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FOR CBSE CLASS 12 EXAM PREPARATION
CBSE Class 12
2026
Question Paper ·
Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT
CBSE Class 12 2026 Question Paper Hindi
DETAILS
Core
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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SET-1
Series Q3SPR àíZ-nÌ H$moS> 2/3/1
परी्षा्वी ्ऺश्न-प्ऴ कोड को उ्तर-पस्ु तिका के
amob Z§.
. c om मख
ु -पृ् पर अवश्य स्िखें ।
e m
e m las
[]
las ag
a>
नोट
g
(I) कृ पया जााँच कर िें स्क इस ्ऺश्न-प्ऴ में मस्ु िि पृ् 11 हैं ।
(II) ्ऺश्न-प्ऴ में दास्हने हा्व की ओर स्दए गए ्ऺश्न-प्ऴ कोड को परी्षा्वी उ्तर-पस्ु तिका के मख ु -पृ् पर
स्िखें ।
(III) कृ पया जााँच कर िें स्क इस ्ऺश्न-प्ऴ में 12 ्ऺश्न हैं ।
(IV) कृपया ्ቚश्न का उ्ቈर लिखना शरू ु करने से पहिे, उ्ቈर-पलु तिका में यथा तथान पर ्ቚश्न का
्ቅमाांक अवश्य लिखें ।
o m
(V) c
इस ्ऺश्न-प्ऴ को पढ़ने के स्िए 15 स्मनट का समय .स्दया गया है । ्ऺश्न-प्ऴ का स्विरण पवू ाा्ቡ में 10.15
बजे स्कया जाएगा । 10.15 बजे से 10.30 बजेeिक mपरी्षा्वी के वि ्ऺश्न-प्ऴ को पढ़ेंगे और इस अवस्ि के
s
la गे ।
दौरान वे उ्तर-पस्ु तिका पर कोई उ्तर नहीं स्िखें
ag
लहन्दी (आधार)
*261M22* HINDI (Core)
निर्धारित समय : 3 घण्टे अनर्कतम अक
ं : 80
सामान्यनि्ቖेश:
o m
निम्िनिनित नि्शेशों को बहुत सधवर्धिी से पऩिए औि उिकध स़ባती से अिपु धिि कीनिए :
m . c
c. (i)o यह ्ቚश्ि-प्ቔ तीि िण्डों में नवभधनित है । s
m
eअनिवाययहै ।
m a
se (iii) खण्डख में पधि्यपस्ु तक अनभव्यनि औि मधध्यम से ्ቚश्ि पछू े गए हैं ।a्ቚश्gिोंl में आंतरिक नवकल्प न्शए
(ii) खण्डक में अपनित बोर् पि आर्धरित ्ቚश्ि प छ
ू े गए हैं । सभी ्ቚश्िों के उ्ቈि ्शे
ि ध
गए हैं ।
(iv) खण्डग में पधि्यपस्ु तक आिोह तथध नवतधि से ्ቚश्ि पछ ू े गए हैं । ्ቚश्िों में आतं रिक नवकल्प न्शए गए
हैं ।
(v) तीिों िडं ों के ्ቚश्िों के उ्ቈि ्शेिध अनिवधया है ।
(vi) यथधसंभव तीिों िंडों के ्ቚश्िों के उ्ቈि ्ቅमशः निनिए ।
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खण्ड क
(अपलिि बोध)
1. स्नम्नस्िस्खि गद्ाांश को ध्यानपवू ाक पढ़कर उस पर आिाररि ्ऺश्नों के उ्तर स्िस्खए : 10
स्न:शब्द िीमी चाि और सस्दयों का सा्षी − जब कोई ्ऺाणी हमारी िरिी पर ्ऺकृ स्ि का सबसे
शािां िेस्कन सबसे मज़बिू ्ऺहरी बनकर खडा हो, िो उसका महत्व के वि जैव-स्वस्वििा िक सीस्मि
नहीं रह जािा, वह हमारी सांतकृ स्ि, चेिना और पयाावरण की आत्मा बन जािा है । कछुआ, जो समय
की रे ि पर अपने िैया और दीर्ाायु के पदस्च्ቡ छोडिा आया है, आज खिरे में है । 23 मई को मनाया
जाने वािा स्वश्व कछुआ स्दवस के वि एक स्दन नहीं, बस्कक पक ु ार है, उस मौन जीवन के स्िए, स्जसे
हमने व्षों िक नज़रअांदाज स्कया और जो आज हमसे बचाव की गहु ार कर रहा है ।
