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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: उत्पादन के कारक
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
163 – 183 16 39 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 47 pages
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · सामा जक वज्ञान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: उत्पादन के कारक
कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक के सभी प्रश्न के वस्तृत एन.सी.ई.आर.ट . समाधान — पाठ्यपुस्तक समाज का अध्ययन :
भारत और उसके आगे, कक्षा 8, भाग 1 ( वषयवस्तु : हमारे आस-पास का आ थक जीवन) से। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया गया है —
महत्वपूण प्रश्न, छह आइए पता लगाएँ बॉक्स, पाँच आइए वचार कर बॉक्स, तीन पाठ्य प्रश्न तथा सभी दस प्रश्न और क्रयाकलाप — जसम
पृष्ठ 165 क दुकान वाली ता लका और मोबाइल फोन नमाण का प्रवाह- चत्र ( चत्र 7.23) सीधे मु द्रत पृष्ठ से पढ़े गए ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 8) 163 – 183
खं ड प्रश्न
16 39
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 163
अध्याय का आरंभ — वषयवस्तु : हमारे आस-पास का आ थक जीवन
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 उत्पादन के कौन-कौन से कारक ह?
उत्पादन के कारक वे संसाधन या इनपुट्स ह जनका उपयोग वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन म कया जाता है। आपके आस-पास
क प्रत्येक वस्तु अपने अं तम स्वरूप म आप तक पहुँचने से पहले एक उत्पादन प्र क्रया से गुजरती है, और उस प्र क्रया म कुछ
इनपुट्स लगते ह। अथशास्त्र म इन्ह चार प्रकार म वग कृत कया गया है — भू म, श्रम, पूँजी और उद्य मता। प्रौद्यो गक इनम
एक सहयोगी एवं महत्वपूण कारक है, क्य क यह व्यवसाय को समान या कम उत्पादन कारक के साथ अ धक उत्पादन करने म
सक्षम बनाती है।
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कारक पुस्तक इसम क्या-क्या स म्म लत करती है अध्याय से उदाहरण
भू म के वल भौगोिलक भूखंड नही ं, अिपतु म ृद ा, वन, जल, वायु, सूय र त्ना ने ‘पॉज पॉइंट’ के िलए भूखंड िकराए पर िलया;
(प्राकृ तक का पकाश, खिनज, तेल और पाकृ ितक गैस क्र
ु चािहए ; स ब्जी िव े ता को म ृद ा
सै ल ून को जल एवं िवद्य त
संसाधन) में उगा ताजा उ त्पाद
श्रम उत्पादन में पयुक्त शारीिरक और मानिसक योगदान भोजनालय का रसोइया एवं सहायक ; काष्ठकार , कृ षक ,
(मानव िनम ण-श्रिमक , िशक्षक , िचिक त्सक
संसाधन)
पूँजी धन और मानव िनिमत संस ाधन — मशीने,ं औजार, उपकरण, र त्ना का फन चर और रसोई के उपकरण; िव े ता का क्र
वाहन, वेंिडंग काट् स , कं प्यूटर, दुक ाने,ं कारखाने, काय लय तराजू, टोकरी और ठे ल ा
भवन
उद्य मता स्वयं का व्यवसाय आरंभ करना या िकसी समस्या के समाधान स्वयं र त्ना, िजसने स्थान चन
ु ा, धन का पबंध िकया,
हेत ु कु छ नया िनिमत करना — जोिखम उठाना और अन्य कम चारी िनयुक्त िकए और योजना बनाई
कारकों को एकित्रत करना
प्रौद्यो गक वैज्ञ ािनक ज्ञान को पयोग में लाना यू.पी.आई. से भुग तान, जी.पी.एस . से लघुत्त म माग , डोन
(सहयोगी, से उवरक िछड़काव, शल्य िचिक त्सा में रोबोट् स
कारक नह )
भूिम
श्रम
उद्यम इन्हें एक वस्त ुएँ एवं
पूँजी िनिश्चत अनुपात मे ं
सेवाएँ
संयोिजत करता है
उद्यिमता
पौद्योिगकी — पत्येक चरण मे ं सहायक
यह समान या कम इनपुट्स से अिधक उत्पादन संभव बनाती है
उत्पादन के चार कारक उद्यम तक पहुँचते ह, जो उन्ह संयो जत कर वस्तुएँ एवं सेवाएँ बनाता है। प्रौद्यो गक नीचे एक प के रूप म दखाई
गई है, क्य क वह पाँचवाँ इनपुट नह , अ पतु शेष चार क दक्षता बदलने वाला तत्व है।
इनका वग करण क्य आवश्यक है: क्य क उत्पादक को एक व्यावहा रक प्रश्न का उत्तर दे ना होता है — कुछ भी
बनाने से पहले मुझे कन- कन वस्तुओं का प्रबंध करना होगा? पाँच वष पूव जब रत्ना ने ‘पॉज पॉइंट’ आरंभ कया,
तब उसे उ चत स्थान का चयन (भू म), कराये और उपकरण के लए धन का प्रबंध (पूँजी), कमचा रय क नयु क्त
(श्रम), सामग्री क खरीदारी तथा अपने सपने को साकार करने क योजना (उद्य मता) — सब करना पड़ा। चार
अलग-अलग प्रबंध, चार अलग बाजार, चार अलग प्रकार के भुगतान। यह वग करण एक सूची है, कोरा सद्धांत नह ।
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संकेत: कसी इनपुट को छाँटने का सरल परीक्षण है — यह आया कहाँ से? य द इसे प्रकृ त ने बनाया, तो वह भू म
है। य द इसे कसी व्य क्त का प रश्रम दे ता है, तो वह श्रम है। य द लोग ने इसे पहले बनाया और अब यह कुछ और
बनाने म लग रहा है, तो वह पूँजी है। और य द यह इन सबको एक साथ लाने का नणय एवं जो खम है, तो वह
उद्य मता है।
प्र.2 ये कारक कैसे अंतसबं धत ह?
ये इस अथ म अंतसबं धत ह क कोई भी कारक अकेले कुछ भी उत्पा दत नह कर सकता — ये एक-दूसरे के पूरक ह और इन्ह उस
अनुपात म मलाया जाता है जो उत्पाद वशेष पर नभर करता है। अध्याय के शब्द म, एक या अ धक कारक क अनुप स्थ त या
दुरुपयोग क स्थ त म उत्पादन क गुणवत्ता प्रभा वत हो सकती है या उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है।
1. अनुपात उत्पाद के साथ बदलता है। कृ ष, व नमाण और हस्त शल्प जैसे क्षेत्र म उत्पादन मुख्यतः श्रम पर आधा रत होता है,
इस लए ये श्रम-प्रधान कहलाते ह। सेमीकंडक्टर चप या उपग्रह के लए अ धक पूँजी, वशेषीकृत उपकरण और तकनीक ज्ञान
चा हए, इस लए ये पूँजी-प्रधान कहलाते ह।
उत्पाद कौन-सा कारक शेष कारक फर भी क्या करते ह
प्रधान
हथकरघा साड़ी, हस्त शल्प, श्रम — श्रम -पधान भूिम से कपास एवं रंग ; पूँजी से करघा; बुनकर की उद्यिमता से िडजाइन का
नमाणाधीन भवन िनणय
सेमीकंडक्टर चप, उपग्रह पूँजी — पूँजी-पधान बहुत कम, िकं तु अत्यंत कु शल श्रिमक; भूिम से अित-शुद्ध िसिलकॉन, जल एवं
िवद्य तु ; अत्यिधक उद्यमीय जोिखम
2. नई तकनीक स्वयं अनुपात बदल सकती है। कृ ष काय म मशीन का बढ़ता उपयोग श्रम पर नभरता को कम कर सकता है।
दूसरी ओर, त्रआयामी मुद्रण (3-डी प्र टग) बड़े पैमाने पर हथकरघा उत्पाद तैयार करके वस्त्र नमाण क्षेत्र क लुप्त होती कला-
शै लय को पुनज वत कर सकती है — अथात प्रौद्यो गक सदै व श्रम को बाहर नह करती, कभी-कभी वह कसी शल्प को बाजार
लौटा भी दे ती है।
3. कारक भौगो लक रूप से भी जुड़े ह। उत्पादन के इनपुट्स व भन्न भौगो लक स्थान पर उपलब्ध होते ह। व्यवसाय उन स्थान
से इनपुट्स लेकर उन्ह मलाते ह। यह भौगो लक अंतसबंध व्यवसाय को व वध संसाधन तक पहुँच दे ता है — कतु एक दुबलता
भी उत्पन्न करता है। आपू त श्रृंखला वस्तुओं के उत्पादन और वक्रय म स म्म लत व्य क्तय , संगठन , संसाधन , क्रयाओं एवं
प्रौद्यो गक का अंतजाल है। जब स्थानीय संसाधन के स्थान पर दूरस्थ संसाधन पर नभरता के कारण इसम व्यवधान आता है, तो
उत्पादन प्र क्रया अवरुद्ध हो जाती है — जैसा को वड-19 महामारी के समय हुआ था।
4. एक वास्त वक उत्पाद का पीछा क जए और यह सब एक साथ दख जाएगा। 2025 म भारत, चीन के बाद वश्व का दूसरा
सबसे बड़ा मोबाइल फोन नमाता दे श है, और चत्र 7.23 यह प्र क्रया दखाता है —
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मोबाइल फोन के िनम ण की पिक्रया (िचत्र 7.23)
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oिवकास l a
अनुसंधानcएवं
. ag घटकों को जोड़ ना और
sिवशेeसमूm
भूि म क्रय एवं
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कच्चे माल का क्रय
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ह ारा नई
कारखाने की स्थापना सॉफ्टवे य र इं स् टॉल करना
ष ताओं पर मंथन
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फु टकर दुक ानों बड़ े पै माने पर फोन की कायक्षमता,
समाप्त
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तक िवतरण उत्पादन और पै के िजंग गुणवत्ता का परीक्षण
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नीले चरण श्रम एवं मानव पूँजी पर · हरे भूिम पर · नारंगी पूँजी पर आधािरत है।
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उद्यमी पूरी श्रंखला चलाता है और तय करता है िक संसाधन कैसे पयुक्त हों;
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पौद्योिगकी पत्येक चरण मे ं उपिस्थत है।
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l a se पृष्ठ 179 का प्रवाह- चत्र, जसम प्रत्येक चरण पर प्रधान कारक अं कत है। कसी एक रंग को हटा द जए और पूरी श्रृंखला टू ट जाती है।
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सूची से अ धक अंतसबंध क्य महत्वपूण है: क्य क ये चार कारक चार अलग कहा नयाँ नह ह। उत्पादन के
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asकरते ह; उद्यमी संसाधन के उपयोग का मागदशन दे ता है; और भू म,
प्रत्येक चरण म मानवीय प्रयास स म्म लत होता है — यर, वद्युत एवं यां त्रक अ भयंताओं का समूह और
प रयोजना प्रबंधक मलकर उत्पाद वकlसत
संयंत्र के लए स्थान, उपकरण एवं कa
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ु शल श्र मक जुटाने के लए वत्तीय संसाधन चा हए। अध्याय के शब्द म ये सभी
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इनपुट्स पहेली के टु कड़ के समान जुड़ते ह — और एक टु कड़ा कम हो तो चत्र छोटा नह होता, अधूरा हो जाता
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है।
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a g प्र.3 उत्पादन म मानव पूँजी क क्या भू मका है और इसके सहायक तत्व कौन-से ह?
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g l as है। अध्याय यह भेद सावधानी से करता है — श्रम उत्पादन म प्रयुक्त शारी रक और
मानव पूँजी ही श्रम को अ े काय म बदलती
मान सक योगदान है, जब क मानव पूa
ँजी वे व शष्ट कौशल, ज्ञान, क्षमताएँ और वशेषज्ञता ह जो उस श्रम को करने के लए
आवश्यक होते ह। अतः मानव पूँजी केवल बु नयाद श्रम नह , अ पतु उस श्रम क गुणवत्ता और दक्षता का प रचायक भी है।
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mतकनीक का आ वष्कार करता
उत्पादन म इसक भू मका यह है क मनुष्य अपने ज्ञान, कौशल और नणय- नधारण क्षमता का उपयोग करते हुए वस्तुओं एवं
सेवाओं का उत्पादन करते ह। पु लस अ धकारी कानून और व्यवस्था बनाए रखता है, वैज्ञा नकeनई
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co नया व्यंजन तैयार करता है। इन सभी को वशेष प्रकार के ज्ञान, कौशल aऔरglअपने काय के प्र त समपण क आवश्यकता
है, .रसोइया
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होती है। इसके बना वही भू म, वही मशीन और वही धन कह कम उत्पादन दगे।
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सहायक तत्व यह मानव पूँजी कैसे बढ़ाता है पुस्तक का प्रमाण
शक्षा और िशक्षा मूल भूत साक्षरता से आरंभ होकर िविशष्ट िसिवल इंजीिनयिरंग का िवद्य ाथ िडजाइन और िनम ण सामग ी के
प्र शक्षण क्षेत्र ों में िनपुणता तक ज्ञान दे ती है; पिशक्षण उस ं सीखता है, िफर िनम ण स्थलों के अवलोकन, सामग ी परीक्षण
िस द्धात
ज्ञान को हाथ से लगाने का कौशल दे ता है एवं सुर क्षा पि क्रयाओं को समझने से पिशि त होता है — तािक
क्ष
दीघ कािलक , कम लागत वाले और पय वरण के अनुकू ल समाधान बना
सके
स्वास्थ्य सेवा अच्छा स्वास्थ्य संज्ञ ानात्मक िवकास में सहायता वे कम समय में अिधक काय करते है,ं स ृजनात्मक होते है ं और स्वास्थ् य
करता है, िजससे बच्चे िनयिमत िवद्यालय जाते कारणों से अवकाश नही ं ले ते
और अिधक पभावपूण ढं ग से सीखते है;ं स्वस्थ
श्रिमक अपना श्रेष्ठ योगदान दे पाते है ं
सामा जक एवं किठन श्रम, सतत सुध ार और काय को भली- जापान का काइजेन — ‘सतत सुधार’ — 1940 के दशक के मध्य से
सांस्कृ तक भाँित संपन्न करने की संस्कृ ित पूरे कायबल की पयोग में, िजसने जापान को उ च्च जीवन-ग ण
ु वत्त ा िदलाई; जम नी की
प्रभाव गण
ु वत्ता बढ़ ा दे ती है कायिनष्ठा, जो समयबद्धता, बारीिकयों पर ध् यान और ग ण
ु वत्त ा को
महत्व दे ती है
प्रौद्यो गक सीखने और रोजगार पाने की भौगोिलक बाध्यता स्वयं (SWAYAM) क क्ष ा 9 और उससे आगे के िलए रोबोिटक्स ,
समाप्त कर दे ती है जल -कृ िष, वस्त्र -मुद ण जैसे िनःशुल्क पाठ क्रम दे ता है; नेशनल
किरयर सिवस प्लंिबंग से ले खांक न तक रोजगार के अवसर िदखाता है
भारत क स्थ त। साक्षरता जनसंख्या क एक महत्वपूण वशेषता है और मानव पूँजी क कौशलता एवं उत्पादकता बढ़ाने म
सहायक है। वश्व बक के 2023 के अनुमान के अनुसार भारत म वयस्क साक्षरता दर पुरुष के लए 85 प्र तशत और म हलाओं
के लए 70 प्र तशत है — अथात 15 प्र तशत अंक का अंतर, और यही वह स्थान है जहाँ सबसे बड़ा लाभ अभी शेष है। भारतीय
आ थक सवक्षण 2024 के अनुसार 65 प्र तशत जनसंख्या 35 वष से कम आयु क है, अथात लगभग 35 प्र तशत 35 वष या
उससे अ धक क । यह युवा एवं उत्पादक जनसंख्या भारत को जनां कक य लाभांश दे सकती है — वह लाभ जो दे श को तब मलता
है जब उसके पास बड़ी संख्या म युवा एवं कायरत व्य क्त ह और उन पर आ श्रत व्य क्त कम ह ।
यह लाभांश स्वतः क्य नह मलता: बड़ी युवा जनसंख्या केवल एक संभावना है। अध्याय शत स्पष्ट रखता है —
इस क्षमता का लाभ उठाने के लए व्य क्त के पास गुणवत्तापूण शक्षा, स्वास्थ्य, प्र शक्षण एवं कौशल प्र शक्षण तक
पहुँच आवश्यक है। केवल संख्या से कुछ उत्पा दत नह होता, मानव पूँजी से होता है। यही कारण है क पृष्ठ 170 पर
वद्यालय छोड़ने वाला हष केवल अपनी नह , दे श क भी हा न है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 164
प रचय
प्र.1 क्या आपने कभी सोचा है क आपके कपड़े, जूते, स्कूल बैग, फन चर, फोन, कंप्यूटर आ द का नमाण कैसे होता
है?
हाँ — और उत्तर इन सबके लए एक ही है : प्रत्येक वस्तु अपने अं तम स्वरूप म आप तक पहुँचने से पहले उत्पादन प्र क्रया से
गुजरती है, और उस प्र क्रया म कुछ संसाधन या इनपुट्स लगते ह। यही इनपुट्स इस अध्याय के उत्पादन के कारक ह।
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अपने कंधे का स्कूल बैग ली जए और उसे इनपुट-दर-इनपुट खो लए —
कारक स्कूल बैग म क्या-क्या लगा
भू म म ृद ा में, सूय के पकाश और जल से उगी कपास, अथवा तेल से बना पॉिलएस्टर; खिनजों से बने रंग ; कारखाने में पयुक्त जल और
िवद्य तु ; वह भूखंड िजस पर कारखाना खड़ा है
श्रम िडजाइन बनाने वाला, कपड़ा काटने वाला, िसलाई करने वाले , ग ण
ु वत्ता जाँचने वाला, पैक करने वाला, टक चालक और वह
दुक ानदार िजसने आपको बेचा
पूँजी िसलाई मशीने,ं किटंग टेबल, कारखाने का शेड, िवतरण का वाहन, दुक ान — और वह धन िजससे ये सब खरीदे गए
उद्य मता िकसी ने सोचा िक िवद्यािथयों को अिधक मजबूत और हल्का बैग चािहए, कु छ हजार बैग बनाने का जोिखम उठाया और ऊपर
िलखी सारी वस्तुए ँ जुटाईं
प्रौद्यो गक चेन लगाने की मशीन, वह सॉफ्टवेयर जो कटाई की योजना बनाकर कपड़े की बब दी घटाता है, और दुक ान पर आपका यू.पी.आई.
भुग तान
यह करके दे खए: यही अभ्यास अपने जूत और एक फोन पर क जए। एक रोचक बात दखेगी — फोन म प्र त
इकाई कह अ धक पूँजी और कह कम हाथ लगते ह। यही अंतर आगे चलकर श्रम-प्रधान और पूँजी-प्रधान
उत्पादन कहलाता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 165
प रचय — स्थानीय क्षेत्र क दुकान पर समूह प्र तवेदन
आइए पता लगाएँ
प्र.1 छोटे -छोटे समूह म अपने स्थानीय क्षेत्र क आ थक ग त व धय का अध्ययन कर। यह दे खए क वहाँ व भन्न
प्रकार क वस्तुए ँ एवं सेवाएँ कैसे बनती ह या प्रदान क जाती ह?
