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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा

AglaSem पर कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 1 Exploring the Investigative World of Science (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा - Page 1 of 16

About NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा

NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (16 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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Yes. NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 1 विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा – Text

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Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 1: व ान के अन्वेषी संसार क
खोज या ा

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

1–7 6 14 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 15 pages

Page 2

कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: व ान के अन्वेषी संसार क खोज
यात्रा
कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत NCERT समाधान। इस
आरं भक अध्याय म छपा हुआ प्रश्न-समूह केवल एक है — पृष्ठ 1 पर खोजबीन और वचार कर — शेष सभी प्रश्न पाठ के बीच म ही पूछे गए ह, पृष्ठ
6–7 पर पूड़ी के फूलने तक। यहाँ हर प्रश्न का उत्तर केवल अवलोकन नह , उसके पीछे क काय व ध बताते हुए दया गया है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 8) 1–7

खं ड प्रश्न

6 14

माध्यम

हन्द

खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 1
अध्याय का आरंभ — कक्षा 8 क यात्रा आरंभ करने वाले प्रश्न

खोजबीन और वचार कर

प्र.1 पूड़ी क एक परत पतली और दूसरी मोट क्य होती है?

क्य क पूड़ी क दोन परत एक ही क्षण म नह सकत । जो परत पहले सख्त हो जाती है वह फर खच नह पाती; जो परत अब
भी मुलायम है उसी को भाप बाहर क ओर धकेलती है, अतः वही अ धक क्षेत्रफल म फैलकर पतली हो जाती है।
पूड़ी के भीतर क्या होता है, इसे क्रम से दे खए —

1. बेली हुई पूड़ी के आटे म जल बँधा हुआ रहता है।
2. गरम तेल का तापमान लगभग 180 °C होता है, जो जल के क्वथनांक से बहुत अ धक है। एक-दो सेकंड म ही पूड़ी क बाहरी
सतह का जल उड़ जाता है और वहाँ एक पतली, बंद परत (क्रस्ट) बन जाती है।
3. इस परत के नीचे का जल तेजी से भाप म बदलता है। उतना ही जल भाप बनने पर एक हजार गुना से भी अ धक स्थान घेरता है,
अतः भीतर का दाब तेजी से बढ़ जाता है।
4. भीतर का आटा अब भी मुलायम और लचीला है, इस लए फटने के स्थान पर वह दो परत म बँटकर गुब्बारे क भाँ त फूल
जाता है।
5. जो परत पहले तेल के संपक म आई — और जसे हम झारे से दबाकर रखते भी ह — वह सक चुक होती है, अतः बहुत कम
खचती है। दूसरी परत मुलायम रहती है, दाब के आगे झुक जाती है और खच जाती है। उतना ही आटा अ धक क्षेत्रफल म
फैलेगा तो पतला ही होगा।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

पतली, िखंची हुई परत

रुकी हुई भाप

मोटी परत — यह पहले तेल मे ं िसकी

फूली हुई पूड़ी का अनुप्रस्थ काट। बंद परत के नीचे रुक भाप पूड़ी को दो परत म बाँट दे ती है; केवल मुलायम परत ही खच पाती है, अतः
वही पतली होती है।

ऐसा क्य होता है: हाथ से बेली गई पूड़ी क मोटाई कभी भी पूणतः एक-सी नह होती। जहाँ आटा कुछ मोटा है वहाँ
जल अ धक है और वह भाग अ धक दे र तक मुलायम रहता है, अतः दाब बढ़ने पर वही भाग सबसे पहले फैलता है।
मोटाई, तापमान और पूड़ी तेल म कस प्रकार गई — ये तीन मलकर तय करते ह क कौन-सी परत पतली रहेगी।

स्वयं जाँ चए: बलकुल समान मोटाई क दो पू ड़याँ बे लए। एक को सीधा सरकाकर तेल म डा लए और दूसरी को
कनारे क ओर से गराइए। क्या पतली परत सदै व वही होती है जो तेल के संपक म बाद म आई? यह काय कसी
व रष्ठ क उप स्थ त म ही क जए।

क्या आप जानते ह? पुस्तक पृष्ठ 7 पर स्पष्ट लखती है — पूड़ी के फूलने का यह सामान्य अवलोकन भी
वै ा नक ारा आज तक पूणतः समझा नह गया है। ऊपर द गई व्याख्या हमारी सव त्तम समझ है; इसक
बारी कयाँ आज भी आपक अपनी रसोई म पड़ा हुआ एक शोध-प्रश्न ह।

प्र.2 क्या संसार के सभी समुद्र तट एवं रे गस्तान म वद्यमान कुल रेत के कण अ धक ह अथवा हमारी आकाशगंगा म
तार क संख्या अ धक है?

रेत के कण कह अ धक ह — लगभग एक अरब गुना अ धक। हमारी आकाशगंगा वशाल है, परंतु एक तारा भी वशाल होता
है, अतः उसम कुछ सौ अरब तार के लए ही स्थान है। रेत का एक कण अत्यंत सूक्ष्म है, इस लए एक ही समुद्र तट पर इतने कण ह
जन्ह गना ही नह जा सकता।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

इसका उत्तर आप स्वयं एक को ट-मान आकलन से नकाल सकते ह — इसम केवल 10 क घात का सही होना आवश्यक है।

रेत का एक कण ≈ 0.5 mm चौड़ ा → आयतन ≈ 0.125 mm³

1 cm³ = 1000 mm³ → 1000 ÷ 0.125 = 8000 कण-आयतन

कण कभी पूणतः सटकर नही ं भरते ; लगभग 60% स्थान ही भरता है

अतः 1 cm³ ≈ 8000 × 0.6 ≈ 5000 कण

1 m³ = 106 cm³ → 1 m³ ≈ 5 × 109 कण

संसार के सभी समुद तटों की रेत (एक पचिलत आकलन) ≈ 7.5 × 1018 कण

इसमें रेिगस्तान जोिड़ ए — अके ला सहारा सभी तटों से बहुत बड़ ा है — कु ल ≈ 1020 कण या उससे भी अिधक

