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अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू
मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अक-योजना : सामामिक मिज्ञान
SUBJECT कोड सं ा : 087 PAPER कोड : 32/2/2
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
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8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।
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माध्यममक मिद्यालय परीक्षा (मार्च- 2020)
सामामिक मिज्ञान (087)
अंकन योिना 32/2/2
MM-80
QNO अपेमक्षत उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
NO.
अनुभाग - क
1. . D / रूस को जर्मन र्हासंघ के ३९ राज्य स प
ं े गए H-11 1
2. . बेगार- बबना बकसी पाररश्रबर्क के कार् करवाना
H-59 1
3. संगमित और असंगमित क्षेत्र के बीर् अंतर E-30 1
संगमित क्षेत्र
i. रोजगार बनयबर्त हैं।
ii. बनयर्ों और बवबनयर्ों का पालन बकया जाता है।
iii. वैतबनक अवकाश ,भबवष्य बनबि, दी जातीहै
(बकसी को भी सर्झाया जाना)
असंगमित क्षेत्र
i. रोजगार बनयबर्त नहीं हैं।
ii. बनयर्ों और बवबनयर्ों का पालन नहीं बकया जाता है।
iii. वैतबनक अवकाश ,भबवष्य बनबि,नहीं दी जाती है
(बकसी एक को भी सर्झाया जाना)
अथिा
प्रच्छन्न बेरोिगारी
एक गबतबवबि र्ें जब आवश्यकता से अबिक लोग लगे होते हैं , यह प्रच्छन्न
रोजगार के अंतगमत आता है: इसे बेरोजगारी के रूप र्ें भी जाना जाता है।
E-26 1
4. बितीयक क्षेत्र के बवकास के बलए उपाय E-20 1
i. नई और अबिर् प्र द्योबगकी को अपनाना।
ii. सेवा प्रबशक्षण कायमक्रर्ों र्ें।
iii. र्ाध्यबर्क क्षेत्र को बढावा दे ने के बलए सरकार िारा प्रोत्साहन प्रदान
बकया जाना।
iv. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(उपरोक्त र्ें से कोई एक)
1
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5. ताबलका आिाररत प्रश्न E-7 1
केरल
6. d / शहर की अर्ीर पररवार की एक लड़की iv। उसने भाई के सार्ान E-4 1
आज़ादी र्ांगी
7. ममिलाओं को समानता D.P-43 1
i. सरकार िारा सभी क्षेत्रों र्ें पुरुषों और र्बहलाओं को सर्ान
वेतन के बलए बनाए गए कानूनों का सख्ती से पालन बकया जाना
चाबहए।
ii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु
अथिा
पाररिाररक कानून
i. सभी िर्ों िारा बनाए गए पाररवाररक कानूनों र्ें र्बहलाओं के
साथ बकसी भी प्रकार का भेदभाव और अत्याचार नहीं बकया जाना
चाबहए।
ii. हर पररवार िारा छोटे पररवार के र्ानदं डों का पालन बकया
जाता है।
iii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु। D.P-46
1
(उपरोक्त र्ें से कोई एक)
8. (d)/ संघ सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय बनकाय के र्ध्य D.P-8 1
9. कांडला - G-88 1
अथिा
G-88 1
कोलकाता
10. a/ गुजरात G-61 1
11. जापान H-154 1
12. आयात शुल्क- H-100 1
बकसी दू सरे दे श से आने वाली चीज़ों पर वसूल बकया जाने वाला शुल्क I
अथिा
फ्लाई शटल
यह रस्सियों और पुबलयों के जररये चलने वाला एक यांबत्रक औज़ार है बजसका H-122 1
बुनाई के बलए इस्तेर्ाल बकया जाता है I
2
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13. (b) डच और फ्रेंच D.P-2 1
14. . बहुसंख्यकिाद- अगर कोई सर्ुदाय बहुसंख्यक है तो वह अपने र्नर्ाने ढं ग D.P-3 1
से दे श का शासन कर सकते है और अल्पसख्यक सर्ुदाय की जरूरतों की
अवहेलना कर सकता हैI
15. पुतमगाली H-168 1
अथवा
H-168 1
ताबर्ल
