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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि

AglaSem पर कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 3 Health the Ultimate Treasure (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि - Page 1 of 49

About NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि

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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 3: स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

28 – 45 16 45 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 48 pages

Page 2

कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · वज्ञान · जज्ञासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
स्वास्थ्य का अथ केवल रोग का न होना नह है। वश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह अध्याय स्वास्थ्य को पूण शारी रक, मान सक और सामा जक
कल्याण क स्थ त मानता है और फर यह पूछता है क अस्वस्थ होने पर वास्तव म क्या गड़बड़ होती है — संचरणीय रोग रोगजनक ारा एक
व्य क्त से दूसरे तक कैसे पहुँचते ह, मधुमेह और हृदय रोग जैसे असंचरणीय रोग भारत म मृत्यु के सबसे बड़े कारण क्य बन गए ह, तथा प्र तरक्षा,
ट के और प्र तजै वक औष धयाँ कस प्रकार काय करती ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

जज्ञासा (कक्षा 8) 28 – 45

खं ड प्रश्न

16 45

माध्यम

हन्द

खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 28
अध्याय का आरंभ

खोजबीन और वचार कर

प्र.1 आपका शरीर सामान्य सद -जुकाम जैसे संक्रमण के प्र त कैसे अनु क्रया करता है?

शरीर अपनी प्र तरक्षा प्रणाली के माध्यम से इसका सामना करता है। सद -जुकाम म हम जो कुछ अनुभव होता है, वह प्रायः इसी
संघष का प रणाम है, वषाणु का सीधा प्रभाव नह ।
क्रमानुसार यह घ टत होता है—

1. वषाणु नाक या मुँह से प्रवेश करके श्वसन तंत्र क भीतरी परत म बस जाता है।
2. प्र तरक्षा प्रणाली इसे बाहरी मानकर पहचान लेती है और नाक तथा गले म रक्त एवं रक्षक को शकाएँ भेजती है। इससे भीतरी
परत म सूजन आती है और अ धक ेष्मा बनता है — यही ता लका 3.1 म दया गया नाक बंद होना, नाक से पानी बहना
और गले म खराश है।
3. छ क और खाँसी वषाणु तथा ेष्मा को शरीर से बाहर नकालती ह। यह बचाव क क्रया है — और इसी कारण संक्रमण
दूसर तक भी पहुँचता है।
4. शरीर का तापमान बढ़ सकता है। हल्का ज्वर रोगजनक के लए प र स्थ तयाँ प्र तकूल बनाता है और प्र तरक्षा अनु क्रया को तीव्र
करता है।
5. शरीर म दद और थकान इस लए होती है क्य क ऊजा सामान्य काय के स्थान पर इस बचाव म लग रही होती है।

अ धकांश लोग म यह कुछ दन म ठ क हो जाता है। इसके प ात प्र तरक्षा प्रणाली उस वशेष वषाणु को स्मरण रखती है, अतः
अगली बार वही वषाणु कम कष्ट दे ता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: ज्वर, नाक बहना और थकान संकेत और लक्षण ह — अथात प्र तरक्षा प्रणाली के काय करने का
दखाई दे ने वाला प रणाम, न क वषाणु ारा क गई क्ष त।

संकेत: सद -जुकाम वषाणु से होता है, अतः प्र तजै वक औष ध इसम कोई लाभ नह दे ती। घर पर वश्राम
क जए, तरल पदाथ ली जए और खाँसते-छ कते समय मुँह तथा नाक ढ कए जससे दूसरे संक्र मत न ह ।

प्र.2 वतमान म हम चेचक या पो लयो जैसे रोग कम ही दे खते ह परंतु मधुमेह और हृदय संबंधी रोग अ धक सामान्य हो
गए ह। ऐसा क्य है?

क्य क इन दोन वग के रोग के कारण पूणतः भन्न ह और इनम से केवल एक को ट के से रोका जा सकता है।

चेचक, पो लयो मधुमेह, हृदय रोग

संचरणीय — रोगजनक ( वषाणु) से होते ह असंचरणीय — इनम कोई रोगजनक नह होता

एक व्य क्त से दूसरे म फैलते ह एक व्य क्त से दूसरे म नह फैलते

ट काकरण से रोके जा सकते ह इनका कोई ट का संभव नह

व् ृ ला तोड़ दी; 1979 में िवश्व से चेचक का
यापक टीकाकरण ने संचरण की शंख ये जीवनशैल ी, आहार और पय वरण से जुड़े है,ं िजनमें बहुत
उ न्मूल न हो गया पिरवतन आया है

जब पयाप्त लोग का ट काकरण हो गया तो चेचक और पो लयो के वषाणुओं को प्रवेश के लए नया शरीर मलना बंद हो गया और
वे समाप्त हो गए। मधुमेह और हृदय रोग का तंत्र भन्न है। अध्याय इनके बढ़ने के कारण गनाता है— अ धक प्रसंस्कृत भोजन ग्रहण
करना, व्यायाम कम करना और जीवन प्रत्याशा का बढ़ना। इनम से कोई भी रोगाणु नह है, अतः कोई ट का इनसे रक्षा नह कर
सकता।

ऐसा क्य होता है: ट का प्र तरक्षा प्रणाली को कसी रोगजनक को पहचानना सखाता है। जहाँ पहचानने के लए
कोई रोगजनक ही नह है, वहाँ प्र तरक्षा प्रणाली को प्र श क्षत नह कया जा सकता — इस लए असंचरणीय रोग क
रोकथाम जीवनशैली बदलकर ही संभव है, इंजेक्शन से नह ।

यही कारण है क अध्याय कहता है क आज भारत म अ धकांश मृत्यु असंचरणीय रोग के कारण होती है, जब क सौ वष पूव
संक्रमण ही सबसे बड़ा कारण थे।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 क्या जलवायु प रवतन नए प्रकार के रोग क उत्प त्त का कारण बन सकता है?

हाँ — और इससे भी अ धक न त रूप से, यह बदल दे ता है क वतमान रोग कहाँ और कब ह गे। भारत म यह अभी से दखाई
दे ता है।

रोगवाहक ज नत रोग नए क्षेत्र तक पहुँचते ह। मच्छर गम और नम प र स्थ तय म पनपते ह। पृष्ठ 28 का सूचना पट्ट बताता
है क मानसून के आने पर मले रया और डगू ज्वर के मामल म वृ द्ध होती है। य द गम और नम मौसम वष म अ धक समय तक
रहे, या उन पहाड़ी क्षेत्र तक पहुँच जाए जो पहले बहुत ठं डे थे, तो मच्छर वहाँ भी जी वत रहगे — और उनके साथ मले रया तथा
डगू भी पहुँचगे।
बाढ़ और सूखा पेयजल को दू षत करते ह। बाढ़ का जल उत्सज पदाथ को कुओं और पाइप तक ले जाता है। यही ता लका
3.1 म दए गए हैजा, आंत्र ज्वर और यकृतशोथ ए का माग है।
रोगजनक नई जनसंख्या तक पहुँचते ह। जब सूखे, बाढ़ या बदलती कृ ष भू म के कारण मनुष्य और जंतु स्थान बदलते ह तो
कसी जंतु समुदाय म शांत पड़ा रोगजनक ऐसे लोग तक पहुँच सकता है जो कभी उसके संपक म नह आए और जनम उसके
वरुद्ध कोई प्र तरक्षा नह है।
ताप और वायु प्रदूषण भार बढ़ाते ह। सूचना पट्ट वायु प्रदूषण को सावज नक स्वास्थ्य आपात स्थ त और स्वास्थ्य संबंधी संकट
के प्रमुख कारक म से एक कहता है; यह अस्थमा तथा अन्य श्वास संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है।

ऐसा क्य होता है: कसी रोगजनक को जी वत रहने का स्थान और यात्रा का माग चा हए। जलवायु दोन को तय
करती है — रोगवाहक का प्रजनन काल, जल क स्वच्छता, तथा मनुष्य और जंतु कहाँ रहते ह। जलवायु बद लए,
रोग का मान चत्र बदल जाएगा।

प्र.4 तनाव या चता जैसे संवेग हम कस प्रकार प्रभा वत करते ह एवं रोगी बनाते ह?

ये केवल मन पर नह , शरीर पर भी प्रभाव डालते ह — यही कारण है क डबल्यू.एच.ओ. क प रभाषा म शारी रक कल्याण के साथ
मान सक और सामा जक कल्याण भी स म्म लत है।
द घका लक तनाव या चता प्रायः इसी क्रम म प्रकट होती है—

1. सबसे पहले न द बा धत होती है। च तत मन रात म सतक बना रहता है, अतः शरीर को वह वश्राम नह मलता जसम वह
स्वयं क मरम्मत करता है।
2. खानपान बदल जाता है। कुछ लोग क भूख समाप्त हो जाती है और भार घट जाता है; कुछ सामान्य से बहुत अ धक खाने
लगते ह। दोन ही स्थ तय म शरीर को संतु लत आहार नह मलता।
3. शारी रक लक्षण प्रकट होते ह — सरदद, पेट क गड़बड़ी, थकान, ध्यान क द्रत करने म क ठनाई। ये लक्षण वास्त वक होते ह,
क ल्पत नह ।
4. संक्रमण से लड़ने क क्षमता घटती है। अपयाप्त न द और अपयाप्त पोषण प्र तरक्षा प्रणाली को दुबल करते ह, अतः वे
संक्रमण भी पकड़ बना लेते ह जन्ह शरीर सामान्यतः सरलता से हरा दे ता।

क्रयाकलाप 3.1 ठ क यही कथा है — वद्याथ को कोई संक्रमण नह था, फर भी उसे सरदद होता था, उसका वजन कम हो गया
और वह सो नह पाता था। उसका रोग एकाक पन से आरंभ हुआ।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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संकेत: अध्याय स्वयं उपाय बताता है — प रवार और मत्र के साथ समय बताना, बातचीत करना, हँसना, पयाप्त

m a s emकरना। और
l कदम है, दुबलता
न द लेना, शारी रक रूप से स क्रय रहना और योग, ध्यान अथवा प्राणायाम जैसे सरल श्वास व्यायाम
co क भाँ त, परामशदाता या कसी वश्वसनीय बड़े से बात करना समझदारी
क्रयाकलाप .3.1
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नह । se
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प्र.5 रोग के प्रकोप के समय कुछ वग के लोग दूसरे वग क तुलना म अ धक प्रभा वत क्य होते ह?

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क्य क रोगजनक भले ही सबके लए एक हो, संपक म आने क मात्रा और प्र तरोध क क्षमता सबक एक जैसी नह होती।

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c है वहाँ हैजा, आंत्र ज्वर और यकृतशोथ ए सरलता से फैलते ह — इसी कारणagक्रयाकलाप 3.6 के भद्रक स्वच्छता
पयावरण भन्न है। जहाँ आवास सघन ह वहाँ वायु से फैलने वाला रोग कह तेज़ी से पहुँचता है। जहाँ शौचालय या सुर क्षत
पेयजल .नह
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aअseभयान से अ तसार और संक्रमण के मामले घटे। जहाँ जल रुका रहता है और कचरा नह हटाया जाता, वहाँ चत्र 3.3 (ख) क
agl भाँ त मच्छर और म क्खयाँ पनपकर रोग फैलाती ह।
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प्र तरक्षा भन्न है। छोटे बच्च , वृद्धजन और पहले से कसी द घका लक रोग से ग्रस्त व्य क्तय क रक्षा क्षमता कम होती है,

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अतः वही संक्रमण उन पर अ धक प्रभाव डालता है।

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aglभन्न है। जन्ह समय पर ट के लगे ह, जो शीघ्र च कत्सक तक पहुँच सकते ह और
पोषण भन्न है। जस शरीर को संतु लत आहार नह मल रहा, वह सशक्त प्र तरक्षा प्रणाली बनाए नह रख सकता।
रोकथाम और च कत्सा क उपलब्धता
जो घर पर रहकर वश्राम कर सकते ह, वे शीघ्र स्वस्थ होते ह।

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ऐसा क्य होता है: स्वास्थ्य जीवनशैली और पयावरण पर नभर करता है और ये सबके लए
s e m एक समान नह होते।
c m केवल इस पहले से वद्यमान अंतर को दखाई दे ने योग्य बना दे तaा gहै।la
रोग काoप्रकोप
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agl क्या आप जानते ह? यही कारण है क सावज नक स्वास्थ्य के काय — शौचालय बनाना, स्वच्छ जल दे ना,

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ट काकरण अ भयान चलाना — एक साथ पूरे समुदाय क रक्षा करते ह, जो कोई व्य क्त अकेले नह कर सकता।
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अपने प्रश्न को साझा क जए
प्र.6

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.c के वषय म अपने प्रश्न बनाइए और फर उनके उत्तर अध्याय से, कसी वश्वसनीय a g स्वास्थ्य वेबसाइट से अथवा कसी
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se च कत्सक या स्वास्थ्यकम से खो जए। अच्छे प्रश्न प्रायः क्य , कैसे, कब और य द ऐसा हो तो से आरंभ होते ह।
स्वास्थ्य

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नमूना प्रश्न:

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य द ट का कसी रोग का उपचार नह कर सकता तो उसे स्वस्थ व्य क्त को क्य दया जाता है?

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एक ही सद का वषाणु घर के एक सदस्य को रोगी कर दे ता है और दूसरे को क्य नह ?

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ज्वर उतर जाने के बाद भी च कत्सक प्र तजै वक क पूरी खुराक लेने पर बल क्य दे ते ह?
मधुमेह कसी रोगाणु से नह होता — फर यह बच्च म क्य बढ़ रहा है?

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

जो क ट मुझे काटता है वह मुझे ऐसा रोग कैसे दे दे ता है जो स्वयं उसे नह होता?
क्या एकाक पन को सचमुच एक स्वास्थ्य समस्या कहा जा सकता है?
वायु गुणवत्ता सूचकांक कैसे मापा जाता है और आज मेरे नगर का मान मेरे लए क्या अथ रखता है?

यह क जए: अपने प्रश्न प चय पर लखकर एक पात्र म डा लए और कक्षा म प्रत्येक वद्याथ एक पच नकालकर
उसका उत्तर दे । प्रायः वही प्रश्न सबसे उपयोगी नकलते ह जो आपके मन म नह आए थे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 29
3.1 स्वास्थ्य— क्या रोग का नह होना ही मात्र स्वास्थ्य है?

प्र.1 सूचना पट्ट पर लगी समाचार पत्र क कतरन हमारे दे श म लोग के स्वास्थ्य के संबंध म आपको क्या बताती ह?

सभी कतरन मलकर यह बताती ह क आज भारत क सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ संक्रमण नह , अ पतु हमारी जीवनशैली और
हमारा प रवेश ह।

कतरन क्या कहती है यह हम क्या बताती है

भारत क 11.4% जनसंख्या मधुमेह से ग्रस्त है; भारत म 10 करोड़ से अ धक लोग मधुमेह से ग्रस्त ह असंचरणीय, जीवनशैल ी से जुड़े
(आई.सी.एम.आर.); 28.6% भारतीय स्थूलकाय ह; द क्षण-पूव ए शयाई लोग मधुमेह और हृदयाघात से रोग अत्यंत व्यापक हो चुके है ं
अ धक पी ड़त होते ह (डबल्यू.एच.ओ.)

मधुमेह होने के प्रमुख कारण म से एक कारण फास्ट फूड है; आहार मंत्र— आहार म तेल और चीनी क हम जो खाते है ं उसका इन रोगों
मात्रा कम कर से सीधा संबंध है

बच्च म स्क्र न टाइम बढ़ने से स्थूलता, नद्रा संबंधी वकार और व्यग्रता म वृ द्ध होती है; स्क्र न को अ धक बच्चों को रोगाणु नही,ं आदते ं
समय तक दे खने से बच्च म शुष्क नेत्र रोग होता है हािन पहचु ँ ा रही है ं

सोशल मी डया म अत्य धक समय व्यतीत करने से एकाक पन म वृ द्ध मानिसक और सामािजक
क ल्याण भी स्वास्थ् य का भाग है

वायु प्रदूषण एक सावज नक स्वास्थ्य आपात स्थ त है; स्वास्थ्य संबंधी संकट के प्रमुख कारक म से एक पय वरण भी स्वास्थ् य तय करता
कारक वायु प्रदूषण है है

मानसून के आने पर मले रया और डगू ज्वर के मामल म वृ द्ध होती है संचरणीय रोग समाप्त नही ं हुए
है ं — वे ऋतु के अनुस ार आते
है ं

नय मत रूप से हाथ धोने से संक्रमण 50% तक कम हो जाता है; योग से व्यग्रता कम होती है और इसमें से बहुत कु छ सरल ,
एकाग्रता बढ़ती है; फट इं डया मूवमट; आहार म तेल क मात्रा 10% तक कम कर दै िनक आदतों से रोका जा
सकता है

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

यह क्य महत्त्वपूण है: ध्यान द जए क कतरन शरीर (मधुमेह, स्थूलता), मन (एकाक पन, व्यग्रता) और प रवेश
(वायु प्रदूषण) — तीन को छू ती ह। यही डबल्यू.एच.ओ. क स्वास्थ्य क पूरी प रभाषा है, जो समाचार पत्र म प्रकट
हो रही है।

प्र.2 क्या स्वस्थ रहने का अथ केवल रोग का नह होना ही है?

