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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका

AglaSem पर कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका (समाज का अध्ययन) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Social Science Chapter 6 the Parliamentary System Legislature and Executive (Exploring Society), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका - Page 1 of 36

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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (36 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

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NCERT Solutions Class 8 Social Science Chapter 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 6: संसद य प्रणाली— वधा यका
और कायपा लका

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

139 – 162 13 32 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 35 pages

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: संसद य प्रणाली— वधा यका और
कायपा लका
कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे, कक्षा 8,
भाग 1; वषयवस्तु— शासन प्रणाली और लोकतंत्र) के सभी प्रश्न के वस्तृत उत्तर। महत्वपूण प्रश्न, पुनरावलोकन कर, आठ आइए पता लगाएँ
बॉक्स, प्रश्न पूछने वाले दोन इसे अनदे खा न कर बॉक्स और प्रश्न और क्रयाकलाप के दस प्रश्न स म्म लत ह — चत्र 6.8 (कानून नमाण क
प्र क्रया), चत्र 6.9 (स्थायी स म त क रपोट का अंश), पृष्ठ 158 क सारणी तथा पृष्ठ 153 और 156 क तुलनात्मक ता लकाएँ मु द्रत पृष्ठ से सीधे
पढ़कर।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8) 139 – 162

खं ड प्रश्न

13 32

माध्यम

हन्द

महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 139
अध्याय का आरंभ — वषयवस्तु : शासन प्रणाली और लोकतंत्र

महत्वपू ण प्रश्न

प्र.1 भारत क संसद य प्रणाली क्या है और इसक संरचना कस प्रकार क गई है?

संसद य प्रणाली लोकतंत्र का वह रूप है जसम जनता वधा यका का चुनाव करती है, और सरकार (कायपा लका) उसी वधा यका
म से बनती है तथा तभी तक बनी रहती है जब तक उसे वधा यका का व ास प्राप्त है। संसद दे श क सव च्च वधायी संस्था है—
यह कानून बनाती है और सरकार के काय को नयं त्रत तथा नद शत करती है। चूँ क इसके सदस्य जनता ारा चुने जाते ह, इस लए
सरकार को जनता क सहम त से काय करते हुए दे खा जा सकता है।
संरचना। भारतीय संसद म राष्ट्रप त और दो सदन होते ह। दो सदन वाली इस संरचना को ‘ सदनीय’ प्रणाली कहा जाता है (‘ ’
का अथ है दो, ‘सदन’ का अथ है कक्ष)।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

संसद का अन्य नाम सदस्य कैसे आते ह पीठासीन अ धकारी
अंग

राष्ट्रप त राज्य का पमुख िनव चक मंड ल ारा िनव िचत ; संस द का स त्र ब ुल ाते है ं और —
िवधे यकों को स्वीकृ ित दे ते है ं

लोकसभा हाउस ऑफ द पीपल / जनता ारा प यत् क्ष िनव चन, सावभौिमक वयस्क मतािधकार के सदस्यों ारा िनव िचत
िनम्न सदन आधार पर ; संिवधान ारा िनध िरत अिधकतम सं ख्या 550 स्पीकर (अध् यक्ष)

राज्यसभा काउं िसल ऑफ िनव चक मंड ल ारा अप य त् क्ष िनव चन, िजसके बारे में आपने भारत के उपरा पित,
स्टेट्स / उच्च सदन ध्
िपछले अ याय में पढ़ ा सभापित के रूप में

राज्यसभा म आवं टत सीट क संख्या और लोकसभा म प्र त न धत्व करने वाले सांसद क संख्या— दोन ही प्रत्येक राज्य क
जनसंख्या पर आधा रत होती ह। नवा चत लोकसभा प्र त न धय म से बहुमत दल सरकार का गठन करता है।

यह संरचना ऐसी क्य है: टे न क प्रणाली ने हमारी संसद य प्रणाली को प्रे रत कया, कतु सं वधान- नमाता
केवल नकल नह कर रहे थे। उनके पास टश औप नवे शक शासन क संरचनाओं म — भले ही बहुत सी मत रूप
म — भागीदारी से प्राप्त व्यावहा रक अनुभव था, जसने उन्ह संसद य प्र क्रयाओं से प र चत कराया; प्राचीन
गणराज्य (महाजनपद ) क स्मृ त थी; और ग्रामसभा क वह परंपरा थी जहाँ बुजुग सामू हक नणय लेते थे।
सं वधान नमाण के समय इस पर व्यापक वचार- वमश हुआ क दो सदन चा हए या नह । नष्कष यह नकला क
केवल एक प्रत्यक्ष नवा चत सदन स्वतंत्र भारत के समक्ष आने वाली चुनौ तय के लए पयाप्त नह होगा, और
संघवाद क भावना के अनुरूप राज्य क प रषद आवश्यक है — जसक संरचना और नवाचन प्र क्रया जानबूझकर
अलग रखी गई।

क्या आप जानते ह? 1952 क प्रथम लोकसभा के बाद अब तक 17 लोकसभाएँ हो चुक ह। 18व लोकसभा
का गठन जून 2024 म हुआ।

प्र.2 संसद के प्रमुख काय क्या ह?

सं वधान ने संसद के काय को चार शीषक म वग कृत कया है। अध्याय उन्ह इसी क्रम म बताता है—

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

काय संसद इसके अंतगत वास्तव म क्या करती है

1. संवैधा नक रा पित और उपरा पित का िनव चन; संिवधान में संशोधन; तथा संिवधान के मूल मूल्यों की रक्षा — सावभौिमक वयस्क
काय मतािधकार के माध्यम से संस दीय लोकतंत्र को सक्षम बनाना, िवधाियका–कायपािलका–न्यायपािलका के बीच शिक्तयों
ृ क्करण का पालन, संघ ीय व्यवस्था सुिनिश्चत करना, और कानूनों तथा नीितयों का िनम ण कर मौिलक अिधकारों
के पथ
एवं राज्य के नीित-िनदे शक तत्वों को कायम रखना

2. कानून नमाण िवधाियका का पमुख उत्तरदाियत्व। िवधे यक (कानून का पारूप) पस्तुत होता है, पढ़ ा जाता है, पायः स्थायी सिमित ारा
जाँचा जाता है, खंड-दर-खंड चच होती है, मतदान होता है, दू स रा सदन भी पािरत करता है, रा पित की स्वीकृ ित िमलती
है और अंत में राजपत्र में अिधसूिचत होकर वह अिधिनयम बन जाता है

3. कायपा लका मंित्रयों से उनके काय ं और िनणयों का औिचत्य िसद्ध कराना — पश्नकाल के माध्यम से तथा उन सिमितयों के माध्यम
संबंधी उत्तरदा यत्व से िजनके समक्ष मंत्र ालयों को अपनी नीितयाँ समझानी होती है ं

4. वत्तीय वािषक बजट के माध्यम से सरकारी व्यय को स्वीकृ ित दे ना और उसकी िनगरानी करना, तथा िविभन्न मंत्र ालयों को धन
जवाबदे ही के िवतरण की जाँच करना

ये चार एक-दूसरे से क्य जुड़े ह: ध्यान द जए क अं तम दो काय कानून नमाण के साथ जोड़े गए अ त रक्त
काम नह ह — वे ही कानून नमाण को साथक बनाते ह। जस कानून को कोई लागू न करे वह व्यथ है, और जस
लागू करने वाले पर कोई दृ ष्ट न रखे वह खतरनाक है। इसी लए संसद कानून बनाकर सरकार से लगातार दो प्रश्न
पूछती रहती है— क्या आप इसे लागू कर रहे ह? और आप हमारे पैसे का क्या कर रहे ह?

प्र.3 भारत के संसद य लोकतंत्र म वधा यका और कायपा लका क भू मकाएँ क्या ह?

एक पं क्त म— वधा यका कानून बनाती है और सरकार पर दृ ष्ट रखती है; कायपा लका सरकार चलाती है और कानून को लागू
करती है — और कायपा लका को इसका हसाब वधा यका को दे ना पड़ता है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लकाl AglaSem · NCERT Solutions

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पहलू वधा यका कायपा लका

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संरचना
omराज्यसभा
.cऔर
भारत की संस द — रा पित, लोकसभा
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, उ परा पित और पधानमंत्र ी की अध् यक्षता वाल ी मंित्र पिरषद

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रा पित

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aमुgख्य कानून बनाना और कायपािलका के िवधाियका ारा िनिम त कान ूनों को ल ागू करना

भू मका काय ं की दे ख-रे ख करना

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वधेयक संस द में िवधे यक पस्तुत कर सकती है
em . स्त ुत िकए जाते है ं ag
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अिधकाश
ं िवधे यक कायपािल का ारा प

उत्तरदा यत्व
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पश्न पूछकर और स्पष्टीकरण माँग करl अपने िनण यों और काय ं की जानकारी तथा स्पष्टीकरण दे ती है; रा पित को
कायपािलका पर िनयंत्र ण रखती है त्
मह वपूण मामल ों में सहायता और सल ाह दे ती है , िजसमें संस द के स त्र ब ुल ाना भी
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सि मिल त है

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comकरती है l
धन सभी सरकारी व्ययों को अनुम ोिदत

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संस द ारा अन ुमोिद त बजट तैयार करती है एवं उ से ल ागू करती है

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स म िविभन्न संस दीय सिमितयों से परामश दै िनक मामल ों में स्वतंत्र रूप से काय कर सकती है तथा आवश्यकता पड़ने पर
करती है सिमितयों से परामश कर सकती है

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कायपा लका के भीतर एक नह , दो प्रमुख ह। राष्ट्रप त राज्य के प्रमुख और कायपा लका के औपचा रक प्रधान ह — वे
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a पlराजनी तक संकट म, जैसे लोकसभा चुनाव म कसी दल को स्पष्ट बहुमत न मलने
प्रधानमंत्री और अन्य मं त्रय क नयु क्त करते ह, संसद का सत्र बुलाते ह, वधेयक को स्वीकृ त दे ते ह, और मं त्रप रषद क
सहायता तथा परामश पर काय करते ह (यद्य g
पर, वे ववेकाधीन श क्तय का प्रयोग कर सकते ह)। प्रधानमंत्री वास्त वक कायकारी प्रा धकारी ह— मं त्रप रषद का नेतृत्व,

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राष्ट्रप त को परामश, व भन्न मंत्रालय के काय का समन्वय और राष्ट्रीय नी तय को आकार दे ना उनके प्रमुख काय ह। अ धका रय

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का एक स्थायी समूह — स वल सेवक, जन्ह प्रशासक या नौकरशाह भी कहा जाता है — मं त्रय के नदशन म काय करता है और
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वभाग को सुचारु रूप से चलाता है।

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a gl वह कड़ी जो इसे ‘संसद य’ बनाती है: मं त्रप रषद का चयन दोन सदन के सांसद म से होता है, और मंत्री
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सामू हक रूप से लोकसभा के प्र त उत्तरदायी होते ह। अथात कायपा लका कोई अलग से चुनी गई संस्था नह है;

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वह वधा यका के भीतर बैठती है और तभी तक टकती है जब तक लोकसभा उसका समथन करती है।
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कद्र और राज्य स्तर पर वधा यका और कायपा लका का गठन कस प्रकार कया जाता है?
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प्र.4

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g षता। इसी लए भारतीय संघवाद समझना
.c क संरचना जानबूझकर संघ क संरचना का अनुकरण करती है, वशेषता दरaवशे

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राज्य
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सरल है— कद्र क व्यवस्था जान लेने पर राज्य क व्यवस्था अपने आप समझ म आ जाती है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

वशेषताएँ संघ सरकार राज्य सरकार

संवैधा नक प्रमुख भारत के रा पित, िनव चन मंडल ारा िनव िचत रा ज्य के राज्यपाल , रा पित क्
ारा िनय ु त

प्रमुख का कायकाल 5 वष 5 वष

कायकारी अध्यक्ष औपचािरक पमुख रा पित, परंत ु वास्तिवक औपचािरक पमुख रा ज्यपाल , परंत ु वास्तिवक कायकारी
कायकारी पमुख पधानमंत्र ी पमुख मु ख्यमंत्र ी

कायका रणी का चयन लोकसभा में बहुम त दल/गठबंध न के नेता िवधान सभा में बहुम त द ल गठबंध न क/
े नेता

मं त्रप रषद पधानमंत्र ी ारा चयिनत मु ख्यमंत्र ी ारा चयिनत

उत्तरदा यत्व लोकसभा के पित उत्तरदायी िवधान सभा के पित उ त्त रद ायी

वधानमंडलीय संरचना ि सदनीय — लोकसभा और राज्यसभा एकसद नीय (के वल िवधान सभा) या ि सद नीय (िवधान
सभा एवं िवधान पिरषद )

नम्न सदन लोकसभा िवधान सभा

उच्च सदन राज्यसभा िवधान पिरषद — के वल कु छ राज्यों में

नम्न सदन का कायकाल 5 वष 5 वष

पीठासीन अ धकारी ( नम्न अध्यक्ष अ य ध् क्ष
सदन)

वधायी श क्तयाँ संघ सूची और समवत सूची के िवषयों पर कानून रा ज्य सूची और समवत सूची के िवषयों पर कान ून

वत्तीय श क्तयाँ िवत्तीय बजट के वल लोकसभा में ही पस्तुत हो िव त्त ीय बजट के वल िवधान सभा में ही पस्त ुत हो सकता
सकता है है

कस वषय पर कौन कानून बनाए। सं वधान म संघ सूची और राज्य सूची द गई ह, जन पर संघ और राज्य पृथक रूप से
कानून बना सकते ह, तथा एक समवत सूची है जस पर दोन बना सकते ह। परंतु य द समवत सूची के कसी वषय पर संघ
सरकार कानून बना दे ती है तो राज्य सरकार को उसका पालन करना अ नवाय होता है — इसी लए शक्षा समवत सूची म होने के
बावजूद शक्षा का अ धकार अ ध नयम संपूण भारत म लागू है।

स्वयं जाँ चए: केवल छह राज्य सदनीय ह — आंध्र प्रदे श, बहार, कनाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर
प्रदे श। शेष सभी राज्य म एकसदनीय व्यवस्था है, अथात केवल वधान सभा।

पुनरावलोकन कर — पृष्ठ 145

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संसद के वधायी काय — 1) संवैधा नक काय

पु न रावलोकन कर

प्र.1 लोकतंत्र और शासन वषय पर अपने पछले अध्याय से संसद के कुछ संवैधा नक काय के नाम बताइए। क्या
आपने राष्ट्रप त और उपराष्ट्रप त के नवाचन का उल्लेख कया? सं वधान म संशोधन का क्या?