16. (a)/ / वे सस्ती और छोटे आकार की थीI H-162 1
17. a) छपाई के चलते ज्ञानोदय के बचंतको के बवचारो का प्रसार हुआI H-163 1
18. ररक्त स्थान भरें G-2 ½ +½=1
A- सार्ुदाबयक संसािन
B- व्यस्सक्तगत संसािन
19. (c) / बॉक्साइट की खदाने (iii) ओबडशा G-55 1
20. ररक्त स्थान भरें G-62 1
जैसलर्ेर
21. अनुभाग - ख
संगमित क्षेत्र के श्रममकों को रोिगार की सुरक्षा 3
E-30-31
i. रोजगार की शतें बनयबर्त हैं
ii. वैतबनक अवकाश और र्ेबडकल लीव।
iii. िेच्युटी और भबवष्य बनबि।
iv. न्यूनतर् र्जदू री र्ें कट ती।
v. कार् के बनबित घंटे।
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु
(सर्ि रूप से र्ूल्ांकन
अथिा
3
E-25
सभी सेिाएँ समान रूप से निी ं बढ़ रिी िैं
i. भारत र्ें सेवा अनुभागक्षेत्र र्ें बवबभन्न प्रकार के लोग हैं
ii. एक ओर सीबर्त संख्या र्ें सेवाएं हैं जो कुशल और बशबक्षत श्रबर्क
अत्यबिक रोजगार दे ती हैं
iii. दू सरे ओर परबहुत बड़ी संख्या र्ें श्रबर्क लगे हुए हैं -छोटे दु कानदारों,
3
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र्रम्मत व्यस्सक्तयों, पररवहन जैसी सेवाओं र्ें व्यस्सक्त,।
iv. ये लोग बर्ुस्सिल एक जीबवका कर्ाने के बलए प्रबंिन करते हैं
v. उनके बलए कोई वैकस्सल्पक अवसर नहीं है।
vi. इस कारण सेवा क्षेत्रक के ेे केवळ कुछ भागों का ही र्हत्व बढ रहा है
vii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(सर्ि रूप से र्ूल्ांकन बकया जाए)
22.
भारत में िूट उद्योग को प्रमुख समस्याओं
i. कृबत्रर् बवकल्प (बसंथेबटक )से अंतरराष्ट्रीय बाजार र्ें कड़ी प्रबतस्पिाम ।
ii. बां ग्लादे श, ब्राजील, बिलीपींस, बर्स्र और थाईलैंड जैसे प्रबतयोगी दे श। G-70
3
iii. अतराम ष्ट्रीय र्ां ग र्ें वृस्सि।
iv. भारत र्ें जूट पैकेबजंग के अबनवायम उपयोग की सरकारी नीबत ने अंतराम ष्ट्रीय
बाजार को प्रभाबवत बकया।
v. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकन्ही तीन बबंदुओं वणमन
अथिा
3
एक क्षेत्र में उद्योगों के स्थान को प्रभामित करने िाले कारक। G-66
i. कच्चे र्ाल की उपलब्धता।
ii. सस्ते श्रर् की उपलब्धता।
iii. पूंजी की उपलब्धता
iv. शस्सक्त की स्सस्थरता
v. बाजार से बनकटता
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(बकसी भी तीन बबंदुओं का वणमन
नोट - यबद कोई परीक्षाथी अंिेजी र्ाध्यर् र्ें प्रश्न संख्या 22 को नहीं बलखता है तो भी
उसे पूणम अंक बदए जा सकते हैं (3 अंक)
23. संघ सूर्ी के लक्षण
i. संघ सूची र्ें राष्ट्रीय र्हत्व के बवषय शाबर्ल हैं।
D.P-16 3
ii. दे श की रक्षा, बवदे शी र्ार्लों बैंबकंग, संचार और र्ुद्रा के बवषय र्ें शाबर्ल हैं
iii. संघ सरकार अपने बवषयों पर कानून बना सकती है।
vi. पूरे राष्ट्र के बलए सर्ान नीबत बनाने का आिार हैं।
vii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकन्ही तीन बबंदुओं का वणमन
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24. अंतराचष्ट्रीय व्यापार की उन्नमत
i. इसे बकसी दे श का आबथमक वैभव का सूचक र्ाना जाता है।
G-91 3
ii. बनयामत और आयात एक व्यापार के घटक हैं।
iii. जब बनयामत का र्ूल् आयात के र्ूल् से अबिक हो जाता है तो इसे
व्यापार का अनुकूल संतुलन कहा जाता है।
iv. अंतरामष्ट्रीय व्यापार बवदे शी र्ुद्रा अबजमत करने र्ें र्दद करता है।
v. दु बनया के सभी प्रर्ुख व्यापाररक ब्लॉकों के साथ भारत के व्यापाररक
संबंि हैं।
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(बकसी भी तीन का वणमन
25.
