aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

AglaSem पर कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण (समाज का अध्ययन) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Social Science Chapter 2 Reshaping India s Political Map (Exploring Society), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण - Page 1 of 41

About NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण

NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (41 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण have?

NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण contains 41 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 8 study material?

You can find more Class 8 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (41 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 2: भारत के राजनै तक मान चत्र का
पुन नमाण

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

21 – 60 18 28 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 40 pages

Page 2

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: भारत के राजनै तक मान चत्र का
पुन नमाण
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8, भाग 1) का अध्याय 2 ( वषय — अतीत के चत्रपट) 11व से 17व शताब्द तक भारत के
राजनै तक मान चत्र क कहानी कहता है — दल्ली सल्तनत का उदय एवं पतन, द क्षण म वजयनगर साम्राज्य, मुगल, तथा वे अनेक राज्य एवं
समुदाय जन्ह ने इनका प्र तरोध कया। अंत म यह बताता है क इन राज्य का प्रशासन कैसे चलता था और इस कालखंड का जन-जीवन पर क्या
प्रभाव पड़ा।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8) 21 – 60

खं ड प्रश्न

18 28

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 21
वषय — अतीत के चत्रपट

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 इस कालखंड म वदे शी आक्रमण एवं नए राजवंश के उदय ने भारत क राजनै तक सीमाओं को कस प्रकार
नया आकार दया?

इन्ह ने मान चत्र को बार-बार नए सरे से ख चा। 11व से 17व शताब्द के बीच सीमाओं क कोई भी व्यवस्था एक पीढ़ तक भी
नह टक — कोई सा ाज्य अपने चरम वस्तार तक पहुँचता, फर क्षेत्रीय श क्तय म बखर जाता, और उस रक्त स्थान म एक नया
राजवंश उठ खड़ा होता।
अध्याय के तीन मान चत्र यही दखाते ह। इनक तुलना क जए —

Page 1 of 40

Page 3

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

मान चत्र वह क्या दखाता है इससे क्या पता चलता है

िचत्र 2.3 तुगलक वंश का वस्तार (1335) उत्तर-प श्चम म पेशावर से लेकर सुदूर द क्षण म 150 वष से भी कम समय में
(पष्ृ ठ 24) मदुरई तक और पूव म बंगाल तक फैला है। लोद वंश का वस्तार (1479) केवल स ल्तनत ने अपना लगभग सारा
गंगा का मैदान है — दल्ली, ग्वा लयर, जौनपुर। अिजत क्षेत्र खो िदया।

िचत्र 2.12 अब द क्षण अलग-अलग श क्तय से भरा है — ओ डशा तट पर गजप त सा ाज्य िद ल्ली जो क्षेत्र नही ं सँभाल सकी,
(पष्ृ ठ 33) (1458), दक्कन म बहमनी सल्तनत (1477), और कृष्णदे वराय के अधीन कह वह खाली नही ं रहा। वहाँ नए राज्य
अ धक वशाल वजयनगर (1529)। उठ खड़े हुए ।

िचत्र 2.16 उत्तर भर म अकबर के अधीन मुगल सा ाज्य (1605); औरंगजेब का वस्तार मुग लों के चरम िवस्तार के
(पष्ृ ठ 39) (1700) दक्कन और पूव तट को कांचीपुरम तक जोड़ दे ता है। इसी मान चत्र पर मानिचत्र पर ही उनके
राजपूत भूखंड (1751), अहोम राज्य (1826) और सख सा ाज्य (1839) भी उ त्त रािधकारी पहले से िचिह्न त है।
ं
अं कत ह।

अध्याय ने जो कुछ त थयाँ चुनी ह, वे भी क्रम से यही बात कहती ह —

1206 िदल्ली सल्तनत की स्थापना

1326 मेवाड़ सामाज्य की पुनस्थापना

1336 िवजयनगर सामाज्य की स्थापना

1347 बहमनी सल्तनत की स्थापना

1398 िदल्ली पर तैमरू का आक्रमण

1498 पुतगािलयों का भारत आगमन

1526 पानीपत का पथम युद्ध, बाबर की िवजय से
मुगल सामाज्य की स्थापना

1556 पानीपत का ि तीय युद्ध, अकबर की िनण यक िवजय

1565 तालीकोटा का युद्ध, िवजयनगर सामाज्य का िवध्वंस

1576 हल्दीघाटी का युद्ध, महाराणा पताप पीछे हटने पर
िववश हुए

1671 सरायघाट का युद्ध, अहोमों ारा मुगलों की पराजय

1699 गुरु गोिवंद िसंह ारा खालसा का गठन

1754 िदल्ली पर मराठा िनयंत्रण का आरंभ

1799 िसख सामाज्य की स्थापना

Page 2 of 40

Page 4

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय क अपनी समयरेखा ( चत्र 2.2, पृष्ठ 22–23), यहाँ खड़े रूप म। ध्यान द जए क कतनी बार कोई त थ कसी पुराने राज्य के
वस्तार क नह , ब ल्क कसी नए राज्य क स्थापना क सूचक है।

ऐसा क्य हुआ: स्थर सीमाओं के वरुद्ध दो श क्तयाँ काम कर रही थ । पहली — केवल वजय से सीमा नह
बनती। सेना आगे बढ़ जाती है और पीछे जो राज्यपाल छू टता है, वह स्वतंत्रता क घोषणा कर सकता है, जैसे 1330
के दशक म ह रहर एवं बुक्का राय ने कया और बाद म बहमनी के तरफदार ने। दूसरी — सल्तनत म उत्तरा धकार
प्राय: हसक हुआ करते थे: लगभग तीन म से दो सुल्तान ने अपने पूववत को हटाकर सत्ता ह थयाई, इस लए
औसत शासनकाल क ठनता से नौ वष से अ धक रहा। जस शासक को अपदस्थ होने का भय हो, वह जी वत रहने
के लए लड़ता है, सीमा सुदृढ़ करने के लए नह ।

क्या आप जानते ह? मुहम्मद बन तुगलक के समय मौय सा ाज्य के पश्चात पहली बार प्राय: संपूण उपमहा प
एक ही शासक के अधीन आया। अध्याय तुरंत जोड़ता है क यह प्रभुत्व “अल्पका लक सद्ध हुआ”।

प्र.2 भारतीय समाज ने वदे शी आक्रमण का सामना कस प्रकार कया? राजनै तक अ स्थरता के वातावरण म
भारतीय अथव्यवस्था ने कस प्रकार सामंजस्य स्था पत कया?

समाज ने एक साथ तीन प्रकार से सामना कया — शस्त्र से, समझौते से, और अपनी परंपराओं को बचाए रखकर। और
अथव्यवस्था ने सामंजस्य इस प्रकार बैठाया क वह शासक कौन है, इस पर नभर ही न रह गई।
1. सशस्त्र प्र तरोध। अध्याय हर क्षेत्र से उदाहरण दे ता है —

क लग के पूव गंग राज्य ने सल्तनत के कई आक्रमण को वफल कया; नर सहदे व प्रथम ने बंगाल म सल्तनत ारा नयुक्त
प्रशासक को भी परा जत कया और वजय क स्मृ त म कोणाक का सूय मं दर बनवाया।
होयसल ने कई आक्रमण का सामना कया और द क्षण के एकमात्र स्वतंत्र राज्य बने रहे — जब तक बार-बार के आक्रमण
और आंत रक संघष ने उन्ह क्षीण नह कर दया।
मुसुनुरी नायक ने 75 से अ धक मु खयाओं को संग ठत कया और 1330–1336 के आस-पास वारंगल से मुहम्मद बन
तुगलक क सेना को खदे ड़ दया।
राणा कुंभा ने मेवाड़ को दल्ली तथा बाद क सल्तनत से बचाए रखा; महाराणा प्रताप ने मुगल आ धपत्य अस्वीकार कर
अरावली से वष गु रल्ला युद्ध चलाया, जसम भील का प्रबल समथन प्राप्त था — वे धनुधर के रूप म सेना म स म्म लत हुए
और क्षेत्र के अपने ान से भी योगदान दया।
गढ़ राज्य क रानी दुगावती ने 1564 म संख्याबल म कम होते हुए भी स्वयं सेना का नेतृत्व कया; जाट कसान के 20,000
लोग ने मुगल सेना का सामना कया; भील, ग ड, संथाल एवं कोच अपने क्षेत्र और कर के प्रश्न पर लड़े।
अहोम ने 1671 म सरायघाट म 10,000 सै नक से 30,000 क मुगल सेना को हराया; सख ने 1699 म खालसा पंथ क
स्थापना क ।

2. गठबंधन एवं सामंजस्य। हर उत्तर युद्ध नह था। कई राजपूत राज्य ने कूटनी त एवं वैवा हक गठबंधन से मुगल के साथ संबंध
बनाए; राजपूत एवं क्षेत्रीय नेता दरबार म आए और हदू अ धकारी उच्च पद पर नयुक्त हुए। अध्याय इसे एक वास्त वक रणनी त
मानता है, आत्मसमपण नह — फर भी “मुगल सत्ता राजस्थान म सी मत रही”।
3. सांस्कृ तक नरंतरता। “समुदाय ने भी अपनी परंपराओं को बनाए रखने या पुनज वत करने का प्रयास कया” — और इन
परंपराओं क परस्पर क्रया से एक साझा वरासत बनी।

Page 3 of 40

Page 5

as e
a
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
g l AglaSem · NCERT Solutions

अथव्यवस्था ने वकद्र करण से सामंजस्य बैठाया। उसक श क्त उन संस्थाओं म थी जो शासक पर नभर नह थ —
co m
e m.
c o m यह कैसे काम करती थी g l as
.
संस्था राजनै तक उथल-पुथल म यह क्य टक

m a
l a se
g
श्रेणी (संघ ) और उत्पादन एवं कौशल समुदाय के आधार पर संग ठत, सुल्तान बदलने से बुनकरों की श्रेणी बुनना बंद नही ं करती

aजाित राज्य के आधार पर नह

m
.co ag
हुंडी कसी व्य क्त को भुगतान करने का एक ल खत धन राजनैितक सीमाओं के पार िबना मुद ा ढोए पहच
ु ँ ता था,

sem
नदश इसिलए माग में लूटा नही ं जा सकता था

a
मारवाड़ी जैसे व्यापारी
समुद ाय
agl
ऋण एवं वश्वास क समानांतर प्रणा लयाँ ये “आिधकािरक ढाँचों से स्वतंत्र रूप से काय करती थी”ं
और हर शासन-व्यवस्था में चलती थी ं

. com
यापार को िव पोिषत करते थेem
मंिदर-आधािरत दान म मली भू म एवं धन ट्रस्ट के रूप म; बाजार, मंिदर व्यापािरयों को ऋण दे ते थे और आंतिरक तथा समुद ी

com l as
अथव्यवस्था सचाई-सरोवर, धमशालाएँ एवं छत्रम व् त्त

. g
भारत िजतना िनयaत करता था, उससे कही ं कम आयात
m
ase
समुद ी व्यापार कालीकट, मगलोर, सूरत, मसूलीपट्टनम और हुगली

agl
से नयात करता था — इसिलए धन भीतर आता रहा

om a s
. c agl
ऐसा क्य हुआ: इस काल का राज्य अथव्यवस्था पर कर लगाता था, उसे चलाता नह था। भू-राजस्व साधारणत:
उपज का पाँचवाँ भाग था (कुछ सुल्तान ने इसे m
s e
a और वश्वास के जाल समुदाय ने बनाए और सँभाले। यही कारण है क
आधे तक बढ़ाया), और सड़क , सेतुओं, नहर तथा नए नगर का
नमाण भी हुआ। कतु ऋण, कौशल, श्रे
a glणयाँ
जन शता ब्दय म राजनै तक मान चत्र बार-बार फाड़कर नया बनाया जा रहा था, उनम भी उपमहा प “ वश्व के
सबसे धनी क्षेत्र म से एक बना रहा”।
co m
m .
o m l a se
.c रख: अध्याय इसे सुखद अंत नह बनने दे ता। लूटपाट ने “व्यापा रक नेटवक
a g एवं कृ ष उत्पादन को प्रभा वत
m
ase कया”; कसान को कई भीषण अकाल का सामना करना पड़ा और राहत कसी व शष्ट शासक क उदारता पर
ध्यान

agl नभर करती थी; और 1600 के दशक के उत्तराध म कई कसान को अपनी भू म गँवानी पड़ी और वे बंधुआ मजदूर

se m
com a
बन गए।

. a g l
m
ase
प्र.3
agl
इस कालखंड ने लोग के जीवन पर क्या प्रभाव डाला?

co m
m .
m as e
.co a g l
emरहने वाले अ धकतर लोग धनी नह हुए। अध्याय दोन बात स्पष्ट कहता है, और अच्छे उत्तर म दोन रहनी चा हए।
अ धकांश लोग के लए यह कालखंड क ठन रहा — और असमान रूप से क ठन। दे श के रूप म भारत धनी बना रहा; उसम

a s
agl
.c
जो बोझ लोग पर पड़ा —

s e m
m a
co agl
दै नक जीवन के ऊपर नरंतर युद्ध। सैन्य अ भयान म “गाँव एवं नगर पर आक्रमण कए गए तथा मं दर एवं शक्षा कद्र को

m .
e
लूटा और नष्ट कया गया”। नरंतर युद्ध से “जनसंख्या का बलात् वस्थापन हुआ”। तैमूर के आक्रमण ने दल्ली को — जो

g l as
“एक समृद्ध नगरी थी” — खंडहर बना दया। 1565 के बाद वजयनगर नगर महीन लूटा गया और “बड़ी संख्या म नाग रक
का जनसंहार हुआ”। a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 4 of 40

Page 6

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

कर। भू-राजस्व साधारणत: उपज का पाँचवाँ भाग और कभी-कभी आधा तक था। व्यापार पर प्रत्येक स्तर पर कर लगता था,
कतु “इसका सवा धक बोझ कृषक पर पड़ता था”, और कुछ ववरण म राजस्व संग्रह म “अत्य धक क्रूरता” का उल्लेख
मलता है।
ज जया, जसे कुछ सुल्तान ने और फर औरंगजेब ने लगाया, गैर-मु स्लम प्रजा के लए “आ थक बोझ एवं सावज नक
अपमान का कारण” बनता था। औरंगजेब ने हदुओं पर तीथयात्रा कर भी पुनः लगाया।
दासता। गुलाम बनाए गए व्य क्त “मुफ्त म श्रम करते थे या उन्ह दूरस्थ मध्य ए शया भेजकर बेच दया जाता था”।
प वत्र स्थल पर प्रहार। इस अव ध म “बौद्ध, जैन एवं हदू मं दर म प वत्र-पूजनीय मू तय एवं चत्र पर कई प्रहार” हुए, जो
लूट से भी और ‘बुत शकन’ से भी प्रे रत थे। बाद म औरंगजेब के 1669 के आदे श के प रणामस्वरूप बनारस, मथुरा एवं
सोमनाथ के मं दर, जैन मं दर और सख गुरु ारे ध्वस्त कए गए।
अकाल एवं ऋण। 1600 के दशक के उत्तराध म कर और बचौ लय के भुगतान के बाद कसान के पास प्राय: उपज का
छोटा भाग ही बचता था; कई भू म गँवाकर बंधुआ मजदूर बन गए।

जो टका रहा, और बढ़ा भी —

सचाई के वस्तार से कृ ष उत्पादकता बढ़ और अनेक फसल संभव हुईं — चावल, गेहूँ, जौ, दाल, गन्ना, मसाले तथा कपास,
रेशम, ऊन, रंग, लकड़ी और जूट।
शल्पकार ने ह थयार से लेकर आभूषण तक सब बनाया; जहाज नमाण अत्य धक वक सत हुआ; अरब, फारस और मध्य
ए शया के व्यापारी भारतीय बंदरगाह म बस गए।
कलाओं का उत्कष हुआ — ताजमहल, हुमायूँ का मकबरा, दल्ली एवं आगरा के लाल कले, मुगल लघु चत्र एवं सुलेख, और
द क्षण म ‘संगीत स्तंभ ’ वाला वट्ठल मं दर।
परंपराएँ बच और मल भी: “इन सांस्कृ तक परंपराओं के मध्य परस्पर क्रया के प रणामस्वरूप एक साझा वरासत का
नमाण हुआ।”

ऐसा क्य हुआ: धन का सृजन व्यापक था, कतु उसका संचय संक ण। अध्याय यह सीधे कहता है — भारत अभी
भी एक समृद्ध दे श था, “ कतु धन-संप त्त मुख्यतया शासक , दरबा रय , उच्च अ धका रय और व्यापारी वग के हाथ
म क द्रत थी।” कुल संप त्त नह , यही अंतर तय करता था क साधारण जीवन कैसा लगता है।

अध्याय का अपना नष्कष: “इन सबके मध्य, भारत आ थक रूप से समृद्ध रहा, कतु प्राय: राजनै तक रूप से
अ स्थर रहा… यह न केवल क ठनाइय क अ पतु सहनशीलता क भी कहानी है।” समुदाय के आपसी संबंध पर
भी वह उतना ही सावधान है: संघष हुए, “ वशेष रूप से शासक क अनुम त से अप वत्र या नष्ट कए गए पावन
स्थल को लेकर”, कतु “समग्र रूप से, व भन्न धम और समुदाय के लोग एक-दूसरे के साथ शां तपूवक रहते थे
और आ थक रूप से एक-दूसरे पर नभर थे।”

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 26

Page 5 of 40

Page 7

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

दल्ली सल्तनत का उदय एवं पतन

आइए पता लगाएँ

प्र.1 चत्र 2.6 को ध्यानपूवक दे ख। आप क्या सोचते ह, अलाउ न खलजी ने स्वयं को ‘ तीय सकंदर’ क्य कहा?

