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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: बल को जान
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
62 – 79 27 67 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 53 pages
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: बल को जान
कक्षा 8 व ान (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के अध्याय 5 बल को जान के प्रत्येक प्रश्न के वस्तृत NCERT हल। खोजबीन और वचार कर के सभी
बदु, तेरह क्रयाकलाप (5.1 से 5.13), एक सोपान ऊपर बॉक्स, पृष्ठ 62 से 76 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, ज ासा बनाए रख के दस प्रश्न तथा
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर क प रयोजनाएँ — प्रत्येक उत्तर म बल के नाम, उनक दशाएँ और उसके पीछे का कारण स्पष्ट रूप से
समझाया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 8) 62 – 79
खं ड प्रश्न
27 67
माध्यम
हन्द
खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 62
अध्याय का आरंभ — सोनाली और रा गनी क साइ कल यात्रा से उठे प्रश्न
खोजबीन और वचार कर
प्र.1 समतल भू म क तुलना म पहाड़ी पर चढ़ते समय साइ कल चलाना अपेक्षाकृत अ धक क ठन क्य लगता है?
क्य क ढलान पर चढ़ते समय आपको पृथ्वी के खचाव के वरुद्ध पैडल मारने पड़ते ह, जब क समतल भू म पर ऐसा नह होता।
समतल सड़क पर पृथ्वी साइ कल और आपको सीधे नीचे, सड़क क ओर ख चती है। यह खचाव आपक आगे क ग त का वरोध
नह करता — वहाँ आपके पेशीय बल को केवल सड़क और प हय का घषण तथा वायु का घषण बल ही पार करना होता है।
पहाड़ी पर पैडल का प्रत्येक चक्कर आपको और साइ कल को थोड़ा और ऊँचा उठाता है, अत: अब आपके पेशीय बल को
गुरुत्वाकषण बल के वरुद्ध भी काय करना पड़ता है। उसी चाल के लए पैडल पर कह अ धक बड़ा अपकषण चा हए — यही
क ठन लगता है।
ऐसा क्य होता है: कसी वस्तु को ग त दे ने के लए बल आवश्यक है। ढलान जतनी तीव्र होगी, पृथ्वी के खचाव का
उतना ही बड़ा भाग ढलान के साथ पीछे क ओर काय करके आपका वरोध करेगा। साथ ही पहाड़ी सड़क प्राय:
ऊबड़-खाबड़ होती ह, जहाँ घषण भी अ धक होता है।
स्वयं जाँ चए: कहानी का अगला भाग दे खए। ढलान से नीचे उतरते समय दोन पैडल मारना बंद कर दे ती ह फर भी
साइ कल तीव्र ग त से नीचे आती ह। जो गुरुत्वाकषण बल चढ़ाई पर वरोध कर रहा था, वही अब ग त क दशा म
काय कर रहा है, अत: पेशीय बल क आवश्यकता ही नह रहती।
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प्र.2 सूखी सतह क तुलना म गीली सतह पर फसलना अ धक सरल क्य होता है?
क्य क जल दोन सतह क सूक्ष्म अ नय मतताओं को भर दे ता है और उन्ह थोड़ा अलग रखता है, जससे पैर और फश के बीच का
घषण बल बहुत कम हो जाता है।
जो फश दे खने म पूणत: चकना लगता है उसम भी बड़ी संख्या म सूक्ष्म उभार और ग े होते ह ( चत्र 5.6), और यही आपके जूते के
तले म भी होते ह। जब दोन दबकर संपक म आते ह तो ये अ नय मतताएँ एक-दूसरे के पाश म फँस जाती ह और फसलने का
वरोध करती ह — यही वरोध घषण है और यही चलते समय पैर क पकड़ बनाता है। जल क एक पतली परत ग को भर दे ती है
और दोन सतह को अलग-अलग रखती है। अब अ नय मतताएँ आपस म फँस नह पात , घषण तेजी से घट जाता है, पैर पकड़
बनाने के ान पर फसल जाता है और आप गर पड़ते ह।
क्या आप जानते ह? इसी लए स्नानघर क टाइल खुरदरी और खाँचेदार बनाई जाती ह तथा टायर पर गहरे खाँचे
काटे जाते ह — इन खाँच से जल नकल जाता है और उभरे भाग सड़क को स्पश करके घषण बनाए रखते ह।
प्र.3 जब हमारा झूला अपने दोलन के उच्चतम बदु पर पहुँचकर नीचे क ओर आने लगता है तो हम ‘हल्केपन’ क या
‘तैरने’ जैसी अनुभू त क्य होती है?
क्य क उस क्षण आप और झूले क सीट एक साथ नीचे गर रहे होते ह, अत: सीट आपको पहले जतने प्रबल बल से ऊपर क ओर
नह धकेल पाती — और वास्तव म हम अनुभव सीट के इसी अपकषण का होता है, पृथ्वी के खचाव का नह ।
झूले पर र बैठे रहने पर पृथ्वी आपको नीचे क ओर ख चती है और सीट उतने ही बल से आपको ऊपर क ओर धकेलती है; दोन
बल एक-दूसरे को संतु लत करते ह और आपको सीट के माध्यम से अपना सामान्य भार अनुभव होता है। उच्चतम बदु पर झूला क्षण
भर के लए रुकता है और फर नीचे आने लगता है। नीचे आते समय सीट आपके नीचे से हटती जाती है और उसका ऊपर क ओर
अपकषण बहुत कम हो जाता है। नीचे से कम अपकषण ही हल्केपन के रूप म अनुभव होता है — ठ क वैसे ही जैसे नीचे जाती हुई
लफ़्ट के आरंभ म लगता है।
ध्यान द जए, क्या नह बदला: आपका द्रव्यमान वही है और पृथ्वी का आप पर खचाव (आपका भार) भी वही
है। केवल सीट का संपक बल बदला है। हल्का अनुभव होना और भार का कम हो जाना दो अलग बात ह।
प्र.4 अपने प्रश्न को साझा क जए
ऐसे प्रश्न बनाइए जो क्य , कैसे, य द ऐसा हो तो या कहाँ से आरंभ होते ह — ऐसे प्रश्न जनके उत्तर म कसी बल का नाम और
उसक दशा बतानी पड़े। इन्ह अपनी अभ्यास पु स्तका म ल खए और कक्षा म साझा क जए।
नमूना प्रश्न:
हवा साइ कल के प हय को स्पश नह करती, फर भी हवा के वरुद्ध चलते समय पैडल अ धक जोर से क्य मारने पड़ते ह?
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य द घषण सदै व ग त को धीमा ही करता है तो हम चल कैसे पाते ह?
कसी ऊँचे पवत क चोट पर उसी वस्तु को तौलने पर कमानीदार तुला का पाठ्यांक क्या बदलेगा?
चुंबक लोहे क क ल को बना स्पश कए ख च लेता है। क्या क ल भी चुंबक को ख चती है?
लोहे का वशाल जहाज तैरता है परंतु लोहे क छोट -सी क ल डू ब जाती है — ऐसा क्य ?
संकेत: इस अध्याय के सव त्तम प्रश्न वे ह जनका परीक्षण कया जा सके। ऊपर दए पाँच म से दो प्रश्न क जाँच
आप कमानीदार तुला, एक चुंबक और जल से भरी बाल्ट क सहायता से अपनी कक्षा म ही कर सकते ह।
क्रयाकलाप 5.1— आइए, खोज कर — पृष्ठ 63
5.1 बल क्या है?
क्रयाकलाप
प्र.1 गत्ते का एक बड़ा डब्बा ली जए। इस डब्बे का ान प रव तत करने के लए आप अपने म स्तष्क म आने वाली
सभी यु क्तय का प्रयोग क जए।
आप जतनी भी यु क्तयाँ सोचगे, वे सब अंतत: या तो अपकषण (धक्का) ह गी या अ भकषण ( खचाव)।
आप डब्बे के साथ क्या करते ह अपकषण या अ भकषण? कौन-सी दो वस्तुए ँ परस्पर क्रया कर रही ह
दोन हाथ से दबाकर फश पर सरकाना अपकषण आपके हाथ और िड बा ब्
रस्सी बाँधकर अपनी ओर ख चना अिभकषण र सी और िड बा
स् ब्
उठाकर दूसरी जगह ले जाना अिभकषण (ऊपर की ओर) आपकी भुजाएँ और िड बा ब्
तरछा करके कनारे- कनारे लुढ़काना अपकषण आपका हाथ और िड बा ब्
छड़ी से खसकाना अपकषण (अपत्यक्ष संपक ) छड़ ी और िड बा
ब्
पैर से ठोकर मारना अपकषण आपका पैर और िड बा ब्
महत्त्वपूण बात: प्रत्येक पं क्त म दो वस्तुएँ परस्पर क्रया कर रही ह और डब्बा तभी हलता है जब उनम से एक
दूसरी को धकेलती या ख चती है। कसी वस्तु पर लगाए गए इसी अपकषण या अ भकषण को व ान म बल
कहा जाता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान
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क्या आपने चत्र 5.1 म दशाई गई यु क्तय के अ त रक्त कसी अन्य यु क्त से डब्बे का ान प रव तत कया है?
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चत्र 5.1, पृष्ठ 63 — पुनर चत रेखा चत्र: एक डब्बे को व भन्न व धय का उपयोग करके व
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हाँ, और भी अनेक यु क्तयाँ संभव ह। चत्र 5.1 म इनमm
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से केवल तीन दशाई गई ह — (क) धक्का दे कर, (ख) ख चकर, और
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(ग) ऊपर उठाकर ले जाना।
अन्य यु क्तयाँ ह — डब्बे को कनारे- कनारे लुढ़काना, एक ओर रस्सी बाँधकर घसीटना, कपड़े पर रखकर सरकाना, छड़ी से
खसकाना अथवा पैर से ठोकर मारना।
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mतो उसे अपक षत कया या
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परंतु आपने कोई भी यु क्त अपनाई हो, आपने डब्बे के साथ केवल दो म से एक ही काम कया — या
अ भक षत
. c omकया। ऊपर उठाना भी ऊपर क दशा म लगाया गया अ भकषण ही है। यहीagइसlaक्रयाकलाप का सार है — आप
s e m भी यु क्तयाँ सोच ल, वे सब अपकषण या अ भकषण ही नकलगी, और कसी वस्तु पर लगाए गए अपकषण या अ भकषण
laको ही बल कहा जाता है।
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क्रयाकलाप 5.2— आइए, व ष
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5.2 कसी वस्तु पर लगाया गया बल उस पर क्या प्रभाव डालता है? · ता लका 5.1
क्रयाकलाप
प्र.1 ऐसी तय के वषय म वचार क जए जहाँ बल (अपकषण या अ भकषण) आरो पत होता है और उन्ह
ता लका 5.1 म सूचीबद्ध क जए। प्रत्येक त का व ेषण क जए और बल के प्रभाव को ता लका 5.1 म
ल खए। कुछ तयाँ और उनके प्रभाव आपके लए पहले से ही ता लका म अं कत कए गए ह।
ता लका 5.1 — व भन्न क्रयाएँ और उनके प्रभाव
क्र.सं. क्रया अपकषण/ प्रभाव
अ भकषण
1. आपक चलती साइ कल को रोकने के लए अ भकषण साइ कल का रुकना या इसक
आपके मत्र ारा इसे पीछे से पकड़ना चाल का कम होना
2. ग तशील गद को बल्ले से मारना अपकषण ग तशील गद क दशा म
प रवतन
3. एक फूले हुए गुब्बारे को दबाना अपकषण गुब्बारे के आकार म प रवतन
……………… ……………… ………………
पूण क गई ता लका 5.1 इस प्रकार है। पहली तीन पं क्तयाँ पुस्तक म पहले से द गई ह; शेष दै नक जीवन से ली गई ह।
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क्र.सं. क्रया अपकषण / अ भकषण प्रभाव
1. आपक चलती साइ कल को रोकने के लए आपके अिभकषण साइिकल का कना या इसकी चाल
रु
मत्र ारा इसे पीछे से पकड़ना का कम होना
2. ग तशील गद को बल्ले से मारना अपकषण गितशील गेंद की िदशा में पिरवतन
3. एक फुलाए हुए गुब्बारे को दबाना अपकषण गु बारे के आकार में पिरवतन
ब्
4. भू म पर रखी फुटबॉल को कक मारना अपकषण िवरामाव था में रखी गेंद गित करने
स्
लगती है
5. मेज क दराज खोलना अिभकषण दराज िवरामाव था से गित में आ
स्
जाती है
6. रबर बड ख चना अिभकषण आकार में पिरवतन (वह लंबा और
पतला हो जाता है)
7. बेलन से रोट बेलना अपकषण आटे के आकार में पिरवतन
8. ऑटो र ा का स्ट य रग हडल घुमाना एक हाथ से अपकषण, दू स रे से गित की िदशा में पिरवतन
अिभकषण
9. चलती साइ कल म ेक लगाना बेक लीवर पर अपकषण चाल घटती जाती है और अंतत:
साइिकल क जाती है
रु
10. क्षेत्ररक्षक ारा तेजी से आती गद को रोकना अपकषण (हथेिलयाँ गेंद को गेंद की चाल शू य हो जाती है
न्
पीछे धके लती है)ं
संकेत: ता लका भरते समय पहले यह पू छए क बल कस दशा म लगाया गया है? य द वह व्य क्त से दूर क ओर
है तो अपकषण है, और य द व्य क्त क ओर है तो अ भकषण।
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प्र.2 उपयुक्त उदाहरण से आप क्या नष्कष नकालते ह? क्या कोई बल कसी ग तमान वस्तु को रोक सकता है? क्या
यह कसी वस्तु क चाल या ग त क दशा म कोई प रवतन कर सकता है या कसी वस्तु के आकार को प रव तत
कर सकता है?
