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Class 12 Solved Sample Paper 2023
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अध्ययन प्रश्न – 2022-23
विषय – व िंदी (आधार)
विषय कोड - 302
कक्षा - बार िीं
प्रारूप
ब वु िकल्पीय प्रश्न
खिंड खिंड का नाम स्मरण/ज्ञान समझ-बझू अनुप्रयोग कुल प्रश्न
(Mechanical/ (Understanding) (Application)
Recall)
क अपठित गद्यश
ां - 8 2 10
क अपठित पद्यांश 2 6 2 10
क अठिव्यठि और मयध्यम 1 4 - 5
क गद् और पद् खडां - 7 3 10
क पूरक पयि्यपुस्तक 3 6 1 10
कुल 6 31 8 45
िणणनात्मक प्रश्न
ख रचनयत्मक लेखन - - 1 1
ख अठिव्यठि और मयध्यम 1 2 3 6
ख पयि्यपुस्तक 3 7 2 12
कुल 4 9 6 19
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अध्ययन प्रश्न – 2022-23
विषय – व िंदी (आधार)
विषय कोड – 302
कक्षा - बार िीं
वनधाण ररत समय : 3 घटिं े पूणाां क : 80
सामान्य वनदे श –
1. इस प्रश्नपत्र में दो खडां हैं – खडां ‘अ’ और ‘ब’। खडां ‘अ’ में वस्तुपरक/बहठु वकल्पीय और खडां ‘ब’ में
वस्तुठनष्ठ/वर्णनयत्मक प्रश्न हैं।
2. खडां ‘अ’ में कुल 45 वस्तुपरक प्रश्न पछ ू े गए हैं, ठिनमें से के वल 40 प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
3. खांड ‘ब’ में कुल 7 प्रश्न हैं। ठनदेशयनुसयर ठवकल्पों कय ध्ययन रखते हुए सिी प्रश्नों के उत्तर देनय अठनवययण
है।
4. प्रश्नपत्र के दोनों खांडों में प्रश्नों की कुल सांख्यय 13 है और सिी प्रश्न अठनवययण हैं।
5. प्रश्नों के उत्तर ठलखते समय क्रम सांख्यय अवश्य ठलखें। सिी प्रश्नों के उत्तर क्रमयनुसयर ठलखें।
खिंड ‘अ’ िस्तुपरक प्रश्न 40 अिंक
प्रश्न 1. वनम्नवलवखत गद्ािंश को पढ़कर इस पर आधाररत प्रश्नों के उत्तर दीविए। (10X1=10)
ठशक्षय कय अर्ण बयलकों में ऐसी क्षमतय उत्पन्न करनय है ठक वे समयि की परांपरयओ,ां रीठत-ररवयजों और अांधठवश्वयसों
के सयर्-सयर् अपने मन की गठतठवठधयों को ठनष्पक्ष व स्पष्ट रूप से देख सकें । इससे उनकी दृठष्ट स्पष्ट होगी और वे
सांस्कयरों और आदशों की ठमली-िुली सांस्कृठत से स्वतांत्र होकर मौठलक पररवतण न के द्वयरय नवीन सांसयर की रचनय में
सहययतय कर सकें गे । मौठलक पररवतण न के ठलए ठशक्षय की िूठमकय के ठवषय में कृष्र्मूठतण िी ने कहय है , "वयस्तठवक
ठशक्षय आपको मयत्र सस्ां कयरयि
ु होने में सहययतय नहीं करती है बठल्क वह आपको प्रठतठदन िीवन की सांपर्ू ण प्रठक्रयय
को समझने में सहययतय करती है, ठिससे आप ठनठवणघ्न आगे कय मयगण प्रशस्त कर सकें और नवीन ठवश्व कय ठनमयणर्
कर सकें । एक ऐसय ठवश्व िो वतण मयन ठवश्व से एकदम पर्ृ क हो। ठशक्षय कय कययण परांपरय और आदत को सही अर्ों में
ियननय और अन्यर्य कय वध करनय है। अतीत कय सयतत्य और आदत सिगतय से उत्पन्न नहीं होते । सिगतय
रूठ़िवयदी आदतों को दरू कर देती है। ठशक्षय कय उद्देश्य परांपरयओ ां और आदतों से िकडे िीवन को मुि करवयनय
तर्य ठवशयल िीवनधयरय से एकयकयर होकर अनांत िीवन कय अनुिव करवयने में हमयरी सहययतय करने कय होनय
चयठहए।" [1]
ठशक्षय कय कययण बयलक को सीखने की कलय से अवगत करवयनय है। ठशक्षय कय वयस्तठवक कययण यह नहीं होतय ठक
वह व्यठि को क्लकण यय िि यय रयिनेतय बनय दे बठल्क उसकय कययण है व्यठि को ििणर समयि के सांपूर्ण ढयाँचे को
समझने में और स्वतांत्रतय के सयर् अग्रसर होने में सहयोग करे , ठिससे वे इस समयि से स्वतांत्र हो सकें और नवीन
सांसयर कय ठनमयणर् कर सकें । एक ऐसय सांसयर िो अठधकयर, िठि और प्रठतष्ठय पर आधयररत न हो। [2]
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ठशक्षय कय कययण न के वल ठवद्यर्ी को ठवठिन्न क्षेत्रों में मयनव के महयन प्रयत्नों से प्रयप्त ठवशयल ज्ञयन के िांडयर की
ियनकयरी से अवगत करवयनय है बठल्क उसके मन को पयरांपररक दबयव से मुि करवयनय है, ठिससे वह आठवष्कयर
करने और अनसु धां यन करने में समर्ण हो सके अन्यर्य हमयरय मन मयत्र तकनीकी ज्ञयन से बोठझल होकर िस-कय-तस
बनय रहेगय। [3]
स्रोत (संपादित) : कृष्णमूदति और दिक्षा - https://sarkariguider.com/j-krshnaamoorti-ke-anusaar-
shiksha-ke-uddeshy/
(1) गद्ािंश के अनुसार वशक्षा का प्रमुख उद्देश्य _____________ का सामर्थयण विकवसत करना ै।
क. बयधयरठहत िीठवकोपयिणन
ख. पूवयणग्रह से रठहत ठनरीक्षर् और ठवश्ले षर्
ग. िठि और सम्मयन के आधयर पर िीवनययपन
घ. पयरांपररक पद्धठतयों के अवलोकन और समर्णन
(2) गद्ािंश में ले खक वकस प्रकार के निीन सिंसार की कल्पना कर र ा ै?
