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अ यास नप (2021-22) (सेट-1)
क ा 12 हंद ऐि छक (002)
सामा य नदश:-
सामा य नदश-
इस नप म तीन खंड ह- खंड-क, खंड-ख और खंड-ग ।
इस नप म कुल 7 व तुपरक न पूछे गए ह। सभी न म उप न दए गए ह। दए
गए नदश का पालन करते हुए न के उ तर द िजए।
खंड-क म अप ठत बोध (ग यांश व का यांश) से संबं धत कुल न सं. 1 से 36 तक ह,
िजसमे से येक (ग य एवं प य) म से कुल 18 न को हल क िजए ।
खंड- ख म पाँच न ह िजनक म सं. 37 से 41 है । इन सभी न के उ तर द िजए।
खंड-ग म तीन कार के न पछ
ू े गए ह।
न सं. 42 से 51 है । सभी न के उ तर द िजए।
न सं. 52 से 57 म से क ह ं चार (4) न को हल क िजए।
न सं. 58 से 62 म से क ह ं तीन (3) न को हल क िजए।
सभी न क अंकभा रता समान है , अथात 1x 40 = 40 अंक
सह उ तर वाले गोले को भल कार से केवल नील या काल याह वाले बॉल पॉइंट पेन
से ह ओ.एम.आर. शीट म भर।
खंड – क
(अप ठत अंश) अंक-18
I. नीचे दो अप ठत ग यांश दए गए ह। कसी एक ग यांश को यानपूवक प ढ़ए और उस पर
आधा रत न के उ तर सह वक प चन
ु कर ल खए- 1x10=10
दबाव म काम करना यि त के लए अ छा है या नह ं, इस बात पर ाय: बहस होती है । कहा
जाता है क यि त अ य धक दबाव म नकारा मक भाव को अपने ऊपर हावी कर लेता है , िजससे
उसे अकसर काय म असफलता ा त होती है। वह अपना मान सक और शार रक वा य भी खो
बैठता है। दबाव को य द ताकत बना लया जाए, तो ना सफ सफलता ा त होती है ,बि क यि त
कामयाबी के नए मापदं ड रचता है । ऐसे बहुत सारे उदाहरण ह जब लोग ने अपने काम के दबाव को
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अवरोध नह ं बि क ताकत बना लया। ‘सुख-दख
ु , सफलता -असफलता, शां त- ोध और या-कम
हमारे ि टकोण पर ह नभर करता है ।’ जोस स वा इस बात से सहमत होते हुए अपनी पु तक
‘यू द ह लर’ म लखते ह क मन मि त क को चलाता है और मि त क शर र को। इस तरह शर र
मन के आदे श का पालन करता हुआ काम करता है ।
दबाव म यि त य द सकारा मक होकर काम करे , तो वह अपना सव े ठ दशन करने म कामयाब
होता है । दबाव के समय मौजूद सम या पर यान क त करने और बोझ महसूस करने क बजाय
य द यह सोचा जाए क हम अ यंत सौभा यशाल ह, जो एक क ठन चन
ु ौती को परू ा करने के लए
त पर ह, तो हमार बेहतर न मताएँ वयं जागत
ृ हो उठती ह। हमारा दमाग िजस चीज पर भी
अपना यान क त करने लगता है , वह हम बढ़ती तीत होती है । य द हम अपनी सम याओं के
बारे म सोचगे तो वे और बड़ी महसस
ू ह गी। अगर अपनी शि तय पर यान यान क त करगे,
तो वे भी बड़ी महसूस ह गी। इस बात को हमेशा यान म रखना चा हए क ‘िजतना एक आदत
है , पर अफसोस ! हारना भी आदत ह है।’
न न ल खत म से नदशानुसार सबसे उ चत वक प का चयन क िजए ।
[1 ] दबाव म काय करने पर यि त .............. हो जाता है ।
[क]आलसी [ख]स य
[ग]नकारा मक [घ]मूख
[2] अपनी कमजोर को अपनी ताकत बना लेने का या प रणाम होता है
[क] सफलता ा त होती है [ख] शर र म ताकत आ जाती है
[ग] नकारा मकता आती है [घ] कमजोर और बढ़ जाती है
[3] हम सम याओं के बजाय कहाँ यान क त करना चा हए ?