स्रोत आधाररत प्रश्न
21.1 मिमटश साम्राज्य के खखलाफ लड़ने के मलए मिात्मा गांधी का
H-57 1+1+1=3
िमथयार। (1 )
(i) असहयोग आं दोलन।
21.2अंिेज़ भारत र्ें कैसे जर्े (1)
(i) भारतीयों के सहयोग के कारण।
21.3 असहयोग को आं दोलन बनाने के बलए गांिीजी के बवचार। (1)
i. गांिीजी ने प्रस्ताव बदया बक असहयोग को आं दोलन कुछ चरणों र्ें बनाया
जाना चाबहएI
ii. उपाबियों का सर्पमण।
iii. बसबवल सेवाओं, सेना, पुबलस, अदालतों का बबहष्कार
iv. पररषदों, स्कूलों और बवदे शी वस्तुओं का बबहष्कार
v. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकन्ही एक बबंदु की व्याख्या
26. मिटे न में कॉनच लॉ को समाप्त करने के तीन प्रभाि
3
i. बहुत कर् कीर्त पर खाद्य पदाथो का आयात बकया जाने लगा I H-81
ii. आयाबतत खाद्य पदाथो की लगत बब्रटै न र्ें पैदा होने वाले खाि पदाथो से
कर् थीI
iii. बब्रबटश बकसानो की हालत बबगड़ने लगी क्ोंबक वह उस कीर्त का
र्ुक़ाबला नहीं क्र सकते थे I
iv. बवशाल भूभागों पर खेती बंद हो गयी I
v. हजारों पुरुषों और र्बहलाओं को कार् से बाहर कर बदया गया।
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
5
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बकन्ही तीन बबंदुओं की व्याख्या
अथिा
3
H-113
अंतराष्ट्रीय बािार में भरता के रे शमी और सूती उत्पादों के प्रभशाली िोने
के कारण
i. भारत के कपास और रे शर् की बेहतर गुणवत्ता।
ii. यहां के बने कपड़ों के थान पहाड़ी दरो से रे बगस्तान के पार ले जाये जाते थे
iii. औउपबनवेबषक बंदरगाहों से सर्ुद्री व्यापर चलता था , जैसे सूरत
iv. कोरोर्ंडल तट पर र्छलीपट् नर् और बंगाल र्ें हुगली के र्ाध्यर् से
भी दबक्षण पूवी एबशयाई बंदरगाहों के साथ खूब व्यापर चलता था
v. सूरत भारत को खाड़ी और लाल सर्ुद्री बंदरगाहों से जोड़ता है।
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(बकन्ही तीन बबंदुओं की व्याख्या
27. पयाचिरणीय धारणीयता में सुधार के तरीके
3
i. गैर-नवीकरणीय संसािनों जैसे- कोयला, पेटरोबलयर्, लकड़ी आबद का E-15
उपयोग कर् से कर् करना।
ii. भूजल का अत्यबिक उपयोग बंद करो
iii. ऊजाम के गैर पारं पररक स्रोत जैसे- स र ऊजाम , पवन ऊजाम आबद का
उपयोग करना।
iv. नबदयों र्ें पानी छोड़ने से पहले गर्म पानी और औद्योबगक अपबशष्ट्ों का
उपचार।
v. पाररस्सस्थबतक संतुलन के पोषण के बलए िीन बेल्ट प्रदान करना।
vi. सभी प्रकार के प्रदू षण को कर् करना - वायु, जल, भूबर् और शोर।
vii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(बकन्ही तीन बबंदुओं का का वणमन
28. भारतीय रािनीमत में सांप्रदामयकता की समस्या
i. साम्प्रदाबयकता की अबभव्यस्सक्त दै बनक जीवन र्ें बदखती है D.P-47 3