हमारी आकाशगंगा (मंद ािकनी) में तारे ≈ 100 से 400 अरब = 1 से 4 × 1011

1020 ÷ 1011 = 109 → आकाशगंगा के पत्येक तारे के िलए लगभग एक अरब रेत के कण

ऐसा क्य होता है: दोन संख्याएँ इस लए एक-सी लगती ह क्य क दोन “बहुत बड़ी” ह, परंतु बड़ा होने का भी
अपना माप है। 10 का प्रत्येक गुणक संख्या को दस गुना कर दे ता है, और रेत ऐसे नौ गुणक से तार को पीछे छोड़
दे ती है। हमारे म स्तष्क को इस अंतर का अनुमान नह होता — इसी लए यह प्रश्न पूछने योग्य है।

क्या आप जानते ह? एक शब्द बद लए और उत्तर पलट जाएगा। य द रेत क तुलना संपूण दृश्य ब्र ांड के सभी
तार से कर — लगभग 1022 से 1024, क्य क आकाशगंगाएँ ही लगभग दो खरब ह — तो तारे सरलता से जीत
जाएँगे। यही इस प्रश्न क सबसे बड़ी सीख है: वै ा नक प्रश्न म यह स्पष्ट होना चा हए क तुलना कससे क जा रही
है।

प्र.3 कक्षा 6 से ही हम अपने आस-पास के पौध और जंतुओं क अ वश्वसनीय व वधता का अवलोकन करते आ रहे
ह। व भन्न आकार क प त्तय से लेकर अनेक प्रकार के क ट तक प्रकृ त ने इतनी व्यापक व वधता क रचना
क्य क है?

क्य क कोई एक बनावट सब जगह काम नह आती, और सजीव कसी एक न श्चत साँचे म नह ढले होते। संत त अपने
जनक से सदै व थोड़ी भन्न होती है; प्रत्येक स्थान पर वे ही भन्नताएँ अ धक टकती ह जो उस स्थान के अनुकूल ह , और वही आगे
क पी ढ़य तक पहुँचती ह। अत्यंत लंबे समय म इसी प्र क्रया ने पृथ्वी के हर कोने को एक अलग प्रकार के जीवन से भर दया है।
इसम दो ही वचार पूरा काम करते ह —

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

प्रत्येक आवास एक अलग समस्या रखता है। रे गस्तान जल बचाने क माँग करता है। तालाब तैरते रहने क । घने वन का
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अँधेरा तल अत्यंत क्षीण प्रकाश को भी पकड़ने क । एक ही शरीर-रचना इन सबका समाधान नह कर सकती।
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gसामान्य हो जाता है। अलग-
क हा न कम.c a
भन्नता वंशानुगत होती है। एक ही पौधे के दो बीज या दो ट े कभी एक-समान नह होते। शुष्क स्थान पर जन जीव म जल

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e क सम ष्टयाँ अलग-अलग दशा म बढ़ती जाती ह और बहुत लंबे समय बाद स्पष्ट रूप से भन्न प्रकार के जीव बन
sस्थान
होती है वे अ धक जी वत रहते ह और अ धक संत त छोड़ते ह, अतः वह लक्षण वहाँ

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a जाती ह।
अलग

m उत्तर दे ने वाला लक्षण
coउसका
आवास वहाँ क समस्या
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a नागफनी — पित्त याँ काँटों में बदली,ं मोटा हरा तना जल संिचत करता है
रे िगस्तान जल दुलभ और सूय प्रचंड

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तैरते रहना और प्रकाश तक पहुँचना जलकुं भी — वायु से भरा स्पंजी फू ला हुआ वृंत
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तालाब की सतह

पकड़. ले ं
चौड़ ी, पतली और बड़ ी पित्त याँ जो हर िकरण m
m a se
घने वन का तल प्रकाश बहुत कम पहुँचता है

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ठं डा, तेm चीड़ — शंक्वाकार वृक्ष पर सुईaजैस ी पतली पित्त याँ
a s e ज हवा वाला पवत बफ का भार और हमशीत हवाएँ

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ऐसा क्य होता है: सजीव एक-दूसरे का पयावरण भी ह। कसी पुष्प क बनावट कसी वशेष क ट के मुखांग के

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अनुकूल होती है; कोई पत्ती अपने को खाने वाली इल्ली के वरुद्ध कड़वी हो जाती है और इल्ली उस कड़वाहट को
सहना सीख लेती है। एक का प रवतन दूसरे म पmरवतन को जन्म दे ता है और व वधता उससे कह अ धक बढ़ जाती
l a se
ag
है जतनी केवल भौ तक पयावरण से बनती।

co m
ध्यान द जए: व ान म “क्य ” का अथ है “यह कैसे बना”, न क “ कस उ े श्य से बनाया गया”। प्रकृ त ने बैठकर
m .
o m l a se
व वधता क अ भकल्पना नह क ; व वधता तो वह प रणाम है जो वंशानुगत भन्नता और भन्न- भन्न प र स्थ तय
g वरण कहते ह।
.c लंबे समय तक साथ रहने से मलता है। वै ा नक इस प्र क्रया को प्राकृaतक
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के बहुत
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क्या कोई ऐसा प्रश्न है जो आपको संसार के वषय म ज ासु बनाता है? आगे दए गए स्थान म ल खए—
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प्र.4

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अपना प्रश्न पुस्तक म दए गए रक्त स्थान म ल खए — परंतु ऐसा प्रश्न ल खए जसक जाँच आप वास्तव म कर सक।

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अध्याय कोई प्रभावशाली लगने वाला प्रश्न नह माँग रहा; वह ऐसा प्रश्न माँग रहा है जससे कोई प्रयोग आरंभ हो सके।

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अच्छा प्रश्न तीन कसौ टय पर खरा उतरता है —
gगन, व ालय के मैदान या घर के माग म।
1..cवह ऐसी वस्तु के वषय म हो जसे आप दे ख या कर सक — अपनी रसोई,aआँ
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2. वह वषय-आधा रत हो। “प्रकृ त कैसे काय करती है?” क जाँच नह क जा सकती। “दही स्ट ल के कटोरे म जल्द जमता है

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या म के?” क जा सकती है।

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3. उसे इस रूप म लखा जा सके — “य द म ___ बदल दूँ तो ___ का क्या होगा?” य द आप दोन रक्त स्थान भर सक तो

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आपके पास एक प्रयोग तैयार है।

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नमूना उत्तर (इनम से कसी को अपनाइए, अथवा इससे अच्छा यह होगा क अपना प्रश्न स्वयं बनाइए) —

केले का छलका रे जरेटर म काला क्य पड़ जाता है परंतु मेज पर नह ?

