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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: संख्याओं क कहानी
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
48 – 81 24 55 हन्द
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · ग णत · ग णत प्रकाश
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: संख्याओं क कहानी
ग णत प्रकाश भाग-I का अध्याय 3 रीमा और उसके पताजी के साथ चार हजार वष पीछे ले जाता है — छ ड़याँ और मलान प्रतीक, गुमुलगल का 2 म
गनना, रोमन अक्षर, 10 क घात वाले मस्र के प्रतीक, मेसोपोटा मया क आधार-60 प ट्टकाएँ, माया के बदु और दं ड, चीनी छड़ — और दखाता है
क कस प्रकार चार बड़ी अवधारणाओं (समूहन, सांके तक संख्याएँ, आधार तथा 0 स हत ानीय मान) से अंततः वह हदू संख्या पद्ध त बनी
जससे हम आज लखते ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत प्रकाश (कक्षा 8) 48 – 81
खं ड प्रश्न
24 55
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 48
3.1 रीमा क ज ासा
प्र.1 मनुष्य ने कब से गनना आरंभ कया?
लखाई के आ वष्कार से बहुत पहले से — कम से कम पाषाण युग से, अथात लगभग दस हजार वष पूव से। च ह्नत ह य के
प्रमाण तो इससे भी कह अ धक प्राचीन ह।
लेबोम्बो ह ी (दि ण अफीका) — 29 िचह्न — लगभग 44,000 वष पुरानी
इशाग ं ो गणराज्य) — स्तं भ वार िचह्न — 20,000 से 35,000 वष पुरानी
ं ो ह ी (काग
पाषाण युग के पशुपालक — लगभग 10,000 वष पूव
ऐसा क्य होता है: गनने के लए न लखाई आवश्यक है और न संख्या-नाम। जो पशुपालक प्रत्येक गाय के लए
एक छड़ी रख लेता है, उसके पास पहले से ही एक संख्या पद्ध त है। अत: गनती इस अध्याय के कसी भी संख्यांक
से कह अ धक प्राचीन है — ह याँ हम केवल यह बताती ह क गनती का अ भलेख कतना पुराना है, यह नह क
गनती कब आरंभ हुई।
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प्र.2 उन्ह गनने क क्या आवश्यकता थी? वे क्या गनते थे?
जस भी वस्तु का हसाब रखना पड़ता था और जस भी घटना का पूवानुमान करना पड़ता था, उसे वे गनते थे।
भोजन: उपलब्ध फल, सब्जी और अनाज क मात्रा।
पशुधन: झुंड म पशुओं क संख्या, जससे कोई पशु खो जाने पर तुरंत पता चल जाए।
व्यापार: अन्य समूह के साथ वस्तुओं के आदान-प्रदान का ववरण।
अनुष्ठान: द गई भट क संख्या।
समय: वगत दन का हसाब, जससे अमावस्या, पू णमा या कसी ऋतु के आगमन का पूवानुमान कया जा सके।
क्या आप जानते ह? लेबोम्बो ह ी पर 29 चह्न ह — चंद्रमास के 29 या 30 दन के अत्यंत नकट। इसी लए
अनेक इ तहासकार मानते ह क इसका प्रयोग चंद्र कालदशक के रूप म हुआ होगा। दन गनना उतना ही आवश्यक
था जतना पशु गनना।
प्र.3 मनुष्य ने कब से संख्याओं को आधु नक रूप म लखना आरंभ कया?
लगभग 2000 वष पूव, भारत म।
काल क्या हुआ
पाचीन (यजुवद 10 क घात पर आधा रत संख्या-नाम — एक (एकक), दस (दश), सौ (शत), हजार (सहस्र), दस हजार (अयुत) …
संिहता) 1012 और उससे आगे तक, लगभग वैसे ही जैसे आज बोले जाते ह
लगभग तीसरी ब ाली पांडु ल प — 0 स हत 10 अंक से संख्याएँ लखने का पहला ात उदाहरण; 0 तब एक बदु के रूप म
शताब्दी सा.सं. लखा जाता था
499 सा.सं. आयभट्ट ने 10 प्रतीक वाली भारतीय पद्ध त को पूणत: स्पष्ट कया और इससे गणनाएँ क
628 सा.सं. ब्रह्मगुप्त ने 0 को ऋणात्मक संख्याओं स हत एक संख्या के रूप म सं हताबद्ध कया
800 – 830 सा.सं. अरब जगत म पहुँची; अल-ख्वा रज्मी और अल- कद ने लोक प्रय बनाया
1100 – 1200 यूरोप पहुँची; फबोनाची ने इसे अपनाने का पक्ष रखा
सा.सं.
17वी ं शताब्दी तक पूरे यूरोप म अपनाई गई — इसे न अपनाना वै ा नक प्रग त म बाधा बन जाता
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ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क मौ खक रूप पहले आया। भारतीय ग्रंथ म 10 क घात पर आधा रत नाम
हजार वष पूव से थे; परंतु उनसे मेल खाता ल खत रूप — 10 क प्रत्येक घात के लए एक अंक और रक्त घात के
लए 0 — बहुत बाद म बना, क्य क उसके लए 0 का आ वष्कार आवश्यक था।
प्र.4 मेसोपोटा मया के लोग 20, 50, 100,...... को कैसे लखते ह गे?
मेसोपोटा मया क पद्ध त आधार-60 है। इसम केवल दो चह्न ह — 1 के लए एक क ल (यहाँ हम Y लखगे) और 10 के लए एक
कोणीय क ल (यहाँ <)। 59 तक क संख्याएँ एक ही ान म आ जाती ह; 60 से आगे बाईं ओर एक और ान लेना पड़ता है।
20 = 10 + 10 → <<
50 = 10 + 10 + 10 + 10 + 10 → <<<<<
100 = (1) × 60 + 40 → Y | <<<<
अत: 20 और 50 के लए केवल इकाई का ान पयाप्त है। परंतु 100, 60 से बड़ा है, अत: इसके लए दो ान चा हए — एक 60
और शेष 40।
ऐसा क्य होता है: आधार-60 पद्ध त म 60 क कोई घात 60 या उससे अ धक बार नह आ सकती — य द ऐसा
हो तो उनम से 60 को अगली घात म समूहीकृत कर दया जाता है। इस लए प्रत्येक ान म संख्या सदै व 0 से 59 के
बीच रहती है, और यही कारण है क 1 तथा 10 के दो चह्न ही पूरे ान को भरने के लए पयाप्त ह।
संकेत: आधार 60 से आपका सामना प्र त दन होता है। 1 घंटा = 60 मनट और 1 मनट = 60 सेकंड —
मेसोपोटा मया क पद्ध त आज भी प्रयोग म है।
ग णत चचा — पृष्ठ 51
गणन क क्रया व ध
MATH TALK
प्र.1 हम यह कैसे सु न त करगे क सभी गाय चरने के प ात अपने ान पर सुर क्षत वापस आ गई ह?
प्रत्येक गाय के लए एक छड़ी र खए और लौटती हुई गाय से छ ड़य का मलान क जए।
प्रात:काल जैसे-जैसे प्रत्येक गाय बाहर जाए, एक छड़ी बतन म डालते जाइए। न कुछ गनना है, न कोई नाम लेना है — एक
गाय, एक छड़ी।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
संध्या को जैसे-जैसे प्रत्येक गाय लौटे , बतन से एक छड़ी नकालते जाइए।
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अं तम गाय के लौटने पर य द बतन खाली है तो सभी गाय लौट आई ह। य द छ ड़याँ शेष रह जाएँ तो शेष छ ड़य का वह संग्रह
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ही खोई हुई गाय क संख्या है।
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aजुgड़l त और कोई छड़ी बची नह रहती। जन दो संग्रह का एकैक मलान हो जाए, उनका आकार समान होता है,
ऐसा क्य होता है: छ ड़य और गाय के बीच एकैक प्र त चत्रण बनाया गया है — कोई दो गाय एक ही छड़ी से नह
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चाहे उस आकार का नाम कोई जानता हो या नह । गणना क पूरी क्रया व ध यही है और इसम एक भी संख्या-नाम
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क आवश्यकता नह पड़ती।
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प्र.2 क्या हमारे पास अपने पड़ोसी क तुलना म कम गाय ह?
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यह उत्तर बना यह जाने भी दया जा सकता है क कसके पास कतनी गाय ह।
अपनी प्रत्येक गाय के लए एक छड़ी रखकर अपना ढे र बनाइए। पड़ोसी से भी वैसा ही ढे र बनवाइए।
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अब दोन ढे र का युग्म बनाइए — अपने ढे र से एक छड़ी और उनके ढे र से एक छड़ी, बार-बार।
जसका ढे र पहले समाप्त हो जाए, उसके पास कमm
a s e गाय ह। य द दोन साथ-साथ समाप्त ह तो दोन झुंड बराबर ह।
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ऐसा क्य होता है: युग्म बनाना यह जाँचता है क दोन झुंड के बीच एकैक प्र त चत्रण संभव है या नह । य द
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हमारा ढे र उनके ढे र म समा जाए और कुछ छ ड़याँ उनक शेष रह जाएँ, तो हमारा झुंड छोटा है। अत: आकार क
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तुलना करना, आकार मापने से सरल समस्या है — “कम है क्या?” का उत्तर “ कतनी ह?” से बहुत पहले मल जाता
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है।
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m हो जाए? a
य द हमारे पास गाय क संख्या कम है तो हम कतनी और अ धक गाय क आवश्यकता होगी जससे हमारी
और हमारे पड़ोसी क गाय क संख्या एक o l
प्र.3
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उत्तर agl
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युग्म बनाने के प ात पड़ोसी के ढे र म जो छ ड़याँ शेष रह जाती ह, वही उत्तर ह।
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हमारी छिड़ याँ ↔ उनकी छिड़ याँ (युग् म बनाइए)
m हमारा ढे र पहले समाप्त हो जाता है a
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ag उनके ढे र में शेष छिड़ याँ = िकतनी और गाये ं चािहए
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उस शेष संग्रह को बाजार ले जाइए और प्रत्येक छड़ी के बदले एक गाय ले आइए। अब दोन झुंड का पूण मलान हो जाएगा। agl
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ऐसा क्य होता है: यह घटाव है, जो पूणत: मलान से कया गया है। बड़े संग्रह का अ म लत भाग ही दोन संग्रह का
अंतर है — वही वचार जसे आगे चलकर हम 15 − 11 = 4 लखते ह। अंतर यह है क यहाँ उत्तर कोई शब्द या
संख्यांक नह , ब ल्क छ ड़य का एक ढे र है जसे सीधे प्रयोग कया जा सकता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 52 – 53
गणन क क्रया व ध — व ध 1 से 3
MATH TALK
प्र.1 आप अन्य दो प्रश्न (प्रश्न 2 और प्रश्न 3) के उत्तर दे ने के लए छ ड़य का उपयोग कस प्रकार करगे?
एक संग्रह का दूसरे से युग्म बनाकर और शेष को दे खकर।
चरण छ ड़य के साथ क्या क जए इससे क्या ात होता है
1 हमारी प्रत्येक गाय के लए एक छड़ी; पड़ोसी क प्रत्येक गाय के लए एक दो संग्रह जो दोन झुंड को दशाते ह
छड़ी
2 दोन ढे र से एक साथ एक-एक छड़ी हटाते जाइए एकैक प्र त चत्रण बन रहा है
3 हमारा ढे र पहले समाप्त होता है हमारे पास कम गाये ं है ं (पश्न 2)
4 कुछ ग नए मत — उनके ढे र म शेष छ ड़याँ अलग रख ली जए वही संग ह बताता है िक िकतनी और गाये ं चािहए (पश्न
3)
ऐसा क्य होता है: छ ड़याँ झुंड क स ी प्र तकृ त ह, अत: झुंड से जुड़ा प्रत्येक प्रश्न छ ड़य से जुड़े प्रश्न म बदला
जा सकता है — और छ ड़य को हटाया, यु ग्मत तथा अलग रखा जा सकता है, गाय को नह । इसी लए संख्या-नाम
के अ स्तत्व से पहले भी वस्तुओं ारा संख्या नरूपण उपयोगी था।
प्र.2 आप अपनी भाषा के वण क ध्व नय का उपयोग करके इस प्रकार से कतनी संख्याओं को नरू पत कर सकते
ह?
जतने वण आपक भाषा म ह, ठ क उतनी ही संख्याएँ — उससे एक भी अ धक नह ।
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अंगेजी: 26 वण a, b, c, …, z → संख्याएँ 1 से 26
दे वनागरी (िहंद ी): 11 स्वर + 33 व्यंजन = 44 वण → संख्याएँ 1 से 44
तिमल: 12 स्वर + 18 व्यंजन = 30 मूल वण → संख्याएँ 1 से 30
कोई भी भाषा ली जए, उत्तर सदै व एक न त, सी मत संख्या ही होगा। अपनी वणमाला के वण ग नए — वही आपक सीमा है।
ऐसा क्य होता है: इस व ध म प्रत्येक संख्या वण-क्रम का पालन करते हुए एक वण से जोड़ी जाती है। एकैक
प्र त चत्रण उस संग्रह से आगे कभी नह जा सकता जसम वह प्र त च त्रत हो रहा है। अत: वणमाला सी मत होने के
कारण एक सी मत मानक अनुक्रम दे ती है — और संख्याएँ अंतहीन ह। यही इसक कमी है: यह व ध गनने म
सु वधाजनक है परंतु रुक जाती है।
संकेत: इसक तुलना छ ड़य वाली पद्ध त से क जए। छ ड़य म संख्याएँ कभी समाप्त नह होत परंतु बड़े संग्रह के
लए वे असु वधाजनक ह; वण बोलने म सरल ह परंतु समाप्त हो जाते ह। हदू पद्ध त ही दोन बात एक साथ साध
पाती है।
प्र.3 क्या आप इसी प्रकार बड़ी संख्याओं को दशाने के लए भी इस व ध का वस्तार कर सकते ह? और कैसे?
