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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है

AglaSem पर कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 12 How Nature Works in Harmony (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है - Page 1 of 60

About NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है

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NCERT Solutions Class 8 Science Chapter 12 प्रकृति कैसे सामंजस्य में कार्य करती है – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 12: प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय
करती है

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

190 – 209 22 60 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 59 pages

Page 2

कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय
करती है
सकुड़ते वन से नकलकर गन्ने के खेत म पहुँचा हाथी कोई व चत्र व्यवहार नह कर रहा — वह भोजन और जल के पीछे चल रहा है। यह अध्याय उसी
कड़ी को पकड़कर एक पयावास से पूरे पा रतंत्र तक जाता है और दखाता है क आहार जाल म ऊजा तथा पोषक तत्व कस प्रकार बहते ह और एक
जीव के हट जाने का प्रभाव पूरे जाल म क्य फैल जाता है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 8) 190 – 209

खं ड प्रश्न

22 60

माध्यम

हन्द

खोजबीन और वचार कर — पृष्ठ 190
अध्याय आरंभ — हाथी ग लयारा

खोजबीन और वचार कर

प्र.1 वन क्षेत्र का क्षरण और वषा के प्र तरूप म प रवतन खेत और गाँव म हा थय के प्रवेश का कारण कैसे बन
सकता है?

क्य क सकुड़ा और सूखा हुआ वन अपने हा थय को भोजन और जल नह दे पाता, इस लए वे बाहर नकलकर वहाँ जाते ह जहाँ
भोजन उपलब्ध है।
अध्याय इन घटनाओं को एक श्रृंखला के रूप म रखता है—

वष और तापमान में पिरवतन → वन स्पितयाँ पभािवत

सड़ कों और भवनों के िलए वृक्षों की कटाई → वन सूखते और िसकु ड़ ते है ं

जल-कं ु ड सूख जाते है ं → पय वास की हािन

जंत ु मानव पय वासों की ओर जाते है ं → फसलों को क्षित और कभी-कभी मनुष्यों तथा पालतू जंत ओ
ु ं को हािन

हाथी एक बहुत बड़ा शाकाहारी है, अत: उसे प्र त दन बहुत अ धक मात्रा म चारा और जल चा हए। खेत या बागान वही दे ता है जो
पतला होता वन अब नह दे पाता — पास-पास खड़े केले और गन्ना, जो सरलता से मल जाते ह। इस लए हाथी भटक नह रहे, वे
भोजन के पीछे चल रहे ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: हाथी वन के जीवन के लए अनुकू लत है। अनुकूलन धीमा होता है, वह अनेक पी ढ़य म बनता
है। कटाई और बदला हुआ मानसून वन को कुछ ही वष म बदल दे ते ह — अनुकूलन इतनी तेजी से नह हो सकता,
इस लए जंतुओं को स्थान बदलना पड़ता है। यही कारण है क वन्यजीव पा र स्थ तक वद ग लयार क पहचान
करके उन्ह चह्नां कत करते ह, ता क हाथी मानव ब स्तय के संपक म आए बना बड़े वन क्षेत्र के बीच आवागमन
कर सक।

प्र.2 कल्पना क जए क आप सघन वन का एक वृक्ष ह। जल, सूय का प्रकाश, अन्य जंतुओं तथा वन के अन्य घटक
के साथ आपके संबंध कस प्रकार के ह गे?

वृक्ष के रूप म म एक उत्पादक ँ, इस लए वन का लगभग हर संबंध या तो मुझे पोषण दे ता है या मुझसे पोषण लेता है।

सूय के प्रकाश, जल और वायु के साथ (अजै वक → जै वक): म सूय के प्रकाश, काबन डाइऑक्साइड और जल से प्रकाश
सं ेषण ारा अपना भोजन बनाता ँ और ऑक्सीजन नमुक्त करता ँ। मृदा मुझे खड़े रहने का माध्यम और अ नवाय पोषक
तत्व दे ती है।
मृदा और वायु के साथ (जै वक → अजै वक): मेरी जड़ मृदा को अपने स्थान पर थामे रखती ह और अपरदन रोकती ह, मेरी
छाया और गरी प त्तयाँ मृदा क नमी बनाए रखती ह, और मुझसे नकला जल आस-पास क वायु को ठं डा करता है। अथात म
नज व घटक को उतना ही बदलता ँ जतना वे मुझे।
जंतुओं के साथ: हरण और शशक मेरी प त्तयाँ तथा नन्हे पौधे खाते ह; क ट, पक्षी और चमगादड़ मेरे पुष्प का परागण करते
ह; पक्षी और गलहरी मेरे फल खाकर बीज को दूर तक ले जाते ह, जससे मेरे पौधे नई भू म तक पहुँचते ह; पक्षी मेरी शाखाओं
म घ सले बनाते ह।
अन्य पादप के साथ: म पड़ोसी वृक्ष से सूय के प्रकाश, जल और स्थान के लए स्पधा करता ँ — इसी कारण वन के वृक्ष
ऊँचे और सीधे बढ़ते ह। मेरी शाखा पर उगा ऑ कड केवल सहारा लेता है (सहभो जता), जब क कोई परजीवी लता मुझसे
भोजन लेकर मुझे हा न पहुँचाती है (परजी वता)।
सूक्ष्मजीव के साथ: मेरी प त्तयाँ गरने पर और अंतत: मेरे मरने पर कवक तथा जीवाणु मुझे वघ टत करके मेरे पोषक तत्व
मृदा को लौटा दे ते ह, जहाँ से अगला वृक्ष उन्ह लेगा।

संकेत: ध्यान द जए क वृक्ष पहले पोषी स्तर पर है। ऊपर लखा हर जंतु-संबंध वास्तव म उसी ऊजा का है जसे
वृक्ष ने सूय के प्रकाश से सबसे पहले ग्रहण कया।

प्र.3 क्या आपको लगता है क पृथ्वी मनुष्य के बना फल-फूल सकती है? क्या मनुष्य पृथ्वी के बना जी वत रह सकते
ह?

पृथ्वी मनुष्य के बना फल-फूल सकती है; मनुष्य पृथ्वी के बना जी वत नह रह सकते।
दे खए क कसी पा रतंत्र म ऊजा कहाँ से आती है। वह केवल उत्पादक के रास्ते, सूय के प्रकाश से प्रवेश करती है और फर
उपभोक्ताओं से होकर अपघटक ारा मृदा म लौट जाती है। मनुष्य उपभोक्ता ह। हम इस प्रवाह से लेते ह — उसम कुछ जोड़ते
नह । हम हटा द जए, प्रवाह फर भी पूरा हो जाएगा।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

अब प्रश्न को उल टए। हमारी हर आवश्यकता पा रतंत्र से मला लाभ है — वन हम शुद्ध वायु, उपजाऊ मृदा, भोजन, रेशे, इमारती
लकड़ी और औष धयाँ दे ते ह; जलीय पा रतंत्र जल और भोजन दे ते ह; और पा रतंत्र का स दयबोधक तथा मनोरंजन-स्थल के रूप म
भी महत्त्व है। इनम से कोई भी शून्य से नह बनाया जा सकता।

ऐसा क्य होता है: हम इस जाल के भीतर ह, बाहर नह । इसी लए अध्याय चेताता है क जब हम प्राकृ तक
संसाधन का अत्य धक उपयोग अथवा दुरुपयोग करते ह तो हम प्रकृ त के संतुलन को बगाड़ दे ते ह — क्ष त उन्ह
क ड़य से होकर हम तक लौट आती है जनसे हम लाभ मलता है।

प्र.4 य द दो प्रकार के पक्षी एक ही फल के लए प्र तस्पधा करते ह तो समय के साथ उनके जीवन जीने क शैली म
क्या प रवतन आ सकता है?

समय के साथ दोन प क्षय का पूरा-पूरा अ तव्यापन समाप्त होने लगेगा — प्रत्येक अपने खाने, खाने के स्थान अथवा खाने के समय
म कुछ प रवतन कर लेगा।
तक माँग और पू त का है। फल क एक फसल केवल सी मत प क्षय को पाल सकती है। य द दोन प्रकार के पक्षी एक ही समय और
एक ही स्थान पर वही फल चाहगे तो प्रत्येक को कम मलेगा; जस पक्षी को कम भोजन मलेगा वह कम शावक पालेगा और उसक
संख्या घटे गी। दबाव उसी पक्षी पर कम होगा जो कोई ऐसा रास्ता खोज ले जसका उपयोग दूसरा नह कर रहा। संभा वत प रवतन
—

एक वृक्ष के ऊपरी भाग म और दूसरा नीची शाखाओं पर भोजन करे;
एक प्रात:काल और दूसरा दन म बाद म भोजन करे;
एक छोटे क े फल ले जन्ह उसक च च संभाल सके, दूसरा बड़े पके फल;
एक पयावास के दूसरे भाग म चला जाए अथवा अपने भोजन म क ट और मकरंद जोड़ ले।

ऐसा क्य होता है: अध्याय कहता है क साझा संसाधन के लए स्पधा जीवसंख्या के आकार को नयं त्रत करने
और पा रतंत्र को संतु लत रखने म सहायता करती है। इसके अभाव म एक प्रजा त अत्य धक संख्या म बढ़कर
पा रतंत्र म असंतुलन उत्पन्न कर सकती है। इस लए स्पधा केवल संघष नह है — यह उन बल म से एक है जो
समुदाय को संतुलन म रखते ह।

प्र.5 क्या मानवीय क्रयाकलाप प्राकृ तक आपदाओं का कारण बन सकते ह?

मानवीय क्रयाकलाप एक साधारण प्राकृ तक घटना को आपदा म बदल सकते ह, और कुछ आपदाओं को सीधे भी जन्म दे सकते
ह।
अध्याय का अपना उदाहरण इसे स्पष्ट कर दे ता है। सुंदरबन चक्रवात और बाढ़ के समय तेज वायु और लहर को मंद करके
हमारी रक्षा करते ह। त मलनाडु के कु ालोर जले म सेल्वम का गाँव 2004 क सुनामी से आस-पास के गाँव क तुलना म कम
प्रभा वत हुआ क्य क वहाँ मग्रोव वन बचा हुआ था। जहाँ ईंधन और कृ ष के लए मग्रोव काट दए गए, वहाँ यह कवच नह रहा —
वही लहर अब घर और खेत तक पहुँच जाती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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यही तक अध्याय म आगे भी चलता है—
.
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ढलान के वृक्ष काट द जए तो जड़ मृदा को नह थामगी और साधारण वषा भी भूस्खलन तथा न दय म गाद
emले आएगी।
. a gl मस के अभाव म मृदा
co के अत्य धक उपयोग से मृदाकण को जोड़े रखने वाला मस घटता है; पयाप्त
em
सं े षत उवरक

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l का व्यापक स्तर पर संग्रहण क जए तो कृ ष पीड़क बढ़ जाएँगे — यह फसल-हा न पूरी तरह हमारी बनाई हुई है।
अपरदन के लए प्रवण हो जाती है।

agमढक

. c om
क्या आप जानते ह? घटना (तूफान, लहर, वषा) प्राकृ तक है। वह आपदा बनेगी या नह , यह प्राय: इस पर नभर
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a s emहै या नह ।
करता है क उसे सोख लेने वाला पा रतंत्र अब भी वहाँ

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अपने प्रश्न को साझा क जए
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प्र.6

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gऐसेl प्रश्न बनाइए जन्ह वास्तव म जाँचा जा सके — कसी अवलोकन, गणना अथवा सवक्षण से। आरं भक पृष्ठ पढ़ने के बाद कुछ
a प्रश्न इस प्रकार हो सकते ह—
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एक हाथी ग लयारा कतना चौड़ा होना चा हए और यह कौन तय करता है क वह कहाँ से जाएगा?

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ग लयारा संर क्षत कर दे ने के बाद के वषgमl क्या कम हाथी खेत म आते ह?
वन के समीप के गाँव म कन फसल को सबसे अ धक क्ष त होती है और कस महीने म?

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हा थय के अ त रक्त उसी ग लयारे का उपयोग और कौन-से जंतु करते ह?
एक वयस्क हाथी को एक दन म कतना चारा और जल चा हए?
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s e mहै?
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हमारे अपने क्षेत्र म कौन-से वृक्ष सबसे अ धक काटे जाते ह और उनके स्थान पर क्या लगाया जाता

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m क जए: प्रत्येक प्रश्न को एक पच पर ल खए और उसके सामने ल खए क आप उसका उत्तर कैसे खोजगे —
eयह
as गणना से, मान चत्र से, साक्षात्कार से या पुस्तकालय से। जस प्रश्न को जाँचा न जा सके वह केवल एक राय है।
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s — पृष्ठ 191
aकर
क्रयाकलाप 12.1— आइए, खोज
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12.1 हम कस प्रकार अपने प रवेश का अनुभव करते और उसे समझते ह?

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.
क्रयाकलाप

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m .c अपने आस-पास के कन्ह दो पयावास क पहचान क जए। ये नम्नagल खत म से कोई भी दो हो सकते ह—
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प्र.1

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तालाब, वन, कृ ष फाम अथवा कोई बड़ा वृक्ष, जैसे— बरगद, आम या पलखन (सफेद अंजीर)।

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ऐसे दो पयावास चु नए जनक नज व प र स्थ तयाँ स्पष्ट रूप से भन्न ह — तुलना तभी साथक होती है। गाँव का तालाब और आम

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का वृक्ष, अथवा वद्यालय का उद्यान और सड़क का कनारा अच्छे वकल्प ह।
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नमूना उत्तर: हमारे समूह ने चुना — (i) गाँव का तालाब और (ii) वद्यालय क द वार के पास का पुराना बरगद।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

जाने से पहले तय कर ली जए क आप क्या-क्या दे खगे, जससे दो समूह के अ भलेख तुलनीय रह—

केवल बीच का भाग नह , कनारे और सतह भी दे खए;
पत्थर के नीचे, छाल के नीचे और प त्तय के ढे र के नीचे दे खए — अ धकांश छोटे जीव छपे रहते ह;
वे बात भी ल खए जन्ह केवल अनुभव या माप सकते ह — कतनी गरमी है, मृदा कतनी नम है, भू म तक कतना सूय का
प्रकाश पहुँचता है।

सावधानी: अपने शक्षक के साथ समूह म पयावास का अन्वेषण क जए। गहरे जल म न जाइए और घ सल , बल
तथा जंतुओं को परेशान न क जए — हर पत्थर वैसे ही रख द जए जैसा आपने पाया था।

प्र.2 इन पयावास म आपके ारा अवलो कत कए गए सजीव और नज व वस्तुओं क सूची बनाइए। अपने
अवलोकन को ता लका 12.1 म अ भले खत क जए।

ता लका 12.1— दो पयावास के व भन्न घटक

तालाब वन

सजीव नज व वस्तुए ँ सजीव नज व वस्तुए ँ

मछली जल घास म ृद ा

वृक्ष

पक्षी

ता लका 12.1, पृष्ठ 192 — पुस्तक के अनुसार; रक्त कोष्ठक आपके अपने अवलोकन के लए ह।

चत्र 12.1 म दखाए गए तालाब और वन को लेकर पूरी क गई ता लका 12.1—

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

तालाब वन

सजीव नज व वस्तुए ँ सजीव नज व वस्तुए ँ

मछली जल घास म ृद ा

बत्तख सूय का पकाश वृक्ष सूय का पकाश

कच्छप, मेंढक वायु (जल में घुल ी ऑक्सीजन) पक्षी (िगद्ध, िशकरा) वायु

व्याधपतंग , घोंघे तल की िम ी और पत्थर िहरण, शशक, लोमड़ी, चूहा, िगलहरी च ाने ं और पत्थर

कमल, कु मुिदनी, नरकट, शैवाल तापमान म ृत ठू ँठ पर उगे मशरूम तापमान

अपनी ता लका म वही भ रए जो आपने वास्तव म दे खा — नाम भन्न ह गे, प्र तरूप वही रहेगा।

ऐसा क्य होता है: दोन सू चय म दो-दो स्तंभ बना कारण नह ह। सजीव पयावास के जै वक घटक ह और नज व
वस्तुएँ अजै वक घटक। कोई भी सूची अकेले अथ नह रखती — कमल को जल और सूय का प्रकाश चा हए, और
वही जल आं शक रूप से उसम उगने वाले पादप के कारण ठं डा और स्वच्छ बना रहता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 192
12.1 हम कस प्रकार अपने प रवेश का अनुभव करते और उसे समझते ह?

प्र.1 क्रयाकलाप 12.1 म आप दोन पयावास म क्या समान वशेषताएँ दे खते ह?

