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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली

AglaSem पर कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली (समाज का अध्ययन) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Social Science Chapter 5 Universal Franchise and India s Electoral System (Exploring Society), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली - Page 1 of 39

About NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली

NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (39 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

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एनसीईआरट समाधान

अध्याय 5: सावभौ मक मता धकार और
भारत क नवाचन प्रणाली

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

117 – 138 15 34 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 38 pages

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: सावभौ मक मता धकार और
भारत क नवाचन प्रणाली
कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे,
कक्षा 8, भाग 1; वषयवस्तु — शासन प्रणाली और लोकतंत्र) के सभी प्रश्न के वस्तृत उत्तर। महत्वपूण प्रश्न, सभी ग्यारह आइए पता लगाएँ
मंजूषाएँ, पृष्ठ 133 क इसे अनदे खा न कर मंजूषा का प्रश्न, आइए वचार कर, दोन पाठ्य प्रश्न तथा सभी नौ प्रश्न और क्रयाकलाप — मानस-
मान चत्र ( चत्र 5.4), भारत नवाचन आयोग क संरचना ( चत्र 5.11), आँकड़ ( चत्र 5.12), मतदान प्र क्रया ( चत्र 5.13), आर क्षत सीट के वृत्त- चत्र
और राज्यसभा पटल ( चत्र 5.23) को मु द्रत पृष्ठ से पढ़कर।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8) 117 – 138

खं ड प्रश्न

15 34

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 117
अध्याय का आरंभ — वषयवस्तु : शासन प्रणाली और लोकतंत्र

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 सावभौ मक वयस्क मता धकार क्या है?

सावभौ मक वयस्क मता धकार का अथ है — प्रत्येक वयस्क नाग रक को एक मत दे ने का अ धकार है और सभी मत का समान
मूल्य है। भारत म इसका अथ यह हुआ क जा त, मत, नस्ल, धम, लग, शक्षा, आय आ द का भेदभाव कए बना 18 वष से
अ धक आयु के प्रत्येक भारतीय नाग रक को मत दे ने का अ धकार है। ‘सावभौ मक’ शब्द का अथ यही है — कसी भी वयस्क
समूह को बाहर नह रखा जाता।
तीन शब्द को अलग-अलग दे खए, क्य क हर शब्द कुछ काम कर रहा है —

शब्द यह कसे रोकता है यह क्य महत्वपूण है

सावभौ मक जाित, मत, नस्ल, धम, िलंग , िशक्षा या एक िनध न खेितहर मजदू र और एक धनी पाध् यापक — दोनों एक -एक मत दे ते है ं
आय के आधार पर कोई भी रोक और दोनों मतों का मूल्य समान है

वयस्क बालकों को मतािधकार संिवधान 18 वष की आयु को वह आयु मानता है जब नागिरक यह िनणय ले
सकता है; भारत ने 1988 में यह आयु 21 से घटाकर 18 वष कर दी

मता धकार ऐसी कृ पा िजसे जब चाहे वापस ले िलया मतािधकार संिवधान या सरकार ारा पदान िकया गया अिधकार है — यहाँ
जाए अनुच्छे द 326 ारा। अंग ेजी में ‘सफे ज’ इसका पय यवाची है

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

इस अ धकार के साथ दो व्यावहा रक शत भी ह। पहली — मता धकार का प्रयोग करने के लए मतदाता का अपने नवाचन
क्षेत्र म पंजीकृत होना आवश्यक है। दूसरी — गंभीर अपराध म दोषी पाए जाने पर संबं धत व्य क्त को मतदान करने से
रोका जाता है। और एक नयम इसक रक्षा करता है — कोई भी व्य क्त अन्य व्य क्त क ओर से मतदान नह कर सकता।

इसे आधार शला क्य कहा जाता है: लोकसभा, प्रत्येक राज्य एवं कद्रशा सत प्रदे श क वधानसभा और गाँव एवं
शहर म सभी स्थानीय चुनाव — ये सभी सावभौ मक मता धकार पर आधा रत ह। अथात् यही सद्धांत ग्राम पंचायत
से लेकर संसद तक चलता है। य द कसी एक स्तर पर इसे हटा दया जाए, तो वह स्तर जनता के प्र त उत्तरदायी
रहना बंद कर दे गा।

प्र.2 नवाचन प्रणाली क्या है?

नवाचन प्रणाली वह संपूण व्यवस्था है जसके ारा नाग रक अपने प्र त न ध चुनते ह — नयम, संस्थाएँ और उन्ह चलाने वाले
लोग, जो मलकर काम करते ह। अध्याय क हा शया- टप्पणी प्रणाली को इस प्रकार प रभा षत करती है — “परस्पर जुड़े या
परस्पर नभर तत्व का एक समूह जो एक सामान्य उ े श्य या काय को प्राप्त करने के लए एक साथ काम करते ह।” नवाचन
प्रणाली ठ क यही है, और उसका सामान्य उ े श्य है — स्वतंत्र और नष्पक्ष चुनाव।
अध्याय पढ़कर इसके अंग गनाए जा सकते ह —

नयम — सावभौ मक वयस्क मता धकार (अनु े द 326), गुप्त मतदान, ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ के आधार पर गणना,
सीट का आरक्षण, आदश आचार सं हता।
संस्थाएँ — भारत नवाचन आयोग, तथा स्थानीय नकाय के लए राज्य नवाचन आयोग।
धरातल का तंत्र — मतदाता सूची, नवाचन क्षेत्र, मतदान कद्र, मतदान अ धकारी, ई.वी.एम. और वी.वी.पी.ए.ट ., अ मट
स्याही, मतगणना कक्ष।
भागीदार — मतदाता, प्रत्याशी और राजनै तक दल, जो सब एक ही नयम से बँधे ह।

इसे केवल नयम का समूह न कहकर ‘प्रणाली’ क्य कहते ह: क्य क इसके अंग एक-दूसरे पर नभर ह। पूण
मतदाता सूची तब व्यथ है जब मतदान कद्र तक पहुँचा ही न जा सके; गुप्त मतदान तब व्यथ है जब प्रत्याशी मत
खरीद सके; ईमानदार मतगणना तब व्यथ है जब सत्ता म बैठा दल सरकारी संसाधन से मतदाताओं को प्रभा वत कर
ले। कोई एक अंग हटा द जए, शेष अंग अकेले नष्पक्ष प रणाम नह दे पाएँगे — इसी लए अध्याय कहता है क
भारत को “एक व्यापक और सुव्यव स्थत प्रणाली” चा हए।

प्र.3 भारत क नवाचन प्रणाली कैसे काय करती है?

यह तीन स्तर पर काय करती है, और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष चुनाव म अलग-अलग ढं ग से। पूरा अध्याय एक साथ इस प्रकार दे खा
जा सकता है —
1. इसे कौन चलाता है। भारत नवाचन आयोग (ई.सी.आई.) — एक स्वतंत्र संवैधा नक नकाय, जसक स्थापना 1950 म
हुई। इसक संरचना राष्ट्रीय स्तर से मतदान कद्र तक उतरती है —

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

भारत िनव चन आयोग

रा ीय स्तर पर राज्य/संघ शािसत स्तर पर िजला स्तर पर

मुख्य िनव चन आयुक्त मुख्य िनव चन अिधकारी िजला िनव चन अिधकारी

दो िनव चन आयुक्त
िनव चन अिधकारी (िरटिन गं ) िनव चन पंजीकरण
चुन ाव का संचालन अिधकारी — मतदाता सूची

स्थानीय िनकायों के चुन ाव राज्य िनव चन आयोग कराते है ं।

भारत नवाचन आयोग क संरचना, जैसी पृष्ठ 127 पर चत्र 5.11 म छपी है।

2. प्रत्यक्ष चुनाव — लोकसभा और राज्य वधान सभाएँ। लोकसभा नवाचन के लए दे श को 543 नवाचन क्षेत्र म वभा जत
कया गया है। प्रत्येक पंजीकृत मतदाता एक गुप्त मत दे ता है; भारत ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ प्रणाली का उपयोग करता है,
इस लए सवा धक मत पाने वाला प्रत्याशी 50 प्र तशत मत के बना भी जीत जाता है। वजेता सांसद (लोकसभा) और वधायक
( वधान सभा) कहलाते ह। बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन सरकार बनाता है और उसका नेता प्रधानमंत्री — राज्य म मुख्यमंत्री —
बनता है।
3. मतदान के दन मतदाता चार चरण से गुजरता है — प्रथम मतदान अ धकारी मतदाता सूची म नाम और पहचान-पत्र क जाँच
करता है; तीय अंगुली पर स्याही लगाकर पच दे ता है और हस्ताक्षर लेता है; तृतीय पच लेकर अंगुली क जाँच करता है (नोटा का
वकल्प भी उपलब्ध रहता है); फर मतदाता ई.वी.एम. पर बटन दबाता है, एक बीप क ध्व न सुनता है और वी.वी.पी.ए.ट . म
छपी पच दे खता है।
4. अप्रत्यक्ष चुनाव। राज्यसभा, राष्ट्रप त और उपराष्ट्रप त का चुनाव आम जनता प्रत्यक्ष रूप से नह करती। राज्यसभा के 245
सदस्य म से 233 को नवा चत वधायक चुनते ह और 12 को राष्ट्रप त ना मत करते ह। राष्ट्रप त का चुनाव संसद के दोन सदन के
सदस्य तथा राज्य एवं दल्ली और पुडुचेरी क वधानसभाओं के सदस्य के नवाचक मंडल ारा होता है। इन सबम एकल
संक्रमणीय मत प्रणाली का उपयोग कया जाता है।

स्वयं जाँ चए: अध्याय का अपना उदाहरण — 2024 म लगभग 96.8 करोड़ मतदाता, 543 नवाचन क्षेत्र और 10
लाख से अ धक मतदान कद्र — यही वह पैमाना है जो प्रणाली को इतने स्तर म बाँटने के लए ववश करता है।
एक अ धकारी दस लाख कद्र क दे ख-रेख नह कर सकता; मुख्य नवाचन आयुक्त से नवाचन अ धकारी तक क
श्रृंखला कर सकती है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 118

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

सावभौ मक वयस्क मता धकार
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आइए पता लगाएँ

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a s emने 1988 म मतदान क आयु 21 वष से घटाकर 18 वष कर द । चचा क जए क क्या यह एक अ ा
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भारत
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नणय था।

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agमता धकार रोके रखना क ठनाई से ही उ चत ठहराया जा सकता था। दोन
कुल मलाकर यह एक अ ा नणय था, और सबसे मजबूत कारण है — संग त। 18 वष के व्य क्त को लगभग हर दूसरे
मामले म वयस्क माना जाता है, इस लए केवल
पक्ष यहाँ दए ह, ता क आप अपने समूह म तक कर सक, केवल दावा न कर।

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18 वष करने के पक्ष म तक जो तक वरोध म उठाए

18 वष m . c a g
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a उसे ये दाियत्व सौंपता है, तो मत भी सौंपना चािहए
में नागिरक कानून की दृ िष्ट से पूण उत्तरदायी है और काम कर सकता है। यिद कु छ लोगों का मत था िक 18 वष का िव ाथ अब भी

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समाज पढ़ रहा होता है और माता-िपता या िम त्र ों के कहने पर
मत दे सकता है

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भारत एक युवा दे श है। 18–20 वष के लोगों को बाहर रखने का अथ था उस बड़े वग कु छ का मानना था िक तीन वष और अध् ययन तथा

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को बाहर रखना िजसका भिवष्य आज के िनणयों — िशक्षा, रोजगार,
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अनुभव से अिधक सूिचत मतदाता तैयार होगा

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सबसे अिधक पभािवत होता है

मतदान स्वयं नागिरकता की पाठशाला है। िजतनी जल्दी आरंभ हो, उतनी ही अिधक राजनैितक दल के वल युवाओं को ल क्ष्य कर वादे कर

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संभावना है िक मतदान जीवन भर की आदत बने सकते है ं

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comह संपूण वयस्क जनता के िनकट
यह सावभौिमक मतािधकार के तक से मेल खाता है — िजतनी कम रोक, उतना ही
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देlता है
बड़ा मतदाता-समूह पहले से िवशाल चन
ु ाव को और

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मतदाता-समू किठन बना

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‘वे अभी तैयार नह ह’ वाला तक कमजोर क्य है: यही तक 1947 म नरक्षर मतदाताओं के वषय म दया गया

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था — क मता धकार केवल साक्षर को मले। सं वधान नमाताओं ने उसे तब अस्वीकार कया, क्य क जो अ धकार

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केवल उन्ह मले जन्ह कोई और ‘तैयार’ घो षत करे, वह अ धकार रह ही नह जाता। य द 18 पर प रपक्वता क
s समूह पर भी माननी पड़ेगी। भारत ने इसके स्थान पर एक स्पष्ट और
कसौट मान, तो 21 पर, 25 पर औरaअन्य
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समान नयम चुना। a g

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चचा के लए संकेत: ध्यान द जए क इस प रवतन से कोई सुरक्षा-उपाय कमजोर नह
s e mहुआ। 18 वष के मतदाता
. cकोom a gla है, और वह भी कसी अन्य क
भी अपने नवाचन क्षेत्र म पंजीकृत होना पड़ता है, वह भी गुप्त मतदान ही करता

as em ओर से मत नह दे सकता। मता धकार का वस्तार करना और प्र क्रया को कठोर रखना — ये दो अलग बात ह।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 118
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सावभौ मक वयस्क मता धकार

प्र.1 क्या आप गणना कर सकते ह क आपको पहली बार मत दे ने के लए कतने समय क प्रतीक्षा करनी होगी?

अपनी आज क आयु को 18 म से घटाइए — और फर दे खए क आपका जन्म दन मतदाता सूची क अहता त थ से पहले
पड़ता है या बाद म। पूरी गणना इतनी ही है, पर दूसरा भाग प्रायः छू ट जाता है।

पतीक्षा के वष = 18 − ( आपकी आज की आयु)
उदाहरण — यिद आप आज 13 वष 4 माह के है ं → 18 − 13 = 5 वष, में से 4 माह पहले ही बीत चुके

→ आप लगभग 4 वष 8 माह में 18 वष के होंगे

कक्षा 8 के अ धकतर व ाथ 13 या 14 वष के होते ह, इस लए उत्तर प्रायः लगभग चार से पाँच वष होता है — और पहली बार
वास्तव म मत दे ने म कुछ और समय, क्य क दो बात और होनी ह —

आपको अपने नवाचन क्षेत्र म मतदाता के रूप म पंजीकृत होना होगा। अध्याय स्पष्ट कहता है — “अपने मता धकार का
प्रयोग करने के लए कसी मतदाता का अपने नवाचन क्षेत्र म पंजीकृत होना आवश्यक है।” पंजीकरण नवाचन पंजीकरण
अ धकारी करता है, जो मतदाता सूची का प्रबंधन करता है।
कोई चुनाव आना भी चा हए। लोकसभा का चुनाव सामान्यतः पाँच वष म एक बार होता है और आपके राज्य क वधान सभा
का अपने चक्र पर। इस लए आपका पहला मत पंचायत, नगर नकाय, वधान सभा या लोकसभा — जो भी 18 वष के बाद
पहले आए — के लए हो सकता है।

यह क जए: वह वष नका लए जसम आप 18 वष के ह गे, फर कसी बड़े से पूछकर जा नए क अगला
लोकसभा चुनाव और आपके राज्य क वधान सभा का अगला चुनाव कब होने वाला है। इनम से कौन-सा आपका
पहला मत होगा?

