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CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-3-2 Solutions (Hindi)

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About CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-3-2 Solutions (Hindi)

CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-3-2 Solutions (Hindi) is available here for free download. Published by CBSE for Class 10, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (17 pages). Candidates preparing for Class 10 can use CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-3-2 Solutions (Hindi) to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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Yes. CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-3-2 Solutions (Hindi) can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

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CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-3-2 Solutions (Hindi) – Text

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अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू

मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अक-योजना : सामामिक मिज्ञान
SUBJECT कोड सं ा : 087 PAPER कोड : 32/3/2

सामा िनदश :-

1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।

2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।

3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।

4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।

5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।

6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।

7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।

Page 2

8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।

9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।

10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)

11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –

 उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
 उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
 उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
 उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
 आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
 योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
 उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
 कु ल अंक के योग म अशुि
 उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
 उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।

12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।

13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।

14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।

15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।

16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।

Page 3

माध्यममक मिद्यालय परीक्षा (मार्च- 2020)

सामामिक मिज्ञान (087)

अंकन योिना 32/3/2
MM-80
QNO. अपेमक्षत उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
अनुभाग - क NO.
1. ज़ोल्वेराइन (Zollverein) PG-10 1
H.
2. प्रमत व्यक्ति आय- PG-8 1
दे श की कुल आय इसकी कुल जनसंख्या से विभावजत है। E

अथिा
PG-10
साक्षरता दर- E 1
7 और उससे अविक आयु िर्ग में साक्षर जनसंख्या के अनुपात को मापता है ।
3. . PG-20 1
E
C) / बढ़ई (3) प्राथवमक क्षेत्र

4. .
PG-40 1
b) भारतीय ररजिग बैंक E

5. मक्का की फसल के वलए तापमान की आिश्यकता- 21º से 23 PG-38 1
G
अथिा
PG-38 1
र्ेहं के वलए िावषगक िषाग की आिश्यकता- 50 से 75 से.मी.

6. आईटी उद्योर् PG-75 1
G
अथिा
PG-76 1
G
सीमेंट उद्योर्

Page 4

7. PG-64 1
सरकार द्वारा बािाओं या प्रवतबंिों को हटाना उदारीकरण के रूप में जाना E
जाता है।

अथिा
PG-65 1
विश्व व्यापार संर्ठन (WTO) एक ऐसा संर्ठन है वजसका उद्दे श्य अंतराग ष्ट्रीय
E
व्यापार को उदार बनाना है।

8. रािनीमतक दलों को लोगों की िरूरतों और मांगों के प्रमत अमिक PG-74 1
संिेदनशील बनाने का तरीका- DP

i. केिल उन राजनीवतक दलों का चुनाि करके जो लोर्ों के कल्याण के
वलए काम करते हैं।
ii. मतभेदों को सुलझाने के वलए तंत्र विकवसत करना।
iii. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।
वकसी एक का उल्लेख

अथिा

रािनीमतक दलों में िन भागीदारी को बढािा दे ने का तरीका- PG-83 1
i. राजनीवतक दलों को विवभन्न समूहों को समायोवजत करने के वलए DP
प्रवतवनवित्व दे ना चावहए।
ii. लोर्ों के कल्याण के वलए कानूनों और नीवतयों की रूपरे खा तैयार
करना।
iii. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।
वकसी एक का उल्लेख

9. . भारत में पयचटन को बढािा- PG-91. 1
i. पयगटकों के वलए सुवििाएं प्रदान करके G
ii. विरासत पयगटन को बढ़ािा दे ना।
iii. दे श के आर्े बुवनयादी ढांचे का विकास करना
iv. पयगटक की सुरक्षा सुवनवित करना।
v. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु
वकसी एक का उल्लेख

