Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 8: व वधता म एकता या ‘एक म
अनेक’
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
125 – 136 11 24 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 29 pages
Page 2
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: व वधता म एकता या ‘एक म
अनेक’
कक्षा 6 सामा जक व ान के अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ (पुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) के संपूण
एन.सी.ई.आर.ट . समाधान। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया गया है — महत्वपूण प्रश्न, सभी छह आइए पता लगाएँ बॉक्स, पृष्ठ 126 और 133 के
पाठ्य प्रश्न, आगे बढ़ने से पहले... तथा प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ के पाँच प्रश्न — और पृष्ठ 127 का अनाज-मान चत्र, पृष्ठ 128 क
वैशाली क आकृ त, पृष्ठ 129 का वस्त्र- चत्र, पृष्ठ 130–131 के साड़ी के छह चत्र, पृष्ठ 132 का मकर संक्रां त मान चत्र तथा पृष्ठ 134 का मेवाड़ी
रामायण- चत्र मु त पृष्ठ से ध्यानपूवक दे खकर उत्तर लखे गए ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 6) 125 – 136
खं ड प्रश्न
11 24
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 125
अध्याय का आरंभ
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 भारतीय प रदृश्य म ‘ व वधता म एकता’ का क्या अथ है?
इसका अथ है क भारत क वशाल व वधता — भाषा, प रधान, भोजन, त्योहार, री त- रवाज और भूदृश्य क — असंबद्ध टु कड़
का ढे र नह है। इन भन्नताओं के नीचे कुछ साझा है, इस लए अनेक वस्तुत: एक के ही अलग-अलग रूप ह। ी अर वद ने इसे ‘एक
म अनेक’ कहा और यही अध्याय का शीषक भी बना।
अध्याय यह प्रश्न टश इ तहासकार वसट स्मथ के शब्द म रखता है —
“इस अचं भत करने वाली व वधता म भारत का इ तहास कस प्रकार लखा जा सकता है? ...इस प्रश्न का उत्तर इस तथ्य म न हत
है क भारत ‘ व वधता म एकता’ प्रद शत करता है।”
इसके बाद अध्याय जीवन के चार बल्कुल अलग क्षेत्र म यही बात सद्ध करता है।
Page 1 of 29
Page 3
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
जीवन का ‘अनेक’ — जो भन्न है ‘एक’ — जो साझा है
क्षेत्र
भोजन लाखों न सही, हजारों पकार के व्यंजन और पकवान वही मुख्य अनाज — चावल , जौ, गेहू,ँ बाजरा, ज्वार , रागी, दाले ं —
और वही मसाले , हल्दी, जीरा, इलायची, अदरक
प रधान साड़ी के सै क ड़ों पकार, पहनने के अनेक तरीके , हर एक ही पिरधान — िबना िसला एक लंबा कपड़ा, साड़ी
क्षेत्र और समुद ाय में िभन्न
त्योहार िचत्र 8.5 के मानिचत्र पर लगभग एक दजन अलग- वही ितिथ (14 जनवरी के आस -पास ) और वही अथ — फसलों की
अलग नाम कटाई का आरंभ
सा हत्य हर भारतीय भाषा में अनुवाद, रूपात
ं रण तथा इन सबके पीछे दो संस्कृ त महाकाव्य और पंचतंत्र
अनिगनत लोक और जनजातीय संस्करण
अध्याय का अं तम वाक्य पूरी बात कह दे ता है — “भारतीय संस्कृ त व वधता को संपन्नता के रूप म प्रचा रत करती है, कतु
साथ ही व वधता को पो षत करने वाली अंत न हत एकता को भी दृ ष्ट से ओझल नह होने दे ती।”
ऐसा क्य कहा जाता है: वाक्य म न तो ‘ व वधता के ान पर एकता’ है और न ‘एकता के ान पर व वधता’।
यहाँ एकता का अथ एकरूपता नह है। चावल, दाल और हल्द पूरे भारत म एक जैसे ह, परंतु कश्मीरी, बंगाली और
त मल रसोई उनसे बल्कुल अलग-अलग व्यंजन बनाती है — और हर व्यंजन पूरी तरह अपना है। इसी लए पुस्तक
कहती है क व वधता “ वभा जत नह , अ पतु समृद्ध करती है”।
प्र.2 भारत क व वधता के कौन-से पक्ष सवा धक उल्लेखनीय ह?
अध्याय क अपनी सूची ‘आगे बढ़ने से पहले...’ म द गई है — “भारत म व भन्न प रदृश्य , व्य क्तय , भाषाओं, प रधान ,
भोजन, त्योहार एवं परंपराओं क व वधता है।” इनम से जन चार का वस्तार से अध्ययन कया गया है, वे ह — भोजन,
प रधान, त्योहार और सा हत्य।
Page 2 of 29
Page 4
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
पक्ष अध्याय के अपने आँकड़े और उदाहरण
जनसंख्या 1.4 अरब से भी अिधक िनवासी — िवश्व की जनसंख्या का लगभग 18 पितशत। ‘भारत के लोग ’ पिरयोजना में सभी
राज्यों के 4,635 समुद ायों का सवक्षण
भाषाएँ और उसी सवक्षण में 25 िलिपयों का उपयोग करने वाली 325 भाषाओं की गणना। एक ही रे ल -यात्र ा में पिरिचत-अपिरिचत
ल पयाँ भाषाएँ सुनाई दे ती है ं और िविभन्न िलिपयाँ िदखाई दे ती है ं
भोजन “लाखों न सही, िकं तु हजारों पकार के व्यंजन”; िचत्र 8.1 में पूरे मानिचत्र पर फै ले क्षेत्र ीय अनाज और दाले ं
प रधान “भारत के पत्येक क्षेत्र के लोगों ने वस्त्रों और पिरधानों की अपनी स्वयं की शैल ी िवकिसत की है। ” अके ली साड़ी के ही
“सै क ड़ों पकार” है ं
त्योहार “त्योहारों की अपार िविवधता” — जनवरी के एक ही पव के दे श भर में लगभग एक दजन नाम
सा हत्य भारतीय सािहत्य “िवश्व के सबसे धनी सािहत्यों में से एक”; के वल तिमलनाडु में महाभारत के लगभग 100 लोक स्वरूप
लोग का अनेक भारतीय पवासी कहे जा सकते है ं — अपने जन्म स्थान या मूल समुद ाय से दू र — इसिलए िविवधता एक ही नगर,
आवागमन यहाँ तक िक एक ही कक्षा में भी िमल जाती है
इनम भाषा प्राय: सबसे पहले ध्यान ख चती है, क्य क वह सुनने और पढ़ने — दोन म बदल जाती है।
पुस्तक से आगे: भारत क 325 भाषाएँ आपस म असंबद्ध नह ह। व ान इनम से अ धकांश को कुछ भाषा-
प रवार म रखते ह, अथात ऐसी भाषाएँ जनका मूल एक ही है। यह अध्याय म नह है, पर इससे भाषा म भी
‘ व वधता म एकता’ सरलता से दखाई दे ती है।
भाषा- कुछ भाषाएँ मुख्यत: कहाँ
प रवार
भारोपीय िहंद ी, बाग्ं ला, मराठी, ग ज
ु राती, पंजाबी, ओिड़या, असिमया, उत्तर पदे श, मध्य पदे श, िबहार, राजस्थान, हिरयाणा,
(आय शाखा) उदू , मैिथली, कश्मीरी, कोंक णी, नेपाली, डोगरी, िसंध ी महारा , ग ज
ु रात, पंजाब, ओिडशा, पिश्चम बंग ाल, असम,
— संस्कृ त इसी शाखा की शास्त्रीय भाषा है गोवा, जम्मू-कश्मीर तथा आसपास के राज्य
द िवड़ तिमल, तेल ुग ,ु कन्नड़, मलयालम; तुल ु, गोंडी, कु ड़ुख भी तिमलनाडु, आंध पदे श, तेल ंग ाना, कन टक, के रल; गोंडी
और कु ड़ुख मध्य भारत में
ऑस्टो- संताली, मुंडारी, हो; खासी झारखंड, ओिडशा, पिश्चम बंग ाल (संताली, मुंडारी, हो);
एिशयाई मेघ ालय (खासी)
ितब्बती-बम मैतेई (मिणपुर ी), बोडो, िमज़ो, आओ, अंग ामी, ल ाखी, मिणपुर , असम, िमज़ोरम, नागालै ंड, िसिक्कम, ल ाख,
भोिटया अरुणाचल पदे श
अंडमानी ग ेट अंडमानी, जारवा, ओंग े अंडमान ीप समूह — िवश्व के सबसे छोटे भाषा-समुद ायों
में से
भारत क 22 भाषाएँ सं वधान क आठव अनुसूची म स म्म लत ह।
Page 3 of 29
Page 5
as e
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
हम व वधता म न हत एकता का कैसे पता लगाते ह?
e
प्र.3
m l as
.co a g
a s em
agl जब कोई भन्नता दखे, यह पूछकर — “यह कसके अलग-अलग रूप ह?” अध्याय इसी व ध को चार बार दोहराता है।
हर बार
co m
. ag
1. साझी सामगी खोिजए। हजारों व्यंजन → वही चावल, गेहूँ, बाजरा, दाल, हल्दी, जीरा
e m
l as
2. साझी वस्तु खोिजए। सैक ड़ ों सािड़ याँ, अने क तरीके → एक िबना िसला कपड़ ा
g
a
3. साझी ितिथ और साझा कारण खोिजए। जनवरी में एक दजन नाम → एक ही फसल, सूय का एक ही
co m
m.
उत्तरायण
m as e
4. साझी कथा खोिजए। असंख्य रूपांत रण → रामायण और महाभारत
.co a g l
a s em
a glपहली दृ म क्या दखता है नीचे दे खने पर क्या मलता है
m a s
.co agl
कश्मीरी, ग ज
ु राती और तिमल थाली में कोई समानता नही ं तीनों वही मुख्य अनाज और मसाले है ं — “एक ही पकार की सामग ी (एकता) से
em
िदखती िविभन्न पकार के (िविवधता) अनिगनत व्यंजन”
a s
ं ीवरम और पाटन पटोला एक-दू स रेgसेl
बनारसी, काज
a
िबल्कु ल िभन्न है ं और बाँध ने के तरीके भी अलग है ं
“ले िकन अंततोग त्वा यह एक ही पकार का पिरधान — ‘साड़ी’ है”
co m
लोहड़ी, िबहू, पोंग ल और उत्तरायण के नाम, भोजन और
m .
ये एक ही ितिथ पर पड़ते है ं और एक ही घटना के सूचक है ं — फसलों की कटाई
as e
com l
रीितयाँ अलग है ं का आरंभ
.गोंड, मुंडा और नीलिगिर की जनजातीय कथाएँ a g
e m
as संस्कृत पाठ से और एक-दू सरे से िभन्न है ं
भील, ये सब एक ही महाकाव्य के रूप है,ं िजसने सिदयों में “भारत एवं एिशया के िविभन्न
agl
भागों के म ध् य एक सांस्कृ ितक सूत्र के गहन तंत्र को िवकिसत िकया”
se m
com g l a
. a
महाकाव्य सबसे मजबूत प्रमाण क्य ह: ये रूपांतरण कसी के आदे श से नह बने। हर समुदाय ने अपनी भाषा म
m
ase
अपना संस्करण बनाया और उसम अपने पहाड़, नद और वन जोड़ लए — प रणाम यह क केरल का ब ा और
agl
असम का ब ा, दोन हनुमान को पहचानते ह। यह एकता आपसी साझेदारी से बनी है, कसी के थोपने से नह ।
co m
यह क जए: कोई भी रोजमरा क वस्तु ली जए — द पक, ार क रंगोली, ववाह गीत, अ भवादन का ढं ग — और
m .
as e
com l
दो स्तंभ बनाइए : ‘जो ान- ान पर बदलता है’ और ‘जो हर जगह एक-सा रहता है’। दूसरा स्तंभ ही एकता है।
. a g
m
ase
agl c
m .
e
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 126
m a s
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 4 of 29
Page 6
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
समृद्ध व वधता
प्र.1 ‘ व वधता म एकता’ का अथ क्या है?
