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NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 4 चतुर्भुज

AglaSem पर कक्षा 8 गणित अध्याय 4 चतुर्भुज (गणित प्रकाश) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Maths Chapter 4 Quadrilaterals (Ganita Prakash), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 4 चतुर्भुज - Page 1 of 69

About NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 4 चतुर्भुज

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NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 4 चतुर्भुज – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 4: चतुभज
ु

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

82 – 111 15 86 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 68 pages

Page 2

कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · ग णत · ग णत प्रकाश

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: चतुभज
ु
ग णत प्रकाश भाग-I का अध्याय 4 चार भुजाओं वाली आकृ तय — आयत, वग, समांतर चतुभुज, समचतुभुज, पतंग तथा समलंब चतुभुज — का
अध्ययन कराता है। पूरे अध्याय क एक ही आदत है: कसी गुण को दे ख लेने के बाद उसे केवल मापकर मान नह लेना, ब ल्क सवागसम त्रभुज ,
समांतर रेखाओं के कोण तथा 360° के कोण-योग ारा उसका नगमन करना।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ग णत प्रकाश (कक्षा 8) 82 – 111

खं ड प्रश्न

15 86

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 82

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

प रचय

प्र.1 नीचे द गई आकृ तय का अवलोकन क जए। आकृ तयाँ (i), (ii) व (iii) चतुभुज ह तथा अन्य आकृ तयाँ
चतुभुज नह ह। क्य ?

(i) (ii) (iii)

(iv) (v)

पृष्ठ 82 पर द गई पाँच आकृ तयाँ (i) से (v)। आकृ तय (i), (ii) और (iii) म भुजाओं के बीच के कोण अं कत ह।

क्य क केवल (i), (ii) तथा (iii) ही ऐसी बंद आकृ तयाँ ह जो ठ क चार रेखाखंड से बनी ह, जो सरे से सरे तक जुड़े ह, न कोई
रेखाखंड दूसरे को काटता है और न ही कोई सरा खुला है।
प्रत्येक आकृ त को दो शत पर पर खए —

वह बंद हो — उसे बनाते हुए आप प्रारं भक बदु पर लौट आएँ;
वह चार सरल भुजाओं से बनी हो जो केवल अपने अंत बदुओं पर मल।

आकृ तयाँ (iv) तथा (v) दूसरी शत पूरी नह करत । दोन बंद तो ह, परंतु उनक सीमा केवल सरल रेखाखंड से नह बनी है —
(iv) म तीन सरल भुजाएँ ह और एक भुजा वक्र है, तथा (v) म दो सरल भुजाएँ ह और दो भुजाएँ वक्र ह। वक्र को भुजा नह माना
जाता, अत: इनम से कोई भी आकृ त चार रेखाखंड से नह बनी है।

यह महत्त्वपूण क्य है: 'क्वा ीलेटेरल' शब्द लै टन के क्वा ी (चार) तथा लैटस (भुजा) से बना है। यही प रभाषा
हम 'आकृ त के चार कोण' कहने का अ धकार दे ती है — (i), (ii) व (iii) म कसी शीष पर मलने वाली भुजाओं
का युग्म ठ क एक आंत रक कोण बनाता है, अत: आकृ त के चार सु न त कोण होते ह। जस आकृ त क सीमा म
वक्र हो, उसम ऐसे चार कोण होते ही नह ।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 83–85
4.1 आयत तथा वग — एक बढ़ई क समस्या

ग णत चचा

प्र.1 क्या आयत को प रभा षत करने क अन्य व धयाँ ह?

हाँ। अध्याय म दो और व धयाँ मलती ह, और यह भी सद्ध होता है क तीन ठ क एक ही ेणी के चतुभुज को दशाती ह।

प रभाषा यह कहाँ से आई

सभी कोण 90° तथा सम्मुख भुजाएँ समान सबसे पहले द गई प र चत प रभाषा

िवकण समान हों तथा एक-दू स रे को समि भािजत करते हों बढ़ई क समस्या का उत्तर

सभी कोण 90° नगमन 4 — 'सम्मुख भुजाएँ समान' वाला भाग स्वयं ही सद्ध हो जाता है

प रभाषा एक कसौट होती है — कोई आकृ त ठ क तभी आयत है जब वह कसौट पर खरी उतरे। दो भन्न कसौ टयाँ भी समान
रूप से सही हो सकती ह, बशत दोन एक ही आकृ तय को स्वीकार कर और एक ही आकृ तय को अस्वीकार कर।

संकेत: तीसरी प रभाषा सबसे सरल है, इसी लए पुस्तक अंतत: इसे ही अपनाती है — आयत एक चतुभुज है
जसके प्रत्येक कोण का माप 90° होता है। आयत के शेष सभी तथ्य तब गुण बन जाते ह, प रभाषा का भाग
नह ।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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em8 सट मीटर लंबी
प्र.2 एक बढ़ई को दो पतली लकड़ी क प काओं को चत्र 1 म दशाए अनुसार इस प्रकार साथ म रखना है क जब

m a s
l क उन दोन
co से ही उपलब्ध है। अन्य प का क लंबाई कतनी होनी चा हए? यह भीagबताइए
एक धागा इनके अंत बदुओं से होकर जाए तो धागे से एक आयत बन सके। बढ़ई के पास एक
प का .पहले

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प काओं को कहाँ से जोड़ा जाना चा हए?
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A D
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Fig. 1
चत्र 1, पृष्ठ 83 — लकड़ी क दो प काएँ O पर एक-दूसरे को काटती ह और धागा उनकेm
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चार अंत बदुओं A, B, C, D

. a
से होकर जाता है।

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दूसरी प का भी 8 सट मीटर क होनी चा हए, तथा दोन को उनक े मध्य बदुओं पर — अथात प्रत्ये क सरे से 4 सट मीटर क दूरी
पर — जोड़ा जाना चा हए।
l a se
ag उनके चार अंत बदु ही उस चतुभुज के शीष ह जो धागे से बनता है, अत: प काएँ उस
प काओं को रेखाखंड के रूप म दे खए।
चतुभुज के वकण ह। अब प्रश्न यह हो गया क आयत के वकण म कौन-सी बात सत्य होनी चा हए।

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m .
m as e
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िनगमन 1 → आयत के िवकण समान होते है ं
a g l
se m िनगमन 2 → वे एक-दू सरे को समि भािजत करते है ं
g l a
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.
अत: दू सरी पि का 8 सेट
ं ीमीटर, मध्यिबंद ु पर जुड़ी हुई

s e m
. c om a g la
ऐसा क्य होता है: दोन प काओं केm
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बीच का कोण न त नह है। नगमन 3 दशाता है क य द प काएँ समान
ह और मध्य बदु पर जुड़ी ह g
a कोई भी कोण आयत ही दे गा। अत: बढ़ई के पास एक स्वतंत्र चुनाव है — वह
आयत को लंबा-पतला बना सकती है या लगभग वगाकार — पर आकृ त आयत ही बनी रहेगी।

com
m .
m ase
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? यह व ध व्यवहार म प्रयुक्त होती है। यूरोप म बढ़ई आयताकार े म बनाने म इसका उपयोग
करते ह, तथा अ का के मोजां बक म कृषक घर का आयताकार आधार बनाने म।

प्र.3 अन्य वकण क लंबाई कतनी है?

8 सट मीटर — पहले वकण के बराबर, क्य क आयत के वकण सदै व समान होते ह।
नगमन 1. आयत ABCD म ∆ADC तथा ∆DAB क तुलना क जए —

AB = CD (आयत की सम्मुख भुजाएँ)

∠BAD = ∠CDA = 90° (आयत के कोण)

AD = DA (उभयिनष्ठ भुजा)

अत: SAS िनयम से ∆ADC ≅ ∆DAB

अत: AC = BD (सव गं सम ि भुजों के संगत भाग)

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक वकण एक ऐसे समकोण त्रभुज का कण है जसक दोन भुजाएँ आयत क लंबाई एवं
चौड़ाई ह। दोन वकण एक ही दो भुजाओं वाले समकोण त्रभुज पर टके ह, अत: दोन कण समान होने ही चा हए।
सवागसमता का तक यही कहता है, बना कोई लंबाई गने।

स्वयं जाँ चए: तीन अलग-अलग आयत बनाइए और दोन वकण मा पए। हर बार वे समान मलगे — परंतु तीन
उदाहरण प्रमाण नह होते, इसी लए नगमन 1 लखा गया है।

प्र.4 दोन वकण का प्र त े द बदु कहाँ है?

वह दोन वकण का मध्य बदु है — वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ह।
नगमन 2. आयत ABCD के वकण O पर मलते ह। ∆AOB तथा ∆COD क तुलना क जए।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

AB = CD (सम्मुख भुजाएँ)

∠AOB = ∠COD (शीष िभमुख कोण)

अब ∠1 = ∠OAB, ∠2 = ∠OCD तथा ∠3 = ∠DBC लीिजए —
∠B = 90° है, अत: ∠3 + ∠1 = 90°

∆BCD में: ∠3 + ∠2 + 90° = 180°, अत: ∠3 + ∠2 = 90°

अत: ∠1 = ∠2 = 90° – ∠3

अत: AAS िनयम से ∆AOB ≅ ∆COD

अत: OA = OC तथा OB = OD

इस प्रकार O, AC का भी मध्य बदु है और BD का भी।

ऐसा क्य होता है: ∠1 तथा ∠2 दोन ही एक समकोण म से वही कोण ∠3 घटाने पर बचा हुआ भाग ह — एक B
के कोने के भीतर, दूसरा त्रभुज BCD के भीतर। जो दो कोण दोन ही 90° – ∠3 ह , वे समान ही ह गे। यही एक
समता पूरी सवागसमता खोल दे ती है।

संकेत: कसी लंबाई को सम भा जत करने का अथ है उसे दो समान भाग म बाँटना। ' वकण एक-दूसरे को
सम भा जत करते ह' कहना 'प्रत्येक वकण दूसरे के मध्य बदु से होकर जाता है' कहने का ही सं क्षप्त रूप है।

प्र.5 वकण के मध्य क्या कोण होना चा हए?

कोई भी कोण चलेगा। बढ़ई क समस्या का यही सबसे रोचक भाग है — यह कोण बंधा हुआ नह है।
नगमन 3 म समान लंबाई के ऐसे दो वकण लए जाते ह जो एक-दूसरे को सम भा जत करते ह और जनके बीच कोई भी
यादृ क कोण x हो; फर दखाया जाता है क बनने वाले चतुभुज का प्रत्येक कोण 90° ही नकलता है। अत: बढ़ई प काओं को
कसी भी कोण पर जोड़ सकती है — भन्न कोण केवल भन्न आकार-प्रकार के आयत दगे।

x = 90° → चारों भुजाएँ समान → वग

x का मान 0° या 180° के िनकट → लंबा एवं पतला आयत

ऐसा क्य होता है: चार अंत बदु प्र त े द बदु O से समान दूरी ( वकण क आधी लंबाई) पर ह, अत: वे O कद्र
वाले एक वृत्त पर त ह। एक प का को O के प रत: घुमाने पर दो बदु उसी वृत्त पर सरक जाते ह — चार बदु
वृत्त पर ही रहते ह और आकृ त आयत ही रहती है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

प्र.6 क्या ∆AOD ≅ ∆COB सद्ध करने के लए नम्न ल खत समताओं का उपयोग कया जा सकता है? AO = CO
(ऊपर सद्ध कया गया है।), ∠AOB = ∠COD (शीषा भमुख कोण), AD = CB

नह । इन तीन तथ्य म से दो तो उन त्रभुज के अंग ही नह ह जनक तुलना क जा रही है।

AO = CO — उपयोगी। AO, ∆AOD क भुजा है तथा CO, ∆COB क ।
∠AOB = ∠COD — अनुपयोगी। ∠AOB, ∆AOD का कोण नह है और ∠COD, ∆COB का नह । यहाँ चा हए ∠AOD
तथा ∠COB (जो शीषा भमुख होने के कारण वास्तव म समान ह)।
AD = CB — उपयोगी तो है, परंतु यह तीसरी भुजा है, कोण के साथ लगी दूसरी भुजा नह ।

एक सही समुच्चय यह है —

AO = CO, ∠AOD = ∠COB (शीष िभमुख कोण), OD = OB

⇒ SAS िनयम से ∆AOD ≅ ∆COB

यह क्य महत्त्वपूण है: सवागसमता का नयम यह बताता है क कौन-से भाग मेल खाने चा हए, केवल यह नह क
कतनी समताएँ गनाई जा सकती ह। SAS म कोण दोन भुजाओं के बीच होना चा हए। आकृ त के कसी और भाग
का कोण लख दे ने से इन दो त्रभुज के वषय म कुछ सद्ध नह होता।

प्र.7 आइए, जाँच कर क दाईं ओर दशाए गए चत्र अनुसार य द हम दो वकण इस प्रकार ख चते ह क उनक लंबाई
समान हो, वह एक-दूसरे को सम भा जत करते ह एवं उनके बीच एक 60° का यादृ क कोण बनता हो।
बताइए क कौन-सा चतुभुज प्राप्त होता है। क्या आप अन्य सभी कोण को ात कर सकते ह?

आकृ त का प्रत्येक कोण ात कया जा सकता है। पहले प्र त े द बदु O पर बने चार कोण ली जए।

िदया है ∠AOB = 60°

∠COD = 60° (शीष िभमुख कोण)

∠AOD = 180° – 60° = 120° (रैिखक युग् म)

∠BOC = 120° (शीष िभमुख कोण)

अब चार सम बाहु त्रभुज का उपयोग क जए। वकण समान ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह, अत: OA = OB =
OC = OD।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

त्रभुज O पर शीष कोण आधार कोण

∆AOB 60° 60°, 60°

∆COD 60° 60°, 60°

∆AOD 120° 30°, 30°

∆BOC 120° 30°, 30°

अत: ABCD के प्रत्येक शीष पर दो अध-कोण 30° तथा 60° ह, जनका योग 30° + 60° = 90° है। ABCD के चार कोण
समकोण ह, अत: ABCD एक आयत है।

ऐसा क्य होता है: OA = OB होने से ∆AOB सम बाहु बनता है और उसके आधार कोण समान होते ह — यही
एकमात्र कारण है क संख्याएँ इस प्रकार नकलती ह। ABCD के प्रत्येक शीष कोण म 60° वाले त्रभुज का एक
आधार कोण और 120° वाले त्रभुज का एक आधार कोण जुड़ता है, और 60 + 30 सदै व 90 होता है।

प्र.8 ∆AOB म चूँ क OA = OB है अत: उनके सम्मुख कोण एक समान ह गे। माना क वह a है। क्या आप a का मान
ात कर सकते ह?

a = 60°

∆AOB में: a + a + 60 = 180 (ि भुज के अंत :कोणों का योग)

2a = 180 – 60 = 120

a = 60

अत: ∆AOB के तीन कोण 60° के ह — यह समबाहु त्रभुज है, जससे यह भी ात होता है क AB = OA = OB।

ऐसा क्य होता है: त्रभुज म समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते ह। OA = OB होने से उनके सम्मुख दोन
कोण एक ही मान a के हो जाते ह, अत: कोण-योग से एक ही अ ात वाला एक समीकरण बनता है और a पूणत:
नधा रत हो जाता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 86–87

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

4.1 आयत तथा वग — नगमन 3
co m
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m l as
.co a g
क्या अब हम पहचान सकते ह क चतुभुज ABCD कस प्रकार का चतुभुज है? ध्यान द जए क इसके प्रत्येक
m
प्र.1

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शीष कोण का योग 90° (30° + 60°) है।

a g

यह एक आयत है।
. com ag
a s emम बाँटता है, और 30° + 60° = 90°। अत: ABCD के चार कोण
agl
प्रत्येक शीष पर वकण कोण को 30° तथा 60° के दो भाग
90° के ह, जो क आयत क प रभाषा ही है।

co m
m.
∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°

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जाँच : 90 × 4 = 360° ✓ (िकसी भी चत भ
ु ज
ु के कोणों का योग)
a g l
se m
g l a
a संकेत: यह आकृ त आयत के रूप म बनाई नह गई थी — यह दो समान रेखाखंड को मध्य बदु पर 60° के कोण

m a s
agl
पर काटकर बनाई गई थी। आयत होना नष्कष है, प्रारं भक मान्यता नह ।

m .co
l a se
a g
प्र.2 हम इस चतुभुज क भुजाओं के वषय म क्या कह सकते ह?

co m
m .
as e
coजm l

सम्मुख.भु
a g
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ाएँ समान ह — AB = CD तथा AD = CB।

l a se
a g
m
∆AOB ≅ ∆COD ⇒ AB = CD

a se
∆AOD ≅ ∆COB ⇒ AD = CB
. com a g l
m
ase
agl
प्रत्येक सवागसमता SAS से मलती है — OA = OC, OB = OD ( वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ह), तथा O पर उनके
बीच का कोण दोन त्रभुज म समान है क्य क शीषा भमुख कोण समान होते ह।

. c om
ऐसा क्य होता है: एक वकण का आधा भाग, दूसरे वकण का आधा भाग तथा उनक
s e mे बीच का कोण — ये तीन
. cमलकर a gजlठa क इन्ह तीन भाग से बने ह, अत:
om एक त्रभुज को पूणत: नधा रत कर दे ते ह। O के दोन ओर के त्रभु
a s em उनक तीसरी भुजाएँ — जो ABCD क सम्मुख भुजाएँ ह — समान होनी ही चा हए।
agl c
m .
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सभी कोण 90° तथा सम्मुख भुजाएँ समान होने से ABCD पुस्तक क पहली प रभाषा को संतुष्ट करता है।
m a s
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 य द वकण के मध्य कोण को प रव तत कर दया जाए तो क्या ABCD एक आयत ही रहेगा? क्या हम इसका
व्यापक करण कर सकते ह?

