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CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi

Download the CBSE Class 9 Hindi Syllabus 2027 PDF for free at AglaSem. This official CBSE Class 9 Hindi curriculum for the 2026-27 academic session covers the complete course structure, unit-wise topics and weightage, marking scheme, and prescribed books. Use this latest CBSE Hindi syllabus to plan your board exam 2027 preparation, understand the question paper design, and focus on high-scoring topics — download the free PDF now.
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About CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi

CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi is available here for free download. Published by CBSE for Class 9, this syllabus can be viewed online or downloaded as a PDF (11 pages). Candidates preparing for Class 9 can use CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi?

Open this page and click the Download button to save CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi free to download?

Yes. CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi have?

CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi contains 11 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 9 study material?

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CBSE Class 9 Syllabus 2027 Hindi – Text

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Page 1

FOR CBSE CLASS 9 SYLLABUS EXAM PREPARATION

CBSE Class 9 Syllabus
2027
Question Paper · Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT

CBSE Class 9 Syllabus 2027 Question Paper Hindi

Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests

Page 2

.
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हंद पा य म (2026-27)
क ा-नवीं (आर -1)

भाषा कसी भी ान- े क आधार शला है। हम कृ त और समाज को बहुत हद तक अपनी भाषा
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के ढाँचे के मा यम से ह समझते और व ले षत करते ह। इस काय को करने म भाषा का सा ह य . co
हमार . c
वशेष सहायता करता है। मा य मक तर पर वेश करने वाले व याथ सामा य भाषा- ान e m
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से व श ट अनश
ु ासना मक अ ययन क ओर बढ़ते ह।
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रा य
के अनु प यह पा य म हंद को केवल एक वषय नह ं बि क अनभ
ु व , मू य , बहुसां कृ तकता,
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ृ ना मकता और संवाद क एक सम ृ ध या के प म तत
ु करता है । यह ान के सं ह तक
सी मत नह ं रहता बि क व या थय को सोचने, क पना करने, व लेषण करने और अ भ यि त के
लए े रत करता है । पा य म का ल य व या थय क चेतना को इस दशा क ओर ले जाना है
क हंद भाषा के मा यम से यथाथ को अथात जो भी घ टत हो रहा है , उसे समझा जाए और उसम
अपनी आकां ाओं का च रचा जाए।इस पा य म का क य उ दे य पाठ का पठन-पाठन मा
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नह ं बि क उनके मा यम से व या थय म गहन पाठानभ
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ु ू त, संवेदनशील अ भ यि त, ता कक
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व लेषण, संदभ-आधा रत लेखन तथा भा षक एवं सां कृ तक व वधता क समझ को वक सत करना
है। हंद भाषा के सीखने- सखाने के मा यम सेas
l व या थय म भाषा, सं कृ त का समावेशी ि टकोण

ag व वधता के त सकारा मकता का बोध पैदा
पैदा करना, जीवन के व वध संदभ को समझना,
करना- यह सब आव यक प से अपे त है ।

नवीं क ा म वेश करने वाले व याथ क भाषा-शैल और वचार-बोध का एक ऐसा आधार बन
चक
ु ा होता है क अब उसे उसके भा षक दायरे के व तार और वैचा रक समृ ध के लए आव यक
संसाधन मुहैया कराए जाने क आव यकता होती है। मा य मक तर तक आते-आते व याथ
कशोराव था म वेश कर चक
ु े होते ह और उनम सुनने, बोलने, पढ़ने, लखने एवं समझने के साथ-
साथ आलोचना मक o m
ि ट वक सत होने लगती है। उनम भाषा के स दया मक प , कथा मकता,
m मकता, समाचार-प क समझ, श द-शि तय के बीच अंतर क समझ, राजनै m c
तक. चेतना एवं
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ag जाते ह। इतना ह नह ं, वे व भ न वधाओं और अ भ यि त क अनेक शै लय से भी प र चत हो
चक
ु े होते ह। अब व या थय का अ ययन आस-पड़ोस, रा य-दे श क सीमा को लाँघते हुए वैि वक
तज तक फैल जाता है । इन व या थय क द ु नया म समाचार, खेल, फ़ म तथा अ य कलाओं
के साथ-साथ प -प काएँ और अलग-अलग तरह क पु तक भी वेश पा चुक होती ह।

