Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: वलेय , वलायक और वलयन
का अ त संसार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
134 – 151 21 52 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 45 pages
Page 2
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · व ान · ज ासा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: वलेय , वलायक और वलयन
का अ त संसार
नमक जल म घुलकर दखाई दे ना बंद हो जाता है, चॉक का चूण नह ; चीनी का एक चम्मच घुल जाता है, दसवाँ चम्मच तली पर बैठ जाता है। इसी एक
दै नक प्रेक्षण से यह अध्याय दो बड़ी अवधारणाओं तक पहुँचता है — वलेयता, जो कसी तापमान पर वलायक क सीमा बताती है, और घनत्व, जो
इकाई आयतन म भरा द्रव्यमान है और यह तय करता है क क्या तैरेगा और क्या डू बेगा।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ज ासा (कक्षा 8) 134 – 151
खं ड प्रश्न
21 52
माध्यम
हन्द
खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 134
अध्याय का आरंभ — समुद्र तट पर नमक एक त्रत करते लोग
खोजबीन और वचार कर
प्र.1 आपको क्या लगता है क उपयुक्त चत्र म क्या हो रहा है।
अध्याय के आरंभ का चत्र, पृष्ठ 134। समुद्र-तट का एक वस्तृत दृश्य। बाईं ओर नीला-हरा समुद्र जल
गीली, समतल रेत पर फैल रहा है; दाईं ओर रेत ऊँची उठकर सूखा कनारा बनाती है। जल के कनारे गीली
रेत पर सफ़ेद पपड़ी के खुरदरे धब्बे जमे ह। चत्र के मध्य म सामने क ओर एक वृद्ध, गंजे व्य क्त सफ़ेद
धोती और चादर पहने, गोल चश्मा लगाए, नीचे झुके हुए ह; उनके बाएँ हाथ म लंबी बाँस क लाठ है और
दाएँ हाथ से वे उस सफ़ेद पपड़ी को उठा रहे ह। उनके बाईं ओर दो और लोग झुककर उन्ह सफ़ेद धब्ब क
ओर हाथ बढ़ा रहे ह। पीछे एक बड़ी भीड़ उन्ह दे ख रही है — सफ़ेद कुत और सफ़ेद टोपी पहने पुरुष, सफ़ेद
तथा हल्के रंग क सा ड़य म सर ढके स्त्रयाँ, एक गहरे रंग क बंडी पहने व्य क्त झुककर दे खता हुआ, और
एक अन्य कंधे पर सफ़ेद तौ लया डाले हुए।
अध्याय के आरंभ का चत्र, पृष्ठ 134 — यहाँ केवल वणन दया गया है; मूल चत्र के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
चत्र म लोग समुद्र तट से प्राकृ तक नमक एक त्रत कर रहे ह। पीछे समुद्र है, सामने गीली रेत पर नमक क सफेद परत जमी है और
धोती पहने एक व्य क्त झुककर मु भर नमक उठा रहा है।
इस चत्र का वज्ञान वही है जो पूरे अध्याय का है। समुद्र का जल शुद्ध जल नह है — वह एक वलयन है जसम साधारण नमक
और अन्य लवण वलेय ह तथा जल वलायक है। धूप और वायु जल को वा ष्पत कर दे ती है परंतु नमक वा ष्पत नह हो सकता।
जैसे-जैसे जल घटता है, शेष वलयन अ धक से अ धक सांद्र होता जाता है और अंततः संतृप्त हो जाता है। इसके प ात जतना भी
Page 1 of 45
Page 3
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
जल वा ष्पत होता है, उतना नमक ठोस रूप म पीछे छू ट जाता है और रेत पर सफेद क्रस्टल के रूप म दखाई दे ने लगता है। लोग
वही नमक उठा रहे ह जो समुद्र ने छोड़ दया।
ऐसा क्य होता है: वाष्पन से केवल वलायक नकलता है। घुले हुए नमक का द्रव्यमान वही रहता है जब क जल का
आयतन घटता जाता है, अतः सांद्रता नरंतर बढ़ती है — और संतृप्त हो जाने के बाद अ त रक्त नमक के पास
क्रस्टल बनकर बाहर आने के अ त रक्त कोई माग नह बचता।
क्या आप जानते ह? यह दृश्य अप्रैल 1930 क दांडी यात्रा से लया गया है, जब महात्मा गांधी दांडी के समुद्र तट
पर पहुँचकर नमक कानून तोड़ने के लए मु भर नमक उठाया था। यही वाष्पन आज भी गुजरात और त मलनाडु के
नमक क्षेत्र म तथा म णपुर के नगेल गाँव म (दे खए अध्याय के अंत का हमारी वैज्ञा नक परंपरा बॉक्स) प्रयोग होता
है।
प्र.2 क्या होता है जब आप चाय म चीनी अ धक डाल दे ते ह और वह घुलना बंद कर दे ती है? आप इस समस्या का
समाधान कस प्रकार कर सकते ह?
चाय उस तापमान पर चीनी का संतृप्त वलयन बन चुक है। अब वह और चीनी नह रख सकती, इस लए अ त रक्त चीनी कण के
रूप म प्याले क तली पर बैठ जाती है।
दो उपाय काम करगे और एक नह करेगा —
चाय को गरम क जए (या गरम चाय मलाइए)। तापमान बढ़ने पर ठोस क वलेयता बढ़ती है, अतः संतृप्त वलयन गरम
होते ही असंतृप्त क भाँ त व्यवहार करने लगता है और तली क चीनी घुल जाती है।
और चाय अथात और वलायक मलाइए। उतनी ही चीनी अब अ धक जल म फैलेगी, इस लए वलयन संतृप्त नह रह
जाएगा।
केवल वलो डत करने से कुछ नह होगा। वलोडन घुलने क क्रया को केवल तेज़ करता है, सीमा को नह बढ़ाता। सीमा पर
पहुँच जाने के बाद आप घंट चम्मच चलाइए, कण तली पर ही रहगे।
ऐसा क्य होता है: घुलने का अथ है क जल के कण चीनी के कण को क्रस्टल से ख चकर अलग कर और उन्ह
अलग-अलग बनाए रख। कसी न त तापमान पर जल के कण के पास ऊजा न त होती है, इस लए जल क
एक न त मात्रा म चीनी के केवल एक न त संख्या के कण ही अलग रखे जा सकते ह — यही वलेयता है। गरम
करने से कण को अ धक ऊजा और अ धक स्थान मलता है, अतः अ धक चीनी सँभाली जा सकती है; और जल
बढ़ाने से पकड़ने वाले कण अ धक हो जाते ह।
प्र.3 चीनी और नमक जल म क्य घुल जाते ह जब क तेल म नह घुलते? जल को एक अ ा वलायक क्य माना
जाता है?
क्य क घुलना आकषण क रस्साकशी है, और इसम जल जीत जाता है जब क तेल हार जाता है।
Page 2 of 45
Page 4
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
नमक या चीनी के दाने म कण एक नय मत व्यवस्था म एक-दूसरे से कसकर बँधे रहते ह। दाने के घुलने के लए द्रव के कण को उन
कण को एक-एक करके ख चकर अलग करना होता है और फर उन्ह अलग-अलग तथा समान रूप से फैलाए रखना होता है। जल
के कण यह कर सकते ह — जल के प्रत्येक कण का एक सरा कुछ धनात्मक और दूसरा कुछ ऋणात्मक होता है, इस लए वह
क्रस्टल क सतह के कण को पकड़ता है, ख चकर अलग करता है और उन्ह चार ओर से घेर लेता है। तेल के कण म ऐसा खचाव
नह होता। वे आपस म तो एक-दूसरे को आक षत करते ह, परंतु नमक या चीनी के कण को लगभग बलकुल नह — अतः क्रस्टल
कभी टू टता ही नह और ज्य का त्य तेल म पड़ा रहता है।
जल को अ ा वलायक क्य कहते ह:
यह पदाथ क बहुत वस्तृत श्रेणी को घोलता है — लवण, शकराएँ, ओ.आर.एस. का चूण, अनेक औष धयाँ और ऑक्सीजन
तथा काबन डाइऑक्साइड जैसी गैस भी।
यह सामान्य तापमान क पूरी परास म द्रव रहता है, सस्ता है, वषैला नह है और आग नह पकड़ता।
यह जीवधा रय म घुले पदाथ का वहन करता है — पौध म रस, शरीर म रु धर और आँत म पचा हुआ भोजन।
क्या आप जानते ह? आयुवद, सद्ध और अन्य भारतीय च कत्सा पद्ध तयाँ शता ब्दय से औष ध संरूपण बनाने म
मुख्य वलायक के रूप म जल का उपयोग करती आई ह, और जहाँ कोई पदाथ उनम अ धक घुलता है वहाँ तेल, घी
और दूध का भी।
प्र.4 जल क बोतल गोलाकार होने क अपेक्षा प्राय: लंबी और बेलनाकार आकृ त क क्य होती ह?
क्य क लंबा बेलन सरलता से खड़ा रहता है, सरलता से पकड़ म आता है और सरलता से रखा जाता है, जब क गोला इनम से कुछ
भी नह कर पाता।
आवश्यकता लंबा बेलन गोला
मेज़ या बैग में खड़ा समतल वृ ाकार तली — सीधा खड़ ा रहता है लुढ़क जाता है; अलग आधार चा हए
रहना
एक हाथ की पकड़ कम व्यास , उँ गिलयाँ चारों ओर िमल जाती है ं उतने ही आयतन के लए व्यास बड़ा — पकड़ना
क ठन
रै क या िडब्बे में रखना बेल न अगल -बगल सटकर रखे जाते है,ं स्थान कम व्यथ गोल के बीच बड़े खाली स्थान छू ट जाते ह
होता है
शेष जल का अनुम ान आयतन = πr²h, अतः जल की ऊँ चाई सीधे मात्रा बताती है सबसे चौड़े भाग के पास स्तर से कुछ पता नह
चलता
भरना और उँ डेल ना एक िसरे पर सँक री गद न पवाह को िनयंित्रत करती है बना छलकाए उँ डेलना क ठन
Page 3 of 45
Page 5
as e
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
.
ऐसा क्य होता है: गोले का एक लाभ अवश्य है — कसी दए गए आयतन के लए उसम सामग्री सबसे कम लगती
com
m है। आकृ त
है। परंतु बोतल को खड़ा भी होना है, पकड़ म भी आना है, रखा भी जाना है और उससे उँ डेला भी eजाना
s
उपयोग को दे.ख
m
coकर चुनी जाती है, केवल सामग्री को दे खकर नह । ठ क इसी कारण मापक a
glस लडर भी सँकरा और
emजाता है (पृष्ठ 144)। a
a s
agl
लंबा बनाया
com
e m . ag
as
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 135
a g l
co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
m a s
m .co agl
l a se
a g
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 4 of 45
Page 6
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
9.1 वलेय, वलायक और वलयन क्या ह?
प्र.1 क्या आप अनुमान लगा सकते ह क यह मश्रण समरूप है या नह ( चत्र 9.1)?
चत्र 9.1, पृष्ठ 135 — पुनर खत रेखा चत्र: चीनी, नमक और जल के मश्रण से भरा काँच का गलास।
यह एक समरूप मश्रण है। चीनी और नमक जल म पूणतया घुल गए ह, इस लए द्रव स्वच्छ दखाई दे ता है और गलास म कह भी
चीनी या नमक अलग से दखाई नह दे ते।
ऐसा क्य होता है: जल के कण चीनी और नमक के कण को उनके क्रस्टल से ख चकर पूरे द्रव म समान रूप से
फैला दे ते ह। अतः मश्रण क प्रत्येक बूँद का संघटन एक जैसा होता है — इसी कारण घर पर बने ओ.आर.एस. का
प्रत्येक घूँट एक जैसा लगता है, एक घूँट नमक न और दूसरा मीठा नह होता। ऐसे समरूप मश्रण को वलयन कहते
ह।
Page 5 of 45
Page 7
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 क्या होता है जब चॉक के चूण को जल के साथ मलाया जाता है— क्या यह समरूप मश्रण बनाता है?
नह । चॉक का चूण घुलता नह है। वह छोटे -छोटे ठोस कण के रूप म बना रहता है जससे जल दू धया दखने लगता है, और
गलास को कुछ दे र स्थर रखने पर ये कण धीरे-धीरे तली पर बैठ जाते ह। यह एक वषमरूप मश्रण है, ठ क वैसा ही जैसा जल म
रेत या लकड़ी का बुरादा ( चत्र 9.2)।
ऐसा क्य होता है: जल के कण चॉक के कण को एक-दूसरे से अलग नह कर पाते — चॉक के भीतर का आकषण
जल के खचाव से कह अ धक प्रबल है। अतः चॉक अनेक कण के गुच्छ के रूप म ही रहता है जो इतने बड़े होते ह
क दखाई द और इतने भारी क बैठ जाएँ। वलयन म वलेय एकल कण तक टू ट जाता है जो दे खे जाने या बैठने के
लए बहुत ही छोटे होते ह।
स्वयं जाँ चए: गलास को प्रकाश के सामने र खए। जल म चीनी का वलयन आर-पार स्वच्छ दखेगा; जल म चॉक
धुँधला दखेगा। दखने का यही अंतर समरूप और वषमरूप क सबसे सरल पहचान है।
प्र.3 हम जानते ह क वायु एक मश्रण है। क्या गैस के मश्रण को भी वलयन माना जाएगा?