ii. िाबर्मक पूवाम िहों, िाबर्मक सर्ुदायों की रूबढयां और अन्य िर्ों के र्ुकाबले
बकसी एक िर्म की श्रेष्ठता र्ें बवश्वास।
iii. राजबनबतक पाबटम यां सर्थमन हाबसल करने के बलए जाबतगत भावनाओ को
उकसाते हैं
iv. सावमभ र् व्यसक र्त्तबिकार और ‘एक व्यस्सक्त- एक वोट’ की व्यवस्था ने
राजबनबतक सर्थमन पाने और लोगो को गोलबंद करने के बलए सबक्रय
v. कभी-कभी संचार सां प्रदाबयक बहं सा, दं गों और नरसंहार का कारण बन
सकता है ।
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंद
बकन्ही तीन बबंदुओं का वणमन
अथिा
6
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भारतीय मिधामयका में ममिलाओं के कम प्रमतमनमधत्व की समस्याएं ।
i. भारत अभी भी पुरुष प्रिान है , बपतृसत्तात्मक सर्ाज है ।
ii. र्बहलाओं र्ें कानून की साक्षरता दर।
iii. र्बहलाओं की सर्स्याओं पर उबचत ध्यान नहीं बदया जाता है।
iv. र्बहलाओं के बलए लोकसभा र्ें एक बतहाई सीटों के आरक्षण का एक दशक
से अबिक सर्य से लंबबत है ।
v. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु D.P-44 3
बकन्ही भी तीन बबंदुओं का वणमन
29. अनुभाग - ग
ओटो-िॉन मबस्माकच की भूममका
H-19 5
i. ओटो वॉन बबस्माकम जर्मनी के एकीकरण के बलए की गई प्रबक्रया के
जनक थे ।
ii. इस प्रबक्रया र्ें उन्होंने प्रशI की सेना और न करशाही की र्दद ली।
iii. उन्होंने ऑस्सररया, डे नर्ाकम और फ्रां स के साथ सात वषों तक तीन युि
लड़े ।
iv. प्रशI की जीत के साथ युि सर्ाप्त हो गए और जर्मनी के एकीकरण
की प्रबक्रया का अनुपालन बकया।
v. जनवरी 1871 र्ें, प्रशI के राजा, बवबलयर् I को जर्मन सम्राट घोबषत
बकया गया था।
vi. जर्मनी र्ें राष्ट्र-बनर्ामण की प्रबक्रया ने प्रशI राज्य शस्सक्त के प्रभुत्व का
प्रदशमन बकया।
vii. जर्मनी र्ें र्ुद्रा, बैंबकंग, कानूनी और न्याबयक प्रणाली का
आिुबनकीकरण बकया गया।
viii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(सर्ि रूप से र्ूल्ांकन बकया जाए)
अथिा
ियुत्सेपे मेखत्सनी की भूममका
i. एक क्रांबतकारी थे।
ii. उन्होंने गणराज्य के एकीकरण के बलए एक कायमक्रर् की र्ांग की ।
iii. उन्होंने अपने लक्ष्ों के प्रसार के बलए यंग इटली नार्क एक गुप्त
सर्ाज का गठन बकया।
iv. 1831 और 1843 र्ें क्रांबतकारी बवद्रोह की बविलता के बाद इटली के
एकीकरण की बजम्मेदारी सरबडबनया बपडर्ॉन्ट राजा बवक्टर इर्ैनुअल
बितीय पर आ गई ।
v. 1861 र्ें बवक्टर इर्ैनुएल II को संयुक्त इटली का राजा घोबषत बकया
गया था।
vi. एक एकीकृत इटली के बलए उन्होंने आबथमक बवकास और राजनीबतक 5
H-20
प्रभुत्व की संभावना की पेशकश की।
7