ता लका 5.1 — व भन्न क्रयाएँ और उनके प्रभाव
क्र.सं. क्रया अपकषण/ प्रभाव
अ भकषण
1. आपक चलती साइ कल को रोकने के लए अ भकषण साइ कल का रुकना या इसक
आपके मत्र ारा इसे पीछे से पकड़ना चाल का कम होना
2. ग तशील गद को बल्ले से मारना अपकषण ग तशील गद क दशा म
प रवतन
3. एक फूले हुए गुब्बारे को दबाना अपकषण गुब्बारे के आकार म प रवतन
……………… ……………… ………………
तीन का उत्तर हाँ है। इन उदाहरण से ात होता है क कसी वस्तु पर लगाया गया बल —
वरामाव ा म रखी वस्तु को ग त प्रदान कर सकता है (पं क्त 4, 5);
पहले से ग तमान वस्तु क चाल को प रव तत कर सकता है — जसम उसे रोक दे ना भी स म लत है, क्य क रुकना चाल
का शून्य हो जाना ही है (पं क्त 1, 9, 10);
ग तमान वस्तु क ग त क दशा प रव तत कर सकता है (पं क्त 2, 8);
वस्तु के आकार म प रवतन ला सकता है (पं क्त 3, 6, 7);
इनम से कुछ या सभी प्रभाव एक साथ उत्पन्न कर सकता है।
ऐसा क्य होता है: यह नष्कष उल्ट दशा म भी सही है और वही अ धक उपयोगी है — जहाँ भी चाल, दशा या
आकार म प रवतन दखाई दे , वहाँ कोई न कोई बल अवश्य काय कर रहा है। इनम से कोई भी प रवतन स्वयं नह
होता।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 65
5.2 बल का प्रभाव · 5.3 क्या बल दो अथवा दो से अ धक वस्तुओं के बीच क पारस्प रक क्रया है?
प्र.1 बल लगाने का वस्तुओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
कसी वस्तु पर लगाया गया बल —
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वरामाव ा म रखी वस्तु को ग त प्रदान कर सकता है — भू म पर पड़ी फुटबॉल कक मारने पर चल पड़ती है;
पहले से ग तमान वस्तु क चाल को प रव तत कर सकता है — ेक साइ कल को धीमा करते ह, पैडल उसे तेज;
ग तमान वस्तु क ग त क दशा प रव तत कर सकता है — बल्ला आती हुई गद को वापस मोड़ दे ता है;
वस्तु के आकार म प रवतन ला सकता है — दबाने पर गुब्बारा चपटा हो जाता है, बेलन के नीचे आटा फैल जाता है;
इनम से कुछ या सभी प्रभाव एक साथ उत्पन्न कर सकता है — क्षेत्ररक्षक के हाथ गद को धीमा भी करते ह और मोड़ भी दे ते
ह।
प्र.2 क्या इसका तात्पय यह है क जब भी कसी वस्तु क चाल या दशा उसके आकार म कोई प रवतन होता है तो उस
वस्तु पर कोई बल काय कर रहा होता है?
हाँ — इनम से कोई भी प्रभाव बल लगाए बना संभव नह हो सकता।
अत: य द आप कसी ग तमान वस्तु को तेज होते, धीमे होते, रुकते, मुड़ते या दबते- खचते दे ख तो आप न श्चत रूप से कह सकते ह
क उस पर कोई बल काय कर रहा है, भले ही आपको दखाई न दे क वह बल कौन लगा रहा है। स्वयं रुक जाने वाली लुढ़कती गद
इसका प्रमुख उदाहरण है — उस पर कुछ अवश्य काय कर रहा है, और अगले खंड म हम पाते ह क वह घषण है।
ध्यान द जए: यह कथन उल्टा नह चलता। य द कुछ भी प रव तत नह हो रहा तो इसका अथ यह नह क कोई
बल काय नह कर रहा — हो सकता है क वस्तु पर लगने वाले बल एक-दूसरे को संतु लत कर रहे ह (इसी पृष्ठ का
एक सोपान ऊपर बॉक्स दे खए)।
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प्र.3 ता लका 5.1 म सूचीबद्ध सभी क्रयाओं के वषय म वचार क जए। प्रत्येक क्रया म कतनी वस्तुए ँ स म्म लत ह?
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क्या आपने ध्यान दया है क बल तभी उत्पन्न होते ह जब दो वस्तुए ँ कसी न कसी तरह से परस्पर
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क्र.सं. क्रया अपकषण/ प्रभाव
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आपके मत्र ारा इसे पीछे g
1. आपक चलती साइ कल को रोकने अ भकषण साइ कल का रुकना या इसक
चाल का कम होना
2. ग तशील गद को बल्ले से मारना अपकषण
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ग तशील गद क दशा म
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3. अपकषण
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प्रत्येक क्रया म कम से कम दो वस्तुए ँ स म्म लत ह, और हाँ — बल तभी उत्पन्न होता है जब दो वस्तुएँ परस्पर क्रया करती ह।
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ता लका 5.1 क क्रया बल लगाने वाली वस्तु जस वस्तु पर बल लगता है
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मत्र ारा चलती साइ कल को पकड़कर रोकना िमत्र के हाथ
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मेज क दराज खोलना
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ऐसा क्य होता है: बल कोई ऐसी वस्तु नह जो कसी पड के पास स्वयं हो; वह तो एक वस्तु ारा दूसरी वस्तु पर
कया गया काय है। इसी लए प रभाषा इस प्रकार लखी जाती है — बल कसी वस्तु पर लगने वाला अपकषण या
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अ भकषण है जो उस वस्तु क कसी अन्य वस्तु के साथ परस्पर क्रया का प रणाम होता है। दोन म से एक वस्तु
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हटा द जए, बल समाप्त हो जाएगा।
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एक सोपान ऊपर — पृष्ठ 65
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5.3 क्या बल दो अथवा दो से अ धक वस्तुओं के बीच क पारस्प रक क्रया है?
एक सोपान ऊपर
प्र.1 मान ली जए कोई वस्तु वरामाव ा म है। क्या इसका तात्पय यह है क इस वस्तु पर कोई बल काय नह कर रहा
है?
जी नह । इसका तात्पय है क वस्तु पर लगने वाले बल एक-दूसरे को संतु लत कर रहे ह।
अपनी मेज पर रखी पुस्तक को ली जए। पृथ्वी उसे नीचे क ओर ख च रही है — यह खचाव उसका भार है और वह कह समाप्त
नह हुआ है। साथ ही मेज पुस्तक को ठ क उतने ही बल से ऊपर क ओर धकेल रही है। दोन बल एक ही पुस्तक पर वपरीत
दशाओं म लगकर एक-दूसरे को नरस्त कर दे ते ह, अत: पुस्तक ग त नह करती। वरामाव ा यह बताती है क बल संतु लत ह, यह
नह क बल ह ही नह ।
क्या आप जानते ह? रस्साकशी म जब कोई भी दल नह हलता तब भी यही होता है — दोन दल प्रबल बल लगा
रहे ह, परंतु समान और वपरीत दशाओं म। संतु लत एवं असंतु लत बल के वषय म आप उच्च कक्षाओं म वस्तार
से पढ़गे।
एक सोपान ऊपर — पृष्ठ 66
5.4 बल के व भन्न प्रकार क्या ह? · 5.4.1 संपक बल
एक सोपान ऊपर
प्र.1 जब आपने अपने हाथ से मेज को धक्का दया तो क्या आपको भी अपने हाथ पर कसी बल का अनुभव हुआ?
हाँ — जब तक आप मेज को धक्का दे ते रहते ह तब तक आपक हथेली को मेज का अपकषण अनुभव होता है, और जैसे ही आपने
धक्का दे ना बंद कया वैसे ही आपके हाथ पर लगने वाला बल भी लगना बंद हो गया।
यह सीधे बल क प रभाषा से नकलता है। बल दो वस्तुओं क परस्पर क्रया का प रणाम है, और परस्पर क्रया एकतरफा हो ही
नह सकती। जब भी दो वस्तुएँ परस्पर क्रया करती ह तो प्रत्येक वस्तु पर दूसरी वस्तु के कारण बल लगता है। जैसे ही उनके बीच क
यह परस्पर क्रया बंद होती है वैसे ही उन वस्तुओं पर लगने वाला बल भी समाप्त हो जाता है।
यह करके दे खए: अपनी हथेली को पहले द वार पर और फर कसी मुलायम स्पंज पर दबाइए। आप जतने प्रबल
बल से दबाएँगे, वे उतने ही प्रबल बल से आपको वापस धकेलगे — और यह आपको अपनी हथेली पर अनुभव
होगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 67
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5.4.1 संपक बल — घषण
प्र.1 क्या कोई अन्य बल भी संपक बल है?
हाँ — घषण बल। पेशीय बल ही एकमात्र संपक बल नह है।
घषण उन दो सतह के बीच लगता है जो एक-दूसरे के संपक म ह, तब जब उनम से एक दूसरी पर ग त करती है या ग त करने का
प्रयास करती है। यह संपक बल इस लए है क्य क यह संपक म रखी दो सतह से ही उत्पन्न होता है — सतह स्पश म न ह तो घषण
भी नह । भू म पर लुढ़कती गद, समतल सड़क पर बना पैडल चलती साइ कल और मेज पर सरकाई गई ट फन — तीन इसी बल
के कारण धीमी होकर रुक जाती ह।
प्र.2 ऐसी तय म वस्तुओं क ग त म होने वाले इस प रवतन का क्या कारण होता है? … क्या यह संभव है क
वास्तव म कोई बल उन पर काय कर रहा हो? य द हाँ, तो वह कौन-सा बल है?
हाँ, बल अवश्य काय कर रहा है — वह घषण बल है, और यह ग त क दशा के वपरीत दशा म काय करता है।
हम पहले ही सीख चुके ह क कसी वस्तु क चाल म प रवतन हेतु बल आवश्यक होता है। गद और बना पैडल चलती साइ कल
दोन क चाल घट रही है, अत: उन पर कोई बल अवश्य लग रहा है, भले ही कोई उन्ह स्पश करता दखाई न दे । यह बल संपक म
आई सतह के बीच लगता है — गद और धरातल के बीच, टायर और सड़क के बीच — और ग त के वपरीत दशा म लगता है। इसी
कारण चाल लगातार घटती जाती है और वस्तु वरामाव ा म आ जाती है।
पुस्तक का संकेत: ऊबड़-खाबड़ सड़क पर साइ कल सपाट सड़क क तुलना म कम समय म रुक जाती है। अथात
यह बल जो भी हो, वह संपक म आने वाली सतह क प्रकृ त पर नभर करता है — ठ क वैसा ही जैसा दो सतह के
मलन से जन्मे कसी बल से अपे क्षत है।
क्रयाकलाप 5.3— आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 67
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5.4.1 संपक बल — घषण ( चत्र 5.5)
क्रयाकलाप
प्र.1 इसे धीरे से धक्का द जए और अवलोकन क जए ( चत्र 5.5)। क्या यह कुछ दूरी तय करने के बाद रुक जाती है?
क्या इस पर कोई बल लग रहा है जो इसे वरामाव ा म ला दे ता है?
चत्र 5.5, पृष्ठ 68 — पुनर चत रेखा चत्र: मेज पर रखे बंद डब्बे को हाथ से धीरे से धक्का दया जा रहा है।
दोन का उत्तर हाँ है। ट फन कुछ दूरी तक फसलकर रुक जाती है, और हाँ, उसे वरामाव ा म लाने वाला बल है — डब्बे के तल
और मेज के बीच लगने वाला घषण बल।
आपका हाथ केवल आरंभ म डब्बे को स्पश करता है; उसके बाद मेज के अ त रक्त कुछ भी उसे स्पश नह कर रहा। फर भी उसक
चाल लगातार घटती जाती है। चूँ क बल के बना चाल नह बदल सकती, अत: कोई बल अवश्य काय कर रहा है — और वह उस
दशा के वपरीत दशा म लग रहा होगा जसम डब्बा फसल रहा है, क्य क केवल पीछे क ओर लगने वाला बल ही चाल घटा
सकता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
गित की िदशा
िटिफन
घषण बल
मेज की सतह — संपक में रखी दो सतहे ं
घषण संपक म आई सतह के बीच, ग त क वपरीत दशा म काय करता है और डब्बे को वरामाव ा म ले आता है।
ऐसा क्य होता है: जो मेज छू ने म चकनी लगती है उसम भी बड़ी संख्या म सूक्ष्म अ नय मतताएँ होती ह, और
यही डब्बे के तल म भी ( चत्र 5.6)। संपक म आने पर ये अ नय मतताएँ एक-दूसरे के पाश म फँस जाती ह और एक
सतह को दूसरी पर फसलने के प्रयास का वरोध करती ह।
प्र.2 अब वस्तु को वपरीत दशा म धक्का द जए। क्या यह वस्तु अब भी कुछ दूरी तय करने के पश्चात वरामाव ाम
आ जाती है?
हाँ, वह पुन: रुक जाती है — और लगभग उतनी ही दूरी तय करने के पश्चात, क्य क वही दो सतह आपस म फसल रही ह।
इस क्रयाकलाप का सबसे उपयोगी नष्कष यही है। घषण कमरे क कसी नयत दशा क ओर नह लगा था; जब आपने ग त
उलट तो घषण भी उलट गया। इससे ात होता है क घषण क अपनी कोई नयत दशा नह होती — यह सदै व उस दशा के
वपरीत काय करता है जसम वस्तु ग त कर रही है या ग त करने का प्रयास कर रही है।
स्वयं जाँ चए: अब डब्बे को इतने धीरे से धके लए क वह हले ही नह । घषण तब भी काय कर रहा है — इस बार
वह आपके ग त दे ने के प्रयास का वरोध कर रहा है। इसी लए प रभाषा म ‘ग त करती है या ग त करने का प्रयास
करती है’ कहा गया है।
क्रयाकलाप 5.4— आइए, खोज कर — पृष्ठ 68
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान
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5.4.1 संपक बल — घषण सतह क प्रकृ त पर नभर करता है
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क्रयाकलाप
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a s emवस्तु उतनी ही दूरी चलने के पश्चात वरामाव ा म आती है जतनी दूरी चलने के पश्चात क्रयाकलाप 5.3 म
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क्या
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प्र.1
आई थी?
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नह । उसी वस्तु को उतना ही धक्का दे ने पर भी वह भन्न सतह पर रुकने से पहले भन्न दूरी तय करती है।
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वस्तु म कोई प रवतन नह हुआ — वही डब्बा है और वही उसका तल। केवल दूसरी सतह बदली है। अत: उसे रोकने वाला बल इस
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बात पर नभर करता है क संपक म आने वाली दोन सतह कस प्रकार क ह, केवल वस्तु पर नह ।
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. वस्तु सभी सतह पर समान दूरी चलने के पश्चात वरामाव ा म आती है?a
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नह । सतह जतनी खुरदरी होगी, वस्तु उतनी ही जल्द रुक जाएगी।
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सतह
a l तक फसलती है
वस्तु कतनीgदूर घषण के वषय म यह क्या बताता है
अ यंत िचकनी — घषण यूनतम
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काँच, सरे मक टाइल सबसे अिधक दू र ी
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e m अिधक खुरदरी — घषण अिधक
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कपड़ा और कम दू र ी
agl रेत लगभग तुर ंत रुक जाती है सबसे खुरदरी — घषण सव िधक
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अत: व भन्न सतह पर वस्तु अलग-अलग दूरी तय करने o
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m .c है। खुरदरी सतह के बीच घषण अ धक होता है।
े पश्चात वरामाव ा म आती है और हम यह कह सकते ह क घषण बल
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संपक म आने वाली सतह क प्रकृ त पर नभर
se करता
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संकेत: तुलना नष्पक्ष तभी होगी जब आप हर बार डब्बे को समान धक्का द, अन्यथा आप एक साथ दो बात बदल
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दगे और प रणाम कुछ भी सद्ध नह करेगा।
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5.4.1 संपक बल — सतह क अ नय मतताएँ
प्र.1 क्या इसका तात्पय यह है क य द सतह अ धक खुरदरी ह तो उनके बीच घषण बल अ धक होगा?
