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2026
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हिन्दी (पाठ्यक्रम-अ ) कोड (002)
प्रहिदर्श प्रश्नपत्र*
कक्षा-दसवी ीं (2025-26)
हिर्ाशरिि समय: 3 घींटे अहर्किम अींक : 80
सामान्य हिदे र् :
णनम्नणिखिर् णनदे शोां को बहुर् सावधानी से पणिए और उनका सख्ती से अनुपािन कीणजए :
(i) इस प्रश्नपत्र में कुि चार िांड हैं - क,ि,ग,घ |
(ii) इस प्रश्नपत्र में कुि 15 प्रश्न हैं | सभी प्रश्न अणनवायत हैं |
(iii) प्रश्नपत्र में आर्ांररक णवकल्प णदए गए हैं |
(iv) प्रश्नोां के उत्तर णदए गए णनदे शोां का पािन करर्े हुए णिखिए |
िांड – क अांक
( अपणिर् बोध ) 14
1 णनम्नणिखिर् गद्ाां श को ध्यानपूवतक पिकर उस पर आधाररर् पूछे गए प्रश्नोां के उत्तर 7
णिखिए :
भारर्ीय सांस्कृणर्,जीवनशैिी और िान-पान में मोटे अनाजोां (णमिेट्स) का णवशेष स्र्ान रहा है |
ये णवणशष्ट अनाज हमारे स्वास्थ्य के णिए िाभदायक होने के सार्-सार् पयातवरि के णिए भी अच्छे
होर्े हैं क्ोांणक कम पानी और सांसाधन के बीच ये णवकणसर् हो जार्े हैं | यह हमारे णिए गौरव की
बार् है णक भारर् सरकार के सुझाव पर सांयुक्त राष्टर ने वषत 2023 को अांर्रराष्टरीय मोटा अनाज वषत
के रूप में घोणषर् णकया | णजसका उद्दे श्य मोटे अनाजोां को िेकर जागरूकर्ा फैिाना और इनके
उत्पादन व सेवन को बिावा दे ना है |
आमजन के बीच मोटे अनाजोां का सेवन णपछिी कई शर्ाखियोां से प्रचणिर् है , परन्तु इसके
पोषकीय और औषधीय गुिोां की जानकारी हाि ही में हुए जैव-रासायणनक अनुसांधानोां और
णचणकत्सा सांबांधी अध्ययनोां से सामने आई है | कुपोषि की समस्या के समाधान में मोटे अनाजोां की
अहम् भूणमका है | आधुणनक जीवनशैिी से उत्पन्न होने वािे रोगोां के सांदभत में मोटे अनाजोां के
अनेक स्वास्थ्य िाभोां को दु णनया ने जाना-पहचाना और सराहा है | मोटे अनाजोां में गेहूँ और धान
की अपेक्षा प्रोटीन और सांर्ुणिर् अमीनो अम्ल अणधक पाया जार्ा है | इस र्रह से ये मोटे अनाज
बाकी अनाजोां से पोषि के मामिे में श्रेष्ठ होर्े हैं | इसके अिावा, मोटे अनाज आहार सांबांधी रे शोां,
गुिवत्तापूित वसा और महत्त्वपूित िणनज जैसे- कैखलशयम, पोटै णशयम, मैग्नीणशयम, आयरन, ण ांक
र्र्ा बी-कॉम्प्लेक्स णवटाणमनोां के समृद्ध स्रोर् हैं |
मोटे अनाजोां में पोषि और स्वास्थ्य से जुड़े इर्ने फ़ायदोां के बावजूद वर्तमान समय में मानव
आबादी इनका सेवन नहीां करर्ी या बहुर् कम िोग इसे अपने िाने की र्ािी में जगह दे र्े हैं | यह
एक णवडां बना है |
स्रोर् – णवज्ञान प्रगणर् (माणसक पणत्रका)
(क) उपयुतक्त गद्ाांश णकस णवषयवस्तु पर आधाररर् है ? 1
(i) कुपोषि की समस्या पर
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(ii) मोटे अनाज के महत्त्व पर
(iii)सांर्ुणिर् आहार के महत्त्व पर