हाँ। वायु नाइ ोजन, ऑक्सीजन, काबन डाइऑक्साइड, जलवाष्प तथा अन्य गैस का समरूप मश्रण है, और समरूप मश्रण ही
वलयन कहलाता है। गैस समान रूप से फैली रहती ह, कोई घटक अलग से दखाई या पहचाना नह जा सकता, और इस कक्ष म
कह से भी ली गई वायु का संघटन एक जैसा होगा।
अध्याय के अपने नयम के अनुसार — समान अवस्था वाले दो पदाथ म अ धक मात्रा वाला वलायक होता है — नाइ ोजन (वायु
का लगभग चार-पाँचवाँ भाग) वलायक है तथा ऑक्सीजन और शेष गैस वलेय ह।
ऐसा क्य होता है: गैस के कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते ह और सब दशाओं म तेज़ ग त से चलते रहते ह।
इस लए एक ही पात्र म रखी भन्न गैस स्वयं ही पूणतया मल जाती ह और मली रहती ह; वे कभी परत म नह बैठत
जैसे जल म रेत बैठ जाती है।
संकेत: वलयन का द्रव होना आवश्यक नह है। वायु गैस-गैस वलयन है, समुद्र जल ठोस-द्रव वलयन है और
पीतल जैसी मश्रातु ठोस-ठोस वलयन है।
क्रयाकलाप 9.1— आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 136
Page 6 of 45
Page 8
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
9.2 वलायक क एक न श्चत मात्रा वलेय क कतनी मात्रा घोल सकती है?
क्रयाकलाप
प्र.1 इसी जल म एक और चम्मच भरकर नमक को धीरे-धीरे डा लए और उसे वलो डत क जए। अवलोकन क जए
क नमक पूणतया घुलना बंद होने से पूव आप कतने चम्मच और नमक डाल सकते ह। ता लका 9.1 म अपने
अवलोकन को अं कत क जए।
ली गई नमक क मात्रा (छोटा चम्मच) अवलोकन (नमक घुल जाता है / नमक नह घुलता है)
एक
दो
तीन
चार
…
ता लका 9.1, पृष्ठ 136 — जल म नमक का घुलना; ग त व ध करते समय अवलोकन वाला स्तंभ भ रए।
पहले कुछ चम्मच पूरी तरह घुल जाते ह। आधे गलास जल (लगभग 100 mL) म छठे से आठव चम्मच के आस-पास कण घुलना
बंद कर दे ते ह और कतना भी वलो डत करने पर तली म नमक क परत बनी रहती है। भरी हुई ता लका 9.1 सामान्यतः इस प्रकार
दखेगी —
ली गई नमक क मात्रा (छोटा चम्मच) अवलोकन (नमक घुल जाता है / नमक नह घुलता है)
एक नमक पूणतया घुल जाता है — िवलयन असंतप्ृ त है
दो नमक पूणतया घुल जाता है — असंतप्ृ त
तीन नमक पूणतया घुल जाता है — असंतप्ृ त
चार घुल जाता है, पर िवलोडन अिधक दे र करना पड़ ता है
पाँच दे र तक िवलोिडत करने पर घुल ता है
छह अिधकांश घुल जाता है, कु छ कण शेष रह जाते है ं
सात नमक नही ं घुल ता — तली पर बैठ जाता है। अब िवलयन संतप्ृ त है
Page 7 of 45
Page 9
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
आपक अपनी संख्या सात से भन्न हो सकती है, और होनी भी चा हए। यह इस पर नभर है क आपने कतना जल लया, आपका
चम्मच कतना बड़ा है और कमरा कतना गरम है — अतः जो आप दे ख वही अं कत क जए।
ऐसा क्य होता है: उस तापमान पर जल केवल नमक के एक न त संख्या के कण को ही एक-दूसरे से अलग रख
सकता है। इस सीमा तक प्रत्येक नया चम्मच ख चकर अलग कर दया जाता है और जल म फैल जाता है। सीमा आ
जाने पर आगे का नमक क्रस्टल के रूप म ही पड़ा रहता है — वलयन संतृप्त हो गया।
संकेत: हर बार एक ही चम्मच ली जए, उसे ऊपर से समतल क जए और प्रत्येक बार डालने के बाद उतनी ही दे र
वलो डत क जए। अन्यथा आप एक साथ दो बात बदल रहे ह और गनती का कोई अथ नह रह जाता।
चचा के कुछ बदु — पृष्ठ 136
क्रयाकलाप 9.1
चचा के लए
प्र.1 आप कतने चम्मच नमक जल म घोल पाए इससे पहले क घोल म नमक का कुछ अंश अघुलनशील रह जाए?
आधे गलास जल म, अथात लगभग 100 mL म, प्रायः छह से आठ समतल छोटे चम्मच नमक घुलता है, इसके बाद नमक तली पर
बैठने लगता है। अपनी गनती स्वयं ल खए, क्य क वह आपके जल क मात्रा, आपके चम्मच और आपके कमरे के तापमान क
गनती है।
ऐसा क्य होता है: कक्ष तापमान पर साधारण नमक क वलेयता 100 mL जल म लगभग 36 g होती है और एक
समतल छोटे चम्मच म लगभग 5 g नमक आता है। अतः लगभग सात चम्मच अपे क्षत ह — और यही कारण है क
यह संख्या मनमानी नह है, यह उस तापमान पर नमक और जल का न त गुण है।
यह करके दे खए: अब केवल चौथाई गलास जल लेकर यही क जए। आप पाएँगे क लगभग आधे चम्मच ही घुलते
ह — इससे स्पष्ट होता है क सीमा जल क मात्रा से तय होती है, नमक से नह ।
प्र.2 यह जल क नमक घोलने क क्षमता के वषय म क्या इं गत करता है?
यह दशाता है क जल क एक न त मात्रा क एक न त सीमा होती है — वह अनंत नमक नह घोल सकती। सीमा तक वलयन
असंतृप्त रहता है; सीमा पर वह उस तापमान का संतृप्त वलयन बन जाता है और अ त रक्त नमक बना घुले तली पर पड़ा रहता
है।
इस एक अवलोकन से तीन बात नकलती ह —
Page 8 of 45
Page 10
ase
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
सीमा इस पर नभर करती है क वलायक कतना है। दुगुना जल लगभग दुगुना नमक घोलेगा।
co m
se m.
सीमा तापमान पर नभर करती है। जल गरम क जए तो वह अ धक नमक ले लेगा ( क्रयाकलाप 9.2 यही बात बे कग सोडा के
o m l a
.cय क उस वलायक म होती है। जल म चीनी, बे कग सोडा और नमक — तीनagक अपनी-अपनी सीमा है।
लए दखाता है)।
सीमा उसmवले
l a se क न त मात्रा म घुलने वाली यही अ धकतम मात्रा वलेयता कहलाती है।
ag
वलायक
co m
ऐसा क्य होता है: जल का एक कण नमक के सी मत कण को ही अलग रख सकता है। जब सभी जल-कण पहले
e m .
से ही घुले हुए कण को घेरने म लगे ह , तब अगले क्रस्टल को तोड़ने के लए कोई बचता ही नह — इस लए वह ag
क्रस्टल ही बना रहता है।
g l as
a
co m
em.
omन श्चत मात्रा वलेय क कतनी मात्रा घोल सकती है? as
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 136
9.2 वलायक क.c
a g l
em
एक
a s
agl प्र.1 क्या होगा य द हम जल क एक न श्चत मात्रा म नमक को और अ धक मलाते जाएँ?
m a s
em
.co agl
a s
a gl क्रमशः अ धक सांद्र होता जाएगा। फर एक अवस्था आएगी जब डाला गया
आरंभ म प्रत्येक चम्मच घुलता जाएगा और वलयन
नमक घुलना बंद कर दे गा और तली पर बैठ जाएगा। उस क्षण से वलयन उस तापमान पर संतृप्त है, और अब आप कतना भी
नमक डाल, उसम से कुछ भी नह घुलेगा — अ त रक्त नमक ठोस के रूप म जमा होता जाएगा।
co m
m .
o m l a se
c
न . त होती है। नमक डालते जाने पर यह क्षमता धीरे-धीरे समाप्त होती जाती a
g
ऐसा क्य होता है: जल क एक न त मात्रा क वलेय-कण को अलग-अलग तथा फैला हुआ रखने क क्षमता
se m है। समाप्त हो जाने पर जल क्रस्टल
a से और कण ख च नह पाता, इस लए क्रस्टल अखं डत रहकर बैठ जाते ह।
agl
se m
com g l a
.
संकेत: बैठे हुए नमक के ऊपर का वलयन दुबल नह होता — वह उस तापमान का सबसे प्रबल संभव वलयन
m a
ase
agl
होता है। संतृप्त वलयन म नमक डालने से तली के ठोस क मात्रा बदलती है, द्रव क प्रबलता नह ।
co m
m .
e
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 137
m l as
.co a g
9.2 वलायक क एक न श्चत मात्रा वलेय क कतनी मात्रा घोल सकती है?
se m
g l a
a क्या अब आप यह बता सकते ह क कौन-सा वलयन अ धक सां द्रत है— 100 mL जल म 2 चम्मच नमक या
c
.
प्र.1
50 mL जल म 4 चम्मच नमक को घोल कर बनाया गया वलयन?
s e m
m a
m . co agl
l a se
50 mL म 4 चम्मच वाला वलयन g
a — और वह भी चार गुना।
सांद्रता का अथ है वलयन क न श्चत मात्रा म उप स्थत वलेय क मात्रा, अतः तुलना से पहले दोन को एक ही आयतन पर लाइए।
com
m .
m ase
.co
a g l Page 9 of 45
Page 11
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
पहला िवलयन: 100 mL में 2 चम्मच
दू सरा िवलयन: 50 mL में 4 चम्मच = 2 × 50 mL में 2 × 4 चम्मच = 100 mL में 8 च म्मच
8 चम्मच पित 100 mL ÷ 2 चम्मच पित 100 mL = 4 गुन ा अिधक सांद
ऐसा क्य होता है: 2 और 4 क सीधी तुलना नह क जा सकती, क्य क नमक क ये दोन मात्राएँ जल क भन्न
मात्राओं म बँट ह। दूसरे वलयन म नमक दुगुना है और जल आधा — अथात 2 × 2 = 4 गुना अ धक भीड़। पहला
तनु वलयन है और दूसरा सांद्र।
संकेत: तनु और सांद्र सापेक्ष पद ह — ये केवल यह बताते ह क दो वलयन म कसम प्र त इकाई आयतन अ धक
वलेय है। ये यह नह बताते क कोई वलयन संतृप्त है या नह ।
प्र.2 क्या तापमान कसी वलेय क वलेयता को प्रभा वत करता है?
हाँ, बहुत अ धक। अ धकांश ठोस के लए तापमान बढ़ने पर वलेयता बढ़ती है। क्रयाकलाप 9.2 यह सीधे दखाता है — जो
बे कग सोडा 20 °C पर नह घुलता वह 50 °C पर घुल जाता है, और 70 °C पर उससे भी अ धक घुलता है।
दो प रणाम याद रखने योग्य ह —
जो वलयन एक तापमान पर संतृप्त है, वही गरम करने पर असंतृप्त क भाँ त व्यवहार करता है — उसक सीमा ऊपर खसक
गई है।
चूँ क प्रत्येक तापमान पर सीमा अलग होती है, वलेयता का कोई मान तब तक अथहीन है जब तक उसके साथ तापमान न
लखा हो।
ऐसा क्य होता है: गरम करने पर वलायक और ठोस दोन के कण तेज़ ग त करने लगते ह। तेज़ चलते जल-कण
क्रस्टल पर अ धक बल से टकराते ह और अ धक कण तोड़कर अलग कर पाते ह; साथ ही यह तेज़ ग त मुक्त हुए
कण को वापस क्रस्टल पर बैठने से भी रोकती है। इस लए संतुलन घुलने के पक्ष म झुक जाता है।
क्या आप जानते ह? गैस का व्यवहार इसका उलटा है — जल गरम होने पर उनक वलेयता घटती है (खंड 9.3)।
क्रयाकलाप 9.2— आइए, प्रयोग कर ( नदशन क्रयाकलाप) — पृष्ठ 137
Page 10 of 45
Page 12
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
9.2.1 कसी वलेय क वलेयता को तापमान कैसे प्रभा वत करता है?
क्रयाकलाप सव प र सु र क्षा
प्र.1 अब इसे वलो डत करते हुए 50°C तक गरम क जए ( चत्र 9.7)। इस अ वलीन बे कग सोडा का क्या होता है?
