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Marking Scheme for Social Science (2025-26)
Sample Paper Class 9th
1. A
2. B
3. B
4. D
5. A
6. C
7. D
8. A
9. B
10. C
11. B
12. A
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13. तीसरे भाग में
14. 1960 के दशक में
15. प्राथममक
16. सकल घरे लू उत्पाद
17. पंजाब
18. 2004
19. D
20. A
21. बंगाल के राष्ट्रवामदय ं ने बंगाल मवभाजन
का घ र मवर ध मकया। उन् न
ं े बंग- भंग क
अपना अपमान समझा तथा माना मक उनके
साथ बडा ध खा हुआ है। राष्ट्रवामदय ं द्वारा
बंगाल मवभाजन क पूवव मनय मजत घमणवत
कायव कहा गया। बंगाल मवभाजन के
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पररणाम स्वरुप बंग- भंग मवर धी आं द लन
आरं भ हुआ।
22. i) राष्ट्र प्रेम की भावना का मवकास
करना।
ii) सांप्रदामयकता की भावना क समाप्त
करके अनेकता में एकता स्थामपत करना ।
iii) स्वदे शी मशक्षा द्वारा राष्ट्रीयता का प्रचार
करना।
iv) ग्रामीण क्षेत्र में राष्ट्रवादी जागरूकता पैदा
करना।
23. ये मसंचाई के मलए जल प्रदान करती हैं।
पीने य ग्य जल प्राप्त ह ता है। नौका
पररवहन का अच्छा साधन है ।झील ं में
मछमलयां पाली जाती हैं। पयवटन क बढावा
ममलता है।
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24. तममलनाडु में आगे बढते हुए मानसून की
ऋतु में बहुत कम वर्ाव ह ती है। वहां
अमधकतर वर्ाव उत्तरी पूवी मानसून द्वारा
शीतकाल में ह ती है। ये पवने य ं त शुष्क
ह ती हैं परं तु खाडी बंगाल के ऊपर से
गुजरते समय ये पयावप्त आद्रता ग्रहण कर
लेती हैं और पूवी घाट से टकराकर
तममलनाडु के तट पर काफी वर्ाव करती हैं।
इस प्रकार तममलनाडु में शीतकाल में
अमधक वर्ाव ह ती है।
25. ल कतांमत्रक शासन प्रणाली के मलए
संमवधान का ह ना अमनवायव है। संमवधान
सरकार की शक्ति तथा सत्ता का स्र त है।
संमवधान सरकार के मवमभन्न अंग ं के
पारस्पररक संबंध मनधावररत करता है।
संमवधान सरकार और नागररक ं के संबंध ं
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क मनधावररत करता है। संमवधान सरकार
की शक्तिय ं पर सीमाएं लगाता है।
26. भारतीय संमवधान में नागररक ं क 6
मौमलक अमधकार मदए गए हैं ज
मनम्नमलक्तखत हैं।
समानता का अमधकार, स्वतंत्रता का
अमधकार, श र्ण के मवरुद्ध अमधकार, धाममवक
स्वतंत्रता का अमधकार, सांस्कृमतक और
शैक्षमणक अमधकार, संवैधामनक उपाय ं का
अमधकार।
27. स्वास्थ्य का अथव केवल जीवन जीना नही ं
है। इसमें केवल व्यक्ति की भौमतक स्वास्थ्य
ही शाममल नही ं ह ता परं तु उसका मानमसक
आमथवक व सामामजक कल्याण भी शाममल
ह ता है। अच्छा स्वास्थ्य श्रममक ं की
कुशलता क बढाता है। अच्छा स्वास्थ्य
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श्रममक ं की ज्ञान अजवन क्षमता क बढाता
है।
28. राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कायवक्रम
14 नवंबर 2004 क पूरक श्रम र जगार के
सजवन क तीव्र करने के उद्दे श्य से दे श के
150 सवावमधक मपछडे मजल ं में शुरू मकया
गया था। यह कायवक्रम उन सभी ग्रामीण
गरीब ं के मलए है मजन्ें वेतन र जगार की
आवश्यकता है और ज एक कुशल
शारीररक श्रम करने के इच्छु क हैं। इस
कायवक्रम के द्वारा केंद्र सरकार के माध्यम