हाँ। खुरदरी सतह के बीच घषण अ धक होता है, और क्रयाकलाप 5.4 यही दशाता है — रेत पर डब्बा लगभग तुरंत रुक जाता है
जब क काँच पर वह दूर तक फसलता है।
ऐसा क्य होता है: घषण संपक म आने वाली दोन सतह क अ नय मतताओं के कारण उत्पन्न होता है। यहाँ तक
क चकनी दखाई दे ने वाली सतह म भी बड़ी संख्या म सूक्ष्म अ नय मतताएँ होती ह ( चत्र 5.6)। संपक म आने पर
ये एक-दूसरे के पाश म फँस जाती ह और एक सतह को दूसरी पर फसलने के प्रयास का वरोध करती ह। खुरदरी
सतह क अ नय मतताएँ बड़ी और गहरी होती ह, अत: उनम से अ धक संख्या म और अ धक मजबूती से फँसती ह
— फसलने का वरोध, अथात घषण, इसी लए अ धक होता है।
क्या आप जानते ह? इसी कारण नए खेल-जूते का तला गहरा खाँचेदार होता है और घसा हुआ तला फसलता है।
इसी कारण गीली ढलान पर रेत या राख बखेरी जाती है, और कैरम-बोड पर बो रक पाउडर छड़का जाता है —
जहाँ पकड़ चा हए वहाँ घषण बढ़ाने के लए और जहाँ नह चा हए वहाँ घटाने के लए।
एक सोपान ऊपर — पृष्ठ 68
5.4.1 संपक बल — द्रव और गैस म घषण
एक सोपान ऊपर
प्र.1 क्या घषण बल केवल तभी लगता है जब वस्तुए ँ ठोस सतह पर ग तमान ह ? द्रव और गैस म ग तमान वस्तुओं
के वषय म आपका क्या वचार है?
नह , घषण केवल ठोस सतह तक सी मत नह है। वायु, जल और अन्य द्रव भी अपने भीतर ग तमान वस्तुओं पर घषण बल
लगाते ह।
वायु या जल म चलने वाली प्रत्येक वस्तु को उस वायु या जल को अपने माग से हटाना पड़ता है, और वायु या जल उसे पीछे क ओर
धकेलते ह — ठ क वैसे ही जैसे दो ठोस सतह के बीच घषण करता है। तेज हवा के वरुद्ध साइ कल चलाते समय अथवा कमर तक
गहरे जल म दौड़ने का प्रयास करते समय आप इसे स्वयं अनुभव करते ह।
चूँ क यह घषण ईंधन का अपव्यय करता है और चाल को सी मत करता है, अत: वायुयान, जलयान, नाव और तीव्र ग त वाली
रेलगाड़ी जैसी वस्तुओं क संरचना का अ भकल्पन कुछ व शष्ट आकृ तय के साथ कया जाता है — पतली और नुक ली
— जससे उन पर लगने वाला घषण बल कम हो जाता है।
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क्या आप जानते ह? मछ लय और प क्षय के शरीर क आकृ त भी ठ क इसी प्रकार क होती है और कारण भी
वही है। जस समस्या को अ भयंता रेलगाड़ी का अग्रभाग बनाते समय हल करते ह, प्रकृ त उसे बहुत पहले हल कर
चुक है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 69
5.4.2 असंपक बल — चुंबक य बल
प्र.1 क्या एक वस्तु ारा दूसरी वस्तु पर बल लगाने के लए उन दोन का संपक म रहना आवश्यक है?
नह , आवश्यक नह है। कुछ बल ऐसे होते ह जनका प्रभाव उस समय भी अनुभव कया जा सकता है जब वस्तुएँ परस्पर संपक म
न ह । इन बल को असंपक बल कहते ह।
पेशीय बल और घषण के लए स्पश आवश्यक है — वे संपक बल ह। परंतु चुंबक लोहे क क ल को दूर से ख च लेता है, रगड़ी हुई
कंघी कागज के टु कड़ को बना छु ए उठा लेती है, और पृथ्वी गरते हुए आम को ख चती है यद्य प दोन के बीच कुछ भी नह है। इस
अध्याय म पढ़े जाने वाले तीन असंपक बल ह — चुंबक य बल, रवै ुत बल तथा गुरुत्वाकषण बल।
प्र.2 क्या आपको स्मरण है क एक चुंबक कसी अन्य चुंबक अथवा चुंबक य पदाथ पर उसके संपक म आए बना बल
लगा सकता है?
हाँ। यह हमने कक्षा 6 क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय ‘चुंबक को जान’ म सीखा था।
चुंबक चुंबक य पदाथ से न मत वस्तुओं को, जैसे लोहे क आल पन को, बना स्पश कए अपनी ओर आक षत करता है।
जब दो चुंबक को समीप लाया जाता है तो समान ुव (उत्तर-उत्तर, द क्षण-द क्षण) एक-दूसरे को प्र तक षत करते ह जब क
असमान ुव (उत्तर-द क्षण) एक-दूसरे को आक षत करते ह।
इस पुस्तक के अध्याय 4 म हमने व ुत चुंबक के वषय म भी सीखा था जो चुंबक क तरह व्यवहार करते ह।
आकषण और प्र तकषण स्वयं एक खचाव और एक धक्का ही ह, अथात बल। और दोन चुंबक के बीच का अंतराल यह दशाता है
क इस बल को संपक क आवश्यकता नह है।
प्र.3 क्या ऐसे और भी बल ह जो एक वस्तु दूसरी वस्तु पर दूर से लगा सकती ह?
हाँ — इस अध्याय म दो और पढ़े जाते ह।
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असंपक बल कसके ारा लगाया जाता है आकष या प्र तकष ?
चुंबक य बल एक चुंबक ारा, दू स रे चुंबक अथवा चुंबकीय पदाथ पर दोनों — समान धु व पितकिषत, असमान धु व आकिषत करते
है ं
रवैद्युत बल एक आवेिशत िपंड ारा, दू स रे आवेिशत या अनावेिशत िपंड दोनों — समान आवेश पितकिषत, िवषम आवेश आकिषत
पर करते है ं
गुरुत्वाकषण पथ्ृ वी (और पत्येक अन्य ग ह) ारा, पत्येक वस्तु पर सदै व आकष
बल
क्रयाकलाप 5.5— आइए, परीक्षण कर — पृष्ठ 69
5.4.2 असंपक बल — चुंबक य बल ( चत्र 5.7)
क्रयाकलाप
प्र.1 अब दूसरे वलय चुंबक को उसके ऊपर इस प्रकार डाल क दोन चुंबक के समान ुव एक दूसरे के सामने ह । क्या
दूसरा चुंबक पहले चुंबक के ऊपर कुछ दूरी पर तैरता रहता है?
हाँ। ऊपर वाला वलय चुंबक नीचे वाले से थोड़ा ऊपर हवा म तैरता रहता है और केवल लकड़ी क छड़ी उसम से होकर गुजरती है।
पृथ्वी ऊपरी चुंबक को नीचे क ओर ख च रही है, अत: कोई वस्तु उसे ठ क उतने ही बल से ऊपर क ओर धकेल रही होगी, अन्यथा
वह नीचे आ जाता। उसे कुछ भी स्पश नह कर रहा। ऊपर क ओर लगने वाला यह अपकषण आमने-सामने रखे समान ुव के बीच
का चुंबक य प्र तकषण बल है, और वह अंतराल के आर-पार काय कर रहा है।
प्र.2 दूसरे चुंबक को धीरे से नीचे धकेलने का प्रयास क जए। क्या आप उस पर लगने वाले बल का अनुभव करते ह?
हाँ — आपक अँगुली को एक ग जैसा प्र तरोध अनुभव होता है, और आप ऊपरी चुंबक को नीचे वाले के जतना अ धक नकट
दबाते ह यह प्र तरोध उतना ही प्रबल होता जाता है।
छोड़ते ही चुंबक पुन: उसी ऊँचाई पर तैरने लगता है। इससे दो बात स्पष्ट होती ह — समान ुव के बीच का प्र तकषण एक
वास्त वक बल है, और चुंबक के नकट आने पर उसका प रमाण बढ़ता है।
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प्र.3 अब दोन चुंबक के ुव को उलट द जए। क्या दूसरा चुंबक अभी भी पहले चुंबक के ऊपर तैरता रहता है?
नह । ुव उलटने पर अब असमान ुव आमने-सामने हो जाते ह, अत: दोन चुंबक प्र तक षत करने के ान पर आक षत करते
ह। ऊपरी चुंबक छड़ी पर सरककर सीधे नीचे आ जाता है और नचले चुंबक से चपक जाता है।
ऐसा क्य होता है: चुंबक य बल समाप्त नह हुआ — उसक दशा बदल गई। समान ुव सामने होने पर वह ऊपरी
चुंबक को ऊपर धकेलकर पृथ्वी के खचाव को संतु लत कर रहा था। असमान ुव सामने आने पर वह उसे नीचे
ख चता है, अथात पृथ्वी के खचाव का वरोध करने के ान पर उसम जुड़ जाता है। यही प्रमाण है क एक चुंबक
दूसरे चुंबक पर उसके संपक म आए बना भी बल लगा सकता है — और यह असंपक बल आकष या प्र तकष ,
दोन म से कोई भी हो सकता है।
क्रयाकलाप 5.6— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 70
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5.4.2 असंपक बल — रवै ुत बल ( चत्र 5.8)
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क्रयाकलाप
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a s emइसे मेज पर रखे कागज के छोटे-छोटे टुकड़ को नकट लाइए, ध्यान र खए क आपका मापक या न लका
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कागज के टु कड़ को स्पश न कर ( चत्र 5.8)। क्या आप कुछ आश्चयजनक दे खते ह?
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चत्र 5.8, पृष्ठ 70 — पुनर चत रेखा चत्र: रगड़ा हुआ प्ला स्टक मापक मेज के ठ क ऊपर पकड़ा हुआ है और कागज के
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छोटे -छोटे टु कड़े उसके नीचे चपके हुए ह।
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हाँ। कागज के छोटे -छोटे टु कड़े मेज से उछलकर ऊपर आते ह और प्ला स्टक मापक या न लका से चपक जाते ह — यद्य प
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मापक ने उन्ह स्पश तक नह कया।
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आश्चय कागज के हलने का नह , ब ल्क इस बात का है क वह अंतराल रहते हुए ही हलता है। रगड़ने से पहले वही मापक उन्ह
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टु कड़ के ऊपर रखने पर कुछ नह करता। रगड़ने ने मापक को कागज को खाली ान के आर-पार ख च लेने क क्षमता दे द है।
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कागज के टु कड़े प्ला स्टक मापक या न लका क ओर खचते ह और जब इसे कागज के टु कड़ के अ धक नकट
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लाया जाता है तो वे उससे चपक जाते ह। ऐसा क्य होता है?
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क्य क रगड़ने से मापक आवे शत वस्तु बन गया है, और आवे शत वस्तु अपने नकट रखी अनावे शत वस्तुओं पर रवै ुत बल
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लगाती है।
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जब कुछ न श्चत पदाथ से बनी दो वस्तुओं को आपस म रगड़ा जाता है तो उनक सतह पर व ुत आवेश उत्पन्न होते ह। इन
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s e mक ये स्वयं ग त नह करते; जस वस्तु पर ै तक आवेश आ जाता है उसे आवे शत
वस्तु कहते ह। एक आवे शत वस्तु कुlछaपदाथ से बनी अनावे शत वस्तुओं, जैसे कागज के छोटे टु कड़ , को आक षत करती है
आवेश को ै तक आवेश कहा जाता है क्य
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अथात उन पर बल लगाती है। यह बल वस्तुओं के संपक म आए बना भी लगता है — इसी लए कागज मापक से स्पश होने से
पहले ही उछल पड़ता है।
संकेत: यह क्रयाकलाप नमी वाले दन असफल हो जाता है, और तब भी असफल होता है जब आप रगड़े हुए भाग
को अपने हाथ या कसी धातु क वस्तु से स्पश कर लेते ह। पुस्तक इसी लए सावधान करती है — आवेश नकल
जाता है और मापक पुन: साधारण हो जाता है।
क्रयाकलाप 5.7— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 70
5.4.2 असंपक बल — रवै ुत बल ( चत्र 5.9)
क्रयाकलाप
प्र.1 दोन गुब्बार को ऊनी कपड़े से रग ड़ए और इन्ह छोड़ द जए। ध्यान र खए क रगड़े हुए गुब्बार को अपनी
अँगु लय से स्पश न कर। आप क्या दे खते ह?
दोन लटके हुए गुब्बारे एक-दूसरे से दूर जाते ह, मानो वे एक-दूसरे को प्र तक षत कर रहे ह ( चत्र 5.9, ख), और उन्ह लटकाने
वाले धागे बाहर क ओर तरछे हो जाते ह।
रगड़ने से पहले वे शांत होकर पास-पास लटके थे ( चत्र 5.9, क)। रगड़ने के अ त रक्त उनम कुछ भी नह जोड़ा गया — और अब वे
अंतराल के आर-पार एक-दूसरे को धकेल रहे ह। अथात रगड़ने ने दोन गुब्बार पर कुछ ऐसा उत्पन्न कर दया है जो उन्ह प्र तक षत
कराता है।
प्र.2 अब गुब्बार को रगड़ने के लए प्रयोग कए गए ऊनी कपड़े को रगड़े हुए गुब्बार म से एक के पास लाइए। दे खए
क क्या होता है?
गुब्बारा और ऊनी कपड़ा एक-दूसरे क ओर बढ़ते ह, मानो वे एक-दूसरे को आक षत कर रहे ह । गुब्बारा अपनी ऊध्वाधर त
से हटकर कपड़े क ओर झुक जाता है।
यह ठ क उसका उल्टा है जो दोन गुब्बार ने परस्पर कया था — और वह भी उसी कपड़े के साथ जससे उन्ह रगड़ा गया था।
प्र.3 इन प्रेक्षण से हम क्या नष्कष नकालते ह?
