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NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा

AglaSem पर कक्षा 8 गणित अध्याय 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा (गणित प्रकाश) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Maths Chapter 6 We Distribute Yet Things Multiply (Ganita Prakash), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा - Page 1 of 83

About NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा

NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (83 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 8 Maths Chapter 6 जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 6: जतना बाँटगे उतना बढ़ेे गा

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

136 – 158 21 91 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 82 pages

Page 2

कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

क ा 8 · ग णत · ग णत प्रकाश

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: जतना बाँटगे उतना बढ़े गा
ग णत प्रकाश कक्षा 8 (भाग I) का अध्याय 6 केवल एक गुणधम — वतरण गुणधम, a(b + c) = ab + ac — से पूरा अध्याय खड़ा करता है:
गुणनफल म वृ द्ध, वग क तीन सवस मकाएँ, 11 और 101 से शीघ्र गुणन, तथा कई संख्या-प्र तरूप जो अंततः एक ही सवस मका के भन्न रूप
नकलते ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ग णत प्रकाश (क ा 8) 136 – 158

खं ड प्रश्न

21 91

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 136
6.1 गुणन के कुछ गुणधम — गुणनफल म वृ द्ध

प्र.1 य द पहली संख्या (23) म 1 क वृ द्ध क जाए तो गुणनफल म कतनी वृ द्ध होगी?

गुणनफल म 27 क वृ द्ध होगी, अथात दूसरी संख्या के बराबर।

23 × 27 = 621

24 × 27 = 648

वृि = 648 – 621 = 27

वतरण गुणधम से यही बात बना गुणा कए मल जाती है—

(23 + 1) × 27 = 23 × 27 + 1 × 27

= 23 × 27 + 27

ऐसा क्य होता है: 24 × 27 का अथ है चौबीस बार 27। इनम से तेईस बार से 23 × 27 बनता है और चौबीसवाँ
एक अ त रक्त 27 है। पहली संख्या म 1 बढ़ाने पर दूसरी संख्या क एक अ त रक्त प्र त जुड़ जाती है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 य द दूसरी संख्या (27) म 1 क वृ द्ध क जाए तो गुणनफल म क्या प रवतन होगा?

तब गुणनफल म 23 क वृ द्ध होगी, अथात पहली संख्या के बराबर।

23 (27 + 1) = 23 × 27 + 23 × 1

= 621 + 23 = 644

जाँच : 23 × 28 = 644 ✓

ऐसा क्य होता है: यह सवस मका a (b + c) = ab + ac ही है जसम a = 23, b = 27, c = 1 है। 28 बदुओं
क तेईस पं क्तयाँ, 27 बदुओं क तेईस पं क्तय के साथ प्रत्येक पं क्त म एक अ त रक्त बदु ह — कुल 23
अ त रक्त बदु।

प्र.3 जब दोन संख्याओं म 1 क वृ द्ध क जाए तब गुणनफल म क्या प रवतन होगा?

गुणनफल म 27 + 23 + 1 = 51 क वृ द्ध होगी।

(23 + 1)(27 + 1) = (23 + 1) 27 + (23 + 1) 1

= 23 × 27 + 27 + 23 + 1
= 621 + 51 = 672

जाँच : 24 × 28 = 672 ✓

ऐसा क्य होता है: पहली संख्या बढ़ाने पर एक पूरी नई पं क्त (27 बदु) जुड़ती है, दूसरी बढ़ाने पर एक पूरा नया
स्तंभ (23 बदु) जुड़ता है, और जहाँ नई पं क्त नए स्तंभ से मलती है वह कोने का एक बदु अलग से जुड़ता है —
यही “+ 1” है।

प्र.4 क्या आपको कोई ऐसा प्र तरूप दखाई दे ता है जो कन्ह दो संख्याओं के गुणनफल के हमारे अवलोकन को
सामान्यीकृत करने म सहायक हो?

हाँ। दोन संख्याओं को a और b ल खए। तब—

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

a (b + 1) = ab + a

(a + 1) b = ab + b

(a + 1)(b + 1) = ab + a + b + 1

a = 23 और b = 27 रखने पर ऊपर क तीन वृ द्धयाँ ठ क वैसी ही मलती ह — 23, 27 और 51।

संकेत: यह सामान्य कथन तीन उत्तर से अ धक मूल्यवान है, क्य क यह एक साथ प्रत्येक संख्या-युग्म पर लागू
होता है — ऋणात्मक संख्याओं पर भी। आगे यही सवस मका 1 का रूप ले लेता है: (a + m)(b + n) = ab +
mb + an + mn।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 138
6.1 गुणन के कुछ गुणधम

प्र.1 हम इसका प्रसार कस प्रकार कर? [(a + 1) (b + 1)]

पूरे कोष्ठक (a + 1) को एक एकल पद मा नए और दूसरे कोष्ठक पर वतरण गुणधम लगाइए।

(a + 1)(b + 1) = (a + 1) b + (a + 1) 1

= (ab + b) + (a + 1)

= ab + a + b + 1

अतः गुणनफल ab म a + b + 1 क वृ द्ध होती है।

ऐसा क्य होता है: वतरण गुणधम को इससे कोई अंतर नह पड़ता क “एकल संख्या” a क्या है — वह स्वयं एक
कोष्ठक भी हो सकता है। एक बार प्रयोग करने पर दूसरा कोष्ठक खुलता है, दूसरी बार प्रयोग करने पर पहला, और
तब एक कोष्ठक का प्रत्येक पद दूसरे के प्रत्येक पद से मल चुका होता है।

प्र.2 य द हम पहले (b + 1) को एकल पद मानकर (a + 1) (b + 1) का प्रसार कर तब हम क्या प्राप्त होता? इसे हल
करने का प्रयास क जए?

वही उत्तर मलता है — और यही इस प्रश्न का उ े श्य है।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
(a + 1)(b + 1) = a (b + 1) + 1 (b + 1)
m l as
.co
= (ab + a) + (b + 1)
m a g
l a se
g
= ab + a + b + 1
a
m
a = 5, b = 4 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 6 × 5 = 30, दायाँ पक्ष = 20 + 5 + 4 + 1 = 30 ✓

. co ag
se m
l a
g a×1, 1×b और 1×1 — ये चार गुणनफल ही जुड़ते ह।
ऐसा क्य होता है: गुणन क्रम व नमेय है, इस लए (a + 1)(b + 1) और (b + 1)(a + 1) एक ही गुणनफल ह।
आप कोई भी कोष्ठक पहले खोल, अंत मaa×b,

co m
em.
m l as
.co a g
य द कसी गुणनफल क पहली संख्या म 1 क वृ द्ध और दूसरी संख्या म 1 क कमी क जाए तो हम क्या प्राप्त
mहोगा? क्या उनके गुणनफल म कोई प रवतन होगा?
प्र.3

l a se
a g
s

m a
.co agl
प रवतन होता है और वह b – a – 1 है।

se m
g l a
(a + 1)(b – 1) = (a + 1) b – (a + 1) 1 a
= ab + b – a – 1
co m
m .
m as e
.co
a = 23, b = 27 लेने पर—
a g l
se m
g l a
a 24 × 26 = 23 × 27 + 27 – 23 – 1

se m
= 621 + 3 = 624 ✓
com g l a
m . a
ase
agl
ऐसा क्य होता है: प रवतन b – a – 1 है, शून्य नह । अतः जब b, a से कम-से-कम 2 अ धक हो तब गुणनफल
बढ़ता है; जब b = a + 1 हो तब वही रहता है; और जब b ≤ a हो तब घट जाता है। एक संख्या म 1 जोड़ना और

co m
.
दूसरी म से 1 घटाना बराबरी का सौदा नह है।

se m
o m l a
m .cस्वयं जाँ चए: 9 × 11 = 99 परंतु 10 × 10 = 100; यहाँ a = 9, b = 11agहै, अतः प रवतन 11 – 9 – 1 = +1
l a se
ag है।

.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 82

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 क्या गुणनफल म सदै व वृ द्ध होगी? ऐसे तीन उदाहरण का पता लगाइए जहाँ गुणनफल घटता है।

नह । प रवतन b – a – 1 है, इस लए जब भी b ≤ a हो, गुणनफल घटता है।

A, B AB (A + 1)(B – 1) प रवतन B – A – 1

a = 5, b = 3 15 6 × 2 = 12 3 – 5 – 1 = –3

a = 7, b = 7 49 8 × 6 = 48 7 – 7 – 1 = –1

a = 10, b = 3 30 11 × 2 = 22 3 – 10 – 1 = –8

ऐसा क्य होता है: आपको b बदुओं का एक पूरा स्तंभ मलता है परंतु a बदुओं क एक पूरी पं क्त चली जाती है,
और कोने का बदु भी चला जाता है। जब जाने वाली पं क्त, मलने वाले स्तंभ से कम नह होती तब कुल संख्या घट
जाती है।

प्र.5 क्या होगा जब a और b ऋणात्मक पूणाक ह ? उपयुक्त प्रत्येक त म a और b के लए व भन्न मान
प्र त ा पत करके जाँच क जए। उदाहरण के लए a = –5, b = 8; a = –4, b = –5 इत्या द।

कुछ नह बदलता — सभी ंजक सही बने रहते ह, क्य क पूणाक भी वतरण गुणधम को संतुष्ट करते ह: कन्ह तीन पूणाक x, y,
z के लए x (y + z) = xy + xz।

A, B AB (A + 1)(B + 1) AB + A + B + 1

–5, 8 –40 –4 × 9 = –36 –40 – 5 + 8 + 1 = –36 ✓

–4, –5 20 –3 × –4 = 12 20 – 4 – 5 + 1 = 12 ✓

तथा (a + 1)(b – 1) = ab + b – a – 1 म a = –5, b = 8 रखने पर: –4 × 7 = –28 और –40 + 8 + 5 – 1 = –28 ✓

ऐसा क्य होता है: सवस मका ंजक के वषय म कथन है, बदु गनने के वषय म नह । जैसे ही अक्षर-संख्याएँ
कोई भी पूणाक हो सकती ह, बदुओं का चत्र केवल स्मरण-सहायक रह जाता है — प्रमाण वतरण गुणधम से आता
है, जसे पूणाक मानते ह।

संकेत: ध्यान द जए क a = –5, b = 8 पर “वृ द्ध” a + b + 1 = 4 धनात्मक है, परंतु a = –4, b = –5 पर वह –
8 है। “वृ द्ध” केवल प रवतन का नाम है; प रवतन ऋणात्मक भी हो सकता है।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 139
6.1 गुणन के कुछ गुणधम — सवस मका 1

प्र.1 य द दो संख्याओं म से एक म m और दूसरी म n क वृ द्ध कर द जाए तो उनके गुणनफल म कतना प रवतन
होगा?

