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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव

AglaSem पर कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 4 Electricity Magnetic and Heating Effects (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव - Page 1 of 38

About NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव

NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (38 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 4: व त
ु — चुब
ं क य एवं तापीय
प्रभाव

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

46 – 61 16 44 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 37 pages

Page 2

कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: व त
ु — चुब
ं क य एवं तापीय
प्रभाव
कक्षा 8 व ान अध्याय 4 व ुत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के वस्तृत एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। इसम
पृष्ठ 46 के खोजबीन और वचार कर के प्रश्न, क्रयाकलाप 4.1 से क्रयाकलाप 4.6 तक के सभी प्रश्न, दोन वै ा नक क भाँ त सोच बॉक्स,
पृथ्वी के चुंबकत्व पर एक सोपान ऊपर का प्रश्न, पृष्ठ 49 से 56 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, ज ासा बनाए रख के ग्यारह प्रश्न तथा खोज,
अ भक ल्पत कर एवं चचा कर के तीन काय स म्म लत ह — प्रत्येक उत्तर म प्रेक्षण, उसका कारण एवं उसके पीछे क क्रया व ध स्पष्ट क गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 8) 46 – 61

खं ड प्रश्न

16 44

माध्यम

हन्द

खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 46
अध्याय का आरंभ

खोजबीन और वचार कर

प्र.1 व ुत सेल से व ुत-प रपथ बनाते समय य द हमारे पास व ुत लप नह है तो क्या हमारे पास कोई अन्य व ध
है जसके ारा हम पता लगा सकते ह क उस प रपथ म धारा प्रवा हत हो रही है या नह ?

हाँ। प रपथ के तार के समीप — सव त्तम है ठ क उसके नीचे — एक चुंबक य दक्सूचक र खए और स्वच ऑन करते समय सुई का
अवलोकन क जए।

य द सुई अपनी सामान्य उत्तर-द क्षण दशा से वक्षे पत होती है तो धारा प्रवा हत हो रही है।
य द सुई स्थर रहती है तो धारा प्रवा हत नह हो रही है।
स्वच ऑफ करने पर सुई पुनः अपनी प्रारं भक दशा म लौट आती है।

ऐसा क्य होता है: धारावाही तार अपने चार ओर चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करता है। दक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा
चुंबक है, अतः वह इस क्षेत्र के कारण घूम जाती है। धारा न होने पर क्षेत्र भी नह होता और सुई सामान्य रूप से
उत्तर-द क्षण दशा म ठहरी रहती है। यही परीक्षण आप क्रयाकलाप 4.1 म करते ह।

संकेत: दूसरी, अपेक्षाकृत मोट व ध तापीय प्रभाव है — प रपथ म लगा नक्रोम का पतला तार धारा प्रवा हत होने
पर गरम हो जाता है। दक्सूचक वाली व ध ेष्ठ है क्य क यह तत्काल प रणाम दे ती है, इसम तार छू ना नह पड़ता
और यह अत्यंत अल्प धारा के लए भी काय करती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 क्या अस्थायी चुंबक बनाना संभव है? इन्ह कैसे बनाया जा सकता है?

हाँ। लोहे क क ल पर वद्युतरोधी तार क कुंडली लपेटकर उसम धारा प्रवा हत करने पर अस्थायी चुंबक बन जाता है — इसे वद्युत-
चुंबक कहते ह।

1. लगभग 50 cm लंबा लचीला वद्युतरोधी तार और एक लोहे क क ल ली जए।
2. तार को क ल पर एक ही दशा म, फेरे पर फेरा, कसकर लपे टए।
3. तार के दोन स्वतंत्र सर को कुछ सेकंड के लए ही वद्युत सेल से जो ड़ए।
4. अब क ल लोहे क कागज- क्लप को उठा लेती है। सेल से वयुक्त करते ही क्लप गर जाती ह।

यह अस्थायी क्य है: चुंबकत्व क ल का नह , धारा का है। कुंडली का प्रत्येक फेरा अपना चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करता
है और सभी फेरे एक ही दशा म लपेटे होने से ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दशा म जुड़ जाते ह। इस क्षेत्र म रखी
लोहे क क ल स्वयं चुंबक बन जाती है और पूरे वद्युत-चुंबक को और प्रबल बना दे ती है। धारा रुकते ही कुंडली का
क्षेत्र समाप्त हो जाता है और लोहा भी अपना लगभग सारा चुंबकत्व खो दे ता है — इस लए क्लप गर जाती ह।

क्या आप जानते ह? क्रेन पर लगा उ ापक वद्युत-चुंबक ठ क इसी प्रकार काय करता है। प्रचालक को भार को
ख चकर अलग नह करना पड़ता — वह केवल धारा ऑफ कर दे ता है।

प्र.3 हम जीवाश्म ईंधन एवं लकड़ी को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न करते ह परंतु व भन्न प्रकार के व ुत उपकरण म ऊष्मा
कैसे उत्पन्न होती है?

वद्युत उपकरण म कुछ भी जलता नह है। वहाँ ऊष्मा वद्युत धारा के तापीय प्रभाव से प्राप्त होती है।

ऐसा क्य होता है: जब कसी चालक से वद्युत धारा प्रवा हत होती है तो उसे कुछ वरोध अथवा प्र तरोध का
सामना करना पड़ता है। इस प्र तरोध के कारण वद्युत ऊजा का कुछ भाग तापीय ऊजा म प रव तत हो जाता है और
चालक गरम हो जाता है। प्र तरोध जतना अ धक होगा, समान धारा के लए उतनी ही अ धक ऊष्मा उत्पन्न होगी।

इसी लए प्रत्येक तापन उपकरण म एक छड़ अथवा तार क कुंडली होती है जसे तापन अवयव कहते ह और जो प्रायः नक्रोम क
बनी होती है, क्य क समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार क तुलना म नक्रोम कह अ धक प्र तरोध उत्पन्न करता है। वद्युत
कक्ष-तापक अथवा हीटर म यह अवयव लाल-तप्त चमकता हुआ दखाई दे ता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

लकड़ी अथवा जीवाश्म ईंधन जलाना व ुत उपकरण

ईंध न की रासायिनक ऊज जलने पर ऊष्मा के रूप में मुक्त होती है िव त
ु ऊज पितरोध क ष्
े कारण ऊ म ा में बद ल ती है

धआ
ु ँ, कािलख एवं राख उत्पन्न होती है ध ुआँ , कािल ख अथवा राख नही ं बनती

शीघ बंद अथवा िनयंित्रत करना किठन ि स् ष्
वच से ऊ म ा आरंभ एवं बंद हो जाती है

प्र.4 हम कैसे ात कर सकते ह क कोई सेल अथवा बैटरी अब काय के योग्य नह रह गई है? क्या सभी प्रकार के सेल
अथवा बैट रय को पुनः आवे शत करके काय के योग्य बनाया जा सकता है?

जब सेल के भीतर के रसायन उपयोग म आ चुके होते ह तो वह वद्युत आपू त नह कर पाता और न ष्क्रय कहलाता है। इसे इन
प्रकार से पहचाना जा सकता है—

उससे जुड़ा लप अथवा एल.ई.डी. द प्त नह होता, या बहुत मंद द प्त होता है।
उससे बना वद्युत-चुंबक कागज- क्लप नह उठा पाता।
प रपथ के तार के समीप रखी दक्सूचक सुई म वक्षेप बहुत कम अथवा शून्य होता है।
जो यु क्त पहले घंट चलती थी वह अब कुछ ही मनट म बंद हो जाती है।

नह — सभी सेल एवं बैट रय को पुनः आवे शत नह कया जा सकता।

प्रकार क्या पुनः आवे शत हो समाप्त होने पर क्या कर
सकता है?

शुष्क से ल (टॉच, घड़ी, िरमोट) नही ं — यह एक बार उ पयोग ई-कचरा पुनचक्रण सु वधा म नस्तारण क जए
वाल ा से ल है

पुनः आवेशनीय बैटरी (फोन, लै पटॉप, हाँ — अनेक बार अनेक बार आवे शत होने के प ात यह क्ष रत हो जाती है; तब
इनवटर, वाहन) पुनचक्रण हेतु भे जए

पुनः आवेशनीय बैटरी भी सदै व क्य नह चलती: प्रत्येक बार आवे शत एवं उपयोग होने पर उसके भीतर के
पदाथ म थोड़ा-थोड़ा प रवतन होता जाता है। एक-दो वष के दै नक आवेशन के प ात ये प रवतन जुड़कर बैटरी क
क्षमता घटा दे ते ह और फोन को अ धक बार आवे शत करना पड़ता है।

स्वयं जाँ चए: काय करना बंद कर चुक बैटरी पूणतः ‘ नष्प्रयोज्य’ नह होती — उसम अम्ल जैसे पदाथ तथा सीसा,
कैड मयम, नकल अथवा ली थयम जैसी धातुएँ रह जाती ह। सामान्य कचरे म फकने पर ये आग लगने का कारण
बन सकती ह अथवा पयावरण के लए हा नकारक हो सकती ह, और मूल्यवान पदाथ व्यथ चला जाता है। उपयोग
क गई बैट रयाँ सदै व ‘ई-कचरा’ पुनचक्रण कद्र को द जए; स्थान ात न हो तो अपने शक्षक से पू छए।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
अपने प्रश्न को साझा क जए
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प्र.5

m l as
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a s em
ऐसे g
a l बनाइए जो क्य , कैसे अथवा य द ऐसा हो तो से आरंभ ह और जन्ह आप एक सेल, एक कुंडली और एक दक्सूचक से
प्रश्न
वास्तव म जाँच सक। कुछ प्रश्न आरंभ करने के लए नीचे दए ह — इनके उत्तर इसी अध्याय म ह, अतः पढ़ते समय इन्ह अपने पास

com
ag
र खए।

m .
as e
आपका प्रश्न
a g l अध्याय म उत्तर कहाँ है

क्या तार से दू र ी बदलने पर भी िदक्सूचक सुई का िव ेप उतना ही रहता है? 4.1, िक्रयाकल ाप 4.1

m
खंड

co
यिद मैं 50 के स्थान पर 100 फे रे लपेटूँ तो क्या कुं डली अिधक िक्लपें
e m.
, पष्ृ ठ 51; खोजें, अिभकिल्पत करे ं एवं

as
वै ािनक की भाँित सोचें

m l
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, पष्ृ ठ 61
g
उठाएगी?

a
चच करे ं

a s em
glऐलुिमिनयम की पन्नी क्यों नही ं?
कुं डली लोहे की िक्लपें उठा ले ती है परंत ु प्लािस्टक का बटन अथवा खंड 4.1.1 — के वल चबुं कीय पद ाथ ही आकिषत होते है ं

a
a s
com
4.2, पष्ृ ठ 53

agl
हीटर की तापन कुं डली ताँबे की नही ं, िनक्रोम की क्यों बनती है?

.
खंड

m
ase
4.6; खोजें, अिभकिल्पत करे ं एवं चच करे ं, पष्ृ ठ 61

agl
क्या नी ंबू की भाँित आलू अथवा टमाटर भी एल.ई.डी. दीप्त कर सकता है? िक्रयाकल ाप

m
यह क जए: अध्याय पढ़ने से पहले अपने प्रश्न अभ्यास पु स्तका म ल खए और उत्तर मलने पर उन पर नशान

. co
m
लगाते जाइए। अंत म जो प्रश्न बना नशान के बच, वही अपने शक्षक से पूछने योग्य सव त्तम प्रश्न ह।

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aglक्रयाकलाप 4.1 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 47–48
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com g l a
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agl

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

खंड 4.1 क्या व ुत धारा का कोई चुंबक य प्रभाव होता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 दक्सूचक सुई का नरीक्षण करते समय व ुत-प रपथ म व ुत धारा को प्रवा हत करने के लए स्वच को ‘ऑन’
क जए ( चत्र 4.1, ख)। आप क्या अवलोकन करते ह?