चत्र 2.6 म क्या दखता है। गहरे मरून रंग के मखमल पर अगल-बगल रखे दो चाँद के
सक्क का छाया चत्र — ये वास्तव म एक ही मोटे गोल टं का के दो पहलू ह। दोन पहलू कनारे
से कनारे तक केवल लखावट से भरे ह — बीच म उभरी हुई अरबी-फ़ारसी ल प क चार-
पाँच पं क्तयाँ, और एक सादे गोल घेरे के भीतर कनारे- कनारे चलती एक और पं क्त। कसी
भी पहलू पर न कोई चेहरा है, न पशु, न कोई प्रतीक — केवल शब्द। छाया चत्र पर ही सफ़ेद
अक्षर म ऊपर बाईं ओर शासक का नाम “Ala-ud-din Khilji” और ऊपर दाईं ओर धातु
तथा वज़न “Ag – 10.7 g / Tanka” छपा है।

चत्र 2.6, पृष्ठ 26 — यहाँ केवल वणन दया गया है; सक्क का छाया चत्र पाठ्यपुस्तक म दे ख।

क्य क वह स्वयं को वश्व वजेता घो षत कर रहा था — और यह घोषणा उसने उस वस्तु पर क जो हर व्य क्त तक पहुँचती
है: मुद्रा।
पहले ध्यान से दे खए क चत्र 2.6 वास्तव म क्या दखाता है। यह चाँद का लगभग 10.7 ग्राम का एक टका है, जसके दोन पहलू
दखाए गए ह। दोन ओर एक साद रेखा के भीतर कनारे से कनारे तक केवल फारसी ल प म लेखन है। न कोई चेहरा, न मुकुट,
न युद्ध का चत्र — केवल शब्द। उन्ह शब्द म एक है ‘ सकंदर सानी’, अथात ‘ तीय सकंदर’।
इससे तीन बात नकलती ह —

1. उसके लए सकंदर कौन था। सकंदर प श्चम से आया, फारसी सा ाज्य जीता और सधु तक पहुँचा। दल्ली के जस दरबार
क भाषा फारसी थी, वहाँ सकंदर वजय का मानक था। स्वयं को तीय सकंदर कहना उसके समान होने का दावा नह ,
वश्व वजय म उसका उत्तरा धकारी होने का दावा है।
2. उसने अभी-अभी क्या कया था। यह उपा ध उसके काय से मेल खाती है। 14व शताब्द के आरंभ म उसने उत्तर एवं मध्य
भारत के वस्तृत क्षेत्र म अ भयान चलाकर अनेक नगर लूटे, और साथ ही मंगोल सेनाओं के कई आक्रमण वफल कए — जो
भारत को अपने वशाल सा ाज्य का अंग बनाना चाहते थे। उधर उसके गुलाम सेनानायक म लक काफूर ने सल्तनत का
वस्तार द क्षण तक कया।
3. सक्के पर ही क्य । मध्यकालीन शासक के पास सबसे सस्ता और सबसे व्यापक प्रचार-साधन सक्का ही था। वह हर बाजार म
हाथ-दर-हाथ चलता है, सं चत कया जाता है, सीमाओं के पार जाता है, और शासक से अ धक जी वत रहता है। चाँद पर
अं कत उपा ध बना कसी घोषणाकता के दन म हजार बार अपनी घोषणा कर दे ती है।

ऐसा क्य हुआ: जो शासक बल से सत्ता लेता है, उसे यह बताना पड़ता है क उसक आ ा क्य मानी जाए।
अलाउ न खलजी कसी प्राचीन राजवंश का दावा नह कर सकता था — खलजी स्वयं ममलुक को हटाकर आए
थे। इस लए उसने वह दावा कया जो वंश नह दे सकता: फारसी जगत म सबसे बड़े वजेता क प्र तष्ठा। ऐसी
उपा धयाँ वणन नह , वैधता के तक होती थ ।

Page 6 of 40

Page 8

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

ऐसे ोत को कैसे पढ़: यह सक्का इस बात का प्रबल प्रमाण है क अलाउ न लोग से क्या मनवाना चाहता था,
और इस बात का दुबल प्रमाण क उसने वास्तव म क्या प्राप्त कया। इसक तुलना पृष्ठ 32 क उपा धय —
गजप त, नरप त, अश्वप त — से क जए। इस काल का हर राजवंश अपने नाम से ही अपना व ापन करता था।

आइए पता कर — पृष्ठ 26
दल्ली सल्तनत का उदय एवं पतन

आइए पता कर समू ह काय

प्र.1 आपके वचार से उन दन सेना को बनाए रखने एवं युद्ध संचालन के लए कन प्रकार के संसाधन क
आवश्यकता होती होगी? समूह म व भन्न प्रकार के व्यय पर चचा कर, जैसे — ह थयार या सै नक के लए
भोजन से लेकर युद्ध म पशुओं का उपयोग, सड़क नमाण इत्या द।

इस काल म सेना को चलाने से कह अ धक महँगा उसे बनाए रखना था। अ धकांश व्यय ह थयार पर नह , भोजन, पशुओं
और वेतन पर होता था — और यह व्यय प्र त दन करना पड़ता था, चाहे युद्ध हो या न हो।

व्यय का इसम क्या आता था अध्याय म इसका प्रमाण
प्रकार

मनुष्य सै नक का वेतन, भोजन, तंबू, वस्त्र; साथ चलने वाले औरंग जेब ने द क्कन के अिभयानों हेत ु 25 वष तक “िवशाल
रसोइए, लोहार, बढ़ई, भश्ती, वैद्य से ना का रख-रखाव” िकया

पशु युद्ध के घोड़े, हाथी, ऊँट और गा ड़याँ ख चने वाले बैल; मनसबदारों को “हािथयों, घोड़ों, ऊँटों और सै िनकों की एक
और उनका चारा, सईस तथा च कत्सा िनिश्चत संख्या” रखनी पड़ती थी; रानी दुग वती के पास
1,000 हाथी थे

हिथयार एवं तलवार, धनुष, कवच; 16व शताब्द से क्षेत्रीय तोपखाना 1526 में बाबर की पानीपत िवजय में “बारूद , क्षेत्र ीय तोपखाने
बारूद और तोड़ेदार बंदूक, साथ ही बारूद, गोले और तोप ढालने एवं तोड़ेद ार बंदू क ों पर अितशय िनभरता थी”
वाले कारीगर

दुग एवं दुग का नमाण एवं उनम सै नक रखना; घेरा डालने के कुं भलगढ़ की 36 िकलोमीटर लंबी दीवार ; अकबर ने
घे र ाबंद ी साधन और महीन क रसद िचत्त ौड़गढ़ को पाँच माह से अिधक घे रे रखा

आवागमन सड़क, सेतु, नद -नौकाएँ, सामान क गा ड़याँ, पड़ाव स ल्तनत काल में “िवशेषकर उ त्त र भारत में सड़क माग ,ं
से तओ
ु ं” का िनम ण हुआ ; असम में मुग लों के पास नदी-
नौकाओं का बड़ा बेड़ा था

िनरीक्षण एवं यह जाँचने वाले अ धकारी क सै नक वास्तव म ह और “िनयमों का अनुपालन सुिनिश्चत करने के िलए िनयिमत
अिभले ख पशु वैसे ही ह जैसा वचन दया गया था िनरीक्षण िकए जाते थे”

Page 7 of 40

Page 9

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

धन कहाँ से आता था — अध्याय तीन ोत बताता है: सैन्य अ भयान से प्राप्त लूट, साधारण जन एवं व जत क्षेत्र पर लगाए गए
कर, तथा गुलाम व्यापार म भागीदारी। सल्तनत म पहले दो को एकत्र करने का तंत्र इक्ता था — कुलीन को क्षेत्र स पे जाते थे, जो
कर वसूलकर व्यय काटने के बाद शेष सुल्तान के कोष म भेजते थे, जो “सेना के रख-रखाव के लए वशेष रूप से आवश्यक” था।

यह क्य महत्वपूण है: क्य क यही व्यय इस अध्याय क बहुत-सी राजनी त समझा दे ता है। म लक काफूर क
द क्षण वजय के बारे म कहा गया है क उनसे “सल्तनत के वशाल सैन्य तंत्र को आ थक रूप से समथ बनाया” —
अथात सेना को वेतन दे ते रहने के लए वजय करते रहना पड़ता था। और काल के दूसरे छोर पर, दक्कन म वशाल
सेना के रख-रखाव ने “सा ाज्य के राजकोष को क्षीण कया और प्रशासन पर भारी दबाव डाला”, जसे 1707 के
बाद मुगल श क्त के तीव्र पतन का एक प्रमुख कारक माना जाता है। सेना श क्त का ोत भी थी और उसे खा जाने
वाली वस्तु भी।

आपक समूह चचा के लए: ऊपर क छह पं क्तयाँ समूह के सदस्य म बाँट ली जए और प्रत्येक व्य क्त अध्याय म
से एक और उदाहरण खोजे। फर मलकर क ठन प्रश्न पू छए — इनम से कौन-सा व्यय शां त के समय समाप्त हो
जाता है? आप पाएँगे क लगभग कोई नह । इसी लए इस अध्याय के दो बल्कुल भन्न राज्य ने स्थायी सेना से बचने
के उपाय नकाले: मुगल क मनसबदारी प्रणाली (पृष्ठ 54) और अहोम क पाइक प्रणाली (पृष्ठ 48)।

आइए वचार कर — पृष्ठ 28
दल्ली सल्तनत का उदय एवं पतन

आइए वचार कर

प्र.1 हम प्र तमा (इमेज) शब्द का प्रयोग क्य करते ह, जब क सामान्यत: ‘मू त’ या ‘ चह्न’ जैसे शब्द प्रच लत ह?

क्य क अं ेजी के ‘idol’ और ‘icon’ तटस्थ शब्द नह ह — उनम नणय पहले से छपा है, और ‘image’ (प्र तमा) म
नह ।
अध्याय कारण ठ क-ठ क बताता है: ये दोन शब्द “यहूद , ईसाई एवं इस्लाम जैसे पंथ -मजहब के संदभ म नदनीय है क्य क इन
पंथ क रू ढ़वाद शाखाएँ मू त पूजा या चह्न क पूजा क नदा करती ह।” अंग्रेजी म idol शब्द प्राय: idolatry क छाया के बना
नह आता — और वह एक ऐसी प्रथा है जसे ये परंपराएँ नदनीय मानती ह। अथात कसी मं दर क प्र तमा को ‘idol’ कहना उसे
उन्ह लोग क शब्दावली म व णत करना है जो उसे अस्वीकार करते ह।
भारतीय शास्त्रीय ग्रंथ ने कभी ऐसा शब्द प्रयोग नह कया। उनम मू त, वग्रह, प्र तमा, रूप जैसे शब्द मलते ह, जो मं दर या घर म
पूजा म प्रयुक्त प्र तमाओं के लए थे। इनम से कसी म मथ्यात्व का भाव नह है। अं ेजी म ‘image’ ही वह शब्द है जो इनसे
मेल खाता है: वह बताता है क वस्तु क्या है, यह नह क आपको उसके बारे म क्या सोचना चा हए।

Page 8 of 40

Page 10

as e
a
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
यहाँ यह क्य महत्वपूण है: यह बॉक्स ठ क बुत शकन वाले अनुच्छेद के बीच म है — “मू तपूजक माने जाने वाले
प्रतीक या धा मक चत्र को अस्वीकार करना या नष्ट करना”। य द इ तहास क पुस्तक नष्ट क गईem
m a s
gl गया था। तटस्थ शब्द
प्र तमाओं को
coवह चुपचाप उस कारण से सहम त जता दे गी जो उन्ह नष्ट करने के लए aदया
‘idol’ कहे, .तो
m
चुननाsइeतहासकार के काम को घटना म स म्म लत लोग क राय से अलग रखता है: जो हुआ उसका वणन
a
aकgl जए, ऐसे शब्द म जो पक्ष न ल।

co m
em . ag
as
यह क जए: ध्यान द जए क शब्द का चुनाव कतनी बार बहस आरंभ होने से पहले ही उसे समाप्त कर दे ता है।

a g l
‘ वद्रोही’ या ‘स्वतंत्रता सेनानी’; ‘आक्रमण’ या ‘अ भयान’; ‘उपद्रव’ या ‘जन-आंदोलन’। हर जोड़े म तथ्य एक ही हो
सकते ह और नणय शब्द कर दे ता है। इ तहास को ठ क से पढ़ने का अथ है यह पहचानना।

co m
em.
m — पृष्ठ 29
coकर g l as
. a
emका प्र तरोध
आइए वचार
दल्ली a s
gl
सल्तनत
aआइए वचार कर

om a s
क्या आपको लगता है क उस समय 75 मुm
e
. c agl
a s
खयाओं को एकजुट करना सरल काय रहा होगा?

agl
प्र.1

com
नह — और यही क ठनाई इस उपल
m .
को उल्लेखनीय बनाती है। 14व शताब्द म 75 मु खयाओं को एक संघ म लाने के

m l
लए कम से कम चार समस्याएँ सुलझानी पड़त , और उनम से एक भी सै नक समस्या नह थी।
o a se
1. उन.c a gवह भी आज के तेलंगाना के जंगल, पहाड़
se m तक संदेश पहुँचाना। उस समय संदेश घुड़सवार से तेज नह जा सकता था, और
a
agl
और नद वाले क्षेत्र से होकर। 75 मु खयाओं से एक बार परामश करने म ही सप्ताह लग जाते, और हर संदेश पकड़ा जा सकता
था।

se m
mको यह मानना पड़ा क तुगलक का संकट पड़ोसी से बड़ा है। l a
2. प्र त ं य को साथ खड़ा करना। प्रत्येक मु खया के पास अपना क्षेत्र, अपने सशस्त्र लोग और अपना राजस्व था — और
प्राय: पड़ोसी मु खया से कोई पुराना झगड़ा भी। हरco g
m . एक
a
l a se सेनाप त चा हए। इसका अथ है क 74 नेता अपने ही बराबर के एक व्य क्त के
ag समाज म इसक क मत प्र तष्ठा से चुकानी पड़ती है, जो घर पर उनके अ धकार का
3. नेतृत्व पर सहम त। संघ को रणभू म म एक
नीचे रहना स्वीकार कर — और योद्धा
आधार थी।

. c om
4. सब कुछ दाँव पर लगाना। सल्तनत के वरुद्ध संघ म स म्म लत होने का अथ था प्र तशोध के लए च ह्नत हो जाना। जो

m a s em
स म्म लत हो और फर संघ बखर जाए, उसे दल्ली क सेना का सामना अकेले करना पड़ता।

. co a gl
as em फर भी यह क्य संभव हुआ: मुसुनुरी नायक स्वयं तेलुगु मु खया थे, इस लए उनके पास दूसर को बुलाने क
agl प्र तष्ठा थी; और उन्ह ने संघ चरण म बनाया — पहले संघ ने “छोटे राज्य ” को परा जत कया, और हर सफलता
c
m .
अगले मु खया को मनाना सरल बनाती गई। वजय से बड़ा कोई नमंत्रण नह होता। प रणाम यह हुआ क उन्ह ने
m a s e
. co agl
दल्ली सल्तनत क सेनाओं को परा जत कया और 1330–1336 के आस-पास वारंगल से मुहम्मद बन तुगलक क
e m
as
सेना को खदे ड़ दया।

a g l

com
m .
m ase
.co


a g l Page 9 of 40

Page 11

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

इसे जोड़कर दे खए: अब 1565 म दूसरे पक्ष के साथ जो हुआ, उससे तुलना क जए। दक्कन क पाँच सल्तनत —
बीजापुर, गोलकुंडा, बरार, अहमदनगर और बीदर — सामान्यत: आपस म लड़ती थ , और वजयनगर काफ हद
तक इसी लए टका था। जस क्षण उन्ह ने “गठबंधन बनाया”, वजयनगर तालीकोटा म हार गया। इस काल म
मलकर खड़े होने क क्षमता प्राय: कसी भी अकेली सेना के आकार से अ धक मूल्यवान थी।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 31
दल्ली सल्तनत का प्र तरोध

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आपको क्य लगता है क मध्यकाल म ऐसे स्थान को दुग के नमाण के लए चुना गया? इसके पक्ष- वपक्ष पर
चचा क जए। (संकेत — रणनी त, सुरक्षा, भेद्यता इत्या द वषय पर वचार कर।)

क्य क ऊँचाई और दुगम भू म रक्षक के लए वही काम करती ह जो अ त रक्त सै नक करते ह — और यह काम वे स्थायी
रूप से, बना वेतन के करती ह। कुंभलगढ़ ( चत्र 2.10) अध्याय का उदाहरण है: 15व शताब्द म राणा कुंभा ारा अरावली क
पहा ड़य म न मत, “घने जंगल और खड़ी पहा ड़य से घरा”, और 36 कलोमीटर लंबी वशाल द वार वाला।