हाँ — ये दोन इस सूची म आते ह। जन संवैधा नक काय से आप पहले ही प र चत ह, वे ह—

राष्ट्रप त का नवाचन। संसद के नवा चत सांसद, राज्य क वधान सभाओं के नवा चत सदस्य के साथ मलकर वह
नवाचक मंडल बनाते ह जो राष्ट्रप त का चुनाव करता है।
उपराष्ट्रप त का नवाचन, जो राज्यसभा के सभाप त भी होते ह।
सं वधान म संशोधन — अथात सं वधान के मूल पाठ को ही बदलना या उसम जोड़ना, जैसा 86व सं वधान संशोधन
अ ध नयम, 2002 ारा कया गया, जसने अनुच्छेद 21(क) जोड़कर 6 से 14 वष के बच्च के लए नःशुल्क और अ नवाय
शक्षा को अ धकार बनाया।

इनके अ त रक्त अध्याय कहता है क संसद को प्रत्यक्ष रूप से भारतीय सं वधान के मूल्य क रक्षा का दा यत्व स पा गया है, जनम
स म्म लत ह—

1. सावभौ मक वयस्क मता धकार के माध्यम से संसद य लोकतंत्र को सक्षम बनाना;
2. वधा यका, कायपा लका और न्यायपा लका के बीच श क्तय के पृथक्करण का पालन करना;
3. संघीय व्यवस्था सु न श्चत करना; और
4. कानून और नी तय का नमाण कर मौ लक अ धकार तथा राज्य के नी त- नदे शक तत्व को कायम रखना।

ये ‘संवैधा नक’ काय क्य कहलाते ह: इनम से प्रत्येक म संसद केवल कोई साधारण कानून नह बना रही होती —
वह सं वधान पर ही काय कर रही होती है : सं वधान ारा सृ जत सव च्च पद को भरना, सं वधान के पाठ म
प रवतन करना, या उसम लखे मूल्य क रक्षा करना। इसी लए अध्याय इन्ह साधारण कानून नमाण से अलग रखता
है। पुस्तक जोड़ती है क कुछ अन्य महत्वपूण संवैधा नक काय भी ह, जनका अध्ययन आप उच्च कक्षाओं म करगे।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 148
कानून नमाण — बच्च का नःशुल्क और अ नवाय शक्षा अ धकार अ ध नयम, 2009 क यात्रा

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आर.ट .ई. कस प्रकार एक अ ध नयम बना, यह प्र क्रया दशाने के लए एक छोटा-सा चाट बनाएँ।

यह रहा चाट, जो पृष्ठ 146 पर आर.ट .ई. के अपने कथन और पृष्ठ 147 के चत्र 6.8 क सामान्य प्र क्रया से बनाया गया है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

राज्य के नीित-िनदेश क तत्व — 1990 के दशक के आरंभ मे ं 86वाँ संि वधान संश ोधन
हर बच्चे को िशक्षा का िवचार न्यायालय मे ं तक : िशक्षा अिधिनयम, 2002
जीवन के अिधकार का अं ग → अनुच्छे द 21(क)

मुख्य चच : िवत्तपोषण — सिमित ने गहन अध्ययन कर राज्यसभा मे ं िवधेय क के
िव ालय, िशक्षक, व्यय संश ोधन सझ
ु ाए रूप मे ं प स्तुत (2008)

2008 तक सा ंसदों ने तय अगस्त 2009 मे ं लोकसभा रा पित की स्वीकृित —
िकया िक समय आ गया है मे ं पािरत अिधिनयम बना

पिरणाम : िव ालय में पवेश के िविधक माग, नए िव ालयों का िनम ण, िनःशुल् क पुस्तकें और गणवेश —
बच्चों का िनःशुल् क और अिनवाय िशक्षा अिधकार अिधिनयम, 2009।

आर.ट .ई. क यात्रा — नी त- नदे शक तत्व के एक वचार से संसद के अ ध नयम तक; अध्याय के अनुसार यह यात्रा लगभग एक सद लंबी
है।

चरण क्या हुआ चत्र 6.8 का कौन-सा
चरण

1 यह िवचार राज्य के नीित-िनदे शक िस द्धांतों में िनिहत था; संिवधान िनम ता चाहते थे िक स्वतंत्र ता िवधे यक से पहले — नीितगत
के एक दशक के भीतर इसे लागू कर िदया जाए, िकं तु ऐसा नही ं हो सका ष्
प ृ ठभ ूिम

2 1990 के दशक के आरंभ में न्यायालय में तक िदया गया िक िशक्षा पहले से ही मौिलक अिधकार न्यायपािल का की ओर से
‘जीवन के अिधकार ’ का अंग है, क्योंिक साथक जीवन के िलए िशक्षा आवश्यक है िवधाियका को संके त

3 86वें संिवधान संशोधन अिधिनयम , 2002 ने अनुच्छे द 21(क ) जोड़ा — राज्य 6 से 14 वष के संस द का संवैध ािनक काय

सभी बच्चों को िनःशुल्क और अिनवाय िशक्षा उपलब्ध कराएगा

4 छह वष बाद िवधे यक राज्यसभा में पस्तुत िकया गया िकसी भी सद न में प स्त ुतीकरण

5 एक सिमित ने गहन अध्ययन कर संशोधन सुझाए स्थायी सिमित को पेषण

6 मुख्य चच िवत्त पोषण पर थी — लाखों बच्चों के िलए नए िव ालय, आधारभूत ढाँचा और िशक्षक िवचार , खंड-द र -खंड चच ,
महँग े थे। िकं तु 2008 तक सांस दों ने िनश्चय कर िलया िक समय आ गया है संशोधनों पर मतद ान

7 2009 के चुनावों के बाद नई सरकार ने िवषय आगे बढ़ ाया; अग स्त 2009 में यह लोकसभा में दू सरे सद न में पि या का

पािरत हआ
ु द ोहराव

8 रा पित की स्वीकृ ित िमली और यह अिधिनयम बन गया रा पित की स्वीकृ ित (िफ र
राजप त्र अिधसूचना)

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

सुझाव: अपनी कॉपी म यह चाट बनाते समय बाईं ओर हा शये म वष ल खए — 2002, 2008, 2009। इनके बीच
का अंतराल ही असली बात है : जस वधेयक से सद्धांत रूप म सब सहमत थे, उसे भी अनुच्छेद 21(क) से
अ ध नयम तक पहुँचने म सात वष लगे।

प्र.2 य द आर.ट .ई. लोकसभा म प्रस्तुत कया गया होता तो आपके वचार से उसक प्र कया कैसी होती?

प्र क्रया लगभग वही रहती — केवल दोन सदन का क्रम बदल जाता। चत्र 6.8 का पहला चरण ही है “संसद के कसी भी
सदन म प्रस्तुतीकरण”, इस लए आर.ट .ई. जैसा साधारण वधेयक व धक रूप से कसी भी सदन म आरंभ हो सकता था।

चरण वास्तव म जो हुआ य द लोकसभा म प्रस्तुत होता

प्रस्तुतीकरण राज्यसभा ल ोकसभा

वाचन और स म त वाचन, िफर सिमित को पेषण िजसने संशोधन सुझाए िबल कु ल वही — वाचन, िफ र सिमित को
पेषण

चचा और मतदान खंड-दर-खंड चच , संशोधनों पर मतदान, िफर िवधे यक पर िबल कु ल वही

मतदान

दूसरा सदन लोकसभा में पि या दोहराई गई, िजसने अगस्त 2009 में इसे रा ज्यसभा में पि या द ोहराई जाती

पािरत िकया

स्वीकृ त और रा पित की स्वीकृ ित, िफर राजपत्र अिधसूचना िबल कु ल वही

अ धसूचना

दूसरे सदन म जाना क्य अ नवाय है: वधेयक अ ध नयम तभी बनता है जब दोन सदन उसे एक ही रूप म पा रत
कर द। सदनीय वधा यका का यही उद्दे श्य है — राज्य क प रषद पूरे दे श के लए बनने वाले कानून को दे खे, और
जनता का सदन उस वधेयक को दे खे जसे प रषद ने आरंभ कया हो। लोकसभा म आरंभ होने से वधेयक
राज्यसभा को छोड़ नह सकता था।

क्या आप जानते ह? एक प्रकार का वधेयक ऐसा है जसम सदन का चुनाव वास्तव म मायने रखता है : धन
वधेयक, जो वत्तीय मामल (कर नधारण, सरकारी ऋण आ द) से संबं धत होता है, केवल लोकसभा म ही प्रस्तुत
कया जा सकता है — और उसके लए राष्ट्रप त क पूव अनुशंसा भी आवश्यक है। आर.ट .ई. धन वधेयक नह था,
यद्य प उस पर सबसे बड़ी बहस धन को लेकर ही हुई।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 150

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

कायपा लका संबंधी उत्तरदा यत्व — चत्र 6.9, स्वास्थ्य एवं प रवार कल्याण संबंधी ायी स म त क रपोट का अंश
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आइए पता लगाएँ

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mको। इस अंश को दो दशाओं म प ढ़ए—
मंत्रालय स म त को रपोट कर रहा है, और स म त संसद
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laम त — सांसद क स म त — ने एक अनुशंसा क थी। मंत्रालय (यहाँ
स्वास्थ्य एवं प रवार कल्याण संबंधी ायीgस
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आयुष मंत्रालय) को ‘क गई कायवाही’ शीषक के अंतगत ल खत रूप म बताना पड़ा क उसने उस अनुशंसा पर क्या कया।

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.
अथात कायपा लका वधा यका को रपोट कर रही है।

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दसंबर 2024) और लोकसभा के पटल पर (फरवरी 2025) रखी जाती है। lअथात
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फर स म त अनुशंसा और उत्तर दोन को एक रपोट म रखती है — यह अंश एक सौ बासठव रपोट से है — जो राज्यसभा

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के पटल पर (20
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स म त संसद के दोन
सदनmको, और उनके माध्यम से जनता को, रपोट कर रही है।
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अध्याय इसे क्य दखाता है: प्रश्नकाल कायपा लका के उत्तरदा यत्व का प्रत्यक्ष और दखाई दे ने वाला रूप है। यह

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— इससे बचना मंत्रालय के लए एक मौ खक उत्तर.cसे कह क ठन है। यह भी ध्यान द जए क इन स म तय म agl
दस्तावेज उसका शांत रूप है। यहाँ हर अनुशंसा का ल खत उत्तर मलता है जसे कोई भी महीन बाद पढ़ सकता है

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व भन्न राजनी तक दल के सांसद हो सकते ह, इस लए सरकार बदलने पर यह जाँच रुकती नह ।

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कस वषय क समीक्षा क गई है?
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प्र.2

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वषय है मद 1.2 — “प्राथ मक स्वास्थ्य कद्र (पी.एच.सी.), सामुदा यक स्वास्थ्य कद्र (सी.एच.सी.) और जला
च कत्सालय (डी.एच.) म आयुष सु वधाओं का सह-
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ान”।
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m .c व्यवस्था के तीन स्तर पर, अथात गाँव के प्राथ मक स्वास्थ्य कद्र, उससे ag
चeकत्सालय म, आयुष ( च कत्सा क पारंप रक पद्ध तयाँ) क सेवाएँ नय मत
सरल शब्द म— यह दे खा गया क क्या सावज नक स्वास्थ्य
ऊपर के सामुदा यक स्वास्थ्य कद्र और जलाas
सेवाओं के साथ-साथ उपलब्ध कराई जा
l
agरही ह। इसी के भीतर वशेष रूप से यह वषय है क राज्य और कद्र शा सत प्रदेश ने
आयुष का पृथक वभाग स्था पत कया है या नह ।

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m a s emदे खए (यहाँ 1.2)। उसके
l ह क आगे का सारा ववरण
o के उप-क्रमांक — अनुशंसा के लए 1.2.1 और उत्तर के लए 1.2.2 a—gबताते
सुझाव: कसी भी स म त- रपोट का अंश पढ़ते समय सबसे पहले क्रमांक वाला शीषक
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a g l उसी एक वषय से संबं धत है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 स म त क अनुशंसा पहचा नए।

स म त क अनुशंसा अनुच्छेद 1.2.1 म है—
स म त ने ध्यान दलाया क कुछ राज्य और कद्र शा सत प्रदे श म आयुष का पृथक वभाग ा पत नह कया गया है।
इस लए आयुष प्रणाली को प्रोत्सा हत करने और आयुष स्वास्थ्य दे खभाल म उत्तम समन्वय के लए उसने अनुशंसा क क
मंत्रालय ऐसे राज्य और कद्र शा सत प्रदे श पर बल दे और उन्ह प्रे रत करे क वे ऐसा वभाग ा पत कर, जससे आयुष
क्षेत्र और उसक योजनाओं का शीघ्र वकास तथा कायान्वयन हो सके। (स म त अपनी रपोट के अंश 2.13 का उल्लेख करती है।)

स म त क भाषा पर ध्यान द जए: वह “बल दे और प्रे रत करे” कहती है, “आदे श दे ” नह । संसद य स म त
अनुशंसा करती है, आदे श नह दे ती। यही एक शब्द उस संवैधा नक क ठनाई क ओर संकेत कर दे ता है जसे
मंत्रालय अपने उत्तर म उठाता है।

प्र.4 सरकार का प्रत्युत्तर क्या है?

सरकार का उत्तर अनुच्छेद 1.2.2 म, ‘क गई कायवाही’ शीषक के अंतगत है। इसके तीन भाग ह—

1. एक संवैधा नक सीमा। “सावज नक स्वास्थ्य” राज्य का वषय है, इस लए राज्य /कद्र शा सत प्रदे श म आयुष का पृथक
वभाग बनाने का अ धकार संबं धत राज्य/कद्र शा सत सरकार के क्षेत्र म आता है — संघीय मंत्रालय इसका आदे श नह दे
सकता।
2. उस सीमा के भीतर उसने क्या कया। आयुष मंत्रालय ने व भन्न बैठक म राज्य सरकार से अनुरोध कया है क वे पृथक
नदे शालय स्था पत कर और एस.पी.एम.यू. (राज्य प रयोजना प्रबंधन इकाई) तथा डी.पी.एम.यू. ( जला प रयोजना प्रबंधन
इकाई) म कमचा रय क नयु क्त कर, जससे राष्ट्रीय आयुष मशन (एन.ए.एम.) योजना का शीघ्र वकास और कायान्वयन
हो सके।
3. अब तक का प रणाम। वतमान म 24 राज्य /कद्र शा सत प्रदे श म पृथक आयुष नदे शालय उपलब्ध है।

यह आदान-प्रदान संघवाद के बारे म क्या सखाता है: स म त कुछ करवाना चाहती थी; मंत्रालय उद्दे श्य से सहमत
था, कतु उसने बताया क यह श क्त राज्य के पास है, और अपनी जगह उसने जो प्रे रत करने का प्रयास कया
उसका ब्योरा दया। यही संघवाद है जैसा अध्याय बताता है — सत्ता का वभाजन कद्र और राज्य के बीच। और यही
उत्तरदा यत्व भी है, क्य क मंत्रालय को 24 क संख्या अ भलेख म दज करनी पड़ी, जसके सामने अगली रपोट को
मापा जा सकेगा।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 151

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

4) वत्तीय जवाबदे ही

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आपके वचार से संसद सरकारी व्यय पर दृ ष्ट क्य रखती है? (संकेत— सरकार कसका पैसा खच करती है?)