Page 5

10. b) / बंवकम चंद्र चट्टोपाध्याय PG-71 1
H

11. जलोढ़ वमट्टी PG- 8. 1
G

12. PG-92 1
a) / दोनों (A) और (R) सत्य हैं और (R) Aका सही स्पष्ट्ीकरण है । DP

13. d) / पारं पररक अवभजात िर्ों ने इसका समथगन वकया। PG-164 1
H
14. . वद्वतीय विश्व युद्ध के दो खेमे - िुरी शक्तियां और वमत्र राष्ट्र । PG-98 1
H
अथिा

PG-118 1
बॉम्बे के उद्योर्पवत वजन्ोंने 19 िीं शताब्दी में विशाल औद्योवर्क साम्राज्य
H
बनाए थे- वदनशॉ मानेक जी पेवटट और जमशेदजी नुसरिानजी टाटा।

15. c) व्यक्ति के वलए अज़्ज़ादी और कानून के समक्ष सबकी बराबरी. PG-9H 1

16. b) मैटरवनख PG-13 1
H

17. d) 4-3-1-2 PG-56 1
H
18. A- पाइपलाइन PG-81 ½+1/2=1
B- - समुद्री पररिहन G

19. PG-48-49 1
िमगवनरपेक्षता DP

20. PG-20 1
d) /1,2, और 3

21. अनुभार्-ख

तृतीयक क्षेत्र का महत्व:
PG-24 3
i. वकसी भी दे श में कई सेिाओं जैसे वक अस्पतालों, शैक्षवणक E
संस्थानों, पोस्ट और टे लीग्राफ सेिाओं, पुवलस स्टे शनों, अदालतों,

Page 6

आवद की आिश्यकता होती है। इन्ें मूलभूत सेिाओं के रूप में
माना जा सकता है।
ii. कृवष और उद्योर् के विकास से पररिहन, व्यापार, भंडारण जैसी
सेिाओं का विकास होता है।
iii. जैसे-जैसे आय का स्तर बढ़ता है , कुछ वनवित लोर् कई और
सेिाओं की मांर् करने लर्ते हैं जैसे बाहर खाना, पयगटन, खरीदारी,
वनजी अस्पताल, वनजी स्कूल, व्यािसावयक क्षेत्र आवद।

समग्र रूप में मूल्यांकन

अथिा

एक अथचव्यिस्था का संगमित क्षेत्र:

संर्वठत क्षेत्र उन उद्यमों या काम के स्थानों को शावमल करता है जहां
रोजर्ार की शतें वनयवमत हैं और इसवलए, काम का आश्वासन वदया है।

i. उन्ें सरकार द्वारा पंजीकृत वकया जाता है और इसके वनयमों और
विवनयमों का पालन करना होता है जैसे वक फैक्ट्र ीज एक्ट्, न्यूनतम
मजदू री अविवनयम, ग्रेच्युटी अविवनयम का भुर्तान, दु कानें और
प्रवतष्ठान अविवनयम आवद।
PG-31 3
ii. इस को संर्वठत कहा जाता है क्ोंवक इसमें कुछ औपचाररक E
प्रवियाएँ और प्रवियाएँ हैं।
iii. इनमें से कुछ लोर्ों को वकसी के द्वारा वनयोवजत नहीं वकया जा
सकता है, लेवकन िे स्वयं काम कर सकते हैं , लेवकन उन्ें भी
सरकार के साथ खुद को पंजीकृत करना होर्ा और वनयमों और
विवनयमों का पालन वकया जाता है I
iv. संर्वठत क्षेत्र के श्रवमकों को रोजर्ार की सुरक्षा प्राप्त है ।
v. उनसे केिल कुछ घंटों के वलए काम करने की उम्मीद की जाती
है। यवद िे अविक काम करते हैं , तो उन्ें वनयोिा द्वारा
ओिरटाइम का भुर्तान करना होर्ा।
vi. उन्ें अिकाश, भविष्य वनवि, ग्रेच्युटी आवद के दौरान भुर्तान
वकया जाता है।
vii. उन्ें वचवकत्सा लाभ वमलना चावहए और कानूनों के तहत, कारखाने
के प्रबंिक को पीने के पानी और सुरवक्षत कामकाजी िातािरण
जैसी सुवििाओं को सुवनवित करना है।