मान्यिा है स्क कछुए िरिी पर करोडों व्षों से अस्तित्व में हैं । उन्होंने स्हम यगु ों, महास्वनाशों
और भगू भीय पररविानों को झेिा है । उनके अस्तित्व की स्त्वरिा, उनकी िीमी िेस्कन त्वायी
जीवन-शैिी का ्ऺमाण है । मगर दख ु द है स्क आज स्जन सक ां टों का वे सामना कर रहे हैं वे स्कसी
्ऺाकृ स्िक आपदा के नहीं, बस्कक मानवीय िािच और िापरवाही के कारण हैं । स्वश्व में ्ञाि 350 से
अस्िक कछुआ ्ऺजास्ियों में से िगभग 60 फीसदी ्ऺजास्ियााँ सांकट्ቇति या स्विोप के कगार पर हैं ।
समिु ी कछुए-जैसे मादा ऑस्िव ररडिे, जो हजारों स्किोमीटर िैरकर अांडे देने के स्िए ओस्डशा िट पर
आिी है, को जि और ्ऺकाश ्ऺद्षू ण ि्वा मानवीय हति्षेप से भारी खिरा है । इन मक ू ्ऺास्णयों के
स्िए सांकट के ्ऺमख ु कारणों में प्िास्तटक ्ऺद्षू ण, समिु ी िटों का अस्ि्ቅमण, अवैि व्यापार और
जिवायु पररविान है ।
कछुआ हमें स्सखािा है स्क दौडना ज़रूरी नहीं, स्टके रहना ़ቩयादा ज़रूरी है । यह भी स्क मौन
शस््ि की एक अिग भा्षा है, जो शब्दों से नहीं, बस्कक कमा से बोििी है । उनकी िीमी चाि में हमें
भस्वष्य की गाँजू सनु ाई देिी है स्क यस्द हम उन्हें बचा पाए िो खदु को बचा पाएाँगे ।
(i) गद्ाांश के आिार पर कछुए की मह्ता का मुख्य आिार है : 1
(A) स्न:शब्द मांद गस्ि
(B) उसका शाि ां तवभाव
(C) जैव-स्वस्वििा का अांग
(D) सांतकृ स्ि, चेिना और पयाावरण की आत्मा
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(ii) जैव-स्वस्वििा से अस्भ्ऺाय है : 1
(A) सभी ्ऺकार के जीवन की स्वस्वििा
(B) पेड-पौिों की स्वस्भन्न ्ऺजास्ियााँ
m की स्वस्भन्न ्ऺजास्ियााँ
सष्ू मoजीवों
m
c
(C)
(D) m
. s e
s e पश-ु पस््षयों के जीवन की स्वस्वििा g l a
g la a
a स्नम्नस्िस्खि क्वन ि्वा कारण को ध्यानपवू ाक पढ़कर उस्चि स्वककप का चयन कर स्िस्खए : 1
(iii)
कथि : समय की रे ि पर अपने िैया और दीर्ाायु के स्च्ቡ छोडने वािे कछुओ ां का जीवन
आज सांकट में है ।
कधिण : उन्होंने स्हमयगु ों, महास्वनाशों और भगू भीय पररविानों को झेिा है ।
लवकल्प :
m
(A) क्वन ि्वा कारण दोनों ग़िि हैं ।
m .co
(B)
la seहै ।
कारण सही है, स्कांिु क्वन ग़िि
g
a क्वन की ग़िि व्याख्या करिा है ।
(C) क्वन सही है, स्कांिु कारण,
(D) क्वन ि्वा कारण दोनों सही हैं ि्वा कारण, क्वन की सही व्याख्या करिा है ।
(iv) ‘मौन शस््ि की एक अिग भा्षा है’ – आशय तपष्ट कीस्जए । 2
m
.co
(v) “दौडना ज़रूरी नहीं, स्टके रहना ़ቩयादा ज़रूरी है” – से ्या अस्भ्ऺाय है ? 2
m
m .co s e m
se कछुओ ां के सांर्षण हेिु स्कन्हीं दो उपायों का उकिेख कीस्जए । l a
ag
(vi) 1
(vii) ्ऺवासी कछुए भारि में ्यों आिे हैं ? इन्हें स्कससे खिरा है ? 2
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2. स्नम्नस्िस्खि पद्ाांश को ध्यानपवू ाक पढ़कर उस पर आिाररि स्दए गए ्ऺश्नों के उ्तर स्िस्खए : 8