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

कील कील

E
तार
N S

W
िस्वच (ऑफ)
चुंबकीय िदक्सूचक

− +
सेल
(क)

कील कील

E
तार
N S

W
िस्वच (ऑन)
चुंबकीय िदक्सूचक

− +
सेल
(ख)

चत्र 4.1, पृष्ठ 47 — दोन छाया चत्र का पुनःआरे खत रेखा चत्र: वही प रपथ (क) स्वच ‘ऑफ’ पर और (ख) स्वच
‘ऑन’ पर। दक्सूचक दोन क ल के मध्य तने हुए सीधे तार के नीचे रखा है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

स्वच बंद करते ही दक्सूचक सुई वक्षे पत हो जाती है — वह अपनी उत्तर-द क्षण दशा छोड़कर तार से कुछ कोण बनाती हुई ठहर
जाती है।

तार में िव त
ु धारा
कील कील

िदक्सूचक

सेल िस्वच ऑन

क्रयाकलाप 4.1 — स्वच ऑन करने पर तने हुए तार के नीचे रखे दक्सूचक क सुई उत्तर-द क्षण दशा से हट जाती है।

ऐसा क्य होता है: धारावाही तार अपने चार ओर के क्षेत्र म चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करता है। दक्सूचक सुई स्वयं एक
छोटा चुंबक है, अतः वह इस क्षेत्र से प्रभा वत होकर अपनी स्थर दशा से घूम जाती है। यह वक्षेपण इस बात का
संकेत है क धारा प्रवा हत हो रही है — सुई को कोई स्पश नह करता, और यह प्रभाव तार एवं दक्सूचक के मध्य
रखे गत्ते के आर-पार भी अनुभव होता है क्य क गत्ता अचुंबक य पदाथ है।

प्र.2 अब पुनः दक्सूचक सुई का अवलोकन करते समय स्वच को ‘ऑफ’ स्थ त म कर द जए। अब आप क्या
अवलोकन करते ह?

सुई अपनी प्रारं भक दशा म वापस लौट आती है — घूमकर पुनः उत्तर-द क्षण रेखा म ठहर जाती है।

ऐसा क्य होता है: स्वच ऑफ करने पर प रपथ टू ट जाता है और धारा रुक जाती है। धारा न होने पर तार के चार
ओर चुंबक य क्षेत्र भी नह रहता, और सुई पर केवल पृथ्वी का चुंबकत्व ही काय करता है। पृथ्वी के चुंबक य क्षेत्र म
स्वतंत्र रूप से घूमने वाला चुंबक उत्तर-द क्षण दशा म ठहरता है, अतः सुई वह लौट जाती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: ध्यान द जए क सुई कतनी शीघ्र प्र त क्रया करती है। चुंबक य प्रभाव धारा के साथ ही आता और जाता है
— यह तार म सं चत नह होता।

प्र.3 स्वच को ‘ऑन’ और ‘ऑफ’ करने क प्र कया को कई बार दोहराइए। प्रत्येक बार सावधानीपूवक अवलोकन
क जए क दक्सूचक सुई कस प्रकार से व्यवहार करती है?

सुई प्रत्येक बार एक ही प्रकार का व्यवहार करती है — प्रत्येक ‘ऑन’ पर उत्तर-द क्षण दशा से वक्षे पत होती है और प्रत्येक
‘ऑफ’ पर वापस लौट आती है।

स्वच तार म धारा तार के चार ओर चुंबक य क्षेत्र दक्सूचक सुई

ऑन पवािहत उ पि स्
थत िव ेिपत

ऑफ पवािहत नही ं अन ुपि स्
थत उ त्त -
र दि ण िद शा में वापस

दोहराना क्य आवश्यक है: एक बार का प्रेक्षण संयोग भी हो सकता है — हवा का झ का अथवा समीप रखा कोई
चुंबक। ऑन-ऑफ क प्र क्रया कई बार दोहराने पर हर बार वही प रणाम मलना यह सद्ध करता है क वक्षेपण
वास्तव म धारा से ही जुड़ा है, कसी और कारण से नह । हस क्र यन ऑस्टड ने भी 1820 म अपनी खोज
प्रका शत करने से पूव यही जाँच क थी।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 49
खंड 4.1.1 व ुत-चुंबक

पाठ्य प्रश्न

प्र.1 क्या हम व ुत धारा का उपयोग चुंबक बनाने म कर सकते ह?

हाँ। धारावाही कुंडली ठ क चुंबक क भाँ त व्यवहार करती है और ऐसी कुंडली को वद्युत-चुंबक कहते ह।

यह कैसे संभव होता है: हम अभी दे ख चुके ह क धारावाही तार अपने चार ओर चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करता है। एक
अकेले सीधे तार का क्षेत्र इतना दुबल होता है क वह कुछ भी नह उठा सकता। परंतु उसी तार को अनेक फेर क
कुंडली के रूप म लपेट दया जाए तो प्रत्येक फेरा अपना क्षेत्र जोड़ता है, और सभी फेरे एक ही दशा म लपेटे होने के
कारण ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दशा म होते ह। इस प्रकार 50 फेरे उसी छोटे क्षेत्र म लगभग 50 गुना प्रभाव
दे ते ह — इतना प्रबल क कुंडली चुंबक क भाँ त व्यवहार करे, दक्सूचक सुई को वक्षे पत करे और लोहे क क्लप
उठा ले।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

क्रयाकलाप 4.2 एवं 4.3 इसी क जाँच ह — कुंडली लपे टए, धारा ऑन क जए और दे खए क कुंडली कागज- क्लप उठाती है
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तथा दक्सूचक सुई को घुमाती है।
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agl 4.2 — आइए, खोज कर — पृष्ठ 49
क्रयाकलाप

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खंड 4.1.1 व ुत-चुंबक

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क्रयाकलाप

g l as
प्र.1
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क ल को लोहे से बनी कागज- क्लप के समीप लाइए और थोड़ा ऊपर उठाइए। क्या क्लप क ल के सर पर
चपक जाती ह?
co m
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हाँ। कुंडली को सेल से जोड़ते ही क्लप क ल से चपक जाती ह और उसके दोन सर पर लटक जाती ह — आप उनक छोट

a glंखला मेज से ऊपर उठा सकते ह।
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com agl
ऐसा क्य होता है: कुंडली म प्रवा हत धारा चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है; इस क्षेत्र म रखी लोहे क क ल स्वयं चुंबक

m .
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asइस लए वे आक षत होती ह। वे सर पर एकत्र होती ह क्य क कसी
बन जाती है और अपना चुंबकत्व भी जोड़ दे ती है, अतः
लोहे क , अथात चुंबक य पदाथ क बनीlह,
अब क ल छड़ चुंबक क भाँ त व्यवहार करती है। क्लप

g
भी चुंबक क भाँ त यहाँ भी चुंबक यaप्रभाव ुव पर सवा धक प्रबल होता है।

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m अन्यथा सेल शीघ्र ही
सावधानी: पुस्तक चेतावनी दे ती है क तार को सेल से कुछ सेकंड से अ धक संयो जत नeरख,
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o जाता है — और तार भी गरम होने लगता है।
दुबलcहो gl a
m . a
ase
agl
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तार म धारा प्रवाह रोकने हेतु तार को सेल से वयुक्त कर द जए। क्या क्लप गर जाते ह?
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प्र.2

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हाँ — क्लप तत्काल गर जाती ह।

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ऐसा क्य होता है: चुंबकत्व क ल म सं चत नह था, वह धारा ारा उत्पन्न कया जा रहा
s e m था। प रपथ तोड़ते ही धारा
. cरुकomजाती है और कुंडली का चुंबक य क्षेत्र समाप्त हो जाता है। तब लोहे कagकlलa भी अपना लगभग सारा चुंबकत्व
as em खो दे ती है, क्लप को थामे रखने वाला कुछ नह बचता और वे गर जाती ह। यही गुण वद्युत-चुंबक को अस्थायी
agl चुंबक बनाता है — और क्रेन प्रचालक को ठ क यही चा हए।
c
m .
m a s e
e m . co agl
las कर — पृष्ठ 49–50
क्रयाकलाप 4.3 — आइए, प्रयोग
ag

com
m .
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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

खंड 4.1.1 व ुत-चुंबक

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र 4.3 (ग) म दशाए अनुसार कुंडली के दोन सरे सेल के सर से संयो जत क जए और चुंबक य दक्सूचक
का अवलोकन क जए। क्या आप दक्सूचक क सुइय म कोई वक्षेपण दे खते ह?

कागज के बेलन पर कुं डली

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E W E W

N N

चुंबकीय िदक्सूचक चुंबकीय िदक्सूचक

− +
सेल

चत्र 4.3 (ग), पृष्ठ 50 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: कुंडली के दोन सरे सेल के सर से संयो जत; बेलन के प्रत्येक सरे
के समीप एक चुंबक य दक्सूचक।

हाँ। कुंडली को सेल से जोड़ते ही दोन दक्सूचक क सुइयाँ वक्षे पत हो जाती ह — यद्य प कुंडली केवल कागज के बेलन पर लपेट
है और उसम लोहा है ही नह ।

ऐसा क्य होता है: अब कुंडली धारावाही है, अतः वह चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है। 50 फेर म से प्रत्येक अपना
क्षेत्र दे ता है और सभी फेरे एक ही दशा म लपेटे होने के कारण ये क्षेत्र बेलन के अक्ष के अनु दश जुड़ जाते ह।
प रणामी क्षेत्र इतना प्रबल होता है क दोन सर पर रखी सुइयाँ घूम जाएँ। कागज का बेलन इसम कोई भू मका नह
नभाता — वह केवल कुंडली का आकार बनाए रखने का आधार है।

स्वयं जाँ चए: दोन सुइयाँ वपरीत दशाओं म घूमती ह क्य क वे कुंडली के दो भन्न सर के सामने ह। यही पहला
संकेत है क छड़ चुंबक क भाँ त कुंडली के भी दो वपरीत प्रकार के सरे होते ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 सेल से तार को वयो जत क जए। दे खए क क्या दक्सूचक क सुइयाँ अपनी प्रारं भक स्थ तय म वापस आ
जाती ह?

हाँ। दोन सुइयाँ घूमकर पुनः उत्तर-द क्षण दशा म ठहर जाती ह।

ऐसा क्य होता है: सेल वयो जत होने पर धारा नह रहती, अतः कुंडली कोई चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न नह करती।
सुइय पर केवल पृथ्वी का चुंबकत्व शेष रह जाता है और पृथ्वी के क्षेत्र म स्वतंत्र सुई उत्तर-द क्षण दशा म ठहरती है।
कुंडली केवल तभी तक चुंबक रहती है जब तक धारा प्रवा हत होती है।

प्र.3 कागज के बेलन के अंदर एक क ल प्र वष्ट क जए ( चत्र 4.3, घ) और उपरोक्त चरण को दोहराइए। क्या
दक्सूचक सुइय के वक्षेपण म कोई अंतर आता है?

