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अत्यंत गोपनीय केवल आंतरिक एवं सीमित प्रयोग हे तु
अंक-योजना ( 2025-26 )
ववषय हहंदी (ऐच्छिक)
कक्षा – बािहवीं
ववषय कोड संख्या -523
सािान्य ननदे श :-
1. परीक्षार्थियों के सही और उर्ित आकलन के ललए उत्तर पुस्ततकाओं का मूलयांकन एक
महत्वपूर्ि प्रक्रिया है। मूलयांकन में एक छोटी-सी त्रुटट भी गंभीर समतया को जन्म दे
सकती है, जो परीक्षार्थियों के भववष्य, लिक्षा प्रर्ाली और अध्यापन-व्यवतथा को भी
प्रभाववत कर सकती है। इससे बिने के ललए अनुरोध क्रकया जाता है क्रक मूलयांकन प्रारं भ
करने से पूवि ही आप मूलयांकन ननदे िों को पढ़ और समझ लें।
2. योग्यता आधाररत प्रश्नों का मूलयांकन करते समय कृपया टदए गए उतरों को समझे, भले
ही उत्तर माक्रकिंग तकीम में न हो, छात्रों को उनकी योग्यता के आधार पर अंक टदए जाने
िाटहए।
3. अंक योजना में उत्तरों के ललए केवल सझ
ु ाए गए मान बबंद ु होते हैं। ये केवल टदिा-ननदे िों
की प्रकृनत के हैं और पर्
ू ि नहीं हैं। यटद परीक्षार्थियों की अलभव्यस्तत सही है तो उसके
अनस
ु ार ननयत अंक टदए जाने िाटहए।
4. परीक्षक सही उत्तर पर सही का र्िह्न () लगाएँ और गलत उतर पर गलत का ()
मल
ू यांकनकताि द्वारा ये र्िह्न न लगाने से ऐसा समझ में आता है क्रक उत्तर सही है , परं तु
उस पर अंक नहीं टदए गए।
5. यटद क्रकसी प्रश्न के उपभाग हो तो कृपया प्रश्नों के उपभागों के उत्तरों पर दायी ओर अंक
टदए जाएँ। बाद में इन उपभागों के अंकों का योग बायाँ और के हालिये में ललखकर उसे
गोलाकृत कर टदया जाए।
6. यटद क्रकसी प्रश्न के कोई उपभाग न हो तो बायीं ओर के हालिये में अंक टदए जाएँ और
उन्हें गोलाकृत क्रकया जाए।
7. यटद परीक्षाथी ने क्रकसी प्रश्न का उत्तर दो तथानों पर ललख टदया है और क्रकसी को काटा
नहीं है तो स्जस उत्तर पर अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हो, उस पर अंक दें और दस
ू रे को
काट दें । यटद परीक्षाथी ने अनतररतत प्रश्न/प्रश्नों का उत्तर दे टदया है तो स्जन उत्तरों पर
अर्धक अंक प्राप्त हो रहे हो, उन्हें ही तवीकार करे , उन्हीं पर अंक है।
8. एक ही प्रकार की अिुद्र्ध बार-बार हो तो उसे अनदेखा करें और उस पर हर बार अंक न
काटे जाएँ।
9. यहाँ यह ध्यान रखना होगा क्रक मूलयांकन में पूर्ि अंक पैमाना 0-80 (उदाहरर् 0-80
अंक जैसा क्रक प्रश्न में टदया गया है) का प्रयोग अभीष्ट है , अथाित परीक्षाथी ने यटद सभी
अपेक्षक्षत उत्तर-बबंदओ
ु ं का उललेख क्रकया है तो उसे परू े अंक दे ने में संकोि न करें ।
10. ये सुननस्श्ित करें क्रक उत्तर पुस्ततका के अंदर टदए गए अंकों का आवरर् के अंकों के साथ
लमलान हो।
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11. आवरर् पष्ृ ठ पर दो ततंभों के अंकों का योग जाँि लें ।
12. उत्तर पुस्ततकाओं का मलू यांकन करते हुए यटद कोई उत्तर पूर्ि रूप से गलत हो तो उस