Page 7

viii. कोई अन्य प्रसांवर्क वबंदु
वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या

22. आिुमनक समय में संर्ार क्षेत्र में बदलाि की गमत तेि है।" PG-90. 3
G
i. संचारक या ररसीिर के भौवतक आं दोलन लंबी दू री की संचार बहुत
आसान है।
ii. दे श में संचार, रे वडयो, प्रेस, वफल्ों आवद सवहत व्यक्तिर्त संचार
और जन संचार प्रमुख संचार माध्यम हैं।
iii. भारतीय डाक नेटिकग दु वनया में सबसे बडा है। यह पासगल के
साथ-साथ व्यक्तिर्त वलक्तखत संचार भी संभालता है।
iv. काडग और वलफाफे को प्रथम श्रेणी का मेल माना जाता है और
जमीन और हिा दोनों को किर करने िाले स्टे शनों के बीच
एयरवलफ्ट वकया जाता है । वद्वतीय श्रेणी के मेल में बुक पैकेट
शावमल हैं, सतह मेल द्वारा वकए जाते हैं , भूवम और जल पररिहन
को किर करते हैं।
v. बडे कस्ों और शहरों में मेल की त्वररत वडलीिरी की सुवििा के

वलए, छह मेल चैनल शुरू वकए र्ए हैं। उन्ें राजिानी चैनल, मेटरो
चैनल, ग्रीन चैनल, वबजनेस चैनल, बल्क मेल चैनल और आिविक

चैनल कहा जाता है।
vi. भारत में एवशया का सबसे बडा दू रसंचार नेटिकग है।

vi। भारत में र्ांिों को पहले से ही सब्सिाइबर टर ं क डायवलंर् (एसटीडी)
टे लीफोन सुवििा के साथ किर वकया र्या है।

vii। कोई अन्य प्रसांवर्क वबंदु

वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या

अथिा

Page 8

PG-82 3
"रे ल पररिहन की अपेक्षा सड़क पररिहन की महत्ता अमिक है "

i. सडकों की वनमागण लार्त रे लिे लाइनों की तुलना में बहुत कम है।
ii. सडकें तुलनात्मक रूप से अविक विच्छे वदत भूभार्ों पर बनाई जा
सकती हैं
iii. अविक ढाल प्रिणता तथा पहाडी क्षेत्रो में भी सडके वनवमगत की
जा सकती है और इस तरह से वहमालय जैसे पहाडों को पार कर
सकती हैं।
iv. अपेक्षा कृत काम व्यक्तियों , कम दु री ि् कम िस्तुओं के पररिहन
में सडके वमतव्ययी है
v. यह घर घर सेिा भी प्रदान करती है ; इस प्रकार, चढ़ाने और
उतरने की लार्त बहुत कम है।
vi. सडक पररिहन को पररिहन के अन्य सािनों के वलए कडी के
रूप में भी उपयोर् वकया जाता है जैसे वक िे रे लिे स्टे शन, हिाई
और समुद्री बंदरर्ाहों के बीच एक वलंक प्रदान करते हैं ।
vii. कोई अन्य प्रसांवर्क वबंदु
वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या

23. प्राकृमतक गैस को पयाचिरण अनुकूल ईंिन माना िाता है। PG- 60. 3
i. ऑटोमोबाइल उद्योर् में सीएनजी का उपयोर्। G
ii. अविक जार्रूकता विकवसत करें ।
iii. ईंिन को सीएनजी से बदलें।
iv. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।
वकन्ी तीन वबंदुओं का स्पष्ट्ीकरण.