क. आदशण और सांस्कयरों से ठनठमणत
ख. अतीत की ठनरांतरतय और आदतों से ठनठमणत
ग. मौठलक सोच और दृठष्टकोर् पर आधयररत
घ. प्रयचीन अवधयरर्यओ ां और मूल्यों पर आधयररत
(3) तकनीकी ज्ञान से ले खक का क्या अविप्राय ै?
क. सयमयठिक ढयाँचे की ििणरतय कय ज्ञयन
ख. ियनकयररयों के स्मरर् कय ज्ञयन
ग. सभ्यतय और सांस्कृठत कय ज्ञयन
घ. मयनवीय मूल्यों कय ज्ञयन
(4) दूसरे अनुच्छे द में मुख्य रूप से क्या बताया गया ै?
क. सयमयठिक बांधनों को चुनौती देनय
ख. नवीन अवधयरर्यओ ां को चुनौती देनय
ग. पयरांपररक पद्धठतयों कय ठवकयस करनय
घ. िौगोठलक सीमयओ ां कय ठवकयस करनय
(5) प ले अनुच्छे द में बताया गया ै वक बाधारव त विकास _____________ ोने पर सिंिि ै।
क. शरीर कय ठवकयस
ख. समझ कय ठवकयस
ग. समयि कय ठवकयस
घ. तकनीक कय ठवकयस
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(6) परिंपराओ िं और आदतों से िकडे िीिन में वकनका विकास ोता ै?
क. अस्पष्टतय और रूठ़िवयठदतय
ख. मौठलकतय और सिगतय
ग. अठधकयर और स्वतांत्रतय
घ. अनिु व और तकनीक
(7) मूल अिधारणाओ िं के प्रवत दृविकोण के पररितणन से __________________ का विकास ोता ै।
क. समयि में धयठमणकतय और सयस्ां कयररकतय
ख. समयि में अतीत की परांपरयओ ां और आदशों
ग. सयमयठिक ठक्रययकलयपों के ठनष्पक्ष और स्पष्ट ठनरीक्षर्
घ. धयठमणकतय के आधयर पर सयमयठिक ठक्रययकलयपों के आकलन
(8) विद्ार्थी आविष्कार और अनुसिंधान कब कर पाता ै?