पयोगशाला स्टैड
ं
पयोगशाला तापमापी
काँच की छड़
बीकर
बेिकंग सोडा युक्त जल
तार की जाली
ित्रपाद स्टैड
ं
िस्पिरट लैपं
चत्र 9.7, पृष्ठ 138 — जल म बे कग सोडा घोलने क उपकरण-व्यव ा का पुनर खत रेखा चत्र।
वह घुल जाता है। जैसे-जैसे जल 20 °C से 50 °C तक गरम होता है, बीकर क तली पर पड़ी ठोस बे कग सोडा क परत लुप्त हो
जाती है और द्रव पुनः स्वच्छ हो जाता है।
ऐसा क्य होता है: 20 °C पर जल अपनी सीमा तक पहुँच चुका था — वह संतृप्त वलयन था और अ त रक्त
बे कग सोडा के पास कोई स्थान नह था। गरम करने पर वह सीमा ऊपर उठ जाती है। अ धक तापमान वाले जल के
कण तेज़ चलते ह, ठोस से कण अ धक प्रभावी ढं ग से तोड़ते ह और उनम से अ धक को अलग रख पाते ह। अतः जो
वलयन 20 °C पर संतृप्त था वह 50 °C पर असंतृप्त है और बैठा हुआ ठोस वलयन म चला जाता है।
सव प र सुरक्षा: तापन उपकरण का उपयोग करते हुए सावधान र हए। तापमापी का बल्ब द्रव म रहे पर बीकर क
तली को न छु ए, वलोडन काँच क छड़ से क जए, तापमापी से कभी नह , और बीकर हटाने से पहले स्प रट लप
बुझा द जए।
Page 11 of 45
Page 13
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 इसे पुनः वलो डत करते हुए 70°C तक गरम क जए। आप क्या दे खते ह?
वही बात दुबारा होती है — अ वलीन बे कग सोडा घुल जाता है। 50 °C पर और बे कग सोडा डालकर वलयन को फर से संतृप्त
कर दे ने के बाद, उसे 70 °C तक गरम करने पर वह ठोस भी घुल जाता है।
तीन अवस्थाओं को साथ र खए और प्रवृ स्पष्ट हो जाती है —
जल का तापमान गरम करने से पहले वलयन क अव ा घुले बे कग सोडा क मात्रा
20 °C संतृप्त; तली पर ठोस सबसे कम
50 °C असंतृप्त हो जाता है, और डालने पर पुनः संतृप्त अिधक
70 °C पुनः असंतृप्त हो जाता है सबसे अिधक
सबसे कम घुला सबसे अिधक घुला
20 °C — संतृप्त, 50 °C — और 70 °C — कोई ठोस
ठोस शेष अिधक घुलता है शेष नही ं
वही बीकर तीन तापमान पर। नीले बदु जल म फैले बे कग सोडा के घुले कण ह; नारंगी परत वह बे कग सोडा है जो घुला नह । गरम करते
जाने पर परत घटती है और अंत म लुप्त हो जाती है।
ऐसा क्य होता है: बे कग सोडा क वलेयता का मान प्रत्येक तापमान के लए अलग होता है। तापमान बढ़ाने पर
यह मान बढ़ जाता है, इस लए हर बार गरम करने पर वही जल पहले से अ धक ठोस घुला हुआ रख पाता है।
प्र.3 इस प्रयोग से आप क्या नष्कष नकालते ह?
अ धकांश ठोस क द्रव म वलेयता तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है। 70 °C का जल 50 °C के जल से अ धक बे कग सोडा
घोलता है, और 20 °C का जल तीन म सबसे कम।
इससे दो कथन नकलते ह, और दोन लखने योग्य ह —
Page 12 of 45
Page 14
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
कसी तापमान पर संतृप्त वलयन तापमान बढ़ाने पर असंतृप्त वलयन क भाँ त व्यवहार करता है — और तब शेष बचा ठोस
घुल जाता है।
वलेयता के लए दए गए कसी भी मान के साथ तापमान अवश्य लखा होना चा हए, अन्यथा वह मान कुछ न त नह
बताता।
ऐसा क्य होता है: क्रस्टल क सतह पर दो वपरीत प्रक्रम साथ-साथ चलते रहते ह — कण का सतह छोड़कर
जल म जाना, और घुले कण का लौटकर सतह पर पुनः बैठ जाना। संतृप्त वलयन वही अवस्था है जसम ये दोन
एक ही दर से होते ह। गरम करने पर छोड़ने क दर लौटने क दर से कह अ धक बढ़ती है, अतः संतुलन खसक
जाता है और दोन दर के पुनः बराबर होने से पहले अ धक ठोस घुल चुका होता है।
स्वयं जाँ चए: 70 °C वाले वलयन को बना हलाए कक्ष तापमान तक ठं डा होने द जए। तली पर ठोस बे कग
सोडा पुनः प्रकट हो जाएगा — यही प्रमाण है क आपने सीमा को ऊपर जाते हुए पार कया था और नीचे आते हुए
फर पार कर रहे ह।
वै ा नक प रचय — पृष्ठ 138
हमारी वै ा नक परंपरा
वै ा नक प रचय
प्र.1 असीमा चटज ने औषधीय पौध पर काय करने क प्रेरणा कहाँ से प्राप्त क ।
भारत क अपनी सुद घ पादप-औष ध परंपरा से। आयुवद, सद्ध और अन्य भारतीय पद्ध तयाँ शता ब्दय से जड़ी-बू टय ारा रोग
का उपचार करती आ रही थ , और असीमा चटज ने यह खोजना आरंभ कया क प्रत्येक पौधे का कौन-सा रासाय नक यौ गक
वास्तव म उपचार करता है — अथात पारंप रक ज्ञान को परखी हुई रसायन- वद्या म बदलना।
उनक व ध इसी अध्याय के रसायन का उपयोग है। कसी पौधे से उपयोगी यौ गक नकालने के लए कुट हुई जड़ी-बूट को चुने हुए
वलायक — जल, ऐल्कोहॉल अथवा हाइ ो-ऐल्कोहॉ लक मश्रण — म घोला जाता है ता क वां छत यौ गक वलयन म आ जाए
और शेष अ धकांश भाग न आए। सही वलायक चुनना और फर घुले हुए भाग को पृथक तथा शुद्ध करना — इसी प्रकार उन्ह ने
यौ गक पृथक कए और अपस्मार-रोधी तथा मले रया-रोधी औष धयाँ वक सत क ।
उपल ववरण
िव ान में डॉक्टरे ट जानकी अम्माल के बाद यह उपािध अिजत करने वाली दू स री भारतीय मिहला
शांित स्वरूप भटनागर पुर स्कार रसायन िव ान के क्षेत्र में यह पुरस्कार पाने वाली पहली मिहला
पद्मभूषण िव ान में योगदान के िलए रा ारा स म्मािनत
Page 13 of 45
Page 15
ase
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
वलायक क्य महत्वपूण है: कोई यौ गक केवल उसी वलायक म घुलता है जसके कण उसे आक षत करते ह।
m a s emमलाने पर
glसे क्या बाहर आएगा।
केवल जल का उपयोग करने पर वे यौ गक पीछे रह जाते ह जन्ह जल नह घोल सकता; ऐल्कोहॉल
. coसमूह घुलकर नकलता है। वलायक चुनकर रसायनज्ञ यह चुनता है क पौधे
a
em
बलकुल दूसरा
a s
agl
com
ag
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 139
m .
9.3 गैस क वलेयता
as e
a g l
क्या गैस भी जल म घुलती ह?
m
प्र.1
co
se m.
o m l a
.c स हत अनेक गैस जल म घुलती ह, यद्य प ऑक्सीजन जल म सी मत मात्रा मaहीgघुलती है।
e
sभलेm
हाँ। ऑक्सीजन
g l a
a ऑक्सीजन जल से ही लेते ह, ऊपर क वायु से नह , और यही घुली हुई ऑक्सीजन उन्ह जी वत रखती है।
मात्रा ही अल्प हो, तालाब, नद या समुद्र का समस्त जीवन उसी पर नभर है। मछ लयाँ, जलीय पौधे और अन्य जीव अपनी
om a s
ऐसा क्य होता है: जल क सतह पर गैस के कण .cनरंतर टकराते रहते ह और उनम से कुछ जल-कण के बीच के agl
रक्त स्थान म फसलकर वह रुक जातेlह। a sगैeसmके कण पहले से ही दूर-दूर होते ह और आपस म कसकर बँधे नह
g
होते, इस लए उन्ह नमक के क्रस्टलaक भाँ त तोड़ना नह पड़ता — परंतु जल उनम से थोड़े ही कण को रख पाता
m
है, इसी लए गैस क वलेयता कम होती है।
. co
e m
m l as
.co a g
क्या आप जानते ह? ठं डे पेय क फुसफुसाहट दाब के अंतगत जल म घुली काबन डाइऑक्साइड है। बोतल खोलते
m
l a se ही दाब घटता है और गैस वलयन से नकलकर बुलबुल के रूप म बाहर आती है।
ag
se m
om
जल म गैस का यह मश्रण समरूप है या.cवषमरूप? g l a
em a
s
प्र.2
a
agl
co m
यह समरूप मश्रण है, अथात वलयन। गैस जल म समान रूप से घुलती ह; वे दखाई नह दे त , बुलबुल के रूप म ऊपर नह
m .
as e
उठत , और कसी भी गहराई से लए गए नमूने म उतनी ही घुली गैस मलेगी।
m l
.co a g
m ऐसा क्य होता है: घुली हुई गैस जल-कण के बीच के रक्त स्थान म पृथक कण के रूप म उप स्थत रहती है,
s e
agla ठ क वैसे ही जैसे घुला हुआ नमक। इतने छोटे और इतने समान रूप से फैले कण कसी आवधक यु क्त से भी नह
.c
e m
दे खे जा सकते, और यही समरूप मश्रण क कसौट है।
m a s
m . co agl
l a se
संकेत: कुछ दे र रखे जल के गलास क भीतरी द वार पर जो बुलबुले चपके दखते ह, वे जल के गरम होने पर
ag— वे घुली हुई गैस नह ह।
वलयन से बाहर आई गैस ह
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 14 of 45
Page 16
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 क्या तापमान द्रव म गैस क वलेयता को भी प्रभा वत करता है? य द हाँ, तो कैसे?
हाँ, और ठोस से उलटे ढं ग से — तापमान बढ़ने पर गैस क वलेयता सामान्यतः घटती है। ठं डे जल म अ धक ऑक्सीजन घुली
रहती है; जल गरम होते ही घुली ऑक्सीजन नकल जाती है।
वलेय तापमान बढ़ाने का प्रभाव अध्याय का उदाहरण
अिधकांश ठोस िवले यता बढ़ ती है जल म बे कग सोडा, 20 °C → 70 °C
गैसे ं िवले यता घटती है ग्रीष्म ऋतु म तालाब के जल म ऑक्सीजन
ऐसा क्य होता है: घुली हुई गैस का कण जल-कण के बीच केवल ढ ले-ढाले ढं ग से टका रहता है। गरम करने पर
उसे इतनी ऊजा मल जाती है क वह छू टकर ऊपर क वायु म नकल जाए। ठोस के लए यही ऊष्मा क्रस्टल से कण
तोड़ने म लगती है, जससे घुलना सरल होता है; गैस म तोड़ने को कुछ है ही नह , इस लए अ त रक्त ऊजा केवल उसे
नकलने म सहायता करती है।
क्या आप जानते ह? इसी कारण ग्रीष्म क दोपहर म उथले तालाब क मछ लयाँ कष्ट म रहती ह, और कसी
कारखाने से नद म छोड़ा गया गरम जल बना कसी प्रदूषक के भी जलीय जीवन को हा न पहुँचा सकता है।
प्र.4 मने दे खा है क कुछ वषमरूप मश्रण , जैसे— जल म बुरादे वाले मश्रण म बुरादा तैरता है जब क रेत और जल
के मश्रण म रेत डू ब जाता है। मुझे आश्चय होता है क ऐसा क्य होता है?
घनत्व के कारण — अथात इकाई आयतन म भरे द्रव्यमान के कारण। बुरादे का घनत्व जल से कम है, इस लए वह तैरता है; रेत का
घनत्व जल से कह अ धक है, इस लए वह डू ब जाती है।
घनत्व = द व्यमान / आयतन
जल ≈ 1 g/cm³ लकड़ ी और बुरादा: 1 g/cm³ से कम रेत : लगभग 2.6 g/cm³
ऐसा क्य होता है: लकड़ी भीतर से ठोस नह होती — वह वायु से भरी सूक्ष्म खोखली को शकाओं से बनी होती है,
अतः लकड़ी का टु कड़ा अपने आयतन म बहुत कम द्रव्यमान समेटता है। रेत चट्टान के कण ह जनके भीतर वायु नह
फँसी होती, इस लए उतने ही आयतन म कह अ धक द्रव्यमान होता है। इनम से कोई भी घुलता नह , अतः दोन ही
मश्रण वषमरूप रहते ह; अंतर केवल इतना है क कण ऊपर बैठते ह या तली म।
Page 15 of 45
Page 17
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: पुस्तक पृष्ठ 140 पर एक महत्वपूण चेतावनी दे ती है — घनत्व ही एकमात्र कारक नह है जो तैरना तय
करता है। इस्पात का जहाज़ तैरता है यद्य प इस्पात जल से कह अ धक सघन है, क्य क उसे वशेष आकृ त द
जाती है और उसम वायु बंद रहती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 140
9.4 वस्तुए ँ जल म तैरती या डू बती क्य ह? • 9.5 घनत्व क्या है?
