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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 6: दाब, पवन, झंझावात एवं
चक्रवात
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
80 – 97 19 58 हन्द
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात
कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के सभी प्रश्न के पूण एनसीईआरट समाधान। खोजबीन और
वचार कर के प्रश्न, ता लका 6.1, सभी छह क्रयाकलाप (6.1 से 6.6), पृष्ठ 81 से 89 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, ज ासा बनाए रख के तेरह प्रश्न
तथा खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर क प रयोजनाएँ — प्रत्येक उत्तर म केवल प्रेक्षण नह , ब ल्क उसके पीछे क क्रया व ध समझाई गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 8) 80 – 97
खं ड प्रश्न
19 58
माध्यम
हन्द
खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 80
अध्याय का आरंभ — वे प्रश्न जनके उत्तर यह अध्याय दे ता है
खोजबीन और वचार कर
प्र.1 वायु क ग त अन्य दन क तुलना म कुछ दन म अ धक तीव्र क्य होती है?
क्य क दो स्थान के बीच वायुदाब का अंतर कुछ दन म अ धक होता है, और पवन क चाल इसी अंतर पर नभर करती है।
पवन वस्तुत: उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर बहती वायु ही है। जब सूय कसी भू-भाग को अ धक गरम करता है तो वहाँ
क वायु गरम और हल्क होकर ऊपर उठ जाती है और वहाँ नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। आस-पास के उच्च दाब क्षेत्र से वायु
उसका स्थान लेने आती है। य द गरम होना कम है तो दाब का अंतर कम होगा और वायु मंद ग त से आएगी — वह दन शांत रहेगा।
य द गरम होना तीव्र है, या आद्र वायु तेजी से ऊपर उठकर संघ नत हो रही है, तो कद्र का दाब बहुत घट जाता है और वायु तीव्र ग त
से आती है — वह दन तीव्र पवन वाला होगा।
ऐसा क्य होता है: क्रयाकलाप 6.5 इसे सीधे दखाता है। वायु फूले हुए गुब्बारे से बना फूले गुब्बारे म तब तक ही
गई जब तक दोन के दाब भन्न थे, और दाब समान होते ही प्रवाह रुक गया। पुस्तक यह भी कहती है क य द बाहर
नकलती वायु क चाल मापी जाए तो दाब का अंतर अ धक होने पर चाल भी अ धक मलेगी। खुले म चलने
वाली पवन भी इसी नयम का पालन करती है।
प्र.2 जल क टं कय को प्राय: ऊँचाई पर क्य रखा जाता है?
जससे नल के ऊपर जल स्तंभ क ऊँचाई अ धक हो, क्य क द्रव ारा लगाया गया दाब उसके स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है।
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क्रयाकलाप 6.1 दखाता है क जल स्तंभ क ऊँचाई बढ़ने पर गुब्बारे का फैलाव बढ़ता है, जब क पाइप क चौड़ाई से कोई अंतर
नह पड़ता। टं क का जल भी इसी प्रकार व्यवहार करता है — नल के ऊपर जल स्तंभ जतना ऊँचा होगा, नल पर दाब उतना ही
अ धक होगा। यही दाब जल को बाहर धकेलता है। भू म पर रखी टं क से केवल मंद धार मलेगी, जब क वही टं क छत पर रखने से
जल क तीव्र धार मलती है।
संकेत: ध्यान द जए क महत्त्वपूण ऊँचाई है, जल क मात्रा नह । उसी ऊँचाई पर रखी दोगुने जल वाली चौड़ी टं क
नल पर ठ क उतना ही दाब दे गी।
प्र.3 क्या वायु दाब हम वस्तुत: दबा सकता है?
वायुमंडल हम पर अत्यंत बड़ा बल लगाता है, फर भी हम नह दबते, क्य क हमारे शरीर के भीतर का दाब उसे संतु लत कर दे ता है।
पुस्तक आँकड़ा दे ती है — केवल 15 cm × 15 cm क्षेत्रफल पर वायु स्तंभ लगभग 2250 N का बल लगाता है, अथात् 225 kg
द्रव्यमान के पड पर लगने वाले गुरुत्वीय बल के लगभग बराबर। हमारी त्वचा के प्रत्येक भाग पर इतना ही भार पड़ता है। हम कुछ
अनुभव नह होता क्य क हमारे ऊतक और अंग म तरल पदाथ व गैस क ग त से उत्पन्न आंत रक दाब वायुमंडलीय दाब के समान
रहता है और दोन एक-दूसरे को संतु लत कर दे ते ह।
ऐसा क्य होता है: कसी वस्तु को दबाने या ग त दे ने का काय केवल दाब नह , ब ल्क दाब का अंतर करता है।
क्रयाकलाप 6.4 का चूषक इसी लए चपकता है क्य क उसके भीतर क वायु नकाल द गई और बाहर का दाब
अ धक हो गया। य द हमारे शरीर के भीतर का दाब अचानक हटा दया जाए तो बाहर क वायु हम सचमुच दबा दे गी।
प्र.4 झंझावात एवं चक्रवात कन कारण से होते ह? य द पृथ्वी का घूमना रुक जाए तो क्या चक्रवात फर भी बनगे?
झंझावात और चक्रवात दोन का आरंभ गरम वायु के ऊपर उठने और नम्न दाब का क्षेत्र बनने से होता है। परंतु चक्रवात को
भीतर आती वायु के चक्रण के लए पृथ्वी के घूणन क भी आवश्यकता होती है — अत: य द पृथ्वी का घूमना रुक जाए तो चक्रवात,
जैसा हम जानते ह, नह बनगे।
झंझावात कैसे बनता है: स्थल (अथवा समुद्र) गरम होता है, उसके ऊपर क गरम और आद्र वायु हल्क होकर ऊपर उठती है और
नीचे नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। आस-पास के उच्च दाब क्षेत्र से ठं डी वायु आकर उसका स्थान लेती है, गरम होकर स्वयं ऊपर
उठती है और इस प्रकार वायु चक्रण क सतत प्र क्रया चलती रहती है। ऊपर उठती वायु फैलकर ठं डी होती है, उसक नमी संघ नत
होकर जल क बूँद और बादल बनाती है; छोट बूँद मलकर भारी बूँद बनाती ह जो वषा, ओले या हम के रूप म गरती ह। तीव्र वायु
के साथ होने वाली इस वषा को झंझावात कहते ह।
चक्रवात कैसे बनता है: महासागर के गरम जल के ऊपर यही प्र क्रया चलती रहती है, परंतु जब भी जलवाष्प संघ नत होकर वषा
क बूँद बनाती है तो वाष्पन के समय ली गई ऊष्मा मुक्त हो जाती है। यह ऊष्मा ऊपर उठती वायु को और गरम कर दे ती है, अत:
वह और ऊपर उठती है और कद्र का दाब और भी कम हो जाता है। आस-पास के क्षेत्र से वायु तीव्र ग त से आकर ऊपर उठने लगती
है। पृथ्वी के घूणन के कारण यह ग तमान वायु चक्रण करती है और इस चक्र क पुनरावृ त्त से अत्य धक नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता
है जसके चार ओर तीव्रगामी वायु घूमती है — यही चक्रवात है।
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ऐसा क्य होता है: चक्रण झंझावात स्वयं उत्पन्न नह करता। पुस्तक स्पष्ट कहती है क ग तमान वायु पृथ्वी के
घूणन के कारण चक्रण करती है। य द पृथ्वी न घूमे तो वायु फर भी नम्न दाब के कद्र क ओर सीधी दौड़ेगी, भारी
वषा और तीव्र पवन भी होगी — परंतु भीतर आती वायु के मुड़ने का कोई कारण नह होगा, अत: वह शांत अ क्ष वाले
चक्रण करते तंत्र का रूप नह ले पाएगी।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 81
अध्याय का प्रारं भक अंश · 6.1 दाब
प्र.1 क्या आपने कभी वचार कया क गरी हुई प त्तयाँ वायु म ऊपर क्य उठती ह तथा पेड़ लहराते हुए झुक क्य जाते
ह?
क्य क ग तमान वायु उन पर धक्का लगाती है — पवन जस भी पृष्ठ से टकराती है उस पर बल आरो पत करती है।
भू म पर पड़ी पत्ती का भार बहुत कम होता है जब क उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल बड़ा होता है। जब वायु उसके ऊपर से बहती है तो वह
इसी पृष्ठ पर बल लगाती है, और थोड़ा-सा बल भी पत्ती को उठाकर बहा ले जाने के लए पयाप्त होता है। पेड़ कह अ धक भारी है,
परंतु उसक प त्तयाँ और शाखाएँ पवन के सामने बहुत बड़ा क्षेत्रफल प्रस्तुत करती ह, अत: उन पर लगने वाला कुल बल इतना हो
जाता है क तना झुक जाए।
करके दे खए: पंखे के सामने एक कागज क चादर और उसी कागज क मुड़ी हुई गद पक ड़ए। चादर दूर तक
धकेली जाती है, गद लगभग स्थर रहती है — भार दोन का समान है, केवल वायु के सामने आने वाला क्षेत्रफल
बदला है।
प्र.2 क्या वायु गरी हुई प त्तय पर कोई बल लगाती है जससे वे ऊपर उठती ह तथा पेड़ झुक जाते ह?
हाँ। ग तमान वायु जस वस्तु से टकराती है उस पर बल लगाती है, और यही बल प त्तय को उठाता और पेड़ को झुकाता है।
बल क पहचान उसके प्रभाव से होती है — वह कसी वरामावस्था क वस्तु को ग त दे सकता है, ग तमान वस्तु क चाल या दशा
बदल सकता है, अथवा उसक आकृ त बदल सकता है। वायु ये सभी काय करती है — स्थर पत्ती चलने लगती है, लहराती शाखा
दशा बदलती है, सीधा तना झुक जाता है। दरवाज का बंद होना, खड़ कय का खड़खड़ाना और कपड़ का लहराना भी इसी बल के
अन्य रूप ह।
ऐसा क्य होता है: जस क्षेत्रफल पर यह बल फैला होता है, उसके सापेक्ष इसे ही अध्याय वायु दाब कहता है। दाब
के रूप म सोचने से यह भी समझ आता है क एक ही पवन चौड़े दरवाजे को क्य बंद कर दे ती है और संकरी खड़क
को केवल खड़खड़ाती है — समान दाब बड़े क्षेत्रफल पर लगे तो बल भी बड़ा होता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात
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क्या प ट्टय का आकार एवं आकृ त वास्तव म कोई अंतर उत्पन्न करता है?
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प्र.3
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पवन — सं करी पि याँ मेघा — चौड़ ी पि याँ
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चत्र 6.1, पृष्ठ 81 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: मेघा और पवन समान भार वाले बस्ते ले जाते हुए। पवन के बस्ते म संकरी
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प ट्टयाँ ह और मेघा के बस्ते म चौड़ी प ट्टयाँ।
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agl उत्तर
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हाँ — बस्ते के भार म नह , ब ल्क उस भार से कंध पर उत्पन्न होने वाले दाब म।
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मेघा और पवन के बस्ते समान रूप से भारी ह, अत: गुरुत्व बल दोन को समान बल से नीचे ख चता है। परंतु यह बल कंध तक
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ह।sदाब बल म क्षेत्रफल का भाग दे ने पर मलता है, अत: संकरी प य के नीचे दाब
प य के ारा पहुँचता है। पवन क संकरी प याँ पूरा बल त्वचा के कम क्षेत्रफल पर पहुँचाती ह, जब क मेघा क चौड़ी प याँ उसी
बल को कह अ धक क्षेत्रफल पर फैला दे तlी a
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बहुत अ धक होता है — और त्वचा परaअ धक दाब ही पीड़ा दे ता है।
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दाब = बल / क्षेत्रफल
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com बल, कम क्षेत्रफल → अिधक दाब (पवन का बस्ता)
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g l a समान बल, अिधक क्षेत्रफल → कम दाब (मेघा का बस्ता)
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 82
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6.1 दाब — चौड़े व संकरे ह े, सर पर रखा भार
प्र.1 अब आप समझ गए ह गे क जल से भरी चौड़े ह े वाली बाल्ट को संकरे ह े वाली बाल्ट क तुलना म उठाना
सु वधाजनक क्य होता है ( चत्र 6.2)।
चौड़ ा हत्था संकरा हत्था
चत्र 6.2, पृष्ठ 82 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: दो एक जैसी बा ल्टयाँ — एक चौड़े ह े वाली और दूसरी संकरे ह े वाली।
दोन बा ल्टयाँ हाथ को समान बल से नीचे ख चती ह, परंतु चौड़ा ह ा उस बल को हथेली और अँगु लय के अ धक क्षेत्रफल पर
फैला दे ता है, अत: त्वचा पर दाब कम होता है।
संकरा ह ा हाथ को एक पतली रेखा के रूप म छू ता है। बाल्ट का पूरा भार उसी पतली प से होकर जाता है, वहाँ दाब बहुत
अ धक हो जाता है और वह त्वचा म गड़ता है। चौड़ा ह ा अँगु लय क पूरी चौड़ाई पर टकता है। भार वही है, क्षेत्रफल कई गुना
अ धक है, अत: दाब उसी अनुपात म घट जाता है।
घड़ या सब्जी क टोक रय के नीचे सर पर रखा जाने वाला कपड़े का गोला ( चत्र 6.3) भी ठ क इसी प्रकार काय करता है। उसके
बना घड़े का कनारा सर के छोटे -से वृत्ताकार भाग पर दबता है; उसके साथ भार कह अ धक चौड़े भाग पर फैल जाता है। दोन ही
स्थ तय का उ े श्य एक है — क्षेत्रफल बढ़ाकर दाब कम करना।
ता लका 6.1— अपने प्रेक्षण को अं कत क जए — पृष्ठ 82
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6.1 दाब — ये क्रयाकलाप कसी वयस्क के मागदशन म ही कए जाने चा हए
क्रयाकलाप
प्र.1 लोहे क क ल को ठोकना — क ल के शीष क ओर से, तथा क ल के नुक ले सरे क ओर से। क्रयान्वयन म
सरल या ज टल? कारण द जए।
क ल को उसके नुक ले सरे क ओर से ठोकना सरल है; शीष क ओर से ठोकना अत्यंत ज टल है।
काय व ध सरल या कारण
ज टल?
