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CBSE Class 12 Question Paper 2026 Hindi Elective

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About CBSE Class 12 Question Paper 2026 Hindi Elective

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CBSE Class 12 Question Paper 2026 Hindi Elective – Text

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Page 1

FOR CBSE CLASS 12 EXAM PREPARATION

CBSE Class 12
2026
Question Paper ·
Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT

CBSE Class 12 2026 Question Paper Hindi
DETAILS

Elective

Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests

Page 2

666
SET-1
Series Q3SPR àíZ-nÌ H$moS> 29/3/1

परी्षा्वी ्ऺश्न-प्ऴ कोड को उ्तर-पस्ु तिका के
amob Z§.
. c om मख
ु -पृ्቗ पर अवश्य स्िखें ।
e m
e m las
[]
las ag
a g
नोट >
(I) कृ पया जााँच कर िें स्क इस ्ऺश्न-प्ऴ में मस्ु िि पृ्቗ 11 हैं ।
(II) ्ऺश्न-प्ऴ में दास्हने हा्व की ओर स्दए गए ्ऺश्न-प्ऴ कोड को परी्षा्वी उ्तर-पस्ु तिका के मख ु -पृ्቗ पर स्िखें ।
(III) कृ पया जााँच कर िें स्क इस ्ऺश्न-प्ऴ में 13 ्ऺश्न हैं ।
(IV) कृपया ्ቚश्न का उ्ቈर लिखना शुरू करने से पहिे, उ्ቈर-पुलतिका में यथा तथान पर ्ቚश्न का ्ቅमाांक
अवश्य लिखें ।
(V) इस ्ऺश्न-प्ऴ को पढ़ने के स्िए 15 स्मनट का समय स्दया o mहै । ्ऺश्न-प्ऴ का स्विरण पवू ाा्ቡ में 10.15 बजे
स्कया जाएगा । 10.15 बजे से 10.30 बजे िकm c गया
. के वि ्ऺश्न-प्ऴ को पढ़ेंगे और इस अवस्ि के
परी्षा्वी
दौरान वे उ्तर-पस्ु तिका पर कोई उ्तर नहीं स्िखेंsगeे ।
g la
a
*2961M22* लहन्दी (ऐलछिक)
HINDI (Elective)
निर्धारित समय : 3 घण्टे अनर्कतम अंक : 80
सामान्‍य‍नि्ቖेश‍:
नि्शेशों को बहुत सधवर्धिी से पऩिए औि उिकध स़ባती से अिपु धिि कीनिए : .co
m
m
निम्िनिनित
. co(i) इस ्ቚश्ि-प्ቔ में ्ቚश्िों की संख्यध 13 है । s e m
m a
se (ii) इस ्ቚश्ि-प्ቔ में तीि िण्ड हैं – खण्‍ड क, ख औि‍ग । a g l
(iii) तीिों िंडों के ्ቚश्िों के उ्ቈि ्शेिध अनिवधया है ।
(iv) न्शए गए नि्शेशों कध पधिि किते हुए सभी ्ቚश्िों के उ्ቈि निनिए ।
(v) यथधसभ ं व सभी िण्डों के ्ቚश्िों के उ्ቈि ्ቅमधिसु धि निनिए ।

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खण्ड क
(अपलिि बोध)
1. स्नम्नस्िस्खि गद्ाांश को ध्यानपवू ाक पढ़कर उस पर आिाररि स्दए गए ्ऺश्नों के उ्तर स्िस्खए : 10