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 120
सावभौ मक वयस्क मता धकार — 1947 का साक्षरता वाला तक

आइए पता लगाएँ

प्र.1 भारत म 1947 म लगभग 14 प्र तशत व्य क्त साक्षर थे, जसम लगभग 8 प्र तशत म हलाएँ थ । कुछ लोग के
अनुसार केवल साक्षर व्य क्तय को मता धकार दया जाना चा हए। अपने समूह म चचा कर क सं वधान-
नमाताओं ने स्वतंत्रता प्रा प्त के साथ ही सावभौ मक मता धकार दे ने का नश्चय क्य कया।

क्य क साक्षरता क कसौट नए गणतंत्र को सीधे उसी छोटे वग के हाथ स प दे ती जसे औप नवे शक शासन पहले ही
वशेषा धकार दे चुका था — और सौ म से लगभग 86 भारतीय तथा सौ म से 92 म हलाएँ पूरी तरह मूक रह जात ।
सं वधान नमाताओं ने यही दे खा था — स्वतंत्रता से पहले लगभग 13 प्र तशत भारतीय को ही मत दे ने का अ धकार था और

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मता धकार सावभौ मक नह था। सावभौ मक मता धकार उसी से जान-बूझकर कया गया व े द था।
उन्ह ने जन कारण पर वचार कया होगा, बल के क्रम म —

1. कम साक्षरता औप नवे शक शासन का प रणाम थी, जनता का दोष नह । जस अभाव को औप नवे शक राज्य ने उत्पन्न
कया, उसी के लए भारतीय को दं डत करना दोहरा अन्याय होता।
2. नरक्षर होना और नणय न कर पाना एक बात नह है। कसान जानता है क नहर क मरम्मत हुई या नह , राशन गाँव तक
पहुँचा या नह , व ालय म अध्यापक है या नह । मत इसी जानकारी को दज करता है।
3. जन्ह प्र त न धत्व क सबसे अ धक आवश्यकता थी, वही बाहर रह जाते। नधन, म हलाएँ और पी ढ़य से शक्षा से वं चत
समुदाय — इन्ह क समस्याओं को वधा यका म सुना जाना सबसे आवश्यक था।
4. कोई भी कसौट आगे बढ़ाई जा सकती है। एक बार साक्षरता को छलनी मान लया, तो कोई संप त्त जोड़ दे गा, कोई आय,
कोई शक्षा — और मतदाता-समूह सकुड़ता चला जाएगा। एक स्पष्ट, सावभौ मक नयम यह ार बंद कर दे ता है।
5. वैधता। सात म से एक वयस्क ारा चुनी गई सरकार यह दावा नह कर सकती थी क वह पूरे राष्ट्र क ओर से बोलती है, और
नए सं वधान को सबक स्वीकृ त चा हए थी।
6. वश्वास को संस्थापक नणय बनाना। अध्याय के आरंभ म उद्धत अल्लाद कृष्णास्वामी अय्यर ने इसे इस प्रकार कहा —
“आम व्य क्त पर अपार वश्वास प्रकट करते हुए... वयस्क मता धकार का सद्धांत स्वीकार कया।”

यह प्रयोग सफल क्य हुआ: प्रणाली मतदाता को जैसा वह था, वैसा मानकर बनाई गई — कसी आदश मतदाता
को मानकर नह । प्रत्या शय को चुनाव चह्न दए गए, ता क नाम न पढ़ पाने वाला मतदाता भी दल पहचान सके;
मतदान गुप्त रखा गया; मतदान अ धकारी सहायता के लए उप स्थत रहे। पहले अ धकार दया गया, फर उसे
प्रयोग-योग्य बनाने के लए तंत्र खड़ा कया गया — इसका उल्टा नह ।

क्या आप जानते ह? भारत ने म हलाओं को भी आरंभ से ही मता धकार दया, जब क अनेक पुराने लोकतंत्र म
ऐसा नह था। स्वट् ज़रलड म म हलाओं को मत दे ने का अ धकार 1971 म मला — भारतीय म हलाओं के मतदान
आरंभ करने के बीस वष से भी अ धक बाद।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 120
चत्र 5.4 — लोकतंत्र म सावभौ मक मता धकार का महत्व

प्र.1 सावभौ मक मता धकार के महत्वपूण होने के कई कारण ह। इनम से कुछ को नीचे दए गए मानस-मान चत्र म
दशाया गया है। अपने दो कारण रक्त मंजूषा म लख।

पहले वह प ढ़ए जो मानस-मान चत्र ( चत्र 5.4, पृष्ठ 120) पहले से दे ता है, क्य क आपके दो कारण इनक पुनरावृ त्त नह होने
चा हए। कद्र म “सावभौ मक वयस्क मता धकार क्य ?” के चार ओर पुस्तक पाँच शाखाएँ छापती है —

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मानस-मान चत्र क शाखा पुस्तक बाहर के गोले म क्या जोड़ती है

प्रत्येक व्य क्त समान है जाित, पंथ, िलंग , िशक्षा, धन-संपित्त के आधार पर भेद भाव नही ं

प्रत्येक व्य क्त के वचार महत्वपूण ह रा के भिवष्य के िनध रण में सभी भाग ले सकते है ं

नवा चत प्र त न ध नवाचक के प्र त चुनाव में लोग इन्हे ं हरा सकते है ं
उत्तरदायी ह

अपना भ वष्य नधा रत करने क श क्त लोग िनिश्चत करते है ं िक वे कै सा भिवष्य चाहते है ं और उनका पितिनिधत्व उत्तम ढं ग से कौन
कर सकता है

नाग रक सहभा गता म वृ द्ध लोग अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में भाग ले ते है ं

रक्त मंजूषाओं के लए अपने दो कारण — प्रत्येक ऐसा कारण हो जो सबके मतदान करने से नकलता हो, केवल मतदान से नह
—

आपक मंजूषा कारण, एक पं क्त म यह यहाँ क्य बैठता है

सत्ता का शां तपूण सत्ता बल से नही ं, मत िगनकर बदलती है जब पत्येक वयस्क का मतपेटी में िहस्सा है, तब हारने वाले पक्ष के
हस्तांतरण पास लौटने का वैध माग — अगला चन
ु ाव — रहता है, लड़ने का
कारण नही ं

नी तयाँ सबके लए जो दल िनधनों, मिहलाओं या िकसी छोटे जब िकसी समूह का नाम सूची से काटा नही ं जा सकता, तब िकसी
बनानी पड़ती ह समुद ाय की उपेक्षा करे ग ा, उनके मत खो समूह की उपेक्षा भी सुर िक्षत नही ं रहती
दे ग ा

अन्य उ चत कारण — अपनेपन क भावना बढ़ती है, क्य क मत दे ने वाले नाग रक को दे श अपना लगता है; अल्पसंख्यक क
रक्षा होती है, क्य क केवल संख्या यह तय नह करती क कौन भाग ले सकता है; और नाग रक प्र श क्षत होते ह, क्य क मत दे ने
के लए यह जानना पड़ता है क प्रत्याशी वास्तव म क्या कहते ह।

संकेत: मानस-मान चत्र क अ मंजूषा छोट होती है — चार-पाँच शब्द — और व्याख्या बाहर के गोले म रहती
है, ठ क जैसे पुस्तक ने कया है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 121

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बाधाएँ पार करना, भागीदारी म सक्षम बनाना — सावभौ मक मता धकार सु न श्चत करना

आइए पता लगाएँ

प्र.1 समूह म चचा कर क इस प्रकार के उपाय लोकतंत्र म क्या भू मका नभाते ह? क्या इन उपाय से लाभा न्वत हुए
कसी व्य क्त को आप जानते ह? इन उपाय से मतदाताओं क भागीदारी कैसे बढ़ सकती है? तकनीक इसम
कैसे सहायक हो सकती है?

इनक भू मका है — मता धकार होने और उसका प्रयोग कर पाने के बीच क दूरी मटाना। कागज पर लखा सावभौ मक
मता धकार उस 95 वष के मतदाता के लए कुछ नह है जो तीन कलोमीटर दूर मतदान कद्र तक नह जा सकता, या उस दृ ष्टबा धत
मतदाता के लए जो मतपत्र पढ़ नह सकता, या उस व्य क्त के लए जसक प हया कुस के सामने सी ढ़याँ ह। अध्याय म गनाए
गए उपाय अ धकार को प्रयोग-योग्य अ धकार म बदलते ह।
भारत नवाचन आयोग ने वास्तव म क्या कया (पृष्ठ 121, और पृष्ठ 122 पर चत्र 5.6) —

नवाचन अ धकारी दूर-दूर तक जाते ह ता क प्रत्येक नाग रक अपने लोकतां त्रक अ धकार का उपयोग कर पाए — चत्र 5.6
क पं क्त के अनुसार केवल एक म हला मतदाता के लए मतदान कद्र तक क व्यवस्था क गई।
वष 2024 म पहली बार वृद्ध और दव्यांग व्य क्तय के लए घर से ही मतदान करने का वकल्प दया गया।
मतदाताओं के एक वशेष वग के लए डाक से मतदान।
ेल-सक्षम मतपत्र तथा प हया कु सय और रप्स के लए ऐप-आधा रत अनुरोध।

यह केवल सु वधा नह , लोकतंत्र का प्रश्न क्य है: य द वृद्ध, दव्यांग और दूरदराज़ के लोग दूसर क तुलना म
कम मत दगे, तो वधा यका उनक बात कम सुनेगी — और नी तयाँ धीरे-धीरे उन्ह वग क ओर झुक जाएँगी जो
मतदान करते ह। सुगमता के उपाय मतदाता-समूह को जनता का सच्चा चत्र बनाए रखते ह। यह वही सद्धांत है जो
सावभौ मक मता धकार का है, व्यवहार म उतारा हुआ।

आपके पड़ोस म भागीदारी कैसे बढ़ सकती है — और यह भाग सवक्षण से जानने का है, अनुमान से नह —

रप, बैठने क व्यवस्था और छायादार पं क्त से अ त वृद्ध मतदाता क लंबी प्रतीक्षा सह्य हो जाती है।
घर से मतदान शय्याग्रस्त मतदाता क सबसे बड़ी बाधा — यात्रा — हटा दे ता है।
भूतल पर मतदान कद्र और सहायता के लए स्वयंसेवक होने पर प रवार को दादा-दाद को ले जाने और काम पर जाने म से एक
नह चुनना पड़ता।
केवल यह जान लेना क ये सु वधाएँ ह, बहुत बड़ा अंतर लाता है — अनेक लोग इस लए मत नह दे ते क्य क वे मान लेते ह क
वे दे ही नह सकते।

तकनीक कैसे सहायक हो सकती है: प हया कुस या रप के लए ऐप-आधा रत अनुरोध; मतदान क त थ, कद्र और पं क्त क
स्थ त के वषय म एस.एम.एस. और ऐप से सूचना; मतदाता सूची म नाम क ऑनलाइन जाँच और सुधार; ेल तथा श्रव्य रूप म
जानकारी; और स्वयं ई.वी.एम.–वी.वी.पी.ए.ट ., जससे मतदाता लंबा मतपत्र पढ़े बना ही अपने मत क पु ष्ट कर लेता है।

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

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समूह-काय क व ध: दो-तीन बुजुग पड़ो सय से पू छए — (क) क्या उन्ह ने पछली बार मत दया, (ख) य द नह ,
तो क्या बाधा थी, और (ग) क्या उन्ह घर से मतदान या डाक से मतदान के वषय म पता था। उत्तरem
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g,l2024 म घर से मतदान
क एक छोट
. co नमूना उत्तर: “मेरी दाद , जो 84 वष क ह और दूर तक चल नह सकत
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e,mक्य क एक अ धकारी उनका अनुरोध दज करने आए थे। इससे पहले उन्ह ने 2014 के बाद मत नह दया
ता लका बनाइए।

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gl अपना उत्तर वास्त वक बातचीत से ल खए — ग ढ़ए मत।
कर सक
aथा।”

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प्र.2 य द आपके पास इंटरनेट है तो ई.सी.आई. क वेबसाइट — (https://www.eci.gov.in/persons-with-
disabilities) दे ख। ई.सी.आई. ारा दव्यांग के मता धकार म सहायता के जो व भन्न उपाए कए गए ह, उन्ह

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पढ़ और उनक पहचान कर।
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यह खोज-काय है, इस लए पहले व ध, फर यह क पूण उत्तर म क्या-क्या होना चा हए।

gवl ध: पृष्ठ खो लए और चार प्रकार के उपाय को ढूँ ढ़ते हुए प ढ़ए — (i) मतदान कद्र तक पहुँचना, (ii) कद्र के भीतर जाना, (iii)
a मत डालना, और (iv) मतदान से पहले जानकारी। प्रत्येक उपाय अपने शब्द म ल खए और साथ म एक पं क्त यह भी क वह
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कौन-सी बाधा हटाता है। यही अं तम स्तंभ सूची को उत्तर बनाता है।

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बाधा का
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अध्याय स्वयं जो उपाय बताता है
l a वेबसाइट पर क्या दे खना है
प्रकार a

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कद्र तक ं ों और वृद्धों के िलए घर से मतदान (2024 से ); िवशेष
िदव्याग मतदान कें द तक िन:शुल्क वाहन; पाथिमकता से पवेश,

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पहुँचना वग के िलए डाक से मतदान; अिधकािरयों का दू र -दू र तक तािक िद व्यांग मतदाता को लंबी पंिक्त में खड़ा न रहना पड़े

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जाना

eकmद्र म प्रवेश a
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पिहया कु स और रै ंप्स के िलए ऐप-आधािरत अनुर ोध पत्येक मतदान कें द पर रै ंप, भूतल पर कें द , सुग म शौचालय,

a सहायता के िलए स्वयंसे वक

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मत डालना
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बेल -सक्षम मतपत्र; वी.वी.पी.ए.टी. के साथ ई.वी.एम. ई.वी.एम . की मतपत्र इकाई पर बेल ; न माक कर सकने वाले

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मतदाता के िलए सहयोगी की व्यवस्था; सांके ितक भाषा में

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सहायता

जानकारी a
आयोग के अपने सुग म्यता पष्ठ और ऐप ं े ितक भाषा और उपशीषक वाले वीिडयो; वह ऐप िजससे
साक

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पहले से सहायता का अनुर ोध दज हो जाए

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आयोग इसे अपना कतव्य क्य मानता है: अनु
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े द 326 का अ धकार प्रत्येक वयस्क नाग रक का है। य द कोई

s e m दव्यांग नाग रक उसका प्रयोग नह कर पाता, तो चूक प्रणाली क है, उसक नह । इस लए बाधा हटाने क अपेक्षा
agla मतदाता से नह , आयोग से क जाती है। अध्याय क यह पं क्त इसी तक से नकली है क आयोग ने “प्रत्येक
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मतदाता क भागीदारी सु न त करने के लए अनेक उपाय कए ह”।
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य द इंटरनेट उपलब्ध न हो: तब भी अध्याय से अ ा उत्तर लखा जा सकता है। पुस्तक म गनाए पाँच उपाय (घर
से मतदान, डाक से मतदान, ेल-सक्षम मतपत्र, ऐप-आधा रत अनुरोध, प हया कु सयाँ एवं रप्स) ल खए और उसम
वह जो ड़ए जो आपने अपने नकट के मतदान कद्र पर स्वयं दे खा हो। बाद म अवसर मलने पर सूची को वेबसाइट से
मलाइए।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 123
बाधाएँ पार करना, भागीदारी म सक्षम बनाना — 2024 म मतदान प्र तशत

आइए पता लगाएँ

प्र.1 लगभग 34 प्र तशत मतदाताओं ने 2024 के चुनाव म मता धकार का प्रयोग नह कया। आपके वचार से ऐसा
क्य है? लोग अपने अ धकार का प्रयोग करने म कन- कन चुनौ तय का सामना करते ह? इन प्रश्न के उत्तर के
लए अपने प रवार और पड़ोस म बड़ के साथ एक लघु सवक्षण कर। सवक्षण के नष्कष का व ेषण कर और
सुझाव के साथ एक प्र तवेदन लख क प्रत्येक व्य क्त ारा अपने मत का उपयोग कैसे सु न श्चत कया जा
सकता है।

पहले संख्या दे खए। 2024 म लगभग 96.8 करोड़ मतदाता पात्र थे, इस लए 34 प्र तशत का मतदान न करना बताता है क
लगभग हर तीन म से एक पात्र भारतीय — करीब 32.9 करोड़ लोग — ने मत नह डाला। यह अनेक दे श क कुल जनसंख्या
से बड़ी संख्या है, इसी लए अध्याय इसे लोकतंत्र क स्थ त का गंभीर प्रश्न मानता है।

96.8 करोड़ का 34%

= 0.34 × 96.8 = 32.9 करोड़
→ लगभग 66 पितशत ने मत िदया — तीन में से लगभग दो

लोग मत क्य नह दे ते — कारण को वग म बाँ टए, क्य क उपाय अलग-अलग ह —

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कारण का प्रकार उदाहरण वास्तव म क्या काम करेगा

व्यावहा रक पवासी श्रिमक िजनका नाम सै क ड़ों िकलोमीटर दू र गाँव डाक से और घर से मतदान; सवेतन अवकाश
की सूची में है; मतदान का िदन कायिदवस है और िदहाड़ी का कड़ाई से पालन; जहाँ व्यिक्त वास्तव में
ृ ावस्था; कें द दू र
का नुक सान वास्तिवक है; बीमारी या वद्ध रहता है वही ं पंजीकरण

प्रशास नक मतदाता सूची में नाम नही ं या गलत; पहचान-पत्र नही ं; नगर सूची की ऑनलाइन जाँच और सुध ार ; घर -घर
बदलने पर िफर से पंजीकरण नही ं स त्यापन अिभयान

दृ कोण — अध्याय इसे “मेरे एक मत से क्या होगा”; “सब पत्याशी एक जैसे है”ं ; जाग रूकता अिभयान; कम अंतर से तय हुए
मतदाताओं क उदासीनता िवशेषकर शहरी मतदाता मतदान के िदन को अवकाश मान स्थानीय पिरणाम िदखाना; नोटा को घर बैठ ने
कहता है ले ते है ं के ईमानदार िवक ल्प के रूप में समझाना