[क] अपनी कमजो रय पर [ख] शि तय पर
[ग] वातावरण पर [घ] पु तक पर
[4] ‘लोग ने अपने काय के दबाव को अवरोध क जगह ताकत बना लया।’ रचना के आधार पर
वा य है-
[क] इ छा वाचक [ख] संदेह वाचक
[ग] म वा य [घ] सरल वा य
[5]सफलता म यय है-
[क] सा [ख] फल
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[ग] स [घ] ता
[6] सुख-दख
ु , शां त- ोध और या -कम कस पर नभर करते ह?
[क]वातावरण पर [ख] ि टकोण पर
[ग]आ थक ि थ त पर [घ]दबाव पर
[7]‘यू द ह लर ‘ पु तक के लेखक कौन ह ?
[क] हे नर स वा [ख] जोस केनर
[ग] हे नर केनर [घ]जोस स वा
[8] दबाव म ...........होकर ह यि त अपना सव े ठ दशन करने म कामयाब होता है ।
[क] सकारा मक [ख] वाबलंबी
[ग] कायरत [घ] इनम से कोई नह ं
[9] लेखक के अनुसार हारना या है ?
[क] को शश [ख] आदत
[ग] चन
ु ौती [घ] या
[10] सम याओं के बारे म लगातार सोचने का या प रणाम होगा ?
[क] वयं समा त हो जाएँगी [ख] य क य रहगी
[ग] हम परे शान करती रहगी [घ] और बढ़ जाएंगी
अथवा
संवाद म दोन प बोले यह आव यक नह ं। ायः एक यि त क संवाद म मौन भागीदार
अ धक लाभकर होती है । यह ि थ त संवादह नता से भ न है । मन से हारे दख
ु ी यि त के लए
दस
ू रा प अ छे व ता के प म, अ छे ोता के प म अ धक लाभकर होता है।
बोलने वाले के हावभाव और उसका सल का, उसक कृ त और सां कृ तक-सामािजक प ृ ठभू म को
पल भर म बता दे ते ह। संवाद से संबंध बेहतर भी होते ह और अ श ट संवाद संबंध बगड़ने का
कारण भी बनता है । बात करने से बड़े-बड़े मसले ,अंतररा य सम याएँ तक हल हो जाती ह। पर
संवाद क सबसे बड़ी शत है क एक- दस
ू रे क बात पूरे मनोयोग से, संपण
ू धैय से सुनी जाएँ। ोता
उ ह कान से सुने और मन से अनुभव कर तभी उनका लाभ है ,तभी सम याएँ सुलझने क
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संभावना बढ़ती है और कम से कम यह समझ म आता है क अगले के मन के परत के भीतर है
या?
सच तो यह है क सुनना एक कौशल है िजसम हम ायः अकुशल होते ह। दस
ू रे क बात काटने
के लए, उसे समाधान सझ
ु ाने के लए हम उतावले होते ह और यह उतावलापन हमे संवाद क
आ मा तक नह पहुँचने दे ता। हम तो बस अपना झंडा गाड़ना चाहते ह। तब दस
ू रे प को
झुंझलाहट होती है । वह सोचता है यथ ह इसके सामने मुँह खोला। रह म ने ठ क ह कहा था –
“सु न इठलैह लोग सब ,बाँ ट न लैह कोय। ” यान और धैय से सुनना संवाद क सफलता का
मूलमं है ।
संवेदनशील लोग तो पेड़- पौध से ,नद -पवत से, पशु -प य तक से संवाद करते ह। राम ने इन
सबसे पूछा था– “ या आपने सीता को दे खा?” और उ ह एक प ी ने ह पहल सच
ू ना द थी।
इस लए संवाद क अनंत स भावनाओं को समझा जाना चा हए।
न न ल खत म से नदशानुसार सबसे उ चत वक प का चयन क िजए।
[11] उपयु त ग यांश के लए उपयु त शीषक होगा –
[क] संवाद का मह व [ख] संवाद ह नता
[ग] संवाद क असफलता [घ ]संवाद क शू यता
[12]‘संवाद ह नता से या ता पय है?
