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FOR CBSE CLASS 12 SYLLABUS EXAM PREPARATION
CBSE Class 12 Syllabus
2027
Question Paper · Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT DETAILS
CBSE Class 12 Syllabus 2027 Question Paper Hindi Elective
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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ह ॠदी (ऐ्िक)
हिषय कोड – 002
(2026-27)
का 11िी ॠ – 12िी ॠ (2026-27)
(2025-26)
(2026-27)
उৡतर मा ममक र म७ ঋवेश लेने वाला मव ाथी पहली बार सामा मशा से मवशेष अनुशासन की
मशा की ओर उ ुख होता है । दस वषॵ म७ मव ाथी भाषा के मवमवध कौशलोॠ का साथथक उपयोग करने लग
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जाता है । भाषा और सामह के
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र पर उसका दायरा अब घर, पास-पडोस, ू ल, ঋाॠ त और दे श से
होता ॽआ धीरे -धीरे मव तक फैल जाता है । वह इस उএ म७ पॽफ़ च चुका है मक दे श की साॠ ृ मतक, . co
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सामामजक, राजनीमतक और आमथथक सम ाओॠ पर मवचार-मवमशथ कर सके, एक मि ेदार नागररक
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की तरह अपनी मि े दाररयोॠ को समझ सके तथा दे श और यॠ को सही मदशा दे सकने म७ भाषा की
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ताकत को पहचान सके। ऐसे ु भामषक और वैचाररक आधार के साथ जब मव ाथी आता है तो उसे
मवमशथ की भाषा के ॺप म७ महॠ दी की ापक समझ और ঋयोग म७ द बनाना सबसे पहला उ े होगा।
मकशोराव ा से युवाव ा के इस नािुक मोड पर मकसी भी मवषय का चुनाव करते समय बৡे और उनके
अमभभावक इस बात को लेकर सबसे अमधक मचॠमतत रहते ह॰ मक चयमनत मवषय उनके भमव और
जीमवका के अवसरोॠ म७ मदद करे गा मक नहीॠ। इस उএ के मव ामथथयोॠ म७ मचॠतन और मनणथय करने की ঋवृमि
भी ঋबल होती है । इसी आधार पर वे अपने मानमसक, सामामजक, बौ्िक और भामषक मवकास के ঋमत
भी सचेत होते ह॰ और अपने भावी अ यन की मदशा तय करते ह॰ । इस र पर ऐ्िक महॠ दी का अ यन
एक सृजना क, सामह् क, साॠ ृ मतक और मवमभ ঋयु्ियोॠ की भाषा के ॺप म७ होगा। इस बात
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पर भी बल मदया जाएगा मक मनरॠ तर मवकमसत होती महॠ दी के अ्खल भारतीय ॺप से बৡे का रर ा बन
सके।
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इस र पर मव ामथथयोॠ म७ भाषा के मल्खत ঋयोग के साथ-साथ उसके मौ्खक ঋयोग की कुशलता और
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दता का मवकास भी िॺरी है । ঋयास यह भी होगा मक मव ाथी अपने मबखरे ॽए मवचारोॠ और भावोॠ की
