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2026
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अंक योजना
प्रतिदर्श प्रश्नपत्र (2025-26)
हिन्दी (पाठ्यक्रम-अ )
कोड (002)
कक्षा-दसव ं
तनर्ाशरिि समय: 3 घंटे अधर्किम अंक : 80
सामान्य तनदे र् :
1. अंक योजना का उद्दे श्य मल
ू यांकन को अधिकाधिक वस्तनु नष्ठ बनाना है |
2. अंक योजना में ददए गए वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर बबंद ु अंनतम नह ं हैं |
ये सझ
ु ावात्मक एवं सांकेनतक हैं |
3. यदद पर क्षार्थी इन उत्तर बबन्दओ
ु ं से भिन्न, ककं तु उपयुक्त उत्तर दें तो उसे
उपयुक्त अंक ददए जाएँ |
4. एक ह प्रकार की अशुद्धि पर बार-बार अंक न काटा जाए |
5. मूलयांकन में संपूर्ण अंक पैमाने – 0 से 80 का प्रयोग अिीष्ट है
अंक
और
प्रश्न उत्ति संकेि / मूल्य ब द
ं ु अंक
वविाजन
खंड – क
( अपदठत बोि ) 14
1 ननम्नभिखखत गद्यांश को ध्यानपव
ू क
ण पढ़कर उस पर आिाररत पछ
ू े गए प्रश्नों के उत्तर 7
भिखखए :
(क) (ii) मोटे अनाज के महत्त्व पर । 1
(ख) (iii) कर्थन सह है और कारर् कर्थन की सह व्याख्या है | 1
(ग) (i) कर्थन (I) और (II) सह हैं | 1
(घ) आज मोटे अनाजों की िोकवप्रयता के कारर् : 2
• जैव-रासायननक अनुसंिानों और धिककत्सा संबंिी अध्ययनों से मोटे अनाजों के
अनेक पोषकीय और औषिीय गुर्ों से िोग पररधित हुए हैं |
• ये हमारे स्वास््य के भिए िािदायक होने के सार्थ-सार्थ पयाणवरर् के भिए िी
अच्छे होते हैं |
• अंतरराष्र य मोटा अनाज वषण मनाने से इनके सेवन को बढ़ावा भमिा |
( केवि दो बबंद ु अपेक्षक्षत )
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(ङ) कुपोषर् की समस्या के समािान में मोटे अनाजों की अहम ् िभू मका है – 2
• मोटे अनाज आहार संबंिी रे शों, गर्
ु वत्तापर्
ू ण वसा और महत्त्वपर्
ू ण खननज जैसे-
कैल्लशयम, पोटै भशयम, मैग्नीभशयम, आयरन, ल् ंक तर्था बी-कॉम््िेक्स ववटाभमनों
के समद्
ृ ि स्रोत हैं |
• मोटे अनाज बाकी अनाजों से पोषर् के मामिे में श्रेष्ठ होते हैं |
• मोटे अनाजों में पोषर् और स्वास््य से जुड़े अनेक फ़ायदों के प्रनत िोगों में
जागरूकता फैिाना और मोटे अनाजों के सेवन को बढ़ावा दे ना |
( केवि दो बबंद ु अपेक्षक्षत )
2 ननम्नभिखखत काव्यांश को ध्यानपूवक
ण पढ़कर उस पर आिाररत पूछे गए प्रश्नों के उत्तर 7
भिखखए :
(क) (iii) व्यंग्य 1
(ख) (i) शहर के पढ़े -भिखे नौजवानों का | 1
(ग) (iii) कर्थन सह है और कारर् कर्थन की सह व्याख्या है | 1
(घ) • वहाँ शहर की तरह उसके अनुकूि वातावरर् नह ं है | 2
• वहाँ उसके प्रशंसक नह ं है |
• वहाँ उसकी उपयोधगता नह ं है |
( केवि दो बबंद ु अपेक्षक्षत )
(ङ) ककसान को फूिने के बाद फ़सि दे ने वािे फूि िाते हैं क्योंकक फ़सि ह उसकी जीववका 2
का सािन है |
(केवि दो बबंद ु अपेक्षक्षत)
खंड – ख
(व्यावहाररक व्याकरर्) 16
3 ननदे शानुसार ‘रिना के आिार पर वाक्य िेद’ पर आिाररत पाँि प्रश्नों में से ककन्ह ं िार 4x1=4
प्रश्नों के उत्तर भिखखए :
(क) नवाब साहब ने तौभिया झाड़कर सामने बबछा भिया | 1
(ख) जब हािदार साहब उिर से गुजरे तब उन्हें मूनतण में कुछ अंतर ददखाई ददया | 1
(ग) मन्नू के एक इशारे पर िड़ककयाँ कक्षा से बाहर ननकि ं और नारे िगाने िगीं | 1
अर्थवा
मन्नू ने एक इशारा ककया और िड़ककयाँ कक्षा से बाहर ननकि नारे िगाने िगीं |
(घ) भमश्र वाक्य | 1