फूि से बोिी किी ्यों व्यति मरु झाने में है
फायदा ्या गांि औ मकरांद स्बखराने में है
िनू े अपनी उ् ्यों वािावरण में र्ोि दी
अपनी मनमोहक पाँखरु रयों की छटा ्यों खोि दी
िू तवयां को बााँटिा है स्जस र्डी से िू स्खिा
स्कन्िु इस उपकार के बदिे में िझु को ्या स्मिा
मझु को देखो मेरी सब खश
ु बू मुझ ही में बांद है
मेरी सांदु रिा है अ्षय अनछुआ मकरांद है
मैं पिी कााँटों में जब ्वी दस्ु नया िब सोिी रहीं
मेरी ही ्या ये कभी स्कसी की भी कभी होिी नहीं
ऐसी दस्ु नया के स्िए सौरभ िटु ाऊाँ स्कसस्िए
तवा्वी समदु ाय का मेिा िगाऊाँ स्कसस्िए
फूि उस नादान की वाचाििा पर चपु रहा
स्फर तवयां को देखकर भोिी किी से ये कहा
स्ज़दां गी स्सद्ाांि की सीमाओ ां में बाँटिी नहीं
ये वो पाँजू ी है जो व्यय से बढ़िी है र्टिी नहीं
(i) फूि और किी के सांवाद के माध्यम से कस्व ने तपष्ट स्कया है : 1
(A) जीवन की सा्वाकिा को
(B) जीवन की ्षणभांगरु िा को
(C) जीवन की नश्वरिा को
(D) जीवन के दृस्ष्टकोण को
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(ii) काव्याश
ां के अनसु ार कौन-सी पाँजू ी बााँटने से बढ़िी है ? 1
(A) ्ञान
(B) स्ज़ांदगी
सांपदा
(C)
o m m
(D) दख ु. c s e
e m la
(iii) la
s g
a 1
ag (A) चािाकी
काव्याश
ां के सांदभा में ‘वाचाििा’ शब्द का अ्वा है :
(B) समझदारी
(C) बडबोिापन
(D) मख
ू ािा
किी और फूि के व्यस््ित्व में ्या अिां र है ? om
(iv)
. c 2
m
किी अपना सौंदया और महक स्कसीaकेseसा्व ्यों नहीं बााँटना चाहिी ?
(v)
g l 2
a
किी अ्ववा फि, आप स्कसके स्वचारों से सहमि हैं ? िका पणा उ्तर दीस्जए ।
(vi) ू ू 1
खण्ड ख
(अलिव्यलि और माध्यम पतु िक पर आधाररि ्ቚश्न)
o mिेख
स्नम्नस्िस्खि स्दए गए िीन स्व्षयों में से स्कसी एक स्व्षय पर िगभग 120 शब्दों में रचनात्मक
.c
3.
.c om स्िस्खए : em
6
m as
se (i) िारों भरी राि का सौंदया
ag
l
(ii) पतु िक मेिे में पतु िक का िोकापाण
(iii) अांिरााष्रीय मांच पर भारि का बढ़िा वचातव
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4. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं चार्ऺश्नों के उ्तर िगभग 40 शब्दों में स्िस्खए : 42=8
(i) सीिा स्परास्मड और उकटा स्परास्मड शैिी में ्या अांिर है ? तपष्ट कीस्जए ।
(ii) प्ऴकाररिा के ्षे्ऴ में ‘डेतक’ से ्या अस्भ्ऺाय है ?
(iii) कहानी का नाट्य रूपाांिरण करिे समय सबसे बडी समतया ्या होिी है और इसे कै से हि
स्कया जा सकिा है ?
(iv) रे स्डयो नाटक के स्िए कहानी का चनु ाव करिे समय ्या साविानी बरिनी चास्हए और ्यों ?
(v) िेखन ्षमिा का स्वकास करने के स्िए हमें ्या करना चास्हए ? कारण सस्हि उ्तर स्िस्खए ।
5. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 80 शब्दों में स्िस्खए : 24=8
(i) आस््वाक प्ऴकाररिा के महत्व को रे खाांस्कि करिे हुए स्िस्खए स्क आस््वाक जगि के प्ऴकारों
से ्या अपे्षा रखी जािी है ?