पक्ष म वपक्ष म

शत्र ु पहले िदखता है। ऊँचाई से आती हुई से ना एक िदन पहले िदख जाती है रसद सबसे कमजोर कड़ी है। अन्न और िवशेषकर जल भीतर
और नीचे के गाँवों को चेतावनी भेजी जा सकती है। संिचत करना या ऊपर ढोना पड़ता है। घे र ा डालने वाले को
दीवार तोड़ने की आवश्यकता नही ं — के वल पतीक्षा करनी है।

खड़ ी ढलाने ं सै िनकों को कई गुना कर दे ती है।ं आक्रमणकािरयों को सँक रे लंबी दीवार पर बहुत लोग चािहए। 36 िकलोमीटर की पाचीर पर
माग ं से एक-एक कर चढ़ ना पड़ता है, इसिलए थोड़े रक्षक भी वह ार रोक हर जगह पहरा संभव नही;ं दृ ढ़ शत्र ु टटोलता रहता है जब तक
ले ते है ं िजसे बड़ी से ना भी एक झटके में नही ं ले सकती। कमजोर भाग न िमल जाए।

जंगल िछपाते और धीमा करते है।ं वे रक्षकों की गितिविध िछपाते है ं और घे रे यह मुख्य माग से दू र है। जो एकांत दुग की र क्षा करता है, वही
के भारी साधनों — बाद में तोपों — को ऊपर लाना अत्यंत किठन बना दे ते उसे उन व्यापार -माग ं और खेतों से दू र रखता है जहाँ से वास्तव में
है।
ं राजस्व आता है।

पत्थर और जल ोत वही ं िमलते है।ं पहाड़ी िनम ण-सामगी दे ती है और पाय: व्यय बहुत बड़ा है। ऐसा दुग बनाने और उसमें से ना रखने में
झरने भी, इसिलए दुग वही ं बन सकता है। पीिढ़ यों तक धन और जनशिक्त फँ सी रहती है।

अंितम शरण। मैद ान िछन जाने पर शासक, कोष और पिरवारों के िलए एक यिद यह िगरा तो सब िगरा। शासक , कोष और पिरवार एक ही
िठकाना बना रहता है — इसीिलए कुं भलगढ़ “मेवाड़ के शासकों के िलए एक स्थान पर रखने से एक पराजय सवनाश बन जाती है — जैस ा
सुदृ ढ़ गढ़ के रूप में काय करता था”। िचत्त ौड़गढ़ में हुआ ।

Page 10 of 40

Page 12

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य हुआ: मध्यकालीन राज्य आधु नक राज्य क भाँ त सै नक क अटू ट पं क्त से सीमा क रक्षा नह कर
सकता था। वह बदुओं क रक्षा करता था — और उनके बीच क भू म को पार करना महँगा बना दे ता था। पहाड़ी
दुग भूगोल को स्थायी रूप से सेना का अंग बना दे ता है। यही तक बड़े पैमाने पर अरावली म महाराणा प्रताप के लए
और असम के जंगल -न दय म अहोम के लए काम करता है।

स्वयं जाँ चए: मान चत्र पर अपने नकटतम दुग को खो जए — ग्वा लयर, दौलताबाद, गोलकुंडा, चत्तौड़गढ़,
कुंभलगढ़, जूनागढ़, या कोई स्थानीय दुग। दो प्रश्न पू छए: वहाँ के पहरेदार को क्या दखता था? और उसका जल
कहाँ से आता था? इन दो उत्तर म यह लगभग पूरा समा जाता है क दुग वह क्य बना।

आइए वचार कर — पृष्ठ 32
वजयनगर साम्राज्य

आइए वचार कर

प्र.1 क्या आप अनुमान लगा सकते ह क इन तीन उपा धय का क्या अथ है?

हर उपा ध म प त — अथात ‘स्वामी’ या ‘प्रभु’ — उस वस्तु से जुड़ा है जस पर वह राजवंश सबसे अ धक गव करता था।
शब्द तो ड़ए, अथ अपने आप नकल आएगा।

उपा ध शब्द- अथ कसने प्रयोग क और यह क्य उपयुक्त है
व ेद

नरपित नर (मनुष्य) + मनुष्यों का वजयनगर के राजा। उनका बल वशाल पैदल सेना म था।
पत स्वामी

अश्वपित अश्व (घोड़ा) घोड़ों का बहमनी सल्तनत के शासक। दक्कन क सल्तनत क श क्त घुड़सवार सेना थी — और
+पत स्वामी अच्छे युद्ध-अश्व आयात करने पड़ते थे, इसी लए वजयनगर का राजा पुतगाली घोड़ा-
व्यापा रय का इतना ध्यान रखता था (पृष्ठ 35)।

गजपित गज (हाथी) + हािथयों का ओ डशा के शासक, जनके युद्ध-हाथी प्र सद्ध थे। चत्र 2.12 म गजप त सा ाज्य (1458)
पत स्वामी पूव तट पर अं कत है।

छत्रपित छत्र (राजछत्र) छत्र का मराठा शासक। छत्र प्राचीन भारत म स्वतंत्र संप्रभु का चह्न था — इस लए यह उपा ध सेना
+पत स्वामी नह , प्र तष्ठा का दावा करती है।

ऐसा क्य हुआ: उपा ध इस बात का सं क्षप्त तक होती है क राजा को राजा क्या बनाता है। इनम से तीन राजवंश ने
राजत्व को उस सैन्य अंग से नापा जसक वे कमान करते थे — मनुष्य, घोड़े, हाथी — क्य क इस काल म सेना ही
राज्य थी। मराठ ने भन्न चुनाव कया: छत्र कहता है ‘म कसी के अधीन नह ’, न क ‘मेरे पास सबसे बड़ी सेना है’।
अध्याय के शब्द म, “प्रत्येक उपा ध राजत्व एवं श क्त के व भन्न पक्ष को दशाती है।”

Page 11 of 40

Page 13

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? यही घटक आपके चार ओर मलेगा — गणप त (गण के स्वामी), पशुप त (पशुओं के
स्वामी), राष्ट्रप त, लोकप त, भूप त (पृथ्वी के स्वामी)। एक बार प त पहचान लेने पर लंबी उपा ध भी पढ़ जा सकती
है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 35
कृष्णदे वराय

आइए पता लगाएँ

प्र.1 चत्र 2.14 म आप कौन-से तत्व दे खते ह? वे उस समय क जीवन-शैली के बारे म क्या बताते ह? (संकेत — शस्त्र,
जानवर, ग त व धय को ध्यान से दे ख।)

चत्र 2.14 म क्या दखता है। हंपी के वट्ठल मं दर क ेनाइट क तराशी हुई द वार का
छाया चत्र। पत्थर हल्के शहद-रंग के ह और नक़्क़ाशी उथली उभार-नक़्क़ाशी है, जो एक के
ऊपर एक पाँच लगातार क्षै तज प य म चलती है।
सबसे ऊपर क प । एक के पीछे एक चलते हाथी, सूँड नीचे मुड़ी हुई; दाएँ छोर पर
एक घोड़ा और उसके साथ एक व्य क्त।
दूसरी प । पैदल चलते लोग ऊँट और घोड़ को हाँक रहे ह — एक व्य क्त रस्सी से
ऊँट ख च रहा है, अन्य लोग डंडे लए पशुओं के बीच चल रहे ह।
तीसरी प । घुड़सवार; कई घोड़े पछले पैर पर उठे हुए ह; एक सवार धनुष ख च रहा
है, दूसरा लंबा शस्त्र लए है।
चौथी प । शकार के दृश्य — शकारी कुत्ते हरन के पीछे दौड़ते हुए, एक व्य क्त
धनुष ख चता हुआ, एक व्य क्त पास से पशु पर प्रहार करता हुआ।
सबसे नीचे क प । क़दम-से-क़दम मलाकर चलते पैदल सै नक क पं क्तयाँ, प्रत्येक
के हाथ म गोल ढाल और छोट तलवार; उनके बीच और भी ऊँट तथा सवार।
पुस्तक का अपना शीषक है — “ वट्ठल मं दर का एक पैनल”।

चत्र 2.14, पृष्ठ 35 — यहाँ केवल वणन दया गया है; तराशे हुए पैनल का छाया चत्र पाठ्यपुस्तक म दे ख।

यह प का क्षै तज प य म उकेरी गई है, एक के ऊपर एक, और हर प राज्य के जीवन का एक अलग भाग दखाती है।
ऊपर से नीचे दे खए —

सबसे ऊपरी प — हाथी। हा थय क एक पं क्त, एक के पीछे एक चलती हुई, और साथ म छोट मानव आकृ तयाँ।
दूसरी प — ऊँट और उनके चालक। पैदल चलते लोग ऊँट को हाँक रहे ह, हाथ म डंडे या अंकुश; साथ म बोझ उठाए हुए
अन्य आकृ तयाँ।

Page 12 of 40

Page 14

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

तीसरी प — घोड़े। कुछ घोड़ को सईस लगाम पकड़कर ले जा रहे ह; कुछ पर सवार ह, और एक-दो सवार के हाथ म लंबा
शस्त्र — भाला या धनुष — है, जब क उनके घोड़े उछल रहे ह।
चौथी प — आखेट। पैदल पुरुष धनुष और डंडे लए हुए, आगे दौड़ते कुत्ते, और उनसे भागते पशु।
सबसे नीचे — पैदल आकृ तय क पं क्तयाँ, कुछ के हाथ म गोल ढाल और शस्त्र।

इससे उस समय के जीवन के बारे म क्या पता चलता है —

पत्थर पर क्या उकेरा है वह क्या बताता है

हाथी, घोड़े और ऊँट — मनुष्यों पशु राज्य की शिक्त का माप थे। वे से ना, माल और राजा — तीनों को ढोते थे। रानी दुग वती की शिक्त भी
िजतने ही महत्व और आकार में इसी पकार बताई गई है: 20,000 सै िनक और 1,000 हाथी।

सईस घोड़ों को हाँक रहे है,ं घोड़े के वल पयोग नही ं होते थे, उनका व्यापार भी होता था। इसी पष्ृ ठ पर अध् याय बताता है िक पुतगाली
उन पर सवार नही ं िवजयनगर घोड़ े बेचने आते थे और राजा उनका अच्छा व्यवहार इसिलए करता था िक वे शत्र ु राज्यों को न
बेचें।

भाले , धनुष, ढाले ं; सवार और घुड़सवार और पैद ल से ना एक ही बल के रूप में लड़ती थी, और मंिदर की दीवार इसे अंिकत करने का
पैद ल सै िनक साथ-साथ उपयुक्त स्थान माना गया — युद्ध सावजिनक , यहाँ तक िक पावन, पदशन का अंग था।

कु त्तों के साथ आखेट आखेट राजसी गितिविध थी — युद्ध का अभ्यास और कौशल का पदशन — और पत्थर पर उके रे जाने
योग्य।

चलती, हाँक ती, बोझ उठाती यह एक शोभायात्र ा है: एक महानगर की रोज की हलचल। यह इसी पष्ृ ठ पर िदए डोिमगो पायस के िववरण से
साधारण आकृ ितयों की मेल खाती है — “सड़कों एवं बाजारों में बोझ ढोने वाले बैल भरे पड़े है…
ं यहाँ आप िवपुल मात्र ा में सब कु छ पाप्त
पंिक्तयाँ कर सकते है ं जो आप चाहते है।
ं ”

ऐसा क्य हुआ: वजयनगर का मं दर केवल पूजा-स्थल नह था। जैसा अध्याय आगे (पृष्ठ 57) बताता है, मं दर ने
“चहल-पहल भरे बाजार वाले पा र स्थ तक तंत्र का भी नमाण कया”, भू म और धन ट्रस्ट के रूप म रखा, सचाई
और यात्री-आवास बनवाए, और व्यापा रय को ऋण दया। जो भवन नगर क अथव्यवस्था के कद्र म हो, उसक
द वार पर वही अथव्यवस्था उकेरी जाना स्वाभा वक है — सै नक, व्यापारी, पशु और आखेटक, केवल दे वता नह ।

स्वयं जाँ चए: अपनी पुस्तक म चत्र 2.14 खो लए और प ट्टयाँ ग नए। फर ग नए क एक ही पट्ट म कतने भन्न
पशु मलते ह। श ल्पय ने एक ही आकृ त दोहराई और उसम थोड़ा-थोड़ा प रवतन कया — इसी से छोट
आकृ तय क द वार दूर से भी पढ़ जा सकती है।

आइए वचार कर — पृष्ठ 37

Page 13 of 40

Page 15

as e
a
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
g l AglaSem · NCERT Solutions

मुगल — बाबर और भारत
co m
e m.
m as
आइए वचार कर समू ह काय

.co a g l
a s emके वषय म बाबर के वचार म आप क्या वशेष पाते ह? समूह म चचा कर।
gl
भारत
a
प्र.1

o m
c ag

.
m कतनी दुहरी है, और स्वयं वह व्य क्त कतना दुहरा है।
s e
दो बात तुरंत ध्यान ख चती ह: भारत के बारे म उसक राय
a उसक समृ द्ध क प्रशंसा करता है। वह मध्य ए शया से अ तशय जुड़ाव
agl
1. वह एक ही साँस म दे श को नापसंद करता है और
रखता था और भारत को ‘अल्प आकषण का दे श’ मानता था। फर भी उसने लखा — “ हदुस्तान वशाल दे श है एवं इसम सोना-

co m
चाँद बहुतायत म है… वषा ऋतु के समय यहाँ क हवा अत्यंत शुद्ध एवं स्वास्थ्यप्रद है… हदुस्तान म हर प्रकार के शल्पकार तथा

se m.
कारीगर अन गनत संख्या म उपलब्ध ह।” अध्याय स्पष्ट नष्कष नकालता है — “शायद भारत क समृ द्ध तथा संसाधन को दे खकर

o m
c नह क उसे भारत कैसा लगा। g l a
उसने मध्य ए शया वापस जाने के स्थान पर यह अपनी सत्ता बनाए रखने का नणय लया।” वह इस लए रुका क भारत के पास
क्या था, इस.लए a
m
seकन बात पर ध्यान दे ता है, इससे उसके मन का पता चलता है। केवल दुग और राजस्व नह , ब ल्क पक्षी — जनम से
2.la
g
a कई को उसने ववरण स हत सूचीबद्ध कया — फलदार वृक्ष, वास्तुकला और क वता। यह एक ज ासु, सूक्ष्म दृ ष्ट वाले लेखक का
वह

m a s
agl
मन है। बाबरनामा इ तहासकार के लए इसी लए मूल्यवान है क उसने वही लखा जो उसे रोचक लगा, केवल वह नह जो उसे बड़ा

.co
em
दखाता।

l a s
कोgदास बनाना, और मारे गए लोग के शरीर से ‘खोप ड़य क मीनार’ बनवाना, “इसम
3. और वही पुस्तक भयानक बात बना कसी खेद के दज करती है। वह “एक नदयी वजेता भी था” — कई नगर के
नवा सय क हत्या, म हलाओं तथा बच्च a
उसे गव का अनुभव होता था।” ध्यान दे ने योग्य शब्द है गव। वह स्वीकारो क्त नह कर रहा, उपल ब्ध दज कर रहा है।

. com
इ तहास पढ़ने के लए यह क्य महत्वपूण है: अतीत के लोग को अच्छे और बुरे म बाँeटm
m a s
l वाला वजेता एक ही मनुष्य
दे ने का मन करता है।

. cबँoटता नह । प क्षय क गनती करने वाला संस्कारी व्य क्त और खोप ड़याँagगनने
m
बाबर

aseहै, जो एक ही पुस्तक लख रहा है। जो इ तहास केवल पहला रखे वह चाटुका रता है; जो केवल दूसरा रखे वह व्यंग्य-
agl चत्र। ईमानदार ववरण दोन रखता है और यह कहता भी है।

se m
com g l a
m . a
e
आपके समूह के लए: अध्याय बाबरनामा को “ऐ तहा सक दृ ष्ट से अत्यंत महत्वपूण” आत्मकथा कहता है। चचा

g l asमलता है और क्या फर भी नह मलता। आत्मकथा प्रत्यक्षदश ोत है,
कतु वह उस व्य क्त क लखी a
क जए क आत्मकथा होने से हम क्या
है जसने चुना क क्या लखना है, और जो जानता था क उसे पढ़ा जाएगा। पू छए:

m
जन नगर को उसने लूटा, वहाँ के लोग क्या लखते — और वह हमारे पास क्य नह है?
. co
em
m l as
.co a g
a s em वचार कर — पृष्ठ 40
gl
आइए
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 40

Page 16

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

अकबर

आइए वचार कर

प्र.1 आपके वचार म अकबर ने साम्राज्य वस्तार हेतु अलग-अलग रणनी तयाँ क्य अपनाईं, जब क दल्ली के पहले
शासक प्राय: केवल सैन्य श क्त पर ही नभर थे?

