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FOR HARYANA CLASS 12 PREPARATION
HBSE Class 12 Syllabus
2027 Hindi (Elective)
EXAM YEAR TYPE SUBJECT
Haryana Class 12 2027 Syllabus Hindi
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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ह रयाणा िव ालय िश ा बोड
पाठ्य म एवं अ यायवार अंको का िवभाजन (2026-27)
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क ा-बारहव.co िवषय:िह दी(ऐि छक) कोड:523 e m
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सामा य िनदश:
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1.a सपं णू पाठ्य म के आधार पर एक वािषक परी ा होगी।
2. वािषक परी ा 80 अंक क होगी और आतं रक मू यांकन 20 अंक का होगा।
3. आतं रक मू याक
ं न के िलए:
िन नानसु ार आविधक मू यांकन होगा:
क) 4 अंक के िलए दो SAT परी ा आयोिजत क जाएगी िजनका अंितम आंत रक
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मू यांकन के िलए 04 अंक का भारा.क ं coहोगा।
ख) 2 अंक के िलए एक अध sवािषक em परी ा आयोिजत क जाएगी िजसका अंितम
आतं रक मू याक g
ं न के िलएla02 अकं का भाराकं होगा।
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ग) 2 अंक के िलए िवषय िश क CRP (क ा क क भागीदारी) के िलए मू याक ं न
करगे और अिधकतम 02 अक ं दगे।
घ) 2 अंक के िलए एक ी-बोड परी ा आयोिजत क जाएगी िजसका अंितम आंत रक
मू याक
ं न के िलए 02 अक ं का भाराक ं होगा।
ङ) 5 अंक के िलए छा ारा एक प रयोजना काय िकया जाएगा िजसका अंितम आंत रक
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m मू यांकन के िलए 05 अंक का भाराक ं होगा। c. o
m .co च) 5 अंक के िलए िव थ क उपि थित के िन नानसु ार 05 अंक दान
s emिकए। जाएँगे :-
s e 75% से 80% तक - 01 अंक la
la gं
80% से अिधक से 85% तक - 02a अक
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85% से अिधक से 90% तक - 03 अक ं
90% से अिधक से 95% तक - 04 अक ं
95% से अिधक से 100% तक - 05 अंक
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पाठ्य म सरं चना (2026-27)
क ा- बारहव िवषय: िह दी(ऐि छक) कोड: 523
पु तक का नाम अ याय अंक
रचना मक बोध अपिठत ग ांश 10
अपिठत प ांश
अतं रा भाग-2 (ग खडं ) रामचं शु ल - ेमघन क छाया - मिृ त 20
पंिडत चं धर शमा गुलरे ी - सुिम रनी के मनके
फणी रनाथ 'रे ण'ु - सवं िदया
भी म साहनी - गांधी, नेह और या सेर अराफ़ात
असगर वजाहत – शेर,पहचान,चार हाथ, साझा
िनमल वमा – जहां कोई वापसी नह
ममता कािलया- दसू रा देवदास
हजारी साद ि वेदी – कुटज
अतं रा भाग-2 (का य जयशंकर साद - (क) देवसेना का गीत 20
खंड) (ख) कानिलया का गीत
सूयकातं ि पाठी 'िनराला'- सरोज मिृ त
सि चदानंद हीरानंद वा यायन- 'अ ेय'
(क)यह दीप अके ला
(ख) मने देखा, एक बँदू
के दारनाथ िसहं - (क) बनारस
(ख)िदशा
रघवु ीर सहाय - (क) वसतं आया
(ख) तोड़ो
तल ु सीदास - (क) भरत राम का ेम
(ख) पद
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मिलक महु मद जायसी - बारहमासा
िव ापित - पद
घनानंद - किव
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अंतराल भाग -2 सरू दास क झोपड़ी 7
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. co िब कोहर क माटी s e m
s em अपना मालवा