सहज और मौमलक अमभ ्ि की मता हामसल कर सके। ag
नई मशा नीमत 2020 तथा क७ঈीय मा ममक मशा बोडथ ारा समय-समय पर दता आधाररत मशा,
कला समेमकत अमधगम, अनुभवा क अमधगम को अपनाने की बात की गई है जो मशामथथयोॠ की ঋमतभा
को उजागर करने , खेल-खेल म७ सीखने पर बल दे ने, आनॠदपूणथ ৯ानाजथन और मव ाजथन के मवमवध
तरीकोॠ को अपनाने तथा अनुभव के ारा सीखने पर बल दे ती है ।
दता आधाररत मशा से ता यथ है सीखने और मू ाॠ कन करने का एक ऐसा मिकोण जो मशाथी के
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सीखने के ঋमतफल और मवषय म७ मवशेष दता को ঋा करने पर बल दे ता है । योता वह मता,
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कौशल, ৯ान और मिकोण है जो ्ि को वा मवक जीवन म७ कायथ करने म७ सहायता करती है । इससे
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s e मशाथी यह सीख सकते ह॰ मक ৯ान और कौशल को मकस ঋकार ঋा मकया जाए तथा उ ७ वा मवक
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g la जीवन की सम ाओॠ पर कैसे लागू मकया जाए। ঋ े क मवषय, ঋ ेक पाठ को जीवनोपयोगी बनाना तथा
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a वा मवक जीवन के अनुभवोॠ से पाठ को समृि करना ही दता आधाररत मशा है । इसके मलए उৡ
रीय मचॠतन कौशल पर मवशे ष बल दे ने की आव कता है ।
कला समेमकत अमधगम को मशण-अमधगम ঋमिया म७ सुमनमित करना अ मधक आव क है । कला के
सॠसार म७ क ना की एक अलग ही उडान होती है । कला एक ्ि की रचना क अमभ ्ि है । कला
समेमकत अमधगम से ता यथ है कला के मवमवध ॺपोॠ सॠ गीत, नृ , नाटक, कमवता, रॠ गशाला, याআा,
मूमतथकला, आभूषण बनाना, गीत मलखना, नुজड नाटक, कोलाज, पो र, कला ঋदशथनी आमद
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को मशण अमधगम की ঋमिया का अमभ मह ा बनाना। मकसी मवषय को आरॠ भ करने के मलए आइस
ेमकॠग गमतमवमध के ॺप म७ तथा सामॠज पूणथ समझ पैदा करने के मलए अॠतरमवषयक या बॽमवषयक
पररयोजनाओॠ के ॺप म७ कला समेमकत अमधगम का ঋयोग मकया जाना चामहए। इससे पाठ अमधक रोचक
एवॠ ঁा हो जाएगा।
अनुभवा क अमधगम या आनुभमवक ৯ानाजथन का उ े शैमक वातावरण को छाআ क७मঈत बनाने के
साथ-साथ यॠ मू ाॠ कन करने , आलोचना क ॺप से सोचने , मनणथय लेने तथा ৯ान का मनमाथ ण कर
उसम७ पारॠ गत होने से है । यहाफ़ मशक की भूममका सुमवधा ঋदाता व ঋेक की रहती है । ৯ानाजथन
आनुभामवक,सहयोगा क तथा तॠআ ॺप से होता है और यह मशामथथयोॠ को एक साथ कायथ करने तथा
यॠ के अनुभव ारा सीखने पर बल दे ता है । यह मसिाॠ त और वहार के बीच की दू री को कम करता है ।
इस पाਉॿम के अ यन से:
1. मव ाथी अपनी ॹमच और आव कता के अनुॺप सामह का गहन और मवशेष अ यन जारी
रख सक७गे।
2. मव मव ालय र पर मनधाथ ररत महॠ दी-सामह से सॠबॠमधत पाਉिम के साथ सहज सॠबॠध ामपत
कर सक७गे।
3. लेखन-कौशल के ावहाररक और सृजना क ॺपोॠ की अमभ ्ि म७ सम हो सक७गे।
4. रोिगार के मकसी भी ेআ म७ जाने पर भाषा का ঋयोग ঋभावी ढॠ ग से कर सक७गे।
5. यह पाਉिम मव ाथी को जनसॠचार तथा ঋकाशन जैसे मवमभ -ेআोॠ म७ अपनी मता ि करने
का अवसर ঋदान कर सकता है ।
6. मव ाथी दो मभ पाठोॠ की पाਉव ु पर मचॠतन करके उनके म की सॠबिता पर अपने मवचार
अमभ ि करने म७ सम हो सक७गे।
7. मव ाथी रटे -रटाए वाভोॠ के ान पर अमभ ्िपरक/ ् मत आधाररत/ उৡ मचॠतन मता
के ঋ ोॠ पर सहजता से अपने मवचार ঋकट कर सक७गे।
उ े :
● सृजना क सामह की सराहना, उसका आनॠद उठाना और उसके ঋमत सृ जना क और
आलोचना क मि का मवकास करना।
● सामह की मवमवध मवधाओॠ (कमवता, कहानी, मनबॠध आमद), मह पूणथ कमवयोॠ और
रचनाकारोॠ, ঋमुख धाराओॠ और शैमलयोॠ का पररचय करवाना।
● भाषा की सृजना क बारीमकयोॠ और ावहाररक ঋयोगोॠ का बोध तथा सॠदभथ और समय के
अनुसार ঋभावशाली ढॠ ग से उसकी मौ्खक और मल्खत अमभ ्ि करना।
● मवमभ ৯ानानुशासनोॠ के मवमशथ की भाषा के ॺप म७ महॠ दी की मवमशि ঋकृमत एवॠ मता का बोध
करवाना।
● सामह की ঋभावशाली मता का उपयोग करते ॽए सभी ঋकार की मवमवधताओॠ (धमथ,
जामत, मलॠग, वगथ, भाषा आमद) एवॠ असमानताओॠ के ঋमत सकारा क और सॠवेदनशील
वहार का मवकास करना।
● दे श-मवदे श म७ ঋचमलत महॠ दी के ॺपोॠ से पररमचत करवाना।
● सॠचार-मा मोॠ (मঋॠट और इलेঠरॉमनक) म७ ঋयुि महॠ दी की ঋकृमत से अवगत करवाना और
नवीन मवमधयोॠ के ঋयोग की मता का मवकास करना।
● सामह की ापक धारा के बीच रखकर मवमशि रचनाओॠ का मव ेषण और मववेचन करने की
मता हामसल करना।
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● अमूतथ सॠक नाओॠ/मवचारोॠ को अमभ ि करने की भाषा का मवकास क नाशीलता और
मौमलक मचॠतन को अमभ ्ि ঋदान करने की भाषा का मवकास।
हिण-यु्ियाफ़ :
इन काओॠ म७ उमचत वातावरण-मनमाथ ण म७ अ ापकोॠ की भूममका सदै व उ ेरक एवॠ सहायक की होनी
चामहए। उनको भाषा और सामह की पुाई म७ इस बात पर ान दे ने की िॺरत होगी मक-
● का का वातावरण सॠवादा क हो तामक अ ापक, मव ाथी और पु क-तीनोॠ के बीच एक
रर ा बन सके।
● बৡोॠ को तॠআ ॺप से बोलने , मलखने और पुने मदया जाए और मफर उनसे होने वाली भूलोॠ
की पहचान करवाकर अ ापक अपनी पुाने की शैली म७ पररवतथन करे ।
● ऐसे मशण-मबॠदुओॠ की पहचान की जाए, मजससे का म७ मव ाथी की समिय भागीदारी रहे
और अ ापक भी उनका साथी बना रहे ।
● मभ मता वाले मव ामथथयोॠ के मलए उपयुि मशण-सामঁी का उपयोग मकया जाए तथा मकसी