कागज के बेलन पर कुं डली

S S

E W E W

N N

चुंबकीय िदक्सूचक चुंबकीय िदक्सूचक

− +
सेल
लोहे की कील
चत्र 4.3 (घ), पृष्ठ 50 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: वही कुंडली एवं सेल, अब कागज के बेलन के अंदर लोहे क क ल
प्र वष्ट है।

हाँ — क ल प्र वष्ट करने पर वक्षेपण पहले क तुलना म बहुत अ धक होता है, जब क सेल और कुंडली वही के वही ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

कुंडली के भीतर क्रोड दक्सूचक सुइय का वक्षेपण क्या क्लप थाम सकती है?

कु छ नही ं (के वल कागज का बेल न) कम ,
नही ं अथवा नाममा त्र

लोहे की कील बहुत अिधक हाँ

लोहा इतना अंतर क्य लाता है: लोहा चुंबक य पदाथ है। कुंडली के चुंबक य क्षेत्र के भीतर रखी क ल स्वयं चुंबक
बन जाती है और उसका चुंबकत्व कुंडली के पहले से उत्पन्न क्षेत्र म जुड़ जाता है। इस प्रकार कुल क्षेत्र अकेली कुंडली
क तुलना म कह अ धक प्रबल हो जाता है — इसी लए व्यावहा रक अनुप्रयोग हेतु अ धकांश वद्युत-चुंबक म लौह
क्रोड लगाया जाता है।

केवल कं ु डली लोहे की कील सिहत कं ु डली

कम िव ेपण कही ं अिधक िव ेपण

कं ु डली का पत्येक फेरा अपना ेत्र उत्पन्न करता है।
सभी फेरे एक ही िदशा में होने से ये ेत्र कं ु डली के
भीतर जुड़ जाते है।
ं इस ेत्र से चुबं िकत हुआ लौह
क्रोड अपना चुबं कत्व भी इसमें जोड़ देता है।

वद्युत-चुंबक प्रबल क्य होता है — अनेक फेर के क्षेत्र का जुड़ना, और साथ म स्वयं चुंबक बन गया लौह क्रोड।

प्र.4 क ल के दोन सर के समीप लोहे से बनी कुछ कागज- क्लप र खए। क्या क्लप क ल के सर क ओर
आक षत होती ह?

हाँ। क्लप क ल के दोन सर क ओर खचती ह और धारा प्रवा हत रहने तक वह लटक रहती ह ( चत्र 4.3, ङ)। धारा रोकते ही वे
गर जाती ह।

वे सर पर ही क्य एकत्र होती ह: लौह क्रोड स हत कुंडली अब चुंबक क भाँ त व्यवहार कर रही है, और कसी
भी चुंबक म चुंबक य प्रभाव दोन ुव पर सवा धक प्रबल होता है। कुंडली से लपटा क ल का मध्य भाग बहुत कम
आकषण करता है। इस लए क्लप वह एकत्र होती ह जहाँ खचाव सबसे अ धक है — सर पर।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

यह क जए: प्रत्येक सरे पर लटक क्लप क गनती क जए। फर एक और सेल जोड़कर पुनः ग नए। आपने
अभी-अभी मोटे तौर पर यह माप लया क वद्युत-चुंबक क प्रबलता धारा पर कस प्रकार नभर करती है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 50
खंड 4.1.1 व ुत-चुंबक

पाठ्य प्रश्न

प्र.1 क्या व ुत-चुंबक म भी छड़ चुंबक क भाँ त दो ुव होते ह?

हाँ। छड़ चुंबक क भाँ त वद्युत-चुंबक के भी दो ुव — उत्तर एवं द क्षण होते ह, कुंडली के प्रत्येक सरे पर एक।
क्रयाकलाप 4.4 यही दशाता है। कुंडली के सरे ‘अ’ के समीप दक्सूचक र खए: दक्सूचक सुई का कोई एक वशेष ुव उसक
ओर आक षत होता है। चूँ क वपरीत ुव एक-दूसरे को आक षत करते ह, इससे सरे ‘अ’ क ुवता ात हो जाती है। सरे ‘आ’ पर
यही दोहराने पर वपरीत ुव मलता है — अथात वद्युत-चुंबक के दोन सरे सदै व वपरीत ुवता के होते ह, ठ क छड़ चुंबक के
सर क भाँ त।

दो ुव क्य होते ह: वद्युत-चुंबक का क्षेत्र कुंडली के फेर म एक ही दशा म घूमती धारा से उत्पन्न होता है। यह दशा
न त होती है, अतः क्षेत्र कुंडली के एक सरे से नकलकर दूसरे सरे म प्रवेश करता है — इसी से एक सरा उत्तरी
और दूसरा द क्षणी ुव बनता है। धारा क दशा उलटने पर दोन ुव आपस म बदल जाते ह, जो छड़ चुंबक कभी
नह कर सकता।

क्रयाकलाप 4.4 — आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 50–51
खंड 4.1.1 व ुत-चुंबक

क्रयाकलाप

प्र.1 कुंडली को सेल से संयो जत क जए और दक्सूचक का अवलोकन क जए। अवलोकन क जए क कुंडली के
सरे ‘अ’ क ओर चुंबक य दक्सूचक का कौन सा ुव आक षत होता है। अपने अवलोकन को अपनी अभ्यास
पु स्तका म ल खए।

चत्र 4.4 (क) म दशाई गई व्यवस्था म दक्सूचक सुई का उत्तरी ुव (लाल सरा) कुंडली के सरे ‘अ’ क ओर आक षत होता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
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िदक्सूच क का उत्तरी धु व िसरे ‘अ’ की ओर आकिषत होता है
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िवपरीत धु व एक-दू सरे को आकिषत करते है ं
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अतः िसरा ‘अ’ िव -
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ु च ुंबक का द ि णी धु व है

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यह परीक्षण उ चत क्य है: कक्षा 6 से आप जानते ह क वपरीत ुव (उत्तर-द क्षण) आक षत करते ह और समान
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ुव प्र तक षत करते ह। दक्सूचक सुई एक ऐसा चुeंबm
a s क है जसके ुव हम पहले से ात ह। अतः सुई का जो ुव
सरे ‘अ’ क ओर खचता है वह सरे ‘अ’ क
प्रयुक्त हो रही है।
agl ुवता के वपरीत होगा — सुई यहाँ बने-बनाए ुव-सूचक के रूप म

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स्वयं जाँ चए: आपक कुंडली म उत्तर इसका उल्टा भी आ सकता है और यह त्रु ट नह है। कौन-सा सरा उत्तरी
g ओर से जोड़ा। जो आपका
m .cइस पर नभर करता है क आपने तार कस दशा म लपेटा और सेल को aकस
se चक दशाए, वही अ भले खत क जए।
होगा, यह

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प्र.2 इसी प्र क्रया को सरे ‘आ’ क ुवता ात करने हेतु दोहराइए ( चत्र 4.4, ख)। क्या आप पाते ह क सरे ‘आ’ क
ुवता सरे ‘अ’ क ुवता के वपरीत है?

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चुंबकीय िदक्सूचक

− +
सेल
ख
( )
चत्र 4.4 (ख), पृष्ठ 51 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: उसी व ुत-चुंबक के सरे ‘आ’ के समीप रखा चुंबक य दक्सूचक।

हाँ। सरे ‘आ’ के समीप सुई का दूसरा ुव आक षत होता है, अतः सरा ‘आ’ उत्तरी ुव है जब क सरा ‘अ’ द क्षणी ुव है।

कुंडली का सरा दक्सूचक सुई का आक षत होने वाला ुव उस सरे क ुवता

‘अ’ उ त्त री दि णी

‘आ’ दि णी उ त्त री

ये वपरीत क्य होने ही चा हए: वही धारा कुंडली के प्रत्येक फेरे म एक ही दशा म घूमती है, अतः कुंडली का
चुंबक य क्षेत्र अक्ष के अनु दश केवल एक ही दशा म चलता है — एक सरे से बाहर नकलकर दूसरे म प्रवेश करता
हुआ। कसी चुंबक के दोन सरे उत्तरी नह हो सकते। इसी लए छड़ चुंबक क भाँ त वद्युत-चुंबक म भी सदै व एक
उत्तरी और एक द क्षणी ुव होता है।

वै ा नक क भाँ त सोच — पृष्ठ 51

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खंड 4.1.1 व ुत-चुंबक

वै ा नक क भाँ त सोच

प्र.1 (i) उसी कुंडली से 2 और 4 सेल के संयोजन के साथ तथा (ii) 2 सेल के साथ भन्न- भन्न फेर क संख्या वाली
कुंडली का संयोजन करके क्रयाकलाप 4.3 को दोहराइए। आप क्या दे खते ह?

दोन ही प रवतन वद्युत-चुंबक को अ धक प्रबल बनाते ह: दक्सूचक सुई का वक्षेप बढ़ जाता है और कुंडली अ धक क्लप थाम
लेती है।

क्या बदला गया क्या दे खा गया कारण

1 से ल कम िव ेप ; कु छ ही िक्ल पें एकल सेल कम मात्रा म धारा प्रदान करता है, अतः चुंबक य क्षेत्र दुबल
होता है

2 से ल अिधक िव ेप; अिधक िक्ल पें 2 सेल क बैटरी अ धक धारा दे ती है, अतः क्षेत्र प्रबल होता है

4 से ल और भी अिधक और अ धक धारा, और अ धक प्रबल क्षेत्र

2 से ल , कुं डली में अिधक से ल बद ले िबना ही अिधक प्रत्येक अ त रक्त फेरा अपना क्षेत्र कुल क्षेत्र म जोड़ता है
फे रे पबल ता

ऐसा क्य होता है: कुंडली का चुंबक य क्षेत्र फेर म घूमती धारा से बनता है। धारा बढ़ाने पर प्रत्येक फेरे का योगदान
बढ़ जाता है; फेरे बढ़ाने पर जुड़ने वाले योगदान क संख्या बढ़ जाती है। दोन म से कोई भी — अथवा दोन एक
साथ — कुंडली के भीतर के क्षेत्र को प्रबल बनाते ह, अतः सुई अ धक घूमती है और अ धक क्लप थमी रहती ह।

संकेत: दक्सूचक को प्रत्येक बार ठ क उसी स्थान पर र खए, अन्यथा आप एक साथ दो बात बदल दगे और यह नह
कह पाएँगे क अंतर कस कारण से आया।

प्र.2 क्रयाकलाप 4.4 को कुंडली म धारा क दशा प रव तत करके भी दोहराइए।

सेल के संयोजन उलट दे ने पर दक्सूचक सुई का वक्षेप भी उलट जाता है: सुई का जो ुव पहले सरे ‘अ’ क ओर आक षत होता
था वह अब प्र तक षत होता है और दूसरा ुव आक षत होता है। अथात व ुत-चुंबक के ुव आपस म बदल गए ह — जो
द क्षणी था वह अब उत्तरी है।

ऐसा क्य होता है: कुंडली म धारा कस दशा म घूमती है, यही तय करता है क कौन-सा सरा उत्तरी होगा। धारा
उलटने पर यह दशा उलट जाती है और दोन ुव स्थान बदल लेते ह। वक्षेप का प रमाण नह बदलता, क्य क धारा
क मात्रा पहले जतनी ही है — केवल उसक दशा बदली है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

पूरे बॉक्स का सार—

वद्युत-चुंबक क प्रबलता धारा के प रमाण, फेर क संख्या अथवा दोन म प रवतन करके बदली जाती है।
वद्युत-चुंबक क ुवता धारा क दशा उलटकर उत्क्र मत क जाती है।

क्या आप जानते ह? स्थायी छड़ चुंबक इनम से कुछ भी नह कर सकता। इ ानुसार प्रबलता और ुवता बदल
पाना ही वद्युत-चुंबक को घं टय , मोटर , लाउडस्पीकर और क्रेन म इतना उपयोगी बनाता है।

एक सोपान ऊपर — पृष्ठ 51
पृथ्वी एक चुंबक क भाँ त

एक सोपान ऊपर

प्र.1 परंतु पृथ्वी एक चुंबक क भाँ त व्यवहार क्य करती है?