भारि में इटां रनेट के उपयोग और िकनीक को अपनाने की दर िेजी से बढ़ रही है । िाजा आाँकडों
के अनसु ार देश में 90 करोड से अस्िक िोग इटां रनेट का इतिेमाि करिे हैं । इससे भारि अब दस्ु नया के
सबसे बडे ऑनिाइन बाजारों में आ चक ु ा है स्कांिु िेजी से बढ़िे स्डस्जटिीकरण के सा्व बडा साइबर
अपराि का खिरा भी जडु ा है । आज साइबर अपराि स्स्ऻा अमीरों िक ही सीस्मि नहीं है, बस्कक गााँवों
और शहरों में रहने वािे आम िोग भी इसके स्शकार हो रहे हैं । इसस्िए सरु स््षि इटां रनेट उपयोग के
स्िए सिका रहना और साइबर सरु ्षा को ्ऺा्वस्मकिा देना जरूरी है ।
साइबर हमिे पहिे से अस्िक जस्टि हो गए हैं । जागरूकिा का तिर भी अपे्षाकृ ि कम है ।
अस्िकाांश िोगों को साइबर सरु ्षा के बस्ु नयादी स्नयमों की जानकारी नहीं होिी । इससे वे असरु स््षि
ऑनिाइन िरीके अपनािे हैं और उनका सांवेदनशीि डेटा खिरे में पड जािा है । एक और महቈኚवपूणा
पहिू यह है स्क साइबर सरु ्षा ्ऺस्श्षण के पारांपररक िरीके उबाऊ और कस्िन माने जािे हैं । अि:
आज के स्डस्जटि यगु में साइबर सरु ्षा को रोचक और ्ऺभावी िरीके से स्सखाने की जरूरि है । उ्቞
और भाषा के स्हसाब से िैयार साइबर सरु ्षा से जुडे नतु खे स्दए जाने चास्हए । भारि जैसे बहुभाषी देश में
त्वानीय और साांतकृ स्िक रूप से ्ऺासांस्गक साइबर सरु ्षा साम्ቇी की कमी बडी चनु ौिी है ।
साइबर अपराि के स्खिाफ जागरूकिा बढ़ाने के स्िए ‘साइबरपीस कॉ्ቚसा’ जैसे ्ऺयास
महቈኚवपणू ा भस्ू मका स्नभा सकिे हैं । यह पहि साइबर सरु ्षा से जडु े तवयसां ेवकों का एक नेटवका िैयार
करिी है जो जमीनी तिर िक जाकर िोगों को जागरूक करने और साइबर सरु ्षा में सहयोग देने का
काम करिे हैं । साइबर अपराि के पीस्डिों की मदद करिे हैं ।
िोगों को पिा होना चास्हए स्क साइबर अपराि होने पर कहााँ स्शकायि करें और कहााँ अपनी
समतयाएाँ उिाएाँ ि्वा मौजदू ा आईटी और डेटा सरु ्षा काननू ों के िहि उन्हें कौन-से अस्िकार ्ऺा्ቚि हैं ।
यह ्ऺयास सामस्ू हक रूप से परू े समाज को स्डस्जटि रूप से सशक्ि कर सकिा है ।
(i) गद्ाश
ां के सदां भा में स्डस्जटि रूप से सशक्ि होने का आशय है : 1
(A) ऑनिाइन सेवाओ ां का अस्िकास्िक स्वतिार
(B) इटां रनेट की बेहिर और मजबूि सस्ु विा
(C) साइबर अपराि के ्ऺस्ि अनस्भ्ञिा
(D) इटां रनेट के सरु स््षि उपयोग के ्ऺस्ि सिका िा

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(ii) स्नम्नस्िस्खि क्वन ि्वा कारण को ध्यानपवू ाक पस्ढ़ए ि्वा उ्तर के स्िए स्दए गए स्वककपों में
से सही स्वककप का चयन कर स्िस्खए : 1
कथि : भारि स्वश्व के सबसे बडे ऑनिाइन बाजारों में से एक है ।
कधिण : साइबर अपराि के ्ऺस्ि िोग सचेि हो गए हैं ।
लवकल्प : om
.c
(A) mक्वन सही है, स्कांिु कारण ग़िि है । s em
s e कारण सही है, स्कांिु क्वन ग़िि है । g l a
g la
(B) a
a (C) क्वन और कारण दोनों सही हैं, स्कांिु कारण, क्वन की सही व्याख्या िहीं करिा है ।
(D) क्वन और कारण दोनों सही हैं और कारण, क्वन की सही व्याख्या करिा है ।
(iii) गद्ाांश के आिार पर सही स्वककप/स्वककपों का चयन कर स्िस्खए : 1
I. साइबर अपराि के ्ऺस्ि िोगों में चेिना आई है ।
II. साइबर अपराि की घटनाएाँ शहरी उच्चवगीय िोगों को िेजी से अपनी चपेट में िे
रही हैं ।
o m
c
.और अनपु ािन से साइबर अपराि की घटनाओ ां
III. साइबर सरु ्षा स्नयमों की जानकारी m
को रोका जा सकिा है । ase
g l
लवकल्प : a
(A) I, II और III
(B) के वि I और III
(C) के वि II और III
(D) के वि III
(iv) साइबर जागरूकिा से क्या अस्भ्ऺाय है ? m 1
m c. o
c. o (v) साइबर अपराि से स्नपटने के स्िए भारि के सम्ष सबसे बडी चनु ौिी क्या m
e है ? इसे कै से दरू

