NCERT Solutions for Class 10 Hindi (कृतिका) एही ठैंया झुलनी हैरानी ओ रामा [Old Book] – Text
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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 10th
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Book : Kritika Ncert Solutions | Chapter - 4 Hindi
Class : 10th
Subject : हंद
Chapter : 4
Chapter Name : ए ह ठै याँ झुलनी है रानी हो रामा !
Q1.हमार आज़ाद क लड़ाई म समाज के अपे त माने जाने वाले वग का योगदान भी काम नह ं रहा है
| इस कहानी म ऐसे लोग के योगदान को कस कार उभारा है ?
Answer.हमार आज़ाद क लड़ाई म हर वग और हर धम ने बढ़-चढ़कर अपना अपना योगदान दया था
| इस कहानी म टु नू और दल ु ार के योगदान को बताया है | जैसे क दल
ु ार टु नू को दे खकर रे शम
छोड़कर खद ु भी ख दर धारण कर लेती है , और वदे शी सा ड़य के बंडल को वदे शी व तओ ु ं क होल
जलने के लए दे दे ती है | टु नू आज़ाद के लए नकाले गए जल ु स
ू म भाग लेते हुए अपनी जान दे दे ता है
| टु नू और दल
ु ार दोन ह कजल गायक थे फर भी उ ह ने आज़ाद क लड़ाई म अपना योगदान दया
था | इस कहानी म लेखक ने इस योगदान को बहुत ह अ छ तरह से उभारा है |
Page no: 41, Block: श न अ यास
Q2.कठोर दयी समझी जाने वाल दल ु ार टु नू क म ृ यु पर य वच लत हो उठ ?
Answer.कठोर दयी समझी जाने वाल दल ु ार टु नू क म ृ यु पर इस लए वच लत हो उठ य क
दल
ु ार को अपनी गलती का एहसास हो गया था । वह टु नू और उसके ेम को बचकाना समझती थी पर
बाद म उसको एहसास होता है क टु नू का ेम स चा था | टु नू ह एक ऐसा इंसान था िजसने उससे
इ ज़त से बात क थी और बदले म दल ु ार ने उसक बे जती क थी।इस लए उसने टु नू क द हुई खाद
क धोती पहन ल थी और वदे शी धो तय को होल म जलाने के लए दे दया था |
Q3.कजल दं गल जैसी ग त व धय का आयोजन य हुआ करता होगा ? कुछ और परं परागत लोक
आयोजन का उ लेख क िजये |
Answer.पहले कजल दं गल जैसी ग त व धयाँ मनोरं जन का साधन हुआ करती थी | पहले इस तरह के
आयोजन बहुत हुआ करते थे जहाँ टु नू और दलु ार जैसे लोग कजल गाने के लए बल
ु ाये जाते थे | इन
आयोजन के मा यम से लोग के बीच म दे श भि त का चार कया जाता था, और इन आयोजन म
लोक गायक का दशन होता था | इस तरह के और परं परागत आयोजन है - द ण भारत म बैल का
दं गल, उ र भारत म कु ती, राज थान म पशु मेले आ द |
Q4.दल ु ार व श ट कहे जाने वाले सामािजक-सां कृ तक दायरे से बाहर है और फर भी अ त व श ट है
| इस कथन को यान म रखते हुए दल ु ार क चा र क वशेषताएँ ल खए |
Answer.दल ु ार व श ट कहे जाने वाले सामािजक-सां कृ तक दायरे के बाहर है य क समाज म
व श ट कहे जाने वाले यि तय से इनक कला को उ चत स मान नह ं मलता है और इ हे हमेशा
नीची नज़र से दे खा जाता है |दलु ार फर भी व श ट इस लए है य क उसमे कला और हुनर है | दल ु ार
क चा र क वशेषताएँ है -
१. दलु ार एक बहुत ह अ छ गा यका थी, उसक आवाज़ बहुत ह मधरु और सरु ल थी |
२. दल ु ार दे श के त सम पत थी य क उसने बना सोचे फकू वारा द हुई वदे शी सा ड़यां वदे शी
व तओ ु ं क होल जलने के लए दे द थी |
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३. दल
ु ार अपने वा य का बहुत ह यान रखती थी िजसके लए वह नयम से रोज़ कसरत करती थी
|
४.दलु ार भले ह उ च वग क नार नह ं थी, पर तु वह वा भमानी थी | उसने अपना सर ऊपर रखके
जीना सीखा था |
५. दलु ार भले ह कठोर दय थी, पर टु नू के लए उसके मन म ेम था, इसी लए वह उसक म ृ यु क
खबर सन ु कर बहुत ह वच लत हुई थी |
Q5.दल ु ार का टु नू से पहल बार प रचय कहाँ और कस प म हुआ ?
Answer.दल ु ार का टु नू से प रचय कजल दं गल म हुआ था जो भाद म तीज के अवसर पर आयोिजत
कया गया था | इस दं गल म दो वग थे खोजवां बाज़ार और बजरडीहा, दल ु ार खोजवां बाज़ार क
त वं वी थी और टु नू बजरडीहा क तरफ से था | दोन ने ह न-उ र करने म महानता ा त कर
हुई थी, टु नू ने दल
ु ार को चनु ौती द थी और दल
ु ार ने इस चन
ु ौती को मु कुराते हुए वीकार कया था |
Q6.दलु ार का टु नू को यह कहना कहाँ तक उ चत था - "तै सरबउला बोल िज़ंदगी म कब दे खले
लोट?...!" दलु ार के इस आपे म आज के यव ु ा वग के लए या स दे श छपा है ? उदहारण स हत
प ट क िजये |
Answer.दल ु ार का टु नू को यह कहना उ चत था - "तै सरबउला बोल िज़ंदगी म कब दे खले लोट?...!"
