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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: वग और घन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1 – 18 18 65 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 47 pages
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
क ा 8 · ग णत · ग णत प्रकाश
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: वग और घन
ग णत प्रकाश भाग 1 का अध्याय 1 रानी रत्नामंजुरी के इ ापत्र और 100 लॉकर वाले गुप्त कक्ष से आरंभ होता है। प्रत्येक लॉकर कतनी बार घुमाया
गया — यह गनना वास्तव म गुणनखंड गनना है, और यही एक वचार वग संख्याओं, वगमूल, घन और घनमूल तक ले जाता है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत प्रकाश (क ा 8) 1 – 18
खं ड प्रश्न
18 65
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 1
रानी रत्नामंजुरी क पहेली
प्र.1 प्र क्रया के आरंभ होने से पूव ही खोईसनाम को समझ म आ गया क अंत म कौन-से लॉकर खुले मलगे। बताइए
क उसने इस उत्तर को कैसे ात कया होगा? संकेत — पता लगाइए क प्रत्येक लॉकर कतनी बार घुमाया गया।
उसने गुणनखंड गने। संख्या k वाला व्य क्त लॉकर n को तभी छू ता है जब k, n को वभा जत करता है। अत: लॉकर n उसके
प्रत्येक गुणनखंड के लए एक बार घुमाया जाता है।
लॉकर 6 को व्यिक्त 1, 2, 3, 6 छू ते है ं → 4 बार घुमाया गया
पत्येक लॉकर आरंभ में बंद है, अत: वह खुला तभी रहेगा जब वह िवषम बार घुमाया जाए
अब प्रश्न यह बनता है — 1 से 100 तक कन संख्याओं के गुणनखंड क संख्या वषम है?
ऐसा क्य होता है: गुणनखंड सह-गुणनखंड युग्म म आते ह — य द d, n को वभा जत करता है तो n ÷ d भी
करता है, और दोन का गुणनफल n है। य द प्रत्येक गुणनखंड का सह-गुणनखंड उससे भन्न हो तो सभी युग्म म बँट
जाने से संख्या सम हो जाएगी। संख्या वषम तभी होगी जब कोई गुणनखंड स्वयं अपना सह-गुणनखंड हो, अथात d
× d = n। यह केवल वग संख्याओं म होता है।
अत: खोईसनाम को पहले से ात था क खुले रहने वाले लॉकर ह —
1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64, 81, 100
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
स्वयं जाँ चए: लॉकर 16 को 1, 2, 4, 8, 16 — पाँच व्य क्त छू ते ह, अथात वषम बार, अत: वह खुला रहेगा।
लॉकर 12 को 1, 2, 3, 4, 6, 12 — छह व्य क्त छू ते ह, अत: वह बंद हो जाएगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 2
गुणनखंड और सह-गुणनखंड
प्र.1 क्या प्रत्येक संख्या के गुणनखंड क संख्या सम संख्या होती है?
नह । अ धकांश संख्याओं के लए यह सत्य है, परंतु वग संख्याओं के लए नह ।
6 : 1 × 6, 2 × 3 → 4 गुणनखंड (सम)
10 : 1 × 10, 2 × 5 → 4 गुणनखंड (सम)
9 : 1 × 9, 3 × 3 → 3 गुणनखंड (िवषम)
ऐसा क्य होता है: कसी संख्या को दो गुणनखंड के गुणनफल के रूप म लखने पर प्रत्येक गुणनखंड का एक सह-
गुणनखंड बन जाता है। जब तक प्रत्येक युग्म के दोन सदस्य भन्न ह, सभी गुणनखंड दो-दो के युग्म म बँट जाते ह
और कुल संख्या सम रहती है। यह क्रम केवल तब टू टता है जब कसी युग्म के दोन सदस्य समान ह — और d × d
का अथ है क संख्या d2 है।
अत: वग संख्याओं को छोड़कर प्रत्येक संख्या के गुणनखंड क संख्या सम होती है।
प्र.2 क्या आप उपयुक्त समझ का उपयोग करके अन्य संख्याएँ ात कर सकते ह जनके गुणनखंड क संख्या वषम
हो?
हाँ — कसी भी संख्या को स्वयं से गुणा क जए।
1 × 1 = 1, 2 × 2 = 4, 3 × 3 = 9, 4 × 4 = 16, 5 × 5 = 25, …
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संख्या गुणनखंड कतने
1 1 1
4 1, 2, 4 3
9 1, 3, 9 3
16 1, 2, 4, 8, 16 5
25 1, 5, 25 3
36 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18, 36 9
इनम से प्रत्येक एक वग है, और कोई भी ऐसी संख्या जो वग नह है इस सूची म नह आ सकती।
प्र.3 उदाहरण के लए 36 का एक गुणनखंड युग्म 6 × 6 है, यहाँ दोन संख्याएँ 6 ह। क्या इस संख्या के गुणनखंड क
संख्या वषम है? यहाँ 6 के अ त रक्त 36 के प्रत्येक गुणनखंड का सह-गुणनखंड भन्न है तब हम न त रूप से
कह सकते ह क 36 के गुणनखंड क संख्या वषम होगी। क्या यह कथन सत्य है? जाँच क जए।
हाँ, 36 के 9 गुणनखंड ह — वषम संख्या। युग्म दर युग्म जाँच इस प्रकार है —
1 × 36 → 1 और 36, िभन्न
2 × 18 → 2 और 18, िभन्न
3 × 12 → 3 और 12, िभन्न
4 × 9 → 4 और 9, िभन्न
6 × 6 → 6 का सह-गुणनखंड स्वयं 6 है
भन्न गुणनखंड के चार युग्म से 4 × 2 = 8 गुणनखंड मले और अकेला 6 एक और जोड़ता है —
8 + 1 = 9 गुणनखंड — 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18, 36
ऐसा क्य होता है: प्रश्न म दया गया कथन ही सामान्य तक है। स्वयं-सह-गुणनखंड को छोड़कर शेष सभी गुणनखंड
अलग-अलग युग्म म बँट जाते ह, जससे सम संख्या मलती है; अकेला बचा गुणनखंड कुल संख्या को वषम बना
दे ता है। ऐसा स्वयं-सह-गुणनखंड केवल वग म होता है, अत: केवल वग के गुणनखंड क संख्या वषम हो सकती है।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 3
m as e
1.1 वग संख्याएँ
.co a g l
a s em
aप्र.1gl
उन लॉकर क संख्याएँ ल खए जो खुले रहते ह।
co m
. ag
—m
1 से 100 तक क वग संख्याओं वाले लॉकर खुले रहते ह e
a s
agl
m
1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64, 81, 100
co
em.
m l as
.co g
अथात 10 लॉकर — 12, 22, 32, …, 102। अगला वग 112 = 121 है जो 100 से आगे है।
em a
a s
a gl संकेत: 100 तक खुले लॉकर 10 इस लए ह क्य क 102 = 100 है। सामान्यत: 1 से N तक वग संख्याओं क
गनती √N का पूणाक भाग होती है।
m a s
m .co agl
l a se
प्र.2 ये पाँच लॉकर कौन-से ह? a g
co m
m .
e
m l as
.co a g
गुप्त संकेत वाले लॉकर वे ह जन्ह ठ क दो बार घुमाया गया, अथात जनक संख्या के ठ क दो गुणनखंड ह — अभाज्य संख्याएँ।
a s em
agl 2 → 1, 2
se m
com l a
3 → 1, 3
. a g
m
ase
5 → 1, 5
7 → 1, 7 agl
m
11 → 1, 11
. co
e m
m l as
.co g
ऐसे पहले पाँच लॉकर 2, 3, 5, 7 और 11 ह, अत: कोड 2-3-5-7-11 है।
m a
l a se
ag ऐसा क्य होता है: जो लॉकर ठ क दो बार घुमाया गया उसे संख्या 1 वाला व्य क्त खोलता है और ठ क एक अन्य
.c
m
व्य क्त बंद करता है। इसका अथ है क उस संख्या के गुणनखंड केवल 1 और वह संख्या स्वयं ह — यही अभाज्य
m a s e
co agl
संख्या क प रभाषा है। ध्यान द जए क 1 को केवल एक बार छु आ जाता है, अत: वह इस सूची म नह है।
m .
ase
a g l
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 4 of 47
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प्र.3 क्या हम 3/5 या 2.5 इकाई भुजा वाला वग बना सकते ह?
हाँ। भुजा क लंबाई का पूण संख्या होना आवश्यक नह है; भन्न और दशमलव के वग भी उसी प्रकार नकाले जाते ह।
(3/5)2 = (3/5) × (3/5) = 9/25 वग इकाई
(2.5)2 = 2.5 × 2.5 = 6.25 वग इकाई
ऐसा क्य होता है: वग का क्षेत्रफल भुजा × भुजा होता है, भुजा चाहे जो हो। भन्न का वग करने पर अंश और हर
दोन का अलग-अलग वग होता है, क्य क (a/b) × (a/b) = (a×a)/(b×b)।
संकेत: 9/25 और 6.25 भन्न तथा दशमलव के वग ह, परंतु ये पूण वग नह ह — यह नाम केवल प्राकृत संख्याओं
के वग के लए प्रयोग होता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 4
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पूण वग के प्र तरूप (पैटन) और गुण
MATH TALK
प्र.1 प्रथम 30 प्राकृत संख्याओं के वग ात क जए और उन्ह नम्न ता लका म अं कत क जए।
1² = 1 11² = 121 21² = 441
2² = 4 12² = 22² =
3² = 9 13² =
4² = 16 14² =
5² = 25 15² =
6² = 16² =
7² = 17² =
8² = 18² =
9² = 19² =
10² = 20² =
प्रथम 30 पूण वग क पूरी ता लका —
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12 = 1 112 = 121 212 = 441
22 = 4 122 = 144 222 = 484
32 = 9 132 = 169 232 = 529
42 = 16 142 = 196 242 = 576
52 = 25 152 = 225 252 = 625
62 = 36 162 = 256 262 = 676
72 = 49 172 = 289 272 = 729
82 = 64 182 = 324 282 = 784
92 = 81 192 = 361 292 = 841
102 = 100 202 = 400 302 = 900
संकेत: हर बार गुणा करने क आवश्यकता नह है। चूँ क (n+1)2 = n2 + (2n + 1) होता है, प्रत्येक वग पछले
वग म अगली वषम संख्या जोड़ने से मल जाता है — 400 + 41 = 441, 441 + 43 = 484, 484 + 45 = 529,
और इसी प्रकार आगे।
प्र.2 आपने उपयुक्त ता लका म कन प्र तरूप का अवलोकन कया? अपने अवलोकन को अपने सहपा ठय के साथ
साझा क जए एवं अनुमान लगाइए।
ता लका म एक साथ कई प्र तरूप दखाई दे ते ह।
इकाई अंक। प्रत्येक वग 0, 1, 4, 5, 6 या 9 पर समाप्त होता है। कोई भी 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त नह होता।
युग्म। जन संख्याओं के इकाई अंक का योग 10 है उनके वग का इकाई अंक समान होता है — 1 और 9 दोन से 1, 2 और 8
दोन से 4, 3 और 7 दोन से 9, 4 और 6 दोन से 6।
अंतर। क्रमागत वग का अंतर क्रमागत वषम संख्याएँ ह — 4 – 1 = 3, 9 – 4 = 5, 16 – 9 = 7, …
सम- वषम। सम संख्या का वग सम और वषम संख्या का वग वषम होता है।
शून्य। 102 = 100, 202 = 400, 302 = 900 — संख्या के अंत का एक शून्य वग म दो शून्य बन जाता है।
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इकाई अंक का नयम क्य चलता है: गुणनफल का अं तम अंक केवल गुणा क जा रही संख्याओं के अं तम अंक
पर नभर करता है। अत: n2 का अं तम अंक केवल n के अं तम अंक से तय होता है और जाँचने के लए दस ही
तयाँ ह — 0→0, 1→1, 2→4, 3→9, 4→6, 5→5, 6→6, 7→9, 8→4, 9→1। प्राप्त अंक का
समुच्चय ठ क {0, 1, 4, 5, 6, 9} है।
प्र.3 य द कोई संख्या 0, 1, 4, 5, 6 या 9 पर समाप्त होती है तो क्या वह सदै व एक वग संख्या होगी?