हाँ — प्रत्येक कोण के लए यह आयत ही रहेगा। नगमन 3 इसी का व्यापक करण करता है।
वकण के बीच का एक कोण x मान ली जए। तब O पर बने चार कोण x, x, 180 – x, 180 – x ह गे।

समि बाहु ∆AOB में (OA = OB), आधार कोण a:

a + a + x = 180 ⇒ 2a = 180 – x ⇒ a = 90 – x⁄2

समि बाहु ∆AOD में (OA = OD), आधार कोण b:

b + b + (180 – x) = 180 ⇒ 2b = x ⇒ b = x⁄2

ABCD का पत्येक कोण = a + b = (90 – x⁄2) + x⁄2 = 90

x कट जाता है। यही पूरी बात है — उत्तर x पर नभर ही नह करता, अत: वकण के बीच कोई भी कोण हो, चतुभुज आयत ही
होगा।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक शीष पर एक अध-कोण जतनी तेज़ी से बढ़ता है, दूसरा उतनी ही तेज़ी से घटता है।
वकण को थोड़ा खो लए तो a उसका आधा घट जाता है और b उतना ही बढ़ जाता है। उनका योग 90° से हट ही
नह सकता।

स्वयं जाँ चए: सूत्र म x = 60 र खए — a = 90 – 30 = 60 तथा b = 30, जो पृष्ठ 85 पर हल कए गए उदाहरण
से पूणत: मेल खाता है।

प्र.4 चूँ क हम जानते ह क ∆AOB एक सम बाहु त्रभुज है अत: हम इसके दोन आधार कोण के माप को a ारा
नरू पत कर सकते ह। x के पद म a का मान ( ड ी म) क्या है?

a = 90 – x⁄2 ड ी

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

a + a + x = 180 (ि भुज के अंत :कोणों का योग)

2a = 180 – x

a = (180 – x)⁄2 = 90 – x⁄2

X A = 90 – X/2 B = X/2 A+B

40° 70° 20° 90°

60° 60° 30° 90°

90° 45° 45° 90°

140° 20° 70° 90°

यहाँ बीजग णत क्य : x = 60° जैसा कोई एक संख्यात्मक उदाहरण केवल एक आयत क जाँच करता है। उत्तर
को x के पद म लखने पर सभी आयत क जाँच एक साथ हो जाती है — यह अक्षर उन सभी कोण का
प्र त न धत्व करता है जो दोन प काएँ बना सकती ह।

प्र.5 AB व CD तथा AD व BC के वषय म हम क्या कह सकते ह?

AB = CD तथा AD = CB — कोण x कुछ भी हो, सम्मुख भुजाएँ समान रहती ह।

∆AOB ≅ ∆COD ⇒ AB = CD

∆AOD ≅ ∆COB ⇒ AD = CB

प्र.3 के साथ मलाकर दे खए — य द दो रेखाखंड समान ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह , तो उनके अंत बदुओं से बने
चतुभुज के सभी कोण 90° तथा सम्मुख भुजाएँ समान ह गी। अत: वह एक आयत है — और बढ़ई क समस्या पूणत: हल हो गई।

संकेत: इसी से दूसरी प रभाषा वैध बनती है — आयत एक चतुभुज है जसके वकण समान होते ह और एक-
दूसरे को सम भा जत करते ह। नगमन 1 व 2 सद्ध करते ह क प्रत्येक आयत यह कसौट पूरी करता है;
नगमन 3 सद्ध करता है क यह कसौट पूरी करने वाली प्रत्येक आकृ त आयत है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 89–90

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

4.1 आयत तथा वग — नगमन 4

प्र.1 पूव प रभाषा म हमने कहा था क (i) सम्मुख भुजाएँ समान लंबाई क होती ह। (ii) सभी कोण 90° के होते ह।
क्या हमारा कथन त्रु टपूण होगा य द हम आयत को एक ऐसे चतुभुज के रूप म प रभा षत कर जसम प्रत्येक
कोण का माप 90° हो।

नह , यह त्रु टपूण नह होगा। छोट प रभाषा ही पयाप्त है।
शत (i) कोई अ त रक्त माँग है ही नह — वह शत (ii) से स्वयं नकल आती है। नगमन 4 दशाता है क जब चार कोण 90° के ह
तो सम्मुख भुजाएँ समान होनी ही पड़ती ह; चार समकोण वाला ऐसा कोई चतुभुज बनाया ही नह जा सकता जसक सम्मुख भुजाएँ
असमान ह ।

ऐसा करना क्य उ चत है: अ प रभाषा म कोई अनावश्यक बोझ नह होना चा हए। य द प रभाषा का कोई
भाग शेष भाग से सद्ध हो सकता है, तो उसका ान गुण म है, प रभाषा म नह । छोट प रभाषा से जाँच भी सरल
हो जाती है — केवल चार कोण दे खने होते ह।

संकेत: वास्तव म तीन समकोण ही पयाप्त ह, क्य क चतुभुज के कोण का योग 360° होता है और 360 – 270 =
90। पुस्तक चार का उल्लेख इस लए करती है क्य क कहने म यह अ धक सरल है।

प्र.2 आपके वचार से य द यह प रभाषा पूण नह हो तब एक ऐसे चतुभुज क रचना करने का प्रयास क जए जसम
प्रत्येक कोण का माप 90° हो परंतु सम्मुख भुजाएँ एक समान न ह । क्या आप ऐसा चतुभुज बना सकते ह?

ऐसा कोई चतुभुज है ही नह — रचना करते समय आकृ त सदै व आयत बनकर ही बंद होती है, और कारण भी बनाते-बनाते दख
जाता है।
प्रयास क जए — कोई भी लंबाई क AB ख चए। B पर 90° मुड़कर कोई भी लंबाई क BC ख चए। C पर 90° मुड़कर CD
ख चए। अब D पर भी कोण 90° बनाने के लए D को ठ क A के ऊपर आना ही होगा — और इससे

CD = AB तथा AD = BC

जैसे ही आप CD को AB से बड़ा या छोटा करगे, चौथा कोना समकोण बनने से मना कर दे गा। आपके पास केवल तीन स्वतंत्र चुनाव
ह (दो लंबाइयाँ और प्रारं भक दशा); चौथी भुजा स्वयं न त हो जाती है।

ऐसा क्य होता है: तीन बार 90° मुड़ने के बाद आप अपनी मूल दशा के वपरीत मुख कर लेते ह। आकृ त तभी बंद
होगी जब उस दशा म ख ची गई दोन भुजाएँ समान ह , और यही दूसरे युग्म पर भी लागू होता है। नगमन 4 इसी
अवलोकन को सवागसम त्रभुज ारा प्रमाण म बदल दे ता है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 B एवं D को मलाइए। ∆BAD और ∆DCB सवागसम प्रतीत होते ह। क्या यह तथ्य तक संगत है? त्रभुज म दो
समानताएँ प्रत्यक्ष रूप से दे खी जा सकती ह। ∠1 और ∠2 के वषय म हम क्या कह सकते ह?

∠1 = ∠2, और यही वह छू ट हुई कड़ी है — तक ठ क वही है जो नगमन 2 म था।
माना ABCD के चार कोण 90° के ह और BD मलाया गया है। ∠1 = ∠ADB, ∠2 = ∠CBD तथा ∠3 = ∠DBA ली जए।

∠B = 90° है, अत: ∠3 + ∠2 = 90°

∆ABD में: ∠3 + ∠1 + 90° = 180°, अत: ∠3 + ∠1 = 90°

अत: ∠1 = ∠2 = 90° – ∠3

अब ∆BAD तथा ∆DCB क तुलना क जए —

∠A = ∠C = 90°

∠1 = ∠2 (अभी िसद्ध िकया)

BD = DB (उभयिनष्ठ भुजा)

⇒ AAS िनयम से ∆BAD ≅ ∆DCB

⇒ AD = CB तथा DC = BA

अत: जस चतुभुज के सभी कोण 90° ह , उसक सम्मुख भुजाएँ स्वत: ही समान होती ह — वह आयत है।

ऐसा क्य होता है: वकण BD प्रत्येक समकोण को दो भाग म बाँटता है। B के कोने म से जतना भाग लया जाता
है, उतना ही D पर बच जाता है, क्य क दोन योग (कोने का तथा त्रभुज का) एक ही 90° तक जाते ह। एक ही
वकण साझा करते हुए जन दो त्रभुज के कोण-युग्म मेल खाते ह , वे एक-दूसरे क प्र तकृ त ही ह गे।

प्र.4 क्या ∆BAD ≅ ∆CDB लखना त्रु टपूण होगा? य द हाँ, तो ऐसा क्य ?

हाँ, यह त्रु टपूण है। सवागसमता के कथन म अक्षर संगत क्रम म ही लखे जाने चा हए।
सही कथन ∆BAD ≅ ∆DCB है, जो यह बताता है —

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ase
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
∆BAD संगत ∆DCB

m as e
B
.co
↔ D
a g l
se m
g l a
a
A ↔ C

D ↔ B

o m
ान पर ∆BAD ≅ ∆CDB लखने का अथ होगा Bm
e
. c ag
s
इसके ↔ C, A ↔ D तथा D ↔ B, अथात BA = CD तथा ∠B = ∠C।
a मात्र है, जब क ∠C पूरा समकोण है — ये सामान्यत: समान नह होते।
परंतु यहाँ ∠B का अथ ∠DBA है, जो कोने का एकlभाग
ag
संकेत: सवागसमता के कथन को दोन त्रभुज के बीच का शब्दकोश सम झए। आगे आप जो भी समता — भुजा
co m
e m.
या कोण — उद्धत करगे, वह इसी शब्दकोश से नकलेगी, अत: अक्षर का क्रम बगड़ते ही आपको असत्य समताएँ
m l as
.co g
मलने लगगी।
m a
l a se
a g
s
क्या आयत क सम्मुख भुजाएँ समांतर होती ह?
m a
agl
प्र.5

m.co
l a se
g

a
हाँ, और यह केवल समकोण से ही सद्ध हो जाता है — मापने क आवश्यकता नह ।

m
AB को AD तथा BC के लए तयक रेखा मा नए।
. co
em
m l as
.co
∠A + ∠B = 90° + 90° = 180°
m तथा ∠B ितयक रेखा AB के एक ही ओर के अंत:कोण है ं a g
a s e∠A
a gl
m
जब ऐसे कोणों का योग 180° हो तो रेखाएँ समांत र होती है ं

a se
⇒ AD ∥ BC
. com a g l
m
ase
agl
ऐसा क्य होता है: य द AD तथा BC समांतर न होत तो वे कह मलत और AB के साथ एक त्रभुज बनात । उस

co m
त्रभुज के दो शीष पर ही 90° + 90° = 180° हो जाता, तीसरे के लए कुछ बचता ही नह — जो असंभव है। अत:

m .
se
वे कभी नह मलत ।

o m l
g है।a
m .c गुण 3 — आयत क सम्मुख भुजाएँ एक-दूसरे के समांतर होती ह प्राप्त होता
a
se
इससे
a
agl c
m .
m a s e
co agl
क्या आप इसी प्रकार यह दशा सकते ह क AB, DC के समांतर है (AB || DC)?
.
प्र.6

e m
g l as
a
हाँ — केवल तयक रेखा बदल द जए।

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 68

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AD को AB तथा DC के िलए ितयक रेखा लीिजए

∠A + ∠D = 90° + 90° = 180°

ये AD के एक ही ओर के अंत :कोण है ं

⇒ AB ∥ DC

अत: आयत क सम्मुख भुजाओं के दोन युग्म समांतर ह। इसी लए प्रत्येक आयत एक समांतर चतुभुज भी है — वह समांतर
चतुभुज क प रभाषा को संतुष्ट करता है और इसके अ त रक्त उसके सभी कोण 90° के होते ह।

संकेत: यही तक चार भुजाओं म से कसी पर भी लागू होता है, क्य क आयत का प्रत्येक कोण 90° का है। आप
जो युग्म सु वधाजनक लगे, वही चुन सकते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 90–93
4.1 एक वशेष आयत — वग

प्र.1 नीचे दए गए चतुभुज म से कौन-से चतुभुज आयत नह ह?

कोई नह — चार ही आयत ह, आकृ त (iv) स हत।

आकृ त भुजाएँ सभी कोण 90°? आयत?

(i) 5 cm, 2 cm, 5 cm, 2 cm हाँ हाँ

(ii) 3.6 cm, 6 cm, 3.6 cm, 6 cm हाँ हाँ

(iii) 5 cm, 1 cm, 5 cm, 1 cm हाँ हाँ

(iv) 4 cm, 4 cm, 4 cm, 4 cm हाँ हाँ — और यह वग भी है

चार आकृ तय के प्रत्येक कोने पर समकोण का चह्न है, और प रभाषा इससे अ धक कुछ माँगती ही नह । पृष्ठ पर तरछ होने से
((ii) तथा (iii) क तरह) कोई अंतर नह पड़ता — कोण इस बात पर नभर नह करते क आकृ त कस ओर घुमाकर रखी है।

(iv) आयत क्य है: वग आयत क कसौट पूरी करता है — उसके सभी कोण 90° के ह। यह एक वशेष आयत है
जसक सभी भुजाएँ संयोग से समान ह। अत: प्रत्येक वग एक आयत है, परंतु प्रत्येक आयत वग नह — ठ क
वैसे ही जैसे प्रत्येक मलयाली भारतीय है, पर प्रत्येक भारतीय मलयाली नह ।

वग: वह चतुभुज जसके प्रत्येक कोण का माप 90° हो और सभी भुजाएँ समान लंबाई क ह ।

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प्र.2 आइए, हम पुनः बढ़ई क समस्या पर वचार कर। य द लकड़ी क प काओं को इस प्रकार रखा जाए क अंत
बदुओं से होकर जाने वाला धागा एक वग बनाता हो तो ऐसा करने के लए हम क्या करना होगा?

प काएँ समान लंबाई क ह , मध्य बदुओं पर जुड़ी ह , तथा एक-दूसरे पर लंबवत ह ।

समान + समि भाजक → सभी कोण 90° (आयत)

+ 90° पर पितच्छे द → चारों भुजाएँ भी समान

⇒ वग

पहली दो शत आयत के लए पहले से ही आवश्यक थ । कोण को ठ क 90° रखना ही एकमात्र अ त रक्त माँग है, और नगमन 5
दशाता है क यही सही माँग है।

प्रयास क जए: 8 सट मीटर वकण वाला वग बनाने के लए 8 सट मीटर का रेखाखंड ख चए, उसका मध्य बदु O
अं कत क जए, O पर लंब ख चए और O के दोन ओर 4-4 सट मीटर काट ली जए। चार अंत बदुओं को क्रम से
मला द जए।

प्र.3 भुजाओं क समान लंबाई प्राप्त करने के लए हम और अ धक कसक आवश्यकता है? क्या वकण के मध्य के
कोण को सही प्रकार से चय नत करके यह प्राप्त कया जा सकता है?

