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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 3 मराठा साम्राज्य का उदय

AglaSem पर कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 मराठा साम्राज्य का उदय (समाज का अध्ययन) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Social Science Chapter 3 the Rise of the Marathas (Exploring Society), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 3 मराठा साम्राज्य का उदय - Page 1 of 24

About NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 3 मराठा साम्राज्य का उदय

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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 3 मराठा साम्राज्य का उदय – Text

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Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 3: मराठा सा ाज्य का उदय

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

61 – 82 8 17 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 23 pages

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: मराठा सा ाज्य का उदय
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय के सभी प्रश्न के वस्तृत एन.सी.ई.आर.ट . समाधान — समाज का अध्ययन : भारत
और उसके आगे भाग 1 के अतीत के चत्रपट खंड से। अध्याय के तीन महत्वपूण प्रश्न, चार आइए पता लगाएँ बॉक्स, दोन वचार-बॉक्स और अंत
के आठ प्रश्न और क्रयाकलाप — प्रत्येक उत्तर म केवल नष्कष नह , उसके पीछे का तक और अध्याय से लया गया प्रमाण भी दया गया है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8) 61 – 82

खं ड प्रश्न

8 17

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 61
अध्याय का आरंभ — अतीत के चत्रपट

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 मराठा कौन थे? वे टश शासन स्था पत होने से पूव भारतवष क सबसे बड़ी अ खल भारतीय श क्त कैसे बने?

मराठा दक्कन पठार के, वशेष रूप से वतमान महाराष्ट्र के नवा सय का एक समूह थे, जनक पहचान उनक भाषा मराठ से है —
इस भाषा का 12व शताब्द से सतत और समृद्ध सा ह त्यक इ तहास रहा है। वे सबसे बड़ी अ खल भारतीय श क्त इस लए बन सके
क्य क तीन अलग-अलग बात एक साथ उनके पक्ष म थ — उनसे पहले तैयार हुआ सांस्कृ तक आधार, उनके अपने भूभाग के
अनुकूल युद्धपद्ध त, और ऐसा प्रशासन जसम श क्त व्य क्त के पास नह , राज्य के पास रहती थी।

सांस्कृ ितक आधार (7वी ं–17वी ं शताब्दी) → िशवाजी का स्वराज्य (1646–1680)

→ औरंगजेब के आक्रमण में िटके रहना (1682–1707)

→ अिखल भारतीय िवस्तार (18वी ं शताब्दी)

→ अंगेजों से पूव का सबसे बड़ ा भारतीय सामाज्य

1. आधार पहले सांस्कृ तक बना, फर राजनै तक। 7व से 17व शताब्द के मध्य संत ने आध्या त्मक उ ान के लए बाह्य
अनुष्ठान क अपेक्षा भ क्त-माग को महत्व दया और लोकभाषाओं म रचना क । महाराष्ट्र म ानेश्वर, नामदे व, तुकाराम और रामदास
ने उप नषद और भगव ता जैसे ग्रंथ का मराठ म अनुवाद कया; कुछ संत ने सख गुरुओं क भाँ त सामा जक संगठन और
राजनै तक चेतना पर भी बल दया। अध्याय इसका प रणाम स्पष्ट बताता है — समाज को ‘एक सुदृढ़ सांस्कृ तक आधार प्राप्त हुआ
जसने आगे चलकर मराठ को एक राजनै तक श क्त के रूप म संग ठत होने म सहायता क ’। 17व शताब्द तक कुछ मराठा
सरदार ने स्वराज्य के प्रयत्न कए थे, पर वे असफल रहे — उनम साहस क नह , एकता क कमी थी।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

2. छत्रप त शवाजी ने इस आधार को राज्य म बदला। 1630 म भ सले कुल म शाहजी और जीजाबाई के यहाँ जन्मे शवाजी ने
केवल 16 वष क आयु म सैन्य अ भयान आरंभ कए — पहले पुणे के आसपास के उपे क्षत और नजन दुग लेकर उनक सुरक्षा
सुदृढ़ क । बीजापुर और फर मुगल के वरुद्ध उन्ह ने गु रल्ला युद्ध अपनाया — छोटे दल, तीव्र ग त, आक स्मकता और भूभाग का
गहन ान। 1657 म उन्ह ने नौसेना बनाई, जो न बीजापुर के पास थी न मुगल के पास; 1674 म रायगढ़ म राज्या भषेक हुआ;
और 1677 म द क्षण- द ग्वजय से उत्तरी त मलनाडु तथा कनाटक के कुछ भाग राज्य म जुड़े।
3. राज्य ने सबसे क ठन परीक्षा पार क । औरंगजेब ने बीजापुर और गोलकुंडा जीत लए, संभाजी को यातनाएँ दे कर मार डाला
और राजधानी रायगढ़ भी ले ली — फर भी मराठ को समाप्त नह कर सका। राजाराम युद्ध को जजी ले गए; मराठ ने अपने दुग
क दृढ़ता से रक्षा क और प्रायः मुगल पर भारी पड़े; औरंगजेब दक्कन से नकल ही नह सका और मराठ को परास्त कए बना ही
मर गया (1682–1707)। पचीस वष के इसी प्र तरोध ने एक क्षेत्रीय राज्य को युद्ध-कठोर श क्त बना दया।
4. फर वस्तार पूरे भारत म हुआ। राजाराम क रानी ताराबाई ने समझा क मुगल सेना दक्कन म उलझी है और उत्तर भारत
असुर क्षत है; उन्ह ने वशाल सेनाएँ उत्तर भेज — अध्याय उन्ह उत्तर म मराठा वस्तार क सूत्रधार कहता है। पेशवा बाजीराव प्रथम
और नानासाहेब ने अ खल भारतीय वस्तार कया; 1754 म दल्ली पर मराठा नयंत्रण आरंभ हुआ; महादजी शदे ने 1771 म
दल्ली पुनः जीती और वह तीन दशक तक मराठ के पास रही। वस्तार क चरम सीमा पर लाहौर, अटक और पेशावर तक मराठा
नयंत्रण पहुँचा।

ऐसा क्य हुआ: केवल बड़ी सेना से सा ाज्य नह बनता — मुगल क सेना तो और बड़ी थी। मराठे इस लए जीते
क्य क उनक युद्धपद्ध त उनके भूगोल से मेल खाती थी (दुग और पहाड़), उनका धन केवल जीती हुई भू म पर
नभर नह था ( जन प्रांत क वे केवल रक्षा करते थे, उनसे चौथ और सरदे शमुखी मलती थी), और उनके अ धकारी
वेतनभोगी तथा स्थानांतरणीय थे, इस लए कोई सेनानायक अपने पद को नजी उत्तरा धकार नह बना सकता था।
यही कारण है क संस्थापक के नधन और राजधानी के पतन के बाद भी राज्य चलता रहा।

क्या आप जानते ह? अध्याय के आरंभ म दया गया ोत — रामचंद्रपंत अमात्य का आ ापत्र (1715) — पहले
ही चेतावनी दे ता है क यूरोपीय ‘टोपीधारी’ अन्य व्यापा रय के समान नह ह, उनका पूरा ध्यान ‘इस दे श म प्रवेश
करने, अपना क्षेत्र वस्तृत करने’ म है। एक मराठा मंत्री ने यह खतरा 1818 से पूरे सौ वष पहले दे ख लया था।

प्र.2 उनके शासन प्रणाली क प्रमुख वशेषताएँ क्या थ ?

मराठा शासन प्रणाली क छह प्रमुख वशेषताएँ थ — वेतनभोगी और स्थानांतरणीय नाग रक प्रशासन, आठ मं त्रय क प रषद्,
प्रत्यक्ष अधीन क्षेत्र से बाहर ‘रक्षा के बदले कर’ क व्यवस्था, दुग पर टक त्र-अंगी सेना, स्थानीय एवं अपील योग्य न्यायव्यवस्था,
तथा व्यापार और यातायात को राज्य का स क्रय प्रोत्साहन।
1. नाग रक प्रशासन। छत्रप त शवाजी ने अपेक्षाकृत कद्र कृत प्रशासन स्था पत कया। उन्ह ने वंशानुगत पद — जो सुल्तान और
मुगल के अधीन सामान्य थे — और भू म आवंटन समाप्त कर दए, तथा प्रत्येक राजक य अ धकारी को राज्य कोष से वेतन दया।
कई अ धका रय का समय-समय पर स्थानांतरण होता था। युद्ध म शहीद सै नक क वधवाओं को पशन द जाती थी और उनके
पुत्र को सैन्य पद भी दए जाते थे।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

यह क्य महत्वपूण था: य द अ धकारी को वेतन के स्थान पर भू म द जाए तो वह भू म धीरे-धीरे उसक हो जाती
है; और य द पद उसके पुत्र को मल जाए तो एक ही पीढ़ म राज्य उस पद पर नयंत्रण खो दे ता है। वेतन और
स्थानांतरण से, अध्याय के शब्द म, यह सु न श्चत होता था क अ धका रय के पास ‘राजा पर अपनी शत थोपने क
पयाप्त श क्त न हो’। श क्त व्य क्त के पास नह , पद के पास रहती थी।

2. अष्टप्रधान मंडल — संप्रभु छत्रप त क सहायता करने वाले आठ मंत्री ( चत्र 3.13):

पद वभाग पद वभाग

पधान पधान मंत्र ी (पेशवा) से नापित पधान से नापित

अमात्य िवत्त मंत्र ी सुम ंत िवदे श मंत्र ी

सिचव भू-राजस्व मंत्र ी न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश

मंत्र ी खुिफया मंत्र ी पंिडतराव धािम क िवषयों के पमुख

3. सीमा के बाहर से राजस्व। जो प्रांत प्रत्यक्ष रूप से उनके अधीन नह थे — दक्कन और उत्तर भारत म — उनसे मराठे चौथ
(25 प्र तशत) और सरदे शमुखी (अ त रक्त 10 प्र तशत) वसूलते थे। बदले म वे उन प्रांत क रक्षा करते थे और उनके आंत रक
प्रशासन म हस्तक्षेप नह करते थे। मुगल ने भी व भन्न सं धय से इस व्यवस्था को स्वीकृ त द और समय के साथ इनम से कुछ प्रांत
मराठा सा ाज्य का भाग बन गए।
4. सैन्य प्रशासन। सेना तीन अंग म थी — पैदल, घुड़सवार और नौसेना। घुड़सवार सेना म दो प्रकार के सै नक थे — बारगीर,
जनके घोड़े और उपकरण राज्य दे ता था, और शलेदार, जो स्वयं व्यय उठाते थे। तलवार और भाले प्रय ह थयार थे, कतु बंदूक
का प्रयोग भी बड़ी संख्या म होता था; शवाजी के समय से ही रॉकेट प्रयुक्त होते थे और 1770 तक धातु-न लकाओं वाले रॉकेट भी।
18व शताब्द म मराठ ने यूरोपीय शैली के अनुशा सत सै नक और तोपखाने क श्रेष्ठता दे खकर वैसी सेना तैयार करने का प्रयास
कया — महादजी शदे के पास एक वशाल यूरोपीय शैली क सेना थी। इन सबके नीचे आधार थे दुग, जो महत्वपूण माग पर
नयंत्रण रखते और छापामार युद्ध के समय सेना को आश्रय दे ते थे।
5. न्याय व्यवस्था। यह कुशल थी और मृत्युदंड के संय मत प्रयोग के लए उल्लेखनीय थी। पंचायत — स्थानीय अ धका रय और
प्र त ष्ठत व्य क्तय का समूह, जो आज के सरकारी पंचायती नकाय से भन्न था — न्याय का मुख्य अंग थी, और असंतोषजनक
नणय पर मराठा सरदार के समक्ष अपील क जा सकती थी। पुणे, इंदौर आ द प्रमुख नगर म कोतवाल कानून-व्यवस्था संभालता
था।
6. व्यापार और लोक- नमाण। शवाजी ने व्यापार को प्रोत्सा हत कया और स्वयं समुद्र वदे शी व्यापार म भाग लया — उनके
और उनके अ धका रय के पोत यमन के मोचा, ओमान के मस्कट और मले शया के मलक्का तक जाते थे और सोना, वस्त्र आ द ले
जाते थे। सड़क बन और उनका रख-रखाव हुआ, न दय और छोट जलधाराओं पर पुल बने, और 18व शताब्द म ओ डशा जैसे
स्थान पर नद प रवहन के लए नौकाओं का तंत्र चलाया गया।