(ङ) संज्ञा उपवाक्य | 1
4 ननदे शानस
ु ार ‘वाच्य’ पर आिाररत पाँि प्रश्नों में से ककन्ह ं िार प्रश्नों के उत्तर भिखखए : 4x1=4
(क) पतोहू द्वारा िगत को दनु नयादार से ननवत्त
ृ कर ददया गया र्था | 1
(ख) नवाब साहब ने खीरे पर मसािा नछड़का | 1
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(ग) आओ, पेड़ की छाया में बैठा जाए | 1
(घ) मैं यह काम नह ं कर सकता | 1
(ङ) कमणवाच्य | 1
5 ननदे शानुसार ‘पद पररिय’ पर आिाररत पाँि प्रश्नों में से ककन्ह ं िार प्रश्नों के रे खांककत 4x1=4
पदों का पद-पररिय भिखखए :
(क) शीिा अग्रवाि - व्यल्क्तवािक संज्ञा, स्रीभिंग, एकविन, कमण कारक | 1
(ख) पननयाती- गुर्वािक ववशेषर्, ववशेष्य ‘फाँके’, बहुविन | 1
(ग) बढ़ता है - अकमणक किया, वतणमान काि, एकविन, पल्ु लिंग, कतव
ण ृ ाच्य | 1
(घ) िगातार- र नतवािक किया ववशेषर्, ‘िि रह ं र्थीं’ किया की ववशेषता | 1
(ङ) शाबाश –ववस्मयाददबोिक अव्यय, प्रसन्नता सूिक | 1
6 ननदे शानुसार ‘अिंकार’ पर आिाररत पाँि प्रश्नों में से ककन्ह ं िार प्रश्नों की रे खांककत 4x1=4
काव्य पंल्क्तयों में अिंकार पहिान कर भिखखए :
(क) रूपक अिंकार | 1
(ख) उपमा अिंकार | 1
(ग) अनतशयोल्क्त अिंकार | 1
(घ) मानवीकरर् अिंकार | 1
(ङ) उत्प्रेक्षा अिंकार | 1
खंड – ग
(पाठ्य पुस्तक एवं पूरक पाठ्य पुस्तक) 30
7 ननम्नभिखखत पदठत गद्यांश पर आिाररत बहुववकलपीय प्रश्नों के सवाणधिक उपयुक्त उत्तर 5x1=5
वािे ववकलप िुनकर भिखखए :
(क) (iii)कर्थन (I) और (IV) सह हैं | 1
(ख) (ii)आत्मा | 1
(ग) (iii)कथन सही है और कारण कथन की सही व्याख्या है | 1
(घ) (iv)कथन (II) और (III) सही हैं | 1
(ङ) (iv)वह पुनर्विवाह कर ले | 1
8 ननिाणररत गद्य पाठों के आिार पर ननम्नभिखखत िार प्रश्नों में से ककन्ह ं तीन प्रश्नों के 3x2=6
उत्तर िगिग 25-30 शब्दों में भिखखए :
(क) • हािदार साहब का व्यल्क्तत्व दे शिल्क्त की िावना से ओतप्रोत र्था | 2
• वे शह दों और दे शिक्तों का सम्मान करते र्थे |
• दे श िल्क्त का म ाक उड़ाया जाना पसंद नह ं करते र्थे |
• वे स्विाव से िावुक र्थे |
( ककन्ह ं दो बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
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(ख) िेखखका मन्नू िंडार ने अपनी माँ की ति
ु ना िरती से इसभिए की है : 2
• िरती की तरह उनकी माँ में िी असीम िैयण और सहनशल्क्त र्थी।
• उन्होंने िी िरती की तरह केवि दे ना ह सीखा र्था, ककसी से कुछ पाने की इच्छा
नह ं रखी र्थी |
• अपने शांत स्विाव के कारर् वे सहनशीि र्थीं।
• वपता की ज़्यादनतयाँ और बच्िों की फ़रमाइशें मानती र्थीं।
( ककन्ह ं दो बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
(ग) सुमिुर सुर िे सुरों को सुनकर व्यल्क्त इतना िाव-वविोर हो जाता है कक उसकी आँखों से 2
आँसू ननकि आते हैं। ये आँसू सच्िे मोती की तरह होते हैं। इनके ननकि आने पर सरु
की पर क्षा हो जाती है । बबल्स्मलिा खाँ नमा के बाद स दे में खुदा से ऐसे ह सुर की
माँग करते र्थे, वे सुर को खुदा की दे न मानते र्थे। उनके भिए सुरों से बढ़कर कोई िी
कीमती नह ं र्थी।
(घ) िेखक संस्कृनत-असंस्कृनत और सभ्यता-असभ्यता के भ्रमजाि में फँसे मनुष्यों से प्रश्न 2
करता है कक :
• मनुष्य की जो योग्यता उससे आत्म-ववनाश के सािनों का आववष्कार कराती है ,
उसे संस्कृनत कहना उधित है या असंस्कृनत ?