पर (x) ननिान लगाएँ और िून्य (0) अंक दें ।
13. उत्तर पुस्ततका में क्रकसी प्रश्न का बबना जाँिे हुए छूट जाना या योग में क्रकसी भूल का
पता लगना, मल
ू यांकन सलमनत के सभी लोगों की छवव को और बोर्ि की प्रनतष्ठा को
धूलमल करता है। परीक्षक सुननस्श्ित करें क्रक सभी उत्तरों का मूलयांकन हुआ है। आवरर्
पष्ृ ठ पर तथा योग में कोई अिुद्र्ध नहीं रह गई है तथा कुल योग को िब्दों और अंकों
में ललखा गया है।
उपयुितत मल
ू यांकन ननदे ि उत्तर-पुस्ततकाओं की जाँि हे तु आदे ि नहीं अवपतु केवल
ननदे ि हैं। यटद इन मूलयांकन ननदे िों में क्रकसी प्रकार की त्रुटट हो, क्रकसी प्रश्न का उत्तर
तपष्ट न हो, अंक योजना में टदए गए उत्तर से अनतररतत कोई और भी उत्तर सही हो, तो
परीक्षक अपने वववेकानुसार उस प्रश्न का मल
ू यांकन करे ।
अंक-योजना
ववषय हहंदी (ऐच्छिक)
ववषय कोड संख्या -523
कक्षा : बारहवीं अर्धकतम अंक 80
सािान्य ननदे श :-
1. अंक योजना का उद्दे श्य मल
ू यांकनको अर्धकार्धक वततुननष्ठ बनाना है।
2. वर्िनात्मक प्रश्नों के अंक योजना में टदए गए उत्तर बबंद ु अंनतम नहीं है बस्लक ये
सझ
ु ावात्मक एवम ् सांकेनतक हैं।
3. यटद परीक्षाथी इन सांकेनतक बबंदओ
ु ं से लभन्न , क्रकन्तु उपयत
ु त उत्तर है, तो उन्हें अंक
टदए जाएँ।
4. मूलयांकन कायि ननजी व्याख्या के अनुसार नहीं बस्लक अंक योजना में टदए गए
ननदे िानुसार ही क्रकया जाए।
प्रश्न प्रश्न उत्तर संकेत/ मख्
ु य बबंद ु ननधािररत अंक
संख्या उपभाग ववभाजन
1 1x5=5
1 (अ) गरीब अमीर भेदभाव से मुतत 1
2 (अ) जानत प्रथा 1
1
(स) सामास्जक समानता का
3
(अ) ई
4 1
(ब) समानता के ववववध रूप
5 1
2 1x5=5
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1 (स) परु ानी यादों पर 1
1
(स) समय की पररवतिनिीलता
2 1
3 (द) बीता टदन परु ाना हो जाता है 1
(स) तया यह वही मकान है? 1
4
5 (स) प्रश्नवािक
3 1x 5=5
1 (क) रामिंद्र िुतल 1
2 (ग )अपने साथी के साथ 1
3 1
(ख) नारी मन के दुःु ख और करुर्ा की
(क) पतनिील सामंती व्यवतथा
1
(ग) ववतथापन की समतया
4
5 1
4 1x5=5
1 (ख) प्रधानािायि के पुत्र के ललए 1
2
(ग) पढ़ाई का पुतला कौन सी पुततक मांग बैठे 1
(ख) आंखों में
(ग) बालक के लड्र्ू मांगने पर 1
3
4 (घ) बालक का बिपन बि गया 1
1
5
5 प्रश्नों के उत्ति 2+2+3+3
क आँखे बंद िखने से लोगो ने लंबे सिय तक अपना शोषण 2
किवाया था उन्होंने आँखे बंद किके िाजा को उनका शोषण
किने की पूिी आजादी दे दी है उत्पादन श्रिता का ववकास हुआ
था एकाग्रता अवश्य बड़ी पि वह िात्र भ्रि है आँखे खोलकि
दे खने से उन्हें सिझ िें आया था वह अभी तक क्या कि िहे है
I
लेखक के वपता की बदली मिजाापुि के बाहि नगि िें हुई है वहा
िहते हुए उन्हें एक हदन ज्ञात हुआ था कक भाितेन्दु हरिश्चंद के
सखा च्जनका नाि उपाध्याय बदिीनािायण चोधिी थी जो
प्रेिघन उपनाि से मलखते थे वे यहाँ िहते थे लेखक उन्हें
मिलने को आतुि हो उठा औि अपने मित्रो की िंडली के साथ
