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NCERT Solutions Class 5 The World Around Us Chapter 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं?

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NCERT Solutions Class 5 The World Around Us Chapter 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं? – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा5

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 8: वस्त्र — वस्तुए ँ कैसे न मत होती
ह?

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — हमारा अ त संसार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

131 – 144 15 27 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 37 pages

Page 2

कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह? AglaSem · NCERT Solutions

क ा 5 · हमारे चार ओर क दु नया · हमारा अ त सं सार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: वस्त्र — वस्तुए ँ कैसे न मत होती
ह?
हमारा अ त संसार का अध्याय 8 इकाई 4 हमारे चार ओर क वस्तुए ँ का अं तम अध्याय है। यह एक पक्षी से आरंभ होता है — बया, जो मनुष्य से
बहुत पहले से घ सले बुनता आ रहा है। इसके बाद अध्याय कपास के एक फाहे से लेकर आपक कमीज तक क पूरी यात्रा दखाता है। इसम बुनाई,
करघा और हथकरघा परंपराएँ, धागा और कताई, प्राकृ तक तथा कृ त्रम रेशे, रेशमक ट का जीवन-चक्र, सुई-धागे से सलाई, भारत क
कढ़ाइयाँ और पुराने कपड़ का पुनचक्रण आते ह। अध्याय म 8 ग त व धयाँ, एक चचा क जए, दो वचार क जए बॉक्स, दो पाठ्य प्रश्न ( रक्त
पं क्तय स हत), एक प्रदशनी काय और अंत म आइए वचार कर के 7 प्रश्न ह। अंत म कोई अलग अभ्यास नह है — प्रश्न पूरे अध्याय म फैले हुए ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
हमारा अ त संसार (क ा 5) 131 – 144

खं ड प्रश्न

15 27

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 131
धाग से बने प्र तरूप

प्र.1 नीचे दए गए चत्र को दे खए। आपको क्या दखाई दे रहा है?

पृष्ठ 131 के ऊपर दया गया चत्र।

मुझे एक छोटा प ी और घास से बने दो लटकते हुए घ सले दखाई दे रहे ह। घ सले बड़े हरे पत्त वाले पौधे से लटक रहे ह।

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह? AglaSem · NCERT Solutions

पृष्ठ 131 के चत्र को ध्यान से दे खए और जो दखे वह ल खए।

म क्या दे खता मुझे क्या दखाई दया
ँ

पक्षी एक छोटा प ी, िजसका िसर चमकीला पीला है, पीठ भूर ी है और चोंच छोटी तथा मजबूत है। वह बाई ं ओर बैठा है और चोंच
में घास का एक लंबा तंत ु पकड़े है।

पहला घ सला एक लंबा घोंस ला, जो ऊपर से चौड़ा और नीचे की ओर सँक रा होता जाता है, टहनी से सीधा लटका हुआ ।

दूसरा घ सला उसके पास एक अिधक गोल और ऊबड़-खाबड़ घोंस ला, िजसमें घास के िसरे बाहर िनकले हुए है।
ं

घ सले कससे ु ं से , जो एक -दू स रे के ऊपर और नीचे से पार िकए गए है।
सूखी घास के सै क ड़ों पतले तंतओ ं
बने ह

वे कहाँ लटके ह प े द ार पौधे की टहिनयों से , जमीन से काफी ऊपर , हवा में झूल ते हुए ।

यह चत्र अध्याय के आरंभ म क्य है: घ सला न तो चपकाया गया है और न ही एक गाँठ से बाँधा गया है। घास
का हर तंतु एक तंतु के ऊपर से और दूसरे के नीचे से बार-बार नकाला गया है, जब तक क सब तंतु एक-दूसरे को
थाम न ल। बुनाई का अथ बलकुल यही है। इस लए अध्याय पहले एक पक्षी क बुनी हुई वस्तु दखाता है, उसके बाद
मनुष्य क बुनी हुई वस्तु।

स्वयं दे खए: बया के लटकते घ सले खेत के पास बबूल या ताड़ के पेड़ पर और पानी के कनारे आसानी से दख
जाते ह। वषा के बाद के महीन म ऊपर दे खए। प्रायः एक ही पेड़ पर कई घ सले दखते ह, क्य क कई नर पास-
पास घ सले बनाते ह।

प्र.2 क्या आप जानते ह क हमारे पयावरण म एक ऐसा छु पा हुआ कलाकार भी है जसने मानव से पहले बुनाई का
काय शुरू कर दया था।

हाँ — वह छपा हुआ कलाकार है बया प ी। पृष्ठ 132 पर पुस्तक यही बताती है। पक्षी और क ट मनुष्य के कपड़ा बनाना सीखने
से बहुत पहले से बुनते, सलते और चपकाते आ रहे ह।
नर बया क्या करता है — क्रम से:

1. वह अपनी च च से घास क लंबी-पतली प याँ चीरता है।
2. एक बार म एक प लेकर टहनी तक ले जाता है।
3. पहले कुछ तंतुओं को टहनी के चार ओर लपेटकर एक छल्ला बनाता है, जस पर वह बैठ सके।
4. फर बुनाई करता है — एक तंतु के ऊपर से और अगले के नीचे से प नकालकर कसकर ख चता है।
5. वह यही काम सैकड़ बार दोहराता है, जब तक घ सला मजबूत लटकती थैली न बन जाए।
6. तैयार घ सला टहनी से झूलता रहता है और उन जंतुओं से सुर क्षत रहता है जो इतनी दूर तक नह पहुँच सकते।

पुस्तक यह भी बताती है क कौन अच्छ बुनाई करता है —

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह? AglaSem · NCERT Solutions

कौन बुन रहा है घ सला कैसा बनता है

कुशल बया बहुत महीन, सुंद र और कसा हुआ

सीखता हुआ ब ा कु छ ऊबड़-खाबड़ और ढीला

यह बात क्य महत्वपूण है: पक्षी को भी अच्छ बुनाई के लए अभ्यास करना पड़ता है। कपड़ा बुनना या सलाई
सीखने वाले व्य क्त के साथ भी ठ क यही होता है। कौशल जादू से नह आता। वह एक ही काम को बार-बार ध्यान
से करने से आता है।

और भी छपे कलाकार: मकड़ी रेशम का जाला बुनती है। फुदक पत्ते को सलती है। मधुमक्खी मोम के कक्ष
बनाती है। बुनकर च टयाँ अपने ब के रेशम से पत्त को जोड़ दे ती ह। प्रकृ त बहुत लंबे समय से धाग से वस्तुएँ
बनाती आ रही है।

चचा क जए — पृष्ठ 133
धाग से बने प्र तरूप — हमारे आस-पास क बुनी वस्तुए ँ

चचा क जए

प्र.1 क्या आपने घर पर अथवा कसी अन्य ान पर प्राकृ तक साम य से बुनी हुई वस्तुए ँ दे खी ह? वे कौन-सी
वस्तुए ँ ह?

हाँ। भारतीय घर क अनेक वस्तुए ँ प्राकृ तक साम ी से बुनी होती ह — चटाई, टोकरी, रस्सी, खाट, पंखा, झाड़ू और सूप।
आपने जो वस्तुएँ सचमुच दे खी ह, उन्ह क चचा क जए। नीचे द गई सूची सहायता करेगी।

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह?
g l AglaSem · NCERT Solutions

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m.
बुनी हुई वस्तु कससे बुनी जाती है कहाँ दखती है

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चटाई
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ताड़ या खजूर का पत्ता, मदुर घास, सरकंडा
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बैठने या सोने के िलए फश पर िबछी हुई

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टोकरी
a बाँस क प याँ, बत, ताड़ का पत्ता
a
रसोई में, बाजार में, खेत पर

खाट या चारपाई ना रयल क जटा क रस्सी, जूट क रस्सी, नवाड़ आँग न में बुनी हुई खाट

co m
पायदान
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ना रयल का रेशा (कॉयर) ag
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घर के दरवाजे पर

हाथ का पंखा
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ताड़ का पत्ता, बाँस गम की दोपहर में

com
सूप बाँस, बत चावल , गेहू ँ और दाल फटकने के िलए

.
a s emसब्जी ढोने के िलए
com agवहlसब जो हम पहनते है ं
जूट का थैला, बोरी जूट अनाज और

m .
ase
कपड़ा — साड़ी, गमछा, तौ लया, पोशाक कपास, रेशम, ऊन

agपृlष्ठ 133 पर ग त व ध 1 के साथ छपे चत्र म ऐसी ही चार वस्तुएँ दखाई गई ह — ताड़ क प य से बुनी तीन टोक रयाँ, हरे-पीले
m a s
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रंग क ह ेदार छोट टोकरी, एक चपट बुनी हुई वस्तु और हथेली पर रखी हरे पत्ते से बुनी एक गोल वस्तु।

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इन सबम एक बात समान है: इनम से कोई भी वस्तु एक बड़ी चादर काटकर नह बनी। हर वस्तु पतली प य से
a
बनी है जो एक-दूसरे के ऊपर और नीचे से नकलती ह। इसी लए ये मजबूत भी ह और आसानी से मुड़ भी जाती ह

m
— क्य क प याँ एक-दूसरे को अपनी जगह पर थामे रखती ह।
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चचा के लए: एक-दूसरे से पू छए, “इनम से कौन-सी वस्तु हमारे ही गाँव या नगर म बनती है, और कौन बनाता
g
a s eहैm?” कई ान पर एक ही प रवार या समुदाय पी ढ़य से वह वस्तु बनाता आ रहा है और उस साम ी को सबसे
a gl अच्छ तरह जानता है।
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com g l a
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agl
ग त व ध 1 — पृष्ठ 133
धाग से बने प्र तरूप — कागज क चटाई बुनना

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गतवध

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g सतह पर टेप से चपका द जए। 2.
m .c 1. नीले कागज क 5–6 प याँ ली जए और उन्ह ऊपर क ओर से कसीa
se
प्र.1

a
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पीले कागज क प य का एक और समूह (सेट) ल और उन्ह नीली प य के ऊपर-नीचे से क्रमश: नकालकर

.c
बुन। 3. यह क्रम तब तक दोहराइए जब तक आपक चटाई पूरी न हो जाए।

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co m gl a
m . a
a s e एक चपट चटाई, ठ क वैसी जैसी पृष्ठ 133 के अं तम चत्र म है। प याँ कह भी
agभीl चटाई उठाने पर वह बखरती नह , एक साथ उठ आती है।
आपको क्या मलेगा: नीले-पीले खान वाली
आपस म चपकाई नह गईं — फर
इसे कैसे कर:

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m ase
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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह? AglaSem · NCERT Solutions

1. नीले कागज क 5 या 6 प याँ का टए। सबक चौड़ाई लगभग 2 सेमी और लंबाई लगभग 20 सेमी र खए।
2. उन्ह मेज पर ऊपर से नीचे क ओर, थोड़ी-थोड़ी दूरी पर, अगल-बगल बछा द जए।
3. ऊपर के सर पर टे प क एक प चपका द जए, ता क वे हल न सक।
4. उतनी ही पीली प याँ, उसी चौड़ाई क , काट ली जए।
5. पहली पीली प ली जए। उसे नीली प 1 के ऊपर से, प 2 के नीचे से, प 3 के ऊपर से, प 4 के नीचे से नका लए।
इसे टे प तक ऊपर खसका द जए।
6. दूसरी पीली प उल्टे क्रम से शुरू क जए — प 1 के नीचे से, प 2 के ऊपर से, प 3 के नीचे से। इसे पहली प से सटा
द जए।
7. हर बार क्रम बदलते हुए यही दोहराइए, जब तक सब पीली प याँ लग न जाएँ। कनार पर बचे सर को टे प से चपका द जए।

टे प

नीली पि याँ िस्थर रहती है ं पीली पि याँ आर-पार बुनी जाती है ं

जहाँ नीला खाना दखता है वहाँ नीली प ऊपर है, जहाँ पीला दखता है वहाँ पीली प ऊपर है — ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे।

चटाई बखरती क्य नह : हर पीली प फँसी हुई है — एक नीली प उसे नीचे दबाए है और अगली उसे ऊपर
उठाए है। नीली प याँ भी इसी तरह फँसी ह। कोई भी प दूसरी प य को हटाए बना बाहर नह नकल सकती।
पुस्तक के शब्द म — धाग को सावधानी से एक-दूसरे के ऊपर और नीचे से पार करने पर एक जुड़ी या बुनी संरचना
तैयार होती है।

प्र तरूप सही रखने के लए: य द दो पीली प याँ एक ही तरह से आरंभ हो जाएँ तो खाने नह , धा रयाँ बन
जाएँगी। इस लए नयम याद र खए — हर नई प ऊपर वाली प से उल्टे क्रम म आरंभ होगी।

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प्र.2 4. क्या आप इस व ध का उपयोग टोकरी बनाने के लए कर सकते ह?