[क]पर पर वातालाप का अभाव [ख] बात को धैयपूवक सुनना
[ग]संवाद क ग भीरता [घ] इनम से कोई नह ं
[13] भाव प ट क िजए, “यह उतावलापन हमे संवाद क आ मा तक नह पहुँचने दे ता।”
[क] उतावलापन संवाद क आ मा है
[ख] बात को धैय सन
ु े व समझे बना बोलने क शी ता संवाद क ग भीरता को न ट कर दे ती है
[ग] संवाद का मूलमं है -उतावलापन
[घ] इनम से कोई नह ं
[14] दख
ु ी यि त से संवाद म दस
ू रा प कब अ धक लाभकार होता है ?
[क] अ छे ोता के प म [ख] समाधान ा तकता के समय
[ग] वचार के प म [घ] उपरो त सभी
[15] सुनना कौशल क वशेषता है –
[क] अधीर होना [ख] धैयवान होना
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[ग] बेबाक होना [घ] वाचाल होना
[16] हम संवाद क आ मा तक ायः य नह ं पहुँच पाते ?
[क] सजगता के अभाव म [ख] समाधान सुझाने के उतावलेपन के कारण
[ग] अधीरता के कारण [घ] उपरो त सभी
[17] रह म के कथन का आशय समझाइए -
[क] दस
ू र क सम या सुनकर लोग हँसते ह
[ख] दस
ू र क परे शानी का मज़ाक बनाते ह
[ग] दस
ू र के दद को कम करते ह
[घ] दस
ू र के दद को बढ़ाते ह
[18] राम का उदाहरण य दया गया है ?
[क] संवाद क अनंत संभावनाओं को समझने के लए
[ख] एक -दस
ू रे से संवाद करने के लए
[ग] केवट से संवाद के लए
[घ] इनम से कोई नह ं
[19]पेड़- पौध से ,नद -पवत से ,पशु -प य से कौन संवाद कर लेता ह।
[क] वाक् पटु लोग
[ख] चम कार लोग
[ग]संवेदनशील लोग
[घ] चालाक लोग
[20] ‘झंडे गाड़ना’ मुहावरे का अथ है –
[क] भु व था पत करना [ख] अपनी बात मनवाना
[ग] झंडे को गाड़ना [घ] भावपूवक बात करना
II. नीचे दो का यांश दए गए ह। कसी एक का यांश को यानपव
ू क प ढ़ए और उस पर आधा रत न
के उ तर सह वक प चुनकर ल खए- 1x8=8
जो नह ं हो सके पूण -काम
म उनको करता हूँ णाम!
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कुछ कंु ठत औ’ कुछ ल य- ट
िजनके अ भमं त तीर हुए
रण क समाि त के पहले ह
जो वीर र त तूणीर हुए
-उनको णाम !
जो छोट - सी नैया लेकर
उतरे करने को उद ध -पार
मन क मन म ह रह , वयं
हो गए उसी म नराकार
-उनको णाम !
जो उ च शखर क ओर बढ़े
रह- रह, नव -नव उ साह भरे
पर कुछ ने ले ल हम समा ध
कुछ असफल ह नीचे उतरे
-उनको णाम !
कृत- कृ य नह ं जो हो पाए
युत फाँसी पर गए झूल
कुछ ह दन बीते ह , फर भी
यह द ु नया िजनको गई भूल
-उनको णाम !
न न ल खत म से नदशानुसार सबसे उ चत वक प का चयन क िजए ।
[21] समाज कन लोग को भुला चक
ु ा है ?
[क] दे श क वतं ता के लए, समाज क भलाई के लए ाण को दाँव पर लगाने वाल को
[ख] समाज म खब
ू धन कमाने वाल को
[ग] वीर, तापी राजाओं को
[घ] माता- पता का आदर स मान करने वाल को
[22] छोट -सी नौका से सागर पार करने क को शश करने वाल का मह व है –
[क] ये गलत यास से लोग को सीख दे ते ह ।
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[ख] इनके कारण ह नई खोज और बड़े प रवतन होते ह ।
[ग] यह लोग को बड़ी नाव लेने का संदेश दे ते ह ।
[घ] यह लोग को सागर म ना जाने को सचेत करते ह ।
[23] ‘ हम समा ध’ से अ भ ाय है -
[क] बफ पर बैठकर तप या करना
[ख] बफ म जम जाना
[ग] अपनी जान गँवाना
[घ] उपयु त सभी
[24] क व ने यहाँ कन लोग को णाम कया है ?