स्वयं जाँ चए: वशेषता 1 और 4 क तुलना बाद के काल से क जए। जब 18व शताब्द म सरदार को ‘अ धक
श क्त और स्वायत्तता’ मली तो, अध्याय के अनुसार, ‘कभी-कभी अनुशासनहीनता और दुव्यवहार भी हुए जो
छत्रप त शवाजी के मूल्य से बल्कुल वपरीत थे’। व्यवस्था ठ क थी; उसे ढ ला छोड़ना महँगा पड़ा।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय
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भारतीय इ तहास पर मराठा सा ाज्य का क्या प्रभाव पड़ा?
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मराठाglप्रभाव राजनै तक, प्रशास नक, सांस्कृ तक और अंततः प्रेरणात्मक था — और अध्याय अंत म कहता है क सबसे बड़ा
प्रभाव अं तम ही था।

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प्रभाव मराठ ने क्या कया अध्याय से प्रमाण

राजनै तक सेg
मुग ल पभुत्व को तोड़ा और अंग ेजोंa
l a औरंग जेब मराठों को परास्त िकए िबना द क्कन में ही मर गया; मराठों ने पूव , उ त्त री
पूव का सबसे बड़ा भारतीय सामाज्य और म ध् य भारत के अिधकांश भाग तथा 1754/1771 से िद ल्ली पर िनयंत्र ण रखा
बनाया
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.co करने की एक नई िविध’ स्थािपत की
प्रशास नक ‘एक कु शल पशासन के साथ शासन वेतनभोगी, स्थानांतरणीय अिधकारी; अष्टपधान मंडल ; चौथ और सरदे शमुखी;

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म ृत्युद ंड के संयिमत पयोग वाली पंचायत-न्यायव्यवस्था

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a g सामु द्रक नवीनतम तकनीक के िबना भी लंबे
समय तक यूर ोपीय नौसै िनक वचस्व का
कान्होजी आंग े ने भूग ोल - ान और युद्धनीित से अनेक िवजय पाईं; मराठे स्वयं
यूर ोिपयों से व्यापार -पत्र माँग ने लगे, िजस पर उ न्हे ं ‘समुद ी डाकू ’ कहा गया

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comके स्थान पर संस्कृत मुहर; राज्य-व्यवहार-कोष; मोडी िलिप; नागपुर के agl
पितकार िकया

.फारसी
सांस्कृ तक िविभन्न क्षेत्र ों के भारतीयों में नया
a s emभोंसले ारा पुरी में जगन्नाथ पूजा का पुनज वन; अिहल्याबाई होलकर के मंिदर,
सांस्कृ ितक आत्मिवश्वास जगाया
a gl घाट, कु एँ और माग (के दारनाथ से रामेश्वरम तक ); सरफोजी ि तीय का
सम न्वयकारी तंजावुर

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प्रेरणात्मक
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यह िदखाया िक शिक्तशाली सामाज्य
के आदश ने ‘भारतीयों को पेिरत िकया िकa वे s
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छत्र साल ने िशवाजी से पेिरत होकर स्वतंत्र बुंदे ल खंड बनाया; आगे चलकर स्वराज्य

.co स्वयं सामाज्य चला सकते है ं agl
परािजत िकए जा सकते है ं और भारतीय स्वयं शासन कर सकते है’ं और

se m स्वतंत्रता आंद ोलन का बीजारोपण िकया

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अं तम पं क्त सबसे प्रबल क्य है: सा ाज्य समाप्त होते ह — मराठा सा ाज्य भी 1818 म समाप्त हुआ। जो
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सा ाज्य के बाद भी बचा रहा, वह एक प्रमाण था। शवाजी से पहले दक्कन म संप्रभुता का अथ कसी सुल्तान क
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सेवा था; उनके बाद लोग के सामने यह जीवंत उदाहरण था क भारतीय स्वयं सा ाज्य का नमाण, वस्तार और

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प्रशासन कर सकते ह। इसी लए अध्याय कहता है क उन्ह ने सबसे अ धक योगदान ‘लोग को यह दखाकर’ दया
क श क्तशाली सा ाज्य को परा जत कया जा सकता है।

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mसमाप्त करने म ततालीस
संकेत: मराठा प्रभाव इससे भी दखता है क अंग्रेज को क्या करना पड़ा। मराठा शeक्त
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cवषo (1775–1818) म तीन आंग्ल-मराठा युद्ध लगे — और उससे पहले नाना a
glफड़णवीस पहला अ खल भारतीय
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टश- वरोधी गठबंधन बना चुके थे, जसम मैसूर के हैदर अली और हैदराबाद के नजाम जैसे पुराने वरोधी भी
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स म्म लत थे।

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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 63 las
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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

मराठा कौन थे? — भ क्त परंपरा

आइए पता लगाएँ

प्र.1 क्या आपने कभी ‘भ क्त’ शब्द सुना है? आपके लए इसका क्या अथ है? भारत के कसी भी भ क्त संत का
चयन कर उनके जीवन, उपदे श और संदेश का अध्ययन क जए। आप उनक कोई क वता या भजन ढूँ ढ़कर उसे
अपने सहपा ठय के साथ साझा क जए।

अध्याय के अनुसार भ क्त का अथ है — ईश्वर या कसी व शष्ट दे वता के प्र त समपण। 7व से 17व शताब्द के मध्य भारत के
संत और साधक ने आध्या त्मक उ ान के लए बाह्य अनुष्ठान क अपेक्षा भ क्त-माग को अ धक महत्व दया — और सबसे
महत्वपूण बात यह क उन्ह ने संस्कृत के स्थान पर लोकभाषाओं म रचना क , इसी लए उनके वचार दूर-दूर तक पहुँचे।

भ क्त इतनी दूर तक क्य पहुँची: इसने एक साथ दो बाधाएँ हटा द । पहली — यह कहा क महत्व अनुष्ठान क
शुद्धता का नह , समपण का है। दूसरी — यह मराठ , हद , कन्नड़, त मल, पंजाबी या बांग्ला म बोली, इस लए एक
साधारण कसान या बुनकर भी इसे समझ और गा सकता था। संत ‘समाज के व वध वग से’ आते थे, इस लए
उनके श्रोता भी व वध वग से थे।

यह क्रयाकलाप कैसे क जए

1. कसी एक संत का चयन क जए — महाराष्ट्र से अध्याय स्वयं ानेश्वर, नामदे व, तुकाराम और रामदास के नाम दे ता है; अन्य
क्षेत्र से आप कबीर, मीराबाई, सूरदास, गुरु नानक, बसवण्णा, आंडाल, चैतन्य महाप्रभु या असम के शंकरदे व को ले सकते ह।
2. तीन बात खो जए — वे कब और कहाँ रहे, उन्ह ने क्या सखाया, और वे कनसे बात कर रहे थे।
3. एक छोट क वता या भजन चु नए। पहले उसे मूल भाषा म प ढ़ए, फर अपने शब्द म उसका अथ बताइए।
4. अंत म एक वाक्य ल खए क उसम आपको क्या सबसे अ ा लगा।

नमूना उत्तर : संत तुकाराम (17व शताब्द )

जीवन: तुकाराम 17व शताब्द म पुणे के पास दे हू म रहे — अथात उसी शताब्द म जसम छत्रप त शवाजी का उदय हुआ। वे
अनाज के व्यापारी थे; अकाल म प रवार और व्यापार खोने के बाद वे पंढरपुर के वट्ठल क भ क्त म लीन हो गए। वे वारकरी
परंपरा के संत ह, जसके वारकरी आज भी प्र तवष पैदल पंढरपुर जाते ह। अध्याय म चत्र 3.4 म उन्ह पर आधा रत डाक
टकट दया गया है।
उपदे श: उन्ह ने साधारण मराठ म अभंग रचे — छोटे भ क्त-पद। उनका कहना था क ईश्वर प्रेम और स े आचरण से मलता
है, दखावे से नह ; धम के नाम पर होने वाले पाखंड क उन्ह ने कठोर आलोचना क ।
संदेश: संतत्व क कसौट करुणा है। उनका एक प्र सद्ध अभंग है — ‘जे का रंजले गांजले, त्यांसी म्हणे जो आपुले, तो च साधु
ओळखावा, दे व तेथे च जाणावा’ — अथात ‘जो दुखी और पी ड़त को अपना कहे, उसी को साधु जानो; ईश्वर वह है।’
यहाँ इसका महत्व: यही वह ‘सुदृढ़ सांस्कृ तक आधार’ है जसक बात अध्याय करता है। जो समाज चार शता ब्दय से अपनी
ही भाषा म ऐसे पद गा रहा था, वह स्वयं को एक इकाई मानने का अभ्यस्त हो चुका था — और इसी से आगे चलकर राजनै तक
एकता संभव हुई।

यह क जए: य द आप अपने ही क्षेत्र के कसी संत को चुन, तो घर के कसी बुजुग से पू छए क उन्ह उस संत का
कोई भजन कंठस्थ है या नह । जो गीत कभी लखे नह गए, वे प्रायः केवल स्मृ त म बचे ह — ऐसा एक गीत इकट्ठा
करना वास्त वक ऐ तहा सक काय है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 65
मराठा श क्त क स्थापना और छत्रप त शवाजी का उदय

आइए पता लगाएँ

प्र.1 य द आप भूतकाल म यात्रा करके छत्रप त शवाजी से मल सक तो आप उनसे कौन-से तीन प्रश्न पूछगे और
क्य ?