हाँ — वकण के बीच का कोण 90° रख द जए। केवल यही एक प रवतन पयाप्त है।

नगमन 3 से स्मरण क जए क कसी शीष पर अध-कोण a = 90 – x⁄2 तथा b = x⁄2 होते ह, जहाँ x वकण के बीच का कोण है।
भुजाएँ ठ क तभी समान ह गी जब O के चार त्रभुज सवागसम ह , और ऐसा तभी होगा जब O पर बने चार कोण समान ह —

x = 180 – x ⇒ 2x = 180 ⇒ x = 90°

x = 90° पर a = b = 45° भी मलता है, अत: प्रत्येक वकण प्रत्येक कोने को 45° के दो भाग म बाँट दे ता है।

ऐसा क्य होता है: AOB, BOC, COD तथा DOA — चार त्रभुज क दो भुजाएँ वकण के आधे भाग ह। वे
केवल उन भुजाओं के बीच के कोण म भन्न ह। उस कोण को चार म समान कर द जए तो SAS से त्रभुज
सवागसम हो जाएँगे — और उनक तीसरी भुजाएँ, जो चतुभुज क चार भुजाएँ ह, समान हो जाएँगी।

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प्र.4 वह दो त्रभुज कौन-से ह जनक सवागसमता के ारा हम वकण के मध्य बने कोण को ात कर सकते ह? क्या
इसका उपयोग वकण ारा बनाए गए कोण ∠BOA और ∠BOC को ात करने के लए कया जा सकता है?

∆BOA तथा ∆BOC ली जए। इन्ह से कोण तुरंत मल जाते ह।

BA = BC (वग की भुजाएँ)

OA = OC (िवकण एक-दू सरे को समि भािजत करते है)ं

BO = BO (उभयिनष्ठ भुजा)

⇒ SSS िनयम से ∆BOA ≅ ∆BOC

अत: ∠BOA = ∠BOC (संगत भाग)
परंत ु ∠BOA + ∠BOC = 180° (AC पर सरल कोण)

⇒ ∠BOA = ∠BOC = 90°

यही नगमन 5 है — वग के वकण एक-दूसरे को समकोण पर सम भा जत करते ह।

ऐसा क्य होता है: B, A तथा C से समान दूरी पर है, अत: B, AC के लंब सम भाजक पर त है। O भी AC
का मध्य बदु है। अत: BO ही AC का लंब सम भाजक है — और यही कहना है क वकण 90° पर मलते ह।

संकेत: यही तक कसी भी समचतुभुज पर लागू होता है, इसी लए पृष्ठ 102 का गुण 6 कहता है क समचतुभुज के
वकण 90° पर मलते ह। वग तो बस वह समचतुभुज है जो आयत भी है।

प्र.5 इस तथ्य का उपयोग करते हुए 8 सट मीटर लंबाई के एक वकण के साथ वग क रचना क जए।

रचना के चरण।

1. AC = 8 सट मीटर ख चए।
2. परकार से AC का लंब सम भाजक बनाइए — A तथा C से समान त्रज्या के चाप दोन ओर लगाकर उनके कटान बदुओं को
मलाइए। यह AC को O पर काटता है, अत: OA = OC = 4 सट मीटर।
3. इस लंब पर AC के दोन ओर B तथा D इस प्रकार अं कत क जए क OB = OD = 4 सट मीटर।
4. AB, BC, CD तथा DA मलाइए।

ABCD अपे क्षत वग है।

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िवकण: AC = BD = 8 सेट
ं ीमीटर (समान)

वे O पर एक-दू सरे को समि भािजत करते है ं और 90° पर िमलते है ं

⇒ ABCD एक वग है िजसकी पत्येक भुजा = √(4² + 4²) = 4√2 ≈ 5.66 सेट
ं ीमीटर

लंब सम भाजक ही पूरा काम क्य कर दे ता है: वह एक ही रचना म 'एक-दूसरे को सम भा जत करना' तथा
'90° पर मलना' — दोन शत दे दे ता है, और 4-4 सट मीटर काटने से ' वकण समान' वाली शत पूरी हो जाती है।
कह भी चाँदे क आवश्यकता नह पड़ती।

प्र.6 नगमन 1 और नगमन 2 के ज्या मतीय तक ारा यह सत्या पत क जए क क्या उपयुक्त तथ्य सत्य ह? इसके
साथ यह भी दे खए क क्या वे वग म भी प्रयुक्त कए जा सकते ह?

दोन नगमन अक्षरश: लागू होते ह, क्य क दोन म समकोण तथा समान सम्मुख भुजाओं के अ त रक्त कुछ भी प्रयोग नह हुआ
था — और ये दोन बात वग म ह।

नगमन कन तथ्य का प्रयोग हुआ क्या वग म ये ह?

1 — िवकण समान AB = CD, ∠BAD = ∠CDA = 90°, AD उभयिनष्ठ (SAS) हाँ

2 — िवकण समि भािजत AB = CD, शीष िभमुख कोण, ∠1 = ∠2 (AAS) हाँ

अत: वग के वकण समान होते ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह — और नगमन 5 से वे 90° पर भी मलते ह।

यह बना प रश्रम क्य मल जाता है: वग एक आयत है। सभी आयत के वषय म सद्ध कया गया प्रत्येक कथन
प्रत्येक वग पर स्वत: लागू होता है; वग केवल गुण जोड़ता है, घटाता कभी नह । वेन आरेख वाले चत्र का व्यावहा रक
लाभ यही है।

प्र.7 वग का एक और वशेष गुण होता है। ∠1, ∠2, ∠3 और ∠4 के माप क्या है? आइए, दे खते ह क तक अथवा
प्रयोग ारा इसे कस प्रकार प्राप्त कर सकते ह। ... इसी प्रकार ∠2 और ∠4 का मान ात क जए।

चार 45° के ह।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
∆ADC में: ∠1 + ∠3 + 90 = 180 ⇒ ∠1 + ∠3 = 90
m l as
.co
AD = DC (वग की भुजाएँ) ⇒ ∠1 = ∠3
m a g
l a se
g
अत: 2∠1 = 90 ⇒ ∠1 = ∠3 = 45°
a

co m
. ag
∆ABC में: AB = BC तथा ∠B = 90°
em
⇒ ∠2 = ∠4 = 45°
g l as
a
m
अत: वकण प्रत्येक 90° के कोने को 45° के दो भाग म बाँट दे ता है। यही गुण 5 — वग के वकण उसके शीष कोण को
co
m.
सम भा जत करते ह।

o m l a se
ऐसा क्य.cहोता है: वग का वकण उसे दो सम बाहु समकोण त्रभुज म बाँट दे ताaहैg
e m । सम बाहु त्रभुज म आधार
s समान होते ह, और यहाँ उन्ह शीष के समकोण के बाद बचे 90° को आपस म बाँटना है — अत: प्रत्येक को
gla
कोण
a ठ क आधा मलता है।

om a s
e
. c
mभी मलता है — a = 90 – 45 = 45 तथा b = 45। दोन माग agl
s
संकेत: यही 45° नगमन 3 म x = 90 रखने पर
एक ही उत्तर दे ते ह, जो इस बात का अ laा प्रमाण है क दोन सही ह।
ag

co m
m .
as e
com l
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 94
4.1 आयत .तथा a g
e m
aग sणत चचा प्रयास क जए
वग

a g l
se m
com g l a
प्र.1
.
नीचे दए गए आयत के अन्य सभी आंत रक कोण को ात क जए।
m a
ase
उत्तर agl
m
आकृ त (i) — आयत ABCD, जसम A नीचे-बाएँ, B नीचे-दाएँ, C ऊपर-दाएँ तथा D ऊपर-बाएँ है, दोन वकण खचे ह और

. co
m
∠CAB = 30° दया है।

m बाहु ह। as e
cजoसम g l
आयत के वकण समान होते ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह, अत: OA = OB = OC = OD, अथात O पर बने चार
. a
sem
त्रभु
a
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
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a g l Page 19 of 68

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∠CAB = 30° (िदया है) ⇒ ∠DAC = 90 – 30 = 60°

∆AOB समि बाहु ⇒ ∠ABD = ∠BAC = 30° ⇒ ∠DBC = 60°

∆ABC में: ∠ACB = 180 – 90 – 30 = 60° ⇒ ∠ACD = 30°
∆ABD में: ∠ADB = 180 – 90 – 30 = 60° ⇒ ∠BDC = 30°

O पर: ∠AOB = 180 – 30 – 30 = 120° = ∠COD

∠AOD = ∠BOC = 180 – 120 = 60°

D C
30° 30°
60° 60°

120°
O
60° 60°

120°
60° 60°

30° 30°
A B

आकृ त (i): दए गए ∠CAB = 30° से आयत के भीतर के सभी कोण।

आकृ त (ii) — आयत PQRS, जसम P नीचे-बाएँ, Q ऊपर-बाएँ, R ऊपर-दाएँ तथा S नीचे-दाएँ है, दोन वकण खचे ह और
प्र त े द बदु O पर ∠QOR = 110° दया है।

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∠POS = 110° (∠QOR का शीष िभमुख कोण)

∠QOP = ∠ROS = 180 – 110 = 70° (रैिखक युग् म)

∆QOR समि बाहु (OQ = OR): ∠OQR = ∠ORQ = (180 – 110) ÷ 2 = 35°

∆POS समि बाहु (OP = OS): ∠OPS = ∠OSP = 35°

∆POQ समि बाहु (OP = OQ): ∠OPQ = ∠OQP = (180 – 70) ÷ 2 = 55°

∆ROS समि बाहु (OR = OS): ∠ORS = ∠OSR = 55°

प्रत्येक शीष पर जाँच: 35° + 55° = 90° ✓

सम बाहु त्रभुज कहाँ से आते ह: आयत के वकण समान होते ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह,
अत: OP, OQ, OR तथा OS — चार अध- वकण समान लंबाई के ह। इसी लए O पर बना प्रत्येक त्रभुज
सम बाहु है और उसके आधार कोण समान होने ही चा हए। यही एक दए हुए कोण से बारह कोण नकाल दे ता है।

प्र.2 एक ऐसा चतुभुज बनाइए जसके प्रत्येक वकण क लंबाई 8 सट मीटर हो एवं वे एक-दूसरे को सम भा जत
करते ह और नम्न ल खत कोण बनाते ह । (i) 30° (ii) 40° (iii) 90° (iv) 140°

रचना चार तय म एक जैसी है; केवल O पर बना कोण बदलता है।

1. AB = 8 सट मीटर ख चए और उसका मध्य बदु O अं कत क जए (अत: OA = OB = 4 सट मीटर)।
2. O पर OB के साथ अपे क्षत कोण बनाती हुई एक करण ख चए।
3. इस करण पर तथा इसक वपरीत करण पर OC = OD = 4 सट मीटर काट ली जए।
4. AD, DB, BC तथा CA मलाइए। ADBC अपे क्षत चतुभुज है।

चार आकृ तयाँ आयत ही ह गी, क्य क वकण समान (8-8 सट मीटर) ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह — नगमन 3
के अनुसार उनके बीच के कोण से कोई अंतर नह पड़ता।

O पर कोण प्रत्येक शीष पर अध-कोण (90 – X/2, X/2) प्राप्त आकृ त

(i) 30° 75° तथा 15° लंबा-पतला आयत

(ii) 40° 70° तथा 20° आयत

(iii) 90° 45° तथा 45° वग

(iv) 140° 20° तथा 70° आयत ((ii) जैस ा ही, के वल घुम ा हुआ )

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(ii) तथा (iv) एक ही आकार क्य दे ते ह: 40° तथा 140° संपूरक ह, और O पर बने कोण सदै व x, x, 180 –
x, 180 – x होते ह। 140° चुनने पर केवल यह बदलता है क कौन-सा युग्म छोटा है — वही आयत दूसरी ओर
खड़ा मल जाता है।

स्वयं जाँ चए: त (iii) म चार भुजाएँ मा पए। प्रत्येक लगभग 5.7 सट मीटर मलेगी, क्य क प्रत्येक भुजा √(4²
+ 4²) = 4√2 सट मीटर है।

प्र.3 माना O कद्र का कोई वृत्त है। जहाँ पर रेखाखंड PL और AM वृत्त के दो व्यास ह, यह परस्पर लंबवत ह। बताइए
क APML कस प्रकार क आकृ त है? कारण और/अथवा प्रयोग ारा इसे ात क जए।

APML एक वग है।
दोन व्यास ही चतुभुज APML के वकण ह, अत: उन्ह वग क कसौट पर पर खए।

PL = AM — वृत्त के सभी व्यास समान लंबाई के होते है ं ⇒ िवकण समान

दोनों कें द O से होकर जाते है ं और O पत्येक का मध्यिबंद ु है ⇒ िवकण एक -दू सरे को समि भािजत करते है ं

PL ⊥ AM (िदया है) ⇒ िवकण 90° पर िमलते है ं

समान वकण जो एक-दूसरे को समकोण पर सम भा जत कर ⇒ आकृ त वग है।

ऐसा क्य होता है: चार शीष वृत्त पर ह, अत: प्रत्येक O से r दूरी पर है। O पर बने चार त्रभुज r भुजाओं वाले
सवागसम सम बाहु समकोण त्रभुज ह, अत: APML क चार भुजाएँ r√2 तथा चार कोण 45° + 45° = 90° के
ह।

प्रयास क जए: 3 सट मीटर त्रज्या का वृत्त तथा दो परस्पर लंबवत व्यास ख चए। APML क भुजा मा पए —
लगभग 4.2 सट मीटर मलेगी, क्य क 3√2 ≈ 4.24।

प्र.4 हमने दे खा क कागज को मोड़कर 90° का कोण कैसे बनाया जाता है। हम मान लेते ह क हमारे पास कागज नह
है परंतु समान लंबाई क दो छ ड़याँ और एक धागा है। इनसे हम 90° का कोण कस प्रकार बनाएँगे?

बढ़ई क समस्या को उलटकर प्रयोग क जए — पहले आयत बनाइए, उसके कोने ही आपके समकोण ह।

1. माना AB तथा CD दोन समान छ ड़याँ ह। धागे को छड़ी पर रखकर आधा मोड़कर प्रत्येक का मध्य बदु ात क जए।
2. दोन छ ड़य को इस प्रकार र खए क उनके मध्य बदु एक ही बदु O पर आ जाएँ। वह जोड़ द जए।

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3. धागे को चार सर A, C, B, D से घुमाकर वापस A तक लाइए और तान द जए।

ACBD एक आयत है, क्य क उसके वकण AB तथा CD समान ह और एक-दूसरे को सम भा जत करते ह। अत: ∠C = ∠A =
∠B = ∠D = 90° — धागे से बनी आकृ त का प्रत्येक कोना ठ क समकोण है।

यह अनुमान नह , सट क क्य है: यहाँ कह भी कोण को आँख से आँकना नह पड़ता। जन दो शत को आप
भौ तक रूप से नयं त्रत कर सकते ह — छ ड़याँ समान लंबाई क , मध्य बदु पर जुड़ी हुई — नगमन 3 सद्ध कर
चुका है क वही चार कोण को 90° बनाने के लए पयाप्त ह।

एक और व ध: सम बाहु त्रभुज का उपयोग क जए। धागे से ऐसा त्रभुज बनाइए जसक दो समान भुजाएँ
छ ड़य पर ह ; शीष से आधार के मध्य बदु तक क रेखा आधार पर लंब होगी, क्य क वह लंब सम भाजक है।

प्र.5 हमने दे खा क आयत का एक गुण यह भी है क उसक सम्मुख भुजाएँ समांतर होती ह। क्या इसे आयत क
प रभाषा के रूप म प्रयुक्त कया जा सकता है? दूसरे शब्द म प्रत्येक चतुभुज जसक सम्मुख भुजाएँ समांतर
और समान ह तो क्या वह एक आयत होगा?

