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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस

AglaSem पर कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 10 Light Mirrors and Lenses (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस - Page 1 of 55

About NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस

NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (55 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 10: प्रकाश — दपण एवं लस

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

152 – 169 26 61 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 54 pages

Page 2

कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · वज्ञान · जज्ञासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: प्रकाश — दपण एवं लस
समतल दपण सदै व वस्तु के बराबर आमाप का प्र त बब बनाता है। कतु य द परावतक पृष्ठ को व क्रत कर दया जाए — अथवा काँच के टु कड़े के पृष्ठ
व क्रत कर दए जाएँ — तो चत्र पूरी तरह बदल जाता है। इस अध्याय म परावतन का करण मॉडल बनता है, परावतन के दो नयम स्था पत होते ह,
और इन्ह से समझ आता है क अवतल दपण आपका चेहरा बड़ा या उल्टा क्य दखाता है, उत्तल दपण पीछे का यातायात सदै व छोटा क्य दखाता है,
और उत्तल लस कागज को क्य जला सकता है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

जज्ञासा (कक्षा 8) 152 – 169

खं ड प्रश्न

26 61

माध्यम

हन्द

खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 152
अध्याय का आरंभ

खोजबीन और वचार कर

प्र.1 क्या हम ऐसे दपण बना सकते ह जनसे आव धत अथवा लघुकृत प्र त बब बनते ह ?

हाँ। इसके लए बस परावतक पृष्ठ को व क्रत करना पड़ता है। समतल दपण प्रत्येक करण को इस प्रकार लौटाता है क करणपुंज
का फैलाव नह बदलता, इस लए प्र त बब सदै व वस्तु के बराबर आमाप का होता है। गोलीय दपण — जसका पृष्ठ खोखले गोले का
एक भाग होता है — इससे भन्न है, क्य क इसका पृष्ठ प्रत्येक बदु पर थोड़ी भन्न दशा म होता है।

अवतल दपण (भीतर क ओर व क्रत) पराव तत करण को पास लाता है। चेहरे के समीप रखने पर यह आव धत एवं सीधा
प्र त बब बनाता है; दूर ले जाने पर प्र त बब उल्टा हो जाता है और फर छोटा होता जाता है।
उत्तल दपण (बाहर क ओर व क्रत) पराव तत करण को फैला दे ता है, इस लए इसका प्र त बब सदै व सीधा और लघुकृत
होता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

परावतक पृष्ठ परावतक पृष्ठ

अवतल दपण उत्तल दपण
पा से दे खने पर अंतर स्पष्ट हो जाता है — अवतल दपण का चमक ला पृष्ठ भीतर क ओर धँसा होता है और उत्तल दपण का चमक ला
पृष्ठ बाहर क ओर उभरा होता है। छायां कत भाग अपरावत पृष्ठ है।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक बदु पर परावतन उसी नयम का पालन करता है — परावतन कोण, आपतन कोण के
बराबर। कतु व क्रत पृष्ठ पर आगे बढ़ते ही अ भलंब क दशा थोड़ी-थोड़ी बदलती जाती है, इस लए समांतर आई
करण भन्न- भन्न दशाओं म लौटती ह। अवतल पृष्ठ पर अ भलंब एक-दूसरे क ओर झुके होते ह ( करण
अ भस रत), उत्तल पृष्ठ पर एक-दूसरे से दूर ( करण अपस रत)।

स्वयं जाँ चए: स्ट ल क चम्मच म दोन दपण एक साथ ह — इसका भीतरी धँसा पृष्ठ अवतल है और बाहरी उभरा
पृष्ठ उत्तल।

प्र.2 वाहन म लगे पा -दृश्य दपण पर एक चेतावनी अं कत होती है जसका हद म अथ है — “वस्तुओं के बीच
वास्त वक दूरी दपण म दखाई दे ने वाली दूरी से कम होती है।” उन पर यह चेतावनी क्य लखी होती है?

क्य क पा -दृश्य दपण उत्तल दपण होता है, और उत्तल दपण का प्र त बब सदै व वस्तु से छोटा होता है।
हम कसी वस्तु क दूरी का अनुमान बहुत हद तक उसके दखाई दे ने वाले आमाप से लगाते ह। जस मोटरसाइ कल का प्र त बब
आधा आमाप का दखे, आँख उसे दुगुनी दूरी पर मान लेती है। इस लए पीछे आ रही बस वास्तव म उतनी दूर नह होती जतनी
उसका छोटा प्र त बब सुझाता है। लेन बदलते समय चालक यह भूल न करे, इसी के लए यह चेतावनी लखी जाती है।

फर उत्तल दपण लगाया ही क्य जाता है: बाहर क ओर व क्रत होने के कारण यह पीछे क सड़क के बहुत
अ धक वस्तृत क्षेत्र का प्रकाश समेटकर उसी छोटे दपण म दखा दे ता है। उतने ही आमाप का समतल दपण आमाप
तो सही दखाता, पर दृश्य क्षेत्र बहुत सी मत रहता और अंध-क्षेत्र (blind spot) बड़ा हो जाता। नमाता वस्तृत दृश्य
के बदले दूरी के इस भ्रम को स्वीकार कर लेता है — और चेतावनी लख दे ता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? अंग्रेज़ी संस्करण म यही चेतावनी “Objects in mirror are closer than they
appear” के रूप म द गई है — बात वही है, कहने का ढं ग भन्न।

प्र.3 कुछ ऐनक के लस पर एक वक्र रेखा क्य होती है?

वह रेखा उसी लस के नचले भाग म बने एक दूसरे लस-क्षेत्र क सीमा है। ऐसे लस को फोकसी (बाइफोकल) लस कहते ह —
एक ही काँच म दो अलग-अलग वक्रता वाले भाग।

ऊपर का बड़ा भाग कम व क्रत होता है और दूर क वस्तुएँ दे खने के काम आता है।
वक्र रेखा से घरा नीचे का छोटा भाग अ धक व क्रत होता है। अ धक व क्रत उत्तल पृष्ठ होने के कारण यह पास क मु द्रत सामग्री
को बड़ा दखाता है, इस लए पहनने वाला केवल आँख नीची करके पढ़ लेता है।

दो वक्रताओं क आवश्यकता क्य : लस प्रकाश को कतना मोड़ेगा, यह उसके पृष्ठ क वक्रता पर नभर करता है।
एक ही वक्रता 30 सट मीटर दूर रखी पुस्तक और 30 मीटर दूर लगे सूचना-पट्ट — दोन के लए उपयुक्त नह हो
सकती। इस लए दोन वक्रताएँ एक ही लस म घस द जाती ह और उनका जोड़ एक वक्र रेखा के रूप म दखाई दे ता
है।

संकेत: इस प्रश्न का उत्तर अध्याय म नह दया गया है — यह आपको वास्त वक ऐनक ध्यान से दे खने के लए प्रे रत
करता है। कसी बुजग के पढ़ने के चश्मे को तरछे प्रकाश म दे खए, रेखा सरलता से दख जाएगी।

प्र.4 अपने प्रश्न को साझा क जए

इस पृष्ठ के चत्र दे खकर आपके मन म जो प्रश्न वास्तव म उठते ह, उन्ह अपनी अभ्यास पु स्तका के आरंभ म ल खए। अध्याय पूरा
होने तक आपको इनम से हर प्रश्न का उत्तर दे ना आ जाना चा हए।
नमूना प्रश्न:

चम्मच के भीतरी पृष्ठ म मेरा चेहरा उल्टा और बाहरी पृष्ठ म सीधा क्य दखता है?
क्या कोई ऐसी दूरी होती है जस पर अवतल दपण का प्र त बब पलट जाता है? उस दूरी म वशेष क्या है?
अवतल दपण कागज जला सकता है, पर उतने ही आमाप का समतल दपण क्य नह ?
दपण म प्र त बब दखता है और लस के माध्यम से वस्तु दखती है — यह अंतर क्य ?
सड़क के तीखे मोड़ पर उत्तल दपण लगाए जाते ह। क्या वहाँ अवतल दपण काम करेगा?

संकेत: अच्छा प्रश्न वह है जो आपके कसी वास्त वक प्रेक्षण से जुड़ा हो और ‘क्य ’ या ‘य द ऐसा हो तो’ पूछे। ‘दो
दपण आमने-सामने रखने पर क्या होगा?’ ‘दपण क्या है?’ से कह अच्छा प्रश्न है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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क्रयाकलाप 10.1— आइए, खोज कर — पृष्ठ 153
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10.1 गोलीय दपण क्या ह?
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क्रयाकलाप

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धातु क एक चमकदार चम्मच ली जए और इसके व क्रत पृष्ठ को अपने चेहरे के पास लाइए। क्या आप अपना
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प्र.1
प्र त बब इसम दे ख पाते ह?
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हाँ, स्पष्ट रूप से। पॉ लश क हुई स्ट ल क चम्मच प्रकाश को दपण क ही भाँ त नय मत रूप से पराव तत करती है, इस लए उसम

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चेहरे का प्र त बब बनता है।

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eतmर करणपुंज परावतन के बाद भी व्यव स्थत रहता है — प्रत्येक करण परावतन के नयम का पालन करती है
ऐसा क्य होता है: पॉ लश कया हुआ धा त्वक पृष्ठ प्रकाश के पैमाने पर चकना होता है, इस लए उस पर पड़ा

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gl और पड़ोसी करण साथ-साथ चलती रहती ह। यही प्र त बब बनाता है। खुरदरी या खर च वाली चम्मच करण को
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सब दशाओं म बखेर दे ती है और उसम केवल चमक ला धब्बा दखता है, प्र त बब नह ।
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प्र.2 a g
अपने चेहरे के प्र त बब को ध्यान से दे खए। क्या यह उस प्र त बब से भन्न है जो आप समतल दपण म दे खते ह?

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हाँ, बहुत भन्न है। समतल दपण म चेहरा बराबर आमाप का और सीधा दखता है। चम्मच के भीतरी धँसे पृष्ठ म, समीप रखने पर,
m
l a seचेहरा कह अ धक बड़ा दखता है — और तब भी सीधा रहता है।

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ऐसा क्य होता है: चम्मच का भीतरी पृष्ठ अवतल होता है। भीतर क ओर व क्रत होने के कारण यह चेहरे से आने
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वाली करण को परावतन के बाद भीतर क ओर मोड़ दे ता है। चेहरा जब चम्मच के बहुत पास हो तो ये पराव तत
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करण आँख तक पहुँचते-पहुँचते भी फैली ही रहती ह, इस लए आँख उन्ह पीछे क ओर सीधी रेखाओं म बढ़ाकर

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चम्मच के पीछे एक बदु पर ले जाती है — और वहाँ बना चत्र आपके चेहरे से बड़ा होता है।

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m a s emक्या आपको प्र त बब म कोई
co प रवतन दखाई दे ता है? gl
प्र.3 प्र त बब का अवलोकन करते हुए चम्मच को धीरे-धीरे अपने चेहरे से दूर ले जाइए।

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हाँ, और प रवतन एक न त क्रम म होता है —

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1. पहले प्र त बब सीधा रहता है और बड़ा होता जाता है।

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2. एक वशेष दूरी पर यह धुँधला पड़ जाता है और स्पष्ट दखाई नह दे ता।
3. उससे आगे प्र त बब उल्टा दखने लगता है — पहले बड़ा, फर चम्मच को और दूर ले जाने पर लगातार छोटा होता जाता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: अवतल पृष्ठ पराव तत करण को अ भस रत करता है। जब तक चेहरा एक न त दूरी से पास
है, यह अ भसरण इतना नह होता क करण आँख तक पहुँचने से पहले मल जाएँ — इस लए प्र त बब सीधा और
आव धत रहता है। उस दूरी के बाद करण दपण के सामने ही एक-दूसरे को काट दे ती ह, और कटने के बाद बना
प्र त बब उल्टा होता है। यह पलटाव धीरे-धीरे नह होता — वह कटान- बदु आपक आँख के आगे नकल जाता है,
बस।

प्र.4 अब चम्मच को उल्टा कर ली जए और उपयुक्त चरण को दोहराइए।

उभरा हुआ बाहरी पृष्ठ सामने करने पर व्यवहार कह अ धक सरल है। प्र त बब हर दूरी पर सदै व सीधा और सदै व चेहरे से छोटा
रहता है। चम्मच को दूर ले जाने पर वह थोड़ा और छोटा हो जाता है, पर कभी उल्टा नह होता।

ऐसा क्य होता है: बाहरी पृष्ठ उत्तल होता है। यह पराव तत करण को पास लाने के बजाय फैला दे ता है, इस लए वे
कभी एक-दूसरे को काटती ही नह । जो करण कभी नह कटत वे उल्टा प्र त बब बना ही नह सकत — यही
कारण है क उत्तल पृष्ठ केवल सीधा और लघुकृत प्र त बब ही बना सकता है।

यह भी क जए: उभरी चम्मच म केवल आपका चेहरा नह , पूरे कमरे क एक पट्ट दखती है। यही अ त रक्त
चौड़ाई पा -दृश्य दपण म उत्तल दपण लगाने का कारण है।

क्रयाकलाप 10.2— आइए, भेद कर — पृष्ठ 155

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

10.1 गोलीय दपण क्या ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 अब आँख को दपण के ऊपरी पृष्ठ के तल म लाकर पा से दे खकर पहचा नए क पृष्ठ भीतर क ओर व क्रत है या
बाहर क ओर ( चत्र 10.4)।

बाहर की ओर वि त
भीतर की ओर वि त
दपण के तल मे ं आँख

अवतल दपण उत्तल दपण
चत्र 10.4, पृष्ठ 155 — मेज पर परावतक पृष्ठ ऊपर क ओर रखे दोन दपण, आँख को उनके तल म लाकर पा से
दे खने पर। पुनःरेखां कत चत्र: अवतल दपण का पृष्ठ भीतर क ओर व क्रत है और उत्तल दपण का बाहर क ओर।

पृष्ठ के तल म आँख लाकर दे खने पर आकृ त तुरंत स्पष्ट हो जाती है —

य द चमक ला पृष्ठ बीच म धँसा है — कनारे बीच से ऊँचे ह — तो वह अवतल दपण है।
य द चमक ला पृष्ठ बीच म उठा है — बीच कनार से ऊँचा है — तो वह उत्तल दपण है।

परावतक पृष्ठ परावतक पृष्ठ

अवतल दपण उत्तल दपण

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

पा से दे खने पर अंतर स्पष्ट हो जाता है — अवतल दपण का चमक ला पृष्ठ भीतर क ओर धँसा होता है और उत्तल दपण का चमक ला
पृष्ठ बाहर क ओर उभरा होता है। छायां कत भाग अपरावत पृष्ठ है।

आँख पृष्ठ के तल म ही क्य लानी है: ठ क ऊपर से दे खने पर दोन दपण एक जैसी चमक ली चक तयाँ लगते ह,
क्य क तब पृष्ठ सामने से दखता है और उसका थोड़ा-सा उभार या धँसाव छप जाता है। आँख को दपण के तल तक
लाने पर पृष्ठ क पा -रूपरेखा पृष्ठभू म के सामने दखने लगती है और एक मलीमीटर का अंतर भी दखाई दे जाता
है।

स्वयं जाँ चए: दपण को हलाए बना दूसरी तरह भी पु ष्ट क जा सकती है — प्रत्येक के सामने 3–4 सट मीटर पर
कोई छोट वस्तु र खए। जो दपण उसे बड़ा दखाए वह अवतल है, जो छोटा दखाए वह उत्तल।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 155
10.1 गोलीय दपण क्या ह?

