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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: द्रव्य क कणीय प्रकृ त
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
98 – 115 24 54 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 37 pages
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: द्रव्य क कणीय प्रकृ त
कक्षा 8 व ान (पाठ्यपुस्तक ज ासा) के अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त के प्रत्येक प्रश्न के वस्तृत NCERT हल। खोजबीन और वचार कर के
सभी बदु, याकलाप 7.1 से याकलाप 7.9 तक के सभी प्रश्न, हमारी वै ा नक परंपरा तथा वै ा नक क भाँ त सोच बॉक्स, पृष्ठ 99 से 111
तक के सभी पाठ्य प्रश्न, ज ासा बनाए रख के दस प्रश्न तथा खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर के चार काय — प्रत्येक उत्तर कणीय मॉडल
के आधार पर, अथात् अंतराकणीय ान, अंतराकणीय आकषण और घटक कण क ग त के संदभ म समझाया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 8) 98 – 115
खं ड प्रश्न
24 54
माध्यम
हन्द
खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 98
अध्याय का आरंभ — नद के कनारे से उठे प्रश्न
खोजबीन और वचार कर
प्र.1 पत्थर या रेत का ढे र लगाना संभव होता है परंतु जल जैसे कसी द्रव का नह । ऐसा क्य ?
क्य क पत्थर और रेत का प्रत्येक कण ठोस है जब क जल द्रव है — और यह अंतर पूणतः इस बात पर नभर करता है क उनके
घटक कण कतनी प्रबलता से परस्पर जुड़े ह।
प्रत्येक पत्थर और रेत के प्रत्येक दाने के भीतर कण सुसंकु लत होते ह तथा अंतराकणीय आकषण बल अत्यंत प्रबल होते ह। ये बल
प्रत्येक कण को उसक नयत त पर रखते ह, अत: प्रत्येक दाना अपनी न त आकृ त बनाए रखता है और नीचे वाले दान पर
बना दबे टका रह सकता है। दाना दाने पर टकता है और ढे र खड़ा रहता है।
जल म अंतराकणीय आकषण बल बहुत दुबल होते ह। इसके कण एक-दूसरे के पास से होकर ग त करने के लए स्वतंत्र होते ह,
अत: जल क कोई परत अपने ऊपर वाली परत को सँभाल नह सकती। ढे र लगाने का प्रयास करते ही नीचे के कण कनार क ओर
सरक जाते ह और जल फैलकर समतल हो जाता है।
ध्यान द जए क ढे र वास्तव म है क्या: रेत का ढे र कोई एक ठोस वस्तु नह है — यह अनेक पृथक ठोस दान का
समूह है जो एक-दूसरे पर टके ह और जनके बीच वायु से भरे रक्त ान ह। इसी लए ठोस होते हुए भी रेत को
उँ डेला जा सकता है।
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प्र.2 अंज ल म जल भरने पर जल उसी आकार का हो जाता है परंतु अंज ल से छोड़े जाने पर जल का यह आकार
प रव तत क्य हो जाता है?
क्य क द्रव का आयतन न त होता है परंतु आकृ त न त नह । अंज ल ही उस समय पात्र का काय करती है; हथे लयाँ
खोलते ही पात्र समाप्त हो जाता है।
जल के कण ग त करने के लए स्वतंत्र होते ह, परंतु केवल सी मत ान के भीतर। अंज ल म जल बाहर नह जा सकता, अत: उसके
कण हथे लय क गहराई के अनुसार व्यव त हो जाते ह और जल ठ क वही आकृ त ले लेता है — ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप
7.4 म 200 mL जल पात्र ‘अ’ से पात्र ‘ब’ म डालने पर होता है।
हथे लयाँ खोलते ही द वार नह बचत । जल का अंतराकणीय आकषण इतना प्रबल नह है क वह कण को स्वयं ही कटोरे क
आकृ त म रोक सके, अत: कण एक-दूसरे के पास से सरक जाते ह और जल बह जाता है। उसका आयतन त नक भी नह
बदलता — केवल आकृ त बदलती है।
ऐसा क्य होता है: न त आकृ त के लए कण का नयत त पर होना आवश्यक है, जो केवल ठोस म होता है।
द्रव का आयतन न त रहता है क्य क उसके कण एक-दूसरे के नकट बने रहते ह, और आकृ त न त नह रहती
क्य क वे ग त कर सकते ह।
प्र.3 हम वायु को नह दे ख सकते फर भी वह फूले हुए गुब्बारे के भार म वृ द्ध कैसे कर दे ती है?
क्य क वायु भी द्रव्य ही है — वह भी घटक कण से बनी है और उसके प्रत्येक कण का अपना द्रव्यमान होता है।
हम वायु को दो कारण से नह दे ख पाते: उसके कण अत्यंत सूक्ष्म होते ह, और गैस म अंतराकणीय ान अ धकतम तथा आकषण
नगण्य होता है, अत: कण दूर-दूर बखरे रहते ह और कोई ऐसी सतह नह बनाते जससे प्रकाश पराव तत हो। कसी वस्तु का
दखाई न दे ना यह प्रमाण नह है क वह है ही नह — यही तो क्रयाकलाप 7.2 सखाता है, जहाँ घुली हुई चीनी दखाई नह दे ती
परंतु स्वाद म स्पष्ट अनुभव होती है।
गुब्बारा फुलाते समय आप उसम वायु के अत्य धक संख्या म कण भर दे ते ह। उन सबका द्रव्यमान जुड़ जाता है, पृथ्वी उन सब पर
आकषण बल लगाती है, अत: फूला हुआ गुब्बारा उसी खाली गुब्बारे से भारी हो जाता है।
स्वयं जाँ चए: क्रयाकलाप 7.6 सद्ध करता है क वायु वास्तव म भीतर है। वायु से भरी स रज का खुला सरा
अँगूठे से बंद करके प्लंजर दबाइए। वह वरोध करता है और छोड़ते ही वापस आ जाता है। कोई अदृश्य वस्तु है जो
पीछे धकेल रही है।
प्र.4 वतमान म हम जस वायु म ास लेते ह क्या हजार वष पूव भी यह ऐसी ही थी?
कण बहुत हद तक वही ह; परंतु उनका मश्रण वैसा नह रहा।
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साधारण प रवतन से द्रव्य के कण न बनते ह और न नष्ट होते ह — पीसना, घोलना, गलन और क्वथन केवल उनक व्यव ा
बदलते ह। अत: आपके चार ओर क वायु के घटक कण बहुत लंबे समय से उपयोग म आते रहे ह। गैस के कण सभी दशाओं म
स्वतंत्र रूप से नरंतर ग त करते ह, इस लए वायु नरंतर मलती-जुलती रहती है; एक ान पर छोड़ा गया कण दूर कसी पौधे ारा
ग्रहण कर पुनः वायु म लौटाया जा सकता है।
जो बदला है वह है वायु म व भन्न पदाथ क मात्रा। वाहन , कारखान और घर म ईंधन जलने से नए पदाथ नरंतर जुड़ते जा रहे
ह, साथ ही वह धूल भी जसे नलं बत कणीय द्रव्य कहते ह (दे खए एक सोपान ऊपर, पृष्ठ 109)। अत: आज क वायु उन्ह प्रकार
के कण से बनी है, परंतु उनका अनुपात वही नह रहा।
प्र.5 अपने प्रश्न को साझा क जए
इस अध्याय के लए अ ा प्रश्न वह है जसका उत्तर कण क बात कए बना नह दया जा सकता — वे कतनी दूरी पर ह, कतनी
प्रबलता से एक-दूसरे को आक षत करते ह, अथवा कस प्रकार ग त कर रहे ह। अपने प्रश्न अपनी कॉपी म ल खए और कक्षा म
साझा क जए।
नमूना प्रश्न:
य द ठोस म कण के बीच ान न के बराबर है तो हथौड़ा मारने पर पत्थर चपटा होने के ान पर टू ट क्य जाता है?
वायु से भरी स रज दब जाती है, जल से भरी नह । आ खर दबने पर बाहर क्या नकलता है?
जल 100 °C पर उबलता है, फर भी ठं डे दन म गीला फश सूख क्य जाता है?
भोजन क सुगंध घर के अं तम कक्ष तक पहुँच जाती है। क्या भोजन स्वयं वहाँ तक जाता है?
बफ जल पर तैरती है। इससे बफ म कण के अंतराकणीय ान के वषय म क्या पता चलता है?
सुझाव: अपनी कॉपी म एक पृष्ठ ‘मेरे शेष प्रश्न’ शीषक से र खए। अध्याय 7 आपको कणीय मॉडल दे ता है; आपके
कुछ प्रश्न का पूरा उत्तर उच्च कक्षाओं म ही मलेगा — उन्ह लख रखना भी उतना ही उपयोगी है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 99
खंड 7.1 द्रव्य कससे बना होता है?
प्र.1 क्या आपने वचार कया क ये कंकड़, पत्थर और रेत कहाँ से आते ह?
ये पवत क च ान से आते ह।
पवत म अपरदन के कारण चट्टान धीरे-धीरे टू टती रहती ह। इन पवत से बहने वाली न दयाँ इन अपर दत टु कड़ को अपने साथ बहा
ले जाती ह और बहते-बहते उन्ह और तोड़ती जाती ह — पहले कंकड़, फर पत्थर, फर रेत — और उनक वृहत मात्रा को मैदान
तक पहुँचा दे ती ह। नद या समुद्र के कनारे जो कंकड़ आप उठाते ह वे लंबी यात्रा कर चुक चट्टान के छोटे , गोल अवशेष ह।
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इस अध्याय के लए इसका महत्व: यह सब केवल भौ तक प रवतन है। रेत का दाना उसी पदाथ का बना है
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जसक वह चट्टान थी — टू टने से टु कड़ का आकार बदला है, उनका पदाथ नह । ठ क यही वचार
o जाँचता है।
चॉक के टु कड़े.cसे
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प्र.2 क्या ये कण कसी बड़ी च ान क सबसे छोट इकाई है या रेत और म के इन कण को और भी तोड़ा जा सकता
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है?
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ये सबसे छोट इकाई नह ह — रेत और मट्ट के इन कण को और भी तोड़ा जा सकता है।
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m पर वह केवल और
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चॉक के टु कड़े क भाँ त ही रेत का प्रत्येक दाना स्वयं घटक कण क एक वृहत संख्या से बना होता है। पीसने
महीन दान म बँoटmजाता है और प्रत्येक महीन दाना भी उतने ही असंख्य कण से बना रहता है। य दla
चलती रहेm . c a g पीसने क यह प्र क्रया नरंतर
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a इकाइयाँ ह।
तो अंततः एक ऐसी त आएगी जब टु कड़ को और अ धक तोड़ा नह जा सकेगा; वही इकाइयाँ उस पदाथ क सबसे
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छोट
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coसेmभी नह दे खा जा सकता। agl
पैमाने का ध्यान र खए: आवधक लस से मु श्कल से दखाई दे ने वाला रेत का कण भी कसी घटक कण क तुलना
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म वशाल है। घटक कण को कसी सामान्य सूक्ष्मदश
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क्या चॉक के इस महीन चूण का प्रत्येक कण अभी भी उसी पदाथ का बना हुआ है या यह तोड़ने या पीसने पर
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प्र.3
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कसी और पदाथ म प रव तत हो गया है?
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a प्रत्येक कण अभी भी उसी पदाथ — चॉक — का ही बना है। कोई नया पदाथ नह बना।
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omकण का एक समूह दूसरे समूह से केवल पृथक होता है। कण स्वयं l a
आवधक लस से चूण दे खए ( चत्र 7.1, घ): प्रत्येक सूक्ष्म कण उतना ही सफ़ेद और चॉक जैसा है जतना वह पूरा टु कड़ा था जससे
आपने आरंभ कया था। तोड़ने और पीसने से चॉक के c
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घटक
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अछू ते रहते ह — वे न कटते ह, न बदलते ह और न कसी अन्य पदाथ म प रव तत होते ह।
ऐसा क्य होता है: कसी पदाथ के गुणधम उसके कण के प्रकार से आते ह। जब तक कण अप रव तत ह, पदाथ
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भी अप रव तत रहेगा, चाहे आप टु कड़े कतने ही छोटे कर ल। इसी कारण पीसना एक भौ तक प रवतन है।
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agl प्र.4 कक्षा 7 क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय ‘हमारे आस-पास के प रवतन— भौ तक एवं रासाय नक’ का पुनः
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स्मरण क जए। चॉक को पीसना एक भौ तक प रवतन है या रासाय नक प रवतन?