नह । 'सम्मुख भुजाएँ समांतर एवं समान' आयत का सच्चा गुण तो है, परंतु उसे प रभा षत करने के लए पयाप्त नह ।
प रभाषा को प्रत्येक आयत स्वीकार करना चा हए तथा शेष सब अस्वीकार। यह कसौट दूसरी शत पर वफल है — प्रत्येक
समांतर चतुभुज क सम्मुख भुजाएँ समांतर एवं समान होती ह, और अ धकांश समांतर चतुभुज आयत नह होते।

∠A = 30° तथा भुजाएँ 4 सेट
ं ीमीटर व 5 सेट
ं ीमीटर वाला समांत र चत भ
ु ज
ु

सम्मुख भुजाएँ समांत र ✓ सम्मुख भुजाएँ समान ✓

परंत ु ∠A = 30° ≠ 90° ⇒ आयत नही ं

कोण का उल्लेख क्य आवश्यक है: समांतरता केवल भुजाओं क दशा तय करती है, दो दशाओं के बीच का
कोण नह । आयत के ऊपरी भाग को बगल म धके लए — भुजाएँ समांतर एवं समान बनी रहती ह पर प्रत्येक कोण
बदल जाता है, और 'झुका हुआ' समांतर चतुभुज बन जाता है। केवल 'सभी कोण 90°' वाली शत ही इसे रोक
सकती है।

संकेत: जो प रभाषाएँ काम करती ह उनसे तुलना क जए — 'सभी कोण 90°' अथवा ' वकण समान ह और एक-
दूसरे को सम भा जत कर'। सामान्य समांतर चतुभुज म वकण एक-दूसरे को सम भा जत तो करते ह पर समान
नह होते — ठ क यही बात वफल प रभाषा म छू ट गई है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 94–95

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

4.2 चतुभुज के कोण
co m
e m.
m l as
.co a g
क्या ऐसे चतुभुज क रचना करना संभव है जसके तीन कोण 90° के समान ह एवं चौथा कोण 90° के समान न
m
प्र.1

l a se
हो?

a g

co m
. ag
नह , यह असंभव है। जतनी बार चाह रचना क जए — चौथा कोण सदै व ठ क 90° पर ही बंद होगा।

em
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चत भ
ु ज
ु के कोणों का योग = 360° a
तीन समकोण लेते है ं 90 × 3 = 270°
co m
em.
as
चौथा कोण = 360 – 270 = 90°
m l
.co a g
a s em
l
g(ii) को भी सद्ध कर देता है।)
कसी अन्य मान के लए ान ही नह बचता, अत: ऐसा चतुभुज हो ही नह सकता। (यही पृष्ठ 109 के सत्य/असत्य प्रश्न के कथन
a
m a s
.co agl
संकेत: इसी लए पुस्तक क सं क्षप्त प रभाषा 'चार कोण 90°' के ान पर 'तीन कोण 90°' भी कह सकती थी।

se m
l a
दोन कसौ टयाँ ठ क एक ही आकृ तय को स्वीकार करती ह।

a g

co m
m .
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परंतु क्य नह ?

as
प्र.2

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gl क्य क प्रत्येक चतुभुज पर एक गुण लागू होता है — उसके सभी कोण का योग 360° होता है।

a
एक वकण ख चए। वह चतुभुज को दो त्रभुज म बाँट दे ता है, और प्रत्येक त्रभुज 180° दे ता है।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
180° + 180° = 360°

co m
यह योग न त हो जाने पर 90° के तीन कोण चौथे के लए ठ क 90° ही छोड़ते ह। रचना म कुछ भी करने से यह नह बदल
सकता।
m .
o m l a se
m .cयही असली कारण क्य है: दस प्रयास म असफल होना केवल यह बताताagहै क काय क ठन है। कोण-योग का
l a se
ag
गुण बताता है क काय असंभव है — कोई भी प्रयास, कतना भी सावधानीपूवक, कभी सफल नह हो सकता।
प्रयोग से बने अनुमान और प्रमाण म यही अंतर है।
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s e m
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g l as
a

co m
m .
m as e
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 एक चतुभुज SOME पर वचार क जए। एक वकण SM ख चए। हम दो त्रभुज ∆SEM और ∆SOM प्राप्त होते
ह। सभी छ: कोण का योग करने पर हम क्या प्राप्त होता है?

हम 360° प्राप्त होता है, और वे छह कोण ठ क चतुभुज के चार कोण म पुनव्यव त हो जाते ह।

∆SEM में: ∠1 + ∠2 + ∠3 = 180°

∆SOM में: ∠4 + ∠5 + ∠6 = 180°

जोड़ ने पर: ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 = 180° + 180° = 360°

पुन व्यविस्थत करने पर: (∠1 + ∠4) + (∠3 + ∠6) + ∠2 + ∠5 = 360°

यहाँ ∠1 + ∠4 चतुभुज का S पर पूरा कोण है, ∠3 + ∠6 M पर पूरा कोण है, तथा ∠2 व ∠5 क्रमश: E व O के पूरे कोण ह।
अत: —
कसी भी चतुभुज के सभी कोण का योगफल 360° होता है।

E

2 M
3
6

1
4
S 5

O
िवकण SM चतुभज
ु को दो ि भुजों मे ं बाँटता है
एक वकण कसी भी चतुभुज को दो त्रभुज म बदल दे ता है, अत: उसके कोण का योग 180° + 180° = 360° होता है।

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वकण का भीतर होना क्य आवश्यक है: इस पुनव्यव ा के लए वकण आकृ त के भीतर होना चा हए, तभी
∠1 तथा ∠4 वास्तव म S के कोण के दो भाग ह गे। अवतल चतुभुज म दो म से एक वकण बाहर पड़ जाता है —
परंतु दूसरा भीतर ही रहता है, अत: प रणाम बना रहता है (अं तम 'आइए, पता लगाएँ' का प्रश्न 10 दे खए)।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 95–99
4.3 समांतर सम्मुख भुजाओं वाले और चतुभुज

प्र.1 क्या ऐसे चतुभुज ह जनम सम्मुख भुजाएँ समांतर ह परंतु वह आयत नह ह?

हाँ, अनेक ह। समांतर रेखाओं के ऐसे दो युग्म ख चए जो समकोण पर न मल — उनसे कटने वाले चतुभुज क सम्मुख भुजाओं के
दोन युग्म समांतर ह गे, पर कोई भी कोण 90° का नह होगा।
ऐसे चतुभुज को समांतर चतुभुज कहा जाता है।

समातं र चतुभजु : वह चत भु जु िजसकी सम्मुख भुजाएँ समातं र हों।

आयत ही सब कुछ क्य नह : समांतर होना केवल दशा क बात है। समांतर रेखाओं के दो प रवार कसी भी कोण
पर मल सकते ह; 90° तो अनंत संभावनाओं म से एक ही चुनाव है। शेष प्रत्येक चुनाव ऐसा समांतर चतुभुज दे ता है
जो आयत नह है।

संकेत: अत: समांतर चतुभुज का समूह आयत के समूह से बड़ा है। वेन आरेख म आयत का अंडाकार पूरी तरह
समांतर चतुभुज के अंडाकार के भीतर बैठता है।

प्र.2 मापक और सेट-स्क्वेयर अथवा परकार (क ास) तथा मापक का उपयोग करके समांतर रेखाओं क रचना कैसे
क जाती है? पूव तथ्य को स्मरण करते हुए ऐसी एक आकृ त क रचना क जए।

मापक तथा सेट-स्क्वेयर से।

1. एक रेखा l ख चए। सेट-स्क्वेयर को मापक के सहारे सरकाकर l के समांतर दूसरी रेखा m ख चए।
2. दोन को काटती हुई तीसरी रेखा p ख चए, कोण 90° के अ त रक्त कोई भी हो।
3. सेट-स्क्वेयर को p क दशा म सरकाकर p के समांतर चौथी रेखा q ख चए।
4. चार प्र त े द बदु समांतर चतुभुज के शीष ह।

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परकार तथा मापक से — कोण क प्र त ल प बनाइए। रेखा l तथा उस पर त बदु P से होकर एक तयक रेखा ख चए। l तथा
तयक रेखा के बीच बने कोण क प्र त ल प तयक रेखा पर आगे कसी बदु Q पर बनाइए। नई भुजा l के समांतर होगी, क्य क
संगत कोण समान होने पर रेखाएँ समांतर होती ह।

कोण क प्र त ल प वाली व ध क्य काम करती है: यह संगत कोण वाले गुण का वलोम है। य द कोई तयक
रेखा दो रेखाओं के साथ समान संगत कोण बनाती है तो वे रेखाएँ कभी मल ही नह सकत — अत: वे समांतर ह।
सेट-स्क्वेयर वाली व ध भी यही बात एक ही ग त म करती है: सरकाने से मापक के साथ बना कोण अप रव तत
रहता है।

प्र.3 क्या एक आयत एक समांतर चतुभुज है?

हाँ। आयत क सम्मुख भुजाओं के दोन युग्म समांतर होते ह (पृष्ठ 90 पर सद्ध), और यही समांतर चतुभुज क प रभाषा है।
अ धक स्पष्ट रूप से, आयत एक व शष्ट प्रकार का समांतर चतुभुज है जसके प्रत्येक कोण का माप 90° होता है।

कथन सत्य?

पत्येक आयत एक समात
ं र चतुभज
ु है हाँ

पत्येक समांतर चतुभज
ु एक आयत है नही ं

पत्येक वग एक समांतर चतुभज
ु है हाँ

संकेत: वेन आरेख म यह तीन परस्पर समा हत क्षेत्र के रूप म दखता है — वग, आयत के भीतर; आयत, समांतर
चतुभुज के भीतर। 'भीतर' को 'प्रत्येक ... एक ... है' पढ़ने से पूरा प रवार स्पष्ट रहता है।

प्र.4 एक समांतर चतुभुज क रचना क जए जसक आसन्न भुजाएँ 4 सट मीटर और 5 सट मीटर ह तथा इनके मध्य
का कोण 30° हो। समांतर चतुभुज के शेष कोण के माप क्या ह? बताइए क शेष अन्य भुजाओं क लंबाई क्या
है?

कोण: 30°, 150°, 30°, 150°। भुजाएँ: 4 सेमी, 5 सेमी, 4 सेमी, 5 सेमी।
रचना। AB = 4 सट मीटर तथा AD = 5 सट मीटर इस प्रकार ख चए क ∠A = 30° हो। D से होकर AB के समांतर तथा B से
होकर AD के समांतर रेखाएँ ख चए; उनका प्र त े द बदु C है।
कोण ( नगमन 6)। AB ∥ CD है और AD तयक रेखा है, अत: ∠A तथा ∠D एक ही ओर के अंत:कोण ह —

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∠A + ∠D = 180° ⇒ ∠D = 180 – 30 = 150°

∠A + ∠B = 180° ⇒ ∠B = 150°

∠C + ∠D = 180° ⇒ ∠C = 30°
जाँच : 30 + 150 + 30 + 150 = 360° ✓

भुजाएँ ( नगमन 7)। ∆ABD तथा ∆CDB क तुलना क जए — एक चाप से च ह्नत कोण समान ह (समांतर चतुभुज के सम्मुख
कोण), दो चाप से च ह्नत कोण समान ह (एकांतर कोण, क्य क AD ∥ BC तथा BD तयक रेखा है), और BD उभय नष्ठ है।

∆ABD ≅ ∆CDB (AAS)

⇒ AD = CB = 5 सेट
ं ीमीटर तथा AB = CD = 4 सेटं ीमीटर

आसन्न कोण का योग 180° क्य होता है: जन दो भुजाओं से आपने आरंभ कया, वे एक ऐसी तयक रेखा से
कटती ह जो दो समांतर भुजाओं को जोड़ती है। तयक रेखा के एक ही ओर के अंत:कोण का योग सदै व सरल कोण
होता है — अत: समांतर चतुभुज का एक कोण जान लेने पर चार ात हो जाते ह।

प्र.5 सम्मुख कोण के वषय म आपका क्या वचार है? क्या वह सभी समांतर चतुभुज म एक समान ह गे? य द हाँ,
तब हम कैसे आश्वस्त हो सकते ह? आइए, हम इनम से एक कोण को x मान लेते ह। बताइए क शेष कोण का
माप कतना होगा?

हाँ — समांतर चतुभुज के सम्मुख कोण सदै व समान होते ह। संख्या के ान पर अक्षर लेने से यह एक ही बार म सभी समांतर
चतुभुज के लए सद्ध हो जाता है।
समांतर चतुभुज PERA (शीष क्रम P, E, A, R) म ∠P = x ली जए।

∠P + ∠R = 180° ⇒ ∠R = 180 – x

∠A + ∠R = 180° ⇒ ∠A = 180 – (180 – x) = 180 – 180 + x = x

अत: ∠P = ∠A = x

इसी पकार ∠R = ∠E = 180 – x

जाँच: x + (180 – x) + x + (180 – x) = 360° ✓

दो बार संपूरक लेने पर वही कोण क्य लौट आता है: ∠A, ∠R का संपूरक है और ∠R, ∠P का। संपूरक दो बार
लेने पर आप वह पहुँच जाते ह जहाँ से चले थे, अत: ∠A को ∠P के बराबर होना ही है। बीजग णत म x का कट
जाना इसी कारण होता है।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
संकेत: इससे गुण 3 मलता है — समांतर चतुभुज म आसन्न कोण का योग 180° होता है और सम्मुख कोण समान

m as e
l
होते ह। अत: एक कोण माप लेना ही चार कोण भरने के लए पयाप्त है।

m .co a g
l a se
a g
प्र.6 नगमन 7 — हम एक समांतर चतुभुज क भुजाओं के वषय म क्या कह सकते ह? क्या हम इसे दशाने के लए

co m
ag
पुन: सवागसमता का उपयोग कर सकते ह? इसके लए कौन-से दो त्रभुज पर वचार कर सकते ह?

m .
as e
a g l
∆ABD तथा ∆CDB ली जए — वकण BD से बने दोन भाग।

co m
e m.
m as
∠A = ∠C (समांत र चत भ
ु ज
ु के सम्मुख कोण, िनगमन 6 से)
c o
. = ∠CBD (एकांतर कोण, क्योंिक AD ∥ BC तथा BD ितयक रेखा हैa) g l
s e
∠ADB m
a glaBD = DB (उभयिनष्ठ भुजा)
⇒ AAS िनयम से ∆ABD ≅ ∆CDB
m a s
⇒ AD = CB तथा AB = CD
m .co agl
l a se
a g
अत: समांतर चतुभुज क सम्मुख भुजाएँ समान होती ह — गुण 1।

co m
m .
e
वकण ही स्वाभा वक उपकरण क्य है: जन भुजाओं क तुलना करनी है वे कसी एक त्रभुज म ह ही नह , जब

c o m g l as
.
तक आप वकण न ख च। वकण ऐसे दो त्रभुज बना दे ता है जनम मलकर चार भुजाएँ आ जाती ह, और समांतर

eरेm a
s
खाएँ तुरंत एकांतर कोण का समान युग्म दे दे ती ह।
a
agl
संकेत: तक का क्रम दे खए — नगमन 6 (कोण) का प्रयोग नगमन 7 (भुजाएँ) के भीतर होता है। एक बार कोई
se m
com g l a
.
गुण सद्ध हो जाए तो वह अगले प्रमाण का उपकरण बन जाता है।
m a
ase
agl
≅ ∆CBD लखना त्रु टपूण है? य द हाँ, तो ऐसा क्य ?
co m
प्र.7 क्या ∆ABD

m .
m ase
.co
a g l
a s emहाँ, यह त्रु टपूण है। शीष संगत क्रम म नह ह।
agl सही कथन ∆ABD ≅ ∆CDB है, जो A↔C, B↔D, D↔B दशाता है। इसके ान पर ∆ABD ≅ ∆CBD लखने का अथ होगा
.c
A↔C, B↔B, D↔D, अथात —
s e m
m a
e m . co agl
AB = CB तथा ∠ABD = ∠CBD
g l as
a

co m
m .
m as e
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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

सामान्य समांतर चतुभुज म इनम से कोई भी सत्य नह है — AB तथा CB भन्न लंबाई क आसन्न भुजाएँ ह, और BD, B पर बने
कोण को सम भा जत नह करता।

क्रम केवल औपचा रकता क्य नह है: सवागसमता का पूरा लाभ उन समान भाग क सूची है जो उससे पढ़
जाती है (CPCT)। य द अक्षर गलत क्रम म ह तो वह सूची असत्य कथन क सूची बन जाती है, और उस पर टका
हर आगामी चरण ढह जाता है।

प्र.8 क्या एक समांतर चतुभुज के वकण सदै व समान होते ह? अपने ारा बनाए गए समांतर चतुभुज के साथ इसक
जाँच क जए।

नह । सामान्य समांतर चतुभुज म दोन वकण भन्न लंबाई के होते ह।
4 सट मीटर व 5 सट मीटर भुजाओं तथा ∠A = 30° वाले समांतर चतुभुज म दोन वकण बहुत भन्न नकलते ह — 150° वाले
कोन को जोड़ने वाला वकण 30° वाले कोन को जोड़ने वाले वकण से कह अ धक लंबा है। अपनी आकृ त म दोन मा पए; जब
तक कोण 90° के न ह , वे कभी समान नह मलगे।

चतुभुज वकण समान?

