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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 8TH
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Book : Bharat Ki Khoj Ncert Solutions | Chapter - Bharat Ki Khoj Hindi
Class : 8th
Subject : Hindi
Chapter Name : भारत की खोज
Q1 ‘आखखर यह भारत है क्या? अतीत में यह ककस किशेषता का प्रकतकिकित्व करता था? उसिे अपिी प्राचीि शखि
को कैसे खो किया? क्या उसिे इस शखि को पूरी तरह खो किया है ? किशाल जिसंख्या का बसेरा होिे के अलािा
क्या आज उसके पास ऐसा कुछ बचा है कजसे जाििार कहा जा सके?’
ये प्रश्न अध्याय िो के शुरूआती कहस्से से कलए गए है । अब तक अब पूरी पुस्तक पढ़ चुके होंगे। आपके किचार से इि
प्रश्नों के क्या उत्तर हो सकते हैं? जो कुछ आपिे पढ़ा है उसके आिार पर और अपिे अिुभिों के आिार पर
बताइए।
Answer. भारत की संस्कृकत और सभ्यता एक ऐसी चीज़ रही है कजसिे भारत को पूरे किश्व में प्रकसद्धी किलायी।
अपिी किकशष्ट और शालीि संस्कृकत के कारण भारत को िा कसर्फ़ एक पहचाि कमली बखि लोगों तक यह भी संिेश
पहुँ चा कक माििता िास्ति में होती क्या है । भारत की असली शखि भारत की संस्कृकत ही रही है । हालाुँ कक समय
समय पर कई बाहरी लोगों िे आकर भारत पर राज्य ककया और उन्ोंिे अपिी पूरी कोकशश की कक िे भारत की
संस्कृकत को जड़ से ख़त्म कर िे । उिकी इतिी कोकशशों के बािजूि िे ऐसा िहीं कर पाए और भारतीय संस्कृकत
अपिे शालीि रुप में सिा किद्यमाि रही। आज किर से पाश्चात्य संस्कृकत की कोकशशें हैं कक िह भारतीय संस्कृकत पर
अपिा िच़स्व कायम कर ले। िास्ति में पाश्चात्य संस्कृकत अपिा असर लोगों पर डाल रही है ककन्तु किर भी यह
भारतीय संस्कृकत को कमटा पािे में असक्षम है। भारतीय संस्कृकत भारत का एक ऐसा तत्व है कजसे जाििार कहा जा
सकता है ।
Page : 126 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q2 आपके अिुसार भारत यूरोप की तुलिा में तकिीकी-किकास की िौड़ में क्यों कपछड़ गया था?
Answer.भारत तकिीकी किकास में यूरोप से इसकलए पीछे छूट गया क्योंकक यहाुँ पर पुिजा़ गरण कार्फी िे र में लागू
हआ था। कजस समय पूरा किश्व किकास की ओर अग्रसर था और तकिीक की खोज कर रहा था उस समय भारत
अपिे अखस्तत्व को बचािे की कोकशश में लगा हआ था।जब भारत को तकिीकी किकास करिा चाकहए था उस समय
भारत हमलों की चपेट में था। उत्तर भारत में लगातार बाहरी हमले हो रहे थे।इसके अलािा भारत आज़ाि भी िहीं
था और िह अंग्रेजों का गुलाम था।स्वराज ि होिे के कारण भारतीय िैज्ञाकिकों को आज़ािी से काय़ करिे की
अिुमकत िहीं कमल पाती थी।बाहरी हमलों के िुकसाि से बचिे के कलए भारत उिके बारे में उपाय खोजता रहता था
जबकक और िे श इस तरह की चीज़ों से कबलकुल परे थे।यूरोप के िे शों को अपिे अखस्तत्व को बचािे के कलए कोई
जद्दोजहि िहीं करिी पड़ रही थी क्योंकक िे आज़ाि थे और इस प्रकार िे तकिीकी किकास कर रहे थे।
Page : 126 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q3 िेहरू जी िे कहा कक – “मेरे ख्याल से हम सब के मि में अपिी मातृभूकम की अलग-अलग तसिीरें हैं और कोई
िो आिमी कबलकुल एक जैसा िहीं सोच सकते” अब आप बताइए कक-
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(क) आपके मि में अपिी मातृभूकम की कैसी तसिीर है ?
(ख) अपिे साकथयों से चचा़ करके पता करो कक उिकी मातृभूकम की तसिीर कैसी है और आपकी और उिकी
तसिीर (मातृभूकम की छकि) में क्या समािताएुँ और कभन्नताएुँ हैं ?