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यह एक भौ तक प रवतन है।
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कोई प रवतन रासाय नक तभी होता है जब नए गुणधम वाला कोई नया पदाथ बने। चॉक को पीसने पर कुछ भी नया नह बनता:
चूण चॉक ही है, दखने म चॉक जैसा, स्पश म चॉक जैसा और व्यवहार म भी चॉक जैसा। बदलता केवल यह है क प्रत्येक कण का
आकार और छोटा होता जाता है।
जाँचने क कसौट : स्वयं से पू छए — "प रवतन के बाद वाला पदाथ वही पदाथ है या नह ?" चॉक पीसने म उत्तर
‘हाँ’ है, अत: प रवतन भौ तक है। इसक तुलना मोमबत्ती के जलने या लोहे म जंग लगने से क जए, जहाँ उत्तर
‘नह ’ होता है।
याकलाप 7.1— आइए, खोज कर — पृष्ठ 99
खंड 7.1 द्रव्य कससे बना होता है?
याकलाप
प्र.1 आप क्या दे खते ह?
चॉक नरंतर छोटे -से-छोटे टु कड़ म टू टता जाता है और कसी भी अव ा म चॉक होना बंद नह करता।
टु कड़ा दो भाग म टू टता है ( चत्र 7.1, ख), फर वे भाग भी टू टते ह — जब तक क टु कड़े इतने छोटे न हो जाएँ क उन्ह
अँगु लय से पकड़कर तोड़ना क ठन हो जाए।
जहाँ हाथ रुकते ह वहाँ ओखल और मूसल काम आते ह। पीसने पर वे टु कड़े महीन सफ़ेद चूण म बदल जाते ह ( चत्र 7.1, ग)।
आवधक लस से दे खने पर ( चत्र 7.1, घ) यह चूण कोई चकना लेप नह दखता — यह अलग-अलग सूक्ष्म कण क बहुत
बड़ी संख्या है, और प्रत्येक कण सफ़ेद तथा चॉक जैसा ही है।
इससे क्या पता चलता है: चॉक का टु कड़ा कभी भी एक अखंड, सतत पड नह था। वह अनेक छोट इकाइय का
संकुलन था और तोड़ना उन्ह केवल पृथक करता है। और अ धक पीसने पर कण और भी महीन ही ह गे।
प्र.2 क्या दखाई दे ने वाला प्रत्येक कण अभी भी चॉक का ही कण है?
हाँ — और आवधक लस से आप इसे स्वयं जाँच सकते ह। चूण के प्रत्येक कण का रंग वही सफ़ेद, स्पश वही धूलभरा और प्रकृ त
वही चॉक जैसी है जो मूल टु कड़े क थी।
यह एक अवलोकन ही पूरे खंड का वचार अपने म समेटे है। य द चॉक को तोड़ने से कुछ और बन जाता तो चूण दखने और व्यवहार
म भन्न होता। ऐसा नह होता। अत: चॉक का टु कड़ा एक जैसी अनेक इकाइय से बना होगा और तोड़ना केवल उन इकाइय को
एक-दूसरे से अलग करता है।
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करके दे खए: इस चूण को थोड़ा-सा श्यामपट्ट पर रग ड़ए। यह अब भी लखता है। कोई पदाथ अपने गुणधम उस
सबसे छोटे कण तक बनाए रखता है जसे आप बना सकते ह — कणीय मॉडल का यही पहला दावा है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 100
खंड 7.1 द्रव्य कससे बना होता है?
प्र.1 क्या इस प्रकार प्राप्त चॉक के सूक्ष्म कण चॉक क सबसे छोट इकाइयाँ माने जा सकते ह?
ओखल म प्राप्त कण नह — परंतु यह प्र या जन इकाइय तक ले जाती है, वे अवश्य ह। इन दोन को अलग-अलग
समझना आवश्यक है।
ओखल और मूसल से वास्तव म जो मलता है वह चॉक का अत्यंत महीन चूण है। इसका प्रत्येक कण अभी भी लाख -लाख
घटक कण से बना है। यह सबसे छोट इकाई से कोस दूर है।
पाठ आपसे यह कल्पना करने को कहता है क पीसने क प्र क्रया नरंतर चलती रहे। अंततः एक ऐसी त आएगी जब कण
को और अ धक तोड़ा नह जा सकेगा। वही सूक्ष्म इकाइयाँ वे मूल नमाण इकाइयाँ ह जनसे चॉक बना था — उसके घटक
कण।
कल्पना क आवश्यकता क्य : कोई ओखल वास्तव म उस त तक नह पहुँच सकती और वे कण कसी
सामान्य सूक्ष्मदश से भी दखाई नह दे ते। हम उस वचार तक उसी से पहुँचते ह जो हम दे ख सकते ह — क प्रत्येक
कण, चाहे कतना भी महीन हो, चॉक ही रहता है।
यह मॉडल यहाँ क्या दावा नह करता: अध्याय यह नह कहता क इन इकाइय को कसी भी उपाय से कभी
वभा जत नह कया जा सकता। यह कहता है क ये चॉक क सबसे छोट इकाइयाँ ह — इन्ह वभा जत कर दे ने पर
चॉक शेष नह रहेगा। ये कससे बनी ह, यह उच्च कक्षाओं म पढ़गे (दे खए एक सोपान ऊपर, पृष्ठ 115: परमाणु और
अणु)।
प्र.2 चीनी को जल म घोलकर वलयन बनाने क प्र या को स्मरण कर। जब जल म चीनी को घोला जाता है तो क्या
होता है?
चीनी अपने घटक कण म टू ट जाती है, ये कण परस्पर पृथक हो जाते ह और जल के कण के बीच के ान म फैल जाते ह।
चीनी का प्रत्येक छोटा दाना ऐसे ही लाख -लाख कण से न मत होता है। जल उन्ह दाने से एक-एक कर बाहर ख च लेता है और वे
जल म पहले से वद्यमान अंतराकणीय ान म चले जाते ह। ये कण अत्यंत सूक्ष्म होते ह और अब पूरे द्रव म अलग-अलग बखर
चुके होते ह, अत: चीनी का कोई दाना दखाई नह दे ता।
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चीनी न लुप्त हुई है और न नष्ट। वलयन का प्रत्येक चम्मच मीठा लगता है, अत: चीनी के कण उसम सवत्र उप त होने चा हए।
प्र.3 क्या आपको वलयन म चीनी का कोई कण दखाई दे रहा है?
नह — गलास म कह भी एक भी कण दखाई नह दे ता।
इसके दो कारण एक साथ काम करते ह, और दोन महत्वपूण ह:
1. चीनी के घटक कण अत्यंत सूक्ष्म होते ह — इतने क उन्ह कसी सामान्य सूक्ष्मदश से भी नह दे खा जा सकता, नग्न आँख क
तो बात ही छो ड़ए।
2. अब वे कसी दाने म एक साथ संकु लत नह ह। प्रत्येक कण पृथक होकर जल के अंतराकणीय ान म जा चुका है, अत:
दखाई दे ने लायक कुछ शेष ही नह बचा।
फर भी वे वह ह: जल ऊपरी सतह पर भी उतना ही मीठा है जतना नीचे। जो प्रमाण दे खने से नह मलता वह
स्वाद से मल जाता है। कसी वस्तु का दखाई न दे ना उसक अनुप त का प्रमाण नह है — इस अध्याय म
जब भी अदृश्य कण क बात हो, यह बात स्मरण रखने योग्य है।
याकलाप 7.2— आइए, करके दे ख — पृष्ठ 100
खंड 7.1 द्रव्य कससे बना होता है?
याकलाप
प्र.1 क्या यह जल स्वाद म मीठा लगता है?
वलोडन से पहले — नह , अथवा अत्यंत हल्का-सा।
चीनी अभी-अभी डाली गई है और जल से भारी होने के कारण गलास क तली म ढे र के रूप म पड़ी है। अभी उसका थोड़ा-सा भाग
ही घुलना आरंभ हुआ है और वे कण भी तली के पास ही ह। अत: सबसे ऊपरी सतह से लया गया चम्मच भर जल साधारण पेय
जल जैसा ही लगता है।
पयाप्त प्रतीक्षा क जए तो यह बदल जाएगा। बना वलोडन के भी जल के कण नरंतर ग त करते रहते ह और
चीनी के कण को धीरे-धीरे ऊपर तक पहुँचा दगे — वही फैलाव जो आप क्रयाकलाप 7.8 म पोटै शयम परमगनेट
के साथ दे खते ह। वलोडन केवल इसे तीव्र बनाता है।
सावधानी: इस क्रयाकलाप को शक्षक अथवा कसी वयस्क के मागदशन म ही क जए और कसी भी वस्तु या
पदाथ को तब तक न खाएँ और न पएँ जब तक ऐसा करने के लए कहा न जाए।
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प्र.2 आपको स्वाद म क्या अंतर लगा? क्या यह स्वाद म मीठा है?
वलोडन के बाद ऊपरी सतह से लया गया चम्मच स्पष्ट रूप से मीठा लगता है। यही अंतर है।
वलोडन से चीनी पूणतया घुल गई है — वह अपने घटक कण म टू ट गई है और वे कण जल के कण के बीच के अंतराकणीय ान
म जाकर पूरे द्रव म फैल गए ह। अत: वलयन का प्रत्येक भाग, ऊपरी सतह स हत, अब चीनी के कण रखता है और प्रत्येक भाग
मीठा लगता है।
यह स्वाद क्या सद्ध करता है: चीनी न तली म जमी रही, न सूखी, न लुप्त हुई। वह वलयन म एकसमान रूप से
उप त है, परंतु ऐसे रूप म जो दे खे जाने के लए बहुत ही सूक्ष्म है। घटक कण क पूरी अवधारणा इसी
अवलोकन पर टक है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 101
खंड 7.2 द्रव्य क व भन्न अव ाएँ कैसे नधा रत होती ह?
प्र.1 परंतु चीनी कहाँ गई?
जल के कण के बीच के ान म।
घुलने पर चीनी के छोटे -छोटे कण परस्पर पृथक हो जाते ह और जल के कण के बीच उपलब्ध ान म चले जाते ह। इन ान का
नाम है — अंतराकणीय ान।
दो अलग-अलग अवलोकन एक ही उत्तर क ओर संकेत करते ह:
स्वाद ( याकलाप 7.2): संपूण वलयन मीठा है, अत: चीनी के कण पूरे जल म फैले हुए ह।
आयतन ( याकलाप 7.7): चीनी घुलने पर जलस्तर चह्न ‘ब’ से घटकर ‘स’ पर आ जाता है। वलयन जल और चीनी के
अलग-अलग आयतन के योग से कम ान घेरता है — यह तभी संभव है जब चीनी उस ान म समा गई हो जो पहले से
वद्यमान था।
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चीनी का िवलयन, आविधत रूप में
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चीनी का कण
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a चीनी के कण उन्ही ं अंतराकणीय
स्थानों को घेरते है ं जो जल मे ं
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पहले से ही उपिस्थत थे।
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a s eचह्नm‘ब’ से जलस्तर नीचे क्य आ जाता है — घुले हुए कण को अपने लए नया ान नह चा हए; वे जल के कण के बीच पहले से
a gl वद्यमान ान म चले जाते ह, इस लए वलयन का आयतन जल और चीनी के आयतन के योग से कम होता है।
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चॉक और चीनी दोन को उनके घटक कण म तोड़ा जा सकता है परंतु इनके जन ठोस टु कड़ को हम दे खते ह
उनम ये घटक कण परस्पर कस प्रकार जुड़े होते ह?
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कण के बीच लगने वाले आकषण बल ारा, जन्ह अंतराकणीय आकषण कहते ह।
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अध्याय इन बल के वषय म तीन बात बताता है और तीन महत्वपूण ह:
ag ये बल प्रकृ त म आकष ह — ये कण को एक-दूसरे क ओर ख चते ह और इसी लए चॉक का टु कड़ा एक वस्तु के रूप म बना
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m पर नभर करती है। कण क दूरी म अल्प वृ द्ध भी इन बल को a
रहता है।
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इनक प्रबलता पदाथ क प्रकृ त एवं अंतराकणीय
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aglक भौ तक अव ा नधा रत करती है — ठोस, द्रव अथवा गैस।
अत्य धक कम कर दे ती है।
इन बल क प्रबलता ही अंतत: पदाथ
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ठोस चॉक और ठोस चीनी म ये बल इतने प्रबल होते ह क प्रत्येक कण अपनी नयत त पर बँधा रहता है। इसी कारण चॉक के
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टु कड़े क आकृ त और आयतन न त होते ह और उसे उँ डेला नह , बलपूवक तोड़ा जाता है।
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.cआगे क ओर दे खए: यही एक वाक्य — दूरी बढ़ते ही बल का अत्य धकaघटg जाना — शेष पूरे अध्याय क व्याख्या
m कर दे ता है। ठोस को गरम क जए, कण थोड़ा दूर हो जाते ह, बल टूट जाता है, और ठोस पघल जाता है।
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आचाय कणाद और परमाणु क अवधारणा
हमारी वै ा नक परं प रा
प्र.1 क्या आप जानते ह क प्राचीनकाल से लोग इस वषय पर वचार कर रहे ह क वस्तुओं को कस सीमा तक तोड़ा
जा सकता है एवं द्रव्य का नमाण कससे हुआ है?