दोन संख्याएँ a + m और b + n बन जाती ह, और गुणनफल म an + bm + mn का प रवतन होता है।

(a + m)(b + n) = (a + m) b + (a + m) n

= ab + mb + an + mn

सवसिमका 1: (a + m)(b + n) = ab + mb + an + mn

पुराना गुणनफल ab घटाने पर प रवतन बचता है: an + bm + mn।

b स्तंभ n स्तंभ

पंिक्तयाँ ab an

पंिक्तयाँ mb mn

(a + m) × (b + n) क बदु-सरणी चार भाग म बँटती है। इनक संख्याएँ ab, an, mb, mn ही सवस मका 1 के चार पद ह।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: यह गुणनफल (a + m) के प्रत्येक पद का (b + n) के प्रत्येक पद से गुणनफल का योग है।
“कोष्ठक का प्रसार” इससे अ धक कुछ नह है — यह वतरण गुणधम का दो बार प्रयोग मात्र है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 140
6.1 गुणन के कुछ गुणधम — सवस मका 1 का उपयोग

प्र.1 क्या आप समझ सकते ह क एक संख्या या दोन संख्याओं म कमी करने पर इस सवस मका का प्रयोग कस
प्रकार कया जा सकता है?

हाँ — कमी करना, ऋणात्मक संख्या क वृ द्ध करना ही है, अतः कसी नई सवस मका क आवश्यकता नह ।

(a + 1)(b – 1) = (a + 1)(b + (–1))

सवसिमका 1 में m = 1, n = –1 लीिजए—
ab + (1) × b + a × (–1) + (1) × (–1)

= ab + b – a – 1

यह ठ क वही ंजक है जो पहले सीधे प्रसार से मला था।

ऐसा क्य होता है: पूणाक गुणन के नयम (धनात्मक × ऋणात्मक = ऋणात्मक, ऋणात्मक × ऋणात्मक =
धनात्मक) चार पद पर सही चह्न स्वयं लगा दे ते ह। इसी लए एक ही सवस मका चार तयाँ सँभाल लेती है —
दोन म वृ द्ध, दोन म कमी, तथा एक म वृ द्ध व दूसरी म कमी क दोन तयाँ।

प्र.2 सवस मका 1 का प्रयोग करके ात क जए क गुणनफल म कस प्रकार प रवतन होता है जब — (i) एक संख्या
म 2 क कमी क जाती है और दूसरी संख्या म 3 क वृ द्ध क जाती है। (ii) दोन संख्याओं म से एक म 3 क
कमी तथा दूसरी म 4 क कमी क जाती है। व्यवकलन (घटाव) को योग (जोड़) म प रवतन कए बना गुणनफल
ात क जए एवं उत्तर क जाँच क जए।

(i) m = –2, n = 3 ली जए।

(a – 2)(b + 3) = ab + (–2)b + 3a + (–2)(3)

= ab + 3a – 2b – 6

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

घटाव को वैसा ही रखकर सीधी जाँच: (a – 2)(b + 3) = a(b + 3) – 2(b + 3) = ab + 3a – 2b – 6 ✓
(ii) m = –3, n = –4 ली जए।

(a – 3)(b – 4) = ab + (–3)b + (–4)a + (–3)(–4)

= ab – 4a – 3b + 12

सीधी जाँच: (a – 3)(b – 4) = a(b – 4) – 3(b – 4) = ab – 4a – 3b + 12 ✓

स्वयं जाँ चए: a = 10, b = 10 र खए। (i) 8 × 13 = 104 और 100 + 30 – 20 – 6 = 104। (ii) 7 × 6 = 42
और 100 – 40 – 30 + 12 = 42।

प्र.3 वस्तार क जए (i) (a – u) (b + v), (ii) (a – u) (b – v)

पहले कोष्ठक का प्रत्येक पद, दूसरे के प्रत्येक पद से गुणा होता है; चह्न पूणाक- नयम से आते ह।

(i) (a – u)(b + v) = a·b + a·v + (–u)·b + (–u)·v

= ab – ub + av – uv

(ii) (a – u)(b – v) = a·b + a·(–v) + (–u)·b + (–u)(–v)

= ab – ub – av + uv

(ii) क जाँच a = 7, u = 2, b = 9, v = 3 पर: बायाँ पक्ष = 5 × 6 = 30; दायाँ पक्ष = 63 – 18 – 21 + 6 = 30 ✓

ऐसा क्य होता है: (ii) म घटाए गए दोन भाग ub और av कोने के आयत uv पर एक-दूसरे को ढकते ह, इस लए
वह कोना दो बार घट जाता है। + uv जोड़ने पर वह केवल एक बार घटता है — यही हसाब आगे (a – b)² = a² –
2ab + b² दे गा।

प्र.4 उदाहरण 1— 3a⁄2 (a – b + 1⁄5) को वस्ता रत रूप म ल खए।

वतरण गुणधम एक कोष्ठक के भीतर दो पद तक सी मत नह है — प्रत्येक पद से गुणा होता है।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
3a⁄2 (a – b + 1⁄5) = (3a⁄2 × a) – (3a⁄2 × b) + (3a⁄2 × 1⁄5)
m l as
m .co a g
a se
अब घातांक संकेतन से प्रत्येक पद सरल क जए—

a g l
3a⁄2 × a = 3⁄2 × (a × a) = 3⁄2 a²

co m
3a⁄2 × b = 3⁄2 × (a × b) = 3⁄2 ab
e m . ag
g l as
a
3a⁄2 × 1⁄5 = (3⁄2 × 1⁄5) a = 3⁄10 a

co m
3a⁄2 (a – b + 1⁄5) = 3⁄2 a² – 3⁄2 ab + 3⁄10 a
e m.
m l as
m .co a g
l a se
a = 2, b = 1 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 3 × (2 – 1 + 0.2) = 3.6; दायाँ पक्ष = 6 – 3 + 0.6 = 3.6 ✓

ag
संकेत: तीन पद क चर संख्याएँ भन्न ह (a², ab, a), अतः वे समान पद नह ह और ंजक पहले ही अपने
m a s
.co agl
सरलतम रूप म है।

se m
g l a
a
m
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 141
. co
e m
6.1 गुणन के कुछ गुणधम — समान पद

m l as
.co a g
m क्या कन्ह भी दो पद का योग करके एकल पद प्राप्त कया जा सकता है? उदाहरण के लए क्या 3⁄2 a² और
s e
la
प्र.1

ag
3⁄10 a का योग करके एकल पद प्राप्त कया जा सकता है?

se m
com g l a
.

m a
ase
नह । दो पद को एक पद म तभी मलाया जा सकता है जब वे समान पद ह , अथात उनक चर संख्याएँ पूणतया समान ह ।

agl
3⁄2 a² का अक्षर-भाग है a × a

co m
3⁄10 a का अक्षर-भाग है a
m .
m as e
.co
a × a ≠ a, अतः ये समान पद नही ं है ं
a g l
a s em
agl a = 4 पर दे खए: 3⁄2 × 16 = 24 और 3⁄10 × 4 = 1.2, योग 25.2। परंतु a = 10 पर योग 153 हो जाता है — कोई एक ही पद
.c
इन दोन मान को नह दे सकता।
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 9 of 82

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: समान पद का योग वतरण गुणधम को उलटा पढ़ने से होता है: 2ab + 3ab = (2 + 3) ab।
उभय नष्ठ गुणनखंड तभी बाहर लया जा सकता है जब वह दोन पद म वास्तव म हो। a² और a म a उभय नष्ठ है,
अतः 3⁄2 a² + 3⁄10 a = a(3⁄2 a + 3⁄10) — पर यह दो रा शय का गुणनफल है, एकल पद नह ।

प्र.2 उदाहरण 2— (a + b) (a + b) का वस्तार क जए।

(a + b)(a + b) = (a + b) a + (a + b) b

= a × a + b × a + ab + b × b

= a² + ba + ab + b²

चूँ क ba = ab, बीच के दोन पद समान पद ह—

ba + ab = ab + ab = 2ab

(a + b)(a + b) = a² + 2ab + b²

a = 3, b = 5 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 8 × 8 = 64; दायाँ पक्ष = 9 + 30 + 25 = 64 ✓

ऐसा क्य होता है: चार गुणनफल a·a, a·b, b·a और b·b ह। इनम दो समान ह क्य क गुणन क्रम व नमेय है —
केवल यही एक बात है जसके कारण योग के वग के बीच म “2ab” आता है, दो अलग-अलग पद नह ।

प्र.3 उदाहरण 3— (a + b) (a² + 2ab + b²) का वस्तार क जए।

(a + b)(a² + 2ab + b²) = (a + b)a² + (a + b) × 2ab + (a + b)b²

= (a × a²) + ba² + (a × 2ab) + (b × 2ab) + ab² + (b × b²)

प्रत्येक पद को सरल क जए—

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a × a² = a³ (a × a × a)

ba² = a²b

a × 2ab = 2 × a × a × b = 2a²b
b × 2ab = 2 × a × b × b = 2ab²

b × b² = b³

= a³ + a²b + 2a²b + 2ab² + ab² + b³

अब समान पद को जो ड़ए—

a²b + 2a²b = (1 + 2) a²b = 3a²b

ab² + 2ab² = (1 + 2) ab² = 3ab²

(a + b)(a² + 2ab + b²) = a³ + 3a²b + 3ab² + b³

a = 2, b = 1 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 3 × (4 + 4 + 1) = 27; दायाँ पक्ष = 8 + 12 + 6 + 1 = 27 ✓

क्या आप जानते ह? चूँ क a² + 2ab + b² स्वयं (a + b)² है, इससे (a + b)³ = a³ + 3a²b + 3ab² + b³
सद्ध हो जाता है। गुणांक 1, 3, 3, 1 ह — 1, 2, 1 के ठ क बाद वाली पं क्त।

आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 142

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

6.1 गुणन के कुछ गुणधम

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.1 नम्नां कत गुणन जाल का अवलोकन क जए। जाल के अंतगत द गई प्रत्येक संख्या दो संख्याओं के गुणन से
बनी है। य द 3 × 3 े म क मध्य संख्या व्यंजक pq ारा दशाई गई है जैसा क चत्र म दशाया गया है तो जाल म
अन्य संख्याओं के लए व्यंजक ल खए।

× 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10

1 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10

2 2 4 6 8 10 12 14 16 18 20

3 3 6 9 12 15 18 21 24 27 30

4 4 8 12 16 20 24 28 32 36 40

5 5 10 15 20 25 30 35 40 45 50

6 6 12 18 24 30 36 42 48 54 60

7 7 14 21 28 35 42 49 56 63 70

8 8 16 24 32 40 48 56 64 72 80

9 9 18 27 36 45 54 63 72 81 90

10 10 20 30 40 50 60 70 80 90 100

पृष्ठ 142 का गुणन जाल। लाल रेखा से घरी नौ संख्याएँ 3 × 3 े म ह।

3×5 3×6 3×7

4×5 4×6 4×7

5×5 5×6 5×7

pq

वही नौ संख्याएँ गुणनफल के रूप म (बाएँ), और वह रक्त े म जसक मध्य संख्या pq है (दाएँ)।