क्य क वह पैसा सरकार का नह , जनता का है। सरकार का राजस्व नाग रक से आता है— उन कर से जो हम सीधे दे ते ह, उन
कर से जो हमारी लगभग हर खरीद म स म्म लत ह, और उन सावज नक संप त्तय से जो पूरे राष्ट्र क ह। सरकार उस धन का केवल
प्रबंधन करती है; वह उसक स्वामी नह है।
अब कड़ी को दे खए। जनता स्वयं हसाब नह जाँच सकती, इस लए वह प्र त न ध चुनती है। वे प्र त न ध संसद म बैठते ह। इस लए
संसद जनता क ओर से व्यय पर दृ ष्ट रखती है — और यही अध्याय भी कहता है क संसद वा षक बजट के माध्यम से सरकारी
व्यय को स्वीकृ त दे ती है, उसक नगरानी करती है और व भन्न मंत्रालय को धन के वतरण क जाँच करती है।

संसद क्या करती है इससे क्या रुकता है

धन खच होने से पहले बजट को स्वीकृ ित दे ती है ऐसे काय ं पर व्यय िजनके िल ए जनता के पितिनिधयों ने कभी सहमित नही ं द ी

मंत्र ालयों के बीच धन के िवतरण की जाँच करती है श्
िकसी िवभाग को धन का अभाव और िकसी को आव यकता से अिधक धन

सिमितयों के माध्यम से व्यय की बाद में िनगरानी करती है द्द श्य के िल ए स्वीकृ त धन का च ुपचाप दू सरे काम में ल गना, या उ सका अपव्यय
एक उ े

इसके पीछे का नयम: लोकतंत्र म जो नकाय धन जुटाता है, वही उसे खच करने क अनुम त भी दे । इसी लए
कायपा लका बजट तैयार करती है कतु वधा यका उसे स्वीकृ त दे ती है (पृष्ठ 153 क ता लका दे खए), और
इसी लए धन वधेयक केवल प्रत्यक्ष नवा चत लोकसभा म ही आरंभ हो सकता है। अध्याय इस सौदे का दूसरा पक्ष
भी बताता है— सरकार से अपेक्षा क जाती है क वह संसद को आवश्यक सूचना समय पर और सट क ढं ग से
उपलब्ध कराए, क्य क सही आँकड़ के बना नगरानी संभव ही नह ।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 151
संसद के कायपा लका संबंधी काय — सं वधान के भाग V का क्रम

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 भारतीय सं वधान का भाग V, अध्याय I— ‘कायपा लका’ से आरंभ होता है। इसम राष्ट्रप त, उपराष्ट्रप त और
मं त्रप रषद स हत अन्य क भू मकाओं और उत्तरदा यत्व का वणन है। अध्याय II म संसद क भू मका और काय
का उल्लेख है। आपके वचार म ऐसा क्य कया होगा?

दो स्पष्टीकरण संभव ह, और वे परस्पर वरोधी नह ह।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

1. सं वधान पहले पद बनाता है, फर वह नकाय जसका वह पद अंग है। अध्याय I राष्ट्रप त, उपराष्ट्रप त और मं त्रप रषद का
सृजन करता है। कतु अध्याय II म व णत संसद म राष्ट्रप त स्वयं स म्म लत ह — “भारत क संसद… राष्ट्रप त, लोकसभा और
राज्यसभा से मलकर बनती है।” जब तक राष्ट्रप त का पद ही न बना हो, संसद का वणन नह कया जा सकता। इस लए यह क्रम
ता कक है, कोई श्रेष्ठता-क्रम नह : पहले पद प रभा षत क जए, फर वह सभा जसका वह पद अंग है।
2. यह क्रम दोन अंग के वास्त वक संबंध को दशाता है। हमारी व्यवस्था म कायपा लका संसद से बाहर नह है — मं त्रप रषद
दोन सदन के सांसद म से बनती है, अ धकांश वधेयक कायपा लका प्रस्तुत करती है, और राष्ट्रप त ही संसद का सत्र बुलाते ह तथा
वधेयक को स्वीकृ त दे ते ह। कायपा लका को पहले रखना यह दखाता है क दोन कतनी गहराई से गुँथे हुए ह — और यही
संसद य प्रणाली को राष्ट्रप त-प्रणाली से अलग करता है।

इस क्रम का अथ यह नह है क कायपा लका श्रेष्ठ है। दोन अध्याय को साथ प ढ़ए तो उत्तरदा यत्व उल्ट दशा म
चलता है — मं त्रप रषद सामू हक रूप से लोकसभा के प्र त उत्तरदायी है, संसद सभी सरकारी व्यय को स्वीकृ त दे ती
है, और मं त्रय को प्रश्नकाल म अपने काय का औ चत्य सद्ध करना पड़ता है। पाठ म स्थान और श क्त के क्रम म
स्थान — दोन एक बात नह ह।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 152
2) प्रधानमंत्री और मं त्रप रषद

आइए पता लगाएँ

प्र.1 य द कायपा लका के सदस्य वधा यका का ही अंग ह तो हम कैसे कह सकते ह क यह श क्तय का पृथक्करण
है? (संकेत— ऊपर दए गए वधा यका वाले भाग पर पुनः ध्यान द।)

क्य क भारत म श क्तय के पृथक्करण का अथ है काय और उत्तरदा यत्व का पृथक्करण — व्य क्तय का नह । वही सांसद
मंत्री हो सकती है; कतु मंत्री के रूप म वह जो काय करती है, वह संसद का काय नह है, और संसद उससे उस काय का हसाब माँग
सकती है।

क्या साझा है फर भी क्या पृथक है

मंत्र ी दोनों सदनों के सांस दों में से चुने काय अल ग है ं : िवधाियका कान ून बनाती और दे ख-रे ख करती है; कायपािल का उ न्हे ं ल ागू करती है
जाते है,ं इसिलए व्यिक्त वही है ं

अिधकांश िवधे यक कायपािलका न्
उ हे ं पािरत के वल संस द कर सकती है — मंत्र ी के िवधे यक को भी सिमित की जाँच, खंड-द र -खंड चच
पस्तुत करती है और द ोनों सद नों के मतद ान से ग ुजरना पड़ ता है

बजट कायपािलका तैयार करती है व्यय की स्वीकृ ित के वल संस द दे सकती है

मंत्र ी सदन में बैठते है ं और वही ं उत्तर वे वहाँ उ न ल ोगों के रूप में बैठते है ं िजन्हे ं अपना औिचत्य िस द्ध करना है — पश्नकाल में और सिमितयों
दे ते है ं के सम क्ष। मंित्र पिरषद सामूिहक रूप से ल ोकसभा के पित उ त्त रद ायी है और उ सके ारा हटाई जा

सकती है

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तीसरा अंग उत्तर को पूरा करता है। न्यायपा लका दोन से पूणतः बाहर है। वह जाँचती है क संसद ारा पा रत कानून संवैधा नक
ढाँचे का उल्लंघन न कर, और कायपा लका ारा कानून लागू करते समय सं वधान का उल्लंघन होने पर हस्तक्षेप कर सकती है।
इस लए जहाँ वधा यका और कायपा लका एक-दूसरे म मलती भी ह, वहाँ भी उनम से कोई अपने ही आचरण का अं तम नणायक
नह है।

संतुलन को स्पष्ट रूप से सम झए: जो प्रणाली व्य क्तय को पूरी तरह अलग रखती है (जैसे राष्ट्रप त-प्रणाली)
उसम पृथक्करण अ धक तीखा होता है, कतु ग तरोध भी हो सकता है, जहाँ कायपा लका और वधा यका एक-दूसरे
के साथ काम करने से ही इनकार कर द। संसद य प्रणाली इस अ तव्यापन को स्वीकार करती है और बदले म कुछ
और पाती है — ऐसी सरकार जसे हर बैठक के दन नवा चत सदन के सामने अपनी सफाई दे नी पड़ती है, और जो
उस सदन का व ास खोते ही गर जाती है। 1956 म रेल दुघटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री का त्यागपत्र, जब क
उन्ह दोषी नह ठहराया गया था, दखाता है क इस उत्तरदा यत्व को कतनी गंभीरता से लया जाता था।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 154–155
न्यायपा लका— नयंत्रण और संतुलन क भू मका

आइए पता लगाएँ

प्र.1 य द तीन अंग म से कसी एक— वधा यका, कायपा लका या न्यायपा लका के पास समस्त श क्त आ जाए,
तब क्या हो सकता है? यह लोग के अ धकार को कस प्रकार प्रभा वत कर सकता है? इस वषय पर अपने
सहपा ठय से वचार- वमश क जए क प्रत्येक अंग कस प्रकार दूसरे अंग पर नयंत्रण रखता है। उदाहरण के
लए, वधा यका कस प्रकार न्यायपा लका क कायवाही पर प्रश्न उठाती है? न्यायपा लका कस प्रकार सु न त
करती है क न मत कानून और शासक य काय सं वधान के अनुरूप ह ? क्या आपको लगता है क न्यायपा लका
क कायवा हय क भी कसी प्रकार समीक्षा क जा सकती है?

य द कसी एक अंग के पास समस्त श क्त आ जाए तो वह अपने ही आचरण का न्यायाधीश बन जाएगा — और तब
अ धकार सं वधान पर नह , उस अंग क स ावना पर टके रहगे। तीन स्थ तय पर वचार क जए—

य द समस्त श क्त इस …तो क्या समाप्त हो जाएगा लोग के अ धकार पर प्रभाव
अंग के पास हो…

वधा यका िकसी कानून को संिवधान की कसौटी पर ल्
मौिल क अिधकारों का उ ल ंघ न करने वाल ा कान ून भी र द्द नही ं हो
परखने वाला कोई नही ं बचेग ा सके गा ; बहुम त के वल मत दे कर अल्पसंख्यक के अिधकार छीन
सके गा

कायपा लका कोई उससे धन रोक नही ं सके गा, पश्न कान ून के स्थान पर आदे श आ जाएँग ;े न पश्नकाल , न सिमित, न
नही ं पूछ सके गा, न ही उसे कानून मानने बजट पर मतद ान — और जनता की से वा छोड़ च ुकी सरकार को
को बाध्य कर सके गा हटाने का कोई माग नही ं

न्यायपा लका कोई िनव िचत िनकाय नीित नही ं बनाएगा; ल ोग मत दे कर कान ून नही ं बद ल सके ं गे , क्योंिक िनणय करने
व्याख्या की कोई सीमा नही ं रहेग ी न् न्
वाले वे ल ोग नही ं होंग े िज हे ं उ होंने च ुना है

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

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िवधाियका

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संसद — कानून बनाती है

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पश्नकाल, सिमितयाँ,

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जाँचती है िक कानून

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बजट की स्वीकृित, संिवधान का उल्लंघन

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सामूिहक उत्तरदाियत्व न करे

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.co कायपािलका agयायपािलका
sem
न्

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पधानमंत्री और मंित्रपिरषद न्यायालय — व्याख्या करते है ं

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कानून लागू करते समय संिवधान का

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उल्लंघन होने पर हस्तक्षेप करती है

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कोई भी अंग अपने ही आचरण का अंितम िनण यक नही ं है।

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नयंत्रण और संतुलन : प्रत्येक अंग कसी दूसरे के प्र त उत्तरदायी है, जससे कोई भी अंग अत्य धक श क्तशाली न हो जाए।

co m
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वधा यका कायपा लका पर प्रश्न कैसे उठाती है। प्रश्नकाल के माध्यम से — सामान्यतः सत्र का पहला घंटा, जब सांसद मं त्रय

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g दखाता है। बजट के माध्यम से,
.c के माध्यम से, जनके समक्ष मंत्रालय को ल खत उत्तर देने होते ह, जैसा चत्रa6.9
से सरकारी नी तय और ग त व धय पर प्रश्न पूछते ह और मं त्रय को अपने काय तथा नणय का औ चत्य सद्ध करना होता है।
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se क हर रुपये क स्वीकृ त संसद देती है। और अंततः सामू हक उत्तरदा यत्व के माध्यम से — मं त्रप रषद तभी तक पद पर रहती
तय
aक्य
agl है जब तक लोकसभा का समथन उसके साथ है।
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संरक्षक है। उसे यह “अनूठा और महत्वपूण अ धकार”.cदया गया है क वह जाँचे क संसद ारा पा रत कानून ने संवैधा नक ढाँचे
न्यायपा लका कैसे सु न त करती है क कानून और शासक य काय सं वधान के अनुरूप ह । न्यायपा लका सं वधान क
g l a
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l a se ारा कानून के कायान्वयन के दौरान सं वधान का उल्लंघन होता है तो उसके पास
g वह कानून क व्याख्या, ववाद के समाधान और मौ लक अ धकार क रक्षा के माध्यम
का उल्लंघन न कया हो; और य द कायपा लका
पुनः हस्तक्षेप करने क श क्त है। यह a
काय
से, अपने न्यायालय क प्रणाली ारा करती है।

. com
emनणय क पुनरीक्षा कर सकता है,
क्या न्यायपा लका क भी समीक्षा होती है? हाँ, और कई रूप म। नचले न्यायालय के नणय के वरुद्ध उच्च न्यायालय म अपील

m a s
o क कोई पीठ कानून पर भन्न दृ ष्टकोण अपना सकती है। संसद कसी नणय gकlे उत्तर म, संवैधा नक सीमाओं के भीतर,
क जा सकती है, इस लए अ धकांश नणय क पुनः जाँच होती है। सव च्च न्यायालय अपने ही

. cबाद a
semकानून म या सं वधान म संशोधन कर सकती है। न्यायाधीश क नयु क्त होती है और अत्यंत गंभीर स्थ तय म एक वशेष
और

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.
प्र क्रया ारा संसद उन्ह हटा भी सकती है। और प्रत्येक नणय खुले न्यायालय म सुनाया तथा प्रका शत कया जाता है, इस लए वह
सावज नक और अकाद मक आलोचना के लए खुला रहता है। जो जानबूझकर नह होने दया जाता, वह यह है क कोई न्यायाधीश
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के नणय क समीक्षा इस आधार पर करे क वह कौन है — यही स्वतंत्रता न्यायालय को तत्कालीन सरकार के वरुद्ध नणय दे ने म

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समथ बनाती है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

यह करके दे खए: अपने समूह म कोई एक अ धकार ली जए — जैसे अनुच्छेद 21(क) के अंतगत शक्षा का
अ धकार — और पता लगाइए क हर चरण पर उसक रक्षा कौन-सा अंग करता है : उसे बनाया कसने, वद्यालय
चलाता और उनके लए धन दे ता कौन है, और य द आपके क्षेत्र म वद्यालय उपलब्ध न हो तो आप कसके पास
जाएँगे।

एक टप्पणी: हद पुस्तक म यह उदाहरण “ वधा यका कस प्रकार न्यायपा लका क कायवाही पर प्रश्न उठाती
है?” के रूप म छपा है, जब क अंग्रेजी संस्करण म यही वाक्य “ वधा यका कस प्रकार कायपा लका के काय पर
प्रश्न उठाती है?” है। अध्याय का पूरा प्रसंग कायपा लका के उत्तरदा यत्व का है — प्रश्नकाल, स म तयाँ, बजट —
इस लए ऊपर दोन पक्ष को स्पष्ट कया गया है।

प्र.2 क्या आप ऐसे उदाहरण ढूँ ढ़ सकते ह जहाँ न्यायपा लका ने कानून बनाने वाल से कसी कानून क समीक्षा करने
के लए कहा हो? क्या आप ऐसे उदाहरण भी ढूँ ढ़ सकते ह जहाँ कसी कानून के क्रयान्वयन पर न्यायपा लका ने
प्रश्न उठाए ह ?