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Page 3

एनसीईआरट के पा य म और पा यपु तक म आर1 और आर2 के संदभ एनसीसीएफ-एसई
2023 के प र े य पर आधा रत सांके तक और ासं गक ह। इन संदभ का उ दे य मा य मक
तर पर आर1 और आर2 के बीच कसी भी कार का संरचना मक या यो यता-आधा रत अंतर
दशाना नह ं है।

पा यपु तक क वषयव त,ु अ धगम प रणाम और मू यांकन मा य मक तर पर आर 1 और
आर 2 के लए प रकि पत सामा य यो यता ढाँचे के अनु प ह, इस लए संदभ के अनस
ु ार इन
पा यपु तक का लचीले ढं ग से उपयोग कया जा सकता है।

इस तर पर हंद का अ ययन-अ यापन सा हि यक, सां कृ तक और यावहा रक भाषा के प म
कुछ इस तरह से हो क मा य मक तर तक पहुँचते-पहुँचते यह व या थय क पहचान,
आ म व वास और वमश क भाषा बन सके। आव यकता इस बात क है क व याथ भाषा के
ल खत योग के साथ-साथ सहज और वाभा वक मौ खक अ भ यि त म भी स म हो सक। वे
हंद क कृ त के अनस
ु ार वतनी और उ चारण के आपसी संबंध को समझ सक ता क उनक
ल खत और मौ खक भाषा म समानता एवं प टता हो।

CG-1: लेखन के व भ न प ( नबंध, प , लेख, चचा, सा ा कार, सावज नक भाषण) और
नव मी डया (ईमेल, य और य साम ी) के मा यम से भावी सं ेषण के लए भाषा का
उपयोग करना।

द ताएँ सीखने के संकेत बंद/ु ग त व धयाँ

C-3.1- व भ न य और ल खत साम ी का  वभ न कार क य और ल खत साम ी
व लेषण और मू यांकन करना। म ववरण का अवलोकन और व लेषण करके
उ ह यवि थत प से लखते ह।

 कसी एक वषय पर व भ न ोत से ा त
साम ी का व लेषण करके उसक
व वसनीयता क जाँच करते ह।

C-3.2-रचना म प रवेश का सावधानीपूवक  पा यव तु को पढ़ते और सुनते समय वयं के
मू यांकन करके उ चत तक के साथ चचा- पव
ू ह को पहचानते ह और सा य का
प रचचा करना। मू यांकन करके पा यव त/ु य-साम ी क
व वसनीयता का नधारण करते ह।

[2]

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Page 4

पा यचया CG-4: भारतीय भाषाई व वधता से जड़
ु ी सा हि यक और सां कृ तक वरासत क
सराहना करना।

द ताएँ सीखने के संकेत बंद/ु ग त व धयाँ

C-4.1-पाठ को पढ़ते हुए व भ न शै लय क  भारतीय समाज क बहुभाषी कृ त को
साम ी के अवलोकन के मा यम से भारतीय पहचानने के लए व भ न े ीय भाषाओं के
समाज और सा हि यक व वधता क बहुभाषी चल च और व ृ च दे खते ह और उनके बारे
कृ त क पहचान करना। म अपने वचार साझा करते ह।

C-4.2-भारतीय भाषाओं क वभ न  पढ़ गई सा हि यक रचनाओं को वषय , पा
सा हि यक रचनाओं म न हत सं कृ त एवं और प रि थ तय के आधार पर अपने
वरासत क व वधता और उनके आपसी संबंध यि तगत अनभ
ु व /जीवन से जोड़ते ह।
क सराहना करना।
 व भ न भारतीय भाषाओं के सा ह य क
व श टता और सा ह य जगत म उनके
योगदान क सराहना करते ह।

C-4.3-हमार सं कृ त और पहचान के नमाण  भाषा म न हत सां कृ तक परं पराओं से
म भाषा क भू मका को समझते हुए भा वत कहावत /पहे लय /मुहावर के उदाहरण
अ भ य त करना। साझा करते ह।
 लखने और बोलने म सां कृ तक परं पराओं से
भा वत अपनी भाषा क श दावल का संदभ
के अनस
ु ार उपयु त उपयोग करते ह।

हंद पा य म - आर -1 (2026 - 27 )

क ा - नवीं

खंड भारांक

क अप ठत बोध 14

ख यावहा रक याकरण 16

[3]

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Page 5

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ग पा यपु तक 30

घ रचना मक लेखन 20

 भारांक - 80 (वा षक पर ा) +20 (आंत रक पर ा)