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.

m as e
क पं क्त p + 1 .हैc; o l
दए गए े म म मध्य संख्या 4 × 6 = 24 है, अतः p उस संख्या क पं क्त है और q उसका स्तंभ। ऊपर क पं क्त p – 1 और नीचे
a g
em
बाईं ओर का स्तंभ q – 1 और दाईं ओर का q + 1 है।

a s
agl स्तंभ Q – 1 स्तंभ Q स्तंभ Q + 1

m
.co ag
पं क्त P – 1 (p – 1)(q – 1) (p – 1) q (p – 1)(q + 1)

a sem
agl
पं क्त P p (q – 1) pq p (q + 1)

पं क्त P + 1 (p + 1)(q – 1) (p + 1) q (p + 1)(q + 1)

co m
em.
as
पुस्तक के े म से जाँच, जहाँ p = 4 और q = 6 है—
m l
.co a g
a s em
3 × 5 = 15 3 × 6 = 18 3 × 7 = 21
l
ag 4 × 5 = 20 4 × 6 = 24 4 × 7 = 28

m a s
.co agl
5 × 5 = 25 5 × 6 = 30 5 × 7 = 35

se m
g l a
a
ऐसा क्य होता है: गुणन जाल म पं क्त i और स्तंभ j क संख्या i × j ही होती है। एक कदम ऊपर या नीचे जाने पर
केवल पं क्त वाला गुणनखंड 1 से बदलता है; एक कदम दाएँ या बाएँ जाने पर केवल स्तंभ वाला। इसी लए pq का

co m
प्रत्येक पड़ोसी उपयुक्त ता लका का ही कोई गुणनफल है।
m .
m as e
.co a g l
a s em प्रयास क जए: दोन वकण के गुणनफल का प्रसार क जए। दोन (p² – 1)(q² – 1) नकलते ह, अथात इस

ag l े म के दोन वकण-गुणनफल सदा बराबर होते ह।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
प्र.2 नम्न ल खत गुणनफल का वस्तार क जए। (i) (3 + u) (v – 3) (ii) 2⁄3 (15 + 6a) (iii) (10a + b) (10c +
d) (iv) (3 – x) (x – 6) (v) (–5a + b) (c + d) (vi) (5 + z) (y + 9)

co m
.

m a s emह।
co gl
पहले कोष्ठक का प्रत्येक पद दूसरे के प्रत्येक पद से गुणा होता है; चह्न पूणाक- नयम से तय होते

. a
as em
agl
(i) (3 + u)(v – 3) = 3v – 9 + uv – 3u
.c
= uv + 3v – 3u – 9
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

(ii) 2⁄3 (15 + 6a) = 2⁄3 × 15 + 2⁄3 × 6a

= 10 + 4a

(iii) (10a + b)(10c + d) = 100ac + 10ad + 10bc + bd

(iv) (3 – x)(x – 6) = 3x – 18 – x² + 6x

= –x² + 9x – 18

(v) (–5a + b)(c + d) = –5ac – 5ad + bc + bd

(vi) (5 + z)(y + 9) = 5y + 45 + yz + 9z

जाँच: (i) म u = 1, v = 4 पर 4 × 1 = 4 और 4 + 12 – 3 – 9 = 4 ✓; (iv) म x = 2 पर 1 × (–4) = –4 और –4 + 18 – 18
= –4 ✓

क्या आप जानते ह? भाग (iii) ही दो अंक के गुणन क पूरी व ध है। अंक a, b वाली दो अंक क संख्या 10a +
b होती है, अतः (10a + b)(10c + d) = 100ac + 10(ad + bc) + bd — यही सैकड़ा, दहाई और इकाई ह।

प्र.3 ऐसे तीन उदाहरण द जए जनम दो संख्याओं म से एक संख्या म 2 क वृ द्ध क जाए और दूसरी संख्या म 4 क
कमी क जाए तो भी उनके गुणनफल अप रव तत रह।

प रवतन को शून्य रखकर हल क जए।

(a + 2)(b – 4) = ab

ab – 4a + 2b – 8 = ab

2b = 4a + 8

b = 2a + 4

अथात ऐसा प्रत्येक युग्म चलेगा जसम दूसरी संख्या, पहली क दुगुनी से 4 अ धक हो।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

A B = 2A + 4 AB (A + 2)(B – 4)

1 6 6 3×2=6 ✓
2 8 16 4 × 4 = 16 ✓
3 10 30 5 × 6 = 30 ✓

ऐसा क्य होता है: पहली संख्या 2 बढ़ाने पर 2b का लाभ होता है, दूसरी 4 घटाने पर 4a क हा न, और कोने से 8
क और हा न। गुणनफल तभी अप रव तत रहेगा जब लाभ 2b, हा न 4a + 8 के ठ क बराबर हो।

प्र.4 वस्तार क जए (i) (a + ab – 3b²) (4 + b) और (ii) (4y + 7) (y + 11z – 3)

(i) दूसरे कोष्ठक को खो लए—

(a + ab – 3b²)(4 + b) = 4(a + ab – 3b²) + b(a + ab – 3b²)

= 4a + 4ab – 12b² + ab + ab² – 3b³

= 4a + 5ab + ab² – 12b² – 3b³

(4ab और ab समान पद ह: 4ab + ab = 5ab।)
(ii)

(4y + 7)(y + 11z – 3) = 4y(y + 11z – 3) + 7(y + 11z – 3)
= 4y² + 44yz – 12y + 7y + 77z – 21

= 4y² + 44yz – 5y + 77z – 21

(–12y और 7y समान पद ह: –12y + 7y = –5y।)
(ii) क जाँच y = 1, z = 1 पर: बायाँ पक्ष = 11 × 9 = 99; दायाँ पक्ष = 4 + 44 – 5 + 77 – 21 = 99 ✓

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प्र.5 वस्तार क जए (i) (a – b) (a + b) (ii) (a – b) (a² + ab + b²) और (iii) (a – b)(a³ + a²b + ab² + b³)
क्या इनम आपको कोई प्र तरूप दखाई दे ता है? आपको दखाई दे ने वाले प्र तरूप म अगली सवस मका क्या
होगी? क्या आप इसक जाँच सवस मका को वस्ता रत करके कर सकते ह?

(i) (a – b)(a + b) = a² + ab – ab – b² = a² – b²

(ii) (a – b)(a² + ab + b²)

= a³ + a²b + ab² – a²b – ab² – b³ = a³ – b³

(iii) (a – b)(a³ + a²b + ab² + b³)

= a⁴ + a³b + a²b² + ab³ – a³b – a²b² – ab³ – b⁴ = a⁴ – b⁴

प्र तरूप: (a – b) को उन सभी पद के योग से गुणा करने पर, जनम a और b क घात का योग n – 1 है, a क n घात म से b
क n घात घट हुई प्राप्त होती है। अतः अगली सवस मका होगी—

(a – b)(a⁴ + a³b + a²b² + ab³ + b⁴) = a⁵ – b⁵

प्रसार करके जाँच—

a(a⁴ + a³b + a²b² + ab³ + b⁴) = a⁵ + a⁴b + a³b² + a²b³ + ab⁴

–b(a⁴ + a³b + a²b² + ab³ + b⁴) = –a⁴b – a³b² – a²b³ – ab⁴ – b⁵

जोड़ ने पर: a⁵ – b⁵ ✓

a = 3, b = 2 पर संख्यात्मक जाँच: बायाँ पक्ष = 1 × (81 + 54 + 36 + 24 + 16) = 211; दायाँ पक्ष = 243 – 32 = 211 ✓

ऐसा क्य होता है: बीच का प्रत्येक पद दो बार आता है — एक बार “a” वाले भाग से धन चह्न के साथ और एक
बार “–b” वाले भाग से ऋण चह्न के साथ — अतः पूरा मध्य भाग जोड़ म कट जाता है। केवल पहला पद a·a⁴
और अं तम पद (–b)·b⁴ शेष रहते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 143

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वतरण गुणधम के प्रयोग से शीघ्र गुणन

ग णत चचा

प्र.1 कसी संख्या को 11 से गुणा करने पर एक ही चरण म गुणनफल ात करने के लए नम्न ल खत गुणन का
उपयोग क जए। (i) 3874 × 11 (ii) 5678 × 11

11 को 10 + 1 के रूप म तो ड़ए और वतरण गुणधम लगाइए।

(i) 3874 × 11 = 3874 (10 + 1) = 38740 + 3874 = 42614

(ii) 5678 × 11 = 5678 (10 + 1) = 56780 + 5678 = 62458

(i) म अंक को ध्यान से दे खए। संख्या को dcba = 3874 लखने पर—

38740 dcba0

+ 3874 + dcba

42614 d, (c + d), (b + c), (a + b), a

ऐसा क्य होता है: 10 से गुणा करने पर प्रत्येक अंक एक ान बाईं ओर खसक जाता है। इसके बाद मूल संख्या
जोड़ने पर अंक a, अंक b के नीचे और अंक b, अंक c के नीचे आ जाता है — अतः योग का प्रत्येक स्तंभ पड़ोसी
अंक का युग्म बन जाता है। 3874 के लए: 4, 7 + 4 = 11, 8 + 7 = 15, 3 + 8 = 11, 3 — हा सल लेने पर
42614।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 144
वतरण गुणधम के प्रयोग से शीघ्र गुणन

ग णत चचा

प्र.1 कसी संख्या ( कतने भी अंक क कोई संख्या) को 11 से गुणा करने का सामान्य नयम बताइए तथा गुणनफल
को एक पं क्त म ल खए।

नयम। इकाई का अंक ज्य -का-त्य ल खए। फर बाईं ओर बढ़ते हुए प्रत्येक पड़ोसी अंक-युग्म का योग ल खए। अंत म सबसे बाएँ
वाला अंक ल खए। हा सल सामान्य ढं ग से ली जए।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
… d c b a के िलए—
m l as
इकाई का अंक → a
m .co a g
l a se
g
दहाई का अंक → a + b
aसैकड़ े का अंक → b + c

co m
. ag
हजार का अंक → c + d
e m
अगला अंक → d
g l as
a
गुणनफल = d | (c + d) | (b + c) | (a + b) | a (हािसल सिहत)

co m
em.
as
3874 × 11 के चरण, दाएँ से बाएँ—
m l
.co जोड़े गए अंक a g
a s
चरण
em अब तक लखा

ag 1 l 4 4

m a s
.co agl
2 7 + 4 = 11 → 1 ल खए, 1 हा सल 14

se m
g l
8 + 7 + 1 = 16 → 6 ल खए, 1 हा सल
a
a
3 614

4 3 + 8 + 1 = 12 → 2 ल खए, 1 हा सल 2614

co m
m .
e
5 3+1=4 42614

m l as
.co a
m क्य होता है: N × 11 = N × 10 + N, और एक ान के खसकाव के कारण उस जोड़ का प्रत्येक स्तंभ N
g
a s eऐसा
agl के दो सटे हुए अंक का युग्म बन जाता है। इसम कह भी N के अंक क संख्या का उपयोग नह हुआ, अतः नयम
कसी भी लंबाई क संख्या पर लागू होता है।
se m
com g l a
m . a
ase
प्र.2 agl
गणना क जए— (i) 94 × 11 (ii) 495 × 11 (iii) 3279 × 11 (iv) 4791256 × 11

co m
m .
as e

m l
.co
m (i) 9 | 9 + 4 | 4 = 9 | 13 | 4 → हािसल 1 → 1034 a g
l a se
ag
.c
s e m
m a
. co agl
(ii) 4 | 4 + 9 | 9 + 5 | 5 = 4 | 13 | 14 | 5 → 5445
e m
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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(iii) 3 | 3 + 2 | 2 + 7 | 7 + 9 | 9 = 3 | 5 | 9 | 16 | 9 → 36069

