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FOR CBSE CLASS 9 SYLLABUS EXAM PREPARATION
CBSE Class 9 Syllabus
2027
Question Paper · Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT
CBSE Class 9 Syllabus 2027 Question Paper Hindi
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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हंद पा य म (2026-27)
क ा-नवीं (आर -1)
भाषा कसी भी ान- े क आधार शला है। हम कृ त और समाज को बहुत हद तक अपनी भाषा
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के ढाँचे के मा यम से ह समझते और व ले षत करते ह। इस काय को करने म भाषा का सा ह य . co
हमार . c
वशेष सहायता करता है। मा य मक तर पर वेश करने वाले व याथ सामा य भाषा- ान e m
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से व श ट अनश
ु ासना मक अ ययन क ओर बढ़ते ह।
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a श ा नी त 2020 और व यालयी श ा हेतु रा य पा यचया क परेखा 2023 क ि ट
रा य
के अनु प यह पा य म हंद को केवल एक वषय नह ं बि क अनभ
ु व , मू य , बहुसां कृ तकता,
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ृ ना मकता और संवाद क एक सम ृ ध या के प म तत
ु करता है । यह ान के सं ह तक
सी मत नह ं रहता बि क व या थय को सोचने, क पना करने, व लेषण करने और अ भ यि त के
लए े रत करता है । पा य म का ल य व या थय क चेतना को इस दशा क ओर ले जाना है
क हंद भाषा के मा यम से यथाथ को अथात जो भी घ टत हो रहा है , उसे समझा जाए और उसम
अपनी आकां ाओं का च रचा जाए।इस पा य म का क य उ दे य पाठ का पठन-पाठन मा
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नह ं बि क उनके मा यम से व या थय म गहन पाठानभ
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ु ू त, संवेदनशील अ भ यि त, ता कक
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व लेषण, संदभ-आधा रत लेखन तथा भा षक एवं सां कृ तक व वधता क समझ को वक सत करना
है। हंद भाषा के सीखने- सखाने के मा यम सेas
l व या थय म भाषा, सं कृ त का समावेशी ि टकोण
ag व वधता के त सकारा मकता का बोध पैदा
पैदा करना, जीवन के व वध संदभ को समझना,
करना- यह सब आव यक प से अपे त है ।
नवीं क ा म वेश करने वाले व याथ क भाषा-शैल और वचार-बोध का एक ऐसा आधार बन
चक
ु ा होता है क अब उसे उसके भा षक दायरे के व तार और वैचा रक समृ ध के लए आव यक
संसाधन मुहैया कराए जाने क आव यकता होती है। मा य मक तर तक आते-आते व याथ
कशोराव था म वेश कर चक
ु े होते ह और उनम सुनने, बोलने, पढ़ने, लखने एवं समझने के साथ-
साथ आलोचना मक o m
ि ट वक सत होने लगती है। उनम भाषा के स दया मक प , कथा मकता,
m मकता, समाचार-प क समझ, श द-शि तय के बीच अंतर क समझ, राजनै m c
तक. चेतना एवं
c. o गीता s eके अनसु ार
e m सामािजक चेतना का वकास हो जाता है । वे आस-पड़ोस क भाषा और आव यकता
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तlआ द से प र चत हो
las उपयु त भाषा- योग, श द के सु वचा रत योग, भाषा क नयमब ध कृ g
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ag जाते ह। इतना ह नह ं, वे व भ न वधाओं और अ भ यि त क अनेक शै लय से भी प र चत हो
चक
ु े होते ह। अब व या थय का अ ययन आस-पड़ोस, रा य-दे श क सीमा को लाँघते हुए वैि वक
तज तक फैल जाता है । इन व या थय क द ु नया म समाचार, खेल, फ़ म तथा अ य कलाओं
के साथ-साथ प -प काएँ और अलग-अलग तरह क पु तक भी वेश पा चुक होती ह।
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एनसीईआरट के पा य म और पा यपु तक म आर1 और आर2 के संदभ एनसीसीएफ-एसई
2023 के प र े य पर आधा रत सांके तक और ासं गक ह। इन संदभ का उ दे य मा य मक