दोन पयावास म सजीव के साथ-साथ नज व वस्तुए ँ भी वद्यमान ह। यही समानता है। परंतु सजीव के प्रकार भन्न- भन्न ह
और नज व वस्तुएँ भी भन्न प्रकार क ह।

तालाब वन

दोनों में समान जैिवक घटक + अजैिवक घटक, जो परस्पर िक्रया करते है ं

जैिवक घटक मछली, मढक, शैवाल, कमल वृक्ष, घास, हरण, लोमड़ी, मशरूम

अजैिवक घटक जल माध्यम है; ऑक्सीजन उसम घुली रहती है वायु माध्यम है; जल को मृदा थामे रखती है

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक पयावास को वही चार चीज दे नी होती ह — भोजन, ऑक्सीजन, आश्रय और वृ द्ध के
लए स्थान। अंतर इसम है क वह उन्ह कैसे दे ता है। मछली ऑक्सीजन जल से लेती है, हरण वायु से। एक ही
आवश्यकता दो अलग ढं ग से पूरी होती है, और इसी लए दोन पयावास म जीव के दो अलग समूह मलते ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 क्या आपने कभी सोचा है क कुछ जीव भू म पर एवं कुछ जल म क्य रहते ह?

क्य क प्रत्येक जीव को जी वत रहने के लए व शष्ट स्थ तय क आवश्यकता होती है और व भन्न पयावास रहने हेतु व भन्न
स्थ तयाँ प्रदान करते ह।
कोई जीव वह रह सकता है जहाँ उसका शरीर वास्तव म काय करे। मछली का शरीर जल म घुली ऑक्सीजन लेने के लए बना है,
उसका आकार जल म चलने के लए बना है, और उसके अंडे जल म ही दे ने पड़ते ह ता क वे सूख नह । उसे भू म पर रख द जए तो
इनम से कुछ भी काम नह करेगा। हरण का शरीर ठ क उल्टा बना है — वह ऑक्सीजन वायु से लेता है, उसक टाँग मृदा पर दौड़ने
के लए ह, और जल म डू बे रहने पर उसक त्वचा से जल शीघ्र नकल जाएगा।

ऐसा क्य होता है: जीव उन प रवेशी स्थ तय के लए स्वयं को अनुकू लत करते ह जहाँ वे रहते ह। अनुकूलन शरीर
और प र स्थ तय के बीच का मेल है। प र स्थ तयाँ बदल जाएँ तो यह मेल टू ट जाता है — वन के सूखने पर हा थय
के साथ यही होता है।

प्र.3 मछ लयाँ तालाब म कैसे जी वत रहती ह?

तालाब मछली क हर आवश्यकता पूरी करता है — भोजन, ऑक्सीजन, आश्रय और वृ द्ध के लए स्थान।

जै िवक आवश्यकता — भोजन → तालाब के छोटे पादपों और जंत ओ
ु ं से

अजै िवक आवश्यकता — ऑक्सीजन → जल से (उसमें घुली हुई)

आश्रय → नरकट, जलीय वनस्पित और कमल के पत्ते

स्थान → स्वयं तालाब का आयतन

ध्यान द जए क दोन प्रकार क आवश्यकताएँ दो अलग प्रकार के घटक से पूरी होती ह। क्रयाकलाप का यही सार है — मछली
केवल जल के कारण जी वत नह रहती, न केवल शैवाल के कारण, ब ल्क इस लए क तालाब के जै वक और अजै वक घटक
मलकर काय करते ह।

स्वयं जाँ चए: सो चए क य द तालाब के पादप मर जाएँ तो क्या होगा। जल म ऑक्सीजन का उत्पादन कम हो
जाएगा — और मछली संकट म आ जाएगी, जब क जल तो वह है। यही श्रृंखला आपको चत्र 12.13 म फर
मलेगी।

क्रयाकलाप 12.2— आइए, अ भले खत कर — पृष्ठ 193

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

12.2 प्रकृ त म कौन-कौन से जीव एक साथ रहते ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 अपने वद्यालय के उद्यान म 1 मीटर × 1 मीटर का एक क्षेत्र च त क जए। इस क्षेत्र म उप स्थत कन्ह चार
जीव क पहचान क जए और उनक संख्या ग नए। जीव क संख्या को ता लका 12.2 म अ भले खत क जए।

ता लका 12.2— कसी दए गए स्थान और समय म वशेष प्रकार के जीव क संख्या

जीव का नाम सम ष्ट (जीव क संख्या)

पादप 1 : 20

पादप 2 : 05

जंत ु 1 :

जंत ु 2 :

ता लका 12.2, पृष्ठ 193 — पुस्तक के अनुसार; नाम और दो रक्त संख्याएँ आपको भरनी ह।

चार खूँ टय और डोरी से वग च ह्नत क जए, फर उसके भीतर चुने गए प्रत्येक प्रकार के हर जीव को ग नए — पादप को एक ही
बार ग नए चाहे उसक प त्तयाँ कतनी भी ह , और जो केवल आधा भीतर हो उसे न ग नए।
नमूना उत्तर ( वद्यालय के उद्यान म एक समूह का 1 मीटर × 1 मीटर क्षेत्र)—

जीव का नाम सम ष्ट (जीव क संख्या)

पादप 1: दू ब घास 20

पादप 2: गेंद ा 05

जंत ु 1: ची ंटी 32

जंत ु 2: कें चुआ 03

इसके बाद चार -पाँच समूह से आँकड़े संक लत क जए, जससे कक्षा के पास अनेक वग क गणना आ जाए।

ऐसा क्य होता है: क्षेत्रफल और समय दोन जानबूझकर न त कए गए ह। कोई गणना तभी अथ रखती है जब
आप बताएँ क कतने क्षेत्र म और कब। अलग-अलग आकार के टु कड़े गनने वाले, अथवा दोपहर और साँझ को
च टयाँ गनने वाले दो समूह अपनी संख्याओं क तुलना ही नह कर सकते। इसी लए सम ष्ट क प रभाषा है — एक
न त समय म एक पयावास म उप स्थत एक ही प्रकार के जीव का समूह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है
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दए गए उदाहरण म 1 × 1 m2 क्षेत्र म पादप 1 _____ क संख्या 20 है और पादप 2 _____ क संख्या मात्र 05 है।
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l आपके ारा पहचाने गए दो प्रकार के पादप के नाम के लए ह — आपक अपनी ता लका के पादप 1 और पादप 2।
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ऊपर दए गए नमूने के अनुसार—

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1 × 1 m2 क्षेत्र में दू ब घास की संख्या 20 है और eगेm
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ंद ा की संख्या मात्र 05 है।

दो अलग संख्याएँ, दो अलग सम ष्टयाँ, एक ही पयावास।

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co ारा फैलती है और र दे जाने तथा छाया दोन को सह लेती है, इस लए aवहglपूरा वग भर दे ती है; गदे को
ऐसा क्य होता है: दोन पादप समान संख्या म नह ह क्य क उनक प र स्थ तयाँ समान रूप से अनुकूल नह ह।
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दूब भूस्तारी

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बीज से उगना पड़ता है और अ धक प्रकाश तथा स्थान चा हए, इस लए वह बहुत कम संख्या म आता है। एक ही वग
a म सम ष्टय क तुलना करके ही आप समझना आरंभ करते ह क कस जीव को वास्तव म कौन-सी स्थ तयाँ चा हए।

m a s
m.co agl
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 194
ag
12.2 प्रकृ त म कौन-कौन से जीव एक साथ रहते ह?

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m a s emहोगा?
क्या एक पयावास म केवल एक ही प्रकार के जीव हो सकते ह? य द ऐसा हो तो क्या

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प्र.1

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ag अ धक समय तक नह । केवल एक ही प्रकार के जीव वाला पयावास शीघ्र ही टूट जाएगा।

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.cदूसरा चाहता है, उसी समय और उसी स्थान पर। इससे सीधे प्र तस्पधा होगी ag
य द सभी जीव एक ही प्रकार के ह तो उन सबक भोजन, जल, स्थान जैसी आवश्यकताएँ समान ह गी। पयावास का कोई

और संभवत: संसाधन क कमी हो जाएगी।ase
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बँटवारा होगा ही नह — हर जीव ठ क वही चाहेगा जो

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agजीव
इससे भी बड़ी बात यह क जो काय दूसरे करते ह वे ह गे ही नह —

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य द वह एक प्रकार पादप हो तो कोई परागणकारी नह होगा, अत: फल और बीज बहुत कम बनगे;

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य द वह जंतु हो तो उसे खलाने वाला कोई उत्पादक ही नह होगा;
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.co a g
अपघटक के बना मृत शरीर एकत्र होते जाएँगे और उनके पोषक तत्व कभी मृदा म नह लौटगे।

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a ऐसा क्य होता है: समुदाय इस लए चलता है क्य क उसक व भन्न सम ष्टय को अलग-अलग चीज चा हए और वे
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अलग-अलग काय करती ह। एक ही प्रकार का जीव एक साथ उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक नह हो सकता,
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इस लए ऊजा का प्रवाह और पदाथ का पुनचक्रण दोन रुक जाते ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 आपके वचार से और क्या हो सकता है?

दो बात और, जन्ह आप वास्त वक पा रतंत्र म दे ख सकते ह—

रोग बहुत तेजी से फैलेगा। एक ही प्रकार के जीव एक जैसे होते ह, अत: जो रोग एक पर आक्रमण कर सकता है वह सब पर
कर सकता है। पयावास म उसे रोकने वाला कुछ नह होगा। यही दुबलता अध्याय आगे धान्य कृ ष म बताता है — एक ही भू म
पर बार-बार एक ही फसल उगाना।
संख्या म भारी उतार-चढ़ाव आएगा। न कोई परभक्षी, न कोई स्पध — सम ष्ट तब तक बढ़े गी जब तक अपना ही भोजन
समाप्त न कर ले, और फर अचानक गर जाएगी। अध्याय यह सीधे कहता है — स्पधा के अभाव म एक प्रजा त अत्य धक
संख्या म वृ द्ध कर सकती है, इससे पा रतंत्र म असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।

क्या आप जानते ह? मृदा भी बदल जाएगी। जड़ क व वधता और अपघटक के बना मृदा का मस घट जाएगा,
वह कम जल थामेगी और धीरे-धीरे उस एक बची प्रजा त को भी संभाल नह पाएगी।

क्रयाकलाप 12.3— आइए, पढ़ — पृष्ठ 194–195

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

12.3 क्या कसी समुदाय म प्रत्येक जीव महत्त्वपूण होता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 शोधकताओं ने यह दे खने के लए एक अध्ययन कया क तालाब म मछ लयाँ अपने आस-पास के पादप म बीज
उत्पादन को कैसे प्रभा वत करती ह। उन्ह ने दो तालाब का अवलोकन कया— तालाब ‘क’ जसम मछ लयाँ और
उनके आस-पास बड़ी संख्या म पुष्पीय पादप थे, तालाब ‘ख’ जसम मछ लयाँ नह थ और आस-पास पुष्पीय
पादप भी कम थे ( चत्र 12.3)। इन अवलोकन के कसी एक कारण पर वचार क जए।

तालाब ‘क’ तालाब ‘ख’
मछिलयाँ हैं · अनेक पुष्पीय पादप मछिलयाँ नही ं · अनेक व् याधपतंग · कम पुष्पीय पादप

चत्र 12.3, पृष्ठ 194 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: तालाब ‘क’ मछ लय स हत और तालाब ‘ख’ मछ लय र हत।

एक संभा वत कारण — मछ लयाँ पादप को सीधे प्रभा वत कर ही नह रह ; वे उन क ट को प्रभा वत कर रही ह जो पादप का
परागण करते ह।
क ड़याँ दे खए। मछ लयाँ व्याधपतंग के लावा खाती ह, जो जल म रहते ह। वयस्क व्याधपतंग म क्खयाँ, मधुम क्खयाँ और तत लयाँ
खाते ह, जो तालाब के ऊपर वायु म उड़ते ह और आस-पास के पुष्प पर जाते ह। अत:—

तालाब ‘क’: मछिलयाँ है ं → व्याधपतं ग के लाव कम → व्याधपतं ग कम → मधुमिक्खयाँ, मिक्खयाँ और

िततिलयाँ अिधक → अिधक परागण → अिधक बीज

तालाब ‘ख’: मछिलयाँ नही ं → लाव बच जाते है ं → व्याधपतं ग अिधक → मधुमिक्खयाँ और िततिलयाँ कम →

कम परागण → कम बीज

इसी लए तालाब ‘क’ के आस-पास पुष्पीय पादप बड़ी संख्या म ह और तालाब ‘ख’ के आस-पास कम।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: चत्र 12.4 यही दशाता है। लाल तीर प्रत्यक्ष प्रभाव ह (मछली का लावा पर, व्याधपतंग का मधुमक्खी पर);
हरे तीर अप्रत्यक्ष प्रभाव ह (मछली का मधुमक्खी पर, मछली का पादप पर)। अप्रत्यक्ष प्रभाव कसी तीसरे जीव के
माध्यम से पहुँचता है।

प्र.2 दोन तालाब म व्याधपतंग, मधुम क्खय और तत लय क संख्या क तुलना क जए। क्या आपको व्याधपतंग
और मधुम क्खय या तत लय क संख्या के बीच कोई संबंध दखाई दे ता है? हमने दे खा क तालाब ‘क’ ( जसम
मछ लयाँ थ ) म तालाब ‘ख’ क तुलना म व्याधपतंग क संख्या कम थी। ऐसा क्य था?

हाँ — संबंध वपरीत है। जहाँ व्याधपतंग अ धक ह वहाँ मधुम क्खयाँ और तत लयाँ कम ह; जहाँ व्याधपतंग कम ह वहाँ
मधुम क्खयाँ और तत लयाँ अ धक ह।

तालाब ‘क’ (मछ लय स हत) तालाब ‘ख’ (मछ लय र हत)

व्याधपतंग कम अिधक

मध मु िक्खयाँ, मिक्खयाँ, िततिलयाँ अिधक कम

आस-पास के पुष्पों से बने बीज अिधक कम

तालाब ‘क’ म व्याधपतंग कम इस लए ह क्य क मछ लयाँ व्याधपतंग के लावा खाती ह। व्याधपतंग अपना आरं भक जीवन जल
म लावा के रूप म बताता है, और वह मछली उस तक पहुँच सकती है। कम लावा बचते ह, इस लए कम वयस्क व्याधपतंग वायु म
नकलते ह।

ऐसा क्य होता है: व्याधपतंग मधुम क्खय और तत लय का परभक्षी है। परभक्षी हटा द जए तो उसका शकार
बढ़ जाता है — इस लए तालाब ‘क’ म मधुम क्खयाँ, म क्खयाँ और तत लयाँ अ धक हो जाती ह। यही नयम आप
ज ासा को बनाए रख के प्रश्न 4 म फर लगाएँगे, जहाँ आहार श्रृंखला से मढक लुप्त हो जाते ह।

प्र.3 यह अध्ययन क्या दशाता है? तालाब म मछ लय क सम ष्ट आस-पास के पादप म बीज उत्पादन को कैसे
प्रभा वत करती है?

यह दशाता है क समुदाय के जीव तब भी जुड़े होते ह जब वे कभी मलते तक नह — और एक सम ष्ट का प रवतन समुदाय से
होकर बलकुल भन्न प्रकार के जीव तक पहुँच सकता है।
मछली कभी कसी पुष्प को छू ती नह । फर भी तालाब म मछ लय क संख्या तय करती है क पुष्प कतने बीज बनाएँगे — तीन
चरण क एक कड़ी से—

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मछिलयाँ अिधक → व्याधपतं ग के लाव कम

→ वयस्क व्याधपतं ग कम

→ मधुमिक्खयाँ, मिक्खयाँ और िततिलयाँ अिधक

→ एक पुष्प से दू सरे पुष्प तक अिधक पराग

→ अिधक बीज उत्पन्न

अध्ययन यह भी दशाता है क जै वक घटक (मछली, व्याधपतंग, परागणकारी, पादप) और अजै वक घटक (तापमान, जल, पोषक
तत्व) परस्पर क्रया करते ह और एक-दूसरे को प्रभा वत करते ह। अत: खंड के शीषक का उत्तर — क्या कसी समुदाय म
प्रत्येक जीव महत्त्वपूण होता है? — हाँ है: प्रत्येक जीव एक कड़ी है जस पर कुछ और नभर है।

क्या आप जानते ह? जो प्रभाव कसी दूसरे जीव से होकर पहुँचे, जैसे मछली का पुष्प पर प्रभाव, उसे अप्रत्यक्ष
प्रभाव कहते ह। अप्रत्यक्ष प्रभाव प्राय: प्रत्यक्ष प्रभाव से भी अ धक प्रबल होते ह, और यही कारण है क एक प्रजा त
हटाने पर पा रतंत्र ऐसे बदल जाता है जसक कसी ने कल्पना नह क थी।

प्र.4 इसी प्रकार क्या मनुष्य ारा अत्य धक मछली पकड़ने से इस संतुलन म प रवतन हो सकता है? आपके वचार से
यह पयावास के जै वक और अजै वक घटक को कैसे प्रभा वत कर सकता है?