नह । वश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यू.एच.ओ.) के अनुसार स्वास्थ्य पूण शारी रक, मान सक और सामा जक स्वास्थ्य क स्थ त है,
न क मात्र रोग क अनुप स्थ त।

शारीिरक मानिसक

स्वास्थ्य

सामािजक

पुस्तक का चत्र 3.1 — स्वास्थ्य शारी रक, मान सक और सामा जक कल्याण का मलन बदु है; व्य क्त तभी स्वस्थ है जब तीन एक साथ
ह।

अतः स्वस्थ व्य क्त वह है जो—

अपने शरीर क दे खभाल करता है — पौ ष्टक भोजन, स्वच्छता, व्यायाम, पयाप्त न द;
मान सक दृ ष्टकोण को सकारात्मक बनाए रखता है; और
सामा जक जीवन का आनंद लेता है तथा पारस्प रक संबंध को दृढ़ बनाए रखता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा व्य क्त सामान्यतः व भन्न काय को अ धक कुशलता से कर सकता है, भन्न- भन्न तथा क ठन प र स्थ तय का भली-भाँ त
सामना कर सकता है और अपने सा थय तथा समाज के अन्य सदस्य के साथ भली प्रकार सामंजस्य बना सकता है।

ऐसा क्य होता है: तीन आयाम एक-दूसरे को प्रभा वत करते ह। अपयाप्त न द (शारी रक) से एकाग्रता और
मनोदशा बगड़ती है (मान सक); एकाक पन (सामा जक) से सरदद और भार म कमी आ सकती है (शारी रक),
जैसा क्रयाकलाप 3.1 दखाता है। एक को सुधारकर शेष दो क उपेक्षा नह क जा सकती।

क्रयाकलाप 3.1— आइए, पढ़ — पृष्ठ 29
3.1 स्वास्थ्य— क्या रोग का नह होना ही मात्र स्वास्थ्य है?

सोच और वचार कर

प्र.1 वद्याथ क स्वास्थ्य समस्याओं का कारण क्या था?

इसका कारण एकाक पन था — कोई रोगजनक नह ।
अनुच्छेद म द गई ंखला दे खए—

1. उसने दूसरे शहर के नए वद्यालय म प्रवेश लया, अतः नए प रवेश म उसका कोई मत्र नह था।
2. उसके माता- पता व्यस्त थे, अतः घर पर भी उसे साथ नह मला।
3. एकाक पन दूर करने के लए वह मोबाइल फोन और सोशल मी डया पर अ धक समय व्यतीत करने लगा — परंतु इससे
उसका एकाक पन और अ धक बढ़ गया।
4. फर उसने मत्र बनाने का प्रयास करना बंद कर दया, जससे वह और अ धक कट गया।
5. इसके प ात शारी रक लक्षण आए — सरदद, वजन कम होना और न द पूरी न होना।

ऐसा क्य होता है: स्वास्थ्य म सामा जक कल्याण भी स म्म लत है। जब यह भाग अनुप स्थत हो तो मन प्रभा वत
होता है और अशांत मन शरीर म वास्त वक शारी रक लक्षण के रूप म प्रकट होता है। स्क्र न टाइम ने एकाक पन
उत्पन्न नह कया, परंतु उसने वह वस्तु छ न ली जो एकाक पन दूर कर सकती थी — वास्त वक संग त — अतः
समस्या गहरी होती गई।

ध्यान द जए: नए स्थान पर जाने के बाद एकाक पन अनुभव करना सामान्य है और इसम ल ा क कोई बात
नह । कथा म यह समस्या औष ध से नह , सहायता से हल हुई — च कत्सक ने स्क्र न टाइम कम करने और
परामशदाता से मलने क सलाह द , और वद्यालय के परामशदाता ने उसे मत्र बनाने म सहायता द । सहायता
माँगना ही वह कदम था जो सफल हुआ।

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प्र.2 उसक आदत और प रवेश ने उसके स्वास्थ्य को कैसे प्रभा वत कया?

प रवेश ने समस्या उत्पन्न क और आदत ने उसे बढ़ाया — और दोन ने मलकर स्वास्थ्य के तीन आयाम को हा न पहुँचाई।

आयाम प रवेश आदत उस पर प्रभाव

सामा जक नया शहर, नया वद्यालय, कोई मत्र मत्र बनाने का प्रयास करना बंद कर दया पूण अलगाव
नह ; माता- पता व्यस्त

मान सक बात करने के लए कोई नह मोबाइल फोन और सोशल मी डया पर लंबे एकाकीपन घटने के स्थान पर
समय तक व्यस्त रहना और बढ़ गया

शारी रक — रात तक स्क्र न दे खना, अ नय मत दनचया िसरदद , वजन कम होना, नी ंद
पूर ी न होना

ऐसा क्य होता है: सोशल मी डया संग त जैसा प्रतीत होता है परंतु संग त दे ता नह — वहाँ न बातचीत है, न हँसी,
न साथ खेला गया कोई खेल। अतः एकाक पन बना रहा जब क वे घंटे समाप्त हो गए जो लोग से मलने म लग
सकते थे। इसके साथ ही रा त्र म स्क्र न दे खने से न द बा धत होती है और अपयाप्त न द से सरदद, थकान और भूख
म कमी आती है। इसी प्रकार एक सामा जक समस्या शारी रक रोग बन गई।

स्वास्थ्य लाभ भी इसी तक से उल्टे क्रम म हुआ — कम स्क्र न टाइम (हा नकारक आदत हटाना), परामशदाता (मान सक तनाव
का उपचार) और मत्र बनाने म सहायता (सामा जक अभाव क पू त)।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 30
3.2 हम स्वस्थ कैसे रह सकते ह?

प्र.1 हम स्वयं को स्वस्थ रखने के लए क्या करना चा हए और क्या नह ?

अध्याय इसका उत्तर दो सू चय म दे ता है — एक उन आदत क जो अपनानी ह और एक उनक जो छोड़नी ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
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हम क्या करना चा हए हम क्या नह करना चा हए

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अनाज स म्म लत.c gू ड का सेवन
प्र त दन फास्ट फूड और जंकaफ
संतु लत आहार ली जए जसम प्रचुर मात्रा म फल, स ब्जयाँ और साबुत प्रसंस्कृत, वसायुक्त अथवा शकरायुक्त खाद्य और पेय पदाथ;

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gl खेलकर, टहलकर, दौड़कर, साइ कल चलाकर या व्यायाम करके
aबाहर मोबाइल फोन अथवा अन्य ड जटल स्क्र न पर बहुत अ धक
शारी रक रूप से स क्रय र हए समय व्यतीत करना

co m रा त्र म बहुत देर से सोना अथवा पयाप्त न द न लेना
शरीर और म स्तष्क को वश्राम दे ने के लए पयाप्त न द ली जए
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व्य क्तगत स्वच्छता बनाए र खए
a भोजन, वशेषकर सुबह का अल्पाहार (कलेवा), न करना

प्र त दन वश्राम और ध्यान के लए समय नका लए; नय मत रूप से योग —
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अथवा प्राणायाम जैसे सरल श्वास व्यायाम क जए

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स्क्र न टाइम को सी मत क जए और प्रकृ त के सा न्नध्य म अ धक समय —

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बताइए

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a तंबाकू, मद्य और मादक पदाथ जैसे हा नकारक पदाथ को ‘ना’ क हए —

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अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ र खए; प रवार और मत्र के —

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साथ समय बताइए

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ऐसा क्य होता है: बाईं ओर क प्रत्येक बात स्वास्थ्य के तीन आयाम म से कसी एक को सुदृढ़ करती है — भोजन

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और व्यायाम शरीर को, वश्राम और न द मन को, तथा प रवार और मत्र सामा जक पक्ष को। दाईं ओर क प्रत्येक
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बात इनम से कसी एक से समय या पोषण छ न लेती है।

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a क्रयाकलाप 3.2— आइए, सूची बनाएँ — पृष्ठ 30
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3.2 हम स्वस्थ कैसे रह सकते ह?

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क्रयाकलाप

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प्र.1 कुछ अच्छ आदत क सूची बनाइए जनका अनुपालन करने के लए प्रायः आपके माता- पता, शक्षक अथवा

.
m स्वच्छता बनाए रख। स्वस्थ
व रष्ठजन आपको प्रे रत करते ह। इनम से कतनी आदत पहले से ही आपक दनचया का भाग ह? आप कन
आदत का अनुपालन आरंभ करना चाहगे? नीचे द गई सूची म जो ड़ए— व्य e
m a s
gl व ाम और ध्यान के लए समय
co और संतु लत आहार ली जए। नय मत रूप से व्यायाम क जए। प्र तaदन
क्तगत

.
as em नका लए।
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m .
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m . co
पुस्तक म द गई चार आदत से आरंभ क जए और फर अपनी आदत जो ड़ए। प्रत्येक के सामने ईमानदारी से ल खए क वह पहले
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las
से दनचया म है या आप उसे आरंभ करना चाहते ह।
नमूना उत्तर — वस्ता रत सूची:ag

co m
m .
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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

अच्छ आदत व रष्ठजन इस पर बल क्य दे ते ह पहले से / आरंभ
करनी है

व्य क्तगत स्वच्छता बनाए रखना साबुन से हाथ धोने पर रोगजनक मुँह तक पहुँचने से पहले ही हट जाते पहले से
ह

स्वस्थ और संतु लत आहार लेना सभी पोषक तत्व मलते ह; अभावजन्य तथा जीवनशैली ज नत रोग पहले से
नह होते

नय मत रूप से व्यायाम करना हृदय और पे शयाँ सशक्त रहती ह तथा न द अच्छ आती है आरंभ करनी है

प्र त दन वश्राम और ध्यान के लए तनाव घटता है; पृष्ठ 28 का सूचना पट्ट कहता है क योग से व्यग्रता कम आरंभ करनी है
समय नकालना होती है और एकाग्रता बढ़ती है

उबला अथवा शुद्ध जल पीना हैजा, आंत्र ज्वर और यकृतशोथ ए से बचाव पहले से

प्र त दन एक ही समय पर सोना और शरीर न द म ही स्वयं क मरम्मत करता है आरंभ करनी है
उठना

वद्यालय जाने से पूव अल्पाहार प्रातःकाल के लए ऊजा मलती है; कक्षा म थकान नह होती पहले से
करना

खाँसते या छ कते समय मुँह और वायु से फैलने वाले रोग सहपा ठय तक नह पहुँचते पहले से
नाक ढकना

प्र त दन कम से कम एक घंटा बाहर व्यायाम, धूप और संग त — स्वास्थ्य के तीन आयाम एक साथ आरंभ करनी है
खेलना

कक्षा और घर के आस-पास स्वच्छता म क्खय और मच्छर को प्रजनन का स्थान नह मलता पहले से
रखना

यह क जए: ‘आरंभ करनी है’ वाले स्तंभ से केवल एक आदत चु नए और दो सप्ताह तक उसका अनुपालन
क जए, तत्प ात अगली ली जए। लखी हुई लंबी सूची से नभाई गई एक आदत कह अ धक मूल्यवान है।

प्र.2 अब उन आदत के वषय म वचार क जए जो आपके स्वास्थ्य के लए अच्छ नह ह। नीचे द गई सूची म और
भी आदत को जो ड़ए— मोबाइल फोन अथवा अन्य ड जटल स्क्र न पर बहुत अ धक समय व्यतीत करना।
प्र त दन फास्ट फूड और अन्य अस्वास्थ्यप्रद भोजन (जंक फूड) का सेवन करना। रा त्र म बहुत दे र से सोना अथवा
पयाप्त न द न लेना। भोजन वशेषकर सुबह का अल्पाहार (कलेवा) न करना।

नमूना उत्तर — पुस्तक क चार आदत, उनके साथ और आदत तथा प्रत्येक का कारण:

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

स्वास्थ्य के लए अच्छ न होने वाली आदत इसका प्रभाव

मोबाइल फोन अथवा अन्य ड जटल स्क्र न पर बहुत थूल ता, िनद ा संबंध ी िवकार , व्यगता और शुष्क नेत्र रोग से जुड़ा; खेल ने और िमलने
स्

अ धक समय व्यतीत करना का समय छीन ले ता है

प्र त दन फास्ट फूड और अन्य अस्वास्थ्यप्रद भोजन इसमें तेल , चीनी और नमक अिधक तथा आवश्यक पोषक तत्व कम होते है;ं सूचना पट्ट
का सेवन करना फास्ट फू ड को मध मु ेह के पमुख कारणों में िगनाता है

रा त्र म बहुत दे र से सोना अथवा पयाप्त न द न लेना शरीर और मन को िवश्राम तथा स्वास्थ् य लाभ का समय नही ं िमलता; अगले िदन
एकागता और मनोदशा िबगड़ ती है

भोजन, वशेषकर सुबह का अल्पाहार, न करना पातःकाल शरीर को ऊज नही ं िमलती; पायः बाद में अिधक खा िलया जाता है

जल के स्थान पर शकरायुक्त शीतल पेय पीना बहुत अिधक चीनी िमलती है और कोई अन्य पोषक तत्व नही ं

भोजन से पूव हाथ न धोना ु ँ ते है ं — आंत्र ज्वर , हैजा और गोल कृ िम का यही
रोगजनक सीधे हाथ से मुँह तक पहच
माग है

तौ लया, रुमाल अथवा पानी क बोतल साझा करना अपत्यक्ष संपक — संचरणीय रोगों के फै लने का एक पमुख माध् यम

घंट बना हले-डु ले बैठे रहना शारीिरक सिक्रयता की कमी को अध् याय मध मु ेह के कारणों में िगनाता है

गमल , कूलर और पुराने टायर म जल एकत्र रहने म च्छरों को पजनन का स्थान िमलता है और मले िरया तथा डेंगू घर तक आ जाते है ं
दे ना

च कत्सक क सलाह के बना औष धयाँ, वशेषकर पितजैिवक पितरोधी जीवाणु उ त्पन्न होते है ं (खंड 3.5.1)
प्र तजै वक, लेना

ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क ये आदत उसी दन रोगी नह बनात । ये धीरे-धीरे प्रभाव डालती ह और यही
इन्ह अनदे खा करने म सरल तथा पलटने म क ठन बना दे ता है।

क्रयाकलाप 3.3— आइए, तुलना कर — पृष्ठ 31

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

3.2.2 पयावरण को स्वच्छ रख

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र 3.3 (क) और चत्र 3.3 (ख) दे खए। आप कस खेल के मैदान म खेलना पसंद करगे और क्य ?

(क)

(ख)

चत्र 3.3, पृष्ठ 31 — खेल के दो भन्न मैदान, पुनः च त्रत रेखा चत्र।

चत्र 3.3 (क) के मैदान म — क्य क वह स्वच्छ, सुव्यव स्थत और सुंदर है, जब क चत्र 3.3 (ख) का मैदान प्रदू षत, गंदा, अस्वच्छ
और म क्खय -मच्छर से भरा हुआ है।
कारण केवल यह नह क स्वच्छ मैदान अच्छा दखता है। गंदा मैदान स्वास्थ्य के लए संकट है और अध्याय इसका कारण भी बताता
है—

रुके हुए जल म पनपने वाले मच्छर रोगवाहक ह — वे मले रया और डगू फैलाते ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

कचरे पर बैठकर भोजन पर बैठने वाली म क्खयाँ आंत्र ज्वर, हैजा तथा अन्य जल एवं भोजन ज नत रोग के रोगजनक ले जाती
ह।
ऐसे स्थान क धूल और धुआँ श्वास लेने म क ठनाई उत्पन्न करते ह तथा खाँसी अथवा अस्थमा का कारण बन सकते ह।

इसी लए पुस्तक नष्कष दे ती है क ऐसे क्षेत्र म रहने वाले लोग बार-बार बीमार पड़ सकते ह।

ऐसा क्य होता है: स्वयं को स्वच्छ रखने से केवल हमारी रक्षा होती है। प रवेश को स्वच्छ रखने से वह स्थान ही
समाप्त हो जाता है जहाँ रोगवाहक पनपता है — और इससे उस मैदान का उपयोग करने वाले सभी लोग सुर क्षत
होते ह। यही कारण है क अध्याय ‘पयावरण को स्वच्छ रख’ को व्य क्तगत स्वच्छता के समान महत्त्व दे ता है।

प्र.2 क्या आपको कभी धुए ँ अथवा धूल वाली जगह पर श्वास लेने म क ठनाई हुई है?