Answer.(क) हमारे मि में अपिी मातृभूकम को लेकर एक शां कत से भरपूर राज्य की तस्वीर है । हमारा िे श अपिी
संस्कृकत को लेकर पूरे किश्व में अग्रणी रहा है । मातृभूकम की संस्कृकत ही हमारी पहचाि है ।बात यकि यहाुँ के
भौगोकलक क्षेत्र की करें तो यहाुँ के हरे भरे मैिाि, िकियाुँ, बड़े बड़े पि़त और यहाुँ बसिे िाले तरह तरह के लोग
हमारे िे श को सुंिर बिाते हैं । अिेकता में एकता िाली कमसाल हमारी मातृभूकम के अलािा और कहीं िहीं कमल
सकती है ।
(ख) हमारे िोस्तों के मि में मातृभूकम को लेकर एक जैसी तस्वीर तो िहीं है लेककि यह थोड़ी बहत कमलती जुलती है।
उिसे बात करिे पर पता चलता है कक िे मातृभूकम से अटू ट लगाि और प्रेम रखते हैं । यहाुँ तक कक िे संकट के
समय मातृभूकम पर अपिे प्राण न्योछािर करिे के कलए भी तैयार हैं । मातृभूकम से ऐसा लगाि िे खकर िास्ति में हमें
अपिे िे श पर गि़ होता है ।
Page : 126 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q4जिाहरलाल िेहरू िे कहा, “यह बात किलचस्प है कक भारत अपिी कहािी की इस भोर-बेला में ही हमें एक िन्ें
बच्चे की तरह िहीं, बखि अिेक रूपों में किककसत सयािे रूप में किखाई पड़ता है ।” उन्ोंिे भारत के किषय में ऐसा
क्यों और ककस संिभ़ में कहा है ?
Answer.कसंिु घाटी सभ्यता भारतीय सभ्यता की प्रारं कभक अिस्था थी। उस प्रारखिक अिस्था में होते हए भी भारत
िे अपिी एक अलग पहचाि बिायी और लोगों पर छाप छोड़ी। िेहरु जी िे इस कबंिु को सराहा और कहा कक
भारतीय संस्कृकत िास्ति में सबसे अलग संस्कृकत है। भारत िैसे भी कशक्षा का केंद्र रहा है ! अपिी संस्कृकत के कारण
भारत को किश्वगुरु की पहचाि कमली थी। ऐसा इसकलए था क्योंकक भारत िे माग़िश़क बिकर पूरे किश्व को एक िई
किशा किखाई थी।
Page : 126 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q5 कसंिु घाटी सभ्यता के अंत के बारे में अिेक किद्वािों के कई मत हैं । आपके अिुसार इस सभ्यता का अंत कैसे
हआ होगा, तक़ सकहत कलखखए।
Answer.कसंिु घाटी सभ्यता के अंत के किषय में किद्वािों के कभन्न-कभन्न मत रहे हैं-
(1) कुछ किद्वाि मािते हैं कक अकस्मात ककसी िु घ़टिा के कारण इस सभ्यता का अंत हो गया, पर इसका प्रमाण
ककसी के पास िहीं है।
(2) कुछ मत के अिुसार, कसंिु सभ्यता कसंिु ििी के ककिारे बसी थी। यह ििी भंयकर बाढ़ों के कलए प्रकसद्ध है । इन्ीं
बाढ़ों के कारण इस घाटी का अंत हो गया होगा।
(3) कुछ मत के अिुसार तो मौसम पररित़ि से ज़मीि सूख गई हो और उपजाऊ भूकम रे कगस्ताि में बिल गई हो।
इस मत के तो कुछ सबूत भी कमलते हैं । जैसे- खुिाई के िौराि मोहिजोिड़ो सभ्यता के खंडहर बालू की सतह के
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िीचे कमले हैं । किद्वािों के अिुसार बालू के कारण ज़मीि की सतह ऊुँची उठती गई और िगरिाकसयों को मजबूर
होकर पुरािी िींिों पर ऊुँचाई पर मकाि बिािे पड़े ।
मेरे अिुसार बिलते मौसम के कारण उपजाऊ भूकम का रे कगस्ताि में बिल जािा इस सभ्यता के अंत की शुरूआत
रहा होगा क्योंकक एक सभ्यता एक ही स्थाि पर इतिे लंबे समय तक प्रगकत की ओर अग्रसर होती रही हो, िो यूंही
तो िहीं उजड़ सकती। यकि कोई बड़ी िु घ़टिा घटी होती तो प्रमाण हमें अिश्य कमलते। िू सरा ििी में बाढ़ के कारण
तो ये भी थोड़ा भ्रम सा उत्पन्न करता है परन्तु यकि यह सत्य है तो इसका कोई कारण िहीं किखता आज भी भारत के
कई कहस्सों में बाढ़ आती है और हर िू सरे िष़ आती है । इससे बबा़ िी अिश्य होती है पर एक सभ्यता का िाश हो
जाए इस मत का समथ़ि करिे का मि िहीं करता। इसकलए किद्वािों द्वारा तीसरे मत से ही सहमकत लगती है कक इस
सभ्यता का अंत मौसम के पररित़ि के कारण रहा होगा क्योंकक मौसम िे उिकी कृकष सम्बन्धी ि भरण-पोषण
सम्बन्धी समस्याओं को उत्पन्न कर िहाुँ की भूकम को रे कगस्ताि में तबिील कर उस सभ्यता को िम तोड़िे पर मजबूर
कर किया।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q6 उपकिषिों में बार-बार कहा गया है कक-”शरीर स्वस्थ हो मि स्वच्छ हो और ति-मि िोिों अिुशासि में रहें ।”
आप अपिे िै किक किया-कलापों में इसे ककतिा लागू कर पाते हैं ? कलखखए।