योजना अनुसाि एक डेढ़ मिल चलकि उनके घि के ननचे खड़े
हुए ।
ख
2
. पाश्चात्य ववचािकों के इस ित पि हिप्पणी किते हुए लेखक
कहता है कक स्वाथा से भी बढ़कि च्जजीववषा से भी भयंकि कोई
न कोई शच्क्त अवश्य है। उदाहिण के मलए भाित िाता को
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स्वतंत्र किाते सिय फांसी के फंदे पि झूलने वाले शहीदों का तो
काई व्यच्क्तगत स्वाथा पिू ा नहीं हो िहा था औि जीवन तो वे
अपनी इछिा से सिाप्त कि िहे थे। गुरू गोववंद मसंह के दो
बालक जब दीवाि िें चचनवाए जा िहे थे, तब वे बालक अपने
ननजी स्वाथा औि च्जजीववषा से बहुत ऊपि उठ चुके थें ।
3
बड़ी हवेली से जब हिगोबबन को बुलावा आया, तो उसके िन िें
(ग) आशंका हुई कक अवश्य कोई गुप्त संदेश ले जाना है। इस संदेश
की खबि चाँद-सूिज, पेड़ो तथा पक्षक्षयों को भी नहीं लगनी
चाहहए।
घ
3
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6 1×5=5
1 ग) भारतीय संतकृनत सौंदयि का 1
2 ग) व्यस्तत से 1
3 ग) फूलों की महक फैलती है और सब खुिी खुिी बैठ जाते हैं। 1
ख) रूपक 1
क) माता कौिलया के ललए 1
4
5
7 सप्रसंग व्याख्या 5×1=5
प्रसंग 1
3
व्याख्या 1
काव्य -सौन्दयि
8 2+2+3+3
क कोयल और भोरो के कलरव का नानयका पर प्रनतकूल प्रभाव 2
पड़ता था कोयल का मधूर तवर और भोरो का गुंजन नानयका
को अपने प्रेमी की याद टदला दे ती थी वह अपने कानो को बंद
कर इनके कलरव सुनने से बिना िाहती थी परन्तु ये आवाजे
उसे क्रफर भी सता रही थी।
कवव को बसंत आने की सूिना प्रकृनत में आए पररवतिनों को
दे खकर लमली जैसे- र्िडड़यों की कुक, गुनगुनी ताज़ी हवा तथा
पेड़ों से झड़ते पीले पत्ते। कवव ने अपनी इस सूिना को
तपष्टीकरर् दे ने के ललए घर पहुँिकर कैलेंर्र में दे खकर
2
जानकारी की पुस्ष्ट की।
(ख)
आिा में मनुष्य बावला हो जाता है और आिा से मनुष्य को
िस्तत लमलती है। प्रेम में तो आिा बहुत ही बावली होती है।
वह स्जसे प्रेम करता है उसके प्रनत हजारों सपने बुनता है क्रफर
उस का प्रेमी उस से प्यार करें या ना करें तो वह आिा के
सहारे सपनों में तैरता रहता है।
कवव बनारस की पूर्िता को उसके उललास भरे टदन से दिािता
था उसके अनुसार यह िहर हर तरह से प्रसन्न रहता था यहाँ
(ग)
का हर टदन तकलीफों तथा कटठनाइयो के बाद भी उललास और 3
आनद से भरपूर होता था बनारस की ररतता को वह मत
ृ िरीरो
के माध्यम से दिािता था।
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9 अंतिाल भाग -2 के आधाि पि प्रश्नों के उत्ति 2+2+3
क भैरों ने सूरदास की झोपड़ी इसललए जलाई तयोंक्रक वह सुभागी
और सूरदास के संबंध से िोर्धत था. भैरों को लगा क्रक सूरदास
और सुभागी के बीि संबंध तथावपत हो गया है, इसललए उसने
अपनी बदनामी का बदला लेने के ललए झोपड़ी जला दी. इसके
2
अलावा, भैरों ने सूरदास के रुपयों को िुराने की भी योजना
बनाई थी और झोपड़ी जलाने के बाद रुपए भी गायब हो गए.