जानकारी ितिथ, कें द या पत्यािशयों के िवषय में जानकारी न होना एस .एम .एस . और ऐप से सूचना; आयोग ारा
पत्यािशयों की जानकारी; िव ालय-
महािव ालय में जाग रूकता अिभयान

सवक्षण क रूपरेखा — एक व्यावहा रक योजना:

1. नमूना: अपने प रवार के अ त रक्त कम-से-कम दो घर के 10–15 वयस्क, जनम आयु का मश्रण हो (एक युवा, एक अधेड़
कामकाजी, एक वृद्ध) और म हलाएँ तथा पुरुष दोन । केवल आयु-वग और लग ल खए — नाम नह ।
2. प्रश्न, छोटे र खए: (i) क्या आपने पछले चुनाव म मत दया? (ii) य द नह , तो मुख्य कारण क्या था? (iii) आपका मतदान
कद्र कतनी दूर है? (iv) क्या मतदाता सूची म आपका नाम सही था? (v) कौन-सा एक प रवतन आपके लए मतदान सरल बना
दे ता?
3. व ेषण: कारण क गनती क जए और उन्ह क्रम द जए। मत दे ने वाल का प्र तशत नका लए और उसक तुलना लगभग
66 प्र तशत के राष्ट्रीय आँकड़े से क जए।
4. प्र तवेदन: एक पृष्ठ — व ध, प रणाम क छोट ता लका, तीन प्रमुख कारण, और तीन सुझाव जो आपके अपने आँकड़ से
नकले ह , कसी सामान्य सूची से नह ।

नमूना नष्कष (अपने वास्त वक उत्तर से स्वयं ल खए): “सवक्षण म स म्म लत 12 वयस्क म से 9 ने मत
दया। न दे ने वाले 3 म से 2 का कहना था क सूची म उनका नाम नह था और 1 राज्य से बाहर काम कर रहे थे।
सुझाव — मतदान से दो माह पहले हमारे मोहल्ले म मतदाता सूची सत्यापन श वर।”

‘सबको मत दे ना ही चा हए’ को नष्कष बनाते समय सावधानी: मत दे ना एक अ धकार है और भारत म मतदान
अ नवाय नह है। इस लए आपके सुझाव का ईमानदार लक्ष्य है — जो नाग रक मत दे ना चाहता है, उसके माग क
हर बाधा हटाना, और जसे इसका अथ नह दखता उसे समझाना — कसी को ववश करना नह । नोटा भी
इसी लए है — असंतुष्ट मतदाता अपना असंतोष प्रणाली से बाहर जाकर नह , प्रणाली के भीतर रहकर दज कर सके।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 125

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कक्षा प्र त न ध का चुनाव — कक्षा 8, सूय दय व ालय

आइए पता लगाएँ

प्र.1 इस प्रकरण म चुनावी प्र क्रया के सबसे महत्वपूण पक्ष क्या ह?

यह प्रकरण वास्त वक भारतीय चुनाव का लघु रूप है, और इसका प्रत्येक चरण भारत नवाचन आयोग के कसी न कसी
काय से मेल खाता है। यही मेल इस कहानी का उ े श्य है।

कक्षा म आम चुनाव म वही बात यह क्य महत्वपूण है

िन प िनव चन अिधकारी — सुश्री उषा, िजन्हे ं यह
ष् क्ष भारत िनव चन आयोग — एक स्वतंत्र जो व्य क्त मुकाबला करवा रहा है, वह
सुिनिश्चत करने के िलए िनयुक्त िकया गया िक पिक्रया संवैध ािनक िनकाय स्वयं मुकाबले म नह होना चा हए
िनष्पक्ष तथा पारदश हो और सभी िनयमों का पालन हो

खुल ी पित पध — अहमद, गरु मत और रिव, तीनों चुनाव
स् कोई भी पात्र नागिरक चन
ु ाव लड़ मतदाता के पास वास्त वक वकल्प
लड़ सके सकता है; दलों का पंजीकरण आयोग होना चा हए
करता है

मु ों पर चुनाव-अिभयान — स्वच्छता, सहपाठी-अनुिशक्षण, घोषणा-पत्र और पचार -भाषण, आदश मतदाता घो षत वचार पर नणय ल,
कलाओं को अिधक स्थान आचार संिहता की सीमा में प्रलोभन पर नह

िनयम पहले ही सबको समझाए गए आयोग कायक्रम और िनयम पकािशत बाद म कोई यह नह कह सकता क
करता है; संिहता सब दलों पर समान उसे पता नह था
रूप से लागू होती है

गु त मतदान — कक्षा के एक कोने में स्थािपत मतदान
प् मतदान कें द , परदे वाला मतदान क क्ष कोई यह न जान पाए क कसने कसे
कें द मत दया — इस लए कसी पर दबाव
नह डाला जा सकता

सुगमता — नेहा के िलए बेल िलिप में मतपत्र बेल -स क्षम मतपत्र , रै ंप, घर से मतदान य द मतदाता अ धकार का प्रयोग ही न
कर सके तो अ धकार व्यथ है

सीलबंद मतपेटी, जो गणना तक बंद रखी गई सीलबंद ई.वी.एम . जो पहरे में स्टांग मतदान और गणना के बीच मत न
रूम में रखी जाती है ं जोड़े जा सक, न हटाए जा सक

सा ी के सम गणना — समीपस्थ कक्षा से सुश्री शीबा
क्ष क्ष पत्यािशयों के अिभकत ओं और पेक्षकों पारद शता; प रणाम पर वश्वास
के सम क्ष मतगणना इस लए होता है क्य क उसे दे खा गया

अवैध मत अलग रखे गए और पिरणाम खुले रूप में घोिषत अस्वीकृ त मत दज होते है;ं िनव चन नयम दखाई दे ते हुए और सब पर
अिधकारी पिरणाम सावजिनक रूप से समान रूप से लागू होते ह
घोिषत करता है

हारने वालों ने पिरणाम वीकार िकया — अहमद और रिव
स् परािजत दल जनादे श स्वीकार कर यही सत्ता के शां तपूण हस्तांतरण को
ने ग रु मत को बधाई दी और समथन िदया िवपक्ष में बैठते है ं संभव बनाता है

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अं तम पं क्त सबसे महत्वपूण क्य है: शेष सब कुछ अ धकारी व्यव स्थत कर सकते ह। हारने वाला पक्ष गणना
स्वीकार करेगा या नह , यह कोई व्यव स्थत नह कर सकता। चुनाव सत्ता के झगड़े को बल के बना तभी सुलझाता है
जब हारने वाले प रणाम से बँधना स्वीकार कर — और वे तभी स्वीकार करगे जब प्र क्रया दखाई दे ते हुए नष्पक्ष
रही हो। इसी लए गोपनीयता, सीलबंद पेट और साक्षी केवल औपचा रकता नह ह — वही इस स्वीकृ त को अ जत
करते ह।

प्र.2 गुप्त मतपत्र का होना क्य महत्वपूण था?

क्य क यह मत को मतदाता से अलग कर दे ता है, और इस प्रकार कसी को इस बात का पुरस्कार या दं ड दे ने का कोई
रास्ता नह बचता क उसने कसे मत दया। अध्याय इसे ठ क इन्ह शब्द म कहता है — “कोई यह न जान पाए क कसने
अपना मत कसे दया। इससे यह प्र क्रया गोपनीय और नष्पक्ष बनी रहती है।”
सो चए क गोपनीयता न होती तो कक्षा म ही क्या होता —

जस व ाथ का घ नष्ठ मत्र चुनाव लड़ रहा है, उसके लए कसी और को मत दे ना क ठन हो जाता, क्य क मत्र चह्न दे ख
लेता।
कोई लोक प्रय या बलवान प्रत्याशी सहपा ठय पर दबाव डाल सकता था और बाद म जाँच सकता था क कसने कहा माना।
जन्ह ने हारने वाले को मत दया, उन्ह बाद म चढ़ाया जा सकता था या अलग कया जा सकता था।
तब प रणाम यह मापता क कससे सबसे अ धक भय या दबाव था, न क कसके वचार सबसे अ े थे।

यही तक आम चुनाव पर भी लागू होता है। जस मत का पता लगाया जा सके, वह मत खरीदा जा सकता है — भुगतान करके यह
जाँचा जा सकता है क सौदा पूरा हुआ या नह — या नयोक्ता, भूस्वामी अथवा कसी दबंग ारा दबाव से लया जा सकता है।
इसी लए मतदान कद्र म परदे वाला कक्ष होता है, ई.वी.एम. केवल प्रत्येक प्रत्याशी का कुल दज करती है — यह कभी नह क बटन
कसने दबाया — और वी.वी.पी.ए.ट . क छपी पच मतदाता को द नह जाती, सीलबंद पेट म गरती है।

गोपनीयता और पारद शता वरोधी नह ह: चुनाव गुप्त है; प्र क्रया पूरी तरह खुली है। प्रत्याशी नयम जानते थे,
गणना एक साक्षी के सामने हुई, और प रणाम सबके सामने घो षत हुए। गोपनीयता मतदाता क रक्षा करती है;
पारद शता प रणाम क । चुनाव को दोन चा हए।

क्या आप जानते ह? गोपनीयता हारने वाले के समथक क भी रक्षा करती है। चूँ क यह सद्ध नह कया जा सकता
क कसने वजेता के वरुद्ध मत दया, इस लए वजेता के पास कारवाई करने के लए कोई सूची ही नह होती —
यही एक कारण है क परा जत पक्ष न त होकर प रणाम स्वीकार कर लेता है और, जैसा अहमद और र व ने कया,
समथन भी दे ता है।

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अपने प्रत्याशी का चयन करते समय व ा थय ने कन- कन बात पर वचार कया होगा?
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प्र.3

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a gl व ा थय ने अलग-अलग बात तौली ह गी, और प्रकरण म इतना ववरण है क इनम से कई का अनुमान
अलग-अलग
लगाया जा सके। तीन प्रत्या शय के कायक्रम वास्तव म भन्न थे —

. comकसे सबसे अ धक आक षत करता ag
प्रत्याशी क्या आश्वासन दया
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अहमद
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कक्षा के कमरों और खेल के मैद ान की स्वच्छता वे िव ाथ जो मैद ान में खेल ते है,ं या िजन्हे ं अस्वच्छ क क्षा खटकती है
— सबको िदखाई दे ने वाला पितिदन का लाभ

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गुरमत सभी सहपािठयों का बेहतर ढं ग से सीखना — सहपाठी- वे िव ाथ जो िकसी िवषय में किठनाई अनुभव करते है,ं और वे भी जो

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अनुिशक्षण और पारस्पिरक सहायता की पणाली
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िसखाने को तैयार है ं — यह लगभग पूर ी क क्षा को कु छ दे ता है

m समय-सारणी में कलाओं — संगीत, नाटक, दृ श्य कला a
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रव कलाओं में रुिच रखने वाले िव ाथ ; आकषण गहरा है िकं तु समूह

a g — को नई पाठ चय के अनुरूप अिधक महत्व छोटा

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आश्वासन के अ त रक्त व ा थय ने उ चत ही इन बात पर भी वचार कया होगा —
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s e m के भीतर सहपाठ -अनु शक्षण चला सकता है; समय-सारणी बदलने के
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क्या यह वादा व्यावहा रक है? कक्षा प्र त न ध कक्षा

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लए व ालय क सहम त चा हए।
इससे कतने सहपा ठय को लाभ होगा? गुरमत का वचार सीधे पूरी कक्षा तक पहुँचता था — संभवतः यह भी एक कारण है
क वह जीत ।
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क्या यह व्य क्त यह काम कर पाएगा? कक्षा प्र त न ध को शक्षक के साथ बैठक म कक्षा का प्र त न धत्व करना है, समारोह

coकाmआत्म वश्वास। g l as
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आयो जत करने ह और कड़ी का काम करना है — इस लए वचार जतना ही महत्वपूण है वश्वसनीयता और शक्षक से बात
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चुनाव-अ भयान का ढं ग। गुरमत ने सूचना-पट्ट का उपयोग कया और सहपा ठय से बातचीत भी क — दो-तरफा तरीका।
अहमद ने पोस्टर लगाए; र व ने संगीत प्रस्तु त द , जसम उनक प्र तभा तो दखी कतु मुख्यतः उनक अपनी रु च ही सामने

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comभी मत देते ह जन्ह वे जानते और पसंद करते ह। l a
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मत्रता और प रचय — सच यही है क व ाथ .उन्ह
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इन्ह अलग करके दे खना क्य a gl है: पहली तीन बात कक्षा के हत क ह; अं तम बात मतदाता क अपनी
उपयोगी
सु वधा क । वचारशील मतदाता — व ालय म हो या आम चुनाव म — स्वयं से पूछता है क इन दोन म से कौन

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उसका हाथ चला रहा है। अध्याय का अं तम खंड यही कहता है क आगे का माग मतदाताओं को “ वचारशील और
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उत्तरदायी चुनाव करने के लए” आवश्यक जानकारी से सशक्त करने म है।

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प्र.4 क्या आप सोचते ह क गुरमत के कक्षा प्र त न ध नवा चत होने के बाद व ा थय के कोई उत्तरदा यत्व ह? य द
हाँ, तो वे क्या ह?

हाँ — और यही वह उत्तरदा यत्व है जसे अ धकतर लोग भूल जाते ह। मतदान से नाग रक का काम आरंभ होता है, समाप्त
नह । गुरमत अब कक्षा के प्र त उत्तरदायी ह; कतु यह उत्तरदा यत्व तभी टकेगा जब कक्षा वास्तव म उनसे हसाब माँगे।
व ा थय का गुरमत के प्र त उत्तरदा यत्व:

प रणाम स्वीकार कर सहयोग करना — उन व ा थय को भी जन्ह ने अहमद या र व को मत दया, जैसा स्वयं अहमद और
र व ने कया, बधाई दे कर और समथन दे कर।
उनके वाद म भाग लेना। सहपाठ -अनु शक्षण तभी चलेगा जब सहपाठ पढ़ाने और पढ़ने, दोन के लए आएँ। प्र त न ध
अकेले कुछ नह कर सकता।
उन्ह सही जानकारी दे ना, ता क वे शक्षक के साथ बैठक म कक्षा का सच्चा प्र त न धत्व कर सक।

व ा थय का स्वयं अपने प्र त उत्तरदा यत्व:

वादे क प्रग त दे खना — एक माह बाद पूछना क सहपाठ -अनु शक्षण क प्रणाली वास्तव म आरंभ हुई या नह ।
समस्याएँ उन्ह के सामने रखना, आपस म शकायत करने के बजाय — व ा थय और व ालय के अ धका रय के बीच
‘कड़ी’ का अथ यही है।
न्यायपूवक मूल्यांकन करना — उन्ह बात पर जो एक कक्षा प्र त न ध के वश म ह — और अगले चुनाव म इसे स्मरण रखना।

यह कक्षा से बाहर क्य महत्वपूण है: पृष्ठ 120 का मानस-मान चत्र लखता है — “ नवा चत प्र त न ध
नवाचक के प्र त उत्तरदायी ह”, और बाहर का गोला बताता है क कैसे — “चुनाव म लोग इन्ह हरा सकते ह।”
कतु यह दं ड तभी काम करता है जब मतदाताओं ने दे खा हो क प्र त न ध ने कया क्या। अध्याय का अं तम खंड दे श
के वषय म यही कहता है — “एक जागरूक और सतक मतदाता लोकतां त्रक प्रणाली क सबसे श क्तशाली सुरक्षा
है।” पाँच वष म एक बार मतदान कद्र म बताए पाँच मनट पयाप्त नह ; बीच के वष क सतकता ही उन पाँच मनट
को श क्त दे ती है।

प्र.5 सु ी उषा ने क्या भू मका नभाई? यह क्य महत्वपूण थी?