Answer. मैंिे अपिे िै किक जीिि में कुछ अच्छी चीज़ें सखिकलत की है कजससे मेरा ति-मि िोिों ही अिुशासि में
रहते हैं । मैं प्रातः जल्दी उठता हुँ और राकत्र में जल्दी सोता हुँ । मैं कोकशश करता हुँ कक मेरा हर काय़ समय पर
होजाए।मैं कियकमत रूप से कसरत करता हुँ और संतुकलत आहार लेता हुँ ताकक मेरा शरीर स्वस्थ रहे। मि की
स्वच्छता के कलए मैं अपिे मखस्तष्क में सकारात्मक किचारों को ही जगह िे ता हुँ ।मेरी पूरी कोकशश रहती है कक मैं
िकारात्मकता से िू र रहुँ।
उपकिषिों में कहीं गई बात कक “शरीर स्वस्थ हो मि स्वच्छ हो और ति-मि िोिों अिुशासि में रहें ” पूण़ता सत्य है
क्योंकक यह िास्ति में ही जीिि जीिे का तरीका है ।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q7 िेहरू जी िे कहा कक-“इकतहास की उपेक्षा के पररणाम अच्छे िहीं हए।” आपके अिुसार इकतहास लेखि में के
या-क्या शाकमल ककया जािा चाकहए? एक सूची बिाइए और उस पर कक्षा में अपिे साकथयों और अध्यापकों से चचा़
कीकजए।
Answer.िेहरू जी का कहिा कक “इकतहास की उपेक्षा के पररणाम अच्छे िहीं हए” कबलकुल सटीक बात है ।हमारा
इकतहास हमारे बीते कल की गाथा गुिगुिाता है। अपिे कपछले कल में हमिे क्या ककया, क्या खोया, क्या पाया यह
सब हमारा इकतहास अपिे आप में संजोये रखता है।इकतहास में हमारे पूि़जों की स्मृकतयाुँ बसी हई है । यकि हम
इकतहास की उपेक्षा करते हैं तो ये हमारे बीते कल और पूि़जों की भी उपेक्षा होती है । अगर हम अपिे बीते कल को
कोसेंगे तो यह बात कबलकुल सत्य है कक हम अपिे आिे िाले कल को कभी अच्छा िहीं बिा पाएं गे। इसकलए
इकतहास की उपेक्षा ि करके हमें इसे एक आईिे के तौर पर िे खिा चाकहए और संभाल कर रखिा चाकहए।
यकि हम इकतहास लेखि का काय़ करें तो इसके कलए हमें कुछ मािकों की आिश्यकता होती है । इकतहास यािी कक
बीते कल में जो घटिाएुँ मुख्य रूप से घटी हैं और कजि व्यखियों के द्वारा कजस जगह पर घटीं हैं उसका कििरण िज़
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करिा ज़रूरी होता है। इसके कलए हम कतकथयों, कशलालेखों और खंडहर के अिशेषों के द्वारा जािकारी प्राप्त कर
सकते हैं ।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q8 “हमें आरं भ में ही एक ऐसी सभ्यता और संस्कृकत की शुरुआत किखाई पड़ती है जो तमाम पररित़िों के बािजूि
आज भी बिी हई है ।” आज की भारतीय संस्कृकत की ऐसी कौि-कौि सी बातें/चीजें हैं , जो हजारों साल पहले से चली
आ रही हैं । आपस में चचा़ करके पता लगाइए।
Answer.हमारी संस्कृकत और सभ्यता िास्ति में बहत पुरािी है और कार्फी समय से चली आ रही है । समय समय
पर हमारी मातृभूकम पर अिेक सभ्यताओं के लोग आए कजन्ोंिे हमारी संस्कृकत को प्रभाकित करिे की चेष्टा की
ककन्तु तब भी हमारी संस्कृकत अपिे मूल रूप में ही रही। इसका कारण है कक हमारी संस्कृकत के तत्व अमर हैं ।
हमारी संस्कृकत में त्याग की भाििा, सत्य की राह,मातृभूकम से लगाि और प्यार, पररिार के प्रकत समप़ण, अकतकथ
और गुरु का सिोपरर स्थाि, अकहं सा और परोपकार जैसे तत्व व्याप्त हैं । ये सारी चीज़ें हज़ारों साल से चली आ रही हैं
और आज भी िैसी की िैसी हैं।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q9 आपिे कपछले साल ( सातिीं कक्षा में) बाल महाभारत कथा पढ़ी। भारत की खोज में भी महाभारत के सार को
सूत्रबद्ध करिे का प्रयास ककया गया है-“िू सरों के साथ ऐसा आचरण िहीं करो जो तुम्हें खुि अपिे कलए स्वीकाय़ ि
हो। आप अपिे साकथयों से कैसे व्यिहार की अपेक्षा करते हैं और स्वयं उिके प्रकत कैसा व्यिहार करते हैं ? चचा़
कीकजए।
Answer.हमें िू सरों के साथ िही आचरण करिा चाकहए जो आचरण हम अपिे कलए चाहते हैं । इसकलए हमें ये
िे खिा चाकहए कक हम िू सरों से सही व्यिहार कर रहे हैं या िहीं। मैं जब भी अपिे िोस्तों से बात करता हुँ तो इस
बात का ख्याल रखता हुँ कक मैं बहत ही शालीिता से ही उिसे पेश आऊुँ।मैं गुस्से जैसी भाििा से कबलकुल िू र रहता
हुँ क्योंकक गुस्सा कसर्फ़ िुकसाि पहुँ चाता है ।इसी प्रकार मैं अपिे िोस्तों से उिीि करता हुँ कक िे अपिी कोई भी
बात कबलकुल आराम और शालीिता से कहें ।िे स्वाथ़ और कहं सा जैसी भाििा से कबलकुल िू र रहें । मैं अपिे साकथयों