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अिभ यिglaऔर मा यम 1) िविभ न मा यम के िलए लेखन 15 a
a 2) प कारीय लेखन के िविभ न प और लेखन ि या
3) िवशेष लेखन- व प और कार
4) कै से बनती है किवता
5) नाटक िलखने का याकरण
6) कै से िलख कहानी
7) कै से कर कहानी का नाट्य पातं रण
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8) कै से बनता है रे िडयो नाटक
9) नए और अ यािशत e m िवषय पर लेखन
आदश जीवन मू य l
1)दबु लता छोड़ो---as ढ़ता अपनाओ 8
(उ रा)
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2) दिु वधाaसे ऊपर उठो
3) संतिु लत जीवन
4) काय म कुशलता लाएं
5) शांत मन --उ नत जीवन
6) संघष म िवजय का माग
7) खेती से अिजत गौरव और समिृ
8) दगु ा भाभी o m
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c. o 9) सव भवतं ु सुिखन:
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e m 10) हे
म चं िव मािद य
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las योग ag 80
ag आतं रक मू यांकन 20
कुल योग 100
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अंतरा भाग-2 (ग खंड):
1) ेमघन क छाया मृित सं मरणा मक िनबंध म शु ल जी ने िहदं ी भाषा एवं सािह य के ित
अपने ारंिभक झान का बड़ा रोचक वणन िकया है। ेमघन के यि व ने शु ल जी क
समवय क मडं ली को िकस तरह भािवत िकया, िहदं ी के ित िकस कार आकिषत िकया
तथा िकसी रचनाकार के यि व िनमाण आिद से संबंिधत पहलओ ु ं का बड़ा िच ाकषक
िच ण इस िनबंध म िकया गया है।
2) पंिडत चं धर शमा गुलेरी सिु म रनी के मनके नाम से तीन लघु िनबंध-बालक बच गया,
घड़ी के पुज और ढेले चुन लो पाठ्यपु तक म िदए गए ह। बालक बच गया िनबंध का मूल
ितपा है िश ा हण क सही उ । लेखक मानता है िक हम यि के मानस के िवकास के
िलए िश ा को ततु करना चािहए, िश ा के िलए मनु य को नह । हमारा ल य है मनु य और
मनु यता को बचाए रखना मनु य बचा रहेगा तो वह समय आने पर िशि त िकया जा सके गा।
लेखक ने अपने समय क िश ा णाली और िश क क मानिसकता को कट करने के िलए
अपने जीवन के अनुभव को हमारे सामने अ यंत यावहा रक प म रखा है। घड़ी के पजु म
लेखक ने धम के रह य को जानने पर धम उपदेशक ारा लगाए गए ितबंध को घड़ी के
ांत ारा बड़े ही रोचक ढंग से तुत िकया है। ढेले चुन लो म लोक िव ास म िनिहत
अंधिव ासी मा यताओ ं पर चोट क गई है। तीन िनबंध समाज क मल ू सम याओ ं पर िवचार
करने वाले ह। इनक भाषा शैली सरल, बोलचाल क होते हए भी गंभीर ढगं से िवषय वतन
करने वाली ह।
3) फणी र नाथ रेणु सवं िदया कहानी म मानवीय संवेदना क गहन एवं िवल ण पहचान तुत
हई है। असहाय और सहनशील नारी मन के कोमल तंतु क , उसके दख ु और क णा क , पीड़ा
तथा यातना क ऐसी सू म पकड़ रेणु जैसे ‘आ मा के िश पी’ ारा ही संभव है। रे णु ने बड़ी
बह रया क पीड़ा को उसके भीतर के हाहाकार को संविदया के मा यम से अपनी परू ी सहानभु िू त
दान क है। लोकभाषा क न व पर खड़ी संविदया कहानी पहाड़ी झरने क तरह गितमान है।
उसक गित, लय, वाह, संवाद और सगं ीत पढ़ने वाले के रोम-रोम म झंकृत होने लगता है।
4) भी म साहनी - गांधी, नेह और या सेर अराफ़ात उनक आ मकथा आज के अतीत का एक
अंश है। जोिक एक सं मरण है। इसम लेखक ने िकशोराव था से ौढ़ाव था तक के अपने
अनभु व को मिृ त के आधार पर श दब िकया है। भावशाली श द िच के मा यम से
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तुत िकया है। तुत सं मरण अ यंत रोचक, सरस एवं पठनीय बन पड़ा है य िक भी म