नुक ीला िसरा लकड़ी में पवेश करे , सरल नोक का क्षेत्रफल अत्यंत कम है, अत: हथौड़े का बल वहाँ बहुत अ धक दाब
इस पकार हथौड़ा मारना उत्पन्न करता है और लकड़ी के रेशे सरलता से अलग हो जाते ह।
शीष को लकड़ी से लगाकर हथौड़ा जिटल चपटे शीष का क्षेत्रफल कह अ धक है। वही बल अब कम दाब दे ता है जो क ल
मारना को भीतर धकेलने के लए पयाप्त नह होता।
ऐसा क्य होता है: दोन स्थ तय म हथौड़े क चोट समान है। केवल वह क्षेत्रफल बदलता है जस पर बल पहुँचता
है, और दाब बल म क्षेत्रफल का भाग दे ने पर मलता है। नोक बल को लकड़ी के छोटे -से भाग पर क द्रत कर दे ती है;
शीष उसे फैला दे ता है।
सुरक्षा: पुस्तक के अनुसार ता लका 6.1 म सूचीबद्ध क्रयाकलाप कसी वयस्क के मागदशन म ही कए जाने
चा हए।
प्र.2 चाकू से सेब को काटना — चाकू क तीक्ष्ण धार से, तथा चाकू क कुंद धार से। क्रयान्वयन म सरल या ज टल?
कारण द जए।
तीक्ष्ण धार से सेब सरलता से कट जाता है; कुंद धार से नह कटता।
काय सरल या कारण
वध ज टल?
तीक्ष्ण धार सरल धार अत्यंत पतली होती है, अत: सेब से उसका संपक क्षेत्रफल बहुत कम होता है। हल्का-सा दबाव भी
से बहुत अ धक दाब उत्पन्न कर दे ता है और सेब कट जाता है।
कुं द धार जिटल चाकू क कुंद पीठ का पृष्ठ कह चौड़ा होता है। वही दबाव उस पर फैल जाता है, दाब कम रहता है और
से सेब कटने के स्थान पर केवल दब जाता है।
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क्या आप जानते ह? इसी कारण चाकू को भारी बनाने के स्थान पर तीक्ष्ण कया जाता है। तीक्ष्ण करने से हाथ का
बल नह बढ़ता — क्षेत्रफल घटता है, और यही दाब बढ़ाता है।
प्र.3 ता लका 6.1 के प्रेक्षण से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?
ता लका 6.1 — अपने प्रेक्षण को अं कत क जए
क्रयाकलाप काय व ध क्रयान्वयन म सरल या ज टल?
कारण द जए
लोहे की कील को
ठोकना
क ल के शीष क
ओर से क ल के नुक ले सरे क
ओर से
चाकू से से ब को
काटना
चाकू क तीक्ष्ण
धार से चाकू क कुंद धार से
जब समान बल कम क्षेत्रफल पर लगाया जाता है तो उत्पन्न दाब अ धक होता है — और अ धक दाब कुछ काय को सरल बना
दे ता है।
ता लका क दोन पं क्तयाँ एक ही बात भन्न शब्द म कहती ह। क ल का नुक ला सरा और चाकू क तीक्ष्ण धार इस लए सफल होते
ह क वहाँ अ धक बल नह लगता, ब ल्क वही बल बहुत कम क्षेत्रफल पर क द्रत हो जाता है। क ल का शीष और चाकू क कुंद धार
इस लए असफल रहते ह क वही बल फैल जाता है।
दाब = बल / क्षेत्रफल
क्षेत्रफल कम → दाब अिधक → कील ठुक ती है, सेब कटता है
क्षेत्रफल अिधक → दाब कम → कु छ नही ं होता
यह क्य महत्त्वपूण है: यही वचार उल्टे चुनाव को भी समझाता है। चौड़ी प याँ, चौड़े ह े और सर पर रखा कपड़े
का गोला जान-बूझकर क्षेत्रफल बढ़ाते ह, क्य क वहाँ हम दाब कम रखना चाहते ह।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 83
6.1 दाब — उप रवत टं क ; क्या द्रव भी दाब डालते ह?
प्र.1 आपने जल आपू त हेतु स्थानीय क्षेत्र म तथा घर क छत पर रखी उप रवत टं कय को दे खा होगा ( चत्र 6.4)।
इन टं कय को सदै व ऊँचाई पर ही क्य रखा जाता है?
उपिरवत टंकी
चत्र 6.4, पृष्ठ 83 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: ऊँची इस्पात मीनार पर रखी उप रवत जल टं क , जससे आपू त न लका
नीचे भू म तक जाती है।
क्य क द्रव ारा लगाया गया दाब उसके स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है, और यही दाब नल से जल को बाहर नकालता है।
टं क का जल पाइप ारा घर के प्रत्येक नल से जुड़ा होता है। नल के ऊपर जल का स्तंभ जतना ऊँचा होगा, उस नल पर दाब उतना
ही अ धक होगा। टं क को छत पर रखने से यह स्तंभ अ धकतम ऊँचा हो जाता है, अत: नल से जल तीव्र धार के रूप म नकलता है
और ऊपरी तल के नल तक भी पहुँच पाता है।
ऐसा क्य होता है: क्रयाकलाप 6.1 दखाता है क ऊँचा जल स्तंभ गुब्बारे को अ धक फुलाता है, जब क पाइप
चौड़ा करने से कोई अंतर नह पड़ता। अत: नकास पर दाब केवल ऊँचाई से तय होता है — टं क के आमाप या उसम
भरे जल क मात्रा से नह ।
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क्या द्रव भी दाब डालते ह?
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प्र.2
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a द्रवl अपने पात्र के तल पर, पात्र क द वार पर, वस्तुत: सभी दशाओं म दाब डालता है।
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क्रयाकलाप 6.1 तल पर लगने वाले दाब को दखाई दे ने योग्य बना दे ता है — जल से भरे पाइप के नचले सरे पर बँधा गुब्बारा
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बाहर क ओर फूल जाता है, और जल स्तंभ ऊँचा करने पर और अ धक फूलता है। क्रयाकलाप 6.2 पाश्व दाब दखाता है — बोतल
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क द वार म बने छद्र से जल बाहर क ओर नकलता है। दोन
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डालता है।
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स्वयं जाँ चए: बाँध का आधार उसके ऊपरी भाग से इसी लए बहुत चौड़ा बनाया जाता है। एक त्रत जल का क्षै तज
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दाब तल के समीप सबसे अ धक होता है, और उसे सहने के लए चौड़ा आधार चा हए ( चत्र 6.8)।
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aक्रयाकलाप 6.1 — आइए, प्रयास कर और जान — पृष्ठ 83
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6.1 दाब — जल स्तंभ ारा लगाया गया दाब ( चत्र 6.5)
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क्रयाकलाप
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क्या दोन गुब्बारे फूल जाते ह? क्या दोन गुब्बारे समान रूप से फूलते ह?
प्र.1
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gहै और दूसरा संकरा।
हाँ, दोन.cगुब्बारे फूलते ह — और ठ क समान रूप से फूलते ह, यद्य प एक पाइप चौड़ा
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se पाइप लगभग 25 cm लंबे ह और उनम जल समान स्तर तक, लगभग आधा भरा गया है। प्रत्येक पाइप के नचले सरे पर
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दोन
लगा गुब्बारा बाहर क ओर फूलता है और दोन का फैलाव एक जैसा दखाई दे ता है। पहली दृ ष्ट म यह आश्चयजनक लगता है,
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क्य क चौड़े पाइप म संकरे पाइप क तुलना म कह अ धक जल है, अथात् कह अ धक भार है।
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स्टै ंड
समान जल स्तर
संकरा पाइप चौड़ ा पाइप
समान ऊँचाई का जल स्तंभ दोन गुब्बार म समान फैलाव उत्पन्न करता है, यद्य प चौड़े पाइप म जल कह अ धक है।
प्र.2 इस क्रयाकलाप से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?
यह क फैलाव जल स्तंभ के दाब से उत्पन्न होता है, और यह दाब स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है, गुब्बारे के ऊपर रखे जल के
भार पर नह ।
तक इस प्रकार क जए। दोन पाइप के व्यास भन्न ह, अत: उनम जल का भार भन्न- भन्न है। य द फैलाव के लए जल का भार
उत्तरदायी होता तो चौड़े पाइप वाला गुब्बारा कह अ धक फूलता। परंतु ऐसा नह होता — दोन का फैलाव समान है। अत: भार
कारण नह हो सकता। दोन पाइप म जो समान है वह है जल स्तंभ क ऊँचाई, और फैलाव उसी का अनुसरण करता है।
ऐसा क्य होता है: चौड़े पाइप का अ त रक्त जल पाइप के उतने ही अ धक अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल पर टका होता
है। बल और क्षेत्रफल साथ-साथ बढ़ते ह, अत: बल म क्षेत्रफल का भाग — अथात् दाब — वही रहता है। इसी कारण
असमान व्यास होते हुए भी समान ऊँचाई का जल स्तंभ समान फैलाव उत्पन्न करता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 84
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6.1 दाब — जल स्तंभ क ऊँचाई ( चत्र 6.6)
प्र.1 य द पाइप के भीतर जल स्तंभ क ऊँचाई म वृ क जाए तो गुब्बारे के फैलाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
गुब्बारे का फैलाव बढ़ जाएगा, और जतनी बार अ त रक्त जल डाला जाएगा उतनी बार वह और बढ़ता जाएगा।
चत्र 6.5 के कसी एक पाइप म थोड़ा और जल डा लए तो उसके नचले सरे का गुब्बारा और अ धक बाहर नकल आता है। इसे
कई बार दोहराने पर हर बार फैलाव बढ़ता है। कारण यह है क पाइप के तल पर दाब उसके ऊपर खड़े जल क ऊँचाई पर नभर
करता है — ऊँचा स्तंभ रबड़ पर अ धक दाब डालता है और रबड़ अ धक फैल जाती है।
जल स्तं भ की ऊँ चाई बढ़ ी
→ पाइप के तल पर दाब बढ़ ा
→ गुब्बारे का फै लाव बढ़ ा
प्र.2 क्या आप गुब्बारे के फैलाव और पाइप के जल स्तंभ क ऊँचाई के मध्य कोई संबंध पाते ह?
हाँ — जल स्तंभ क ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ गुब्बारे का फैलाव भी बढ़ता है। दोन साथ-साथ बढ़ते ह।
क्रयाकलाप 6.1 के साथ मलाकर दे ख तो पात्र म द्रव के दाब का पूरा नयम मल जाता है — यह पात्र क चौड़ाई या उसम भरे द्रव
क मात्रा पर नभर नह करता, परंतु द्रव स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है। गुब्बारे का फैलाव उसी दाब को दे खने का एक ढं ग
मात्र है।
संकेत: यही एक प रणाम उप रवत टं क , भूतल के नल क तीव्र धार और बाँध के चौड़े आधार — तीन को समझा
दे ता है। द्रव के दाब का कोई भी प्रश्न मले तो पहले पू छए: उस बदु के ऊपर स्तंभ कतना ऊँचा है?
प्र.3 मान ली जए क आप तीन मं जला भवन के तीय तल पर रहते ह और जल क टं क सबसे ऊपर के तल क छत
पर रखी हुई है। आप अथवा प्रथम तल पर रहने वाले आपके मत्र दोन म से कसे नल से नकलने वाले जल का
अ धक प्रवाह प्राप्त होगा? कारण बताइए।
प्रथम तल पर रहने वाले मत्र को जल का अ धक प्रवाह प्राप्त होगा।
टं क सबसे ऊपर के तल पर रखी है, अत: कसी नल के ऊपर जल स्तंभ क ऊँचाई टं क से नीचे क ओर नापी जाएगी। प्रथम तल,
तीय तल क अपेक्षा टं क से अ धक नीचे है, अत: प्रथम तल के नल के ऊपर जल का स्तंभ अ धक ऊँचा है। ऊँचा स्तंभ अथात्
नल पर अ धक दाब, और अ धक दाब अथात् तीव्र धार।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
टं क ी तीन मंिजला भवन के सबसे ऊपरी तल पर
ि तीय तल के नल के ऊपर जल स्तं भ = कम
पथम तल के नल के ऊपर जल स्तं भ = अिधक
→ पथम तल पर दाब अिधक → पथम तल पर जल की धार अिधक तीव
ऐसा क्य होता है: पाइप या नल म कोई अंतर नह है — केवल टं क से नीचे क ऊध्वाधर दूरी बदली है। इसी
कारण ऊँचे भवन के सबसे ऊपरी तल पर जल क आपू त प्राय: सबसे कमजोर रहती है, और टं क को सदै व उससे
ऊँचा रखना पड़ता है जहाँ तक जल पहुँचाना है।
प्र.4 क्या द्रव पात्र क द वार पर भी दाब डालते ह?
हाँ। क्रयाकलाप 6.2 इसी को दखाने के लए है, और वह दखा भी दे ता है — बोतल क द वार म बने छद्र से जल पाश्व दशा म
बाहर नकलता है।
य द जल केवल नीचे क ओर दाब डालता तो वह बोतल म य ही पड़ा रहता और पाश्व छद्र से कुछ न नकलता। जल का क्षै तज
रूप से बाहर नकलना ही सद्ध करता है क वह द वार पर बाहर क ओर दाब डाल रहा है।
क्रयाकलाप 6.2— आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 84
6.1 दाब — पात्र क द वार पर द्रव का दाब ( चत्र 6.7)
क्रयाकलाप
प्र.1 आपने क्या अवलोकन कया?
