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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 9: शासक से शा सत तक —
सरकार के प्रकार
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
185 – 208 14 37 हन्द
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · सामा जक व ान · समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1)
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: शासक से शा सत तक — सरकार
के प्रकार
कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार के सम्पूण एनसीईआरट समाधान — पाठ्यपुस्तक समाज का
अध्ययन : भारत और उसके आगे (कक्षा 7, भाग 1) के वषय-क्षेत्र शासन प्रणाली और लोकतंत्र का पहला अध्याय। अध्याय का प्रत्येक प्रश्न हल कया
गया है — महत्वपूण प्रश्न, सात आइए पता लगाएँ बॉक्स, दोन आइए वचार कर बॉक्स, पृष्ठ 205 और 207 के पाठ्य प्रश्न, आगे बढ़ने से
पहले... तथा प्रश्न एवं क्रयाकलाप के आठ प्रश्न — जनम ता लका 9.1, ता लका 9.2, सरकार के काय का चत्र ( चत्र 9.2) और 1889 का
व्यंग्य- चत्र ( चत्र 9.13) मु त पृष्ठ से ध्यानपूवक पढ़कर समझाए गए ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे (भाग 1) (कक्षा 7) 185 – 208
खं ड प्रश्न
14 37
माध्यम
हन्द
महत्वपूण प्रश्न — पृष्ठ 185
अध्याय का आरंभ — वषय-क्षेत्र ‘शासन प्रणाली और लोकतंत्र'
महत्वपू ण प्रश्न
प्र.1 सरकार के व भन्न प्रकार कौन-कौन से ह?
अध्याय सरकार को दो वग म बाँटता है — लोकतां त्रक सरकार और अन्य प्रकार क सरकार।
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वग प्रकार शासन कौन करता है अध्याय म दया उदाहरण
लोकतंत्र पत्यक्ष लोकतंत्र सभी नाग रक स्वयं प्रत्येक नणय म भाग लेते ह ि स्वट्जरलै ंड की कु छ
‘जनता का व्यवस्थाएँ
शासन'
पितिनिध लोकतंत्र जनता प्र त न ध चुनती है, जो उसक ओर से शासन करते भारत तथा आज के अिधकांश
ह ल ोकतं त्र
— संस दीय लोकतंत्र कायपा लका वधा यका का ही भाग होती है और उसे भारत , ऑ स्टेिल या
उसका वश्वास चा हए
— अध्यक्षीय शासन जनता ारा नवा चत राष्ट्राध्यक्ष वधा यका से स्वतंत्र काय क्
संय ु त रा ज्य अमेिरका, द िक्षण
पणाली करता है कोिरया
अन्य स्वरूप िनरंकु श राजतंत्र राजा कानून बनाता है, लागू कराता है और न्या यक नणय सऊद ी अरब
भी दे ता है
संवैध ािनक राजतंत्र राजा के पास केवल औपचा रक श क्त; वास्त वक शासन िबटेन
संसद और प्रधानमंत्री का
धमतंत्र शासन धा मक नयम और धा मक नेताओं के अनुसार ईरान , अफ गािनस्तान, वेिटकन
िसटी
अिधनायकतंत्र संपूण सत्ता एक व्य क्त या छोटे समूह के पास; सं वधान िहटल र का जम नी ; ईद ी अमीन
या कानून का कोई नयंत्रण नह का य ुगांड ा
अल्पतंत्र कुछ श क्तशाली लोग या प रवार सारे महत्वपूण नणय पाचीन ग ीस के कु ल ीन पिरवार
लेते ह
एक शब्द और जोड़ ली जए, क्य क अध्याय उसे अलग से प रभा षत करता है — गणराज्य वह शासन व्यव ा है जसम राज्य का
प्रमुख नवा चत होता है और वह वंशानुगत राजा या रानी नह होता। गणराज्य इन प्रकार के साथ खड़ा पाँचवाँ ‘प्रकार' नह है; यह
बताता है क राष्ट्राध्यक्ष कैसे चुना जाता है। भारत लोकतंत्र भी है और गणराज्य भी।
ध्यान द: ये नाम एक-दूसरे पर आ भी सकते ह। टे न राजतंत्र भी है और संसद य लोकतंत्र भी। ईरान म धमतंत्र और
लोकतंत्र दोन के तत्व ह। इस लए कसी दे श क शासन प्रणाली बताते समय यह भी बताइए क आप कौन-सी
वशेषता क बात कर रहे ह।
प्र.2 सरकार अपनी श क्त कहाँ से प्राप्त करती है?
जसे वह दे श सत्ता का ोत मानता है, वह से। यही व भन्न शासन प्रणा लय के बीच सबसे आधारभूत अंतर है। अध्याय का पहला
‘प्रमुख अंतर' यही पूछता है — ‘यह सरकार है’ — यह तय करने का अ धकार कसे है?
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शासन श क्त और सत्ता का ोत सरकार का गठन कैसे
प्रणाली
लोकतंत्र दे श की जनता नय मत और न त अंतराल पर होने वाले चुनाव से
राजतंत्र न्
ज म और उ त्त रािधकार ; कही-ं कही ं राजाओं ने ईश्वर वंशानुगत — सामान्यतः राजा का ज्येष्ठ पुत्र
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से िद य शि क्त का द ावा भी िकया
धमतंत्र श्
धािम क िव वास और धािम क सं स्था का मुिखया धमगुरुओं का समूह सव च्च नेता का चयन करता है; ईरान म
नवा चत राष्ट्रप त और संसद भी ह
अिधनायकतंत्र एक व्यिक्त या छोटे समूह ारा अिजत और बनाए रखी 1933 म चांसलर बनने के तुरंत बाद हटलर ने ऐसे कानून
गई स त्त ा, िजस पर कोई संवैध ािनक िनयंत्र ण नही ं बनाए जन्ह ने उसे नरंकुश श क्त द और वपक्ष समाप्त कर
दया
अल्पतंत्र कु छ पिरवारों या व्यिक्तयों की संपित्त और पभाव औपचा रक व्यव ा चाहे जो हो, वास्त वक नणय यही छोटा
समूह लेता है
ऐसा क्य : सत्ता का ोत ही तय करता है क सरकार को कसक सुननी है। य द श क्त जनता से आती है तो
सरकार को जनता के प्र त जवाब दे ना होगा — यही उत्तरदा यत्व है और चुनाव इसे लागू करने का साधन। य द
श क्त जन्म से, बल से या धन से आती है, तो जनता के पास ऐसा कोई साधन नह रहता।
क्या आप जानते ह? जस दे श क श क्त का ोत कसी बाहरी प्रभाव से स्वतंत्र होता है, उसे संप्रभु कहते ह।
इसी लए हमारे सं वधान क प्रस्तावना म भारत के लए पहला शब्द ‘सम्पूण प्रभुत्व-सम्पन्न' आता है।
प्र.3 एक दे श क सरकार जनता से कस प्रकार संवाद ा पत करती है?
यह पूरी तरह शासन प्रणाली पर नभर है। लोकतंत्र म संवाद दोन ओर से होता है; अन्य स्वरूप म प्रायः केवल ऊपर से नीचे क
ओर।
लोकतंत्र म जनता सरकार तक इन माध्यम से पहुँचती है —
चुनाव — सावभौ मक वयस्क मता धकार से प्रत्येक वयस्क नाग रक अपना प्र त न ध चुनता है। भारत म प्रत्येक पाँच साल म
आम चुनाव होते ह, अमे रका म प्रत्येक चार साल म।
प्र त न धत्व — चुने गए प्र त न ध वधा यका का भाग बनते ह और अपने मतदाताओं क आवश्यकताएँ वहाँ रखते ह, ठ क वैसे
ही जैसे कक्षा प्र त न ध अपनी कक्षा क बात वद्याथ स म त म रखता है।
अ भव्य क्त क स्वतंत्रता — नाग रक सरकार के वषय म अपनी राय खुलकर कह सकते ह और सरकार को उसे सुनना होता
है।
न्यायालय — स्वतंत्र न्यायपा लका के कारण एक साधारण नाग रक भी सरकार को चुनौती दे सकता है और अपने मौ लक
अ धकार क रक्षा करा सकता है।
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और सरकार जनता तक पहुँचती है — कानून बनाकर, सेवाएँ दे कर ( शक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना), कानून व्यव ा बनाए
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रखकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सु न त करके और अथव्यव ा का प्रबंधन करके — अथात पृष्ठ 186 पर द गई भू मकाओं
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ऐसा क्य m .coहै: क्य क सरकार क श क्त मूलतः जनता से ही आई है, इस लए उसे aजनता gl के प्र त उत्तरदायी
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sपड़ता
होता
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रहना है। य द वह अपने दा यत्व का सही नवहन नह करती तो लोग अगले चुनाव म अपने प्र त न ध बदल
ह। यही भय सरकार क कायप्रणाली पर नरंतर नगरानी बनाए रखता है।
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अब पृष्ठ 203 क शेन क कहानी से तुलना क जए — नयम उसके बाल, उसके कपड़े और उसक सैन्य सेवा तय करते ह, वह
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बाहर क सूचना तक नह पहुँच सकता और उससे दूसर क जानकारी दे ने क अपेक्षा क जाती है। वहाँ सरकार जनता पर नजर
रखती है; जनता सरकार पर नह रख सकती। a
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लोकतंत्र का क्या महत्व है?
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क्य क यह नाग रक को पाँच ऐसी चीज दे ता है, जनक गारंट अन्य शासन प्रणा लयाँ अपनी बनावट के कारण नह दे पात ।
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1. बराबर क भागीदारी। सावभौ मक वयस्क मता धकार प्रत्येक वयस्क को — धनी हो या नधन — एक मत दे ता है।
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2. कानून के समक्ष समानता तथा शक्षा और स्वास्थ्य जैसी सु वधाओं तक समान पहुँच।
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3. स्वतंत्रता। लोग तय कर सकते ह क क्या बोलना है, क्या पहनना है, कस वश्वास को मानना है और अपनी अ भव्य क्त कैसे
करनी है — अध्याय समझदारी भरी सीमा भी जोड़ता है, ‘जब तक क यह अन्य कसी के अ धकार को क्ष त न पहुँचाए'।
4. उत्तरदा यत्व और शां तपूण उपाय। सरकार असफल हो तो लोग उसे मतदान से बदलते ह, व ोह से नह ।
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m a s emभी करते ह।
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5. संरक्षण। स्वतंत्र न्यायपा लका ारा संर क्षत मौ लक अ धकार नाग रक क रक्षा सरकार के वरुद्ध
यहीm .coहै क आज वश्व के आधे से अ धक देश ने लोकतंत्र अपनाया है। a
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कारण
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स्वयं जाँ चए: अध्याय यह दावा नह करता क लोकतंत्र नद ष है। वह वास्त वक समस्याएँ भी गनाता है —
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comत्र महत्वपूण है और उसे सजग नाग रक चा हए — दोन बात l
भ्रष्टाचार, आ थक वषमता, लोकतां त्रक सं ाओं पर कुछ लोग का अत्य धक नयंत्रण, न्यायपा लका क स्वतंत्रता
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का क्षरण और सूचना माध्यम का दुरुपयोग। लोकतं
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पुस्तक म ह।
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आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 186
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सरकार क्या है? इसके क्या काय ह? — चत्र 9.2
आइए पता लगाएँ
प्र.1 क्या आपको अपनी कक्षा 6 क पाठ्यपुस्तक का यह चत्र याद है?