हाँ — ठ क उसी प्रकार जैसे स्वयं रोमन पद्ध त ने कया। प्रतीक को दोहराते जाइए और जब दोहराव अ धक लंबा हो जाए तब एक
नया प्रतीक ले आइए।
XX के बाद आगे बिढ़ ए: XXI, XXII, … XXIX, XXX (30), … XXXX अथवा XL (40)
50 के िलए XXXXX िलखने के स्थान पर नया पतीक: L
िफर LX, LXX, LXXX, XC … और 100 के िलए पुन : नया पतीक: C
तथा आगे: D = 500, M = 1000
अथात वस्तार दो चरण म होता है: (क) उपलब्ध प्रतीक को दोहराइए, और (ख) जब लगभग पाँच दोहराव जमा हो जाएँ तब उस
पूरे समूह को एक नए प्रतीक से बदल द जए।
ऐसा क्य होता है: केवल दोहराव तो मलान प्रतीक ही है — 1000 के लए एक हजार चह्न लगाने पड़गे। 5, 10,
50, 100 पर नया प्रतीक ले आने से प्रत्येक संख्यांक छोटा रहता है। परंतु इसका मूल्य यह है क प्रत्येक नई
सांके तक संख्या के लए एक नया प्रतीक चा हए, अत: आप कतने भी प्रतीक बना ल, कोई न कोई संख्या पहुँच से
बाहर रह ही जाएगी। इसका समाधान अनुभाग 3.4 म है — नए प्रतीक के ान पर प्रतीक क त का उपयोग
क जए।
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आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 54
गणन क क्रया व ध
MATH TALK TRY THIS
प्र.1 मान ली जए आप एक संख्या पद्ध त का उपयोग कर रहे ह जसम संख्याओं को दशाने के लए छ ड़य का
उपयोग कया जाता है जैसा क व ध 1 म बताया गया है। हदू संख्या पद्ध त के संख्या नाम या संख्यांक का
उपयोग कए बना दो संख्याओं या छ ड़य के दो संग्रह के जोड़, घटाव, गुणन और वभाजन क व ध बताइए।
चार सं क्रयाएँ केवल छ ड़याँ इधर-उधर रखकर क जा सकती ह। दोन संग्रह को क और ख क हए।
सं क्रया छ ड़य के साथ क्या क जए उत्तर क्या है
क+ख दोन ढे र को मलाकर एक ढे र बना द जए। िमला हुआ ढे र
क−ख ख क प्रत्येक छड़ी का क क एक छड़ी से युग्म बनाकर दोन हटा द जए। क की शेष अिमिलत छिड़याँ
ख के समाप्त होने पर रुक जाइए।
क×ख ख क प्रत्येक छड़ी के लए क का एक पूरा नया ढे र बनाइए। फर उन िमला हुआ ढे र
सभी ढे र को मला द जए।
क÷ख क म से बार-बार ऐसे बंडल नका लए जनका ख से एकैक मलान हो। िचह्न -छिड़याँ भागफल है;ं क में शेष वे छिड़याँ जो
प्रत्येक पूरे बंडल के पास एक चह्न-छड़ी रख द जए। पूर ा बंडल नही ं बना पाती,ं शेषफल है ं
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक नयम उस सं क्रया का अथ ही है, नाम से र हत। जोड़ना अथात संग्रह को मलाना;
घटाना अथात मलान कया गया भाग हटाना; गुणन अथात समान संग्रह को बार-बार जोड़ना; भाग अथात समान
संग्रह को बार-बार घटाना — और भागफल है कतनी बार ऐसा हो सका, जो स्वयं एक संख्या है, इसी लए उसके
लए भी चह्न-छ ड़य का अपना संग्रह बनता है। यहाँ कह भी “सात” शब्द क आवश्यकता नह पड़ी।
स्वयं जाँ चए: क = 7 छ ड़याँ और ख = 3 छ ड़याँ ली जए। 3-3 के बंडल नका लए: दो बंडल बनगे (दो चह्न) और
1 छड़ी शेष रहेगी। यही 7 ÷ 3 = 2, शेषफल 1 है — और एक भी संख्या बोले बना।
प्र.2 व ध 2 म द गई संख्या पद्ध त का वस्तार करने क एक व ध यह है क एक से अ धक वण वाली ृंखला का
प्रयोग कया जाए। उदाहरण के लए हम 27 के लए ‘aa’ का प्रयोग कर सकते ह। सभी संख्याओं को दशाने के
लए आप इस पद्ध त को कैसे वस्ता रत कर सकते ह? ऐसा करने क अनेक व धयाँ हो सकती ह।
कसी लंबाई क सभी ृंखलाओं का शब्दकोश-क्रम म प्रयोग कर ली जए, तभी अगली लंबाई पर जाइए।
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ृंखला क लंबाई ृंखलाएँ कौन-सी संख्याएँ कतनी
1 वण a, b, c, …, z 1 – 26 26
2 वण aa, ab, ac, …, az, ba, …, zz 27 – 702 262 = 676
3 वण aaa, aab, …, zzz 703 – 18278 263 = 17576
4 वण aaaa, …, zzzz 18279 – 475254 264 = 456976
26 + 676 = 702
702 + 17576 = 18278
18278 + 456976 = 475254
दो वण क पहली ृंखला aa है और वह ठ क 27 पर आती है — जैसा पुस्तक म सुझाया गया है।
ऐसा क्य होता है: k लंबाई क 26k ृंखलाएँ होती ह और योग 26 + 262 + 263 + … असी मत रूप से बढ़ता
है। अत: प्रत्येक संख्या को एक ृंखला मल जाती है और कोई ृंखला व्यथ नह जाती — प्रत्येक संख्या का ठ क
एक नाम और प्रत्येक नाम क ठ क एक संख्या। इस प्रकार यह एक अंतहीन मानक अनुक्रम बन जाता है, जो केवल
26 वण वाली पद्ध त नह थी।
प्रयास क जए: एक सरल वस्तार यह भी है — a, b, …, z, फर aa, bb, …, zz, फर aaa, bbb, …, zzz।
यह भी कभी समाप्त नह होता, परंतु प्रत्येक चरण पर 26k के ान पर केवल 26 नए नाम दे ता है, अत: संख्यांक
बहुत लंबे हो जाते ह। दोन सही ह — पहला कह अ धक प्रभावी है।
प्र.3 आप स्वयं एक संख्या पद्ध त बनाने का प्रयास क जए।
यहाँ एक उदाहरण दया गया है; आपक पद्ध त पूणत: भन्न हो सकती है और वह भी ठ क है। तीन प्रतीक ली जए, जनम प्रत्येक
अगला प्रतीक पछले का दस गुना समूह दशाए।
●=1 ■ = 10 ★ = 100
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संख्या समूहन मेरा संख्यांक
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306 100 + 100 + 100 + 1+1+1+1+1+1
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agटय पर जाँ चए जो अध्याय अब तक रख चुका है:
पद्ध त को अं तम रूप दे ने से पहले उन तीन कसौ
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क्या यह अंतहीन है? अभी नह — यह 1000 से ठ क पहले रुक जाती है। मुझे या तो 1000 के लए प्रतीक जोड़ना होगा या
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ान का प्रयोग करना होगा।
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g दस ● मलकर एक ■ और दस
.c गणना सरल है? हाँ, क्य क प्रत्येक सांके तक संख्या पछली क 10 गुना है,aअत:
क्या इससे गनना सरल है? हाँ — प्रतीक का क्रम न त है।
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■s मलकर एक ★ बनाते ह।
क्या इससे
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ऐसा क्य होता है: सांके तक संख्याओं को कसी एक संख्या क घात चुनने से ही पुन: समूहन यां त्रक बन जाता है।
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य द आपने ● = 1, ■ = 7, ★ = 30 चुना होता तो पद्ध त संख्याएँ लखने के लए तब भी काम करती, परंतु आपको
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ान पर दो अलग-अलग व नमय दर याद रखनी पड़त ।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 57 – 58
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3.2 III. दो के बार-बार गणन से प्राप्त संख्याओं के नाम
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आइए, नीचे दए गए प्रत्येक बक्से म वस्तुओं क संख्या शीघ्रता से गन—
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पृष्ठ 57 के नौ बक्स को पं क्तवार पढ़ने पर:
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बक्सा वस्तुए ँ क्या एक दृ ष्ट म दख गया?
मुिगयाँ 2 हाँ, तुरंत
पीले फू लों का ग च्ु छा इतने िक बता न सकें नह — गु ा खोलकर गनना पड़ेगा
लकड़ी की ग िु ड़याँ 4 हाँ, क ठनाई से
सीढ़ ी के पायदान लगभग 10 नह — दृ ष्ट ऊपर तक ले जानी पड़ती है
कु ा 1 हाँ, तुरंत
अंग ूर का ग च्ु छा इतने िक बता न सकें नह
से ब 6 नह — अ धकांश लोग को गनना पड़ता है
पेंिसले ं लगभग 8 नह — एक-एक करके गननी पड़ती ह
िपरािमड 3 हाँ, तुरंत
ऐसा क्य होता है: बक्से जान-बूझकर ऐसे चुने गए ह। जो तुरंत पढ़े जा सकते ह — 1 कुत्ता, 2 मु गयाँ, 3 परा मड,
4 गु ड़याँ — वे सभी छोटे ह। जैसे ही कसी बक्से म 5 या अ धक वस्तुएँ आती ह, आप संख्या दे खना बंद करके उसे
गनना आरंभ कर दे ते ह। अंगूर और फूल यही बात दूसरे छोर पर दशाते ह।
प्र.2 आप गणना कए बना ही कस आकार के समूह म वस्तुओं क संख्या तुरंत दे ख सकते ह?
लगभग 4 तक। अ धकांश व्य क्तय को एक बार म 5 या उससे अ धक वस्तुओं वाले समूह को गनना क ठन लगता है।
ऐसा क्य होता है: यह सीमा कोई ग णतीय तथ्य नह , मनुष्य क आँख और म स्तष्क का तथ्य है — और संख्यांक
के इ तहास पर इसक छाप हर जगह दखाई दे ती है। जैसे ही मलान चह्न पाँच तक पहुँचते, उन्ह एक दृ ष्ट म कोई
नह पढ़ पाता था, अत: लोग पाँच चह्न के प्रत्येक समूह को एक नए प्रतीक से बदलने लगे। यही रोमन V है जो IIIII
के ान पर आया, और X जो दो V के ान पर।
क्या आप जानते ह? इसी लए संख्या पद्ध तय म बार-बार वही छोटे , मानव-अनुकूल समूह आकार दखाई दे ते ह:
2 (गुमुलगल), 5 (रोमन V), 10 (दोन हाथ क अँगु लयाँ — मस्र और हदू पद्ध त) तथा 20 (हाथ-पैर क
अँगु लयाँ — माया पद्ध त)।
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प्र.3 ऐसी संख्या पद्ध त का प्रयोग करने म क्या क ठनाइयाँ हो सकती ह जो मात्र एक ही आकार के समूह म गणना
करती है? आप 1345 जैसी संख्या को उस पद्ध त म कैसे नरू पत करगे जो मात्र 5 के बार-बार प्रयोग से गणना
करती है?
क ठनाई यह है क संख्यांक क लंबाई लगभग संख्या जतनी ही बड़ी बनी रहती है।
1345 ÷ 5 = 269 (क्योंिक 5 × 269 = 1345)
अत: 1345 = 5 + 5 + 5 + … + 5 (269 बार)
अथात “पाँच” का प्रतीक 269 बार लखना पड़ेगा। 5 के समूहन ने मलान पद्ध त के 1345 चह्न को घटाकर 269 कर दया —
बचत तो हुई, पर पयाप्त नह । इसे लखना, पढ़ना और दो ऐसे संख्यांक क तुलना करना — तीन व्यवहार म असंभव ह।
उपाय बड़ा समूह आकार नह , ब ल्क समूह आकार का एक अनुक्रम है, जसम प्रत्येक पछले का 5 गुना हो:
1 → 5 → 25 → 125 → 625 → 3125
1345 = (2 × 625) + (0 × 125) + (3 × 25) + (4 × 5) + (0 × 1)
= 1250 + 0 + 75 + 20 + 0 = 1345 ✓
आधार-5 संख्यांक : 20340
अब वही संख्या चत्र-रूप म केवल 9 प्रतीक माँगती है (∿∿ ⬡⬡⬡ □□□□), 269 नह ।
ऐसा क्य होता है: एक ही समूह आकार से संख्यांक क लंबाई संख्या के अनुपात म बढ़ती है — संख्या दुगुनी
क जए, लखाई भी दुगुनी। परंतु जब सांके तक संख्याएँ 5 क घात ह तो प्रत्येक नया प्रतीक परास को 5 गुना कर
दे ता है, अत: लंबाई केवल आवश्यक घात क संख्या जतनी तेजी से बढ़ती है। आधार रखने का सारा लाभ यही है।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 59
3.2 IV. रोमन संख्यांक
प्र.1 नम्न ल खत संख्याओं को रोमन पद्ध त म दशाइए। (i) 1222 (ii) 2999 (iii) 302 (iv) 715
पुस्तक का ही नयम ली जए: पहले यथासंभव 1000, फर यथासंभव 500, फर 100, 50, 10, 5 और अंत म 1।
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(i) 1222 = 1000 + 100 + 100 + 10 + 10 + 1 + 1
= MCCXXII
(ii) 2999 = 1000 + 1000 + 900 + 90 + 9
= MM + CM + XC + IX = MMCMXCIX
(iii) 302 = 100 + 100 + 100 + 1 + 1
= CCCII
(iv) 715 = 500 + 100 + 100 + 10 + 5
= DCCXV
पढ़कर जाँ चए: MCCXXII = 1000 + 200 + 20 + 2 = 1222 ✓ MMCMXCIX = 2000 + 900 + 90 + 9 = 2999 ✓
CCCII = 300 + 2 = 302 ✓ DCCXV = 500 + 200 + 15 = 715 ✓
ऐसा क्य होता है: 2999 रोचक है। केवल समूहन के नयम से 900 = DCCCC, 90 = LXXXX और 9 = VIIII
मलता, अथात MMDCCCCLXXXXVIIII — 17 प्रतीक। “एक कम” वाली व ध (4 के लए IV, 40 के लए
XL) से CM, XC, IX मलते ह और केवल 8 प्रतीक लगते ह। पुस्तक स्वयं कहती है क इस पद्ध त का प्रयोग करने
वाले सदै व एक-सा अनुसरण नह करते थे, अत: प्राचीन शलालेख म दोन रूप मलते ह; आज छोटा रूप प्रच लत
है।
संकेत: कोई प्रतीक अपने से बड़े प्रतीक के पहले हो तो घटाया जाता है (IX = 10 − 1) और बाद म हो तो जोड़ा
जाता है (XI = 10 + 1)। रोमन संख्यांक बाएँ से दाएँ प ढ़ए और दे खए क कह कोई छोटा अक्षर कसी बड़े के
आगे तो नह खड़ा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 60
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3.2 IV. रोमन संख्यांक
TRY THIS
प्र.1 अब इसे स्वयं क जए। (ख) LXXXVII + LXXVIII
दोन संख्यांक के प्रतीक को एक साथ र खए, फर सबसे छोटे से आरंभ करके पुन: समूहन क जए — यह ध्यान रखते हुए क
रोमन व नमय दर सब जगह एक-सी नह ह।
LXXXVII = L + X + X + X + V + I + I
LXXVIII = L + X + X + V + I + I + I
कु ल: L L X X X X X V V I I I I I
अब एक-एक करके व नमय क जए:
व नमय क्य क अब शेष
IIIII→V 5 इकाई मलकर एक पाँच L L, X X X X X, V V V
VV→X 2 पाँच मलकर एक दस L L, X X X X X X, V
XXXXX→L 5 दस मलकर एक पचास L L L, X, V
LL→C 2 पचास मलकर एक सौ C, L, X, V
योग = C + L + X + V = CLXV
जाँच : 87 + 78 = 165 = 100 + 50 + 10 + 5 ✓
ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क इसम कतनी सावधानी लगी। I से V जाने पर पाँच का व नमय; V से X पर दो
का; X से L पर पुन: पाँच; L से C पर पुन: दो। मस्र या हदू पद्ध त म प्रत्येक व नमय “इनम से दस मलकर उनम
से एक” होता है, अत: वही पुन: समूहन बना सोचे कया जा सकता है। यही एक अंतर बताता है क रोमन
अंकग णत के लए अबेकस और प्र श क्षत व्य क्त क्य चा हए थे।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
mL × D, V × D
रोमन संख्यांक म द गई दो संख्याओं को हदू संख्यांक म प रव तत कए बना आप कैसे गुणा करगे?