पहले व ध। अपने समूह के साथ एक न श्चत माग चु नए — एक बाजार क सड़क, एक गली, या वद्यालय के आस-पास क
दुकान — और जो दखे वही ल खए, जो याद हो वह नह । प्रत्येक प्र तष्ठान के लए चार बात ल खए : वह कस प्रकार का है, उस
प्रकार के कतने गने, वह क्या उत्पा दत या प्रदान करता है, और उसके लए क्या चा हए। यही चार पुस्तक क ता लका के स्तंभ ह।
चलते-चलते परखने योग्य मुख्य वचार : वस्तुओं को — जो ठोस रूप म स पी जा सक, जैसे ब्रेड, स ब्जयाँ — सेवाओं से अलग
क जए, जो आपके लए कया गया काय है और जसे उठाकर ले नह जाया जा सकता, जैसे बाल काटना, बस यात्रा, ूशन।
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स्थानीय ग त व ध उत्पा दत वस्तुए ँ प्रदत्त सेवाएँ
बेकरी, मठाई क दुकान, आटा चक्क बेड, िबस्कु ट, िमठाई, िपसा आटा घर तक पहच
ु ँ ाना, आयोजनों के आदे श
दज , मोची, बढ़ई िसले वस्त्र , फन चर कपड़ों में पिरवतन, जूता मरम्मत, घर पर िफिटंग
दवा क दुकान, क्ली नक, रोग परीक्षण कद्र बेची गई औषिधयाँ परामश, जाँच, घाव की प ी
ऑटो एवं ई- र ा स्टड, कू रयर, रचाज क दुकान — पिरवहन, िवतरण, िरचाज एवं िबल भुग तान
ूशन कद्र, साइबर कैफे, बक शाखा, सैलून िपंटआउट, फोटोकॉपी पढ़ ाना, इंटरनेट, बचत एवं ऋण, साज-सज्जा
नमूना उत्तर: “हमारे 500 मीटर के माग म 41 प्र तष्ठान थे। बनने या बकने वाली वस्तुओं म ब्रेड और बस्कुट, पका
भोजन, स ब्जयाँ, सली कमीज और लकड़ी के स्टू ल थे। सेवाओं म बाल काटना, मोबाइल रपेयर, ूशन, सलाई,
फोटोकॉपी, ऑटो और ब कग थ । हमने दे खा क सेवाएँ वस्तुओं से लगभग दुगुनी थ , और हर सेवा-दुकान को भी
इनपुट के रूप म कुछ वस्तुएँ चा हए थ — नाई को कची और क्र म, ूशन कद्र को कमरा, बोड और वद्युत।”
यह अभ्यास अध्याय के आरंभ म क्य है: क्य क चार कारक पर वश्वास तब सहज होता है जब आप उन्ह स्वयं
गन चुके ह । यह चक्कर पूरा करते-करते आपको बना बताए दख जाएगा क हर दुकान को एक स्थान (भू म),
कसी का प रश्रम एवं कौशल (श्रम), कुछ उपकरण एवं धन (पूँजी), और उसे आरंभ करने वाला कोई व्य क्त
(उद्य मता) — चार चा हए थे।
प्र.2 यहाँ लता, आशा, मोहन और करण ारा बनाया गया एक छोटा-सा प्र तवेदन ( रपोट) दया गया है। आप भी
अपनी चय नत दुकान के लए इस प्रकार का एक प्र तवेदन बना सकते ह।
यही वह नमूना है जसक नकल आपके समूह के प्र तवेदन को करनी है। नीचे पृष्ठ 165 पर मु द्रत प्र तवेदन ज्य का त्य दया है,
और उसके बाद उसम ध्यान दे ने योग्य बात।
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दुकान के प्रकार आपके क्षेत्र म उत्पा दत वस्तुए ँ या प्रदत्त आवश्यक इनपुट्स के प्रकार
संख्या सेवाएँ
कराने क दुकान 13 खाद्यान्न (अनाज), दू ध , बेड डब्बाबंद वस्तुए,ँ शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुए,ँ भंडारण
का स्थान
भोजनालय/फूड 8 पका हुआ भोजन, नाश्ता, पेय कच्ची सामग्री जैसे स ब्जयाँ और फल, गैस, बतन,
स्टॉल पदाथ रसोइया/सहायक
सब्जी वक्रेता 15 ताजी सिब्जयाँ एवं फल ताजा उत्पाद, टोक रयाँ, तराजू, ठे ला या स्टॉल
मोबाइल रपेयर क 4 मोबाइल िरपेयर एवं उससे उपकरण, कलपुज, मोबाइल के अवयव और उनके
दुकान संबंिधत सामग ी काय का ज्ञान एवं कौशल
सैलून/पालर 3 बाल काटना, साज-सज्जा एवं कची, क्र म, स दय उत्पाद, जल, वद्युत
सौंद य से वाएँ
िगने गए कु ल पितष्ठान
= 13 + 8 + 15 + 4 + 3
= 43 दुक ाने ं
यह प्र तवेदन तीन बात दखाता है।
सबसे अ धक संख्या वाली दुकान को सबसे कम पूँजी चा हए। सब्जी वक्रेता सबसे बड़ा समूह ह (43 म से 15, अथात
एक- तहाई से कुछ अ धक)। उनके इनपुट्स ह — टोकरी, तराजू और ठे ला या स्टॉल, जो सूची म सबसे सस्ते ह। मोबाइल
रपेयर क दुकान, जनके लए उपकरण, कलपुज और वशेष ज्ञान चा हए, केवल 4 ह।
प्रत्येक पं क्त म चार कारक पहले से मौजूद ह। भंडारण का स्थान और जल भू म ह; रसोइया/सहायक और मरम्मत करने
वाले का कौशल श्रम एवं मानव पूँजी; तराजू, बतन, ठे ला और कची पूँजी; और प्रत्येक दुकान आरंभ करने वाला दुकानदार
उद्यमी।
एक दुकान का उत्पाद दूसरी का इनपुट है। सब्जी वक्रेता का ताजा उत्पाद भोजनालय के इनपुट म लखा है। यही आपू त
श्रृंखला क शुरुआत है, जसे अध्याय पृष्ठ 178 पर प रभा षत करता है।
स्वयं जाँ चए: अपना प्र तवेदन बनाते समय एक ही न श्चत माग और एक ही दन ली जए, और संख्या तब भी
ल खए जब वह 1 या 0 हो। कसी गाँव क गली म मोबाइल रपेयर क 0 दुकान एक वास्त वक नष्कष है, खाली
स्थान नह ।
प्र.3 लोग को अपने व्यवसाय के लए आवश्यक धन कहाँ से प्राप्त होता है?
वे अपने और अपने नकटतम लोग के धन से आरंभ करते ह, शेष उधार लेते ह। अध्याय तीन ोत बताता है, उसी क्रम म
जस क्रम म व्यवसाय उन तक पहुँचता है।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक
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1. व्य क्तगत बचत, प रवार एवं मत्र। सामान्यतः जब कोई व्य क्त व्यवसाय आरंभ करता है तो धन और सहयोग के प्राथ मक
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ोत यही होते ह — रत्ना ने भी यही कया।
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g ब्याज वह अ त रक्त रा श है
.c एक न श्चत अव ध म ऋण क रा श के साथ-साथ ब्याज का भी भुगतान कया। a
2. कमी पूरी करने के लए बक ऋण। ‘पॉज पॉइंट’ आरंभ करने के लए रत्ना के पास पयाप्त धन नह था, इस लए उसने बक से
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seलेने वाला, ऋण देने वाले को उसका धन एक न श्चत अव ध तक प्रयोग करने के बदले देता है।
ऋण लया। उसने
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agबड़ी कंप नय के लए शेयर बाजार। बड़े व्यवसाय को वस्तार के लए अत्य धक धन चा हए, इस लए वे शेयर (स्टॉक)
ऋण
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बाजार के माध्यम से आम जनता को अपने व्यवसाय के शेयर बेचकर धन जुटाती ह और बदले म लाभ का एक भाग, जसे
लाभांश कहा जाता है, दे ती ह।
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ऋण का एक छोटा उदाहरण a
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िलया गया ऋण = ₹2,00,000 ब्याज दर 12% वािषक
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एक वष का ब्याज = 2,00,000 का 12%
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= (12 ÷ 100) × 2,00,000
a gl = ₹24,000
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लाभांश का एक छोटा उदाहरण
जनता के पास शेयर = 10,00,000ag l a
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घोिषत लाभांश = ₹3 पित शेयर
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कु ल भुगतान = 10,00,000 × 3 = ₹30,00,000 (₹30 लाख)
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क्रम क्य महत्वपूण है: हर अगला चरण अ धक महँगा और अ धक माँग वाला है। बचत नःशुल्क है, कतु
सी मत। ऋण बड़ा है, कतु व्यवसाय चले या न चले, ब्याज स हत समय पर लौटाना ही पड़ता है। शेयर बेचने से
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comसंयंत्र शेयर बाजार से — आवश्यक पूँजी का आकार ही तय l a
सबसे अ धक धन आता है, कतु उससे अनजान लोग को आपके लाभ पर स्थायी अ धकार मल जाता है। इसी लए
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सड़क का ठे ला बचत से चलता है और पेट्रो-रसायन
करता है क उसके लए कहाँ जाना पड़ेs
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गा।
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केश-प्रसाधक (हेयर ेसर) ने प्र शक्षण कहाँ से प्राप्त कया?
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प्रायः कक्षा म नह — कसी ऐसे व्य क्त के साथ अभ्यास करके जसे यह कौशल पहले से आता था। अध्याय क अपनी
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प रभाषा इसका कारण बताती है : कौशल “ कसी ग त व ध या काय को अभ्यास और प्र शक्षण ारा सुचारु रूप से करने क
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क्षमता” है, और प्र शक्षण “ कसी वशेष काय या ग त व ध के लए आवश्यक कौशल को सीखने क प्र क्रया” है।
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कसी चलती हुई दुकान म सहायक के रूप म — पहले बाल धोना और सफाई, एक-दो वष तक व रष्ठ को दे खना, फर स्वयं
कची चलाने क अनुम त। a
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प रवार से — माता- पता या चाचा से, जो वही दुकान चलाते ह। अध्याय भारत के वषय म यही कहता है — ज्ञान का पीढ़ -
दर-पीढ़ हस्तांतरण हुआ और इसी क्रम म नए ज्ञान का सृजन भी हुआ।
कसी अल्पका लक पाठ्यक्रम से — स दय एवं स्वास्थ्य प्र शक्षण संस्थान, आई.ट .आई. या कौशल- वकास कायक्रम, और
उसके बाद नरीक्षण म अभ्यास।
नःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम से, जैसे स्वयं (SWAYAM) पर उपलब्ध ह — अध्याय इसे प्रौद्यो गक ारा कौशल- वकास
तक पहुँच का उदाहरण बताता है।
यह प्रश्न अथशास्त्र के अध्याय म क्य है: क्य क यह श्रम को मानव पूँजी से अलग करता है। दो व्य क्त एक ही
कुस पर आठ घंटे खड़े रह सकते ह — वह समान श्रम है। कतु जसने प्र शक्षण लया है, वह बीस मनट म अच्छा
बाल-कतन कर दे ता है और ग्राहक लौटकर आते ह; यही अंतर मानव पूँजी है, अथात श्रम क गुणवत्ता और दक्षता।
और ध्यान द जए क यह आया कहाँ से — दुकान क पूँजी से नह , सीखने म लगाए गए समय से।
प्र.5 खाद्य- वक्रेताओं (फूड वडस) को खाना बनाना कसने सखाया?
प्रायः पहले घर क रसोई ने, फर कसी और क रसोई म बताए वष ने। खाद्य- वक्रेता उसी परंपरागत री त से सीखते ह
जससे भारत म कौशल हस्तांत रत होता आया है — दे खकर, हाथ बँटाकर और दोहराकर, न क लखी हुई व ध पढ़कर।
घर पर, माता, पता या दाद -नानी से — इसी लए कसी स्टॉल क वशेषता प्रायः कसी क्षेत्र- वशेष का पा रवा रक व्यंजन होती
है।
कसी दूसरे फूड स्टॉल या ढाबे म सहायक बनकर — एक वष तक काटना और धोना, तब कह तवे क जम्मेदारी। ध्यान
द जए क पुस्तक क ता लका म भोजनालय के इनपुट म “रसोइया/सहायक” लखा है — सहायक वस्तुतः प्र शक्षण ले रहा
रसोइया है।
कसी औपचा रक पाठ्यक्रम से — खानपान या होटल प्रबंधन संस्थान, अथवा खाद्य प्रसंस्करण का कौशल पाठ्यक्रम। होटल
का शेफ प्रायः इसी माग से आता है; अध्याय कहता है क रसोइया नया व्यंजन तैयार करता है और इसके लए वशेष ज्ञान एवं
कौशल चा हए।
क्या आप जानते ह? अध्याय इसी प्रकार के हस्तांतरण क बात करता है जब वह कहता है क ज्ञान का पीढ़ -दर-
पीढ़ हस्तांतरण हुआ “और इसी क्रम म नए ज्ञान का सृजन भी हुआ”। कसी वक्रेता क चटनी क व ध इसी
प्र क्रया का छोटा-सा जीवंत उदाहरण है — वरासत म मली, फर उन ग्राहक के अनुसार बदली गई जो वास्तव म
उसी स्टॉल पर रुकते ह।
प्र.6 व्यापा रय को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने क प्रेरणा कहाँ से मली?
व्य क्त अलग-अलग ह, कतु प्रेरणाएँ चार वग म आ जाती ह — और अध्याय उद्यमी का वणन करते हुए इनम से अ धकांश का
नाम लेता है।
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प्रेरणा व्यवसायी के अपने शब्द म अध्याय क भाषा म
कसी समस्या का “इस राजमाग पर स्वच्छ, गरम भोजन कही ं उ द्य मी “सम स्या की पहचान कर उसके नए समाधान पस्तुत
समाधान िमलता ही नही ं था।” करता है”
आजी वका और आय “मेर ी नौकरी चली गई” अथवा “घर की जमीन उ द्य म “लोगों को आिथक गितिविधयों में सिम् मिलत होने का
से सबका पेट नही ं भरता था।” अवसर ” दे ते है ं
स्वतंत्रता और “मैं िकसी के नीचे काम नही ं करना चाहता था” · उ द्य िमता का तात्पय “स्वयं का व्यवसाय आरंभ करना” है
पा रवा रक परंपरा “यह दुक ान मेरे िपताजी की थी।”
संतु ष्ट और सेवा “लोग लौटकर कहते है ं िक खाना घर जैस ा उ द्य िमयों को “अपने सपनों को साकार होते और लोगों की
लगा।” से वा करते दे ख गहरी संतिु ष्ट की अनुभिू त होती है”
रत्ना अध्याय का अपना उदाहरण है। उसका एक सपना था, उसने शहर के बाहरी क्षेत्र म वह स्थान चुना जहाँ राजमाग के यात्री रुकते
ह, और उसे सफल बनाने क योजना बनाई। पाँच वष बाद ‘पॉज पॉइंट’ स्वा दष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले भोजन के लए प्र सद्ध है
तथा सात लोग को रोजगार दे ता है — अथात उसके एक नणय ने सात आजी वकाएँ भी बनाईं।
केवल लाभ इसका दुबल स्पष्टीकरण क्य है: य द प्रेरणा केवल धन होती, तो कोई व्यवसाय आरंभ ही न करता
— ऋण का ब्याज न श्चत है, जब क नई दुकान क आय अ न श्चत। इस जो खम को स्वीकार करने का साहस इस
वश्वास से आता है क वह व्य क्त कसी समस्या को वतमान से बेहतर सुलझा सकता है। यही वश्वास व्यवसाय क
असली आरं भक पूँजी है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 166
उत्पादन के कारक — भू म (प्राकृ तक संसाधन)
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अपने प्र तवेदन का पुनरावलोकन कर। आपक सूची म से कन वस्तुओं को ‘भू म’ क श्रेणी म रखा जा सकता
है?
वह सब कुछ जो प्रकृ त ने दया, मनुष्य ने नह । अध्याय क वस्तृत प रभाषा स्मरण र खए — अथशास्त्र म ‘भू म’ म केवल
भौगो लक भूखंड नह , अ पतु मृदा, वन, जल, वायु, सूय का प्रकाश, ख नज, तेल और प्राकृ तक गैस भी स म्म लत ह। पृष्ठ 165 क
ता लका पर यही कसौट लगाइए।
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प्र तवेदन क वस्तु भू म? कारण
शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुए;ँ ताजा उत्पाद; ताजी हाँ — भूिम - यह सब म ृद ा में, जल और सूय के पकाश से उगता है, अथवा भूिम पर
स ब्जयाँ एवं फल; कच्ची सामग्री जैसे स ब्जयाँ आधािरत पले पशुओ ं से आता है
और फल; खाद्यान्न, दूध
भंडारण का स्थान; दुकान का प रसर; वह हाँ, भूखंड के िलए भूखंड भूिम है; उस पर बना भवन पूँजी है। दुक ान का िकराया वस्तुतः
जगह जहाँ ठे ला या स्टॉल खड़ा होता है दोनों का िमला-जुल ा भुग तान है
गैस (रसोई गैस) हाँ पाकृ ितक गैस और तेल का नाम अध्याय में पाकृ ितक संस ाधनों में है
जल हाँ भूिम की पिरभाषा में सीधे सिम्मिलत
वद्युत आंिशक रूप से िवद्य तु मनुष्य उत्पन्न करता है, िकं तु उसका ोत पाकृ ितक संस ाधन
है — कोयला, बाँध का जल या सूय का पकाश। सच्चा उत्तर यह है
िक यह भूिम से बना हुआ एक उत्पािदत इनपुट है
टोक रयाँ, तराजू, ठे ला या स्टॉल, बतन, कची, नही ं — पूँजी वस्तुओ ं एवं से वाओं के उत्पादन में पयुक्त मानव िनिमत संस ाधन
उपकरण, कलपुज, कंप्यूटर
रसोइया/सहायक; मोबाइल के अवयव को नही ं — श्रम एवं पिरश्रम, और उस पिरश्रम के पीछे का कौशल
सँभालने का ज्ञान एवं कौशल मानव पूँजी
डब्बाबंद वस्तुए,ँ क्र म, स दय उत्पाद नही ं — पूँजी इन्हे ं भूिम से िमली कच्ची सामग ी से िकसी और कारखाने में बनाया
क्र
( य िकया गया गया, तब यह दुक ान इन्हे ं खरीदकर लाई
माल )
कुछ पं क्तयाँ वास्तव म क ठन क्य ह: क्य क अ धकांश इनपुट्स ऐसे प्राकृ तक संसाधन ह जो पहले ही कसी
के हाथ से गुजर चुके ह। खेत का टमाटर भू म है; कतु ट्रक क टोकरी म रखा वही टमाटर श्रम, वाहन और ईंधन भी
अपने भीतर रखता है। अथशास्त्री इसे इस प्रश्न से सुलझाते ह क भुगतान कस बात का हो रहा है — भूखंड का
कराया इस लए है क उसे कसी ने बनाया नह , जब क टोकरी का मूल्य इस लए क उसे कसी ने बनाया। य द
आपके समूह म इस पर बहस हुई तो संकोच न क जए; अध्याय के अंत का प्रश्न 1 आपसे यही क ठनाइयाँ पूछता है।
संकेत: छाँटने का एक शीघ्र नयम, जो लगभग हर पं क्त पर लागू होता है — य द मनुष्य कभी हुआ ही न होता, तब
भी क्या यह होती? मृदा, जल, सूय का प्रकाश, गैस : हाँ। तराजू, क्र म, कलपुजा : नह ।
आइए वचार कर — पृष्ठ 168
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मानव पूँजी के सहयोगी कारक — स्वास्थ्य सेवा
आइए वचार कर
प्र.1 आधारभूत संरचनाएँ एवं स्वास्थ सेवा संबंधी व्यवस्थाएँ, जैसे— अस्पताल, प्राथ मक च कत्सा कद्र, च कत्सक,
औषधालय, रोग परीक्षण कद्र आ द मानव पूँजी को वक सत करने म कस प्रकार अपनी भू मका नभाते ह?