अ ा उत्तर केवल तीन प्रश्न नह है — वे तीन प्रश्न ह जनका उत्तर केवल वे ही दे सकते थे, और प्रत्येक के साथ अध्याय से लया
गया कारण। ऐसे प्रश्न मत पू छए जनका उत्तर पुस्तक पहले ही दे चुक है (‘आपका जन्म कब हुआ?’); नणय , दु वधाओं और
चुनाव के बारे म पू छए, क्य क उन्ह कोई ोत दज नह करता।

ऐ तहा सक प्रश्न अ ा कब होता है: इ तहासकार क्या हुआ (जो ोत बता सकते ह) और कसी ने वैसा करने का
नणय क्य लया (जो ोत प्रायः नह बताते) म अंतर करते ह। अ भलेख बताते ह क 1657 म नौसेना बनी; कोई
अ भलेख यह नह बताता क उन्ह यह व्यय उ चत क्य लगा। आपके प्रश्न इसी रक्त स्थान म होने चा हए।

नमूना उत्तर:

1. ‘1657 म नौसेना बनाने का नणय आपने क्य लया, जब क बीजापुर और मुगल दोन पूणका लक नौसेना को
अनावश्यक मानते थे?’
क्य पूछूँगा: अध्याय इसे ‘ नतांत क्रां तकारी कदम’ कहता है। बीजापुर के पास व्यापारी जहाज तो थे पर तटरक्षा के लए कोई
स्थायी नौसेना नह , और मुगल म भी नौसेना का उपयोग अत्यंत सी मत था। अथात वे सी मत धन उस पर लगा रहे थे जसे हर
पड़ोसी श क्त अनावश्यक मान चुक थी। म जानना चाहूँगा क क्या उन्ह ने वही यूरोपीय सामु द्रक खतरा पहले ही भाँप लया था
जस पर 1715 म रामचंद्रपंत अमात्य ने लखा।
2. ‘पुरंदर म आपको राज्य का बड़ा भाग छोड़ना पड़ा और पुत्र संभाजी को मुगल सेवा म भेजना पड़ा। आपने कैसे तय
कया क एक कठोर सं ध हारे हुए युद्ध से बेहतर है?’
क्य पूछूँगा: यह अध्याय का सबसे क ठन क्षण है — वजय नह , पराजय। कोई नेता कब लड़ना बंद करने का नणय लेता है,
यह जानना उसक कसी भी वजय से अ धक बताता है। यही वह नणय भी है जसने उन्ह जी वत रखा, और नौ वष बाद
उनका राज्या भषेक हुआ।
3. ‘आपने अ धका रय को आदे श दया था क प्रजा से बलपूवक घास का एक तनका भी न छ न और कसान के आम-
कटहल के वृक्ष न काट। दूर-दूर तैनात अ धका रय से आपने यह वास्तव म पलवाया कैसे?’
क्य पूछूँगा: अ ा आदे श दे ना सरल है, सैकड़ दुग तक उसे लागू कराना नह । अध्याय संकेत दे ता है — भू म के स्थान पर
कोष से वेतन, और समय-समय पर स्थानांतरण — पर म उन्ह से सुनना चाहूँगा क व्यवस्था यही थी, या नरीक्षण और दं ड पर
नभरता थी।

संकेत: कक्षा म अपने तीन प्रश्न साझा करते समय दे खए क कतने सहपा ठय ने युद्ध के बारे म पूछा और कतन
ने शासन के बारे म। अध्याय प्रशासन पर लगभग उतना ही स्थान दे ता है जतना युद्ध पर — और प्रशासन ही वह
वस्तु थी जसने राज्य को उनके बाद 138 वष तक चलाया।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 66
गु रल्ला युद्ध

आइए पता लगाएँ

प्र.1 गु रल्ला युद्ध के बारे म अ धक जानने का प्रयास कर। दु नया के अन्य कन दे श म यह पद्ध त अपनाई गई?
उन्ह ने इसके लए कन भौगो लक लाभ का उपयोग कया? अपने नष्कष पर समूह म चचा कर।

अध्याय के अनुसार गु रल्ला युद्ध वह पद्ध त है जसम ‘छोटे -छोटे दल कसी भूभाग के गहन ान के आधार पर तीव्र ग त से
आक स्मक आक्रमण कर शत्रुओं क वशाल सेना को परास्त कर दे ते ह’। ‘गु रल्ला’ शब्द स्वयं स्पेनी है — इसका अथ है ‘छोटा
युद्ध’ — और यह नेपो लयन के वरुद्ध स्पेन के प्र तरोध से प्रच लत हुआ।

यह पद्ध त काम क्य करती है: बड़ी नय मत सेना तभी श क्तशाली है जब वह एकत्र हो सके, अपनी रसद पा सके
और आमने-सामने का युद्ध लड़ सके। गु रल्ला तीन से इनकार कर दे ते ह। वे वहाँ प्रहार करते ह जहाँ शत्रु कमजोर
है, उसके एकत्र होने से पहले लुप्त हो जाते ह, और उसक रसद-रेखा काट दे ते ह। इससे बड़ी सेना का लाभ —
उसका आकार — बोझ बन जाता है, क्य क आकार को सड़क, अनाज और चारा चा हए। तीन वष तक वशाल
सेना से आक्रमण करने वाले शाइस्ता खाँ के श वर पर छत्रप त शवाजी का केवल कुछ सै नक के साथ रा त्र-
आक्रमण ठ क यही तक है।

कहाँ लगभग कब कस भौगो लक लाभ का उपयोग

भारत — मराठे 17वी ं–18वी ं शताब्दी स ह्यािद (पिश्चमी घाट) — खड़ी पहािड़याँ, वनाच्छािदत ढलाने,ं सँक रे घाट-माग और
सै क ड़ों पहाड़ी दुग िजनमें लौटकर आ श्रय िलया जा सके

स्पेन 1808–1814, पवतीय, शुष्क भूभाग और खराब सड़कें — फ ांस ीसी रसद -दल कु छ ही िनिश्चत माग ं
नेपोिलयन के िवरुद्ध से चल सकते थे

वयतनाम 20वी ं शताब्दी का मध्य घने उ ष्णकिटबंध ीय वन, नदी-डेल्टा और सुर ंग ों का जाल ; भारी वष िजससे वाहन और
िवमान सीिमत हो जाते थे

क्यूबा 1956–1959 िसएरा मायेस्त्र ा के पवत, जो मुख्य सड़कों और नगरों से दू र थे

द क्षण अ का — 1900–1902 िवशाल खुल ा घास -मैद ान और बहुत कम रे ल -माग ; छोटे घुड़सवार दल दू र तक जाकर
बोअर दस्ते स्थानीय संस ाधनों पर िटक सकते थे

चीन 1930–1940 का दशक िवशाल दू िरयाँ और ग ामीण भीतरी भाग , जहाँ से ना गाँवों में िबखर सकती थी

समान प्र तरूप। अं तम स्तंभ प ढ़ए — वही तीन भौगो लक स्थ तयाँ बार-बार आती ह:

वषम भूभाग — पवत, वन, दलदल या मरुस्थल — जसे बड़ी टु कड़ी शीघ्रता से पार नह कर सकती।
कम माग, जससे बड़ी सेना का माग पूवानुमेय हो जाता है और उसक रसद काट जा सकती है।
स्थानीय ान और स्थानीय समथन — रक्षक हर पगडंडी, झरने और गुफा को जानते ह, आक्रमणकारी नह । यही अध्याय क
प रभाषा वाला ‘भूभाग का गहन ान’ है, और यह ऐसी वस्तु है जसे शत्रु खरीद नह सकता।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

समूह-चचा के लए: यह पू छए क क्या गु रल्ला युद्ध अकेले कभी पयाप्त होता है। मराठ के प्रसंग म नह था —
अध्याय स्पष्ट कहता है क छापामार आक्रमण के साथ दुग भी थे, जो इन छोटे दल को आश्रय और रक्षा का
ठकाना दे ते थे। इस वचार को ता लका के कसी एक अन्य उदाहरण पर भी पर खए।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 69
छत्रप त शवाजी के प ात मराठा

आइए पता लगाएँ

प्र.1 छत्रप त शवाजी के जीवन क कसी एक घटना का चयन क जए और अपने सहपा ठय के साथ मलकर नाटक
के रूप म उसका मंचन क जए।

ऐसी घटना चु नए जसम कोई नणय हो, केवल क्रया नह — रंगमंच पर वही दृश्य चलता है जसम पात्र को कुछ चुनना पड़े। इस
अध्याय म चार ऐसी घटनाएँ ह — प्रतापगढ़ क तलहट म अफज़ल खाँ से भट (1659), शाइस्ता खाँ के श वर पर रा त्र-आक्रमण,
आगरा से मु क्त (1666), और रायगढ़ का राज्या भषेक (1674)।
अ े मंचन के लए क्या आवश्यक है

अध्याय ारा दए गए तथ्य म शुद्धता — त थयाँ, नाम, स्थान। केवल संवाद आपक कल्पना ह ।
एक स्पष्ट मोड़, जसे दशक अनुभव कर सक।
कम साम ी। एक टोकरी, एक शाल और दो कु सयाँ पयाप्त ह; शेष दशक स्वयं कल्पना कर लगे।
अं तम पं क्त म यह बताइए क घटना का महत्व क्या था, जससे कक्षा को केवल कहानी नह , इ तहास मले।

नमूना उत्तर : ‘आगरा क टोक रयाँ’ — चार दृश्य का नाटक

दृश्य स्थान क्या होता है मुख्य संवाद

1 आगरा का जय सह के आग्रह पर आए शवाजी को औरंगजेब और उस िशवाजी : ‘िनमंत्र ण राजा को िमला था।
मुग ल दरबार मुगल वजीर के सामने खड़ा कया जाता है जसे वे पहले खड़ा से वक को िकया जा रहा है। ’
परा जत कर चुके थे।

2 दरबार के क्रो धत होकर वे दरबार से बाहर नकल जाते ह। औरंगजेब उन्ह औरंग जेब : ‘स्वािभमान रहने दो। स्वतंत्र ता
बाहर नजरबंद करने का आदे श दे ता है। नही ं रहेग ी। ’

3 नजरबंद ी का शवाजी संत-महात्माओं और मुगल सरदार को फल- मष्ठान्न क पहरे द ार : ‘िफर फल। जाने दो। ’
भवन बड़ी टोक रयाँ भेजने लगते ह। पहरेदार पहली टोक रयाँ खोलते
ह, फर दसव , फर जाँचना ही छोड़ दे ते ह।

4 संध् या, भवन दो बड़ी टोक रयाँ बाहर जाती ह। उनम शवाजी और उनके पुत्र सूत्र धार : ‘औरंग जेब उ न्हे ं िफर कभी पकड़
का ार संभाजी ह। सूत्रधार नाटक समाप्त करता है। न सका। आठ वष बाद रायगढ़ में उनका
राज्यािभषेक हुआ । ’

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यही घटना क्य चुन: यह बल का नह , बु द्ध का प्रसंग है। शवाजी ने द वार नह तोड़ी — उन्ह ने पहरेदार क
दनचया का अध्ययन कया, कई दन तक नरथक जाँच दोहराकर जाँच को व्यथ बना दया, औरem
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co यह वही सोच है जो गु रल्ला युद्ध क है — शत्रु क द वार पर नह , उसक
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संकेत: कसी एक सहपाठ को ‘तथ्य-परीक्षक’ का काय द जए। मंचन से पहले वह पृष्ठ 66–67 पढ़कर पु ष्ट करे

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क आपक पटकथा का हर तथ्य सही है — क संभाजी भी साथ थे, क जय सह के प्रयास से वे आगरा गए थे,
और क वष 1666 था।
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आइए वचार कर — पृष्ठ 72
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मराठा प्रशासन —

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आइए वचार

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प्र.1 छत्रप त शवाजी के पत्र के आधार पर आप एक शासक के रूप म उनके मूल्य के बारे म क्या कह सकते ह?