नम्न ल खत सांके तक संख्याओं के युग्म का गुणनफल ात करने का प्रयास क जए। V ×eL,
प्र.2
m a s
एवं VII.c×oIX
a gl
a s em
a
उत्तरgl
co m
कोई सामान्य नयम है ही नह , क्य क रोमन सांके तक संख्याएँ कसी एक संख्या क घात नह ह। प्रत्येक गुणनफल अलग से —
बार-बार जोड़कर या वतरण गुणधम से — नकालना पड़ता है।
m . ag
l a se
गुणनफल हल
ag रोमन संख्यांक
V×L 5 पचास = L+L+L+L+L = 250 = CCL
co m
em.
C+C+L
m l as
L×D
m .co 50 पाँच-सौ = 25,000 = 25 हजार a g
MMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMM (M को
l a se 25 बार )
g
a V×D 5 पाँच-सौ = 2500 = M + M + D MMD
om a s
.cLXIII agl
VII × (X − I) = LXX − VII = 70 − 7
m
VII × IX
a se
= 63 = L + X + III
a g l
ऐसा क्य होता है: मस्र क पद्ध त म सांके तक × सांके तक सदै व एक और सांके तक संख्या ही होती है (102 ×
co m
m .
103 = 105), अत: दोन गुणक जानते ही उत्तर लखा जा सकता है। यहाँ V × L = CCL स्वयं सांके तक संख्या ही
o m l a se
नह है, और L × D = 25,000 का तो कोई प्रतीक ही नह — ववश होकर M को प ीस बार लखना पड़ता है।
m .cसांके तक संख्याएँ ×5, ×2, ×5, ×2, ×5, ×2 क छलाँग लगाती ह, अत:aनgकोई नयम याद रखने योग्य है
aseऔर न कोई पैटन उपयोग करने योग्य।
रोमन
agl
se m
com g l a
.
संकेत: VII × IX को VII × (X − I) के रूप म करना सबसे सरल है। इस पद्ध त म छोटा प्रतीक बड़े के आगे पहले
m a
ase
से ही घटाव का अथ रखता है, अत: यह यु क्त यहाँ बहुत स्वाभा वक है।
agl
co m
CCXXXI और MDCCCLII को गुणा कर
m .
e
प्र.3
com g l as
. a
a sem
agl पहले दोन संख्यांक प ढ़ए।
c
m .
m a s e
. co agl
CCXXXI = 100 + 100 + 10 + 10 + 10 + 1 = 231
e m
g l as
MDCCCLII = 1000 + 500 + 300 + 50 + 2 = 1852
a
com
m .
m ase
.co
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दूसरे संख्यांक को उसक सांके तक संख्याओं म तोड़कर वतरण गुणधम लगाइए:
231 × 1852 = 231 × (1000 + 800 + 50 + 2)
= 231 × 1000 + 231 × 800 + 231 × 50 + 231 × 2
= 231000 + 184800 + 11550 + 462
= 427812
जाँच: 231000 + 184800 = 415800; 415800 + 11550 = 427350; 427350 + 462 = 427812 ✓
अब 427812 को रोमन संख्यांक म लखने का प्रयास क जए। सबसे बड़ा रोमन प्रतीक M = 1000 है, अत: 427 M लखने
पड़गे और उसके बाद DCCCXII। बाद के रोमन इसका उपाय संख्यांक के ऊपर एक रेखा ख चकर करते थे, जसका अथ था
“1000 गुना”:
427812 = 427 हजार + 812
427 = CDXXVII, 812 = DCCCXII
अत: 427812 = C̄ D̄ X̄ X̄ V̄ Ī Ī DCCCXII
ऐसा क्य होता है: काटू न का व्यंग्य यही है। CCXXXI को MDCCCLII से गुणा करने को कहा जाना सचमुच शेर
से लड़ने जतना ही सुखद था — इस लए नह क ग णत क ठन है, ब ल्क इस लए क संकेतन कोई सहायता नह
दे ता। हदू संख्यांक म आप 231 × 1852 को स्तंभ म रखकर एक मनट म कर लगे, क्य क प्रत्येक हा सल “इनम
से दस मलकर उनम से एक” ही है।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 60 – 61
3.2 IV. रोमन संख्यांक
MATH TALK TRY THIS
प्र.1 प्रशांत महासागर के एक प म रहने वाले मूल नवा सय का एक समूह भन्न- भन्न वस्तुओं को गनने के लए
संख्या नाम के व भन्न अनुक्रम का प्रयोग करते ह। वे ऐसा क्य करते ह? सोचकर बताइए।
क्य क ऐसी भाषाओं म संख्या-शब्द अभी भी गनी जा रही वस्तु से जुड़ा हुआ है — गनती को वस्तु से अलग नह कया गया है।
नाम म अ त रक्त सूचना होती है। ना रयल के लए एक अनुक्रम, नाव के लए दूसरा, मछली के लए तीसरा — शब्द सुनने
वाले को कतने और कसके दोन बता दे ता है, अत: कुछ दोहराना नह पड़ता।
भन्न वस्तुए ँ भन्न प्राकृ तक समूह म रखी जाती ह। मछ लयाँ जोड़े म, ना रयल गु म, अनाज टोकरी म। जो अनुक्रम
वस्तु के रखे और बेचे जाने के ढं ग से बना हो, वही उस वस्तु के लए सबसे सु वधाजनक है।
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मान और अनुष्ठान। व्य क्तय के लए अथवा अनुष्ठान क वस्तुओं के लए प्राय: अलग अनुक्रम रखा जाता था, जससे वे
साधारण व्यापार क वस्तुओं से भन्न दख।
ऐसा क्य होता है: ग णत क दृ ष्ट से महत्त्वपूण बात यह है क ऐसी पद्ध त क्या नह कर सकती। य द मछ लय का
“तीन” और ना रयल का “तीन” अलग-अलग शब्द ह तो 3 मछली + 3 ना रयल भाषा के भीतर जोड़े ही नह जा
सकते — पद्ध त म अकेले “तीन” क कोई अवधारणा ही नह है। यह समझना क तीन मछ लय का तीनपन और
तीन ना रयल का तीनपन एक ही वस्तु है, वही कदम है जससे अंकग णत संभव होता है। हमारी भाषा म भी पुरानी
आदत के चह्न बचे ह — जूत का जोड़ा, अंड का दजन।
प्र.2 2 के बार-बार प्रयोग से गनती करने क इसी व ध से गुमुलगल संख्या पद्ध त क 6 से आगे क संख्याओं पर
वचार क जए। इस पद्ध त म आने वाली संख्याओं के लए हदू संख्यांक का प्रयोग कए बना व भन्न
अंकग णतीय सं क्रयाएँ (+, –, ×, ÷) करने क व धय का पता लगाइए। इसका उपयोग नम्न ल खत का
मूल्यांकन करने के लए क जए। (i) (उकासर-उकासर-उकासर-उकासर-उरापोन) + (उकासर-उकासर-उकासर-
उरापोन) (ii) (उकासर-उकासर-उकासर-उकासर-उरापोन) – (उकासर-उकासर-उकासर) (iii) (उकासर-
उकासर-उकासर-उकासर-उरापोन) × (उकासर-उकासर) (iv) (उकासर-उकासर-उकासर-उकासर-उकासर-
उकासर-उकासर-उकासर) ÷ (उकासर-उकासर)
इस पद्ध त म उरापोन = 1 और उकासर = 2 ह, तथा प्रत्येक संख्या एक ृंखला है: जतने 2 ह उतने उकासर, और य द संख्या
वषम हो तो अंत म एक उरापोन। 6 से आगे बढ़ने के लए कोई नया शब्द नह चा हए — केवल लंबी ृंखलाएँ।
चार नयम, इसी पद्ध त के भीतर:
जोड़: दोन ृंखलाएँ एक के बाद एक लख द जए; य द अब दो उरापोन आ जाएँ तो उन्ह एक उकासर से बदल द जए।
( कसी ृंखला म एक से अ धक उरापोन क आवश्यकता कभी नह पड़ती।)
घटाव: उकासर को उकासर से और उरापोन को उरापोन से का टए। य द बड़ी संख्या म काटने योग्य उरापोन न हो तो पहले
उसके एक उकासर को दो उरापोन म तोड़ ली जए।
गुणन: दूसरी संख्या जतनी बार कहती है, पहली संख्या को उतनी बार लख द जए और फर उरापोन को व्यव त कर
ली जए।
भाग: ृंखला को भाजक के बराबर बंडल म बाँ टए; बंडल क संख्या ही उत्तर है।
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भाग 2 और 1 म हल उत्तर
(i) (2+2+2+2+1) + 7 उकासर और 2 उरापोन; दो उरापोन मलकर एक उकासर -उकासर -उकासर -उकासर -
(2+2+2+1) और उकासर → 8 उकासर उकासर -उकासर -उकासर -उकासर (16)
=9+7
(ii) (2+2+2+2+1) − तीन उकासर कटे ; एक उकासर और एक उरापोन शेष उकासर -उरापोन (3)
(2+2+2)
=9−6
(iii) (2+2+2+2+1) × 9 वाली ृंखला चार बार: 16 उकासर और 4 उकासर 18 बार (36)
(2+2) उरापोन; चार उरापोन से 2 और उकासर → 18
=9×4 उकासर
(iv) (8 उकासर) ÷ (2 8 उकासर को 2-2 उकासर के बंडल म बाँ टए: 4 उकासर -उकासर (4)
उकासर) बंडल
= 16 ÷ 4
ऐसा क्य होता है: यहाँ प्रत्येक नयम मलान पद्ध त का ही नयम है, बस एक अ त रक्त व नमय के साथ — “दो
उरापोन मलकर एक उकासर”। यह एक व नमय संख्यांक क लंबाई आधी कर दे ता है, जो वास्त वक लाभ है, परंतु
इसके आगे कोई व नमय उपलब्ध नह : 100 के लए आज भी पचास उकासर चा हए। एक ही समूह आकार म
गनना मलान प्रतीक से ठ क एक कदम आगे ले जाता है, उससे अ धक नह ।
प्र.3 हदू संख्या पद्ध त क उन वशेषताओं क पहचान क जए जो इसे रोमन संख्या पद्ध त क तुलना म अ धक
प्रभावी बनाती ह।
पाँच वशेषताएँ, और इनम से प्रत्येक रोमन पद्ध त क एक न त कमी दूर करती है।
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वशेषता हदू संख्या पद्ध त रोमन संख्या पद्ध त
पतीक का मान ानीय मान — 375 का 3 अथात 3 × 102, 32 न त मान — X कह भी हो, 10 ही है
का 3 अथात 3 × 10
शून्यता का 0, जो अंक भी है और संख्या भी शून्य के लए कोई प्रतीक ही नह
पतीक
पतीकों की दस प्रतीक कतनी भी बड़ी संख्या लख दे ते ह प्रत्येक नई सांके तक संख्या के लए नया प्रतीक: I V X L C
संख्या DM…
सांके ितक सभी 10 क घात, अत: सांके तक × सांके तक पुन: अनुपात ×5, ×2, ×5, ×2 — कोई पैटन नह , अत: गुणन का
संख्याएँ सांके तक कोई नयम नह
संख्यांक की बहुत धीरे बढ़ती है — 1888 के लए 4 अंक तेजी से बढ़ती है — 1888 = MDCCCLXXXVIII, 13
लंबाई प्रतीक
ऐसा क्य होता है: इनम सबसे गहरी बात है ानीय मान का 0 के साथ मलना। चूँ क प्रत्येक ान स्वयं बता दे ता
है क वह 10 क कौन-सी घात गन रहा है, इस लए 108 या 1015 के लए कोई नया प्रतीक गढ़ना नह पड़ता; और
चूँ क 0 रक्त ान को भर सकता है, इस लए 305 को 35 नह पढ़ा जा सकता। शेष सब कुछ — छोटे संख्यांक,
स्तंभ म जोड़, लंबा गुणा और भाग — इन्ह दो अवधारणाओं से नकलता है।
स्वयं जाँ चए: 1888 और 1976 को पहले रोमन संख्यांक म जो ड़ए, फर हदू संख्यांक म। दूसरे म कुछ सेकंड
लगगे; पहले म अनेक व नमय और बहुत सावधानी।
प्र.4 इस अनुभाग म चचा क गई अवधारणाओं का प्रयोग करते हुए पूव म बनी संख्या पद्ध त को प रष्कृत करने का
प्रयास क जए।
पृष्ठ 54 वाली पद्ध त (● = 1, ■ = 10, ★ = 100) ली जए और उसे अब तक बताए गए दो प रष्कार से गुजा रए।
प रष्कार 1 — सांके तक संख्याओं को कसी एक संख्या क घात बनाइए। हमारी पहले से ही ह: 1, 10, 100। अत: असंबद्ध
छलाँग के ान पर उसी क्रम म आगे ब ढ़ए — अगली सांके तक संख्याएँ 1000, 10000, 100000 होनी चा हए।
प रष्कार 2 — अध्याय क दोन कसौ टय पर जाँ चए।
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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
कसौट पहले प रष्कार के बाद
m as e
.co
क्या अनुक्रम अंतहीन है? नह — 1000 से पहले रुक जाता है
g
पतीकaहो
l
हाँ, जब 10 की पत्येक घात का अपना
se m
g l a
aक्या पुन: समूहन सरल है? हाँ — दस ● मलकर एक ■ हाँ, और अब वही िनयम पत्येक स्तर पर
m
.co ag
क्या सांके ितक × सांके ितक = हाँ — ■ × ■ = ★ हाँ, अत: ग ण
ु न का िनयम बन जाता है
sem
साक
ं े ितक?