सु ी उषा नवाचन अ धकारी थ — उन्ह यह सु न त करने के लए नयुक्त कया गया था क “यह प्र क्रया नष्पक्ष तथा
पारदश हो और सभी आवश्यक नयम का पालन कया जाए।” व ालय म वे वही ह जो दे श म भारत नवाचन आयोग है।
उन्ह ने क्या-क्या कया, क्रम से:

1. कक्षा को नयम समझाए — प्रत्येक व ाथ को बताया क गुप्त मतदान प्र क्रया क्या होती है।
2. मतदान कद्र स्था पत कया — कक्षा के एक कोने म, ता क मत गोपनीय रूप से डाले जा सक।
3. सुगमता सु न श्चत क — नेहा के लए ेल ल प म मतपत्र क व्यवस्था क ।
4. मतदान करवाया और प्रत्येक व ाथ को तीन प्रत्या शय के नाम वाला मतपत्र दया।
5. मतपत्र सुर क्षत रखे — उन्ह मतपेट म एकत्र कर गणना से पहले तक सीलबंद कर दया।
6. स्वतंत्र साक्षी बुलाई — गणना प्र क्रया दे खने के लए समीपस्थ कक्षा से सुश्री शीबा को।

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7. गणना पर नयम लागू कए — जन मतपत्र पर चह्न अं कत नह था उन्ह अवैध घो षत कया — और प रणाम घो षत कए।

यह भू मका क्य महत्वपूण थी — तीन अलग कारण:
1. नष्पक्षता। वे स्वयं प्रत्याशी नह थ और कसी प रणाम से उन्ह कुछ मलना नह था, इस लए गणना पर कोई
संदेह नह कर सकता था।
2. समान व्यवहार। तीन प्रत्या शय और प्रत्येक मतदाता पर वही नयम लागू हुए, जसम यह नयम भी क बना
चह्न वाले मतपत्र अवैध ह।
3. प रणाम पर वश्वास। चूँ क एक नष्पक्ष अ धकारी ने चुनाव करवाया और एक बाहरी व्य क्त ने गणना दे खी,
इस लए अहमद और र व हार स्वीकार कर सके — यह माने बना क उनके साथ छल हुआ। उनके बना कोई भी
हारने वाला प्रत्याशी यह कह सकता था क पेट से छे ड़छाड़ हुई, और कक्षा के पास इसे गलत सद्ध करने का कोई
उपाय न होता।

तुलना क जए: इसी लए अध्याय बल दे ता है क भारत नवाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधा नक नकाय है। य द
चुनाव सत्ता म बैठा दल कराता, तो हर प रणाम पर यही संदेह होता — और यही कारण है क आदश आचार सं हता
सरकार म बैठे दल को सरकारी संसाधन चुनावी लाभ के लए उपयोग करने से रोकती है।

प्र.6 सु ी उषा ारा नेहा के लए ेल मतपत्र क व्यवस्था करना क्य महत्वपूण था?

क्य क इसके बना नेहा के पास मत दे ने का अ धकार तो होता, पर उसे प्रयोग करने का कोई साधन नह — और इससे भी
बुरा यह क उसे अपना चुनाव कसी और को बताना पड़ता, अथात् वह गोपनीयता खो दे ती जो शेष सब व ा थय को
मली थी।
ेल मतपत्र ने एक साथ तीन बात क रक्षा क —

समानता। सावभौ मक मता धकार का अथ है क प्रत्येक मतदाता का समान महत्व है। य द कसी एक व ाथ को वही मत
डालने के लए भन्न रूप चा हए, तो वह रूप दे ना उपकार नह — समानता क आवश्यकता है।
गोपनीयता। य द नेहा को नाम पढ़वाने और चह्न लगवाने के लए कसी सहपाठ क सहायता लेनी पड़ती, तो वह सहपाठ
उसका चुनाव जान लेता और उसे प्रभा वत कर सकता था या बता सकता था। ेल मतपत्र ने उसे भी सबक तरह गुप्त रूप से
मत दे ने दया।
ग रमा और भागीदारी। जस मतदाता को हर बार सहायता माँगनी पड़े, वह धीरे-धीरे भाग लेना छोड़ दे ता है। सुगम मतपत्र यह
कहता है क वह इस प्र क्रया म अपनी शत पर स म्म लत है।

यह छोट बात क्य नह है: यह कक्षा म उसी बात का रूप है जो आयोग दे श भर म करता है। अध्याय ेल-सक्षम
मतपत्र, प हया कु सय और रप्स के लए ऐप-आधा रत अनुरोध, 2024 से वृद्ध और दव्यांग के लए घर से
मतदान, और केवल एक म हला मतदाता के लए बनाए गए मतदान कद्र ( चत्र 5.6) — सबका उल्लेख करता है।
इन सबके पीछे वही सद्धांत है जो सुश्री उषा ने लागू कया — प्रणाली को झुककर मतदाता तक पहुँचना होगा,
क्य क अ धकार मतदाता का है और उसे प्रयोग-योग्य बनाने का दा यत्व प्रणाली का।

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संकेत: ध्यान द जए क सुश्री उषा ने यह व्यवस्था पहले से क , तब नह जब नेहा मतदान कद्र पर पहुँची। पहले से
क गई सुगमता समावेशन है; मतदान के दन जल्दबाजी म क गई सुगमता प्रायः दे र हो चुक होती है।

प्र.7 य द कक्षा के अनेक व ा थय ने कसी भी वकल्प पर चह्न अं कत न कया होता तो क्या होता?

चुनाव तब भी वजेता दे ता, कतु बहुत कमजोर वजेता — जसे कक्षा के थोड़े-से भाग ने चुना हो और शेष ने कुछ कहा ही
न हो। प्रकरण के अपने अंक से गणना क जए।

डाले गए मत = 33

िजन मतपत्रों पर िचह्न नही ं था → अवैध घोिषत = 3
अहमद 8 + गुरमत 12 + रिव 10 = 30 वैध मत (33 − 3 = 30 ✔)
िवजेत ा — गुरमत, 33 में से 12 मत → लगभग 36 पितशत

अब मान ली जए 33 म से 20 व ा थय ने मतपत्र खाली छोड़ दया होता। तब केवल 13 वैध मत बचते और कोई प्रत्याशी 5 या 6
मत से जीत जाता — कक्षा के पाँचव भाग से भी कम। इसके चार प रणाम होते —

वजेता का जनादे श छोटा हो जाता। जस प्र त न ध को कक्षा के पाँचव भाग का समथन हो, वह “कक्षा क ओर से” शक्षक
से बात करते समय बहुत कम अ धकार रखती है।
छोटे समूह प रणाम तय करने लगते। वैध मत जतने कम ह गे, कुछ मत्र का समूह प रणाम उतनी ही आसानी से पलट
सकता है।
कक्षा अपनी ही आवाज़ खो दे ती। जन्ह ने चह्न नह लगाया, उन्ह ने वजेता को रोका नह — केवल स्वयं को यह तय करने
से रोका क वजेता कौन हो।
कतु इससे संकेत अवश्य जाता। बड़ी संख्या म खाली मतपत्र सबको बता दे ते क व ाथ तीन प्रत्या शय म से कसी से
संतुष्ट नह थे।

यह सीधे नोटा तक ले जाता है: इसी पृष्ठ क ‘इसे अनदे खा न कर’ मंजूषा पूछती है क जो व ाथ अहमद, गुरमत
या र व — कसी को भी मत नह दे ना चाहता, उसके पास क्या वकल्प हो। भारत स हत कुछ दे श नोटा — नन
ऑफ द एबव, अथात उपरोक्त म से कोई नह का अ त रक्त वकल्प दे ते ह। इससे मतदाता सभी प्रत्या शय को
औपचा रक रूप से अस्वीकृत कर सकता है। इससे प रणाम म प रवतन नह होता, कतु खाली मतपत्र के
वपरीत यह दज होता है — यह संदेश जाता है क मतदाता बेहतर वकल्प चाहते ह। मौन और सोच-समझकर क
गई, गनी जाने वाली अस्वीकृ त म यही अंतर है — नोटा, पुस्तक के शब्द म, “लोकतंत्र म एक मौन कतु
श क्तशाली साधन है।”

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ध्यान द जए: इस पाठ्यपुस्तक के हद संस्करण म 3 मतपत्र को अवैध बताया गया है, जो 8 + 12 + 10 = 30
और कुल 33 मत से पूरी तरह मेल खाता है। अंग्रेज़ी संस्करण म “एक मतपत्र” लखा है, जो गणना से मेल नह
खाता। सही गणना है — 33 मत डाले गए, 3 अवैध, 30 वैध।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 128
नवाचन प्र क्रया का प्रबंधन

आइए पता लगाएँ

प्र.1 अपने व ालय या आस-पास उन शक्षक क पहचान कर जन्ह ने चुनाव काय ( ूट ) कया हो। अपनी कक्षा म
उन्ह अपने अनुभव साझा करने के लए आमं त्रत कर।

यह क्षेत्र-काय है। इसे कैसे करना है और उसका अ ा ववरण कैसा होगा — दोन नीचे दए ह।
शक्षक को ही क्य ? क्य क चत्र 5.12 म छपा पैमाना ऐसा है — 2024 म लगभग 96.8 करोड़ मतदाता, 543 संसद य
नवाचन क्षेत्र और 10 लाख से अ धक मतदान कद्र। प्रत्येक मतदान कद्र पर एक पीठासीन अ धकारी और तीन-चार मतदान
अ धकारी चा हए। अध्याय स्पष्ट कहता है — “इस संपूण प्र क्रया म सहायता के लए शक्षक स हत अनेक लोग को नयुक्त कया
जाता है।” सरकारी व ालय के शक्षक इस लए लगाए जाते ह क्य क वे श क्षत ह, दे श के हर भाग म उप स्थत ह और सरकारी
कमचारी होने के नाते व धपूवक तैनात कए जा सकते ह।

10,00,000 से अिधक मतदान कें द

× पित कें द लगभग 4 अिधकारी

→ एक ही आम चुन ाव के िलए लगभग 40 लाख मतदान कम
कैसे कर:

1. पहचान: अपनी कक्षा-अध्या पका या प्रधानाचाय से पू छए क कन शक्षक ने चुनाव काय कया है; प रवार और पड़ोस म भी
पू छए, क्य क बक कमचारी तथा अन्य सरकारी कमचारी भी लगाए जाते ह।
2. अनुम त अपने शक्षक के माध्यम से ली जए और एक सु वधाजनक कालांश तय क जए।
3. प्रश्न पहले से तैयार क जए — बना तैयारी क बातचीत अ त थ का समय व्यथ करती है।
4. टप्पणी ली जए और एक सं क्षप्त प्र तवेदन कक्षा के सूचना-पट्ट के लए ल खए।

पूछने योग्य प्रश्न:

आपका काय क्या था — प्रथम, तीय या तृतीय मतदान अ धकारी, अथवा पीठासीन अ धकारी?
आपको कौन-सा प्र शक्षण मला और मतदान से कतने दन पहले?
आप मतदान कद्र तक कैसे पहुँचे, और ई.वी.एम. कैसे ले जाई गईं तथा रात म कहाँ रखी गईं?
प्रत्येक मतदाता क कौन-कौन-सी जाँच आपने क , और य द कसी का नाम सूची म न होता तो क्या करते?
मतदान समाप्त होने पर क्या हुआ — मशीन कैसे सीलबंद क गईं?
सबसे क ठन क्या था? कस बात ने आपको च काया? क्या आपने सुगमता के उपाय का उपयोग होते दे खा?

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर (वास्त वक बातचीत से अपना ल खए): “हमारे वज्ञान शक्षक श्री रमेश कुमार 2024 म एक
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m a s emशाम को
glऔर कहते ह क सबसे
ग्रामीण मतदान कद्र पर तीय मतदान अ धकारी थे। उन्ह दो बार प्र शक्षण मला, वे एक दन पहले
. co के साथ कद्र पहुँचे, ग्यारह घंटे म लगभग 700 अंगु लय पर स्याही लगाई,
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emउन दो मतदाताओं को समझाना जनके नाम सूची से हट गए थे — इसी लए अब वे सबसे कहते ह क
सीलबंद ई.वी.एम.
क ठनsथा
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aसूgचl ी पहले ही जाँच ल।”

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यह क्रयाकलाप अध्याय म क्य है: यह ‘प्रणाली’ जैसे अमूत शब्द को मूत बना दे ता है। जस व ाथ ने कसी

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शक्षक से शाम छह बजे ई.वी.एम. सील करने का वणन सुना है, वह कसी भी रेखा चत्र से कह बेहतर समझता है
क इतने बड़े चुनाव के लए मुख्य नवाचन आयुक्त से नवाचन अ धकारी तक क श्रृंखला क्य चा हए — और

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अध्याय इसे “एक वशाल काय” क्य कहता है।

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emलगाएँ — पृष्ठ 131
आइए sपता
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आदश आचार सं हता — आयोग ारा नवा रत शकायत ( चत्र 5.17–5.20)

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आइए पता लगाएँ

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प्र.1 यहाँ कुछ प्रकार क शकायत द g
a l ह जनका नवारण भारत नवाचन आयोग करता है— आपके वचार म ये
गई
आचार सं हता के उल्लंघन क्य ह?

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चार एक ही मूल नयम तोड़ते ह — चुनाव मतदाताओं को समझाकर जीता जाना चा हए, और वह भी हर दूसरे प्रत्याशी के
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a s em शत पर। प्रत्येक चत्र इससे बचने का एक अलग तरीका दखाता है। पृष्ठ 131 के चार चत्र क्या दखाते ह और प्रत्येक
gl उल्लंघन क्य है —
बराबर

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चत्र क्या दखाता है
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यह आदश आचार सं हता का उल्लंघन क्य है
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चत्र एक पत्याशी ारा मिहला यह उपहार दे क र मत खरीदना है । सं ि हता प ट कहती है
स् ष्— “मतदाताओं को वोट के बदले
5.17 मतदाताओं को सािड़ याँ और घरे उपहार दे क र पभािवत करना दंडनीय है। ” यह पत्यािशयों के बीच समानता भी समाप्त कर
उपकरण बाँटे गए दे ता है — धनी पत्याशी ईमानदार पत्याशी से अिधक खच कर सकता है

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चत्र एक दल के पत्याशी ारा िवपक्षी संिहता के अनुस ार सभी पत्यािशयों से अपेक्षा है िक वे “िववेक और संयम का पिरचय दे ं,

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com आपि जनक भाषा का पयोग agl सकते है ं
5.18 दल के पत्याशी के िवरुद्ध तािक िनव चन शांितपूवक संप हो”। अपश द समथ कों को भड़का सकते है ं और िवचारों
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की पित पध को झगड़े — या िहंस ा — में बदल

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चत्र सरकारी अिधकारी सत्ता दल के सरकारी कम चािरयों को वेतन जनता दे ती है और उ न्हे ं पत्येक नागिरक की से वा करनी है।

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5.19 िलए पचार करते हुए संिहता का पहला तत्व यही है िक सरकार में रहते हुए दल सरकार ारा उपल ब्ध संस ाधनों

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ु ावी लाभ के िलए न करे — और अिधकारी उन संस ाधनों में सबसे पभावी है ं
का उपयोग चन

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िनरीक्षण के समय एक पत्याशी की m चनु ाव के समय बड़ी मा ा में बेिहसाब नकदी मत खरीदने या अघोिषत चनु ावी यय की ओर a g
a se संकेत करती है — यही वह बात है िजसे अ याय आगे चनु ावों में धन का बढ़ ता पभाव कहता
चत्र
कार से 500 पये के नोटोंlकी
त्र व्

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5.20 रु ध्

गि याँ िमली ं है। प यािशयों के यय पर कड़ी चौकसी टी.एन. शेषन के सुध ारों में से एक थी
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चार म समान सद्धांत: मत का उ े श्य यह दज करना है क मतदाता ने क्या उ चत समझा। उपहार नणय के स्थान
पर एहसान रख दे ता है; अपशब्द उसके स्थान पर क्रोध; प्रचार करता सरकारी अ धकारी उसके स्थान पर सरकारी
कृपा का भय या आशा; और बे हसाब धन तीन को खरीद लेता है। हर स्थ त म गणना तो होगी, पर वह यह नह
मापेगी क जनता क्या सोचती है — और चुनाव का पूरा प्रयोजन ही समाप्त हो जाएगा।

क्या आप जानते ह? आदश आचार सं हता का आरंभ एक स्वै क सहम त के रूप म हुआ — इसे 1960 म
केरल म अपनाया गया, जसे उस समय के प्रमुख राजनै तक दल के प्र त न धय ने स्वे ा से स्वीकार कया।
आयोग ने इसे 1962 के आम चुनाव के दौरान दल के बीच प्रसा रत कया, और 1991 से आयोग इसका अनुपालन
सु न त करने म स क्रय भू मका नभाने लगा। इस प्रकार स्वयं पर लगाए गए शष्टाचार राष्ट्रीय स्तर पर लागू
अनुशासन बन गए।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 132
ट .एन. शेषन पर ‘इसे अनदे खा न कर’ मंजूषा के बाद

आइए पता लगाएँ

प्र.1 जस क्षेत्र म आप रहते ह, वहाँ अगला चुनाव कब होने वाला है? क्या वह राज्य स्तर, शहरी स्थानीय नकाय या
पंचायत का चुनाव है?