तर पर आर1 और आर2 के बीच कसी भी कार का संरचना मक या यो यता-आधा रत अंतर
दशाना नह ं है।
पा यपु तक क वषयव त,ु अ धगम प रणाम और मू यांकन मा य मक तर पर आर 1 और
आर 2 के लए प रकि पत सामा य यो यता ढाँचे के अनु प ह, इस लए संदभ के अनस
ु ार इन
पा यपु तक का लचीले ढं ग से उपयोग कया जा सकता है।
इस तर पर हंद का अ ययन-अ यापन सा हि यक, सां कृ तक और यावहा रक भाषा के प म
कुछ इस तरह से हो क मा य मक तर तक पहुँचते-पहुँचते यह व या थय क पहचान,
आ म व वास और वमश क भाषा बन सके। आव यकता इस बात क है क व याथ भाषा के
ल खत योग के साथ-साथ सहज और वाभा वक मौ खक अ भ यि त म भी स म हो सक। वे
हंद क कृ त के अनस
ु ार वतनी और उ चारण के आपसी संबंध को समझ सक ता क उनक
ल खत और मौ खक भाषा म समानता एवं प टता हो।
CG-1: लेखन के व भ न प ( नबंध, प , लेख, चचा, सा ा कार, सावज नक भाषण) और
नव मी डया (ईमेल, य और य साम ी) के मा यम से भावी सं ेषण के लए भाषा का
उपयोग करना।
द ताएँ सीखने के संकेत बंद/ु ग त व धयाँ
C-3.1- व भ न य और ल खत साम ी का वभ न कार क य और ल खत साम ी
व लेषण और मू यांकन करना। म ववरण का अवलोकन और व लेषण करके
उ ह यवि थत प से लखते ह।
कसी एक वषय पर व भ न ोत से ा त
साम ी का व लेषण करके उसक
व वसनीयता क जाँच करते ह।
C-3.2-रचना म प रवेश का सावधानीपूवक पा यव तु को पढ़ते और सुनते समय वयं के
मू यांकन करके उ चत तक के साथ चचा- पव
ू ह को पहचानते ह और सा य का
प रचचा करना। मू यांकन करके पा यव त/ु य-साम ी क
व वसनीयता का नधारण करते ह।
[2]
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पा यचया CG-4: भारतीय भाषाई व वधता से जड़
ु ी सा हि यक और सां कृ तक वरासत क
सराहना करना।
द ताएँ सीखने के संकेत बंद/ु ग त व धयाँ
C-4.1-पाठ को पढ़ते हुए व भ न शै लय क भारतीय समाज क बहुभाषी कृ त को
साम ी के अवलोकन के मा यम से भारतीय पहचानने के लए व भ न े ीय भाषाओं के
समाज और सा हि यक व वधता क बहुभाषी चल च और व ृ च दे खते ह और उनके बारे
कृ त क पहचान करना। म अपने वचार साझा करते ह।
C-4.2-भारतीय भाषाओं क वभ न पढ़ गई सा हि यक रचनाओं को वषय , पा
सा हि यक रचनाओं म न हत सं कृ त एवं और प रि थ तय के आधार पर अपने
वरासत क व वधता और उनके आपसी संबंध यि तगत अनभ
ु व /जीवन से जोड़ते ह।
क सराहना करना।
व भ न भारतीय भाषाओं के सा ह य क
व श टता और सा ह य जगत म उनके
योगदान क सराहना करते ह।
C-4.3-हमार सं कृ त और पहचान के नमाण भाषा म न हत सां कृ तक परं पराओं से
म भाषा क भू मका को समझते हुए भा वत कहावत /पहे लय /मुहावर के उदाहरण
अ भ य त करना। साझा करते ह।
लखने और बोलने म सां कृ तक परं पराओं से
भा वत अपनी भाषा क श दावल का संदभ
के अनस
ु ार उपयु त उपयोग करते ह।
हंद पा य म - आर -1 (2026 - 27 )
क ा - नवीं
खंड भारांक
क अप ठत बोध 14
ख यावहा रक याकरण 16
[3]
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ग पा यपु तक 30
घ रचना मक लेखन 20
भारांक - 80 (वा षक पर ा) +20 (आंत रक पर ा)
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खंड -क (अप ठत बोध) उपभार कुल भार
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e m वषयव तु
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अप ठत ग यांश व का यांश पर बोध, चंतन, व लेषण, सराहना आ द 14ag
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a बहु वक पीय, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न
पर
अ एक अप ठत ग यांश लगभग 200 श द का | 7
इसके आधार पर एक अंक य तीन बहु वक पी न (1x3=3) पछ
ू े
जाएँगे, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न (2×2=4) पूछे जाएँगे |
ब एक अप ठत का यांश लगभग 80-100 श द का | 7
m
इसके आधार पर एक अंक य तीन बहु वक पी coन (1x3=3) पूछे
.