चार छद्र से एक ही समय पर जल बाहर नकलता है और धाराएँ बोतल से दूर, पाश्व दशा म जाती ह।
चार छद्र तल से समान ऊँचाई पर बनाए गए ह, टे प से बंद कए गए ह और बोतल जल से भरी गई है। जब सभी टे प एक साथ हटाए
जाते ह तो प्रत्येक छद्र से जल क धारा नकलती है। छद्र समान ऊँचाई पर ह, अत: चार धाराएँ एक जैसी होती ह; और बोतल म
जल का स्तर घटने पर चार धाराएँ साथ-साथ कमजोर होती जाती ह।
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बोतल (ढक्कन हटा हुआ)
जल की धारा जल की धारा
चारों िछद तल से समान ऊँचाई पर
पाश्व द वार के प्रत्येक छद्र से जल नकलता है, अत: द्रव द वार पर बाहर क ओर दाब डाल रहा है।
प्र.2 इस अवलोकन से आप क्या अनुमान लगा सकते ह?
यह क द्रव पात्र के तल पर ही नह , उसक द वार पर भी दाब डालता है — वस्तुत: द्रव सभी दशाओं म दाब डालता है।
छद्र बोतल क ऊध्वाधर द वार म ह। जल उनसे बाहर तभी नकल सकता है जब वह उस द वार पर क्षै तज रूप से, बाहर क ओर
दाब डाल रहा हो। और चूँ क समान ऊँचाई के चार छद्र से एक जैसी धाराएँ नकलती ह, अत: कसी द हुई गहराई पर पाश्व दाब
चार ओर समान होता है।
यह क्य महत्त्वपूण है: इसी कारण जल के पाइप के रसाव वाले जोड़ या छद्र से जल फव्वारे के रूप म नकलता है
— पाइप के भीतर का जल उसक द वार पर दाब डाल रहा होता है, और जहाँ द वार टू ट हो वह से वह दाब जल
को बाहर धकेल दे ता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 85
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात
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6.1 दाब — रसाव वाले पाइप · 6.2 वायु ारा आरो पत दाब
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आपने दे खा होगा क जल के पाइप के छद्र से अथवा रसाव वाले जोड़ से जल क प्रबल धारा फव्वारे के रूप म
em है। क्या आप समझा सकते ह क ऐसा क्य होता है? क्या यह जल ारा पाइप क द वार पर लगाए गए
प्र.1
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नकलती
a gl दाब के कारण होता है?
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हाँ — फव्वारा पाइप क द वार पर लगने वाले जल केeदाब
s m से ही बनता है।
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agl क पाइप को कह ऊपर रखी टंक से जल मलता है। यह जल पाइप क द वार
आपू त के पाइप म जल दाब के अंतगत रहता है, क्य
पर सवत्र बाहर क ओर दाब डालता है, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 6.2 म बोतल क द वार पर डालता था। जहाँ द वार अटू ट है
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वहाँ धातु या प्ला स्टक उतना ही बल वापस लगाकर जल को रोके रखता है। दरार या ढ ले जोड़ पर रोकने वाला कुछ नह होता, अत:
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जल उसी अंतराल से बाहर धकेल दया जाता है।
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यह ऊपर तक क्य उछलता है: छद्र छोटा होता है, अत: बाहर नकलने वाले पूरे जल को उसी कम क्षेत्रफल से तीव्र
a gl ग त से गुजरना पड़ता है और वह छद्र क दशा म ही नकलता है। पाइप को जल दे ने वाली टंक जतनी ऊँची होगी,
दाब उतना अ धक और फव्वारा उतना ही ऊँचा होगा — यह भी इसी बात का प्रमाण है क द्रव का दाब ऊपर के
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स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है।
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क्रयाकलाप 6.3— आइए, खोज कर — पृष्ठ 85
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6.2 वायु ारा आरो पत दाब — ढक हुई कागज क प्लेट उठाना ( चत्र 6.9)
क्रयाकलाप
प्र.1 कस स्थ त म कागज क प्लेट को उठाना अ धक सु वधाजनक है? तह कए हुए पत्रक को अथवा बना तह कए
हुए चाट पत्रक को जसने कागज क प्लेट को ढक रखा है।
(ख) (ग)
चत्र 6.9 (ख) और (ग), पृष्ठ 86 — पुनः च त्रत: (ख) दो बार तह कए गए चाट पत्रक से ढक उल्ट रखी कागज क
प्लेट; (ग) बना तह कए गए चाट पत्रक से ढक वही प्लेट। दोन म छड़ पत्रक के बीच बने छद्र से बाहर नकलती है।
तह कए गए चाट पत्रक से ढक प्लेट उठाना अ धक सु वधाजनक है। बना तह कए पत्रक के साथ स्पष्ट रूप से अ धक बल
लगाना पड़ता है।
दोन चाट पत्रक एक समान ह — लगभग 70 cm × 56 cm — अत: उनका भार समान है। एक को दो बार मोड़ने से वह हल्का
नह होता; केवल प्लेट पर उसका फैलाव कम हो जाता है। फर भी तह कया पत्रक सरलता से उठ जाता है और फैला हुआ पत्रक
अवरोध करता है। यह अंतर भार से नह आ सकता, अत: यह क्षेत्रफल से ही आया होगा।
प्र.2 इससे आप क्या नष्कष नकाल सकते ह?
यह क वायु ढकने वाले पत्रक पर दाब डालती है, और पत्रक का क्षेत्रफल बढ़ने के साथ यह बल भी बढ़ता जाता है। प्र त एकांक
क्षेत्रफल पर लगने वाला बल ही दाब है — अत: वायु दाब आरो पत करती है।
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दोन स्थ तय क तुलना क जए। पत्रक वही, भार वही, छड़ वही, प्लेट वही। बदला केवल यह क पत्रक ने वायु के सामने कतना
क्षेत्रफल प्रस्तुत कया। जब वह क्षेत्रफल बढ़ाया गया तो प्लेट उठाने म लगने वाला बल भी बढ़ गया। अत: पत्रक के ऊपर कोई वस्तु
उसे नीचे क ओर दबा रही है, और यह दबाव क्षेत्रफल के अनुपात म है — दाब ठ क इसी प्रकार व्यवहार करता है।
तह िकया पत्रक → कम क्षेत्रफल → कम अधोमुखी बल → उठाना सरल
िबना तह का पत्रक → अिधक क्षेत्रफल → अिधक अधोमुखी बल → उठाना किठन
बल ∝ क्षेत्रफल, अत: बल / क्षेत्रफल = एक अचर दाब — वायुमंडलीय दाब
ऐसा क्य होता है: वायु खाली स्थान नह है। वह प्लेट के चार ओर उप स्थत वास्त वक पदाथ है और अपने संपक
क प्रत्येक वस्तु पर दाब डालती है। हमारे चार ओर क वायु ारा डाला गया यही दाब वायुमंडलीय दाब कहलाता
है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 86
6.2 वायु ारा आरो पत दाब — गुब्बारे को फुलाना ( चत्र 6.10)
प्र.1 आपने अनुभव कया होगा क जब आप गुब्बारे म वायु भरते ह तो वह फूल जाता है। क्य ?
क्य क भरी हुई वायु गुब्बारे क आंत रक द वार पर बाहर क ओर दाब आरो पत करती है और रबड़ उस दाब से फैल जाती है।
प्रत्येक फूँक उसी छोटे स्थान म और वायु भर दे ती है। भीतर क वायु रबड़ को भीतर से धकेलती है; बाहर का वायुमंडल उसे बाहर से
दबाता है। जब तक भीतर का दाब अ धक है, रबड़ फैलती जाती है और गुब्बारा बड़ा होता जाता है। जब खची हुई रबड़ भीतर के
अ त रक्त दाब को संतु लत करने योग्य तनी हो जाती है, तब फैलना रुक जाता है।
प्र.2 क्या हम यह कह सकते ह क वायु सभी दशाओं म दाब आरो पत करती है?
हाँ — और इसका प्रमाण स्वयं गुब्बारा है, क्य क वह केवल ऊपर या बगल म नह , सभी दशाओं म फूलता है।
य द भीतर क वायु केवल नीचे क ओर दाब डालती तो गुब्बारा नीचे से लटक जाता और शेष भाग चपटा रहता। इसके स्थान पर वह
चार ओर समान रूप से गोल हो जाता है, जससे पता चलता है क भीतर क वायु द वार के प्रत्येक भाग पर समान दाब डाल रही है।
बाहर क वायु भी ऐसा ही करती है — वह हमारे चार ओर क प्रत्येक वस्तु के ऊपर, बगल और नीचे, सब ओर दाब डालती है।
क्या आप जानते ह? द्रव भी ऐसा ही करते ह — क्रयाकलाप 6.2 म जल बोतल क द वार पर पाश्व दाब डाल रहा
था। द्रव एवं गैस दोन पात्र क द वार पर, सभी दशाओं म दाब आरो पत करते ह।
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प्र.3 क्या होता है जब एक फूले हुए गुब्बारे के मुँह को बना बंद कए रख दया जाता है? गुब्बारे से वायु क्य नकल
जाती है?
वायु बाहर नकल जाती है और गुब्बारा पचक जाता है। वह इस लए नकलती है क गुब्बारे के भीतर क वायु का दाब बाहर के
वायुमंडलीय दाब से अ धक होता है।
खची हुई रबड़ भीतर क वायु को दबाकर रखती है, अत: भीतर क वायु कमरे क वायु से अ धक दाब पर होती है। वायु सदै व उच्च
दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर बहती है। खुला मुँह उसे माग दे दे ता है, अत: वह तब तक बाहर बहती रहती है जब तक भीतर
और बाहर के दाब समान न हो जाएँ — तब तक गुब्बारा अपने मूल आमाप म लौट चुका होता है।
आगे यह कहाँ काम आएगा: पवन का पूरा वचार यह से आरंभ होता है। साइ कल क ूब पंचर होने पर भी वायु
इसी कारण नकलती है, और क्रयाकलाप 6.5 इस अवलोकन को नयम का रूप दे दे ता है — वायु उच्च दाब क्षेत्र
से नम्न दाब क्षेत्र क ओर प्रवा हत होती है।
क्रयाकलाप 6.4 — आइए, करके दे ख — पृष्ठ 87
6.2 वायु ारा आरो पत दाब — रबड़ का चूषक ( चत्र 6.11)
क्रयाकलाप
प्र.1 क्या आपने अनुभव कया क यह सतह से चपकता है?
हाँ — समतल चकने पृष्ठ पर बलपूवक दबाने के पश्चात चूषक स्वयं वह चपका रहता है।
कप को दबाने से उसके और पृष्ठ के बीच क अ धकांश वायु बाहर नकल जाती है। भीतर बहुत कम वायु रह जाती है, अत: चूषक के
भीतर का वायु दाब बाहर के वायुमंडलीय दाब से बहुत कम हो जाता है। अब बाहर क वायु चूषक को चार ओर से पृष्ठ पर दबाए
रखती है और वह चपका रहता है।
पृष्ठ चकना क्य होना चा हए: खुरदरे पृष्ठ पर कप और उभार के बीच के सूक्ष्म अंतराल से वायु नरंतर भीतर
आती रहती है। भीतर का दाब कभी घटता ही नह , दाब का अंतर बनता ही नह , अत: चूषक नह चपकता।
प्र.2 अब इसे ख चने का प्रयास क जए। क्या आपको इसे बाहर ख चने म क ठनाई होती है?
हाँ, इसे ख चना आश्चयजनक रूप से क ठन होता है — और यही हम बताता है क वायुमंडलीय दाब कतना अ धक है।
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चूषक को उठाने के लए आपको उसके बाहर क वायु और भीतर क वरल वायु के बीच के दाब अंतर को पार करना पड़ता है।
आपका खचाव उस बल से अ धक होना चा हए जससे वायुमंडल कप को दबाए हुए है। वायुमंडल प्रत्येक वग सट मीटर पर बड़ा
बल लगाता है, अत: छोटा-सा चूषक भी दृढ़ खचाव माँगता है।
चूषक के बाहर: वायुमंडलीय दाब (अिधक)
चूषक के भीतर फँसी वायु: कप दबाने से घटा हुआ दाब (कम)
चूषक दाब अंत र के कारण िचपका रहता है
हटाने के िलए: लगाया गया बल इस अंत र से अिधक होना चािहए
क्या आप जानते ह? पुस्तक वायुमंडल के इस दबाव को संख्या म भी बताती है — केवल 15 cm × 15 cm
क्षेत्रफल पर वायु स्तंभ लगभग 2250 N बल लगाता है, अथात् 225 kg द्रव्यमान पर लगने वाले गुरुत्वीय बल के
बराबर।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 87
6.2 वायु ारा आरो पत दाब · 6.3 पवन का बनना
प्र.1 क्या आप जानते ह क वायुमंडलीय दाब कतना अ धक होता है?