रेल पटरी पर दौड़ती हई
ु नयी सड़क बनाती हई
ु
तेज़ गित की रेलगाड़ी सड़क-िनम ण मशीनें
अस्पताल मे ं रोगी की जाँच करती सीमा की चौकी पर बंदूक िलए
डॉक्टर, पास खड़ा उसका पिरवार पहरा देते सैिनक
यातायात संकेत पर वाहनों को िगरी हुई इमारत पर नारंगी वद
रोकता यातायात पिु लसकम और हेलमेट पहने बचाव कम
खंभों की कतार वाली लंबी, हल्की
कक्षा मे ं डेस्क पर बैठे बच्चे
गुलाबी सरकारी इमारत, सामने
और पढ़ ाती िशिक्षका
पेड़ और हरा मैदान
भीड़ भरा सरकारी काय लय —
लाल डाकपेटी के पास खड़ा
काउंटर पर खड़े लोग, मेज़ों पर
खाकी वद वाला डािकया
बैठे कमचारी
िचत्र 9.2
चत्र 9.2, पृष्ठ 186 — दस छोटे चत्र का समूह, पुस्तक म छपे उसी दो स्तंभ और पाँच पं क्त वाले क्रम म। यहाँ प्रत्येक
चत्र शब्द म व णत है; मूल चत्रांकन के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
हाँ — चत्र 9.2 कक्षा 6 क पुस्तक का वही चत्र है जो सरकार को काय करते हुए दखाता है। यह दस छोटे -छोटे दृश्य क एक
प ट्टका है और हर दृश्य सरकार क एक भू मका को दशाता है। इन्ह एक-एक करके दे खए तो पृष्ठ 186 क पूरी सूची स्पष्ट हो
जाएगी।
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चत्र म क्या दख रहा है सरकार क कौन-सी भू मका
पटरी पर दौड़ती आध िु नक रे ल गाड़ी पिरवहन — एक आवश्यक जनसे वा
सड़क बनाता हुआ रोड रोलर आधारभ ूत संर चना का िनम ण
पिरवार की जाँच करता स्वास्थ्यकम स्वास्थ् य से वा की आपूित
सीमा पर गश्त करते सै िनक रा ीय सुर क्षा
चौराहे पर यातायात पुिलसकम कान ून व्यवस्था बनाए रखना
हेल मेट पहने बचाव कम आपद ा राहत — ल ोगों की सुर क्षा और सुर क्षा-व्यवस्था
बच्चों से भरी कक्षा िश क्षा उ पल ब्ध कराना
उच्चतम न्यायालय का भवन न्याय — न्याियक काय
काय लय या बैक
ं के काउं टर पर लोग अथ यव व् स्था और ल ोक पशासन का पबंध न
साइिकल और पत्र-पेटी के साथ डािकया संचार और डाक से वाएँ
पुस्तक यह चत्र दोबारा क्य दे ती है: कक्षा 6 ने पूछा था क सरकार क्या है। कक्षा 7 पूछती है क सरकार कतने
प्रकार क होती है। वही प र चत चत्र फर से रखकर पुस्तक यह बताती है क ये सभी काय हर दे श म करने ही पड़ते
ह — भन्नता इसम है क इन्ह करने का नणय कौन लेता है और वह कसके प्र त जवाबदे ह है।
प्र.2 सरकार के बहुत से अन्य काय भी ह। उन्ह सूचीबद्ध क जए।
पृष्ठ 186 पर सात भू मकाएँ द गई ह। नीचे कुछ और, जो आप प्र त दन अपने आस-पास दे खते ह — साथ म वह सं ा भी जो
प्रायः यह काय करती है।
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सरकार का अन्य काय दै नक जीवन म यह कैसा दखता है
चुनाव कराना नवाचन आयोग मतदान कराता है, मतदाता पहचान पत्र दे ता है और मतगणना करता है
कर एकत्र करना और बजट बनाना आयकर, जीएसट ; प्र तवष संसद म प्रस्तुत होने वाला क य बजट
मुद ा जारी करना और बैक
ं ों का िनयमन भारतीय रज़व बक नोट छापता है और ब्याज दर तय करता है
आपदा पबंध न बाढ़, चक्रवात और भूकंप म एनडीआरएफ क ट म
पय वरण संर क्षण वन वभाग, राष्ट्रीय उद्यान, प्रदूषण नयंत्रण बोड
सावजिनक िवतरण और कल्याण राशन क दुकान, मध्याह्न भोजन, पशन, मनरेगा
िव ान, पौ ोिगकी और अंतिरक्ष इसरो के उपग्रह; कृ ष और च कत्सा अनुसंधान सं ान
संस्कृ ित और िवरासत भारतीय पुरातत्व सवक्षण, संग्रहालय, पुस्तकालय, स्मारक का संरक्षण
पंजीकरण और अिभले ख जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, भू म अ भलेख, पासपोट, आधार
खेल और जन-स्वास्थ्य अिभयान स्टे डयम और प्र शक्षण; ट काकरण अ भयान, स्वच्छ भारत
कू टनीित और िवदे श में नागिरकों की सहायता दूतावास, वीज़ा, संघष-क्षेत्र से भारतीय को सुर क्षत नकालना
यह क जए: घर से वद्यालय तक जाते हुए ग नए क कतनी चीज केवल इस लए ह क्य क सरकार ने कोई नणय
लया — सड़क, स्ट्र ट लाइट, बस, नाली और स्वयं वद्यालय। ऐसी दस चीज क अपनी सूची बनाइए और हर एक
के सामने उसक भू मका ल खए।
आइए वचार कर — पृष्ठ 188
वद्यालय का उदाहरण — कक्षा प्र त न ध और संसद/ वधान सभा के सदस्य
आइए वचार कर
प्र.1 वद्यालय का उदाहरण हम प्र त न धत्व क अवधारणा और इसक कायप्रणाली को समझने म सहायता करता है।
यद्य प वद्या थय क स म त, संसद य और वधायी स म तय से भन्न होती है, जैसे क वद्यालय के कक्षा
प्र त न ध संसद अथवा वधान सभा के सदस्य से काफ भन्न होते ह। ये भन्नताएँ क्या ह? कक्षा म अपने शक्षक
के साथ चचा क जए और इन भन्नताओं क एक सूची बनाइए।
वचार दोन म एक ही है — बहुत ारा चुने गए कुछ लोग सबक ओर से बोलते ह। इसके अ त रक्त लगभग सब कुछ भन्न है।
कक्षा-चचा के लए तैयार सूची नीचे द गई है।
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वद्यालय का कक्षा प्र त न ध संसद सदस्य / वधान सभा सदस्य
कौन चुनता है एक कक्षा के िव ाथ पूरे िनव चन क्षेत्र के सभी वयस्क मतद ाता, सावभौिमक
वय स्क मतािधकार से
कौन खड़ा हो उसी कक्षा का कोई भी िव ाथ ,
वह नागिरक जो आय ु नागिरकता और कान ून ारा िनध िरत
सकता है न् ग्
अ य यो यताएँ पूर ी करता हो
अ धकार का पधानाध्यािपका का सिमित बनाने का िनणय भारत का संिवधान
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कस वषय पर िव ालय के काम — पाथना सभा के वक्ता, खेल कू द, कान ून और बजट , जो पूरे राज्य या दे श पर बाध् यकारी होते है ं
नणय स्वच्छता, बस्तारिहत िदवस की गितिविधयाँ
श क्तयाँ िव ालय के िनयम सुझाना और उनके ि यान्वयन में कान ून बनाना और बद ल ना , कर तथा व्यय स्वीकृ त करना,
सहायता करना; पधानाध्यािपका ही पमुख रहती है ं मंि त्र यों से पश्न पूछना, नीितयों पर बहस
नणय का प्रभाव एक िव ालय पर, एक सत्र के िलए -
ल ाखों करोड़ ों ल ोगों पर , कभी-कभी पीिढ़यों तक
कायकाल और पायः एक सत्र या एक वष; िव ालय तय करता है ल ोक सभा और अिधकांश िवधान सभाओं के िल ए पाँच वष ,
हटाना कान ून श्
ारा िनि चत ; हटाना के वल िनध िरत पि या से
उत्तरदा यत्व सहपािठयों और िशक्षकों के पित अगले च ुनाव में मतद ाताओं के पित , सद न के पित और
न्यायाल य के पित
वेतन और कु छ नही ं — यह स्वैिच्छक से वा है वेतन , भत्ते , काय ल य और क्षेत्र िवकास िनिध
कायालय
सबसे गहरा अंतर: वद्याथ स म त उस वद्यालय के भीतर सलाह और सहायता करती है, जसे प्रधानाध्या पका
चलाती ह। वधा यका स्वयं राज्य के तीन अंग म से एक है — वह कानून बनाती है और सरकार को भी उसका
पालन करना पड़ता है। इसी लए संसद य स म त अ धका रय को बुला सकती है और सरकारी व्यय क जाँच कर
सकती है, जब क वद्यालय क स म त ऐसा नह कर सकती।
ध्यान द: फर भी समानता उपयोगी है। दोन एक ही प्रश्न का उत्तर दे ते ह — बहुत से लोग क बात एक साथ बोले
बना कैसे सुनी जाए? दोन का उत्तर है — प्र त न धत्व।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 188
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वद्या थय के सामने आए तीन वकल्प
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आइए पता लगाएँ
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a s emतरीक म से आप सबसे अ धक प्रभावी कसे मानते ह और क्य ?
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तीसरा तरीका — प्रत्येक कक्षा के वद्याथ अपना एक प्र तm .
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aहै। e न ध चुन और वही प्र त न ध मलकर स म त बनाएँ। तीन को इस
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कसौट पर क सए क स म त को वास्तव म करना क्या
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तरीका क्या शीघ्र नणय हो सकेगा? क्या हर कक्षा क बात सुनी जाएगी? नष्कष
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नह — सैकड़ सदस्य के साथ नणय सद्धांततः हाँ
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1. िव ालय के सभी यायसंग त , पर
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तक पहुँचना और उसका अनुपालन
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िव ाथ सिमित में
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अ यावहािरक
कराना बहुत क ठन
agl2. पधानाध्यािपका हाँ — स म त छोट रहेगी नह — अ धकांश वद्या थय को दा यत्व नह व्यावहािरक , पर
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मलेगा और अपनी बात पहुँचाने का कोई
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स्वयं सदस्य चुने ं न्यायसंग त नही ं
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तरीका नह होगा
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हाँ — स म त छोट रहेगी
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3. पत्येक कक्षा अपना न्यायसंग त भी और
पितिनिध चुने आवश्यकताओं का पक्ष रखेगा व्यावहािरक भी
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ऐसा क्य : स म त को दो ऐसी बात एक साथ चा हए जो एक-दूसरे को ख चती ह — वह इतनी छोट हो क काम
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.,cदूसरा कायक्षमता दे ता है पर प्र त न धत्व नह । तीसरा दोन दे ता है, क्य कaकgु छ लोग बहुत क आवाज लेकर
कर सके और इतनी व्यापक हो क सबका प्र त न धत्व करे। पहला तरीका प्र त न धत्व दे ता है पर कायक्षमता
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aseचलते ह। यही कारण है क बड़े दे श प्रत्यक्ष लोकतंत्र क जगह प्र त न ध लोकतंत्र चुनते ह।
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क्या आप जानते ह? यही तक बड़े पैमाने पर भी लागू होता है। भारत म लगभग 96 करोड़ मतदाता ह, जो लोक
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सभा के 543 सदस्य चुनते ह। इनम से हर सदस्य वही कर रहा है जो आपका कक्षा प्र त न ध करता है — बहुत-सी
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आवाज उस कक्ष तक ले जाना जो नणय ले सकने लायक छोटा हो।
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m लगाएँ — पृष्ठ 196 as e
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ता लका 9.1 — लोकतां त्रक सरकार के व भन्न स्वरूप
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पछले पृष्ठ पर द गई ता लका 9.1 म दे श ‘क’ और दे श ‘ख’ के रूप म अपनी पसंद के दो अलग-अलग दे श का
चयन कर रक्त ता लका भर।
लोकतां त्रक सरकार के व भन्न स्वरूप
दे श कायपा लका वधा यका न्यायपा लका
भारत प्रधानमंत्री और नम्न सदन (लोक सभा) उच्च सदन कायपा लका एवं वधा यका
मं त्रप रषद (राज्य सभा) से अ धक श क्तशाली से स्वतंत्र (श क्तय का
है। पृथक्करण)
संयुक्त राज्य रा ाध्यक्ष उच्च सदन (सीनेट) नम्न सदन कायपा लका एवं वधा यका
अमे रका (प्र त न ध सभा) से अ धक से स्वतंत्र (श क्तय का
श क्तशाली है। पृथक्करण)
द क्षण रा ाध्यक्ष एकल सदन (रा ीय सभा) कायपा लका एवं वधा यका
को रया से स्वतंत्र (श क्तय का
पृथक्करण)
ऑस्ट्रे लया प्रधानमंत्री और उच्च सदन (सीनेट) और नम्न सदन कायपा लका एवं वधा यका
मं त्रप रषद (प्र त न ध सभा) दोन ही समान रूप से स्वतंत्र (श क्तय का
से श क्तशाली ह। पृथक्करण)
क
ख
ता लका 9.1, पृष्ठ 195 — “लोकतां त्रक सरकार के व भन्न स्वरूप”, पुस्तक के अनुसार यथावत्; ‘क’ और ‘ख’ क
पं क्तयाँ भरने के लए रक्त छोड़ी गई ह।
ऐसे दो दे श चु नए जो ता लका म पहले से न ह , ता क तुलना से कुछ नया सीखने को मले। यहाँ दे श ‘क' है टे न (यूनाइटे ड
कगडम) और दे श ‘ख' है ांस। वही तीन स्तंभ भरने ह — कायपा लका, वधा यका, न्यायपा लका।
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दे श कायपा लका वधा यका न्यायपा लका
क— पधानमं त्र ी और मंित्र मंडल (राजा रा ाध् यक्ष नम्न सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) उच्च कायपा लका एवं वधा यका से
िबटेन ,
है ं पर उ नके पास के वल औपचािरक शि क्त सदन (हाउस ऑफ लॉड् स) से अ धक स्वतंत्र (श क्तय का पृथक्करण)
है) श क्तशाली है।
ख— जनता ारा सीधे िनव िचत रा ध् क्ष, साथ
ा य नम्न सदन (नेशनल असबली) उच्च सदन कायपा लका एवं वधा यका से
फ ांस में पधानमंत्र ी (सीनेट) से अ धक श क्तशाली है। स्वतंत्र (श क्तय का पृथक्करण)
आप जो भी दे श चुन, उसे इन तीन प्रश्न से जाँ चए —
1. कायपा लका का प्रमुख कौन है और उसे कौन चुनता है? य द जनता सीधे प्रमुख को चुनती है तो व्यव ा अध्यक्षीय क
ओर झुकती है; य द वधा यका का बहुमत तय करता है तो वह संसद य है।
2. वधा यका म कतने सदन ह और कौन अ धक श क्तशाली है? एक सदन, दो समान सदन, या अ धक श क्तशाली नम्न
सदन।
3. क्या न्यायपा लका शेष दोन से अलग है? ता लका 9.1 के हर लोकतंत्र म उत्तर ‘हाँ' है।
ध्यान द: हद संस्करण म ता लका 9.1 के पहले स्तंभ का शीषक दे श है, जो सही है। अंग्रेजी संस्करण म इसी स्तंभ
का शीषक ‘Institution' (सं ा) छपा है, जब क उसम भी दे श के ही नाम ह — उसे ‘दे श' ही पढ़ा जाना चा हए।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 ता लका का व ेषण कर और इसके उदाहरण म सभी समानताओं और भन्नताओं पर आपस म चचा कर।