हाँ, कर सकते ह। टोकरी वही बुनी हुई चटाई है जसके कनारे मोड़कर ऊपर उठा दए गए ह और उन्ह आपस म बुन दया गया हो।
बुनाई ठ क वैसी ही रहती है — ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे।
चटाई को टोकरी म कैसे बदल:

1. ग त व ध 1 क तरह चटाई बु नए, पर प य के सरे लंबे छोड़ द जए — का टए मत।
2. चटाई के बीच म कोई छोटा डब्बा या कटोरी उल्ट रख द जए। यही आपका आकार बनेगा।
3. सब प य को डब्बे के कनार के साथ ऊपर क ओर मोड़ द जए। अब वे बाड़ क तरह खड़ी हो जाएँगी।
4. एक नई लंबी प ली जए। उसे खड़ी प य के चार ओर घुमाइए — एक के ऊपर से, अगली के नीचे से।
5. इसी तरह और प याँ एक के ऊपर एक लगाते जाइए, जब तक द वार मनचाही ऊँचाई क न हो जाए।
6. ऊपर बचे सर को अंदर क ओर मोड़कर बुनाई म ख स द जए या चपका द जए, जससे कनारा साफ बने।
7. डब्बा बाहर नकाल ली जए। टोकरी अपना आकार बनाए रखेगी।

यह क्य काम करता है: चटाई और टोकरी दोन एक ही व ध से बनती ह। अंतर बस इतना है क टोकरी म प याँ
चपट नह रहत — वे मुड़कर ऊपर चली जाती ह। बाँस क तोकरी, बत क टोकरी और पृष्ठ 133 के चत्र म दखी
ताड़ के पत्ते क टोक रयाँ ठ क इसी प्रकार बनती ह।

यह क जए: दो रंग क प याँ ली जए और टोकरी क द वार पर भी ऊपर-नीचे का क्रम ठ क र खए। तब टोकरी
के चार ओर खान वाला प्र तरूप बनेगा, ठ क पुस्तक के चत्र क हरी-पीली टोकरी जैसा।

प्र.3 कागज के अ त रक्त अन्य साम य , जैसे— तार , र स्सय , रबन या सरकंड का उपयोग करने का प्रयास
क जए।

इनम से हर साम ी बुनी जा सकती है, और हर एक से अलग तरह क चटाई बनती है। व ध कभी नह बदलती — एक समूह
र रहता है, दूसरा ऊपर-नीचे से नकलता है।
धागे या रस्सी से कैसे बुन:

1. लकड़ी का एक छोटा े म ली जए, या जूते के डब्बे के ढक्कन के दोन छोटे कनार पर खाँचे काट ली जए।
2. एक मजबूत धागे को खाँचे से खाँचे तक बार-बार लपेटकर र धाग का समूह बना ली जए। धागा कसा हुआ र खए।
3. अब दूसरे रंग का ऊन या रबन ली जए।
4. उसे एक धागे के ऊपर से और अगले के नीचे से, पूरे आर-पार नका लए।
5. वापस आते समय उल्टे क्रम से आरंभ क जए।
6. हर पं क्त को पछली पं क्त से सटाकर दबा द जए। े म भर जाने तक यही करते जाइए।
7. पीछे से धागे काटकर जोड़े-जोड़े म गाँठ बाँध द जए। आपक छोट बुनी चटाई या कोस्टर तैयार है।

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साम ी वह कैसा व्यवहार करती है कसके लए अ है

कागज क प याँ कड़ी, पकड़ने म आसान, जोर से ख चने पर फट जाती है अभ्यास की चटाई, शुभकामना काड

ऊन या सूती धागा नरम और लचीला, कसने के लए े म चा हए कोस्टर , छोटा गलीचा, दीवार पर टाँग ने की
वस्तु

रस्सी या जटा मोट और खुरदरी, बहुत मजबूत पायदान, स्टू ल की बैठक

रबन चकना और चमकदार, फसलता है सुंद र बुक माक , सजावट

सरकंडा, ताड़ का पत्ता, ताजा हो तो अच्छ तरह मुड़ता है, सूखने पर कड़ा हो जाता चटाई, टोकरी, पंखा
घास है

साम ी बदलने से क्या सीखते ह: प्र तरूप वही रहता है, पर चटाई पूरी तरह बदल जाती है। रस्सी क चटाई
खुरदरी होती है और उस पर चला जा सकता है। ऊन क चटाई नरम और गम होती है। इस लए बुनकर साम ी चुनते
समय एक ही प्रश्न पूछता है — यह कपड़ा कस काम आएगा?

सुझाव: रबन जैसी फसलने वाली साम ी बार-बार बाहर नकल आती है। उसके दोन सर को टे प से चपकाइए
या े म का उपयोग क जए, और हर पं क्त को पछली पं क्त से कसकर सटाइए।

वचार क जए — पृष्ठ 134
धाग से बने प्र तरूप — क ा म बुनी वस्तुए ँ

वचार क जए

प्र.1 आप अपनी क ा म ऐसी कौन-सी वस्तुए ँ दे खते ह जन्ह बुनकर तैयार कया गया है? य द हम कागज क प य
के ान पर धाग से बुनाई कर तो वह कपड़ा बन जाता है।

क ा म बहुत-सी वस्तुए ँ बुनी हुई ह — और सबसे बड़ी वस्तु वह है जो सब पहने हुए ह। कक्षा क हर पोशाक बुना हुआ कपड़ा
है।

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क ा क बुनी हुई वस्तु कैसे पहचान क यह बुनी हुई है

हमारी पोशाक — कमीज, कुता, सलवार, दुप ा, मोजे िकनारे को पास से दे िखए , छोटे-छोटे धागे आर -पार जाते िदखेंग े

बस्ता और उसक प याँ प ी एक बुना हुआ फीता है, उस पर ताना-बाना साफ िदखता है

बैठने क चटाई या दरी घास की चौड़ी पि याँ या मोटे सूती धागे आर -पार जाते हुए

डस्टर या सफाई का कपड़ा धागे आर -पार , और फटे िकनारे पर ढीले धागे लटकते हए
ु

कुस क बत या प्ला स्टक क बैठक पि याँ स्पष्ट रूप से ऊपर -नीचे से िनकलती हुई

परदा और खड़क का चक धागे या पतली पि याँ अगल -बगल बुनी हुई

कोने म रखा जूट का थैला या बोरी जूट के धागे इतने मोटे िक िबना काँच के भी िदख जाते है ं

घंट क रस्सी, तरंगा र स्सी बटी और बुनी होती है; झंडा बुना हआ
ु कपड़ा है

एक वाक्य म वचार: कपड़ा और कुछ नह , कागज क प य के ान पर धाग से क गई बुनाई है। धागे इतने
पतले होते ह क दूर से कपड़ा एक चकनी चादर जैसा लगता है। पास जाइए तो वही ऊपर-नीचे वाला प्र तरूप
मलेगा — वही जो बया पक्षी उपयोग करता है और वही जो आपने ग त व ध 1 म कया।

अनुमान नह , दे खए: कक्षा क कुछ वस्तुएँ बुनी हुई नह होत — प्ला स्टक क शीट, रबड़ क चटाई, कागज का
चाट। य द पास से दे खने पर भी कोई धागे आर-पार जाते न दख तो वह वस्तु प्रायः बुनी हुई नह है। यह एक अच्छ
जाँच है।

ग त व ध 2 — पृष्ठ 134
धाग से बने प्र तरूप — कपड़े को पास से दे खना

गतवध

प्र.1 कसी कपड़े के टु कड़े को आवधक काँच से या मोबाइल फोन के कैमरे पर जूम (बड़ा) करके दे खए। यह कोई
कमीज या कोई अन्य पोशाक हो सकती है जो आपने पहनी हुई हो। क्या आपको यह अ त ताने-बाने का
प्र तरूप (पैटन) दखाई दे रहा है?

हाँ। आपको धाग क पं क्तयाँ एक दशा म और दूसरी पं क्तयाँ उनके आर-पार जाती दखगी, जो एक-दूसरे के ऊपर और
नीचे से नकल रही ह गी — ठ क वैसे ही जैसे ग त व ध 1 क कागज क चटाई म, बस बहुत-बहुत छोटे रूप म।
इसे कैसे कर:

1. सादा और हल्के रंग का कपड़ा चु नए। सूती कमीज या रूमाल सबसे अच्छा रहेगा।
2. उसे तानकर सीधा क जए और अच्छे प्रकाश म पक ड़ए — खड़क के पास सबसे अच्छा।

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह?
g l AglaSem · NCERT Solutions

3. आवधक काँच को कपड़े से थोड़ा ऊपर पक ड़ए। उसे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे क जए, जब तक चत्र साफ न दखने लगे।
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4. फोन का उपयोग कर रहे ह तो कैमरा पास लाकर धीरे-धीरे जूम क जए।
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5. अब दो चीज ढूँ ढ़ए — ऊपर से नीचे जाते धागे, और आर-पार जाते धागे।

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मने क्या दे खा आवधक काँच से क्या दखाई दया

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साद सूती कमीज साफ -सुथरा ताना-बाना, शतरंज की छोटी िबसात जैस ा। धागों के छोटे-छोटे खाने, सब एक बराबर।

ताना-बाना तो है, पर उस पर नरमm
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मोटा तौ लया फं दे खड़े हुए है।
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ऊनी स्वेटर खाने नही ं — एक -दूaसg
रे में फँ से फं दों की पंिक्तयाँ। स्वेटर बुना नही,ं बिल्क सलाइयों से बनाया जाता है।

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जूट का बोरा धागे इतने मोटे िक िबना काँच के ही ऊपर -नीचे का पितरूप िदख जाता है।

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कपड़े का कटा कनारा ढीले धागे बाहर लटके हुए — पमाण िक कपड़ा अलग -अलग धागों से बना है।

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a gl यह प्र तरूप इतना क ठनाई से क्य दखता है: कपड़े के धागे बहुत पतले होते ह — आपक कागज क प य से
कह अ धक पतले। आवधक काँच उन्ह बड़ा करके दखा दे ता है, और तब बात साफ हो जाती है — कपड़ा कोई
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ठोस चादर नह है। वह सैकड़ अलग-अलग धागे ह जो एक-दूसरे को थामे हुए ह।

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स्वयं जाँ चए: कसी पुराने कपड़े के कटे कनारे से एक धागा ख चकर नका लए। कपड़ा साबुत रहेगा, पर जहाँ वह
धागा था वहाँ एक पतली लक र दखने लगेगी। अब आप ठ क-ठ क दे ख सकते ह क हर धागा कहाँ बैठा था।

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ग तeवmध 3 — पृष्ठ 135
g l as— कपास से सूत बनाना
a धागा

se m
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गतवध

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• रूई का एक गोला ल और उससे
l asधीरे से ख चकर एक रेशा बना ली जए। • अब अपनी उँग लय से रेशे को धीरे-
a ध्यान द जए क जैसे-जैसे आप इसे बाँटते ह, यह सुदृढ़ होता जाता है। • एक
प्र.1
धीरे बाँटने का प्रयास क जए।

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प सल ली जए। अब रूई के रेशे या तंतु को प सल पर लपे टए और रूई के गोले से अ धका धक रूई ख चकर

. co
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इसक लंबाई बढ़ाइए।

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आप क्या दे खगे: रूई ख चने पर एक ढ ला, फूला हुआ रेशा नकलता है जो जरा-सा ख चते ही टू ट जाता है। पर जैसे-जैसे आप
उसे उँ ग लय से बाँटते (बल दे ते) ह, वह पतला, कसा हुआ और कह अ धक मजबूत होता जाता है। कुछ दे र म उससे रूई का गोला
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भी लटकाया जा सकता है और वह टू टता नह । आपने धागा बना लया।

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इसे कैसे कर:

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1. साफ रूई का एक छोटा गोला ली जए। उसे धीरे-धीरे ख चकर ढ ला कर ली जए।

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह? AglaSem · NCERT Solutions

2. गोला बाएँ हाथ म पक ड़ए। दाएँ हाथ से कुछ रेशे पकड़कर धीरे से ख चए। एक नरम, पतला रेशा नकल आएगा — झटका मत
द जए, वरना टू ट जाएगा।
3. अब उस रेशे को अंगूठे और उँ गली के बीच एक ही दशा म लगातार घुमाइए। यही बल दे ना है।
4. थोड़ा ख चए, थोड़ा बल द जए — बार-बार। रेशा लंबा और मजबूत होता जाएगा।
5. खुले सरे को प सल से बाँध द जए। प सल घुमाइए ता क बल बना रहे, और धागा प सल पर लपटता जाए।
6. जब धागा पतला होने लगे तो गोले से कुछ और रेशे ख चकर उसी म मला द जए। नए रेशे पुराने रेश से जुड़ जाएँगे।