(iv)स्वास्थ्य सांबांधी समस्याओां पर
(ि) णनम्नणिखिर् कर्न और कारि पर णवचार करर्े हुए उपयुक्त णवकल्प का चयन कर णिखिए : 1
कर्न : मोटे अनाज बाकी अनाजोां से पोषि के मामिे में श्रेष्ठ होर्े हैं |
कारि : मोटे अनाजोां में अनेक पोषकीय और औषधीय िूणबयाूँ होर्ी हैं |
णवकल्प –
(i) कर्न ग़िर् है, णकांर्ु कारि सही है |
(ii) कर्न और कारि दोनोां ग़िर् हैं |
(iii) कर्न सही है और कारि कर्न की सही व्याख्या है |
(iv) कर्न सही है णकांर्ु कारि कर्न की सही व्याख्या नहीां है |
(ग) अांर्रराष्टरीय मोटा अनाज वषत का उद्दे श्य है – 1
उणचर् णवकल्प का चयन करें -
(I)मोटे अनाज के उत्पादन को बिावा दे ना |
(II)मोटे अनाज के प्रणर् जागरूकर्ा फैिाना |
(III)मोटे अनाज को मुख्य फ़सि घोणषर् करना |
(IV)मोटे अनाज की प्रणर्ष्ठा को क्षणर् पहुूँचाना ।
णवकल्प –
(i) कर्न (I) और (II) सही हैं |
(ii) केवि कर्न (III) सही है |
(iii) कर्न (I) और (IV) सही हैं |
(iv) कर्न (I), (II) और (IV) सही हैं |
(घ) आज मोटे अनाज अपने णकन गुिोां के कारि िोकणप्रय हो रहे हैं ? 2
(ङ) कुपोषि की समस्या के समाधान में मोटे अनाजोां की क्ा भूणमका हो सकर्ी है ? 2
2 णनम्नणिखिर् काव्याांश को ध्यानपूवतक पिकर उस पर आधाररर् पूछे गए प्रश्नोां के उत्तर णिखिए : 7
गुिाब का फूि है
हमारा पिा-णििा
मैंने उसे काफी
उिट-पुिट कर दे िा है
मुझे र्ो वह ऐसा ही णदिा
सबसे बड़ा सबूर्
उसके गुिाब होने का यह है
णक वह गाूँव में जाकर
बसने के णिए
र्ैयार नहीां है
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गाूँव में उसकी
प्रदशतनी कौन कराएगा
वहाूँ वह अपनी शोभा की
प्रशांसा णकससे कराएगा
वह फूिने के बाद
णकसी फसि में र्ोड़े ही
बदि जार्ा है
मूरि णकसान को फूिने के बाद
फसि दे ने वािा ही र्ो भार्ा है
गाूँव में इसणिए िीक है
अिसी और सरसोां और
णर्िी के फूि
जा नहीां सकर्े वहाूँ कदाणप
गुिाब और णििी के फूि
बुरा नहीां मानना चाणहए
इस गुिाब - वृणत्त का
गाूँव वािोां को
क्ोांणक वहाूँ रहना चाणहए णसफत ऐसे हार्-पाूँव वािोां को
जो बो सकर्े हैं
और काट सकर्े हैं
कुएूँ िोद सकर्े हैं
िाई पाट सकर्े हैं
और णफर भी चुपचाप
समाजवाद पर भाषि सुनकर
वोट दे सकर्े हैं
गुिाब के फूि को
– भवानी प्रसाद णमश्र
(क) प्रस्तुर् कणवर्ा में णकस भाव की प्रधानर्ा है ? 1
(i) हास्य
(ii) प्राकृणर्क सौांदयत
(iii) व्यांग्य
(iv) आक्रोश
(ि) ‘गुिाब’ णकसका प्रर्ीक है ? 1
(i) शहर के पिे -णििे नौजवानोां का |
(ii) शहर के वार्ावरि का |
(iii) शहर की ण ांदगी का |
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(iv) शहर की सुणवधाओां का |
(ग) णनम्नणिखिर् कर्न और कारि पर णवचार करर्े हुए उपयुक्त णवकल्प का चयन कर णिखिए : 1
कर्न : बुरा नहीां मानना चाणहए, इस गुिाब-वृणत्त का |