क. िब वह तकनीकी ज्ञयन में पयरांगत हो ियतय है।
ख. िब वह स्वतांत्रतय और ठनष्पक्षतय से मुि हो ियतय है।
ग. िब वह िठि और प्रठतष्ठय दोनों को प्रयप्त कर लेतय है।
घ. िब वह परांपरय, रीठत-ररवयज और अधां ठवश्वयस से मि ु हो पयतय है।
(9) दिक्षा का कार्ि परंपरा और आित को सही अर्थों में जानना और अन्र्र्था का वध करना है।
उपयुणक्त कर्थन में रे खािंवकत िाक्यािंश का स ी िािार्थण प चावनए।
क. के वल परांपरय और आदतों कय समर्णन करनय
ख. अनयवश्यक गठतठवठधयों कय त्ययग करनय
ग. के वल अपने ज्ञयन कय प्रसयर करनय
घ. कुरीठतयों पर गहन ठचांतन करनय
(10) कर्थन (A) और कारण (R) को पढ़कर उवचत विकल्प चुवनए।
कर्थन (A) : दिक्षा का कार्ि दनष्पक्ष और स्पष्ट दृदष्टकोण का दवकास करना है।
कारण (R) : ऐसी दिक्षा ही रचनात्मकता को जन्म िेने में सहार्क होती है।
क. कर्न (A) गलत है ठकांतु कयरर् (R) सही है।
ख. कर्न (A) और कयरर् (R) दोनों ही गलत हैं।
ग. कर्न (A) सही है और कयरर् (R) उसकी सही व्ययख्यय है।
घ. कर्न (A) सही है ठकांतु कयरर् (R) उसकी गलत व्ययख्यय है।
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प्रश्न 2. वनम्नवलवखत कावयािंश को पढ़कर इस पर आधाररत प्रश्नों के उत्तर दीविए। (5X1=5)
िान जगत का प्रकृत धमि है, मनुज व्र्र्थि डरता है,
एक रोज़ तो हमें स्वर्ं सब कुछ िेना पड़ता है।
बचते वही, समर् पर जो सविस्व िान करते हैं,
ऋतु का ज्ञान नहीं दजनको, वे िेकर भी मरते हैं। [1]
वीर कणि, दवक्रमी, िान का अदत अमोघ व्रतधारी,
पाल रहा र्था बहुत काल से एक पुण्र्-प्रण भारी।
रदव-पूजन के समर् सामने जो र्ाचक आता र्था,
मुँहु -माुँगा वह िान कणि से अनार्ास पाता र्था। [2]
र्थी दवश्रुत र्ह बात कणि गुणवान और ज्ञानी हैं,
िीनों के अवलम्ब, जगत के सविश्रेष्ठ िानी हैं।
जाकर उनसे कहो, पड़ी दजस पर जैसी दवपिा हो,
गो, धरती, गज, वादज माुँग लो, जो दजतना भी चाहो। [3]
'नाहीं' सुनी कहाुँ, दकसने, कब, इस िानी के मुख से,
धन की कौन दबसात? प्राण भी िे सकते वह सुख से।
और िान िेने में वे दकतने दवनम्र रहते हैं!
िीन र्ाचकों से भी कै से मधुर वचन कहते हैं। [4]
- रामधारी दसंह 'दिनकर'
स्रोत : ‘रदममरर्थी’ चतुर्थि सगि - रामधारी दसंह दिनकर - https://kavishala.in/sootradhar/ramdhari-singh-
dinkar/rasmirathi-caturtha-sarga
(1) दूसरे पद में कवि ने कणण की प्रवतज्ञा को _________ और __________ बताया ै।
क. अठडग, ओिस्वी
ख. ठवचठलत, स्र्ययी
ग. अठस्र्र, स्खठलत
घ. बठलष्ठ, ठचरस्र्ययी
(2) कवि ने कणण के चररत्ािंकन ेतु _____________ का अिलिंब वलया ै।
क. कर्ोपकर्नों
ख. ठक्रययकलयपों
ग. अठिियषर्ों
घ. उपमयओ ां
(3) उपयुणक्त कावयािंश में कणण के _______________ की प्रवतष्ठा की गई ै।
क. उपेठक्षत िीवन
ख. मयनवीय उदयत्त मूल्यों
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ग. अतीत के स्वठर्णम ठचत्रों
घ. िठवष्य की उज्जज्जवल सांियवनयओ ां
(4) कणण की दानिीरता का उल्ले ख करने से पूिण क्या प्रवतपावदत वकया गया ै?
क. दयन के मठहमयमय आलोक को
ख. पयत्र की मयनठसक अठिरुठच को
ग. िीवन के ियवनयत्मक उद्देश्य को
घ. पयत्र के िीवन के अांतठनणठहत लक्ष्य को
(5) 'और िान िेने में वे दकतने दवनम्र रहते हैं!'
उपयणु क्त पिंवक्त में रे खािंवकत शब्द का प्रयोग वकस सदिं िण में आ
ु ै?
क. ठदवस में ठदयय ियने वयलय दयन बतयने के ठलए
ख. दयन की सांख्यय कय अनुमयन लगयने के ठलए
ग. स्वयियठवक ठवनम्रतय को ठछपयने के ठलए
घ. बहुत ठवनम्र स्वियव को बतयने के ठलए
अर्थिा
वनम्नवलवखत कविता पर आधाररत प्रश्नों के उत्तर दीविए।
ठकसे खोिने ठनकल पडी हो
ियती हो तुम कहयाँ चली,
ढली रांगतों में हो ठकसकी
तुम्हें छल गयय कौन छली? [1]
क्यों ठदन-रयत अधीर बनी-सी
पडी धरय पर रहती हो,
द:ु सह आतप शीत-वयत सब
ठदनों ठकसठलए सहती हो? [2]
किी फै लने लगती हो क्यों
कृश तन किी ठदखयती हो,
अांग-िांग कर-कर क्यों आपे
से बयहर हो ियती हो? [3]
कौन िीतरी पीडयएाँ
लहरें बन ऊपर आती हैं,
क्यों टकरयती ही ठफरती हैं
क्यों कयाँपती ठदखयती हैं? [4]
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बहतु दूर ियनय है तुमको
पडे रयह में रोडे हैं,
हैं सयमने खयइययाँ गहरी
नहीं बखेडे र्ोडे हैं। [5]
पर तुमको अपनी ही धुन है
नहीं ठकसी की सुनती हो,
कयाँटों में िी सदय फूल तुम
अपने मन के चुनती हो। [6]
उषय कय अवलोक वदन
ठकसठलए लयल हो ियती हो,
क्यों टुकडे-टुकडे ठदनकर की
ठकरर्ों को कर पयती हो? [7]
क्यों प्रियत की प्रिय देखकर
उर में उिती है ज्जवयलय,
क्यों समीर के लगे तुम्हयरे
तन पर पडतय है छयलय? [8]
- अर्ोध्र्ा दसंह उपाध्र्ार् 'हररऔध'
स्रोत (संपादित) : सररता - अर्ोध्र्ा दसंह उपाध्र्ार् 'हररऔध' https://rb.gy/r9bu9g
(1) पद सिंख्या छ में नदी की कौन-सी विशे षता दृिवय ै?