हाँ — कचरा जलते हुए स्थान के पास, व्यस्त सड़क पर अथवा धूल भरे नमाण स्थल पर प्रायः ऐसा होता है। ऐसा इस लए होता है
क्य क स्वच्छ वायु एवं जल हमारे स्वास्थ्य के लए बहुत महत्त्वपूण ह।
धुआँ और धूल सूक्ष्म ठोस कण से बने होते ह। इन्ह श्वास के साथ लेने पर श्वास माग क भीतरी परत म जलन होती है। शरीर
खाँसकर इन कण को बाहर नकालने का प्रयास करता है और श्वास माग सकुड़ जाता है — इसी से श्वास लेना क ठन लगता है।

शहर म वाहन एवं कारखान से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण खाँसी अथवा अस्थमा (दमा) जैसी समस्याएँ हो सकती
ह।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वा लट इंडेक्स, AQI) हम बताता है क कसी दन वायु कतनी स्वच्छ है।
अपेक्षाकृत स्वच्छ पयावरण हम स्वस्थ रहने और अच्छा अनुभव कराने म सहायक होता है।

स्वयं दे खए: अपने नगर का आज का AQI दे खए। कम मान का अथ है स्वच्छ वायु; अ धक मान का अथ है क
वायु म कण का भारी भार है और उस दन बाहर व्यायाम करना कसी स्वच्छ दन के लए टाल दे ना बेहतर है।

क्रयाकलाप 3.4— आइए, पता कर — पृष्ठ 33
3.4.1 संचरणीय रोग क उत्प त्त और प्रसार कैसे होता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 पुस्तक , वश्वसनीय वेबसाइट ारा अथवा अपने वज्ञान के शक्षक से पूछकर सूची म द गई जानकारी क जाँच
क जए। कोई अन्य महत्त्वपूण जानकारी जो छू ट गई हो, उसे जो ड़ए।

ता लका 3.1 म द गई जानकारी सही है। अध्याय से जाँच करने पर यह रही सत्या पत ता लका, जसम एक उपयोगी स्तंभ जोड़ा
गया है — संचरण का माध्यम, क्य क उसी से यह तय होता है क रोग को कैसे रोका जाए।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
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रोग कारक शरीर म प्रमुख लक्षण संचरण का माध्यम
(जोड़ा m
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संक्रमण का गया)

. co स्थान
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वायु के माध्यम से फैलने वाले रोग

सद -जुकाम और िवषाणु श्वसन तंत्र नाक बंद होना और नाक से पानी बहना, खाँसने-छ कने से नकली बूँद;

m
.co ag
इन्फ्लूएज़
ं ा गले म खराश, ज्वर, खाँसी, शरीर म दद व्य क्तगत वस्तुएँ साझा करना

m
श्वसन तंत्र, त्वचा se हल्का ज्वर, त्वचा म खुजली, चकत्ते,
a
agl
छोट माता िवषाणु वायु म बूँद; फफोल से संपक
( चकनपॉक्स) फफोले

खसरा (मीजल्स) िवषाणु त्वचा, श्वसन तंत्र ज्वर, गले म खराश तथा गदन, कान
co
वायु म बूँद
m
e m.
और त्वचा के अन्य भाग पर लाल

m l as
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चकत्ते

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l a se
क्षय रोग (ट बी) जीवाणु फेफड़े खाँसी, ज्वर, थकान, भूख न लगना, रात संक्र मत व्य क्त क खाँसी से

a g म पसीना आना नकली बूँद

m a s
agl
दू षत जल और भोजन से फैलने वाले रोग

.coथकान, ज्वर, भूख न लगना, मतली,
यकृतशोथ िवषाणु यकृत
a s em उत्सज पदाथ से दू षत जल
(हेपेटाइ टस) ए
ag l वमन, पी लया, पेट के ऊपरी दा हने अथवा भोजन
भाग म दद

co m
.
हैजा (कॉलरा) जीवाणु आंत्र अ तसार और नजलीकरण दू षत पेयजल और भोजन;

e m
as
म क्खयाँ

com
आंत्र .ज्वर सरदद, पेट म तकलीफ, ज्वरa g l
m
ase(टाइफॉइड)
जीवाणु आंत्र और दू षत पेयजल और भोजन

agl
अ तसार

एस्के रसता (गोल कृ िम आंत्र मल म कृ म, भूख न लगना, वृ द्ध म दू षत भोजन, जल अथवा मृदा
se m
कृ म संक्रमण)
com रक्ताल्पता
कमी, अ तसार, वजन कम होना,
g l a
m . a
ase
कट ारा संच रत रोग
agl
m
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मले रया ( वषम पोटोजोआ त्वचा, रक्त तीव्र ज्वर, अत्य धक पसीना आना, मच्छर (रोगवाहक) का काटना

m
ज्वर) कंपकंपी आना

a se
com g l
m.ज्वर) a
डगू ज्वर (ह ी तोड़ िवषाणु त्वचा, रक्त ज्वर, सरदद, माँसपे शय और जोड़ म स्वच्छ, रुके हुए जल म पनपने

e
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दद, मतली वाले मच्छर का काटना

ag c
m .
जोड़ा गया स्तंभ क्य उपयोगी है: कारक बताता है क रोग क्या है; संचरण का माध्यम बताता है क करना क्या है।
a s e
. com
ट बी और खसरा दोन मुँह ढकने से रुकते ह, हैजा और आंत्र ज्वर उबला जल पीने से, तथा मले रया और डगू रुका
agl
a s emचार भन्न प्रकार के ह।
agl
जल हटाने से — यद्य प इनके रोगजनक

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m .
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ध्यान द जए: ता लका म प्रोटोजोआ, जीवाणु, वषाणु और कृ म — चार आते ह। ये सभी रोगजनक ह और कृ म
परजीवी के रूप म रहते ह, अथात ऐसे जीव जो कसी दूसरे जीव के शरीर म या शरीर पर रहते ह।

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प्र.2 नीचे द गई ता लका का अध्ययन क जए और वचार क जए क कौन-से सरल उपाय प्रत्येक रोग क रोकथाम म
सहायता कर सकते ह।
ता लका 3.1— मनुष्य को प्रभा वत करने वाले कुछ सामान्य संचरणीय रोग (पृष्ठ 33–35)।

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रोग कारक शरीर म लक्षण नवारक उपाय
संक्रमण
का स्थान

वायु के माध्यम से फैलने वाले रोग

सद -जुकाम और वषाणु श्वसन तंत्र नाक बंद होना और नाक बार-बार हाथ धोएँ, व्य क्तगत
इन्फ्लूएज
ं ा से पानी बहना, गले म वस्तुए ँ साझा न कर एवं मुँह और
खराश, ज्वर, खाँसी, नाक को मास्क से ढक कर रख।
शरीर म दद

छोट माता वषाणु श्वसन तंत्र, हल्का ज्वर, त्वचा म रोगी को पूरी तरह से अलग रख, मुँह
( चकनपॉक्स) त्वचा खुजली, चकत्ते, फफोले और नाक ढक कर रख एवं
ट काकरण करवाएँ।

खसरा (मीजल्स) वषाणु त्वचा, ज्वर, गले म खराश और रोगी को अलग रख, मुँह और नाक
श्वसन तंत्र गदन, कान तथा त्वचा के को ढक कर रख, स्वच्छता बनाए
अन्य भाग पर लाल रख एवं ट काकरण करवाएँ।
चकत्ते

क्षय रोग (ट बी) जीवाणु फेफड़े खाँसी, ज्वर, थकान, ट बी से संक्र मत लोग के नकट
भूख न लगना, रात म संपक से बच, मुँह और नाक को ढक
पसीना आना कर रख, स्वच्छता बनाए रख एवं
ट काकरण करवाएँ।

दू षत जल और भोजन से फैलने वाले रोग

यकृतशोथ वषाणु यकृत थकान, ज्वर, भूख न उबला हुआ पानी पएँ एवं
(हेपेटाइ टस) ए लगना, मतली, वमन, ट काकरण करवाएँ।
पी लया, पेट के ऊपरी
दा हने भाग म दद

हैजा (कॉलरा) जीवाणु आंत्र अ तसार और व्य क्तगत स्वच्छता और स्वच्छता
नजलीकरण संबंधी आदत को अपनाएँ, भली-
भाँ त पका हुआ भोजन खाएँ एवं
उबला हुआ पानी पएँ और
ट काकरण करवाएँ।

आंत्र ज्वर जीवाणु आंत्र सरदद, पेट म तकलीफ, व्य क्तगत स्वच्छता और स्वच्छता
(टाइफॉइड) ज्वर और अ तसार संबंधी अच्छ आदत को अपनाएँ,
अच्छ तरह से पका हुआ भोजन
खाएँ एवं उबला हुआ पानी पएँ और
ट काकरण करवाएँ।

एस्के रसता कृ म आंत्र मल म कृ म, भूख न व्य क्तगत स्वच्छता और स्वच्छता
(गोल कृ म लगना, वृ म कमी, संबंधी अच्छ आदत को अपनाएँ,
संक्रमण) अ तसार, वजन कम अच्छ तरह से पका हुआ भोजन
होना, रक्ताल्पता खाएँ और उबला हुआ पानी पएँ।
(एनी मया)

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कट ारा संच रत रोग

मले रया ( वषम प्रोटोजोआ त्वचा, रक्त तीव्र ज्वर, अत्य धक मच्छरदानी और मच्छर प्र तक षय
ज्वर) पसीना आना, कंपकंपी का उपयोग कर, पूरी बाँह के कपड़े
आना पहन एवं अपने घर और आस-पास
मच्छर के प्रजनन को नयं त्रत कर।

डगू ज्वर (ह ी वषाणु त्वचा, रक्त ज्वर, सरदद, मच्छरदानी और मच्छर प्र तक षय
तोड़ ज्वर) माँसपे शय और जोड़ का उपयोग कर, पूरी बाँह के कपड़े
म दद, मतली पहन, अपने घर और आस-पास
मच्छर के प्रजनन को नयं त्रत कर
एवं रुके हुए पानी वाले स्थान से
बच।

रोग को संचरण के माध्यम के अनुसार समू हत क जए — तब उपाय का एक समूह पूरे वग को रोक दे ता है।

माध्यम रोग रोकथाम के सरल उपाय

वायु ारा सद -जुकाम और खाँस ते या छी ंकते समय मुँह और नाक ढकना; भीड़ -भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना;
इन्फ्लूएज़
ं ा, छोट माता, व्यिक्तगत वस्तुए ँ साझा न करना; रोगी को अलग रखना; बार -बार हाथ धोना;

खसरा, क्षय रोग टीकाकरण करवाना (छोटी माता, खसरा, टीबी)

दू षत जल और यकृतशोथ ए, हैजा, आंत्र उबला हुआ अथवा सुर िक्षत पानी पीना; भली-भाँित पका हुआ भोजन खाना; व्यिक्तगत
भोजन ारा ज्वर, एस्के रसता स्वच्छता और स्वच्छता संबंध ी अच्छी आदते ं अपनाना; शौचालय का उपयोग करना;

भोजन से पूव हाथ धोना; टीकाकरण करवाना (यकृ तशोथ ए , हैजा, आंत्र ज्वर )

कट मले रया, डगू ज्वर म च्छरदानी और म च्छर पितकिषयों का उपयोग; पूर ी बाँह के कपड़ े पहनना; घर और
(रोगवाहक ) आस -पास म च्छरों के पजनन को िनयंित्रत करना; रुद्ध जल वाले क्षेत्रों से बचना
ारा

दो उपाय हर समूह म आते ह और इसी लए सबसे मूल्यवान ह—

साबुन और पानी से हाथ धोना — सूचना पट्ट के अनुसार नय मत रूप से हाथ धोने से संक्रमण 50% तक कम हो जाता है।
स्वयं को और अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखना।

ऐसा क्य होता है: रोगजनक को एक यात्रा पूरी करनी होती है — एक शरीर से नकलना, बाहर जी वत रहना और
दूसरे शरीर म प्रवेश करना। ऊपर का प्रत्येक उपाय इस यात्रा को कसी एक बदु पर तोड़ता है — मास्क नकास पर,
उबालना माग म, मच्छरदानी प्रवेश पर, और ट का उस शरीर को ही रोगजनक के लए अनुपयोगी बना दे ता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 35

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
a g l AglaSem · NCERT Solutions

3.4.2 असंचरणीय रोग कस कारण होते ह?
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m l as
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क्या रोग सदै व संक्रमण के कारण होते ह?
m
प्र.1

l a se
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उत्तरg
m
नह । संक्रमण रोग उत्पन्न होने के दो माग म से केवल एक है।

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em
संक्रमण से होने वाले
g l as संक्रमण से न होने वाले

नाम संचरणीय (संक्रामक) रोग
a असंचरणीय रोग

co m
m.
कारण रोगजनक — जीवाणु, वषाणु, कवक, कृ म अथवा जीवनशैली, आहार एवं/अथवा पयावरण; अथवा कसी पोषक तत्व क

as e
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प्रोटोजोआ कमी

. एक व्य क्त से दूसरे म फैलते ह a g
m
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संचरण एक व्यिक्त से दू स रे में नही ं फै लते

aglउदाहरण आंत्र ज्वर, डगू, फ्लू, चेचक, को वड—19 कसर, मधुमेह, अस्थमा, हृदय रोग; तथा अभावजन्य रोग — स्कव ,

om a s
एनी मया और घघा

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वस्तुतः अध्याय बताता है क भारत म अब असंक्रामक वग ही बड़ी समस्या है— असंचरणीय रोग भारत म मृत्यु के सबसे सामान्य
कारण ह।
agl

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ऐसा क्य होता है: रोग वह स्थ त है जो शरीर या मन के सामान्य काय को प्रभा वत करती है। रोगजनक इस काय
.
mश्वास लेना, अथवा रक्त
s
को बगाड़ने का एक माग है — परंतु वटा मन सी से र हत आहार, वष तक प्रदू षत वायु म
शकराoको
e
mनयं त्रत न कर पाने वाला शरीर भी उतने ही बड़े माग ह। काय बगड़नेgकlे aलए कसी रोगाणु क
. c a
e m
as
आवश्यकता नह ।

agl
se m
com g l a
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 36
m . a
ase
agl
3.4.2 असंचरणीय रोग कस कारण होते ह?

य द म वटा मन और ख नज का सेवन अ धक मात्रा म करूँ तो क्या होगा?
co m
.
प्र.1

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m l as
.co a g
emपोषक तत्व उ चत मात्रा म ही लाभ करते ह। कमी से अभावजन्य रोग होते ह और अ धकता भी अस्वस्थ कर सकती है।

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मात्रा प रणाम उदाहरण

बहुत अभावजन्य रोग — जो एक असंचरणीय रोग है स्कव ( वटा मन सी), एनी मया (लोहा), घघा (आयोडीन) — कक्षा 6 म
कम पढ़ा

उ चत सामान्य वृिद्ध और शरीर का सामान्य काय संतु लत आहार से यह मात्रा मल जाती है
मात्रा

बहुत अ त रक्त मात्रा या तो बाहर नकल जाती है या वटा मन ए क अ धकता से सरदद तथा यकृत को हा न; वटा मन डी क
अ धक सं चत होती है, और सं चत अ धकता हा न कर अ धकता से रक्त म कै ल्सयम बढ़कर वृक्क को हा न; लोहे क अ धकता
सकती है वषाक्त होती है

ऐसा क्य होता है: वटा मन बी और सी जल म घुलनशील ह, अतः इनक थोड़ी अ धकता मूत्र के साथ बाहर नकल
जाती है। वटा मन ए, डी, ई और के वसा म घुलनशील ह और अ धकांश ख नज क भाँ त शरीर म सं चत हो जाते
ह। जो सं चत होता है वह बढ़ सकता है, और बहुत बढ़ जाने पर वह उसी अंग के काय म बाधा डालने लगता है
जसम वह सं चत है।

संकेत: प्रचुर फल, स ब्जय और साबुत अनाज वाला संतु लत आहार इन पोषक तत्व को स्वयं ही उ चत मात्रा म दे
दे ता है। गो लयाँ और अनुपूरक औष धयाँ ह — इन्ह तभी लेना उ चत है जब च कत्सक बताए क कसी वशेष
पोषक तत्व क कमी है।

क्रयाकलाप 3.5— आइए, सवक्षण कर — पृष्ठ 36
3.4.2 असंचरणीय रोग कस कारण होते ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 अपने आस-पड़ोस म जीवनशैली से संबं धत तीन सबसे सामान्य रोग का पता लगाइए। कसी च कत्सक, नस,
स्वास्थ्यकम या प रवार के ऐसे सदस्य से बात क जए जसे स्वास्थ्य के वषय म जानकारी हो और जो यह बता
सके क जीवनशैली म कस प्रकार के प रवतन से इन रोग क रोकथाम अथवा प्रबंधन कया जा सकता है।

सवक्षण क व ध। जाने से पूव तीन प्रश्न तैयार क जए— यहाँ जीवनशैली से जुड़े कौन-से रोग सबसे अ धक दखाई दे ते ह? ये
प्रायः कस आयु म आरंभ होते ह? आप सबसे पहले कौन-सा प रवतन सुझाते ह? नकटतम स्वास्थ्य कद्र म च कत्सक, नस, आशा
अथवा आंगनवाड़ी कायकता से और ऐसे प रवारजन से बात क जए जो कसी रोग का प्रबंधन कर रहे ह। उत्तर लखते समय कसी
का नाम मत ल खए — कसी का रोग उसक नजी बात है। जो सुना, उसक जाँच कसी वश्वसनीय स्वास्थ्य वेबसाइट अथवा अपने
व ान के शक्षक से क जए।
नमूना उत्तर। भारत के अ धकांश मोहल्ल म सबसे अ धक बताए जाने वाले तीन रोग ह—

1. मधुमेह — अध्याय के अनुसार भारत अब वश्व म मधुमेह के सबसे अ धक मामल वाले दे श म से एक है।
2. उच्च रक्तचाप।
3. स्थूलता — सूचना पट्ट के अनुसार 28.6% भारतीय स्थूलकाय ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

स्वास्थ्यकम प्रायः तीन के लए एक ही पहली सलाह दे ते ह, क्य क तीन परस्पर जुड़े ह— कम तेल, चीनी और नमक वाला
संतु लत आहार; नय मत शारी रक स क्रयता; पयाप्त न द; तंबाकू और मद्य से दूरी; तथा नय मत अंतराल पर जाँच
जससे रोग आरंभ म ही पकड़ म आ जाए।

एक ही सलाह तीन पर क्य लागू होती है: ये तीन अलग-अलग दुघटनाएँ नह ह। ये आहार, स क्रयता के स्तर
और तनाव के एक ही संयोजन से पनपते ह, अतः उस संयोजन म कया गया प रवतन तीन पर एक साथ काय करता
है।

ध्यान द जए: जीवनशैली अनेक कारण म से एक है — अध्याय स्वयं आदत के साथ-साथ हॉम न असंतुलन और
‘अन्य कारण ’ को भी गनाता है। जो पाया, उसे स्वास्थ्य के वषय के रूप म ल खए, कसी का दोष बताकर नह ।

प्र.2 ता लका 3.2 म रक्त स्थान क पू त क जए और जीवनशैली से संबं धत रोग के वषय म और अ धक जा नए।
ता लका 3.2— असंचरणीय रोग, जैसा पृष्ठ 36 पर छपा है — रक्त खाने ही भरने ह।

क्र.सं. जीवनशैली से संबं धत संकेत और लक्षण जीवनशैली म सुझाए गए
सामान्य रोग के नाम प रवतन

1. स्थूलता संतु लत आहार लेना और
नय मत व्यायाम करना

2. मधुमेह बार-बार पेशाब आना; अत्य धक प्यास
लगना; भार घटना; थकान; धीमी ग त से
घाव भरना