se
m स्कया जा सकिा है ?
g l as 2

(vi)
a ां्ऴण पाया जा सकिा है ।”
“सिका और जागरूक रहकर साइबर अपराि की घटनाओ ां पर स्नय
गद्ाांश के आिार पर तपष्ट कीस्जए । 2

(vii) ‘साइबरपीस कॉ्ቚसा’ क्या है ? साइबर जागरूकिा की स्दशा में इसका क्या योगदान है ? 2

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2. स्नम्नस्िस्खि काव्याांश को ध्यानपवू ाक पढ़कर उस पर आिाररि स्दए गए ्ऺश्नों के उ्तर स्िस्खए : 8
ऐसी िेज होिी बाररश में
िकरीबन पच्चीस सािों के बाद वे स्मिेंगे
यह हैरि होिी है सोचकर !
वे स्मिे मुझे एक दवाई की दक ु ान पर
बाररश की बौछारों से बचिे हुए
बरसों देखे गए उस चेहरे को
भि ू ना असांभव ्वा !
मैं अपने इिाके के उस
डास्कए को याद कर रहा ्वा
जो उस समय िकरीबन चािीस-पैंिािीस का
रहा होगा
्ऺाय: रोज ही आिे ्वे मेरी डाक िेकर
सतु िािे ्वे हमारी बैिक में
मााँ उन्हें चाय-पानी के स्िए पछ ू िी ्वी
उनके झरु रा यों से भर रहे
इन्हीं हा्वों ने
हजारों स्चरठयााँ, पस््ऴकाएाँ, स्किाबें, मनीऑडार ....
मेरे घर पहुचाँ ाए ्वे कभी !
अब िो कोई स्चठी नहीं आिी !
इिाके का डास्कया कौन है
बरसों से नहीं जान पाया ।
हमने बाररश के बीच
एक छोटी-सी झोपडी में सा्व चाय पी
उन्होंने अपनी नौकरी के स्दनों
और नोनीहाट के बहुि से िोगों को याद स्कया
और भर आई आाँखों को
बार-बार पोंछिे रहे
चाय पीिे हुए उन्होंने स्फर कहा स्क
आम के मौसम में आपका इिां जार रहेगा !
उन्होंने मेरे हा्वों पर अपना हा्व रखा
और जाने की इजाजि चाही ।
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(i) डास्कए का अपनी भर आई आाँखों को बार-बार पोंछना दशाािा है : 1
(A) स्नराशा और आ्ቅोश को
(B) अांदरूनी पीडा और कसक को
(C) दयनीय स्त्वस्ि को
(D)omभय और सांकोच को
. c e m
m
e स्नम्नस्िस्खि क्वन ि्वा कारण को ध्यानपवू ाक पस्ढ़ए ि्वा उ्तर के स्िए स्दए गए glas
s
la स्वककपों में से सही स्वककप का चयन कर स्िस्खए :
(ii)
a 1
ag
कथि : डास्कया तवयां को अके िा और स्वतमृि महससू करिा है ।
कधिण : आज के समय में सबां िां ों की गरमाहट और मानवीय सवां ेदनाएाँ ि्ቚु ि होिी जा
रही हैं ।
लवकल्प :
(A) क्वन सही है, स्कांिु कारण ग़िि है ।
(B)
m
कारण सही है, स्कांिु क्वन ग़िि है ।
(C) co की सही व्याख्या िहीं करिा है ।
क्वन सही है, स्कांिु कारण, .क्वन
(D) क्वन और कारण दोनों s emसही हैं और कारण, क्वन की सही व्याख्या करिा
है । glaa
(iii) डास्कए के ्ऺस्ि कस्व का दृस्ष्टकोण कै सा है ? 1
(A) उपे्षापणू ा
(B) उदासीन
(C) सांवेदनशीि
(D) आिोचनात्मक
“अब िो कोई स्चठी नहीं आिी, इिाके का डास्कया कौन है, बरसों .सेcoनहीं जान
m
m
.co
(iv)
पाया ।” – पस्ां क्ि के माध्यम से कस्व ने स्कस सामास्जक पररविाeनm
m la s की ओर सक
ां े ि
se स्कया है ?$
ag
1

