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NCERT Solutions for Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 8 बड़े भाई साहब

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 8 बड़े भाई साहब - Page 1 of 11

About NCERT Solutions for Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 8 बड़े भाई साहब

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 8 बड़े भाई साहब – Text

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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 10th

aglase .co

Page 2

Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

Class : 10th

Subject : हंद

Chapter : 10

Chapter Name : बड़े भाई साहब

मौ खक

न न ल खत न के उ र एक-दो पंि तय म द िजए -

Q. 1. कथा नायक क च कन काय म थी?

Answer –कथा नायक को वॉल बॉल क फुत , फुटबॉल क उछलकूद, कब डी के दाँव-पच, मैदान क
ह रयाल आक षत करती थी | उसक च खेलने म, कंक रया उछालने म, कागज़ क तत लयाँ उड़ाने
म, फाटक पर सवार उसे आगे-पीछे चलाने म थी |

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Q. 2. बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल या पछ
ू ते थे?

Answer – बड़े भाई साहब का पहला सवाल यह होता था - 'कहा थे '?

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Q. 3. दस
ू र बार पास होने पर छोटे भाई के यवहार म या प रवतन आया?

Answer – दस
ू र बार पास होने पर छोटा भाई और वछं द हो गया | वो सोचने लगा क बना पढ़े भी वह
पास हो सकता ह और अपना अ धकांश समय पतंगबाज़ी म यतीत करने लगा |

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Q. 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उ म कतने बड़े थे और वे कौन-सी क ा म पढ़ते थे?

Answer – बड़े भाई साहब छोटे भाई से उ म पाँच साल बड़े थे और वे नौवीं क ा म पढ़ते थे |

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Q. 5. बड़े भाई साहब दमाग को आराम दे ने के लए या करते थे?

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

Answer – बड़े भाई साहब दमाग को आराम दे ने के लए कभी कॉपी पर, कताब के हा शय पर च ड़याँ,
कु े, ब ल क त वीर बनाया करते थे | कभी एक ह नाम, श द या वा य को, एक ह शेर को बार-बार
लखते |

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ल खत

(क) न न ल खत न के उ र (25-30 श द म) ल खए -

Q. 1. छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टे बल बनाते समय या- या सोचा और फर उसका पालन
य नह ं कर पाया?

Answer – छोटा भाई खब ू जी लगाकर पढ़ने के इरादे से टाइम-टे बल बनाता िजसम खेल-कूद के लए
कोई थान नह ं रहता था | टाइम-टे बल बना लेना आसान था ले कन उस पर अमल करना मिु कल |
पहले ह दन से उसक अवहे लना शु हो जाती य क वॉल बॉल क फुत , फुटबॉल क उछलकूद,
कब डी के दाँव-पच, मैदान क ह रयाल , हवा के झ के उसे अपनी ओर खींच लेते और वह सब कुछ भलू
जाता |

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Q. 2. एक दन जब गु ल -डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनक या
त या हुई ?

Answer – एक दन जब गु ल -डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उ ह ने
गु से म उसे बहुत डाँटा | बड़े भाई साहब ने उसे कहा क - खेल-कूद को छोड़कर पढ़ाई पर यान दो| सफ
पर ा म पास हो जाना काफ नह ं, बु ध का वकास होना भी ज र ह | घमंड इंसान क बु ध भ ृ ट कर
दे ता है जैसे रावण क और फर इंसान का अंत तय ह |

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Q. 3. बड़े भाई साहब को अपने मन क इ छाएँ य दबानी पड़ती थीं?

Answer – बड़े भाई साहब का भी मन करता था खेलने का, पतंगबाज़ी करने का, ले कन उ ह लगता था
क य द वे ह इस राह पर चलने लगे तो अपने छोटे भाई को या समझाएंगे | छोटे भाई क िज मेदार
क वजह से उ ह अपने मन क इ छाएँ दबानी पड़ती थी |

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Q. 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई को या सलाह दे ते थे और य ?