कारि : वह बचपन से शहर में ही पिा-बड़ा है |
णवकल्प :
(i) कर्न ग़िर् है, णकांर्ु कारि सही है |
(ii) कर्न और कारि दोनोां ही ग़िर् हैं |
(iii) कर्न सही है और कारि कर्न की सही व्याख्या है |
(iv) कर्न सही है णकांर्ु कारि कर्न की सही व्याख्या नहीां है |
(घ) गुिाब गाूँव में जाकर बसने के णिए क्ोां र्ैयार नहीां है ? 2
(ङ) कणवर्ा के आधार पर णिखिए णक णकसान को णकस र्रह के फूि भार्े हैं और क्ोां ? 2
िांड – ि 16
( व्यावहाररक व्याकरि )
3 णनदे शानुसार ‘रचना के आधार पर वाक् भेद’ पर आधाररर् पाूँच प्रश्नोां में से णकन्ीां चार प्रश्नोां के 4x1=4
उत्तर णिखिए :
(क) नवाब साहब ने र्ौणिया झाड़ा और सामने णबछा णिया |
(सरि वाक् में बदणिए)
(ि) हािदार साहब को उधर से गु रर्े समय मूणर्त में कुछ अांर्र णदिाई णदया |
(णमश्र वाक् में बदणिए)
(ग) मन्नू के एक इशारे पर िड़णकयाूँ कक्षा से बाहर णनकिकर नारे िगाने िगीां |
(सांयुक्त वाक् में बदणिए)
(घ) काणर्क आया नहीां णक बािगोणबन भगर् की प्रभाणर्याूँ शुरू हुईां |
(रचना की दृणष्ट से वाक् का भेद णिखिए)
(ङ) सबसे बड़ी बार् है णक काशी के पास उस्ताद णबखिल्ला िाूँ जैसा नायाब हीरा रहा है |
(रे िाांणकर् उपवाक् का भेद णिखिए)
4 णनदे शानुसार ‘वाच्य’ पर आधाररर् पाूँच प्रश्नोां में से णकन्ीां चार प्रश्नोां के उत्तर णिखिए : 4x1=4
(क) पर्ोह ने भगर् को दु णनयादारी से णनवृत्त कर णदया र्ा | (कमतवाच्य में बदणिए)
(ि) नवाब साहब द्वारा िीरे पर मसािा णछड़का गया। (कर्ृतवाच्य में बदणिए)
(ग) आओ,पेड़ की छाया में बैिे | (भाववाच्य में बदणिए)
(घ) मुझसे यह काम नहीां हो सकर्ा | (कर्ृतवाच्य में बदणिए)
(ङ) उद्धव द्वारा ज्ञान का उपदे श णदया गया। (वाच्य पहचानकर भेद बर्ाइए)
5 णनदे शानुसार ‘पद पररचय’ पर आधाररर् पाूँच प्रश्नोां में से णकन्ीां चार प्रश्नोां के रे िाांणकर् पदोां का पद- 4x1=4
पररचय णिखिए :
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(क) शीिा अग्रवाि को कॉिेज वािोां ने नोणटस र्मा णदया |
(ि) िीरे की पणनयार्ी फाूँकें बहुर् स्वाणदष्ट र्ीां।
(ग) शुक्ल पक्ष में चाूँद णनरां र्र बिर्ा है।
(घ) उनकी अूँगुणियाूँ िूँजड़ी पर िगार्ार चि रहीां र्ीां |
(ङ) शाबाश ! र्ुमने णकर्ना अच्छा कायत णकया।
6 णनदे शानुसार ‘अिांकार’ पर आधाररर् पाूँच प्रश्नोां में से णकन्ीां चार प्रश्नोां की रे िाांणकर् काव्य पांखक्तयोां 4x1=4
में अिांकार पहचान कर णिखिए :
(क) प्रीणर्-नदी में पाउूँ न बोरयौ |
(ि) कोणट कुणिस सम बचनु र्ुम्हारा |
ब्यर्त धरहु धनु बान कुिारा ||
(ग) आगे नणदया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उर्रे पार ।
रािा ने सोचा इस पार, र्ब र्क चेर्क र्ा उस पार ।।
(घ) णसमटा हुआ सांकोच है हवा की णर्रकन का |
(ङ) सुनर् जोग िागर् है ऐसौ, ज्ौां करुई ककरी |
िांड – ग 30