यह बहुत अ धक होता है। 15 cm × 15 cm क्षेत्रफल पर वायु स्तंभ लगभग 2250 N का बल लगाता है — अथात् 225 kg
द्रव्यमान के पड पर लगने वाले गुरुत्वीय बल के लगभग बराबर।
इसी क्षेत्रफल के लए दाब नका लए:
क्षेत्रफल = 15 cm × 15 cm = 0.15 m × 0.15 m = 0.0225 m2
दाब = बल / क्षेत्रफल = 2250 N ÷ 0.0225 m2
= 100000 N/m2 = 1 × 105 Pa
अथात् भू म, छत या त्वचा के प्रत्येक वग मीटर पर वायुमंडल लगभग एक लाख न्यूटन का बल लगाता है। हम इस लए सुर क्षत रहते
ह क हमारे शरीर के भीतर का दाब — जो ऊतक और अंग म तरल पदाथ व गैस क ग त से उत्पन्न होता है — भी वायुमंडलीय
दाब के समान होता है और उसे संतु लत कर दे ता है।
संकेत: मौसम व ान म यह दाब प्राय: एक सोपान ऊपर म दए गए प्रायो गक मात्रक म लखा जाता है — 1
मलीबार (mb) = 1 हैक्टोपास्कल (hPa) = 100 Pa, अत: 100000 Pa लगभग 1000 mb हुआ। इसी लए
चत्र 6.19 क समदाब रेखाएँ 994 mb, 996 mb, 998 mb और 1008 mb पढ़ जाती ह।
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m ूब पचक
आपने दे खा होगा क वायु से भरे हुए गुब्बारे के मुँह को य द खुला छोड़ दया जाए तो गुब्बारे से वायु नकल जाती
ूब म छे द (पंचर) होता है तो वायु बाहर नकल जाती हैeऔर
प्र.2
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o दोन घटनाओं म क्या वायु उच्च दाब वाले क्षेत्र से नम्न दाब वाले क्षेत्रaकglओर प्रवा हत होती है?
है। याद क जए जब साइ कल क
जाती है.।cइन
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उत्तरgl
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हाँ। दोन स्थ तय म भीतर क वायु बाहर क वायु से अ धक दाब पर है और वह तब तक बाहर बहती है जब तक दोन दाब समान
न हो जाएँ।
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गुब्बारे म खची हुई रबड़ भीतर क वायु को दबाए रखती है। साइ कल क ूब म पंप ने बहुत-सी वायु कम आयतन म भर द है।
a पर है। गुब्बारे का मुँह खोल द जए या ूब म छे द हो जाए — उस उच्च दाब
दोन म वायु वायुमंडलीय दाब से कह अ धक दाब
वाली वायु को बाहर क नम्न दाब वाली वायु तक जाने का माग मल जाता है, अत: वह नकल जाती है और गुब्बारा या ूब पचक
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जाती है।
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यह क्य .cमहत्त्वपूण है: यही वह नयम है जो पवन उत्पन्न करता है। पृथ्वी पर कह भीgवायु इसी प्रकार व्यवहार
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agl से जुड़े दो गुब्बार ारा नयं त्रत रूप म दखाता है।
करती है — वह उच्च वायु द ाब वाले क्षे त्र से नम्न वायु द ाब वाले क्षे त्र क ओर जाती है । क्रयाकलाप 6.5 इसे न लका
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 88
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6.3 पवन का बनना — पवन कैसे बनती है?
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पवन कैसे बनती है?
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प्र.1
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पवन उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर ग तमान वायु ही है। जहाँ भी ऐसा दाब अंतर बनता है, वहाँ वायु बहने लगती है
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और उसी प्रवाह को हम पवन कहते ह।
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.c है। जब कोई क्षेत्र अपने आस-पास क अपेक्षा अ धक गरम होता है तो ag
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se उठ जाती है और वहाँ नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। आस-पास के ठं डे, उच्च
यह दाब अंतर प्राय: असमान रूप से गरम होने से बनता
उसके ऊपर क वायु गरम और हल्क होकर ऊपर
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g स्थान लेने आती है। यही क्षै तज ग त वह पवन है जसे हम अनुभव करते ह।
दाब वाले क्षेत्र से वायु क्षै तज रूप से a
उसका
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असमान रूप से गरम होना → गरम वायु ऊपर उठी → िन म्न दाब बना
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आस-पास की ठं डी वायु उच् च दाब पर
m → वायु उच्च दाब से िनम्न दाब की ओर बही = पवन a g
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प्र.2 क्या वायुदाब म अंतर पवन के बनने से संबं धत है?
हाँ — दाब का अंतर ही पवन का पूरा कारण है, और उसी का प रमाण यह तय करता है क पवन कतनी तीव्र होगी।
क्रयाकलाप 6.5 दोन बात सद्ध कर दे ता है। वायु फूले हुए गुब्बारे से बना फूले गुब्बारे म तभी तक गई जब तक दोन के दाब भन्न
थे; दाब समान होते ही प्रवाह रुक गया और दोन गुब्बार का आमाप स्थर हो गया। पुस्तक यह भी जोड़ती है क य द बाहर नकलती
वायु क चाल मापी जा सके तो दाब का अंतर अ धक होने पर चाल भी अ धक मलेगी।
कक्षा 7 क पाठ्यपुस्तक ज ासा म पढ़े गए समुद्र समीर और स्थल समीर खुले म यही प्रभाव ह। दन म स्थल जल क तुलना म
तीव्रता से गरम होता है, अत: स्थल के ऊपर क वायु गरम और हल्क होकर ऊपर उठती है और वहाँ नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है;
समुद्र के उच्च दाब वाले क्षेत्र से वायु स्थल क ओर बहती है — यही समुद्र समीर है। रा त्र म जल स्थल क तुलना म अ धक गरम
रहता है, नम्न दाब अब समुद्र के ऊपर बनता है और वायु स्थल से समुद्र क ओर बहती है — यही स्थल समीर है।
क्रयाकलाप 6.5 — आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 88
6.3 पवन का बनना — वायु उच्च दाब से नम्न दाब क ओर ( चत्र 6.12)
क्रयाकलाप
प्र.1 अनुमान लगाइए क गुब्बार का क्या होगा?
अनुमान: फूला हुआ गुब्बारा छोटा होता जाएगा और बना फूला गुब्बारा फूलता जाएगा, जब तक दोन का आमाप लगभग समान न
हो जाए।
यह अनुमान लगाने का आधार वही नयम है जो हम पहले से ात है — वायु उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर जाती है। फूले
हुए गुब्बारे म वायु का दाब न लका के दूसरे सरे पर लगे ढ ले गुब्बारे से अ धक है। जैसे ही मुँह से अँगु लयाँ हटाई जाएँगी, न लका
दोन के बीच माग बन जाएगी, अत: वायु फूले हुए गुब्बारे से बना फूले गुब्बारे क ओर जानी चा हए।
संकेत: अनुमान क्रयाकलाप करने से पहले लखना चा हए। य द प्रेक्षण उससे मल जाए तो नयम क पु ष्ट हो जाती
है; य द न मले तो समझाने के लए कुछ नया मल जाता है।
प्र.2 अवलोकन क जए क दोन गुब्बार के साथ क्या हुआ? क्या यह पूवानुमान के अनुरूप हुआ है?
हाँ, यह पूवानुमान के अनुरूप ही होता है। फूला हुआ गुब्बारा छोटा होने लगता है और बना फूला गुब्बारा भरने लगता है।
वायु न लका से होकर फूले हुए गुब्बारे से ढ ले गुब्बारे म जाती है। प्राय: वायु के बहने क ध्व न भी सुनाई दे ती है और दोन गुब्बार म
प रवतन एक ही समय पर दखाई दे ता है। कुछ ही दे र म ग त मंद पड़कर रुक जाती है और दोन गुब्बारे लगभग समान आमाप के
रह जाते ह।
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निलका
फूला हुआ िबना फूला
उच्च दाब िनम्न दाब
वायु इस ओर बहती है
वायु न लका से होकर उच्च दाब वाले गुब्बारे से नम्न दाब वाले गुब्बारे क ओर जाती है — यही नयम पवन को भी चलाता है।
प्र.3 क्या आपने गुब्बार के आकार म कोई प रवतन दे खा? अपने अवलोकन को ल खए।
हाँ। दोन गुब्बार का आमाप बदलता है, और वपरीत ढं ग से बदलता है।
फूला हुआ गुब्बारा छोटा होता जाता है — उससे वायु नकलती जाती है।
बना फूला गुब्बारा फूलता जाता है — उसम वायु आती जाती है।
कुछ समय पश्चात दोन गुब्बार का आमाप लगभग समान हो जाता है और आगे कोई प रवतन नह दखता।
यह भी ध्यान द जए क दोन गुब्बारे तुरंत समान नह होते। प रवतन आरंभ म सबसे तीव्र होता है, जब दोन दाब का अंतर सबसे
अ धक है, और जैसे-जैसे दाब पास आते ह, ग त मंद पड़ती जाती है।
प्र.4 गुब्बार के आकार म हुए प रवतन का क्या कारण हो सकता है?
फूले हुए गुब्बारे म वायु का दाब बना फूले गुब्बारे से अ धक है, अत: वायु न लका से होकर फूले हुए गुब्बारे से बना फूले गुब्बारे
म चली जाती है।
जस गुब्बारे से वायु जाती है वह छोटा हो जाता है; जसम वायु आती है वह फूल जाता है। इस अवस्था म न कोई मुँह से फूँक मार
रहा है और न कोई रबड़ को हाथ से ख च रहा है — एकमात्र उपलब्ध कारण न लका के दोन सर के दाब का अंतर ही है।
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प्र.5 क्या आपने ध्यान दया क कुछ समय पश्चात दोन गुब्बार का आकार लगभग समान हो गया और वायु का प्रवाह
भी बंद हो गया? वायु का प्रवाह क्य बंद हुआ?
प्रवाह इस लए बंद हुआ क दोन गुब्बार म वायु का दाब समान हो गया। जब कोई दाब अंतर शेष ही नह रहा तो वायु को
न लका म चलाने वाला कुछ बचा ही नह ।
पूरी प्र क्रया इस प्रकार है। आरंभ म दाब का अंतर अ धक है, अत: वायु तेजी से बहती है। फूले हुए गुब्बारे से वायु नकलने पर
उसका दाब घटता है; दूसरे गुब्बारे म वायु भरने पर उसका दाब बढ़ता है। दोन के बीच का अंतर घटता जाता है, प्रवाह मंद पड़ता
जाता है, और जब दोन दाब समान हो जाते ह तो ग त पूणत: रुक जाती है। उस अवस्था म दोन गुब्बार का आमाप लगभग समान
होता है।
क्रयाकलाप का नष्कष: वायु उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर प्रवा हत होती है, और वह तभी तक
बहती है जब तक दाब का अंतर बना रहे। पवन भी इसी कारण चलती है — और दाब समान हो जाने पर शांत हो
जाती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 89
6.4 तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है
प्र.1 मने पढ़ा है क तीव्रगामी पवन छत उड़ा सकती ह। म आश्चयच कत ँ! कैसे?
क्य क तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है। जब तीव्र पवन छत के ऊपर से बहती है तो छत के ऊपर का दाब घर के भीतर क
शांत वायु के दाब से कम हो जाता है और छत नीचे से ऊपर क ओर धकेली जाती है।
छत को एक ढक्कन मा नए जसके दोन ओर वायु है। नीचे, घर के भीतर, वायु शांत है और सामान्य वायुमंडलीय दाब पर है। ऊपर
पवन तीव्र ग त से बह रही है, और जहाँ वायु तेज चलती है वहाँ उसका दाब कम होता है। अत: नीचे क वायु ऊपर क ओर जतना
धकेलती है, ऊपर क वायु नीचे क ओर उससे कम धकेलती है। य द यह अंतर अ धक हो और छत कमजोर हो तो छत उठकर उड़
जाती है ( चत्र 6.14 क)।
पवन छत के ऊपर तीव हुई → छत के ऊपर दाब घटा
घर के भीतर का दाब पूववत अिधक
नीचे से ऊ वमुखी धक्का > ऊपर से अधोमुखी धक्का
→ कमजोर छत उड़ जाती है
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
इसका उपाय: पुस्तक क सलाह है क तीव्रगामी पवन के साथ झंझावात आने पर घर के दरवाजे और
खड़ कयाँ खुली रखनी चा हए। तब पवन छत के ऊपर से और घर के भीतर से भी चलती है, अत: भीतर का दाब
भी घट जाता है। भीतर और छत के ऊपर का अंतर अत्य धक कम हो जाता है और छत यथावत बनी रहती है ( चत्र
6.14 ख)।
स्वयं जाँ चए: क्रयाकलाप 6.6 यही प्रभाव छोटे पैमाने पर दखाता है — दो लटके गुब्बार के बीच फूँक मा रए और
वे दूर होने के स्थान पर पास आ जाते ह।
क्रयाकलाप 6.6 — आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 89
6.4 तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है ( चत्र 6.13)
क्रयाकलाप
प्र.1 गुब्बार का क्या होता है? अपने अवलोकन को ल खए।
दोन गुब्बारे एक-दूसरे क ओर आ जाते ह और उनके बीच का अंतराल घट जाता है, यद्य प आप वायु उसी अंतराल म फूँक रहे
ह।
लगभग समान आमाप के दो फूले हुए गुब्बारे 6–10 सट मीटर के अंतराल पर एक छड़ से लटके ह। अ धकांश लोग यह अपेक्षा करते
ह क वायु का झ का उन्ह दूर धकेल दे गा। इसके वपरीत, जैसे ही आप संकरे स्थान म फूँक मारते ह, गुब्बारे भीतर क ओर झूल
जाते ह और कभी-कभी छू भी जाते ह।
प्र.2 अब अ धक वेग से फूँक मा रए और अवलोकन क जए।
अ धक वेग से फूँक मारने पर गुब्बारे अ धक वेग से और अ धक बलपूवक एक-दूसरे के नकट आते ह।
आप जतने अ धक वेग से फूँक मारते ह, गुब्बार के बीच से गुजरती वायु क चाल उतनी ही अ धक होती है और वहाँ उत्पन्न दाब
उतना ही कम। अत: बाहर के दाब और अंतराल के दाब का अंतर बढ़ जाता है, प्रत्येक गुब्बारे पर भीतर क ओर लगने वाला धक्का
बढ़ जाता है और वे तेजी से पास आते ह।
संकेत: यह एक उ चत परीक्षण है — वायु क चाल के अ त रक्त कुछ भी नह बदला। इसी लए हम इस प्रभाव को
केवल चाल से जोड़ पाते ह।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
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m.
