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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: प्राकृ तक संसाधन एवं उनका
उपयोग
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1 – 20 14 21 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 31 pages
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: प्राकृ तक संसाधन एवं उनका
उपयोग
कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग के स ूण एन.सी.ई.आर.ट . समाधान — पाठ्यपुस्तक समाज का
अध्ययन : भारत और उसके आगे, कक्षा 8 भाग 1 क वषयवस्तु भारत एवं वश्व : भूभाग एवं उनके नवासी का प्रथम अध्याय। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न
हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, दोन इसे अनदे खा न कर प्रश्न, दोन आइए वचार कर बॉक्स, सात आइए पता लगाएँ बॉक्स, पृष्ठ 19 का
पाठ्य प्रश्न तथा सभी पाँच प्रश्न और क्रयाकलाप।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8) 1 – 20
खं ड प्रश्न
14 21
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 1
वषयवस्तु : भारत एवं वश्व — भूभाग एवं उनके नवासी
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 हम प्राकृ तक संसाधन का वग करण कैसे करते ह?
कसी मानदं ड — अथात कसी समान वशेषता — को चुनकर और उसी के आधार पर संसाधन को समूह म रखकर। अध्याय दो
मानदं ड का प्रयोग करता है, इस लए वह दो अलग-अलग श्रेणी-समूह दे ता है।
1. उपयोग के आधार पर (पृष्ठ 4) —
ेणी यह अलग समूह क्य है अध्याय के उदाहरण
जीवन के लए इनके िबना पथ्ृ वी पर जीवन संभव नही ं और हम इन्हे ं वह वायु जसम हम श्वास लेते ह, वह जल जसे हम पीते
आवश्यक संसाधन स्वयं बना भी नही ं सकते ह, वह मृदा जो हम भोजन दे ती है
सामग्री के लए इनसे हम भौितक वस्तुए ँ बनाते है ं — उपयोिगता के लकड़ी (कुस , प्र तमा), संगमरमर, कोयला, सोना
संसाधन िलए भी और सौंद य के िलए भी
ऊजा के लए संसाधन ये भवनों, पिरवहन और सभी उत्पादन पिक्रयाओं को कोयला, जल, ख नज तेल, प्राकृ तक गैस, सूय का
चलाते है ं प्रकाश, पवन
2. नवीकरणीयता के आधार पर (पृष्ठ 5–8) —
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ेणी कसौट उदाहरण
नवीकरणीय पकृ ित इन्हे ं मानवीय समयाविध के भीतर पुनस्थ िपत और पुनजिनत सौर ऊज , पवन ऊज , पवािहत जल से ऊज , वनों
कर दे ती है से लकड़ ी
अनवीकरणीय लंबी अविध में बने; िजस अनुपात से हम उपयोग करते है ं उस अनुपात कोयला, पेटोिलयम, लोहा, ताँबा, सोना
में पुनःपूित नही ं
पाकृितक संसाधन
मानदंड 1 : उपयोग मानदंड 2 : नवीकरणीयता
जीवन के िलए
सामगी के िलए नवीकरणीय अनवीकरणीय
आवश्यक
ऊज के िलए
एक ही संसाधन दोनों ओर आ सकता है — कोयला ऊज का ोत भी है और अनवीकरणीय भी।
दो मानदं ड, दो श्रेणी-समूह। कोयला दोन म आता है, और प्रवा हत जल भी।
वग करण क्य करते ह: अध्याय श्रे णयाँ दे ने से पहले यही समझाता है। हम कुछ समान वशेषताएँ चुनते ह, समूह
का नामकरण करते ह, और फर एक ही शब्द पूरे वणन का काम कर दे ता है। ‘अनवीकरणीय’ कहते ही सुनने वाला
जान जाता है क भंडार सी मत है, तेज़ी से उपयोग करने से वह बढ़े गा नह , और कसी दन वकल्प खोजना ही होगा
— यह सब बार-बार समझाना नह पड़ता।
सुझाव: कोई श्रेणी उतनी ही अच्छ है जतना उसका मानदं ड। स्वयं से पू छए क वग करण कस प्रश्न का उत्तर दे ने
के लए है। ‘क्या म इसे सदा उपयोग कर सकता हूँ?’ से नवीकरणीय/अनवीकरणीय मलता है; ‘मुझे इसक
आवश्यकता कस लए है?’ से उपयोग-आधा रत तीन श्रे णयाँ।
प्र.2 जीवन के व भन्न पक्ष और प्राकृ तक संसाधन के वतरण के मध्य क्या संबंध है?
प्राकृ तक संसाधन पृथ्वी पर या कसी दे श के भीतर भी समान रूप से वत रत नह ह, और मानव जीवन का लगभग हर पक्ष इसी
तथ्य के अनुसार ढलता है।
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जीवन का वतरण उसे कैसे आकार दे ता है अध्याय का प्रमाण
पक्ष
लोग कहाँ संस ाधन के िनकट उ ोग लगते है,ं उ ोगों के आस- पृष्ठ 9 — प्राकृ तक संसाधन के नकट स्थत उद्योग स्थानीय
बसते ह पास बिस्तयाँ बनती है ं और लोग वहाँ आते है ं लोग के लए आजी वका के अवसर सृ जत करते ह
जीवन क बस्ती के साथ आध िु नक सुिवधाएँ आती है ं पृष्ठ 9 — ‘जीवन क गुणवत्ता म सुधार लाने वाली आधु नक
गुणवत्ता सु वधाएँ सुलभ होती ह’
व ापन और वही िवकास उन लोगों को उजाड़ता है जो संस ाधन के पृष्ठ 9–10 — संसाधन-संपन्न क्षेत्र के लोग को घर से
संघष ऊपर बसे है;ं पावन स्थान संक ट में पड़ते है ं वस्था पत होना पड़ा; कुछ मामल म पावन स्थान संकट म ह,
जससे संघष उत्पन्न होते ह
व्यापार रा ीय और अंतर ीय व्यापार संस ाधनों की भौगोिलक पृष्ठ 10 — वूट्ज स्ट ल; व्यापार ने भारत म बड़े सा ाज्य के
िस्थित पर िनभर करता है; कच्चे माल में कौशल जुड़ने वकास को ग त द
से िवलक्षण उत्पाद बनते है ं
राज्य और पकृ ित राजनैितक सीमाओं पर ध्यान नही ं दे ती, इसिलए पृष्ठ 10 — कावेरी जल का कनाटक, त मलनाडु , केरल
दे श के संबंध साझा संस ाधन समझौते से ही बाँटा जा सकता है और पुडुचेरी के मध्य वतरण; इसके लए आपसी संवाद और
कुशल प्रबंधन आवश्यक हुआ
युद्ध संस ाधनों पर िनयंत्र ण युद्धों का कारण रहा है और आज पृष्ठ 8 — ‘प्राकृ तक संसाधन पर नयंत्रण पाने के लए अनेक
भी है युद्ध लड़े गए ह और आज भी लड़े जा रहे ह’
समाज के संस ाधन उपलब्ध होने पर भी उस तक पहच
ु ँ पायः पृष्ठ 18 — नगर के अनेक क्षेत्र म पीने के जल क पयाप्त
भीतर न्याय असमान होती है आपू त नह ; वायु प्रदूषण उन्ह सवा धक प्रभा वत करता है जो
स्वयं को बचा नह सकते
यह संबंध स्वतः क्य नह बनता: अध्याय यहाँ सावधान है। प्रचुरता समृ द्ध क गारंट नह है — यही ‘प्रचुरता का
वरोधाभास’ है (पृष्ठ 11)। कसी भंडार को स्थायी लाभ म बदलने का काम मानवीय ज्ञान, सुशासन और रणनी तक
योजना करती है; इनके बना समृद्ध भंडार भी केवल एक अस्थायी अप्रत्या शत लाभ बनकर रह जाता है।
प्र.3 प्राकृ तक संसाधन के असंधारणीय उपयोग/अ तशोषण से क्या आशय है?
इसका आशय है संसाधन का ऐसा उपयोग जो पुन ापन और पुनजनन क प्राकृ तक लय को तोड़ दे — अथात प्रकृ त क
भरपाई करने क ग त से अ धक तेज़ी से लेना। इससे वह संसाधन, जो अनंत काल तक चल सकता था, नवीकरण करना बंद कर
दे ता है और उस पर नभर सब कुछ लड़खड़ाने लगता है।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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m.कहाँ
कसका प रणाम अध्याय म
अ तशोषण
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वृक्षों के बढ़ ने की गित से अिधक तेज़ी से लकड़ी काटने पर अंततः वन नष्ट हो जाते a
वन
as em है ं पृष्ठ 6
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aजीवाश्म ईंधन + तापमान वृिद्ध; िहमालय के िहमनद इतने शीघ िपघल रहे है ं िक वष उनकी पूित नही ं कर पाती; पृष्ठ 6
वन-कटाई ‘वाटर टावर’ पर िनभर मैद ानी जनसंख्या की जल सुर क्षा संक ट में
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मछली-भंडार व्यवसायीकरण से टू ना की संख्या में तीव और व्यापक ास; टू ना छोटी मछिलयों और झी ंगों को पृष्ठ 6 — इसे
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खाकर समुद ी पािरिस्थितकी तंत्र को संतिु लत रखती है, इसिलए असंतल
ु न आगे फै लता है अनदे खा न कर
न दयाँ (अप शष्ट के
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जो अपिशष्ट सड़-गलकर िकसी जीव का भोजन नही ं बन पाता, वह चक्र में व्यवधान डालता है; पृष्ठ 7
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लए) नदी िवषाक्त हो जाती है और जीवन का पोषण नही ं कर पाती
.
m पृष्ठ 12–14
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भूजल दोहन पुनभरण से अिधक होने पर कमी बढ़ ती जाती है — िनष्कषण महँग ा, िफर असंभव।
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पंजाब में जल लगभग 30 मीटर की गहराई तक चला गया और लगभग 80% क्षेत्र ‘अित-
l a se दोिहत’ घोिषत है
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a मृदा रासायिनक उवरकों और कीटनाशकों के अनुिचत उपयोग से म ृद ा-क्षरण; पंजाब में वही रसायन पृष्ठ 12–13
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भूजल में घुल कर स्वास्थ्य संक ट बन गए
ं भारत का m
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अनवीकरणीय वे समाप्त हो जाते है।
a s e कोयला लगभग 50 वष और चल सकता है, जबिक माँग बढ़ ती पृष्ठ 8
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संसाधन जा रही है
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पृष्ठ 12 के अनुसार, इन वषय का अध्ययन करने वाले वैज्ञा नक ने चेतावनी द है क प्राकृ तक संसाधन के अ ववेकपूण दोहन से
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प्रदूषण, जैव- व वधता क हा न और जलवायु प रवतन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई ह, जो हाल के वष म तीव्रता से घ टत हो रही
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a s eहाmन लाभ से अ धक समय तक क्य रहती है: पंजाब इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है। ह रत क्रां त वास्तव म
a gl सफल रही — उसने दे श के एक बड़े भाग को भोजन दया और भारत को खाद्यान्न म आत्म नभर बनाया। परंतु खाद्य
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सुरक्षा अल्पाव ध के लए मली, जब क द घका लक प रणाम को ‘ठ क करने म समय और प्रयास लगेगा’। कुछ
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ऋतुओं म मला लाभ दशक क हा न से चुकाया
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इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 3
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coखाmन कर
ानीय परंपराओं म प्रकृ त क प वत्रता
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इसे अनदे
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क्या आप ऐसी प्रथाओं के बारे म जानते ह जो इसे प्र त ब बत करती ह?