लोगों का मानना है क्रक फूल अपने रं ग तथा गंध के कारर्
पहिाने जाते हैं। लेखक इस बात को नकारता है। वह गंध की
महत्व को तवीकार करता है लेक्रकन वह यह भी कहता है क्रक
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फूल केवल गंध नहीं दे ते, वह दवा भी करते हैं। वह भरभंर्ा
नामक फूल का वर्िन करता है। इस फूल से ननकलने वाला दध
ू
आँखे आने पर दवा का काम करता है। इसे आँख में ननिोड़ दे ने
से आँख की बीमारी सही हो जाती है। नीम के फूल िेिक के
ख 2
मरीज को ठीक कर सकते हैं। बेर के फूलों को सूँघने मात्र से ही
बरें -ततैये का र्ंक अपने आप झड़ जाता है।
आज पूरे संसार में ग्लोबल वालमिंग का खतरा मंर्रा रहा है। पूरे
ववश्व के वैज्ञाननक इस स्तथनत से परे िान है। इसके कारर्
धरती का वातावरर् तेज़ी से गरम हो रहा है। हम मनुष्य ने
अपनी सुववधाओं के नाम पर जो भी कुछ क्रकया है, वह हमारे
ललए खतरनाक लसद्ध हो रहा है। वाहनों, हवाई जहाजों, बबजली
बनाने वाले संयंत्रों (प्लांटस), उद्योगों इत्याटद से अंधाधुंध होने
वाले गैसीय उत्सजिन की वजह से काबिन र्ायऑतसाइर् में
वद्
ृ र्ध हो रही है। इन गनतववर्धयों से काबिन र्ायऑतसाइर्,
लमथेन, नाइट्रोजन ऑतसाइर् इत्याटद ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा
में बढ़ रही हैं, स्जससे इन गैसों का आवरर् घना होता जा रहा
है। यही आवरर् सूयि की परावनतित क्रकरर्ों को रोक रहा है,
स्जससे धरती के तापमान क्रकरर्ों को रोक रहा है, स्जससे धरती
के तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। ग्लेलियरों की बफि बढ़ रहे
तापमान से तेज़ी से वपघल रही है। स्जससे आने वाले समय में
जल संकट खड़ा हो सकता है। जंगलों का बड़ी संख्या में हो रहा
(ग)
कटाव भी इसकी दस
ू री सबसे बड़ी वजह है। जंगल काबिन 3
र्ायऑतसाइर् की मात्रा को प्राकृनतक रूप से ननयंबत्रत करते हैं,
लेक्रकन इनकी अंधाधुंध कटाई से यह प्राकृनतक ननयंत्रक भी नष्ट
हो रहे हैं। यटद जलदी नहीं की गई तो हमारे जीवन पर भी
सवाललया ननिान उठ खड़ा होगा। इन गैसों के उत्सजिन में
अमेररका तथा यूरोपीय दे िों की भूलमका मुख्य है। वहाँ से सबसे
अर्धक इन गैसों का उत्सजिन हो रहा है। वे इस बात तवीकार
नहीं करते हैं।
10 क 1×5=5
1. “फोन इन” का अथि है एक प्रसारर् कायििम 1
में, स्जसमें श्रोता या दििक टे लीफोन के
माध्यम से कायििम में अपनी राय या वविार
व्यतत कर सकते हैं। इसे “कॉल-इन” भी कहा
जाता है, और आमतौर पर यह क्रकसी ववलिष्ट
ववषय पर ििाि के ललए क्रकया जाता है.