इस क्रयाकलाप से हम क्या नष्कष नकाल सकते ह?
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प्र.3
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यह gकl तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है।
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गुब्बार के बीच फूँक मारने से वहाँ तीव्रगामी वायु का, अथात् नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। गुब्बार के बाहरी ओर क वायु अब
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. ag
भी सामान्य वायुमंडलीय दाब पर है, जो तुलना म अ धक है। यही अ धक दाब प्रत्येक गुब्बारे को नम्न दाब वाले क्षेत्र क ओर, अथात्
s em
भीतर क ओर धकेलता है — और वे बीच म आकर मल जाते
a
ह।
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अंत राल में तीव वायु → अंत राल का दाब घटा
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m.
गुब्बारों के बाहर दाब = वायुमंडलीय (अिधक)
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पत्येक गुब्बारे पर पिरणामी धक्का भीतर की ओर → गुब्बारे पास आए
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a s emवेग से फूँक → अिधक दाब अंतर → और ते जी से पास
gl
अिधक
a
m a s
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यह कहाँ काम आता है: यही नयम झंझावात म छत के उड़ने, बैनर और हो डग्स म छद्र बनाने, तथा तीव्र ग त से
जाते वाहन क ओर कागज-पत्त के खच जाने m .
a s e को समझाता है।
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ज ासा बनाए रख — पृष्ठ 94
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अध्याय के अंत का अभ्यास, प्रश्न 1–13
ज ासा बनाए रख
प्र.1 सही वकल्प का चयन क जए। (i) चत्र 6.21 को ध्यानपूवक दे खए। पात्र ‘ग’ म जल भरा जा रहा है। जल भरने
क प्र क्रया रोकने पर पात्र म जलस्तर होगा — (क) पात्र ‘क’ म उच्चतम (ख) पात्र ‘ख’ म उच्चतम (ग) पात्र ‘ग’
म उच्चतम (घ) सभी पात्र म समान।
क ख ग
चत्र 6.21, पृष्ठ 94 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: भन्न- भन्न आकृ त और चौड़ाई के तीन पात्र ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’, जो तली
के पास न लकाओं ारा एक-दूसरे से जुड़े ह। पात्र ‘ग’ म जल डाला जा रहा है।
(ii) एक रबर चूषक ‘क’ को एक समतल चकने पृष्ठ पर एवं समान चूषक ‘ख’ को खुरदरे पृष्ठ पर दबाया गया।
(क) ‘क’ और ‘ख’ दोन ही अपने पृष्ठ से चपक जाएँगे। (ख) ‘क’ और ‘ख’ दोन अपने पृष्ठ से नह चपकगे।
(ग) ‘क’ चपक जाएगा परंतु ‘ख’ नह चपकेगा। (घ) ‘क’ नह चपकेगा परंतु ‘ख’ चपक जाएगा। (iii) कसी
भवन क छत पर एक जल क टं क को H ऊँचाई पर रखा जाता है। भूतल पर जल को अ धक दाब से प्राप्त करने
के लए हम करना होगा— (क) जहाँ टं क रखी है, उस ऊँचाई H को बढ़ा दया जाए। (ख) जहाँ टं क रखी है उस
स्थान क ऊँचाई H को कम कर दया जाए। (ग) टं क को समान ऊँचाई वाली दूसरी टं क जसम अ धक जल आ
सके, से प रव तत कर दया जाए। (घ) टं क को समान ऊँचाई क दूसरी टं क जसम कम जल आ सके, से
प रव तत कर दया जाए। (iv) दशाए गए चत्र 6.22 म दो पात्र ‘क’ और ‘ख’ म समान स्तर तक जल भरा गया।
दोन पात्र म लगने वाले दाब क्रमश: Pक और Pख तथा बल क्रमश: Fक और Fख म संबंध होगा।
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क ख
चत्र 6.22, पृष्ठ 95 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: भन्न चौड़ाई परंतु समान ऊँचाई के पात्र ‘क’ और ‘ख’ — दोन म जल
समान स्तर तक भरा है।
(क) Pक = Pख, Fक = Fख (ख) Pक = Pख, Fक < Fख (ग) Pक < Pख, Fक = Fख (घ) Pक > Pख, Fक > Fख
(i) (घ) सभी पात्र म समान • (ii) (ग) ‘क’ चपक जाएगा परंतु ‘ख’ नह चपकेगा • (iii) (क) ऊँचाई H को बढ़ा दया
जाए • (iv) (ख) Pक = Pख, Fक < Fख
(i) चत्र 6.21 म तीन पात्र ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ भन्न आकृ त एवं चौड़ाई के ह, परंतु तल के पास न लकाओं ारा एक-दूसरे से जुड़े
ह। अत: ‘ग’ म डाला गया जल तीन म फैल जाता है। द्रव का दाब केवल स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है, इस लए जल वराम म
तभी रह सकता है जब सवत्र स्तंभ क ऊँचाई समान हो — य द कसी पात्र म स्तंभ ऊँचा होता तो उसका अ धक दाब जल को
जोड़ने वाली न लका से दूसरे पात्र म धकेल दे ता। अत: पात्र क आकृ त या चौड़ाई कुछ भी हो, जलस्तर तीन म समान ही रहेगा।
(ii) चूषक इस लए चपकता है क दबाने पर कप के नीचे क वायु नकल जाती है, भीतर का दाब बाहर के वायुमंडलीय दाब से कम
हो जाता है और बाहर क वायु उसे दबाए रखती है। समतल चकने पृष्ठ पर कनारा भली-भाँ त बैठ जाता है, वायु भीतर नह आ
पाती और चूषक ‘क’ चपक जाता है। खुरदरे पृष्ठ पर कनारे के नीचे के सूक्ष्म अंतराल से वायु नरंतर भीतर आती रहती है, भीतर
का दाब कम बना ही नह रहता, दाब अंतर नह बनता और चूषक ‘ख’ गर जाता है।
(iii) कसी नल पर दाब उसके ऊपर के जल स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है। टं क ऊँची करने से यह स्तंभ ऊँचा हो जाता है,
अत: भूतल पर दाब बढ़ जाता है। वकल्प (ग) और (घ) केवल जल क मात्रा बदलते ह, ऊँचाई नह — और जल क मात्रा से दाब
पर कोई अंतर नह पड़ता, जैसा क्रयाकलाप 6.1 म चौड़े और संकरे पाइप से सद्ध हुआ था।
(iv) दोन पात्र म जल समान स्तर तक है, अत: जल स्तंभ क ऊँचाई समान है और तल पर दाब भी समान है: Pक = Pख। परंतु
पात्र ‘ख’ अ धक चौड़ा है, अत: उसके तल का क्षेत्रफल अ धक है। बल = दाब × क्षेत्रफल होने के कारण समान दाब अ धक
क्षेत्रफल पर अ धक बल दे गा।
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Pक = Pख (समान ऊँ चाई के जल स्तं भ )
बल = दाब × क्षेत्रफल, तथा क्षेत्रफलख > क्षेत्रफलक
→ F क < Fख
प्र.2 बताइए नम्न ल खत कथन सत्य ह या असत्य — (i) वायु उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर बहती है। (ii)
द्रव केवल पात्र के तल पर दाब डालते ह। (iii) चक्रवात अ क्ष म मौसम झंझावाती होता है। (iv) त ड़तझंझा के
समय हम कार म सुर क्षत रहते ह।
(i) सत्य • (ii) असत्य • (iii) असत्य • (iv) सत्य
कथन सत्य / कारण
असत्य
(i) वायु उच्च दाब क्षेत्र से िनम्न स त्य यही क्रयाकलाप 6.5 का नष्कष है। वायु फूले हुए गुब्बारे से बना फूले गुब्बारे म गई और
दाब क्षेत्र की ओर बहती है। दोन के दाब समान होते ही रुक गई। पवन इसी प्रवाह का वशाल रूप है।
(ii) द व के वल पात्र के तल पर अस त्य क्रयाकलाप 6.2 म जल बोतल क पा द वार के छद्र से बाहर नकलता है। द्रव तल के
दाब डालते है।
ं साथ-साथ द वार पर भी — वस्तुत: सभी दशाओं म — दाब डालते ह।
(iii) चक्रवात अिक्ष में मौसम अस त्य अ क्ष कद्र म अत्य धक नम्न दाब का क्षेत्र है और वहाँ वायु शांत रहती है। तीव्र वायु और
झंझावाती होता है। भारी वषा अ क्ष के आस-पास के क्षेत्र म होती है।
(iv) तिड़तझंझा के समय हम स त्य पुस्तक के अनुसार त ड़त के समय य द आप बस या कार म सवार ह तो आप अपेक्षाकृत
कार में सुर िक्षत रहते है।
ं अ धक सुर क्षत ह। धातु क बॉडी आवेश को भीतर बैठे व्य क्तय के स्थान पर अपने चार
ओर से ले जाती है।
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प्र.3 चत्र 6.23 (क) म रेतीली सतह पर एक लड़के को क्षै तज रूप से लेटा हुआ दशाया गया है और चत्र 6.23 (ख) म
लड़के को ऊध्वाधर खड़ा हुआ दशाया है। कस स्थ त म लड़का रेत के अंदर अ धक धँसेगा? कारण द जए।
(क) (ख)
चत्र 6.23, पृष्ठ 95 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: (क) ढ ली रेत क सतह पर क्षै तज रूप से लेटा हुआ लड़का; (ख) उसी रेत
पर ऊध्वाधर खड़ा हुआ वही लड़का।
ऊध्वाधर खड़े होने पर लड़का रेत म अ धक धँसेगा ( चत्र 6.23 ख)।
दोन चत्र म उसका भार बल्कुल समान है — लेटने से कोई हल्का नह हो जाता। जो बदलता है वह है उस भार को सँभालने
वाली रेत का क्षेत्रफल। खड़े होने पर वह केवल अपने दोन पैर के तलव से रेत को छू ता है, जो बहुत कम क्षेत्रफल है। लेटने पर
उसक पीठ, टाँग, भुजाएँ और सर सब रेत पर टकते ह, जो कई गुना अ धक क्षेत्रफल है। दाब बल म क्षेत्रफल का भाग दे ने पर
मलता है, अत: खड़े होने पर रेत पर दाब कह अ धक होता है, और ढ ली रेत के कण अ धक दाब पर खसक जाते ह — इस लए
वह अ धक धँसता है।
लड़ के का भार = दोनों िस्थितयों में समान
खड़ े होने पर: कम संपक क्षेत्रफल → अिधक दाब → अिधक धँसेगा
लेट ने पर: अिधक संपक क्षेत्रफल → कम दाब → कम धँसेगा
स्वयं जाँ चए: इसी कारण ढ ली रेत या दलदली भू म पार करते समय चलने के स्थान पर रगने या लेटने क सलाह
द जाती है, और ऊँट के पैर रे गस्तान क रेत पर चलने के लए चौड़े एवं ग े दार होते ह।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
एक हाथी अपने चार पैर पर खड़ा है। य द एक पैर ारा घेरे जाने वाला क्षेत्रफल 0.25 m2 है और हाथी का भार
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प्र.4
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20000 N है तो हाथी ारा स्थल पर आरो पत दाब क गणना क जए।
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हाथी स्थल पर 20000 N/m2, अथात् 20000 Pa का दाब आरो पत करता है।
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ag
हाथी चार पैर पर खड़ा है, अत: उसका पूरा भार चार पैर के कुल क्षेत्रफल पर बँटता है। पहले कुल क्षेत्रफल नका लए, फर भार म
m .
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उसका भाग द जए।
a g l
कु ल क्षेत्रफल = 4 × 0.25 m2 = 1 m2
co m
m.
भार (बल) = 20000 N
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दाब = बल / क्षेत्रफल = 20000 N ÷ 1 m2
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em N/m2 = 20000 Pa
=s20000
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पैर क संख्या क्य महत्त्वपूण है: य द हाथी एक पैर उठा ले और तीन पैर पर खड़ा हो तो क्षेत्रफल घटकर 0.75
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m2 रह जाएगा और दाब बढ़कर लगभग 26667 Pa हो जाएगा। भार त नक भी नह बदला — केवल वह क्षेत्रफल
बदला जस पर वह काय करता है। g
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.cका क्षेत्रफल 3.5 m2 है और उसम 3 लोग बैठे ह। य द प्रत्येक व्य क्त का aभारg 700 N है तो पता लगाएँ क कस
प्र.5 ‘क’ और ‘ख’ दो नाव ह। नाव ‘क’ के आधार का क्षेत्रफल 7 m2 है और उसम 5 लोग बैठे ह। नाव ‘ख’ के आधार
se m नाव के आधार पर अ धक दाब लगेगा और कतना?