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

क्या म के मटके का जल हवा वाले दन म शांत दन क अपेक्षा जल्द ठं डा होता है?
क्या मेरे आँगन क च टयाँ चीनी क गरी बूँद तक सदै व एक ही माग से जाती ह?
रंगोली का चूण गीले फश पर सूखे फश क अपेक्षा अ धक चमक ला क्य दखता है?
रोट गैस क आँच पर जल्द फूलती है या गरम तवे पर?

यह क जए: इस वष एक छोट “प्रश्न-पु स्तका” र खए। उसम दनांक, प्रश्न और उसका उत्तर पाने के लए आपने
क्या कया — यह ल खए। कक्षा 8 के अंत तक आप स्वयं दे ख सकगे क आपके कौन-से प्रश्न का उत्तर वास्तव म
मला — और वै ा नक ठ क इसी प्रकार काय करता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 2
व ान के अन्वेषी संसार म प्रवेश

प्र.1 आटा क्य फूलता है?

क्य क आटे के भीतर एक गैस बनती है और वह बाहर नह नकल पाती। यह गैस हजार सूक्ष्म बुलबुल म एकत्र हो जाती है,
प्रत्येक बुलबुला आटे को बाहर क ओर धकेलता है और पूरा ल दा फूल जाता है।
गैस कहाँ से आती है, यह इस पर नभर करता है क आटा कस प्रकार तैयार हुआ —

खमीर उठाया हुआ आटा (ब्रेड, भटू रा, इडली और डोसा का घोल): यीस्ट तथा कुछ जीवाणु जैसे सूक्ष्मजीव आटे क शकरा
और मंड पर पलते ह और श्वसन के साथ काबन डाइऑक्साइड गैस छोड़ते ह। इसी लए ऐसे आटे को घंट गरम स्थान पर रखा
जाता है।
खाने के सोडा से फुलाया गया आटा: इसम कोई सजीव स म्म लत नह है। सोडा दही या न बू के रस जैसे कसी अम्ल के
संपक म आते ही काबन डाइऑक्साइड छोड़ दे ता है। इसी लए सोडा और दही वाला भटू रे का घोल तुरंत बुलबुले छोड़ने लगता
है।

ऐसा क्य होता है: गैस बनना आधी कहानी है — आटे म उसे रोक पाने क क्षमता भी होनी चा हए। गे ँ के आटे
को जल के साथ गूँधने पर उसका ग्लूटेन एक लचीला, ग जैसा जाल बना लेता है। गैस इस जाल से नकल नह
पाती, अतः प्रत्येक बुलबुला बाहर भागने के स्थान पर आटे को ख चता है। बना गूँधे आटे म गैस बुलबुले छोड़कर
नकल जाएगी और ल दा चपटा ही रहेगा। बाद म सकने या तलने पर खची हुई द वार बुलबुल के चार ओर सख्त हो
जाती ह — इसी लए ब्रेड स्पंज जैसी होती है।

यह क जए: खमीर उठे आटे के दो एक-समान ल दे ली जए। एक को रसोई के गरम कोने म और दूसरे को
रे जरेटर म र खए। 2 घंटे बाद दोन क ऊँचाई मा पए। आपने केवल तापमान बदला है, अतः फूलने म जो भी
अंतर मले उसका कारण तापमान ही होगा — सूक्ष्मजीव गरमी म तेजी से काय करते ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 क्या भूमंडलीय तापमान म वृ हो रही है?

हाँ। थल पर लगे हजार तापमापी, समुद्र म जहाज और प्लव से लए गए मापन तथा अब उपग्रह के आँकड़े — सभी एक ही बात
कहते ह: लगभग 1850 के बाद से पृथ्वी क सतह का औसत तापमान लगभग 1.1 °C से 1.3 °C तक बढ़ चुका है।

ऐसा क्य होता है: कोयला, पे ोल, डीजल और प्राकृ तक गैस जलाने से वायु म काबन डाइऑक्साइड मलती जाती
है। सूय का प्रकाश इस गैस से सरलता से नकल आता है, परंतु गरम पृथ्वी जो ऊष्मा वापस बाहर भेजती है उसका
कुछ भाग यह गैस सोखकर पुनः नीचे लौटा दे ती है — मानो एक कंबल हो। वायु म कंबल जतना अ धक होगा,
ऊष्मा उतनी ही कम बाहर जाएगी और औसत तापमान उतने ही ऊँचे मान पर आकर ठहरेगा।

एक डग्री तो बहुत कम लगती है, फर इससे क्या अंतर पड़ता है? क्य क यह पूरे ग्रह का और पूरे वष का औसत है। औसत
खसकने पर चरम स्थ तयाँ भी उसी के साथ खसक जाती ह — लू लंबी और अ धक बार पड़ती है, मानसून अ नय मत हो जाता है,
और जो हमनद अब तक संतुलन म थे वे जतनी बफ बनाते ह उससे अ धक खोने लगते ह।
यह केवल एक गरम गरमी नह है, यह हम कैसे जानते ह? एक गरम दन मौसम है; सौ वष से अ धक समय तक बना रहने वाला
औसत म उठाव जलवायु है। और तापमा पय से स्वतंत्र प्रमाण भी यही कहते ह — हमालय के हमनद पीछे हट रहे ह, समुद्र जल
गरम होकर फैलने से समुद्र-तल ऊपर उठ रहा है, और महासागर स्वयं मापनीय रूप से अ धक गरम ह।

ध्यान द जए: इस पुस्तक का अं तम अध्याय इसी प्रश्न पर वस्तार से लौटता है। ध्यान र खए क यह उत्तर कसी
एक अवलोकन पर नह , समय के साथ मापी गई प्रवृ त्त पर टका है — वै ा नक कथन और मत म यही अंतर है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 3
वष भर क यात्रा — सूक्ष्मजीव और स्वस्थ रहना

प्र.1 हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लए क्या आवश्यक है?