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प्र.1
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हाँ, अनेक। जन परंपराओं म प्रकृ त पालनकता और पोषणकता मानी जाती है, वहाँ यह सम्मान केवल कहा नह जाता — वह
दै नक व्यवहार म गुँथा होता है।
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प्रथा यह क्या दशाती है
घर म तुलसी-पूजा (आपक पुस्तक का चत्र 1.6) पिरवार के कल्याण हेत ु पितिदन एक पौधे की दे खभाल और सम्मान
प वत्र उपवन — दे वराई, कावु, सरना, ओरण वन के ऐसे भाग जहाँ कटाई विजत है। पष्ृ ठ 2 पर अध्याय स्वयं इन्हे ं सांस्कृ ितक रूप से
अस्वीकाय दोहन का उदाहरण बताता है — और इसीिलए वे आज भी खड़े है ं
सूय को अ य अ पत करना ( चत्र 1.9) पकाश और ऊष्मा के पित कृ तज्ञतास्वरूप जल का अपण
न दय को माता कहना — गंगा, नमदा, कावेरी िजस नदी को माता कहा जाए, उसे नाला बनाना किठन हो जाता है
फसल और पशुओं से जुड़े त्योहार — प गल, बहू, म ृद ा, सूय, गाय-बैल और वष के पित ठीक उसी क्षण कृ तज्ञता जब उन्होंने िदया है
ओणम, बैसाखी, गोवधन पूजा, नाग पंचमी
वृक्ष का व्य क्तगत सम्मान — पीपल, बरगद, नीम िजस वृक्ष का नाम और रक्षक हो, वह पायः नही ं काटा जाता
को धागा बाँधना और जल दे ना
सामान्य (हल्क ) जुताई ( चत्र 1.4) भूिमगत पािरिस्थितकी तंत्र में न्यूनतम व्यवधान और म ृद ा की नमी बनी रहना
ये प्रथाएँ आ ा से आगे क्य महत्वपूण ह: दे खए क हर प्रथा करती क्या है। प वत्र उपवन स्थानीय जैव-
व वधता बचाते ह और भूजल का पुनभरण करते ह। परती दन और मछली न पकड़ने क ऋतुएँ जनसंख्या को
उबरने का अवसर दे ती ह। वृक्ष का सम्मान उसे खड़ा रखता है। पृष्ठ 6 पर अध्याय का भी यही तक है — समुदाय
प्रजनन काल म मछली पकड़ना नयं त्रत करते थे और इसी से मछ लय क संख्या बनी रहती थी। श्रद्धा व्यवहार म
ठ क उसी समय संयम बन जाती है जब संयम आवश्यक होता है।
यह क जए: घर के कसी बड़े से पू छए क आपके यहाँ कौन-सा पौधा, वृक्ष, नद या पशु वशेष माना जाता है और
कस दन। फर ल खए क वह प्रथा कसक रक्षा करती है। दो स्तंभ बनाइए — प्रथा, और वह जसका वह संरक्षण
करती है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 3
दै नक वस्तुओं का उद्गम- ोत खोजना
आइए वचार कर
प्र.1 थोड़ा ठह रए। स्वयं और अपने आस-पास क वस्तुओं को दे खए। इनम से प्रत्येक का उद्गम- ोत क्या है? कसी-
न- कसी मोड़ पर ये सभी प्रकृ त क ओर ले जाती ह, यहाँ तक क आपके वस्त्र पर लगा प्ला स्टक का बटन भी।
कमरे क हर वस्तु का सूत्र अंततः प्रकृ त तक जाता है — प्रायः कई चरण से होकर, और इसी लए उसका उद्गम भूल जाना आसान
है।
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वस्तु कससे बनी जो आता है
सूती कमीज़ कपास का रे शा मृद ा, जल और सूय के पकाश पर उगे पौधे से
प्ला स्टक का बटन पेटो-रसायनों से बना बहुल क खिनज तेल से — लाखों वष पहले दबे जीवों के अवशेष
कॉपी और यह पाठ्यपुस्तक कागज़ वृक्षों की लुगदी से
परकार, ब्लेड, साइ कल इस्पात धरती से िनकाला लौह अयस्क , कोयले से गलाया गया
खड़क का काँच काँच िसिलका रे त, तीव ताप पर िपघलाई गई
कक्षा क द वार सीमेंट, रे त, ईंट चूना-पत्थर, रे त, िचकनी िम ी — और बहुत सारी ऊज
पंखे क बजली िव तु संयंत्र में उत्पन्न कोयला, पवािहत जल , सूय का पकाश या पवन
आपका भोजन अनाज, सिब्ज़याँ, दू ध मृद ा, जल , सूय का पकाश और पौधों पर पले पशु
आपका अपना शरीर भोजन, जल, वायु िनरंतर पकृ ित से — इस सूची में आप भी अपवाद नही ं है ं
अध्याय ठहरने को क्य कहता है: वस्तु और उसके उद्गम के बीच जतने अ धक चरण ह गे, वह उतनी ही कम
प्राकृ तक दखेगी। बटन न मत लगता है और आम प्राकृ तक — जब क दोन का आरंभ प्रकृ त म है। एक बार यह
ंखला जोड़ लेने पर ‘संसाधन’ दूर क खान और वन का शब्द नह रह जाता, वह आपक मेज़ पर रखी वस्तुओं का
शब्द बन जाता है। दृ ष्ट का यही प रवतन पूरे अध्याय का उ े श्य है।
स्वयं जाँ चए: आज सुबह छु ई हुई कोई पाँच वस्तुएँ चु नए। प्रत्येक के लए तीन तीर क ंखला ल खए — वस्तु
→ सामग्री → प्रकृ त का तत्व। जो ंखला पूरी न हो, वही सबसे रोचक है — पता क जए क वह कससे बनी है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 4
प्राकृ तक संसाधन के वग करण के मानदं ड
आइए वचार कर
प्र.1 प्राकृ तक संसाधन को वग कृत करने के लए हम कौन-से व भन्न मानदं ड का उपयोग कर सकते ह?
मानदं ड वह समान वशेषता है जसके आधार पर आप छाँटते ह। मानदं ड बद लए, और आपको एक भन्न — परंतु उतना ही सही —
श्रेणी-समूह मलेगा।
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मानदं ड इससे बनने वाली े णयाँ उदाहरण
हम इसका उपयोग कस लए करते ह जीवन के िलए आवश्यक · सामग ी वायु और जल · लकड़ी और संगमरमर · कोयला और
(अध्याय का पहला मानदं ड) के िलए · ऊज के िलए सूय का प्रकाश
प्रकृ त इसका नवीकरण करती है या नवीकरणीय · अनवीकरणीय पवन, प्रवा हत जल, वन क लकड़ी · कोयला,
नह (अध्याय का दूसरा मानदं ड) पे ो लयम, सोना
सजीव या नज व उद्गम जैिवक · अजैिवक वन, मत्स्य, पशुधन · ख नज, धातुए,ँ च ान
कहाँ पाया जाता है वायुम ंडलीय · जलीय · भूिम एवं म ृद ा वायु · न दयाँ और भूजल · कृ ष भू म · लौह अयस्क,
· भू-गभ य (खिनज) बॉक्साइट
वकास क अव ा ज्ञात परंत ु अनुपयोगी · उपयोग में समुद्र क उस गहराई का ख नज तेल जहाँ हम अभी
पहुँच नह सकते · मुंबई हाई, जो उत्पादन म है
स्वा मत्व व्यिक्तगत · सामुद ाियक · रा ीय · कसान का कुआँ · गाँव का तालाब या उपवन · कोयला
अंतर ीय क्षेत्र · खुला महासागर
एक से अ धक मानदं ड क्य उपयोगी ह: हर मानदं ड एक अलग प्रश्न का उत्तर दे ता है। ‘जै वक या अजै वक’
बताता है क भंडार स्वयं क वृ द्ध कर सकता है या नह । ‘नवीकरणीय या नह ’ बताता है क आप उसे लेते रह
सकते ह या नह । ‘स्वामी कौन है’ बताता है क उपयोग से पहले कसक सहम त चा हए — और इसी लए कावेरी के
लए चार राज्य के बीच समझौता आवश्यक हुआ (पृष्ठ 10)। कोई एक वग करण ‘सही’ नह होता; आप वह मानदं ड
चुनते ह जो आपके नणय पर खरा उतरे।
सुझाव: अच्छा मानदं ड हर संसाधन को छाँट सके और हर एक को केवल एक ही श्रेणी म रखे। अपने मानदं ड को
कसी क ठन उदाहरण पर पर खए — जैसे भूजल। यह नवीकृत तो होता है, पर धीरे; इसी कारण उसका अ त-दोहन
सरल है, और इसी लए आगे अध्याय म पंजाब का प्रकरण आता है।
इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 6
मछली पकड़ने म पारंप रक संयम और टू ना का ास
इसे अनदे खा न कर
प्र.1 क्या आप ऐसी अन्य पारंप रक प्रथाओं के वषय म जानते ह, जो पा र तक तंत्र को संतु लत रखने म सहायता
करती ह?
हाँ। इनम से अ धकांश ठ क उसी तरह काय करती ह जैसे बॉक्स म व णत मछली-प्रथा — वे उपयोग को ठ क उसी समय या स्थान
पर रोक दे ती ह जहाँ संसाधन का पुनजनन हो रहा होता है।
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प्रथा कसक रक्षा संतुलन कैसे बना रहता है
प वत्र उपवन (दे वराई, कावु, सरना, ओरण) मूल वनों के भाग कुछ काटा नह जाता, इस लए आस-पास क भू म साफ़ हो जाने
पर भी बीज का स्रोत तथा प क्षय , क ट और जल का आश्रय
बचा रहता है
चक्र य चराई और परती वष चरागाह और म ृद ा पशुओं के लौटने से पहले घास और मृदा के जीव उबर जाते ह
फसल-चक्र और म त फसल म ृद ा की उवरता भन्न फसल भन्न पोषक तत्व लेती ह और क ट-चक्र तोड़ती ह —
पृष्ठ 16 पर वृक्षायुवद के अंतगत अध्याय ने दोन का नाम लया है
गोबर व अन्य प्राकृ तक उवरक, पलवार म ृद ा का जीवन और वष-दर-वष केवल नकालने के स्थान पर जै वक पदाथ मृदा को
(गीली घास) नमी लौटाया जाता है (पृष्ठ 12)
पारंप रक जल-संचयन; तालाब, पोखर, भूजल वषा-जल भू म पर इतनी दे र रुकता है क रसकर नीचे जा सके,
जोहड़, कुंड, बाव ड़याँ जससे पुनभरण दोहन के साथ चलता रहे (पृष्ठ 12)
फलदार-पु पत वृक्ष न काटना; फसल का पक्षी, चमगादड़ और बीज फैलाने और परागण करने वाले जीव को अभाव क ऋतु म
कुछ भाग छोड़ दे ना परागणकत भोजन मलता रहता है
वशेष प्रजा तय क रक्षा — पीपल और आधार-पजाितयाँ ऐसी एक प्रजा त के हटने से अनेक अन्य असंतु लत हो जाती ह,
बरगद, साँप, बंदर, बश्नोई गाँव के नकट इस लए उसक रक्षा पूरे जाल क रक्षा है
काला हरण
मछली पकड़ने और शकार क बंद ऋतुए ँ मछली और वन्य प्रजनन नबाध होता है — ठ क वही प्रथा जसका वणन बॉक्स म
जीव है
व्यवसायीकरण ने टू ना-प्रथा को क्य तोड़ा: जो गाँव हर वष उसी जल म मछली पकड़ता है, उसका ही नुकसान
होगा य द वह जल खाली कर दे — इस लए वहाँ संयम लाभदायक है। जो व्यावसा यक बेड़ा अगले क्षेत्र म चला जा
सकता है, उसे यह हा न नह उठानी पड़ती; उसका मूल्य कोई और, बाद म चुकाता है। इसी लए, जैसा बॉक्स कहता
है, टू ना क संख्या घटने पर उत्तर परंपरा से नह , मछली पकड़ने पर नयंत्रण के समझौत से दे ना पड़ा — और
फर भी यह प्रजा त घट ही रही है।
क्या आप जानते ह? बॉक्स स्वयं बताता है क टू ना अपनी संख्या से आगे भी क्य महत्वपूण है — छोट मछ लय ,
झ ग आ द का सेवन करके वे समुद्र पा र स्थ तक तंत्र को संतु लत रखती ह। कसी बड़े परभक्षी के हटते ही वे जीव
बढ़ जाते ह जन्ह वह खाता था, और नीचे का पूरा आहार-जाल बदल जाता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 7
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प्रकृ त क पुन ापन-पुनजनन क्षमता को रोकने वाले मानवीय कायकलाप
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आइए पता लगाएँ
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a s emआस-पास के उन मानवीय कायकलाप क पहचान कर जनके प रणामस्वरूप प्रकृ त अपनी पुन ापन
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और पुनजनन क क्षमता खो रही है। प्रकृ त के चक्र को पुन ा पत करने के लए कस प्रकार के हस्तक्षेप कए
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जा सकते ह?