[क] सफल लोग को
[ख] नराशा से भरे लोग को
[ग] असफल परं तु कमशील लोग को
[घ] द न ह न गर ब लोग को
[25] उ च शखर क ओर बढ़ने से क व का या अ भ ाय है ?
[क] सफलता क ओर बढ़ना
[ख] ऊँचाई पर चढ़ना
[ग] पहाड़ पर चढ़ना
[घ] द न ह न गर ब लोग को
[26] क व कनके यास क बात कर रहे ह ?
[क] लेखक क
[ख] वाधीनता सेना नय क
[ग] सै नक क
[घ] वै ा नक क
[27]’ उद ध’ श द का अथ है -
[क] नद
[ख] झरना
[ग] नहर
[घ] समु
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[28] ‘रह-रह’, ‘नव-नव’ म कौन सा अलंकार है ?
[क] मानवीकरण [ख] पुन ि त काश
[ग] अ तशयोि त [घ] पक
अथवा
गुलाब का फूल है हमारा पढ़ा - लखा
मने उसे काफ उलट-पल
ु ट कर दे खा है
मुझे तो वह ऐसा ह दखा
सबसे बड़ा सबूत उसके गुलाब होने का यह है
क वह गाँव म जाकर बसने के लए तैयार नह ं है
गाँव म उसक दशनी कौन कराएगा
वहाँ वह अपनी शोभा क शंसा कससे कराएगा
वह फूलने के बाद कसी फसल म थोड़े ह बदल जाता है
मूख कसान को फूलने के बाद
फसल दे ने वाला ह तो भाता है
गाँव म इस लए ठ क है अलसी और सरस के फूल ।
बीच-बीच म यह ताव क गुलाब गाँव म च क सा कर या पढ़ाए
पेश करने म कोई हज नह ं है
मगर साफ समझ लेना चा हए क गुलाब का यह फज नह ं है क
गाँव जाकर खले, अलसी और सरस वगैरा से मले
ढँ क जाए वहाँ क धूल म
और व त -बेव त अपनी दशनी न कराए
आमीन गुलाब पर ऐसा व त कभी ना आए ।
न न ल खत म से नदशानुसार सबसे उ चत वक प का चयन क िजए ।
[29] क व ने कसे मूख कहा है ?
[क] गुलाब को [ख] कसान को
[ग] सरसो को [घ] पढ़े - लखे शहर को
[30] पढ़ा- लखा गुलाब कहाँ जाकर बसने को तैयार नह ं है ?
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[क] शहर म [ख] क बे म
[ग] महानगर म [घ]गाँव म
[31] क व के अनुसार गुलाब का न न म से या फ़ज़ नह है
[क] वह गाँव म जाकर खले
[ख] अलसी सरस वगैरा से मले
[ग] वहाँ क धल
ू से ढक जाए
[घ] उपरो त सभी
[32] ‘बीच-बीच’ म कौन सा अलंकार है
[क] अनु ास यमक [ख] पन
ु ि त काश
[ग] यमक [घ] उपमा
[33] गुलाब कसका तीक है ?
[क] पढ़े लखे शहर लोग का , जो गाँव म आकर काय करना चाहते ह
[ख] पढ़े लखे शहर लोग का ,जो गाँव म आकर काय नह ं करना चाहते
[ग] अमीर लोग का
[घ] उपरो त सभी
[34] क व के अनुसार गाँव के लए या ठ क है?
[क] गुलाब
[ख] अलसी
[ग] सरस
[घ] ख और ग दोन
[35] क व के अनुसार गुलाब गाँव के लए उपयु त य नह ं है ?