क्रम से तीन नष्कष नकलते ह —
1. दोन गुब्बारे एक ही प्रकार से आवे शत कए गए थे, अत: उन्ह ने एक जैसा आवेश प्राप्त कया होगा। चूँ क उन्ह ने एक-दूसरे
को प्र तक षत कया, अत: समान (एक जैसे) आवेश एक-दूसरे को प्र तक षत करते ह।
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2. आवे शत गुब्बारे और ऊनी कपड़े ने एक-दूसरे को आक षत कया। रगड़ने वाली वस्तु और रगड़ी गई वस्तु दोन आवे शत हो
जाती ह परंतु उनम वपरीत प्रकार के आवेश आ जाते ह। उनका आकषण दशाता है क वपरीत प्रकार के ( वषम) आवेश
एक-दूसरे को आक षत करते ह।
3. अत: ै तक आवेश ठ क दो प्रकार के होते ह, जन्ह ‘धनात्मक’ और ‘ऋणात्मक’ आवेश कहा जाता है।
एक आवे शत पड ारा दूसरे आवे शत अथवा अनावे शत पड पर लगाया गया बल रवै ुत बल कहलाता है। यह अंतराल के
आर-पार लगता है, अत: यह एक असंपक बल है।
पास लाई गई जोड़ी क्या दे खा गया यह क्या सद्ध करता है
दो रगड़े हुए गुब्बारे वे दू र हट जाते है ं समान आवेश पितकिषत करते है ं
रगड़ा हुआ गुब्बारा और ऊनी कपड़ा वे पास आ जाते है ं िवषम आवेश आकिषत करते है ं
रगड़ा हुआ मापक और सादे कागज के टु कड़े ( क्रयाकलाप कागज ऊपर िखंच आता आवेिशत िपंड अनावेिशत िपंड को आकिषत
5.6) है करता है
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 71
5.4.2 असंपक बल — आवेश के दो प्रकार
प्र.1 क्या यह दशाता है क गुब्बारे पर आवेश ऊनी कपड़े पर आवेश से भन्न प्रकार का है?
हाँ, यही दशाता है। दो समान रूप से आवे शत गुब्बार ने एक-दूसरे को प्र तक षत कया जब क गुब्बारे और ऊनी कपड़े ने एक-
दूसरे को आक षत कया। चूँ क एक जैसा आवेश प्र तक षत करता है, अत: यह आकषण केवल यही अथ रख सकता है क कपड़े
पर गुब्बारे से भन्न प्रकार का आवेश है।
रगड़ने वाली वस्तु (कपड़ा) और रगड़ी गई वस्तु (गुब्बारा) — दोन आवे शत हो जाती ह, परंतु उनम वपरीत प्रकार के आवेश आते
ह।
प्र.2 क्या इसका तात्पय यह है क व ुत आवेश दो प्रकार के होते ह?
हाँ। इन दो प्रकार के ै तक आवेश को ‘धनात्मक’ आवेश और ‘ऋणात्मक’ आवेश कहा जाता है।
रगड़ने के पूरे प्रयोग क व्याख्या केवल दो सरल नयम से हो जाती है —
समान (एक जै से) आवेश → एक-दू सरे को पितकिषत करते है ं
िवषम (िवपरीत) आवेश → एक-दू सरे को आकिषत करते है ं
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रगड़ने से कभी अकेला एक आवेश उत्पन्न नह होता। सदै व दोन प्रकार के आवेश एक साथ उत्पन्न होते ह, प्रत्येक वस्तु पर एक —
इसी लए गुब्बारा और कपड़ा एक-दूसरे को आक षत करते ह, जब क एक ही प्रकार से रगड़े गए दो गुब्बारे एक-दूसरे को दूर धकेलते
ह।
क्या आप जानते ह? चुंबक से इसक तुलना क जए, जहाँ दो ुव उत्तर और द क्षण होते ह और यही दो नयम
लागू होते ह। बड़ा अंतर आगे आता है — गुरुत्वाकषण बल म ऐसी कोई जोड़ी नह होती, वह सदै व आकष होता है।
क्रयाकलाप 5.8— आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 71
5.4.2 असंपक बल — गुरुत्वाकषण बल
क्रयाकलाप
प्र.1 एक गद ली जए और इसे ऊध्वाधरतः ऊपर क ओर फ कए। क्या यह नीचे क ओर वापस गरती है?
हाँ। गद ऊपर जाती है, धीमी होती है, शीष पर क्षण भर के लए रुकती है और फर धरती पर वापस गर जाती है — प्रत्येक बार।
ऊपर जाते समय गद क चाल घट रही है, अत: उस पर कोई बल अवश्य लग रहा है और वह नीचे क ओर, ग त के वपरीत, लग
रहा होगा। वही नीचे क ओर लगने वाला बल फर गद को वापस लाता है और नीचे आते समय उसक चाल बढ़ाता जाता है। हवा म
रहते हुए गद को कुछ भी स्पश नह कर रहा, अत: यह एक असंपक बल है — पृथ्वी का खचाव।
प्र.2 अब इसे पुन: फ कए परंतु इस बार अ धक बल से फ कए। क्या यह अब भी धरती पर वापस गरती है?
हाँ। अ धक बल से फकने पर गद अ धक ऊँची जाती है और अ धक दे र हवा म रहती है, फर भी वह धरती पर वापस आ ही जाती
है।
आपके फकने का बल केवल यह तय करता है क गद कतनी ऊँचाई तक जाएगी। वह पृथ्वी के खचाव को समाप्त नह कर सकता।
चत्र 5.10 म यही बात बास्केटबॉल, कूदते खलाड़ी, पेड़ के फल और गोताखोर — सबके साथ दखाई गई है: कोई भी वस्तु कसी
भी दशा म फक जाए, अंतत: वह पुन: धरती या फश पर आकर गरती है।
ऐसा क्य होता है: चूँ क सभी वस्तुएँ पृथ्वी क ओर गरती ह, इसका अथ है क पृथ्वी उन्ह आक षत करती (अपनी
ओर ख चती) है। जस बल से पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आक षत करती है वह गुरुत्वाकषण बल कहलाता है
— इसे गुरुत्वीय बल या केवल गुरुत्व भी कहते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 72
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5.4.2 असंपक बल — गुरुत्वाकषण बल · 5.5 भार और उसका मापन
प्र.1 सभी वस्तुए ँ पृथ्वी क ओर क्य गरती ह?
क्य क पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपनी ओर आक षत (ख चती) है। यही खचाव गुरुत्वाकषण बल है।
ऊँचाई से गराई गई वस्तु नीचे क ओर एक ऊध्वाधर सरलरेखीय पथ पर गरती है ( चत्र 5.11, क) क्य क पृथ्वी उसे उसी दशा म
— अपनी ओर — ख चती है। ऊध्वाधरतः ऊपर फक गई वस्तु सीधी ऊपर जाती है, उसक चाल धीमी होती जाती है, वह शीष पर
क्षण भर के लए रुकती है और फर एक सरलरेखीय पथ पर ऊध्वाधरतः नीचे गरती है ( चत्र 5.11, ख)। ऊपर जाते समय उसक
चाल घटती जाती है और नीचे आते समय बढ़ती जाती है — दोन प रवतन उसी एक नीचे क ओर लगने वाले खचाव से होते ह।
गुरुत्वीय बल के अधीन ऊध्वाधर दशा म होने वाली इस ग त को ऊध्वाधर ग त कहते ह।
प्र.2 क्या कोई बल है जो उन वस्तुओं पर लगता है? यह बल कसके कारण लगता है?
हाँ — गुरुत्वाकषण बल, और यह पृथ्वी के कारण लगता है।
पृथ्वी ारा लगाया गया गुरुत्वाकषण बल गुरुत्वीय बल या केवल गुरुत्व भी कहलाता है। इसक दो बात स्मरण रखने योग्य ह —
यह वस्तु के संपक म आए बना उसे आक षत करता है, अत: यह एक असंपक बल है।
यह सदै व आकष बल होता है, जब क चुंबक य बल या रवैद्युत बल आकष या प्र तकष दोन म से कोई भी हो सकता है।
प्र.3 क्या पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को समान बल से आक षत करती है?
नह । भन्न- भन्न वस्तुओं को भन्न- भन्न बल से आक षत करती है, और क्रयाकलाप 5.9 इसे सीधे दखा दे ता है।
एक क ल से ग लटकाइए और उससे प सल बॉक्स लटकाइए — ग क लंबाई बढ़ जाती है। वस्तु बद लए, लंबाई-वृ द्ध भी
बदल जाती है। चूँ क यह वृ द्ध लटक हुई वस्तु पर पृथ्वी के खचाव के कारण होती है, अत: भन्न वृ द्ध का अथ है भन्न खचाव।
जस बल से पृथ्वी कसी वस्तु को अपनी ओर ख चती है उसी को उस वस्तु का भार कहते ह, अत: यही कहना है क भन्न- भन्न
वस्तुओं का भार भन्न- भन्न होता है।
क्रयाकलाप 5.9— आइए, खोज कर — पृष्ठ 73
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान
a g l AglaSem · NCERT Solutions
5.5 भार और उसका मापन ( चत्र 5.12)
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क्रयाकलाप
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a s eगmके एक सरे को एक क ल से लटकाइए ( चत्र 5.12, क)। दूसरे सरे से उपयुक्त वस्तुओं म से कसी एक
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प्र.1
वस्तु को लटकाइए एवं ग का नरीक्षण क जए ( चत्र 5.12, ख)। क्या ग क लंबाई म वृ द्ध होती है?
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ag (क)
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agl चत्र 5.12, पृष्ठ 73 — (क) एक लटकता हुआ ग (ख) ग से लटक हुई दो अलग-अलग वस्तुए।ँ
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com g l a
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agl
हाँ, ग क लंबाई म वृ द्ध होती है — वस्तु लटकाते ही, और जब तक वस्तु लटक रहती है तब तक वह वृ द्ध बनी रहती है।
comग क लंबाई-वृ द्ध इसी
ग अपने नचले सरे पर नीचे क ओर ख ची जा रही है। वस्तु को ग के अ त रक्त कुछ भी स्पश नह कर रहा, अत: उस पर
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नीचे क ओर लगने वाला यह खचाव पृथ्वी क ओर से है — गुरुत्वाकषण बल, अथात वस्तु का भार।
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खचाव का दृश्य प्रभाव है।
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ag
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प्र.2 अब एक-एक करके अन्य वस्तुओं को लटकाइए एवं प्रत्येक बार ग म हुई लंबाई वृ द्ध पर ध्यान द जए। क्या
प्रत्येक वस्तु के कारण लंबाई म वृ द्ध समान है?
नह । लंबाई-वृ द्ध भन्न- भन्न वस्तुओं के लए भन्न- भन्न होती है — पत्थर ग को प सल बॉक्स क तुलना म अ धक ख चता
है और ट फन बॉक्स कसी तीसरे प रमाण म।
ग तो वही है, अत: अ धक वृ द्ध का अथ केवल अ धक खचाव ही हो सकता है। इससे ात होता है क पृथ्वी व भन्न वस्तुओं
को भन्न- भन्न बल से आक षत करती है, अथात भन्न- भन्न वस्तुओं का भार भन्न- भन्न होता है।
प्र.3 क्या हम ग का उपयोग वस्तु का भार मापने के लए कर सकते ह?
हाँ — और कमानीदार तुला ठ क यही है।
ग क लंबाई-वृ द्ध उस पर लगने वाले खचाव के साथ बढ़ती है, अत: यह वृ द्ध भार का माप बन सकती है। कमानीदार तुला
( ग बैलस) एक सरल उपकरण है जसका उपयोग भार (बल) मापने के लए कया जाता है। इसम कमानी का एक सरा ऊपर क
ओर र कया जाता है और दूसरे सरे पर एक हुक लगा होता है। जब हम कसी वस्तु को हुक से लटकाते ह तो कमानी क लंबाई
म वृ द्ध होती है एवं इस वृ द्ध का प रमाण वस्तु का भार दशाता है। इस तुला पर एक पैमाना होता है जस पर भार (बल) को न्यूटन
(N) म दशाया जाता है, तथा सामान्यत: द्रव्यमान के संगत मान को ग्राम (g) म दशाने के लए एक अन्य पैमाना भी होता है।
ध्यान द जए: ग्राम वाले अंक इस धारणा के साथ अं कत कए गए ह क तुला का उपयोग पृथ्वी पर कया जा रहा
है, जहाँ पृथ्वी का गुरुत्वाकषण बल वस्तु को आक षत करता है। उपकरण वास्तव म एक बल मापता है; द्रव्यमान का
पैमाना केवल हमारी सु वधा के लए है।
क्रयाकलाप 5.10— आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 73
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5.5 भार और उसका मापन — कमानीदार तुला से प रचय ( चत्र 5.13)
क्रयाकलाप
प्र.1 चत्र 5.13 म दशाई गई कमानीदार तुला को ध्यान से दे खए। यह अ धकतम कतना भार माप सकती है?
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
कमानीदार तुला
गाम यूटन
न्
0 0
100 01
200 02
300 03
400 04
500 05
600 06
700 07
800 08
900 09
1000 10
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान
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चत्र 5.13, पृष्ठ 74 — कमानीदार तुला और इसका पैमाना: बाईं ओर ग्राम, दाईं ओर न्यूटन।
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यह अ धकतम 10 न्यूटन भार माप सकती है। इस प्रकार इसके पैमाने का परास 0 से 10 N है।
इसे उपकरण पर ही प ढ़ए — चत्र 5.13 म दाईं ओर का NEWTONS पैमाना 0, 01, 02, … से 10 तक अं कत है और 10 उस
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पर अं तम चह्न है। उसके साथ बाईं ओर GRAMS पैमाना 0, 100, 200, … से 1000 तक अं कत है, अत: यही तुला 0 से 1000
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g तक द्रव्यमान भी दशा सकती है।
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संकेत: कसी भी उपकरण म सबसे पहले परास ही दे खना चा हए — ठ क वैसे ही जैसे कक्षा 6 क पाठ्यपुस्तक
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m.
ज ासा के अध्याय ‘ताप एवं उसका मापन’ म तापमापी के साथ कया था। इस तुला से 10 N से भारी वस्तु
लटकाने पर कमानी
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ायी रूप से क्ष तग्रस्त हो सकती है।
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aक्रयाकलाप 5.11— आइए, प रकलन कर — पृष्ठ 74
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5.5 भार और उसका मापन — तुला ारा मापा जा सकने वाला न्यूनतम भार
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क्रयाकलाप
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प्र.1 दो बड़े च के बीच क दूरी भार का कतना अंतर इं गत करती है?