साहनी ने अपने रोचक अनभु व को बीच-बीच म जोड़ िदया है। इस पाठ के मा यम से रचनाकार
के यि व के अित र रा ीयता, देश ेम और अंतररा ीय मै ी जैसे मु े भी पाठक के सामने
उजागर हो जाते ह।
5) असगर वजाहतm - शेर, पहचान, चार हाथ और साझा नाम से उनक चार लघुकथाएँ दी गई . c om
ह। शेर तीका . coमक और यं या मक लघकु था है। शेर यव था का तीक है िजसके पेट म sem
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जंगaलsकेe सभी जानवर िकसी न िकसी लोभन के चलते समाते चले जा रहे ह। पहचान म राजा gl
g l बहरी, गँगी और अधी जा पसद आती है जो िबना कछ बोले िबना कछ सने और िबनाa
a क ू ं ं ु ु ु
कुछ देखे उसक आ ा का पालन करती रहे। कहानीकार ने इसी यथाथ क पहचान कराई है।
भूमंडलीकरण और उदारीकरण के दौर म इ ह गित और उ पादन से जोड़कर संगत और उर
भी ठहराया जा रहा है। चार हाथ पूँजीवादी यव था म मजदरू के शोषण को उजागर करती है।
पँजू ीपित भाँित-भाँित के उपाय कर मजदरू को पगं ु बनाने का यास करते ह।साझा म उ ोग
पर क जा जमाने के बाद पूँजीपितय क नजर िकसान
o m क जमीन और उ पाद पर जमी है। गाँव
का भु वशाली वग भी इसम शािमल है। वह.cिकसान को साझा खेती करने का देता है और
e mको पता भी नह चलता और उसक सारी कमाई
उसक सारी फसल हड़प लेता है। िकसान
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हाथी के पेट म चली जाती है। यहaहाथी g और कोई नह बि क समाज का बना और भु वशाली
वग है जो िकसान को भीख म डालकर उसक सारी मेहनत को हजम करता है। यह कहानी
आजादी के बाद िकसान क बदहाली का वणन करते हए उसके कारण क पहल करती है।
6) िनमल वमा- जहाँ कोई वापसी नह या ा-वृ ांत धुंध से उठती धनु सं ह से िलया गया है।
उसम लेखक ने पयावरण सबं धं ी सरोकार को ही नह , िवकास के नाम पर पयावरण िवनाश से
उपजी िव थापन संबंधी मनु य क यातना को भी रे खांिकत िकया है। यह पाठ िव थािपत क
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o m अने क सम याओ ं का दय पश िच त त
ु करता है । इस स य को भी उ ािटत. c
करता है िक
. c e mउसका प रवेश,
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आध ि
ु नक औ ोगीकरण क आँ ध ी म िसफ़ मनु य ही नह उखड़ता,
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las स ं क ृ ित और आवास थल भी हमे श ा के िलए न हो जाते ह। ag
ag 7) ममता कािलया- दसू रा देवदास कहानी म लेिखका ने इस तरह घटनाओ ं का सयं ोजन िकया
है िक अनजाने म ेम का थम अक ं ु रण संभव और पारो के दय म बड़ी अजीब प रि थितय
म उ प न होता है। कहानी के मा यम से लेिखका ने ेम को बंबईया िफ म क प रपाटी से
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अलग हटाकर उसे पिव और थायी व प दान िकया है। क य, िवषयव तु, भाषा और
िश प क ि से कहानी बेजोड़ है।
8) हजारी साद ि वेदी- कुटज िहमालय पवत क ऊँचाई पर सख ू ी िशलाओ ं के बीच उगने
वाला एक जंगली पौधा है, िजसम फूल लगते ह। इसी फूल क कृित पर यह िनबंध कुटज
िलखा गया है। कुटज म न िवशेष स दय है, न सगु ंध, िफर भी लेखक ने उसम मानव के िलए
एक संदश
े पाया है। कुटज म अपराजेय जीवनशि है, वावलबं न है, आ मिव ास है और
िवषम प रि थितय म भी शान के साथ जीने क मता है। वह समान भाव से सभी प रि थितय
को वीकारता है। सामा य से सामा य व तु म भी िवशेष गुण हो सकते ह यह जताना इस िनबंध