नह । इकाई अंक क जाँच केवल एक दशा म काम करती है।
16 = 42 ✓ और 36 = 62 ✓, परंत ु 26 का इकाई अंक 6 है और वह वग नही ं है
इसी पकार 20, 21, 24, 30, 31 … सभी का इकाई अंक स्वीकाय है पर वे वग नही ं है ं
ऐसा क्य होता है: 0, 1, 4, 5, 6 या 9 पर समाप्त होना आवश्यक प्र तबंध है, पयाप्त नह । वग को यह शत पूरी
करनी ही होगी, परंतु शत पूरी करने भर से कोई संख्या वग नह बन जाती। उपयोगी दशा उल्ट है — य द कोई
संख्या 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त होती है तो वह न त रूप से वग नह है।
संकेत: यही सबसे तेज़ पहली छननी है। 1027 का अंत 7 पर है → वग नह , और गुणनखंडन क आवश्यकता ही
नह पड़ी।
प्र.4 ऐसी 5 संख्याएँ ल खए जनके इकाई अंक को दे खकर आप यह नधा रत कर सक क वे वग नह ह।
2, 3, 7 या 8 पर समाप्त होने वाली कोई भी संख्या ली जए। उदाहरण के लए —
42, 153, 267, 638, 1082
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संख्या इकाई अंक नष्कष
m as e
42
.co
2
a g
वग नही ं
l
se m
g l a
a
153 3 वग नही ं
267 7 वग नही ं
co m
638 8
e m . वग नही ं ag
g l as
1082 2
a वग नही ं
co m
m.
कसी भी प्राकृत संख्या का वग इन चार अंक पर समाप्त नह हो सकता, अत: एक दृ ष्ट म ही पाँच का नणय हो जाता है।
m as e
.co a g l
a s emवग 1², 9², 11², 19², 21² और 29² इन सभी संख्याओं का इकाई अंक 1 है। अब आप ऐसे अगले दो वग और
gl ल खए। ध्यान द जए य द कसी संख्या का इकाई अंक 1 या 9 है तो उसके वग का इकाई अंक 1 होता है।
प्र.5
a
m a s
m .co agl
l a se
सूची 1, 9, 11, 19, 21, 29 आगे 1 या 9 पर समाप्त होने वाली अगली संख्याओं से चलती है — अथात 31 और 39।
ag
312 = 961
co m
m .
392 = 1521
m as e
.co a g l
a s emका इकाई अंक 1 है, जैसा अपे क्षत था।
gl
दोन
a
se m
m मलता — दस तयाँ ह 0→0, 1→1, 2→4, 3→9, a
ऐसा क्य होता है: वग का इकाई अंक केवल संख्या के इकाई अंक से तय होता है। 1 × 1 = 1 का अंत 1 पर है
1oनह
और 9 × 9 = 81 का भी। कसी अन्य अंक से c
. a g l
a s em अत: वग का इकाई अंक 1 ठ क तभी होता है जब उसके मूल का
agl
4→6, 5→5, 6→6, 7→9, 8→4, 9→1।
इकाई अंक 1 या 9 हो।
co m
m .
as e
.om — पृष्ठ 5
c
पाठ्य प्रश्न
a g l
s e m
a
agl
पूण वग के प्र तरूप (पैटन) और गुण
.c
नम्न ल खत म से कौन-सी संख्याओं म इकाई का अंक 6 है? (i) 38² (ii) 34² (iii) 46² (iv) 56² (v) 74² (vi)
s e m
m a
agl
प्र.1
82²
. co
e m
g l as
a
केवल संख्या के इकाई अंक का वग क जए और उसका अं तम अंक दे खए।
co m
m .
m ase
.co
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संख्या इकाई अंक उसका वग वग का इकाई अंक
(i) 38 8 64 4
(ii) 34 4 16 6 ✓
(iii) 46 6 36 6 ✓
(iv) 56 6 36 6 ✓
(v) 74 4 16 6 ✓
(vi) 82 2 4 4
अत: (ii) 342, (iii) 462, (iv) 562 और (v) 742 म इकाई का अंक 6 है।
ऐसा क्य होता है: वग का इकाई अंक 6 ठ क तभी होता है जब मूल का इकाई अंक 4 या 6 हो, क्य क 4 × 4 =
16 और 6 × 6 = 36 ही एक अंक वाले ऐसे गुणनफल ह जो 6 पर समाप्त होते ह।
स्वयं जाँ चए: 342 = 1156, 462 = 2116, 562 = 3136, 742 = 5476 — सभी 6 पर समाप्त; जब क 382 =
1444 और 822 = 6724 का अंत 4 पर है।
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प्र.2 आपके ारा पू रत ता लका से संख्याओं और उनके वग का अवलोकन करके ऐसे और अ धक प्र तरूप खो जए।
1² = 1 11² = 121 21² = 441
2² = 4 12² = 22² =
3² = 9 13² =
4² = 16 14² =
5² = 25 15² =
6² = 16² =
7² = 17² =
8² = 18² =
9² = 19² =
10² = 20² =
पृष्ठ 4 क वग क ता लका — वही जसे आपने भरा था।
302 तक क ता लका से चार और प्र तरूप स्पष्ट दखाई दे ते ह।
5 पर समाप्त होने वाली संख्याओं के वग। 152 = 225, 252 = 625 — वग सदै व 25 पर समाप्त होता है और उससे पहले
का भाग दहाई अंक तथा उसके अगले अंक का गुणनफल है — 1×2 = 2, 2×3 = 6।
अंक का योग। वग के अंक को बार-बार जोड़ने पर अंत म सदै व 1, 4, 7 या 9 मलता है। 576 → 5+7+6 = 18 → 9।
441 → 4+4+1 = 9। कभी 2, 3, 5, 6 या 8 नह ।
गोल संख्या से ठ क पहले। 192 = 361 = 400 – 39, 292 = 841 = 900 – 59 — दोन पड़ोसी संख्याओं का योग घटा
द जए।
तीन का गुणज। जो वग 3 के गुणज ह वे 9 के भी गुणज ह — 9, 36, 81, 144, 225, 324, 441, 576, 729, 900।
'5 पर समाप्त' वाला नयम क्य चलता है: 5 पर समाप्त होने वाली संख्या 10a + 5 होती है और
(10a + 5)2 = 100a2 + 100a + 25 = 100 × a(a+1) + 25।
अत: अं तम दो अंक सदै व 25 रहते ह और आगे का भाग a × (a + 1) होता है। 25 के लए a = 2, a(a+1) = 6,
अत: 625।
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प्र.3 य द कसी संख्या के अंत म 3 शून्य ह तो उसके वग के अंत म कतने शून्य ह गे?
छह शून्य।
2000 = 2 × 1000
20002 = 4 × 1000 × 1000 = 4 × 1000000 = 4000000 → 6 शून्य
ऐसा क्य होता है: तीन शून्य पर समाप्त होने वाली संख्या m × 103 होती है, जहाँ m का अंत शून्य पर नह है। वग
करने पर m2 × 106 मलता है और m2 का अंत भी शून्य पर नह हो सकता, अत: अंत म ठ क 6 शून्य बचते ह।
वग करने से अंत के शून्य क संख्या दुगुनी हो जाती है।
प्र.4 आपने कसी संख्या के अंत म शून्य क संख्या और इसके वग के अंत म शून्य क संख्या के वषय म क्या
अवलोकन कया? क्या ऐसा सदै व होता रहेगा? क्या हम कह सकते ह क वग के अंत म शून्य क संख्या केवल
सम संख्या ही हो सकती है?
वग के अंत म शून्य सदै व दुगुने होते ह।
102 = 100 → 1 शून्य से 2
202 = 400 → 1 शून्य से 2
1002 = 10000 → 2 शून्य से 4
7002 = 490000 → 2 शून्य से 4
हाँ, ऐसा सदै व होता है, और हाँ, वग के अंत म शून्य क संख्या केवल सम ही हो सकती है।
ऐसा क्य होता है: संख्या को m × 10k ल खए, जहाँ m का अंत शून्य पर नह है। तब उसका वग m2 × 102k
होगा और m2 का अंत भी शून्य पर नह होगा। अत: वग के अंत म ठ क 2k शून्य ह गे — सदै व सम। इससे एक
और तेज़ जाँच मलती है — वषम संख्या म शून्य पर समाप्त होने वाली संख्या, जैसे 1000 या 490, पूण वग नह
हो सकती।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 कसी संख्या और उसके वग क अनुरूपता के वषय म आपके क्या वचार ह?