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यह पत्र ऐसे शासक को दखाता है जो मानता था क राज्य क आवश्यकता साधारण जनता पर बल प्रयोग का अ धकार नह दे ती।

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नौसेना — उनक अपनी सबसे प्रय प रयोजना — के लए भी लकड़ी अनुम त लेकर ही ली जानी थी, और कुछ वृक्ष को तो छू ना ही
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मना था।

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पत्र क पं क्त उसके पीछे का मूल्य

‘आवश्यकता हो तो जंग ल से पेड़ काटने की अनुम ित ले लो और आगे शिक्त से नही,ं िविध से शासन। राज्य की उिचत आवश्यकता को भी
बढ़ ो।’ सहमित से होकर जाना है — अिधकारी का पद अपने आप उस ले ने को
न्यायसंगत नही ं बनाता।

‘आम और कटहल जैसे अन्य वृक्ष भी उपयोगी है,ं िकं तु उन्हे ं मत संयम। ‘उपयोगी’ और ‘उपल ब्ध ’ एक बात नही ं है। वे एक ऐसी रे खा
छु ओ ।’ खी ंचते है ं िजसे सुिवधा के िलए भी पार नही ं िकया जा सकता।

‘ऐसे पेड़ों को बढ़ ने में कई वष लगते है ं और लोग उनकी दे खभाल संवेद नशीलता और अपूर णीय के पित समझ। आम का पेड़ लकड़ी का
अपने बच्चों की तरह करते है।
ं यिद तुम उन्हे ं काट दोगे, तो क्या टुक ड़ा नही,ं एक पिरवार के दशकों का श्रम है। इसकी क्षितपूित संभव
उनका दुःख कभी समाप्त होगा?’ नही ं।

‘अगर तुम दू स रों पर अत्याचार करके कु छ पाप्त करते हो, तो वह यह के वल नैितक नही,ं राजनैितक िस द्धांत है। वे तक दे ते है ं िक
अत्याचारी के साथ-साथ शीघ ही नष्ट हो जाता है। ’ अत्याचार पर िटकी उपलिब्ध अिस्थर होती है — अथ त न्याय अच्छी
राजनीित भी है।

‘ऐसे वृक्षों के अभाव में हािन भी होती है। ’ संस ाधनों के पित दू र दृ िष्ट। फलदार वृक्षों से रिहत दे श स्वयं दिरद हो
जाता है — िजसे आज हम पय वरणीय क्षित कहते है।
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‘इसिलए िकसी भी पिरिस्थित में बल का पयोग मत करो।’ कोई अपवाद नही ं। आदे श िनरपेक्ष है, और इसीिलए लागू करने योग्य है
— कोई अिधकारी यह नही ं कह सकता िक उसका पसंग िवशेष था।

यह केवल एक भला भाव क्य नह है: ध्यान द जए क शवाजी केवल आदे श नह दे ते, कारण भी बताते ह —
वृक्ष को लगने वाले वष, प रवार का लगाव, अत्याचार से मली वस्तु क अ स्थरता। जो शासक अपने आदे श का
कारण समझाता है, वह अपने अ धका रय म ववेक तैयार कर रहा होता है, ता क वे उन प र स्थ तय म भी ठ क
व्यवहार कर जनक कल्पना पत्र म नह थी। यह वही प्रवृ त्त है जो कोष से वेतन दे ने और अ धका रय का
स्थानांतरण करने म दखती है — ऐसी व्यवस्था बनाइए जो राजा के न दे खने पर भी ठ क चले।

यही मूल्य अध्याय म अन्यत्र भी दखते ह, इसी लए हम जानते ह क यह पत्र कोई अकेला सुंदर वाक्य नह था:

सूरत म उन्ह ने लगभग एक करोड़ रुपये का खजाना लया, कतु धा मक स्थल पर आक्रमण न करने का ध्यान रखा और
दानवीर मोहनदास पारेख के घर को सुर क्षत रखा।
उन्ह ने युद्ध म शहीद सै नक क वधवाओं को पशन द और उनके पुत्र को सैन्य पद दए।
द क्षण म उन्ह ने डच व्यापा रय के दास व्यापार को नषेध कया, जब क उस समय कोई भी भारतीय श क्त इसका वरोध
नह कर रही थी।
उन्ह ने वंशानुगत पद और भू म आवंटन समाप्त कर दए, ता क अ धकारी अपनी प्रजा पर नजी सत्ता न बना सक।

क्या आप जानते ह? ‘घास का एक तनका भी बलपूवक न छ न’ केवल अलंकार नह है — घास ही चारा थी, और
सेना के घोड़ को प्र त दन चा हए थी। घुड़सवार सेना पर टके राज्य म अ धका रय को चारा छ नने से रोकना एक
वास्त वक और महँगा प्र तबंध था।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 79

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

तंजावुर

आइए पता लगाएँ

प्र.1 क्या आपने ‘भरतनाट्यम’ नृत्यशैली के वषय म सुना है? क्या आप जानते ह क इस नृत्यशैली का मराठाओं से
गहरा संबंध है? क्या आप यह ात कर सकते ह क यह संबंध क्या था?

संबंध का नाम है तंजावुर। अध्याय यह सीधे कहता है — तंजावुर के मराठा शासक सरफोजी तीय के काल म ही ‘आधु नक
कनाटक संगीत का वकास हुआ तथा प्र सद्ध शास्त्रीय नृत्यशैली भरतनाट्यम के प्रारं भक चरण वक सत हुए’। अथात आज क
नृत्यशैली ने अपना रूप एक ऐसे दरबार म पाया जो त मल क्षेत्र म मराठ ारा शा सत था।
यह संबंध बना कैसे

1. छत्रप त शवाजी के सौतेले भाई एकोजी ने 17व शताब्द के अंत म तंजावुर पर वजय प्राप्त क , जससे इस क्षेत्र म मराठा
शासन आरंभ हुआ।
2. तंजावुर के मराठे कला के महान संरक्षक थे — कई शासक स्वयं क व और नाटककार थे, और सरफोजी तीय ने दे वद्र
कुरवंजी नामक मराठ नाटक लखा।
3. सरफोजी तीय ने अनेक प्र तभाशाली संगीतकार को संरक्षण दया। इसी संरक्षण म दरबारी संगीतकार और नृत्याचाय ने
त मल क्षेत्र क मं दर-नृत्य परंपरा को एक क्रमबद्ध प्रस्तु त म ढाला।
4. वही क्रम — जस क्रम म आज भी भरतनाट्यम क प्रस्तु त बढ़ती है — आधु नक भरतनाट्यम का सीधा पूवज है।

खोज करने पर आपको यह मलेगा। चन्नैया, पोन्नैया, शवानंदम और व डवेलु — ये चार भाई, जन्ह तंजावुर चतुष्टय
(Thanjavur Quartet) कहा जाता है, 19व शताब्द के आरंभ म सरफोजी तीय के दरबार म थे। नृत्य क प्रस्तु त को
अला रप्पु, ज तस्वरम्, शब्दम्, वणम्, पदम् और तल्लाना के क्रम म व्यव स्थत करने का श्रेय उन्ह को दया जाता है — यही क्रम
आज भी चलता है। उस समय इस नृत्य को स दर जैसे अन्य नाम से जाना जाता था; ‘भरतनाट्यम’ नाम 20व शताब्द म सामान्य
प्रचलन म आया, जब यह मं दर और दरबार से सावज नक मंच पर आया।

मराठ दरबार ने त मल कला को रूप कैसे दया: इसका कारण अध्याय इसी बॉक्स के आगे बताता है — तंजावुर
का सांस्कृ तक प रवेश बहुभाषी था, जहाँ ‘स्थानीय त मल संस्कृ त, पूव शासक क तेलुगु संस्कृ त और वतमान
शासक क मराठ संस्कृ त का परस्पर स्वतंत्र रूप से मेल-जोल हुआ’। मराठ ने त मल कलाओं का स्थान नह
लया; उन्ह ने उन्ह धन, व्यवस्था और संरक्षण दया। अध्याय क ‘समृद्ध और नवीनता से प रपूण समन्वयकारी
संस्कृ त’ का यही अथ है।

क्या आप जानते ह? सरफोजी तीय क रु च नृत्य तक सी मत नह थी। उन्ह ने धन्वंत र महल स्था पत कया,
जहाँ भारतीय और पाश्चात्य दोन पद्ध तय से नःशुल्क उपचार होता था; उन्ह ने भारत म कसी स्थानीय शासक
ारा स्था पत पहला मुद्रणालय आरंभ कया; और बृहदे श्वर मं दर क द वार पर भ सले प रवार का इ तहास
उत्क ण कराया, जो भारत के सबसे बड़े एकल शलालेख म से एक है।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 81

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अध्याय के अंत का अभ्यास

प्र.1 व ेषण कर क कस प्रकार भूगोल ( वशेषकर पवत और समुद्र तट) ने मराठा सैन्य रणनी त और राज्य- नमाण
को नधा रत कया।

भूगोल ने मराठ क केवल सहायता नह क — उसने उनक रणनी त स्वयं तय कर द । सह्या द्र क पहा ड़य ने दुग और गु रल्ला
युद्ध को सबसे सस्ता वकल्प बना दया; क कण के तट ने नौसेना को अ नवाय बना दया; और उसके आगे फैले खुले दक्कन पठार
ने तीव्र घुड़सवार सेना को पूरे भारत तक श क्त पहुँचाने का साधन बना दया।

तटीय दुग — िसंधदु गु , िवजयदुग — बंदरगाहों और बेड़े की रक्षा
बंदरगाह — दाभोल, राजापरु , मालवन, वेंगल
ु — मस्कट, मोचा, मलक्का तक व्यापार

सह्यािद के पहाड़ ी दुग — रायगढ़ , पतापगढ़ — घाट-माग ं पर िनयंत्रण
दक्कन पठार — खुला भूभाग, जहाँ हल्की घुड़सवार सेना दूर तक तेज चल सके

अरब सागर

कोंकण तट सह्यािद दक्कन पठार

मराठा भू म का प श्चम से पूव काट- चत्र। भूभाग के प्रत्येक प े ने राज्य का एक अलग अंग बनाया — तट पर जलदुग और बंदरगाह, ढलान
पर पहाड़ी दुग, पठार पर घुड़सवार सेना। स्थान-नाम चत्र 3.9 के मान चत्र से लए गए ह।