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नाव ‘ख’ के आधार पर अ धक दाब लगेगा — 100 N/m (100 Pa) अ धक।
agl
प्रत्येक नाव के लए पहले उसम बैठे लोग का कुल भार जो ड़ए, फर आधार के क्षेत्रफल का भाग द जए।
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नाव ‘क’
बल = 5 × 700 N = 3500 N
क्षेत्रफल = 7 m2
दाब = 3500 ÷ 7 = 500 N/m2
नाव ‘ख’
बल = 3 × 700 N = 2100 N
क्षेत्रफल = 3.5 m2
दाब = 2100 ÷ 3.5 = 600 N/m2
अंत र = 600 − 500 = 100 N/m2
ध्यान द जए क नाव ‘क’ पर भार अ धक है — 3500 N बनाम 2100 N — फर भी दाब उस पर कम है। उसका आधार दोगुना
चौड़ा है, अत: वही भार दोगुने क्षेत्रफल पर फैल जाता है।
संकेत: दाब के प्रश्न केवल बल क तुलना से कभी हल नह होते। सदै व प्र त एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल क
तुलना क जए। यहाँ प्रश्न के अनुसार केवल व्य क्तय का भार लया गया है।
प्र.6 य द वायु और बादल दोन व ुत के सुचालक होते तो क्या त ड़त उत्पन्न होती? अपने उत्तर का कारण द जए।
नह , त ड़त उत्पन्न नह होती। त ड़त के लए आवश्यक है क वायु वद्युतरोधी हो और बादल पृथक हुए आवेश को रोके रख सके।
त ड़त तीन चरण म बनती है। पहले, ऊध्वगामी और अधोगामी तीव्र पवन हम कण और जल क बूँद म घषण उत्पन्न कर बादल को
आवे शत कर दे ती है। दूसरे, आवेश का पृथक्करण और संचय होता है — हल्के धनावे शत हम कण बादल के ऊपरी भाग म और
भारी ऋणावे शत जल क बूँद नचले भाग म जमा हो जाती ह, और बादल का ऋणावे शत नचला भाग नीचे क भू म को धनावे शत
कर दे ता है। तीसरे, जब सं चत आवेश बहुत अ धक हो जाता है तो वायु का वद्युतरोधी गुण समाप्त हो जाता है और आवेश का
आक स्मक प्रवाह क्षणद प्त प्रकाश उत्पन्न करता है।
अब पदाथ बदलकर दे खए। य द बादल सुचालक होते तो धन और ऋण आवेश उसके भीतर पृथक रह ही नह सकते; वे बनते ही
एक-दूसरे को उदासीन कर दे ते, अत: कभी बड़ी मात्रा म आवेश सं चत होता ही नह । य द वायु सुचालक होती तो आवेश नरंतर
आस-पास क वायु और भू म म रसता रहता, वह सं चत होकर वायु के अचानक टू टने क प्रतीक्षा नह करता। दोन ही स्थ तय म
न बड़ा संचय होता और न आक स्मक वसजन — और त ड़त तो वही आक स्मक वसजन है।
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ऐसा क्य होता है: कसी ु लग के लए आवेश का भंडार और एक ऐसी बाधा चा हए जो अचानक टू टे। सुचालक
स्थायी रूप से सरल माग दे दे ते ह, अत: आवेश कभी सं चत ही नह होता और बाधा बनती ही नह । त ड़त चालक
ठ क इसी सद्धांत का उपयोग करता है — वह जान-बूझकर सरल चालक माग दे ता है ता क आवेश भवन पर प्रहार
करने के स्थान पर चुपचाप भू म म चला जाए।
प्र.7 य द बोतल म जल एक न श्चत ऊँचाई तक भर दया जाए तो दशाए गए चत्र 6.24 के अनुसार दो समान गुब्बार
‘क’ और ‘ख’ का क्या होगा? क्या दोन गुब्बारे फूलगे? य द हाँ, तो क्या वे समान रूप से फूलगे? अपने उत्तर को
समझाइए।
क ख
चत्र 6.24, पृष्ठ 96 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: क प ारा बोतल म जल डाला जा रहा है; बोतल क तली के पास दोन
ओर लगी छोट न लकाओं पर दो समान गुब्बारे ‘क’ और ‘ख’ बँधे ह।
हाँ, दोन गुब्बारे फूलगे — और समान रूप से फूलगे।
चत्र 6.24 म दोन गुब्बारे बोतल के तल के समीप लगी छोट पाश्व न लकाओं पर बँधे ह, और दोन न लकाएँ तल से समान ऊँचाई
पर ह। क प से जल डालने पर वह बोतल को भरता है और दोन पाश्व न लकाओं म भी जाता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
जल अपने पात्र क द वार पर सभी दशाओं म दाब डालता है, अत: वह प्रत्येक पाश्व न लका म बाहर क ओर दाब डालकर रबड़ को
फैला दे ता है — इसी कारण दोन गुब्बारे फूलते ह। कतना फूलगे, यह न लका के मुख पर लगने वाले दाब से तय होता है, और वह
दाब केवल उसके ऊपर खड़े जल स्तंभ क ऊँचाई पर नभर करता है। दोन न लकाएँ समान ऊँचाई पर ह, अत: दोन के ऊपर स्तंभ
समान है, दोन पर दाब समान है, और दोन समान गुब्बारे समान रूप से फैलते ह।
दोनों निलकाएँ बोतल में समान ऊँ चाई पर
→ दोनों के ऊपर जल स्तं भ की ऊँ चाई समान
→ दोनों मुखों पर समान द व दाब
→ समान गुब्बारे समान रूप से फूलेगं े
ऊँचाई ही क्य , मात्रा क्य नह : क्रयाकलाप 6.1 म यही बात चौड़े और संकरे पाइप से सद्ध हुई थी। समान ऊँचाई
के जल स्तंभ ने समान फैलाव दया, यद्य प दोन पाइप म जल क मात्रा बहुत भन्न थी। यहाँ भी बोतल म और जल
डा लए तो दोन गुब्बारे और फूलगे, फर भी समान रूप से, क्य क दोन के ऊपर स्तंभ समान रूप से ऊँचा हुआ है।
प्र.8 व्याख्या क जए क झंझावात चक्रवात म कस प्रकार प रव तत हो जाता है।
झंझावात चक्रवात तब बनता है जब वह महासागर के गरम जल के ऊपर बने, जहाँ संघनन से मुक्त होने वाली ऊष्मा उसे नरंतर
पो षत करती रहे, जससे कद्र का दाब और घटता जाए, और पृथ्वी का घूणन भीतर आती वायु को चक्रण करा दे ।
चरण इस प्रकार ह:
1. गरम आद्र वायु का ऊपर उठना। महासागरीय जल गरम होता है, उसके ऊपर क गरम और आद्र वायु हल्क होकर ऊपर
उठती है और नीचे नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है।
2. जलवाष्प का संघनन और ऊष्मा का मुक्त होना। ऊपर उठती आद्र वायु ठं डी होती है और उसका जलवाष्प संघ नत होकर
वषा क बूँद बनाता है। वाष्पन के समय जल ने जो ऊष्मा ली थी, संघनन पर वही ऊष्मा वायुमंडल म मुक्त हो जाती है।
3. उठना और तीव्र होना। यह मुक्त ऊष्मा ऊपर उठती वायु को और गरम कर दे ती है, अत: वह और ऊँचाई तक उठती है और
कद्र का दाब और भी कम हो जाता है।
4. चार ओर से वायु का आना। आस-पास के उच्च दाब वाले क्षेत्र से वायु कद्र क ओर तीव्र ग त से आती है और स्वयं भी ऊपर
उठने लगती है — और नमी लाती है, अत: चक्र दोहराता और प्रबल होता जाता है।
5. पृथ्वी का घूणन चक्रण दे ता है। ग तमान वायु सीधी भीतर नह जाती; पृथ्वी के घूणन के कारण वह मुड़ती है और पूरा तंत्र
नम्न दाब के कद्र के चार ओर घूमने लगता है।
6. चक्रवात का बनना। प रणाम यह होता है क अत्य धक नम्न दाब के क्षेत्र के चार ओर तीव्रगामी वायु घूमने लगती है —
बादल, पवन एवं वषा का चक्रण करता तंत्र, जसके कद्र म शांत चक्रवात अ क्ष होती है।
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उच्च दाब
1008 mb
998 mb
996 mb
अिक्ष
994 mb
उच्च दाब
पवन सबसे कम दाब की ओर चक्रण करती हईु जाती है
चक्रवात के चार ओर क समदाब रेखाएँ, चत्र 6.19 म दए गए मान के साथ। दाब बाहर 1008 mb से घटकर कद्र म 994 mb रह
जाता है और वायु इसी ढाल पर भीतर क ओर चक्रण करती है।
मुख्य अंतर: स्थल पर बना साधारण झंझावात शीघ्र ही गरम आद्र वायु से वं चत हो जाता है। चक्रवात ऐसे महासागर
के ऊपर होता है जो उसे नरंतर नमी दे ता रहता है, और संघनन का प्रत्येक चक्र नई ऊष्मा मुक्त कर अगले चक्र को
चलाता है। इसी लए पुस्तक कहती है क स्थल पर पहुँचते ही चक्रवात क्षीण होने लगता है — नम वायु का ोत टू ट
जाता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात
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चत्र 6.25 म ग मय क दोपहर के समय म समुद्र तट पर पेड़ को दशाया गया है। पहचा नए ‘क’ अथवा ‘ख’ म
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स्थल कस ओर है। अपने उत्तर को स्पष्ट क जए।
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चत्र 6.25, पृष्ठ 96 — पुनः च त्रत रेखा चत्र: ग मय क दोपहर म समुद्र तट पर उगे ना रयल के पेड़। ‘क’ भू म-रेखा का
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एक सरा है और ‘ख’ दूसरा सरा।
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agl ‘क’ क ओर स्थल है (और ‘ख’ क ओर समुद्र है)।
पहले पेड़ से पवन क दशा प ढ़ए। उनके तने ‘क’ क ओर झुके ह और प त्तयाँ भी ‘क’ क ओर बह रही ह, अत: पवन ‘ख’ से
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‘क’ क ओर चल रही है।
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अब समय पर ध्यान द जए। यह ग मय क दोपहर है, जब स्थल जल क तुलना म कह तीव्रता से गरम होता है। स्थल के ऊपर क
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वायु गरम और हल्क होकर ऊपर उठ जाती है और वहाँ नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। समुद्र के ऊपर क वायु अपेक्षाकृत ठं डी
और उच्च दाब पर रहती है। अत: वायु समुद्र से स्थल क ओर बहती है — यही समुद्र समीर है। यहाँ पवन ‘ख’ से ‘क’ क ओर चल
रही है, अत: ‘ख’ समुद्र होगा और ‘क’ स्थल।
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गरम वायु ऊपर उठती है
समुद समीर
िनम्न दाब उच्च दाब
स्थल (क) समुद (ख)
क ख
ग मय क दोपहर म स्थल अ धक गरम होता है, अत: नम्न दाब स्थल पर बनता है और समीर समुद्र (ख) से स्थल (क) क ओर बहकर पेड़
को ‘क’ क ओर झुका दे ती है।
स्वयं जाँ चए: रा त्र म चत्र उलट जाता है। जल स्थल क तुलना म अ धक गरम रहता है, नम्न दाब समुद्र पर बनता
है और स्थल समीर ‘क’ से ‘ख’ क ओर बहती है — तब पेड़ ‘ख’ क ओर झुके दखाई दे ते।
प्र.10 ऐसे कसी क्रयाकलाप का वणन क जए जो यह दशाए क वायु उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर बहती
है।
क्रयाकलाप 6.5 — दो गुब्बार और एक न लका वाला प्रयोग — इसे सीधे दशाता है।
साम ी: पतले रबड़ के बने एक समान दो गुब्बारे, एक न लका (स् ॉ), रबड़ बड अथवा धागा।
व ध:
1. न लका का एक सरा पहले गुब्बारे के मुँह म डालकर रबड़ बड या धागे से कसकर बाँध द जए, जससे जोड़ से वायु न रसे। इस
गुब्बारे को बना फुलाए रहने द जए।
2. दूसरे गुब्बारे को फुलाइए और उसके मुँह को अँगु लय से पकड़ ली जए जससे वायु बाहर न नकले।
3. न लका का दूसरा सरा फूले हुए गुब्बारे म डालकर उसे भी बाँध द जए, यह सु न श्चत करते हुए क इस बीच वायु बाहर न
नकले। अब न लका का एक सरा फूले हुए गुब्बारे म और दूसरा बना फूले गुब्बारे म है।
4. अपना अनुमान ल खए, फर अँगु लयाँ हटाकर दोन गुब्बार का अवलोकन क जए।
प्रेक्षण: फूला हुआ गुब्बारा छोटा होता जाता है और बना फूला गुब्बारा भरता जाता है। कुछ समय पश्चात दोन लगभग समान
आमाप के हो जाते ह और ग त रुक जाती है।
नष्कष: फूले हुए गुब्बारे म वायु का दाब बना फूले गुब्बारे से अ धक था, अत: वायु न लका से होकर उच्च दाब वाले गुब्बारे से नम्न
दाब वाले गुब्बारे क ओर गई। प्रवाह तभी तक चला जब तक दाब भन्न थे और दाब समान होते ही रुक गया। बाहर चलने वाली पवन
भी ठ क इसी प्रकार बनती है।
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संकेत: इसका सरल रूप यह है क फूले हुए गुब्बारे को बना बाँधे छोड़ द जए, अथवा पंचर हुई साइ कल क ूब
से नकलती वायु को अनुभव क जए। दोन म उच्च दाब क वायु नम्न दाब वाले वातावरण म जाती है, परंतु दो
गुब्बार वाली व्यवस्था इस लए बेहतर है क उसम दाब समान होने पर प्रवाह का रुकना भी दखाई दे ता है।
प्र.11 त ड़तझंझा क्या है? इसके नमाण प्र क्रया क व्याख्या क जए।
त ड़त एवं गजन के साथ आने वाले झंझावात को त ड़त-झंझावात (त ड़तझंझा) कहते ह। (झंझावात स्वयं तीव्र वायु के साथ
होने वाली वषा है।)
नमाण क प्र क्रया:
1. गरम होना और ऊपर उठना। स्थल गरम होता है और उसके ऊपर क गरम, आद्र वायु हल्क होने के कारण ऊपर उठती है,
जससे नम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है।
2. वायु चक्रण। आस-पास के उच्च दाब क्षेत्र से ठं डी वायु आकर उसका स्थान लेती है, गरम होकर स्वयं ऊपर उठती है, और इस
प्रकार वायु चक्रण क सतत प्र क्रया चलती रहती है।
3. बादल का बनना। ऊपर उठती वायु फैलकर ठं डी होती है, उसक नमी संघ नत होकर जल क बूँद बनाती है और बादल बनते
ह। छोट बूँद मलकर भारी बूँद बनाती ह जो वषा, ओले अथवा हम के रूप म गरती ह। तीव्र वायु के साथ यह वषा झंझावात
कहलाती है। भारत जैसे गरम, आद्र एवं उष्णक टबंधीय क्षेत्र म ऐसे झंझावात प्राय: आते रहते ह।
