aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B

Get here CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B. To check solutions of this sample paper, select MARKING SCHEME in above drop down (filter) and then select year 2023. Solve these Model Question Papers to prepare well for Hindi A, B subject. Also you can download PDF for CBSE Class 10 Sample Paper 2023 from download icon. More Detail
CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B - Page 1 of 36

Finished viewing? Save it for later —

Download CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B (PDF · 36 pages)
Downloaded 262 times

About CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B

CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B is available here for free download. Published by CBSE for Class 10, this sample paper can be viewed online or downloaded as a PDF (36 pages). Candidates preparing for Class 10 can use CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B?

Open this page and click the Download button to save CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B free to download?

Yes. CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B have?

CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B contains 36 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 10 study material?

You can find more Class 10 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

CBSE Class 10 Sample Paper 2023 for Hindi A, B – Text

Read the full text of this sample paper below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (36 pages)

Page 1

प्रतिदर्श प्रश्नपत्र, 2022-23
विषय-ह द
िं ी, कोर्श-ए (कोड-002)
तनर्धशरिि र्मय : 3 घिंटे पर्
ू धांक : 80
र्धमधन्य तनदे र् :
(1) इस प्रश्नपत्र में दो खंड हैं- खंड 'क' और ख'। खंड-क में वस्तुपरक/बहुववकल्पी और खंड-ख में
वस्तनु नष्ठ/वर्णनात्मक प्रश्न ददए गए हैं।
(2) प्रश्नपत्र के दोनों खंडों में प्रश्नों की संख्या 17 है और सभी प्रश्न अननवायण हैं।
(3) यथासंभव सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखखए।
(4) खंड 'क' में कुि 10 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 49 है । ददए गए ननदे शों का पािन करते
हुए 40 उपप्रश्नों के उत्तर दे ना अननवायण है ।
(5) खंड 'ख' में कुि 7 प्रश्न हैं, सभी प्रश्नों के साथ उनके ववकल्प भी ददए गए हैं। ननदे शानुसार ववकल्प
का ध्यान रखते हुए सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खिंड – अ (ब ु विकल्पी/ िस्िुपिक प्रश्न)
प्रश्न 1. तनम्नलिखखि गदयधिंर् पि आर्धरिि ब ु विकल्पी प्रश्नों के र्िधशधर्क उपयक्
ु ि विकल्प चन
ु कि
लिखखए- (1x5=5)
(दक्षिध : पधठ्य पुस्िक र्े इिि ककर्ी र्धह त्ययक ि र्धमधन्य गदयधिंर्/ पदयधिंर् को पढ़कि अर्शग्र र्
किने की योग्यिध)
‘घर’ िैसा छोटा-सा शब्द भावात्मक दृजष्ट से बहुत ववशाि होता है । इस आधार पर मकान, भवन, फ़्िैट,
कमरा, कोठी, बँगिा आदद इसके समानाथी बबिकुि भी नहीं िगते हैं क्योंकक इनका सामान्य संबंध
दीवारों, छतों और बाहरी व आंतररक साि-सज्िा तक सीलमत होता है , िबकक घर प्यार-भरोसे और ररश्तों
की लमठास से बनता है । एक आदशण घर वही है , जिसमें प्रेम व भरोसे की दीवारें , आपसी तािमेि की
छतें , ररश्तों की मधुरता के खखिे-खखिे रं ग, स्नेह, सम्मान व संवद
े नाओं की सज्िा हो। घर में
भावात्मकता है , वह भावात्मकता, िो संबंधों को महकाकर पररवार को िोडे रखती है । यह बात हमें
अच्छी तरह याद रखनी चादहए कक िब ररश्ते महकते हैं, तो घर महकता है , प्यार अठखेलियाँ करता है ,
तो घर अठखेलियाँ करता है, ररश्तों का उल्िास घर का उल्िास होता है , इसलिए ररश्ते हैं, तो घर है और
ररश्तों के बीच बहता प्रेम घर की नींव है । यह नींव जितनी मज़बत
ू होगी, घर उतना ही मज़बत
ू होगा। न
िाने क्यों, आि का मनुष्य संवेदनाओं से दरू होता िा रहा है , उसके मन की कोमिता, कठोरता में बदि
रही है ; ददन-रात कायण में व्यस्त रहने और धनोपािणन की अनत तीव्र िािसा से उसके अंदर मशीननयत
बढ़ रही है , इसलिए उसके लिए घर के मायने बदि रहे हैं; उसकी अहलमयत बदि रही है , इसी कारर्
आि पररवार में आपसी किह, द्वंद्व आदद बढ़ रहे हैं। आि की पीढ़ी प्राइवेसी (वैयजक्तकता) के नाम
1|Page

Page 2

पर एकाकीपन में सुख खोि रही है । उसकी सोच ‘मेरा कमरा, मेरी दनु नया’ तक लसमट गई है । एक छत
के नीचे रहते हुए भी हम एकाकी होते िा रहे हैं। काश, सब घर की अहलमयत समझें और अपना अहं
हटाकर घर को घर बनाए रखने का प्रयास करें ।
(1) भधिधयमक दृत्टट र्े घि जैर्े छोटे -र्े र्ब्द की ‘विर्धििध’ में तनह ि ैं-
कर्न पढ़कि र् ी विकल्प कध चयन कीत्जए- (ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)

कर्न
(i) प्रेम, ववश्वास, नातों का माधुयण व संवेदनाएँ
(ii) आकर्णक बनावट, सुंदर िोग, वैभव व संपन्नता
(iii) संद
ु र रं ग संयोिन, आंतररक सिावट एवं हररयािी
(iv) स्नेह, सम्मान, सरसता, संवेदनाएँ, संपन्नता व साि-सज्िा

विकल्प
(क) कथन i सही है ।
(ख) कथन i व ii सही है ।
(ग) कथन ii व iii सही हैं।
(घ) कथन iii व iv सही हैं।

(2) र्धमधन्य रूप में मकधन, भिन, फ़्िैट, कमिध, कोठी आहद र्ब्दों कध र्िंबिंर् ककर्र्े ोिध ै?
(क) हृदय की भावनाओं से
(ख) वैभव और समद्
ृ धध से
(ग) स्थानीय सुववधाओं से
(घ) बनावट व सिावट से

(3) आज की पीढ़ी को र्ख
ु ककर्में हदखधई दे ि ध ै?
(क) ननिी िीवन व एकांनतकता में
(ख) पाररवाररक भावात्मक संबंधों में
(ग) बबना मेहनत सब कुछ लमि िाने में
(घ) धन कमाने के लिए िी तोड मेहनत करने में

(4) गदयधिंर् में प्रेम को घि कध क्यध बिधयध गयध ै?
(क) आभूर्र् (ख) आधार
(ग) भरोसा (घ) उल्िास

2|Page

Page 3

(5) कर्न (A) औि कधिर् (R) को पढ़कि उपयक्
ु ि विकल्प चतु नए- (कर्न ि कधिर् पि आर्धरिि प्रश्न)
कथन (A) - आदमी के अंदर संवेदनाओं की िगह मशीननयत बढ़ती िा रही है ।

कारर् (R) - व्यस्तता और अथोपािणन की अनत महत्वाकांक्षा ने उसे यहाँ तक पहुँचा ददया है ।

(क) कथन (A) गित है , ककं तु कारर् (R) सही है ।

(ख) कथन (A) और कारर् (R) दोनों ही गित हैं।

(ग) कथन (A) सही है और कारर् (R) कथन (A) की सही व्याख्या है ।

(घ) कथन (A) सही है , ककं तु कारर् (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है ।

प्रश्न 2. तनम्नलिखखि दो पदयधिंर्ों में र्े ककर्ी एक पि आर्धरिि ब ु विकल्पी प्रश्नों के र्िधशधर्क उपयक्
ु ि

विकल्प चुनकि लिखखए- (1x5=5)

(दक्षिध : पधठ्य पुस्िक र्े इिि ककर्ी र्धह त्ययक ि र्धमधन्य गदयधिंर्/ पदयधिंर् को पढ़कि अर्शग्र र्
किने की योग्यिध)
सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज़ संघर्ण ही।।

संघर्ण से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कक तुम
िो नत हुआ, वह मत
ृ हुआ, ज्यों वंत
ृ से झरकर कुसुम
िो पंथ भूि रुका नहीं,
िो हार दे ख झक
ु ा नहीं,
जिसने मरर् को भी लिया हो िीत, है िीवन वही।। सच हम नहीं…

ऐसा करो जिससे न प्रार्ों में कहीं िडता रहे ।
िो है िहाँ चुपचाप अपने आप से िडता रहे ।
िो भी पररजस्थनतयाँ लमिें,
काँटे चभ
ु ें , कलियाँ खखिें,
टूटे नहीं इनसान, बस संदेश यौवन का यही।। सच हम नहीं….

अपने हृदय का सत्य अपने आप हमको खोिना।
अपने नयन का नीर अपने आप हमको पोंछना।
आकाश सुख दे गा नहीं,
धरती पसीिी है कहीं!
हर एक राही को भटककर ही ददशा लमिती रही।। सच हम नहीं…
-जगदीर् गुप्ि
3|Page

Page 4

(1) इर् कवििध के केंद्रीय भधि े िु हदए गए कर्नों को पढ़कि र्बर्े र् ी विकल्प चुतनए-
(ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)
कर्न
(i) प्रनतकूिता के ववरुद्ध िझ
ू ते हुए बढ़ना ही िीवन की सच्चाई है ।
(ii) पररजस्थनतयों से समझौता करके िोखखमों से बचना ही उधचत है ।
(iii) िक्ष्य-संधान हे तु मागण में भटक िाने का भय त्याग दे ना चादहए।
(iv) िीवन में ‘अपने छािे, खुद सहिाने’ का दशणन अपनाना चादहए।
विकल्प
(क) कथन ii सही है ।
(ख) कथन i व iii सही हैं।
(ग) कथन i, iii व iv सही हैं।
(घ) कथन i, ii, iii व iv सही हैं।

(2) मिर् अर्धशि मयृ यु को जीिने कध आर्य ै-
(क) साधुता व साधना से अमरत्व प्राप्त करना
(ख) योगाभ्यास व जििीववर्ा से दीघाणयु हो िाना
(ग) अथण, बि व दृढ़ इच्छाशजक्त से िीवन को कष्टमक्
ु त करना
(घ) िीवन व िीवन के बाद भी आदशण रूप में स्मरर् ककया िाना