प्र.1 हम अवतल और उत्तल दपण म कस प्रकार भेद कर सकते ह?

तीन शीघ्र परीक्षण ह, और तीन अलग-अलग बात जाँचते ह।

परीक्षण अवतल दपण उत्तल दपण

पाश्व से दे खना (ि याकलाप 10.2) चमकीला प ृ ठ भीतर की ओर धँस ा
ष् चमकीला प ृ ठ बाहर की ओर उभरा
ष्

समीप रखी वस्तु का पितिबंब सीधा और आविध त सीधा और लघुकृ त

वस्तु को दू र ले जाने पर पितिबंब उ टा हो जाता है
ल् पितिबंब सीधा ही रहता है, के वल छोटा होता है

समांतर िकरणपुंज डालने पर परावितत पुंज अिभसिरत होता है परावितत पुंज अपसिरत होता है

प्र त बब वाला परीक्षण सबसे भरोसेमंद क्य है: वक्रता बहुत कम हो तो आकृ त वाला परीक्षण चूक सकता है,
पर उसी वक्रता का प्रभाव प्र त बब म सरलता से दख जाता है। और करणपुंज वाला परीक्षण तो मूल कारण तक
पहुँचता है — अ भसरण या अपसरण ही वह एक गुण है जो सीधे इस बात से नकलता है क पृष्ठ भीतर व क्रत है या
बाहर।

संकेत: समतल दपण का उत्तर तीसरी पं क्त म मलेगा — उसम प्र त बब हर दूरी पर बराबर आमाप का रहता है
और समांतर पुंज समांतर ही रहता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

क्रयाकलाप 10.3— आइए, खोज कर — पृष्ठ 155
10.2 गोलीय दपण ारा बनाए गए प्र त बब के अ भलक्षण क्या होते ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 दोन दपण को मेज पर एक दूसरे के समीप सीधा खड़ा करके र खए। वस्तु को उनके सामने थोड़ी दूरी (3 – 4
सट मीटर) पर र खए जैसे चत्र 10.5 (क) म दशाया गया है। आप प्रत्येक दपण म कस प्रकार का प्र त बब दे खते
ह? क्या प्र त बब का आमाप उतना ही है जतना उनके सामने रखी वस्तु का है? क्या वे सीधे ह? क्या आप
प्र त बब म पा प रवतन दे खते ह? अपनी अभ्यास पु स्तका म अपने अवलोकन को ल खए।

(क) (ख)

अवतल दपण उत्तल दपण अवतल दपण उत्तल दपण
वस्तु अल्प दूरी (3–4 से ंटीमीटर) पर वस्तु बहुत अिधक दूरी पर

चत्र 10.5, पृष्ठ 155 — अवतल एवं उत्तल दपण के सामने रखा वही खलौना। पुस्तक के छाया चत्र का पुनःरेखांकन।
(क) अल्प दूरी पर अवतल दपण बड़ा सीधा प्र त बब बनाता है और उत्तल दपण छोटा सीधा। (ख) दूर ले जाने पर
अवतल दपण का प्र त बब उल्टा हो जाता है, जब क उत्तल दपण का प्र त बब सीधा और और भी छोटा रहता है।

खलौना केवल 3–4 सट मीटर दूर रखने पर —

दपण आमाप सीधा या उल्टा? पा प रवतन?

अवतल आविध त — िखलौने से बड़ ा सीधा हाँ

उत्तल लघुकृ त — िखलौने से छोटा सीधा हाँ

अतः बीच वाले प्रश्न का उत्तर नह है — कसी भी दपण म प्र त बब वस्तु के बराबर आमाप का नह है, और यही समतल दपण से
पहला स्पष्ट अंतर है। इस अल्प दूरी पर दोन प्र त बब सीधे ह और दोन म पा प रवतन दखता है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
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प रवतन दोन म क्य : पा प रवतन वक्रता के कारण होता ही नह । यह इस लए होता है क हम वस्तु को
अपनी ओर से नह , दपण क ओर से दे ख रहे होते ह — खलौने का जो भाग आपके दा हने हाथ eकmओर है,
c o mओर आ जाता है। यह उलटाव समतल, अवतल और उत्तल — तीन दपणg l asम समान रूप से
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प्र त बब म वह बाईं

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प्र.2 अब धीरे-धीरे वस्तु को दपण से दूर ले जाइए ( चत्र 10.5, ख)। दोन दपण के प्र त बब म आप क्या प रवतन

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दे खते ह? प्र त बब का आमाप घटता है या बढ़ता है? क्या प्र त बब सीधे बने रहते ह? ये सब प्रेक्षण भी अभ्यास
पु स्तका म ल खए।

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(क) (ख)
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अवतल दपण उत्तल दपण अवतल दपण उत्तल दपण

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वस्तु अल्प दूरी (3–4 से ंटीमीटर) पर वस्तु बहत
ु अिधक दूरी पर

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glछोटा सीधा। (ख) दूर ले जाने पर
co (क) अल्प दूरी पर अवतल दपण बड़ा सीधा प्र त बब बनाता है और उत्तल aदपण
चत्र 10.5, पृष्ठ 155 — अवतल एवं उत्तल दपण के सामने रखा वही खलौना। पुस्तक क छाया चत्र का पुनःरेखांकन।

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अवतल दपण का प्र त बब उल्टा हो जाता है, जब क उत्तल दपण का प्र त बब सीधा और और भी छोटा रहता है।

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अवतल दपण। सीधा प्र त बब पहले और बड़ा होता है। एक वशेष दूरी पर वह धुँधला पड़ जाता है; उसके आगे प्र त बब उल्टा
होकर लौटता है — पहले आव धत, और खलौना जतना दूर जाता जाए उतना ही लगातार छोटा होता जाता है।

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उत्तल दपण। यहाँ कुछ नाटक य नह होता। प्र त बब पूरे समय सीधा रहता है और खलौना पीछे ले जाने पर केवल थोड़ा और
छोटा हो जाता है।
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agतत करण को अ भस रत करता है,
.cकेवल अवतल दपण का प्र त बब ही क्य पलटता है: अवतल दपण पराव
m इस लए एक न त वस्तु-दूरी के बाद वे दपण के सामने ही एक-दूसरे को काट दे ती ह। प्रकाश के कट जाने पर ऊपर
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और नीचे आपस म बदल जाते ह और प्र त बब उल्टा हो जाता है। उत्तल दपण पराव तत करण को अपस रत करता

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है; वे कभी कटती ही नह , इस लए उसका प्र त बब वस्तु कह भी रखी जाए, कभी उल्टा नह हो सकता।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 अपने अवलोकन का व ेषण क जए और नष्कष नका लए।

नष्कष 1. गोलीय दपण समतल दपण क भाँ त व्यवहार नह करते। समतल दपण सदै व वस्तु के बराबर आमाप का सीधा प्र त बब
बनाता है, जब क गोलीय दपण म वस्तु क दूरी बदलते ही प्र त बब का आमाप बदल जाता है।
नष्कष 2. अवतल दपण का प्र त बब आव धत, बराबर आमाप का अथवा लघुकृत हो सकता है और सीधा या उल्टा भी — यह
पूरी तरह दपण से वस्तु क दूरी पर नभर करता है।
नष्कष 3. उत्तल दपण कह अ धक अनुमानयोग्य है — वस्तु क दूरी चाहे जो हो, इसका प्र त बब सदै व सीधा और सदै व
लघुकृत होता है।
नष्कष 4. पा प रवतन तीन प्रकार के दपण म दखता है, इस लए इससे दपण म भेद नह कया जा सकता।

संकेत: नष्कष लखते समय प रणाम के साथ शत भी ल खए — ‘वस्तु समीप रखने पर आव धत एवं सीधा’
नष्कष है; अकेला ‘आव धत’ नष्कष नह है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 156
10.2 गोलीय दपण ारा बनाए गए प्र त बब के अ भलक्षण

प्र.1 सही बात है। कतु अपने आस-पास हम उत्तल एवं अवतल दपण का उपयोग कहाँ-कहाँ दे खते ह?

प्रत्येक उपयोग ठ क उसी गुण के कारण चुना गया है जो वह दपण प्रकाश पुंज के साथ करता है।

दपण कहाँ उपयोग होता है वही दपण क्य

अवतल टॉच के ब ब के पीछे परावतक ; कार और
ल् बल्ब को उपयुक्त स्थान पर रखने पर परावतक से प्रकाश एक सशक्त समांतर पुंज
कू टर के अगदीप
स् के रूप म नकलता है जो दूर तक जाता है

अवतल दंत िचिक सक का दपण
त् दाँत के पास रखने पर दाँत का सीधा और आव धत प्र त बब बनता है

अवतल परावतक दू र दशक का मु य दपण; सौर -
ख् बड़े क्षेत्र से प्रकाश समेटकर एक बदु पर संक द्रत कर दे ता है
कु कर और सौर भ ी

उत्तल वाहनों का पा व-दृ य दपण
श् श् सीधा प्र त बब और पीछे क सड़क का कह अ धक वस्तृत दृश्य

उत्तल चौराहों और ती ण मोड़ ों पर लगा सड़ क
क्ष् दोन ओर के चालक दूसरी ओर का यातायात दे ख सक और टकराने से बच सक
सुर ा दपण
क्ष

उत्तल बड़ े भंडार गृहों में चौकसी दपण एक ही दपण से बड़ा क्षेत्र दृ ष्ट म रहता है, जससे चोरी क संभावना घटती है

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

सूची के पीछे का नयम: जहाँ प्रकाश को समेटकर संक द्रत करना हो, या पास रखी छोट वस्तु को आव धत करना
हो, वहाँ अवतल दपण लगता है। जहाँ सही आमाप से अ धक महत्त्व वस्तृत दृश्य का हो, वहाँ उत्तल दपण।

प्र.2 क्या आपने दं त च कत्सक ारा दाँत के नरीक्षण के लए उपयोग म लाए जाने वाले दपण को दे खा है?

हाँ — वह लंबी डंडी पर लगा छोटा गोल दपण जसे च कत्सक मुख के भीतर ले जाते ह। वह अवतल दपण होता है।
दाँत के बलकुल पास रखने पर अवतल दपण सीधा और आव धत प्र त बब बनाता है, इस लए छोट -सी गु हका या दरार भी इतनी
बड़ी दखती है क जाँची जा सके। लंबी डंडी के कारण च कत्सक दाँत के पछले भाग को भी दे ख पाते ह, जसे सीधे दे खा ही नह
जा सकता।

इसे पास ही क्य रखना पड़ता है: अवतल दपण तभी तक आवधन करता है जब तक वस्तु एक न त दूरी से
समीप हो। दूर करते ही प्र त बब पलटकर छोटा हो जाएगा — जो च कत्सक के कसी काम का नह । इसी लए दपण
दाँत से लगभग सटाकर रखा जाता है।

एक सोपान ऊपर — पृष्ठ 156
10.2 गोलीय दपण ारा बनाए गए प्र त बब के अ भलक्षण

एक सोपान ऊपर

प्र.1 क्या कक्षा 6 क पाठ्यपुस्तक जज्ञासा के ‘पृथ्वी से परे’ अध्याय म आपने दूरदशक यंत्र के वषय म जो सीखा था
वह आपको स्मरण है?

हाँ। ‘पृथ्वी से परे’ अध्याय म दूरदशक यंत्र का प रचय उस उपकरण के रूप म दया गया था जो आकाश क धुँधली और दूरस्थ
वस्तुएँ — ग्रह, उपग्रह और तारे — नंगी आँख क तुलना म कह बेहतर दखाता है।
यह अध्याय उसम यह जोड़ता है क अ धकांश आधु नक दूरदशक यह काम कैसे करते ह। वे परावतक दूरदशक होते ह, जनम
प्रकाश समेटने वाला मुख्य भाग एक बड़ा अवतल दपण होता है, लस नह ।

अवतल दपण ही उपयुक्त क्य है: तारा इतना दूर होता है क उसका प्रकाश हम तक समांतर करणपुंज के रूप म
पहुँचता है, और समांतर करणपुंज को एक बदु पर संक द्रत करना ठ क अवतल दपण का गुण है। दपण जतना
बड़ा होगा, उतना ही अ धक क्षीण तारा-प्रकाश समेटेगा और प्र त बब उतना ही चमक ला तथा सूक्ष्म ववरण वाला
बनेगा। दपण को उसके पूरे क्षेत्रफल पर पीछे से सहारा भी दया जा सकता है, इस लए वह बना झुके बहुत बड़ा
बनाया जा सकता है — लस के साथ यह कह अ धक क ठन है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 157
10.3 परावतन के नयम क्या ह?

प्र.1 क्या आपको वह क्रयाकलाप स्मरण है जसे आपने समतल दपण से कसी प्रकाश पुंज के परावतन के अवलोकन
के लए कया था।

हाँ। कक्षा 7 म कंघी से झरी बनाई गई थी — मध्य क एक झरी छोड़कर बाक सब काले कागज से ढक द गई थ , और टॉच का
प्रकाश उसी एक झरी से नकालकर सफेद कागज के अनु दश एक पतला करणपुंज प्राप्त कया गया था। उसी कागज पर उस पुंज
के माग म समतल दपण उध्वाधर खड़ा कया गया था।
पुंज दपण से टकराकर एक न त नई दशा म लौटा — बखरा नह । दपण या टॉच घुमाने पर लौटने वाले पुंज क दशा बदल जाती
थी, कतु पराव तत पुंज सदै व ठ क एक ही होता था।

संकेत: यही व्यवस्था क्रयाकलाप 10.4 म फर उपयोग होती है, पर इस बार कोण वास्तव म मापे जाते ह; और
क्रयाकलाप 10.6 म अनेक झ रयाँ खुली रखकर अनेक समांतर पुंज एक साथ दपण पर डाले जाते ह।

प्र.2 हमने समतल, उत्तल एवं अवतल तीन प्रकार के दपण म बने प्र त बब का अवलोकन कया है। कतु क्या इन
प्र त बब क रचना के कुछ नयम होते ह?