से सभी राज् ं क मनशुल्क अनाज उपलब्ध
करवाया जाता है।
29. 1 मुक्तिम लीग
29.2 महंदुओ ं के मवरुद्ध 1946 में प्रत्यक्ष
कायववाही मदवस की शुरुआत मुक्तिम लीग
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के द्वारा की गई। मुक्तिम लीग के इस
कदम से पूरे दे श में महंदू- मुसलमान ं के
बीच सांप्रदामयक दं गे आरं भ ह गए।
29.3 कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय
आं द लन ं से दूरी बना ली। वेवल एवं
कैमबनेट य जना क असफल कर मदया।
30. 1 प्रमतवगव मकल मीटर क्षेत्र में रहने वाले
व्यक्तिय ं की संख्या क उस क्षेत्र का
जनसंख्या घनत्व कहते हैं।
30.2 समतल मैदान, उपजाऊ ममट्टी, पयावप्त
मात्रा में वर्ाव का ह ना
30.3 हालांमक राजस्थान क्षेत्रफल की दृमष्ट् से
भारत का सबसे बडा राज् है परं तु परं तु
यहां जनसंख्या घनत्व कम है क् मं क
राजस्थान एक शुष्क क्षेत्र है मजसमें पयावप्त
मात्रा में वर्ाव नही ं ह ती।
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31.1 जनमत संग्रह ऐसी प्रमक्रया है मजसमें
मकसी मवशेर् प्रस्ताव या मुद्दे पर जनता से
सीधे राय मांगी जाती है। यह एक प्रकार
का प्रत्यक्ष मतदान है मजसमें मतदाता अपने
प्रमतमनमधय ं के बजाय मकसी मवमशष्ट् नीमत
या कानून पर व ट करते हैं।
31.2 सेना के द्वारा ल कतांमत्रक सरकार
क हटाकर अपनी सत्ता स्थामपत करना
तख्ता पलट कहलाता है।
31.3 अगस्त 2002 में लीगल फ्रेमवकव ऑडव र
के जररए पामकस्तान के संमवधान क बदल
डाला गया। इस आडव र के अनुसार राष्ट्रपमत
,राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबली क भंग कर
सकता है।
32.1 प्राथममक क्षेत्रक
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32.2 पालमपुर में मबजली आने के कारण
मसंचाई की पद्धमत बदल गई अब मकसान
कंु ओ से रहट द्वारा पानी मनकालने की
बजाए नलकूप ं से ज्ादा प्रभावकारी ढं ग से
अमधक क्षेत्र में मसंचाई कर सकते थे।
32.3 एक वर्व में मकसी भूमम पर एक से
ज्ादा फसल पैदा करने क बहूमवध फसल
प्रणाली कहते हैं।
33. 19वी ं सदी के आरं भ से ही भारत में
समाचार पत्र प्रकामशत ह ने लगे। राजा
रामम हन राय द्वारा प्रकामशत बंगदूत, संवाद
कौमुदी, प्रारं मभक समाचार पत्र थे बाद में
और भी अनेक समाचार पत्र जैसे बंगाली,
अमृत बाजार पमत्रका, इं दु प्रकाश, मराठा,
केसरी, द महंदू, क महनूर, प्रताप, यंग इं मडया
आमद प्रकामशत हुए। 1877 ई० तक भारतीय
भार्ाओं में छपने वाले समाचार पत्र ं की
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संख्या 169 तक पहुंच गई थी। इन समाचार
पत्र ं में अंग्रेजी सरकार की आल चना
प्रकामशत ह ने लगी तथा साथ ही इन
समाचार पत्र ं ने ल कतांमत्रक मवचार ं व
स्वतंत्रता की भावना क जनता में ल कमप्रय
बनाया। कालांतर में ये आधुमनक भारतीय
राष्ट्रीयता का दपवण व जनता क मशमक्षत
करने का माध्यम भी बन गए।
34. सदाबहार वन- ये वन उन क्षेत्र ं में पाए
जाते हैं जहां 200 सेंटीमीटर से अमधक
वामर्वक वर्ाव ह ती है तथा शुष्क ऋतु छ टी
ह ती है। ये वन सदा हररत ह ते हैं क् मं क
इन वन ं के सभी वृक्ष एक साथ अपनी
पमत्तयां नही ं मगराते हैं। इन वन ं में मुख्य
रूप से रबड, र जवुड, मह गनी आमद वृक्ष
ममलते हैं।
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पणवपामत वन - ये वन मानसूनी वन ह ते