का अभी है।
अंतरा भाग-2 (का य खडं ) :
1) जयशंकर साद:- कानिलया का गीत -यह गीत चं गु नाटक का िस गीत है।
िस यक ू स क बेटी कानिलया के ारा भारत के ाकृितक स दय वह गौरव गाथा का वणन
िकया गया है। देवसेना का गीत-यह गीत साद जी के नाटक कंद गु से िलया गया है इसम
देवसेना कक पीड़ा के ण का वणन िकया गया है
2) सूयकांत ि पाठी िनराला :- सरोज मृित-सरोज मृित किवता िनराला क िदवंगत पु ी सरोज
पर कि त है। यह किवता बेटी के िदवंगत होने पर िपता का िवलाप है। िपता के इस िवलाप म
किव को कभी शकुंतला क याद आती है कभी अपनी वग य प नी क । बेटी के प रंग म
प नी का प रंग िदखाई पड़ता है, िजसका िच ण िनराला ने िकया है। यही नह इस किवता म
एक भा यहीन िपता का सघं ष, समाज से उसके सबं धं , पु ी के ित बहत कुछ न कर पाने का
अकम यता बोध भी कट हआ है। इस किवता के मा यम से िनराला का जीवन-संघष भी
कट हआ है। वे कहते ह- ‘दख
ु ही जीवन क कथा रही, या कहँ आज जो नह कह ’।
3) सि चदानदं हीरानदं वा यायन अ ेय:- यह दीप अके ला-यह दीप अके ला किवता म
अ ेय ऐसे दीप क बात करते ह जो नेह भरा है, गव भरा है, मदमाता भी है िकंतु अके ला है।
अहकं ार का मद हम अपन से अलग कर देता है। मने देखा एक बदूं मैने देखा एक बँदू किवता
म अ ेय ने समु से अलग तीत होती बँदू क णभंगरु ता को या याियत िकया है। इस
किवता के मा यम से किव ने जीवन म णभंगुरता के मह व को समझाया है।
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4) के दारनाथ िसंह:- बनारस किवता म ाचीनतम शहर बनारस के सां कृितक वैभव के साथ
ठे ठ बनारसीपन पर भी काश डाला गया है। बनारस िशव क नगरी और गगं ा के साथ िविश
आ था का क है। बनारस म गंगा, गंगा के घाट, मंिदर तथा मंिदर और घाट के िकनारे बैठे
िभखा रय के कटोरे िजनम वसंत उतरता है-का िच बनारस किवता म अिं कत है िदशा
किवता बाल मनोिव m ान से संबंिधत है िजसम पतंग उड़ाते ब चे से किव पूछता है िहमालय . c om
िकधर है। बालक . co का उ र बाल सलु भ है िक िहमालय उधर है िजधर उसक पतंग भागी जा sem
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रहीaहैs। eहर यि का अपना यथाथ होता है, ब चे यथाथ को अपने ढगं से देखते ह। किव को gl
g l बाल सलभ स ान मोह लेता है। a
a यह ु ं
5) रघुवीर सहाय:- वसंत आया किवता कहती है िक आज मनु य का कृित से र ता टूट गया
है। वसंत ऋतु का आना अब अनभु व करने के बजाय कै लडर से जाना जाता है। ऋतुओ ं म
प रवतन पहले क तरह ही वभावतः घिटत होते रहते ह। प े झड़ते ह, कोपल फूटती ह, हवा
बहती है, ढाक के जगं ल दहकते ह, कोमल मर अपनी म ती म झमू ते ह। वा तव म किव ने
आज के मनु य क आधिु नक जीवन शैली पर यं यmिकया है इस किवता क भाषा म जीवन
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क िवडंबना िछपी हई है। कृ ित से अंतरंगता.cको य करने के िलए किव ने देशज, त व
श द और ि याओ ं का भरपूर योगasिकया emहै। अशोक, मदन महीना, पंचमी, नंदनवन, जैसे
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परंपरा म रचे-बसे जीवनानुभव aकgभाषा ने इस किवता को आधिु नकता के सामने एक चनु ौती
क तरह खड़ा कर िदया है। किवता म िबंब और तीक का भी संदु र योग हआ है। तोड़ो
उ ोधनपरक किवता है। इसम किव सजृ न हेतु भूिम को तैयार करने के िलए च ान, ऊसर और
बंजर को तोड़ने का आ ान करता है।
6) तुलसीदास :- पाठ्यपु तक म ततु चौपाई और दोह को रामच रतमानस के अयो या काडं