(3) 'आकधर् र्ख
ु दे गध न ीिं, र्ििी पर्ीजी ै क ीिं…' कध अर्श ै कक-
(क) आकाश और धरती दोनों में संवेदनशीिता नहीं है।
(ख) ईश्वर उदार है , अतः वही सख
ु दे ता है , वही पसीिता है ।
(ग) िझ
ु ारू बनकर स्वयं ही िीवन के दख
ु दरू ककए िा सकते हैं।
(घ) सामूदहक प्रयत्नों से ही संकट की जस्थनत से ननकिा िा सकता है ।

(4) अपने आप र्े िड़ने कध अर्श ै-
(क) अपनी अच्छाइयों व बरु ाइयों से भिीभाँनत पररधचत होना
(ख) ककसी मद्
ु दे पर ददि और ददमाग़ का अिग-अिग सोचना
(ग) अपने ककसी ग़ित ननर्णय के लिए स्वयं को संतुष्ट कर िेना
(घ) अपनी दब
ु ि
ण ताओं की अनदे खी न करके उन्हें दृढ़ता से दरू करना

4|Page

Page 5

(5) युिधिस्र्ध में लर्खधिी ै कक-
कर्न पढ़कि र् ी विकल्प कध चयन कीत्जए- (ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)

कर्न
(i) स्वयं को चैतन्य, गनतशीि, आत्मआिोचक व आशावादी बनाए रखें।
(ii) सिग रहें ; िीवन में कभी कदठन पररजस्थनतयाँ उत्पन्न ही न होने दें ।
(iii) सख
ु -दख
ु , उतार-चढ़ाव को भाग्यवादी बनकर स्वीकार करना सीखें।
(iv) प्रनतकूि पररजस्थनतयों के आगे घुटने न टे कें; बजल्क दो-दो हाथ करें ।
विकल्प
(क) कथन i व ii सही हैं।
(ख) कथन i व iv सही हैं।
(ग) कथन ii व iii सही हैं।
(घ) कथन iii व iv सही हैं।
अर्िध
‘फ़सि’ ककसान के कच्चे–अधपके

सपनों की िहिहाती आस है

यह उसके हृदय की गहराइयों में

अंकुररत एक ववश्वास है

यह ववश्वास है -

ढही हुई दीवार की धचनाई का

अट्ठारह पार कर चुकी बेटी की सगाई का

परचनू नए की उधारी चक
ु ाने का

मन के सपनों को नए पररधान पहनाने का

इसी ववश्वास की सिामती के लिए

वह मूँदता है आँखें

ददन में न िाने ककतनी बार...

और दआ
ु एँ प्रेवर्त करता है ऊपर तक

भरोसे और आशंका की रस्साकशी में

न िाने ककतनी बार वह िागता है नींद से

5|Page

Page 6

और िगा दे ना चाहता है उस परमात्मा को भी

जिसके बारे में सुनता आया है कक सभी कुछ उसके ही हाथ है ...

और इसीलिए िब फ़सि सौंधधयाती है

असि में , ककसान के सपने सौंधधयाते हैं

और फ़सि घर आ िाने पर, सपने पक िाते हैं...

-डॉ. विनोद 'प्रर्ून'

(1) फ़र्ि को ककर्धनों के कच्चे-अर्पके र्पनों की ि ि धिी आर् क ने कध कधिर् ै-
कर्न पढ़कि र् ी विकल्प कध चयन कीत्जए- (ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)

कर्न
(i) फ़सि दे खकर बैंकों से सस्ते ब्याि पर ऋर् सरिता से लमि िाना
(ii) फ़सि से ककसान के स्वप्नों की संबद्धता और भावात्मक िगाव होना
(iii) फ़सि से िुडे ननराई, लसंचाई, कटाई, गहाई, भंडारर् आदद के सपने दे खना
(iv) फ़सि से ही िीवन की ज़रूरी इच्छाओं के साकार होने की संभावना िड
ु ी होना
विकल्प
(क) कथन i व ii सही हैं।
(ख) कथन ii व iii सही हैं।
(ग) कथन ii व iv सही हैं।
(घ) कथन iii व iv सही हैं।

(2) ककर्धन के हृदय की ग िधइयों में अिंकुरिि ु ए विश्िधर् की परिधर् में आिे ैं-
(क) कुछ पाकर सामाजिक कायण करने की इच्छाएँ
(ख) अनत आवश्यक कायण एवं मन के भावात्मक सपने
(ग) आधनु नक कृवर् यंत्र आदद िट
ु ा िेने की अलभिार्ाएँ
(घ) कदठन समय के लिए कुछ बचाकर रखने की योिनाएँ

(3) ‘दआ
ु एँ प्रेवषि कििध ै ऊपि िक’ कध आर्य ै-
(क) ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए व्रत-उपवास रखना
(ख) सामूदहक यज्ञ करके फ़सि की कुशिता की कामना करना
(ग) फ़सि की कुशिता हे तु मन ही मन ईश्वर से प्राथणना करना
(घ) ननवेदन को ग्राम्य ववकास से िुडे अधधकाररयों तक पहुँचाना

6|Page

Page 7

(4) ‘भिोर्े औि आर्िंकध की िस्र्धकर्ी में ’ पिंत्क्ि के आर्धि पि ककर्धन की मनोदर्ध र्े जुड़ध र् ी
विकल्प ै-
(क) ईश्वर पर अटूट ववश्वास कक वे फ़सि को कोई हानन नहीं होने दें गे

(ख) ईश्वर पर ववश्वास, ककं तु फ़सि की कुशिता को िेकर मन आशंककत रहना

(ग) पररश्रम पर पर्
ू ण ववश्वास, ककं तु ‘भाग्य में क्या लिखा है ’ इससे सदा आशंककत रहना

(घ) स्वयं पर भरोसा करना, ककं तु प्राकृनतक आपदाओं की आशंका से सदै व भयभीत बने रहना

(5) कर्न (A) औि कधिर् (R) को पढ़कि उपयक्
ु ि विकल्प चतु नए- (कर्न ि कधिर् पि आर्धरिि प्रश्न)
कर्न (A) - ककसान अपनी फ़सि के साथ भावात्मक रूप से िड
ु ा होता है ।

कधिर् (R) - व्यवसाय और व्यवसायी के बीच ऐसे संबध
ं स्वाभाववक हैं।

(क) कथन (A) गित है , ककं तु कारर् (R) सही है ।

(ख) कथन (A) और कारर् (R) दोनों ही गित हैं।

(ग) कथन (A) सही है और कारर् (R) कथन (A) की सही व्याख्या है ।

(घ) कथन (A) सही है , ककं तु कारर् (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है ।

प्रश्न 3. तनदे र्धनुर्धि 'िचनध के आर्धि पि िधक्य भेद' पि आर्धरिि पधँच ब ु विकल्पी प्रश्नों में र्े ककन् ीिं
चधि प्रश्नों के उत्ति दीत्जए- (1x4=4)
(दक्षिध : विलभन्न र्धह त्ययक विर्धओिं ि व्यधि धरिक उदध िर्ों में व्यधकिखर्क र्िंिचनधओिं कध र् ज बोर्)
(1) ‘न िो िुम ि धँ जध र्के, न ी मैं।’ इर्कध र्िि िधक्य ोगध-
(क) तम
ु और मैं दोनों ही वहाँ नहीं िा सके।

(ख) तुम भी वहाँ नहीं िा सके और मैं भी वहाँ नहीं िा सका।

(ग) यद्यवप तुम और मैं वहाँ िा सकते थे, किर भी नहीं िा सके।

(घ) चँकू क तुम वहाँ नहीं िा सके, इसलिए मैं भी वहाँ नहीं िा सका।

(2) ‘र्ूयोदय ोिे ी प्रकृति कध र्ौंदयश खखि उठिध ै ।’ इर्कध र्िंयुक्ि िधक्य ोगध-
(क) सूयोदय होने पर प्रकृनत का सौंदयण खखि उठता है ।

(ख) सय
ू ोदय होता है और प्रकृनत का सौंदयण खखि उठता है ।

(ग) िब सूयोदय होता है , तब प्रकृनत का सौंदयण खखि उठता है ।

(घ) क्योंकक सूयोदय होता है , इसलिए प्रकृनत का सौंदयण खखि उठता है ।

7|Page

Page 8

(3) आपके आिधज़ उठधने पि र्भी आपके र्धर् खड़े ो जधएँगे। इर्कध लमश्र िधक्य ोगध-
(क) आपके आवाज़ उठाते ही सभी आपके साथ खडे हो िाएँगे।

(ख) आप आवाज़ उठाएँगे, तो सभी आपके साथ खडे हो िाएँगे।

(ग) आप आवाज़ उठाएँगे और सभी आपके साथ खडे हो िाएँगे।

(घ) आप आवाज़ उठाएँगे इसलिए सभी आपके साथ खडे हो िाएँगे।

(4) तनम्नलिखखि िधक्यों में लमश्र िधक्य प चधनकि नीचे हदए गए र्बर्े र् ी विकल्प को चुतनए-
(ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)
(i) आप कह सकते थे कक यह गिती आपने नहीं की है ।

(ii) यदद आप अपना पक्ष रखते, तो अवश्य ही ननदोर् लसद्ध होते।

(iii) िब आपने गिती की ही नहीं है , तो उसका दं ड आपको क्यों लमिेगा?