हाँ। दपण जो कुछ करता है वह केवल परावतन के दो नयम से नकलता है, और ये नयम हर दपण के हर बदु पर, हर करण पर
लागू होते ह।

1. आपतन कोण, परावतन कोण के बराबर होता है — दोन कोण आपतन बदु पर ख चे गए अ भलंब से मापे जाते ह।
2. आप तत करण, आपतन बदु पर अ भलंब तथा पराव तत करण — तीन एक ही समतल म होते ह।

दो ही नयम पयाप्त क्य ह: पहला नयम बताता है क करण कतनी मुड़ेगी; दूसरा बताता है क वह कस समतल
म मुड़ेगी। दोन मलकर पराव तत करण के लए केवल एक ही दशा शेष रखते ह। और जब हर पराव तत करण
क दशा तय हो गई तो प्र त बब क स्थ त, आमाप और दशा भी तय हो गई — यही कारण है क वही दो नयम
समतल दपण के बराबर आमाप वाले प्र त बब और अवतल दपण के आव धत, उल्टे प्र त बब — दोन क व्याख्या
कर दे ते ह।

क्रयाकलाप 10.4— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 157

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10.3 परावतन के नयम क्या ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 अब झरी और टॉच को थोड़ा-सा एक ओर हटाइए ता क प्रकाश पुंज दपण पर एक भन्न कोण पर आप तत हो
( चत्र 10.8, ख)। क्या दपण के सापेक्ष पराव तत करण का कोण भी प रव तत हो जाता है?

समतल दपण समतल दपण

अिभलंब अिभलंब

आपितत िकरण परावितत िकरण आपितत िकरण परावितत िकरण

टॉच टॉच
एक िझरी वाला कंघा एक िझरी वाला कंघा

(क) (ख)

चत्र 10.8, पृष्ठ 157 — व्यव ा का ऊपर से दृश्य। टॉच का पतला करणपुंज कंघे क एक झरी से नकलकर समतल
दपण पर बदु O पर आप तत होता है। (क) करणपुंज एक कोण पर आप तत है; (ख) झरी और टॉच हटाने पर यह
भन्न कोण पर आप तत होता है और पराव तत करणपुंज भी उसी के साथ घूम जाता है, r = i बना रहता है।

हाँ। आप तत पुंज का कोण बदलते ही पराव तत पुंज भी नई दशा म चला जाता है — और तुरंत, धीरे-धीरे नह ।

ऐसा क्य होता है: दपण हला नह है, इस लए आपतन बदु पर अ भलंब क दशा वही है। केवल आप तत करण
घुमाई गई है। पराव तत करण को उसी अ भलंब से सदै व उतना ही कोण बनाना है जतना आप तत करण बनाती
है, इस लए आप तत पुंज को जतने कोण से घुमाया जाए, पराव तत पुंज भी उतने ही कोण से घूमता है — कतु
अ भलंब क दूसरी ओर।

स्वयं जाँ चए: टॉच को अ भलंब के पास लाइए, पराव तत पुंज भी अ भलंब के पास आ जाएगा। टॉच को दपण के
लगभग समांतर कर द जए, पराव तत पुंज भी दपण से सटकर नकलेगा।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
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प्रकाश पुंज को दपण पर व भन्न कोण पर पड़ने द जए और अवलोकन क जए क आपतन कोण बदलने से
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प्र.2

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पराव तत प्रकाश पुंज क दशा कस प्रकार प रव तत होती है।

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कोण चाहे जो चु नए, पराव तत पुंज सदै व अ भलंब क दूसरी ओर नकलता है, और अ भलंब से उतना ही झुका होता है जतना

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आप तत पुंज।

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अिभलंब
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m िकरण
आपितत िकरण
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परावितत
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a i = 40° r = 40°
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a g 50°

O . com
e m दपण
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mi और r दोन अ भलंब से मापे जाते ह, दपण से नह । य द i = 40° है तो r = 40° होगा, और पराव तत करण तथा दपण के बीच का
l a se
ag कोण 90° − 40° = 50° होगा।

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आपितत पुंज अिभलंब के पास → परावितत पुंज भी अिभलंब के पास

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आपितत पुंज अिभलंब से दू र → परावितत पुंज भी अिभलंब से दू र

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पत्येक िस्थित में, परावत न कोण = आपतन कोण

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m दपण का पृष्ठ स्वयं नधा रत करता है। दपण से मापना समतल दपण के लए तो चल जाता, पर व क्रत दपण पर
कोण अ भलंब से ही क्य मापा जाता है, दपण से क्य नह : अ भलंब वह एकमात्र रेखा है जसे उस बदु पर

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बेकार होता, जहाँ ‘दपण’ हर बदु पर भन्न ढाल का होता है। आपतन बदु पर पृष्ठ से 90° पर ख चा गया अ भलंब

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हर जगह एक ही तरह प रभा षत होता है — इसी लए नयम उसी के सापेक्ष कहा जाता है।
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प्र.3 आपने जो आरेख बनाया है उसम आपतन कोण और परावतन कोण मा पए और कोण माप ता लका 10.1 म
अं कत क जए। आपतन कोण प रव तत कर इस क्रयाकलाप को दोहराइए।

अिभलं ब
आपितत िकरण परावितत िकरण

i r

O दपण

चत्र 10.9 (ग), पृष्ठ 158 — जो मापना है। आपतन कोण i और परावतन कोण r दोन करण और बदु O पर ख चे गए
अ भलंब के बीच मापे जाते ह, दपण के साथ नह ।

ता लका 10.1— आपतन कोण और परावतन कोण का मापन

क्र.सं. आपतन कोण (I) परावतन कोण (R)

1

2

3

4

सावधानी से बनाए गए आरेख से प्राप्त प्रेक्षण का एक नमूना नीचे दया है। आपके अपने मान इनके नकट ह गे, बलकुल यही नह
— क्य क कोण आप स्वयं चुनते ह।

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क्र.सं. आपतन कोण (I) परावतन कोण (R)

1 20° 20°

2 30° 31°

3 45° 44°

4 60° 60°

5 70° 69°

प्रत्येक पं क्त म दोन कोण एक डग्री के भीतर बराबर ह, और छोटा-सा अंतर कभी धन तो कभी ऋण है। यह मापन क त्रु ट का
लक्षण है, कसी वास्त वक अंतर का नह — अतः नष्कष है

i = r, परावतन का पहला िनयम

एक डग्री का अंतर आता कहाँ से है: झरी से नकले पुंज क अपनी चौड़ाई होती है, इस लए उसके अनु दश
ख ची गई प सल रेखा थोड़ी इधर-उधर हो सकती है; दपण हटाने के बाद उसक स्थ त दशाने वाली रेखा ठ क वह
न खचे यह भी संभव है; और कोणमापक आधा डग्री तक ही पढ़ा जा सकता है। इन्ह पूरी तरह हटाया नह जा
सकता — इसी लए मान ‘लगभग बराबर’ आते ह, ठ क-ठ क बराबर नह ।

संकेत: दपण हटाने से पहले करणपुंज पर दो दूर-दूर के बदु अं कत कर ली जए और फर उन्ह रेखनी से मलाइए।
लंबी रेखा से कोण कह अ धक शुद्ध मलता है।

प्र.4 अंत म आप तत करणपुंज को दपण पर अ भलंब के अनु दश पड़ने द जए और पराव तत करणपुंज का
अवलोकन क जए। यहाँ आपतन कोण एवं परावतन कोण के मान क्या ह?

दोन कोण के मान शून्य ह।

आपितत िकरण अिभलंब के अनुिदश है → दोनों के बीच का कोण = i = 0°

परावतन के िनयम से, r = i = 0°

अतः परावितत िकरण भी अिभलंब के अनुिदश ही होती है

इस लए करणपुंज उसी पथ पर सीधा लौट जाता है जससे आया था।

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यह त महत्त्वपूण क्य है: यही एकमात्र दशा है जसम दपण प्रकाश को ठ क उसके ोत तक लौटा दे ता है।
साथ ही यह कोण क प रभाषा क जाँच भी है — य द आपने भूल से कोण दपण के पृष्ठ से मापा होता तो यहाँ 0°
के स्थान पर 90° मलता और तब भी ‘i = r’ सही दखता। इसी लए पुस्तक बार-बार कहती है क कोण अ भलंब से
ही मा पए।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 158
10.3 परावतन के नयम क्या ह?

प्र.1 क्या आपको स्मरण है क प्रकाश सरल रेखा के अनु दश गमन करता है?

हाँ। एक ही समांगी माध्यम म प्रकाश सरल रेखा के अनु दश चलता है, और ठ क इसी लए हम उसे बाणाग्र युक्त सरल रेखाओं —
अथात करण — के रूप म नरू पत कर पाते ह।
प्रमाण चार ओर ह —

छाया क रूपरेखा वस्तु जैसी ही तीखी होती है, और बड़ी वस्तु क छाया बड़ी बनती है — यही सरल रेखीय गमन क
भ वष्यवाणी है।
टॉच का प्रकाश झरी से नकलकर कागज पर सीधी पट्ट बनाता है, कभी वक्र नह ।
हम मोड़ के पार नह दे ख पाते, और मुड़ी हुई नली के दूसरे सरे से प्रकाश बाहर नह आता।

करण मॉडल यहाँ इतना उपयोगी क्य है: एक बार यह मान लेने पर क प्रकाश सरल रेखा म चलता है, पूरा
आरेख रेखनी से ख चा जा सकता है। दपण से पहले का पथ एक सरल रेखा, दपण के बाद का पथ दूसरी सरल रेखा
— और शेष केवल इतना जानना है क इन दोन के बीच कोण कतना है, जो परावतन के नयम बता दे ते ह।

क्रयाकलाप 10.5— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 159

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10.3 परावतन के नयम क्या ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 अब पत्रक के बाहर नकले हुए भाग को मेज के कनारे से नीचे क तरफ मोड़ द जए ( चत्र 10.10, ख)। क्या
आप अब भी पराव तत करणपुंज को पत्रक के बाहर नकले हुए भाग पर दे ख पाते ह।

(क) (ख)

मेज का िकनारा मेज का िकनारा

दप ण दप ण

चाट प त्रक चाट प त्रक

मुड़ा हुआ
भाग
परावित त िकरणपुंज यहाँ िदखता है मुड़े भाग पर िकरणपुंज नही ं

चत्र 10.10, पृष्ठ 159 — मेज पर रखा चाट पत्रक, जसका कुछ भाग कनारे से बाहर नकला है। (क) पत्रक सीधा
रहने पर पराव तत करणपुंज बाहर नकले भाग पर दखाई दे ता है। (ख) उस भाग को नीचे मोड़ दे ने पर करणपुंज उस
पर नह दखता — पराव तत करण आप तत करण और अ भलंब वाले उसी तल म बनी रहती है।

नह । मेज के कनारे से चाट पत्रक का बाहर नकला भाग नीचे मोड़ते ही उस पर बनी चमक ली पट्ट लुप्त हो जाती है।

वह लुप्त क्य होती है: पराव तत करणपुंज न हला है, न बुझा है — वह अब भी ठ क उसी दशा म, मेज के उसी
समतल म चल रहा है। मुड़ा हुआ कागज उस समतल से बाहर चला गया है, इस लए पुंज उस पर पड़ता ही नह ।
प्रकाश म कोई प रवतन नह हुआ, केवल पदा हट गया।

स्वयं जाँ चए: मुड़े हुए भाग से थोड़ा आगे, मेज के तल म ही, एक कागज सीधा पक ड़ए। पराव तत पुंज उस पर
फर दखने लगेगा — प्रमाण क वह वहाँ था ही।

प्र.2 पत्रक के मुड़े हुए भाग को सीधा कर द जए और अवलोकन क जए।

पराव तत करणपुंज बाहर नकले भाग पर ठ क वह फर प्रकट हो जाता है जहाँ पहले था।

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यही लुप्त होना और प्रकट होना इस क्रयाकलाप का सार है। इससे पता चलता है क पराव तत करणपुंज एक ही वशेष समतल म
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रहता है — उसी समतल म जसम आप तत करणपुंज और अ भलंब ह — और कह नह ।
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परावत न का दू सरा िनयम:
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aआपितत िकरण, दपण के आपतन िबंदु पर अिभलंब तथा परावितत िकरण

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— ये सभी एक ही समतल में अविस्थत होते है।
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ag मोड़ने से पुराने समतल से कोण बनाता हुआ एक नया समतल बन
मोड़ना एक उ चत परीक्षण क्य है: कागज

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जाता है। य द पराव तत प्रकाश मूल समतल छोड़ सकता होता तो उसका कुछ भाग मुड़े हस्से पर पड़ता। वहाँ कुछ

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नह पड़ता, अथात प्रकाश मूल समतल म ही सी मत है — और यही दूसरा नयम कहता है।

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agl प्रश्न — पृष्ठ 160
पाठ्य

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10.3 परावतन के नयम क्या ह?
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क्या परावतन के नयम गोलीय दपण पर भी लागू होते ह?
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प्र.1

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हाँ — परावतन के नयम सभी प्रकार के दपण के लए मान्य ह: समतल, अवतल और उत्तल। ये नयम एक करण के कसी पृष्ठ से

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मलने के बारे म ह, और गोलीय दपण ऐसे ही पृष्ठ- बदुओं से बना है।

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agl फर प रणाम इतने भन्न क्य दखते ह: व क्रत दपण पर नयम नह , अ भलंब बदलता है। समतल दपण पर
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अ भलंब हर बदु पर एक ही दशा म होता है, इस लए समांतर पुंज परावतन के बाद भी समांतर रहता है। गोलीय

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दपण पर कसी बदु का अ भलंब उस बदु और गोले के कद्र को मलाने वाली रेखा के अनु दश होता है, इस लए
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दपण के मध्य से बाहर क ओर बढ़ते ही वह अ.cधक झुकता जाता है। प्रत्येक करण अपने ही अ भलंब के सापेक्ष i = a g
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se के कारण पराव तत करण अ भस रत (अवतल) या अपस रत (उत्तल) हो
r से मुड़ती है, कतु अ भलंब फैले हुएaहोने
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जाती ह।

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संकेत: यही पूरे अध्याय का मूल वचार है — नयम वही, अ भलंब भन्न। इसे ध्यान मm .
सारेm a s e र खए और गोलीय दपण के

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प रणाम स्वयं नकलते चले जाएँगे।

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क्रयाकलाप 10.6— आइए, खोज कर — पृष्ठ 160
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10.3 परावतन के नयम क्या ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 एक-एक करके समतल दपण, अवतल दपण तत्प ात उत्तल दपण पर प्रकाश के अनेक करणपुंज पड़ने द जए।
पराव तत करणपुंज का अवलोकन क जए। क्या आप वैसा कुछ अवलो कत करते ह जैसा चत्र 10.11, ‘ख’,
‘ग’ और ‘घ’ म दशाया गया है?