Answer – बड़े भाई साहब छोटे भाई को खेल-कूद से दरू रहने और पढ़ाई म यान दे ने क सलाह दे ते थे |
उ ह लगता था क अं ेज़ी पढ़ना ब च का खेल नह ं, उसके लए दन-रात मेहनत करनी पड़ती ह |बड़े

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

भाई साहब चाहते थे क छोटा भाई हमेशा सह राह पर चले इस लए वे उसके साथ थोड़ा स ती से पेश
आते थे |

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Q. 5. छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम यवहार का या फ़ायदा उठाया?

Answer – बड़े भाई साहब के नरम यवहार का फायदा उठाकर छोटा भाई और वछं द हो गया | वो
सोचने लगा क बना पढ़े भी वह पास हो सकता ह और अपना अ धकांश समय पतंगबाज़ी म यतीत
करने लगा |

Page: 63, Block Name: न न ल खत न के उ र (25-30 श द म) ल खए -

(ख) न न ल खत न के उ र (50-60 श द म) ल खए –

Q. 1. बड़े भाई क डाँट-फटकार अगर न मलती, तो या छोटा भाई क ा म अ वल आता? अपने वचार
कट क िजए ।

Answer – छोटा भाई बड़े भाई साहब क डांट-फटकार के डर से ह थोड़ी बहुत पढ़ाई कर लेता था | य द
बड़े भाई साहब का डर और कड़ा अनशु ासन न होता तो छोटा भाई कभी अ वल न आता | बड़े भाई साहब
छोटे भाई को उसके हत के लए ह डाँटते थे ले कन उस व त उसे भाई साहब का डाँटना अ छा नह ं
लगता था | ले कन उनक डांट का ह असर था जो छोटा भाई हर क ा म इतने अ छे नंबर से पास हो
जाता था |

Page: 63, Block Name: न न ल खत न के उ र (50-60 श द म) ल खए –

Q. 2. इस पाठ म लेखक ने समच
ू ी श ा के कन तौर-तर क पर यं य कया है ? या आप उनके वचार
से सहमत ह?

Answer – लेखक ने इस पाठ म श ा क आधु नक णाल पर यंग कया है | आधु नक श ा णाल
म कताबी ान पर यादा जोर दया जाता ह | जो कताब म लखा होता है श क चाहते है ब चे वैसा
ह रट ले | जो बात सीधी एक-दो वा य म कह जा सकती है उसे भी नंबर लाने के लए बढ़ा-चढ़ा कर
लखना ज़ र हो गया ह | यावहा रक ान आज क श ा णाल से लु त हो गया ह |

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Q. 3. बड़े भाई साहब के अनस
ु ार जीवन क समझ कैसे आती है ?

Answer – बड़े भाई साहब के अनस ु ार जीवन क समझ कताब पढ़ने से नह ं आती बि क द ु नया दे खने
से आती ह | बड़े लोग को द ु नया और िजंदगी के अनभ
ु व यादा होते ह | अपने अनभ
ु व के आधार पर ह
वे लोग अपनी सम याओं के समाधान खोज लेते ह | सफ कताबी ान ज़ र नह ं होता, बु ध का
वकास होना भी ज़ र ह |

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

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Q. 4. छोटे भाई के मन म बड़े भाई साहब के त धा य उ प न हुई?

Answer – बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को िजंदगी के अनभु व के बारे म समझाया | उ ह ने उसे बताया
क बड़े भाई के रहते तम
ु कभी भी गलत राह पर नह ं चल पाओगे | अगर सफ समझाने से छोटा भाई न
समझ तो बड़े भाई साहब थ पड़ का भी योग कर सकते ह | बड़े भाई साहब क ये सब बात सन ु कर छोटे
भाई को एहसास हुआ क चाह वो कतने ह अ छे नंबर से पास हो जाए, कसी भी क ा म आ जाए
ले कन भाई साहब से उ और अनभ ु व म हमेशा छोटा ह रहे गा और उसके मन म बड़े भाई के त धा
उ प न हुई |

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Q. 5. बड़े भाई क वभावगत वशेषताएँ बताइए?