भी ঋकार से उ ७ अ मव ामथथयोॠ से कमतर या अलग न समझा जाए।
● का म७ अ ापक को हर ঋकार की मवमवधताओॠ(मलॠग, धमथ, जामत, वगथ आमद) के ঋमत
सकारा क और सॠवेदनशील वातावरण मनममथत करना चामहए।
● सृजना कता के अ ास के मलए मव ाथी से साल म७ कम से कम दो रचनाएफ़ मलखवाई जाएफ़ ।
िण तथा िाचन परीा ेतु हदिा हनदे ि (हकसी ररकॉडड अॠि को सुनना)
िण (सुनना)(5 अॠक): वमणथत या पमठत सामঁी को सुनकर अथथ ঁहण करना, वाताथ लाप करना,
वाद-मववाद, भाषण, कमवतापाठ आमद को सुनकर समझना, मू ाॠ कन करना और अमभ ्ि के
ढॠ ग को समझना।
िाचन(बोलना)(5 अॠक): भाषण, स र कमवता-पाठ, वाताथ लाप और उसकी औपचाररकता,
कायथिम-ঋ ुमत, कथा-कहानी अथवा घटना सुनाना, पररचय दे ना, भावानुकूल सॠवाद-वाचन।
हि णी: वाताथ लाप की दताओॠ का मू ाॠ कन मनरॠ तरता के आधार पर परीा के समय ही होगा।
मनधाथ ररत 10 अॠकोॠ म७ से 5 वण (सुनना) कौशल के मू ाॠ कन के मलए और 5 वाचन (बोलना)
कौशल के मू ाॠ कन के मलए होॠगे।
िण (सुनना) एिॠ िाचन(बोलना) कौिल का मू ाॠ कन:
● परीक मकसी ঋासॠमगक मवषय पर एक का ि वाचन करे गा। अनुिेद त ा क या
सुझावा क हो सकता है । अनुिेद लगभग 250 श ोॠ का होना चामहए।
या
परीक 2-3 ममनट का अॠश (ऑमडयो ्िप) सुनवाएगा। अॠश रोचक होना चामहए ।
क /घटना पूणथ एवॠ ि होनी चामहए। वाचक का उৡारण शुि, ि एवॠ मवराम मच ोॠ के
उमचत ঋयोग समहत होना चामहए।
● परीाथी ानपूवथक परीक/ऑमडयो ्िप को सुनने के पिात परीक ारा पूछे गए ঋ ोॠ का
अपनी समझ से मौ्खक उिर द७ गे।
● मकसी मनधाथ ररत मवषय पर बोलना:मजससे मव ाथी अपने ्िगत अनुभवोॠ का ঋ ा रण कर
सक७।
● कोई कहानी सुनाना या मकसी घटना का वणथन करना।
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● पररचय दे ना। ( / पररवार/ वातावरण/ व ु/ ्ि/ पयाथ वरण/ कमव /लेखक आमद)
परीकोॠ के हलए अनुदेि :-
● परीण से पूवथ परीाथी को तैयारी के मलए कुछ समय मदया जाए।
● मववरणा क भाषा म७ मवषय के अनुकूल तीनोॠ कालोॠ का ঋयोग अपेमत है ।
● मनधाथ ररत मवषय परीाथी के अनुभव-जगत के होॠ।
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● मशाथी को मवषय क७मঈत तॠআ अमभ ्ि का अवसर ঋदान कर७ ।
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कौिलोॠ के अॠतरण का मू ाॠकन
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(इस बात का मनिय करना मक ভा मव ाथी म७ वण और वाचन की मन मल्खत योताएफ़ ह॰ ) l as
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l िण (सुनना) ag
ag िाचन (बोलना)
1 पररमचत सॠदभॵ म७ ঋयुि श ोॠ और पदोॠ को 1 केवल अलग अलग श ोॠ और पदोॠ के ঋयोग
समझने की सामा योता है । की योता ঋदमशथत करता है ।