‘ व वधता म एकता’ का अथ है — जो वस्तुए ँ ऊपर से पूरी तरह भन्न दखती ह, वे भीतर से एक ही वस्तु के रूप ह। भारत
के संदभ म इसका अथ यह है क दे श क अनेक भाषाएँ, प रधान, भोजन, त्योहार और परंपराएँ अलग-अलग संसार नह ह जो
संयोग से पास-पास पड़े ह ; वे एक ही साझी भू म से उपजी ह।
यह वाक्यांश अध्याय म वसट स्मथ के माध्यम से आता है, जन्ह पहले इसका उल्टा भय हुआ था। उन्ह ने पूछा क इतने “अचं भत
करने वाले” दे श का एक इ तहास कैसे लखा जाए, और स्वयं उत्तर दया — “इस प्रश्न का उत्तर इस तथ्य म न हत है क भारत
‘ व वधता म एकता’ प्रद शत करता है।”
िविवधता = जो िदखती है — 325 भाषाएँ, 25 िलिपयाँ, 4,635 समुद ाय, लाखों व्यंजन
एकता = जो खोजने पर िमलती है — इन सबमें साझा क्या है
िविवधता में एकता = दोनों एक साथ सत्य है,ं और दू सरी पहली की व्याख्या करती है
संकेत: ध्यान दे ने योग्य शब्द है ‘म’। न व वधता के वरुद्ध एकता, न व वधता के बाद एकता — ब ल्क व वधता के
भीतर पहले से उप त एकता।
प्र.2 हम इस एकता या ‘एक म अनेक’ को कैसे समझ और व्यक्त कर?
अध्याय इसका उत्तर एक व ध चुनकर दे ता है — “इस प्रश्न के उत्तर के लए हम भारतीय जीवन के कुछ आयाम को समझने का
प्रयास करगे।” वह वचार पर बहस नह करता, ब ल्क साधारण वस्तुओं को दे खने चला जाता है।
जस आयाम को दे खा गया अध्याय म कहाँ वह क्या दखाता है
सभी के िलए भोजन पष्ृ ठ 127–128 हर जगह वही मुख्य अनाज और मसाले , पर संयोजन अनिगनत
वस्त्र एवं पिरधान पष्ृ ठ 128–131 एक िबना िसला कपड़ा — साड़ी — के सै क ड़ों पकार और पहनने के अनेक ढं ग
त्योहारों की िविवधता पष्ृ ठ 131–133 जनवरी का एक ही फसल-पव, लगभग एक दजन नामों से
महाकाव्य का िवस्तार पष्ृ ठ 133–135 दो संस्कृ त महाकाव्य, हर भाषा में तथा असंख्य लोक व जनजातीय रूपों में
इसके बाद अध्याय कहता है क यह यात्रा और आगे भी जा सकती थी — “भारतीय शास्त्रीय कलाओं ( जसम शास्त्रीय वास्तुकला
स म्म लत है) म व वधता एवं एकता को सरलता से दे खा जा सकता है” — यह क्षेत्र कला पाठ्यचया के लए छोड़ दया गया है।
Page 5 of 29
Page 7
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
यही व ध सही क्य है: ‘ व वधता म एकता’ दोहराने का नारा नह , पहचानने का एक ढाँचा है। इसे ध्यान से तुलना
करके समझा जाता है — दो था लयाँ, दो सा ड़याँ, दो त्योहार — और तब व्यक्त कया जाता है जब आप हर बार
ठ क-ठ क बता सक क क्या बदला और क्या नह बदला।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 126
समृद्ध व वधता — कक्षा क ग त व ध
आइए पता लगाएँ
प्र.1 कक्षा क एक ग त व ध के रूप म (1) कम से कम 5 सहपा ठय और उनके माता- पता के जन्म स्थान तथा (2)
उनक मातृभाषाओं और उन्ह ात अन्य भाषाओं क सू चयाँ बनाइए। व वधता के प रप्रेक्ष्य म इस ग त व ध के
प रणाम पर चचा क जए।
कैसे क जए। श्यामपट्ट पर पाँच स्तंभ क एक ता लका बनाइए और बारी-बारी से प्रत्येक सहपाठ से पूछकर भ रए। वनम्रता से
पू छए, जो कहा जाए वही ल खए, और कसी के उत्तर पर टप्पणी मत क जए — कोई भाषा या जन्म ान कसी दूसरे से अच्छा
या बुरा नह होता।
क्या पूछ वह ता लका म क्य चा हए
िव ाथ का जन्म स्थान (नगर/गाँव और कक्षा स्वयं कतनी दूर-दूर से आई है, यह दखता है
राज्य)
माता का और िपता का जन्म स्थान एक पीढ़ म हुआ आवागमन दखता है — जो प्राय: व ा थय से कह अ धक वस्तृत होता
है
मातभृ ाषा घर म बोली जाने वाली भाषा
ज्ञात अन्य भाषाएँ अ धकांश भारतीय ब े दो-तीन भाषाएँ जानते ह, कुछ चार
नमूना उत्तर (आपक कक्षा क वास्त वक ता लका अलग होगी — ढाँचा ली जए, नाम नह ):
व ाथ जन्म स्थान माता का जन्म स्थान पता का जन्म स्थान मातृभाषा अन्य ात भाषाएँ
अनन्या नागपुर , महारा अमरावती, महारा नागपुर , महारा मराठी िहंद ी, अंग ेजी
इबािहम नागपुर , महारा हैद राबाद, तेल ंग ाना लखनऊ, उत्तर पदे श उदू िहंद ी, मराठी, अंग ेजी
तेनिजन बायलाकु प्पे, कन टक बायलाकु प्पे, कन टक ले ह, ल ाख ितब्बती िहंद ी, कन्नड़, अंग ेजी
सुजाता राउरके ला, ओिडशा संबलपुर , ओिडशा राउरके ला, ओिडशा ओिड़या सादरी, िहंद ी, अंग ेजी
काितक नागपुर , महारा मदुरै , तिमलनाडु चेन्नई, तिमलनाडु तिमल िहंद ी, मराठी, अंग ेजी
Page 6 of 29
Page 8
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
प रणाम पर चचा — तीन बात अवश्य क हए।
माता- पता का स्तंभ व ा थय के स्तंभ से चौड़ा है। एक ही नगर म जन्मे पाँच ब के माता- पता पाँच अलग राज्य म
जन्मे हो सकते ह। ‘भारत के लोग’ प रयोजना ने ठ क यही पाया था — अनेक भारतीय को प्रवासी कहा जा सकता है, इस
अथ म क वे अपने जन्म ान के नकट या अपने मूल समुदाय के साथ नह रहते (पृष्ठ 126)।
लगभग हर व ाथ बहुभाषी है। अं तम दो स्तंभ क कुल भन्न भाषाएँ ग नए; 40 व ा थय क सामान्य कक्षा म यह
संख्या आठ-दस तक पहुँच जाती है। दे श क 325 भाषाएँ कह दूर नह ह — उनका एक नमूना इसी कमरे म बैठा है।
फर भी कक्षा एक ही कक्षा क तरह चलती है। सब एक ही पाठ पढ़ते ह, एक ही खेल खेलते ह और ट फन बाँटते ह। यही
वह ‘एक’ है जसम ‘अनेक’ रहते ह — और यही पूरे अध्याय क बात है।
और आगे: एक छठा स्तंभ जो ड़ए — ‘मेरी मातृभाषा म पानी के लए शब्द’ : पानी, जल, तण्णी, नीरु, वेळ्ळम,
जोल, चू। इनम से कुछ शब्द स्पष्ट रूप से आपस के रश्तेदार ह और कुछ नह — यह एक ही पं क्त व वधता और
उसके पीछे के भाषा-प रवार, दोन दखा दे ती है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 128
सभी के लए भोजन
आइए पता लगाएँ
प्र.1 कक्षा क एक ग त व ध के रूप म अपने घर म उपयोग क जाने वाली भोजन साम ग्रय (अनाज, मसाल आ द)
क सूची बनाइए।
कैसे क जए। घर म कसी बड़े क अनुम त लेकर रसोई क अलमारी दे खए और जो मले उसे वग म बाँटकर ल खए। सूची कक्षा
म लाइए, सबक सू चयाँ साथ र खए और उन वस्तुओं पर नशान लगाइए जो लगभग हर सूची म ह — वही ‘एकता’ है।
नमूना उत्तर — एक घर क सूची, अध्याय के ही क्रम म :
Page 7 of 29
Page 9
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
वग अलमारी म क्या है क्या लगभग हर भारतीय घर म?
अनाज चावल, गेहू ँ का आटा, सूजी, जौ हाँ — अध् याय चावल , जौ और गेहू ँ का नाम ले ता है
मोटे अनाज बाजरा, ज्वार, रागी हाँ — तीनों अध् याय में नािमत है ं
दाल अरहर/तुअर दाल, मूंग दाल, मसूर दाल, हाँ — “िविभन्न पकार की दाले ं”
चना दाल, उड़द दाल, राजमा, लोिबया, छोले
मसाले हल्दी, जीरा, इलायची, अदरक, धिनया, राई, पहले चार का नाम अध् याय में है — “पूरे दे श में” उपयोग होने वाले
काली िमच, लौंग , दालचीनी, िमच
तेल मूँग फली का तेल , सरसों का तेल , नािरयल रोज का तेल कौन-सा हो, यह क्षेत्र के अनुस ार बदलता है — पूव और उत्तर
तेल , ितल का तेल में सरसों, के रल में नािरयल, पिश्चम में मूँग फली, दिक्षण के कु छ भागों में
ितल
रोजमरा क प्याज, आलू, टमाटर, बैगं न, िभंडी, लौकी, लगभग हर जगह िमलती है,ं पर पकाने के ढं ग िबल्कु ल अलग
स ब्जयाँ पालक
तुलना से क्या पता चलता है। अनाज, दाल और मसाल के स्तंभ पूरी कक्षा म लगभग एक जैसे नकलगे, चाहे सहपाठ अलग-
अलग राज्य से ह । सबसे अ धक अंतर तेल म और बने-बनाए मसाल म दखेगा — बंगाली रसोई म पाँच फोरन, त मल म
सांबार पोडी, पंजाबी म गरम मसाला, अस मया म भूत जोलो कया। आधार एक, अं तम स्पश अलग — यही अध्याय क बात, एक
ही अलमारी म।
क्या आप जानते ह? बाजरा, ज्वार और रागी बहुत कम पानी म और तेज गम म भी उगते ह, इसी लए ये हजार
वष से भारत के शुष्क क्षेत्र का भोजन रहे ह। भारत के प्रस्ताव पर 2023 को अंतररा ीय मलेट वष के रूप म
मनाया गया।
प्र.2 कसी भी एक हरी सब्जी को ली जए एवं वचार क जए क उससे आप कतने प्रकार के व्यंजन बना सकते ह?
आलू ली जए (बटाटा, उरुलै कळं गु, आलूग े)। एक ही सब्जी, हर बाजार म उपलब्ध — और आप जस भी दशा म चल, वह दूसरा
व्यंजन बन जाती है।
Page 8 of 29
Page 10
as e
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
व्यंजन जस क्षेत्र से सवा धक उसी आलू के साथ क्या कया जाता है
m
जाना जाता है
as e
.co a g l
a s em
आलू पराँठा पंजाब, हिरयाणा उबालकर, मसालों के साथ मसलकर, गेहू ँ की लोई में भरकर
ag l से ंक ा जाता है
दम आलू कश्मीर छोटे साबुत आलू तलकर, ढके बतन में धीमी आँच पर पकाए
m
.co ag
जाते है ं
a sem
agl
आलू पोस्तो पिश्चम बंग ाल टुक ड़ों में काटकर खसखस के िपसे ले प के साथ पकाया जाता
है
बटाटा भाजी महारा
co m
उबालकर राई, कढ़ ी पत्ता और हल्दी में छौंक ा जाता है
e m.
m l as
.co
आलू चोखा िबहार, पूव उत्तर पदे श भूनकर या उबालकर, कच्ची सरसों के तेल , प्याज और हरी िमच
a g
em
के साथ मसला जाता है
a s
a glउरुलै िकळं ग ु रोस्ट तिमलनाडु छोटे टुक ड़ों में काटकर िमच के साथ सूखा भूना जाता है
a s
com agl
मसाला दोसा की भरावन कन टक प्याज और हल्दी के साथ मसलकर चावल-दाल के दोसे में भरा
.
em
जाता है
ं s
पूरे भारतlमेa
ag
समोसे की भरावन मटर और मसालों के साथ मोटा मसलकर, मैदे में बंद करके
तला जाता है
co m
.