gl a
क्या कोई पतीक 10 बार आता है?
जाते ह
a
नह — कसी भी प्रतीक के दस मलकर अगला बन नही ं — अत: पत्येक अिधकतम 9 बार
co m
m.
seसांके तक संख्या है। चूँ क
एक समस्या फर भी बची रहती है: नए प्रतीक क अंतहीन आवश्यकता। यही पृष्ठ 69 वाली मस्र क कमी है और इसका उपाय पृष्ठ
o m l a
कोई प्रतीक .9cबार से अ धक नह आता, इस लए नौ चह्न और “कुछ नह ” का एक चह्न — a कुg
73 पर है — सांके तक संख्या का प्रतीक बनाना छोड़ द जए और ान को बताने द जए क कौन-सी
e m
asप रष्कृत होकर आपक पद्ध त हदू संख्या पद्ध त बन जाती है।
ल दस प्रतीक — पयाप्त ह। पूरी
a g l
तरह
m a s
.co agl
ऐसा क्य होता है: यह पूरे अध्याय का तक संक्षेप म है। समूहन संख्यांक छोटे करता है; आधार पुन: समूहन और
se m
गुणन को यां त्रक बनाता है; ानीय मान अंतहीन प्रतीक क आवश्यकता समाप्त करता है; और 0 वह है जसके
बना ानीय मान स्पष्ट नह रह सकता।
g l a
a
co m
m .
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 62
m as e
.co a g l
m
3.3 I. मस्र क संख्या पद्ध त
l a se
a g नम्न ल खत संख्याओं को मस्र क संख्या पद्ध त म दशाइए। 10458, 1023, 2660, 784, 1111, 70707
m
प्र.1
a se
. com a g l
मस्र के प्रतीक 10 क घात पर चलते ह: las
em
ag
mबैठा मनुष्य = 10
.co
|=1 ∩ = 10 कं ु डली = 102 कमल = 103 अँगल
ु ी = 104 मेंढक-िशशु = 105 6
se m
com
सूय = 107
g l a
m . a
ase
agl प्रत्येक संख्या को 10 क घात म समूहीकृत क जए और उतने ही प्रतीक बनाइए।
c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
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संख्या समूहन कतने प्रतीक
10458 10000 + 400 + 50 + 8 1 अँग ल
ु ी, 4 कं ु डली, 5 ∩, 8 |
1023 1000 + 20 + 3 1 कमल , 2 ∩, 3 |
2660 2000 + 600 + 60 2 कमल , 6 कं ु डली, 6 ∩
784 700 + 80 + 4 7 कं ु डली, 8 ∩, 4 |
1111 1000 + 100 + 10 + 1 1 कमल , 1 कं ु डली, 1 ∩, 1 |
70707 70000 + 700 + 7 7 अँग ल
ु ी, 7 कं ु डली, 7 |
ऐसा क्य होता है: अं तम दो पं क्तय क तुलना हदू संख्यांक 1111 और 70707 से क जए। मस्रवासी जतना
अंक कहता है उतनी प्र तकृ तयाँ कसी भी क्रम म बनाते थे और उनके पास शून्य दखाने का कोई साधन नह था —
परंतु आवश्यकता भी नह थी, क्य क 10 क जो घात अनुप त है उसका प्रतीक बस नह बनाया जाता। 1023 म
कोई कुंडली नह है; 70707 म न कमल है न ∩। अंक 0 तभी अ नवाय होता है जब प्रतीक हटाकर ान को काम
स प दया जाए।
संकेत: बनाए गए प्रतीक क संख्या अंक का योग होती है। 70707 के लए 7 + 0 + 7 + 0 + 7 = 21 प्रतीक
चा हए, जब क हदू संख्यांक म केवल 5 अंक। यही मूल्य मस्र क पद्ध त चुकाती है।
प्र.2 ये संख्यांक कन संख्याओं को दशाते ह?
पृष्ठ 62 पर प्रत्येक प्रकार के प्रतीक ग नए और उसक सांके तक संख्या से गुणा क जए।
दए गए प्रतीक मान संख्या
(i) 2 कुंडली, 7 ∩, 6 | 2 × 100 + 7 × 10 + 6 × 1 276
= 200 + 70 + 6
(ii) 4 कमल, 3 कुंडली, 2 ∩, 2 | 4 × 1000 + 3 × 100 + 2 × 10 + 2 × 1 4322
= 4000 + 300 + 20 + 2
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ऐसा क्य होता है: मस्र का संख्यांक पढ़ना शुद्ध जोड़ है — कभी यह नह सोचना पड़ता क प्रतीक कहाँ रखा है,
केवल यह क प्रत्येक कतने ह। इससे पढ़ना नद ष हो जाता है परंतु लखना अपव्ययी: 4322 यहाँ 11 प्रतीक लेता
है और हमारी पद्ध त म 4 अंक। यह भी दे खए क गन तयाँ 4, 3, 2, 2 कतनी स्वाभा वक रूप से 4322 के अंक
से मेल खाती ह — मस्र क पद्ध त ानीय मान के बना आधार-10 है और हदू पद्ध त ानीय मान स हत
आधार-10।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 62
3.3 II. मस्र क संख्या पद्ध त म व वधताएँ और आधार क धारणा
प्र.1 पछली सांके तक संख्या के समान आकार के 10 संग्रह को एक साथ समूहीकृत (जैसा क मस्र पद्ध त म होता
था) करने के ान पर क्या हम पछली सांके तक संख्या के अनुरूप समान आकार के 5 संग्रह को एक साथ
समूहीकृत करके एक संख्या पद्ध त प्राप्त कर सकते ह? क्या इस 5 को कसी भी धनात्मक पूणाक से प्र त ा पत
कया जा सकता है?
पहले प्रश्न का उत्तर हाँ है, और दूसरे का लगभग हाँ।
5 के समूह। पहली सांके तक संख्या 1 ली जए और प्रत्येक बार 5 से गुणा क जए:
50 = 1 51 = 5 52 = 25 53 = 125 54 = 625 55 = 3125
ये सभी 5 क घात ह, अत: हम एक पूणत: उपयुक्त आधार-5 पद्ध त मल जाती है, जसक छह सांके तक संख्याओं के प्रतीक △
□ ⬡ ○ ∿ ↑ ह।
5 के ान पर कोई भी n। यही रचना कसी भी n के लए चलती है: सांके तक संख्याएँ 1, n, n2, n3, … यही तो आधार-n
संख्या पद्ध त क प रभाषा है, और मस्र क पद्ध त इसका n = 10 वाला रूप है।
ऐसा क्य होता है: एक धनात्मक पूणाक को छोड़ना पड़ेगा — n = 1। तब सांके तक संख्याएँ 1, 1 × 1, 1 × 1 ×
1, … अथात सब 1 ही रहगी। कुछ नया कभी बनेगा ही नह , अत: “आधार-1 पद्ध त” मलान प्रतीक के अ त रक्त
कुछ नह है। सही कथन यह है: 5 के ान पर 1 से बड़ा कोई भी पूणाक रखा जा सकता है।
क्या आप जानते ह? आप जो भी कंप्यूटर प्रयोग करते ह वह आधार 2 पर चलता है, जसक सांके तक संख्याएँ 1,
2, 4, 8, 16, … ह और अंक केवल दो। छोटा आधार अथात कम प्रतीक याद रखने ह परंतु संख्यांक लंबे — 25
आधार 10 म “25” है और आधार 2 म “11001”।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 63
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3.3 II. मस्र क संख्या पद्ध त म व वधताएँ और आधार क धारणा
प्र.1 संख्या 143 को इस नई संख्या पद्ध त म व्यक्त क जए।
143 से छोट सबसे बड़ी सांके तक संख्या से आरंभ क जए। वह 53 = 125 है, क्य क अगली, 625, बहुत बड़ी है।
143 − 125 = 18
18 = 5 + 5 + 5 + 3 (तीन 5, िफर 3 इकाई)
अत: 143 = 125 + 5 + 5 + 5 + 1 + 1 + 1
संख्यांक : ○ □□□ △△△
जाँच : 125 + 15 + 3 = 143 ✓
आधार-5 के अंक म यही संख्या इस प्रकार है:
143 = (1)×125 + (0)×25 + (3)×5 + (3)×1 = आधार 5 में 1033
ऐसा क्य होता है: षट् भुज ⬡ (25) यहाँ आया ही नह , क्य क 125 नकालने के बाद केवल 18 बचता है और 18
< 25। चत्र-रूप म उसक अनुप त का अथ केवल इतना है क वह प्रतीक नह बनाया गया; परंतु अंक-रूप म
वही अनुप त 0 लखकर दखानी पड़ती है। यही एक अंतर मस्र क अवधारणा और ानीय मान के बीच है।
स्वयं जाँ चए: यहाँ कोई प्रतीक पाँच या अ धक बार नह आया। य द कभी ऐसा हो तो उनम से पाँच को अगले
प्रतीक के एक से बदल दया जाएगा — इसी लए आधार-5 का प्रत्येक अंक 0 से 4 के बीच रहता है।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 63
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3.3 II. मस्र क संख्या पद्ध त म व वधताएँ और आधार क धारणा
प्र.1 नम्न ल खत संख्याओं को आधार-5 पद्ध त म दए गए प्रतीक का प्रयोग करके ल खए। 15, 50, 137, 293,
651
5⁰ = 1 5¹ = 5 5² = 25 5³ = 125 5⁴ = 625 5⁵ = 3125
पृष्ठ 63 पर बनाई गई आधार-5 पद्ध त के प्रतीक — प्रत्येक सांके तक संख्या के लए एक प्रतीक।
प्रतीक ह △ = 1, □ = 5, ⬡ = 25, ○ = 125, ∿ = 625, ↑ = 3125। हर बार सबसे बड़ी संभव सांके तक संख्या यथासंभव
ली जए, फर नीचे उत रए।
संख्या समूहन संख्यांक आधार-5 अंक
15 5+5+5 □□□ 30
50 25 + 25 ⬡⬡ 200
137 125 + 5 + 5 + 1 + 1 ○ □□ △△ 1022
293 125 + 125 + 25 + 5 + 5 + 5 + 1 + 1 + 1 ○○ ⬡ □□□ △△△ 2133
651 625 + 25 + 1 ∿⬡△ 10101
जाँच: 15 = 3 × 5 ✓ 50 = 2 × 25 ✓ 125 + 10 + 2 = 137 ✓ 250 + 25 + 15 + 3 = 293 ✓ 625 + 25 + 1 =
651 ✓
ऐसा क्य होता है: पहले सबसे बड़ी सांके तक संख्या लेना केवल आदत नह — यही सु न त करता है क कोई
प्रतीक पाँच बार बनाना न पड़े। 651 के लए य द आप 125 से आरंभ करते तो पाँच ○ चा हए होते, और पाँच ○
मलकर एक ∿ बनते ह, अत: पुन: समूहन करना ही पड़ता। ऊपर से आरंभ करने पर सबसे छोटा संख्यांक सीधे
मल जाता है।
संकेत: 651 वशेष है — छह सौ से ऊपर क संख्या केवल तीन प्रतीक म, क्य क 651 = 625 + 25 + 1 लगभग
ठ क 5 क घात पर बैठती है।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
क्या ऐसी कोई संख्या है जसे हमारी उपयुक्त व णत आधार-5 पद्ध त म नह दशाया जा सकता? क्य या क्य
e
प्र.2
m l as
.co
नह ?
a g
se m
g l a
a
हाँ — शून्य। इसका कोई प्रतीक नह है और इसे बनाया भी नह जा सकता, क्य क यहाँ संख्यांक प्रतीक का एक संग्रह है और शून्य
co m
को रक्त संग्रह होना पड़ेगा, जो पृष्ठ पर दख ही नह सकता।
em .