(iv) 4 | 4+7 | 7+9 | 9+1 | 1+2 | 2+5 | 5+6 | 6

= 4 | 11 | 16 | 10 | 3 | 7 | 11 | 6 → 52703816

सामान्य व ध से जाँच: 94 × 11 = 940 + 94 = 1034 ✓; 495 × 11 = 4950 + 495 = 5445 ✓; 3279 × 11 = 32790 +
3279 = 36069 ✓; 4791256 × 11 = 47912560 + 4791256 = 52703816 ✓

संकेत: हा सल दाईं ओर से ली जए, ठ क साधारण जोड़ क तरह — (iii) म 16 से 6 लखकर 1 हा सल 9 म जाता
है, जससे 10 बनता है और आगे फर हा सल जाता है।

प्र.3 कसी संख्या को 101 से गुणा करने के लए भी क्या हम ऐसा ही नयम बना सकते ह?

हाँ — ठ क उसी कारण से।

N × 101 = N (100 + 1) = N × 100 + N

100 से गुणा करने पर प्रत्येक अंक दो ान खसकता है, अतः जोड़ म प्रत्येक स्तंभ पड़ोसी अंक का नह ब ल्क दो ान दूर के
अंक का युग्म बनता है।

ऐसा क्य होता है: 11 के नयम से केवल खसकाव क मात्रा बदली है। जब भी गुणक 10k + 1 के रूप का हो,
नयम बन जाता है “k ान दूर के अंक जो ड़ए”।

प्र.4 3874 को 101 से गुणा क जए।

3874 × 101 = 3874 (100 + 1) = 387400 + 3874 = 391274

dcba = 3874 लेकर स्तंभ-योग के रूप म—

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

387400 dcba00

+ 3874 + dcba

391274 d, c, (b + d), (a + c), b, a

प्र.5 उपयुक्त व्यंजक का प्रयोग 3874 × 101 का मान (गुणनफल) एक पं क्त म ात करने के लए क जए।

अंक प ढ़ए: d = 3, c = 8, b = 7, a = 4 और प्र तरूप d | c | (b + d) | (a + c) | b | a लगाइए।

3 | 8 | (7 + 3) | (4 + 8) | 7 | 4

= 3 | 8 | 10 | 12 | 7 | 4

हािसल: 12 → 2 िलिखए, 1 हािसल; 10 + 1 = 11 → 1 िलिखए, 1 हािसल; 8 + 1 = 9

= 391274

जाँच: 387400 + 3874 = 391274 ✓

प्र.6 कसी संख्या को 101 से एक ही पं क्त म गुणा करने और गुणनफल को लखने का सामान्य नयम क्या हो सकता
है? 1001, 10001......... से गुणा करने के लए इस नयम का वस्तार क जए।

101 से: अं तम दो अंक ज्य -के-त्य ल खए, फर आगे प्रत्येक ान पर उस ान के अंक और उससे दो ान दाईं ओर के अंक
का योग ल खए; अंत म सबसे बाएँ के दो अंक। संकेत रूप म dcba × 101 = d | c | (b + d) | (a + c) | b | a।
1001 से: खसकाव तीन ान का है, अतः तीन ान दूर के अंक जुड़ते ह—

dcba × 1001 = dcba (1000 + 1) = dcba000 + dcba

= d | c | b | (a + d) | c | b | a

10001 से: खसकाव चार ान का है। चार अंक क संख्या dcba के लए दोन प्र तयाँ आपस म मलती ही नह —

dcba × 10001 = dcba0000 + dcba = dcba dcba

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक त म गुणक 10k + 1 है, अतः गुणनफल “संख्या को k ान खसकाकर” और
“संख्या” जोड़ने से बनता है। दोन प्र तयाँ कतनी ढकती ह, यह केवल इस पर नभर है क k, संख्या के अंक क
तुलना म कतना बड़ा है।

संकेत: यही वचार 10k – 1 पर भी चलता है। 99 = 100 – 1 और 999 = 1000 – 1 ह, अतः N × 99 = N00
– N तथा N × 999 = N000 – N।

प्र.7 उपयुक्त नयम का प्रयोग करके नम्न ल खत का गुणनफल ात क जए। (i) 89 × 101 (ii) 949 × 101 (iii)
265831 × 1001 (iv) 1111 × 1001 (v) 9734 × 99 (vi) 23478 × 999

(i) 89 × 101 = 8900 + 89 = 8989 (दो अंक ों की संख्या दोहरा जाती है)

(ii) 949 × 101 = 94900 + 949 = 95849

अंक -िनयम से: 9 | 4 | (9 + 9) | 4 | 9 = 9 | 4 | 18 | 4 | 9 → 95849 ✓

(iii) 265831 × 1001 = 265831000 + 265831 = 266096831

(iv) 1111 × 1001 = 1111000 + 1111 = 1112111

(v) 9734 × 99 = 9734 (100 – 1) = 973400 – 9734 = 963666

(vi) 23478 × 999 = 23478 (1000 – 1) = 23478000 – 23478 = 23454522

क्या आप जानते ह? ब्रह्मगुप्त (628 सामान्य संवत्) ने इन व धय को इष्टगुणन कहा — “अपनी इ ाक
(सु वधाजनक) संख्या से गुणन”। ीधराचाय (750 सामान्य संवत्) और भास्कराचाय (लीलावती, 1150 सामान्य
संवत्) ने भी इनक चचा क है। इनम से प्रत्येक व ध वतरण गुणधम ही है — गुणक को ऐसे भाग म तो ड़ए जन
पर काम करना सरल हो।

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 145
6.2 वतरण गुणधम क वशेष तयाँ — दो संख्याओं के योग का वग

ग णत चचा

प्र.1 60 इकाई भुजा वाले एक वग का ेत्रफल 3600 वग इकाई (60²) है और 5 इकाई भुजा वाले एक वग का ेत्रफल
25 वग इकाई (5²) है। क्या हम इसका उपयोग करके 65 इकाई भुजा वाले वग का ेत्रफल ात कर सकते ह?

हाँ, परंतु केवल 3600 + 25 पयाप्त नह — दो आयत छू ट जाते ह।

65² = (60 + 5)² = 60² + 5² + 2 × (60 × 5)

= 3600 + 25 + 600
= 4225 वग इकाई

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as e
कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
m l as
.co 60 a g 5
a sem
agl

co m
e m . ag
g l as
a
m
60² = 3600 m .co
60
a se
300
.com a g l
m
ase
agl
m a s
m .co agl
l a se
a g

co m
5 60 × 5 = 300 m .
25
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
. a
65 भुजा वाला वग — 60 का वग, 5 का वग और 60 × 5 के दो आयत।
m
ase
वतरण गुणधम से वही बात— agl

co m
(60 + 5)(60 + 5) = 60 × 60 + 5 × 60 + 60 × 5 + 5 × 5
m .
m as e
.co
= 60² + 2 × (60 × 5) + 5²
a g l
se m
g l a
a c
ऐसा क्य होता है: वग को दोन दशाओं म बढ़ाने पर दाईं ओर एक प , नीचे एक प , और जहाँ दोन प याँ
m .
m a s e
co agl
मलती ह वहाँ छोटा-सा कोने का वग जुड़ता है। ये दो प याँ ही “2ab” ह; इन्ह भूल जाना इस अध्याय क सबसे

m .
e
आम त्रु ट है।

g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 द गई आकृ त म क्या आप चार भाग का ेत्रफल ात कर सकते ह?

60 5

60 × 5
60 60²

5 5 × 60 5²

पृष्ठ 145 — 65 भुजा वाले वग को चार भाग म बाँटा गया है, प्रत्येक भुजा पर 60 + 5।

भाग वमाएँ ेत्रफल (वग इकाई)

बड़ा वग 60 × 60 3600

दाईं ओर का आयत 60 × 5 300

नीचे का आयत 5 × 60 300

छोटा वग 5×5 25

कु ल 65 × 65 4225

3600 + 300 + 300 + 25 = 4225 ✓

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 य द हम 65² को (30 + 35)² या (52 + 13)² लख तब क्या होगा? आकृ तयाँ बनाइए और प्राप्त ेत्रफल क
जाँच क जए।

60 5

60 × 5
60 60²

5 5 × 60 5²

पृष्ठ 145 क हल क गई आकृ त — 65 भुजा वाले वग को 60 + 5 के रूप म बाँटा गया है।

कटाव क जगह बदल जाती है, पर चार टु कड़ का योग फर भी 4225 ही रहता है।

(30 + 35)² = 30² + 35² + 2 × (30 × 35)

= 900 + 1225 + 2100 = 4225 ✓

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(52 + 13)² = 52² + 13² + 2 × (52 × 13)

= 2704 + 169 + 1352 = 4225 ✓

30 35

900 1050

1050 1225

65² को (30 + 35)² के रूप म काटने पर चार क्षेत्रफल 900, 1050, 1050 और 1225 — कुल 4225।

ऐसा क्य होता है: वग का क्षेत्रफल एक ही है, चाहे उसे कैसे भी का टए। इसी लए प्रत्येक वभाजन एक भन्न
दखने वाला योग दे ता है पर कुल वही रहता है — और यही कारण है क (a + b)² = a² + 2ab + b² केवल 60
और 5 के लए नह , सभी a और b के लए सत्य है।

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प्र.4 य द a और b कोई दो पूणाक ह तो क्या (a + b)² का मान a² + b² से सदै व बड़ा ही होगा? य द नह तो यह कब
बड़ा होगा?

