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अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू
मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अक-योजना : सामामिक मिज्ञान
SUBJECT कोड सं ा : 087 PAPER कोड : 32/4/2
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
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8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।
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माध्यममक मिद्यालय परीक्षा (मार्च- 2020)
सामामिक मिज्ञान (087)
अंकन योिना 32/4/2
MM80
QNO. अपेमक्षत उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
NO.
खंड -क
1. A / विवियम प्रथम H-19 1
2. अहमदाबाद में गांधी िी का सत्याग्रह - H-31 1
i. सूती कपडा वमि मजदू र ों का समथथन करने के विए
ii.
3. तामलका प्रश्न Eco-pg 1
विहार 10
4. D /नमथदा घाटी से एक आवदिासी - जीविका उपाजथन की पूवतथ के विए Eco-pg 4 1
5. ज़ ल्वेररन (Zollverein) H-pg 10 1
6. (B) /16 िीों शताब्दी के मध्य H-pg 120 1
7. (A) / िॉडथ िारे न हस्टों ग H-pg 1
8. (A) / विविन्न सामावजक समूह DP-pg 4 1
9. सत्ता के साझेदारी 1
i. सोंघर्थ क कम करने के विए। DP-pg 6
ii. राजनीवतक स्थथरता सुवनवित करें ।
iii. ि कतोंत्र की िािना क िनाए रखने के विए।
iv. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
ऊपर िवणथत वकसी िी एक का िणथन करने के विए।
लोकतांमिक दे शों के प्रशासन में सामामिक समूह DP-pg 10 1
i. सामावजक मतिेद ों क समाय वजत करने के विए।
ii. तावक िे अिग-थिग महसूस न करें ।
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iii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
क ई एक विोंदु
10. C /वसोंहिी DP-pg 3 1
11. िामत आधाररत भेदभाि को समाप्त करने का सुझाि
1
i. जावतिाद क र कने के विए सोंविधान क कडे कदम उठाने चावहए। DP-pg 51
ii. शहरीकरण क िढािा दे ना।
iii. साक्षरता का िढना।
iv. व्यािसावयक गवतशीिता।
v. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
क ई एक विोंदु
र्ुनाि और िामत व्यिस्था
i. जावत-आधाररत अपीि से िचें
ii. जावत-आधाररत समथथन के विए दि ों क नहीों ह ना चावहए।
iii. ि ग ों में नई चेतना।
iv. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
क ई एक विोंदु
DP-pg 51
1
12. प्राकृवतक गैस G-pg 58 1
13. . A- गैर परम्परागत G-pg 66 ½+½
=1
B- परम्परागत
14. जिाहर िाि नेहरू प टथ G-pg 85 1
1
G-pg 86
हस्िया प टथ
15. D –उत्तर प्रदे श G-pg 89s 1
16. A –कि ि तेि क्षेत्र -गुजरात G-pg 57 1
17. पांडुमलमपयों का व्यापक रूप से भारत में उपयोग नही ं मकया गया H-pg 119 1
i. िे नाजुक और महोंगे थे।
ii. िहुत अवधक दे खिाि की आिश्यकता है।
iii. आसानी से नहीों पढा जा सकता था जैसा वक विविन्न शैविय ों में विखा
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गया है।
iv. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
क ई एक विोंदु
i.
18. महात्मा गााँधी द्वारा मलखखत -वहोंद स्वराज H-pg 32 1
1
आनंदमठ - िोंवकम चोंद्र चट्ट पाध्याय H-pg 47
19. भारतीय घरे लु कमचर्ाररयों की आय बढ़ाने का कोई एक तरीका Eco- pg 1
i. सस्ता और सस्ता ऋण प्रदान करके 23
ii. िघु उद्य ग शुरू करना।
iii अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
क ई एक विोंदु
i.