[क] उसे कसान पसंद नह ं करते
[ख] य क उसके फूल फसल म नह ं बदलते
[ग] गुलाब अमीर लोग का तीक है
[घ] गुलाब केवल दशनी के लए होता है
[36] गुलाब का फज नह ं है -
[क] गाँव जाकर खले
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[ख] अलसी और सरस वगैरह से मले
[ग] वहाँ क धूल म ढँ क जाए
[घ] उपरो त सभी
खंड-ख
(कायालयी हंद और रचना मक लेखन) अंक-5
III. न न ल खत न को यानपूवक प ढ़ए और उ तर दे ने के लए सवा धक उपयु त वक प का
चयन क िजए- 1x5=5
[37] य के आधार पर घटना क जानकार दे ने वाला एंकर या कहलाता है ?
[क] एंकर [ख] बीट एंकर
[ग] एंकर वजअ
ु ल [घ] लैश एंकर
[38] व भ न कार के समाचार खोज कर अखबार को भेजने वाला यि त या कहलाता है ?
[क] संपादक [ख] र डर
[ग] संवाददाता [घ] काशक
[39] समाचार के ारं भक अंश को या कहते ह ?
[क]इं ो [ख]बॉडी
[ग]ककार [घ]यह सभी
[40] ऑल इं डया रे डयो क थापना कब हुई ?
[क] 1935 [ख]1936
[ग] 1836 [घ] 1856
[41] कसी वशेष मु े के प म जनमत तैयार करने हे तु चलाया गया अ भयान या कहलाता है ?
[क] एनको डंग [ख] वॉच डॉग प का रता
[ग] एडवोकेसी प का रता [घ] लांसर
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खंड – ग
(पा य पु तक और पूरक पा यपु तक) अंक-17
IV. न न ल खत का यांश पर आधा रत दए गए पाँच न के सह उ तर वाले वक प चु नए-
1x5=5
जब हम स य को पक
ु ारते ह
तो वह हम से परे हटता जाता है
जैसे गुहारते हुए यु धि ठर के सामने से
भागे थे वदरु और भी घने जंगल म
स य शायद जानना चाहता है
क उसके पीछे हम कतनी दरू तक भटक सकते ह
कभी दखता है स य
और कभी ओझल हो जाता है
और हम कहते रह जाते ह क को यह हम ह
जैसे धमराज के बार-बार दह
ु ाई दे ने पर
क ठह रये वामी वदरु वामी वदरु
यह म हूँ आपका सेवक कंु तीनंदन यु धि ठर
वे नह ं ठठकते
न न ल खत म से नदशानुसार सबसे उ चत वक प का चयन क िजए ।
[42] का यांश के क व व क वता का नाम है –
[क] व णु खरे वारा र चत स य [ख] व णु खरे वारा र चत एक कम
[ग] रघुवीर सहाय वारा र चत स य [घ] व णु खरे वारा र चत कंु तीनंदन यु धि ठर
[43] स य क अनुभू त के लए ........क आव यकता है ।
[क] वातालाप [ख] ढ संक प
[ग] ईमानदार [घ] उपरो त सभी
।44] क वता म स य के अ वेषक ................ह ।
[क] वदरु [ख] यु धि ठर
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[ग ] ‘क’ व ‘ख’ दोन [घ] उपरो त म से कोई नह ं
[45] इस क वता म मनु य के मन क उलझन व वं व को अ भ य त कया गया है ।
[क] सह [ख] गलत
[ग] कुछ कहा नह कहा जा सकता [घ] ‘ख’ व ‘ग’ दोन
[46] यह ......................क वता है ।
[क] छ दमु त [ख] छं दब
[ग] तुकांत [घ] उपरो त सभी
V. न न ल खत प ठत ग यांश पर आधा रत दए गए पाँच न के सह उ तर वाले वक प
चु नए- 1x5=5
संवाद पहुँचाने का काम सभी नह ं कर सकते। आदमी भगवान के घर से संव दया बनकर आता है ।
संवाद के येक श द को याद रखना, िजस सुर और वर म संवाद सुनाया गया है , ठ क उसी ढं ग
से जाकर सुनाना सहज काम नह ं। गाँव के लोग क गलत धारणा है क नठ ला, कामचोर और
पेटू आदमी ह संव दया का काम करता है । ना आगे नाथ, न पीछे पगहा। बना मजदरू लए ह जो
गाँव-गाँव संवाद पहुंचावे, उसको और या कहगे?........औरत का गुलाम। जरा- सी मीठ बोल
सुनकर ह नशे म आ जाए, ऐसे मद को भी भला मद कहगे ?