लोकतां त्रक सरकार के व भन्न स्वरूप
दे श कायपा लका वधा यका न्यायपा लका
भारत प्रधानमंत्री और नम्न सदन (लोक सभा) उच्च सदन कायपा लका एवं वधा यका
मं त्रप रषद (राज्य सभा) से अ धक श क्तशाली से स्वतंत्र (श क्तय का
है। पृथक्करण)
संयुक्त राज्य रा ाध्यक्ष उच्च सदन (सीनेट) नम्न सदन कायपा लका एवं वधा यका
अमे रका (प्र त न ध सभा) से अ धक से स्वतंत्र (श क्तय का
श क्तशाली है। पृथक्करण)
द क्षण रा ाध्यक्ष एकल सदन (रा ीय सभा) कायपा लका एवं वधा यका
को रया से स्वतंत्र (श क्तय का
पृथक्करण)
ऑस्ट्रे लया प्रधानमंत्री और उच्च सदन (सीनेट) और नम्न सदन कायपा लका एवं वधा यका
मं त्रप रषद (प्र त न ध सभा) दोन ही समान रूप से स्वतंत्र (श क्तय का
से श क्तशाली ह। पृथक्करण)
क
ख
ता लका 9.1, पृष्ठ 195 — “लोकतां त्रक सरकार के व भन्न स्वरूप”, पुस्तक के अनुसार यथावत्; ‘क’ और ‘ख’ क
पं क्तयाँ भरने के लए रक्त छोड़ी गई ह।
ता लका 9.1 को पं क्तय के आर-पार नह , ब ल्क स्तंभ म नीचे क ओर प ढ़ए — पैटन वह दखता है।
समानताएँ — हर पं क्त म एक जैसी
छह लोकतंत्र ह — सत्ता का ोत जनता है और वही सावभौ मक वयस्क मता धकार से वधा यका चुनती है।
छह म वही तीन अंग ह — कायपा लका, वधा यका, न्यायपा लका।
छह म न्यायपा लका स्वतंत्र है। श क्तय के पृथक्करण वाला स्तंभ ही एकमात्र ऐसा है जसम कोई भन्नता नह ।
भन्नताएँ — जहाँ पं क्तयाँ अलग होती ह
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भन्नता का बदु क्या बदलता है दे श
कायपािलका का पमुख प्रधानमंत्री और मं त्रप रषद भारत , ऑ स्टेिल या, िबटेन
राष्ट्राध्यक्ष क्
संय ु त रा ज्य अमेिरका, द िक्षण कोिरया, फ ांस
सदनों की संख्या दो सदन भारत , अमेिरका, ऑ स्टेिल या, िबटेन, फ ांस
एकल सदन (राष्ट्रीय सभा) दि क्षण कोिरया
सदनों में शिक्त-संतल
ु न नम्न सदन अ धक श क्तशाली भारत , िबटेन, फ ांस
उच्च सदन अ धक श क्तशाली क्
संय ु त रा ज्य अमेिरका (सीनेट)
दोन सदन समान रूप से श क्तशाली ऑ स्टेिल या
व ेषण क्या सद्ध करता है: ‘लोकतंत्र' कोई एक न त मशीन नह है। कसी लोकतंत्र क बनावट उस दे श के
अपने इ तहास, संस्कृ त और आकांक्षाओं पर नभर करती है — यही बात पृष्ठ 190 कहता है। कतु मूल तत्व —
जनता का चयन और स्वतंत्र न्यायपा लका — नह बदलते।
चचा के लए: ध्यान द जए क भारत और अमे रका दोन बड़े संघीय लोकतंत्र ह, फर भी भारत क कायपा लका वधा यका के
भीतर बैठती है और अमे रका क उसके बाहर। आपस म पू छए क कस व्यव ा म सरकार को हटाना आसान है — और आपको
संसद य तथा अध्यक्षीय प्रणाली का वास्त वक अंतर मल जाएगा।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 196
लोकतां त्रक सरकार के मुख्य सद्धांत और वद्याथ स म त का क्रयाकलाप
आइए पता लगाएँ
प्र.1 ऊपर दए गए उदाहरण का अध्ययन करने के प ात लोकतां त्रक सरकार के मुख्य सद्धांत को सूचीबद्ध कर।
अपनी समझ के आधार पर नीचे द गई ग त व ध क जए —
छह सद्धांत, जो पृष्ठ 191–192 पर दए गए ह, और दो जो ता लका 9.1 से जुड़ते ह।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार
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मुख्य सद्धांत इसका अथ भारत म यह कैसे दखता है
m प्रत्येक व्य क्त को समान व्यवहार पाने का अ धकार; शक्षा और स्वास्थ्य as e
समानता
.co जैसी सु वधाएँ समान रूप से; सभी कानून के समक्ष समान a g l ; हर नागिरक
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समता का अिधकार
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के िल ए एक ही कान ून
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aस्वतंत्रता नाग रक को स्वयं चयन करने और अपना मत अ भव्यक्त करने का अिभ यि व् क्त की स्वतंत्र ता
अ धकार
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पितिनिध सहभािगता
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प्रत्येक नाग रक को चुनाव के माध्यम से अपने प्र त न ध चुनने का , राज्य सभा, िवधान ag
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ल ोक सभा
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अ धकार; चुने गए प्र त न ध वधा यका का भाग बनते ह , पंचायते ं
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सभाएँ
सावभौिमक वयस्क नधा रत आयु से ऊपर के प्रत्येक नाग रक को मतदान का अ धकार 18 वष पर मतािधकार , गणराज्य के
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मतािधकार 1950 से ही
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आरंभ
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मौिलक अिधकार
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समानता, अ भव्य क्त क स्वतंत्रता और शोषण के वरुद्ध अ धकार जैसे
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संिवधान का भाग
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अ धकार प्रदान और संर क्षत कए जाते ह
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स्वतंत्र न्यायपािलका यह सु न त करती है क मौ लक अ धकार क रक्षा हो और कानून का च्
उ चतम न्यायाल य और उ च्च
पालन नाग रक तथा सरकार के सभी अंग कर न्यायाल य
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उ त्तरदाियत्व सरकार अपने चुनने वाली जनता के प्र त जवाबदे ह होती है श्
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िनयिमत और िनि चत अंतराल पर
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— पत्येक पाँच वष
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च ुनाव
शिक्तयों का ag
वधा यका, कायपा लका और न्यायपा लका स्वतंत्र रूप से काय करते ह तािल का 9.1 का अंितम स्तंभ
पथृ क्करण और एक-दूसरे के काय म हस्तक्षेप नह करते
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o m l a se को पूणतः व्यवहार म नह
g 1971 म मला; टेन म
.cपात ।’ स्वट्जरलड पुराना लोकतंत्र है, फर भी वहाँ म हलाओं को मता धकार
स्वयं जाँ चए: अध्याय इन्ह आदश कहता है — ‘सभी लोकतां त्रक व्यव ाएँ इन आदश
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aseप्रभावी सावभौ मक वयस्क मता धकार 1928 म और अमे रका म 1965 म लागू हो सका। भारत म यह 1950 से ही
उतार
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है, गणराज्य के आरंभ से।
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प्र.2
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आपको अपने वद्यालय म एक वद्याथ स म त का गठन करना है। इसके लए एक योजना बनाइए और उसे
लोकतां त्रक तरीके से लागू क जए, यह सु न त करते हुए क — स म त के काय स्पष्ट रूप से प रभा षत ह ।
स म त के सदस्य के चुनाव क प्र क्रया लोकतां त्रक हो।
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a s emयह क्रयाकलाप है, इस लए महत्व योजना का है। अच्छ योजना म तीन बात होनी चा हए — स्पष्ट ल खत काय, नष्पक्ष चुनाव
agl प्र क्रया और बाद म जवाबदेही का उपाय। नीचे एक नमूना है, जसे आप अपने वद्यालय के अनुसार बदल सकते ह।
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भाग 1 — काय नधा रत क जए (प्रचार शुरू होने से पहले लख ली जए)
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स म त का उसका दा यत्व सरकार का कौन-सा
प्रकोष्ठ काय
िनयम एवं योजना प्राथना सभा, बस्तार हत दवस, खेलकूद और स्वच्छता के नयम का मसौदा बनाना और िवधायी
स म त म उन पर मतदान कराना
ि यान्वयन दन-प्र त दन क व्यव ा— ूट सूची, सामग्री, मध्याह्न भोजन क स्वच्छता कायपािल का संबंध ी
िशकायत एवं शकायत सुनना और यह दे खना क नयम का पालन सबके लए समान रूप से हो रहा न्याियक
िनष्पक्षता है
पहले ही तय क जए — स म त का आकार (प्रत्येक कक्षा से एक प्र त न ध), कायकाल (एक सत्र या एक वष), बैठक कतनी बार
होगी, और वह कन वषय पर नणय नह लेगी (अंक, शुल्क या शक्षक से जुड़े वषय)।
भाग 2 — लोकतां त्रक चुनाव कराइए
1. घोषणा — त थ, पद और नयम कम-से-कम एक सप्ताह पहले सूचना पट्ट पर।
2. नामांकन — कक्षा का कोई भी वद्याथ खड़ा हो सकता है; एक अन्य वद्याथ उसका नाम प्रस्ता वत करे।
3. घोषणापत्र और प्रचार — प्राथना सभा म हर उम्मीदवार को बोलने का समान समय। कोई उपहार नह , कोई व्य क्तगत आक्षेप
नह ।
4. मतदान — एक वद्याथ , एक गुप्त मत, पच पर, सीलबंद पेट म। कक्षा के सभी वद्याथ मतदान कर, उम्मीदवार भी।
5. मतगणना — दो वद्याथ पयवेक्षक और एक शक्षक के सामने। सवा धक मत पाने वाला वजयी; बराबरी होने पर पुनमतदान।
6. प रणाम और शपथ — प रणाम सूचना पट्ट पर; नवा चत सदस्य वचन द क वे पूरी कक्षा के लए काम करगे, केवल अपने
मत्र के लए नह ।
भाग 3 — जवाबदे ही बनाए र खए — हर माह प्राथना सभा म छोट रपोट, एक सुझाव-पेट जसका उपयोग कोई भी कर सके,
और सत्र के अंत म नया चुनाव।
नमूना उत्तर: ‘हमारे वद्यालय म कक्षा 6 से 10 तक ह, इस लए हमने पाँच सदस्य क स म त तय क — हर कक्षा
से एक नवा चत प्र त न ध। पहले हमने स म त के काय एक चाट पर लखकर ग लयारे म लगाए। सोमवार को
नामांकन खुले; हमारी कक्षा से चार वद्याथ खड़े हुए। बुधवार क प्राथना सभा म प्रत्येक ने दो मनट बोला। शुक्रवार
को हमने गुप्त मतदान कया और प चयाँ सीलबंद डब्बे म डाल । रेखा जी ने दो वद्याथ पयवेक्षक के सामने गनती
क । आरव को 38 म से 21 मत मले और वह हमारा प्र त न ध घो षत हुआ। स म त अब हर सोमवार मध्यावकाश म
मलती है और हर माह के पहले काय दवस पर प्राथना सभा म रपोट दे ती है।'
गुप्त मतदान क्य जरूरी है: 10व शताब्द के उत्तरमेरूर शलालेख (पृष्ठ 197) ग्राम सभा के लए सीलबंद
मतपे टय का, सदस्य क योग्यताओं का और उन्ह हटाए जाने क तय का वणन पहले ही कर चुके ह। नष्पक्ष
प्र क्रया कोई आधु नक आ वष्कार नह — यह बहुत पुराना वचार है क चुनाव को स्वतंत्र कैसे रखा जाए।
आइए वचार कर — पृष्ठ 199
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राजतंत्र — राजा क श क्त क सीमाएँ
आइए वचार कर
प्र.1 य द कोई राजा स्वयं को ईश्वरीय श क्तय से युक्त मानने लगे, तो क्या हो सकता है? वह अपनी प्रजा पर कस
प्रकार शासन करेगा?
वह ऐसे शासन करेगा मानो उसे कसी को उत्तर न दे ना हो — प्रश्न इसी खतरे क ओर संकेत करता है।
संभा वत प रणाम
उसका वचन ही कानून बन जाएगा। वह स्वयं कानून बनाएगा, लागू कराएगा और दं ड भी नधा रत करेगा — अध्याय बताता
है क वश्व के कुछ भाग म ठ क यही हुआ, जहाँ राजाओं ने ईश्वर से दव्य श क्त प्राप्त होने का दावा कया।
उससे प्रश्न करना धम- वरुद्ध माना जाने लगेगा, केवल राज्य- वरुद्ध नह । मंत्री, व ान और साधारण लोग सच्ची सलाह दे ना
बंद कर दगे।
सुधार असंभव हो जाएगा। य द ईश्वर-तुल्य राजा गलत हो ही नह सकता, तो गलत नणय बदला नह जा सकता और कोई
न्यायालय उसे रोक नह सकता।
शासन प्रजा को अधीन करने म बदल सकता है — यह शब्द अध्याय ने स्वयं उन राजाओं के लए प्रयोग कया है जन्ह ने
श क्त का प्रयोग जनता को अपने अधीन करने के लए कया।
उत्तरा धकार के झगड़े हसक हो जाएँगे, क्य क सहासन के साथ राजनी तक श क्त ही नह , प वत्र अ धकार भी जुड़ जाता
है।
भारतीय परंपरा दूसरी दशा म क्य जाती है: भारत के कई क्षेत्र म राजा क श क्त न तो नरंकुश थी और न ही
आलोचना से मुक्त। उससे अपेक्षा थी क वह राजधम क सीमाओं म रहकर नणय ले — धम के अनुसार शासन करे
और सभी के कल्याण को सव प र रखे। शां तपव म भीष्म यु ध ष्ठर को बताते ह क प्रजा का कल्याण राजा क
सबसे बड़ी प्राथ मकता है, उसे कानून नष्पक्ष रूप से लागू करने चा हए, सत्ता से आसक्त नह होना चा हए क्य क
इससे अहंकार और भ्रष्टाचार जन्म लेते ह, व ान सलाहकार क सलाह अवश्य लेनी चा हए, और यह समझना
चा हए क उसक सत्ता अ ायी है तथा धम के बंधन से बँधी है। जो राजा स्वयं को ईश्वर मान ले, वह इन पाँच
सीमाओं को एक साथ तोड़ दे ता है।
अध्याय का वपरीत उदाहरण: कश्मीर के राजा चं ापीड मं दर बनवाना चाहते थे, पर उस ान पर एक मोची क झ पड़ी थी।
झ पड़ी गराने के बजाय राजा ने अपने ही शल्पकार को दोषी ठहराया क उन्ह ने पहले अनुम त क्य नह ली, स्वयं मोची के पास
गए, सम्मानपूवक अनुरोध कया और उ चत धनरा श द । प्रसंग का नष्कष है — ‘जो लोग सुख क कामना करते ह, उन्ह झूठे
अहंकार को त्याग दे ना चा हए।' यह राजा धम के सेवक क तरह व्यवहार कर रहा है — उस राजा के ठ क वपरीत जो स्वयं को ईश्वर
समझता है।
ध्यान द: यही वचार आधु नक शासन म भी जी वत है। ‘कोई कानून से ऊपर नह ' और ‘कानून के समक्ष समानता'
राजधम के ही संवैधा नक रूप ह — ऐसी सीमाएँ जो शासक पर भी लागू होती ह।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 204
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शेन क कहानी (पृष्ठ 203) — अ धनायकतंत्र
आइए पता लगाएँ
प्र.1 क्या शेन का दे श एक लोकतां त्रक दे श कहा जा सकता है?