नह , सदै व नह । दोन का अंतर मध्य पद है।

(a + b)² – (a² + b²) = 2ab

त 2AB नष्कष

a, b एक ही िचह्न के (दोनों धन या दोनों ऋण) धनात्मक (a + b)² > a² + b²

a = 0 या b = 0 शून्य (a + b)² = a² + b²

a, b िवपरीत िचह्नों के ऋणात्मक (a + b)² < a² + b²

उदाहरण: a = 3, b = 4 → 49 > 25। a = –3, b = –4 → 49 > 25। a = 3, b = –4 → 1 < 25। a = 5, b = 0 → 25 =
25।

ऐसा क्य होता है: पूण संख्याओं के लए ab क्षेत्रफल का आयत सचमुच दो बार उप त रहता है, अतः योग का
वग बड़ा होना ही चा हए। जब चह्न भन्न होते ह तब वही दोन आयत ऋण चह्न के साथ आते ह और कुल को घटा
दे ते ह।

प्र.5 104², 37² का मान ात करने के लए सवस मका 1A का उपयोग क जए। (संकेत— 104 और 37 को उन
संख्याओं के योग या अंतर म वघ टत क जए जनके वग क गणना करना सरल हो।)

104² = (100 + 4)²

= 100² + 2 × 100 × 4 + 4²

= 10000 + 800 + 16

= 10816

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
37² = (30 + 7)²
m l as
.co
= 900 + 2 × 30 × 7 + 49
m a g
l a se
g
= 900 + 420 + 49
a= 1369

com
m . ag
l a se
agजसम दोन वग सबसे सरल बन।
स्वयं जाँ चए: 37 को 40 – 3 भी लखा जा सकता है, जसके लए सवस मका 1B चा हए: 1600 – 240 + 9 =
1369 — वही उत्तर। वही वभाजन चु नए

co m
em.
पाठ्य प्रश्न —oपृm
c g l as
. a
ष्ठ 146
s e m
gla
6.2 वतरण गुणधम क वशेष तयाँ — सवस मका 1A

a
s
सवस मका 1A का उपयोग करके नम्न ल खत के लए व्यंजक ल खए? (i) (m + 3)² (ii) (6 + p)²
m a
.co agl
प्र.1

se m
g l a
a

सवस मका 1A: (a + b)² = a² + 2ab + b²।

co m
m .
(i) (m + 3)² में a = m, b = 3
as e
. co+m2 × m × 3 + 3² a g l
sem
= m²
a = m² + 6m + 9
agl
se m
com g l a
m . a
ase
(ii) (6 + p)² में a = 6, b = p

= 6² + 2 × 6 × p + p²
agl
= 36 + 12p + p²
co m
m .
m as e
.co l
(i) क जाँच m = 4 पर: 7² = 49 और 16 + 24 + 9 = 49 ✓
a g
se m
g l a
a c
m .
e
(6x + 5)² का वस्ता रत रूप ल खए।
s
प्र.2

m a
e m . co agl
l as

वतरण गुणधम का प्रयोग
a g

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 29 of 82

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(6x + 5)² = (6x + 5)(6x + 5)

= (6x × 6x) + (5 × 6x) + (6x × 5) + 5 × 5

= (6x)² + 2 (6x × 5) + 5²
= 36x² + 60x + 25

सवस मका का प्रयोग

(6x + 5)² = (6x)² + 5² + 2 × (6x × 5)

= 36x² + 25 + 60x

x = 1 पर जाँच: 11² = 121 और 36 + 60 + 25 = 121 ✓

संकेत: य द सवस मका स्मरण न रहे तो दोन कोष्ठक का सीधा गुणा कर ली जए। सवस मका वतरण गुणधम का
सं क्षप्त रूप है, उसका वकल्प नह ।

प्र.3 सवस मका और वतरण गुणधम दोन का उपयोग करके (3j + 2k)² को वस्ता रत क जए।

सवस मका 1A से, a = 3j तथा b = 2k लेकर—

(3j + 2k)² = (3j)² + 2(3j)(2k) + (2k)²

= 9j² + 12jk + 4k²

वतरण गुणधम से

(3j + 2k)(3j + 2k) = 3j(3j + 2k) + 2k(3j + 2k)

= 9j² + 6jk + 6jk + 4k²

= 9j² + 12jk + 4k²

j = 1, k = 1 पर जाँच: 5² = 25 और 9 + 12 + 4 = 25 ✓

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ऐसा क्य होता है: सवस मका 1A म a और b पूरे पद ह, केवल अकेले अक्षर नह । यहाँ a = 3j है, अतः a² =
(3j)² = 9j² और मध्य पद 2 × 3j × 2k = 12jk।

प्र.4 क्या हम 60² (= 3600) और 5² (= 25) का उपयोग करके (60 – 5)² अथवा 55² का मान ात कर सकते ह?

हाँ। 60 इकाई भुजा वाले वग के भीतर 55 इकाई भुजा का वग बनाइए।
60² म से दो 60 × 5 के आयत घटाइए। ऐसा करने पर 5 × 5 का छोटा कोना दो बार घट जाता है, अतः उसे एक बार वापस
जो ड़ए।

(60 – 5)² = 60² – (60 × 5) – (5 × 60) + 5²
= 3600 – 300 – 300 + 25

= 3025 वग इकाई

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60

55² = 3025 300

300

दो बार घटा

5 × 5 का कोना दोन घटाई गई प य म है, अतः उसे एक बार पुनः जोड़ना पड़ता है।

ऐसा क्य होता है: दोन प याँ एक-दूसरे को ढकती ह। उन्ह एक के बाद एक घटाने से ढका हुआ भाग दो बार घट
जाता है, और सवस मका 1B का “+ b²” ठ क इसी क मरम्मत है। जाँच: 55 × 55 = 3025 ✓

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 147

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6.2 वतरण गुणधम क वशेष तयाँ — सवस मका 1B

प्र.1 हमने दे खा क (a + b)² का वस्तार करने पर हम क्या प्राप्त होता है। (a – b)² का वस्ता रत रूप क्या है?

कोष्ठक को उसी से गुणा क जए और वतरण गुणधम लगाइए।

(a – b)² = (a – b) × (a – b)

= a² – ba – ab + b²

= a² – 2ab + b²

सवसिमका 1B: (a – b)² = a² + b² – 2ab

a = 9, b = 4 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 5² = 25; दायाँ पक्ष = 81 + 16 – 72 = 25 ✓

ऐसा क्य होता है: चार गुणनफल a·a, a·(–b), (–b)·a और (–b)(–b) ह। इनम दो –ab ह, जनसे –2ab
बनता है; अं तम +b² है क्य क ऋणात्मक × ऋणात्मक = धनात्मक। यह पृष्ठ 146 के चत्र का ही बीजग णतीय रूप
है — दो प याँ घटाइए, कोना वापस जो ड़ए।

प्र.2 (a – b)² का वस्तार ात करने के लए हम (a + b)² के वस्तार का उपयोग भी कर सकते ह। वचार क जए
क कैसे? संकेत— (a – b)² = (a + (–b))²

घटाना, वपरीत संख्या को जोड़ना ही है, अतः सवस मका 1A इसे पहले से ही सँभाल लेती है।

(a – b)² = (a + (–b))²

= a² + (–b)² + 2 × a × (–b)

= a² + b² – 2ab

इसम केवल दो बात प्रयोग हुईं — (–b)² = b² और a × (–b) = –ab।

ऐसा क्य होता है: सवस मका 1A कन्ह भी संख्याओं a और b के लए सद्ध क गई थी, अतः b के ान पर –b
रखने क पूरी छू ट है। पहली सवस मका से प्र त ापन ारा दूसरी नकाल लेना — नए सरे से आरंभ कए बना —
बीजग णत क एक बड़ी बचत है।

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
ज्या म त का उपयोग करके 55² क भाँ त (a – b)² का वस्ता रत रूप ल खए।
e
प्र.3

m l as
.co a g
a s em
a जlा का एक वग बनाइए। उसके एक कोने म (a – b) भुजा का वग अं कत क जए।
a भुg

co m
. ag
बड़ े वग का क्षेत्रफल = a²
em
दाईं ओर की प ी घटाइए: a × b
g l as
नीचे की प ी घटाइए: b × a
a

co m
m.
b × b का कोना दो बार घट चुक ा है, अतः उसे वापस जोिड़ ए—

m as e
.co
(a – b)² = a² – ab – ba + b² = a² – 2ab + b²
a g l
se m
g l a
a
a s
.acom b agl
m
ase
agl

co m
m .
ase
. com a g l
a s em
agl a (a – b)² b(a–b)
se m
com g l a
m . a
ase
agl

co m
m .
e
.co
m b(a – b)
ag las
b²
a sem
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 34 of 82

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a भुजा का वग (a – b)², b(a – b) क दो प य और b² के कोने म बँटता है। चूँ क 2b(a – b) + b² = 2ab – b², छायां कत वग a²
– 2ab + b² है।

चत्र को उलटा प ढ़ए: a² = (a – b)² + 2b(a – b) + b², और 2b(a – b) = 2ab – 2b² रखने पर पुनः (a – b)² = a² – 2ab
+ b² मलता है।

प्र.4 सवस मका (a – b)² का उपयोग करके (a) 99² और (b) 58² का मान ात क जए।

(a) 99² = (100 – 1)²

= 100² + 1² – 2 × 100 × 1

= 10000 + 1 – 200

= 9801

(b) 58² = (60 – 2)²

= 60² + 2² – 2 × 60 × 2

= 3600 + 4 – 240

= 3364

संकेत: ऐसा वभाजन खो जए जो “एक गोल संख्या म से एक छोट संख्या” का हो। 99 या 58 का वग सीधे
नकालने म पूरा गुणा करना पड़ता है; इस व ध म केवल दो सरल वग और एक दुगुना करना है।

प्र.5 सवस मका 1B और वतरण गुणधम दोन का उपयोग करके नम्न ल खत का वस्तार क जए। (i) (b – 6)² (ii)
(–2a + 3)² (iii) (7y – 3⁄4 z)²

(i) (b – 6)²

सवसिमका 1B: b² + 6² – 2 × b × 6 = b² – 12b + 36

िवतरण गुणधम: (b – 6)(b – 6) = b² – 6b – 6b + 36 = b² – 12b + 36 ✓

(ii) (–2a + 3)² — इसे (3 – 2a)² प ढ़ए

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सवसिमका 1B: 3² + (2a)² – 2 × 3 × 2a = 4a² – 12a + 9

िवतरण गुणधम: (–2a + 3)(–2a + 3) = 4a² – 6a – 6a + 9 = 4a² – 12a + 9 ✓

(iii) (7y – 3⁄4 z)²

सवसिमका 1B: (7y)² + (3⁄4 z)² – 2 × 7y × 3⁄4 z

= 49y² – 21⁄2 yz + 9⁄16 z²

िवतरण गुणधम: 7y(7y – 3⁄4 z) – 3⁄4 z(7y – 3⁄4 z)

= 49y² – 21⁄4 yz – 21⁄4 yz + 9⁄16 z² = 49y² – 21⁄2 yz + 9⁄16 z² ✓

(ii) क जाँच a = 1 पर: (–2 + 3)² = 1 और 4 – 12 + 9 = 1 ✓

संकेत: (ii) म वग करने से पूरे कोष्ठक का चह्न नरथक हो जाता है — (–2a + 3)² और (2a – 3)² बराबर ह,
क्य क (–x)² = x²।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 148
जाँच प्र तरूप — प्र तरूप 1 और प्र तरूप 2

प्रयास क जए

प्र.1 प्राकृत संख्याओं का एक युग्म ली जए। इनके वग का योगफल ात क जए। क्या आप इस योग को दो वग के
योग के रूप म लख सकते ह? इसे अन्य संख्याओं के युग्म के साथ ात करने का प्रयास क जए। क्या आपने
कसी प्र तरूप का पता लगाया?