(v) ‘िकनीकी स्वकास ने मानवीय ररश्िों को ्ऺभास्वि स्कया है ।’ – कस्विा के सांदभा में
इस पर अपने स्वचार तपष्ट कीस्जए । 2

(vi) कस्विा की मि
ू सांवेदना को तपष्ट कीस्जए । 2

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खण्ड ख
(अलिव्यलि और माध्यम पतु िक पर आधाररि ्ቚश्न)

3. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों के उ्तर स्नदेशानसु ार स्िस्खए :
(i) टीवी प्ऴकाररिा के ्षे्ऴ में ‘्ቜेस्कांग न्यजू ’ से क्या अस्भ्ऺाय है ? (शब्द सीमा िगभग
20 शब्द) 1
(ii) प्ऴकारीय िेखन का िात्पया तपष्ट करिे हुए स्िस्खए स्क यह सृजनात्मक िेखन से स्कन रूपों
में स्भन्न है ? कोई एक स्बदां ु स्िस्खए । (शब्द सीमा िगभग 40 शब्द) 2
(iii) ‘स्वशेष ररपोटा’ से आप क्या समझिे हैं ? समाचार-प्ऴ-पस््ऴकाओ ां में इसका क्या महቈኚव है ?
(शब्द सीमा िगभग 40 शब्द) 2

4. स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों में से स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 60 शब्दों में स्िस्खए : 23=6
(i) हमारे दैस्नक जीवन में अपनी उपयोस्गिा और िमाम स्वशेषिाओ ां के बावजदू मस्ु िि माध्यमों
की अपनी सीमा है । सोदाहरण पस्ु ष्ट कीस्जए ।
(ii) स्वशेष िेखन के स्िए एक स्वशेष ्ऺकार की भाषा, िकनीकी शब्दाविी और शैिी की
आवश्यकिा होिी है । सोदाहरण तपष्ट कीस्जए ।
(iii) “समाचार-प्ऴों में सांपादक के नाम प्ऴ जनमि को ्ऺस्िस्बांस्बि करने वािा एक महቈኚवपण ू ा तिांभ
है ।” स्ट्ቚपणी कीस्जए ।

5. स्नम्नस्िस्खि िीन स्वषयों में से स्कसी एक स्वषय पर िगभग 100 शब्दों में रचनात्मक िेख स्िस्खए : 5
(i) अगर कहीं मैं िोिा होिा/होिी
(ii) बाजार का आकषाण
(iii) भीड भरी रे ि में एक स्दन

6. स्नम्नस्िस्खि में से स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 60 शब्दों में स्िस्खए : 23=6
(i) “कस्विा में शब्दों के पयााय नहीं होिे ।” – सोदाहरण तपष्ट कीस्जए ।
(ii) “नाटक मचां न में सवां ाद-योजना और समय का बिां न एक महቈኚवपणू ा भस्ू मका स्नभािे हैं ।”
स्ट्ቚपणी कीस्जए ।
(iii) ‘्षां्ष’ से क्या अस्भ्ऺाय है ? कहानी को आगे बढ़ाने ि्वा उसे रोचक और ्ऺभावी बनाने में ्षां्ष
की क्या भस्ू मका होिी है ? तपष्ट कीस्जए ।