से िलया गया ह। इन छंद म राम वनगमन के प ात् भरत क मनोदशा का वणन िकया गया है।
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o m भरत भाव क
ु दय से बताते ह िक राम का उनके ित अ यिधक म
े भाव है । वे . c
बचपन से ही
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भरत को खे ल म भी सहयोग दे त े रहते थे और उनका मन कभी नह तोड़ते
l asथे ।
las 7) मिलक मोह मद जायसी:- िस रचना प ावत के g
a कुछ अंश िदए गए ह।
‘बारहमासा’ के
ag ततु पाठ म किव ने नाियका नागमती के िवरह का वणन िकया है। किव ने शीत के अगहन
और पसू माह म नाियका क िवरह दशा का िच ण िकया है। थम अंश म ेम के िवयोग म
नाियका िवरह क अि न म जल रही है और भवरे तथा काग के सम अपनी ि थितय का
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वणन करते हए नायक को संदश े भेज रही है। ि तीय अंश म िवरिहणी नाियका के वणन के
साथ-साथ शीत से उसका शरीर काँपने तथा िवयोग से दय काँपने का सदुं र िच ण है।
8) िव ापित :- इस पाठ्यपु तक म िव ापित के तीन पद िलए गए ह। पहले म िवरिहणी के दय
के उ ार को कट करते हए उ ह ने उसको अ यंत दख ु ी और कातर बताया है। दसू रे पद म
ि यतमा सिख से कहती है िक म ज म-ज मातं र से अपने ि यतम का प ही देखती रही परंतु
अभी तक ने संतु नह हए ह। उनके मधरु बोल कान म गँजू ते रहते ह। तीसरे पद म किव ने
िवरिहणी ि यतमा का दख
ु भरा िच ततु िकया है।
9) घनानंद दल :- तुत पु तक म किव घनानदं के थम किवत म किव ने अपनी ेिमका
सुजान के दशन क अिभलाषा कट करते हए कहा है िक सजु ान के दशन के िलए हो ये ाण
अब तक अटके हए ह।
अंतराल भाग-2 :-
1. सूरदास क झ पड़ी - सूरदास क झ पड़ी ेमचंद के उप यास रंगभूिम का एक अंश
है। एक ि हीन यि िजतना बेबस और लाचार जीवन जीने को अिभश होता है,
सरू दास का च र ठीक इसके िवपरीत है। सरू दास अपनी प रि थितय से िजतना दख
ु ी
व आहत है उससे कह अिधक आहत है भैर और जगधर ारा िकए जा रहे अपमान
व उनक ई या से है। सरू दास के च र क िवशेषता यह है िक झ पड़ी के जला िदए
जाने के बावजूद वह िकसी से ितशोध लेने म िव ास नह करता बि क पुनिनमाण म
िव ास करता है। इसीिलए वह िमठुआ के सवाल-" जो कोई सौ लाख बार झ पड़ी को
आग लगा दे तो" के जवाब म ढ़ता के साथ उ र देता है- “तो हम भी सौ लाख बार
बनाएँगे"।
2. िब कोहर क माटी- तुत पाठ िब कोहर क माटी िव नाथ ि पाठी क आ मकथा
नगं ातलाई का गाँव का एक अश ं है। आ मकथा मक शैली म िलखा गया यह पाठ
अपनी अिभ यंजना म अ यंत रोचक और पठनीय है। लेखक ने उ के कई पड़ाव पार
करने के बाद अपने जीवन म माँ, गाँव और आसपास के ाकृितक प रवेश का वणन
करते हए ामीण जीवन शैली, लोक कथाओ,ं लोक मा यताओ ं को पाठक तक पहँचाने
क कोिशश क है।
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3. अपना मालवा (खाऊ-उजाडू स यता म)- भाष जोशी का अपना मालवा-खाऊ-
- उजाडू स यता म पाठ जनस ा, 1 अ टूबर 2006 के कागद कारे तंभ से िलया गया
है। इस पाठ म लेखक ने मालवा देश क िम ी, वषा, निदय क ि थित, उ म एवं
िव तार तथा वहाँ के जनजीवन एवं सं कृित को िचि त िकया है। पहले के मालवा
m
‘मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर' क अब के मालवा ‘नदी नाले . c om
co पग-पग नीर वाला मालवा सखू ा हो गया' से तलु ना क है। जो मालवा अपनी sem
सूख.गए,
s eसmखु -समिृ एवं सपं नता के िलए िव यात था वही अब खाऊ - उजाडू स यता मgla