हाँ — और वे दोन नए वग, युग्म के योग और अंतर से बनते ह।

युग्म A, B A² + B² 2(A² + B²) (A + B)² + (A – B)²

2, 1 5 10 3² + 1² = 10 ✓
3, 1 10 20 4² + 2² = 20 ✓
5, 3 34 68 8² + 2² = 68 ✓
6, 5 61 122 11² + 1² = 122 ✓
7, 4 65 130 11² + 3² = 130 ✓

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प्र तरूप: 2(a² + b²) = (a + b)² + (a – b)²।

प्र.2 क्या नीचे द गई सवस मकाएँ उपयुक्त प्र तरूप को समझाने म सहायक ह? [(a + b)² = a² + 2ab + b² और
(a – b)² = a² – 2ab + b²]

हाँ — इन्ह जोड़ते ही प्र तरूप एक पं क्त म सद्ध हो जाता है।

(a + b)² + (a – b)² = (a² + 2ab + b²) + (a² – 2ab + b²)

समान पद को जो ड़ए: a² + a² = 2a², b² + b² = 2b², और 2ab – 2ab = 0।

2(a² + b²) = (a + b)² + (a – b)²

a = 6, b = 5 पर जाँच: 2(36 + 25) = 122 और 11² + 1² = 122 ✓

ऐसा क्य होता है: दोन मध्य पद बराबर ह पर चह्न वपरीत, अतः वे एक-दूसरे को समाप्त कर दे ते ह। दोन
सवस मकाओं को जोड़ना, दोन वग- चत्र को जोड़ने जैसा है — एक क प याँ दूसरे के रक्त ान ठ क भर दे ती
ह।

क्या आप जानते ह? प्रमाण म केवल दो सवस मकाओं का उपयोग हुआ है, इस लए यह ऋणात्मक संख्याओं और
भन्न पर भी लागू है। a = 1⁄2, b = 1⁄3 ली जए: 2(1⁄4 + 1⁄9) = 13⁄18, और (5⁄6)² + (1⁄6)² = 25⁄36 + 1⁄36
= 26⁄36 = 13⁄18 ✓

प्र.3 यहाँ एक संबं धत प्र तरूप दया गया है। बीजग णत का उपयोग करके इस प्र तरूप क व्याख्या करने का प्रयास
यह नधा रत करने के लए क जए क क्या यह प्र तरूप सदै व लागू होता है? [9 × 9 – 1 × 1 = 10 × 8; 8 × 8 –
6 × 6 = 14 × 2; 7 × 7 – 2 × 2 = 9 × 5; 10 × 10 – 4 × 4 = 14 × 6]

प्रत्येक पं क्त को दो वग के अंतर के रूप म प ढ़ए और दाईं ओर क संख्याओं को दे खए।

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पं क्त A, B A+B A–B

9² – 1² = 10 × 8 9, 1 10 8

8² – 6² = 14 × 2 8, 6 14 2

7² – 2² = 9 × 5 7, 2 9 5

10² – 4² = 14 × 6 10, 4 14 6

अतः अनुमान है a² – b² = (a + b)(a – b)। प्रसार करने पर बात तय हो जाती है—

(a + b)(a – b) = a² – ab + ba – b²

ab + (–ab) = 0, अतः

सवसिमका 1C: (a + b)(a – b) = a² – b²

यह एक स ी सवस मका है, इस लए यह प्र तरूप सदै व लागू होता है। आप यह सवस मका पूव म ही ‘आइए, पता लगाएँ 5 (i)’ म
दे ख चुके थे।

ऐसा क्य होता है: प्र तरूप 1 क भाँ त यहाँ भी बीच के दोन गुणनफल बराबर ह पर चह्न वपरीत, अतः कट जाते
ह। इसी कारण दो वग का अंतर सदा एक गुणनफल म बदला जा सकता है — और इसी से 397 × 403 या 45 ×
55 इतने शीघ्र हो जाते ह।

प्र.4 सवस मका 1C का उपयोग करके 98 × 102 और 45 × 55 क गणना क जए।

दोन संख्याओं के ठ क बीच वाली संख्या खो जए।

98 × 102 = (100 – 2)(100 + 2)

= 100² – 2²

= 10000 – 4 = 9996

45 × 55 = (50 – 5)(50 + 5)

= 50² – 5²

= 2500 – 25 = 2475

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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
संकेत: यह व ध तब चलती है जब दोन संख्याएँ कसी गोल संख्या से बराबर दूरी पर ह । वह मध्य संख्या a है और
उनके अंतर का आधा b।
m as e
.co a g l
se m
g l a
a ज्या मतीय रूप से दशाइए क (a + b) × (a – b) = a² – b² है।
प्र.5

com
m . ag
l a se
a भुजा के वग से आरंभ क जए और एक कोनेaसेgb भुजा का वग काट द जए। बचा हुआ क्षेत्रफल a² – b² है और उसका आकार
अं ेज़ी के L जैसा है।

co m
m.
इस L को दो आयत म का टए और एक को खसकाकर दूसरे के साथ लगाइए—

o m
आयत 1: चौड़ाई a, ऊँचाई (a – b)
l a se
.cचौड़ाई b, ऊँचाई (a – b) a g
m
se2 को आयत 1 के बगल म रखने पर (a + b) चौड़ा और (a – b) ऊँचा एक ही आयत बन जाता है।
आयत 2:

g l a
a आयत

m a s
m .co agl
a
l a se
a g
a+b

co m
m .
e
a × (a – b)
m – sb)
a × (a a
.co agl
a–b
→
se m
g l a
a
(a–b) × b कटा हुआ
se m
com g l a
m . a
ase
agl
m
a² – b² क्षेत्रफल वाले L आकार के भाग को काटकर (a + b) × (a – b) का एक आयत बनाया गया है।

. co
em
m l as
m .a²co– b² = L का क्षेत्रफल = (a + b)(a – b) a g
l a se
ag
.c
ऐसा क्य होता है: काटने और खसकाने से क्षेत्रफल कभी नह बदलता। दोन आयत क ऊँचाई एक ही (a – b)
s e m
m a
. co agl
है, अतः वे ठ क-ठ क साथ बैठ जाते ह और उनक चौड़ाइयाँ a तथा b मलकर a + b बनाती ह।
e m
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 39 of 82

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 149
जाँच प्र तरूप — ीधराचाय क व ध

प्र.1 यह सवस मका सत्य क्य है? [a² = (a + b) (a – b) + b²]

यह सवस मका 1C का ही पुन व त रूप है। आरंभ क जए—

(a + b)(a – b) = a² – b²

दोन पक्ष म b² जो ड़ए—

(a + b)(a – b) + b² = a² – b² + b²
a² = (a + b)(a – b) + b²

इससे वग नकालने का काम, दो सरल संख्याओं के गुणा म बदल जाता है।

वग B का चयन हल उत्तर

31² b=1 32 × 30 + 1 961

197² b=3 200 × 194 + 9 38809

48² b=2 50 × 46 + 4 2304

ऐसा क्य होता है: b ऐसा चु नए क a + b (अथवा a – b) 10 का गुणज बन जाए। तब क ठन वग के बदले एक
सरल गुणनफल और एक बहुत छोटा वग रह जाता है। ीधराचाय (750 सामान्य संवत्) ने ठ क यही व ध द थी।

आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 149
जाँच प्र तरूप

ग णत चचा

प्र.1 कौन-सा व्यंजक बड़ा है— (a – b)² अथवा (b – a)²? अपने उत्तर क पु क जए।

कोई नह — दोन सदै व बराबर ह।

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b – a = –(a – b)

अतः (b – a)² = (–(a – b))² = (a – b)²

अथवा दोन का प्रसार करके तुलना क जए—

(a – b)² = a² – 2ab + b²

(b – a)² = b² – 2ba + a² = a² – 2ab + b²

दोन प्रसार एक ही ंजक ह, अतः प्रत्येक a और b के लए दोन बराबर ह।
a = 3, b = 7 पर जाँच: (3 – 7)² = 16 और (7 – 3)² = 16 ✓

ऐसा क्य होता है: वग करने पर चह्न क जानकारी नष्ट हो जाती है — (–x)² = x²। जो दो संख्याएँ केवल चह्न म
भन्न ह उनके वग सदा समान होते ह, और a – b तथा b – a केवल चह्न म ही भन्न ह।

प्र.2 100 को दो वग के अंतर के रूप म व्यक्त क जए।

सवस मका 1C को उलटकर प्रयोग क जए: a² – b² = (a + b)(a – b), अतः 100 के ऐसे दो गुणनखंड चा हए जनका गुणनफल
100 हो।

a + b = पहला गुणनखंड, a – b = दू सरा गुणनखंड

a और b पूण संख्याएँ तभी बने ंगी जब दोनों गुणनखंड एक ही पकार के हों

(उनका योग 2a और अंत र 2b, दोनों सम होने चािहए)

100 के गुणनखंड-युग्म दोन सम? A, B प रणाम

50 × 2 हाँ ✓ a = 26, b = 24 26² – 24² = 676 – 576 = 100

10 × 10 हाँ ✓ a = 10, b = 0 10² – 0² = 100

100 × 1, 20 × 5, 25 × 4 नह ✗ — पूण संख्या म उत्तर नह

100 = 26² – 24² (तथा साधारण रूप में 100 = 10² – 0²)

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ऐसा क्य होता है: a + b = m और a – b = n से a = (m + n)⁄2 तथा b = (m – n)⁄2 मलता है। ये पूण
संख्याएँ तभी ह गी जब m और n दोन सम ह या दोन वषम। 100 सम है, अतः केवल 50 × 2 और 10 × 10
वाले वभाजन ही बचते ह।

प्र.3 अब तक सीखी गई सवस मकाओं का उपयोग करके 406², 72², 145², 1097² और 124² का मान ात
क जए।

406² = (400 + 6)² — सवसिमका 1A

= 160000 + 2 × 400 × 6 + 36

= 160000 + 4800 + 36 = 164836

72² = (70 + 2)² — सवसिमका 1A

= 4900 + 280 + 4 = 5184

145² = (150 – 5)² — सवसिमका 1B

= 22500 + 25 – 1500 = 21025

1097² = (1100 – 3)² — सवसिमका 1B

= 1210000 + 9 – 6600 = 1203409

124² = (120 + 4)² — सवसिमका 1A

= 14400 + 960 + 16 = 15376

स्वयं जाँ चए: 145² ीधराचाय क व ध से भी नकलता है: 145² = 150 × 140 + 5² = 21000 + 25 =
21025 ✓