संख्या और उसका वग सदै व एक ही प्रकार के होते ह — सम का वग सम, वषम का वग वषम।
सम : 42 = 16, 102 = 100, 262 = 676 → सभी सम
िवषम : 32 = 9, 72 = 49, 212 = 441 → सभी िवषम
ऐसा क्य होता है: सम संख्या 2k होती है, अत: उसका वग 4k2 = 2(2k2) — 2 का गुणज, अथात सम। वषम
संख्या 2k + 1 होती है, अत: उसका वग 4k2 + 4k + 1 = 2(2k2 + 2k) + 1 — कसी सम संख्या से एक
अ धक, अथात वषम।
संकेत: इसे उल्टा भी प ढ़ए। य द कोई पूण वग वषम है तो उसका वगमूल भी वषम होगा; य द सम है तो मूल भी
सम होगा। मूल खोजते समय यह आधी संभावनाएँ हटा दे ता है।
प्र.6 आइए, क्रमागत वग के मध्य अंतर दे ख। आपने क्या अवलोकन कया? 4 – 1 = 3, 9 – 4 = 5, 16 – 9 = 7, 25
– 16 = 9. ध्यान द जए क क्या यह प्र तरूप अगली कुछ वग संख्याओं तक बना रहता है?
अंतर क्रमागत वषम संख्याएँ ह, और यह प्र तरूप आगे भी बना रहता है।
36 – 25 = 11
49 – 36 = 13
64 – 49 = 15
81 – 64 = 17
100 – 81 = 19
ऐसा क्य होता है: n2 और (n+1)2 के बीच का अंतर है
(n + 1)2 – n2 = n2 + 2n + 1 – n2 = 2n + 1,
जो ठ क (n+1)व वषम संख्या है। इन अंतर को 1 से आरंभ करके क्रमश: जोड़ने पर
1 + 3 + 5 + … + (2n – 1) = n2 मलता है।
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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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a g 5 और → 32
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g l as → 22
3 और a
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comक प है जो वग को अगले वग म बदल देती है।
प्रत्येक नई वषम संख्या एक उल्टे L के .आकार agl
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 6
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पूण वग और वषम संख्याएँ
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agl प्र.1 उपयुक्त प्र तरूप का उपयोग करके 36² ात क जए जब क 35² = 1225 है।
se m
com g l a
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1+3
agl
1 + 3 + (3 + 2) 1+3+5 1 + 3 + 5 + (5 + 2) 1+3+5+7
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पृष्ठ 6 — वह चत्र जो बताता है क प्रत्येक अगला उलटा L अगली वषम संख्या क्य दे ता है।
m .
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a s emउत्तर
agl
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1225 प्रथम 35 वषम संख्याओं का योग है, अत: 362 पाने के लए उसम 36व वषम संख्या जोड़नी होगी।
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36वी ं िवषम संख्या = 2 × 36 – 1 = 71
g l as
362 = 1225 + 71 = 1296 a
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a g l Page 14 of 47
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: चूँ क प्रथम n वषम संख्याओं का योग n2 होता है, 352 से 362 तक जाने के लए इस ेणी का
केवल एक और पद जोड़ना पड़ता है। बीजग णत म यही चरण है (n + 1)2 = n2 + 2n + 1, और यहाँ 2 × 35 + 1
= 71।
स्वयं जाँ चए: 36 × 36 = 36 × 30 + 36 × 6 = 1080 + 216 = 1296. ✓
प्र.2 हम 36व वषम संख्या कैसे ात करगे?
वषम संख्याओं को उनके ान के साथ ल खए, नयम स्वयं दखाई दे गा।
ान N 1 2 3 4 5 6
वषम संख्या 1 3 5 7 9 11
प्रत्येक वषम संख्या अपने ान के दुगुने से एक कम है — 2 × 6 – 1 = 11। अत:
36वी ं िवषम संख्या = 2 × 36 – 1 = 71
ऐसा क्य होता है: क्रम से सम संख्याएँ 2, 4, 6, … ह, अत: nव सम संख्या 2n है। प्रत्येक वषम संख्या कसी
सम संख्या से ठ क एक कम होती है, जससे 2n – 1 मलता है।
प्र.3 nव वषम संख्या क्या है?
nव वषम संख्या 2n – 1 है।
n = 1 → 2(1) – 1 = 1
n = 5 → 2(5) – 1 = 9
n = 50 → 2(50) – 1 = 99
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: कोई भी वषम संख्या 2 से भाग दे ने पर 1 शेष छोड़ती है, अत: उसे कसी पूण संख्या k ≥ 0 के
लए 2k + 1 लखा जा सकता है। k = 0 से गनने पर 1, 3, 5, … मलता है और nव ान पर k = n – 1 होता है,
अत: मान 2(n – 1) + 1 = 2n – 1 है।
संकेत: यही सूत्र वषम संख्याओं वाली जाँच को उपयोगी बनाता है। 1 + 3 + 5 + … + (2n – 1) = n2 होने के
कारण, घटाते-घटाते जस चरण पर 0 मलता है वही वगमूल है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 7–8
पूण वग और त्रभुजाकार संख्याएँ; वगमूल
प्र.1 ात क जए क दो क्रमागत पूण वग के मध्य कतनी प्राकृत संख्याएँ आती ह? क्या आपने कसी प्र तरूप का
अवलोकन कया?
n2 और (n+1)2 के मध्य ठ क 2n संख्याएँ आती ह।
वग बीच क संख्याएँ कतनी 2N
1 और 4 2, 3 2 2×1
4 और 9 5, 6, 7, 8 4 2×2
9 और 16 10 … 15 6 2×3
16 और 25 17 … 24 8 2×4
ऐसा क्य होता है: अंतर स्वयं (n + 1)2 – n2 = 2n + 1 है। इस गनती म एक सरा स म लत है, अत: ठ क बीच
म पड़ने वाली संख्याएँ 2n + 1 – 1 = 2n ह। उत्तर सदै व सम होता है और n बढ़ने पर बढ़ता जाता है।
संकेत: पुस्तक इसे क्रमागत वग p और q के लए q – p – 1 के रूप म लखती है। दोन एक ही बात ह — p =
n2 और q = (n+1)2 रखने पर q – p – 1 = (2n + 1) – 1 = 2n।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 1 और 100 के मध्य कतनी वग संख्याएँ ह? 101 से 200 के मध्य कतनी वग संख्याएँ ह? आपने पूव म जस वग
ता लका म संख्याएँ अं कत क थी उस ता लका का उपयोग करके नीचे दए गए ान म मान अं कत क जए
और 100 के प्रत्येक खंड म वग क संख्या को सारणीबद्ध क जए।
1 – 100 101 – 200 201 – 300 301 – 400 401 – 500
501 – 600 601 – 700 701 – 800 801 – 900 901 – 1000
1000 से छोट सबसे बड़ी वग संख्या कौन-सी है?
1000 तक के पूण वग क खंडवार गनती —
खंड उसम वग कतने
1 – 100 1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64, 81, 100 10
101 – 200 121, 144, 169, 196 4
201 – 300 225, 256, 289 3
301 – 400 324, 361, 400 3
401 – 500 441, 484 2
501 – 600 529, 576 2
601 – 700 625, 676 2
701 – 800 729, 784 2
801 – 900 841, 900 2
901 – 1000 961 1
कुल = 10 + 4 + 3 + 3 + 2 + 2 + 2 + 2 + 2 + 1 = 1000 से छोटे 31 वग, और सबसे बड़ा वग है
312 = 961 (अगला वग 322 = 1024 है जो 1000 से बड़ ा है)
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
गनती कम क्य होती जाती है: क्रमागत वग के बीच का अंतर 2n + 1 है जो लगातार बढ़ता है। आरंभ म अंतर
3, 5, 7 ह इस लए 100 के खंड म कई वग आ जाते ह। 900 के आसपास अंतर लगभग 60 हो जाता है, अत:
प्रत्येक खंड म केवल एक-दो वग ही आ पाते ह।
प्र.3 क्या आपको त्रभुजाकार संख्याएँ स्मरण ह?
1 3 6 10 15
पृष्ठ 7 — प्रथम पाँच त्रभुजाकार संख्याएँ।
क्या आप त्रभुजाकार संख्याओं और वग संख्याओं म कोई संबंध दे ख सकते ह? दशाए गए प्र तरूप को आगे
बढ़ाइए और अगले चरण को रेखां कत क जए।
1 + 3 = 4 = 2² 3 + 6 = 9 = 3² 6 + 10 = 16 = 4²
पृष्ठ 7 — प्रत्येक वग दो त्रभुजाकार संख्याओं म वभा जत; अं तम बक्सा आपके लए खाली छोड़ा गया है।
हाँ — दो क्रमागत त्रभुजाकार संख्याओं का योग सदै व एक वग होता है।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
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1 + 3 = 4 = 22
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3 + 6 = 9 =.c3o2m g l as
e=m16 = 42 a
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6+ 10
2
10 + 15 = 25 = 5 ← अगला चरण
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15 + 21 = 36 = 62
e m . ag
g l as
a
अत: अगला चत्र 5 × 5 बदुओं का वग है जसे सीढ़ नुमा रेखा 10 बदुओं और 15 बदुओं के दो त्रभुज म बाँटती है।
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10 (नीला) + 15 .(लाल) com = 25 = 5
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a l का वग त्रभुजाकार संख्याओं 10 और 15 म बँटा हुआ।
5 × 5gबदुओं
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ऐसा क्य होता है: nव त्रभुजाकार संख्या Tn = 1 + 2 + … + n = n(n+1)/2 है। तब
m l as
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Tn–1 + Tn = (n–1)n/2 + n(n+1)/2 = n[(n–1) + (n+1)]/2 = n × 2n/2 = n2।
se m ज्या मतीय रूप से, n – 1 और n ऊँचाई वाले दो सीढ़ नुमा त्रभुज मलकर ठ क n × n का वग बना दे ते ह।
g l a
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 एक वग का ेत्रफल 49 वग सट मीटर है। बताइए इसक एक भुजा क लंबाई क्या है?
भुजा वह संख्या है जसे स्वयं से गुणा करने पर 49 मले।
भुजा × भुजा = 49
7 × 7 = 49, अत: भुजा = 7 सेट
ं ीमीटर
हम 7 को 49 का वगमूल कहते ह और √49 = 7 लखते ह।
केवल 7 ही क्य : बीजग णत म 7 और –7 दोन का वग 49 है, अत: 49 के दो पूणाक वगमूल ह। परंतु भुजा एक
मापी हुई लंबाई है, इस लए यहाँ केवल धनात्मक मूल ही अथपूण है। इसी कारण इस अध्याय म सवत्र धनात्मक
वगमूल लया गया है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 8–9
वगमूल
MATH TALK
प्र.1 64 का वगमूल क्या है?