1. पवत ने गु रल्ला युद्ध सस्ता और घेराबंद महँगी बना द । अध्याय कहता है क शवाजी ने ‘गु रल्ला युद्ध क रणनी त
अपनाई’, जसम छोटे दल भूभाग के गहन ान से तीव्र ग त से आक स्मक आक्रमण करते ह। यह प रभाषा केवल वषम भूभाग म
च रताथ होती है। सह्या द्र म सेना को सँकरे घाट-माग से चलना पड़ता है; एक छोटा स्थानीय दल उसके अग्र या पश्च भाग पर प्रहार
कर पहाड़ी पर लुप्त हो सकता है। प्रतापगढ़ क तलहट के घने जंगल म ‘पहाड़ म छपे मराठ ’ ने अफज़ल खाँ क सेना को इसी
प्रकार परास्त कया।
2. पवत ने दुग को राज्य का स्वाभा वक रूप बना दया। जस पहाड़ी तक चढ़ाई का एक ही खड़ा माग हो, उसे कुछ सौ सै नक
हजार के वरुद्ध रोक सकते ह। इसी लए शवाजी ने 16 वष क आयु म ‘उपे क्षत और नजन दुग पर कब्जा करके उनक सुरक्षा
को सुदृढ़’ कया, और दुग ‘मराठा श क्त के मुख्य आधार’ बने। इसी कारण रामचंद्रपंत अमात्य लख सके क यह राज्य ‘केवल दुग
से ही बनाया गया था’।
3. समुद्र तट ने नौसेना को अ नवाय बनाया। जब राज्य प श्चमी तट तक पहुँचा तो तट य संसाधन तक पहुँच आवश्यक हो गई —
और जस तट क रक्षा न हो, वहाँ शत्रु उतर सकता है। इस लए 1657 म मराठा नौसेना बनी और सधुदुग ( चत्र 3.6) जैसे नौसै नक
दुग बने। यह असाधारण था — बीजापुर के पास व्यापारी जहाज तो थे पर स्थायी नौसेना नह , और मुगल म नौसेना का उपयोग
अत्यंत सी मत था।

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4. तट ने यह भी तय कया क शत्रु कौन होगा। मराठ के पास बंदरगाह थे — मान चत्र म दाभोल, राजापुर, मालवन और वगुला,
तथा मस्कट, मोचा और मलक्का के माग — इस लए उनका सीधा टकराव यूरोपीय सामु द्रक श क्त से हुआ, जो काताज व्यापार-
पत्र पर टक थी। मराठा पोत तकनीक रूप से पीछे थे, फर भी कान्होजी आंग्रे ने ‘कुशल भूगोल- ान और युद्धनी त’ से वजय
पाई। भूगोल ने तकनीक क कमी पूरी कर द ।
5. पठार ने वस्तार का रूप तय कया। घाट के पार भू म खुल जाती है। खुला भूभाग उन घुड़सवार के अनुकूल है जो तेज चल
और माग म ही नवाह कर — चौथ और सरदे शमुखी उन प्रांत से इसी ग तशीलता के बल पर वसूली जा सकती थी जहाँ मराठ क
स्थायी सेना नह थी। यही ग तशीलता 18व शताब्द म उन्ह दल्ली, लाहौर, अटक और पेशावर तक ले गई।
6. दूरी स्वयं एक अस्त्र बनी। 1677 के द क्षण- द ग्वजय से उत्तरी त मलनाडु और कनाटक के भाग जुड़े, जसने अध्याय के
अनुसार ‘मराठ को मुगल आक्रमण के वरुद्ध रणनी तक रूप से उल्लेखनीय साम रक सुदृढ़ता प्रदान क ’। औरंगजेब ने रायगढ़ ले
लया, तो राजाराम ने युद्ध दूर द क्षण के जजी से चलाया। जस राज्य के पास गहराई हो, वह राजधानी छन जाने से समाप्त नह
होता।

यहाँ भूगोल इतना नणायक क्य था: सै नक और धन म मराठे सदा छोट श क्त थे। भूभाग ही वह एकमात्र लाभ
है जसे खरीदा नह जा सकता — मुगल अ धक सै नक और बेहतर तोप जुटा सकते थे, पर सह्या द्र क कसी घाट
या क कण क कसी खाड़ी का प रचय नह खरीद सकते थे। मूलतः मराठा रणनी त यही नणय थी क युद्ध केवल
वह लड़ा जाए जहाँ यह लाभ काम करता हो।

प्र.2 कल्पना क जए क आप व ा थय के लए कसी मराठा नेता क सं क्षप्त जीवनी लख रहे ह। कसी एक
व्य क्तत्व (कान्होजी आं े, बाजीराव प्रथम, महादजी शदे , अ हल्याबाई होलकर या ताराबाई) का चयन क जए
और उनक प्रेरणादायक वशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए तीन-चार अनु े द ल खए। कसी एक चुनौती का
वणन क जए जस पर उन्ह ने वजय प्राप्त क ।

अ सं क्षप्त जीवनी म क्या चा हए: आरंभ व्य क्त से क जए, काल से नह ; चुनौती को शीघ्र सामने लाइए, क्य क वही जीवन
को कथा बनाती है; अध्याय से लए गए सट क वष और स्थान-नाम द जए; और अंत म बताइए क आज उनका क्या शेष है। वाक्य
छोटे र खए।

य द आप चुन… वह चुनौती जस पर जीवनी टकेगी

ताराबाई पित राजाराम का िनधन, द क्कन में औरंग जेब और मुग ल से ना, और राज्य अिस्तत्व के िलए लड़ रहा है — िफर भी वे
र क्षात्मक नही,ं आ क्रामक होती है ं

कान्होजी आं े मराठा पोत यूर ोपीय पोतों से तकनीकी रूप से पीछे है,ं िफर भी उ न्हे ं समुद पर यूर ोपीय एकािधकार तोड़ना है

बाजीराव प्रथम अभी-अभी अिस्तत्व की लड़ाई लड़कर िनकले एक द क्कनी राज्य को अिखल भारतीय शिक्त में बदलना

महादजी शदे 1761 की पानीपत की महािवनाशकारी पराजय के बाद उ त्त र में मराठा शिक्त को िफर खड़ा करना — वह भी यूर ोपीय
पिशिक्षत से नाओं के सामने

अ हल्याबाई पित और पुत्र दोनों को खोकर भी तीस वष तक राज्य चलाना
होलकर

नमूना उत्तर : अ हल्याबाई होलकर

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय
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अ हल्याबाई होलकर, होलकर राजवंश क उत्तरा धका रणी थ — यह वंश उत्तर भारत म मराठा वस्तार म महत्वपूण भू मका
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नभाने वाले प्रमुख कुल म से एक था। 18व शताब्द म होलकर ने मध्य भारत म, वतमान इंदौर के आस-पास एक वशाल क्षेत्र पर

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शासन कया। कतु अ हल्याबाई शासन के लए जन्मी नह थ । सत्ता उन तक सबसे क ठन माग से आई — पहले उन्ह ने अपने प त

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को खोया, फर अपने
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ag और अध्याय उन वष का मूल्यांकन बहुत सट क शब्द म करता है — उन्ह ने ‘प्रजा का ध्यान रखते हुए बु द्धमानी से प्रशासन
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चलाया’। यह संयोग जतना सरल सुनाई दे ता है, उतना है नह । शासक कुशल पर कठोर हो सकता है, या दयालु पर दुबल; तीन
दशक तक एक बड़े राज्य को अ
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े ढं ग से चलाने का अथ है — इनम से कोई भी न होना।
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agजीण द्धार कराया — उत्तर म केदारनाथ से लेकर द क्षण म रामेश्वरम तक। इनम
उनक दूसरी उपल यह थी क उन्ह ने अपने कोष से भारत के तीथ-प रदृश्य का पुन नमाण कया। उन्ह ने पूरे दे श म सैकड़
मं दर , घाट , कुओं तथा माग का नमाण और
दो प्र सद्ध क्ष तय क पू त भी थी — उन्ह ने वाराणसी म काशी वश्वनाथ मं दर का पुन नमाण कराया, जसे औरंगजेब ने नष्ट कया

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था, और गुजरात म सोमनाथ मं दर का, जसे महमूद गज़नी ने ध्वस्त कया था। ध्यान द जए क तीथमाग पर बना एक कुआँ या
माग वस्तुतः क्या है — वह लोकोपयोगी नमाण है, जो सबसे नधन यात्री के काम आता है, न क शासकem
m a s का स्मारक।
o को आज भी छु आ जा सकता है। अ हल्याबाई को मध्य प्रदेश म महेश्वaर gकेlबुनाई उ ोग को बढ़ावा देने और
उनक तीसरी.cउपल
emहथकरघा शल्प को पुनज वत करने का श्रेय दया जाता है, जो आज भी फल-फूल रहा है — महेश्वरी सा ड़याँ वह बुनी
पारंपsरक
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l ह। वे इसी लए प्रेरणादायक ह : सबसे गहरे नजी दुःख के बाद उन्ह ने तीस वष ऐसी वस्तुएँ बनाने म लगाए जो उनके बाद भी
agजाती
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टक — और वे टक ह।

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emकसी एक तथ्य को चत्र म बदल द जए। ‘केदारनाथ से रामेश्वरम agl
लेखन के लए संकेत: छोटे व ा थय के लए
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तक’ तब तक अथहीन है जब तक आपglयह न जोड़ क यह लगभग पूरे भारत क लंबाई है, और 18व शताब्द म
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तीथयात्री यह दूरी पैदल तय करता था।

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प्र.3 .cय द आपको आज कसी एक मराठा दुग (जैसे — रायगढ़, सधुदुग, जजी
a gया प्रतापगढ़) को दे खने का अवसर
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e मले तो आप कसे चुनगे और क्य ? उसके इ तहास, वास्तुकला और साम रक महत्व का अध्ययन क जए। कक्षा
ag las म अपने नष्कष को ड जटल या पोस्टर रूप म प्रस्तुत क जए।

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पहले व ध। आप कोई भी दुग चुन, अध्ययन को प्रश्न म दए गए तीन शीषक म बाँ टए, और एक चौथा शीषक जो ड़ए जो प्रस्तु त
को आपक अपनी बनाता है:

1. इ तहास — कसने बनाया या जीता, और इस अध्याय क कौन-सी घटनाएँ वहाँ घट ।
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2. वास्तुकला — प्रवेश ार, प्राचीर, जल-संग्रह, और भवन स्थल के अनुसार कैसे बने ह।

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4.. एक प्रश्न जसका उत्तर अब भी नह मला — ईमानदार खुला प्रश्न सबसे अ a अं तम स्लाइड है।
3. साम रक महत्व — दुग कस पर नयंत्रण रखता है : कोई घाट, बंदरगाह, माग या राजधानी।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

दुग प्रकार ( चत्र 3.9) दे खने योग्य क्य

रायगढ़ पहाड़ी दुग राजधानी — 1674 में यही ं राज्यािभषेक हुआ और 1680 में यही ं िनधन; संभाजी के बाद औरंग जेब ने
इसे जीत िलया

सधुदुग तटीय दुग महारा -गोवा सीमा के पास समुद में एक च ान पर बना — मराठों के कई नौसै िनक दुग ं में से एक
(िचत्र 3.6)

प्रतापगढ़ पहाड़ी दुग इसी की तलहटी में, घने जंग लों के बीच, अफज़ल खाँ से भेट
ं हईु थी

जजी दू र दिक्षण का पहाड़ी रायगढ़ के पतन के बाद राजाराम यही ं आए और मुग ल -मराठा संघ ष दिक्षण भारत तक फै ला
दुग