(iv) चँकू क दोर्ी कोई और है इसलिए आप यह दोर् अपने ऊपर बबिकुि मत िीजिए।

विकल्प
(क) केवि कथन i सही है ।
(ख) कथन ii व iii सही हैं।
(ग) कथन iii व iv सही हैं।
(घ) कथन i, ii, iii व iv सही हैं।
(5) कॉिम 1 को कॉिम 2 के र्धर् र्ुमले िि कीत्जए औि र् ी विकल्प चुनकि लिखखए-
(ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)

कॉिम 1 कॉिम 2
(1) बबल्िी आई और दध
ू पी गई। (i) सरि वाक्य
(2) यदद दध
ू बाहर न रखा होता, तो बबल्िी ऐसा नहीं कर पाती। (ii) संयुक्त वाक्य
(3) हमें बबल्िी का िठ
ू ा दध
ू िेंकना पडा। (iii) लमश्र वाक्य
विकल्प
(क) 1-iii, 2-i, 3-ii
(ख) 1-ii, 2-iii, 3-i
(ग) 1-ii, 2-i, 3-iii
(घ) 1-ii, 2-i, 3-iii

8|Page

Page 9

प्रश्न 4. तनदे र्धनुर्धि 'िधच्य' पि आर्धरिि पधँच ब ु विकल्पी प्रश्नों में र्े ककन् ीिं चधि प्रश्नों के उत्ति
दीत्जए- (1x4=4)
(दक्षिध : विलभन्न र्धह त्ययक विर्धओिं ि व्यधि धरिक उदध िर्ों में व्यधकिखर्क र्िंिचनधओिं कध र् ज बोर्)
(1) कॉिम 1 को कॉिम 2 के र्धर् र्ुमले िि कीत्जए औि र् ी विकल्प चुनकि लिखखए-
(ित्त
ृ अध्ययन पि आर्धरिि /Case study based)

कॉिम 1 कॉिम 2
(1) भारत द्वारा मैच िीत लिया गया। (i) कतव
ण ृ ाच्य
(2) गें दबाज़ों ने मैच में बेहतरीन प्रदशणन ककया। (ii) कमणवाच्य
(3) ववपक्षी बल्िेबाज़ों से क्रीज़ पर रुका नहीं िा सका। (iii) भाववाच्य
विकल्प
(क) 1-ii, 2-i, 3-iii
(ख) 1-i, 2-iii, 3-ii
(ग) 1-ii, 2-iii, 3-i
(घ) 1-i, 2-ii, 3-iii

(2) इनमें कमशिधच्य कध उदध िर् ै-
(क) रवीना ग़ज़ि नहीं गा पाती है ।
(ख) रवीना से ग़ज़ि नहीं गाई िाती है ।
(ग) रवीना पैदि नहीं चि पाती है ।
(घ) रवीना से पैदि नहीं चिा िाता है ।

(3) इनमें किि
श ृ धच्य कध उदध िर् ै-
(क) चिो, अब घर चिें।
(ख) चिो, अब घर चिा िाए।
(ग) कैरम के बाद अब शतरं ि खेिी िाए।
(घ) हमारे द्वारा शतरं ि खेिी िा सकती है ।

(4) ‘दधदी जी पढ़ न ीिं र्किीिं।’ इर्कध भधििधच्य ोगध-
(क) दादी िी कुछ भी पढ़ नहीं पाएँगी।
(ख) दादी िी से पढ़ा नहीं िा सकेगा।
(ग) दादी िी से पढ़ा नहीं िा सकता।
(घ) दादी िी कुछ भी पढ़ नहीं पाती हैं।
9|Page

Page 10

(5) ‘बबनध र् धिे बूढ़ी मधँ र्े अब चिध न ीिं जधिध ै ।’ इर्कध किि
श ृ धच्य ोगध-
(क) बबना सहारे बूढ़ी माँ अब चि नहीं सकेंगी।
(ख) बबना सहारे बढ़
ू ी माँ अब चि नहीं पाती हैं।
(ग) बबना सहारे बूढ़ी माँ अब चि नहीं पाएँगी।
(घ) बबना सहारे बढ़
ू ी माँ अब चि नहीं सकती हैं।

प्रश्न 5. तनदे र्धनुर्धि 'पद परिचय' पि आर्धरिि पधँच ब ु विकल्पी प्रश्नों में र्े ककन् ीिं चधि प्रश्नों के उत्ति
दीत्जए- (1x4=4)
(दक्षिध : विलभन्न र्धह त्ययक विर्धओिं ि व्यधि धरिक उदध िर्ों में व्यधकिखर्क र्िंिचनधओिं कध र् ज बोर्)

(1) ‘चधिों ओि छधई रियधिी मनमो क िग ि ी र्ी।’ िे खधिंककि अिंर् कध पद-परिचय ोगध-
(क) भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कताण कारक
(ख) भाववाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, बहुवचन, कमण कारक
(ग) िानतवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कताण कारक
(घ) व्यजक्तवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कताण कारक

(2) ‘ड्रधइिि ने ज़ोि र्े ब्रेक मधिे ।’ िे खधिंककि अिंर् कध पद-परिचय ोगध-
(क) रीनतवाचक कक्रयाववशेर्र्, ववशेष्य कक्रया-मारे
(ख) स्थानवाचक कक्रयाववशेर्र्, ववशेष्य कक्रया-मारे
(ग) कािवाचक कक्रयाववशेर्र्, ववशेष्य कक्रया- मारे
(घ) पररमार्वाचक कक्रयाववशेर्र्, ववशेष्य कक्रया- मारे

(3) ‘य पुस्िक मैंने िब खिीदी र्ी, जब मैं पिंद्र िषश कध र्ध।’ िे खधिंककि अिंर् कध पद-परिचय ोगध-
(क) संकेतवाचक सवणनाम, एकवचन, पजु ल्िंग
(ख) सावणनालमक ववशेर्र्, ववशेष्य- पुस्तक
(ग) ननपात, वाक्य के अथण को बि दे रहा है
(घ) पररमार्वाचक ववशेर्र्, ववशेष्य-पुस्तक

(4) ‘ धिदधि र्ध ब ने पधन खधयध।’ िे खधिंककि अिंर् कध पद-परिचय ोगध-
(क) अकमणक कक्रया, सामान्य भूतकाि, कतव
ण ृ ाच्य
(ख) सकमणक कक्रया, कमण-पान, सामान्य भूतकाि, कतव
ण ृ ाच्य
(ग) प्रेरर्ाथणक कक्रया, कमण-पान, सामान्य भूतकाि, कतव
ण ृ ाच्य
(घ) द्ववकमणक कक्रया, कमण-पान, हािदार साहब, सामान्य भत
ू काि, कतव
ण ृ ाच्य

10 | P a g e

Page 11

(5) कुछ िड़के बध ि खेि ि े ैं। चधय में कुछ पड़ध ै। दोनों िधक्यों के कुछ कध र्धमधन्य पद-परिचय
ोगध-
(क) पहिा कुछ- सावणनालमक ववशेर्र्, दस
ू रा कुछ- अननजश्चत संख्यावाचक ववशेर्र्

(ख) पहिा कुछ- अननश्चयवाचक सवणनाम, दस
ू रा कुछ- अननजश्चत संख्यावाचक ववशेर्र्
(ग) पहिा कुछ- अननजश्चत संख्यावाचक ववशेर्र्, दस
ू रा कुछ- अननश्चयवाचक सवणनाम

(घ) पहिा कुछ- अननजश्चत पररमार्वाचक ववशेर्र्, दस
ू रा कुछ- ननश्चयवाचक सवणनाम

प्रश्न 6. तनदे र्धनुर्धि 'अििंकधि' पि आर्धरिि पधँच ब ु विकल्पी प्रश्नों में र्े ककन् ीिं चधि प्रश्नों के उत्ति
दीत्जए- (1x4=4)
(दक्षिध : विलभन्न र्धह त्ययक विर्धओिं ि व्यधि धरिक उदध िर्ों में व्यधकिखर्क र्िंिचनधओिं कध र् ज बोर्)

(1) "अर्श बबनध कब पर्
ू श ैं, र्ब्द, र्कि जग-कधज।
अर्श अगि आ जधए िो, ठधठ-बधट औ’ िधज।।" इर् दो े में प्रयुक्ि अििंकधि ै-
(क) श्िेर् (ख) उत्प्रेक्षा

(ग) मानवीकरर् (घ) अनतशयोजक्त

(2) "कैर्े किवु षि प्रधर् ो गए।
मधनो मन पधषधर् ो गए।।" इन कधव्य-पिंत्क्ियों में प्रयुक्ि अििंकधि ै-
(क) श्िेर् (ख) उत्प्रेक्षा

(ग) मानवीकरर् (घ) अनतशयोजक्त

(3) "इर्ि उठधयध र्नुष क्रोर् में औि चढ़धयध उर् पि बधर्।
र्िध, लर्िंर्,ु नभ कधँपे र् र्ध, विकि ु ए जीिों के प्रधर्।।" इन कधव्य-पिंत्क्ियों में प्रयक्
ु ि अििंकधि ै-
(क) श्िेर् (ख) उत्प्रेक्षा

(ग) मानवीकरर् (घ) अनतशयोजक्त

(4) "एक हदिर् र्ूिज ने र्ोची, छुट्टी िे िेने की बधि।
र्ोचध कुछ पि र्ुकूँ लमिेगध, चिने दो र्ििी पि िधि।।" इन कधव्य-पिंत्क्ियों में प्रयुक्ि अििंकधि ै-
(क) श्िेर् (ख) उत्प्रेक्षा

(ग) मानवीकरर् (घ) अनतशयोजक्त

11 | P a g e

Page 12

(5) "क िी ु ई यों उत्तिध के नेत्र जि र्े भि गए।
ह मकर्ों र्े पर्
ू श मधनो ो गए पिंकज नए।।" इन कधव्य-पिंत्क्ियों में प्रयक्
ु ि अििंकधि ै-
(क) श्िेर् (ख) उत्प्रेक्षा

(ग) मानवीकरर् (घ) अनतशयोजक्त

प्रश्न 7. तनम्नलिखखि पहठि गदयधिंर् पि आर्धरिि ब ु विकल्पी प्रश्नों के र्िधशधर्क उपयक्
ु ि विकल्प
चुनकि लिखखए- (1x5=5)
(पधठ्य पस्
ु िक र्े ककर्ी र्धह त्ययक गदयधिंर्/ पदयधिंर् को पढ़कि अर्शग्र र् िर्ध उर्र्े र्िंबदर् ब ु विकल्पी
प्रश्नों में र्बर्े उपयक्
ु ि विकल्प कध चयन किने की योग्यिध/ स्रोि आर्धरिि एकीकृि प्रश्न)
कुछ नहीं पूछ पाए हािदार साहब। कुछ पि चुपचाप खडे रहे , किर पान के पैसे चुकाकर िीप में आ बैठे

और रवाना हो गए। बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का िो अपने दे श की खानतर

घर-गह
ृ स्थी-िवानी-जज़ंदगी सब कुछ होम दे ने वािों पर भी हँसती है और अपने लिए बबकने के मौके

ढूँढ़ती है । दख
ु ी हो गए। पंद्रह ददन बाद किर उसी कस्बे से गज़
ु रे । कस्बे में घुसने से पहिे ही खयाि

आया कक कस्बे की हृदयस्थिी में सभ
ु ार् की प्रनतमा अवश्य ही प्रनतष्ठावपत होगी, िेककन सभ
ु ार् की

आँखों पर चश्मा नहीं होगा।…क्योंकक मास्टर बनाना भूि गया।...और कैप्टन मर गया। सोचा, आि वहाँ

रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएँगे, मनू तण की तरफ़ दे खेंगे भी नहीं, सीधे ननकि िाएँगे। ड्राइवर से कह

ददया, चौराहे पर रुकना नहीं, आि बहुत काम है , पान आगे कहीं खा िेंगे। िेककन आदत से मिबूर आँखें

चौराहा आते ही मनू तण की तरफ़ उठ गईं। कुछ ऐसा दे खा कक चीखे, रोको! िीप स्पीड में थी, ड्राइवर ने

ज़ोर से ब्रेक मारे । रास्ता चिते िोग दे खने िगे। िीप रुकते-न-रुकते हािदार साहब िीप से कूदकर तेज़-

तेज़ कदमों से मनू तण की तरफ़ िपके और उसके ठीक सामने िाकर अटें शन में खडे हो गए। मनू तण की

आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, िैसा बच्चे बना िेते हैं। हािदार साहब भावुक

हैं। इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं।

(1) धिदधि र्ध ब क्यध र्ोचकि दख
ु ी ो गए?
(क) नेता िी की मूनतण की आँखों पर चश्मा न दे खकर

(ख) दे शभक्तों का मज़ाक उडाने वािी बबकाऊ कौम को दे खकर

(ग) घर-गह
ृ स्थी, िवानी-जज़ंदगी आदद की बीती हुई बातें सोचकर

(घ) दे श में अिग-अिग कौमों की ववचारधारा में बहुत अंतर दे खकर

12 | P a g e

Page 13

(2) 'र्भ
ु धष चिंद्र बोर् की मतू िश की आँखों पि चश्मध न ीिं ोगध...।' धिदधि र्ध ब ऐर्ध क्यों र्ोच ि े र्े?
(क) कैप्टन के सारे चश्मे बबक िाने के कारर्

(ख) कैप्टन के गंभीर रूप से बीमार हो िाने के कारर्

(ग) मूनतणकार मास्टर की भि
ू और कैप्टन की मत्ृ यु के कारर्

(घ) नटखट बच्चों द्वारा चश्मा बार-बार उतार ददए िाने के कारर्

(3) धिदधि र्ध ब की आदि र्े मजबिू आँखों ने क्यध ककयध?
(क) चौराहे पर आते ही पान की दक
ु ान खोिने िगीं

(ख) उन्होंने कैप्टन का स्मरर् ककया और वे नम हो गईं

(ग) चौराहे पर आते ही स्वभावतः मनू तण की ओर उठ गईं

(घ) बाँस पर चश्मे िगाकर उन्हें बेचते हुए कैप्टन को खोिने िगीं

(4) धिदधि र्ध ब क्यों चीख पड़े?
(क) पानवािे का बदिा हुआ व्यवहार दे खकर

(ख) नेता िी की मूनतण पर सरकंडे का चश्मा िगा दे खकर

(ग) नेता िी की मनू तण के पास बहुत सारे बच्चों को एकत्र दे खकर

(घ) ड्राइवर के द्वारा उनके आदे श का पािन न ककए िाने के कारर्

(5) र्िकिंडे र्े बनध छोटध-र्ध चश्मध ककर् बधि कध प्रिीक र्ध?
(क) राष्रीय धरोहरों को संरक्षर् दे ने का

(ख) हस्तकिा के प्रनत बढ़ रहे अनुराग का

(ग) दे शभक्तों के प्रनत श्रद्धा व सम्मान का

(घ) सरकंडे िैसी वनस्पनत को संरक्षक्षत करने का

प्रश्न 8. गदय पधठों के आर्धि पि तनम्नलिखखि दो ब ु विकल्पी प्रश्नों के र्िधशधर्क उपयक्
ु ि विकल्प
चुनकि लिखखए- (स्रोि आर्धरिि एकीकृि प्रश्न) (1x2=2)
(1) बधिगोबबन भगि र्धर्ु की र्भी परिभधषधओिं पि ककन गर्
ु ों के कधिर् खिे उिििे र्े?
(क) मधुर गायन, खेतीबाडी करना, गांधीवादी दशणन, सारा समय पूिा पाठ में बबताना
(ख) मत्ृ यु से न घबराना, हर समय भिन में िीन रहना, बेटे व बहू से बहुत प्रेम करना
(ग) साजत्वक गह
ृ स्थ िीवन, सत्यवाददता, शद्
ु ध व्यवहार, कबीर दशणन से सजज्ित आत्मा
(घ) आजस्तकता, समाि-सेवा, प्रनतददन मंददर िाना, रास्ते में िो भी लमिे, उसे उपदे श दे ना

13 | P a g e

Page 14

(2) कधर्ी को र्िंस्कृति की पधठर्धिध इर्लिए क ध गयध ै क्योंकक - (स्रोि आर्धरिि एकीकृि प्रश्न)
(क) यहाँ के िोग अपने बच्चों को धालमणक संस्कार दे ते हैं।
(ख) यहीं से सांस्कृनतक संरक्षर् अलभयान का शुभारं भ हुआ था।
(ग) यहाँ गिी-गिी में पाठशािाएँ हैं, जिनमें संस्कार लसखाए िाते हैं।
(घ) यह ववद्वानों, किा-ममणज्ञों, किाकारों, स्नेह व सद्भावना की पावन स्थिी है ।

प्रश्न 9. तनम्नलिखखि पहठि पदयधिंर् पि आर्धरिि ब ु विकल्पी प्रश्नों के र्िधशधर्क उपयक्
ु ि विकल्प
चन
ु कि लिखखए- (1x5=5)
(पधठ्य पस्
ु िक र्े ककर्ी र्धह त्ययक गदयधिंर्/ पदयधिंर् को पढ़कि अर्शग्र र् िर्ध उर्र्े र्िंबदर् ब ु विकल्पी
प्रश्नों में र्बर्े उपयक्
ु ि विकल्प कध चयन किने की योग्यिध/ स्रोि आर्धरिि एकीकृि प्रश्न)
तारसप्तक में िब बैठने िगता है उसका गिा

प्रेरर्ा साथ छोडती हुई उत्साह अस्त होता हुआ

आवाज़ से राख िैसा कुछ धगरता हुआ

तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बँधाता

कहीं से चिा आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही दे दे ता है उसका साथ

यह बताने के लिए कक वह अकेिा नहीं है

और यह कक किर से गाया िा सकता है

गाया िा चक
ु ा राग

और उसकी आवाज़ में िो एक दहचक साफ़ सुनाई दे ती है

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की िो कोलशश है

उसे ववििता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा िाना चादहए।

(1) 'िधिर्प्िक में जब बैठने िगिध ै उर्कध गिध' इर् पिंत्क्ि में 'उर्कध' र्ब्द ककर्के लिए प्रयोग ककयध

गयध ै?
(क) संगतकार के लिए (ख) प्रधान गायक के लिए

(ग) गाने के इच्छुक संगीत प्रेलमयों के लिए (घ) वाद्ययंत्र बिाने वािे किाकारों के लिए

14 | P a g e

Page 15

(2) र्िंगिकधि कध स्िि मुख्य गधयक की र् धयिध कब कििध ै?
(क) िब ऐसा करने के लिए उसका मन उससे कहता है
(ख) िब गायन को प्रभावी बनाकर वह वाहवाही िूटना चाहता है
(ग) गायक के द्वारा ककसी पंजक्त ववशेर् को गाने का आग्रह ककए िाने पर
(घ) गायक का कंठ कमज़ोर होने तथा प्रेरर्ा व उत्साह में धगरावट आने पर

(3) 'र्िंगिकधि' ककर्कध प्रिीक ै?
(क) संगीत को पागिपन की हद तक चाहने वािे िज़्बात का
(ख) स्वर को साधने के लिए अनवरत की िाने वािी साधना का
(ग) ककसी की सििता में ननस्स्वाथण सहयोग करने की भावना का
(घ) मनोरं िन, माधुय,ण मनष्ु यत्व, अपनत्व, प्रनतबद्धता व प्रेरर्ा का

(4) कभी-कभी र्िंगिकधि गधयक कध यूँ ी र्धर् क्यों दे िध ै?
(क) अपने आप को उसके समकक्ष प्रदलशणत करने के लिए
(ख) उसे यह संदेश दे ने के लिए कक वह स्वयं को अकेिा न समझे
(ग) वह मुख्य गायक की कमज़ोररयों से पूरी तरह पररधचत होता है
(घ) उसे ववश्वास होता है कक बीच-बीच में गाने से गाने की मधरु ता बनी रहे गी

(4) र्िंगिकधि की 'मनटु यिध' ककन कधयों र्े प्रकट ोिी ै ?
(क) प्रधान गायक की सेवा में सदै व श्रद्धापव
ू क
ण िट
ु े रहने से
(ख) गाने से पहिे प्रत्येक कायण को करने की पूवण योिना बनाने से
(ग) स्वयं को ववलशष्ट न बनाकर प्रधान गायक की ववलशष्टता बढ़ाने से
(घ) कायणक्रम से पहिे एवं उसके उपरांत प्रधान गायक के चरर् स्पशण करने से

प्रश्न 10. पदय पधठों के आर्धि पि तनम्नलिखखि दो ब ु विकल्पी प्रश्नों के र्िधशधर्क उपयुक्ि विकल्प
चन
ु कि लिखखए- (स्रोि आर्धरिि एकीकृि प्रश्न) (1x2=2)
(1) 'फ़र्ि' कवििध में 'फ़र्ि' की श्रेटठ परिभधषध के र्धर् प्रकधर् में आए अन्य बबिंद ु ैं-
(क) िैववक खेती को प्रोत्साहन एवं कृवर् ववज्ञान की समझ द्वारा खेती
(ख) पयाणवरर् संरक्षर् तथा उपभोक्तावाद, प्रकृनत और मनष्ु य के संबंध
(ग) कृवर् संस्कृनत से ननकटता, प्रकृनत एवं मनष्ु य के सहयोग से सि
ृ न
(घ) कमणवाद एवं भाग्यवाद, वैज्ञाननक तरीके से कृवर् करने का आह्वान
15 | P a g e

Page 16

(2) गोवपयों को उदर्ि कध र्ुटक र्िंदेर् पर्िंद न आने कध मुख्य कधिर् र्ध-
(स्रोि आर्धरिि एकीकृि प्रश्न)
(क) उद्धव के कठोर शब्द एवं अनत कटु व्यवहार
(ख) उद्धव में वाक् -पटुता की कमी एवं हृदयहीनता
(ग) गोवपयों का प्रेम मागण के स्थान पर ज्ञान मागण को पसंद
(घ) गोवपयों का ज्ञान मागण के स्थान पर प्रेम मागण को पसंद करना

खिंड - ख (िर्शनधयमक प्रश्न)

प्रश्न 11. गदय पधठों के आर्धि पि तनम्नलिखखि चधि प्रश्नों में र्े ककन् ीिं िीन प्रश्नों के उत्ति िगभग
25-30 र्ब्दों में लिखखए- (2x3=6)
(दक्षिध : पधठ्यिस्िु िर्ध अपने परििेर्गि अनभ
ु िों पि िकश र्ह ि स्िििंत्र एििं स्पटट विचधिधलभव्यत्क्ि
की योग्यिध)
(क) नवाब साहब की सनक नकारात्मक थी, ककं तु हर सनक नकारात्मक नहीं होती। सोदाहरर् लसद्ध

कीजिए कक ककस सनक को सकारात्मक कहा िा सकता है ?