आलू-गोभी, आलू-मटर , आलू-बैगं न, उत्तर भारत दू स री सब्जी के साथ जोड़कर, हर बार नया व्यंजन
आलू-मेथी
se m
o m
c ता लका बारह व्यंजन दे देती है, और कोई भी भारतीय रसोई इनम दस औरaजोड़ l a
g सकती है। बगन के साथ भी यही
m .यही
seजए (बगन भरता, भरली वांगी, एण्णै कत्त रक्काय, बेगुन भाजा, बगन का सालन) — प रणाम वही आएगा।
गणना:
g l a
a
क
se m
com
एक सब्जी इतना कैसे कर लेती है: आलू ‘एकता’ है; व ध और मसाला ‘ व वधता’ है। तेल बद लए (सरस ,
g l a
m . a
e
ना रयल, घी), मसाला बद लए और पकाने का ढं ग बद लए (भूनना, उबालना, तलना, भाप दे ना, धीमी आँच) — वही
आलू कश्मीरी, बंगाली या त मल व्यंजaनsबन जाता है। अध्याय यही कहता है — “एक ही प्रकार क सामग्री (एकता)
agl
से व भन्न प्रकार के ( व वधता) अन गनत व्यंजन और पकवान बनाए जा सकते ह।”
co m
m .
m as e
.coपता लगाएँ — पृष्ठ 129 a g l
m
आइए
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 29
Page 11
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
वस्त्र एवं प रधान — साड़ी
आइए पता लगाएँ
प्र.1 साड़ी का उदाहरण एकता और व वधता को कैसे प्र त ब बत करता है, व्याख्या क जए (100–150 शब्द म)।
लखने से पहले दोन पक्ष अलग कर ली जए — अंक इसी से मलते ह।
एकता — एक वस्तु व वधता — उसके अनेक रूप
एक ही िबना िसला लंबा कपड़ा कपास , रे शम अथवा आजकल कृ ित्र म (िसंथेिटक ) धागे से बना
भारत के अिधकांश भागों में पहनी जाती है बनारसी, कांजीवरम , पैठनी, पाटन पटोला, मूग ा, मैस ूर — और सूती पकार तो और भी
अिधक ; “सै क ड़ों पकार ”
नाम एक ही — साड़ी बुनाई और िडजाइन की िभन्न िविधयाँ; कु छ िडजाइन कपड़े का ही िहस्सा, कु छ बुनाई के
बाद छापे गए ; रंग ों की अनिगनत िविवधता
इितहास कम से कम वैशाली की उके री गई आकृ ित पहनने के अनेक तरीके , जो क्षेत्र और समुद ाय के अनुस ार बदलते है ं — और नए तरीके
तक, कु छ शताब्दी सा.सं.पू. अब भी खोजे जा रहे है ं
नमूना उत्तर (लगभग 130 शब्द):
साड़ी एक ही लंबा सादा कपड़ा है, जसे बना सले ही पहना जाता है और जो भारत के अ धकांश भाग म पहना
जाता है — यही उसक एकता है। शेष सब कुछ बदलता रहता है। वह कपास क हो सकती है, रेशम क , या
आजकल कृ त्रम धागे क । बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा और मैसूर तो रेशमी सा ड़य के कुछ ही
प्र सद्ध प्रकार ह, सूती प्रकार इनसे भी अ धक ह; इस तरह यह एक ही प रधान सैकड़ रूप म मलता है। ये रूप
बुनाई और डजाइन क भन्न व धय से बनते ह — कुछ डजाइन कपड़े म ही बुने जाते ह, कुछ बाद म छापे जाते ह,
और रंग कई प्रकार के रंजक से आते ह। पहनने के तरीके एक क्षेत्र से दूसरे और एक समुदाय से दूसरे म भन्न ह,
और नए तरीके अब भी बन रहे ह। फर भी अंततोगत्वा यह एक ही प रधान है — साड़ी।
यह उदाहरण इतना प्रभावी क्य है: साड़ी को कसी नयम, कारखाने या सत्ता ने एक-सा नह बनाया। वाराणसी
और कांचीपुरम के बुनकर ने कभी आपस म डजाइन तय नह कए, और साड़ी कैसे बाँधी जाए यह भी कोई तय
नह करता। फर भी एकता बनी रहती है, क्य क वह सबसे सरल वचार म है — एक कपड़ा, जैसा है वैसा ही पहन
लया गया। साझा आधार इतना छोटा है, इसी लए व वधता को इतनी जगह मल जाती है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 130–131
Page 10 of 29
Page 12
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
वस्त्र एवं प रधान — साड़ी के अनेक उपयोग ( चत्र 8.4)
आइए पता लगाएँ
प्र.1 क्या आप ऊपर दए गए चत्र से यह पहचान सकते ह क साड़ी का उपयोग कतने प्रकार से कया गया है?
चत्र 8.4, पृष्ठ 130–131 — छह छाया चत्र का वणन यहाँ दया गया है; छाया चत्र दे खने के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
1. पेड़ के नीचे। एक लंबी लाल साड़ी पेड़ क नीची डाल से बाँधी गई है और नीचे झूलती हुई एक गहरी
झोली बनाती है; उस झोली के भीतर एक छोटा शशु सूखे पत्त से थोड़ा ऊपर सोया हुआ है। पीछे दो
स्त्रयाँ सर पर टोकरी रखे जा रही ह।
2. नद म। साँझ के समय एक स्त्री कमर तक पानी म खड़ी है और नारंगी साड़ी का एक सरा पकड़कर
फैले हुए कपड़े को अपने आगे पानी म ख च रही है।
3. खेत म। एक स्त्री पीठ क ओर से दखाई दे ती है; उसके सर पर पीतल का बड़ा घड़ा रखा है और
सर तथा घड़े के बीच लाल चारखाने का कपड़ा गोल लपेटकर मोटा छल्ला बनाकर रखा गया है।
उसक पीठ पर एक टोकरी लटक है।
4. आँगन म (ऊपर से लया गया चत्र)। दो स्त्रयाँ एक लाल साड़ी को अपने हाथ के बीच तानकर
चादर-सी बनाए हुए ह; उनम से एक धातु के माप-पात्र से अनाज उस कपड़े पर उँड़ेल रही है। पास ही
अनाज से भरी बोरी रखी है।
5. वषा म। गुलाबी छपी साड़ी पहने एक स्त्री अपनी साड़ी का नारंगी पल्लू दोन हाथ से उठाकर सर के
ऊपर तान लेती है और वषा क बूँद गर रही ह।
6. घास पर। एक स्त्री घास पर बछ पीली-हरी साड़ी पर हाथ का त कया बनाकर गहरी न द म लेट है;
पीछे पेड़ के बीच एक गाय चर रही है।
चत्र 8.4 (पृष्ठ 130–131, सभी चत्र द क्षण भारत से) के छह चत्र म साड़ी हर बार ऐसा काम कर रही है जसका पहनावे से कोई
संबंध नह ।
Page 11 of 29
Page 13
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
क्र. चत्र म क्या दख रहा है साड़ी का उपयोग
1 बगीचे में पेड़ की नीची शाखा से बँध ी लाल साड़ी, गहरे झूले की पालना या झूला — माँ पास ही काम करती रहती है और ब ा
तरह लटकी हईु , िजसमें एक िशशु सो रहा है छाँव म सोता है
2 एक स्त्री तालाब में कमर तक पानी में खड़ी होकर फै ली हुई मछली पकड़ने का जाल — महीन बुनाई म छोट मछ लयाँ
नारंग ी साड़ी को पानी में खी ंच रही है और झ गे फँस जाते ह
3 एक स्त्री िसर पर भारी पीतल का घड़ा िलए खेत पार कर रही है; इंडुरी ( सर क ग ) — कपड़े को गोल लपेटकर बनाया गया
घड़ा कपड़े के मोटे कुं डल पर िटका है छल्ला, जो घड़े को सँभालता है और भार सहता है
4 ऊपर से िलया गया िचत्र — दो लोग नपने से अनाज उँ ड़ेल रहे है ं पात्र और छननी — अनाज इसी फैले कपड़े म झेला, ढोया और
और उसे फै ली हुई लाल साड़ी में झेल ा जा रहा है साफ कया जाता है
5 वष में एक स्त्री दोनों हाथों से अपनी साड़ी का नारंग ी पल्लू िसर छाता — वषा से और दूसरे दन म धूप से बचाव
के ऊपर तान रही है
6 खेत की घास पर एक स्त्री ले टी है, िसर के नीचे िबछा चारखाने चटाई या चादर — खुले म लेटकर व ाम करने के लए साफ
का कपड़ा है, पीछे मवेशी चर रहे है ं जगह
एक ही प रधान यह सब कैसे कर लेता है: क्य क साड़ी बना सली होती है। सले हुए वस्त्र का एक आकार और
एक ही काम होता है। छह मीटर खुला कपड़ा बाँधा, ताना, लपेटा, फैलाया या बछाया जा सकता है — इस लए वह
वही बन जाता है जसक उस क्षण जरूरत हो। अध्याय क बड़ी बात भी यही है — जतने कम नयम बँधे ह , उतने
अ धक रूप संभव ह।
प्र.2 क्या आप साड़ी के अन्य उपयोग से प र चत ह अथवा क्या आप उसके अन्य उपयोग क कल्पना कर सकते ह?
हाँ — भारतीय घर म पुरानी साड़ी लगभग कभी फक नह जाती। कुछ और उपयोग, जनम से कई आपने स्वयं दे खे ह गे :
Page 12 of 29
Page 14
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
उपयोग कैसे
कपड़े का झूल ा (झूला, तोिट्ट ल, ऊयाला) छत के दो कुं डों या दो पेड़ों के बीच बाँध कर, घर के भीतर भी और बाहर भी
परदा या कमरे का िवभाजन ार या िखड़की पर तानकर — एकांत भी िमलता है और धूप भी कटती है
दही जमाना, छानना, पानी छानना साफ सूती साड़ी घर की सबसे पुर ानी छननी है
गठरी चारों कोने बाँध दीिजए और सब्जी, अनाज या लकड़ी ढोने का थैल ा तैयार
आँग न पर छाँव या अस्थायी तंब ू की दीवार गाँव के आयोजनों और िववाह में खंभों के बीच तानकर
रजाई-ग दु ड़ी (कांथा, गोधड़ ी) कई पुर ानी सािड़याँ परत-दर-परत रखकर चलती िसलाई से जोड़ना — बंग ाल और महारा का
पिसद्ध िशल्प
र स्सी, पट्ट ी या गोफन पिट्टयों में फाड़कर; कु एँ में बाल्टी उतारने के िलए भी
झाड़न, पोंछा, खाट का िबछौना, ग िु ड़या के कपड़े का अंितम चरण, िजसके बाद धागे िचथड़ों की दरी में भी लग जाते है ं
कपड़े
सो चए: यहाँ गनाया गया लगभग हर उपयोग पुन: उपयोग है। जो वस्त्र कभी कसी न श्चत नाप म काटा ही नह
गया, उसे आगे दया जा सकता है, नए ढं ग से बाँधा जा सकता है, परत म लगाया या फाड़ा जा सकता है — और
वह बेकार नह होता। इसी लए साड़ी केवल बहुउपयोगी नह , सचमुच मतव्ययी और पयावरण- हतैषी भी है। घर म
कसी बड़े से पू छए क घर क सबसे पुरानी साड़ी आजकल कस काम आ रही है — उत्तर प्राय: च काने वाला होता
है।
प्र.3 जस प्रकार आपने साड़ी के व भन्न रूप और उपयोग को दे खा, उसी प्रकार एक अन्य प रधान धोती के कपड़े
(फै क) तथा उपयोग को ध्यान म रखते हुए उसके व भन्न रूप क एक सूची तैयार क जए। इस ग त व ध से
आपको क्या समझ म आया?