नमूना उत्तर : म रायगढ़ चुनूँगा/चुनूँगी।
इ तहास। मराठा सा ाज्य का औपचा रक आरंभ रायगढ़ म ही हुआ। अध्याय का पहला चत्र ( चत्र 3.1) उसी महल का भव्य प्रवेश
ार दखाता है जहाँ 1674 म छत्रप त शवाजी महाराज का राज्या भषेक हुआ — पूण वै दक व ध- वधान से। इसके बाद उनक
उपा ध ‘श्री राजा शव छत्रप त’ हुई और उन्ह ने अपनी नई संवत् प्रणाली ‘राज्या भषेक शक’ आरंभ क । 1680 म पचास वष क
आयु म यह उनका नधन हुआ। संभाजी को बंद बनाकर मार डालने के बाद औरंगजेब ने रायगढ़ पर भी अ धकार कर लया।
वास्तुकला। रायगढ़ समुद्र तल से लगभग 800 मीटर ऊँचा एक कलेबंद पवतीय पठार है, जहाँ पहुँचने का मुख्य माग एक ही खड़ी
चढ़ाई है (आज रोपवे भी है)। यहाँ जो शेष है, वह दखाता है क दुग केवल द वार नह , एक कायरत राजधानी के रूप म बनाया गया
था — वशाल महा ार, जसका मुख ऐसा है क आक्रमणकारी को सीधे नह , बगल से आना पड़े; दुकान के चबूतर वाली सीधी
बाजारपेठ; जगद श्वर मं दर; च ान काटकर बनाए गए जल-कुंड, क्य क पहाड़ी दुग का जीवन उसके सं चत जल पर टका होता है;
और टकमक टोक, वह कगार जहाँ से पूरा चढ़ाई-माग दे खा जा सकता है।
साम रक महत्व। रायगढ़ क कण के पीछे सह्या द्र म स्थत है, इस लए वह तट और पठार के बीच के माग पर नयंत्रण रखता है और
स्वयं अत्यंत दुगम है। खुले मैदान के कसी नगर के स्थान पर इसे राजधानी इसी लए चुना गया — शासन का कद्र स्वयं एक दुग था।
यह रामचंद्रपंत अमात्य क पं क्त ‘दुग राज्य का आधार ह’ का मूत रूप है।
मेरा खुला प्रश्न : य द रायगढ़ इतना सुदृढ़ था, तो औरंगजेब ने उसे कैसे लया? इसका उत्तर खोजने के लए रसद, वश्वासघात और
घेरे क अव ध का अध्ययन करना होगा — और इससे यह भी समझ आता है क कोई दुग अजेय नह होता, केवल महँगा होता है।

प्रस्तु त के लए: छह स्लाइड पयाप्त ह — (1) एक चत्र और एक वाक्य, (2) इ तहास, (3) रेखा चत्र स हत
वास्तुकला, (4) छोटे मान चत्र स हत साम रक महत्व, (5) आज का दुग और उसका संरक्षण, (6) आपका खुला
प्रश्न। प्रत्येक चत्र के नीचे उसका ोत अवश्य ल खए।

प्र.4 अध्याय म लखा है क अं ेज ने भारत को मुगल या कसी भी अन्य श क्त से अ धक मराठ से छ ना। आपके
वचार म इसका क्या अथ है? अध्याय म दए गए कौन-से प्रमाण इस वचार का समथन करते ह?

इसका अथ यह है क 18व शताब्द के उत्तराध तक मुगल सा ाज्य केवल नाम का सा ाज्य रह गया था और भारत के बड़े भाग पर
वास्त वक नयंत्रण मराठ के पास आ चुका था। इस लए अंग्रेज ने जब भारत पर अ धकार कया, तो जो भूभाग और जो सत्ता
उन्ह ने वास्तव म ली, वह मुख्यतः मराठा थी, मुगल नह ।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

1707 के बाद मुगल सत्ता का पतन

→ मध्य और उत्तर भारत के अिधकांश भाग तथा िदल्ली मराठों के पास

→ भारत पर शासन के िलए अंगेजों को मराठों को हराना आवश्यक
→ तीन आं ग् ल-मराठा युद्ध , 1775 – 1818

अध्याय से प्रमाण

अं ेज के प्र त ं मराठे थे, मुगल नह । ‘अठारहव शताब्द के उत्तराध म भारत म अंग्रेज के मुख्य प्र त ं मराठे ही थे।’
भूभाग सबसे अ धक उन्ह के पास था। मराठा शासन ने ‘अंग्रेज ारा उपमहा प पर अ धकार से पूव , उत्तरी और मध्य
भारत के अ धकांश भाग पर नयंत्रण कर सबसे बड़ा भारतीय सा ाज्य स्था पत कया’।
दल्ली स्वयं मराठ के पास थी। दल्ली पर मराठा नयंत्रण 1754 म आरंभ हुआ; महादजी शदे ने 1771 म उसे पुनः जीता
और वह ‘अ ग्रम तीन दशक तक मराठ के नयंत्रण म रही’, तदनंतर अंग्रेज ने अ धकार कया। अथात मुगल राजधानी भी
अंग्रेज ने मराठ से ली।
इसम तीन युद्ध और ततालीस वष लगे। आंग्ल-मराठा युद्ध 1775 से 1818 तक चले; पहला युद्ध (1775–1782) मराठ ने
जीता, और मराठा श क्त का अंत केवल तीसरे युद्ध से हुआ। कसी अन्य भारतीय श क्त के लए इतना नह करना पड़ा।
प्र तरोध का संगठन भी मराठ ने कया। नाना फड़णवीस को पहला अ खल भारतीय टश- वरोधी गठबंधन बनाने का श्रेय
है, जसम मैसूर के हैदर अली और हैदराबाद के नजाम जैसे पुराने वरोधी भी स म्म लत हुए।
वे अंततः हारे क्य , यह भी लखा है — ‘मराठ म बढ़ते आंत रक कलह और वघटन एवं अंग्रेज क उत्तम संगठनात्मक
क्षमता और तकनीक श्रेष्ठता के कारण’। ध्यान द जए, इनम से कोई कारण मुगल श क्त नह है।

इस वाक्य पर चचा क्य होती है: इ तहासकार इस पर सहमत ह क मराठे अंग्रेज क अं तम बड़ी बाधा थे, कतु
आरंभ को वे अलग-अलग तौलते ह। एक दृ ष्टकोण यह बल दे ता है क टश सत्ता क न व पहले और अन्यत्र पड़ी
— बंगाल म, जसके राजस्व से 1760 के दशक के बाद वे सेनाएँ खड़ी हुईं जो आगे चलकर मराठ से लड़ — और
यह भी क मैसूर तथा सख राज्य को भी परा जत करना पड़ा। अध्याय के कथन के पक्ष म सबसे प्रबल तक वस्तार
और अंत- बदु का है : वजय का व्यय चाहे कह से आया हो, उत्तरी और मध्य भारत क जो भू म अंततः अंग्रेज के
अधीन आई, वह मुख्यतः मराठ के हाथ से गई, और 1818 म मराठा श क्त के पतन से पहले यह वजय पूरी नह
हुई। दोन बात एक साथ सही हो सकती ह — अ ा उत्तर यही कहेगा।

प्र.5 तुलना क जए क छत्रप त शवाजी और उत्तरवत मराठ ने धा मक स्थल और व भन्न धम के लोग के साथ
कस प्रकार का व्यवहार कया। इस अध्याय म कौन-सा प्रमाण धा मक व वधता के प्र त उनके दृ ष्टकोण को
दशाता है?

छत्रप त शवाजी और उत्तरवत मराठे , दोन एक ही नी त पर चले — अपनी परंपरा क रक्षा और पुनरु ान, कतु अन्य धम को
लक्ष्य बनाए बना। अध्याय का नष्कष यही है क मराठ ने ‘ बना कसी धा मक भेदभाव के स्थानीय हदू परंपराओं को भी
पुनज वत कया’।

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प्रश्न छत्रप त शवाजी उत्तरवत मराठे

युद्ध म धा मक नही ं। सूर त में लगभग एक करोड़ रुपये का अध् याय पूजा-स्थलों पर आ क्रमण की कोई नीित दज नही ं करता;
स्थल पर खजाना ले ने पर भी उन्होंने ‘धािमक स्थलों पर वह यह अवश्य कहता है िक सरदारों के स्वायत्त होने पर ‘कभी-कभी
आक्रमण? आक्रमण न करने का ध्यान रखा’ और दानवीर अनुशासनहीनता और दुव्यवहार भी हुए जो छत्र पित िशवाजी के मूल्यों
मोहनदास पारे ख के घर को सुर िक्षत रखा से िबल्कु ल िवपरीत थे’

अपनी परंपरा ‘एक धमिनष्ठ िहंदू , जो अपने धम का पालन करते अिहल्याबाई होलकर ने काशी िवश्वनाथ और सोमनाथ मंिदरों का
हुए अन्य धम ं का भी सम्मान करते थे’; अपिवत्र पुनिनम ण कराया तथा के दारनाथ से रामेश्वरम तक सै क ड़ों मंिदर ,
िकए गए मंिदरों का पुनिनम ण; संस्कृ त-मराठी घाट, कु एँ और माग बनवाए ; नागपुर के भोंस ले के संर क्षण से पुर ी में
सािहत्य, धािमक संस्थाओं और पारंपिरक कलाओं जग न्न ाथ पूजा पुनज िवत हुई, जो मुग ल शासन में पायः बािधत रहती
को पोत्साहन थी

शासन और धम धािमक िवषय आठ िवभागों में से एक थे — तंजावुर के मराठों ने ‘सम ृद्ध और नवीनता से पिरपूण सम न्वयकारी
अष्टपधान मंडल में पंिडतराव — अथ त धम पूर ा संस्कृ ित’ को संर क्षण िदया; सरफोजी ि तीय के ध न्वंतिर महल में
शासन नही ं था भारतीय और पाश्चात्य दोनों पद्धितयों से िनःशुल्क उपचार होता था

भाषा और पचिलत फारसी मुहरों के स्थान पर संस्कृ त मुहर, ‘गणपित-पंतपधान रुपया’ पर दो िलिपयों — दे वनागरी और फारसी
प्रतीक और दे वनागरी में िसक्के — यह सांस्कृ ितक आत्म- — में ले ख उ त्कीण है;ं 18वी ं शताब्द ी में मराठों ने लोकिपय मुग ल -
पितष्ठा थी, दू स रों का दमन नही ं मुद ाशैल ी अपनाकर उसमें अपने पतीक जोड़े

धम के पार उनके शत्र ु शासक थे, समुद ाय नही ं — वे बीजापुर नाना फड़णवीस ने मैस ूर के हैद र अली और हैद राबाद के िनजाम
राजनी त और मुग लों से लड़े, और अलग से अपनी पजा को — दोनों मुिस्लम शासक और पुर ाने िवरोधी — के साथ िबिटश-
यूर ोपीय दास-व्यापािरयों से बचाया िवरोधी गठबंध न बनाया

सक्का सबसे तीखा प्रमाण क्य है: सक्का राज्य का सबसे सावज नक दस्तावेज है — वह हर व्य क्त के हाथ म
जाता है। पेशवा के अधीन सेनानायक पटवधन ने उसक एक ओर गणप त का आवाहन रखा और दूसरी ओर पेशवा
के प्र त नष्ठा, और पूरा लेख दे वनागरी तथा फारसी दोन म उत्क ण कराया। जो राज्य दूसरी परंपराओं को मटाना
चाहता हो, वह उनक ल प अपनी मुद्रा पर नह रखता।

परीक्षा म इस उत्तर के लए संकेत: प्रश्न ‘तुलना क जए’ कहता है, इस लए उत्तर म एक समानता और एक अंतर
दोन आने चा हए। समानता — रक्षा है, उत्पीड़न नह , यह नी त दोन काल म एक ही रही। अंतर — शवाजी इसे
कद्र कृत, वेतनभोगी प्रशासन के बल पर कठोरता से लागू कराते थे, जब क बाद म अध्याय स्वयं मानता है क
स्वायत्त सरदार कभी-कभी उनके स्तर तक नह पहुँचे।

प्र.6 इस अध्याय म व णत है क मराठ के लए दुग ‘राज्य क आधार शला’ थे। वे इतने महत्वपूण क्य थे? उन्ह ने
मराठ को श क्तशाली शत्रुओं के वरुद्ध खड़े रहने म कस प्रकार सहायता क ?