(ख) महानगरों की ‘फ़्िैट–कल्चर’ और िेखखका मन्नू भंडारी के परं परागत ‘पडोस कल्चर’ में आपको क्या

अंतर ददखाई दे ता है ? ववचार करके लिखखए।

(ग) मंगिध्वनन ककसे कहते हैं? बबजस्मल्िा खाँ को शहनाई की मंगिध्वनन का नायक क्यों कहा गया है ?

स्पष्ट कीजिए।

(घ) सच्चे अथों में ‘संस्कृत व्यजक्त’ ककसे कहा िा सकता है ? 'संस्कृनत' पाठ के आधार पर तकण सदहत

स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 12. पदय पधठों के आर्धि पि तनम्नलिखखि चधि प्रश्नों में र्े ककन् ीिं िीन प्रश्नों के उत्ति िगभग
25-30 र्ब्दों में लिखखए- (2x3=6)
(दक्षिध : पधठ्यिस्िु िर्ध अपने परििेर्गि अनुभिों पि िकश र्ह ि स्िििंत्र एििं स्पटट विचधिधलभव्यत्क्ि
की योग्यिध)
(क) 'क्रोध से बात और अधधक बबगड िाती है ।' 'राम-िक्ष्मर्-परशुराम संवाद' कववता के आिोक में इस

कथन की पजु ष्ट कीजिए।

(ख) आपके पाठ्यक्रम की ककस कववता में कवव ने बादि से िुहार, ररमखझम तथा बरसने के स्थान पर

गरिने के लिए कहा है ? इस आह्वान का क्या कारर् है ? अपने शब्दों में लिखखए।

16 | P a g e

Page 17

(ग) ‘वपघिकर िि बन गया होगा कदठन पार्ार्।’ यह पंजक्त ककस कववता से िी गई है और इसके
माध्यम से कवव क्या कहना चाहता है ?
(घ) आत्मकथा लिखने के लिए ककन गुर्ों की आवश्यकता होती है ? कवव के लिए यह कायण कदठन क्यों
था? सोचकर लिखखए।
प्रश्न 13. पूिक पधठ्यपुस्िक के पधठों पि आर्धरिि तनम्नलिखखि िीन प्रश्नों में र्े ककन् ीिं दो प्रश्नों के
उत्ति िगभग 50-60 -र्ब्दों में लिखखए- (4x2=8)
(दक्षिध : पधठ्यिस्िु िर्ध अपने परििेर्गि अनुभिों पि िकश र्ह ि स्िििंत्र एििं स्पटट विचधिधलभव्यत्क्ि
की योग्यिध)
(क) "वहीं सख
ु , शांनत और सक
ु ू न है , िहाँ अखंडडत संपर्
ू तण ा है । पेड, पौधे, पशु और आदमी सब अपनी-
अपनी िय, ताि और गनत में हैं। हमारी पीढ़ी ने प्रकृनत की इस िय, ताि और गनत से खखिवाड कर
अक्षम्य अपराध ककया है ।" 'साना-साना हाथ िोडड' पाठ के आधार पर बताइए कक इस अक्षम्य अपराध
का प्रायजश्चत मनुष्य ककस प्रकार कर सकता है ?

(ख) रचनाकार की भीतरी वववशता ही उसे िेखन के लिए मिबरू करती है और लिखकर ही रचनाकार
उससे मुक्त हो पाता है । 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर दहरोलशमा घटना से िोडते हुए इस कथन
की पुजष्ट कीजिए।

(ग) ‘माता का अँचि’ पाठ में भोिानाथ का अपने माता–वपता से बहुत िगाव है । बचपन में हर बच्चा
एक पि के लिए भी माता-वपता का साथ नहीं छोडना चाहता है , ककं तु माता-वपता के बूढ़े हो िाने पर
इनमें से ही कुछ उन्हें साथ न रखकर वद्
ृ धाश्रम में पहुँचा दे ते हैं। ऐसे िोगों को आप ककन शब्दों में
समझाएँगे? ववचार करके लिखखए।

प्रश्न 14. तनम्नलिखखि िीन विषयों में र्े ककर्ी एक विषय पि िगभग 120 र्ब्दों में र्धिगलभशि
अनुच्छे द लिखखए- (6)
(हदए गए विषय/ त्स्र्ति के अनुकूि अपनी भधिनधओिं ि अपने विचधिों को अपने अध्ययन, अनुभिों के
आर्धि पि स्पटटिध के र्धर् अलभव्यक्ि किने की योग्यिध)
(क) जीिन कध कहठन दौि औि मधनलर्क मज़बूिी
संकेत-बबंद-ु
• मानलसक दृढ़ता से मजु श्कि हािातों का सामना संभव
• कदठन हािातों से दो-दो हाथ करने की शजक्त
• अनेक संघर्णशीि व्यजक्तयों के उदाहरर्
• मानलसक दृढ़ता का संकल्प
17 | P a g e

Page 18

(ख) र्धइबि युग, र्धइबि ठगी : र्धिर्धतनयधँ एििं र्ुिक्षध उपधय
संकेत-बबंद-ु
• बढ़ते ऑनिाइन कायण
• साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएँ
• सावधाननयाँ
• इससे बचने के उपाय

(ग) बिु ध जो दे खन मैं चिध, बिु ध न लमलियध कोय
संकेत-बबंद-ु
• दस
ू रों की कलमयाँ दे खना स्वाभाववक प्रववृ त्त
• इस प्रववृ त्त का समाि पर प्रभाव
• अपने अंदर झाँकना आवश्यक
• आत्मननरीक्षर् का संकल्प

प्रश्न 15. आप मनस्वी मौयण/ मनजस्वता मािवीय हैं। बरसात के ददनों में दघ
ु ट
ण ना को दावत दे ते खि
ु े पडे
सीवर िाइन के मैनहोिों के संदभण में दै ननक िागरर्, अ ब स नगर के संपादक को एक समाचार
प्रकालशत करने का अनुरोध करते हुए िगभग 100 शब्दों में पत्र लिखखए। (5)
अर्िध
आप श्रेयस रािपूत/ श्रेयसी लसंह हैं। आप छात्रावास में रहते हैं। आपको वपता िी से पता चिा है कक

आपकी माता िी परू े पररवार का तो ध्यान रखती हैं, ककं तु अपने स्वास््य की अक्सर अनदे खी करती हैं।

माता िी को समझाते हुए िगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखखए।

प्रश्न 16. आप तरुर् वैश्य/ तरुर्ा वैश्य हैं। आप बी.एड कर चुके हैं। आपको वववेक इंटरनेशनि स्कूि,

अ ब स नगर में दहंदी अध्यापक/ अध्यावपका पद के लिए आवेदन करना है । इसके लिए आप अपना एक

संक्षक्षप्त स्ववत्त
ृ (बायोडाटा) िगभग 80 शब्दों में तैयार कीजिए। (5)

अर्िध
आप रॉबटण पॉि/ डॉिी डडसूिा हैं। आपने अ ब स प्रकाशन, क ख नगर से ऑनिाइन कुछ पुस्तकें

मँगवाई थीं। प्रकाशन द्वारा उनमें से दो पुस्तकें ककसी अन्य िेखक की भेि दी गई हैं और एक पुस्तक

के पहिे कुछ पेि िटे हुए हैं। इसकी लशकायत करते हुए तथा इन पुस्तकों को शीघ्र िौटाने और नई

पुस्तकें लभिवाने के लिए प्रकाशन के वररष्ठ प्रबंधक को िगभग 80 शब्दों में एक ई-मेि लिखखए।

18 | P a g e

Page 19

प्रश्न 17. आपके चाचा िी ने रे डीमेड कपडों की एक दक
ु ान खोिी है । वे प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय
समाचारपत्र में उसका ववज्ञापन दे ना चाहते हैं। आप उनके लिए िगभग 60 शब्दों में एक आकर्णक
ववज्ञापन तैयार कीजिए। (4)
अर्िध
आप सौम्य गगण/ सौम्या गगण हैं। आपके भैया-भाभी की पहिी वैवादहक वर्णगाँठ (एननवसणरी) है । इस
अवसर पर उनके लिए िगभग 60 शब्दों में शुभकामना एवं बधाई संदेश लिखखए।

19 | P a g e

Page 20

तदश नप (2022-23)
हंद (ब) कोड सं या 085
क ा - दसवीं

नधा रत समय :3 घंटे पूणाक :80
सामा य नदश :-
 इस नप म दो खंड ह - खंड 'अ' और 'ब'।

 खंड 'अ' म उप न स हत 45 व तुपरक न पूछे गए ह। दए गए नदश का पालन करते हुए

कुल 40 न के उ र द िजए।

 खंड 'ब' म वणना मक न पूछे गए ह, आंत रक वक प भी दए गए ह।
 नदश को बहुत सावधानी से प ढ़ए और उनका पालन क िजए।

 दोन खंड के कुल 18 न ह । दोन खंड के न के उ र देना अ नवाय है ।

 यथासंभव दोन खंड के न के उ र मशः ल खए।

खंड - अ (व तप
ु रक न)