क. वैचयररक परतांत्रतय की
ख. मयनठसक दृ़ितय की
ग. आत्मठनिणरतय की
घ. परोपकयररतय की
(2) 'अंग-भंग कर-कर क्र्ों आपे
से बाहर हो जाती हो।।'
उपयुणक्त पिंवक्त के आधार पर नदी की य अिस्र्था वकस ऋतु में ोती ै?
क. ग्रीष्म ऋतु
ख. शरद ऋतु
ग. शीत ऋतु
घ. वषयण ऋतु
(3) 'बहतु िरू जाना है तुमको
पड़े राह में रोड़े हैं,
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हैं सामने खाइर्ाुँ गहरी
नहीं बखेड़े र्थोड़े हैं।'
उपयणु क्त पिंवक्तयों में िवणणत नदी की यात्ा को मानि-िीिन से िोडने पर सबसे उवचत विकल्प कौन-सा
ोगा?
क. िीवन की ययत्रय में समस्ययएाँ कल्पनय मयत्र होती हैं।
ख. िीवन की ययत्रय में पहयडी खयइयों की ही समस्ययएाँ होती हैं।
ग. िीवन की ययत्रय में अनेक प्रकयर की समस्ययएाँ और बयधयएाँ आती हैं।
घ. िीवन की ययत्रय में हमेशय बखेडय खडय करने की आवश्यकतयएाँ होती हैं।
(4) कविता के अनुसार नदी अपने अिंतमण न की वयर्था को ________ के रूप में वयक्त करती ै।
क. खयइयों
ख. ज्जवयलय
ग. लहरों
घ. कयाँटों
(5) उपयुणक्त कविता के अनुसार स ी विकल्प प चावनए।
क. इस कठवतय में प्रयकृठतक वैिव को व्यांग्ययर्ण के रूप में प्रस्तुत ठकयय गयय है।
ख. इस कठवतय में नदी की चांचलतय द्वयरय मयनव की चपलतय को ठवश्ले ठषत ठकयय गयय है।
ग. इस कठवतय में िीवन की कल्पनयओ ां और यर्यर्ण के ठवरोधयियस को व्यि ठकयय गयय है।
घ. इस कठवतय में नदी के यर्यर्ण द्वयरय मयनव िीवन में ठनठहत गू़ियर्ण को सांप्रेठषत ठकयय गयय है।
प्रश्न 3. वनदे शानुसार वनम्नवलवखत प्रश्नों के उत्तर दीविए। (5X1=5)
(1) वनम्नवलवखत में से कौन-सी मुवित माध्यम की विशे षता न ीं ै?
क. ठचांतन, ठवचयर और ठवश्ले षर् कय मयध्यम होनय
ख. िनसांचयर कय सबसे पुरयनय मयध्यम होनय
ग. ठलठखत ियषय कय ठवस्तयर होनय
घ. पयिक कय ठनरक्षर होनय
(2) साक्षात्कार के वलए वनम्नवलवखत में से क्या आिश्यक ै?
(क) साक्षात्कार लेने वाले व्र्दि के बारे में आवमर्क जानकारी होना
(ख) साक्षात्कार का उद्देमर् दनदित होना
(ग) साक्षात्कार के दलए िरूु ह प्रमनावली का प्रर्ोग होना
(घ) साक्षात्कार के समर् हुई चचाि का दलदखत अर्थवा ररकॉडि रूप में होना
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क. के वल (क) और (ख)
ख. के वल (ख) और (घ)
ग. के वल (क), (ख) और (घ)
घ. के वल (ख), (ग) और (घ)
(3) समाचार ले खन में कौन-से ककार सच
ू नात्मक और तर्थयों पर आधाररत ोते ैं?
क. कहयाँ, कै से, क्यों, क्यय
ख. क्यय, कौन, कब, कहयाँ
ग. कै से, क्यों, ठकतनय, कौन
घ. ठकसने, ठकसे, कै से, क्यों
(4) मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय दिवयांगजन टी20 वर्ल्ड कप का दकया शुभारंभ
उपयणु क्त समाचार का शीषणक वकस ले खन क्षेत् के अिंतगण त आएगा?