3. उच्च रक्तचाप

4. ………………… ………………… …………………

पुस्तक म द गई प्र व ष्टयाँ यथावत रखी गई ह और रक्त स्थान भरे गए ह। चौथी पं क्त आपके अपने सवक्षण म मले रोग के लए है
— यहाँ नमूने के रूप म अस्थमा लया गया है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

क्र.सं. जीवनशैली से संकेत और लक्षण जीवनशैली म सुझाए गए प रवतन
संबं धत सामान्य
रोग के नाम

1. स्थूलता आयु और लंबाई के अनुपात में शरीर का भार संतु लत आहार लेना और नय मत व्यायाम करना
स्वस्थ सीमा से बहुत अिधक ; थोड़ े पिर श्रम में

ही थकान या श्वास फू लना; घुटनों तथा
जोड़ ों में दद ; खर टे और बािधत नी ंद

2. मधुमेह बार-बार पेशाब आना; अत्य धक प्यास कम चीनी और कम पसंस्कृ त भोजन वाला संतिु लत
लगना; भार घटना; थकान; धीमी ग त से आहार ; िनयिमत शारीिरक सिक्रयता; पय प्त नी ंद ;
घाव भरना शरीर का भार स्वस्थ सीमा में रखना; िचिक त्सक के
परामश के अनुस ार र क्त शक रा की जाँच

3. उच्च रक्तचाप पायः कोई ल क्षण नही ं — यह के वल र क्तचाप कम नमक तथा कम तैल ीय एवं पसंस्कृ त भोजन;
मापने पर ही पता चलता है; कभी-कभी िनयिमत व्यायाम ; िवश्राम अथवा योग से तनाव पबंध न;
िसरदद , चक्कर आना अथवा श्वास फू लना पय प्त नी ंद ; तंबाकू और म द्य से दू र ी; िनयिमत अंतराल
पर र क्तचाप की माप

4. अस्थमा (दमा) — साँस में सीटी जैस ी ध् विन, बार -बार खाँस ी, ध एु ँ और धूल से दू र रहना; घर को धूल रिहत रखना;
नमूना छाती में जकड़ न, श्वास ले ने में किठनाई — बाहर व्यायाम से पूव AQI दे खना; पाणायाम जैसे श्वास
धूल , ध एु ँ अथवा ठं डी वायु में पायः बढ़ जाना व्यायाम ; िचिक त्सक ारा दी गई औषिध साथ रखना

उच्च रक्तचाप सबसे क ठन क्य है: इसम प्रायः कोई लक्षण नह होता, अतः यह तभी पता चलता है जब कोई इसे
मापे। जस रोग का कोई लक्षण न हो वह हल्का रोग नह होता — वह ऐसा रोग होता है जसका उपचार ही नह हो
पाता। इसी लए अध्याय अंत म कहता है क शीघ्र नदान और नरंतर दे खभाल अत्यंत महत्त्वपूण ह।

ध्यान द जए: स्थूलता भी इस ता लका के अन्य तीन रोग क भाँ त एक स्वास्थ्य स्थ त है। अध्याय स्वयं बताता है
क ऐसी स्थ तयाँ अनेक कारण के संयोजन से पनपती ह — आहार, शारी रक स क्रयता, हॉम न असंतुलन और
अन्य कारण — अतः इसका यहाँ वणन कया गया है, मूल्यांकन नह ।

क्रयाकलाप 3.6— आइए, पढ़ — पृष्ठ 37
3.5 रोग का नवारण और नयंत्रण कैसे कर?

क्रयाकलाप

प्र.1 इस अध्ययन से आप क्या नष्कष नकालते ह?

यह क स्वच्छता बनाए रखने जैसे सरल उपाय संचरणीय रोग के फैलाव को बहुत कम कर सकते ह — और ये तब सवा धक प्रभावी
होते ह जब पूरा समुदाय एक साथ प्रयास करे।
भद्रक के अध्ययन क ंखला दे खए—

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ओिडशा के भद क िजले में समुद ाय आधािरत स्वच्छता अिभयान

→ अिधक लोगों ने शौचालय बनाए और उनका उपयोग िकया

→ खुले में शौच की समस्या में बड़ े स्तर तक कमी

→ पेयजल और मृद ा उत्सज पदाथ से दू िषत होना बंद

→ अितसार और सं क्र मण के मामले कम; बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार

ऐसा क्य होता है: हैजा, आंत्र ज्वर, यकृतशोथ ए और गोल कृ म — सभी एक ही माग से चलते ह, अथात संक्र मत
व्य क्त के उत्सज पदाथ से जल, मृदा या भोजन म और वहाँ से कसी के मुँह तक। शौचालय इस माग को पहले ही
चरण पर काट दे ता है, अतः ये सभी रोग एक साथ घट जाते ह। कोई औष ध यह नह कर सकती।

दूसरा नष्कष उतना ही महत्त्वपूण है — केवल एक प रवार का शौचालय पयाप्त नह है। जल और मृदा साझा होते ह, अतः
अ तसार के मामले तभी घटे जब अ भयान पूरे गाँव तक पहुँचा। स्वास्थ्य केवल व्य क्तगत नह , कुछ हद तक सामुदा यक वषय भी
है।

प्र.2 अपने क्षेत्र म आयो जत ऐसे सामुदा यक अ भयान के वषय म जानकारी एकत्र क जए। इन जानका रय को
अपनी कक्षा म साझा क जए और अपने सा थय के साथ ऐसे प्रयास के प्रभाव पर चचा भी क जए।

जानकारी कहाँ से ल। ग्राम पंचायत अथवा नगरपा लका के वाड कायालय, प्राथ मक स्वास्थ्य कद्र या वद्यालय के कायालय म
पू छए; आशा अथवा आंगनवाड़ी कायकता से बात क जए; स्वास्थ्य कद्र के सूचना पट्ट दे खए; और स्थानीय समाचार पत्र प ढ़ए।
प्रत्येक अ भयान के वषय म चार बात ल खए— कसने चलाया, लोग से क्या करने को कहा गया, कतने समय तक चला, और
उसके बाद क्या बदला — अं तम बात ही असली कसौट है।
नमूना उत्तर — भारत भर म सामान्यतः चलने वाले अ भयान:

अ भयान यह क्या करता है कन रोग पर प्रभाव

स्वच्छ भारत मशन शौचालय बनवाना और उनका उपयोग कराना, कचरा हैजा, आंत्र ज्वर , यकृ तशोथ ए , गोल
हटाना, ना लयाँ साफ कराना कृ िम , अितसार

पल्स पो लयो / सावभौम घर-घर जाकर प्रत्येक बच्चे को पो लयो ॉप्स तथा अन्य पोिलयो, खसरा, टेटेनस , हेपेटाइिटस
ट काकरण अ भयान ट के दे ना

रा ीय कृ म मु क्त दवस वद्यालयी बच्च को कृ मनाशक गोली दे ना ए स्के िरसता तथा अन्य कृ िम संक्रमण

डगू वरोधी ‘शुष्क दवस’ सप्ताह म एक बार कूलर, टायर, गमले और टं कयाँ खाली डेंगू, मले िरया तथा अन्य म च्छर जिनत
अ भयान कराना रोग

फट इं डया मूवमट दै नक शारी रक स क्रयता, योग और संतु लत आहार को असंचरणीय रोग — स्थूल ता, मध मु ेह,
प्रोत्साहन हृ दय रोग

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चचा क जए: इनम से कन अ भयान म सबके भाग लए बना काम नह चलता और कनसे उस एक प रवार को
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m a s em को पूरे
glह।
भी लाभ होता है जो अकेले उसका पालन करे? आप पाएँगे क स्वच्छता और मच्छर वरोधी अ भयान
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समुदाय क आवश्यकता है, जब क ट काकरण और व्यायाम व्य क्त क सीधे सहायता करते

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 37
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शरीर क रोग से लड़ने क क्षमता
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आपने दे खा होगा क कुछ लोग एक जैसे वातावरण म रहने पर भी दूसर क अपेक्षा अ धक रोगग्रस्त होते ह। क्या
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प्र.1

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आप जानते ह क ऐसा क्य होता है?

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क्य क उनक प्र तरक्षा भन्न होती है — अथात शरीर क रोग से लड़ने क प्राकृ तक क्षमता। यह काय प्र तरक्षा प्रणाली नामक
a वशेष प्रणाली करती है।
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दो व्य क्त एक ही वायु म श्वास ले सकते ह और एक ही जल पी सकते ह, फर भी भन्न रूप से रोगग्रस्त होते ह, क्य क दोन क
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प्र तरक्षा प्रणाली न समान रूप से सशक्त है, न समान रूप से तैयार—
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पूव संपक। जो व्य क्त पहले उस रोगजनक से मल चुका है — अथवा जसका उसके वरुद्ध ट काकरण हुआ है — उसम
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उपा जत प्र तरक्षा होती है और वह रोग उत्पन्न होने से पहले ही उसे परास्त कर दे ता है।

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आयु। छोटे बच्च और वृद्धजन क रक्षा क्षमता कम होती है।

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पोषण। संतु लत आहार से ही प्र तरक्षा प्रणाली बनती है; पोषक तत्व क कमी वाला शरीर उसे बनाए नह रख सकता।

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न द, व्यायाम और तनाव। ये तय करते ह क शरीर स्वयं क मरम्मत कतनी अच्छ तरह करता है, जैसा क्रयाकलाप 3.1 ने
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se पहले से वद्यमान रोग। जो व्य क्त पहले से कसी द घका लक रोग से जूझ रहा है, उसके पास नए संक्रमण के लए कम श क्त
दखाया।

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agl शेष रहती है।

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ऐसा क्य होता है: रोगी होना केवल रोगजनकcतय o mनह करता। यह एक संघष का प रणाम है — भीतर पहुँचे g l a
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रोगजनक क संख्या बनाम उनका सामना
a se करने वाली प्र तरक्षा प्रणाली क श क्त। कसी भी एक पक्ष म प रवतन से
प रणाम बदल जाता है। ag

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.om — पृष्ठ 38
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पाठ्य प्रश्न
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एडवड जेनर और चेचक का ट का

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क्या आप जानते ह क पहले ट के क खोज कब हुई थी?
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प्र.1

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17व शताब्द के उत्तराध म, इंग्लड के च कत्सक एडवड जेनर ारा।

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चेचक एक घातक रोग था जो फफोले पैदा करता था और जससे करोड़ लोग क मृत्यु हुई। गाय म पाया जाने वाला अपेक्षाकृत
कम गंभीर रोग गौशीतला (काउपॉक्स) मनुष्य को भी संक्र मत करता था। जेनर ने यह खोज क क जन लोग को गौशीतला
हो चुका था उन्ह चेचक नह होता था, और इसी से प्रथम ट के का आ वष्कार हुआ।
वे इस नष्कष तक जस माग से पहुँचे वह वै ा नक काय का आदश उदाहरण है—

अवलोकन दूध दुहने वाली जन ग्वा लन को गौशीतला हुआ, वे चेचक से संक्र मत नह हुईं — संभवतः इस लए क दोन रोग के वषाणु
संबं धत थे

प रकल्पना गौशीतला के फफोल म उप स्थत पदाथ ने व्य क्तय को चेचक से सुरक्षा प्रदान क

परीक्षण उन्ह ने एक लड़के म गौशीतला के फफोल का तरल पदाथ अंतःक्षे पत कया, जसे बाद म चेचक के संपक म आने पर भी कोई
लक्षण नह दखा

प रणाम गौशीतला के तरल पदाथ से संक्रिमत िकए गए लोग अब चेचक के पितरोधी हो गए थे

अनुप्रयोग यापक स्तर पर टीकाकरण से अंततः पूरे िवश्व से चेचक का उ न्मूल न हुआ
व्

पृष्ठ 38 का ग्राफ दखाता है क यह कतना पूण रूप से सफल रहा। चेचक के मामले बताने वाले दे श क संख्या 1950 म लगभग
80 थी, जो 1960 के दशक के अंत तक घटकर लगभग 40 रह गई और फर तीव्रता से गरकर शून्य हो गई। ग्राफ म 1965 पर
ट काकरण अ भयान और 1979 पर चेचक का उन्मूलन अं कत है।

हमारी वैज्ञा नक वरासत: आधु नक ट क से बहुत पहले भारत म मसू रकाकरण (वै रयोलेशन) नामक पारंप रक
व ध प्रच लत थी। चेचक के फफोल से लया गया पदाथ त्वचा पर खर च कर लगाया जाता था जससे अपेक्षाकृत
कम गंभीर संक्रमण होकर प्र तरक्षा वक सत हो जाती थी। यह प्र क्रया करने वाल को ट केदार कहा जाता था।

ऐसा क्य होता है: गौशीतला का वषाणु चेचक के वषाणु से नकट रूप से संबं धत है। हा नर हत संबंधी पर
प्र श क्षत प्र तरक्षा प्रणाली घातक वषाणु के आने पर उसे तुरंत पहचान लेती है — यही वह सद्धांत है जस पर
उसके बाद का प्रत्येक ट का बना है।

क्रयाकलाप 3.7— आइए, नष्कष नकाल — पृष्ठ 41

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3.5.1 रोग का उपचार

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र 3.5 (ख) म दए गए सूचना आरेख का अध्ययन कर। आपके वचार से जीवा वक रोगजनक म प्र तजै वक
प्र तरोध कैसे वक सत हुआ?

जीवाणु पितजैिवक औषिधयों के िलए पितरोधी कै से बने?
जब पितजैिवक औषिधयाँ
कु छ जीवाणु पितजैिवक रोग उत्पन्न करने वाले पितजैिवक पितरोधी कु छ जीवाणु अन्य
औषिधयों के पित जीवाणुओं को मारती है ं जीवाणु वृिद्ध करते है ं जीवाणुओं को पितजैिवक
पितरोध िवकिसत करते तो वे शरीर को संक्र मण और रोग का उपचार किठन पितरोध स्थानांतिरत
है।ं से बचाने वाले अच्छे हो जाता है। करते है,ं िजससे अिधक
जीवाणुओं को भी मार सम स्याएँ होती है।ं
दे ती है।ं

मुझे अपनी माँ के िलए पितजैिवक या आप अपने मवेिशयों को
क् नही…
ं नही ं। अपने मवेिशयों को
औषिध चािहए। उन्हे ं गले में दद और पितजैिवक औषिध दे रहे है?ं पितजैिवक का इंजेक्शन न दें।
ज्वर है।

आपको एक िचिकत्सक से औषध पत्र लेना नही,ं मैं िकसी पितजैिवक औषिध का अन्यथा यह पितजैिवक पितरोध
होगा। उपयोग नही ं कर रही हू ँ। िवकिसत करेग ा।

चत्र 3.5 (ख), पृष्ठ 41 — सूचना आरेख, पुनः च त्रत।

यह चत्र 3.5 (ख) म दखाए गए चार चरण म वक सत होता है, और इसका आरंभ हमारे ही कसी काय से होता है— आवश्यकता
न होने पर भी प्र तजै वक लेना अथवा औष ध क पूरी खुराक न लेना।

1. कुछ जीवाणु प्र तजै वक औष धय के प्र त प्र तरोध वक सत कर लेते ह। जीवाणुओं क कसी भी बड़ी संख्या म कुछ
ऐसे नकल आते ह जो औष ध को सह लेते ह।
2. जब प्र तजै वक औष धयाँ रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को नष्ट करती ह तो वे शरीर को संक्रमण से बचाने वाले
अच्छे जीवाणुओं को भी नष्ट कर दे ती ह। इससे वह स्थान और भोजन खाली हो जाता है जसका उपयोग वे अच्छे जीवाणु
कर रहे थे।
3. प्र तरोधी जीवाणु वृ करते ह और छा जाते ह। प्र तस्पध हट जाने पर वे थोड़े से बचे हुए जीवाणु गुणन करके बहुसंख्यक
हो जाते ह।

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4. कुछ जीवाणु अन्य जीवाणुओं को प्र तरोध स्थानांत रत कर दे ते ह, जससे अ धक समस्याएँ होती ह। अब प्र तरोध उन
जीवाणुओं तक भी फैल जाता है जनका कभी उपचार ही नह कया गया था।

ऐसा क्य होता है: प्र तजै वक औष ध जीवाणुओं को प्र तरोधी बनाती नह । वह उन सभी जीवाणुओं को हटा दे ती है
जो प्र तरोधी नह ह और इस प्रकार मैदान उन्ह के लए खाली छोड़ दे ती है जो प्र तरोधी ह। अधूरी खुराक सबसे बुरी
स्थ त है — इतनी औष ध क संवेदनशील जीवाणु समाप्त हो जाएँ, परंतु इतनी नह क क ठन जीवाणु भी नष्ट ह ,
जो फर नबाध गुणन करते ह।

चत्र 3.5 (क) यह भी बताता है क ये प्र तरोधी जीवाणु शेष लोग तक कन माग से पहुँचते ह— जंतुओं को द गई प्र तजै वक
औष धय से जंतु खाद्य उत्पाद के माध्यम से; खाद अथवा पशुमल के माध्यम से मृदा और फसल उत्पाद से होते हुए हमारे पाचन
तंत्र तक; तथा च कत्सालय म गंद सतह और स्वास्थ्यक मय के माध्यम से एक रोगी से दूसरे तक, और फर रोगी के घर लौटने पर
पूरे समुदाय म।
प रणाम वही होता है जो अध्याय कहता है — पहले जस प्र तजै वक से नष्ट कए गए जीवाणु उसी औष ध से उपचार के
प ात भी जी वत रहते ह और गुणन करते ह, जससे सामान्य संक्रमण क च कत्सा क ठन हो जाती है और ज टलताओं,
द घका लक रोग तथा मृत्यु क संभावना बढ़ जाती है।

प्र.2 प्र तजै वक प्र तरोध को कम करने के लए कौन-कौन सी सावधा नयाँ रखी जा सकती ह?