ये उन दो वस्तुओं क रक्षा करती ह जनसे मानव पूँजी बनती है — सीखने का समय और काय का समय। अध्याय का तक
दो चरण म चलता है : अच्छा स्वास्थ्य संज्ञानात्मक वकास म सहायता करता है, जससे बच्चे नय मत रूप से वद्यालय जाते ह और
अ धक प्रभावपूण ढं ग से सीखते ह; और स्वस्थ श्र मक शारी रक एवं मान सक रूप से अपना श्रेष्ठ योगदान दे ते ह — वे कम समय म
अ धक काय करते ह, सृजनात्मक होते ह और स्वास्थ्य कारण से अवकाश नह लेते।
व्यवस्था का अंग यह मानव पूँजी के लए वास्तव म क्या करता है
प्राथ मक च कत्सा कद्र उपचार, टीकाकरण और पोषण संबंध ी परामश गाँव से पैद ल दू र ी पर ले आते है,ं िजससे छोटा रोग
बड़ी अनुपिस्थित बनने से पहले ठीक हो जाता है
च कत्सक वे िशकायत को रोग-िनदान में बदलते है।
ं वे स्वयं मानव पूँजी की उपज है ं — वष ं की िशक्षा और
अस्पताल का पिशक्षण — इसिलए यहाँ िकया गया िनवेश आगे कई ग नु ा लौटता है
रोग परीक्षण कद्र रोग को आरंभ में ही पकड़ ले ते है,ं जब उपचार सस्ता होता है और रोगी के कु छ िदन जाते है,ं महीने
नही ं
औषधालय बताई गई दवा घर के पास उपलब्ध और सुल भ बनाते है;ं जो पच भरी न जा सके , वह िकसी को
स्वस्थ नही ं करती
आधारभूत संरचना — सड़क, सड़क रोगी को अस्पताल और बच्चे को िवद्यालय तक ले जाती है; स्वच्छ जल एवं स्वच्छता रोग को
प रवहन, स्वच्छ जल, स्वच्छता, वद्युत, पहले ही रोक दे ते है;ं िवद्य तु और इंटरनेट िवद्याथ को अँधे रे के बाद पढ़ ने और स्वयं (SWAYAM)
इंटरनेट का पाठ क्रम करने दे ते है ं
यह केवल दयालु नह , आ थक तक क्य है: अध्याय उत्पादकता को “एक न श्चत समयाव ध म उत्पादन क
मात्रा” कहता है। स्वास्थ्य दन के घंटे नह बढ़ाता; वह यह बदलता है क उनम से कतने घंटे व्य क्त वास्तव म काम
म ला सकता है, और कतनी अच्छ तरह। जो श्र मक वष म पंद्रह दन टाले जा सकने वाले रोग म खो दे ता है,
उसका लगभग आधा महीना उत्पादन से नकल जाता है — और बच्चे क हा न इससे भी बड़ी है, क्य क एक वष
क पढ़ाई पर अगला वष टका होता है।
जोड़कर दे खए: इसी लए पृष्ठ 170 का जनां कक य लाभांश “गुणवत्तापूण शक्षा, स्वास्थ्य, प्र शक्षण एवं कौशल
प्र शक्षण” पर एक साथ नभर है। अस्वस्थ युवा जनसंख्या लाभांश नह , भार बन जाती है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 169
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक
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सामा जक एवं सांस्कृ तक प्रभाव
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आइए पता लगाएँ
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a s em एक लघु प्रयोग करते ह। अपने प रवार एवं पड़ोस के 10 कायरत वयस्क क एक सूची बनाएँ। उनसे उनके
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प्र.1
कायस्थल क संस्कृ त का वणन करने के लए कह। इस ववरण को अपने सहपा ठय के साथ साझा कर। आपने
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क्या जाना? ऐसे कौन-से वशेषण ह जो अ धकतर प्रयोग कए गए ह।
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g है, इस लए उसे व वध बनाइए — एक दुकानदार, एक कारखाना या नमाण
इसे ठ क से कैसे कर। दस व्य क्त एक छोटा प्रaतदश
श्र मक, एक शक्षक, एक चालक, एक कायालय कमचारी, एक स्वरोजगार वाला, और कम-से-कम चार म हलाएँ। सबसे एक जैसे
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तीन खुले प्रश्न पू छए और उनके अपने शब्द ल खए :
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2. वहाँ कोई.cभूल कर दे तो क्या होता है? g l
1. अपने कायस्थल का वणन तीन शब्द म क जए।
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a फर पूरी कक्षा क सू चयाँ मलाकर सरलता से ग नए क कौन-सा वशेषण कतनी बार आया। यही गनती आपका नष्कष है।
वहाँ कोई आपको कुछ नया सखाता है? कौन, और कैसे?
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ये मानव पूँजी.क
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aश्रमs की संस्कृित — अध्याय में सबसे पहले िगनाया गया गणु
प्रायः अ धक आने वाले वशेषण म क्या बताते ह
व्यस्त, पिर श्रमी, समयबद्ध, अनुशािसत a g l
किठन
कौशल अनौपचािरक रूप से हस्तांतिरत होते है;ं नए श्रिमक शीघ सीखते है ं
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सहयोगी, िम त्र वत, पिरवार जैस ा
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कठोर , ल क्ष्य-आधािरत, दबावपूण, थकाने
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उत्पादन अिधक हो सकता है, िकं तु रोग और भूले ं भी बढ़ ती है ं — पष्ृ ठ 168 का स्वास्थ्य वाला तक
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उलटा चलते हुए
agl सुर िक्षत/असुर िक्षत, स्वच्छ/गंद ा सीधे िनयोक्ता का उत्तरदाियत्व — “उिचत पािरश्रिमक और काय पिरिस्थितयाँ” (पष्ृ ठ 181)
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नमूना उत्तर: “हमारी कक्षा क 300 प्र त क्रयाओंom l a
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म सबसे अ धक आने वाले शब्द थे — व्यस्त, प रश्रमी और
सहयोगी। बहुत कम लोग ने कहा क उन्हem
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कसी व रष्ठ को दे खकर सीखा। सुgधlार शब्द लगभग कसी ने प्रयोग नह कया। हमने नष्कष नकाला क हमारे क्षेत्र
कायस्थल पर औपचा रक प्र शक्षण मला; अ धकांश ने कहा क उन्ह ने
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म प रश्रम क संस्कृ त तो प्रबल है, कतु सोच-समझकर कए जाने वाले सतत सुधार क संस्कृ त दुबल है।”
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ag बारी कय पर ध्यान एवं गुणवत्ता
.c— ‘सतत सुधार’, 1940 के दशक के मध्य से — और जमनी क समयबद्धता,
अध्याय यह क्य पूछता है: ता क ‘काय-संस्कृ त’ जैसा अमूत वचार मापने योग्य बन जाए। जापान का काइजेन
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कोई कानून या मशीन नह ह। वे बस वही ह जो बड़ी संख्या म साधारण श्र मक प्र त दन करते ह — और आपके दस
साक्षात्कार ठ क यही मापते ह। य द आपके सवक्षण म सुधार शब्द एक बार भी न आए, तो यह आपके आस-पास
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क मानव पूँजी के वषय म एक वास्त वक और उपयोगी खोज है।
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प्र.2 ‘अतीत के चत्रपट’ वाले अध्याय म आपने भारत म अनेक शता ब्दय से चले आ रहे कला एवं पुरातत्व के
उदाहरण दे खे। आपक दृ ष्ट म ऐसे कौन-से कारक रहे ह गे जन्ह ने नमाणकताओं को अपने काय म इतनी
उच्चस्तरीय दक्षता प्राप्त करने म सक्षम बनाया होगा। समूह बनाकर चचा कर और पूरी कक्षा के साथ साझा कर।
इस स्तर क उत्कृष्टता कसी एक प्र तभा क दे न नह थी; वह मानव पूँजी क एक पूरी व्यवस्था थी। इसी अध्याय का ‘प्राचीन
भारत क कौशल परंपरा’ वाला भाग पाँच कारक दे ता है, और इनम से प्रत्येक उसी से जुड़ता है जो आप इस अध्याय म पहले पढ़
चुके ह।
कारक अध्याय क्या कहता है यह वचार आपने कहाँ दे खा
ल खत तकनीक िशल्पशास्त्र में मूितकला, िचत्रकला, भवन-िनम ण, काष्ठकारी और िशक्षा — ज्ञ ान िलखकर सुर िक्षत,
मानक आभूषण िनम ण के िवस्ततृ िनदश थे; मूितकला संबंध ी ग ंथों में शारीिरक तािक उसे बार -बार खोजना न पड़े
मुद ा, रंग ों, माप और अनुपात का सटीक िववरण िमलता है
पीढ़ -दर-पीढ़ ज्ञान का पीढ़ ी-दर-पीढ़ ी हस्तांतरण हुआ और इसी क्रम में नए ज्ञान का पिशक्षण एवं िशष्य-परंपरा —
हस्तांत रत और आगे स ृजन भी हुआ । िशल्पकारों के पिरवारों की अनेक पीिढ़ यों ने शतािब्दयों जीवनकालों में संिचत होती मानव
बढ़ाया गया ज्ञान तक मंिदर िनम ण के िलए काय िकया पूँजी
काय को अपण मानना काय अपने स्वभाव की अिभव्यिक्त और पूणता के िलए पयत्न का साधन सामािजक एवं सांस्कृ ितक पभाव
था, दे वता या पाप्तकत के पित अपण; इसे पूण समपण के साथ िकया — वही स्थान जो जापान के िलए
जाता था काइजेन रखता है
कला और वद्या का वस्तुओ ं के िनम ण में कला एवं ज्ञान का अद् भतु िमश्रण सिम्मिलत होता न ऐसा सुंद र िडजाइन जो िटके
मश्रण था नही,ं न ऐसी मजबूत रचना िजसे
कोई दे खना न चाहे
उपकरण और तकनीक काय में पयुक्त उपकरणों (पौद्योिगकी के साधन) की पूजा की जाती थी; पौद्य ोिगकी — उ त्पादन में सहायक ,
का सम्मान यह परंपरा आज भी िवश्वकम पूजा या आयुध पूजा के रूप में चल रही है पष्ृ ठ 176
सबसे प्रभावशाली प्रमाण वह है जो ‘इसे अनदे खा न कर’ म है — उन शल्पकार प रवार ने अपने कौशल का प्रयोग बना इस
अपेक्षा के कया क वे इसका प रणाम दे ख पाएँगे; एक मं दर एक जीवनकाल से भी अ धक समय ले सकता था। काय को पूजा
मानकर, नय मत अभ्यास करते हुए और नई तकनीक को सीखते हुए वे उत्कृष्टता क खोज म लगे रहे।
यह अथशास्त्र के अध्याय के लए क्य महत्वपूण है: यह सबसे प्रबल प्रमाण है क मानव पूँजी सचमुच पूँजी है।
उन नमाणकताओं के पास वत्तीय पूँजी लगभग नह थी और प्रौद्यो गक अत्यंत सरल। उनके पास था — सं चत
कौशल, सट क मानक और ऐसी संस्कृ त जो घ टया काम स्वीकार नह करती थी। इतने भर से वे स्मारक बने जो
आपने ‘अतीत के चत्रपट’ म पढ़े । इसम एक कारक अपनी ओर से जो ड़ए, जसक ओर पुस्तक संकेत करती है —
नरंतर राजाश्रय एवं मं दर का संरक्षण, जसने इन शल्पी प रवार को शता ब्दय तक बाजार दया, और
इसी लए वह कौशल आगे स पने योग्य बना रहा।
आइए वचार कर — पृष्ठ 170
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मानव पूँजी क चुनौ तयाँ
आइए वचार कर
प्र.1 राजक य वद्यालय के कक्षा 8 के वद्याथ हष को दो वष पूव अपना वद्यालय छोड़ना पड़ा क्य क उसके पताजी
क नौकरी चली गई थी। वद्यालयी शक्षा के दो वष क हा न ने शवाय को कैसे प्रभा वत कया होगा?
वे दो वष जीवन भर हर नौकरी के आवेदन म उसका पीछा करगे। वद्यालय छू टने का अथ केवल कम जानना नह है; इसका
अथ है क शक्षा और प्र शक्षण जस मानव पूँजी का नमाण करने वाले थे, वह बनी ही नह — और उस पर टक हर बात क ठन हो
जाती है।
वह क्या खोता है उसका प रणाम
बु नयाद अ धगम कक्षा 8 के आस-पास ही पढ़ ना, गणना और तक अन्य िवषयों के औजार बनते है।
ं इनका छू टना दो वष के ज्ञान की हािन
नही ं, अिपतु आगे के वष ं को असीखने योग्य बना दे ना है, क्योंिक हर वष िपछले वष पर िटका होता है
प्रमाणपत्र और अिधकांश पिशक्षण पाठ क्रमों के िलए िवद्यालयी पमाणपत्र चािहए। स्वयं (SWAYAM) के िनःशुल्क पाठ क्रम भी
पात्रता कक्षा 9 और उससे आगे के िलए बने है।
ं पमाणपत्र के िबना कौशल के ार बंद रह जाते है ं
कौशल, और वह पायः अकु शल काय तक सीिमत रह जाएगा — दै िनक मजदू र ी, सहायक का काम — जो कम वेतन दे ता है,
इस लए आय असुर िक्षत है और िजसमें पिशक्षण भी कम िमलता है
मोल-भाव क श क्त जो श्रिमक अनुबंध या सुर क्षा-सूचना नही ं पढ़ सकता, उसे कम पािरश्रिमक दे ना सरल है और दुघ टना की संभावना
और सुरक्षा अिधक
अगली पीढ़ कम आय के कारण संभावना बढ़ जाती है िक अगली बार संक ट आने पर उसके अपने बच्चे भी िवद्यालय छोड़ें। इस
पकार एक नौकरी का जाना एक चक्र बन जाता है
और यह हा न केवल उसक नह है। अध्याय कहता है क भारत का जनां कक य लाभांश इस बात पर नभर है क व्य क्तय को
गुणवत्तापूण शक्षा, स्वास्थ्य, प्र शक्षण एवं कौशल प्र शक्षण तक पहुँच मले। प्रत्येक ॉपआउट उस लाभांश म से घटा हुआ एक युवा
है — और भारत को इसे लाख से गुणा करना पड़ता है।
यह नराशाजनक क्य नह है: मानव पूँजी पुनः बनाई जा सकती है, बस धीमे और अ धक लागत पर। मुक्त
वद्यालय एवं सेतु पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र लौटा सकते ह; नेशनल क रयर स वस उसे काम से जोड़ सकती है; कौशल
पाठ्यक्रम उसे एक हुनर दे सकता है। इस प्रश्न का उद्दे श्य भ वष्यवाणी नह , यह दखाना है क बच्चे को वद्यालय म
बनाए रखना बाद क भरपाई से सस्ता है।
प्रश्न पर एक टप्पणी: पाठ्यपुस्तक पहली पं क्त म वद्याथ का नाम हष और दूसरी म शवाय लखती है। यह एक
ही वद्याथ है — मुद्रण क चूक है। उत्तर उसी वद्याथ के वषय म ल खए जसने वद्यालय छोड़ा।
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प्र.2 जब कसी व्यवसाय म आवश्यक कौशलयुक्त श्र मक नह मलते तो उन्ह कन समस्याओं का सामना करना
पड़ता है?
व्यवसाय के पास भू म, पूँजी और प्रौद्यो गक तो रह जाती है, कतु उन्ह ठ क से चलाने वाला कोई नह । यही अध्याय का
सामान्य नयम एक कारक पर लागू होता है — कारक क अनुप स्थ त या दुरुपयोग क स्थ त म उत्पादन क गुणवत्ता प्रभा वत हो
सकती है या उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है।
उत्पादन घटता या रुकता है। संचालक के अभाव म मशीन खड़ी रहती ह; आदे श दे र से पूरे होते ह; कभी-कभी पूरी पाली रद्द
करनी पड़ती है। यही ‘अकुशल’ और ‘ठप’ व्यवसाय का अंतर है।
गुणवत्ता गरती है और अपव्यय बढ़ता है। अप्र श क्षत श्र मक कच्चा माल बगाड़ता है, औजार क्ष तग्रस्त करता है और
दोषपूण वस्तुएँ बनाता है, जन्ह फकना पड़ता है — अतः हर अच्छ वस्तु क लागत बढ़ जाती है।
दुघटनाएँ बढ़ती ह। सुरक्षा प्र क्रयाएँ प्र शक्षण का ही भाग ह। जहाँ प्र शक्षण नह , वहाँ जो खम सीधे श्र मक पर आ जाता है।
प्र शक्षण क लागत बढ़ती है। अब वह काम व्यवसाय को स्वयं करना पड़ता है जो शक्षा-व्यवस्था नह कर पाई — यही कारण
है क अध्याय पृष्ठ 181 पर “कौशल- वकास और प्र शक्षण” को व्यवसाय का उत्तरदा यत्व बताता है।
दुलभ कौशल का मूल्य चढ़ जाता है। कुछ कुशल व्य क्त कह अ धक वेतन माँग सकते ह और प्र तस्पध के पास जा सकते ह
— लागत बढ़ती है, कमी फर भी बनी रहती है।
नई प्रौद्यो गक अपनाई नह जा सकती। ऐसी कंप्यूटर- नयं त्रत मशीन खरीदने का कोई अथ नह जसे पूरे क्षेत्र म कोई चला
न सके। व्यवसाय पुरानी पद्ध तय म अटका रहता है जब क प्र तस्पध आगे नकल जाते ह।
व्यवसाय स्थान बदल सकता है। उद्योग वह लगते ह जहाँ कौशल है। जो क्षेत्र कुशल श्र मक नह दे पाता, वह नवेश खो दे ता
है और उसके साथ वे रोजगार भी जनक उसे आवश्यकता थी।
गहरी बात: कौशल क कमी भत क समस्या नह , उत्पादन के कारक क समस्या है। शेष तीन कारक चौथे के बना
न ष्क्रय ह। इसी लए अथशास्त्री वद्यालय , आई.ट .आई. और स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय को मशीन पर होने वाले
व्यय क भाँ त नवेश मानते ह — यह उस इनपुट का नमाण है जसके बना मशीन चल ही नह सकती।
आइए वचार कर — पृष्ठ 170
जनां कक य लाभांश — व भन्न काय का मूल्य
आइए वचार कर
प्र.1 क्या कुछ काय अन्य काय से अ धक महत्वपूण ह? क्या होगा य द कोई सड़क क सफाई न करे, कूड़ा न उठाए,
कसान फसल उगाना बंद कर द, च कत्सक रो गय के उपचार के लए उपलब्ध न ह और इसी प्रकार क अन्य
प र स्थ तयाँ उत्पन्न हो जाएँ।
जस भी काय पर समाज नभर है, वह महत्वहीन नह — और प्रश्न स्वयं जो कसौट सुझाता है, वही इसे सद्ध कर दे ती है।
कसी भी काय से पू छए : य द यह रुक जाए तो क्या होगा? जन काय को लोग सबसे नीचे रखते ह, उन्ह क अनुप स्थ त सबसे
शीघ्र अनुभव होती है।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
य द यह काय रुक कतनी शीघ्र पता क्या होगा
जाए चलेगा
सड़क क सफाई और कु छ ही िदनों में नािलयाँ अवरुद्ध, मिक्खयाँ और चूहे, दू िषत जल, रोगों का पकोप — और िफर बच्चे
कूड़ा उठाना िवद्यालय से तथा श्रिमक काय से दू र
कृ ष एक ऋतु में सवत्र खाद्य संक ट। भोजनालय, िकराने की दुक ाने ं और सब्जी िवक्रेता — पष्ृ ठ 165
की पूर ी तािलका — के पास बेचने को कु छ नही ं बचेग ा
च कत्सक और तत्काल उपचार योग्य रोग पाणघातक हो जाएँग े; वह स्वास्थ्य से वा ही समाप्त हो जाएगी जो मानव
प रचा रकाएँ पूँजी बनाती है
वद्युत, जलापू त, कु छ घंटों में कारखाने, अस्पताल, िवद्यालय और दुक ाने ं एक साथ रुक जाएँग े — ये सबके इनपुट है ं
प रवहन
तो फर लोग को कुछ काय अ धक महत्वपूण लगते क्य ह? प्रायः वेतन और प्र तष्ठा के कारण, और ये दोन महत्व से भन्न
वस्तु मापते ह। वेतन मुख्यतः दुलभता दशाता है — प्र शक्षण म कतने वष लगते ह और कतने कम लोग वह काय कर सकते ह।
हृदय शल्य च कत्सक को सफाईकम से कह अ धक इस लए मलता है क एक शल्य च कत्सक बनने म पंद्रह वष लगते ह,
इस लए नह क नगर सफाईक मय के बना अ धक दन चल सकता है। दुलभता को महत्व समझ लेना ही वह भूल है जसक ओर
यह बॉक्स ध्यान दलाता है।
वास्त वक उत्तर परस्पर- नभरता है: अध्याय कहता है क उत्पादन के कारक पहेली के टु कड़ के समान जुड़ते ह,
और यही बात काय पर भी लागू होती है। शल्य च कत्सक तब तक शल्य क्रया नह कर सकती जब तक कसी ने
कक्ष स्वच्छ न कया हो, कसी ने वद्युत न बनाई हो, कोई एंबुलस न चलाता हो और कसी ने वह अन्न न उगाया हो
जो उसने खाया। हर काय कसी दूसरे के काय का इनपुट है। आपू त श्रृंखला का यही अथ है, और इसी लए
को वड-19 के व्यवधान ने उत्पादन एक साथ हर जगह रोक दया था।
स्मरण र खए: अध्याय का ‘प्राचीन भारत क कौशल परंपरा’ वाला भाग कहता है क काय स्वयं “अपने स्वभाव क
अ भव्य क्त और पूणता के लए प्रयत्न” तथा “दे वता या प्राप्तकता के प्र त अपण” था — यह दृ ष्ट काय को उसके
पद से नह , उसम लगाए गए समपण से मापती है। उ चत माँग यह नह क सभी काय का वेतन समान हो, अ पतु
यह क सभी श्र मक को उ चत पा रश्र मक, सुर क्षत प र स्थ तयाँ और सम्मान मले — वही उत्तरदा यत्व जो अध्याय
पृष्ठ 181 पर गनाता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 172
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक
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प्राचीन भारत क कौशल परंपरा — सले हुए जहाज
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आइए पता लगाएँ
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a s emऐसा क्य सोचते ह क उत्पादन क स्वदे शी तकनीक म अत्य धक गरावट आ चुक है? कक्षा म चचा कर।
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प्र.1
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क्य क जो बाजार उनका मूल्य चुकाता था, वह समाप्तm .