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g उसका उत्तर देने वाला हस्तक्षेप। अच्छा उत्तर वही है जसम वे बात ह जन्ह
दो स्तंभ म काम क जए — पहले कायकलाप,aफर
आप वद्यालय जाते समय उँ गली रखकर दखा सक।
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पुन ापन रोकने वाला प्रकृ त स्वयं क्य नह उबर पाती हस्तक्षेप
कायकलाप
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eउपचार
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a औद्यो गक अप शष्ट नाले या नद
बना का मल-जल और यह अपिशष्ट सड़-गलकर िकसी जीव का पवािहत करने से पहले उपचार; मानकों का पालन;
भोजन नही ं बन पाता; चक्र टू ट जाता है और जल -िनकाय का पुनरुद्धार और पित माह गुणवत्ता की
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जाँच
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म छोड़ना जल िवषाक्त हो जाता है (पष्ृ ठ 7)
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m नही ं दे ता
eिरसने agl
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प्ला स्टक और पैके जग खुले यह अपघिटत नही ं होता, नािलयाँ रोकता है कचरे का पथृ क्करण, एकल -उपयोग प्ल ािस्टक में कमी,
और वष -जलaको
agl
मैदान या ना लय म फकना गीले भाग की क म्पोिस्टंग, सूखे का पुनच णक्र
हर खुली सतह — आँगन, वष -जल िरसने के स्थान पर बह जाता है; छत का वष -जल संचयन; पुनभरण ग े ; जल िरसने
co m का पुनरुद्धार
दे ने वाली फ़ श; तालाबों और पोखरों
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पगडंडी, खेल का मैदान — पर भूजल स्तर लगातार िगरता है
सीमट डाल दे ना
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सचाई.cकo
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m agफु हार िसंचाई; स्थानीय वष के अनुरूप
टपक और
aseअत्य धक पं पग, ट टय और
े लए नलकूप से दोहन पुनभरण से आगे िनकल जाता है और
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कमी वष-दर-वष बढ़ ती है (पष्ृ ठ 12) फसले ं; िरसाव की मरम्मत; उपचािरत जल का
पाइप का रसाव पुनरुपयोग
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omचले जाते है ं
आवास, छाया, म ृद ा की पकड़ और जल- मूल पजाितयाँ लगाना — अध् याय पष्ृ ठ 5 पर स्पष्ट है िक
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नमाण के लए वृक्ष क कटाई;
शोधन — सब एक c
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उपवन साफ़ करना साथ वहाँ मूल रूप से उगने वाले वृक्ष लगाने से ही
a s पािरिस्थितकी तंत्र का पुनस्थ पन होता है
फसल-अवशेष और कूड़ा जलाना aजोgजैlिवक पदाथ मृदा को लौटना था वह अवशेष की क म्पोिस्टंग या पलवार; चारे या बायोगैस में
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पदू षण बनकर वायु में चला जाता है उपयोग
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गोबर और पाक ितक उवरक , पलवार, बहु-
a , नीम जैसे पाकृितक कीट-िनरोधक
com का भारी या बार-बार
रासाय नक उवरक और म ृद ा क्षीण होती है; रसायन भूजल में घुल जाते
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क टनाशक है ं (पष्ृ ठ 12–13) फसलीकरण
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उपयोग
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नद -तल से बालू खनन; बाढ़-क्षेत्र नदी जल को रोकने, स्वच्छ करने और खनन का िनयमन; बाढ़ -क्षेत्रों को िनम ण से मुक्त
या आद्रभू म पर नमाण जलभतृ भरने की क्षमता खो दे ती है रखना; आद भूिमयों का संरक्षण
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s e mका नाला बना उपचार का गंदा पानी नहर म ले जाता है, खाली प्लॉट म प्ला स्टक
laगली का हर आँगन सीमट से ढका है। प रणाम यह है क नहर का पानी काला है और उसम
नमूना उत्तर: ‘हमारे मोहल्ले म बाज़ार के पीछे
फका और जलाया जाता है, और हमारी
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मछली नह , धुआँ हमारी कक्षाओं तक आता है, और हमारे हडपंप को अब तीन वष पहले क तुलना म कह अ धक चलाना पड़ता
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग AglaSem · NCERT Solutions
है। हमने वाड कायालय को तीन सुझाव दए — बाज़ार के लए ढका हुआ क ोस्ट ग ा और सूखे कचरे का अलग संग्रह, चार
नुक्कड़ पर पुनभरण ग े, और नहर के कनारे नीम, पीपल तथा जामुन क पं क्त, जसम हर कक्षा दो वष तक दस पौध को स चने
क ज़म्मेदारी ले।’
हस्तक्षेप का टू टे हुए चरण से मेल क्य आवश्यक है: प्रकृ त का चक्र कसी एक न त बदु पर टू टता है —
पुनभरण, अपघटन, या आवास। वृक्षारोपण बना उपचार वाले अप शष्ट पाइप को ठ क नह करता, और उपचार
संयंत्र जलभृत को नह भरता। पहले टू टा हुआ चरण खो जए, फर मरम्मत चु नए।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 8
अपने क्षेत्र के नवीकरणीय संसाधन पर एक शोध-अध्ययन
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अपने क्षेत्र म नवीकरणीय संसाधन के प्रकार का आकलन करने के लए एक छोटा शोध-अध्ययन कर। आप
अपने शक्षक के साथ अपने अध्ययन के भौगो लक क्षेत्र और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के ोत पर चचा
कर सकते ह। समय के साथ उनक त म क्या प रवतन आया है? एक छोट -सी रपोट बनाएँ जसम प रवतन
के कारण तथा आगे क्या कया जा सकता है, इसका उल्लेख हो।
यह एक क्षेत्र-अध्ययन है, इस लए यहाँ व ध ही सबसे महत्वपूण है। इसे कैसे कर और रपोट म क्या होना चा हए —
चरण 1 — क्षेत्र न त क जए। यह पहले शक्षक के साथ तय क जए। एक वाड, एक ग्राम पंचायत, एक वकास खंड या एक
छोटा जल-ग्रहण क्षेत्र उपयुक्त है; ‘मेरा राज्य’ नह । सीमा लख ली जए और उसे एक रेखा चत्र-मान चत्र पर अं कत क जए।
चरण 2 — उप त नवीकरणीय संसाधन क सूची बनाइए। अध्याय के उदाहरण के अनुसार स्थानीय स्तर पर खो जए।
संसाधन क्या दज करना है
सूय का प्रकाश िकतने महीने आकाश स्वच्छ रहता है; क्षेत्र में सौर पैनल, सौर पंप, सौर पथ-पकाश
पवन िकसी ऋतु में तेज़ हवा चलती है या नही ं; कोई पवनचक्की या पवन-पंप
प्रवा हत जल निदयाँ, नहरे ं, नाले ; कोई लघु जल िव तु संयंत्र या पनचक्की (िचत्र 1.2 दे िखए)
सतही जल और भूजल तालाब, पोखर, कु एँ, हैड
ं पंप, नलकू प — और उनकी गहराई
वन और वृक्ष वृक्षों के अंतगत क्षेत्र फल, पजाितयाँ, और उनसे क्या एकत्र िकया जाता है — ईंध न, चारा, फल, शहद, पत्ते
मृदा उगाई जाने वाली फसले ं, उपज, परती की पथा, गोबर बनाम रासायिनक उवरक
मछली और पशुधन िजन तालाबों-निदयों में मछली पकड़ी जाती है; चरागाह
चरण 3 — समय के साथ आए प रवतन को सद्ध क जए। एक बार का आँकड़ा अध्ययन नह होता; तब और अब, दोन
चा हए।
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बड़े-बुजग से बातचीत — पाँच-छह लोग से वही तीन प्रश्न: तब कुआँ कतना गहरा था और अब कतना; तब यहाँ क्या उगता
था; तब वन से क्या लाया जाता था।
शासक य ोत — पंचायत या नगरपा लका कायालय, खंड कृ ष या वन कायालय, भूजल बोड क ज़ला रपोट, जनगणना,
राज्य के पोटल।
प्रत्यक्ष अवलोकन — आज जो है उसक गनती और चत्र। उसी स्थान के पुराने चत्र सबसे अच्छा प्रमाण होते ह।
चरण 4 — रपोट ल खए पाँच छोटे भाग म : (i) क्षेत्र और उसे चुनने का कारण; (ii) मले हुए संसाधन; (iii) ‘तब और अब’ क
ता लका, स्रोत के नाम स हत; (iv) प्रत्येक प रवतन के कारण; (v) आगे क्या कया जा सकता है और कसे करना है।
नमूना उत्तर (अंश): ‘हमारा अध्ययन वद्यालय के आस-पास के चार वाड का था। मं दर के पास वाले तालाब म 1990 के दशक म
माच तक जल रहता था; आज वह जनवरी म सूख जाता है और उसका आधा तल पाट दया गया है। जन पाँच बुजग से हमने बात
क , उनम से तीन ने बताया क उनक युवावस्था म खुले कुओं म लगभग 6 मीटर पर जल मल जाता था; पछले वष खोदे गए दो
नलकूप 55 और 60 मीटर तक गए। कारण — सड़क चौड़ी करते समय तालाब क आवक-नाली बंद हो गई, अ धकांश आँगन
सीमट के हो गए इस लए वषा-जल रसता नह , और उत्तर के खेत म ज्वार-बाजरा क जगह धान आ गया। आगे क्या — तालाब क
सफ़ाई और गहरीकरण तथा आवक-नाली फर से खोलना, नए नमाण के लए पुनभरण ग े अ नवाय करना, और कृ ष कायालय के
साथ मलकर बाजरे का एक प्रदशन-प्लॉट लगाना।’
‘प रवतन के कारण’ सबसे क ठन भाग क्य है: गरते भूजल स्तर या घटते उपवन का प्रायः एक से अ धक कारण
होता है, और वे कारण आपस म जुड़े होते ह। ऊपर के अंश म सड़क, सीमट और फसल का चुनाव — तीन एक ही
दशा म धकेल रहे ह। इनम से केवल एक का नाम लेने पर वह उपाय मलेगा जो काम नह करेगा।
सुझाव: हर आँकड़े के साथ यह भी ल खए क वह कहाँ से आया — व्य क्त, कायालय या दस्तावेज़, और त थ।
बना स्रोत का आँकड़ा जाँचा नह जा सकता, और बना स्रोत क रपोट पर कारवाई नह हो सकती।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 8
प्र त दन उपयोग होने वाले अनवीकरणीय संसाधन और उनके नवीकरणीय वकल्प
आइए पता लगाएँ
प्र.1 कौन-से अनवीकरणीय संसाधन ह जनका आप प्र त दन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते ह? उनके
संभा वत नवीकरणीय वकल्प क्या ह? नवीकरणीय ऊजा क ओर अग्रसर होने के लए हम कौन-से उपाय कर
सकते ह?