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खंड -क (अप ठत बोध) उपभार कुल भार
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अप ठत ग यांश व का यांश पर बोध, चंतन, व लेषण, सराहना आ द 14ag
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a बहु वक पीय, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न
पर

अ एक अप ठत ग यांश लगभग 200 श द का | 7
इसके आधार पर एक अंक य तीन बहु वक पी न (1x3=3) पछ
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जाएँगे, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न (2×2=4) पूछे जाएँगे |

ब एक अप ठत का यांश लगभग 80-100 श द का | 7
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इसके आधार पर एक अंक य तीन बहु वक पी coन (1x3=3) पूछे
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जाएँगे, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक mन (2×2=4) पूछे जाएँगे
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a खंड -ख ( यावहा रक याकरण)

2 याकरण के लए नधा रत वषय पर वषयव तु का बोध, भा षक 16
बंद ु /संरचना आ द पर अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न
| (1X16 = 16)

कुल 20 न पूछे जाएँगे, िजनम से केवल 16 न के उ र दे ने ह गे
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उपसग - 2 अंक , यय - 2 अंक
g ( 5 न म से 4 न करने ह गे )
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(ii) सं ा, सवनाम, वशेषण, या 4
( 5 न म से 4 न करने ह गे )

(iii) अथ क ि ट से वा य-भेद - 4 अंक 4
( 5 न म से 4 न करने ह गे )

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[4]

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Page 6

(iv) अलंकार - 4 अंक 4
श दालंकार : अनु ास, यमक, लेष
( 5 न म से 4 न करने ह गे )

3 खंड -ग (पा यपु तक) 30

4 खंड -घ (रचना मक लेखन) 20

लेखन

(i) व भ न वषय और संदभ पर व या थय के तकसंगत वचार 5
कट करने क मता को परखने के लए संकेत- बंदओ
ु ं पर
आधा रत समसामा यक एवं यावहा रक जीवन से जड़
ु े हुए तीन
वषय म से कसी एक वषय पर लगभग 120 श द म
अनु छे द लेखन |

(ii) अ भ यि त क मता पर क त अनौपचा रक दो वषय म से 5
कसी एक वषय पर लगभग 100 श द म प लेखन |
( वक प स हत)

(iii) दए गए वषय / प रि थ त के आधार पर लगभग 80 श द म 5
संवाद लेखन |
( वक प स हत)

(iv) दए गए वषय / शीषक के आधार पर लगभग 80 श द म 5
सूचना लेखन |
( वक प स हत)

रा य शै क अनुसंधान क वारा रा य पा यचया क परे खा 2023 के आधार
पर जार क गई पा यपु तक के आधार पर सा ह य से संबं धत अ ययन कया
जाए।

हंद पा य म (2026-27)
क ा-नवीं (आर -2)

रा य पा यचया क परे खा 2023 के अनु प वतीय भाषा के प म हंद आर 2 के प म
पढ़ाई जाएगी। रोचक ढं ग से इस भाषा का अ ययन-अ यापन पण
ू तः तरानुकूल रहे गा िजससे सभी

[5]

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श ाथ लाभाि वत हो सक तथा भारतीय भाषाओं के साथ सु चपण
ू ढं ग से सामंज य था पत कर
सक ।
एनसीईआरट वारा जार पा यचया के ल य एवं द ताओं को मुख प से यान म रखते हुए
श ण बंदओ
ु ं का काया वयन कया जाएगा।
भाषा कसी भी ान- े क आधार शला है । हम कृ त और समाज को बहुत हद तक अपनी भाषा
के ढाँचे के मा यम से ह समझते और व ले षत करते ह। इस काय को करने म भाषा का सा ह य
हमार वशेष सहायता करता है। मा य मक तर पर वेश करने वाले व याथ सामा य भाषा- ान
से व श ट अनश
ु ासना मक अ ययन क ओर बढ़ते ह।
रा य श ा नी त 2020 और व यालयी श ा हे तु रा य पा यचया क परे खा 2023 क ि ट
के अनु प यह पा य म हंद को केवल एक वषय नह ं बि क अनभ
ु व , मू य , बहुसां कृ तकता,
सज
ृ ना मकता और संवाद क एक सम ृ ध या के प म तत
ु करता है । यह ान के सं ह तक
सी मत नह ं रहता बि क व या थय को सोचने, क पना करने, व लेषण करने और अ भ यि त के
लए े रत करता है । पा य म का ल य व या थय क चेतना को इस दशा क ओर ले जाना है
क हंद भाषा के मा यम से यथाथ को अथात जो भी घ टत हो रहा है , उसे समझा जाए और उसम
अपनी आकां ाओं का च रचा जाए।इस पा य म का क य उ दे य पाठ का पठन-पाठन मा
नह ं बि क उनके मा यम से व या थय म गहन पाठानभ
ु ू त, संवेदनशील अ भ यि त, ता कक
व लेषण, संदभ-आधा रत लेखन तथा भा षक एवं सां कृ तक व वधता क समझ को वक सत करना
है। हंद भाषा के सीखने- सखाने के मा यम से व या थय म भाषा, सं कृ त का समावेशी ि टकोण
पैदा करना, जीवन के व वध संदभ को समझना, व वधता के त सकारा मकता का बोध पैदा
करना- यह सब आव यक प से अपे त है ।