इसका उत्तर हर स्थान पर अलग है, इस लए यहाँ यह बताया गया है क अपना उत्तर वश्वसनीय ढं ग से कैसे नकाल और
पूण उत्तर म क्या-क्या होना चा हए।
कहाँ दे ख:

भारत नवाचन आयोग लोकसभा और राज्य वधान सभा चुनाव का कायक्रम घो षत करता है। उसक वेबसाइट और प्रेस
वज्ञ प्तय म त थयाँ रहती ह।
राज्य नवाचन आयोग पंचायत और शहरी स्थानीय नकाय के चुनाव घो षत करता है — अध्याय स्पष्ट कहता है क इन
चुनाव का प्रबंधन राज्य नवाचन आयोग करता है, जो इन मामल म भारत नवाचन आयोग के परामश से काम करता है।
स्थानीय समाचार-पत्र और जला नवाचन अ धकारी का कायालय — घोषणा होते ही वहाँ जानकारी मल जाती है।

आपके उत्तर म क्या होना चा हए:

1. कस नकाय का चुनाव है — लोकसभा, आपके राज्य क वधान सभा, नगर नगम/नगरपा लका/नगर पंचायत, या ग्राम
पंचायत, पंचायत स म त अथवा जला प रषद।
2. कब — वतमान नकाय का कायकाल कस माह और वष म समाप्त हो रहा है, क्य क चुनाव उससे पहले कराना आवश्यक है।
3. कौन कराता है — लोकसभा और वधान सभा के लए भारत नवाचन आयोग; स्थानीय नकाय के लए राज्य नवाचन
आयोग।
4. क्या आपके प रवार के लोग उसम मत दे सकते ह, और कस नवाचन क्षेत्र या वाड म।

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चुनाव सामान्य कायकाल कौन कराता है आप कसे चुनते ह

लोकसभा 5 वष भारत िनव चन आयोग अपना सांसद

राज्य वधान सभा 5 वष भारत िनव चन आयोग अपना वधायक

शहरी स्थानीय नकाय (नगरपा लका, नगर नगम) 5 वष राज्य िनव चन आयोग अपना वाड पाषद

ाम पंचायत तथा अन्य ग्रामीण नकाय 5 वष राज्य िनव चन आयोग अपना वाड सदस्य, सरपंच

चुनाव वष भर फैले क्य रहते ह: अध्याय बताता है क सभी चुनाव नय मत रूप से अलग-अलग समय पर होते ह,
इस लए दे श के व भन्न भाग म प्रत्येक वष अनेक चुनाव नधा रत अव ध पर कराए जाते ह। हर नकाय क पाँच वष
क घड़ी उसी दन से चलती है जस दन वह ग ठत हुआ, इस लए सभी घ ड़याँ एक साथ नह चलत — और यही
कारण है क भारत नवाचन आयोग तथा राज्य नवाचन आयोग स्थायी नकाय ह, पाँच वष म एक बार बनने वाली
स म तयाँ नह ।

नमूना उत्तर (अपने क्षेत्र के अनुसार बद लए): “हमारे जले म अगला चुनाव ग्राम पंचायत का है, जो लगभग आठ
माह बाद होना है, क्य क वतमान पंचायत का पाँच वष का कायकाल तब पूरा हो रहा है। यह चुनाव राज्य नवाचन
आयोग कराएगा और मेरे माता- पता हमारे गाँव के वाड 4 म मत दगे।”

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 133
लोकसभा तथा राज्य वधान सभाओं के लए चुनाव

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 वधान सभा को व भन्न भाषाओं म अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जैसे — वधान सभा और नयम सभा
आ द। आपके राज्य म इसे क्या कहा जाता है?

उत्तर आपके राज्य पर नभर है, इस लए पता लगाकर अपना उत्तर ल खए — कतु नाम बदलने का ढाँचा और कारण यहाँ
दए ह।
पूरे भारत म संस्था एक ही है — कसी राज्य या कद्रशा सत प्रदे श का नवा चत सदन, जसके सदस्य वधायक कहलाते ह और
जन्ह वधान सभा नवाचन क्षेत्र के मतदाता सीधे चुनते ह। केवल नाम भाषा के साथ बदलता है।

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नाम कस भाषा से कहाँ सुनाई दे ता है

वधान सभा संस्कृ त/िहंद ी — िवधान (कानून) + सभा िहंद ी-भाषी राज्य तथा उ त्त र , म ध् य और पिश्चम भारत के
अिधकाश
ं राज्य

नयम सभा मलयालम — िनयमम् (कानून) + सभा के रल — यही उदाहरण पुस्तक स्वयं दे ती है

शासन सभा तेल ुग ु / ओिड़या — शासन (िनयम, आदे श) आंध पदे श, तेल ंग ाना, ओिडशा

सट्टमन्ड्रम् तिमल — सट्टम् (कानून) + मन्डम् (मंच) तिमलनाडु

वधान सभे / बधान वही संस्कृ त मूल कन्नड़, बाग्ं ला और कन टक ; पिश्चम बंग ाल ; ओिडशा
सभा ओिड़या में

नाम भन्न, संस्था वही क्य : सं वधान प्रत्येक राज्य के लए एक ही पद और एक ही प्र क्रया बनाता है; प्रयुक्त शब्द
केवल उस राज्य क अपनी भाषा म अनुवाद ह। यह भारत के एक बड़े ढाँचे का छोटा उदाहरण है — एक समान
संवैधा नक व्यवस्था, जो अनेक भाषाओं म व्यक्त होती है, ता क नाग रक अपनी सरकार से उसी भाषा म व्यवहार
कर सक जो वे वास्तव म बोलते ह।

संकेत: न त करने के लए अपने राज्य के वधान सभा भवन के बाहर लगे बोड को दे खए, या कसी वधायक के
पत्र का शीष दे खए। वहाँ आ धका रक नाम राज्य क भाषा म, हद म और अंग्रेजी म छपा रहता है।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 134
लोकसभा तथा राज्य वधान सभाओं के लए चुनाव

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आपके नवाचन क्षेत्र से सांसद और वधायक कौन ह? (एक लोकसभा नवाचन क्षेत्र म दो या अ धक वधान
सभा नवाचन क्षेत्र हो सकते ह।)

यह अपने क्षेत्र के लए स्वयं पता लगाइए — कतु सही क्रम म, क्य क प्रश्न म कोष्ठक म दया संकेत ही पूरे काय क कुंजी
है।
चरण 1 — अपने नवाचन क्षेत्र पहचा नए। आप एक साथ दो नवाचन क्षेत्र म रहते ह — एक संसद य (लोकसभा) नवाचन
क्षेत्र और उसके भीतर एक वधान सभा नवाचन क्षेत्र। लोकसभा नवाचन के लए दे श को 543 नवाचन क्षेत्र म वभा जत कया
गया है; इनम से प्रत्येक म दो या अ धक वधान सभा नवाचन क्षेत्र होते ह, क्य क कसी राज्य म सांसद से कह अ धक वधायक
होते ह।
चरण 2 — नाम पता क जए। घर पर पू छए, प रवार के कसी वयस्क का मतदाता पहचान-पत्र दे खए (उस पर वधान सभा क्षेत्र
लखा रहता है), स्थानीय समाचार-पत्र दे खए, या भारत नवाचन आयोग क वेबसाइट पर दे खए।
चरण 3 — इस प्रकार ल खए:

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

नवाचन क्षेत्र प्र त न ध कस सदन के लए नवा चत

सांसद आपका संस दीय िनव चन क्षेत्र नाम लोकसभा, नई दल्ली

वधायक आपका िवधान सभा िनव चन क्षेत्र नाम आपके राज्य/कद्रशा सत प्रदे श क वधान सभा

एक सांसद और अनेक वधायक क्य : लोकसभा नवाचन क्षेत्र क जनसंख्या वधान सभा क्षेत्र क तुलना म कह
अ धक होती है, इस लए उसे कई वधान सभा क्षेत्र म बाँटा जाता है। इसी कारण एक सांसद के क्षेत्र का प्र त न धत्व
पाँच, छह या सात वधायक कर सकते ह — और इसी लए प्रश्न म “ वधायक” बहुवचन म भी लखा है। आपका
अपना मत एक वधायक और एक सांसद को जाता है, कतु आपका चुना सांसद आसपास के सभी वधान सभा
खंड के मतदाताओं का भी प्र त न धत्व करता है।

नमूना उत्तर (अपने क्षेत्र के अनुसार बद लए): “हमारे संसद य नवाचन क्षेत्र से एक सांसद ह, और हमारा वधान
सभा क्षेत्र उसी के भीतर छह अन्य वधान सभा क्षेत्र के साथ आता है, जनम से प्रत्येक का अपना वधायक है। दोन
के नाम मुझे माँ के मतदाता पहचान-पत्र से मले और मने आयोग क वेबसाइट से उनक पु ष्ट क ।”

प्र.2 इनम से प्रत्येक कस राजनी तक दल से संबं धत है?

यह पता लगाकर तथ्य के रूप म ल खए। दो बात उत्तर को केवल नाम से आगे ले जाती ह।
कहाँ दे ख: भारत नवाचन आयोग प्रत्येक नवाचन क्षेत्र का प रणाम प्रका शत करता है, जसम वजेता प्रत्याशी के साथ वह दल भी
दया रहता है जसके चह्न पर उसने चुनाव लड़ा। स्थानीय समाचार-पत्र का प रणाम पृष्ठ, या वधान सभा तथा लोकसभा क सदस्य-
सूची भी यही बताती है।
पहली बात — सांसद और वधायक का एक ही दल का होना आवश्यक नह । यह सामान्य और पूरी तरह स्वाभा वक है —
मतदाता वधान सभा के लए एक दल और लोकसभा के लए दूसरे दल को चुन सकता है, क्य क दोन सदन अलग-अलग वषय
दे खते ह। अध्याय के शब्द म — लोकसभा “संपूण दे श को प्रभा वत करने वाली समस्याओं पर वचार करती है”, जब क वधान
सभा के सदस्य “मुख्यत: क्षेत्रीय समस्याओं पर ध्यान क द्रत करते ह।”
दूसरी बात — सदस्य कसी दल का हो सकता है या नदलीय। राजनै तक दल का पंजीकरण भारत नवाचन आयोग करता
है — चत्र 5.9 म दखाए चार अ त-महत्वपूण काय म से एक यही है — और प्रत्येक पंजीकृत दल का अपना चुनाव चह्न होता है।
कोई प्रत्याशी बना कसी दल के भी खड़ा हो सकता है।

दल से प्र त न ध के काम पर क्या फक पड़ता है: लोकसभा म बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन राष्ट्रीय सरकार का
गठन करता है और सामान्यतः उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है; राज्य म इसी प्रकार बहुमत प्राप्त दल का नेता
मुख्यमंत्री बनता है। इस लए सत्ताधारी दल का प्र त न ध सरकार के भीतर से काम करता है, जब क कसी अन्य दल
का प्र त न ध मुख्यतः प्रश्न, वाद- ववाद और वपक्ष के माध्यम से। वधा यका के काय म दोन भू मकाएँ आवश्यक ह।

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

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तटस्थ रहकर ल खए। काय यह दज करना है क प्रत्येक प्र त न ध कस दल का है — यह नह बताना क कौन-सा

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दल बेहतर है। व ालय के अभ्यास म तथ्य ल खए और नणय मतदाता पर छोड़ द जए।

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प्र.3 सांसद और वधायक क्रमशः कन वषय क चता करते ह?

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agमंजूषा म ही है — सांसद संपूण दे श को प्रभा वत करने वाली समस्याओं पर
सं क्षप्त उत्तर अध्याय क ‘पुनरावलोकन कर’
वचार करते ह; वधायक मुख्यत: क्षेत्रीय समस्याओं पर ध्यान क द्रत करते ह। चत्र 5.22 इसे व ा थय क भाषा म कहता है

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— सांसद हमारा प्र त न धत्व राष्ट्रीय संसद म करते ह, जब क वधायक हमारे राज्य क वधान सभा म; दोन एक जैसी चुनावी
प्र क्रया से चुने जाते ह, पर शासन के अलग-अलग स्तर पर काम करते ह।
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a s em सांसद (संसद सदस्य) वधायक ( वधान सभा सदस्य)
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ag कस सदन के लोकसभा — संस द का िनम्न सदन िकसी राज्य या कें द शािसत पदे श की िवधान सभा

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कसके ारा 543 संस दीय िनव चन क्षेत्र ों में से एक के पत्येक पंजीकृ त वयस्क
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उस िवधान सभा िनव चन क्षेत्र के मतदाताओं ारा

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नवा चत मतदाता ारा जहाँ वे पंजीकृ त है ं

मुख्य वषय संपूण दे श को पभािवत करने वाले िवषय — रा ीय कानून और राज्य और क्षेत्र के िवषय — राज्य के कानून, राज्य के

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बजट, पितरक्षा और िवदे श संबंध , रे ल वे, रा ीय राजमाग, तथा वे िव ालय और अस्पताल , सड़कें , जलापूित, िबजली,
िवषय जो राज्यों की सीमाओं के पार जाते है ं
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भूिम और स्थानीय िवकास
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coसेm बहुम त पg
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. aा त दल का नेता मु यमं ी बनता है
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इस सदन बहुम त पाप्त दल या गठबंध न का नेता पधानमंत्र ी बनता है प् ख् त्र

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ता

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वषय का यह बँटवारा क्य : भारत इतना वशाल और व वध है क हर नणय एक ही स्थान पर नह लया जा
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m .cहए — मुद्रा, प्र तरक्षा, वदे श नी त — वे राष्ट्रीय स्तर के ह, जहाँ a
seप र स्थ तयाँ भन्न ह — कोई नहर, कोई जला अस्पताल, कसी राज्य क
सकता। जन वषय म पूरे दे श म एकरूपता चा

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agके ह, जहाँ वधायक बोलता है। सावभौ मक वयस्क मता धकार दोन म चलता है,
सांसद बोलता है। जन वषय म स्थानीय
व ालय व्यवस्था — वे राज्य स्तर

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इसी लए नाग रक हर स्तर पर अलग प्र त न ध चुनता है, सबके लए एक नह ।

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स्वयं जाँ चए: एक सप्ताह के स्थानीय समाचार प ढ़ए और उनम आई समस्याओं को दो स्तंभ म बाँ टए — जन्ह

s e m आपका वधायक उठा सकता है और जनके लए आपका सांसद चा हए। आपके वाड क जलापू त, राज्य राजमाग,
agla व ालय म नयु क्त — वधायक। रेल सेवा, कोई राष्ट्रीय योजना, आयात शुल्क — सांसद। कुछ समस्याएँ दोन म
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आएँगी, और उन पर चचा करना स्वयं म उपयोगी है।
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आइए वचार कर — पृष्ठ 136

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

भारत के राष्ट्रप त का चुनाव

आइए वचार कर

प्र.1 आपके वचार से उपरोक्त समूह भारत के राष्ट्रप त के नवाचन म क्य स म लत नह होते? आम जनता राष्ट्रप त
के नवाचन म क्य स म लत नह होती है?