प्रत्येक गणन संख्या 1, 2, 3, … लखी जा सकती है, और इसका तक यह है: ag
g l as
कोई भी संख्या N लीिजए।
a
co m
m.
सबसे बड़ ी सांके ितक संख्या 5k चुिनए िजसके िलए 5k ≤ N हो। वह पतीक बनाइए और घटा दीिजए।
m as e
.co
शेष पहले से छोटा होता है, अत: यह पिक्रया रुकनी ही है।
a g l
se m
l a
रुकने पर कु छ भी शेष नही ं बचता — पत्येक भाग बन चुक ा होता है।
a g
s
य द आप कसी प्रतीक को पाँच या अ धक बार न बनाएँ तो वह संख्यांक N के लए एकमात्र भी होता है।
m a
em
.co agl
a s
a l आवश्यकता भी नह थी, क्य क वे केवल वद्यमान रा शयाँ अं कत करती
ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क यही आप त्त मस्र और रोमन पद्ध तय पर भी लागू होती है — उनम से कोई
भी शून्य नह लख सकती, और कसीgको
थ । शून्य तभी अ नवाय होता है जब ानीय मान पद्ध त म कसी रक्त ान को दखाना पड़े, ता क 305 को 35
co m
.
न पढ़ा जाए। इसी लए 0 का आ वष्कार इस कहानी के अं तम चरण म आता है, पहले चरण म नह ।
se m
o m l a
gजा सकत । 628 सामान्य संवत् म
क्या.cआप जानते ह? इस पद्ध त म ऋणात्मक संख्याएँ और भन्न भी नह लखी a
m
aseब्रह्मगुप्त क रचना, जसने 0 और ऋणात्मक संख्याओं को पूण संख्या का पद दया, इन सबका माग खोलती है।
agl
se m
com g l a
m . a
ase
आधार-7 पद्ध त क सांके तक संख्याओं का अ भकलन क जए। सामान्यत: आधार-n पद्ध त क सांके तक
agl
प्र.3
संख्याएँ क्या ह?
co m
.
e m
m as
1 से आरंभ क जए और प्रत्येक बार 7 से गुणा क जए।
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 49
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70 = 1
71 = 7
72 = 49
73 = 343
74 = 2401
75 = 16807 …
अत: आधार-7 पद्ध त क सांके तक संख्याएँ ह 1, 7, 49, 343, 2401, 16807, …
सामान्यत: आधार-n पद्ध त क सांके तक संख्याएँ n क घात होती ह:
n0 = 1, n, n2, n3, n4, …
ऐसा क्य होता है: पृष्ठ 63 क प रभाषा कहती है क पहली सांके तक संख्या 1 होती है और प्रत्येक अगली वतमान
को n से गुणा करके मलती है। 1 से आरंभ करके बार-बार n से गुणा करना ही n क घात लेना है। अत: “आधार-
n” और “सांके तक संख्याएँ n क घात” एक ही बात कहने के दो ढं ग ह — और यही वह गुण है जससे पृष्ठ 67 पर
सांके तक × सांके तक = सांके तक बनेगा।
स्वयं जाँ चए: 7 × 343 = 2401 और 49 × 49 = 2401 भी। सांके तक संख्याओं के दो भन्न युग्म वही सांके तक
संख्या दे ते ह, क्य क 71 × 73 और 72 × 72 दोन 74 ही ह।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 65
3.3 आधार-n पद्ध त के लाभ
प्र.1 नम्न ल खत मस्र संख्यांक का योग ात क जए। (i) … और … (ii) … और …
(i) पहले पृष्ठ 65 के दोन संख्यांक प ढ़ए।
पहला: 9 कमल, 6 कं ु डली, 8 | = 9000 + 600 + 8 = 9608
दू सरा: 5 कं ु डली, 7 | = 500 + 7 = 507
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प्रतीक को एक साथ र खए और सबसे छोटे से आरंभ करके पुन: समूहन क जए — कसी भी प्रतीक के दस मलकर अगला बनते
ह।
प्रतीक कुल पुन: समूहन शेष
| (1) 8 + 7 = 15 10 | → 1 ∩ 5 |, हािसल 1 ∩
∩ (10) 0+0+1=1 — 1∩
कुं डली (100) 6 + 5 = 11 10 कुंडली → 1 कमल 1 कं ु डली, हािसल 1 कमल
कमल (1000) 9 + 1 = 10 10 कमल → 1 अँगुली 0 कमल , हािसल 1 अँग ल
ु ी
अँग ल
ु ी (10000) 1 — 1 अँग ल
ु ी
योग = 1 अँगल
ु ी + 1 कं ु डली + 1 ∩ + 5 |
= 10000 + 100 + 10 + 5 = 10115
जाँच : 9608 + 507 = 10115 ✓
(ii)
पहला: 1 कमल, 8 ∩ = 1000 + 80 = 1080
दू सरा: 4 ∩, 6 | = 40 + 6 = 46
|:0+6=6
∩ : 8 + 4 = 12 → 1 कं ु डली और 2 ∩
कं ु डली: 0 + 1 (हािसल) = 1
कमल: 1
योग = 1 कमल + 1 कं ु डली + 2 ∩ + 6 | = 1000 + 100 + 20 + 6 = 1126
जाँच : 1080 + 46 = 1126 ✓
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ऐसा क्य होता है: यह वही स्तंभ वाला जोड़ है, और पृष्ठ 66 पर बा लका का यह कहना ठ क है क उसे मस्र और
हदू पद्ध त के जोड़ म समानता दखती है। “दस | मलकर एक ∩, दस ∩ मलकर एक कुंडली” ठ क वही है जो
“इकाई से दहाई म 1 हा सल” है। यह इस लए चलता है क प्रत्येक सांके तक संख्या नीचे वाली क 10 गुना है, अत:
एक ही हा सल- नयम प्रत्येक स्तर पर काम करता है — और यही रोमन पद्ध त म वफल हो जाता है।
प्र.2 नम्न ल खत संख्यांक का योग हदू संख्या पद्ध त ारा न मत आधार-5 पद्ध त म ात क जए। स्मरण र खए
इस पद्ध त म सांके तक संख्या का 5 गुना करने पर अगली सांके तक संख्या प्राप्त होती है।
पृष्ठ 65 के दोन संख्यांक प ढ़ए:
○ ⬡⬡ □ △△ = 125 + 25 + 25 + 5 + 1 + 1 = 182
○○○ ⬡ □□ △△ = 375 + 25 + 5 + 5 + 1 + 1 = 412
अब प्रतीकवार जो ड़ए:
प्रतीक मान पहला + दूसरा कुल पुन: समूहन?
△ 1 2+2 4 नह , 4 < 5
□ 5 1+2 3 नह
⬡ 25 2+1 3 नह
○ 125 1+3 4 नह
योग = ○○○○ ⬡⬡⬡ □□□ △△△△
= 4 × 125 + 3 × 25 + 3 × 5 + 4 × 1
= 500 + 75 + 15 + 4 = 594
जाँच : 182 + 412 = 594 ✓
ऐसा क्य होता है: इस योग म संयोगवश कह भी पुन: समूहन नह करना पड़ा — प्रत्येक स्तंभ 4 या उससे कम ही
रहा। य द कोई स्तंभ 5 तक पहुँच जाता तो उस प्रतीक के पाँच को अगले प्रतीक के एक से बदलना पड़ता, ठ क वैसे
ही जैसे प्र.1 म दस | मलकर एक ∩ बने। पुस्तक का संकेत हर स्तंभ जाँचने क चेतावनी है, यह संकेत नह क यहाँ
कोई हा सल छपा है।
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प्रयास क जए: ○○○ □□□ △△△ (375 + 15 + 3 = 393) म ○○ □□ △△△ (250 + 10 + 3 = 263)
जो ड़ए। अब त्रभुज 6 हो जाते ह, अत: उनम से पाँच एक □ बन जाएँगे। उत्तर 656 है; जाँ चए क आपके प्रतीक
5×125 + 0×25 + 6×5 + 1 द और पुन: समूहन के बाद ∿ ⬡ □ △ = 625 + 25 + 5 + 1 = 656 बन।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 66
3.3 आधार-n पद्ध त के लाभ
प्र.1 मस्र संख्यांक म दो संख्याओं का गुणा कस प्रकार कर?
दोन संख्यांक को उनक सांके तक संख्याओं म तो ड़ए, पहले क प्रत्येक सांके तक संख्या को दूसरे क प्रत्येक सांके तक संख्या से
गुणा क जए, फर सब मलाकर पुन: समूहन क जए।
(a + b) × (c + d) = ac + ad + bc + bd (िवतरण गुणधम)
पूरी व ध एक ही तथ्य पर टक है, जो अगले दो पृष्ठ पर सद्ध होता है:
10a × 10b = 10a+b — दो साक
ं े ितक संख्याओं का गुणनफल पुन : एक साक
ं े ितक संख्या
अत: प्रत्येक छोटा गुणनफल एक ही प्रतीक बन जाता है और शेष काम केवल यह गनना है क कस प्रतीक के कतने हो गए।
ऐसा क्य होता है: रोमन पद्ध त म यही योजना पहले ही चरण पर टू ट जाती है, क्य क V × L = 250 सांके तक
संख्या ही नह है और L × D = 25000 का कोई प्रतीक ही नह । सांके तक संख्याओं का कसी एक संख्या क घात
होना ही गुणन को वशेष समस्या से सामान्य प्र क्रया म बदल दे ता है।
प्र.2 कसी सांके तक संख्या को ∩ (अथात 10) से गुणा करने पर क्या प्राप्त होता है? नम्न ल खत गुणनफल ात
क जए। (i) ∩ × ∩ (ii) कुंडली × ∩ (iii) कमल × ∩ (iv) अँगुली × ∩
कसी सांके तक संख्या को 10 से गुणा करने पर अगली सांके तक संख्या मलती है, क्य क 10 क घात 1 बढ़ जाती है।
10a × 10 = 10a+1
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
गुणनफल 10 क घात म उत्तर
m as e
(i)
.co
∩×∩ 10 × 10 = 102
a
100 — कं ु डली
g l
se m
g l a
a
(ii) कुंडली × ∩ 102 × 10 = 103 1000 — कमल
m
(iii) कमल × ∩ 103 × 10 = 104 10,000 — अँग ल
ु ी
. c o ag
m
10 × 10 =e10
s
a
(iv) अँगुली × ∩ 4 5 1,00,000 — मेंढक -िशशु
agl
ऐसा क्य होता है: 10a का अथ है 10 को स्वयं से a बार गुणा करना। एक और 10 से गुणा करने पर वह a + 1
co m
दस मलकर गुणा हो जाते ह, अथात 10a+1। अत: यह नयम मस्र के चत्रांकन का संयोग नह — यह घातांक का
e m.
m l as
.co g
नयम है, और इसी कारण प्रतीक क सूची इसी क्रम म है।
m a
l a se
a g
s
कसी सांके तक संख्या को कुंडली (10²) से गुणा करने पर क्या प्राप्त होता है? नम्न ल खत गुणनफल ात
m a
प्र.3
.co agl
क जए। (i) ∩ × कुंडली (ii) कुंडली × कुंडली (iii) कमल × कुंडली (iv) अँगुली × कुंडली
se m
g l a
a
102 से गुणा करने पर सांके तक संख्या दो पद ऊपर चली जाती है।
co m
m .
m as e
.co
10a × 102 = 10a+2
a g l
se m
g l a
a गुणनफल 10 क घात म उत्तर
se m
com g l a
. a
(i) ∩ × कुंडली 10 × 102 = 103 1000 — कमल
e m
as 10 × 10 = 10
agl
(ii) कुंडली × कुंडली 2 2 4 10,000 — अँग ल
ु ी
om
(iii) कमल × कुंडली 103 × 102 = 105 1,00,000 — मेंढक -िशशु
. c
s e m — बैठा मनु य
m a
(iv) अँगुली × कुंडली 104 × 102 = 106 10,00,000 ष्
e m . co agl
g l as
a
ऐसा क्य होता है: 102 से गुणा करना 10 से दो बार गुणा करना है, अत: यहाँ प्रत्येक उत्तर पछले प्रश्न के उत्तर से
.c
m
सूची म दो प्रतीक आगे है। हदू संख्यांक म यही नयम इस प्रकार पढ़ा जाता है — “100 से गुणा करने पर अंत म
m a s e
co agl
दो शून्य लग जाते ह”।
m .
ase
a g l
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 67
co m
m .
m ase
.co
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3.3 आधार-n पद्ध त के लाभ
MATH TALK
प्र.1 नम्न ल खत गुणनफल ात क जए। (i) ∩ × मढक- शशु (ii) कुंडली × कमल (iii) कमल × कमल (iv) अँगुली
× बैठा मनुष्य
हर बार 10 क घात जोड़ द जए।
गुणनफल 10 क घात म उत्तर
(i) ∩ × मढक- शशु 101 × 105 = 101+5 106 — बैठा मनुष्य
(ii) कुंडली × कमल 102 × 103 = 102+3 105 — मेंढक -िशशु
(iii) कमल × कमल 103 × 103 = 103+3 106 — बैठा मनुष्य
(iv) अँगुली × बैठा मनुष्य 104 × 106 = 104+6 1010
अत: कन्ह दो सांके तक संख्याओं का गुणनफल एक अन्य सांके तक संख्या ही होता है।
ऐसा क्य होता है: भाग (iv) पर रुककर सो चए। 1010 सांके तक संख्या तो है, परंतु मस्र के प्रतीक क सूची 107
(सूय) पर समाप्त हो जाती है। अत: यह उत्तर संख्या के रूप म वद्यमान है परंतु मस्र संख्यांक म लखा नह जा
सकता। यही वह कमी है जो पृष्ठ 69 पर बताई गई है — जस पद्ध त म प्रत्येक सांके तक संख्या का अपना प्रतीक
हो, उसे प्रतीक क अंतहीन आपू त चा हए।
संकेत: 1010 अथात एक हजार करोड़, या 1 के आगे दस शून्य। हमारी पद्ध त म यह त नक भी क ठन नह — वही
दस अंक इसे भी संभाल लेते ह।
प्र.2 क्या यह गुणधम हमारे ारा बनाई गई आधार-5 पद्ध त म भी लागू होता है? क्या यह कसी भी आधार वाली
संख्या पद्ध त पर लागू होता है?