हाँ। अत्य धक मछली पकड़ने से मछ लयाँ हट जाती ह, अत: चत्र 12.4 क पूरी कड़ी उल्ट दशा म चलने लगती है।
जै वक घटक पर प्रभाव—

मछिलयाँ कम → व्याधपतं ग के अिधक लाव बचते है ं → अिधक वयस्क व्याधपतं ग

→ मधुमिक्खयाँ, मिक्खयाँ और िततिलयाँ कम

→ कम परागण → आस-पास के पादपों में कम बीज और फल

→ अगली ऋत ु में कम पादप → अन्य जलीय जीवों के िलए कम भोजन और आश्रय

मछ लयाँ छोटे जलीय जंतुओं और शैवाल क उपभोक्ता भी ह। मछ लय के हटते ही मच्छर के लावा तथा अन्य क ट अ नयं त्रत
रूप से बढ़ सकते ह और शैवाल सतह पर फैल सकते ह।
अजै वक घटक पर प्रभाव— शैवाल क मोट परत नीचे के पादप तक सूय का प्रकाश नह पहुँचने दे ती। वे पादप मर जाते ह,
और मरते पादप का अथ है जल म ऑक्सीजन का कम उत्पादन। मृत पदाथ के अपघटन म और ऑक्सीजन खच होती है। इस
प्रकार जल स्वयं — एक अजै वक घटक — अ धक गंदला और ऑक्सीजन म कम हो जाता है, और पूरा पयावास रहने के लए
क ठन हो जाता है।

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ऐसा क्य होता है: पा रतंत्र का संतुलन ग तशील है, स्थर नह । वह जीव क परस्पर क्रयाओं से बना रहता है,

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कसी एक जीव से नह । एक पूरी सम ष्ट को एक साथ हटाने से अनेक परस्पर क्रयाएँ एक साथ हट
coतथा प्राय: नधन अवस्था म बैठ जाता है।
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mकर — पृष्ठ 196 co ag
क्रयाकलाप 12.4— आइए, संबध
ं जान और पहचान
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12.4 जीव और उनके प रवेश के बीच कस प्रकार क व भन्न परस्पर क्रयाएँ होती ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 दए गए मानदं ड के आधार पर चत्र 12.5 म दशाए गए जै वक और अजै वक घटक के बीच परस्पर क्रयाओं क
पहचान क जए और उनका वणन क जए। मानदं ड 1— इसके अंतगत अजै वक और जै वक घटक के बीच
परस्पर क्रयाएँ होती ह। ये क्रयाएँ जै वक घटक म पोषण, श्वसन और जनन जैसे जैव प्रक्रम को प्रभा वत कर
सकती ह। मानदं ड 2— इसम दो अजै वक घटक के बीच परस्पर क्रयाएँ होती ह। ये कसी पयावास क भौ तक
वशेषताओं को प्रभा वत कर सकती ह। मानदं ड 3— इसके अंतगत व भन्न जै वक घटक के बीच परस्पर क्रयाएँ
होती ह। ये पोषण, श्वसन और जनन जैसे जैव प्रक्रम के लए आवश्यक संसाधन क उपलब्धता को प्रभा वत कर
सकती ह।

चील (परभ ी प ी)
क्ष क्ष
सूय

जलवा प
ष्

िकलिकला (िकंगिफ़शर)
नरकट

सू मजीव
क्ष्
कीट
ब ख त्त

मछली

जलीय पादप जल-सप
मेंढक
नम म ृद ा में केंचुआ

चत्र 12.5, पृष्ठ 195 — जै वक और अजै वक घटक म परस्पर क्रयाओं को दशाते तालाब-दृश्य का पुनःआरे खत
रेखा चत्र।

चत्र 12.5 म तालाब और उसका कनारा है — ऊपर सूय का प्रकाश और पहा ड़याँ, जल म बत्तख, मछली, कमल के पत्त पर
मढक, कच्छप, व्याधपतंग, पत्थर पर बैठा कल कला ( कग फशर), जलीय सप और जलीय पादप, तथा नीचे नम मृदा म कचुआ।
वहाँ जो हो रहा है उसे तीन मानदं ड म बाँटने पर पूरी क गई ता लका 12.3—

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मानदं ड 1: जै वक और मानदं ड 2: दो अजै वक घटक मानदं ड 3: व भन्न जै वक घटक के बीच
अजै वक घटक के बीच परस्पर के बीच परस्पर क्रयाएँ परस्पर क्रयाएँ
क्रयाएँ

कचुए नम मृदा म रहते ह। दन का तापमान तेज धूप के कारण मढक क ट खाता है।
अ धक होता है।

तालाब म अनेक सूक्ष्मजीव उप स्थत सूय के प्रकाश के कारण जल शीघ्रता से जलीय सप मछली खाता है।
होते ह। वा ष्पत होता है।

मछली जल म अंडे दे ती है। जल क सतह पर मंद ग त से वायु मढक और मछ लयाँ छोटे क ट के लावा के लए
प्रवा हत होने से हल्क लहर बनती ह। स्पधा कर सकते ह।

तालाब के पास क मृदा नम होती है। मछली अपने अंड को अन्य मछ लय अथवा मढक
से सुर क्षत रखने के लए जल म वनस्प तय के
नकट अंडे दे ती है।

जलीय पादप सूय के पकाश, जल और सूय का पकाश जल की ऊपरी परत को िकलिकला गोता लगाकर मछली पकड़ ता है।
काबन डाइऑक्साइड से भोजन बनाते गहरे जल की तुल ना में अिधक गरम
है।ं करता है।

मछली जल में घुल ी ऑक्सीजन ले ती वायु और ऊष्मा िमलकर तालाब का जल बत्तख जलीय पादप और छोटे जंत ु खाती है।
है। घटाते है,ं िजससे वह उथला हो जाता है।

मेंढक साँस ले ने के िलए जल से बाहर जल की सतह पर बहती वायु उसमें व्याधपतंग जल के ऊपर उड़ ते छोटे कीटों का िशकार
तैरते पत्ते पर बैठता है। ऑक्सीजन घुल ने में सहायता करती है। करता है।

(प्रत्येक स्तंभ क पहली चार पं क्तयाँ पुस्तक के अपने उदाहरण ह; नारंगी पं क्तयाँ वे ह जन्ह आप चत्र 12.5 से स्वयं पढ़ सकते
ह।)

ऐसा क्य होता है: तीन मानदं ड वास्तव म तीन अलग प्रश्न ह। मानदं ड 1 पूछता है — कोई नज व वस्तु कसी जैव
प्रक्रम को कैसे संभव बनाती है? सूय का प्रकाश प्रकाश सं ेषण को, घुली ऑक्सीजन श्वसन को, जल अंड के
वकास को। मानदं ड 2 पूछता है — दो नज व वस्तुएँ मलकर पयावास को कैसे बदलती ह? सूय का प्रकाश और
वायु मलकर तापमान, जलस्तर और घुली ऑक्सीजन बदलते ह। मानदं ड 3 पूछता है — जीव एक-दूसरे के लए
उपलब्ध संसाधन कैसे बदलते ह? खाकर, स्पधा करके, या कसी स्थान को आश्रय बनाकर। ये तीन मलकर ही
पा रतंत्र ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 197

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12.4 जीव और उनके प रवेश के बीच कस प्रकार क व भन्न परस्पर क्रयाएँ होती ह?

प्र.1 क्या आप चत्र 12.6 म अ तव्यापी पा रतंत्र को ढूँ ढ़ पाते ह?

पवत

घर

वन

पशु

कृिष भूिम
िश क के साथ अवलोकन करते िव ाथ
क्ष द्य

घास का मैद ान नदी (जलीय पािरतं )
त्र

चत्र 12.6, पृष्ठ 197 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: पवत, वन, घास के मैदान और कृ ष भू म (स्थलीय पा रतंत्र) के बीच से
बहती एक छोट नद (जलीय पा रतंत्र)।

हाँ। चत्र 12.6 एक ही भूदृश्य म व भन्न स्थलीय और जलीय पा रतंत्र का अ तव्यापन दशाता है—

एक छोट नद — जलीय पा रतंत्र;
पहाड़, वन, घास के मैदान और खेत — स्थलीय पा रतंत्र;
खेत एक मानव न मत पा रतंत्र है।

ये अलग-अलग खान म नह बैठे ह। ये अपने कनार पर मलते ह और एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रया करते रहते ह — नद
पहाड़ से उतरकर वन, घास के मैदान और खेत के साथ-साथ बहती है।

ऐसा क्य होता है: पा रतंत्र क कोई द वार नह होती। जल, पोषक तत्व और जीव एक से दूसरे म जाते रहते ह —
पहाड़ पर गरी वषा नद बनती है; खेत से बही मृदा नद म पहुँचती है; वन म घ सला बनाने वाला पक्षी घास के मैदान
पर भोजन ढूँ ढ़ता है। इसी लए पा रतंत्र बहुत बड़े या बहुत छोटे हो सकते ह — पूरा वन भी एक पा रतंत्र है और उसके
भीतर खड़ा एक बरगद भी।

क्रयाकलाप 12.5— आइए, वग करण कर — पृष्ठ 197–198

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12.4 जीव और उनके प रवेश के बीच कस प्रकार क व भन्न परस्पर क्रयाएँ होती ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र का ध्यानपूवक अध्ययन क जए और ता लका 12.4 म सूचीबद्ध जीव को खो जए। अपने वद्यालय के
पुस्तकालय या इंटरनेट का उपयोग करके पता लगाइए क ये जीव क्या खाते ह। क्या प्रत्येक जीव केवल पादप
और पादप उत्पाद से, केवल जंतुओं से या दोन से ही भोजन प्राप्त करता है, अपने अवलोकन को ता लका 12.4
म अ भले खत क जए।

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पक्ष (
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िशकरा

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िहरण

बंगाल लोमड़ी

शशक

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चत्र 12.1(ख), पृष्ठ 192 — वन पयावास का पुनःआरे खत रेखा चत्र; ता लका 12.4 के सभी नौ जीव इसी चत्र म ह।

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ता लका 12.4— व भन्न जीव क भोजन संबंधी प्रवृ त्तयाँ
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जीव का प्रकाश सं ेषण पादप और पादप जंतुओं से
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ता लका 12.4 के नौ जीव चत्र 12.1 (ख) के वन पयावास म मल जाते ह — चरते हुए हरण और शशक, खुले म बंगाल लोमड़ी,
वृक्ष के पास चूहा और गलहरी, ऊपर उड़ताaगद्ध,
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जीव का प्रकाश सं ेषण पादप और पादप उत्पाद से जंतुओं से भोजन दोन से भोजन
नाम करता है अथवा नह भोजन प्राप्त करता है प्राप्त करता है प्राप्त करता है

िहरण नह हाँ, पौधों की पित्तयाँ और घास नह नह , केवल पादप से

शशक नह हाँ, घास , कोमल कोंपले ं और नह नह , केवल पादप से
छाल

िगद्ध नह नह हाँ, मृत जंतओ
ु ं का माँस नह , केवल जंतुओं से

बंग ाल नह हाँ, फल हाँ, कृंतक, क ट, पक्षी हाँ — सव हारी
लोमड़ी

पक्षी नह नह हाँ, िछपकली, छोटे पक्षी, नह , केवल जंतुओं से
(िशकरा) कीट

िगलहरी नह हाँ, गरी, बीज, फल कभी-कभी क ट और हाँ — मुख्यत: पादपों से
अंडे

चूहा नह हाँ, अनाज और बीज हाँ, क ट हाँ — सव हारी

मशरूम नह कोई नही ं — यह मृत पादपों और जंत ु पदाथ ं पर उगकर उ न्हे ं िवघिटत करता है (अपघटक)

वृक्ष हाँ नह नह नह — यह अपना
भोजन स्वयं बनाता है

ऐसा क्य होता है: ता लका वन को तीन भू मकाओं म बाँट दे ती है। वृक्ष उत्पादक है — वन म ऊजा केवल उसी के
ारा, सूय के प्रकाश से आती है। हरण, शशक, लोमड़ी, शकरा, गलहरी, चूहा और गद्ध उपभोक्ता ह — वे उस
ऊजा को आगे ले जाते ह। मशरूम अपघटक है — वह मृत शरीर म बची ऊजा और पोषक तत्व लेकर पोषक तत्व
मृदा को लौटा दे ता है। वन का प्रत्येक जीव इन्ह तीन भू मकाओं म से कसी एक म आता है।

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प्र.2 ता लका 12.4 से वषमपो षय क सूची बनाएँ।

ता लका 12.4— व भन्न जीव क भोजन संबंधी प्रवृ त्तयाँ

जीव का प्रकाश सं ेषण पादप और पादप जंतुओं से पादप और जंतुओं
नाम करता है अथवा उत्पाद से भोजन भोजन प्राप्त दोन से भोजन प्राप्त
नह प्राप्त करता है करता है करता है

िहरण नही ं हाँ, पौधों की पित्त याँ और नही ं नही,ं के वल पादपों से
घास

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लोमड़ी

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चूहा

मशरूम

वृक्ष हाँ

ता लका 12.4, पृष्ठ 198 — पुस्तक के अनुसार; पुस्तक म केवल ‘ हरण’ क पं क्त और ‘वृक्ष — हाँ’ भरे हुए ह।

हरण, शशक, गद्ध, बंगाल लोमड़ी, पक्षी ( शकरा), गलहरी, चूहा और मशरूम — नौ म से आठ। केवल वृक्ष स्वपोषी है।
भोजन के आधार पर वग करण—

शाकाहारी (केवल पादप खाते ह): हरण, शशक
माँसाहारी (केवल जंतु खाते ह): गद्ध, शकरा
सवाहारी (दोन खाते ह): बंगाल लोमड़ी, गलहरी, चूहा
मृतजीवी (मृत पदाथ पर पो षत): मशरूम

ऐसा क्य होता है: वषम = अन्य, पोष = भोजन। वषमपोषी वह हर जीव है जो अपना भोजन स्वयं नह बना
सकता और इस लए उसे कसी अन्य जीव से लेना पड़ता है। इसम मशरूम भी आता है, यद्य प वह न शकार करता
है न चरता है — वह भी अपना भोजन अन्य जीव से ही लेता है, बस उनके मरने के बाद।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 198
12.5 कौन कसे खाता है?

प्र.1 पादप अपना भोजन कैसे प्राप्त करते ह?

पादप प्रकाश सं ेषण क प्र क्रया ारा अपना भोजन स्वयं बनाते ह। इसी कारण उन्ह उत्पादक या स्वपोषी (स्व = स्वयं + पोष
= भोजन) कहा जाता है।

सूय का पकाश + काबन डाइऑक्साइड + जल → हरी पत्ती में भोजन बनता है, ऑक्सीजन िनमुक्त होती है

पूरे अध्याय का यही सबसे महत्त्वपूण तथ्य है। वन का प्रत्येक जंतु, और प्रत्येक अपघटक भी, उसी ऊजा पर जी रहा है जसे कसी
हरे पादप ने सबसे पहले सूय के प्रकाश से ग्रहण कया था।

ऐसा क्य होता है: कोई जीव ऊजा बना नह सकता। वह बाहर से आनी ही चा हए, और पा रतंत्र म उसका एकमात्र
ार प्रकाश सं ेषण है। इसी लए उत्पादक सदा पहले पोषी स्तर पर होते ह — उनसे नीचे कुछ हो ही नह सकता।

प्र.2 हम कसी दए गए पा रतंत्र म जीव के बीच आहार संबंध क क ड़याँ कस प्रकार जोड़ सकते ह?