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2. स्तटं ग ऑपरे िन एक प्रकार की जांि या
ऑपरे िन है स्जसे धोखे से क्रकसी व्यस्तत को
या क्रकसी संगठन को गलत काम करते हुए
पकड़ने के ललए क्रकया जाता है। यह आमतौर
पर पुललस या मीडर्या द्वारा क्रकया जाता है
और इसमें व्यस्तत या संगठन को क्रकसी
अवैध गनतववर्ध या अपराध करने के ललए
लालि टदया जाता है, ताक्रक उन्हें रं गे हाथों
पकड़ा जा सके।
3. भाषा को प्रभावी बनाने के ललए, एक पत्रकार
को कुछ बातों का ध्यान रखना िाटहए, जैसे
सरल और तपष्ट भाषा का प्रयोग, अनावश्यक
जटटल िब्दों से बिना, और पाठकों के ललए
सुलभ भाषा में ललखना. उन्हें गैर-जरूरी
वविेषर्, जागिन्स और तलीिे से भी बिना
िाटहए.
4. साइबर पत्रकाररता एक ऐसा क्षेत्र है जो
पारं पररक पत्रकाररता से अलग है, जहां खबरों
और जानकारी को इलेतट्रॉननक माध्यमों, जैसे
क्रक इंटरनेट, वेबसाइट, सोिल मीडर्या आटद
के माध्यम से जनता तक पहुंिाया जाता है।
इसे ऑनलाइन पत्रकाररता, डर्स्जटल
पत्रकाररता या वेब पत्रकाररता के नाम से भी
जाना जाता है।
5. भारत में पहला छापाखाना 1556 में
पुतिगाललयों द्वारा गोवा में तथावपत क्रकया
गया था. यह छापाखाना धालमिक पत
ु तकों की
छपाई के ललए उपयोग क्रकया गया था.
ख) 1. इंटरनेट पत्रकाररता सूिनाओं
को तत्काल उपलब्ध करवाकर एक
िांनत लाई है, लेक्रकन इसके कुछ
दष्ु पररर्ाम भी हैं। इंटरनेट पर
सूिनाओं की उपलब्धता और गनत
पारं पररक मीडर्या के मुकाबले बहुत
अर्धक है, लेक्रकन इस तकनीक के
इततेमाल से अनैनतकता, झूठी
खबरों की फैलने और व्यस्ततगत
जानकारी की सुरक्षा खतरे में पड़
जाती है।
तत्काल उपलब्धता के फायदे :
त्वररत सूिना प्रसार:
इंटरनेट पत्रकाररता के माध्यम से कोई भी खबर
या जानकारी तुरंत दनु नया के क्रकसी भी कोने तक
पहुंिाई जा सकती है, स्जससे लोग नवीनतम
घटनाओं से अवगत हो सकते हैं।
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इंटरै स्तटव और बहुमुखी:
यह पत्रकाररता पाठकों को लेखों पर कमेंट करने,
अपनी राय व्यतत करने और अन्य लोगों से
बातिीत करने का अवसर दे ती है।
ववलभन्न प्रकार के माध्यमों का उपयोग:
इंटरनेट पत्रकाररता में टे ततट, वीडर्यो, ऑडर्यो,
इमेज और अन्य मलटीमीडर्या तत्वों का उपयोग
क्रकया जा सकता है, स्जससे पाठकों को सूिनाएं
अर्धक आकषिक और उपयोगी लगती हैं।
दष्ु पररर्ाम:
गलत या झूठी खबरों का प्रसार:
इंटरनेट पर सि
ू नाएं तरु ं त उपलब्ध होने के कारर्
झूठी या गलत खबरें भी तेजी से फैल सकती हैं,
स्जससे लोगों की गलत धारर्ा बन सकती है।
उदाहरर् के ललए, सोिल मीडर्या पर कुछ लोग
गलत जानकारी फैलाकर लोगों को भड़काते हैं,
स्जससे समाज में तनाव बढ़ सकता है।
व्यस्ततगत जानकारी की सुरक्षा:
इंटरनेट पर जानकारी साझा करने के कारर्
व्यस्ततगत जानकारी की सुरक्षा का खतरा बढ़
जाता है। हैकर और साइबर अपराधी आसानी से
लोगों की व्यस्ततगत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं 3+2
और उनका दरु
ु पयोग कर सकते हैं।
ख) 2.फीिर एक ऐसा लेख है जो क्रकसी व्यस्तत, तथान, घटना
या वविार पर गहन, व्याख्यात्मक और आकषिक वर्िन प्रदान
करता है, यह समािार लेखन से अलग होता है. फीिर की
वविेषता यह है क्रक यह तथ्यों के साथ-साथ लेखक के
दृस्ष्टकोर् और भावनाओं को भी िालमल करता है.