इनम से अ धकांश हम तक अप्रत्यक्ष रूप से पहुँचते ह — बजली, प रवहन और न मत वस्तुओं के माध्यम से — इसी लए उन पर
ध्यान नह जाता।
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अनवीकरणीय आप इसे प्र त दन कैसे उपयोग करते ह संभा वत नवीकरणीय वकल्प
संसाधन
कोयला अपत्यक्ष रूप से — बत्ती, पंखे, पंप और फ़ ोन चाज सौर, पवन और जल िव तु ; इस्पात में हाइडोजन या
करने की अिधकांश िबजली; इस्पात िनम ण भी िव तु आधािरत िविधयाँ
पे ो लयम (पे ोल, पत्यक्ष और अपत्यक्ष — िव ालय की बस या ऑटो, नवीकरणीय िबजली से चलने वाले िव तु वाहन; साइिकल
डीज़ल) बाज़ार तक आया सामान, डीज़ल पंप और जनरे टर और पैद ल चलना; अनेक छोटे वाहनों के स्थान पर बस
और रे ल ; जैव-ईंधन
एल.पी.जी. / घर में खाना पकाना गोबर और रसोई के कचरे से बायोगैस ; सौर कु कर;
प्राकृ तक गैस बेहतर चू े; नवीकरणीय िबजली पर इंडक्शन
लोहा और इस्पात साइिकल, बतन, टोंटी, िव ालय का गेट, दीवारों का कोई वास्तिवक िवक ल्प नही ं — इसिलए स् ै प का
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सिरया पुनच ण, और ऐसी वस्तुए ँ बनाना जो िटकें और मरम्मत
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हो सकें
ऐलु म नयम पन्नी, िडब्बे, िखड़की के फे म, बतन पुनचि त ऐलुिमिनयम, िजसमें नई धातु की तुल ना में बहुत
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(बॉक्साइट से) कम ऊज लगती है
ताँबा घर की हर तार और आपका चाजर पुरानी वायिरंग और इले क्टॉिनक कचरे से पुनःपािप्त
चूना-पत्थर (सीमट) वह भवन िजसमें आप बैठे है ं पष्ृ ठ 15 की अध्याय की अपनी सूची — पारंपिरक पत्थर
और मृद ा, नई वनस्पित-आधािरत सामिगयाँ, व्यथ
प्ल ािस्टक से पुनिनिमत सामगी
प्ला स्टक बोतल, थैल ी, कलम, कमीज़ का बटन कपड़ ा, जूट, कागज़ , इस्पात और काँच के पात्र; पुनः
(पे ो लयम से) खरीदने के स्थान पर पुनः भरवाना
भूजल पीने और धोने के िलए — यह धीरे नवीकृ त होता है, संिचत वष -जल , पुनरुद्धार िकए गए तालाब-पोखर,
और पुनभरण से अिधक िनकाल ले ने पर व्यवहार में उपचािरत और पुनरुपयोग िकया गया जल
अनवीकरणीय हो जाता है
नवीकरणीय क ओर बढ़ने के उपाय —
1. पहले उपयोग घटाइए। सबसे सस्ती ऊजा वह है जो खच ही न हो — बत्ती बुझाइए, दन का प्रकाश काम म लाइए, उपकरण
क दे खभाल कराइए, छोट दूरी पैदल तय क जए। जो उपभोग ही नह हुआ, उसका वकल्प भी नह ढूँ ढ़ना पड़ता।
2. ोत बद लए। पृष्ठ 17 का अध्याय का अपना सुझाव — यथासंभव अ धक-से-अ धक काय के लए नवीकरणीय ऊजा स्रोत
क ओर संक्रमण। वद्यालय या घर क छत पर सौर पैनल; सचाई के लए सौर पंप; वद्युत गीज़र के स्थान पर सौर जल-तापक।
3. जो ईंधन जलाता है उसे व ुत पर लाइए, और फर वह वद्युत नवीकरणीय स्रोत से ली जए — इसी लए वद्युत बस उतनी
ही सहायक है जतना उसके पीछे का ग्रड स्वच्छ है।
4. धातुओं का पुनचक्रण और सामग्री का पुनरुपयोग, जससे वही ताँबा और ऐलु म नयम एक बार के स्थान पर दस बार काम
आए।
5. सीमट कम प्रयोग करके नमाण — अध्याय ारा बताए गए वकल्प से : पत्थर, मृदा, वनस्प त-आधा रत और पुन न मत
सामग्री।
6. बड़े स्तर पर भी काय। कोई एक प रवार सौर पाक नह बना सकता; इसी लए अंतरा ीय सौर गठबंधन (पृष्ठ 18) महत्वपूण
है — साझा वत्त और तकनीक वशेषज्ञता ही सूय क रोशनी से समृद्ध दे श को वास्तव म यह प रवतन करने दे ते ह।
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यह संक्रमण तत्काल क्य नह हो सकता: अध्याय यहाँ यथाथवाद है। जनसंख्या वृ द्ध और वकास काय म
तीव्रता के साथ बजली क माँग बढ़ रही है और उसे अब भी कोयला पूरा कर रहा है, जब क भारत का भंडार लगभग
50 वष का अनुमा नत है। इस लए काय दोहरा है — जो है उसका ववेकपूण उपयोग ता क वह पयाप्त समय चले,
और उसके समाप्त होने से पहले वह नवीकरणीय क्षमता खड़ी कर लेना जो उसक जगह लेगी।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 9
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग
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चत्र 1.11 — महत्वपूण ख नज का वतरण
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a s em1.11 म दए गए मान चत्र को ध्यान से दे खए। महत्वपूण ख नज के असमान वतरण पर ध्यान द जए।
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आपके क्षेत्र म कस प्रकार के संसाधन उपलब्ध ह? उनका वतरण कैसे हुआ है?
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20° उ. चंद पुर तालचेर
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मुंबई हाई कोरापुट
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बैलाडीला बंगाल की खाड़ ी
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70° पू. 75° पू. 80° पू. 85° पू. 90° पू. 95° पू.
संकेितका
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agकोयला तेल लौह अयस्क बॉक्साइट
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चत्र 1.11, पृष्ठ 9 — मान चत्र पुनः बनाया गया। पुस्तक के मान चत्र म अं कत ठ क उन्ह ान पर कोयला, तेल, लौह
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अयस्क और बॉक्साइट दखाए गए ह।
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मान चत्र सबसे पहले यही सद्ध करता है क उसक संके तका के चार ख नज — कोयला, तेल, लौह अयस्क और बॉक्साइट —
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बल्कुल भी समान रूप से नह फैले ह। हर ख नज कुछ ही ज़ल म है और दे श के अ धकांश भाग म कह नह ।
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चत्र 1.11 का ख नज-वार पाठ —
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ख नज मान चत्र पर अं कत ान प्र तरूप
(संके तका
चह्न)
कोयला (काला रानीगंज, झिरया, बोकारो, कोरबा, तालचेर , एक प जो प्राय प के उत्तर-पूव म फैली है — झारखंड,
वृत्त) िसंग रे नी, नेवेल ी; असम में माकु म और जंजी प म बंगाल, ओ डशा, छत्तीसगढ़ — तथा सुदूर द क्षण म
नेवेली और ऊपरी असम अलग-थलग
तेल (पीला त्रभुज) िडगबोई, नाहरकिटया, मोरान, हुग रीजन (असम); केवल दो गुच्छे — उत्तर-पूव म ऊपरी असम और प म म
कलोल और अंक ले श्वर (ग ज
ु रात); बसीन और गुजरात तथा मुंबई के नकट समुद्र
मुंबई हाई, दोनों अपतटीय
लौह अयस्क गआ
ु , मयूर भंज, कें दुझार, दुग , बैल ाडीला, चंद पुर ; दो चाप — एक पूव म (झारखंड–ओ डशा–छत्तीसगढ़) और
(गुलाबी वग) रत्नािगरी, गोवा, बेल्लारी, िचत्रदुग , िचकमंग लूर , दूसरा प म एवं द क्षण म (महाराष्ट्र, गोवा, कनाटक)
कु दे म ुख, तुम कु रू
बॉक्साइट (नारंगी कटनी, अमरकं टक, िबलासपुर , कोरापुट सबसे कम स्थान, जो मध्य-पूव पठार पर एक रेखा म ह
समचतुभुज)
इस प्र तरूप का अथ। ध्यान द जए क झारखंड–ओ डशा–छत्तीसगढ़ क प म कोयला और लौह अयस्क कतनी बार साथ-साथ
मलते ह। इसी लए भारत के बड़े इस्पात नगर — बोकारो, दुगापुर, राउरकेला, भलाई — ठ क वह वक सत हुए : अयस्क और उसे
गलाने के लए आवश्यक कोयला, दोन पास ही थे। पृष्ठ 9 क अध्याय क बात यहाँ आँख से दखती है — उद्योग संसाधन के
नकट लगते ह और उनके आस-पास ब स्तयाँ वक सत होती ह।
यह भी दे खए क मान चत्र क्या नह दखाता। उत्तरी मैदान , राजस्थान और सुदूर द क्षण के अ धकांश भाग पर कोई चह्न नह है। ये
क्षेत्र नधन नह ह — उनक संपदा इन चार ख नज के स्थान पर मृदा, जल, सूय का प्रकाश और जन-श क्त है। कोई भी संसाधन-
मान चत्र केवल वही दखाता है जो उसक संके तका मापती है।
नमूना उत्तर (अपने क्षेत्र के लए): ‘हमारा ज़ला मैदानी भाग म है और चत्र 1.11 पर उस पर कोई चह्न नह है। हमारे संसाधन ह
जलोढ़ मृदा, नहर और भूजल, लगभग आठ माह क तेज़ धूप, और नद -तट क ईंट- म । इनका वतरण नद ने तय कया है —
सबसे उपजाऊ मृदा और सबसे ऊँचा भूजल स्तर नद के दोन ओर क चौड़ी प म है, ईंट-भ े तट पर ही ह, और नद से दूर क
पुरानी भू म को अ धक सचाई चा हए। मान चत्र पर अं कत नकटतम ख नज सगरौली का कोयला है, जो हमसे लगभग 200
क.मी. द क्षण म है और वह से हमारी बजली आती है।’
स्वयं जाँ चए: पहले मान चत्र पर अपना ज़ला ढूँ ढ़ए, फर कसी भी दशा म नकटतम चह्न दे खए और उसक दूरी
मापनी (0 – 200 – 400 क.मी.) से ना पए। य द कुछ अं कत न हो, तो उन संसाधन क सूची बनाइए जन पर
आपका ज़ला वास्तव म जीता है — मृदा, जल, सूय का प्रकाश, वन, पत्थर, बालू, मछली — और बताइए क उनम
से प्रत्येक का वतरण ज़ले के भीतर कैसा है।
असमान वतरण इतना महत्वपूण क्य है: क्य क ख नज के मामले म कोई भी क्षेत्र आत्म नभर नह हो सकता।
इसी एक तथ्य से व्यापार, रेल, बंदरगाह, खनन नगर क ओर प्रवास, राज्य के बीच समझौते — और, जैसा पृष्ठ 8
स्पष्ट कहता है, प्राकृ तक संसाधन पर नयंत्रण के लए लड़े जाने वाले युद्ध जन्म लेते ह।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 10
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग AglaSem · NCERT Solutions
दो प्राकृ तक संसाधन का मान चत्रण तथा उनके दोहन के प्रभाव
आइए पता लगाएँ
प्र.1 कन्ह दो प्राकृ तक संसाधन का चयन क जए। भारत के व भन्न भाग म उनक उपलब्धता के वषय म
जानकारी एकत्र क जए। उन्ह मान चत्र पर अं कत क जए। आप उनके वतरण के बारे म क्या दे खते ह? उनसे
जुड़ी आ थक ग त व धयाँ कस प्रकार क ह?