हाँ — और अध्याय ने दोन म से एक-एक उदाहरण पहले ही दे दया है, यद्य प उन्ह इस नाम से नह पुकारा। इन्ह से आरंभ क जए,
फर और खो जए।
1. न्यायपा लका ने वधा यका को प्रे रत कया — स्वयं आर.ट .ई.। 1990 के दशक के आरंभ म न्यायालय म यह तक दया
गया क नःशुल्क शक्षा पहले से ही ‘जीवन के अ धकार’ का अंग है, क्य क साथक जीवन जीने के लए शक्षा आवश्यक है। इसके
बाद संसद य कायवाही आरंभ हुई : 86वाँ सं वधान संशोधन अ ध नयम, 2002 ने अनुच्छेद 21(क) जोड़ा और 2009 म
आर.ट .ई. अ ध नयम आया। यह न्यायालय क व्याख्या से वधा यका के कतव्य-बोध के बदलने का उदाहरण है।
2. न्यायपा लका ने क्रयान्वयन पर प्रश्न उठाया। अध्याय यह सद्धांत सीधे बताता है — “य द कायपा लका ारा कानून के
कायान्वयन के दौरान सं वधान का उल्लंघन होता है तो न्यायपा लका के पास पुनः हस्तक्षेप करने क श क्त है।” व्यवहार म
न्यायालय ऐसा नरंतर करते ह — यह आदे श दे कर क कोई योजना उन लोग तक वास्तव म पहुँचे जनके लए वह बनी थी, या क
कोई अ धकारी कानून म लखी प्र क्रया का पालन करे।

और उदाहरण कैसे खोज:

समाचार-पत्र के संग्रह म कसी वष के साथ ये शब्द खो जए — “उच्चतम न्यायालय ने कानून रद्द कया” या
“उच्च न्यायालय ने सरकार को नदश दया”।
न्यायालय क अपनी वेबसाइट (sci.gov.in तथा अपने राज्य के उच्च न्यायालय क साइट) का उपयोग
क जए, जहाँ नणय और उनके सार प्रका शत होते ह।
प्रत्येक उदाहरण के लए चार बात ल खए : कौन-सा कानून, न्यायालय कौन गया, न्यायालय ने क्या कहा,
और उसके बाद संसद या सरकार ने क्या कया। चौथी बात प्रायः छू ट जाती है, और वही दखाती है क
नयंत्रण वास्तव म काम कर रहा है।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

अंतर स्पष्ट र खए: न्यायालय जब वधा यका से कसी कानून क समीक्षा करने को कहता है तो नशाना कानून
स्वयं होता है — क्या वह सं वधान के अनुरूप है? और जब वह क्रयान्वयन पर प्रश्न उठाता है तो नशाना
कायपा लका का आचरण होता है — क्या कानून वैसे ही लागू हो रहा है जैसा लखा गया था? पहला वधा यका
पर नयंत्रण है, दूसरा कायपा लका पर। दोन का ोत एक ही है : न्यायपा लका सं वधान क संरक्षक है, प्र तस्पध
नी त- नमाता नह , और वह तभी काय करती है जब कोई मामला उसके समक्ष लाया जाए।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 157
राज्य वधानमंडल क संरचना

आइए पता लगाएँ

प्र.1 आपके राज्य म कस प्रकार क वधा यका है?

उत्तर केवल दो म से एक हो सकता है, और अध्याय बताता है क नणय कैसे कर।

प्रकार सदन कौन-से राज्य

सदनीय िवधान सभा और िवधान पिरषद आंध पदे श, िबहार , कन टक , महारा , तेल ंग ाना, उ त्त र पदे श — छह राज्य

एकसदनीय के वल िवधान सभा शेष सभी रा ज्य

नमूना उत्तर (अपने राज्य के अनुसार बदल ली जए): “मेरा राज्य कनाटक है। कनाटक म सदनीय वधानमंडल है : वधान
सभा, जसके सदस्य ( वधायक) प्रत्येक नवाचन क्षेत्र से जनता ारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते ह, और वधान प रषद। वधानमंडल
बगलुरु के वधान सौध म बैठता है, जस भवन क प रकल्पना कगल हनुमंथैया ने क थी — जो स्वतंत्रता सेनानी, सं वधान सभा
के सदस्य, कनाटक के मुख्यमंत्री और बाद म सांसद रहे।”
य द आपका राज्य इन छह म नह है तो आपका उत्तर होगा : “मेरे राज्य म एकसदनीय वधानमंडल है — केवल वधान सभा।
राज्य के लए कानून उसी एक सदन के वधायक बनाते ह, राज्य सूची और समवत सूची के वषय पर।”

स्वयं जाँ चए: आपके राज्य के वधानमंडल क वेबसाइट पर वधान सभा क सदस्य संख्या, अध्यक्ष का नाम और
(य द हो तो) वधान प रषद क जानकारी मलेगी। अपने नवाचन क्षेत्र और अपने वधायक का नाम भी जो ड़ए —
इससे सामान्य उत्तर आपका अपना उत्तर बन जाएगा।

आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 158

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

वधा यका के प्रभावी कामकाज क चुनौ तयाँ

आइए पता लगाएँ

प्र.1 नीचे द गई सारणी का अध्ययन क जए। संसद के कामकाज के वषय म समय के साथ आप कौन-से नष्कष
नकाल सकते ह? हाल के वष के आँकड़े भी संक लत क जए।

यह रही वही सारणी, जसम एक स्तंभ जोड़ दया गया है ता क प्रवृ त्त स्पष्ट दखे।

लोकसभा क अव ध सत्र क संख्या बैठक क संख्या प्र त सत्र औसत बैठक

पहली लोकसभा (1952–1957) 14 677 677 ÷ 14 ≈ 48

दूसरी लोकसभा (1957–1962) 16 567 567 ÷ 16 ≈ 35

दसव लोकसभा (1991–1996) 16 423 423 ÷ 16 ≈ 26

तेरहव लोकसभा (1999–2004) 14 356 356 ÷ 14 ≈ 25

आँकड़ से तीन नष्कष नकलते ह।

1. सत्र क संख्या लगभग अप रव तत रही — पचास वष म 14 से 16 के बीच। संसद आज भी वष म लगभग तीन बार
बैठती है, जैसा अध्याय बताता है : बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र। अथात संसद य वष का ढाँचा वही रहा।
2. कतु बैठक क संख्या तेजी से घट है। पहली लोकसभा क 677 बैठक से तेरहव लोकसभा क 356 — अथात 321
बैठक क कमी, जो लगभग आधी है (356, 677 का लगभग 53% है)। यह गरावट लगातार है, कोई एक बार क घटना नह
: 677 → 567 → 423 → 356।
3. इस लए हर सत्र बहुत छोटा हो गया। एक सत्र क औसत लंबाई लगभग 48 बैठक से घटकर लगभग 25 रह गई — लगभग
आधी। चूँ क एक बैठक सामान्यतः 6 घंटे चलती है, पहली लोकसभा लगभग 677 × 6 ≈ 4,060 घंटे बैठ , जब क तेरहव
लगभग 356 × 6 ≈ 2,140 घंटे।

घंटे क्य मायने रखते ह: ये घंटे केवल औपचा रकता नह ह। इन्ह म वधेयक पढ़े और खंड-दर-खंड परखे जाते ह,
मंत्री प्रश्नकाल का सामना करते ह, स म तयाँ अपनी रपोट रखती ह और बजट क जाँच होती है। कम बैठक का
अथ है हर वधेयक क कम जाँच, और हर व्यवधान क कह अ धक क मत — क्य क उसक भरपाई के लए समय
ही नह बचता। अध्याय क चता यही है : जब “सत्र क अव ध सं क्षप्त क जाती है और अनेक वधेयक पर चचा
करने और पा रत होने म अत्य धक समय लग जाता है, तो यह एक चताजनक वषय बन जाता है।”

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हाल के आँकड़े कैसे संक लत कर (प्रश्न का दूसरा भाग):

लोकसभा और राज्यसभा क वेबसाइट (sansad.in) पर ‘सत्र’ या ‘सां ख्यक य जानकारी’ वाले पृष्ठ म प्रत्येक
लोकसभा के सत्र और बैठक द गई ह।
चौदहव से अठारहव लोकसभा तक के लए यही चार स्तंभ बनाइए।
फर एक साधारण दं ड-आलेख बनाइए जसम क्षै तज अक्ष पर लोकसभा और ऊध्वाधर अक्ष पर बैठक क
संख्या हो। चत्र प्रवृ त्त को अकाट्य बना दे ता है — और यह भी दखा दे ता है क गरावट जारी रही, थम गई, या
पलट गई।

प्र.2 पूव राज्यसभा अध्यक्ष एम. वकैया नायडू ारा 2021 म दया गया यह वक्तव्य प ढ़ए— “2004 से 2014 के मध्य
राज्यसभा क उत्पादकता लगभग 78% रही, कतु इसके प ात यह घटकर लगभग 65% रह गई। जन 11 सत्र
क अध्यक्षता मने क , उनम से चार सत्र म उत्पादकता बहुत कम रही— 6.80%, 27.30%, 28.9% और
29.55%। राज्यसभा ने वष 2018 म अब तक क सबसे न्यून उत्पादकता 35.75% दज क , जो नरंतर व्यवधान
के कारण थी।” इस वक्तव्य से आप क्या नष्कष नकाल सकते ह? इसका राज्य सभा क भू मका पर क्या प्रभाव
पड़ता है?

सबसे पहले, यहाँ ‘उत्पादकता’ का अथ। संसद य संदभ म इसे नधा रत समय के वरुद्ध वास्तव म काय कए गए घंट क संख्या
से मापा जाता है। अथात 65% उत्पादकता का अथ है क जन 100 घंट म राज्यसभा को काय करना था, उनम से लगभग 65 घंटे
काय हुआ और लगभग 35 घंटे नष्ट हो गए।
आँकड़ से नष्कष।

1. गरावट वास्त वक है, कतु औसत म वनाशकारी नह : 2004–14 म लगभग 78% से घटकर बाद म लगभग 65% —
अथात लगभग 13 प्र तशत अंक क कमी, या पहले उपयोग म आने वाले समय का लगभग छठा भाग।
2. कतु औसत बहुत बुरे सत्र को छपा लेता है। जन ग्यारह सत्र क उन्ह ने अध्यक्षता क , उनम से चार म उत्पादकता
6.80%, 27.30%, 28.9% और 29.55% रही। 6.80% उत्पादकता वाला सत्र वह है जसम प्रत्येक 100 नधा रत घंट म
से 7 घंटे भी काय नह हुआ — अथात सदन व्यावहा रक रूप से चला ही नह ।
3. वष 2018 उस सदन के लए अब तक का सबसे बुरा वष रहा — 35.75%, और इसका बताया गया कारण व्यवधान थे, न
क अवकाश या काय क कमी।
4. इस लए हा न बखरी हुई नह , क द्रत है। ग्यारह म से चार बुरे सत्र औसत को उतना नीचे ख च सकते ह जतना हर जगह क
थोड़ी-सी सुस्ती कभी नह ख च सकती। इससे पता चलता है क समस्या ‘टू ट-फूट के प्रसंग ’ क है — जो सामान्य अकुशलता
से भन्न समस्या है और भन्न उपाय माँगती है।

राज्यसभा क भू मका पर प्रभाव। स्मरण क जए क राज्य क प रषद बनाई ही क्य गई थी : सं वधान नमाताओं का नष्कष था
क केवल एक प्रत्यक्ष नवा चत सदन स्वतंत्र भारत क चुनौ तय के लए पयाप्त नह होगा, और संघवाद क भावना के अनुरूप
राज्य को अपना सदन चा हए। राज्यसभा वह सदन है जो दूसरी, शांत दृ ष्ट डालती है — लोकसभा से पा रत वधेयक को परखती
है, राज्य को स्वर दे ती है और कायपा लका से हसाब माँगती है।

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राज्यसभा से जो अपेक्षा है नष्ट घंट क क मत

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सुध ार सुझाना .c
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िवधे यकों को दू स री बार ध्यान से पढ़ ना और
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क्षा करते है ं — द ोनों ही िस्थितयों में ‘प ुनरीक्षण

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िवधे यक कम जाँच के साथ पािरत होते है ं या वष ं पती

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’ प ुनरीक्षण नही ं करता
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aसंgघlीय व्यवस्था में राज्यों का पक्ष रखना
करने वाल ा सद न

िजस मंच के िल ए रा ज्यों की िचंताएँ बनी थी,ं वही ं वे उ ठाई ही नही ं जाती ं

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मंित्रयों से पश्न पूछना और व्यय की जाँच कायपािल का का उ त्त रद ाियत्व ठीक वही ं कमजोर पड़ता है जहाँ वह सबसे मजब ूत होना चािहए
करना
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तक पूण सावजिनक बहस का आदश पस्तुत
करना
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नागिरक तक केस् थान पर व्यवधान दे खते है ं और संस्था पर उ नका िवश्वास घटता है