क्य क पृथ्वी के भीतर गहराई म वद्युत धाराएँ प्रवा हत होती ह। पृथ्वी के क्रोड म उप स्थत तरल लोहा नरंतर ग तशील रहता है और
यह ग त वद्युत धाराओं का नमाण करती है। ये धाराएँ भी, ठ क आपक कुंडली क धारा क भाँ त, चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती ह —
और यह क्षेत्र पृथ्वी क सतह से बहुत दूर तक फैला होता है।

यह अध्याय से कैसे जुड़ता है: यह वही सद्धांत है जसक जाँच आपने क्रयाकलाप 4.1 म क थी। धारा चुंबक य
क्षेत्र उत्पन्न करती है। पृथ्वी उसी बात का एक वशाल रूप है — इसी लए स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक अथवा
दक्सूचक सुई उत्तर-द क्षण दशा म ठहरती है।

पृथ्वी के चुंबक य क्षेत्र के दो प रणाम—

अनेक प्रवासी पक्षी, मछ लयाँ और पशु महा प और महासागर के पार यात्रा करने के लए इसका उपयोग करते ह।
यह एक प ररक्षक क भाँ त काय करते हुए अंत रक्ष से आने वाले हा नकारक कण को रोकता है और पृथ्वी पर जीवन को
बनाए रखने म सहायता करता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 52

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

खंड 4.1.2 एवं खंड 4.2

पाठ्य प्रश्न

प्र.1 क्या वास्त वक जीवन म भी वस्तुओं को उठाने के लए व ुत-चुंबक का उपयोग कया जाता है?

हाँ — इन्ह उ ापक वद्युत-चुंबक कहते ह। ये अत्यंत प्रबल वद्युत-चुंबक होते ह जन्ह क्रेन के सामान्य हुक के स्थान पर लटकाया
जा सकता है।

क्रेन प्रचालक क्या करता है क्या होता है

धारा ऑन करता है िव त
ु-चबुं क चबुं क बन जाता है और ल ोहे या स् टील की व स्
त ुओं को उ ठा ले ता है

धारा ऑफ करता है चबुं कीय त्र
े प् स्
समा त हो जाता है और व त ुएँ मुक् त हो जाती है ं

इनका कारखान एवं कचरा स्थल म धातु क भारी वस्तुओं को कुशलता से स्थानांत रत करने, उठाने और छाँटने हेतु व्यापक रूप
से उपयोग कया जाता है।

यहाँ स्थायी चुंबक क्य नह चलेगा: स्थायी चुंबक भार को पकड़ तो लेगा पर कभी छोड़ेगा नह । वद्युत-चुंबक का
चुंबकत्व केवल धारा प्रवा हत रहने तक ही होता है, इस लए प्रचालक एक स्थान से टन कबाड़ उठाकर दूसरे स्थान
पर केवल स्वच दबाकर गरा सकता है।

प्र.2 व ुत-चुंबक के लए क्रयाकलाप करते समय क्या आपने यह भी अवलोकन कया क तार के सरे गरम हो गए
थे? ऐसा क्य होता है?

हाँ — और यह गरमाहट वद्युत धारा का तापीय प्रभाव है, जो इस अध्याय का दूसरा प्रभाव है।

ऐसा क्य होता है: जब कसी भी चालक से वद्युत धारा प्रवा हत होती है तो उसे कुछ वरोध अथवा प्र तरोध का
सामना करना पड़ता है। इस प्र तरोध के कारण वद्युत ऊजा का कुछ भाग तार के भीतर ही तापीय ऊजा म प रव तत
हो जाता है और तार गरम हो जाता है। यह प्रत्येक धारावाही तार म होता है — वद्युत-चुंबक क कुंडली म भी।
वद्युत-चुंबक वाले क्रयाकलाप म कुंडली सीधे सेल से जुड़ी होती है, अतः अपेक्षाकृत अ धक धारा प्रवा हत होती है
और सर पर गरमाहट सरलता से अनुभव हो जाती है।

संकेत: इसी कारण पुस्तक कहती है क कुंडली को सेल से कुछ सेकंड से अ धक जोड़े न रख। तार को गरम करने म
लगने वाली ऊजा सेल से ही ली जाती है, इस लए सेल शीघ्र दुबल हो जाता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
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क्रयाकलाप 4.5 — आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 52–53
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खंड 4.2 क्या एक धारावाही तार गरम होता है?
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क्रयाकलाप

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नक्रोम के तार को स्पश क जए। आपको कैसा अनुभव होता है?
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प्र.1

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स्वच अभी ऑफ स्थ त म है, अतः नक्रोम का तार ठं डा प्रतीत होता है — वह कक्ष के ताप पर है, आस-पास के गत्ते और क ल से

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भन्न नह ।

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यह चरण क्य आवश्यक है: यही आपका संदभ प्रेक्षण है। जब तक आप यह न जान क धारा प्रवा हत होने से

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अse े प्रयोग का आरंभ प्रारं भक स्थ त अ भले खत करने से होता है।
पहले तार

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लगभग 30 सेकंड के लए स्वच को ऑन m
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लए नक्रोम तार को स्पश क जएl(aनक्रोम तार को पकड़ नह )। आपको क्या अंतर प्रतीत होता है?
प्र.2 र खए और इसके प ात इसे वापस ऑफ स्थ त म लाइए। क्षणभर के

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अब तार स्पष्ट रूप से गरम प्रतीत होता है। ऑन-ऑफ क प्र क्रया दोहराने पर हर बार यही प रणाम m
s e मलता है, जससे पु ष्ट होती है

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क गरमाहट धारा के कारण ही है।
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agl ऐसा क्य होता है: नक्रोम का तार अपने म से प्रवा हत होती धारा के प्रवाह म प्र तरोध उत्पन्न करता है। इस प्र तरोध
के कारण वद्युत ऊजा का कुछ भाग तार म ही तापीय ऊजा म प रव तत हो जाता है और तार का ताप बढ़ जाता है।
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धारा प्रवा हत होने पर चालक के इसी प्रकार गरम हो जाने को व ुत धारा का तापीय प्रभाव कहते ह। इस
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क्रयाकलाप म नक्रोम इसी लए चुना गया है क्य क समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार क तुलना म यह

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अ धक प्र तरोध उत्पन्न करता है, अतः 30 सेकंड म ही तापन अनुभव करने योग्य हो जाता है।

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सुरक्षा सव प र (पुस्तक, पृष्ठ 53): कसी भी प्रकार क क्ष त से बचने के लए तार को अ धक समय तक स्पश न
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कर। इसे केवल क्षणभर के लए छु इए और नक्रोम तार को पकड़ नह ।
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a s emउत्पन्न ऊष्मा क मात्रा तार के पदाथ, मोटाई एवं लंबाई, व ुत धारा के प रमाण तथा धारा प्रवाह क समय अव ध पर नभर
agl करती है।
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वै ा नक क भाँ त सोच — पृष्ठas53
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खंड 4.2 क्या एक धारावाही तार गरम होता है?

वै ा नक क भाँ त सोच

प्र.1 क्रयाकलाप 4.5 को दो सेल क बैटरी के साथ दोहराइए। आप क्या दे खते ह? एक अथवा दो सेल का प्रयोग
समान समयाव ध के लए कया जाए तो तार कस प्रकरण म अ धक गरम होगा?

तार दो सेल के साथ अ धक गरम होता है। समान 30 सेकंड म दो सेल के साथ कए गए प्रयोग म उत्पन्न ऊष्मा क मात्रा अ धक
होती है।

ऐसा क्य होता है: दो सेल क बैटरी नक्रोम के तार से एकल सेल क तुलना म अ धक धारा प्रवा हत करती है, और
उत्पन्न ऊष्मा व ुत धारा के प रमाण पर नभर करती है। उसी तार म उतने ही समय के लए अ धक धारा प्रवा हत
होने का अथ है अ धक वद्युत ऊजा का ऊष्मा म प रवतन, अतः तार अ धक गरम हो जाता है।

कुल मलाकर, कसी तार म उत्पन्न ऊष्मा इन पर नभर करती है—

तार का पदाथ ( नक्रोम ताँबे क तुलना म कह अ धक गरम होता है);
तार क मोटाई;
तार क लंबाई;
व ुत धारा का प रमाण;
धारा प्रवाह क समय अव ध।

सुरक्षा सव प र: पुस्तक स्पष्ट कहती है क यह क्रयाकलाप सदै व एक शक्षक के नदशन म ही कया जाना चा हए।
दो सेल के साथ तार पहले से अ धक गरम होता है, अतः उसे केवल क्षणभर के लए स्पश क जए और कभी
पक ड़ए नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 55 एवं 56
खंड 4.3 बैटरी से व ुत धारा कैसे उत्पन्न होती है?

पाठ्य प्रश्न

प्र.1 हाँ, परंतु क्या आपने कभी सोचा है क इन सेल एवं बैट रय के भीतर वह क्या है जो व ुत उत्पन्न करता है?

प्रत्येक सेल के भीतर भन्न- भन्न पदाथ के दो इलेक् ोड वद्युत-अपघट्य म डू बे रहते ह, और इनके मध्य होने वाली रासाय नक
अ भ क्रया ही वद्युत उत्पन्न करती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

वोल्टीय सेल शुष्क सेल

धात ु की टोपी (+)
इलेक्टोड 1 इलेक्टोड 2

काबन की छड़

िव त-अपघट
ु लेई

िव त-अपघट
ु
(दव)
जस्ते का पात्र
(−)
काँच का पात्र

दोन प्रकार के सेल म वही तीन भाग होते ह — भन्न- भन्न पदाथ के दो इलेक् ोड और वद्युत-अपघट्य। शुष्क सेल म वद्युत-अपघट्य द्रव
नह , गाढ़ नम लेई होती है।

यह व्यवस्था व ुत क्य उत्पन्न करती है: दोन छड़ भन्न- भन्न पदाथ क होनी चा हए। प्रत्येक वद्युत-अपघट्य
— प्रायः दुबल अम्ल अथवा लवण का वलयन — के साथ भन्न प्रकार से अ भ क्रया करती है, और यही भन्नता वह
प्रेरण उत्पन्न करती है जो बाह्य प रपथ म धनात्मक सरे से लप होते हुए ऋणात्मक सरे तक धारा प्रवा हत करती है।
समय के साथ अ भ क्रया म भाग लेने वाले रसायन उपयोग म आ जाते ह और सेल काय करना बंद कर दे ता है; तब
वह न ष्क्रय कहलाता है।

क्या आप जानते ह? इसी कारण ताँबे और लोहे के स्पश से गैल्वेनी के मढक क टाँग फड़क उठ थी, और इसी
कारण वोल्टा को मढक क टाँग के स्थान पर नमक के पानी म भगोया कागज रखने पर भी धारा प्राप्त हुई। वद्युत
मढक से नह , दो धातुओं और द्रव के संयोजन से उत्पन्न हुई थी — और इसी खोज से पहली बैटरी बनी।

प्र.2 क्या हम भी सरलता से उपलब्ध पदाथ से स्वयं का वोल्ट य सेल न मत कर सकते ह?