क. ठवज्ञयन और प्रौद्ोठगकी
ख. ठ़िल्म-मनोरांिन
ग. अर्ण-व्ययपयर
घ. खेल िगत
(5) वनम्नवलवखत में से कौन-सा समाचार कारोबार और वयापार िगत से ै?
क. लगयतयर तीन ठदनों से सोने-चयाँदी की कीमतों में ियरी ठगरयवट
ख. उगते सूयण को अघ्यण देकर मठहलयओ ां ने ठकयय व्रत कय पयरर्
ग. िांगली हयर्ी को देख लोगों ने की बेवकू़िी िरी हरकत
घ. गुिरयत में पुल टूटने के बयद हर तरफ िगदड
प्रश्न 4. वनम्नवलवखत पवित कावयािंश को पढ़कर इस पर आधाररत प्रश्नों के उत्तर दीविए। (5X1=5)
िन्म से ही वे अपने सयर् लयते हैं कपयस
पथ्ृ वी घूमती हुई आती है उनके बेचै न पैरों के पयस
िब वे दौडते हैं बेसुध
छतों को िी नरम बनयते हुए
ठदशयओ ां को मदृ ांग की तरह बियते हुए
िब वे पेंग िरते हएु चले आते हैं
डयल की तरह लचीले वेग से अकसर
छतों के खरतनयक ठकनयरों तक-
उस समय ठगरने से बचयतय है उन्हें
ठस़िण उनके ही रोमयठां चत शरीर कय सगां ीत
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पतांगों की धडकती ऊाँचयइययाँ उन्हें र्यम लेती हैं
महज एक धयगे के सहयरे
पतांगों के सयर्-सयर् वे िी उड रहे हैं
अपने रांध्रों के सहयरे
अगर वे किी ठगरते हैं छतों के खतरनयक ठकनयरों से
और बच ियते हैं तब तो
और िी ठनडर होकर सनु हले सरू ि के सयमने आते हैं
पथ्ृ वी और िी ते ज घूमती हुई आती है
उनके बेचैन पैरों के पयस।
(1) कावयािंश को पढ़कर क ा िा सकता ै वक कवि ने मुख्य रूप से ________________________
वकया ै।
क. बयलोठचत िय को उियगर
ख. स्वयां ठशशवु त आकयक्ष
ां यओ ां कय अठिनय
ग. बयलसल ु ि उत्कांियओ ां कय अनपु म वर्णन
घ. बयल्ययवस्र्य को ठनिणयतय कय पययणय स्वीकयर
(2) 'जन्म से ही वे अपने सार्थ लाते हैं कपास'
उपयणु क्त पिंवक्त के आधार पर वनम्नवलवखत में से कौन-सा/कौन-से कर्थन स ी ैं?
(i) कुछ दििु जन्मावस्र्था के समर् अपने सार्थ कपास लेकर जन्म लेते हैं।
(ii) 'कपास' िब्ि का प्रर्ोग बालमन की कोमल अनभु दू तर्ों के प्रतीक रूप में दकर्ा गर्ा है।
(iii) बच्चों का िारीररक गठन जन्म से ही कपास की भाुँदत नरम और लचीला होता है।
क. कर्न (i), (ii) और (iii) सही है।
ख. कर्न (i) गलत, (ii) और (iii) सही है।
ग. कर्न (i) सही, (ii) और (iii) गलत है।
घ. कर्न (ii) गलत, (i) और (iii) सही है।
(3) कर्थन (A) और कारण (R) को पढ़कर स ी विकल्प चुवनए।
कर्थन (A) : छतों के दकनारों से चोदिल न होने पर बच्चे अदधक दनभिर् हुए।
कारण (R) : सुरदक्षत बच जाने पर उनके आत्मदवश्वास में वदृ ि हुई और वे अदधक बड़ी समस्र्ाओ ं का सामना करने
के दलए तै र्ार हुए हैं।
क. कर्न (A) गलत और कयरर् (R) सही है।
ख. कर्न (A) और कयरर् (R) दोनों गलत हैं।
ग. कर्न (A) सही है और कयरर् (R) उसकी गलत व्ययख्यय कर रहय है।
घ. कर्न (A) सही है और कयरर् (R) उसकी सही व्ययख्यय कर रहय है।
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(4) वदशाओ िं को मृदिंग की तर बिाने का अर्थण ै वक ___________________________।
क. आस-पयस ढोलक की दुकयन है
ख. आस-पयस कय वयतयवरर् सगां ीतमय हो गयय है
ग. चयरों ठदशयओ ां में ढोलक आठद बियए िय रहे हैं
घ. बच्चे छतों पर ढोलक बियते हएु नत्ृ य कर रहे हैं
(5) कॉलम (अ) को कॉलम (ब) से सुमेवलत करके स ी विकल्प चुवनए।
कॉलम (अ) कॉलम (ब)
1. पतांगों की धडकती ऊाँचयइयों द्वयरय बच्चों को र्यमनय (i) तुलनय ठकए ियने के कयरर् उपमय अलांकयर
2. ठदशयओ ां को मदृ गां की तरह बियनय (ii) दृश्य ठबबां कय प्रयोग करनय
3. बच्चों के बेसुध होकर दौडने पर पथ्ृ वी द्वयरय घूमकर (iii) मयनवीय ठक्रययकलयप आरोठपत करके मयनवीकरर्
सांरक्षर् प्रदयन करनय अलांकयर कय प्रयोग करनय