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प्र.4 क्या प्र तरूप 1 और 2 केवल गणन क संख्याओं के लए ही मान्य ह? क्या ये ऋणात्मक पूणाक के लए भी लागू
होते ह? भन्न के वषय म इन प्र तरूप के लए क्या कहा जा सकता है? अपने उत्तर क पु क जए।

ये सभी के लए मान्य ह। दोन प्र तरूप कोष्ठक का प्रसार करके सद्ध हुए थे, और प्रसार म केवल वतरण गुणधम तथा
क्रम व नमेयता का उपयोग होता है — जन्ह पूणाक और भन्न भी उतना ही मानते ह जतना गणन क संख्याएँ।
प्र तरूप 1: 2(a² + b²) = (a + b)² + (a – b)²

A, B 2(A² + B²) (A + B)² + (A – B)²

–3, –5 2(9 + 25) = 68 (–8)² + 2² = 68 ✓
–4, 6 2(16 + 36) = 104 2² + (–10)² = 104 ✓
1⁄2, 1⁄3 2(1⁄4 + 1⁄9) = 13⁄18 (5⁄6)² + (1⁄6)² = 13⁄18 ✓

प्र तरूप 2: a² – b² = (a + b)(a – b)

A, B A² – B² (A + B)(A – B)

–7, 3 49 – 9 = 40 (–4)(–10) = 40 ✓
2⁄3, 1⁄3 4⁄9 – 1⁄9 = 1⁄3 1 × 1⁄3 = 1⁄3 ✓

ऐसा क्य होता है: प्रमाण म कह यह नह कहा गया क “a गणन क संख्या है”। एक बार कोई कथन केवल
अंकग णत के नयम से सद्ध हो जाए तो वह हर उस संख्या-पद्ध त म सत्य रहता है जहाँ वे नयम लागू ह — यही
सवस मका को जाँचे हुए उदाहरण क सूची से कह अ धक श क्तशाली बनाता है।

त्रु ट को पहचान कर सुधा रए — पृष्ठ 150
6.3 त्रु ट को पहचान कर सुधा रए — (i) प्रत्येक सरलीकरण क जाँच क जए, (ii) त्रु ट क व्याख्या क जए, (iii) सही व्यंजक ल खए

प्र.1 –3p (–5p + 2q) = –3p + 5p – 2q = p – 2q

त्रु ट है। गुणनखंड –3p से कोष्ठक के पद को गुणा कया ही नह गया — केवल उसका चह्न दोन पद पर फैला दया गया।

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as e
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co m
e m.
–3p (–5p + 2q) = (–3p)(–5p) + (–3p)(2q)
m l as
= 15p² – 6pq
m .co a g
l a se
g
सही: 15p² – 6pq
a
m
p = 1, q = 1 पर जाँच: –3(–5 + 2) = 9 और 15 – 6 = 9 ✓ (छपे उत्तर p – 2q से –1 मलता है ✗)

. co ag
se m
l a
बाहरी गुणनखंड से गुणा करना है, अक्षर aसgहत; केवल चह्न लगा दे ना पयाप्त नह ।
ऐसा क्य होता है: वतरण गुणधम कहता है a(b + c) = ab + ac — कोष्ठक के भीतर के प्रत्येक पद को पूरे

co m
em.
m l as
.co a g
2(x – 1) + 3 (x + 4) = 2x – 1 + 3x + 4 = 5x + 3
m
प्र.2

l a se
g
a उत्तर
m a s
agl
त्रु ट है। 2 और 3 से प्रत्येक कोष्ठक के केवल पहले पद को गुणा कया गया, दूसरे को नह ।

m .co
l a se
2(x – 1) + 3(x + 4) = 2x – 2 + 3x + 12
a g
= 5x + 10

co m
m .
m
x = 1 पर जाँच: 2(0) + 3(5) = 15 और 5 + 10 = 15 ✓ (छपे उत्तर से 8 मलता है ✗)
as e
.co a g l
a s eसंmकेत: वतरण करते समय पद ग नए — दो पद वाले कोष्ठक से दो गुणनफल बनने ही चा हए।
agl
se m
com g l a
m . a
ase
प्र.3 y + 2 (y + 2) = (y + 2)² = y² + 4y + 4

agl

co m
.
त्रु ट है। y + 2(y + 2) एक योग है, गुणनफल नह ; “y” और “2” को गलती से एक गुणनखंड (y + 2) मान लया गया।

em
m l as
m .yco+ 2(y + 2) = y + 2y + 4 a g
l a se
ag = 3y + 4
.c
s e m
m a
. co agl
y = 1 पर जाँच: 1 + 2(3) = 7 और 3 + 4 = 7 ✓ (छपे उत्तर से 9 मलता है ✗)

e m
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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ऐसा क्य होता है: y + 2(y + 2) म पहले 2 से गुणा होता है, अकेला y बाद म जुड़ता है। इसे (y + 2) × (y + 2)
पढ़ लेने से सं क्रयाओं का क्रम ही बदल जाता है।

प्र.4 (5m + 6n)² = 25m² + 36n²

त्रु ट है। मध्य पद छू ट गया — योग का वग करना, प्रत्येक भाग का वग करना नह है।

(5m + 6n)² = (5m)² + 2(5m)(6n) + (6n)²

= 25m² + 60mn + 36n²

m = 1, n = 1 पर जाँच: 11² = 121 और 25 + 60 + 36 = 121 ✓ (छपे उत्तर से 61 मलता है ✗)

ऐसा क्य होता है: पृष्ठ 145 के क्षेत्रफल- चत्र म दोन वग के बीच 5m × 6n के दो आयत बैठे ह। इन्ह छोड़ दे ना
वैसा ही है जैसे 11 भुजा के वग को केवल 5 और 6 के वग का योग मान लेना।

प्र.5 (– q + 2)² = q² – 4q + 4

कोई त्रु ट नह — यह सही है।

(–q + 2)² = (–q)² + 2(–q)(2) + 2²

= q² – 4q + 4 ✓

q = 3 पर जाँच: (–3 + 2)² = 1 और 9 – 12 + 4 = 1 ✓

संकेत: (–q + 2) और (q – 2) केवल चह्न म भन्न ह, अतः उनके वग समान ह — जो रूप सरल लगे उसी का
प्रसार क जए।

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प्र.6 3a (2b × 3c) = 6ab × 9ac = 54a²bc

त्रु ट है। वतरण गुणधम योग पर गुणन का है। यहाँ कोष्ठक के भीतर गुणनफल है, योग नह , अतः वतरण कया ही नह जा सकता।

3a (2b × 3c) = 3a × 6bc

= 18abc

a = b = c = 1 पर जाँच: 3 × (2 × 3) = 18 और 18abc = 18 ✓ (छपे उत्तर से 54 मलता है ✗)

ऐसा क्य होता है: 3a को दोन गुणनखंड म लख दे ने से 3a से दो बार गुणा हो जाता है। तुलना क जए: 2 × (3
× 4) = 24 है, न क (2 × 3) × (2 × 4) = 48।

प्र.7 1⁄2 (10s – 6) + 3 = 5s – 3 + 3 = 5s

कोई त्रु ट नह — यह सही है।

1⁄2 (10s – 6) + 3 = 5s – 3 + 3

= 5s ✓

s = 2 पर जाँच: 1⁄2 (20 – 6) + 3 = 7 + 3 = 10 और 5 × 2 = 10 ✓

संकेत: कोष्ठक के दोन पद को आधा कया गया और बाहर का “+3” अछू ता छोड़ा गया — बलकुल ठ क।

प्र.8 5w² + 6w = 11w²

त्रु ट है। w² और w समान पद नह ह, अतः उनके गुणांक जोड़े नह जा सकते।

5w² + 6w पहले से ही सरलतम रूप में है।

(चाहे ं तो गुणनखंड कर लीिजए: 5w² + 6w = w(5w + 6)।)

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w = 2 पर जाँच: 20 + 12 = 32, जब क 11w² = 44 ✗

ऐसा क्य होता है: पद को जोड़ना वतरण गुणधम को उलटा पढ़ना है: 5w² + 6w² = (5 + 6)w²। इसके लए
दोन पद का अक्षर-भाग समान होना चा हए। यहाँ एक म w × w है और दूसरे म केवल w।

प्र.9 2a³ + 3a³ + 6a²b + 6ab² = 5a³ + 12a²b²

त्रु ट है। 2a³ और 3a³ को जोड़ना ठ क था, परंतु 6a²b और 6ab² समान पद नह ह और उन्ह गलती से 12a²b² बना दया गया।

2a³ + 3a³ = 5a³ ✓

6a²b + 6ab² को जोड़ ा नही ं जा सकता

सही: 5a³ + 6a²b + 6ab²

a = 1, b = 2 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 2 + 3 + 12 + 24 = 41; सही रूप = 5 + 12 + 24 = 41 ✓ (छपे उत्तर से 5 + 48 = 53
मलता है ✗)

संकेत: a²b का अथ है a × a × b; ab² का अथ है a × b × b। अक्षर वही, गनती अलग — अतः पद अलग।
गुणनखंड फर भी हो सकता है: 5a³ + 6ab(a + b)।

प्र.10 (x + 2)(x + 5) = (x + 2)x + (x + 2)5 = x² + 2x + 5x +10 = x² + 7x + 10

कोई त्रु ट नह — यह सही है और हल लखने का अ ा नमूना भी है।

(x + 2)(x + 5) = (x + 2)x + (x + 2)5

= x² + 2x + 5x + 10

= x² + 7x + 10 ✓

x = 1 पर जाँच: 3 × 6 = 18 और 1 + 7 + 10 = 18 ✓

संकेत: यह सवस मका 1 ही है जसम a = x, m = 2, b = x, n = 5 है: ab + mb + an + mn = x² + 2x +
5x + 10।

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प्र.11 (a + 2) (b + 4) = ab + 8

त्रु ट है। केवल पहले का पहले से और अं तम का अं तम से गुणनफल लया गया; बीच के दोन गुणनफल छू ट गए।

(a + 2)(b + 4) = ab + 4a + 2b + 8

सही: ab + 4a + 2b + 8

a = 1, b = 1 पर जाँच: 3 × 5 = 15 और 1 + 4 + 2 + 8 = 15 ✓ (छपे उत्तर से 9 मलता है ✗)

ऐसा क्य होता है: सवस मका 1 म चार पद इस लए होते ह क्य क दोन दशाओं म कटे आयत के चार टु कड़े होते
ह। इनम से दो, 4a और 2b, वही प याँ ह जो प्रश्न 4 म भी छू ट गई थ ।

प्र.12 ab² + a²b + a²b² = ab (a + b + ab)