• इसी प्रकार ल्जन सािनों के बि पर वह ददन-रात आत्म-ववनाश में जुटा हुआ है ,
उसे सभ्यता समझे या असभ्यता ?
• यदद संस्कृनत का कलयार् की िावना से नाता टूट जाएगा तो असंस्कृनत होकर
रह जाएगी |
• और ऐसी संस्कृनत का अवश्यंिावी पररर्ाम असभ्यता के अनतररक्त दस
ू रा क्या
होगा ?
( ककन्ह ं दो बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
9 र्नम्नर्लखित पर्ित काव्याांश पर आधाररत बहुर्वकल्पीय प्रश्नां के सवािर्धक उपयुक्त उत्तर 5x1=5
वाले र्वकल्प चुनकर र्लखिए :
(क) (iv) मुख्य गायक के भिए | 1
(ख) (i) कर्थन (I) और (II) सह हैं | 1
(ग) (iii) कर्थन सह है और कारर् कर्थन की सह व्याख्या है | 1
(घ) (iv)मख्
ु य गायक के टूटते स्वर में अपना स्वर भमिाकर | 1
(ङ) (ii)संगतकार मख्
ु य गायक का मान बनाए रखना िाहता है | 1
10 ननिाणररत कववताओं के आिार पर ननम्नभिखखत िार प्रश्नों में से ककन्ह ं 3x2=6
तीन प्रश्नों के उत्तर िगिग 25-30 शब्दों में भिखखए :
(क) जब गोवपयों ने दे खा कक : 2
• ल्जस कृष्र् की वे बहुत समय से प्रतीक्षा कर रह र्थीं, वे नह ं आए।
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• उनकी जगह कृष्र् से दरू िे जाने वािा योग-संदेश आ गया तो उन्हें इसमें कृष्र्
की एक िाि न र आई।
• वे इसे अपने सार्थ ककया छि समझने िगीं। इसीभिए उन्होंने आरोप िगाया कक
हरर हैं राजनीनत पदढ़ आए।
• कृष्र् को अब राजनीनत का ज्ञान हो गया है |
( ककन्ह ं दो बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
(ख) • सारे राजाओं के मारे जाने की बात सुनकर िक्ष्मर् मुसकराने िगे। 2
• उन्होंने परशुराम जी से व्यंग्य िरे स्वर में कहा कक बिपन में हमने बहुत-सी
िनुदहयाँ तोड़ी र्थी, तब तो आपने ऐसा िोि किी नह ं ककया।
• इस िनुष से आपका इतना मोह क्यों है ?
(ग) प्रकृनत के सौंदयण का जो धिर ‘अट नह ं रह है ’ कववता उपल्स्र्थत करती है : 2
• कववता में फागुन ऋतु का वर्णन है |
• प्रकृनत का अनुपम सौंदयण दे खने को भमिता है |
• िारों ओर हररयाि , पेड़-पौिों में नई पवत्तयाँ, नए फूि आ जाते हैं |
• सुगंधित हवा बहती रहती है |
• हर तरफ इतना अधिक प्राकृनतक सौंदयण न र आता है, ल्जसका आँखों में समा
पाना िी मुल्श्कि है |
( ककन्ह ं दो बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
(घ) ‘आत्मक्य’ कववता के माध्यम से 2
• कवव जयशंकर प्रसाद जी ने अपनी िि
ू ों को स्वीकारने, अपने जीवन की
असफिताओं का वर्णन और सरिता के कारर् िोखा खाने की स्वीकारोल्क्त
करने के अिावा वतणमान के यर्थार्थण को स्वीकार कर साहसपूर्ण कायण ककया है ।
• कवव द्वारा यह कहना-छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कर्थाएँ आज कहूँ उनकी
ईमानदार का प्रमार् है ।
11 पूरक पाठ्य पुस्तक के ननिाणररत पाठों पर आिाररत ननम्नभिखखत तीन प्रश्नों में से 2x4=8
ककन्ह ं दो प्रश्नों के उत्तर िगिग 50-60 शब्दों में भिखखए :
(क) 'माता का अँिि' पाठ में ग्राम्य संस्कृनत के ल्जस रूप का धिरर् है वह आिुननक युग 4
में पररवनतणत हो िुकी है –
• संिार माध्यम व शहर संस्कृनत के कारर् वहाँ के िोगों की जीवन- शैि बदि
िुकी है ।
• संयुक्त पररवारों का स्र्थान एकि पररवारों ने िे भिया है ।