क्य क अकबर जीता हुआ क्षेत्र रखना चाहता था, और केवल बल जीतने म बहुत अ ा है तथा रखने म बहुत बुरा।
प्रमाण क बल काम आया — और पयाप्त नह था। चत्तौड़ म उसने “कोई दया नह दखाई”: पाँच माह से अ धक घेरा डाला,
राजपूत ने “मुगल सेना को भारी क्ष त पहुँचाई”, और कले म सध लगने पर उसने लगभग 30,000 नाग रक के नरसंहार का आदे श
दया। उसक आयु 25 वष थी। यह वजय का सबसे पूण रूप है, और इसने पीछे ऐसा राजस्थान छोड़ा जसे सदा सेना के बल पर
दबाए रखना पड़ता। जैसे-जैसे सा ाज्य बढ़ा ( चत्र 2.16), ऐसे स्थान सै नक से अ धक हो गए।
इसके स्थान पर उसने क्या कया —

पड़ोसी राज्य क राजकुमा रय के साथ वैवा हक संबंध — प्र त ं य को संबंधी बना दे ना।
राजपूत एवं क्षेत्रीय नेताओं का दरबार म स्वागत, और हदू अ धका रय क उच्च पद पर नयु क्त — जससे अन्य कुलीन वग
का भी सा ाज्य क सफलता म हत बन गया।
ज जया का उन्मूलन — प्रजा क जेब और सम्मान, दोन पर लगे एक स्थायी बोझ को हटाना।
सुलह-ए-कुल क नी त और अंतरपां थक संवाद।
फतेहपुर सीकरी म ‘अनुवाद भवन’, जहाँ महाभारत, रामायण, भगव ता एवं पंचतंत्र का फारसी म अनुवाद हुआ — अपनी
प्रजा क परंपराओं को अपने ही दरबार म पढ़ने योग्य बना दे ना।

प रणाम यह हुआ क उसने “अपने सा ाज्य को वस्तार तथा स्थरता प्रदान क और कई राजपूत शासक का समथन प्राप्त कया”,
और लगभग 50 वष शासन कया — जब क दल्ली सल्तनत का औसत नौ वष से क ठनता से अ धक था।

पहले के सुल्तान ने ऐसा क्य नह कया: एक कारण यह क उनम से अ धकांश इतने वष जी वत ही नह रहे क
प्रयास कर पाते। जस सुल्तान के दस वष म हटाए जाने क संभावना हो — और तीन म से दो ने अपने पूववत को
हटाकर ही सत्ता ली थी — उसके पास ऐसे गठबंधन म नवेश का कोई कारण नह जो बीस वष बाद फल द। दूसरा
कारण अथव्यवस्था का है: आरं भक सल्तनत बहुत हद तक लूट और खराज पर चलती थी, जसके लए नरंतर
अ भयान चा हए; अकबर क व्यवस्था टोडरमल के सव क्षत, स्थर भू-राजस्व पर चलती थी, जसके लए शां त
चा हए। राज्य का खच जस व ध से जुटता है, वही उसक राजनी त का रूप तय करती है।

चत्र को ईमानदार र खए। अध्याय अकबर के प रवतन को पूण नह बताता। वह लखता है क उसके प्रशासन म
गैर-मु स्लम अ धका रय का कुल प्र तशत “शायद ही कभी एक- तहाई से अ धक था और प्राय: इससे भी कम रहता
था”, क मु स्लम अ धका रय म भी वदे शी मूल के अ धका रय को प्राथ मकता द जाती थी, और क उसके अं तम
15 वष कश्मीर, सध, दक्कन और अफगा नस्तान म नए सैन्य अ भयान से भरे रहे। स हष्णुता और वजय साथ-
साथ चलती रह ।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 41

Page 15 of 40

Page 17

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

अकबर

आइए पता लगाएँ मान चत्र काय

प्र.1 चत्र 2.3, 2.12 और 2.16. के मान चत्र क तुलना कर। आप क्या अंतर दे खते ह? इनम क्या ‘प रवतन’ हुए ह?

40° उ॰

उ॰

पेशावर

30° उ॰
िद ल्ली

ग्वािलयर
जौनपुर

जूनागढ़ जाजनगर
दौलताबाद
20° उ॰
कोणाक
बंगाल की
अरब खाड़ ी
सागर

हाले िबदु संकेितका
नरिसंहदेव के अधीन पूव गंग े
क्षत्र

बेल ूर (1264)
होयसल पदेश (1300)
मदुर ई तगु लक वंश का िव तार (1335)
स्
10° उ॰
लोदी वंश का िव तार (1479)
स्

मह वपूण नगर
िहंद त्

महासागर

70° पू॰ 80° पू॰ 90° पू॰

चत्र 2.3, पृष्ठ 24 — तुगलक एवं लोद शासक (13व से 15व शताब्द ) के अधीन क्षेत्र तथा द क्षण एवं पूव क
क्षेत्रीय श क्तय के मध्य तुलना। वास्त वक अक्षांश-दे शांतर पर पुनः बनाया गया; पुस्तक म यह उच्चावच (relief)
पृष्ठभू म पर छपा है।

Page 16 of 40

Page 18

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

उ॰

25° उ॰

बेरार
((अचलप रु ))
जाजनगर

20° उ॰
अहमदनगर

बीदर
बीजाप रु गोलकुं डा
((िबजयप रु ))

15° उ॰
िवजयनगर
(हंप ी))
(

कालीकट
((कोिझकोड ))
संके ितका
10° उ॰ गजपित साम ाज्य (1458)
बहमनी सल् तनत (1477)
िवजयनगर साम ाज्य (1509)
कृष्णदे वराय के अधीन िवजयनगर
साम ाज्य (1529)
महत् वपूण नगर

75° पू॰ 80° पू॰ 85° पू॰

चत्र 2.12, पृष्ठ 33 — दक्कन के राजवंश एवं वजयनगर साम्राज्य, वास्त वक अक्षांश-दे शांतर पर पुनः बनाया गया।
संके तका ठ क वैसी ही द गई है जैसी पुस्तक म छपी है — पुस्तक म “बहमनी सल्तनत (1477)” तथा “ वजयनगर
साम्राज्य (1509)” के सामने कोई अ भकल्प (pattern) नह छपा है।

Page 17 of 40

Page 19

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

उ॰

पठान
जनजाित लाहौर
मुल्तान
30° उ॰
िदल्ली

जयप ुर
आगरा गुवाहाटी
पटना
मेवाड़
ढाका

सूरत

20° उ॰ मुबई
ं कटक
बंगाल की
प ुणे गोलकुं डा खाड़ ी
अरब
सागर मछलीपट्टनम
बीजाप ुर
((िबजयप ुर))
संकेितका
अकबर के अधीन मुगल सामाज्य
(1605)
काचीप
ं ुरम
औरंगजेब के अधीन मुगल िवस्तार
(1700)
10° उ॰ राजपूत भूखंड (1751)
अहोम राज्य (1826)
िहंद िसख सामाज्य (1839)
महासागर महत्वपूण नगर

70° पू॰ 80° पू॰ 90° पू॰

चत्र 2.16, पृष्ठ 39 — व भन्न कालखंड म मुगल और क्षेत्रीय श क्तय का उदय, वास्त वक अक्षांश-दे शांतर पर पुनः
बनाया गया। संके तका ठ क वैसी ही द गई है जैसी पुस्तक म छपी है — पुस्तक म “राजपूत भूखंड (1751)”, “अहोम
राज्य (1826)” तथा “ सख साम्राज्य (1839)” के सामने कोई अ भकल्प (pattern) नह छपा है।

इन तीन को एक ही भू म के, लगभग सौ-सौ वष के अंतर पर लए गए तीन छाया चत्र क तरह प ढ़ए। संके तका और
छाया- चह्न से जो नकलता है, वह यह है —

Page 18 of 40

Page 20

as e
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
चत्र 2.3 (पृष्ठ 24) चत्र 2.12 (पृष्ठ 33) चत्र 2.16 (पृष्ठ 39)

m as e
क्षेत्र
.co
संपूण उपमहा प केवल दक्कन और द क्षण
a g l
संपूण उपमहा प

a s emतुगलक वंश, 1335 — उ र-पि चम
gl
सबसे बड़ ा कृ ष्णदे वराय के अधीन िवजयनगर , 1529
a
त्त श् अकबर के अधीन मुग ल साम ाज्य
भाग में पेशावर से सुदू र दिक्षण में मदुर ई — लगभग 15° उ० से नीचे का संपूण (1605), िजसमें औरंग जेब (1700)
तक , और पूव में बंग ाल तक पाय ीप ने द क्कन तथा काच
ं ीपुर म तक का

m
.co ag
पूव तट जोड़ा

a s em
l
कौन बाहर
ag बहमनी सल्तनत, 1477, उत्तरी दक्कन म
नर सहदे व के अधीन पूव गंग क्षेत्र, गजप त सा ाज्य, 1458, पूव तट पर; उत्तर-प श्चम म पठान कबीले; मेवाड़
है 1264 (जाजनगर, कोणाक); एक अलग भाग के रूप म; और पूव
होयसल प्रदे श, 1300 (बेलूर, म गुवाहाट तथा अहोम क्षेत्र बाहर
हाले बदु)
co m
m.
se तमेभूं खउ ंडरािधकारी
com l a
िसकु ड़ ना लोदी वंश, 1479 — के वल िद ल्ली, बहमनी सल्तनत पाँच राज्य म बँटती है — संके ितका पहले से

ag
त्त

m . का गंगा का मैदान। न पेशावर, न
वािलयर और जौनपुर के आस -पास बीजापुर, गोलकुंडा, बरार (अचलपुर), है ं
: राजपू (1751), अहोम

ase
ग्

agl
अहमदनगर और बीदर, जो इसी मान चत्र राज्य (1826), िसख साम ाज्य
गज
ु रात, न द क्कन। पर नगर के रूप म अं कत ह (1839)

om a s
agl
तो ‘प रवतन’ क्या है? तीन प्रवृ त्तयाँ — और हर एक मान चत्र पर दखती है, केवल कही नह गई है:
. c
s e m तुगलक 1335 से लोद 1479 है: उसी वंश का क्षेत्र 150 वष से कम म
g a म यही करती है — पाँच टुकड़े।
1. वस्तार के तुरंत बाद वखंडन। सबसे स्पष्ट उदाहरण
एक अंश रह जाता है। बहमनी सल्तनत भीlदक्कन
a
2. भू म खाली नह रहती। जहाँ दल्ली नयंत्रण खोती है, वहाँ नई क्षेत्रीय श क्त उभरती है — होयसल के बाद वजयनगर, तट
पर गजप त, दक्कन क सल्तनत, और आगे चलकर राजपूत, अहोम, मराठे और सख।
co m
m .
e
3. श क्त एक बड़े कद्र और अनेक क्षेत्रीय कद्र के बीच झूलती रहती है। चत्र 2.3 म पहले एक वशाल भाग, फर एक छोटा;

m l as
.co g
चत्र 2.12 म कई मध्यम श क्तयाँ; चत्र 2.16 म फर एक वशाल भाग — जस पर उसके उत्तरा धकारी भी अं कत ह।

m
eऐसा a
a s
agl क्य हुआ: क्षेत्र जीतने से अ धक क ठन था उसे बनाए रखना। वजय से शासक को कर और लूट मलती थी,

m
कतु दूरस्थ प्रांत को चलाने के लए राज्यपाल पर वश्वास करना पड़ता था — और सा ाज्य के दूसरे छोर पर बैठा

o m
राज्यपाल स्वतंत्रता क घोषणा कर सकता था, और करता भी था। ह रहर और बुक्का राय ने “आरंभ म मुहम्मद बन
l a se
m .c”; दक्कन क पाँच सल्तनत क स्थापना उन “पूव प्रशासक अथवा ag
sकe घोषणा कर द थी”। जो अ धकारी सा ाज्य को फैलाते थे, वही उसे
तुगलक के अधीन राज्यपाल के रूप म सेवाएँ द

g l a
‘तरफदार ’” ने क “ जन्ह ने स्वायत्तता
तोड़ने क सबसे अच्छ स्थ त मaभी होते थे।

c o m
यह क जए: भारत का एक रक्त रेखा-मान चत्र ली जए और तीन सबसे बड़े वस्तारm .
s e तीन रंग म भ रए — तुगलक
a अध्याय के एक से अ धक
om वजयनगर 1529 और औरंगजेब 1700। फर वे नगर च ह्नत क aजए
.c1335, glजो
se m मान चत्र पर आते ह ( दल्ली, जाजनगर, गोलकुंडा, बीजापुर, कोणाक, मदुरई खो जए)। नगर सा ाज्य से अ धक
g l a
a जी वत रहते ह, और यह कागज पर दे खने योग्य बात है।
c
m .
m a s e
em . co agl
आइए वचार कर — पृष्ठ 43
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 19 of 40

Page 21

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

औरंगजेब

आइए वचार कर

प्र.1 हमने ऊपर दे खा क दल्ली के सुल्तान का औसत शासनकाल लगभग नौ वष था। यह आँकड़ा मुगल सम्राट के
वषय म औरंगजेब तक 27 वष का हो जाता है और य द हम 19व शताब्द म साम्राज्य के अंत तक के सभी मुगल
शासक को स म लत कर तो 16 वष सभी के शासनकाल का औसत था। शासन के वष क इन संख्याओं से
आप क्या नष्कष नकालते ह?

पहले तीन आँकड़े साथ र खए —

िदल्ली के सुल्तान — औसत शासनकाल लगभग 9 वष

औरंगजेब तक के मुगल समाट — औसत 27 वष

19वी ं शताब्दी में सामाज्य के अंत तक सभी मुगल शासक — 16 वष
अथ त औरंगजेब तक के मुगल औसतन एक सुल्तान से लगभग तीन गुन ा समय िटके ।

बीच वाला आँकड़ा आप स्वयं जाँच सकते ह। बाबर से औरंगजेब तक छह शासक ह और 1526 से 1707 तक 181 वष होते ह।
कतु इनम से लगभग 15 वष हुमायूँ के हाथ से सहासन नकला रहा, जब शेरशाह सूरी का सूर सा ाज्य था — अथात मुगल ने
दल्ली पर लगभग 166 वष ही शासन कया, और 166 ÷ 6 ≈ 27, जो ठ क पुस्तक का आँकड़ा है।
इन संख्याओं से क्या नकलता है —

1. नौ वष का औसत बताता है क सल्तनत म उत्तरा धकार का कोई स्थर नयम नह था। अध्याय कारण भी दे ता है:
लगभग तीन म से दो सुल्तान ने अपने पूववत को हटाकर सत्ता ह थयाई। बल से लया गया सहासन औसतन इतने ही समय
तक टकता था, जब तक कोई और उसी व ध से उसे न ले ले।
2. सत्ताईस वष एक भन्न प्रकार का शासन संभव बनाते ह। टोडरमल का संपूण सा ाज्य का भू म-सवक्षण, बारह सूब क
व्यवस्था, नय मत नरीक्षण वाली मनसबदारी, और संस्कृत ग्रंथ का अनुवाद — इनम से कोई भी नौ वष म फल नह दे ता।
शासनकाल क लंबाई केवल भाग्य नह , प्रशासन क पूव-शत है।
3. 27 से 16 पर आ जाना पतन का आकार है। 1707 के बाद के शासक को जोड़ते ही औसत ग्यारह वष गर जाता है, अथात
बाद के मुगल अल्पका लक रहे। यह अध्याय के इस कथन से मेल खाता है क 1707 म औरंगजेब क मृत्यु के बाद मुगल श क्त
का “तेजी से पतन” हुआ।

कतु औसत म बहुत अ धक गुण मत प ढ़ए। लंबा शासनकाल शांत शासनकाल नह होता। औरंगजेब के अपने
49 वष इस प्रकार आरंभ हुए: उसने बड़े भाई दारा शकोह को कई युद्ध म परा जत कर उसक हत्या क और उसका
मस्तक पता के समक्ष प्रस्तुत कया; एक अन्य भाई को बंद बनाकर मृत्युदंड दया, तीसरे को नवासन म भेजा, और
अपने पता शाहजहाँ को आगरा के कले म मृत्यु तक बंद रखा। मुगल उत्तरा धकार सल्तनत जतना ही हसक था
— अंतर केवल यह क वजेता फर टक जाता था।

Page 20 of 40

Page 22

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

औसत के प्रयोग पर सुझाव: औसत वस्तार को छपा दे ता है। अकबर ने लगभग 50 वष और औरंगजेब ने लगभग
49 वष शासन कया; य द छह म से दो शासक ही सौ वष घेर ल, तो ‘सामान्य’ मुगल शासनकाल 27 वष से कम रहा
होगा। इ तहास म जब भी औसत मले, पू छए क सबसे बड़ा और सबसे छोटा मान क्या था।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 45
औरंगजेब

आइए पता लगाएँ

प्र.1 अपने दो पुत्र को लखे गए पत्र म औरंगजेब ने लखा है, “म अकेला आया था और अकेला जा रहा ँ। म नह
जानता क म कौन ँ और क्या कर रहा था... मने न दे श के लए और न ही लोग के लए अ ा कया है। भ वष्य
के लए भी मेरे पास कोई आशा नह है... म जीवनभर नराश रहा और द न-हीन अवस्था म ही जा रहा ँ।” ये
शब्द उनके व्य क्तत्व के कौन-से पक्ष को उजागर करते ह? आपको उनके बारे म कैसा महसूस होता है?