जस जीव को खाया जाता है उससे उस जीव क ओर तीर बनाकर जो उसे खाता है। ऐसे तीर क एक पं क्त आहार श्रृंखला
है।

घास → िट ा → मेंढक → साँप → उकाब

तीर को प ढ़ए — "इसके ारा खाया जाता है", अथवा इससे भी बेहतर, "अपना भोजन और ऊजा इसे दे ता है"। इसी लए तीर घास
से ट े क ओर है, उल्टा नह : तीर वह दशा दशाता है जसम भोजन और ऊजा जाती है।

स्वयं जाँ चए: य द आपके आरेख म कोई तीर शकारी से शकार क ओर जा रहा है तो वह उल्टा बना है। पू छए —
"ऊजा कस ओर जा रही है?" उत्तर सदा उत्पादक से ऊपर क ओर होगा।

क्रयाकलाप 12.6— आइए, क ड़याँ जोड़ और संबध
ं जान — पृष्ठ 199

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

12.5 कौन कसे खाता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 शेष जीव म चत्र 12.8 म दशाए गए अनुसार भोजन संबंध को तीर के माध्यम से दशाइए।

तेदं आ
ु

शशक

घास
चत्र 12.8, पृष्ठ 198 — आहार ंखला घास → शशक → तदुआ का पुनःआरे खत रेखा चत्र। तीर भोजन से खाने वाले
जीव क ओर है।

चत्र 12.8 म पहले से घास → शशक → तदुआ दशाया गया है। जन जीव को अभी जोड़ना है वे ह — ट ा, मढक, साँप और
उकाब। ये तीर जो ड़ए—

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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घास → िट ा (िट ा शाकाहारी है, अत: वह उत्पादक को खाता है)
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िट ा → मेंढक (मेंढक छोटा माँसाहारी है जो कीट पकड़ ता है)
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मेंढक → साँप (साँप मेंढकों का िशकार करता है)
aसाँप → उकाब (उकाब शीष पर बड़ ा माँसाहारी है)
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mएक ही उत्पादक से आरंभ होने वाली दो श्रृंखलाएँ बनती ह— ag
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पहले से दए गए तीर के साथ मलाकर घास के मैदान म अब
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शशक तेदं आ
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घास उकाब
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िट ा मेढं क साँप

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पत्येक तीर का अथ है “अपना भोजन और ऊज इसे देता है”
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एक ही घास के मैदान क दो आहार श्रृंखलाएँ, दोन घास से आरंभ।

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ऐसा क्य होता है: घास दोन श्रृंखलाओं म है क्य क एक उत्पादक एक साथ अनेक शाकाहा रय को पालता है।
यही.cआहार जाल का पहला संकेत है — वास्त वक पा रतंत्र कभी एक ही सीधी
a gरेखा नह होते।
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प्र.2 इस क्रयाकलाप म दए गए जीव से कौन-सी अन्य आहार श्रृंखला बनाई जा सकती है?
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उत्तर agl
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वही जो पुस्तक स्वयं दे ती है—

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घास → िट ा → मेंढक → साँप → उकाब

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agl इसे पोषी स्तर के रूप म प ढ़ए—
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पोषी स्तर जीव भू मका

पहला घास उत्पादक — सूय के प्रकाश से भोजन बनाती है

दू स रा िट ा शाकाहारी

तीसरा मेंढक छोटा माँसाहारी

चौथा साँप माँसाहारी

पाँचवाँ उकाब बड़ा माँसाहारी

संकेत: श्रृंखला सदा उत्पादक से आरंभ होती है, क्य क ऊजा वह से प्रवेश करती है। जो श्रृंखला कसी जंतु से
आरंभ हो वह अधूरी है।

क्रयाकलाप 12.7— आइए, चत्र बनाएँ — पृष्ठ 199

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12.5 कौन कसे खाता है?

क्रयाकलाप

प्र.1 चत्र 12.10 (क) म प्रत्येक प्रकार के जीव क संख्या ग नए। एक ता लका बनाइए और प्रत्येक प्रकार के जीव
क संख्या को ल खए।

कद न्न — कु ल 58 पादप · चूहा — कु ल 15 · उकाब — 1

चत्र 12.10 (क), पृष्ठ 199 — खेत का पुनःआरे खत रेखा चत्र: कदन्न के पादप, चूहे और वृक्ष पर एक उकाब। चत्र म
प्रत्येक प्रकार के जीव क गनती क जए।

चत्र 12.10 (क) के खेत के नौ टु कड़ को एक-एक करके गनने पर—

जीव आहार श्रृंखला म भू मका चत्र 12.10 (क) म गनी गई संख्या

कदन्न (िमले ट) के पादप उत्पादक लगभग 50

चूहा शाकाहारी (उपभोक्ता) 15

उकाब माँसाहारी (उपभोक्ता) 1

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चूहे ठ क-ठ क गने जा सकते ह — सभी टु कड़ म मलाकर 15। कदन्न के पादप गुच्छ म बने ह और कुछ वृक्ष के पीछे छपे ह,
इस लए भन्न वद्या थय क गणना थोड़ी भन्न आएगी, लगभग 50 के आस-पास। अपने चत्र म स्वयं ध्यान से ग नए और अपनी ही
संख्या ल खए; महत्त्वपूण ठ क संख्या नह , ब ल्क क्रम है — कदन्न ≫ चूहे ≫ उकाब।

स्वयं जाँ चए: य द आपक गणना म चूहे कदन्न के पादप से अ धक नकल तो फर से ग नए। कोई खेत अपने
पादप से अ धक शाकाहा रय को नह पाल सकता।

प्र.2 संख्याओं को आरोही क्रम म व्यव स्थत क जए। सवा धक संख्या म उप स्थत जीव को आधार पर और सबसे
कम संख्या वाले जीव को शीष पर र खए। चत्र 12.10 (ख) म चूहे, कदन्न और उकाब को उपयुक्त स्थान पर
र खए।

चत्र 12.10 (ख), पृष्ठ 200 — पुस्तक के अनुसार रक्त परा मड का पुनःआरे खत रेखा चत्र। चूहा पहले से मध्य स्तर
पर है; कदन्न और उकाब को शेष दो स्तर पर र खए।

संख्याओं का आरोही क्रम — 1 (उकाब) < 15 (चूहे) < लगभग 50 (कदन्न)। सबसे बड़ी संख्या आधार पर और सबसे छोट शीष
पर र खए—

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तीसरा स्तर
उकाब — 1

चूहे — 15 दूसरा स्तर

कदन्न के पादप — लगभग 50 पहला स्तर

आधार पर उत्पादक, शीष पर सबसे ऊपर का माँसाहारी

चत्र 12.10 (ख) पूरा कया गया — कदन्न–चूहा–उकाब आहार श्रृंखला का परा मड।

कदन्न (उत्पादक, पहला पोषी स्तर) → चूहा (दू सरा) → उकाब (तीसरा)

प्र.3 आपको कस प्रकार का चत्र दृ ष्टगत होता है?

एक परा मड — आधार पर चौड़ा और शीष पर सँकरा।
ऐसा इस लए बनता है क्य क ऊजा श्रृंखला म कस प्रकार चलती है। चूहा जतना कदन्न खाता है, वह सब चूहे के शरीर म नह बदल
जाता। उस भोजन का अ धकांश भाग चलने, श्वसन, शरीर गरम रखने और वृ द्ध म खच होकर अंतत: ऊष्मा के रूप म नकल जाता
है। केवल थोड़ा-सा भाग चूहे के शरीर म सं चत रहता है, जो उकाब को मलता है।

लगभग 50 कदन्न पादपों में संिचत ऊज → 15 चूहों को पालती है

15 चूहों में संिचत ऊज → 1 उकाब को पालती है

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ऐसा क्य होता है: एक पोषी स्तर से अगले तक जाते समय हर बार अ धकांश ऊजा खच होकर नष्ट हो जाती है।
m -जाते सँकरी
इस लए प्रत्येक स्तर अपने नीचे वाले स्तर से बहुत कम जीव को पाल सकता है और श्रृंखला ऊपरeजाते
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o कारण आहार श्रृंखलाएँ छोट होती ह — चार-पाँच चरण के बाद अगले
होती जाती है.।cइसी
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glस्तर के लए पयाप्त
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emही नह । ऊजा पा रतंत्र म एक ही दशा म बहती है और ऊष्मा बनकर नकल जाती है; पुनचक्रण केवल
ऊजा s
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gl का होता है।
बचती
aपदाथ

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glaऔर संबधं जान — पृष्ठ 200
क्रयाकलाप 12.8— आइए, क ड़याँ जोड़
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12.5 कौन कसे खाता है?

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क्रयाकलाप

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प्र.1 m a g दशाइए।
.c12.11 को दे खए और ‘कौन कसे खाता है’ क लुप्त क ड़य को तीर लगाकर
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चत्र

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बाज साँप

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लोमड़ ी
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खरगोश चूह ा िट ा

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घास

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m .c चत्र 12.11, पृष्ठ 200 — आहार जाल का पुनःआरे खत रेखा चत्र; तीर a
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क पुस्तक के अनुसार ह। ‘कौन कसे खाता

g l a है’ क कुछ क ड़याँ जान-बूझकर छोड़ी गई ह।

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चत्र 12.11 म ये तीर पहले से बने ह — घास → शशक, घास → चूहा, शशक → बाज, चूहा → लोमड़ी, ट ा → मढक, ट ा →
पक्षी, मढक → उल्लू, पक्षी → साँप और साँप → बाज।

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जो क ड़याँ अभी लुप्त ह और जन्ह आपको जोड़ना चा हए—

जोड़ा जाने वाला तीर कारण

घास → िट ा ट ा शाकाहारी है; घास उसका उत्पादक है।

शशक → लोमड़ ी लोमड़ी चूह के साथ-साथ शशक का भी शकार करती है।

चूहा → उ ल्लू उल्लू रात म छोटे कृंतक का शकार करता है।

चूहा → बाज बाज भी खुले मैदान से चूहे उठा लेता है।

मेंढक → साँप साँप केवल प क्षय का नह , मढक का भी शकार करता है।

पक्षी → बाज बाज छोटे प क्षय का शकार करता है।

साँप → उ ल्लू उल्लू छोटे साँप भी पकड़ लेता है।

बाज

लोमड़ी उल्लू साँप

मेंढक पक्षी

शशक चूहा िट ा

घास
पहले से बने तीर जो तीर आपको जोड़ ने है ं

चत्र 12.11 पूरा कया गया। चत्र को पठनीय रखने के लए कुछ और क ड़याँ छोड़ द गई ह।

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प्र.2 कसी पा रतंत्र म भोजन संबंध के माध्यम से एक जीव से कतने अन्य जीव जुड़े हो सकते ह?

दो से कह अ धक। चत्र 12.11 का चूहा ली जए — वह घास खाता है, और उसे लोमड़ी, उल्लू तथा बाज खाते ह; अथात एक ही
जंतु से चार प्रत्यक्ष क ड़याँ। और यह तो केवल च त्रत भाग है; वास्त वक चूहा अनाज और क ट भी खाता है तथा साँप और बल्ली
भी उसे पकड़ते ह।

एक जीव → अपने नीचे अने क पकार का भोजन

एक जीव → अपने ऊपर अने क पकार के परभक्षी

अत: एक जीव पाय: चार, पाँच या अिधक जीवों से सीधे और पूरे पािरतं त्र से अपत्यक्ष रूप से जुड़ा रहता है

ऐसा क्य होता है: कोई जंतु केवल एक ही वस्तु नह खाता और उसे केवल एक ही जीव नह खाता। अनेक भोजन-
ोत से जुड़े रहने के कारण ही कोई जंतु कसी एक ोत के खराब मौसम म भी जी वत रह पाता है। यही कारण है
क आहार श्रृंखलाएँ अलग-अलग नह रहत — वे एक-दूसरे को काटती हुई जुड़कर आहार जाल बनाती ह।

प्र.3 क्या ये आहार श्रृंखलाएँ आपस म जुड़ी हुई ह?

हाँ। चत्र 12.11 म आप कम से कम चार श्रृंखलाएँ खोज सकते ह, और वे प्रत्येक स्तर पर जीव साझा करती ह—

घास → शशक → बाज

घास → चूहा → लोमड़ ी

घास → िट ा → मेंढक → उल्लू

घास → िट ा → पक्षी → साँप → बाज

घास चार म है; बाज दो म है। चूँ क प्रत्येक जीव को दो या दो से अ धक प्रकार के जीव खा सकते ह, इस लए श्रृंखलाएँ जुड़कर
एक जाल बनाती ह — आहार जाल।

ऐसा क्य होता है: जाल कसी एक श्रृंखला क अपेक्षा कह अ धक स्थर होता है। य द कसी वष ट े कम हो जाएँ
तो मढक को दूसरे रास्ते से भोजन मल सकता है और उल्लू के पास चूहे रहते ही ह। परंतु वही क ड़याँ क्ष त भी ले
जाती ह — एक जीव को हा न पहुँचे तो प्रभाव एक साथ कई श्रृंखलाओं म फैल सकता है, और अगला खंड इसी
वषय पर है।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 201
12.6 प्रकृ त म अप शष्ट पदाथ का क्या होता है?

प्र.1 क्या प्रकृ त वास्तव म कुछ भी व्यथ करती है?

नह । प्रकृ त म कुछ भी व्यथ नह होता और प्रत्येक प्राकृ तक वस्तु का पुन: उपयोग हो जाता है।
जसे हम अप शष्ट कहते ह — गरी प त्तयाँ, मृत जंतु, मल — वह कसी और का भोजन है। मशरूम जैसे कवक और जीवाणु मृत
पादप तथा जंतुओं के ज टल पदाथ को अपेक्षाकृत सरल पदाथ म वघ टत कर दे ते ह, और हाथी जैसे जंतुओं के मल पर भृंग तथा
म क्खयाँ यही काय करते ह। इस प्र क्रया को अपघटन कहते ह और इसे संपन्न करने वाले जीव को अपघटक या मृतजीवी कहते ह
(मृत + जीवी)।

उत्पादक उपभोक्ता

अपघटक ृ पदाथ, मल,
मत
(कवक, जीवाणु) िगरी पित्तयाँ

मदृ ा मे ं लौटे पोषक तत्व उत्पादक िफर से गहण कर लेते है ं
पदाथ चक्र में घूमता है; ऊज नही ं — वह हर चरण पर ऊष्मा बनकर िनकल जाती है

अपघटक इस चक्र को पूरा करते ह, इसी लए प्रकृ त म अंतत: कुछ भी व्यथ नह जाता।

ऐसा क्य होता है: पा रतंत्र जन पोषक तत्व का उपयोग करता है वे बार-बार वही परमाणु ह। पादप मृदा म उगते ह
और मृदा म कई पोषक तत्व अपघटन प्र क्रया से आते ह। य द यह चक्र कभी टू ट जाए तो पोषक तत्व मृत शरीर
म ही बंद रह जाएँगे और उत्पादक भूखे रह जाएँगे। ऊजा इससे भन्न है — वह सूय से एक बार आती है और ऊष्मा
बनकर नकल जाती है, इस लए उसक पू त प्र त दन होनी चा हए, जब क पदाथ केवल घूमता रहता है।

क्या आपके सं ान म है… — पृष्ठ 201

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12.6 प्रकृ त म अप शष्ट पदाथ का क्या होता है?

क्या आपके सं ान म है …

प्र.1 क्या आप जानते ह क आपके क्षेत्र म कौन से पक्षी केवल स दय म ही दखाई दे ते ह?

इसका उत्तर आपको अपने ही क्षेत्र से नकालना है — इस लए पहले व ध, फर नमूना उत्तर।
व ध: अक्टू बर से माच तक एक कॉपी र खए। प्रत्येक सप्ताह त थ, स्थान, पक्षी और संख्या ल खए। जो पक्षी इसी अव ध म दखे
और ग्रीष्म तक चला जाए वह शीतकालीन प्रवासी है। अपनी सूची क तुलना गाँव के कसी व रष्ठजन क जानकारी अथवा स्थानीय
पक्षी-सूची से क जए।
नमूना उत्तर: हमारे क्षेत्र म ये केवल स दय म दखाई दए—

पक्षी कहाँ दे खा महीने

डेम ोइसे ल क्रेन गाँव का जलाशय (जैसे जोधपुर िजले का खीचन गाँव) नवंबर – फरवरी

िपनटेल , कॉमन टील गाँव का तालाब और नहर नवंबर – माच

रोजी स्टारिलंग (ग ल
ु ाबी मैना) खेतों के ऊपर झुंड में अक्टू बर – माच

बड़ा राजहंस (फ्ले िमंग ो) उथली झील / नमक क्षेत्र दसंबर – माच

ऐसा क्य होता है: ये पक्षी रुक्ष जलवायु से बचने और भोजन क खोज म सह मील क उड़ान भरते ह। यहाँ
रहते हुए वे परागणकारी और बीज प्रक णक का काय करते ह, इस लए वे दो पयावास को जोड़ते ह जो हजार
कलोमीटर दूर ह। इनम से अनेक क ट पीड़क जीव के परभक्षी भी ह और पीड़क जीव क जीव संख्या नयं त्रत
करने म कसान क सहायता करते ह तथा अप्रत्यक्ष रूप से स्वस्थ फसल वृ द्ध म भी सहायक होते ह।

यह क जए: भारतीय डाक वभाग ारा जारी प्रवासी प क्षय के डाक टकट और वशेष कवर एकत्र क जए, उनके
मूल स्थान तथा प्रवास के कारण पता क जए और उन्ह अपनी व ान प्रयोगशाला अथवा वद्यालय पुस्तकालय म
प्रद शत क जए।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 202

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है
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12.7 एक प रवतन कैसे दूसरे प रवतन क ओर ले जाता है? / 12.8 पारस्प रक क्रयाएँ पा रतंत्र म संतुलन कैसे बनाए रखती ह?
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जब हम प्रकृ त म हस्तक्षेप करते ह तो क्या होता है?
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प्र.1

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एक प रवतन दूसरे प रवतन क श्रृंखला छे ड़ दे ता है, और अं तम कड़ी प्राय: हम पर ही लौटती है। क्रयाकलाप 12.9 इसका

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वास्त वक भारतीय उदाहरण दे ता है।

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1980 के दशक: मेंढक की टाँगों (भारतीय बुलफॉग, हॉप्लोबैटाकस टाइगिरनस) का व्यापक िनय त

→ मेंढकों की जीव संख्या में कमी
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→ मेंढक कीट खाते है,ं अत: कृ िष पीड़ क जीवों की संख्या में वृिद्ध
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. अिधक संश्लेिषत पीड़ कनाशकों का उपयोग करने के िलए बाध्य हुए a g l
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→ िकसान

agl → पय वरण, मृदा और जल की गुणवत्ता को हािन
→ समग पय वरण और मानव स्वास्थ्य पर पितकू ल पभाव
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भारत सरकार ने और अ धक पा र स्थ तक य हा न रोकने के लए मढक क टाँग के नयात पर प्र तबंध लगा दया।
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चत्र 12.13 तालाब म इसी आकार क श्रृंखला दखाता है — प्रदूषण के कारण पादप मरते ह → जल म ऑक्सीजन का उत्पादन

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कम होता है → मछ लय क संख्या घटती है → उपभोक्ता कम होने से क ट क संख्या बढ़ती है → ये क ट आस-पास के खेत म

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फैलते ह → कसान क टनाशक उपयोग करने के लए बाध्य होते ह, जससे पयावरण पर पुन: प्र तकूल प्रभाव पड़ता है।

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ऐसा.cक्य होता है: पा रतंत्र तब संतु लत रहता है जब जीव और उनके पयावरण
a gके बीच परस्पर क्रयाएँ सम ष्टय
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aseऔर संसाधन को स्थर रखती ह। यह संतुलन स्थर नह अ पतु ग तशील है। एक सम ष्ट हटाने से अनेक परस्पर
agl क्रयाएँ एक साथ हट जाती ह, इस लए उसके ऊपर और नीचे क संख्याएँ बदलती ह — और हर प रवतन अगला

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प रवतन आरंभ कर दे ता है। मढक कृ ष से बलकुल असंबं धत कारण से पकड़े जा रहे थे, फर भी मूल्य कसान को
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चुकाना पड़ा।

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प्र.2 चत्र 12.16 म दए गए उदाहरण के आधार पर आपने क्या अवलोकन कया?