हाँ। भारत म यह प्रश्न बहुत पहले प्राचीन भारतीय दाश नक आचाय कणाद ने उठाया था, जन्ह ने सवप्रथम परमाणु क अवधारणा
के वषय म चचा क ।
उनके अनुसार द्रव्य का नमाण सूक्ष्म, अ वभाज्य एवं शाश्वत कण से हुआ है जन्ह परमाणु कहा जाता है।
यह वचार उनके वैशे षक सूत्र नामक ग्रंथ म व णत है।
ध्यान द जए क उनका प्रश्न आपके प्रश्न से कतना मलता है। क्रयाकलाप 7.1 ठ क वही पूछता है जो उन्ह ने पूछा था — कसी
वस्तु को तोड़ते जाइए, तो क्या यह तोड़ना कभी रुकना ही चा हए? उन्ह ने केवल तक से उत्तर दया; आज वही नष्कष प्रयोग से भी
सम थत है — चीनी का घुलना, वायु का संपी डत होना और र जल म रंग का स्वयं फैल जाना।
आधु नक वणन कहाँ भन्न है: यह अध्याय सावधानी से केवल इतना कहता है क घटक कण उस पदाथ क सबसे
छोट इकाइयाँ ह। यह यह दावा नह करता क उनके भीतर कभी कुछ नह मलेगा। वे कण क्या ह — परमाणु और
अणु — यह पृष्ठ 115 के एक सोपान ऊपर म संके तत है और उच्च कक्षाओं म वस्तार से पढ़ा जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 102
खंड 7.2.1 ठोस अव ा
प्र.1 ठोस पदाथ म घटक के कण परस्पर कस प्रकार जुड़े हुए होते ह?
अत्यंत दृढ़ता से। ठोस म कण सुसंकु लत होते ह और अंतराकणीय आकषण बल अत्यंत प्रबल होते ह।
ये प्रबल बल प्रत्येक कण को उसक नयत त पर रखते ह। कण ग त तो कर सकता है — परंतु केवल अपनी त के आस-
पास इधर-उधर, जसे कंपन अथवा दोलन कहते ह। वह अपने पड़ोसी कण के पास से होकर एक ान से दूसरे ान पर नह जा
सकता।
यही एक तथ्य क्रयाकलाप 7.3 के सभी प्रेक्षण क व्याख्या कर दे ता है:
प्रत्येक वस्तु क आकृ त न त है, क्य क प्रत्येक कण अपने ान पर बँधा है।
प्रत्येक वस्तु का आयतन न त है, क्य क कण उतने ही पास-पास ह जतना उनके आकषण बल उन्ह रख सकते ह।
हथौड़े से पीटने पर वस्तु म ग ा पड़ सकता है या वह टू ट सकती है, परंतु ठोस जल क भाँ त कभी प्रवा हत नह होता।
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प्र.2 क्या ठोस अव ा म इन कण को पृथक करने का कोई उपाय है?
(क) ठोस
चत्र 7.4 (क), पृष्ठ 102 — ठोस का आव धत व्यव ा- चत्र: कण सटकर सघन रूप से जमे ह और न त ान पर
बँधे रहते ह।
हाँ — ठोस को गरम क जए। बस इतना ही आवश्यक है।
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ऊष्मा दी गई → कणों की ऊष्मीय ऊज बढ़ ती है
→ कं पन अिधक तीव हो जाते है ं (िचत्र 7.4, ख)
→ कण अपनी िनयत िस्थित छोड़ ने लगते है ं
→ अंत राकणीय दू री बढ़ ती है, अत: आकषण बल दुबल हो जाते है ं
→ ठोस द व में पिरवितत हो जाता है (िचत्र 7.4, ग)
जस तापमान पर ऐसा होता है वह उस ठोस का गलनांक कहलाता है — अ धक ठ क कह तो, वायुमंडलीय दाब पर वह न्यूनतम
तापमान जस पर कोई ठोस पघलकर द्रव म प रव तत होता है।
गरम करना पयाप्त क्य है: दूरी म अल्प वृ द्ध होते ही अंतराकणीय बल अत्य धक कम हो जाता है। अत: जैसे ही
कंपन इतने बड़े हो जाते ह क कण थोड़ा-सा दूर खसक जाएँ, आकषण बल शीघ्र ही ढह जाते ह और कण इधर-
उधर ग त करने के लए स्वतंत्र हो जाते ह।
गलन का अथ यह नह है: कण स्वयं न पघलते ह, न नरम होते ह, न फूलते ह और न कसी प्रकार बदलते ह।
बदलते केवल उनके अंतराकणीय ान और उनक ग त ह। बफ और जल ठ क एक ही प्रकार के कण से बने ह।
याकलाप 7.3— आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 102
खंड 7.2.1 ठोस अव ा
याकलाप
प्र.1 आपके अनुसार उपयुक्त द गई छ: वस्तुओं म से कस वस्तु म कण आपस म प्रबलता से जुड़े ह?
छह म — इनम से प्रत्येक वस्तु ठोस है और ठोस म अंतराकणीय आकषण सदै व अत्यंत प्रबल होते ह। इसी लए इन सबक आकृ त
और आयतन न त ह जन्ह हथौड़े से पीटकर भी सरलता से नह बदला जा सकता।
परस्पर तुलना करने पर हथौड़ा इन्ह तीन प्रकार के व्यवहार म बाँट दे ता है:
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वस्तु पीटने पर क्या होता है इससे क्या संकेत मलता है
लोहे की कील, चाबी, पचकते और चपटे होते ह, परंतु आकषण पबल ; नई िस्थितयों में धके ले जाने पर भी कण एक-दू सरे को
ऐलुिमिनयम का टुक ड़ा एक ही टु कड़े म बने रहते ह थामे रहते है ं
से ंध ा नमक, पत्थर चटककर छोटे टु कड़ म बखर जाते आकषण यहाँ भी पबल है — टुकड़ े के वल कणों के समूह है ं जो दू सरे
ह समूहों से पथृ क हो गए, और पत्येक टुकड़ ा अब भी कठोर है
लकड़ी का ग टु का दबता है और अ धक बल लगाने पर इतनी पबलता से जुड़ा है िक अपनी आकृित और आयतन बनाए रखता
चर जाता है है
इन छह म लोहे क क ल हथौड़े का सवा धक प्र तरोध करती है, और ता लका 7.1 इस नष्कष का समथन करती है: लोहा 1538
°C पर ही पघलता है जब क बफ 0 °C पर। उच्च गलनांक का अथ है क कण को उनक नयत त से हटाने के लए बहुत
अ धक ऊष्मीय ऊजा चा हए — अथात् अंतराकणीय आकषण वशेष रूप से प्रबल ह।
टू टने का सही अथ लगाइए: सधा नमक का चटक जाना दुबल आकषण का प्रमाण नह है। हथौड़ा कण के एक
पूरे समूह को दूसरे समूह से पृथक करता है; वह यह नह बताता क एक कण को उसके पड़ोसी से दूर करना कतना
क ठन है। यह गलनांक बताता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 103
खंड 7.2.1 ठोस अव ा — ता लका 7.1 कुछ ठोस वस्तुओं के गलनांक
प्र.1 ठोस वस्तुओं का एक न त आयतन होता है। द्रव एवं गैस के वषय म आपका क्या वचार है?
द्रव का आयतन न त होता है परंतु आकृ त न त नह । गैस क न आकृ त न त होती है और न आयतन।
अव ा आकृ त आयतन कण के संदभ म कारण
ठोस िनिश्चत िनिश्चत कण सुसंकु लत और प्रबलतम आकषण ारा नयत त पर बँधे; केवल कंपन कर सकते ह
दव िनिश्चत िनिश्चत आकषण कुछ दुबल, अत: कण ग त करते ह — पर केवल सी मत ान के भीतर, और एक-
नहीं दूसरे के नकट ही रहते ह
गैस िनिश्चत िनिश्चत आकषण नगण्य, अत: कण सभी दशाओं म स्वतंत्र ग त करते ह और संपूण उपलब्ध ान घेर
नहीं नहीं लेते ह
पुस्तक आपको दोन बात प्रयोग से दखाती है:
याकलाप 7.4 — वही जल पात्र ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ म डालने पर प्रत्येक पात्र क आकृ त ले लेता है, फर भी स्तर हर बार
200 mL पर ही रहता है। आकृ त न त नह , आयतन न त।
याकलाप 7.5 — गैस जार ‘अ’ म एक त्रत धुआँ स्वयं फैलकर गैस जार ‘ब’ के संपूण ान को भी भर दे ता है। न आकृ त
न त, न आयतन।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त
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ता लका 7.1 के वषय म: बफ 0 °C पर, यू रया 133 °C पर और लोहा 1538 °C पर पघलता है। तीन ठोस ह,
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तीन क अव ा एक है — परंतु जस तापमान पर प्रत्येक ठोस टू ट पड़ता है वही बताता है क उसक
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आकषण कतने
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 104
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खंड 7.2.2 द्रव अव ा
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क्या आप जल म अपनी अँगुली घुमा पा रहे ह?
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प्र.1
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g म क जए तो अँगुली त नक भी
. ायी रूप से तोड़े या काटे बना। यही प्रयास कसी a
s eाmपाएँगे।
हाँ — सरलतापू
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पत्थर
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वास्तव म आपक अँगुली जल को अ ायी रूप से व ा पत करती है। द्रव म अंतराकणीय आकषण ठोस क अपेक्षा दुबल होते ह,
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अत: कण को कनारे धकेला जा सकता है और वे एक-दूसरे के पास से सरक सकते ह। जैसे ही आप अँगुली हटाते ह, कण पुनः
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पास आ जाते ह और जल अपनी पूव त ग्रहण कर लेता है — न कोई कटाव, न कोई छद्र, न कोई नशान।
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परंतु आकषण शून्य नह है: ये बल अब भी इतने प्रबल ह क कण को एक-दूसरे के नकट रखते ह। इसी लए जल
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पात्र म एक ही पड के रूप म न त आयतन लए रहता है और गैस क भाँ त पूरे कक्ष म बखर नह जाता। द्रव
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ठोस और गैस के बीच क अव ा है और यह क्रयाकलाप आपको वह अंतर हाथ से अनुभव करा दे ता है।
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a l प्रश्न — पृष्ठ 105
gपाठ्य
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खंड 7.2.3 गैसीय अव ा
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प्र.1 क्या गैस का एक न त आयतन भी होता है?
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नह । गैस का न आयतन न त होता है और न आकृ त — वह दोन अपने पात्र से लेती है।
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क्रयाकलाप 7.5 इसे प्रत्यक्ष दखाता है। धुआँ केवल गैस जार ‘अ’ म एक त्रत कया जाता है। जब गैस जार ‘ब’ को उसके ऊपर
a s em रखकर काँच का ढक्कन हटाया जाता है तो धुआँ स्वयं फैलकर गैस जार ‘ब’ के संपूण ान को भी भर दे ता है ( चत्र 7.7, घ)।
agl कसी ने उसे वहाँ धकेला नह ; वह स्वयं गया।
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कारण यह है क गैस म कण सभी दशाओं म स्वतंत्र रूप से ग त करते ह और अंतराकणीय आकषण नगण्य होते ह। कण को रोकने
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वाला कुछ नह है, अत: वे तब तक फैलते जाते ह जब तक संपूण उपलब्ध ान घर न जाए।
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प्रमाण का दूसरा भाग: क्रयाकलाप 7.6 यही बात उलट ओर से दखाता है। स रज म बंद वायु को प्लंजर दबाकर
बहुत कम आयतन म संपी डत कया जा सकता है। जो गैस बड़े ान को भी भर दे और छोटे म भी समा जाए,
उसका अपना न त आयतन स्पष्टत: है ही नह ।
तरल: द्रव और गैस दोन प्रवा हत होते ह और अपनी आकृ त नह बनाए रखते, इस लए दोन को एक साथ तरल
कहा जाता है — यही गुणधम इन्ह ठोस पदाथ से वभे दत करता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 107
खंड 7.3 पदाथ क तीन अव ाओं म अंतराकणीय ान कस प्रकार भन्न होते ह?
प्र.1 प्रत्येक अव ा (ठोस, द्रव और गैस) के गुणधम के नधारण म अंतराकणीय ान क क्या भू मका रहती है?