2 छोटे सुसॠबि कथनोॠ को पररमचत सॠदभॵ म७ 2 पररमचत सॠदभॵ म७ केवल छोटे सुसॠबि कथनोॠ
समझने की योता है । का सीममत शुिता से ঋयोग करता है ।
3 पररमचत या अपररमचत दोनोॠ सॠदभॵ म७ कमथत 3 अपेाकृत दीघथ भाषण म७ अमधक जमटल
सूचना को ि समझने की योता है । कथनोॠ के ঋयोग की योता ঋदमशथत करता
है ।
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4 दीघथ कथनोॠ की ृॠखला को पयाथ शुिता से 4
m .coअपररमचत ् मतयोॠ म७ मवचारोॠ को तामकथक ढॠ ग
समझने के ढॠ ग और मन षथ मनकाल सकने
s e से सॠगमठत कर धारा-ঋवाह ॺप म७ ঋ ुत
की योता है ।
l a करता है
5 जमटल कथनोॠ के मवचार मबॠदुओॠ को समझने
की योता ঋदमशथत करने की मता है । वह
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5 उ े और ोता के मलए उपयुि शैली को
अपना सकता है , ऐसा करते समय वह केवल
उ े के अनुकूल सुनने की कुशलता मामूली गलमतयाफ़ करता है ।
ঋदमशथत करते ह॰ ।
पररयोजना कायड - कुल अॠक 10
हिषय ि ु – 5 अॠक भाषा एिॠ ঋ ुहत – 3 अॠक िोध एिॠ मौहलकता - 2 अॠक
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m दी भाषा और सामह से जुडे मवमवध मवषयोॠ /सामह कारोॠ/ समकालीनmले.खनोॠ/ भाषा के
c. o ● महॠतकनीकी प/ ঋभाव/ अनुঋयोग/ सामह के सामामजक सॠदभॵ s एवॠe जीवन-मू
e m l a सॠबॠधी
l as ঋभावोॠ आमद पर पररयोजना कायथ मदए जाने चामहए ।
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● सআ के ঋारॠ भ म७ ही मव ाथी को मवषय चुनने का अवसर ममले तामक उसे शोध, तैयारी और लेखन
के मलए पयाथ समय ममल सके।
पररयोजना-कायड
‘पररयोजना’ श योजना म७ ‘परर’ उपसगथ लगने से बना है । ‘परर’ का अथथ है ‘पूणथता’ अथाथ त
ऐसी योजना जो अपने आप म७ पूणथ हो पररयोजना कहलाती है । मकसी मवशेष लশ की ঋा् हे तु जो योजना
बनाई और कायाथ ्ित की जाती है , उसे पररयोजना कहते ह॰ । यह मकसी सम ा के मनदान या मकसी
मवषय के त ोॠ को ঋकामशत करने के मलए तैयार की गई एक पू णथ मवचार योजना होती है ।
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रािरीय पाਉचचाथ की ॺपरे खा, नई मशा नीमत 2020 तथा के ीय मा ममक मशा बोडथ ारा समय-
समय पर अनुभवा क अमधगम, आनॠदपूणथ अमधगम की बात कही गई है । उৡतर मा ममक र पर
मव ामथथयोॠ के मलए महॠ दी का अ यन एक सृजना क, सामह् क, साॠ ृ मतक और मवमभ ঋयु्ियोॠ
की भाषा के ॺप म७ करने और करवाने के मलए पररयोजना कायथ अ ॠत मह पूणथ व लाभदायक मसि
होता है ।
पररयोजना का म
● ्िगत र पर खोज , कारथ वाई और ारहवीॠ-बारहवीॠ का के दौरान अमजथत ৯ान और
कौशल, मवचारोॠ आमद पर मचॠतन का उपयोग।
● सैिाॠ मतक मनमाथ णोॠ और तकॵ का उपयोग करके वा मवक दु मनया के परर ोॠ का मव ेषण और
मू ाॠ कन