नह । कहानी को पृष्ठ 191–192 पर दए लोकतंत्र के मूलभूत सद्धांत क कसौट पर क सए — वह हर कसौट पर वफल होती
है।
लोकतंत्र का सद्धांत कहानी क्या दखाती है उप त?
स्वयं चयन करने की स्वतंत्र ता सरकार तय करती है क उसके बाल कैसे कट और वह कैसे नही ं
कपड़े पहने
अिभव्यिक्त की स्वतंत्र ता और सूचना वह इंटरनेट का प्रयोग नह कर सकता और बाहर क दु नया से नही ं
तक पहच
ुँ अनजान है
राज्य के िवरुद्ध संर िक्षत अिधकार उसे तब तक सेना म रहना है जब तक सरकार चाहे नही ं
सरकार का जनता के पित सरकार उसक हर ग त व ध पर नजर रखती है; उसे दूसर क नही ं — िनगरानी के वल एक
उत्तरदाियत्व जानकारी दे नी होती है ओर से है
पितिनिध सहभािगता, चुनाव कहानी म इनका कोई उल्लेख नह — न मत, न प्र त न ध, न नही ं
कुछ बदलने का उपाय
पयटक को दया गया उसका अपना उत्तर ही सब बता दे ता है — ‘हम सभी नए तरीक से बाल बनाना चाहते ह, ले कन यह सरकार
नधा रत करती है, हम कस प्रकार से बाल रखने चा हए।' इच्छा जनता क है, श क्त सरकार क । लोकतंत्र म यह वाक्य अथहीन
होता।
तो यह कौन-सी शासन प्रणाली है? जस दे श म श क्त पर सं वधान या कानून का कोई नयंत्रण न हो, जहाँ जनता
शासक को चुन या हटा न सके और जहाँ दै नक जीवन का वस्तार से नयंत्रण हो, वह अध्याय क प रभाषा के
अनुसार अ धनायकतंत्र है।
प्र.2 आपके वचार म शेन का दै नक जीवन कैसा होगा?
केवल वही ली जए जो कहानी बताती है, और उसे एक साधारण दन म उतारकर दे खए।
उसका समय उसका अपना नह है। वह अ नवाय सैन्य सेवा म है और तब तक रहेगा जब तक सरकार चाहे — इस लए
पढ़ाई, काम या यात्रा क कोई योजना नह बना सकता।
छोटे -से-छोटे चयन भी उसके लए तय ह — बाल, कपड़े। जो बात मामूली लगती ह, वे रोज याद दलाती ह क नयंत्रण
कसका है।
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उसक दु नया छोट है। इंटरनेट तक पहुँच न होने से वह न अपनी त क तुलना कर सकता है, न कोई भन्न वचार पढ़
सकता है, न यह जान सकता है क कह और क्या हो रहा है।
उस पर नजर रखी जाती है। सरकार उसक हर ग त व ध दे खती है, इस लए वह घर म भी हर शब्द तौलकर बोलेगा।
उसे दूसर पर नजर रखनी है। नयम तोड़ने वाले क जानकारी दे ने क अपेक्षा पड़ो सय और मत्र को जो खम बना दे ती है।
वश्वास महँगा हो जाता है।
शकायत का कोई रास्ता नह । न चुनाव, न स्वतंत्र समाचार माध्यम, न कोई स्वतंत्र न्यायालय।
इस लए उसके दन का स्वरूप न त पर तनावपूण होगा — भोजन, काम और आश्रय क व्यव ा भले हो, पर भन्न होने क
जगह नह और सच बोलने के लए कोई सुर क्षत व्य क्त नह ।
ध्यान द: उत्तर लखते समय कहानी म दए प्रमाण पर ही ट कए, बाहर से सुनी बात न जो ड़ए। पुस्तक इस कहानी
को इस लए दे ती है क अ धनायकतंत्र भीतर से कैसा लगता है, यह समझा जा सके — प्रश्न भी यही कल्पना करने
को कहता है।
प्र.3 क्या आप ऐसे दे श म रहना चाहगे? बताइए क्य ?
यह आपक अपनी राय माँगता है, इस लए पहले स्पष्ट पक्ष र खए और फर कारण द जए। लगभग हर वद्याथ ‘नह ' कहेगा — पर
अंक क्य म ह।
उत्तर के आधार बन सकने वाले कारण
स्वतंत्रता। म स्वयं तय करना चा ँगा क म कैसा दखूँ, क्या प ँ , कसम वश्वास रखूँ और क्या काम करूँ।
आवाज। य द कोई नयम अनु चत हो तो मुझे उसे कहने का रास्ता चा हए — मत, समाचार पत्र या न्यायालय — केवल
आ ापालन नह ।
वश्वास। जस दे श म मुझे अपने मत्र क सूचना दे नी पड़े, वहाँ सच्चा मत्र हो ही नह सकता।
सुधार। हर सरकार से गलती होती है। जस व्यव ा को यह बताया ही न जा सके क वह गलत है, वह स्वयं को सुधार भी नह
सकती।
नमूना उत्तर: ‘नह , म शेन के दे श म नह रहना चा ँगा। वहाँ नयम उन बात तक पहुँच जाते ह जो मेरी अपनी होनी
चा हए — मेरे बाल, मेरे कपड़े, कतने समय तक म सेना म र ँ। इससे भी बड़ी बात यह क इनम से कुछ भी बदलने
का कोई उपाय नह , क्य क वहाँ न चुनाव है, न स्वतंत्र सूचना, न कोई न्यायालय जहाँ म जा सकूँ। मुझे अपने आस-
पास के लोग क जानकारी भी दे नी होगी, इस लए म कसी मत्र से भी खुलकर बात नह कर पाऊँगा। म वहाँ रहना
पसंद करूँगा जहाँ म खुलकर असहमत हो सकूँ और य द लगे क सरकार वफल हो रही है तो अगले चुनाव म उसे
बदलने म सहयोग कर सकूँ। म जानता ँ क लोकतंत्र क भी अपनी समस्याएँ ह — भ्रष्टाचार और असमानता स हत
— पर लोकतंत्र म इन समस्याओं का नाम लया जा सकता है, उन पर बहस हो सकती है और उन्ह सुधारा जा सकता
है।'
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संतुलन बनाए र खए: अध्याय स्वयं संतु लत है — वह लोकतंत्र क प्रशंसा करता है और उसक बाधाएँ भी गनाता
है। अच्छा उत्तर यह बताता है क आप कन मूल्य को महत्व दे ते ह और क्य , यह दावा कए बनाem
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लोग अच्छे या.cबुoरे ह।
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चत्र 9.13 (पृष्ठ 204) — अल्पतंत्रीय त को दशाता 1889 का व्यंग्य- चत्र
आइए पता लगाएँ
प्र.1 पछले पृष्ठ पर दए गए चत्र 9.13 को ध्यान से दे खए। यह चत्र 19व शताब्द के उत्तराध म अमे रका क एक
नवा चत सं ा को दशाता है। चत्र म दखाए गए सभी लोग नवा चत प्र त न ध ह। आप क्या दे ख रहे ह? चत्र
के ऊपर बाईं ओर क्या दख रहा है? आपके अनुसार इस नवा चत सं ा म नणय कौन ले रहा है?
चत्र 9.13 म क्या है — पक (Puck) प त्रका, 1889 का एक श्वेत-श्याम व्यंग्य- चत्र (ऊपर बीच म
PUCK छपा है):
दृश्य संयुक्त राज्य अमे रका क सीनेट का सदन है। आगे के भाग म लकड़ी क गोलाकार मेज़ क
पं क्तयाँ ह, जन पर नवा चत सदस्य बैठे ह — साधारण कद-काठ के, काले सूट पहने; कोई
लख रहा है, कोई कागज़ पर झुका है, कोई पड़ोसी से बात कर रहा है। कोई भी ऊपर नह दे ख
रहा।
उनके पीछे , सदन क चौड़ाई म फैली ऊँची द घा पर वशालकाय, मोटे आकार खड़े ह। हर एक का
शरीर रुपय क एक वशाल थैली है और सर छोटा, जस पर ऊँची टोपी या गोल हैट है; कुछ के
हाथ म छड़ी है, एक के पेट पर डॉलर का चह्न ($) बना है। वे रे लग पर झुककर नीचे बैठे लोग को
दे ख रहे ह।
हर थैली पर एक नाम लखा है। बाईं ओर से : SALT TRUST, ENVELOPE TRUST, PAPER
BAG TRUST, COAL, TIN TRUST, SUGAR TRUST, IRON TRUST, STANDARD OIL
TRUST, COPPER TRUST, STEEL BEAM TRUST, NAIL TRUST और सबसे दा हने
कनारे पर एक और स्ट ल ट्रस्ट।
ऊपर बाईं ओर द वार म एक छोटा दरवाज़ा है। उसके ऊपर लखा है “PEOPLES’
ENTRANCE” (जनता का प्रवेश- ार), और दरवाज़े पर आड़ा टँगा एक तख़्ता कहता है
“CLOSED” (बंद)।
ऊपर दाईं ओर एक ऊँचा खुला दरवाज़ा है, जस पर लखा है “ENTRANCE FOR
MONOPOLISTS” (एका धका रय का प्रवेश- ार); काले कोट, ऊँची टोपी और छड़ी वाला एक
भारी-भरकम व्य क्त अभी-अभी उससे भीतर आया है।
दोन दरवाज़ के बीच पछली द वार पर एक लंबा बैनर तना है, जस पर लखा है : “THIS IS A
SENATE OF THE MONOPOLISTS, BY THE MONOPOLISTS AND FOR THE
MONOPOLISTS!”
चत्र 9.13, पृष्ठ 204 — “अल्पतंत्रीय त को दशाता हुआ 1889 का एक व्यंग्य- चत्र”। यह एक मु त व्यंग्य- चत्र है,
जसका यहाँ वणन कया गया है; मूल चत्र के लए पाठ्यपुस्तक दे खए।
व्यंग्य- चत्र को धीरे-धीरे प ढ़ए — चत्रकार ने पूरा तक छोटे -छोटे ववरण म छपा रखा है।
आप क्या दे ख रहे ह
यह कक्ष एक वधा यका के रूप म बना है — छोट -छोट मेज क पं क्तयाँ, उन पर बैठे नवा चत सदस्य, और चार ओर
दशक-द घा।
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार AglaSem · NCERT Solutions
इन मेज के ऊपर ऊँचे हैट और औपचा रक कोट पहने वशाल आकृ तयाँ खड़ी ह, जनके शरीर बड़े-बड़े धन क थै लय
के रूप म बने ह। हर थैली पर कसी उद्योग का नाम लखा है — कोयला, चीनी, टन, लोहा, स्टडड ऑयल, ताँबा, स्ट ल बीम,
क ल, कागज क थैली, नमक के व्यापा रक एका धकार (ट्रस्ट)।
नवा चत सदस्य बहुत छोटे दख रहे ह, मेज पर झुके हुए, कुछ आपस म फुसफुसाते हुए, कोई भी इन वशाल आकृ तय को
संबो धत नह कर रहा। आकार का यही अंतर पूरा संदेश है।
पछली द वार पर एक पट्ट लगी है — ‘यह एका धका रय क , एका धका रय ारा और एका धका रय के लए सीनेट
है' — जो पृष्ठ 189 पर उद्धत अ ाहम लकन क प्र सद्ध प रभाषा का उपहासपूण रूपांतर है।
दाईं ओर एक चौड़ा ार खुला है, जस पर लखा है ‘एका धका रय के लए प्रवेश'।
चत्र के ऊपर बाईं ओर
दशक-द घा का एक छोटा ार है जस पर लखा है ‘जनता का प्रवेश ार' — और उस पर एक तख्ती टँ गी है जस पर लखा है
‘बंद'। साधारण नाग रक के लए बना ार बंद है, जब क एका धका रय के लए बना ार पूरा खुला है।
नणय कौन ले रहा है?
नवा चत सदस्य नह । नणय बड़े व्यापा रक घरान के मा लक ले रहे ह — कुछ अत्यंत धनी लोग, जन्ह कसी ने नह चुना।
नवा चत प्र त न ध उप त तो ह, पर स्पष्ट रूप से श क्तहीन ह। यही अल्पतंत्र क प रभाषा है — कुछ श क्तशाली लोग या
प रवार, जो सारे महत्वपूण नणय लेते ह।
यह व्यंग्य- चत्र आज भी क्य महत्वपूण है: यहाँ बाहरी रूप पूरी तरह लोकतां त्रक है — सदन है, चुनाव ह, सदस्य
ह। फर भी सार अल्पतंत्रीय है। चत्र चेतावनी दे ता है क कसी सरकार को केवल उसके रूप से नह आँका जा
सकता; यह पूछना पड़ता है क नणय वास्तव म कौन ले रहा है। अध्याय भी यही कहता है क कुछ लोकतंत्र म
अल्पतंत्र के लक्षण दखाई दे ते ह।
क्या आप जानते ह? यह जोसेफ केप्लर का प्र सद्ध चत्र ‘द बॉसेज ऑफ द सीनेट' है, जो 1889 म अमे रक
प त्रका पक म छपा था — चत्र के शीष पर ‘PUCK' लखा दखता है। ऐसे व्यंग्य- चत्र ने एका धकार के वरुद्ध
कानून बनवाने म जनमत तैयार कया।
प्र.2 लोकतंत्र क्या अल्पतंत्र म बदल सकता है? लोकतंत्र को सशक्त रखने के लए लोग क्या कर सकते ह?