अव ा वह कैसी दखती है कतनी मजबूत है

रूई का गोला एक नरम सफेद बादल छू ते ही िबखर जाता है

ख चा हुआ, बना बल का रेशा मोटा और फूला हुआ जरा-सा खी ंचने पर टू ट जाता है

थोड़ा बल दया हुआ पतला, थोड़ा चमक ला ु ़ ा रहता है, पर टू ट भी जाता है
जड

अच्छ तरह बल दया हुआ पतला, कसा और एक-सा मजबूत — रूई के गोले का भार सँभाल ले ता है

बल दे ने से मजबूती क्य आती है: कपास का हर रेशा बहुत छोटा और बहुत पतला होता है, इस लए अकेला रेशा
कुछ नह थाम सकता। बल दे ने पर रेशे एक-दूसरे के चार ओर लपटकर पकड़ बना लेते ह। अब खचाव कसी एक
रेशे पर नह पड़ता — सब मलकर उसे बाँट लेते ह। पुस्तक इसी को नाम दे ती है: सूती रेश को एक साथ लपेटकर
धागा या सूत बनाने क प्र क्रया को कताई कहते ह। आपक प सल ठ क वही काम कर रही है जो चरखा करता है।

पूरी यात्रा — कपास के पौधे से आपक कमीज तक:

1. कपास 2. रेशे (तंत)ु 3. कताई
कपास के पौधे पर पतले, बाल जैसे — उँगिलयों या चरखे से
लगा सफेद फाहा छोटे और कमजोर रेशों को बल देना

4. धागा (सूत) 5. बुनाई 6. कपड़ ा
लंबा, मजबूत और करघे पर धागे ऊपर- दज इसे िसलकर
बुनने के िलए तैयार नीचे से पार होते है ं हमारे वस्त्र बनाता है

रेशा → धागा → कपड़ा → वस्त्र। आपकी हर कमीज इन छहों चरणों से गुजरी है।

कपास क यात्रा — पौधे से लेकर हमारे पहने हुए वस्त्र तक।

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क्या आप जानते ह? कपास उगाकर उससे वस्त्र बनाने वाला भारत वश्व का पहला दे श था। गांधी जी प्र त दन स्वयं
चरखे पर सूत कातते थे। इस प्रकार हाथ से काते और बुने कपड़े को खाद कहते ह, जो स्वतंत्रता सं ाम और
आत्म नभर बनने का प्रतीक बन गया।

ग त व ध 4 — पृष्ठ 138
प्राकृ तक और कृ त्रम रेशे

गतवध

प्र.1 कुछ ऐसे कपड़ , थैल या अन्य वस्तुओं का अवलोकन क जए जनका आप प्र त दन उपयोग करते ह। इनम
प्रयुक्त होने वाली साम य क सूची बनाइए। क्या वे प्राकृ तक रेश से बनी ह या कृ त्रम रेश से बनी ह। नीचे द
गई ता लका म प्रत्येक के सामने लख क उसक कौन-सी वशेषता आपको पसंद है।

वस्तु प्राकृ तक कृ त्रम मुझे क्या पसंद है?

पहले यह याद कर ली जए क कौन-सा रेशा कस समूह म आता है। पुस्तक के पृष्ठ 136 और 137 पर ये दखाए गए ह।

प्राकृ तक रेशे — पेड़-पौध और जंतुओं से कृ त्रम रेशे — मनुष्य ारा बनाए गए

बाँस, कपास, लनन (अलसी/सन के पौधे से), जूट — पौध से रे यॉन, नायलॉन, पॉिल स्टर , टेिरलीन
ऊन (भेड़ से), रेशम (रेशमक ट से) — जंतुओं से

अब अपनी वस्तुएँ दे खकर ता लका भ रए। सही खाने म सही का चह्न लगाइए। नीचे एक भरी हुई ता लका नमूने के रूप म द गई है।

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वस्तु प्राकृ तक कृ त्रम मुझे क्या पसंद है?

मेरी सूती व ालय- ✓ (कपास) — इसमें हवा आर -पार जाती है, इसिलए गम में गम नही ं
कमीज लगती। ध ल
ु ने में भी आसान है।

मेरा ऊनी स्वेटर ✓ (ऊन) — यह नरम है और सद में सचमुच गम रखता है।

मेरा बस्ता — ✓ (नायलॉन / हल्का है, फटता नही,ं और वष का पानी अंद र नही ं जाता।
पॉ लस्टर)

माँ क रेशमी साड़ी ✓ (रेशम) — िचकनी और चमकदार है। माँ इसे त्योहार के िदन पहनती
है।
ं

बाजार ले जाने वाला जूट ✓ (जूट) — मजबूत है, भारी सिब्जयाँ सँभाल ले ता है, और प्ल ािस्टक का
का थैला नही ं है।

मेरा बरसाती (रेनकोट) — ✓ (पॉ लस्टर) पानी इस पर से िफसल जाता है और यह कु छ ही िमनटों में
सूख जाता है।

हमारी खाट क रस्सी ✓ (ना रयल क जटा — मोटी और खरु दरी है, वष ं बाद भी नही ं टू टती।
/ जूट)

मेरे मोजे ✓ (कपास) ✓ (थोड़ा नायलॉन) कपास पसीना सोख ले ती है और नायलॉन से मोजे िखंचकर
पैर में ठीक बैठते है।
ं

आपक ता लका म आपक अपनी वस्तुएँ ह गी। कोई भी स ा उत्तर सही है — महत्वपूण यह है क आप अनुमान लगाने के बजाय
लेबल दे ख या कसी बड़े से पूछ।

दोन म अंतर कैसे पहचान: यह पू छए क साम ी कहाँ से आई। य द वह कसी पौधे पर उगी या कसी जंतु से
मली, तो वह प्राकृ तक रेशा है। य द वह कारखाने म कृ त्रम साम ी से बनी, तो कृ त्रम रेशा है। अं तम पं क्त पर
ध्यान द जए — आजकल बहुत-से कपड़े दोन के मश्रण से बनते ह, ता क दोन के गुण मल जाएँ।

क्या आप जानते ह? भारत वश्व म जूट (पटसन) का सबसे बड़ा उत्पादक है। और गुजरात म उगने वाली काला
कपास बना रसायन और बना अ त रक्त जल के उगती है। वहाँ के बुनकर उसे हाथ से कातकर मजबूत, पयावरण-
अनुकूल कपड़ा बुनते ह।

ग त व ध 5 — पृष्ठ 139

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सुई और धागे से शल्पकला — पत्तल और दोना

गतवध

प्र.1 छोटे -छोटे समूह म पलाश, सागवान, कटहल या इसी तरह के चौड़े पत्त वाले पौध के ताजा पत्ते एकत्र क जए।
य द पत्ते उपलब्ध न ह तो कागज का उपयोग करके यह ग त व ध क जए। इसके अ त रक्त कुछ छोट -छोट
पतली लकड़ी क डं डयाँ एक त्रत क जए। अब पत्त या कागज के टु कड़ को छोट -छोट डं डय का उपयोग
करके आपस म जो ड़ए और इसे थाली अथवा चम्मच का रूप द जए।

आप क्या बनाएँगे: पत्त क एक गोल थाली (पत्तल) और एक छोटा गहरा दोना या चम्मच — ठ क वही जो पृष्ठ 139 के चत्र म
दखाए गए ह। डं डयाँ छोट क ल जैसा काम करती ह। वे पत्त को बना ग द, बना धागे और बना कसी मशीन के जोड़ दे ती ह।
पत्तल कैसे बनाएँ:

1. पलाश, सागवान या कटहल के 6 से 8 ताजे चौड़े पत्ते इक े क जए। ताजे पत्ते बना टू टे मुड़ जाते ह। उन्ह धोकर पानी झाड़
ली जए।
2. डं डय को लगभग 3 सेमी के छोटे टु कड़ म तोड़ ली जए। सरे बहुत नुक ले न र खए।
3. एक पत्ता सीधा बछाइए। दूसरे पत्ते को इस तरह र खए क वह पहले पत्ते के लगभग आधे भाग पर आ जाए।
4. जहाँ दोन पत्ते एक-दूसरे पर ह, वहाँ एक डंडी आर-पार ख स द जए — अंदर, फर बाहर, टाँके क तरह। दोन पत्ते जुड़ गए।
5. इसी तरह गोलाई म पत्ते जोड़ते जाइए, हर नए पत्ते को पछले पत्ते से ख सते हुए।
6. जब गोला पूरा हो जाए तो अं तम पत्ते को पहले पत्ते से जोड़ द जए।
7. पत्तल को कुछ मनट कसी भारी पुस्तक के नीचे दबा द जए। कनारे को कची से काटकर गोल कर ली जए।

दोना या चम्मच कैसे बनाएँ:

1. एक बड़ा पत्ता ली जए। उसे शंकु (कोन) के आकार म मो ड़ए, जससे नोक नीचे आ जाए।
2. मोड़ को पकड़े र हए और ऊपरी कनारे के पास दोन तह म एक डंडी आर-पार ख स द जए।
3. य द शंकु खुल जाए तो थोड़ा नीचे एक और डंडी लगा द जए।
4. थोड़ा पानी डालकर जाँ चए। य द पानी टपके तो अंदर एक और पत्ता लगाकर उसे भी ख स द जए।

डंडी पकड़ क्य बना लेती है: डंडी दोन पत्त के आर-पार जाती है और उनके रेश के आड़े पड़ती है। पत्त को
अलग करने के लए उन रेश को फाड़ना पड़ेगा, और इसके लए बहुत जोर चा हए। यह ठ क टाँके जैसा ही वचार है
— सुई धागे को कपड़े के दो टु कड़ के आर-पार ले जाती है, और फर कपड़े बना फटे अलग नह होते।

यह जानना क्य जरूरी है: भारत म सैकड़ वष से भोजन म, मं दर म और मेल म पत्तल और दोने का उपयोग
होता आया है। इनम लागत लगभग शून्य है, कारखाने क आवश्यकता नह है, और उपयोग के बाद ये गलकर म
म मल जाते ह। प्ला स्टक क थाली इनम से कुछ भी नह कर पाती। टू ट जाने पर वह केवल कचरा बनकर रह जाती
है।

ग त व ध 6 — पृष्ठ 139

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सुई और धागे से शल्पकला — सलाई सीखना
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गतवध

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a s emआपने कभी सलाई करने का प्रयास कया है? कसी कपड़े के टुकड़े को सलने के लए आपको सुई और
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क्या
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प्र.1
धागे क आवश्यकता होगी। क्या आप फटे हुए कपड़े को ठ क कर सकते ह या बटन लगा सकते ह? आइए, थोड़ी

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सलाई सीख।

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agलगाना, ये दो काम क ा 5 का हर व ाथ सीख सकता है। इसके लए

हाँ — फटा कपड़ा ठ क करना और ढ ला बटन
केवल तीन चीज चा हए: एक सुई, लगभग एक हाथ लंबा धागा, और एक कची।

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पहले तैयारी क जए।

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c के सामने पक ड़ए। धागे का एक सरा सुई के छे द म डा लए। सरे को थोड़ाagगीला कर लेने से वह कड़ा हो जाता
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1. अपने हाथ जतना लंबा धागा का टए। बहुत लंबा धागा उलझ जाता है।

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हैsऔर आसानी से घुस जाता है।
2. सुई को
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ag 3. धागे को इतना ख चए क एक ओर छोटा-सा सरा लटका रहे।

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4. लंबे सरे पर गाँठ बाँध द जए, ता क धागा कपड़े से नकल न जाए।

बटन फर से लगाने के लए:
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1. वह जगह ढूँ ढ़ए जहाँ बटन था। वहाँ पुa glधागे के नशान दखगे।
राने
2. सुई को कपड़े के पीछे से उसी ान पर ऊपर लाइए।

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3. उसे बटन के एक छे द म से ऊपर नकालकर सामने वाले छे द म से नीचे ले जाइए और पीछे नका लए।

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4. इन्ह दो छे द म से यह क्रया पाँच-छह बार दोहराइए।

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5. य द बटन म चार छे द ह तो दूसरे जोड़े म भी यही क जए।

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6. पीछे क ओर समाप्त क जए। एक ही जगह दो छोटे टाँके लगाकर सुई को फंदे म से नकालकर गाँठ बना द जए। धागा काट
a द जए।