s e हो गया; और जब कोई शल्प कमाना बंद कर दे ता है, तो उसे आगे
a g la वस्तार से देता है : 16व शताब्द म हद महासागर म यूरोपीय आगमन के
पहुँचाने वाली कड़ी टू ट जाती है। अध्याय एक उदाहरण
पश्चात सले हुए जहाज नमाण क कला का पतन धीरे-धीरे हुआ, और अब यह तकनीक केवल मछली पकड़ने वाली छोट नाव के
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नमाण म प्रयुक्त होती है।
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कारण यह कैसे काम करता है
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बाजार का लुप्त भारतीय 2000 वष से अिधक समय से िसले हुए जहाजों का पयोग िहंद महासागर में समुद ी व्यापार और सांस्कृ ितक
a g होना आदान-पदान के िलए करते थे। जब यूर ोपीय शिक्तयों ने उस समुद ी व्यापार पर िनयंत्र ण कर िलया, तो बड़े भारतीय
जहाजों की माँग ही िगर गई — और िजस तकनीक का कोई खरीदार न हो, उसका अभ्यास बंद हो जाता है
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लगता है, इसिलए वह चाहे िकतनीm
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बड़े पैमाने के कारखाने की वस्तु पित इकाई सस्ती और बड़ी मात्रा में उपलब्ध होती है। हस्तिनिमत वस्तु में पित इकाई कही ं अिधक श्रम
उत्पादन से
a s e भी अच्छी हो, मूल्य में िटक नही ं पाती
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प्र तस्पधा
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नई साम ी और कीलों से जुड़े, िफर लोहे और इस्पात के , और आज फाइबरग्लास के ढाँचों ने िसले हएु काष्ठ-प ों की जगह ले ली;
मशीन से बना धागा हाथ के धागे की जगह और कृ ित्रम रंग पाकृ ितक रंग ों की जगह आ गए
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व धयाँ
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gनही ं बचता
कड़ी .टूcट िकसी िशल्प को सदा के िलए समाप्त कर सकती है, क्योंिक िसखाने वालाaही
हस्तांतरण क यह ज्ञान पीढ़ ी-दर-पीढ़ ी चलता था। आय घटते ही अगली पीढ़ ी दू स रा काम अपना ले ती है — और एक छू टी हुई पीढ़ ी
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agl बहुत कुछ लखा कु छ िशल्पों के पास िशल्पशास्त्र जैसे ग ंथ थे, िकं तु अिधकांश तकनीक कारीगर के हाथों में ही रहती थी। िबना िलखा ज्ञान
नह गया अंितम कारीगर के साथ चला जाता है
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omऔर हस्तिनिमत को पुराना मानने लगे, और िशल्प का काम पायः कम आय वाला
cिु नक g l a
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बदलती रु च और क्रेता मशीन-िनिमत वस्तु को आध
सामा जक प्र तष्ठा
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था, इसिलए पिरवार उससे बाहर िनकल गए
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इसे केवल एक दुखद कथा नह , आ थक समस्या क तरह प ढ़ए: कोई तकनीक तभी जी वत रहती है जब चार
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कारक उसक ओर बहते रह — मूल्य चुकाने वाला बाजार, उसे सीखने को तैयार श्र मक, सामग्री के लए पूँजी, और
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.cपुनज वत कैसे कर, और अध्याय एक उपाय बताता भी है : त्रआयामी मुaद्रgण (3-डी प्र टग) बड़े पैमाने पर
उसे बेचने के लए कोई संगठनकता। इनम से एक भी टू टे तो शल्प मर जाता है। इससे यह भी पता चलता है क उसे
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हथकरघा उत्पाद तैयार करके वस्त्र क्षेत्र क लुप्त होती कला-शै लय को पुनज वत कर सकती है। जस प्रौद्यो गक ने
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कसी शल्प को हटाया, वही कभी-कभी उसे बाजार लौटा भी दे ती है।
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क्या आप जानते ह? क ल के स्थान पर डो रय से सले जाने के कारण ये ढाँचे लचीले बनते थे, और इसी लए हद
महासागर म उनका आवागमन सरल था — लचीला ढाँचा लहर और प्रवाल भ त्तय का धक्का सोख लेता है, टू टता
नह । यह तकनीक पछड़ी नह थी; अपने समुद्र के लए उपयुक्त थी।
प्र.2 अपने क्षेत्र क कुछ ऐसी तकनीक और उत्पाद को ढूँ ढ़ जनम मानव श्रम एवं कौशल का उपयोग हुआ हो। चत्र
एवं पुस्तक का प्रयोग कर कक्षा म इनक सं क्षप्त व्याख्या कर।
इसे अ े ढं ग से कैसे कर। कसी प्र सद्ध शल्प के स्थान पर एक ऐसा उत्पाद चु नए जो सचमुच आपके पास बनता हो, और उसके
बनाने वाले से म लए। आपक प्रस्तु त छह प्रश्न के उत्तर इसी क्रम म दे —
1. यह क्या है और कस काम आता है?
2. कच्चा माल क्या है और वह कहाँ से आता है? (यही इसम न हत भू म है।)
3. कच्चे माल से तैयार वस्तु तक के चरण क्या ह? इन चरण का प्रवाह- चत्र बनाइए, जैसे चत्र 7.23 मोबाइल फोन के लए
बनाता है।
4. कौन-से औजार लगते ह और वह कौशल सीखने म कतना समय लगता है? (यही पूँजी और मानव पूँजी है।)
5. बनाने वाले को कसने सखाया, और क्या अगली पीढ़ इसे सीखेगी?
6. अब इसे कौन खरीदता है, और माँग बढ़ रही है या घट रही है?
अध्याय स्वयं अपने चत्र म दो ऐसे उत्पाद दखाता है — बाँस एवं बत के उत्पाद, अरुणाचल प्रदे श ( चत्र 7.12) और मृदा के
बतन, दल्ली ( चत्र 7.14)।
नमूना उत्तर — नीली म के बतन (ब्लू पॉटरी), जयपुर, राजस्थान: “ब्लू पॉटरी म म होती ही नह । इसका
मश्रण क्वाट् ज का चूण, पसा हुआ काँच, मुल्तानी म , सुहागा, ग द और जल से बनता है — अथात इसका भू म
वाला इनपुट पूरी तरह ख नज है। इसे प्लास्टर ऑफ पे रस के साँच म ढाला जाता है, सुखाया जाता है, फर हाथ से
कोबाल्ट-ऑक्साइड क नीली चत्रकारी क जाती है, उस पर काँच क परत चढ़ाकर लगभग 800 डग्री से ल्सयस
पर एक ही बार पकाया जाता है। हमारे कारीगर श्री राम कशन ने यह अपने पताजी से सात वष म सीखा; उनके
अनुसार सबसे क ठन कौशल हाथ से क जाने वाली चत्रकारी है, जो कसी कक्षा म नह सखाई जा सकती। उनके
औजार साधारण ह — साँचे, ब्रश और भ — इस लए पूँजी कम, कतु मानव पूँजी बहुत अ धक है। वे अ धकतर
पयटक और ऑनलाइन ग्राहक को बेचते ह, इस लए माँग फर बढ़ रही है, कतु उनक गली के बारह प रवार म से
अब केवल दो ही यह काम करते ह।”
यह अभ्यास वास्तव म क्या सखाता है: यह क हस्त शल्प म मूल्य श्रम और मानव पूँजी म बसता है, मशीन म
नह — और इसी कारण ऐसे क्षेत्र श्रम-प्रधान कहलाते ह, जैसा पृष्ठ 178 बताता है। अपने प्रवाह- चत्र को दे खए
और ग नए क कतने चरण मशीन कर सकती है। ब्लू पॉटरी म उत्तर लगभग शून्य है — यही कारण है क वह
बहुमूल्य है, और यही कारण है क वह संकट म है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 172
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पूँजी
प्र.1 कतु व्यवसाय को पूँजी कहाँ से प्राप्त होती है?
तीन ोत से, और एक न त आकार-क्रम म। पहले यह स्मरण क जए क कसका भुगतान करना है : पूँजी का अथ है धन
और मानव न मत संसाधन जो वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन म उपयोग होते ह — मशीन, औजार, उपकरण, वाहन, व डग
काट् स, कंप्यूटर, दुकान, कारखाने और कायालय भवन। यह सब एक भी रुपया कमाने से पहले जुटाना पड़ता है।
ोत कौन इसका उपयोग करता है व्यवसाय को इसक क्या क मत चुकानी पड़ती है
व्य क्तगत बचत, व्यवसाय आरंभ करने वाले व्यिक्त के िलए औपचािरक रूप से कु छ नही,ं िकं तु रािश सीिमत होती है और जोिखम
प रवार एवं मत्र सामान्यतः पाथिमक ोत — रत्ना ने इसी पिरवार उठाता है
से आरंभ िकया
बक ऋण रत्ना के पास पय प्त धन नही ं था, इसिलए ब्याज — ऋण ले ने वाले ारा ऋण दे ने वाले को उसका धन एक
उसने कमी पूर ी करने के िलए बैक
ं से ऋण िनिश्चत अविध तक पयोग करने के बदले दी जाने वाली रािश, जो ऋण
िलया की िक स्त के साथ चक
ु ाई जाती है
शेयर बाजार िवस्तार के िलए अत्यिधक धन चाहने वाली लाभांश — कं पनी ारा अपने शेयरधारकों को िनयिमत रूप से लाभ में
बड़ी कं पिनयाँ इसे शेयर बेचकर जनता से से िदया जाने वाला अंश
जुटाती है ं
व्यवसाय प्रतीक्षा करके बचत क्य नह करता: क्य क पूँजी पहले चा हए। जब तक रसोई के उपकरण न खरीदे
जाएँ और कराया न दया जाए, रत्ना पहला ग्राहक भी नह परोस सकती थी। ऋण व्यवसाय को यह अवसर दे ता है
क वह कल क कमाई से आज के उपकरण खरीद ले — जो उपयोगी भी है और जो खमपूण भी, क्य क ग्राहक
आएँ या न आएँ, ब्याज दे ना ही पड़ता है। यही उद्यमी का जो खम है, और इसी लए चत्र 7.16 म “समय और धन का
नवेश कर जो खम उठाता है” उसके पाँच काय म गना गया है।
संकेत: दोन क मत का अंतर ध्यान से दे खए। ब्याज एक न त वचन है — बुरे वष म भी दे ना पड़ता है। लाभांश
लाभ का अंश है — लाभ न हो तो बाँटने को कुछ नह । इसी लए ऋणदाता प्र तभू त माँगता है और शेयरधारक
वृ द्ध।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 173
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पूँजी
आइए पता लगाएँ
प्र.1 अपने क्षेत्र के कसी कारखाने क पहचान कर। अनुमान लगाएँ क कारखाने के नमाण म कतनी पूँजी का नवेश
हुआ है। यह भी पता कर क अपने उत्पाद को अं तम रूप से उत्पा दत करने के लए कारखाने म कस प्रकार के
उपकरण का उपयोग कया जाता है?
अनुमान कैसे बनाएँ। कारखाने का लेखा-जोखा आपको नह मलेगा, इस लए अनुमान वैसे लगाइए जैसे अथशास्त्री लगाता है —
मद-दर-मद, और स्पष्ट ल खए क यह अनुमान है। प्रबंधक से, कसी आपू तकता से, या स्थानीय भू म दर से जानकारी ली जए।
चार मद अवश्य ली जए —
1. भू म एवं भवन — भूखंड का क्षेत्रफल × स्थानीय दर, और शेड क लागत।
2. मशीन एवं उपकरण — मुख्य मशीन क सूची और उनका लगभग मूल्य।
3. अन्य स्थर पूँजी — वद्युत क फ टग, जनरेटर, जल संयोजन, कंप्यूटर, फन चर, वाहन।
4. कायशील पूँजी — वह धन जो सदा कच्चे माल, वेतन और बना बके माल म फँसा रहता है। लोग इसे भूल जाते ह, जब क यह
प्रायः कुल का पाँचवाँ से चौथाई भाग होता है।
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नमूना उत्तर — हमारे कस्बे के छोर पर स्ट ल के बतन क एक छोट इकाई:
पूँजी क मद अनुमा नत रा श
भूखंड (लगभग 1,000 वग मीटर) एवं कारखाना शेड ₹60 लाख
मशीन — पावर प्रेस, डीप- ॉइंग प्रेस, खराद, ब फग एवं पॉ ल शग मशीन, वे ल्डग सेट ₹35 लाख
वद्युत फ टग, जनरेटर, जल संयोजन ₹8 लाख
वतरण का वाहन ₹7 लाख
कंप्यूटर, कायालय फन चर, तौल एवं परीक्षण उपकरण ₹3 लाख
कायशील पूँजी (स्ट ल शीट, वेतन, बना बका माल) ₹12 लाख
कु ल अनुमािनत पूँजी
= 60 + 35 + 8 + 7 + 3 + 12 (₹ लाख)
= ₹125 लाख = ₹1.25 करोड़
भूिम एवं भवन का भाग = 60 ÷ 125 = 48%
मशीनों का भाग = 35 ÷ 125 = 28%
“मा लक ने बताया क धन उनक अपनी बचत और एम.एस.एम.ई. योजना के अंतगत बक ऋण से आया, जस पर
वे प्र तमाह ब्याज दे ते ह।”
प्रश्न का दूसरा भाग — उपकरण। मशीन क सूची उसी क्रम म बनाइए जस क्रम से माल उनम से गुजरता है, क्य क इससे सूची
व्याख्या बन जाती है। इस इकाई म : स्ट ल शीट शय रग मशीन पर कटती है, डीप- ॉइंग प्रेस पर आकार लेती है, खराद पर कनारे
बराबर होते ह, जोड़ वेल्ड होते ह, सतह बफ और पॉ लश होती है, फर धुलाई, जाँच और पै कग होती है।
ये आँकड़े क्या बता रहे ह: इस इकाई म लगभग आधी पूँजी भू म और भवन म बँधी है — जो स्वयं कुछ नह बनाते
— और केवल लगभग एक-चौथाई उन मशीन म जो वास्तव म धातु को आकार दे ती ह। छोट नमाण इकाइय म
यह सामान्य है, और यही एक कारण है क नया उद्यमी शेड खरीदने के बजाय कराए पर लेना पसंद करता है, ठ क
जैसे रत्ना ने भू म खरीदने के बजाय कराए पर ली। इसक तुलना पृष्ठ 165 क ता लका के सब्जी वक्रेता से
क जए, जसक पूरी पूँजी एक टोकरी, एक तराजू और एक ठे ला है — तब स्पष्ट होगा क दोन व्यवसाय धन
बल्कुल अलग-अलग ढं ग से क्य जुटाते ह।
आइए वचार कर — पृष्ठ 175
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक
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वह व्य क्त जसने भारत के लए बड़ा स्वप्न दे खा — जे.आर.डी. टाटा
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a s emदए गए उदाहरण से युवा उद्यमी कौन-कौन सी बात सीख सकते ह?
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जे.आर.डी. टाटा के जीवन से सीधे पाँच सीख नकलतीm .
s e ह, और हर एक चत्र 7.16 के कसी काय से मेल खाती है।
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सीख उदाहरण म इसका प्रमाण
1. ऐसी समस्या हल क जए
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उन्होंने 1932 में ‘टाटा एयरलाइन्स’ आरंभ की, जब भारत में कोई हवाई से वा थी ही नही ं। यही आगे
चलकर एयर इंिडया बनी। सबसे पहले होना असुिवधाजनक है, और वही m
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जसका दे श को अभी पता भी नह ।
a s e ं सबसे बड़ा लाभ िछपा होता
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है
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e क परख केवल उसके
sव्यवसाय
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ag लाभ से नह होती।
2. उनका मानना था िक व्यवसायों का उ े श्य के वल लाभ अिजत करना नही ं, अिपतु समाज की से वा
करना भी होना चािहए — यही िवचार भारत ने आगे चलकर 2014 में सी.एस.आर. कानून के रूप में
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िलखा
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वे अपने कमचािरयों.c
eकीmभाषा में, उन्होंने अपनी मानव पूँजी में िनवेश िकया agl
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3. काम करने वाल का ध्यान की दे खभाल करने और उन्हे ं उत्तम काय-पिरिस्थितयाँ दे ने के िलए पिसद्ध थे —
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aउनकgे lनेतत्ृ व में टाटा समूह ने इस्पात, वाहन िनम ण, िवद्यत उत्पादन एवं िवतरण और रसायन िनम ण में
र खए। इस अध्याय
4. एक सफल उत्पाद पर मत ु
ट कए, वस्तार बनाइए। िवस्तार िकया — ऐसा समूह िकसी एक उद्योग के बुरे दशक में भी िटका रहता है
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5. च रत्र ही द घकालीन संप त्त है। वे “ईमानदार, पिरश्रमी एवं उन्नत िवचारों वाले व्यिक्त” थे। 1992 में दे श की से वा के िलए उन्हे ं सव च्च
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नागिरक सम्मान ‘भारत र त्न’ पदान िकया गया
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a समय-मान का अनुभ व कीिजए
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जन्म 1904 · टाटा एयरलाइन्स 1932 में → तबom
c आयु लगभग 28 वष g l a
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a emवष बाद, लगभग 88 वष की आयु में
े s60
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भारत रत्न 1992 में → हवाई सेवा क
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इन त थय म छपी सीख: उद्य मता छोटा खेल नह है। जन काय के लए वे स्मरण कए जाते ह, उनम से कसी
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का प्र तफल शीघ्र नह मला। इस उदाहरण से युवा उद्यमी को महत्वाकांक्षा जतना हीemधैय भी लेना चा हए —
. o जो खम उठाने के छह दशक बाद आई।
cमान्यता a gl
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 क्या उद्यमी का वतमान ज्ञान तात्का लक समस्या के समाधान म सहायक होता है अथवा इसके लए उन्ह अन्य
ोत क आवश्यकता पड़ती है?
दोन — और सच्चा उत्तर यह है क वतमान ज्ञान आवश्यक तो है, कतु कभी पयाप्त नह ।
वतमान ज्ञान क्या करता है। वही उद्यमी को समस्या पहचानने योग्य बनाता है। रत्ना दे ख सक क राजमाग के या त्रय को अच्छा
भोजन नह मलता, क्य क वह उस सड़क को और भोजन को जानती थी। जे.आर.डी. टाटा भारतीय हवाई सेवा क कल्पना कर
सके, क्य क वे स्वयं वमानन को समझते थे। वतमान ज्ञान यह भी बताता है क कौन-सा जो खम उठाने योग्य है — साह सक नणय
और दुस्साहस का अंतर प्रायः केवल जानकारी का होता है।
यह कहाँ कम पड़ जाता है। प रभाषा से ही उद्यमी वह कर रहा होता है जो उस स्थान पर पहले नह हुआ, इस लए कसी के पछले
अनुभव म उसका पूरा उत्तर नह होता। अध्याय हर चरण पर उद्यमी को अपने से बाहर जाते दखाता है —
चत्र 7.23 : अनुसंधान एवं वकास समूह नई वशेषताओं पर वचार-मंथन करता है; सॉफ्टवेयर, वद्युत एवं यां त्रक
अ भयंताओं का समूह तथा प रयोजना प्रबंधक अपनी वशेषज्ञता से उत्पाद वक सत करते ह। उद्यमी का काय है संसाधन
के उपयोग का मागदशन दे ना — सब कुछ स्वयं जानना नह ।
चत्र 7.16 कहता है क उद्यमी उत्पादन के व भन्न कारक को संयो जत करता है। ‘संयो जत करना’ का अथ ही है बाहर
जाकर वह लाना जो आपके पास नह है।
पूँजी बक या शेयर बाजार से आती है — यह भी एक भन्न प्रकार का बाहरी ोत है।
भारत के प्राचीन शल्पकार भी इसी ढं ग से काम करते थे : ज्ञान पीढ़ -दर-पीढ़ मला “और इसी क्रम म नए ज्ञान का सृजन
भी हुआ”, और शल्पशास्त्र इसी लए थे क कसी मू तकार को शून्य से आरंभ न करना पड़े।
इसे स्पष्ट रूप से कहने का तरीका: वतमान ज्ञान बताता है क कौन-सी समस्या उठाई जाए; अन्य ोत बताते ह
क उसे कैसे हल कया जाए। जो उद्यमी दूसर से पूछने से बचता है, वह केवल उन्ह समस्याओं तक सी मत रह
जाता है जनसे वह पहले मल चुका है — और ऐसी समस्याएँ बहुत थोड़ी होती ह, तथा प्रायः महत्वपूण भी नह ।
आज ऐसे ोत म स्वयं (SWAYAM) जैसे नःशुल्क मंच, वशेषज्ञ कमचारी, आपू तकता और सबसे बढ़कर ग्राहक
स म्म लत ह, जो सबसे शीघ्र बताते ह क आपके वचार म कमी कहाँ है।
प्र.3 क्या कसी उद्यमी क एकमात्र प्रेरणा लाभ कमाना ही होना चा हए? क्य अथवा क्य नह ?