( पाठ्य पुस्तक एवां पूरक पाठ्य पुस्तक )
7 णनम्नणिखिर् पणिर् गद्ाांश पर आधाररर् बहुणवकल्पीय प्रश्नोां के सवातणधक उपयुक्त उत्तर वािे 5x1=5
णवकल्प चुनकर णिखिए :
वही पुराना स्वर, वही पुरानी र्ल्लीनर्ा | घर में पर्ोह रो रही है णजसे गाूँव की खियाूँ चुप कराने
की कोणशश कर रही हैं | णकांर्ु, बािगोणबन भगर् गाए जा रहे हैं ! हाूँ , गार्े -गार्े कभी-कभी
पर्ोह के न दीक भी जार्े और रोने के बदिे उत्सव मनाने को कहर्े। आत्मा परमात्मा के पास
चिी गई, णवरणहनी अपने प्रेमी से जा णमिी, भिा इससे बिकर आनांद की कौन बार् ? मैं कभी-
कभी सोचर्ा, यह पागि र्ो नहीां हो गए, णकांर्ु नहीां, वह जो कुछ कह रहे र्े उसमें उनका णवश्वास
बोि रहा र्ा-वह चरम णवश्वास, जो हमेशा ही मृत्यु पर णवजयी होर्ा आया है । बेटे के णक्रया-कमत
में र्ूि नहीां णकया; पर्ोह से ही आग णदिाई उसकी। णकांर्ु ज्ोां ही श्राद्ध की अवणध पूरी हो गई,
पर्ोह के भाई को बुिाकर उसके सार् कर णदया, यह आदे श दे र्े हुए णक इसकी दू सरी शादी कर
दे ना।
(क) बािगोणबन भगर् जी द्वारा णकया गया कौन-सा कायत सामाणजक परां परा के णवरुद्ध र्ा ?
(I) पर्ोह से बेटे की णचर्ा को आग णदिाना |
(II) पर्ोह को उसके भाई के सार् मायके भेजना |
(III) बेटे का श्राद्ध णवणध-णवधान से करना |
(IV) बेटे की मृत्यु का उत्सव मनाना |
णवकल्प –
(i) कर्न (I) और (II) सही हैं |
(ii) केवि कर्न (III) सही है |
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(iii) कर्न (I) और (IV) सही हैं |
(iv) कर्न (II) और (III) सही हैं |
(ि) ‘णवरहनी अपने प्रेमी से जा णमिी’ – इस कर्न में बािगोणबन भगर् के अनुसार
णवरहनी कौन है ?
(i) परमात्मा
(ii) आत्मा
(iii) काया
(iv) मृत्यु
(ग) णनम्नणिखिर् कर्न और कारि पर णवचार करर्े हुए उपयुक्त णवकल्प का चयन कर णिखिए :
कर्न : बािगोणबन भगर् ने अपने पुत्र को मुिाणग्न दे ने का कायत अपनी पुत्रवधु से करवाया |
कारि : बािगोणबन भगर् रूणिणवरोधी और नारी सम्मान के पक्षधर र्े |
णवकल्प :
(i) कर्न ग़िर् है , णकांर्ु कारि सही है |
(ii) कर्न और कारि दोनोां ही ग़िर् हैं |
(iii) कर्न सही है और कारि कर्न की सही व्याख्या है |
(iv) कर्न सही है णकांर्ु कारि कर्न की सही व्याख्या नहीां है |
(घ) िेिक को यह सांदेह है णक बािगोणबन भगर् कहीां पागि र्ो नहीां हो गए क्ोांणक
(I) वे पर्ोह को उसके भाई के सार् मायके भेज रहे र्े |
(II) वे रोने के बदिे उत्सव मनाने को कह रहे र्े ।
(III) वे पुत्र की मृत्यु के बाद गाए जा रहे र्े |
(IV) वे पर्ोह को चुप कराने की कोणशश कर रहे र्े |
णवकल्प –
(i) कर्न (I) और (II) सही हैं |
(ii) केवि कर्न (III) सही है |
(iii) कर्न (I) और (IV) सही हैं |
(iv) कर्न (II) और (III) सही हैं |
(ङ) बेटे की मृत्यु के बाद बािगोणबन भगर् अपनी बह से क्ा अपेक्षा रिर्े र्े ?