प्र.1 आपने ध्यान दया होगा क चावल धोते समय उसम उप त भूसी के कण जल क सतह पर तैरते ह जब क
चावल पात्र क तली पर बैठ जाते ह। ऐसा क्य होता है?
भूसी का घनत्व जल से कम है और चावल के दाने का घनत्व जल से अ धक, इस लए भूसी सतह पर रह जाती है और चावल तली म
बैठ जाता है।
ऐसा क्य होता है: भूसी दाने का सूखा, कागज़-सा बाहरी आवरण है। वह पतली और खोखली होती है तथा उसम
वायु फँसी रहती है, अतः वह ठ क-ठाक आयतन घेरती है पर द्रव्यमान लगभग नह के बराबर रखती है — उसका
घनत्व 1 g/cm³ से नीचे आ जाता है। भीतर का चावल का दाना मंड (स्टाच) से ठसाठस भरा होता है और उसम
वायु का कोई स्थान नह होता, इस लए उतने ही आयतन म कह अ धक द्रव्यमान होता है और उसका घनत्व 1
g/cm³ से ऊपर होता है। जल केवल घनत्व के अनुसार दोन को छाँट दे ता है।
क्या आप जानते ह? कसान शता ब्दय से इसी का उपयोग करते आए ह। ओसाना इसी कारण से वायु म भूसी को
अनाज से अलग करता है, और जल म भूसी को तैराकर हटाना उसी यु क्त का गीला रूप है।
प्र.2 वै ा नक घनत्व को कैसे प रभा षत करते ह?
कसी पदाथ के इकाई आयतन म वद्यमान द्रव्यमान को उसका घनत्व कहते ह।
घनत्व = द व्यमान / आयतन
SI मात्रक: िकलोगाम पित घन मीटर, kg/m³
द वों और छोटे ठोसों के िलए सुिवधाजनक मात्रक: g/mL और g/cm³
घनत्व के दो गुण अभी से मन म बैठा लेने योग्य ह —
Page 16 of 45
Page 18
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
यह टु कड़े क आकृ त या आकार पर नभर नह करता। एक ग्राम लोहे और एक कलोग्राम लोहे का घनत्व बलकुल समान
होता है।
यह तापमान और दाब पर नभर करता है। दाब मुख्यतः गैस के लए महत्वपूण है; ठोस और द्रव पर उसका प्रभाव नगण्य
होता है।
यह प रभाषा ऐसी क्य है: "लोहा लकड़ी से भारी है" कहना अस्पष्ट बात है — एक क ल एक ल े से हल्क होती
है। आयतन को एक इकाई पर स्थर कर दे ने से तुलना म से टु कड़े का आकार नकल जाता है और केवल पदाथ का
अपना गुण बचता है। इसी से घनत्व लोहे क छड़ और उतने ही आकार क लकड़ी क छड़ क उ चत तुलना कर
पाता है।
संकेत: अध्याय का अपना चत्र याद रखने योग्य है — भीड़ भरी बस उच्च घनत्व है, वही बस गने-चुने लोग के साथ
कम घनत्व। बस (आयतन) नह बदली; लोग क संख्या (द्रव्यमान) बदली।
वै ा नक क भाँ त सोच — पृष्ठ 141
Page 17 of 45
Page 19
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
9.5 घनत्व क्या है?
वै ा नक क भाँ त सोच
प्र.1 क्या आपने ध्यान दया है क घी या तेल के कुछ पैकेट पर आयतन 1 L च ह्नत होता है परंतु भार केवल 910
ग्राम होता है ( चत्र 9.11)? इससे हम तेल के घनत्व के वषय म क्या ात होता है? क्या यह जल के घनत्व से कम
है या अ धक?
Page 18 of 45
Page 20
as e
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
m l as
m .co a g
l a se
a g
com
e m . ag
g l as
a
co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
m a s
m .co agl
l a se
a g
1 litre (910 g) m
. co
m
m Batch No.: 01 glase
m .co a
l a se
ag Packed on: Jan. 2025
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
s e
चत्र 9.11, पृष्ठ 141 — तेल क बोतल का पुनर खत रेखा चत्र; लेबल उसी रूप म जैसा बोतल पर छपा है।
m a
e m . co agl
g l as
a
इससे तेल का घनत्व सीधे ज्ञात हो जाता है — और वह जल के घनत्व से कम है।
com
m .
m ase
.co
a g l Page 19 of 45
Page 21
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
ते ल का आयतन = 1 लीटर = 1000 mL
ते ल का द व्यमान = 910 g
घनत्व = द व्यमान / आयतन
घनत्व = 910 g ÷ 1000 mL
ते ल का घनत्व = 0.91 g/mL
जल का घनत्व ≈ 1 g/mL, अतः ते ल का आपेिक्षक घनत्व = 0.91 ÷ 1 = 0.91 (कोई मात्रक नही ं)
0.91 g/mL, 1 g/mL से कम है, अतः उतने ही 1 लीटर जल का द्रव्यमान लगभग 1000 g होता जब क तेल का केवल 910 g
है। समान आयतन के लए तेल हल्का है, इस लए तेल जल पर तैरता है — ठ क वही जो जल के गलास म तेल क बूँद डालने पर
दखाई दे ता है।
ऐसा क्य होता है: लेबल यह नह कह रहा क पैकेट म तेल कम है। तेल पूरा एक लीटर ही है; बात केवल इतनी है
क तेल प्रत्येक मलीलीटर म जल क अपेक्षा कम द्रव्यमान भरता है, क्य क उसके कण अ धक भारी-भरकम होते ह
और उतने पास-पास नह जम सकते। द्रव्यमान और आयतन दो भन्न रा शयाँ ह, और तैरना-डू बना उनका अनुपात
अथात घनत्व तय करता है।
स्वयं जाँ चए: दूध के 1 लीटर पैकेट को दे खए। उस पर लगभग 1030 g लखा मलेगा, अथात एक लीटर जल से
कुछ अ धक, क्य क दूध म शकरा, लवण और प्रोट न घुले रहते ह। अतः दूध जल म डू बता है और तेल उस पर तैरता
है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 143
Page 20 of 45
Page 22
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
9.5.1 घनत्व का नधारण — आयतन कैसे माप?
प्र.1 कसी टे ा पैक पर लखा है क इसम 200 mL छाछ है ( चत्र 9.14)। इसका क्या अथ है?
200 mL
चत्र 9.14, पृष्ठ 143 — 200 mL छाछ के टे ा पैक का पुनर खत रेखा चत्र।
इसका अथ है क भीतर क छाछ 200 मलीलीटर स्थान घेरती है। पैक पर लखी संख्या आयतन है, द्रव्यमान नह — वह बताती है
क द्रव कतना स्थान भरता है, यह नह क वह कतना भारी है।
Page 21 of 45
Page 23
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
1 mL = 1 cm³, अतः 200 mL = 200 cm³
1 L = 1000 mL = 1 dm³, अतः 200 mL = 0.2 L
छाछ मुख्यतः जल है और 1 mL जल का द व्यमान लगभग 1 g होता है,
अतः 200 mL छाछ का द व्यमान लगभग 200 g होगा
आयतन ही क्य लखा जाता है: पेय पदाथ उस स्थान के अनुसार बेचा जाता है जो वह भरता है, क्य क पात्र को
वही सँभालना है और आप वही पीते ह। कसी द्रव के लए इन दोन को एक-दूसरे म बदलना तभी संभव है जब
घनत्व ज्ञात हो — और यही वह रा श है जसक ओर यह अध्याय बढ़ रहा है।
संकेत: ठोस का आयतन प्रायः cm³ म और द्रव का mL म लखा जाता है, पर दोन एक ही आकार के मात्रक ह
— 1 mL ठ क 1 cm³ के बराबर है। इसी लए ता लका 9.2 म वस्था पत जल mL म और पत्थर का आयतन cm³
म लखा गया है।
प्र.2 ये मापक स लडर कतनी यथाथता से माप कर सकते ह?
उतनी ही जतनी उनका सबसे छोटा प्रभाग अनुम त दे , और वह स लडर के आकार पर नभर करता है — बड़े स लडर का पैमाना
अ धक मोटा होता है।
मापक स लडर क क्षमता वह न्यूनतम आयतन जो पढ़ा जा सकता है
10 mL या 25 mL 0.1 mL
100 mL 1 mL
250 mL 2 mL
500 mL 5 mL
अतः स लडर चुनना दो दोष के बीच चुनाव है। 70 mL जल मापने के लए —
50 mL का स लडर एक चरण म यह नह कर सकता — पहले 50 mL, फर 20 mL मापना होगा, और दो चरण म मापना
असु वधाजनक भी है और त्रु ट दो बार जोड़ता भी है;
250 mL या 500 mL का स लडर एक चरण म तो माप दे गा पर वह केवल 2 mL या 5 mL तक ही पढ़ता है, अतः यथाथता
घट जाती है;
100 mL का स लडर एक ही चरण म मापता है और 1 mL तक पढ़ता है — यही सबसे अ ा वकल्प है।
Page 22 of 45
Page 24
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
बड़ा होने से पैमाना मोटा क्य हो जाता है: चौड़े स लडर म उतनी ही ऊँचाई तक द्रव भरने के लए चौड़ी नली
चा हए, अतः डाला गया प्रत्येक मलीलीटर स्तर को कम ऊपर उठाता है। य द चह्न प्रत्येक मलीलीटर पर बनाए जाएँ
तो वे इतने पास आ जाएँगे क पढ़े ही न जा सक, इस लए उन्ह आयतन म अ धक अंतर पर बनाया जाता है।
क्रयाकलाप 9.4— आइए, प्रेक्षण कर प रकलन कर — पृष्ठ 143
9.5.1 घनत्व का नधारण — आयतन कैसे माप?
क्रयाकलाप
प्र.1 यह अ धकतम कतना आयतन माप सकता है?
100 mL। चत्र 9.16 के स लडर पर उसके पैमाने के शीष पर 100 mL अं कत है, और वही सबसे ऊपरी चह्न एक बार म मापा
जा सकने वाला सबसे बड़ा आयतन है।
यह न श्चत क्य है: क्षमता नली के अं कत भाग क लंबाई से तय होती है। अं तम चह्न से ऊपर भरने से कुछ ज्ञात
नह होता, क्य क उसके ऊपर पढ़ने के लए कोई प्रभाग ही नह ह।
संकेत: आरंभ करने से पहले यह संख्या सदै व दे ख ली जए। 100 mL के स लडर से 150 mL मापने का अथ है दो
बार भरना — और पा ांक म त्रु ट के दो अवसर।
प्र.2 दो बड़े चह्न के मध्य इं गत आयतन म कतना अंतर है (उदाहरण के लए 10 mL और 20 mL के बीच)?
10 mL। चत्र 9.16 के स लडर पर अं कत चह्न 10, 20, 30 … से 100 तक चलते ह, अतः एक अं कत चह्न से अगले तक —
10 mL से 20 mL, या 40 mL से 50 mL — का अंतर हर बार 10 mL है।
चह्न समान दूरी पर क्य होते ह: स लडर क चौड़ाई ऊपर तक एक जैसी होती है, इस लए जल क समान मात्रा
स्तर को सदै व समान ऊँचाई तक उठाती है। इसी से एक सीधा और समान रूप से बँटा पैमाना संभव होता है — और
यही एक और कारण है क यह पात्र बेलन बनाया जाता है, शंकु या फ्लास्क नह ।
Page 23 of 45
Page 25
as e
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
दो बड़े चह्न के मध्य कतने छोटे प्रभाग ह?
e
प्र.3
m l as
.co a g
a s em
l 9.16 म 10 mL और 20 mL के बीच क महीन रेखाएँ ग नए — एक अं कत चह्न से अगले तक दस बराबर प्रभाग
10।gचत्र
a
मलगे।
com
e m . ag
as
संकेत: प्रभाग ग नए, रेखाएँ नह । दो अं कत चह्न के बीच नौ छोट रेखाएँ दखगी जो अंतराल को दस भाग म
a g l
बाँटती ह। रेखाएँ गन लेना अल्पतमांक नकालने म क जाने वाली सबसे सामान्य भूल है।
co m
em.
m as
एक छोटा प्रभाग कतना आयतन इं गत करता है?
.co l
प्र.4
a g
se m
g l a
a 1 mL। दस मलीलीटर दस प्रभाग म बराबर-बराबर बँटे ह।
m a s
m .co agl
se
दो बड़ े िच ों के बीच आयतन = 10 mL
उनके बीच पभागों की संख्या = 10ag
l a
co m
m .