नह — कतु लाभ एक आवश्यक प्रेरणा अवश्य है, और आवश्यक तथा एकमात्र का अंतर स्पष्ट रखना चा हए।
लाभ एकमात्र प्रेरणा क्य नह हो सकता। अध्याय बताता है क उद्यमी और क्या-क्या चाहता है —
उद्यमी का उद्दे श्य नई वस्तुओं एवं सेवाओं को बाजार म लाकर समस्या का समाधान प्रस्तुत करना होता है, जससे समाज और
दे श को लाभ पहुँच सके।
वे रोजगार के अवसर सृ जत करते ह और लोग को आजी वका उपा जत करने म सहायता करते ह — रत्ना के सात
कमचारी।
बदले म उन्ह अपने सपन को साकार होते और लोग क सेवा करते दे ख गहरी संतु ष्ट मलती है।
चत्र 7.16 “नवाचार के माध्यम से समाज के कल्याण म योगदान” को उद्यमी के पाँच काय म गनता है।
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जे.आर.डी. टाटा इसका उदाहरण ह : उनका मानना था क व्यवसाय का उद्दे श्य केवल लाभ नह , समाज क सेवा भी है, और
उन्ह ने कमचा रय क प र स्थ तय का ध्यान रखा।
फर भी लाभ क्य आवश्यक है। अ धशेष के बना व्यवसाय न ऋण और ब्याज लौटा सकता है, न श्र मक को उ चत पा रश्र मक
दे सकता है, न बेहतर प्रौद्यो गक खरीद सकता है, और न कसी बुरे वष को झेल सकता है — अथात वह कसी क सेवा जारी ही
नह रख सकता। लाभ वह कसौट है जो बताती है क ग्राहक ने उस वस्तु को इनपुट्स क लागत से अ धक मूल्यवान माना। जो
व्यवसाय कभी लाभ नह कमाता, वह समाज क भू म, श्रम और पूँजी खपाकर उससे कम लौटा रहा है।
संतु लत स्थ त: लाभ को जी वत रहने क शत मा नए और उद्दे श्य को जीने का कारण — भोजन आवश्यक है,
कतु दन का लक्ष्य नह । यही कारण है क भारत 2014 म कॉरपोरेट सामा जक उत्तरदा यत्व पर कानून बनाने
वाला वश्व का प्रथम दे श बना, जसम कंप नय को पछले तीन वष के औसत लाभ का 2 प्र तशत सामा जक
ग त व धय पर व्यय करना अ नवाय है। यह कानून लाभ समाप्त नह करता; वह चाहता है क उसका एक अंश उसी
समाज को लौटे जसके संसाधन से वह बना।
प्र.4 एक सफल उद्यमी बनने के लए व्य क्तत्व म और कौन-से गुण क आवश्यकता होती है?
चत्र 7.16 के पाँच काय के आगे, वे गुण जो इन काय को वास्तव म कर पाने योग्य बनाते ह —
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गुण यह काय के लए क्य आवश्यक है
दृढ़ संकल्प और अटलता अध्याय स्वयं कहता है िक उद्यमी समस्या की पहचान कर उसका समाधान पस्तुत करने में डटा रहता है।
अिधकाश
ं िवचार सफल होने से पहले कई बार असफल होते है;ं उद्यमी को अलग करने वाला ग ण
ु पितभा नही ं,
रुकने से इनकार है
जो खम उठाने क क्षमता वह अपना धन और समय िबना िकसी वचन के लगाता है — और ऋण चुक ता होने तक चैन से सो भी सकना
चािहए
दूरदृ ष्ट और िजस दे श में कोई हवाई से वा न हो वहाँ एयरलाइन दे ख ले ना, या सूने राजमाग पर भोजनालय
कल्पनाशीलता
नणय-क्षमता िचत्र 7.16 : व्यापार संचालन और काय पणाली से संबंिधत पमुख िनणय ले ता है — पायः तब, जब सारे तथ्य
सामने नही ं होते
ईमानदारी और सत्य नष्ठा जे.आर.डी. टाटा के उदाहरण में नािमत। आपूितकत उधार, बैक
ं ऋण और कमचारी अपना समय उसी को दे ते
है ं िजसकी बात िटकती है
लोग के साथ काम करने अिभयंताओं, श्रिमकों, ऋणदाताओं और ग ाहकों को साथ िलए िबना “उत्पादन के िविभन्न कारकों को संयोिजत”
क योग्यता नही ं िकया जा सकता
जज्ञासा और सीखते पुर ानी पौद्योिगकी को नई पितस्थािपत करती रहती है; जो उद्यमी सीखना बंद कर दे ता है, वह कल का व्यवसाय
रहने क तत्परता चला रहा होता है
संवेदनशीलता उस ग ाहक के पित भी िजसकी समस्या हल करनी है और उन श्रिमकों के पित भी जो उसे हल करते है ं — यही
जे.आर.डी. टाटा की काय-पिरिस्थितयों संबंध ी िचंता का आधार था
अनुशासन और अध्याय में विणत जमन कायिनष्ठा वस्तुतः यही ग ण
ु है, रा के स्तर पर
बारी कय पर ध्यान
कक्षा म इस पर बहस क जए: इनम से लगभग कोई भी गुण जन्मजात नह है। अटलता, नणय-क्षमता और
बारी कय पर ध्यान अभ्यास से बढ़ते ह — और यही दावा अध्याय कौशल के वषय म करता है : “ कसी ग त व ध
या काय को अभ्यास और प्र शक्षण ारा सुचारु रूप से करने क क्षमता”। इस दृ ष्ट से उद्य मता स्वयं मानव पूँजी
का ही एक रूप है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 176
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प्रौद्यो गक — उत्पादन म सहायक
प्र.1 क्या आपने दे खा है क कस प्रकार पुरानी प्रौद्यो गक को एक नई और उत्तम प्रौद्यो गक से प्र तस्था पत कर दया
जाता है?
हाँ — और अध्याय का तक यह है क ऐसा इस लए होता है क नई प्रौद्यो गक वही काम सरल, शीघ्र या सस्ते ढं ग से कर
दे ती है, इस लए नह क पुरानी काम करना बंद कर दे ती है।
पुरानी प्रौद्यो गक कसने स्थान लया वास्तव म क्या सुधरा
डाक से पत्र भेजना ई-मेल अध्याय का अपना उदाहरण — हम शीघ ता से और कम लागत में
संपक कर पाते है ं
नकद ले जाना, बल के लए पं क्त यू.पी.आई. (यूिनफाइड पेम ेंट्स एक बटन दबाकर भुग तान
म खड़े रहना इंटरफे स )
रास्ता पूछना, कागज का न ा जी.पी.एस . यह माल ढोने के िलए लघुत्त म माग खोज सकता है — अथ त वही
टक एक िदन में अिधक पहच
ु ँ ाता है
अनुभव से मौसम का अनुमान फोन पर पहले से मौसम की िकसान बुवाई, िछड़काव या कटाई का समय तय कर सकता है
जानकारी
हाथ से उवरक का छड़काव डोन (िचत्र 7.18) अिधक क्षेत्र शीघ , और श्रिमक का रसायनों से संपक कम
कतु अध्याय तुरंत एक चेतावनी भी जोड़ता है, और वही अ धक रोचक है : प्रौद्यो गक क प्रग त का अथ सदै व पुरानी
प्रौद्यो ग कय को बदलना नह होता। कुछ, जैसे चरखी (पुली) और ठे लागाड़ी, आज भी उपयोग म ह — आप उन्ह चत्र 7.20 म
नमाण स्थल पर और चत्र 7.21 म नौकाओं म दे ख सकते ह। कुछ प्रारं भक प्रौद्यो ग कयाँ, जो प्राचीन काल से वद्यमान ह, आज भी
काम आ रही ह।
कुछ पुरानी प्रौद्यो ग कयाँ क्य टक रहती ह: वे सस्ती और सरल ह, उन्ह वद्युत या नेटवक नह चा हए, उपयोग
करने वाला ही उन्ह ठ क कर लेता है, और वे ठ क वह काम करती ह जहाँ आधु नक वकल्प असु वधाजनक हो —
नाव पर, मचान पर, बजली गुल होने पर। ठे लागाड़ी कोई असफल मशीन नह जो प्र तस्थापन क प्रतीक्षा कर रही
हो; अपने काम के लए वह आज भी सव त्तम उत्तर है। कसौट कभी “यह पुरानी है क्या?” नह होती, अ पतु “यहाँ,
इस लागत पर, क्या कोई और इसे इससे बेहतर करता है?” होती है।
परीक्षा के लए संकेत: य द पूछा जाए क क्या नई प्रौद्यो गक सदै व पुरानी को हटा दे ती है, तो उत्तर नह है, और
पुस्तक के दए दो उदाहरण — चरखी और ठे लागाड़ी — ही उद्धत क जए।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 178
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ज्ञान, कौशल और रोजगार के अवसर तक पहुँच का माग प्रशस्त करती प्रौद्यो गक
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आइए पता लगाएँ
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a s emआप कुछ ऐसे प्रौद्यो गक वकास के वषय म सोच सकते ह, जसने आपके आस-पास के लोग और
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क्या
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प्र.1
समुदाय के जीवन को प्रभा वत कया है? इस वषय पर अपने घर और आस-पड़ोस के व रष्ठ सदस्य से चचा कर।
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व रष्ठ सदस्य से वास्त वक उत्तर कैसे नकाल। यह मत पू छए क “क्या प्रौद्यो गक ने जीवन बदला?” — सब हाँ कहगे। कसी
वशेष काय और वशेष समय के वषय म पू छएa:
पहले दूसरे नगर म रहने वाले रश्तेदार को धन कैसे भेजते थे?
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जल कहाँ से लाते थे और कतना समय लगता था?
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भोजन कस पर पकता था और ईंधन कौन लाता था?
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aरात म कोई बीमार पड़ जाए तो प रवार क्या करता था?
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प्रौद्यो गक वकास समुदाय के लए क्या बदला
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gिबनाl खुले पैसे के भुगतान ले ले ता है
मोबाइल फोन और यू.पी.आई. पवासी श्रिमक उसी शाम घर धन भेज दे ता है, नकद ले क र यात्रा नही ं करनी पड़ती; सब्जी िवक्रेता
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एल.पी.जी. संयोजन
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ईंध न बीनने में लगने वाले पितिदन के घंटे बचे — जो पायः मिहलाओं और बािलकाओं के थे — और
घर के भीतर का ध आ
ु ँ बहुत घटा
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वद्युत, और अब सौर पैनल एवं एल.ई.डी.
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अँधे रे के बाद पढ़ ाई; दुक ान में शीतलन; िसंचाई के िलए पंप
s mू प, बूँद- सचाई, ट्रैक्टर, ेशर
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कृ िष में पित श्रिमक अिधक उत्पादन — अध्याय की वही बात िक मशीनों का बढ़ ता उपयोग श्रम पर
िनभरता कम करता है
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मौसम क पूव-सूचना और जी.पी.एस. िकसान काय की योजना बनाते है;ं पिरवहन करने वाले लघुत्त म माग खोजते है ं
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ऑनलाइन अ धगम और टे ली- च कत्सा िजस गाँव में न महािवद्यालय है न अस्पताल, वहाँ पाठ क्रम और िवशेषज्ञ की राय पहच
ु ँ जाती है
( चत्र 7.22)
स्वयं (SWAYAM) और नेशनल
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कक्षा 9 से आगे रोबोिटक्स, जल-कृ िष, वस्त्र-मुद ण के िनःशुल्क पाठ क्रम; प्लंिबंग से ले खाक
ं न तक
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क रयर स वस रोजगार की सूचनाएँ
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m नमूना उत्तर: “मेरी दाद ने कहा क उनके जीवन का सबसे बड़ा प रवतन फोन नह , अ पतु बस माग और पक्क a g
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ag सड़क थी। उससे पहले बीमार व्य क्त को खाट पर मुख्य सड़क तक ले जाया जाता था। सड़क बनने के बाद
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प्राथ मक च कत्सा कद्र बीस मनट क दूरी पर आ गया, बा लकाएँ पास के कस्बे के उच्च वद्यालय जाने लग , और
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सब्जी उगाने वाले उसी सुबह मंडी भेज पाने लगे, सस्ते म गाँव म बेचने के बदले। आधारभूत संरचना के एक ही टु कड़े
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ने स्वास्थ्य, शक्षा और आय — तीन बदलm दए।”
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दोन पक्ष के साथ न्याय क जए। इन्ह साक्षात्कार म हा नयाँ भी नकलती ह — वह बुनकर जो मल के कपड़े से
नह लड़ सका, वह पत्र-लेखक जसका काम समाप्त हो गया, वह तालाब जो सबके बोरवेल खोदने पर सूख गया।
अध्याय भी यही संतुलन चाहता है : प्रौद्यो गक सहायक है, कतु पृष्ठ 180 स्मरण कराता है क उत्पादन उन्ह
संसाधन को क्ष त भी पहुँचा सकता है जन पर वह टका है। अच्छा प्र तवेदन दोन दज करता है।
प्र.2 कसी ऐसे आ वष्कार के वषय म सोच जसे आप कसी समस्या के समाधान के लए बनाना चाहगे। उससे
संबं धत जानकारी जैसे— उसका नाम, उसका काम, वह क्या करता है, उसके स्वरूप का चत्र या रेखा चत्र आ द
एक कागज पर अं कत कर और अपने सहपा ठय के साथ चचा कर।
कसी ऐसी समस्या से आरंभ क जए जो आपने वास्तव म कसी को झेलते दे खा हो, न क कसी ऐसी वस्तु से जो आप
स्वयं चाहते ह। चत्र 7.16 भी यही क्रम रखता है — उद्यमी पहले “समस्या क पहचान” करता है, तभी उसका नया समाधान
खोजता है।
आपके कागज पर ये सात शीषक होने चा हए —
1. समस्या, एक वाक्य म, और यह कसक समस्या है।
2. आ वष्कार का नाम।
3. वह क्या करता है — एक पं क्त म।
4. वह कैसे काम करता है — क्रम से चरण।
5. नामां कत रेखा चत्र। केवल बाहरी आकृ त नह , भाग के नाम भी ल खए।
6. इसे बनाने म कौन-से इनपुट्स लगगे — भू म, श्रम, पूँजी, उद्य मता और प्रौद्यो गक , एक-एक करके। वद्याथ प्रायः यही भाग
छोड़ दे ते ह, और यही भाग यह अध्याय परख रहा है।
7. इसे कौन खरीदे गा और लगभग कस मूल्य पर, तथा क्या गलत हो सकता है।
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नमूना उत्तर — ‘ठं डा ठे ला’, सब्जी के ठे ले के लए सौर शीत-पेट
समस्या: हमारे क्षेत्र के पंद्रह सब्जी वक्रेता (दे खए पृष्ठ 165 क ता लका) प्र त दन सायं तक अपनी पत्तेदार
स ब्जय का एक भाग फक दे ते ह, क्य क वे धूप म मुरझा जाती ह। उनका पूरा माल शीघ्र नष्ट होने वाला है और
उसे रखने क कोई व्यवस्था नह ।
यह क्या करता है: बना कसी वद्युत संयोजन के, ठे ले पर ही लगभग 30 कग्रा पत्तेदार स ब्जय को दन भर
लगभग 10 डग्री से ल्सयस पर रखता है।
यह कैसे काम करता है: ठे ले क छत ही 100 वाट का लचीला सौर पैनल है। वह एक छोट बैटरी चाज करता
है, जो 12 वोल्ट का पंखा चलाती है; पंखा पेट के भीतर बफ क स ल्लय के ऊपर से हवा बहाता है। एक
साधारण ताप नयंत्रक पेट के पयाप्त ठं डा होते ही पंखा बंद कर दे ता है। एक नाली पघला पानी बोतल म ले
जाती है, जससे सड़क पर कुछ नह टपकता।
इनपुट्स: भू म — भूखंड नह चा हए, कतु इसम लगा एल्यु म नयम, प्ला स्टक और स लकॉन सब ख नज से
आते ह; श्रम — ढाँचा बनाने वाला और पैनल जोड़ने वाला वद्युतकम ; पूँजी — पैनल, बैटरी, पंखा, ऊष्मारोधी
पेट , और एक इकाई बनाने म लगभग ₹12,000; उद्य मता — म पाँच बनवाकर वक्रेताओं को एक महीने
नःशुल्क दूँ गा और उसके बाद कराया लूँगा; प्रौद्यो गक — सौर फोटोवोल्टाइक और ताप नयंत्रक।
कौन खरीदे गा और क्या गलत हो सकता है: वक्रेता तभी दगे जब यह अपनी लागत से अ धक बचाए,
इस लए पूरा वचार एक ही आँकड़े पर टका है — वे इस समय प्र त दन कतना माल फकते ह। य द वह ₹50 से
कम है, तो आ वष्कार असफल है, और ईमानदारी यह है क बनाने से पहले यह पता कर लया जाए।
अं तम बदु सबसे महत्वपूण क्य है: उद्यमी “समय और धन का नवेश कर जो खम उठाता है”, और उस जो खम
को घटाने का सबसे सस्ता उपाय है — व्यय से पहले अपनी मान्यता को परखना। तीन वक्रेताओं से दस मनट पूछ
लेना, एक सुंदर रेखा चत्र से अ धक मूल्यवान है।
आइए वचार कर — पृष्ठ 180
उत्पादन के कारक के प्र त हमारा उत्तरदा यत्व
आइए वचार कर
प्र.1 स्थानीय समुदाय और जैव- व वधता पर इस प्रकार क ग त व धय का क्या प्रभाव पड़ता है? क्या आप अपने
आस-पास ऐसे कुछ स्थान को जानते ह, जहाँ समय के साथ जल और भू म का क्षरण हुआ है? कक्षा म इस पर
चचा कर।
वही ग त व ध एक हाथ से दे ती है और दूसरे से लेती है, और प्रायः दोन ओर वही लोग होते ह। अध्याय का उदाहरण यही
कहता है : त मलनाडु म बहुत से लोग चमड़ा उद्योग म काम करके आजी वका कमाते ह। इससे स्थानीय अथव्यवस्था को लाभ
होता है — परंतु इन कारखान से नकलने वाला अप शष्ट न दय और मृदा को प्रदू षत कर सकता है।
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कौन कैसे
प्रभा वत
स्थानीय कु ओं और निदयों का पेयजल असुर िक्षत हो जाता है; त्वचा और पेट के रोग बढ़ ते है;ं पदू िषत म ृद ा में फसल कम होती है; मछली
समुदाय पकड़ने और खेती की आजीिवकाएँ िसकु ड़ती है,ं जबिक कारखाने के रोजगार बढ़ ते है ं — अथ त एक ही पिरवार एक दशक में
मजदू र ी कमा भी सकता है और खेत खो भी सकता है
जैव- व वधता मछिलयाँ और अन्य जलीय जीव मर जाते है ं या अंडे दे ना बंद कर दे ते है;ं म ृद ा को उपजाऊ रखने वाले सूक्ष्म जीव नष्ट होते है;ं
नदी पर िनभर पक्षी और पशु या तो चले जाते है ं या िवषाक्त हो जाते है।
ं नदी के िकसी िहस्से से एक बार कोई पजाित लुप्त हो
जाए तो वह स्वयं लौटती नही ं
सब लोग, जब पुर ाने स्माटफोन का उिचत पुनचक्रण नही ं होता तो उनमें उपिस्थत सीसा और पारा भूिम और जल में िमल जाते है।
ं यह
आगे चलकर पदू षण मनुष्यों, पशुओ ं और पौधों के िलए हािनकारक है — और खराब फसल की भाँित एक ऋतु में समाप्त नही ं होता
अध्याय इससे जो सद्धांत नकालता है वह यह है क उत्पादक प्राकृ तक संसाधन का उत्तरदा यत्वपूण उपयोग कर, जससे हम
अपनी वतमान आवश्यकताओं क पू त भावी पी ढ़य क आवश्यकताओं को संकट म डाले बना कर सक। उन्ह कचरा कम करने,
प्रदूषण से बचने और पयावरण क रक्षा करने का प्रयास करना चा हए तथा संधारणीय उपाय अपनाने चा हए। इसके दो चत्र यह भी
दखाते ह क कैसे — जल ोत म प्रवा हत करने से पहले औद्यो गक दू षत जल का पुनचक्रण ( चत्र 7.24) और पुनच क्रत
उत्पाद का इनपुट्स के रूप म प्रयोग ( चत्र 7.25)।
प्रश्न के स्थानीय भाग का नमूना उत्तर: “हमारे कस्बे के पीछे जो नाला रंगाई क इकाइय के पास से बहता है,
उसम बुजुग के अनुसार बीस वष पहले मछ लयाँ थ और उसम कपड़े धोए तथा पशु नहलाए जाते थे। आज वह
दोपहर तक रंगीन बहता है, उसके कनारे कुछ नह उगता, और उसके नकटतम बोरवेल छोड़ दए गए ह। इन
इकाइय म हमारे ही क्षेत्र के लगभग 200 लोग काम करते ह। कक्षा म चचा के बाद हम इस नष्कष पर पहुँचे क
उत्तर उन्ह बंद करना नह , अ पतु चत्र 7.24 क भाँ त प्रवा हत करने से पहले शोधन अ नवाय कराना है — रोजगार
और नाला, दोन हमारे ह।”
यह उत्पादन के कारक वाले अध्याय म क्य है: क्य क भू म एक कारक है, और पूँजी के वपरीत उसे दोबारा
खरीदा नह जा सकता। घसी हुई मशीन लाभ से बदली जा सकती है; वषाक्त भूजल या क्ष रत मृदा नह । इस लए
भू म का क्षरण उत्पादन का दुष्प्रभाव मात्र नह है — वह उन्ह चार इनपुट्स म से एक को नष्ट करना है जन पर
उत्पादन टका है। नै तक कारण के पीछे यही आ थक कारण है, और इसी लए अध्याय के अंत म कहा गया है क
संसाधन को “संर क्षत कर ववेकपूण ढं ग से उपयोग म लाना आवश्यक है”।
प्रश्न और क्रयाकलाप — पृष्ठ 182–183
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अध्याय के अंत म
प्र.1 उत्पादन के कारक एक-दूसरे से कस प्रकार भन्न ह? पाठगत अभ्यास म उत्पादन के कारक को वग कृत करने म
आपने कन- कन क ठनाइय का सामना कया?