सामान्य समांतर चतुभज
ु नही ं

समचतुभज
ु नही ं (वग होने पर ही हाँ)

आयत हाँ

वग हाँ

समान वकण का अथ आयत क्य है: नगमन 3 दखा चुका है क समान वकण जो एक-दूसरे को सम भा जत
कर, चार कोण को 90° बना दे ते ह। चूँ क प्रत्येक समांतर चतुभुज के वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ही
ह, केवल 'समान' शत जोड़ने से समांतर चतुभुज आयत बन जाता है। अत: समांतर चतुभुज के वकण ठ क तभी
समान होते ह जब वह आयत हो।

प्र.9 क्या वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ह? क्या वे उनके मध्य बदु पर प्र त े द करते ह? इसे ात करने
के लए तक द जए अथवा प्रयोग क जए।

हाँ — समांतर चतुभुज के वकण सदै व एक-दूसरे को सम भा जत करते ह, भले ही वे समान न ह ।
नगमन 8. समांतर चतुभुज EASY के वकण O पर मलते ह। ∆AOE तथा ∆YOS क तुलना क जए —

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

AE = YS (समात
ं र चत भ
ु ज
ु की सम्मुख भुजाएँ)

∠AEO = ∠YSO (एकांत र कोण, AE ∥ YS)

∠EAO = ∠SYO (एकांत र कोण)

⇒ ASA िनयम से ∆AOE ≅ ∆YOS

⇒ OA = OY तथा OE = OS

अत: O दोन वकण का मध्य बदु है — गुण 4।

वकण समान हुए बना यह क्य काम करता है: इस सवागसमता म केवल भुजाओं का एक समान युग्म तथा
समांतरता से मलने वाले एकांतर कोण प्रयुक्त हुए ह। यह कहती है क O के आर-पार आकृ त के दोन आधे भाग
एक-दूसरे क प्र तकृ त ह, अत: प्रत्येक वकण दो समान भाग म कट जाता है — परंतु एक वकण क दूसरे से
तुलना यह करती ही नह ।

प्र.10 क्या ∆AOE ≅ ∆SOY लखना त्रु टपूण होगा? य द हाँ, तो क्य ?

हाँ। सही कथन ∆AOE ≅ ∆YOS है।

सही: ∆AOE ≅ ∆YOS गलत: ∆AOE ≅ ∆SOY
A ↔ Y, O ↔ O, E ↔ S A ↔ S, O ↔ O, E ↔ Y

दे ता है OA = OY, OE = OS ✓ दे ग ा OA = OS, OE = OY ✗

OA तथा OS भन्न वकण के आधे भाग ह, और उनके समान होने का कोई कारण नह — सामान्य समांतर चतुभुज म वे समान
होते भी नह ।

संकेत: सही क्रम पाने के लए दे खए क एक त्रभुज का कौन-सा शीष दूसरे त्रभुज के कस शीष क भू मका नभा
रहा है। A, भुजा EO के सम्मुख है; भुजा SO के सम्मुख शीष Y है, अत: A का युग्म Y ही होगा।

प्र.11 क्या एक समांतर चतुभुज के वकण एक वशेष कोण पर प्र त े द करते ह?

नह — उनके बीच का कोण कुछ भी हो सकता है, और समांतर चतुभुज का आकार बदलने पर वह भी बदलता है।

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चतुभुज वकण के बीच का कोण

सामान्य समांतर चतुभज
ु कोई भी मान; िनिश्चत नही ं

आयत कोई भी मान (यहाँ भी िनिश्चत नही)ं

समचतुभज
ु सदै व 90°

वग सदै व 90°

लंबवत होना समान भुजाओं से मलता है, समांतरता से नह । खंड 4.4 इसी प्रश्न का उत्तर दे ता है, और नगमन 10 इसका नपटारा
करता है — समचतुभुज के वकण 90° पर प्र त े द करते ह।

भुजाएँ इस कोण को क्य नयं त्रत करती ह: य द चार भुजाएँ समान ह तो प्रत्येक शीष अपने दोन पड़ोसी शीष
से समान दूरी पर होता है, अत: प्रत्येक शीष कसी वकण के लंब सम भाजक पर पड़ता है। इससे वकण लंबवत
होने को बाध्य हो जाते ह। भुजाएँ असमान होते ही शीष उन लंब सम भाजक से हट जाते ह और कोण फर स्वतंत्र
हो जाता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 99–102
4.4 समान लंबाई क भुजाओं वाले चतुभुज

प्र.1 क्या वग एकमात्र ऐसा चतुभुज है जसक भुजाएँ समान लंबाई क होती ह? आइए, इस प्रश्न का उत्तर रचना के
माध्यम से ात कर।

नह । वग तो एक बहुत बड़े प रवार — समचतुभुज — का एक सदस्य मात्र है।
समान लंबाई क AD तथा AB ऐसी ख चए क उनके बीच का कोण 90° के अ त रक्त कुछ हो, जैसे 50°। शेष आकृ त इस प्रकार
पूरी क जए क चार भुजाएँ समान ह — आपको चार समान भुजाओं वाला ऐसा चतुभुज मलेगा जसके कोण 50°, 130°, 50°,
130° ह। यह न त ही वग नह है।

समचतुभजु : वह चत भु जु िजसकी सभी भुजाएँ समान लंबाई की हों।

50° के ान पर 180° से कम कोई भी कोण लया जा सकता है, अत: प्रत्येक भुजा-लंबाई के लए अन गनत समचतुभुज ह; उनम
से केवल 90° वाला ही वग है।

चार समान भुजाएँ आकार क्य नह बाँधत : समान छड़ से बनी चार-भुजा वाली संरचना दृढ़ नह होती — आप
उसे बना कसी भुजा क लंबाई बदले झुका सकते ह। तीन छड़ से बना त्रभुज ऐसे नह झुकता, इसी लए त्रभुज
के लए SSS एक सवागसमता नयम है, पर चतुभुज के लए कोई 'SSSS' नयम नह होता।

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प्र.2 क्या हम दए गए चत्र से पूण चतुभुज बना सकते ह जससे क इसक सभी भुजाएँ समान लंबाई क ह ? एक
बदु C च ह्नत क जए जसक B और D से दूरी AB (या AD) के समान हो।

D

50°
A B

पृष्ठ 99 — 50° के कोण के साथ ख ची गई दो समान भुजाएँ AD और AB। AD पर लगा चह्न बदु D को दशाता है,
जसक A से दूरी B के बराबर है।

हाँ, और परकार एक ही चरण म चौथा शीष ढूँ ढ़ दे ता है।

1. परकार को AB क लंबाई तक खो लए।
2. इसी को त्रज्या मानकर B से एक चाप तथा D से दूसरा चाप ख चए।
3. दोन चाप C पर मलते ह। BC तथा DC मला द जए।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
AB = AD (समान खी ंची गईं)
m l as
.co
BC = AB (B से खी ंचे चाप की ि ज्या)
m a g
l a se
g
DC = AB (D से खी ंचे चाप की ि ज्या)
a⇒ AB = BC = CD = DA — एक समचतभु जु

com
m . ag
l a se
चाप अवश्य क्य मलते ह: B कद्र वाले चाप का प्रत्येक बदु B से AB दूरी पर है, और D कद्र वाले चाप का प्रत्येक
g वह एकमात्र
बदु D से AB दूरी पर। उनका कटान बदुaही ान है जो दोन से सही दूरी पर हो — अत: BD क उस
ओर C क यही एकमात्र संभव त है।

co m
e m.
m l as
.co a g
संकेत: यही रचना 90° के प्रारं भक कोण के साथ करने पर वग मलता है, अत: वग वास्तव म एक वशेष कोण

se m
वाला समचतुभुज ही है।

g l a
a
m a s
.co
हमने जो समचतुभुज ABCD बनाया है उसके अन्य कोण का माप ात क जए? यह ात करने के लए तक
m agl
se
प्र.3

l a
द जए या प्रयोग क जए।

a g

co m
50°, 130°, 50° तथा 130°।
m .
o m l a se
नगमन 9 पहले यह दखाता है क कसी भी समचतुभुज म एक वकण जन दो कोण से मलता है उन्ह चार समान भाग म बाँट
दे ता है।.इसे a g a बनाता है।
c ABCD पर लागू क जए, जहाँ ∠A = 50° है और वकण BD चार समान कोण
se m
g l a
a
m
∆ADB में: a + a + 50 = 180

a se
2a = 130 ⇒ a = 65°
. com a g l
m
ase
agl
∠B = ∠D = a + a = 65 + 65 = 130°

co m
.
∠C = ∠A = 50°

e m
m l as
.co
जाँच : 50 + 130 + 50 + 130 = 360° ✓
a g
a s emएक दूसरा, शीघ्र माग भी है। प्रत्येक समचतुभुज एक समांतर चतुभुज है, अत: आसन्न कोण संपूरक होते ह —
agl
.c
s e m
m a
. co agl
∠A = ∠C = 50° तथा ∠D = ∠B = 180 – 50 = 130°

e m
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 34 of 68

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

दोन माग एक ही उत्तर क्य दे ते ह: दे ने ही चा हए — समचतुभुज एक समांतर चतुभुज है (उसक सम्मुख भुजाएँ
समांतर ह, जैसा नगमन 9 के समान एकांतर कोण दशाते ह), अत: समांतर चतुभुज के नयम लागू होते ह। दो स्वतंत्र
तक से एक ही उत्तर मलना दोन क जाँच है।

प्र.4 ∆GAE ≅ ∆MAE यह कैसे ात कया जा सकता है?

वकण AE को उभय नष्ठ भुजा मानकर SSS नयम से।

GA = MA (समचत भ
ु ज
ु GAME की सभी भुजाएँ समान है)ं

GE = ME (इसी कारण)

AE = AE (उभयिनष्ठ भुजा)

⇒ SSS िनयम से ∆GAE ≅ ∆MAE
इस सवागसमता से ∠G = ∠M मलता है तथा A का कोण उसी प्रकार बँटता है जैसे E का। साथ ही दोन सम बाहु त्रभुज GAE
तथा MAE से —

GE = GA ⇒ a = d ME = MA ⇒ b = c

सव गं समता ⇒ a = b तथा c = d

⇒a=b=c=d

इससे गुण 5 कैसे मलता है: a = b का अथ है क वकण AE, A पर बने कोण को दो समान भाग म बाँटता है,
और c = d वही बात E पर कहता है। 'समचतुभुज के वकण उसके कोण को सम भा जत करते ह' का यही अथ
है। इसी से EM ∥ GA तथा GE ∥ AM भी मलता है, क्य क ये समान भाग एकांतर कोण ह — अत: प्रत्येक
समचतुभुज एक समांतर चतुभुज है।

प्र.5 इस प्रकार एक समचतुभुज एक समांतर चतुभुज होता है एवं एक आयत भी एक समांतर चतुभुज होता है। इसे
एक वेन आरेख का प्रयोग करके कैसे दशाया जा सकता है? इस आरेख म वग का समूह कहाँ होगा?

समांतर चतुभुज के लए एक बड़ा अंडाकार बनाइए। उसके भीतर दो अ तव्यापी अंडाकार — आयत तथा समचतुभुज। वग ठ क
उनके उभय नष्ठ भाग म आते ह।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

समात
ं र चतुभज
ु

आयत समचतुभज
ु

वग

वग ठ क वही चतुभुज है जो आयत भी है और समचतुभुज भी।

क्षेत्र वहाँ क्या है

के वल आयत सभी कोण 90°, पर सभी भुजाएँ समान नही ं

के वल समचतुभज
ु सभी भुजाएँ समान, पर कोण 90° नही ं

उभयिनष्ठ भाग वग — सभी कोण 90° तथा सभी भुजाएँ समान

दोनों से बाहर, बड़े अंडाकार के भीतर सामान्य झक
ु ा हुआ समांतर चतुभज
ु

वग उभय नष्ठ भाग म ही क्य : वग एक आयत है (सभी कोण 90°) और समचतुभुज भी (सभी भुजाएँ समान)।
इसके वपरीत, उभय नष्ठ भाग क प्रत्येक आकृ त के सभी कोण 90° तथा सभी भुजाएँ समान ह गी, जो क वग क
प रभाषा ही है। अत: वह भाग केवल वह जगह नह जहाँ वग पड़ जाते ह — वह भाग वग का समूह है।

प्र.6 क्या एक समचतुभुज के वकण समान लंबाई के होते ह?

नह , सामान्यत: नह । वे तभी समान होते ह जब समचतुभुज संयोगवश वग हो।
50° तथा 130° कोण वाले समचतुभुज म 130° वाले दोन कोन को जोड़ने वाला वकण 50° वाले कोन को जोड़ने वाले वकण
से बहुत छोटा है। समचतुभुज को और चपटा क जए तो एक वकण बढ़ता है और दूसरा घटता है, जब क चार भुजाएँ वही रहती ह।

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िवकण समान + एक-दू सरे को समि भािजत ⇒ सभी कोण 90° (िनगमन 3)

सभी कोण 90° वाला समचत भ ु = वग
ु ज

भुजाएँ वकण को नयं त्रत क्य नह कर पात : समचतुभुज एक लचीली संरचना है। चार छड़ भुजाएँ तो बाँध
दे ती ह पर एक स्वतंत्रता — कोण — शेष रह जाती है, और उस कोण के बदलने पर दोन वकण वपरीत दशाओं म
चलते ह। केवल 90° पर ही वे बराबर होते ह।

संकेत: समचतुभुज के पास जो गुण ह वे ह — गुण 4 ( वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ह), गुण 5 (कोण
को सम भा जत करते ह) तथा गुण 6 (90° पर मलते ह)। 'समान लंबाई' इस सूची म नह है।

प्र.7 क्या एक समचतुभुज के वकण कसी वशेष कोण पर प्र त े द करते ह? समचतुभुज GAME म हम ∆GEO ≅
∆MEO क्य प्राप्त होता है?