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a s em0 और 01 N के बीच अथवा 01 N एवं 02 N के बीच इं गत भार का अंतर 1 N है।
a gl इस तुला पर बड़े चह्न 0, 01, 02, … 10 से अं कत ह और ये अंक क्रमश: 0 N, 1 N, 2 N, … 10 N को दशाते ह। अत: एक बड़े
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चह्न से अगले बड़े चह्न तक का प्रत्येक पग एक न्यूटन का है।
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प्र.2 इन दो बड़े च
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के बीच कतने भाग (छोटे च ारा दशाए गए) ह?
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इन चह्न के बीच 5 भाग ह।
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रेख.ाएँ a gमलकर उस दूरी को पाँच बराबर भाग म
c नह , अंतराल ग नए। 0 और 01 N के बीच चार छोटे चह्न ह और वे चार चह्न
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बाँटते ह।
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प्र.3 एक छोटा भाग कतने भार को दशाता है?
एक छोटा भाग दो बड़े चह्न के बीच के 1 N का पाँचवाँ भाग दशाता है।
दो बड़ े िच ों के बीच भार = 1 N
इनके बीच भागों की संख्या = 5
एक छोटा भाग = 1 N ÷ 5 = 0.2 N
अत: कमानीदार तुला ारा पढ़ा जा सकने वाला भार का सबसे छोटा मान 0.2 N है। पढ़े जा सकने वाले इसी सबसे छोटे मान को
उपकरण का अल्पतमांक कहते ह।
0
दो बड़े िच ों के बीच = 1 N
बीच मे ं छोटे भाग = 5
01 N एक भाग = 1 N ÷ 5 = 0.2 N
अल्पतमांक = 0.2 N
02 N
िचत्र 5.13 की कमानीदार तुला का न्यूटन पैमाना
चार छोटे चह्न 1 N क दूरी को पाँच बराबर भाग म बाँट दे ते ह, अत: प्रत्येक भाग 0.2 N का होता है।
स्वयं जाँ चए: आपके वद्यालय क प्रयोगशाला क तुला का परास और सबसे छोटा भाग भन्न हो सकते ह, अत:
उपयोग से पूव उसी व ध से उसका अल्पतमांक नका लए। चत्र 5.13 के द्रव्यमान पैमाने के लए भी यही क जए
— वहाँ 100 g को 5 भाग म बाँटा गया है, अत: एक भाग 100 g ÷ 5 = 20 g पढ़ता है।
क्रयाकलाप 5.12— आइए, मापन कर — पृष्ठ 74
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5.5 भार और उसका मापन · ता लका 5.2 ( चत्र 5.14)
क्रयाकलाप
प्र.1 एक कमानीदार तुला और कुछ वस्तुए ँ ली जए। ध्यान र खए क वस्तुए ँ कमानीदार तुला ारा मापे जा सकने वाले
अ धकतम भार से अ धक भारी नह होनी चा हए अन्यथा यह क्ष तग्रस्त हो सकती है। वस्तुओं को एक-एक करके
हुक से लटकाइए ( चत्र 5.14)। इसके साथ ही भार के पैमाने को ध्यान से प ढ़ए और अपने प्रेक्षण को ता लका
5.2 म अं कत क जए।
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कमानीदार तुला
गाम यूटन
न्
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100 01
200 02
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400 04
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600 06
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चत्र 5.14, पृष्ठ 74 — पुनर चत रेखा चत्र: कमानीदार तुला के हुक से लटक हुई वस्तु।
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a s em ता लका 5.2 — कमानीदार तुला का उपयोग करके भार मापना
ag l क्र.सं. वस्तु भार
com ag
1. प सल बॉक्स
आं शक रूप से भरी हुई e
.
mक बोतल
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2. जल
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पाठ्यांक सही लेने क व ध
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a 2. हुक से एक वस्तु लटकाइए और उसके झूलना बंद होने तक प्रतीक्षा क जए।
1. तुला को स्वतंत्र रूप से लटकाकर दे खए क कुछ भी लटकाए बना संकेतक शून्य पर है।
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agl
3. अपनी आँख को संकेतक के ठ क तल म रखकर न्यूटन पैमाना प ढ़ए, जससे आप ऊपर या नीचे का चह्न न पढ़ ल।
m.co
4. नकटतम भाग तक प ढ़ए — इस तुला के लए नकटतम 0.2 N तक। प्रत्येक प्र व ष्ट के साथ मात्रक N अवश्य ल खए।
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नमूना उत्तर — आपके पाठ्यांक भन्न ह गे, क्य क आपक वस्तुएँ ये नह ह।
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क्र.सं. वस्तु भार (N)
.
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1. प सल बॉक्स
2.m . a g
a s e आं शक रूप से भरी हुई जल क बोतल 5.0 N
agl 3. ज्या म त बॉक्स 2.4 N
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com g l a
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4. एक छोटा पत्थर 3.2 N
m
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चेतावनी क्य महत्त्वपूण है: कमानीदार तुला तभी तक काम करती है जब तक भार हटाने पर कमानी अपनी मूल
लंबाई म लौट आए। अ धक भार लटकाने पर कमानी ायी रूप से खची रह जाती है — उसके बाद वह जो भी
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पाठ्यांक दे गी वह गलत होगा, चाहे आप पढ़ने म कतनी ही सावधानी बरत।
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o m l a se
g करके क्रयाकलाप 5.10 से 5.12
.cसंकेत: तुला के बाईं ओर दशाए गए द्रव्यमान पैमाने ( चत्र 5.13) का उपयोग
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s e m
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दोहराइए और आपने उन्ह वस्तुओं का द्रव्यमान ग्राम म माप लया होगा। ध्यान द जए क दोन बार आपने एक ही
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प्रयोग कया — उपकरण वास्तव म पृथ्वी का खचाव ही मापता है, ग्राम वाला पैमाना उसे केवल बदलकर दखा दे ता
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है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 75
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5.5 भार और उसका मापन — द्रव्यमान एवं भार
प्र.1 भार और द्रव्यमान म क्या अंतर है?
द्रव्यमान कसी वस्तु म पदाथ क मात्रा है। भार वह गुरुत्वाकषण बल है जससे पृथ्वी (या कोई अन्य ग्रह) उस वस्तु को
अपनी ओर ख चती है। ये दो भन्न रा शयाँ ह और इन्ह भन्न मात्रक म मापा जाता है।
द्रव्यमान भार
यह है क्या वस्तु में पदाथ की मात्रा ु त्वाकषण बल िजससे पथ्ृ वी वस्तु को अपनी ओर
वह ग रु
खी ंचती है
क्या यह बल है? नही ं हाँ — भार एक बल है
मात्रक गाम (g) या िकलोगाम (kg) यूटन (N)
न्
कससे मापते ह दंड-तुल ा से (या कमानीदार तुल ा के द व्यमान कमानीदार तुल ा से
पैम ाने से )
क्या यह ान के साथ नहीं — इसका मान प येक थान पर समान
त् स् हाँ — बदल सकता है, योंिक गु वाकषण बल बदलता
क् रुत्
बदलता है? रहता है है
पुस्तक क ता लका इस अंतर को मूत रूप दे दे ती है। एक ही वस्तु भन्न- भन्न लोक पर ले जाई जाती है —
पृथ्वी चंद्रमा मंगल शुक्र बृहस्प त
वस्तु का द्रव्यमान 1 kg 1 kg 1 kg 1 kg 1 kg
वस्तु का भार 10 N 1.6 N 3.8 N 9N 25.4 N
दोन का व्यवहार भन्न क्य है: वस्तु को कह भी ले जाइए, उसम पदाथ क मात्रा उतनी ही रहती है, अत: उसका
द्रव्यमान बदल ही नह सकता। भार केवल वस्तु का गुण नह है — वह तो वस्तु और उस लोक के बीच के खचाव का
प रमाण है, अत: वह उस लोक पर भी नभर करता है। लोक बद लए, भार बदल जाएगा; वस्तु ज्य क त्य रहेगी।
पृथ्वी पर भी गुरुत्वाकषण बल व भन्न ान पर बहुत कम ही सही पर प रव तत हो सकता है, अत: भार भी थोड़ा
बदल सकता है।
संकेत: बाजार म हम कहते ह ‘गे ँ के इस थैले का भार 10 कलोग्राम है’। वै ा नक दृ ष्ट से यह दोन प्रकार से गलत
है — 10 kg द्रव्यमान है, और भार तो न्यूटन म ही बताना पड़ेगा। गे ँ खरीदते समय हमारी रु च वास्तव म पदाथ
क मात्रा अथात द्रव्यमान म ही होती है। अत: सही शब्द का उनके सही मात्रक के साथ उपयोग क जए, भले ही
अनौपचा रक वातालाप ही क्य न हो रहा हो।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 76
5.6 तैरना और डू बना
प्र.1 जल से भरी बाल्ट से मग ारा जल नकालते समय क्या आपने अनुभव कया है क जब तक मग जल म रहता है
तो यह हल्का लगता है?
हाँ — और जैसे ही मग जल क सतह से बाहर आता है वह तुरंत भारी लगने लगता है।
दोन तय म मग पर पृथ्वी का खचाव वही है; मग म कुछ जोड़ा या घटाया नह गया। प रवतन केवल यह है क जब तक मग
जल के भीतर है तब तक जल उसे ऊपर क ओर धकेलता है। यह ऊपर क ओर लगने वाला बल भार का कुछ भाग स्वयं सँभाल
लेता है, अत: आपके हाथ को कम बल लगाना पड़ता है और मग हल्का लगता है। कसी द्रव ारा कसी वस्तु पर ऊपर क दशा म
लगाया गया बल उत्क्षेप अथवा उत्प्लावन बल कहलाता है।
प्र.2 य द हम कुछ वस्तुओं को जल क सतह पर रखते ह तो उनम से कुछ वस्तुए ँ तैरती ह जब क कुछ नीचे डू ब जाती
ह। पृथ्वी का गुरुत्वाकषण बल सभी वस्तुओं पर काय कर रहा है तो सभी वस्तुए ँ जल के पात्र क तली क ओर
क्य नह गरती?
क्य क जल म रखी वस्तु पर केवल गुरुत्वाकषण बल ही नह लगता। जल उस पर उत्प्लावन बल लगाकर ऊपर क ओर धकेलता
है, और प रणाम इस बात पर नभर करता है क दोन म से कौन-सा बल बड़ा है।
गुरु त्वाकषण बल उत्प्लावन बल से अिधक → वस्त ु डू ब जाती है
गुरु त्वाकषण बल उत्प्लावन बल के बराबर → वस्त ु तै रती है
अत: जो वस्तुएँ तैरती ह वे गुरुत्वाकषण से बच नह रही ह — पृथ्वी उन्ह उतने ही बल से ख च रही है जतने से डू बने वाली वस्तुओं
को। वे इस लए तैरती ह क्य क उनके नीचे का जल उन्ह ठ क उतने ही बल से ऊपर धकेल रहा है, और दोन बल एक-दूसरे को
संतु लत कर दे ते ह।
क्या आप जानते ह? उत्प्लावन बल जस एक कारक पर नभर करता है वह है द्रव का घनत्व — इसी लए
अत्य धक खारे जल म तैरना मीठे जल के तालाब क तुलना म सरल होता है। घनत्व के वषय म आप इस पुस्तक के
आगे के अध्याय म जानगे।
क्रयाकलाप 5.13— आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 76
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
5.6 तैरना और डू बना ( चत्र 5.15)
क्रयाकलाप
प्र.1 बोतल को जल क सतह पर रख कर नीचे क ओर धके लए ( चत्र 5.15)। क्या आप बोतल पर ऊपर क ओर
लगते हुए बल का अनुभव करते ह?
चत्र 5.15, पृष्ठ 76 — पुनर चत रेखा चत्र: जल से भरी बाल्ट म बंद खाली बोतल।
हाँ। जैसे-जैसे आप ढक्कन कसी हुई खाली बोतल को बाल्ट के जल म नीचे दबाते ह, आपके हाथ को जल ारा बोतल पर ऊपर
क ओर लगाया गया बल अनुभव होता है — और जतना गहरा दबाते ह यह बल उतना ही प्रबल होता जाता है।
ऊपर क ओर लगने वाला यही बल उत्क्षेप अथवा उत्प्लावन बल है। इसे जल बोतल पर लगाता है और यह आपके दबाने क दशा
के वपरीत दशा म काय करता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 बोतल को छोड़ द जए। क्या वह उछलकर ऊपर आती है?