अध्याय नयम सीधे बताता है— प्र तजै वक औष धय का उपयोग समझदारी से क जए और केवल च कत्सक ारा प्र दष्ट कए
जाने पर सही मात्रा म और नधा रत अव ध तक ही इनका सेवन क जए।

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सावधानी यह क्य प्रभावी है

प्र तजै वक औष ध केवल तभी ली जए जब च कत्सक लखे सबसे सामान्य कारण — आवश्यकता न होने पर पितजैिवक ले ना
— समाप्त हो जाता है

अच्छा अनुभव होने पर भी पूरी खुराक समाप्त क जए किठन जीवाणु भी नष्ट हो जाते है,ं उ न्हे ं गुणन का अवसर नही ं
िमलता

सही मात्रा म और नधा रत अव ध तक ही ली जए अधूर ी खुर ाक संक्रमण ठीक करने के स्थान पर पितरोध को बढ़ ावा
दे ती है

सद , खाँसी या फ्लू म प्र तजै वक कभी न ली जए ये िवषाणु जिनत है ं — औषिध लाभ नही ं करती, के वल पितरोध
बढ़ ाती है

कसी दूसरे क बची हुई औष ध न ली जए और न अपनी दूसर को वह औषिध और मात्रा िकसी दू स रे संक्रमण के िलए चुनी गई थी
द जए

पशु च कत्सक क सलाह के बना मवे शय को प्र तजै वक इंजेक्शन न जंतओ
ु ं के पितरोधी जीवाणु खाद्य उ त्पादों और खाद के माध् यम से
द जए ( चत्र 3.5 ख) हम तक पहच ु ँ ते है ं

संक्रमण को आरंभ म ही रो कए — हाथ धोना, स्वच्छ जल, मास्क, जो संक्रमण होगा ही नही,ं उसके िलए पितजैिवक की आवश्यकता
ट काकरण ही नही ं पड़ ेगी

च कत्सालय क सतह और हाथ स्वच्छ र खए पितरोधी जीवाणुओ ं का एक रोगी से दू स रे तक पसार रुकता है

अध्याय के शब्द म, अनावश्यक उपयोग से बचने से प्र तरोधी जीवाणुओं क वृ रुकती है और प्र तजै वक औष धयाँ भावी
पी ढ़य के लए प्रभावी बनी रहती ह।

क्या आप जानते ह? प्रथम प्र तजै वक पे न स लन क खोज 1928 म लंदन के जीवाणु व ानी अलेक्जडर
फ्ले मग ने क , जब उन्ह ने दे खा क एक अप्रयुक्त पे डश पर लगी फफूँद ने जीवाणु क वृ द्ध रोक द थी। तब से
प्र तजै वक औष धय ने करोड़ जीवन बचाए ह — इसी लए इनक रक्षा करना आवश्यक है।

जज्ञासा बनाए रख — पृष्ठ 42–45

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अध्याय के अंत के प्रश्न
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जज्ञासा बनाए रख

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a s emम दशाए गए रोग को संचरणीय अथवा असंचरणीय रोग के रूप म समू हत कर। सद -जुकाम और फ्लू,
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चत्र
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आंत्र ज्वर (टाइफॉइड), मधुमेह (डायबीट ज), अस्थमा (दमा), छोट माता ( चकनपॉक्स)

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se mछोटी माता िचकनपॉ स
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सद -जुकाम और लू आं वर (टाइफॉइड) मधुमेह (डायिबटीज) अ थमा (दमा)
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पृष्ठ 42 — प्रश्न के साथ छपे पाँच चत्र, पुनः च त्रत रेखा चत्र।

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रोग वग aकारण क्या यह फैलता है?

संचरणीय
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सद -जुकाम और फ्लू वषाणु, श्वसन तंत्र म हाँ — वायु ारा, खाँसने-छ कने से

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नकली बूँद से

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आंत्र .ज्वर
agहाँ — दू षत जल और भोजन ारा
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संचरणीय जीवाणु, आंत्र म

a मधुमेह (डायबीट ज)
agl असंचरणीय हॉम न असंतुलन तथा जीवनशैली संबंधी कारण नह

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प्रदू षत वायु om l a
अस्थमा (दमा) असंचरणीय पयावरण से जुड़ा, वशेषकर धुआँ, धूल और नह

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छोट माता संचरणीय वषाणु, श्वसन तंत्र और त्वचा म हाँ — वायु ारा तथा फफोल के संपक से
( चकनपॉक्स)

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संचरणीय: सद -जुकाम और फ्लू, आंत्र ज्वर, छोट माता। असंचरणीय: मधुमेह, अस्थमा।
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agचलता है — कसौट यह है क उसका
.cऐसा क्य होता है: कसौट यह नह क रोग कतना गंभीर है या कतने समय
m कारण कोई रोगजनक है या नह । रोगजनक दूसरे शरीर तक जा सकता है, अतः रोग संचरणीय हो जाता है। मधुमेह
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ag और अस्थमा म जाने के लए कोई रोगजनक ही नह है, अतः रोगी चाहे कतना ही अस्वस्थ हो, कसी को उससे यह
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रोग नह लगता।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 रोग को व्यापक रूप से संचरणीय और असंचरणीय रोग के रूप म वग कृत कया जा सकता है। नीचे दए गए
वकल्प म से असंचरणीय रोग को पहचा नए। (i) आंत्र ज्वर (ii) अस्थमा (iii) मधुमेह (iv) खसरा — (क) (i)
और (ii) (ख) (ii) और (iii) (ग) (i) और (iv) (घ) (ii) और (iv)

(ख) (ii) और (iii) — अस्थमा और मधुमेह।

रोग कससे होता है वग

(i) आंत्र ज्वर जीवाणु — दू षत जल और भोजन से फैलता है संचरणीय

(ii) अस्थमा पय वरण और जीवनशैल ी — कोई रोगजनक नही ं असंचरणीय

(iii) मधुमेह हॉम न असंतल
ु न और जीवनशैल ी — कोई रोगजनक नही ं असंचरणीय

(iv) खसरा वषाणु — वायु ारा फैलता है संचरणीय

शेष वकल्प क्य गलत ह: उनम से प्रत्येक म आंत्र ज्वर अथवा खसरा स म्म लत है, और ये दोन रोगजनक से होते
ह तथा एक व्य क्त से दूसरे म फैलते ह।

प्र.3 आपके वद्यालय म फ्लू का प्रकोप हुआ है। आपके अनेक सहपाठ अनुप स्थत ह जब क कुछ खाँसते और
छ कते हुए वद्यालय आ रहे ह। (i) संक्रमण को और अ धक फैलने से रोकने के लए वद्यालय ारा तत्काल क्या
उपाय कए जाने चा हए? (ii) य द आपके साथ बच पर बैठने वाले सहपाठ म फ्लू के लक्षण दखने लग तो आप
उन्ह ःख अथवा ठे स पहुँचाए बना कैसे प्र त क्रया दगे? (iii) इस स्थ त म आप स्वयं को और दूसर को संक्र मत
होने से कैसे बचा सकते ह?

(i) वद्यालय ारा तत्काल कए जाने वाले उपाय। फ्लू वायु ारा फैलता है, अतः प्रत्येक उपाय बूँद को रोकने के लए होना
चा हए—

तुरंत अ भभावक को सू चत क जए और क हए क ज्वर, खाँसी या जुकाम वाला वद्याथ घर पर रहकर व ाम करे —
अध्याय के अनुसार इससे स्वास्थ्य लाभ म सहायता मलती है और दूसर तक रोग का संचरण कम होता है।
खाँसने-छ कने वाले प्रत्येक वद्याथ को मास्क द जए और सबसे मुँह तथा नाक ढकने को क हए।
प्रत्येक नल पर साबुन और पानी उपलब्ध कराइए तथा हाथ धोने का न त समय तय क जए — मध्याह्न भोजन से पहले
और खेल के बाद।
कक्षाओं म वायु का आवागमन बनाए र खए, खड़ कयाँ खुली र खए।
पानी क बोतल, ट फ़न, रुमाल और तौ लया साझा करना बंद कराइए।
बार-बार छु ई जाने वाली सतह — दरवाज़ के हडल, डेस्क, नल, खेल का सामान — स्वच्छ र खए।
दन म अस्वस्थ होने वाले वद्याथ को अलग कक्ष म बठाकर अ भभावक को बुलाइए; बड़ी सभाएँ और भीड़ वाले कायक्रम
स्थ गत क जए।
य द मामले बढ़ते जाएँ तो स्थानीय स्वास्थ्य अ धकारी को सू चत क जए।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

(ii) सहपाठ के साथ संवेदनशील व्यवहार। उ े श्य यह है क दोन सुर क्षत रह और मत्र को यह न लगे क उसे दोषी ठहराया जा
रहा है।

धीरे और आत्मीयता से क हए— “तुम्हारी तबीयत ठ क नह लग रही, क्या हम मैडम को बता द?” पूरी कक्षा के सामने घोषणा
मत क जए।
रुमाल या अ त रक्त मास्क द जए और उसके साथ वद्यालय क नस अथवा कायालय तक जाने क पेशकश क जए।
उस दन के लए थोड़ा दूर बैठने का सुझाव द जए और कारण भी बताइए — जससे उसे पता रहे क यह वषाणु क बात है,
उसक नह ।
अपनी नोटबुक दे ने और शाम को फ़ोन करने क बात क हए। अस्वस्थ होकर घर पर रहना अकेलेपन भरा होता है।
घृणा भरे भाव से दूर मत ह टए, चढ़ाइए मत, और कसी को प्रकोप का “कारण” मत क हए। फ्लू कसी को भी हो सकता है;
इससे उस व्य क्त के वषय म कुछ सद्ध नह होता।

(iii) स्वयं को और दूसर को बचाना।

साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोइए तथा बना धुले हाथ से आँख, नाक और मुँह मत छु इए।
प्रकोप के दन म कक्षा म मास्क पह नए।
खाँसते या छ कते समय अपना मुँह और नाक ढ कए — रुमाल या आस्तीन से, हथेली से नह ।
बोतल, ट फ़न या रुमाल साझा मत क जए।
खड़ कयाँ खुली र खए; अवकाश म खुली हवा म बै ठए।
संतु लत आहार ली जए और पयाप्त न द ली जए जससे प्र तरक्षा प्रणाली अपनी पूरी श क्त म रहे।
य द आपम लक्षण दख तो घर पर र हए। शेष कक्षा के लए यही सबसे प्रभावी काय है।

ऐसा क्य होता है: फ्लू वायु ज नत है। ऊपर का प्रत्येक उपाय उसक यात्रा को कसी एक बदु पर काटता है —
मास्क और रुमाल नकास पर, वायु का आवागमन माग म, हाथ धोना सतह पर, और घर पर रहना ोत पर।

प्र.4 आपका प रवार ऐसे स्थान पर यात्रा क योजना बना रहा है जहाँ मले रया का प्रकोप है। (i) यात्रा से पूव, यात्रा के
समय और यात्रा के प ात आपको कौन-कौन सी सावधा नयाँ रखनी चा हए? (ii) आप अपने भाई अथवा बहन
को मच्छरदानी या मच्छर प्र तकष का महत्त्व कैसे समझाएँगे? (iii) य द ऐसे क्षेत्र म यात्री स्वास्थ्य सलाह क
अनदे खी करते ह तो क्या हो सकता है?

मले रया प्रोटोजोआ से होता है और हम तक केवल मच्छर के काटने से पहुँचता है, जो रोगवाहक का काय करता है। अतः प्रत्येक
सावधानी का लक्ष्य एक ही है— मच्छर न काटे ।
(i) सावधा नयाँ

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यात्रा से पूव यात्रा के समय यात्रा के प ात

पता क जए क वहाँ मले रया कतना और कस ऋतु प्रत्येक रात मच्छरदानी लगाकर सोइए अगले कुछ सप्ताह तक तीव्र ज्वर,
म फैलता है; क्या साथ ले जाना है, इस वषय म अत्य धक पसीना और कंपकंपी पर
च कत्सक से परामश क जए ध्यान र खए

मच्छरदानी, मच्छर प्र तकष तथा पूरी बाँह के कपड़े मच्छर प्र तकष लगाइए, वशेषकर ऐसा ज्वर आने पर तुरंत च कत्सक
और पूरी लंबाई क पतलून र खए सुबह और सायंकाल को दखाइए और यात्रा के वषय म
अवश्य बताइए

दे खए क ठहरने के स्थान क खड़ कय पर जाली है सायंकाल पूरी बाँह के कपड़े पह नए च कत्सक ारा द गई औष ध क
या नह , अन्यथा मच्छरदानी साथ ले जाइए पूरी खुराक ली जए

— रुद्ध जल वाले स्थान से ब चए; ठहरने अपने घर के आस-पास भी रुका हुआ
के स्थान के आस-पास जल एकत्र मत जल हटाइए
होने द जए

(ii) छोटे भाई अथवा बहन को समझाना। बात सरल और सत्य र खए—

“मले रया कसी के पास बैठने से या एक ही हवा म साँस लेने से नह फैलता। यह केवल एक वशेष प्रकार के मच्छर
के काटने से होता है। इसका अथ है क य द मच्छर तुम्हारी त्वचा तक पहुँच ही न पाए तो रोग भी तुम तक नह पहुँच
सकता। मच्छरदानी तुम्हारे बस्तर के चार ओर एक द वार है और प्र तकष एक ऐसी गंध है जसके पास मच्छर नह
आता — और इसके अ त रक्त उसके पास कोई तीसरा रास्ता है ही नह ।”

इसे आदे श के स्थान पर साझा काय बनाइए — मच्छरदानी लगाने का काम उसे द जए, और आस-पास जमा जल ढूँ ढ़कर हटाने
वाला भी वही बने।
(iii) य द यात्री स्वास्थ्य सलाह क अनदे खी कर।

उनके काटे जाने और मले रया होने क संभावना कह अ धक होती है — तीव्र ज्वर, कंपकंपी और अत्य धक पसीना, जो इतना
गंभीर हो सकता है क च कत्सालय जाना पड़े।
रोग क पहचान प्रायः दे र से होती है, क्य क लौटने के बाद च कत्सक को मले रया का ध्यान तभी आता है जब यात्रा क बात
बताई जाए। वलंब से रोग और बगड़ता है।
वे रोग को घर तक ले आ सकते ह। य द कोई स्थानीय मच्छर संक्र मत यात्री को काटे तो वह परजीवी दूसर तक पहुँचा सकता है
— अथात एक व्य क्त क लापरवाही पूरे मोहल्ले के लए संकट बन जाती है।
यही लापरवाही — अशुद्ध जल पीना, रुके जल क उपेक्षा — उसी यात्रा म डगू, आंत्र ज्वर और हैजा को भी नमंत्रण दे ती है।

ऐसा क्य होता है: रोगवाहक ज नत रोग के पास प्रवेश का ठ क एक ही ार होता है। स्वास्थ्य सलाह उसी एक ार
को बंद रखने का नदश मात्र है — इसी लए यहाँ उसक अनदे खी दखने से कह अ धक महँगी पड़ती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

प्र.5 आपके चाचाजी ने अपने मत्र क संगत म पड़कर धूम्रपान करना आरंभ कर दया है जब क यह सव व दत है क
धूम्रपान स्वास्थ्य के लए हा नकारक हो सकता है और मृत्यु का कारण भी बन सकता है। (i) आप उन्ह ठे स
पहुँचाए बना उनसे ऐसा क्या कहगे जससे क वे इसे छोड़ द? (ii) य द आपके मत्र ने पाट म आपको धूम्रपान
करने के लए कहा तो आप क्या करगे? (iii) वद्यालय ऐसी हा नकारक आदत से वद्या थय को बचाने म कैसे
सहायता कर सकते ह?