संतु लत आहार, सुर क्षत जल और स्वच्छ वायु, नय मत शारी रक क्रया, पयाप्त न द, व्य क्तगत स्वच्छता तथा रोग से
बचाव। स्वास्थ्य का अथ केवल बीमार न होना नह है — इनम से हर एक शरीर के कसी न कसी जै वक प्रक्रम को ठ क चलाए
रखता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

शरीर को क्या क्य चा हए दै नक जीवन का
चा हए उदाहरण

संतिु लत आहार काब हाइ ेट और वसा ऊजा दे ते ह; प्रोट न शरीर क वृ द्ध और मरम्मत करते ह; दाल -चावल के साथ स ब्जी,
वटा मन और ख नज लवण शरीर के प्रक्रम को चलाते ह; रूक्षांश पाचन को सुचारु दही और मौसमी फल
रखता है

सुर िक्षत पेयजल शरीर म पदाथ का प रवहन करता है, तापमान नयं त्रत रखता है, वज्य पदाथ बाहर उबला हुआ या छाना हुआ जल
नकालता है — और दू षत जल स्वयं रोग लाता है

शारीिरक िक्रया पे शय और अ स्थय को दृढ़ तथा हृदय और फेफड़ को सक्षम बनाए रखती है कब ी, साइिकल चलाना,
तेज चाल से टहलना

नी ंद और िव ाम इसी समय शरीर अपनी मरम्मत करता है और म स्तष्क दन भर सीखी बात को आपकी आयु में पितिदन 8–9
व्यव स्थत करता है घंटे

स्वच्छता हा नकारक सूक्ष्मजीव को शरीर म प्रवेश करने से रोकती है भोजन से पहले और शौच के
बाद साबुन से हाथ धोना

टीके कसी रोगाणु के आने से पहले ही शरीर क प्र तरक्षा को तैयार कर दे ते ह आपके टीकाकरण काड में
िलखे टीके

ऐसा क्य होता है: शरीर कोई भंडार नह है जसे केवल भरना हो। वह नरंतर बनता, मरम्मत करता और स्वयं क
रक्षा करता रहता है, और इन सब काय के लए क ा माल (भोजन), काय करने का माध्यम (जल) तथा मरम्मत का
समय ( वश्राम) — तीन चा हए। इनम से एक भी छू ट जाए तो शेष उसक भरपाई नह कर पाते — इसी लए उत्तम
आहार ले कन न द नह , अथवा भरपूर न द ले कन उ चत आहार नह — दोन ही स्थ तय म स्वास्थ्य बगड़ता है।

प्र.2 हम इन संक्रमण से कैसे लडते ह?

तीन स्तर पर एक साथ — शरीर क अपनी प्र तरक्षा, औष धयाँ और ट के, तथा सबसे प्रभावी उपाय यह क रोगाणु हम
तक पहुँचे ही नह ।
1. शरीर सबसे पहले स्वयं लड़ता है।

त्वचा एक अटू ट अवरोध है। कटा हुआ स्थान एक खुला ार है — इसी लए घाव को धोकर ढका जाता है।
नाक और श्वास नली का ेष्म धूल और सूक्ष्मजीव को फँसा लेता है; छ क और खाँसी उन्ह बाहर फक दे ती ह।
आमाशय का अम्ल भोजन के साथ नगले गए अ धकांश सूक्ष्मजीव को नष्ट कर दे ता है।
रक्त क श्वेत रु धर क णकाएँ भीतर पहुँच गए सूक्ष्मजीव को खोजकर नष्ट करती ह। ज्वर, सूजन और पीड़ा इसी संघष के
संकेत ह।
इसके बाद शरीर उस वशेष रोगाणु को याद रख लेता है और अगली बार उससे कह तेजी से नपटता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

2. शरीर हारने लगे तो औष धयाँ सहायता करती ह। प्र तजै वक (एंट बायो टक) जीवाणुओं को मारते ह या उनका गुणन रोकते
ह। वषाणुओं पर इनका कोई प्रभाव नह पड़ता, अतः सामान्य सद -जुकाम प्र तजै वक से ठ क नह होता। च कत्सक ारा बताई
गई पूरी मात्रा सदै व पूरी क जए — बीच म छोड़ दे ने पर सबसे प्र तरोधी जीवाणु बच जाते ह और वही आगे चलकर उस औष ध को
नष्प्रभावी कर दे ते ह।
3. ट के प्र तरक्षा को पहले से तैयार कर दे ते ह। ट का शरीर को रोगाणु क एक हा नर हत झलक दखाता है। शरीर बना बीमार
पड़े उस रोगाणु क स्मृ त बना लेता है, अतः असली रोगाणु आने पर वह हा न पहुँचाने से पहले ही नष्ट कर दया जाता है। इसी व ध
से संसार से चेचक समाप्त हुई और भारत से पो लयो रुका।
4. सव त्तम उपाय — संक्रमण हो ही नह । साबुन से हाथ धोइए, सुर क्षत जल पी जए, भोजन ढककर र खए, शौचालय का
उपयोग क जए, तथा बतन , कूलर और टायर म जल एकत्र न होने द जए जहाँ मच्छर पनपते ह।

ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क हर उपाय एक ही ढं ग से काय करता है — या तो वह रोगाणु को भीतर आने से
रोकता है, या शरीर क अपनी प्र तरक्षा को उस लड़ाई म जताता है जो वह पहले से लड़ रही है। दस्त म दया जाने
वाला ओ.आर.एस. भी ऐसे ही काय करता है: वह रोगाणु को नह मारता, वह शरीर से नकल रहे जल और लवण
क पू त करता है ता क शरीर लड़ाई पूरी करने योग्य बना रहे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 5
चंद्रमा क कलाएँ और पहली दनद शकाएँ

प्र.1 क्या यह रोमांचक नह है क पृथ्वी पर हमारी दनचया नधा रत करने वाले दनद शका हमारे ग्रह से सुदूर स्थत
पड क ग त से जुड़े हुए ह?