24. स्रोत: PG-90 1+2=3
DP

26.1. मिमभन्न दे शों के बीर् लोकतंत्र के मलए आकर्चण को पहर्ानें। 1

लोकतंत्र लोर्ों की आिश्यकता के वलए पारदशी, जिाबदे ह और
उत्तरदायी है / लोकतंत्र सभी सामावजक-आवथगक और राजनीवतक
समस्याओं का समािान कर सकता है।/ कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु

26.2. अपेमक्षत और िास्तमिक पररणामों के आिार पर लोकतंत्र । 2

Page 9

अपेवक्षत सरकार की र्ुणित्ता है ,--आवथगक भलाई, असमानता को कम
करना, सामावजक मतभेदों को दू र करना और व्यक्ति की र्ररमा।
लोकतंत्र वसफग सरकार का एक रूप है। यह केिल उपयुगि पररणामों
को प्राप्त करने के वलए क्तस्थवतयां बना सकता है।/कोई अन्य प्रासंवर्क
वबंदु/

वकन्ी दो वबंदुओं का उल्लेख
25. . 1992 में सत्ता के मिकेंद्रीकरण की मदशा में उिाए गए कदम- PG-24 3
DP
i. अब स्थानीय सरकारी वनकायों के वलए वनयवमत चुनाि अवनिायग है।
ii. वनिागवचत वनकायों में सीटें अनुसूवचत जावत / अनुसूवचत जनजावत /
अन्य वपछडा िर्ग के वलए आरवक्षत हैं।
iii. एक वतहाई सीटें मवहलाओं के वलए आरवक्षत हैं।
iv. प्रत्येक राज्य में राज्य वनिागचन आयोर् का वनमागण।
v. केंद्र और राज्य सरकारें अपनी कुछ शक्तियों और संसािनों को
स्थानीय वनकायों के साथ साझा करने के वलए।
vi. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।

वकन्ी तीन वबंदुओं का िणगन
26. PG54 3
H
भारत की आमथचक और रािनीमतक क्तस्थमत पर प्रथम मिश्व युद्ध के
मनमहताथच:
i. इसके कारण रक्षा व्यय में भारी िृक्तद्ध की र्यी वजसके कारण युद्ध
ऋण और बढ़ते हुए करों का वित्तपोषण वकया र्या।
ii. सीमा शुल्क को उठाया र्या और आयकर पेश वकया र्या।
iii. मूल्य में िृक्तद्ध हुई और आम लोर्ों के वलए अत्यविक कवठनाई हुई।
iv. ग्रामीण क्षेत्रों में जबरन भती से व्यापक स्तर पर रोष फैल र्या।
v. भारत के कई वहस्ों में फसलें खराब हो र्ईं, वजससे भोजन की भारी
कमी हो र्ई।
vi. यह एक फ्लू की महामारी फ़ैल र्यी
vii. अकाल और महामारी के कारण लाखों लोर् मारे र्ए।
वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या
अथिा

समिनय अिज्ञा आं दोलन ’में गरीब मकसानों की भूममका
i. र्रीब वकसान केिल लर्ान में कमी नहीं चाहते थे उनमे से बहुत सरे
वकसान ज़मींदारो से पत्ते पर ज़मीं ले कर खेती कर रहे थे

Page 10

ii. िे ज़मींदारो िाला भाडा माफ़ करिाना चाहते थे I PG-64 3
iii. िे कई तरह के कट्टरपंथी आं दोलनों में शावमल हुए, वजनका नेतृत्व
H
अक्सर समाजिादी और कम्युवनस्ट करते थे।
iv. कांग्रेस ज्यादातर जर्हों पर 'भाडा विरोिी ' अवभयानों का समथगन करने
के वलए तैयार नहीं थी।
v. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।
वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या