हाँ। छोड़ते ही बोतल तेजी से ऊपर आती है और जल क सतह पर तैरने लगती है।
ऐसा क्य होता है: हाथ हटते ही बोतल पर केवल दो बल शेष रहते ह — नीचे क ओर पृथ्वी का खचाव और ऊपर
क ओर जल का उत्क्षेप। जल के भीतर दबी हुई, वायु से भरी बंद बोतल पर लगने वाला उत्क्षेप उसके भार से कह
अ धक होता है, अत: बोतल तब तक ऊपर क ओर धकेली जाती है जब तक उसका पयाप्त भाग जल से बाहर न आ
जाए और दोन बल संतु लत न हो जाएँ। तब वह तैरने लगती है। वास्तव म सभी द्रव इसी प्रकार का बल लगाते
ह।
यह करके दे खए: अब उसी बोतल को जल से पूरी तरह भरकर, ढक्कन कसकर दोहराइए। अब वह मु श्कल से ही
ऊपर उठे गी। बोतल दोन बार उतना ही ान घेरती है — बदला केवल बोतल का भार है, और इसी से तय होता है
क दोन बल म कौन जीतेगा।
ज ासा बनाए रख — पृष्ठ 77
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय के अंत का अभ्यास, प्रश्न 1–10
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ज ासा बनाए रख
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a s eभm‘क’ म दए गए बल का मलान स्तंभ ‘ख’ के संगत उदाहरण से क जए। स्तंभ ‘क’ (बल का प्रकार): (i)
gl
स्तं
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प्र.1
पेशीय बल (ii) चुंबक य बल (iii) घषण बल (iv) गुरुत्व बल (v) रवै ुत बल। स्तंभ ‘ख’ (उदाहरण): (क)
om
एक क्रकेट क गद का सीमा रेखा को स्पश करने से ठ क पूव अपने आप रुकना (ख) बच्चे ारा अपना बस्ता
. c ag
(स्कूल बैग) उठाना (ग) पेड़ से फल का गरना (घ) ऊनी कपड़े पर रगड़े गए गुब्बारे ारा बाल को आक षत करना
a s emचक सुई
(ङ) उत्तर दशा क ओर इं गत करती एक दक्सू
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स्तंभ ‘क’ स्तंभ ‘ख’ यह मलान क्य
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com (ख) ब चे ारा अपना ब ता ( कू ल बैग) उठाना l a
em
. ag बच्चे की भुजाओं की माँसपेिशयों के
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(i) पेशीय बल ऊपर की ओर का अिभकषण
a
च् स् स्
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िसकु ड़ने से आता है — एक संपक बल
(ii) चुंबक य ङ उ र िदशा की ओर इंिगत करती एक िद सूचक
( ) चुंबिकत सुई पर िबना संपक के चुंबकीय बल काय करके उसे
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त्त क्
सुई m a
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बल घुम ा दे ता है
क एक ि के ट की गेंद का सीमाsरेeखm
ा को पश
l a
(iii) घषण बल ( ) गेंद और मैद ान के बीच का घषण गित के िवपरीत लगकर उसे
ag
स्
करने से ठीक पूव अपने आप कना रु रोक दे ता है
ग पेड़ से फल का िगरना
co m
(iv) गुरुत्व बल ( ) पथ्ृ वी फल को अपनी ओर आकिषत करती है — असंपक और
सदै व आकष बल
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(v)
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रवैद्युत घ ऊनी कपड़ े पर रगड़ े गए गु बारे ारा बालों को
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( ) ब् रगड़ने से ग ब्ु बारा आवेिशत हो जाता है; आवेिशत िपंड अनावेिशत
आकिषत करना
a s
बल बालों को दू र से आकिषत करता है
ag l
संकेत: पहले संपक के आधार पर छाँ टए। पाँच म से केवल (i) और (iii) को ही स्पश चा हए, और उदाहरण म
se m
com g l a
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केवल एक ही म कसी व्य क्त क माँसपे शयाँ लगी ह — इससे दो पं क्तयाँ तुरंत तय हो जाती ह।
m a
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प्र.2 बताइए क नम्न ल खत कथन सत्य ह या असत्य। (i) कसी ग तशील वस्तु क चाल म प रवतन हेतु सदै व एक
बल क आवश्यकता होती है। (ii) घषण के कारण समतल सतह पर लुढ़कती हुई गद क चाल म वृ द्ध हो जाती
m .
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है। (iii) एक दूसरे से कुछ दूरी पर त दो आवे शत वस्तुओं के बीच कोई बल नह लगता है।
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a s emउत्तर
agl
.c
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(i) सत्य। चाल स्वयं नह बदल सकती। वस्तु चलना आरंभ करे, तेज हो, धीमी हो या रुक जाए — हर त म उस पर कोई बल
m a s e
co agl
अवश्य काय कर रहा होता है। यही ता लका 5.1 का कद्र य नष्कष है।
m .
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(ii) असत्य। घषण उस दशा के वपरीत काय करता है जसम गद लुढ़क रही है, अत: वह चाल को घटाता है और अंतत: गद को
वरामाव
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ा म ले आता है। वह चाल कभी बढ़ा नह सकता। (ऊबड़-खाबड़ भू म पर गद सपाट भू म क तुलना म जल्द रुक जाती
a है।)
है — यह इस कथन के ठ क वपरीत
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
(iii) असत्य। रवैद्युत बल एक असंपक बल है, अत: वह दूरी के आर-पार काय करता है — समान आवेश प्र तक षत करते ह
और वषम आवेश आक षत। दूर-दूर लटके दो रगड़े हुए गुब्बारे एक-दूसरे को बना स्पश कए ही दूर धकेलते ह ( क्रयाकलाप 5.7)।
प्र.3 दो गुब्बार को ऊनी कपड़े से रगड़ कर एक-दूसरे के समीप लाया जाए तो क्या होगा और क्य ?
वे एक-दूसरे से दूर हट जाएँगे — अथात एक-दूसरे को प्र तक षत करगे।
दोन गुब्बार को एक ही ऊनी कपड़े से रगड़ा गया है, अत: दोन एक ही प्रकार से आवे शत हुए ह और उन्ह ने समान (एक जैसे)
आवेश प्राप्त कए ह। समान आवेश एक-दूसरे को प्र तक षत करते ह, इस लए प्रत्येक गुब्बारा दूसरे को दूर धकेलता है और उन्ह
लटकाने वाले धागे बाहर क ओर तरछे हो जाते ह ( चत्र 5.9, ख)।
ऐसा क्य होता है: रगड़ने से आवेश केवल एक ही वस्तु पर उत्पन्न नह होता। रगड़ने वाली वस्तु और रगड़ी गई वस्तु
— दोन पर आवेश आते ह और वे वपरीत प्रकार के होते ह। इसी लए दोन गुब्बारे आपस म समान (और प्र तकष )
ह, जब क कोई भी एक गुब्बारा और कपड़ा वषम (और आकष ) ह। ऊनी कपड़े को कसी एक गुब्बारे के पास
लाइए, वह कपड़े क ओर झुकता दखाई दे गा।
स्वयं जाँ चए: यह प्रभाव एक बल है, अत: बल के नयम का पालन करता है — यह दोन गुब्बार पर लगता है और
बना संपक के लगता है। इसी लए इसे रवै ुत बल, अथात एक असंपक बल कहते ह।
प्र.4 जब आप जल से भरे गलास म एक सक्के को डालते ह तो वह डू ब जाता है परंतु जब आप एक बड़ा लकड़ी का
टु कड़ा जल म डालते ह तो वह तैरता है। व्याख्या क जए।
जल म रखी दोन वस्तुओं पर दो बल लगते ह — नीचे क ओर ख चने वाला गुरुत्वाकषण बल और ऊपर क ओर धकेलने वाला
जल का उत्प्लावन बल (उत्क्षेप)। इनम से कौन बड़ा है, यही तय करता है क वस्तु डू बेगी या तैरेगी।
सक्का: सक्का छोटा है, अत: वह बहुत कम जल हटाता है और उसे मलने वाला उत्क्षेप भी बहुत कम होता है। परंतु वह धातु
का बना है, अत: इतना छोटा होकर भी भारी है। यहाँ गुरुत्वाकषण बल उत्प्लावन बल से अ धक है, अत: सक्का तली म जा
बैठता है।
लकड़ी का टु कड़ा: टु कड़ा कह बड़ा है, अत: जल म बैठते ही वह बहुत अ धक जल हटाता है और उसे बड़ा उत्क्षेप मलता है।
लकड़ी अपने आमाप क तुलना म हल्क होती है, अत: टु कड़े को अ धक गहरा डू बना ही नह पड़ता — थोड़ा डू बते ही उत्क्षेप
उसके भार के बराबर हो जाता है। उस त म दोन बल बराबर हो जाते ह और टु कड़ा अपना कुछ भाग जल के ऊपर रखते
हुए तैरने लगता है।
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गुरुत्वाकषण बल उत्प्लावन बल (उत्क्षेप)
िसक्का लकड़ ी का टु क ड़ ा
गुरुत्व > उत्क्षेप → डूबता है गुरुत्व = उत्क्षेप → तैरता है
तीर प रमाण के अनुपात म बनाए गए ह — सक्के पर नीचे का तीर लंबा है, टु कड़े पर दोन तीर बराबर ह।
आमाप भ्र मत न करे: यह कहना सरल लगता है क टु कड़ा लकड़ी का है इस लए तैरता है और सक्का धातु का है
इस लए डू बता है — परंतु वास्त वक तुलना वस्तु के भार और उसे मलने वाले उत्क्षेप के बीच है, और उत्क्षेप इस
पर नभर करता है क वस्तु कतना जल हटाती है। बड़े टु कड़े को बड़ा उत्क्षेप ठ क इस लए मलता है क्य क वह
बड़ा है। यही आ क मडीज का सद्धांत है — डू बी हुई वस्तु पर ऊपर क ओर लगने वाला बल उसके ारा व ा पत
द्रव के भार के बराबर होता है।
प्र.5 य द एक गद को ऊपर क ओर फका जाता है तो वह धीमी होती जाती है फर एक क्षण के लए वरामाव ाम
आती है एवं पुनः धरती पर गर जाती है। गद पर लगने वाले बल का नाम एवं उसक दशाएँ बताइए — (i) ऊपर
क ओर ग त क कालाव ध म (ii) नीचे क ओर ग त क कालाव ध म (iii) इसक सबसे ऊपरी त पर
हवा म रहते हुए गद पर दो बल लगते ह — पृथ्वी का गुरुत्वाकषण बल, जो सदै व ऊध्वाधरतः नीचे क ओर लगता है, तथा वायु के
कारण घषण बल, जो सदै व गद क ग त के वपरीत लगता है।
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ग त क अव ा गद पर लगने वाले प्रत्येक क दशा चाल पर प्रभाव
बल
(i) ऊपर क ओर ग रु
ु त्वाकषण बल; वायु गु व — नीचे की ओर; वायु का
रुत् दोन ग त का वरोध करते ह, अत: चाल घटती जाती
ग त क कालाव ध के कारण घषण बल घषण — नीचे की ओर (ऊपर है
म की गित के िवपरीत)
(ii) नीचे क ओर ग रु
ु त्वाकषण बल; वायु गु व — नीचे की ओर; वायु का
रुत् गुरुत्व बड़ा है, अत: चाल बढ़ती जाती है
ग त क कालाव ध के कारण घषण बल घषण — ऊपर की ओर (नीचे
म की गित के िवपरीत)
(iii) इसक सबसे के वल ग रु
ु त्वाकषण नीचे की ओर गद क्षण भर के लए वरामाव ा म है, अत: वायु के
ऊपरी त पर बल घषण के लए वरोध करने योग्य कोई ग त नह ;
गुरुत्व उसे तुरंत नीचे चला दे ता है
(i) ऊपर की ओर गित (ii) नीचे की ओर गित (iii) सबसे ऊपरी िस्थित
ग घ ग घ ग
दोनों बल नीचे की ओर वाय ु का घषण अब ऊपर की ओर क्षण भर िवराम — केवल ‘ग’
ग = गुरुत्वाकषण बल (सदैव नीचे की ओर) घ = वाय ु के कारण घषण बल
गित की िदशा
पृथ्वी का खचाव अपनी दशा कभी नह बदलता; वायु का घषण पलट जाता है, क्य क वह सदै व गद क ग त का ही वरोध करता है।
गद शीष पर क्य रुकती है: ऊपर जाते समय दोन बल नीचे क ओर लगते ह, अत: चाल लगातार घटकर शून्य हो
जाती है। उस क्षण गुरुत्व काय करना बंद नह करता — वह तब भी नीचे क ओर ख च रहा होता है — अत: गद
वहाँ ठहर नह सकती। उसक ग त क दशा बदल जाती है और वह नीचे गरने लगती है, नीचे आते समय चाल
बढ़ती जाती है।
संकेत: य द प्रश्न केवल गुरुत्व वाले खंड का उत्तर माँगे तो अकेला गुरुत्वाकषण बल बताना पयाप्त है। वायु के घषण
का उल्लेख उत्तर को पूण करता है, क्य क पुस्तक बता चुक है क वायु भी अपने भीतर ग तमान वस्तुओं पर घषण
बल लगाती है।
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प्र.6 एक गद को बदु ‘क’ से छोड़ा जाता है और वह एक नत तल पर एवं इसके पश्चात एक क्षै तज सतह पर ग त
करती है जैसा क चत्र 5.16 म दशाया गया है। क्षै तज सतह पर यह बदु ‘ख’ पर वरामाव ा म आ जाती है।
एक ऐसी व ध ल खए जसम गद को उसी बदु ‘क’ से छोड़ा जाए तो वह (i) बदु ‘ख’ से पूव (ii) बदु ‘ख’ को
पार करने के पश्चात वरामाव ा म आए।
क
ख
चत्र 5.16, पृष्ठ 78 — गद को नत तल के शीष पर बदु ‘क’ से छोड़ा जाता है और वह क्षै तज सतह पर बदु ‘ख’ पर
वरामाव ा म आ जाती है।
गद हर बार उसी बदु ‘क’ से छोड़ी जाती है, अत: वह नत तल के नीचे सदै व एक जैसी ही पहुँचती है। अब यह तय करने के लए क
वह कहाँ रुकेगी, केवल एक ही बात शेष है — गद और क्षै तज सतह के बीच का घषण। इसी को बद लए।
(i) बदु ‘ख’ से पूव रोकने के लए — घषण बढ़ाइए। क्षै तज सतह पर कोई खुरदरा पदाथ बछा द जए — रेत, कपड़े का
टु कड़ा, टाट अथवा खुरदरा कागज। खुरदरी सतह क अ नय मतताएँ बड़ी होती ह, अत: गद पर घषण बल अ धक लगेगा, उसक
चाल तेजी से घटे गी और वह ‘ख’ से पहले ही वरामाव ा म आ जाएगी।
(ii) बदु ‘ख’ को पार करने के पश्चात रोकने के लए — घषण घटाइए। क्षै तज सतह को अ धक चकना बना द जए — उस
पर पॉ लश कर द जए, काँच क या चकनी सरे मक टाइल क शीट बछा द जए, अथवा थोड़ा-सा टै ल्कम पाउडर छड़क द जए।
अ नय मतताएँ छोट होने से घषण बल कम लगेगा, गद क चाल धीरे-धीरे घटे गी और वह ‘ख’ को पार करके आगे जाकर रुकेगी।
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(i) ख (ii)
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(i) सतह पर रे त या कपड़ ा → घषण अिधक → गेंद ‘ख’ से पहले रुकती है
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(ii) पॉिलश या काँच की शीट → घषण कम → गेंद ‘ख’ के आगे जाकर रुकती है
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वही प्रारं भक बदु ‘क’, वही गद — केवल क्षै तज सतह बदली गई है और उसके साथ घषण।
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a gl ध्यान द जए: गद को अ धक ऊँचाई से छोड़कर या उसे धक्का दे कर उत्तर मत द जए। प्रश्न प्रारं भक बदु को ‘क’
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पर र रखता है, अत: उत्तर सतह म खोजना है, छोड़ने के ढं ग म नह ।
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प्र.7 a g
य द हम सावधान न रह तो चकनी सतह जैसे बफ या पॉ लश क हुई सतह पर क्य फसल जाते ह? समझाइए।
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क्य क ऐसी सतह पर हमारे पैर और धरातल के बीच घषण बल बहुत कम होता है, और पकड़ हम सामान्यत: घषण से ही
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मलती
ag सो चए क एक साधारण कदम म क्या होता है। आपका पैर धरातल को पीछे क ओर दबाता है; घषण उस पीछे क ओर फसलने
के प्रयास के वपरीत लगकर पैर को उसी ान पर रोके रखता है और आपको आगे बढ़ने दे ता है। घषण दोन सतह क
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अ नय मतताओं के एक-दूसरे म फँसने से उत्पन्न होता है — और बफ तथा पॉ लश कए फश पर अ नय मतताएँ बहुत कम और बहुत
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उथली होती ह। जूते के तले के फँसने योग्य वहाँ कुछ बचता ही नह । अत: पकड़ बनने के ान पर पैर आपके नीचे से फसल जाता
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है और आप गर पड़ते ह।
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ऐसा क्य होता है: घषण संपक म आने वाली सतह क प्रकृ त पर नभर करता है और खुरदरी सतह पर अ धक
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होता है ( क्रयाकलाप 5.4)। चकनी सतह इसी नयम का चरम उदाहरण है। गीला पॉ लश कया फश और भी बुरा
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होता है, क्य क जल क परत दोन सतह को अलग रखकर घषण और घटा दे ती है।
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क्या आप जानते ह? घषण को प्राय: बाधा कहा जाता है, परंतु यही त दखाती है क वह हम कतना आवश्यक
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है। बफ ले माग पर रेत या राख इसी लए बखेरी जाती है और जूत के तले पर गहरे खाँचे इसी लए बनाए जाते ह —
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जहाँ चकनी सतह ने घषण छ न लया है वहाँ उसे लौटाने के लए।
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प्र.8 य द कोई वस्तु असमान ग त से चल रही है तो क्या इस पर कोई बल लगाया जा रहा है?