हाँ, बदल सकता है — कसी घोषणा से नह , ब ल्क भीतर से धीरे-धीरे खोखला होकर। अध्याय कहता है क कुछ राजनी तक
टप्पणीकार के अनुसार आधु नक समय म कुछ लोकतंत्र म यह दे खा गया है क कुछ श क्तशाली राजनेता और बड़े व्यापा रक
घराने शासन पर अत्य धक प्रभाव रखते ह।
यह फसलन कैसे होती है
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चेतावनी का संकेत यह कैसा दखता है
िकसकी बात सुनी जाएगी, यह धन तय करने लगे केवल अत्यंत धनी लोग चुनाव लड़ पाएँ, जससे मतदाता के सामने वकल्प समट जाएँ
संस्थाएँ स्वतंत्र ता खो दे ं न्यायपा लका क स्वतंत्रता का क्षरण, जससे श क्तशाली लोग पर कोई अंकुश न रहे
सूचना पर िनयंत्र ण सूचना माध्यम का दुरुपयोग, जससे मतदाता गलत चत्र के आधार पर नणय ल
भष्टाचार सामान्य बन जाए नणय पर बहस के बजाय सौदे होने लग
नागिरक भाग ले ना छोड़ दे ं कम मतदान और चुप्पी मैदान कुछ लोग के लए खाली छोड़ दे ती है
लोग क्या कर सकते ह
हर बार मतदान कर। अ धक मतदान सबसे सस्ता बचाव है; इससे साधारण मतदाता क उपेक्षा महँगी पड़ती है।
प्रश्न पूछ और कानून का प्रयोग कर। सूचना का अ धकार अ ध नयम कसी भी नाग रक को यह पूछने दे ता है क नणय कैसे
लया गया और सावज नक धन कहाँ गया।
स्वतंत्र सं ाओं क रक्षा कर — न्यायालय, नवाचन आयोग, लेखा परीक्षक, स्वतंत्र समाचार माध्यम। ये श क्त पर अंकुश के
लए ही बने ह, चाहे श क्त कसी के भी पास हो।
मानने से पहले जाँच। समाचार क पु ष्ट क जए, ोत मलाइए, और जसक पु ष्ट न हो उसे आगे मत भे जए।
ानीय स्तर पर भाग ल — ग्राम सभा, नवासी कल्याण संघ, वद्यालय स म त। लोकतंत्र क आदत घर के पास ही बनती है।
व्यव ा को समझ। जो नाग रक अपने अ धकार जानते ह, उन्ह कनारे करना कह क ठन होता है।
सजगता ही उत्तर क्य है: लोकतंत्र म श क्त सरकार को केवल उधार द जाती है और हर चुनाव म यह उधार नए
सरे से तय होता है। अल्पतंत्र तब पनपता है जब नाग रक यह उधार वापस माँगना बंद कर दे ते ह। इस लए लोकतंत्र
को सशक्त रखना मतदान के दन का एक काम नह — यह वह है जो लोग दो चुनाव के बीच करते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 205
लोकतंत्र क्य महत्वपूण है? — ता लका 9.2, सरकार के व भन्न स्वरूप क वशेषताएँ
प्र.1 शासन प्रण लय के व भन्न स्वरूप म नम्न ल खत वशेषताओं पर वचार कर और रक्त खान को ‘हाँ’ या
‘नह ’ से भर—
पुस्तक पहली पं क्त भर दे ती है (हाँ, नह , नह , नह )। शेष पं क्तयाँ भी उसी क्रम म चलती ह, क्य क पाँच वशेषताएँ एक ही मूल
प्रश्न से नकलती ह — क्या सत्ता का ोत जनता है।
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वशेषताएँ लोकतंत्र अ धनायकतंत्र नरंकुश राजतंत्र अल्पतंत्र
सावभौिमक वयस्क मतािधकार हाँ नह नह नह
नागिरकों के मध्य समानता हाँ नह नह नह
अिभव्यिक्त की स्वतंत्रता हाँ नह नह नह
शिक्तयों का पथृ क्करण हाँ नह नह नह
सभी नागिरकों का क ल्याण तथा समृिद्ध हाँ नह नह नह
हर ‘नह ' के पीछे का कारण
शासन यह स्तंभ ‘नह ' क्य पढ़ता है
प्रणाली
अिधनायकतंत्र एक व्य क्त या छोटे समूह के पास संपूण सत्ता होती है और सं वधान या कानून का कोई नयंत्रण नह । जब शासक से ऊपर
कोई कानून ही न हो, तो न समान मता धकार संभव है, न संर क्षत अ भव्य क्त, न स्वतंत्र न्यायालय।
िनरंकु श राजा कानून बनाता है, लागू कराता है और उल्लंघन पर न्या यक नणय भी दे ता है — तीन काय एक ही हाथ म ह, इस लए
राजतंत्र श क्तय का पृथक्करण असंभव है। सहासन वंशानुगत है, इस लए मतदान का प्रश्न ही नह उठता।
अल्पतंत्र कुछ श क्तशाली लोग सारे महत्वपूण नणय लेते ह। कागज पर चुनाव ह भी, तो वास्त वक चयन कुछ ही लोग के पास
रहता है — जैसा 1889 के व्यंग्य- चत्र म दखता है, जहाँ जनता के ार पर ‘बंद' लखा है।
अं तम पं क्त को ध्यान से प ढ़ए। ‘नह ' का अथ यह नह क कसी राजा ने कभी प्रजा के लए काम नह कया।
अध्याय इसका उलटा उदाहरण भी दे ता है — राजा चं ापीड मोची को उसक झ पड़ी का मूल्य दे ते ह, और राजधम
का आदश भी वह है। ‘नह ' का अथ है क व्यव ा इसक गारंट नह दे ती: नरंकुश राजतंत्र म जनता का
कल्याण एक व्य क्त के च रत्र पर नभर है, जब क लोकतंत्र म यह एक ऐसा कतव्य है जसके लए सरकार जवाबदे ह
है और जसे न नभाने पर उसे हटाया जा सकता है।
ध्यान द: लोकतंत्र पाँच पर ‘हाँ' पाता है, पर आदश रूप म। कोई वशेष लोकतंत्र इन्ह पूरी तरह प्राप्त कर पाता है
या नह , यह अलग प्रश्न है — और अध्याय का अं तम भाग उसी पर चचा करता है।
आइए पता लगाएँ — पृष्ठ 206
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार
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‘आपने सरकार के व भन्न स्वरूप क मूलभूत वशेषताएँ सीखी ह। अब अपनी कक्षा म नम्न ल खत वषय पर एक लघु भू मका नवहन (रोल
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प्ले) ना टका प्रस्तुत कर'
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आइए पता लगाएँ
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aप्र.1 लोकतंत्र
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दृश्य: कक्षा को वा षकोत्सव के लए मले ₹2,000 खच करने का नणय लेना है।
भू मकाएँ — प्रत्येक समूह म 5 मतदाता, 3 उम्मीदवार, 1 नवाचन अ धकारी, 1 अध्यक्ष, 3 ‘मंत्री', 1 न्यायाधीश।
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1. नवाचन अ धकारी मतदान क त थ और नयम घो षत करता है।
2. हर उम्मीदवार एक मनट बोलता है — ‘य द म चुना गया तो यह रा श … पर खच करूँगा।'
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3. प्रत्येक वद्याथ एक बार, गुप्त रूप से, पच पर मतदान करता है।
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gl5. प्रस्ताव पर बहस होती है, संशोधन होते ह और मतदान होता है। बहुमत नणय करता है।
4. प चयाँ सबके सामने गनी जाती ह। वजेता ‘मं त्रप रषद' बनाते ह और पूरी कक्षा ‘ वधा यका' बन जाती है।
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6. कोई आप त्त करता है क नयम तोड़ा गया; न्यायाधीश दोन पक्ष सुनकर नणय दे ता है — मं त्रय के वरुद्ध भी।
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दृश्य का समापन वाक्य: ‘हम असहमत हुए, हमने मतदान कया और प रणाम स्वीकार कया — और नयम वजेताओं को भी
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मानने पड़े।'
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दशक क्या दे ख: नणय से पहले चचा, गुप्त और समान मत, हारे हुए पक्ष को कोई दं ड नह , और ऐसा न्यायाधीश
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जो कसी दल का नह ।
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agl प्र.2 राजतंत्र
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दृश्य: वही ₹2,000 — पर अब कक्षा एक राज्य है।
भू मकाएँ — एक राजा या रानी, मं त्रप रषद, एक व ान सलाहकार, और प्रजा।
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1. सहासन जन्म के कारण मलता है — ‘मेरी माता मुझसे पहले शासन करती थ ।'
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2. प्रजा राजा से प्राथना कर सकती है; मतदान नह कर सकती।
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3. मंत्री सलाह दे ते ह; व ान सलाहकार राजा को राजधम क याद दलाता है — क प्रजा का कल्याण सव प र है और सत्ता
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em4. राजा नणय करता है। दृश्य दो बार क जए — एक बार ऐसे राजा के रूप म जो सुनता है (जैसे चं ापीड मोची के पास स्वयं
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agl गए) और एक बार ऐसे नरंकुश राजा के रूप म जो कसी क नह सुनता।
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दृश्य का समापन वाक्य: ‘आज नणय न्यायसंगत रहा — पर केवल इस लए क राजा ने न्यायसंगत होना चुना।'
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दो बार क्य : इससे वास्त वक अंतर दखता है। राजतंत्र म अच्छा प रणाम शासक के च रत्र पर नभर है; लोकतंत्र म
वह उस प्र क्रया पर नभर है जो जनता के हाथ म है।
प्र.3 अ धनायकतंत्र
दृश्य: वही ₹2,000, पर नणय एक नेता और दो सहयोगी लेते ह।
भू मकाएँ — एक नेता, दो सहयोगी, शेष कक्षा नाग रक। स्वर गंभीर र खए, हास्यास्पद नह ; उ े श्य वकल्पहीनता को महसूस
करना है, कसी का उपहास करना नह ।
1. नेता बना कसी से पूछे घोषणा करता है — ‘यह रा श अमुक काय पर खच होगी। वषय समाप्त।'
2. एक नाग रक आप त्त के लए हाथ उठाता है; सहयोगी कहता है क आप त्त क अनुम त नह है।
3. ऐसे नयम जोड़े जाते ह जनका पैसे से कोई संबंध नह — सबको एक ही तरह बैठना है, कोई फुसफुसाएगा नह ।
4. एक नाग रक से कहा जाता है क बताए क कसने फुसफुसाया।
5. कोई पूछता है क अगला नणय कब होगा। कोई उत्तर नह मलता।
दृश्य का समापन वाक्य: ‘ कसी बात पर मतदान नह हुआ, कसी नणय के वरुद्ध अपील नह हो सक , और कसी को पता नह
क यह कब बदलेगा।'
ध्यान द: भू मका नवहन म कसी वास्त वक जी वत नेता या दे श का नाम न ली जए। उ े श्य व्यव ा को समझना है
— एक व्य क्त या छोटा समूह, जसक श क्त पर सं वधान या कानून का कोई नयंत्रण नह ।
प्र.4 इसके प ात वचार कर क कौन-सी शासन व्यव ा आपको सबसे उपयुक्त लगी?
तीन दृश्य के बाद अ धकांश कक्षाएँ लोकतंत्र चुनगी — और कारण उसी अनुभव से आएँगे जो अभी-अभी हुआ, जो इस
क्रयाकलाप का पूरा उ े श्य है।
भू मका नवहन म लोकतंत्र राजतंत्र अ धनायकतंत्र
िनणय िकसने िलया बहस के बाद बहम
ु त ने सलाह के बाद राजा ने अकेले एक व्य क्त ने
क्या असहमत होना सुर िक्षत था? हाँ प्राथना क जा सकती थी नह
क्या गलत िनणय बदला जा सकता था? हाँ — अगले मतद ान में केवल तब जब राजा मान जाए नह
हारने वाले पक्ष ने कै सा अनुभव िकया? िनराश , पर सुना गया नभर चुप करा दया गया
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नमूना उत्तर: ‘हमारी कक्षा को लोकतंत्र सबसे उपयुक्त लगा। यह अन्य दोन से धीमा था — बहस म तानाशाह क
घोषणा से दुगना समय लगा — पर यही एकमात्र व्यव ा थी जसम मतदान हारने वाले के साथ भी बराबरी का
व्यवहार हुआ, और यही एकमात्र व्यव ा थी जसम गलती को उसी व्य क्त से अनुम त लए बना सुधारा जा सकता
था जसने वह गलती क । हमने यह भी दे खा क अच्छे राजा और बुरे राजा — दोन के पास श क्तयाँ बल्कुल एक
जैसी थ , और इसी बात ने हम समझाया क न्यायसंगत प रणाम कसी एक व्य क्त के च रत्र पर नभर नह होना
चा हए।'
तक म नष्पक्ष र हए: अध्याय यह दावा नह करता क लोकतंत्र दोषर हत है। वह कहता है क अ धकतर दे श म
इसे बेहतर माना जाता है, और तुरंत लोकतंत्र क अपनी बाधाएँ भी गना दे ता है। अच्छा उत्तर यह बताता है क आप
इसे क्य पसंद करते ह और यह नाग रक से क्या माँगता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 207
लोकतंत्र क्य महत्वपूण है? — लोकतंत्र के समक्ष चुनौ तयाँ
प्र.1 हम एक व्य क्त और समाज के रूप म सजग रहकर इन समस्य और बाधाओं को कम करने के लए क्या कर
सकते ह?