4. हम कण का बनना। कुछ न श्चत प र स्थ तय म गरम वायु इतनी ऊँचाई तक पहुँच जाती है क वहाँ के कम तापमान के
कारण जल क बूँद हम कण म प रव तत हो जाती ह।
5. बादल का आवे शत होना। ऊध्वगामी और अधोगामी तीव्र पवन हम कण तथा जल क बूँद म परस्पर घषण करा दे ती है।
जैसा आपने ‘बल को जान’ अध्याय म पढ़ा, घषण से वस्तुएँ आवे शत हो जाती ह — अत: बादल म स्थर वैद्युत आवेश उत्पन्न
हो जाता है।
6. त ड़त और गजन। हल्के धनावे शत हम कण बादल के ऊपरी भाग म और भारी ऋणावे शत जल क बूँद नचले भाग म जमा
हो जाती ह। आवेश पयाप्त मात्रा म सं चत हो जाने पर वायु का वद्युतरोधी गुण समाप्त हो जाता है और आवेश का आक स्मक
प्रवाह त ड़त उत्पन्न करता है; इससे गरम होकर फैलती वायु से तीव्र ध्व न, अथात् गजन, उत्पन्न होती है। त ड़त एवं गजन के
साथ आने वाला झंझावात ही त ड़त-झंझावात है।
क्या आप जानते ह? भारत म वल गत एवं स्थानीकृत त ड़त-झंझावात के स्थानीय नाम ह — प श्चम बंगाल, बहार
एवं झारखंड म कालबैशाखी और असम म बोदोइ सला। ये मानसून से पूव आते ह और खरीफ फसल को उगाने म
सहायक होते ह। केरल, कनाटक एवं त मलनाडु म इन्ह आम वषा कहते ह क्य क ये आम पकाने म सहायक होते ह,
और कनाटक म स्थानीय त ड़त-झंझावात कॉफ के पौध क वृ द्ध म सहायक होते ह।
प्र.12 उस प्र क्रया क व्याख्या क जए जसके कारण त ड़त उत्पन्न होती है।
त ड़त आवेश का वह आक स्मक प्रवाह है जो तब होता है जब बादल म सं चत आवेश इतना अ धक हो जाए क वायु उसे और
रोक न सके।
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1. घषण से आवेशन। ऊँचे झंझा-बादल के भीतर ऊध्वगामी और अधोगामी तीव्र पवन चलती है। वह हम कण और जल क बूँद
म परस्पर घषण करा दे ती है, और कन्ह भी दो वस्तुओं के घषण क भाँ त वे आवे शत हो जाती ह।
2. आवेश का पृथक्करण। धनावे शत हल्के हम कण ऊपर क ओर जाकर बादल के ऊपरी भाग को घेर लेते ह। ऋणावे शत
भारी जल क बूँद नचले भाग म रह जाती ह। इस प्रकार बादल म ऊपर-नीचे आवेश का पृथक्करण हो जाता है।
3. भू म पर प्रे रत आवेश। जब बादल का ऋणावे शत नचला भाग स्थल के समीप आता है तो वह भू म और आस-पास क
वस्तुओं — जैसे पेड़-पौधे अथवा इमारत — को धनावे शत कर दे ता है।
4. वायु का व ुतरोधी गुण समाप्त होना। वायु प्राय: वद्युतरोधी क तरह काय करती है और वपरीत आवेश को मलने नह
दे ती। परंतु जब आवेश अ धकता म सं चत हो जाए तो वायु का यह गुण समाप्त हो जाता है।
5. क्षणद प्त प्रकाश। आवेश का आक स्मक प्रवाह होता है और क्षणद प्त प्रकाश उत्पन्न होता है — यही त ड़त है। यह बादल के
भीतर, बादल के मध्य अथवा बादल और धरातल के मध्य उत्पन्न हो सकती है। त ड़त आस-पास क वायु को तीव्र ग त से गरम
कर दे ती है, वायु फैलती है और तीव्र ध्व न उत्पन्न होती है जसे गजन कहते ह।
+++++++
हल्के िहम कण ऊपर
−−−−−−−
भारी जल की बूदँ े ं नीचे
तिड़ त
भूिम +++++++++
बादल के भीतर आवेश का पृथक्करण और नीचे भू म पर प्रे रत धनावेश। संचय पयाप्त होने पर वायु का वद्युतरोधी गुण समाप्त हो जाता है
और आवेश प्रवा हत हो जाता है।
पुस्तक ारा द गई सावधा नयाँ: त ड़त के समय ऊँची वस्तुओं से दूर रह, कसी नम्न एवं खुले स्थान पर छप कर
बैठ जाएँ और भू म से सीधे संपक को कम रख। भू म पर न लेट। धातु क छड़ी वाला छाता उपयोग न कर। य द आप
जल के भीतर ह तो तुरंत बाहर नकल जाएँ। य द आप बस या कार म सवार ह तो आप अपेक्षाकृत अ धक सुर क्षत
ह।
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प्र.13 व्याख्या क जए क प्रदशपट्ट (बैनर) और व ापन पट्ट (हो डग्स) म छद्र क्य बनाए जाते ह।
छद्र इस लए बनाए जाते ह क पवन बैनर के आर-पार नकल सके और उससे टकराकर रुके नह — इससे बैनर के दोन पृष्ठ के
बीच दाब का अंतर कम बना रहता है और बैनर न फटता है, न उड़ता है।
बैनर खुले म लगी एक बड़ी चपट चादर है। जब तीव्र पवन उससे टकराती है तो उसके अगले पृष्ठ पर बहती वायु क चाल अ धक
होने से वहाँ दाब घट जाता है, जब क पीछे क ओर क आश्रय पाई वायु सामान्य वायुमंडलीय दाब पर बनी रहती है। दोन पृष्ठ के
दाब का यह अंतर बैनर के पूरे बड़े क्षेत्रफल पर काय करता है, अत: बहुत बड़ा बल उत्पन्न होता है — इतना क कपड़ा फट जाए,
र स्सयाँ टू ट जाएँ या ढाँचा गर जाए।
छद्र वायु को उच्च दाब वाली ओर से नम्न दाब वाली ओर आर-पार जाने दे ते ह। तब दोन पृष्ठ का दाब लगभग समान हो जाता है,
बैनर पर लगने वाला प रणामी बल बहुत घट जाता है और बैनर अपने स्थान पर टका रहता है।
िछद न हों: पवन रुकी → दोनों पृष्ठों का दाब िभन्न → बड़ े क्षेत्रफल पर बड़ ा बल
िछद हों: वायु आर-पार िनकली → दाब लगभग समान → कम बल → बैन र सुरिक्षत
यह तक आप पहले भी दे ख चुके ह: झंझावात के समय दरवाजे- खड़ कयाँ खुली रखने का कारण भी यही है। वायु
को केवल छत के ऊपर से नह , घर के भीतर से भी जाने दे ने पर भीतर और छत के ऊपर के दाब का अंतर घट जाता
है और छत उड़ने से बच जाती है ( चत्र 6.14 ख)।
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर — पृष्ठ 97
अंतर वषयक प रयोजनाएँ — व ान एवं समाज
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर
प्र.1 अपने अँगूठे और तजनी अँगुली के मध्य 18 cm लंबी और 2 cm चौड़ी एक कागज क पट्ट को पक ड़ए ता क ये
मुक्त रूप से लटक रहे। अनुमान लगाइए क कागज पर फूँक मारने से आपका अवलोकन क्या होगा? इस
क्रयाकलाप को क जए। अपने प्रेक्षण को अं कत कर प रणाम क व्याख्या क जए।
अ धकांश व ा थय का अनुमान: वायु प को नीचे धकेल दे गी। वास्तव म होता यह है: प ऊपर उठ जाती है और वायु क
धारा क ओर फड़फड़ाती है।
व ध: लगभग 18 cm लंबी और 2 cm चौड़ी कागज क प का टए। उसका एक सरा अँगूठे और तजनी के बीच, अपने नचले
ह ठ से थोड़ा नीचे पक ड़ए और शेष भाग स्वतंत्र रूप से लटकने द जए। अब प के ऊपरी पृष्ठ के ऊपर से लगातार फूँक मा रए,
कनारे पर नह ।
अं कत करने योग्य प्रेक्षण:
धीरे फूँक मारने पर मुक्त सरा थोड़ा ऊपर उठकर काँपता है।
अ धक वेग से फूँक मारने पर प और ऊपर उठ जाती है और लगभग क्षै तज हो सकती है।
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फूँक मारना रोकते ही प वापस नीचे लटक जाती है।
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व्याख्या: फूँक मारने से प के ऊपर क वायु तीव्र ग त से चलने लगती है, और तीव्रगामी वायु से दाब घट जाता
emहै। प के नीचे क
. co सामान्य वायुमंडलीय दाब पर बनी रहती है। अब नीचे का दाब ऊपर के दाब aसेgअlधक है और यही अंतर प
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वायु शांत है, अत: वह
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यहीgपlरणाम क्रयाकलाप 6.6 म भी मला था।
को ऊपर उठा दे ता है। अ धक वेग से फूँकने पर ऊपर क चाल और बढ़ती है, दाब और घटता है और प और ऊपर उठती है —
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व्यापक नष्कष: झंझावात म छत का उड़ना और हो डग्स म छद्र बनाना — दोन क क्रया व ध यही है। प्रत्येक
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स्थ त म तीव्रगामी वायु क धारा कसी पृष्ठ के एक ओर m दाब घटा दे ती है और दूसरी ओर क शांत वायु उसे धकेल
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दे ती है।
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वगत 20 वष म भारत म आए तीन प्रमुख चक्रवात क सूची बनाइए। प्रत्येक चक्रवातeसेm
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co क सूची बनाइए। स्थानीय सरकार और समुदाय ारा जीवन एवं संपaत्तgकl क्ष त को कम करने के लए
प्र.2 होने वाली दो प्रमुख
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emकौन से कदम उठाए गए? ऐसे दो सुझाव को इं गत क जए जन्ह आप स्थानीय सरकार को दे ना चाहगे।
क्ष तय
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यह प रयोजना कैसे कर: जानकारी ऐसे ोत से ली जए जो आ धका रक अ भलेख रखते ह — भारत मौसम व ान वभाग
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a l ग त और हुई क्ष त ल खए। कोई भी आँकड़ा लखने से पहले कम-से-कम दो
(IMD) क चक्रवात रपोट, रा ीय आपदा प्रबंधन प्रा धकरण (NDMA), तथा उन दन के समाचार-पत्र। प्रत्येक चक्रवात का नाम,
वष, वह तट जहाँ वह पहुँचा, उसक उच्चतमgपवन
ोत से मलाइए और अंत म अपने ोत अवश्य द जए।
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नमूना उत्तर:
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m .co वष एवं तट
चक्रवात दो प्रमुख क्ष तयाँ
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agl 2020, पि चम
बंगाल एवं ओिडशा
उच्चतम पवन ग त लगभग 270 km/h (यह अध्याय म भी दया है); तट य प श्चम बंगाल तथा
सुंदरबन के बड़े भाग जलमग्न हो गए और कोलकाता एवं आस-पास के जल म वद्युत तथा दूरसंचार
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कई दन तक बा धत रहा।
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as वृक्ष नष्ट हो गए।
फिण 2019, ओिडशा पुरी एवं भुवनेश्वर म घर तथा वद्युत और जलापू त व्यवस्था को भारी क्ष त; तट के साथ खड़ी फसल
(फ़ ानी)
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और हजार
फाइिलन 2013, ओिडशा गंजाम जले के बड़े क्षेत्र म धान तथा अन्य खड़ी फसल नष्ट; जल क द वार (उत्प्रवाह) से मछली
एवं आंध पदे श
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पकड़ने वाली नौकाएँ, कच्चे घर और तट य माग क्ष तग्रस्त।
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सरकार और समुदाय ारा उठाए गए कदम:
se m IMD ने उपग्रह ारा प्रत्येक चक्रवात का अनुवीक्षण कया और कई दन पूव ही चेताव नयाँ जारी क ।
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तट पर पहुँचने से पहले लाख लोग को नधा रत चक्रवात सुरक्षा गृह म पहुँचाया गया — फ ण और फाइ लन म जनहा न
पहले के चक्रवात क तुलना म बहुत कम रहने का सबसे बड़ा कारण यही रहा।
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मछु आर को समुद्र म न जाने को कहा गया और नौकाएँ तट पर लाकर सुर क्षत बाँध द गईं।
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राहत दल (NDRF एवं राज्य बल) भोजन,
s emपेयजल और औष धय के साथ पहले से तैनात कए गए; चक्रवात के पश्चात उन्ह ने
l वद्युत लाइन पुन: जोड़ ।
गरे हुए वृक्ष हटाकर माग खोलेgऔर
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समुदाय के स्वयंसेवक ने वृद्ध , बच्च और पशुओं को सुर क्षत स्थान पर पहुँचाया तथा सुरक्षा गृह म सामुदा यक रसोई चलाई।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
स्थानीय सरकार के लए दो सुझाव (अपने सुझाव चु नए और प्रत्येक का कारण द जए):
1. प्रत्येक तट य गाँव से पैदल दूरी पर चक्रवात सुरक्षा गृह बनाए या सुधारे जाएँ — ऊँचे चबूतरे, संग्र हत पेयजल और सौर
प्रकाश के साथ — और उन्ह हर मौसम म चलने योग्य सड़क से जोड़ा जाए। जब लोग समय पर सुरक्षा गृह तक पहुँच ही न पाएँ
तो नष्कासन क योजना वफल हो जाती है।
2. तट के कनारे म ोव वन क रक्षा और पुनर पण कया जाए। मग्रोव क प जल क द वार क ग त धीमी करती है और
म को बाँधे रखती है, जससे बाढ़ और कृ ष भू म क लवणता — दोन क क्ष त घटती है, जनका उल्लेख इस अध्याय म है।
पुस्तक क सलाह याद र खए: मौसम संबंधी सूचनाओं तथा भारतीय मौसम वभाग (IMD) ारा समय-समय पर
जारी चेताव नय से अवगत रहना महत्त्वपूण है। य द आप चक्रवात संवेदनशील क्षेत्र म रहते ह तो आवश्यक सामग्री
के साथ आपातकालीन पेट ( कट) अवश्य रखनी चा हए, और चक्रवात के समय नकटवत चक्रवात सुरक्षा गृह म
तुरंत चले जाना चा हए।
प्र.3 भारत के व भन्न क्षेत्र म त ड़तझंझा क प्रबलता के आँकड़े एक त्रत क जए। अपने आँकड़ क तुलना करके
पहचा नए क कौन से क्षेत्र म त ड़तझंझा क संभावनाएँ अ धक ह। क्या आप अपने नष्कष का कारण दे सकते
ह?