ये शब्द बताते ह क इस अध्याय के सबसे लंबे और सबसे श क्तशाली शासनकाल के अंत म, उसे चलाने वाले व्य क्त ने
स्वयं उसे असफल माना — और वह भी उस कसौट पर जो वजय नह थी।
पं क्त-दर-पं क्त दे खए क वह क्या कह रहा है —

“म अकेला आया था और अकेला जा रहा हूँ।” यह वह स ाट कह रहा है जसने तीन भाइय को रास्ते से हटाया और अपने
पता को बंद बनाया।
“म नह जानता क म कौन हूँ।” यह उस शासक के शब्द ह जसने स्वयं को ‘आलमगीर’ अथात ‘ वश्व वजेता’ ना मत कया
था।
“मने न दे श के लए और न ही लोग के लए अच्छा कया है।” ध्यान द जए क वह कसौट कौन-सी चुनता है। क्षेत्र नह — उस
माप से तो वह सफल था, क्य क उसी के शासनकाल म सा ाज्य अपने चरम वस्तार पर पहुँचा — ब ल्क दे श और लोग।
“म जीवनभर नराश रहा…” यह उस व्य क्त के शब्द ह जसने अपने जीवन के अं तम 25 वष दक्कन म युद्ध करते हुए बताए
और राजकोष क्षीण कर दया।

Page 21 of 40

Page 23

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

इ तहासकार ऐसे अंश को कैसे पढ़ते ह। यहाँ एक से अ धक पाठ संभव ह, और दोन बताना ही ईमानदारी है:

सच्चा प ात्ताप। पुत्र को लखा नजी पत्र कोई सावज नक घोषणा नह है; इससे उसे कुछ पाना नह था। इस
पाठ म यह एक व्य क्त का अंत म अपना जीवन तौलना है, और यह पाना क सा ाज्य उसका उत्तर नह है।
पारंप रक वनम्रता। औरंगजेब अत्य धक मजहबी था और अनुशा सत जीवन जीता था। उस परंपरा म
मरणासन्न व्य क्त से ईश्वर के समक्ष अपनी तुच्छता स्वीकार करने क अपेक्षा क जाती है। इस पाठ म पत्र सच्चा
तो है, कतु औपचा रक — वह उसक आस्था के वषय म अ धक बताता है, उसक नी तय के मूल्यांकन के
वषय म कम।

सबसे उ चत यह है क एक चुनकर दूसरा छपाया न जाए। पत्र इस बात का प्रमाण है क उसने क्या अनुभव कया;
इस बात का प्रमाण नह क उसने क्या कया। उसके लए अध्याय 1669 का वह फरमान दे ता है जसम सभी प्रांत
के गवनर को वद्यालय एवं मं दर नष्ट करने का आदे श था, उसके बाद बनारस, मथुरा और सोमनाथ म तथा जैन
मं दर एवं सख गुरु ार पर हुआ वध्वंस, और पुनः लगाया गया ज जया व तीथयात्रा कर। अंत का पश्चात्ताप इनम
से कुछ भी नह मटाता, और अध्याय भी यह संकेत नह करता क वह मटाता है।

नमूना उत्तर — दूसरा भाग पूछता है क आपको कैसा लगता है; यह व्य क्तगत उत्तर है, इस लए अपना ल खए।
तुलना के लए एक ईमानदार उत्तर यहाँ है। “मुझे यह पत्र प्रेरक नह , दुखद लगता है। दुखद इस लए क उपमहा प
म जस व्य क्त के पास सबसे अ धक श क्त थी, वह उसका उपयोग वह करने म नह कर सका जसे वह स्वयं अच्छा
मानता था — और यह वह जानता भी था। कतु इससे उसके शासन के बारे म मेरा नणय नह बदलता। जनके
मं दर और गुरु ारे नष्ट हुए, और गुरु तेग बहादुर, जनका 1675 म उसी के आदे श पर सर काटा गया — उनके लए
इस पश्चात्ताप से कुछ नह बदलता। मुझे लगता है दोन बात एक साथ सच हो सकती ह: पत्र एक वास्त वक मनुष्य
को दखाता है, और अ भलेख वास्त वक क्ष त को।”

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 48
अहोम

आइए पता लगाएँ कक्षा चचा

प्र.1 कक्षा म चचा कर क ‘पाइक’ प्रणाली ने अहोम साम्राज्य म लोग के दै नक-जीवन को चुनौ तय एवं लाभ के
संदभ म कैसे प्रभा वत कया तथा कैसे राजाओं को सेना और अथव्यवस्था दोन का प्रबंधन करने म सहायता
क।

पहले यह ठ क-ठ क सम झए क प्रणाली थी क्या। ‘पाइक’ प्रणाली म “प्रत्येक सक्षम व्य क्त से भू म अ धकार के स्थान पर
श्रम या सैन्य कतव्य के माध्यम से राज्य को सेवा प्रदान करने का आ ान कया जाता था।” अथात पाइक पेशेवर सै नक नह था।
वह कसान था जस पर राज्य के लए काम करने का दा यत्व था — और राज्य उसे सक्क म नह , भू म रखने के अ धकार म
भुगतान करता था।

Page 22 of 40

Page 24

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

लोग के लए लाभ लोग के लए चुनौती

भूिम भू म रखने के लए नकद राजस्व नह दे ना पड़ता था। दा यत्व ऐसा भूिम का अिधकार से वा से बँध ा था। से वा रुकी तो जोत
काम था जो आप वास्तव म कर सकते थे। का आधार ही समाप्त।

समय सेवा बारी-बारी से थी, इस लए कसी घर के सारे पुरुष एक साथ बुवाई या कटाई के समय बुल ावा आ जाए तो पिरवार का
नह जाते थे। पूर ा वष िबगड़ सकता था। खेती पतीक्षा नही ं करती।

िकया गया श्रम से तटबंध, सड़क और तालाब बने, जनका उपयोग वही गाँव आपका श्रम आपका नही ं था िक आप उसे बेच सकें ।
काम करते थे। अपने काम का फल दखता था। क्या बनेग ा, यह राज्य तय करता था।

युद्ध आप अपनी ही भू म पर, अपनी ही घाट के लए, अपने पड़ो सय युद्ध का सीधा जोिखम साधारण िकसानों पर पड़ता था,
के साथ लड़ते थे — जो अच्छ तरह लड़ने का प्रबल कारण है। और बार -बार पड़ता था।

इसने राजा क दो सबसे क ठन समस्याएँ एक साथ हल क —

सेना क समस्या। अध्याय प रणाम ठ क-ठ क बताता है: “इससे शासक को सावज नक आधारभूत संरचना का नमाण करने
एवं स्थायी सेना के बना वशाल त्व रत बल बनाए रखने का अवसर मला।” स्थायी सेना को शां त के हर महीने म वेतन दे ना
पड़ता है। पाइक बल तब तक कुछ खच नह करता जब तक बुलाया न जाए।
अथव्यवस्था क समस्या। वही लोग, उसी बारी म, खाइयाँ खोदते, तटबंध बनाते और नौकाएँ गढ़ते थे। जस व्यवस्था से राज्य
को सै नक मलते थे, उसी से सावज नक नमाण भी — एक दा यत्व, दो लाभ।

यह यह क्य सफल हुआ: ब्रह्मपुत्र घाट म कसान के पास पहले से जो कौशल थे, युद्ध को उन्ह क आवश्यकता
थी। नाव चलाना, खाई खोदना, तीरंदाजी — ये सैन्य कतव्य बनने से पहले दै नक काम थे। मुगल सेनाप त राम सह
ने यही दे खा: “प्रत्येक अस मया सै नक नाव चलाने, तीरंदाजी करने, खाई खोदने तथा बंदूक एवं तोप को चलाने म
नपुण है।” यह साहस क प्रशंसा नह , पाइक प्रणाली के प रणाम का वणन है। 1671 म सरायघाट म ल चत
बरफुकन और उनके 10,000 सै नक ने 30,000 क मुगल सेना को परा जत कया।

आपक कक्षा-चचा के लए — यह तुलना क जए: इस अध्याय के हर राज्य के सामने यही समस्या थी और हर
एक ने भन्न समाधान नकाला। दल्ली सल्तनत ने इक्ता अपनाई: कुलीन को क्षेत्र, जनसे कर वसूलकर सेना का
खच चले। अकबर ने मनसबदारी अपनाई: मनसब के अनुसार न श्चत संख्या म हाथी, घोड़े, ऊँट और सै नक, और
भुगतान जागीर म। अहोम ने पाइक अपनाई: सबका श्रम, भुगतान भू म अ धकार म। कक्षा से पू छए क इन तीन
म से साधारण कसान पर सबसे भारी बोझ कौन-सी डालती है — और बदले म सबसे अ धक कौन-सी दे ती है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 49

Page 23 of 40

Page 25

as e
a
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
g l AglaSem · NCERT Solutions

अहोम
co m
e m.
m as
आइए पता लगाएँ

.co a g l
a s em ने असम क न दय , पहा ड़य और जंगल का उपयोग अपने लाभ के लए कैसे कया? क्या आप उन
gl
अहोम
a
प्र.1
उपाय के बारे म सोच सकते ह, जनसे भूगोल ने उनक रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने और युद्ध लड़ने म सहायता

m
प्रदान क ?

. co ag
se m
l a
agववश कया जहाँ संख्या का महत्व समाप्त हो जाता है। अध्याय इस वषय म

उन्ह ने मुगल को ऐसी भू म पर लड़ने के लए
स्पष्ट है: मुगल “के पास अ धक सै नक और नद -नौकाओं का एक बड़ा बेड़ा था”, फर भी वे हारे।

. c om
आक्रमणकारी को इसक m
असम क
m
अहोम ने इसका उपयोग कैसे कया
a s e क्या क मत चुकानी

. co agl
वशेषता पड़ी

e m
lबaह्मsपुत्र
ag
उन्ह ने नद पर लड़ना चुना। सरायघाट का युद्ध (1671) नदी पर बड़ा बेड़ा अपनी सारी नौकाएँ एक साथ नही ं लगा
वतमान गुवाहाट के नकट ब्रह्मपुत्र नद पर लड़ा गया। सकता; बड़ा बल भी उतने ही सँक रे मोच में िसमट जाता है

a s
coक्षेm
िजतने में छोटा।

“लगातार गु रल्ला रणनी त” के लए आड़ .—
e m agl
s आक्रमण और
घने जंगल त्र क िजस से ना को िदखता नही,ं वह अपने आकार का उपयोग
जानकारी रखने वाले छोटे समूहaअचानक
घात लगाते थे। a g l नही ं कर सकती। रसद की टुक िड़याँ िनशाना बन जाती
है।
ं

पहािड़ याँ
co m
.
उन माग पर नजर रखने और घात लगाने क जगह, जनसे हर कू च दे खा जाता है; कु छ भी आकिस्मक नही ं रह
आक्रमणकारी को गुजरना ही था। जाता।
se m
निदयाँ.cएवंo
m l a
भारी तोपें औरgघुड़सवार से ना, जो मुग लों की शि त थी,ं
m a
aseदलदल
उन्ह ने खाइयाँ खोद और मट्ट के बाँध बनाए — वही क्

agl
कौशल जो राम सह ने गनाए — और नौकाओं को लड़ाई आद एवं ऊबड़-खाबड़ भूिम में सबसे कम उपयोगी होती है।
ं
के मंच के रूप म प्रयोग कया।

se m
com g l a
.
अ भयान का क्रम ही इस पद्ध त को दखा दे ता है। औरंगजेब क भेजी सेना ने अहोम राजधानी गढ़गांव पर अ धकार तो कया

e m a
as क्षेत्र म पीछे हट गए और तब तक लड़ते रहे जब तक आक्रमणकारी क स्थ त
— कतु केवल थोड़े समय के लए। उस दे श म राजधानी ले लेने से युद्ध समाप्त नह होता था, क्य क रक्षक ने सब कुछ उसी को

g l
असंभव न हो गई; फर उन्ह ने उसे नदa पर सरायघाट म घेरा — ल चत बरफुकन के 10,000 सै नक बनाम 30,000 क मुगल
बचाने पर नह लगाया था। वे अपने जाने-पहचाने

m
सेना। अंततः अहोम अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने म सफल रहे।

. co
se m
o m l a
केवल भूगोल पयाप्त क्य नह होता: भूभाग उसी क सहायता करता है जो उसे जानता हो और जो वह से शीघ्र
ag व्य क्त पर पहले से सेवा का दा यत्व
.cसै नक जुटा सके। यहाँ दोन शत पूरी थ । पाइक प्रणाली के कारण हर सक्षम
m था, इस लए राज्य अल्प सूचना पर बड़ा बल खड़ा कर सकता था; और चूँ क पाइक स्थानीय कसान थे, उनके
l a se
ag साधारण कौशल — नाव चलाना, खाई खोदना, तीरंदाजी — ठ क वही थे जो नद -जंगल के युद्ध को चा हए थे।
.c
s e m
m a
भूगोल केवल उसी सेना के लए लाभ है जो उसी भूगोल के लोग से बनी हो।

e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 24 of 40

Page 26

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

इसे जोड़कर दे खए: यही सद्धांत इस अध्याय म दो बार और आता है। महाराणा प्रताप ने “अरावली क पहा ड़य
से मुगल के वरुद्ध वष तक गु रल्ला युद्ध जारी रखा”, और उन्ह भील का प्रबल समथन प्राप्त था, जो धनुधर के
रूप म आए और “उस क्षेत्र के अपने ान से भी योगदान” दया। और कुंभलगढ़ अरावली म “घने जंगल और खड़ी
पहा ड़य से घरा” बना। इस काल म पहाड़, जंगल और स्थानीय ान बार-बार संख्या पर भारी पड़े — इसी लए जो
श क्तयाँ जीती नह जा सक , वे मान चत्र के कनार पर मलती ह, मैदान म नह ।

इसे अनदे खा ना कर — पृष्ठ 51
सख का उदय

इसे अनदे खा ना कर

प्र.1 क्या आप जानते ह क दल्ली के प्र सद्ध खरीदारी क्षेत्र चाँदनी चौक म गुरु ारा शीशगंज सा हब का क्या महत्व
है?

यह ठ क वही स्थान है जहाँ 1675 म औरंगजेब के आदे श पर नौव सख गुरु, गुरु तेग बहादुर का सावज नक रूप से सर
कलम कर दया गया था। ( सख पंथ म गुरु ारा एक पूजा स्थल है।)
वहाँ क्या हुआ था — अध्याय के अपने ववरण म। 1675 म कश्मीरी पं डत का एक समूह इस्लामी उत्पीड़न से सुरक्षा क माँग
करते हुए गुरु तेगबहादुर के पास पहुँचा। गुरु ने उनके साथ खड़े होने एवं शहादत स्वीकार करने का नणय लया। औरंगजेब ने उन्ह
बंद बना लया तथा इस्लाम स्वीकारने का आदे श दया। यातनाएँ झेलने तथा अपने तीन शष्य क यातनाओं के कारण मृत्यु हो जाने
के बाद भी गुरु ने इनकार कर दया। औरंगजेब के आदे श पर चाँदनी चौक म सावज नक रूप से उनका सर कलम कर दया गया।
इसके बाद क्या हुआ। उनके पुत्र गुरु गो बद सह — 10व एवं अं तम गुरु — ने 1699 म खालसा पंथ क स्थापना क , जो
“न्याय, समानता तथा आस्था क रक्षा हेतु प्र तबद्ध एक सैन्य भाईचारा था”।
इसे आज कैसे स्मरण कया जाता है। इस ऐ तहा सक गुरु ारे को “ सख रे जमट ारा व शष्ट सम्मान दया जाता है, जो 1979
से प्रत्येक वष गणतंत्र दवस परेड म राष्ट्रप त से पूव इसे सलामी दे ती है।” अध्याय इसे “भारतीय इ तहास म आस्था एवं ब लदान का
एक श क्तशाली प्रतीक” कहता है।

स्थान क्य महत्वपूण है: चाँदनी चौक तब भी और आज भी एक चलता हुआ बाजार है। यह दं ड सावज नक रूप से,
राजधानी के सबसे व्यस्त स्थान पर दया गया, ता क सब दे ख ल क इनकार क क मत क्या है। अब उसी स्थान पर,
उसी बाजार म, गुरु ारा खड़ा है — अथात यह स्मृ त नगर के कनारे कसी स्मारक म बंद नह है, वह साधारण
जीवन के बीचोबीच वह है जहाँ घटना घट थी।

क्या आप जानते ह? नाम स्वयं बता दे ता है क स्थान क्या है। शीश का अथ है ‘ सर’ और गंज का अथ है बाजार या
कोष — इस लए शीशगंज का पाठ ही ‘शीश का स्थान’ बनता है। दल्ली म इससे जुड़ा एक और स्थल है, गुरु ारा
रकाबगंज सा हब, जो गुरु के शरीर से संबं धत है। स्थान के नाम खोलकर दे ख तो प्राय: वे अपना इ तहास स्वयं बता
दे ते ह।

Page 25 of 40

Page 27

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

आइए वचार कर — पृष्ठ 52
सख का उदय

आइए वचार कर

प्र.1 आपको ऐसा क्य लगता है क गुरु तेग बहादुर ने धम प रवतन करने के स्थान पर यातनाएँ सहन क ? उन्ह ने क्य
सोचा क उनका ब लदान कोई प्रभाव डालेगा?