[47]फणी वरनाथ रे णु को कहा जाता है -
[क] आ मा का श पी [ख]आंच लक कथाकार
[ग] ग तशील वचारधारा समथक [घ] उपरो त सभी
[48]संव दया का यि त व कैसा होता है?
[क] संव दया तभाशाल होते है [ख] संव दया पेटू आदमी होते ह
[ग] संव दया कामचोर होते है [घ]गुणी नह होते
[49] “न आगे नाथ ,न पीछे पगहा” का अथ न न म से या है ?
[क] सबका नाथ होना [ख]कोई िज मेदार न होना
[ग]आगे पीछे घूमने वाला [घ] िज मेदार यि त
[50] 'संव दया' पाठ म संव दया का या नाम है ?
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[क] हरगो वंद [ख] हरगो बन
[ग] गो बंद [घ] उपरो त म से कोई नह
[51] संव दया बनने के लए अ भनय व संवाद याद रखने जैसे गुण होना वांछनीय है । यह कथन
.........है ।
[क] सह [ख] ग़लत
[ग] उपरो त म से कोई नह ं [घ]अस य
VI. न न ल खत छह भाग म से क ह ं चार न के सह उ तर वाले वक प चु नए- 1x4=4
[52] ेमघन क छाया म ृ त पाठ -------- वधा म र चत है
[क] जीवनी [ख] सं मरण
[ग] रे खा च [घ] आ मकथा
[53] रामच शु ल क भारतद ु जी के मकान के नीचे कससे भट हुई?
[क] पं डत ब नाथ गौड़ [ख] पं डत केदारनाथ पाठक
[ग] पं डत उमाशंकर ववेद [घ] भारतद ु ह र चं
[54] ‘घड़ी के पुज़’ लघु नब ध का मूल तपा य ....... है -
[क] घड़ी के पुज़ के बारे म बताना
[ख] धम के बारे म समझाना
[ग] धम के उपदे शक क नंदा करना
[घ] धम के रह य को जानने पर धम उपदे शक वारा लगाए गए तब ध को तुत करना।
[55] बालक वारा ‘ल डू क पुकार’ सुनकर लेखक को कैसी अनुभू त हुई ?
[क] जी वत व ृ के हरे प त का मधुर ममर
[ख] काठ क अलमार क खड़खड़ाहट
[ग] बहते हुए झरने का मधुर संगीत
[घ] ‘क’ व ‘ग’ द नो
[56] 'ढे ले चन
ु लो' लघु नब ध म स चा ेमी कस पेट को चुनता है ?
[क] लोहे क [ख] सोने क चाँद क
[ग] चाँद क [घ] लकड़ी क
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[57] अंध व वासी मा यताओं पर कस नब ध म चोट क गई है ?
[क] ढे ले चन
ु लो [ख] बालक बच गया
[ग] घड़ी के पुज़ [घ] गौशाला क म ी
VII. न न ल खत पाँच भाग म से क ह ं तीन न के सह उ तर वाले वक प चु नए- 1x3=3
[58] प संह शैला के लए कौन से फूल लाता था ?
[क] बु ं स [ख] हर संगार
[ग] कुमुद [घ] गुलाब
[59] प संह 'पहाड़ के रोएँ' क ह कहता था ?
[क] च ान को [ख] दे वदार के व ृ को
[ग] प य को [घ] चीड़ के व ृ को
[60]‘सरू दास क झोपड़ी’ पाठ म टे नी कौन मारता था?
[क] जगधर [ख] मठुआ
[ग] भैर [घ] सूरदास
[61] शहर जीवन क दखावट और बनावट को कौन- सी कहानी दशाती है?
[क] सूरदास क झोपड़ी [ख] आरोहण
[ग] संव दया [घ] उपरो त सभी
[62] "चू हा ठं डा कया होता ,तो द ु मन का कलेजा ठं डा कैसे होता" ।यह कथन कसका है ?
[क] जगधर [ख] बजरं गी
[ग] नायकराम [घ] सभ
ु ागी