27. अंग्रेिों के मलए फायदे मंद भारतीय व्यापार: PG-91 3
H
i. व्यापार अविशेष - विटे न में भारतीय के साथ एक व्यापार अविशेष
वकया था। विटे न ने अन्य दे शों के साथ अपने व्यापार घाटे को संतुवलत
करने के वलए इस अविशेष का उपयोर् वकया।
ii. होम चाजग - भारत में विटे न के व्यापार अविशेष ने तथाकवथत घरे लू
शुल्क का भुर्तान करने में भी मदद की, वजसमें विवटश अविकाररयों
और व्यापाररयों द्वारा वनजी प्रेषण घर, भारत के बाहरी ऋण पर ब्याज
भुर्तान और भारत में विवटश अविकाररयों के पेंशन शावमल थे।
iii. कपास का प्रमुख आपूवतगकताग - भारत विवटशों को कच्चे कपास का
एक प्रमुख आपूवतगकताग बना रहा, वजसे विटे न के सूती िस्त्र उद्योर् को
क्तखलाना आिश्यक था।
iv. इं डेंट्योर श्रवमकों के आपूवतगकताग - वबहार, यूपी, मध्य भारत के कई
इं डेंट्योर श्रवमक खानों और बार्ानों में काम करने के वलए दू सरे दे शों
में चले र्ए।
v. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु
वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या

#(नोट- कृपया शताब्दी पर ध्यान न दे ते हुए उत्तर को िांर् कीमिये)

अथिा

उन्नीसिी ं सदी के मध्य में कुलीन िगच के पसंदीदा हाथ से बने सामान: PG-109- 3
i. बहुत सारे उत्पाद केिल हाथ से ही तैयार वकये जा सकते थे ीी मशीनों 110
से तो एक जैसे वकस्म के उत्पाद ही बडी संख्या में बनाये जा सकएते थे H
ii. बाजार की मांर् अक्सर बारीक वडजाइन और ख़ास आकारों िाले
सामानों के वलए थी जो केिल हाथ श्रम का उत्पादन कर सकते थे।

Page 11

iii. विक्ट्ोररयन विटे न में, उच्च िर्ों ने हाथ से उत्पावदत चीजों को
प्राथवमकता दी। िे
iv. हाथों से बनी चीज़ो को पररष्कार और सुरुवच का प्रतीकमाना जIता था
v. उनकी वफवनश और वडज़ाइन अच्छे होते थी । िे बेहतर रूप से तैयार
थे, व्यक्तिर्त रूप से वनवमगत और साििानीपूिगक वडजाइन वकए र्ए।
vi. मशीन-वनवमगत सामान कॉलोवनयों को वनयागत के वलए थे।
vii. बहुत सारे उत्पाद केिल हाथे से ही तैयार वकये जा सकते थे
वकन्ी तीन वबंदुओं की व्याख्या

28. . ग्रामीण अथचव्यिस्था में स्व-सहायता समूहों की भूममका- PG-51. 3
E
i. स्वयं सहायता समूह ग्रामीण र्रीबों को उनकी बचत के वलए मदद
करते हैं।
ii. िे मवहलाओं को आवथगक रूप से आत्मवनभगर बनने में मदद करते हैं ।
iii. िे विवभन्न सामावजक मुद्दों जैसे स्वास्थ्य, पोषण, घरे लू वहंसा आवद पर
कायग करते हैं।
iv. िे उिारकतागओं को संपावश्वगक की कमी की समस्या को दू र करने में
मदद करते हैं ।
v. िे सदस्यों के वलए स्वरोजर्ार के अिसर पैदा करने में मदद करते हैं ।
vi. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।

कोई तीन समझाया जाए
29. अनुभाग- ग

उद्योगों को प्रभामित करने िाले भौमतक करक
PG- 66 5
i. कच्चे माल की उपलब्धता G
ii. वबजली संसािनों की उपलब्धता
iii. पानी की उपलब्धता
iv. अनुकूल जलिायु
मानिीय कारक:
v. कुशल और अकुशल श्रम की श्रम-उपलब्धता अविक उद्योर्ों
को प्रेररत करती है
vi। बाजार - बाजार में वनकटता आिश्यक है क्ोंवक पररिहन में न
केिल व्यय शावमल है , बक्तल्क विलंब भी शावमल है
vii। सरकारी नीवत --इन सभी भौवतक और मानिीय कारकों से ऊपर,
सबसे महत्वपूणग कारक सरकारी नीवत है।