हाँ — और यह संयोग नह है। दनद शका क प्रत्येक इकाई वास्तव म आकाश म हो रही कसी ग त क गनती ही है।

दनद शका क इकाई वह वास्तव म क्या गनती है कतना समय

िदन पृथ्वी का अपने अक्ष पर एक घूणन लगभग 24 घंटे

मास चंद्रमा क कलाओं का एक पूरा चक्र, एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक लगभग 29.5 िदन

वष पृथ्वी क सूय के चार ओर एक प रक्रमा लगभग 365.25 िदन

ऐसा क्य होता है: दनद शका तभी उपयोगी है जब वह पूवानुमान लगाने दे — कब बोना है, वषा कब आएगी,
कोई पव कब पड़ेगा। पूवानुमान उसी का लगाया जा सकता है जो नय मत रूप से दोहराया जाए। कसी भी घड़ी के
बनने से बहुत पहले आकाश ही एकमात्र ऐसी वस्तु था जो पूण नय मतता से दोहराता था — सूय प्र त दन उदय होता
था और चंद्रमा वही कलाएँ बार-बार दोहराता था। अतः मनुष्य ने आकाश को गना और वही गनती दनद शका बन
गई।

एक क ठनाई: ये तीन ग तयाँ एक-दूसरे म पूरी-पूरी नह बँटत , और इसी कारण संसार म एक से अ धक दनद शकाएँ ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा
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12 चंद मास = 12 × 29.5 ≈ 354 िदन
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1 सौर वष ≈ 365.25 िदन
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365.25 − 354 ≈ पितवष लगभग 11 िदन कम
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पूणतः चंद्र दनद शका ( हजरी) म मास ऋतुओं के सापेक्ष खसकते रहते ह, अतः रमज़ान धीरे-धीरे पूरे वष म घूम जाता है।

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पूणतः सौर दनद शका (द वार पर लगी ग्रेगो रयन) म ऋतुएँ स्थर रहती ह और बचे हुए 0.25 दन को समेटने के लए हर चार
वष म एक अ धवष- दन जोड़ा जाता है।
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g सार चलते ह, परंतु लगभग हर तीन वष म एक अ त रक्त मास (अ धक मास)
भारतीय पंचांग चांद्र-सौर ह: मास चंद्रमा कa
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जोड़ दया जाता है ता क पव अपनी ऋतु म ही रह।

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इस अध्याय म द गई दनद शका चैत्र क है, जो भारतीय रा ीय दनद शका का प्रथम मास है। सन् 2025 म चैत्र 22 माच से 20

नणय से नह.c o m g l a
अप्रैल तक रहा — ठ क 30 दन, और इसका आरंभ पृथ्वी क कक्षा म उसक स्थ त से तय होता है, पृथ्वी पर लए गए कसी

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ag क्या आप जानते ह? चंद्रमा लगभग 3,84,000 km और सूय लगभग 15 करोड़ km दूर है। होली, ईद, द वाली या
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प गल आप जस दन मनाते ह वह इन्ह दो सुदूर पड क स्थ त से तय होता है — इसी लए वही पव हर वष अंग्रेजी
दनद शका क भन्न त थ पर पड़ता है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 6
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एक वै ा नक क भाँ त सोचना — पूड़ी के फूलने क जाँच
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a s em क्या आपने दे खा है क पूड़ी या भटूरा गरम तेल म डालने पर कैसे फूल जाता है? या आँच पर डालने से रोट गुब्बारे
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प्र.1
क भाँ त क्य फूल जाती है? साथ ही एक परत दूसरी से पतली क्य है?

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पूड़ी इस लए फूलती है क्य क आटे के भीतर का जल भाप म उतनी तेजी से बदल जाता है जतनी तेजी से वह भाप बाहर
नह नकल पाती। कुछ ही सेकंड म बाहर एक बंद परत बन जाती है, उसके नीचे रुक भाप के पास नकलने का कोई माग नह
रहता, और मुलायम आटा दाब के आगे झुककर गुब्बारे क भाँ त फूल जाता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

1 · गरम तेल मे ं 2 · बाहरी सतह सूखकर 3 · रुकी हुई भाप
पूड़ी डाली (~180 °C) बंद परत बनाती है पूड़ी को फु ला देती है

भीतर जल दाब बढ़ ता है दो परते ं बनती है ं

पूड़ी के फूलने क तीन अवस्थाएँ। पूड़ी म बाहर से कुछ नह डाला जाता — गुब्बारा पूड़ी के अपने ही जल से, भाप बनकर, बनता है।

क्रम से दे खए —

1. लगभग 180 °C का तेल जल के क्वथनांक से बहुत ऊपर है, अतः पूड़ी क सतह का जल लगभग तुरंत उड़ जाता है और वहाँ
एक पतली, बंद परत बन जाती है।
2. इस परत के नीचे का जल तेजी से भाप बन जाता है। भाप बनने पर उतना ही जल एक हजार गुना से भी अ धक स्थान माँगता
है, अतः भीतर का दाब बहुत तेजी से बढ़ता है।
3. नीचे का आटा अब भी मुलायम और लचीला है। फटने के स्थान पर वह बीच से दो परत म बँट जाता है और फूल उठता है —
ठ क गुब्बारा फुलाने जैसा, बस फूँक भीतर से लगती है।
4. कुछ दे र और तलने पर दोन परत सख्त हो जाती ह और आकार बना रहता है।