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छोटा फटा भाग ठ क करने के लए:

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as क वे बस छू जाएँ। ख चए मत।
1. कपड़े को उलटकर सीधा बछाइए।

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2. फटे हुए दोन कनार को इतना पास लाइए
3. फटन आरंभ होने से लगभग 1 सेमी पहले से छोटे -छोटे क े टाँके लगाना शुरू क जए।
4. फटन समाप्त होने के 1 सेमी बाद तक टाँके लगाइए, ता क अं तम टाँका मजबूत कपड़े पर पड़े।
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5. पीछे गाँठ बाँधकर धागा काट द जए। कपड़ा सीधा कर ली जए।

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a s em वह एक अ त रक्त सट मीटर क्य जरूरी है: य द आप केवल वह सलाई कर जहाँ कपड़ा पहले से फटा है, तो

agl पूरा खचाव फटन के कनारे पर ही पड़ेगा और वह फर खुल जाएगा। मजबूत कपड़े से आरंभ करने पर खचाव
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अ धक बड़े भाग म बँट जाता है। इसी लए दज हर मरम्मत खराब भाग से थोड़ा पहले शुरू करता है और थोड़ा आगे

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तक ले जाता है।

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सावधानी — पुस्तक क अपनी चेतावनी: सुई नुक ली होती है। उससे कभी खे लए मत, उसे मुँह म मत र खए,
और कुस या फश पर पड़ी मत छो ड़ए। उपयोग न करते समय उसे कपड़े के छोटे टु कड़े म ख स द जए और अंत म
सुइयाँ गनकर र खए। यह ग त व ध शक्षक या कसी बड़े क दे ख-रेख म ही क जए।

वचार क जए — पृष्ठ 139
सुई और धागे से शल्पकला — हमारे आस-पास क सलाई

वचार क जए

प्र.1 1. क्या आपने कभी घर पर या आस-पड़ोस म कसी को सलाई करते दे खा है? वे क्या बना रहे थे या क्या सल
रहे थे?

हाँ। हमारे आस-पास हर समय सलाई होती रहती है — घर पर, दज क दुकान पर, मोची के ठे ले पर और हर फटे बस्ते क
मरम्मत म।
नमूना उत्तर: “हाँ, मने दे खा है। मेरी दाद दोपहर म खड़क के पास बैठकर सलाई करती ह। पछले सप्ताह उन्ह ने मेरी व ालय-
कमीज पर दो बटन लगाए और भाई के पतलून के घुटने के अंदर एक पैबंद लगाया। हमारे बस-अ े के पास एक दज क दुकान भी
है। दज मशीन पर बैठकर हाथ से प हया घुमाता है और कपड़ा सुई के नीचे सरकता जाता है। मने उसे ब्लाउज सलते और एक
ढ ली हो गई कमीज को छोटा करते दे खा है।”

कौन सलाई कर रहा कन औजार से क्या बना या ठ क कर रहा था
था

घर पर माँ या दाद सुई और धागा बटन, उधड़ी मोहरी, ढीली जेब, पुर ानी साड़ी से बना थैल ा

दज सलाई मशीन, कची, इंच-टे प, ख ड़या कमीज, कु त , ब्ल ाउज, सलवार -कमीज, िव ालय की पोशाक ;
पतलून छोटी करना

मोची मोट मुड़ी हुई सुई और मजबूत मोम चप्पल का टू टा फीता, जूते की िसलाई, चमड़े के थैले का हत्था
लगा धागा

कढ़ाई करती म हला सुई, रंगीन धागे, घेरा ( े म) दुप े पर फू ल , ग ी का िगलाफ , दीवार पर टाँग ने का कपड़ा

रजाई बनाने वाला सुई-धागा, पुराने कपड़े के टु कड़े छोटे-छोटे टुक ड़े जोड़कर बनी रजाई या ग दु ड़ी

बोरी बेचने वाला बड़ी सुई और जूट क डोरी भरी हुई अनाज की बोरी का मुँह बंद करना
दुकानदार

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इस काम के बारे म ध्यान दे ने योग्य बात: इनम से हर व्य क्त कुशल काम कर रहा है। दज को नाप लेना, काटना
और इस तरह जोड़ना आता है क कपड़ा सचमुच कसी शरीर पर ठ क बैठे। मोची को चमड़े के आर-पार सुई
नकालनी पड़ती है। ये ऐसे काय ह जन्ह सीखने म वष लगते ह, और इनके बना कसी गाँव या नगर का काम नह
चल सकता।

प्र.2 2. अपनी कमीज या बस्ते को दे खए। क्या आप यह पता लगा सकते ह क कपड़े के टु कड़ को कहाँ-कहाँ सलाई
करके जोड़ा गया है?

हाँ — कमीज कपड़े का एक टु कड़ा नह होती। वह कई टु कड़ को टाँक क पं क्तय से जोड़कर बनाई जाती है। टाँक क
हर पं क्त को सलाई-रेखा कहते ह। उस पर उँ गली फे रए तो एक छोट उभरी हुई रेखा महसूस होगी।

कमीज पर कहाँ दे ख वहाँ क्या जोड़ा गया है

बगल से नीचे तक, दोन ओर आगे का भाग पीछे के भाग से जोड़ा गया है

कंधे पर, बाँह के ऊपरी सरे पर बाँह को धड़ से जोड़ा गया है

हर बाँह के अंदर क ओर बाँह का कपड़ा स्वयं से जोड़कर नली बनाई गई है

गले के चार ओर कॉलर जोड़ा गया है

आगे के कनारे और नीचे क मोहरी पर कपड़ा मोड़कर िसला गया है तािक िकनारा उधड़े नही ं — इसे मोहरी या हेम कहते है ं

हर बटन और काज पर छोटे कसे हुए टाँके बटन को पकड़े है ं और काज को घे रे हुए है ं

जेब एक अलग छोटा टुक ड़ा तीन ओर से िसला हुआ , ऊपर से खल
ु ा

बस्ते पर कहाँ दे ख वहाँ क्या जोड़ा गया है

जहाँ हर प बस्ते से मलती है बार -बार िसलाई — एक चौकोर और उसके भीतर क्रॉस , क्योंिक पूर ा भार यही ं पड़ता है

ज़प के चार ओर िज़प की प ी दोनों ओर कपड़े से िसली गई है

सब कोने और कनारे चपटे टुक ड़े जोड़कर िडब्बे जैस ा आकार बनाया गया है, पायः िसलाई के ऊपर एक मजबूत फीता
लगाकर

सामने क जेब, नाम-प , ऊपर का हर एक अलग से िसलकर लगाया गया है
ह ा

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कपड़े को काटकर फर क्य जोड़ा जाता है: हमारा शरीर चपटा नह होता, पर कपड़ा चपटा होता है। इस लए
दज सही आकार के चपटे टु कड़े काटता है और उन्ह सलकर जोड़ दे ता है, जससे चपटा कपड़ा शरीर पर बैठने
वाला आकार ले लेता है। ध्यान द जए क सलाई कहाँ दोहरी क गई है — बस्ते क प पर, पतलून क सीट पर,
बाँह के जोड़ पर। यही वे ान ह जहाँ सबसे अ धक खचाव पड़ता है।

यह क जए: कोई पुरानी कमीज उलटकर दे खए। अब हर सलाई-रेखा साफ दखेगी और आप गन सकगे क
कमीज बनाने म कपड़े के कतने टु कड़े लगे। अ धकतर कमीज आठ से दस अलग टु कड़ से बनती ह।

ग त व ध 7 — पृष्ठ 140
सुई और धागे से शल्पकला — क ा टाँका

गतवध

प्र.1 आइए क े टाँके लगाना सीखकर हम अपना सलाई अभ्यास आरंभ करते ह। 1. सुई म धागा डा लए और उसके
एक सरे पर गाँठ बाँध द जए। 2. कपड़े के पीछे से टाँका लगाना आरंभ क जए। सुई को बदु ‘क’ पर ऊपर
लाइए। 3. सुई को बदु ‘ख’ पर नीचे क ओर नका लए। 4. इसे बदु ‘ग’ पर ऊपर लाइए और फर बदु ‘घ’ पर
नीचे ले जाइए। 5. इसी प्रकार सीधी रेखा म ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे टाँके लगाते हुए सलाई कर। 6. इसे क ा
टाँका (र नग स्टच) कहा जाता है।

आपको क्या मलेगा: टाँक क एक सुंदर बदुदार रेखा, ठ क पृष्ठ 140 के चत्र जैसी — ऊपर धागे का छोटा टु कड़ा, फर खाली
जगह, फर धागे का टु कड़ा। कपड़े को उलटकर दे खए तो उल्टा दखेगा: जहाँ ऊपर खाली जगह थी वहाँ धागा, और जहाँ धागा था
वहाँ खाली जगह। धागा कपड़े के अंदर-बाहर दौड़ता चला गया है।
इसे कैसे कर:

1. सुई म धागा डालकर एक सरे पर गाँठ बाँध ली जए।
2. कपड़ा सीधा पक ड़ए। सुई को पीछे से बदु ‘क’ पर ऊपर लाइए। धागे को तब तक ख चए जब तक गाँठ पीछे अटक न जाए।
3. अब सुई को ‘क’ से थोड़ा आगे बदु ‘ख’ पर कपड़े म नीचे उता रए और धागा ख च ली जए। ऊपर आपका पहला टाँका बन
गया।
4. सुई को ‘ख’ से थोड़ा आगे बदु ‘ग’ पर फर ऊपर लाइए।
5. उसे बदु ‘घ’ पर नीचे ले जाइए। यह आपका दूसरा टाँका है।
6. इसी प्रकार आगे बढ़ते जाइए — ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे — सीधी रेखा म।
7. हर टाँका और हर खाली जगह बराबर लंबाई क रखने का प्रयास क जए। इसी से सलाई सुंदर दखती है।
8. अंत म पीछे क ओर एक ही जगह दो टाँके लगाकर धागा काट द जए।

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह? AglaSem · NCERT Solutions

क (ऊपर) घ (नीचे) ऊपर िदखता धागा

कपड़ा

ख (नीचे) ग (ऊपर)
कपड़े के नीचे िछपा धागा

मोटे टु कड़े वे ह जो ऊपर दखते ह। बदुदार वक्र वही धागा है जो कपड़े के नीचे-नीचे चल रहा है।

इसे क ा टाँका (र नग स्टच) क्य कहते ह: क्य क धागा बीच म कह गाँठ लगाए बना कपड़े के भीतर-बाहर
बस दौड़ता चला जाता है। यह सबसे तेज टाँका है और हर दज सबसे पहले यही सीखता है। बाक सब क ठन टाँके
इसी पर आधा रत ह।

सुंदर बनाने के लए: पहले कपड़े पर प सल से हल्क रेखा ख च ली जए और उसी पर टाँके लगाइए। हर टाँका
लगभग चावल के दाने जतना और हर खाली जगह उतनी ही र खए। धागे को कसकर मत ख चए, वरना कपड़ा
सकुड़ जाएगा।

ग त व ध 8 — पृष्ठ 140 – 141

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह?
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कपड़ को सलकर आपस म जोड़ना
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गतवध

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a s emको सलकर आपस म जोड़ना — अब आइए इन टाँक का उपयोग करके वस्त्र के दो टुकड़ को आपस म
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कपड़
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जोड़। 1. दज क दुकान पर बचे हुए छोटे -छोटे वस्त्र के टु कड़े या पुराने वस्त्र के कुछ टु कड़े एक त्रत क जए। 2.