फूल परािगत हो जाता है । ✓ मधमु क् खी को मकरंद िमलता है । ✓

ऑिक ड को सहारा िमलता है । ✓ व ृक्ष की शाखा पर पभाव
नही ं पड़ ता है । ✓

कु त्ते की त्वचा में खुजली िकलनी (िटक ) कु त्ते के
होती है । ✗ रक् त से पोषण लेती है । ✓

चत्र 12.16, पृष्ठ 203 — पुनःआरे खत रेखा चत्र: सहोपका रता (फूल और मधुमक्खी), सहभो जता (ऑ कड और वृक्ष
क शाखा) और परजी वता ( कलनी और कुत्ता)।

यह क जीव तीन स्पष्ट रूप से भन्न ढं ग से साथ रहते ह, और अंतर इसम है क कसे लाभ होता है और कसे हा न—

संबंध जीव 1 जीव 2 चत्र 12.16 का उदाहरण

सहोपकािरता लाभ लाभ मधुमक्खी को मकरंद मलता है; फूल परा गत हो जाता है

सहभोिजता लाभ कोई प्रभाव नह ऑ कड को सहारा मलता है; वृक्ष क शाखा पर प्रभाव नह पड़ता

परजीिवता लाभ हािन कलनी कुत्ते के रक्त से पोषण लेती है; कुत्ते क त्वचा म खुजली होती है

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ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क तीन म कम से कम एक साथी को लाभ है — इसी लए संबंध बना रहता है।
अंतर दूसरे साथी क हा न म है। सहोपका रता इस लए फैलती है क्य क दोन साथी बेहतर स्थ त म आते ह;
परजीवी को अपने पोषक को इतनी हा न नह पहुँचानी चा हए क पोषक मर जाए, अन्यथा उसका अपना घर ही
चला जाएगा। ये सभी पारस्प रक क्रयाएँ, स्पधा के साथ मलकर, एक पा रतंत्र म जीवन के ज टल जाल का
भाग ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 204
12.9 पा रतंत्र के क्या लाभ ह?

प्र.1 हम वन , न दय और आ भू म को होने वाली क्ष त को कैसे रोक सकते ह? वचार क जए क आप और आपका
समुदाय इन महत्त्वपूण स्थान क रक्षा के लए क्या कर सकते ह।

आरंभ वहाँ से क जए जहाँ से क्ष त हो रही है। अध्याय उसे नाम दे ता है — वन क कटाई, प्राकृ तक संसाधन का अत्य धक
उपयोग, आक्रामक प्रजा तय क संख्या बढ़ना, भू म का असंधारणीय उपयोग और प्रदूषण। हर एक का एक उत्तर है।

क्ष त समुदाय क्या कर सकता है

ईंध न के िलए वृक्षों की कटाई ईंधन-कु शल चू े और बायोगैस का उपयोग; शीघ बढ़ ने वाले स्थानीय वृक्षों का एक अलग खंड
लगाना, तािक पाकृितक वन न कटे

निदयों में अनुपचािरत वािहत मल और गाँव और नगर का अपिशष्ट जल नदी तक पहचु ँ ने से पहले उपचािरत हो, इसका आगह करना; ठोस
औद्योिगक अपिशष्ट कचरा नािलयों में न डालना

आद भूिम का पाटा जाना गाँव के तालाब और ताल की गाद िनकालते रहना और उ न्हे ं उपयोग में रखना — िजस तालाब की
गाँव को आवश्यकता होती है, गाँव उसकी रक्षा भी करता है

वन संस ाधनों का अत्यिधक उपयोग और संरिक्षत क्षेत्रों का समथन — रा ीय उ द्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल आरिक्षत क्षेत्र और
अवैध िशकार सामुद ाियक संरिक्षत क्षेत्र

आक्रामक पजाितयाँ तालाबों और सड़ क िकनारों से उ न्हे ं हटाकर उनके स्थान पर दे शी पजाितयाँ लगाना

कचरा और प्लािस्टक कचरे का पथृ क्करण, एकल -उपयोग प्लािस्टक से इनकार, स्वच्छता िदवस का आयोजन

ऐसा क्य होता है: इनम से अ धकांश स्थान कसी एक बड़े काय से नह , अनेक छोटे -छोटे काय से क्ष तग्रस्त होते ह
— इस लए वे अनेक छोटे -छोटे काय से ही सुधरते भी ह। और यह करने योग्य है: ये पा रतंत्र हम शुद्ध वायु, उपजाऊ
मृदा, भोजन, रेशे, इमारती लकड़ी, औष धयाँ और जल दे ते ह तथा तूफान म हमारी रक्षा करते ह — ऐसे लाभ जो
मानव उत्तरजी वता और स्वास्थ्य के लए महत्त्वपूण ह।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 205
12.9.1 मानव न मत पा रतंत्र / 12.9.2 स्वस्थ पा रतंत्र खेत के लए कस प्रकार सहायक ह?

प्र.1 क्या आप अपने क्षेत्र म कसी मानव न मत पा रतंत्र का नाम बता सकते ह?

हाँ — मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं क पू त के लए मछली के तालाब, खेत और उद्यान जैसे कृ त्रम पा रतंत्र का नमाण
कया है। अ धकांश वद्यालय के आस-पास ऐसे कई मल जाएँगे—

वद्यालय का उद्यान और रसोई उद्यान;
कृ ष क्षेत्र, फलोद्यान अथवा बागान;
गाँव का मछली तालाब या सचाई का ताल;
नगर का उद्यान, सड़क कनारे वृक्ष क पं क्त, मछलीघर।

नमूना उत्तर: हमारे वद्यालय के पीछे का धान का खेत एक मानव न मत पा रतंत्र है। इसके जै वक घटक ह — धान के पादप,
खरपतवार, मढक, मक ड़याँ, व्याधपतंग, कचुए और पक्षी; और अजै वक घटक ह — हमारे ारा भरा गया जल, मृदा, सूय का
प्रकाश और तापमान।

ऐसा क्य होता है: भली-भाँ त अ भक ल्पत कए जाने पर ये पा रतंत्र प्रदूषण कम करने, जैव व वधता को बढ़ावा
दे ने और मनोरंजक स्थल उपलब्ध कराने म सहायक हो सकते ह। परंतु प्राकृ तक पा रतंत्र के वपरीत इन्ह मानव
ारा दे खभाल और प्रबंधन क आवश्यकता होती है — क्य क यहाँ क्या उगेगा यह हम तय करते ह, इस लए
वह संतुलन बनाए रखने का काय भी हमने ही ले लया है जो प्राकृ तक पा रतंत्र स्वयं करता है।

प्र.2 ये पद्ध तयाँ कस प्रकार पयावरण और मानव-स्वास्थ्य दोन को हा न पहुँचाती ह?

जन पद्ध तय क बात है वे वही ह जन्ह अध्याय असंधारणीय कहता है — सं े षत रसायन का अत्य धक उपयोग, भूजल का
अत्य धक दोहन और व्यावसा यक लाभ के लए मात्र एक ही प्रकार क फसल उगाना। इनम से प्रत्येक कसी और को हा न
पहुँचाने से पहले स्वयं खेत को हा न पहुँचाती है।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

पद्ध त पयावरण पर प्रभाव स्वास्थ्य पर प्रभाव

संश्ले िषत उवरकों का िहतैषी सूक्ष्मजीवों और जैिवक पदाथ ( मू स ) में कमी से मृद ा की अ त रक्त रसायन बहकर तालाब और कुओं
अत्यिधक उपयोग उवरता घटती है; मू स के अभाव में मृद ा अपरदन के िलए पवण के पेयजल म पहुँचते ह
हो जाती है

पीड़कनाशकों का पीड़ कों के साथ-साथ पाकृितक परभक्षी भी मरते है,ं िजससे अवशेष भोजन के माध्यम से हम तक पहुँचते
अत्यिधक उपयोग अंतत: पीड़ क बढ़ जाते है;ं कु छ पीड़ क पितरोधक क्षमता ह; छड़काव के समय कसान सीधे संपक म
िवकिसत कर ले ते है ं आते ह

भूजल का अत्यिधक जल स्तर िगरता है; कु एँ और तालाब सूखते है,ं िजससे पूरा क्षेत्र पीने और पशुओं के लए सुर क्षत जल कम
दोहन पभािवत होता है

एक ही फसल बार-बार फसल की िविवधता घटती है, परागणकारी पभािवत होते है ं और भोजन म व वधता कम; फसल वफल होने
(धान्य कृ िष) मृद ा का क्षरण होता है पर एक साथ सब कुछ प्रभा वत

अत्यिधक िसंचाई और के ं चुए और घोंघे जैसे मृद ा जीव पभािवत होते है ं जो मृदा नबल होने से समय के साथ उपज
बार-बार जुताई पािरिस्थितकीय संतलु न के िलए महत्त्वपूण है ं घटती है

ऐसा क्य होता है: खेत भी एक पा रतंत्र है। ये पद्ध तयाँ उन जीव को हटाकर काम करती ह — सूक्ष्मजीव, कचुए,
परभक्षी भृंग, परागणकारी — जो न:शुल्क उपयोगी काय कर रहे थे। एक बार वे चले जाएँ तो कसान को उनका
काय मशीन और रसायन से करना पड़ता है, जसम लागत अ धक आती है और और अ धक जीव नष्ट होते ह। यही
चक्र इन पद्ध तय को असंधारणीय बनाता है।

क्रयाकलाप 12.10— आइए, सवक्षण कर — पृष्ठ 205
12.9.2 स्वस्थ पा रतंत्र खेत के लए कस प्रकार सहायक ह?

क्रयाकलाप

प्र.1 कृषक से प्रश्न पूछने के लए एक सूची तैयार क जए जससे यह ात कया जा सके क वे कौन-से
पीड़कनाशक और अन्य कृ ष साम ी का उपयोग करते ह। साथ ही यह भी जान सक क क्या वे अपनी फसल
को और अ धक अच्छा बनाने के लए पदाथ का पुन: उपयोग या पुनचक्रण करते ह।

प्रश्न छोटे , खुले और इस वषय पर र खए क कसान वास्तव म करता क्या है — यह नह क उसके वचार से क्या ठ क है। ले जाने
योग्य एक अच्छ सूची—

1. आप कौन-सी फसल उगाते ह और कस ऋतु म?
2. क्या आप एक ही खेत म हर वष वही फसल उगाते ह या फसल चक्र अपनाते ह?
3. आप कौन-से उवरक उपयोग करते ह — गोबर क खाद, कंपोस्ट, सं े षत उवरक? कतनी मात्रा म?
4. आप कौन-से पीड़कनाशक छड़कते ह, एक ऋतु म कतनी बार, और यह कैसे तय करते ह क कब छड़कना है?
5. छड़काव के समय आप क्या सुरक्षा साधन पहनते ह?
6. क्या आप फसल अवशेष, गोबर या रसोई के अप शष्ट से कंपोस्ट बनाते ह?

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7. सचाई का जल कहाँ से आता है — नहर, तालाब या नलकूप? क्या जलस्तर बदला है?
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8. पहले क तुलना म अब आपके खेत म कौन-से पक्षी, क ट और कचुए दखाई दे ते ह?
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9. बीज कहाँ से आता है — अपना सहेजा हुआ या हर वष खरीदा हुआ?

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aसंgवकlभन्न
े त: " कतनी बार" और " कतनी मात्रा" पू छए, "क्या बहुत अ धक उपयोग करते ह" नह । संख्याओं क तुलना
कसान के बीच हो सकती है, वचार क नह ।

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l a se
प्र.2 agम कस प्रकार प रवतन हुए ह और क्य ?
समय के साथ आपक कृ ष पद्ध तय

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g और नलकूप अपना लया,
c डालते थे। लगभग 1990 के दशक से मने एक ही फसल, संकर बीज, यू रया-डीएपी
के गोबर क .खाद
कसान ारा दया गया नमूना उत्तर: "जब म छोटा था तब हम मलाकर बोते थे — बाजरे के साथ मोठ — और अपने ही पशुओं

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seप्र त बीघा उपज अ धक थी और मंडी को मात्रा म एक ही फसल चा हए थी। अब मुझे ऋतु म कम से कम तीन बार छड़काव
क्यaक
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a करना पड़ता है, जो पहले कभी नह करना पड़ता था।"
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कसान प्राय: ये कारण बताते ह—

एक ही बकाऊ फसल से अ धक उपज और बेहतरm . c
s e मूल्य;

a gla उपलब्ध;
घर म पशु कम हो जाने से गोबर क खाद कम
नए बीज जो उवरक पर अच्छ प्र त क्रया दे ते ह;
श्र मक क कमी, जसने मशीन और रसायन क ओर धकेला।
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ऐसा क्य होता है: यह अध्याय म व णत प रवतन का स्थानीय रूप है। 1950 से 1965 के बीच भारत को कम

s e m उत्पादन के कारण खाद्य संकट का सामना करना पड़ा; 20व शताब्द के मध्य से ैक्टर , मशीन , सं े षत
la उवरक और पीड़कनाशक ने उत्पादन बढ़ाने म सहायता क , और इस काल को ह रत क्रां त कहा जाता है। इसने
फसल

ag
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वास्तव म भारत को खाद्य सुरक्षा द । अब यह स्पष्ट हो चुका है क दशक तक भारी मात्रा म उपयोग क गई वही
पद्ध तयाँ मृदा को घसा दे ती ह।
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सं े षत उवरक और पीड़कनाशक का उपयोग करने पर आपको क्या प्रभाव दखाई दे ते ह?
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प्र.3

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se m
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g आरंभ के वष म उपज अच्छ रहती है। पर
.c ारा दया गया नमूना उत्तर: "यू रया के बाद फसल शीघ्र हरी हो जाती हैaऔर

se mकसान
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अब वही प रणाम पाने के लए मुझे अ धक डालना पड़ता है। छड़काव के बाद पीड़क पंद्रह दन के लए जाता है और फर पहले से

.c
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अ धक होकर लौटता है, और फसल म जो सोनपंखी भृंग तथा मक ड़याँ रहती थ वे अब नह दखत । जुताई करते समय कचुए भी

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कम मलते ह।"

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कन प्रभाव पर ध्यान द और उनके पीछे का कारण—

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कसान क्या दे खता है वास्तव म क्या हो रहा है

उतनी ही उपज के िलए अिधक उवरक िहतैषी सूक्ष्मजीवों और मू स के घटने से मृद ा की उवरता िगर रही है

पीड़क शीघ लौटते है ं और किठनाई से मरते कु छ पीड़ क पीड़ कनाशकों के पित पितरोधक क्षमता िवकिसत कर ले ते है ं
है ं

खेत में मकिड़याँ, भंगृ और पक्षी कम पीड़ कनाशक पाकृितक परभिक्षयों की संख्या घटाते है,ं िजससे अंतत: पीड़ कजीवों की समिष्ट बढ़
जाती है

पुष्पन के समय मध मु िक्खयाँ कम परागणकारी पभािवत होते है ं — और वे खाद्य उ त्पादन के िलए महत्त्वपूण है ं

क्या आप जानते ह? चत्र 12.18 इसका वकल्प दखाता है — क ट को खाने वाला भृंग। यह शका रय ारा
क ट का प्राकृ तक नयंत्रण है, और कसान को इसका कोई मूल्य नह दे ना पड़ता।

प्र.4 क्या आपने इन सं े षत उवरक और पीड़कनाशक के उपयोग के पश्चात मृदा स्वास्थ्य म कोई प रवतन दे खा है?