धोती भी वही वचार है जो साड़ी है — एक सादा बना सला कपड़ा, जो भारत के अ धकांश भाग म पुरुष पहनते ह और जसे
लगभग हर जगह अलग नाम से पुकारा जाता है।
भाग 1 — रूप, नाम और कपड़ा।
Page 13 of 29
Page 15
as e
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
नाम और क्षेत्र प्राय: कस कपड़े का पहनने का ढं ग
m as e
.co
धोती — उ त्त र भारत सफे द या क्रीम सूती; िववाह और अनुष्ठान
a g l
कमर पर लपेटकर, आगे चुन्नट, एक छोर पैर ों के बीच से
m
ase
में रे शमी पीछे खोंस ा हआ
ु
aधgिु तl— पिश्चम बंगाल महीन सूती, पाय: पतली रंग ीन िकनारी आगे चौड़ी चुन्नटें, कु त या पंजाबी के साथ
m
.co ag
धोतर — महारा सूती, नौ गज लंबा काछा ढं ग, पीछे खोंस कर, िजससे चलना-िफरना सहज
sem
रहता है
gl a
वेिष्ट — तिमलनाडु
a
सूती, सुनहरी या रंग ीन िकनारी (जरी कर )
के साथ
पूर ा लंबा, या काम के समय घुटनों तक मोड़कर
co m
e m.
मुंडु — के रल महीन सफे द सूती, पाय: कसवु सुनहरी कमर पर एक बार लपेटा; काम के समय इसी तरह मोड़
com l as
िकनारी िलया जाता है
. a g
m
ase
पंचे / क च्चे — कन टक
aglपंचा — आंध पदे श, तेलंगाना
सूती, कभी रे शमी खुल ा या कच्चे ढं ग से खोंस कर
सूती, पाय: िकनारी वाला लपेटकर खोंस ा हुआ ; कं धे पर उत्तरीयम्
m a s
.co agl
धोितयु / चोरणो — ग ज
ु रात, सूती, कभी बंधे ज का के िडयु और पगड़ी के साथ
राजस्थान
se m
g l a
लाचा / तहमद — पंजाब a
सूती, पाय: चारखाना बीच में खोंसे िबना लपेटा; भांग ड़ा और खेत के काम के िलए
co m
.
पहलवान और कब ी िखलाड़ी मजबूत सूती, छोटी कसकर और ऊँची खोंस ी हईु , िजससे पैर पूर ी तरह स्वतंत्र
की धोती
se
रहे ं
m
o m l a
c प रधान के अ त रक्त उपयोग। साड़ी क तरह धोती भी दूसरे काम आती हैa:gपल्ले से मुँह-हाथ प छने का अंगोछा,
भागm 2.—
l a se क छननी, कोने बाँधकर अनाज या चारा ढोने का थैला, गम म पंखा, बैठने-सोने क चादर, आपात त म प या
ag पानी
गोफन, और फाड़ने पर रस्सी। घुटन तक मोड़ ली जए तो वही धोती काम के कपड़े ह; टखन तक छोड़ द जए तो मं दर और ववाह
se m
com l a
का औपचा रक प रधान।
. a g
m
ase
इस ग त व ध से क्या समझ म आया।
एक िबना िसला कपड़ ा
agl
co m
.
+ अलग-अलग कपड़ े, िकनािरयाँ, लंबाइयाँ और बाँधने के ढं ग
e m
m l as
.co
+ अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम
a g
s e m = वही ‘िविवधता में एकता’ जो साड़ ी में थी, पर एक िबल्कुल दू सरे पिरधान में
agla िनष्कष : यह भारतीय जीवन का एक ढर है, कोई इक्का-दुक्का संयोग नही।ं
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 29
Page 16
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
वही ढरा दो बार क्य दखाई दे ता है: दोन प रधान सबसे सरल रचना से आरंभ होते ह — बना काटा हुआ
कपड़ा। चूँ क सलाई कुछ भी तय नह करती, इस लए हर क्षेत्र अपना कपड़ा, अपनी कनारी, अपनी लंबाई और
अपना ढं ग चुनने के लए स्वतंत्र है और फर भी साझा रूप से बाहर नह जाता। व वधता एकता के वरुद्ध नह ,
उसी म से नकलती है — अध्याय यही सद्ध कर रहा है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 133
त्योहार क व वधता ( चत्र 8.5)
आइए पता लगाएँ
प्र.1 आपका सबसे प्रय त्योहार कौन-सा है एवं यह आपके क्षेत्र म कस प्रकार मनाया जाता है? क्या आप जानते ह
क यह भारत के कसी अन्य भाग म भी वस्तुत: कसी अन्य नाम से मनाया जाता है?
अ े उत्तर म तीन बात होनी चा हए : (1) अपने त्योहार का नाम और स ाई से यह क वह आपको प्रय क्य है; (2) आपके
अपने क्षेत्र म वह कैसे मनाया जाता है — भोजन, वस्त्र, सजावट, कतने दन; (3) कम से कम दो अन्य क्षेत्र, जहाँ वही पव दूसरे
नाम से मनाया जाता है।
नमूना उत्तर :
मेरा सबसे प्रय त्योहार मकर संक्रां त है, क्य क वष म यही एक दन है जब पूरा मुहल्ला एक साथ छत पर होता है।
महाराष्ट्र के हमारे भाग म यह 14 जनवरी को पड़ता है। रसोई म तल भुनने क सुगंध भर जाती है और हम तलगुल
— तल और गुड़ के लड्डू — बनाते ह, जो हर मलने वाले को “ तळ-गुळ घ्या, गोड-गोड बोला” कहकर दए जाते ह,
अथात यह मठास ली जए और मीठा बो लए। स्त्रयाँ उस दन काली साड़ी पहनती ह और हळद -कुंकू म छोटे
उपहार बाँटती ह। सुबह से साँझ तक आकाश पतंग से भरा रहता है।
यही पव उसी त थ को पूरे भारत म दूसरे नाम से मनाया जाता है। त मलनाडु म यह प गल है, जसम नए चावल
को बतन म तब तक उबाला जाता है जब तक वह उफनकर बाहर न आ जाए। पंजाब म एक रात पहले लोहड़ी क
अ ग्न जलती है और अगला दन माघी होता है। असम म यह माघ बहू है, जसम सामू हक भोज होते ह। गुजरात
म यह उत्तरायण है, जो पतंग के लए प्र सद्ध है। इस प्रकार मेरा प्रय त्योहार वस्तुत: पूरे दे श के साथ साझा त्योहार
नकला।
य द आपका त्योहार कोई और है, तब भी पृष्ठ 132 का मान चत्र व ध बता दे ता है — त थ और कारण ढूँ ढ़ए, फर उसी त थ और
कारण को अन्यत्र दूसरे नाम से खो जए।
Page 15 of 29
Page 17
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
मान चत्र ( चत्र 8.5) म क्षेत्र कसका सूचक / कैसे मनाया जाता है
नाम
िशशुर से ंक्रात कश्मीर घाटी कड़ाके की सद में सूय का उत्तर की ओर मुड़ना
माघी / लोहड़ी पंजाब, हिरयाणा, िहमाचल लोहड़ी की रात अिग्न; रबी की फसल और आती हुई कटाई
पदे श
िखचड़ी पव उत्तर पदे श नदी में स्नान और िखचड़ी का दान
मकर संक्रांत मध्य पदे श और मध्य भारत पतंग ें तथा ितल-ग ड
ु ़ की िमठाइयाँ
उ त्त रायण गज
ु रात और राजस्थान शब्द का अथ ही है सूय की उत्तर-यात्रा; पिसद्ध पतंग -पव
मकर संक्रांित महारा ितलग ल
ु के ल ू और “मीठा बोिलए” का संदे श
माघ िबहू असम कटाई के मौसम का अंत; सामूिहक भोज और अलाव
पौष साँग क्रािन्त पिश्चम बंग ाल ु ़ और नािरयल के पीठे -
पौष मास का अंितम िदन; नए चावल, खजूर के ग ड
पुली
मकर संक्रांित ओिडशा नए चावल से बना मकर चाउला का भोग
पे ा पंडुग ा आंध पदे श और तेल ंग ाना ‘बड़ा त्योहार’, कई िदनों तक; मुग्ग ु रंग ोली और सजे हुए बैल
मकर संक्रमण कन टक एळ्ळु-बेळ्ळ (ितल और गड
ु ़ ) बाँटते हुए — “मीठा खाइए, मीठा बोिलए”
पोंग ल तिमलनाडु चार िदन; नए चावल को उफनने तक उबालना, सूय और गोधन के पित
कृ तज्ञता
मकर िवल क्कु के रल मकर संक्रांित की संध् या को सबरीमला की तीथ-ऋतु के समापन पर जलने
वाला दीप
एक ही पव के इतने नाम क्य : पव के पीछे क घटना कोई नाम नह है — वह सूय का उत्तरायण और उसके बाद
आने वाली फसल है, और यह पूरे दे श म उन्ह दन होता है। हर क्षेत्र ने उसी घटना को अपनी भाषा म अपना नाम,
अपना भोजन, अपने वस्त्र और अपने खेल दे दए। कारण एक, उत्सव अनेक।
प्र.2 अक्तूबर-नवंबर माह म भारत म कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते ह। उनम से कुछ प्रमुख त्योहार एवं दे श के व भन्न
भाग म उन्ह जन नाम से पुकारा जाता है, उनक सूची बनाइए।
अक्तूबर और नवंबर भारतीय वष के सबसे व्यस्त सप्ताह ह, क्य क तब वषा ऋतु समाप्त हो चुक होती है और मुख्य फसल घर आ
जाती है। मुख्य त्योहार और उनके क्षेत्रीय नाम :
Page 16 of 29
Page 18
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
त्योहार भारत के व भन्न भाग म नाम और रूप लगभग कब
नवरात्र और पिश्चम बंग ाल, ओिडशा, असम और ित्रपुर ा में दुग पूजा; उत्तर भारत में दशहरा और रामलीला; िसतंबर के अंत
िवजयादशमी कन टक में दसरा या नाड हब्ब, िवशेषकर मैस ूरु में; ग ज
ु रात में गरबा और डािं डया रास ; तिमलनाडु में से अक्तूबर मध्य
बोम् मै गोलु तथा आंध पदे श-तेल ंग ाना में बोम् मल कोलुव;ु तेल ंग ाना में बतुक म् मा; दिक्षण में आयुध पूजा तक
और सर स्वती पूजा
दीपावली उत्तर, पिश्चम और मध्य भारत में िदवाली; दिक्षण में दीपावली, जहाँ तिमलनाडु इसे एक िदन पहले अक्तूबर मध्य से
नरक चतुद शी के रूप में मनाता है; उसी रात पिश्चम बंग ाल में काली पूजा; िसखों के िलए बंद ी छोड़ नवंबर मध्य तक
िदवस ; िसिक्कम, दािजिलंग और नेपाली-भाषी क्षेत्र ों में ितहार ; जैन इसे महावीर के िनव ण िदवस के रूप
में मनाते है ं
दीपावली का उत्तर भारत में गोवध न पूजा या अन्नकू ट; महारा , कन टक और गोवा में बिल पितपदा या पाडवा; दीपावली के
अगला िदन ु रात में बेस्तु वरस , अथ त नववष
गज अगले िदन
भाई-बहन का उत्तर भारत में भाई दू ज; महारा में भाऊबीज; ग ज
ु रात में भाई बीज; पिश्चम बंग ाल में भाई फोंटा; दिक्षण दीपावली के दो
िदन में भिगनी हस्त भोजनम् िदन बाद
छठ िबहार, झारखंड और पूव उत्तर पदे श में छठ पूजा, िजसे सूय षष्ठी या डाला छठ भी कहते है ं — जल में दीपावली के छह
खड़े होकर डू बते और उगते सूय को अ य िदन बाद
पूव त्त र के मेघ ालय के गारो समुद ाय का वांग ला, सौ ढोलों का फसल-पव; मिणपुर के कु की-िचन-िमज़ो समुद ायों अक्तूबर-नवंबर
फसल -पव का कु ट, जो 1 नवंबर को मनाया जाता है
ग रु
ु नानक ग रु
ु पव या पकाश पव — ग रु
ु नानक का पकाशोत्सव, पूरे भारत में िसख समुद ाय ारा, सबसे बड़े नवंबर, काितक
जयंती आयोजन पंजाब में पूिणमा को
काितगै दीपम तिमलनाडु का दीप-पव, ितरुवण्णामलै की िवशाल ज्योित के िलए पिसद्ध; के रल में इसे ित्रक्काितका नवंबर के अंत या
कहते है ं िदसंबर के आरंभ
में
इस सूची से क्या दखता है। दो ढर, और दोन इसी अध्याय के ह :
एक त्योहार, अनेक नाम — जो रात दल्ली म दवाली है, वही कोलकाता म काली पूजा, अमृतसर म बंद छोड़ दवस और
गंगटोक म तहार है।
अनेक त्योहार, एक ऋतु — दुगा पूजा, द पावली, छठ, वांगला और कुट अलग-अलग समुदाय के अलग-अलग पव ह, फर
भी सब इन्ह आठ सप्ताह म आ जाते ह, क्य क सबके पीछे वषा का अंत और मुख्य फसल है।
अपनी सूची कैसे जाँच: हर त्योहार के सामने ल खए (क) त थ, (ख) कारण, (ग) नाम। य द दो त्योहार म (क)
और (ख) समान ह पर (ग) अलग, तो आपने व वधता म एकता खोज ली। य द केवल (ख) समान हो, तो आपने
अनेक समुदाय क साझी ऋतु खोजी है — यह एकता का दूसरा रूप है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 133
Page 17 of 29
Page 19
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
महाकाव्य का वस्तार
प्र.1 उदाहरण के लए, पंचतंत्र के बारे म कसने नह सुना है?
