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अत्यंत गोपनीय केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हेतु
अंक-योजना
मवषय- महंदी
कक्षा – नौवी ं
सािान्य मनदे श :-
1. पिीक्षामथियों के सही औि उमित आकलन के ललए उत्ति पुस्तिकाओं का िूल्ांकन एक िहत्वपूर्ि
प्रमिया है। िूल्ांकन िें एक छोटी-सी त्रुमट भी गंभीि सिस्या को जन्म दे सकती है, जो पिीक्षामथियों के
भमवष्य, लशक्षा प्रर्ाली औि अध्यापन-व्यवस्था को भी प्रभामवत कि सकती है। इससे बिने के ललए
अनुिोध मकया जाता है मक िूल्ांकन प्रािं भ किने से पूवि ही आप िूल्ांकन मनदे शों को पढ़ औि
सिझ लें।
2. योग्यता आधारित प्रश्ों का िूल्ांकन किते सिय कृपया मदए गए उतिों को सिझे, भले ही उत्ति
िामकिंग स्कीि िें न हो, छात्रों को उनकी योग्यता के आधाि पि अंक मदए जाने िामहए।
3. अंक योजना िें उत्तिों के ललए केवल सुझाए गए िान मबंदु होते हैं। ये केवल मदशा-मनदे शों की प्रकृमत
के हैं औि पूर्ि नही ं हैं। यमद पिीक्षामथियों की अमभव्यस्ति सही है तो उसके अनुसाि मनयत अंक मदए
जाने िामहए।
4. पिीक्षक सही उत्ति पि सही का मिह्न () लगाएँ औि गलत उति पि गलत का () िूल्ांकनकताि
द्वािा ये मिह्न न लगाने से ऐसा सिझ िें आता है मक उत्ति सही है, पिं तु उस पि अंक नही ं मदए गए।
5. यमद मकसी प्रश् के उपभाग हो तो कृपया प्रश्ों के उपभागों के उत्तिों पि दायी ओि अंक मदए जाएँ ।
बाद िें इन उपभागों के अंकों का योग बायाँ औि के हालशये िें ललखकि उसे गोलाकृत कि मदया
जाए।
6. यमद मकसी प्रश् के कोई उपभाग न हो तो बायी ं ओि के हालशये िें अंक मदए जाएँ औि उन्हें गोलाकृत
मकया जाए।
7. यमद पिीक्षाथी ने मकसी प्रश् का उत्ति दो स्थानों पि ललख मदया है औि मकसी को काटा नही ं है तो लजस
उत्ति पि अमधक अंक प्राप्त हो िहे हो, उस पि अंक दें औि दू सिे को काट दें । यमद पिीक्षाथी ने
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अमतरिि प्रश्/प्रश्ों का उत्ति दे मदया है तो लजन उत्तिों पि अमधक अंक प्राप्त हो िहे हो, उन्हें ही
स्वीकाि किे , उन्ही ं पि अंक है।
8. एक ही प्रकाि की अशुलि बाि-बाि हो तो उसे अनदे खा किें औि उस पि हि बाि अंक न काटे जाएँ ।
9. यहाँ यह ध्यान िखना होगा मक िूल्ांकन िें पूर्ि अंक पैिाना 0-80 (उदाहिर् 0-80 अंक जैसा मक
प्रश् िें मदया गया है) का प्रयोग अभीष्ट है, अथाित पिीक्षाथी ने यमद सभी अपेमक्षत उत्ति-मबंदुओ ं का
उल्लेख मकया है तो उसे पूिे अंक दे ने िें संकोि न किें ।
10. ये सुमनमित किें मक उत्ति पुस्तिका के अंदि मदए गए अंकों का आविर् के अंकों के साथ मिलान हो।
11. आविर् पृष्ठ पि दो िंभों के अंकों का योग जाँि लें ।
12. उत्ति पुस्तिकाओं का िूल्ांकन किते हुए यमद कोई उत्ति पूर्ि रूप से गलत हो तो उस पि (x)
मनशान लगाएँ औि शून्य (0) अंक दें ।
13. उत्ति पुस्तिका िें मकसी प्रश् का मबना जाँिे हुए छूट जाना या योग िें मकसी भूल का पता लगना,