से िम़ व्यिहार की अपेक्षा करता हुँ क्योंकक मैं भी उिके कलए कििम्र आचरण रखता हुँ ।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q10 प्राचीि काल से लेकर आज तक राजा यह सरकार द्वारा ज़मीि और उत्पािि पर कर लगाया जाता रहा है ।
आज कल हम इि िस्तुओं और सेिाओं पर कर िे ते हैं सूची बिायी है
Answer.आज कल हम लगभग अपिी हर चीज़ पर कर िे ते हैं ।हम अपिे खाद्य पिाथों से लेकर अपिे िै किक
जीिि में प्रयोग होिे िाली छोटी से छोटी िस्तु पर कर िे ते हैं ।हम अपिे रहिे का भी कर िे ते हैं । यकि हम कोई
व्यापार करते हैं तो हमें उस पर होिे िाले मुिार्फे अथा़ त लाभ का भी कर िे िा पड़ता है ।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q11 (क) प्राचीि समय में कििे शों में भारतीय संस्कृकत के प्रभाि के िो उिाहरण बताइए।
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(ख) ित़माि समय में कििे शों में भारतीय संस्कृकत के कौि-कौि से प्रभाि िे खे जा सकते हैं ? अपिे साकथयों के साथ
कमलकर एक सूची बिाइए। (संकेत-खाि-पाि, पहिािा, कर्फल्में कहं िी, कंप्यूटर, टे लीमाकेकटं ग आकि)
Answer.प्राचीि समय में कििे शों में भारत की संस्कृकत का कार्फी प्रभाि िैला था।कहन्िू िम़ और बौद्ध िम़ का
प्रचार पूरी िु किया में ककया गया था। इसी प्रकार हमारी सभ्यता में अकतकथ सत्कार को कार्फी सराहिा कमलती थी और
इसका असर कििे शों में ये िे खिे को कमला कक लोग हमारे लोगों का भी उसी प्रकार सत्कार करते थे।
बात यकि ित़माि समय की करें तो आज भी हमारी संस्कृकत और सभ्यता का प्रभाि कििे शों में ज़ोर शोर से हो रहा
है ।आज हमारे 56 प्रकार के भोग पूरे किश्व में पसंि ककए जाते हैं । हमारी संस्कृकत में व्याप्त “िसुिैि कुटु म्बकम” की
भाििा को कार्फी सराहिा कमलती है । आज कििे शों में हमारे कहं िी कसिेमा को कार्फी पसंि ककया जाता है। इतिा ही
िहीं, भारतीय साड़ी और लकलत कलाओं को भी कििे शों में कार्फी पसंि ककया जाता है ।
Page : 127 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q12 पृष्ठ संख्या 34 पर कहा गया है कक जातकों में सौिगारों की समुद्री यात्राओं, यातायात के हिाले भरे हए हैं ।
किश्व/ भारत के मािकचत्र में उि स्थािों/रास्तों को खोकजए, कजिकी चचा़ इस पृष्ठ पर की गई।
Answer.छात्र स्वयं उत्तर को हल करें ।
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q13 .कौकटल्य के अथ़शास्त्र में अिेक किषयों की चचा़ है , जैसे, “व्यापार और िाकणज्य, कािूि और न्यायालय, िगर
व्यिस्था, सामाकजक रीकत-ररिाज, कििाह और तलाक, खस्त्रयों के अकिकार, कर और लगाि, कृकष, खािों और
कारखािों को चलािा, िस्तकारी, मंकडयाुँ, बागिािी, उद्योग-िंिे, कसंचाई और जलमाग़, जहाज़ और जहाजरािी,
किगमें, जि-गणिा, मत्स्य-उद्योग, कसाई खािे, पासपोट़ और जेल-सब शाकमल हैं। इसमें किििा कििाह को मान्यता
िी गई है और किशेष पररखस्थकतयों में तलाक को भी।” ित़माि में इि किषयों की क्या खस्थकत है ? अपिी पसंि के
ककन्ीं िो-तीि किषयों पर कलखखए।
Answer.कौकटल्य िे अथ़शास्त्र में अिेक किषयों की चचा़ की है और उसमें से आज लगभग हर िस्तु पहले से
ज़्यािा आिुकिक और किककसत हो चुकी है । बात यकि कािूि और न्यायालय की करें तो आज हर व्यखि न्याय पािे
के कलए भी स्वतंत्र है। आज हर ककसी को मौकलक अकिकार प्रिाि ककए गए हैं जो पहले राजा महाराजाओं के समय
में िहीं किए जाते थे। व्यापार की दृकष्ट से भी भारत िे कार्फी किकास ककया है । आज भारत से कई िस्तुओं का बाहर
किया़ त ककया जाता है ।मकहलाओं की खस्थकत कार्फी बेहतर हो गई है ।आज किििा कििाह को मान्यता तो प्राप्त है ही
इसके साथ ही किििा को हे य दृकष्ट से िहीं िे खा जाता है । मकहलाओं को स्वतंत्रता प्रिाि की गई है और िे आज
पुरुषों के साथ कंिे से कंिा कमलाकर चल रही हैं।
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q14 आजािी से पहले ककसािों की समस्याएुँ किम्नकलखखत थीं “गरीबी, कज़, किकहत स्वाथ़, जमींिार, महाजि, भारी
लगाि और कर, पुकलस के अत्याचार- “आपके किचार से आजकल ककसािों की समस्याएुँ कौि-कौि सी हैं ?