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कपड़े का एक टु कड़ा मेज पर सीधा बछाइए। दूसरे कपड़े के टु कड़े को उसके ऊपर थोड़ा आ ा दत करते हुए

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र खए। 3. अब उन्ह एक साथ जोड़ने के लए एक सुई और धागे का उपयोग करके ऊपर बताई गई व धय के
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अनुसार क े टाँके लगाइए।

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यहाँ दोनों एक-दू सरे को ढकतेmहै.ंc
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कपड़ ा 2 .com
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कच्चा टाँका
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g l as कपड़े के दो टु कड़े एक-दूसरे पर थोड़ा आ ा दत रखे ह और जहाँ वे एक-दूसरे को ढकते ह, वहाँ क े टाँके लगाए गए

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आपको क्या मलेगा: कपड़े के दो अलग टु कड़े मलकर एक बड़ा टु कड़ा बन जाएँगे। एक कोने से उठाइए तो पूरा कपड़ा एक साथ
उठ आएगा। टाँक क रेखा उसे थामे रहती है, और जोड़ पर धागे क सुंदर बदुदार रेखा दखाई दे ती है।

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इसे कैसे कर:
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2.. दो टु कड़े चु नए। आरंभ करने वाल के लए सादा सूती कपड़ा सबसे आसान रहता
a gहै।
1. दज क दुकान से बचे हुए टु कड़े माँग ली जए। दज प्रायः खुशी से दे दे ते ह। या पुरानी चादर या पुराने कुत के टु कड़े ले ली जए।

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3. पहला टु कड़ा मेज पर सीधा बछाकर उसक सलवट ठ क कर ली जए।

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4. दूसरे टु कड़े को इस तरह र खए क वह एक कनारे पर पहले टु कड़े को लगभग 2 सेमी तक ढक ले। यही ढका हुआ भाग

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आ ादन है।

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5. आच्छादन को कसकर पक ड़ए या पन लगा द जए, ता क काम करते समय वह खसके नह ।

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6. सुई म धागा डालकर गाँठ लगाइए और आच्छादन के बीच बीच क े टाँक क एक रेखा बनाइए — ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे,
जैसा ग त व ध 7 म कया था।

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7. टाँके छोटे र खए और रेखा सीधी र खए। धागे को कसकर मत ख चए।

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8. अंत म पीछे क ओर एक ही जगह दो टाँके लगाकर धागा काट द जए।
9. अब जोड़ को पकड़कर धीरे से ख चए। वह खुलना नह चा हए।

टु कड़ का एक-दूसरे पर चढ़ना क्य आवश्यक है: य द दोन कनारे केवल छू ते हुए रखकर सलाई कर, तो धागे
को पकड़ने के लए कपड़ा नाममात्र का ही मलेगा और जोड़ तुरंत फट जाएगा। आच्छादन होने पर हर टाँका कपड़े
क दो पूरी तह म से, कटे कनारे से दूर हटकर नकलता है। इससे खचाव कनारे के थोड़े-से धाग पर नह , ब ल्क
कपड़े के बहुत-से धाग पर बँट जाता है।

य द जोड़ बार-बार खुल जाए: आच्छादन चौड़ा क जए, टाँके छोटे और पास-पास लगाइए, या उसी रेखा पर
वापस आते हुए खाली जगह भर द जए। दो पं क्तय क सलाई एक पं क्त से दुगनी मजबूत होती है।

प्र.2 4. मेजपोश, चटाई, कोस्टर, सफाई का कपड़ा या अपनी रु च क कोई भी साम ी बनाने के लए इसी प्रकार और
अ धक टु कड़े जो ड़ए।

टु कड़े जोड़ते जाइए और बचे हुए चीथड़ का ढे र कसी काम क वस्तु बन जाएगा। पृष्ठ 141 के चत्र म यही दखाया गया है
— हाथ छपे हुए कपड़ के छोटे चौकोर टु कड़े जोड़ रहे ह, और तैयार वस्तुएँ कई रंगीन खान से बनी ह।
इसक योजना कैसे बनाएँ:

1. पहले तय क जए क क्या बनाना है और वह कतना बड़ा होगा। कोस्टर लगभग 10 सेमी का होता है, मेजपोश बहुत बड़ा।
2. टु कड़ को आकार के अनुसार छाँट ली जए। उन्ह एक ही नाप के — मान ली जए 10 सेमी के — चौकोर टु कड़ म काट ली जए,
ता क वे ठ क-ठ क जुड़।
3. सलाई शुरू करने से पहले सब चौकोर टु कड़े फश पर पं क्तय म बछा द जए। रंग का क्रम पसंद आने तक उन्ह इधर-उधर
रखते र हए।
4. पहले एक पूरी पं क्त स लए — एक चौकोर टु कड़े को दूसरे से, कनार पर क े टाँके लगाकर।
5. इसी तरह बाक पं क्तयाँ भी बना ली जए।
6. अब पं क्त को पं क्त से जो ड़ए, जब तक पूरी चादर न बन जाए।
7. बाहरी कनारे को एक बार मोड़कर सल द जए। यही मोहरी है — इससे कनारे उधड़ते नह ।

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क्या बनाना है कतने टु कड़े चा हए कस काम आएगा

कोस्टर 1 या 2 चौकोर, और नीचे क तह के लए एक और गम िगलास रखने के िलए

सफाई का कपड़ा 4 चौकोर मेज या श्यामपट पोंछने के िलए

मेज क चटाई 6 से 9 चौकोर भोजन के समय थाली के नीचे

छोट चटाई या आसन 16 चौकोर (4 पं क्तयाँ × 4) बैठने के िलए

मेजपोश 25 या अ धक चौकोर पदशनी के िदन क ा की मेज ढकने के िलए

थैला 2 बड़े आयत और ह के लए 2 प याँ पुस्तकें या स ब्जी ढोने के िलए

यह करने योग्य क्य है: ये टु कड़े फके ही जाने वाले थे। उन्ह जोड़कर आपने बना कुछ खरीदे एक नई और उपयोगी
वस्तु बना ली। यही वह पुरानी भारतीय परंपरा है जसका वणन पुस्तक पृष्ठ 142 पर करती है — छोटे -छोटे टु कड़
को जोड़कर सुंदर रजाई बनाना।

इसे अपना बनाइए: गहरे और हल्के रंग के टु कड़े एक के बाद एक र खए, प्र तरूप अपने आप बन जाएगा। या
कसी एक कोने म दूसरे रंग के धागे से कुछ टाँक म अपना नाम लख द जए।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 141
कपड़ को सलकर जोड़ना — टाँक पर वचार

प्र.1 अपने दै नक जीवन म हम क े टाँक का उपयोग और कहाँ कर सकते ह?

क े टाँके लगभग हर उस जगह काम आते ह जहाँ कपड़े को थामकर रखना हो — मरम्मत म, मोहरी म, टु कड़े जोड़ने म और
सजावट म।

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क े टाँके कहाँ काम आते ह वहाँ वे क्या करते ह

फट कमीज या फट जेब क मरम्मत फटे दोनों िकनारों को पास लाकर थाम ले ते है ं

पतलून या स्कट के नीचे क मोहरी बनाना मुड़े हुए िकनारे को दबाए रखते है ं तािक वह उधड़े नही ं

टु कड़े जोड़कर रजाई या गुदड़ी बनाना चौकोर टुक ड़ों को जोड़ते है ं और तहों को भी एक साथ थामते है ं

बंगाल, ओ डशा और त्रपुरा क कंथा कढ़ाई पूर ी िडजाइन क च्चे टाँक ों की पंिक्तयों से ही बनती है — वही टाँक ा जो आपने अभी
सीखा

मशीन क सलाई से पहले क ी सलाई दो टुक ड़ों को ढीले -ढाले जोड़े रखती है, तािक दज नाप जाँच सके

पायजामे या थैले म नाड़े क नली बनाना नाड़ा या डोरी िनकालने के िलए सुर ंग बना दे ते है ं

कपड़े म चुन्नट डालना एक रे खा में टाँके लगाकर धागा खी ंिचए — कपड़ा िसमटकर चन्न
ु टदार हो जाता
है

त कए का गलाफ, ग े का खोल या अनाज क बोरी बंद खल
ु ा मुँह बंद कर दे ते है ं
करना

पोशाक के अंदर नाम-प लगाना प ी को िटका दे ते है ं तािक वह खो न जाए

एक साधारण टाँका इतने काम कैसे कर लेता है: क ा टाँका तेज लगता है, उसम धागा बहुत कम लगता है, और
गलती हो जाए तो उसे आसानी से खोला जा सकता है। जहाँ बहुत अ धक मजबूती चा हए वहाँ दज मशीन का टाँका
लगाता है — पर रोज के जोड़ने और मरम्मत का अ धकतर काम यही एक टाँका कर दे ता है।

कंथा को फर दे खए: पृष्ठ 142 के चत्र म क्र म रंग के कपड़े पर लाल फूल और हरी प त्तयाँ ह। उनक हर रेखा
क े टाँक क पं क्त है। पूव भारत क म हलाओं ने उसी टाँके से एक पूरी कला खड़ी कर द जो ब ा सबसे पहले
सीखता है।

प्र.2 य द आपक सलाई म कह पर धागा या एक टाँका टू ट जाए तो आपको क्या लगता है क शेष टाँक का क्या
होगा?

धागा टू टते ही उसके आस-पास के टाँके एक-एक करके ढ ले होने लगगे और वहाँ से जोड़ खुल जाएगा। दूर वाले टाँके कुछ
समय तक टके रह सकते ह — पर तभी तक, जब तक ढ ला धागा और न खचे।
क्या होता है — क्रम से:

1. धागा कसी एक जगह टू ट जाता है।
2. टू टे हुए दोन सरे कपड़े के भीतर खसक जाते ह।
3. पास वाले टाँके को थामने के लए कुछ नह बचता, इस लए वह भी नकल जाता है।
4. फर अगला टाँका नकलता है, फर उसका अगला।

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5. उस भाग म कपड़े के दोन टु कड़े अलग हो जाते ह।
6. य द पूरी रेखा एक ही धागे से बना बीच म गाँठ लगाए सली गई हो तो पूरी रेखा उधड़ सकती है।

एक धागा इतना महत्वपूण क्य है: टाँके अलग-अलग छोट चीज नह ह। वे सब एक ही धागे से बने ह जो भीतर-
बाहर दौड़ता है। इस लए वे सब एक-दूसरे से जुड़े ह। एक नकला क अगला ढ ला। यही बात ग त व ध 1 क बुनी
चटाई म भी थी — एक प नका लए और आस-पास क प याँ ढ ली पड़ जाती ह, क्य क हर प दूसरी को थामे
हुए थी।

दज इसका क्या उपाय करता है: दज सलाई-रेखा के दोन सर पर धागे क मजबूत गाँठ लगाता है, और जहाँ
खचाव सबसे अ धक होता है वहाँ दो-तीन बार आगे-पीछे सलाई करता है। तब बीच म धागा टू ट भी जाए तो गाँठ
बाक सलाई को उधड़ने से रोक दे ती ह। य द आपक मोहरी खुलने लगे तो उसे तुरंत सल ली जए — आज क
छोट मरम्मत अगले सप्ताह क बड़ी मरम्मत से कह आसान है।

प्रदशनी — पृष्ठ 143
प्रदशनी

प्रदशनी

प्र.1 आपने बहुत-सी अ त साम याँ बनाई ह। आपके ारा बनाई गई चटाई, कपड़ के टु कड़ को जोड़कर बनाई गई
वस्तुओं और पत्त से बनी चम्मच, पत्तल, दौने आ द क एक प्रदशनी लगाइए। नाम प य और छोटे ववरण पत्र
लगाकर बताइए क आपने इन्ह कैसे बनाया। अपने अन्य सहपा ठय या माता- पता को भी इसे दे खने के लए
आमं त्रत क जए।

प्रदशनी केवल वस्तुए ँ सजाकर रख दे ना नह है। यह दूसर को यह बताने का तरीका है क वह वस्तु कैसे बनी। इस लए नाम-
प और छोटा ववरण-पत्र उतने ही महत्वपूण ह जतनी वस्तु स्वयं।
प्रदशनी कैसे लगाएँ:

1. एक दन और एक ान तय क जए — कक्षा का कोई कोना, दो मेज मलाकर, या बरामदा।
2. कक्षा ने जो कुछ बनाया है, सब इक ा क जए: ग त व ध 1 क कागज क चटाइयाँ, ग त व ध 3 म प सल पर लपटा सूत,
ग त व ध 5 क पत्तल और दोने, तथा ग त व ध 8 के जुड़े हुए कपड़े।
3. वस्तुओं को वषय के अनुसार समूह म र खए — बुनाई का कोना, धागा का कोना, सलाई का कोना और पत्ता- शल्प का
कोना।
4. हर वस्तु के लए नाम-प ल खए: वस्तु का नाम, कसने बनाई, और कस साम ी से बनी।
5. हर कोने के लए चार-पाँच पं क्तय का ववरण-पत्र ल खए क वहाँ क वस्तुएँ कैसे बन ।
6. नमंत्रण-पत्र बनाकर दूसरी कक्षाओं और अपने माता- पता को द जए।
7. तय क जए क कस कोने पर कौन खड़ा होकर समझाएगा। बारी-बारी से खड़े होइए, ता क सबको बाक प्रदशनी भी दे खने को
मले।
8. ार पर एक कॉपी र खए, जसम आने वाले एक पं क्त लख सक क उन्ह क्या अच्छा लगा।

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नमूना नाम-प और ववरण:
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प पर हमने क्या लखा

emकागज की बुनी हईु चटाई a
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वस्तु का