वे इसम भन्न ह क वे आते कहाँ से ह, उन्ह दे ता कौन है, उनका भुगतान क्या है, और क्या उन्ह बढ़ाया जा सकता है। इन्ह
चार आधार पर तुलना करने से यह वग करण नाम क सूची न रहकर उपयोगी बन जाता है।
आधार भू म श्रम पूँजी उद्य मता
उत्प त्त पकृ ित की दे न — म ृद ा, वन, मनुष्य, शारीिरक और मानव िनिमत; स्वयं पहले व्यिक्त का िवचार,
जल, वायु, सूय का पकाश, मानिसक योगदान के उत्पािदत, िफर उत्पादन िववेक और जोिखम
खिनज, तेल , पाकृ ितक गैस रूप में में पयुक्त उठाने की तत्परता
क्या इसे बढ़ाया नही ं — इसकी कु ल मात्र ा हाँ, और िशक्षा, पिशक्षण हाँ — बचत और िनवेश दुल भ; इसे पोत्सािहत
जा सकता है? सीिमत है और यह क्षिरत हो एवं स्वास्थ् य से इसकी से िकया जा सकता है,
सकती है गुणवत्ता भी बनाया नही ं
ग तशीलता अचल — भूखंड, खान या नदी गितशील, िकं तु लोग धन तत्काल जाता है; गितशील — उद्यमी
हटाई नही ं जा सकती अिनच्छा से ही स्थान मशीन लागत सिहत वही ं जाता है जहाँ
बदलते है ं अवसर हो
पुस्तक के िकराया, यिद खरीदी न गई हो श्रम का उिचत ऋणदाता को ब्याज; जो शेष बचे — लाभ,
अनुसार भुगतान पािर श्रिमक शेयरधारकों को लाभांश और उसकी कोई
गारंटी नही ं
जो खम िकराया िमल जाए तो स्वामी बहुत कम — वस्तु िबके ब्याज हर िस्थित में दे य पूर ा। उद्यमी को सबसे
पर कोई नही ं या न िबके , पािरश्रिमक अंत में िमलता है, या
दे य है नही ं िमलता
वग करण क क ठनाइयाँ — और ये वास्त वक ह।
सीमा पर बैठे इनपुट्स। वद्युत भू म है या पूँजी? उसे मनुष्य बनाता है, कतु कोयले, जल या सूय से। भंडारण का स्थान भू म
है या पूँजी? भूखंड भू म है, उस पर बना भवन पूँजी, और कराया एक ही दोन के लए।
पहले से संसा धत कच्चा माल। ताजा उत्पाद आरंभ म भू म था, कतु भोजनालय तक पहुँची स ब्जय क टोकरी म श्रम,
वाहन और ईंधन भी स म्म लत हो चुके ह। पीछे कहाँ तक जाएँ?
श्रम या मानव पूँजी? प्र तवेदन म इनपुट के रूप म “मोबाइल के अवयव का ज्ञान एवं कौशल” लखा है। यह श्रम का प रश्रम
नह , उसके पीछे क मानव पूँजी है। पुस्तक दोन को अलग रखती है, कतु हमारी ता लका म उसका कोई स्तंभ नह था।
एक ही व्य क्त तीन भू मकाओं म। छोट कराने क दुकान का स्वामी पूँजी भी दे ता है, श्रम भी करता है और उद्यमी भी है।
बड़ी कंपनी म ये तीन अलग-अलग समूह होते ह, इसी लए वहाँ वग करण साफ दखता है।
धन स्वयं पूँजी नह है। बक म पड़ा धन कुछ उत्पा दत नह करता; वह तभी पूँजी बनता है जब उपकरण, माल या दुकान म
बदल जाए।
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यह क ठनाई दोष क्य नह है: ये श्रे णयाँ भुगतान और आपू त के वषय म सोचने के औजार ह, प्रकृ त के खाने
नह । जब भी कोई वस्तु रखने म क ठनाई हो, यह पू छए क आप कस प्रश्न का उत्तर खोज रहे ह।em
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o है, तो वद्युत को उस आपू तकता के साथ र खए जो बल भेजता हैa। यglद जानना है क प्रकृ त
य द जानना है क
कसे भुगतान.cकरना
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प्र.2 मानव पूँजी, भौ तक पूँजी से कस प्रकार भन्न है?
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भौ तक पूँजी मशीन है; मानव पूँजी उसे भली-भाँ त चलाने क क्षमता। अध्याय पूँजी को कोई भी भौ तक या वत्तीय संप त्त
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c mकरने के लए आवश्यक होती ह — अथात उस श्रम क गुणवत्ता और दक्षता। gla
कहता है जो वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन म प्रयुक्त होती है, और मानव पूँजी को वे व शष्ट कौशल, ज्ञान,
वशेषज्ञता जोoश्रम
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aglअंतर का आधार भौ तक पूँजी मानव पूँजी
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यह है क्या मशीने,ं औजार, उपकरण, वाहन, वेंिडंग काट् स , व्यिक्त में िनिहत कौशल , ज्ञ ान, क्ष मताएँ, िवशेषज्ञ ता,
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कं प्यूटर, दुक ाने,ं कारखाने, काय लय भवन — और अनुभव और स्वास्थ् य
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वह धन िजससे ये खरीदे जाते है ं
यह रहती कहाँ है ag
व्यिक्त के बाहर; इसे दे खा, तौला और िचित्रत िकया व्यिक्त के भीतर ; के वल काय की ग ण
ु वत्त ा में िदखाई
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जा सकता है दे ती है
िश ा, पिश ण, वा m
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यह बनती कैसे है बचत करके खरीदने से — एक िदन में पूर ा हो जाने
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aपिरवेश से — वष ं में, और इसे बनी-
य से वा, पौ ोिगकी के उपयोग
aglनही ं जा सकता
क्ष क्ष स् स्थ् द्य
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वाला सौदा और सामािजक
se m बनाई खरीदा
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ag क्या इसे बेचा या हाँ — मशीन बेच दीिजए, वह िकसी और की हो नही ं। इसे िसखाया जा सकता है, िकंतु िसखाने से
हस्तांत रत कया जा जाएगी िशक्षक की अपनी कम नही ं होती। इसे धारक से
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सकता है?
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अलग नही ं िकया जा सकता
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उपयोग से क्या होता है वह िघसती है; पित वष उसका मूल्य घटता है अभ्यास से पायः बढ़ ती है, और अनुपयोग , रोग या म ृत्यु
से ही समाप्त होती है
इसे मुख्यतः कौन फम, अपने धन या ऋण से
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पिरवार , िवद्य ालय, स्वास्थ् य व्यवस्था और समाज —
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बनाता है साथ ही फम , कायस्थल पर पिशक्षण दे क र
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m यह अंतर नी त क्य तय करता है: अ धक भौ तक पूँजी चा हए तो बचत और ऋण चा हए। अ धक मानव पूँजी a g
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ag चा हए तो वद्यालय, शक्षक, प्राथ मक च कत्सा कद्र और प्र शक्षण संस्थान चा हए — और प्र तफल के लए एक
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पीढ़ प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसी लए अध्याय भारत के जनां कक य लाभांश को कारखान से नह , “गुणवत्तापूण
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शक्षा, स्वास्थ्य, प्र शक्षण एवं कौशल प्र शक्षण” से जोड़ता है। कोई दे श मशीन आयात कर सकता है; अपने लोग का
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कौशल आयात नह कर सकता।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
य द समय कम हो तो एक पं क्त म: भौ तक पूँजी उत्पादन म प्रयुक्त मानव न मत वस्तुएँ ह; मानव पूँजी उन
वस्तुओं को चलाने वाले लोग के भीतर का ज्ञान, कौशल और स्वास्थ्य है — और स्वयं बढ़ने क क्षमता केवल दूसरी
म है।
प्र.3 प्रौद्यो गक व्य क्त के कौशल और ज्ञान के वकास को कस प्रकार प रव तत कर रही है, आप इस वषय म क्या
सोचते ह?
इसका सबसे बड़ा प रवतन यह है क इसने सीखने से भूगोल हटा दया है। अध्याय यही कहता है : प्रौद्यो गक ने भौगो लक
सीमाओं क बाध्यता को समाप्त कर लोग को भारत तथा वदे श म ज्ञान, कौशल- वकास और रोजगार के अवसर प्रदान कए ह।
क्या बदला अध्याय का प्रमाण
कहाँ सीख सकते िवद्याथ िकसी भी स्थान से सीख सकते है।
ं िजस गाँव में महािवद्यालय नही ं, वह भी अब कटा हुआ नही ं
ह
कब सीख सकते िवद्याथ नौकरी करते हुए या अन्य पाठ क्रम पढ़ ते हुए भी अपनी गित से सीख सकते है ं — अथ त कायरत वयस्क आय
ह छोड़े िबना पुनः पिशक्षण ले सकता है
क्या सीख सकते स्वयं (SWAYAM) मैिसव ओपन ऑनलाइन कोसज पर चलता है और कक्षा 9 से आगे रोबोिटक्स , जल -कृ िष और वस्त्र -
ह मुद ण जैसे िवषय दे ता है — ऐसे िवषय िजनके िशक्षक अिधकाश
ं िवद्यालयों में हो ही नही ं सकते
कतना खच ये पाठ क्रम िनःशुल्क है,ं इसिलए यह बात तय करना बंद हो जाती है िक िकसके पास शुल्क दे ने का सामथ्य है
कौशल के साथ सरकार का नेशनल किरयर सिवस पोटल प्लंिबंग से ले खांक न तक िविवध क्षेत्र ों में अवसर िदखाता है — सीखना और
काम मलना िनयुिक्त जुड़ जाते है ं
और यह केवल पहुँच नह , कौशल क वषय-वस्तु भी बदलती है। कसान को अब मौसम क चेतावनी पढ़नी आनी चा हए;
प रवहन वाले को जी.पी.एस.; दुकानदार को यू.पी.आई.; शल्य च कत्सक रोबोट् स के साथ काम करता है ( चत्र 7.19) और
छड़काव करने वाला ोन उड़ाता है ( चत्र 7.18)। जो कौशल पूणतः हस्तकौशल थे, उन पर अब एक ड जटल परत चढ़ गई है।
सीमाओं के वषय म ईमानदार र हए। ऑनलाइन पहुँच के लए उपकरण, वद्युत और संयोजकता चा हए, जो हर
घर म नह — इस लए प्रौद्यो गक अंतर पाट भी सकती है और बढ़ा भी सकती है। और कुछ कौशल पद पर नह
सीखे जा सकते : वेल्डर को कुछ धातु जलानी ही पड़ती है, रसोइए को कुछ व्यंजन बगाड़ने ही पड़ते ह, और अध्याय
क अपनी प्र शक्षण क प रभाषा व्यावहा रक है — नमाण स्थल का अवलोकन, सामग्री परीक्षण, सुरक्षा
प्र क्रयाओं को समझना। सबसे अच्छा ढं ग वही है जो स वल इंजी नय रग वाले उदाहरण म है : सद्धांत ऑनलाइन
या कक्षा म सी खए, फर उन्ह वास्त वक कायस्थल पर करके दे खए।
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प्र.4 कौशल वह है जसे आप अभ्यास से सीखते और उसम नपुण होते ह। यह कसी भी काय, जैसे— खेल खेलना,
रचनात्मक लेखन करना, ग णत क समस्याएँ हल करना, भोजन बनाना आ द के प्रभावी नष्पादन म आपक
सहायता करता है। यहाँ तक क लोग से उ चत संवाद स्था पत करना भी एक कौशल है। य द आज आपको कोई
एक कौशल सीखने का अवसर मले तो आप कौन-सा कौशल सीखना चाहगे और क्य ?
इसका उत्तर आपका अपना है — कतु अच्छा उत्तर एक नह , तीन काम करता है : कौशल का ठ क-ठ क नाम लेता है, कसी
वास्त वक प र स्थ त से जुड़ा कारण दे ता है, और यह भी बताता है क आप उसका अभ्यास कैसे करगे — क्य क अध्याय
कौशल को अभ्यास और प्र शक्षण से आने वाली क्षमता कहता है। “मुझे को डग सीखनी है” जैसा अस्पष्ट उत्तर दुबल है; “म ऐसा
एक कायक्रम लखना चाहता ँ जो मेरी एक वास्त वक समस्या हल कर दे ” सशक्त है।
अ े उत्तर का अंग स्वयं से पू छए
नाम ठ क-ठ क “संग ीत” नही ं, “तबला बजाना”; “अच्छा बोलना” नही ं, “कक्षा के सामने िबना पच के तीन िमनट बोलना”
ली जए
यही क्य आज आप क्या नही ं कर पाते जो इससे कर पाएँग े? इससे और िकसे लाभ होगा?
सीखगे कैसे कौन िसखा सकता है — कोई बुजगु , िशक्षक, पड़ोसी, या स्वयं (SWAYAM) का िनःशुल्क पाठ क्रम? सप्ताह में
िकतना अभ्यास?
सफलता कैसे जानगे ऐसी एक परीक्षा जो आप छह महीने में सचमुच पास कर सकें
नमूना उत्तर: “म बना पच दे खे सबके सामने बोलना सीखना चा ँगा। हमारे वद्यालय म हर समूह-प रयोजना के
अंत म प्रस्तु त होती है, और मुझे वषय आता है, फर भी खड़े होते ही शब्द नह नकलते — अथात मेरा ज्ञान अपने
वास्त वक मूल्य से कम रह जाता है। यह प्र तभा नह , कौशल है : यह अभ्यास और प्र शक्षण से सुधरता है, ठ क
जैसा अध्याय कहता है। म प्र त दन दस मनट ऊँचे स्वर म प ँ गा, फर सप्ताह म एक बार प रवार के सामने अपनी
पढ़ हुई कसी बात पर दो मनट बोलूँगा, और महीने म एक बार प्राथना-सभा म स्वेच्छा से बोलूँगा। मेरी परीक्षा यह
होगी क अगली समूह-प रयोजना म अकेले, तीन मनट, बना कागज पकड़े प्रस्तुत करूँ। मने इसे कसी तकनीक
कौशल पर इस लए चुना क यह आगे सीखे जाने वाले हर कौशल का मूल्य बढ़ा दे ता है — जो अ भयंता अपना
डजाइन समझा न सके, उसे कसी और के समझाने क प्रतीक्षा करनी पड़ती है।”
आपके चुनाव के पीछे का अथशास्त्र: आप जो भी चुन, आप मानव पूँजी बना रहे ह — और मानव पूँजी वह
अकेली पूँजी है जसे कोई आपसे ले नह सकता। इसम एक वशेषता और है जो भौ तक पूँजी म नह : यह उपयोग
से बढ़ती है। प्र त दन चलने वाली मशीन घसती है; प्र त दन प्रयोग होने वाला कौशल और पैना होता है।
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प्र.5 क्या आप मानते ह क उद्य मता उत्पादन क ‘प्रेरक श क्त’ है? क्य या क्य नह ?