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viii। पररिहन सुवििा - एक कुशल पररिहन नेटिकग कारखानों तक
पहुंचने के वलए कच्चे माल और बाजारों तक पहुंचने के वलए तैयार माल
की मदद करता है।
झ। पूंजी - प्रत्येक उद्योर् को िय मशीनों, वबजली और कच्चे माल के
वलए पूंजी की आिश्यकता होती है , और मजदू री का भुर्तान करने
और पररिहन लार्तों को पूरा करने के वलए भी।
vi। कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।
वकन्ी पाँच वबंदुओं की व्याख्या

अथिा

औद्योमगक प्रदू र्ण:
i. पुन: उपयोर् करके प्
ii. पानी का उपयोर् कम से कम करके और इसे दो या अविक PG-78 5
िवमक चरणों में पुनचगिण करके। G
iii. पानी की आिश्यकताओं को पूरा करने के वलए िषाग जल का
संचयन।
iv. नवदयों और तालाबों में छोडने से पहले र्मग पानी और
अपवशष्ट्ों का उपचार करना।
v. औद्योवर्क अपवशष्ट्ों का उपचार तीन चरणों में वकया जा
सकता है।
(ए) यांवत्रक तरीकों, स्क्रीवनंर्, पीस, और अिसादन द्वारा
प्राथवमक उपचार।
(b) जैविक प्रविया द्वारा वद्वतीयक उपचार

c) जैविक, रासायवनक और भौवतक प्रवियाओं द्वारा तृतीयक
उपचार, अपवशष्ट् जल का पुनचगिण।

vi.भूजल की अविकता को कानूनी रूप से विवनयवमत करने की
आिश्यकता है।
vii. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।
वकन्ी पाँच वबंदुओं की व्याख्या

30. लोकतांमत्रक दे शों में रािनीमतक दलों की आिश्यकता: PG-75 5
DP
i. वनिागवचत प्रवतवनवि अपने वनिागचन क्षेत्र के वलए जिाबदे ह होर्ा वक
िे स्थानीय स्तर पर क्ा करते हैं।

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ii. राजनीवतक दलों का उदय प्रत्यक्ष रूप से प्रवतवनवि लोकतंत्रों के
उद्भि से जुडा हुआ है।
iii. बडे पैमाने पर समाजों को प्रवतवनवि लोकतंत्र की आिश्यकता है।
iv. जैसे-जैसे समाज बडे और जवटल होते र्ए, उन्ें विवभन्न मुद्दों पर
विवभन्न विचारों को एकत्र करने और सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने
के वलए कुछ एजेंसी की भी आिश्यकता होती है।
v. उन्ें विवभन्न प्रवतवनवियों को एक साथ लाने के वलएकोवशश करते
है तावक एक वजम्मेदार सरकार बनाई जा सके।
vi. राजनीवतक दल इन जरूरतों को पूरा करते हैं जो प्रत्येक प्रवतवनवि
सरकार के पास है।

vii। कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु

वकन्ी पांच वबंदुओं की व्याख्या ।

अथिा

भारत में रािनीमतक दलों और उसके नेताओं में सुिार के मलए हाल
के प्रयास:

i. वनिागवचत वििायकों और सांसदों को दल बदलने से रोकने के वलए PG-83 5
DP
संवििान में संशोिन वकया र्या।

ii. सांसदों और वििायकों को पाटी के नेताओं को जो भी तय करना
है उसे स्वीकार करना होर्ा।

iii. यह हर उस उम्मीदिार के वलए अवनिायग है जो अपनी संपवत्त और
उसके क्तखलाफ लंवबत आपराविक मामलों का वििरण दे ते हुए

AFFIDAVIT दाक्तखल करने के वलए चुनाि लडता है।
iv. नई प्रणाली ने बहुत सी जानकारी जनता के वलए उपलब्ध कराई