हाँ — एक न बू, ताँबे का तार और लोहे क क ल पयाप्त ह। ठ क यही आप क्रयाकलाप 4.6 म बनाते ह।

इलेक् ोड: ताँबे का तार और लोहे क क ल — दो भन्न धातुए,ँ जैसा वोल्ट य सेल के लए आवश्यक है।
व ुत-अपघट्य: न बू का रस, जो एक दुबल अम्ल है और वद्युत चालन म सहायता करता है। लवण का वलयन भी उतना ही
उपयुक्त है।
पात्र: स्वयं न बू।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

अनेक न बू क्य जोड़े जाते ह: एक न बू का सेल बहुत कम प्रेरण दे ता है — प्रायः अकेले एल.ई.डी. द प्त करने के
लए पयाप्त नह । पाँच-छह न बुओं को ंखला म, एक के ताँबे को दूसरे क क ल से, जोड़ने पर उनके प्रेरण जुड़
जाते ह और एल.ई.डी. द प्त हो जाती है।

यह क जए: इसे आलू, टमाटर अथवा संतरे के साथ और धातुओं के अन्य युग्म — जस्ता-ताँबा, ऐलु म नयम-ताँबा,
मैग्नी शयम-ताँबा — के साथ दोहराइए। कस युग्म से एल.ई.डी. सबसे अ धक चमकती है?

क्रयाकलाप 4.6 — आइए, नमाण कर — पृष्ठ 56
खंड 4.3.1 वोल्ट य सेल

क्रयाकलाप

प्र.1 पहले न बू के ताँबे का तार और अं तम न बू के लोहे क क ल के मध्य संयोजन तार का उपयोग करके एल.ई.डी.
जो ड़ए। आप क्या अवलोकन करते ह? क्या एल.ई.डी. द प्त हो जाती है?

य द एल.ई.डी. सही दशा म जुड़ी है तो वह द प्त हो जाती है — मंद प्रकाश के साथ, पर कक्ष के छायादार कोने म स्पष्ट दखाई दे ती
है। एक द प्त हुई एल.ई.डी. इं गत करती है क आपका सेल काय कर रहा है।

एल.ई.डी.

ताँबे का तार लोहे की कील

न बू के सेल ताँबे से क ल क ओर ंखला म जोड़े जाते ह; एल.ई.डी. पहले न बू के ताँबे और अं तम न बू क क ल के मध्य लगती है।

यह द प्त क्य होती है: प्रत्येक न बू म ताँबे का तार और लोहे क क ल दो भन्न इलेक् ोड ह तथा न बू का रस
वद्युत-अपघट्य है, अतः प्रत्येक न बू एक छोटा वोल्ट य सेल है। दोन धातुओं पर होने वाली रासाय नक अ भ क्रयाएँ
बाह्य प रपथ म धारा प्रवा हत करती ह और यही धारा एल.ई.डी. को द प्त करती है। कई न बुओं को ंखला म
जोड़ने पर उनके प्रेरण जुड़ जाते ह और एल.ई.डी. द प्त करने के लए पयाप्त हो जाते ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 य द एल.ई.डी. द प्त नह होती है तो इसके सर को उलट द जए। क्या अब एल.ई.डी. द प्त होती है?

हाँ। प रपथ म एल.ई.डी. को उलटकर जोड़ते ही वह द प्त हो जाती है।

दशा क्य महत्त्वपूण है: एल.ई.डी. से वद्युत धारा केवल एक ही दशा म प्रवा हत हो सकती है। जैसा आप पहले
सीख चुके ह, धारा एल.ई.डी. से तभी प्रवा हत होती है जब उसका धनात्मक सरा (लंबा तार) बैटरी के धनात्मक सरे
से और ऋणात्मक सरा (छोटा तार) बैटरी के ऋणात्मक सरे से जुड़ा हो। य द वह उल्ट जुड़ी थी तो कोई धारा
प्रवा हत ही नह हुई — सेल तो आरंभ से ही काय कर रहा था।

संकेत: अतः एल.ई.डी. का द प्त न होना यह प्रमाण नह है क न बू का सेल असफल रहा। यह नष्कष नकालने से
पहले सदै व एक बार एल.ई.डी. उलटकर दे ख ली जए।

ज ासा बनाए रख — पृष्ठ 58–61
अध्याय के अंत के प्रश्न

ज ासा बनाए रख

प्र.1 रक्त स्थान भ रए— (i) वोल्ट य सेल म प्रयुक्त होने वाला वलयन ______________ कहलाता है। (ii) एक
धारावाही कुंडली ______________ क भाँ त व्यवहार करती है।

(i) वोल्टीय सेल में पयुक्त होने वाला िवलयन िव त
ु -
अपघट कहलाता है।

(ii) एक धारावाही कं ु डली च ुंबक की भाँित व्यवहार करती है।

ये उत्तर क्य :

व ुत-अपघट्य — वोल्ट य सेल म दोन इलेक् ोड एक द्रव म आं शक रूप से डू बे रहते ह जो प्रायः दुबल अम्ल
अथवा लवण का वलयन होता है। इलेक् ोड और इसी द्रव के मध्य होने वाली रासाय नक अ भ क्रया वद्युत
उत्पन्न करती है, और इस द्रव को वद्युत-अपघट्य कहते ह।
चुंबक — कुंडली म प्रवा हत धारा चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है। तब कुंडली दक्सूचक सुई को वक्षे पत करती
है, लोहे क क्लप आक षत करती है और छड़ चुंबक क भाँ त उसके उत्तरी एवं द क्षणी ुव भी होते ह। ऐसी
कुंडली वद्युत-चुंबक कहलाती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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mल के उपयोग से
सही वकल्प चु नए— (i) शुष्क सेल, वोल्ट य सेल क तुलना म कम सुवाह्य है। (सत्य/असत्य) (ii) कुंडली तभी
व ुत-चुंबक बनती है जब कुंडली से व ुत धारा प्रवा हत होती है। (सत्य/असत्य) (iii) एकeसे
प्र.2

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l के अ धक कागज-
बना व.cुतo-चुंबक दो सेल क बैटरी के उपयोग से बने उसी व ुत-चुंबक क अपेक्षाgलोहे
em को आक षत करता है। (सत्य/असत्य) a
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क्लप
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कथन उत्तर
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(i) शुष्क से ल , वोल्टीय से ल की अस य त् aशुgष्क सेल म द्रव होता ही नह — उसका वद्युत-अपघट्य जस्ते के बंद पात्र म भरी गाढ़
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तुल ना में कम सुवाह्य है। नम लेई है। वोल्ट य सेल के लए काँच अथवा प्ला स्टक के खुले पात्र म द्रव चा हए जो

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छलक सकता है और जसे सीधा रखकर ले जाना पड़ता है। अतः शुष्क सेल अ धक सुवाह्य
है — इसी लए दै नक उपयोग म उसने वोल्ट य सेल का स्थान लेm
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लया।

. co चुंबकत्व धारा से ही उत्पन्न होता है। धारा रोकते हीaक्षेg
m
seहै जब कुं डली से िव तु धारा
(ii) कुं डली तभी िव तु -चुंबक त् त्र समाप्त हो जाता है और क्लप गर

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स य

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ag पवािहत होती है।
बनती जाती ह — वद्युत-चुंबक एक अस्थायी चुंबक है।

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(iii) एक से ल से बना िव तु -चुंबक अस य त् वास्तव म इसका उल्टा होता है। दो सेल अ धक धारा प्रवा हत करते ह, अतः चुंबक य क्षेत्र
दो से ल ों की बैटरी वाले उसी
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प्रबल होता है और अ धक क्लप थमी रहती ह। एकल सेल कम धारा और दुबल क्षेत्र दे ता
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िव तु -चुंबक से अिधक िक्लपें
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आकिषत करता है।
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o m l a seतार गरम हो जाता है। (ii) तार
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कसी नक्रोम के तार म अल्प समय क े लए व त
ु धारा प्रवा हत क जाती है । (i)

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के नीचे रखे चु ब
ं क य दक्सू चक क सु ई वक्षे पत हो जाती है । सही वकल्प का चयन क जए— (क) केवल

ag वकल्प (i) सही है। (ख) केवल वकल्प (ii) सही है। (ग) वकल्प (i) और (ii) दोन सही ह। (घ) वकल्प (i) और
(ii) दोन सही नही ह।
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com g l a
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सही वकल्प है (ग) वकल्प (i) और (ii) दोन सही ह।
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दोन एक साथ क्य होते ह: एक ही धारा उसी तार म एक ही समय पर दोन प्रभाव उत्पन्न करती है।

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m l as
.co बदलता है और तार गरम हो जाता है। यही क्रयाकलाप 4.5 है।
तापीय प्रभाव — नक्रोम धारा प्रवाह म प्र तरोध उत्पन्न करता है, अतः वद्युत ऊजा का कुछ भाग ऊष्मा म
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se m
g l a
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चुंबक य प्रभाव — वही धारा तार के चार ओर चुंबक य क्षेत्र भी उत्पन्न करती है, अतः नीचे रखे दक्सूचक क
सुई वक्षे पत हो जाती है। यही क्रयाकलाप 4.1 है।
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. c o agl
कोई भी प्रभाव दूसरे को समाप्त नह करता। नक्रोम केवल तापन को सरलता से अनुभव करने योग्य बना दे ता है;

s e m चक भी वक्षे पत होता है।
वह चालक भी भली प्रकार है, अतः दक्सू
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m .
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प्र.4 स्तंभ ‘क’ म दए गए एकांश का मलान स्तंभ ‘ख’ म दए गए एकांश से क जए। स्तंभ ‘क’ — (i) वोल्ट य सेल
(ii) व ुत इस्तरी (iii) नक्रोम तार (iv) व ुत-चुंबक। स्तंभ ‘ख’ — (क) व ुत तापक हेतु सवा धक उपयुक्त
(ख) व ुत धारा के चुंबक य प्रभाव पर काय करती है। (ग) व ुत धारा के तापीय प्रभाव पर काय करती है। (घ)
रासाय नक अ भ क्रयाओं ारा व ुत उत्पन्न करती है।

स्तंभ ‘क’ मलान स्तंभ ‘ख’ कारण

(i) वोल्टीय (घ ) रासाय नक अ भ क्रयाओं ारा वद्युत-अपघट्य म डू बे दो भन्न इलेक् ोड; इनके मध्य क अ भ क्रया
से ल वद्युत उत्पन्न करती है धारा उत्पन्न करती है

(ii) िव तु (ग ) वद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर धारा प्रवा हत होने पर उसका तापन अवयव गरम होता है और तप्त
इस्तरी काय करती है तली कपड़े प्रेस करती है

(iii) िनक्रोम (क ) वद्युत तापक हेतु सवा धक यह अ धक प्र तरोध उत्पन्न करता है, अतः द हुई धारा के लए अ धक
तार उपयुक्त ऊष्मा दे ता है और पघले बना लाल-तप्त हो सकता है

(iv) िव तु - (ख) वद्युत धारा के चुंबक य प्रभाव पर कुंडली म प्रवा हत धारा चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है, अतः कुंडली
चुंबक काय करती है चुंबक क भाँ त व्यवहार करती है

(i) → (घ) (ii) → (ग) (iii) → (क) (iv) → (ख)