हाँ। असमान ग त से चलती वस्तु वह है जसक चाल लगातार बदल रही है — और कसी वस्तु क चाल म प रवतन हेतु सदै व एक
बल क आवश्यकता होती है।
अत: य द कोई बस तेज हो रही है, धीमी हो रही है, या कसी एक भाग म दूसरे भाग से अ धक तेज चल रही है तो उस पर कोई न
कोई बल काय कर रहा है। घषण इनम सबसे सामान्य है — इसी के कारण लुढ़कती गद या बना पैडल चलती साइ कल बना कसी
के स्पश कए ही चाल खोती जाती है और अंतत: रुक जाती है।
ऐसा होना ही क्य चा हए: अध्याय का कद्र य नष्कष दोन दशाओं म चलता है। बल कसी वस्तु क चाल बदल
सकता है — और इसके वपरीत, बल के अ त रक्त कोई भी वस्तु क चाल नह बदल सकता। अत: य द ग त
असमान है तो कोई बल अवश्य काय कर रहा है, चाहे आपको दखाई दे या न दे क वह कौन लगा रहा है।
ध्यान द जए: प्रश्न असमान ग त का है। य द वस्तु समान चाल से कसी वक्र पथ पर चल रही हो तो उसक दशा
बदल रही है — और उसके लए भी बल आवश्यक है, क्य क बल ग त क दशा भी प रव तत कर सकता है।
प्र.9 चंद्रमा पर कसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार के छठव भाग के समान हो जाता है। इस प रवतन का क्या
कारण है? क्या वस्तु का द्रव्यमान चंद्रमा पर भी पृथ्वी पर उसके द्रव्यमान का छठवाँ भाग हो जाता है?
कारण: भार स्वयं वह गुरुत्वाकषण बल है जससे कोई पड कसी वस्तु को अपनी ओर ख चता है। चंद्रमा का गुरुत्वाकषण बल
पृथ्वी क तुलना म बहुत कम है — लगभग छठवाँ भाग — अत: चंद्रमा उसी वस्तु को पृथ्वी के छठव भाग जतने बल से ही ख चता
है। यही कम खचाव चंद्रमा पर वस्तु का कम भार है।
नह — द्रव्यमान बल्कुल नह बदलता। द्रव्यमान कसी वस्तु म पदाथ क मात्रा है। वस्तु को चंद्रमा पर ले जाने से उसम से पदाथ
नह नकलता, अत: चंद्रमा पर उसका द्रव्यमान ठ क वही रहेगा जो पृथ्वी पर था।
पृथ्वी पर: द व्यमान = 1 kg, भार = 10 N
चंद मा पर: द व्यमान = 1 kg (अपिरवित त ), भार = 10 N ÷ 6 ≈ 1.6 N
पुस्तक क अपनी ता लका भी यही दखाती है — द्रव्यमान पृथ्वी, चंद्रमा, मंगल, शुक्र और बृहस्प त सब पर 1 kg रहता है जब क
भार क्रमश: 10 N, 1.6 N, 3.8 N, 9 N और 25.4 N पढ़ा जाता है।
दोन का व्यवहार भन्न क्य है: द्रव्यमान केवल वस्तु का गुण है। भार केवल वस्तु का गुण नह — वह वस्तु और
जस लोक पर वह रखी है, दोन के बीच के खचाव का प रमाण है, अत: वह उस लोक पर भी नभर करता है। लोक
बद लए, भार बदल जाएगा; वस्तु स्वयं अछू ती रहेगी।
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स्वयं जाँ चए: चंद्रमा पर ले जाई गई कमानीदार तुला अपने पृथ्वी वाले पाठ्यांक का छठवाँ भाग दखाएगी, क्य क
वह एक बल मापती है। दं ड-तुला वहाँ भी वही प रणाम दे गी, क्य क वह वस्तु क तुलना ात द्रव्यमान से करती है
और चंद्रमा का कम खचाव दोन पलड़ पर समान रूप से लगता है।
प्र.10 समान आमाप और आकृ त क भन्न- भन्न पदाथ से बनी तीन वस्तुए ँ 1, 2 और 3 जल म रखी गई ह। वे भन्न-
भन्न गहराई तक डू बती ह जैसा क चत्र 5.17 म दशाया गया है। य द तीन वस्तुओं 1, 2 और 3 के भार क्रमशः
w1, w2 और w3 ह तो नम्न ल खत म से कौन-सा वकल्प सत्य है? (i) w1 = w2 = w3 (ii) w1 > w2 >
w3 (iii) w2 > w3 > w1 (iv) w3 > w1 > w2
3
2
1
चत्र 5.17, पृष्ठ 79 — समान आमाप और आकृ त क कतु भन्न- भन्न पदाथ से बनी तीन वस्तुए ँ जल म भन्न- भन्न
गहराई तक डू बी हुई।
वकल्प (ii): w1 > w2 > w3।
चत्र 5.17 म तीन वस्तुएँ तैर रही ह, अत: प्रत्येक के लए जल का उत्प्लावन बल उसके भार के ठ क बराबर है। चत्र को प ढ़ए —
वस्तु 1 सबसे अ धक गहराई तक डू बी है, वस्तु 2 उससे कम और वस्तु 3 सबसे कम।
वस्त ु िजतनी गहरी डू बेगी → उतना अिधक जल हटाएगी → उस पर उत्क्षेप उतना ही अिधक
वस्त ु तै र रही है → उत्क्षेप = वस्त ु का भार
अत: सबसे गहरी डू बी वस्त ु का भार सबसे अिधक
डू बने की गहराई: 1 > 2 > 3, अत: w1 > w2 > w3
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3
2
1
सबसे गहरी डू बी कम डू बी सबसे कम डू बी
w1 सबसे अिधक w2 बीच मे ं w3 सबसे कम
आमाप और आकृ त समान, पदाथ भन्न: जो सबसे गहरी बैठती है वह सबसे अ धक जल हटाती है, अत: वही सबसे भारी होगी।
शेष वकल्प क्य गलत ह: (i) के लए तीन को समान गहराई तक डू बना पड़ता, जो चत्र के वरुद्ध है। (iii) और
(iv) दोन वस्तु 1 को — जो सबसे गहरी डू बी है — कसी अन्य से हल्का बताते ह, जो हो ही नह सकता, क्य क
तैरती वस्तु उतना ही डू बती है जतने म उसे अपने भार के बराबर उत्क्षेप मल जाए।
क्या आप जानते ह? यह आ क मडीज के सद्धांत का प्रयोग है — डू बी हुई वस्तु पर ऊपर क ओर लगने वाला बल
उसके ारा व ा पत द्रव के भार के बराबर होता है। तीन वस्तुओं का आमाप और आकृ त समान है, अत: केवल
पदाथ ही भन्न हो सकता है — और सबसे भारी पदाथ से बनी वस्तु ही सबसे गहरी डू बेगी।
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर — पृष्ठ 79
अंतर वषयक प रयोजनाएँ — व ान एवं समाज
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर
प्र.1 व भन्न पदाथ , जैसे – प्ला स्टक, ऊन, रेशम, रबर, पॉलीथीन शीट, कागज और धातुओं से बनी वस्तुओं को
एक त्रत क जए। एक वस्तु को दूसरी वस्तु से रग ड़ए एवं जाँ चए क क्या यह कागज के छोटे टु कड़ को
आक षत करती है या नह अथवा यह आवे शत होती है या नह । अपने प्रेक्षण को व्यव त ढं ग से अ भले खत
क जए और एक शोध पत्र ल खए।
कैसे कर। कागज के कुछ बहुत छोटे टु कड़े काटकर सूखी मेज पर र खए। एक बार म दो पदाथ लेकर उन्ह लगभग आधे मनट तक
तेजी से आपस म रग ड़ए, फर प्रत्येक को कागज के टु कड़ के ठ क ऊपर बना स्पश कए लाइए। दे खए क टु कड़े उछलते ह या
नह । रगड़े हुए भाग को अपने हाथ या कसी धातु से स्पश न क जए, और यह प्रयोग सूखे दन क जए — नमी वाले दन आवेश
नकल जाता है और कुछ नह होता।
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इस प्रकार अ भले खत क जए (नमूना ता लका, जसम अपे क्षत प्रकार के प रणाम दए ह) —
रगड़ी गई वस्तु कससे कागज के टु कड़े आक षत क्या यह आवे शत हुई?
रगड़ा हुए?
प्ला स्टक मापक पॉलीथीन शीट हाँ, पबलता से हाँ
गुब्बारा (रबर) ऊनी कपड़ा हाँ हाँ
प्ला स्टक क कंघी सूखे बाल हाँ हाँ
रेशमी कपड़ा काँच की छड़ हाँ, दुबल प से
रू हाँ
हाथ म पकड़ी लोहे क ऊनी कपड़ा नहीं नह — आवेश आपके हाथ से नकल जाता है
कल
कागज कागज नहीं नह — एक जैसे दो पदाथ एक-दूसरे को आवे शत
नह करते
शोध पत्र कैसे लख। वही खंड र खए जो वास्त वक शोध पत्र म होते ह — प्रश्न (कौन-से पदाथ रगड़ने पर आवे शत होते ह?),
व ध (आपने ठ क-ठ क क्या कया, ता क कोई और दोहरा सके), प्रेक्षण (ता लका), व ेषण (कौन-सी जो ड़याँ सफल रह और
कौन-सी नह ), नष्कष तथा सीमाएँ (आद्रता, रगड़ने का समय, कागज के टु कड़ का आकार)।
प रणाम क्या दखाएँगे: आवेशन सबसे अ ा दो भन्न अधातुओं के बीच होता है, और दोन वस्तुएँ आवे शत होती
ह — वपरीत प्रकार के आवेश के साथ। नंगे हाथ म पकड़ी धातु आवे शत होती नह दखती, क्य क आवेश आपके
शरीर से होकर नकल जाता है।
प्र.2 एक ऐसे प रदृश्य क कल्पना क जए जहाँ गुरुत्वाकषण वलुप्त हो जाता है। एक कहानी तैयार क जए। अपनी
कहानी प्रस्तुत करने के लए एक हास्य प (काटू न स् प) बनाइए।
कहानी म ये बात सही होनी चा हए। गुरुत्वाकषण ही वह बल है जो सब कुछ धरती से दबाए रखता है और प्रत्येक वस्तु को उसका
भार दे ता है। वह हट जाए तो (क) कुछ भी नीचे नह गरेगा, (ख) कसी का भार नह रहेगा, यद्य प प्रत्येक वस्तु का द्रव्यमान ज्य
का त्य रहेगा, (ग) बँधी हुई वस्तुओं के अ त रक्त सब कुछ तैरने लगेगा, (घ) जल न ढलेगा और न गलास म ठहरेगा, (ङ) आप चल
नह पाएँगे, क्य क चलना घषण पर नभर है और जूत तथा फश के बीच घषण के लए आपके भार का दबाव आवश्यक है।
नमूना कहानी — जस दन गुरुत्वाकषण ने छु ले ली
1. पैनल 1: मीरा क आँख खुलती है तो चादर, त कया और स्वयं वह — तीन पंखे के पास हवा म लटके हुए ह।
2. पैनल 2: वह दाद के लए चाय ढालती है। चाय केतली से नकलकर एक डोलती हुई चमक ली गद बनकर रसोई म तैरने लगती
है।
3. पैनल 3: वह वद्यालय क ओर दौड़ने का प्रयास करती है पर वह घूमकर रह जाती है — जूते फश पर दबाव ही नह डाल पाते,
अत: धकेलने के लए घषण ही नह मलता।
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4. पैनल 4: कक्षा म कमानीदार तुला प्रत्येक वस्तु के लए शून्य दखाती है। श क्षका ध्यान दलाती ह क प सल बॉक्स म पदाथ
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अब भी उतना ही, 200 g, है — केवल खचाव चला गया है।
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चार.बजे गुरुत्वाकषण लौट आता है। सब कुछ एक साथ नीचे आ गरता है, और मीराaसोचती है क चढ़ाई पर साइ कल
5. पैनल 5: क्रकेट क गद एक बार बल्ले से लगकर कभी नीचे नह आती। वह गाँव के ऊपर से नकलकर दूर नकल जाती है।
6. पैनल 6: m
a e जस बल क वह शकायत करती थी, वही उसक पूरी दु नया को थामे हुए है।
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चलाते
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काटू न स् प के लए संकेत: प्रत्येक पैनल म कसी एक वस्तु के पास एक छोटा तीर बनाइए जो दखाए क वहाँ
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कौन-सा बल लग रहा है (या नह लग रहा)। इससे एक मनोरंजक प . व ान बन जाती है, और पैनल 4 क बात — ag
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द्रव्यमान वही, भार शून्य — ठ क से समझ म आती है।as
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अपनी कक्षा म घषण — एक आवश्यकता या एक समस्या, वषय पर एक चचा क जए।m
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omअपनी अभ्यास पु स्तका म ल खए और बताइए क घषण कहाँ आवश्यक laहै और कब यह एक समस्या
प्र.3 चचा का सं क्षप्त
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ववरण
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a s emबन जाता है?