ऐसे दो संसाधन चु नए जनका स्वभाव भन्न हो — एक ख नज और एक नवीकरणीय — जससे मान चत्र का अंतर स्वयं आपको
कुछ सखाए। नीचे लौह अयस्क और सौर ऊजा से यह कया गया है।
कैसे क जए: भारत का रूपरेखा मान चत्र ली जए, संके तका म हर संसाधन के लए अलग चह्न और रंग र खए, चत्र 1.11 तथा
कसी एटलस या राज्य सरकार के पोटल से मुख्य क्षेत्र अं कत क जए, और मान चत्र के नीचे एक पं क्त म ल खए क हर आँकड़ा
कहाँ से आया।
लौह अयस्क (अनवीकरणीय) सौर ऊजा (नवीकरणीय)
कहाँ मलता ओिडशा (कें दुझार, मयूर भंज), झारखंड (ग आ
ु ), छत्तीसगढ़ राजस्थान, गुजरात, ल ाख, मध्य पदे श, महारा ,
है (बैल ाडीला, दुग ), कन टक (बेल्लारी, िचत्रदुग , कु दे म ुख, कन टक , आंध पदे श और तिमलनाडु में सव िधक —
तुम कु रू), गोवा, महारा (रत्नािगरी, चंद पुर ) — सभी िचत्र 1.11 पष्ृ ठ 5 पर अध्याय कहता है िक भारत के अिधकांश भाग
पर अंिकत में पचुर धूप उपल ब्ध है
मान चत्र पर िबंद ु। कु छ सघन गच्ु छे ; शेष लगभग पूर ा दे श खाली। यह के वल पवणता। सवत्र उपल ब्ध, शुष्क उ त्तर-पिश्चम में अिधक
प्र तरूप वही ं है जहाँ िवशेष च ाने ं बनी ं तीव और अिधक बादल वाले भागों में कम। इसे कही ं
ढोना नही ं पड़ ता
आ थक खनन; िपसाई और साद
ं ण; रे ल और बंद रगाह से ढुल ाई राजस्थान का भड़ ला (िचत्र 1.21) तथा रायचूर,
ग त व धयाँ (पारादीप, िवशाखापत्तनम, मामुगाओ); बोकारो, िभलाई, कन टक का सौर पाक (िचत्र 1.22); पैनल और इन्वटर
राउरके ला के इस्पात संयंत्र ; आगे इंजीिनयिरंग , वाहन, िनम ण िनम ण; छत पर स्थापना और अनुरक्षण; िसंचाई के सौर
और रे ल उ ोग; खनन बिस्तयाँ पंप; िगड संचरण
सीमाएँ सीिमत भंडार। भंडार समाप्त होने पर उस नगर को जीिवका समाप्त होने वाला भंडार नही,ं परंत ु भूिम, रात के िलए
का दू स रा आधार खोजना पड़ता है भंडारण और उपभोक्ता तक ले जाने के िलए िगड चािहए
आप क्या दे खते ह: अनवीकरणीय संसाधन स्थान-बद्ध होता है — वह उद्योग और बस्ती को कुछ ही बदुओं से बाँध दे ता है और
शेष सब कुछ उसी के पास आना पड़ता है। सूय के प्रकाश जैसा नवीकरणीय संसाधन वत रत होता है — वह आ थक ग त व ध को
क द्रत होने के बजाय फैलने दे ता है। यही अंतर, केवल मात्रा नह , इस बात का कारण है क अध्याय दोन श्रे णय को अलग-अलग
दे खता है।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 उन भाग म प्राकृ तक संसाधन के दोहन के वतमान और भावी पी ढ़य पर पड़ने वाले प्रभाव पर चचा क जए।
प्रकृ त के उपहार का ववेकपूवक उपयोग करने क व धयाँ सुझाइए।
दोहन से वतमान म वास्त वक लाभ मलते ह और भ वष्य पर वास्त वक भार पड़ता है; अध्याय दोन को एक साथ दे खने को कहता
है।
वतमान पीढ़ के लए भावी पी ढ़य के लए
लाभ: स्थानीय लोगों को आजीिवका; िव ालय, अस्पताल और पिरवहन वाली हािन: भंडार घटा या समाप्त; भारत का कोयला लगभग
बिस्तयाँ; दू स रों के िलए भी आिथक अवसर; इस्पात, सीमेंट और िबजली के िलए 50 वष और चलने का अनुम ान (पष्ृ ठ 8)
कच्चा माल; राज्य को राजस्व (पष्ृ ठ 9)
मूल्य: संस ाधन-संपन्न क्षेत्र ों के लोगों का िवस्थापन; पावन स्थानों पर संक ट और क्षीण भूिम और वन; िगरा हुआ भूजल स्तर ; बने रहने वाले
उससे उपजे संघ ष (पष्ृ ठ 9–10); खानों और सीमेंट कारखानों के आस-पास धूल , पदू षक — पंजाब के भूजल में घुले रसायन आज ही
शोर और पदू िषत जल (पष्ृ ठ 15) स्वास्थ् य संक ट है ं (पष्ृ ठ 13)
लाभ कें िद त और तत्काल है मूल्य िबखरा हुआ और िवलंिबत है — इसीिलए उसकी
उपेक्षा करना सरल है
प्रकृ त के उपहार के ववेकपूण उपयोग क व धयाँ — अध्याय के अपने सुझाव :
उपयोग क दर को नवीकरण क दर के बराबर र खए। लकड़ी उतनी ही जतनी वन उगा सके; भूजल उतना ही जतना
पुनभ रत हो सके। यही एकमात्र कसौट नवीकरणीय को नवीकरणीय बनाए रखती है (पृष्ठ 6)।
अनवीकरणीय संसाधन को ख चए — उनका ववेकपूण उपयोग क जए ता क वे इतने लंबे समय तक चल क मानवता
अ धक संधारणीय वकल्प ढूँ ढ़ सके (पृष्ठ 8 और 17)।
पुनचक्रण और पुनरुपयोग — अध्याय का आरंभ ही इसी वचार से होता है : एक ऐसी अथव्यवस्था जो प्रयुक्त संसाधन का
पुनरुपयोग करे, अप शष्ट को न्यूनतम करे और समाप्त हो चुके संसाधन क पुनःपू त करे।
जो लया है उसे लौटाइए। खनन क गई भू म को भरकर उसम मूल प्रजा तयाँ लगाइए; तालाब और पोखर का पुनरुद्धार
क जए; वषा-जल का संचयन क जए (पृष्ठ 5 और 12)।
अप शष्ट का उपचार कारखाने म ही क जए, जससे नद से वह सहने को न कहा जाए जसे वह अपघ टत नह कर सकती
(पृष्ठ 7); कद्र य प्रदूषण नयंत्रण बोड के दशा- नदश का पालन क जए, जैसे सीमट कारखान को करना है (पृष्ठ 15)।
कम प्रदूषण वाली सामग्री — कुछ सीमट के स्थान पर पत्थर, मृदा, वनस्प त-आधा रत और पुन न मत सामग्री (पृष्ठ 15)।
वहाँ के लोग को नणय, रोज़गार और मुआवज़े म स म्म लत क जए, जससे वकास का आरंभ वस्थापन से न हो।
मूल्य-वधन दे श म ही क जए। अयस्क को इस्पात और इस्पात को मशीन बनाना ही वह माग है जससे कोई क्षेत्र ‘प्रचुरता के
वरोधाभास’ से बचता है — इसी लए भारत ने ऐसे उद्योग म नवेश कया (पृष्ठ 11)।
यह केवल आपू त का नह , न्याय का भी प्रश्न क्य है: दोहन से लाभ पाने वाले और उसका मूल्य चुकाने वाले
प्रायः एक ही लोग नह होते — और भावी पी ढ़याँ, जन्ह खाली भंडार और प्रदू षत जलभृत मलगे, अपना पक्ष रख
ही नह सकत । पृष्ठ 19 के लोकसंग्रह के पीछे यही वचार है : सभी क भलाई के लए काय करने का अथ है उन्ह भी
गनना जो कक्ष म उप स्थत नह ह।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 10
अंतरा ीय संदभ म संसाधन को लेकर संघष
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अंतरा ीय संदभ म ऐसे कसी संघष के वषय म जानकारी प्राप्त क जए। अपने अन्वेषण पर कक्षा म चचा कर।
अध्याय ने अभी-अभी दे श के भीतर का उदाहरण दया है — कनाटक, त मलनाडु , केरल और पुडुचेरी के बीच कावेरी का जल, जहाँ
शां त बनाए रखने के लए आपसी संवाद और कुशल प्रबंधन आवश्यक हुआ। अंतराष्ट्रीय स्तर पर यही समस्या है, पर पक्ष के ऊपर
कोई एक सरकार नह होती — इसी लए पृष्ठ 10 कहता है क ‘पड़ोसी दे श के मध्य ऐसे समझौते करना सरल नह है’।
जन प्रकरण पर आप खोज कर सकते ह —
प्रकरण ववा दत ववाद क्या है अब तक क्या कया गया
संसाधन
सधु — भारत नदी-जल सीमा पार बहने वाली नद -प्रणाली के जल का िसंध ु जल संिध (1960), िवश्व बैकं की
और पा कस्तान बँटवारा मध्यस्थता में, िजसने पूव और पिश्चमी
निदयाँ दोनों दे शों में बाँटी ं
ब्रह्मपुत्र (आपक नदी-जल यही नद तब्बत म यालुग सांगपो, भारत म आँक ड़ ों के आदान-पदान की व्यवस्था और
पुस्तक का चत्र ब्रह्मपुत्र और बांग्लादे श म जमुना है; ऊपरी क्षेत्र ि पक्षीय वात एँ; पूरे बेिसन की कोई एक
1.12) के बाँध और मोड़ नीचे के दे श क चता ह संिध नही ं
नील नदी-जल ऊपरी क्षेत्र म इ थयो पया का वशाल बाँध और अफ ीकी संघ की मध्यस्थता में लंबी वात एँ;
नीचे मस्र तथा सूडान क नभरता अभी पूरी तरह हल नही ं
फरक्का पर गंगा नदी-जल शुष्क ऋतु म बांग्लादे श तक कतना प्रवाह पहुँचे भारत और बाग्ं लादे श के बीच गंगा जल
बँटवारा संिध (1996) ने बँटवारे का सूत्र
तय िकया
आक टक तेल , गैस , बफ़ पीछे हटने के साथ समुद्र-तल पर परस्पर संयक्ु त रा समुद ी िविध के अंतगत दावे;
मत्स्य, जहाज़ी टकराते दावे आक िटक पिरषद एक मंच दे ती है
माग
खुले महासागर के मछली-भंडार अनेक दे श के बेड़े एक ही प्रवासी भंडार पर, क्षेत्रीय मत्स्य समझौते और पकड़ की
मत्स्य क्षेत्र जैसे टू ना सीमाएँ — वही समझौते िजनका उ ल्ले ख
पष्ृ ठ 6 के ‘इसे अनदे खा न करे ं’ बॉक्स में है
कक्षा म कैसे प्रस्तुत कर — चार चरण, ता क चचा प्रमाण पर टक रहे : (i) संसाधन और दे श के नाम; (ii) वह भूगोल जससे
समस्या बनी, प्रायः यह क संसाधन उस सीमा को पार करता है जो प्रकृ त ने कभी ख ची ही नह ; (iii) हर पक्ष का तक उसी के
शब्द म, नष्पक्षता से; (iv) कौन-सी व्यवस्था आजमाई गई — सं ध, अ धकरण, मध्यस्थता, आँकड़ का साझा करना — और वह
टक या नह ।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 1 प्राकृ तक संसाधन एवं उनका उपयोग
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ये संघष इतने लंबे क्य चलते ह: नद या मछली-भंडार एक ही भौ तक तंत्र है, परंतु उस पर अनेक संप्रभु सत्ताओं
m a s emनह जसे
gl और जनसंख्या, वषा
का शासन है। ऊपरी क्षेत्र जो लेता है, वह नचले क्षेत्र को नह मलता; और ऐसा कोई ऊपरी न्यायालय
. coबाध्य ह । इस लए स्थायी समाधान वही है जसे दोन पक्ष न्यायसंगत मानa—
em बदलने पर उस न्याय पर फर से बातचीत करनी पड़ती है।
दोन मानने को
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और आवश्यकताएँ
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सुझाव: प्रस्तु त म कम-से-कम दो भन्न दे श के स्रोत ली जए। साझा संसाधन के ववाद म कसी एक दे श का स्रोत
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सच तो बताएगा, पर अधूरा सच।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 11
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‘प्रचुरता का वरोधाभास’
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आपके वचार से व भन्न भौगो लक क्षेत्र म उपलब्ध प्राकृ तक संसाधन के उपयोग को सक्षम बनाने के लए
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प्र.1
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कौन-कौन से इनपुट आवश्यक ह?