(ii) टेिीस्वज़न पर ्ऺसारण से पवू ा स्कसी भी सचू ना को समाचार बनने के स्िए स्कन-स्कन चरणों से
गजु रना पडिा है ? सां्षेप में स्िस्खए ।
(iii) आपके स्वद्ािय ने ्ቇीष्मावकाश के दौरान ‘योग क्षाओ’ां का आयोजन स्कया गया, स्जसमें
स्वद्ास््वायों के सा्व उनके अस्भभावकों ने भी इन क्षाओ ां का िाभ उठाया । अपनी तकूि
पस््ऴका के स्िए स्वद्ािय में आयोस्जि इस काया्ቅम की एक ररपोटा देव/देवाशां ी की ओर से
िैयार कीस्जए ।
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खण्ड ग
(पाि्य-पुतिक आरोह िथा लविान पर आधाररि ्ቚश्न)
6.
o m ांश पर आिाररि स्दए गए ्ऺश्नों के सवाास्िक उपय्ु ि उ्तर वािे स्वककप
स्नम्नस्िस्खि पस्ठि काव्या
चनु कर स्िस्खए : .c 51=5 em
eमmस्ु श्कि को िैया से समझे स्बना l as
las
सारी
ag
g
a मैं पेंच को खोिने के बजाए
उसे बेिरह कसिा चिा जा रहा ्वा
्यों स्क इस करिब पर मझु े
साफ सनु ाई दे रही ्वी
िमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह !
o m
आस्खरकार वही हुआ स्जसका मझु े डर.c्वा
s em
ज़ोर ज़बरदतिी से
g la
बाि की चडू ी मर गई a
और वह भा्षा में बेकार र्मू ने िगी !
हार कर मैंने उसे कीि की िरह
उसी जगह ठोंक स्दया ।
m
m .co
.co
‘बाि की चडू ी मरना’ से ्या अस्भ्ऺाय है ?
m
(i)
m s e
se
(A) बाि का पकड में न आना
l a
(B) बाि का ्ऺभावहीन हो जाना ag
(C) कथ्य और माध्यम का िािमेि होना
(D) बाि में कसाव और िाकि का होना
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(ii) स्नम्नस्िस्खि क्वन ि्वा कारण को ध्यानपवू ाक पढ़कर उस्चि स्वककप का चयन कर स्िस्खए :
कथि : कथ्य के भाव या अस्भव्यस््ि के अनरू ु प ही भा्षा का चनु ाव करना चास्हए ।
कधिण : भा्षा के शब्द-जाि में फाँ सकर कथ्य की जीवांििा और सा्वाकिा नष्ट हो जािी
है ।
लवकल्प :
(A) क्वन ि्वा कारण दोनों ग़िि हैं ।
(B) कारण सही है, िेस्कन क्वन ग़िि है ।
(C) क्वन सही है, िेस्कन कारण, क्वन की ग़िि व्याख्या करिा है ।
(D) क्वन ि्वा कारण दोनों सही हैं ि्वा कारण, क्वन की सही व्याख्या करिा है ।
(iii) तिांभ-I को तिांभ-II से समु ेस्िि कीस्जए ि्वा सही स्वककप चनु कर स्िस्खए :
स्तभं -I स्तभं -II
1. पेंच खोिना (i) कथ्य के माध्यम को सरि बनाना
2. बेिरह कसना (ii) बाि में कसावट का न होना
3. कीि की िरह ठोंकना (iii) भा्षा को अिांकृि करना
लवकल्प :
(A) 1-(ii), 2-(i), 3-(iii) >
(B) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
(C) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
(D) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
(iv) कस्व भा्षा को और अस्िक िराशने में ्यों िगा रहा ?
(A) भा्षा का महत्व न जानने के कारण
(B) आत्म-सांिस्ु ष्ट ्ऺाप्ि न होने के कारण
(C) सां्ऺे्षणीय शब्द न स्मिने के कारण
(D) िोगों से स्मिने वािी ्ऺशांसा के कारण
(v) ‘्यों स्क इस करिब पर मझु े’ – पांस््ि में स्कस करिब की बाि हो रही है ?
(A) भा्षा को अिांकृि करने की
(B) कथ्य को अिक ां ृ ि करने की
(C) कस्विा पाठ करने की
(D) पाठक और ्ቦोिाओ ां को िभु ाने की
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7. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 60 शब्दों में स्िस्खए : 23=6
(i) ‘कस्विा के बहाने’ कस्विा के सदां भा में कस्विा और फूि के सौंदया का िि
ु नात्मक वणान करिे
हुए स्िस्खए स्क स्कसका सौंदया अस्िक है और ्यों ?