जाएँगे, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक mन (2×2=4) पूछे जाएँगे
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a खंड -ख ( यावहा रक याकरण)
2 याकरण के लए नधा रत वषय पर वषयव तु का बोध, भा षक 16
बंद ु /संरचना आ द पर अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न
| (1X16 = 16)
कुल 20 न पूछे जाएँगे, िजनम से केवल 16 न के उ र दे ने ह गे
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m .co (i) श द - नमाण s em4
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उपसग - 2 अंक , यय - 2 अंक
g ( 5 न म से 4 न करने ह गे )
a
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(ii) सं ा, सवनाम, वशेषण, या 4
( 5 न म से 4 न करने ह गे )
(iii) अथ क ि ट से वा य-भेद - 4 अंक 4
( 5 न म से 4 न करने ह गे )
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[4]
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(iv) अलंकार - 4 अंक 4
श दालंकार : अनु ास, यमक, लेष
( 5 न म से 4 न करने ह गे )
3 खंड -ग (पा यपु तक) 30
4 खंड -घ (रचना मक लेखन) 20
लेखन
(i) व भ न वषय और संदभ पर व या थय के तकसंगत वचार 5
कट करने क मता को परखने के लए संकेत- बंदओ
ु ं पर
आधा रत समसामा यक एवं यावहा रक जीवन से जड़
ु े हुए तीन
वषय म से कसी एक वषय पर लगभग 120 श द म
अनु छे द लेखन |
(ii) अ भ यि त क मता पर क त अनौपचा रक दो वषय म से 5
कसी एक वषय पर लगभग 100 श द म प लेखन |
( वक प स हत)
(iii) दए गए वषय / प रि थ त के आधार पर लगभग 80 श द म 5
संवाद लेखन |
( वक प स हत)
(iv) दए गए वषय / शीषक के आधार पर लगभग 80 श द म 5
सूचना लेखन |
( वक प स हत)
रा य शै क अनुसंधान क वारा रा य पा यचया क परे खा 2023 के आधार
पर जार क गई पा यपु तक के आधार पर सा ह य से संबं धत अ ययन कया
जाए।
हंद पा य म (2026-27)
क ा-नवीं (आर -2)
रा य पा यचया क परे खा 2023 के अनु प वतीय भाषा के प म हंद आर 2 के प म
पढ़ाई जाएगी। रोचक ढं ग से इस भाषा का अ ययन-अ यापन पण
ू तः तरानुकूल रहे गा िजससे सभी
[5]
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श ाथ लाभाि वत हो सक तथा भारतीय भाषाओं के साथ सु चपण
ू ढं ग से सामंज य था पत कर
सक ।
एनसीईआरट वारा जार पा यचया के ल य एवं द ताओं को मुख प से यान म रखते हुए
श ण बंदओ
ु ं का काया वयन कया जाएगा।
भाषा कसी भी ान- े क आधार शला है । हम कृ त और समाज को बहुत हद तक अपनी भाषा
के ढाँचे के मा यम से ह समझते और व ले षत करते ह। इस काय को करने म भाषा का सा ह य
हमार वशेष सहायता करता है। मा य मक तर पर वेश करने वाले व याथ सामा य भाषा- ान
से व श ट अनश
ु ासना मक अ ययन क ओर बढ़ते ह।
रा य श ा नी त 2020 और व यालयी श ा हे तु रा य पा यचया क परे खा 2023 क ि ट
के अनु प यह पा य म हंद को केवल एक वषय नह ं बि क अनभ
ु व , मू य , बहुसां कृ तकता,
सज
ृ ना मकता और संवाद क एक सम ृ ध या के प म तत
ु करता है । यह ान के सं ह तक
सी मत नह ं रहता बि क व या थय को सोचने, क पना करने, व लेषण करने और अ भ यि त के
लए े रत करता है । पा य म का ल य व या थय क चेतना को इस दशा क ओर ले जाना है
क हंद भाषा के मा यम से यथाथ को अथात जो भी घ टत हो रहा है , उसे समझा जाए और उसम
अपनी आकां ाओं का च रचा जाए।इस पा य म का क य उ दे य पाठ का पठन-पाठन मा
नह ं बि क उनके मा यम से व या थय म गहन पाठानभ
ु ू त, संवेदनशील अ भ यि त, ता कक
व लेषण, संदभ-आधा रत लेखन तथा भा षक एवं सां कृ तक व वधता क समझ को वक सत करना