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धरती के नीचे पड़ा भंडार अभी संसाधन नह है। उसे संसाधन बनाने म अनेक इनपुट लगते ह — और पृष्ठ 11 क समापन पं क्त
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नणायक इनपुट गना दे ती है : मानवीय ज्ञान, सुशासन और रणनी तक योजना ही तय करती है क वे स्थायी लाभ बनगे या अस्थायी
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अप्रत्या शत लाभ।
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इनपुट यह क्या करता है इसके बना
ान और प्रौ ो गक भंडार खोजती है, वहाँ तक पहच
ु ँ ाती है और पृष्ठ 2 का अध्याय का अपना उदाहरण — समुद्र क जस
पसंस्करण करती है गहराई म स्थत ख नज तेल तक पहुँचने क तकनीक हमारे
पास नह , वह संसाधन ही नह है
कुशल जन-श क्त अिभयंता, भूवैज्ञ ािनक, मशीन चालक, संयंत्र बन तो जाता है, पर न चलाया जा सकता है न सुधारा
तकनीिशयन — और उन्हे ं तैयार करने वाले
िव ालय व पिशक्षण संस्थान
पूँजी खान खोदने, संयंत्र लगाने, िग ड िबछाने का धन बात सवक्षण से आगे नह बढ़ती। ध्यान द जए क अंतराष्ट्रीय
— जो पायः िकसी भी लाभ से वष ं पहले लगाना सौर गठबंधन का एक काय ‘ मतव्ययी वत्तपोषण वकल्प
पड़ता है उपलब्ध कराना’ ही है (पृष्ठ 18)
ऊजा और जल िनष्कषण और पसंस्करण का हर चरण दोनों काम रुक जाता है — या स्थानीय भूजल सूख जाता है और
खाता है एक दूसरी समस्या खड़ी हो जाती है
प रवहन और संपक सड़क, रे ल , बंद रगाह, पाइपलाइन और संचरण भंडार वह बंद पड़ा रह जाता है; बना रेल के धरती म पड़े
लाइने,ं जो संस ाधन को उपयोग-स्थल तक ले अयस्क का कोई मूल्य नह
जाएँ
मूल्य बढ़ाने वाले कच्चे माल को उच्च मूल्य वाले उत्पाद में ठ क वही वफलता जसे ‘प्रचुरता का वरोधाभास’ कहते ह :
उ ोग बदलते है ं — अयस्क से इस्पात, इस्पात से ऐसे उद्योग न बना पाने वाली अथव्यवस्थाएँ संपदा नयात
मशीन करती रहकर भी नधन रहती ह
सुशासन और स्पष्ट प े दे ना, पदू षण की सीमाएँ तय करना और वस्थापन, पावन स्थल पर संघष और अ नयं त्रत प्रदूषण
नयम लागू कराना, िववाद सुल झाना, वहाँ के लोगों की
रक्षा करना
रणनी तक योजना यह तय करती है िक िकतनी गित से िनकाले ं, एक उछाल, फर खाली भंडार और बना काम के नगर
भंडार समाप्त होने पर क्या करे ं, और िवकल्प
समय रहते कै से खड़ा हो
सांस्कृ तक स्वीकायता दोहन को वहाँ रहने वालों की दृ िष्ट में वैध बनाती पृष्ठ 2 क तीसरी शत टू ट जाती है — जैसे प वत्र उपवन म
और ानीय सहम त है वृक्ष काटना
भूगोल बदलते ही इनपुट बदल जाते ह। राजस्थान के सौर पाक को चा हए समतल, सस्ती, धूप वाली भू म, पैनल, भंडारण और
संचरण। हमाचल क जल वद्युत प रयोजना को चा हए तीव्र ढाल, भरोसेमंद जल-प्रवाह और क ठन पवतीय अ भयां त्रक । मुंबई
हाई के अपतट य संयंत्र को चा हए समुद्र मंच, हे लकॉप्टर और समुद्र के नीचे पाइपलाइन। वचार वही, सूची अलग।
भारत ‘संसाधन अ भशाप’ से बड़ी सीमा तक क्य बचा: पृष्ठ 11 सीधे कारण दे ता है — अपनी बढ़ती
आवश्यकताओं क पू त हेतु ऐसे उद्योग के वकास म नवेश करके, जो संसाधन को उच्च मूल्य वाले उत्पाद म
बदल सक। इसी लए पूव प का कोयला और लौह अयस्क केवल कच्चे अयस्क का नयात न रहकर इस्पात संयंत्र
और इंजी नय रग उद्योग बने। इन्ह इनपुट को आप इसी पुस्तक के आगे के अध्याय म ‘उत्पादन के कारक’ के रूप
म पढ़गे।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 19
लोकसंग्रह और प्रकृ त का संरक्षण
प्र.1 भगवद्ग ता म लोकसंग्रह का उल्लेख है क सभी को अपनी व्य क्तगत इ ाओं से ऊपर उठकर सभी क भलाई के
लए काय करना चा हए। क्या अब समय आ गया है क हम इस पर गंभीरता से वचार कर?
हाँ — और यह बात भावना से नह , स्वयं अध्याय के प्रमाण से सद्ध होती है।
अध्याय ने जतनी समस्याएँ बताई ह, सबका आकार एक ही है। हर व्य क्त का नणय अकेले म उ चत है, और उन सबका योग सबके
लए हा न है :
कोई एक कृषक थोड़ा और भूजल ख चे तो वह अपनी फसल के लए ठ क ही कर रहा है। परंतु जब सभी ऐसा करते ह, तो
दोहन पुनभरण से आगे नकल जाता है और पंजाब का लगभग 80% क्षेत्र ‘अ त-दो हत’ हो जाता है — और तब कसी को
भी जल नह मलता (पृष्ठ 14)।
एक व्यावसा यक बेड़ा अ धक टू ना पकड़े तो उसका कुछ नह बगड़ता। जब सब पकड़ते ह, तो भंडार ही ढह जाता है और
मत्स्य-व्यवसाय सबके लए समाप्त हो जाता है (पृष्ठ 6)।
एक कारखाना अप शष्ट-उपचार का व्यय बचाए तो उसे लाभ है। जब अनेक बचाते ह, तो नद वषाक्त हो जाती है और जीवन
का पोषण नह कर पाती (पृष्ठ 7)।
लोकसंग्रह ठ क इसी अंतर को पाटता है : वह प्रत्येक व्य क्त से कहता है क वह केवल अपनी तात्का लक इच्छा नह , सभी क
भलाई तौले — उनक भी जो नद के नीचे बसे ह और उनक भी जो अभी जन्मे नह ह।
अध्याय यह समय अभी क्य मानता है: क्य क उपयोग का पैमाना बदल गया है। पृष्ठ 12 कहता है क प्रदूषण,
जैव- व वधता क हा न और जलवायु प रवतन हाल के वष म तीव्रता से घ टत हो रहे ह, और पृष्ठ 18 जोड़ता है क
जल और स्वच्छ वायु जैसे आधारभूत संसाधन तक पहुँच भी समाज के कुछ वग के साथ न्यायसंगत नह है। जब
क्ष त धीमी और छोट हो, तब परंपरा और आदत ही उसे रोक लेती ह। जब वह तीव्र और वशाल हो, तब एक सचेत
जीवन-दृ ष्ट चा हए।
अध्याय अतीत म लौटने को नह कहता, न ही इसे सरल बताता है। उसके अपने उदाहरण दखाते ह क इस पर चलना कैसा दखता
है : स क्कम के कृषक ने ऐसी मृदा पाने के लए, जो टके, पाँच क ठन वष स्वीकार कए; भारत ने सौर तकनीक और वत्त अपने
पास रखने के बजाय अंतराष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से अन्य दे श के साथ साझा कया; समुदाय प्रजनन काल म मछली पकड़ना
रोक दे ते थे। हर बार कसी ने आज का छोटा लाभ छोड़कर कल का बड़ा और साझा लाभ चुना।
इस पर सो चए: ईमानदार प्र त-तक यह है क नधन प रवार तीस वष बाद मलने वाले लाभ के लए आज कुछ
छोड़ नह सकता। यह उ चत आप त्त है — और इसी लए अध्याय व्य क्तगत संयम के साथ सुशासन को भी रखता
है। नयम, मूल्य और साझा नवेश ही उत्तरदायी वकल्प को वहन-योग्य बनाते ह, ता क संरक्षण का भार उन पर
सबसे अ धक न पड़े जनके पास सबसे कम है।
प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 19
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अध्याय के अंत के अभ्यास प्रश्न
प्र.1 आज जो संसाधन नवीकरणीय है, उसे कल अनवीकरणीय कैसे बनाया जा सकता है? कुछ ऐसे उपाय का वणन
क जए जनसे ऐसा होने से रोका जा सकता है।
केवल एक बात से : उसे प्रकृ त के पुनस्थापन और पुनजनन क ग त से अ धक तेज़ी से उपयोग करके। कोई संसाधन इस लए
नवीकरणीय नह होता क वह कस पदाथ का बना है — वह इस लए नवीकरणीय है क उसके नवीकरण क दर हमारे उपयोग क
दर से अ धक है। इस तुलना को तोड़ द जए, और श्रेणी बदल जाती है।
उपयोग की दर < नवीकरण की दर → नवीकरणीय
उपयोग की दर > नवीकरण की दर → भंडार पितवष घटता है
यह लंबे समय तक चले → संसाधन व्यवहार में अनवीकरणीय हो जाता है
अध्याय के अपने उदाहरण —
नवीकरणीय कससे वह पलट जाता है प रणाम
संसाधन
वन / लकड़ी वृक्षों के बढ़ ने की गित से अिधक तेज़ी से अंततः वन नष्ट हो जाते ह (पृष्ठ 6)
लकड़ी काटना
भूजल वष-दर-वष पुनभरण से अिधक दोहन गहरा और महँगा पं पग, फर अनुपलब्धता; पंजाब का लगभग 80%
क्षेत्र ‘अ त-दो हत’ (पृष्ठ 12, 14)
नद का जल िबना उपचार का औ ोिगक अपिशष्ट, जो नद वषाक्त हो जाती है और जीवन का पोषण नह कर पाती (पृष्ठ
िकसी जीव का भोजन नही ं बन पाता 7)
मछली व्यावसाियक अत्यिधक मछली पकड़ना, तीव्र और व्यापक ास — टू ना का उदाहरण (पृष्ठ 6)
पजनन काल में भी
मृदा रासायिनक उवरकों और कीटनाशकों का मृदा-क्षरण और फसल का ास ( चत्र 1.14, पृष्ठ 12)
अनुिचत उपयोग
हमनद-पो षत जीवाश्म ईंध न आधािरत औ ोगीकरण और हमालय के हमनद इतने शीघ्र पघल रहे ह क वषा उनक पू त नह
न दयाँ वनों की कटाई → तापमान वृिद्ध कर पाती, जससे मैदान क जल सुरक्षा संकट म है (पृष्ठ 6)
इसे रोकने के उपाय —
1. उपयोग क दर नवीकरण क दर से तय क जए। उतनी ही लकड़ी का टए जतनी पुनः उग सके; उतना ही भूजल ली जए
जतना पुनभ रत हो सके। यही मूल नयम है, शेष सब इसी से नकलता है।
2. पुनजनन काल क रक्षा क जए। प्रजनन काल म मछली न पकड़ना; भू म के लए परती वष; चक्र य चराई — वही पारंप रक
प्रथा जसक अध्याय पृष्ठ 6 पर प्रशंसा करता है।
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3. मूल प्रजा तय से वृक्षारोपण। पृष्ठ 5 स्पष्ट है : वहाँ मूल रूप से उगने वाले वृक्ष लगाने से पा र स्थ तक तंत्र का पुनस्थापन होता
है और पक्षी, गलह रयाँ तथा अन्य जीव लौट आते ह।
4. केवल नका लए नह , भ रए भी। पारंप रक जल-संचयन, तालाब और पोखर का पुनरुद्धार, जल के अपव्यय म कमी, जल
को प्रसंस्क रत करके पुनरुपयोग (पृष्ठ 12)।
5. चक्र म अप शष्ट न जाने द जए। नद तक पहुँचने से पहले अप शष्ट का उपचार क जए, ता क अपघटन का काम चलता रहे।
6. मृदा को लौटाइए — भारी रासाय नक उपयोग के स्थान पर गोबर और अन्य प्राकृ तक उवरक, पलवार और बहु-फसलीकरण,
जन्ह ने समग्र मृदा-प्रबंधन संभव बनाया था (पृष्ठ 12)।
7. जीवाश्म ईंधन का जलना और वन क कटाई घटाइए, क्य क यही तापमान वृ द्ध हमारी न दय के पीछे खड़े हमनद को
पघला रही है।
‘नवीकरणीय’ शब्द भ्रम म क्य डाल सकता है: यह ऐसा लगता है मानो वस्तु का कोई स्थायी गुण हो। ऐसा नह है
— यह दो ग तय के संबंध का कथन है। सूय का प्रकाश तो हमारे कए-धरे से बेपरवाह आता रहेगा, परंतु वन,
मत्स्य-भंडार, मृदा और जलभृत केवल एक शत पर नवीकरणीय ह — और वह शत नभाना या तोड़ना हमारे हाथ म
है।
प्र.2 पाँच पा र तक तंत्र काय के नाम बताइए जो मानव के लए उपयुक्त ह।
पा र तक तंत्र का काय वह है जो प्रकृ त स्वाभा वक रूप से करती है; जब मनुष्य उससे लाभा न्वत होते ह, तब उसी को
पा र तक तंत्र सेवा कहा जाता है (पृष्ठ 7)। पाँच काय, साथ म उनका लाभ —
क्र. पा र तक तंत्र का काय (प्रकृ त क्या करती है) पा र तक तंत्र सेवा (हम क्या मलता है)
1 वृक्ष ऑ क्सीजन उ त्पन्न करते है ं और काबन डाइऑक्साइड सोखते है ं साँस ले ने योग्य वायु, और तापमान वृिद्ध पर अंकु श
2 वन जल को शुद्ध करता है जब वह म ृद ा और जड़ों से होकर बहता है हमारे नालों, कु ओं और नलों में स्वच्छ जल