भारत म तो शायद ही कसी ने न सुना हो — और आश्चय यह है क भारत के बाहर भी बहुत से लोग ने सुना है। इसी लए
अध्याय ‘एक से अनेक’ बनने का पहला उदाहरण पंचतंत्र को ही चुनता है।
पंचतंत्र के वषय म अध्याय क्या कहता है
यह क्या है मुख्य पात्रों के रूप में पशुओ ं के माध्यम से मनोरंजक कथाओं का संग ह, जो “हमें महत्वपूण जीवन-कौशल िसखाता है”
कतना पुराना मूल संस्कृ त पाठ लगभग 2,200 वष पुर ाना
भारत के भीतर इसका रूपांतरण “लगभग हर भारतीय भाषा में िकया जा चुक ा है”
भारत के बाहर यह दिक्षण-पूव एिशया, अरब दे शों तथा यूर ोप में भी पढ़ ा जाता है और वहाँ कथाओं के नए संग हों की पेर णा बना
कतने रूपांतरण 50 से अिधक भाषाओं में 200 से अिधक रूपात
ं रण
अध्याय स्वयं नष्कष नकालता है — “यह प्रद शत करता है क ‘एक’ कहा नय का संग्रह कस प्रकार ‘अनेक’ म प रव तत हो
गया।”
पशु-कथाएँ इतनी दूर तक क्य जाती ह: कसी वशेष दे श के राजा क कथा उसी दे श क रह जाती है। पर एक
कौआ, एक चूहा, एक कछु आ और एक हरन जो एक-दूसरे को बचाते ह — यह कथा हर उस व्य क्त क है जसने
कौआ दे खा हो। इसम शब्द के अ त रक्त कुछ भी अनुवाद नह करना पड़ता, इसी लए ये कथाएँ भाषाओं, मत और
महा प को इतनी सरलता से पार कर गईं।
क्या आप जानते ह? सबसे प्र सद्ध कथाएँ वही ह जो आप पहले सुन चुके ह गे — बंदर और मगरमच्छ, नीला
सयार, ाह्मण और बकरी, हंस के साथ उड़ता बातूनी कछु आ, और वे चार मत्र जन्ह ने बहे लए के जाल से हरन
को छु ड़ाया। अरब दे श म पहुँचकर यह संग्रह कलीला व दमना नाम से प्र सद्ध हुआ — यह नाम उसके पहले तंत्र के
दो सयार का है — और वहाँ से यह फारसी, ह ू, लै टन और अ धकांश यूरोपीय भाषाओं म पहुँचा।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 134
Page 18 of 29
Page 20
ase
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’
a g l AglaSem · NCERT Solutions
महाकाव्य का वस्तार — चत्र 8.6 का चत्रांकन
co m
e m.
m as
आइए पता लगाएँ
.co a g l
s m
ष्ठe 134 पर चत्र 8.6 म दशाए गए प्रसंग क पहचान क जए एवं उससे संबं धत घटनाओं पर कक्षा म चचा
gl aपृ
a
प्र.1
क जए।
o m
. c
eहैm, मूल चत्र पाठ्यपुस्तक म दे खए। ag
s
चत्र 8.6, पृष्ठ 134 — एक चत्रकृ त (सा हबद न, मेवाड़, 1652, इं डया ऑ फस लाइ ेरी, लंदन); यहाँ केवल वणन
दयाa
मेवाड़ शैली का एक भरा-पूरा a
gl
गया
लघु चत्र, जो लाल, पीले, हरे और नीले सपाट खंड म बँटा है और जसके
m
चार ओर सुनहरी-नारंगी कनारी है। खंड-दर-खंड इस प्रकार है —
co
e m.
नीचे बाईं ओर, हरे मैदान पर: युद्ध के बाद का दृश्य। सोने के मुकुट पहने दो नीले वण के राजकुमार
भू म पर पड़े ह, उनके शरीर पर हल्के रंग के कुंडल लपटे ह और लंबे बाणsआर-पार
c o m g l a पड़े ह। उनके
m . a ह या सर पकड़े बैठे ह। बीच-
se
चार ओर दजन वानर और भालू — कुछ धूसर, कुछ भूरे — गरे हुए
g l a
a
बीच म कुछ मुकुटधारी योद्धा खड़े होकर नीचे दे ख रहे ह।
ऊपर बाईं ओर, नीले आकाश म: छोट -छोट आकृ तयाँ सुनहरी छतरीदार सवा रय म तथा श्वेत
m
अश्व के रथ म आकाश-माग से जाती हुई नीचे का दृश्य दे ख रही ह।
a s
em
.co
बीच म, पीले महल म: शरस्त्राण पहने सै नक क पं क्तयाँ आँगन और सी ढ़य पर भरी ह; कुछ
agl
a s
agपृष्ठlभू म पर: एक दरबार का दृश्य। मुकुट क तरह ऊपर-नीचे सजे अनेक सर
घोड़ पर सवार ह, एक गहरे भूरे अश्व पर है और एक धनुष उठाए हुए है।
ऊपर दाईं ओर, लाल
तथा अस्त्र थामे अनेक भुजाओं वाली एक बड़ी आकृ त सहासन पर बैठ है और उसके सामने हाथ
. c
जोड़े तथा धनुष ताने दरबारी व योद्धा खड़े ह।
om
s e mभुजाओं वाली आकृ त
m g a सेवक खड़ा है।
दाईं ओर बीच म, गुलाबी-पीली पृष्ठभू म पर: वही अनेक सर और अनेक
फर से, अब एक कक्ष के भीतर सहासन पर, पास मlएक
. co a
e m
l as
नीचे दाईं ओर, उपवन म: लाल वस्त्र पहने एक स्त्री फूल से लदे वृक्ष के नीचे बैठ है और दो
a g सहच रयाँ उसक सेवा म ह — सारे युद्ध से दूर।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
पहले शीषक प ढ़ए। उसी म लगभग सब कुछ है — रामायण का युद्धकांड, सा हबद न, मेवाड़, 1652, इं डया ऑ फस लाइ ेरी,
m
लंदन। अथात यह पन्ना रामायण के छठे कांड युद्धकांड का है, इसे मेवाड़ (राज ान) के चत्रकार सा हबद न ने 1652 म बनाया,
और यह आज लंदन म सुर क्षत है।
. co
e m
m जाता है।
cे oपढ़ा l as
अब चत्र प ढ़ए। मेवाड़ी शैली म एक ही पृष्ठ पर कथा के कई क्षण अलग-अलग रंग के खंड म दखाए जाते ह, जन्ह एक-एक
g
. a
sem
करक
a
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
com
m .
m ase
.co
a g l Page 19 of 29
Page 21
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
कहाँ दे खए वहाँ क्या बना है वह क्या बताता है
बाईं ओर का योद्धा तथा वानरों और भालुओ ं की पूर ी से ना भूिम पर पड़ी है, लंबी पराजय के बाद का रणक्षेत्र। सफेद कुंड लयाँ
बड़ा हरा मैद ान सफे द कुं डिलयों से बँध ी हईु ; उनके बीच दो नीले वण के राजकु मार ; सप ह — वे बाण जो साँप बनकर पूरी सेना को
शेष वानर शोक में बैठे है ं बाँध गए
ऊपर का नीला सुनहरे आकाश-रथों में बैठे पात्र , और श्वेत अश्वों के रथ से बाण युद्ध भू म पर ही नह , आकाश म भी लड़ा जा
आकाश चलाता एक योद्धा रहा है — राक्षस योद्धाओं क मायावी श क्त
का संकेत
ऊपर दाईं ओर महल में िसंहासन पर बैठा दस िसरों और अनेक भुजाओं वाला लंका धप त रावण अपनी सभा म, रणक्षेत्र का
का लाल क क्ष मुकु टधारी पात्र , िजसके सामने योद्धा और दू त खड़े है ं समाचार सुनते हुए
नीचे दाईं ओर वही दस िसरों वाला पात्र िफर से िसंहासन पर , सामने हाथ जोड़े खड़ा उसी सभा का दूसरा क्षण — चत्रकार एक ही
का ग ल
ु ाबी खंड एक योद्धा पात्र को दोहराकर समय का बीतना दखाता है
नीचे दाईं ओर चारदीवारी के भीतर फू लों-पेड़ों के बीच बैठी दो िस्त्र याँ अशोक वा टका म सीता, पहरे म, पर एक
का पीला उपवन सं गनी के साथ
सब मलाकर। सबसे संभा वत पहचान — और प्राय: कक्षा इसी पर पहुँचती है — युद्धकांड का प्र सद्ध नागपाश प्रसंग है : रावण-
पुत्र मेघनाद (इंद्र जत) आकाश से अदृश्य रहकर राम, लक्ष्मण और वानर सेना पर ऐसे बाण चलाता है जो सप बनकर उन्ह जकड़
लेते ह; इसका समाचार रावण क सभा म पहुँचता है, और उधर सीता अशोक वा टका म प्रतीक्षा करती ह। कथा म आगे बंधन कट
जाता है और युद्ध चलता रहता है।
चचा म लाने योग्य महत्वपूण बात :
पात्र क पहचान के संकेत — राम और लक्ष्मण नीले वण म; रावण के दस सर; हनुमान तथा वानर सेना बंदर के रूप म;
जांबवान का समुदाय भालुओं के रूप म।
चत्रण क शैली — एक ही पृष्ठ पर कई दृश्य, रंग क प ट्टय से अलग कए हुए, और एक ही पात्र अलग-अलग खंड म
दोहराया हुआ। इसे छाया चत्र क तरह बाएँ से दाएँ नह , ब ल्क खंड-दर-खंड कथा क तरह पढ़ा जाता है।
समय और स्थान — 1652, मेवाड़। यह एक संस्कृत महाकाव्य का राजस्थानी चत्रांकन है, जो अब लंदन म है। यह चत्र
स्वयं अध्याय का उदाहरण है — एक ही कथा, एक और भाषा म कही गई; वह भाषा है चत्रकला।
कक्षा-चचा के लए एक ईमानदार बात: अलग-अलग समूह प्रसंग का नाम कुछ अलग बता सकते ह, क्य क
युद्धकांड के कई क्षण दे खने म मलते-जुलते ह — मैदान म गरी सेना, सभा म रावण, वा टका म सीता। यह ठ क है।
यह ग त व ध वस्तुत: यह जाँचती है क आप जो दख रहा है उसका वणन कारण स हत कर पाते ह या नह । पहले
जो दखता है वह क हए, नाम बाद म द जए।
आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 136
Page 20 of 29
Page 22
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय तीन बदुओं म
आगे बढ़ने से पहले . ..
प्र.1 भारत म व भन्न प रदृश्य , व्य क्तय , भाषाओं, प रधान , भोजन, त्योहार एवं परंपराओं क व वधता है।
इस वाक्य के हर शब्द के पीछे अध्याय कुछ ऐसा रखता है जसे गना या दे खा जा सके।
वाक्य का अध्याय का प्रमाण
शब्द
पिरदृ श्य “यिद आप रे ल ारा भारत की यात्रा करते है,ं तो आप न के वल बदलते भूदृ श्यों को दे खेंग े...”