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vii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(सर्ि रूप से र्ूल्ांकन बकया जाए)
30. िीमिका मनिाचि और िामणखज्यक कृमि के बीर् भेद
िीमिका मनिाचि
G-34-35 5
i. यह भूबर् के छोटे पैर्ाने पर की जाती है।
ii. पुराने उपकरण जैसे कुदाल, हल और खोदने के बलए इस्तेर्ाल बकये
जाते है
iii. इस प्रकार की खेती र्ानसून और प्राकृबतक उवमरता पर बनभमर करती
है।
iv. पाररवाररक / सार्ुदाबयक श्रर् पर बनभमर करता है।
v. कर् उत्पादन
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु
िामणखज्यक कृमि
i. एकल िसल बड़े क्षेत्र र्ें उगाई जाती है।
ii. इस प्रकार की खेती र्ें नई तकनीक का उपयोग बकया जाता है।
iii. रासायबनक उवमरकों की उच्च खुराक, HYV बीज, कीटनाशकों का
इस्तेर्ाल बकया।
iv. पूंजी गहन आदानों और प्रवासी र्जदू रों के साथ बकया।
v. अबिक उत्पादन
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु
31.
भारतीय िनता पाटी की मिशेिताएं
H-80 5
i. तत्कालीन भारतीय जनसंघ को पुनजीबवत करके 1980 र्ें स्थाबपत
बकया गया।
ii. सांस्कृबतक राष्ट्रवाद या बहंदू िर्म इसकी र्हत्वपूणम अविारणा है।
iii. भारत के साथ जम्मू-कश्मीर का पूणम क्षेत्रीय और राजनीबतक
एकीकरण चाहता है।
iv. दे श र्ें रहने वाले सभी लोगों के बलए एक सर्ान नागररक संबहता
चाहता है।
v. पाटी िाबर्मक रूपांतरण के स्सखलाि है।
vi. 1998,2014,2019 र्ें सत्ता र्ें आई।
vii. पाटी का पूरे भारत र्ें सर्थमन है।
viii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु
सर्ि रूप र्ें आं का जाना।)
8
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32. स्रोत आधाररत प्रश्न
स्रोत ए- ििाबदे ि, उत्तरदायी और िैध सरकार। DP
32.1 लोकतांबत्रक सरकार नागररकों को राजनीबतक बनणमय लेने का बहिा कैसे (1+2+2=
91, 93,
बनाती है? 5)
97
i) यह सुबनबित करके बक लोगों को अपना शासक चुनने और उन पर बनयंत्रण
रखने का अबिकार होगा।
ii) नागररक अपने प्रबतबनबियों के र्ाध्यर् से बनणमय लेने र्ें सक्षर् हैं। (1)
iii) कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु
बकसी को भी सर्झाया जाए
स्रोत बी- आमथचक और संिृखि मिकास
32.2 बकस हद तक हर् कह सकते हैं बक लोकतंत्र आबथमक बवकास के बलए
कार् करता है ?
i. लोकतंत्र लोगों के कल्ाण के बलए कार् करता है
ii. लोकतंत्र आबथमक बवकास को बढावा दे ने का प्रयास करता है
iii. सरकार गरीबी और असर्ानता को कर् करने का प्रयास करती है
iv. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकसी भी दो बबंदुओं की व्याख्या (2)
स्रोत सी - नागररकों की गररमा और स्वतंत्रता
32.3 बकस हद तक लोकतंत्र व्यस्सक्त की गररर्ा और स्वतंत्रता को बढावा दे ता
है?
