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MODEL PAPER
2024
Practice Papers
MODEL PAPERS
Marking Scheme
ANSWER KEY
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अत्यंत गोपनीय केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
अंक-योजना
ववषय हहंदी (ऐच्छिक)
कक्षा – ग्यािहवीं
ववषय कोड संख्या -523
सािान्य ननदे श :-
1. परीक्षार्थियों के सही और उर्ित आकलन के ललए उत्तर पस्ु ततकाओं का मलू यांकन एक
महत्वपर्
ू ि प्रक्रिया है। मल
ू यांकन में एक छोटी-सी त्रटु ट भी गंभीर समतया को जन्म दे
सकती है, जो परीक्षार्थियों के भववष्य, लिक्षा प्रर्ाली और अध्यापन-व्यवतथा को भी
प्रभाववत कर सकती है। इससे बिने के ललए अनरु ोध क्रकया जाता है क्रक मल
ू यांकन प्रारं भ
करने से पव
ू ि ही आप मल
ू यांकन ननदे िों को पढ़ और समझ लें।
2. योग्यता आधाररत प्रश्नों का मूलयांकन करते समय कृपया टदए गए उतरों को समझे, भले
ही उत्तर माक्रकिंग तकीम में न हो, छात्रों को उनकी योग्यता के आधार पर अंक टदए जाने
िाटहए।
3. अंक योजना में उत्तरों के ललए केवल सुझाए गए मान बबंद ु होते हैं। ये केवल टदिा-ननदे िों
की प्रकृनत के हैं और पूर्ि नहीं हैं। यटद परीक्षार्थियों की अलभव्यस्तत सही है तो उसके
अनुसार ननयत अंक टदए जाने िाटहए।
4. परीक्षक सही उत्तर पर सही का र्िह्न () लगाएँ और गलत उतर पर गलत का ()
मूलयांकनकताि द्वारा ये र्िह्न न लगाने से ऐसा समझ में आता है क्रक उत्तर सही है , परं तु
उस पर अंक नहीं टदए गए।
5. यटद क्रकसी प्रश्न के उपभाग हो तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तरों पर दायी ओर अंक
टदए जाएँ। बाद में इन उपभागों के अंकों का योग बायाँ और के हालिये में ललखकर उसे
गोलाकृत कर टदया जाए।
6. यटद क्रकसी प्रश्न के कोई उपभाग न हो तो बायीं ओर के हालिये में अंक टदए जाएँ और
उन्हें गोलाकृत क्रकया जाए।
7. यटद परीक्षाथी ने क्रकसी प्रश्न का उत्तर दो तथानों पर ललख टदया है और क्रकसी को काटा
नहीं है तो स्जस उत्तर पर अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हो, उस पर अंक दें और दस
ू रे को
काट दें । यटद परीक्षाथी ने अनतररतत प्रश्न/प्रश्नों का उत्तर दे टदया है तो स्जन उत्तरों पर
अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हो, उन्हें ही तवीकार करे , उन्हीं पर अंक है।
8. एक ही प्रकार की अिुद्र्ध बार-बार हो तो उसे अनदेखा करें और उस पर हर बार अंक न
काटे जाएँ।
9. यहाँ यह ध्यान रखना होगा क्रक मलू यांकन में पर्
ू ि अंक पैमाना 0-80 (उदाहरर् 0-80
अंक जैसा क्रक प्रश्न में टदया गया है) का प्रयोग अभीष्ट है, अथाित परीक्षाथी ने यटद सभी
अपेक्षक्षत उत्तर-बबंदओ
ु ं का उललेख क्रकया है तो उसे परू े अंक दे ने में संकोि न करें ।