प्र.5 सामान्यतः व ुत-तापन यु क्तय म नक्रोम तार का उपयोग कया जाता है क्य क यह— (i) व ुत का सुचालक
है। (ii) कसी न त प रमाण क व ुत धारा के लए अ धक ऊष्मा उत्पन्न करता है। (iii) ताँबे क अपेक्षा सस्ता
है। (iv) व ुत का कुचालक है।

सही उत्तर है (ii) कसी न त प रमाण क वद्युत धारा के लए अ धक ऊष्मा उत्पन्न करता है।

(ii) ही कारण क्य है: समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार क तुलना म नक्रोम का तार अ धक प्र तरोध उत्पन्न
करता है। प्र तरोध जतना अ धक होगा, धारा प्रवा हत होने पर वद्युत ऊजा का उतना ही अ धक भाग ऊष्मा म
प रव तत होगा। अतः समान धारा के लए नक्रोम ताँबे से कह अ धक ऊष्मा दे ता है — तापक, हीटर अथवा इस्तरी
को ठ क यही चा हए।

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वकल्प नणय कारण

(i) िव तु का सुचालक है त्
स य है , पर ताँबा तो और भी अ ा चालक है, फर भी तापन अवयव ताँबे का नह बनाया
कारण नही ं जाता — क्य क वह बहुत कम गरम होता है

(ii) दी हुई धारा के िलए अिधक सही यही गुण इसे तापन अवयव बनाता है
ऊष्मा उत्पन्न करता है

(iii) ताँबे की अपे ा सस्ता है कारण नही ं इसका चयन मूल्य के आधार पर नह , द जाने वाली ऊष्मा के आधार पर होता
है

(iv) िव तु का कु चालक है गल त कुचालक से धारा प्रवा हत ही नह होगी, अतः ऊष्मा भी उत्पन्न नह होगी।
नक्रोम चालक है

प्र.6 व ुत-तापन यु क्तय (जैसे — व ुत कक्ष-तापक अथवा व ुत हीटर) को प्रायः पारंप रक तापन व धय (जैसे
— लकड़ी अथवा चारकोल जलाना) क तुलना म अ धक सु वधाजनक माना जाता है। समाज पर पड़ने वाले
प्रभाव को ध्यान म रखते हुए इस कथन के समथन हेतु कारण द जए।

वद्युत तापन म वद्युत ऊजा तापन अवयव के भीतर ही ऊष्मा म बदलती है, अतः कक्ष म कुछ भी जलाना नह पड़ता। इसी एक
अंतर से उपयोगकताओं के जीवन म बहुत कुछ बदल जाता है।

घर के भीतर स्वच्छ वायु। लकड़ी और चारकोल धुआँ एवं का लख दे ते ह। प्र त दन यह धुआँ साँस के साथ भीतर जाने से
खाँसी और फेफड़ के रोग होते ह, और सवा धक कष्ट चूल्हे के सबसे पास बैठने वाली म हलाओं तथा छोटे ब को होता है।
वद्युत हीटर से धुआँ, का लख अथवा राख कुछ भी नह नकलती।
समय क बचत, वशेषकर बा लकाओं के लए। लकड़ी एकत्र करने और ढोने म प्र त सप्ताह घंट लगते ह और यह काय
प्रायः म हलाओं तथा ब के हस्से आता है — वे घंटे वद्यालय, अध्ययन अथवा उपाजन म लग सकते थे। वद्युत उपकरण के
लए केवल एक स्वच चा हए।
तत्काल एवं नयं त्रत ऊष्मा। स्वच ऑन करते ही ऊष्मा आरंभ हो जाती है, ऑफ करते ही रुक जाती है, और उसे घटाया-
बढ़ाया भी जा सकता है। लकड़ी क आग को जलाना, सँभालना और फर बुझाना पड़ता है।
कम दुघटनाएँ। खुली लौ, उड़ती चगारी और दहकते कोयले नह होते, अतः जलने क घटनाएँ और आग लगने के प्रकरण कम
होते ह — घनी ब स्तय म यह अत्यंत महत्त्वपूण है।
वन एवं ईंधन। कम लकड़ी और चारकोल का अथ है कम वृक्ष कटना, और बाहरी वायु म भी धुआँ न जाना।
स्वच्छ घर एवं बतन। न राख हटानी पड़ती है, न का लख से काले हुए बतन माँजने पड़ते ह।

दूसरा पक्ष भी दे खए: वद्युत का उत्पादन तो कह न कह करना ही पड़ता है। य द वह कोयला जलाकर बनती है तो
प्रदूषण घर से हटकर वद्युत संयंत्र तक चला जाता है — इसी लए अध्याय के अंत म वद्युत श क्त के पयावरण
अनुकूल ोत क बात कही गई है। वद्युत तापन के लए वश्वसनीय आपू त भी आवश्यक है, तथा तार, प्लग एवं
सॉकेट उपकरण क न दष्ट वद्युत-धारा के लए अनुमो दत होने चा हए, अन्यथा वे अ तता पत हो जाते ह।

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प्र.7 चत्र 4.4 (क) का अवलोकन क जए।

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चुंबकीय िदक्सूचक

− +
सेल
क
( )
चत्र 4.4 (क), पृष्ठ 51 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: सेल से संयो जत व ुत-चुंबक के सरे ‘अ’ के समीप रखा चुंबक य
दक्सूचक।

य द इसम कुंडली के समीप रखे दक्सूचक क सुई म वक्षेपण होता है तो— (i) व ुत धारा का पथ दशाने हेतु
आरेख पर तीर का चह्न लगाइए। (ii) स्पष्ट क जए क कुंडली म व ुत धारा प्रवा हत करने पर दक्सूचक सुई
क्य घूमती है? (iii) य द आप बैटरी के सर को उल्टा कर दे ते ह तो पूवानुमान लगाइए क वक्षेप पर क्या प्रभाव
पड़ेगा?

(i) व ुत धारा का पथ। चत्र 4.4 (क) म सेल कुंडली के नीचे है, जसका ऋणात्मक सरा बाईं ओर और धनात्मक सरा दाईं ओर
है। अतः धारा धनात्मक सरे से नकलकर दा हने तार से ऊपर सरे ‘आ’ तक जाती है, कुंडली के फेर से होती हुई ‘आ’ से ‘अ’ क
ओर बहती है, बाएँ तार से नीचे उतरकर ऋणात्मक सरे म प्रवेश करती है। इसी क्रम म पूरे प रपथ पर तीर लगाइए।

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अ आ

िदक्सूचक दि णी उत्तरी

‘अ’ से नीचे धारा ऊपर
आती धारा ‘आ’ की ओर

− +

प्र.7 — धारा धनात्मक सरे से नकलकर सरे ‘आ’ तक जाती है, कुंडली म ‘आ’ से ‘अ’ क ओर बहती है और ऋणात्मक सरे म लौटती
है। सुई का लाल सरा (उत्तरी ुव) ‘अ’ क ओर आक षत होता है, अतः ‘अ’ द क्षणी ुव है।

(ii) दक्सूचक सुई क्य घूमती है। कुंडली के फेर म घूमती धारा चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है, अतः कुंडली अपने दोन सर पर
उत्तरी एवं द क्षणी ुव स हत चुंबक क भाँ त व्यवहार करने लगती है। दक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा चुंबक है। कुंडली के चुंबक य
क्षेत्र म रखी जाने पर वह घूमकर उस क्षेत्र के अनु दश आ जाती है — यही आपको वक्षेपण के रूप म दखाई दे ता है। धारा रोकते ही
क्षेत्र समाप्त हो जाता है और सुई पुनः उत्तर-द क्षण दशा म लौट आती है।
(iii) य द बैटरी के सरे उल्टे कर दए जाएँ। तब धारा कुंडली म वपरीत दशा म घूमेगी, अतः वद्युत-चुंबक के ुव आपस म बदल
जाएँगे — सरा ‘अ’ उत्तरी और सरा ‘आ’ द क्षणी हो जाएगा। इस लए सुई वपरीत दशा म वक्षे पत होगी। वक्षेप का प रमाण
लगभग उतना ही रहेगा, क्य क सेल उलटने से धारा क मात्रा नह बदलती — केवल उसक दशा बदलती है।

मूल वचार: प्रबलता इस पर नभर है क धारा कतनी है (और फेरे कतने ह); ुवता इस पर क वह कस दशा म
बहती है। प रमाण बद लए तो वक्षेप घटे गा-बढ़े गा; दशा बद लए तो वक्षेप उलट जाएगा।

प्र.8 मान ली जए क अध्याय के आरंभ म उ ल्ल खत कहानी म सुमना अपने उ ापक व ुत-चुंबक प्रदश के स्वच
को ऑफ करना भूल जाती है। कुछ समय प ात लोहे क क ल लोहे से बनी कागज- क्लप को नह उठा पाती है
परंतु लोहे क क ल के चार ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उ ापक व ुत-चुंबक ने क्लप को उठाना
क्य बंद कर दया? संभा वत कारण बताइए।

तार अभी भी गरम है, अथात कुछ धारा अब भी प्रवा हत हो रही है — प रपथ टू टा नह है। जो घटा है वह चुंबक य प्रभाव क
प्रबलता है, प रपथ नह ।
संभा वत कारण

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

1. सेल दुबल हो गया है — यही सबसे संभा वत कारण है। लंबे समय तक जुड़ा रहने से सेल के भीतर के रसायन उपयोग म आ
co m
se m.
जाते ह। सेल दुबल हो जाता है, धारा घट जाती है, और कम धारा से बना दुबल चुंबक य क्षेत्र क्लप को उनके अपने भार के

o m l a
.c सं चत होती रही है। कुंडली म लगातार बहुत देर तक धारा प्रवा हत होती रहीaहैgऔर तापीय प्रभाव उस पूरे
वरुद्ध थामे रखने के लए पयाप्त नह रहता। और अ धक समय बीतने पर सेल पूणतः न ष्क्रय हो जाता है।

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e करता है। इस लए कुंडली अब भी गरम है, यद्य प धारा आरंभ क तुलना म बहुत कम हो चुक है। कई मनट तक
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2. इस बीच ऊष्मा

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agगरम रहा तार कुछ समय तक गरम बना रहता है।
समय

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3. कोई संयोजन ढ ला हो सकता है। गरमाहट से टे प नरम पड़ जाता है और ऐंठकर बनाए गए जोड़ ढ ले हो जाते ह; आं शक

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रूप से ढ ला जोड़ केवल थोड़ी-सी धारा जाने दे ता है — तार को गरम रखने भर के लए पयाप्त, क्लप उठाने के लए नह ।
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agसमाप्त नह होते। कुछ उठाने के लए चुंबक य प्रभाव को पयाप्त बड़ी
मुख्य बात: धारा के दोन प्रभाव एक साथ
धारा चा हए, जब क लंबे समय तक बहती अल्प धारा भी तार को गरम रखने के लए पयाप्त है। गरम तार के साथ

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m.
क्लप का गरना ठ क उसी स्थ त का लक्षण है जसम धारा घट गई हो, रुक न हो।

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संकेत: इसी लए क्रयाकलाप 4.2 म चेतावनी द गई है क कुंडली को सेल से कुछ सेकंड से अ धक जोड़े न रख।

a gl उपयोग न होने पर वद्युत-चुंबक तत्काल ऑफ कर द जए — इससे सेल भी बचता है और कुंडली भी ठं डी रहती है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.9 चत्र 4.12 (क) और (ख) म से कस चत्र म स्वच बंद (ऑन) होने पर एल.ई.डी. द प्त होगी?