3 जड़ें और वनस्पित म ृद ा-अपरदन रोकती है ं संरिक्षत कृ िष भूिम; निदयों और जलाशयों में कम गाद
4 कीट, पक्षी और चमगादड़ फू लों का परागण करते है ं परािगत फसले ं — फल , सिब्ज़याँ, ितलहन और दलहन
5 वन पशुओ ं को आवास दे ते है,ं तथा जीवाण,ु फफूँ द और कीट म ृत जैव-िविवधता बनी रहती है और पोषक तत्व मृद ा को लौटते है ं
पदाथ ं का अपघटन करते है ं िजससे नए पौधे उगते है ं
य द और माँगे जाएँ तो दो और : न दयाँ और वषा भूजल का पुनभरण करती ह, जससे हम जल सुरक्षा मलती है; और आद्रभू मयाँ
तथा बाढ़-क्षेत्र बाढ़ के जल को सोख लेते ह, जससे नीचे क ब स्तयाँ बचती ह।
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क्या आप जानते ह? पृष्ठ 7 का ‘इसे अनदे खा न कर’ बॉक्स ऑक्सीजन वाले काय को ग णत से जाँचने दे ता है।
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एक प रपक्व वृक्ष प्र त दन लगभग 275 लीटर ऑक्सीजन उत्पन्न करता है; एक मनुष्य को प्र त दन
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लीटर चा हए।
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agl350 ÷ 275 = 1.27
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अथ त एक व्यिक्त को लगभग 1.3 पिरपक्व वृक्षों के िदन भर के उत्पादन की आवश्यकता है — पित
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व्यिक्त एक से अिधक वृक्ष।
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दोन आँकड़े बदलते रहते ह — वृक्ष के प्रकार से, और व्य क्त क ग त व ध, ऊँचाई तथा भार से — पर उत्तर क
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दशा नह बदलती।
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a s emऔर सेवा का भेद क्य महत्वपूण है: काय तो तब भी होता रहता है जब कोई दे ख न रहा हो; वह ‘सेवा’ तभी
gl कहलाता है जब उससे कोई मानवीय लाभ जुड़ता है। उसे सेवा कहते ही वह गनने योग्य बन जाता है — और जो
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गना जा सके, उसे अनजाने म नष्ट करना क ठन हो जाता है, क्य क उसक हा न दखाई दे ने लगती है।
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नवीकरणीय संसाधन क्या ह? ये अनवीकरणीय संसाधन से कैसे भन्न ह? लोग यह सु न त करने के लए क्या
कर सकते ह क नवीकरणीय संसाधन हमारे और आने वाली पी ढ़य के उपयोग के लए उपलब्ध रह? दो
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उदाहरण द जए।
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g l aनवीकरणीय संसाधन वे ह जन्ह प्रकृ त समय के साथ पुनस्था पत और पुनज नत करती रहती है — इस लए वे उपलब्ध बने रह
a सकते ह, बशत पुनस्थापन और पुनजनन क प्राकृ तक लय बा धत न हो। सौर ऊजा, पवन ऊजा, प्रवा हत जल से उत्पन्न ऊजा और
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वन से प्राप्त लकड़ी अध्याय के उदाहरण ह, और अध्याय हर बार शत भी जोड़ता है — य द हम उनका प्रबंधन सातत्य व धय से
कर सक।
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अनवीकरणीय संसाधन लंबी अव ध म न मत होते ह और जस अनुपात से हम उन्ह उपयोग करते ह, उस अनुपात म उनक
पुनःपू त नह हो सकती — जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला और पे ो लयम, तथा ख नज एवं धातुएँ जैसे लोहा, ताँबा और सोना।
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अंतर का नवीकरणीय अनवीकरणीय
आधार
पुनःपू त कैसे पकृ ित इन्हे ं मानवीय समयाविध में पुनस्थ िपत और पुनजिनत करती है — लाखों वष ं में बने; व्यवहार में इनकी
वष और िपघलते िहमनद निदयों को पोिषत करते है,ं वन स्वयं को नवीनीकृ त पुनःपूित होती ही नही ं
करते है,ं म ृद ा स्वयं का पुनिनम ण करती है
उपयोग का यिद उपयोग नवीकरण की दर के भीतर हो तो भंडार िस्थर रहता है िजतना उपयोग हुआ, भंडार उतना ही
प्रभाव स्थायी रूप से कम
जुड़ी हुई शत तभी तक नवीकरणीय जब तक पुनजनन की लय बािधत न हो कोई शत इसे नवीकृ त नही ं कर सकती
— के वल उपयोग की दर संभाली जा
सकती है
उदाहरण सौर ऊज , पवन ऊज , पवािहत जल, वनों की लकड़ी कोयला, पेटोिलयम, लोहा, ताँबा, सोना
दा यत्वपूण उपयोग कीिजए, पर नवीकरण की गित से अिधक नही ं इतना िववेक पूण उपयोग िक वे संधारणीय
उपयोग का अथ िवक ल्प िमलने तक चल सकें
अध्याय क वृक्षों के बढ़ ने से अिधक तेज़ी से लकड़ी काटी तो वन नष्ट हो जाएँग े भारत का कोयला भंडार लगभग 50 वष
चेतावनी और चल सकता है, जबिक माँग बढ़ रही
है
नवीकरणीय संसाधन को उपलब्ध बनाए रखने के लए लोग क्या कर सकते ह —
1. उपयोग को नवीकरण क दर के भीतर रख — यही नणायक नयम है।
2. संसाधन को उबरने का समय द : प्रजनन काल म मछली न पकड़ना, भू म के लए परती अव ध, चक्र य चराई।
3. मूल प्रजा तय से वृक्षारोपण और पुन ापन, जससे केवल वृक्ष क गनती नह , पूरा पा र स्थ तक तंत्र लौटे ।
4. जल का पुनभरण — छत का वषा-जल संचयन, तालाब और पोखर का पुनरुद्धार, अपव्यय म कमी, उपचा रत जल का
पुनरुपयोग।
5. अप शष्ट को बाहर रख, ता क न दयाँ और मृदा अपने चक्र पूरे कर सक।
6. मृदा को वापस द — क ोस्ट, गोबर, पलवार और बहु-फसलीकरण से।
दो उदाहरण, वस्तार से —
उदाहरण क्या कया गया क्या प्राप्त हुआ
स क्कम क पेम ा के पिरवार ने कम्पोस्ट खाद अपनाई, नीम और 2016 में िसिक्कम शत-पितशत जैिवक राज्य बन गया और
जै वक कृ ष लहसुन से पाकृ ितक कीट-िनरोधक बनाए, और वष भर उसकी सारी कृ िष भूिम जैिवक पमािणत हो गई। स्थानीय
(पृष्ठ 16–17) अनेक फसले ं उगाईं। राज्य ने पूरे राज्य में जैिवक खेती जैव-िविवधता फली-फू ली, लाभदायक कीड़ े और पक्षी लौटे;
को पोत्साहन िदया। आरंभ के वष किठन थे — वष ं के पयटन बढ़ ा; कृ षकों की आय औसतन 20 पितशत बढ़ ी। मृद ा
ृ ा की क्षमता लौटने तक
रासायिनक उपयोग से म द — एक नवीकरणीय संस ाधन — िफर से पुनजनन की सीमा
उत्पादन घटा रहा में आ गई
भूजल का पारंपिरक जल-संचयन की पद्धितयाँ, तालाबों और पोखरों पुनभरण िफर से दोहन की दर के िनकट आता है, िजससे कु एँ
पुनभरण (पृष्ठ का पुनरुद्धार, जल के अपव्यय में कमी, तथा जल को वष-दर-वष गहरे नही ं होते जाते — यही उस भिवष्यवाणी का
12) पसंस्किरत करके पुनरुपयोग उपाय है िक तीवता से बढ़ ते हमारे नगरों में शीघ ही भूजल
समाप्त हो जाएगा
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स क्कम केवल एक सुंदर कथा क्य नह , एक मज़बूत उदाहरण है: वह सौदे के दोन पक्ष ईमानदारी से दखाता
है। पहले उत्पादन घटा, और लगभग पाँच वष बाद ही खेत फला-फूला। पुनजनन क सीमा पार कर चुका संसाधन
उस क्षण ठ क नह हो जाता जब हम दबाव हटाते ह — उबरने म भी समय लगता है, और उस अव ध म कसी को
सहारा दे ना पड़ता है। इसी लए यह प रवतन तब सफल हुआ जब राज्य क नी त उसके साथ थी, और अकेले एक
प रवार के लए शायद संभव न होता।
प्र.4 अपने घर और पड़ोस म ऐसी सांस्कृ तक प्रथाओं क पहचान क जए जो प्राकृ तक संसाधन के ववेकपूण
उपयोग क ओर इं गत करती ह।
उन साधारण आदत को दे खए जन्ह कोई ‘संरक्षण’ नह कहता। अ धकांश भारतीय घर इन्ह से भरे ह।
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प्रथा कसक बचत
चावल-दाल धोया हुआ पानी पौध म डालना; बचा हुआ पीने का पानी बतन म जल — और उसमें घुले पोषक तत्व
उड़ेलना, नाली म नह
बहते फव्वारे के बजाय बाल्ट से स्नान; जहाँ जल दुलभ है वहाँ बतन राख या रेत जल
से माँजना
ठं डे पानी के लए मटका; दनभर कूलर चलाने के बजाय आर-पार हवा और मोट िव तु
द वार
उतना ही पकाना जतना खाया जाए; बचा भोजन अगली सुबह काम म लेना; अनाज, जल और उन्हे ं उगाने में लगी ऊज
अन्न कभी न फकना
रसोई के छलके पशुओं को खलाना या आँगन के कोने म क ोस्ट बनाना म ृद ा की उवरता — अपिशष्ट भोजन बनकर लौटता है,
ठीक पकृ ित के चक्र की तरह
कपड़े छोटे भाई-बहन को दे ना; पुरानी सूती से कंथा, झाड़न या थैले बनाना; कपास, धातु और उन्हे ं बनाने की ऊज
इस्पात-पीतल के बतन दशक चलाना और मरम्मत कराना
कबाड़ीवाला, जो अख़बार, काँच, प्ला स्टक और धातु वापस खरीदता है हर पुनचक्रण योग्य वस्तु — एक पुर ानी, चलती हईु
पुनचक्रण व्यवस्था
बाज़ार के लए कपड़े या जूट का थैला; दुकान से वही इस्पात का डब्बा भरवाना प्लािस्टक, और इसिलए पेटोिलयम
कपड़े, अनाज, पापड़ और अचार धूप म सुखाना ईंध न और िबजली
तुलसी को प्र त दन जल; मं दर के पास का पीपल या नीम कभी न कटना; प क्षय वृक्ष, तथा उन पर िनभर पक्षी और कीट
के लए दाना-पानी
तालाब, कुएँ और बाव ड़याँ समुदाय ारा स्वच्छ रखना; गाँव का साझा ताल भूजल और सतही जल
फसल और पशुओं से जुड़े त्योहार — प गल, बहू, ओणम, गोवधन पूजा ठीक उसी क्षण कृ तज्ञता जब पकृ ित ने िदया है — यही
मनोवृित्त ऊपर की सारी पथाओं के पीछे है
नमूना उत्तर: ‘हमारे घर म दाद सब्ज़ी धोया हुआ पानी कभी नाली म नह जाने दे त ; वह तुलसी और करी-पत्ते के पौधे म जाता है।
कपड़े छत पर धूप म सूखते ह और इस्तरी केवल वद्यालय क वद पर होती है। हर दूसरे र ववार कबाड़ीवाला अख़बार, बोतल और
पुराने बतन ले जाता है, और माँ ने दरवाज़े पर बाज़ार के लए कपड़े का थैला टाँग रखा है। हमारी गली म नुक्कड़ क दुकान के पास
वाले नीम के चार ओर चबूतरा बना है और उसक डाल कोई नह काटता। इन्ह कोई पयावरण क प्रथा नह कहता — यह तो बस
ऐसे ही होता आया है — पर इनम से हर एक जल, बजली, प्ला स्टक या कोई वृक्ष बचाती है।’
इन्ह ‘ ववेकपूण उपयोग’ क्य कहा जाए: पृष्ठ 12 पर अध्याय क बात यही है क पारंप रक कृ ष पद्ध तय म मृदा
को धरती माता का अंग माना गया — अथात एक संबंध, न क ख च लेने योग्य भंडार। जब संसाधन को अपने से
बड़ी कसी वस्तु का अंग माना जाता है, तब संयम लागू कराने का नयम न रहकर आदत बन जाता है। इसी लए ये
प्रथाएँ बना कसी नरीक्षक के पी ढ़य तक चलती रह ।
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यह क जए: एक सप्ताह तक दो स्तंभ क डायरी र खए — जब-जब आपने जल या बजली का उपयोग कया,
और जब-जब उपयोग से बचे। अंत म उन ‘बचे’ प्र व ष्टय पर नशान लगाइए जो कसी पा रवा रक आदत से हुईं,
बना सोचे। वही सबसे मूल्यवान ह।
प्र.5 वतमान उपयोग के लए वस्तुओं के उत्पादन म कन बात को ध्यान म रखना चा हए?