(ii) ‘कै मरे में बदां अपास्हज’ कस्विा का अिां स्कस रूप में होिा है ? ्या मीस्डयाकमी अपने उ्देश्य
में सफि होco m? िका पणू ा उ्तर दीस्जए ।
पाया m
e m.
(iii) ‘कस्विाविी’ में ििु सीदास जी ने पे ट की आग की स्वशाििा और भयावहिा को स्कस ्ऺकार l as e
s
laव्य्ि स्कया है ? तपष्ट कीस्जए । a g
a g
8. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 40 शब्दों में स्िस्खए : 22=4
(i) ‘बादि राग’ कस्विा में कस्व ने ऐसा ्यों कहा है स्क ‘सदा पक ां पर ही होिा
जि-स्वप्िव-प्िावन’ ?
(ii) ‘बगिु ों के पांख’ कस्विा से उद्िृ ‘उसे कोई िस्नक रोक र्खो’ पांस्ि से ्या आशय है ?
(iii) ‘पिांग’ कस्विा के सांदभा में बच्चों और कपास केoबीच m का सबां ांि तपष्ट कीस्जए ।
. c
e m
स्नम्नस्िस्खि पस्ठि गद्ाांश पर आिाररि स्दaएs गए ्ऺश्नों के सवाास्िक उपय्ु ि उ्तर वािे स्वककप
9.
g l
चनु कर स्िस्खए : a 51=5
जेठ की जििी िपू में, जब िरर्ऴी स्निामू अस्ननकांु ड बनी हुई ्वी, स्शरी्ष नीचे से ऊपर िक फूिों
से िद गया ्वा । कम फूि इस ्ऺकार की गरमी में फूि सकने की स्हम्मि करिे हैं । कस्णाकार और
आरनवि (अमििास) की बाि मैं भि ू नहीं रहा हाँ । वे भी आस-पास बहुि हैं । िेस्कन स्शरी्ष के सा्व
आरनवि की िि ु ना नहीं की जा सकिी । वह पिां ह-बीस स्दन के स्िए फूििा है, वसिां ॠिु के पिाश
की भााँस्ि । कबीरदास को इस िरह पांिह स्दन के स्िए िहक उठना पसांद नहीं ्वा । यह भी ्या स्क दस
o mदारों से
m स्दन फू िे और स्फर खां खड-के ख
ां ड – ‘स्दन दस फ ू िा फू स्िके खां खड भया पिास !’ .
ऐसेc द म
ु
c. o िो िाँडूरे भिे । फूि है स्शरी्ष । वसांि के आगमन के सा्व िहक उठिा है, आ्षाढ़ िक m
-ख
m s e स्नस्श्चि रूप
जो
se से मति बना रहिा है । मन रम गया िो भरे भादों में भी स्नर्ााि फूििा रहिा g lहैa । जब उमस से ्ऺाण
उबििा रहिा है और िू से हृदय सख a
ू िा रहिा है, एकमा्ऴ स्शरी्ष कािजयी अवििू की भााँस्ि जीवन
की अजेयिा का मां्ऴ ्ऺचार करिा रहिा है । यद्स्प कस्वयों की भााँस्ि हर फूि-प्ते को देखकर मनु ि होने
िायक हृदय स्विािा ने नहीं स्दया है, पर स्निाांि ठूाँठ भी नहीं हाँ । स्शरी्ष के पष्ु प मेरे मानस में ्वोडा
स्हकिोि ज़रूर पैदा करिे हैं ।
2/3/1* 9*Page P.T.O.
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(i) “स्शरी्ष कािजयी अवििू की भााँस्ि जीवन की अजेयिा का मां्ऴ ्ऺचार करिा रहिा है ।” इस
क्वन के सम्वान में स्वककप है :
(A) स्शरी्ष के सा्व और पेडों की िि ु ना नहीं हो सकिी ।
(B) स्शरी्ष मन रमने पर भादों में भी फूिों से िदा रहिा है ।
(C) स्शरी्ष के पेडों पर वसांि ॠिु में फूि आिे हैं और आ्षाढ़ िक रहिे हैं ।
(D) अपनी अजेय स्जजीस्व्षा के कारण स्न:तपृह भाव से ्ऺचांड गरमी में अस्वचि खडा
रहिा है ।
(ii) ‘स्दन दस फूिा ....’ पांस््ि का ्ऺयोग स्कस सांदभा में स्कया गया है ?