अंतराकणीय ान ही सब कुछ नधा रत करता है, क्य क यही ान अंतराकणीय दूरी है — और आकषण क प्रबलता इसी दूरी
पर नभर करती है, जो दूरी बढ़ते ही अत्य धक घट जाती है।
अत: एक ही रा श दो बात एक साथ नयं त्रत करती है: कण कतनी प्रबलता से बँधे ह, और वे कतनी स्वतंत्रता से ग त कर सकते ह।
यही दोन मलकर पदाथ क आकृ त, आयतन और संपीड्यता तय करते ह।
ठोस दव गैस
स्थान न्यूनतम कुछ अिधक अिधकतम
चत्र 7.12 का पुन: आरेखन: अंतराकणीय ान ठोस म न्यूनतम, द्रव म कुछ अ धक और गैस म अ धकतम होता है। इन रक्त ान म
कुछ भी वद्यमान नह होता — वायु भी नह ।
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अव ा अंतराकणीय उससे बनने वाला उससे बनने वाले गुणधम
ान आकषण
ठोस यूनतम
न् अ धकतम आकृ त और आयतन न त; कण केवल कंपन करते ह; व्यावहा रक
रूप से असंपीड्य
दव ठोस से कु छ अिधक ठोस से कुछ दुबल आयतन न त, आकृ त न त नह ; कण सी मत ान म ग त करते
ह; व्यावहा रक रूप से असंपीड्य
गैस अिधकतम न्यूनतम (नगण्य) न आकृ त न त, न आयतन; कण संपूण उपलब्ध ान म ग त करते
ह; सरलता से संपी डत
अध्याय क एक चेतावनी: आप यह मान सकते ह क कण के बीच के ान म वायु भरी है। ऐसा नह है। उनम
कुछ भी वद्यमान नह होता।
प्र.2 हम स रज के अंदर गैस के व्यवहार के वषय म क्या कह सकते ह?
यह क गैस संपीड्य है — उसके कण को बहुत पास लाया जा सकता है — और छोड़ते ही वह स्वयं पूव त म लौट आती है।
आपका अँगूठा खुले सरे को बंद रखता है, अत: वायु का एक भी कण बाहर नह नकल सकता। फर भी प्लंजर भीतर जाता है और
स रज के अंदर वायु का आयतन कम हो जाता है। उतनी ही वायु कम ान तभी घेर सकती है जब आरंभ म उसके कण के बीच
बहुत अ धक रक्त ान रहा हो, जसे आपके दबाव ने कम कर दया।
दबाना बंद क जए और सभी दशाओं म स्वतंत्र ग त करते वे कण पुनः फैल जाते ह तथा प्लंजर अपनी मूल त म आ जाता है।
अब यही जल के साथ दोहराइए: प्लंजर लगभग हलेगा ही नह — जल वास्तव म असंपीड्य है। यही वरोध इस
क्रयाकलाप का मम है। गैस के कण के बीच बहुत ान होता है; द्रव के कण के बीच बहुत कम।
याकलाप 7.6 — आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 107
खंड 7.3 पदाथ क तीन अव ाओं म अंतराकणीय ान कस प्रकार भन्न होते ह?
याकलाप
प्र.1 आप क्या अवलोकन करते ह?
चार बात, इसी क्रम म:
1. अँगूठे से खुला सरा बंद रखने पर भी प्लंजर भीतर क ओर दबाया जा सकता है — स रज के अंदर वायु का आयतन कम
हो जाता है, जब क वायु बाहर नह नकल रही।
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2. जैसे-जैसे आप दबाते जाते ह, दबाना क ठन होता जाता है। वायु अ धका धक प्र तरोध करती है।
3. दबाना रोकते ही प्लंजर स्वयं अपनी मूल त म लौट आता है।
4. यही क्रयाकलाप वायु के ान पर जल भरकर दोहराइए — प्लंजर लगभग हलता ही नह । जल व्यावहा रक रूप से
असंपीड्य है।
दोन का व्यवहार इतना भन्न क्य : गैस म अंतराकणीय ान अ धकतम होता है, अत: दबाने पर कण पास आ
जाते ह और गैस कम ान घेरती है। द्रव म कण पहले से ही नकट ह, अत: नकालने के लए लगभग कोई
अ त रक्त ान बचा ही नह है।
याकलाप 7.7— आइए, अवलोकन कर — पृष्ठ 108
खंड 7.3 पदाथ क तीन अव ाओं म अंतराकणीय ान कस प्रकार भन्न होते ह?
याकलाप
प्र.1 अनुमान लगाइए क चह्न ‘ब’ के संदभ म जल का स्तर बढ़े गा या घटे गा।
अनुमान: स्तर घटे गा। चीनी घुलने के प ात अं तम स्तर ‘स’ चह्न ‘ब’ से नीचे आ जाता है — और जैसा चत्र 7.10 (घ) दखाता
है, वह ‘अ’ से कुछ ऊपर ही रहता है।
अ = के वल जल का स्तर
ब = चीनी डालने के बाद, परंत ु घुलने से पहले का स्तर
स = चीनी घुल जाने के बाद का स्तर
अ < स < ब, अत: स्तर ‘ब’ से घटता है
यह अनुमान क्य सही नकलता है: चह्न ‘ब’ पर चीनी तली म ढे र के रूप म पड़ी है और पात्र म अपना ान
घेरकर जल को ऊपर उठाए हुए है। घुलते ही उसके कण पृथक होकर जल के कण के बीच पहले से वद्यमान
अंतराकणीय ान म चले जाते ह — वह ान जसे पहले गना ही नह जा रहा था। अत: वलयन का आयतन
जल और चीनी के आयतन के योग से कम नकलता है और स्तर नीचे आ जाता है।
‘स’ ठ क ‘अ’ तक क्य नह गरता: चीनी के प्रत्येक कण के लए रक्त ान उपलब्ध नह होते, अत: वलयन
अकेले जल क तुलना म कुछ अ धक ान घेरता ही है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 108
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खंड 7.3 पदाथ क तीन अव ाओं म अंतराकणीय ान कस प्रकार भन्न होते ह?
प्र.1 आपको इन जलस्तर म क्या अंतर दखा?
स्तर पहले बढ़ता है और फर कुछ नीचे आ जाता है।
अ → ब: दो छोटे चम्मच चीनी डालने पर स्तर बढ़ जाता है, क्य क बना घुली चीनी एक ठोस के रूप म तली म पड़ी है और
पात्र म अपना ान घेरती है।
ब → स: वलोडन से चीनी घुल जाने के प ात स्तर कुछ कम हो जाता है — ‘स’ चह्न ‘ब’ से नीचे रहता है, यद्य प ‘अ’ से
ऊपर।
यही इस क्रयाकलाप का मम है: प्राप्त वलयन का आयतन जल और चीनी के आयतन के योग से कम होता है। यह तभी संभव है
जब जल के कण के बीच पहले से कुछ रक्त ान ह और घुली हुई चीनी के कण उन्ह ान म चले गए ह ( चत्र 7.11)।
प्र.2 प्रत्येक त म आप क्या दे खते ह? क्या रेत के कण घुलते ह? क्या रेत म श्रत करने पर पात्र म जल का आयतन
प रव तत होता है? य द हाँ, तो क्य ?
मलाया गया घुलता जलस्तर का क्या होता है
ठोस है?
साधारण नमक हाँ डालने पर बढ़ता है, घुलने के बाद कुछ नीचे आ जाता है — चीनी जैसा ही ‘ब’ से ‘स’ तक का
घटाव
ग्लूक ोस हाँ वही व्यवहार: पहले बढ़ता है, घुलने पर कुछ घट जाता है
रे त नहीं डालने पर बढ़ता है और बढ़ा ही रहता है; कतना भी वलो डत क जए, घटता नह
पत्थर के टुक ड़े नहीं रेत क भाँ त ही बढ़कर वह बना रहता है
नह , रेत के कण नह घुलते। रेत एक ठोस पदाथ है जो जल म नह घुलती। जल म डालने पर रेत के कण नीचे बैठ जाते ह और
पात्र म कुछ ान घेर लेते ह।
हाँ, पात्र म जल का आयतन बदलता है — वह बढ़ जाता है और बढ़ा ही रहता है। रेत अपने घटक कण को दान के भीतर
बाँधे रखती है, अत: वे जल के अंतराकणीय ान म जाने के ान पर जल को कनारे धकेलकर अपना ान बना लेते ह। कुल
आयतन इस लए जल के आयतन और रेत के आयतन का योग हो जाता है।
यही वरोध सीख है: घुलनशील ठोस पहले से वद्यमान ान म समा जाता है, अत: कुल आयतन पुनः घट जाता है।
अघुलनशील ठोस अपना ान जोड़ता है, अत: कुल आयतन केवल बढ़ता है।
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चीनी और रेत दोन ठोस ह। चीनी जल म घुल जाती है जब क रेत नह । ऐसा क्य ?
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क्य gकl दोन ठोस म यह अंतर है क उनके अपने घटक कण कतनी प्रबलता से परस्पर जुड़े ह, और जल के कण उन्ह कतने
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बल से ख च सकते ह।
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चीनी म अंतराकणीय आकषण इतने दुबल ह क ग तशील जल-कण चीनी के कण को दाने से एक-एक कर बाहर ख च लेते ह।
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मुक्त होकर वे कण जल के अंतराकणीय ान म फैल
a s emजाते ह — चीनी घुल जाती है।
ड़े lहोते ह क जल के कण उन्ह बाहर ख च ही नह पाते। कुछ मुक्त नह होता,
रेत म घटक कण इतनी प्रबलता से परस्पर जुg
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अत: कुछ फैलता भी नह और रेत दखाई दे ने वाले दान के रूप म तली म पड़ी रहती है। रेत जैसे पदाथ जल म अघुलनशील
कहलाते ह।
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इसे बल क स्पधा के रूप म प ढ़ए: घुलना कोई ऐसी क्रया नह जो जल कसी भी ठोस के साथ कर ले। यह तभी
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होता है जब जल-कण का खचाव ठोस के भीतर के अंतराकणीय आकषण पर भारी पड़ जाए। ठोस होना नणायक
a gl नह है — उसके आकषण बल क प्रबलता नणायक है।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 109
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खंड 7.3 पदाथ क तीन अव a g
ाओं म अंतराकणीय ान कस प्रकार भन्न होते ह?
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आप ठोस पदाथ म अंतराकणीय ान के वषय म क्या सोचते ह?
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gl ये तीन अव ाओं म न्यूनतम होते ह — परंतु शून्य नह ।
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ठोस के घटक कण प्रबल आकषण बल ारा जुड़े होते ह, अत: वे एक ान से दूसरे ान तक ग त नह करते और सुसंकु लत रहते
ह। फर भी, सुसंकु लत होते हुए भी कण के बीच कुछ
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ान रक्त रहते ह, जैसा क चत्र 7.12 (क) म दशाया गया है।
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अध्याय जो सुधार करता है: आप मान सकते ह क इन ान म वायु भरी हुई है। ऐसा नह है। अंतराकणीय
ान म कुछ भी वद्यमान नह होता। वायु स्वयं कण से बना द्रव्य है; य द वायु इन र क्तय म होती तो उसके कण
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को भी अपनी र क्तयाँ चा हए होत और यह प्रश्न कभी समाप्त ही न होता।
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omभी ठोस असंपीड्य क्य है: l a
g कण को उनके
m .cफर ान है अवश्य, परंतु वह अत्यंत कम हैaऔर
ase वाले आकषण इतने प्रबल ह क कोई सामान्य दबाव उसे बंद नह कर सकता। इसक तुलना क्रयाकलाप 7.6 क
ान पर बाँधे रखने
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वायु भरी स रज से क जए।
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la कर — पृष्ठ 109 se
याकलाप 7.8— आइए,ag
प्रयोग
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
खंड 7.4 पदाथ क व भन्न अव ाओं म कण कस प्रकार ग त करते ह?
याकलाप
प्र.1 आप क्या दे खते ह?
बना कसी वलोडन के रंग स्वयं पूरे जल म फैल जाता है।
आरंभ म — तली म पड़े पोटै शयम परमगनेट के दान से गुलाबी रंग क पतली धा रयाँ ऊपर और चार ओर फैलती दखाई
दे ती ह ( चत्र 7.13, क)।
कुछ समय प ात — ये धा रयाँ आपस म मल जाती ह और संपूण जल एकसमान गुलाबी रंग का हो जाता है ( चत्र 7.13,
ख)।
सावधानी: पोटै शयम परमगनेट को अपने हाथ से न छु एँ। इसे डालने के लए कसी चम्मच या स्पैचुला का उपयोग
क जए।
प्र.2 क्या आप जानते ह क ऐसा क्य होता है?
क्य क जल के कण नरंतर ग त म रहते ह। यह काय वे दो चरण म करते ह:
1. ग तशील जल-कण पोटै शयम परमगनेट के कण को उसके दाने से एक के बाद एक ख च लेते ह।
2. फर वे उन मुक्त कण से बार-बार टकराकर उन्ह इधर-उधर धकेलते ह, जब तक वे पूरे द्रव म न फैल जाएँ।
न कुछ वलो डत कया गया, न कुछ उँ डेला गया। यह फैलाव पूणत: उन कण का कया हुआ है जो वैसे भी, हर समय ग त करते ही
रहते ह — चाहे आप दे ख रहे ह या नह ।
रेत के साथ ऐसा क्य नह होता: बहुत से पदाथ म घटक कण इतनी प्रबलता से परस्पर जुड़े होते ह क जल के
कण उन्ह दूर करने म असमथ रहते ह। ऐसे पदाथ — पुस्तक का उदाहरण रेत है — जल म अघुलनशील होते ह।
पहला चरण ही वफल हो जाता है, अत: दूसरा आरंभ ही नह होता।
वै ा नक क भाँ त सोच — पृष्ठ 110
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खंड 7.4 पदाथ क व भन्न अव ाओं म कण कस प्रकार ग त करते ह?
