NCERT Solutions for Class 8 Social Science (नागरिक शास्त्र) Chapter 4 कानूनों के समझ – Text
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CLASS - 8TH
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Book : Samajik avam Rajnitik Jeevan Ncert Solutions | Chapter - 4 Social Science - Civics
Class : 8th
Subject : अर्थशास्त्र
Chapter : 4
Chapter Name : कानून ों की समझ
Q1 कानून का शासन पद से आप क्या समझते है ?अपने शब् ों में लिखिए।अपना जवाब दे ते हुए कानून के उल्लोंघन
का क ई वास्तलवक या काल्पलनक उदहारण दीलजये।
⚫ कानून का शासन हमे यह लसिाता है लक कानून की नज़र में सभी व्यखि एक बराबर हैं ।
⚫ कानून का शासन का मतिब है लक सभी कानून दे श के सभी नागररक ों पर सामान्य रूप से िागू ह ते हैं ।
⚫ इसके तहत क ई भी व्यखि कानून से ऊपर नहीों है चाहे व सरकारी अलिकारी ह या क ई िनाशेत।
⚫ यहााँ तक की राष्ट्रपलत भी कानून से ऊपर नहीों हैं ।
⚫ हर अपराि की या कानून के उल्लोंघन की एक सजा लनिाथ ररत है और उसे सजा तक पहुचने की एक
लनिाथ ररत प्रलिया है ।
⚫ लजसमे अपरािी का अपराि सालबत ह ता है ।
⚫ कानून के उल्लोंघन के कुछ उदहारण नीचे लदए गए है:
⚫ i.ट्र ै लिक लसग्नि पर िाि बत्ती ह ने पर भी गाड़ी न र कना कानून का उल्लोंघन है ।
⚫ ii.लबना हे िमेट् के गाडी चिाना कानून का उल्लोंघन है।
Q2 इलतहास इस दावे क गित ठहराता है लक भारत में कानून का शासन अोंग्रेज़ ने शुरू लकया र्ा।इसके कारण ों में
से द कारण बताइये।
भारत में कानून अोंग्रेज़ ने शुरू लकया र्ा इस दावे क इलतहास गित ठहराता है क्य लों क
⚫ भारत में क़ानूनी मामि के लवकास में भारतीय राष्ट्रवालदय ने एक अहम भूलमका लनभायी र्ी।
⚫ औपलनवेलशक कानून मनमानेपन पर आिाररत र्ा,1870 का राजद्र ह एक्ट अोंग्रेज़ के मनमाने शासन की
लमसाि र्ा।
⚫ इसके तहत अगर क ई भी व्यखि लिलट्श सरकार की आि चना या लवर ि करता र्ा त उसपर लबना
मुकदमा चिाये ही लगरफ्तार लकया जा सकता र्ा।
⚫ भारतीय राष्ट्रवादी अोंग्रेज़ द्वारा सत्ता के इस मनमाने इस्तेमाि का लवर ि और आि चना करते र्े।
Q3 घरे िु लहों सा पर नया कानून लकस तरह बना,मलहिा सोंगठन ने इस प्रलिया में अिग-अिग तरीके से क्या
भूलमका लनभाई उसे अपने शब् ों में लिखिए।
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⚫ बहुत समय के बाद घरे िु लहों सा से परे शान ह कर कुछ मलहिाओों ने मलहिा सोंगठन के दफ्तर में इसके
खििाि लशकायत दजथ करवाई।
⚫ लदन प्रलत लदन घरे िु लहों सा की बढ़ती लशकायत ों के कारण मलहिा सोंगठन क एक नए कानून की
आवश्यकता महसूस हुई।
⚫ सभी ि ग ने घरे िू लहों सा का मुद्दा लवलभन्न मोंच पर उठाया।