● एक तॠআ और मव ाररत कायथ का मनमाथ ण करने के मलए मह पूणथ और रचना क सोच कौशल
और मताओॠ के अनुঋयोग का ঋदशथन ।
● उन मवषयोॠ पर कायथ करने का अवसर मजनम७ मशामथथ योॠ की ॹमच है ।
● नए ৯ान की ओर अঁसर
● खोजी ঋवृमि म७ वृ्ि
● भाषा ৯ान समृि एवॠ ावहाररक
● सम ा समाधान की मता का मवकास
पररयोजना कायड हनधाड ररत करते समय ान दे ने यो बात७
● पररयोजना कायथ मशामथथयोॠ म७ योता आधाररत मता को ान म७ रखकर मदए जाएफ़ मजससे वे
मवषय के साथ जुडते ॽए उसके ावहाररक प को समझ सक७। वतथ मान समय म७ उसकी
ঋासॠमगकता पर भी ान मदया जाए।
● सআ के ঋार म७ ही मव ामथथयोॠ को मवषय चुनने का अवसर ममले तामक उसे शोध, तैयारी और
लेखन के मलए पयाथ समय ममल सके।
● अ ामपका/अ ापक ारा का म७ पररयोजना-कायथ को लेकर मव ारपूवथक चचाथ की जाए मजससे
मव ाथी उसके अथथ , मह व ঋमिया को भली-भाफ़ मत समझने म७ सम हो सक७ ।
● महॠ दी भाषा और सामह से जुडे। मवमवध मवषयोॠ/ मवधाओॠ/ सामह कारोॠ/ समकालीन
लेखन/ भाषा के तकनीकी प/ ঋभाव/ अनुঋयोग/ सामह के सामामजक सॠ दभॵ एवॠ जीवन-
मू सॠबॠधी ঋभावोॠ आमद पर पररयोजना कायथ मदए जाने चामहए।
● मशाथी को उसकी ॹमच के अनुसार मवषय का चयन करने की छूट दी जानी चामहए तथा अ ापक/
अ ामपका को मागथदशथक के ॺप म७ उसकी सहायता करनी चामहए।
● पररयोजना – कायथ करते समय मन मल्खत मब दु ओॠ को अपनाया जा सकता है -
1. ঋमाण – पআ
2. आभार ৯ापन
3. मवषय-सूची
4. उ े
5. पररयोजना सम ा
6. पररक ना
7. ঋमिया (साশ सॠ ঁह, साশ का मव ेषण)
8. ঋ ुतीकरण (मवषय का मव ार)
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9. अ यन का पररणाम
10. अ यन की सीमाएफ़
11. ঔोत
12. अ ापक मट णी
● पररयोजना – कायथ म७ शोध के दौरान स् मलत मकए गए मचআोॠ और सॠदभॵ के मवषय म७ उमचत
जानकारी दी जानी चामहए। उनके ोत को अव अॠमकत करना चामहए।
● मचআ, रे खामचআ, मव৯ापन, ঁाफ, मवषय से सॠ बॠमधत आफ़ कडे , मवषय से सॠबॠमधत समाचार की
कतरन७ एकमআत के जानी चामहए।
● ঋमाण ॺप स् मलत मकए गए आफ़ कडे , मचআ, मव৯ापन आमद के ोत अॠमकत करने के
साथ-साथ समाचार-पআ, पमআकाओॠ के नाम एवॠ मदनाॠ क भी मलखने चामहए।
● सामह कोश, सॠदभथ -ঁॠथ, श कोश की मदद लेनी चामहए।
● पररयोजना-कायथ म७ मशामथथयोॠ के मलए अनेक सॠभावनाएफ़ ह॰ । उनके ्िगत मवचार तथा उनकी
क ना के मव ृत सॠ सार को अव स् मलत मकया जाए।
पररयोजना – कायड के कुछ हिषय सुझािा क ॺप म७ हदए जा र े ॰।
भाषा और सामह से जुडे मवमवध मवषयोॠ/ मवधाओॠ/ सामह कारोॠ/ समकालीन लेखन के आधार पर
(1) ह ॠदी कहिता म७ ঋकृहत हचআण (पाठ – जयिॠकर ঋसाद)
मवमभ कमवयोॠ की कमवताओॠ का तु लना क अ यन,
भाषा शैली, मवशेषताएफ़
वतथमान के साथ ঋासॠमगकता इ ामद।