हैं। ये उन क्षेत्र ं में ममलते हैं जहां 100 से
200 सेंटीमीटर के बीच वामर्वक वर्ाव ह ती
है। ये वृक्ष ग्रीष्म ऋतु में 6 से 8 सप्ताह के
मलए अपनी पमत्तयां मगरा दे ते हैं। इन वन ं
के मुख्य वृक्ष सागौन ,साल, चंदन, शीशम
आमद हैं।
35. भारत में चुनाव ं में धन का बहुत अमधक
खचव ह ता है मजसे दे खकर साधारण व्यक्ति
चुनाव लडने की कल्पना भी नही ं कर
सकता। इससे राजनीमतक भ्रष्ट्ाचार क
बढावा ममल रहा है। भारतीय मनवावचन
प्रणाली का एक गंभीर द र् यह है मक
इसकी त्रुमटय ं का लाभ उठाकर अपराधी भी
चुनाव लडने लगे हैं और मवधान मंडल ं के
सदस्यता प्राप्त कर रहे हैं। भारत में चुनाव
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के दौरान जामत व धमव के नाम पर भी व ट
मांगे जाते हैं, ज की उमचत नही ं है।
36. बफर स्टॉक बनाए जाने का मुख्य उद्दे श्य
कमी वाले राज् ं तथा समाज के मनधवन वगव
के ल ग ं क बाजार कीमत से कम कीमत
पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। भारत
सरकार का बफर स्टॉक बनाए जाने का
अन्य मुख्य उद्दे श्य आपदा या खराब मौसम
के कारण ह ने वाली अनाज की कमी क
दूर करना है। बफर स्टॉक बनाए जाने का
एक अन्य मुख्य उद्दे श्य मकसान ं क बाजार
के उतार -चढाव से बचाना है। इसके
अंतगवत सरकार द्वारा जारी की गई कीमतें
मकसान ं क दी जाती हैं ,मजससे मकसान
श र्ण से बच जाते हैं।
37. भारत छ ड आं द लन क शुरू मकए
जाने का मुख्य कारण मक्रप्स ममशन की
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असफलता व जापान की बढती हुई शक्ति
थी। भारतीय ं की यह स च थी मक वे स्वयं
जापान का मुकाबला करें । इसमलए वे
जापान के आक्रमण से पहले मिमटश शासन
से मुक्ति पाना चाहते थे। उन् न
ं े भारत
छ ड आं द लन का प्रस्ताव पास मकया।
गांधी जी ने अंग्रेज ं भारत छ ड का नारा
मदया। मिमटश सरकार के व्यवहार से तंग
आकर कांग्रेस ने 8 अगस्त 1942 क मुंबई
अमधवेशन में भारत छ ड आं द लन का
प्रस्ताव पास मकया। उन् न
ं े यह मांग की मक
अंग्रेज ं क तुरंत मबना शतव भारत छ ड दे ना
चामहए। भारत छ ड आं द लन के प्रस्ताव के
पास ह ने के अगले मदन ही कांग्रेस के
मुख्य नेताओं जैसे गांधी जी, जवाहरलाल
नेहरू, सरदार पटे ल आमद क मगरफ्तार कर
मलया गया। इस खबर से भारतीय ं में र र्
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की भावना व्याप्त ह गई। मुंबई, उत्तर प्रदे श,
मबहार, बंगाल, असम, उत्तर पमिमी सीमा
प्रांत,के ल ग मिमटश शासन क उखाड
फेंकने के मलए तैयार ह गए ।गांधी जी ने
कर या मर का नारा मदया। इस राष्ट्रव्यापी
आं द लन में वकील ,ं अध्यापक ,ं व्यापाररय ,ं
डॉक्टर ं ,पत्रकार ,ं मज़दूर ं मवद्याथीय ं ने बढ-
चढकर भाग मलया। मवमभन्न नगर ं में सभाएं
की गई एवं जुलूस मनकाले गए। ल ग ं ने
महंसा का उत्तर महंसा से मदया। कई
सरकारी भवन व पुमलस थान ं क जला
मदया गया। तार की लाइन काट दी गई।
अंग्रेजी सरकार ने आं द लन क कुचलने के
मलए दमन की नीमत का सहारा मलया।
सरकार ने शांमतपूणव जुलूस ं पर ग मलयां
चलाई व लाठी चाजव मकया। एक लाख से
अमधक क्तिय ं -पुरुर् ं क बंदी बना मलया
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गया। सरकार की दमन नीमत के कारण