आधार-5 पद्ध त म हाँ, और प्रत्येक आधार-n पद्ध त म भी हाँ।
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आधार 5 में: ⬡ × □ = 25 × 5 = 125 = ○ (52 × 51 = 53)
○ × □ = 125 × 5 = 625 = ∿ (53 × 51 = 54)
⬡ × ⬡ = 25 × 25 = 625 = ∿ (52 × 52 = 54)
सामान्यत: na × nb = na+b
ऐसा क्य होता है: na म n गुणनखंड के रूप म a बार आता है और nb म b बार। दोन को गुणा क जए तो n
कुल a + b बार आ जाता है — अथात na+b, जो पुन: n क घात है और इस लए पुन: एक सांके तक संख्या। इस
तक म 10 या 5 का कह प्रयोग नह हुआ; यह केवल गुणनखंड गनने क बात है, अत: यह प्रत्येक आधार पर लागू
होता है।
स्वयं जाँ चए: अब रोमन पद्ध त के V × L = CCL से तुलना क जए। रोमन सांके तक संख्याएँ 1, 5, 10, 50,
100, 500, 1000 ह — अनुपात 5, 2, 5, 2, 5, 2 ह, अत: वे कसी एक संख्या क घात नह ह और यह गुणधम
वफल हो जाता है। यही एक वफलता रोमन गुणन क सारी क ठनाई का कारण है।
प्र.3 मस्र क पद्ध त म कसी संख्या और ∩ (10) के गुणनफल के वषय म हम क्या नष्कष नकाल सकते ह?
संख्यांक का प्रत्येक प्रतीक अगले प्रतीक से बदल जाता है, और प्रत्येक प्रकार क संख्या वैसी ही बनी रहती है।
पुस्तक दो उदाहरण से यह दखाती है।
(i) कं ु डली कं ु डली × ∩
कं ु डली कं ु डली = कं ु डली + कं ु डली, अत:
(कं ु डली + कं ु डली) × ∩ = (कं ु डली × ∩) + (कं ु डली × ∩) (िवतरण गुणधम)
= कमल + कमल = कमल कमल
संख्याओं में: (100 + 100) × 10 = 1000 + 1000 = 2000 ✓
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(ii) कं ु डली ∩∩ | × ∩
कं ु डली ∩∩ | = कं ु डली + ∩∩ + |, अत:
(कं ु डली + ∩∩ + |) × ∩ = (कं ु डली × ∩) + (∩∩ × ∩) + (| × ∩)
= कमल + कं ु डली कं ु डली + ∩
= कमल कं ु डली कं ु डली ∩
संख्याओं में: 121 × 10 = 1210 ✓
ऐसा क्य होता है: वतरण गुणधम से प्रत्येक भाग अलग-अलग गुणा हो जाता है, और प्रत्येक भाग एक सांके तक
संख्या है, अत: वह प्रतीक-सूची म केवल एक ान आगे खसक जाता है। गन तयाँ अछू ती रहती ह — दो कुंडली
दो कमल बन जाती ह, दो ∩ दो कुंडली। हदू संख्यांक म यही कथन इस प्रकार है: “10 से गुणा करने के लए अंत
म एक 0 लगा द जए।” 121 से 1210 बनता है और अंक 1, 2, 1 त नक भी नह बदले, केवल एक ान बाईं ओर
खसक गए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 68
3.3 आधार-n पद्ध त के लाभ
प्र.1 नम्न ल खत का गुणनफल ात क जए। (i) (कुंडली कुंडली कुंडली कुंडली कुंडली कुंडली ∩∩ ||) × ∩ (ii)
(कमल ∩) × ∩
(i) पहले कोष्ठक का संख्यांक प ढ़ए: 6 कुंडली, 2 ∩, 2 |।
= 600 + 20 + 2 = 622
622 × 10 = 6220
प्रतीकवार, प्रत्येक एक पद ऊपर चढ़ जाता है:
पहले अब मान
6 कुं डली (600) 6 कमल 6000
2 ∩ (20) 2 कं ु डली 200
2 | (2) 2∩ 20
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गुणनफल = 6 कमल, 2 कं ु डली, 2 ∩ = 6000 + 200 + 20 = 6220 ✓
(ii) कमल ∩ = 1000 + 10 = 1010
1010 × 10 = 10100
कमल → अँगल
ु ी (1000 → 10,000)
∩ → कं ु डली (10 → 100)
गुणनफल = 1 अँगल
ु ी, 1 कं ु डली = 10000 + 100 = 10100 ✓
ऐसा क्य होता है: भाग (ii) म ध्यान द जए क संख्यांक 1010 म सैकड़े और इकाई का ान रक्त है, और गुणा
करने के बाद 10100 म हजार, दहाई और इकाई के ान रक्त ह। मस्र क लखाई म इन र क्तय का कोई मूल्य
नह — प्रतीक बस नह बनाया जाता। ये र क्तयाँ तभी भरनी पड़ती ह जब प्रतीक हटाकर ान का प्रयोग कया
जाए, और तब 0 अ नवाय हो जाता है।
प्र.2 कसी संख्या को ∩ से गुणा करने का एक सरल नयम क्या होगा?
प्रत्येक प्रतीक को सूची के अगले प्रतीक से बदल द जए, और प्रत्येक क गनती वैसी ही रहने द जए।
| → ∩ → कं ु डली → कमल → अँगल
ु ी → मेंढक-िशशु → बैठा मनुष्य → सूय
हदू संख्यांक म यही नयम इस प्रकार है: अंत म एक 0 लगा द जए।
4 कं ु डली + 3 ∩ + 7 | = 437
↓ पत्येक पतीक एक पद ऊपर
4 कमल + 3 कं ु डली + 7 ∩ = 4370 = 437 × 10 ✓
ऐसा क्य होता है: वतरण गुणधम से संख्या अपनी सांके तक संख्याओं म बँट जाती है और घातांक के नयम से
प्रत्येक सांके तक संख्या 10 से गुणा होकर अगली बन जाती है। न कुछ मलता है, न कुछ बनता है, अत: गन तयाँ
अछू ती रहती ह — इसी लए संख्यांक वैसा ही दखता है, बस एक ान आगे खसका हुआ।
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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संकेत: इस नयम क एक सीमा है। मस्र क सूची सूय, अथात 107 पर समाप्त हो जाती है। जस संख्यांक म सूय
as e
comान सदै व उपलब्ध रहता है। l
ह उसे 10 से गुणा क जए तो चढ़ने के लए अगला प्रतीक ही नह मलेगा। हमारी पद्ध त म ऐसी कोई द वार नह ,
. a g
em
क्य क अगला
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agl
com
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 69
e m
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3.3 दशमलव पद्ध त का उपयोग करने वाला अबेकस
a g
योगफल ात करने के लए आप इसका उपयोग कस प्रकार करगे?
m
प्र.1
co
e m.
m l as
.co g
a
sem
कlaजए।
ऊध्वाधर वभाजन रेखा के दाईं ओर के गणक को बाईं ओर क संगत पं क्तय पर सरका द जए, फर प्रत्येक पं क्त को व्यव त
ag पृष्ठ 69 के बोड पर बाईं ओर 2907 और दाईं ओर 43 है:
om एक साथ रखने पर a s
43.cम agl
sem
पं क्त 2907 म मान
a
1000 पं क्त पर 2 गणक agl — पंिक्त पर 2 2000
m
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100 ऊपर 1 (500) + पं क्त पर 4 (400) — ऊपर 1 + पंिक्त पर 4 900
se m
com l a
— 4 गणक 4 + 1 हािसल = 5 → पंिक्त के ऊपर 1 गणक 50
g
10
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agl
ऊपर 1 (5) + पं क्त पर 2 (2) 3 गणक 7 + 3 = 10 → हटाकर 10 वाली पंिक्त पर 1 गणक 0
se m
योग = 2000 + 900 + 50 + 0 = 2950
com g l a
m . a
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जाँच : 2907 + 43 = 2950 ✓
agl
co m
ऐसा क्य होता है: अबेकस लकड़ी से बनी एक दशमलव ानीय मान मशीन है। प्रत्येक पं क्त 10 क एक घात है
m .
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और उस पर रखे गणक उस ान का अंक ह — अत: दोन ओर के गणक को मलाना ही जोड़ है, और व नमय
c o m g l as
प्रत्येक अंक को 10 से कम रखते ह। इसक पूरी रचना आधार-10 क अवधारणा पर टक है, यही कारण है क
m .रोमन संख्यांक म लखने वाले लोग भी गणना आधार 10 म ही करते थे। a
l a se
ag
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a
com
m .
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 प्रत्येक पं क्त के गणक को एक साथ रखा गया। य द कसी पं क्त म कुल संख्या 10 से अ धक हो जाए तो क्या
कया जाए?
दो व नमय बोड को पठनीय बनाए रखते ह:
कसी पं क्त के दस गणक हटाकर उनके ान पर अगली ऊपर वाली पं क्त पर एक गणक रख दया जाता है — अथात
10 क अगली घात।
कसी पं क्त के पाँच गणक हटाकर उनके ान पर उसी पं क्त के ठ क ऊपर एक गणक रखा जाता है, क्य क पं क्त के
ऊपर रखा गणक 5 का मान दे ता है।
2907 + 43 में: 7 इकाई + 3 इकाई = 10 इकाई
→ इकाई की पंिक्त खाली कीिजए, दहाई की पंिक्त पर 1 गणक रिखए
दहाई की पंिक्त: 4 + 1 = 5 गणक → दहाई की पंिक्त के ऊपर 1 गणक (= 50)
ऐसा क्य होता है: यह ठ क वही हा सल है जो आप स्तंभ म जोड़ते समय करते ह, बस यहाँ वह दखाई दे ता है।
“इनम से दस मलकर उनम से एक” प्रत्येक पं क्त पर संभव है क्य क पं क्तयाँ 10 क क्रमागत घात ह — यही गुण
आधार को प रभा षत करता है। यही बोड रोमन व नमय (पाँच I से एक V, दो V से एक X, पाँच X से एक L) के
साथ चलाइए तो लगभग हर पं क्त पर अलग नयम चा हए होगा।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 69 – 70
3.3 III. मस्र क संख्या पद्ध त क सीमाएँ
MATH TALK
प्र.1 क्या कोई ऐसी संख्या हो सकती है जसके मस्र संख्यांक नरूपण म कोई एक प्रतीक 10 या उससे अ धक बार
आता हो? क्य नह ?
नह — कम से कम उस व्यव त रूप म नह जो मस्रवासी वास्तव म लखते थे।
िकसी सांके ितक संख्या 10a की 10 पितकृ ितयाँ = 10 × 10a = 10a+1
और 10a+1 का अपना अलग पतीक होता है।
अत: दस समान प्रतीक को सदै व अगले प्रकार के एक प्रतीक से बदल दया जाता। इस लए प्रत्येक प्रतीक अ धकतम 9 बार आ
सकता है।
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ऐसा क्य होता है: यही तथ्य हमारे अंक क सीमा भी तय करता है। हदू पद्ध त का कोई अंक बताता है क 10 क
उस घात के कतने ह, और यह उत्तर कभी 10 या अ धक नह हो सकता — इसी लए अंक 0 से 9 तक ही चलते ह,
आगे नह । 9 पर रुकना मनमाना नह है; वह आधार से ठ क एक कम है।
संकेत: एक ान पर यह तक टू टता है। सबसे ऊपर का प्रतीक सूय है, 107। दस सूय 108 ह गे और उसके लए
कोई प्रतीक है ही नह — अत: दस करोड़ और उससे बड़ी संख्याओं के लए सूय को सचमुच दस या अ धक बार
बनाना पड़ेगा। इसी अनुभाग क सीमा यही है।
प्र.2 आधार-4 क अपनी स्वयं क संख्या पद्ध त बनाइए और 1 से 16 तक क संख्याओं को इसम नरू पत क जए।
आधार 4 क पहली तीन सांके तक संख्याओं के लए तीन प्रतीक ली जए:
∟ = 40 = 1 △ = 41 = 4 □ = 42 = 16
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
संख्या समूहन संख्यांक आधार-4 अंक
1 1 ∟ 1
2 1+1 ∟∟ 2
3 1+1+1 ∟∟∟ 3
4 4 △ 10
5 4+1 △∟ 11
6 4+2 △ ∟∟ 12
7 4+3 △ ∟∟∟ 13
8 4+4 △△ 20
9 8+1 △△ ∟ 21
10 8+2 △△ ∟∟ 22
11 8+3 △△ ∟∟∟ 23
12 4+4+4 △△△ 30
13 12 + 1 △△△ ∟ 31
14 12 + 2 △△△ ∟∟ 32
15 12 + 3 △△△ ∟∟∟ 33
16 16 □ 100
ऐसा क्य होता है: संख्यांक वाले स्तंभ को ऊपर से नीचे प ढ़ए और आधार काम करता दखेगा — कोई प्रतीक चार
या अ धक बार नह आता, क्य क चार ∟ के बदले एक △ और चार △ के बदले एक □ ले लया जाता है। इसी लए
आधार-4 के अंक केवल 0, 1, 2, 3 ह। यही यह भी बताता है क 16 केवल एक प्रतीक म क्य लखा जाता है
जब क 15 के लए छह चा हए: 16 एक सांके तक संख्या है और 15 उससे ठ क नीचे।
स्वयं जाँ चए: आगे ब ढ़ए — 17 = □∟ और 20 = □△, और जाँ चए क 16 + 4 = 20 है।
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प्र.3 हमारे ारा बनाई गई आधार-5 पद्ध त म कसी द गई संख्या को 5 से गुणा करने का एक सरल नयम द जए।
प्रत्येक प्रतीक को अगले प्रतीक से बदल द जए, गन तयाँ वैसी ही रहने द जए।
△→□→⬡→○→∿→↑
(1 → 5 → 25 → 125 → 625 → 3125)
उदाहरण। ○ □□ △ = 125 + 5 + 5 + 1 = 136 ली जए।
○→∿ □□ → ⬡⬡ △→□
पिरणाम: ∿ ⬡⬡ □ = 625 + 25 + 25 + 5 = 680
जाँच : 136 × 5 = 680 ✓
ऐसा क्य होता है: वतरण गुणधम से संख्या अपनी सांके तक संख्याओं म बँट जाती है और प्रत्येक भाग 5 से गुणा
होता है। चूँ क 5 × 5a = 5a+1, प्रत्येक भाग अगली सांके तक संख्या बन जाता है, और चूँ क गन तयाँ बढ़ नह ,
कह पुन: समूहन क आवश्यकता नह पड़ती। आधार-5 अंक म लखने पर वही प र चत नयम बनता है: अंत म
एक 0 लगा द जए — 136 आधार 5 म 1021 है और 680 आधार 5 म 10210।
संकेत: यही नयम प्रत्येक आधार म चलता है — आधार से ही गुणा करने पर सब कुछ एक ान ऊपर खसक
जाता है। इसी लए आधार 10 म “10 से गुणा, एक शून्य” और आधारी म “2 से गुणा, एक शून्य” काम करता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 72
3.4 I. मेसोपोटा मया क संख्या पद्ध त
प्र.1 क्या हम इसे और अ धक सं क्षप्त रूप से नरू पत कर सकते ह?