(2) भारतीय ঁामीण का जीिन (पाठ – सूरदास की झोपड़ी)
आिादी से पहले, बाद म७ तथा वतथमान म७ ् मत
सुधार की आव कताएफ़
आपकी भूममका/ योगदान/ सुझाव
(3) समकालीन, साॠ ृ हतक एिॠ साह ्िक हिषयोॠ से सॠबॠहधत
भूममका – ভा है , ভोॠ है आमद का मववरण
मवमभ दे शोॠ म७ ঋभाव
भारत के साथ तु लना क अ यन
कारण और मनवारण
आपकी भूममका/ योगदान/ सुझाव
उपयुथि मवषय सुझाव के ॺप म७ ঋ ुत मकए गए ह॰ । आप मदशामनदे शोॠ के आधार पर अ मवषयोॠ का
चयन ভा जा सकता है ।
पररयोजना की श सीमा 2000 श ोॠ की होनी चामहए।
िण कौिल एिॠ पररयोजना कायड का मू ाॠकन हि ालय र पर आॠ तररक परीक (हिषय
अ ापक) ारा ी हकया जाएगा।
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ह ॠदी (ऐ्िक)
हिषय कोड – 002
का 12िी ॠ (2025-26)
(2026-27)
(2026-27)
ঋ -पআ तीन खਔोॠ – खॠड- क, ख और ग म७ ोगा|
खॠड- क म७ अपहठत बोध पर आधाररत ঋ पू छे जाएफ़ गे I सभी ঋ ोॠ के उ र दे ने ोॠगे।
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खॠड- ख म७ अहभ
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्ि और मा म पु क के आधार पर ঋ पू छे जाएफ़ गे | ঋ ोॠ म७ आॠ तररक हिक . co
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हदए जाएफ़ गे |
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खॠड- गaम७sअॠतरा भाग – 2 एिॠ अॠतराल भाग – 2 पाਉ पु कोॠ के आधार पर ঋ पूछे जाएफ़ गे|gঋ ोॠ
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आॠ तररक हिक हदए जाएफ़ गे |
भाराॠक - 80 हनधाडररत समय - 03 घॠिे
िाहषडक परीा े तु भार हिभाजन
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खॠड-क (अपहठत बोध) 18 अॠक
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1 as पर आधाररत बोध, मचॠतन,
01 अपमठत ग ाॠ श (लगभग 250 श ोॠ का)
l 10 अॠक
मव ेषण पर बॽमवक ीय ঋ , g
aअमतलघूिरा क ঋ , लघूिरा क ঋ पूछे
जाएफ़ गे I (बॽमवक ीय ঋ 01 अॠक x 3 ঋ =3 अॠ क, अमतलघूिरा क ঋ
01 अॠक x 1ঋ =1 अॠक, लघूिरा क ঋ 02 अॠक x 3 ঋ =6 अॠक)
01 अपमठत प ाॠ श (लगभग 100 श ोॠ का) पर आधाररत बोध, सराहना,
2 सौॠदयथ, मचॠतन, मव ेषण आमद पर बॽमवक ीय ঋ अमतलघूिरा क ঋ 08 अॠक
लघूिरा क ঋ पूछे जाएफ़ गे I (बॽमवक ीय ঋ 01 अॠक x 3 ঋ =3 अॠक,
अमतलघूिरा क ঋ 01 अॠक x 1ঋ =1 अॠक, लघूिरा क ঋ 02 अॠक x
2 ঋ =4 अॠक)
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m खॠड- ख (अहभ ्ि और मा म पु क के आधार पर ) c. o 22 अॠक
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s e इकाई एक – जनसॠचार मा म और लेखन ( पाठ 3,4 और
g la 5 ) 05 अॠक
g la पर आधाररत (लगभग 30-40 श ोॠ म७) अमतलघूिरा aक ঋ एवॠ