(क) (ख) (ग)

समतल दपण अवतल दपण उत्तल दपण

चत्र 10.11 (ख), (ग), (घ), पृष्ठ 160 — कंघे से प्राप्त अनेक समांतर करणपुंज एक-एक करके प्रत्येक दपण पर।
समतल दपण से पराव तत करणपुंज समांतर रहते ह; अवतल दपण से वे नकट आ जाते ह (अ भस रत); उत्तल दपण
से फैल जाते ह (अपस रत)।

हाँ, अवलोकन चत्र से ठ क मलते ह —

समतल दपण ( चत्र 10.11, ख) — पराव तत करणपुंज भी परस्पर समांतर रहते ह।
अवतल दपण ( चत्र 10.11, ग) — पराव तत करणपुंज नकट आ जाते ह, अथात अ भस रत होकर एक बदु पर मलते ह।
उत्तल दपण ( चत्र 10.11, घ) — पराव तत करणपुंज फैल जाते ह, अथात अपस रत हो जाते ह।

िकरणपुंज अिभसिरत िकरणपुंज अपसिरत

F F

अवतल दपण उत्तल दपण

प्रत्येक करण i = r का ही पालन करती है। पृष्ठ व क्रत होने के कारण दपण के प्रत्येक बदु पर अ भलंब क दशा भन्न होती है — इसी से
पराव तत पुंज अ भस रत (अवतल) या अपस रत (उत्तल) हो जाता है। जस बदु F पर समांतर करणपुंज मलता है — या जहाँ से आता
हुआ प्रतीत होता है — उसे दपण का फोकस कहते ह।

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तीन प रणाम भन्न क्य : इनम से हर करण i = r का ही पालन करती है। समतल दपण पर सभी अ भलंब
समांतर ह, इस लए हर करण उतने ही कोण से मुड़ती है और पूरा समूह समांतर बना रहता है। अवतल दपण पर
मध्य से बाहर क ओर अ भलंब भीतर क ओर झुकते जाते ह, इस लए बाहरी करण भीतरी करण से अ धक भीतर
मुड़ती ह और पूरा समूह समट आता है। उत्तल दपण पर अ भलंब बाहर क ओर झुकते ह, इस लए बाहरी करण
और बाहर फक द जाती ह और समूह फैल जाता है।

संकेत: कंघी, टॉच और दपण — तीन एक ही कागज पर र खए। टॉच थोड़ी भी ऊपर उठ तो करणपुंज कागज के
तल से बाहर चले जाएँगे और आकृ त दखनी क ठन हो जाएगी।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 161
10.3 परावतन के नयम क्या ह?

प्र.1 अवतल दपण प्रकाश करणपुंज को अ भस रत करता है तो क्या इससे प्रकाश एक छोटे क्षेत्र म संक द्रत नह हो
जाएगा?

हाँ, ठ क यही होता है। अवतल दपण अपने पूरे पृष्ठ पर पड़ा प्रकाश समेटकर एक बहुत छोटे धब्बे पर पहुँचा दे ता है।

दपण पर आपितत पकाश : पूरे पृष्ठ पर फैला हुआ

परावतन के बाद : कु छ िमलीमीटर के धब्बे में िसमटा हुआ

ं क्षेत्रफल पकाश ऊज कई गुन ा अिधक
→ उस धब्बे पर पित एकाक

संकद्रण से ऊष्मा क्य उत्पन्न होती है: प्रकाश ऊजा वहन करता है। बड़ा दपण उसे बड़ी मात्रा म रोकता है। य द
वह सारी ऊजा कागज के अत्यंत छोटे भाग पर डाल द जाए तो कागज प्र त सेकंड इतनी ऊजा पाने लगता है जतनी
वह आस-पास क वायु को नह दे पाता, इस लए उसका ताप बढ़ता जाता है — और अंततः वह जलने योग्य ताप
तक पहुँच जाता है। क्रयाकलाप 10.7 यही प्रयोग है।

सुरक्षा सवप्रथम: सूय क ओर अथवा सूय को पराव तत करते दपण क ओर कभी सीधे न दे ख, और संक द्रत
प्रकाश कभी कसी के चेहरे पर न डाल।

क्रयाकलाप 10.7— आइए, खोज कर — पृष्ठ 161

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10.3 परावतन के नयम क्या ह?

क्रयाकलाप सु र क्षा सवप्रथम

प्र.1 दपण और कागज के बीच क दूरी को समं जत क जए जब तक क इस पर एक स्पष्ट चमकदार धब्बा न बन जाए
जैसे चत्र 10.12 म दशाया गया है।

सूय का पकाश

चमकदार ध बा
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अवतल दपण कागज का पत्रक

चत्र 10.12, पृष्ठ 161 — पुनःरेखां कत चत्र। अवतल दपण से पराव तत सूय का प्रकाश कागज के पत्रक पर एक छोटे
चमकदार धब्बे पर अ भस रत हो जाता है; दूरी को तब तक समं जत करते ह जब तक धब्बा स्पष्ट न बन जाए।

कागज को दपण क ओर और उससे दूर धीरे-धीरे ले जाइए। प्रकाश का धब्बा पहले छोटा होता है, फर एक छोटा, अत्यंत चमकदार
और तीखे कनार वाला धब्बा बनता है, और उसके बाद फर चौड़ा होने लगता है। जस स्थ त पर धब्बा सबसे छोटा और सबसे
चमकदार हो, वह रुक जाइए।

एक ही सव त्तम दूरी क्य होती है: सूय इतना दूर है क उसक करण दपण तक व्यावहा रक रूप से समांतर
पहुँचती ह। अवतल दपण समांतर करणपुंज को अपने सामने एक वशेष बदु पर लाकर मलाता है, जसे दपण का
फोकस कहते ह। कागज को इससे पास र खए तो करण अभी मली ही नह होत ; दूर र खए तो वे मलकर फर
फैलने लगती ह। केवल फोकस पर ही सारा पराव तत प्रकाश एक छोटे धब्बे म समटता है।

संकेत: जो दूरी आपने अभी पाई है वही आपके दपण क फोकस दूरी है। दपण से कागज तक क दूरी नापकर
अभ्यास पु स्तका म लख ली जए — अ धक गहरे दपण क फोकस दूरी कम होती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 कुछ समय तक दपण एवं कागज क तयाँ र बनाए र खए। क्या कागज जलने लगता है और इससे धुआँ
उठने लगता है?

हाँ। स्थर पकड़े रखने पर चमकदार धब्बे वाला कागज पहले भूरा पड़ता है, फर उससे धुएँ क पतली लट उठती है, और अंततः वह
जल भी सकता है।

कागज जलता क्य है: दपण अपने पूरे मुख पर पड़ी धूप समेटकर कुछ मलीमीटर चौड़े धब्बे पर उड़ेल दे ता है। अब
उस धब्बे पर प्र त सेकंड आने वाली ऊजा उससे कई गुना है जो उसी कागज को खुले म मलती, जब क कागज
ऊष्मा वायु को उतनी ही धीमी ग त से दे पाता है। इस लए ऊष्मा एकत्र होती जाती है, उस छोटे भाग का ताप कागज
के जलने के ताप से ऊपर चला जाता है और वह जल उठता है। उतने ही आमाप का समतल दपण यह नह कर
सकता — वह उसी ऊजा को पहले जतने ही बड़े क्षेत्र पर फैला दे ता है, इस लए कुछ भी अ धक गम नह होता।

सुरक्षा सवप्रथम: यह क्रयाकलाप सदै व शक्षक अथवा कसी वयस्क के मागदशन म ही कर, सूय क ओर या दपण
म उसके प्र त बब क ओर न दे ख, प्रकाश केवल कागज पर संक द्रत कर और पास म जल रख।

एक सोपान ऊपर — पृष्ठ 161
10.3 परावतन के नयम क्या ह?

एक सोपान ऊपर

प्र.1 आपको स्मरण होगा क एक पूववत अध्याय म आपने इस्पात को पघलाने के लए व ुत भ य के उपयोग के
संबंध म पढ़ा था।

हाँ — अध्याय 4 ‘ व ुत — चुंबक य एवं तापीय प्रभाव’ म। वहाँ पढ़ा था क व ुत धारा के तापीय प्रभाव का उपयोग एक वशेष
रूप से बनी उच्च तापमान भट्ट म कया जाता है, अथात ऊष्मा उत्पन्न करने हेतु न मत एक प रबद्ध स्थान म, जहाँ र इस्पात
पघलाकर पुनः उपयोगी इस्पात म बदला जाता है।
सौर भ उतना ही ऊँचा ताप बलकुल भन्न माग से प्राप्त करती है। वहाँ चालक म धारा प्रवा हत करने के स्थान पर एक बड़ा
अवतल दपण (या दपण का समूह) सूय के प्रकाश को एक छोटे लक्ष्य पर संक द्रत कर दे ता है।

व ुत भ सौर भ

ऊज कहाँ से िव तु धारा सूय का पकाश

ऊष्मा कै से बनती है चालक में धारा का तापीय पभाव परावतन — दपणों ारा धूप छोटे े पर संकें िद त
क्ष त्र

ईंध न और चालन-व्यय िनरंतर िव तु आपूित आव यक
श् कोई ईंध न नही;ं के वल धूप रहने तक काय करती है

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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यह तुलना क्य महत्त्वपूण है: दोन भ ट्टयाँ एक ही काम करती ह — बहुत-सी ऊजा को छोटे स्थान म समेटना।

m a s emहै क प्रकाश
gl 10.7 म आपके
व ुत भट्ट यह इस चुनाव से करती है क धारा को प्र तरोध कहाँ मले; सौर भट्ट इस चुनाव से करती
co सौर-संकद्रक का दपण वशाल पैमाने पर ठ क वही कर रहा है जो क्रयाकलाप
करण कहाँ .मल।
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a s em दपण ने कागज के साथ कया था।
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छोटे अवतल

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 162
10.4 लस क्या होता है?
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प्र.1 हमने कसी वस्तु के व क्रत दपण ारा बने प्र त बब का अन्वेषण कया। परंतु व क्रत पृष्ठ वाले पारदश पदाथ

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के माध्यम से दे खने पर वस्तुए ँ कैसी दखाई पड़ती ह?
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a वे आमाप म बदली हुई दखती ह, और य द पृष्ठ पयाप्त व क्रत हो तो उल्ट भी दख सकती ह — लगभग वैसे ही जैसे व क्रत दपण
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म, अंतर केवल इतना क अब हम पदाथ के माध्यम से दे ख रहे ह, उसम नह ।

em
.co agl
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aglएक ही प्रकार मुड़ती है, इस लए पुंज का आकार अप रव तत रहता है और
प रवतन होता ही क्य है: प्रकाश वायु से काँच या जल म जाते समय और वापस बाहर आते समय मुड़ता है।
समतल पृष्ठ पर करणपुंज क हर करण
वस्तु सामान्य दखती है। व क्रत पृष्ठ पर दोन फलक हर बदु पर करण से भन्न ढाल बनाते ह, इस लए बाहरी करण

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भीतरी करण से अ धक मुड़ती ह — पुंज समट या फैल जाता है, और वस्तु आव धत या लघुकृत दखने लगती है।

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m .cजाँ चए: जल से भरे काँच के गलास के पार इस पं क्त को प ढ़ए। समतलagकनारे से कुछ नह बदलता; व क्रत
aseपा से अक्षर खच जाते ह।
स्वयं

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कतु य द पारदश पदाथ के पृष्ठ व क्रत ह तब भी क्या ये वस्तुए ँ वैसी ही दखाई दगी?

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प्र.2

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नह , वैसी नह दखगी।

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g लगती ह। क्रयाकलाप 10.8 यह केवल
c पृष्ठ व क्रत होता है, पीछे के अक्षर या वस्तुएँ वास्त वक से बड़ी या छोट aदखने
समतल काँच क खड़क के पार हर वस्तु अपने आमाप और आकृ त म दखती है — इसी लए खड़ कयाँ काम क ह। कतु जैसे
ही .पारदश
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se जल क एक बूँद से दखा देता है।
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समतल काँच वशेष त क्य है: समतल प ट्टका के दोन फलक समांतर होते ह, इस लए करण भीतर जाते
समय जतनी मुड़ती है, बाहर आते समय ठ क उतनी ही वापस मुड़ जाती है। वह अपनी मूल दशा म ही नकलती है
— थोड़ी बगल म खसक हुई, पर मुड़ी हुई नह । व क्रत फलक समांतर नह होते, इस लए दोन मोड़ एक-दूसरे को
काटते नह और करण क दशा वास्तव म बदल जाती है।

क्रयाकलाप 10.8— आइए, खोज कर — पृष्ठ 162
10.4 लस क्या होता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 जल क बूँद का अवलोकन क जए। इसका पृष्ठ कस आकृ त का है? क्या यह समतल है, भीतर क ओर व क्रत
है या बाहर क ओर व क्रत है?

बूँद का पृष्ठ बाहर क ओर व क्रत है — यह एक छोटे गुंबद क भाँ त ऊपर उभरा हुआ है। न तो यह समतल है और न भीतर क
ओर धँसा।

तेल या मोम क पतली परत क्य आवश्यक है: बना परत वाले काँच पर जल फैलकर समतल फल्म बन जाता
है, और समतल फल्म से कुछ नह बदलता। तेल या मोम जल को काँच पर फैलने नह दे ता, इस लए बूँद समटकर
गोल हो जाती है — और यही बाहर क ओर उभार उसे लस क भाँ त व्यवहार करने योग्य बनाता है।

संकेत: छोट बूँद बड़ी बूँद से अ धक तीखी वक्रता बनाती है, और अ धक व क्रत पृष्ठ अ धक आवधन दे ता है। दो
भन्न आमाप क बूँद अगल-बगल रखकर दे खए।

प्र.2 अब प का के नीचे क पाठ्यसामग्री को जल क बूँद के ऊपर से दे खए। क्या आपको जल क बूँद के नीचे के
अक्षर या अक्षर के आमाप म कोई प रवतन दखाई पड़ता है। क्या ये आमाप म बड़े दखाई पड़ते ह या छोटे ?

हाँ — बूँद के नीचे के अक्षर स्पष्ट रूप से बड़े दखाई पड़ते ह, बूँद के ठ क बाहर पड़े उन्ह अक्षर से बड़े।

बूँद आवधन क्य करती है: बूँद पारदश पदाथ का ऐसा टु कड़ा है जसका पृष्ठ बाहर क ओर व क्रत है — अथात
जो कनार क अपेक्षा बीच म मोटा है। यही उत्तल लस क आकृ त है। यह मु द्रत अक्षर से ऊपर आती करण को
भीतर क ओर मोड़ दे ती है, और आपक आँख उन मुड़ी करण को सीधी रेखाओं म पीछे बढ़ाकर अक्षर को उसके
वास्त वक आमाप से बड़ा मान लेती है।

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क्या आप जानते ह? आवधक लस ( चत्र 10.14) ठ क वही कर रहा है जो जल क यह बूँद कर रही है — वह
केवल काँच का बना बड़ा और स्थायी रूप है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 163
10.4 लस क्या होता है?

प्र.1 वस्तुओं को जब लस के माध्यम से दे खा जाता है तो उनम क्या प रवतन दखाई दे सकते ह?