8 × 8 = 64 है, और (–8) × (–8) = 64 भी है।
82 = 64 और (–8)2 = 64
अत: 64 के वगमूल +8 और –8 है ं
√64 = ±8; इस अध्याय में √64 = 8
दो वगमूल क्य होते ह: ऋणात्मक × ऋणात्मक = धनात्मक होता है, अत: कसी भी पूण वग के दो पूणाक वगमूल
होते ह जो केवल चह्न म भन्न ह। सामान्यत: √(n2) = ±n। √ चह्न अकेले प्रयोग होने पर केवल धनात्मक मूल
दशाता है, इसी लए √100 = 10 है, –10 नह ।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 य द 327 या 576 जैसी कोई संख्या द गई हो तो हम कैसे ात करगे क यह एक पूण वग है? य द यह एक पूण
वग है तो हम इसका वगमूल कस प्रकार ात कर सकते ह?
जाँच क्रम से लगाइए — सबसे सरल पहले।
1. इकाई अंक। 327 का अंत 7 पर है, अत: वह न त रूप से पूण वग नह है। 576 का अंत 6 पर है, अत: वह इस जाँच म
बच जाता है पर नणय अभी नह हुआ।
2. वग क सूची। 202 = 400, 212 = 441, 222 = 484, 232 = 529, 242 = 576। अत: 576 पूण वग है और √576 =
24। यह व ध चलती तो है पर बड़ी संख्याओं के लए धीमी है।
3. वषम संख्याएँ घटाना। 1, 3, 5, … क्रमश: घटाइए; य द kव चरण पर ठ क 0 मले तो संख्या k2 है।
4. अभाज्य गुणनखंडन। अभाज्य गुणनखंड को दो समान समूह म बाँ टए।
576 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3
= (2 × 2 × 2 × 3) × (2 × 2 × 2 × 3)
= 242, अत: √576 = 24
अभाज्य गुणनखंडन ही सबसे भरोसेमंद जाँच क्य है: य द कोई संख्या m2 है तो m का प्रत्येक अभाज्य
गुणनखंड m2 म दुगुनी बार आता है। अत: पूण वग ठ क वही संख्या है जसम प्रत्येक अभाज्य सम बार आता है —
और प्रत्येक घातांक को आधा करते ही वगमूल सीधे मल जाता है।
प्र.3 क्या हम इस व ध के माध्यम से 729 का वगमूल ात कर सकते ह?
हाँ, परंतु इसम अ धक समय लगेगा — 27 बार घटाना पड़ेगा।
729 – 1 = 728, 728 – 3 = 725, 725 – 5 = 720, …
… और 27वें चरण पर 53 घटाने से 0 शेष बचता है
अत: 729 = 272 और √729 = 27
यह व ध धीमी क्य है: इस व ध से √N ात करने म लगभग √N चरण लगते ह। 81 के लए 9 चरण ठ क ह,
729 के लए 27, और छह अंक क संख्या के लए सैकड़ । अभाज्य गुणनखंडन कह छोटा है — 729 = 36 =
(33)2 = 272, एक ही पं क्त म।
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स्वयं जाँ चए: वषम संख्याओं का योग 1 + 3 + 5 + … + 53 = 272 = 729 है, क्य क 53 = 2 × 27 – 1।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 9
अभाज्य गुणनखंडन से वगमूल
प्र.1 हम जानते ह क कसी एक पूणाक को स्वयं से गुणा करके एक पूण वग प्राप्त कया जा सकता है। क्या कसी
संख्या का अभाज्य गुणनखंडन उसके पूण वग के नधारण म हमारी सहायता करेगा?
हाँ। य द अभाज्य गुणनखंड को दो समान भाग म बाँटा जा सके तो कसी एक भाग का गुणनफल ही वगमूल है।
36 = 2 × 2 × 3 × 3 = (2 × 3) × (2 × 3) = 62 → √36 = 6
50 = 2 × 5 × 5 → 2 का कोई सह-गुणनखंड नही ं → पूण वग नही ं
यह क्य काम करता है: m का वग करने पर m का प्रत्येक अभाज्य ठ क दुगुनी बार आ जाता है। इसे उल्टा पढ़ने
पर, कोई संख्या पूण वग तभी है जब उसका प्रत्येक अभाज्य सम बार आए — और तभी पूरा गुणनखंडन दो समान
भाग म बँट सकता है। प्रत्येक घातांक को आधा करने पर मूल तुरंत मल जाता है।
प्र.2 क्या 324 एक पूण वग है?
हाँ, 324 = 182 है।
324 = 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 3
दो समान समूह: (2 × 3 × 3) × (2 × 3 × 3)
= (2 × 3 × 3)2 = 182
या युग् मों में: (2 × 2) × (3 × 3) × (3 × 3)
अत: √324 = 18
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
दोन व धयाँ एक ही बात क्य कहती ह: युग्म बनाने से दखता है क प्रत्येक अभाज्य सम बार आया है — 2 दो
बार और 3 चार बार। प्रत्येक युग्म से एक सदस्य लेने पर 2 × 3 × 3 = 18 मलता है, जो मूल है। दो समान भाग म
बाँटना और युग्म बनाना एक ही तथ्य के दो रूप ह — क सभी घातांक सम ह।
प्र.3 क्या 156 एक पूण वग है?
नह ।
156 = 2 × 2 × 3 × 13
युग् म (2 × 2) तो बन गया, परंत ु 3 और 13 अके ले रह जाते है ं
अत: 156 को दो समान समूहों में नही ं बाँट ा जा सकता
इस लए 156 एक पूण वग नह है।
स्वयं जाँ चए: 122 = 144 और 132 = 169, अत: 156 दो क्रमागत वग के बीच पड़ता है और स्वयं वग नह हो
सकता।
प्र.4 अभाज्य गुणनखंडन का उपयोग करके ात क जए क 1156 और 2800 पूण वग है या नह ।
1156 पूण वग है; 2800 नह है।
1156 = 2 × 578 = 2 × 2 × 289 = 2 × 2 × 17 × 17
= (2 × 17) × (2 × 17) = 342
√1156 = 34
2800 = 2 × 1400 = 2 × 2 × 700 = 2 × 2 × 2 × 350 = 2 × 2 × 2 × 2 × 175
=2×2×2×2×5×5×7
चारों 2 और दोनों 5 युग् म बना लेते है,ं परंत ु अके ला 7 िबना जोड़ ी के रह जाता है
अत: 2800 पूण वग नह है।
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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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बचा हुआ 7 ही नणय क्य कर दे ता है: पूण वग म प्रत्येक अभाज्य सम बार आना चा हए। 2800 म अभाज्य 7
m
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केवल एक बार आया है, अथात वषम बार, अत: गुणनखंड को कैसे भी सजाइए एक 7 अकेला ही
o l a se रहे
.c a g
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se2800 = 400 × 7 = 202 × 7 है। 2800 को 7 से गुणा करने पर 19600 = 1402 मल जाएगा।
l a
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सं क े त:
com
e m . ag
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 10
g l as
1.1 वग संख्याएँ a
co m
em.
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प्र.1 नम्न ल खत म से कौन-सी संख्याएँ पूण वग नह ह? (i) 2032 (ii) 2048 (iii) 1027 (iv) 1089
m l
m .co a g
l a
se
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a (i) 2032, (ii) 2048 और (iii) 1027 पूण वग नह ह। 1089 पूण वग है।
m a s
.co agl
संख्या कारण नणय
se m
g l a
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(i) 2032 अंत 2 पर वग नही ं
वग नही ं
comवग नही ं
(ii) 2048 अंत 8 पर
m .
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(iii) 1027 अंत 7 पर
(iv) .co
m g l
m a
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1089 1089 = 3 × 3 × 11 × 11 = 332 पूण वग
agl
पहली तीन के लए इकाई अंक ही पयाप्त क्य है: कोई भी वग 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त नह होता, अत: ये तीन
se m
com g l a
.
एक दृ ष्ट म ही बाहर हो जाती ह। चौथी का अंत 9 पर है जो स्वीकाय है, इस लए उसक वास्त वक जाँच आवश्यक
m a
ase
थी — और गुणनखंडन से 1089 = 332, अथात √1089 = 33।
agl
m
संकेत: 2048 = 211 है। घातांक 11 वषम है — यह दूसरा कारण है क वह वग नह हो सकती।
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m l as
.co a g
a s emप्र.2
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64², 108², 292², 36² म से कसका इकाई अंक 4 है?
a c
m .
m a s e
agl
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केवल आधार संख्या का इकाई अंक महत्त्व रखता है।
g l as
a
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m .