(A) पिाश के फूिों की अकपायु का वणान करने के स्िए
(B) जीवन की नश्वरिा का उकिेख करने के स्िए
(C) स्शरी्ष के फूिों को औरों से ्ቦेष्ठ स्सद् करने के स्िए
(D) जीवन की ्षणभांगरु िा का उकिेख करने के स्िए
(iii) ‘स्निाांि ठूाँठ हृदय’ से अस्भ्ऺाय है :
(A) नीरस
(B) सरस
(C) कोमि
(D) समृस्द्हीन
(iv) स्नम्नस्िस्खि में स्हन्दी मास का नाम िहींहै :
(A) ज्ये्
(B) आ्षाढ़
(C) भािपद
(D) वसांि
(v) ‘ऐसे दमु दारों से ....’ िोकोस््ि का अ्वा गद्ाांश के सांदभा में है :
(A) छोटी पाँछ ू होने से बेहिर है, न होना
(B) कम होने से बेहिर है, न होना
(C) कम सािनों से सािनहीनिा अच्छी है
(D) अकपावस्ि से अवस्िहीनिा अच्छी है
2/3/1* 10 * P a g e
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10. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 60 शब्दों में स्िस्खए : 23=6
(i) “िका -स्विका करने की किा का स्श्षा से कोई सांबांि नहीं है ।” भस््िन के व्यस््ित्व के
आिार पर इस क्वन की पस्ु ष्ट कीस्जए ।
(ii)
m
“जहााँ िृष्णा है, बटोर रखने की तपृहा है, वहााँ उस बि का बीज नहीं है ।” क्वन का आशय
तपष्ट करिे.cहुoए स्िस्खए स्क ‘बाज़ार दशान’ पाठ में यह बाि स्कस सदां भा में कही गई है । e m
m
eके दसिपा और आ्षाढ़ का पहिा पखवारा बीि जाने पर भी बाररश न होने पर ‘कािे gla s
s
laमेर्ा पानी दे’ पाठ में गााँव वािों ्षारा ्या-्या उपाय स्कए गए ? उन उपायों को आप स्किनाa
(iii) जेठ
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उस्चि मानिे हैं ? िका पणू ा उ्तर दीस्जए ।
11. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 40 शब्दों में स्िस्खए : 22=4
(i) हैजे और मिेररया से पीस्डि गााँव की स्त्वस्ि का वणान ‘पहिवान की ढोिक’ पाठ के अनसु ार
अपने शब्दों में कीस्जए ।
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(ii) ‘भस््िन’ पाठ के आिार पर स्िस्खए स्क महादे c
. वी जी के र्र आने वािे सास्हत्यकारों के ्ऺस्ि
भस््िन के सम्मान का ्या मापदडां ्वाs?e m
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a पाठ के आिार पर स्िस्खए स्क ्ቦम स्वभाजन की ्या
(iii) ‘्ቦम स्वभाजन और जास्ि ्ऺ्वा’
आवश्यकिा है ? पाठ में इसकी स्कस कमी की ओर सांकेि स्कया गया है ?
12. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 100 शब्दों में
स्िस्खए : 25=10
(i) ‘हम परु ानी चाि के , हमारी र्डी परु ानी चाि की’ – ‘स्सकवर वैस्डांग’ कहानी में पिां जी ्षारा
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यह क्वन स्कस सांदभा में कहा गया ? इस क्वन के आिोक में पांिजी की स्कन्
c. o हीं चार
.co स्वशे्षिाओ ां का उकिेख कीस्जए ।
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s em ‘जझू ’ कहानी में छा्ऴों को अनश g
ु ासन में रखने के स्िए अध्यापकों a
l ्षारा स्दए जाने वािे
a के सा्व इस ्ऺकार का
(ii)
शारीररक दडां का भी उकिेख स्कया गया है । आपकी दृस्ष्ट में छा्ऴों
व्यवहार कहााँ िक उस्चि है ? िका पणू ा उ्तर दीस्जए । विामान में इसमें ्या पररविान आया है ?
(iii) स्सिां ु र्ाटी सभ्यिा के आिार पर स्सद् कीस्जए स्क हमारे पवू जा आज के इजां ीस्नयरों से जि का
्ऺबांिन करना कहीं बेहिर जानिे ्वे ।
2/3/1* 11 * P a g e P.T.O.
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