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खण्ड ग
(पाि्य-पतु िकों अांिरा िथा अांिराि पर आधाररि ्ቚश्न)
7. स्नम्नस्िस्खि पस्िि काव्याांश को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्दए गए बहुस्वककपीय ्ऺश्नों के सवाास्िक उपय्ሹ
ु
स्वककपों का चयन कर स्िस्खए : 51=5
m
पसू जाड ्वर्वर िन.cकााँoपा । सरुु ज जडाइ िक m
ां स्दस्स िापा ।।
s e
स्बरह बास्ढ़sभाemदारुन सीऊ । काँ स्प काँ स्प मरौं िेस्ह हरर जीऊ ।। l a
laहौं िागौं स्हयरै । पां्व अपार सझू नस्हां स्नयरें ।। a g
g
कांि कहााँ
a
सौर सपु ेिी आवै जडू ी । जानहुाँ सेज स्हवांचि बढ़ू ी ।।
चकई स्नस्स स्बछुरैं स्दन स्मिा । हौं स्नस्स बासर स्बरह कोस्किा ।।
रै स्न अके स्ि सा्व नस्हां सखी । कै सें स्जऔ ां स्बछोही पाँखी ।।
स्बरह सचान भवैं िन चााँडा । जीयि खाइ मएु ाँ नस्हां छााँडा ।।
रकि ढरा मााँसू गरा, हाड भए सब सांख ।
िस्न सारस होइ ररर मईु , आइ समेटहु पख ां ।। .co
m
e m
(i) s
नास्यका की स्वरह-व्य्वा के सांबिां lमेंaसही स्वककप/स्वककपों का चयन कर स्िस्खए :
I. ag में स्दन-राि जििी रहिी है ।
नास्यका स्वरह रूपी अस्नन
II. उसके शरीर का सारा रक्ि आाँसू बनकर बह रहा है ।
III. वह प्षी बनकर अपने पस्ि के पास उड जाना चाहिी है ।
लवकल्प :
(A) I, II और III
(B) के वि II
m
.co
के वि I और II
m
(C)

m .co (D) के वि II और III
s e m
se l a
(ii) कस्व ने स्वरस्हणी नास्यका की स्वरह की स्त्वस्ि की िि कीgहै ?
ु ना स्कससे a
(A) कोस्किा
(B) बाज
(C) चकवी
(D) मोरनी
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(iii) स्नम्नस्िस्खि क्वन ि्वा कारण को ध्यानपवू ाक पस्ढ़ए ि्वा उ्तर के स्िए स्दए गए स्वककपों में
से सही स्वककप का चयन कर स्िस्खए :
कथि : नास्यका पस्ि के स्वयोग में अत्यांि कमजोर हो गई है ।
कधिण : स्वरह की इस घडी में वह स्निाांि अके िी है ।
लवकल्प :
(A) क्वन सही है, स्कांिु कारण ग़िि है ।
(B) क्वन ग़िि है, स्कांिु कारण सही है ।
(C) क्वन सही है, स्कांिु कारण, क्वन की सही व्याख्या िहीं करिा है ।
(D) क्वन और कारण दोनों सही हैं और कारण, क्वन की सही व्याख्या करिा है ।
(iv) कस्विा में स्कसकी स्वरह व्य्वा का वणान है ?
(A) प्माविी (B) चकवी
(C) नागमिी (D) सारस
(v) पौष मास में रानी नागमिी की स्वरह वेदना और भी अस्िक क्यों बढ़ जािी है ?
(A) सरू ज के दस््षण स्दशा में स्छप जाने के कारण
(B) राजा रत्नसेन की अनपु स्त्वस्ि के कारण
(C) भवन में अके िे रहने के कारण
(D) सौर-सपु ेिी के स्हवांचि हो जाने के कारण
8. काव्य खांड पर आिाररि स्नम्नस्िस्खि िीन ्ऺश्नों में से स्कन्हीं ्ቖो‍्ऺश्नों के उ्तर िगभग 40 शब्दों में
स्िस्खए : 22=4
(i) “तवयां में स्वस्शष्ट होिे हुए भी समाज से कट कर रहने वािे व्यस्क्ि का कोई महቈኚव नहीं ।” –
‘यह दीप अके िा’ कस्विा के आिार पर अपने स्वचार व्यक्ि कीस्जए ।
(ii) “ ‘वसिां आया’ कस्विा आिस्ु नक मनष्ु य की ्ऺकृ स्ि से अिगाव और उसके ्ऺस्ि उदासीनिा
को व्यक्ि करिी है ।” क्वन पर स्ट्ቚपणी कीस्जए ।
(iii) ‘चाहि चिन ये साँदस े ो िै सजु ान को’ – पस्ां क्ि के आिार पर कस्व की मनोदशा का वणान
कीस्जए ।
9. स्नम्नस्िस्खि काव्याांशों में से स्कसी एक‍ काव्याांश की िगभग 100 शब्दों में स्ऺसांग व्याख्या
कीस्जए : 6