वस्तु का आमाप बदल सकता है और उत्तल लस के साथ उसक दशा भी।

लस वस्तु लस के समीप वस्तु लस से दूर

उत्तल सीधी और आविध त उ टी — पहले आविध त, िफर छोटी होती हुई
ल्

अवतल सीधी और लघुकृ त सीधी ही, और छोटी होती हुई

उत्तल लस वस्तु को उल्टा दखा सकता है, अवतल क्य नह : उत्तल लस अपने से गुज़रते प्रकाश को अ भस रत
करता है, इस लए एक न त वस्तु-दूरी के बाद करण आँख तक पहुँचने से पहले ही कट जाती ह — और कट हुई
करण उल्टा दृश्य दे ती ह। अवतल लस करण को केवल फैलाता है; वे कभी कटती नह , इस लए उससे दखने वाला
दृश्य कभी उल्टा नह हो सकता।

प्र.2 क्या लस भी प्रकाश पुंज को अ भस रत और अपस रत करते ह?

हाँ। उत्तल लस समांतर प्रकाश पुंज को अ भस रत करता है और अवतल लस उसे अपस रत करता है — इसी लए इन्ह क्रमशः
अ भसारी लस और अपसारी लस भी कहते ह। क्रयाकलाप 10.10 दोन को दखाता है।

दोन आकृ तय का व्यवहार वपरीत क्य है: करण वहाँ अ धक मुड़ती है जहाँ काँच के दोन फलक एक-दूसरे से
अ धक तरछे होते ह। उत्तल लस बीच म सबसे मोटा होता है और मध्य से बाहर क ओर उसके फलक भीतर क ओर
ढलते ह, इस लए बाहरी करण भीतर क ओर धकेली जाती ह और पुंज एक बदु पर समट जाता है। अवतल लस
बीच म सबसे पतला होता है और उसके फलक उलट दशा म ढलते ह, इस लए बाहरी करण बाहर क ओर धकेली
जाती ह और पुंज फैल जाता है।

क्रयाकलाप 10.9— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 163

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10.4 लस क्या होता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 वस्तु को लस के दूसरी ओर से लस के माध्यम से दे खए ( चत्र 10.17, क) और अपने अवलोकन को अपनी
अभ्यास पु स्तका म ल खए।

उत्तल लेस
ं

(क) वस्तु लेस
ं के समीप
चत्र 10.17 (क), पृष्ठ 163 — पुनःरेखां कत चत्र। उत्तल लस के पीछे समीप रखी वस्तु को लस से दे खने पर वह सीधी
और आव धत दखाई दे ती है।

वस्तु को उत्तल लस के पीछे अल्प दूरी पर रखकर दे खने पर वह सीधी और आव धत दखाई पड़ती है — नंगी आँख से दे खने क
तुलना म स्पष्ट रूप से बड़ी, और सीधी।

इस दूरी पर आवधन क्य : उत्तल लस वस्तु से आती करण को भीतर क ओर मोड़ता है, कतु इतनी कम दूरी म वे
आँख तक पहुँचते समय भी फैली ही रहती ह। आँख उन्ह सीधी रेखाओं म पीछे बढ़ाकर वस्तु से अ धक दूर और
अ धक चौड़े स्थान पर ले जाती है — इस लए वस्तु बड़ी दखती है, और सीधी भी।

संकेत: प्रत्येक अवलोकन के साथ वास्त वक दूरी सट मीटर म अवश्य ल खए। दूरी के बना उस अवलोकन क
कसी और से तुलना ही नह हो सकती।

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प्र.2 अब धीरे-धीरे वस्तु को लस से दूर हटाते जाइए और अवलोकन करते जाइए क प्र त बब कस प्रकार प रव तत
होता है ( चत्र 10.17, ख)। उत्तल लस से वस्तु क दूरी का प रवतन प्र त बब को कस प्रकार प्रभा वत करता है?

उत्तल लेस
ं

(ख) वस्तु लेस
ं से दूर
चत्र 10.17 (ख), पृष्ठ 163 — पुनःरेखां कत चत्र। वही उत्तल लस, वस्तु को दूर हटाने पर वस्तु उल्ट दखाई दे ती है
(उसका लकड़ी का गुटका ऊपर क ओर दखता है)।

दूरी ही सब कुछ तय करती है —

1. अल्प दूरी — सीधी और आव धत।
2. एक वशेष दूरी पर — दृश्य धुँधला पड़ जाता है और कोई स्पष्ट प्र त बब नह दखता।
3. उससे आगे — वस्तु उल्ट दखने लगती है, आरंभ म तब भी आव धत।
4. और दूर — वह उल्ट ही रहती है और अब लगातार छोट होती जाती है।

पलटाव क्य होता है: उत्तल लस प्रकाश को सदै व अ भस रत करता है। वस्तु समीप हो तो करण इतनी तेज़ी से
फैल रही होती ह क यह अ भसरण उन्ह आपक आँख से पहले मला नह पाता — दृश्य सीधा रहता है। एक न त
वस्तु-दूरी के बाद करण आपक ओर आते-आते मलकर एक-दूसरे को काट दे ती ह, और प्रकाश के कट जाने पर
ऊपर-नीचे बदल जाते ह। यही वह बदु है जहाँ चत्र पलट जाता है।

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अब इन्ह चरण को अवतल लस के साथ दोहराइए ( चत्र 10.17, ग)।
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प्र.3

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a g (ग) अवतल लेस
ं

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चत्र 10.17 (ग), पृष्ठ 163 — पुनःरेखां कत चत्र। अवतल लस से दे खने पर वस्तु सदै व सीधी और छोट दखाई दे ती है।

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agl उत्तर

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अवतल लस के साथ हर दूरी पर उत्तर एक ही है — वस्तु सीधी और लघुकृत दखाई दे ती है। लस से दूर हटाते जाने पर वह और

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छोट होती जाती है। वह न कभी पलटती है और न कभी आव धत होती है।
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s लस बीच म पतला होता है, इस लए उससे गुज़रती करण पहले से भी
और कुछ हो ही नह सकता, क्य l: aअवतल
a g
अ धक फैल जाती ह। जो करण दूर धकेली जा रही ह वे कभी मलकर कट नह सकत , और कटान के बना न
उल्टा दृश्य संभव है न आवधन। यह उत्तल दपण का लस-रूप है।
co m
m .
m as e
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m 165 के सारांश म ठ क-ठ क ‘सदै व सीधा और आमाप म वस्तु से छोटा’ लखा है। प्रयोग और अंग्रेज़ी संस्करण दोन
ध्यान द जए: पृष्ठ 163 के मूल पाठ म अवतल लस के लए ‘सदै व उल्टा और आमाप म छोटा’ छपा है, जब क पृष्ठ

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सीधा क पु ष्ट करते ह — पृष्ठ 163 क पं क्त मुद्रण क भूल है।

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प्र.4 अपनी अभ्यास पु स्तका म अ भले खत अपने प्रेक्षण का व ेषण क जए और दोन लस से दे खे गए प्र त बब
क तुलना क जए। आप क्या नष्कष नकालते ह?

उत्तल लस अवतल लस

आकृ ित बीच में अिधक मोटा िकनारों पर अिधक मोटा

वस्तु अल्प दू र ी पर सीधी, आविध त सीधी, लघुकृ त

वस्तु अिधक दू र ी पर उ टी, िफर छोटी होती हुई
ल् सीधी, छोटी होती हुई

समात
ं र िकरणपुंज पर पभाव अिभसिरत करता है अपसिरत करता है

िकस दपण जैस ा व्यवहार अवतल दपण उ ल दपण
त्त

नष्कष. उत्तल लस ारा बना प्र त बब आव धत, लघुकृत अथवा वस्तु के बराबर आमाप का हो सकता है और सीधा या उल्टा भी
— यह लस से वस्तु क दूरी पर नभर करता है। अवतल लस ारा बना प्र त बब सदै व सीधा और लघुकृत होता है।

पूरी ता लका के पीछे एक ही वचार है: अ भसारी यु क्तयाँ (अवतल दपण, उत्तल लस) करण को काट सकती
ह, इस लए वे उल्टे और आव धत प्र त बब बना सकती ह। अपसारी यु क्तयाँ (उत्तल दपण, अवतल लस) करण को
कभी कटने ही नह दे त , इस लए वे सीधे और लघुकृत प्र त बब तक सी मत ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 164
10.4 लस क्या होता है?

प्र.1 क्य क उत्तल लस प्रकाश को अ भस रत करता है तो क्या इसका उपयोग करके भी कागज को जलाया जा
सकता है?

हाँ। जो भी यु क्त सूय के प्रकाश को पयाप्त छोटे धब्बे म संक द्रत कर दे वह कागज को झुलसा और जला सकती है, और उत्तल लस
प्रकाश को ठ क वैसे ही अ भस रत करता है जैसे अवतल दपण।
अंतर केवल प्रकाश के माग का है। अवतल दपण धूप को पराव तत करके अपने सामने एक बदु पर लाता है; उत्तल लस धूप को
अपने पार नकलने दे ता है और दूसरी ओर एक बदु पर लाता है। दोन म दपण या लस के पूरे मुख पर पड़ी ऊजा कुछ मलीमीटर
चौड़े धब्बे पर पहुँच जाती है। क्रयाकलाप 10.11 यही परीक्षण है।

सुरक्षा सवप्रथम: सूय को सीधे अथवा लस के माध्यम से न दे ख, इससे नेत्र को स्थायी क्ष त पहुँच सकती है।

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क्रयाकलाप 10.10— आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 164
10.4 लस क्या होता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 अब पतली काँच प का, उत्तल लस और अवतल लस पर चत्र 10.18 म दशाए अनुसार प्रकाश के अनेक समांतर
करणपुंज आप तत होने द जए। क्या इनम से प्रकाश का समांतर करणपुंज उसी प्रकार पार होता है जैसे चत्र म
दशाया गया है?

(क) (ख) (ग)

पतली काँच पि का उत्तल लेस
ं अवतल लेस
ं

चत्र 10.18, पृष्ठ 164 — वही समांतर करणपुंज एक-एक करके प्रत्येक से होकर। पतली काँच प का से वे यथावत
समांतर नकलते ह; उत्तल लस उन्ह अ भस रत करता है; अवतल लस उन्ह अपस रत कर दे ता है।

नह — केवल समतल प ट्टका ही करणपुंज को अछू ता छोड़ती है।

पतली पारदश काँच प का — करणपुंज यथावत पार हो जाता है और दूसरी ओर भी समांतर रहता है।
उत्तल लस — करणपुंज पास आ जाते ह; वे अ भस रत होकर एक बदु पर मलते ह।
अवतल लस — करणपुंज फैल जाते ह; वे अपस रत हो जाते ह।

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उत्तल ले ंस — अिभसारी अवतल ले ंस — अपसारी

प्रकाश काँच म प्रवेश करते समय और बाहर नकलते समय मुड़ता है। उत्तल लस बीच म मोटा होता है, इस लए बाहरी करण भीतर क ओर
मुड़कर F पर मलती ह। अवतल लस बीच म पतला होता है, इस लए करण बाहर क ओर मुड़ती ह और केवल F से आती हुई प्रतीत होती
ह। बदु F को लस का फोकस कहते ह।

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समतल प का कुछ क्य नह बदलती: इसके दोन फलक समांतर होते ह, इस लए करण भीतर जाते समय
जतनी मुड़ती है, बाहर आते समय ठ क उतनी ही वापस मुड़ जाती है। वह अपनी मूल दशा म ही नकलती है —
केवल थोड़ी बगल म खसक हुई। लस के फलक व क्रत होते ह और इस लए समांतर नह होते, अतः दोन मोड़ एक-
दूसरे को काटते नह ; और कतना नह काटते यह इस पर नभर करता है क करण लस के मध्य से कतनी दूर से
गुज़री। यही समांतर पुंज को अ भसारी या अपसारी बना दे ता है।

प्र.2 अपने अवलोकन को अ भले खत क जए और उनका व ेषण क जए।

प्रकाश कससे होकर गुज़रा नकलने वाले करणपुंज ने क्या कया नाम

पतली पारदश काँच पि का समांतर ही रहा — यथावत पार हो गया —

उत्तल ले ंस एक िबंद ु पर िमल गया अिभसारी ले ंस

अवतल ले ंस फै ल गया अपसारी ले ंस

व ेषण. उत्तल लस को अ भसारी लस और अवतल लस को अपसारी लस भी कहते ह। क्रयाकलाप 10.6 से तुलना क जए
— उत्तल लस पारगत प्रकाश के साथ वही करता है जो अवतल दपण पराव तत प्रकाश के साथ करता है, और अवतल लस वही जो
उत्तल दपण करता है।

संकेत: दोन पुस्तक पर कागज एक ही तल म र खए और कमरा कुछ अंधेरा र खए। करणपुंज मंद हुआ तो उत्तल
लस का मलन- बदु दखना क ठन हो जाता है।

क्रयाकलाप 10.11— आइए, अन्वेषण कर — पृष्ठ 165

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10.4 लस क्या होता है?

क्रयाकलाप सु र क्षा सवप्रथम

प्र.1 सूय क करण के माग म अवतल दपण के ान पर उत्तल लस रख कर क्रयाकलाप 10.7 को दोहराइए ( चत्र
10.19)। क्या आप इसका उपयोग करके कागज को जला सकते ह?

सूय का पकाश

उत्तल लेसं

चमकदार धब्बा

कागज का पत्रक
चत्र 10.19, पृष्ठ 165 — पुनःरेखां कत चत्र। सूय क करण के माग म रखा उत्तल लस उन्ह कागज पर एक चमकदार
धब्बे पर अ भस रत कर दे ता है, ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप 10.7 म अवतल दपण ने कया था।

हाँ। उत्तल लस को इस प्रकार पक ड़ए क सूय का प्रकाश उससे होकर कागज पर पड़े, और दूरी तब तक समं जत क जए जब तक
प्रकाश का धब्बा सबसे छोटा और सबसे चमकदार न हो जाए। एक-दो मनट स्थर पकड़े रखने पर कागज भूरा पड़ता है, धुआँ दे ता
है और जल भी सकता है — ठ क वैसे ही जैसे अवतल दपण के साथ हुआ था।

लस यह काम उतनी ही अ तरह क्य कर लेता है: सूय क करण समांतर आती ह। उत्तल लस समांतर
करणपुंज को अपने फोकस पर लाकर मलाता है, इस लए लस के पूरे मुख पर पड़ी सारी प्रकाश ऊजा कुछ
मलीमीटर चौड़े धब्बे पर पहुँच जाती है। वहाँ प्र त सेकंड आने वाली ऊजा उससे कह अ धक होती है जतनी कागज
वायु को दे पाता है, इस लए उसका ताप बढ़ते-बढ़ते जलने के ताप तक पहुँच जाता है। दपण यह परावतन से करता
है और लस अपवतन से, कतु भौ तक कारण दोन म एक ही है — प्रकाश ऊजा का संकद्रण।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
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सुरक्षा सवप्रथम: सूय को सीधे अथवा लस के माध्यम से न दे ख, इससे नेत्र को क्ष त पहुँच सकती है। यह काय

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वयस्क के मागदशन म कर और पास म जल रख।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 165

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10.4 लस क्या होता है?