य क टु नू सफ सोलह या स ह बरस का था, उसे पता नह ं था क कैसे खद ु से पैसे कमाए जाते ह,
तभी दलु ार ने कहा था " तनू े कहाँ िज़ंदगी म नोट दे खे ह |"
दल
ु ार के इस कथन म उन यव ु ा वग के लए स दे श छुपा है जो खद
ु तो कुछ नह ं करते पर बात बहुत
बड़ी-बड़ी करते ह | इस कथन म यह भी कहा गया है क हम उतनी ह बात करनी चा हए िजतनी सच हो
य क न जाने कब सच सामने आ जाये |
Q7.भारत के वाधीनता आंदोलन म दल ु ार और टु नू ने अपना योगदान कस कार दया ?
Answer.भारत के वाधीनता आंदोलन म दल ु ार और टु नू ने इस कार योगदान दया दल ु ार ने
व भमा नता दखते हुए जलाये जाने वाले वदे शी व तओु ं के ढे र म वदे शी मील क बानी कोर स दय
को फककर एक दे श ेमी होने क मान सकता दखाई | टु नू ने अं ेज़ के वरोध म हुए आंदोलन म
ह सा लया था और वदे शी व तए ु ं भी जलाई थी और इसी आंदोलन म उसने अपने ाणो का ब लदान दे
दया था |
Q8.दल ु ार और टु नू के ेम के पीछे उनका कलाकार मन और उनक कला थी ? यह ेम दल ु ार को दे श
ेम तक कैसे पहुँचता है ?
Answer.टु नू दल ु ार से ेम करता था पर तु दल
ु ार उसके ेम को वीकार नह ं करना चाहती थी |
दलु ार को लगता था क उसका ेम बस एक नादानी है जो समय साथ ख़ म हो जाएगी, इसी लए वह
हमेशा उसका नरादर करती रहती थी |दोन के बीच म उनका कलाकार मन उनक कला थी | पर तु
दल ु ार जानती थी टु नू का ेम शार रक नह ं आ मा से है तब भी दल
ु ार उसके ेम को वीकार नह ं
करती थी | अं ेज़ के वारा नदयी प से टु नू क ह या होने पर दल ु ार के मन म दे श ेम क भावना
जागती है इसी लए वह टु नू क द हुई साड़ी पहनकर उसके म ृ यु थान पर जाती है | यह घटना दल ु ार
को दे श ेम तक पहुँचती है |
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Q9.जलाये जाने वाले वदे शी व म अ धकांश व फटे परु ाने थे पर तु दल ु ार वारा वदे शी मल म
बानी कोर सा ड़य का फका जाना उसक कस मान सकता को दशाता है ?
Answer. वदे शी व तओ ु ं क होल जलने के लए एक टोल वदे शी व इक ठा कर रह थी अ धकतर
लोग ने फटे परु ाने कपडे दए थे पर तु दल
ु ार ने कोर सा ड़यां फक थी | दल
ु ार वारा फक हुई कोर
सा ड़यां यह दशाता है क वह अपने दे श से ेम करती थी, उसके लए नयी सा ड़य का कोई मू य नह ं था
पर तु दे श क अजाद़ सब कुछ थी | सा ड़य का फकना उसके टु नू के त ेम को भी दशाता है य क
टु नू ने उसको खाद क साडी भट क थी |
Q10." मन पर कसी का बस नह ं; वह प या उ का कायल नह ं होता |" टु नू के इस कथन म उसका
दलु ार के त कशोर ज नत ेम य त हुआ है पर तु उसके ववेक ने उसके ेम को कस दशा क ओर
मोड़ा ?
Answer.टु नू दल ु ार से स चा ेम करता था पर तु वह दल ु ार से उ म बहुत ह छोटा था | दल
ु ार को
लगता था क उसका ेम बस एक नादानी है जो समय साथ ख़ म हो जाएगी, इसी लए वह हमेशा उसका
नरादर करती रहती थी | टु नू दलु ार क आ मा से ेम करता था न क उसके शर र से, इसी लए दल ु ार
को वो होल पर साडी दे ता है और बदले म कुछ भी नह ं मांगता |
टु नू का ववेक उसके ेम को दे श भि त क तरफ मोड़ता है | टु नू अं ेज़ के खलाफ आंदोलन म
ह सा लेता है , वदे शी व क होल जलने वाल टोल म भी शा मल होता है और आ खर म दे श के
लए अपने ाण दे दे ता है |
Q11.'ए ह ठै याँ झुलनी हे रानी हो रामा!' का तीकाथ समझाइये |
Answer.'ए ह ठै याँ झुलनी हे रानी हो रामा!' का अथ है - इसी जगह पर मेर नाक क ल ग खो गयी , म
क से पछ
ू ू ? नाक क ल ग सह ु ाग का तीक होती है | इसका तीकाथ है क इस कहानी म टु नू क म ृ यु
उसी थान पर होती है जहाँ पर उ ह पहल बारे गाने के लए बल ु ाया जाता है | मतलब यहाँ इस कथन का
मतलब है क यह ं पर मेरे ेमी क म ृ यु हो गयी अब म उससे कैसे मलंग ू ी|
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