अध्याय ने जो बाधाएँ गनाई ह, उनम से हर एक के सामने एक उपाय र खए — अच्छे उत्तर का यही ढाँचा है।
अध्याय म द गई बाधा एक व्य क्त के रूप म समाज के रूप म
भष्टाचार रश्वत न द और न ल; रसीद रख; सूचना का स्वतंत्र ले खा परीक्षक और भष्टाचार -िनरोधी
अ धकार अ ध नयम से पूछ क धन कहाँ गया संस्थाएँ; स्थानीय काय ं का िहसाब सावजिनक
करना
आिथक िवषमता सरकारी वद्यालय और अस्पताल का उपयोग और न्यायसंग त कर , क ल्याणकारी योजनाएँ, सबके
समथन कर; पढ़ाने या स्वास्थ्य श वर म स्वयंसेवा च्
िल ए अ छी सावजिनक िश क्षा और स्वास्थ् य से वा
कर
लोकतांित्रक संस्थाओं पर कु छ हर चुनाव म मतदान कर — पंचायत और पारद श च ुनावी चंद ा ; सशक्त िनव चन आयोग ;
लोगों का अत्यिधक िनयंत्रण नगरपा लका के चुनाव म भी िकसी एक पद पर बने रहने की सीमा
न्यायपािलका की स्वतंत्रता का जान क न्यायालय क्या करते ह; न्यायालय के न्यायाधीशों की िनय ुिक्त की स्पष्ट पि या ; पय प्त
क्षरण आदे श का सम्मान कर न्यायाल य और न्यायाधीश तािक न्याय में दे री न हो
सूचना माध्यमों का दुरुपयोग कोई समाचार मानने या आगे भेजने से पहले दो स्वतंत्र समाचार माध् यम , िव ाल यों में मीिडया
वश्वसनीय ोत म जाँच सा क्षरता, सबके िल ए सुल भ तथ् य-जाँच
पाँच आदत जो इन सबको समेट लेती ह
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1. मतदान क जए, और जानकारी लेकर क जए। प ढ़ए क उम्मीदवार क्या वादा करते ह, और बाद म जाँ चए क उन्ह ने क्या
कया।
2. पू छए। कोई भी नाग रक कसी सरकारी कायालय से पूछ सकता है क नणय कैसे लया गया। प्रश्न सजगता का सबसे सस्ता
रूप ह।
3. पु ष्ट क जए। जसक पु ष्ट न हो, उसे आगे मत भे जए। लाख अच्छे लोग ारा फैलाई गई अफवाह उतना ही नुकसान करती
है जतना एक व्य क्त का झूठ।
4. ानीय स्तर पर भाग ली जए। ग्राम सभा, वाड क बैठक, वद्यालय स म त, स्वच्छता अ भयान — लोकतंत्र का अभ्यास
पहले पास-पड़ोस म होता है, फर दे श म।
5. केवल अपने नह , दूसर के अ धकार के लए भी बो लए। समानता तभी टकती है जब लोग उसे अपने से भन्न लोग के
लए भी माँग।
‘सजग' शब्द ही सही क्य है: सरकार जनता के प्र त उत्तरदायी है — पर उत्तरदा यत्व अपने आप काम नह
करता। वह तब काम करता है जब कोई दे ख रहा हो, पूछ रहा हो और मतदान कर रहा हो। कक्षा 7 के वद्याथ के
रूप म आपके पास इनम से तीन साधन अभी ह — आप ध्यान से पढ़ सकते ह, प्रश्न पूछ सकते ह, और जसक पु ष्ट
न हो उसे फैलाने से मना कर सकते ह।
आगे बढ़ने से पहले... — पृष्ठ 207
अध्याय पाँच बदुओं म
आगे बढ़ने से पहले …
प्र.1 सरकार कसी भी दे श के संचालन म महत्वपूण भू मका नभाती है। समूचे वश्व म व भन्न प्रकार क सरकार इन
प्रश्न के अलग-अलग उत्तर दे ती ह— ‘यह सरकार है’ — इसे कौन नधा रत करता है? सरकार के कौन-कौन से
अंग होते ह और वे क्या काय करते ह? सरकार कसके लए काय करती है? सरकार को कन मूल्य और आदश
का पालन करना चा हए?
ये चार प्रश्न अध्याय का मापदं ड ह। कसी भी सरकार को इन पर क सए और उसका प रचय बन जाएगा।
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प्रश्न लोकतंत्र राजतंत्र धमतंत्र अ धनायकतंत्र अल्पतंत्र
‘यह दे श की जनता जन्म; कभी-कभी धा मक वश्वास और वह व्य क्त या समूह कुछ धनी या
सरकार है' दव्य श क्त का दावा धा मक सं ा का जसके पास सत्ता है प्रभावशाली
— कौन तय मु खया प रवार
करता है?
गठन कै से श्
िनि चत अंतराल पर वंशानुगत उत्तरा धकार धमगुरुओं ारा सत्ता पर अ धकार; प्रभाव के बल
होता है? च ुनाव चयन (ईरान म वपक्ष समाप्त पर, औपचा रक
नवा चत राष्ट्रप त प्र क्रया चाहे जो
और संसद भी) हो
अंग और िवधाियका , नरंकुश राजतंत्र म तीन अंग के ऊपर व्यवहार म तीन एक औपचा रक अंग
उनके काय कायपािल का , तीन राजा के पास; एक सव च्च धा मक व्य क्त या समूह के रहते ह;
न्यायपािल का — संवैधा नक म संसद अ धकार नयंत्रण म वास्त वक नणय
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पथक और स्वतंत्र और प्रधानमंत्री के बाहर होते ह
पास
िकसके िलए समता और सभी आदशतः सबका आ धका रक धम के शासक के अपने उस छोटे समूह के
काय? नागिरकों की सम ृि द्ध कल्याण (राजधम); नयम पर आधा रत उ े श्य हत
व्यवहार म शासक पर समाज
नभर
चौथा प्रश्न — सरकार को कन मूल्य और आदश का पालन करना चा हए? — का उत्तर अध्याय स्वयं दे ता है: समानता,
स्वतंत्रता, सहभा गता, अ धकार और सभी नाग रक का कल्याण।
प्र.2 वतमान म सबसे लोक प्रय शासन प्रणाली लोकतंत्र है। वश्व भर म लोकतां त्रक सरकार के व भन्न स्वरूप
वद्यमान ह, जनम प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्र त न ध लोकतंत्र स म्म लत ह।
वश्व के आधे से अ धक दे श ने लोकतंत्र अपनाया है — पर ‘लोकतंत्र' एक प रवार का नाम है, कसी एक बनावट का नह ।
प्रत्यक्ष लोकतंत्र प्र त न ध लोकतंत्र
नणय कौन लेता है सभी नागिरक स्वयं, पत्येक िनयम और काय पर नागिरकों ारा िनव िचत पितिनिध
दै नक शासन कौन नागिरक स्वयं िनव िचत सरकार , जो जनता के पित उ त्त रद ायी रहती है
चलाता है
व्यावहा रक सीमा लागू करना बहुत किठन, िवशेषकर बड़े दे शों में — िकसी भी आकार के दे श में संभव ; ईमानद ार बने रहने के िल ए
िव ालय की कहानी यही िदखाती है श्
िनयिमत और िनि चत अंतराल पर च ुनाव आव यक श्
उदाहरण िस्वट् जरलै ंड की कु छ व्यवस्थाएँ भारत तथा आज के अिधकांश ल ोकतं त्र
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ये भन्नताएँ क्य ह: सरकार दे श के अपने इ तहास, संस्कृ त और आकांक्षाओं के साथ वक सत होती है। जो सबम
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समान रहता है वह है मूल तत्व — समानता, स्वतंत्रता और सावभौ मक वयस्क मता धकार।
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प्र.3 प्र त न ध लोकतंत्र के भी दो प्रमुख प्रकार होते ह— अध्यक्षीय प्रणाली और संसद य प्रणाली। भारत म संसद य
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लोकतंत्र है।
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अंतर केवल एक बात का है — कायपा लका वधा यका के भीतर बैठती है या बाहर।
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संसद य लोकतंत्र अध्यक्षीय शासन प्रणाली
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कायपा लका पधानमंत्र ी और मंित्रपिरषद
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aglकौन चुनता है जनता िवधाियका चुनती है; िवधाियका के कु छ
चयिनत सदस्य ही मंत्र ी बनते है ं
जनता सीधे रा ध् क्ष को च ुनती है
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क्या कायपा लका वधा यका
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हाँ — भारत में पधानमंत्री और मंत्री संस द के — कायपािल का िवधाियका से स्वतंत्र काय
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का भाग है? सदस्य भी होते है ं
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तभी तक, जब तक िवधाियका का िवश्वास पाप्त हो रा ध् क्ष को पद बनाए रखने के िल ए िवधाियका के
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समथन की आव यकता नही ं
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ज्य अमेिरका द ि ण कोिरया
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संय ु त रा
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a s emसंसद य लोकतंत्र है — हम अपने सांसद को चुनते ह, लोक सभा म बहुमत रखने वाला दल या गठबंधन सरकार बनाता है,
gl और मं त्रप रषद तभी तक पद पर रहती है जब तक उसे उस बहुमत का वश्वास प्राप्त है।
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क्या आप जानते ह? भारत के राज्य — राज ान, केरल आ द — क अपनी सरकार होती ह, कतु वे पूणतः
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स्वतंत्र नह ह; वे एक बड़ी राष्ट्रीय सरकार, भारत सरकार, के अंतगत ही आती ह।
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प्र.4 अन्य प्रकार क शासन व्यव ाओं म राजतंत्र, धमतंत्र, अ धनायकतंत्र और अल्पतंत्र स म्म लत ह।
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चार अन्य स्वरूप, और हर एक ‘ नणय कौन लेता है' का उत्तर अलग ढं ग से दे ता है।
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स्वरूप मूल वशेषता उपप्रकार / अध्याय के उदाहरण
राजतंत्र शासन राजा ारा, जो संप्रभु श क्त िनरंकु श — सऊद ी अरब (राजा सल ाहकार पिरषद िनयक्ु त करता है पर उ सकी
का प्रयोग करता है; सामान्यतः ध् )
सल ाह मानने को बा य नही ं । संवैध ािनक — िबटेन, जहाँ राजा के पास के वल
वंशानुगत, प्रायः ज्येष्ठ पुत्र औपचािरक शि क्त है और कान ून िनव िचत संस द बनाती है
उत्तरा धकारी
धमतंत्र दे श का शासन धा मक नयम और ईरान — इस्ल ामी धम ग रु
ु ओं के समूह ारा जीवनपयत
ं के िल ए च ुना गया सव च्च
धा मक नेताओं के नदश के अनुसार नेता िवधाियका , कायपािल का और न्यायपािल का तीनों पर सव च्च अिधकार रखता
है, जबिक िनव िचत रा पित और संस द दै िनक पशासन दे खते है ं। साथ ही
अफ गािन स्तान और वेिटकन िसटी
अिधनायकतंत्र एक व्य क्त या छोटे समूह के पास 1933 से जम नी में एडोल्फ िहटल र — होल ोकॉस्ट के िल ए उ त्त रद ायी और ि तीय
संपूण सत्ता, जस पर सं वधान या श्
िव व य ु द्ध (1939–1945) का पमुख कारण; य ुगांडा में ईद ी अमीन, िजनके समय
कानून का कोई नयंत्रण नह अनेक भारतीय मूल के पिरवारों को दे श छोड़ ना पड़ ा
अल्पतंत्र कुछ श क्तशाली लोग या प रवार सारे पाचीन ग ीस के कु छ भागों में कु ल ीन पिरवार ; आध ुिनक ल ोकतंत्र ों के िल ए चेतावनी
महत्वपूण नणय लेते ह के रूप में 1889 का व्यंग्य-िचत्र (िचत्र 9.13)
ध्यान द: हद संस्करण म क्रम है — 1. राजतंत्र, वतमान राजतंत्र ( बना क्रमांक), 2. धमतंत्र, 3. अ धनायकतंत्र, 4.
अल्पतंत्र। अंग्रेजी संस्करण म ‘Monarchies today' को भूल से ‘2' क्रमांक दे दया गया है, जससे 2 दो बार आ
गया है। सही पाठ हद वाला है — अन्य स्वरूप चार ह, पाँच नह ।
प्र.5 लोकतंत्र महत्वपूण है, ले कन इसके समक्ष गंभीर चुनौ तयाँ भी ह, जनके लए नाग रक को सजग और सतक
रहना आवश्यक है।
इस वाक्य के दोन भाग साथ-साथ पढ़े जाने चा हए।
लोकतंत्र क्य महत्वपूण है
लोग अपना दै नक जीवन अपने ढं ग से जी सकते ह — क्या बोलना है, क्या पहनना है, कस वश्वास को मानना है, अ भव्य क्त
कैसे करनी है — जब तक क यह अन्य कसी के अ धकार को क्ष त न पहुँचाए।
लोग अपनी सरकार चुनते ह; सरकार का दा यत्व है क वह नाग रक के अ धकार क रक्षा करे और उनक मूलभूत
आवश्यकताएँ पूरी करे।
य द सरकार दा यत्व नह नभाती तो लोग चुनाव से अपने प्र त न ध बदल सकते ह — इससे सरकार क कायप्रणाली पर
नरंतर नगरानी बनी रहती है।
अध्याय म गनाई गई चुनौ तयाँ
भ्रष्टाचार
आ थक वषमता
लोकतां त्रक सं ाओं पर कुछ लोग का अत्य धक नयंत्रण
न्यायपा लका क स्वतंत्रता का क्षरण
सूचना माध्यम का दुरुपयोग
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सजगता नाग रक का काम क्य है: लोकतंत्र के आदश स्वयं अपनी रक्षा नह करते। समानता, स्वतंत्रता और
मता धकार धीरे-धीरे अ जत और वस्ता रत हुए — टे न म प्रभावी सावभौ मक वयस्क मता धकार 1928 म और
अमे रका म 1965 म आया, तथा स्वट् जरलड ने म हलाओं को मता धकार 1971 म दया। जो धीरे-धीरे पाया गया,
वह धीरे-धीरे खोया भी जा सकता है — इसी लए अध्याय अंत म यही पूछता है क सजग रहने के लए हम क्या कर
सकते ह।
प्रश्न एवं क्रयाकलाप — पृष्ठ 207–208
अध्याय के अंत का अभ्यास
प्र.1 आपने अध्याय म कस- कस प्रकार क सरकार के बारे म पढ़ा? उनके नाम ल खए।
अध्याय म नौ ना मत स्वरूप आते ह, जो दो वग म बँटे ह।
क. लोकतां त्रक सरकार
1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र
2. प्र त न ध लोकतंत्र
संसद य लोकतंत्र
अध्यक्षीय शासन प्रणाली
ख. अन्य प्रकार क सरकार
3. राजतंत्र
नरंकुश राजतंत्र
संवैधा नक राजतंत्र
4. धमतंत्र
5. अ धनायकतंत्र
6. अल्पतंत्र
अध्याय गणराज्य को भी प रभा षत करता है — वह शासन व्यव ा जसम राज्य का प्रमुख नवा चत होता है, वंशानुगत राजा या
रानी नह — और व महाजनपद, चोलकालीन ग्राम सभा तथा रोम व ग्रीस के प्रारं भक गणराज्य का वणन करता है।
ध्यान द: य द प्रश्न केवल ‘सरकार के प्रकार' पूछे तो छह नाम पयाप्त ह — प्रत्यक्ष लोकतंत्र, प्र त न ध लोकतंत्र,
राजतंत्र, धमतंत्र, अ धनायकतंत्र, अल्पतंत्र। ‘ कस- कस प्रकार' पूछे जाने पर उपप्रकार भी जो ड़ए।
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प्र.2 भारत म कस प्रकार क सरकार है और उसे ऐसा क्य कहा जाता है?