अध्याय के चार उत्पादन-उदाहरण से जो उत्तर नकलता है वह यह है क उत्पादन को हर चरण पर परखना चा हए — केवल इससे
नह क उत्पाद उपयोगी है या नह ।
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ध्यान दे ने क्या पूछ अध्याय म कहाँ दखता है
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योग्य बात
क े माल का .c क्या वह नवीकरणीय है, और क्या उसे नवीकरण की a g l
ोत as
em दर के भीतर िलया जा रहा है? यिद अनवीकरणीय है, पृष्ठ 6, 8, 17
agl तो क्या उसका उपयोग िववेक पूण है और क्या कु छ
भाग पुनचिक्रत सामग ी से आ सकता है?
. comसीमट — सबसे अ धक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग म एक; महीन ag
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प्र क्रया से पिक्रया वायु, जल और म ृद ा में क्या छोड़ती है, और
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प्रदूषण क्या उसका उपचार बाहर जाने से पहले होता है? धूल फेफड़ को क्ष त पहुँचाती है, प त्तय पर जमकर उत्पादकता
a घटाती है, और मृदा तथा जल को प्रदू षत करती है (पृष्ठ 15)।
बना उपचार का औद्यो गक अप शष्ट न दय को वषाक्त करता है
(पृष्ठ 7)
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नयमन और क्या लागू मानकों का पालन हो रहा है? कद्र य प्रदूषण नयंत्रण बोड के सीमट कारखान के लए दशा-
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अनुपालन
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नदश, ता क प्रदूषण न्यूनतम हो या समाप्त हो जाए (पृष्ठ 15)
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glसामग्री का
a चयन क्या वही काम करने वाला कोई कम पदू षण वाला पारंप रक पत्थर और मृदा, नई वनस्प त-आधा रत साम ग्रयाँ, व्यथ
प्ला स्टक से पुन न मत सामग्री; जैसलमेर दुग तथा ऑरो वले अथ
िवकल्प है?
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इंस्ट ूट का आधु नक मृदा-भवन (पृष्ठ 15)
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अप शष्ट और पृष्ठ 5 और पृष्ठ 1 — ऐसी अथव्यवस्था जो प्रयुक्त संसाधन का
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क्या अपिशष्ट िफर से कच्चा माल बन सकता है,
पुनरुपयोग िजससे उत्पादन पकृ ित के उन चक्रों जैस ा हो जहाँ पुनरुपयोग करे और अप शष्ट को न्यूनतम करे
कु छ भी अपिशष्ट नही ं होता?
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ानीय क्या यह पिक्रया वहाँ के लोगों को काम दे ती है, या पृष्ठ 16 — नई संधारणीय साम ग्रय क प्र क्रया कम प्रदूषणकारी
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रोज़गार के वल उनसे ले ती है? है, स्थानीय रोज़गार दे ती है और उस स्थान क जलवायु को ध्यान
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म रखकर बनाई जाती है
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gl जलवायु से
पृष्ठ 16
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क्या यह उसी स्थान के िलए बनाया गया है जहाँ खड़ा
होगा, तािक चलाने में कम ऊज लगे?
मेल
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emहै?
ऊजा का ोत क्या यह पिक्रया जीवाश्म ईंध न के स्थान पृष्ठ 17 — यथासंभव अ धक-से-अ धक काय के लए
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नवीकरणीय ऊज से चल सकती नवीकरणीय ऊजा स्रोत क ओर संक्रमण
उत्पाद तक यह िकसे िमले ग ा, और इसे बनाने का मूल्य कौन पृष्ठ 18 — जल और स्वच्छ वायु जैसे आधारभूत संसाधन तक
न्यायसंगत चुक ा रहा है?
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भी वतरण और पहुँच समाज के कुछ वग के साथ न्यायसंगत
पहुँच नह होती
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भावी पी ढ़याँ क्या यह पचास वष बाद भी संभव होगा, या हम वह पृष्ठ 12 और 14 — पंजाब क अल्पाव ध खाद्य सुरक्षा बनाम वे
l a s खच कर रहे है ं जो हमारे पोतों को चािहए? द घका लक प रणाम जन्ह ठ क करने म समय और प्रयास लगेगा
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सीमट अध्याय क सबसे अ कसौट क्य है: सीमट को छोड़ा नह जा सकता। घर, वद्यालय, अस्पताल, सेतु,
माग और हवाई अ े — सबको उसक आवश्यकता है; अध्याय स्वयं यही कहता है। इस लए प्रश्न कभी ‘उत्पादन कर
या न कर’ का नह , कैसे कर का होता है : धूल पर नयंत्रण, दशा- नदश का पालन, जहाँ चल सके वहाँ मृदा-पत्थर-
वनस्प त और पुन न मत सामग्री का प्रयोग, और स्थानीय जलवायु के अनुसार रूपरेखा। व्यवहार म दा यत्वपूण
उत्पादन का यही अथ है।
सुझाव: इस प्रश्न के अच्छे सं क्षप्त उत्तर म तीन उत्पाद के नह , तीन चरण के नाम होने चा हए — सामग्री कहाँ से
आती है, प्र क्रया क्या छोड़ती है, और काम पूरा होने पर उस वस्तु का क्या होता है। ऊपर क लगभग हर बात
इन्ह तीन म समा जाती है।
अध्याय — एक नज़र म
प्रकृ त का कोई तत्व तभी संसाधन बनता है जब मानव वास्तव म उसका उपयोग कर सके। अध्याय तीन शत रखता है — वह
तकनीक रूप से सुलभ हो, उसका दोहन आ थक रूप से व्यवहाय हो और वह सांस्कृ तक रूप से स्वीकाय हो। इसी लए समुद्र
क अत्य धक गहराई म स्थत ख नज तेल या प वत्र उपवन के वृक्ष संसाधन नह कहलाते।
संसाधन का वग करण एक से अ धक प्रकार से हो सकता है। उपयोग के आधार पर — जीवन के लए आवश्यक संसाधन
(वायु, जल, मृदा), सामग्री के लए संसाधन (लकड़ी, संगमरमर, कोयला, सोना) तथा ऊजा के लए संसाधन (कोयला, जल,
ख नज तेल, प्राकृ तक गैस, सूय का प्रकाश, पवन)। नवीकरणीयता के आधार पर — नवीकरणीय और अनवीकरणीय।
प्रकृ त पुन ापन (मूल स्वस्थ अवस्था म लौटना) और पुनजनन (नवजीवन क रचना) से काय करती है, ऐसे चक्र म जहाँ
कुछ भी अप शष्ट नह होता। कोई संसाधन तभी तक नवीकरणीय है जब तक यह लय बा धत न हो — वन के बढ़ने क ग त से
अ धक लकड़ी काट जाए तो वन नष्ट हो जाते ह; तापमान बढ़े तो हमालय के हमनद इतने शीघ्र पघलते ह क वषा उनक
पू त नह कर पाती।
अनवीकरणीय संसाधन लंबी अव ध म न मत होते ह। अनुमान है क भारत म कोयले का भंडार केवल अगले 50 वष तक
चल सकता है, जब क बजली क माँग बढ़ती जा रही है — इस लए जब तक अ धक टकाऊ वकल्प व्यापक रूप से
उपलब्ध न ह , इनका ववेकपूण उपयोग आवश्यक है।
संसाधन का वतरण असमान है ( चत्र 1.11), और यही असमानता ब स्तय , व्यापार, अंतराष्ट्रीय संबंध और संघष को
आकार दे ती है। केवल प्रचुरता से कोई दे श समृद्ध नह हो जाता — यही ‘प्रचुरता का वरोधाभास’ या ‘प्राकृ तक संसाधन
अ भशाप’ है; भारत ने उच्च मूल्य वाले उत्पाद बनाने वाले उद्योग म नवेश करके इससे अपना बचाव कया है।
अध्याय का उत्तर है दा यत्वपूण एवं ववेकपूण उपयोग (प्रबंधन) — इसके चार उदाहरण ह पंजाब का भूजल (लगभग
80% क्षेत्र ‘अ त-दो हत’ घो षत), सीमट उत्पादन का प्रदूषण, 2016 म स क्कम का शत-प्र तशत जै वक राज्य बनना
और 2015 का अंतरा ीय सौर गठबंधन।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म कहाँ उदाहरण / ववरण
आया है
प्रकृ त उन सजीव और िनज व रूपों की समग ता जो हमारे पृष्ठ 2 — ‘प्रकृ त कब वन म खड़ा एक वृक्ष
पय वरण का भाग है,ं परंत ु मानव ारा िनिमत नही ं है ं एक संसाधन बन जाती
है?’
प्राकृ तक संसाधन वे सामिग याँ और पदाथ जो पकृ ित में पाए जाते है ं और पृष्ठ 3 वायु, जल, मृदा, कोयला,
मानव के िलए मूल्यवान होते है ं ख नज तेल, लकड़ी, धातु
अयस्क, बहुमूल्य पत्थर
दोहन यहाँ इसका कोई नकारात्मक अथ नही ं — इसका पृष्ठ 2 (कोष्ठक म द कोयले का खनन; भूजल का
आशय है पाकृ ितक संस ाधनों का िनष्कषण, उपयोग गई टप्पणी) पं पग
और उपभोग
नवीकरणीय संसाधन िजसे पकृ ित पुनस्थ िपत और पुनजिनत करती रहती पृष्ठ 5–6 सौर ऊजा, पवन ऊजा, प्रवा हत
है — परंत ु तभी जब हम उसे उसके नवीनीकरण की जल से उत्पन्न ऊजा, वन से
गित से अिधक तेज़ी से न ले ं प्राप्त लकड़ी
अनवीकरणीय संसाधन लंबी अविध में िनिमत; िजस अनुपात से हम उपयोग पृष्ठ 8 कोयला, पे ो लयम, लोहा,
करते है ं उस अनुपात में इनकी पुनःपूित नही ं हो ताँबा, सोना
सकती
पुनस्थापन िकसी क्षीण या क्षितग स्त वस्तु को उसकी मूल स्वस्थ पृष्ठ 5 त्वचा के घाव का भर जाना;
अवस्था में पुनः लाने की पिक्रया दावानल के बाद वन का पुनः
स्वस्थ होना
पुनजनन पकृ ित की नवजीवन तथा फलने-फू लने के िलए पृष्ठ 5 मूल रूप से उगने वाले वृक्ष
अनुकू ल पिरिस्थितयाँ िनिमत करने की क्षमता — यह लगाना जससे पक्षी और
पुनस्थ पन से अिधक व्यापक है गलह रयाँ लौट आएँ
पा र स्थ तक तंत्र के काय पकृ ित के स्वाभािवक रूप से िकए जाने वाले काय पृष्ठ 7 — इसे अनदे खा वन का जल शुद्ध करना, मृदा-
न कर अपरदन रोकना, आवास दे ना
पा र स्थ तक तंत्र सेवाएँ वे पाकृ ितक पिक्रयाएँ जब वे मनुष्यों के िलए पृष्ठ 7 स्वच्छ जल, संर क्षत कृ ष भू म,
लाभदायक होती है ं परा गत फसल
‘प्रचुरता का वरोधाभास’ / संस ाधनों से सम ृद्ध क्षेत्र ों में आिथक वृिद्ध का मंद रह पृष्ठ 11 भारत ने ऐसे उद्योग के वकास
प्राकृ तक संसाधन अ भशाप जाना, क्योंिक वे संस ाधनों को उच्च मूल्य वाले म नवेश करके इससे बचाव
उत्पादों में पिरवितत नही ं कर पाते कया
वृक्षायुवद पौधों और वृक्षों के अध्ययन एवं दे खभाल पर कें िद त पृष्ठ 16 सुरपाल का वृक्षायुवद, लगभग
पाचीन भारतीय वनस्पित-िवज्ञान 10व शताब्द
लोकसंग्रह भगवद् ग ीता का िवचार िक सभी को अपनी व्यिक्तगत पृष्ठ 18–19 अध्याय का समापन-आग्रह —
इच्छाओं से ऊपर उठकर सभी की भलाई के िलए प्रकृ त के संरक्षक बन
काय करना चािहए
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