पहले भाग का उत्तर अध्याय स्वयं दे ता है — “ऐसा इस लए है क्य क इससे यह सु न श्चत होता है क केवल प्रत्यक्ष रूप से
नवा चत प्र त न ध ही राष्ट्रप त के नवाचन म मतदान कर। इससे लोकतां त्रक रूप बना रहता है क्य क राष्ट्रप त को
जनता क इ ा का प्र त न ध माना जाता है — अप्रत्यक्ष कतु साथक रूप से।” दे खए क यह एक नयम पूरी ब हष्कृत सूची
को कैसे समझा दे ता है, और फर दूसरा प्रश्न ली जए।
नवाचक मंडल म कौन है (पृष्ठ 136) —

संसद के दोन सदन — लोकसभा और राज्यसभा — के सदस्य।
भारत के प्रत्येक राज्य तथा दल्ली और पुडुचेरी के कद्र/संघ शा सत प्रदे श क वधानसभाओं के सदस्य।

कौन स म लत नह , और ब हष्कार एक ही नयम से क्य नकलता है —

बाहर रखा गया समूह वे क्य बाहर ह

रा यसभा के मनोनीत सद य (12)
ज् स् इन्हे ं रा पित ने नािमत िकया है, िकसी ने चन
ु ा नही ं। यिद ये अगले रा पित के चयन में भाग ले ं, तो एक
पद अपने ही उ त्त रािधकार को पभािवत करने लगेग ा

रा य िवधानसभाओं के मनोनीत सद य
ज् स् वही कारण — िकसी मतदाता ने इन्हे ं नही ं चन
ु ा, इसिलए इन्हे ं जनता से जोड़ने वाली मतों की कोई
कड़ी नही ं है

ि सदनीय िवधानमंडलों में िवधान िवधान पिरषद राज्य का उ च्च सदन है। इसके ‘िनव िचत’ सद स्य भी आम मतदाता-समूह ारा नही ं
पिरषदों के सद य — िनव िचत और
स् ु े जाते — उ न्हे ं िशक्षकों, स्नातकों और स्थानीय िनकायों जैसे िवशेष िनव चक समूह चन
चन ु ते है।
ं
मनोनीत, दोनों अथ त् वे जनता ारा पत्यक्ष रूप से िनव िचत नही ं है ं

कें द शािसत पदे शों, िद ली और पुडुचेरी
ल् िफर वही — ये िनव िचत नही,ं मनोनीत है ं
की िवधानसभाओं के मनोनीत सद य स्

इस स्तंभ को नीचे तक प ढ़ए और नयम दखाई दे गा — केवल वही मत दे सकते ह जन्ह स्वयं मतदाताओं ने पद पर बैठाया
है। प्रत्येक बाहर रखा गया समूह इसी एक कसौट पर खरा नह उतरता।
आम जनता प्रत्यक्ष रूप से स म लत क्य नह होती। कई कारण मलकर काम करते ह —

राष्ट्रप त कोई कायक्रम चलाने के लए चुना गया नी त- नमाता नह है। सरकार का नेतृत्व प्रधानमंत्री करता है, जो
लोकसभा के बहुमत से आता है — और लोकसभा को जनता प्रत्यक्ष रूप से चुनती ही है। राष्ट्रप त के लए अलग से दे शव्यापी
जन-चुनाव कराने पर संसद य शासन प्रणाली म जनता के अ धकार के दो प्र त ं दावे खड़े हो जाते, जसके लए यह प्रणाली
बनी ही नह है।
राष्ट्रप त पूरे दे श का — संघ और राज्य का — प्र त न धत्व करता है। इसी लए नवाचक मंडल म सांसद के साथ वधायक
भी ह। अध्याय कहता है — “चूँ क राष्ट्रप त पूरे दे श का प्र त न धत्व करता है, इस लए यह पद्ध त कद्र और राज्य, दोन सरकार
का सहयोग लेती है।”

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एकल संक्रमणीय मत प्रणाली और मत का भा रत मूल्य। मतदान और मतगणना के नयम बहुत वस्तृत ह और अ धक
जनसंख्या वाले राज्य क भू मका महत्वपूण होती है। राज्य के बीच तथा संसद और राज्य के बीच का यह सावधान संतुलन
एक न त नवाचक मंडल से ही संभव है, साधारण दे शव्यापी मतदान से नह ।
वैधता क कड़ी टू टती नह , केवल लंबी होती है। जनता सांसद और वधायक को चुनती है; वही सांसद और वधायक
राष्ट्रप त को चुनते ह। इस लए राष्ट्रप त भी जनता क इ ा से ही पद पर है — अप्रत्यक्ष कतु साथक रूप से।

उपराष्ट्रप त से तुलना क जए: उनका नवाचन मंडल संसद के दोन सदन के नवा चत और मनोनीत सदस्य से
बनता है — यहाँ मनोनीत सदस्य स म्म लत ह और वधायक नह । यह पद के अनुरूप है — उपराष्ट्रप त राज्यसभा
का सभाप त होता है, इस लए उसका नवाचक समूह संसद ही है, संसद और राज्य मलकर नह ।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 138
अध्याय के अंत म

प्र.1 एक स्वस्थ लोकतंत्र के लए सावभौ मक वयस्क मता धकार क्य महत्वपूण है?

क्य क यही एकमात्र ऐसी व्यवस्था है जसम कोई सरकार ईमानदारी से यह दावा कर सकती है क वह संपूण जनता क
ओर से बोलती है — और यही एकमात्र व्यवस्था है जसम जनता उसे हटा भी सकती है। अध्याय इसे “भारतीय लोकतंत्र क
आधार शला” कहता है। कारण, और उनके साथ अध्याय के प्रमाण —

1. यह नाग रक को राजनी तक रूप से समान बनाता है। जा त, मत, नस्ल, धम, लग, शक्षा या आय का भेदभाव कए बना
प्रत्येक वयस्क को एक मत मलता है और सभी मत का मूल्य समान है। मतदान कद्र के बाहर लोग म धन और श क्त का बड़ा
अंतर होता है; भीतर नह । समानता का यही एक दन नधनतम नाग रक को सबसे श क्तशाली पर पकड़ दे ता है।
2. यह प्र त न धय को उत्तरदायी बनाता है। पृष्ठ 120 का मानस-मान चत्र कहता है — नवा चत प्र त न ध नवाचक के प्र त
उत्तरदायी ह — और बाहर का गोला बताता है कैसे — “चुनाव म लोग इन्ह हरा सकते ह।” जस प्र त न ध का पद जा सकता
है, उसे सुनते रहना पड़ता है।
3. कसी समूह क उपेक्षा सुर क्षत नह रहती। जब प्रत्येक वयस्क मत दे ता है, तब नधन , म हलाओं या कसी छोटे समुदाय क
उपेक्षा करने वाला दल उनके मत खो दे ता है। सावभौ मक मता धकार हर समुदाय को राजनी तक गणना के भीतर ले आता है।
4. यह लोग को अपने भ वष्य पर अ धकार दे ता है। लोग न त करते ह क वे कैसा भ वष्य चाहते ह और उनका प्र त न धत्व
उत्तम ढं ग से कौन कर सकता है, तथा वे अपने क्षेत्र क समस्याओं के समाधान म भाग लेते ह।
5. यह वैधता और शां त दे ता है। सब वयस्क ारा चुनी गई सरकार को वे भी स्वीकार कर लेते ह जन्ह ने उसके वरुद्ध मत दया
— इस लए सत्ता बल से नह , मत गनकर बदलती है।
6. यह नाग रकता क पाठशाला है। मता धकार नाग रक सहभा गता बढ़ाता है — समझदारी से मत दे ने के लए व्य क्त को यह
जानना पड़ता है क हो क्या रहा है और प्रत्याशी क्या कह रहे ह।

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दूसरा वकल्प असफल क्य होता: 1947 म कुछ लोग ने मता धकार केवल साक्षर को दे ने का तक दया था, जब
साक्षरता लगभग 14 प्र तशत और म हलाओं म 8 प्र तशत थी। ऐसा नयम वशाल बहुमत को — और लगभग सभी
म हलाओं को — मूक बना दे ता और सत्ता एक छोटे वशेषा धकार-प्राप्त वग के हाथ स प दे ता। स्वतंत्रता से पहले
लगभग 13 प्र तशत भारतीय ही मत दे सकते थे, और वह व्यवस्था औप नवे शक राज्य के काम आती थी, भारतीय
जनता के नह । सं वधान नमाताओं ने उसे इसी लए अस्वीकार कया — जस लोकतंत्र म अ धकांश वयस्क मत ही
न दे सक, वह लोकतंत्र है ही नह ।

क्या आप जानते ह? सावभौ मक वयस्क मता धकार सबसे नीचे तक पहुँचता है। भारत म 2,50,000 से भी
अ धक स्थानीय नकाय म 31 लाख नवा चत प्र त न ध ह, जनम 13 लाख म हलाएँ ह — और ये सभी इसी
सद्धांत से चुने जाते ह।

प्र.2 ‘गुप्त मतदान’ का क्या अथ है? यह लोकतंत्र म क्य महत्वपूण है?

गुप्त मतदान का अथ है — ऐसा मतदान जसम कोई यह न जान पाए क कसने अपना मत कसे दया। अध्याय क अपनी
प रभाषा सूय दय व ालय के प्रकरण से आती है — सुश्री उषा ने नयम समझाते हुए बताया क गुप्त मतदान प्र क्रया क्या होती है,
“ जससे कोई यह न जान पाए क कसने अपना मत कसे दया। इससे यह प्र क्रया गोपनीय और नष्पक्ष बनी रहती है।”
भारतीय चुनाव म गोपनीयता वास्तव म कैसे बनाई जाती है:

मतदाता अकेले परदे वाले मतदान कक्ष म जाता है।
ई.वी.एम. केवल प्रत्येक प्रत्याशी के मत क कुल संख्या दज करती है — यह कभी नह क कौन-से मतदाता ने कौन-सा बटन
दबाया।
वी.वी.पी.ए.ट . क पच मतदाता को एक खड़क से दखाकर सीलबंद पेट म गरा द जाती है; वह मतदान कद्र से बाहर नह
जाती।
मतपत्र या मशीन गणना तक सीलबंद रहती ह — ठ क जैसे सुश्री उषा ने कक्षा म पेट सील क थी।

यह क्य महत्वपूण है — एक नह , चार प रणाम:

गोपनीयता कसे उसके बना क्या होता
रोकती है

दबाव िनयोक्ता, भूस्वामी या कोई दबंग मतदाताओं को धमका सकता और िफर जाँच सकता िक िकसने कहा माना

मत खरीदना पत्याशी मतों का मूल्य दे क र सौदा पूर ा होना जाँच सकता। िजस खरीदे मत की जाँच न हो सके , वह घाटे का सौदा
है — गोपनीयता ही उसे अपुष्ट बनाती है

पिरणाम के बाद पितशोध िवजेता उ न्हे ं पहचानकर दंिडत कर सकते िजन्होंने उनके िवरुद्ध मत िदया; हारने वालों के समथक भय में जीते

सामािजक दबाव लोग अपने िववेक से नही,ं बिल्क जाित-समूह, िनयोक्ता या पिरवार की अपेक्षा के अनुस ार मत दे ते

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यह मत को केवल गोपनीय नह , समान भी बनाता है: सावभौ मक मता धकार प्रत्येक वयस्क को समान मूल्य का
एक मत दे ता है। कतु धमक या धन के बल पर दया गया मत वास्तव म मतदाता का रहता ही नह — उसका मूल्य
उस व्य क्त को चला जाता है जसने दबाव डाला। गोपनीयता ही अनु े द 326 क वादा क हुई समानता क रक्षा
करती है। इसी लए गोपनीयता और खुलापन साथ-साथ चलते ह — चुनाव गुप्त है, जब क प्र क्रया — नयम,
गणना, प रणाम — पूरी तरह सावज नक।

प्र.3 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव के उदाहरण द जए।

प्रत्यक्ष चुनाव म जनता स्वयं पदा धकारी को चुनती है; अप्रत्यक्ष चुनाव म जनता प्र त न ध चुनती है और वे प्र त न ध
पदा धकारी को चुनते ह। अध्याय दोन के स्पष्ट उदाहरण दे ता है।

प्रत्यक्ष चुनाव अप्रत्यक्ष चुनाव

कौन मत दे ता है िनव चन क्षेत्र का पत्येक पंजीकृ त वयस्क नागिरक िनव िचत पितिनिधयों का एक िनिश्चत समूह

अध्याय से लोकसभा — 543 िनव चन क्षेत्र, सांस द राज्यसभा — 245 में से 233 सद स्य राज्य िवधान सभाओं के
उदाहरण मतदाताओं ारा िनव िचत ु े जाते है ं (12 रा पित ारा नािमत)
िनव िचत िवधायकों ारा चन
रा य एवं कें द शािसत पदे शों की िवधान सभाएँ —
ज् भारत के रा पित — संस द के दोनों सदनों के सद स्यों तथा
िवधायक मतदाताओं ारा िनव िचत राज्यों एवं िद ल्ली और पुडुचेर ी की िवधानसभाओं के सद स्यों के
गाम पंचायत और शहरी थानीय िनकाय — कक्षा
स् िनव चक मंडल ारा
6 में पढ़ े गए; इनका पबंध न राज्य िनव चन आयोग भारत के उपरा पित — संस द के दोनों सदनों के िनव िचत एवं
करता है मनोनीत सद स्यों के िनव चन मंडल ारा

मतदान क व ध एक व्यिक्त, एक मत; ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ एकल संक्रमणीय मत पणाली — मतदाता पत्यािशयों को वरीयता
— सव िधक मत पाने वाला पत्याशी िवजयी के अनुस ार क्रम दे ते है ं

अध्याय का पूर ी कक्षा कक्षा पितिनिध चुनती है यिद िव ालयी स्तर की िवशेष पिरषद के सद स्य क क्षा पितिनिधयों
व ालय- ु े जाएँ, तो वह अपत्यक्ष चन
ारा चन ु ाव होगा
उदाहरण

भारत दोन का उपयोग क्य करता है: प्रत्यक्ष चुनाव कसी सदन को स्वयं जनता का अ धकार दे ता है, इसी लए
लोकसभा — जससे सरकार बनती है — प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है। अप्रत्यक्ष चुनाव कसी सदन को केवल
जनसंख्या के अ त रक्त कुछ और का प्र त न धत्व करने दे ता है। राज्यसभा ‘राज्य क प रषद’ है — इसे राज्य
वधानमंडल चुनते ह ता क संसद म राज्य का प्र त न धत्व हो, और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली इस लए ता क
छोटे राज्य को भी समु चत प्र त न धत्व मले। राष्ट्रप त, जसे पूरे संघ का प्र त न धत्व करना है, संसद और राज्य
वधानसभाओं ारा मलकर चुना जाता है।

ध्यान रख: ‘अप्रत्यक्ष’ का अथ ‘अलोकतां त्रक’ नह है। मतदाता वधायक चुनते ह; वधायक राज्यसभा के सदस्य
चुनते ह और राष्ट्रप त के चुनाव म भाग लेते ह। सहम त क कड़ी लंबी अवश्य है, कतु आरंभ मतदाता से ही होता है।

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लोकसभा के सदस्य का चुनाव, राज्यसभा के सदस्य के चुनाव से कस प्रकार भन्न है?
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र lनाम म नह है — दोन के सदस्य सांसद ही कहलाते ह — ब ल्क इसम है क उन्ह कौन चुनता है, मत क गणना कैसे
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होती है और सदन कतने समय तक रहता है।

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लोकसभा
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चुनाव का
प्रकार
प य — जनता ारा
त् क्ष
a अपत्यक्ष — िनव िचत पितिनिधयों ारा

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कौन मत दे ता िनव चन क्षेत्र का 18 वष से अिधक आयु का पत्येक राज्य िवधान सभाओं के िनव िचत सद स्य (िवधायक )

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है पंजीकृ त नागिरक

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संख्या 543 िनव चन क्षेत्र 245 सद स्य — 233 िवधायकों ारा िनव िचत और 12 भारत के

a g रा पित ारा नािमत

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गणना क ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ — िनव चन क्षेत्र में एकल संक्रमणीय मत पणाली — िवधायक पत्यािशयों को वरीयता

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वध सव िधक मत पाने वाला जीतता है, चाहे 50 पितशत के अनुस ार क्रम दे ते है ं

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न िमले हों

सीट का agl84 अनुसूिचत जाितयों
पित िनव चन क्षेत्र एक सीट; पत्येक राज्य को जनसंख्या के अनुस ार सीटें — उ त्त र पदे श की

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बँटवारा और 47 अनुस ूिचत जनजाितयों के िलए आरिक्षत सीटें अरुणाचल पदे श से अिधक

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सदन क आयु पूर ा सदन एक साथ चुना जाता है और िवघिटत हो स्थायी सदन — कभी िवघिटत नही ं होता। सद स्य का कायकाल

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सकता है छह वष; पत्येक दो वष में एक -ितहाई सद स्य से वािनवृत्त होते है ं और

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नए चन
ु े जाते है ं

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gl कसका
a सीधे जनता का; इसी के बहुम त से सरकार बनती है राज्यों का — यह राज्यों की पिरषद है
प्र त न धत्व
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रचना भन्न क्य है: दोन सदन के काम अलग ह। लोकसभा को जनता क वतमान इ ा दशानी है, इस लए वह
प्रत्यक्ष रूप से और पूरी एक साथ चुनी जाती है, और उसम बहुमत पाने वाला दल या गठबंधन सरकार बनाता है।
राज्यसभा को राज्य का प्र त न धत्व करना है और नरंतरता दे नी है — चूँ क प्रत्येक दो वष म केवल एक- तहाई

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बदलता है, यह कभी एक साथ नह बहती, और संसद म सदै व पछले काल के अनुभव वाले सदस्य बने रहते ह।
mसकते ह, न क सबसे बड़ा
एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से छोटे राज्य तथा वधान सभा के छोटे समूह भी सीटeपा
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m .cदलo सब कुछ ले जाए। agl
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ध्यान द जए: एकल संक्रमणीय मत प्रणाली क सट क कायप्रणाली आप उच्च कक्षाओं म पढ़गे। अभी इतना जान

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लेना पयाप्त है क वह क्या साधती है — वरीयताओं के अनुपात म प्र त न धत्व, न क वजेता को सब कुछ।

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प्र.5 आपके वचार से मतपत्र क तुलना म ई.वी.एम. के क्या-क्या लाभ ह?

मुख्य लाभ ह — गणना म तेजी और शुद्धता, अवैध मत का लगभग समाप्त हो जाना, और वी.वी.पी.ए.ट . के साथ ऐसा
कागजी प्रमाण जसे फर भी जाँचा जा सके। दोन क सीधी तुलना क जए।

मतपत्र वी.वी.पी.ए.ट . स हत ई.वी.एम.