भारत म संसद य लोकतंत्र है — पूरी तरह कह तो लोकतां त्रक, प्र त न ध, संसद य शासन प्रणाली, और भारत एक गणराज्य
भी है।
वशेषण भारत को ऐसा क्य कहा जाता है
लोकतंत्र सत्ता का ोत जनता है। प्रत्येक वयस्क नाग रक सावभौ मक वयस्क मता धकार से मतदान करता है, जो भारत म गणराज्य
बनने के साथ 1950 से ही है।
पितिनिध जनता सीधे शासन नह करती; वह प्र त न ध चुनती है जो शासन करते ह, और सरकार सदै व जनता के प्र त उत्तरदायी रहती है।
आम चुनाव प्रत्येक पाँच वष म होते ह।
संस दीय कायपा लका के सदस्य वधा यका का भी भाग होते ह — प्रधानमंत्री और मं त्रप रषद संसद के सदस्य भी होते ह। मं त्रप रषद
तभी तक काय करती है जब तक उसे लोक सभा का वश्वास प्राप्त रहता है। जनता वधा यका चुनती है, कायपा लका नह ;
वधा यका के कुछ चय नत सदस्य ही मंत्री बनते ह।
गणराज्य हमारे राष्ट्राध्यक्ष, राष्ट्रप त, नवा चत होते ह, वंशानुगत राजा नह ।
ता लका 9.1 भारत को एक पं क्त म समेट दे ती है — कायपा लका : प्रधानमंत्री और मं त्रप रषद; वधा यका : नम्न सदन (लोक
सभा) उच्च सदन (राज्य सभा) से अ धक श क्तशाली; न्यायपा लका : कायपा लका एवं वधा यका से स्वतंत्र (श क्तय का
पृथक्करण)।
नणायक कसौट : पू छए — ‘क्या वधा यका कायपा लका को हटा सकती है?' भारत म हाँ — लोक सभा का
वश्वास समाप्त होते ही मं त्रप रषद को जाना पड़ता है। अमे रका जैसे अध्यक्षीय लोकतंत्र म नह , क्य क वहाँ
राष्ट्राध्यक्ष जनता ारा अलग से चुना जाता है। यही एक कसौट भारत को संसद य बनाती है, अध्यक्षीय नह ।
प्र.3 आपने पढ़ा क सभी लोकतां त्रक व्यव ाओं म स्वतंत्र न्यायपा लका होती है। न्यायपा लका का स्वतंत्र होना क्य
आवश्यक है? कोई तीन कारण बताइए।
तीन कारण, तीन सीधे अध्याय से।
1. प्रत्येक नाग रक के मौ लक अ धकार क रक्षा के लए। समानता, अ भव्य क्त क स्वतंत्रता और शोषण के वरुद्ध अ धकार
तभी अथ रखते ह जब कोई उन्ह लागू करा सके। अध्याय स्पष्ट कहता है क स्वतंत्र न्यायपा लका यह सु न त करती है क
प्रत्येक नाग रक के मौ लक अ धकार क रक्षा हो। दबाव म आने वाली न्यायपा लका केवल श क्तशाली क रक्षा करेगी।
2. ता क कानून सरकार पर भी लागू हो। न्यायपा लका सु न त करती है क कानून का पालन नाग रक के साथ-साथ सरकार
के सभी अंग भी कर। य द न्यायाधीश उन्ह मं त्रय पर नभर ह जनके काय पर उन्ह नणय दे ना है, तो कसी मंत्री को कभी
कानून के दायरे म नह लाया जा सकेगा — और ‘कानून के समक्ष समानता' केवल नारा रह जाएगी।
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3. श क्तय का पृथक्करण वास्त वक बनाए रखने के लए। वधा यका, कायपा लका और न्यायपा लका को स्वतंत्र रूप से
काय करना है और एक-दूसरे के काय म हस्तक्षेप नह करना है। न्यायपा लका इसी व्यव ा क नणायक है; य द नणायक
स्वयं कसी एक पक्ष का हो जाए तो पूरी संरचना ढह जाती है और सत्ता एक ही अंग क ओर सरकने लगती है — यही
अ धनायकतंत्र म होता है।
चौथा कारण, य द चा हए: साधारण नाग रक को जाने के लए एक ान मलता है। जो व्य क्त न चुनाव जीत सकता है, न प्रभाव
खरीद सकता है, वह भी मुकदमा दायर कर सकता है। इसी लए अध्याय ‘न्यायपा लका क स्वतंत्रता का क्षरण' को लोकतंत्र क
गंभीर बाधाओं म गनता है।
ध्यान द: उत्तर लखते समय हर कारण के बाद एक पं क्त प रणाम क जो ड़ए — ‘य द न्यायपा लका स्वतंत्र न होती
तो …'। इससे सूची तक बन जाती है।
प्र.4 क्या आपको लगता है क लोकतां त्रक सरकार अन्य शासन प्रणा लय से बेहतर है? क्य ?
हाँ — और तक अध्याय स्वयं दे ता है। अ धकतर दे श म लोकतंत्र को अ धक उपयुक्त माना जाता है और वश्व के आधे से अ धक
दे श ने इसे अपनाया है। चार बदुओं म कारण दे खए।
1. नणय म सबक हस्सेदारी। सावभौ मक वयस्क मता धकार हर वयस्क को एक मत दे ता है, इस लए सरकार सबके ारा चुनी
जाती है — जन्म, धन या बल से नह ।
2. अ धकार और स्वतंत्रता कृपा नह , गारंट ह। लोग तय कर सकते ह क क्या बोल, क्या पहन, कस वश्वास को मान और
अपनी अ भव्य क्त कैसे कर — इस उ चत सीमा के साथ क यह कसी और के अ धकार को क्ष त न पहुँचाए — और मौ लक
अ धकार क रक्षा स्वतंत्र न्यायपा लका करती है।
3. सत्ता शां तपूवक बदली जा सकती है। य द सरकार अपने दा यत्व नह नभाती तो लोग चुनाव से प्र त न ध बदल दे ते ह।
राजतंत्र म राजा क मृत्यु क प्रतीक्षा करनी होती है; अ धनायकतंत्र म शायद कोई रास्ता ही न हो।
4. गल तयाँ सुधारी जा सकती ह। बहस, स्वतंत्र समाचार माध्यम, न्यायालय और चुनाव — ये सब गलती पकड़ने के साधन ह।
जन व्यव ाओं म ये नह , उनम सुधार का कोई तंत्र नह ।
ईमानदार शत: लोकतंत्र बनावट म बेहतर है, व्यवहार म अपने आप बेहतर नह हो जाता। अध्याय वास्त वक
समस्याएँ गनाता है — भ्रष्टाचार, आ थक वषमता, कुछ लोग का अत्य धक नयंत्रण, न्यायपा लका क स्वतंत्रता का
क्षरण, सूचना माध्यम का दुरुपयोग। वह यह भी बताता है क नरंकुश राजतंत्र म भी कोई अच्छा राजा प्रजा के
कल्याण के लए काम कर सकता है, जैसा राजधम अपेक्षा करता था। इस लए सबसे सशक्त उत्तर यह है —
लोकतंत्र ही एकमात्र ऐसी व्यव ा है जो सुशासन को शासक क कृपा नह , जनता का उत्तरदा यत्व बनाती है —
और इसी लए वह सजग नाग रक भी माँगता है।
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नीचे कुछ दे श क शासन पद्ध तय से जुड़ी ग त व धयाँ द गई ह। क्या आप इनका मलान संबं धत शासन
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प्र.5
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प्रणाली से कर सकते ह?
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प्रत्येक प्रथा का मलान उस शासन प्रणाली से क जए जसका वह वणन करती है।
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क्र. दे श म प्रच लत प्रथा क्य
सं.
g l as प्रणाली
1.
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सभी नागिरकों को कानून के समक्ष समान रूप से दे खा जाता ल ोकतं त्र कानून के समक्ष समानता लोकतंत्र का
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है। मूलभूत सद्धांत है
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s मकmनयम और धा मक
यहाँ शासन धा e
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comहै।
2. सरकार पत्येक िनणय के िलए धािमक नेताओं से परामश त्र
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धम तं
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करती नेताओं क अनुसार होता है
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a g l3. शासक की म ृत्यु के बाद उसका पुत्र राजा बनता है। राजतं त्र राजतंत्र सामान्यतः वंशानुगत होता है —
प्रायः राजा का ज्येष्ठ पुत्र ही भावी राजा होता
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है
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बाध्य नही ं है। वह सभी िनणय अपनी इच्छाaकs
4. शासक िकसी पकार के संिवधान का अनुपालन करने के िलए त्र एक व्य क्त के पास संपूण सत्ता और
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अिधनायकतं
े अनुस ार ले ता सं वधान या कानून का कोई नयंत्रण नह
है।
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संक्षेप म उत्तर: 1 → लोकतंत्र, 2 → धमतंत्र, 3 → राजतंत्र, 4 → अ धनायकतंत्र।
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m पं क्त-दर-पं क्त मलान न कर सक। पहले प्रथा प ढ़ए, स्वयं शासन प्रणाली का नाम सो चए, और तब उसे दाएँ a g
ध्यान द: ता लका के दाएँ स्तंभ म वकल्प भन्न क्रम म छपे ह (अ धनायकतंत्र, राजतंत्र, लोकतंत्र, धमतंत्र), ता क
a s eआप
a gl स्तंभ म ढूँ ढ़ए।
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com g l a
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ह।sपता लगाइए क इनम कौन-सी शासन व्यव ा प्रच लत है—
नीचे कुछ दे श के नाम दए गएla
प्र.6
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s e m उस देश क आ धका रक
comया वदेश मंत्रालय के देश-पृष्ठ। नीचे उत्तर, हर एक के कारण स हत। agla
यह ‘पता लगाइए' वाला प्रश्न है, इस लए कसी वश्वसनीय और अद्यतन ोत से जाँ चए — एटलस,
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वेबसाइट,
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क्र. दे श शासन प्रणाली ऐसा क्य कहा जाता है
सं.
1. भूटान ल ोकतांि त्र क संवैध ािनक 2008 के सं वधान के अंतगत वंशानुगत राजा (द्रुक ग्यालपो) राष्ट्राध्यक्ष ह, जब क
राजतं त्र (संस द ीय) नवा चत संसद कानून बनाती है और प्रधानमंत्री सरकार का नेतृत्व करते ह
2. नेपाल संघ ीय ल ोकतांि त्र क 2008 म राजतंत्र समाप्त हुआ; अब राष्ट्राध्यक्ष नवा चत राष्ट्रप त ह और प्रधानमंत्री
गणरा ज्य (संस द ीय सरकार का नेतृत्व करते ह। अध्याय क अपनी ता लका म भी नेपाल म लोकतंत्र क
ल ोकतं त्र ) ापना का वष 2008 दया गया है
3. बांग्लादे श संस द ीय ल ोकतं त्र नवा चत संसद (जातीय संसद), सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री और राष्ट्राध्यक्ष
(गणराज्य) राष्ट्रप त
4. दिक्षण संस द ीय गणरा ज्य नाग रक राष्ट्रीय सभा चुनते ह और वही राष्ट्रप त का चुनाव करती है — जो राष्ट्राध्यक्ष
अफ ीका (ल ोकतंत्र ) और सरकार के प्रमुख, दोन होते ह
5. बाजील ध् क्षीय ल ोकतंत्र
अ य राष्ट्रप त जनता ारा सीधे चुने जाते ह और दो सदन वाली राष्ट्रीय कांग्रेस से स्वतंत्र
(संघ ीय गणराज्य) काय करते ह
यह सूची क्या सखाती है: पाँच म से चार लोकतंत्र ह, फर भी कन्ह दो क बनावट एक जैसी नह । भूटान ने राजा
रखा है; नेपाल ने राजतंत्र हटाया; द क्षण अ का का राष्ट्रप त वधा यका से आता है; ाजील का सीधे मतदाताओं
से। यही अध्याय क बात है — लोकतंत्र के अनेक स्वरूप होते ह, जो हर दे श के अपने इ तहास से बनते ह।
स्वयं जाँ चए: शासन प्रणा लयाँ बदलती भी ह। 2008 से पहले नेपाल क प्र व ष्ट ‘राजतंत्र' होती। जस ोत का
उपयोग कर, उसका वष अवश्य दे ख ली जए।
प्र.7 लोकतां त्रक शासन प्रणाली म लोकतंत्र के आदश और मूल्य को प्राप्त करने म कौन-कौन सी बाधाएँ आ सकती
ह? उन्ह कैसे दूर कया जा सकता है?