व्यिक्त 1.4 अरब से अिधक िनवासी, िवश्व की जनसंख्या का लगभग 18 पितशत; सभी राज्यों में 4,635 समुद ायों का सवक्षण
भाषाएँ 25 िलिपयों का उपयोग करने वाली 325 भाषाएँ — एक ही यात्रा में भाषाएँ सुनाई दे ती है ं और िलिपयाँ िदखाई दे ती है ं
पिरधान “भारत के पत्येक क्षेत्र के लोगों ने वस्त्रों और पिरधानों की अपनी स्वयं की शैल ी िवकिसत की है”; अके ली साड़ी के सै क ड़ों
पकार
भोजन “लाखों न सही, िकं तु हजारों पकार के व्यंजन”; िचत्र 8.1 में पूरे मानिचत्र पर फै ले अनाज और दाले ं
त्योहार “त्योहारों की अपार िविवधता” — जनवरी के एक ही पव के लगभग एक दजन नाम
परंपराएँ अपने ही क्षेत्र में “भारत के िविभन्न भागों से आए अलग-अलग रीित-िरवाजों और परंपराओं वाले लोग”
अध्याय यह भी कहता है क यही व वधता “वह पहला पक्ष है जो हमारे दे श म आने वाले पयटक को प्रभा वत करता है” — और
इतनी बड़ी जनसंख्या म यह “आश्चयजनक नह है”।
प्र.2 व भन्न क्षेत्र म व वधता दृ गोचर होती है, परंतु इसम अंत न हत एकता भी है।
वाक्य के दोन भाग जानबूझकर असमान ह। व वधता सरल है — वह रेल क खड़क से ही दख जाती है। एकता को खोजना
पड़ता है, क्य क वह सतह के नीचे है।
जो सहज िदखता है — िभन्न पिरधान, िभन्न भोजन, िभन्न भाषाएँ, िभन्न िलिपयाँ
↓ नीचे दे िखए ↓
अंत िनिहत एकता — वही मुख्य अनाज, वही पिरधान, वही पव, वही कथाएँ
Page 21 of 29
Page 23
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
क्षेत्र जो तुरंत दखता है जो नीचे मलता है
भोजन हजारों व्यंजन चावल , जौ, गेहू,ँ बाजरा, ज्वार , रागी, दाले ं; हल्दी, जीरा, इलायची,
अदरक
प रधान सै क ड़ों सािड़याँ, अनेक तरीके एक िबना िसला लंबा कपड़ा
त्योहार जनवरी में एक दजन नाम एक ितिथ, एक फसल
सा हत्य अनिगनत क्षेत्र ीय, लोक और जनजातीय संस्करण रामायण, महाभारत और पंचतंत्र
कलाएँ संग ीत, नत्ृ य और वास्तुक ला की अनेक शास्त्रीय यहाँ भी “िविवधता एवं एकता को सरलता से दे खा जा सकता है” (पष्ृ ठ
शैिलयाँ 135)
यह प रश्रम क्य आवश्यक है: य द आप वाक्य के पहले भाग पर ही रुक जाएँ तो भारत अजन बय का समूह
लगेगा। दूसरे भाग तक जाइए तो वही तथ्य एक बहुत लंबे साझे जीवन का प्रमाण बन जाते ह। और इसके लए
भन्नताओं म से कुछ भी नकारना नह पड़ता — यही इस वचार क सबसे बड़ी श क्त है।
प्र.3 भारतीय एकता, व वधता का उत्सव मनाती है क्य क व वधता वभा जत नह , अ पतु समृद्ध करती है।
यह अध्याय का नष्कष है और यह एक सामान्य धारणा को उलट दे ता है। भन्नता को प्राय: घटाने योग्य समस्या माना जाता है; यहाँ
उसे संपन्नता माना गया है।
य द व वधता वभा जत अध्याय के अनुसार वास्तव म क्या हुआ
करती तो…
हर क्षेत्र अपनी कथाएँ अपने पास पंचतंत्र का रूपांतरण लगभग हर भारतीय भाषा में हुआ और 50 से अिधक भाषाओं में 200 से अिधक
रखता रूपांतरण उपल ब्ध है ं
महाकाव्य उसी क्षेत्र की सीमा पर वे सवत्र दोहराए गए — भील , गोंड, मुंडा तथा पूव त्त र और िहमालयी क्षेत्र की अिधकांश जनजाितयों ने
रुक जाते जहाँ रचे गए अपने संस्करण बनाए और अपनी भूिम पर नायकों के आने की िकं वदंितयाँ गढ़ ी ं
कोई पिरधान के वल एक ही समुद ाय साड़ी और धोती पूरे दे श में पहनी जाती है,ं और हर क्षेत्र अपना कपड़ा, अपनी िकनारी और अपना ढं ग जोड़
का होता दे ता है
पड़ोसी क्षेत्र ों का पंचांग साझा न होता वही जनवरी वाला पव क श्मीर से के रल तक एक ही ितिथ को, एक ही कारण से मनाया जाता है
अध्याय का अं तम वाक्य पूरी बात कहता है — “भारतीय संस्कृ त व वधता को संपन्नता के रूप म प्रचा रत करती है, कतु साथ
ही व वधता को पो षत करने वाली अंत न हत एकता को भी दृ ष्ट से ओझल नह होने दे ती है।” क्रया क दशा पर ध्यान द जए
— एकता व वधता को पो षत करती है। अनेक, एक के लए संकट नह ; वे एक क ही उपज ह।
Page 22 of 29
Page 24
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
परीक्षा के लए संकेत: इस पं क्त क व्याख्या पूछ जाए तो तीन धुँधले उदाहरण के बदले एक स्पष्ट उदाहरण
द जए। साड़ी सबसे सरल है — चूँ क सब मानते ह क वह एक सादा बना सला कपड़ा है, इसी लए वाराणसी और
कांचीपुरम दोन उसे अपने ढं ग से बुनने के लए स्वतंत्र ह — और भारत को एक के बदले सैकड़ प्रकार मल जाते ह।
प्रश्न, क्रयाकलाप और प रयोजनाएँ — पृष्ठ 136
अध्याय के अंत का अभ्यास
प्र.1 पाठ के आरंभ म दए गए दो उद्धरण पर कक्षा म चचा क जए।
पृष्ठ 125 के दोन उद्धरण एक ही बात दो बल्कुल अलग स्वर म कहते ह — एक क व क प्राथना, दूसरा दाश नक का कथन। चचा
से पहले दोन को धीरे-धीरे प ढ़ए।
उद्धरण वह क्या कह रहा है
रवी ंद नाथ टैग ोर : “हे ईश्वर! मेर ी यह पाथना स्वीकार करे ं िक मैं यह पाथना है, कथन नही ं — किव िकसी वस्तु के खोने से बचना चाहता है।
अनेक ता में एकता के स्पश का आनंद कभी न गवाँ सकूँ ।” वह जो खोना नही ं चाहता, वह है अनेक ता के बीच एकता को अनुभव करने
की क्षमता। ‘स्पश’ शब्द बताता है िक यह िस द्ध करने की नही,ं महसूस करने
की बात है, और ‘आनंद ’ बताता है िक िविवधता उलझन नही,ं रस है
ी अरिवंद : “...िविवधता में एकता का िसद्धांत सदै व से भारत के वे िविवधता में एकता को भारत के िलए ‘स्वाभािवक ’ कहते है ं — कोई
िलए स्वाभािवक रहा है और यह उसकी पकृ ित एवं अिस्तत्व के उपलिब्ध या नारा नही,ं बिल्क उसकी सामान्य दशा। स्वभाव अथ त अपनी
िलए आवश्यक है। एक में अनेक का यह भाव भारत को उसके पकृ ित, स्वधम अथ त अपना कतव्य या अपना माग । उनका कथन यह है िक
स्वभाव व स्वधम की सुिनिश्चत नी ंव पर स्थािपत करे गा।” भारत तभी दृ ढ़ भूिम पर है जब वह स्वयं हो, अथ त एक -में-अनेक
चचा को आगे बढ़ाने वाले प्रश्न :
टै गोर अनेकता को ‘आनंद’ कहते ह, ी अर वद एक-म-अनेक को भारत का ‘स्वभाव’। आपके अपने अनुभव से कौन-सा
शब्द अ धक मेल खाता है, और क्य ?
टै गोर प्राथना करते ह क यह भाव ‘कभी न गवाँ सकूँ’। ऐसा क्या है जससे कोई इसे खो सकता है? (केवल अपने जैसे लोग
के बीच रहना; अपने ही ढं ग को एकमात्र सही मानना; न घूमना, न सुनना।)
ी अर वद कहते ह क दे श तब सबसे बलवान होता है जब वह अपने स्वभाव पर चले। क्या यही बात व्य क्त पर भी लागू होती
है — व ाथ तब अ धक सशक्त है जब दूसर क नकल करे, या जब कक्षा का अंग रहते हुए पूरी तरह स्वयं हो?
दोन ने यह पुस्तक लखे जाने से बहुत पहले लखा था। क्या अध्याय क कोई बात — अनाज का मान चत्र, साड़ी, जनवरी का
पव, जनजातीय रामायण — इनम से कसी को सही सद्ध करती है?
अध्याय तथ्य के बदले क वता और दशन से क्य आरंभ होता है: तथ्य आगे आते ह और पयाप्त आते ह। ये
दोन उद्धरण वह वचार दे ते ह जससे तथ्य अथ पाते ह — क व वधता अव्यव ा नह , संपन्नता का रूप है। इस
वचार के बना ‘325 भाषाएँ’ केवल एक बड़ी संख्या भर है।
Page 23 of 29
Page 25
as e
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
पंचतंत्र क कुछ कहा नयाँ चु नए और चचा क जए क उनके संदेश कस प्रकार आज भी प्रासं गक ह। क्या आप
e
प्र.2
m l as
.co
अपने क्षेत्र से संबं धत कोई अन्य कहा नयाँ भी जानते ह?
a g
se m
g l a
a
भाग 1 — चार कहा नयाँ और उनका आज का संदेश।
co m
कहानी क्या होता है
e m . संदेश आज भी क्य सही है
ag
g l as
बंद र और मगरम च्छ
a
मगरमच्छ बंद र से िमत्रता करता है तािक उसे घर ले जाकर
उसका हृदय ले सके ; बंद र यह कहकर बच िनकलता है िक
डर के क्षण में भी बुिद्ध मत खोइए; और यह भी दे िखए
िक कोई आपसे िमत्रता क्यों कर रहा है — यह बात
om
उसका हृदय तो पेड़ पर ही रह गया आजकल के ऑनलाइन ‘िमत्रों’ पर ठीक बैठती है
. c
a sं —em
com
चार िम त्र और िहरन दल की जीत िभ क्षमताओं
एक जैसे होने से lनही
चार िबल्कु ल िभन्न पाणी, हर एक अपनी अके ली क्षमता न्न के मेल से होती है, सबके
(कौआ , चूहा,
. है, कथा के a
g
m
लगाकर, फँ से हएु िहरन को छु ड़ा ले ते है ं यही तो इसी अध्याय की बात
ase
कछु आ , िहरन) रूप में
aglनीला िसयार िसयार रँग रे ज के हौद में िगरकर नीला हो जाता है, जो आप नही ं है ं वह बने रहना अिधक िदन नही ं चलता;
m a s
चमत्कारी पाणी समझा जाकर राजा बन जाता है — और और भीड़ कु छ समय तक िदखावे से भिमत हो सकती
.co agl
िजस क्षण दू स रे िसयारों के साथ हुआ ँ-हुआ ँ करता है, पकड़ा है, सदा नही ं
जाता है
se m
g l a
बाह्मण और बकरी a
तीन ठग बारी-बारी आकर कहते है ं िक कं धे पर बैठी बकरी झूठी बात भी पय प्त लोगों ारा दोहराई जाए तो सच
(तीन ठग ) कु त्ता है, और अंतत: वह उसे छोड़ दे ता है जान पड़ने लगती है। अफवाह और अग ेिषत संदे श
co m
.