वै ा नक क भाँ त सोच
प्र.1 इन्ह ध्यान से दे खए और तुलना क जए। आप क्या दे खते ह?
पोटै शयम परमगनेट का एक जैसा दाना तीन स्पष्ट रूप से भन्न ग तय से फैलता है, और क्रम सदै व वही रहता है।
गलास फैलने क ग त जल-कण क ग त
गरम जल सबसे तीव जल के कण अ धक तीव्रता से ग त करते ह
कक्ष के तापमान वाला जल कम तीव गरम जल क तुलना म धीमे
बफ ारा ठं डा िकया हुआ जल सबसे धीमा और भी धीमे
तीन गलास म केवल एक ही बात भन्न है — उनका तापमान। अत: यह अंतर तापमान के कारण ही होना चा हए।
नष्कष: जब ऊष्मा प्रदान क जाती है तो कण क ग त म वृ द्ध हो जाती है। तीव्र ग त वाले जल-कण पोटै शयम
परमगनेट के कण को दाने से जल्द ख चते ह और उतने ही समय म उन्ह अ धक दूर तक धकेल दे ते ह, इसी लए रंग
गरम जल के प्रत्येक भाग तक सबसे पहले पहुँचता है।
परीक्षण को नष्पक्ष र खए: तीन गलास एक ही आकार के ह , तीन म जल क मात्रा समान हो, दाने लगभग एक
ही आकार के ह और तीन म एक ही क्षण डाले जाएँ। तभी केवल तापमान बदलेगा और तुलना साथक होगी।
प्र.2 चत्र के आरेखन ारा इसे दशाने का प्रयास क जए।
अ े चत्र म तीन गलास एक ही क्षण के, अगल-बगल दखाए जाने चा हए, ता क तुलना एक ही दृ ष्ट म स्पष्ट हो जाए। बनाइए
और नामां कत क जए:
तीन गलास, जन पर गरम जल, कक्ष के तापमान वाला जल और बफ ारा ठं डा कया हुआ जल लखा हो;
प्रत्येक क तली म पोटै शयम परमगनेट का दाना;
गुलाबी रंग गरम जल वाले गलास के बड़े भाग म, कक्ष के तापमान वाले म मध्यम भाग म और ठं डे जल म केवल दाने के आस-
पास थोड़े-से भाग म;
कुछ कण के पास छोटे तीर, जो उनक ग त दशाएँ — सबसे लंबे तीर गरम जल वाले गलास म।
इसे इस प्रकार बनाया जा सकता है:
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
एक जैसा दाना, एक जैसा समय
गरम जल कक्ष के तापमान पर बफ से ठंडा जल
सबसे तीव फैलाव कम तीव फैलाव सबसे धीमा फैलाव
बगनी पट्ट = पोटै शयम परमगनेट का दाना; गुलाबी बदु = समान समय के बाद उसके कण। जल जतना गरम है, उसके कण उतनी ही
तीव्रता से ग त करते ह और रंग उतनी ही दूर तक पहुँचता है।
चत्र पर सही नामांकन क जए: गुलाबी बदु उन कण को नरू पत करते ह जो दे खे जाने के लए बहुत ही सूक्ष्म
ह। कणीय मॉडल का चत्र सदै व कसी वचार का अत्य धक आव धत चत्र होता है — वह आँख से दखने वाला दृश्य
नह होता।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 110
खंड 7.4 पदाथ क व भन्न अव ाओं म कण कस प्रकार ग त करते ह?
प्र.1 गैस के जन कण को हम नग्न आँख से नह दे ख सकते ह उनक ग त को हम कैसे दशा सकते ह?
अप्रत्यक्ष रूप से — ऐसी वस्तु का अवलोकन करके जसे हम दे ख या अनुभव कर सकते ह और जसे वे अदृश्य गैस-कण इधर-
उधर धकेलते ह।
अध्याय ऐसे तीन उपाय दे ता है:
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
उपाय हम क्या अनुभव कर अदृश्य कण के वषय म यह क्या दशाता है
सकते ह
गैस जारों में ध आ
ु ँ जार ‘अ’ से जार ‘ब’ म वायु म नलं बत धुएँ के सूक्ष्म कण से गैस के अदृश्य कण टकराते ह और
(ि याकलाप 7.5) फैलता धूसर धुआँ उनक ग त हम गैस-कण क ग त का अवलोकन करने म सहायता करती है
बंद गैस जार में आयोडीन पूरे जार को भरती बगनी गैस के कण सभी दशाओं म ग त करते ह और संपूण उपलब्ध ान घेर लेते ह
वाष्प (िचत्र 7.8) वाष्प
जलती हईु अगरब ी कक्ष के दूसरे कोने तक वायु के कण नरंतर ग त कर रहे ह और सुगंध के कण को पूरे कक्ष म फैला दे ते
(ि याकलाप 7.9) पहुँचती सुगंध ह
यह प्रमाण क्य माना जाता है: धुआँ स्वयं तैरता नह और सुगंध स्वयं चलती नह । कोई है जो उन्ह धकेल रहा है,
जो कक्ष म सवत्र है और जो कभी रुकता नह । नरंतर ग तशील वायु-कण ही वह व्याख्या है जो इन सब बात म ठ क
बैठती है।
याकलाप 7.9— आइए, ात कर — पृष्ठ 110
खंड 7.4 पदाथ क व भन्न अव ाओं म कण कस प्रकार ग त करते ह?
याकलाप
प्र.1 क्या आप दूर से इसक सुगंध का अनुभव करते ह?
हाँ — यद्य प तुरंत नह । कुछ क्षण प्रतीक्षा क जए और सुगंध कक्ष के दूसरे छोर पर भी अनुभव होने लगती है।
जलाने के तुरंत बाद: सुगंध केवल अगरबत्ती के आस-पास ही अनुभव होती है।
कुछ समय प ात: आप पूरे कक्ष म इसक सुगंध का अनुभव कर सकते ह।
ऐसा इस लए होता है क्य क सुगंध के कण फैलकर पूरे कक्ष को भर दे ते ह। वे अपने आप यात्रा नह करते: वायु के कण नरंतर ग त
कर रहे ह, वे सुगंध के कण से टकराते ह और उन्ह कक्ष म चार ओर फैलने म सहायता करते ह।
इसम कुछ क्षण क्य लगते ह, तत्काल क्य नह : सुगंध का कण सीधी रेखा म आपक नाक तक नह उड़ता। हर
दशा से आते वायु-कण उसे बार-बार धकेलते ह, अत: वह लंबे और टे ढ़े-मेढ़े माग से होकर कक्ष पार करता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 111
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त
a g l AglaSem · NCERT Solutions
खंड 7.4 पदाथ क व भन्न अव ाओं म कण कस प्रकार ग त करते ह? — क्या आपने कभी सुना है…
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क्या आप दै नक जीवन से संबं धत ऐसी अन्य प र तयाँ साझा कर सकते ह जनम आपने कसी गैस के कण
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प्र.1
l a seक ग त का अनुभव कया हो?
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o mान से दूसरे ान तक बना कसी के ले जाए पहुँच जाते ह,
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हाँ — ऐसा प्र त दन अनेक बार होता है। प्रत्येक त म कण एक
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क्य क वायु के कण नरंतर ग त करते ह और उन्ह धकेलतेeरहते
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दै नक जीवन क त
agl क्या ग त कर रहा है, और आपको कैसे पता चलता है
भोजन के कण पूरे घर की वायु में फै ल जाते है ं .com
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रसोई में दाल के छौंक की सुग ंध का दू र वाले कमरे तक पहच
ु ँ ना
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. comमें जलाया गया कपूर या अगरब ी उसके कण पत्येक व्यिक्त तक gपहlचु ँ जाते है,ं ठीक ि याकलाप 7.9
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मंिदर के एक कोने
की भाँित
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a कक्ष के एक िसरे पर पयुक्त मच्छर भगाने वाली दवा या िफनाइल गंध शीघ ही पूरे कक्ष में उपिस्थत हो जाती है
m गैस स्वयं फै ल जाती है — इसीिलए उसमें तीव गंध िमलाई ही जाती है a s
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दू स रे कमरे से ही रसोई गैस के िरसाव की गंध का अनुभव होना
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g l a दव से बनी वाष्प वायु में फै लकर वहाँ तक पहचु ँ जाती है
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कलाई पर लगाया गया इत्र दू र खड़े व्यिक्त को भी अनुभव होना
रसोई में कटा हआ
ु प्याज दरवाज़े पर खड़े व्यिक्त की आँखों में जलन याज के कण वायु के माध्यम से पूरे कक्ष में फै ल जाते है ं
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कर दे ना
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se की ओर फै लते है ं
कण दुकान से चारों िदशाओं मेaं बाहर
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गली में मुड़ने से पहले ही गरम जले िबयों की सुग ंध आ जाना
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agl क्या आपने कभी सुना है… पुस्तक का अपना उदाहरण, जसम द्रव्य क कणीय प्रकृ त काम करती है: तेल के धब्बे
वाले कपड़ को साबुन से धोते समय साबुन के अनेक कण तेल के कण को चार ओर से घेर लेते ह। साबुन के कण
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का एक सरा तेल से जुड़ जाता है और दूसरा जल के साथ, जससे तेल बाहर नकल आता है और धुल जाता है ( चत्र
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7.15)।
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ज ासा बनाए रख — पृष्ठ 113
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय के अंत का प्रश्न-समूह (पृष्ठ 114 तक)
ज ासा बनाए रख
प्र.1 सही वकल्प चु नए— ठोस पदाथ और द्रव म मूल अंतर यह है क घटक कण (क) ठोस पदाथ म सुसंकु लत
होते ह जब क द्रव म र होते ह। (ख) ठोस पदाथ म एक दूसरे से अ धक दूर होते ह और द्रव म उनक नयत
त होती है। (ग) ठोस पदाथ म सदै व ग त करते रहते ह और द्रव म उनक नयत त होती है। (घ) ठोस
पदाथ म सुसंकु लत होते ह और द्रव म एक ान से दूसरे ान तक ग त करते ह।
(घ) ठोस पदाथ म सुसंकु लत होते ह और द्रव म एक ान से दूसरे ान तक ग त करते ह।
केवल यही कथन दोन भाग म सही है। ठोस म कण दृढ़ता से संकु लत होते ह और अत्यंत प्रबल आकषण बल ारा नयत
तय पर बँधे रहते ह, अत: वे केवल कंपन कर सकते ह। द्रव म आकषण कुछ दुबल और अंतराकणीय ान कुछ अ धक होता
है, अत: कण एक-दूसरे के पास से होकर ग त कर सकते ह — इसी लए आप जल म अँगुली घुमा सकते ह, पत्थर म नह ।
शेष वकल्प क्य गलत ह:
(क) — पहला भाग सही है, परंतु द्रव के कण र कदा प नह होते; उन्ह क ग त पूरे गलास म पोटै शयम
परमगनेट को फैलाती है।
(ख) — दोन भाग उलटे ह। ठोस के कण दूर नह , नकट होते ह; और नयत त द्रव म नह , ठोस म होती
है।
(ग) — ठोस के कण एक ान से दूसरे ान तक ग त करते ही नह , और द्रव के कण क कोई नयत त
नह होती।
प्र.2 नम्न ल खत म से कौन-से कथन सत्य ह? असत्य कथन को सत्य कथन के रूप म ल खए। (क) बफ का जल म
पघलना कसी ठोस का द्रव म रूपांतरण का एक उदाहरण है। (ख) गलन प्र या म रूपांतरण के समय
अंतराकणीय आकषण म कमी होती है। (ग) ठोस पदाथ क एक न त आकृ त और न त आयतन होता है।
(घ) ठोस पदाथ म अंतराकणीय अन्योन्य याएँ अ त प्रबल होती ह और अंतराकणीय ान अ त सूक्ष्म होते ह।
(ङ) जब हम कक्ष के कसी कोने म कपूर को गरम करते ह तो उसक सुगंध कक्ष के सभी कोन म पहुँच जाती है।
(च) गरम करने पर हम कपूर को ऊजा दे रहे ह और यह ऊजा गंध के रूप म मुक्त होती है।
कथन (क), (ख), (ग), (घ) और (ङ) सत्य ह। केवल (च) असत्य है।
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कथन सत्य / कारण
असत्य
(क) सत्य बफ ठोस है और जल द्रव, अत: बफ का पघलना ठ क वही प रवतन है जो चत्र 7.4 म दशाया गया है
(ख) सत्य गरम करने पर कंपन इतने तीव्र हो जाते ह क कण अपनी नयत त छोड़ने लगते ह; अंतराकणीय दूरी बढ़ती
है और आकषण बल दुबल हो जाते ह
(ग) सत्य प्रबल आकषण और न्यूनतम अंतराकणीय ान प्रत्येक कण को उसके ान पर बाँधे रखते ह, अत: ठोस
अपनी आकृ त और आयतन दोन बनाए रखता है
(घ) सत्य यही ठोस अव ा के दो मूल लक्षण ह; इन सूक्ष्म ान म कुछ भी वद्यमान नह होता, वायु भी नह
(ङ) सत्य वही जो आप क्रयाकलाप 7.9 म अगरबत्ती के साथ दे खते ह — कण पूरे कक्ष म फैल जाते ह
(च) असत्य आपक नाक तक ऊजा नह , कपूर के कण पहुँचते ह
(च) का सही रूप: गरम करने पर हम कपूर को ऊजा दे रहे ह। यह ऊजा उसके कण क ग त इतनी बढ़ा दे ती है क वे ठोस से
मुक्त होकर कक्ष क वायु म फैल जाते ह; हम जो गंध अनुभव होती है वह इन्ह कपूर-कण के नाक तक पहुँचने से होती है, ऊजा के
गंध के रूप म मुक्त होने से नह ।
मूल कथन गलत क्य है: गंध ऊजा का कोई रूप नह है। यह कसी पदाथ के वास्त वक कण के हमारी नाक तक
पहुँचने पर होने वाली अनुभू त है। द गई ऊजा का काम अलग है — वह कण को ठोस से मुक्त करती है और उन्ह
ग तशील बनाए रखती है।
प्र.3 सत्यता स हत सही उत्तर का चयन क जए। य द हम कसी कुस से सभी घटक कण हटा पाते तो क्या होता? (क)
कुछ भी नह बदलता (ख) कण क हा न के कारण कुस का भार कम हो जाता (ग) कुस का कुछ भी नह बचता
(ग) कुस का कुछ भी नह बचता।
सत्यता (औ चत्य)। कुस कोई ऐसी वस्तु नह है जो कण को अपने भीतर रखती हो, जैसे डब्बा कंच को रखता है। कुस स्वयं
घटक कण क एक वृहत संख्या ही है जो अंतराकणीय आकषण ारा जुड़ी हुई कुस के आकार म व्यव त है। उसक लकड़ी,
उसका भार, उसक कठोरता और उसक आकृ त — सब उन्ह कण और उनके बीच के बल के गुणधम ह।
प्रत्येक कण हटा द जए तो कुस बनने के लए कोई पदाथ ही शेष नह रहेगा — न लकड़ी, न पाए, न बैठने का भाग, न भार, कुछ
भी नह । अंतराकणीय ान भी शेष नह रहगे, क्य क जहाँ कण ही न ह वहाँ कण के बीच का ान हो ही नह सकता।
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अन्य वकल्प क्य वफल ह:
(क) यह मानता है क कुस अपने कण से अलग कोई अ त रक्त वस्तु है जो स्वयं बनी रह सकती है। पूरा
अध्याय दखाता है क ऐसा नह है: चॉक के टु कड़े को पयाप्त तोड़ते जाइए तो अंत म उसके कण ही बचते ह,
और कुछ नह ।
(ख) यह कण को कुस का एक भाग मात्र मानता है, मानो उन्ह हटाने पर हल्क कुस बच जाएगी। परंतु वे कुस
का सब कुछ ह। कसी वस्तु का सब कुछ हटा दे ने पर उसका हल्का रूप नह बचता।
प्र.4 गैस सरलतापूवक क्य म श्रत हो जाती ह जब क ठोस पदाथ म श्रत नह होते। ऐसा क्य ?