⚫ 1999 में वकीि,कानून लवद्यार्ी और समाज वैज्ञालनक के सोंगठन 'िॉयसथ किेखक्टव' ने इस लवषय पर
राष्ट्रव्यापी चचाथ की और घरे िु लहों सा लविेयक का मसौदा तैयार लकया।
⚫ इस लवियक क बहुत सारे ि ग क पढ़ाया गया और 2002 में इससे सोंसद में पेश लकया गया।
⚫ कुछ मलहिा समूह ने इस लवियक का लवर ि भी लकया क्य लों क इसमें उनके सुझाई हुई एक भी बात नहीों
र्ी।
⚫ एक प्रेस काों फ्रेंस का आय जन लकया गया लजसमें सभी ि ग ने ऑनिाइन अपनी यालचकाएों भेजी।
⚫ इसे ऑनिाइन लिया गया र्ा ताकी सभी ि ग तुरोंत अपनी राय दे सके।
⚫ इसके बाद मलहिा सोंगठन ने स्र्ानीय सोंसद क अपने सुझाव सौप लदए और सोंसद ने उन्हें राज्यसभा में
सौप लदया।
⚫ इन् लशिररश क ि कसभा में भी पेश लकया गया।
⚫ कलमट्ी की ररप ट्थ ने मलहिा सोंगठन की बहुत सी माों गे स्वीकार कर िी गयी र्ी।
⚫ 2005 में एक नया लवियक सोंसद के सामने पेश लकया गया र्ा और द न ों सदन ों की मोंजूरी के बाद इससे
राष्ट्रपलत के पास मोंजूरी के लिए भेजा गया।
⚫ 2006 से घरे िु लहसा के खििाि कानून िागु ह गया र्ा।
⚫ इस प्रकार से कानून की आवश्यकता महसूस करना,लवियक बनवाना,उसे अपने सुझाव दे कर बेहतर
बनाना जैसे अिग-अिग काम क मलहिा सोंगठन ने करके इस कानून के िागू ह ने में उन्ह न
ों े एक अहम्
भूलमका लनभायी है ।
Q4 अपने शब् ों में लिखिए की इस अद्याय में आये लनम्नलिखित वाक्य से आप क्या समझते है ; अपनी बात ों क
मनवाने के लिए उन्ह न
ों े सोंघषथ शुरू कर लदया।यह समानता का सोंघषथ र्ा।उनके लिए कानून का मतिब ऐसे लनयम
नहीों र्े लजनका पािन करना मज़बूरी ह ।वे कानून क इससे अिग ऐसी व्यवस्ता के रूप में दे िना चाहते र्े ज
न्याय के लवचार पर आिाररत ह ।
⚫ भारत राष्ट्रवादी अोंग्रेज़ के मनमाने कानून से सहमत नहीों र्े इसीलिए गित कानून क सहने के बजाए
उन्ह न
ों े अपनी माों गे उनके सामने रिी और अपनी माों गे मनवाने के लिए उन्ह न
ों े सोंघषथ लकया।
⚫ वे चाहते र्े की सभी ि ग क कानून की नज़र में एक समझ जाये।
⚫ वे सभी ि ग में बराबरी चाहते र्े।
⚫ सही कानून व लनयम ह ते है ज हर व्यखि क न्याय दे और उनकी मुखिि क कम करके उनका जीवन
सरि बनाये।
⚫ ऐसा कानून ज न्याय दे ने के बजाए ि ग की स्वतोंत्रता छीन िे वे ऐसा कानून नहीों चाहते र्े।
⚫ यलद कानून से सबका न्याय ह गा त लकसी क भी उसे मज़बूरी से पािन नहीों करना पड़े गा।
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⚫ इन वाक्य से हमे सही कानून क्या ह ता है यह समझाया है और अगर क ई ऐसा कानून ह ज लनदोष क
तकिीि पहुचाये या लकसी भी तरह का भेद भाव उत्पन करे त हमे उसका लवर ि करने मे सोंक च नहीों
करना चालहए।
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