हाँ — सदै व 90° पर।
∆GEO ≅ ∆MEO क्य : वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ह (प्रत्येक समचतुभुज एक समांतर चतुभुज है), अत: O, GM
का मध्य बदु है।

GE = ME (समचत भ
ु ज
ु की भुजाएँ)

GO = MO (O, GM का मध्यिबंद ु है)

EO = EO (उभयिनष्ठ भुजा)

⇒ SSS िनयम से ∆GEO ≅ ∆MEO

नगमन 10. सवागसमता से ∠GOE = ∠MOE। ये दोन कोण सरल रेखा GM पर ह, अत: रै खक युग्म बनाते ह —

∠GOE + ∠MOE = 180°

2 × ∠GOE = 180° ⇒ ∠GOE = 90°

यही गुण 6 — समचतुभुज के वकण एक-दूसरे को 90° के कोण पर प्र त े द करते ह।

ऐसा क्य होता है: E, G तथा M से समान दूरी पर है, और O भी। जो दो बदु G तथा M दोन से समान दूरी पर ह
वे GM का लंब सम भाजक नधा रत करते ह — और EO वही रेखा है। लंब सम भाजक का अथ ही है
'मध्य बदु से होकर, समकोण पर'।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 102
4.4 समान लंबाई क भुजाओं वाले चतुभुज

प्र.1 नम्न ल खत चतुभुज के शेष कोण का माप ात क जए।

(i) समांतर चतुभुज PERA — शीष P (नीचे-बाएँ), E (नीचे-दाएँ), A (ऊपर-दाएँ), R (ऊपर-बाएँ); PE ∥ RA तथा PR ∥ EA;
∠P = 40°।

∠A = ∠P = 40° (समांत र चत भ
ु ज
ु के सम्मुख कोण)

∠E = 180 – 40 = 140° (आसन्न कोण संपूरक होते है)ं

∠R = ∠E = 140°

जाँच : 40 + 140 + 40 + 140 = 360° ✓

(ii) समांतर चतुभुज PQRS — P (नीचे-बाएँ), Q (नीचे-दाएँ), R (ऊपर-दाएँ), S (ऊपर-बाएँ); SR ∥ PQ तथा SP ∥ RQ; ∠P =
110°।

∠R = ∠P = 110° (सम्मुख कोण)

∠Q = 180 – 110 = 70° तथा ∠S = 70°

जाँच : 110 + 70 + 110 + 70 = 360° ✓

(iii) समचतुभुज XWVU — चार भुजाओं पर एक-एक चह्न है, वकण XV खचा है तथा ∠XVW = 30° है।

समचत भ
ु ज
ु का िवकण उसके कोणों को समि भािजत करता है, अत:

∠XVU = ∠XVW = 30° ⇒ ∠UVW = 30 + 30 = 60°

∠X = ∠UVW = 60° (सम्मुख कोण), िजसे XV 30° + 30° में बाँट ता है

∠U = 180 – 60 = 120° तथा ∠W = ∠U = 120°

जाँच : 60 + 120 + 60 + 120 = 360° ✓

(iv) समचतुभुज OIEA — चार भुजाओं पर चह्न, वकण OE खचा है तथा ∠OEI = 20° है।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
∠OEA = ∠OEI = 20° (िवकण ∠E को समि भािजत करता है)
m l as
.co
∠AOE = ∠EOI = 20° (वह ∠O को भी समि भािजत करता है, और ∠O = ∠E)
m a g
l a se
g
∠E = ∠AEI = 20 + 20 = 40° तथा ∠O = 40°
a∠A = ∠I = 180 – 40 = 140°

co m
. ag
जाँच : 40 + 140 + 40 + 140 = 360° ✓
e m
g l as
a
हर बार एक ही कोण पयाप्त क्य है: समांतर चतुभुज म सम्मुख कोण समान होते ह और आसन्न कोण का योग
180°, अत: एक कोण चार को नधा रत कर दे ता है। समचतुभुज म इससे भी अ धक मलता है — वकण जन दो
co m
e m.
कोण से मलता है उन्ह आधा-आधा बाँटता है, अत: (iii) के 30° जैसा अध-कोण भी पूरी आकृ त नधा रत कर दे ता
m l as
.co g
है।

m a
l a se
a g
s
वकण के गुण को आधार बनाते हुए एक समांतर चतुभुज क रचना क जए जसके वकण क लंबाई 7
m a
प्र.2

.co agl
सट मीटर तथा 5 सट मीटर हो। इसके साथ ही ये वकण 140° के कोण पर प्र त े द भी करते ह ।

se m
g l a
a
समांतर चतुभुज को प रभा षत करने वाला वकण-गुण एक ही है — वकण एक-दूसरे को सम भा जत करते ह। अत: दोन

co m
.
लंबाइय को आधा क जए और प्र त े द बदु से बाहर क ओर रचना क जए।

se m
o m l a
1. AB = 7 सट मीटर ख चए और उसका मध्य बदु O अं कत क जए, अत: OA = OB = 3.5 सट मीटर।
c OB के साथ 140° का कोण बनाती करण ख चए।
2. O .पर g
m a
a s3.e उस करण पर C इस प्रकार ली जए क OC = 2.5 सट मीटर; वपरीत करण पर D ली जए, OD = 2.5 सट मीटर। तब CD
agl = 5 सट मीटर और O उसका मध्य बदु है।

se m
com a
4. AC, CB, BD तथा DA मलाइए।

. a g l
m
ase
ACBD अपे क्षत समांतर चतुभुज है।

a gl
िवकण AB = 7 सेमी तथा CD = 5 सेमी, असमान ⇒ आयत नही ं

co m
O पर कोण = 140° ≠ 90° ⇒ समचत भ ु नही ं
ु ज
m .
m as e
.co
िवकण एक-दू सरे को समि भािजत करते है ं ⇒ यथाथ समांत र चत भ
ु ज
ु
a g l
se m
g l a
a c
.
केवल सम भाजन ही क्य पयाप्त है: य द OA = OB तथा OC = OD हो, तो O पर शीषा भमुख कोण के

s e m
a
कारण SAS से ∆AOC ≅ ∆BOD। अत: AC = BD, और समान एकांतर कोण से AC ∥ BD। दूसरे युग्म पर यही
m
. co
तक AD ∥ CB दे ता है — सम्मुख भुजाओं के दोन युग्म समांतर, जो प रभाषा ही है।
e m agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 39 of 68

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 वकण के गुण का प्रयोग करके एक समचतुभुज क रचना क जए जसके वकण क लंबाई 4 सट मीटर और 5
सट मीटर हो।

समचतुभुज के वकण को एक-दूसरे को समकोण पर सम भा जत करना चा हए — और इसके लए चाँदे क आवश्यकता नह ,
क्य क लंब सम भाजक परकार से बनाया जा सकता है।

1. AB = 5 सट मीटर ख चए।
2. परकार से AB का लंब सम भाजक बनाइए; वह AB को O पर काटता है, अत: OA = OB = 2.5 सट मीटर।
3. उस लंब पर C तथा D इस प्रकार अं कत क जए क OC = OD = 2 सट मीटर (अत: CD = 4 सट मीटर)।
4. AD, DB, BC तथा CA मलाइए।

ADBC अपे क्षत समचतुभुज है।

पत्येक भुजा = √(2.5² + 2²) = √(6.25 + 4) = √10.25 ≈ 3.2 सेट
ं ीमीटर
चारों भुजाएँ समान है ं क्योंिक O पर बने चारों ि भुज 2.5 सेमी व 2 सेमी भुजाओं वाले सव गं सम समकोण ि भुज

है।
ं

लंबवत सम भाजन भुजाओं को समान क्य बना दे ता है: AOC, COB, BOD तथा DOA — चार त्रभुज
क भुजाएँ 2.5 सेमी व 2 सेमी ह और उनके बीच समकोण है, अत: वे SAS से सवागसम ह। अत: उनके कण — जो
चतुभुज क चार भुजाएँ ह — समान होने ही चा हए।

स्वयं जाँ चए: चार भुजाएँ मा पए; प्रत्येक 3.2 सट मीटर से कुछ अ धक मलेगी। O पर कोण मा पए; वह ठ क
90° दखाएगा।

जयोबोड ग त व ध — पृष्ठ 103
4.5 चतुभुज के साथ खेल — जयोबोड ग त व ध

प्र.1 वकण बनाने के लए समान लंबाई के दो रबड़ बड को एक-दूसरे पर लंबवत रूप म व्यव त क जए। इसके
साथ सर को जो ड़ए। आपको जो चतुभुज प्राप्त हुआ वह कस प्रकार का है? अपने उत्तर क पु ष्ट क जए।

आपको एक वग प्राप्त होता है।
जयोबोड पर दोन बड क ल के बीच इस प्रकार तने होते ह क वे बीच वाली क ल पर कटते ह — अथात प्रत्येक बड दूसरे ारा
आधा-आधा बँट जाता है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

िवकण समान ✓ + एक-दू सरे को समि भािजत ✓ ⇒ चारों कोण 90° (िनगमन 3)

िवकण 90° पर िमलते है ं ✓ ⇒ चारों भुजाएँ समान (िनगमन 5)

⇒ वग

चार भुजाएँ समान क्य नकलती ह: कद्र पर बने चार छोटे त्रभुज क दोन भुजाएँ समान लंबाई (बड का आधा
भाग) क ह और उनके बीच समकोण है। अत: वे SAS से सवागसम ह, और उनके कण — जो आकृ त क चार
भुजाएँ ह — समान होने ही चा हए।

स्वयं जाँ चए: य द प्रत्येक बड 6 इकाई लंबा हो, तो प्रत्येक आधा भाग 3 इकाई का है और वग क प्रत्येक भुजा
√(3² + 3²) = 3√2 ≈ 4.24 इकाई होगी।

प्र.2 दोन म से कसी एक वकण को दोन ओर 2 सट मीटर तक वस्ता रत क जए। अब आपको जो चतुभुज प्राप्त
हुआ वह कस प्रकार का होगा? अपने उत्तर के औ चत्य को सद्ध क जए।

अब आपको समचतुभुज मलता है — वग नह , परंतु चार भुजाएँ अब भी समान।
एक बड को दोन सर पर 2-2 सट मीटर बढ़ाने से उसका मध्य बदु ठ क वह रहता है। अत: दो बात अप रव तत रहती ह और एक
बदल जाती है —

शत पहले वस्ता रत करने के बाद

िवकण एक-दू स रे को समि भािजत करते है ं हाँ हाँ — म ध् यिबंद ु िहला ही नही ं

िवकण लंबवत है ं हाँ हाँ — िदशाएँ नही ं बदली ं

िवकण समान है ं हाँ नही ं — एक अब 4 से ंटीमीटर लंबा है

जो वकण एक-दूसरे को समकोण पर सम भा जत कर वे समचतुभुज दे ते ह; 'समान' वाली शत, जो समचतुभुज को वग बनाती है,
अब छू ट गई है।

भुजाएँ समान क्य बनी रहती ह: आधी लंबाइय को p तथा q क हए। कद्र पर बने चार त्रभुज p तथा q भुजाओं
वाले समकोण त्रभुज ह, अत: चतुभुज क प्रत्येक भुजा √(p² + q²) है। p बढ़ाने से यह उभय नष्ठ मान बदल जाता
है, पर चार भुजाएँ फर भी एक-दूसरे के बराबर रहती ह।

संकेत: यह उसी तथ्य का जयोबोड रूप है क वग समान वकण वाला समचतुभुज है। एक वकण ख च द जए
और वग ढ ला होकर झुके हुए समचतुभुज म बदल जाता है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

त्रभुज को जोड़ना — पृष्ठ 104–105
4.5 चतुभुज के साथ खेल — त्रभुज को जोड़ना

प्र.1 8 सट मीटर भुजा वाले समबाहु त्रभुज के काड बोड के दो कटआउट ली जए। क्या आप उपयुक्त काडबोड
कटआउट को जोड़कर एक चतुभुज बना सकते हो?

हाँ। दोन कटआउट इस प्रकार र खए क पहले क एक भुजा दूसरे क एक भुजा पर ठ क बैठ जाए और दोन त्रभुज उस उभय नष्ठ
कनारे के वपरीत ओर ह ।
प्रत्येक भुजा 8 सट मीटर क है, अत: एक क कोई भी भुजा दूसरे क कसी भी भुजा से मेल खा जाती है। उभय नष्ठ कनारा भीतर
छप जाता है और वकण बन जाता है, तथा शेष चार कनारे — प्रत्येक 8 सट मीटर का — चतुभुज क भुजाएँ बन जाते ह।

2 ि भुज × 3 भुजाएँ = 6 िकनारे

2 िकनारे जोड़ में लग जाते है ं ⇒ 6 – 2 = 4 भुजाएँ ✓

पूरे कनारे पर ही क्य जोड़ना चा हए: य द आप एक त्रभुज को सरका द क कनारे का केवल एक भाग स्पश
करे, तो बाहरी रूपरेखा म अ त रक्त कोने बन जाएँगे और आकृ त चार भुजाओं वाली नह रहेगी। कनारे सरे से सरे
तक मलने चा हए, इसी लए भुजाओं का समान होना महत्त्वपूण है।

प्र.2 उपयुक्त चतुभुज कस प्रकार का है? अपने उत्तर का सत्यापन क जए।

यह 8 सट मीटर भुजा तथा 60°, 120°, 60°, 120° कोण वाला समचतुभुज है।

ं ीमीटर ⇒ समचतुभ ज
चारों बाहरी िकनारे समबाहु ि भुजों की भुजाएँ है ं ⇒ सभी 8 सेट ु

कोण: उभयिनष्ठ िकनारे के दोनों िसरों पर दो 60° के कोण िमलते है:ं

60° + 60° = 120°

शेष दो शीष ं पर के वल एक ि भुज का कोण है: 60°

जाँच : 60 + 120 + 60 + 120 = 360° ✓

यह वग नह है, क्य क 60° ≠ 90°।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

यह और कुछ हो ही क्य नह सकता: चार समान भुजाएँ होना ही समचतुभुज क प रभाषा है। जो वकण पहले
जोड़ था वह 8 सट मीटर का है — भुजा के बराबर — अत: वह दो समबाहु त्रभुज बनाता है, और यही कोण को
60° तथा 120° पर बाँध दे ता है।

प्र.3 8 सट मीटर, और 6 सट मीटर भुजाओं वाले सम बाहु त्रभुज के काडबोड के दो कटआउट ली जए। उपयुक्त को
एक साथ जोड़कर एक चतुभुज बनाने के व भन्न प्रकार क्या ह?

जोड़ समान लंबाई के कनार के कसी भी युग्म पर संभव है, और प्रत्येक युग्म के लए दूसरा त्रभुज पलटा भी जा सकता है या
घुमाया भी। इससे तीन वास्त वक रूप से भन्न चतुभुज बनते ह।

जोड़ कस कनारे पर दूसरा टु कड़ा कैसे रखा प्राप्त भुजाएँ चतुभुज

6 से ंटीमीटर वाले िकनारे पर दपण पितिबंब (या आधा घुम ाव — यहाँ दोनों एक ही आकृ ित दे ते है)ं 8, 8, 8, 8 समचतुभज
ु

8 से ंटीमीटर वाले िकनारे पर िकनारे के मध्यिबंद ु के पिरत: आधा घुम ाव 8, 6, 8, 6 समांतर चतुभज
ु

8 से ंटीमीटर वाले िकनारे पर िकनारे के आर-पार दपण पितिबंब 8, 6, 6, 8 पतंग

पुस्तक इनम से पहले दो दशाती है।

6 सट मीटर वाले कनारे पर दपण और घुमाव एक ही क्य दे ते ह: त्रभुज सम बाहु है और 6 सट मीटर वाली
भुजा उसका आधार है, अत: वह उस आधार के लंब सम भाजक के प रत: पहले से ही सम मत है। पलटने से
बाहरी रूपरेखा म कोई अंतर नह आता। 8 सट मीटर वाले कनारे पर ऐसी सम म त नह है, इस लए दोन व्यव ाएँ
भन्न आकृ तयाँ दे ती ह।

प्र.4 ऊपर दशाए गए दोन चतुभुज कस प्रकार के चतुभुज ह? अपने उत्तर का सत्यापन क जए।

पहली आकृ त — 6 सट मीटर वाले कनारे पर जोड़ने से: 8 सट मीटर भुजा वाला समचतुभुज।

ं ीमीटर वाली भुजाएँ है ं ⇒ चार समान भुजाएँ ⇒ समचतुभ ज
चारों बाहरी िकनारे 8 सेट ु
6 सेट
ं ीमीटर वाला जोड़ िवकण बन जाता है और िजन दो कोणों से िमलता है उन्हे ं समि भािजत करता है

(दोनों आधे ि भुज समि बाहु है,ं अत: िवकण समिमित रेखा है)

दूसरी आकृ त — 8 सट मीटर वाले कनारे पर, एक त्रभुज को आधा घुमाकर जोड़ने से: 8 सट मीटर तथा 6 सट मीटर
भुजाओं वाला समांतर चतुभुज।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
em.
ऊपरी तथा िनचला िकनारा: 6-6 सेट
ं ीमीटर बाएँ तथा दाएँ िकनारे: 8-8 सेट
ं ीमीटर
m l as
.co
सम्मुख भुजाएँ समान ⇒ समांत र चतुभ ज
g
ु (अगले 'आइए, पता लगाएँ' का पश्न 9 इसे िसद्ध करता है)
a
a s em
gl सीधे — उभय नष्ठ 8 सट मीटर कनारे के मध्य बदु के प रत: आधा घुमाव प्रत्येक भुजा को उसक समांतर प्र तकृ त म बदल
अaधक
दे ता है जो वपरीत दशा म है, अत: सम्मुख भुजाएँ समांतर हो जाती ह। यही समांतर चतुभुज क प रभाषा है।