कसान ारा दया गया नमूना उत्तर: "मृदा कठोर और फ क पड़ गई है। पहले से अ धक जल माँगती है और शीघ्र सूख जाती है।
पहले ऊपरी परत गहरे रंग क , भुरभुरी और कचुओं से भरी रहती थी; अब वषा के बाद ऊपरी मृदा बहकर नाली म चली जाती है।"
मृदा स्वास्थ्य गरने के लक्षण और उनका कारण—

मृदा कठोर और फ क — मृदाकण को जोड़े रखने वाला जै वक पदाथ ( मस) घट गया है।
ऊपरी मृदा बह जाती है — पयाप्त मस के अभाव म मृदा अपरदन के लए प्रवण हो जाती है।
कचुए और घ घे कम — अत्य धक सचाई और बार-बार जुताई इन मृदा जीव को प्रभा वत करती है, जो पा र स्थ तक य
संतुलन के लए महत्त्वपूण ह।
जल या तो बह जाता है या भरा रहता है — मस म कम मृदा जल को ठ क से नह थामती।

ऐसा क्य होता है: मृदा केवल पसी हुई च ान नह , एक सजीव तंत्र है। सं े षत उवरक के अत्य धक उपयोग से
उसम हतैषी सूक्ष्मजीव और जै वक पदाथ घटते ह, अथात मृदा का वह भाग सबसे पहले नष्ट होता है जो सजीव है
— और जो ख नज भाग को उपयोगी बनाता है। इसी लए रसायन जारी रहने पर भी उपज गरती है।

प्र.5 कृषक के साथ अपनी बातचीत से आप क्या नष्कष नकालते ह?

रपोट चार भाग म बनाइए — (i) आप कब और कहाँ गए तथा कतने कसान से मले; (ii) उनके उत्तर क ता लका; (iii)
अ धकांश ने कन बात पर एक जैसी बात कही; (iv) आपका नष्कष।

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नमूना नष्कष: सं े षत उवरक और पीड़कनाशक ने फसल उत्पादन म सुधार लाने म महत्त्वपूण भू मका नभाई है और भारत
जैसे दे श को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने म सहायता क है। परंतु हमसे मले हर कसान ने वही धीमा प रवतन बताया — उतनी ही
उपज के लए अ धक सामग्री, पीड़क का अ धक बल के साथ लौटना, कचुओं और परागणका रय का घटना, और ऊपरी मृदा का
बह जाना। अथात लाभ पहले मला और मूल्य बाद म चुकाना पड़ा, और वह मूल्य स्वयं मृदा चुका रही है।
इससे वही नष्कष नकलता है जो अध्याय का अपना है — पा रतंत्र को समझने से हम और अ धक संधारणीय कृ ष पद्ध तयाँ
अपनाने म सहायता मल सकती है। हमसे मले कुछ कसान पहले से ही जै वक और प्राकृ तक पद्ध तय क खोज कर रहे ह,
जनका उ े श्य सं े षत सामग्री घटाना और प्राकृ तक पा रतंत्र म न्यूनतम हस्तक्षेप करना है।

स्वयं जाँ चए: रपोट तब अ धक सशक्त होती है जब कसान ने क्या कहा और आपने क्या नष्कष नकाला — ये
दोन अलग-अलग खंड म ह , ता क पाठक आपके तक को जाँच सके।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 206
12.9.2 स्वस्थ पा रतंत्र खेत के लए कस प्रकार सहायक ह?

प्र.1 अपने अ धगम के आधार पर आपके वचार से कौन-सी कृ ष पद्ध तयाँ भ वष्य म मृदा एवं पयावरण के संरक्षण
और खाद्य सुरक्षा को सु न श्चत करने म कसान क सहायता कर सकती ह?

वे पद्ध तयाँ जो खेत म उन जीव को लौटा द जन्ह वह खो रहा था, ता क पा रतंत्र फर से कुछ काय स्वयं करने लगे—

पद्ध त यह कैसे सहायक है

कं पोस्ट, गोबर की खाद, हरी खाद मू स और िहतैषी सूक्ष्मजीव लौटाती है, िजससे मृद ा जुड़ी रहती है और जल थामती है

धान्य कृ िष के स्थान पर फसल चक्र और िभन्न फसले ं िभन्न पोषक तत्व ले ती है ं और िभन्न कीटों को पालती है,ं अत: जैव िविवधता तथा
िमिश्रत फसल परागणकारी बने रहते है ं और पीड़ क एकत्र नही ं होते

खेत की मेड़ें और बाड़ें िबना काटे छोड़ना उन पाकृितक परभिक्षयों — भंगृ , मकड़ ी, पक्षी — को आश्रय दे ती है ं जो िन:शुल्क पीड़ क
िनयंत्रण करते है ं (िचत्र 12.18)

िछड़काव के वल तब जब पीड़क वास्तव में कम िछड़ काव अथ त कम पितरोधी पीड़ क और अिधक बचे हुए परभक्षी
हािनकारक स्तर पार कर ले ं

बूदँ और फु हार िसंचाई, वष जल संचयन भूजल का अत्यिधक दोहन घटाती है, िजसे अध्याय असंधारणीय बताता है

कम जुताई; फसल अवशेष खेत में लौटाना के ं चुओं और घोंघों की रक्षा करती है तथा ऊपरी मृद ा को अपने स्थान पर रखती है

जैिवक और पाकृ ितक कृ िष पद्धितयाँ संश्ले िषत उवरकों का उपयोग कम करना और पाकृितक पािरतंत्र में न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ
संधारणीय कृिष को बढ़ ावा दे ना इनका उ े श्य है

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क्या आप जानते ह? प्राचीन ग्रंथ वृक्षायुवद म मृदा स्वास्थ्य और पोषण के महत्त्व को पहले ही बताया गया है। यह
ग्रंथ कुणप जल — पशु और वनस्प त अप शष्ट से कण्वन ारा बनाया गया एक तरल उवरक जो ज टल पदाथ को
सरल पदाथ म वघ टत कर दे ता है — तथा अन्य जै वक खाद के माध्यम से मृदा के नरंतर पोषण का समथन करता
है; ठ क वही काय जो प्रकृ त म अपघटक करते ह।

ज ासा को बनाए रख — पृष्ठ 207–208

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अध्याय के अंत के प्रश्न

ज ासा को बनाए रख

प्र.1 दए गए आरेख ( चत्र 12.19) को दे खए और गलत कथन का चयन क जए। (i) समुदाय सम ष्ट से बड़ा होता है।
(ii) समुदाय एक पा रतंत्र से छोटा होता है। (iii) पा रतंत्र कसी समुदाय का भाग होता है।

समुदाय
समि ट
ष्

पािरतंत्र

चत्र 12.19, पृष्ठ 207 — पुनःआरे खत: एक के भीतर एक तीन वृत्त — सम ष्ट, समुदाय के भीतर और समुदाय,
पा रतंत्र के भीतर।

गलत कथन है (iii) पा रतंत्र कसी समुदाय का भाग होता है।
वास्तव म इसका उल्टा सही है। चत्र 12.19 म तीन वृत्त एक के भीतर एक दखाए गए ह—

समिष्ट ⊂ समुदाय ⊂ पािरतं त्र

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सम ष्ट एक न त समय म एक पयावास म एक ही प्रकार के जीव का समूह है — जैसे कसी खेत क सारी घास।
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समुदाय उस पयावास को साझा करने वाली सभी व भन्न सम ष्टयाँ ह — घास, ट े, मढक, सूक्ष्मजीव। अत: समुदाय सम ष्ट से
m.
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g सूय का प्रकाश और
c दाय है साथ म वे अजै वक घटक जनसे वह परस्पर क्रया करता है — मृदा,aजल,
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बड़ा होता है: कथन (i) सही है।

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se अत: समुदाय पा रतंत्र से छोटा होता है: कथन (ii) सही है।
पा रतंत्र वही
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तापमान।

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ऐसा क्य होता है: बाहर क ओर हर चरण कुछ जोड़ता है। सम ष्ट से समुदाय तक जाते समय अन्य प्रकार के जीव

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जुड़ते ह; समुदाय से पा रतंत्र तक जाते समय नज व प रवेश जुड़ता है। इस लए समुदाय सदा पा रतंत्र के भीतर ag
रहता है, वह उसे कभी अपने भीतर नह ले सकता।
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सम ष्ट कसी समुदाय का भाग होती है। य द सभी अपघटक, अकस्मात एक वन पा रतंत्र m
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glaहोते ह।
coे mवचार से क्या प रवतन ह गे? व्याख्या क जए क अपघटक आवश्यकaक्य
प्र.2 से लुप्त हो जाएँ तो

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आपक

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वन पहले मृत पदाथ से भर जाएगा और फर धीरे-धीरे भूखा मरने लगेगा।
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m .co agl
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अपघटक लुप्त → िगरी पित्तयाँ, िगरे वृक्ष, मल और मृत जंत ु िवघिटत होना बंद

→ वन की भूिम पर कू ड़ ा एकत्र होता जाएगा
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→ पोषक तत्व मृत शरीरों में ही बंद रहेगं े, मृद ा तक कभी नही ं पहुँचे ंगे
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→ मृद ा अपने पोषक तत्व और मू स खो दे गी; वह कठोर होकर अपरिदत होगी
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s e m उत्पादकों की वृिद्ध रुक जाएगी
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ag → शाकाहािरयों के िलए कम भोजन → कम माँसाहारी → पूरा आहार जाल पतला पड़ जाएगा

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अपघटक आवश्यक क्य ह: अपघटक ही एकमात्र ऐसे
m .c जीव ह जो पा रतं त्र म पदाथ को पीछे क ओर ले जाते ह। आहार जाल का
a
हर दूसरा तीर ऊपर क ओर है — घास से ट sा,e ट े से मढक। केवल अपघटक पदाथ को श्रृंखला के आरंभ तक लौटाते ह। कवक
और जीवाणु जैसे सूक्ष्मजीव मृत पादपag
औरlaजंतुओं के ज टल पदाथ को सरल पदाथ म वघ टत करते ह और इस प्र क्रया से मृदा
म महत्त्वपूण पोषक तत्व वापस आ जाते ह। पादप मृदा म उगते ह और मृदा के कई पोषक तत्व अपघटन से ही आते ह।

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s e m पुनचक्रण न हो तो उनक
cपूoतmनह हो सकती, जब क ऊजा क पू त सूय से बाहर से होती रहती है। aइसglलएa अपघटक का लुप्त होना केवल
ऐसा क्य होता है: कसी पा रतंत्र म पोषक तत्व का भंडार सी मत होता है। य द उनका

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as em गंदगी क समस्या नह है; यह उत्पादक क , और इस लए उनके ऊपर क हर चीज क , पोषक-आपू त काट दे ता है।
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प्र.3 त मलनाडु के कु ालोर जले के सेल्वम ने बताया क उनका गाँव म ोव वन क उप स्थ त के कारण 2004 क
सुनामी से आस-पास के गाँव क तुलना म कम प्रभा वत हुआ था। इससे स रता, शबनम और शजो को आश्चय
हुआ। वे सोच रही थ क क्या म ोव वन गाँव क सुरक्षा कर रहे थे। क्या आप इसे समझने म उनक सहायता कर
सकते ह?

सेल्वम ठ क कह रहे ह — मग्रोव समुद्र और गाँव के बीच एक जी वत द वार का काम कर रहे थे।
मग्रोव वन तट के उथले जल म खड़ा होता है। उसके वृक्ष घनी, मेहराबदार अवस्तंभ जड़ पर टके रहते ह और हजार छोट जड़
क चड़ से बाहर नकली रहती ह। आती हुई लहर को इन सबके बीच से होकर जाना पड़ता है। हर जड़ लहर क थोड़ी-थोड़ी ऊजा ले
लेती है, इस लए वन के पीछे बसे गाँव तक पहुँचते-पहुँचते जल धीमा और नीचा हो जाता है।

लहर की ऊज हजारों अवस्तं भ जड़ ों से टकराती है → ऊज िबखरकर अवशोिषत

→ प ी के पीछे जल धीमा और उथला पहुँच ता है

→ घरों और खेत ों को कम क्षित

जड़ े ं कीचड़ को थामे रहती है ं → तट बहता नही ं

अध्याय सुंदरबन के वषय म यही कहता है — वे चक्रवात और बाढ़ के समय तेज वायु और लहर को मंद करके हमारी रक्षा
करते ह। जन गाँव ने ईंधन या तालाब के लए अपने मग्रोव साफ कर दए थे, उनके पास उसी लहर को धीमा करने वाला कुछ नह
था, इस लए उन्ह अ धक क्ष त हुई।

ऐसा क्य होता है: यह पा रतंत्र से मला एक लाभ है — वह काय जो पा रतंत्र हमारे लए करता है और अन्यथा हम
बनाना पड़ता। कंक्र ट क द वार यह काम आं शक रूप से कर सकती है, परंतु मग्रोव मृदा को भी थामता है, काबन
डाइऑक्साइड अवशो षत करके ऑक्सीजन नमुक्त करता है, और उन मछ लय तथा केकड़ को आश्रय दे ता है
जन्ह गाँव खाता है। इसी महत्त्व के कारण संयुक्त राष्ट्र शै क्षक, वै ा नक और सांस्कृ तक संगठन (यूनेस्को) ने 1987
म सुंदरबन को वश्व धरोहर स्थल घो षत कया।

प्र.4 इस आहार श्रृंखला को दे ख— घास → ट ा → मढक → साँप। य द इस पा रतंत्र से मढक लुप्त हो जाएँ तो ट
और साँप क सम ष्ट पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्य ?

ट क संख्या बढ़े गी और साँप क घटे गी। मढक ही वह कड़ी है जो दोन को जोड़ती है, और उसके हटते ही श्रृंखला बीच से
कट जाती है।

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घास िट ा मेढं क साँप
▲ बढ़ ता है ▼ घटता है

टू ट के नीचे: परभक्षी हट गया। टू ट के ऊपर: भोजन हट गया।
िट े बढ़ ने पर घास भी अिधक चरी जाएगी।

एक कड़ी हटने पर उसके नीचे और ऊपर के स्तर वपरीत दशाओं म बदलते ह।

ट े बढ़गे क्य क मढक उनका परभक्षी था। उन्ह खाने वाला कोई नह बचा, इस लए अ धक ट े जी वत रहकर जनन करगे और
उनक संख्या चढ़े गी। फर वे कह अ धक घास खाएँगे, अत: घास पर भी संकट आएगा — प्रभाव नीचे क ओर भी जाता है।
साँप घटगे क्य क मढक उनका भोजन था। साँप को जो ऊजा मढक के रास्ते मलती थी, वह रास्ता अब बंद है। य द पा रतंत्र म चूहे
या पक्षी जैसे अन्य शकार ह तो कुछ साँप उनक ओर मुड़ सकते ह; जहाँ वे नह ह, वहाँ साँप क सम ष्ट गर जाएगी।

ऐसा क्य होता है: श्रृंखला का प्रत्येक जीव एक साथ दो भू मकाएँ नभाता है — वह अपने ऊपर वाले स्तर का
भोजन है और अपने नीचे वाले स्तर पर नयंत्रण है। उसे हटाइए तो दोन भू मकाएँ एक साथ चली जाती ह, इसी लए
प्रभाव केवल एक दशा म नह , दोन दशाओं म चलता है।

प्र.5 एक वद्यालय के उद्यान म वद्या थय ने पछले मौसम म अपेक्षाकृत कम तत लयाँ दे ख । इसके संभा वत कारण
क्या हो सकते ह? प रसर म अ धक तत लयाँ लाने के लए वद्याथ क्या कदम उठा सकते ह?