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10. ये सुननस्श्ित करें क्रक उत्तर पुस्ततका के अंदर टदए गए अंकों का आवरर् के अंकों के साथ
लमलान हो।
11. आवरर् पष्ृ ठ पर दो ततंभों के अंकों का योग जाँि लें ।
12. उत्तर पुस्ततकाओं का मलू यांकन करते हुए यटद कोई उत्तर पूर्ि रूप से गलत हो तो उस
पर (x) ननिान लगाएँ और िून्य (0) अंक दें ।
13. उत्तर पुस्ततका में क्रकसी प्रश्न का बबना जाँिे हुए छूट जाना या योग में क्रकसी भूल का
पता लगना, मल
ू यांकन सलमनत के सभी लोगों की छवव को और बोर्ि की प्रनतष्ठा को
धूलमल करता है। परीक्षक सुननस्श्ित करें क्रक सभी उत्तरों का मूलयांकन हुआ है। आवरर्
पष्ृ ठ पर तथा योग में कोई अिुद्र्ध नहीं रह गई है तथा कुल योग को िब्दों और अंकों
में ललखा गया है।
उपयुितत मल
ू यांकन ननदे ि उत्तर-पुस्ततकाओं की जाँि हे तु आदे ि नहीं अवपतु
केवल ननदे ि हैं। यटद इन मल
ू यांकन ननदे िों में क्रकसी प्रकार की त्रुटट हो, क्रकसी प्रश्न का
उत्तर तपष्ट न हो, अंक योजना में टदए गए उत्तर से अनतररतत कोई और भी उत्तर सही
हो, तो परीक्षक अपने वववेकानुसार उस प्रश्न का मूलयांकन करे ।
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अंक-योजना
ववषय हहंदी (ऐच्छिक)
ववषय कोड संख्या -523
कक्षा : ग्यारहवीं अर्धकतम अंक 80
सािान्य ननदे श :-
1. अंक योजना का उद्दे श्य मूलयांकनको अर्धकार्धक वततुननष्ठ बनाना है।
2. वर्िनात्मक प्रश्नों के अंक योजना में टदए गए उत्तर बबंद ु अंनतम नहीं है बस्लक ये
सुझावात्मक एवम ् सांकेनतक हैं।
3. यटद परीक्षाथी इन सांकेनतक बबंदओ
ु ं से लभन्न , क्रकन्तु उपयुतत उत्तर है, तो उन्हें अंक
टदए जाएँ।
4. मूलयांकन कायि ननजी व्याख्या के अनुसार नहीं बस्लक अंक योजना में टदए गए
ननदे िानुसार ही क्रकया जाए।
प्रश्न प्रश्न उत्ति संकेत/ िुख्य ब द
ं ु ननर्ाारित अंक
संख्या उपभाग ववभाजन
1 1x5=5
I ख) अनेकता में एकता को ॰ 1
1
Ii क) संतकृनत को 1
Iii ग) एकता 1
Iv ग) ववकलप क और ख दोनों 1
V ख) स्तथरता
2 1x5=5
I ख) वार्ी ववहीन पंडर्त 1
Ii 1
ग)अपनी भाषा 1
Iii
ख) अंग्रेजी भाषा के माध्यम से आधुननक ज्ञान-ववज्ञान की बातें
Iv सीखी जा सकती हैं
ख) अपनी भाषा में संप्रेषर् की सग
ु मता अर्धक होती है 1
V ख) मातभ
ृ ाषा को
1
3 1x 10=10
I (ग) लसपाही 1
Ii (घ) क्रकसी को भरपेट भोजन न लमलने के दुख के कारर् 1
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Iii (ग) धालमिक आर्ंबरों के ऊपर 1
Iv . (क) ववकलांगों के प्रनत समाज की संवेदनहीनता व्यतत करना 1
v. (घ) समाज सुधारक 1
vi. (ग) महेि 1
vii. (क) औपाननवेलिक साम्राज्यवाद 1
viii. (ग) पत्र 1
ix. (घ) खाना बनाने का बतिन 1
x. (ख) आबबद 1
4 1x5=5
i. पाठ- भारतवषि की उन्ननत कैसे हो सकती है, लेखक –भारतेंदु 1
1
हररश्िंद्र 1