(i) मैं जानउाँ स्नज ना्व सभु ाऊ । अपरास्िहु पर कोह न काऊ ।।
मो पर कृ पा सनेहु स्बसेखी । खेिि खस्ु नस न कबहाँ देखी ।।
स्ससपु न िें पररहरे उाँ न सगां ू । कबहुाँ न कीन्ह मोर मन भगां ू ।।
मैं ्ऺभु कृ पा रीस्ि स्जयाँ जोही । हारें हाँ खेि स्जिावस्हां मोंही ।।
अथवा
29/3/1* 8*Page
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666
(ii) देखा स्ववाह आमूि नवि,
िझु पर शभु पडा किश का जि ।
देखिी मझु े िू हाँसी मांद,
होिों में स्बजिी फाँ सी तपांद
उर में भर झूिीm छस्व सांदु र
.
स््ऺय की अशब् o
c द û¥¨गार-मखु र e m
ुm
िू sखeि ी एक-उच्छ्वास-सांग, las
laस्वश्वास-तिब्ि बाँि अांग-अांग ag
g
a नि नयनों से आिोक उिर
कााँपा अिरों पर ्वर-्वर-्वर ।
10. स्नम्नस्िस्खि गद्ाश
ां के आिार पर स्दए गए बहुस्वककपीय ्ऺश्नों के उ्तर के स्िए सवाास्िक उपयक्ु ि
स्वककप का चयन कर स्िस्खए : 51=5

रस कहााँ है ? ये जो स्िांगने से िेस्कन शानदार दरख्ि गरमी की भयांकर मार खा-खाकर और भख ू -्ቚयास
m जी ही नहीं रहे हैं, हाँस भी रहे हैं । बेहया
की स्नरांिर चोट सह-सहकर भी जी रहे हैं, इन्हें क्या कहाँ ? स्स्ऻा
o
c
हैं क्या ? या मतिमौिा हैं ? कभी-कभी जो िोग ऊपर .से बेहया स्दखिे हैं, उनकी जडें का्ऻी गहरी, पैिी
m
रहिी हैं । ये भी पाषाण की छािी फाडकर ना जाने seस्कस अिि ग्ቮर से अपना भोनय खींच िािे हैं ।
la
(i)
g
a स्कसके सांदभा में स्कया गया है ?
गद्ाांश में ‘स्िांगने’ शब्द का ्ऺयोग
(A) मनष्ु य के सांदभा में (B) कुटज के सांदभा में
(C) पाषाण के सांदभा में (D) पहाड के सांदभा में

(ii) स्नम्नस्िस्खि क्वन ि्वा कारण को ध्यानपवू ाक पस्ढ़ए ि्वा उ्तर के स्िए स्दए गए स्वककपों में
से सही स्वककप का चयन कर स्िस्खए :
m
m कथि : स्िगां ना वृ्ष सख
ू ी, नीरस िरिी से भी अपने स्िए जीवन-रस की ििाश करिा c. o है ।
m .co कधिण : मस्ु श्कि पररस्त्वस्ियों से गजु रकर स्नकिे हुए िोग अकसर बेहया होem
s जािे हैं ।
se लवकल्प : la
(A) क्वन सही है, स्कांिु कारण ग़िि है । ag
(B) क्वन ग़िि है, स्कांिु कारण सही है ।
(C) क्वन सही है, स्कांिु कारण, क्वन की सही व्याख्या िहीं करिा है ।
(D) क्वन और कारण दोनों सही हैं और कारण, क्वन की सही व्याख्या करिा है ।
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(iii) गद्ाश
ां में िेखक ने ‘पेड’ की स्कस स्वशेषिा को दशााया है ?
(A) सघनिा
(B) स्निाज्जिा
(C) जीवटिा
(D) तवा्वापरिा
(iv) गद्ाश
ां के आिार पर सही स्वककप/स्वककपों का चयन कर स्िस्खए :
I. स्िगना वृ्ष स्वपरीि पररस्त्वस्ियों में भी उकिस्सि भाव से खडा रहिा है ।
II. स्िगने वृ्ष की स्जजीस्वषा अदम्य है ।
III. जिवायु और पररस्त्वस्ियााँ वृ्ष के स्िए अनक ु ू ि हैं ।
लवकल्प :
(A) I, II और III
(B) के वि I और III
(C) के वि I
(D) के वि I और II
(v) िेखक ‘पेड’ के स्कस गणु से ्ऺभास्वि है ?
(A) कमाििा से
(B) दृढ़िा और सहनशीििा से
(C) बेहयापन से
(D) सघनिा से