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m a s emसकता है, और
l दलाने का उनके पास
नष्पक्ष दृ ष्ट: व्यवधान एक ऐसा उपाय है जसका प्रयोग कसी भी सदन का कोई भी समूह कर
. co करने वाले सदस्य प्रायः यह तक दे ते ह क कसी अत्यावश्यक वषय परagध्यान
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उसका प्रयोग

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कोई और माग नह था। ऊपर का वक्तव्य एक पीठासीन अ धकारी का है, जो इसक क मत बता रहे ह। दोन बात
a एक साथ सत्य हो सकती ह — इसी लए अध्याय का नष्कष कसी पर दोष मढ़ने का नह , संस्थाओं और नाग रक

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का है : संसद और राज्य वधानसभाओं क प रकल्पना वचारशील वाद- ववाद के मंच के रूप म क गई थी, और
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उनका वैसा काय न कर पाना चता का वषय है।

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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 159
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वधा यका के प्रभावी कामकाज क चुनौ तयाँ — एक लघु समूह प रयोजना
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आइए पता लगाएँ

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a एक लघु समूह प रयोजना के रूप म काय क जए। अपने राज्य या संघ शा सत प्रदे श म वधा यका क

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प्र.1

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कायप्रणाली से संबं धत आँकड़े संक लत क जए।

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व ध — क्या-क्या एकत्र करना है। काम बाँट ली जए, हर जोड़ी एक स्तंभ ले, और अंत म सब पत्रक एक साथ र खए।

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क्या पता करना है कहाँ दे ख यह क्य महत्वपूण है

संर चना: एकसदनीय या ि सदनीय; िवधान सभा आपके रा ज्य िवधानमंडल की बताता है िक राज्य के कानून िकतने लोग
(और िवधान पिरषद, यिद हो) की सदस्य संख्या आिधकािरक वेबसाइट बनाते है ं

िपछले पाँच वष ं में पत्येक वष के स त्र और बैठकें िवधान सभा के ‘स त्र ’ या ‘ब ुले िटन’ पष्ृ ठ; यही वह माप है जो आपने पष्ृ ठ 158 पर संस द
त्
प येक स त्र के अंत की समाचार िरपोट ं के िलए दे खा — इसिलए तुल ना संभव होगी

पित वष पस्तुत और पािरत िवधे यक िवधान सभा की वेबसाइट ; राज्य राजपत्र िदखाता है िक कानून िनम ण का िकतना काय
की अिधसूचनाएँ वास्तव में हुआ

स्थगन या व्यवधान में नष्ट हुए घंटे, यिद उपलब्ध ; ध् क्ष का स त्र ांत
समाचार िरपोट ं अ य यह ‘उत्पादकता’ का राज्य-स्तरीय रूप है
हों वक्तव्य

आपकी िवधान सभा की सिमितयाँ और उनकी िवधान सभा की वेबसाइट , ‘सिमितयाँ’ ं और िवस्ततृ उत्तरदाियत्व का काय
जहाँ शात
कोई पकािशत िरपोट खंड होता है

अ प रयोजना म क्या होना चा हए: प्रत्येक आँकड़े के साथ उसका ोत और त थ; कम से कम एक आलेख (प्र त वष
बैठक क संख्या अच्छा वषय है); पृष्ठ 158 के संसद-संबंधी आँकड़ से तुलना; और एक छोटा अनुच्छेद जसम आपका नष्कष हो
तथा यह भी हो क आप क्या पता नह कर सके। ईमानदारी से बताई गई कमी अच्छे शोध का अंग है — उसे अनुमान से मत भ रए।

सुझाव: काम बाँटने से पहले सारणी का एक ही प्रारूप तय कर ली जए, अन्यथा अं तम दन एक-दूसरे के नोट
बदलने म ही नकल जाएगा। और हर उस पृष्ठ का पता (वेब लक) ल खए जसका आपने उपयोग कया, ता क
पढ़ने वाला उसे जाँच सके।

प्र.2 कसी वधायक से समय लेकर भट क जए और राज्य वधानमंडल से संबं धत चुनौ तय के बारे म जानकारी
एक त्रत क जए।

भट कैसे तय कर। वद्यालय क ओर से, अपने शक्षक के हस्ताक्षर स हत एक सं क्षप्त पत्र या ई-मेल ल खए जसम आपक कक्षा,
उद्दे श्य (राज्य वधानमंडल क कायप्रणाली पर सामा जक व ान क प रयोजना), आने वाले वद्या थय क संख्या और तीन
संभा वत त थयाँ ह । इसे वधायक के क्षेत्रीय कायालय म भे जए और कुछ दन बाद वनम्रता से दूरभाष पर स्मरण कराइए। य द
वधायक उपलब्ध न ह तो कायालय के अ धकारी, कसी पूव वधायक या वधानसभा क रपो टग करने वाले पत्रकार से भट भी
उतनी ही उपयोगी है — अपनी रपोट म यह बात स्पष्ट लख द जए।
पूछने योग्य प्रश्न (प्रश्न संस्था के वषय म र खए, दलगत राजनी त पर नह — इसी से भट उपयोगी और नष्पक्ष बनती है)—

पछले वष वधान सभा कतने दन बैठ , और क्या यह समय पयाप्त था?
कसी वधेयक पर चचा से पहले सदस्य को उसे पढ़ने के लए कतना समय मलता है?
आप कन स म तय के सदस्य ह, और सत्र के बीच स म त वास्तव म क्या करती है?
आपके ारा रखे गए प्रश्न का क्या होता है — उत्तर आने म कतना समय लगता है और वह कतना वस्तृत होता है?
आपके अनुभव म स्थगन के सबसे सामान्य कारण क्या ह?
लोग अपनी समस्याएँ आप तक कैसे पहुँचाते ह, और उनम से कनके लए कानून बदलना पड़ता है और कनके लए केवल
प्रशासन?

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वधान सभा क कायप्रणाली म आप क्या बदलना चाहगी/चाहगे?

नमूना उत्तर ( जसे आप अपने अनुसार बदल सकते ह): “हम श नवार प्रातः अपने वधायक से उनके क्षेत्रीय कायालय म मले।
उन्ह ने बताया क पछले वष वधान सभा 31 दन बैठ और उनके वचार म यह बहुत कम है : वधेयक प्रायः दो-तीन दन क
सूचना पर सूचीबद्ध हो जाते ह, जससे उन्ह ठ क से पढ़ने या क्षेत्र के लोग से परामश करने का समय नह मलता। उन्ह ने कहा क
स म त का काय उनके काम का वह भाग है जो जनता को कभी दखाई नह दे ता और जसम सबसे अ धक काम होता है, क्य क
वहाँ अ धका रय को वस्तृत प्रश्न के ल खत उत्तर दे ने पड़ते ह। उनक मुख्य शकायत स्थगन के कारण प्रश्नकाल के नष्ट होने क थी
— पेयजल योजना पर उनका रखा प्रश्न उत्तर मलने से पहले दो बार समाप्त हो गया। बदलाव के वषय म उन्ह ने कहा : वष म
बैठक के न्यूनतम दन न श्चत ह , और हर वधेयक कम से कम दो सप्ताह पहले प रचा लत हो।”

स्वयं जाँ चए: अपने नोट उसी दन लख डा लए, धन्यवाद-पत्र भे जए, और — यह महत्वपूण है — जो भी आँकड़ा
आपको बताया गया (बैठक के दन, वधेयक क संख्या) उसे रपोट म डालने से पहले वधान सभा क वेबसाइट से
मलाइए। भट से दृ ष्टकोण मलता है; अ भलेख से आँकड़े।

इसे अनदे खा न कर — पृष्ठ 160
लोकसभा म अटल बहारी वाजपेयी

इसे अनदे खा न कर

प्र.1 आपके वचार से यह कथन लोकतंत्र म संसद और नेताओं क भू मका के बारे म क्या संदेश दे ता है? जब
राजनै तक श क्त बदलती है तब भी लोकतां त्रक मूल्य क रक्षा करना क्य आवश्यक है?

पं क्तयाँ ह— “सरकार आएँगी, जाएँगी। पा टयाँ बनगी- बगड़गी। मगर यह दे श रहना चा हए, इस दे श का लोकतंत्र अमर रहना
चा हए।”
संसद और नेताओं के बारे म संदेश। यह कथन दो भन्न को टय के बीच रेखा ख चता है—

अ ायी ायी

कोई िवशेष सरकार, कोई िवशेष दल, कोई िवशेष नेता रा , संिवधान और संस्थाएँ — संस द , राज्य िवधानसभाएँ, न्यायपािल का

चुनाव में िमले बहुम त के कारण पद पर, और के वल अगले चुनाव तक कोई भी जीते , ये बनी रहती है ं

अथात नेता न्यासी ह, स्वामी नह । संसद उस दल क संप त्त नह है जसके पास उसम बहुमत है; वह उन लोग क है जन्ह ने उसे
चुना, और बहुमत उसे केवल एक कायकाल के लए उधार लेता है। कसी नेता क असली उपल ब्ध इससे मापी जाती है क संस्थाएँ
उसे जैसी मली थ , उससे अ धक सुदृढ़ छू ट या नह ।
सत्ता बदलने पर भी लोकतां त्रक मूल्य क रक्षा क्य आवश्यक है। तीन कारण, और तीन को आप इसी अध्याय पर परख
सकते ह—

1. नयम तभी काम के ह जब वे हार के समय भी टक। जो बहुमत प्रश्नकाल को कमजोर करता है, स म तय क अनदे खी
करता है, या बना चचा वधेयक पा रत कराता है, वह ऐसे औजार गढ़ रहा है जो अगला बहुमत उसी के वरुद्ध प्रयोग करेगा।
सत्ता म संयम दूरदश स्वाथ भी है।

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2. नरंतरता ही दे श को चलने योग्य बनाती है। कानून, बजट, न्यायालय और स वल सेवा सरकार बदलने पर भी चलते रहते ह।
य द हर नई सरकार खेल के नयम ही बदल सके तो न कोई नाग रक योजना बना सकेगा, न कसी संस्था पर भरोसा कया जा
सकेगा।
3. अन्यथा अ धकार इस पर नभर हो जाएँगे क जीता कौन। मौ लक अ धकार इसी लए मूल्यवान ह क वे तत्कालीन बहुमत
क स ावना पर नभर नह करते — और इसी लए न्यायपा लका, सं वधान क संरक्षक होने के नाते, संसद ारा पा रत कानून
को भी सं वधान क कसौट पर परख सकती है।

इसे सगोल के साथ प ढ़ए। अध्याय बताता है क लोकसभा म सभाप त क कुस के पास रखा राजदं ड चोल काल
म नए शासक को यह स्मरण कराने के लए स पा जाता था क सत्ता का संचालन सदै व धम और न्याय के
मागदशन म होना चा हए, और उसके शीष पर न्याय का प्रतीक नंद है। वाजपेयी क पं क्तयाँ आधु नक शब्द म
यही कहती ह — सत्ता एक धरोहर है और वह अपने से ऊपर कसी वस्तु के प्र त उत्तरदायी है। यह वचार भारतीय
भी है और लोकतां त्रक भी।

प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 161–162
अध्याय के अंत का अभ्यास

प्रश्न और क्रयाकलाप

प्र.1 पता लगाइए क आपके राज्य से संसद के प्रत्येक सदन म कतने प्र त न ध ह।

इसे कैसे नकाल। प्रत्येक राज्य दोन सदन म सदस्य भेजता है, और दोन ही स्थ तय म संख्या राज्य क जनसंख्या पर नभर
करती है — यही नयम अध्याय बताता है। लोकसभा के सांसद प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते ह, राज्य के प्रत्येक संसद य नवाचन क्षेत्र से
एक; राज्यसभा के सांसद नवाचक मंडल ारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते ह।
कहाँ जाँच: sansad.in (लोकसभा और राज्यसभा क वेबसाइट) पर राज्यवार सदस्य क सूची है, और नवाचन आयोग क
वेबसाइट पर प्रत्येक राज्य के संसद य नवाचन क्षेत्र दए गए ह। संख्या सदै व वह से ली जए, स्मृ त से नह ।
नमूना उत्तर — कुछ राज्य, जनसे यह दखे क जनसंख्या संख्या को कैसे तय करती है—

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राज्य लोकसभा म सीट राज्यसभा म सीट

उत्तर प्रदे श 80 31

महाराष्ट्र 48 19

प श्चम बंगाल 42 16

बहार 40 16

त मलनाडु 39 18

मध्य प्रदे श 29 11

कनाटक 28 12

गुजरात 26 11

राजस्थान 25 10

केरल 20 9

अपने राज्य के लए वाक्य इस रूप म ल खए : “मेरा राज्य … है। यह लोकसभा म … सदस्य और राज्यसभा म … सदस्य भेजता है।
मेरा संसद य नवाचन क्षेत्र … है और मेरे सांसद … ह।”

क्या आप जानते ह? सं वधान लोकसभा के लए अ धकतम 550 सदस्य क व्यवस्था करता है। चूँ क सीट
जनसंख्या के आधार पर बँटती ह, इस लए उत्तर प्रदे श जैसा बड़ा राज्य कसी छोटे राज्य से कई गुना अ धक सांसद
भेजता है — ‘जनता का सदन’ का अथ यही है। राज्यसभा म भी आवंटन जनसंख्या से जुड़ा है, कतु कह कम
तीव्रता से, इस लए वहाँ छोटे राज्य का सापेक्ष प्र त न धत्व बेहतर है — यह संघीय व्यवस्था क सोची-समझी रचना
है।

प्र.2 वे कौन-से तत्व ह जो भारतीय संसद को ‘जनता क आवाज’ बनाते ह? यह कैसे सु न त करती है क व भन्न
वचार को सुना जाए?