m ase
.co
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
वग आधार का इकाई अंक उसका वग अं तम अंक
642 4 16 6
1082 8 64 4 ✓
2922 2 4 4 ✓
362 6 36 6
दो संख्याएँ शत पूरी करती ह — 1082 और 2922।
स्वयं जाँ चए: 1082 = 11664 और 2922 = 85264 — दोन का अंत 4 पर; जब क 642 = 4096 और 362 =
1296 का अंत 6 पर है। प्रश्न म ' कसका' पूछा गया है, परंतु संख्याओं से दो उत्तर मलते ह, अत: दोन बताने
चा हए।
ऐसा क्य होता है: वग का इकाई अंक 4 ठ क तभी होता है जब मूल का इकाई अंक 2 या 8 हो, क्य क 2 × 2 = 4
और 8 × 8 = 64 ही एक अंक वाले ऐसे गुणनफल ह जो 4 पर समाप्त होते ह।
प्र.3 य द 125² = 15625 तो 126² का मान क्या है? (i) 15625 + 126 (ii) 15625 + 262 (iii) 15625 + 253 (iv)
15625 + 251 (v) 15625 + 512
(iv) 15625 + 251
1262 = (125 + 1)2 = 1252 + 2 × 125 + 1
= 15625 + 250 + 1 = 15625 + 251
= 15876
ऐसा क्य होता है: क्रमागत वग का अंतर अगली वषम संख्या होता है और यहाँ वह 126व वषम संख्या 2 ×
126 – 1 = 251 है। दूसरे रूप म, 1262 – 1252 = (126 + 125)(126 – 125) = 251 × 1।
स्वयं जाँ चए: 126 × 126 = 15876 और 15625 + 251 = 15876. ✓
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 441 वग मीटर ेत्रफल वाले वग क भुजा क लंबाई ात क जए।
भुजा √441 है।
441 = 3 × 3 × 7 × 7
= (3 × 7) × (3 × 7) = 212
भुजा = 21 मीटर
अभाज्य गुणनखंडन यहाँ सबसे साफ़ रास्ता क्य है: दोन अभाज्य दो-दो बार आए ह, अत: गुणनखंड 3 × 7
वाले दो समान समूह म बँट जाते ह। एक समूह का गुणनफल 21 ही वगमूल है। अनुमान से भी उत्तर मल सकता था
— 202 = 400 है और संख्या का अंत 1 पर है, अत: मूल का इकाई अंक 1 या 9 होगा, और इस परास म केवल 21
ही बचता है।
प्र.5 वह छोट से छोट वग संख्या ात क जए जो 4, 9 और 10 से वभा जत होती हो।
पहले लघुत्तम समापवत्य ली जए, फर उसे वग बनाइए।
4 = 22, 9 = 32, 10 = 2 × 5
ल.स. = 22 × 32 × 5 = 180
180 में अभाज्य 5 के वल एक बार आया है — िवषम बार
5 से गुणा कीिजए: 180 × 5 = 900 = 22 × 32 × 52 = 302
अभीष्ट सबसे छोटी वग संख्या = 900
900 ही सबसे छोट क्य है: 4, 9 और 10 से वभा जत होने वाली प्रत्येक संख्या उनके ल.स. 180 का गुणज
होगी। 180 का जो गुणज वग हो उसम 180 का प्रत्येक अभाज्य सम बार आना चा हए, अत: कम से कम एक और
5 चा हए। ऐसा सबसे छोटा गुणज 180 × 5 = 900 है, और 900 = 302 वास्तव म 4, 9 तथा 10 से वभा जत
होती है।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.6 वह छोट से छोट संख्या ात क जए जसे 9408 से गुणा करने पर पूण वग प्राप्त हो। प्राप्त गुणनफल का
वगमूल भी ात क जए।
9408 का अभाज्य गुणनखंडन क जए और वषम घातांक वाला अभाज्य ढूँ ढ़ए।
9408 = 2 × 4704 = 2 × 2 × 2352 = 2 × 2 × 2 × 1176
= 2 × 2 × 2 × 2 × 588 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 294 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 147
147 = 3 × 49 = 3 × 7 × 7
अत: 9408 = 26 × 3 × 72
सभी 2 और दोन 7 युग्म बना लेते ह; केवल अकेला 3 बचता है। अत: 3 से गुणा क जए।
9408 × 3 = 28224 = 26 × 32 × 72
= (23 × 3 × 7)2 = 1682
√28224 = 168
3 ही सबसे छोटा गुणक क्य है: प्रत्येक घातांक को सम बनाने के लए वषम घातांक वाले हर अभाज्य को एक
बार और दे ना पड़ता है। यहाँ ऐसा केवल अभाज्य 3 है, अत: सबसे छोटा गुणक 3 ही है; इससे छोट कोई संख्या 3
को अकेला ही छोड़ दे गी।
प्र.7 नम्नां कत संख्याओं के वग के मध्य कतनी संख्याएँ ह? (i) 16 और 17 (ii) 99 और 100
n2 और (n+1)2 के मध्य 2n संख्याएँ होती ह।
(i) n = 16 → 2 × 16 = 32 संख्याएँ (257 से 288 तक, क्योंिक 162 = 256, 172 = 289)
(ii) n = 99 → 2 × 99 = 198 संख्याएँ (9802 से 9999 तक, क्योंिक 992 = 9801, 1002 = 10000)
ऐसा क्य होता है: (n + 1)2 – n2 = 2n + 1 एक वग से अगले वग तक क पूरी छलाँग गनता है। ऊपरी सरे के
वग को हटा दे ने पर ठ क बीच क 2n संख्याएँ बचती ह।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
स्वयं जाँ चए: 289 – 256 – 1 = 32 और 10000 – 9801 – 1 = 198. ✓
प्र.8 नम्न ल खत प्र तरूप म वलुप्त संख्या अं कत क जए। 1² + 2² + 2² = 3², 2² + 3² + 6² = 7², 3² + 4² + 12²
= 13², 4² + 5² + 20² = (___)², 9² + 10² + (___)² = (___)²
पहले चौथी पं क्त —
42 + 52 + 202 = 16 + 25 + 400 = 441 = 212
अब पूरी पं क्तय से नयम प ढ़ए। प्रत्येक पं क्त म तीसरा आधार पहले दो आधार का गुणनफल है और उत्तर उस गुणनफल से एक
अ धक है।
N N+1 N(N + 1) N(N + 1) + 1
1 2 2 3
2 3 6 7
3 4 12 13
4 5 20 21
9 10 90 91
92 + 102 + 902 = 81 + 100 + 8100 = 8281 = 912
यह नयम क्य सत्य है: मान ली जए k = n(n + 1)। तब
n2 + (n+1)2 + k2 = n2 + n2 + 2n + 1 + k2 = 2n2 + 2n + 1 + k2 = 2k + 1 + k2 = (k + 1)2,
क्य क 2n2 + 2n = 2n(n + 1) = 2k। अत: यह सवस मका केवल द गई पं क्तय के लए नह , प्रत्येक n के
लए सत्य है।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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नम्नां कत चत्र म छोटे वग क संख्या कतनी ह? छोटे वग क संख्या का अभाज्य गुणनखंडन ल खए।
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प्र.9
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पृष्ठ 11 — टाइल से बना वग।
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a
दो चरण म ग नए — पहले खंड, फर एक खंड के भीतर के छोटे वग।
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m
िचत्र में खंडों की व्यवस्था 9 × 9 है → 81 खंड
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.पत्येक खंड (सीधा हो या ितरछा) 5 × 5 का जाल है → 25 छोटे वग a g l
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g l a कु ल = 81 × 25 = 2025 छोटे वग
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अभाज्य गुणनखंडन —
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
81 = 34, 25 = 52
2025 = 34 × 52
=3×3×3×3×5×5
उत्तर वग क्य नकला: यहाँ प्रत्येक अभाज्य का घातांक सम है, अत: 2025 पूण वग है — 2025 = (32 × 5)2 =
452। चत्र यह सीधे दखाता है — खंड का 9 × 9 वग, और प्रत्येक खंड छोटे वग का 5 × 5 वग, अत: पूरा चत्र
(9 × 5) × (9 × 5) = 45 × 45 का वग है।
संकेत: खंड को तरछा कर दे ने से उसम छोटे वग क संख्या नह बदलती, अत: तरछे खंड भी सीधे खंड क तरह
ही गने जाते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 12
1.2 घन संख्याएँ
MATH TALK
प्र.1 1 सट मीटर भुजा वाले कतने घन से 2 सट मीटर भुजा वाला एक घन बनता है?
8 घन।
पत्येक परत में 2 × 2 = 4 इकाई घन
ऐसी 2 परते ं है ं
कु ल = 2 × 2 × 2 = 23 = 8
तीन बार गुणा क्य करते ह: घन क लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई तीन बराबर होती ह। उसे इकाई घन से भरने का
अथ है तीन दशाओं म 2-2 ान चुनना, अत: गनती 2 × 2 × 2 होगी। यही कारण है क n × n × n को 'n का
घन' कहते ह।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 1 सट मीटर भुजा वाले कतने घन से 3 सट मीटर भुजा वाला एक घन बनता है?
27 घन।
पत्येक परत में 3 × 3 = 9 इकाई घन
ऐसी 3 परते ं है ं
कु ल = 3 × 3 × 3 = 33 = 27
संकेत: भुजा दुगुनी करने पर इकाई घन क संख्या दुगुनी नह , आठ गुनी हो जाती है, क्य क तीन दशाएँ दुगुनी
होती ह। भुजा 2 से 3 करने पर गनती 8 से 27 हो जाती है, 8 से 12 नह ।
प्र.3 ये संख्याएँ पूण घन कहलाती ह। क्या आप बता सकते ह क इन्ह ये नाम क्य दया गया?
क्य क इनम से प्रत्येक बताती है क कसी घन को भरने म कतने इकाई घन लगते ह।
1 = 1 × 1 × 1 → भुजा 1 का घन
8 = 2 × 2 × 2 → भुजा 2 का घन
27 = 3 × 3 × 3 → भुजा 3 का घन
64 = 4 × 4 × 4 → भुजा 4 का घन
यह नाम कैसे आया: वग के साथ भी ठ क यही हुआ था — 1, 4, 9, 16 को वग इस लए कहते ह क्य क वे कसी
वग म इकाई वग क संख्या बताते ह। यहाँ ठोस आकृ त ने संख्या को अपना नाम दे दया। संस्कृत म भी यही चुनाव
हुआ — घन शब्द ठोस घन और तीसरी घात दोन के लए प्रयुक्त होता था।
प्र.4 क्या 9 एक पूण घन है?
नह ।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
2×2×2=8
3 × 3 × 3 = 27
9, 8 और 27 के बीच है और 2 तथा 3 के बीच कोई पूण संख्या नही ं है
अत: 9 पूण घन नह है — और न ही 10 से 26 तक क कोई संख्या।
यह अंतराल इतना बड़ा क्य है: घन, वग क तुलना म बहुत तेज़ी से बढ़ते ह। 8 और 27 के बीच कोई और घन
इस लए नह है क्य क 2 और 3 के बीच कोई पूण संख्या नह है। यही कारण है क पूण घन, पूण वग से कह
अ धक वरल ह — 100 तक दस वग ह पर केवल चार घन (1, 8, 27, 64)।
प्र.5 क्या आप 4 इकाई क भुजा वाले घन म इकाई घन क संख्या का अनुमान लगा सकते ह?
64 इकाई घन।
पत्येक वग कार परत में 4 × 4 = 16 इकाई घन
ऐसी 4 परते ं है ं
कु ल = 16 × 4 = 4 × 4 × 4 = 43 = 64
संकेत: परत म सोचना आगे भी काम आएगा। यह त्र वमीय गनती को 'एक परत का क्षेत्रफल × परत क संख्या'
म बदल दे ता है — आयतन इसी प्रकार मापा जाता है।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.6 नीचे द गई ता लका को पूण क जए।
1³ = 1 11³ = 1331
2³ = 8 12³ =
3³ = 27 13³ = 2197
4³ = 64 14³ = 2744
5³ = 125 15³ =
6³ = 16³ =
7³ = 17³ = 4913
8³ = 18³ = 5832
9³ = 19³ = 6859
10³ = 20³ =
उपयुक्त ता लका म आप क्या प्र तरूप दे खते ह?