(i) चाचाजी से क्या कह। एकांत म, आदर के साथ और चता के भाव से बात क जए, आरोप के भाव से नह । जस बड़े को लगे
क उस पर आक्रमण हो रहा है, वह सुनना बंद कर दे ता है।

आरंभ संबंध से क जए, आदत से नह — “चाचाजी, म यह इस लए कह रहा ँ क्य क म चाहता ँ क आप बहुत लंबे समय
तक हमारे साथ रह।”
उपदे श के स्थान पर एक-दो तथ्य र खए। अध्याय तंबाकू को उन हा नकारक पदाथ म गनाता है जन्ह ‘ना’ कहना चा हए।
धूम्रपान फेफड़ और हृदय को हा न पहुँचाता है तथा क्षय रोग जैसे संक्रमण से लड़ना क ठन बना दे ता है।
यह भी बताइए क धुआँ कमरे म उप स्थत सभी लोग तक पहुँचता है — घर के बच्चे और बुजुग भी उसे साँस के साथ लेते ह।
उस कारण क ओर संकेत क जए जससे यह आरंभ हुआ। मत्र क संगत म बने रहने के लए स्वास्थ्य क क मत चुकाना घाटे
का सौदा है, और वह क मत उनके मत्र नह चुकाएँगे।
नणय सुनाने के स्थान पर सहायता द जए — उनके साथ च कत्सक के पास च लए अथवा साथ बैठकर रा ीय तंबाकू
क्वटलाइन दे खए। छोड़ना क ठन होता है क्य क तंबाकू व्यसनकारी है, अतः हर प्रयास को प्रग त मा नए और असफल प्रयास
पर उपहास कभी मत क जए।

(ii) य द मत्र सगरेट का प्रस्ताव दे ।

सरलता से मना क जए— “नह , धन्यवाद, म धूम्रपान नह करता।” छोटा उत्तर लंबे स्पष्टीकरण से अ धक प्रभावी होता है और
आप कसी को सफ़ाई दे ने के लए बाध्य नह ह।
वहाँ से आगे बढ़ जाइए — वषय बद लए, पानी पी जए, कसी दूसरे समूह म स म्म लत हो जाइए। दबाव बना रहे तो वहाँ से
चले जाइए।
अपना उत्तर पहले से तय र खए। सा थय का दबाव झझक पर ही काम करता है और तैयार वाक्य उस झझक को समाप्त कर
दे ता है।
य द ऐसा बार-बार हो, वशेषकर य द कक्षा के अन्य वद्या थय पर भी दबाव डाला जा रहा हो, तो माता- पता, शक्षक अथवा
कसी वश्वसनीय बड़े को बताइए।

ध्यान द जए क आपके चाचाजी के साथ ठ क यही हुआ था। एक बार, आरंभ म ही मना कर दे ना बाद म छोड़ने से कह सरल है।
(iii) वद्यालय कैसे सहायता कर सकते ह।

कक्षा म तथ्य स्पष्ट रूप से पढ़ाएँ और कसी च कत्सक को बुलाकर वद्या थय के प्रश्न के उत्तर दलाएँ।
वद्यालय और उसके प रसर को तंबाकू मुक्त रख तथा ार के नकट नाबा लग को तंबाकू बेचने वाली दुकान का वषय
संबं धत अ धका रय के समक्ष उठाएँ।
पोस्टर प्र तयो गता, वाद- ववाद, नुक्कड़ नाटक और स्वास्थ्य अ भयान चलाएँ जससे वद्याथ एक-दूसरे को समझाएँ —
सहपाठ क बात सूचना पट्ट से कह दूर तक जाती है।
ऐसा परामशदाता उपलब्ध कराएँ जससे वद्याथ दं ड के भय के बना एकांत म बात कर सक, जैसा क्रयाकलाप 3.1 के
वद्यालय ने कया।
खेल, संगीत, क्लब और एन.एस.एस. जैसी ग त व धयाँ चलाएँ जससे प्रत्येक वद्याथ को अपनापन मले और उसे कसी
हा नकारक आदत को प्रवेश शुल्क के रूप म न अपनाना पड़े।

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

अ भभावक को जोड़, जससे वही संदेश घर और वद्यालय दोन जगह सुनाई दे ।
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ऐसा क्य होता है: धूम्रपान प्रायः स्वाद के लए आरंभ नह होता। लोग कह का हो जाने के लए आरंभ करते ह।

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इसी लए जो वद्यालय प्रत्येक वद्याथ को अपनापन दे ता है, वह केवल चेतावनी दे ने वाले वद्यालय से कह अ धक

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हा न रोकता है।

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सा नया अपनी सखी वनीता से कहती है, “प्र तजै वक औष धयाँ कसी भी संक्रमण को ठ क कर सकती ह

agचा हए।” वनीता ऐसे कौन-कौन से प्रश्न पूछ सकती ह जससे सा नया
प्र.6
इस लए हम रोग क चता नह करनी
समझ सके क उसका कथन गलत है?

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c पूछे जनसे सा नया अपने ही कथन को अपनी ही जानकारी से जाँच ले। ag
वनीता ऐसे .प्रश्न l
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seतजै वक औष धयाँ वास्तव म कन रोगाणुओं को नष्ट करती ह? क्या ये सद , फ्लू, खसरा, चेचक और डगू करने वाले
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ag वषाणुओं पर काम करती ह, या मले रया करने वाले प्रोटोजोआ पर?”
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“य द प्र तजै वक हर संक्रमण ठ क कर दे त तो सद -जुकाम म च कत्सक गोली दे ने के स्थान पर व ाम और तरल पदाथ

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लेने को क्य कहते ह?”

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“क्या तुम्ह प्र तजै वक प्र तरोध के वषय म पता है? जब कोई अनावश्यक रूप से प्र तजै वक ले ले या खुराक बीच म छोड़ दे
तो बचे हुए जीवाणुओं का क्या होता हैa
“य द औष ध इतनी पूण रूप से काम करती है तो च कत्सक पूरी खुराक लेने पर इतना बल क्य दे ते ह?”

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“क्या मधुमेह और अस्थमा का उपचार प्र तजै वक से होता है? उन रोग का क्या जो संक्रमण ह ही नह ?”

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“य द प्र तजै वक से सब कुछ ठ क हो जाता तो पूरे वश्व को ट क , स्वच्छ जल और शौचालय

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पड़ती?”

g l aसही स्थ त। प्र तजै वक औष धयाँ केवल जीवाणु से होने वाले संक्रमण म प्रभावी ह, क्य क ये जीवाणु को शकाओं के केवल उन्ह
a भाग को ल क्षत करती ह जो मानव अथवा अन्य जंतु को शकाओं से भन्न होते ह। ये वषाणु या प्रोटोजोआ से होने वाले रोग म
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प्रभावी नह ह, और असंचरणीय रोग से तो इनका कोई संबंध ही नह । इसके अ त रक्त इनके अ नयं त्रत उपयोग से इनक

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प्रभावशीलता पहले ही घट रही है। अतः यह कथन दो प्रकार से गलत है — प्र तजै वक हर सं क्रमण ठ क नह कर सकत , और इन
पर नभर रहने से ये सबके लए कम उपयोगी होeजाती
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संकेत: अच्छा प्र त-प्रश्न सामने वाले को यह नह बताता क वह गलत है। वह उसे एक ऐसा तथ्य थमा दे ता है जसे

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वह पहले से मानता है, और उसे स्वयं वरोधाभास दखाई दे जाता है।

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प्र.7 नम्न ल खत ता लका म एक वष क अव ध म एक च कत्सालय म अं कत कए गए डगू के मामल क संख्या क
जानकारी द गई है— जनवरी 10, फरवरी 12, माच 15, अप्रैल 18, मई 22, जून 40, जुलाई 65, अगस्त 65,
सतंबर 65, अक्तूबर 30, नवंबर 30, दसंबर 20। आप एक बार ग्राफ (दं ड आलेख) बनाइए जसम Y-अक्ष पर
मामल क संख्या और X-अक्ष पर माह के नाम अं कत ह । अपने नष्कष का समीक्षात्मक व ेषण क जए एवं
नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर द जए— (i) कन तीन महीन म डगू के मामले सबसे अ धक थे? (ii) कस महीने
अथवा महीन म मामले सबसे कम थे? (iii) डगू के सवा धक प्रकोप वाले महीन म कौन-से प्राकृ तक या
पयावरणीय कारण इसके मामल म वृ का कारण बन सकते थे? (iv) कुछ ऐसे नवारक उपाय सुझाइए जो
समुदाय अथवा सरकार ारा ऐसे समय से पूव कए जा सकते ह जब डगू के मामले सबसे अ धक होते ह ता क
डगू के प्रकोप को कम कया जा सके?
ता लका, जैसी पृष्ठ 44 पर छपी है—

क्र.सं. 1 2 3 4 5 6

माह जनवरी फरवरी माच अप्रैल मई जून

डगू के मामल क संख्या 10 12 15 18 22 40

क्र.सं. 7 8 9 10 11 12

माह जुलाई अगस्त सतंबर अक्तूबर नवंबर दसंबर

डगू के मामल क संख्या 65 65 65 30 30 20

70
65 65 65
60

50
डे ंग ू के मामलों की संख्या

40
40
30 30
30
22
20
20 18
15
12
10
10

0
जन फर माच अपै मई जून जुल अग िसत अक्तू नव िदस

माह

च कत्सालय म अं कत डगू के मामले, माह के अनुसार। लाल दं ड सवा धक प्रकोप वाले तीन महीने दशाते ह।

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(i) सबसे अ धक: जुलाई, अगस्त और सतंबर — तीन म 65-65 मामले।
(ii) सबसे कम: जनवरी — 10 मामले।

वष भर के कु ल मामले = 10 + 12 + 15 + 18 + 22 + 40 + 65 + 65 + 65 + 30 + 30 + 20

= 392

जुलाई + अगस्त + िसतं बर के मामले = 65 + 65 + 65 = 195

वष में इनका भाग = 195 ÷ 392 ≈ 0.50, अथ त वष के के वल एक चौथाई समय में लगभग आधे मामले

(iii) प्रकोप वाले महीन के प्राकृ तक और पयावरणीय कारण। जुलाई से सतंबर मानसून और उसके ठ क बाद का समय है।

वषा का जल एकत्र होकर रुक जाता है — पुराने टायर , गमल , कूलर , टं कय , फके गए पात्र , अवरुद्ध ना लय और ग
म। डगू का मच्छर इसी प्रकार के स्वच्छ, रुके हुए जल म प्रजनन करता है, और अध्याय का अपना नवारक उपाय भी रुद्ध जल
वाले क्षेत्र से बचना है।
गम और आ मौसम मच्छर के जीवन चक्र को तेज़ कर दे ता है और वयस्क मच्छर को अ धक समय तक जी वत रखता है,
अतः काटने वाले मच्छर कह अ धक हो जाते ह।
भारी वषा के बाद जल भराव और नकासी क कमी से एक साथ अनेक स्थान पर प्रजनन स्थल बन जाते ह।
वषा और मामल के बीच अंतराल होता है — अंड को फूटना है, मच्छर को वयस्क होकर काटना है और रोग को वक सत
होना है। इसी लए संख्या जून (40) म चढ़ती है और चरम जुलाई से आता है।
अक्तूबर तक वषा रुक जाती है, जल सूख जाता है और तापमान गरता है — और संख्या 65 से घटकर आधी, 30, रह जाती
है।

(iv) प्रकोप के समय से पूव कए जाने वाले नवारक उपाय। ग्राफ का मूल्य यही है क यह दखाता है क चरम प्रत्येक वष एक
ही समय पर आता है, अतः उसक तैयारी क जा सकती है।

मानसून से पूव ही ना लय क सफाई और गाद नकासी कराइए तथा ग े और नीची भू म भरवाइए।
साप्ता हक ‘शुष्क दवस’ अ भयान चलाइए — प्रत्येक घर सप्ताह म एक बार कूलर, टं क , गमले और टायर खाली करके
रगड़कर साफ करे, जससे लावा वयस्क बनने से पहले ही नष्ट हो जाएँ।
पछले वष जन मोहल्ल म मामले आए थे वहाँ धूम्रीकरण (फॉ गग) और लावानाशी छड़काव कराइए।
तालाब , टं कय और सजावट जलाशय म लावाभक्षी मछ लयाँ छो ड़ए।
मच्छरदानी और मच्छर प्र तकष वत रत कराइए अथवा सस्ते उपलब्ध कराइए और पूरी बाँह के कपड़ को प्रोत्सा हत
क जए।
वषा आरंभ होते ही वद्यालय , स्वास्थ्यक मय , रे डयो और पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अ भयान चलाइए।
स्वास्थ्य कद्र से सं दग्ध मामल क शीघ्र सूचना दलवाइए, जससे मामल का समूह प्रकोप बनने से पहले पकड़ म आ जाए,
और च कत्सालय म चरम सप्ताह के लए सामग्री तथा कम पहले से तैयार र खए।

रोकथाम ही पहला उपाय क्य है: डगू के वषाणु को नष्ट करने वाली कोई औष ध नह है। पूरा बचाव इसी पर
टका है क मच्छर न पनपे और न काटे — और यह काय मई और जून म करना होता है, अगस्त म नह ।

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प्र.8 कल्पना क जए क आप एक वद्यालय के स्वास्थ्य अ भयान के प्रभारी ह। इस भू मका म आप संचरणीय और
असंचरणीय रोग को कम करने के लए कौन-कौन से मुख्य संदेश दगे?

अ भयान तभी सफल होता है जब प्रत्येक संदेश छोटा, स्पष्ट और उसी दन कर पाने योग्य हो। म इसे एक ही सूत्र वाक्य के अंतगत
चलाऊँगा — “स्वच्छ हाथ, स्वच्छ प रवेश, स्वस्थ आदत” — और संदेश के दो समूह रखूँगा, क्य क दोन प्रकार के रोग दो भन्न
तरीक से रुकते ह।

संचरणीय रोग कम करने के लए यह संदेश क्य

भोजन से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोइए िनयिमत रूप से हाथ धोने से संक्रमण 50% तक कम हो जाता है

खाँसते-छ कते समय मुँह और नाक ढ कए; भीड़ म मास्क पह नए वायु का माग रुकता है — सद , फ्लू, खसरा, टीबी

केवल उबला अथवा सुर क्षत जल पी जए; भली-भाँ त पका भोजन खाइए हैजा, आंत्र ज्वर , यकृ तशोथ ए , गोल कृ िम रुकते है ं

अपनी बोतल, ट फ़न, तौ लया या रुमाल कभी साझा मत क जए अपत्यक्ष संपक का माग बंद होता है

कह भी रुका हुआ जल नह — गमले, कूलर, टायर प्रत्येक सप्ताह दे खए मले िरया और डेंगू के म च्छर का पजनन स्थल समाप्त होता है

अस्वस्थ ह तो घर पर रहकर वश्राम क जए वास्थ् य लाभ होता है और क क्षा सुर िक्षत रहती है
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सभी ट के समय पर लगवाइए यह आपकी और आपके आस -पास के लोगों की र क्षा करता है

असंचरणीय रोग कम करने के लए यह संदेश क्य

प्र त दन संतु लत आहार ली जए — फल, स ब्जयाँ और साबुत अभावजन्य और जीवनशैल ी जिनत, दोनों पकार के रोग रुकते है ं
अनाज

तेल, चीनी और नमक घटाइए; फास्ट फूड कभी-कभार, दनचया नह पष्ृ ठ 28 का सूचना पट्ट फास्ट फू ड को मध मु ेह के पमुख कारणों में
िगनाता है

प्र त दन एक घंटा बाहर खे लए शारीिरक सिक्रयता की कमी को अध् याय मध मु ेह के कारणों में िगनाता
है

सुबह का अल्पाहार मत छो ड़ए िवद्य ालय के िदन के िलए ऊज िमलती है

समय पर सोइए; सोने से एक घंटा पहले स्क्र न बंद क जए स्क्र ीन टाइम स्थूल ता, िनद ा िवकार और व्यगता से जुड़ा है

तंबाकू, मद्य और मादक पदाथ को पहली ही बार ‘ना’ क हए एक बार मना कर दे ना बाद में छोड़ ने से कही ं सरल है

मन उदास हो तो कसी से बात क जए; प्र त दन दस मनट योग या मानिसक क ल्याण स्वास्थ् य का भाग है; योग से व्यगता कम होती है और
प्राणायाम क जए एकागता बढ़ ती है

अ भयान कैसे चलाऊँगा: वद्या थय ारा प्र त सप्ताह अद्यतन कया जाने वाला स्वास्थ्य पट्ट; प्रत्येक कक्षा म हाथ धोने क सही
व ध का दो मनट का प्रदशन; प्रत्येक शुक्रवार ‘शुष्क दवस’ जसम हर कक्षा अपने ग लयारे और बगीचे म रुका जल दे खे; पोस्टर
और नुक्कड़ नाटक प्र तयो गता; प्रश्न के उत्तर दे ने के लए च कत्सक को आमंत्रण; और एक सरल मा सक गणना — रोग के कारण

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होने वाली अनुप स्थ तय क — जससे वद्यालय दे ख सके क अ भयान काम कर रहा है या नह ।

संकेत: प्रत्येक संदेश का अंत चेतावनी से नह , कसी काय से क जए। “र ववार को अपना कूलर खाली क जए”
व्यवहार बदलता है; “डगू खतरनाक है” नह बदलता।

प्र.9 यह सलाह द जाती है क वायरल संक्रमण, जैसे— सद , खाँसी या फ्लू म प्र तजै वक औष धयाँ न ल। क्या आप
इस सलाह के संभा वत कारण बता सकते ह?

क्य क प्र तजै वक औष धयाँ केवल जीवाणु से होने वाले संक्रमण म प्रभावी ह, जब क सद , खाँसी या फ्लू वषाणु से होते ह।
औष ध को रोगी के भीतर ऐसा कुछ मलता ही नह जस पर वह काय कर सके।

ऐसा क्य होता है: प्र तजै वक औष धयाँ जीवाणु को शकाओं के उन भाग को ल क्षत करती ह जो मानव
अथवा अन्य जंतु को शकाओं से भन्न होते ह — यही उन्ह हमारे लए सुर क्षत और जीवाणुओं के लए घातक
बनाता है। वषाणु म ऐसा कोई भाग होता ही नह । वह स्वयं एक को शका भी नह है; वह हमारी ही को शकाओं के
भीतर गुणन करता है। अतः प्र तजै वक के पास आक्रमण करने के लए कुछ है ही नह , और कोई भी मात्रा इसे बदल
नह सकती।

फर भी लेना केवल व्यथ नह , हा नकारक है—

यह उन अच्छे जीवाणुओं को नष्ट कर दे ती है जो शरीर को संक्रमण से बचाते ह ( चत्र 3.5 ख), जससे प्र तरोधी जीवाणुओं
को बढ़ने और छा जाने का अवसर मल जाता है।
यह प्र तजै वक प्र तरोध बढ़ाती है, जससे बाद म जब वास्त वक जीवा वक संक्रमण हो तब औष ध काम न करे — आपके
लए भी और शेष सबके लए भी।
इसके दुष्प्रभाव हो सकते ह और यह ‘कुछ तो कर लया’ का झूठा संतोष दे कर उ चत दे खभाल म वलंब करा दे ती है।

वषाणु ज नत सद या फ्लू का सही उपचार वही है जो अध्याय बताता है — घर पर वश्राम, तरल पदाथ, और मुँह तथा नाक ढकना।
प्र तरक्षा प्रणाली कुछ दन म वषाणु को स्वयं समाप्त कर दे ती है।

ध्यान द जए: यही तक बताता है क मले रया म भी प्र तजै वक से लाभ नह होगा — वह प्रोटोजोआ से होता है
और अध्याय स्पष्ट कहता है क प्र तजै वक औष धयाँ प्रोटोजोआ से होने वाले रोग म प्रभावी नह ह।

प्र.10 कसी संक्र मत व्य क्त के उत्सज पदाथ ारा पेयजल के संदू षत होने पर नम्न ल खत म से कौन-कौन से रोग
फैल सकते ह? यकृतशोथ (हेपेटाइ टस) ए, क्षयरोग (ट बी), पो लयोमाइलाइ टस, हैजा, चेचक

यकृतशोथ (हेपेटाइ टस) ए, पो लयोमाइलाइ टस और हैजा।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
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रोग दू षत पेयजल से कारण

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फैलता है?