िूल्ांकन समिमत के सभी लोगों की छमव को औि बोर्ि की प्रमतष्ठा को धूमिल किता है। पिीक्षक
सुमनमित किें मक सभी उत्तिों का िूल्ांकन हुआ है। आविर् पृष्ठ पि तथा योग िें कोई अशुलि नही ं
िह गई है तथा कुल योग को शब्ों औि अंकों िें ललखा गया है।
उपयुिि िूल्ांकन मनदे श उत्ति-पुस्तिकाओं की जाँि हेतु आदे श नही ं अमपतु केवल मनदे श हैं।
यमद इन िूल्ांकन मनदे शों िें मकसी प्रकाि की त्रुमट हो, मकसी प्रश् का उत्ति स्पष्ट न हो, अंक योजना
िें मदए गए उत्ति से अमतरिि कोई औि भी उत्ति सही हो, तो पिीक्षक अपने मववेकानुसाि उस प्रश्
का िूल्ांकन किे ।
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उत्तर कुं जी
कोड न. - 2501
कक्षा 9
1.) व्याकरण पर आधाररत ननम्नलिखित बहुनिकल्पीय प्रश्ोुं के उनित निकल्प िनकर अपनी उत्तरपखिका
मे लिखिए।
(क) (iv) अनुप्रास अिुंकार
(ि) (i) मनि्
(ग) (i) निया निशेषण
(घ) (iv) नदी
(ड) (i) फािसी-अिबी
(ि) (ii) अिावस्या
(छ) (i) शब्द
2.) ननम्नलिखित प्रश्ोुं के यथानननदि ष्ट उत्तर दीलजए।
(क) प्रेम, िम, कमि, िि आनद |
(ि) (i) गले लगाना।
(ii) शमििंदा होना।
(ग) उत्ति पदप्रधान होता है औि पूवि पद गौर् होता है। कािक की मवभस्ति का लोप हो। उदाहिर्:
िसोईघि = िसोई के ललए घि।
(घ) निकारी: वे शब् जो ललंग, विन, काल, कािक, आमद के आधाि पि परिवमतित हो जाते है। जैसे –
सुंज्ञा, सििनाम, निशेषण, आनद।
3.) ननम्नलिखित में से कोई एक निषय पर ननबुंध लिखिए।
(क) प्रदू षर्, अथि प्रकाि कािर् औि उपाय।
(ि) पिोपकाि का अथि पिोपकाि का िहत्व।
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(ग) प्रािीन, िध्य, आधुमनक सिय िें स्त्री की स्तस्थमत, घि व नौकिी िें सािजस्य।
(घ) स्वदे श प्रेम – भूनमका, स्वदे श प्रेम, स्वदे श का आकषिण, स्वदे श की उन्ननत, राष्टरीयता और उपसुंहार
(ि) इं टिनेट का अथि, इं टिनेट के नकािात्मक औि सकािात्मक प्रभाव।
4.)
पत्र भेजने िािे का पता
नदनाुंक
सम्बोधन
अनभिादन
पत्र लििने का कारण
निषय का नििार
समापन
अथिा
निद्यािय का पता
नदनाुंक
निषय
सम्बोधन
निषय का नििार
समापन
िुंड (ि)
5.) नक्षनतज (काव्य िुंड )के आधार पर ननम्नलिखित बहुनिकल्पीय प्रश्ोुं के उनित निकल्प िनकर अपनी
पखिका मे लिखिए।
(क) (i) महन्दु ओ ं का
(ि) (i) लशव
(ज) (iv) कृष्ण
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(घ) (i) मािन िाि ितिेदी
(ड) (ii) अंग्रेजी शासन
(ि) (iv) िसखान
प्रश् 6 ननम्नलिखित काव्याुंश को पढ़ कर पूछे गए प्रश्ोुं के उत्तर दीलजए।
(क) कबीर दास
(ि) दे वल, िस्तिद काबा औि काशी िें।
(ग) ईश्वि को प्राप्त किने के ललए िनुष्य पूजा पाठ निाज़ योग बैिाग बहा आर्म्बि मिया किि आमद
किता है ।
(घ) ईश्वि सब जगह व्याप्त है, कर् कर् िें व्याप्त है।
(ड) ईश्वि को प्राप्त किने के ललए पल भि का सिय िामहए।
7.)