नवीं क ा म वेश करने वाले व याथ क भाषा-शैल और वचार-बोध का एक ऐसा आधार बन
चक
ु ा होता है क अब उसे उसके भा षक दायरे के व तार और वैचा रक समृ ध के लए आव यक
संसाधन मुहैया कराए जाने क आव यकता होती है। मा य मक तर तक आते-आते व याथ
कशोराव था म वेश कर चक
ु े होते ह और उनम सुनने, बोलने, पढ़ने, लखने एवं समझने के साथ-
साथ आलोचना मक ि ट वक सत होने लगती है। उनम भाषा के स दया मक प , कथा मकता,
गीता मकता, समाचार-प क समझ, श द-शि तय के बीच अंतर क समझ, राजनै तक चेतना एवं
सामािजक चेतना का वकास हो जाता है । वे आस-पड़ोस क भाषा और आव यकता के अनस
ु ार
उपयु त भाषा- योग, श द के सु वचा रत योग, भाषा क नयमब ध कृ त आ द से प र चत हो
जाते ह। इतना ह नह ं, वे व भ न वधाओं और अ भ यि त क अनेक शै लय से भी प र चत हो
चक
ु े होते ह। अब व या थय का अ ययन आस-पड़ोस, रा य-दे श क सीमा को लाँघते हुए वैि वक
तज तक फैल जाता है । इन व या थय क द ु नया म समाचार, खेल, फ़ म तथा अ य कलाओं
के साथ-साथ प -प काएँ और अलग-अलग तरह क पु तक भी वेश पा चुक होती ह।

एनसीईआरट के पा य म और पा यपु तक म आर 1 और आर 2 के संदभ एनसीसीएफ-एसई
2023 के प र े य पर आधा रत सांके तक और ासं गक ह। इन संदभ का उ दे य मा य मक

[6]

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Page 8

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तर पर आर1 और आर2 के बीच कसी भी कार का संरचना मक या यो यता-आधा रत अंतर
दशाना नह ं है।

पा यपु तक क वषयव त,ु अ धगम प रणाम और मू यांकन मा य मक तर पर आर1 और
आर2 के लए प रकि पत सामा य यो यता ढाँचे के अनु प ह, इस लए संदभ के अनस
ु ार इन
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पा यपु तक का लचीले ढं ग से उपयोग कया जा सकता है।

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तर पर हंद का अ ययन-अ यापन सा हि यक, सां कृ तक और यावहा रक भाषा के
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कुछ इस तरहsसे हो क मा य मक तर तक पहुँचते-पहुँचते यह व या थय क पहचान, g
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ल खत योग के साथ-साथ सहज और वाभा वक मौ खक अ भ यि त म भी स म हो सक। वे
हंद क कृ त के अनस
ु ार वतनी और उ चारण के आपसी संबंध को समझ सक ता क उनक
ल खत और मौ खक भाषा म समानता एवं प टता हो।
CG-1: लेखन के व भ न प ( नबंध, प , लेख, चचा, सा ा कार, सावज नक भाषण) और
नव मी डया (ईमेल, य और य साम ी) के मा यम से भावी सं ेषण के लए भाषा का
उपयोग करना।
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द ताएँ

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C-3.1- व भ न
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य और ल खत साम gी lका व भ न कार क य और ल खत साम ी
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व लेषण और मू यांकन करना। म ववरण का अवलोकन और व लेषण करके
उ ह यवि थत प से लखते ह।
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साम ी का व लेषण करके उसक
व वसनीयता क जाँच करते ह।

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मू यांकन करके पा यवsत/ु य-साम ी क
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पा यचया CG-4: भारतीय भाषाई व वधता से जड़
ु ी सा हि यक और सां कृ तक वरासत क
सराहना करना।