(i) वह उनकी आजीवन सेवा करे |
(ii) वह णवधवा का जीवन व्यर्ीर् करे |
(iii) वह कबीर के गीर् गाया करे |
(iv) वह पुनणवतवाह कर िे |
8 णनधातररर् गद् पािोां के आधार पर णनम्नणिखिर् चार प्रश्नोां में से णकन्ीां र्ीन प्रश्नोां के उत्तर िगभग 3x2=6
25-30 शिोां में णिखिए :
(क) ‘नेर्ाजी का चश्मा’ कहानी के आधार पर हािदार साहब के व्यखक्तत्व का पररचय
णिखिए |
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(ि) िेखिका मन्नू भांडारी ने अपनी माूँ की र्ुिना धरर्ी से क्ोां की है ?
‘एक कहानी यह भी’ पाि के आधार पर स्पष्ट कीणजए।
(ग) ‘मेरे माणिक एक सुर बक्श दे । सुर में वह र्ासीर पैदा कर णक आूँ िोां से सच्चे मोर्ी की र्रह
अनगि आूँ सू णनकि आएूँ |’ ‘नौबर्िाने में इबादर्’ पाि के आधार पर णबखिल्ला िाूँ के इस
कर्न को स्पष्ट कीणजए।
(घ) िेिक सांस्कृणर्-असांस्कृणर् और सभ्यर्ा-असभ्यर्ा के भ्रमजाि में फूँसे मनुष्ोां से क्ा प्रश्न करर्ा
है ?
9 णनम्नणिखिर् पणिर् काव्याां श पर आधाररर् बहुणवकल्पीय प्रश्नोां के सवातणधक उपयुक्त उत्तर वािे 5x1=5
णवकल्प चुनकर णिखिए :
र्ारसप्तक में जब बैिने िगर्ा है उसका गिा
प्रेरिा सार् छोड़र्ी हुई उत्साह अस्त होर्ा हुआ
आवा से राि जैसा कुछ णगरर्ा हुआ
र्भी मुख्य गायक को ढाूँिस बूँधार्ा
कहीां से चिा आर्ा है सांगर्कार का स्वर
कभी-कभी वह योां ही दे दे र्ा है उसका सार्
यह बर्ाने के णिए णक वह अकेिा नहीां है
और यह णक णफर से गाया जा सकर्ा है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवा में जो एक णहचक साफ़ सुनाई दे र्ी है
या अपने स्वर को ऊूँचा न उिाने की जो कोणशश है
उसे णवफिर्ा नहीां
उसकी मनुष्र्ा समझा जाना चाणहए |
(क) ‘र्ारसप्तक में जब बैिने िगर्ा है उसका गिा’ इस पांखक्त में ‘उसका’ शि णकसके णिए प्रयोग
णकया गया है ?
(i) सांगर्कार के णिए |
(ii) सांगीर्कार के णिए |
(iii) र्बिा वादक के णिए |
(iv) मुख्य गायक के णिए |
(ि) णनम्नणिखिर् काव्य पांखक्तयोां में से णकस पांखक्त से मुख्य गायक के उत्साह के क्षीि होने का पर्ा
चिर्ा है ?