11. गद् खांड पर आिाररि स्नम्नस्िस्खि िीन ्ऺश्नों को ध्यानपवू ाक पढ़कर स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग
40 शब्दों में स्िस्खए : 22=4
(i) ‘सवां स्दया’ पाि में वस्णाि बडी बहुररया की स्त्वस्ि के आिार पर समाज में स्त्ऴयों की दशा पर
अपने स्वचार व्यक्ि कीस्जए ।
(ii) ‘जहााँ कोई वापसी नहीं’ पाि के आिार पर ‘स्सांगरौिी’ ्षे्ऴ की स्वशेषिाओ ां का वणान
कीस्जए ।
(iii) ‘िड्डू की मााँग बािक के बािपन की तवाभास्वक मााँग है ।’ – ‘बािक बच गया’ पाि के
आिार पर इस क्वन की सा्वाकिा स्स्ቍ कीस्जए ।

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12. स्नम्नस्िस्खि पस्िि गद्ाांशों में से स्कसी एक गद्ाश
ां की िगभग 100 शब्दों में स्ऺसगां व्याख्या
कीस्जए : 6

(i) जगां ि में मेरा पहिा ही स्दन ्वा जब मैंने बरगद के पेड के नीचे एक शेर को बैिे हुए देखा । शेर
का माँहु खि ु ा हुआ ्वा । शेर का खि ु ा माँहु देखकर मेरा जो हाि होना ्वा वही हुआ, यानी मैं
डर के मारे एकm
. c o झाडी के पीछे स्छप गया । मैंने देखा स्क झाडी की ओट भी गजब की चीज है ।
e m
अगर झास्डयााँ
em
न हों िो शेर का माँहु -ही-माँहु हो और स्फर उससे बच पाना बहुि कस्िन हो जाए ।
l as
l a s अथवा a g
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(ii)
g चौिरी साहब एक खासे स्हदां तु िानी रईस ्वे । बसांि पांचमी, होिी इत्यास्द अवसरों पर उनके
यहााँ खबू नाचरांग और उत्सव हुआ करिे ्वे । उनकी हर एक अदा से ररयासि और िबीयिदारी
टपकिी ्वी । कांिों िक बाि िटक रहे हैं । आप इिर से उिर टहि रहे हैं । एक छोटा-सा
िडका पान की िश्िरी स्िए पीछे -पीछे िगा हुआ है ।

स्नम्नस्िस्खि ्ऺश्नों में से स्कन्हीं ्ቖो ्ऺश्नों के उ्तर िगभग 100 शब्दों में स्िस्खए :
om
13. 25=10

सरू दास के स्िए उसकी पोटिी की क्या अहस्मयि . c ्वी ? पोटिी चोरी होने की बाि को स्छपा
(i)
m
जाना उसके व्यस्क्ित्व की स्कस स्वशेषsिाe को दशाािा है ? उसका ऐसा करना आपकी दृस्ष्ट में
laस्िस्खए ।
कहााँ िक उस्चि है ? यस्ु क्ियक्ु िgउ्तर
a
(ii) ‘स्बतकोहर की माटी’ पाि के आिार पर िेखक के गााँव की स्वशेषिाओ ां का उकिेख करिे हुए
स्िस्खए स्क आिस्ु नक समय में ्ቇामीण जीवन में क्या बदिाव आया है ?
(iii) “जि और पयाावरण सांबांिी समतयाएाँ ‘अपना मािवा − खाऊ-उजाड़ू सभ्यिा में’ पाि के कें ि
में हैं ।” – पाि के आिार पर स्ट्ቚपणी कीस्जए स्क इन समतयाओ ां को दरू करने की स्दशा में क्या
्ऺयास स्कए जा सकिे हैं ?
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m .co
m .co s e m
se l a
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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeQuestion Paper
Pages12
Languagehindi
Updated24 Sep 2026