घन क पूरी ता लका —
13 = 1 113 = 1331
23 = 8 123 = 1728
33 = 27 133 = 2197
43 = 64 143 = 2744
53 = 125 153 = 3375
63 = 216 163 = 4096
73 = 343 173 = 4913
83 = 512 183 = 5832
93 = 729 193 = 6859
103 = 1000 203 = 8000
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
ता लका म दखने वाले प्र तरूप —
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m as
सम- वषम बना रहता है। वषम संख्या का घन वषम और सम संख्या का घन सम होता है।
.co a g l
em
सभी इकाई अंक आते ह। वग के वपरीत घन का अंत दस अंक पर होता है — 1 से 10 तक के आधार के लए 1, 8, 7,
a s
l अंक से आधार का अंक तय। घन का अंत 8 पर हो तो आधार का अंत 2 पर; 7 पर हो तो 3 पर; 3 पर हो तो 7 पर; 2
4, 5, 6, 3, 2, 9, 0।
a gइकाई
पर हो तो 8 पर। अंक 0, 1, 4, 5, 6, 9 अपने ान पर ही रहते ह।
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शून्य तगुने होते ह। 103 = 1000, 203 = 8000 — संख्या के अंत का एक शून्य घन म तीन शून्य बन जाता है।
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a s emही परास म 89 वग ह।
agl
घन वरल ह। 8000 तक केवल 20 घन ह, जब क उतने
सभी अंक क्य आते ह: 0 से 9 तक के अंक के घन ह 0, 1, 8, 27, 64, 125, 216, 343, 512, 729, जनके
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अं तम अंक ह 0, 1, 8, 7, 4, 5, 6, 3, 2, 9 — दस अंक, प्रत्येक ठ क एक बार। अत: घन का अं तम अंक उसके
घनमूल का इकाई अंक न त रूप से बता दे ता है — वग म ऐसा नह होता।
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a प्रश्न — पृष्ठ 13
पाठ्य
m a s
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1.2 घन संख्याएँ
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1,l4, 5, 6, 9 ही संभा वत इकाई अंक होते ह। बताइए क पूण घन के संभा वत
हम जानते ह क वग के लए 0, g
प्र.1
इकाई अंक क्या ह गे?
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0 से 9 तक सभी दस अंक संभव ह।
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agl संख्या का इकाई अंक 0 1 2 3 4 5 6 7 8 9
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उसके घन का इकाई अंक 0
com
1 8 7 4 5 6 3 2 9
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घन वग से भन्न क्य ह: दस अंक का घन करने पर हर बार अलग इकाई अंक मलता है, अत: यह संग त एक-
एक है और दस अंक को ढक लेती है। वग म 2 और 8 दोन से 4, 3 और 7 दोन से 9 मलता है — दो अंक एक
co m
पर मुड़ जाते ह और केवल छह प रणाम बचते ह। इसी लए इकाई अंक से कई संख्याएँ वग होने से बाहर हो जाती ह,
m .
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पर कोई भी संख्या घन होने से बाहर नह होती।
m l
.co a g
m संकेत: इससे घनमूल का अनुमान सरल हो जाता है। 4913 का अंत 3 पर है, अत: उसके घनमूल का अंत 7 पर
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ag होगा; और 103 = 1000 तथा 203 = 8000 के बीच होने से मूल 10 और 20 के बीच है — अत: वह 17 ही है।
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a
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 क्या आप वग के समान 1 अंक, 2 अंक और 3 अंक वाले पूण घन क संख्या ात कर सकते ह? आप क्या
अवलोकन करते ह?
13, 23, 33, … से सीधे ग नए और वग से तुलना क जए।
अंक घन कतने तुलना के लए वग कतने
1 1, 8 2 1, 4, 9 3
2 27, 64 2 16, 25, 36, 49, 64, 81 6
3 125, 216, 343, 512, 729 5 100, 121, …, 961 22
अवलोकन: घन, वग क तुलना म बहुत वरल ह। 1000 से छोटे केवल 9 घन ह, जब क वग 31 ह।
यह वरलता क्य बढ़ती है: क्रमागत घन का अंतर (n+1)3 – n3 = 3n2 + 3n + 1 है जो n2 क तरह बढ़ता है,
जब क क्रमागत वग का अंतर केवल 2n + 1 है। घन के अंतराल कह तेज़ी से चौड़े होते ह, इस लए कसी भी
नयत परास म उनक संख्या कम पड़ती जाती है।
प्र.3 क्या एक पूण घन के अंत म दो शून्य (00) हो सकते ह? व्याख्या क जए।
नह । कसी घन के अंत म 0, 3, 6 … शून्य हो सकते ह, पर ठ क 2 कभी नह ।
103 = 1000 → 3 शून्य
203 = 8000 → 3 शून्य
1003 = 1000000 → 6 शून्य
शून्य क संख्या 3 का गुणज क्य होती है: संख्या को m × 10k ल खए, जहाँ m का अंत शून्य पर नह है। घन
करने पर m3 × 103k मलता है और m3 का अंत भी शून्य पर नह हो सकता — य द होता तो 10, m3 को
वभा जत करता और m म 2 तथा 5 दोन होते। अत: घन के अंत म ठ क 3k शून्य ह गे, जो सदै व 3 का गुणज है।
दो शून्य असंभव ह।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: वग से तुलना क जए, जहाँ अंत के शून्य सदै व सम संख्या म होते ह। दोन तय म शून्य क संख्या उसी
घात से गुणा हो जाती है जो आप ले रहे ह।
प्रयास क जए — पृष्ठ 14
टै क्सीकैब संख्याएँ
TRY THIS
प्र.1 1729 के प ात अगली दो टै क्सीकैब संख्याएँ 4104 और 13832 ह। इनम से प्रत्येक को दो धनात्मक घन के योग
के रूप म व्यक्त करने क दो व धयाँ ात क जए।
प्रत्येक संख्या से छोटे घन म ऐसे दो घन खो जए जनका योग वही संख्या हो।
4104 = 23 + 163 = 8 + 4096
4104 = 93 + 153 = 729 + 3375
13832 = 23 + 243 = 8 + 13824
13832 = 183 + 203 = 5832 + 8000
खोज को छोटा कैसे कर: 4104 के लए सबसे बड़ा संभव घन 163 = 4096 है, क्य क 173 = 4913 पहले ही
बड़ा है। अत: a को 1 से 16 तक चलाइए, 4104 म से a3 घटाइए और दे खए क शेष कोई घन है या नह । केवल a
= 2 और a = 9 काम करते ह। इसी प्रकार 13832 पर a को 24 तक चलाने पर a = 2 और a = 18 मलते ह।
क्या आप जानते ह? हाड ने 1729 को 'अत्यंत नीरस संख्या' कहा था, जस पर रामानुजन ने उत्तर दया क यह
वह न्यूनतम संख्या है जसे दो घन के योग के रूप म दो भन्न प्रकार से व्यक्त कया जा सकता है — 1729 = 13 +
123 = 93 + 103। ध्यान द जए क 13832 = 23 × 1729 है — अथात तीसरी टै क्सीकैब संख्या पहली क ही
आठ गुनी है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 14–15
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
पूण घन संख्याएँ और क्रमागत वषम संख्याएँ; घनमूल
प्र.1 आगे बढ़ते हुए इस ेणी म हम क्रमागत वषम संख्याओं का नम्न ल खत योग प्राप्त होता है — 91 + 93 + 95 +
97 + 99 + 101 + 103 + 105 + 107 + 109. क्या आप गणना कए बना ात कर सकते ह क उपयुक्त का
योगफल कतना है?
1000, अथात 103।
पदों की िगनती: 91, 93, …, 109 → 10 क्र मागत िवषम संख्याएँ
पितरूप में n क्रमागत िवषम संख्याओं का योग n3 होता है
अत: योग = 103 = 1000
यह क्य चलता है: पं क्तय म क्रमश: 1, फर 2, फर 3, … क्रमागत वषम संख्याएँ ली गई ह और उनके योग 13,
23, 33, … ह। अत: 10 संख्याओं क पं क्त का योग 103 ही होगा। बीच से भी दे ख सकते ह — पद जोड़े बनाते ह:
91 + 109 = 200, 93 + 107 = 200, इस प्रकार 200 के पाँच जोड़े, अथात 5 × 200 = 1000।
संकेत: प्रत्येक पं क्त वह से आरंभ होती है जहाँ पछली समाप्त हुई थी, अत: पं क्तयाँ कह भी नह दोहराती।
इसी लए n तक क सभी पं क्तय को जोड़ने पर 13 + 23 + … + n3 वषम संख्याओं के एक अखंड खंड के रूप म
मल जाता है।
प्र.2 आइए, दे ख क क्या 3375 एक पूण घन है?
हाँ, 3375 = 153 है।
3375 = 3 × 3 × 3 × 5 × 5 × 5
तीन समान समूह: (3 × 5) × (3 × 5) × (3 × 5)
= (3 × 5)3 = 153
या ित्रकों में: (3 × 3 × 3) × (5 × 5 × 5) = 33 × 53
अत: ∛ 3375 = 15
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
तीन समूह ही सही जाँच क्य है: m का घन करने पर m का प्रत्येक अभाज्य ठ क तगुनी बार आ जाता है। अत:
पूण घन वही संख्या है जसम प्रत्येक अभाज्य 3 के गुणज बार आता है, और यही कहने का दूसरा तरीका है क पूरा
गुणनखंडन तीन समान समूह म बँट जाए। प्रत्येक घातांक को 3 से भाग दे ने पर घनमूल मल जाता है।
प्र.3 क्या 500 एक पूण घन है?
नह ।
500 = 2 × 2 × 5 × 5 × 5
तीनों 5 एक ित्रक बना लेते है,ं परंत ु 2 के वल दो ही है ं
अत: गुणनखंडों को तीन समान समूहों में नही ं बाँट ा जा सकता
इस लए 500 एक पूण घन नह है।
एक कम घातांक ही नणय क्य कर दे ता है: 500 = 22 × 53 म 2 का घातांक 2 है जो 3 का गुणज नह है।
गुणनखंड को कैसे भी सजाइए, यह कमी दूर नह होगी।
स्वयं जाँ चए: 73 = 343 और 83 = 512, अत: 500 दो क्रमागत घन के बीच पड़ता है। 500 को 2 से गुणा करने
पर 1000 = 103 मल जाता है — यही सबसे छोटा गुणक है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 15–16
घनमूल; क्रमागत अंतर
प्र.1 नम्न संख्याओं के घनमूल ात क जए। (i) ∛64 = (ii) ∛512 = (iii) ∛729 =
प्रत्येक का गुणनखंडन त्रक म क जए।
(i) 64 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 = (2 × 2)3 = 43 → ∛ 64 = 4
(ii) 512 = 29 = (23)3 = 83 → ∛ 512 = 8
(iii) 729 = 36 = (32)3 = 93 → ∛ 729 = 9
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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
घातांक से यह इतना शीघ्र क्य हो जाता है: ये तीन कसी एक ही अभाज्य क घात ह, अत: घनमूल लेने का अथ
m as e
l
केवल घातांक को 3 से भाग दे ना है — 26 → 22, 29 → 23, 36 → 32।
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a s em
gl आप जानते ह? 64 पूण वग भी है (82) और पूण घन भी (43), क्य क 64 = 26 है और 6, 2 तथा 3 दोन से
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वभा जत होता है। ऐसी अगली संख्या 729 = 36 = 272 = 93 है।
co m
e m . ag
g l as
प्र.2
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क्रमागत पूण घन के अंतर उस चरण तक ात क जए जब तक क अंतर एकसमान न हो जाए। आपने क्या
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अवलोकन कया?
co
em.