सही णवकल्प का चयन कीणजए –
(I) आवा से राि जैसा कुछ णगरर्ा हुआ |
(II) प्रेरिा सार् छोड़र्ी हुई उत्साह अस्त होर्ा हुआ |
(III) कहीां से चिा आर्ा है सांगर्कार का स्वर |
(IV) उसकी आवा में जो एक णहचक साफ़ सुनाई दे र्ी है |
णवकल्प –
(i) कर्न (I) और (II) सही हैं |
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(ii) केवि कर्न (III) सही है |
(iii) कर्न (I) और(IV) सही हैं |
(iv) कर्न (II) और (III) सही हैं |
(ग) णनम्नणिखिर् कर्न और कारि पर णवचार करर्े हुए उपयुक्त णवकल्प का चयन कर णिखिए :
कर्न : सांगर्कार की आवा में एक णहचक साफ़ सुनाई दे र्ी है और वह
अपनी आवा को ऊूँचा नहीां उिने दे ने की कोणशश करर्ा है |
कारि : दू सरोां को सफ़ि बनाने के णिए त्याग करना मनुष्र्ा होर्ी है |
सांगर्कार का त्याग उसकी मनुष्र्ा का पररचायक है |
णवकल्प :
(i) कर्न ग़िर् है, णकांर्ु कारि सही है |
(ii) कर्न और कारि दोनोां ही ग़िर् हैं |
(iii) कर्न सही है और कारि कर्न की सही व्याख्या है |
(iv) कर्न सही है णकांर्ु कारि कर्न की सही व्याख्या नहीां है |
(घ) सांगर्कार णकस प्रकार मुख्य गायक को अहसास णदिार्ा है णक वह अकेिा नहीां है ?
(i) मुख्य गायक के समान भारी स्वर में गाकर |
(ii) मुख्य गायक को प्रेररर् करके |
(iii) मुख्य गायक से ऊूँचे स्वर में गाकर |
(iv) मुख्य गायक के टू टर्े स्वर में अपना स्वर णमिाकर |
(ङ) सांगर्कार के स्वर में णहचक सुनाई दे ने का क्ा कारि है ?
(i) सांगर्कार में आत्मणवश्वास का अभाव है |
(ii) सांगर्कार मुख्य गायक का मान बनाए रिना चाहर्ा है |
(iii) सांगर्कार को गायन में अभी प्रवीिर्ा नहीां आई है |
(iv) सांगर्कार में भय और हीनर्ा का भाव है |
10 णनधातररर् कणवर्ाओां के आधार पर णनम्नणिखिर् चार प्रश्नोां में से णकन्ीां र्ीन प्रश्नोां के उत्तर िगभग 3x2=6
25-30 शिोां में णिखिए :
(क) गोणपयोां को उद्धव से क्ोां कहना पड़ा – ‘हरर हैं राजनीणर् पणि आए’ |
‘सूरदास के पद’ के आधार पर उत्तर णिखिए |
(ि) “सो णबिगाउ णबहाई समाजा | न र् मारे जैहणहां सब राजा’- परशुराम जी के मुूँह से ऐसा सुनकर
िक्ष्मि की क्ा प्रणर्णक्रया रही ?
(ग) ‘उत्साह’ और ‘अट नहीां रही है ’ कणवर्ाओां के आधार पर सूयतकाांर् णत्रपािी ‘णनरािा’
जी के प्रकृणर् णचत्रि का वितन अपने शिोां में कीणजए।
(घ) ‘आत्मकथ्य’ कणवर्ा के माध्यम से कणव श्री ‘जयशांकर प्रसाद’ जी के व्यखक्तत्व की जो झिक
णमिर्ी है , वह उनकी ईमानदारी और साहस का प्रमाि है , स्पष्ट कीणजए।
11 पूरक पाठ्य पुस्तक के णनधातररर् पािोां पर आधाररर् णनम्नणिखिर् र्ीन प्रश्नोां में से णकन्ीां दो प्रश्नोां के 2x4=8
उत्तर िगभग 50-60 शिोां में णिखिए :
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(क) 'मार्ा का अूँचि' पाि में ग्राम्य सांस्कृणर् के णजस रूप का णचत्रि है - वह आधुणनक युग में पयातप्त
अांशोां में पररवणर्तर् हो चुका है। पररवणर्तर् रूप से कुछ उदाहरि दे र्े हुए इस कर्न के समर्तन में
अपने णवचार णिखिए ।
(ि) ‘यांत्रोां की दु णनया ने मनुष् को याांणत्रक व भाव शून्य बनाने का कायत णकया है , जबणक यात्राएूँ मनुष्
को भाव शून्य होने से रोकर्ी हैं।’ ‘साना-साना हार् जोणड़’ पाि के आधार पर आप अपने णवचार
णिखिए |
(ग) ‘मैं क्ोां णििर्ा हूँ ’ पाि के आधार पर बर्ाइए णक भीर्री णववशर्ा क्ा होर्ी है ? िेिक श्री अज्ञेय
जी ने इसे स्पष्ट करने के णिए णकसकी चचात की है ?