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लस का उपयोग कहाँ-कहाँ होता हैa
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जहाँ भी प्रकाश क दशा को नयं त्रत करना हो, वह लस काम आता है।

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कहाँ वहाँ लस क्या करता है

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ने में पवेश करने से पहले पकाश को थोड़ ा मोड़ दे ता है, िजससे पहनने वाले को प ट पितिबंब िमलता है
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ऐनक (चश्मा)

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कै मरे , स्माटफोन के कै मरे दृ य से आते पकाश को अिभसिरत
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दू र दशक यंत्र आकाश की दू र थ व तुओं से आता पकाश समेटता है
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सूक्ष्म दश अ यंत छोटी व तुओं का अ यिधक आविध त दृ य दे ता है
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आवधक ले ंस छोटे मुिद त अ रों को बड़ ा िदखाता है
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gl हमारे अपने नेत्र के भीतर
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त्त स् स्

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पाते है ं

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नेत्र लस इन सबम सबसे अ त क्य है: ऊपर क सूची के हर लस क वक्रता न त है, इस लए वह प्रकाश को

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एक न त मात्रा म ही अ भस रत करता है। हमारे नेत्र का लस अपनी आकृ त बदल सकता है — पास क वस्तु के
लए अ धक व क्रत और दूर क वस्तु के लए अ धक चपटा — इस लए एक ही लस पूरे समूह का काम कर दे ता है।
इसी से हम एक पं क्त पढ़कर तुरंत ऊपर दे खकर पहाड़ी भी दे ख लेते ह।
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eजज्ञासा
gl a बनाए रख — पृष्ठ 166
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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय के अंत के प्रश्न

जज्ञासा बनाए रख

प्र.1 कसी दपण पर आप तत प्रकाश क एक करण एवं उसके संगत प रव तत करण चत्र 10.12 म दशाई गई है
आप तत करण दपण पर अ भलंब के साथ 40° का कोण बनाती है। पराव तत करण और दपण के बीच बने
कोण का मान कतना है? (i) 40° (ii) 50° (iii) 45° (iv) 60°

आपितत िकरण अिभलंब परावितत िकरण

i r

दपण

चत्र 10.21, पृष्ठ 166 — कसी दपण पर आप तत प्रकाश क एक करण और उसक पराव तत करण। बदुदार रेखा
अ भलंब है; i और r दोन इसी से मापे जाते ह।

पुस्तक के हद संस्करण म इस प्रश्न म “ चत्र 10.12” छपा है, जब क प्रश्न के साथ दया गया चत्र
वस्तुतः चत्र 10.21 है (अंग्रेज़ी संस्करण Curiosity म यहाँ Fig. 10.21 ही छपा है)। यह पुस्तक
क छपाई क त्रु ट है।

(ii) 50°

आपतन कोण, i = 40° (अिभलंब से मापा गया)

परावतन के पहले िनयम से, r = i = 40°

अिभलंब दपण से 90° पर होता है, अतः

दपण से बना कोण = 90° − r = 90° − 40° = 50°

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

अिभलंब

आपितत िकरण परावितत िकरण

i = 40° r = 40°

50°

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दपण

i और r दोन अ भलंब से मापे जाते ह, दपण से नह । य द i = 40° है तो r = 40° होगा, और पराव तत करण तथा दपण के बीच का
कोण 90° − 40° = 50° होगा।

40° क्य नह : प्रश्न म कोण अ भलंब से दया गया है, कतु पूछा दपण से गया है। नयम i = r केवल अ भलंब के
सापेक्ष है। r = 40° नकालने के बाद शेष केवल ज्या म त है — अ भलंब और दपण परस्पर लंबवत ह, इस लए
आपतन बदु पर उस ओर के दोन कोण का योग 90° होना ही चा हए।

संकेत: परावतन का कोई भी प्रश्न हल करने से पहले रेखां कत क जए क दया गया कोण अ भलंब से है या दपण
से। इस वषय क लगभग हर भूल यह से आरंभ होती है।

ध्यान द जए: हद संस्करण म मुद्रण क भूल से ‘ चत्र 10.12’ छपा है; प्रश्न वस्तुतः चत्र 10.21 से संबं धत है।

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प्र.2 चत्र 10.22 म तीन भन्न तयाँ दशाई गई ह जनम प्रकाश करण एक दपण पर आप तत है— (i) प्रकाश
करण अ भलंब के अनु दश दपण पर आप तत है। (ii) दपण को कसी कोण पर घुमा दया गया है कतु प्रकाश
करण अभी भी इस पर अ भलंब के अनु दश आप तत है। (iii) दपण को कसी कोण पर घुमा दया गया है और
प्रकाश करण इस पर अ भलंब से 20° का कोण बनाती हुई आप तत होती है। उपयुक्त तीन तय म
पराव तत करण आरे खत क जए [(सही आरेख बनाने के लए रेखनी (रूलर) एवं कोणमापक (प्रो ै क्टर) का
उपयोग क जए)]। प्रत्येक त के लए बताइए क परावतन कोण का मान कतना है?

आपितत िकरण आपितत िकरण आपितत िकरण
अिभलंब

20°

दपण

दपण दपण

(i) (ii) (iii)

चत्र 10.22, पृष्ठ 166 — तीन तयाँ। (i) समतल दपण, करण अ भलंब के अनु दश सीधी नीचे आप तत। (ii)
दपण 20° घुमा दया गया है और करण भी उसी के साथ घूम गई है, अतः यह अब भी अ भलंब के अनु दश आप तत
है। (iii) वही घुमा हुआ दपण, करण ऊध्वाधर आप तत है और अ भलंब ( बदुदार) से 20° का कोण बनाती है।

हर स्थ त म पहले अ भलंब ख चए — जहाँ करण दपण से मलती है वहाँ पृष्ठ से 90° पर। फर उसी अ भलंब से i मा पए और
दूसरी ओर उतना ही r रख द जए।

आपितत परावितत आपितत आपितत
अिभलंब
परावितत

दपण
दपण दपण
(i) i = 0°, r = 0° (ii) i = 0°, r = 0° (iii) i = 20°, r = 20°

प्रत्येक स्थ त म पराव तत करण। (i) और (ii) म करण अ भलंब के अनु दश आप तत होती है, इस लए i = 0° और करण अपने ही
पथ पर लौट जाती है। (iii) म पराव तत करण अ भलंब के दूसरी ओर, 20° पर होती है।

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त आपतन कोण (I) परावतन कोण (R) पराव तत करण का पथ

(i) 0° 0° आप तत करण के अनु दश सीधे वापस

(ii) 0° 0° आप तत करण के अनु दश सीधे वापस

(iii) 20° 20° अ भलंब क दूसरी ओर 20° पर (आप तत करण से 40° दूर)

दपण क त भन्न होने पर भी (i) और (ii) का उत्तर एक ही क्य है: दपण घुमाने पर उसका अ भलंब भी
उतना ही घूम जाता है। (ii) म करण दपण के साथ ही घुमा द गई है, इस लए वह अब भी अ भलंब के अनु दश है
और i अब भी 0° है। उत्तर इस बात से तय नह होता क दपण कमरे म कैसे रखा है, ब ल्क इससे क करण और
अ भलंब के बीच कतना कोण है — और वह अप रव तत है।

स्वयं जाँ चए: (iii) म आप तत और पराव तत करण के बीच का कोण 40° अथात 2 × 20° है। यह सदै व सत्य है
— आप तत और पराव तत करण के बीच का कोण आपतन कोण का दुगुना होता है।

प्र.3 चत्र 10.23 म तीन प्रकार के दपण के सामने स्केच पेन का ढक्कन रखा गया है। प्र त बब का मलान सही दपण
से क जए। (i) समतल दपण (ii) उत्तल दपण (iii) अवतल दपण

पितिबंब वस्त ु

(i) (ii) (iii)

चत्र 10.23, पृष्ठ 166 — तीन छाया चत्र का पुनःरेखांकन। प्रत्येक म असली स्केच पेन का ढक्कन दपण के बगल म
समान आमाप का रखा है, जससे दपण म बने प्र त बब से सीधी तुलना क जा सके।

प्रत्येक चत्र म दपण के प्र त बब क तुलना उसके बगल म रखे वास्त वक ढक्कन से क जए।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
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प्र त बब कैसा दखता है दपण

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(iii) सीधा, और ढक्कन के बराबर आमाप का समतल दपण

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यहाँ केवल आमाप से ही नणय क्य हो जाता है: ढक्कन तीन दपण के समीप रखा है, और इतनी कम दूरी पर
agदपण बराबर आमाप के अ त रक्त कुछ बना ही नह सकता। उत्तल
तीन को अलग पहचानना सरल है। समतल
दपण लघुकृत के अ त रक्त कुछ नह बना सकता। अवतल दपण, वस्तु इतनी पास होने पर, आव धत प्र त बब

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बनाता है। तीन प्र त बब सीधे ह, इस लए दशा से कोई संकेत नह मलता — आमाप ही नणायक है।

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m .यcद (ii) म ढक्कन को कह अ धक दूर रख दया जाता तो अवतल दपण उसेagउल्टा दखाता। तीन म से
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laकsे वल अवतल दपण ही ऐसा कर सकता है।
संकेत:

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l बब का अवलोकन क जए। ये चत्र 10.24 म दशाए अनुसार हो सकते ह।
चत्र 10.24 म एक स्केच पेन के ढक्कन को एक उत्तल लस, एक अवतल लस और एक समतल काँच प का के
पीछे समान दूरी पर र खए और प्रgत
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प्रत्येक प्र त बब का मलान सही प्रका शक यु क्त के साथ क जए। (i) काँच क समतल पारदश प का (ii)
उत्तल लस (iii) अवतल लस
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(i) (ii)

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चत्र 10.24, पृष्ठ 167 — पुनःरेखां कत चत्र। वही स्केच पेन का ढक्कन तीन — दो गोल लस और एक समतल

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तीन चत्र समान वस्तु-दूरी पर लए गए ह, e
s mलए आमाप म जो भी अंतर है वह केवल काँच के कारण है।
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प्र त बब कैसा दखता है लस/काँच

(i) सीधा और बहुत आव धत, गोल लस के पार उ ल ले ंस
त्त

(ii) सीधा और बहुत छोटा, गोल लस के पार अवतल ले ंस

(iii) आमाप म अप रव तत, चौकोर समतल प ट्टका के पार काँच की समतल पारदश पि का

समतल प का ढक्कन को क्य नह बदलती: उसके दोन फलक समांतर ह, इस लए हर करण काँच म घुसते
समय जतनी मुड़ती है, नकलते समय ठ क उतनी ही वापस मुड़ जाती है। करण अपनी मूल दशा म ही आगे बढ़ती
है, केवल थोड़ी बगल म खसक हुई — इस लए ढक्कन अपने वास्त वक आमाप म दखता है। दोन लस के फलक
व क्रत और असमांतर ह, इस लए दोन मोड़ नह कटते — उत्तल लस इस दूरी पर प्रकाश को अ भस रत कर ढक्कन
को बड़ा दखाता है और अवतल लस उसे अपस रत कर छोटा।

प्र.5 कसी समतल दपण पर प्रकाश अ भलंब के अनु दश आप तत है। बताइए क नम्न ल खत म से कौन सा कथन
सत्य है— (i) आपतन कोण 90° है। (ii) आपतन कोण 0° है। (iii) परावतन कोण 90° है। (iv) इस तम
प्रकाश पराव तत नह होता है।

(ii) आपतन कोण 0° है।

आपतन कोण, आपितत िकरण और अिभलंब के बीच का कोण होता है।

यहाँ आपितत िकरण अिभलंब के अनुिदश ही है, अतः दोनों के बीच का कोण i = 0°

और इसिलए r = i = 0°

प्रकाश अपने ही पथ पर सीधा वापस लौट जाता है।

शेष वकल्प क्य गलत ह: 90° वह कोण है जो करण दपण के पृष्ठ से बनाती है, अ भलंब से नह — वकल्प (i)
और (iii) गलत रेखा से मापने के कारण बनते ह। वकल्प (iv) सवथा असत्य है: दपण प्रकाश को भली-भाँ त
पराव तत करता है, बस उसे उसी दशा म लौटा दे ता है जससे वह आया था, इस लए अलग से कोई पराव तत पुंज
दखाई नह दे ता।

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प्र.6 चत्र 10.25 म तीन दपण— समतल, अवतल एवं उत्तल रखे गए ह। कसी ग्राफ पत्रक के दपण म बने प्र त बब के
आधार पर इन दपण क पहचान क जए और चत्र म दपण के ऊपर उनके नाम ल खए।

गाफ पत्रक

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चत्र 10.25, पृष्ठ 167 — पुनःरेखां कत चत्र। मेज पर रखे तीन गोल दपण के पीछे एक ग्राफ पत्रक खड़ा है; प्रत्येक
दपण म उसी जाल का अपना प्र त बब बनता है। प्रत्येक दपण म बने वग के आमाप क तुलना पत्रक के वग से
क जए और ऊपर बने खाने म दपण का नाम ल खए।

प्रत्येक दपण म दख रहे वग क तुलना पीछे खड़े वास्त वक ग्राफ पत्रक के वग से क जए।

चत्र 10.25 का दपण ग्राफ पत्रक का प्र त बब कैसा दखता है दपण

बायाँ वग वास्त वक पत्रक से बड़े, इस लए दपण म कम वग समाते ह अवतल दपण

बीच वाला वग वास्त वक पत्रक के बराबर और रेखाएँ सीधी बनी रहती ह समतल दपण

दायाँ वग छोटे , कह अ धक वग समा जाते ह और रेखाएँ स्पष्ट रूप से मुड़ी दखती ह उ ल दपण
त्त

ग्राफ पत्रक इतनी अ परीक्षण-वस्तु क्य है: साद वस्तु केवल अपना कुल आमाप बताती है। जालीदार पत्रक
एक साथ यह बता दे ता है क दपण हर बदु पर क्या कर रहा है — य द कनारे के वग बीच के वग से भन्न आमाप
के ह तो दपण व क्रत है, और सीधी जाल-रेखाओं का मुड़ना बता दे ता है क कस ओर व क्रत है। बीच वाले दपण म
जाल हूबहू बनता है, जो कोई व क्रत दपण कर ही नह सकता; दाएँ म जाल छोटा भी है और मुड़ा भी — यह बाहर
क ओर व क्रत पृष्ठ का लक्षण है।

स्वयं जाँ चए: उत्तल दपण म ग्राफ पत्रक क पट्ट शेष दोन से चौड़ी दखती है। उतनी ही चकती म अ धक चौड़ा
दृश्य समाना ही उसम वग के छोटे दखने का कारण है।