क्य क गैस म कण यात्रा करने के लए स्वतंत्र ह और ठोस म नह ।
गैस म। अंतराकणीय आकषण नगण्य और अंतराकणीय ान अ धकतम होता है। प्रत्येक कण सभी दशाओं म स्वतंत्र ग त करता
है और कभी रुकता नह । दो गैस को पास लाइए और प्रत्येक के कण दूसरी के कण के बीच के वस्तृत ान म चले जाते ह,
टकराते ह, और धकेले जाकर आगे बढ़ते जाते ह — जब तक दोन एकसमान रूप से न फैल जाएँ। इसके लए न वलोडन चा हए, न
हलाना, न गरम करना — क्रयाकलाप 7.9 म सुगंध स्वयं पूरा कक्ष पार कर लेती है।
ठोस म। अंतराकणीय आकषण अत्यंत प्रबल और अंतराकणीय ान न्यूनतम होता है। प्रत्येक कण नयत त पर बँधा है और
केवल इधर-उधर कंपन कर सकता है; वह अपने पड़ो सय के पास से होकर नह जा सकता और ठोस को छोड़ भी नह सकता।
अत: दो ठोस को साथ रखने पर एक से दूसरे म कुछ भी नह जा सकता। वे केवल अपनी सतह पर स्पश करते ह।
दो चूण को मलाने का क्या? हल्द और नमक को साथ पीसने और हलाने से दाने मलते ह, कण नह । ध्यान से
दे खए तो प्रत्येक दाना अब भी शुद्ध हल्द या शुद्ध नमक ही है। दो गैस के मश्रण म ‘दाने’ जैसी कोई वस्तु होती ही
नह — वहाँ मश्रण सबसे नीचे के स्तर तक होता है।
प्र.5 जब काँच के गलास म रखा दूध मेज पर छलक जाता है तो वह बहता है और फैल जाता है परंतु काँच के गलास
क आकृ त वही रहती है। इस कथन को सत्या पत क जए।
क्य क दूध द्रव है और गलास ठोस, और दोन म यह अंतर है क उनके कण कतनी प्रबलता से बँधे ह तथा कतनी स्वतंत्रता से
ग त कर सकते ह।
दूध बहता और फैलता है। द्रव म अंतराकणीय आकषण ठोस क अपेक्षा कुछ दुबल होते ह, अत: कण एक-दूसरे के पास से होकर
ग त कर सकते ह — यद्य प केवल सी मत ान के भीतर। गलास के भीतर वह सी मत ान द वार दे ती ह और दूध गलास क
आकृ त ले लेता है। मेज पर छलकने के बाद कोई द वार नह बचती, अत: कण को रोकने वाला कुछ नह है; वे एक-दूसरे पर सरक
जाते ह और दूध पतली परत के रूप म फैलकर मेज क सतह क आकृ त ले लेता है। उसका आयतन तब भी नह बदलता —
उतना ही दूध अब ऊँचा और सँकरा न रहकर चौड़ा और उथला हो गया है।
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गलास अपनी आकृ त बनाए रखता है। ठोस म कण सुसंकु लत होते ह और अत्यंत प्रबल अंतराकणीय आकषण प्रत्येक कण को
नयत त पर रखते ह। वे केवल कंपन कर सकते ह, एक-दूसरे के पास से होकर नह जा सकते। अत: काँच क आकृ त और
आयतन न त रहते ह जन्ह गरना नह बदलता — आघात अ धक हो तो वह चटक सकता है, परंतु मेज पर बहेगा कभी नह ।
याद रखने योग्य एक वाक्य: एक ही घटना, एक ही मेज, एक ही तापमान — फर भी प रणाम पूणत: भन्न; और
दोन पदाथ म अंतर केवल उनके अंतराकणीय आकषण क प्रबलता का है।
प्र.6 जब बफ पघलती है और वह जल वाष्प म रूपांत रत होती है तो कण क व्यव ा म होने वाले प रवतन को
चत्र ारा नरू पत क जए।
उन्ह कण क तीन व्यव ाएँ, जन्ह अव ा के दो प रवतन जोड़ते ह:
बफ (ठोस) जल (द व) जल वाष्प (गैस)
गलन क्वथन
0 °C पर 100 °C पर
िनयत िस्थित, के वल कं पन सीिमत स्थान में गित सभी िदशाओं में स्वतंत्र गित
आव धत व्यव ात्मक चत्र। बाएँ से दाएँ अंतराकणीय ान बढ़ता जाता है और अंतराकणीय आकषण दुबल होता जाता है — परंतु कण
तीन म बलकुल एक जैसे ही ह।
प्रत्येक अव ा क्या दशाती है और क्य :
बफ। कण सुसंकु लत, प्रबल आकषण ारा नयत तय पर बँधे। वे केवल कंपन कर सकते ह। अंतराकणीय ान न्यूनतम,
अत: बफ क आकृ त और आयतन न त।
गलनांक तक गरम करना। द गई ऊष्मीय ऊजा आकषण बल को अप्रभावी करने म लगती है। कंपन इतने तीव्र हो जाते ह क
कण अपनी नयत त छोड़ दे ते ह; अंतराकणीय दूरी म अल्प वृ द्ध होती है, आकषण दुबल हो जाते ह और बफ जल बन
जाती है।
जल। कण कुछ वरल संकु लत, ग तशील — परंतु फर भी एक-दूसरे के नकट और सी मत ान के भीतर। आयतन न त,
आकृ त न त नह ।
क्वथनांक तक गरम करना। कण क ग त इतनी तीव्र हो जाती है क वे एक-दूसरे से दूर हट जाते ह, आकषण समाप्तप्राय हो
जाते ह और कण द्रव से मुक्त हो जाते ह।
जल वाष्प। आकषण नगण्य, अंतराकणीय ान अ धकतम, कण सभी दशाओं म स्वतंत्र ग त करते ह। न आकृ त न त, न
आयतन।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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कॉपी म बनाते समय: तीन बॉक्स म एक ही आकार के, एक ही संख्या म वृत्त बनाइए। बदलना केवल उनका
अंतराकणीय ान और व्यव ा चा हए। गैस के लए बड़े वृत्त बनाना यह कहेगा क गरम करनेeपर
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जाते ह, जो सही
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aक्या आप जानते ह? जल को वाष्प बनने के लए 100 °C तक पहुँचना आवश्यक नह । वाष्प का नमाण प्रत्येक
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तापमान पर, धीरे-धीरे और केवल सतह से होता रहता है — यही धीमी प्र क्रया वाष्पन है, और इसी कारण छलका
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हुआ जल साधारण दन म भी सूख जाता है।
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प्र.7 नम्न ल खत म उप त कण को नरू पत करता हुआ चत्र आरे खत क जए — (क) ऐलु म नयम प णका
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(ख) ग्लसरीन (ग) मेथेन गैस
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a ऐलु म नयम प णका ठोस है, ग्लसरीन द्रव और मेथेन गैस — अत: तीन चत्र वही तीन मानक व्यव ाएँ ह, एक ही पैमाने पर
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बनाई गईं।
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(क) ऐलुिमिनयम पिणका
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ठोस — संकुिलत और िनयत द व — कुछ अिधक स्थान गैस — दूर-दूर, स्वतंत्र
तीन बॉक्स एक ही आकार के ह और उनम कण भी.c
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एक ही आकार के ह। भन्न केवल अंतराकणीय ान और ग त क स्वतंत्रता है।
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पदाथ अव ा चत्र कैसे बनाएँ क्य
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ठोस
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एक जैसे वृत्त, नय मत पं क्तय म लगभग स्पश अंतराकणीय आकषण अ धकतम, ान न्यूनतम,
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ऐलुिमिनयम
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पिणका करते हुए, पूरे बॉक्स को भरते हुए कण केवल नयत त पर कंपन करते ह
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वही वृत्त, कुछ वरल और अ नय मत रूप से रखे आकषण ठोस से कुछ दुबल; कण ग त करते ह,
a हुए, फर भी नकट और बॉक्स को भरते हुए परंतु केवल सी मत ान के भीतर
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गैस
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मेथेन गैस केवल चार-पाँच वृत्त, दूर-दूर बखरे हुए, बीच म आकषण नगण्य, अंतराकणीय ान अ धकतम,
बड़े रक्त
m .ान कण सभी दशाओं म स्वतंत्र ग त करते ह
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दो भूल जनसे बच: गैस के कण को ठोस के कण से बड़ा न बनाइए — कण प्रत्येक अव ा म एक जैसे ही होते
ह। और रक्त ान को छायां कत न क जए: अंतराकणीय ान म कुछ भी वद्यमान नह होता, वायु भी नह ।
प्र.8 चत्र 7.16 (क) का अवलोकन क जए जसम एक ऐसी मोमबत्ती का चत्र है जसे कुछ समय जलने के प ात
बुझाया गया है। चत्र म मोम क व भन्न अव ाओं को पहचा नए और चत्र 7.16 (ख) म दशाई गई कण क
व्यव ा के साथ उनका मलान क जए।
(क)
(ख)
िचत्र 7.16
चत्र 7.16 — (क) पाठ्यपुस्तक के छाया चत्र का पुनः चत्रण (redrawn sketch): अभी-अभी बुझाई गई मोमबत्ती
— काली बत्ती से उठती धुए ँ क लक र, बत्ती के चार ओर ग े म जमा मोम, कनार से बहकर उतरा मोम तथा स्टड पर
खड़ी मोमबत्ती। (ख) कण क तीन व्यव ाएँ।
अभी-अभी बुझाई गई मोमबत्ती म एक ही पदाथ — मोम — क तीन अव ाएँ एक साथ दखाई दे ती ह।
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चत्र 7.16 (क) म कहाँ दखता है मोम क चत्र 7.16 (ख) क कौन-सी व्यव ा
अव ा
मोमब ी का िपंड, तथा िकनारों से बहकर ठोस वह बॉक्स जसम कण सुसंकु लत होकर उसे पूरा भर दे ते ह (ऊपर बाईं
जम चुक ा सफे़ द मोम ओर वाला)
ब ी के चारों ओर बने ग े में िपघले मोम दव वह बॉक्स जसम कण कुछ वरल संकु लत ह, रक्त ान कुछ अ धक
का तालाब तथा नीचे बहती बूदँ े ं ह पर बॉक्स फर भी भरा है (ऊपर दाईं ओर वाला)
अभी-अभी बुझी ब ी से उठती सफ़े द लट गैस (मोम की वह बॉक्स जसम केवल कुछ ही कण, दूर-दूर ह और अ धकांश भाग
वाष्प) रक्त है (नीचे वाला)
एक ही मोमबत्ती तीन अव ाएँ कैसे दखाती है: ज्वाला बत्ती के पास के ठोस मोम को गरम करती है। उसके