अध्याय पाँच बाधाएँ गनाता है और कहता है क ‘और भी कई' ह। हर एक को ली जए, बताइए क वह क्या नुकसान करती है, और
उपाय द जए।
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बाधा यह कसे क्ष त पहुँचाती है इसे कैसे दूर कया जा सकता है
भष्टाचार समानता को — नणय योग्यता के आधार पर लेने सूचना का अिधकार जैसे पारद िशता कान ून ; स्वतंत्र
के बजाय बक जाते ह ले खा परी क्षक ; िबचौिल यों को हटाने वाल ा ई-गवनस
ं ;
पद दे खे िबना द ंड
आिथक िवषमता शक्षा, स्वास्थ्य और न्याय तक समान पहुँच को — ल् च्
िनःश ु क और अ छी सावजिनक िश क्षा व स्वास्थ् य
नधन उन अ धकार का उपयोग नह कर पाता से वा ; क ल्याण और रोजगार योजनाएँ; न्यायसंग त कर ;
जनका खच वह नह उठा सकता ल्
िनःश ु क िविधक सहायता
लोकतांित्रक संस्थाओं पर प्र त न धत्व को — लोकतंत्र अल्पतंत्र जैसा दखने पारद श राजनीितक चंद ा ; सशक्त िनव चन आयोग ;
कु छ लोगों का अत्यिधक लगता है समाचार मा यमों औरध् व्यापार में शिक्त के कें द ीकरण
िनयंत्रण पर सीमा ; अिधक मतद ान
न्यायपािलका की स्वतंत्रता मौ लक अ धकार क रक्षा और श क्तय के न्यायाधीशों की िनय ुिक्त की स्पष्ट और ख ुल ी पि या ;
का क्षरण पृथक्करण को पय प्त न्यायाल य और न्यायाधीश; स्वयं सरकार ारा
न्यायाल य के आदे शों का स म्मान
सूचना माध्यमों का दुरुपयोग चयन क स्वतंत्रता को — गलत चत्र के आधार पर स्वतंत्र और िविवध समाचार माध् यम ; िव ाल यों में
मतदाता सही चुनाव नह कर सकता मीिडया सा क्षरता; तथ् य-जाँच; जानब ूझकर फै ल ाए गए
झूठ पर रोक , पर से ंस रिशप के िबना
नागिरकों की उदासीनता पूरी व्यव ा को, क्य क सत्ता उन्ह के पास चली मतद ाता जाग रूकता अिभयान; सरल पंजीकरण और
और कम भागीदारी जाती है जो सामने आते ह मतद ान ; नागिरक िशक्षा; स्थानीय िनकायों में भागीद ारी
सभी उपाय के पीछे एक ही वचार: इनम से हर उपाय या तो नाग रक तक सूचना पहुँचाता है या कसी सं ा
को स्वतंत्र रखता है। यही दो चीज लोकतंत्र को स्वयं को सुधारने योग्य बनाती ह। अध्याय का अं तम प्रश्न — हम
एक व्य क्त और समाज के रूप म सजग रहकर क्या कर सकते ह — आपसे यही दे खने को कह रहा है।
प्र.8 लोकतंत्र, राजतंत्र और अ धनायकतंत्र से कस प्रकार भन्न है? स्पष्ट क जए।
तीन को उन्ह चार प्रश्न पर साथ-साथ र खए, जनसे अध्याय सरकार को अलग करता है।
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तुलना का लोकतंत्र राजतंत्र अ धनायकतंत्र
बदु
स त्ता का ोत दे श की जनता जन्म और उत्तरा धकार; कभी-कभी दव्य एक व्य क्त या छोटे समूह ारा
श क्त का दावा अ जत और बनाए रखी गई सत्ता
सरकार का सावभौिमक वय स्क मतािधकार पर वंशानुगत उत्तरा धकार — प्रायः राजा का सत्ता पर अ धकार; वपक्ष को
गठन आधािरत , िनयिमत और िनिश्चत ज्येष्ठ पुत्र समाप्त करने वाले कानून, जैसे
अंतराल पर च ुनाव हटलर ने 1933 म बनाए
शासक पर िल िखत संिवधान , िवधाियका और नरंकुश राजतंत्र म कानूनी रूप से कोई कोई नह — सं वधान या कानून
िनयंत्रण स्वतंत्र न्यायपािल का नह (यद्य प भारत म राजधम नै तक सीमा का कोई नयंत्रण नह
था); संवैधा नक राजतंत्र म संसद और
सं वधान
तीनों काय िवधाियका , कायपािल का और तीन राजा के पास हो सकते ह — वह व्यवहार म तीन शासक के नयंत्रण
न्यायपािल का पथक
ृ और स्वतंत्र कानून बनाता, लागू कराता और दं ड भी म
तय करता है
नागिरकों के मौिल क अिधकार , कान ून के प्रजा प्राथना कर सकती है; क्या मलेगा, अत्यंत सी मत — जैसे शेन क
अिधकार सम क्ष समानता, अिभव्यिक्त की यह शासक पर नभर कहानी म बाल और कपड़े तक
स्वतंत्र ता — न्यायाल य ारा सरकार तय करती है
संर ि क्षत
सरकार शािं तपूवक , अगले च ुनाव में मतद ान केवल शासक क मृत्यु या पदत्याग पर प्रायः भीतर से संभव ही नह
बदलना से
उ त्तरदाियत्व सरकार जनता के पित जवाबदे ह शासक परंपरा, धम और अपने ववेक के शासक कसी के प्र त नह
प्र त
एक वाक्य म: लोकतंत्र म सत्ता जनता ारा उधार द जाती है और चुनाव म वापस ली जाती है; राजतंत्र म वह वरासत म मलती
है; अ धनायकतंत्र म वह अ जत करके बनाए रखी जाती है।
सावधानी: ‘राजतंत्र' अपने आप लोकतंत्र का वरोधी नह है। टे न एक ही समय म राजतंत्र भी है और संसद य
लोकतंत्र भी, क्य क वहाँ राजा के पास केवल औपचा रक श क्त है। इस प्रश्न म वास्त वक तुलना नरंकुश राजतंत्र
से है।
अध्याय — एक नज़र म
सरकार तीन काय करती है, और हर प्रकार क सरकार इन्ह कसी न कसी रूप म करती है। कानून बनाना वधायी
काय है, उन्ह लागू करना और उनके अनुसार दे श का प्रशासन चलाना कायपा लका संबंधी काय है तथा यह सु न त करना
क नयम का पालन हो, न्या यक काय है। दे श-दे श म जो बदलता है वह यह है क ये काय कौन करता है और उसे यह
अ धकार कसने दया।
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चार प्रश्न एक सरकार को दूसरी से अलग करते ह। ‘यह सरकार है’ — यह तय करने का अ धकार कसे है? सरकार का
गठन कस प्रकार होता है? सरकार के व भन्न अंग कौन-से ह और वे क्या करते ह? सरकार कस उ े श्य से काय कर रही है?
इन चार प्रश्न के उत्तर ही कसी शासन प्रणाली का प रचय ह।
लोकतंत्र का अथ है ‘जनता का शासन’। इसके मूलभूत सद्धांत ह — समानता, स्वतंत्रता, प्र त न ध सहभा गता,
सावभौ मक वयस्क मता धकार, मौ लक अ धकार और स्वतंत्र न्यायपा लका। अध्याय स्पष्ट कहता है क ये आदश ह
और सभी लोकतंत्र इन्ह पूरी तरह व्यवहार म नह उतार पाते — इसी लए नाग रक को इन्ह सदै व सामने रखना चा हए।
लोकतंत्र के भी अनेक स्वरूप ह। प्रत्यक्ष लोकतंत्र म नाग रक स्वयं सभी नणय म भाग लेते ह (बड़े दे श म क ठन)।
प्र त न ध लोकतंत्र म जनता प्र त न ध चुनती है — संसद य, जहाँ कायपा लका वधा यका का ही भाग होती है और उसे
उसका वश्वास चा हए (भारत, ऑस्ट्रे लया), अथवा अध्यक्षीय, जहाँ जनता ारा चुना गया राष्ट्राध्यक्ष वधा यका से स्वतंत्र काय
करता है (अमे रका, द क्षण को रया)।
अन्य स्वरूप — राजतंत्र, धमतंत्र, अ धनायकतंत्र और अल्पतंत्र। राजतंत्र नरंकुश हो सकता है (सऊद अरब) या
संवैधा नक ( टे न, जो वास्तव म संसद य लोकतंत्र है)। धमतंत्र म शासन धा मक नयम और धा मक नेताओं के अनुसार
चलता है; अ धनायकतंत्र म संपूण सत्ता एक व्य क्त या छोटे समूह के पास होती है; अल्पतंत्र म वास्त वक नणय कुछ धनी
या प्रभावशाली प रवार लेते ह।
सामू हक शासन के आरं भक प्रयोग भारत के अतीत म भी मलते ह। व महाजनपद के लच्छवी कुल म नेता जन्म
से नह , योग्यता से चुने जाते थे; चोलकालीन (10व शताब्द ) उत्तरमेरूर शलालेख सीलबंद मतपे टय , सदस्य क
योग्यताओं और भ्रष्टाचार पर तत्काल पदच्यु त का ववरण दे ते ह। रोम और ग्रीस म भी गणराज्य थे, यद्य प वहाँ मतदान का
अ धकार सी मत वग तक ही था।
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शब्द अध्याय म
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कहाँ
प्र त न ध वह व्यिक्त िजसे िकसी अन्य व्यिक्त या समूह की ओर से हा शया वद्यालय क कहानी इसी शब्द पर टक है
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काय करने या िनणय ले ने के िलए अिधकृ त िकया गया हो टप्पणी, पृष्ठ — एक वद्याथ पूरी कक्षा क बात रखता
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कानूनों का िनम ण, जो दे श के संg l a
वधायी काय
आधार बनते है ं
a चालन का सशक्त पृष्ठ 189 यह काय वधा यका करती है — भारत म
‘संसद’, अमे रका म ‘कांग्रेस’
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कायपा लका संबंधी िनयमों का काय न्वयन और उनके अनुस ार दे श का पृष्ठ 189 भारत म प्रधानमंत्री और मं त्रप रषद
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काय पशासन
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न्या यक काय कानूनों की व्याख्या करना और िववादों का िनपटारा पृष्ठ 189 प्रत्येक लोकतंत्र म यह स्वतंत्र
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करना न्यायपा लका करती है
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सावभौ मक वयस्क िनध िरत आयु से ऊपर के पत्येक नागिरक को मतदान पृष्ठ 191 भारत म 1950 से; स्वट् जरलड म
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मता धकार का अिधकार म हलाओं को 1971 म मला
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उत्तरदा यत्व सरकार का जनता के पित जवाबदे ह होना हा शया इसी लए चुनाव नय मत और न त
टप्पणी, पृष्ठ अंतराल पर होते ह
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श क्तय का िवधाियका, कायपािलका और न्यायपािलका का स्वतंत्र पृष्ठ 196 ता लका 9.1 का अं तम स्तंभ — चार
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पृथक्करण रूप से काय करना और एक-दू स रे के काय ं में हस्तक्षेप न दे श म समान
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करना
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agl गणराज्य वह शासन व्यवस्था िजसमें राज्य का पमुख िनव िचत होता पृष्ठ 197 व महाजनपद और चोलकालीन ग्राम
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है, वंशानुग त राजा या रानी नही ं सभा भारतीय उदाहरण ह
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coलोगों शां तपव म भीष्म यु ध ष्ठर को यही सखाते gla
राजधम
कल्याण को सव पिर रखना —eराजा
धम के अनुस ार शासन करना और सभी
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m के िनणय की सीमा
पृष्ठ 198–199
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संप्रभु कोई दे श अपने आंa
तिरक मामलों में सव च्च तथा बाहरी हा शया राजा संप्रभु श क्त का प्रयोग करते ह
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टप्पणी, पृष्ठ
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मामलों में स्वतंत्र है
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m l a seसऊद अरब; राजा सलाहकार प रषद
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नरंकुश राजतंत्र वह राजतंत्र िजसमें राजा कानून बनाता है, लागू कराता है पृष्ठ 200–201
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और उल्लंघ न पर न्याियक िनणय भी दे ता है नयुक्त करता है पर उसक सलाह मानने
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को बाध्य नह
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संवैधा नक राजतंत्र वह राजतंत्र िजसमें राजा या रानी के पास के वल पृष्ठ 201 टे न — रूप म राजतंत्र, वास्तव म
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संस द तथा पधानमंत्र ी के पास .c agl
औपचािरक शिक्त होती है और वास्तिवक शिक्त िनव िचत संसद य लोकतंत्र
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धमतंत्र aglिजसमें दे श का शासन धािमक िनयमों
वह शासन पणाली पृष्ठ 202 ईरान (जहाँ नवा चत राष्ट्रप त और संसद
और धािमक नेताओं के िनदशों के अनुस ार होता है भी ह), अफगा नस्तान, वे टकन सट
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कक्षा 7 सामा जक व ान अध्याय 9 शासक से शा सत तक — सरकार के प्रकार AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ अध्याय म याद रखने योग्य
कहाँ
अ धनायकतंत्र वह शासन पद्धित िजसमें एक व्यिक्त या छोटा समूह संपूण पृष्ठ 202–203 जमनी म एडोल्फ हटलर, युगांडा म ईद
सत्ता रखता है और संिवधान या कानून का कोई िनयंत्र ण अमीन
नही ं होता
अल्पतंत्र कु छ शिक्तशाली लोगों या पिरवारों का शासन, जो सारे पृष्ठ 204 ग्रीक ओ लगोस ‘कुछ’ + आक ‘शासन
महत्वपूण िनणय ले ते है ं करना’
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