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कसने ु , क ा 5-ब

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मीना और अजन

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बनाई

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कससे
बनी
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नीले कागज की छह पि याँ और पीले कागज की छह पि याँ

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emवाला पितरूप बना। कही ं
कैसे बनाई हमने नीली पि यों को ऊपर से टेप से िचपका िदया तािक वे िहल न सकें । िफर हर पीली प ी को एक नीली प ी के ऊपर से और

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अगली के नीचे से आर -पार िनकाला। हर नई प ी ऊपर वाली से उ ल्टे म में शुरू की। इसी से खानों

coगोंद नही ं लगाया — पि याँ एक-दू सरे को ही थामे हुए है।ं gl
क्र

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a सीखा
हमने कपड़ा भी ठीक इसी तरह बनता है, बस कागज की पि यों के स्थान पर धागे होते है।
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. cतोomकोई भी दे ख सकता है। पर यह केवल बनाने वाला ही बता agl
emअपने काम को कसी आगंतुक को समझाते ह, तब पता चलता है
sआप
समझाना ही सबसे महत्वपूण भाग क्य है: चटाई
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सकता है क प याँ बखरती क्य नह । lजब
क आपने वास्तव म कतना समझा a
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है — और यही पूरे अध्याय क असली परीक्षा है।

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एक अ ा सुझाव: अपनी प्रदशनी म कसी ानीय बुनकर, दज या टोकरी बनाने वालेem
m a s को बुलाइए। उनसे क हए
o एक औजार साथ लाएँ और उसका उपयोग दखाएँ। उनका काम उसी
क वेcअपना
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s m कया है, और वे आपको ऐसी बात बताएँगे जो कसी पुस्तक म नह ह।
eसप्ताह
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आइए वचार कर — पृष्ठ 143 – 144 m. a
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समापन प्रश्न

आइए वचार कर

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1. क्या आपने कभी पुराने कपड़ का पुनरुपयोग या पुनचक्रण कया है? आपने या आपके प रवारजन ने उनसे
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प्र.1

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हाँ। अ धकतर भारतीय घर म पुराना कपड़ा य ही फका नह जाता — उससे कुछ और बना लया जाता है।

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नमूना उत्तर: “हाँ, हमने कया है। माँ क पुरानी सूती साड़ी से दो चीज बन । उसके अच्छे भाग को काटकर मेरी छोट बहन के लए

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जसे हम बाजार ले जाते ह। मेरी aवg ालय क कमीज छोट होने पर काटकर रसोई के सफाई-कपड़े बना द गईं। पताजी का फटा
गुदड़ी बनाई गई — पुराने कपड़ क तीन तह लंबे क े टाँक से जोड़कर। साड़ी का कनारा काटकर उससे एक झोला सला गया,

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कुता मोची को दया, जसने उसका एक टु कड़ा एक थैले क मरम्मत म अस्तर के रूप म लगाया।”

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पुराने कपड़ का सामान्यतः य उपयोग होता है —

कपड़ा पहले क्या था वह क्या बन जाता है

छोट हो चुक कमीज या ॉक छोटे भाई-बहन या पड़ोसी के बच्चे को दे दी जाती है

पुरानी साड़ी रजाई या ग दु ड़ी, पेटीकोट, कपड़े का थैल ा, परदा, फश की चटाई

घसा हुआ तौ लया या चादर रसोई के कपड़े, डस्टर , फश पोंछने का कपड़ा

दज क दुकान के छोटे टु कड़े रजाई के चौकोर टुक ड़े, कोस्टर , ग िु ड़या के कपड़े, पाउच, ग ी की भराई

पुराना ऊनी स्वेटर ऊन खोलकर िफर से मोजे, टोपी या द स्ताने बुन िलए जाते है ं

फट ज स या मोटा कपड़ा पेंिसल -पाउच, थैल ा, दू स री पतलूनों के घुटनों पर पैबंद

बहुत घसा हुआ कपड़ा सफाई के चीथड़े, पोंछा, श्यामपट का डस्टर

यह क्य महत्वपूण है: कपड़े के हर टु कड़े म बहुत सारा प रश्रम भरा है। कसी ने कपास उगाई, कसी ने सूत काता,
कसी ने बुना, कसी ने सला। कपड़े को फर से उपयोग म लाने का अथ है क वह सारा प रश्रम काम आता रहेगा।
साथ ही एक नई वस्तु कम बनानी पड़ेगी और एक वस्तु कम कचरे म जाएगी।

प्र.2 2. य द सले हुए कपड़े या बुनी हुई चटाई म से एक धागा टू ट जाए तो क्या होगा? प्रत्येक धागा क्य महत्वपूण है?

कपड़ा या चटाई उसी ान से खुलने लगेगी — और खुलाव आगे भी बढ़ सकता है। हर धागा इस लए महत्वपूण है क्य क हर
धागा अपने पास वाले धाग को अपनी जगह पर थामे हुए है।
बुनी हुई चटाई म:

1. एक धागा टू ट जाता है।
2. जो धागे उसे काटकर जा रहे थे, उनक पकड़ ढ ली पड़ जाती है।
3. वहाँ एक छे द बन जाता है और ढ ले धागे खसकने लगते ह।
4. य द कुछ न कया जाए तो छे द बड़ा होता जाता है और चटाई उधड़ जाती है।

सले हुए कपड़े म:

1. सलाई का धागा कसी एक जगह टू ट जाता है।
2. पास वाला टाँका ढ ला होता है, फर अगला, फर उसका अगला।
3. सलाई-रेखा के साथ-साथ कपड़े के दोन टु कड़े अलग हो जाते ह।
4. चूँ क पूरी सलाई एक ही धागे से हुई थी, पूरी सलाई खुल सकती है।

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प्रत्येक धागा क्य महत्वपूण है: कपड़ा कोई ठोस चादर नह है। वह बहुत-से धाग से बना है, जनम से हर धागा
दूसर के ऊपर और नीचे से नकलता है, इस लए हर धागा अपने पड़ो सय को थामता है और स्वयं भी उनसे थमा
रहता है। पूरा काम कोई एक धागा नह कर रहा — और कोई एक धागा बेकार भी नह है। एक नकाल द जए, तो
पास वाले धाग के पास पकड़ने को कुछ नह बचेगा। बुनाई का पूरा वचार यही है: श क्त साथ मलकर काम करने
से आती है।

इसका उपाय: छोट फटन तुरंत सल द जए। सलाई-रेखा के दोन सर पर ठ क से गाँठ लगाइए। और ध्यान
द जए क यही बात प रवार, कक्षा और गाँव म भी लागू होती है — कोई एक व्य क्त सारा काम नह करता, पर य द
एक व्य क्त का हस्सा छू ट जाए तो उसके आस-पास का काम भी बखरने लगता है।

प्र.3 3. कसी व्यस्क व्य क्त के साथ कसी दज या हथकरघे क दुकान पर जाइए। वहाँ आपने कौन-से मशीन या
उपकरण उपयोग म आते हुए दे खे?

कसी बड़े के साथ जाइए, वहाँ काम कर रहे व्य क्त का अ भवादन क जए, और कुछ भी छू ने से पहले पूछ ली जए। हर
औजार पर दो प्रश्न पू छए — “इसका नाम क्या है?” और “इसका उपयोग कस लए होता है?” उत्तर वह लख ली जए।
नमूना उत्तर — हमारी गली के दज क दुकान पर मेरी यात्रा

मशीन या औजार उसका उपयोग

सलाई मशीन सुई बहुत तेजी से ऊपर -नीचे चलती है और कपड़ा उसके नीचे सरकता जाता है। हाथ से जो िसलाई एक घंटे में
होगी, मशीन उसे एक िमनट में कर दे ती है।

बॉ बन और बॉ बन केस धागे की छोटी चरखी, जो मशीन के नीचे लगती है। मशीन के टाँके में दो धागे लगते है ं — एक ऊपर से , एक नीचे
बॉिबन से ।

बड़ी कची कपड़ा काटने के िलए। दज इससे कागज कभी नही ं काटता, क्योंिक कागज से धार भोथरी हो जाती है।

इंच-टे प (नापने का फ ता) ग ाहक का नाप ले ने के िलए — छाती, कमर , लंबाई, कं धा, बाँह।

दज क ख ड़या कपड़े पर काटने की रे खाएँ बनाने के िलए। यह िनशान बाद में झड़ जाता है।

पन और पन-कुशन िसलाई से पहले दो टुक ड़ों को अपनी जगह पर िटकाए रखने के िलए।

सुइयाँ और अँगुश्ताना हाथ की िसलाई के िलए ; अँग श्ु ताना उस उँ ग ली को बचाता है जो सुई को धके लती है।
( थबल)

अनेक रंग के धाग क रील तािक िसलाई का रंग कपड़े के रंग से िमल जाए।

इस्तरी और इस्तरी क मेज िसलाई-रे खाओं को दबाकर चपटा करने के िलए , िजससे तैयार वस्त्र ठीक बैठे।

कागज के नमूने (पैटन) नमूने से काटने का आकार िमलता है; पुतले पर नाप जाँची जाती है।
और पुतला

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नमूना उत्तर — हथकरघा बुनकर के यहाँ मेरी यात्रा

औजार या करघे उसका उपयोग
का भाग

करघा लकड़ी का बड़ा ढाँचा, िजस पर कपड़ा बुना जाता है। यह धागों के एक पूरे समूह को कसकर और सीधा पकड़े रखता
है।

ताना और उसका बेलन कपड़े की लंबाई में जाने वाले धागे। ये पीछे के बेल न पर िलपटे रहते है ं और िस्थर रहते है।
ं

ढरक (शटल) नाव जैस ी िचकनी लकड़ी, िजसमें धागे की नली रहती है। बुनकर इसे एक ओर से दू स री ओर फें कता है, िजससे
धागा ताने के आर -पार चला जाता है — यही बाना है।

राछ और पायदान पायदान दबाते ही ताने का हर दू स रा धागा ऊपर उठ जाता है और ढरकी के िनकलने के िलए रास्ता खल
ु जाता है।
िमनट में सै क ड़ों बार “ऊपर -नीचे” इसी तरह होता है।

कंघी (रीड) हर बार ढरकी फें कने के बाद इसे आगे धके लकर नए धागे को बुने हुए कपड़े से सटाकर कसा जाता है।

कपड़े का बेलन सामने का बेल न, िजस पर बुना हुआ कपड़ा िलपटता जाता है।

चरखी या नली भरने ढरकी में डालने वाली छोटी निलयों पर धागा लपेटने के िलए।
का चरखा

बुनकर के हाथ और पैर दोनों पैर पायदान चलाते है ं और दोनों हाथ ढरकी फें ककर कं घी खी ंचते है ं — वह भी एक ही समय पर , पूरे िदन।

सबसे अ धक ध्यान दे ने योग्य बात: इनम से कोई भी काम आसान नह है। बुनकर घंट तक हाथ और पैर क एक
लय बनाए रखता है। दज को कसी सचमुच के व्य क्त का नाप लेकर कपड़ा काटना पड़ता है, और गलत कट जाए
तो कपड़ा वापस नह जुड़ता। ये दोन कुशल काय ह, जन्ह सीखने म वष लगते ह। जाते समय धन्यवाद क हए, और
हो सके तो कोई छोट वस्तु खरीद ली जए।

क्या आप जानते ह? हथकरघा बुनाई म बजली बलकुल नह लगती। इसी लए इसे पयावरण-अनुकूल और
संधारणीय कहा जाता है — और यह भारत म 45 लाख से अ धक लोग को, जनम अ धकतर म हलाएँ और ामीण
कारीगर ह, आजी वका दे ती है।

प्र.4 4. पता लगाइए क आपके ेत्र या राज्य म कस प्रकार क बुनाई या सलाई का काम प्र सद्ध है। उसका नाम
बताइए।

भारत का लगभग हर राज्य कसी न कसी अपने कपड़े के लए जाना जाता है। कसी बड़े से पू छए, साड़ी बेचने वाले
दुकानदार से पू छए, या दे खए क त्योहार के दन आपके नगर म लोग क्या पहनते ह।
पता कैसे लगाएँ:

1. घर पर पू छए — “क्या हमारे क्षेत्र का कोई प्र सद्ध कपड़ा या कढ़ाई है?”