एक छोटा पभाग = 10 ÷ 10 = 1 mL
m as e
.co a g l
s m
eयह
gl a
a
व ध क्य चलती है: यही व ध आपने कक्षा 6 क जज्ञासा म तापमापी के लए अपनाई थी — अं कत पैमाने
m
के एक पूरे पग का मान ली जए और उसे उतने बराबर भाग से भाग द जए जतन म वह पग बँटा है। यह कसी भी
a se
com l
रै खक पैमाने पर लागू होती है: मापनी, तापमापी या मापक स लडर।
. a g
m
ase
agl
प्र.5 मापक स लडर ारा पढ़ा जा सकने वाला न्यूनतम आयतन __________ है।
co m
m .
as e
com l
. a g
s e m
1 mL — चत्र 9.16 म दशाए 100 mL के मापक स लडर के लए।
a
agl
पढ़े जा सकने वाले इस न्यूनतम मान को उपकरण का अल्पतमांक कहते ह। यही तय करता है क स लडर आपको क्या बता सकता
है: 1 mL अल्पतमांक के साथ आप ईमानदारी से 47 mL लख सकते ह, 47.3 mL नह ।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 45
Page 26
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
स लडर बड़े चह्न के बीच आयतन प्रभाग न्यूनतम पाठ्यांक
100 mL (िचत्र 9.16) 10 mL 10 1 mL
10 mL या 25 mL 1 mL 10 0.1 mL
250 mL 10 mL 5 2 mL
500 mL 50 mL 10 5 mL
संकेत: य द आपक वद्यालय प्रयोगशाला का स लडर भन्न आकार का है तो 1 mL क नकल मत क जए। उसके
अपने पैमाने से उसका अपना अल्पतमांक नका लए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 144
9.5.1 घनत्व का नधारण — आयतन कैसे माप?
प्र.1 मापक स लडर को सदै व संक ण एवं लंबा ही क्य बनाया जाता है तथा ये बीकर क भाँ त चौड़े एवं छोटे क्य
नह होते?
क्य क संक ण नली म द्रव क उतनी ही थोड़ी मात्रा स्तर म कह अ धक बड़ी वृ द्ध करती है, जससे चह्न इतनी दूरी पर बनाए जा
सकते ह क यथाथता से पढ़े जा सक।
बेलन के लए आयतन = π r² h, अतः डाले गए आयतन से स्तर म वृ द्ध होगी
h = आयतन ÷ (π r²)
संक ीण िसिलंडर, r = 1.5 cm: अनुपस्थ काट = π × 1.5² ≈ 7.1 cm²
1 mL से स्तर उठे गा 1 ÷ 7.1 ≈ 0.14 cm = 1.4 mm — दे खने और अंिकत करने योग्य
चौड़ ा बीकर, r = 4 cm: अनुपस्थ काट = π × 4² ≈ 50.3 cm²
1 mL से स्तर उठे गा 1 ÷ 50.3 ≈ 0.02 cm = 0.2 mm — पढ़ ने के िलए बहत
ु ही कम
Page 25 of 45
Page 27
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
दोनों मे ं जल की समान मात्रा डाली गई
बड़ ी वृिद्ध
नगण्य वृिद्ध
संकीण िसिलंडर चौड़ ा बीकर
जल क उतनी ही थोड़ी मात्रा एक संक ण स लडर म और एक चौड़े बीकर म डाली गई है। संक ण पात्र म स्तर कई मलीमीटर चढ़ जाता है;
चौड़े पात्र म वह मु श्कल से हलता है, इस लए उस पर कोई उपयोगी पैमाना अं कत नह कया जा सकता।
ऐसा क्य होता है: स्तर म वृ द्ध आयतन को अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से भाग दे ने पर मलती है। पात्र को संक ण
बनाने से यह क्षेत्रफल कम हो जाता है, जससे उतने ही आयतन के लए वृ द्ध बड़ी हो जाती है। तब अपे क्षत क्षमता
को संक ण नली म समाने के लए उसे लंबा बनाना ही पड़ता है।
संकेत: एक और लाभ भी है। संक ण नली म नवचंद्रक छोटा और स्पष्ट वक्र वाला बनता है, जसके साथ आँख क
सीध बठाना बीकर क चौड़ी, चपट सतह क तुलना म कह सरल है — अतः लंबन त्रु ट भी कम रहती है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 145
क्रयाकलाप 9.5— आइए, 50 mL जल माप
प्र.1 मुझे आश्चय है क रंगीन द्रव का स्तर कैसे मापा जाता है?
रंगीन द्रव के लए वह चह्न पढ़ा जाता है जो नवचंद्रक के ऊपरी भाग के साथ सीध म हो — जल के लए जो कया जाता है उससे
ठ क उलटा।
Page 26 of 45
Page 28
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
द्रव नवचंद्रक का कौन-सा कारण
भाग पढ़
जल और अन्य रंग हीन द व नवचंद क की तली पारदश द्रव के आर-पार वक्र स्पष्ट दखाई दे ता है
रंग ीन द व (स्याही, पोटैिशयम परमैंग नेट का नवचंद क का ऊपरी भाग रंग वक्र क तली को छपा दे ता है; केवल ऊपरी कनारा
िवलयन, दू ध ) ही स्पष्ट दखता है
दोन ही स्थ तय म एक नयम कभी नह बदलता — पाठ्यांक पढ़ते समय आपक आँख उसी तल क सीध म ह जसे आप
पढ़ रहे ह।
ऐसा क्य होता है: संक ण नली म द्रव क सतह इस लए वक्र बनती है क्य क द्रव काँच क ओर आक षत होता है।
रंगहीन द्रव म आप आर-पार दे खकर इस वक्र का नम्नतम बदु दे ख सकते ह। रंगीन द्रव म प्रकाश आर-पार नह
जाता, अतः दखता है केवल रंग का एक ठोस पट्ट, जसका तीक्ष्ण ऊपरी कनारा ही एकमात्र रेखा है जस पर आँख
टक सकती है।
संकेत: य द आपक आँख सतह से ऊपर है तो पा ांक अ धक आएगा और नीचे है तो कम। लंबन नाम क यह त्रु ट
स लडर के अल्पतमांक से कह बड़ी होती है — अतः झुककर आँख को द्रव के तल तक लाइए।
क्रयाकलाप 9.7— आइए मापन कर — पृष्ठ 146
अ नय मत आकार क वस्तुओं का आयतन ात करना
क्रयाकलाप
प्र.1 कसी वस्तु, जैसे— पत्थर को धागे से बाँ धए और धीरे से उसे मापक स लडर म लटकाइए। आप क्या दे खते ह?
जल का स्तर ऊपर उठ जाता है — चत्र 9.19 म 50 mL से 55 mL तक। पत्थर ने ठ क अपने आयतन के बराबर जल हटाया
अथात व ा पत कया है, अतः स्तर म हुई वृ द्ध ही पत्थर का आयतन है।
क्र.सं. वस्तु प्रारं भक आयतन अं तम आयतन व ा पत जल वस्तु का आयतन
(ML) (A) (ML) (B) (ML) (B–A) (CM³)
1. पत्थर 50 mL 55 mL 5 mL 5 cm³
2. धातु क चाबी 50 mL 52 mL 2 mL 2 cm³
3. अन्य (काँच 50 mL 53 mL 3 mL 3 cm³
क गोली)
Page 27 of 45
Page 29
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
पं क्त 2 और 3 नमूना पा ांक ह — आपक अपनी वस्तुओं से जो मले वही ल खए। क्रयाकलाप 9.3 से प्राप्त द्रव्यमान के साथ
अब वह प रकलन पूरा कया जा सकता है जो अध्याय बताता है —
घनत्व = द व्यमान / आयतन
घनत्व = 16.400 g ÷ 5 cm³
पत्थर का घनत्व = 3.28 g/cm³
व ापन व ध क्य काम करती है: दो वस्तुएँ एक ही समय म एक ही स्थान नह घेर सकत । पत्थर के भीतर जाते
ही जस स्थान पर पहले जल था उसे कह और जाना पड़ता है, और जाने के लए केवल ऊपर क दशा बची है।
अतः जल क बढ़ हुई ऊँचाई म ठ क उतना ही आयतन है जतना पत्थर का — और इसी से उस वस्तु का आयतन
ज्ञात हो जाता है जसक न कोई नय मत आकृ त है और न कोई सूत्र।
स्वयं जाँ चए: पत्थर को धीरे से उता रए और उसे पूरी तरह जल म डू बा र खए, पर द वार से छू ने न द जए। य द
पत्थर का कुछ भाग सतह के ऊपर रह गया तो आप केवल डू बे भाग का माप लगे; और य द जल छलक गया तो
अं तम पा ांक कम आएगा। इस क्रयाकलाप म धागे का आयतन नगण्य माना गया है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 147
आइए, गहन अध्ययन कर
प्र.1 क्या आप जानते ह क हमारा ग्रह पृथ्वी अनेक परत , जैसे— भू-पपट , ऊपरी प्रावार, अधः प्रावार, बाहरी क्रोड
और आंत रक क्रोड से मलकर बना है जनम से प्रत्येक परत का अपना व शष्ट घनत्व है?
हाँ — और ये परत एक स्पष्ट क्रम म ह: सतह से कद्र क ओर बढ़ने पर घनत्व बढ़ता जाता है। सबसे बाहरी परत, भू-पपट , इन
सबम सबसे हल्क है।
परत (बाहर से भीतर क ओर) अन्य परत क तुलना म घनत्व
भू-पपटी सबसे हल्की — न्यूनतम घनत्व
ऊपरी पावार भू-पपटी से अिधक सघन
अधः पावार उससे भी अिधक सघन
बाहरी ोड (द व) बहुत अिधक सघन
आंतिरक ोड (ठोस) सव िधक सघन
Page 28 of 45
Page 30
ase
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: जैसे-जैसे गहराई बढ़ती है वैसे-वैसे दाब और तापमान दोन म उल्लेखनीय वृ द्ध होती है। ऊपर
पड़े समस्त पदाथ का वशाल दाब सामग्री को कम आयतन म दबा दे ता है जब क उसका द्रव्यमानeवही
s m रहता है, और
co m a
gl भी ह। द्रव्य का इस
m . a
प्रकारsसंeपी डत होना ठ क वही प्रभाव है जो खंड 9.5.3 म व णत है — केवल यहाँ वह एक ग्रह के पैमाने पर हो रहा
घनत्व = द्रव्यमान/आयतन होने से घनत्व बढ़ जाता है। गहरी परत मूलतः भारी पदाथ से बनी
a
aहैg।l
co m
e m . ag
as
संकेत: ध्यान द जए क यहाँ तापमान और दाब वपरीत दशाओं म ख च रहे ह। अकेली ऊष्मा पदाथ को फैलाकर
a g l
घनत्व घटा दे ती; पृथ्वी के भीतर का दाब इतना अ धक है क वह सरलता से जीत जाता है।
co m
em.
mप्रभाव as
क्या आपके सं ान म है... — पृष्ठ 148
coका
9.5.3 घनत्व पर .दाब a g l
a seे m
क्याlआपक
ag
सं ान म है . ..
m a s
.co agl
प्र.1 बफ जल पर क्य तैरती है?
se m
g l a
उत्तर a
m
क्य क बफ द्र वत जल क अपेक्षा कम सघन होती है — उतना ही द्रव्यमान जमने के बाद अ धक स्थान घेरता है।
. co
m
क्रम इस प्रकार है —
m as e
.co g l
जल का घनत्व 4 °C पर सवा धक होता है। इससे नीचे ठं डा करने पर वह असामान्य व्यवहार करने लगता है।
a
s e m
la स्थान घेरती है। इसे वस्तारण कहते ह।
0 °C पर वह बफ म बदल जाता है और उसक संरचना बदल जाती है — कण स्वयं को ऐसी व्यवस्था म जमा लेते ह जो अ धक
ag
se m
द्रव्यमान नह बदला, पर आयतन बढ़ गया। चूँ क घनत्व = द्रव्यमान/आयतन, घनत्व घट जाता है।
com
समान आयतन के लए हल्क होने से बफ नीचे के जल पर तैरने लगती है।
g l a
m . a
ऐसा क्य होता है: लगभग हर दूसरेla
e
s म ठं डा करने पर कण पास आते ह और जमने पर ठोस अपने द्रव से
अ धक सघन हो जाता है, अतः a
g पदाथ
ठोस डू ब जाता है। जल अपवाद है — जमते समय उसके कण एक खुली, फैली हुई
co m
व्यवस्था म जुड़ जाते ह जसम रक्त स्थान बने रहते ह, इस लए ठोस उस द्रव से अ धक भारी-भरकम हो जाता है
m .
e
जससे वह बना।
m l as
.co a g
m क्या आप जानते ह? ठं डी झील का जीवन इसी अपवाद पर टका है। बफ तैरती है इस लए वह सतह पर एक
l a se
ag
.c
ढक्कन-सी परत बना दे ती है और नीचे का जल इतना गरम बना रहता है क मछ लयाँ और अन्य जीव जाड़ा काट
सक। य द बफ डू बती तो झील तली से ऊपर तक जम जात ।
s e m
m a
e m . co agl
g l as
वै ा नक क भाँ त सोच — पृष्ठ 148 a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 45
Page 31
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
9.5.3 घनत्व पर दाब का प्रभाव
वै ा नक क भाँ त सोच
प्र.1 आप इस व्यव ा म क्या प रवतन कर सकते ह जससे अंडा जल म डू बने क अपेक्षा तैरने लगे?