20. तृतीयक क्षेि Eco-pg 1
i. कुि उत्पादन की अिवध में सिसे अवधक। 23 23
ii. र जगार सृजन की अिवध में सिसे अवधक।
iii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
क ई एक विोंदु
संगमठत क्षेि के लाभ
i. नौकरी की सुरक्षा
ii. काम के घोंटे तय वकए
iii. िैतवनक अिकाश / मेवडकि िाि Eco-pg 1
iv. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु। 30
i. क ई एक विोंदु
खोंड- ख
21. Eco 3
असंगमठत क्षेि के श्रममकों की सुरक्षा की आिश्यकता Pg-31
i. उनका अक्सर श र्ण वकया जाता है और उवचत मजदू री का िुगतान
नहीों वकया जाता है।
ii. कम और अवनयवमत कमाई।
iii. असुरवक्षत नौकरी और क ई अन्य िाि नहीों।
iv. िे कमज र ि ग हैं इसविए आवथथक / सामावजक सुरक्षा की जरूरत है
v. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
3
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वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
मनिी क्षेि की गमतमिमधयााँ
i. सोंपवत्त का स्वावमत्व और सेिाओों की वडिीिरी वनजी व्यस्ि या
कोंपवनयाों के हाथ ों में है
ii. मकसद िाि कमाना है।
iii. कीमत तोंत्र के अनुसार काम
iv. वनजी क्षेत्र से सेिाएँ प्राप्त करने के विए हमें इन व्यस्िय ों और
कोंपवनय ों पैसे दे ने ह ग
ों े
v. टाटा आयरन एों ड टीि कोंपनी विवमटे ड (TISCO) या ररिायोंस
3
उद्य ग विवमटे ड (RIL) वनजी स्वावमत्व में हैं। Eco
vi. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु Pg-33
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
22. ममहलाओं के साथ भेदभाि DP 3
Pg-42
i. िारतीय माता-वपता पुरुर् िच्चे क पसोंद करते हैं और मवहिा क
गिथपात कराते हैं।
ii. माता-वपता िडवकय ों की वशक्षा पर समान रूप से खचथ नहीों करते हैं।
iii. मवहिाओों क विविन्न क्षेत्र ों में पुरुर् ों की तुिना में कम िुगतान वकया
जाता है
iv. कायथ - समय।
v. कईों िार मवहिाओ के घरे िू वहोंसा क सामना करना पडता है
vi. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
िवणथत वकए जाने िािे तीन विोंदु
भारत में िामतयों की सरं र्ना और िामत व्यिस्था में पररितचन
i. जावत पदानुक्रम की पुरानी धारणाएों टू ट रही हैं
ii. आवथथक विकास के कारण।
iii. िडे पैमाने पर शहरीकरण के कारण।
iv. साक्षरता और वशक्षा के विकास के कारण।
v. व्यािसावयक गवतशीिता के कारण। DP 3
vi. पुरानी जावत की पदानुक्रम क त डना। Pg-49
vii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
िवणथत वकए जाने िािे तीन विोंदु
4
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23. केंद्र और राज्य के बीर् शखियों का मितरण
i. सोंविधान स्पष्ट रूप से िीच में विधायी शस्िय ों क वितररत करता है
G-pg 90, 3
राज्य और सोंघ सरकार
91
ii. iविदे शी मामि ों / िैंवकोंग जैसे राष्टरीय महत्व के विर्य केंद्र सरकार की
सोंघ सूची में आया।
iii. पुविस, व्यापार जैसे थथानीय महत्व के विर्य राज्य सूची के तहत राज्य
सरकार।
iv. वशक्षा / वििाह जैसे सामान्य वहत के विर्य आए केंद्र और राज्य सरकार
द न ों की समिती सूची के अोंतगथत।
v. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या की जाएI
24. अंतराचष्ट्रीय व्यापार को दे श के मलए आमथचक बैरोमीटर कहा िाता है : G 3
i. अोंतराथष्टरीय व्यापार क आवथथक समृस्ि की उन्नवत क सूचकाोंक माना Pg-97
जाता है I
ii. वकसी दे श के वनयाथत का मूल्य उसकी अथथव्यिथथा क िढाता है।
iii. राष्टर से अवधक आयात के मूल्य अथथव्यिथथा में वगरािट पैदा करते हैं।
iv. राष्टर के वनयाथत से विदे शी मुद्रा एकत्र की जा सकती हैं।
v. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
25.