i. लोकतंत्र ने वंबचत और भेदभाव वाली जाबतयों और अल्पसंख्यकों को
सर्ान दजाम और सर्ान अवसर प्रदान करके उनके बहतो र्जबूत
बकया है। उदाहरण - अस्पृश्यता को कानून िारा सर्ाप्त कर बदया
गया है।
ii. र्बहलाओं के साथ सम्मान और सर्ान व्यवहार।
iii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकसी भी दो बबंदुओं की व्याख्या (2)
33. भारतीय ररििच बैंक
i. भारतीय ररजवम बैंक ऋण के औपचाररक स्रोतों के कार्काज का
पयमवेक्षण करता है। 5
E-48
ii. RBI वास्तव र्ें नकदी संतुलन बनाए रखने के बलए बैंकों की बनगरानी
करता है।
iii. RBI यह सुबनबित करता है बक बैंक न केवल लाभ कर्ाने वाले
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व्यवसाय और व्यापार को बस्सल्क छोटे कृषक और लघु उद्योग और
बकसानों को भी ऋण दें ।
iv. सर्य-सर्य पर बैंकों को RBI को यह जानकारी दे नी होती है बक वे
बकसको और बकस ब्याज दर पर ऋण दे रहे हैं।
v. RBI यह दे खती है बक क्ा बैंक अपने िारा प्राप्त की गई जर्ा राबश र्ें
से न्यूनतर् नकदी शेष रखते हैं या नहीं।
vi. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकन्ही पांच बबंदुओं की व्याख्या
अथिा
स्वयं सिायता समूि
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E-51
i. िार्ीण गरीब र्बहलाएं बवशेष रूप से स्वयं सहायता सर्ूह का
आयोजन करती हैं और अपनी बचत को पूल करती हैं ।
ii. सदस्य अपनी जरूरतों को पूरा करने के बलए सर्ूह से छोटे ऋण ले
सकते हैं।
iii. सर्ूह ऋण पर बहुत कर् ब्याज दर लेता है।
iv. स्वयं सहायता सर्ूह उिारकताम ओं को संपाबश्वमक (कोलाटसम ) की कर्ी
की सर्स्या को दू र करने र्ें र्दद करते हैं ।
v. एक या दो वषों के बाद यबद सर्ूह बचत करने र्ें बनयबर्त होता है तो
वह बैंक से ऋण प्राप्त करने के बलए पात्र हो जाता है।
vi. ऋण ,सर्ूह के नार् पर बदया जाता है जो अपने सदस्यों को रोजगार
के अवसर पैदा करते हैं।
vii. कायमशील पूंजी की जरूरतों के बलए अपने सदस्यों को छोटे ऋण
प्रदान बकए जाते हैं - बीज, उवमरक, कच्चा र्ाल, बसलाई र्शीन आबद
खरीदना।
viii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
(सर्ि रूप से र्ूल्ांकन बकया जाए)
34.
िैश्वीकरण के प्रभाि
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i. वैश्वीकरण ने स्थानीय और बवदे शी दोनों उत्पादकों के बीच अबिक E-67-68
प्रबतस्पिाम पैदा की है ।
ii. कई वस्तुओं की गुणवत्ता और कर् कीर्तों र्ें सुिार का आनंद लेने के
बलए उपभोक्ताओं के सार्ने अबिक बवकल्प हैं।
iii. लोग अब एक बदन जीवन स्तर का आनंद लेते हैं ।
iv. बहुराष्ट्रीय कंपबनयों ने भारत र्ें अपना बनवेश बढाया है ।
v. कई शीषम भारतीय कंपबनयों को बढी हुई प्रबतस्पिाम से लाभास्सित बकया
गया है।
vi. वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी भारतीय कंपबनयों को बहुराष्ट्रीय कंपबनयों के
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रूप र्ें उभरने र्ें सक्षर् बनाया है , जैसे- टाटा र्ोटसम, इं िोबसस,
रै नबैक्सी आबद
vii. कोई अन्य प्रासंबगक बबंदु।
बकन्ही पााँच बबंदुओं की व्याख्या
35. 35A और 35-B के मलए भरे हुए मानमर्त्र दे खें
2+4=6
दृमष्ट्बामधत परीक्षामथचयों के मलए
35.1 पंिाब
३५.२ अिमदाबाद
35.3 मद्रास 1X6=6
35.4 उत्तराखंड
35.5 छत्तीसगढ़
35.6 कनाचटक
35.7 उत्तर प्रदे श
35.8 तममलनाडु
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