कोई त्रु ट नह — यह सही है। पुनः प्रसार करके जाँ चए—

ab(a + b + ab) = ab × a + ab × b + ab × ab

= a²b + ab² + a²b² ✓

a = 2, b = 3 पर जाँच: बायाँ पक्ष = 18 + 12 + 36 = 66; दायाँ पक्ष = 6(2 + 3 + 6) = 6 × 11 = 66 ✓

ऐसा क्य होता है: तीन पद म कम-से-कम एक a और कम-से-कम एक b है, अतः प्रत्येक म से ab बाहर लया
जा सकता है। उभय नष्ठ गुणनखंड बाहर लेना, वतरण गुणधम को दाएँ से बाएँ पढ़ना ही है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 150

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as e
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6.4 इस ओर या उस ओर, सभी रास्ते खाड़ी क ओर
co m
e m.
m as
ग णत चचा

.co a g l
a s emद गई आकृ त म प्र तरूप का अवलोकन क जए। इस आकृ त म क्रम म आने वाली अगली आकृ त
gl
नीचे
a
प्र.1
बनाइए। इसम कतने वृत्त ह? दसव चरण म आकृ त म कुल कतने वृत्त ह गे? चरण k म प्राप्त आकृ त म वृत्त क

m
संख्या के लए व्यंजक ल खए।

. co ag
em
g l as
1 a 2 3

co m
m.
se. . . . . .
m l a
m .co ag
l a se
a g

om a s
. c
emके वृत्त-प्र तरूप के चरण 1, 2 और 3। agl
l a s
पृष्ठ 150

ag

co m
m .
o m
छपी आकृ तयाँ गनने पर: चरण 1 म 3 वृत्त, चरण 2 म 8 और चरण 3 म 15।
l a se
c ृ त (चरण 4) वृत्त का 5 × 5 का ब्लॉक है जसम एक कोने का वृत्त नह हैa—g 24 वृत्त।
अगली.आक
se m
g l a
a
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com g l a
m . a
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agl

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m .
m as e
.co a g l
se m
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e m . co agl
g l as
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m .
m as e
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चरण 4: वृत्त का 5 × 5 वग जसम एक कोने का वृत्त नह है — 25 – 1 = 24 वृत्त।

चरण k के लए व्यंजक। प्रत्येक आकृ त (k + 1) × (k + 1) का वग है जसम से एक वृत्त हटा है—

चरण k = (k + 1)² – 1 = k² + 2k + 1 – 1 = k² + 2k

चरण K 1 2 3 4 10

k² + 2k 3 8 15 24 120

चरण 10 में 10² + 2 × 10 = 120 वृत्त होंगे।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक बार आकृ त म एक पं क्त और एक स्तंभ जुड़ता है, अतः उसके “पूरे वग” क भुजा 2,
3, 4, 5, … चलती है — अथात चरण k पर k + 1 — और कोने से ठ क एक वृत्त सदा कम रहता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 152

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6.4 इस ओर या उस ओर, सभी रास्ते खाड़ी क ओर

प्र.1 चरण 15 म वृत्त क संख्या ात करने के लए उपयुक्त सूत्र का उपयोग क जए।

चरण k पर वृत्तों की संख्या = k² + 2k

k = 15 पर: 15² + 2 × 15

= 225 + 30

= 255 वृत्त

k = 15 पर चार व धय से जाँच—

वध व्यंजक K = 15 पर मान

1 (k + 1)² – 1 256 – 1 = 255

2 k² + 2 × k 225 + 30 = 255

3 k × (k + 1) + k 240 + 15 = 255

4 k × (k + 2) 15 × 17 = 255

ऐसा क्य होता है: चार ंजक भन्न दखते ह क्य क वे चत्र को दे खने के चार भन्न तरीके ह, परंतु सरलीकरण पर
प्रत्येक k² + 2k बन जाता है। समान ंजक प्रत्येक k पर समान मान दगे ही — “समान ंजक” का अथ ही यही
है।

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प्र.2 नीचे दए गए चत्र म वगाकार टाइल्स से बने प्र तरूप पर वचार क जए।

1 2 3

......

पृष्ठ 152 के वगाकार टाइल्स के प्र तरूप के चरण 1, 2 और 3।

प्रत्येक आकृ त टाइल्स का एक वगाकार े म है — एक बड़ा वग जसके बीच से एक छोटा वग कट गया है।

चरण बाहरी वग बीच का रक्त वग टाइल्स

1 3×3 1×1 9–1=8

2 4×4 2×2 16 – 4 = 12

3 5×5 3×3 25 – 9 = 16

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चरण 3: टाइल्स का 5 × 5 वग जसम 3 × 3 का रक्त भाग है — 25 – 9 = 16 टाइल्स।

संकेत: चरण n पर रक्त भाग n × n का है और बाहरी वग (n + 2) × (n + 2) का, क्य क े म चार ओर एक ही
टाइल मोटा है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 153

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

6.4 इस ओर या उस ओर, सभी रास्ते खाड़ी क ओर
co m
em.
m as
ग णत चचा

.co a g l
a s em
gl
प्रत्ये क आकृ त म कतनी वगाकार टाइल्स ह?
a
प्र.1

co m
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1 2 3

em
g l as
a
......

co m
e m.
as
पृष्ठ 152 के वगाकार टाइल्स के प्र तरूप के चरण 1, 2 और 3।
m l
m .co a g
l a se
g
a उत्तर
m a s
.co agl
आकृ त टाइल्स क संख्या दो वग के अंतर के रूप म

se m
g l a
a
चरण 1 8 3² – 1²

चरण 2 12 4² – 2²

co m
m .
as e
चरण 3 16 5² – 3²

m
coबार g l
संख्याएँ.हर a
e m
as
4 से बढ़ती ह: 8, 12, 16, …

agl
se m
com g l a
.
अनुक्रम के चरण 4 म कतनी वगाकार टाइल्स ह? दसव चरण म कतनी वगाकार टाइल्स ह?
a
प्र.2

m
ase
agl

co m
चरण 4: 6² – 4² = 36 – 16 = 20 टाइल्स
m .
m ase
.co
चरण 10: 12² – 10² = 144 – 100 = 44 टाइल्स
a g l
a s em
agl सवस मका 1C से दोन तुरंत मल जाते ह—
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


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(n + 2)² – n² = ((n + 2) + n)((n + 2) – n)

= (2n + 2) × 2 = 4n + 4

चरण 4: 4 × 4 + 4 = 20 ✓ चरण 10: 4 × 10 + 4 = 44 ✓

प्र.3 चरण n म टाइल्स क संख्या के लए एक बीजीय व्यंजक ल खए। अपनी व धयाँ क ा म साझा क जए। क्या
आप उत्तर प्राप्त करने क एक से अ धक व धयाँ खोज सकते ह?

े म को दे खने के कई तरीके ह, और सभी एक ही ंजक पर पहुँचते ह।

दे खने का तरीका व्यंजक सरल रूप

बड़ा वग घटा िरक्त वग (n + 2)² – n² 4n + 4

चार भुजाएँ, पत्येक (n + 1) टाइल की 4(n + 1) 4n + 4

दो पूर ी पंिक्तयाँ + दो छोटे स्तंभ 2(n + 2) + 2n 4n + 4

चार भुजाओं की n टाइल + चार कोने 4n + 4 4n + 4

चरण n में टाइल्स की संख्या = (n + 2)² – n² = 4n + 4 = 4(n + 1)

जाँच: n = 1 → 8 ✓, n = 2 → 12 ✓, n = 3 → 16 ✓, n = 10 → 44 ✓

ऐसा क्य होता है: “चार भुजाएँ, प्रत्येक (n + 1) क ” वाला दृ ष्टकोण इस सुंदर उत्तर को समझा दे ता है। े म के
चार ओर घू मए और प्रत्येक कोने क टाइल को उसक बाईं भुजा को दे द जए; तब प्रत्येक भुजा के पास ठ क n +
1 टाइल्स ह गी और कोई टाइल दो बार नह गनी जाएगी।

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प्र.4 नीचे द गई आकृ त म छायां कत (आंत रक) भाग का ेत्रफल ात क जए। सभी 4 आयत क वमाएँ समान
ह।

m

n

एक वग के चार ओर रखे चार बराबर आयत, पृष्ठ 153।

दो व ाथ इसे दो प्रकार से दे खते ह और दोन सही ह।
तडांग क व ध। पूरी आकृ त (m + n) भुजा का वग है और चार आयत m × n के ह।

छायांिकत क्षेत्रफल = (m + n)² – 4mn

युसुफ क व ध। छायां कत भाग स्वयं एक वग है। ऊपरी भुजा पर (m + n) क लंबाई एक आयत क छोट भुजा m और उसके
बाद उसक लंबी भुजा n से ढक है; छायां कत वग वह से आरंभ होकर अगले आयत के m से पहले समाप्त होता है, अतः उसक
भुजा (m + n) – m – m = n – m है।

छायांिकत क्षेत्रफल = (n – m)²

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m

(n – m)²
n

m × n के चार समान आयत, (n – m) भुजा के वगाकार रक्त भाग के चार ओर चक्र रूप म।

छायांिकत भाग का क्षेत्रफल = (m + n)² – 4mn = (n – m)²

प्र.5 दोन व्यंजक का वस्तार करके जाँच क जए क (m + n)² – 4mn = (n – m)² है।

(m + n)² – 4mn = (m² + 2mn + n²) – 4mn

= m² – 2mn + n²

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(n – m)² = n² – 2nm + m²

= m² – 2mn + n²

दोन प्रसार एक ही ंजक ह, अतः दोन व धयाँ सहमत ह — और होना भी यही चा हए, क्य क दोन एक ही भाग को नाप रही ह।
m = 3, n = 7 पर जाँच: (10)² – 4 × 21 = 100 – 84 = 16 और (7 – 3)² = 16 ✓

क्या आप जानते ह? इसे पुन व त करने पर (m + n)² – (n – m)² = 4mn मलता है, जो सवस मका 1C
का ही एक और वशेष रूप है: इन दो वग का अंतर (2n)(2m) है।

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कक्षा 8 ग णत अध्याय 6 जतना बाँटगे उतना बढ़े गा
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आकृ त म तरछ रेखाओं वाले भाग का ेत्रफल ात क जए। यहाँ तीन आयत क भुजाएँ समान ह ( चत्र 1)।
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प्र.6

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agl चत्र 1, पृष्ठ 153 — तीन बराबर आयत।

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a s emतीन आयत x × y के ह। तरछ रेखाओं वाला भाग ऊपर और नीचे क प य के बीच, बीच वाले आयत के दोन ओर है।
agl अनुषा क व ध। ABCD दोन प य के बीच x भुजा का वग है; EFGH बीच वाला आयत है, x ऊँचा और y चौड़ा।
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आवश्यक क्षेत्रफल = क्षेत्रफल (ABCD) – क्षेत्रफल (EFGH)co agl
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= x² – xy

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages83
Languagehindi
Updated19 Sep 2026