मत नाम के सामने ‘X’ का िचह्न लगाना, पत्र एक बटन दबाना; बीप की ध् विन से पुिष्ट होती है और वी.वी.पी.ए .टी. में छपी
डालना मोड़कर पेटी में डालना पच िदखती है

अवैध मत सामान्य — िबना िचह्न का मतपत्र, गलत स्थान लगभग असंभव — मशीन ठीक एक बटन स्वीकार करती है, इसिलए मत या
पर िचह्न या दो िचह्न होने पर मत अवैध हो जाता तो पड़ा है या नही ं पड़ा
है। 33 मतों के कक्षा-चुनाव में 3 मतपत्र इसी
कारण अवैध हुए

गणना पत्येक मतपत्र छाँटकर हाथ से िगनना पड़ता है; मशीन कु ल संख्या िदखा दे ती है; पूरे िनव चन क्षेत्र का पिरणाम कु छ घंटों में
पिरणाम में बहुत समय लगता है और मानवीय िमल जाता है
त्र िु ट की संभावना रहती है

व्यय और लाखों छपे मतपत्र, मतपेिटयाँ, भंडारण — और ु ावों में पुनः पयुक्त होती है;ं कागज बहुत कम
मशीने ं अनेक चन
साम ी बहुत सारा कागज

सुरक्षा पेटी में अितिरक्त मतपत्र भरे जा सकते है ं या मशीन एक सीिमत गित से ही मत दज करती है और सीलबंद कर रखी जा
पेटी छीनी जा सकती है सकती है; मतपत्र डालकर कु ल नही ं बदला जा सकता

सत्यापन मतपत्र स्वयं ही पमाण है ं वी.वी.पी.ए .टी. मत की छपी पच िनकालती है, िजससे मतदाता जान ले ता है
िक उसका इले क्टॉिनक वोट सही से दज हो गया है; और यह पच िववाद
अथवा इले क्टॉिनक पणाली में त्र िु ट की िस्थित में स त्यापन और पुनः गणना के
िलए बैक अप पमाण दे ती है

इस तक म वी.वी.पी.ए.ट . का महत्व: कसी भी इलेक् ॉ नक प्रणाली पर सबसे बड़ी आप त्त यही है क मतदाता
को ऐसी मशीन पर भरोसा करना पड़ता है जसे वह जाँच नह सकता। वी.वी.पी.ए.ट . इस आप त्त का उत्तर दे ती है
और मशीन के लाभ भी बने रहते ह — मतदाता अपनी पसंद क पु ष्ट करती छपी पच दे ख लेता है, और वही पच
सीलबंद पेट म ऐसे प्रमाण के रूप म रह जाती है जसे दोबारा गना जा सके। इस प्रकार ई.वी.एम.–वी.वी.पी.ए.ट .
का संयोजन इलेक् ॉ नक क ग त और शुद्धता तथा कागज क जाँच-योग्यता, दोन बनाए रखता है।

क्या आप जानते ह? भारत क ई.वी.एम. और वी.वी.पी.ए.ट . प्रणाली का उपयोग नामी बया और भूटान जैसे
दे श म भारत नवाचन आयोग क सहायता से कया जाता है, और अन्य दे श ने भी इस प्रौ ो गक का अध्ययन
कया है तथा इसे अपनाने के लए भारत से प्र शक्षण प्राप्त कया है।

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

प्र.6 भारत के कुछ नगरीय क्षेत्र म मतदान प्र तशत म कमी आ रही है। इस प्रवृ त्त के क्या कारण हो सकते ह और
अ धक लोग को मतदान हेतु प्रोत्सा हत करने के लए क्या कदम उठाए जा सकते ह?

अध्याय इस स्थ त को नाम दे ता है — “मतदाताओं क उदासीनता ( वशेषकर शहरी क्षेत्र म)” — और इसे भारतीय
लोकतंत्र क चुनौ तय म गनता है। 2024 म लगभग 34 प्र तशत पात्र मतदाताओं ने मता धकार का प्रयोग नह कया।
शहरी मतदान का ग्रामीण से कम रहना एक जानी-पहचानी प्रवृ त्त है, और इसके कारण चार वग म आते ह।

कारण शहर म यह अ धक क्य वास्तव म क्या काम करेगा

उदासीनता — शहरी िनव चन क्षेत्र में मतदाता बहत
ु अिधक होते जाग रूकता अिभयान, िजनमें बहत
ु कम अंतर से तय हई
ु सीटें
“मेरे मत से क्या है,ं इसिलए एक मत छोटा लगता है। अनेक िदखाई जाएँ; िव ालय-महािव ालय में मतदाता िशक्षा; मीिडया
होगा” नगरवासी िवजेता पत्याशी से स्वयं को दू र अनुभव और संस्थाएँ यह समझाएँ िक सांस द या पाषद वास्तव में क्या तय
करते है ं करता है

प्रवास और लोग काम के िलए शहर आते है ं िकं तु नाम गाँव या नए पते पर पंजीकरण का सरल स्थानांतरण; नई बिस्तयों में घर -
आवागमन िपछले शहर की सूची में ही रहता है, और मतदान घर नामाक
ं न अिभयान
के िदन लौटना संभव नही ं होता

मतदाता सूची क िकराए के मकान बार-बार बदलने से नाम हट जाते सूची की ऑनलाइन जाँच और सुध ार ; चन
ु ाव की घोषणा से पहले
समस्याएँ है ं या गलत वाड में चले जाते है ं हर मोहल्ले में स त्यापन िशिवर

मतदान के दन कायिदवस के अवकाश का उपयोग यात्रा या िनयोक्ताओं के िलए सवेतन अवकाश दे ना और उसका अिभले ख
को अवकाश मान मनोरंजन में होता है; कु छ मतदाता लौटने का कष्ट रखना अिनवाय हो; अवकाश को मतदान से जोड़ना संभव नही ं है,
लेना ही नही ं उठाते इसिलए यहाँ काम समझाने से ही होगा

वकल्प से िजन मतदाताओं को कोई पत्याशी उपयुक्त नही ं नोटा समझाना — इससे पिरणाम नही ं बदलता, िकं तु यह दज हो
असंतोष लगता, वे आपित्त दज कराने के बजाय घर बैठ जाता है िक मतदाता बेहतर िवक ल्प चाहते है ं
जाते है ं

अब तक क्या कया जा चुका है, अध्याय से ही: वृद्ध और दव्यांग के लए घर से मतदान (2024 से), वशेष वग के लए डाक
से मतदान, ेल-सक्षम मतपत्र, प हया कुस और रप्स के लए ऐप-आधा रत अनुरोध, तथा अ धका रय का दूर-दूर तक जाना —
यहाँ तक क केवल एक मतदाता के लए मतदान कद्र बनाना। इनसे आयोग का तरीका स्पष्ट होता है — मतदाता को दोष दे ने के
बजाय बाधा हटाओ।

घटता शहरी मतदान केवल एक बेढंगा आँकड़ा क्य नह है: य द कोई वग दूसरे वग से बहुत कम मत दे गा, तो
वधा यका उस वग क बात कम सुनेगी और नी तयाँ चुपचाप उन्ह क ओर झुक जाएँगी जो मतदान करते ह। और
कम मतदान पर जीता प्र त न ध मतदाता-समूह के छोटे भाग का प्र त न धत्व करता है, जससे वह उत्तरदा यत्व
कमजोर पड़ता है जसक बात पृष्ठ 120 का मानस-मान चत्र करता है। अध्याय का नष्कष यही है — “एक
जागरूक और सतक मतदाता लोकतां त्रक प्रणाली क सबसे श क्तशाली सुरक्षा है।”

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

प्र.7 आपके वचार म लोकसभा क कुछ सीट अनुसू चत जा तय और अनुसू चत जनजा तय के लए आर क्षत क्य
होती ह? एक सं क्षप्त टप्पणी ल खए।

सीट का आरक्षण इस लए है क जन समुदाय को ऐ तहा सक रूप से सत्ता से बाहर रखा गया, वे वधा यका म वास्तव म
उप स्थत ह — केवल मतदान करने क अनुम त भर न पाएँ। अध्याय संख्याएँ दे ता है — 543 लोकसभा नवाचन क्षेत्र म से
84 अनुसू चत जा त के व्य क्तय के लए और 47 अनुसू चत जनजा तय के लए आर क्षत ह; शेष 412 सामान्य ह।

412 सामान्य + 84 अ.जा. + 47 अ.ज.जा. = 543 लोकसभा िनव चन क्षेत्र
आरिक्षत सीटें = 84 + 47 = 131, अथ त् सदन का लगभग 24 पितशत

84 सीटे ं — अ.जा.

47 सीटे ं — अ.ज.जा.

412 सीटे ं — सामान्य

412 कु ल 543
सामान्य

लोकसभा क 543 सीट का वभाजन, जैसा पृष्ठ 129 के वृत्त- चत्र म दखाया गया है।

कारण, सं क्षप्त टप्पणी के रूप म:

1. केवल मतदान से प्र त न धत्व क गारंट नह मलती। ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ प्रणाली म नवाचन क्षेत्र म सवा धक मत
पाने वाला जीतता है। य द कसी समुदाय के लोग लगभग हर जगह अल्पसंख्यक ह, तो वे हर चुनाव म मत दे कर भी अपने बीच
से लगभग कसी को नह चुन पाएँगे। कुछ नवाचन क्षेत्र आर क्षत करने से यह न त हो जाता है क वहाँ वजेता उसी समुदाय
से आएगा।
2. इन समुदाय ने लंबे समय तक ब हष्कार सहा। अनुसू चत जा तय और अनुसू चत जनजा तय को पी ढ़य तक शक्षा, भू म,
मं दर-प्रवेश और सावज नक पद से वं चत रखा गया। कागज पर लखी समानता इसे शीघ्र नह मटा सकती थी; कानून बनाने
वाले सदन म न त स्थान उन्ह उस समय तक आवाज़ दे सकता था जब तक यह मटाया जा रहा हो।

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

3. कानून तब बेहतर बनते ह जब प्रभा वत लोग उन्ह बनाने म भाग ल। जनजातीय भू म, वन अ धकार, भेदभाव और शक्षा
तक पहुँच के प्रश्न वही सदस्य सबसे अ े ढं ग से उठा सकते ह जन्ह ने ये प र स्थ तयाँ जी ह — केवल दूसर का वणन पयाप्त
नह ।
4. यह लोकतंत्र को कमजोर नह , मजबूत करता है। ध्यान द जए — आर क्षत नवाचन क्षेत्र म प्रत्येक मतदाता मत दे ता है;
आरक्षण सीट का है, मत का नह । इस लए कसी मतदाता का कोई अ धकार नह जाता; सदन केवल उस दे श जैसा बन जाता है
जसका वह शासन करता है।

यह इसी अध्याय म क्य है: अध्याय का तक यही है क सावभौ मक मता धकार तभी साथक है जब लोग उसका
वास्तव म उपयोग कर सक। सुगमता के उपाय यह सु न त करते ह क दव्यांग या वृद्ध मतदाता मत डाल सके;
आर क्षत सीट यह सु न त करती ह क ऐ तहा सक रूप से ब हष्कृत समुदाय बनने वाले सदन म वास्तव म सुने
जाएँ। दोन एक ही प्रश्न के उत्तर ह — औपचा रक अ धकार को वास्त वक अ धकार कैसे बनाया जाए?

प्र.8 सोशल मी डया हमारे चुनावी अनुभव के तरीके को बदल रहा है — आकषक प्रचार रील और लाइव भाषण से
लेकर इंस्टा ाम और ट् वटर पर राजनै तक वाद- ववाद तक। क्या यह लोकतंत्र को सशक्त बना रहा है या इसे
उलझा रहा है? समूह बनाकर चचा क जए — इसके लाभ एवं चुनौ तयाँ क्या ह और ड जटल युग म चुनाव का
भ वष्य क्या हो सकता है?

ईमानदार उत्तर यह है क सोशल मी डया दोन काम करता है, और इनम से कौन भारी पड़ेगा यह इस पर नभर है क
मतदाता उसका उपयोग कैसे करते ह। समूह-चचा के लए सामग्री — लाभ, चुनौ तयाँ और भ वष्य — साथ म वह कसौट जो
अध्याय स्वयं दे ता है।

लाभ — यह लोकतंत्र को कैसे सशक्त करता है चुनौ तयाँ — यह कैसे उलझा सकता है

सीधी पहचु ँ । मतदाता पत्याशी के अपने शब्द लाइव सुन झूठी सूचना तेजी से फै लती है। छे ड़छाड़ िकया गया वीिडयो या गढ़ ा गया दावा
सकता है, समाचार-पत्र की पतीक्षा िकए िबना ु ँ जाता है — और सुध ार मूल सामग ी से कही ं
सुध ार से पहले ही करोड़ों तक पहच
धीमे चलता है

बोलने की लागत कम। िजस पत्याशी के पास होिडंग के धन नए रूप में लौट आता है। सशुल्क िव ापन, पायोिजत पोस्ट और खातों की
िलए धन नही ं और िजस साधारण नागिरक के पास पश्न है भीड़ िबना धन वाली आवाज़ को दबा सकती है — यह अध् याय की उसी िचंता से
— दोनों सुने जा सकते है ं जड
ु ़ ता है िक चन
ु ावों में धन का पभाव बढ़ रहा है

दो-तरफा संवाद। मतदाता सावजिनक रूप से पश्न पूछ ु ा। अध् याय पत्याशी ारा आपित्त जनक भाषा (िचत्र 5.18) को
अपशब्द और शत्र त
सकते है ं और दे ख सकते है ं िक उत्तर िमलता है या नही ं आचार संिहता का उ ल्लंघ न बताता है; ऑनलाइन ऐसी भाषा और दू र तथा और तेज
फै लती है

युवाओं तक पहचु ँ । अनेक नए मतदाता समाचार यही ं से एक जैसे िवचारों का घे र ा। फीड वही अिधक िदखाती है िजससे आप पहले ही
पाते है;ं आयोग स्वयं इन माध्यमों से मतदाता जागरूकता सहमत है,ं इसिलए मतदाता दू स रे पक्ष के तक से िमलना ही बंद कर सकते है ं
फै लाता है

सावजिनक जवाबदे ही। रील में दज वादा पाँच वष बाद िवषय से अिधक शैल ी। बीस से कं ड की रील में याद रह जाने वाली पंिक्त को
िफर चलाया जा सकता है पुर स्कार िमलता है, काम की योजना को नही ं

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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 5 सावभौ मक मता धकार और भारत क नवाचन प्रणाली AglaSem · NCERT Solutions

भ वष्य कैसा हो सकता है: सड़क से अ धक ऑनलाइन प्रचार; नवाचन आयोग
co
ारा ड जटल चुनावी व्यय और सशुल्क
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राजनै तक वज्ञापन क उतनी ही कड़ी नगरानी जतनी पोस्टर और सभाओं क ; सत्यापन के तेज साधन और छे ड़छाड़ क गई
m.
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g आचरण पर भी उतनी ही
.c जो साझा करने से पहले दावे क जाँच कर। आदश आचार सं हता को ऑनलाइन
सामग्री पर स्पष्ट चह्न; और — जैसे-जैसे कृ त्रम बु द्धमत्ता से वश्वसनीय नकली वी डयो बनाना सरल होगा — ऐसे मतदाताओं क

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se करना होगा जतना धरातल पर।
कह अ धक आवश्यकता
पूणता सेaलागू
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इस सबको जाँचने क कसौट : अध्याय कहता है क आगे बढ़ने का माग मतदाताओं को उस जानकारी से सशक्त

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करने म है, जसक उन्ह “ वचारशील और उत्तरदायी चुनाव करने के लए आवश्यकता होती है”, और मी डया, शक्षा

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g भी ड जटल प रवतन से यह पू छए — क्या इससे मतदाता बेहतर
तथा जागरूकता अ भयान को मलकर लोग — वशेषकर युवाओं — को समझाना चा हए क सोच-समझकर
मतदान करना क्य महत्वपूण है। इस लएaकसी

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नणय कर पाता है, या इससे केवल कोई और तेजी से मना पाता है? जो सोशल मी डया सूचना दे ता है वह

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लोकतंत्र को सशक्त करता है; जो केवल उत्ते जत करता, भ्र मत करता या बाँटता है, वह नह ।

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जोड़ी म चचा के लए संकेत: कसी सावज नक वषय पर हाल ही म ऑनलाइन दे खा गया कोई एक दावा ली जए

a gl और उसके मूल ोत तक पहुँचने का प्रयास क जए। आप सफल ह या न ह , यही अभ्यास स्वयं इस प्रश्न का उत्तर
है — जागरूक और सतक मतदाता ही लोकतां त्रक प्रणाली क सबसे श क्तशाली सुरक्षा है।