कबीि ने ईश्वि के प्रास्तप्त के ललए प्रिललत अंधमवश्वासों का खंर्न मकया है, लजसिें िस्तिद जाना, निाज,
पूजा पाठ, अंधमवश्वास, बहा आर्ं बि आमद का खंर्न मकया ह।
अथिा
मनष्य का जीिन प्राप्त करने पर ग्वािोुं के रूप में।
पश की योनन प्राप्त करने पर नुंद बाबा की गाय के रूप में।
ननजीि पत्थर बनने पर गोिधिन पिित पर ही स्थान पाए।और पक्षी बनने पर यमना नकनारे ही कदम्ब के
पेड़ की शािाओुं पर ही बसेरा करे ।
8)
कमव व कोयल के बीि का तुलनात्मक वर्िन, कोयल के गीत जहां सब औि प्रशंसा पाते हैं, वहां कमव का
िोना भी गुनाह है, तुकबंदी, अनुप्रास अलंकाि, तत्सि शब्ावली।
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9.) हथकमियों को गहना इस ललए कहा गया है क्ोंमक दे श को स्वतंत्र किने के ललए पहनी गयी है।
िुंड (ग)
प्रश् 10 नक्षनतज (गद्य िुंड) के आधार पीआर ननम्नलिखित बहुनिकल्पीय प्रश्ोुं के उनित निकल्प िनकर
अपनी उत्तर पखिका में लिखिए:
(क) (i) झूिी
(ि) (i) िाहुल सांकृत्यायन
(ग) (iii) आम जनमानस को।
(घ) (iii) साइिेंट िैिी।
(ड) (i) मनबंध
(ि) (i) सुभद्रा कुिािी िौहान
11.)
(क) उपभोिावाद की संस्कृमत, श्यािििर् दु बे
(ि) सीमित संसाधनों का
(ज) आिोश औि अशांमत
(घ) नैमतक िानदं र् ढीले पि िहे ह।
(ड़) मपज़्जा औि बगिि।
12.)
प्रेमिुंद - जन्म 1880 िमही गाुंि उत्तर प्रदे श
मूि नाम धनपत राय पहिे उदू ि में लििते थे ।
प्रमि रिनाएुं
उपन्यास - सोजे ितन , ननमििा , रुं गभूनम, कमिभूनम ,सेिा सदन , गबन आनद
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नाटक - कबििा
कहाननयाुं - बड़े घर की बेटी , ईदगाह , प्रेम पच्चीसी आनद
भाषा – महािरे दार भाषा, उदू ि के शब्दोुं का प्रयोग, तत्सम तद्भि और दे शज शब्दाििी का प्रयोग।
अथिा
राहुि साुंकृत्यायन
जन्म 1893, आजमगढ़ उत्तर प्रदे श
मूि नाम केदार पाण्डे य
घमक्कड़ प्रिृनत्त 1930 में श्रीिुंका जाकर बौद्ध धमि ग्रहण नकया।
प्रमि रिनाएुं , बोल्गा से गुंगा ,भागो नही दननया को बदिो , मेरी जीिन यात्रा आनद
भाषा बोििाि की भाषा, सहज सरि , तत्सम, तद्भि
शैिी में नित्रात्मक गण ।
13.)
(क) मतब्बती सिाज की मवशेषताएं िाजनैमतक आमथिक एवं भौगोललक स्तस्थमत का वर्िन किना।
(ि) एक बार बिपन में सालिम अिी मामा की दी हुई एयरगन से िेि रहे थे। उसी एयरगन से एक
गौरै या घायि होकर नगर पड़ी। इस घटना ने सालिम अिी के जीिन की नदशा को बदि नदया। सालिम
गौरे या के निषय में जानना िाहते थे तब मामा ने उन्हें नैिरि नहस्ट्र ी सोसायटी (बी.एन.एि.एस) जाकर
गौरै या की पूरी जानकारी प्राप्त करने को कहा, िहााँ जाने के बाद उनकी रूनि पूरे पक्षी- सुंसार की ओर
मड़ गयी और िे पक्षी-प्रेमी बन गए।
(ग) यहाँ पि जूते का आशय ताकत एवं शस्ति प्रदशिन है, तथा टोपी िान ियािदा तथा इज्जत का प्रमतक है
लोग इज्जत से ज्यादा ताकत को िहत्व दे ते है।
िुंड -घ
14.)