दुग राज्य क आधार शला इस लए थे क्य क वे एक साथ चार काम करते थे — माग पर नयंत्रण, छापामार सेना को आश्रय,
राज्य क सं चत साम ी क सुरक्षा, और शत्रु क संख्या-श्रेष्ठता को नणायक के बजाय महँगा बना दे ना।
शवाजी के वत्तमंत्री रामचंद्रपंत अमात्य ने आ ापत्र म यह तक इस प्रकार रखा :

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‘दुग राज्य का आधार है।
ं उनके अभाव में बाह्य आक्रमण के समक्ष राज्य नष्ट हो जाता है … यह राज्य स्वग य
महान गुरु ारा केवल दुग ं से ही बनाया गया था। औरंगजेब जै से पबल शत्रु ने आक्रमण करके बीजापुर और
भागनगर जै से महान सामाज्यों को जीता … िकंतु दुग ं के कारण ही [मराठा] राज्य दशकों के पचंड आघातों के बाद
भी सुरिक्षत रह सका।’

दुग इतने महत्वपूण क्य थे

1. वे आवागमन पर नयंत्रण रखते थे। अध्याय कहता है क दुग ‘साम रक दृ ष्ट से महत्वपूण माग पर नयंत्रण’ के लए
आवश्यक थे। पहाड़ी भूभाग म कुछ ही घाट-माग उपयोग योग्य होते ह; जो घाट के ऊपर के दुग का स्वामी है, वही तय करता है
क उससे कौन गुजरेगा। एक छोटा राज्य बड़े क्षेत्र से कर और व्यवस्था इसी प्रकार चलाता है।
2. उन्ह ने गु रल्ला युद्ध को संभव बनाया। दुग ‘छापामार युद्ध के दौरान सेना को सुर क्षत रखने’ के लए थे। छोटे आक्रमणकारी
दल को वश्राम, पुनः शस्त्र-स ा और घायल के लए स्थान चा हए। ठकाने के बना गु रल्ला केवल भगोड़े रह जाते ह।
3. वे राज्य क पूँजी संभालते थे। अनाज, च ान काटकर बने कुंड म जल, शस्त्र और कोष पहाड़ी पर सुर क्षत रह सकते थे। जो
राज्य अपने संसाधन शत्रु क पहुँच से बाहर रख सके, वह एक अ भयान म समाप्त नह होता।
4. उन्ह ने संख्या का ग णत उलट दया। जस पहाड़ी दुग तक चढ़ाई का एक ही खड़ा माग हो, उसे छोट सेना बहुत बड़ी सेना के
वरुद्ध रोक सकती है, क्य क आक्रमणकारी एक समय म कुछ ही सै नक प्राचीर तक ला सकता है। उधर घेरा डालने वाले को
हजार सै नक और घोड़ को वह खलाना पड़ता है। समय और भूख रक्षक के पक्ष म काम करते ह।
5. वे राजनै तक घोषणा भी थे। शवाजी ने 1674 के राज्या भषेक के लए ‘रायगढ़ के सुदृढ़ पवतीय दुग’ को चुना। राज्य क
राजधानी स्वयं एक दुग थी।
6. तट य दुग ने यही वचार समुद्र तक बढ़ाया। सधुदुग और वजयदुग ने बंदरगाह क रक्षा क और मराठा बेड़े को सुर क्षत
ठकाने दए ( चत्र 3.6, चत्र 3.9)।

इससे वे श क्तशाली शत्रुओं के सामने कैसे टके — प्रमाण है 1682–1707। औरंगजेब पूरी मुगल सेना लेकर दक्कन आया।
उसने दोन बड़ी सल्तनत — बीजापुर और गोलकुंडा — जीत ल । संभाजी को बंद बनाकर मार डाला और राजधानी रायगढ़ भी ले
ली। उस युग के सामान्य नयम से मराठा राज्य वह समाप्त हो जाना चा हए था। कतु हुआ यह :

राजाराम दूर द क्षण के जजी चले गए और युद्ध भी वह चला गया — राज्य कसी एक स्थान से बँधा नह था।
मराठ ने ‘अपने दुग क दृढ़ता से रक्षा क और अनेक युद्ध और संघष म प्रायः मुगल पर भारी पड़े’।
प्रत्येक दुग को अलग-अलग घेरना पड़ता था, इस लए औरंगजेब ‘दक्कन से नकलने म असमथ रहा और मराठ को परास्त कए
बना ही मर गया’।

यह अध्याय का सबसे गहरा बदु क्य है: जो राज्य एक राजधानी पर टका हो, उसे वह नगर जीतकर समाप्त
कया जा सकता है। जो राज्य सैकड़ दुग पर टका हो, उसे दुग-दर-दुग जीतना पड़ता है — और इसम व्यय बढ़ता
जाता है जब क प्रा प्त छोट रहती है। औरंगजेब ने इस प्रयास म पचीस वष और अपना जीवन लगा दया। मराठ ने
मुगल सा ाज्य को अ धक बल से नह हराया; उन्ह ने अपने ऊपर वजय को उसके मूल्य से अ धक महँगा बना दया।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय
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mव्याख्या क जए।
आपको मराठा सक्क का मुख्य अ भकल्पक ( डजाइनर) नयुक्त कया गया है। एक ऐसे सक्के का रूपांकन
य और मूल्य का प्र त न धत्व करे। अपने ारा चुने गए प्रतीक eक
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क जए, जो मराठा उपल

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पहले दे खए क वास्त वक मराठा सक्के क्या करते थे, क्य क अध्याय दो उदाहरण दे ता है और दोन म एक स्पष्ट वचार है :

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छत्रप त शवाजी के सक्के ( चत्र 3.12) सोने और ताँबे के थे, उनके अपने नाम से ढाले गए — जो उनक संप्रभुता दशाते थे

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— और उन पर दे वनागरी ल प थी, जसे अध्याय ‘उनक सांस्कृ तक पहचान का प्रतीक’ कहता है, जब क उस समय मुद्रा क
सामान्य भाषा फारसी थी।
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‘गणप त-पंतप्रधान रुपया’ ( चत्र 3.14) 19व शताब्द के आरंभ म पटवधन ने ढाला। उसम लोक प्रय मुगल-मुद्राशैली रखी

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गई पर मराठा प्रतीक जोड़े गए — एक ओर गणप त का आवाहन, दूसरी ओर पेशवा के प्र त नष्ठा, और लेख दे वनागरी तथा
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फारसी दोन ल पय म।

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c तक दस्तावेज क्य है: यह राज्य क वह एकमात्र वस्तु है जसे हर aव्यgक्त छू ता है। उस पर कसका
सक्का.राजनै
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se है, यह बताता है क संप्रभु कौन है; कस ल प म है, यह बताता है क सावज नक भाषा कसक है; और उस
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नाम
पर क्या अं कत है, यह बताता है क राज्य क्या याद रखवाना चाहता है। इस लए अ ा रूपांकन सजावट नह होता

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— उसका हर तत्व एक ऐसा दावा होता है जसे आप सद्ध कर सक।

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श्री राजा िशव m .
स्वराज्य
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रायगढ़ · 1674 मराठा नौसेना

अग भाग — दुग और स्वराज्य
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पष्ृ ठ भाग — नौसेना और संपभु का नाम

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प्रस्ता वत रूपांकन। दोन ओर दे वनागरी का प्रयोग है, जैसा छत्रप त शवाजी के अपने सक्क म था।

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agl नमूना उत्तर : प्रतीक और उनके चुने जाने का कारण
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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

प्रतीक कहाँ क्या दावा करता है, और प्रमाण

‘स्वराज्य’ शब्द अग भाग में राज्य का मूल िवचार। िशवाजी की ‘एक स्वतंत्र राज्य या स्वराज्य की क ल्पना’ आगामी वष ं में
ऊपर राजनैितक , आिथक और सास्
ं कृ ितक पक्षों तक िवस्तत
ृ हईु , और अध् याय के अनुस ार आगे चलकर
इसी ने भारतीयों को स्वयं शासन करने का िवश्वास िदया

पहाड़ी दुग अग भाग के ‘दुग राज्य का आधार है’ं — आ ापत्र । मराठा शिक्त को इससे सटीक कोई पतीक नही ं दश ता
मध्य में

रायगढ़ · 1674 दुग के नीचे रायगढ़ का राज्यािभषेक , िजससे मराठा साम ाज्य का औपचािरक आरंभ हुआ और ‘राज्यािभषेक शक ’
चला

पाल खोले हुए पोत पष्ृ ठ भाग के 1657 में स्थािपत नौसे ना — जो कदम िकसी पड़ोसी शिक्त ने नही ं उठाया था — और आगे चलकर
मध्य में कान्होजी आंग े की यूर ोपीय बेड़ों पर िवजय

‘श्री राजा शव पष्ृ ठ भाग में राज्यािभषेक के बाद उनकी ठीक यही औपचािरक उपािध थी। िस क्के पर शासक का अपना नाम ही
छत्रप त’ ऊपर संपभुता की घोषणा है, इसीिलए उ न्होंने अपने नाम से िस क्के ढलवाए

पूरे सक्के पर दोनों ओर उनके वास्तिवक िस क्कों की भाँित, जहाँ दे वनागरी का पयोग ‘उनकी सांस्कृ ितक पहचान का पतीक ’
दे वनागरी था। राज्य-व्यवहार -कोष भी यही भाषा-नीित िदखाता है

सादा, िसक्के का यह चुनाव वृक्षों वाले पत्र से आता है : जो राज्य अपने अिधकािरयों को घास का ितनका तक बलपूवक
अलंकरणर हत िकनारा न ले ने का आदे श दे ता हो, उसे अपनी मुद ा पर आ त्मपशंस ा नही ं करनी चािहए
कनारा

यह भी क जए: कसी बाद के मराठा शासक के लए दूसरा सक्का बनाइए और दे खए क उसम क्या बदलना
पड़ेगा — पेशवा-काल के सक्के पर पेशवा का अ धकार भी अं कत करना होगा, जैसा वास्त वक ‘गणप त-पंतप्रधान
रुपये’ म हुआ, क्य क तब तक सत्ता छत्रप त से खसककर प्रधानमंत्री के पास जा चुक थी।

प्र.8 मराठा काल क इस भू मका अध्ययन करने के प ात आपके वचार म भारतीय इ तहास म उनका सबसे
महत्वपूण योगदान क्या था? अध्याय से उदाहरण लेकर अपने वचार का समथन करते हुए एक अनु े द ल खए।
अपने वचार को सहपा ठय के साथ साझा कर उन पर चचा क जए।