ततली को दो बलकुल भन्न वस्तुएँ चा हए — वयस्क के लए मकरंद वाले पादप और इल्ली (कैटर पलर) के लए पोषक पादप।
तत लयाँ कम होने का अथ प्राय: यह है क इनम से कोई एक समाप्त हो गया है।
संभा वत कारण

पुष्पीय पादप हटा दए गए, अथवा उद्यान म ऐसे पादप लगाए गए जनम मकरंद कम है।
कनार क झा ड़याँ और खरपतवार साफ कर दए गए — वे ही इ ल्लय के पोषक पादप थे।
उद्यान म या पास के खेत म पीड़कनाशक का छड़काव हुआ; वह पीड़क के साथ इ ल्लय को भी मार दे ता है।
घास और बाड़ ठ क उसी समय काट गईं जब इ ल्लयाँ उन पर पल रही थ ।
जल और नम खुली मृदा नह , जहाँ से तत लयाँ जल लेती ह।
अत्य धक धूल, धुआँ अथवा बहुत शुष्क मौसम।

वद्याथ क्या कदम उठा सकते ह

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

कदम यह क्य काम करता है

मकरंद वाले पादप लगाइए — गेंद ा, ज़ीिनया, इक्सोरा, वयस्क िततिलयों को भोजन दे कर उ न्हे ं बुल ाते है ं
पेंटास, तुल सी

पोषक पादप लगाइए — करी पत्ता और नी ंबू, आक इिल्लयों को वही पादप दे ते है ं िजसे वे खा सकती है,ं िजससे िततिलयाँ पिरसर में
(मदार), सौंफ , कै िसया के वल आती नही,ं जनन भी करती है ं

उद्यान में पीड़कनाशक का िछड़काव बंद कीिजए पीड़ कनाशक इिल्लयों और प्यूपा को मार दे ता है, और अगली ऋतु की िततिलयाँ वही ं
से आती है ं

एक कोना िबना काटे और िबना साफ िकए छोिड़ए वहाँ के खरपतवार पोषक पादप है;ं िगरी पित्तयाँ शुष्क महीनों में प्यूपा को आश्रय दे ती है ं

गीली रे त या िम ी सिहत उथले पात्र में जल रिखए िततिलयाँ नम मृद ा से जल और खिनज ले ती है ं

धूप वाले , वायु से बचे स्थान पर लगाइए और वष भर कु छ िततिलयाँ धूप में सिक्रय रहती है ं और उ न्हे ं के वल एक महीने नही,ं पूरे वष मकरंद
न कु छ िखलता रहे चािहए

ऐसा क्य होता है: तत लयाँ परागणकारी ह, केवल सजावट नह । यहाँ तक वही है जो क्रयाकलाप 12.3 म था —
एक वस्तु बद लए (पादप अथवा छड़काव) और उस पर नभर क ट क सम ष्ट उसी के साथ बदल जाएगी।

प्र.6 ऐसा पा रतंत्र क्य संभव नह है जसम केवल उत्पादक ह और कोई उपभोक्ता या अपघटक न ह ?

क्य क ऐसे तंत्र म ऊजा तो प्रवेश कर सकेगी, परंतु पदाथ कभी ग त नह करेगा — और पा रतंत्र को दोन चा हए।
दे खए क्या होगा। उत्पादक प्रकाश सं ेषण करके बढ़गे। ऐसा करने के लए वे मृदा से पोषक तत्व लगे। अंतत: प्रत्येक पादप मरेगा।
अब—

कोई अपघटक नह है, इस लए मृत पादप वघ टत नह ह गे। उन्ह ने मृदा से जो पोषक तत्व लए थे वे सदा के लए उन्ह म बंद
रह जाएँगे;
अत: मृदा के पोषक तत्व समाप्त हो जाएँगे और पादप क अगली पीढ़ उग ही नह पाएगी;
मृत पादप पदाथ ऊपर ढे र होता जाएगा और कसी नए अंकुर के लए प्रकाश तथा स्थान दोन रोक दे गा।

उपभोक्ता भी महत्त्वपूण ह, यद्य प दूसरे ढं ग से। अनेक पादप अपने पुष्प के परागण और बीज के प्रक णन के लए जंतुओं पर
नभर रहते ह। जंतुओं के बना अ धकांश पुष्पीय पादप बहुत कम बीज बनाएँगे और नई भू म तक फैल नह सकगे।

सूय का पकाश → उत्पादक → मृत पादप पदाथ → आगे कही ं नही ं

पोषक तत्व: मृद ा → पादप → मृत पादप → मृद ा में कभी वापस नही ं

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ऐसा क्य होता है: प्रकृ त म ऊजा बहती है और पदाथ चक्र म घूमता है। ऊजा क पू त सूय प्र त दन करता है,
इस लए उसे अकेले उत्पादक भी ग्रहण कर सकते ह। पदाथ क पू त नह होती — वही पोषक तत्व बार-बार उपयोग
होने चा हए, और उन्ह आरंभ तक केवल अपघटक ही लौटा सकते ह। केवल उत्पादक वाले पा रतंत्र म ऊजा क
आपू त चालू रहती है और पदाथ क आपू त टू ट रहती है, इस लए वह कुछ ही पी ढ़य म रुक जाता है।

प्र.7 अपने घर या वद्यालय के समीप दो अलग-अलग स्थान का अवलोकन क जए (जैसे एक उद्यान और सड़क के
कनारे का कोई स्थल)। आपको दखाई दे ने वाले सजीव एवं नज व घटक क सूची बनाइए। दोन पा रतंत्र कस
प्रकार भन्न ह?

व ध: प्रत्येक स्थान पर दन के एक ही समय दस मनट खड़े र हए। जो भी सजीव दखे या सुनाई दे और जो भी नज व वस्तु उन्ह
प्रभा वत करती हो, उसे ल खए। फर तुलना क जए।
नमूना उत्तर — वद्यालय के पास का उद्यान और सड़क का कनारा—

उद्यान सड़क का कनारा

सजीव घास, नीम और गुलमोहर, बाड़, पुष्पीय झा ड़याँ, तत लयाँ, कुछ कठोर वृक्ष, दरार म धूल भरी घास और खरपतवार,
(जैिवक) मधुम क्खयाँ, च टयाँ, कचुए, मैना, गौरैया, गलहरी, एक कौवे, कबूतर, घरेलू म क्खयाँ, च टयाँ, एक कुत्ता
कुत्ता

िनज व कोमल नम मृदा, छाया, नल तथा प क्षय के पात्र म जल, कंक्र ट और तारकोल, दबी हुई कठोर मृदा, दन के
(अजैिवक) ठं डी वायु, गरी प त्तयाँ अ धकांश समय छाया नह , धूल, अ धक गरम वायु,
नाली का जल

जीवों के पकार अनेक — कई वृक्ष, झािड़ याँ, कीट और पक्षी बहुत कम — िगनी-चुनी कठोर पजाितयाँ
िकतने

आहार कई, जो जुड़कर एक छोटा जाल बनाती है ं बहतु छोटी, और पाय: उ त्पादकों के बजाय मानव कचरे पर
ृ लाएँ
श्रंख िटकी हईु

दोन म अंतर कैसे: सजीव का अंतर नज व के अंतर से नकलता है। कोमल नम मृदा और छाया जड़ , कचुओं और प त्तय के ढे र
को बनने दे ती ह, इस लए उद्यान म उत्पादक, कई प्रकार के उपभोक्ता और मृदा म काम करते अपघटक — तीन ह। तारकोल और
दबी मृदा जड़ तथा जल को रोक दे ती है, और ऊष्मा तथा धूल स्थ तय को कठोर बना दे ती ह, इस लए सड़क कनारे केवल कुछ
सहनशील प्रजा तयाँ ही टक पाती ह। सड़क का कनारा वह स्थान भी है जहाँ मनुष्य लगातार हस्तक्षेप करते ह — बुहारना, काटना,
कचरा डालना — इस लए वहाँ का समुदाय कभी बन ही नह पाता।

ऐसा क्य होता है: अजै वक घटक तय करते ह क कसी स्थान पर कौन-से जीव रह भी सकते ह, और फर जीव
क संख्या तय करती है क आहार जाल म कतनी क ड़याँ बन सकती ह। मृदा और छाया बदल द जए तो आपने
पूरा समुदाय बदल दया।

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कृ ष क्षेत्र जैसे मानव न मत पा रतंत्र आवश्यक ह परंतु उन्ह संधारणीय बनाया जाना चा हए। इस कथन पर
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प्र.8

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टप्पणी कर।

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कथन के दोन भाग सही ह, और दोन आपस म जुड़े हुए ह।

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वे आवश्यक ह। मनुष्य सह वष से फसल उगाने के लए खेती कर रहे ह, और जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ , कृ ष पर हमारी

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नभरता भी बढ़ती गई। 1950 से 1965 के बीच भारत को कम फसल उत्पादन के कारण खाद्य संकट का सामना करना पड़ा; 20व

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agप्राकृ तक पा रतंत्र नह खला सकता।
शताब्द के मध्य म ै क्टर , मशीन , सं े षत उवरक और पीड़कनाशक — अथात ह रत क्रां त — ने खाद्य उत्पादन बढ़ाकर दे श
को खाद्य सुरक्षा द । इतनी बड़ी जनसंख्या को कोई

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उन्ह संधारणीय बनाया जाना चा हए। वही पद्ध तयाँ अब असंधारणीय मानी जाती ह — सं े षत रसायन का अत्य धक उपयोग,

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भूजल का अत्य धक दोहन और व्यावसा यक लाभ के लए मात्र एक ही प्रकार क फसल उगाना। प रणाम है मृदा का क्षरण: कम

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मस, कम हतैषी सूक्ष्मजीव, अपरदन, गरता जलस्तर, प्र तरोधक क्षमता वाले पीड़क और घटते परागणकारी।

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l खेsत एक पािरतं त्र है िजसका पबंधन हम करते है ं
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अच्छा पबंधन → मृद ा के जीव, परागणकारी और पीड़ क-परभक्षी हमारे िलए काम करते रहते है ं
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बुरा पबंधन → उनका काम हमें रसायनों से करना पड़ ता है → लागत बढ़ ती है, मृद ा घटती है
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यहाँ "संधारणीय" का अथ: खेत का ऐसा उपयोग जो मृदा को अगले वष भी उतना ही अच्छा छोड़े जतनी वह इस वष है। कंपोस्ट

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और गोबर क खाद, धान्य कृ ष के स्थान पर फसल चक्र और म श्रत फसल, कुशल सचाई, आवश्यकता पड़ने पर ही छड़काव,
तथा वे जै वक और प्राकृ तक कृ ष पद्ध तयाँ जो प्राकृ तक पा रतंत्र म न्यूनतम हस्तक्षेप करती ह।
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g और प्रबंधन क
ऐसा.cक्य होता है: वन के वपरीत, मानव न मत पा रतंत्र को मानव ारा दे खaभाल
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aseआवश्यकता होती है — उसे बनाते समय हमने उसके अ धकांश प्राकृ तक नयंत्रण हटा दए थे। इस लए वकल्प
agl खेती और बना खेती के बीच नह है; वकल्प उस खेती और इस खेती के बीच है जो मृदा को नया करती है अथवा

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उसे खच कर दे ती है।

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प्र.9 य द कसी रोग के कारण भारतीय शशक क सम ष्ट कम हो जाती है ( चत्र 12.20) तो इसका अन्य जीव क
संख्या पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

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सूय

घास और पादप

शशक िहरण

लोमड़ ी
उकाब

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चत्र 12.20, पृष्ठ 208 — आहार जाल के भाग का पुनःआरे खत रेखा चत्र: सूय → घास और पादप → शशक तथा
हरण → लोमड़ी तथा उकाब।

चत्र 12.20 यह जाल दखाता है — सूय घास और पादप को पो षत करता है, जनसे शशक और हरण को भोजन मलता है;
शशक को लोमड़ी खाती है और हरण को उकाब। अत: शशक क कमी दोन शाखाओं म फैल जाती है।

सूय

घास और पादप ▲

शशक ▼ िहरण ▲

लोमड़ ी ▼ उकाब ▲

▼ घटता है ▲ बढ़ ता है — शशकों की कमी एक शाखा में नीचे और दू सरी में ऊपर जाती है

चत्र 12.20 के जाल म शशक क सम ष्ट घटने का प्रभाव।

जीव प रवतन कारण

लोमड़ी घटेगी इस जाल म शशक उसका भोजन है। शशक कम होने पर लोम ड़य को कम भोजन मलेगा, वे कम शावक
पालगी और उनक संख्या गरेगी। कुछ लोम ड़याँ दूसरे शकार क ओर मुड़ सकती ह — जससे दबाव उन
जीव पर चला जाएगा।

घास और आरंभ में उन्ह चरने वाले दो शाकाहा रय म से एक कम हो गया है, अत: घास कम चरी जाएगी।
पादप बढ़ े ंगे

िहरण बढ़ े ंगे अ धक घास उपलब्ध है और उसके लए स्पधा कम है, इस लए अ धक हरण जी वत रहकर जनन करगे।

उकाब बढ़ े ंगे इस जाल म हरण उसका भोजन है, अत: अ धक हरण का अथ अ धक उकाब।

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ऐसा क्य होता है: शशक क दो भू मकाएँ ह — वह घास का उपभोग करता है और लोमड़ी को पोषण दे ता है।
उसके हटने से घास पर दबाव घटता है (संख्या बढ़ती है) और लोमड़ी भूखी रहती है (संख्या घटती है)। चूँ क घास
हरण के साथ साझा है, यह छू ट वह नह रुकती: वह जाल क दूसरी शाखा से होकर हरण और फर उकाब तक
पहुँच जाती है। इसी लए एक सम ष्ट का प रवतन कभी एक स्थान पर नह रुकता — आहार जाल उसे हर उस दशा
म ले जाता है जधर तीर जाते ह।

स्वयं जाँ चए: हरण क वृ द्ध सदा नह चलेगी। संख्या बढ़ते ही वे घास चर डालगे और आपसी स्पधा उनक संख्या
फर नीचे ले आएगी — संतुलन ग तशील है, वह असीम रूप से बढ़ने के बजाय कसी नए स्तर पर आकर बैठ जाता
है।

खोज, अ भकल्पना कर और चचा कर — पृष्ठ 208–209
अध्याय के अंत क प रयोजनाएँ

खोज, अ भकल्पना कर और चचा कर

प्र.1 अपने वद्यालय या आस-पास के कसी उद्यान म स्वच्छता दवस क योजना बनाइए। दस्ताने पहनकर और थैल
का उपयोग करके जो भी कूड़ा आपको दखाई दे उसे एकत्र क जए। आपके ारा एक त्रत कचरे के प्रकार पर
चचा क जए। सबसे सामान्य कौन-सा था? हम इस तरह के कचरे को कैसे कम कर सकते ह?

कैसे कर: मैदान को खंड म बाँ टए, एक समूह को एक खंड द जए, और तीन थैले र खए — प्ला स्टक, कागज, और अन्य। पूरे
समय दस्ताने पह नए, काँच या कोई नुक ली वस्तु हाथ से न उठाइए, और बाद म हाथ अवश्य धोइए। प्रत्येक समूह ने जो एकत्र कया
उसे ग नए या तौ लए, ता क कक्षा के पास केवल अनुमान नह , आँकड़े ह ।
नमूना अ भलेख — वद्यालय के मैदान और साथ लगे उद्यान क एक घंटे क सफाई—

कचरे का प्रकार टु कड़ क संख्या अ धकांश कहाँ से

प्लािस्टक के रै पर और पाउच 146 ार और कट न के पास के जलपान के पैकेट

प्लािस्टक की बोतले ं और िगलास 38 बच के आस-पास

कागज और गत्ता 27 कक्षाओं के पास

काँच और धातु 9 चारद वारी के साथ

सबसे सामान्य: प्ला स्टक के रैपर, बहुत बड़े अंतर से। वे हल्के होते ह, उड़ते रहते ह, वघ टत नह होते, और कोई अपघटक उन्ह
तोड़ नह सकता — इस लए वे पा रतंत्र म अ न त काल तक बने रहते ह।
इसे कैसे कम कर: पैक कया हुआ जलपान खरीदने के बजाय भोजन स्ट ल या कपड़े के डब्बे म लाइए; बार-बार भरने योग्य जल
क बोतल र खए; पृथक्करण वाले कूड़ेदान वहाँ र खए जहाँ कचरा वास्तव म गरता है (केवल कायालय के पास नह , ार और
कट न के पास); कट न से एकल-उपयोग प्ला स्टक बंद करने का आग्रह क जए; रसोई और उद्यान का अप शष्ट वद्यालय के ग े म

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कंपोस्ट क जए ता क कचरे का जो भाग वघ टत हो सकता है वह वास्तव म हो जाए।
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ऐसा क्य होता है: प्रकृ त म कुछ भी व्यथ नह होता, क्य क हर प्रकार के मृत पदाथ के लए कोई न कोई अपघटक

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है। प्ला स्टक अपवाद है — उसका कोई अपघटक नह । इसी लए वह एकत्र होता जाता है, और इसी लए उसे उठाने

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से अ धक महत्त्वपूण उसे कम करना है।

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अरुणाचल प्रदे श म न्यशी और मशमी जनजा तयाँ बाघ को प वत्र मानती ह। छत्तीसगढ़ म बैगा जनजा त

ag मान्यता है क बाघ वन के रक्षक होते ह। कसी अन्य भारतीय जनजा त
प्र.2
बागेसुर दे व क पूजा करती है और उनक
के वषय म पता क जए जसका कसी जंतु के साथ वशेष जुड़ाव है।