क्य क उनके सामने रखा गया प्रश्न वस्तुतः उनक अपनी आस्था का नह था। वह इस बात का था क क्या कसी को भी
पंथ बदलने के लए बाध्य कया जा सकता है — और इसका उत्तर वे कश्मीरी पं डत के साथ खड़े होने का नणय लेकर
पहले ही दे चुके थे।
उन्ह ने धम प रवतन क्य नह कया। अध्याय म घटनाक्रम पर ध्यान द जए। उन्ह पहले बंद नह बनाया गया और बाद म
मतांतरण को कहा गया; उन्ह ने पहले “उनके साथ खड़े होने एवं शहादत स्वीकार करने का नणय लया”, और उसके बाद वे बंद
बनाए गए। वे यह जानते हुए इस स्थ त म गए क इसक माँग क्या होगी। य द वे यातना के आगे झुक जाते, तो पं डत पर लगाई गई
वही माँग सफल सद्ध हो जाती — अथात जस सद्धांत क रक्षा के लए वे आए थे, वही उसी व्य क्त के हाथ टू ट जाता। जो इनकार
दबाव म झुक जाए, वह अपने ही कथन का खंडन कर दे ता है।
उन्ह ने यह क्य सोचा क इसका प्रभाव पड़ेगा। तीन कारण, और तीन अध्याय म दखते ह —

1. संकट उन पर नह था। उनका कोई नजी झगड़ा नह था; वे दूसर क पूजा-स्वतंत्रता क रक्षा म खड़े हुए थे। इससे इस प्रकरण
को स्वाथ कहकर टालना असंभव हो गया।
2. यह सावज नक था। एकांत म हुई मृत्यु कुछ नह बदलती। चाँदनी चौक म, ऐसे व्य क्त का सावज नक वध जसके बारे म सब
जानते थे क वह कसी और के लए आया है, पूरी राजधानी के सामने उस माँग को उघाड़ दे ता है — और तब सफाई दे ने का
भार वध करने वाल पर आता है, उन पर नह ।
3. यह उनक अपनी शक्षा से मेल खाता था। गुरु ग्रंथ सा हब, जसम उन्ह के भजन भी जोड़े गए, कहता है — “सत्य उच्च है
परंतु सच्चा जीवन उससे भी सव च्च है।” जो शक्षक यह कहे और फर झुक जाए, वह स्वयं का खंडन कर दे ता है।

क्या उनका अनुमान सही था? अध्याय का अपना साक्ष्य ‘हाँ’ कहता है। “प्रत्युत्तर म, उनके पुत्र गुरु गो बद सह —
10व एवं अं तम गुरु ने खालसा पंथ क स्थापना क ” (1699), और वध-स्थल पर आज गुरु ारा शीशगंज सा हब है,
जसे 1979 से प्रत्येक गणतंत्र दवस पर सख रे जमट राष्ट्रप त से पूव सलामी दे ती है। जो काय एक आंदोलन को
समाप्त करने के लए कया गया, उसी ने उसे प रभा षत करने म सहायता क ।

प्र.2 सख गुरुओं एवं खालसा ने कन मूल्य को अपनाया?

अध्याय इन्ह तीन स्थान पर गनाता है, और ये एक-दूसरे पर टके हुए ह।

Page 26 of 40

Page 28

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

ोत मूल्य व्यवहार म इसका अथ

गुरु नानक , 15वी ं शताब्दी का पंजाब समानता, क रुणा तथा ईश्वर की एकता (इक सभी के लए एक ही ईश्वर का अथ है क कोई जन्म
ओंक ार ) से ईश्वर के अ धक नकट नह — इस लए समानता
आस्था पर जोड़ा गया सुधार नह , आस्था से नकलने
वाला प रणाम है।

गुरु गंथ सािहब, सबसे पहले गरुु स त्यिनष्ठा, क रुणा, िवनम ता एवं आ त्म - ग्रंथ कथन से ऊपर आचरण को रखता है: “सत्य
अजन दे व ारा संक िलत, िजसमें िनयंत्र ण; “सभी के िलए एक ही ईश्वर है”, उच्च है परंतु सच्चा जीवन उससे भी सव च्च है।”
बाद में ग रु
ु तेग बहादुर के भजन िजसने “पथ्ृ वी को धम के ग ृह के रूप में
जोड़े गए स्थािपत िकया”

खालसा, गरुु गोिबंद िसंह ारा न्याय, समानता तथा आ स्था की र क्षा इन मूल्य क सेवा म साहस — खालसा “प्राय: प्राण
1699 में स्थािपत क चता कए बना मुगल सेना से भड़ता था”।

दो और मूल्य ऐसे ह जो सद्धांत के रूप म नह , गुरुओं के कम से दखते ह —

दूसर के लए खड़े होना। 1675 म जो कश्मीरी पं डत गुरु तेग बहादुर के पास आए, वे सख नह थे। फर भी गुरु उनके साथ
खड़े हुए। जस स्वतंत्रता क आपको स्वयं आवश्यकता नह , उसक रक्षा करना उस स्वतंत्रता क रक्षा का सबसे प्रबल रूप है।
सेवा — नःस्वाथ सेवा, जसे पृष्ठ 59 के अं तम प्रश्न म प्रारं भक सख पंथ के कद्र य मूल्य म गनाया गया है।

आंदोलन बदला, मूल्य नह : अध्याय यहाँ सावधान है। “ सख पंथ का आरंभ एक आध्या त्मक आंदोलन के रूप म
हुआ था”; बाद के गुरुओं को “कुछ मुगल शासक क बढ़ती अस हष्णुता एवं उत्पीड़न” का उत्तर दे ने पर ववश होना
पड़ा। गुरु अजन दे व को यातनाएँ दे कर मृत्युदंड दए जाने के बाद ही गुरु हरगो बद ने सैन्य प्र शक्षण आरंभ कया
और सख सेना बनाई। अथात शस्त्र बाद म आए और उत्तर के रूप म आए, आरंभ- बदु के रूप म नह — मूल्य वही
रहे जो गुरु नानक ने सखाए थे।

प्र.3 वतमान वश्व म वे कैसे प्रासं गक ह?

इन्ह एक-एक करके ली जए और सामान्य रूप से सराहने के स्थान पर यह पू छए क आज हर मूल्य हमसे क्या माँगता है।

Page 27 of 40

Page 29

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

मूल्य आज यह हमसे क्या माँगता है

समानता भारत का संिवधान िविध के सम क्ष समता की गारंटी दे ता है और धम , मूल वंश, जाित, िलंग या जन्म स्थान के आधार पर भेद भाव
का िनषेध करता है। मूल्य तब वास्तिवक बनता है जब वह यह तय करे िक आप िकसके साथ बैठेंग ,े िकसके साथ काम करे ंग े
और िकसके पक्ष में बोले ंग े — के वल िस द्धांत रूप में मान ले ने से नही ं। लंग र , जहाँ सब एक ही पंिक्त में बैठकर एक ही भोजन
करते है,ं इसी का दै िनक अभ्यास है।

क रुणा उस क ष्ट को दे ख पाना जो आपका अपना नही ं है, और उस पर कु छ करना। क ष्ट अिधकांश लोग दे ख ले ते है;ं मूल्य करने में
है।

न्याय िकसी के अिधकारों की र क्षा तब भी करना जब वह आपके समुद ाय का न हो — ग रु
ु तेग बहादुर ने 1675 में ठीक यही िकया।
यह इन मूल्यों में सबसे किठन है और िविवधता वाले दे श में सबसे आवश्यक भी।

से वा िबना बदले की अपेक्षा और िबना नाम की चाह के दू स रों के िलए िकया गया काम — लंग र में से वा से ले क र बाढ़ या भूकं प के बाद
स्वयंसे वा तक। यह पूछे िबना से वा करना िक से वा िकसकी हो रही है, एक दुल भ और उपयोगी आदत है।

स च्चा जीवन “स त्य उ च्च है परंत ु स च्चा जीवन उससे भी सव च्च है। ” कसौटी यह नही ं िक आप सही बात कह सकते है ं या नही,ं बिल्क यह िक
आपका साधारण आचरण — परीक्षा-क क्ष में, बहस में, ऑनलाइन — उससे मेल खाता है या नही ं।

िवनमता एवं सुध ारे जाने के िलए तैयार रहना, और तब क्रोध रोक ले ना जब न रोकना अिधक सुखद लगे। सावजिनक बहस में आज दोनों
आत्म- की बहत
ु कमी है।
िनयंत्रण

ये मूल्य कसी एक समुदाय क संप त्त क्य नह ह: इन्ह गुरु ग्रंथ सा हब म एक परंपरा क भाषा म कहा गया है,
कतु इनम से प्रत्येक को कोई भी पहचान सकता है और जी सकता है। अनेक पंथ वाले दे श म यही बात इन्ह
उपयोगी बनाती है — जस मूल्य को केवल एक समूह अपना सके, वह कसी समाज क न व नह बन सकता।

यह क जए: इनम से कोई एक चुनकर एक सप्ताह तक नभाइए। हर दन के अंत म एक ऐसा अवसर ल खए जब
उस पर टके रहने म आपको कुछ खोना पड़ा। यह छोट -सी सूची इस प्रश्न का कसी भी अनुच्छेद से कह अच्छा
उत्तर है — और यही वह अंतर है जसक ओर गुरु ग्रंथ सा हब सत्य और सच्चे जीवन के बीच संकेत करता है।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 59
अध्याय के अंत म

प्रश्न और क्रयाकलाप

प्र.1 दल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य क राजनै तक रणनी तय क तुलना क जए। इनम क्या समानताएँ और
भन्नताएँ थ ?

दोन मध्य ए शयाई मूल के राजवंश थे, दोन दल्ली से शासन करते थे और दोन का खच भारतीय भू-राजस्व से चलता
था। अंतर इसम था क वजय को शासन म कैसे बदला जाए।

Page 28 of 40

Page 30

as e
a
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
g l AglaSem · NCERT Solutions

c om
समानताएँ
.
m
वजय ही राज्य का आधार। दोन अ भयान से फैले। अकबर ने भी अपने पूवव तय का यह वचार अपनाया
a s em — “एक शासक
को सदै व वजयoक इच्छा रखनी चा हए अन्यथा उसके शत्रु उसके वरुद्ध शस्त्र उठा लगे।”
. c a gl
कद्र म eपूm
a s
gरूपl म पूण अ धकार थे”, और उसे एक मं त्रप रषद क सहायता प्राप्त थी; मुगल व्यवस्था स ाट पर क द्रत थी, जसे मं त्रय क
ण अ धकार। सल्तनत क व्यवस्था “सुल्तान पर क द्रत” थी, “ जसम सुल्तान के पास राजनी तक और सैन्य प्रमुख के

a
सहायता थी।

co m
. ag
सेना का खच भू-राजस्व से। दोन ने सेना रखने के लए कृषक पर कर लगाया और दोन ने बचौ लय का एक वग बनाया —

em
as
पहले इक्तादार, फर जागीरदार।

a g l
हसक उत्तरा धकार। अध्याय दोन को सीधे जोड़ता है: “हमने पूव म उल्लेख कया है क सल्तनत काल म उत्तरा धकार प्राय:
हसक हुआ करते थे। इसक पुनरावृ त्त शाहजहाँ के उत्तरा धकार के समय भी हुई।”

co m
पंथ-नी त दोन म कठोर हो सकती थी। कुछ सुल्तान ने ज जया लगाया और मं दर नष्ट हुए; औरंगजेब ने ज जया एवं

em.
तीथयात्रा कर पुनः लगाया और 1669 म गवनर को गैर-मुसलमान के वद्यालय एवं मं दर नष्ट करने का आदे श दया।

m l as
.co a g
भन्नताएँ

se m
g l a
a
दल्ली सल्तनत मुगल (अकबर से)

राजस्व का
शेष कोष म भेजते थे; पद वंशानुगत नह थे omघोड़ों, ऊँटों और सै िनकों की िनि चत सं या रखनी पड़ती थी, िनयिमत a s
agl
इक्ता — कुलीन को क्षेत्र, जो कर वसूलकर मनसबदारी — मनसब के अनुस ार श्रेणीबद्ध अिधकारी, िजन्हे ं हािथयों,
आवंटन
m .c िनरी ण के साथ, और भुगतान जागीर में श् ख्

l a se
क्ष

िवभाग व भन्न वभाग के प्रभारी a
g
मं त्रय क एक उ रदािय व बँटा हुआ और नामांिकत — दीवान (िव ), मीर ब शी
त्त त् त्त ख्

m
प रषद (सै न्य), खान-ए -सामान (सावजिनक काय, व्यापार , उ ोग , कृ िष, शाही
घराना), सदर (न्याय, पंथ-मजहब, िशक्षा)
. co
se m
o m इक्तादार के माध्यम से रखे गए क्षेत्र l a
. c agजाँच और संतलु न की यव था लागू थी”
पांत बारह सूबे, आगे छोटी इकाइयों में िवभािजत, िजनमें “सरकारी

m
ase
अिधकािरयों के म य पभावी
ध् व् स्

agl राजस्व व्यापार पर प्रत्येक स्तर पर कर; सवा धक बोझ टोडरमल ारा फसलों की पैद ावार एवं कीमतों का िवस्ततृ सवक्षण, और
िनध रण कृषक पर, और राजस्व संग्रह म “अत्य धक पूरे साम ाज्य में भूिम का व्यविस्थत सवक्षण
se m
क्रूरता” के उल्लेख
com g l a
m . a
ase
agl
पित ंि यों से मुख्यत: सैन्य श क्त वैवािहक गठबंध न, दरबार में राजपूत एवं क्षेत्र ीय नेता, उ च्च पदों पर िहंदू
व्यवहार अिधकारी, सुल ह-ए -कु ल , जिजया का उ न्मूल न

िस्थरता
co m
औसत शासनकाल नौ वष से क ठनता से औरंग जेब तक औसत शासनकाल 27 वष
अ धक
m .
m ase
.co a g l
s e m वह एक भन्नता जससे शेष सब नकलती ह: सल्तनत का खच बहुत हद तक लूट और खराज से चलता था,
agla जसके लए नरंतर अ भयान आवश्यक ह; अकबर का खच सव क्षत, स्थर भू-राजस्व से चलता था, जसके लए
.c
e m
शां त और अ भलेख आवश्यक ह। जब आप कसी ग्रामीण क्षेत्र पर वष-दर-वष कर लगाते ह, तो आपको वह समृद्ध,

m a s
co agl
शांत और सहमत चा हए — और वैवा हक गठबंधन, सुलह-ए-कुल तथा दरबार म राजपूत वह से आते ह। राज्य का

m .
as e
खच जुटाने क व ध ही राज्य क राजनी त का रूप गढ़ती है।

a g l

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 29 of 40

Page 31

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

इसे ईमानदार र खए: ‘मुगल नी त’ एक वस्तु नह थी। अकबर ने ज जया समाप्त कया; औरंगजेब ने पुनः लगाया।
अकबर ने सुलह-ए-कुल क नी त चलाई; औरंगजेब ने दरबार म संगीत एवं नृत्य पर प्र तबंध लगाया और गैर-मु स्लम
के साथ-साथ सू फय तथा पार सय का भी उत्पीड़न कया। जो तुलना मुगल को एक ही नी त मान ले, वह राजवंश
के उत्तराध को गलत समझेगी।

प्र.2 वजयनगर साम्राज्य और अहोम साम्राज्य जैसे अन्य राज्य क अपेक्षा अ धक समय तक परा जत होने से कैसे
बच सके? उनक सफलता म कन भौगो लक, सैन्य और सामा जक कारक का योगदान था?

दोन दल्ली से दूर थे, दोन ऐसी भू म पर लड़े जो बड़ी आक्रमणकारी सेना को दं ड दे ती है, और — सबसे महत्वपूण —
दोन के पास सै नक जुटाने क ऐसी व ध थी जो राजकोष को खाली नह करती थी।

कारक वजयनगर अहोम

भौगोिलक प्राय प म बहुत भीतर, वध्य से कह आगे — चत्र 2.12 बह्मपुत्र घाटी, जो घने जंग लों, पहािड़यों और निदयों से
उसका कद्र कृष्णा-तुंगभद्रा के द क्षण दखाता है। उत्तर से आने िघरी है। मुग लों ने राजधानी गढ़ गांव पर अिधकार िकया,
वाली हर सेना एक अत्यंत लंबी रसद-रेखा के अंत म पहुँचती िकं तु थोड़े समय के िलए ही; दे श पर अिधकार दू स री बात
थी। हंपी स्वयं पथरीली पहा ड़य और नद के बीच है। थी।

सै न्य समृ द्ध से युद्ध के घोड़े खरीदे जाते थे — जो आया तत थे, पाइक पणाली से िबना स्थायी से ना के अल्प सूचना पर
और इसी लए पुतगाली व्यापा रय के साथ इतना अच्छा िवशाल बल , और “लगातार ग िु र ल्ला रणनीित”।
व्यवहार होता था। सशक्त शासक, वशेषकर कृष्णदे वराय, सरायघाट (1671) में लिचत बरफु कन के 10,000
जन्ह ने “सा ाज्य का वस्तार कया और दक्कन पर प्रभुत्व सै िनकों ने 30,000 को हराया।
स्था पत कया”।

सामािजक संस्कृत, तेलुगु तथा कन्नड़ के क वय - व ान को संरक्षण, अहोमों ने “स्थानीय संस्कृ ित को आ त्मसात िकया, कृ िष
और तरुप त से लेकर वट्ठल मं दर तक अनुदान — जससे को बढ़ ावा िदया, िविवध धम ं को पोत्सािहत िकया एवं
कई भाषा-क्षेत्र के कुलीन एक ही दरबार से जुड़े। मं दर- असम की सम ृद्ध परंपराओं में योगदान िदया” — इसिलए
अथव्यवस्था व्यापार और ऋण को वत्तपो षत करती थी। राज्य घाटी के ऊपर बैठी कोई िवदे शी परत नही,ं उसी का
अंग था।

राजनैितक संस्थापक ह रहर एवं बुक्का राय, जो मुहम्मद बन तुगलक के 13वी ं शताब्दी में वतमान म्यांम ार से आया एक समूह,
उद् भव अधीन राज्यपाल रह चुके थे — वे सल्तनत क कायप्रणाली िजसने आरंभ से ही घाटी में अपनी संस्थाएँ बनाईं।
भीतर से जानते थे।