Answer – बड़े भाई साहब वभाव से अ ययनशील थे | कसी भी मामले म ज दबाज़ी उ ह पसंद न थी
| वे अनश
ु ासन य थे और अपने छोटे भाई को भी अनशु ासन म रखते थे | अपने छोटे भाई के त अपनी
िज मेदा रय को वे समझते थे और नभाते भी थे | अपने छोटे भाई को गलत राह पर जाने से रोकने के
लए वे अपनी इ छाओं को भी दबा दे ते थे |

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Q. 6. बड़े भाई साहब ने िज़ंदगी के अनभ
ु व और कताबी ान म से कसे और य मह वपण
ू कहा है ?

Answer – बड़े भाई साहब ने िज़ंदगी के अनभ
ु व को मह वपण
ू बताया है | उनके अनस
ु ार कताबी ान से
सफ ड याँ हा सल क जा सकती ह ले कन बु ध का वकास नह ं हो पाता | िजंदगी के अनभ ु व से ह
इंसान अपनी सम याओं का समाधान करने यो य बनता है , उसम सह गलत क पहचान करने क
समझ आती ह |

Page: 64, Block Name: न न ल खत न के उ र (50-60 श द म) ल खए -

Q. 7. बताइए पाठ के कन अंश से पता चलता है क −

(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है ।

(ख) भाई साहब को िज़ंदगी का अ छा अनभ
ु व है ।

(ग) भाई साहब के भीतर भी एक ब चा है ।

(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते ह।

Answer –

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

(क) बड़े भाई साहब जब छोटे भाई को डाँटते तो वह चप ु चाप उनक बात सन
ु लेता, कभी पलटकर जवाब
नह ं दे ता था | उनके डांट के डर से पढ़ाई भी कर लेता था |

(ख) बड़े भाई साहब को िजंदगी का अनभु व है , वह अपनी िज मेदा रय को समझते ह | उ ह ने अपने
छोटे भाई का भी अ छे से यान रखा और उसे गलत राह पर जाने से रोकने के लए अनश
ु ासन म रखा|

(ग) एक दन एक पतंग उनके ऊपर से गुजर रह थी, उसक डोर लटक रह थी | बड़े भाई साहब ने अपनी
ल बाई का फायदा उठाते हुए उसे पकड़ लया और हॉ टल क तरफ दौड़ने लगे | इस घटना से पता
चलता है क उनके भीतर भी एक ब चा है ।

(घ) बड़े भाई साहब छोटे भाई को हमेशा पढ़ाई करने के लए कहते रहते थे | उनक डांट से ह छोटा भाई
थोड़ा बहुत पढ़ लेता था और अ छे नंबर से पास भी हुआ | वे हमेशा उसक भलाई चाहते थे |

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(ग) न न ल खत क
​ े आशय प ट क िजए −

Q. 1. इि तहान पास कर लेना कोई चीज़ नह ं, असल चीज़ है बु ध का वकास।

Answer – बड़े भाई साहब के अनसु ार कताब पढ़कर इि तहान तो आसानी से पास कया जा सकता है
ले कन बु ध का वकास नह ं हो पाता | बु ध का वकास होना ज र है य क जीवन क सम याएं हम
तभी सल
ु झा सकते ह |

Page: 64, Block Name: न न ल खत क
​ े आशय प ट क िजए −

Q. 2. फर भी जैसे मौत और वप के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन म जकड़ा रहता है , म
फटकार और घडु कयाँ खाकर भी खेल-कूद का तर कार न कर सकता था।

Answer – छोटे भाई को खेल-कूद अ यंत य था | िजस कार मनु य अपने अं तम समय तक मोह
माया के बंधन से आज़ाद नह ं हो पाता उसी तरह बड़े भाई साहब से डांट -फटकार पाकर भी छोटा भाई
खेलना नह ं छोड़ता था |