जल म पयाप्त साधारण नमक घोल द जए और तब तक वलो डत क जए जब तक और नमक न घुले। जो अंडा नल के
जल म डू ब गया था वह इस नमक के वलयन म तली से उठकर तैरने लगेगा।
क्या करना है —
अंडा नकाल ली जए और नल के जल वाला वही गलास र खए।
एक-एक चम्मच नमक डालकर हर बार वलो डत क जए, जब तक वलयन संतृप्त के नकट न पहुँच जाए।
अब अंडे को धीरे से उता रए। वह ऊपर उठ आएगा और उसका थोड़ा भाग सतह से बाहर रखते हुए तैरने लगेगा।
ऐसा क्य होता है: आपने अंडे म कोई प रवतन नह कया — आपने द्रव बदल दया। नमक घोलने से जल म बहुत-
सा द्रव्यमान जुड़ जाता है जब क आयतन बहुत थोड़ा ही बढ़ता है, क्य क नमक के कण जल-कण के बीच के रक्त
स्थान म समा जाते ह। द्रव्यमान बढ़ा, आयतन लगभग वही रहा, अतः घनत्व = द्रव्यमान/आयतन बढ़ गया। नल का
जल ताज़े अंडे से कुछ कम सघन होता है इस लए अंडा डू ब जाता है; पयाप्त नमक घुल जाने पर वलयन अंडे से
अ धक सघन हो जाता है और अंडा तैरने लगता है।
यह करके दे खए: गलास को आधा प्रबल नमक- वलयन से भ रए, फर द वार के सहारे बहुत धीरे-धीरे सादा जल
डा लए ता क वह बना मले ऊपर ठहर जाए। अब अंडा उता रए — वह बीच म आकर रुक जाएगा, एक साथ
नमक- वलयन पर तैरता हुआ और सादे जल म डू बा हुआ। मृत सागर म व्य क्त के सरलता से तैरने का कारण भी
यही है।
ज ासा जी वत रख — पृष्ठ 149
Page 30 of 45
Page 32
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय के अंत का प्रश्न-समूह (पृष्ठ 149–151)
ज ासा जी वत रख
प्र.1 बताइए क नीचे दए गए कथन सत्य ह अथवा असत्य। असत्य कथन या कथन को सत्य बनाइए। (क)
ऑक्सीजन गैस ठं डे पानी क अपेक्षा गरम पानी म अ धक घुलनशील होती है। (ख) रेत और पानी का मश्रण एक
वलयन है। (ग) कसी वस्तु ारा घेरे गए ान को उसका द्रव्यमान कहते ह। (घ) असंतृप्त वलयन म संतृप्त
वलयन क अपेक्षा अ धक वलेय घुला हुआ होता है। (ङ) वायुमंडल म उप त व भन्न गैस भी एक समरूपी
मश्रण है।
कथन सत्य / सुधारा हुआ कथन
असत्य
(क) ऑक्सीजन गैस ठं डे पानी की अपेक्षा गरम पानी में अस त्य ऑक्सीजन गैस गरम पानी क अपेक्षा ठं डे पानी म अ धक
अिधक घुल नशील होती है। घुलनशील होती है।
(ख) रे त और पानी का िमश्रण एक िवलयन है। अस त्य रेत और पानी का मश्रण एक वषमरूप मश्रण है, वलयन
नह ।
(ग) िकसी वस्तु ारा घे रे गए स्थान को उसका द व्यमान अस त्य कसी वस्तु ारा घेरे गए स्थान को उसका आयतन कहते ह।
कहते है।
ं
(घ) असंतप्ृ त िवलयन में संतप्ृ त िवलयन की अपेक्षा अस त्य समान तापमान पर असंतृप्त वलयन म संतृप्त वलयन क
अिधक िवले य घुल ा हुआ होता है। अपेक्षा कम वलेय घुला हुआ होता है।
(ङ) वायुम ंडल में उपिस्थत िविभन्न गैसे ं भी एक समरूपी स त्य —
िमश्रण है।
प्रत्येक का कारण:
(क) घुली हुई गैस का कण जल-कण के बीच ढ ला-ढाला टका रहता है। गरम करने पर उसे नकल भागने योग्य
ऊजा मल जाती है, अतः गरम जल कम ऑक्सीजन रखता है — इसी से उथले गरम जल म मछ लय को कष्ट
होता है।
(ख) रेत घुलती नह । उसके कण दखाई दे ते रहते ह और तली म बैठ जाते ह, अतः घटक समान रूप से वत रत
नह होते।
(ग) द्रव्यमान पदाथ क मात्रा है (ग्राम, कलोग्राम); आयतन घेरा गया स्थान है (cm³, mL, m³)। ये दो भन्न
रा शयाँ ह और इनका अनुपात घनत्व है।
(घ) संतृप्त का अथ है क अ धकतम संभव मात्रा पहले ही घुल चुक है। असंतृप्त का अथ है क वलयन अभी
उस अ धकतम से नीचे है, अतः उसम कम ही घुला होगा।
(ङ) वायु गैस का वलयन है — नाइ ोजन, ऑक्सीजन, काबन डाइऑक्साइड आ द समान रूप से फैली रहती
ह और कोई घटक पृथक रूप से दखाई नह दे ता।
Page 31 of 45
Page 33
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 रक्त ान क पू त क जए— (क) कसी ठोस का आयतन व ापन व ध ारा मापा जा सकता है जहाँ ठोस
को जल म __________ जाता है और जल स्तर क __________ मापी जाती है। (ख) कसी व शष्ट तापमान पर
__________ म घुली __________ क अ धकतम मात्रा उस तापमान पर उसक वलेयता कहलाती है। (ग) प्राय:
तापमान म वृ द्ध से घनत्व __________ है। (घ) वह वलयन जसम ग्लूकोस जल म पूणतः घुल गया हो तथा दए
गए तापमान पर और अ धक ग्लूकोस नह घुल सकता, ग्लूकोस का __________ वलयन कहलाता है।
रक्त ान उत्तर
(क) ठोस को जल में _____ जाता है और जल स्तर की _____ मापी जाती है डुबोया … वृिद्ध
(ख) िकसी िविशष्ट तापमान पर _____ में घुल ी _____ की अिधकतम मात्रा िवलायक की िनि चत मात्रा (100 mL) … िवले य
(ग) पाय: तापमान में वृिद्ध से घनत्व _____ है घटता
(घ) … ग्लूक ोस का _____ िवलयन कहलाता है संतप्ृ त
ये उत्तर क्य ह:
(क) डू बा हुआ ठोस अपने ही आयतन के बराबर जल हटा दे ता है, और उस जल के पास ऊपर उठने के
अ त रक्त कोई माग नह — अतः स्तर क वृ द्ध ठोस के आयतन के बराबर होती है।
(ख) वलेयता एक अ धकतम मात्रा है, वह कसी वशेष वलायक म उस वलेय का गुण है, और वह वलायक
क न त मात्रा (100 mL) तथा न त तापमान के लए बताई जाती है। इनम से कोई एक भी छोड़ द जए तो
वह संख्या अथहीन हो जाती है।
(ग) गरम करने पर कण दूर-दूर हो जाते ह और आयतन बढ़ता है जब क द्रव्यमान वही रहता है। घनत्व =
द्रव्यमान/आयतन, अतः घनत्व घट जाता है।
(घ) "पूणतः घुल गया हो और उस तापमान पर और न घुल सके" — यही संतृप्त वलयन क प रभाषा है।
प्र.3 आप जल से भरे गलास म तेल डालते ह। तेल ऊपर तैरने लगता है। इससे आपको क्या ात होता है? (क) तेल
जल से अ धक सघन होता है। (ख) जल तेल से अ धक सघन होता है। (ग) तेल और जल का घनत्व समान होता
है। (घ) तेल जल म घुल जाता है।
(ख) जल तेल से अ धक सघन होता है।
Page 32 of 45
Page 34
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
जल का घनत्व ≈ 1 g/mL
खाद्य ते ल का घनत्व ≈ 0.91 g/mL (पृष्ठ 141 के 1 लीटर / 910 g वाले पैके ट से)
0.91 g/mL < 1 g/mL, अतः ते ल जल के ऊपर आ जाता है
अन्य वकल्प क्य गलत ह —
(क) य द तेल अ धक सघन होता तो वह डू बकर जल के नीचे बैठ जाता, जो होता नह है।
(ग) य द दोन के घनत्व समान होते तो कसी एक के ऊपर आने का कोई कारण ही न होता; दोन जहाँ रखे जाते वह बने रहते।
(घ) तेल जल म घुलता ही नह — इसी लए दो अलग परत दखाई दे ती ह। य द घुल जाता तो एक ही स्वच्छ समरूप द्रव
मलता।
ऐसा क्य होता है: जब दो ऐसे द्रव साथ रखे जाएँ जो आपस म नह मलते, तब जो प्रत्येक मलीलीटर म कम
द्रव्यमान भरता है वह ऊपर आ जाता है। जल के कण एक-दूसरे को प्रबलता से आक षत करके समट जाते ह और
ऊपर क तेल क परत को दबा दे ते ह।
प्र.4 कसी पत्थर क मू त का वजन 225 g है और इसका आयतन 90 cm³ है। इसके घनत्व का प रकलन क जए
और पूवानुमान लगाइए क यह मू त जल म तैरेगी अथवा डू बेगी।
द व्यमान = 225 g, आयतन = 90 cm³
घनत्व = द व्यमान / आयतन
घनत्व = 225 g ÷ 90 cm³
घनत्व = 2.5 g/cm³
जल का घनत्व = 1 g/cm³
2.5 g/cm³ > 1 g/cm³ → मूित डू ब जाएगी
जल के सापेक्ष उसका आपे क्षक घनत्व 2.5 ÷ 1 = 2.5 है, एक ऐसी संख्या जसका कोई मात्रक नह — अथात मू त जल से ढाई
गुना सघन है।
Page 33 of 45
Page 35
as e
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
यह क्य डू बेगी: 90 cm³ जल का द्रव्यमान 90 g होता है; उतने ही 90 cm³ इस पत्थर का द्रव्यमान 225 g है।
जतना स्थान वह घेरती है उसक तुलना म मू त कह अ धक भारी है, अतः वह जल म ऊपर नह e
s m सकती।
m gl a
ठहर
. co a
a s em
agl नम्न ल खत म से कौन सा कथन सवा धक उपयुक्त है? अन्य कथन उपयुक्त क्य नह ह? (क) एक संतृप्त
प्र.5
co m
ag
वलयन कसी न श्चत तापमान पर और अ धक वलेय घोल सकता है। (ख) कसी दए गए तापमान पर एक
m .
as e
असंतृप्त वलयन म वलेय क अ धकतम संभव मात्रा घुल गई है। (ग) एक न श्चत तापमान पर संतृप्त वलयन म
g l
और अ धक वलेय नह घुल सकता है। (घ) एक संतृप्त वलयन केवल उच्च तापमान पर बनता है।
a
co m
सवा धक उपयुक्त कथन है (ग) एक न श्चत तापमान पर संतृप्त वलयन म और अ धक वलेय नह घुल सकता है। यही
e m.
m l as
.co g
संतृप्तता क प रभाषा है।
m a
l a se
a g
कथन यह उपयुक्त क्य नह है
s
(क) संतप्ृ त िवलयन और अिधक यह असंतप्ृ त िवलयन का वणन है। संतप्ृ त िवलयन अपनी सीमा तक पहचु ँ चुक ा होता है; अितिरक्त िवले य
m a
.co agl
िवले य घोल सकता है तली पर बैठ जाता है।
m
seमें बदल गए है।ं अिधकतम मात्रा घुली होना ही िवलयन को संतप्ृ त बनाता है; असंतप्ृ त का
(ख) असंतप्ृ त िवलयन में
अिधकतम संभव मात्रा घुल गई है
l a
अथ हैaिकgवह अभी अिधकतम से नीचे है।
दोनों शब्द आपस
m
.coबनाता है।
(घ) संतप्ृ त िवलयन के वल उच्च िवलयन िकसी भी तापमान पर संतप्ृ त हो सकता है। ठं डा जल कम िवले य से संतप्ृ त हो जाता है और गरम
तापमान पर बनता है जल अिधक से — ि याकलाप 9.1 क क्ष तापमान पर ही नमक का संतप्ृ त िवलयन
se m
com g l a
m . क शब्दावली इतनी सावधान क्य है: "एक न त तापमान पर" वाक्यांaश पर ध्यान द जए। संतृप्तता
as e
agl
(ग)
वलयन क स्थायी अवस्था नह है — उसे गरम क जए और वही द्रव असंतृप्त हो जाता है, क्य क उसक सीमा
ऊपर खसक जाती है। संतृप्तता का कोई भी कथन जसम तापमान न हो, अधूरा है।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 34 of 45
Page 36
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.6 आपके पास 2 लीटर आयतन क एक बोतल है। आप इसम 500 mL जल भरते ह। बोतल म और कतना जल
भरा जा सकता है?