.co हाँ जल और भोजन ज नत वषाणु; ता लका 3.1 मa
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यकृतशोथ
se m इसका नवारक उपाय उबला हुआ

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(हेपेटाइ टस) ए पानी पीना बताया गया है

क्षयरोग (ट बी) नह फेफड़ का जीवा वक रोग, जो संक्र मत व्य क्त क खाँसी से वायु ारा फैलता है

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हाँ
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पो लयोमाइलाइ टस पो लयो का वषाणु उत्सज पदाथ के साथ शरीर से बाहर आता है और दू षत जल

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अथवा भोजन से नए व्य क्त म प्रवेश करता है

हैजा हाँ
a आंत्र का जीवा वक रोग; ता लका 3.1 म इसक रोकथाम उबले पेयजल और

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स्वच्छता संबंधी अच्छ आदत से बताई गई है

.
mतथा फफोल के संपक से
श्वसन तंत्र और त्वचा का वषाणु ज नत रोग, जो वायु eारा
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चेचक नह

m . फैलता है

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agl ऐसा क्य होता है: इस माग से फैलने के लए रोगजनक को उत्सज पदाथ के साथ शरीर से बाहर नकलना और
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जल म जी वत रहना — दोन आना चा हए। यकृतशोथ ए, पो लयो और हैजा — तीन पाचन तंत्र को संक्र मत करते

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ह अथवा उसी से बाहर नकलते ह। क्षय रोग फेफड़ म रहता है और चेचक श्वास माग तथा त्वचा म, अतः वे जल तक
पहुँचते ही नह ।
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क्या आप जानते ह? क्रयाकलाप 3.6 का भद्रक स्वच्छता अ भयान ठ क इन्ह तीन रोग पर काय कर रहा था।
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शौचालय बनाने और उपयोग करने से उत्सज पदाथ जल तक नह पहुँचता — इसी लए एक ही अ भयान से अनेक
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भन्न रोग एक साथ घट गए।
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जब हमारा शरीर कसी रोगजनक (रोगाणु) का पहली बार सामना करता है तो हमारी प्र तरक्षा प्र त क्रया
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प्र.11

.c है। ऐसा क्य होता है? a g
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सामान्यतः कम होती है परंतु जब उसी रोगजनक से पु न: सामना होता है तो शरीर क प्र तरक्षा प्र त क्रया पहली
बार क तुलना म कह अ धक प्रबल
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क्य क पहली मुठभेड़ के बाद प्र तरक्षा प्रणाली उस रोगजनक को स्मरण रखती है। दूसरी अनु क्रया नए सरे से नह , प्र श क्षत

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अवस्था से आरंभ होती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

पहला सामना उसी रोगजनक से दूसरा सामना

पहचान रोगजनक अप र चत है; प्र तरक्षा प्रणाली को पहले िपछली बार से बची हुई कोिशकाएँ उसे तुर ंत पहचान ले ती है ं
उसे पहचानना पड़ता है

गत धीमी — व शष्ट रक्षा तैयार होने म कई दन लगते ह तीव — र क्षा लगभग तुर ंत आरंभ हो जाती है

अनु क्रया का कम कही ं अिधक
प रमाण

प रणाम रक्षा तैयार होते-होते व्य क्त प्रायः रोगग्रस्त हो जाता है रोगजनक इतना गुणन कर पाने से पहले ही नष्ट हो जाता है
िक रोग उ त्पन्न कर सके

ऐसा क्य होता है: पहले संक्रमण के समय प्र तरक्षा प्रणाली उसी एक रोगजनक के लए व शष्ट रक्षा तैयार करती है
और उनम से कुछ को शकाओं को बाद के लए सुर क्षत रख लेती है। वही रोगजनक लौटने पर ये को शकाएँ उसे
तत्काल पहचानकर गुणन करती ह, अतः पूरी अनु क्रया दन के स्थान पर घंट म तैयार हो जाती है। अध्याय इसे
उपा जत प्र तरक्षा कहता है — वह सुरक्षा जो कसी रोगाणु या ट के के संपक म आने के प ात वक सत होती है।

ट काकरण का पूरा सद्धांत यही है। ट का प्र तरक्षा प्रणाली को एक सुर क्षत ‘पहला सामना’ करा दे ता है — क्षीणीकृत अथवा मृत
रोगाणुओं से, या रोगाणु के न ष्क्रय अथवा हा नर हत भाग से — जससे यह स्मृ त रोग हुए बना बन जाती है। जब वास्त वक
रोगजनक आता है तो शरीर उसे दूसरा सामना मानकर शीघ्र परास्त कर दे ता है।

क्या आप जानते ह? इसी कारण छोट माता या खसरा प्रायः जीवन म एक ही बार होता है, जब क सद -जुकाम
अनेक बार — सद के वषाणु सैकड़ प्रकार के होते ह और एक को स्मरण रखने से अगले के वरुद्ध सहायता नह
मलती।

खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर — पृष्ठ 45
अंतर वषयक प रयोजनाएँ: वज्ञान और समाज

खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर अं त र वषयक प रयोजनाएँ

प्र.1 वद्याथ कम से कम एक महीने तक एक स्वास्थ्य दै नं दनी बनाएँ और उसम अपने भोजन, स्वच्छता, व्यायाम,
न द, स्क्र न समय और भावनात्मक स्थ त को लख।

व ध। प्रत्येक सप्ताह के लए एक पृष्ठ पर नीचे दए गए स्तंभ बनाइए और प्र त दन एक न त समय पर, रा त्र म भ रए — प्र व ष्ट
दो मनट से अ धक क नह होनी चा हए, अन्यथा यह एक महीने तक नह चलेगी। जो वास्तव म हुआ वही ल खए, जो करना चाहते
थे वह नह ; जस दै नं दनी को सुधारकर लखा जाए वह कुछ नह सखाती। इसे नजी र खए और महीने के अंत म कसी एक दन
पर नणय दे ने के स्थान पर प्रवृ त्तयाँ खो जए।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

दनांक भोजन स्वच्छता व्यायाम नद स्क्र न कैसा अनुभव
समय कया

1 अल्पाहार कया; 1 भोजन से पूव 45 मनट रा त्र 10:30 – 1 घंटा 20 अच्छा
अगस्त फल; 1 पैकेट चप्स हाथ धोए: हाँ क्रकेट प्रातः 6:30 (8 मनट
घंटे)

2 अल्पाहार छोड़ा; 2 स्नान, नाखून कुछ नह रा त्र 12:15 – 3 घंटे थकान,
अगस्त शीतल पेय काटे प्रातः 6:30 (6 चड़ चड़ापन
घंटे)

महीने के अंत म क्या दे ख। अनुमान मत लगाइए, ग नए—

कतने दन आपको 8 घंटे क न द मली? उन दन क मनोदशा क तुलना शेष दन से क जए।
जन दन स्क्र न समय सबसे अ धक था, उन दन सोने का समय और मनोदशा क्या थी? सूचना पट्ट स्क्र न टाइम, नद्रा
वकार और व्यग्रता के बीच यही संबंध बताता है।
कतने दन आपने अल्पाहार छोड़ा और उन दन वद्यालय म प्रातःकाल कैसा अनुभव हुआ?
कतने दन कम से कम एक घंटे क शारी रक स क्रयता रही?
पूरे महीने के स्क्र न समय (अथवा न द) का एक सरल दं ड आलेख बनाइए, ठ क वैसे ही जैसे प्रश्न 7 म बनाया था। ग्राफ वह
प्रवृ त्त दखा दे ता है जो संख्याओं क सूची म छपी रह जाती है।

संकेत: यह दै नं दनी आपके लए है, अंक के लए नह । इसका एकमात्र उ े श्य यह है क आप एक ऐसी आदत ढूँ ढ़
सक जसे बदलना उ चत है — और वह भी कसी क सलाह पर नह , अपने ही प्रमाण के आधार पर।

प्र.2 भारतीय वैज्ञा नक यथा सुनीती सोलोमन, अ समा चट्टज , येल्लाप्रगाडा सुब्बाराव, मैरी पूनन लूकोस के स्वास्थ्य
और रोग के क्षेत्र म योगदान के वषय म प ढ़ए।

आरंभ के लए प्रत्येक के वषय म एक सं क्षप्त प रचय यहाँ दया गया है। पुस्तकालय क पुस्तक अथवा कसी वश्वसनीय वेबसाइट
से इसक जाँच क जए और इसम जो ड़ए, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 3.4 म ता लका 3.1 के साथ करने को कहा गया था।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

वैज्ञा नक क्षेत्र स्वास्थ्य और रोग के क्षेत्र म योगदान

सुनीती सूक्ष्मजीव भारत में एच.आई.वी. संक्रमण के पथम पले िखत मामलों की पहचान चेन्नई में 1980 के दशक के म ध् य में
सोलोमन व ान, की, उस समय जब अनेक लोग यह मानने को तैयार नही ं थे िक यह रोग दे श तक पहच ु ँ चुक ा है। आगे
च कत्सा चलकर उ न्होंने एच.आई.वी. से गस्त व्यिक्तयों के िलए दे खभाल , परामश और शोध की व्यवस्था खड़ ी
की और उनसे जुड़े सामािजक कलंक को दू र करने का काय िकया।

अ समा चट्टज काब नक भारत के औषधीय पादपों और उनमें उपिस्थत ए ल्के लॉइड के रसायन का अध् ययन िकया। उनके काय
रसायन से िमग और मले िरया की औषिधयों के िवकास में सहायता िमली। वे िव ान में डी.एस -सी. की उपािध
पाने वाली पारंिभक भारतीय मिहलाओं में से थी ं।

येल्लाप्रगाडा जैव रसायन यह समझने में योगदान िदया िक शरीर फॉस्फोरस यौिगकों, जैसे ए .टी.पी., के माध् यम से ऊज कै से
सुब्बाराव संिचत और उपयोग करता है। कैं सर तथा फाइले िरया की औषिधयों के िवकास में और टेटासाइिक्लन
पितजैिवक तक पहच ु ँ ाने वाले काय में उनकी महत्त्वपूण भूिमका रही।

मैरी पूनन च कत्सा, त्र ावणकोर की पथम मिहला िचिक त्सक और भारत में सजन जनरल बनने वाली पथम मिहला। उ न्होंने
लूकोस सावज नक क्ष य रोग के उपचार तथा माताओं और िशशुओ ं के स्वास्थ् य के िलए िचिक त्सालय और से वाएँ संगिठत
स्वास्थ्य की ं।

आप इसी अध्याय से कमल रण दवे और महाराज कशन भान को भी जोड़ सकते ह — उन्ह ने अध्ययन कया क हॉम न और
कुछ वषाणु कसर से कैसे संबं धत ह तथा तंबाकू, आहार और प्रदूषण कसर का जो खम कैसे बढ़ाते ह; और उन्ह ने बच्च को
अ तसार से बचाने वाले रोटावायरस के ट के को वक सत करने म महत्त्वपूण भू मका नभाई।

चार म समान क्या है: इनम से कसी ने भी रोग पर केवल सैद्धां तक काय नह कया। प्रत्येक ने वही समस्या उठाई
जो उनके आस-पास के लोग को हा न पहुँचा रही थी — एच.आई.वी., मले रया, कसर, क्षय रोग। इसी कारण इस
अध्याय के प्रश्न भी कसी प रभाषा से नह , समाचार क कतरन से आरंभ होते ह।

प्र.3 जानलेवा रोग चेचक का ट काकरण के माध्यम से उन्मूलन कया गया था। पता लगाइए क यह कैसे संभव हुआ
और यह क्य प्रभावी रहा। चचा क जए क क्या दूसर क सुरक्षा के लए सभी को ट काकरण करवाने क
आवश्यकता होती है?

यह कैसे संभव हुआ। जेनर क खोज के प ात वश्व स्तर पर एक अ भयान संग ठत कया गया। पृष्ठ 38 का ग्राफ प रणाम अं कत
करता है — 1950 म लगभग 80 दे श चेचक के मामले बता रहे थे; 1965 म सघन ट काकरण अ भयान आरंभ हुआ; 1970 के
दशक म संख्या तीव्रता से गरी; और 1979 तक चेचक का उन्मूलन हो गया। यह आज तक मनुष्य का एकमात्र पूणतः समाप्त
कया गया रोग है।
यह क्य प्रभावी रहा। चेचक म संयोगवश वे सभी वशेषताएँ थ जो उन्मूलन को संभव बनाती ह—

ट का प्रभावी था और उसे दूरस्थ स्थान तक सं चत करके ले जाया जा सकता था।
रोग म स्पष्ट पहचाने जाने योग्य चकत्ते होते थे, अतः प्रत्येक मामला शीघ्र ढूँ ढ़ा और सू चत कया जा सकता था।
वषाणु केवल मनुष्य को संक्र मत करता था — उसके पास छपकर प्रतीक्षा करने का कोई दूसरा आश्रय नह था।
स्वास्थ्यक मय ने वलय ट काकरण अपनाया — कोई मामला मलते ही रोगी के आस-पास के सभी लोग का ट काकरण,
जससे वषाणु को नया शरीर मल ही न सके।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

दे श ने भारत स हत एक दशक से अ धक समय तक नरंतर सहयोग बनाए रखा।

ऐसा क्य होता है: रोगजनक नए शरीर तक पहुँचकर ही जी वत रहता है। प्रत्येक रोगी के चार ओर पयाप्त लोग
का ट काकरण कर द जए तो एक साथ सभी माग बंद हो जाते ह — ंखला टू ट जाती है और वषाणु अपने अं तम
रोगी के साथ ही समाप्त हो जाता है।

चचा: क्या ट काकरण अ नवाय होना चा हए?

अ नवायता के पक्ष म अ नवायता के वपक्ष म

अध्याय के अनुसार ट का न केवल आपको सुर क्षत रखता है अ पतु आस- अपने शरीर के वषय म च कत्सक य नणय सामान्यतः
पास के व्य क्तय क भी रक्षा करता है व्य क्त क स्वेच्छा का वषय होते ह

कुछ लोग को ट का लग ही नह सकता — नवजात शशु, गंभीर रूप से कुछ व्य क्त वास्तव म कोई वशेष ट का नह ले सकते, अतः
रोगग्रस्त व्य क्त। वे तभी सुर क्षत ह जब उनके आस-पास के लोग सुर क्षत कोई भी नयम पूणतः नरपवाद नह हो सकता
ह

उन्मूलन के लए बहुत उच्च कवरेज चा हए; कुछ असुर क्षत क्षेत्र भी रोग को बाध्यता से संदेह बढ़ सकता है; समझाने से नयम क तुलना म
लौटा सकते ह अ धक कवरेज मल सकता है

कुछ लोग म ट क के प्र त भय और संशय होता है, यद्य प वै ा नक और पहले जानकारी और पहुँच सु न त होनी चा हए — अनेक
च कत्सक सुरक्षा क दृ ष्ट से इनका सावधानीपूवक परीक्षण करते ह लोग इस लए चूक जाते ह क कद्र दूर है, इनकार के कारण
नह

एक तकसंगत स्थ त: पहले नःशुल्क उपलब्धता, स्पष्ट जानकारी और स क्रय पहुँच सु न त होनी चा हए, क्य क अ धकांश अंतर
इच्छा का नह , सु वधा का है; जहाँ रोग घातक हो और तेज़ी से फैलता हो वहाँ वद्यालय म प्रवेश अथवा च कत्सालय म काय के
लए ट काकरण क शत उ चत है, बशत वास्त वक च कत्सक य छू ट का प्रावधान हो। आप अपना पक्ष चु नए, परंतु उसे ग्राफ और
आँकड़ से सद्ध क जए, केवल मत से नह ।

प्र.4 वतमान दशा- नदश के अनुसार अचानक श्वास रुकने क स्थ त म वयस्क पर हृदय-फुफ्फुसीय पुनज वन
(का डयोपल्मोनरी रस सटे शन या सी.पी.आर.) करने के सही क्रम को सी खए। वद्यालय म कसी च कत्सक या
वशेषज्ञ को आमं त्रत करके एक नकली आपातकालीन अभ्यास (मॉक ल) के लए कहा जा सकता है।

इसे क्रम क रूपरेखा के रूप म प ढ़ए, प्र शक्षण के रूप म नह । सी.पी.आर. एक शारी रक कौशल है। इसे कसी च कत्सक
अथवा प्रमा णत प्र शक्षक के नदशन म पुतले पर अभ्यास करके ही सी खए — पुस्तक का सुझाव यही है क वद्यालय म मॉक ल
कराई जाए।
वयस्क के लए वतमान क्रम—

1. दे खए क स्थान सुर क्षत है — आपके लए भी और उस व्य क्त के लए भी। य द आप स्वयं चो टल हो गए तो कसी क
सहायता नह कर सकगे।
2. अनु क्रया क जाँच क जए। कंध को दृढ़ता से थपथपाकर ऊँची आवाज़ म पू छए— “क्या आप ठ क ह?”