Page: 64, Block Name: न न ल खत क
​ े आशय प ट क िजए –

Q. 3. बु नयाद ह पु ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने?

Answer – बड़े भाई साहब श ा के मामले म कोई ज दबाज़ी नह ं करते थे | उनके अनस
ु ार य द
शु आत से ह ठ क से न पढ़े तो आगे जाकर कुछ नह ं कर पाएँगे | पढ़ाई क नींव जब मज़बत
ू होगी तभी
आगे जाकर सफलता मलेगी |

Page: 64, Block Name: न न ल खत क
​ े आशय प ट क िजए −

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Q. 4. आँखे आसमान क ओर थीं और मन उस आकाशगामी प थक क ओर, जो मंद ग त से झम
ू ता
पतन क ओर चला आ रहा था, मानो कोई आ मा वग से नकलकर वर त मन से नए सं कार हण
करने जा रह हो।

Answer – एक दन शाम म छोटा भाई पतंग पकड़ने के लए दौड़ रहा था | उसक आँखे नरं तर
आसमान म पतंग क ओर ह दे ख रह थी और उसके मन म उसको पकड़ने क ज द थी | पतंग अपनी
म ती म झूमती धीरे -धीरे नीचे आ रह थी जैसे कोई आ मा वग से उतर रह हो |

Page: 64, Block Name: न न ल खत क
​ े आशय प ट क िजए −

भाषा अ ययन

Q. 1. न न ल खत श द के दो-दो पयायवाची श द ल खए –

नसीहत, रोष, आज़ाद , राजा, ता जब
ु

Answer –

नसीहत – सलाह, सीख

रोष – गु सा, ोध

आज़ाद – वतं ता, मिु त

राजा – नरे श, भप
ू त

ता जब
ु - है रानी, आ चय

Page: 64, Block Name: भाषा अ ययन

Q. 2. ेमचंद क भाषा बहुत पैनी और मह
ु ावरे दार है । इस लए इनक कहा नयाँ रोचक और भावपण
ू
होती ह। इस कहानी म आप दे खगे क हर अनु छे द म दो-तीन मह
ु ावर का योग कया गया है ।
उदाहरणत: इन वा य को दे खए और यान से प ढ़ए −

• मेरा जी पढ़ने म ब कुल न लगता था। एक घंटा भी कताब लेकर बैठना पहाड़ था।

• भाई साहब उपदे श क कला म नपण
ु थे। ऐसी-ऐसी लगती बात कहते, ऐसे-ऐसे सिू त बाण चलाते क
मेरे िजगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और ह मत टूट जाती।

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

• वह जानलेवा टाइम-टे बल, वह आँख-फोड़ पु तक, कसी क याद न रहती और भाई साहब को नसीहत
और फ़ज़ीहत का अवसर मल जाता।

न न ल खत मह
ु ावर का वा य म योग क िजए –

सर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथ लेना, अंधे के हाथ बटे र लगना, लोहे के चने चबाना, दाँत
पसीना आना, ऐरा-गैरा न थू खैरा

Answer –

· सर पर नंगी तलवार लटकना – खतरा/ भय बना रहना

छोटे भाई को बड़ा भाई हमेशा सर पर नंगी तलवार लटकता सा तीत होता था |

· आड़े हाथ लेना – खर -खोट सन
ु ाना

जब राम बाहर से खेलकर आया तो पताजी ने उसे आड़े हाथो लया |

· अंधे के हाथ बटे र लगना – अयो य यि त मू यवान व तु मलना

हमेशा खेल-कूद म लगे रहने के बाद भी छोटा भाई अ वल तो ऐसा लगा जैसे अंधे के हाथ बटे र लग
गयी |

· लोहे के चने चबाना – क ठन काम करना

आज क यव
ु ा पीढ़ को सध
ु ारना लोहे के चने चबाने के समान है |

· दाँत पसीना आना – क ठनाई आना

अं ेज़ी पढ़ने म नेहा को दाँतो पसीना आ गया |

· ऐरा-गैरा न थू खैरा - बेवक़ूफ़ आदमी

कोई भी ऐरा-गैरा न थू खैरा अं ेज़ी का व वान नह ं बन सकता |

Page: 65, Block Name: भाषा अ ययन

Q. 3. न न ल खत त सम, त भव, दे शी, आगत श द को दए गए उदाहरण के आधार पर छाँटकर
ल खए।

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

त सम त भव दे शी आगत (अं ेज़ी एवं उद/ू अरबी-फारसी)