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om ा है, न केवल बुरा। जहाँ पकड़ चा हए वहाँ यह आवश्यकता है a
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चचा जस नष्कष तक पहुँचनी चा हए: घषण न तो केवल अ
m प्राय: एक ही मशीन म दोन बात एक साथ होती ह।
और जहाँ सरल ग त चा हए वहाँ यह समस्या है —eऔर
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घषण एक आवश्यकता है
agl घषण एक समस्या है
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चलना — पैर धरातल को पकड़कर पीछे धकेलता है
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रगड़ खाते मशीन के पुज गरम होकर िघस जाते है ं
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साइ कल या बस के ेक प हए को रोकते ह जूतों के तले , टायर और सड़कें िघसती रहती है ं
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agl — प सल का लेड कागज पर घषण से ही चढ़ता है इंजनों में के वल घषण पार करने के िलए अितिरक्त ईंध न जलता है
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गलास पकड़ना, गाँठ बाँधना, मा चस जलाना वायु और जल का घषण वायुयानों तथा जलयानों को धीमा करता है
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सीढ़ का न फसलना; द वार म क ल का टका रहना भारी अलमारी को फश पर सरकाने में बहुत बल लगाना पड़ता है
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चचा कैसे चलाएँ: कक्षा को दो समूह म बाँ टए, प्रत्येक को दस मनट द जए क वे घर, सड़क और खेल के मैदान से उदाहरण
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एकत्र कर, फर उन्ह तक करने द जए। यह शत र खए क प्रत्येक उदाहरण म संपक म आने वाली दोन सतह के नाम बताए
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जाएँ — यही कसी राय को वै ा नक तक बनाता है।
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.cअंत म यह बात र खए: अ भयंता घषण को मटाने का प्रयास नह करते;aवेgउसे वहाँ रखते ह जहाँ वह चा हए और
m वहाँ से हटाते ह जहाँ नह चा हए। बॉल-बेय रग और तेल प हए के भीतर घषण घटाते ह, जब क उसी प हए के टायर
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ag क खाँचेदार सतह सड़क पर घषण बढ़ाने के लए बनाई जाती है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 5 बल को जान AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 अपने शक्षक क सहायता से अपनी स्वयं क एक कमानीदार तुला बनाइए और मानक भार का उपयोग करके
इसे च त क जए। अब व भन्न वस्तुओं के भार मा पए और व भन्न वस्तुओं के भार और द्रव्यमान के अनुपात
क गणना क जए। क्या आप कोई स्पष्ट संबंध दे खते ह?
बनाना और च त करना। एक दृढ़ स्टड से हल्क कमानी लटकाइए, उसके नचले सरे पर एक संकेतक तथा उसके पीछे कागज
का एक पैमाना लगाइए। कुछ भी न लटकाकर संकेतक क त अं कत क जए — यही आपका शून्य है। अब एक-एक करके
मानक द्रव्यमान (100 g, 200 g, 300 g …) लटकाकर प्रत्येक बार संकेतक क नई त अं कत क जए। इन चह्न को
मलाइए, आपका च ह्नत पैमाना तैयार है।
जो संबंध दखाई दे गा। चह्न समान अंतराल पर बनते ह — प्रत्येक अ त रक्त 100 g कमानी को उतना ही अ त रक्त ख चता है।
और भार को द्रव्यमान से भाग दे ने पर उत्तर प्रत्येक वस्तु के लए लगभग समान आता है।
वस्तु द्रव्यमान मापा गया भार भार ÷ द्रव्यमान
मानक द्रव्यमान 100 g = 0.1 kg 1N 10 N/kg
प सल बॉक्स 200 g = 0.2 kg 2N 10 N/kg
छोटा पत्थर 300 g = 0.3 kg 3N 10 N/kg
जल क बोतल 500 g = 0.5 kg 5N 10 N/kg
इस संबंध का अथ: वस्तु चाहे कसी भी पदाथ क हो, यह अनुपात वही रहता है — पृथ्वी पर प्र त कलोग्राम
लगभग 10 N। इसी लए कमानीदार तुला पर न्यूटन के पैमाने के साथ ग्राम का पैमाना भी बनाया जा सकता है: पृथ्वी
पर दोन पाठ्यांक सदै व एक नयत अनुपात म रहते ह। उसी तुला को चंद्रमा पर ले जाइए तो न्यूटन वाले पाठ्यांक
लगभग छठव भाग रह जाएँगे जब क द्रव्यमान अप रव तत रहगे — और तब ग्राम वाला पैमाना गलत हो जाएगा।
ध्यान द जए: ऐसी कमानी चु नए जो 100 g से दखाई दे ने योग्य खच जाए परंतु आपक सबसे भारी वस्तु से
ायी रूप से न खचे। प्रत्येक मापन के बाद जाँ चए क संकेतक शून्य पर लौटता है; य द नह लौटता तो कमानी पर
अ धक भार पड़ चुका है और तुला को पुन: च ह्नत करना होगा।
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प्र.5 व ुतदश (इलेक् ोस्कोप) एक ऐसा उपकरण है जो यह नधा रत कर सकता है क कोई वस्तु व ुत आवे शत है
या नह । आप अपनी कक्षा म अपने शक्षक क सहायता से स्वयं का व ुतदश बना सकते ह ( चत्र 5.18) एवं
उपकरण का परीक्षण कर सकते ह। पता लगाइए क आप इस व ुतदश का अन्य कन व धय से उपयोग कर
सकते ह।
ताँबे का तार
निलका
ढक्कन
जार
एलुिमिनयम पन्नी
चत्र 5.18, पृष्ठ 79 — स्वयं बनाया जा सकने वाला व ुतदश : ऊपर ताँबे के तार क चपट कुंडली, न लका से होकर
जार के ढक्कन के आर-पार, और नीचे हुक से लटक एलु म नयम पन्नी क दो प याँ।
बनाना ( चत्र 5.18)। प्ला स्टक या गत्ते के ढक्कन वाला एक काँच का जार ली जए। ढक्कन म छे द करके एक न लका (स् ॉ)
डा लए। न लका म से होकर ताँबे का तार गुजा रए, उसके ऊपरी सरे को चपट कुंडली के रूप म लपे टए और नचले सरे को जार
के भीतर छोटे हुक क तरह मोड़ द जए। इस हुक से एलु म नयम पन्नी क दो पतली प याँ इस प्रकार लटकाइए क वे एक-दूसरे को
स्पश करती हुई स्वतंत्र रूप से लटक। ढक्कन बंद कर द जए।
परीक्षण। एक प्ला स्टक मापक को पॉलीथीन से रगड़कर ताँबे क कुंडली से स्पश कराइए। पन्नी क दोन प याँ एक-दूसरे से दूर
हट जाती ह। आवेश तार के सहारे नीचे उतरकर दोन प य तक पहुँच गया है; दोन को एक जैसा आवेश मला है और समान
आवेश प्र तक षत करते ह — अत: प याँ एक-दूसरे को दूर धकेल दे ती ह। कुंडली को अँगुली से स्पश क जए, आवेश आपके शरीर
से नकल जाएगा और प याँ पुन: मल जाएँगी।
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आप इसका कन- कन काम म उपयोग कर क्या दे खना है
सकते ह
यह जाँचना क कोई वस्तु आवे शत है या नह पि याँ फै ले ं → आवेिशत; न िहले ं → अनावेिशत
दो वस्तुओं के आवेश क तुलना करना पि याँ िजतनी अिधक फै ले ं, आवेश उतना अिधक
यह पता लगाना क कौन-से पदाथ रगड़ने पर अ ा लाि टक, रबर, रे शम, ऊन, कागज को बारी-बारी जाँचकर फै लाव की तुल ना
प् स्
आवे शत होते ह कीिजए
यह दखाना क आवेश धीरे-धीरे नकल जाता है नमी वाले िदन पि यों को धीरे -धीरे िमलते दे िखए, या कुं डली छू ते ही तुरंत
यह दखाना क धातुएँ आवेश ले जाती ह, प्ला स्टक नह कुं डली को पहले धातु के च मच से , िफर लाि टक के च मच से पश कराकर
म् प् स् म् स्
तुल ना कीिजए
ध्यान द जए: जार और पन्नी क प याँ पूरी तरह सूखी र खए, और रगड़ी हुई वस्तु को केवल उसके बना रगड़े सरे
से पक ड़ए। नमी और बीच म आ जाने वाली अँगु लयाँ ही इस प्रयोग को असफल करती ह।
अध्याय — एक नज़र म
बल कसी वस्तु पर लगने वाला अपकषण (धक्का) या अ भकषण ( खचाव) है जो उस वस्तु क कसी अन्य वस्तु के साथ
परस्पर क्रया का प रणाम होता है। बल के काय करने के लए कम से कम दो वस्तुओं का परस्पर क्रया करना आवश्यक है।
बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
बल वरामाव ा म रखी वस्तु को ग त दे सकता है, ग तमान वस्तु क चाल बदल सकता है, उसक ग त क दशा बदल
सकता है, उसके आकार म प रवतन ला सकता है, अथवा इनम से कुछ या सभी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। बल लगाए बना
इनम से कोई भी प रवतन संभव नह है।
संपक बल तभी लगते ह जब दोन वस्तुएँ स्पश म ह — पेशीय बल तथा घषण बल। घषण सदै व उस दशा के वपरीत काय
करता है जसम वस्तु ग त कर रही है या ग त करने का प्रयास कर रही है; यह सतह क अ नय मतताओं के कारण उत्पन्न होता
है और खुरदरी सतह पर अ धक होता है।
असंपक बल बना स्पश के दूर से लगते ह — चुंबक य बल, रवै ुत बल तथा गुरुत्वाकषण बल। समान ुव एवं समान
आवेश प्र तक षत करते ह, असमान आक षत; गुरुत्वाकषण बल सदै व आकष होता है।
वह बल जससे पृथ्वी कसी वस्तु को अपनी ओर ख चती है उस वस्तु का भार कहलाता है। भार एक बल है, अत: इसे न्यूटन
म कमानीदार तुला से मापा जाता है। द्रव्यमान वस्तु म पदाथ क मात्रा है और इसे g या kg म मापते ह। द्रव्यमान कभी नह
बदलता; भार ान के साथ बदल सकता है।
द्रव म रखी प्रत्येक वस्तु पर द्रव ऊपर क ओर बल लगाता है — उत्क्षेप अथवा उत्प्लावन बल। य द वस्तु पर लगने वाला
गुरुत्वाकषण बल उत्प्लावन बल से अ धक है तो वस्तु डू ब जाती है; य द दोन बराबर ह तो वह तैरती है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म पु स्तक से उदाहरण
कहाँ
बल िकसी वस्तु पर लगने वाला अपकषण या अिभकषण जो खंड 5.1 एवं गत्ते के डब्बे को धकेलना, ख चना या
िकसी अन्य वस्तु के साथ उसकी परस्पर ि या का पिरणाम 5.3, पृष्ठ 63–65 ऊपर उठाना ( क्रयाकलाप 5.1, चत्र
है 5.1)
न्यूटन (N) बल का, और इसीिलए भार का भी, SI मात्रक खंड 5.3, पृष्ठ चत्र 5.13 क कमानीदार तुला
65 अ धकतम 10 N तक पढ़ती है
संपक बल वह बल जो वस्तुओ ं के बीच भौितक संपक होने पर ही उत्पन्न खंड 5.4.1, पृष्ठ पेशीय बल तथा घषण बल
होता है 66
पेशीय बल माँस पेिशयों के िसकु ड़ने और फै लने की ि या के कारण खंड 5.4.1, पृष्ठ बैल ारा हल ख चना; हृदय क
उत्पन्न बल 66 माँसपे शय ारा रक्त का संचरण
घषण वह बल जो तब उत्पन्न होता है जब कोई वस्तु िकसी अन्य खंड 5.4.1, पृष्ठ धक्का द गई ट फन कुछ दूरी चलकर
सतह पर गित करती है या गित करने का पयास करती है; 67–68 रुक जाती है ( क्रयाकलाप 5.3)
सदै व गित के िवपरीत
असंपक बल वह बल िजसका पभाव वस्तुओ ं के संपक में न होने पर भी खंड 5.4.2, पृष्ठ चुंबक य, रवैद्युत तथा गुरुत्वाकषण
अनुभव िकया जा सकता है 69 बल
चुंबक य बल एक चुंबक ारा दू स रे चुंबक अथवा चुंबकीय पदाथ पर खंड 5.4.2, पृष्ठ समान ुव आमने-सामने होने पर ऊपरी
लगाया गया बल 69 वलय चुंबक का तैरते रहना ( क्रयाकलाप
5.5)
रवैद्युत बल एक आवेिशत िपंड ारा दू स रे आवेिशत अथवा अनावेिशत खंड 5.4.2, पृष्ठ रगड़ा हुआ प्ला स्टक मापक कागज के
िपंड पर लगाया गया बल 70–71 टु कड़ को उठा लेता है ( क्रयाकलाप
5.6)
गुरुत्वाकषण बल वह बल िजससे पथ्ृ वी वस्तुओ ं को अपनी ओर आकिषत खंड 5.4.2, पृष्ठ ऊपर फक गई गद पुन: धरती पर आ
(गुरुत्व) करती है; यह सदै व आकष होता है 72 गरती है ( क्रयाकलाप 5.8, चत्र 5.10)
भार ु त्वाकषण बल िजससे पथ्ृ वी िकसी वस्तु को अपनी
वह ग रु खंड 5.5, पृष्ठ 1 kg क वस्तु का भार पृथ्वी पर 10 N
ओर खी ंचती है; न्यूटन में मापा जाता है 72–75 परंतु चंद्रमा पर केवल 1.6 N
द्रव्यमान िकसी वस्तु में पदाथ की मात्रा; g या kg में मापा जाता है खंड 5.5, पृष्ठ वही वस्तु पृथ्वी, चंद्रमा, मंगल, शुक्र और
और पत्येक स्थान पर समान रहता है 75 बृहस्प त — सब पर 1 kg
उत्क्षेप / िकसी द व ारा उसमें रखी वस्तु पर ऊपर की िदशा में खंड 5.6, पृष्ठ बंद खाली बोतल जल म धकेलने पर
उत्प्लावन बल लगाया गया बल 76 उछलकर ऊपर आ जाती है ( क्रयाकलाप
5.13)
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