कण क ऊष्मीय ऊजा बढ़ती है, अंतराकणीय आकषण दुबल हो जाते ह और मोम पघलकर वह तालाब बना दे ता
है जो आप दे खते ह। वही द्रव बत्ती म ऊपर चढ़ता है, और गरम होकर मोम क वाष्प म बदल जाता है — वस्तुतः
यही वाष्प जलती है, ठोस मोम नह । ज्वाला बुझा द जए तो बची हुई वाष्प बना जले नकल जाती है और वही
सफ़ेद लट के रूप म दखती है। ठं डा होने पर पूरा क्रम उलटा चलता है: वाष्प संघ नत होती है, तालाब जम जाता है
और कनार पर ठोस मोम रह जाता है।
स्वयं जाँ चए: मोमबत्ती बुझाने के तुरंत बाद जलती हुई तीली उस सफ़ेद लट म ले जाइए। ज्वाला लट के सहारे नीचे
उतरकर बत्ती को पुनः जला दे ती है — यही प्रमाण है क वह लट धुआँ नह , मोम क वाष्प है।
प्र.9 समुद्र के जल का स्वाद नमक न क्य होता है जब क इसम नमक दखाई भी नह दे ता है? समझाइए।
क्य क नमक घुला हुआ है — वह पृथक घटक कण के रूप म जल म फैला हुआ है और वे कण दे खे जाने के लए बहुत ही सूक्ष्म
ह।
घुलने पर नमक अपने घटक कण म टू ट जाता है। ये कण अत्यंत सूक्ष्म होते ह, इतने क उन्ह कसी सामान्य सूक्ष्मदश से भी नह
दे खा जा सकता, और वे जल के कण के बीच पहले से वद्यमान अंतराकणीय ान म चले जाते ह। इसके बाद जल-कण क
नरंतर ग त उन्ह पूरे जल म एकसमान रूप से फैला दे ती है। ऐसा हो जाने पर नमक का कोई दाना कह नह बचता जसे आँख खोज
सके — परंतु समुद्र क प्रत्येक बूँद म नमक के कण उप त रहते ह और जीभ उन्ह तत्काल पहचान लेती है।
यह ठ क क्रयाकलाप 7.2 है, बहुत बड़े पैमाने पर। दो छोटे चम्मच चीनी एक गलास जल म पूणतः लुप्त हो जाती है, फर भी सबसे
ऊपरी सतह से लया गया चम्मच मीठा लगता है। क्रयाकलाप 7.7 दूसरा प्रमाण जोड़ता है: स्तर ‘ब’ से घटकर ‘स’ पर आ जाता है,
जो दशाता है क घुले हुए कण पहले से वद्यमान ान म समा गए ह।
सामान्य नष्कष: अदृश्य होने का अथ अनुप त होना नह है। दे खना द्रव्य को पहचानने का केवल एक उपाय
है; स्वाद, गंध और आयतन म प रवतन भी उतने ही उपाय ह — और इस अध्याय म यही उपाय काम आते ह।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? यह नमक वहाँ उसी माग से पहुँचा है जससे समुद्र तट के कंकड़। बहती न दयाँ चट्टान को
घसती ह (पृष्ठ 99); रेत और मट्ट के साथ वे घुले हुए लवण भी समुद्र तक ले जाती ह। समुद्र से जल वाष्पन ारा
उड़ता रहता है, परंतु नमक के कण वह रह जाते ह — इस लए समुद्र और अ धक खारा होता जाता है।
प्र.10 चावल के दाने और चावल के आटे को जब व भन्न पात्र म रखा जाता है तो वे पात्र का आकार ले लेते ह। क्या वे
ठोस ह या द्रव? व्याख्या क जए।
दोन ठोस ह। पात्र क आकृ त ढे र लेता है, पदाथ नह ।
आँख से नह , कणीय कसौट से जाँ चए:
एक दाने को दे खए। चावल के एक दाने क अपनी न त आकृ त और अपना न त आयतन है, और वह उन्ह हर जगह
बनाए रखता है। उसके घटक कण सुसंकु लत ह, प्रबल आकषण ारा नयत तय पर बँधे ह और केवल कंपन कर सकते ह।
ठोस क यही प रभाषा है। चावल का आटा उसी को और महीन पीसा हुआ रूप है — उसका प्रत्येक कण अब भी ठोस चावल
का छोटा टु कड़ा ही है, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 7.1 म पसी हुई चॉक का प्रत्येक कण चॉक ही था।
पू छए क वास्तव म ग त कौन कर रहा है। पात्र को झुकाने पर दाने एक-दूसरे पर लुढ़कते ह। प्रत्येक दाने के भीतर कुछ भी
अपने ान से नह हलता। सच्चे द्रव म कण स्वयं एक-दूसरे के पास से सरकते ह और उनके भीतर कोई और छोट वस्तु होती
ही नह ।
फर से उँडे लए। चावल वही गने जा सकने वाले दाने बनकर वापस आ जाता है, अप रव तत। उँ डेला हुआ जल पृथक, एक
जैसे टु कड़ के रूप म वापस नह आता।
कसौट चावल के दाने / चावल का आटा स ा द्रव, जैसे जल
क्या ढे र लगाया जा सकता है? हाँ — चावल या आटे का ढे र ढलवाँ सतह बनाए नह — बहकर सतह समतल कर
रखता है लेता है
क्या भीतर िदखाई दे ने वाले िरक्त स्थान है?ं हाँ, दानों के बीच वायु से भरे िरक्त स्थान नह , द्रव सतत होता है
क्या पत्येक टुक ड़ा अपनी आकृ ित बनाए हाँ, पत्येक दाना नह , जल म टु कड़े होते ही नह
रखता है?
यह प्रश्न अ ा भ्रम क्य उत्पन्न करता है: बहना और पात्र को भर दे ना द्रव जैसा व्यवहार लगता है, अत: केवल
उसी से नणय करने का मन होता है। परंतु ये गुण छोटे ठोस टु कड़ के ढे र के ह। अव ा का नणय इस बात से
होता है क घटक कण कस प्रकार व्यव त और बँधे ह — और चावल म वे नयत तय पर बँधे ह।
पृष्ठ 98 से जो ड़ए: यह वही तक है जो रेत का ढे र लगाने वाले आरं भक प्रश्न म था। रेत उँ डेली जा सकती है, फर
भी रेत नस्संदेह ठोस है।
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर — पृष्ठ 115
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समाज– व ान अंतर वषयक प रयोजनाएँ
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर
प्र.1 एक बोतल के संक ण भाग (बोतल के मुँह) पर एक गुब्बारा लगाइए एवं बोतल को गरम जल म रख द जए।
इसके साथ ही जाँच क जए क क्या होगा?
गुब्बारा स्वयं फूल जाएगा और बोतल के मुँह पर तनकर खड़ा हो जाएगा — जब क आपने उसम फूँक भी नह मारी।
कैसे कर। एक खाली, सूखी बोतल ली जए और गुब्बारे के मुँह को उसक गदन पर इतना कसकर चढ़ाइए क कह से वायु न नकल
सके। बोतल को गरम जल से भरे कसी बतन म इस प्रकार खड़ा क जए क उसका अ धकांश भाग जल म डू बा रहे। एक-दो मनट
गुब्बारे को दे खए। फर बोतल को नकालकर ठं डे जल म र खए और पुन: दे खए।
आप क्या दे खगे।
बोतल कहाँ रखी है गुब्बारा
गरम जल में धीरे -धीरे फू लकर तन जाता है
इसके बाद ठं डे जल में िपचककर पुनः ढीला पड़ जाता है
ऐसा क्य होता है: बोतल खाली नह है — वह वायु से भरी है, और वायु कण से बना द्रव्य है। गरम जल उस वायु
को ऊष्मा दे ता है, अत: उसके कण क ऊष्मीय ऊजा बढ़ती है और वे तीव्रता से ग त करने लगते ह। गैस म
अंतराकणीय आकषण नगण्य होते ह, अत: तीव्र ग त वाले कण और अ धक दूर-दूर फैलकर अ धक ान घेर लेते
ह। गैस का आयतन न त नह होता, इस लए वायु फैल जाती है और फैलने के लए एकमात्र ान गुब्बारा ही है।
बोतल को ठं डा क जए तो कण धीमे हो जाते ह, वायु कम ान घेरती है और गुब्बारा बैठ जाता है।
परीक्षण नष्पक्ष र खए: गुब्बारा गदन पर वायुरोधी होना चा हए, अन्यथा वायु काय करने के ान पर बाहर नकल
जाएगी। और ध्यान र खए क कोई नई वायु नह बनी — वही कण अ धक आयतन म फैल गए ह।
सावधानी: उबलते जल के ान पर नल का या कुछ दे र रखा हुआ गरम जल ली जए और बतन कसी वयस्क क
सहायता से ही सँभा लए।
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प्र.2 म से न मत गो लय , मो तय इत्या द के उपयोग से ठोस पदाथ , द्रव और गैस के कण को नरू पत करते
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हुए अंतराकणीय ान को दशाता हुआ एक सामान्य प्र तमान (मॉडल) अ भक ल्पत क जए और उसका सृजन
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क जए।
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बदलते केवल उनका अंतराकणीय ान और उनक ग त ह। तीनco mजैसी उथली े या डब्ब के ढक्कन ली जए ता क तीन
व ध। सभी गो लयाँ एक ही आकार क बनाइए — यही सबसे महत्वपूण नयम है, क्य क अव ा बदलने पर कण नह बदलते;
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प्र तमान क तुलना नष्पक्ष रहे।
प्र तमान कैसे बनाएँ क्या दशाना चा हए
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ठोस े को एक ही आकार क मट्ट क गो लय से, नय मत पं क्तय म लगभग न्यूनतम अंतराकणीय
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स्पश करते हुए भर द जए और उन्ह चपका द जए ता क कोई हल न सके संकुलन, कण नयत त पर
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l a se उसी े म उतनी ही गो लयाँ र खए, परंतु ढ ली और अ नय मत रूप से, बीच म ठोस से कुछ अ धक ान, कोई नयत
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a कुछ अ धक रक्त ान छोड़कर; उन्ह खसकने के लए स्वतंत्र रहने द जए व्यव ा नह , सी मत ान के भीतर ग त
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गैस े म केवल चार-पाँच गो लयाँ, दूर-दूर र खए और े को धीरे से हलाइए ता क अ धकतम अंतराकणीय ान, स्वतंत्र ग त,
वे पूरी े म लुढ़कती रह
m . संपूण उपलब्ध ान म फैलाव
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नमूना प्रस्तु त। तीन े पर ठोस, द्रव और गैस ल खए और प्रत्येक के नीचे एक वाक्य: “आकषण प्रबलतम, ान न्यूनतम, केवल
कंपन”; “आकषण कुछ दुबल, ान कुछ अ धक, सी मत ान म ग त”; “आकषण नगण्य, ान अ धकतम, सभी दशाओं म
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स्वतंत्र ग त”।
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अपने प्र तमान क स्वयं जाँच क जए। उससे तीन प्रश्न पू छए: क्या तीन े म गो लयाँ एक ही आकार क ह?