बोतल की क्षमता = 2 L
1 L = 1000 mL, अतः 2 L = 2 × 1000 = 2000 mL
पहले से भरा जल = 500 mL
शेष िरक्त स्थान = 2000 mL − 500 mL
शेष िरक्त स्थान = 1500 mL = 1.5 L
पहले मात्रक बदलना क्य आवश्यक है: 2 म से 500 घटाया नह जा सकता — दोन संख्याएँ भन्न मात्रक म ह।
दोन को एक ही मात्रक (यहाँ मलीलीटर) म लाने पर घटाना साथक हो जाता है। आयतन के कसी भी प्रश्न म सबसे
पहले यही जाँ चए।
संकेत: 1500 mL = 1500 cm³ भी है, क्य क 1 mL = 1 cm³। और चूँ क जल का घनत्व लगभग 1 g/mL है,
इतने जल का द्रव्यमान लगभग 1500 g अथात 1.5 kg होगा।
प्र.7 कसी वस्तु का द्रव्यमान 400 g और आयतन 40 cm³ है। इसका घनत्व क्या है?
द व्यमान = 400 g, आयतन = 40 cm³
घनत्व = द व्यमान / आयतन
घनत्व = 400 g ÷ 40 cm³
घनत्व = 10 g/cm³
जल के सापेक्ष इसका आपे क्षक घनत्व 10 ÷ 1 = 10 है। यह वस्तु जल से दस गुना सघन है, अतः जल म डू ब जाएगी।
Page 35 of 45
Page 37
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
इस संख्या का अथ: इस वस्तु का प्रत्येक घन सट मीटर 10 g पदाथ रखता है, जब क 1 cm³ जल म केवल
लगभग 1 g होता है। इतने ऊँचे घनत्व भारी धातुओं के होते ह — सीसा लगभग 11.3 g/cm³ और चाँद लगभग
10.5 g/cm³।
प्र.8 चत्र 9.25 (क) और 9.25 (ख) का व ेषण क जए। बना छला हुआ संतरा जल म क्य तैरता है एवं छला
हुआ संतरा जल म क्य डू ब जाता है? व्याख्या क जए।
(क) (ख)
चत्र 9.25 (क) और (ख), पृष्ठ 150 — पुनर खत रेखा चत्र: (क) जल से भरे गलास म बना छला हुआ संतरा, (ख)
जल से भरे गलास म छला हुआ संतरा।
छलका असंख्य सूक्ष्म वायु-कोष्ठ से भरा होता है। वह संतरे म आयतन तो बहुत जोड़ता है पर द्रव्यमान बहुत थोड़ा, इस लए बना
छले पूरे फल का औसत घनत्व 1 g/cm³ से नीचे रहता है और वह तैरता है ( चत्र 9.25, क)। छलका उतारते ही वह हल्क , वायु-
भरी परत हट जाती है; जो बचता है वह रसीला सघन गूदा है जसका घनत्व 1 g/cm³ से कुछ अ धक होता है, अतः वह डू ब जाता
है ( चत्र 9.25, ख)।
Page 36 of 45
Page 38
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
बना छला संतरा ( चत्र 9.25, क) छला हुआ संतरा ( चत्र 9.25, ख)
द व्यमान कुछ अ धक ( छलका स हत) कु छ कम
आयतन कह अ धक — मोटा स्पंजी छलका कही ं कम
औसत घनत्व = द व्यमान/आयतन 1 g/cm³ से कम 1 g/cm³ से अिधक
जल में पिरणाम तैरता है डू ब जाता है
ऐसा क्य होता है: यह वरोधाभास लगता है — द्रव्यमान घटाने पर संतरा डू ब गया — परंतु घनत्व एक अनुपात है।
छलका उतारने से द्रव्यमान थोड़ा घटता है और आयतन बहुत अ धक; भन्न के हर म से अंश क अपेक्षा अ धक
घटाने पर अनुपात बढ़ जाता है। छलके म फँसी वायु ठ क वही काम कर रही है जो बुरादे के लए खोखली
को शकाएँ और चाट के लए खोखला बाँस करता है।
यह करके दे खए: एक ही आकार के दो संतरे ली जए, एक छला हुआ और एक बना छला। और पृष्ठ 140 क
चेतावनी स्मरण र खए — घनत्व ही तैरने का एकमात्र कारक नह है, परंतु इस जोड़ी म नणायक कारक वही है।
प्र.9 कसी वस्तु ‘क’ का द्रव्यमान 200 g और आयतन 40 cm³ है। वस्तु ‘ख’ का द्रव्यमान 240 g और आयतन 60
cm³ है। कस वस्तु का घनत्व सघन है?
वस्त ु ‘क’: घनत्व = 200 g ÷ 40 cm³ = 5 g/cm³
वस्त ु ‘ख’: घनत्व = 240 g ÷ 60 cm³ = 4 g/cm³
5 g/cm³ > 4 g/cm³ → वस्तु ‘क ’ अिधक सघन है
भारी वस्तु अ धक सघन क्य नह है: ‘ख’ का द्रव्यमान अ धक है — 240 g बनाम 200 g — फर भी वह दोन
म कम सघन है, क्य क वह द्रव्यमान 40 cm³ के स्थान पर 60 cm³ म फैला है। घनत्व द्रव्यमान से भन्न प्रश्न पूछता
है: "पदाथ कतना है?" नह , ब ल्क "प्रत्येक इकाई स्थान म पदाथ कतना भरा है?" उ चत तुलना के लए आयतन
से भाग दे ना अ नवाय है।
स्वयं जाँ चए: दोन को एक ही आयतन पर लाइए। 120 cm³ म ‘क’ का 600 g होगा और ‘ख’ का केवल 480 g
— वही नष्कष, बना भाग दए।
Page 37 of 45
Page 39
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.10 रीमा के पास प्र तरूपण मृदा (मॉड लग क्ले) का एक टु कड़ा है जसका वजन 120 g है। वह पहले इसे एक ठोस
घन के रूप म ढालती है जसका आयतन 60 cm³ है। इसके पश्चात वह इसे एक पतले पत्रक के रूप म समतल
करती है। अनुमान लगाइए क इसके घनत्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
कोई प्रभाव नह पड़ेगा — घनत्व ठ क वही रहेगा, 2 g/cm³।
घन के रूप में: घनत्व = 120 g ÷ 60 cm³ = 2 g/cm³
पतले पत्रक के रूप में:
द व्यमान = अब भी 120 g (न कु छ जोड़ ा गया, न हटाया गया)
आयतन = अब भी 60 cm³ (मृद ा के वल पुन ः व्यविस्थत हुई है, न दबाई गई न खी ंची गई)
घनत्व = 120 g ÷ 60 cm³ = 2 g/cm³
ऐसा क्य होता है: समतल करने से आकृ त बदलती है, पदाथ क मात्रा और घेरा गया स्थान नह । जैसा अध्याय
कहता है, पदाथ का घनत्व उसके आकार या आकृ त पर नभर नह करता; वह केवल तापमान और दाब पर
नभर करता है। इनम से कुछ भी नह बदला, अतः घनत्व भी नह बदलेगा।
संकेत: मृदा का पतला पत्रक जल पर तैर भी सकता है जब क घन डू ब जाता है — पर यह घनत्व का प रवतन नह
है। यह आकृ त का प रवतन है, और ठ क इसी कारण इस्पात का जहाज़ तैरता है जब क इस्पात क क ल नह ।
प्र.11 लोहे के एक ब्लॉक का द्रव्यमान 600 g और घनत्व 7.9 g/cm³ है। इसका आयतन क्या होगा?
घनत्व के सूत्र को आयतन के लए पुनव्यव स्थत क जए।
घनत्व = द व्यमान / आयतन → आयतन = द व्यमान / घनत्व
आयतन = 600 g ÷ 7.9 g/cm³
आयतन = 75.95 cm³ (लगभग 76 cm³)
उलटकर जाँ चए: 75.95 cm³ × 7.9 g/cm³ = 600.0 g। ✔
Page 38 of 45
Page 40
as e
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
.
उत्तर इतना छोटा क्य है: 600 g जल 600 cm³ स्थान भरेगा — एक बड़ी बोतल का लगभग आधा। उतने ही
com
m
600 g लोहे को 76 cm³ से भी कम स्थान चा हए, अथात लगभग 4 cm भुजा का एक टु कड़ा, क्य
a s emक लोहा
. coमीटर म 7.9 g भरता है। ऊँचे घनत्व का व्यावहा रक अथ यही है। agl
em
प्रत्येक घन सट
a s
aसंgकl े त: भाग दे ते समय मात्रक पर ध्यान र खए: g ÷ (g/cm³) = cm³। य द आपके मात्रक आयतन के रूप म न
com
ag
आएँ तो आपने सूत्र उलटा लगाया है।
m .
as e
a g l
co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
m a s
m .co agl
l a se
a g
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 45
Page 41
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.12 आपको चत्र 9.26 (क) और 9.26 (ख) म दशाए अनुसार एक प्रयोगात्मक व्यव ा द गई है। परखनली ( चत्र
9.26, ख) को गरम जल (~70 °C) से भरे बीकर म रखने पर काँच क नली म जल के स्तर म वृ द्ध हो जाती है।
यह घनत्व को कस प्रकार प्रभा वत करता है?
काँच की नली
परखनली
जल
परखनली स्टै ंड
(क)
जल की सतह
परखनली
गरम जल से भरा हुआ बीकर
(ख)
चत्र 9.26 (क) और (ख), पृष्ठ 151 — प्रयोगात्मक व्यव ा का पुनर खत रेखा चत्र: (क) कॉक म लगी काँच क नली
स हत जल भरी परखनली, परखनली स्टड पर रखी हुई; (ख) वही परखनली स्टड म कसी हुई और गरम जल से भरे
बीकर म रखी हुई।
जल का घनत्व घट जाता है। काँच क नली म स्तर का ऊपर उठना ही इस बात का दखाई दे ने वाला चह्न है क जल फैल गया है।
Page 40 of 45
Page 42
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
परखनली में जल का द व्यमान: अपिरवित त — नली कॉक से बंद है, न कु छ भीतर आता है न बाहर जाता है
उसी जल का आयतन: बढ़ जाता है — इसीिलए काँच की नली में स्तर ऊपर चढ़ ता है
घनत्व = द व्यमान / आयतन
वही द व्यमान ÷ बढ़ ा हुआ आयतन = कम घन त्व
ऐसा क्य होता है: गरम करने पर जल के कण को अ धक ऊजा मलती है, वे तेज़ चलते ह और एक-दूसरे से कुछ
और दूर हट जाते ह। उतने ही कण को — अथात उतने ही द्रव्यमान को — अब अ धक स्थान चा हए, और संक ण
काँच क नली थोड़े-से वस्तारण को भी स्तर क बड़ी वृ द्ध के रूप म दखा दे ती है। यही खंड 9.5.2 का सामान्य
नयम है: गरम करने पर पदाथ का घनत्व घटता है और ठं डा करने पर बढ़ता है।
क्या आप जानते ह? यही प्रभाव बताता है क गरम वायु ऊपर क्य उठती है और गरम वायु का गुब्बारा कैसे उड़ता
है ( चत्र 9.22), तथा यही क्रयाकलाप 9.2 म उपयोग कए गए द्रव तापमापी का काय- सद्धांत भी है — बल्ब का
द्रव भी ठ क इसी प्रकार संक ण नली म फैलकर ऊपर चढ़ता है।
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर — पृष्ठ 151
व ान • समाज • अंतर वषयक प रयोजनाएँ
खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर प रयोजनाएँ
प्र.1 मृत सागर पर शोध प रयोजना— मृत सागर म जलीय जीवन क्य नह है? यह ात करने का प्रयास क जए क
क्या कह और भी इसी प्रकार के जल ोत ह।
प रयोजना कैसे कर: मान चत्रावली या वश्वकोश से मृत सागर क लवणता, घनत्व और तापमान के आँकड़े एकत्र क जए, उनक
तुलना साधारण समुद्र जल से क जए और फर रसायन से जीव वज्ञान क व्याख्या क जए। एक पृष्ठ क रपोट म एक तुलना-
ता लका और एक मान चत्र अवश्य द जए।
नमूना उत्तर:
मृत सागर वास्तव म सागर नह , इज़राइल और जॉडन के बीच स्थत एक स्थलबद्ध झील है। न दयाँ इसम घुले हुए लवण लाती रहती
ह, परंतु इसका कोई नकास नह है और मरुस्थल क धूप जल को तेज़ी से वा ष्पत कर दे ती है। वाष्पन वलायक को नकाल दे ता है
और वलेय को पीछे छोड़ दे ता है, अतः सह वष म यह जल अत्यंत सांद्र लवण- वलयन बन चुका है — संतृ प्त के नकट, और
साधारण समुद्र जल से लगभग दस गुना अ धक खारा।
इसम लगभग कुछ भी जी वत नह रह पाता, तीन कारण से —
वलयन जी वत को शकाओं के लए बहुत अ धक सांद्र है। इसम रखी गई मछली या पौधे क को शकाओं से जल बाहर