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.
e mभ करके बार-बार अंतर ली जए। a
s
घन से आरं
a
aglपूण घन 1 8 27 64 125 216 343
m a s
em24
.co agl
चरण 1 7 19 37 61 91 127
a s
चरण 2 12
a
18
gl 30 36
m
चरण 3 6 6 6 6
. co
e m
m l as
.co
अंतर चरण 3 पर एकसमान हो जाते ह और वह अचर मान 6 है।
a g
s m 3 ही क्य , और 6 ही क्य : वग म एक बार अंतर लेने पर n2 से 2n + 1 (घात 1) मलता है और दूसरी बार
eचरण
gl a
a लेने पर अचर 2। घन म —
se m
चरण 2: उसका अंतर 6n + 6, घात 1 का व्यं.जcक; om
चरण 1: (n+1)3 – n3 = 3n2 + 3n + 1, घात 2 का व्यंजक;
g l a
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l a s
agकम
चरण 3: उसका अंतर अचर 6।
प्रत्येक बार अंतर लेने से घात एक हो जाती है, अत: तीसरी घात को तीन चरण चा हए। बचा हुआ अचर 3 × 2
m
× 1 = 6 है, ठ क वैसे जैसे वग म 2 × 1 = 2 बचता है।
. co
em
m l as
.co a g
संकेत: गणना से पहले अनुमान लगाइए — चौथी घात के अंतर चरण 4 पर एकसमान ह गे और अचर 4 × 3 × 2
se m × 1 = 24 होगा। 1, 16, 81, 256, 625, 1296 पर आज़माइए।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 16
e m . co agl
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
1.3 इ तहास क एक झलक
प्र.1 ग णतीय सं क्रया √ (वगमूल, घनमूल आ द) के लए ‘मूल’ (पौधे क जड़) शब्द का प्रयोग क्य कया जाता है?
क्य क प्राचीन भारत म इस सं क्रया के लए संस्कृत शब्द मूल प्रयुक्त होता था, जसका अथ है पौधे क जड़, और साथ ही आधार,
कारण, उत्प त्त।
वग = वगाकार आकृ त, उसका क्षेत्रफल तथा दूसरी घात; वग-मूल = वगमूल।
घन = ठोस घन तथा तीसरी घात; घन-मूल = घनमूल।
पाद (पैर, आधार, उत्प त्त) भी मूल के लए प्रयुक्त होता था। ब्रह्मगुप्त (628 सामान्य संवत्) के अनुसार, " कसी कृ त (वग) का
पाद (मूल) वह है जसका वह वग होता है।"
यह उपमा क्य ठ क बैठती है: जड़ वह है जससे कोई वस्तु उपजती है। 9 का वग बनने पर 3 ही वह संख्या है
जससे 9 'उपजा' है, अत: 3 को 9 का मूल कहना पौधे और उसक जड़ वाला ही चत्र है। यह शब्द आगे भी गया
— अरबी म जध्र और लै टन म radix, दोन का अथ पौधे क जड़ ही है, और अं ेज़ी का 'root' तथा 'radical'
लै टन से आए ह।
क्या आप जानते ह? इस ग णतीय अथ म 'मूल' शब्द भारत म कम से कम पहली शताब्द सामान्य संवत् पूव से
और 'वग' तथा 'घन' कम से कम तीसरी शताब्द सामान्य संवत् पूव से प्रयोग म ह। चौथी घात का अपना नाम था
— वग-वग।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 17
1.3 इ तहास क एक झलक
प्र.1 27000 और 10648 का घनमूल ात क जए।
त्रक म गुणनखंडन क जए।
27000 = 27 × 1000 = 33 × 103 = (3 × 10)3 = 303
∛ 27000 = 30
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10648 = 2 × 5324 = 2 × 2 × 2662 = 2 × 2 × 2 × 1331
1331 = 11 × 11 × 11
10648 = 23 × 113 = (2 × 11)3 = 223
∛ 10648 = 22
इनका अनुमान भी लगाया जा सकता था: 10648 का अंत 8 पर है, अत: घनमूल का अंत 2 पर होगा। यह
8000 = 203 और 27000 = 303 के बीच है, अत: मूल 20 और 30 के बीच है — और उस परास म 2 पर समाप्त
होने वाली एकमात्र संख्या 22 है।
प्र.2 1323 को घन संख्या बनाने के लए आप कस संख्या से गुणा करगे?
गुणनखंडन करके दे खए क कस अभाज्य का घातांक 3 के गुणज से कम है।
1323 = 3 × 441 = 3 × 3 × 147 = 3 × 3 × 3 × 49
= 3 3 × 72
तीन 3 पहले ही त्रक बना चुके ह; 7 एक कम है। अत: 7 से गुणा क जए।
1323 × 7 = 9261 = 33 × 73 = (3 × 7)3 = 213
∛ 9261 = 21
7 ही सबसे छोटा गुणक क्य है: घन बनाने के लए प्रत्येक घातांक 3 का गुणज होना चा हए। यहाँ 7 का घातांक 2
है, अत: उसे 3 तक पहुँचाने के लए ठ क एक और 7 चा हए। इससे छोट कोई संख्या यह नह कर सकती, और बड़ी
संख्या नए अभाज्य ले आएगी जन्ह फर सुधारना पड़ेगा।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 नम्न म से सत्य या असत्य बताइए। साथ ही अपने तक क व्याख्या क जए। (i) कसी वषम संख्या का घन सम
होगा। (ii) ऐसा कोई पूण घन नह जो 8 पर समाप्त होता है। (iii) 2 अंक य संख्या का घन 3 अंक य संख्या हो
सकता है। (iv) 2 अंक वाली संख्या के घन म सात या अ धक अंक हो सकते ह। (v) घन संख्याओं के गुणनखंड
क संख्या वषम होती है।
पाँच कथन असत्य ह। कारण इस प्रकार ह —
कथन नणय कारण
(i) िवषम संख्या का घन सम होगा अस त्य िवषम × िवषम × िवषम िवषम ही होता है: 33 = 27, 73 = 343
(ii) कोई पूण घन 8 पर समाप्त नही ं होता अस त्य 23 = 8, 123 = 1728, 223 = 10648
(iii) 2 अंक ीय संख्या का घन 3 अंक ीय हो सकता है अस त्य सबसे छोटा 103 = 1000 है, जो पहले ही 4 अंक ों का है
(iv) 2 अंक ीय संख्या के घन में 7 या अिधक अंक हो सकते है ं अस त्य सबसे बड़ा 993 = 970299 है, के वल 6 अंक
(v) घन संख्याओं के ग ण
ु नखंडों की संख्या िवषम होती है अस त्य 8 के ग ण
ु नखंड 1, 2, 4, 8 — चार, अथ त सम
(i) और (ii) क्य असत्य ह: वषम संख्या 2k + 1 होती है और वषम संख्याओं का गुणनफल सदै व वषम रहता
है, अत: कसी वषम संख्या का घन सम हो ही नह सकता। (ii) के लए, घन का अं तम अंक आधार के अं तम अंक
से तय होता है और 2 का घन 8 पर समाप्त होता है — वस्तुत: 2 पर समाप्त होने वाली प्रत्येक संख्या का घन 8 पर
समाप्त होता है।
(iii) और (iv) क्य असत्य ह: दो अंक क संख्याएँ 10 से 99 तक ह, अत: उनके घन 103 = 1000 से 993 =
970299 तक ह। इस परास के प्रत्येक घन म 4, 5 या 6 अंक होते ह — न 3, न 7।
(v) क्य असत्य है: गुणनखंड क वषम संख्या वग का लक्षण है, घन का नह । कसी घन n3 के गुणनखंड क
संख्या वषम तभी होगी जब वह वग भी हो, जैसे 64 = 43 = 82 (गुणनखंड 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64 — सात)। 8
या 27 के लए यह संख्या सम है।
प्र.4 आपको बताया जाता है क 1331 एक पूण घन संख्या है। इस संख्या का गुणनखंड कए बना क्या आप अनुमान
लगा सकते ह क इसका घनमूल क्या है? इसी प्रकार 4913, 12167 और 32768 के घनमूल का अनुमान
लगाइए।
हाँ — अं तम अंक से इकाई अंक तय क जए और आकार से दहाई अंक।
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घन अं तम अंक → मूल का इकाई अंक परास घनमूल
1331 1→1 1000 = 103, 8000 = 203 → मूल 10–20 में 11
4913 3→7 मूल 10–20 में 17
12167 7→3 8000 = 203, 27000 = 303 → मूल 20–30 में 23
32768 8→2 27000 = 303, 64000 = 403 → मूल 30–40 में 32
यह अनुमान संयोग नह , न त क्य है: घन करने पर प्रत्येक अंक अलग अं तम अंक दे ता है, अत: घन का
अं तम अंक उसके मूल का इकाई अंक अ तीय रूप से तय कर दे ता है (1→1, 3→7, 7→3, 8→2)। फर संख्या
का आकार दहाई अंक तय कर दे ता है। दोन मलकर ठ क एक ही संभावना छोड़ते ह।
स्वयं जाँ चए: 113 = 1331, 173 = 4913, 233 = 12167, 323 = 32768. ✓
प्र.5 नम्न ल खत म से सबसे बड़ा कौन है? अपने तक क व्याख्या क जए। (i) 67³ – 66³ (ii) 43³ – 42³ (iii) 67²
– 66² (iv) 43² – 42²
(i) 673 – 663 सबसे बड़ा है। पूरी घात नकालने के बजाय दोन अंतर-सूत्र का उपयोग क जए।
a3 – (a – 1)3 = 3a2 – 3a + 1
a2 – (a – 1)2 = 2a – 1
व्यंजक हल मान
(i) 673 – 663 3(672) – 3(67) + 1 = 13467 – 201 + 1 13267
(ii) 433 – 423 3(432) – 3(43) + 1 = 5547 – 129 + 1 5419
(iii) 672 – 662 2(67) – 1 = 134 – 1 133
(iv) 432 – 422 2(43) – 1 = 86 – 1 85
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गणना से पहले ही उत्तर कैसे दखता है: क्रमागत घन का अंतर 3a2 क तरह बढ़ता है, जब क क्रमागत वग का
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om> 43 है, वकल्प (i) सबसे बड़ा है। l
अंतर केवल 2a क तरह। अत: (i) और (ii), (iii) तथा (iv) से कह बड़े ह; और दोन घन-अंतर म बड़े a वाला
जीतेगा। चूँ क.c67 a g
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agl 3 3
स्वयं जाँ चए: 67 = 300763 और 66 = 287496, अत: 300763 – 287496 = 13267. ✓
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पहेली का समय — वगाकार युग्म! — पृष्ठ 18 a
वगाकार युग्म!