स्रोत आधाररत प्रश्न
H 1+1+1=
3
25.1 आसाम के िैगनी मज़दू र ों के विए स्वराज की अिधारणा क स्पष्ट Pg-60
कीवजये I
सीवमत थथान से स्वतोंत्र रूप से अोंदर और िाहर जाने का अवधकार। (1)
21.2 िागानी मजदू र ों की आज़ादी में िडक के रूप में 1859 के इनिैंड
इमीग्रेशन एक्ट क एक िाधा के रूप में स्पष्ट करें
i. िृक्षार पण श्रवमक ों की स्वतोंत्रता।
ii. िागान श्रवमक ों क विना अनुमवत के चाय िागान से जाने की अनुमवत
नहीों थी (1)
21.3 मजदू र ों के असहय ग आों द िन में वहस्सा िेने के प्रमुख पररणाम क स्पष्ट
कीवजये I
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i. उन्ें पुविस ने पकड विया और िेरहमी से पीटा।
ii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु (1)
वकसी एक विोंदु की व्याख्या
26. 19 िी ं शताब्दी के दौरान अथचशाखियों द्वारा पहर्ाने गए तीन प्रिाह
3
i. व्यापार का प्रिाह काफी हद तक माि में व्यापार के विए सोंदविथत H-
ह ता था (गेहों या कपडे ) PG-57
ii. ि ग ों का प्रिाह (ख ज में ि ग ों का प्रिासन) र जगार)
iii. िघु / दीघथकाविक वनिेश के विए पूोंजी का प्रिाह
iv. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
भारत से कपडा मनयाचत
i. कपास की महीन वकस्म िारत से ही आती थी
ii. िारतीय व्यापाररय ों / िैंकर ों की विविधता
iii. व्यापार के वनयाथत का नेटिकथ
iv. उन् न
ों े िुनकर ों क सिाह दी
v. िुनाई िािे गाोंि ों से कपडे । 3
H-PG-89
vi. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
i. वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
ii.
27. शहरी क्षेिों के मिमिध लोगों के मिकास के लक्ष्य Eco-pg 4 3
i. उनके पास समानता की तरह सुरक्षा की आकाोंक्षाएों और इच्छाएों हैं
ii. शहरी िेर जगार युिाओों क र जगार के िेहतर विकल् ों की
आिश्यकता है।
iii. शहरी मवहिाएों अवधक स्वतोंत्रता और सुरवक्षत िातािरण चाहती हैं।
iv. दै वनक िेतन ि गी कमथचारी अवधक से अवधक मजदू री
v. काम करने की स्थथवत में सुरवक्षत ह ना चाहते हैं
vi. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या की जाए
28. संसाधनों के समान मितरण का महत्व G 3
i. जीिन की एक सतत गुणित्ता के विए PG-3
ii. अमीर और गरीि के िीच के अोंतर क खत्म करना
iii. गरीिी क कम करने के विए
iv. विश्व में शाोंवत िनाये रखने के विए
v. हमारे ग्रह क खतरे से िचाने के विए।
vi. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
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मानि अखित्व के मलए संसाधन
i. मानि ,सामग्री क सोंसाधन ों में िदि सकता है और उनका उपय ग कर
सकता है।
ii. मानि अपने क सोंतुष्ट करने के विए कच्चे माि के रूप में सोंसाधन ों का
उपय ग करता है
iii. जरूरत ों और आराम के विए सोंसाधनाओ की आिश्यकता
iv. उनका उपय ग िे कपडे , ि जन िनाने, मकान िनाने के विए करते हैं
v. िे क यिा, गैस आवद जैसे ऊजाथ सोंसाधन ों का उपय ग करते हैं।
vi. विजिी, विजिी या चिाने के विए ईोंधन के रूप में िाहन, कारखाने
3
आवद। G
vii. साधन जीिन की मुख्य गुणित्ता में िी मदद करते हैं। PG-3
viii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों तीन विोंदुओों की व्याख्या
िंर- ग
29. स्वयं सहायता समूह
Eco-pg 5
i. िे ग्रामीण गरीि / मवहिाओों क आत्मवनिथर िनने में मदद करते हैं।