g la फँ सकर उलझ गया है। यह खाऊ-उजाड स यता यरोप और अमे रका क देन है िजसकेa
a ू ू
कारण िवकास क औ ोिगक स यता उजाड़ क अपस यता बन गई है। इससे परू ी
दिु नया भािवत हई है, पयावरण िबगड़ा है।
अिभ यि और मा यम :-
1) िविभ न मा यम के िलए लेखन – जनसंचार के िविभ न मा यम क खिू बयाँ और
m
ख़ािमयाँ, मिु त मा यम म लेखन के िलए c. o यान रखने यो य बात,रेिडयो समाचार क
सरं चना,रेिडयो के िलए समाचार लेखeन, mटेलीिवज़न खबर के िविभ न चरण, रेिडयो और
l as
टेलीिवजन समाचार क भाषा
a g शैली, इटं रनेट प का रता का इितहास और भारत म
और
इटं रनेट प का रता, िह दी नेट संसार।
2) प कारीय लेखन के िविभ न प और लेखन ि या – प कारीय लेखन या
है?समाचार कै से िलखा जाता है? समाचार लेखन और छह ककार, फ़ चर या है? फ़ चर
कै से िलख? िवशेष रपोट कै से िलखे? िवचारपरक लेखन -लेख, िटि पिणयाँ,संपादक य
m
m लेखन, तंभ लेखन, संपादक के नाम प , सा ा कार। co .
.co s e m
s em 3) िवशेष लेखन- व प और कार – िवशेष लेखन या हैg?lिवशे a ष लेखन क भाषा
g la a
a और शैली, िवशेष लेखन के े , कै से हािसल कर िवशेष ता।
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4) कै से बनती है- किवता- किवता या है? किवता कै से बनती है? किवता म श द का
चयन, किवता म िबबं और छंद, किवता क सरं चना, किवता के घटक।
5) नाटक िलखने का याकरण- नाटक और अ य िवधाएँ, नाटक म समय का बंधन,
नाटक के त व, नाटक के िवषय, नाटक म वीकार और अ वीकार क अवधारणा, नाटक
क िश प सरं चना।
6) कै से िलख कहानी – कहानी या है? कहानी के त व।
7) नाटक कै से कर कहानी का नाट्य पांतरण – कहानी और नाटक का संबंध, कहानी
को नाटक कै से बनाएँ? नाट्य पांतरण क चनु ौितयाँ।
8) कै से बनता है रेिडयो नाटक – रे िडयो नाटक क परंपरा, िसनेमा,रंगमच
ं और रे िडयो
नाटक – समानता और असमानता,रे िडयो नाटक म विन संकेत क मह ा।
9) नए और अ यािशत िवषय पर लेखन - अ यािशत िवषय पीरी लेखन या है? या
इसक कोई तकनीक हो सकती है?कै से कर तैयारी?
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मािसक पाठ्य म िश ण योजना (2026-27)
क ा- बारहव िवषय:िह दी(ऐि छक) कोड:523
मास पु तक का नाम िवषय- व तु िश ण दोहराई m
om कालांश कालाश
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अंतराeभाग -2 रामचं शु ल - ेमघन क छाया – मिृ त 4 l as
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जयशंकर साद - (क) देवसेना का गीत
(ख) कानिलया का गीत 4
अिभ यि और िविभ न मा यम के िलए लेखन 5
मा यम
प कारीय लेखन के िविभ न प और लेखन 5 4
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आदश जीवन दबु लता छोड़ो--emढ़ता अपनाओ 1
मू य (उ रा) l as
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मई अतं रा भाग -2 पिं डत चं धर शमा गल
ु रे ी - सिु म रनी के मनके 5 5
सयू कातं ि पाठी 'िनराला'- सरोज मिृ त 5
अिभ यि और िवशेष लेखन- व प और कार 5 m
om मा यम . co
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e m आदश जीवन las 1
las दिु वधा से ऊपर उठो
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ag मू य (उ रा)
सतं िु लत जीवन 1
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जून
ी मकालीन अवकाश (प रयोजना काय)
जुलाई अंतरा भाग -2 फणी रनाथ 'रेण'ु - सवं िदया 4 4