ताँबे की पत्ती
लोहे की कील
नी ंबू का रस

(क)

ताँबे की पत्ती
लोहे की कील
शुद्ध जल

(ख)
चत्र 4.12, पृष्ठ 60 — पुनःआरे खत: एल.ई.डी., स्वच तथा दो इलेक् ोड (लोहे क क ल एवं ताँबे क पत्ती) वाला वही
प रपथ, जो (क) न बू के रस म और (ख) शुद्ध जल म डु बोया गया है।

एल.ई.डी. चत्र (क) म द प्त होगी — जस बीकर म न बू का रस है। चत्र (ख) म, जहाँ शुद्ध जल है, वह द प्त नह होगी।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्रकरण बीकर म द्रव क्या यह व ुत-अपघट्य है? एल.ई.डी.

(क) नीब
ं ू का रस हाँ — यह द ुबल अम्ल है प्
द ी त होगी

(ख) शुद्ध जल नही ं प्
द ी त नही ं होगी

कारण: दोन बीकर म लोहे क क ल और ताँबे क पत्ती ह — भन्न- भन्न धातुओं के दो इलेक् ोड। परंतु यह वोल्ट य
सेल का केवल आधा भाग है; शेष आधा वद्युत-अपघट्य है। न बू का रस दुबल अम्ल है, अतः (क) म वोल्ट य सेल के
तीन भाग पूरे हो जाते ह: दोन धातुओं पर रासाय नक अ भ क्रयाएँ होती ह, प रपथ म धारा प्रवा हत होती है और
एल.ई.डी. द प्त हो जाती है। शुद्ध जल वद्युत-अपघट्य नह है, अतः (ख) म न ऐसी अ भ क्रया होती है और न जल
स्वयं धारा जाने दे ता है। स्वच बंद करने से कुछ नह बदलता।

यह क जए: शुद्ध जल वाले बीकर म एक चम्मच साधारण नमक घोलकर पुनः स्वच बंद क जए। लवण का
वलयन वद्युत-अपघट्य है, अतः अब एल.ई.डी. द प्त होनी चा हए — इससे सद्ध होता है क दोष धातुओं म नह ,
द्रव म था।

प्र.10 नेहा ठ क वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रयाकलाप 4.4 म ली गई थी कतु वह इसके भीतर से लोहे क क ल को
बाहर नकाल दे ती है जससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दक्सूचक सुई को
वक्षे पत करेगी? य द हाँ, तो क्या वक्षेपण पहले क तुलना म अ धक होगा अथवा कम?

हाँ, कुंडली अब भी दक्सूचक को वक्षे पत करेगी — परंतु वक्षेपण पहले क तुलना म कम होगा, जब लोहे क क ल भीतर
थी।

यह अब भी क्य काय करती है: चुंबक य क्षेत्र कुंडली के फेर म घूमती धारा से उत्पन्न होता है और धारा म कोई
प रवतन नह हुआ है। यह आपने क्रयाकलाप 4.3 म स्वयं दे खा था: चत्र 4.3 (ग) क स्थ त म कुंडली केवल
कागज के बेलन पर लपेट थी और तब भी दोन दक्सूचक क सुइयाँ वक्षे पत हुई थ — क ल प्र वष्ट करने से पहले
ही।

यह अब दुबल क्य है: लोहा चुंबक य पदाथ है। कुंडली के क्षेत्र के भीतर रखी क ल स्वयं चुंबक बन जाती है और
अपना चुंबकत्व कुंडली के चुंबकत्व म जोड़ दे ती है। क ल बाहर नकालते ही यह अ त रक्त योगदान समाप्त हो जाता
है और केवल कुंडली का अपना क्षेत्र शेष रहता है। अतः सुई घूमती तो है, पर कम कोण से — और संभव है क
कुंडली अब कागज- क्लप न थाम सके।

स्वयं जाँ चए: कागज पर सुई क स्थर स्थ त अं कत क जए, फर क ल स हत और क ल र हत वक्षे पत स्थ तयाँ
अं कत क जए। इन दोन कोण का अंतर ही लौह क्रोड का योगदान है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.11 चत्र 4.13 म दशाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलु म नयम एवं नक्रोम क बनी एक जैसी आकृ त और
आकार क चार कुंड लयाँ ह।

लोहा ताँबा

+ − + −

(क) (ख)

ऐलुिमिनयम िनक्रोम

+ − + −

(ग) (घ)

चत्र 4.13, पृष्ठ 60 — पुनःआरे खत: चार एक जैसे प रपथ, प्रत्येक म एक सेल, एक स्वच और ना मत धातु क एक
कुंडली।

जब कुंड लय से व ुत धारा प्रवा हत क जाती है तो कुंड लय के समीप रखी दक्सूचक सुइयाँ वक्षेप दशाएँगी
— (i) केवल प रपथ (क) म (ii) केवल प रपथ (क) और (ख) म (iii) केवल प रपथ (क), (ख) और (ग) म
(iv) सभी चार प रपथ म

सही उत्तर है (iv) सभी चार प रपथ म।

कारण: लोहा, ताँबा, ऐलु म नयम और नक्रोम — चार धातुए ँ ह और चार वद्युत के चालक ह। अतः प्रत्येक स्वच
बंद करने पर चार म से हर कुंडली म धारा प्रवा हत होगी — और कोई भी धारावाही कुंडली अपने चार ओर
चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है। इस लए चार दक्सूचक क सुइयाँ वक्षे पत ह गी।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

कुंडली धारा प्रवा हत होगी? चुंबक य क्षेत्र बनेगा? दक्सूचक वक्षे पत होगा?

(क) लोहा हाँ हाँ हाँ

(ख) ताँबा हाँ हाँ हाँ

(ग) ऐलुिमिनयम हाँ हाँ हाँ

(घ) िनक्रोम हाँ हाँ हाँ

क्या आप जानते ह? चार वक्षेप बराबर ह , यह आवश्यक नह । नक्रोम सवा धक प्र तरोध उत्पन्न करता है, अतः
उसम सबसे कम धारा जाती है और वक्षेप सबसे कम होता है — जब क वह गरम सबसे अ धक होता है। चुंबक य
प्रभाव चार म उप स्थत है; केवल उसका प रमाण भन्न है।

खोज, अ भक ल्पत कर एवं चचा कर — पृष्ठ 61
व ान, समाज एवं अंतर वषयक प रयोजनाएँ

खोज, अ भक ल्पत कर एवं चचा कर

प्र.1 25, 50, 75 और 100 फेर वाली कुंड लयाँ बनाइए। उन्ह एक-एक करके सेल से संयो जत क जए। सभी
प्रकरण म उनके सापेक्ष एक ही स्थ त म र खए चुंबक य दक्सूचक म सुई का वक्षेपण नोट क जए। अपने
अवलोकन का अ भलेखन क जए। व ुत-चुंबक क प्रबलता पर कुंडली के फेर क संख्या के प्रभाव के संबंध म
नष्कष नका लए।

नष्पक्ष परीक्षण कैसे कर। प्रत्येक प्रकरण म केवल एक ही बात बदलनी चा हए — फेर क संख्या।

हर बार वही सेल, वही व ुतरोधी तार और वही कागज का बेलन प्रयोग क जए।
दक्सूचक क स्थ त मेज पर चॉक से अं कत कर ली जए और उसे कभी न हलाइए; कुंडली के सरे से दूरी भी वही र खए।
पहले सुई क स्थर दशा नोट क जए, फर वक्षे पत दशा, और घूमा हुआ कोण अ भले खत क जए।
प्रत्येक बार केवल कुछ सेकंड के लए ही संयो जत क जए, जससे प्रयोग के दौरान सेल दुबल न हो जाए।

फेर क संख्या दक्सूचक सुई का वक्षेपण थमी हुई क्लप क संख्या

25 सबसे कम सबसे कम

50 अिधक अिधक

75 और अिधक और अिधक

100 सव िधक सव िधक

नष्कष। धारा समान रखने पर वद्युत-चुंबक क प्रबलता कुंडली के फेर क संख्या बढ़ने के साथ बढ़ती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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ऐसा क्य होता है: प्रत्येक फेरे म वही धारा प्रवा हत होती है और प्रत्येक अपना चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करता है। सभी

m a s emअ धक फेर का
cत्रoम अ धक योगदान का जुड़ना, अतः कुल क्षेत्र प्रबल हो जाता है। agl
फेरे एक ही दशा म लपेटे होने के कारण ये सभी क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दशा म जुड़ जाते ह।
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अथ है उसी क्षे

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aसंgकl े त: नष्पक्ष परीक्षण के लए फेरे बढ़ाते समय कुंडली क लंबाई वही रहनी चा हए — अ त रक्त फेर को बेलन

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पर लंबाई म फैलाने के स्थान पर परत म लपे टए।

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समान लंबाई एवं भन्न- भन्न मोटाई के दो पतले नक्रोम के तार ली जए ( जनम एक तार क मोटाई दूसरी तार क

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प्र.2

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मोटाई क लगभग दोगुनी हो, जैसे — 0.3 मलीमीटर और 0.6 मलीमीटर)। उन्ह एक-एक करके एक ऐसे प रपथ
म संयो जत क जए जसम एक स्वच और एक सेल हो तथा प्रत्येक स्थ त म 30 सेकंड m
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omकराइए। इन तार को क्षण भर के लए स्पश क जए। कौन-सा तार अagधकlaगरम होता है? अब इसी
के लए व ुत धारा

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प्रवा हत

a emक्रयाकलाप को समान व्यास परंतु भन्न- भन्न लंबाई के दो नक्रोम के तार के साथ दोहराइए। अपने क्रयाकलाप
s का एक प्र तवेदन तैयार क जए।
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यह क्रयाकलाप केवल अपने शक्षक के नदशन मm
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a कर द जए।
ही क जए। प्रत्येक तार को क्षण भर के लए ही स्पश क जए, कभी
पक ड़ए नह , और 30 सेकंड पूरे होते ही स्वच lऑफ
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भाग 1 — समान लंबाई, भन्न मोटाई। पतला (0.3 mm) तार अ धक गरम होता है।

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भाग 2 — समान मोटाई, भन्न लंबाई। समान 30 सेकंड क तुलना म लंबा तार अ धक गरम होता है।

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प्रकरण क्या बदला गया कौन-सा अ धक गरम लगा

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agl 0.3 mm और 0.6 mm, ल ंबाई समान 0.3 mm वाल ा (पतल ा) तार

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2 , मोटाई समान

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छोटा और ल ंबा ल ंबा तार

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g l as म उत्पन्न ऊष्मा तार के पदाथ, मोटाई, लंबाई एवं धारा प्रवाह क समय
कारण: अध्याय बताता है क कसी तार
a पदाथ एवं लंबाई के मोटे तार क तुलना म पतला तार धारा प्रवाह म अ धक
अव ध पर नभर करती है। समान

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प्र तरोध उत्पन्न करता है, अतः उसम वद्युत ऊजा का अ धक भाग ऊष्मा म बदलता है। इसी प्रकार समान मोटाई के

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छोटे तार क तुलना म लंबा तार अ धक प्र तरोध उत्पन्न करता है। यही कारण है क हीटर का तापन अवयव छोट

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मोट छड़ के स्थान पर लंबे, पतले नक्रोम तार क कुंडली का बनाया जाता है।
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a s emप्र तवेदन कैसे लख। उ ेश्य ल खए; तार के सही माप स हत सामग्री क सूची द जए; व ध ल खए; प्रेक्षण क सारणी द जए;
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फर प्रत्येक भाग का नष्कष एक-एक वाक्य म ल खए और अंत म बरती गई सावधानी ल खए।