आस-पास के वलयन म नकल जाता है और वे जी वत नह रह पात ।
Page 41 of 45
Page 43
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
इसम ऑक्सीजन बहुत कम घुलती है। जो द्रव पहले से घुले लवण से भरा हो उसम घुली गैस के लए स्थान कम बचता है,
और जल गरम भी रहता है — गरम जल तो वैसे भी कम ऑक्सीजन रखता है।
इसम कोई पौधा नह उग सकता, अतः जंतुओं को सँभालने वाली कोई आहार ंखला ही नह बनती।
केवल कुछ सूक्ष्मजीव वहाँ जी वत रहते ह, इसी लए इस झील को "मृत" कहा जाता है। इसका बहुत अ धक घनत्व — मानव शरीर
से स्पष्ट रूप से अ धक — यही कारण है क तैराक बना प्रयास के उस पर तैरता रहता है।
जल ोत कहाँ समानता का कारण
ग ेट सॉल्ट यूटा, संयुक्त राज्य स्थलबद्ध, कोई िनकास नही,ं बहुत अिधक लवणता; के वल बाइन िश्रंप और शैवाल जीिवत
ले क अमे रका रहते है ं
ले क असाल जबूती, अ का पथ्ृ वी की सबसे खारी झीलों में से एक ; इसके तटों से नमक िनकाला जाता है
साँभर झील राजस्थान, भारत भारत की सबसे बड़ ी अंतःस्थलीय लवण झील ; इसके जल को वािष्पत कर नमक बनाया
जाता है
लोनार झील महाराष्ट्र, भारत उ ल्कािपंड से बनी झील , खारी और क्षारीय दोनों; बहुत कम जीव इसमें रहते है ं
पैगं ोंग त्सो ल ाख, भारत ऊँ चाई पर िस्थत खारी झील िजसमें मछिलयाँ लगभग नही ं है ं
सबका साझा कारण: इनम से हर एक एक बंद द्रोणी है — जल घुले लवण लेकर भीतर आता है परंतु बाहर केवल
वाष्पन से जाता है, और वाष्पन लवण को साथ नह ले जाता। अतः सांद्रता केवल बढ़ ही सकती है।
प्र.2 जाँच क जए क साधारण नमक व भन्न वलायक , जैसे— जल, सरका और तेल म कतनी भली प्रकार से
घुलता है। प्रत्येक वलायक म नमक क घुलनशीलता क तुलना क जए और अपने अवलोकन को अं कत
क जए।
व ध — वलायक के अ त रक्त सब कुछ समान र खए। तीन स्वच्छ पारदश गलास ली जए और कक्ष तापमान पर पहले म 50
mL जल, दूसरे म 50 mL सरका और तीसरे म 50 mL खाद्य तेल डा लए। तीन म एक समतल छोटा चम्मच साधारण नमक
डा लए, स्वच्छ चम्मच से उतनी ही दे र वलो डत क जए और अवलोकन क जए। तब तक चम्मच डालते जाइए जब तक नमक
घुलना बंद न कर दे , और गनती करते जाइए। सब कुछ ता लका म अं कत क जए।
वलायक (50 आप क्या दे खते ह लगभग कतने नष्कष
ML) चम्मच घुलते ह
जल नमक लुप्त हो जाता है; द्रव स्वच्छ बना रहता है 3 से 4 बहुत अच्छ तरह घुलता है
िसरका नमक लुप्त हो जाता है, कुछ धीरे लगभग 3 अच्छ तरह घुलता है — सरका
मुख्यतः जल ही है
खाद्य तेल कण ज्य के त्य रहकर तली पर बैठ जाते ह, कोई नही ं बलकुल नह घुलता
कतना भी वलो डत क जए
Page 42 of 45
Page 44
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
प रणाम ऐसे क्य आते ह: नमक तभी घुलता है जब वलायक के कण नमक के कण को क्रस्टल से ख चकर
अलग रख सक। जल के कण यह कर सकते ह। सरका जल म ऐसी टक अम्ल का वलयन है, इस लए वह लगभग
जल क भाँ त ही व्यवहार करता है, यद्य प घुला हुआ अम्ल जल क कुछ क्षमता पहले ही ले चुका होता है। तेल के
कण म ऐसा खचाव है ही नह , अतः क्रस्टल कभी टू टता नह — नमक ज्य का त्य तेल म पड़ा रहता है।
स्वयं जाँ चए: हर गलास म एक ही चम्मच ली जए, हर बार उसे समतल क जए और उतनी ही गनती तक
वलो डत क जए। य द आप एक साथ दो बात बदल दगे तो यह नह कह पाएँगे क अंतर कससे आया — उ चत
परीक्षण का पूरा अथ यही है।
प्र.3 कक्षा म चचा क जए क क्या जल वास्तव म सबसे सवतोमुखी वलायक है?
चचा कैसे कराएँ: कक्षा को दो पक्ष म बाँ टए, प्रत्येक को उदाहरण जुटाने के लए दस मनट द जए, और यह शत र खए क हर
बात के साथ एक उदाहरण हो, केवल मत नह । नणय प्रमाण से हो, ऊँची आवाज़ से नह ।
हाँ — जल सबसे सवतोमुखी वलायक है नह — यह सबसे सवतोमुखी नह है
यह पदाथ ं की िवशाल श्रेणी को घोलता है — लवण, शक राएँ, यह तेल , वसा, मोम, प्ल ािस्टक और अिधकाशं पेंट-वािनश नही ं घोल
ओ.आर.एस. का चूण, अनेक औषिधयाँ तथा ऑक्सीजन और काबन सकता — इसीिलए तैल ीय पेंट तारपीन से पतला िकया जाता है, जल
डाइऑक्साइड जैस ी गैसे ं। से नही ं।
यह पत्येक जीवधारी में घुले पदाथ ं का वहन करता है — पौधों में रस, कु छ औषधीय यौिगक जड़ ी-बूटी से के वल ऐ ल्कोहॉल या हाइडो-
जंतओ
ु ं में रुिधर, आपकी आँत में पचा हुआ भोजन। ऐ ल्कोहॉिलक िमश्रण से ही िनकलते है,ं जैस ा अध्याय के अपने
िवरासत-बॉक्स में िलखा है।
यह सस्ता, पचुर , िवषरिहत और अज्वलनशील है — एक ऐसा भारतीय पारंपिरक िचिक त्सा भी वहाँ तेल , घी और दू ध को िवलायक
औद्योिगक िवलायक जो िपया भी जा सकता है। बनाती है जहाँ जल काम नही ं आता।
जीवन का आरंभ ही जल में हुआ और वह आज भी जल में ही चलता है, "सबसे सवतोमुखी" का िनणय हवा में नही ं हो सकता — सबसे अच्छा
इसी ग ण
ु के कारण। िवलायक वही है जो उस पदाथ को घोल दे िजसे आपको घोलना है।
सबसे सशक्त पक्ष: जल को सवत्र वलायक कहा जाना उ चत ही है, और कोई दूसरा अकेला द्रव दै नक पदाथ क इतनी बड़ी
श्रेणी को नह घोलता। परंतु "सवत्र" एक प्रशंसा है, तथ्य नह — थाली क चकनाई के लए साबुन चा हए, तैलीय पट के लए
तारपीन, और रसायनज्ञ वलायक काय के अनुसार चुनता है। जल हमारे पास का सबसे सवतोमुखी वलायक है, और फर भी
अकेला पयाप्त नह है।
संकेत: दोन पक्ष म सबसे अच्छा तक वही होगा जसका ठोस उदाहरण दूसरा पक्ष काट न सके। ऐसा एक उदाहरण
अपनी रसोई से लाइए।
Page 43 of 45
Page 45
ase
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
se m.
o
अध्याय — एक नज़र म
m l a
g मश्रण अथात वलयन
m .मc घटक समान रूप से वत रत ह और अलग-अलग पहचाने न जा सक, वह समरूपa
seम नमक या चीनी वलयन है; जल म चॉक का चूण, रेत या लकड़ी का बुरादा वषमरूप मश्रण है।
जस मश्रण
हैl।a
agजब कोई ठोस कसी द्रव म घुलता है तब ठोस घटक वलेय और द्रव घटक वलायक कहलाता है। दो द्रव के मश्रण म कम
जल
co m
मात्रा म उप स्थत पदाथ वलेय होता है।
m . ag
se
जस वलयन म उस तापमान पर और वलेय घुल सके वह असंतृप्त है; जब वलेय घुलना बंद कर तली पर बैठने लगे तब वह
l a
g घुलने वाली अ धकतम मात्रा उसक वलेयता है।
उस तापमान पर संतृप्त वलयन है। वलयन क न त मात्रा म उप स्थत वलेय क मात्रा उसक सांद्रता है (तनु या सांद्र),
और वलायक क न त मात्रा (100 mL)aम
तापमान बढ़ाने पर द्रव म ठोस क वलेयता सामान्यतः बढ़ती है — संतृप्त वलयन गरम करने पर असंतृप्त क भाँ त व्यवहार
. c om
करता है — परंतु गैस क वलेयता घटती है। इसी कारण ठं डे जल म जलीय जीवन के लए अ धक ऑक्सीजन घुली रहती है।
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन। इसका SI मात्रक kg/m³ है; द्रव और छोटे ठोस के लए g/mLeऔर
s m g/cm³ सु वधाजनक
m a
glके आकार या आकृ त पर नभर
o घनत्व जल से तुलना करता है और उसका कोई मात्रक नह होता। घनत्व वस्तु
ह। आपेcक्षक
नह m
. a
ase
agl द्रव्यमान तुला से, द्रव का आयतन मापक स लडर से (नवचंद्रक क तली पढ़कर), नय मत ठोस का आयतन l × w × h से
करता, केवल तापमान और दाब पर नभर करता है।
और अ नय मत ठोस का आयतन जल के व ापन से मापा जाता है।
m a s
. c o agl
गरम करने पर कण दूर-दूर फैलते ह, आयतन बढ़ता है पर द्रव्यमान नह — अतः घनत्व घटता है; इसी से गरम वायु ऊपर
उठती है और गरम वायु का गुब्बारा उड़ता है। दाबm
s e गैस को अ धक, द्रव को कम और ठोस को नगण्य रूप से प्रभा वत करता
a
है। जल वशेष है — इसका घनत्व 4 °C पर
g laसवा धक होता है और बफ बनने पर कण अ धक स्थान घेरते ह, इस लए बफ जल
पर तैरती है।
com
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 44 of 45
Page 46
कक्षा 8 वज्ञान अध्याय 9 वलेय , वलायक और वलयन का अ त संसार AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
पद अथ अध्याय का उदाहरण मान / मात्रक
वलयन ृ क रूप से िदखाई
समरूप िमश्रण िजसके घटक पथ जल म नमक और चीनी (ओ.आर.एस.); —
नही ं दे ते वायु; गुलाब जामुन क चाशनी
वलेय / वलायक घुल ने वाला पदाथ / घोलने वाला पदाथ; दो द वों में चाशनी म चीनी ( वलेय) और जल —
कम मात्रा वाला िवले य ( वलायक)
संतृप्त वलयन उस तापमान पर िजसमें और िवले य नही ं घुल सकता; क्रयाकलाप 9.1 म चम्मच-दर-चम्मच —
अितिरक्त िवले य तली पर बैठ जाता है नमक डालना
असंतृप्त वलयन िजसमें उस तापमान पर और िवले य घोला जा सकता एक-दो चम्मच नमक घोलने के बाद का —
है वही वलयन
सांद्रता िवलयन की िनि चत मात्रा में उपिस्थत िवले य की मात्रा 50 mL म 4 चम्मच, 100 mL म 2 चम्मच प्र त 100
— तनु या साद
ं चम्मच से 4 गुना सांद्र mL
वलेयता िकसी िविशष्ट तापमान पर िवलायक की िनि चत मात्रा बे कग सोडा — 70 °C पर 50 °C या g प्र त 100 mL
(घुलनशीलता) (100 mL) में घुल ने वाली िवले य की अिधकतम मात्रा 20 °C क अपेक्षा अ धक घुलता है
द्रव्यमान वस्तु में उपिस्थत पदाथ की मात्रा; तुल ा से मापा जाता अंक य तुला पर तोला गया पत्थर 16.400 g
है
भार वह बल िजससे पथ्ृ वी वस्तु को अपनी ओर खी ंचती है अ धकांश तुला वास्तव म भार मापती ह न्यूटन (N)
— द व्यमान से िभन्न पर अंकन द्रव्यमान म होता है
आयतन वस्तु ारा घे र ा गया स्थान नोटबुक 25 cm × 18 cm × 2 cm; 900 cm³; 5
पत्थर वस्थापन से cm³
मापक स लडर का वह न्यूनतम आयतन जो वह पढ़ सकता है 100 mL स लडर — चह्न के बीच 10 1 mL
अल्पतमांक mL ÷ 10 प्रभाग
घनत्व इकाई आयतन में िवद्यमान द व्यमान, द व्यमान / 10 cm³ म 27 g ऐलु म नयम; 5 cm³ 2.7 g/cm³;
आयतन म 16.400 g पत्थर 3.28 g/cm³
आपे क्षक घनत्व पदाथ का घनत्व ÷ उस तापमान पर जल का घनत्व जल के सापेक्ष ऐलु म नयम 2.7 (कोई मात्रक
नह )
Page 45 of 45