साझा सूत्र अलग से कहने योग्य है: दूरी और दुगम भूभाग ने आक्रमण को महँगा बनाया, और स्थानीय रूप से जुटाई गई सेना ने रक्षा
को सस्ता। जस श क्त क रक्षा सस्ती और जस पर आक्रमण महँगा हो, वह लंबे समय तक टकती है।

Page 30 of 40

Page 32

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

कतु दोन कहा नय का अंत अलग है, और असली सीख यही है। अहोम “अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखने म
सफल रहे”। वजयनगर नह : 1565 म दक्कन क सल्तनत — बीजापुर, गोलकुंडा, बरार, अहमदनगर और बीदर,
जो सामान्यत: आपस म लड़ती थ — ने “गठबंधन बनाया” और तालीकोटा म वजयनगर क सेना नष्ट कर द ।
वजयनगर क रक्षा सदा इस बात पर टक थी क उसके पड़ोसी बँटे रह। जस क्षण यह शत टू ट , दूरी और समृ द्ध
उसे नह बचा सक । जो प्र तरोध शत्रु क फूट पर टका हो, वह तब तक सुदृढ़ रहता है जब तक वह अचानक ढह न
जाए।

एक तीसरे उदाहरण से तुलना: महाराणा प्रताप के अधीन मेवाड़ ने छोटे पैमाने पर यही तत्व प्रयोग कए —
अरावली क पहा ड़याँ, गु रल्ला युद्ध, और वे भील धनुधर जन्ह ने “उस क्षेत्र के अपने ान से भी योगदान दया”।
प रणाम यह हुआ क “मुगल सत्ता राजस्थान म सी मत रही”। भूभाग और स्थानीय समथन — यही इस अध्याय का
बार-बार दोहराया जाने वाला सूत्र है।

प्र.3 कल्पना क जए क आप अकबर या कृष्णदे वराय के दरबार म एक व ान ह। अपने कसी मत्र को पत्र लखकर
वहाँ क राजनी त, व्यापार, संस्कृ त और समाज का वणन क जए।

अ े उत्तर म क्या होना चा हए। यह कल्पना का काय है, कतु वास्त वक सामग्री पर टका हुआ — इस लए मूल्यांकन कल्पना के
नीचे क सट कता का होता है:

1. एक ही दरबार चु नए और उसी म र हए। अकबर क फतेहपुर सीकरी और कृष्णदे वराय क हंपी को मलाइए मत।
2. चार बात आनी चा हए — राजनी त, व्यापार, संस्कृ त और समाज।
3. अध्याय से कम से कम छह ठोस ववरण ली जए — नाम, स्थान, पद, ग्रंथ, भवन। साधारण और अच्छे उत्तर म अंतर यही
डालता है।
4. पत्र क शैली र खए: उत्तम पुरुष, त थ, संबोधन और अंत म हस्ताक्षर।
5. अपने व ान को पुरानी वेशभूषा म आधु नक व्य क्त मत बनाइए। वह प्रभा वत भी हो, अ न श्चत भी और पक्षपाती भी —
प्रत्यक्षदश ऐसा ही होता है।

नमूना उत्तर:

Page 31 of 40

Page 33

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

फतेहपुर सीकरी, हुजूर के शासन के इकतीसव वष का दसवाँ मास
प्रय रामदास,
तुमने पूछा है क यहाँ मनुष्य क्या दे खता है। बताता हूँ, यद्य प मुझे भय है क तुम आधा भी न मानोगे।
पहले राजनी त। स ाट चार बड़े अ धका रय से शासन चलाते ह और उनका काम आपस म नह उलझता: कोष के
लए द वान, सेना के लए मीर ब ी, सावज नक काय और शाही घराने के लए खान-ए-सामान, तथा न्याय एवं
शक्षा के लए सदर। यही पद बारह सूब म से हर एक म ह, और अ धकारी एक-दूसरे पर दृ ष्ट रखने के लए बठाए
गए ह। इनके नीचे मनसबदार ह, जनम से हर एक का मनसब यह तय कर दे ता है क उसे कतने घोड़े, हाथी, ऊँट
और सै नक तैयार रखने ह — और नरीक्षक बना सूचना आकर गनती करते ह। टोडरमल ने संपूण सा ाज्य क
फसल और क मत का सवक्षण करवाया है, जससे राजस्व नाप से तय होता है, वसूलने वाले के मजाज से नह ।
सुनता हूँ, पहले के समय से अंतर बहुत बड़ा है।
अब व्यापार। सूरत से ऐसा माल आता है जो एक मास पहले जहाज पर था। अरब और फारस के व्यापारी बंदरगाह
म अपने घर रखते ह और भीतर का काम हुंडी से चलाते ह — कागज का एक पुजा, जो दूसरे नगर म मुद्रा बन जाता
है, ता क आदमी डाकुओं के क्षेत्र से भी अपनी सारी पूँजी आस्तीन म लेकर नकल जाए। मारवाड़ी यह प्रणाली हर
सीमा के पार चलाते ह, शासक कोई भी हो। सूती वस्त्र इस दे श से इतनी मात्रा म जाता है क एक नगर भर जाए;
रेशम, घोड़े और धातुएँ आती ह, फर भी हम खरीदते कम और बेचते अ धक ह।
अब संस्कृ त। स ाट पढ़ नह सकते — उन्ह ने इसे कभी छपाया नह — और फर भी ग्रंथ क ऐसी भूख मने
कह नह दे खी। उन्ह ने यहाँ एक अनुवाद भवन बनवाया है, और मने महाभारत को फारसी म रज़्मनामा के रूप म
दे खा है, और एक रामायण जसम एक सौ छहत्तर लघु चत्र इतने सुंदर ह क दे खकर लोग चुप रह जाते ह।
भगव ता और पंचतंत्र पर काम चल रहा है। सभाओं म म ब्राह्मण , जैन आचाय , सू फय और काले वस्त्र वाले दो
जेसुइट के बीच बैठा हूँ — सब बहस करते ह, और स ाट बोलने से अ धक सुनते ह।
अब समाज। वे अपनी नी त को सुलह-ए-कुल कहते ह, सबके साथ शां त। ज जया समाप्त कर दया गया है, और
राजपूत सरदार इस दरबार म अ धकारी के रूप म भी बैठते ह और संबंधी के रूप म भी, क्य क उन्ह ने उनके घर म
ववाह कए ह। कतु यह मत समझ लेना क सब बराबर है। उच्च अ धका रय म तीन म से एक भी मु श्कल से गैर-
मु स्लम है, और मुसलमान म भी वदे श म जन्मे लोग को यहाँ जन्मे लोग पर प्राथ मकता मलती है। और म इतना
बूढ़ा हूँ क चत्तौड़ म जो हुआ, वह मुझे स्मरण है। जस व्य क्त ने यह अनुवाद भवन बनवाया, उसी ने वह नरसंहार
भी करवाया था। म दोन को एक साथ रखना अब तक सीख नह पाया, और मुझे नह लगता क यहाँ कोई सीख
पाया है।
शीत ऋतु म आना। पंचमहल पाँच मं जल का है और हर मं जल हवा के लए खुली है, और ऊपर से पूरा मैदान
दखता है।
तुम्हारा,
दे वीदास

Page 32 of 40

Page 34

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

य द आप कृष्णदे वराय का दरबार चुन, तो पत्र इन पर बनाइए: हंपी और चत्र 2.11 के ध्वंसावशेष; वरुपाक्ष एवं
वट्ठल मं दर और उनके अखंड ‘संगीत स्तंभ’; राजा का स्वयं र चत तेलुगु महाकाव्य आमुक्तमाल्यदा, जो भ क्त
संत क व आंडाल क कथा पर है और जसका एक खंड सुशासन पर राजनी त है; तरुप त को दए अनुदान; संस्कृत,
तेलुगु और कन्नड़ के क व- व ान; वे पुतगाली जो घोड़े बेचने आते थे और जनका अच्छा व्यवहार इस लए होता था
क वे शत्रु को न बेच; और डो मगो पायस के अपने शब्द — “यह नगर... मेरे लए रोम जतना वशाल”, “यह वश्व
म सबसे अच्छ आपू त वाला नगर है”।

प्र.4 अकबर, जो अपनी युवावस्था म एक क्रूर वजेता था, कुछ वष बाद कैसे स हष्णु और दयालु हो गया? ऐसे
प रवतन का क्या कारण हो सकता है?

पहले यह स्पष्ट कर ली जए क प रवतन वास्त वक था, क्य क अध्याय म उसके दोन छोर दज ह।

25 वष क आयु म अकबर बाद का अकबर

िचत्तौड़ को पाँच माह से अिधक घे रे रखा; लगभग 30,000 जिजया का उ न्मूल न; सुल ह-ए -कु ल की नीित; दरबार में राजपूत एवं क्षेत्र ीय
नागिरकों के नरसंहार का आदे श िदया; जीिवत मिहलाओं एवं बच्चों नेताओं का स्वागत और उ च्च पदों पर िहंदू अिधकारी; अंतरपांिथक संवाद ;
को दास बना िलया गया। उसका िवजय संदे श: “अपनी अनुवाद भवन की स्थापना। उसके अपने दज शब्दों में: “औपचािरक रूप से
रक्तिपपासु तलवार की सहायता से हमने उनके मिस्तष्क से कु फ मैंने लोगों को अपने पंथ के अनुरूप ढाला और इसे ही इस्लाम मान िलया।
के िचह्न िमटा िदए है ं तथा संपूण िहंद ुस्तान में मंिदरों को नष्ट िकया जैसे -जैसे मैंने ान पाप्त िकया, मुझे अत्यंत ल ज्जा हुई। ”
है। ”

इसके क्या कारण हो सकते ह — चार, और अकेला कोई पयाप्त नह :

1. साम्राज्य का ग णत। चत्र 2.16 जतने बड़े सा ाज्य म हर जगह सेना नह बैठाई जा सकती। जो भी राजपूत सरदार मत्र बन
जाए, वह एक ऐसा प्रांत है जस पर अ धकार जमाए रखने क आवश्यकता नह । गठबंधन सेनाओं से सस्ते ह, और अकबर के
पास यह सीखने के लए पचास वष थे।
2. संपक और ज ासा। वह नरक्षर था कतु “फारसी तथा भारतीय ग्रंथ का अध्ययन करने के लए उत्सुक” था, व ान को
दरबार म बुलाता था, और उसने महाभारत, रामायण, भगव ता एवं पंचतंत्र का अनुवाद करवाया। जो व्य क्त वष ब्राह्मण ,
जैन , सू फय और जेसुइट क बहस सुने, वह 25 वष क आयु वाली मान्यताओं के साथ बाहर नह आता।
3. संबंध। पड़ोसी राज्य क राजकुमा रय से वैवा हक संबंध ने प्र त ं घरान को उसका अपना प रवार बना दया। जनसे
आपके पुत्र वंश पाते ह , उन्ह ‘का फर’ मानते रहना क ठन है।
4. आयु और आत्ममंथन। उसक अपनी व्याख्या यही है: “जैसे-जैसे मने ान प्राप्त कया, मुझे अत्यंत ल ा हुई।” और वह
केवल खेद नह जताता, तक भी दे ता है — “बलपूवक मतांत रत लोग से प्र तबद्धता क क्या अपेक्षा क जा सकती है?”
बलपूवक बदली गई नष्ठा अ वश्वसनीय प्रजा बनाती है। यह नै तक कारण भी है और शासक का व्यावहा रक कारण भी।

Page 33 of 40

Page 35

as e
a
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
जहाँ इ तहासकार वास्तव म असहमत ह: यह आस्था थी या गणना? एक पक्ष कहता है क यह एक चतुर शासक

m a s em
l मकता मलती थी,
का वही करना था जो वशाल सा ाज्य को शांत रखे, और वह अध्याय से ही यह उद्धत करता है क गैर-मु स्लम
. co ही कभी एक- तहाई से अ धक” थे, क वदे शी मूल के अ धका रय कोagप्राथ
m े अं तम 15 वष फर से कश्मीर, सध, दक्कन और अफगा नस्तान के अ भयान के थे। दूसरा पक्ष
eउसक
अ धकारी “शायद

a s
gl है क केवल गणना करने वाले शासक को महाभारत का अनुवाद करवाने क आवश्यकता नह थी,
और क
aकहता

com
अंतरपां थक संवाद म बैठने क आवश्यकता नह थी, और वह अपने ही जीवनीकार से अपनी ल ा तो कदा प दज

.
न करवाता। सबसे उ चत स्थ त यह है क दोन ने एक-दूसरे को बल दया: जो नी त उपयोगी थी, वही आगे चलकर
em ag
a s
agl मनुष्य बन गया’ — चत्तौड़ का नरसंहार और सुलह-ए-कुल एक ही
उसक अपनी भी बन गई, और आस्था ने उसे उससे आगे तक ले जाया जतना केवल उपयो गता ले जाती। अध्याय
यह कहने क छू ट नह दे ता क वह बस ‘भला
अध्याय म ह।

co m
se m.
o m l a
gक जए और द क्षण भारत के
प्र.5 m य .दc वजयनगर साम्राज्य तालीकोटा का युद्ध जीत जाता तो क्या होता? कल्पना
a
l a se राजनी तक और सांस्कृ तक इ तहास पर उसके प्रभाव का वणन क जए।
ag
a s
com agl

यह ‘य द ऐसा होता’ वाला प्रश्न है, इस लए पहले यही .कह
e m
s बढ़ता है जो अध्याय स्था पत करता है। आधार के लए चार तथ्य —
द जए क न त रूप से कोई नह जान सकता। कतु अ ा
उत्तर मनगढ़ं त नह होता — वह उन्ह तथ्य सेaआगे
a g l
तालीकोटा म वजयनगर के सामने ऐसी पाँच सल्तनत थ जो सामान्यत: आपस म लड़ती थ और केवल इसी अ भयान के
लए एक साथ आई थ ।
com
m .
as e
डो मगो पायस के साक्ष्य से वजयनगर नगर वशाल और समृद्ध था — “रोम जतना वशाल”, “ वश्व म सबसे अच्छ आपू त
m l
.co a g
वाला नगर”।

a s em पराजय के बाद “सा ाज्य छोटे -छोटे भाग म वभा जत हो गया, जसका शासन नायक (पूव सै नक अ धप त) के अधीन था”,

ag l और 17व सद के मध्य तक उसका अंत हो गया।
m
एक शताब्द बाद औरंगजेब ने दक्कन म 25 वष युद्ध कए, जससे मुगल राजकोष क्षीण हुआ।

a se
. com
राजनै तक रूप से, हारा हुआ गठबंधन संभवतः तुरंत बखर जाता — ऐसे गठबंधन को जोड़े रखने वाली वस्तु जीत क संभावना
a g l
s e m
रहते जो वे थे — सै नक अ धप त — स्वतंlत्रaउत्तरा धकारी राज्य नह बनते। और जब औरंगजेब के समय मुगल द क्षण आते, तो
ही होती है। तब वजयनगर कृष्णा-तुंगभद्रा के उत्तर म बीजापुर और गोलकुंडा पर एक-एक कर दबाव बना सकता था। नायक वही

g
उन्ह कई दुबल राज्य के स्थान पर एकaबड़ी द क्षणी श क्त मलती — जससे दक्कन के युद्ध दल्ली के लए और लंबे तथा और

co m
वनाशकारी हो सकते थे; या य द मुगल फर भी जीतते, तो द क्षण क स्वतंत्रता कई अ भयान के स्थान पर एक ही अ भयान म

m .
se
समाप्त हो जाती।

o m l a
g बच जाता, तो हंपी आज बहुत संभव है क
c श मं दर नष्ट कर दए गए। बड़ी संख्या म नाग रक का जनसंहार हुआ।” य दaवह
अ .धकां
सांस्कृ तक रूप से, जो हा न हम सबसे स्पष्ट रूप से नाप सकते ह, वह नगर है। उसे महीन लूटा गया: “घर, दुकान, महल एवं

se m
a
agl
चत्र 2.11 के ध्वंसावशेष नह , एक जी वत नगर होता, और वट्ठल मं दर के ‘संगीत स्तंभ’ कसी स्मारक के नह , चलते हुए मं दर के
अंग होते। संस्कृत, तेलुगु एवं कन्नड़ को एक साथ संरक्षण दे ने क जो परंपरा कृष्णदे वराय के अपने आमुक्तमाल्यदा तक पहुँची थी,
.c
s e m
m a
वह नायक के अलग-अलग दरबार म बखरने के स्थान पर एक ही छत के नीचे चलती रहती।

e m . co
आ थक रूप से, पुतगाली घोड़ा-व्यापार वजयनगर क ओर बहता रहता, उसके प्र त ं य क ओर नह — और उसी से घुड़सवार
agl
g l as
सेना का खच चलता, अथात लाभ स्वयं को बढ़ाता रहता।
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 34 of 40

Page 36

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

इस अभ्यास क ईमानदार सीमाएँ। अकेला युद्ध शायद ही कभी सब कुछ तय करता है। वजयनगर के अपने
आंत रक तनाव भी थे। कृष्णदे वराय क मृत्यु 1529 म ही हो चुक थी, अथात तालीकोटा से छत्तीस वष पूव, और
तब तक सा ाज्य क सैन्य श क्त नायक के बीच बँट चुक थी — वही नायक, जन्ह ने पराजय के बाद उसके टु कड़
पर शासन कया। जस सा ाज्य क सेनाएँ क्षेत्रीय अ धप तय के हाथ म ह , वह युद्ध जीतकर भी बखर सकता है।
इस लए सबसे सुर क्षत नष्कष ‘द क्षण भारत का इ तहास बदल जाता’ से कह संकरा है: तालीकोटा क वजय
नगर को लगभग न त रूप से बचा लेती, और साम्राज्य के वखंडन को रोकती नह , केवल टालती। इतना
कह दे ने पर आप कहानी नह सुना रहे, इ तहासकार क तरह तक कर रहे ह।