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Answer.आज़ािी से पहले ककसािों की कार्फी समस्याएं थीं और आज भी ककसािों को लगभग उि समस्याओं से
िो चार होिा पड़ता है। आज भी ककसािों को गरीबी, कज़़, िि के संसाििों के अभाि जैसी समस्याओं से जूझिा
पड़ता है ।कई बार तो ऐसा होता है कक ककसािों के ऊपर इतिा कज़़ हो जाता है कक िह आत्महत्या तक कर लेते हैं ।
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q15 “साि़जकिक काम राजा की मजी के मोहताज िहीं होते, उसे खुि हमेशा इिके कलए तैयार रहिा चाकहए।” ऐसे
कौि-कौि से साि़जकिक काय़ हैं कजन्ें आप कबिा ककसी कहचककचाहट के करिे को तैयार हो जाते हैं ?
Answer.कुछ ऐसे काय़ होते हैं कजिके कलए हमें ककसी राजा, महाराजा या सरकार से आज्ञा लेिे की आिश्यकता
िहीं होती है।हम उन्ें एक जागरूक िागररक के तौर पर कर सकते हैं ।ऐसे ही कुछ काम है जो हमें करिे ही चाकहए
जैसे िृक्षारोपण करिा।पया़ िरण की सुरक्षा के कलए हम िृक्ष लगा सकते हैं।अपिे आस पास व्याप्त गंिगी को सार्फ
करके हम जागरूक िागररक होिे का सबूत िे सकते हैं ।सड़क पर कोई पत्थर या कोई बेसहारा जाििर हो तो उसे
ककिारे करके भी हम साि़जकिक काय़ में मिि िे सकते हैं।लड़ककयों की कशक्षा और उिकी सुरक्षा करके हम िारी
कल्याण में सहयोग िे सकते हैं । इसी प्रकार गरीब बच्चों और उिके पररिारों के कलए सुकििाएुँ जुटाकर हम उिकी
मिि कर सकते हैं ।
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q16 महाि सम्राट अशोक िे घोषणा की कक िह प्रजा के काय़ और कहत के कलए हर स्थाि पर और हर समय हमेशा
उपलब्ध हैं । हमारे समय के शासक/लोक-सेिक इस कटौती पर ककतिा खरा उतरते हैं ? तक़ सकहत कलखखए।
Answer.बाि यकि महाि सम्राट अशोक की घोषणा की करें कक िे प्रजा के काय़ और कहत के कलए हर स्थाि पर
और हर समय हमेशा उपलब्ध हैं तो यह आज के िेताओं पर लागू िहीं होता है । आज कल हम कजि िेताओं को
अपिा प्रकतकिकित्व और िेतृत्व करिे के कलए चुिते हैं िे कसर्फ़ खोखले िािे और घोषणाएुँ करते हैं । िे कसर्फ़ उस
समय हमारे सामिे आते हैं जब उन्ें िोट चाकहए होता है । उस समय िे हमें अिेक सपिे किखाते हैं और किकास के
िायिे करते हैं ।
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q17 “औरतों के परिे में अलग-अलग रहिे से सामाकजक जीिि के किकास में रुकािट आई।” कैसे?
Answer.औरतों का पिे में रहिे के कारण सामाकजक जीिि के किकास में रुकािट आयी है । यकि बात करें औरतों
के पिे और सामाकजक किकास में रुकािट की तो पिे के कारण औरतों घर की चारिीिारी में कसमटकर रह गयी
हैं । एक तरह से िे पुरुषों पर किभ़र हो गई हैं । कहीं कहीं पर तो पिे के कारण औरतों की कशक्षा और उिके स्वास्थ्य
का भी कोई ख्याल िहीं रखा जाता।
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q18 मध्य काल के इि संत रचिाकारों की अिेक रचिाएुँ अब तक आप पढ़ चुके होंगे। इि रचिाकारों की एक-
एक रचिा अपिी पसंि से कलखखए-
1. अमीर खुसरो
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2. कबीर
3. गुरुिािक
4. रहीम
Answer.
1. अमीर खुसरो- -पहे कलयाुँ एिं मुकररयां
2. कबीर-बीजक, (साखी, सबि ि रमैिी)
3. गुरु िािक िे ि- गुरुग्रंथ साकहब
4. रहीम- रहीम के िोहे
Page : 128 , Block Name : प्रश्न अभ्यास
Q19 बात को कहिे के तीि प्रमुख तरीके अब तक आप जाि चुके होंगे-
(क) अकभिा
(ख) लक्षणा
(ग) व्यंजिा
बताइए, िेहरू जी का किम्नकलखखत िाक्य इि तीिों में से ककसका उिाहरण है ? यह भी बताइए कक आपको ऐसा क्यों
लगता है ?