है। हंद भाषा के सीखने- सखाने के मा यम से व या थय म भाषा, सं कृ त का समावेशी ि टकोण
पैदा करना, जीवन के व वध संदभ को समझना, व वधता के त सकारा मकता का बोध पैदा
करना- यह सब आव यक प से अपे त है ।
नवीं क ा म वेश करने वाले व याथ क भाषा-शैल और वचार-बोध का एक ऐसा आधार बन
चक
ु ा होता है क अब उसे उसके भा षक दायरे के व तार और वैचा रक समृ ध के लए आव यक
संसाधन मुहैया कराए जाने क आव यकता होती है। मा य मक तर तक आते-आते व याथ
कशोराव था म वेश कर चक
ु े होते ह और उनम सुनने, बोलने, पढ़ने, लखने एवं समझने के साथ-
साथ आलोचना मक ि ट वक सत होने लगती है। उनम भाषा के स दया मक प , कथा मकता,
गीता मकता, समाचार-प क समझ, श द-शि तय के बीच अंतर क समझ, राजनै तक चेतना एवं
सामािजक चेतना का वकास हो जाता है । वे आस-पड़ोस क भाषा और आव यकता के अनस
ु ार
उपयु त भाषा- योग, श द के सु वचा रत योग, भाषा क नयमब ध कृ त आ द से प र चत हो
जाते ह। इतना ह नह ं, वे व भ न वधाओं और अ भ यि त क अनेक शै लय से भी प र चत हो
चक
ु े होते ह। अब व या थय का अ ययन आस-पड़ोस, रा य-दे श क सीमा को लाँघते हुए वैि वक
तज तक फैल जाता है । इन व या थय क द ु नया म समाचार, खेल, फ़ म तथा अ य कलाओं
के साथ-साथ प -प काएँ और अलग-अलग तरह क पु तक भी वेश पा चुक होती ह।
एनसीईआरट के पा य म और पा यपु तक म आर 1 और आर 2 के संदभ एनसीसीएफ-एसई
2023 के प र े य पर आधा रत सांके तक और ासं गक ह। इन संदभ का उ दे य मा य मक
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तर पर आर1 और आर2 के बीच कसी भी कार का संरचना मक या यो यता-आधा रत अंतर
दशाना नह ं है।
पा यपु तक क वषयव त,ु अ धगम प रणाम और मू यांकन मा य मक तर पर आर1 और
आर2 के लए प रकि पत सामा य यो यता ढाँचे के अनु प ह, इस लए संदभ के अनस
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पा यपु तक का लचीले ढं ग से उपयोग कया जा सकता है।
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तर पर हंद का अ ययन-अ यापन सा हि यक, सां कृ तक और यावहा रक भाषा के
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कुछ इस तरहsसे हो क मा य मक तर तक पहुँचते-पहुँचते यह व या थय क पहचान, g
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l और वमश क भाषा बन सके। आव यकता इस बात क है क व याथ भाषा के a
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ल खत योग के साथ-साथ सहज और वाभा वक मौ खक अ भ यि त म भी स म हो सक। वे
हंद क कृ त के अनस
ु ार वतनी और उ चारण के आपसी संबंध को समझ सक ता क उनक
ल खत और मौ खक भाषा म समानता एवं प टता हो।
CG-1: लेखन के व भ न प ( नबंध, प , लेख, चचा, सा ा कार, सावज नक भाषण) और
नव मी डया (ईमेल, य और य साम ी) के मा यम से भावी सं ेषण के लए भाषा का
उपयोग करना।
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द ताएँ
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C-3.1- व भ न
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य और ल खत साम gी lका व भ न कार क य और ल खत साम ी
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उ ह यवि थत प से लखते ह।
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साम ी का व लेषण करके उसक
व वसनीयता क जाँच करते ह।
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पा यचया CG-4: भारतीय भाषाई व वधता से जड़
ु ी सा हि यक और सां कृ तक वरासत क
सराहना करना।