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.c वद्यालय के पुस्तकालय तथा राज्य के पयटन या जनजातीय कल्याण वभाग aकेgप्रकाशन म दे खए; अपने ही
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ायeके कसी व रष्ठजन से पू छए क यहाँ कौन-से जंतु, वृक्ष या उपवन प वत्र माने जाते ह; और केवल नाम नह , उसका कारण
कैसे पता कर:
समुदs
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agभी ल खए।
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नमूना उत्तर — भारत भर के वे समुदाय जो वशेष जंतुओं क रक्षा करते ह—

eड़mाव
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समुदाय कहाँ
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िबश्नोई राजस्थान, हिरयाणा a
g अपने धा मक नयम के अंतगत काले हरण और चकारा क रक्षा करते ह तथा हरे वृक्ष

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नह काटते

धान के भरे खेत म मछली पालते ह और प वत्र उपवन m . c o
आपातानी
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जीरो घाटी, अरुणाचल
a s e बनाए रखते ह

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पदे श
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seखासी और
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ag जयंितया
मेघालय प वत्र उपवन (लॉ कतांग) रखते ह जहाँ कसी पादप या जंतु को हा न नह पहुँचाई
जाती

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मध्य भारत
cचoातेm g l a
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कुल- चह्न वशेष जंतुओं और वृक्ष से जुड़े होते ह, जन्ह उस कुल के लोग हा न नह
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भील और गोंड

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पहुँ

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टोडा
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नीलिगिर, तिमलनाडु प वत्र भस-झुंड और शोला वन म प वत्र उपवन

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ऐसा क्य होता है: कसी जंतु को प वत्र मानने क मान्यता व्यवहार म संर क्षत क्षेत्र क तरह काम करती है। वह
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.cउपवन प्राय: कसी जले म बचे हुए मूल वन के अं तम टुकड़े होते ह। पा रतंaत्रgके भीतर रहने वाले समुदाय सीधे उसी
कसी सम ष्ट का शकार होकर समाप्त होना रोकती है और उसका पयावास बचाए रखती है — इसी लए प वत्र

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पर नभर होते ह, और ये परंपराएँ उस नभरता के नयम बन जाने का एक रूप ह।

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प्र.3 अपने घर या वद्यालय के पास एक वृक्ष का चयन क जए। 4 सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह म एक बार उसका
नरीक्षण क जए। कसी भी नए पत्ते, फूल, फल या आने वाले प क्षय एवं क ट को नोट क जए। अपने
अवलोकन को अ भले खत क जए। आप अपने नष्कष को www.seasonwatch.in पर अपलोड करके
एक युवा नाग रक वै ा नक बन सकते ह।

कैसे कर: ऐसा एक वृक्ष चु नए जहाँ आप सरलता से पहुँच सक और उसका नाम पहचा नए। उसे सप्ताह के उसी दन और दन के
उसी समय दे खए, ता क चार अवलोकन क तुलना हो सके। हर बार दस मनट द जए। एक न त प्रारूप म अ भलेख र खए।
नमूना अ भलेख — वद्यालय के ार के पास का नीम, माच मास—

सप्ताह नई प त्तयाँ पुष्प फल दखाई दए

1 कुछ, हलक हरी नह नह तने पर ची ंिटयाँ, 2 मैना

2 अनेक क लयाँ आईं नह मधुमिक्खयाँ, 1 िगलहरी

3 पूरा वतान गुच्छ म खले नह बहुत सी मधुमिक्खयाँ, एक शक्करखोरा, 3 मैना

4 पूरा वतान मुरझाते हुए छोटे हरे फल बनने लगे कम मधुमिक्खयाँ, 2 बुल बुल

क्या नष्कष नकाल: मधुम क्खयाँ तब आईं जब पुष्प खले और तब चली गईं जब पुष्प मुरझा गए, और फल पुष्पन के बाद ही
बने। यही परागण आपक आँख के सामने हो रहा है — क ट परागकण को पुंकेसर से अंडप तक ले जाते ह, और तभी फल तथा
बीज बनते ह। यही ता लका www.seasonwatch.in पर अपलोड क जए, जहाँ वह पूरे भारत से आए उसी प्रजा त के
अवलोकन से जुड़ जाएगी।

संकेत: जहाँ कुछ न दखे वहाँ "कुछ नह " ल खए। खाली स्थान का अथ है आप दे खना भूल गए; "कुछ नह " भी
एक आँकड़ा है।

प्र.4 कृषक के साथ वातालाप क जए और संधारणीय खेती के लए उनके ारा अपनाई जाने वाली स्वदे शी पद्ध तय
को अ भले खत क जए। घर या वद्यालय म एक स्थायी प्राकृ तक उद्यान (हबल गाडन) बनाइए। यह व भन्न
कक्षाओं के वद्या थय के साथ कया जाने वाला एक सामू हक क्रयाकलाप हो सकता है।

भाग 1 — पद्ध तयाँ अ भले खत क जए। वशेष रूप से यह पू छए क सं े षत सामग्री के प्रच लत होने से पहले कसान क्या
करते थे और क्य । संभा वत उत्तर—

म श्रत फसल और फसल चक्र — अनाज के साथ दलहन, ता क हर वष मृदा से वही पोषक तत्व न नकल;
गोबर क खाद और कंपोस्ट के ग े; हरी खाद क फसल को खेत म ही जोत दे ना;
पछली फसल के सव त्तम पादप से बीज सहेजना;
पीड़क के वरुद्ध नीम क पत्ती या नीम खली, गोबर का घोल और राख;
मेड़ और खेत के कनारे बना काटे छोड़ना तथा खेत म और उसके चार ओर वृक्ष बनाए रखना;

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बुवाई का समय स्थानीय वषा के अनुसार तय करना, जसे प क्षय , फूलते वृक्ष अथवा वायु से पहचाना जाता है।

भाग 2 — उद्यान बनाइए।

1. धूप वाला स्थान चु नए और बीच म रास्ते छोड़कर छोट -छोट क्या रयाँ बनाइए।
2. रसोई और उद्यान के अप शष्ट के लए कंपोस्ट का ग ा बनाइए; क्या रय म केवल यही कंपोस्ट डा लए।
3. ऐसी औषधीय और रसोई क जड़ी-बू टयाँ लगाइए जो आपके क्षेत्र म सरलता से उग — तुलसी, पुद ना, अजवाइन, न बू घास,
घृतकुमारी (एलोवेरा), करी पत्ता, गलोय, अश्वगंधा, ध नया।
4. एक क्यारी म एक ही पादप लगाने के बजाय मलाकर लगाइए, और कनार पर गदा लगाइए — वह परागणका रय को बुलाता
है और कुछ पीड़क को दूर रखने म सहायक है।
5. क्या रय पर सूखी प त्तय क परत (मल्च) डा लए, जससे नमी बनी रहे और कचुओं को भोजन मले।
6. कोई सं े षत उवरक या पीड़कनाशक बलकुल न डा लए। प्रात:काल सचाई क जए; प क्षय और तत लय के लए उथले
पात्र म जल र खए।
7. एक पं जका र खए — कस दन कौन सचाई करेगा, कब क्या लगाया गया, और उद्यान म कौन आया।

ऐसा क्य होता है: इनम से प्रत्येक पद्ध त वही करती है जो अध्याय बताता है — मृदा को जै वक पदाथ लौटाना,
फसल क व वधता बनाए रखना ता क परागणकारी और पीड़क-परभक्षी बने रह, और प्राकृ तक पा रतंत्र म
यथासंभव कम हस्तक्षेप करना। यही इसे संधारणीय बनाता है: उद्यान वष-दर-वष अ धक सामग्री माँगने के बजाय
समय के साथ बेहतर होता जाता है।

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प्र.5 कृषक ारा अपनाई जाने वाली व भन्न कृ ष पद्ध तय को समझने के लए चत्र 12.21 दे खए या आप कसी
व रष्ठजन के साथ पास के कसी खेत म जाकर भी इसका अवलोकन कर सकते ह। पयावरण के अनुकूल और
संधारणीय तकनीक को अपनाकर कृ ष पद्ध तय को उन्नत बनाने के लए अपनी नोटबुक म कुछ सुझाव
ल खए। आप पोस्टर अथवा मॉडल भी बना सकते ह और वद्यालय के कायक्रम , व ान मेल अथवा कृ ष मेल
म भाग लेकर उन्ह प्रद शत कर सकते ह।

मुग घर — दाना डालती िकसान
पशुशाला — दुधारू पशु

टमाटर की क्यािरयाँ (सहारे सिहत )

भूसे का ढे र (चारा)

सरसों का खेत

खेत का भंड ार-गृह

बाड़ा — बकरी और मेमना

फल उ द्य ान — फल तोड़ते हुए
बैल ों की जोड़ी से ज ुताई
मेड़ पर गे ंदे की क्यारी

चत्र 12.21, पृष्ठ 209 — पुस्तक म दशाई गई कृ ष पद्ध तय का पुनःआरे खत रेखा चत्र: पशुपालन, बैल से जुताई,
सरस और टमाटर क क्या रयाँ, गदे क मेड़, बकरी का बाड़ा, मुग पालन और फल उद्यान।

चत्र 12.21 क्या दखाता है: एक ऐसा खेत जहाँ एक साथ कई काम हो रहे ह, पूरी भू म पर एक ही काम नह — टमाटर और
पुष्पीय पादप वाली सब्जी क क्या रयाँ, बाड़ लगे बाड़े म गाय और बक रयाँ, एक फलदार वृक्ष जससे कसान और एक बा लका
टोक रय म फल तोड़ रहे ह, टु कड़ के बीच बाड़ और घास, तथा खेत का घर। यह म श्रत कृ ष है — एक ही जोत पर फसल, वृक्ष
और पशुधन साथ-साथ।
नोटबुक म लखने योग्य सुझाव—

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है AglaSem · NCERT Solutions

सुझाव यह कैसे सहायक है

िचत्र की भाँित फसल, फलदार वृक्ष और पशुओं का गोबर क्यािरयों की खाद बनता है; फसल अवशेष चारा बनता है। एक भाग का
पशुध न साथ रिखए अपिशष्ट दू स रे भाग की सामगी है — ठीक वैसे ही जैसे पाकृितक पािरतंत्र में होता है

फसल चक्र अपनाइए और एक से अिधक िभन्न फसले ं िभन्न पोषक तत्व ले ती है ं और िभन्न कीटों को पालती है,ं अत: मृद ा और परागणकारी
फसल उगाइए; धान्य कृ िष से बिचए दोनों बने रहते है ं

खेत और रसोई का सारा अपिशष्ट कं पोस्ट मू स और िहतैषी सूक्ष्मजीव लौटते है,ं िजससे मृद ा जुड़ी रहती है और अपरदन का सामना कर
कीिजए; गोबर की खाद डािलए पाती है

िकनारों पर पुष्पीय पादप और बाड़ें रिखए परागण के िलए मधुमिक्खयों को तथा िन:शुल्क पीड़ क िनयंत्रण करने वाले भंगृ ों, मकिड़ यों और
पिक्षयों को आश्रय दे ती है ं (िचत्र 12.18)

बूदँ या फु हार िसंचाई और वष जल संचयन भूजल का अत्यिधक दोहन घटाता है, िजसे अध्याय असंधारणीय पद्धित बताता है
अपनाइए

िछड़काव तभी कीिजए जब जाँच में पीड़क कम िछड़ काव अथ त कम पितरोधी पीड़ क और अिधक बचे हुए पाकृितक परभक्षी
वास्तव में हािनकारक स्तर पार कर ले ं

खेत की मेड़ों पर वृक्ष बनाए रिखए जड़ ें मृद ा थामती है,ं छाया तापमान घटाती है, और वृक्ष वन काटे िबना फल , चारा तथा ईंधन दे ते
है ं

पोस्टर या मॉडल के लए: अच्छा अ भकल्प वह है जसम एक ही खेत दो बार दखाया जाए — एक ओर नंगी धान्य कृ ष, दूसरी
ओर बाड़ , वृक्ष , कंपोस्ट और पशुओं स हत म श्रत कृ ष — और तीर से दशाया जाए क खाद, चारा और परागणकारी कधर-
कधर जाते ह। प्रदशनी म कृ ष वै ा नक , कृषक और वशेष को आमं त्रत क जए, ता क इन सुझाव पर उन लोग से चचा हो
सके जो वास्तव म खेती करते ह।

अध्याय — एक नज़र म
पयावास वह स्थान है जो कसी जीव को नवास और वृ द्ध के लए उपयुक्त प र स्थ तयाँ दे ता है। उसके सजीव भाग जै वक
घटक ह तथा वायु, जल, मृदा, सूय का प्रकाश और तापमान अजै वक घटक ह।
एक ही प्रकार के जीव का समूह सम ष्ट है; एक पयावास को साझा करने वाली व भन्न सम ष्टयाँ मलकर समुदाय बनाती ह;
और समुदाय अजै वक घटक के साथ मलकर पा रतंत्र बनाता है।
हरे पादप उत्पादक ह — पा रतंत्र म ऊजा केवल उन्ह के ारा सूय से प्रवेश करती है। उपभोक्ता उस ऊजा को आगे ले जाते
ह और अपघटक मृत पदाथ को वघ टत करके पोषक तत्व मृदा को लौटा दे ते ह।
आहार श्रृंखला दशाती है क कौन कसे खाता है; प्रत्येक जीव को दो या अ धक प्रकार के जीव खाते ह, इस लए श्रृंखलाएँ
जुड़कर आहार जाल बनाती ह। श्रृंखला म जीव का स्थान उसका पोषी स्तर कहलाता है।
ऊजा एक ही दशा म बहती है और हर चरण पर ऊष्मा के रूप म नकल जाती है, इस लए ऊपर जाते-जाते संख्या घटती है
और आहार श्रृंखला परा मड जैसी दखती है। पदाथ का पुनचक्रण होता है — प्रकृ त म कुछ भी व्यथ नह होता।

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कक्षा 8 व ान अध्याय 12 प्रकृ त कैसे सामंजस्य म काय करती है
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स्पधा, सहोपका रता, सहभो जता और परजी वता सम ष्टय को संतुलन म रखती ह, जो ग तशील है, स्थर नह । वन क
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कटाई, प्रदूषण, अत्य धक दोहन और धान्य कृ ष इस संतुलन को बगाड़ते ह; संर क्षत क्षेत्र और संधारणीय कृ ष इसे संभालने म
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सहायक ह।

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त्व रत पुनरावृ त्त

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पद अथ अध्याय से उदाहरण कहाँ

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पयावास वह स्थान जो जीव को रहने और वृिद्ध करने की तालाब, वन, यहाँ तक क कसी वृक्ष क 12.1

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उपयुक्त पिरिस्थितयाँ दे ता है छाल

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जै वक घटक
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पय वास के सजीव भाग
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मछली, शैवाल, हरण, मशरूम, जीवाणु 12.1

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अजै वक घटक पय वास के िनज व भाग वायु, सूय का प्रकाश, जल, तापमान, मृदा 12.1
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सम ष्ट एक िनिश्चत समय में एक पय वास में एक ही पकार 1 मीटर × 1 मीटर क्षेत्र म एक ही प्रकार के 12.2

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के जीवों का समूह 20 पादप

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समुदाय
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एक ही पय वास को साझा करने वाली िविभन्न तालाब के पादप + जंतु + सूक्ष्मजीव 12.2
समिष्टयाँ
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पा रतंत्र समुद ाय और वे अजैिवक घटक िजनसे वह परस्पर तालाब, नद , झील (जलीय); वन, खेत 12.4

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(स्थलीय)

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िक्रया करता है

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उत्पादक / स्वपोषी पकाश संश्ले षण ारा अपना भोजन स्वयं बनाता है घास, कदन्न, बरगद 12.4

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ag उपभोक्ता / वषमपोषी हरण (शाकाहारी), तदुआ (माँसाहारी), 12.4
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अपना भोजन स्वयं नही ं बना सकता, अन्य जीवों पर

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िनभर रहता है कौवा (सवाहारी)

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अपघटक / मृतजीवी म ृत पदाथ ं को सरल पदाथ ं में िवघिटत करता है (म ृत मशरूम, जीवाणु, हाथी के मल पर भृंग 12.6

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+ जीवी)

आहार श्रृंखला / आहार कौन िकसे खाता है, इसका अनुक्रम / परस्पर जुड़ी घास → ट ा → मढक → साँप → 12.5

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जाल ृ लाएँ
आहार श्रंख उकाब

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.co ag तीसरे स्तर पर
पोषी स्तर ृ ला में जीव का िविशष्ट स्थान
आहार श्रंख उत्पादक पहले, शाकाहारी दूसरे, छोटे 12.5

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माँसाहारी

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agl सहोपका रता, सहभो जता,
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दोनों को लाभ / एक को लाभ, दू स रे पर पभाव नही ं / मधुमक्खी और पुष्प; वृक्ष पर ऑ कड; 12.8

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परजी वता एक को लाभ, दू स रे को हािन कुत्ते पर कलनी

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages60
Languagehindi
Updated19 Sep 2026