50, 51
ii. सामावजक विर्य ों पर चचाथ करने के विए स्वयों सहायता समूह की
वनयवमत िैठकें
iii. स्वास्थ्य, प र्ण, घरे िू वहोंसा जैसे मुद्दे पर चचाथ
iv. सोंपावश्वथक की समस्या क दू र करने के विए स्वयों सहायता समूह
मददगार
v. िे िचत क ज ड कर समूह के सदस्य ों की मदद करते है
vi. िे गरीिी िी कम करते हैं
vii. स्वर जगार के अिसर पैदा करने में सहायक
viii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों पाँच विोंदुओों की व्याख्या
रोिमराच की मिंदगी में मुद्रा
i. पैसे के उपय ग से सामान खरीदा और िेचा जाता है ।
5
ii. पैसे के साथ कई तरह की सेिाओों का िी आदान-प्रदान वकया जाता ECO
है। PG-39,40
iii. धन का उपय ग, चाहत ों के द हरे सोंय ग की आिश्यकता क कम
करता है।
iv. पैसा रखने िािा व्यस्ि आसानी से विवनमय कर सकता है
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v. अच्छी सेिाएों िी पायी जा सकती ही
vi. सामन्य जीिन की अिश्क्िाओ की िी पूवतथ मुद्रा से आसान ह जाती
है
vii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु
वकन्ीों पाँच विोंदुओों की व्याख्या की जाएi
30. भारतीय मकसानों द्वारा सामना की िाने िाली र्ुनौमतयााँ G- 5
i. विकवसत दे श ों के वकसान ों के साथ कडी प्रवतस्पधाथ। PG42
ii. हररत क्राोंवत ने िहुत िादा वकया िेवकन िूवम क्षरण पैदा वकया।
iii. हमारी सरकार से सस्िडी और समथथन में कमी।
iv. कृवर् में आधुवनक तरीक ों और प्रौद्य वगकी का अिाि।
v. वकसान उत्पादन और िाजार की अवनवितताओों से िुरी तरह प्रिावित
हैं ।
vi. िूवम के छ टे आकार िी फसि ों का कम उत्पादन करते हैं।
vii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
i. वकन्ीों पाँच विोंदुओों की व्याख्या की जाएi
31. रािनीमतक दलों का महत्व DP
i. राजनीवतक दि नीवतय ों और कायथक्रम ों की रूपरे खा तैयार करते हैं PG-72 5
ii. राजनीवतक दि कानून िनाते हैं
iii. पावटथ याों सरकारें िनाती हैं और चिाती हैं
iv. पावटथ याों नेताओों की िती करती हैं , उन्ें प्रवशवक्षत करती हैं और वफर
उन्ें मोंत्री िनाती है सरकार चिाने के विए।
v. राजीवतक पावटथ य ों का विपक्ष के रूप में महत्व िी ह ता है
vi. विफिताओों या गित नीवतय ों के विए सरकार की आि चना करती है
vii. जनता की राय क आकार दे ती है
viii. राजवनवतक दि नए मुद्द ों क उजागर करते हैं।
ix. पावटथ याों , किी-किी ि ग की समस्याओों क दू र करने के विए
आों द िन िी शुरू करती हैं
x. सरकारी मशीनरी और कल्याणकारी य जनाएों िनाती है
xi. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों पाँच विोंदुओों की व्याख्या की जाएI
32. 1830 का दशक यूरोप में भरी कमठनाईयां ले कर आया H
5
i. यूर प में 19 िीों शताब्दी की पहिी छमाही में जनसोंख्या में िारी िृस्ि PG-15
दे खी गई
ii. र जगार चाहने िाि ों की सोंख्या र जगार से अवधक है।
iii. ग्रामीण से शहरी क्षेत्र ों में िडी आिादी का प्रिास।
iv. इों ग्लॅण्ड के सस्ते मशीन-वनवमथत सामान ों के आयात से कडी प्रवतस्पधाथ
v. अविजात िगथ ने अिी िी शस्ि विशेर्ावधकार का आनोंद विया।
vi. वकसान सामोंती िकाया के ि झ तिे जूझते रहे।
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vii. खराि फसि के कारण खाद्य कीमत ों में िृस्ि।