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द ताएँ सीखने के संकेत बंद/ु ग त व धयाँ
C-4.1-पाठ को पढ़ते हुए व भ न शै लय क भारतीय समाज क बहुभाषी कृ त को
साम ी के अवलोकन के मा यम से भारतीय पहचानने के लए व भ न े ीय भाषाओं के
समाज और सा हि यक व वधता क बहुभाषी चल च और व ृ च दे खते ह और उनके बारे
कृ त क पहचान करना। म अपने वचार साझा करते ह।
C-4.2-भारतीय भाषाओं क वभ न पढ़ गई सा हि यक रचनाओं को वषय , पा
सा हि यक रचनाओं म न हत सं कृ त एवं और प रि थ तय के आधार पर अपने
वरासत क व वधता और उनके आपसी यि तगत अनभ
ु व /जीवन से जोड़ते ह।
संबंध क सराहना करना। व भ न भारतीय भाषाओं के सा ह य क
व श टता और सा ह य जगत म उनके
योगदान क सराहना करते ह।
C-4.3-हमार सं कृ त और पहचान के नमाण भाषा म न हत सां कृ तक परंपराओं से
म भाषा क भू मका को समझते हुए भा वत कहावत /पहे लय /मुहावर के उदाहरण
अ भ य त करना। साझा करते ह।
लखने और बोलने म सां कृ तक परं पराओं से
भा वत अपनी भाषा क श दावल का संदभ
के अनस
ु ार उपयु त उपयोग करते ह।
हंद पा य म - आर - 2 (2026 - 27 )
क ा - नवीं
खंड भारांक
क अप ठत बोध 14
ख यावहा रक याकरण 16
ग पा यपु तक 30
घ रचना मक लेखन 20
भारांक - 80 (वा षक पर ा) +20 (आंत रक पर ा)
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खंड -क (अप ठत बोध) उपभार कुल
भार
वषयव तु
1 अप ठत ग यांश पर बोध, चंतन, व लेषण, सराहना आ द पर 14
बहु वक पीय, अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न
दो अप ठत ग यांश लगभग 200 श द के। 7+7=14
एक अंक य तीन बहु वक पी न (1x3=3) पूछे जाएँगे
अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक न (2×2=4) पछ
ू े जाएँगे |
खंड -ख ( यावहा रक याकरण)
2 याकरण के लए नधा रत वषय पर वषयव तु का बोध, 16
भा षक बंद ु /संरचना आ द पर अ तलघू रा मक एवं लघू रा मक
न | (1X16 = 16)
कुल 20 न पूछे जाएँगे, िजनम से केवल 16 न के उ र दे ने
ह गे |
(i) (क) श द भंडार 4
समानाथ श द - 2 अंक ( पा यपु तक के आधार पर )
( 3 न म से 2 न करने ह गे )
(ख) मुहावरे -2 अंक ( पा यपु तक के आधार पर )
( 3 न म से 2 न करने ह गे )
(ii) श द - नमाण 4
उपसग - 2 अंक , यय -2 अंक
( 5 न म से 4 न करने ह गे )
(iii) वराम च न - 2 अंक 2
( 3 न म से 2 न करने ह गे )
(iv) सं ा -2 अंक 6
सवनाम -2 अंक
नपात -2 अंक
( 7 न म से 6 न करने ह गे )
3 खंड -ग (पा यपु तक) 30
[9]
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4 खंड -घ (रचना मक लेखन) 20
लेखन
(i) व भ न वषय और संदभ पर व या थय के तकसंगत 5
वचार कट करने क मता को परखने के लए संकेत-
m
बंदओ
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ु ं पर आधा रत समसामा यक एवं यावहा रक जीवन
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वषय पर लगभग 100 श द म प लेखन |
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( वक प स हत)
(iii) दए गए वषय / प रि थ त के आधार पर लगभग 80 5
श द म संवाद लेखन |
( वक प स हत)
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(iv) कसी य /घटना के च पर आधा रत लगभग 80 श द 5
म लेखन |
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( बना कसी वक प के)
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रा य शै क अनस
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वारा परे खा 2023 के आधार
पर जार क गई पा यपु तक के आधार पर सा ह य से संबं धत अ ययन
कया जाए।
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