न 1 न न ल खत ग यांश को यानपूवक पढ़कर इसके आधार पर सवा धक उपयु त उ र वाले
वक प चन
ु कर ल खए- (1×5=5 )
द ता:पा य पु तक से इतर कसी सा हि यक व सामा य ग यांश को पढ़कर अथ हण करने क
यो यता।
'एक भारत े ठ भारत' अ भयान दे श के व भ न रा य म सां कृ तक एकता को बढ़ावा दे ता है।
भारत एक अनोखा रा है, िजसका नमाण व वध भाषा, सं कृ त, धम के तान -बान , अ हंसा और
याय के स धा त पर आधा रत वाधीनता सं ाम तथा सां कृ तक वकास के सम ृ ध इ तहास
वारा एकता के सू म बाँधकर हुआ है। हम इ तहास क बात कर या वतमान क भारतवष म कला
एवं सं कृ त का अनठ
ू ा दशन हर समय एवं हर थान पर हुआ है। न ृ य, संगीत, च कला,
मू तकला, वा तुकला इ या द से सम ृ ध भारत क पहचान पूरे व व म है। भारतीय वा तुकला एवं
मू तकला क परंपरा अ यंत ाचीन है। इस कला क कहानी लगभग पाँच हज़ार वष पूव संधु घाट
क स यता से आरं भ होती है। इसके दो मख
ु नगर ;मोहनजोदाड़ो और हड़ पा म अ छ सड़क, दो
मंिज़ले मकान, नान-घर, प क ट के योग के सबूत मले ह। गज
ु रात के लोथल नामक थान
क खुदाई से पता चलता है क वहाँ नाव से सामान उतारने के लए 216 x 37 मीटर ल बी-चौड़ी
तथा 15 फ ट गहर गोद बनी हुई थी। ये लोग म ट , प थर, धात,ु ह डी, काँच आ द क मू तयाँ

Page 21

एवं खलौने बनाने म कुशल थे। धातु से बनी एक मू त म एक नार को कमर पर हाथ रखे न ृ य
मु ा म दशाया गया है। दस
ू र मू त पशप
ु तनाथ शव क तथा तीसर मू त दाढ़ वाले यि त क है।
ये तीन मू तयाँ कला के सव े ठ नमन
ू े ह। मू त का े ठ होना मू तकार के कौशल पर नभर करता
है। मू त क येक भावभं गमा को दशाने म मू तकार जी-जान लगा दे ता है। भारत के येक कोने
म इस कार क व भ न कलाएँ हमार सं कृ त म त बं बत होती ह। इस अतल
ु नीय न ध का
बचाव और चार- सार ह एक भारत े ठ भारत क प रक पना है।

(1) भारत को 'अनोखा रा ' कहने से लेखक का ता पय है-
(क) बहुमख
ु ी तभा का दशन
(ख) मू तकला के सव े ठ नमन
ू े
(ग) संवेदनशील भारतीय नाग रक
(घ) व भ नता म एकता का तीक

(2 ) संधु घाट क स यता तीक है-
(क) मू तकार के कौशल का
(ख) एक भारत े ठ भारत का
(ग) ाचीन सु यवि थत स यता का
(घ) वाधीनता सं ाम के नायक का

(3) ग यांश हम संदेश दे ता है-
(क) कलाकार अपनी कला का े ठ दशन करता है।
(ख) भारतीय न ृ य और संगीत क कला व व स ध है।
(ग) भारतीय स यता व सं कृ त का संर ण आव यक है।
(घ) वाधीनता सं ाम म ां तका रय का वशेष योगदान है।

(4) ग यांश म मू तय का स व तार वणन दशाता है -
(क) सू म अवलोकन एवं कला- ेम
(ख) ाचीन मू तय क भावभं गमा
(ग) थल
ू अवलोकन एवं कला- ेम
(घ) सां कृ तक एकता एवं सौहा

Page 22

(5) न न ल खत कथन (A) तथा कारण (R) को यानपूवक प ढ़ए। उसके बाद दए गए वक प
म से कोई एक सह वक प चन
ु कर ल खए।
कथन (A) भारतवष म कला एवं सं कृ त का अनठ
ू ा दशन हर समय हुआ है।
कारण (R) भारतीय वा तक
ु ला एवं मू तकला क परं परा अ यंत ाचीन है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोन गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है ले कन कारण (R) सह है।
(ग) कथन (A) सह है ले कन कारण (R) उसक गलत या या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोन सह ह तथा कारण (R) कथन (A) क सह या या करता
है।

न 2 न न ल खत ग यांश को यानपूवक पढ़कर इसके आधार पर सवा धक उपयु त उ र वाले
वक प चन
ु कर ल खए- (1×5=5 )
द ता:पा य पु तक से इतर कसी सा हि यक व सामा य ग यांश को पढ़कर अथ हण करने क
यो यता।
प र म यानी मेहनत अपना जवाब आप ह है। उसका अ य कोई जवाब न है, न हो सकता है अथात
िजस काम के लए प र म करना आव यक हो, हम चाह क वह अ य कसी उपाय से पूरा हो जाए,
ऐसा हो पाना कतई संभव नह ं। वह तो लगातार और मन लगाकर प र म करने से ह होगा। इसी
कारण कहा जाता है क 'उ यो गनं पु ष संहमप
ु ै त ल मी' अथात उ योग या प र म करने वाले पु ष
संह का ह ल मी वरण करती है । सभी कार क धन-संप याँ और सफलताएँ लगातार प र म से
ह ा त होती ह। प र म ह सफलता क कंु जी है, यह पर ण क कसौट पर कसा गया स य है।
नरं तर ग त और वकास क मंिज़ल तय करते हुए हमारा संसार आज िजस तर और ि थ त तक
पहुँच पाया है , वह सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से नह ं हुआ। कई कार के वचार बनाने,
अनस
ु ध
ं ान करने, उनके अनस
ु ार लगातार योजनाएँ बनाकर तथा कई तरह के अभाव और क ठनाइय
को सहते हुए नरं तर प र म करते रहने से ह संभव हो पाया है। आज जो लोग सफलता के शखर
पर बैठकर दस
ू र पर शासन कर रहे ह, आदे श दे रहे ह, ऐसी शि त और स ा ा त करने के लए
पता नह ं कन- कन रा त से चलकर, कस- कस तरह के क ट और प र मपूण जीवन जीने के बाद
उ ह इस ि थ त म पहुँच पाने म सफलता मल पाई है। हाथ-पैर हलाने पर ह कुछ पाया जा सकता
है, उदास या नराश होकर बैठ जाने से नह ं। नरंतर प र म यि त को चु त-द ु त रखकर सजग
तो बनाता ह है, नराशाओं से दरू रख आशा-उ साह भरा जीवन जीना भी सखाया करता है।

(1) पर ण क कसौट पर कसे जाने से ता पय है-
(क) स य स ध होना

Page 23

(ख) कथन का ामा णक होना
(ग) आकलन या ती होना
(घ) यो यता का मू यांकन होना

(2)'हाथ-पैर हलाने से कुछ पाया जा सकता है ।'पंि त के मा यम से लेखक........................ क
ेरणा दे रहे ह।
(क) तैराक
(ख) प र म
(ग) पर ण
(घ) ह त श प

(3) न न ल खत कथन पर वचार क िजए - द ता:वत
ृ अ ययन
(i) प र म यि त को सकारा मक बनाता है ।
(ii) आज संसार पतन क ओर बढ़ रहा है ।
(iii) पु षाथ के बल पर ह यि त धनाजन करता है।
उपयु त कथन म से कौन-सा /कौन-से कथन सह है /ह?
(क) केवल (i)
(ख) केवल (ii)
(ग) (i) और (iii)
(घ) (ii) और (iii)

(4) न न ल खत म से कौन-सा श द ग यांश म दए गए 'अनस
ु ध
ं ान' श द के सह अथ को दशाता
है-
(क) पर ण
(ख) योजनाएँ
(ग) अ वेषण
(घ) संहमुपै त

(5) न न ल खत म से कस कथन को ग यांश क सीख के आधार पर कहा जा सकता है -
(क) अ प ान खतरनाक होता है।
(ख) गया समय वापस नह ं आता है।
(ग) मेहनत से क पना साकार होती है।

Page 24

(घ) आव यकता आ व कार क जननी है।

न 3 नदशानुसार ‘पदबंध ' पर आधा रत पाँच बहु वक पीय न म से क ह ं चार न के उ र
द िजए-
(1x4=4)
द ता : व भ न सा हि यक वधाओं को पढ़ते हए याकर णक संरचनाओं पर चचा/ ट पणी करते ह।
(1) ‘वामीरो फटती हुई धरती के कनारे चीखती हुई दौड़ रह थी।’ रे खां कत पदबंध का भेद है -
(क) सं ा पदबंध
(ख) सवनाम पदबंध
(ग) या पदबंध
(घ) वशेषण पदबंध

(2) ‘ नभ क और साहसी वज़ीर अल अपने अ धकार के लए लड़ रहा था।’ इस वा य म वशेषण
पदबंध है –
(क) साहसी वज़ीर अल
(ख) लए लड़ रहा था
(ग) नभ क और साहसी
(घ) अपने अ धकार के लए

(3) या पदबंध का उदाहरण छाँ टए -
(क) ब ल ने उचककर दो म से एक अंडा तोड़ दया।
(ख) यह काम तो हमेशा आदशवाद लोग ने ह कया है।
(ग) दोन कबूतर रातभर खामोश और उदास बैठे रहते ह।
(घ) शैल तो फ़ म- नमाता बनने के लए सवथा अयो य थे ।

(4) ‘ बादशाह सल
ु ेमान मानव जा त के साथ-साथ पशु प य के भी राजा ह।’ रे खां कत पदबंध का
भेद है -
(क) सं ा पदबंध
(ख) सवनाम पदबंध
(ग) वशेषण पदबंध
(घ) या वशेषण पदबंध

Page 25

(5) 'ह रहर काका धीरे -धीरे चलते हुए आँगन तक पहुँचे।' रे खां कत पदबंध का भेद है-
(क) सं ा पदबंध
(ख) या पदबंध
(ग) वशेषण पदबंध
(घ) या वशेषण पदबंध

न 4 नदशानुसार 'रचना के आधार पर वा य भेद' पर आधा रत पाँच बहु वक पीय न म से
क ह ं चार न के उ र द िजए- (1x4=4)
द ता: व भ न सा हि यक वधाओं को पढ़ते हए याकर णक संरचनाओं पर चचा/ ट पणी करते ह।

(1) ' जब उसने तताँरा को दे खा तो वह फूटकर रोने लगी।' इस वा य का सरल वा य होगा -
(क) तताँरा को दे खते ह वह फूटकर रोने लगी।
(ख) तताँरा को दे खकर वामीरो फूटकर रोने लगी।
(ग) वामीरो ने तताँरा को दे खा और फूटकर रोने लगी।
(घ) जैसे ह वामीरो ने तताँरा को दे खा वह फूटकर रोने लगी।