और पतली परत? जो परत तेल के संपक म पहले आई वह पहले सक जाती है, अतः वह बहुत कम खच पाती है। दूसरी परत दाब
पहुँचने तक मुलायम रहती है, अतः पूरा खचाव वही सहती है — और उतना ही आटा अ धक क्षेत्रफल म फैलेगा तो पतला ही होगा।
(पूरी व्याख्या के लए दे खए खोजबीन और वचार कर प्र.1।)

ऐसा क्य होता है: खुली आँच पर रोट भी इसी व ध से फूलती है — आँच सतह को सुखाकर बंद कर दे ती है और
भीतर का जल भाप बनकर उसे फुला दे ता है। थाली म रखी पूड़ी पर भी ध्यान द जए: कुछ मनट बाद वह बैठ जाती
है। भाप ठं डी होकर पुनः द्रव जल बन गई और गुब्बारे को खोले रखने वाला दाब समाप्त हो गया।

ध्यान द जए: इसी से यह भी स्पष्ट होता है क ठं डा या सूखा आटा कम फूलता है। भीतर जल कम है तो भाप कम
बनेगी, और भाप कम बनेगी तो परत को अलग करने वाला दाब भी कम मलेगा।

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प्र.2 वे कौन-सी व भन्न स्थ तयाँ ह जो तले जाने पर पूड़ी के फूलने के तरीक म प रवतन कर सकती ह?

इन्ह दो सू चय म बाँ टए — जन्ह हम बदल या नयं त्रत कर सकते ह, और जनका हम अवलोकन या मापन कर सकते ह।
यही एक कदम एक अस्पष्ट ज ासा को प्रयोग म बदल दे ता है, और अध्याय आपसे यही करवाना चाहता है।

जन्ह हम बदल या नयं त्रत कर सकते ह जनका हम अवलोकन या मापन कर सकते ह

बेले हुए आटे की मोटाई पूड़ी फू ली या नही?ं (हाँ / ना)

बेल ी हईु पूड़ी का आमाप (व्यास) फू लने में लगा समय (से कं ड)

आटे का पकार — आटा, मैद ा इत्यािद क्या बहुत मोटी बेल ी पूड़ी में भी एक परत पतली रहती है?

तेल का तापमान — खौलता हुआ , गरम, कम गरम िकतनी फू ली — पूर ी गोल , आधी, िबलकु ल नही ं

तेल में डालने का ढं ग — लंबवत िगराना, कोण पर सरकाना, धीरे -धीरे डालना क्या तेल के छी ंटे पड़ े, गंध आई या धआ
ु ँ िनकला?

आटा िकतने जल से गूँध ा; िकतनी दे र रखा रहा रंग, तथा थाली में रखने पर पूड़ी फू ली रहती है या नही ं

वह नयम जससे यह पूरी व ध काम करती है: एक बार म इनम से केवल एक ही स्थ त बद लए और शेष सब समान र खए।
य द आपको खौलते हुए, गरम और कम गरम तेल क तुलना करनी है तो समान मोटाई क , समान आटे क पू ड़याँ, समान ढं ग से
डा लए। अन्यथा जब कोई पूड़ी नह फूलेगी तब आप जान ही नह पाएँगे क आपके कस प रवतन का यह प रणाम था।

वै ािनक पश्न क्या बदलेगं े और एक बार में केवल अवलोकन, मापन नए पश्न
पूिछए क्या दे खे ंग े — एक बात बदिलए और सब कु छ जन्म लेते है ं
सूची बनाइए िलखकर रिखए

…और चक्र िफर से आरंभ हो जाता है

क्रमबद्ध जाँच का चक्र। अं तम खाना सबसे महत्त्वपूण है — अच्छा प्रयोग वही है जो आरंभ से बेहतर प्रश्न पर समाप्त हो।

ऐसा क्य होता है: य द दो स्थ तयाँ एक साथ बदल जाएँ तो यह बताया ही नह जा सकता क प रणाम कसके
कारण आया — दोन के प्रभाव मल जाते ह और बाद म उन्ह अलग नह कया जा सकता। शेष सब समान रखना
कोई अनावश्यक कड़ाई नह है; यही एकमात्र उपाय है जससे प्रयोग ऐसा उत्तर दे सके जस पर भरोसा करने का
आपको अ धकार हो।

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ध्यान द जए: हर अवलोकन संख्या नह होता। “फूली या नह — हाँ या ना?” भी पूरी तरह वै ा नक अवलोकन है,
और “तेल से जली हुई गंध आई” भी। दोन प्रकार ल खए।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 7
अ भलेखन, और प्रयोग से जन्मे नए प्रश्न

प्र.1 क्या तेल के छ टे पड़े, गंध आई या धुआँ नकला?

तीन को लख ली जए — इनम से हर एक आपको प्रयोग के वषय म कुछ ऐसा बता रहा है जो अन्यथा छू ट जाता। ये
इधर-उधर क बात नह , ये आँकड़े ह।

अवलोकन यह क्या बता रहा है क्या करना चा हए

तेल के छी ंटे खुला जल गरम तेल तक पहुँचा — गीली पूड़ी, गीले हाथ या गीले झारे से। 180 झारा पोंछकर सुखाइए ; पूड़ी सूखे आटे
पड़े °C पर वह जल तुरंत भाप बनकर तेल को उछाल दे ता है की हल्की पले थन से बेिलए

गंध आई ऊष्मा से तेल का अपघटन हो रहा है, अथवा पछली पू ड़य के आटे के कण जले हुए कण छानकर िनकािलए ; एक
तेल म जल रहे ह ही तेल को बार -बार मत गरम कीिजए

धआ
ु ँ िनकला तेल अपने धूम्र- बदु से ऊपर जा चुका है — वह अ धक गरम है। इसके आगे आँच तुर ंत धीमी कीिजए और तेल को
पूड़ी भीतर भाप बनने से पहले ही बाहर से भूरी हो जाती है, अतः वह फूल भी कु छ ठं डा होने दीिजए
नह पाती