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प्र.7 कसी संग्रहालय म कोई म हला एक वशाल अवतल दपण म अपना प्र त बब दे खती हुई चल कर उसक ओर
जाती है ( चत्र 10.26)। वह दे खेगी क— (i) उसके सीधे प्र त बब का आमाप घटता जाता है। (ii) उसके उल्टे
प्र त बब का आमाप घटता जाता है। (iii) उसके उल्टे प्र त बब का आमाप बढ़ता जाता है और अंततः यह सीधा
तथा आव धत हो जाता है। (iv) उसके सीधे प्र त बब का आमाप बढ़ता जाता है।

िवशाल अवतल दपण वह दपण की ओर चलती है

चत्र 10.26, पृष्ठ 167 — पुनःरेखां कत चत्र। संग्रहालय म म हला एक वशाल अवतल दपण के फोकस से काफ दूर
खड़ी है और इस दूरी पर उसका प्र त बब उल्टा बनता है। सो चए क दपण क ओर चलते रहने पर इस प्र त बब का क्या
होगा।

(iii) उसके उल्टे प्र त बब का आमाप बढ़ता जाता है और अंततः यह सीधा तथा आव धत हो जाता है।
दूर से चलना आरंभ क जए —

1. दपण से दूर — प्र त बब उल्टा और छोटा होता है, ठ क वैसा ही जैसा चत्र 10.26 म दपण के भीतर उसे उल्टा दखाया गया
है।
2. पास आते हुए — प्र त बब उल्टा ही रहता है पर बड़ा होता जाता है।
3. दपण के बहुत पास — प्र त बब पलटकर सीधा और आव धत हो जाता है।

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I

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दपण

अवतल दपण, जसम वस्तु F और दपण के बीच रखी है। दोन पराव तत करण फैल जाती ह, इस लए वे दपण के सामने कह नह
मलत ; पीछे क ओर बढ़ाने पर ( बदुदार रेखाएँ) वे दपण के पीछे मलती ह। अतः प्र त बब आभासी होता है — जसे पद पर नह लया
जा सकता — तथा सीधा और आव धत होता है।

पास आते-आते पलटाव क्य होता है: अवतल दपण पराव तत करण को अ भस रत करता है। जब तक वह दूर
है, ये करण उसक आँख तक पहुँचने से पहले दपण के सामने कट जाती ह, और कट हुई करण उसे उल्टा दखाती
ह। पास आने पर उससे नकलती करण अ धक तेज़ी से फैल रही होती ह, और एक न त दूरी के बाद दपण उन्ह
कटने योग्य अ भस रत कर ही नह पाता — वे आँख तक फैलती हुई ही पहुँचती ह, और आँख उन्ह पीछे बढ़ाकर
दपण के पीछे एक बदु पर ले जाती है। पीछे बना यह प्र त बब सीधा और उससे बड़ा होता है; और चूँ क दपण के
पीछे से वास्तव म कोई प्रकाश नह आता, इसे पद पर नह लया जा सकता — ऐसे प्र त बब को आभासी प्र त बब
कहते ह।

संकेत: वकल्प (i) और (iv) तुरंत हटाए जा सकते ह — पूरे समय सीधा रहने वाला प्र त बब समतल या उत्तल
दपण दे ता है, अवतल नह ।

प्र.8 एक आवधक लस को कसी मु द्रत पाठ्यसामग्री के ऊपर लाइए और उस दूरी को पहचा नए जस पर
पाठ्यसामग्री का आमाप बड़ा दखाई दे ने लगता है। अब इसे पाठ्यसामग्री से दूर ले जाइए। आप क्या अवलोकन
करते ह? बताइए आवधक लस कस प्रकार का लस होता है?

आवधक लस एक उत्तल लस होता है — वह लस जो कनार क अपेक्षा बीच म अ धक मोटा होता है।
क्रमशः क्या दखाई दे ता है:

1. पृष्ठ के समीप रखने पर अक्षर सीधे और आव धत दखते ह; कुछ सट मीटर क एक पूरी परास ऐसी मलती है जसम मुद्रण
बड़ा भी है और स्पष्ट भी।
2. लस को ऊपर उठाते जाने पर अक्षर एक सीमा तक और बड़े होते जाते ह।

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3. एक वशेष ऊँचाई पर मुद्रण पूरी तरह धुँधला पड़ जाता है और पढ़ा नह जाता।
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4. और ऊपर उठाने पर मुद्रण उल्टा होकर लौटता है और अब ऊँचाई बढ़ाने के साथ छोटा होता जाता है।
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अक्षर पलटते क्य ह: उत्तल लस पृष्ठ से आते प्रकाश को अ भस रत करता है। जब तक पृष्ठ एक न त दूरी से
gl है, करण आँख तक पहुँचते समय भी फैली हुई रहती ह, इस लए आँख उन्ह पीछे बढ़ाकर एक आव धत, सीधा
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प्र त बब बनाती है। उस दूरी के बाद करण आँख तक पहुँचने से पहले ही मलकर कट जाती ह, और कट हुई करण

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उल्टा दृश्य दे ती ह। बीच क धुँधली स्थ त वही है जहाँ करण न ठ क से फैल रही ह और न ठ क से कट रही ह।

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g पकड़कर उसके पार दूर क खड़क दे खए। खड़क उल्ट और बहुत
स्वयं जाँ चए: आवधक लस को हाथ भरaदूर
छोट दखेगी — यही ऊपर क सूची का अं तम चरण है।

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प्र.9 m स्तं.भc I क प्र व ष्टय का मलान स्तंभ II म क गई प्र व ष्टय से क जए। स्तंभaI — (i) अवतल दपण (ii) उत्तल
l a se दपण (iii) उत्तल लस (iv) अवतल लस। स्तंभ II — (क) एक ऐसा गोलीय दपण जसका परावतक पृष्ठ भीतर
ag क ओर व क्रत होता है। (ख) यह सदै व सीधा और आमाप म वस्तु से छोटा प्र त बब बनता है। (ग) इसके पीछे

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agl
रखी वस्तु कुछ अ धक दूरी पर उल्ट रखी हुई प्रतीत होती है। (घ) इसके पीछे रखी वस्तु आमाप म सदै व अपने
वास्त वक आमाप से छोट दखाई दे ती है।
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उत्तर a g

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स्तंभ I स्तंभ क्य

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(i) अवतल (क ) प रभाषा से — इसका परावतक पृष्ठ भीतर क ओर व क्रत होता

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(ii) उत्तल दपण (ख) इसक पराव तत करण सदै व अपस रत होती ह, इस लए प्र त बब सीधा और लघुकृत ही बन सकता है
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(iii) उत्तल (ग ) यह प्रकाश को अ भस करता है, इस लए एक न त दूरी के बाद करण कट जाती ह और वस्तु उल्ट

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ले ंस प्रतीत होती है

(iv) अवतल (घ ) यह प्रकाश को अपस रत करता है, इस लए इसके पार दखने वाली वस्तु सदै व सीधी और लघुकृत होती है
ले ंस
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m सकती ह। (ख) कहता है प्र त बब बनाता है — यह दपण क भाषा है, इस लए वह उत्तल दपण है। (घ) कहता है
(ख) और (घ) म भ्रम कैसे दूर कर: दोन म ‘सदै व’ शब्द है, और ‘सदै व’ का वचन केवल अपसारी यु क्तयाँ ही दे

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इसके पीछे रखी वस्तु — इस अध्याय म यही भाषा लस के लए प्रयुक्त हुई है, क्य क लस के माध्यम से दे खा जाता
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है, इस लए वह अवतल लस है।
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प्र.10 नम्न ल खत प्रश्न अ भकथन या कारण पर आधा रत है। अ भकथन— पीछे के यातायात के अवलोकन के लए
उत्तल दपण को वरीयता द जाती है। कारण— उत्तल दपण समतल दपण क तुलना म साथक रूप से व्यापक
दृ ष्ट क्षेत्र प्रदान करता है। सही वकल्प का चयन क जए— (i) अ भकथन और कारण दोन सही ह और कारण
अ भकथन क सही व्याख्या है। (ii) अ भकथन और कारण दोन सही ह परंतु कारण अ भकथन क सही
व्याख्या नह है। (iii) अ भकथन सही है कतु कारण असत्य है। (iv) अ भकथन और कारण दोन असत्य ह।

(i) अ भकथन और कारण दोन सही ह और कारण अ भकथन क सही व्याख्या है।
अ भकथन — सही। वाहन म लगे पा -दृश्य दपण उत्तल दपण ही होते ह।
कारण — सही। बाहर क ओर व क्रत होने के कारण उत्तल दपण पीछे क सड़क क कह अ धक चौड़ी पट्ट का प्रकाश समेटकर
उसी छोटे दपण म दखा दे ता है।
और कारण वास्तव म व्याख्या भी है। लेन बदलने से पहले चालक को पीछे क सड़क अ धक से अ धक दखनी चा हए, और
सबसे छोटे दपण म सबसे चौड़ा दृश्य ठ क उत्तल दपण ही दे ता है। इसी कारण उतने ही आमाप के समतल दपण के स्थान पर इसे
चुना जाता है।

इस गुण क क मत भी है: उतनी ही चकती म चौड़ा दृश्य ठूँ सने से हर वाहन छोटा दखता है, और छोटा प्र त बब
अ धक दूर का प्रतीत होता है। इसी कारण दपण पर ‘वस्तुओं के बीच वास्त वक दूरी दपण म दखाई दे ने वाली दूरी से
कम होती है’ जैसी चेतावनी लखी जाती है। यह उसी गुण क हा न है, कोई अलग गुण नह — इस लए इससे कारण
कमज़ोर नह पड़ता।

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प्र.11 चत्र 10.27 म O वस्तु, M दपण तथा I प्र त बब को नरू पत करता है। नम्न ल खत म से कौन सा कथन सत्य
है? (i) चत्र (क) समतल दपण और चत्र (ख) अवतल दपण नरू पत करता है। (ii) चत्र (क) उत्तल दपण और
चत्र (ख) अवतल दपण नरू पत करता है। (iii) चत्र (क) अवतल दपण तथा चत्र (ख) उत्तल दपण नरू पत
करता है। (iv) चत्र (क) समतल दपण तथा चत्र (ख) उत्तल दपण नरू पत करता है।

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(क)

O M I
(ख )

चत्र 10.27, पृष्ठ 168 — O वस्तु, M दपण तथा I प्र त बब है। प्रत्येक चत्र म I क ऊँचाई क तुलना O क ऊँचाई से
क जए।

(ii) चत्र (क) उत्तल दपण और चत्र (ख) अवतल दपण नरू पत करता है।
प्रत्येक चत्र म I वाले तीर क तुलना O वाले तीर से क जए। दोन चत्र म प्र त बब सीधा है और दपण M के दूसरी ओर बना है,
इस लए भेद केवल आमाप से हो सकता है।

चत्र प्र त बब क वस्तु से तुलना यह कौन-सा दपण कर सकता है

(क) सीधा और O से छोटा उत्तल दपण — इसका प्र त बब सदै व सीधा और लघुकृत होता है

(ख) सीधा और O से बड़ ा अवतल दपण, वस्तु उसके समीप रखी होने पर

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस AglaSem · NCERT Solutions

I

O F

दपण

उत्तल दपण। पराव तत करण सदै व अपस रत होती ह, इस लए प्र त बब उन्ह पीछे क ओर बढ़ाकर प्राप्त होता है। यह आभासी होता है
— जसे पद पर नह लया जा सकता — तथा सीधा और लघुकृत होता है और सदै व दपण और F के बीच बनता है — वस्तु कतनी भी
दूर ले जाई जाए, प्र त बब दपण के नकट ही रहता है।

दोन म समतल दपण क्य नह हो सकता: समतल दपण वस्तु के ठ क बराबर आमाप का प्र त बब बनाता है,
और कसी भी चत्र म I क ऊँचाई O के बराबर नह है। इस लए वकल्प (i) और (iv), जो कसी एक चत्र को
समतल दपण बताते ह, गलत ह। वकल्प (iii) म दोन उलटे ह — आवधन अवतल दपण का काम है, उत्तल दपण
का नह ।

संकेत: दोन चत्र म I को M के उस ओर दखाया गया है जस ओर O नह है, अथात दपण के पीछे । अतः दोन वे
ही सीधे प्र त बब ह जो करण को पीछे बढ़ाकर मलते ह — उत्तल दपण केवल यही बनाता है, और अवतल दपण
तब बनाता है जब वस्तु उसके समीप हो।

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प्र.12 कसी पारदश काँच के गलास के पीछे एक प सल र खए ( चत्र 10.28)। अब गलास को आधा जल से भ रए
( चत्र 10.28)। जल भरे भाग से गलास के पार दे खने पर प सल कैसी दखती है? व्याख्या क जए क इसक
आकृ त म प रवतन क्य प्रतीत होता है?

पेंिसल

जल

(क) (ख )
चत्र 10.28, पृष्ठ 169 — पुनःरेखां कत चत्र। (क) खाली गलास के पीछे रखी प सल। (ख) आधा जल भरा गलास
— जल वाले भाग से दे खने पर प सल स्पष्ट रूप से अ धक चौड़ी दखती है, इस लए वह जल क सतह पर टू ट हुई
प्रतीत होती है।

खाली गलास के पार प सल सामान्य दखती है। आधा जल भरते ही जल के पार दखने वाला भाग जल-तल के ऊपर वाले भाग से
स्पष्ट रूप से अ धक चौड़ा दखता है और एक ओर थोड़ा खसका हुआ भी — इस लए प सल जल के तल पर टू ट हुई प्रतीत होती
है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
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(क) खाली
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(ख) आधा जल भरा
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gl प सल जल के तल पर टूट हुई प्रतीत होती है।
खाली गलास के पार प सल सामान्य दखती है। जल के पार इसका नचला भाग अ धक चौड़ा और एक ओर खसका हुआ दखता है,

aजससे

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आकृ त बदली हुई क्य प्रतीत होती है: जल से भरा गलास एक ऐसा पारदश पड है जसका बाहरी पृष्ठ व क्रत

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g भन्न- भन्न मात्रा म भीतर क
.cष्ठ व क्रत होने के कारण प सल के बाएँ और दाएँ कनार से चलने वाली करण
है — अथात लटाया हुआ बेलनाकार उत्तल लस। प सल से आता प्रकाश जल और काँच से वायु म आते समय मुड़ता
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aseओर मुड़ती ह, इस लए वे आपक आँख तक आरंभ क तुलना म अ धक दूर-दूर पहुँचती ह। आँख उन्ह सीधी रेखाओं
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म पीछे बढ़ाकर प सल को उसक वास्त वक चौड़ाई से अ धक चौड़ा मान लेती है। जल-तल के ऊपर केवल वायु और

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दखता है और दोन भाग आपस म मलते नह.।co
काँच क पतली व क्रत परत है, जो प्रकाश को नाममात्र ही मोड़ती है — इस लए वह भाग अपनी सही चौड़ाई म
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यह भी क जए: व क्रत पृष्ठ केवल वक्रता क दशा म ही आवधन करता है। गलास को हाथ म घुमाइए — प सल