आं द लन काफी मशमथल पड चुका था। गांधी
जी क ररहा कर मदया गया और भारत
छ ड आं द लन धीरे -धीरे समाप्त ह गया।
यधमप यह आं द लन भारत से मवदे मशय ं क
मनकालने तथा दे श क स्वतंत्र कराने में
असफल रहा तथामप यह आं द लन मजसे
अगस्त क्रांमत के नाम से भी जाना जाता है ,
एक महान घटना थी।
अथवा
सरकार ने 1927 ईस्वी में साइमन कमीशन
की मनयुक्ति कर भारतीय प्रशासन की जांच
तथा उसमें आवश्यक सुधार की मसफाररश
करने के मलए सर साइमन की अध्यक्षता में
एक कमीशन की मनयुक्ति की गई। सरकार
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का यह कहना था मक सरकार भारतीय
प्रशासन में सुधार लाना चाहती है। परं तु
इस कमीशन के संबंध में सबसे अनुमचत
बात यह थी मक कमीशन के सभी सदस्य
अंग्रेज थे, मजन्ें भारतीय समस्याओं क
थ डा सा भी अनुभव नही ं था। ऐसे में
भारतीय ं ने कमीशन का मवर ध करने का
मनिय मकया। सभी ने इसका बमहष्कार
मकया। लाहौर अमधवेशन 1929 ईस्वी में
कांग्रेस ने पूणव स्वतंत्रता का प्रस्ताव पास
करके अपना लक्ष्य पूणव स्वतंत्रता रखा। 26
जनवरी 1930 ई क दे शभर में पूणव स्वतंत्रता
मदवस मनाया गया तथा गांधी जी ने
समवनय अवज्ञा आं द लन की य जना बनानी
आरं भ कर दी। 12 माचव 1930 ई क
महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा से समवनय
अवज्ञा आं द लन का आरं भ मकया। आरं भ में
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गांधी जी के साथ 78 अनुयामयय ं ने भाग
मलया परं तु धीरे -धीरे मागव में सैकड ल ग ं
ने उन्ें अपना समथवन मदया। 24 मदन के
पिात 6 अप्रैल 1930 ई क महात्मा गांधी
दांडी के समुद्र तट पर पहुंचे, वही ं उन् न
ं े
समुद्र के पानी से नमक तैयार करके नमक
कानून का उल्लंघन मकया। उनका यह कायव
इस बात का प्रतीक था मक सारे दे श में
समवनय अवज्ञा आं द लन आरं भ मकया जाए।
समवनय अवज्ञा आं द लन के तहत गांधीजी ने
दे श के ल ग ं से आवाह्न मकया मक दे श के
सभी ल ग नमक बनाएं । मवद्याथी सरकारी
स्कूल ं का बमहष्कार करें ।शराब की दुकान ं
के समक्ष धरने मदए जाएं ।स्वदे शी का
इस्तेमाल करके मवदे शी का बमहष्कार मकया
जाए ।सरकार का मकसी प्रकार का सहय ग
न मकया जाए ।समवनय अवज्ञा आं द लन
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तीव्रता से सारे दे श में फैल गया। जनता ने
इसके प्रमत बहुत उत्साह मदखाया। प्रत्येक
संभव स्थान पर नमक बनाया गया तथा
कानून का उल्लंघन मकया गया।
38. भारत के प्रमुख भू आकृमतक मवभाग
मनम्नमलक्तखत प्रकार से हैं :-
i) महमालय पववत
ii) उत्तरीमैदान
iii) प्रायद्वीपीय पठार
iv) तटीय मैदान
v) द्वीप समूह
महमालय तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच
लक्षण ं में अंतर:-
i) बनावट- महमालय तल छठी शैल ं से बने
हैं और यह संसार के सबसे युवा पववत हैं।
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इनकी ऊंचाई भी सबसे अमधक है। इनकी
औसत ऊंचाई 5100 मीटर है। इसके
मवपरीत प्रायद्वीपीय पठार का जन्म आज से
50 कर ड वर्व पूवव हुआ था। यह आग्नेय
तथा कायंतररत शैल ं से बने हैं। इस पठार
की औसत ऊंचाई 600 से 900 मीटर तक
है।
ii) मवस्तार- महमालय पववत जम्मू कश्मीर से
अरुणाचल प्रदे श तक फैला हुआ है। इसके
पूवव में पूवी श्रेमणयां और पमिम में पमिमी