आज यही करते है ं
e m
c o m g l as
. a
भाग 2 — अपने क्षेत्र क ऐसी ही कहा नयाँ। यह सूची नकल मत क जए; पहले घर पर पू छए। भारत के हर भाग के पास अपना
संग्रहmहै और प्रश्न का उ े श्य आपका अपना संग्रह ढूँ ढ़ना है।
e
ag las
m
संग्रह या कथावाचक क्षेत्र / भाषा कहा नयाँ कैसी ह
a se
संस्कृ त, बहत
. com a g l
m
िहतोपदे श ु कु छ पंचतंत्र से िलया हआ
ु पशु-कथाएँ, राजकु मारों को दी गई सीख के रूप में
e
aकsभारतीय भाषाओं में
जातक कथाएँ
a g l
बौद्ध परंपरा, अने बुद्ध के पूवजन्मों की कथाएँ, पाय: पशु-रूप में
m
तेनाली रामा की कथाएँ तेल ुग ,ु िवजयनगर के दरबार से एक हािजरजवाब दरबारी, जो समस्याएँ बुिद्ध से सुल झाता है
. co
बीरबल की कथाएँ उत्तर भारत, िहंद ी-उदू
se m
वही ढर — बुिद्ध का बल और धन पर भारी पड़ना
m l a
.िवcक्रoम-बेताल हर कथाaकg
sem
संस्कृ त और अिधकांश उत्तर भारतीय भाषाएँ े अंत में ‘क्या उिचत है’ की पहेल ी
a
agl c
.
गोपाल भाँड़ की कथाएँ बांग्ला दरबारी िवदू षक की हास्य और तीखी कथाएँ
s e m
m a
.co agl
परमाथ ग रु
ु की कथाएँ तिमल एक मूख ग रु
ु और उसके िशष्यों की हास्य कथाएँ
se m
g l a
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 29
Page 26
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए क इससे क्या सद्ध होता है: संदेश दे ने वाली पशु-कथा कसी एक क्षेत्र या भाषा क संप त्त नह है।
संस्कृत, पा ल, तेलुगु, बांग्ला, त मल और हद — सबके पास अपनी ह, और कभी-कभी तो वही कथा दूसरे नाम से।
एक ही प्रकार क कथा, अनेक कहने वाले — अध्याय क बात फर से।
प्र.3 अपने क्षेत्र से कुछ लोककथाएँ एक त्रत क जए एवं उनके संदेश पर चचा क जए।
ठ क ढं ग से संग्रह कैसे कर। यह एक छोटा क्षेत्र-काय है, और यहाँ कथाओं क संख्या से अ धक महत्व सावधानी का है।
1. कहने वाले चु नए। दादा-दाद , नाना-नानी, बड़े पड़ोसी, दुकानदार, कसान, घर म सहायता करने वाले, कसी दूसरे राज्य से
आया कोई व्य क्त — व वधता स्वयं महत्वपूण है।
2. खुला प्रश्न पू छए : “बचपन म सुनी कोई ऐसी कहानी जो आपको आज भी याद है?” कहानी स्वयं मत सुझाइए।
3. जहाँ तक हो सके कहने वाले के ही शब्द म ल खए और यह भी ल खए क कहानी कस भाषा म सुनाई गई। य द वह
भाषा कक्षा क साझी भाषा नह है, तो नाम और गीत के मूल शब्द रहने द जए।
4. तीन बात अवश्य नोट क जए : कहानी कहाँ घटती है (कोई वास्त वक पहाड़, नद , गाँव?), पात्र कौन ह, और कहानी कससे
सावधान कर रही है या कसक प्रशंसा कर रही है।
5. ोत का नाम और आभार ल खए — “ ीमती कमला दे वी, आयु 74 वष, बुंदेली म सुनाई”। कहने वाले के बना संक लत
कथा आधी ही है।
नमूना प्र व (ढाँचा ली जए, कहानी नह ) :
कहानी: तोता और कंजूस
सुनाने वाली: मेरी दाद , भोजपुरी म
कथा: एक धनी व्य क्त ने तोते को सोने के पजरे म रखा और उत्तम फल खलाए, पर कभी बाहर नह नकलने
दया। एक नधन लकड़हारे क बेट के पास पजरा था ही नह ; एक तोता हर साँझ उसक झ पड़ी पर कुछ दाने
चुगने आ जाता। जब दोन बीमार पड़े, तो धनी का तोता कसी को बुला न सका, पर लड़क का तोता उड़कर गाँव से
पड़ो सय को ले आया।
संदेश: जो बलपूवक रोका जाए वह वास्तव म अपना नह होता; जो प्रेम से दया जाए वह लौटकर आता है।
क्षेत्र के बारे म क्या पता चलता है: कथा बाजरा उगाने वाले गाँव क है और उसम महुआ के पेड़ का उल्लेख है,
अत: यह उसी शुष्क मध्य क्षेत्र क है जहाँ यह पेड़ महत्वपूण है।
कथाएँ आ जाने पर कक्षा म क्या चचा क जए।
संदेश के अनुसार छाँ टए — स ाई, अ त थ-सत्कार, पशुओं पर दया, जल और वन का सम्मान, बल पर बु द्ध क वजय,
लोभ का दुष्प रणाम। आप पाएँगे क भन्न- भन्न भाषाओं से संक लत कथाओं म वही थोड़े-से संदेश बार-बार लौटते ह।
स्थानीय ब्योरा ढूँ ढ़ए — कसी पहाड़, नद , पेड़ या मेले का नाम। यही उस कथा को आपक कथा बनाता है।
प र चत कथा नए रूप म पहचा नए। प्राय: कसी सहपाठ क कथा उसी कथा का दूसरा रूप नकलती है जसे आप पहले से
जानते ह। यही अध्याय क खोज है, और वह आपक अपनी कक्षा ने क — एक ही कथा, अनेक ानीय रूप।
Page 25 of 29
Page 27
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 क्या आपने कसी प्राचीन कहानी को कला के माध्यम से दशाते या च त्रत होते हुए दे खा है? यह एक मू तकला,
चत्रकला, नृत्य प्रस्तु त या कोई चल चत्र भी हो सकता है। अपने सहपा ठय के साथ कक्षा म चचा क जए।
अ े उत्तर म क्या हो: कथा का नाम, कला-रूप और आपने उसे कहाँ दे खा, और फर यह क उस कला-रूप ने कथा को
कैसे कहा — क्य क हर रूप उसे अलग ढं ग से कहता है।
कला-रूप ऐसे उदाहरण जो आपने दे खे ह गे वह कथा कैसे कहता है
मूितकला / मंिदरों पर रामायण और महाभारत के िभित्त-फलक; एक ही ठहरा हआ
ु क्षण, जो इसीिलए चुना जाता है िक
उके री गई महाबिलपुर म का ‘अजुन का तप’; साँची और भरहुत की जातक पूर ी कथा उसमें आ जाए; पढ़ ने के िलए कथा पहले से
आकृ ित कथाएँ जाननी होती है
िचत्र कला इसी अध् याय का िचत्र 8.6 — 1652 की मेवाड़ी रामायण; एक ही सतह पर कई क्षण, खंडों में बँटे हुए , िजन्हे ं
मध बु नी, पटिचत्र, कलमकारी, फड़ और वारली िचत्र कथा-क्रम में पढ़ ा जाता है
शास्त्र ीय नत्ृ य कथकली और कू िडयाट्टम (के रल), भरतनाट म, ओिडसी, अिभनय से — मुख, नेत्र और हस्त-मुद ाओं से —
कथक, सत्रीया (असम), मिणपुर ी रास लीला इसिलए एक ही नतक कई पात्र िनभा ले ता है
लोक रंग मंच रामलीला और रासलीला (उत्तर भारत), यक्षगान (कन टक), रात भर, खुले में, दशकों की भागीदारी के साथ —
तेरुक्कू त्तु (तिमलनाडु), छऊ (झारखंड, ओिडशा, पिश्चम कथा मंच की नही ं, गाँव की होती है
बंग ाल), भवाई (ग ज
ु रात)
कठपुतली तोलु बोम्मलाट (आंध पदे श), तोगलु गोम्बेयाट (कन टक), चमड़े या लकड़ी की आकृ ितयाँ, पाय: पकािशत परदे
कठपुतली (राजस्थान) के पीछे छाया के रूप में
चलिचत्र और रामायण और महाभारत पर बनी िफल्में और धारावािहक; सबसे नया रूपात
ं रण — और अध्याय के अनुस ार,
दू र दशन एिनमेशन; िचत्रकथाएँ पहले से मौजूद सै क ड़ों संस्करणों में एक और
नमूना उत्तर :
पछले वष व ालय हम एक मं दर-मेले म यक्षगान क प्रस्तु त दखाने ले गया। प्रसंग था महाभारत का अ भमन्यु
का चक्रव्यूह म प्रवेश। कलाकार ने वशाल शरोभूषण पहने थे और चेहरे रंगे थे; कथा एक ओर खड़े गायक और
ढोल सँभालते थे, जब क कलाकार नाचते और संवाद बोलते थे। मुझे यह बात च काने वाली लगी क दशक को
पहले से पता था क आगे क्या होगा — सब जानते थे क अ भमन्यु लौटकर नह आएगा — फर भी पूरा प्रांगण चुप
था। यह प्रसंग मने पुस्तक म पढ़ा था, पर मंच पर यह अपने कसी प र चत के साथ घटती घटना जैसा लगा।
यह ग त व ध इसी अध्याय म क्य है: इनम से हर कला-रूप एक ही कथा क अलग भाषा है। मू तकार, कथकली
नतक, कठपुतली कलाकार और फल्मकार रामायण को ऐसे रूप म कहते ह जो एक-दूसरे से बल्कुल भन्न दखते
ह — और फर भी हर रूप रामायण ही है। यही व वधता म एकता है, अपनी आँख से दे खी हुई।
Page 26 of 29
Page 28
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ारा स्वतंत्रता से पहले भारत के कई भाग क यात्रा के उपरांत कही
गई नम्न पं क्तय पर कक्षा म चचा क जए — “हर जगह मुझे एक सांस्कृ तक पृष्ठभू म मली, जसने उनके
जीवन पर प्रभावशाली असर डाला। ...भारत के महाकाव्य, रामायण एवं महाभारत और अन्य प्राचीन पुस्तक,
लोक प्रय अनुवाद और व्याख्याओं म जनता के बीच व्यापक रूप से जानी जाती थ । उनम उप स्थत प्रत्येक
लोक प्रय घटना, कहानी और नै तकता क बात जनमानस के अंतमन पर अं कत थ जो क उसे साथक एवं
समृद्ध बनाती थ । नरक्षर ग्रामीण को भी सैकड़ ोक कंठस्थ थे एवं उनक आपसी बातचीत म इन महाकाव्य
अथवा कुछ पुरानी कालजयी कहा नय के संदभ क प्रचुरता होती थी जो नै तकता को प्र तस्था पत करती थ ।”
संदभ महत्वपूण है। नेहरू स्वतंत्रता से पहले भारत के अनेक भाग क यात्रा कर रहे थे, उन वष म जब वे उस दे श को समझना
चाहते थे जसके लए काम कर रहे थे। उन्ह अलग-अलग क्षेत्र म ऐसे ग्रामीण मले जो भन्न भाषाएँ बोलते थे और कभी आपस म
मले नह थे। उन्ह आश्चय इस बात पर हुआ क इन सबम साझा कतना अ धक था।
नेहरू के शब्द उनका आशय
“हर जगह मुझे एक सास्ं कृ ितक पष्ृ ठभूिम िकसी एक क्षेत्र में नही,ं सब जगह — यह एकता दे शव्यापी थी
िमली”
“लोकिपय अनुवादों और व्याख्याओं में” मूल संस्कृ त में नही,ं हर क्षेत्र की अपनी भाषा और अपने रूपात
ं रण में — ठीक वही ‘महाकाव्य का
िवस्तार ’ जो यह अध् याय बताता है
“जनमानस के अंतम न पर अंिकत” ये कथाएँ पुस्तकालयों में नही,ं लोगों में रखी थी ं — वही मौिखक शिक्त जो अध् याय जनजातीय
संस्करणों के िलए बताता है
“िनर क्षर ग ामीणों को भी सै क ड़ों श्लोक ज्ञ ान और अक्षर -ज्ञ ान एक बात नही ं है। जो पढ़ नही ं सकते थे, वे भी पूर ा सािहत्य स्म ृित में रखते थे
कं ठस्थ थे”
“उनकी आपसी बातचीत में इनके संद भ ं महाकाव्य पढ़ ने की वस्तु नही ं थे; वे वह भाषा थे िजसमें लोग सोचते थे — ‘यह तो धम राज है’ किहए ,
की पचुर ता” बात समझ ली जाती थी
“साथक एवं सम ृद्ध बनाती थी ं” उनका मूल्यांक न — इस साझी पूँजी ने साधारण जीवन को संक ीण नही,ं भरा-पूर ा बनाया
यह उद्धरण अध्याय से कैसे जुड़ता है। नेहरू का प्रेक्षण पृष्ठ 133–135 क बात का साक्ष्य है। अध्याय कहता है क दोन
महाकाव्य ने “भारत एवं ए शया के व भन्न भाग के मध्य एक सांस्कृ तक सूत्र के गहन तंत्र को वक सत कया”; नेहरू उसी तंत्र
म चलकर उसका ववरण दे रहे ह — कथाओं और मूल्य क एक साझी पूँजी, जसे ऐसे लोग सँभाले हुए थे जनक न भाषा साझी
थी, न क्षेत्र।
कक्षा-चचा के प्रश्न :
नेहरू ने यह 1930 के दशक म दे खा था। क्या आज भी कथाओं क ऐसी साझी पूँजी है? उसका ान कसने लया — फल्म,
धारावा हक, गीत, खेल, इंटरनेट?