क. 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
ख. 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
ग. 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
घ. 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
प्रश्न 5. वनम्नवलवखत पवित गद्ािंश को पढ़कर इस पर आधाररत प्रश्नों के उत्तर दीविए। (5X1=5)
ियठत प्रर्य को यठद श्रम ठवियिन मयन ठलयय ियए, तो यह स्वयियठवक ठवियिन नहीं है, क्योंठक यह मनुष्य की रुठच
पर आधयररत नहीं है। कुशल व्यठि यय सक्षम-श्रठमक-समयि कय ठनमयणर् करने के ठलए यह आवश्यक है ठक हम
व्यठियों की क्षमतय इस सीमय तक ठवकठसत करें , ठिससे वह अपनय पेशय यय कययण कय चुनयव स्वयां कर सके । इस
ठसद्धयांत के ठवपरीत ियठत-प्रर्य कय दूठषत ठसद्धयांत यह है ठक इससे मनुष्य के प्रठशक्षर् अर्वय उसकी ठनिी क्षमतय
कय ठवचयर ठकए ठबनय, दूसरे ही दृठष्टकोर् िैसे मयतय-ठपतय के सयमयठिक स्तर के अनुसयर, पहले से ही अर्यणत
गिणधयरर् के समय से ही मनुष्य कय पेशय ठनधयणररत कर ठदयय ियतय है।
ियठत-प्रर्य पेशे कय दोषपूर्ण पूवणठनधयणरर् ही नहीं करती बठल्क मनुष्य को िीवन-िर के ठलए एक पेशे में बयाँध िी
देती है, िले ही पेशय अनपु यि ु यय अपययणप्त होने के कयरर् वह िख
ू ों मर ियए। आधठु नक यगु में यह ठस्र्ठत प्रययः
आती है, क्योंठक उद्ोग-धांधों की प्रठक्रयय व तकनीक में ठनरांतर ठवकयस और किी-किी अकस्मयत पररवतण न हो
ियतय है, ठिसके कयरर् मनुष्य को अपनय पेशय बदलने की आवश्यकतय पड सकती है और यठद प्रठतकूल पररठस्र्ठतयों
में िी मनुष्य को अपनय पेशय बदलने की स्वतांत्रतय न हो, तो इसके ठलए िूखों मरने के अलयवय क्यय चयरय रह ियतय
है? ठहांदू धमण की ियठत प्रर्य ठकसी िी व्यठि को ऐसय पेशय चुनने की अनुमठत नहीं देती है, िो उसकय पैतृक पेशय न
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हो, िले ही वह उसमें पयरांगत हो। इस प्रकयर पेशय पररवतण न की अनुमठत न देकर ियठत प्रर्य ियरत में बेरोिगयरी कय
एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कयरर् बनी हुई है।
(1) आिंबेडकर के अनुसार िारत में श्रम वििािन का आधार क्या ै?
क. श्रठमकों कय प्रियवी प्रठशक्षर्
ख. श्रठमकों कय शयरीररक बल
ग. श्रठमकों की कययणकुशलतय
घ. श्रठमकों की वांश-परांपरय
(2) गद्ािंश के आधार पर कौन-सा कर्थन गलत ै?
क. ियठतप्रर्य श्रम कय ठवियिन करती है।
ख. ियठतगत व्यवसयय अठनवययण होनय चयठहए।
ग. बेरोिगयरी कय एक कयरर् ियठतप्रर्य िी है।
घ. कययण कय ठवियिन दक्षतय के आधयर पर होनय चयठहए।
(3) श्रवमक के वलए सबसे बडी समस्या क्या ै?
क. गरीब होनय
ख. सयप्रां दयठयकतय में सल
ां ग्न होनय
ग. कययणस्र्ल कय असुरठक्षत होनय
घ. अरुठचकर कययण के ठलए बयध्य होनय
(4) समतामूलक समाि में श्रम का वििािन __________ के आधार पर वकया िाता ै।
क. धमण
ख. ियठत
ग. दक्षतय
घ. बेरोिगयरी
(5) कर्थन (A) और कारण (R) को पढ़कर उवचत विकल्प चुवनए।
कर्थन (A) : जीदवकोपाजिन के दलए स्वतंत्रता प्रत्र्ेक मनुष्र् का संवैधादनक अदधकार है।
कारण (R) : कानून सभी जादतर्ों को जीदवकोपाजिन का समान अवसर मुहैर्ा करवाता है।
क. कर्न (A) गलत है ठकांतु कयरर् (R) सही है।
ख. कर्न (A) और कयरर् (R) दोनों ही गलत हैं।
ग. कर्न (A) सही है और कयरर् (R) उसकी गलत व्ययख्यय है।
घ. कर्न (A) सही है और कयरर् (R) उसकी सही व्ययख्यय है।
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प्रश्न 6. वनदे शानुसार वनम्नवलवखत प्रश्नों के उत्तर दीविए। (10X1=10)
(1) यशोधर पिंत घर िालों के सार्थ सामिंिस्य क्यों न ीं वबिा पाते ैं?