है।
v. इसके कारण अमीरों और अपरावियों के प्रभाि में कमी आई है।

vi. चुनाि आयोर् ने एक आदे श पाररत कर राजनीवतक दलों के वलए
यह आिश्यक कर वदया वक िे अपने संर्ठनात्मक चुनाि

आयोवजत करें और अपने आयकर ररटनग दाक्तखल करें ।

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vii. राजनीवतक दलों के आं तररक मामलों को विवनयवमत करने के

वलए एक कानून बनाया जाना चावहए। राजनीवतक दलों को अपने
सदस्यों के एक रवजस्टर को बनाए रखने, अपने स्वयं के संवििान

का पालन करने, एक स्वतंत्र अविकार रखने, पाटी वििादों के
मामले में न्यायािीश के रूप में कायग करने, सिोच्च पदों पर खुले

चुनाि कराने के वलए अवनिायग वकया जाना चावहए।
viii. राजनीवतक दलों को मवहला उम्मीदिारों को न्यूनतम संख्या में
एक वतहाई वटकट दे ना अवनिायग वकया जाना चावहए।
ix. ।चुनािों का राज्य वित्त पोषण होना चावहए।
x. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु

वकन्ी पांच वबंदुओं की व्याख्या ।
31. . िामत-रािनीमत में मिमिि रूप ले सकती है PG-51-53 5
DP
i. राजनीवतक दल उम्मीदिारों को नामांवकत करने के वलए मतदाताओं
की जावत- रचना को ध्यान में रखते हैं।
ii. राजनीवतक दल जावत-आिाररत अपील करते हैं ।
iii. चुनािों में समथगन के वलए जावतर्त भािनाओं का इस्तेमाल वकया जाता
है।
iv. सािगभौवमक ियस्क मताविकार और एक व्यक्ति के वसद्धांत एक िोट
ने नेताओं को राजनीवतक समथगन जुटाने और सुरवक्षत करने का काम
करने के वलए मजबूर वकया।
v. यह उन लोर्ों में चेतना लाता है वजन्ें हीन और नीच समझा जाता था।
vi. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।

वकन्ी पाँच वबंदुओं की व्याख्या
32. िैश्वीकरण का प्रभाि एक समान नही ं ”: PG-66 – 5
69
E
i. उत्पादकों और श्रवमकों के बीच, िैश्वीकरण का प्रभाि एक समान नहीं

रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपवनयों को सेल फोन, ऑटोमोबाइल,
इलेक्ट्रॉवनक्स, सॉफ्ट वडर ं क, फास्ट फूड या शहरी क्षेत्रों में बैंवकंर् जैसी

सेिाओं में वदलचस्पी रही है। इन उत्पादों में बडी संख्या में अच्छी तरह
से खरीदार हैं।

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ii. इन उद्योर्ों और सेिाओं में, नई नौकररयां पैदा हुई हैं।

iii. इन उद्योर्ों को कच्चे माल आवद की आपूवतग करने िाली स्थानीय
कंपवनयां समृद्ध हुई हैं।

iv. शीषग भारतीय कंपवनयों में से कई बढ़ी हुई प्रवतस्पिाग से लाभ उठाने में
सक्षम हैं।

v. िैश्वीकरण ने कुछ बडी भारतीय कंपवनयों को स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपवनयों
के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है -टाटा मोटसग (ऑटोमोबाइल),

इं फोवसस (आईटी)।
vi. िैश्वीकरण ने सेिा प्रदान करने िाली कंपवनयों के वलए भी नए अिसर

पैदा वकए हैं , विशेष रूप से आईटी से जुडे लोर्ों के वलए
नकारात्मक प्रभाि -

vii. छोटे वनमागताओं को प्रवतस्पिाग के कारण कडी टक्कर वमली है।
viii. कई इकाइयों ने कई श्रवमकों को रोजर्ार दे ने के वलए बंद कर वदया है।

ix. प्रवतस्पिाग और अवनवित रोजर्ार िैश्वीकरण और प्रवतस्पिाग के दबाि ने
श्रवमकों के जीिन को काफी हद तक बदल वदया है।