वे कहते ह क ग्रामीण महाकाव्य को “लोक प्रय अनुवाद और व्याख्याओं” म जानते थे। क्या अपनी भाषा का रूपांतरण
मूल से कम मूल्यवान है, या अ धक — क्य क लोग वास्तव म उसी के साथ जीते ह?
“ नरक्षर ग्रामीण को भी सैकड़ ोक कंठस्थ थे।” यह स्मृ त के वषय म क्या बताता है, और कसी व्य क्त को केवल
पढ़ने- लखने से आँकने के वषय म क्या?
Page 27 of 29
Page 29
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’ AglaSem · NCERT Solutions
क्या यही अनुच्छेद आज आपके नगर के लए लखा जा सकता है? “हर जगह मेरे नगर म मुझे मला...” से आरंभ करके चार
पं क्तयाँ ल खए।
चचा म एक सावधानी: नेहरू जो दे खा वही बता रहे ह, कसी को ऊँचा-नीचा नह ठहरा रहे। भारत के समुदाय
कथाओं और मूल्य क अनेक पूँ जय से जुड़े ह — महाकाव्य, लोककथाएँ, संत और गुरुओं के जीवन, हर प्रकार
क मौ खक परंपराएँ — और अध्याय क बात यही है क इन्ह ने बहुत लंबे समय से एक-दूसरे से लया- दया है। चचा
साझी वरासत पर क जए और हर समुदाय के अपने रूप को समान आदर द जए।
अध्याय — एक नज़र म
अध्याय क एक ही बात — भारत क व वधता भी सच है और उसके नीचे क एकता भी। भारत म यात्रा क जए तो
भूदृश्य, प रधान, भोजन, भाषाएँ और ल पयाँ लगातार बदलती जाती ह; प्राय: यही पहली बात है जो हमारे दे श आने वाले
पयटक को प्रभा वत करती है। 1.4 अरब से अ धक नवा सय ( वश्व क जनसंख्या का लगभग 18 प्र तशत) वाले दे श म यह
आश्चयजनक भी नह है। टश इ तहासकार वसट स्मथ ने पूछा था क इतनी अचं भत करने वाली व वधता म भारत का
इ तहास कैसे लखा जाए, और स्वयं उत्तर दया — “भारत व वधता म एकता प्रद शत करता है।” ी अर वद का शब्द इसी
बात का दूसरा नाम है और वही अध्याय का शीषक भी है — ‘एक म अनेक’।
आँकड़े एक बड़े सवक्षण से आए ह। 20व शताब्द के अंत म भारतीय मानव व ान सवक्षण ने ‘भारत के लोग’
प रयोजना के अंतगत दे श के सभी राज्य म 4,635 समुदाय का व्यापक सवक्षण कया। इसम 25 ल पय का उपयोग करने
वाली 325 भाषाओं क गणना क गई और यह भी पाया गया क अपने जन्म ान के नकट या अपने मूल समुदाय के साथ
न रहने के कारण अनेक भारतीय को प्रवासी कहा जा सकता है।
भोजन — सामग्री एक, व्यंजन अन गनत। भारत म लाख न सही, हजार प्रकार के व्यंजन मलते ह। फर भी लगभग पूरे
दे श म वही मुख्य अनाज काम आते ह — चावल, जौ, गेहूँ; बाजरा, ज्वार, रागी; तथा व भन्न प्रकार क दाल। यही बात
हल्द , जीरा, इलायची और अदरक जैसे मसाल पर लागू होती है। सामग्री एक (एकता), संयोजन अन गनत ( व वधता)।
वस्त्र — एक बना सला कपड़ा, सैकड़ रूप। साड़ी भारत के अ धकांश भाग म पहनी जाती है — कपास, रेशम और
आजकल कृ त्रम ( सथे टक) कपड़े क भी। बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पाटन पटोला, मूगा और मैसूर रेशमी सा ड़य के
प्र सद्ध प्रकार ह और सूती प्रकार तो और भी अ धक। बुनाई, डजाइन, छपाई और रंग इन रूप को कई गुना कर दे ते ह; पहनने
के तरीके भी क्षेत्र और समुदाय के अनुसार बदलते ह और नए तरीके अब भी खोजे जा रहे ह। वैशाली (आज के बहार) क
कुछ शताब्द सा.सं.पू. क पत्थर पर उकेरी गई आकृ त म भी साड़ी पहने स्त्री दखाई दे ती है। भारत बहुत लंबे समय तक वश्व
का सवा धक महीन सूत बनाता रहा; छपे हुए सूती कपड़े ‘छ ट’ क लोक प्रयता से घबराकर इंग्लड और ांस को उसके
आयात पर प्र तबंध लगाना पड़ा।
त्योहार — त थ एक, अथ एक, नाम अनेक। 14 जनवरी के आस-पास, जो भारत के अनेक भाग म फसल क कटाई
का सूचक है, एक ही पव लगभग एक दजन नाम से मनाया जाता है — शशुर सक्रात, माघी/लोहड़ी, खचड़ी पव,
उत्तरायण, मकर संक्रां त, माघ बहू, पौष साँग क्रा न्त, पे ा पंडुगा, मकर संक्रमण, प गल, मकर वलक्कु ( चत्र 8.5,
पृष्ठ 132)।
कथाएँ — दो महाकाव्य, असंख्य रूपांतरण। पंचतंत्र का मूल संस्कृत पाठ कम से कम 2,200 वष पुराना है और इसके 50
से अ धक भाषाओं म 200 से अ धक रूपांतरण उपलब्ध ह। भारत के दो महाकाव्य रामायण और महाभारत (मूल
संस्करण म लगभग 7,000 पृष्ठ) दो सह ा ब्दय से अनू दत एवं रूपांत रत होते आए ह, और इनके अन गनत लोक संस्करण
भी ह — केवल त मलनाडु म एक व ान ने महाभारत के 100 से अ धक लोक स्वरूप गने। भील, ग ड, मुंडा तथा पूव त्तर
और हमालयी क्षेत्र क अ धकांश जनजा तय के अपने संस्करण और अपनी कवदं तयाँ ह। मानव व ानी के.एस. सह के
शब्द म — “लोककथाओं के अनुसार इस दे श म शायद ही ऐसा कोई ान हो जहाँ महानायक पांडव न गए ह ।”
Page 28 of 29
Page 30
as e
कक्षा 6 सामा जक व ान अध्याय 8 व वधता म एकता या ‘एक म अनेक’
a g l AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय का अं तम वाक्य ही पूरा अध्याय है। “भारतीय संस्कृ त व वधता को संपन्नता के रूप म प्रचा रत करती है, कतु
co m
साथ ही व वधता को पो षत करने वाली अंत न हत एकता को भी दृ ष्ट से ओझल नह होने दे ती।” यहाँ एकता का अथ
em.
m l as
.co g
एकरूपता नह है — अथ यह है क अनेक भन्न रूप कसी साझी वस्तु से ही उपजते ह।
m a
l a se
a g
त्व रत पुनरावृ त्त
. comअध्याय म ag
e m
as
शब्द अथ याद रखने योग्य
a g l कहाँ
m
व वधता म जीवन, पिरधान, भोजन, भाषा और परंपरा के अनेक अध्याय का वसट स्मथ का उत्तर — “भारत व वधता म
co
m.
एकता िभन्न रूप, िजनके नीचे कु छ साझा है शीषक; पृष्ठ 126 एकता प्रद शत करता है”
m ी अरिवंद का शब्द — अनेक िकसी एक के ही रूप as e
‘एक म अनेक’
c o
. है ं
पृष्ठ 125,
a g l
एकता का अथ एकरूपता नह
m
ase
आरं भक उद्धरण
gl के लोग’
a‘भारत भारतीय मानव िवज्ञ ान सवक्षण का व्यापक सवक्षण, पृष्ठ 126 और 4,635 समुदाय, 325 भाषाएँ, 25 ल पयाँ
s
प रयोजना िनदशक के .एस . िसंह 135
m a
m .co पृष्ठ 126 agl
se
प्रवासी (यहाँ वह व्यिक्त जो अपने जन्म स्थान के िनकट या अपने सवक्षण के अनुसार अनेक भारतीय इस अथ म
प्रयुक्त अथ म)
g
मूल समुद ाय के साथ नही ं रहता
l a प्रवासी ह
मुख्य अनाज
a
अिधकांश भारतीयों का पमुख भोजन बनने वाले पृष्ठ 126–128, चावल, जौ, गे ँ; बाजरा, ज्वार, रागी; दाल
com
अनाज चत्र 8.1
.
a s em— बनारसी, कांजीवरम, पैठनी,
com agl
साड़ी भारत के अिधकांश भागों में पहना जाने वाला िबना पृष्ठ 128–131 रेशमी प्रकार
m.
िसला लंबा वस्त्र पाटन पटोला, मूगा, मैसूर
l a sे eरी गई आकृ त
ag
उक ऐसा िडजाइन जो पत्थर, लकड़ी, म ृित्तका आिद की पृष्ठ 129, हा शया चत्र 8.2 — वैशाली से प्राप्त, कुछ शताब्द
m
समतल सतह के ऊपर उभरा हो सा.सं.पू.
a se
छट
.com
भारत में बनने वाला छपा हुआ सुंद र सूती कपड़ा पृष्ठ 129, ‘ध्यान 17व शताब्द के यूरोप म इतना लोक प्रय क
a g l
m
ase
रख’ इंग्लड और ांस ने आयात पर प्र तबंध
agl
लगाया
मकर संक्रां त 14 जनवरी के आस-पास का पव, जो भारत के पृष्ठ 131–132, एक पव, मान चत्र पर लगभग एक दजन नाम
co m
.
अनेक भागों में फसलों की कटाई का सूचक है चत्र 8.5
m
seसे कम 2,200 वष पुराना; 50 से अ धक
m l a
.co ag भाषाओं म 200 से अ धक रूपांतरण
पंचतंत्र पशुओ ं को मुख्य पात्र बनाकर िलखी गई संस्कृ त पृष्ठ 133 कम
sem
कथाओं का संग ह, जो जीवन-कौशल िसखाता है
a महाकाव्य
agl सामान्यत: एक लंबी किवता जो अतीत के महान पृष्ठ 133, हा शया रामायण और महाभारत — मूल रूप म
c
m .
e
नायकों एवं योद्धाओं की कथाओं का व्याख्यान लगभग 7,000 पृष्ठ
a s
com gl
करती है
.
mिलिखत पाठ में
िकसी महाकाव्य का वह रूपeजो
a
a s
aायlकी मौिखक परंपरा में जीिवत
लोक संस्करण पृष्ठ 134–135 केवल त मलनाडु म महाभारत के लगभग 100
नही ं, बिल्क समुदg लोक स्वरूप
रहता है
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 29