इस अध्याय से तीन उत्तर सद्ध कए जा सकते ह, और चुनाव से पहले तीन को जान लेना चा हए।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

संभा वत उत्तर सबसे अ ा प्रमाण उसक दुबलता

सा ाज्य स्वयं अंग ेजों से पूव का सबसे बड़ा भारतीय सामाज्य; 1754/1771 से वह समाप्त हो गया — 1818 में। जो
िदल्ली; उसे समाप्त करने में तीन युद्ध साम ाज्य िगर जाए , वह उस िवचार से कम
शेष छोड़ता है जो नही ं िगरता

शासन क पद्ध त वंशानुग त पद और भूिम आवंटन के स्थान पर वेतनभोगी, मराठों ने स्वयं इसे ढीला छोड़ िदया —
स्थानांतरणीय अिधकारी; अष्टपधान मंडल; म त्ृ युद ंड के संयिमत स्वायत्त सरदारों से ‘कभी-कभी
पयोग वाली पंचायत-न्यायव्यवस्था; सै िनकों की िवधवाओं को पेंशन अनुशासनहीनता और दुव्यवहार ’ हुए

यह प्रमाण क अध्याय का अपना िनष्कष, और पष्ृ ठ 80 पर स्वतंत्र ता आंद ोलन से इसे मापना सबसे किठन है — पेर णा को
भारतीय स्वयं शासन जुड़ाव भूभाग की तरह तौला नही ं जा सकता
कर सकते ह

नमूना उत्तर (आदश अनु े द):
भारतीय इ तहास म मराठ का सबसे महत्वपूण योगदान उनके सा ाज्य का आकार नह , ब ल्क वह प्रमाण था जो उन्ह ने दया —
क श क्तशाली सा ाज्य परा जत कए जा सकते ह और भारतीय स्वयं सा ाज्य का नमाण, वस्तार और प्रशासन कर सकते ह।
अध्याय ठ क यही कहता है, और इसका प्रमाण पूरे अध्याय म फैला है। छत्रप त शवाजी ने सोलह वष क आयु म उपे क्षत दुग
जीतने से आरंभ कया और 1674 म रायगढ़ म अपनी संवत् प्रणाली के साथ राज्या भषेक तक पहुँचे; औरंगजेब पूरी मुगल सेना
लेकर पचीस वष दक्कन म रहा, बीजापुर और गोलकुंडा जीते, संभाजी को मार डाला और रायगढ़ ले लया — फर भी मराठ को
परास्त कए बना ही मर गया। यह प्रमाण महाराष्ट्र से बाहर तत्काल पहुँचा : बुंदेला राजकुमार छत्रसाल शवाजी के संघष से प्रे रत
होकर स्वतंत्र बुंदेलखंड क स्थापना करते ह, और हद क व भूषण वशेष रूप से महाराष्ट्र जाकर उनके गुणगान म काव्य रचते ह।
यह प्रमाण सा ाज्य के पतन के बाद भी बचा रहा — अध्याय का अं तम नणय यही है क स्वराज्य के ज्वलंत आदश ने ‘भारतीय
को प्रे रत कया क वे स्वयं शासन कर सकते ह और इस प्रकार भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का बीजारोपण कया’। भूभाग एक ही
युद्ध म छन सकता है — 1818 म मराठा भूभाग छना भी। कतु एक बार दया गया प्रमाण वापस नह लया जा सकता।

कक्षा-चचा के लए: कसी मत क स ी परीक्षा यह है क आप उसके वरुद्ध सबसे प्रबल तक बता सक या नह ।
य द आप स्वराज्य को सबसे बड़ा योगदान मानते ह, तो आपके वरुद्ध तक यह है क वचार सस्ते होते ह और
प्रशासन क ठन — और यह क 17व शताब्द के लए वेतनभोगी, स्थानांतरणीय अ धकारी-वग कसी भी नारे से
कह अ धक असाधारण उपल थी। इस आप त्त का उत्तर दे सक, तभी आपका तक साथक है।

अध्याय — एक नज़र म
मराठा दक्कन पठार, वशेष रूप से वतमान महाराष्ट्र के नवा सय का एक समूह ह। वे मराठ बोलते ह, जसका 12व
शताब्द से सतत और समृद्ध सा ह त्यक इ तहास रहा है। उनके राजनै तक उदय क भू म भ क्त संत — ानेश्वर, नामदे व,
तुकाराम, रामदास — ने तैयार क , जन्ह ने उप नषद और भगव ता को मराठ म लाकर समाज को एक सुदृढ़ सांस्कृ तक
आधार दया।
छत्रप त शवाजी (जन्म 1630, भ सले कुल, शाहजी और जीजाबाई के पुत्र) ने 16 वष क आयु म दुग जीतने आरंभ कए,
1646 से शासन कया, 1657 म मराठा नौसेना क स्थापना क , 1674 म रायगढ़ म राज्या भषेक कराकर ‘श्री राजा शव
छत्रप त’ उपा ध धारण क और 1677 म द क्षण- द ग्वजय कया। 1680 म पचास वष क आयु म उनका नधन हुआ।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

उनक रणनी त थी — दुग और गु रल्ला युद्ध, अथात छोटे -छोटे दल, तीव्र ग त, आक स्मकता और भूभाग का गहन ान।
रामचंद्रपंत अमात्य ने आ ापत्र म लखा क ‘दुग राज्य का आधार ह’ — और 1682–1707 के औरंगजेब के प्रचंड आघात म
राज्य को दुग ने ही बचाया।
शासन का आधार था — वेतनभोगी और स्थानांतरणीय प्रशासन (न वंशानुगत पद, न भू म आवंटन), आठ मं त्रय का
अष्टप्रधान मंडल, अप्रत्यक्ष क्षेत्र से चौथ (25%) और सरदे शमुखी (अ त रक्त 10%), मृत्युदंड का संय मत प्रयोग करने
वाली पंचायत-न्यायव्यवस्था, और वह नौसेना जसने यूरो पय को उलटे मराठा व्यापार-पत्र लेने पर ववश कया।
शवाजी के पश्चात राज्य बढ़ा, पर वक द्रत हुआ — पेशवा छत्रप त पर भी हावी हो गए, ताराबाई ने उत्तर क ओर वस्तार का
सूत्रपात कया, और बाजीराव प्रथम, नानासाहेब तथा महादजी शदे ने मराठा श क्त को दल्ली (1754, पुनः 1771),
लाहौर, अटक और पेशावर तक पहुँचाया — अंग्रेज से पूव का सबसे बड़ा भारतीय सा ाज्य।
वरासत तीन स्तर पर है — मुगल प्रभुत्व को चुनौती दे ता एक सा ाज्य; शासन क एक कुशल पद्ध त; और सांस्कृ तक
पुनरु ान — संस्कृत मुहर, राज्य-व्यवहार-कोष, मोडी ल प, अ हल्याबाई होलकर के मं दर-घाट और सरफोजी तीय का
समन्वयकारी तंजावुर। स्वराज्य का आदश आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का बीज बना।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 3 मराठा सा ाज्य का उदय AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म महत्व क्य
कहाँ

स्वराज्य अपना संपभु राज्य — िकसी सुल्तान के अधीन पृष्ठ 64, 80 16 वष क आयु से शवाजी क प्रेरणा; आगे चलकर
कोई पद नही ं इसी ने ‘भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का बीजारोपण’
कया

जागीर राजा ारा से वा के पुर स्कारस्वरूप िदया गया पृष्ठ 64 शाहजी क जागीर पुणे म थी, जहाँ शवाजी पले-बढ़े ;
भूभाग, िजससे पाप्तकत कर वसूल सकता था बाद म उन्ह ने अपने राज्य म ऐसे भू म आवंटन समाप्त
कर दए

गु रल्ला युद्ध छोटे दल, तीव गित, आकिस्मक आक्रमण और पृष्ठ 65 इसी से एक दक्कनी सरदार ने बीजापुर और मुगल
भूभाग का गहन ान — इससे िवशाल से ना को सेनाओं को हराया; यह सह्या द्र के भूगोल के कारण ही
परास्त करना संभव था

अष्टप्रधान आठ मंित्रयों की पिरषद् — पधान, अमात्य, सिचव, पृष्ठ 72, चत्र शासन व्य क्तगत कृपापात्र से नह , ना मत वभाग से
मंडल मंत्र ी, सुम ंत, से नापित, न्यायाधीश, पंिडतराव 3.13 चलता था — कद्र म संप्रभु छत्रप त

चौथ और अपत्यक्ष अधीन पात
ं ों से िलया जाने वाला 25 पृष्ठ 73 रक्षा के बदले राजस्व, आंत रक प्रशासन म हस्तक्षेप नह
सरदे शमुखी पितशत कर, और उस पर अितिरक्त 10 पितशत — समय के साथ ऐसे कई प्रांत सा ाज्य का भाग बने

बारगीर और वे घुड़सवार िजनके घोड़े-उपकरण राज्य दे ता था पृष्ठ 73 घुड़सवार सेना बढ़ाने के दो तरीके — राज्य-पो षत नष्ठा
शलेदार (बारगीर) या जो स्वयं दे ते थे (िशले द ार) और स्वयं-पो षत संख्या

काताज पुतगाली नौसै िनक व्यापार-पत्र; िबना पत्र वाला पृष्ठ 74 मराठ ने इसे उलट दया — वे स्वयं यूरो पय से पत्र
जहाज जब्त कर िलया जाता था माँगने लगे, जस पर यूरो पय ने कान्होजी आंग्रे को
‘समुद्र डाकू’ कहा

आ ापत्र ‘राजकीय आदे श’ — 1715 में िशवाजी के पृष्ठ 61, 74 अध्याय का मुख्य ल खत ोत — यूरोपीय
िवत्तमंत्र ी रामचंद पंत अमात्य की कृ ित ‘टोपीधा रय ’ क चेतावनी और दुग का महत्व, दोन
इसी म ह

पेशवा ‘पधानमंत्र ी’ के िलए फारसी शब्द; 18वी ं शताब्दी में पृष्ठ 70 बाजीराव प्रथम और नानासाहेब ने अ खल भारतीय
सत्ता का वास्तिवक कें द वस्तार कया — कतु छत्रप त नाममात्र रह गए और
सरदार स्वायत्त हो गए

पंचायत और न्याय दे ने वाला स्थानीय अिधकािरयों और पितिष्ठत पृष्ठ 75–76 न्याय स्थानीय था और सरदार के समक्ष अपील योग्य;
कोतवाल व्यिक्तयों का समूह; कोतवाल नगर की पुिलस मृत्युदंड का प्रयोग उल्लेखनीय रूप से संय मत था

मोडी ल प दे वनागरी का एक ितयक (घसीट) रूप पृष्ठ 78 मराठा पत्राचार क मुख्य ल प — चत्र 3.20 म छत्रप त
शाहू महाराज क अपनी लखावट है

राज्य-व्यवहार- िशवाजी ारा िलखवाया गया ग ंथ, िजसमें पृष्ठ 76 भाषा-नी त का मापने योग्य प रणाम — मराठा कूटनी त
कोष राजनियक फारसी शब्दों के संस्कृ त पय य िदए गए म वदे शी शब्द का प्रयोग बहुत कम हो गया

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages24
Languagehindi
Updated19 Sep 2026