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द ताएँ सीखने के संकेत बंद/ु ग त व धयाँ

C-4.1-पाठ को पढ़ते हुए व भ न शै लय क  भारतीय समाज क बहुभाषी कृ त को
साम ी के अवलोकन के मा यम से भारतीय पहचानने के लए व भ न े ीय भाषाओं के
समाज और सा हि यक व वधता क बहुभाषी चल च और व ृ च दे खते ह और उनके बारे
कृ त क पहचान करना। म अपने वचार साझा करते ह।

C-4.2-भारतीय भाषाओं क वभ न  पढ़ गई सा हि यक रचनाओं को वषय , पा
सा हि यक रचनाओं म न हत सं कृ त एवं और प रि थ तय के आधार पर अपने
वरासत क व वधता और उनके आपसी यि तगत अनभ
ु व /जीवन से जोड़ते ह।
संबंध क सराहना करना।  व भ न भारतीय भाषाओं के सा ह य क
व श टता और सा ह य जगत म उनके
योगदान क सराहना करते ह।

C-4.3-हमार सं कृ त और पहचान के नमाण  भाषा म न हत सां कृ तक परंपराओं से
म भाषा क भू मका को समझते हुए भा वत कहावत /पहे लय /मुहावर के उदाहरण
अ भ य त करना। साझा करते ह।
 लखने और बोलने म सां कृ तक परं पराओं से
भा वत अपनी भाषा क श दावल का संदभ
के अनस
ु ार उपयु त उपयोग करते ह।

हंद पा य म - आर - 2 (2026 - 27 )

क ा - नवीं

खंड भारांक

क अप ठत बोध 14

ख यावहा रक याकरण 16

ग पा यपु तक 30

घ रचना मक लेखन 20

 भारांक - 80 (वा षक पर ा) +20 (आंत रक पर ा)

[8]

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खंड -क (अप ठत बोध) उपभार कुल
भार

वषयव तु

1 अप ठत ग यांश पर बोध, चंतन, व लेषण, सराहना आ द पर 14
बहु वक पीय, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न

दो अप ठत ग यांश लगभग 200 श द के। 7+7=14

एक अंक य तीन बहु वक पी न (1x3=3) पूछे जाएँगे
अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न (2×2=4) पछ
ू े जाएँगे |

खंड -ख ( यावहा रक याकरण)

2 याकरण के लए नधा रत वषय पर वषयव तु का बोध, 16
भा षक बंद ु /संरचना आ द पर अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक
न | (1X16 = 16)
कुल 20 न पूछे जाएँगे, िजनम से केवल 16 न के उ र दे ने
ह गे |

(i) (क) श द भंडार 4
समानाथ श द - 2 अंक ( पा यपु तक के आधार पर )
( 3 न म से 2 न करने ह गे )
(ख) मुहावरे -2 अंक ( पा यपु तक के आधार पर )
( 3 न म से 2 न करने ह गे )

(ii) श द - नमाण 4
उपसग - 2 अंक , यय -2 अंक
( 5 न म से 4 न करने ह गे )

(iii) वराम च न - 2 अंक 2
( 3 न म से 2 न करने ह गे )

(iv) सं ा -2 अंक 6
सवनाम -2 अंक
नपात -2 अंक
( 7 न म से 6 न करने ह गे )

3 खंड -ग (पा यपु तक) 30

[9]

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4 खंड -घ (रचना मक लेखन) 20

लेखन

(i) व भ न वषय और संदभ पर व या थय के तकसंगत 5
वचार कट करने क मता को परखने के लए संकेत-
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बंदओ
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ु ं पर आधा रत समसामा यक एवं यावहा रक जीवन
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वषय पर लगभग 100 श द म प लेखन |
5

( वक प स हत)

(iii) दए गए वषय / प रि थ त के आधार पर लगभग 80 5
श द म संवाद लेखन |
( वक प स हत)

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c. o
(iv) कसी य /घटना के च पर आधा रत लगभग 80 श द 5
म लेखन |
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( बना कसी वक प के)
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रा य शै क अनस
ु ंधान क ag रा य पा यचया क
वारा परे खा 2023 के आधार
पर जार क गई पा यपु तक के आधार पर सा ह य से संबं धत अ ययन
कया जाए।

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[10]

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 9
TypeSyllabus
Pages11
Languagehindi
Updated24 Sep 2026