ii. जो दे ि काल के अनुसार िोध और बदले जा सकते हैं। 1
iii जो समय एवं तथान के अनुकूल व उपकारी हों। 1
iv. ववधवा-वववाह पर बल और बाल -वववाह पर रोक ।
v. ववलभन्न कुरीनतयों ने जन्म ललया।
5 ककन्ही दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत 2x2=4
क) यह खखलौने के रूप में, रोटटयाँ सेकने के ललए तथा हाथ में 2
मजीरे के समान प्रयोग में लाया जा सकता है।
ख) िमेली का दया भाव टदखाकर अपने पास रखना,लेक्रकन गँग
ू ा
2
अर्धकार िाहता है। िमेली का बसंता का पक्ष लेना व गूँगे की
अर्धकार भावना आहत करना । िमेली के पक्षपातपूर्ि व्यवहार
गूँगे की आँखों में तपष्ट टदखना।
ग) लसद्धेश्वरी अिानक मुंिी जी से बाररि के ववषय में , कभी फूफा
2
जी के ववषय में, कभी गंगािरर् बाबू की लड़की के ववषय में बात
करना ,मुंिी जी के पास उसके प्रश्नों का उत्तर न होना ,घर की
आर्थिक स्तथनत खराब होना लेक्रकन बात करने से कतराना।
6 1x10=10
i. (घ) ननगिर्
ु काव्यधारा 1
ii. (क) सहज भाव 1
iii. (ख) वे तवयं खेलना िाहते थे 1
iv. (ख) आकाि
1
v. 1
(क) पतनिील और सामंती व्यवतथा पर
1
vi. (घ) कम तौलना
1
vii. (ग) तवाधीनता आंदोलन
1
viii. (क)आकाि से
1
ix. (घ) उपरोतत सभी
1
x. (ख) गरीबी
7 6x1=6
प्रसंग 1
3
व्याख्या 2
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काव्य -सौन्दयि
8 ककन्ही दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत 2x2=4
(क) कृष्र् ने नंद बाबी की दह
ु ाई दे कर यह ननस्श्ित क्रकया क्रक वह 2
अपनी बारी दें गे और सबको हारकर ही रहें गे। 2
(ख) दख
ु , गरीबी और उत्पीड़न को झेलना , नाते-ररश्तेदारों को 2
साफ़-सथ
ु रा घर न दे पाना,वह िहर में रहने वाले बननयों के समान
न उठा पाना, उन्ननत के मागि खोजना आटद।
(ग) घर में घोर कारर् ररश्तों में खखंिाव व तनाव है। स्जसके
कारर् सब एक-दस
ू रे के सामने जाने से कतराते हैं।
9 अंतिाल भाग -2 के आर्ाि ककन्ही दो प्रश्नों के उत्ति अपेक्षक्षत 2x3=6
(क) पूरा ध्यान ड्राइंग और पेंटटंग पर,रोजाना 20 रे खार्ित्र,दक
ु ान 2
पर बैठने वालों के तकेि बनाता,पहली ऑयल पेंटटंग दक
ु ान पर
बनाना, लसंघगढ़ क्रफ़लम से प्रभाववत होकर क्रकताबें बेिकर ऑयल
पेंटटंग बनाना।
(ख) पहले यह एक वगि तक सीलमत था।अब लोग कला की कद्र 2
अर्धक करते हैं। ऐसा नहीं है क्रक पहले लोग कला की कद्र नहीं
करते थे।
(ग) िरद के नाना के घर तालाब में नहाना, पिु तथा पक्षक्षयों को 2
पालना, बाहर जाकर खेलना, उपवन लगाना, घम
ू ना, पतंग, लट्टू,
र्गलली-र्ंर्ा तथा गोली इत्याटद खेल खेलना तक ननवषद्ध था।
िरत्िन्द्र को बन्धन बबलकुल भी पसंद नहीं था,तवतंत्र वविारों के
थे, उन सभी कायों को करना स्जन पड़ नाना ने रोक लगा रखी
थी।
(घ) उनके पात्र दे वदास, श्रीकांत, ददािंतराम और सव्यसािी िरत के 2