a लघूिरा क ঋ पूछे जाएफ़ गे
(01 अॠक x 01 ঋ ,02 अॠक x 02 ঋ )
4 06 अॠक
पाठ 3,4 और 5 पर आधाररत दो लघुउिरीय ঋ (03 अॠक x 02 ঋ )
) (लगभग 60 श ोॠ म७)
मदए गए तीन नए और अঋ ामशत मवषयोॠ म७ से मकसी एक मवषय पर लगभग
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5 100 श ोॠ म७ रचना क लेखन (05 अॠक x 01 ঋ ) 05 अॠक
पाठ 6,7 और 8 पर आधाररत तीन ঋ ोॠ म७ से मक ीॠ दो ঋ ोॠ के उिर (3
6 06 अॠक
अॠक x 2 ঋ ) (लगभग 60 श ोॠ म७)
खॠड- ग (अॠ तरा भाग – 1 एिॠ अॠ तराल भाग – 1 पाਉ पु कोॠ के आधार पर ) 40 अॠक
7 पमठत का ाॠ श पर 05 बॽमवक ा क ঋ I सभी 05 ঋ ोॠ के उिर दे ने 05 अॠक
होॠगे। (01 अॠक x 05 ঋ )
8 का खॠड पर आधाररत 03 ঋ ोॠ म७ से मक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उिर (लगभग 40 04 अॠक
श ोॠ म७) (02 अॠ क x 02 ঋ )
9 मकसी एक का ाॠ श की सঋसॠग ाূा (मवक समहत) (दीघथउिरीय ঋ )
06 अॠक
(06 अॠक x 01 ঋ ) लगभग 100 श ोॠ म७
10 पमठत ग ाॠ श पर 05 बॽमवक ा क ঋ I सभी 05 ঋ ोॠ के उिर दे ने 05 अॠक
होॠगे। (01 अॠक x 05 ঋ )
ग खॠड पर आधाररत 03 ঋ ोॠ म७ से मक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उिर (लगभग 40 04 अॠक
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श ोॠ म७) (02 अॠक x 02 ঋ )
06 अॠक
12 01 ग ाॠ श की सঋसॠग ाূा (मवक समहत) (दीघथउिरीय ঋ ) (
06 अॠक x 01 ঋ ) लगभग 100 श ोॠ म७
13 अॠतराल के पमठत पाठोॠ पर 03 ঋ ोॠ म७ से मक ीॠ 02 ঋ ोॠ के उिर (लगभग 10 अॠक
100 श ोॠ म७) (05 अॠक x 02 ঋ )
_________________________________________________ __________
14 (अ) वण तथा वाचन 10+10=20
(ब) पररयोजना कायथ अॠक
कुल अॠ क 100 अॠक
हनधाडररत पु क७:
1. अॠ तरा, भाग–2, एन.सी.ई.आर.टी., नई मद ी ारा ঋकामशत नवीनतम सॠ रण
2. अॠ तराल, भाग–2, एन.सी.ई.आर.टी., नई मद ी ारा ঋकामशत नवीनतम सॠ रण
3. ‘अहभ ्ि और मा म’, एन.सी.ई.आर.टी., नई मद ी ारा ঋकामशत नवीनतम सॠ रण
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नोि : हन हल्खत पाठोॠ से ঋ न ी ॠ पू छे जाएफ़ गे ।
अॠ तरा भाग 2
1. सूयथकाॠ त मআपाठी मनराला - गीत गाने दो मु झे (घटाया गया पाठ का अॠश और उससे सॠबॠमधत ঋ अ ास)
2. मव ु खरे - एक कम, स (पूरा पाठ)
3. केशवदास - रामचॠमঈका (पूरा पाठ)
4. घनानॠ द - सवैया (घटाया गया पाठ का अॠश और उससे सॠबॠमधत ঋ अ ास)
5. जमोहन ास - कৡा मचा (पूरा पाठ)
6. राममवलास शमाथ - यथा ै रोचते मव म (पूरा पाठ)
पू रक पाਉपु क - अॠ तराल 2
1. सॠजीव - आरोहण
का बार िी ॠ ेतु ঋ -पআ का हि ृत ঋाॺप जानने के हलए कृपया बोडड ारा जारी आदिड
(ঋहतदिड )ঋ -पআ दे ख७।
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