(2) ' हम जब अकेले पड़ते ह तब अपने आप से लगातार बड़बड़ाते रहते ह।' रचना के आधार पर
वा य भेद है-
(क) सरल वा य
(ख) संयु त वा य
(ग) म त वा य
(घ) सामा य वा य

(3) ‘आपके अ छे काय म को सभी पसंद करते ह ।‘ दए गए वा य का म त वा य होगा -
(क)आपके अ छे काय म सभी के पसंद दा होते ह।
(ख) जब काय म होते ह अ छे ह सभी पसंद करते ह ह।
(ग) आपके काय म इतने अ छे होते ह क सभी पसंद करते ह।
(घ) आपके काय म इतने अ छे ह इस लए सभी को पसंद आते ह ।

(4) न न ल खत वा य म से संयु त वा य है -
(क) आपने मझ
ु े कारतस
ू दए इस लए आपक जान ब शी करता हूँ।
(ख) उसके अफ़साने सन
ु के रॉ बनहुड के कारनामे याद आ जाते ह।

Page 26

(ग) वह एक छह मंिज़ल इमारत थी िजसक छत पर एक सद
ुं र पणकुट थी।
(घ) वा लयर से बंबई क दरू ने संसार को काफ़ कुछ बदल दया था।

(5) 'सभी लख चक
ु े ह ले कन कनक अभी तक लख रह है।' रचना के आधार पर इस वा य का
भेद होगा-
(क) सरल वा य
(ख) संयु त वा य
(ग) म वा य
(घ) वधानवाचक वा य

न 5 नदशानुसार समास पर आधा रत पाँच बहु वक पीय न म से क ह ं चार न के उ र
द िजए- (1x4=4)
द ता: व भ न सा हि यक वधाओं को पढ़ते हए याकर णक संरचनाओं पर चचा/ ट पणी करते ह।

(1) 'महावीर' श द/सम तपद कौन-से समास का उदाहरण है ?
(क) वगु समास
(ख) कमधारय समास
(ग) त पु ष समास
(घ) अ यीभाव समास

(2)'चं खलौना'-सम त पद का व ह होगा -
(क)चं का खलौना
(ख)चं और खलौना
(ग) चं पी खलौना
(घ) चं के लए खलौना

(3) न न ल खत यु म पर वचार क िजए : द ता:वत
ृ -अ ययन
सम तपद समास
(i) गहृ वेश (i) वं व समास
(ii) साफ़ - साफ़ (ii) अ ययीभाव समास
(iii) कोण (iii) त पु ष समास

Page 27

(iv) मग
ृ लोचन (iv) बहु ी ह समास
उपयु त यु म म से कौन-से सह सम
ु े लत ह –
(क) i और ii
(ख)i और iii
(ग) ii और iv
(घ) iii और iv

(4) 'स या ह' श द के लए सह समास- व ह और समास का चयन क िजए -
(क) स य और ह - वं व समास
(ख) स य का आ ह - त पु ष समास
(ग) स य आ ह - अ ययीभाव समास
(घ) स य के लए आ ह - त पु ष समास

(5) 'चतुमख'
ु का समास व ह एवं भेद होगा -
(क) चतुर है जो - बहु ी ह समास
(ख) चार मख
ु - त पु ष समास
(ग) चार ह मख
ु िजसके अथात मा - बहु ी ह समास
(घ) चतुराई झलकती है िजसके मख
ु से अथात यि त वशेष - बहु ी ह समास

न 6 नदशानुसार मह
ु ावरे पर आधा रत छह बहु वक पीय न म से क ह ं चार न के उ र
द िजए- (1x4=4)
द ता: व भ न सा हि यक वधाओं को पढ़ते हए याकर णक संरचनाओं पर चचा/ ट पणी करते ह।

(1)मह
ु ावरे और अथ के उ चत मेल वाले वक प का चयन क िजए-
(क) गरह बाँधना - मार डालना
(ख)तलवार खींचना-सब कुछ न ट करना
(ग)प ने रं गना- यथ म लखना
(घ)कदम उठाना - सामना करना

(2)'अयो य को कोई मह वपण
ू व तु मलना' के लए उपयु त मह
ु ावरा है -
(क)दाँत तले उँ गल दबाना

Page 28

(ख) अंधे के हाथ बटे र लगना
(ग) अंधे क लाठ बनना
(घ) मोह-माया के बंधन म पड़ना

(3) तू म है या श ु है? जहाँ भी जाता हूँ, वह ं मेरे सामने………………………… । र त थान क पू त के
लए उपयु त वक प का चयन क िजए -
(क) डेरा डालता है
(ख) हवा म उड़ता है
(ग) यौ रयाँ चढ़ा लेता है
(घ) द वार खड़ी कर दे ता है

(4) पढ़ाई म मेहनत कर म…………….. हो सकता हूँ। उ चत मह
ु ावरे से र त थान क पू त क िजए।
(क) खून का घट
ूँ
(ख) एक पंथ दो काज
(ग) पैर पर खड़ा होना
(घ)अपना हाथ जग नाथ

(5)रे खां कत अंश के लए कौन-सा मह
ु ावरा यु त करना उ चत रहे गा?
तम
ु सारा दन काम म जुटे रहते हो, कभी आराम भी कर लया करो।
(क) को हू का बैल
(ख) खेत का बैल
(ग) तीन तेरह होना
(घ) ह का-ब का

(6)'अ य धक दख
ु ी होना' अथ के लए उपयु त मह
ु ावरा है-
(क) कड़वे घट
ूँ पीना
(ख) आपे से बाहर होना
(ग) कलेजा मँह
ु को आना
(घ) अ ल पर प थर पड़ना

न 7 न न ल खत प यांश को पढ़कर पूछे गए न के उ र के लए सह वक प का चयन
क िजए- (1x5=5)

Page 29

चलो अभी ट माग म सहष खेलते हुए,
वप , व न जो पड़ उ ह ढकेलते हुए ।
घटे न हे लमेल हाँ, बढ़े न भ नता कभी,
अतक एक पंथ के सतक पंथ ह सभी।
तभी समथ भाव है क तारता हुआ तरे ,
वह मनु य है क जो मनु य के लए मरे
(1) क व सभी को एक होकर चलने क ेरणा दे ते ह। इससे ात होता है क क व…………….. के
प धर ह।
(क) नर वय
(ख) सम वय
(ग) मा वय
(घ) दरू ा वय

(2) अभी ट माग से ता पय है-
(क) वगगत माग
(ख) मा णत माग
(ग) ड़ा े ीय माग
(घ) मनोवां छत माग

(3)समथ भाव है, दस
ू र को
(क) सफल करते हुए वयं सफल होना
(ख) ान माग बताते हुए सफल बनाना
(ग) शि त दशन वारा सफलता दलाना
(घ) सफल करते हुए अपना वाथ स ध करना

(4)' भ नता ना बढ़े ' का आशय है-
(क) मत भ नता हो
(ख) मतभेद कम ह
(ग) भेदभाव भ न ह
(घ) मतभेद अ धक ह

Page 30

(5) न न ल खत वा य को यानपूवक प ढ़ए- द ता:वत
ृ -अ ययन
(i) हम म ृ यु से कभी नह ं डरना चा हए ।
(ii) बा य आडंबर का वरोध करना चा हए।
(iii) माग क वप य को ढकेलते हुए आगे बढ़ना चा हए।
(iv) ाकृ तक स दय के लए ई वर को ध यवाद दे ना चा हए।
(v) हम अपने जीवन म सकारा मक ि टकोण अपनाना चा हए।

प यांश से मेल खाते वा य के लए उ चत वक प चु नए -
(क) (i),(ii),(v)
(ख) (i),(iii),(v)
(ग)(ii),(iii),(iv)
(घ) ((ii),(iv),(v)

न 8 न न ल खत न के उ र दे ने के लए उ चत वक प का चयन क िजए – (1x2=2)
(1) 'तु ह ं राम, तु ह ं ल मण' क व ने ऐसा कहा है य क –
(क) दे श क र ा सभी दे शवा सय का कत य है।
(ख) राम और ल मण वारा सीता क र ा क गई है ।
(ग) सै नक यु ध भू म म वीरग त को ा त हो चक
ु े ह।
(घ) आ मब लदान के अवसर नरं तर बने रहते ह।

(2) 'तव मख
ु पहचानँू छन- छन म' का भाव है -
(क) भु क स ा पर संदेह न करना।
(ख) येक जीव म परमा मा को दे खना।
(ग) ई वर के दशन क अ भलाषा रखना।
(घ) स माग पर चलकर जीवन यापन करना।

न 9 न न ल खत ग यांश को पढ़कर पूछे गए न के उ र के लए सह वक प का चयन
क िजए-(1x5=5)

'रात दस दशाओं से कहगी अपनी कहा नयाँ' पर संगीतकार जय कशन ने आप क । उनका याल
था क दशक 'चार दशाएँ' तो समझ सकते ह- 'दस दशाएँ' नह ं। ले कन शैल प रवतन के लए
तैयार नह ं हुए। उनका ढ़ मंत य था क दशक क च क आड़ म हम उथलेपन को उन पर नह ं

Page 31

थोपना चा हए। कलाकार का यह कत य भी है क वह उपभो ता क चय का प र कार करने का
य न कर और उनका यक न गलत नह ं था। यह नह ं, वे बहुत अ छे गीत भी जो उ ह ने लखे
बेहद लोक य हुए। शैल ने झठ
ू े अ भजा य को कभी नह ं अपनाया। उनके गीत भाव- वण थे- द ु ह
नह ं। 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलन
ू इंग ल तानी, सर पे लाल टोपी सी, फर भी दल है
हंद ु तानी' - यह गीत शैल ह लख सकते थे। शांत नद का वाह और समु क गहराई लए हुए।
यह वशेषता उनक िज़ंदगी क थी और यह उ ह ने अपनी फ़ म के वारा भी सा बत कया था।

(1) गीत ‘रात दस दशाओं से कहगी अपनी कहा नयाँ’ पर संगीतकार जय कशन ने आप क
य क उनके अनस
ु ार -
(क) दस दशाओं का गहन ान दशक को नह ं होगा।
(ख) इससे दशक क चय का प र कार नह ं होगा।
(ग) जाग क दशक ऐसी प ट बात पसंद नह ं करते थे।
(घ) दशक क च के लए उन पर उथलापन नह ं थोपना चा हए।