ज मस ध आँख दाल-भात पोज़ीशन, फ़जीहत

ताल म, ज दबाज़ी, पु ता, हा शया, चे टा, जमात, हफ़, सिू तबाण, जानलेवा, आँखफोड़, घड़
ु कयाँ,
आ धप य, प ना, मेला-तमाशा, मसलन, पेशल, क म, फटकार, ात:काल, व वान, नपण
ु , भाई
साहब, अवहे लना, टाइम-टे बल

Answer –

त सम – चे टा, सिू तबाण, आ धप य, मेला, ात:काल, व वान, नपण
ु , अवहे लना

त भव – जानलेवा, आँखफोड़, प ना, भाई साहब

दे शी – घड़
ु कयाँ, फटकार

आगत (अं ेज़ी एवं उद/ू अरबी-फारसी) - ताल म, ज दबाज़ी, पु ता, हा शया, जमात, हफ़, तमाशा,
मसलन, पेशल, क म, टाइम-टे बल

Page: 654, Block Name: भाषा अ ययन

Q. 4. याएँ मु यत: दो कार क होती ह−सकमक और अकमक।

सकमक या − वा य म िजस या के योग म कम क अपे ा रहती है , उसे सकमक या कहते ह;

जैसे − शीला ने सेब खाया।

मोहन पानी पी रहा है ।

अकमक या − वा य म िजस या के योग म कम क अपे ा नह ं होती, उसे अकमक या कहते
ह; जैसे − शीला हँसती है ।

ब चा रो रहा है ।

नीचे दये वा य म कौन-सी या है − सकमक या अकमक? ल खए –

(क) उ ह ने वह ं हाथ पकड़ लया। -----------------------------

(ख) फर चोर −सा जीवन कटने लगा। -----------------------------

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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 10 Hindi

(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ह होगा। -----------------------------

(घ) म यह लताड़ सन
ु कर आँसू बहाने लगता। -----------------------------

(ङ) समय क पाबंद पर एक नबंध लखो। -----------------------------

(च) म पीछे -पीछे दौड़ रहा था। -----------------------------

Answer –

(क) सकमक या

(ख) सकमक या

(ग) सकमक या

(घ) सकमक या

(ङ) सकमक या

(च) अकमक या

Page: 65, Block Name: भाषा अ ययन

Q. 5. इक' यय लगाकर श द बनाइए −

वचार, इ तहास, संसार, दन, नी त, योग, अ धकार

Answer –

वचार - वैचा रक

इ तहास - ऐ तहा सक

संसार - सांसा रक

दन - दै नक

नी त - नै तक

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योग – ायो गक

अ धकार - आ धका रक

Page: 65, Block Name: भाषा अ ययन

यो यता व तार

Q. 1. ेमचंद क कहा नयाँ मानसरोवर के आठ भाग म संक लत ह | इनम से कहा नयाँ प ढ़ए और
क ा म सन
ु ाइए | कुछ कहा नय का मंचन भी क िजए |

Answer - छा वयं कर |

Page: 65, Block Name: यो यता व तार

Q. 2. श ा रटं त व या नह ं है - इस वषय पर क ा म प रचचा आयोिजत क िजए |

Answer - छा वयं कर |

Page: 65, Block Name: यो यता व तार

Q. 3. या पढ़ाई और खेल-कूद साथ-साथ चल सकते ह - क ा म इस पर वाद- ववाद काय म
आयोिजत क िजए |

Answer - छा वयं कर |

Page: 66, Block Name: यो यता व तार

Q. 4. या पर ा पास कर लेना ह यो यता का आधार है ? इस वषय पर क ा म चचा क िजए |

Answer - छा वयं कर |

Page: 66, Block Name: यो यता व तार

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 10
TypeSolution
Pages11
Languagehindi
Updated11 Aug 2026