ Healthy

हतभुक् यः िहतकरं खादित हतकारक खाने वाला One who eats nutritious food

मतभुक् यः आवश्यक-मात्रा-अनुस ारं सी मत मात्रा म भोजन करने One who eats food in limited quantity
भोजनं खादित वाला

ऋतुभुक् यः ऋत्वनुकू लं पथ्यं भोजनं ऋतु के अनुसार उपयुक्त भोजन One who eats food which is appropriate
करोित करने वाला as per season

झटत शीघ मेव शीघ्र Quickly

प्रयुञ्जीत पयोगं कु य त् प्रयोग करे Should take

अजातानाम् न उत्प ानाम् जो पैदा नह हुए उनको Of those who are not born

अनुत्प त्तकरम् यत् (िवकारान्) न उत्पादयित जो ( वकार ) को उत्पन्न न करे That which may not cause (harm)

ग रष्ठम् यत् किठनतया पच्यते जो क ठनता से पचे Difficult to digest

अ तमात्रम् मात्रायाः आिधक्यम् अत्य धक मात्रा से In excessive quantity

बुभुक्षायाम् क्षध
ु ायाम् भूख लगने पर On feeling hungry

Page 32 of 32

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages33
Updated19 Sep 2026