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सुरक्षा सव प र: धारा को नधा रत 30 सेकंड से अ धक प्रवा हत न क जए, और कसी भी प्रकार क क्ष त से बचने
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के लए तार को अ धक समय तक स्पश न क जए।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 व भन्न फल एवं स ब्जय का उपयोग करके व ुत सेल बनाने का प्रयास क जए। व भन्न धातुओं के इलेक् ोड
का उपयोग करके व ुत सेल बनाने का प्रयास क जए। अपने प्रेक्षण के आधार पर एक सं क्षप्त प्र तवेदन तैयार
क जए।

व ध। क्रयाकलाप 4.6 का न बू सेल पुनः बनाइए, परंतु एक बार म केवल एक ही बात बद लए।

फल अथवा सब्जी बदलना: इलेक् ोड वही (ताँबे का तार और लोहे क क ल) रखते हुए न बू, संतरा, टमाटर, आलू, क ा
आम और लवण के वलयन का प्याला आज़माइए।
धातुए ँ बदलना: न बू वही रखते हुए अध्याय म बताए युग्म आज़माइए — जस्ता या ताँबा, जस्ता या चाँद , ऐलु म नयम या
ताँबा, लोहा या ताँबा, मैग्नी शयम या ताँबा और सीसा या ताँबा।
प्रत्येक प्रकरण को एल.ई.डी. क चमक से आँ कए। वही एल.ई.डी., ंखला म उतने ही सेल और इलेक् ोड के बीच वही दूरी
र खए, अन्यथा तुलना नरथक हो जाएगी।

आप क्या आज़माते ह क्या अपे क्षत है कारण

रसीले , ख े फल — नी ंबू, एल ई डी . . . अच्छी तरह इनका रस अपेक्षाकृत प्रबल दुबल अम्ल है, अतः अ ा वद्युत-अपघट्य है
कच्चा आम, संतरा प्
द ी त होती है

आलू, टमाटर एल ई डी . . . द ीप्त तो होती इनका रस दुबल वद्युत-अपघट्य है, अतः उत्पन्न प्रेरण कम होता है
है, पर पायः मंद

एक ही धातु के दो इले क्टोड एल ई डी . . . द ीप्त नही ं होती सेल के लए दो भन्न धातुएँ आवश्यक ह; एक जैसी छड़ एक जैसी अ भ क्रया
करती ह और कोई प्रेरण उत्पन्न नह होता

जस्ता-ताँबा, मैग्नीिशयम-ताँबा पायः सबसे अिधक चमक ताँबा धनात्मक इलेक् ोड क भाँ त और जस्ता ऋणात्मक इलेक् ोड क भाँ त
काय करता है, जो उनके रासाय नक गुणधम के कारण है

जस वचार क जाँच हो रही है: इनम से प्रत्येक वही वोल्ट य सेल है — दो भन्न इलेक् ोड और एक वद्युत-
अपघट्य। केवल वद्युत-अपघट्य बदलकर, अथवा केवल धातुएँ बदलकर, आप यह पता लगाते ह क सेल कतनी
वद्युत उत्पन्न करेगा, यह कस भाग से तय होता है।

प्र तवेदन हेतु नमूना नष्कष: “ कसी भी रसीले फल अथवा सब्जी से सेल बनाया जा सकता है, बशत दोन इलेक् ोड भन्न धातुओं
के ह । ख े रस फ के रस क तुलना म बेहतर काय करते ह, और जस्ता-ताँबा युग्म से एल.ई.डी. सबसे अ धक चमक । एक ही धातु
के दो इलेक् ोड से कभी कोई धारा प्राप्त नह हुई।”

संकेत: एल.ई.डी. द प्त न हो तो पहले उसे उलटकर दे खए, फर ंखला म एक और फल जो ड़ए। जस फल म
धातु के इलेक् ोड लगाए गए ह उसे खाइए नह ।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 4 वद्युत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय — एक नज़र म
जब कसी चालक (जैसे — तार) से वद्युत धारा प्रवा हत होती है तो यह उसके चार ओर चुंबक य क्षेत्र उत्पन्न करती है। इसे
व ुत धारा का चुंबक य प्रभाव कहते ह। इसी कारण धारावाही तार के नीचे रखी दक्सूचक सुई वक्षे पत हो जाती है और
धारा रुकते ही चुंबक य क्षेत्र समाप्त हो जाता है।
चुंबक क भाँ त व्यवहार करने वाली धारावाही कुंडली व ुत-चुंबक कहलाती है। कुंडली का प्रत्येक फेरा अपना चुंबक य क्षेत्र
उत्पन्न करता है और सभी फेरे एक ही दशा म लपेटे होने के कारण ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दशा म जुड़ जाते ह —
इसी लए 50 फेर क कुंडली एक सीधे तार से कह अ धक प्रबल होती है।
छड़ चुंबक क भाँ त वद्युत-चुंबक के भी दो ुव — उत्तर एवं द क्षण होते ह। धारा का प रमाण बढ़ाकर (अ धक सेल) अथवा
फेर क संख्या बढ़ाकर इसक प्रबलता बढ़ाई जा सकती है तथा धारा क दशा उलटकर इसके ुव उत्क्र मत कए जा सकते
ह। यह एक अस्थायी चुंबक है — धारा प्रवा हत होने तक ही चुंबक रहता है।
अ धकांश व्यावहा रक वद्युत-चुंबक म लौह क्रोड होता है। लोहा चुंबक य पदाथ है, अतः कुंडली के चुंबक य क्षेत्र म रखी लोहे
क क ल स्वयं चुंबक बन जाती है और उसका चुंबकत्व कुंडली के चुंबकत्व म जुड़ जाता है। क्रेन से लटके उ ापक व ुत-
चुंबक इसी सद्धांत से लोहे-इस्पात का भार उठाते और छोड़ते ह।
चालक धारा प्रवाह म प्र तरोध उत्पन्न करता है जसके कारण वद्युत ऊजा का कुछ भाग तापीय ऊजा म बदल जाता है — यही
व ुत धारा का तापीय प्रभाव है। समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार क तुलना म नक्रोम अ धक प्र तरोध उत्पन्न
करता है, इसी लए कक्ष-तापक, हीटर, केतली, इस्तरी, नमज्जन छड़ और हेयर ायर का तापन अवयव नक्रोम का बनता है।
वोल्ट य (गैल्वे नक) सेल म भन्न- भन्न पदाथ के दो इलेक् ोड व ुत-अपघट्य — कसी दुबल अम्ल अथवा लवण के
वलयन — म डू बे रहते ह। इनके मध्य होने वाली रासाय नक अ भ क्रया वद्युत उत्पन्न करती है। रसायन समाप्त होने पर सेल
न ष्क्रय हो जाता है। ताँबे के तार और लोहे क क ल स हत एक न बू भी कायशील वोल्ट य सेल है।
शुष्क सेल म जस्ते का पात्र ऋणात्मक सरा तथा धातु क टोपी से ढक कद्र य काबन क छड़ धनात्मक सरा होती है और
चार ओर लेई जैसा वद्युत-अपघट्य भरा होता है। शुष्क सेल केवल एक बार उपयोग म आता है, जब क पुनः आवेशनीय
बैट रय को अनेक बार आवे शत करके उपयोग कया जा सकता है — पर वे भी क्ष रत होती ह और उनका नस्तारण ई-
कचरा पुनचक्रण सु वधा म ही करना चा हए।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द इसका अथ अध्याय म कहाँ दै नक जीवन का उदाहरण

चुंबक य क्षेत्र चुंबक अथवा धारावाही तार के चारों ओर का वह ेत्र खंड 4.1, पृष्ठ 48 चुंबक के समीप लाने पर दक्सूचक सुई
िजसमें उसका चुंबकीय पभाव अनुभव िकया जा सकता का घूमना
है

वद्युत धारा का धारा पवािहत होने पर चालक के चारों ओर चुंबकीय खंड 4.1, पृष्ठ 48 स्वच ऑन करते ही तार के नीचे रखी
चुंबक य प्रभाव ेत्र का उत्पन्न होना दक्सूचक सुई का वक्षे पत होना

वद्युत-चुंबक चुंबक की भाँित व्यवहार करने वाली धारावाही कुं डली खंड 4.1.1, पृष्ठ 50 वद्युत घंट , पंखे एवं लाउडस्पीकर क
कुंडली

क्रोड कुं डली के भीतर रखी लोहे की छड़ अथवा कील जो खंड 4.1.1, पृष्ठ 50 क्रयाकलाप 4.3 म कुंडली के भीतर
िव तु -चुंबक को अिधक पबल बनाती है प्र वष्ट लोहे क क ल

वद्युत-चुंबक के कुं डली के दो िसरे — उत्तर एवं दि ण; धारा की िदशा क्रयाकलाप 4.4, चत्र 4.4 म कुंडली के सरे ‘अ’ एवं ‘आ’
ुव उलटने पर इनकी धु वता उत्क्रिमत हो जाती है पृष्ठ 50–51

उ ापक वद्युत- क्रेन से लटका पबल िव तु -चुंबक जो धारा ऑन करने खंड 4.1.2, पृष्ठ 52 कचरा स्थल एवं इस्पात कारखान म
चुंबक पर उठाता और ऑफ करने पर छोड़ दे ता है लोहे का कबाड़ छाँटना

प्र तरोध धारा पवाह में चालक ारा उत्पन्न िकया गया िवरोध खंड 4.2, पृष्ठ 53 समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे क
तुलना म नक्रोम अ धक प्र तरोध दे ता है

वद्युत धारा का धारा पवािहत होने के कारण चालक में ऊष्मा का उत्पन्न खंड 4.2, पृष्ठ 53 तापद प्त लप का तंतु; क्रयाकलाप म तार
तापीय प्रभाव होना के सर का गरम होना

तापन अवयव उपकरण की वह छड़ अथवा तार की कुं डली िजसका पृष्ठ 53 वद्युत कक्ष-तापक अथवा हीटर क लाल-
गरम होना अभीष्ट होता है तप्त कुंडली

इलेक् ोड से ल में िव तु -अपघट में डू बी िभन्न-िभन्न पदाथ ं की खंड 4.3.1, पृष्ठ 55 न बू सेल म ताँबे का तार और लोहे क
( वद्युताग्र) दो धातु छड़ों में से एक कल

वद्युत-अपघट्य वह द व अथवा ले ई — पायः दुबल अम्ल या लवण का खंड 4.3.1, पृष्ठ 55 न बू का रस; लवण का वलयन; शुष्क
िवलयन — िजसमें इले क्टोड डू बे रहते है ं सेल क नम लेई

न ष्क्रय सेल वह से ल िजसके रसायन उपयोग में आ चुके हों और पृष्ठ 55 टॉच का वह सेल जो अब लप को द प्त
जो अब िव तु आपूित न कर सके नह करता

शुष्क सेल के वल एक बार उपयोग में आने वाला से ल िजसका खंड 4.3.2, पृष्ठ 57 द वार घड़ी अथवा ट .वी. रमोट का सेल
िव तु -अपघट द व नही ं, गाढ़ ी नम ले ई होती है

पुनः आवेशनीय वह बैटरी िजसे अनेक बार आवेिशत करके पुनः उपयोग खंड 4.3.3, पृष्ठ 57 मोबाइल, लैपटॉप, कैमरा, इनवटर एवं
बैटरी में लाया जा सकता है वद्युत वाहन क बैटरी

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Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages38
Languagehindi
Updated19 Sep 2026