हाँ — इस वशेष अथ म क उद्य मता ही शेष तीन कारक को ग त दे ती है; कतु नह , य द ‘प्रेरक श क्त’ का अथ यह
लया जाए क वह अकेले कुछ उत्पा दत कर सकती है। पहले अपनी स्थ त बताइए, फर दोन पक्ष र खए।
इसे प्रेरक श क्त कहने के पक्ष म। भू म, श्रम और पूँजी तीन न ष्क्रय ह। भूखंड खाली पड़ा रहता है, मशीन बेकार खड़ी रहती है
और कुशल श्र मक बेरोजगार बैठा रहता है, जब तक कोई यह तय न करे क बनाना क्या है और उसका उत्तरदा यत्व न ले। चत्र
7.16 बताता है क वह ‘कोई’ क्या करता है, और उसक हर बात पहल का काय है —
समस्या क पहचान कर उसके नए समाधान प्रस्तुत करता है — जब तक आवश्यकता दखे नह , कुछ उत्पा दत नह होता।
समय और धन का नवेश कर जो खम उठाता है — शेष तीन कारक को भुगतान वस्तु बके या न बके मलता है; केवल
उद्यमी को नह ।
उत्पादन के व भन्न कारक को संयो जत करता है — यही वस्तुतः उत्पादन का आरंभ है।
व्यापार संचालन और काय प्रणाली से संबं धत प्रमुख नणय लेता है।
नवाचार के माध्यम से समाज के कल्याण म योगदान दे ता है, रोजगार सृ जत करता है और आजी वकाओं को सहारा दे ता
है।
रत्ना छोटा उदाहरण है, जे.आर.डी. टाटा बड़ा : 1932 म भारत के पास पायलट, पूँजी और भू म सब थे, कतु हवाई सेवा तब तक
नह थी जब तक एक व्य क्त ने उसे आरंभ करने का नश्चय नह कया।
इसे बढ़ा-चढ़ाकर न कहने के पक्ष म। पूँजी के बना उद्यमी मशीन नह खरीद सकता, कुशल श्रम के बना उसे चला नह सकता,
और भू म या कच्चे माल के बना उसके पास काम करने को कुछ नह — अथात उद्य मता उत्पादन को संग ठत करती है, उत्पन्न नह
करती। उत्पादन नजी उद्यमी के बना भी होता है : सरकारी वभाग, दुग्ध संघ जैसी सहकारी संस्थाएँ और पा रवा रक खेत भी
कारक को जोड़ते ह। और उद्यमी के नणय मूल्य बना भी सकते ह और नष्ट भी कर सकते ह, इसी लए अध्याय उद्यमी वाले भाग के
बाद उत्तरदा यत्व वाला भाग रखता है।
दोन बात एक साथ कहने का सट क ढं ग: उद्य मता आरंभ करने और संग ठत करने वाला कारक है — जो
तय करती है क क्या बनेगा, प्रत्येक अन्य कारक कतना लगेगा, और असफल होने पर हा न कौन उठाएगा। उसे
प्रेरक श क्त कहना उ चत है। उसे पूरा इंजन कहना नह , क्य क अध्याय क अपनी उपमा पहेली के टु कड़ क है,
और पहेली म कोई एक टु कड़ा पूरा चत्र नह होता।
प्र.6 क्या प्रौद्यो गक अन्य कारक , जैसे श्रम को प्र तस्था पत कर सकती है? यह अ ा है या बुरा? अपने उत्तर क
पु ष्ट उदाहरण क सहायता से कर।
हाँ, प्रौद्यो गक श्रम को प्र तस्था पत कर सकती है — कतु वह व्य क्तय से अ धक काय को प्र तस्था पत करती है, और
यह अ ा है या बुरा, यह पूरी तरह इस पर नभर है क वस्था पत श्र मक को पुनः प्र श क्षत कया जाता है या नह ।
पुस्तक का अपना उदाहरण: कृ ष काय म मशीन का बढ़ता उपयोग श्रम पर नभरता को कम कर सकता है। ट्रै क्टर और ेशर एक
दन म वह कर दे ते ह जो एक दजन श्र मक सप्ताह भर म करते थे। इसके साथ अध्याय के अन्य उदाहरण भी ली जए — डाक के
स्थान पर ई-मेल, हाथ से छड़काव के स्थान पर ोन, और शल्य च कत्सा म सहायता करते रोबोट् स।
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अ ा बुरा
समान या कम इनपुट्स से अिधक उत्पादन — अध्याय पौद्योिगकी की िजस श्रिमक का काय मशीन ले ले ती है, उसकी आजीिवका जाती
भूिमका इसी रूप में बताता है है, और सबसे पहले सबसे कम कु शल पर मार पड़ती है
खतरनाक, दोहरावपूण और कमरतोड़ काम मनुष्य से हट जाता है — हाथ आयु में बड़े श्रिमक पुनः पिशक्षण नही ं ले पाते; एक गाँव एक ही ऋतु
से रसायन िछड़कना सचमुच हािनकारक है में अपनी मुख्य मजदू र ी खो सकता है
लागत कम और ग ण
ु वत्ता बेहतर, इसिलए वस्तु अिधक लोगों तक पहच
ु ँ ती है लाभ मुख्यतः मशीन के स्वामी को जाता है, इसिलए असमानता बढ़
सकती है
नए पकार के काय बनते है ं — डोन संचालक, सॉफ्टवेयर एवं ग ण
ु वत्ता नए काय ं के िलए पायः वे कौशल चािहए जो िवस्थािपत श्रिमकों के
अिभयंता, ऑनलाइन पाठ क्रम बनाने वाले , मशीन ठीक करने वाले पास नही,ं और वे काय दू स रे स्थानों पर होते है ं
और प्र तस्थापन ही पूरी कहानी नह है। अध्याय एक उल्टा उदाहरण भी दे ता है : त्रआयामी मुद्रण (3-डी प्र टग) बड़े पैमाने
पर हथकरघा उत्पाद तैयार करके वस्त्र क्षेत्र क लुप्त होती कला-शै लय को पुनज वत कर सकती है। यहाँ प्रौद्यो गक कसी शल्प
को मारने के बजाय उसे बाजार लौटा दे ती है। वह यह भी स्मरण कराता है क चरखी और ठे लागाड़ी आज भी उपयोग म ह —
प्रौद्यो गक सब कुछ बहा नह ले जाती।
नणय, संतु लत रूप म: प्रौद्यो गक से उत्पादन बढ़ना अच्छा है; कसी श्र मक का बना कसी माग के बाहर हो
जाना बुरा है। ये दोन एक ही घटना नह ह, और समाज इन्ह अलग कर सकता है। इसी लए अध्याय कौशल-
वकास और प्र शक्षण को व्यवसाय का उत्तरदा यत्व बताता है — “ जससे श्र मक को ऐसे कौशल प्राप्त हो सक
जो उन्ह श्रम बाजार म प्र तस्पध बनाए रख” — और इसी लए स्वयं (SWAYAM) जैसे नःशुल्क मंच महत्वपूण ह।
प्रश्न यह नह क मशीन आने द जाए या नह , अ पतु यह क जस व्य क्त का काम गया उसे कह और खड़े होने म
सहायता मली या नह ।
प्र.7 शक्षा और कौशल-प्र शक्षण मानव पूँजी को कस प्रकार प्रभा वत करते ह? क्या वे एक-दूसरे को प्र तस्था पत
करते ह या एक-दूसरे के पूरक ह?
दोन मानव पूँजी बढ़ाते ह, और वे एक-दूसरे के पूरक ह, प्र तस्थापक नह । कोई भी दूसरे का काम नह कर सकता।
शक्षा कौशल-प्र शक्षण
पुस्तक के अनुसार ज्ञान पाप्त करने में सहायता करती है; यह पिक्रया मूल भूत साक्षरता िकसी िवशेष काय या गितिविध के िलए
यह है क्या से आरंभ होकर िविशष्ट क्षेत्र ों में िनपुणता तक पहच
ु ँ ती है आवश्यक कौशल को सीखने की पि क्रया
यह क्या दे ती है क्यों — िसद्धात
ं , तक , और उन समस्याओं को हल करने की क्षमता कै से — हाथ, िववेक, गित और सुरक्षा की
जो पहले कभी िमली नही ं आदते ं
यह होती कहाँ है िवद्यालय, महािवद्यालय; िवद्यालय में सीखा हुआ ज्ञान को सम ृद्ध िनम ण स्थल पर , कायशाला में, रसोई में;
करता है व्यावहािरक अनुभव ारा
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अध्याय का अपना उदाहरण इस प्रश्न को सुलझा दे ता है। स वल इंजी नय रग का वद्याथ डजाइन और नमाण साम ी के
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सद्धांत सीखता है — यह शक्षा है। इन्ह सद्धांत का उपयोग सड़क और पुल जैसी आधारभूत संरचना बनाने म होता है, और
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g एवं व्यावहा रक अनुभव से।
.c है — नमाण स्थल के अवलोकन, सामग्री परीक्षण, सुरक्षा प्र क्रयाओं को समझने
चुनौती एक द घका लक, कम लागत वाले और पयावरण के अनुकूल समाधान क होती है। पुस्तक कहती है क यह चुनौती प्र शक्षण
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sप्रe शक्षण, दोन से ही व्य क्त अपने कायक्षेत्र म उत्कृष्ट बन पाता है।
ारा प्राप्त क जाती
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शक्षा और
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दोन दशाओं म प्र तस्थापन क्य वफल है: प्र शक्षण के बना शक्षा ऐसा व्य क्त दे ती है जो बीम पर पड़ने वाला
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भार तो नकाल सकता है, कतु उसने कभी कंक्र ट ढलते नह दे खा — वह स्थल पर खराब मश्रण नह पहचान
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ag जाता है। पहला कर नह पाता, दूसरा बदल नह पाता। और चूँ क
पाएगा। शक्षा के बना प्र शक्षण ऐसा व्य क्त दे ता है जो ठ क वही काम कर सकता है जो उसे दखाया गया, और
डजाइन, सामग्री या मशीन बदलते ही अटक
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पुरानी प्रौद्यो गक को नई प्र तस्था पत करती रहती है, दूसरे का कौशल अल्पजीवी होता है — यही सबसे व्यावहा रक
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तक है क पुनः प्र शक्षण को संभव शक्षा ही बनाती है।
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तीसरे साथी को न भू लए: अध्याय इनके साथ स्वास्थ्य को भी गनाता है। शक्षा, प्र शक्षण और स्वास्थ्य सेवा
a gl मलकर मानव पूँजी के सहयोगी कारक ह, और जो व्य क्त अस्वस्थ है वह शेष दोन का पूरा उपयोग नह कर
सकता।
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प्र.8 कल्पना क जए क आप एक a gl आरंभ करना चाहते ह जो स्ट ल क पानी क बोतल का उत्पादन करेगा।
व्यवसाय
आपको कस प्रकार के इनपुट्स क आवश्यकता होगी? आप उन्ह कैसे प्राप्त करगे? य द कोई एक कारक
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उपलब्ध न हो तो आपके व्यवसाय के संचालन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
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emकारक पर क्रम से च लए, फर बताइए क प्रत्येक कहाँ से आएगा।
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कारक इस व्यवसाय को क्या चा हए म इसे कैसे प्राप्त करूँगा
भू म लगभग 500–1,000 वग मीटर का शेड; िवश्वसनीय िवद्य तु भूिम खरीदने के बजाय िनकटतम औ द्य ोिगक क्षेत्र में
संयोजन; ध ल
ु ाई और शीतलन के िलए जल; और कच्चा माल इकाई िकराए पर लूँग ा — अध् याय की वही बात िक
— स्टेनले स स्टील , जो लौह अयस्क और क्रोिमयम से बनता है व्यवसायी भूिम खरीदते है ं अथवा िकराए पर ले ते है।
ं
स्टील शीट िकसी रोिलंग िमल या िवतरक से कं ु डिलयों में
खरीदू ँग ा
श्रम एवं पेस संचालक, वेल्डर, पॉिलश करने वाले , ढक्कन और गैस के ट स्थानीय स्तर पर और सरकार के नेशनल किरयर सिवस
मानव पूँजी जोड़ने वाला, ग ण
ु वत्ता जाँचने वाला, एक िडजाइनर, एक से भत ; आई.टी.आई. पिशिक्षत पेस एवं वेिल्डंग कम ; शेष
पयवेक्षक, तथा िवक्रय एवं ले खा के िलए एक व्यिक्त को कायस्थल पर पिशक्षण, क्योंिक “कौशल -िवकास और
पिशक्षण” िनयोक्ता के रूप में मेर ा उ त्त रदाियत्व है
पूँजी डीप-डॉइंग पेस , िशयिरंग मशीन, खराद, वेिल्डंग से ट, बिफं ग एवं पहले व्यिक्तगत बचत और पिरवार , िफर कमी के िलए
पॉिलिशंग मशीने,ं िनव त-ऊष्मारोधन एवं िरसाव परीक्षण ं ऋण, िजसे एक अविध में ब्याज सिहत चक
बैक ु ाऊँगा —
उपकरण, छपाई या ले जर अंक न मशीन, पैिकं ग टेबल, िवतरण ठीक वही माग जो र त्ना ने अपनाया
का वाहन — और कच्चे माल, वेतन तथा िबना िबके माल के
िलए कायशील पूँजी
उद्य मता बोतल बनाने का िनणय, िडजाइन और मूल्य, जोिखम, और यह मेर ा अपना है। मैं सम स्या पहचानता हू ँ — स स्ती
व्यवसाय के दै िनक िनणय प्लािस्टक बोतले ं जो िरसती है ं और फें क दी जाती है ं —
और शेष तीन कारकों को जोड़कर उसका समाधान
करता हू ँ
प्रौद्यो गक दोहरी दीवार वाली बोतल के िलए डीप-डॉइंग और िनव त- मशीने ं खरीदू ँग ा; पि क्रयाएँ आपूितकत ओं और ऑनलाइन
ऊष्मारोधन; ले जर अंक न; यू.पी.आई. आधािरत भुग तान; एक पाठ क्रमों से सीखूँगा
वेबसाइट
य द कोई एक कारक न हो। अध्याय का नयम है क कारक क अनुप स्थ त या दुरुपयोग पर उत्पादन क गुणवत्ता प्रभा वत हो
सकती है या उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है। इनम से क्या होगा, यह इस पर नभर है क कौन-सा कारक गया।
अनुप स्थत कारक क्या होगा अकुशल या ठप?
स्ट ल क आपू त नह दबाने को कु छ नही ं। मशीने ं और श्रिमक खाली बैठे रहते है,ं जबिक वेतन और ब्याज ठप
(भू म) चलते रहते है ं
कुशल वेल्डर नह (श्रम) बोतले ं जोड़ से िरसती है ं और अस्वीकृ त होती है;ं या तो उत्पादन घटता है या अकु शल , और लंबा चला
अपव्यय बढ़ ता है तो ठप
पूँजी नह (ऋण पेस खरीदे ही नही ं जा सकते, या माल का भुग तान नही ं हो सकता; व्यवसाय आरंभ ठप
अस्वीकृत) ही न हो
वद्युत या जल नह पेस और ध ल
ु ाई रुक जाते है;ं जनरे टर लागत बहुत बढ़ ा दे ता है ठप, या अत्यंत महँग ा
उद्यमी नह सब कु छ उपिस्थत है और कोई िनणय नही ं — न िडजाइन चुना गया, न आदे श िदया आरंभ ही नही ं होगा
गया, न मूल्य तय हुआ
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नकालने योग्य नष्कष: उत्पादन चार कारक का योग नह , गुणनफल है — य द कोई एक शून्य हो, तो उत्तर
शून्य है, चाहे शेष कतने ही बड़े ह । इसी लए अध्याय इन्ह पहेली के टु कड़ से जोड़ता है, और इसी लए व्यवसाय-
योजना म चार का प्रबंध आरंभ करने से पहले करना पड़ता है, एक-एक करके नह ।
प्र.9 कसी उद्यमी या संस्थापक का साक्षात्कार क जए और जा नए क उन्ह व्यवसाय आरंभ करने क प्रेरणा कहाँ से
प्राप्त हुई, उन्ह कौन-कौन से अवसर प्राप्त हुए और उन्ह कन- कन चुनौ तय का सामना करना पड़ा। आप समूह
म बँटकर एक प्रश्नावली बना सकते ह और प्राप्त जानकारी को एक रपोट म साझा कर सकते ह।
व ध। जोड़ी बनाकर काम क जए — एक पूछे, दूसरा लखे, जससे बातचीत रुके नह । ऐसा व्य क्त चु नए जस तक पहुँच सक :
दुकानदार, दज , फूड स्टॉल का स्वामी, छोट कायशाला का मा लक, ूशन कद्र का संस्थापक। पहले अनुम त ली जए, लगभग बीस
मनट ली जए, और अंत म अपने नोट् स पढ़कर सुना द जए ता क कुछ गलत दज न हो।
अध्याय के अनुसार बनी प्रश्नावली। प्रश्न खुले र खए और उन्ह कारक के अनुसार समूहबद्ध क जए, जससे आपक रपोट
लगभग स्वयं बन जाएगी —
1. इससे पहले आप क्या करते थे, और अपना काम आरंभ करने क प्रेरणा कहाँ से मली?
2. आपको ऐसी कौन-सी समस्या दखी जसे कोई ठ क से हल नह कर रहा था?
3. यह स्थान क्य चुना, और यह आपका अपना है या कराए का? (भू म)
4. आपके साथ कतने लोग काम करते ह? उन्ह ने यह काम कहाँ सीखा? क्या आप उन्ह प्र श क्षत करते ह? (श्रम एवं मानव पूँजी)
5. सबसे पहले कौन-से उपकरण खरीदने पड़े और उनक लगभग लागत कतनी थी? (पूँजी)
6. धन कहाँ से आया — बचत, प रवार, बक ऋण? ऋण मलना क ठन था? (पूँजी)
7. सबसे क ठन वष कौन-सा था और कस बात ने लगभग रोक ही दया था?
8. क्या कसी नई प्रौद्यो गक ने आपका काम बदला — यू.पी.आई., कोई डलीवरी ऐप, कोई नई मशीन?
9. आप अपने प्र तस्प धय से अलग क्या करते ह?
10. य द सरकार का कोई एक नयम सरल हो जाए तो आपको सबसे अ धक सहायता कससे मलेगी?
11. जो वद्याथ अपना कुछ आरंभ करना चाहता है, उससे आप क्या कहगे?
रपोट का ढाँचा — एक पृष्ठ पयाप्त है : हमने कसका साक्षात्कार लया और व्यवसाय क्या है · प्रेरणा · चार कारक, एक-एक छोटा
अनुच्छेद · उन्ह दखे अवसर · उनक चुनौ तयाँ · हमने क्या सीखा। एक चत्र या रेखा चत्र और एक आँकड़ा अवश्य जो ड़ए।
नमूना नोट् स: “हमने श्रीमती सुनीता दे वी से बात क , जो अपने स्वयं-सहायता समूह क चार म हलाओं के साथ
अचार बनाने क इकाई चलाती ह। प्रेरणा: वे पहले से ही रश्तेदार के लए अचार बनाती थ और उन्ह लगा क इसे
बेचा जा सकता है; वे ऐसा काम भी चाहती थ जो घर के पास हो। भू म: अपने घर के दो कमरे, और अगले गाँव के
कसान से खरीदे आम एवं मच। श्रम: चार म हलाएँ, सभी उन्ह क सखाई हुई; उनके अनुसार सबसे क ठन बात
यह सखाना है क तेल कब पयाप्त गरम हुआ। पूँजी: आरंभ म ₹40,000 — स्ट ल के बड़े बतन, मतबान और
सी लग मशीन — जसम आधा बचत से और आधा स्वयं-सहायता समूह से आया। अवसर: पास के राजमाग के
ढाब को एक स्थर स्थानीय आपू तकता चा हए था। चुनौ तयाँ: हर खेप म एक-सी गुणवत्ता रखना, और
एफ.एस.एस.ए.आई. लाइसस क कागजी प्र क्रया, जसम चार महीने लगे। हमने क्या सीखा: उन्ह ने कहा क
व्यवसाय तभी स्थर हुआ जब उन्ह ने मूल्य पर प्र तस्पधा छोड़कर हर मतबान पर त थ छापनी आरंभ क — ढाबे
सस्तापन नह , गुणवत्ता खरीद रहे थे।”
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा म नोट् स मलाते समय क्या दे खए: लगभग हर उद्यमी धन और कुशल श्र मक — इन्ह दो को सबसे बड़ी
बाधा बताएगा, जो पूँजी और मानव पूँजी के वषय म अध्याय का दावा है, कतु अब वह आपक अपनी कक्षा ारा
नकाला गया नष्कष होगा, पुस्तक से पढ़ा हुआ वाक्य नह ।
प्र.10 अथशास्त्री क भाँ त वचार कर। आइए पता लगाएँ क क्या होता है जब प र स्थ तयाँ प रव तत होती ह। य द
आप रत्ना होते तो, नम्न ल खत प र स्थ तय म क्या करते? अपने सहपा ठय के साथ चचा कर। क. मान
ली जए क आपके कायस्थल का कराया अचानक दोगुना हो जाता है। क्या आप लागत क भरपाई के लए
परोसे जाने वाले भोजन क क मत बढ़ाएँगे? क्या आप सस्ते स्थान क खोज करगे? यह आपके व्यवसाय को
कस प्रकार प्रभा वत करेगा? ख. कल्पना क जए क आपका एक कमचारी अचानक काम छोड़ दे ता है। क्या
शेष कमचारी उतना ही काम संभाल सकते ह? नए कमचारी को आक षत करने के लए क्या आप अ धक वेतन
दगे? ग. आपको अपने भोजनालय म अ तकनीक एवं उपकरण लाने के लए एक लघु ऋण प्राप्त होता है।
क्या इससे उत्पादन म वृ द्ध या गुणवत्ता म सुधार होगा? क्या आप इसक सहायता से अ धक ाहक तक पहुँच
पाएँगे? घ. मान ली जए क आपके पड़ोस म एक नया भोजनालय खुल जाता है। आप ाहक को आक षत
करने और उन्ह अपना ाहक बनाए रखने के लए क्या करगे? क्या आप अपनी सेवा म सुधार करगे, क मत कम
करगे या फर कुछ नया उपलब्ध कराएँगे? ङ. व्यवसाय संचालन को अ धक सहज बनाने हेतु कन सरकारी
नयम म संशोधन कए जाने चा हए?