आँकड़े कैसे एकत्र कर: IMD क मानसून-पूव एवं मानसून रपोट तथा उसके त ड़त बुले टन, और आपदा प्रबंधन संस्थाओं क
वा षक त ड़त रपोट दे खए। प्रत्येक राज्य के लए (i) वष म त ड़तझंझा के दन क संख्या, (ii) वे महीने जनम ये आते ह, तथा
(iii) अ भ ल खत त ड़त प्रहार क संख्या ल खए। सभी आँकड़े एक ही ता लका म र खए ता क तुलना उ चत हो — सदै व एक ही
रा श क , एक ही अव ध के लए तुलना क जए।
क्षेत्र कब अ धक कारण
पि चम बंग ाल, िबहार, माच–मई, मानसून मानसून-पूव स्थल का तीव्र गरम होना और बंगाल क खाड़ी से आती प्रचुर आद्र वायु। इन्ह
झारखंड, ओिडशा से पूव झंझावात को कालबैशाखी कहते ह।
असम एवं पूव त्तर माच–मई बंगाल क खाड़ी से आती आद्र वायु पहा ड़य से टकराकर ऊपर उठती है और ऊँचे बादल
शीघ्र बन जाते ह। स्थानीय नाम बोदोइ सला।
के रल, कन टक, मानसून-पूव महीने गरम एवं आद्र तट य वायु सरलता से ऊपर उठती है। ये आम वषा कहलाती ह और आम
तिमलनाडु पकाने म सहायक होती ह; कनाटक म स्थानीय त ड़त-झंझावात कॉफ के पौध क वृ द्ध म
सहायक होते ह।
उत्तर-पि चम के शुष्क तिड़ तझंझा के वायु गरम तो होती है परंतु शुष्क होती है। पयाप्त नमी के बना संघनन कम होता है, अत:
क्षेत्र (तुल ना हेत)ु िदन बहुत कम ऊँचे झंझा-बादल कम ही बनते ह।
नष्कष और उसका कारण: त ड़तझंझा वहाँ सबसे अ धक होते ह जहाँ दो बात साथ ह — स्थल का तीव्र गरम होना और वायु म
प्रचुर नमी। गरम होने से वायु ऊपर उठती है और नम्न दाब बनता है जो और वायु ख चता है; नमी वह जलवाष्प दे ती है जो संघ नत
होकर ऊँचे बादल बनाती है और ऊष्मा मुक्त कर वायु को और ऊपर उठाती है। इसी कारण बंगाल क खाड़ी के नकट पूव और
पूव त्तर राज्य म उत्तर-प श्चम के शुष्क भीतरी भाग क तुलना म त ड़तझंझा के दन कह अ धक होते ह। अध्याय भी यही एक
पं क्त म कहता है: त ड़त-झंझावात के नमाण के लए आद्रता एवं तीव्र वायु महत्त्वपूण आवश्यकताएँ ह।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: अपनी तुलना प्रस्तुत करते समय स्पष्ट ल खए क आँकड़े कस वष के ह और कहाँ से लए गए ह। भन्न-
भन्न राज्य के भन्न- भन्न वष के आँकड़ से नकाला गया नष्कष उ चत तुलना नह होती।
अध्याय — एक नज़र म
प्र त एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते ह, दाब = बल / क्षेत्रफल। समान बल कम क्षेत्रफल पर लगे तो दाब
अ धक होता है — इसी कारण नुक ली क ल सरलता से ठु कती है और तीक्ष्ण धार वाला चाकू सरलता से काटता है। दाब का SI
मात्रक न्यूटन/मीटर2 (N/m2) है, जसे पास्कल (Pa) भी कहते ह।
द्रव पात्र के तल पर ही नह , उसक द वार पर भी — वस्तुत: सभी दशाओं म — दाब डालता है। यह दाब द्रव स्तंभ क
ऊँचाई पर नभर करता है, पात्र क चौड़ाई या उसम भरे जल क मात्रा पर नह । इसी कारण उप रवत टं कयाँ ऊँचाई पर रखी
जाती ह और बाँध का आधार उसके ऊपरी भाग से चौड़ा बनाया जाता है।
वायु भी अपने चार ओर क प्रत्येक वस्तु पर दाब डालती है। हमारे चार ओर क वायु ारा लगाया गया दाब वायुमंडलीय दाब
कहलाता है; केवल 15 cm × 15 cm क्षेत्रफल पर वायु स्तंभ लगभग 2250 N बल लगाता है — अथात् 225 kg द्रव्यमान
पर लगने वाले गुरुत्वीय बल के बराबर। हम इस लए नह दबते क्य क हमारे शरीर के भीतर का दाब इसे संतु लत कर दे ता है।
पवन वायु का उच्च दाब क्षेत्र से नम्न दाब क्षेत्र क ओर प्रवाह है। गरम वायु हल्क होकर ऊपर उठती है और नम्न दाब का
क्षेत्र बना दे ती है; आस-पास के उच्च दाब क्षेत्र से ठं डी वायु उसका स्थान लेने आती है। दाब का अंतर जतना अ धक, पवन
उतनी ही तीव्र — समुद्र समीर, स्थल समीर और झंझावात इसी नयम से बनते ह।
तीव्रगामी पवन से वायुदाब घट जाता है। जब तीव्र पवन छत के ऊपर से बहती है तो छत के ऊपर का दाब भीतर के दाब से
कम हो जाता है और कमजोर छत उड़ सकती है। झंझावात के समय दरवाजे- खड़ कयाँ खुली रखने से यह अंतर घट जाता है;
बैनर और हो डग्स म बने छद्र भी यही काय करते ह।
त ड़त-झंझावात म ऊध्वगामी और अधोगामी तीव्र पवन हम कण और जल क बूँद म घषण उत्पन्न करती है जससे बादल
आवे शत हो जाते ह। आवेश का पृथक्करण होता है — ऊपर धनावेश, नीचे ऋणावेश — और जब वायु का वद्युतरोधी गुण
समाप्त हो जाता है तो आवेश का आक स्मक प्रवाह त ड़त उत्पन्न करता है; गरम होकर फैलती वायु से गजन होता है।
चक्रवात महासागर के गरम जल के ऊपर बनने वाला बादल, पवन एवं वषा का चक्रण करता हुआ तंत्र है। संघनन से मुक्त
ऊष्मा वायु को और ऊपर उठाती है, कद्र का दाब और घटता है, आस-पास से वायु तीव्र ग त से आती है और पृथ्वी का घूणन
उसे चक्रण करा दे ता है। शांत कद्र को चक्रवात अ क्ष कहते ह; भारत मौसम व ान वभाग (IMD) चक्रवात का अनुवीक्षण
कर चेताव नयाँ जारी करता है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म कहाँ पुस्तक से उदाहरण
दाब िकसी पष्ृ ठ पर लंबवत लगने वाला बल, उस पष्ृ ठ खंड 6.1, पृष्ठ 81– चौड़ी प य वाला बस्ता संकरी प य वाले
के क्षेत्र फल से भाग दे ने पर: दाब = बल/क्षेत्र फल 82 बस्ते क तुलना म कंध पर कम दाब डालता है
( चत्र 6.1)
पास्कल (Pa) दाब का SI मात्रक; 1 Pa = 1 N/m2 खंड 6.1, पृष्ठ 82 2 m2 के गत्ते पर 100 N का बल = 50
N/m2 = 50 Pa
मलीबार (mb) / वायुद ाब के पायोिगक मात्रक; 1 mb = 1 hPa = एक सोपान ऊपर, चत्र 6.19 म 994 mb, 996 mb, 998
हैक्टोपास्कल 100 Pa पृष्ठ 87 mb, 1008 mb क समदाब रेखाएँ
(hPa)
द्रव का दाब द व स्तंभ ारा लगाया गया दाब; यह स्तंभ की क्रयाकलाप 6.1 समान ऊँचाई का जल स्तंभ दोन गुब्बार म
ऊँचाई के साथ बढ़ ता है और सभी िदशाओं में काय एवं 6.2, पृष्ठ 83– समान फैलाव दे ता है ( चत्र 6.5); बोतल के
करता है 85 चार पाश्व छद्र से जल नकलता है ( चत्र
6.7)
वायुमंडल पथ्ृ वी के चारों ओर वायु का आवरण — नाइटोजन, खंड 6.2, पृष्ठ 85 यह पृथ्वी क सतह से कई कलोमीटर ऊपर
ऑक्सीजन, ऑगन, काबन डाइऑक्साइड तथा तक वस्ता रत है
अल्प मात्रा में अन्य गैसे ं
वायुमंडलीय दाब हमारे चारों ओर की वायु ारा लगाया गया दाब खंड 6.2, पृष्ठ 86– वायु रबड़ के चूषक को चकने पृष्ठ पर दबाए
87 रखती है ( क्रयाकलाप 6.4, चत्र 6.11)
पवन उच्च दाब क्षेत्र से िनम्न दाब क्षेत्र की ओर गितमान खंड 6.3, पृष्ठ 87– न लका ारा फूले हुए गुब्बारे से बना फूले
वायु 89 गुब्बारे म वायु का जाना ( क्रयाकलाप 6.5,
चत्र 6.12)
समुद्र समीर एवं िदन में समुद से स्थल की ओर तथा राित्र में स्थल खंड 6.3, पृष्ठ 88– दन म स्थल तीव्रता से गरम होता है, अत:
स्थल समीर से समुद की ओर चलने वाली पवन, जो दाब के 89 नम्न दाब का क्षेत्र स्थल पर बनता है
अंतर से उत्पन्न होती है
झंझावात तीव वायु के साथ होने वाली वष खंड 6.5, पृष्ठ 90 भारत जैसे गरम, आद्र एवं उष्णक टबंधीय
क्षेत्र म झंझावात प्राय: आते रहते ह
त ड़त-झंझावात तिड़त एवं गजन के साथ आने वाला झंझावात खंड 6.5, पृष्ठ 91 प श्चम बंगाल, बहार एवं झारखंड म
कालबैशाखी; असम म बोदोइ सला; केरल,
कनाटक एवं त मलनाडु म आम वषा
त ड़त आवेश की अिधक मात्रा एकत्र होने पर वायु का खंड 6.5, पृष्ठ 91 बादल के भीतर, बादल के मध्य अथवा बादल
िव तु रोधी ग ण
ु समाप्त होने से उत्पन्न क्षणदीप्त और धरातल के मध्य ( चत्र 6.16)
पकाश
त ड़त चालक भवन की दीवारों के साथ लगाई गई धातु की छड़, क्या आपके सं ान यह वैद्युत आवेश को भू म म जाने का सरल
िजसका नुक ीला िसरा भवन के उच्चतम िबंद ु से म है…, पृष्ठ 92 माग दे ती है ( चत्र 6.18)
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कक्षा 8 व ान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ अध्याय म कहाँ पुस्तक से उदाहरण
ऊँचा और दू स रा िसरा भूिम में गहराई तक दबा
होता है
चक्रवात महासागर के गरम जल के ऊपर, अत्यिधक िनम्न खंड 6.6, पृष्ठ 92– वष 2020 म आए अ ान चक्रवात क
दाब के कें द के चारों ओर बनने वाला बादल, पवन 93 उच्चतम ग त 270 km/h थी
एवं वष का चक्रण करता तंत्र
चक्रवात अ क्ष चक्रवात के कें द में अत्यिधक िनम्न दाब का क्षेत्र , खंड 6.6, पृष्ठ 92 इसके आस-पास के क्षेत्र म तीव्र वायु और
जहाँ वायु शांत होती है भारी वषा होती है ( चत्र 6.20)
जल क द वार चक्रवात की तीव वायु ारा तट की ओर धके ला खंड 6.6, पृष्ठ 93 यह तट य एवं दूरस्थ क्षेत्र म बाढ़ लाता है तथा
(उत्प्रवाह) गया महासागरीय जल, जो 3 से 12 मीटर तक पीने योग्य जल ोत को प्रदू षत करता है
ऊँचा हो सकता है
IMD भारत मौसम िव ान िवभाग, जो चक्रवात एवं खंड 6.6, पृष्ठ 93 मौसम नगरानी उपग्रह से चक्रवात क पूव
तिड़त-झंझावात का अनुवीक्षण कर चेताविनयाँ सूचना और उसके माग का पूवानुमान मलता
जारी करता है है
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