• खेि व खेिने की सामग्री बदि गई है।
• बच्िे मोबाइि, िैपटॉप का प्रयोग करने िगे हैं।
• आज गाँव के नागररक हर क्षेर की जानकार रखते हैं |
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• वे पररवेश के प्रनत जागरूक हैं। उत्तम खाद, बीज व कृवष-सािनों का प्रयोग करते
हैं ।
• बैंक की सवु विा उन्हें प्रा्त है ।
( ककन्ह ं िार बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
(ख) याराएँ मनुष्य को िाव शून्य होने से रोकती हैं – 4
• मनुष्य की नीरस होती जीवन-शैि से मुल्क्त ददिाने में याराएँ बहुत महत्वपूर्ण
िूभमका ननिाती हैं।
• मनोरं जन, ज्ञानविणन एवं अज्ञात स्र्थिों की जानकार के सार्थ-सार्थ िाषा एवं
संस्कृनत का िी आदान-प्रदान होता है |
• ‘साना-साना हार्थ जोडड़’ यारा-वत
ृ ांत में िेखखका की भसल्क्कम की यारा बहुत ह
मोहक, आकषणक एवं आनंदपूर्ण र्थी।
• वहाँ का अनुपम सौंदयण उनकी आत्मा को छू गया र्था |
• िेखखका प्रकृनत की अिूतपूवण सुंदरता, ववराटता तर्था मदहमा से सम्मोदहत हो
उठ ं।
• फूिों की घादटयाँ, झर-झर धगरते जि-प्रपात तर्था गहनतम खाइयों ने उनका मन
मोह भिया । प्राकृनतक सौंदयण से आसक्त होकर उनका यह सोिना कक जीवन का
आनंद इसी सौंदयण में है , यह स्पष्ट करता है कक याराएँ मनुष्य के जीवन में
पररवतणन िाने में सक्षम हैं ।
( ककन्ह ं िार बबंदओ
ु ं का उलिेख अपेक्षक्षत )
(ग) ‘मैं क्यों भिखता हूँ’ पाठ के आिार पर िीतर वववशता : 4
• ककसी िी दृश्य या घटना को दे खकर या सन
ु कर जब मन में अनि
ु नू त की
प्रबिता हो, वह िीतर वववशता होती है |
• जब तक कवव या िेखक उसे शब्दों में अभिव्यक्त नह ं करता तब तक उसे
शांनत नह ं भमिती |
• िेखक ने इसे स्पष्ट करने के भिए दहरोभशमा पर भिखी कववता की ििाण की
है |
खंड – घ
(रचनात्मक लेिन) 20
12 ननम्नभिखखत तीन ववषयों में से ककस एक ववषय पर संकेत बबन्दओ
ु ं के आिार पर िगिग 1x6=6
120 शब्दों में एक अनुच्छे द भिखखए :
अनुच्छे द िेखन
• िूभमका 1 अंक
• ववषयवस्तु 3 अंक
• ननष्कषण 1 अंक
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• िाषा शद्
ु िता 1 अंक
13 ककसी एक ववषय पर िगिग 100 शब्दों में पर भिखखए : 1x5=5
पर-िेखन
• प्रारूप (प्रारं ि और अंत की औपिाररकताएँ) 1 अंक
• ववषयवस्तु 3 अंक
• भाषा शुद्धता 1 अांक
14 स्ववत
ृ िेखन 1x5=5
• प्रारूप 1 अंक
• ववषयवस्तु 3 अंक
• िाषा शुद्िता 1 अंक
अर्थवा
ई - मेि
• प्रारूप 1 अंक
• ववषयवस्तु 3 अंक
• िाषा शुद्िता 1 अंक
15 ववज्ञापन िेखन 1x4=4
• रिनात्मक प्रस्तनु त 1 अंक
• ववषयवस्तु 2 अंक
• िाषा शद्
ु िता 1 अंक
अर्थवा
संदेश िेखन
• प्रारूप 1 अंक
• ववषयवस्तु 2 अंक
• भाषा शुद्धता 1 अांक
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Study Materials
Notes
Model Papers Class 6 Notes
Sample Papers Class 7 Notes
Half Yearly Sample Papers Class 8 Notes
Class 9 Notes
Important Resources
Class 10 Notes
Periodic Table
Class 11 Notes
Writing Skills / Formats
Maps of India / World Class 12 Notes
Books and Solutions
NCERT Books
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HC Verma Chapter Wise Solutions
RD Sharma Solutions
CGBSE Solutions