हाँ — और जस ढं ग से हम ऐसा करते ह, वही ानीय मान का जन्म है।
पृष्ठ 71 वाली संख्या 640 थी, जसका समूहन इस प्रकार हुआ:
640 = (10) × 60 + 40
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions
m
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मस्र क अवधारणा से चल तो 60 वाला प्रतीक दस बार और फर चार 10-क ल — कुल चौदह प्रतीक बनाने पड़गे। इसके ान पर
60 वाले ान म दस का संख्यांक और इकाई वाले ान म चालीस का संख्यांक लख द जए:
se m
com g l a
m . a
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gl “दस बार 60 और एक बार 40” पढ़ ा जाता है — ठीक वही जो समीकरण कहता है
< | <<<<
aिजसे
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7530 के लए भी वही:
em . ag
g l as
7530 = (2) × 3600 + (5) × 60 + 30
a
co m
m.
जाँच : 7200 + 300 + 30 = 7530 ✓
m as e
.co
संख्यांक : YY | YYYYY | <<<
a g l
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g l a
a देता है। उन्ह हटा द जए और संख्यांक जतना सं क्षप्त हो सकता है, उतना हो जाता है।
जब प्रत्येक ान अपना अथ स्वयं रखने लगे तो 60 क घात बताने वाले प्रतीक क आवश्यकता ही नह रहती — ान ही बता
a s
co60mक कोई घात कभी 60 या उससे अ धक बार नह आ
ऐसा क्य होता है: यह संक्षेपण इस लए संभव है .क agl
सकती। य द आ जाए तो उनम से 60 को a s emघात म समूहीकृत कर दया जाएगा — पुस्तक यह (1) × 3600 +
agl× 60 + 2 से दखाती है। अत: प्रत्येक ान म संख्या 0 से 59 के बीच
अगली
(70) × 60 + 2 = (2) × 602 + (10)
रहती है, जसे थोड़ी-सी क ल सदै व लख दे ती ह। सी मत ान ही
co
ानीय मान को संभव बनाता है।
m
m .
m as e
.co a g l
m
lase पता लगाएँ — पृष्ठ 73
आइए,
ag3.4 I. मेसोपोटा मया क संख्या पद्ध त
se m
o m
c पद्ध त म नरू पत क जए। (i) 63 (ii) 132 (iii) 200 (iv) 60 (v) ag
नीचे द गई संख्याओं को मेसोपोटा मया .क
l a
प्र.1
se m
l a
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3605
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1-क ल के लए Y और 10-क ल के लए < ल खए। दाईं ओर से पढ़ने पर ान क्रमश: इकाई, 60 और 3600 के ह।
m l as
m .co a g
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समूहन 3600 का ान 60 का ान इकाई का ान
(i) 63 1 × 60 + 3 — Y YYY
(ii) 132 2 × 60 + 12 — YY < YY
(iii) 200 3 × 60 + 20 — YYY <<
(iv) 60 1 × 60 + 0 — Y (िर क्त)
(v) 3605 1 × 3600 + 0 × 60 + 5 Y (िर क्त) YYYYY
जाँच: 60 + 3 = 63 ✓ 120 + 12 = 132 ✓ 180 + 20 = 200 ✓ 3600 + 0 + 5 = 3605 ✓
ऐसा क्य होता है: भाग (iv) और (v) ही इस पद्ध त क त्रु ट उजागर करते ह। (iv) म अकेली क ल 60 के ान
पर है और इकाई का ान रक्त — परंतु रक्तता दखाई नह दे ती, अत: संख्यांक ठ क 1 के संख्यांक जैसा लगता
है। (v) म दो क्रमागत ान रक्त ह और कतना भी सावधान अंतराल यह नह बता सकता क एक र क्त अभीष्ट
थी या दो। बाद के मेसोपोटा मया वा सय ने इसे ानधारक प्रतीक से सुधारा और हमारा 0 इसे पूणत: समाप्त कर
दे ता है।
संकेत: कसी भी संख्या को बदलने के लए बार-बार 60 से भाग द जए। 3605 के लए: 3605 ÷ 60 = 60,
शेषफल 5; और 60 ÷ 60 = 1, शेषफल 0। शेषफल को ऊपर क ओर पढ़ने पर ान मलते ह 1, 0, 5 — अथात
1 × 3600 + 0 × 60 + 5।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 73
3.4 I. मेसोपोटा मया क संख्या पद्ध त
प्र.1 संख्या 60 के नरूपण का अवलोकन क जए। संख्या 3600 का नरूपण क्या होगा?
पुन: एक अकेली क ल Y — इस बार 3600 के ान पर, जसके दाईं ओर दो रक्त ान ह।
संख्या 3600 का ान 60 का ान इकाई का ान वास्तव म क्या लखा जाता है
1 — — Y Y
60 — Y ( रक्त) Y
3600 Y ( रक्त) ( रक्त) Y
प ट्टका पर तीन एक जैसे ही दखते ह। केवल प्रसंग से ही पढ़ने वाला जान सकता था क कौन-सी संख्या अभीष्ट है।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ानीय मान पद्ध त म अथ ान से आता है — परंतु रक्त ान पर स्याही नह होती, और
संख्यांक के अंत म पड़ा रक्त ान तो दखाई भी नह दे ता। बाद के मेसोपोटा मया वा सय ने संख्यांक के बीच क
र क्त के लए एक ानधारक चह्न बनाया, जो अ त वचार है और हमारे 0 के बहुत नकट। परंतु उन्ह ने इसका
प्रयोग अंत म नह कया, अत: 1, 60 और 3600 क अस्पष्टता बनी रही। हदू पद्ध त ने 0 को अन्य अंक जैसा ही
अंक मानकर यह अस्पष्टता पूणत: समाप्त कर द ।
स्वयं जाँ चए: उसी पृष्ठ पर 12, 602 और 36002 — तीन < YY के रूप म लखे दखते ह, और उन्ह अलग करने
वाला केवल अंतराल है। हमारी पद्ध त म ये तीन स्पष्टत: भन्न संख्यांक ह, क्य क प्रत्येक रक्त ान 0 से भर दया
जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 76
3.4 II. माया संख्या पद्ध त
प्र.1 माया संख्या पद्ध त का प्रयोग करके द गई संख्याओं को नरू पत क जए। (i) 77 (ii) 100 (iii) 361 (iv) 721
माया पद्ध त क सांके तक संख्याएँ 1, 20, 360, 7200, 144000 ह — ध्यान द जए क तीसरी 20 × 18 = 360 है, 400 नह ।
बदु 1 है, दं ड 5 है और सीप 0 है। प्रतीक के समूह एक के नीचे एक लखे जाते ह; सबसे नीचे वाला इकाई गनता है, उसके ऊपर
वाला 20, उसके ऊपर वाला 360।
समूहन 360 वाली पं क्त 20 वाली पं क्त इकाई वाली पं क्त
(i) 77 3 × 20 + 17 — 3 िबंद ु 3 दंड + 2 िबंद ु
(ii) 100 5 × 20 + 0 — 1 दंड सीप
(iii) 361 1 × 360 + 0 × 20 + 1 1 िबंद ु सीप 1 िबंद ु
(iv) 721 2 × 360 + 0 × 20 + 1 2 िबंद ु सीप 1 िबंद ु
जाँच: 60 + 17 = 77 ✓ 100 + 0 = 100 ✓ 360 + 0 + 1 = 361 ✓ 720 + 0 + 1 = 721 ✓
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
77 100 361 721
360
20
1
प्रत्येक संख्यांक नीचे से ऊपर पढ़ा जाता है — सबसे नीचे का समूह इकाई गनता है, उसके ऊपर वाला 20 और उसके ऊपर वाला 360।
नारंगी सीप 0 के लए माया ानधारक है।
ऐसा क्य होता है: (iii) और (iv) म सीप वास्त वक काय कर रही है। उसके बना 361 एक बदु, एक र क्त और
फर एक बदु होता — और कोई पढ़ने वाला यह नह बता पाता क र क्त कतनी चौड़ी थी। यही क ठनाई
मेसोपोटा मया वाल को थी, और माया लोग ने इसका समाधान संसार के दूसरे छोर पर, स्वतंत्र रूप से खोजा।
क्या आप जानते ह? तीसरी सांके तक संख्या 360 होने के कारण, न क 400, यह पद्ध त लगभग आधार-20 है,
पूणत: नह । इसी लए अध्याय कहता है क इसम आधार वाली पद्ध त क गणना-सु वधा नह है: 20 × 20 = 400
सांके तक संख्या नह है, अत: सांके तक × सांके तक सदै व सांके तक नह होता। व ान का मत है क 360 माया
त थपत्र के अनुरूप चुना गया था।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 78
3.4 IV. हदू संख्या पद्ध त
प्र.1 संख्या नरूपण के वचार के वकास म हदू तथा भारतीय संख्या पद्ध त का क्या ान है? इस पद्ध त क
सांके तक संख्याएँ कौन-सी ह? क्या इस पद्ध त म ानीय मान प्रणाली का उपयोग कया जाता है?
इसका ान: कहानी के ठ क अंत म — यही एकमात्र पद्ध त है जो अध्याय क प्रत्येक अवधारणा को एक साथ समेटती है और
अपनी ओर से अं तम अवधारणा भी जोड़ती है।
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
अवधारणा पहली बार कहाँ हदू पद्ध त म?
िनिश्चत समूह आकार में गणन गुमुलगल (2 म) हाँ — 10 के समूहों में
सांके ितक संख्याओं का अनुक्रम रोमन हाँ
सांके ितक संख्याएँ िकसी एक संख्या की घाते ं — आधार मस्र (आधार 10) हाँ — आधार 10, दशमलव
पतीक के स्थान पर िस्थित मेसोपोटा मया, माया, चीन हाँ — स्थानीय मान
0 स्थानधारक और संख्या दोनों भारतीय ग णत हाँ — और के वल यही ं
इसक सांके तक संख्याएँ 10 क घात ह:
1, 10, 102 = 100, 103 = 1000, 104, 105, … — अंत हीन
हाँ, यह एक ानीय मान पद्ध त है। पुस्तक का अपना उदाहरण:
375 = (3) × 102 + (7) × 10 + (5) × 1
= 300 + 70 + 5 = 375 ✓
ऐसा क्य होता है: जहाँ मेसोपोटा मया क पद्ध त अस्पष्ट थी, वहाँ यह पद्ध त स्पष्ट है — दो नयम मलकर यह
करते ह: प्रत्येक ान पर एक ही अंक, और रक्त ान के लए अंक 0। दोन मलकर यह सु न त करते ह
क कोई संख्यांक केवल एक ही ढं ग से पढ़ा जा सके — 305, 35 और 350 तीन भन्न संख्याओं क तीन भन्न
ृंखलाएँ ह, और इसम अंतराल क कोई भू मका नह । और चूँ क सांके तक संख्याएँ 10 क घात ह, सांके तक ×
सांके तक पुन: सांके तक होता है, अत: गुणा और भाग के सरल सामान्य नयम बन जाते ह।
क्या आप जानते ह? भारतीय ग णत म शून्य केवल ानधारक नह था। आयभट्ट ने 499 सामान्य संवत् म इसके
अंकग णतीय गुण का प्रयोग कया, और ब्रह्मगुप्त ने 628 सामान्य संवत् म 0 तथा ऋणात्मक संख्याओं को पूण
संख्या का पद दया — इससे वह बना जसे आज हम बलय कहते ह, अथात ऐसा समूह जो योग, व्यवकलन और
गुणन के अंतगत संवृत हो। आधु नक बीजग णत और व ेषण क न व यही वचार ह।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 80
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी
a g l AglaSem · NCERT Solutions
3.4 हदू संख्या पद्ध त
co m
em.
m as
MATH TALK
.co a g l
a s emे वचार से चीन के लोग ज ग और हग प्रतीक को एकांतर रूप से क्य प्रयोग करते थे? य द मात्र ज ग
gl
आपक
a
प्र.1
प्रतीक का ही प्रयोग कया जाता तो 41 को कैसे प्रद शत कया जाता? य द दो क्र मक ान के मध्य कोई
m
साथक अंतराल न हो तो क्या इस संख्यांक क कसी अन्य प्रकार से व्याख्या क जा सकती थी?
. co ag
se m
l a
ag पर रखी हुई छड़ थ और दो ान के बीच का रक्त अंतराल दखाई नह
एकांतर क्य : क्य क छड़ संख्यांक वास्तव म गणना-पट्ट
दे ता। प्रत्येक ान पर छड़ को समकोण घुमा दे ने से ान क सीमा स्वयं दखने लगती है।
co m
e m.