. com ag
आधा घुमाव सदै व समांतर चतुभुज क्य दे ता हैe: m
a s कसी त्रभुज को उसक एक भुजा के मध्य बदु के प रत: 180°

a सटl मीटर वाली भुजा का प्र त बब मूल 6 सट मीटर वाली भुजा के समांतर
घुमाने पर हर दशा उलट जाती है। अत: 6 g
बनता है, और तीसरी भुजा का प्र त बब उस तीसरी भुजा के समांतर — सम्मुख भुजाओं के दोन युग्म समांतर

co m
m.
नकल आते ह।

m as e
.co a g l
a s em6 सट मीटर, 9 सट मीटर और 12 सट मीटर भुजाओं वाले एक वषमबाहु त्रभुज के काडबोड के दो कटआउट
a gl प्र.5
ली जए। इन्ह एक साथ जोड़कर एक चतुभुज बनाने के व भन्न प्रकार क्या ह गे?

m a s
m .co agl
se

g l a
तीन भुजाएँ भन्न ह, अत: जोड़ केवल मेल खाते कनार पर ही संभव है — 6 के साथ 6, 9 के साथ 9, अथवा 12 के साथ 12।
प्रत्येक कनारे के लए दो व्यव a
ाएँ ह (आधा घुमाव अथवा दपण प्र त बब), अत: कुल छह प्रकार ह।

co m
जोड़ कस कनारे पर आधा घुमाव दे ता है
m .
दपण प्र त बब दे ता है

m as e
.co a g l
e9m
6 से ंटीमीटर 9, 12, 9, 12 9, 12, 12, 9

a s
agl से ंटीमीटर 6, 12, 6, 12 6, 12, 12, 6

se m
a
12 से ंटीमीटर

com
6, 9, 6, 9 6, 9, 9, 6

. a g l
m
ase
agानl पर अवतल चतुभुज मलता है। टुकड़े काटकर छह को स्वयं आजमाइए।
संकेत: दपण वाले जोड़ म सावधानी चा हए। सबसे लंबी भुजा पर प्र त बब बनाने से प्र त ब बत शीष भीतर क ओर
धँस सकता है — तब उत्तल के

co m
m .
o m l a sकरe सकते ह? चतुभुज क पहचान
.c ag
क्या आप त्रभुज को जोड़कर प्राप्त होने वाले व भन्न चतुभुज क पहचान

em
प्र.6

l a s करने के प ात आप अपने उत्तर का सत्यापन क जए।

ag c
m .
s e

दो स्पष्ट प रवार बनते ह।
. com a gla
तीन आधे-घुमाव वाले जोड़ समांतर चतुeभm
a s
aglजोड़ीदार के समांतर हो जाती है —
ुज दे ते ह। उभय नष्ठ कनारे के मध्य बदु के प रत: आधा घुमाव सभी दशाएँ उलट
दे ता है, अत: प्रत्येक शेष भुजा अपनी

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 44 of 68

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

ं ीमीटर पर जोड़ ⇒ 9 सेट
6 सेट ं ीमीटर तथा 12 सेटं ीमीटर भुजाओं वाला समातं र चत भु जु
ं ीमीटर पर जोड़ ⇒ 6 सेट
9 सेट ं ीमीटर तथा 12 सेटं ीमीटर भुजाओं वाला समांत र चत भु जु
ं ीमीटर पर जोड़ ⇒ 6 सेट
12 सेट ं ीमीटर तथा 9 सेटं ीमीटर भुजाओं वाला समांत र चत भु जु

तीन दपण वाले जोड़ पतंग दे ते ह (जब रूपरेखा उत्तल बनी रहे), क्य क प्र त बब से आसन्न भुजाओं के दो समान युग्म बन जाते
ह—

12 सेट ं ीमीटर िवकण वाली पतं ग
ं ीमीटर पर जोड़ ⇒ भुजाएँ 6, 9, 9, 6 ⇒ 12 सेट

यही अं तम आकृ त पुस्तक पृष्ठ 105 पर पतंग का प रचय दे ने के लए प्रयोग करती है। इसक आसन्न भुजाएँ युग्म म समान ह —
ऊपर 6 के साथ 6, नीचे 9 के साथ 9।

प्र त बब पतंग और घुमाव समांतर चतुभुज क्य दे ता है: प्र त बब म उभय नष्ठ कनारा सम म त रेखा बना रहता
है, अत: उसके दोन ओर क भुजाएँ दपण-जोड़ी होती ह — आसन्न समान युग्म, अथात पतंग। आधा घुमाव प्रत्येक
भुजा को सम्मुख कोने पर भेज दे ता है, अत: समान युग्म आमने-सामने आ जाते ह — अथात समांतर चतुभुज।

स्वयं जाँ चए: जोड़ने का तरीका कोई भी हो, चार कोण का योग 360° ही होगा, क्य क दोन त्रभुज 180°-180°
दे ते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 105–107
4.6 पतंग और समलंब चतुभुज

प्र.1 गुण 1 — पतंग ABCD म वकण BD — (i) ∠ABC और ∠ADC को सम भा जत करता है। (ii) वकण AC
को सम भा जत करता है अथात AO = OC है। इसके साथ AC पर लंबवत भी है। संकेत — क्या ∆AOB ≅
∆COB?

पतंग ABCD म AB = BC तथा CD = DA है। माना वकण O पर मलते ह।
चरण 1 — वकण BD पतंग को दो सवागसम त्रभुज म बाँटता है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 4 चतुभुज AglaSem · NCERT Solutions

AB = CB (िदया है)

AD = CD (िदया है)

BD = BD (उभयिनष्ठ)
⇒ SSS िनयम से ∆ABD ≅ ∆CBD

⇒ ∠ABD = ∠CBD तथा ∠ADB = ∠CDB

यही भाग (i) है — BD, ∠ABC तथा ∠ADC दोन को सम भा जत करता है।
चरण 2 — अब ∆AOB तथा ∆COB क तुलना क जए।

AB = CB (िदया है)

∠ABO = ∠CBO (अभी िसद्ध िकया)

BO = BO (उभयिनष्ठ)

⇒ SAS िनयम से ∆AOB ≅ ∆COB

⇒ AO = OC तथा ∠AOB = ∠COB

परंत ु ∠AOB + ∠COB = 180° (AC पर रैिखक युग् म)

⇒ ∠AOB = ∠COB = 90°

अत: BD, AC को सम भा जत करता है और उस पर लंबवत भी है — भाग (ii)।

केवल एक ही वकण म ये श क्तयाँ क्य ह: B तथा D दोन A व C से समान दूरी पर ह, अत: दोन AC के लंब
सम भाजक पर त ह — और BD वही लंब सम भाजक है। A तथा C के लए ऐसा कुछ नह है, इसी लए AC
सामान्यत: BD को सम भा जत नह करता।

संकेत: समचतुभुज म आसन्न भुजाओं के दोन युग्म समान होते ह, अत: दोन वकण को ये गुण मल जाते ह।
इसी लए समचतुभुज के वकण एक-दूसरे को सम भा जत भी करते ह, कोण को भी सम भा जत करते ह और
90° पर मलते भी ह।

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प्र.2 एक समलंब चतुभुज क रचना क जए। इसके आधार कोण (आकृ त म अं कत) को भी मा पए। क्या आप शेष
कोण को मापे बना ात कर सकते ह?

P Q

S R

पृष्ठ 106 — समलंब चतुभुज PQRS, जसम PQ ∥ SR है। S और R पर अं कत कोण ही इसके आधार कोण ह।

हाँ। समलंब चतुभुज PQRS म PQ ∥ SR है, अत: प्रत्येक तरछ भुजा दोन समांतर भुजाओं के लए तयक रेखा है और उसके
दोन सर के कोण एक ही ओर के अंत:कोण ह।

गुण 1: ∠S + ∠P = 180° तथा ∠R + ∠Q = 180°

अत: दोन आधार कोण ∠P तथा ∠Q मा पए और फर घटा द जए —

∠S = 180° – ∠P ∠R = 180° – ∠Q

उदाहरण के लए य द ∠P = 70° तथा ∠Q = 55° माप, तो ∠S = 110° तथा ∠R = 125°। जाँच: 70 + 55 + 110 + 125 =
360° ✓

समांतर भुजाओं का केवल एक युग्म ही क्य पयाप्त है: एक ही ओर के अंत:कोण वाला नयम प्रत्येक तरछ
भुजा पर अलग-अलग लागू होता है, और प्रत्येक तरछ भुजा दोन समांतर भुजाओं को छू ती है। असमांतर युग्म कुछ
नया नह दे ता — इसी लए समांतर चतुभुज के वपरीत, समलंब चतुभुज के सम्मुख कोण सामान्यत: समान नह
होते।

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स्वयं जाँ चए: ∠R तथा ∠S क गणना के बाद उन्ह चाँदे से मा पए। एक ड ी के भीतर मेल मलेगा — यह मापन
क त्रु ट है, तक क नह ।

प्र.3 हम सम बाहु समलंब चतुभुज क रचना कस प्रकार करते ह? एक सम बाहु समलंब चतुभुज UVWX क
रचना क जए जसम UV || XW हो। इसके ∠U को मा पए। क्या आप बना मापे शेष कोण का मान ात कर
सकते ह?

रचना।

1. लंबी समांतर भुजा UV ख चए।
2. अपे क्षत ऊँचाई पर UV के समांतर एक रेखा ख चए।
3. उस रेखा पर X तथा W इस प्रकार अं कत क जए क UX = VW हो। सरलतम उपाय यह है क आकृ त को UV के लंब
सम भाजक के प रत: सम मत र खए — X तथा W को दोन सर से समान दूरी पर ली जए।
4. UX तथा VW मलाइए।

बना मापे शेष ात करना। ∠U एक बार मा पए। फर —

∠V = ∠U (समान भुजाओं के सम्मुख कोण — गुण 2)

∠X = 180° – ∠U (भुजा UX पर एक ही ओर के अंत :कोण)

∠W = 180° – ∠V = ∠X

य द ∠U = 72° हो, तो ∠V = 72°, ∠X = ∠W = 108°, और 72 + 72 + 108 + 108 = 360° ✓

एक ही मापन क्य पयाप्त है: समलंब चतुभुज एक संबंध दे ता है (एक ही ओर के अंत:कोण का योग 180°) और
समान भुजाएँ दूसरा (∠U = ∠V)। दो संबंध तथा 360° का योग मलकर केवल एक अ ात छोड़ते ह, अत: एक
मापा हुआ कोण सब कुछ नधा रत कर दे ता है।

प्र.4 क्या ऐसा प्रतीत होता है क समान भुजाओं के एक ही ओर बनने वाले सम्मुख कोण ∠U और ∠V भी समान ह?
क्या हम यहाँ सवागसम त्रभुज को ात कर सकते ह? UV के लंबवत रेखाखंड XY और WZ पर वचार क जए।
XWZY कस प्रकार का चतुभुज है?

XWZY एक आयत है, और यही सवागसम त्रभुज उपलब्ध कराता है।
X तथा W से UV पर लंब XY तथा WZ डा लए।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
XW ∥ UV (िदया है), अत: YZ ितयक रेखा है
m l as
.co
a = 180° – ∠XYZ = 180° – 90° = 90°
m a g
l a se
g
b = 180° – ∠WZY = 180° – 90° = 90°
aअत: XWZY के चारों कोण 90° के है ं ⇒ XWZY एक आयत है
o m
आयत होने के कारण उसक सम्मुख भुजाएँ समान ह, अत: m
e
. c ag
s
XY = WZ — दोन लंब समान लंबाई के ह।
a
agl
∆UXY तथा ∆VWZ में:

co m
m.
UX = VW (समि बाहु समलंब चत भ
ु ज
ु की समान भुजाएँ)

m as e
.co
XY = WZ (आयत XWZY की सम्मुख भुजाएँ)
a g l
a s em = ∠VZW = 90°
gl
∠UYX
a ⇒ ि भुज सव गं सम है ं (RHS) ⇒ ∠U = ∠V

m a s
em
.co agl
a s
agहैl, और वही आयत वह एक समता (XY = WZ) दे दे ता है जससे दोन छोर
लंब ही मुख्य वचार क्य ह: ∠U तथा ∠V आकृ त के दोन छोर पर ह और उनके बीच कोई कड़ी नह । दोन लंब
डालने से बीच म एक आयत बन जाता
के त्रभुज सवागसम बन जाते ह।

co m
m .
as e
omदशाया जा सकता है क ∆UXY ≅ ∆VWZ (कैसे)?
.cअब a g l
a s emप्र.5

agl
se m
com g l a
. a
ऊपर ा पत आयत XWZY का उपयोग करते हुए RHS (समकोण–कण–भुजा) नयम से।
m
ase
agl
∠XYU = ∠WZV = 90° (XY तथा WZ, UV पर लंब खी ंचे गए थे )

UX = VW (कण — समि बाहु समलंब चत भ
ु ज
ु की समान असमांत र भुजाएँ)
co m
m .
XY = WZ (एक-एक भुजा, आयत XWZY की सम्मुख भुजाएँ)
m as e
.⇒co∆UXY ≅ ∆VWZ a g l
se m
g l a
a c
m .
अत: ∠U = ∠V तथा UY = VZ भी
m a s e
e m . co agl
l as
यही गुण 2 — सम बाहु समलंब चतुभुज म समान भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते ह।
g
a

co m
m .
m ase
.co


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UY = VZ भी क्य महत्त्वपूण है: यह बताता है क दोन तरछे छोर हर ओर बराबर-बराबर बाहर नकले हुए ह।
सम बाहु समलंब चतुभुज के सम मत होने का ठ क यही अथ है — UV तथा XW के मध्य बदुओं से होकर जाने
वाली उसक एक सम म त रेखा होती है।

संकेत: यही आकृ त यह भी दखा दे ती है क सम बाहु समलंब चतुभुज के वकण समान होते ह: UX = VW, ∠U
= ∠V तथा UV उभय नष्ठ होने से SAS ारा ∆UXV ≅ ∆VWU, अत: XV = WU।

आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 107–109
4.6 पतंग और समलंब चतुभुज

प्रयास क जए

प्र.1 4 सट मीटर भुजा वाले दो समबाहु त्रभुज को जोड़कर प्राप्त चतुभुज के सभी कोण और सभी भुजाओं को ात
क जए।

चार भुजाएँ 4 सट मीटर; कोण 60°, 120°, 60° तथा 120°। आकृ त एक समचतुभुज है।
दोन कटआउट को पूरी एक भुजा पर जो ड़ए। वह भुजा 4 सट मीटर का वकण बन जाती है, और शेष चार कनारे भुजाएँ बन जाते
ह।

भुजाएँ: 4 सेमी, 4 सेमी, 4 सेमी, 4 सेमी ⇒ समचतुभ ज
ु

जोड़ के दोनों िसरों पर दो 60° के कोण िमलते है:ं

60° + 60° = 120° (दो बार)

दोनों दू रस्थ शीष ं पर अके ला 60° का कोण रहता है: 60° (दो बार)

जाँच : 60 + 120 + 60 + 120 = 360° ✓

यह वग क्य नह है: वग के लए 90° के कोण चा हए। यहाँ कोण समबाहु त्रभुज से तय होते ह, जो केवल 60°
ही दे सकते ह। चार समान भुजाएँ इसे समचतुभुज बनाती ह, पर कोण इसे वग बनने नह दे ते।

संकेत: छोटा वकण 4 सट मीटर (जोड़) है। बड़ा वकण 2 × (4 × √3 ∕ 2) = 4√3 ≈ 6.93 सट मीटर होगा, क्य क
प्रत्येक समबाहु त्रभुज क ऊँचाई (√3∕2) × 4 है।

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प्र.2 एक पतंग क रचना क जए जसके वकण क लंबाई 6 सट मीटर और 8 सट मीटर हो।