“यकि किटे ि िे भारत में यह बहत भारी बोझ िहीं उठाया होता (जैसा कक उन्ोंिे हमें बताया है ) और लंबे समय तक
हमें स्वराज्य करिे की िह ककठि कला िहीं कसखाई होती, कजससे हम इतिे अिजाि थे, तो भारत ि केिल अकिक
स्वतंत्र और अकिक समृद्ध होता …. बखि उसिे कहीं अकिक प्रगकत की होती।”
Answer.व्यंजिा शब्द शखि का उिाहरण है ।
इस िाक्य के द्वारा अंग्रेज़ों पर किंिा की गई है ।अंग्रेज़ हम पर राज करते थे और िे कहते थे कक िे हमें स्वराज्य की
कला कसखा रहे हैं । उिके अिुसार िे भारतीयों को एक पाठ पढ़ा रहे थे कक ककस प्रकार अपिा िे श चलाया जाता
है ।असल में िे हमें कुछ कसखा िहीं रहे थे बखि िे हमें गुलाम बिा रहे थे। इस किंिा के द्वारा उन्ें यह संिेश किया
गया है कक अगर िे भारत पर राज ि करते तो भारत बहत पहले ही स्वतंत्र और अत्यकिक समृद्ध हो गया होता।
उन्ोंिे भारत को असल में लूटा और अपिी िीकतयों को भारतीयों पर ज़बरिस्ती थोपा। इस प्रकार िे भारतीयों का
शोषण करते रहे और भारत का किकास िहीं होिे किया।
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Q20 “ियी ताकतों िे कसर उठाया और िे हमें ग्रामीण जिता की ओर ले गईं। पहली बार एक िया और िू सरे ढं ग का
भारत उि युिा बुिकिजीकियों के सामिे आया…’ आपके किचार से आज़ािी की लड़ाई के बारे में कही गई ये बातें
ककस ियी ताकत’ की ओर इशारा कर रही हैं ? िह कौि व्यखि था और उसिे ऐसा क्या ककया कजसिे ग्रामीण जिता
को भी आज़ािी की लड़ाई का कसपाही बिा किया?
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Answer.आज़ािी के समय भारत तीि िगों में किभाकजत था-उच्च िग़, मध्यम िग़ और किम्न िग़।उच्च िग़ के लोगों
को समाज में सिाि प्राप्त था और िे बड़े बड़े लोगों अथा़ त अंग्रेज़ अर्फसरों के साथ उठते बैठते थे।अंग्रेज़ भी उस
िग़ की कार्फी इज़्ज़त करते थे। किम्न िग़ समाज में हे य दृकष्ट से िे खा जाता था और उसे सामाकजक कायों में भाग लेिे
की अिुमकत िहीं थी। इस प्रकार उच्च िग़ और किम्न िग़ िोिों के काम बुँटे थे जबकक मध्यम िग़ के साथ ऐसा कोई
स्पष्ट कचत्र िहीं था।
मध्यम िग़ के लोग िाही अत्यकिक सिाि पाते थे और ि ही िे कगरे हए कगिे जाते थे। इस प्रकार मध्यम िग़ के लोग
कसर्फ़ अपिी कचंता में लगे रहते थे और िे िू सरों के मामले में िखलंिाजी िहीं करते थे।ककन्तु किर एक समय ऐसा
आया जब मध्यम िग़ को उसकी ताकत का एहसास किलाया गया। मध्यम िग़ के लोगों को उिके कत़व्यों के प्रकत
जागरूक ककया गया कजससे िे भी आज़ािी के कलए ति कर खड़े हो गये। यह िग़ आज़ािी के कलए िास्ति में कार्फी
महत्वपूण़ साकबत हआ। उपयु़ि िाक्य मध्यम िग़ की ओर ही इशारा करता है कक ककस प्रकार उसिे अपिी ताकत
का प्रयोग करके भारत के आज़ािी आं िोलि में अपिा सहयोग किया।
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Q21 ‘भारत माता की जय’ आपके किचार से इस िारे में ककसकी जय की बात कही जाती है ? अपिे उत्तर का कारण
भी बताइए।
Answer.“भारत माता की जय” का अथ़ भारत की भूकम और भारत में पाई जािे िाली हर िस्तु के सिाि से है ।जब
हम भारत माता की जय बोलते हैं तो इसका अथ़ होता है कक हमिे भारत की भूकम, िकियाुँ , पि़त, पशु-पक्षी, सागर-
महासागर और भारत के हर िागररक के सिाि के कलए आिाज़ उठायी। इस प्रकार ये सारी चीज़ें ही भारत से जुड़ी
हई साकबत हो जाती हैं ।इस प्रकार भारत माता की जय बोलकर हम भारतीय मूल्यों की भी जयकार कर लेते हैं ।
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Q22 (क) भारत पर प्राचीि काल से ही अिेक कििे शी आिमण होते रहे। उिकी सूची बिाइए। समय िम में बिाएुँ
तो और भी अच्छा रहे गा।
(ख) आपके किचार से भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापिा इससे पहले के आिमणों से ककस तरह अलग है ?