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TRY THIS
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a s emद गई संख्याओं को दे खए — 3 6 10 15 1. ये इस प्रकार व्यव
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त क गई ह क संलग्न संख्याओं का युग्म
a
प्र.1
जोड़ने पर एक वग प्राप्त होता है। 3 + 6 = 9, 6 + 10 = 16, 10 + 15 = 25, 15 + 1 = 16. 1 से 17 तक क
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संख्याओं को एक पं क्त म इस प्रकार व्यव त करने का प्रयास क जए क प्रत्येक संलग्न संख्या युग्म जोड़ने पर
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एक वग प्राप्त हो।
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यह व्यव ा काम करती है —
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16, 9, 7, 2, 14, 11, 5, 4, 12, 13, 3, 6, 10, 15, 1, 8, 17
a g l
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a gl क संलग्न युग्म का योग 9, 16 या 25 है —
प्रत्ये
se m
16+9 = 25 9+7 = 16 7+2 = 9
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2+14 = 16 14+11 = 25 11+5 = 16
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agl 1+8 = 9
5+4 = 9 4+12 = 16 12+13 = 25 13+3 = 16 3+6 = 9 6+10 = 16
10+15 = 25 15+1 = 16 8+17 = 25
. c om
इसे संयोग से नह , व ध से कैसे खोज: 1 से 17 तक क दो संख्याओं का योग कमmसे कम 3 और अ धक से
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अoधक a
33 होगा, अत: संभव वग केवल 9, 16 और 25 ह। अब प्रत्येक संख्याlक
se
m .c— 1 के साथ 8 और 15; 2 के साथ 7 और 14; 16 के साथ केवल 9; 17agके साथ केवल 8। फर सबसे कम
े लए उसके संभव पड़ोसी ल खए
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agl वकल्प वाली संख्याओं से आरंभ करके ंखला जोड़ते जाइए।
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प्र.2 क्या आप इन संख्याओं को एक से अ धक प्रकार से व्यव त कर सकते ह? य द नह तो क्या आप इसक
व्याख्या कर सकते ह?
नह — उसी पं क्त को उल्टा पढ़ने के अ त रक्त कोई दूसरी व्यव ा नह है।
16 + p वग बनता है के वल p = 9 के िलए (16 + 9 = 25)
17 + p वग बनता है के वल p = 8 के िलए (17 + 8 = 25)
यही सब कुछ क्य तय कर दे ता है: जस संख्या का केवल एक ही संभव पड़ोसी है वह पं क्त के बीच म नह बैठ
सकती, क्य क बीच के ान पर दो पड़ोसी चा हए। अत: 16 और 17 को दोन सर पर होना ही पड़ेगा। इससे
आरंभ 16, 9, … और अंत …, 8, 17 न त हो जाता है। आगे भी प्रत्येक चरण बाध्य है — 9 के बाद संभव पड़ोसी
7 (16) और 16 (25) ह, पर 16 पहले ही प्रयुक्त है, अत: 7 ही आएगा; इसी तक से हर चरण पर एक ही ंखला
बचती है। उसे उल्टा पढ़ना नई व्यव ा नह , वही पं क्त है।
संकेत: कुछ संख्याओं के संभव पड़ोसी दे खए — 4 के साथ 5 और 12; 6 के साथ 3 और 10; 13 के साथ 3 और
12। जनके दो वकल्प ह वे पं क्त के भीतर बैठती ह; जनका एक ही वकल्प है वे सर पर।
प्र.3 क्या आप इसी प्रकार क व्यव ा 1 से 32 तक (पुन: बना पुनरावृ त्त) क संख्याओं से कर सकते ह परंतु इस बार
सभी संख्याएँ एक वृत्त पर व्यव त करनी ह?
हाँ। 1 से 32 तक क एक ऐसी वृत्तीय व्यव ा यह है, जसम प्रत्येक संलग्न युग्म का योग एक वग है —
1, 8, 28, 21, 4, 32, 17, 19, 30, 6, 3, 13, 12, 24, 25, 11, 5, 31, 18, 7, 29, 20, 16, 9, 27, 22, 14, 2,
23, 26, 10, 15 — और िफर वापस 1 पर
वृत्त म चलते हुए सभी योग 9, 16, 25, 36 या 49 ह —
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1+8 = 9 8+28 = 36 28+21 = 49 21+4 = 25 4+32 = 36 32+17 = 49
17+19 = 36 19+30 = 49 30+6 = 36 6+3 = 9 3+13 = 16 13+12 = 25
12+24 = 36 24+25 = 49 25+11 = 36 11+5 = 16 5+31 = 36 31+18 = 49
18+7 = 25 7+29 = 36 29+20 = 49 20+16 = 36 16+9 = 25 9+27 = 36
27+22 = 49 22+14 = 36 14+2 = 16 2+23 = 25 23+26 = 49 26+10 = 36
10+15 = 25 15+1 = 16
वृत्त, पं क्त से क ठन क्य है: पं क्त म दोन सर को केवल एक-एक पड़ोसी चा हए, अत: जस संख्या का एक ही
संभव पड़ोसी है उसे सरे पर रखा जा सकता है। वृत्त म प्रत्येक संख्या को दो पड़ोसी चा हए, अत: कसी भी संख्या
का केवल एक पड़ोसी नह होना चा हए। इसी लए 1 से 17 तक को वृत्त म नह सजाया जा सकता — 16 और 17
के पास एक-एक ही पड़ोसी है — जब क 32 इतना बड़ा है क प्रत्येक संख्या के कम से कम दो पड़ोसी बन जाते ह।
प्रयास क जए: जाँ चए क 1 से 31 तक वृत्त क्य नह बनता — 31 के पड़ोसी केवल 5 और 18 ह, और 30 के
केवल 6 और 19; ंखला आगे बढ़ाकर दे खए कहाँ टू टती है। वृत्तीय व्यव ा 32 से आरंभ होकर उससे बड़ी प्रत्येक
संख्या के लए संभव है।
अध्याय — एक नज़र म
प्रत्येक लॉकर उसक संख्या के प्रत्येक गुणनखंड के लए एक बार घुमाया जाता है, अत: वह तभी खुला रहेगा जब गुणनखंड
क संख्या वषम हो। गुणनखंड सह-गुणनखंड युग्म म आते ह और युग्म के दोन सदस्य केवल वग म समान होते ह —
इसी लए ठ क वग संख्या वाले लॉकर खुले रह जाते ह।
कसी प्राकृत संख्या n के लए n × n = n2 पूण वग कहलाता है। पूण वग केवल 0, 1, 4, 5, 6 या 9 पर समाप्त होते ह और
उनके अंत म शून्य क संख्या सदै व सम होती है।
प्रथम n वषम संख्याओं का योग n2 होता है। अत: 1, 3, 5, … क्रमश: घटाते जाना एक जाँच है — य द k-व चरण पर ठ क
0 प्राप्त हो तो संख्या k2 है।
अभाज्य गुणनखंडन दोन प्रश्न का उत्तर दे ता है। य द अभाज्य गुणनखंड को दो समान समूह म बाँटा जा सके तो संख्या पूण
वग है, और तीन समान समूह म बाँटा जा सके तो पूण घन है।
वगमूल, वग क व्युत्क्रम सं क्रया है; प्रत्येक पूण वग के दो पूणाक वगमूल होते ह — एक धनात्मक और एक ऋणात्मक —
और इस अध्याय म केवल धनात्मक वगमूल √ लया जाता है। घनमूल ∛ से दशाया जाता है।
वग के क्रमागत अंतर चरण 2 पर और घन के चरण 3 पर एकसमान हो जाते ह — यह पहला संकेत क प्र तरूप क घात
स्वयं को कैसे प्रकट करती है; और संस्कृत म इन वचार के नाम बहुत पहले बन चुके थे — वग के लए वग, घन के लए घन,
तथा मूल नकालने क सं क्रया के लए मूल (पौधे क जड़), जससे आगे अरबी जध्र और लै टन radix बने।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 1 वग और घन AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
वचार अथ जाँ च / नयम उदाहरण
वग संख्या n × n, िजसे n2 िलखते है ं अभाज्य गुणनखंड दो समान समूह म बँट 182 = 324 = (2×3×3)2
इकाई अंक वग का अंितम अंक केवल 0, 1, 4, 5, 6, 9 संभव 1027 का अंत 7 पर → वग नह
अंत के शून्य वग के अंत में शून्य सदै व सम संख्या म 4002 = 160000 (4 शून्य)
वषम संख्याओं का 1 + 3 + 5 + … + (2n–1) बराबर n2 1+3+5+7+9 = 25 = 52
योग
nव वषम संख्या 2n – 1 36व वषम संख्या = 71 352 + 71 = 362 = 1296
वग के बीच अंतराल n2 और (n+1)2 के मध्य 2n 162 और 172 के मध्य 32
संख्याएँ संख्याएँ
त्रभुजाकार संबंध Tn–1 + Tn बराबर n2 10 + 15 = 25 = 52
वगमूल वह x िजसका x2 = y √y; दो पूणाक मूल, ± √441 = 21
घन संख्या n × n × n, िजसे n3 िलखते है ं अभाज्य गुणनखंड तीन समान समूह म बँट 3375 = (3×5)3 = 153
घन का इकाई अंक घन का अंितम अंक 0 से 9 तक सभी दस अंक संभव 23 = 8, 83 = 512
घनमूल वह x िजसका x3 = y ∛y ∛10648 = 22
क्रमागत अंतर बार-बार अंतर ले ना वग म चरण 2, घन म चरण 3 पर घन: 6, 6, 6, …
एकसमान
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