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध
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3. सहायता के लए पुका रए और तुरंत एंबुलस बुलाइए (भारत म 112), अथवा कसी एक व्य क्त का नाम लेकर उसे फ़ोन
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करने और उपलब्ध हो तो ए.ई.डी. लाने को क हए। फ़ोन को स्पीकर पर र खए जससे आपके हाथ खाली रह।
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c न हो तो छाती पर संपीडन आरंभ क जए। एक हाथ क हथेली का नचलाagभाग छाती के मध्य म र खए,
.श्वास
4. श्वास क जाँच क जए — लगभग 10 सेकंड से अ धक नह । हाँफना सामान्य श्वास नह है।

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e उसके ऊपर, भुजाएँ सीधी और कंधे हाथ के ठ क ऊपर र खए, और तेज़ तथा दृढ़ता से दबाइए — लगभग 100
sहाथ
5. य द सामान्य
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agसे 120 संपीडन प्र त मनट, लगभग 5 सट मीटर गहराई तक, प्रत्येक संपीडन के बीच छाती को पूरी तरह वापस उठने
दूसरा

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द जए।

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6. य द आप प्र श क्षत ह और तैयार ह तो प्रत्येक 30 संपीडन के प ात 2 बचाव श्वास द जए। य द प्र श क्षत नह ह तो केवल
संपीडन क जए और रु कए मत।
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g उसके बोले गए नदश का ठ क-ठ क पालन क जए।
7. ए.ई.डी. आते ही उसका उपयोग क जएaऔर
8. बना रुके जारी र खए जब तक क व्य क्त सामान्य रूप से श्वास न लेने लगे, कोई प्र श क्षत व्य क्त दा यत्व न ले ले, अथवा

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आप शारी रक रूप से जारी रखने म असमथ न हो जाएँ। य द कोई और उप स्थत हो तो प्रत्येक दो मनट म बदल जाइए जससे
कोई भी न थके।
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s m काम करता है: हृदय रुकने पर रक्त का प्रवाह रुक जाता है और म स्तष्क को कुछ ही मनट म क्ष त होने
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gl लगती है। छाती पर संपीडन बाहर से हृदय को दबाकर कुछ रक्त — और इस लए कुछ ऑक्सीजन — म स्तष्क तक
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पहुँचाते रहते ह, जब तक हृदय को पुनः चालू न कया जा सके। संपीडन के बना बीता प्रत्येक मनट जी वत रहने क
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संभावना घटाता है, इसी लए यहाँ पूणता से अ धक शीघ्रता महत्त्वपूण है।

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अभ्यास के समय च कत्सक से पू छए: यह कैसे जान क यह हृदयाघात है, मूच्छा नह ? 5 सट मीटर वास्तव म

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कतना होता है? य द पसली चटकने क ध्व न सुनाई दे तो क्या कर? बच्चे या शशु के लए क्रम म क्या अंतर होता

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है?

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agl प्र.5 वद्यालय म एक च कत्सक को आमं त्रत क जए। कुपोषण, अल्प पोषण और अ त पोषण के मु पर
च कत्सक से वातालाप करने के लए वद्या थय को प्रोत्सा हत कया जा सकता है।
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वातालाप से पूव तैयारी। च कत्सक को वषय पहले भेज द जए, प्रत्येक कक्षा से ल खत प्रश्न एकत्र क जए जससे संकोची
वद्या थय क बात भी पहुँचे, और दो वद्या थय को टप्पणी लखने तथा एक को धन्यवाद दे ने का दा यत्व द जए। चचा को
स्थ तय तक सी मत र खए, कक्ष म उप स्थत कसी व्य क्त पर कभी मत लाइए।
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तीन शब्द, जससे आप चचा को समझ सक—
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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

शब्द अथ इससे क्या हो सकता है

कुपोषण आहार से पोषक तत्व उ चत मात्रा म न मलना — यह सामान्य शरीर सामान्य रूप से काय या वृिद्ध नही ं कर पाता
शब्द है जसम शेष दोन स म्म लत ह

अल्प भोजन क मात्रा कम होना अथवा कसी पोषक तत्व क कमी वृिद्ध में कमी, थकान, संक्रमण से लड़ ने की क्षमता में
पोषण होना िगरावट, तथा क क्षा 6 में पढ़ े अभावजन्य रोग — स्कव ,
एनीिमया, घे ंघ ा

अत शरीर ारा उपयोग क जाने वाली ऊजा से अ धक ऊजा लेना, थूल ता, तथा आगे चलकर मध मु ेह और हृदय रोग की
स्

पोषण प्रायः तेल, चीनी और नमक अ धक होने पर भी कसी पोषक तत्व अिधक संभावना
क कमी के साथ

च कत्सक से पूछने योग्य प्रश्न:

क्या कोई व्य क्त अ त पो षत होते हुए भी एक साथ लोहे या वटा मन क कमी से ग्रस्त हो सकता है?
हमारी आयु के वद्याथ के लए वास्तव म संतु लत थाली कैसी होती है, वह भी हमारे बाज़ार म मलने वाले खाद्य से?
यहाँ बच्च म आप कस कमी को सबसे अ धक दे खते ह और उसे दूर करने का सबसे सस्ता उपाय क्या है?
एक ही आहार दो व्य क्तय पर भन्न प्रभाव क्य डालता है?
एनी मया क पहचान कैसे होती है और सदै व थकान अनुभव करने वाले वद्याथ को क्या करना चा हए?
हम क्या नह करना चा हए — आहार संबंधी कौन-सी प्रच लत सलाह है जसे आप चाहते ह क वद्याथ न मान?

ध्यान द जए: तीन पर अनेक कारण वाली स्वास्थ्य स्थ तय के रूप म चचा क जए — घर म उपलब्ध भोजन,
पा रवा रक आय, रोग, हॉम न और स क्रयता, सभी क भू मका होती है। अध्याय स्वयं अनेक कारण को साथ-साथ
गनाता है। कसी के शरीर क चचा उसक व्य क्तगत असफलता के रूप म नह होनी चा हए।

प्र.6 य द आपको अपना स्वास्थ्य पत्रक (हैल्थ काड) बनाने का अवसर मले तो आप इसम क्या-क्या स म्म लत करना
चाहगे? अपना स्वास्थ्य पत्रक बनाइए और इस पर चचा क जए।

स्वास्थ्य पत्रक म वह होना चा हए जसक आवश्यकता च कत्सक को आपात स्थ त म पड़े और जसक आवश्यकता आपको
समय के साथ अपनी स्थ त पर दृ ष्ट रखने के लए हो। इसे एक ही पृष्ठ म र खए।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

भाग क्या स म्म लत कर यह क्य आवश्यक है

पहचान नाम, आयु, जन्म त थ, कक्षा, पता, रक्त वग आपात िस्थित में सबसे पहले र क्त वग ही पूछा जाता है

आपातकालीन माता- पता या संरक्षक, पा रवा रक च कत्सक, नकटतम जहाँ िमनट महत्त्वपूण हों, वहाँ िमनट बचते है ं
संपक च कत्सालय, एंबुलस नंबर

वृ द्ध का अ भलेख प्रत्येक सत्र म एक ही त थ पर मापी गई लंबाई और भार एक अके ला माप कु छ नही ं बताता; पवृि बहुत कु छ
बताती है

ट काकरण लगे हुए सभी ट के, त थ स हत; अगला ट का कब दे य है टीके रोकथाम के िलए होते है ं — छू टी हुई ितिथ ही पूर ी
अ भलेख सम स्या है

एलज और कसी औष ध या भोजन से एलज ; अस्थमा, मधुमेह उपचार में होने वाली खतरनाक भूल रुक जाती है
द घका लक रोग अथवा अन्य द घका लक रोग; नय मत ली जाने वाली
औष धयाँ

रोग का इ तहास प्रमुख रोग, च कत्सालय म भत , शल्य क्रया — त थ नए िचिक त्सक को िस्थित समझने में सहायता िमलती
स हत है

जाँच नेत्र परीक्षण, दं त परीक्षण, सामान्य जाँच क त थयाँ और दृ िष्ट कमज़ोर होने जैस ी सम स्याएँ ढू ँढ़ने पर ही िमलती
नष्कष है ं

दै नक आदत सामान्यतः सोने के घंटे, शारी रक स क्रयता, स्क्र न समय अिधकांश असंचरणीय रोगों के पीछे यही कारण होते है ं

कल्याण यह लखने का स्थान क आप कब उदास, च तत या स्वास्थ् य शारीिरक , मानिसक और
सामािजक है —
अकेला अनुभव कर रहे थे और आप कससे बात कर िक्रयाकलाप 3.1 ने िदखाया िक यह पत्रक में क्यों होना
सकते ह चािहए

कक्षा म चचा क जए: यह पत्रक कसे दे खने क अनुम त होनी चा हए? अ धकांश कक्षाएँ इस नष्कष पर पहुँचती
ह क वद्याथ , माता- पता, च कत्सक और वद्यालय क नस — और कोई नह । स्वास्थ्य का अ भलेख नजी
जानकारी है और पत्रक बनाने से पूव इस सद्धांत पर सहमत हो जाना उ चत है।

प्र.7 ‘क्या फास्ट फूड का पालतू पशुओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?’ इस वषय पर चचा क जए।

वषय एक प्रश्न के रूप म है, अतः इसका नणय भावना से नह , प्रमाण से होना चा हए। सच्चा उत्तर है — हाँ, फास्ट फूड पालतू
पशुओं को हा न पहुँचाता है, और दो अलग-अलग कारण से।
कारण 1: गलत पोषक तत्व क अ धकता। फास्ट फूड म तेल, नमक और चीनी अ धक होते ह। कुत्ता या बल्ली कसी वयस्क
मनुष्य से कह छोटे होते ह, अतः पज़्ज़ा या समोसे का वही टु कड़ा उनक दै नक ऊजा का बहुत बड़ा भाग बन जाता है। ऐसा भोजन
नय मत रूप से दे ने पर पालतू पशुओं का भार बढ़ जाता है और वही परेशा नयाँ आती ह जो अध्याय मनुष्य के संदभ म बताता है
— श्वास फूलना, जोड़ म दद, और छोटा तथा कष्टपूण जीवन। अचानक अ धक वसा वाला भोजन अग्न्याशय म शोथ भी कर सकता
है, और नरम, शकरायुक्त भोजन दाँत तथा मसूड़ को हा न पहुँचाता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य न ध AglaSem · NCERT Solutions

कारण 2: कुछ मानव खाद्य पशुओं के लए वास्तव म वषाक्त होते ह। यह वह भाग है जसे अनेक लोग नह जानते। चॉकलेट,
प्याज़ और लहसुन, अंगूर और कश मश तथा ज़ाइ लटॉल नामक मठास — ये सभी कुत्त के लए केवल अस्वास्थ्यकर नह , अ पतु
घातक ह। पालतू पशु लेबल नह पढ़ सकता, अतः दा यत्व पूणतः हमारा है।

पक्ष म (नकारात्मक प्रभाव पड़ता वपक्ष म उत्तर
है)

अ धक तेल, नमक और चीनी से पालतू “कभी-कभार एक छोटा सुर िक्षत भोजन के िवरले उपहार के िलए यह सही है; हािन िनयिमत
पशुओं म स्थूलता और पाचन संबंधी रोग टु कड़ा हा न नह आदत से होती है, और 10 िकलोगाम के पशु के िलए हमारा ‘छोटा’
होते ह करता” टुक ड़ ा बड़ ा होता है

अनेक सामान्य मानव खाद्य कुत्त और “सड़क के पशु बचा- जीिवत रहना स्वस्थ होना नही ं है — और यही पशु सबसे अिधक
ब ल्लय के लए वषाक्त ह खुचा खाकर जी वत पाचन संबंध ी रोगों के साथ आ श्रयों में िदखाई दे ते है ं
रहते ह”

पालतू पशु चुन या मना नह कर सकता; “पालतू पशुओं का सादा पका चावल , दाल , दही, उबली सि जयाँ और स्वच्छ जल
नणय पालक का होता है वशेष आहार महँगा है” कम खच ले तथा फास्ट फू ड से अिधक सुर िक्षत है ं

चचा को अच्छा कैसे बनाएँ: दोन पक्ष से क हए क वे एक-एक ोत साथ लाएँ — कसी पशु च कत्सक क
सलाह, पशुपालन क पुस्तक अथवा कोई वश्वसनीय वेबसाइट — और बोलते समय उसका नाम बताएँ। नणायक
के रूप म स्थानीय पशु च कत्सक को आमं त्रत क जए। जस चचा म दोन पक्ष ोत बताते ह, वह उस चचा से कह
अ धक सखाती है जसम दोन पक्ष केवल दृढ़ता से अनुभव करते ह।

अध्याय — एक नज़र म
स्वास्थ्य का अथ है पूण शारी रक, मान सक और सामा जक कल्याण क स्थ त, न क मात्र रोग क अनुप स्थ त। एकाक पन,
तनाव और प्रदू षत प रवेश भी स्वास्थ्य को उतना ही हा न पहुँचाते ह जतना रोगाणु।
लक्षण वह है जसे हम अनुभव करते ह — दद, थकान, चक्कर आना। संकेत वह है जसे दे खा या मापा जा सकता है —
ज्वर, दाने, उच्च रक्तचाप, शोथ।
संचरणीय रोग रोगजनक (जीवाणु, वषाणु, कवक, कृ म, प्रोटोजोआ) से होते ह और वायु, दू षत जल तथा भोजन, प्रत्यक्ष
एवं अप्रत्यक्ष संपक, और मच्छर तथा मक्खी जैसे रोगवाहक ारा फैलते ह।
असंचरणीय रोग — मधुमेह, हृदय रोग, कसर, अस्थमा तथा स्कव , एनी मया और घघा जैसे अभावजन्य रोग — रोगजनक
से नह होते। ये जीवनशैली, आहार और पयावरण से जुड़े ह और आज भारत म अ धकांश मृत्यु इन्ह से होती है।
प्र तरक्षा शरीर क रोग से लड़ने क प्राकृ तक क्षमता है। ट का रोगाणु के मृत, क्षीणीकृत या हा नर हत भाग से प्र तरक्षा
प्रणाली को प्र श क्षत करता है और उपा जत प्र तरक्षा दे ता है। ट के रोकथाम के लए होते ह, च कत्सा के लए नह ।
प्र तजै वक औष धयाँ केवल जीवाणुओं को नष्ट करती ह क्य क वे जीवाणु को शकाओं के उन्ह भाग को ल क्षत करती ह
जो मानव को शकाओं म नह होते। आवश्यकता न होने पर इनका सेवन करना अथवा पूरी खुराक न लेना प्र तजै वक
प्र तरोध को जन्म दे ता है।

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त्व रत पुनरावृ त्त

पद इसका अथ अध्याय से उदाहरण स्मरणीय बात

स्वास्थ्य पूण शारीिरक, मानिसक और सामािजक कल्याण क्रयाकलाप 3.1 के वद्याथ को तीन आयाम — शरीर, मन और
की िस्थित, न िक मात्र रोगों की अनुपिस्थित कोई संक्रमण नह था, फर भी वह संबंध — का ध्यान रखना आवश्यक
(डबल्यू.एच.ओ.) अस्वस्थ था है

लक्षण िजसे रोगी स्वयं अनुभव करता है दद, थकान, चक्कर आना इसे कोई दूसरा माप नह सकता

संकेत िजसे दे खा या मापा जा सकता है ज्वर, दाने, उच्च रक्तचाप, शोथ च कत्सक इसी को अं कत करता है

रोगजनक रोग उत्पन्न करने वाला जीव जीवाणु, वषाणु, कवक, कृ म, सभी संचरणीय रोग रोगजनक से ही
(रोगाणु) प्रोटोजोआ होते ह

रोगवाहक वह कीट जो रोगजनक को एक व्यिक्त से दू स रे मच्छर मले रया और डगू फैलाते ह; रोगवाहक को नयं त्रत क जए, रोग
(वेक्टर) तक पहच
ु ँ ाता है म क्खयाँ भोजन तक रोगाणु ले रुक जाएगा
जाती ह

संचरणीय रोग रोगजनक से होने वाला रोग जो एक व्यिक्त से आंत्र ज्वर, डगू, फ्लू, चेचक, को वड संचरण के माध्यम को तो ड़ए —
दू स रे में फै ल सकता है —19 वायु, जल, भोजन, संपक,
रोगवाहक

असंचरणीय वह रोग जो रोगजनक से नही ं होता और दू स रों में मधुमेह, हृदय रोग, कसर, अस्थमा जीवनशैली, आहार और पयावरण से
रोग नही ं फै लता जुड़ा; भारत म अ धकांश मृत्यु का
कारण

अभावजन्य पोषक तत्व की कमी से होने वाला असंचरणीय स्कव , एनी मया, घघा (कक्षा 6 म आहार सुधारने से ठ क होता है,
रोग रोग पढ़ा) केवल औष ध से नह

द घका लक लंबे समय तक — 3 महीने से अिधक — बना कसर, मधुमेह, अस्थमा इसम नरंतर दे खभाल चा हए, एक
रोग रहने वाला रोग सप्ताह क दवा नह

प्र तरक्षा शरीर की रोगों से लड़ने की पाकृ ितक क्षमता प्र तरक्षा प्रणाली रोगाणुओं को इसी से समझ आता है क एक ही
पहचानकर उन पर आक्रमण करती घर के दो लोग भन्न रूप से रोगग्रस्त
है क्य होते ह

ट का रोगाण ु के म ृत, क्षीणीकृ त या हािनरिहत भाग से पो लयो ॉप्स, खसरा, टे टेनस, उपा जत प्र तरक्षा दे ता है; रोकथाम
(वैक्सीन) बना पदाथ जो पितरक्षा पणाली को पिशिक्षत हेपेटाइ टस के ट के के लए, उपचार के लए नह
करता है

प्र तजै वक जीवाणओ
ु ं को नष्ट करने वाली औषिध पे न स लन, जसक खोज 1928 वषाणु और प्रोटोजोआ पर
औष ध म अलेक्जडर फ्ले मग ने क नष्प्रभावी

प्र तजै वक पहले िजस पितजैिवक से नष्ट होते थे, वही जीवाण ु आवश्यकता न होने पर प्र तजै वक प्र तजै वक केवल च कत्सक के
प्र तरोध उपचार के बाद भी जीिवत रहकर ग ण
ु न करते है ं लेना अथवा पूरी खुराक न लेना परामश पर, पूरी खुराक म ली जए

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages49
Languagehindi
Updated19 Sep 2026