Answer.(क) भारत पर प्राचीि काल में होिे िाले आिमणों को किम्नकलखखत रूप में सूचीबद्ध ककया जा सकता है-
महमूि गजििी, मोहिि गोरी, िाकिर शाह, अर्फगाकियों का आिमण, मंगोलों का आिमण, तुकों का आिमण,
अंग्रेज़ों का आिमण।
(ख) अंग्रेज़ों का भारत पर आिमण और राज्य करिे का तरीका पहले के आिमणों और लोगों के राज्य करिे के
तरीके से कबलकुल अलग था।अंग्रेज़ों के पहले कजतिे भी शासकों िे भारत पर राज़्य ककया उन्ोंिे भारत को लूटा
और इसके किपरीत भारत को रचाया बसाया भी। उन्ोंिे भारत में अिेक इमारतों का किमा़ ण कराया।भारत की
सुंिरता में चार चाुँ ि लगािे के तरीके खोजे और भारत की संस्कृकत को अपिाया ि उसका प्रचार प्रसार भी ककया।
अंग्रेजों िे भारत पर राज्य ककया, भारत पर आिमण ककया, भारत को लूटा और इि सबके साथ साथ भारत और
भारतीयों को अपिा गुलाम बिाया। उन्ोंिे भारतीयों पर अत्याचार की सीमा पार कर िी।भारतीयों को तरह तरह की
यातिाएं िीं और बहत से भारतीयों को मौत के घाट उतार किया।िे भारतीयों को गुलाम की दृकष्ट से िे खते थे। कजि
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कजि भारतीयों िे अंग्रेजों के कख़लार्फ अपिी आिाज़ उठायी अंग्रेज़ों िे उन्ें मार डाला। यहाुँ तक कक जब िे िे श
छोड़कर जा रहे थे तब भी िे िे श का बुँटिारा करके गए और आपस में िूट डाली। इसके साथ ही उन्ोंिे भारत की
कीमती िरोहर को भी चुरा कलया और अपिे साथ ले गए।
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Q23 (क) अंग्रेजी सरकार कशक्षा के प्रसार को िापसंि करती थी, क्यों?
(ख) कशक्षा के प्रसार को िापसंि करिे के बािजूि अंग्रेज़ी सरकार को कशक्षा के बारे में थोड़ा बहत काम करिा
पड़ा/क्यों?
Answer.(क) अंग्रेज़ी सरकार भारतीयों की कशक्षा िीक्षा के कख़लार्फ थी क्योंकक कशक्षा के कारण भारतीयों में
जागरूकता उत्पन्न हो जाती। अंग्रेज़ चाहते थे कक िे भारत पर कबिा ककसी रुकािट के राज करें ।अगर भारतीयों में
कशक्षा िीक्षा िहीं होगी तो उिके कख़लार्फ आिाज़ उठािे िाला कोई िहीं होगा क्योंकक स्वराज जैसी भाििा उिके
अंिर िहीं आएगी। इसकलए कबिा ककसी अड़चि के राज करिे हे तु िे चाहते थे कक भारतीयों में ककसी प्रकार की कोई
जागरूकता िा आए और िे अकशकक्षत ही रहें ।
(ख) अंग्रेज़ी सरकार भारतीयों की कशक्षा िीक्षा के कख़लार्फ थी लेककि इसके बािजूि उसे कशक्षा का प्रसार प्रचार
करिा पड़ा। इसका कारण यह था कक अंग्रेजों को कम िेति पर मज़िू रों और क्लकों की आिश्यकता थी। ऐसे
क्लक़ जो अत्याचार और कम िेति लेकर भी अंग्रेजों के कख़लार्फ आिाज़ ि उठाएुँ और उिका काम भी करते रहें।
अंग्रेज़ी लोग ख़ुि जब पढ़ कलख जाते थे तो िे कम िेति पर काम िहीं करिा चाहते थे। िे अपिी सरकार से इस बात
की कडमां ड रखते थे कक उन्ें पूरा िेति और सुकििाएुँ प्रिाि की जाएुँ । िे ककसी प्रकार की कोई गुलामी िहीं करते
थे। इसके किपरीत भारतीय ऐसा कोई प्रस्ताि िहीं रखते थे और चुपचाप काय़ करिे को तैयार हो जाते थे। इसकलए
उन्ें कशक्षा का प्रचार प्रसार करिा पड़ा।
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Q24 किकटश शासि के िौर के कलए कहा गया कक-“िया पूुँजीिाि सारे किश्व में जो बाज़ार तैयार कर रहा था उससे
हर सूरत में भारत के आकथ़क ढाुँ चे पर प्रभाि पड़िा ही था।” क्या आपको लगता है कक अब भी िया पूुँजीिाि पूरे
किश्व में जो बाज़ार तैयार कर रहा है , उससे भारत के आकथ़क ढाुँ चे पर प्रभाि पड़ रहा है ? कैसे?