(2) ‘उनका यह ढ़ मंत य था क दशक क च क आड़ म हम उथलेपन को उन पर नह ं थोपना
चा हए।कलाकार का यह कत य भी है क वह उपभो ता क चय का प र कार करने का य न
करे ।‘
कथन के मा यम से ात होता है क शैल ह –
(क) ढ़ न चयी, सफल फ़ म नमाता व क व
(ख) सफल फ़ म नमाता, गीतकार व क व
(ग) समाज-सध
ु ारक,कमयोगी गीतकार व क व
(घ) आदशवाद ,उ चको ट के गीतकार व क व

( 3) न न ल खत कथन (A) तथा कारण (R) को यानपूवक प ढ़ए। उसके बाद दए गए वक प
म से कोई एक सह वक प चन
ु कर ल खए।
कथन (A)-उनके गीत भाव- वण थे- द ु ह नह ं।
कारण (R ) - शैल के वारा लखे गीत भावनाओं से ओत- ोत थे, उनम गहराई थी ।गीत क
भाषा सहज, सरल थी, ि ल ट नह ं थी।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोन गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है ले कन कारण (R) सह है।
(ग) कथन (A) सह है ले कन कारण (R) उसक गलत या या करता है।

Page 32

(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोन सह ह तथा कारण (R) कथन (A) क सह या या करता है।

(4) 'मेरा जूता है जापानी……. 'यह गीत शैल ह लख सकते थे ।लेखक वारा ऐसा कहा जाना
दशाता है, शैल के त उनका -
(क) कत यबोध
(ख) मै ीभाव
(ग) यि त व
(घ) अवलोकन

(5) ग यांश के आधार पर शैल के नजी जीवन क छाप मलती है क वे थे -
(क) बेहद गंभीर, उदार, ढ इ छाशि त और संक ण दय
(ख) बेहद गंभीर, उदार,कृपणऔर संक ण दय
(ग) बेहद गंभीर, भावक
ु ,कृपण और ढ इ छाशि त
(घ) बेहद गंभीर, उदार, ढ इ छाशि त और भावुक

न 10 न न ल खत न के उ र दे ने के लए उ चत वक प का चयन क िजए - (1x2=2)

(1) न न ल खत म से कौन-से वा य 'बड़े भाई साहब' कहानी से ा त ेरणा को दशाते ह -
द ता:वत
ृ -अ ययन
(i) कथनी और करनी का अंतर हमार ि थ त को हा या पद बना सकता है।
(ii) पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी छा जीवन के आव यक अंग ह।
(iii) केवल पर ा से पहले यान लगाकर पढ़ लेने से थम आ सकते ह।
(iv) बड़े भाई साहब ान क बात लेखक को आसानी से समझा दे ते ह।
(क) केवल (i)
(ख) (i) और (ii)
(ग) केवल (iv)
(घ) (ii),(iii),(iv)

(2) सआदत अल को अवध के त त पर बठाने के लए पीछे कनल का उ दे य था-
(क)अपने परम म सआदत अल क हरसंभव सहायता करना
(ख) जाँबाज़ यो धा के प म म सआदत अल को स ध करना
(ग) कंपनी के वक ल का क ल करवाने के लए मलकर षडयं रचना

Page 33

(घ) अ य प से अवध पर कंपनी का आ धप य था पत करना

खंड - ब (वणना मक न)

न 11 न न ल खत न म से क ह ं दो न के उ र लगभग 60 श द म द िजए - (1x2=2)
(3x2=6)

(1) मण हम सभी के जीवन का अ भ न अंग है। अपनी य ततम दनचया के बीच चैन से भरे
कुछ पल शायद हम इसी कार नकाल सकते ह। शांत वातावरण म अपने तथा अपन के लए
जीवन यतीत करना आव यक है।
आपके वारा इस पा य म म पढ़े गए पाठ म चैन भरे पल बताने के लए लेखक ने या कया ?
या वा तव म सभी को इसक आव यकता है? अपने वचार य त क िजए।
द ता: अपने प रवेशगत अनभ
ु व पर अपनी वतं और प ट राय मौ खक एवं ल खत प म
य त करते ह।

(2) 'डायर का एक प ना' के मा यम से आपने गल
ु ाम भारत के वतं ता दवस के आयोजन के
वषय म जाना। आज हम आज़ाद भारत म आज़ाद का अमत
ृ महो सव मना रहे ह।
दे श के त अपने कत य को बताते हुए पाठ से ा त सीख का वणन क िजए।
द ता: अपने प रवेशगत अनभ
ु व पर अपनी वतं और प ट राय मौ खक एवं ल खत प म
य त करते ह।

(3) इस वष आपने पा य म म लोककथा पर आधा रत एक कहानी पढ़ है। यह कहानी समाज क
वसंग तय को दरू करने का संदेश दे ती है। कथन का मू यांकन करते हुए अपने वचार ल खए।

न 12 न न ल खत न म से क ह ं दो न के उ र लगभग 60 श द म द िजए - (3x2=6)
6)
(1) आपके वारा इस पा य म म पढ़ गई कस क वता क अं तम पंि तयाँ आपको सवा धक भा वत
करती ह और य ? लगभग 60 श द म य त क िजए।

(2) कबीर और मीरा क भि त क वशेषताओं का उ लेख क िजए ।

Page 34

(3) आपके पा य म म कस क वता म वषा के ाकृ तक स दय का वणन कया गया है ? अपने श द
म वणन क िजए।

न 13 न न ल खत न म से क ह ं दो न के उ र लगभग 60 श द म द िजए - (3x2=6)
)
(1) लोग के बीच बहस छड़ जाती है। उ रा धकार के कानून पर जो िजतना जानता है, उससे दस
गुना अ धक उगल दे ता है। फर भी कोई समाधान नह ं नकलता। रह य ख म नह ं होता,
आशंकाएँ बनी ह रहती ह। ले कन लोग आशंकाओं को नज़रअंदाज कर अपनी प धरता शु कर
दे ते ह।
ह रहर काका सभी के लए चचा का क बने हुए थे। ह रहर काका मामले म गाँव वाल क राय
तकस हत प ट क िजए।

(2) काउट परे ड करते समय लेखक वयं को मह वपण
ू 'आदमी' फ़ौजी जवान समझने लगता था।
कथन के आलोक म अपने वचार कट करते हुए बताइए क व यालय जीवन म श ण व
ग त व धय क या उपयो गता है?

(3)बालमन कसी वाथ या हसाब से चलायमान नह ं होता। बचपन ेम के र ते के अलावा कसी
और र ते को कुबूल नह ं करता।
'टोपी शु ला' पाठ म टोपी अपने प रवार के एक सद य को बदलने क बात करता है। उसक सोच के
आधार पर उसक मनोदशा का वणन क िजए।

न 14 न न ल खत म से कसी एक वषय पर संकेत- बंदओ
ु ं के आधार पर लगभग 100 श द म
अनु छे द ल खए - (5x1=5)
द ता : अपने आस-पास और कूल सा थय क ज़ रत को अपनी भाषा म अ भ य त करते ह।

(1) व याथ जीवन और च र नमाण
 संपूण जीवन क आधार शला • च र नमाण क आव यकता • दे श व समाज के लए
उपयोगी
(2) वट - वट केट का रोमांच
 मैच कब और कहाँ • ट म का संघष • दशक क त या
(3) दौड़ती हुई िज़ंदगी
 कैसे • कारण • आव यकताओं म व ृ ध • या कर ?

Page 35


न 15 (1) आप वेणु राजगोपाल /वेणी राजगोपाल ह। हंद ु तान टाइ स द ल के संपादक के नाम
एक प लखकर सामािजक जीवन म बढ़ रह हंसा पर अपने वचार य त क िजए।( श द-सीमा -
लगभग 100 श द)
द ता: औपचा रक प , जैसे— धानाचाय, सं पादक को अपने आस-पास क सम याओं को यान म
रखकर प लखते ह। (5x1=5)
अथवा
(2) आपके व यालय म खेल क उपयु त साम ी है तथा समय-समय पर सभी तर पर मैच का
आयोजन भी कया जाता है। व यालय के खेल क तान होने के नाते धानाचाय के त आभार
य त करते हुए प ल खए।

न 16 न न ल खत म से कसी एक वषय पर लगभग 80 श द म सच
ू ना ल खए - (4x1=4)
द ता: अपने आस-पास और कूल सा थय क ज़ रत को अपनी भाषा म अ भ य त करते ह।

(1) आप व यालय के सां कृ तक स चव ह। बाल दवस समारोह के अवसर पर व यालय म आयोिजत
होने वाले सां कृ तक काय म के ववरण स हत सच
ू ना तैयार क िजए।

अथवा

(2) आप रजत च टोपा याय/ रजनी र तोगी, मोह ला सध
ु ार स म त के स चव ह। व छता अ भयान
के अंतगत ' व छता पखवाड़ा' काय म म भाग लेने के इ छुक लोग के लए एक सच
ू ना तैयार
क िजए।

न 17 न न ल खत म से कसी एक वषय पर लगभग 60 श द म व ापन तैयार क िजए-
(3x1=3)
द ता: अपने आस-पास और कूल सा थय क ज़ रत को अपनी भाषा म अ भ य त करते ह।

(1) वा य मं ालय वारा योग दवस के अवसर के चार सार के लए एक आकषक व ापन
लगभग 60 श द म तैयार क िजए।
अथवा

Page 36

(2)लोकल फॉर वोकल ( थानीय उ पाद का योग ) के चार- सार के लए एक
आकषक व ापन लगभग 60 श द म तैयार क िजए।

न 18 (1) 'जैसा करोगे वैसा भरोगे' वषय पर लघु कथा लगभग 100 श द म ल खए।(5x1=5)
द ता: रे डयो, ट .वी. या प -प काओ व अ य य- य सं चार मा यम से सा रत, का शत प
को कथा सा ह य एवं रचनाओ पर मौ खक एवं ल खत ट पणी/ व लेषण करते ह।
अथवा
(2)आप वेता कपरू /शैलेश कपरू ह। आप वतमान प र े य म हंद क उपयो गता जानते ह इसी लए
यारहवीं क ा म व ान वषय के साथ भी हंद अ त र त वषय के प म पढ़ना चाहते ह। अपने
धानाचाय को व यालय के ईमेल पते पर ईमेल लखकर अनम
ु त ा त क िजए। ( श द-सीमा
लगभग 100 श द)
द ता: अपने आस-पास और कूल सा थय क ज़ रत को अपनी भाषा म अ भ य त करते ह।

>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>

Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 10
TypeSample Paper
Pages36
Updated30 Apr 2026