ऐसा क्य होता है: रसोई म तेल का तापमान मापना क ठन है, परंतु छ टे , गंध और धुआँ मुफ्त के तापमापी ह —
तेल स्वयं बता रहा है क वह कतना गरम है। वै ा नक ऐसे गुणात्मक अवलोकन इसी लए लखता है क्य क वे उन
स्थ तय को पकड़ लेते ह जन्ह कमरे का कोई उपकरण नाप ही नह रहा।

सुरक्षा सव प र: 180 °C का तेल गंभीर रूप से जला सकता है और धुआँ छोड़ता तेल आग पकड़ सकता है।
पुस्तक का हद संस्करण भी स्पष्ट कहता है — यह कसी व रष्ठ क उप स्थ त म ही कर। जलते हुए तेल पर कभी
जल मत डा लए; कड़ाही को ढक द जए और आँच बंद कर द जए।

प्र.2 क्या ताजा गूँधे आटे से बनी हुई पूड़ी अ धक फूलती है या रखे हुए आटे से बनी हुई?

ताजा गूँधा आटा, जसे लगभग 15–20 मनट रखा गया हो, प्रायः सबसे अच्छा फूलता है — परंतु यह ऐसा प्रश्न है जसे
आपको जाँचना है, केवल मान लेना नह ; अतः यहाँ उत्तर से अ धक महत्त्व प्रयोग का है।

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ताजे आटे को लाभ क्य मलता है —

उसम गूँधते समय डाला गया सारा जल अब भी है, और वही जल भाप बनकर पूड़ी को फुलाता है। रखा हुआ आटा ऊपर से
सूखकर पपड़ी बना लेता है, अतः भाप बनने के लए जल कम बचता है।
थोड़ी दे र रखना भी आवश्यक है। गूँधने के तुरंत बाद ग्लूटेन कसा हुआ रहता है और बेलते समय पूड़ी पीछे सकुड़ती है। 15–20
मनट म वह ढ ला पड़ जाता है, तब एक-सी मोटाई क पूड़ी बेली जा सकती है — और एक-सी मोटाई ही एक-सी बंद परत
बनाती है।
घंट रखा आटा, वशेषकर गरम मौसम म, खमीर उठाकर ख ा होने लगता है। ग्लूटेन का जाल कमजोर पड़ जाता है, गैस रुकने
के स्थान पर नकल जाती है और पूड़ी ठ क से बंद ही नह हो पाती।
रे जरेटर से सीधे नकाला आटा ठं डा होता है और तेल म जाते ही अपने चार ओर के तेल को ठं डा कर दे ता है। ठं डे तेल म परत
दे र से बनती है, अतः पूड़ी कम फूलती है।

इसे वास्तव म कैसे जाँच — एक उ चत परीक्षण:

1. एक ही बार म आटा गूँ धए। आधा अभी प्रयोग क जए; आधा ढककर 8 घंटे रख द जए।
2. शेष सब कुछ समान र खए — वही आटा, वही मोटाई, वही व्यास, वही तेल, वही तापमान, तेल म डालने का वही ढं ग।
केवल आटे क आयु भन्न हो।
3. प्रत्येक भाग से कम से कम 5 पू ड़याँ त लए — एक पूड़ी से कुछ सद्ध नह होता, क्य क कोई एक पूड़ी संयोग से भी बगड़
सकती है।
4. हर बार दो बात ल खए — पूड़ी फूली या नह (हाँ/ना), और फूलने म कतने सेकंड लगे।
5. तुलना क जए — 5 म से कतनी फूल और औसत समय कतना रहा।

ऐसा क्य होता है: पाँच बार दोहराना ही कसी सुनी-सुनाई बात को प रणाम म बदलता है। रसोई छोट -छोट
अ नयं त्रत भन्नताओं से भरी है — तेल का कोई भाग कुछ अ धक गरम, कोई पूड़ी कुछ अ धक मोट । दोहराने से ये
भन्नताएँ आपस म कट जाती ह और जो प्रभाव आप वास्तव म खोज रहे ह वह उभरकर सामने आ जाता है।

प्र.3 य द म पूड़ी तलने से पूव उसम एक छे द कर दूँ तो क्या होगा?

वह नह फूलेगी। वह चपट ही तलकर करारी हो जाएगी — आपने पूड़ी नह , पापड़ी या मठरी जैसा कुछ बना लया होगा।

ऐसा क्य होता है: पूरा गुब्बारा इसी पर टका है क बाहरी परत बंद रहे। भाप तो दोन स्थ तय म बनेगी, परंतु
कया गया छे द उसके नकलने का खुला माग है। भाप उसी से बहती रहती है, अतः दाब कभी बनता ही नह , और
दाब के बना दोन परत को अलग करने वाला कुछ नह होता। पूड़ी एक ही चपट परत बनी रहती है, तेल म अपना
जल खोती रहती है और अंत म सूखी तथा करारी हो जाती है — और चपट रहने के कारण वह तेल के संपक म
अ धक दे र रहती है, अतः तेल भी अ धक सोखती है।

यह एक पूवानुमान है, अतः इसे ठ क से जाँ चए: एक ही आटे से समान मोटाई और समान व्यास क दो पू ड़याँ बे लए। एक म
काँटे से छे द क जए, दूसरी को पूरा रहने द जए। दोन को एक ही तेल म, एक के बाद एक, एक ही ढं ग से डालकर त लए। य द छे द
वाली नह फूलती और पूरी वाली फूल जाती है, तो आपक व्याख्या अपनी परीक्षा म उत्तीण हो गई।