प्र.6 प्रारं भक सख पंथ ारा प्रचा रत अनेक मूल्य जैसे समानता, सेवा और न्याय आज भी प्रासं गक ह। इनम से
कसी एक मूल्य का चयन क जए और चचा क जए क यह समकालीन समाज म कैसे प्रासं गक है।

अ े उत्तर म क्या होना चा हए: एक मूल्य चु नए; बताइए क वह अध्याय म कहाँ से आता है; उस समय उसका क्या अथ था;
और फर कसी ठोस वतमान उदाहरण से दखाइए क आज वह क्या माँगता है। एक मूल्य पर ठ क से कया गया तक, तीन मूल्य
के नाम गना दे ने से कह अच्छा है।
नमूना उत्तर — चुना गया मूल्य: समानता।
यह कहाँ से आता है। 15व शताब्द के पंजाब म गुरु नानक ने “समानता, करुणा तथा ईश्वर क एकता (इक ओंकार) का संदेश”
फैलाया। ये दो नह , एक ही वचार ह: य द सबके लए एक ही ईश्वर है, तो जन्म से कोई ईश्वर के नकट नह । गुरु ग्रंथ सा हब यही
कहता है — “सभी के लए एक ही ईश्वर है” — और 1699 म स्था पत खालसा “न्याय, समानता तथा आस्था क रक्षा हेतु
प्र तबद्ध” था।
उस समय इसका क्या अथ था। जन्म के आधार पर संग ठत समाज म यह कहना क सब ईश्वर के समक्ष बराबर ह, कोई सुखद
भावना नह थी; यह इस बात को चुनौती थी क प्र तष्ठा कैसे बँट है। लंगर, जहाँ सब एक ही पं क्त म बैठकर एक ही भोजन करते ह,
ने इस वचार को ऐसा रूप दया जसे केवल मानना नह , प्र त दन करना पड़ता है।
यह आज भी प्रासं गक क्य है।

अब यह व ध है, कतु अभी आदत नह । भारत का सं वधान व ध के समक्ष समता क गारंट दे ता है और धम, मूलवंश,
जा त, लग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का नषेध करता है। कागज पर लखी गारंट यह बदलती है क न्यायालय क्या
करेगा; वह स्वयं यह नह बदलती क कसे घर बुलाया जाता है, कसे सबसे बाद म परोसा जाता है, और कसका नाम बना
क्षमा माँगे गलत बोला जाता है।
कसौट साधारण है, नाटक य नह । समानता कक्षाओं, पं क्तय , छात्रावास और कायस्थल म तय होती है — इसम क क्या
वही नयम और वही शष्टाचार उस व्य क्त पर भी लागू होते ह जो आपका कुछ बगाड़ नह सकता।
इसक क मत चुकानी पड़ती है, इसी लए इसका कारण चा हए। सबके साथ समान व्यवहार का अथ प्राय: वह सु वधा
छोड़ना है जो आपको मुफ्त मलती रही है। नयम तब नभाना सरल होता है जब आप जानते ह क वह क्य है — और “सबके
लए एक ही ईश्वर” ऐसा कारण है जो इस पर नभर नह करता क कोई दे ख रहा है या नह ।

Page 35 of 40

Page 37

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

य द आप कोई और मूल्य चुन: सेवा के लए लंगर और आपदा-राहत म स्वयंसेवा को आधार बनाइए, और तक
द जए क जो सेवा यह नह पूछती क कसक सेवा हो रही है, वही उसे दान से अलग करके सेवा बनाती है। न्याय
के लए 1675 को आधार बनाइए — गुरु तेग बहादुर उन कश्मीरी पं डत के साथ खड़े हुए जो उनके अपने समुदाय
के नह थे — और तक द जए क अपने से भन्न लोग के अ धकार क रक्षा ही न्याय क एकमात्र साथक कसौट
है। हर स्थ त म क्रम वही रहे: अध्याय म ोत, तब उसका अथ, आज क माँग, और एक वास्त वक उदाहरण।

प्र.7 कल्पना क जए क आप कसी बंदरगाह नगर (सूरत, कालीकट या हुगली) म एक व्यापारी ह। वहाँ वस्तुओं,
व्यापार करने वाले लोग , जहाज क आवा-जाही आ द के संबंध म आप जो दृश्य दे खते ह, उनका वणन क जए।

अ े उत्तर म क्या होना चा हए: अध्याय के व्यापार-संबंधी तथ्य, एक दृश्य के भीतर रखे हुए। लखने से पहले पृष्ठ 55–57 से ये
बटोर ली जए —

अध्याय क्या बताता है इसका उपयोग कसम

िनय त “तटीय और नदी िकनारे के नगरों, जैसे — कालीकट, मैंग लोर, सूर त, मसूल ीपट्टनम जहाजों के गंतव्य और पित ं ी बंद रगाहों के नाम
और हुग ली के माध्यम से ” होता था

कपास, “िजससे वस्त्र उत्पादन में उन्नित हुई”; साथ ही रे शम, ऊन, रंग , लकड़ी, जूट, आपके घाट पर क्या ढे र लगा है
मसाले , गन्ना

आयात: रे शम, घोड़े, धातुए ँ और िवलािसता की वस्तुए ँ — और “भारत िजतना िनय त करता जहाजों से क्या उतरता है, और आपका बही-खाता
था, उससे कही ं कम आयात करता था” क्यों लाभ में रहता है

अरब, फारस (वतमान ईरान) और मध्य एिशया के व्यापारी भारतीय बंद रगाहों में बस गए आप वास्तव में िकनसे ले न-दे न करते है,ं और
िकतनी भाषाओं में

“नदी एवं समुद ी व्यापार के िलए आवश्यक जहाज िनम ण इस अविध में अत्यिधक िवकिसत गोदी, शोर , और राल की गंध
हआ
ु ”

हंडु ी — भुगतान का िलिखत िनदश, िजसे राजनैितक सीमाओं के पार ले जाया जा सकता आप बड़ा िहसाब िबना एक िस क्का चलाए कै से
था चुक ाते है ं

िशल्पकारों ने “हिथयारों से ले क र बतनों और आभूषणों तक” बनाया बंद रगाह के पीछे की कारीगर -बिस्तयाँ

नमूना उत्तर:

Page 36 of 40

Page 38

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

म सूरत म तीसरे फाटक पर अपना बही-खाता रखता हूँ, और बताता हूँ क यहाँ सवेरा कैसा दखता है।
सूरज ठ क से नकलने से पहले ही ग लयाँ गा ड़य से रुँ ध जाती ह — भीतरी बुनकर गाँव से आई सूती कपड़े क
गठ रयाँ, आदमी से ऊँची लद हुईं, और हर गठरी पर ख ड़या से उस श्रेणी का नाम लखा है जसने उसे बुना है। पीछे
रंग के मटके आते ह, फर लकड़ी, जूट, और काली मच क बो रयाँ, जनक गंध गली के दूसरे सरे तक जाती है।
मेरा मुनीम गनता है, मेरा दलाल झगड़ता है, और गाड़ीवान चल्लाते ह क पहले क बारी उन्ह को द गई थी।
पानी पर तीन तरह क हलचल है। छोट नाव दन भर नद से भीतर का माल लाती रहती ह। बड़े जहाज कुछ दूर
लंगर डाले खड़े ह और छोट नाव से लादे जाते ह — प श्चम जाने वाले अरब जहाज, और अब कुछ वष से पुतगाली,
जो घोड़े लाते ह और मसाले तथा कपड़ा ले जाना चाहते ह। उनसे भी परे गोद म जहाज बन रहे ह: हथौड़ क
आवाज कभी बंद नह होती, और भोर से राल खौल रही होती है।
जनसे मेरा लेन-दे न है, वे हर जगह से ह। तीन दरवाजे आगे एक फारसी व्यापारी है जसका प रवार यहाँ मेरे प रवार
से भी पुराना है; एक अरब कोठ है जसका अपना गोदाम है; मध्य ए शया के व्यापा रय के गुमाश्ते ह, जो एक ऋतु
के लए आते ह और चले जाते ह। हम तीन भाषाओं और बहुत सारे इशार के मश्रण से काम चलाते ह, और जहाँ
धन का प्रश्न है, वहाँ एक-दूसरे को भली भाँ त समझ लेते ह।
बाहर से आने वाल को सबसे अ धक आश्चय यह होता है क सक्के इतने कम दखते ह। कल मने इतना बड़ा ऋण
चुकाया क उसे ले जाने के लए ह थयारबंद पहरे क आवश्यकता होती, और वह मने एक हुंडी से चुका दया — एक
ल खत नदश, जसे मेरा प्र त न ध दूसरे नगर म, दूसरे राज्य म, दूसरे शासक के अधीन मान लेगा। हमारे व्यापार का
पूरा रहस्य यही है: माल जहाज से चलता है, कतु धन कागज से — और कागज माग म लूटा नह जा सकता।
और हम खरीदते जतना ह, बेचते उससे कह अ धक ह। भीतर आता है रेशम, घोड़े, धातुएँ और बड़े घर के लए
वला सता क वस्तुए।ँ बाहर जाता है वह, जो यह दे श भारी मात्रा म बनाता है। इसी लए जहाज लौट-लौटकर आते
ह।

सुझाव: य द आप कालीकट चुन तो मसाल और अरब सागर के व्यापार को कद्र म र खए, और यह स्मरण र खए
क पुतगा लय का भारत आगमन 1498 म हुआ (समयरेखा दे खए)। य द हुगली चुन तो उसे नद -बंदरगाह बनाइए
— नाव, रेशम, जूट, और बंगाल क खाड़ी तक क लंबी यात्रा।

अध्याय — एक नज़र म
अध्याय इस कालखंड को भारतीय इ तहास के मध्यकाल का उत्तराद्ध कहता है, कतु सावधान करता है क यह मूलतः यूरोपीय
शब्द है और इ तहासकार सदै व सहमत नह होते क भारत म यह कस काल के लए प्रयुक्त हो। यहाँ इसका अथ है 11व से
17व शताब्द ।
दल्ली सल्तनत (1206 से) म तुक-अफगान मूल के पाँच राजवंश आए — ममलुक, खलजी, तुगलक, सैयद और लोद ।
लगभग तीन म से दो सुल्तान ने अपने पूववत को हटाकर सत्ता ह थयाई, इस लए औसत शासनकाल क ठनता से नौ वष से
अ धक रहा।
प्र तरोध हर दशा से हुआ — नर सहदे व प्रथम के अधीन पूव गंग राज्य, होयसल, मुसुनुरी नायक, मेवाड़ के राणा कुंभा एवं
महाराणा प्रताप, रानी दुगावती, जाट कसान, भील-ग ड-संथाल-कोच जैसे समुदाय, अहोम और सख।

Page 37 of 40

Page 39

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

द क्षण म वजयनगर (1336 से) कृष्णदे वराय के अधीन अपनी चरम सीमा पर पहुँचा, कतु 1565 म तालीकोटा के युद्ध म
दक्कन सल्तनत के गठबंधन से हार गया; नगर महीन लूटा गया और ध्वंसावशेष ही शेष बचे।
मुगल साम्राज्य का आरंभ 1526 म बाबर क पानीपत वजय से हुआ। अकबर ने वैवा हक गठबंधन , सुलह-ए-कुल और
ज जया के उन्मूलन से सा ाज्य को स्थरता द ; औरंगजेब ने उसे सवा धक वस्तार दया कतु ज जया पुनः लगाया और
दक्कन के 25 वष के युद्ध म राजकोष क्षीण कर दया।
प्रशासन सल्तनत म इक्ता प्रणाली पर और मुगल म मनसबदारी, बारह सूब तथा टोडरमल के भू म सवक्षण पर चलता था।
राजनी त के नीचे भारत वश्व के सबसे धनी क्षेत्र म एक बना रहा — कृ ष, शल्पकार, े णयाँ, जा तयाँ, मं दर-आधा रत
अथव्यवस्थाएँ और हुंडी इसका आधार थे।

Page 38 of 40

Page 40

as e
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
त्व रत पुनरावृ त्त
m l a se
m .coअथ agआता है
ase
शब्द अध्याय म यह कहाँ पृष्ठ

agl
सल्तनत ‘सुल्तान’ ारा शािसत क्षेत्र — एक उपािध िजसे कु छ मुिस्लम दल्ली सल्तनत, जसक स्थापना 1192 म
पृथ्वीराज चौहान क पराजय के बाद हुई
पृष्ठ 25
शासकों ने अपनाया था

co m
तुक
e m .
वे लोग, भाषाएँ एवं संस्कृ ितयाँ जो ऐितहािसक रूप से मध्य इस काल के कई हमलावर मध्य ए शयाई — पृष्ठ 23
ag
l as
एिशया से ले क र तुक एवं साइबेिरया तक के िवशाल क्षेत्र से तुक या अफगान थे
जुड़ी रही है ं
a g
नकली सक्के बने और अथव्यवस्थाoका m ास
सांके तक मुद्रा सस्ते ताँबे के िसक्के , िजन्हे ं चाँद ी एवं सोने के िसक्कों के समान मुहम्मद बन तुगलक क योजना; इससे पृष्ठ 27

. c
em
मूल्य का घोिषत िकया गया

om a s
gl
हुआ

बुत शकन m . c बौद्ध, जैन एवं aहदू मं दर क मू तय एवं
a s
(प्रlतमा-
e मूितपूजक माने जाने वाले पतीकों या धािमक िचत्रों को पृष्ठ 28

agवनाशवाद)
अस्वीकार करना या नष्ट करना चत्र पर हुए प्रहार

m a s
.co agl
का फर वह व्यिक्त जो (िकसी िदए गए पंथ के ) िवश्वास को साझा नही ं तैमूर का घो षत उ े श्य — “का फर के साथ पृष्ठ 28

m
ase
करता युद्ध करना एवं उनक धन-संप त्त को लूटना”

ज जया agl
गैर -मुिस्लम पजा पर सुर क्षा पदान करने और सै न्य से वा से छू ट कुछ सुल्तान ने लगाया; अकबर ने समाप्त पृष्ठ 28,
दे ने के बदले वसूल ा जाने वाला कर कया; औरंगजेब ने पुनः लगाया 38, 43

co m
m .
e
राणा मेवाड़ के राणा कुंभा, कुंभलगढ़ के नमाता; पृष्ठ 30

as
राजपूत राजाओं के िलए पाय: पयुक्त एक उपािध

m l
.co g
राणा सांगा

m a
l a se
जौहर चत्तौड़गढ़ म, जब अकबर ने कले म सध पृष्ठ 38
g
बंद ी बनाए जाने एवं ग ल
ु ाम बनाए जाने से बचने के िलए राजपूत

a िस्त्रयों का सामूिहक रूप से स्वयं को अिग्न में समिपत करना लगाई

se m
com l a
सुलह-ए-कुल वस्तुतः ‘सभी के साथ शािं त’ — सभी पंथों के पित सिहष्णतु ा अकबर क नी त, जसके साथ उसने ज जया पृष्ठ 38

g
m. a
भी समाप्त कया

ase
aglएवं घात लगाकर बड़ी से नाओं को
गु रल्ला युद्ध लड़ाई की एक शैल ी िजसमें क्षेत्र की जानकारी रखने वाले छोटे अरावली म महाराणा प्रताप; असम म अहोम पृष्ठ 47
समूह अचानक आक्रमण

m
हराने का पयास करते है ं

. c o
s e m बना स्थायी सेना के
m वशाल त्वaरत बल रख सके
पाइक प्रणाली पत्येक सक्षम व्यिक्त भूिम अिधकारों के बदले राज्य को श्रम या इसी से अहोम शासक पृष्ठ 48

. co agl
सै न्य से वा दे ता था

m
seइक्ता
l a
ag
कर वसूल ी के िलए कु लीनों (इक्तादारों) को सौंपे गए क्षेत्र ; ये सल्तनत क सेना का खच जुटाने का मुख्य पृष्ठ 53

.c
पद वंशानुग त नही ं थे साधन

s e m
m a
.co agl
मनसबदारी मनसबदार (अिधकारी) अपने मनसब (पद) के अनुस ार अकबर क प्रणाली, जसे अबुल फ़ज़ल ने पृष्ठ 54

se m
हािथयों, घोड़ों, ऊँटों और सै िनकों की एक िनिश्चत संख्या आइन-ए-अकबरी म दज कया; भुगतान
रखते थे
g l a जागीर के रूप म

a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 39 of 40

Page 41

कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 2 भारत के राजनै तक मान चत्र का पुन नमाण AglaSem · NCERT Solutions

शब्द अथ अध्याय म यह कहाँ आता है पृष्ठ

हुंडी िकसी व्यिक्त को भुग तान करने का एक िलिखत िनदश, िजसे व्यापारी बना मुद्रा ढोए धन भेज सकते थे — पृष्ठ 57
राजनैितक सीमाओं के पार ले जाया जा सकता था आधु नक ब कग का अग्रदूत

Page 40 of 40

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages41
Languagehindi
Updated19 Sep 2026