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2. कपड़े क दुकान पर पू छए क ववाह के समय लोग कौन-सा ानीय कपड़ा माँगते ह।
3. दे खए क दाद क सबसे अच्छ साड़ी या दादाजी के शॉल को क्या कहते ह।
4. नाम, बनने का ान और उसक एक वशेषता लख ली जए।

नमूना उत्तर: “हमारे राज्य पंजाब म प्र सद्ध काम है फुलकारी। फुल अथात् फूल और कारी अथात् काम — यानी नाम का अथ है
फूल का काम। म हलाएँ सादे कपड़े पर चमक ले रेशमी धागे से, प्रायः उल्ट ओर से, कढ़ाई करती ह, जससे सीधी ओर लाल, पीले,
गुलाबी और नारंगी फूल तथा ज्या मतीय आकार भर जाते ह। इसे दुप े या ओढ़नी के रूप म पहना जाता है और परंपरा से ववाह के
समय लड़क को फुलकारी द जाती है। मेरी दाद के पास एक फुलकारी है जो उनक माँ ने बनाई थी।”
भारत क कुछ प्र सद्ध बुनाई और कढ़ाई परंपराएँ — इनम से कई का उल्लेख इसी अध्याय म है:

राज्य या ेत्र प्र सद्ध बुनाई या सलाई का काम

त मलनाडु ं ीवरम रे शमी सािड़याँ (बुनाई); नीलिगिर की टोडा कढ़ ाई
काज

कश्मीर पश्मीना शॉल (बुनाई); क श्मीरी कढ़ ाई और उसका आम -कली (पेजली) पितरूप

ओ डशा और गुजरात इकत बुनाई; ग ज
ु रात के पाटन की पटोला सािड़याँ

उत्तर प्रदे श लखनऊ की िचकनकारी; वाराणसी की बनारसी रे शमी सािड़याँ

राज ान बंजारा कढ़ ाई, गोटा काम , बाध
ं नी

पंजाब फु लकारी कढ़ ाई

प म बंगाल, ओ डशा, त्रपुरा कं था कढ़ ाई, जो क च्चे टाँक ों की पंिक्तयों से बनती है

मेघालय खनेग
ं कढ़ ाई

गुजरात (कच्छ) काला कपास की बुनाई, शीशे की कढ़ ाई

असम और पूव त्तर मूग ा और एरी रे शम की बुनाई, जो घर के करघों पर होती है

मध्य प्रदे श चंदे र ी और महेश्वरी सािड़याँ

आंध्र प्रदे श और तेलंगाना पोचमपल्ली इकत, कलमकारी

बहार और झारखंड तसर रे शम की बुनाई, सुजनी कढ़ ाई

महाराष्ट्र पैठणी सािड़याँ; पुर ाने कपड़ों से बनी ग दु ड़ी

केरल कसावु — सुनहरे िकनारे वाला सफे द सूती वस्त्र

हर ान का अपना कपड़ा क्य है: बुनकर वही साम ी उपयोग करते थे जो पास म मलती थी — काली म
वाले क्षेत्र म कपास, जहाँ शहतूत उगता है वहाँ रेशम, ठं डे पहाड़ म ऊन। फर हर क्षेत्र ने अपने प्र तरूप और रंग
जोड़े और उन्ह पीढ़ -दर-पीढ़ आगे बढ़ाया। इस लए कपड़ा केवल कपड़ा नह होता। वह बताता है क वह कहाँ से
आया है।

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कक्षा 5 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे न मत होती ह?
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5. हम पुराने कपड़े नह फकने चा हए। क्य ?
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प्र.5

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a l पुराना कपड़ा अब भी काम का है, उसे बनाने म बहुत प रश्रम लगा है, और उसे फकने से केवल कचरा बढ़ता है।
क्य gक

कोई और उसे अब भी पहन सकता है। जो कमीज आपके लए छोट हो गई, वह कसी छोटे ब े को ठ क आती है। कपड़े

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आगे दे ना हमारे घर क पुरानी आदत है और इसम कुछ खच नह होता।
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a s emसे रजाइयाँ बनती ह। पुरानी कमीज से सफाई के कपड़े और थैले।
glबनाने क पुरानी भारतीय परंपरा बताती है।
उससे कुछ नया बनाया जा सकता है। पुरानी सा ड़य

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पुस्तक हम छोटे -छोटे टु कड़े जोड़कर सुंदर रजाई
कपड़ा बनाने म बहुत प रश्रम लगता है। कसी ने कपास उगाई और चुनी, कसी ने सूत काता, कसी ने करघे पर बुना, कसी
ने सला। कपड़ा फकने का अथ है यह सारा प रश्रम फक दे ना।
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कपड़ा बनाने म बहुत जल और भू म लगती है। कपास क फसल के लए भू म, जल और महीन क दे खभाल चा हए। कपड़े
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को अ धक समय तक चलाने का अथ है कम नया कपड़ा बनाना पड़ेगा।

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कपड़े का कचरा गायब नह होता। सूती कपड़ा धीरे-धीरे गल जाता है, पर नायलॉन और पॉ लस्टर जैसे कृ त्रम कपड़े वष तक

a gl म पड़े रहते ह। फके हुए कपड़ का ढे र वह का वह रहता है।
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कसी को उसक आवश्यकता है। पुराने पर साफ कपड़े कसी जरूरतमंद को दे ने पर उनका मोल कूड़ेदान से कह अ धक

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होता है।

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िकसी को दे दीिजए → कोई उसे पहने ग ा

काटकर िसल लीिजए → रजाई, थै ला, सफाई का कपड़ ा

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फेंक दीिजए → कु छ भी हाथ नहीं आता
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s m े पीछे का वचार: हर कपड़े म कसान, कातने वाले, बुनकर और दज का प रश्रम भरा है। उस प रश्रम का
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a आदर करने का अथ है कपड़े को तब तक चलाना जब तक चल सके, और फर उससे कुछ और बना लेना। हमारी

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दाद -नानी यही करती थ , बना कसी से यह शब्द सीखे — पुनचक्रण।

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6. नीचे रेशमक ट के जीवन-चक्र के चरण को आगे-पीछे दया गया है। इन्ह प ढ़ए और सही क्रम म 1 से 6 तक

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संख्याएँ ल खए। • व्यस्क रेशमक ट कोकून से बाहर आता है। • अंड से छोटे -छोटे रेशमक ट (लावा) नकलते ह।

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• रेशमक ट अंडे दे ता है। • चक्र पुनः आरंभ होता है। • रेशमक ट (लावा) शहतूत के पत्ते खाते ह और बड़े हो जाते

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ह। • रेशमक ट (लावा) अपने चार ओर कृ मकोष (कोकून) बुनते ह।
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a s emउत्तर
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सही क्रम यह है। ये संख्याएँ पुस्तक म दए गए गोल म ल खए।

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पुस्तक म दया गया चरण इसका अथ कौन-सी संख्या
लख

व्यस्क रेशमक ट कोकून से बाहर आता है। क ट अपने रेशमी खोल को तोड़कर बाहर आता 5
है

अंड से छोटे -छोटे रेशमक ट (लावा) नकलते ह। अंड से नन्हे लावा नकलते ह 2

रेशमक ट अंडे दे ता है। सबसे पहली अव ा 1

चक्र पुनः आरंभ होता है। नया क ट अंडे दे ता है और सब फर से शुरू 6

रेशमक ट (लावा) शहतूत के पत्ते खाते ह और बड़े हो जाते वे खाते जाते ह और तेजी से बढ़ते ह 3
ह।

रेशमक ट (लावा) अपने चार ओर कृ मकोष (कोकून) बुनते हर लावा स्वयं को रेशम म लपेट लेता है 4
ह।

अब सही क्रम म प ढ़ए:

1. रेशमक ट अंडे दे ता है।
2. अंड से छोटे -छोटे रेशमक ट (लावा) नकलते ह।
3. रेशमक ट (लावा) शहतूत के पत्ते खाते ह और बड़े हो जाते ह।
4. रेशमक ट (लावा) अपने चार ओर कृ मकोष (कोकून) बुनते ह।
5. व्यस्क रेशमक ट कोकून से बाहर आता है।
6. चक्र पुनः आरंभ होता है।

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2 और 3. लाव
शहतूत के प े खाकर बड़ ा होता है

1. अंडे रेशमकीट का 4. कृिमकोष
प े पर िदए हुए जीवन-चक्र चारों ओर िलपटा रेशम

6. कीट अंडे दे त ा है और चक्र पुनः आरंभ हो जाता है।

5. वयस्क रेशमकीट
कोकून से बाहर आता है

चार अव ाएँ घूम-घूमकर दोहराई जाती ह। इसी लए इसे चक्र कहते ह — इसका कोई अंत नह ।

क्रम स्वयं कैसे नकाल: यह पू छए क कौन-सा चरण कसके पहले आना ही चा हए। अंडे दए बना लावा नह
नकल सकते, इस लए “अंडे दे ता है” पहले आएगा। कोकून बुनने से पहले लावा को बड़ा होना पड़ेगा। और वयस्क
क ट कोकून बनने के बाद ही बाहर आ सकता है। जो क ट बाहर आता है, वही अगले अंडे दे ता है — इस लए अं तम
चरण फर पहले चरण से जुड़ जाता है। जीवन-चक्र का यही अथ है: वृ द्ध और प रवतन का ऐसा क्रम जो दोहराया
जाता है।

रेशम कहाँ से आता है: जो रेशम हम पहनते ह, वह चरण 4 का धागा है — कृ मकोष का। कोकून को गम पानी म
डालकर धागा धीरे से बाहर नकाला जाता है और उससे रेशमी सूत बनता है। एक कोकून म बहुत लंबा, बहुत महीन
और बना टू टा हुआ एक ही धागा होता है।

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प्र.7 7. अपने घर से या आस-पास के दज से व भन्न प्रकार के वस्त्र के 5–6 टु कड़े (बचे हुए कपड़े) ली जए। इन वस्त्र
का ध्यानपूवक अवलोकन करके ता लका पूरी क जए। कसी बड़े से पूछ या अपनी पुस्तक म ढूँ ढ़कर पता कर क
ये वस्त्र कस पदाथ (रेशे) से बने ह — सूती, ऊनी, रेशमी, जूट, पॉ लएस्टर या नायलॉन।

वस्त्र क कैसा अनुभव मोटा/ चमकदार खचाव आपके अनुमान के
क्रम हुआ? ( चकना, पतला (हाँ/नह ) (हाँ/नह ) अनुसार यह कस पदाथ
संख्या खुरदुरा) (रेशे) से बना है?

1.

2.

3.

4.

5.

हर टु कड़े क जाँच कैसे कर:

1. छू कर दे खए। आँख बंद करके उसे उँ ग लय म म लए। वह चकना है, खुरदुरा है, नरम है या चुभने वाला?
2. प्रकाश के सामने र खए। य द प्रकाश आसानी से आर-पार जाए तो कपड़ा पतला है, नह जाए तो मोटा।
3. प्रकाश म घुमाइए। क्या वह चमकता है, या प्रकाश उसम डू ब जाता है?
4. धीरे से ख चए दो दशाओं म। क्या वह खचकर वापस आ जाता है, या वैसा ही रहता है?
5. कसी बड़े से पू छए क यह कौन-सा कपड़ा है, और लेबल हो तो दे खए। फर पृष्ठ 136 और 137 के रेश से मलाइए।

नमूना उत्तर — मेरी भरी हुई ता लका

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वस्त्र क कैसा अनुभव हुआ? मोटा/ चमकदार खचाव आपके अनुमान के
क्रम संख्या ( चकना, खुरदुरा) पतला (हाँ/नह ) (हाँ/नह ) अनुसार यह कस पदाथ
(रेशे) से बना है?