सि चदानंद हीरानंद वा यायन- 'अ ेय'
(क)यह दीप अके ला 6
(ख) मने देखा, एक बँदू
अिभ यि और कै से बनती है किवता 5
मा यम
आदश जीवन काय म कुशलता लाएं 2
मू य (उ रा)
अग त अंतरा भाग -2 भी म साहनी – 4
गांधी, नेह और या सेर अराफ़ात 5
के दारनाथ िसहं - (क) बनारस
(ख)िदशा
अिभ यि और नाटक िलखने का याकरण 5
मा यम
अंतराल भाग -2 सरू दास क झोपड़ी 4
आदश जीवन
शातं मन ---उ नत जीवन 1
मू य (उ रा)
सघं ष म िवजय का माग
1
िसतंबर
असगर वजाहत – शेर,पहचान,चार हाथ, साझा
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अंतरा भाग -2 रघवु ीर सहाय - (क) वसंत आया 4
(ख) तोड़ो 4
अिभ यि और ----
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मा यम
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आदश m जीवन खेती से अिजत गौरव और समिृ 1
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a अध-वािषक परी ा के िलए पनु राविृ 8
अध-वािषक परी ा
अ ू बर अतं रा भाग -2 िनमल वमा – जहां कोई वापसी नह 4 4
तल
ु सीदास - (क) भरत राम का ेम 5
(ख) पदcom
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अतं राल भाग-2 a
िब कोहर कglमाटी 4
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अिभ यि और कै से िलख कहानी 3
मा यम
कै से कर कहानी का नाट्य पांतरण 4
आदश जीवन दगु ा भाभी 1
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a नवंबर अंतरा भाग -2 ममता कािलया- दसू रा देवदास 4 4
मिलक महु मद जायसी – बारहमासा 4
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अिभ यि और कै से बनता है रे िडयो नाटक 4
मा यम
आदश जीवन सव भवंतु सिु खनः 1
(मू य उ रा)
िदसंबर अंतरा भाग -2 हजारी साद ि वेदी – कुटज 5 3
िव ापित - पद 4
अंतराल भाग-2 अपना मालवा 3
अिभ यि और नए और अ यािशत िवषय पर लेखन 6
मा यम
आदश जीवन हेमचं िव मािद य 1
मू य (उ रा)
जनवरी अंतरा भाग -2 घनानंद - किव 3 12
पाठ्य म पनु राविृ
फ़रवरी पाठ्य म पनु राविृ 20
माच वािषक परी ा
नोट:
िवषय िश क को सलाह दी जाती है िक वे छा को श दावली या अवधारणा क
प ता को बढ़ाने के िलए अ याय म उपयोग क जाने वाली श दावली /
प रभाषा मक श द क नोटबुक तैयार करने के िलए िनदिशत कर।
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िनधा रत पु तक:
1. अंतरा भाग-2 (BSEH काशन © NCERT)
2. अंतराल भाग -2 परू क पु तक (BSEH काशन © NCERT)
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3. अिभ यि और
o m मा यम (BSEH काशन) . co
.c मू य (उ रा) - क ा 12 के िलए (BSEH काशन) e m
4. आदश जीवन
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प ा प (2026-27)
क ा- बारहव िवषय: िह दी(ऐि छक) कोड:523
अ याय अक
ं िववरण कुल
सं या अंक
रचना मक बोध 5 5 अपिठत ग ांश (1x5=5) 10
5 5 अपिठत प ाश
ं (1x5=5)
अतं रा भाग-2 (ग 1 5 बहिवक पीय (1x5=5) 20
खडं ) ग ांश पर आधा रत (1x5=5)
1 1
3,2 4 पाठ पर आधा रत
(3+3+2+2=10)
अतं रा भाग-2 ( 1 5 बहिवक पीय (1x5=5) 20
खंड) 1 1 स सगं या या (दो म कोई एक)
(5×1=5)
3,2 4 किवताओ ं पर आधा रत
(3+3+2+2=10)
अतं राल भाग-2 2,3 3 पाठ पर आधा रत (2+2+3=7) 7
अिभ यि और 1 5 अितलघु रा मक (1x5=5) 15
मा यम 3, 2 2 लघु रा मक (3+2=5)
5 1 दीघउ रा मक(दो म से कोई एक) (1x5=5)
आदश जीवन मू य 2 4 लघु रा मक (4x2=8) 8
(उ रा)
कुल 80
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