संसद ‘जनता क आवाज’ इस लए है क उसका प्रत्येक सदस्य जनता क पसंद से वहाँ पहुँचा है, और इस लए भी क वह
सरकार को उत्तर दे ने के लए बाध्य कर सकती है। चार बात इसे सद्ध करती ह—

1. सावभौ मक वयस्क मता धकार। प्रत्येक वयस्क नाग रक मतदान करता है, चाहे उसक सामा जक या आ थक पृष्ठभू म, लग,
जा त या धम कुछ भी हो। इस लए लोकसभा पूरे जन-समुदाय ारा चुनी जाती है, उसके कसी वग ारा नह ।
2. नवाचन क्षेत्र के अनुसार प्रत्यक्ष चुनाव। प्रत्येक सांसद उन लोग के प्र त उत्तरदायी है जो अगले चुनाव म उसे हटा सकते ह।
3. सरकार नवा चत सदन से बनती है और उसी के ारा हटाई जा सकती है। मं त्रप रषद सामू हक रूप से लोकसभा के प्र त
उत्तरदायी है, इस लए “सरकार को जनता क सहम त से काय करते हुए दे खा जा सकता है।”
4. धन पर संसद का नयंत्रण। जस व्यय को जनता के प्र त न धय ने स्वीकृ त न द हो, वह हो ही नह सकता।

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व भन्न वचार कैसे सुने जाते ह। यह संयोग से नह होता — इसके लए न श्चत व्यवस्थाएँ ह।
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व्यव ा यह कसका स्वर आने दे ती है

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gl है, हर िवषय पर दू सरी दृ िष्ट डालती है
दो सदन। राज्यसभा, जो िभन्न रीित से चुनी जाती है और राज्यों का पितिनिधत्व रूप क्षेत्र ीय और राज्यों का मत

aकरती
संघ वाद की भावना के अन ु

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पीठासीन अिधकारी। अध्यक्ष सदस्यों को बोलने की अनुम ित दे ते है,ं अनुशासन वे सद स्य जो बहुम त में नही ं है ं — िनयम इसीिल ए है ं िक बहुम त

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बनाए रखते है ं और िनयमों का पालन सुिनिश्चत करते है ं सबको द बा न सके

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खंड-दर -खंड चच , िजसमें संशोधनों पर अलग-अलग मतदान होता है वह हर

भले ही शेष
व्यिक्त िजसे िवधे यक के िकसी एक भाग पर आपित्त है,
स्वीकाय हो

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सिमितयाँ, िजनमें िविभन्न राजनीितक दलों के सांस द हो सकते है ं क्ष के सद स्य, तथा साक्ष्य के रूप में एक त्र िवशेषज्ञ और
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िवप

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जन मत

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पश्नकाल , जो अपने क्षेत्र की िशकायत सीधे संबंिधत

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कोई भी सांस द

मंत्र ी के सामने रख सकता है

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अनेक भाषाओं में अनुवाद — पहले 12 भाषाएँ, और हाल ही में छह और (बोडो, स्य और नागिरक जो िहंद ी या अंग ेजी में काम नही ं करते

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वे सद

मैिथली, मिणपुर ी, उदू , संस्कृ त और डोगरी) — यह समावेिशता का व्यावहािरक रूप है

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चचा क शैली भी मायने रखती है: अध्याय म संसद म क वता और हास्य के उदाहरण — कद्र य बजट के साथ
उद्धत तरुक्कुरल का ोक और 2011 का काव्यात्मक आदान-प्रदान — केवल सजावट नह ह। वे दखाते ह क

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तीखी असहम त भी ऐसे रूप म रखी जा सकती है जसका दूसरा पक्ष उत्तर दे सके। जो सदन व भन्न वचार को
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केवल समेटे रहता है और जो उन्ह वास्तव म सुनता है — अंतर यही है।

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प्र.3 आपके वचार से सं वधान ने कायपा लका को वधा यका के प्र त उत्तरदायी क्य बनाया?

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क्य क कायपा लका ही वह अंग है जसके पास लोग के दै नक जीवन को प्रभा वत करने क वास्त वक श क्त है — और
लोकतंत्र म ऐसी श क्त कसी के प्र त अनुत्तरदायी नह छोड़ी जा सकती। वधा यका ही वह नकाय है जसे जनता स्वयं चुनती

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है, इस लए कायपा लका को वधा यका के प्र त उत्तरदायी बनाना एक कदम क दूरी पर जनता के प्र त उत्तरदायी बनाना ही है।

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य द ऐसा न होता तो क्या होता, यह दे खए—

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चूँ क कायपा लका वधा यका के प्र त उत्तरदायी है… …इस लए यह रुकता है

मंित्रयों को पश्नकाल में और सिमितयों के समक्ष अपने काय ं तथा िनणयों का औिचत्य ऐसी सरकार जो िकसी को कु छ बताए िबना काय

िसद्ध करना पड़ता है करती रहे

मंित्रपिरषद सामूिहक रूप से लोकसभा के पित उ त्त रदायी है और उसका समथन खोते श्
िनव िचत सद न का िव वास खो च ुकी सरकार का पद

ही िगर जाती है पर बने रहना

संस द सभी सरकारी व्यय को स्वीकृ ित दे ती है जनता के पितिनिधयों की सहमित के िबना सावजिनक

धन का व्यय

कायपािलका के वल उन्ही ं कानूनों को लागू कर सकती है जो संस द ने पािरत िकए हों आदे शों का शासन — कान ून के स्थान पर के वल
आदे श

गहरा कारण — श क्तय का पृथक्करण। सं वधान श क्त का बँटवारा जानबूझकर ऐसा करता है क कोई भी
अंग अत्य धक श क्तशाली न हो जाए। वधा यका कानून बनाती है; कायपा लका उसे लागू करती है;
न्यायपा लका जाँचती है क दोन सं वधान के भीतर रह। य द कायपा लका कसी के प्र त उत्तरदायी न होती तो वह
उन्ह कानून को लागू करती जनक वह स्वयं अवहेलना भी कर सकती, और जनता क सेवा छोड़ चुक सरकार को
शां तपूवक बदलने का कोई माग न होता। वधा यका के प्र त उत्तरदा यत्व ही श क्त को जवाबदे ह श क्त बनाता है।

क्या आप जानते ह? यह उत्तरदा यत्व केवल व धक नह , नै तक भी है। वष 1956 म रेल मंत्री लाल बहादुर
शास्त्री ने एक रेल दुघटना के बाद त्यागपत्र दे दया, यद्य प उन्ह दोषी नह ठहराया गया था, क्य क उनका मानना था
क मंत्री को अपने मंत्रालय म होने वाली कसी भी घटना का नै तक उत्तरदा यत्व लेना चा हए। नेहरू ने पहले इसे
अस्वीकार कया; शास्त्री ने आग्रह कया और अंततः त्यागपत्र स्वीकार कर लया गया।

प्र.4 आपके अनुसार कद्र स्तर पर सदनीय वधा यका क्य चुनी गई?

क्य क भारत जैसे वशाल और व वध दे श के लए एक सदन, चाहे वह कतना ही लोकतां त्रक ढं ग से चुना गया हो,
पयाप्त नह माना गया। अध्याय बताता है क सं वधान नमाण के समय ठ क इसी प्रश्न पर व्यापक वचार- वमश हुआ, और उत्तर
के दो कारण दे ता है।

1. क्षमता। “यह प्रतीत हुआ क केवल एक प्रत्यक्ष रूप से चुना गया सदन स्वतंत्र भारत के समक्ष आने वाली चुनौ तय का
सामना करने के लए पयाप्त नह होगा।” दूसरा सदन हर कानून को दूसरी, कम जल्दबाजी वाली दृ ष्ट दे ता है।
2. संघवाद। “‘संघवाद’ क भावना के अनुरूप, राज्य क प रषद अथात राज्यसभा क आवश्यकता प्रतीत हुई।” भारत म सत्ता
कद्र, राज्य और स्थानीय सरकार म बँट है; इस लए राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को अपना सदन चा हए था।

और रचना उ े श्य के अनुरूप क गई। राज्यसभा क संरचना और उसके नवाचन क प्र क्रया जानबूझकर अलग रखी गई —
मतदाताओं ारा प्रत्यक्ष चुनाव के स्थान पर नवाचक मंडल ारा अप्रत्यक्ष चुनाव। य द दोन सदन एक ही री त से चुने जाते तो दूसरा
सदन पहले क पुनरावृ त्त मात्र होता, और उसे रखने का कोई अथ न रहता।

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लोकसभा राज्यसभा

प्र त न धत्व सीधे जनता का रा ज्यों का — राज्यों की पिरषद

नवाचन सभी वयस्क नागिरकों ारा, पत्यक्ष िनव चक मंड ल ारा , अपत्यक्ष

वशेष धन िवधे यक के वल यही ं आरंभ होते है;ं सरकार इसी के पित प ुनरी क्षण और जाँच; रा ीय कान ून िनम ण में संघ ीय
श क्त उत्तरदायी है स्वर

सामान्य स ांत: सदनीय वधा यका कानून बनाने क ग त जानबूझकर धीमी करती है। कानून बनाने म ग त
सव च्च मूल्य नह है — जल्दबाजी म पा रत बुरा कानून हटाने म वष लग सकते ह और तब तक वह सब पर लागू
रहता है। दूसरा सदन एक अंत न हत वराम है, और वह स्थान भी है जहाँ राज्य कसी राष्ट्रीय कानून के अं तम होने से
पहले कह सकते ह क “हम पर इसका प्रभाव भन्न पड़ेगा।”

प्र.5 हाल ही म संसद म पा रत कसी वधेयक क पूरी प्र क्रया को समझने का प्रयास क जए। जा नए क वह वधेयक
सबसे पहले कस सदन म प्रस्तुत कया गया था। क्या उस पर कोई बड़ी चचा या वरोध हुआ था? इस वधेयक को
कानून बनने म कतना समय लगा? इसके लए आप समाचार-पत्र क पुरानी खबर, सरकारी वेबसाइट और
लोकसभा क चचाएँ दे ख सकते ह। आवश्यकता हो तो अपने शक्षक से सहायता ली जए।

व ध। चत्र 6.8 को अपनी जाँच-सूची बनाइए और प्रत्येक चरण के सामने त थ भ रए। एक ही वधेयक ली जए, और ऐसा ली जए
जो अ ध नयम बन चुका हो, अन्यथा अं तम पं क्तयाँ खाली रह जाएँगी।

चत्र 6.8 का चरण क्या लखना है कहाँ मलेगा

कसी भी सदन म प्रस्तुतीकरण ठीक ितिथ, और कौन-सा sansad.in के ‘िबल टैक ’ पष्ृ ठ; पी.आर .एस . ले िजस्ले िटव िरसच
सदन

वधेयक का वाचन पस्तुत होने और पहली चच ल ोकसभा रा/ ज्यसभा की चच ओं का िववरण
की ितिथ

स्थायी स म त को प्रेषण पेिषत हआ
ु या नही ं, और संस द की वेबसाइट पर पकािशत सिमित िरपोट (िटप्पणी स्मरण रिखए —
सिमित ने कब िरपोट दी सभी िवधे यक सिमितयों को पेिषत नही ं िकए जाते)

वचार, खंड-दर-खंड चचा, असहमित के मुख्य िबंद ु; चच ओं का िववरण ; अगले िद न के समाचार -पत्र
संशोधन पर मतदान कौन-से खंड बदले गए

मतदान; दूसरे सदन म दोहराव दोनों ितिथयाँ संस द के ब ुले िटन

राष्ट्रप त क स्वीकृ त, राजपत्र स्वीकृ ित की ितिथ और भारत का राजप त्र (egazette.gov.in)
अ धसूचना अिधिनयम संख्या

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फर तीन प्रश्न का उत्तर द जए: वधेयक कस सदन म आरंभ हुआ; असहम त कस बात पर थी (प्रायः धन पर, या यह क
कानून कन पर लागू होगा, या यह क काम संघ करे या राज्य); और कुल कतना समय लगा, जो प्रस्तुतीकरण क त थ को स्वीकृ त
क त थ से घटाकर मल जाएगा।
नमूना उत्तर — इसी अध्याय के वधेयक का उपयोग करते हुए: “मने बच्च का नःशुल्क और अ नवाय शक्षा अ धकार
वधेयक लया। यह राज्यसभा म प्रस्तुत हुआ। एक स म त ने इसका गहन अध्ययन कर संशोधन सुझाए। मुख्य असहम त
वत्तपोषण को लेकर थी — लाख बच्च के लए नए वद्यालय, आधारभूत ढाँचा और शक्षक अत्य धक महँगे थे — और इसी से
वष क दे री हुई; 2008 तक सांसद ने नश्चय कर लया क अब समय आ गया है। 2009 के चुनाव के बाद नई सरकार ने वषय
आगे बढ़ाया और अगस्त 2009 म यह लोकसभा म पा रत होकर, राष्ट्रप त क स्वीकृ त पाकर अ ध नयम बन गया। 2002 के
अनुच्छेद 21(क) से गन तो लगभग सात वष लगे; नी त- नदे शक तत्व के वचार से गन तो कह अ धक।”

सुझाव: सारी त थयाँ एक ही रेखा पर समय-क्रम म ल खए, और अंतराल को अनुपात म दखाइए। वधेयक के
जीवन म लंबे खाली अंतराल ही सबसे अ धक बताते ह — वे दखाते ह क असली असहम त कहाँ थी।

प्र.6 संसद ारा हाल ही म पा रत कसी कानून का चयन क जए। कक्षा को अलग-अलग समूह म बाँ टए— कुछ
व ाथ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद बन, कुछ मंत्री बन जो प्रश्न के उत्तर द और कोई राष्ट्रप त क
भू मका नभाए। सभी मलकर एक लघु ना टका तैयार कर जसम दशाया जाए क एक वधेयक संसद म कैसे
प्रस्तुत होता है, कैसे उस पर चचा होती है, वह पा रत होता है और अंत म राष्ट्रप त क स्वीकृ त मलने पर कानून
बन जाता है। एक ‘मॉडल संसद’ का मंचन क जए।

तैयारी कैसे कर। ये भू मकाएँ बाँ टए और फर चत्र 6.8 के आठ चरण क्रम से नभाइए — वही ढाँचा आपक पटकथा है।

भू मका कतने क्या करना है

अध्यक्ष (लोकसभा) और 2 सद न की कायवाही चल ाएँ , सद स्यों को बोल ने की अन ुमित दे ं, अन ुशासन बनाए रखें, िनयमों का
सभाप त (राज्यसभा) श्
पाल न सुिनि चत करे ं। सभापित की भ ूिमका उ परा पित की है

वधेयक के प्रभारी मंत्री 1 िवधे यक प स्त ुत करे ं, उ सकी आवश्यकता बताएँ, चच का उ त्त र दे ं और पश्नकाल में पश्नों के
उ त्त र दे ं

वधेयक के समथक सांसद 4–6 प क्ष में तक दे ं; उ से बेहतर बनाने के िल ए संशोधन पस्तािवत करे ं

वरोध या संशोधन चाहने वाले 4–6 -
खंड द र खंड आपि - त्त याँ उ ठाएँ; संशोधन रखें; ऐसे पश्न पूछें िजनका मंत्र ी को उ त्त र दे ना पड़े
सांसद