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ध्यान द जए: यही वचार यह भी बताता है क कोई पूड़ी बना कसी स्पष्ट कारण के क्य नह फूलती। बेलते समय

m a s emखुल गई, और
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पड़ी एक छोट -सी दरार या चीर वही काम करती है जो जान-बूझकर कया गया छे द करता — परत
खुली परत से.cगुo
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ब्बारा नह बनता।
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अध्याय — एक नज़र म
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कक्षा 6 ने बताया क व ान का आरंभ आश्चय के भाव से होता है; कक्षा 7 ने बताया क व ान सतत रूप से वकासशील

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है। कक्षा 8 इन दोन को मलाकर हम व ान के अन्वेषी संसार म ले जाती है — अब हम केवल नए तथ्य नह जानगे, अ पतु

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नए तथ्य को खोजना सीखगे।

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gृ ष्ट बनाते ह।
.c क अ भकल्पना करते ह और फर अपने अवलोकन से अपनी समझ को उत्क
अन्वेषण का अथ केवल दे खना और सरल प्रश्न पूछना नह है। आप वषय-आधा रत प्रश्न पूछते ह, उनका उत्तर पाने के लए

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seअध्याय पूरे वष क यात्रा क झलक है — जल क एक बूँद के सूक्ष्मजीव; पौ ष्टक भोजन, व्यायाम, औष धय और ट क से
सरल प्रयोग

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स्वस्थ रहना; व ुत धारा के तापीय एवं चुंबक य प्रभाव; बल, दाब, हवाएँ और चक्रवात; पदाथ बनाने वाले कण; तत्व, यौ गक,

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मश्रण और वलयन; परावतन, दपण एवं लस; चंद्रमा क कलाएँ और उनसे बनी दनद शकाएँ; पा र स्थ तक तंत्र; और अंत म
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पृथ्वी जीवन के लए पूणतः उपयुक्त क्य है।
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ध्यानपूवक कए गए अवलोकन और यहgपूlछने क आदत क है क “क्या होता य द…?”
आपको कसी वशेष प्रयोगशाला क आवश्यकता नह है। घर क रसोई भी पयाप्त है। आवश्यकता केवल ज ासा,

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पूड़ी के उदाहरण से अध्याय जो व ध सखाता है — वै ा नक प्रश्न पू छए → सूची बनाइए क आप क्या प रव तत या

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नयं त्रत कर सकते ह और क्या अवलोकन या मापन कर सकते ह → एक बार म केवल एक ही बात बद लए → जो कुछ

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दे ख, सूँघ और सुन, सब ल खए → प रणाम से नए प्रश्न जन्म लेने द जए।
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बाएँ पृष्ठ के नीचे बनी जड़ और दाएँ पृष्ठ के ऊपर उड़ती पतंग ही इस अध्याय का संदेश ह — यथाथ अवलोकन के ठोस

s e mधरातल पर टके र हए और अपने वचार को उड़ान भरने द जए। और स्मरण रहे — पूड़ी के फूलने का यह सामान्य
agla अवलोकन भी वै ा नक ारा आज तक पूणतः समझा नह गया है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 1 व ान के अन्वेषी संसार क खोज यात्रा AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म दै नक जीवन का उदाहरण
कहाँ

अन्वेषण िकसी पश्न का उत्तर पाने की क्रमबद्ध िविध — पृष्ठ 2, 7 पूड़ी कन कारण से फूलती है, यह पता
अवलोकन, पयोग, व्याख्या; के वल दे ख ले ना नही ं लगाना

वै ा नक प्रश्न ऐसा िवषय-आधािरत पश्न िजसका परीक्षण वास्तव में पृष्ठ 6 “तले जाने पर पूड़ी के फूलने के तरीक
पयोग ारा िकया जा सके को क्या बदलता है?”

जसे हम बदल या नयं त्रत पयोग में वह िस्थित िजसे आप जान-बूझकर पिरवितत पृष्ठ 6 आटे क मोटाई, आमाप, आटे का
कर सकते ह करते है ं प्रकार, तेल का तापमान, डालने का ढं ग

जसका हम अवलोकन या वह िजसे आप दे खते, िगनते या मापते है ं तािक पिरवतन पृष्ठ 6–7 पूड़ी फूली या नह (हाँ/ना); फूलने म
मापन कर सकते ह का पभाव िदख सके लगा समय (सेकंड)

उ चत परीक्षण एक बार में के वल एक ही िस्थित बदलना और शेष सभी पृष्ठ 6–7 समान मोटाई, डालने का समान ढं ग —
िस्थितयाँ समान रखना केवल तेल का तापमान बदला

अ भलेखन (नोट रखना) जो कु छ िदखे, सूँघे ं और सुने ं वह सब िलखना, के वल पृष्ठ 7 “क्या तेल के छ टे पड़े, गंध आई या
संख्याएँ नही ं धुआँ नकला?”

क्रमबद्ध जाँच पश्न → पयोग → अवलोकन → नए पश्न का पूर ा पृष्ठ 7 प्रयोग का एक चक्र अगला प्रश्न खड़ा
चक्र, जो सरल से जिटल तक सभी िव ान में चलता है कर दे ता है

जड़ का प्रतीक बाएँ पष्ृ ठों के नीचे — ध्यानपूवक िकए गए अवलोकन पृष्ठ 2 जो वास्तव म दखे उसी पर टके रहना
तथा हमारी धरोहर का ठोस आधार

पतंग का प्रतीक दाएँ पष्ृ ठों के ऊपर — अ ात की खोज के िलए पृष्ठ 2 वचार को नए क्ष तज क ओर ले
िज ासा को उड़ान भरनी होगी जाना

चैत्र भारतीय रा ीय (शक) िदनदिशका का पथम मास, पृष्ठ 5 सन् 2025 म चैत्र 22 माच से 20 अप्रैल
िजसका िचत्र अध्याय में िदया गया है तक रहा

अनुत्त रत प्रश्न ऐसा पश्न िजसका उत्तर िव ान अब तक पूर ी तरह नही ं पृष्ठ 7 पूड़ी ठ क-ठ क क्य फूलती है, यह
दे पाया आज भी पूणतः ात नह

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages16
Languagehindi
Updated19 Sep 2026