प्रत्येक प र स्थ त को उत्पादन के कसी एक कारक म आए प रवतन के रूप म दे खए, और पू छए क उससे लागत,
उत्पादन और ाहक पर क्या असर पड़ेगा। ‘अथशास्त्री क भाँ त वचार करना’ यहाँ यही है।
क. कराया दोगुना — भू म क लागत म तीव्र वृ द्ध।
मान लीिजए िकराया ₹20,000 मािसक था और दोगुन ा होकर ₹40,000 हो गया।
अितिरक्त लागत = ₹20,000 पितमाह
यिद ‘पॉज पॉइंट ’ पितिदन लगभग 40 थािलयाँ परोसता है → 40 × 30 = 1,200 थािलयाँ मािसक
पित थाली अितिरक्त लागत = 20,000 ÷ 1,200 ≈ ₹17
क मत बढ़ाएँ? थोड़ी, और सावधानी से। ₹150 क थाली पर ₹17 लगभग 11 प्र तशत क वृ द्ध है। राजमाग के यात्री आगे
बढ़कर अगले भोजनालय पर रुक सकते ह; य द अ धक लोग ऐसा करने लग तो प्र त थाली मले अ त रक्त रुपये कई गुना
अ धक था लय के रूप म खो जाएँगे।
सस्ता स्थान खोज? राजमाग से हटकर कराया कम है — कतु राजमाग ही तो व्यवसाय है। ग्राहक स्थान के कारण आते ह,
इस लए सस्ता स्थान कराए म जतना बचाएगा, बक्र म उससे अ धक गँवा सकता है। भू म अचल भी है : उसके नय मत यात्री
ग्राहक नए स्थान पर उठाकर नह ले जाए जा सकते।
म वास्तव म क्या करूँगी: लंबी अव ध के लए कराया स्थर कराने क बात करूँगी, अपव्यय घटाकर और स ब्जयाँ सीधे
कसान से खरीदकर कुछ लागत सोखूँगी, उन्ह व्यंजन क क मत थोड़ी बढ़ाऊँगी जन पर ग्राहक कम ध्यान दे ते ह, और उसी
कराए से अ धक था लयाँ बेचने का प्रयास करूँगी — क्य क कराया एक स्थर लागत है, इस लए हर अ त रक्त ग्राहक प्र त
थाली कराए का भार घटाता है।
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
व्यवसाय पर प्रभाव: लाभ तत्काल घटे गा; य द वह न बक्र बढ़ा सक न क मत, तो कह और कटौती करनी होगी, और सबसे
बुरी स्थ त म उस स्थान पर व्यवसाय चलाना क ठन हो जाएगा।
ख. एक कमचारी का जाना — श्रम क अचानक कमी।
क्या शेष कमचारी संभाल लगे? रत्ना के पास सात लोग ह। छह कुछ समय तक अ धक काम करके संभाल सकते ह, सदा
नह : भीड़ के समय सेवा धीमी होगी, भूल और अपव्यय बढ़गे, और थके कमचारी बीमार पड़गे — पृष्ठ 168 का उत्पादकता
वाला तक उलटा चलता हुआ। अथात एक सप्ताह के लए हाँ, एक महीने के लए नह ।
अ धक वेतन? संभवतः। य द क्षेत्र म रसोइए दुलभ ह तो उन्ह आक षत करने के लए अ धक दे ना ही पड़ेगा — दुलभता मूल्य
के साथ यही करती है। कतु एक व्य क्त का वेतन दूसर से ऊपर करने से असंतोष फैलता है, इस लए बेहतर यह है क पद के
लए वेतन बढ़ाया जाए और यह बात सबको बताई जाए।
अथशास्त्री जो अन्य वकल्प गनाएगा: कसी वतमान सहायक को ऊपर के काम का प्र शक्षण दे कर सरल काम के लए नया
व्य क्त रखना (सस्ता भी, और मानव पूँजी भी बढ़ती है); केवल भीड़ के घंट के लए अंशका लक सहायक; अथवा श्रम के स्थान
पर थोड़ी पूँजी — बतन धोने क मशीन या आटा गूँधने क मशीन — जो अध्याय क उसी बात का प्रयोग है क प्रौद्यो गक श्रम
पर नभरता घटा सकती है।
सीख: कोई कारक कम पड़ने पर उत्पादन ठप होने से पहले अकुशल होता है। रत्ना को चा हए क कम-से-कम एक व्य क्त हर
काम म प्र श क्षत रहे, ता क कसी एक के जाने से रसोई रुक न सके।
ग. बेहतर तकनीक के लए लघु ऋण — पूँजी म वृ द्ध।
क्या उत्पादन या गुणवत्ता बढ़े गी? दोन , य द धन सही वस्तु पर लगे, क्य क प्रौद्यो गक का काम ही यही है — वह समान या
कम इनपुट्स के साथ अ धक उत्पादन करने म सक्षम बनाती है। व्यावसा यक गैस चूल्हा और रे जरेटर पकाने का समय और
खराब होने वाला माल दोन घटाएँगे; आटा गूँधने क मशीन रसोइए को तवे के लए मुक्त कर दे गी।
क्या अ धक ाहक तक पहुँच होगी? हाँ, दो प्रकार से — वह उसी भीड़ के समय अ धक था लयाँ परोस सकेगी, और दूसरी
तरह क प्रौद्यो गक (यू.पी.आई. का कोड, कसी डलीवरी ऐप पर सूची, फोन नंबर वाला बोड) उन ग्राहक को ले आएगी जो
अन्यथा आगे नकल जाते।
सावधानी: ऋण पर ब्याज है, जो हर महीने दे ना होगा, चाहे अ त रक्त ग्राहक आएँ या न आएँ। इस लए वही उपकरण चु नए
जो सबसे शीघ्र अपनी लागत नकाल दे , और हस्ताक्षर से पहले ग णत कर ली जए : य द ऋण क मा सक लागत ₹3,000 है
और रे जरेटर ₹4,000 का माल खराब होने से बचाता है, तो यह लाभ का सौदा है; य द वह ₹1,500 ही बचाता है, तो नह ।
घ. पड़ोस म नया भोजनालय।
क मत घटाना सबसे दुबल उत्तर है। नया भोजनालय भी घटा सकता है, और तब दोन उतने ही काम के लए कम कमाएँगे।
मूल्य-युद्ध वही जीतता है जसक जेब गहरी हो, और वह प्रायः छोटा स्वामी नह होता।
अपनी मौजूदा श क्त पर प्र तस्पधा क जए: स्वा दष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले भोजन क पाँच वष क प्र तष्ठा। गुणवत्ता हर
दन बल्कुल एक जैसी र खए, भोजनालय और शौचालय स्वच्छ र खए — राजमाग के या त्रय के लए यह नणायक होता है
— और सेवा तीव्र र खए, क्य क यात्री क असली लागत समय है।
कुछ नया द जए: कोई क्षेत्रीय वशेष व्यंजन जो दूसरे के पास न हो, या त्रय के लए न श्चत मूल्य वाली थाली, रास्ते के लए
पैक भोजन, सुर क्षत पेयजल एवं फोन चा जग, छायादार पा कग।
पुराने ाहक बनाए र खए: नय मत ग्राहक को पहचा नए, उनक प्र त क्रया ली जए, और ट्रक एवं बस चालक को — जो
यात्री लाते ह — यह रुकने का कारण द जए।
अथशास्त्री क बात: प्र तस्पधा केवल खतरा नह है। वह दोन भोजनालय को सुधरने पर ववश करती है, और यात्री को लाभ
होता है। रत्ना का लक्ष्य भन्न होना चा हए, केवल सस्ता नह ।
ङ. व्यवसाय संचालन सहज बनाने हेतु कन नयम म संशोधन हो। इसे इस दृ ष्ट से र खए क रत्ना जैसे छोटे स्वामी को वास्तव
म कन बात से जूझना पड़ता है — यह चचा का प्रश्न है, इस लए नारे नह , कारण द जए —
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक
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छोटे उद्यम के लए एकल- खड़क पंजीकरण — व्यापार लाइसस, खाद्य सुरक्षा लाइसस, दुकान एवं स्थापना पंजीकरण और
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जी.एस.ट . एक ही ऑनलाइन आवेदन म, और नणय के लए न श्चत समय-सीमा।
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छोटे व्यवसाय के लए सरल कर- ववरणी — वष म कम ववर णयाँ, और ऐसे प्रपत्र जो दुकानदार बना लेखाकार रखे भर
सके।
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a भरता है; यह चरण जतना सरल होगा, उतनी ही अ धक रत्नाएँ ह गी।
शीघ्र और बना प्र तभू त के लघु ऋण। अध्याय दखाता है क व्य क्तगत बचत कम पड़ती है और बक ऋण उस कमी को
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नरीक्षण के स्पष्ट, प्रका शत नयम — क्या जाँचा जाएगा, कौन जाँचेगा और कतनी बार — जससे अनुपालन संभव हो और
ईमानदार स्वामी घाटे म न रहे।
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बड़े क्रेताओं ारा छोटे आपू तकताओं का समय पर भुगतान, ता क छोट इकाई क कायशील पूँजी फँसी न रहे।
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पाँच प र स्थ तय म समान बात क्या है: हर प र स्थ त कसी एक कारक क उपलब्धता या उसक क मत
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बदलती है, और हर बार रत्ना के पास तीन म से एक उत्तर होता है — प्र तस्थापन (सहायक के स्थान पर मशीन),
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मतव्य यता (बढ़े कराए के बदले कम अपव्यय), या व शष्टता (कम क मत के बदले बेहतर गुणवत्ता)। यही तीन
m .c लघु-व्यवसाय का पूरा अथशास्त्र बनाते ह, और ये सीधे अध्याय के उसagकथन से नकलते ह क कारक
seअनुपात म मलाए जाते ह जसे उत्पादक बदल सकता है।
उत्तर मलकर
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अध्याय — एक नज़र म ag
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आपके उपयोग क प्रत्येक वस्तु एक उत्पादन प्र क्रया से होकर आती है। वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन म उपयोग कए
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जाने वाले संसाधन या इनपुट्स ही उत्पादन के कारक कहलाते ह। अथशास्त्र इन्ह चार प्रकार म बाँटता है — भू म, श्रम, पूँजी
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और उद्य मता। प्रौद्यो गक पाँचवाँ कारक नह , अ पतु एक सहयोगी है — यह व्यवसाय को समान या कम कारक से
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उत्पादन करने म सक्षम बनाती है।
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अथशास्त्र म ‘भू म’ का अथ केवल भूखंड नह है। इसम मृदा, वन, जल, वायु, सूय का प्रकाश, ख नज, तेल और प्राकृ तक
गैस — प्रकृ त ारा दया गया सब कुछ स म्म लत है। व्यवसायी आवश्यक भू म या तो खरीदते ह अथवा एक न श्चत अव ध के
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mतात्पय उत्पादन म प्रयुक्त शारी रक और मान सक योगदान से है। मानव glase
लए कराए पर लेते ह, जैसा रत्ना ने अपने राजमाग के भोजनालय ‘पॉज पॉइंट’ के लए कया।
श्रम और मानव पूँजी एक ही वस्तु नह ह। श्रमcका
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पूँजी उन व शष्ट कौशल , ज्ञान, क्षमताओंsऔर mवशे
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agहै।lइसके सहयोगी कारक ह — शक्षा और प्र शक्षण, स्वास्थ्य सेवा, तथा सामा जक
षज्ञता से है जो उस श्रम को करने के लए आवश्यक होते ह — अथात वह
उस श्रम क गुणवत्ता और दक्षता
एवं सांस्कृ तक प्रभाव — जैसे जापान का काइजेन (सतत सुधार, 1940 के दशक के मध्य से) और जमनी क काय नष्ठा।
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भारत क मानव पूँजी युवा है, कतु असमान रूप से वक सत। वश्व बक के 2023 के अनुमान के अनुसार वयस्क
साक्षरता दर पुरुष के लए 85 प्र तशत और म हलाओं के लए 70 प्र तशत है। भारतीय
s e m आ थक सवक्षण 2024 के
. omसार 65 प्र तशत जनसंख्या 35 वष से कम आयु क है — यह एक संभaा वत
cअनु g laजनां कक य लाभांश है, कतु केवल तभी
as em जब इस जनसंख्या को गुणवत्तापूण शक्षा, स्वास्थ्य, प्र शक्षण एवं कौशल प्र शक्षण उपलब्ध हो।
agl भारत क कौशल परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। काय एक अपण था, जो पूण समपण के साथ कया जाता था; उपकरण क
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पूजा होती थी, जो परंपरा आज भी वश्वकमा पूजा या आयुध पूजा के रूप म चल रही है; उत्पाद म कला और वद्या का मश्रण
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था; शल्पशास्त्र म मुद्रा, रंग, माप और अनुपात के सट क नदश थे। भारतीय 2000 वष से अ धक समय से क ल के स्थान
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पर डो रय से जहाज सलते रहे — यह तकनीक 16व शताब्द म हद महासागर म यूरोपीय आगमन के पश्चात तीव्रता से घट
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ag न मत संसाधन — मशीन, औजार, उपकरण, वाहन, व डग काट्स, कंप्यूटर, दुकान,
गई।
पूँजी का अथ है धन और मानव
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कारखाने। व्यवसाय इसे पहले व्य क्तगत बचत, प रवार एवं मत्र से, फर बक ऋण से ( जस पर ब्याज दे ना होता है), और
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बड़ी कंप नयाँ शेयर बाजार के माध्यम से जनता से जुटाती ह, जसके बदले लाभ का एक भाग लाभांश के रूप म दया जाता
है।
उद्यमी वह है जो शेष सभी कारक को जोड़ता है। चत्र 7.16 उसके पाँच काय बताता है — समस्या क पहचान कर उसके
नए समाधान प्रस्तुत करना, समय और धन का नवेश कर जो खम उठाना, उत्पादन के व भन्न कारक को संयो जत करना,
व्यापार संचालन के प्रमुख नणय लेना, तथा नवाचार के माध्यम से समाज के कल्याण म योगदान दे ना। अध्याय का उदाहरण ह
जे.आर.डी. टाटा (जन्म 1904) — 1932 म टाटा एयरलाइन्स, जो आगे चलकर एयर इं डया बनी; 1992 म भारत रत्न।
कारक का अनुपात उत्पाद पर नभर करता है। कृ ष, व नमाण और हस्त शल्प श्रम-प्रधान ह; सेमीकंडक्टर चप और
उपग्रह पूँजी-प्रधान। ये कारक एक-दूसरे के पूरक ह — कसी एक क अनुप स्थ त या दुरुपयोग से उत्पादन क गुणवत्ता
प्रभा वत हो सकती है अथवा उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है, जैसा को वड-19 महामारी के समय आपू त श्रृंखला म
व्यवधान से हुआ।
उत्पादन के साथ उत्तरदा यत्व भी जुड़े ह। त मलनाडु के चमड़ा कारखान का अप शष्ट न दय और मृदा को प्रदू षत कर
सकता है; पुराने स्माटफोन का उ चत पुनचक्रण न होने पर सीसा और पारा भू म तथा जल म मल सकते ह। श्र मक के प्र त
व्यवसाय के उत्तरदा यत्व ह — उ चत पा रश्र मक और सुर क्षत काय प र स्थ तयाँ, कौशल- वकास और प्र शक्षण, तथा
कायस्थल संबंधी अ धकार। भारत 2014 म सी.एस.आर. पर कानून बनाने वाला वश्व का प्रथम दे श बना, जसके
अंतगत कंप नय को पछले तीन वष के औसत लाभ का 2 प्र तशत इन ग त व धय पर व्यय करना अ नवाय है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक इसके वषय म क्या कहती है
उत्पादन के कारक वस्तुओ ं एवं से वाओं के उत्पादन में उपयोग िकए जाने प रचय, पृष्ठ 164 चार प्रकार म वग कृत — भू म, श्रम, पूँजी
वाले संस ाधन या इनपुट्स और उद्य मता
व्यवसाय या उद्यम एक फम, दुक ान, फै क्टी आिद जो वस्तुओ ं का हा शये क टप्पणी, व्यवसाय व भन्न कारक का संयोजन करते
उत्पादन या िवक्रय करती है अथवा से वा पदान पृष्ठ 164 ह, जससे लोग को आ थक ग त व धय म
करती है स म्म लत होने का अवसर मलता है
भू म के वल भौगोिलक भूखंड नही ं, अिपतु म ृद ा, वन, जल, ‘भू म (प्राकृ तक व्यवसायी आवश्यक भू म खरीदते ह अथवा
वायु, सूय का पकाश, खिनज, तेल और पाकृ ितक संसाधन)’, पृष्ठ 166 न श्चत अव ध के लए कराए पर लेते ह
गैस
श्रम उत्पादन में पयुक्त शारीिरक और मानिसक योगदान ‘श्रम (मानव काष्ठकार, कृषक, नमाण-श्र मक, शक्षक
संसाधन)’, पृष्ठ और च कत्सक व भन्न स्तर क शारी रक
166–167 श क्त, ज्ञान और कौशल का उपयोग करते ह
कौशल िकसी गितिविध या काय को अभ्यास और पिशक्षण हा शये क टप्पणी, पु लस अ धकारी, वैज्ञा नक, रसोइया —
ारा सुचारु रूप से करने की क्षमता पृष्ठ 166 सभी को वशेष प्रकार के ज्ञान और कौशल
क आवश्यकता होती है
मानव पूँजी वे िविशष्ट कौशल, ज्ञान, क्षमताएँ और िवशेषज्ञता जो ‘मानव एक संसाधन केवल बु नयाद श्रम नह , अ पतु उस श्रम क
श्रम करने के िलए आवश्यक होती है ं के रूप म’, पृष्ठ 167 गुणवत्ता और दक्षता का प रचायक भी
प्र शक्षण िकसी िवशेष काय या गितिविध के िलए आवश्यक हा शये क टप्पणी, स वल इंजी नयर के लए — नमाण स्थल
कौशल को सीखने की पिक्रया पृष्ठ 168 का अवलोकन, सामग्री परीक्षण, सुरक्षा
प्र क्रयाओं को समझना, व्यावहा रक अनुभव
काइजेन एक जापानी अवधारणा, िजसका अथ है ‘सतत ‘सामा जक एवं 1940 के दशक के मध्य से जापान म प्रयोग
सुध ार’ सांस्कृ तक प्रभाव’, म; इसने जापान को उच्च जीवन-गुणवत्ता
पृष्ठ 169 दलाई
वयस्क साक्षरता 15 वष और उससे अिधक आयु के वे व्यिक्त जो हा शये क टप्पणी, भारत, 2023 ( वश्व बक) — पुरुष 85
दर अपने दै िनक जीवन के िवषय में एक छोटा एवं सरल पृष्ठ 169 प्र तशत, म हलाएँ 70 प्र तशत
कथन पढ़ -िलख और समझ सकते है,ं उनका
पितशत
जनां कक य वह लाभ जो एक दे श को तब पाप्त होता है जब पृष्ठ 170 भारतीय आ थक सवक्षण 2024 — 65
लाभांश उसके पास बड़ी संख्या में युवा एवं कायरत व्यिक्त हों प्र तशत जनसंख्या 35 वष से कम आयु क
शल्पशास्त्र पाचीन ग ंथ, िजनमें मूितकला, िचत्रकला, भवन- ‘प्राचीन भारत क मू तकला संबंधी ग्रंथ म शारी रक मुद्रा, रंग ,
िनम ण, काष्ठकारी और आभूषण िनम ण संबंध ी कौशल परंपरा’, पृष्ठ माप और अनुपात का सट क ववरण
िवस्ततृ िनदश है ं 171
पूँजी अथशास्त्र में कोई भी भौितक या िवत्तीय संपित्त ‘पूँजी’, पृष्ठ 172– धन और मानव न मत संसाधन — मशीन,
िजसका उपयोग वस्तुओ ं या से वाओं के उत्पादन के 173 औजार, वाहन, व डग काट् स, कंप्यूटर,
िलए होता है दुकान, कारखाने, कायालय भवन
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कक्षा 8 सामा जक वज्ञान अध्याय 7 उत्पादन के कारक AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ अध्याय म कहाँ पु स्तक इसके वषय म क्या कहती है
ब्याज ऋण ले ने वाले ारा ऋण दे ने वाले को, उसका धन हा शये क टप्पणी, रत्ना ने एक न श्चत अव ध म ऋण क रा श
एक िनिश्चत अविध तक पयोग करने के बदले दी पृष्ठ 173 के साथ-साथ ब्याज का भी भुगतान कया
जाने वाली अितिरक्त रािश
लाभांश कं पनी ारा अपने शेयरधारकों को िनयिमत रूप से हा शये क टप्पणी, बड़ी कंप नयाँ शेयर बाजार के माध्यम से
लाभ में से िदया जाने वाला अंश पृष्ठ 173 लाभ का एक भाग दे ने के बदले जनता से धन
जुटाती ह
स्टाटअप सीिमत संस ाधनों वाला एक उद्यमशील उपक्रम, हा शये क टप्पणी, उद्यमी अपने स्टाटअप के वचार को सफल
िजसका उ े श्य तकनीकी का लाभ उठाते हुए तीव पृष्ठ 174 बनाने के लए कड़ी मेहनत करता है
वृिद्ध और िवस्तार करना होता है
आपू त श्रृंखला वस्तुओ ं के उत्पादन और िवक्रय में सिम्मिलत ‘कारक आपस म इसम व्यवधान से उत्पादन रुक जाता है, जैसा
व्यिक्तयों, संग ठनों, संस ाधनों, िक्रयाओं एवं कैसे संबं धत ह?’, को वड-19 महामारी के समय हुआ
पौद्योिगकी का अंतज ल पृष्ठ 178
कॉरपोरेट व्यवसायों ारा अपने संचालन में सामािजक और पृष्ठ 181 भारत 2014 म इस पर कानून बनाने वाला
सामा जक पय वरणीय िचंताओं को ध्यान में रखते हुए समाज वश्व का प्रथम दे श — पछले तीन वष के
उत्तरदा यत्व एवं जैव-िविवधता के िहत में काय करना औसत लाभ का 2 प्र तशत
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