श्रेमणयां है। पूवी श्रेमणय ं में खासी, गार ं
,जयंमतयां तथा पमिमी श्रेमणय ं में महं दू कुश
तथा मकरथर श्रेमणयां पाई जाती हैं। महमालय
के तीन भाग हैं -महान महमालय अथवा
महमाद्री, मध्य महमालय अथवा महमाचल तथा
बाह्य महमालय अथवा मशवामलक। इसके
मवपरीत प्रायद्वीपीय पठार के द भाग हैं -
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मालवा का पठार तथा दक्कन का पठार
।यह अरावली पववत से लेकर मशलांग के
पठार तक तथा दमक्षण से कन्याकुमारी तक
फैला हुआ है इसमें पाई जाने वाली प्रमुख
पववत श्रेमणयां है अरावली पववत श्रेणी
मवंध्याचल पववत श्रेणी तथा सतपुडा पववत
श्रेणी।
iii) नमदयां - महमालय से मनकलने वाली
नमदयां बफीले पववत ं से मनकलने के कारण
सारा साल बहती हैं जबमक प्रायद्वीपीय पठार
की नमदयां बरसाती नमदयां हैं शुष्क ऋतु में
इनमें पानी का अभाव ह जाता है ।
iv) पववत मशखर- महमालय में माउं ट एवरे स्ट,
नंदा दे वी जैसे सवोच्च मशखर पाए जाते हैं।
उनकी तुलना में प्रायद्वीपीय पठार के मशखर
बहुत ही कम ऊंचे हैं।
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अथवा
भारत के उत्तरी मैदान ं क ऐसे समतल
मैदान माना जाता है मजनमें उच्चावच की
क ई मवमवधता नही ं है। परं तु यह बात सही
नही ं है, इनकी भौग मलक आकृमतय ं में भी
मवमवधता पाई जाती है। प्राकृमतक मभन्नता के
आधार पर उतरी मैदान ं क मनम्नमलक्तखत
चार भाग ं में बांटा जाता है :-
भाबर- महमालय की नमदयां पववत ं से
नीचे उतरते समय मशवामलक की ढाल पर 8
से 16 मकल मीटर की चौडी पट्टी में गुमटका
का मनक्षेपण करती हैं। इसे भाबर के नाम
से जाना जाता है। सभी सररताएं इस भाबर
पट्टी में समा जाती हैं।
तराई- भाबर पट्टी के दमक्षण में से
सररताएं एवं नमदयां पुनः मनकल आती हैं
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और एक दलदली क्षेत्र का मनमावण करती
हैं, मजसे तराई कहा जाता है। बंगाल अथवा
भांगर- उत्तरी मैदान का सबसे बडा भाग
पुराने जल ढ का बना है। यह नमदय ं के
बाढ वाले मैदान के ऊपर क्तस्थत है। इस
भाग क बांगर के नाम से जाना जाता है।
इस क्षेत्र की मृदा में चुनेदार मनक्षेप पाए
जाते हैं, मजसे स्थानीय भार्ा में कंकर कहते
हैं।
खादर- बाढ वाले मैदान ं के नए तथा
युवा मनक्षेप ं क खादर कहा जाता है इनका
लगभग हर साल पुनमनवमावण ह ता है।
इसमलए ये बहुत ही उपजाऊ हैं तथा गहन
खेती के मलए आदशव हैं।
39. संसद की शक्तियां तथा कायव मनम्न
प्रकार से हैं:-
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i) मवधायी शक्तियां
ii) मवत्तीय शक्तियां
iii) कायवपामलका पर मनयंत्रण
iv राष्ट्रीय नीमतय ं क मनधावररत करना
v) न्यामयक शक्तियां
vi) संवैधामनक शक्तियां
vi) साववजमनक मामल ं पर वाद- मववाद
viii)मनवावचन संबंधी अमधकार
अथवा
प्रधानमंत्री के कायव तथा शक्तियां
मनम्नमलक्तखत प्रकार से हैं :-
i) मंमत्रमंडल का नेता
ii) मंमत्रमंडल का मनमावण
iii) मवभाग ं का मवभाजन
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iv) मंमत्रमंडल का सभापमत
v) मंमत्रय ं की पदच्युमत
vi) प्रधानमंत्री का समन्वयकारी रूप
vii) राष्ट्रपमत का मुख्य सलाहकार
viii) संसद का नेता
ix) ल कसभा क भंग करने का अमधकार
x) मनयुक्तियां
xi) संकटकालीन शक्तियां
40. मानमचत्र कायव