ायी स म त 4–5 अल ग बैठ कर ‘मंत्र ाल य के अिधकािरयों’ से पश्न पूछें और अन ुशंस ाओं सिहत एक संिक्षप्त
िरपोट पढ़ कर सुनाएँ

राष्ट्रप त 1 अंत में स्वीकृ ित दे ं — तभी, जब द ोनों सद न िवधे यक पािरत कर च ुके हों, उ ससे पहले नही ं

पत्रकार द घा 2 बाद में क क्षा को चच की िरपोट दे ं, जैसे वास्तिवक ल ोकतंत्र में मीिडया दे ता है

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ना टका का क्रम (लगभग 20 मनट) : एक सदन म प्रस्तुतीकरण → वाचन → स्थायी स म त को प्रेषण (और उसक रपोट) →
वचार तथा खंड-दर-खंड चचा, जसम कम से कम दो संशोधन पर वास्तव म मतदान हो → वधेयक पर मतदान → दूसरे सदन म
वही चचा संक्षेप म → राष्ट्रप त क स्वीकृ त → अध्यक्ष ारा राजपत्र अ धसूचना क घोषणा।

ना टका को केवल शोर से अ क्या बनाएगा:

खंड-दर-खंड मतदान कराइए, केवल अंत म एक बार नह — वधेयक का रूप वह बदलता है।
वरोध करने वाले पक्ष को वास्त वक तक द जए, जो वधेयक से ही नकले ह (लागत, कन पर लागू होगा,
लागू कौन करेगा)। ऐसी भू मका-ना टका जसम एक पक्ष जानबूझकर हास्यास्पद हो, कुछ नह सखाती।
यह नयम कड़ाई से लागू क जए क हर सदस्य अध्यक्ष को संबो धत करे, एक-दूसरे को नह । आपको तुरंत
समझ आ जाएगा क यह नयम क्य बना।
पत्रकार द घा अंत म यह बताए क क्या तय हुआ, यह नह क सबसे जोर से कौन बोला।

प्र.7 म हला आरक्षण वधेयक, 2023 व्यापक समथन के साथ पा रत हुआ। इतने लंबे समय तक चचा के बाद भी इस
वधेयक को पा रत होने म 25 वष से अ धक समय क्य लगा?

क्य क अंत म मला व्यापक समथन पूरी प्र क्रया के दौरान क सहम त के बराबर नह होता — और क्य क यह सं वधान
संशोधन था, जो कानून का सबसे क ठन प्रकार है। इस दे री को समझाने के सारे साधन अध्याय पहले ही दे चुका है।

1. यह सं वधान म प रवतन करता है, केवल एक साधारण कानून म नह । लोकसभा और राज्य क वधान सभाओं म सीट
आर क्षत करने का अथ है सं वधान म ही संशोधन। साधारण वधेयक के लए साधारण बहुमत चा हए; सं वधान संशोधन के
लए कह बड़ा और अ धक व्यापक बहुमत चा हए। इस लए कोई प्रस्ताव बहुमत का समथन पाकर भी पा रत न हो पाना संभव
है।
2. लोकसभा भंग होने पर वधेयक समाप्त हो जाता है। यह प्रस्ताव पहली बार 1990 के दशक के मध्य म संसद के समक्ष
आया और बाद क लोकसभाओं म फर- फर प्रस्तुत हुआ। बीच म आया हर आम चुनाव संसद य यात्रा को आरंभ से —
प्रस्तुतीकरण, वाचन, स म त, चचा — दोहराने पर बाध्य करता रहा।
3. असहम त केवल उ े श्य पर नह , रचना पर भी वास्त वक थी। चचा इन प्रश्न पर होती रही क आरक्षण के भीतर कन्ह
वशेष वग के लए अलग व्यवस्था हो या नह , आर क्षत सीट कैसे चुनी और बदली जाएँ, और यह व्यवस्था कतने समय तक
चले। ये ठ क वही खंड-दर-खंड प्रश्न ह जन्ह सुलझाने के लए कानून- नमाण क प्र क्रया बनी है, और उनम समय लगता है।
4. स म तय ने इसे एक से अ धक बार परखा। जैसे आर.ट .ई. म हुआ, स म त को भेजने से महीने लगते ह कतु पाठ सुधरता
है; इसी अध्याय क आर.ट .ई. कथा वही प्र तरूप दखाती है — जस वचार को सब सद्धांत रूप म मानते थे, उसे भी अनुच्छेद
21(क) से अ ध नयम तक सात वष लगे।
5. कायान्वयन अपने प्रश्न खड़े करता है। सीट का कोई भी आरक्षण नवाचन क्षेत्र के प रसीमन के साथ जोड़कर तय करना
पड़ता है, जो स्वयं एक बड़ा काय है। संसद को यह संतोष चा हए था क कानून व्यवहार म लागू भी हो सकेगा।

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प्रश्न वास्तव म जो सखाना चाहता है: संसद य लोकतंत्र म दे री सदै व असफलता नह होती और ग त सदै व
सफलता नह । जन वशेषताओं ने इस वधेयक को धीमा कया — दो सदन, स म त क जाँच, खंeडm
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gl दोहरा है : सुरक्षा-
-दर-खंड चचा,
. coक ऊँची शत — वही वशेषताएँ बुरे कानून को रोकती ह। ईमानदार नष्कष
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emअपनी रचना के अनुसार काम कर रही थ , और इतनी लंबी दे री क क मत उन लोग को चुकानी पड़ी
सं वधान बदलने

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l े लए कानून बना था। अध्याय भी यही कहता है : जब “अनेक वधेयक पर चचा करने और पा रत होने म
agजनक
व्यवस्थाएँ

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अत्य धक समय लग जाता है, तो यह एक चताजनक वषय बन जाता है।”

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कभी-कभी संसद बा धत हो जाती है और जतने दन तक इसे काय करना चा हए, उतना काय नह कर पाती।

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आपको क्या लगता है क इसका कानून क गुणवत्ता और लोग के अपने प्र त न धय के प्र त व ास पर क्या

em.
प्रभाव पड़ता है?

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a 1. कानून क गुणवत्ता पर। चत्र 6.8 के हर चरण के लए सदन म समय चा हए। समय घटते ही चरण सकुड़ जाते ह—
दो अलग-अलग प्रकार क हा न होती है — एक कानून को, दूसरी नाग रक और उनके प्र त न धय के संबंध को।

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व्यवधान क्या छ न लेता है कानून पर उसका प्रभाव

खंड-दर-खंड चच के घंटे जो
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त्रag ध्
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ुिटयाँ ,
यान से पढ़ ने पर पकड़ ी जाती ं वे अिधिनयम में रह जाती है ं और बाद में संशोधन या न्यायाल य
ध्

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के मा यम से ठीक करनी पड़ ती है ं

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स्ततृ जाँच तैयार तो होती है, पर उ सका उ पयोग नही ं होता
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सिमित की अनुशंस ाओं पर िवचार िवधे यक की सबसे िव

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का समय

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श्नकाल मंि त्र यों को िनणयों का औिचत्य िस द्ध नही ं करना पड़ता, इसिल ए गल ितयाँ दे र से पकड़ी जाती है ं और मह ँगी

a पड़ ती है ं

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बजट और व्यय की जाँच का समय स्वीकृ त हो जाती है ं िक वे खच कै से होंग ी

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बड़ ी रािशयाँ इस चच के िबना

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कु ल बैठकों के िदन िवधे यक वष ं पतीक्ष ा करते है ं और सम स्याएँ अनसुल झी रहती है ं — या स त्र के अंत में कान ून जल्द बाजी में
पािरत होते है ं

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अध्याय के आँकड़े इसे ठोस बनाते ह : बैठक पहली लोकसभा क 677 से घटकर तेरहव म 356 रह गईं, और राज्यसभा क

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उत्पादकता लगभग 78% से घटकर लगभग 65%, जसम एक सत्र केवल 6.80% पर और सबसे बुरा वष 2018 35.75% पर —

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gजब उन्ह बहस के स्थान पर स्थगन दखता है
2..cव ास पर। लोग संसद इस लए दे खते ह क उनक अपनी चताओं पर बहस हो।
और कारण स्पष्ट रूप से “ नरंतर व्यवधान” बताया गया।

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तो तीन बात होती ह : उन्ह लगता है क उनका वषय उठाया ही नह गया; उन्ह संदेह होने लगता है क चचा से कुछ बदलता भी है या
नह ; और वे मानने लगते ह क उनके प्र त न धय क रु च काम से अ धक होड़ म है। अध्याय इस चता के साथ यह भी कहता है क
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लोकसभा के प्र त न धय का एक बड़ा भाग आपरा धक मामल का सामना कर रहा है और कई बार क्रोध या पक्षपात के कारण

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mअसंतोष को हास्य के साथ व्यक्त करते ह, जो सभी स्वस्थ लोकतंत्र म सामान्य है।
जनता से जुड़े महत्वपूण वषय पर पयाप्त ध्यान नह दया जाता। चत्र 6.13 जैसे व्यंग्य चत्र — “मानसून सत्र— गजन, बजली,
आँधी, दरार आ द क उम्मीद क जए” — e
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इसी

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दोन पक्ष के प्र त न्याय क जए। व्यवधान करने वाले सदस्य प्रायः कहते ह क कसी अत्यावश्यक वषय को
उठाने का उनके पास कोई और माग नह था, और ऐसी व्यवस्था म जहाँ कायसूची पर सरकार का नयंत्रण रहता है,
इस तक को सुना जाना चा हए। कतु क मत कसी दल क नह , संस्था क चुकती है — और वह उन नाग रक को
भुगतनी पड़ती है जनके कानून क जाँच नह हो पाती। इसी लए अध्याय का उपाय कसी पर दोष मढ़ना नह ,
ब ल्क संस्थागत और नाग रक है : अ धक जागरूक और स क्रय नाग रक, और प्र त न धय से रचनात्मक जुड़ाव।

प्र.9 क्या आप व ा थय के बीच हत समूह बनाकर कसी नी त से संबं धत प्रश्न क एक सूची तैयार कर सकते ह,
जन्ह आप अपने सांसद या वधायक से पूछना चाहगे? यही प्रश्न वधायक के ान पर सांसद से पूछ जाएँ तो
उनम क्या अंतर होगा? और य द सांसद क जगह वधायक से पूछगे तो प्रश्न कैसे भन्न ह गे?

इस पूरे क्रयाकलाप क कुंजी तीन सू चयाँ ह। सांसद संघ सूची और समवत सूची पर कानून बनाते ह; वधायक राज्य सूची
और समवत सूची पर। इस लए सही प्रश्न इस बात पर नभर करता है क काय करने क श क्त कसके पास है — सही व्य क्त से
गलत प्रश्न पूछना सबसे आम भूल है।
इसे कैसे कर। चार-पाँच हत समूह बनाइए — जैसे वद्यालयी शक्षा समूह, सावज नक प रवहन समूह, स्वच्छ जल समूह, रोजगार
एवं कौशल समूह, पयावरण समूह। प्रत्येक समूह एक नी त चुने, पता करे क वह कस सूची म आती है, और फर अपने प्रश्न दो
स्तंभ म लखे।

नी त का क्षेत्र अपने सांसद से (संघ / समवत ) अपने वधायक से (राज्य / समवत )

व ालयी शक्षा क्या आर.टी.ई. के िलए संघ का अंश हमारे राज्य को समय पर िमल हमारे िजले में िश क्षकों के िकतने पद िर क्त है?ं
(समवत सूची) रहा है? क्या रा ीय कानून में संशोधन कर 14 वष से अिधक आयु के रा ज्य बजट में स्वीकृ त भवन हमारे िव ाल य को

बच्चों को भी सिम्मिलत िकया जाएगा? कब िमले गा ?

सावज नक इसके िलए रा ीय योजना क्या है और उसमें हमारे राज्य को िकतना सावजिनक स्वास्थ् य राज्य का िवषय है —
स्वास्थ्य आवंटन हुआ ? हमारे पाथिमक स्वास्थ् य कें द में िचिक त्सक
और पूर ी द वाएँ कब आएँग ी ?

सड़क और हमारे िजले से ग ज
ु रने वाला रा ीय राजमाग कब पूर ा होगा? क्या राज्य पिरवहन की बस हमारे गाँव तक
प रवहन आएगी ? हमारी िजल ा सड़क का रखरखाव
कौन करता है ?

पयावरण (समवत रा ीय कानून क्या अपेक्षा करता है, और क्या वह यहाँ लागू हो रहा है? हमारे क स्बे के पास की पदू षण फै ल ाने वाल ी
सूची) इकाई पर रा ज्य ने िकस िनयम के अंतग त क्या
कार वाई की ?

तो प्रश्न म अंतर क्या होगा?

स्तर। सांसद से प्रश्न राष्ट्रीय कानून, राष्ट्रीय योजना या संघ के बजट का होगा; वधायक से प्रश्न राज्य के कानून, राज्य क योजना
या कसी व शष्ट स्थानीय सु वधा का।
मंच। सांसद उसे संसद म — प्रश्नकाल म या कसी स म त म — उठाएँगी; वधायक उसे वधान सभा म।
उत्तर कौन दे गा। सांसद के प्रश्न पर संघ के मंत्री; वधायक के प्रश्न पर राज्य के मंत्री।

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अ तव्यापन वास्त वक है। समवत सूची के वषय पर दोन काय कर सकते ह — कतु य द संघ ने कानून बना दया हो तो
राज्य को उसका पालन करना अ नवाय है। अध्याय का अपना उदाहरण आर.ट .ई. है : शक्षा समवत सूची म है, फर भी
अ ध नयम संपूण भारत म लागू है।

स्वयं जाँ चए: कोई भी प्रश्न भेजने से पहले उसे एक वाक्य पर पर खए — “जो म माँग रही ँ, क्या उसे करने क
श क्त इस व्य क्त के पास है?” य द उत्तर ‘नह ’ है तो या तो प्रश्न बद लए या उसे दूसरे प्र त न ध को भे जए। हर प्रश्न
तथ्यपरक र खए और नी त के वषय म र खए, व्य क्त के वषय म नह ; ऐसे लखे प्रश्न का उत्तर वास्तव म मलता
है।

प्र.10 भारतीय लोकतंत्र म न्यायपा लका क क्या भू मका है? य द हमारे पास स्वतंत्र न्यायपा लका न हो तो क्या हो
सकता है?