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चौड़ी तो होती है पर लंबी कभी नह , क्य क गलास केवल अपनी प र ध के अनु दश व क्रत है, ऊपर-नीचे नह ।

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a s em अ भक ल्पत कर और चचा कर — पृष्ठ 169
agl खोज,
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वस्तार काय

खोज, अ भक ल्पत कर और चचा कर

प्र.1 अपने शक्षक अथवा अ भभावक के साथ कसी नकटवत च कत्सालय अथवा कसी कान, नाक, गला
(ई.एन.ट ) वशेषज्ञ अथवा दं त च कत्सक के च कत्सालय म जाइए। च कत्सक से अनुरोध क जए क वे
आपको वह दपण दखाएँ जो वे कान, नाक, गले अथवा दाँत के परीक्षण के लए उपयोग म लाते ह। पहचा नए
क इन यंत्र म कस प्रकार का दपण लगा होता है।

कैसे क जए। भ्रमण शक्षक के माध्यम से तय क जए। अभ्यास पु स्तका साथ ले जाइए और हर दखाए गए यंत्र के लए तीन बात
ल खए — पा से दे खने पर परावतक पृष्ठ क आकृ त, उसके पास कोई छोट वस्तु रखने पर प्र त बब बड़ा दखता है या छोटा,
और च कत्सक उस यंत्र का उपयोग कस लए करते ह।
आपको क्या मलेगा।

यंत्र दपण का वही क्य
प्रकार

दंत दपण (मुख दपण) अवतल दाँत के पास रखने पर सीधा और आव धत प्र त बब बनता है, जससे छोट गु हका
भी स्पष्ट दखती है। लंबी डंडी के कारण दाँत का पछला भाग भी दे खा जा सकता
है।

ई.एन.टी. िचिकत्सक का माथे अवतल , बीच में रोगी के पीछे रखे लप का प्रकाश समेटकर कान, नाक या गले क गहरी और सँकरी
पर बाँध ा जाने वाला दपण एक छोटा िछद जगह पर संक द्रत करता है। च कत्सक बीच के छद्र से उसी दशा म दे खते ह।

डंडी पर लगा छोटा परीक्षण समतल अथवा यह मुख्यतः दृ ष्ट को मोड़कर गले के भीतर पहुँचाने के लए है; समतल पृष्ठ दृश्य को
दपण (गले का दपण) ह का अवतल
ल् बना वकृत कए दखाता है।

साझा वचार: च कत्सा के यंत्र म अवतल दपण तब चुना जाता है जब प्रकाश को कसी अँधेरी गुहा म समेटना हो
या कसी छोट रचना को आव धत करना हो। जहाँ दपण से केवल मोड़ पर से दे खना है, वहाँ समतल पृष्ठ बेहतर है,
क्य क वह च कत्सक को दखने वाली वस्तु का आमाप नह बदलता।

संकेत: च कत्सक से पू छए क माथे वाले दपण के बीच छद्र क्य होता है। पूरे अध्याय म यह सबसे सुंदर उदाहरण
है जहाँ प्रकाश एक ओर भेजा जाता है और उसी रेखा के अनु दश दे खा भी जाता है।

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प्र.2 सूय के प्रकाश का उपयोग करना भावी ऊजा चुनौ तय के समाधान क कुंजी है। सौर-कुकर ( चत्र 10.29) जैसी
यु क्तय म सूय के व करण को अ भस रत करने और ऊष्मा उत्पन्न करने के लए दपण का उपयोग कया जाता
है। भारत के गाँव म इस प्रकार क रचनाओं का उपयोग व ुत क बचत करने और जीवाश्म ईंधन के उपयोग म
कमी लाने के लए कया जाता है। अपने व ालय अथवा घर के लए सौर-कुकर क अ भकल्पना पर वचार
क जए और इसके लए एक वस्तृत प्रस्ताव तैयार क जए जसम आवश्यक आय-व्यय पत्र भी स म्म लत ह ।

सूय का पकाश

खाना पकाने का बतन

स्टैड
ं
वि त दपण पि याँ

चत्र 10.29, पृष्ठ 169 — छाया चत्र म दखाए गए सौर-कुकर का पुनःरेखांकन। तरछे े म म लगी व क्रत दपण प याँ
सूय के प्रकाश को एकत्र करके एक छोटे क्षेत्र पर भेजती ह, जहाँ एक भुजा पर खाना पकाने का बतन टका है।

अ े प्रस्ताव म ये छह बात होनी चा हए: (1) आवश्यकता, (2) प्रयुक्त भौ तक , (3) माप स हत नामां कत अ भकल्पना, (4)
सामग्री और व्यय क ता लका, (5) परीक्षण क व ध, और (6) सीमाएँ।
नमूना प्रस्ताव — व ालय क रसोई के लए समतल परावतक वाला बक्सा-प्रकार का सौर-कुकर
1. आवश्यकता. व ालय म मध्याह्न भोजन के लए जल गम करने और दाल पकाने म एल.पी.जी. का उपयोग होता है। वष म
लगभग 250 स्वच्छ धूप वाले दन म सौर-कुकर उस काम का एक भाग सँभालकर गैस का खच और ईंधन दोन घटा सकता है।
2. प्रयुक्त भौ तक . ढक्कन पर कब्ज़े से लगा समतल दपण सूय का एक अ त रक्त करणपुंज बक्से के भीतर पराव तत करता है,
जससे भोजन को दो दशाओं से धूप मलती है। भीतर का काला पृष्ठ उस प्रकाश को अवशो षत कर ऊष्मा म बदल दे ता है, और
दोहरा काँच का ढक्कन धूप भीतर आने दे ता है पर गम वायु को बाहर नह जाने दे ता — इससे भीतर का ताप लगभग 100–120 °C
तक पहुँच जाता है।
3. अ भकल्पना. बाहरी लकड़ी का बक्सा 60 सेमी × 60 सेमी × 20 सेमी; भीतरी एलु म नयम े 50 सेमी × 50 सेमी, मैट काले
रंग से रँगी हुई; दोन के बीच 5 सेमी थम कोल अथवा काँच-ऊन का ऊष्मारोधन; ढक्कन के लए 4 ममी मोट दो काँच क चादर, 2
सेमी क दूरी पर; ढक्कन से कब्ज़े ारा जुड़ा 60 सेमी × 60 सेमी का समतल दपण; ढक्कनदार चार काले रँगे एलु म नयम बतन।

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सामग्री व श ष्ट अनुमा नत व्यय (₹)

लकड़ी का बाहरी बक्सा 60 × 60 × 20 सेमी, प्लाईवुड 1200

एलुिमिनयम भीतरी टे 50 × 50 सेमी 700

ऊष्मारोधन थम कोल / काँच-ऊन, 5 सेमी 300

दोहरा काँच ढक्कन 2 चादर, 4 ममी 600

समतल दपण एवं कब्ज़े 60 × 60 सेमी 800

काला रंग , सीले ंट, पेंच — 400

चार बतन एलु म नयम, काले रँगे, ढक्कन स हत 600

तापमापी (0–150 °C) परीक्षण हेतु 200

कु ल 4800

4. परीक्षण. कसी स्वच्छ धूप वाले दन प्रातः 10 बजे से अपराह्न 3 बजे तक हर 15 मनट पर भीतर का ताप ल खए — एक बार
दपण-ढक्कन खोलकर और एक बार बंद रखकर — और दोन वक्र आले खत क जए। फर 500 ग्राम चावल पकने म लगा समय
ना पए और बची हुई एल.पी.जी. क क मत से तुलना करके नका लए क कुकर कतने महीन म अपनी लागत लौटा दे गा।
5. सीमाएँ, ईमानदारी से. यह बादल वाले दन या लगभग 3 बजे के बाद काम नह करता; इसम तलना संभव नह ; और कुकर को
सूय क ओर बनाए रखने के लए लगभग हर घंटे घुमाना पड़ता है।

यहाँ समतल दपण पयाप्त क्य है और बड़े संयंत्र म अवतल क्य चा हए: बक्सा-कुकर को केवल एक और
करणपुंज चौड़े बक्से म जोड़ना है, और समतल दपण यह बना सट क लक्ष्य-साधन के कर दे ता है। तलने योग्य —
या बड़े पैमाने पर सौर भट्ट योग्य — कह ऊँचा ताप पाने के लए धूप को एक बदु पर लाना पड़ता है, और यह
केवल अवतल (अ भसारी) परावतक ही कर सकता है।

प्र.3 गोलीय दपण और लस के साथ आभासी (वचुअल) प्रयोग करने के लए ऑनलाइन साधन (टू ल्स) अथवा
ए नमेशन का उपयोग क जए। अनुरूपण म ( समुलेशन) वस्तु क त प रव तत क जए और प्र त बब म होने
वाले प रवतन का अवलोकन क जए।

अनुरूपण का सही उपयोग। अनुरूपण तभी उपयोगी है जब आप कोई प्रश्न लेकर उसम जाएँ। पहले प्रश्न तय क जए, एक बार म
केवल एक ही बात बद लए, और केवल चत्र नह — मान भी ल खए।
करने योग्य प्रयोग

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क्रम क्या बद लए क्या अ भले खत क जए

1 अवतल दपण; वस्तु को बहुत दूर से धीरे-धीरे पास लाइए वह व तु-दू र ी िजस पर पितिबंब उ टे से सीधा हो जाता है
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2 अवतल दपण; वस्तु बहुत दूर पितिबंब कहाँ बनता है — यह फोकस पर होना चािहए

3 उत्तल दपण; वस्तु को पास से बहुत दूर तक ले जाइए या पितिबंब कभी उ टा या बड़ ा होता है (नही ं होना चािहए )
क् ल्

4 उत्तल लस; क्रम 1 दोहराइए पलटाव की दू र ी की तुल ना अवतल दपण से कीिजए

5 अवतल लस; क्रम 3 दोहराइए या पितिबंब पूरे समय सीधा और लघुकृ त रहता है
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6 कोई भी दपण; वस्तु स्थर रखकर वक्रता बद लए दपण अिधक गहरा करने पर पितिबंब का आमाप कै से बदलता है

आप क्या नष्कष नकाल सकगे। अवतल दपण और उत्तल लस एक जैसा व्यवहार करते ह, तथा उत्तल दपण और अवतल लस
एक जैसा। प्रत्येक जोड़ी म अंतर केवल इतना है क प्रकाश पराव तत होता है या पारगत; प्र त बब तो इससे तय होता है क करण
अ भस रत कराई गईं या अपस रत।

संकेत: अनुरूपण म करण-प्रदशन (ray display) चालू र खए। करण कहाँ कटती ह — या कहाँ नह कटत —
यह दे खना अकेले प्र त बब दे खने से कह अ धक समझाता है।

अध्याय — एक नज़र म
गोलीय दपण वह दपण है जसका परावतक पृष्ठ कसी खोखले गोले के एक भाग जैसा होता है। य द यह भीतर क ओर
व क्रत है तो अवतल दपण, और य द बाहर क ओर व क्रत है तो उत्तल दपण कहलाता है।
अवतल दपण ारा बना प्र त बब आव धत, लघुकृत अथवा वस्तु के बराबर आमाप का हो सकता है और सीधा या उल्टा भी —
यह दपण से वस्तु क दूरी पर नभर करता है। उत्तल दपण का प्र त बब सदै व सीधा और लघुकृत होता है।
परावतन के दो नयम — (i) आपतन कोण, परावतन कोण के बराबर होता है, तथा (ii) आप तत करण, आपतन बदु पर
अ भलंब और पराव तत करण सभी एक ही समतल म होते ह। दोन कोण अ भलंब से मापे जाते ह।
ये नयम समतल, अवतल और उत्तल — सभी दपण पर लागू होते ह। गोलीय पृष्ठ व क्रत होने के कारण प्रत्येक बदु पर
अ भलंब क दशा भन्न होती है, इसी लए समांतर करणपुंज अ भस रत (अवतल) या अपस रत (उत्तल) हो जाता है।
लस पारदश काँच या प्ला स्टक का वह टु कड़ा है जसके पृष्ठ व क्रत होते ह। उत्तल लस बीच म मोटा होता है और प्रकाश को
अ भस रत करता है; अवतल लस कनार पर मोटा होता है और प्रकाश को अपस रत करता है।
प्र त बब के संदभ म उत्तल लस अवतल दपण जैसा व्यवहार करता है और अवतल लस उत्तल दपण जैसा — यही इस अध्याय
का सार है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 10 प्रकाश — दपण एवं लस
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त्व रत पुनरावृ त्त
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g मलता है
aकहाँ
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शब्द अथ मु ख्य व्यवहार

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गोलीय दपण वह दपण िजसका परावतक पष्ृ ठ खोखले पृष्ठ के प्रत्येक बदु पर अ भलंब क दशा
भन्न होती है
अवतल और उत्तल दपण
गोले का एक भाग होता है

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m रत करता है
समांतर करणपुंज को एक बदु F पर

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अवतल दपण परावतक पष्ृ ठ भीतर की ओर वि त टॉच का परावतक, वाहन का अग्रद प,

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अ भस दं त च कत्सक का दपण

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उत्तल दपण परावतक पष्ृ ठ बाहर की ओर वि त करणपुंज को अपस रत करता है; पा -दृश्य दपण, सड़क सुरक्षा दपण,

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प्र त बब सदै व सीधा और लघुकृत चौकसी दपण

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आप तत दपण पर पड़ने वाली पकाश िकरण दपण से आपतन बदु O पर मलती है चत्र 10.9 (क)

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करण

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अ भलंब आपतन िबंद ु पर दपण से 90° का कोण i और r दोन इसी से मापे जाते ह, दपण चत्र 10.9 (ख)
बनाती रे खा से नह

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आपतन कोण आपितत िकरण और अिभलंब के बीच i=r ता लका 10.1

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(i) का कोण
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परावतन कोण परावितत िकरण और अिभलंब के बीच a ता लका 10.1
(r) का कोण

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सीधा / उल्टा उत्तल दपण और अवतल लस म सदै व चत्र 10.5, चत्र 10.17

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पितिबंब वस्तु की भाँित सीधा / उल्टा

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सीधा

आवeधतm/ a
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gl लघुकृत
पितिबंब वस्तु से बड़ा / छोटा उत्तल दपण और अवतल लस म सदै व चत्र 10.23, चत्र 10.24

a लघुकृत

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coदपण l a
पा प रवतन पितिबंब में बायाँ और दायाँ परस्पर बदल समतल, अवतल और उत्तल — तीन क्रयाकलाप 10.3

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जाना

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उत्तल लस
अिधक मोटा होता है a
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वह ले ंस जो िकनारों की अपेक्षा बीच में अ भसारी लस; धूप म कागज जला
सकता है
आवधक लस, कैमरा, हमारा नेत्र लस

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अवतल लस वह ले ंस जो बीच की अपेक्षा िकनारों पर अपसारी लस; प्र त बब सदै व सीधा और कुछ ऐनक के लस

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अिधक मोटा होता है लघुकृत

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Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages55
Languagehindi
Updated19 Sep 2026