Answer. िये पूंजीिाि िे जो बाज़ार तैयार ककया है उससे भारत के आकथ़क साुँ चे पर कार्फी असर पड़ रहा है । पर
ये असर असल में िकारात्मक है । भारतीय युिा पीढ़ी ककसी ि ककसी तरह िि कमािे के सपिे िे खिे लगी है और
इस प्रकार िे कििे शों को अपिी सेिाएुँ प्रिाि कर रहे हैं । इस कारण भारत की अपिी पूंजी बाहर जा रही है और
भारत को िुकसाि पहुँ च रहा है । कसर्फ़ इतिा ही िहीं बखि भारत के अपिे बाज़ार भी बाहरी िस्तुओं से भरे पड़े हैं ।
ये ि कसर्फ़ भारत की अथ़व्यिस्था को िुकसाि पहुँ चा रहे हैं बखि भारतीय संस्कृकत के कलए ख़तरा भी बि रही हैं । िे
भारतीयों को कार्फी मात्रा में प्रभाकित कर रही हैं और अपिा िच़स्व भारत पर कायम कर रही हैं ।
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Q 25:गां िी जी के िकक्षण अफ्रीका से लौटिे पर किम्नकलखखत में ककस तरह का बिलाि आया, पता कीकजए-
(क) कां ग्रेस संगठि में।
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(ख) लोगों में किद्याकथ़यों, खस्त्रयों, उद्योगपकतयों आकि में।
(ग) आजािी की लड़ाई के तरीकों में।
(घ) साकहत्य, संस्कृकत, अखबार आकि में।
Answer.(क) कां ग्रेस संगठि में बिलाि इस प्रकार िे खिे को कमला कक कां ग्रेसी आपस में अपिे बैर भुलाकर एक
हो गए।िे अब कसर्फ़ एक उद्दे श्य को लेकर चलिे लगे कक उन्ें हर हाल में अंग्रेजों के कख़लार्फ आिाज़ उठािी है और
िे श को स्वतंत्र करािा है ।
(ख) गां िी जब िापस लौटे तो उिके व्यखित्व और स्वराज्य की भाििा से जुड़े किचारों िे किद्याकथ़यों, खस्त्रयों और
उद्योगपकतयों अथा़ त हर भारतीय में स्वराज्य की ज्वाला भड़का िी। भारत का हर िग़ सब कुछ भुलाकर बस
स्वराज्य पािे के उद्दे श्य में जुट गया।
(ग) आज़ािी की लड़ाई का तरीका बिल गया।जहाुँ पहले खूि ख़राबा और मार-काट से स्वराज की माुँ ग रखी जाती
थी िहीं अब सत्य और अकहं सा का माग़ अपिाया गया।गां िी जी की सत्य और अकहं सा के आं िोलि िे अंग्रेजों के
इरािों को कहलाकर रख किया।
(घ) स्वराज्य की भाििा कुछ इस प्रकार लोगों में रच बस गई कक अब हर कोई अंग्रेजों के कख़लार्फ होिे लगा
था।अख़बारों में, ककताबों और आम जिता के बीच आं िोलि के किचारों का प्रचार प्रसार होिे लगा।लोगों के बीच
स्वराज पािे की लालसा आम हो गई। अंग्रेज़ों की िमिकारी िीकत के कख़लार्फ हर जगह प्रचार प्रसार होिे के कारण
अंग्रेज़ों का भारतीयों पर कबिा रुकािट के राज्य करिे का सपिा टू टिे लगा था।
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Q26 “अक्सर कहा जाता है कक भारत अंतकि़रोिों का िे श है ।” आपके किचार से भारत में ककस-ककस तरह के
अंतकि़रोि हैं ? कक्षा में समूह बिाकर चचा़ कीकजए।
(संकेत-अमीरी-गरीबी, आिुकिकता-मध्ययुगीिता, सुकििा-संपन्नता-सुकििाकिहीि आकि)
Answer.भारत अंतकि़रोिों का िे श है इसका मतलब है कक भारत अंिरूिी मार को झेलता रहता है ।हम इस बात
को इस प्रकार कह सकते हैं कक भारत में रहिे िाले लोग आपस में एक िू सरे से बैर किखाते हैं । एक तरर्फ जहाुँ
भारत में अमीर तबका है तो िहीं िू सरी ओर भारत में गरीब लोगों की संख्या भी कार्फी ज़्यािा है ।अमीरों और गरीबों
में हमेशा बैर की भाििा चलती रहती है।इसके अलािा भारत में िाकम़क और सां प्रिाकयक िं गे होिा तो बेहि
सािारण बात है । यहाुँ लोग िम़ के िाम पर लड़ते रहते हैं । हम भले ही बाहर के लोगों से सुरकक्षत है क्योंकक सीमा
पर हमारे जिाि पहरा िे रहे हैं ककन्तु हमारा िे श अंिर से ही खोखला होता जा रहा है। इस प्रकार भारत में अंिरूिी
मार कार्फी ज़्यािा है ।
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Q27 पृष्ठ संख्या 122 पर िेहरू जी िे कहा है कक-”हम भकिष्य की उस ‘एक िु किया की तरर्फ बढ़ रहे हैं जहाुँ राष्टरीय
संस्कृकतयाुँ मािि जाकत की अंतरराष्टरीय संस्कृकत में घुलकमल जाएुँ गी।” आपके अिुसार उस ‘एक िु किया में क्या-क या
अच्छा है और कैसे-कैसे खतरे हो सकते हैं ?
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Answer.कजस किि सारी संस्कृकतयाुँ आपस में कमल गयीं और सबके जीिि जीिे का तरीका एक हो गया िह किि
िास्ति में पूण़तः का किि होगा। ये िास्ति में कार्फी सुकूि िे िे िाला किि होगा कक अब आपस में कोई भेिभाि िहीं
रह गया।सारे लोग एक ही िम़ का पालि करें गे जो कसर्फ़ माििता का होगा। लोग एक साथ चलेंगे और सभी का
किकास होगा। ककसी भी इं साि या ककसी भी जाकत िम़ को अलग थलग रहिे की आिश्यकता िहीं होगी।सब एक
िू सरे से घुलेंगे कमलेंगे और आपस में प्यार करें गे।
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