viii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों पाँच विोंदुओों की व्याख्या की जाए
साम्राज्यिाद से िुड कर राष्ट्रिाद प्रथम मिश्व युद्ध का कारण
i. िाल्कन में र माोंवटक राष्टरिाद के विचार ों का प्रसार
ii. तुकथ साम्राज्य का विघटन
iii. व्यापार, उपवनिेश, नौसेना और सैन्य पर यूर पीय शस्िय ों के िीच
तीव्र प्रवतद्वों वद्वता,
iv. राष्टर िावदय ों द्वारा साम्राज्यिाद विर धी आों द िन H 5
v. स्वतोंत्र राष्टर राज्य िनाने के विए सोंघर्थ PG-27
vi. िे सामूवहक राष्टरीय एकता की िािना से प्रेररत थे।
vii. राष्टरिाद के यूर पीय विचार ों ने अपनी विविधता विकवसत की
Vii क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
समग्र रूप से मूल्याोंकन
33. लोकतंि रािनीमतक समानता पर आधाररत है। DP
PG-90 5
i. ि कतोंत्र का सविधान है
ii. िे चुनाि करते हैं
iii. उनके पास पावटथ याों हैं
iv. िे नागररक ों के अवधकार ों की गारों टी दे ते हैं।
v. नागररक ों में समानता क िढािा दे ता है
vi. व्यस्ि की गररमा क िढाता है
vii. वनणथय िेने की गुणित्ता में सुधार करता है
viii. सोंघर्थ क हि करने के विए एक विवध प्रदान करता है
ix. ि कतोंत्र सिी नागररक ों क ि ट दे ने का अवधकार दे ता है।
x. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु।
वकन्ीों पाँच विोंदुओों की व्याख्या
34. स्रोत आधाररत प्रश्न ECO 2+2+1=
PG 59-67 5
स्रोत ए - मिदे शी व्यापार और बािारों का एकीकरण
34.1 विदे शी व्यापार िाजार क कैसे एकीकृत करता है ?
i) विदे शी व्यापार के विए एक अिसर पैदा करता है
उत्पादक ों घरे िू िाजार ों से परे तक पहुँचने के विए।
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ii) वनमाथता अपने उत्पाद ों क स्थथत िाजार ों में िेच सकते हैं
अन्य दे श ों में।
iii) यह परे माि की पसोंद का विस्तार करने में मदद करता है
घरे िू िाजार।
iv) यह दे श ों क ज डने िािा एक मुख्य चैनि है
v) क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु
क ई िी द अोंक
(2)
स्रोत बी – िैश्वीकरण
34.2 िैश्वीकरण कैसे क्षेत्र और महाद्वीप ों में मानि गवतविवध का विस्तार कर
रहा है?
i. एक दे श से दू सरे दे श में ि ग ों की आिाजाही
ii. िेहतर आय / नौकरी / वशक्षा की ख ज।
iii. िैश्वीकरण िडे के विए अवधक अिसर पैदा करता है
iv. दु वनया िर के िाजार।
v. दे श ों में पूोंजी प्रिाह की अवधक पहुोंच है
vi. प्रौद्य वगकी, मानि पूोंजी,
vii. सस्ता आयात और िडा वनयाथत िाजार
viii. क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु
क ई िी द अोंक (2)
स्रोत -C मिश्व व्यापार संगठन
34.3- विश्व व्यापार सोंगठन के कायों और विवधय ों मजिूत िहस क जन्म वदया
है
i. डब्ल्यूटीओ के वनयम ों ने विकासशीि दे श ों क व्यापार क हटाने के
विए मजिूर वकया
ii. िे िाधाएँ ज विकासशीि दे श ों के वहत में अनुवचत हैं।
i) क ई अन्य प्रासोंवगक विोंदु
क ई िी एक विोंदु (1)
35. 35 के विए Q 35 a और b - संलग्न मानमर्ि दे खें 2+4=6
दृमष्ट्बामधत परीक्षामथचयों के मलए मानमर्ि के स्थान पर मनम्नमलखखत प्रश्न 1X6 = 6
35.1 दाोंडी
35.2 खेडा
35.3 ओवडशा
35.4 ओवडशा
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35.5 महाराष्टर
356. तवमिनाडु
35.7 अमृतसर
35.8 म हािी
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