गहनता, मनोरं जनात्मक, आत्मकथात्मक िैली
11 5
रे डर्यो नाटक एक ऐसी नाटकीय प्रततनु त है जो केवल श्रवर् पर
आधाररत होती है, स्जसमें दृश्य तत्व नहीं होते हैं. यह संवाद,
ध्वनन प्रभाव और संगीत के माध्यम से कहानी सुनाया जाता है .
रे डर्यो नाटक की भाषा िैली तवाभाववक, सरल, और सहज होनी
िाटहए, ताक्रक श्रोता आसानी से समझ सके. ललखते समय,
लेखक को भाषा का ियन, संवादों का ननमािर्, और ध्वनन
प्रभावों का उपयोग जैसे कारकों पर ध्यान दे ना िाटहए.
रे डर्यो नाटक की भाषा िैली:
तवाभाववक और सरल:
भाषा का उपयोग सहज और तवाभाववक होना िाटहए, जैसे क्रक
लोग आम बोलिाल में बात करते हैं.
संक्षक्षप्त और तपष्ट:
संवाद संक्षक्षप्त और तपष्ट होने िाटहए, ताक्रक श्रोता तुरंत समझ
सके.
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अथवा
वविेष लेखन, स्जसे वविेष ररपोटटिंग भी कहते हैं, क्रकसी खास
ववषय पर सामान्य लेखन से हटकर क्रकया गया लेखन है। यह
क्रकसी ववषय, घटना, या व्यस्तत के बारे में गहराई से जानकारी
दे ता है और पाठकों को उस ववषय के बारे में ववततत
ृ जानकारी
और ववश्लेषर् प्रदान करता है। समािार पत्रों में वविेष लेखन
की भलू मका महत्वपर्
ू ि होती है तयोंक्रक यह पाठकों को सामान्य
समािारों से परे , वविेष मुद्दों और घटनाओं पर गहरा वविार
करने में मदद करता है।
वविेष लेखन की भूलमका:
जानकारी प्रदान करना:
वविेष लेखन पाठकों को क्रकसी खास ववषय के बारे में ववततत
ृ
जानकारी प्रदान करता है।
ववश्लेषर् और व्याख्या:
यह सामान्य समािारों की तुलना में अर्धक गहराई से
ववश्लेषर् और व्याख्या करता है।
नया दृस्ष्टकोर्:
वविेष लेखन पाठकों को क्रकसी ववषय के बारे में नया दृस्ष्टकोर्
प्रदान कर सकता है।
12 क 1965 के भारत-पाक्रकततान युद्ध में पाक्रकततान ने अपने पैटन 2×4=8
टैंक अमेररका से प्राप्त क्रकए थे. ये टैंक उस समय के सबसे
आधुननक और िस्ततिाली माने जाते थे.
हेमू ने आटदल िाह के राज्य की सुरक्षा कई ववद्रोटहयों से की,
स्जनमें अफगान ववद्रोटहयों, हुमायूं और अकबर की मुगल सेनाएं
िालमल थीं. हेमू ने उत्तर भारत में, पंजाब से बंगाल तक,
ख अफगान ववद्रोटहयों और मुगल सेनाओं से आटदल िाह के ललए
कई युद्ध लड़े, स्जनमें से 22 युद्ध आटदल िाह सूरी के ललए
जीते.
लंदन के इंडर्या हाउस में मदन लाल ढींगरा की मुलाकात
ववनायक दामोदर सावरकर और श्यामजी कृष्र् वमाि से हुई थी.
इंडर्या हाउस उस समय भारतीय छात्रों के राजनीनतक
गनतववर्धयों का केंद्र था, और ढींगरा अतसर वहां जाते थे और
बैठकों में भाग लेते थे.
ग
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गीता के अनुसार, जगत की उत्पवत्त प्रकृनत और पुरुष (ईश्वर)
के संयोग से होती है। प्रकृनत में तीन गर्
ु (सत्व, रज, और
तम) होते हैं, जो लमलकर सस्ृ ष्ट के ननमािर् में योगदान दे ते हैं.
घ