पूरे के रूप में मूल्यांकन वकया जाना है।

33. PG-169- 1+2+2=5
नीचे वदए र्ए स्रोतों को पढ़ें और वनम्न प्रश्ों के उत्तर दें : 172.
H
स्त्रोत 1- िाममचक सुिार और सािचिमनक बहस।
29.1। इस बात का मूल्यांकन करें वक भारत में उन्नीसिीं शताब्दी की शुरुआत
में वप्रंट ने बहस की प्रकृवत कैसे बनाई। (1)
सामावजक और िावमगक सुिारकों और विििाओं के अलर्ाि, एकेश्वरिाद,
िाह्मणिादी पुरोवहतिाद और मूवतगपूजा जैसे मामलों पर वहंदू और कट्टरपंवथयों
के बीच र्हन वििाद। बंर्ाल में, जैसा वक बहस विकवसत हुई, टर ै क्स और
अखबारों ने कई तरह के तकग प्रसाररत वकए।

स्त्रोत 2- प्रकाशन के नए रूप।
29.2। आप वकस हद तक सहमत हैं वक वप्रंट ने अनुभि की नई दु वनया को
खोला, और मानि जीिन की विवििता का एक ज्वलंत अथग वदया? (2)

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अन्य नए सावहक्तत्यक रूपों ने भी पढ़ने-पढ़ने की दु वनया में प्रिेश वकया, लघु
कथाएँ , सामावजक और राजनीवतक मामलों के बारे में वनबंि। अलर्-अलर्
तरीकों से, उन्ोंने मानि जीिन और अंतरं र् भािनाओं पर नए जोर को मजबूत
वकया, राजनीवतक और सामावजक वनयमों के बारे में वजन्ोंने इस तरह की
चीजों को आकार वदया।

स्त्रोत 3- ममहलाएं और मुद्रण
29.3। वप्रंट संस्कृवत ने मवहलाओं के जीिन और भािनाओं में वकस हद तक
रुवच वदखाई? (2)
i. मवहलाओं के जीिन और भािनाओं में बहुत रुवच पैदा की,
ii. मध्यम िर्ग के घरों में मवहलाओं की रीवडं र् बहुत बढ़ र्ई।
iii. मवहला वशक्षा में िृक्तद्ध,
वकसी भी दो का आकलन वकया जाना है
34. . यू एन डी पी और मिश्व बैंक द्वारा उपयोग मकए िाने िाले मिमभन्न PG-8,13 5
मानदं ड- E

UNDP-

i. मानि मिकास सूर्कांक के अनुसार विकास के स्तर को मापता है।
ii. यह विवभन्न दे शों को िर्ीकृत करने के वलए जीिन प्रत्याशा, साक्षरता
दर, सकल नामांकन अनुपात और स्वास्थ्य संकेतकों का उपयोर्
करता है।
दू सरी ओर, मिश्व बैंक उपयोग करता है -
iii. तीन श्रेवणयों में दे शों को िर्ीकृत करने के वलए प्रवत व्यक्ति आय या
औसत आय मानदं ड:
iv. उच्च आय िर्ग के दे शों को अमीर दे श कहा जाता है ।
v. वनम्न आय िर्ग के दे शों को वनम्न आय िाले दे श कहा जाता है।
vi. कोई अन्य प्रासंवर्क वबंदु।

एक पूरे का आकलन वकया जाए
35. OnMap: 35A & 35 B- संलग्न मानमर्त्र दे खे 2+4=6

नोट: वनम्नवलक्तखत प्रश् (केिल प्रश् संख्या 35 ) दृवष्ट्बावित के वलए हैं ,।

:
35.1 वबहार
35.2 कलकत्ता (कोलकाता)
35.3 अमृतसर

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35.4 केरला 1X6=6
35.5 महाराष्ट्र
35.6 र्ाँिी नर्र
35.7 र्ोिा
35.8 तवमल नाडु

Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 10
TypeSolution
Pages17
Updated22 Jul 2026