ज ग (खड़ी छड़) — इकाई, सैकड़ा, दस हजार …
m l as
.co g
हग (लेट छड़) — दहाई, हजार, सौ हजार …
em a
a s
gl ान कहाँ समाप्त होकर अगला कहाँ आरंभ हुआ।
अत: पृष्ठ 77 के संख्यांक 2634 म आप 2 (हग), 6 (ज ग), 3 (हग), 4 (ज ग) पढ़ते ह और कह भी यह संदेह नह होता क एक
a
s
केवल ज ग से 41: 41 = 4 दहाई और 1 इकाई, अत: ज ग-4 के बाद ज ग-1 रखा जाएगा:
m a
m .co agl
| | | | | — एक पंिक्त में पाँच खड़ ी छड़ े ं
l a se
a g
m
हाँ, अंतराल स्पष्ट न हो तो इसे अनेक अन्य प्रकार से पढ़ा जा सकता है। पाँच छड़ इस प्रकार बाँट जा सकती ह:
. co
पढ़ा जाएगा em
om l as
छड़ कैसे बँट ह
| |m
. c a g
a s e
agl
| | | (कोई िवभाजन नही ं) 5
m
| |||| 14
a se
|| |||
. com 23
a g l
m
ase
agl
||| || 32
|||| | 41
co m
m .
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 3 संख्याओं क कहानी AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: दशा बदलना चतुर उपाय है, परंतु आधा ही। यह बता दे ता है क ान कहाँ आरंभ होते ह, फर
भी यह नह कह पाता क कोई ान रक्त है, अत: अनुप त ान के लए र क्त छोड़नी पड़ती थी और र क्तयाँ
गनना क ठन है। जैसा पुस्तक कहती है, शून्य के लए एक प्रतीक होने पर छड़ संख्यांक एक पूणत: वक सत
ानीय मान पद्ध त बन जाते। भारतीय पद्ध त ने ठ क यही कदम उठाया।
प्र.2 उकासर और उरापोन को अंक के रूप म लेकर एक आधार-2 वाली ानीय मान पद्ध त बनाइए। इस पद्ध त क
तुलना गुमुलगल पद्ध त से क जए।
आधार-2 पद्ध त म ठ क दो अंक चा हए और उनम से एक को शून्य दशाना ही होगा। मान ली जए
उरापोन = 0 उकासर = 1
सांके ितक संख्याएँ: 1, 2, 4, 8, 16, 32, …
संख्या 2 क घात म समूहन आधार-2 ानीय मान पद्ध त गुमुलगल पद्ध त
1 1 उकासर उरापोन
2 2 उकासर उरापोन उकासर
3 2+1 उकासर उकासर उकासर-उरापोन
4 4 उकासर उरापोन उरापोन उकासर-उकासर
5 4+1 उकासर उरापोन उकासर उकासर-उकासर-उरापोन
6 4+2 उकासर उकासर उरापोन उकासर-उकासर-उकासर
7 4+2+1 उकासर उकासर उकासर उकासर-उकासर-उकासर-उरापोन
8 8 उकासर उरापोन उरापोन उरापोन उकासर-उकासर-उकासर-उकासर
तुलना।
गुमुलगल पद्ध त म शब्द क त का कोई अथ नह — बस जोड़ते जाइए: प्रत्येक उकासर 2 दे ता है और प्रत्येक उरापोन 1।
इसक सांके तक संख्याएँ केवल 1 और 2 ह।
आधार-2 ानीय मान पद्ध त म त ही सब कुछ है: वही शब्द उकासर ान के अनुसार 1, 2, 4 या 8 बन जाता है।
इसक सांके तक संख्याएँ अंतहीन ह: 1, 2, 4, 8, 16, …
लंबाई: N लखने के लए गुमुलगल को लगभग N ÷ 2 शब्द चा हए; ानीय मान पद्ध त को केवल लगभग log2N अंक।
1024 के लए यह 512 शब्द बनाम 11 अंक है।
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ानीय मान वाले रूप म शून्य के लए एक अंक चा हए; गुमुलगल पद्ध त को इसक आवश्यकता ही नह , क्य क जो ान
रक्त है वह बोला ही नह जाता।
ऐसा क्य होता है: दोन पद्ध तयाँ 2 म गनती ह, फर भी उनका व्यवहार पूणत: भन्न है। गुमुलगल समूह आकार
का प्रयोग केवल नाम बनाने म करते ह; आधार-2 पद्ध त उसका प्रयोग ान बनाने म करती है, और प्रत्येक नया
ान परास को दुगुना कर दे ता है। एक बात से सावधान र हए: 2 गुमुलगल पद्ध त म उकासर है परंतु आधार-2
पद्ध त म उकासर उरापोन — वही शब्द, दो भन्न नयम से पढ़े गए।
प्र.3 बताइए क कस प्रकार आपके दै नक जीवन म और कन व्यवसाय म हदू संख्यांक और 0 महत्त्वपूण भू मका
नभाते ह? य द हमारी संख्या पद्ध त और 0 का आ वष्कार या कल्पना नह हुई होती तो हमारा जीवन कतना
भन्न होता?
दै नक जीवन म: दुकान पर मूल्य और शेष पैसे, कैलडर क त थयाँ, घड़ी का समय, दूरभाष संख्या, पन कोड, बस और रेलगाड़ी
क संख्या, मकान संख्या, क्रकेट का स्कोर और रन-रेट, अंक-ता लका के प्राप्तांक, तराजू का पा ांक, इसी पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक।
व्यवसाय म:
दुकानदार और लेखाकार — बल, बहीखाता, जी.एस.ट . क गणना।
बककम — ब्याज, कस्त, खाते का शेष।
अ भयंता, वास्तु वद और सवक्षक — माप, पैमाने के रेखा चत्र, भार क गणना।
च कत्सक और औष ध- वक्रेता — मलीग्राम म मात्रा, रक्त-जाँच क रपोट।
कसान — हेक्टे यर म भू म, उपज, बाजार भाव।
वै ा नक — 1023 या 10-9 जैसी अ त बड़ी और अ त छोट संख्याएँ, जो ानीय मान का ही स्वाभा वक वस्तार है।
अ भकलन करने वाले — प्रत्येक कंप्यूटर आधार 2 पर, केवल 0 और 1 से चलता है।
इनके बना जीवन बहुत भन्न होता:
अंकग णत के लए कोई उपकरण चा हए होता। पृष्ठ 60 स्मरण क जए: रोमन संख्यांक प्रयोग करने वाल को अबेकस चा हए
था और उसे केवल प्र श क्षत व्य क्त ही चला पाते थे। साधारण दुकानदार अपना बल स्वयं जाँच भी न पाता।
कागज पर न स्तंभ म जोड़ होता, न लंबा गुणा, न लंबा भाग।
0 के संख्या रूप के बना ब्रह्मगुप्त वाली ऋणात्मक संख्याएँ न होत , अत: आधु नक बीजग णत, नदशांक ज्या म त और ग त
के समीकरण भी न होते।
न दशमलव होते, न वै ा नक संकेतन, न आधारी पद्ध त — अत: न कंप्यूटर, न ड जटल भुगतान, न मोबाइल फोन।
ऐसा क्य होता है: हदू पद्ध त केवल संख्याएँ अं कत नह करती, वह गणना को हर व्य क्त के लए संभव बना दे ती
है। इसी लए लाप्लास ने कहा क इसका महत्त्व इतना गहरा है और फर भी इतनी सरलता से अनदे खा हो जाता है —
इसने “अंकग णत को उपयोगी आ वष्कार म सव प र ान” ठ क इसी लए दलाया क उसने उसे साधारण बना
दया।
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प्र.4 प्राचीन भारतीय ने हदू संख्या पद्ध त के लए संभवत: आधार-10 का उपयोग कया होगा क्य क मनुष्य क दस
अँगु लयाँ होती ह और इसी लए हम अपनी अँगु लय से गनती कर सकते ह। य द हमारी केवल 8 अँगु लयाँ होती
तो क्या होता? तब हम संख्याएँ कैसे लखते? य द हम आधार 8 का उपयोग करते तब हदू संख्यांक कैसे लखते?
आधार-5 का उपयोग करने पर हदू संख्यांक कैसे लखे जाते ह? आधार 10 वाले हदू संख्यांक 25 को क्रमश:
आधार-8 और आधार-5 वाले हदू संख्यांक के रूप म लखने का प्रयास क जए। क्या आप इसे आधार-2 म
लख सकते ह?
8 अँगु लयाँ होत तो हम लगभग न त ही आधार 8 चुनते। पद्ध त क शेष सारी बात वैसी ही रहत — केवल आधार बदलता।
सांके ितक संख्याएँ: 1, 8, 64, 512, 4096, …
आवश्यक अंक : 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 — आठ अंक , आधार से एक कम तक
संख्या N इस पकार िलखी जाती ak ak−1 … a1 a0, िजसका अथ है
N = ak·8k + ak−1·8k−1 + … + a1·8 + a0, जहाँ 0 ≤ ai ≤ 7
25 लखना:
आधार समूहन संख्यांक
8 25 = 3 × 8 + 1 31
5 25 = 1 × 25 + 0 × 5 + 0 × 1 100
2 25 = 16 + 8 + 1 = 1×16 + 1×8 + 0×4 + 0×2 + 1×1 11001
10 25 = 2 × 10 + 5 25
जाँच: 3 × 8 + 1 = 25 ✓ 1 × 25 = 25 ✓ 16 + 8 + 0 + 0 + 1 = 25 ✓
ऐसा क्य होता है: आधार एक साथ दो बात तय करता है। पहला, कतने अंक चा हए — सदै व आधार जतने, 0
स हत। दूसरा, संख्यांक कतने लंबे ह गे। छोटा आधार अथात कम प्रतीक सीखने ह परंतु संख्यांक लंबे: 25 आधार 8
म “31”, आधार 5 म “100” और आधार 2 म “11001” है। आधार 10 ग णतीय दृ ष्ट से कसी भी प्रकार वशेष
नह है; उसका पूरा कारण दस अँगु लयाँ ह। जो वास्तव म वशेष है और प्रत्येक आधार म काम करता है, वह है
संरचना — आधार क घात वाली सांके तक संख्याएँ, प्रत्येक ान पर एक अंक, और रक्त ान के लए 0।
स्वयं जाँ चए: आधार 5 म 100 का अथ आधार 10 म 25 है, और आधार 8 म 100 का अथ 64। प्रत्येक आधार म
संख्यांक “100” का अथ उस आधार का वग होता है — ानीय मान का यही वचन है।
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अध्याय — एक नज़र म
संख्याओं को नरू पत करने के लए वस्तुओं, नाम या ल खत प्रतीक का एक ऐसा मानक अनुक्रम चा हए जसका क्रम
न त हो — इसी को संख्या पद्ध त कहते ह। कसी संग्रह क गणना उससे एकैक प्र त चत्रण बनाकर क जाती है।
ल खत संख्या पद्ध त के प्रतीक को संख्यांक कहते ह। जन संख्याओं का अपना प्रतीक होता है और जो संदभ बदु का काम
करती ह, उन्ह सांके तक संख्याएँ कहते ह।
य द सांके तक संख्याएँ 1, n, n2, n3, … अथात कसी एक संख्या क घात ह तो वह आधार-n पद्ध त है। आधार-10 पद्ध त
को दशमलव पद्ध त कहते ह।
आधार वाली पद्ध त म दो सांके तक संख्याओं का गुणनफल भी एक सांके तक संख्या ही होता है — इसी कारण उसम गुणा
सरल है और रोमन पद्ध त म क ठन।
जस पद्ध त म प्रतीक क त यह तय करती है क वह कस सांके तक संख्या को गन रहा है, वह ानीय मान पद्ध त है।
मेसोपोटा मया, माया, चीन और भारत — चार सभ्यताएँ इस वचार तक पहुँच ।
हदू (भारतीय) संख्या पद्ध त — आधार 10, ानीय मान, तथा 0 का ानधारक अंक एवं स्वतंत्र संख्या दोन रूप म प्रयोग
— केवल दस प्रतीक से प्रत्येक संख्या को स्पष्ट रूप म लख दे ती है। इसक उत्प त्त लगभग 2000 वष पूव भारत म हुई और
आज यह संपूण वश्व म प्रयुक्त होती है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
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m .co सांके तक संख्याएँ ag 27 कैसे लखा जाएगा
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संख्या पद्ध त जो नई अवधारणा जुड़ी
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छ ड़याँ / मलान के वल 1 एकैक प्र त चत्रण — एक वस्तु, एक चह्न 27 चह्न
प्रतीक
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गुमुलगल 1, 2
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एक न त समूह आकार (2) म गणन उकासर 13 बार, फर उरापोन
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(ऑस् े लया) (14 शब्द)
रोमन
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सांके तक संख्याओं का अनुक्रम — परंतु कसी एक XXVII
1, 5, 10, 50, 100, 500,
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1000 संख्या क घात नह
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मस्र 1, 10, 102, …, 107 सांके तक संख्याएँ 10 क घात — आधार क ∩ और 7 |
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अवधारणा
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aपद्ध त
हमारी आधार-5 1, 5, 25, 125, 625, वही अवधारणा, भन्न आधार के साथ ⬡ △△ (25 + 1 + 1)
3125
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मेसोपोटा मया 1, 60, 602, 603 ानीय मान; बाद म रक्त ान के लए << YYYYYYY (दो 10-क ल,
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(बेबीलोन) ानधारक सात 1-क ल)
माया 1, 20, 360, 7200, agl ऊध्वाधर ानीय मान; 0 के लए सीप ऊपर 1 बदु; नीचे 1 दं ड और 2
144000 बदु
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चीनी छड़ संख्यांक ज ग और हग को एकांतर रखकर ान स्पष्ट करना दहाई म हग-2, इकाई म ज ग-7
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10 की घाते ं
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हदू (भारतीय) 1, 10, 100, 1000, … 0 का अंक और संख्या दोन रूप म प्रयोग; सब कुछ 27
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दस प्रतीक से
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