क. दफ़्तर के कययों के कयरर्
ख. बच्चों के व्यवहयर के कयरर्
ग. धयठमणक और कमणकयांडी होने के कयरर्
घ. अपने ठसद्धयांतों और धयरर्यओ ां के कयरर्
(2) क ानी में पुरानी और नई पीढ़ी के बीच बढ़ती दूररयों का मुख्य कारण क्या ै?
क. एक-दसू रे से प्रठतद्वठां द्वतय
ख. पुरयनी पी़िी में धैयण कय अियव
ग. दोनों पीठ़ियों कय रूठ़िवयदी होनय
घ. दोनों पीठ़ियों के ठवचयरों में अांतर होनय
(3) क ानी में सिंयुक्त पररिार की वकस समस्या को दशाण या गया ै?
क. धनोपयिणन की समस्यय
ख. पयररवयररक कलह की समस्यय
ग. पयररवयररक आयोिन की समस्यय
घ. बिु गु ों द्वयरय मयगण दशणन की समस्यय
(4) आनिंद के सबिं धिं में कौन-सा कर्थन स ी ै?
क. आनदां प़ियई में कमजोर और तुक बनयने में मयठहर र्े।
ख. आनांद कठवतयओ ां की ओर स्वयां की प्रठतिय के कयरर् प्रवत्तृ हुए र्े।
ग. आनदां प़िने के सयर्-सयर् खेतों में कयम करने के अठधक इच्छुक र्े।
घ. आनांद अपने दयदय की अपेक्षय मयाँ के सयमने ियवनयएाँ व्यि कर पयते र्े।
(5) आनिंद अपनी उम्र के व साब से अवधक __________ प्रतीत ोते ैं।
क. िोले
ख. ठिज्ञयसु
ग. ठववेकी
घ. अठिमयनी
(6) कर्थन (A) और कारण (R) को पढ़कर उवचत विकल्प चुवनए।
कर्थन (A) : दिक्षक के सार्थिक पररश्रम की गवाही आनंि है।
कारण (R) : दिक्षक पूरी दनष्ठा से अपना कमि करते रहे हैं।
क. कर्न (A) गलत है ठकांतु कयरर् (R) सही है।
ख. कर्न (A) और कयरर् (R) दोनों ही गलत हैं।
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ग. कर्न (A) सही है और कयरर् (R) उसकी सही व्ययख्यय है।
घ. कर्न (A) सही है ठकांतु कयरर् (R) उसकी गलत व्ययख्यय है।
(7) मुअनिो-दडो की सामाविक वयिस्र्थाओ िं में एकरूपता को दे खकर ले खक ने क्या अनुमान लगाया?
क. सिी व्यवस्र्यओ ां में अनुशयसन कय
ख. सयमयठिक व्यवस्र्य में रयितांत्र कय
ग. व्यवस्र्यओ ां में ठदखयवे की कमी कय
घ. सैन्य व्यवस्र्य द्वयरय सयमयठिक प्रबधां न कय
(8) 'अतीत में दबे पााँि' पाि में ले खक को य कै से पता चला वक सवु यिस्र्था ेतु शवक्त की आिश्यकता
न ीं पडती?
क. सयमयठिक व्यवस्र्यओ ां की समयनतय ठमलने से
ख. नगर योिनय और वयस्तुठशल्प को देखने से
ग. शयसन और सयमयठिक प्रबांध को देखने से
घ. अिययबघर में हठर्ययरों के न ठमलने से
(9) मुअनिो-दडो की शासन वयिस्र्था की सबसे प्रमुख विशे षता प चावनए।
क. शयसन में सैन्य बल कय प्रियवी होनय
ख. शयसन कय व्ययपयर पर ठनिणर न होनय
ग. शयसन में हठर्ययरों कय ठवकठसत होनय
घ. शयसन कय सैन्य-शठि पर ठनिणर न होनय
(10) बौद्ध स्तूप को दे खकर 'अतीत में दबे पााँि' पाि के ले खक को कै सी अनुिूवत ईु ?