पृष्ठ 105 पर सद्ध कए गए पतंग के वकण-गुण का उपयोग क जए — एक वकण दूसरे का लंब सम भाजक होता है।

1. PQ = 6 सट मीटर ख चए — यही वह वकण होगा जो सम भा जत होगा।
2. परकार से PQ का लंब सम भाजक बनाइए; वह PQ को T पर मले, अत: PT = TQ = 3 सट मीटर।
3. उस लंब पर PQ के दोन ओर R तथा S इस प्रकार अं कत क जए क RS = 8 सट मीटर हो — परंतु T उसका मध्य बदु न
हो। जैसे TR = 2 सट मीटर तथा TS = 6 सट मीटर ली जए।
4. PR, RQ, QS तथा SP मलाइए।

PRQS अपे क्षत पतंग है।

PR = QR = √(3² + 2²) = √13 ≈ 3.6 सेट
ं ीमीटर
PS = QS = √(3² + 6²) = √45 ≈ 6.7 सेट
ं ीमीटर
आसन्न भुजाओं के दो समान युग् म ⇒ पतं ग ✓

R तथा S असमान दूरी पर क्य रखने ह: य द TR = TS = 4 सट मीटर ल तो दूसरा वकण भी सम भा जत हो
जाएगा और समचतुभुज मलेगा — जो एक वशेष पतंग है। TR ≠ TS रखने से भुजाओं के दोन युग्म भन्न रहते ह
और साधारण पतंग बनती है। 6 सट मीटर व 8 सट मीटर वकण वाली अनेक भन्न पतंग संभव ह; TR का प्रत्येक
चुनाव एक नई पतंग दे ता है।

प्र.3 नम्न ल खत समलंब चतुभुज के शेष कोण का मान ात क जए —

समलंब चतुभुज (i)। ऊपरी तथा नचली भुजाओं पर तीर के चह्न ह, अत: वे समांतर ह। अं कत कोण 135° तथा 105° छोट
( नचली) भुजा के सर पर ह। प्रत्येक तरछ भुजा तयक रेखा है, अत: उसके दोन सर के कोण का योग 180° होगा।

135° वाले कोने के ऊपर: 180 – 135 = 45°

105° वाले कोने के ऊपर: 180 – 105 = 75°

जाँच : 135 + 105 + 45 + 75 = 360° ✓

समलंब चतुभुज (ii)। यहाँ दोन तरछ भुजाओं पर चह्न ह, अत: वे समान ह — यह सम बाहु समलंब चतुभुज है। 100° का
कोण एक समान भुजा तथा छोट समांतर भुजा के बीच है।

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उसी भुजा के दू सरे िसरे पर: 180 – 100 = 80°

गुण 2: पत्येक समांत र भुजा पर बने कोण समान होते है,ं अत:

छोटी समांत र भुजा पर दू सरा कोण = 100°
बड़ ी समांत र भुजा पर दू सरा कोण = 80°

जाँच : 100 + 100 + 80 + 80 = 360° ✓

45° 75°
100° 100°

135° 105°
80° 80°
(i)
(ii)

दए गए कोण लाल/नीले रंग म, ात कए गए कोण हरे रंग म। दोन आकृ तय म योग 360° है।

(ii) म चह्न क आवश्यकता क्य है: साधारण समलंब चतुभुज म दोन दए गए कोण कुछ भी हो सकते ह, और
अकेला 100° केवल उसी भुजा के दूसरे सरे का कोण तय करता। समान भुजाएँ दूसरा संबंध — गुण 2 — दे ती ह,
जससे एक ही मापन चार कोण नधा रत कर दे ता है।

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प्र.4 एक वेन आरेख बनाइए जसम समांतर चतुभुज, पतंग, समलंब चतुभुज आयत और वग के समूह को दशाया गया
हो। तत्प ात नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर द जए— (i) वह कौन-सा चतुभुज है जो पतंग और समांतर चतुभुज
दोन है? (ii) क्या ऐसा कोई चतुभुज हो सकता है जो एक पतंग और एक आयत दोन ह ? (iii) क्या प्रत्येक पतंग
एक समचतुभुज है? य द नह , तो इन दो प्रकार के चतुभुज के मध्य का संबंध क्या है?

समांतर चतुभुज

आयत समचतुभुज

वग

पतंग

आयत तथा समचतुभुज दोन समांतर चतुभुज के भीतर ह; उनका उभय नष्ठ भाग वग का है। समचतुभुज पूरी तरह पतंग के भीतर भी ह,
और पतंग का समूह समांतर चतुभुज से बाहर तक फैला है।

(i) समचतुभुज। जो चतुभुज पतंग भी हो और समांतर चतुभुज भी, उसम आसन्न भुजाओं के दो समान युग्म (पतंग) तथा समान
सम्मुख भुजाएँ (समांतर चतुभुज) ह गी — और इससे चार भुजाएँ समान हो जाती ह।

पतं ग: AB = BC तथा CD = DA

समांत र चत भ
ु ज
ु : AB = CD तथा BC = DA

दोनों िमलकर: AB = BC = CD = DA ⇒ समचत भ
ु ज
ु (वग इसकी िवशेष िस्थित है)

(ii) हाँ — वग। वग म AB = BC तथा CD = DA होता है, अत: वह पुस्तक क पतंग क प रभाषा (पृष्ठ 105) पर खरा उतरता है,
और उसके सभी कोण 90° के होने से वह आयत भी है।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
उत्तर-कुंजी के वषय म एक टप्पणी: अध्याय के अंत म द गई उत्तर-कुंजी यहाँ 'नह ' कहती है। वह तभी सही
mभाग (i)
होता जब पतंग के लए यह अ नवाय होता क उसके दोन युग्म भन्न लंबाई के ह । परंतु इसी प्रश्नeका
s
m
coपतंग मानकर चलता है, अत: उसी दृ ष्ट से वग को भी पतंग मानना ही होगा
g— a
l और वग न त ही
m . a
आयतsहैe। संगत उत्तर है हाँ, वग।
समचतुभुज को

a
agl
m
(iii) नह । प्रत्येक समचतुभुज पतंग है, परंतु प्रत्येक पतंग समचतुभुज नह ।

. co ag
e m
समचत भ
g l as
ु : AB = BC = CD = DA ⇒ िनिश्चत ही AB = BC तथा CD = DA ⇒ पतं ग ✓
ु ज
a
AB = BC = 6 सेमी तथा CD = DA = 9 सेमी वाली पतं ग ⇒ समचत भ ु नही ं ✗
ु ज

co m
अत: सही संबंध है समचतुभुज ⊂ पतंग — समचतुभुज का समूह पूरी तरह पतंग के समूह के भीतर है।m.

o m l a se
.c a g
se m
l a
ag प्र.5 य द PAIR और RODS दो आयत ह तो ∠IOD ात क जए।
m a s
m .co agl
se

∠IOD = 30°
g l a
a
आकृ त म PAIR एक आयत है जसम R नीचे-बाएँ तथा I नीचे-दाएँ है, O भुजा AI पर त है, और RO से दूसरा आयत RODS
लटका हुआ है। अं कत 30° वास्तव म ∠ORI है, अथात रेखाखंड RO का भुजा RI के साथ बना कोण।
com
m .
m as e
.co
∆ORI में: ∠RIO = 90° (आयत PAIR का I पर कोण, क्योंिक O, AI पर है)
a g l
s m = 30° (िदया है)
e∠IRO
gl a
a
m
⇒ ∠ROI = 180 – 90 – 30 = 60°

a se
. com a g l
m
ase
agl
RODS एक आयत है, अत: ∠ROD = 90°

I तथा D, RO के एक ही ओर है,ं अत: ∠ROI + ∠IOD = ∠ROD

co m
.
⇒ ∠IOD = 90 – 60 = 30°
em
m l as
m .co a g
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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P A

O

5 cm

D

30°
R I

5 cm

S

आयत PAIR धूसर रंग म, आयत RODS हरे रंग म; RO दोन तक म उभय नष्ठ है।

उत्तर दए गए कोण के बराबर क्य नकलता है: ∠IRO तथा ∠IOD दोन ही एक ही रेखा RO से नापे गए
समकोण के 'बचे हुए' भाग ह — एक R पर ∆ORI के भीतर, दूसरा O पर RODS के कोने के भीतर। चूँ क
∠ROI = 90 – 30 है, दूसरा बचा हुआ भाग भी 30 ही होगा। इसी लए इस कोण के लए 5 सट मीटर वाले दोन
चह्न क आवश्यकता नह पड़ती; वे केवल आकृ त का आकार तय करते ह।

प्र.6 चाँदे (प्रो े क्टर) का प्रयोग कए बना 6 सट मीटर वकण वाले एक वग क रचना क जए।

वग के वकण-गुण का उपयोग क जए — समान वकण जो एक-दूसरे को 90° पर सम भा जत कर। समकोण परकार से मल
जाता है, अत: चाँदे क आवश्यकता नह ।

1. AB = 6 सट मीटर ख चए।
2. कद्र A लेकर AB के आधे से अ धक कोई त्रज्या लेकर AB के ऊपर तथा नीचे चाप लगाइए। यही कद्र B से भी उसी त्रज्या से
क जए। दोन कटान बदुओं को मलाइए — यह रेखा AB का लंब सम भाजक है और AB को उसके मध्य बदु O पर काटती
है।
3. इस लंब पर C तथा D इस प्रकार अं कत क जए क OC = OD = 3 सट मीटर, एक-एक दोन ओर।

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4. AC, CB, BD तथा DA मलाइए।

ACBD अपे क्षत वग है।

AB = CD = 6 सेट
ं ीमीटर (समान िवकण)

OA = OB = OC = OD = 3 सेट
ं ीमीटर (एक-दू सरे को समि भािजत)

∠AOC = 90° (रचना से)

पत्येक भुजा = √(3² + 3²) = 3√2 ≈ 4.24 सेट
ं ीमीटर

चाप वाली रचना स ा लंब क्य दे ती है: दोन कटान बदु A तथा B से समान दूरी पर ह, अत: दोन AB के लंब
सम भाजक पर त ह। दो बदु उस रेखा को नधा रत कर दे ते ह — और लंब सम भाजक का अथ ही है '90°
पर तथा मध्य बदु से होकर', जो ठ क वही दो शत ह जो वग के वकण को चा हए।

प्र.7 CASE एक वग है। बदु U, V, W और X वग क भुजाओं के मध्य बदु ह। UVWX कस प्रकार का चतुभुज है?
इसे ज्या मतीय तक, रचना और मापन के उपयोग ारा ात क जए। एक वग के अंतगत एक अन्य वग क रचना
करने क व धयाँ ात क जए ध्यान र खए क आंत रक वग के शीष बाहरी वग क भुजाओं पर त ह जैसा
क आकृ त (b) म दशाया गया है।

C U A

V X

E W S
(a) (b)
पृष्ठ 108 — (a) वग CASE, जसम U, V, W और X भुजाओं के मध्य बदु ह; (b) एक वग के अंदर बना दूसरा
चतुभुज, जसके शीष बाहरी वग क भुजाओं पर ह।

UVWX एक वग है, जसक भुजा CASE क भुजा क 1⁄√2 गुनी है — अत: उसका क्षेत्रफल ठ क आधा है।

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ज्या मतीय तक। माना CASE क भुजा x है, अत: प्रत्येक अध-भुजा x⁄2 है। UVWX ारा काटे गए चार कोने के त्रभुज दे खए।
कोने C पर त्रभुज क भुजाएँ CU = CV = x⁄2 ह और उनके बीच समकोण है; यही A, S तथा E पर भी सत्य है।

UV² = CU² + CV² = x²⁄4 + x²⁄4 = x²⁄2

⇒ UV = x⁄√2

चारों कोने के ि भुज सव गं सम है ं (SAS), अत:

UV = VW = WX = XU = x⁄√2

कोण। प्रत्येक कोने का त्रभुज सम बाहु समकोण त्रभुज है, अत: उसके दोन आधार कोण 45° के ह। भुजा CA पर त बदु U
पर तीन कोण एक सरल रेखा पर ह —

45° + ∠XUV + 45° = 180° ⇒ ∠XUV = 90°

V, W तथा X पर भी यही ⇒ चारों कोण 90° के

चार समान भुजाएँ तथा चार समकोण ⇒ वग।

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C U A

45° 45°

V X

45° 45°

E W S

वग क भुजाओं के मध्य बदुओं को मलाने पर आधे क्षेत्रफल वाला, 45° घुमा हुआ वग बनता है।

रचना एवं मापन से। 6 सट मीटर भुजा वाला वग बनाइए, चार मध्य बदु अं कत क जए और उन्ह मलाइए। मा पए — भीतरी
प्रत्येक भुजा लगभग 4.2 सट मीटर मलेगी (क्य क 6 ∕ √2 ≈ 4.24) तथा प्रत्येक कोण 90°।
अन्य आंत रक वग (आकृ त b)। मध्य बदु ही एकमात्र वकल्प नह ह। कोई भी दूरी d ली जए और बाहरी वग के चार ओर एक
ही घूणन दशा म चलते हुए प्रत्येक भुजा पर उस कोने से d दूरी पर एक बदु अं कत क जए जसे आप छोड़ रहे ह। चार बदुओं को
मला द जए।

तब पत्येक कोने के ि भुज की भुजाएँ d तथा (x – d) होंगी, चारों SAS से सव गं सम

⇒ भीतरी चारों भुजाएँ समान, पत्येक √(d² + (x – d)²)

⇒ और पहले की तरह कोण 90° िनकलते है ं — पत्येक d के िलए वग

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as e
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. com
एक ही दशा म घूमना क्य आवश्यक है: इससे चार कोने के त्रभुज पूरी आकृ त के कद्र के प रत: चौथाई घुमाव
m चार
ारा सवागसम बन जाते ह। चौथाई घुमाव भीतरी चतुभुज को स्वयं पर मान च त्रत करता है, अत:eउसक
s
m a
gl त तो d = x⁄2 मात्र
co कोण समान होने ही चा हए — और यही उसे वग बनाता है। मध्य बदु वाली
. a
em छोटा भीतरी वग दे ती है।
भुजाएँ तथा चार
a
है,lजोsसबसे
ag

. c om ag
य द एक चतुभुज क चार भुजाएँ समान ह e
s m एक कोण 90° का हो तो क्या यह एक वग होगा? ज्या मतीय
a
और

aglउत्तर ात क जए।
प्र.8
तक, रचना और मापन के उपयोग ारा

co m
m.

m
हाँ, वह वग ही होगा।
as e
.co a g l
a s emभुजाएँ समान ⇒ चतभु जु एक समचतुभजु है
gl
चारों
a पत्येक समचत भ
ु ज
ु एक समात
ं र चत भ
ु ज
ु है, अत:
m a s
.co agl
आसन्न कोणों का योग 180° तथा सम्मुख कोण समान

se m
g l a
माना ∠A = 90°। तब
a

co m
.
∠B = 180 – 90 = 90° (आसन्न)
e m
m l as
.co
∠C = ∠A = 90° (सम्मुख)
a g
s e m = ∠B = 90°
la
∠D

ag
se m
सभी कोण 90° तथा सभी भुजाएँ समान ⇒ वग
com g l a
m . a
रचना से। AB = 5 सट मीटर ख चए औरlA
e
asपर परकार के चाप से लंब AD = 5 सट मीटर बनाइए। कद्र B तथा कद्र D से 5
g
सट मीटर त्रज्या के चाप लगाइए; वे Caपर मलते ह। ∠B, ∠C तथा ∠D मा पए — प्रत्येक 90° मलेगा, और BC = CD = 5

m
सट मीटर।

. co
se m
o m l a
ag हो जाती है और आकृ त के पास वग
.c— कोण। उस अकेले कोण को 90° पर बाँध दे ने से अं तम स्वतंत्रता भी समाप्त
एक ही समकोण पयाप्त क्य है: भुजाएँ न त हो जाने के बाद समचतुभुज म केवल एक स्वतंत्रता शेष रहती है

se m
g l a
a
बनने के अ त रक्त कोई वकल्प नह बचता। इसक तुलना सामान्य चतुभुज से क जए, जहाँ चार समान भुजाएँ और
एक 90° का कोण कह भी पयाप्त सूचना नह होती।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages69
Languagehindi
Updated19 Sep 2026