न्यायपा लका सरकार का वह अंग है जो दे श के कानून क व्याख्या तथा क्रयान्वयन के लए उत्तरदायी है, जसम ववाद
का नपटारा भी स म्म लत है। वह न्यायालय क प्रणाली के माध्यम से काय करती है, और अध्याय उसे चार काय दे ता है—

1. कानून क व्याख्या — यह तय करना क कसी वास्त वक स्थ त पर लागू होने पर कानून का अथ क्या है।
2. ववाद का समाधान — नाग रक के बीच, तथा नाग रक और सरकार के बीच।
3. मौ लक अ धकार क रक्षा।
4. सं वधान के संरक्षक के रूप म काय — यह सु न श्चत करना क सरकार क सभी शाखाएँ सं वधान म न हत सद्धांत और
मानदं ड के अनुसार काय कर। वशेष रूप से, वह जाँचती है क संसद ारा पा रत कानून ने संवैधा नक ढाँचे का उल्लंघन न
कया हो, और कायपा लका ारा उन कानून को लागू करते समय सं वधान का उल्लंघन होने पर हस्तक्षेप कर सकती है।

यही अं तम काय न्यायपा लका को नयंत्रण एवं संतुलन क प्रणाली का तीसरा स्तंभ बनाता है : “ जस प्रकार संसद वधा यका और
कायपा लका के माध्यम से काय करती है, उसी प्रकार न्यायपा लका भी अपने न्यायालय के माध्यम से काय करती है।”
य द स्वतंत्र न्यायपा लका न हो तो क्या हो सकता है?

क्या समाप्त हो जाएगा प रणाम

ऐसा िनकाय जो िकसी कानून को संिवधान ल्
मौिल क अिधकारों का उ ल ंघ न करने वाल ा कान ून के वल इसिल ए िटका रहेग ा िक वह पािरत हो

की कसौटी पर परख सके गया — संिवधान उ च्चतर िविध न रहकर मात्र परामश बन जाएगा

ऐसा िनकाय जो कानून के ि यान्वयन पर अिधकारी कान ून को असमान रूप से ल ागू कर सकें गे, या अनदे खा कर सकें गे, और पीिड़त के
पश्न उठा सके पास कोई उ पाय नही ं होगा

िववादों के िलए िनष्पक्ष मंच सरकार से िववाद में उ ल झा नागिरक सरकार से ही यह कह रहा होगा िक वह अपना िनण य स्वयं
करे

बहुम त के िवरुद्ध व्यिक्त की रक्षा अिधकार तभी तक िटके ं गे जब तक वे ल ोकिपय है ं — अथ त ठीक तब समाप्त हो जाएँग े जब
उ नकी सबसे अिधक आव यकता है श्

कानून के अथ की िनिश्चतता अन ुबंध , संपित्त , िनवेश और व्यिक्तगत सुर क्षा — सब इस पर िनभर हो जाएँग े िक उ स वष स त्त ा
िकसके पास है

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका AglaSem · NCERT Solutions

‘स्वतंत्र’ शब्द ही नणायक क्य है। जस न्यायालय को सरकार पुरस्कृत या दं डत कर सकती हो, वह सुनवाई भी
करेगा और नणय भी सुनाएगा — कतु उन पर भरोसा कोई नह कर सकेगा, क्य क वह उन्ह के वरुद्ध कभी
नणय नह दे गा जनके हाथ म उसका भ वष्य है। स्वतंत्रता न्यायाधीश का वशेषा धकार नह , वह शत है जो उनके
नणय को नाग रक के लए मूल्यवान बनाती है। इसी कारण न्या यक श क्त असी मत नह , सी मत है — नणय क
उच्च न्यायालय म अपील हो सकती है, बाद क पीठ उनक पुनरीक्षा कर सकती ह, और संसद संवैधा नक सीमाओं
के भीतर कानून म संशोधन कर उत्तर दे सकती है — ता क नणायक भी नयम के अधीन रहे।

अध्याय — एक नज़र म
भारत क संसद सदनीय है — इसम राष्ट्रप त, लोकसभा (हाउस ऑफ द पीपल या नम्न सदन) और राज्यसभा
(काउं सल ऑफ स्टे ट्स या उच्च सदन) होते ह। लोकसभा के सदस्य का नवाचन सावभौ मक वयस्क मता धकार के आधार
पर प्रत्यक्ष रूप से होता है (सं वधान ारा नधा रत अ धकतम संख्या 550); राज्यसभा के सांसद नवाचक मंडल ारा
अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते ह। दोन सदन म सीट का आवंटन राज्य क जनसंख्या पर आधा रत है। 1952 से अब तक 17
लोकसभाएँ हो चुक ह; 18व लोकसभा का गठन जून 2024 म हुआ।
सं वधान ने संसद के चार प्रमुख काय नधा रत कए ह — संवैधा नक काय (राष्ट्रप त और उपराष्ट्रप त का नवाचन,
सं वधान म संशोधन, सावभौ मक वयस्क मता धकार, श क्तय का पृथक्करण, संघीय व्यवस्था तथा मौ लक अ धकार और
नी त- नदे शक तत्व को कायम रखना), कानून नमाण, कायपा लका संबंधी उत्तरदा यत्व और वत्तीय जवाबदे ही।
वधेयक कानून का प्रारूप है; अ ध नयम वह है जो वह बनता है। चत्र 6.8 क यात्रा — संसद के कसी भी सदन म
प्रस्तुतीकरण → वधेयक का वाचन → स्थायी स म त को प्रेषण → वचार एवं पा रत करने हेतु स्वीकार करना → खंड-दर-
खंड चचा और संशोधन पर मतदान → वधेयक पर मतदान → दूसरे सदन म प्र क्रया का दोहराव → राष्ट्रप त क स्वीकृ त
→ राजपत्र अ धसूचना। सभी वधेयक स म तय को प्रे षत नह कए जाते, और धन वधेयक केवल लोकसभा म ही,
राष्ट्रप त क पूव अनुशंसा से, प्रस्तुत कया जा सकता है।
कायपा लका वधा यका के भीतर है और उसी के प्र त उत्तरदायी है। संघीय कायपा लका म राष्ट्रप त, उपराष्ट्रप त और
प्रधानमंत्री क अध्यक्षता म मं त्रप रषद होते ह; मंत्री दोन सदन के सांसद म से चुने जाते ह और सामू हक रूप से लोकसभा
के प्र त उत्तरदायी होते ह। प्रश्नकाल — सामान्यतः सत्र का पहला घंटा — और संसद य स म तयाँ इसी उत्तरदा यत्व को लागू
करने के साधन ह। राष्ट्रप त औपचा रक प्रमुख ह; प्रधानमंत्री वास्त वक कायकारी प्रा धकारी ह।
न्यायपा लका तीसरा अंग और नणायक है। यह कानून क व्याख्या और क्रयान्वयन करती है, ववाद का नपटारा करती
है और सं वधान के संरक्षक के रूप म काय करती है — यह जाँचती है क संसद ारा पा रत कानून संवैधा नक ढाँचे का
उल्लंघन न कर, और य द कायपा लका कानून को लागू करते समय सं वधान का उल्लंघन करे तो हस्तक्षेप करती है। यही
श क्तय का पृथक्करण और नयंत्रण एवं संतुलन क प्रणाली है, जससे कोई भी अंग अत्य धक श क्तशाली न हो जाए।
राज्य स्तर क संरचना संघ स्तर के समान है। प्रत्येक राज्य क अपनी वधा यका और कायपा लका है — राज्यपाल
संवैधा नक प्रमुख, मुख्यमंत्री वास्त वक कायकारी प्रमुख, और वधायक राज्य सूची तथा समवत सूची के वषय पर कानून
बनाते ह। राज्य वधानमंडल एकसदनीय (केवल वधान सभा) या सदनीय ( वधान प रषद स हत) हो सकते ह — केवल
आंध्र प्रदे श, बहार, कनाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदे श सदनीय ह।
व्यव ा के सामने वास्त वक चुनौ तयाँ ह। सदस्य क अनुप स्थ त, असहयोगात्मक व्यवहार, चचाओं क घटती गुणवत्ता
और प्रश्नकाल का बा धत होना उत्पादकता घटाते ह — अथात नधा रत समय क तुलना म सदन वास्तव म कतने घंटे चला।
बैठक क संख्या पहली लोकसभा क 677 से घटकर तेरहव लोकसभा म 356 रह गई। अध्याय का समाधान कम लोकतंत्र

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नह , अ धक लोकतंत्र है — जागरूक और स क्रय नाग रक जो प्रश्न पूछ, सावज नक चचाओं म भाग ल और प्र त न धय से
रचनात्मक रूप से जुड़।

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कक्षा 8 सामा जक व ान अध्याय 6 संसद य प्रणाली— वधा यका और कायपा लका
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त्व रत पुनरावृ त्त

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शब्द अध्याय म कहाँ क्या कहती है

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सदनीय दो सदनों वाली िवधाियका (‘ि ’ = दो, ‘सदन’ = ‘भारतीय संसद क
संरचना’, पृष्ठ 142
केवल एक प्रत्यक्ष नवा चत सदन पयाप्त नह
माना गया; संघवाद क भावना के अनुरूप
कक्ष)

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राज्य क प रषद — राज्यसभा — आवश्यक

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समझी गई

सावभौ मक
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सभी वयस्क नागिरकों को सामािजक या आिथक ‘प रचय’, पृष्ठ 141 सं वधान ारा स्था पत आधारभूत सद्धांत;
वयस्क पष्ृ ठभूिम, िलंग , जाित या धम के भेद के िबना लोकसभा इसी आधार पर प्रत्यक्ष रूप से चुनी

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मता धकार मतदान का अिधकार जाती है

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बीच संlतa
sem और स्थानीय सरकार के
comकेंद, राज्यों और स्थानीय सरकारों के मध्य होता
संघीय व्यवस्था शासन की वह पणाली िजसमें सत्ता का िवभाजन इसे अनदे खा न कर, यह “राष्ट्रीय एकता

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(संघवाद) पृष्ठ 143 ुलन बनाए रखने म सहायक होती है”

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aराजदं राजा या रानी ारा समारोहों में अपनी शिक्त के हा शया टप्पणी, पृष्ठ सगोल 14 अगस्त 1947 को पं. नेहरू को

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पतीक के रूप में धारण की जाने वाली सुस िज्जत 144 स पा गया; अब लोकसभा म सभाप त क

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छड़ी कुस के पास; चोल काल क परंपरा, शीष पर

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नंद (न्याय का प्रतीक)

वधेयक agl
पस्तािवत कानून का पारूप िजसे कानून बनने से हा शया टप्पणी, पृष्ठ वधेयक अ ध नयम बनने से पहले “एक लंबी
पूव संस द ारा अनुम ोिदत िकया जाना आवश्यक 146 तथा प रश्रमपूण प्र क्रया से गुजरता है”

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.co agप्रस्तुत हुआ, अगस्त 2009 म लोकसभा म
अ ध नयम वह साधन िजसके माध्यम से कानून को लागू ‘कानून नमाण’, पृष्ठ आर.ट .ई. राज्यसभा म वधेयक के रूप म

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िकया जाता है 146

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पा रत हुआ और राष्ट्रप त क स्वीकृ त से
अ ध नयम बना

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वाचन चच शुरू होने से पहले सांस द िवधे यक पढ़ ते है ं चत्र 6.8 क टप्पणी, परंपरा टश संसद से आई, जहाँ कई सांसद
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पृष्ठ 147 नरक्षर होने के कारण क्लक वधेयक पढ़कर

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सुनाता था

खंड िवधे यक के वे भाग जो उसके िविशष्ट िववरण की चत्र 6.8 क टप्पणी, उदाहरण— आर.ट .ई. उस आयु वग को

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पृष्ठ 147 प रभा षत करता है जस पर यह लागू होता है

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व्याख्या करते है ं

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(6 से 14 वष)

m l a sचत्रe 6.9 इसे काय करते हुए दखाता है —
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स्थायी स म त सांस दों से बनी स्थायी सिमित (सांस द बदल हा शया टप्पणी, पृष्ठ

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सकते है,ं सिमित का ढाँचा वही रहता है) जो 147 स्वास्थ्य एवं प रवार कल्याण संबंधी स म त

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सरकार के काय ं की जाँच-पड़ताल करती है, और मंत्रालय का ‘क गई कायवाही’ उत्तर
सुझाव दे ती है और पश्न पूछती है
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राजपत्र आिधकािरक सरकारी पकाशन जो कानूनी चत्र 6.8 क टप्पणी, राजपत्र अ धसूचना कानून नमाण क प्र क्रया

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पले खों और आिधकािरक सूचनाओं पृष्ठ 147 का अं तम चरण है

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शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक क्या कहती है

धन वधेयक िवत्तीय मामलों — कर िनध रण, सरकारी ऋण इसे अनदे खा न कर, यह केवल लोकसभा म ही प्रस्तुत हो सकता है,
आिद — से संबंिधत कानून का पारूप पृष्ठ 148 और उसके लए राष्ट्रप त क पूव अनुशंसा
आवश्यक है

प्रश्नकाल एक िनिश्चत अविध (सामान्यतः सत्र का पहला ‘कायपा लका संबंधी यह संसद क वह प्र क्रया है जो कायपा लका
घंटा) िजसमें सांस द मंित्रयों से सरकारी नीितयों उत्तरदा यत्व’, पृष्ठ को ‘उत्तरदायी’ बनाती है, अथात उसे अपने
और गितिविधयों पर पश्न पूछते है ं 148 सभी काय और नणय का औ चत्य सद्ध
करना होता है

उत्पादकता िनध िरत समय के िवरुद्ध सदन ने वास्तव में हा शया टप्पणी, पृष्ठ एम. वकैया नायडू (2021)— 2004–14 म
िकतने घंटे काय िकया 158 राज्यसभा क उत्पादकता लगभग 78%,
उसके बाद लगभग 65%; सबसे न्यून
35.75% वष 2018 म

संघ सूची / राज्य वे सूिचयाँ जो तय करती है ं िक िकन िवषयों पर ‘संघ सूची, राज्य सूची य द समवत सूची के वषय पर संघ कानून
सूची / समवत कौन कानून बना सकता है — के वल संघ , के वल और समवत सूची’, बना दे तो राज्य को उसका पालन करना
सूची राज्य, या दोनों पृष्ठ 155 अ नवाय है — इसी लए आर.ट .ई. संपूण
भारत म लागू है

सत्र और बैठक संस द वष में तीन बार बैठती है (बजट, मानसून पृष्ठ 158 सामान्यतः संसद सत्र प्र त दन 6 घंटे चलता है,
और शीतकालीन सत्र); पत्येक सत्र में कई बैठकें आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है;
होती है ं राज्य वधानसभाओं क कायप्रणाली भी ऐसी
ही है

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Board / OrgNCERT
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Updated19 Sep 2026