क. अतीत की स्मठृ तयों में खो गयय।
ख. िौगोठलकतय कय ज्ञयन हो गयय।
ग. बौद्ध धमण में अनुरि हो गयय।
घ. सौंदयण से अठििूत हो गयय।
खडिं ‘ब’ िणण नात्मक प्रश्न 40 अक
िं
प्रश्न 7. वनम्नवलवखत चार अप्रत्यावशत विषयों में से वकसी एक विषय पर लगिग 120 शब्दों में रचनात्मक
ले ख वलवखए। (1X6=6)
(क) गमी में कुल़्िी बेच तय आदमी
(ख) पययणवरर् की ठचांतय और ियरत
(ग) ई-ठशक्षय ठवद्यठर्णयों के ठलए लयि यय हयठन
(घ) अतां ररक्ष के रहस्य उियगर करने को आतुर ठवज्ञयन
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प्रश्न 8. वनम्नवलवखत में से वकन् ीं दो प्रश्नों के उत्तर लगिग 60 शब्दों में दीविए। (2X3=6)
(क) ठचत्र देखकर कर्यनक के स्वरूप के आधयर पर ठकन्हीं दो सांियठवत द्वांद्वों कय उल्लेख करते हुए रोचक कहयनी
ठलठखए।
(ख) रे ठडयो प्रसयरर् की 'ठवज्ञयन ठवशेष' कक्षय में ठशक्षक छयत्रों को िलचक्र से सबां ठां धत पयि प़िय रहे हैं। इस दौरयन
ठशक्षक को ठकन सहययक सयमठग्रयों की आवश्यकतय पडेगी? ठकन्हीं दो सयमठग्रयों कय नयम ठलखते हएु सिां यठवत
चयर ध्वठन प्रियवों कय उल्लेख कीठिए।
(ग) अप्रत्ययठशत लेखन के ठकतने आधयर हो सकते हैं? ठकन्हीं तीन आधयरों को समझयकर ठलठखए।
प्रश्न 9. वनम्नवलवखत में से वकन् ीं दो प्रश्नों के उत्तर लगिग 80 शब्दों में दीविए। (2X4=8)
(क) समयचयर चै नल की ओर से एिेंडय देने के ठलए कोई दो ठवषय ठलठखए। समयि की ओर से उन पर अपनी
प्रठतठक्रयय िी व्यि कीठिए।
(ख) सयठहत्य और पत्रकयररतय लेखन में क्यय अतां र है?
(ग) बीट लेखन से ठवशेषीकृत लेखन ठकस प्रकयर ठिन्न है?
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प्रश्न 10. कावय खिंड पर आधाररत वनम्नवलवखत में से वकन् ीं दो प्रश्नों के उत्तर लगिग 60 शब्दों में दीविए।
(2X3=6)
(क) 'कठवतय के बहयने' में कठव ने कठवतय की अनांततय एवां सांियवनयओ ां पर बयत की है। इस कर्न की सत्यतय को
लगिग 60 शब्दों में स्पष्ट कीठिए।
(ख) 'कै मरे में बदां अपयठहि' कठवतय क्षीर् होती मयनवीय सवां ेदनय कय ठचत्रर् है।' ठकन्हीं तीन उदयहरर्ों द्वयरय इसे
प्रमयठर्त कीठिए।
(ग) 'पेि की भख
ू बड़वादनन से भी बड़ी है।' इस कर्न को 'कठवतयवली' के आधयर पर स्पष्ट कीठिए।
प्रश्न 11. कावय खिंड पर आधाररत वनम्नवलवखत में से वकन् ीं दो प्रश्नों के उत्तर लगिग 40 शब्दों में
दीविए। (2X2=4)
(क) कठव बयदल कय आह्वयन ठकस रूप में और क्यों करनय चयहतय है? 'बयदल रयग' कठवतय के आधयर पर ठलठखए।
(ख) पठक्षयों और ययठत्रयों की तरह कठव कय िीवन चलययमयन क्यों नहीं है ? 'एक गीत' कठवतय के आधयर पर
समझयकर ठलठखए।
(ग) 'उषय' कठवतय में कठव ने 'रयख' और 'गीले चौके ' शब्दों कय प्रयोग क्यों ठकयय है?
प्रश्न 12. गद् खिंड पर आधाररत वनम्नवलवखत में से वकन् ीं दो प्रश्नों के उत्तर लगिग 60 शब्दों में दीविए।
(2X3=6)
(क) समयि में चूरन वयले िगत िी की तरह अठधक लोग होंगे तो बयजयर एवां समयि पर क्यय असर होगय? 'बयजयर
दशणन' पयि के आधयर पर उत्तर ठलठखए।
(ख) 'ठशरीष के फूल' में गयांधीिी कय उल्लेख ठकस सांदिण में हुआ एवां उसके क्यय कयरर् होंगे ?
(ग) 'पहलवयन और ढोलक के बीच रयगयत्मक सांबांध र्य।' इस कर्न की पुठष्ट कीठिए।
प्रश्न 13. गद् खिंड पर आधाररत वनम्नवलवखत में से वकन् ीं दो प्रश्नों के उत्तर लगिग 40 शब्दों में दीविए।
(2X2=4)
(क) 'िठिन' की ठकन ठवशेषतयओ ां ने महयदेवी वमयण को प्रियठवत ठकयय?
(ख) 'कयले मेघय पयनी दे' पयि में इांदर सेनय को देखकर लेखक के मन में ठकन प्रश्नों ने िन्म ठलयय?
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(ग) 'दूध-पयनी के ठमश्रर् की तरह ियईचयरे कय दूसरय नयम है लोकतांत्र।' 'मेरी कल्पनय कय आदशण-समयि' पयि के
आधयर पर इस कर्न की पुठष्ट कीठिए।