(क) सिाज िें उिा जैसे दृढ़, स्पष्ट वामदनी तथा उच्च िरित्र वाले व्यस्तित्व की आवश्यकता है। शंकि जैसे
लिके सिाज के ललए अमभशाप है ये सिाज को कोई मदशा नही ं दे सकते।
अथिा
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'रीढ़ की हड्डी' एक उद्दे श्यपूणि एकाुंकी है। इस एकाुंकी में िेिक ने स्पष्ट नकया है नक िड़के और िड़की
में भेदभाि करना उनित नही ुं है। िड़की भी उच्च लशक्षा के साथ-साथ सम्मान की अनधकाररणी है। नििाह
के नाम पर उससे तरह-तरह के सिाि पूछकर उसे अपमाननत करना उनित नही ुं है। आज िड़नकयाुं भी
िड़कोुं के हो समान उच्च लशक्षा प्राप्त कर रही हैं। अतः उन्हें भी उनित सम्मान नमिना िानहए। िेिक ने
गोपािप्रसाद जैसे रूनढ़िादी नििारधारा के िोगोुं पर प्रहार भी नकया है|
(ि) िृत्यु का तिल दू त बाढ़ को कहा गया है क्ोंमक बाढ़ आने पि जान िाल की हामन होती है।
(ग) लेस्तखका की नानी की वैसे तो प्रत्यक्ष रूप से आज़ादी के आन्दोलन िें मकसी प्रकाि की भागीदािी नही ं
िही पि उन्होंने स्वतंत्रता की भावना को िन-ही-िन पनपने मदया। उन्होंने कभी पमत के अंग्रेजी शौक को
स्वीकाि नही ं मकया। उनके पमत अंग्रेजों के भि थे, मिि भी नानी ने कभी अंग्रेजों की जीवन शैली को
अपनाया नही।ं नानी ने अपनी बेटी की शादी िांमतकािी से किने की इच्छा व्यि की लजससे उनकी दे श
प्रेि की भावना का पता िलता है। उनका सबसे बिा योगदान यह है मक इस मववाह की घटना से एक
उदाहिर् प्रिुत मकया औि दे श के िांमतकारियों को भी बिी प्रेिर्ा प्रदान की मक अन्य लोग भी इस
कायि िें उनके साथ हैं। इस तिह अप्रत्यक्ष रूप से लेस्तखका की नानी की स्वतंत्रता आन्दोलन िें भागीदािी
िही है।
15.) आदशि जीिन मूल्य माध्यमा के आधार पर ननम्नलिखित नकन्ही 4 प्रश्ोुं के उत्तर दीलजए:
(क) क्ोंमक अजुिन सत्य के िागि पि िलने वाला थ। वह अपने आिाध्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रमत अतुटू
श्रिा, मनष्ठां, सिपर्ि व मवश्वास किते थे।
(ि) गीता से हिें अनेक लशक्षाएं मिलती है:
१. कििशील बने िहना।
२. मनष्ठां से अपने कत्तिव्य का पालन किना।
३. ईश्वि के प्रमत अटू ट मवश्वास, श्रिा, मनष्ठा सिपिर् एवं मवश्वास िखना ।
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(ग) गरुजनोुं और बड़े -बजगों का आशीिािद बहुत महत्त्वपूणि भूनमका ननभाता है। अपने आिायि-लशक्षक या
गरुजनोुं के ननकट जाना, उनसे अपनी लजज्ञासा का समाधान करिाना, प्रश्ोुं का उत्तर िेना और उनके
अनभि का अपने लिए िाभ िेना बहुत अच्छा भी है और आिश्यक भी है|
(घ) आपसी शत्रता के बारे में कहा था, "िैर से बद्ध ने िैर शान्त नही ुं होता। अिैर से ही िैर शान्त होता है।"
यह सनहरा सूत्र सििदा साथिक |
(ड) मनष्य के जीिन की साथिकता पररश्रम करने में है। जो व्यखि जीिन में परुषाथि करता है तथा निपरीत
पररखस्थनत आने पर भी ननराश नही ुं होता, उस व्यखि का जीिन साथिक माना जाता है |