1 नरम और चकना, पर पतला नह नह सूती — पुर ानी कमीज का
फसलने वाला नह टुक ड़ा

2 बहुत चकना और फसलने पतला हाँ नह रे शमी — साड़ी के िकनारे का
वाला, छू ने म ठं डा टुक ड़ा

3 नरम पर थोड़ा चुभने वाला, मोटा नह हाँ ऊनी — पुर ाने स्वेटर का टुक ड़ा
तुरंत गम लगता है

4 खुरदुरा और रोएँदार, हाथ म मोटा नह नह जूट — बोरी का टुक ड़ा
चुभता है

5 चकना और थोड़ा फसलने पतला हाँ थोड़ा पॉिलए स्टर — बस्ते के अस्तर
वाला, पानी नह सोखता का टुक ड़ा

6 बहुत चकना, लगभग पतला हाँ हाँ नायलॉन — पुर ाने छाते के कपड़े
प्ला स्टक जैसा, सरसराहट क का टुक ड़ा
आवाज करता है

आपक ता लका म आपके अपने टु कड़े ह गे, इस लए आपके उत्तर अलग हो सकते ह। महत्वपूण यह है क हर खाना सचमुच छू कर
और दे खकर भरा जाए, अनुमान से नह ।
पहचानने म सहायता के लए एक छोट ता लका:

य द कपड़ा ऐसा है… तो प्रायः वह है

नरम, बना चमक का, पतला, पानी जल्द सोखने वाला, जल्द सलवट पड़ने वाला सूती

चकना, चमकदार, ठं डा और बहुत हल्का रे शमी

मोटा, रोएँदार, गम, थोड़ा खचने वाला ऊनी

खुरदुरा, रोएँदार, कड़ा, भूरा-सा जूट

चकना और थोड़ा चमकदार, सलवट न पड़ने वाला, बहुत जल्द सूखने वाला पॉिलए स्टर

बहुत चकना और फसलने वाला, मजबूत, सरसराता हुआ, पानी फसल जाने वाला नायलॉन

ये जाँच काम क्य करती ह: कपड़ा कैसा लगता है, यह सीधे उसके रेशे पर नभर करता है। ऊन गम इस लए लगती
है क्य क उसके रेशे हवा को अपने बीच रोक लेते ह। सूती कपड़ा पसीना सोखता है क्य क उसके रेशे पानी को
भीतर ले लेते ह। नायलॉन और पॉ लएस्टर कारखाने म बनते ह और पानी बलकुल नह सोखते, इस लए वे जल्द
सूखते ह पर गम म पहनने पर गम लगते ह। अथात् कपड़े का व्यवहार बता दे ता है क वह कस रेशे का है — और
यह भी क उसे कब पहनना चा हए।

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सावधानी: आजकल बहुत-से कपड़े दो रेश के मश्रण से बनते ह — जैसे कपास म थोड़ा पॉ लएस्टर। य द कोई

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टु कड़ा सूती जैसा लगे पर उसम सलवट बलकुल न पड़े तो वह प्रायः मश्रण होगा। न त न हो पाने
co लगता है वह ल खए और फर कसी बड़े से पूछ ली जए।
क जए; जो .आपको
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अध्याय — एक नज़र म
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बुनाई का अथ है धाग के दो समूह को एक-दूसरे के ऊपर और नीचे से पार करना। एक समूह एक दशा म बछाया

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जाता है। दूसरा समूह उसके आर-पार जाता है। हर प पहले ऊपर, फर नीचे, फर ऊपर, फर नीचे जाती है। ऐसा बार-बार

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करने से प याँ आपस म फँस जाती ह और एक ही चादर बन जाती है। यह चादर चटाई भी हो सकती है, टोकरी भी और

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gहै। वह तंतुओं को ऊपर-नीचे से
कपड़ा भी। पृष्ठ 133 का चत्र दे खए — नीली और पीली कागज क प य से इसी तरह चटाई बनती है।

m .cपहले एक प ी बुनाई करता था। नर बया घास से लटकने वाला घ सला बनाता a
aबुsनeता है ता क घ सला मजबूत बने। घ सला थैली जैसा होता है और टहनी से लटका रहता है। कुशल बया बहुत सुंदर और
मनुष्य से

agl महीन घ सला बुनता है, जब क सीखने वाले ब े ऊबड़-खाबड़ घ सला बनाते ह। अथात् पक्षी के लए भी बुनाई एक कौशल
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है, जो अभ्यास से आता है।

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लोग बहुत लंबे समय से प्राकृ तक साम याँ बुनते आए ह। ना रयल के रेशे, ताड़ के सरकंडे, बाँस, घास, जूट, कपास और
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agl काँच से दे खए — आपको छोटा-सा ताना-बाना दखाई देगा।
रेशम — इन सबसे चटाइयाँ, टोक रयाँ और चादर बुनी जाती ह। य द कागज क प य के
ान पर धाग से बुनाई कर तो
कपड़ा बन जाता है। अपनी कमीज को आवधक
कपड़ा करघे पर बुना जाता है। करघा वह ढाँचा है जो धाग के एक समूह को कसकर पकड़े रखता है, जब क बुनकर दूसरे

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समूह को आर-पार ले जाता है। भारत म लोग 4000 साल पहले भी बुनाई करना जानते थे। करघे पर हाथ से बुने कपड़े को

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हथकरघा कपड़ा कहते ह। भारत म वश्व के कुछ सव त्कृष्ट हथकरघा बुनकर ह। हर क्षेत्र क अपनी परंपरा है — त मलनाडु

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का कांजीवरम, कश्मीर का पश्मीना, ओ डशा और गुजरात का इकत। कपड़ा मल भी यही दो काम — कताई और बुनाई —

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करती ह, पर बड़ी मशीन से और बहुत बड़ी मात्रा म।
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बुनाई केवल कला नह , आजी वका भी है। भारतीय हस्तकरघा क्षेत्र म 45 लाख से अ धक लोग को काम मलता है, जनम

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अ धकतर म हलाएँ और ामीण कारीगर ह। यह वश्व के सबसे बड़े कुट र उ ोग म से एक है। हथकरघा बुनाई म बजली नह

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लगती, इस लए यह पयावरण के अनुकूल है। यह पुराने डजाइन और कौशल को भी जी वत रखती है। भारतीय मलमल
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.cजाता था — पूरी साड़ी एक अँगूठ म से नकल जाती थी। a g
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इतनी बारीक होती थी क उसे ‘बुनी हुई हवा’ कहा

l a se जाता है। इसे कताई कहते ह। रेशा या तंतु वह पतला, बाल जैसा धागा है जो
है।gअकेला रेशा छोटा और कमजोर होता है। बहुत सारे रेश को एक साथ बाँटने (बल दे ने) पर
रेश को आपस म बल दे कर धागा बनाया
सूती धागे को खोलने पर मलता a
लंबा और सुदृढ़ धागा या सूत बनता है। यही काम चरखा करता है — और ग त व ध 3 म यही काम आपक प सल करती है।

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गांधी जी स्वयं सूत कातते थे। इस प्रकार बने कपड़े को खाद कहते ह, जो स्वतंत्रता सं ाम और आत्म नभर बनने का प्रतीक

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बन गया।

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रेशे दो प्रकार के होते ह — प्राकृ तक और कृ त्रम। प्राकृ तक रेशे पेड़-पौध और जंतुओं से मलते ह — बाँस, कपास,

se m लनन, ऊन और रेशम। कृ त्रम रेशे मनुष्य कृ त्रम साम य से बनाते ह — रेयॉन, नायलॉन, पॉ लस्टर और टे रलीन। हम
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a प्र त दन दोन प्रकार क वस्तुओं का उपयोग करते ह। भारत वश्व का पहला दे श था जसने कपास उगाकर उससे वस्त्र बनाए,
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और भारत जूट (पटसन) का वश्व म सबसे बड़ा उत्पादक है।

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रेशम एक क ट से मलता है। रेशमक ट अंडे दे ता है। अंड से लावा नकलते ह, जो शहतूत के पत्ते खाकर बड़े होते ह। फर

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प्रत्येक लावा अपने चार ओर रेशम का कृ मकोष (कोकून) बुन लेता है। कृ मकोष को गम पानी म डालकर रेशम का धागा धीरे

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agदोहराए जाने वाले क्रम को जीवन-चक्र कहते ह।
से बाहर नकाला जाता है और उससे रेशमी कपड़ा बनता है। कोकून से वयस्क रेशमक ट बाहर आता है, अंडे दे ता है, और चक्र
फर से आरंभ हो जाता है। इस

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सुई और धागा कपड़े को जोड़ते भी ह और सजाते भी ह। सबसे सरल टाँका है क ा टाँका — सीधी रेखा म ऊपर, नीचे,
ऊपर, नीचे। प्रकृ त म भी एक छपा हुआ कलाकार यही करता है — फुदक (टे लरबड) बड़े पत्ते के कनार पर छे द करके पौधे
के रेशे या मकड़ी के रेशम से उसे सल दे ती है और उसम ग दार घ सला बनाती है। भारत म टाँके कपड़े को सजाते भी ह —
लखनऊ क चकनकारी, राज ान क बंजारा और गोटा, प म बंगाल-ओ डशा- त्रपुरा क कंथा, पंजाब क फुलकारी,
त मलनाडु क टोडा, कश्मीर क कश्मीरी और मेघालय क खनग कढ़ाई।
पुराने कपड़े फके नह जाते। जो कपड़े अब नह आते, वे छोटे भाई-बहन को या कसी ऐसे व्य क्त को दे दए जाते ह जो उन्ह
पहन सके। बड़े लोग पुराने कपड़ से कुछ नया बना लेते ह। हमारे दे श म छोटे -छोटे टु कड़ को जोड़कर सुंदर रजाई बनाने क
पुरानी परंपरा है। कपड़ा बनाने म बहुत प रश्रम लगता है — कसी ने कपास उगाई, कसी ने सूत काता, कसी ने बुना, कसी ने
सला। गुजरात के पाटन क एक पटोला साड़ी बुनने म छह महीने से एक वष तक लग जाता है — केवल एक साड़ी म।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द इसका अथ पाठ म कहाँ रोज़मरा का उदाहरण

बुनाई पि यों या धागों के दो समूहों को ऊपर-नीचे से पार धाग से बने प्र तरूप, पृष्ठ चटाई, बत क टोकरी, आपक कमीज
करके एक चादर बनाना 132

कपड़ा / वस्त्र धागों को बुनने पर बनने वाली चादर धाग से बने प्र तरूप, पृष्ठ साड़ी, चादर, व ालय क पोशाक
132

करघा वह ढाँचा िजस पर धागों को पकड़कर बुनाई की जाती बुनाई क परंपराएँ, पृष्ठ गाँव के बुनकर का करघा
है 134

हथकरघा करघे पर हाथ से बुना गया कपड़ा, मशीन से नही ं बुनाई क परंपराएँ, पृष्ठ खाद का कुता, कांजीवरम साड़ी
134

कपड़ा मल वह कारखाना जो बड़ी मशीनों से सूत कातता और पृष्ठ 135 दुकान म मीटर से बकने वाला मल
कपड़ा बुनता है का कपड़ा

धागा या सूत रे शों को बल दे क र बनाया गया लंबा और मजबूत तंत ु धागा, पृष्ठ 135 दज क दुकान म धागे क रील

रेशा / तंतु धागे को खोलने पर िमलने वाला पतला, बाल जैस ा पृष्ठ 136 रूई से ख चा हुआ एक महीन बाल
धागा

कताई रे शों को आपस में बल दे क र धागा बनाने की पिक्रया पृष्ठ 136 चरखे पर सूत कातती दाद

चरखा वह पिहया जो कपास से सूत कातने में सहायता करता पृष्ठ 136 पृष्ठ 131 के चत्र म दख रहा चरखा
है

खाद हाथ से काते और हाथ से बुने कपड़े; स्वतंत्र ता संग ाम क्या आप जानते ह?, पृष्ठ खाद का झोला या कुता
का पतीक 136

प्राकृ तक रेशा पेड़-पौधे या जंत ु से िमलने वाला रे शा प्राकृ तक रेशे, पृष्ठ 136 कपास, ऊन, रेशम, लनन, बाँस, जूट

कृ त्रम रेशा मनुष्य ारा कृ ित्रम सामिग यों से बनाया गया रे शा कृ त्रम रेशे, पृष्ठ 137 नायलॉन क रस्सी, पॉ लस्टर क
कमीज

कृ मकोष रे शम का वह खोल जो लाव अपने चारों ओर बुन ले ता पृष्ठ 136 गम पानी म डालकर धागा नकाले
(कोकून) है जाने वाले कोकून

जीवन-चक्र जन्म से ले क र वृि और पिरवतन का वह क्रम िजससे रेशमक ट का जीवन-चक्र, अंडा → लावा → कोकून → वयस्क
हर जीव ग ज
ु रता है पृष्ठ 137 कट

क ा टाँका सीधी रे खा में ऊपर-नीचे चलने वाला सरल टाँक ा ग त व ध 7, पृष्ठ 140 दो टु कड़ को जोड़ने के लए लगाया
गया टाँका

कढ़ाई कपड़े को सजाने के िलए लगाए जाने वाले टाँके सलाई कर और सजाएँ, दुप े पर फुलकारी, कुत पर
पृष्ठ 141 चकनकारी

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शब्द इसका अथ पाठ म कहाँ रोज़मरा का उदाहरण

बांधनी रँग ाई की वह िविध िजसमें कपड़े के छोटे भाग बाँध कर पृष्ठ 141 का हा शया गुजरात क लाल-सफेद बांधनी ओढ़नी
रँग े जाते है ं

पुनचक्रण पुर ानी वस्तु से कु छ नया बनाकर उसे िफर से उपयोग पुनचक्रण, पृष्ठ 142 पुराने कपड़ के टु कड़ से बनी रजाई
में लाना

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 5
TypeSolution
Pages42
Languagehindi
Updated13 Oct 2026