s m रक्त ान वास्तव म खाली ह, उनम कुछ भरा या बनाया हुआ नह ? क्या ठोस वाली े म हल्के कंपन के
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gl अ त रक्त कोई ग त सचमुच संभव नह है? इनम से कसी म भी वफल प्र तमान गलत वचार सखाएगा।
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om कण मट्ट क गो लय से कल्पनातीत रूप से सूक्ष्म होते ह,
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mतमान व्यव ा और अंतराकणीय ान अ तरह दखा दे ता है;
एक सीमा जो स्पष्ट कहनी चा हए: वास्त वक
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sे।eप्र
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रंगहीन होते ह और कभी वराम नह लेत
पैमाना और नरंतर ग त वह नहagदखा सकता।
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o mव भन्न तापमान पर ठोस पदाथ , द्रव एवं गैस के कण का अ भनय क a
l seऔर कण क ग त दशाते हुए
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प्र.3 जए
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व ध। पूरी कक्षा कण बन जाए और फश पात्र। चॉक या रस्सी से पात्र क सीमा बनाइए और तीन दृश्य म उसका आकार समान
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र खए, ता क जो बदले वह अंतराकणीय ान ही हो।
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दृश्य कहाँ खड़े ह कैसे ग त कर
ठोस, ठं डा कंधे से कंधा मलाकर नय मत पं क्तय म, पैर र; केवल अपने ान पर हल्का-सा ह लए — पड़ोसी से ान
च ह्नत क्षेत्र को भरते हुए कभी न बद लए
ठोस को गरम वही पं क्तयाँ, वही ान ढोल क ग त बढ़ने के साथ अ धका धक ज़ोर से ह लए, जब तक
करना कुछ वद्याथ अपना ान छोड़ न द
दव अब भी नकट, परंतु पं क्तय म नह धीरे-धीरे च लए, एक-दूसरे के पास से नकलते हुए, च ह्नत क्षेत्र के
भीतर ही र हए
गैस दूर-दूर फैलकर तेज़ी से, सीधी दशाओं म, सभी ओर च लए — कक्ष क द वार तक;
अब चॉक क सीमा लागू नह
सूत्रधार के लए नमूना संवाद: “हम बफ के कण ह। हम हमारे पड़ो सय ने कसकर थाम रखा है, हम केवल अपने ान पर काँप
सकते ह। ऊष्मा आ रही है … हम और ज़ोर से काँप रहे ह … पकड़ टू ट , अब हम जल ह — अब हम चल सकते ह, पर साथ-साथ
ही रहते ह। और ऊष्मा … अब हम इतनी तेज़ी से चल रहे ह क नकल ही भागे। अब हम वाष्प ह। हम पूरे कक्ष म भर गए ह।”
केवल अव ा नह , तापमान भी दखाइए: ग त ढोल या ताली से नयं त्रत क जए। तेज़ ताल = अ धक ऊष्मीय
ऊजा = तीव्र ग त वाले कण। यही एक यु क्त इस नृत्य को अध्याय का सही कथन बना दे ती है — ऊष्मा प्रदान करने
पर कण क ग त बढ़ जाती है।
प्र.4 कक्षा म चचा क जए क गैस वस्तार कर सकती ह और समस्त उपलब्ध ान को पूण रूप से भर दे ती है। गैस
का यह गुणधम लाभदायक है या हा नकारक?
दोन — यह गुणधम स्वयं म न अ ा है, न बुरा। महत्व इस बात का है क फैलने वाली गैस कौन-सी है और कहाँ फैल रही
है। यही पक्ष रखने योग्य है, और दोन ओर से तक उसी भौ तक से आने चा हए: गैस म अंतराकणीय आकषण नगण्य, अंतराकणीय
ान अ धकतम और कण सभी दशाओं म स्वतंत्र होते ह, अत: कह भी मुक्त हुई गैस तब तक फैलती है जब तक संपूण उपलब्ध
ान न घर जाए।
लाभदायक हा नकारक
रसोई गैस के िसिलंडर का िरसाव दू सरे कमरे से ही सूँघ िलया जाता है उसी िरसाव से स्वयं गैस भी पूरी रसोई में फै ल जाती है, अत: एक
— चेतावनी की गंध ख़ तरे से पहले पहच
ु ँ जाती है िचंगारी पूरे कक्ष में आग लगा सकती है
िसिलंडर से ऑक्सीजन रोगी तक एकसमान रूप से पहचु ँ ती है; शल्य कक्ष वाहनों और कारखानों का धुआँ तथा हािनकारक गैसें िचमनी के पास
में िनश्चेतक गैसें भी िवश्वसनीय रूप से फै लती है ं नहीं ठहरतीं — वे पूरे नगर पर फै ल जाती है ं
अगरब ी, कपूर या इत्र की सुगंध पूरे कक्ष अथवा मंिदर के कोने-कोने िकसी कारखाने में गैस का िरसाव आस-पास की बिस्तयों तक फै ल
तक पहचु ँ ती है (ि याकलाप 7.9) सकता है, इससे पहले िक उसे रोका जा सके
वायु स्वयं िनरंतर िमलती-जुल ती रहती है, अत: ऑक्सीजन िबना िकसी पराली या कू ड़ ा जलाने का धुआँ उस खेत से बहुत दू र तक फै ल
पंप के घर के हर कमरे तक पहचु ँ ती है जाता है जहाँ वह जलाया गया था
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चचा कैसे कराएँ। कक्षा को दो भाग म बाँ टए। प्रत्येक पक्ष को (क) कोई वास्त वक त बतानी होगी, (ख) उसे अंतराकणीय
ान, आकषण और कण क ग त के आधार पर समझाना होगा, तथा (ग) दूसरे पक्ष के कसी एक तक का उत्तर दे ना होगा। “गैस
ख़तरनाक होती ह” या “गैस उपयोगी होती ह” जैसे अकेले वाक्य तक के रूप म स्वीकार मत क जए — प्रत्येक दावा कणीय मॉडल
से जुड़ा होना चा हए।
मलकर पहुँचने योग्य नष्कष: गैस को एक ान पर रुकने के लए मनाया नह जा सकता, अत: उसे घेरकर
रखना ही पड़ता है। इसी लए रसोई गैस बंद स लडर म बेची जाती है, प्रयोगशालाओं म आयोडीन बंद जार म रखी
जाती है ( चत्र 7.8), कारखान म चम नयाँ और शोधक लगाए जाते ह, और इसी लए हम कहा जाता है क गैस के
रसाव को जलती हुई तीली से कभी न खोज। हम गुणधम नह बदलते; हम उसे ध्यान म रखकर व्यव ा बनाते ह।
अध्याय — एक नज़र म
प्रत्येक द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म घटक कण क बहुत बड़ी संख्या से बना होता है। ये कण इतने छोटे होते ह क इन्ह कसी सामान्य
सूक्ष्मदश से भी नह दे खा जा सकता। तोड़ने या पीसने से ये कण नह बदलते — केवल कण का एक समूह दूसरे समूह से
पृथक होता है।
कण परस्पर आकषण बल ारा जुड़े रहते ह जन्ह अंतराकणीय आकषण कहते ह। इनक प्रबलता पदाथ क प्रकृ त एवं
अंतराकणीय दूरी पर नभर करती है — दूरी म अल्प वृ द्ध भी इन बल को अत्य धक कम कर दे ती है।
इन्ह बल क प्रबलता भौ तक अव ा नधा रत करती है। ठोस म कण सुसंकु लत होते ह, आकषण प्रबलतम होता है और
कण केवल अपनी नयत त पर कंपन कर सकते ह — अत: न त आकृ त और न त आयतन। द्रव म आकषण कुछ
दुबल होता है, कण सी मत ान के भीतर ग त करते ह — न त आयतन, परंतु आकृ त न त नह । गैस म आकषण
नगण्य होता है और कण सभी दशाओं म स्वतंत्र ग त करते ह — न आकृ त न त, न आयतन।
कण के बीच अंतराकणीय ान होते ह — ठोस म न्यूनतम, द्रव म कुछ अ धक तथा गैस म अ धकतम। इन ान म कुछ
भी वद्यमान नह होता — वायु भी नह । जल म चीनी का घुलना तथा स रज म वायु का संपी डत होना, दोन इन ान के
होने का प्रत्यक्ष प्रमाण ह।
कण नरंतर ग तशील रहते ह। इसी कारण पोटै शयम परमगनेट बना वलोडन के पूरे गलास के जल को रंग दे ता है और
अगरबत्ती क सुगंध पूरे कक्ष म फैल जाती है। ऊष्मा दे ने पर यह ग त बढ़ जाती है, अत: फैलाव गरम जल म सबसे तीव्र और
बफ जैसे ठं डे जल म सबसे धीमा होता है।
अंतत: कण क ऊष्मीय ऊजा ही अव ा नधा रत करती है। गलनांक पर द गई ऊष्मीय ऊजा आकषण बल को अप्रभावी
कर दे ती है और ठोस द्रव बन जाता है; क्वथनांक पर कण द्रव से पूणतः मुक्त हो जाते ह। वाष्प का धीमा नमाण प्रत्येक
तापमान पर, केवल सतह से होता रहता है — यही वाष्पन है।
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कक्षा 8 व ान अध्याय 7 द्रव्य क कणीय प्रकृ त AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक से उदाहरण
घटक कण वह मूल इकाई िजससे िकसी पदाथ या सामग ी के बड़े खंड 7.1, पृष्ठ चॉक को नरंतर पीसते जाने पर अंत म वे ही
टुक ड़े का िनम ण होता है 100 इकाइयाँ शेष रहती ह जनसे चॉक बना था
( क्रयाकलाप 7.1)
अंतराकणीय घटक कणों के बीच का स्थान; इसमें कु छ भी िवद्यमान खंड 7.1 एवं 7.3, चीनी घुलने पर जलस्तर ‘ब’ से ‘स’ तक घट
ान नही ं होता, वायु भी नही ं पृष्ठ 101 एवं 109 जाता है ( क्रयाकलाप 7.7, चत्र 7.10)
अंतराकणीय कणों को परस्पर जोड़े रखने वाला आकषण बल; खंड 7.2, पृष्ठ लोहे के टु कड़े म प्रबलतम, जल म दुबल,
आकषण अंतराकणीय दू र ी बढ़ ने पर यह तेज़ी से घटता है 101 वायु म नगण्य
ठोस अव ा िनिश्चत आकृ ित एवं आयतन; कण सुस ंकु िलत, खंड 7.2.1, पृष्ठ लोहे क क ल, सधा नमक, पत्थर, चाबी,
आकषण पबलतम, गित के वल िनयत िस्थित पर कं पन 102 लकड़ी का गुटका, ऐलु म नयम ( चत्र 7.3)
द्रव अव ा िनिश्चत आयतन, परंत ु आकृ ित िनिश्चत नही ं; कण गित खंड 7.2.2, पृष्ठ वही 200 mL जल पात्र ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’
करते है ं पर के वल सीिमत स्थान के भीतर 104 म ( क्रयाकलाप 7.4, चत्र 7.5)
गैसीय अव ा न आकृ ित िनिश्चत, न आयतन; आकषण नगण्य, कण खंड 7.2.3, पृष्ठ धुआँ गैस जार ‘ब’ के संपूण ान को भर
सभी िदशाओं में स्वतंत्र गित करते है ं 106 दे ता है ( क्रयाकलाप 7.5, चत्र 7.7)
गलनांक वायुम ंडलीय दाब पर वह न्यूनतम तापमान िजस पर ठोस खंड 7.2.1, पृष्ठ बफ 0 °C, यू रया 133 °C, लोहा 1538
िपघलकर द व बनता है 103 °C (ता लका 7.1)
क्वथनांक वायुम ंडलीय दाब पर वह तापमान िजस पर द व खंड 7.2.2, पृष्ठ बुलबुले केवल सतह पर नह , द्रव के भीतर
उबलकर वाष्प में पिरवितत होता है 105 भी बनते ह
वाष्पन द व का वाष्प में धीमा पिरवतन, जो पत्येक तापमान पर खंड 7.2.2, पृष्ठ छलका हुआ जल कुछ समय बाद लुप्त हो
और के वल सतह से होता है 105 जाता है
तरल द व एवं गैस — दोनों पवािहत होते है ं और इनकी खंड 7.2.3, पृष्ठ एक पात्र से दूसरे म उँ डेला गया जल; गैस
िनिश्चत आकृ ित नही ं होती 106 जार म फैलता धुआँ
ऊष्मीय ऊजा कणों की ऊष्मा-ऊज ; यही तय करती है िक कण आइए, इसे ठोस म नम्न, द्रव म अ धक, गैस म
िकतनी दू र ी पर रहेगं े, अत: पदाथ की अवस्था भी दोहराएँ!, पृष्ठ सवा धक
112
नलं बत कणीय वायु में िनलंिबत धूल के सूक्ष्म कण — ये घटक कण एक सोपान ऊपर, वायु प्रदूषण क चचा म प्रयुक्त होने वाला
द्रव्य (SPM) नही ं है;ं पत्येक धूल कण स्वयं परमाणओ
ु ं एवं अणओ
ु ं की पृष्ठ 109 पद
अत्यिधक संख्या से बना होता है
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