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प्र.9 gl भी वष के एक नवाचन संसद य चुनाव क्षेत्र के प रणाम का अध्ययन कर।
वेबसाइट ______ पर जाएँ औरaकसी
अपने राज्य के कसी वधान सभा चुनाव का भी इसी प्रकार अध्ययन कर।

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m .
o m l a se
m .c ध्यान द जए क मु द्रत पुस्तक म इस प्रश्न म वेबसाइट का पता रक्त छोड़agदया गया है — जहाँ वेबसाइट का नाम
se चा हए, वह स्थान हद और अंग्रेजी दोन संस्करण म खाली है। जस स्थल क बात है वह भारत नवाचन आयोग का
पहले यह

g l aआना
a आ धका रक चुनाव प रणाम पोटल है, जो आयोग क अपनी वेबसाइट eci.gov.in से पहुँचा जा सकता है और जहाँ अनेक
दशक के प्रत्येक संसद य तथा वधान सभा क्षेत्र के प रणाम प्रका शत ह। आरंभ करने से पहले वतमान पता अपने शक्षक से पुष्ट
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कर ली जए।
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व ध — इसी क्रम म क जए:

1. एक वष और एक संसद य नवाचन क्षेत्र चु नए — अपना क्षेत्र सबसे रोचक रहेगा।

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2. उसका प रणाम खोलकर ल खए — वजेता प्रत्याशी और दल, दूसरे स्थान का प्रत्याशी, दोन को मले मत, कुल वैध मत, नोटा

.
3. यही अपने राज्य के कसी वधान सभा नवाचन क्षेत्र के लए दोहराइए — य द हो सकेeतोmऐसा क्षेत्र चु नए जो उसी संसद य
क संख्या और मतदान प्र तशत।

c o mके भीतर आता हो। g l as
m . क्षे त्र
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4. दोन क तु लना क जए और चार-पाँ च वाक्य म ल खए क आपने क्या दे खा।

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क्या दे खना है — यही आँकड़े उतारने को उत्तर म बदलता है:

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आँकड़ से पूछने योग्य प्रश्न यह आपको क्या सखाता है

क्या िवजेता को 50 पितशत से अिधक मत िमले ? पायः नही ं — यही ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ पणाली है। अध् याय का अपना उदाहरण —
ग रु मत 33 में से 12 मत पाकर जीत गई ं

जीत का अंतर िकतना था? ं “मेरे एक मत से क्या होगा” का इससे स्पष्ट उ त्त र
कु छ सीटें कु छ सौ मतों से तय होती है।
कोई नही ं

मतदान पितशत िकतना था? रा ीय आँक ड़े से तुल ना कीिजए — 2024 में लगभग 66 पितशत ने मत िदया, अथ त् लगभग
34 पितशत ने नही ं

नोटा को िकतने मत िमले ? इससे पिरणाम नही ं बदलता, पर सभी पत्यािशयों से असंतोष दज हो जाता है

क्या सीट अ.जा. या अ.ज.जा. के िलए आरिक्षत 84 लोकसभा सीटें अनुस ूिचत जाितयों और 47 अनुस ूिचत जनजाितयों के िलए आरिक्षत है ं
है?

क्या संस दीय और िवधान सभा — दोनों सीटें पायः नही ं — मतदाता रा ीय और राज्य के मु ों में अंतर करते है ं
एक ही दल ने जीती ं?

नमूना लेखन (अपने वास्त वक आँकड़ से बद लए): “हमारे संसद य नवाचन क्षेत्र म वजेता को लगभग 41
प्र तशत वैध मत मले, अथात् पाँच म से लगभग तीन मतदाताओं ने कसी और को चुना था — फर भी ‘जो सबसे
आगे, वह जीता’ प्रणाली म यह जीतने के लए पयाप्त था। मतदान लगभग 63 प्र तशत रहा, जो राष्ट्रीय औसत से
कुछ कम है। उसी के भीतर आने वाले वधान सभा क्षेत्र म दूसरे दल ने जीत दज क और जीत का अंतर 4,000 मत
से भी कम था।”

यह क्रयाकलाप अध्याय के अंत म क्य है: आपने जो कुछ पढ़ा — सावभौ मक मता धकार, भारत नवाचन
आयोग, ‘जो सबसे आगे, वह जीता’, नोटा, आर क्षत सीट, मतदान प्र तशत — वह सब एक ही प रणाम पृष्ठ पर एक
साथ दखाई दे ता है। ऐसे एक पृष्ठ को ध्यान से पढ़ना यह समझने का सबसे तेज तरीका है क ‘ नवाचन प्रणाली’
कोई अमूत वचार नह , ब ल्क आपके अपने पड़ोस के आँकड़ का समूह है।

अध्याय — एक नज़र म
सावभौ मक वयस्क मता धकार का अथ है — प्रत्येक वयस्क नाग रक को एक मत, और सभी मत का समान मूल्य।
जा त, मत, नस्ल, धम, लग, शक्षा, आय आ द का भेदभाव कए बना 18 वष से अ धक आयु के प्रत्येक भारतीय नाग रक
को मत दे ने का अ धकार है। ‘सावभौ मक’ शब्द का अथ यही है। यह अ धकार सं वधान के अनु े द 326 पर आधा रत है
और लोकसभा, प्रत्येक राज्य एवं कद्रशा सत प्रदे श क वधानसभा तथा गाँव एवं शहर के सभी स्थानीय चुनाव पर लागू होता
है। कोई भी व्य क्त अन्य व्य क्त क ओर से मतदान नह कर सकता, और गंभीर अपराध म दोषी पाए जाने पर व्य क्त को
मतदान से रोका जाता है।
सं वधान नमाताओं ने यह नणय आरंभ से ही लया, और यह एक साह सक नणय था। 1947 म लगभग 14
प्र तशत व्य क्त साक्षर थे, जनम म हलाएँ लगभग 8 प्र तशत — कुछ लोग का मत था क मता धकार केवल साक्षर को
मले। स्वतंत्रता से पहले लगभग 13 प्र तशत भारतीय को ही मत का अ धकार था। फर भी भारत ने म हलाओं को आरंभ से

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ही मता धकार दया, जब क स्वट् ज़रलड म म हलाओं को यह अ धकार 1971 म मला। अध्याय के आरंभ म अल्लाद
कृष्णास्वामी अय्यर के शब्द ह — “इससे पहले वश्व इ तहास म कभी ऐसा साह सक प्रयोग नह कया गया है।”
नवाचन तंत्र इतना व्यापक इस लए है क्य क पैमाना वशाल है। 2024 के आम चुनाव म लगभग 96.8 करोड़ मतदाता
543 नवाचन क्षेत्र म मतदान के पात्र थे और 10 लाख से अ धक मतदान कद्र बनाए गए। भारत म मतदाताओं क संख्या
यूनाइटे ड कगडम क तुलना म पंद्रह गुना है और क्षेत्रफल ांस से छह गुना बड़ा। इसके अ त रक्त 2,50,000 से अ धक
स्थानीय नकाय म 31 लाख नवा चत प्र त न ध ह, जनम 13 लाख म हलाएँ ह — ये सभी सावभौ मक वयस्क मता धकार
से चुने जाते ह।
भारत नवाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधा नक नकाय है, जसक स्थापना 1950 म हुई। यह लोकसभा, राज्यसभा,
राज्य वधान सभाओं तथा राष्ट्रप त एवं उप-राष्ट्रप त के पद के लए चुनाव कराता है; स्वतंत्र भारत म प्रथम आम चुनाव
1951–1952 म हुए। यह चुनाव क त थयाँ नधा रत करता है, राजनै तक दल का पंजीकरण करता है, आदश आचार सं हता
लागू करता है और संपूण चुनावी प्र क्रया क दे ख-रेख करता है। इसक संरचना राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य नवाचन आयुक्त और दो
नवाचन आयुक्त से लेकर राज्य/संघ शा सत स्तर पर मुख्य नवाचन अ धकारी, जला स्तर पर जला नवाचन अ धकारी और
उनके नीचे नवाचन अ धकारी ( रट नग ऑ फसर) — जो चुनाव का संचालन करता है — तथा नवाचन पंजीकरण
अ धकारी — जो मतदाता सूची का प्रबंधन करता है — तक फैली है। स्थानीय नकाय के चुनाव राज्य नवाचन आयोग
कराते ह।
लोकसभा और वधान सभाओं के लए भारत ‘जो सबसे आगे, वह जीता’ (फस्ट पास्ट द पोस्ट) प्रणाली अपनाता है।
नवाचन क्षेत्र म सवा धक मत पाने वाला प्रत्याशी वजयी होता है, चाहे उसे 50 प्र तशत मत न मले ह — जैसे गुरमत 33 म से
केवल 12 मत पाकर भी जीत गई। लोकसभा के नवा चत सदस्य सांसद और वधान सभाओं के वधायक कहलाते ह। 84
लोकसभा क्षेत्र अनुसू चत जा तय और 47 अनुसू चत जनजा तय के लए आर क्षत ह; शेष 412 सामान्य ह। बहुमत प्राप्त दल
या गठबंधन सरकार बनाता है और उसका नेता प्रधानमंत्री (राज्य म मुख्यमंत्री) बनता है।
सभी चुनाव प्रत्यक्ष नह होते। राज्यसभा के 245 सदस्य म से 233 को राज्य वधान सभाओं के नवा चत वधायक चुनते ह
और 12 को राष्ट्रप त ना मत करते ह; यह स्थायी सदन है जो कभी वघ टत नह होता, सदस्य का कायकाल छह वष है और
प्रत्येक दो वष म एक- तहाई सदस्य सेवा नवृत्त होते ह। राष्ट्रप त का चुनाव संसद के दोन सदन के सदस्य तथा राज्य एवं
दल्ली और पुडुचेरी क वधानसभाओं के सदस्य के नवाचक मंडल ारा होता है; उपराष्ट्रप त का चुनाव संसद के दोन सदन
के नवा चत एवं मनोनीत सदस्य ारा। तीन म एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का उपयोग होता है।
सुरक्षा-उपाय, और शेष चुनौ तयाँ। गुप्त मतदान, अ मट स्याही, नोटा का वकल्प, ई.वी.एम. के साथ वी.वी.पी.ए.ट . क
पच तथा आदश आचार सं हता (केरल म 1960 म अपनाई गई, 1962 म आयोग ारा प्रसा रत, 1991 से स क्रय रूप से
लागू) — ये सब चुनाव को स्वतंत्र और नष्पक्ष बनाए रखने के लए ह। 1990 म मुख्य नवाचन आयुक्त बने ट .एन. शेषन ने
मतदाता प रचय पत्र और चुनावी व्यय पर कड़ी चौकसी जोड़ी। फर भी अध्याय तीन समस्याएँ बताता है — चुनाव म धन का
बढ़ता प्रभाव, आपरा धक पृष्ठभू म वाले प्रत्या शय क उल्लेखनीय संख्या, और वशेषकर शहरी क्षेत्र म मतदाताओं क
उदासीनता। 2024 म लगभग 34 प्र तशत मतदाताओं ने मता धकार का प्रयोग नह कया। अध्याय का उत्तर है — जागरूक
और सतक मतदाता।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक क्या कहती है

मता धकार संिवधान या सरकार ारा पदान िकया गया हा शया- टप्पणी, पृष्ठ अंग्रेजी म अन्य शब्द ‘स े ज’ है, जो
( चाइज) अिधकार 118 चाइज का पयायवाची है

सावभौ मक वयस्क पत्येक वयस्क नागिरक को एक मत और सभी ‘सावभौ मक वयस्क 18 वष से अ धक आयु; जा त, मत, नस्ल,
मता धकार मतों का समान मूल्य मता धकार’, पृष्ठ 118 धम, लग, शक्षा, आय का भेदभाव नह ;
अनु े द 326

नवाचन क्षेत्र वह क्षेत्र िजसके मतदाता िकसी िवधायी हा शया- टप्पणी, पृष्ठ लोकसभा के लए 543 नवाचन क्षेत्र; एक
िनकाय के िलए पितिनिध चुनते है ं 119 लोकसभा क्षेत्र म दो या अ धक वधान
सभा क्षेत्र हो सकते ह

प्रणाली परस्पर जुड़े या परस्पर िनभर तत्वों का एक हा शया- टप्पणी, पृष्ठ ‘ नवाचन प्रणाली’ का अथ समझाने के
समूह जो एक सामान्य उ े श्य या काय को 119 लए द गई प रभाषा
पाप्त करने के िलए एक साथ काम करते है ं

भारत नवाचन स्वतंत्र और िनष्पक्ष चुनाव कराने के िलए ‘भारत नवाचन आयोग स्थापना 1950; लोकसभा, राज्यसभा,
आयोग (ई.सी.आई.) उत्तरदायी स्वतंत्र संवैध ािनक िनकाय — एक सं क्षप्त प रचय’, राज्य वधान सभाओं तथा राष्ट्रप त एवं
पृष्ठ 126 उप-राष्ट्रप त के चुनाव कराता है

गुप्त मतदान ऐसा मतदान िजसमें कोई यह न जान पाए िक सूय दय व ालय का “इससे यह प्र क्रया गोपनीय और नष्पक्ष
िकसने अपना मत िकसे िदया प्रकरण, पृष्ठ 124 बनी रहती है”

नोटा (NOTA) ‘नन ऑफ द एबव’ अथ त उपरोक्त में से कोई इसे अनदे खा न कर, पृष्ठ इससे प रणाम म प रवतन नह होता,
नही ं — सभी पत्यािशयों को अस्वीकृ त करने 125 कतु संदेश मलता है क मतदाता बेहतर
का िवकल्प वकल्प चाहते ह

ई.वी.एम. इले क्टॉिनक मतदान मशीन; बटन दबाने पर चत्र 5.13, पृष्ठ 129; नामी बया और भूटान जैसे दे श म आयोग
एक बीप की ध्विन सुनाई दे ती है चत्र 5.16, पृष्ठ 130 क सहायता से उपयोग; अन्य दे श ने
भारत से प्र शक्षण लया

वी.वी.पी.ए.ट . मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑिडट टेल — आइए पता लगाएँ, पृष्ठ ववाद या त्रु ट क स्थ त म सत्यापन और
मत की छपी पच 130 पुनः गणना के लए बैकअप प्रमाण

आदश आचार नेताओं, राजनैितक दलों और उम्मीदवारों के ‘आदश आचार सं हता’, केरल म 1960 म अपनाई गई; आयोग ने
सं हता िलए क्या करना और क्या नही ं करना, इसकी पृष्ठ 130 1962 म प्रसा रत क ; 1991 से आयोग
सूची स क्रय

‘जो सबसे आगे, वह िनव चन क्षेत्र में सव िधक मत पाने वाला पृष्ठ 132–133 प्रत्याशी कुल मत का 50 प्र तशत प्राप्त
जीता’ पत्याशी िवजयी कए बना भी जीत सकता है

गठबंधन दो या दो से अिधक दलों का साथ िमलकर हा शया- टप्पणी, पृष्ठ लोकसभा म बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन
काय करना 133 राष्ट्रीय सरकार का गठन करता है

अप्रत्यक्ष नवाचन मतदाता पितिनिध चुनते है ं और वे पितिनिध ‘राज्यसभा के लए राज्यसभा के 245 म से 233 सदस्य
िकसी अन्य को चुनते है ं चुनाव’, पृष्ठ 134 वधायक ारा चुने जाते ह; 12 राष्ट्रप त

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शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक क्या कहती है

ारा ना मत

एकल संक्रमणीय एक िवशेष िविध िजसमें मतदाता पत्यािशयों को पृष्ठ 134–137 राज्यसभा, राष्ट्रप त और उपराष्ट्रप त के
मत प्रणाली वरीयता के अनुस ार क्रम दे ते है ं चुनाव म; छोटे राज्य को भी समु चत
प्र त न धत्व मलता है

सदन का वघटन िकसी सदन के कायकाल की समािप्त या हा शया- टप्पणी, पृष्ठ राज्यसभा स्थायी सदन है — इसे कभी
अन्य संवैध ािनक कारण से समािप्त 134 वघ टत नह कया जाता

सदनीय वह पणाली िजसमें िवधायी िनकाय को दो हा शया- टप्पणी, पृष्ठ ऐसे राज्य क वधान प रषद के सदस्य
वधानमंडल अलग-अलग सदनों में िवभािजत िकया जाता है 136 राष्ट्रप त के नवाचन म मतदान नह करते

नवाचक मंडल अपत्यक्ष चुनाव में मतदान करने वाले िनव िचत ‘भारत के राष्ट्रप त का संसद के दोन सदन के सदस्य + राज्य
पितिनिधयों का िनिश्चत समूह चुनाव’, पृष्ठ 136 तथा दल्ली और पुडुचेरी क
वधानसभाओं के सदस्य

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages39
Languagehindi
Updated19 Sep 2026