जीवन की झलक दे ते हैं। बड़ी बहू', 'कािीनाथ', लमत्र धीरू, 'िुभदा'
आटद
10 क 1x4=4
i. अपने संदेि को क्रकसी भाषा में पररवनतित करना 1
ii. पत्रकाररता,प्रेस और समािार 1
iii. पदे पर टदखायी जानी वाली कथा 1
iv.पूवि में ललखे गए सरकारी पत्र को तमरर् कराने हेतु ललखा गया 1
पत्र।
ख 3x 2=6
i.संिारक,संदेि,माध्यम,प्राप्तकताि,प्रनतपस्ु ष्ट व िोर 3
ii. ववश्वकोि-ज्ञान िाखाओं से सम्बस्न्धत समतत गहन जानकाररयों 3
को िमबद्ध रूप से व्यवतथा,ववद्वानों द्वारा रर्ित एवं संपाटदत
लेख जो संक्षक्षप्त, सारगलभित, पूर्ि, प्रमाखर्क एवं ववश्वसनीय होते हैं।
ग कथा, संरिना या ढाँिा, प्रत्येक दृश्य के साथ होने वाली घटना के 5x1=5
समय का संकेत ,पात्रों की गनतववर्धयों के संकेत ,दृश्य का
बँटवारा,प्रत्येक दृश्य के साथ उस दृश्य के घटनातथल का
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उललेख,पात्रों के संवाद बोलने के ढं ग के ननदे ि ,प्रत्येक दृश्य के
अंत में डर्ज़ॉलव, फ़ेर् आउट, कटटू जैसी जानकारी
अथवा
तववत्त
ृ में अपना पूरा पररिय, पता, सम्पकि सूत्र - (टे लीफोन,
मोबाइल, ई-मेल आटद), िैक्षखर्क व व्यावसानयक योग्यताओं के
लसललसलेवार वववरर् के साथ-साथ अन्य संबंर्धत योग्यताओं,वविेष
उपलस्ब्धयों, कायेत्तर गनतववर्धयों व अलभरुर्ियों का उललेख।
11 2x 5=10
क) अटहलयाबाई होलकर ने प्रजा को कष्ट दे ने वाले असामास्जक 2
तत्वों को पकड़कर समझाने का प्रयास क्रकया तथा उन्हें जीवन
यापन हेतु जमीन दे कर सुधार का रातता टदखाया।यटद कोई
राज्य का कमििारी अवैध रूप से प्रजा से वसूली करता पाया
जाता है तो उसे तुरंत दं र् दे कर अर्धकार ववहीन कर टदया
जाता था। प्रजा की सुववधाओं को ध्यान में रखते हुए रातते
पल
ु घाट व धमििाला में बावड़ी व तालाब बनवाए।ननधिन तीथि
याबत्रयों की सुववधा के ललए अन्नदान क्षेत्र खोले गए।
ख) ऱ्ॉतटर सी वी रमन की ववज्ञान में रुर्ि होने के कारर् वे
पबत्रकाओं के ललए ववज्ञान संबंधी िोध लेख ललखने लगे।मात्र 2
19 वषि की आयु में इंडर्यन एसोलसएिन फ़ॉर कलटीवेिन
ऑफ़ साइंस के सदतय बन गए। उन्हें कोलकाता के ववत्त
मंत्रालय में प्रिासननक अर्धकारी के पद पर आसीन क्रकया
गया।
ग) जैन धमि के पांि महाव्रत
1.अटहंसा का पालन 2
2.िोरी ना करना .
3.झूठ न बोलना
4. धन संग्रह न करना
5.ब्रह्मियि का पालन करना।
घ) सावरकर जी ने पनतत पावन मंटदर की तथापना की और
उसका उद्घाटन िंकरािायि द्वारा कराया। वे एक ऐसा मंटदर 2
बनाना िाहते थे स्जसमें सभी भेदभाव को भुलाकर लोग एक
जगह बैठ कर भोजन कर सके
ङ) ववश्व एक पररवार है और हम एक ही ईश्वर की संतान
2
हैं।यह भारतीय संतकृनत की ववरासत वसुधैव कुटुंबकम की
भावना का पररिायक है यटद हम मानवीय मल
ू यों को मनसा,
वािा, कमिर्ा यटद व्यवहार में लाने का प्रयास करें तो ववश्व
एक पररवार बन जाएगा।