िांड – घ 20
( रचनात्मक िेिन )
12 णनम्नणिखिर् र्ीन णवषयोां में से हकसी एक णवषय पर सांकेर् णबन्दु ओां के आधार पर िगभग 120 1x6=6
शिोां में एक अनुच्छेद णिखिए :
(क) ऑनिाइन गेणमांग का बिर्ा जाि
• ऑनिाइन गेणमांग क्ा है ?
• बच्चोां और णकशोरोां पर बिर्ी पकड़
• ऑनिाइन गेणमांग के दु ष्पररिाम
(ि) स्वस्र् जीवन शैिी
• स्वस्र् जीवन शैिी की आवश्यकर्ा
• स्वस्र् आदर्ें णजनका पािन णकया जाना चाणहए
• स्वस्र् जीवनशैिी के िाभ
(ग) हाि ही में दे िी णफ़ल्म / नाटक की समीक्षा
• कहानी,पात्र,सांवाद,अणभनय कैसा िगा ?
• क्ा वास्तणवक जीवन के णनकट र्ी ?
• क्ा प्रेरिा णमिी ?
13 (क) आप आनांदी/आनांद हैं | अपने क्षेत्र में णबजिी की कटौर्ी से उत्पन्न समस्याओां का उल्लेि 1x5=5
करर्े हुए णकसी िोकणप्रय दै णनक समाचार-पत्र के सांपादक को िगभग 100 शिोां में पत्र णिखिए।
अर्वा
(ि) आप आनांदी/आनांद हैं | छोटे -मोटे रोगोां के णिए आपकी दादी माूँ द्वारा बर्ाए गए घरे िू नुस्ोां
को सांकणिर् करके आपने एक पुस्तक बनाई है | णजसका नाम आपने ‘दादी माूँ के घरे िू नुस्े’
रिा है | पुस्तक के प्रकाशन के अवसर पर अपनी दादी माूँ को आमांणत्रर् करर्े हुए उन्ें िगभग
100 शिोां में पत्र णिखिए।
14 (क) आप प्रेरिा/प्रेरक हैं । आपने णहन्दी णवषय में एम.ए.णकया है सार् ही आपके पास बी.एड. 1x5=5
की णडग्री भी है | आपके शहर के एक प्रणर्णष्ठर् णवद्ािय में णहन्दी णवषय के स्नार्क णशक्षकोां के
कुछ पद ररक्त हैं |आपको उस पद के णिए आवेदन करना है | इसके णिए िगभग 80 शिोां में
अपना एक स्ववृर् िेि र्ैयार कीणजए |
अर्वा
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(ि) आप प्रेरिा/प्रेरक हैं। आपके क्षेत्र में सफ़ाई व्यवस्र्ा चरमराई हुई है। सफ़ाई कमतचारी
अक्सर अनुपखस्र्र् रहर्े हैं। नगर णनगम अणधकारी को इससे अवगर् करार्े हुए िगभग 80 शिोां
में ई-मेि कीणजए ।
15 (क) सौर ऊजात के प्रयोग को प्रोत्साहन दे ने के णिए एक आकषतक णवज्ञापन िगभग 40 शिोां में 1x4=4
णवद् युर् मांत्रािय की ओर से र्ैयार कीणजए |
अर्वा
(ि) आपके णहन्दी णशक्षक/णशणक्षका का नया ‘काव्य सांग्रह’ प्रकाणशर् हुआ है | उन्ें इस अवसर
पर बधाई दे र्े हुए िगभग 40 शिोां में एक बधाई सांदेश णिखिए |
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Study Materials
Notes
Model Papers Class 6 Notes
Sample Papers Class 7 Notes
Half Yearly Sample Papers Class 8 Notes
Class 9 Notes
Important Resources
Class 10 Notes
Periodic Table
Class 11 Notes
Writing Skills / Formats
Maps of India / World Class 12 Notes
Books and Solutions
NCERT Books
NCERT Book Solutions
HC Verma Chapter Wise Solutions
RD Sharma Solutions
CGBSE Solutions